Author name: Prasanna

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 पवन, तूफ़ान और चक्रवात

Haryana State Board HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 पवन, तूफ़ान और चक्रवात Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Science Solutions Chapter 8 पवन, तूफ़ान और चक्रवात

HBSE 7th Class Science पवन, तूफ़ान और चक्रवात InText Questions and Answers

बूझो/पहेली

प्रश्न 1.
मैं यह नहीं समझ पा रही है कि पवन की दिशा ठीक उत्तर-दक्षिण दिशा क्यों नहीं है?
उत्तर:
क्योंकि पवन के प्रवाह की दिशा उत्तर से दक्षिण या दक्षिण से उत्तर होती है जो कि पृथ्वी के घूर्णन के कारण होती है।

प्रश्न 2.
मैं यह जानने के लिए उत्सुक हूँ कि ये पवन धाराएँ हमारे लिए क्या करती हैं ?
उत्तर:
ये पवन धाराएँ अपने साथ जलवाष्प लाती हैं जिनके कारण वर्षा होती है। यह प्रक्रिया जल-चक्र का चरण ही है।

प्रश्न 3.
कभी-कभी वर्षा अनेक समस्याओं को जन्म देती है। क्या आप ऐसी कुछ समस्याओं के नाम बता सकते हैं?
उत्तर:
बाढ़ के कारण चारों ओर जल ही जल भर जाता है, जिससे फसल, मकान तथा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो. जाता है।

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HBSE 7th Class Science पवन, तूफ़ान और चक्रवात Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वक्तव्यों में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) पवन …………………….. वाय है।
(ख) पवन पृथ्वी के …………………….. तापन के कारण उत्पन्न होती है।
(ग) पृथ्वी की सतह के निकट …………………….. वायु ऊपर उठती है, जबकि …………………….. वायु नीचे आती है।
(घ) वायु …………………….. दाब के क्षेत्र से …………………….. दाब के क्षेत्र की ओर गति करती है।
उत्तर:
(क) गतिशील
(ख) असमान
(ग) गर्म, ठण्डी
(घ) उच्च, निम्न।

प्रश्न 2.
किसी दिये गये स्थान पर पवन की गति की दिशा पता लगाने के लिए दो विधियाँ बताइए।
उत्तर:
(1) पवन की गति की दिशा का पता हवा में छोड़ी गई सूखी पत्ती के उड़ने की दिशा देखकर लगाया जा सकता है।
(2) पवन की दिशा का दिशासूचक यंत्र द्वारा भी पता लगाया जा सकता है।

प्रश्न 3.
ऐसे कोई दो अनुभव बताइए, जिनसे आपको ऐसा अनुभव हुआ हो कि वायु दाब डालती है (अध्याय में दिये गये उदाहरणों के अतिरिक्त)।
उत्तर:
(i) जब हम गुब्बारे में हवा भरते हैं तो वह फूल जाता है।
(ii) जब हवा चलती है तो दरवाजों तथा खिड़कियों पर लगे परदे उड़ते हैं।

प्रश्न 4.
आप एक भवन खरीदना चाहते हैं। क्या आप ऐसा भवन खरीदना चाहेंगे, जिसमें खिड़कियाँ हों, लेकिन रोशनदान न हों ? अपने उत्तर का कारण समझाइए।
उत्तर:
नहीं, क्योंकि मकान में रोशनदान भी आवश्यक होता है। खिड़कियों से प्रवेश होने वाली हवा रोशनदान से निकल जाती है। बिना रोशनदान वाले मकान तेज पवनों से सुरक्षित नहीं रहते हैं। क्योंकि गर्म हवा ऊपर उठती है, यह केवल रोशनदान से ही बाहर निकल पाती है।

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प्रश्न 5.
समझाइए कि कपड़े के बैनरों और धातु की चादर से बने विज्ञापन-पट्टों में छिद्र क्यों किये जाते हैं ?
उत्तर:
बैनरों तथा धातु की चादरों पर हवा का दबाव पड़ता है जिससे ये क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। इन पर हवा के दबाव को कम करने के लिए इनमें छिद्र बनाये जाते हैं जिससे हवा कम दबाव डालते हुए बाहर निकल जाती है।

प्रश्न 6.
यदि आपके गाँव अथवा शहर में चक्रवात आ जाये, तो आप अपने पड़ोसियों की सहायता कैसे करेंगे?
उत्तर:
हमें अपने पड़ोसियों की सहायता निम्न प्रकार से करनी चाहिए
(i) आने वाले खतरे से सावधान करके।
(ii) किसी सुरक्षित आश्रय की खोज करके।
(iii) पानी और खाद्य पदार्थों का संग्रह करके।
(iv) प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराकर।

प्रश्न 7.
चक्रवात से उत्पन्न होने वाली स्थिति से निपटने के लिए पहले से किस प्रकार की योजना तैयार करने की आवश्यकता होती है ?
उत्तर:
चक्रवात से उत्पन्न होने वाली स्थिति से निपटने के लिए निम्न योजना की आवश्यकता होती है
(i) चक्रवात की पूर्व घोषणा के लिए चक्रवात चेतावनी केन्द्र की स्थापना।
(ii) जल एवं खाद्य सामग्रियों का संग्रहण ।
(iii) सुरक्षित स्थानों का चयन।
(iv) प्राथमिक चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था।

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से किस स्थान पर चक्रवात आने की सम्भावना नहीं होती।
(क) चेन्नई
(ख) मेंगलुरू (मंगलोर)
(ग) अमृतसर
(घ) पुरी।
उत्तर:
(ग) अमृतसर में चक्रवात आने की सम्भावना नहीं होती क्योंकि यह तटीय क्षेत्र से दूर है।

प्रश्न 9.
नीचे दिये गये वक्तव्यों में से कौन-सा सही है
(क) शीतकाल में पवन थल से सागर की ओर बहती
(ख) ग्रीष्मकाल में पवन थल से सागर की ओर बहती है।
(ग) चक्रवात का निर्माण अति उच्च दाब तंत्र और उसके इर्द-गिर्द अति उच्च वेग की पवन के घूमने से होता है।
(घ) भारत की तटरेखा पर चक्रवातों के आने की सम्भावना नहीं है।
उत्तर:
(क) शीतकाल में पवन थल से सागर की ओर बहती है।

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HBSE 7th Class Science पवन, तूफ़ान और चक्रवात Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. बहुविकल्पीय प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों में से सही विकल्प का चयन कीजिए
1. पवन का वेग बढ़ने से वायु दाब
(क) समान रहता है
(ख) बढ़ जाता है
(ग) कम हो जाता है ।
(घ) कभी बढ़ता, कभी घटता है
उत्तर:
(ग) कम हो जाता है ।

2. पवन सदैव अधिक वायु दाब वाले क्षेत्र से
(क) और अधिक वायु दाब वाले क्षेत्र की ओर गति करता
(ख) कम वायु दाब वाले क्षेत्र की ओर गति करती है
(ग) वापस उसी क्षेत्र की ओर लौट जाती है
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ख) कम वायु दाब वाले क्षेत्र की ओर गति करती है

3. पवन धाराएँ उत्पन्न होने का कारण है
(क) पृथ्वी का सदैव ठंडा रहना
(ख) पृथ्वी का सदैव गर्म रहना
(ग) पृथ्वी का असमान रूप से गर्म होना
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) पृथ्वी का असमान रूप से गर्म होना

4. समुद्र से थल की ओर बहने वाली पवन कहलाती है
(क) मौसमी चक्रवात
(ख) टाइफून
(ग) मानसूनी पवन
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ग) मानसूनी पवन

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II. रिक्त स्थान

निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थान भरिए

1. गर्म मानसून हवाएँ अपने साथ जलवाष्प लाती हैं जिससे ………… होती है।
2. कुछ प्राकृतिक घटनाएँ ऐसी परिस्थितियों को जन्म देती हैं जिनसे कभी-कभी ………… आती हैं।
3. बिजली चमकने के साथ तीव्र वर्षा होना …………… कहलाता है।
4. ………… काफी विनाशकारी हो सकते हैं।
उत्तर:
1. वर्षा
2. आपदाएँ
3. तड़ित-झंझावात
4. चक्रवात ।

III. सुमेलन

कॉलम A का कॉलम B के शब्दों से मिलान कीजिए-

कॉलम Aकॉलम B
1. उड़ीसा(a) हरिकेन
2. अमेरिकी महाद्वीप(b) तटीय क्षेत्र
3. फिलीपीन्स, जापान(c) 18 अक्टूबर 1999 का चक्रवात
4. चक्रवात(d) टाइफून

उत्तर:

कॉलम Aकॉलम B
1. उड़ीसा(c) 18 अक्टूबर 1999 का चक्रवात
2. अमेरिकी महाद्वीप(a) हरिकेन
3. फिलीपीन्स, जापान(d) टाइफून
4. चक्रवात(b) तटीय क्षेत्र

IV. सत्य/असत्य

निम्नलिखित वाक्यों में से सत्य एवं असत्य छाँटिए

1. आँधी, तूफान एवं चक्रवात प्राकृतिक घटनाएँ हैं।
2. गुब्बारे में हवा भरने पर उसकी रबर पर अन्दर की ओर से वायु दाब बढ़ जाता है।
3. गर्म वायु, ठंडी वायु की अपेक्षा भारी होती है।
4. पवन धाराएँ पृथ्वी के असमान रूप से गर्म होने के कारण उत्पन्न होती हैं।
उत्तर:
1. सत्य
2. सत्य
3. असत्य
4. सत्य।

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
तूफान से बचने के दो उपाय बताइए।
उत्तर:
(i) चेतावनी तंत्र द्वारा प्रेषित सूचना को मानना चाहिए।
(ii) तूफान के दौरान बाहर नहीं जाना चाहिए।

प्रश्न 2.
बताइए कि धुंआ ऊपर क्यों उठता है ? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
धुंआ गर्म होता है। गर्म हवा वायु से हल्की होती है अतः धुंआ ऊपर उठता है।

प्रश्न 3.
जब आप पतंग उड़ाते हैं तो क्या आपके पीछे से आती हवा सहायक होती है?
उत्तर:
हाँ, पीछे से आने वाली हवा पतंग पर दबाव डालती है।

प्रश्न 4.
क्या आपको पवन की दिशा के विपरीत साइकिल चलाने में कठिनाई होती है ?
उत्तर:
हाँ, क्योंकि पवन आगे की ओर से दबाव डालती है।

प्रश्न 5.
साइकिल के ट्यूब के अन्दर हवा क्यों भरते हैं ?
उत्तर:
ट्यूब के अन्दर हवा दाब डालती है जिससे टायर का आकार बना रहता है।

प्रश्न 6.
मानसूनी पवन क्या होती हैं?
उत्तर:
ऐसी पवन जो अपने साथ बादलों को उड़ाकर लाती हैं, मानसूनी पवन कहलाती हैं।

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प्रश्न 7.
गर्म जल से भरे कसकर बन्द किए हुए डिब्बे पर एकदम से ठंडा पानी डालने पर क्या होगा? और क्यों? (क्रियाकलाप)।
उत्तर:
डिब्बे के अन्दर के आयतन में कमी आने के कारण डिज्वा सिकुड़ जाएगा।

प्रश्न 8.
हरिकेन क्या होते हैं ?
उत्तर:
अमेरिकी महाद्वीप में चक्रवात को हरिकेन कहा जाता है।

प्रश्न 9.
मानसून का अर्थ बताइए।
उत्तर:
मानसून शब्द की उत्पत्ति अरबी शब्द मौसम से हुई है जिसका अर्थ है ऋतु।

प्रश्न 10.
पवन वेग बढ़ने से वायु दाब पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
पवन वेग बढ़ने से वायु दाब वास्तव में कम हो जाता है।

प्रश्न 11.
ताप का वायु दाब पर क्या प्रभाव होता है? (क्रियाकलाप)।
उत्तर:
ताप बढ़ने पर वायु दाब भी बढ़ जाता है।

प्रश्न 12.
गर्म मानसूनी हवाएँ क्यों लाभप्रद हैं ?
उत्तर:
गर्म मानसूनी हवाएँ अपने साथ जलवाष्प लाती हैं, जिससे वर्षा होती है।

प्रश्न 13.
टाइफून किसे कहते हैं ?
उत्तर:
हरिकेन को फिलीपीन्स और जापान में टाइफून कहते हैं।

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
तड़ित झंझावात किसे कहते हैं ? समझाइए।
उत्तर:
तड़ित झंझावात भारत जैसे गर्म, आई और उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में अक्सर विकसित होते हैं। ताप में वृद्धि होने के कारण ऊपर की ओर उठती हुई पवन प्रबल हो जाती है। पवन वायु में पहले से विद्यमान जल बूंदों को अपने साथ ऊपर की ओर ले जाती है जहाँ ताप कम होने के कारण वे जम जाती हैं और पुनः नीचे की ओर गिरने लगती है। गिरती हुई जल की चर्दै और तीव्र वेग से ऊपर उठती हुई वायु की परस्पर क्रिया से बिजली (तड़ित) काँधती है, जिससे ध्वनि उत्पन्न होती है। इसी घटना को हम तड़ित झंझावात कहते हैं।

प्रश्न 2.
क्या कारण है हमारे देश में ग्रीष्मकाल में अधिक और शीतकाल में कम वर्षा होती है?
उत्तर:
थल विशेष रूप से राजस्थान के मरुस्थलों के असमान तापमान से ग्रीष्मकाल में दक्षिण-पश्चिमी दिशा से मानसून निर्मित होता है। ये मानसूनी पवन अपने साथ हिन्द महासागर से काफी जलवाष्प लेकर आती है। शीतकाल में थल और जल के असमान तापमान के कारण पवन उत्तर-पश्चिम के अपेक्षाकृत ठण्डे स्थानों से आती हैं। ये शीत पवन अपने साथ कम जलवाष्प लाती हैं, इसलिए शीतकाल में वर्षा भी कम होती है।

प्रश्न 3.
चक्रवात किसे कहते हैं और यह कैसे बनता
उत्तर:
बादल के बनने से पहले जल वायुमण्डल से ऊष्मा लेकर वाष्प में परिवर्तित हो जाता है। जलवाष्प वर्षा की बूँदों के रूप में पुनः द्रव रूप में परिवर्तित होती है और यह ऊष्मा वायुमण्डल में निर्मुक्त हो जाती है। निर्मुक्त होने वाली ऊष्मा से आस-पास की वायु गर्म हो जाती है। इस प्रकार गर्म वायु ऊपर की ओर उठती है, जिससे वायु दाब कम हो जाता है। फलस्वरूप तड़ित झंझावात के केन्द्र की ओर उच्च वेग की अधिक वायु गति करने लगती है। इस चक्र की पुनरावृत्ति अनेक बार होती है। घटनाओं की इस श्रृंखला का अन्त बहुत ही निम्न दाब के एक ऐसे तन्त्र के निर्माण के साथ होता है जिसके चारों ओर उच्च वेग की वायु की अनेक परतें कुण्डली के रूप में घूमती रहती हैं। मौसम की इस स्थिति को चक्रवात कहते हैं।

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प्रश्न 4.
वायुमापी क्या है ? इसका चित्र बनाइए।
उत्तर:
आपने पढ़ा कि सभी झंझावात या तूफान निम्न दाब के तन्त्र होते हैं। झंझावात के निर्माण में पवन महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए पवन के वेग की माप करना महत्वपूर्ण है। वेग की माप करने वाले उपकरण को वायुमापी कहते हैं।
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 पवन, तूफ़ान और चक्रवात -1
चित्र : पवन के वेग को मापने के लिए एक वायुमापी

प्रश्न 5.
चक्रवात के दुष्प्रभावों के सुरक्षा उपाय क्या
उत्तर:
चक्रवात के दुष्प्रभावों को कम करने में निम्नलिखित व्यवस्थाएँ सहायक हो सकती हैं। सरकारी/सामाजिक स्तर पर-
(1) चक्रवात पूर्वानुमान और चेतावनी सेवा ।
(2) सरकारी संस्थाओं, समुद्रतटों, मछुआरों, जलपोतों और आम जनता को शीघ्रातिशीघ्र चेतावनी देने के लिए तीव्रगामी संचार व्यवस्था।
(3) चक्रवात सम्भावित क्षेत्रों में चक्रवात आश्रयों का निर्माण और लोगों को तेजी से सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था।

प्रश्न 6.
यदि आप चक्रवात प्रभावित क्षेत्र में रहते हों तो वहाँ चक्रवात के बाद आप क्या सावधानी रखेंगे?
उत्तर:
(i) चक्रवात से प्रभावित जल का पीने के लिए प्रयोग नहीं करेंगे क्योंकि यह सन्दूषित हो सकता है।
(ii) हमें गीले स्विच और बिजली के खम्भों को नहीं छूना चाहिये।
(iii) चक्रवात प्रभावित क्षेत्र और बाढ़ को मनोरंजन केन्द्र नहीं बनाना चाहिए।
(iv) बचाव दल के कार्यों में दखल नहीं देना चाहिए।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वायु को गर्म करने पर इसका प्रसार होता है।’ एक क्रियाकलाप द्वारा समझाइए। (क्रियाकलाप)
उत्तर:
एक क्वथन नली लीजिए। नली के मुख पर एक गुब्बारे को कसकर लगाइए। आप इसे कसने के लिए टेप का उपयोग भी कर सकते हैं। किसी बीकर में लगभग दो-तिहाई ऊँचाई तक गर्म जल डालिए। गुब्बारा लगी क्वथन नली को गर्म जल में इस प्रकार रखिए कि गुब्बारा जल से बाहर रहे (चित्र)। दो तीन मिनट तक यह देखिए कि क्या गुब्बारे के आकार में किसी प्रकार का परिवर्तन होता है। क्वथन नली को जल से बाहर निकाल लीजिए, इसे कमरे के ताप तक ठण्डा होने दीजिए। अब एक अन्य बीकर में थोड़ा बर्फ का ठण्डा जल लीजिए और क्वथन नली को पहले की भाँति 2-3 मिनट के लिए ठण्डे जल में रख दीजिए। गुब्बारे के आकार में होने वाले परिवर्तन को नोट कीजिए। अपने प्रेक्षणों के आधार पर आगे दिये गए प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास कीजिए-
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 पवन, तूफ़ान और चक्रवात -2
चित्र : गर्म और ठण्डे जल में गुब्बारे का आकार

प्रश्न 2.
तड़ित झंझावात किसे कहते हैं ? इसके लिए क्या सावधानी रखनी चाहिए?
उत्तर:
तड़ित झंझावात : यदि झंझा के साथ तड़ित (बिजली) भी गिरे तो, उसे तड़ित झंझावात कहते हैं।

पवन वायु में पहले से विद्यमान जल बूंदों को अपने साथ ऊपर की ओर ले जाती है, जहाँ ताप कम होने के कारण वे जम जाती हैं और पुनः नीचे की ओर गिरने लगती हैं। गिरती हुई जल की बूंदें और तीव्र वेग से ऊपर उठती हुई वायु की परस्पर क्रिया से बिजली (तड़ित) काँधती है, जिससे ध्वनि उत्पन्न होती है। तड़ित झंझावात में हमें निम्नलिखित सावधानियाँ बरतनी चाहिए-
(i) किसी ऐसे वृक्ष के नीचे आश्रय न लें, जो अलगथलग हो। यदि आप वन में हैं, तो किसी छोटे वृक्ष के नीचे आश्रय लें। खुली जमीन पर न लेटें।
(ii) धातु की डण्डी वाले छाते का उपयोग न करें।
(iii) खिड़की के निकट न बैठे। खुले गैरेज, भण्डारण शेड, धात्विक चादरों की छत वाले शेड आदि आश्रय लेने के लिए उपयुक्त स्थान नहीं होते।
(iv) कार अथवा बस आश्रय लेने के लिए सुरक्षित स्थान हैं।
(v) यदि आप जल में हैं तो बाहर निकलकर किसी इमारत में चले जाएँ।

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प्रश्न 3.
पवन धाराएँ किस प्रकार उत्पन्न होती हैं ? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
निम्नलिखित दो स्थितियाँ हैं जिनके कारण पवन धाराएँ उत्पन्न होती हैं-
(क) भूमध्यरेखीय और ध्रुवीय क्षेत्रों का असमान रूप से गर्म होना:
भूमध्य रेखा के आस-पास के क्षेत्रों को सर्य की अधिकतम ऊष्मा मिलती है, इससे इन क्षेत्रों में पृथ्वी की सतह के निकट की वायु गर्म हो जाती है। गर्म वायु ऊपर उठती है और ठण्डी वायु भूमध्य रेखा के दोनों ओर स्थित 0 से 30 डिग्री अक्षांश की पट्टी के क्षेत्रों से भूमध्य क्षेत्र की ओर गतिशील हो जाती है। इस प्रकार उत्पन्न पवन धाराएँ उत्तर और दक्षिण से भूमध्य रेखा की ओर बहती हैं। ध्रुवों पर वायु पृथ्वी के लगभग 60° अक्षांश तक के क्षेत्रों की वायु से अधिक ठण्डी होती है। इन क्षेत्रों में गर्म वायु ऊपर उठती है, जिसका स्थान लेने के लिए ध्रुवों से ठण्डी वायु उस ओर प्रवाहित होने लगती है। इस प्रकार वायु का प्रवाह ध्रुवों से अपेक्षाकृत अधिक गर्म क्षेत्रों की ओर होता रहता है।
इसी प्रकार हम समझ सकते हैं कि 30° तथा 60° अक्षांश के क्षेत्रों के असमान रूप से गर्म होने के कारण पवन का प्रवाह 30° अक्षांश से 60° अक्षांश की ओर होगा।

(ख) थल और जल का असमान रूप से गर्म होना:
ग्रीष्मकाल (गर्मियों) में, थलीय क्षेत्र अधिक तेजी से गर्म होता है और अधिकांश समय थल का ताप समुद्री जल की अपेक्षा अधिक रहता है। थल के ऊपर की वायु गर्म होकर ऊपर उठ जाती है। इससे पवन समुद्र से थल की ओर बहती है। यह मानसूनी पवन होती है।

प्रश्न 4.
चक्रवात का निर्माण कैसे होता है? चित्र द्वारा समझाइए।
उत्तर:
किसी चक्रवात का केन्द्र एक शांत क्षेत्र होता है। इसे झंझा का नेत्र कहते हैं। कोई विशाल चक्रवात वायुमण्डल में वायु का तेजी से घूर्णन करता पिण्ड होता है, जो पृथ्वी तल से 10 से 15 km की ऊँचाई पर स्थित होता है। चक्रवात के नेत्र का व्यास 10 से 30 km तक होता है (संलग्न चित्र A)| यह बादलों से मुक्त क्षेत्र होता है और इसमें पवन का वेग न्यून होता है। इस शांत और स्पष्ट नेत्र के इर्दगिर्द लगभग 150 km आमाप का बादल का क्षेत्र होता है (संलग्न चित्र B)। इस क्षेत्र में उच्च वेग की पवन (150250 km/h) और सघन वर्षा वाले घने बादल होते हैं। इस क्षेत्र से परे पवन वेग क्रमशः कम होता जाता है। चक्रवातों की उत्पत्ति का प्रक्रम अत्यधिक जटिल होता है। चित्र A में इसे एक प्रतिरूप द्वारा दर्शाने का प्रयास किया गया है।
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प्रश्न 5.
चक्रवात बनने की घटना को समझाने के लिए एक प्रवाह चित्र बनाइए।
उत्तर:
निम्नलिखित प्रवाह चित्र द्वारा इस परिघटना को समझाया जा सकता है, जिसके कारण बादलों का निर्माण और वर्षा होती है तथा तूफान और चक्रवात बनते हैं।
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 8 पवन, तूफ़ान और चक्रवात -4

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पवन, तूफ़ान और चक्रवात Class 7  HBSE Notes in Hindi

→ गतिशील वायु, पवन कहलाती है।
→ छ हमारे आस-पास की वायु दाब डालती है।
→ पवन का वेग बढ़ने पर वायु दाब घट जाता है।
→ पवन सदैव अधिक वायु दाब वाले क्षेत्र से कम वायु दाब वाले क्षेत्र की ओर गति करती है।
→ वायु गर्म करने पर प्रसारित होती है और ठण्डा करने पर संकुचित होती है।
→ गर्म वायु ऊपर उठती है, जबकि अपेक्षाकृत ठण्डी वायु की प्रवृत्ति पृथ्वी की सतह की ओर आने की होती है।
→ जब गर्म वायु ऊपर उठती है तो उस स्थान पर वायु दाब कम हो जाता है और आस-पास के क्षेत्र की उच्च दाब की ठण्डी वायु उस स्थान की ओर प्रवाहित होने लगती है।
→ गतिशील वायु पवन कहलाती है। ७ पृथ्वी पर असमान तापन पवनों के बनने का प्रमुख कारण है।
→ जलवाष्प वाली पवन वर्षा लाती है। 12 उच्च वेग की पवन और वायुदाब के अन्तर से चक्रवात बन सकते हैं।
→ उपग्रहों तथा राडार जैसी उन्नत प्रौद्योगिकी की सहायता से चक्रवातों की निगरानी करना आसान हो गया है।
→ स्व सहायता सबसे अच्छी सहायता है। अत: किसी भी चक्रवात के आने से पहले ही अपनी सुरक्षा की योजना बना लेना और सुरक्षा के उपायों को तैयार रखना अच्छा रहता है।
→ पवन – गतिशील वायु पवन कहलाती है।
→ दाब – वायु द्वारा किसी एकांक क्षेत्र पर पड़ने वाला बल दाब कहलाता है।
→ पवन वेग मापी – हवा की गति को मापने के यंत्र को पवन वेग मापी कहते हैं।
→ चक्रवात – चक्रवात वह तूफान है जो अधिकांश तटीय क्षेत्रों को प्रभावित करता है।
→ तड़ित झंझावात – जल की गिरती हुई बूंदों तथा तीव्र गति से ऊपर उठती हुई वायु की परस्पर क्रिया से उत्पन्न ध्वनि को तड़ित झंझावात कहते हैं।
→ मानसूनी पवन – मानसूनी पवन अपने साथ पानी लाती हैं जिससे वर्षा होती है।
→ टॉरनेडो – टॉरनेडो गहरे रंग का कीपाकार बादल होता है। इनकी कीप जैसी संरचना आकाश से पृथ्वी तल की ओर आती हुई प्रतीत होती है।
→ टाइफून – चक्रवात को जापान में टाइफून कहा जाता है।
→ हरिकेन – अमेरिकी महाद्वीप में चक्रवात को हरिकेन कहा जाता है।

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HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 मौसम, जलवायु तथा जलवायु के अनुरूप जंतुओं द्वारा अनुकूल

Haryana State Board HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 मौसम, जलवायु तथा जलवायु के अनुरूप जंतुओं द्वारा अनुकूल Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Science Solutions Chapter 7 मौसम, जलवायु तथा जलवायु के अनुरूप जंतुओं द्वारा अनुकूल

HBSE 7th Class Science मौसम, जलवायु तथा जलवायु के अनुरूप जंतुओं द्वारा अनुकूल InText Questions and Answers

बूझो/पहेली

प्रश्न 1.
बूझो जानना चाहता है कि मौसम की रिपोर्ट कौन तैयार करता है?
उत्तर:
मौसम की रिपोर्ट मौसम विभाग तैयार करता

प्रश्न 2.
बूझो जानना चाहता है कि मौसम इतनी तेजी से क्यों बदलता है?
उत्तर:
पृथ्वी के सूर्य के परितः तथा अपनी अक्ष के परितः घूर्णन के कारण मौसम इतनी तेजी से बदलता है।

प्रश्न 3.
पहेली जानना चाहती है कि आखिर मौसम का स्रोत क्या है?
उत्तर:
मौसम के सभी परिवर्तनों का स्रोत सूर्य होता है।

प्रश्न 4.
पहेली जानना चाहती है कि क्या मछलियाँ और तितलियाँ भी पक्षियों की तरह प्रवास करती हैं?
उत्तर:
हाँ।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 मौसम, जलवायु तथा जलवायु के अनुरूप जंतुओं द्वारा अनुकूल

HBSE 7th Class Science मौसम, जलवायु तथा जलवायु के अनुरूप जंतुओं द्वारा अनुकूल Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
उन घटकों के नाम बताइए जो किसी स्थान के मौसम को निर्धारित करते हैं ?
उत्तर:
वर्षा, तापमान, आर्द्रता।

प्रश्न 2.
दिन में किस समय ताप के अधिकतम और न्यूनतम होने की सम्भावना होती है ?
उत्तर:
सामान्यतः दोपहर के समय दिन का तापमान अधिकतम होता है। दिन का न्यूनतम तापमान प्रात:काल होता है।

प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) दीर्घ अवधि के मौसम का औसत ……………………. कहलाता है।
(ख) किसी स्थान पर बहुत कम वर्षा होती है और उस स्थान का तापमान वर्ष भर उच्च रहता है, उस स्थान की जलवायु ……………………. और ……………………. होगी।
(ग) चरम जलवायवीय परिस्थितियों वाले पृथ्वी के दो क्षेत्र ……………………. और ……………………. हैं।
उत्तर:
(क) जलवायु
(ख) उष्ण, शुष्क
(ग) ध्रुव, रेगिस्तान।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित क्षेत्रों की जलवायु का प्रकार बताइए
(क) जम्मू एवं कश्मीर
(ख) केरल
(ग) राजस्थान
(घ) उत्तर-पूर्व भारत।
उत्तर:
(क) जम्मू एवं कश्मीर – (क) ठंडी और आई।
(ख) केरल – (ख) गर्म और आर्द्र।
(ग) राजस्थान – (ग) गर्म और शुष्क।
(घ) उत्तर-पूर्व भारत – (घ) गर्म और आई।

प्रश्न 5.
मौसम और जलवायु में से किसमें तेजी से परिवर्तन होता है ?
उत्तर:
मौसम में जलवायु की अपेक्षा तेजी से परिवर्तन होता है। जलवायु किसी स्थान की दीर्घ अवधि 25 वर्ष के मौसम के प्राचलों द्वारा निर्धारित होती है।

प्रश्न 6.
जन्तुओं की कुछ विशेषताओं की सूची नीचे दी गई है
(क) आहार मुख्यतः फल हैं
(ख) सफेद बाल/फर
(ग) प्रवास की आवश्यकता
(घ) तीन स्वर-ध्वनि (तेज आवाज)
(च) पैरों के चिपचिपे तलवे
(छ) त्वचा के नीचे वसा की मोटी परत
(ज) चौड़े और बड़े नखर
(झ) चटख रंग
(ट) मजबूत पूँछ
(ठ) लम्बी और बड़ी चोंच
उपरोक्त प्रत्येक विशेषता के लिए यह बताइए कि वह उष्णकटिबन्धीय वर्षा वन अथवा ध्रुवीय क्षेत्र में से किसके लिए अनुकूलित हैं। क्या आप समझते हैं कि इनमें से कुछ विशेषताएँ दोनों क्षेत्रों के लिए अनुकूलित हो सकती हैं ?
उत्तर:
(क) उष्णकटिबन्धीय
(ख) ध्रुवीय
(ग) दोनों
(घ) दोनों
(च) ध्रुवीय
(छ) ध्रुवीय
(ज) ध्रुवीय
(झ) उष्ण कटिबन्धीय
(ट) उष्ण कटिबन्धीय
(ठ) उष्ण कटिबन्धीय।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 मौसम, जलवायु तथा जलवायु के अनुरूप जंतुओं द्वारा अनुकूल

प्रश्न 7.
उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन जन्तुओं की विशाल जनसंख्या को आवास प्रदान करते हैं। समझाइए कि ऐसा क्यों है?
उत्तर:
उष्णकटिबन्धीय वर्षा वन लगातार गर्मी तथा वर्षा के कारण जन्तुओं तथा वनस्पति की विशाल आबादी को आवास प्रदान करते हैं। वहाँ की परिस्थितियाँ जन्तुओं व वनस्पतियों के अनुकूल होती हैं।

प्रश्न 8.
उदाहरण सहित समझाइए कि किसी विशेष जलवायवीय परिस्थिति में कुछ विशिष्ट जन्तु ही जीवन-यापन करते क्यों पाये जाते हैं ?
उत्तर:
किसी विशेष जलवायवीय परिस्थिति में कुछ विशिष्ट जन्तु ही जीवनयापन करते पाये जाते हैं, क्योंकि वे जन्तु उन स्थितियों में जीने के लिए अनुकूलित होते हैं। जन्तुओं में जीने के लिए जलवायु के प्रति अनुकूलन होना अति आवश्यक है।

उदाहरण धुवीय भालू के सम्पूर्ण शरीर पर सफेद बाल (फर) होते हैं जिसके कारण वे बर्फ की सफेद पृष्ठभूमि में आसानी से दिखाई नहीं देते हैं। इस गुण के कारण उन्हें भोजन हेतु शिकार करने में सहायता मिलती है क्योंकि उनके शिकार जन्तु उन्हें आसानी से देख नहीं पाते। फरों की मोटी परत के कारण इन्हें सर्दी में भी अधिक कठिनाई नहीं होती। ये परतें भालू की अत्यधिक सर्दी से रक्षा करती हैं। इन भालुओं की त्वचा के नीचे चर्बी की मोटी परत होती है जो सर्दी को शरीर में प्रवेश नहीं करने देती तथा शरीर की गर्मी को निर्मुक्त नहीं होने देती। ध्रुवीय भालू का शरीर इतनी अच्छी तरह से शीतरोधी होता है कि वे धीमे-धीमे चलते हैं ताकि उनके शरीर का ताप आवश्यकता से अधिक न हो जाये। गर्म मौसम में भौतिक क्रियाकलापों के बाद इन्हें अपने शरीर को ठंडा रखना पड़ता है। अतः ये समुद्री जल में तैर सकते हैं। इनके पंजे चौड़े तथा बड़े होते हैं जिनमें नाखून उपस्थित होते हैं जिससे इनको बर्फ पर चलने में आसानी होती है। इनके सूंघने तथा देखने की क्षमता अच्छी होती है जिसके कारण ये अपना शिकार बर्फ में भी ढूँढ़ लेते हैं।

प्रश्न 9.
उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वनों में रहने वाला हाथी किस प्रकार अनुकूलित है?
उत्तर:
उष्णकटिबन्धीय वर्षा वनों में रहने वाले हाथियों ने स्वयं को निम्न प्रकार से अनुकूलित किया है
(i) यह अपनी लम्बी सैंड का प्रयोग एक हथियार के रूप में करते हैं, जो हाथी की नाक होती है।
(ii) हाथी अपनी सँड़ का प्रयोग भोजन तोड़ने, पकड़ने एवं उठाने के लिए करता है।
(iii) इनके बाहा दाँत रदनक कहलाते हैं जिनका उपयोग करके ये अपनी पसन्द के वृक्षों की छाल को आसानी से छील सकते हैं।
(iv) हाथी स्पर्धा के बावजूद भी अपना भोजन आसानी – से जुटाने में समर्थ होते हैं।
(v) हाथी के बड़े कान बहुत हल्की ध्वनि को भी सुनने में सहायक होते हैं। ये कान वर्षा वनों की गर्म और आर्द्र जलवायु में हाथी को ठण्डा करने में भी मदद करते हैं।

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निम्नलिखित प्रश्नों में सही विकल्प चुनिए

प्रश्न 10.
कोई मांसाहारी जन्तु, जिनके शरीर पर धारियाँ होती हैं, अपने शिकार को पकड़ते समय बहुत तेजी से भागता है। इसके पाये जाने की सम्भावना है किसी
(क) ध्रुवीय क्षेत्र में
(ख) मरुस्थल में
(ग) महासागर में
(घ) उष्णकटिबन्धीय वर्षा वन में।
उत्तर:
(घ) उष्णकटिबन्धीय वर्षा वन में।

प्रश्न 11.
ध्रुवीय भालू को अत्यधिक ठण्डी जलवायु में रहने के लिए कौन-सी विशेषताएँ अनुकूलित करती
(क) श्वेत बाल/फर, त्वचा के नीचे बसा, तीव्र सूंघने की क्षमता।
(ख) पतली त्वचा, बड़े नेत्र, श्वेत फर या बाल।
(ग) लम्बी पूँछ, मजबूत नखर, सफेद बड़े पंजे।
(घ) श्वेत (सफेद) शरीर, तैरने के लिए पंजे, श्वसन के लिए क्लोम (गिल)।
उत्तर:
(क) श्वेत बाल/फर, त्वचा के नीचे वसा, तीव्र सँधने की क्षमता।

प्रश्न 12.
निम्न में से कौन-सा विकल्प उष्णकटिबन्धीय क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ (सबसे अच्छा) वर्णन करता है?
(क) गर्म और आई
(ख) मध्यम तापमान-अत्यधिक वर्षा
(ग) सर्द और आर्द्र
(घ) गर्म और शुष्क।
उत्तर:
(क) गर्म और आर्द्र।

HBSE 7th Class Science मौसम, जलवायु तथा जलवायु के अनुरूप जंतुओं द्वारा अनुकूल Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. बहुविकल्पीय प्रश्न निम्नलिखित प्रश्नों में से सही विकल्प का चयन कीजिए

1. किसी स्थान का मौसम परिवर्तित होता है
(क) दिन-प्रतिदिन
(ख) सप्ताह दर सप्ताह
(ग) प्रत्येक ऋतु में
(घ) से सभी
उत्तर:
(घ) से सभी

2. उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन पाए जाते हैं
(क) भारत में
(ख) ब्राजील में
(ग) मलेशिया में
(घ) इन सभी में
उत्तर:
(घ) इन सभी में

3. ध्रुवीय पेंग्विन है, एक
(क) स्तनी
(ख) रेंगने वाला जन्तु
(ग) पक्षी
(घ) मछली
उत्तर:
(ग) पक्षी

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4. हाथी के लम्बे बाहर निकले दाँत होते हैं
(क) रद (रदनक)
(ख) छेदक
(ग) मोलर
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(क) रद (रदनक)

5. निम्न में से कौन-सा वृक्षाश्रयी नहीं है
(क) लाल नेत्र वाला मेढ़क
(ख) पैंग्विन पक्षी
(ग) टूकन पक्षी
(घ) न्यूवर्ल्ड मंकी
उत्तर:
(ख) पैंग्विन पक्षी

II. रिक्त स्थान

निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थान भरिए
1. वर्षा को ………… यंत्र द्वारा मापा जाता है।
2. ध्रुवों पर ………… महीने तक सूर्यास्त नहीं होता है।
3. ध्रुवीय भालू की तरह…………भी अच्छे तैराक होते है।
4. ………… क्षेत्रों की जलवायु सामान्यतः गर्म होती है।
उत्तर:
1. वर्षा मापी,
2. छ:,
3. पेंग्विन
4: उष्ण कटिबन्धीय।

III. सुमेलन

कॉलम A तथा कॉलम B के शब्दों का मिलान कीजिए-

कॉलम Aकॉलम B
1. त्वचा के भीतर वसा परत(a) बर्फ पर चलने हेतु
2. नखर युक्त पैर(b) शिकार को ढूँढ़ना
3. बालों का सफेद रंग(c) सदी से बचाव
4. तीव्र घ्राण शक्ति(d) शिकार की नजर से छिपना

उत्तर:

कॉलम Aकॉलम B
1. त्वचा के भीतर वसा परत(a) बर्फ पर चलने हेतु
2. नखर युक्त पैर(b) शिकार को ढूँढ़ना
3. बालों का सफेद रंग(c) सदी से बचाव
4. तीव्र घ्राण शक्ति(d) शिकार की नजर से छिपना

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IV. सत्य/असत्य

निम्नलिखित वाक्यों में से सत्य एवं असत्य कथन छाँटिए
1. ध्रुवों पर किसी भी प्रकार का कोई जीव नहीं पाया जाता
2. ध्रुवीय क्षेत्रों में छः महीने का दिन एवं छ: महीने की रात होती है।
3. सारस एवं कोयल प्रवासी पक्षी हैं।
4. हाथी केवल मरुस्थली क्षेत्रों में पाया जाता है।
उत्तर:
1. असत्य
2. सत्य
3. सत्य
4, असत्य।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
वर्षामापी क्या है?
उत्तर:
वर्षा मापने का यन्त्र वर्षामापी कहलाता है।

प्रश्न 2.
लाल नेत्र वाला मेढ़क कहाँ पाया जाता है ?
उत्तर:
वृक्षों पर।

प्रश्न 3.
वर्षा वन में पाये जाने वाले प्राणियों के नाम लिखिए।
उत्तर:
कपि (बन्दर), गुरिल्ला, शेर, चीता, तेंदुआ, सर्प आदि।

प्रश्न 4.
प्रचुर वर्षा वाले क्षेत्र के वनों को क्या कहते है?
उत्तर:
उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन।

प्रश्न 5.
भारतीय उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन के एक सामान्य जन्तु का नाम लिखिए।
उत्तर:
हाथी।

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प्रश्न 6.
पेंग्विन कहाँ का प्रमुख पक्षी है ?
उत्तर:
पैग्विन ध्रुवीय क्षेत्र का प्रमुख पक्षी है।

प्रश्न 7.
किसी मरुस्थलीय जलवायु का प्रमुख लक्षण बताइए।
उत्तर:
यहाँ जलवायु गर्म और शुष्क होती है।

प्रश्न 8.
आपके क्षेत्र का कम से कम तथा अधिकतम तापमान कितना होता है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
सर्दियों में 5°C निम्नतम तथा गर्मियों में 45°C अधिकतम।

प्रश्न 9.
पेंग्विन का प्रमुख लक्षण जो इसे धुवीय प्रदेश में रहने के अनुकूल बनाता है, लिखिए।
उत्तर:
शरीर पर घने फरों का पाया जाना।

प्रश्न 10.
आर्द्र जलवायु क्या होती है ?
उत्तर:
वायु में अत्यधिक नमी का पाया जाना।

प्रश्न 11.
किसी प्रवासी पक्षी का नाम लिखिए।
उत्तर:
साइबेरियन क्रेन।

प्रश्न 12.
प्रवासी पक्षी प्रवास पर क्यों आते हैं ?
उत्तर:
प्रजनन के लिए तथा प्रतिकूल मौसम से बचने के लिए।

प्रश्न 13.
हाथी में वृक्षों की छाल छीलने के लिए क्या अनुकूलन होता है ?
उत्तर:
लम्बे व बाहर निकले रदनक दाँत।

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लयु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अखबारों में आने वाली दैनिक मौसम रिपोर्ट कहाँ से आती है?
उत्तर:
मौसम की रिपोर्ट भारत के मौसम विज्ञान विभाग द्वारा तैयार की जाती है। यह विभाग प्रतिदिन विभिन्न स्थानों से वहाँ के ताप, पवन वेग आदि पर आँकड़े एकत्रित करता है और मौसम के बारे में पूर्वानुमान लगाता है। यहाँ से ये रिपोर्ट अखबार में छापी जाती हैं।

प्रश्न 2.
“मौसम में होने वाले सभी परिवर्तन सूर्य के कारण होते हैं,” कैसे ? समझाइए।
उत्तर:
मौसम में सभी परिवर्तन सूर्य के कारण होते हैं। सूर्य अत्यधिक उच्च ताप पर गरम गैसों का गोला है। सूर्य की हमसे दूरी बहुत अधिक है परन्तु सूर्य से उत्सर्जित कर्जा इतनी अधिक है कि पृथ्वी से इतनी दूरी होने के बावजूद सूर्य हमारे लिए समस्त ऊष्मा और प्रकाश का स्रोत है। अत: सूर्य ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत है जो मौसम में परिवर्तन लाता है। पृथ्वी के थल क्षेत्र, समुद्रों और वायुमण्डल द्वारा अवशोषित और परावर्तित की जाने वाली ऊर्जा भी किसी स्थान पर मौसम को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होती है।

प्रश्न 3.
पेंग्विन नामक पक्षी में ध्रुवीय क्षेत्रों में रहने के लिए क्या अनुकूलन पाये जाते हैं ?
उत्तर:
पैग्विन सफेद रंग के होते हैं और आसानी से बर्फ की सफेद पृष्ठभूमि में मिल जाते हैं जिससे ये शिकारियों से बचे रहते हैं। इनके शरीर में स्वयं को सर्दी से बचाने के लिए मोटी त्वचा और अत्यधिक वसा होती है। ये झुण्डों में रहते हैं जिससे भी ये गर्म बने रहते हैं। ये अच्छे तैराक होते हैं, इनके पैरों में तैरने के लिए जाल जैसी रचना पायी जाती है।

प्रश्न 4.
उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन किन देशों में पाये जाते हैं। उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वनों के कुछ वन्य जन्तुओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन भारत, मलेशिया, इण्डोनेशिया, ब्राजील, कांगो गणतन्त्र, केन्या, युगान्डा और नाइजीरिया में पाये जाते हैं। उष्णकटिबन्धीय वर्षा वनों के वन्य जन्तुओं में-चीता, बारहसिंगा, शेर, हाथी, बन्दर, गिलहरी, सर्प, अजगर आदि सम्मिलित हैं।

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प्रश्न 5.
प्रवास से आप क्या समझते हैं ? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर:
जीवधारी अधिक प्रतिकूल मौसम में स्वयं को बचाने के लिए दूसरे स्थानों पर चले जाते हैं, इस परिघटना को प्रवास कहते हैं। अनेक मछलियाँ ठण्ड से बचने के लिए गर्म धाराओं में प्रवास करती हैं। उदाहरण के लिए, साइबेरियाई क्रेन जो साइबेरिया से राजस्थान में भरतपुर और हरियाणा में सुल्तानपुर जैसे स्थानों पर सर्दियों में प्रवास के लिए आते हैं।

प्रश्न 6.
वर्षा वनों में कुछ जीव वृक्षों पर रहते हैं। इनमें वृक्षों पर रहने के लिए क्या अनुकूलन पाये जाते हैं। दो उदाहरणों द्वारा समझाइए।।
उत्तर:
(1) लाल नेत्र वाले मेंढ़क के पैर के तलवे चिपचिपे होते हैं, जो उन्हें उन वृक्षों पर चढ़ने में सहायता करते हैं, जिन पर वे रहते हैं।
(2) वृक्षवासी बन्दरों की लम्बी पूँछ इन्हें वृक्षों पर रहने में सहायता करती है। यह शाखाओं को पकड़ने में सहायता करती है। इनके हाथ पैर ऐसे होते हैं जिससे ये आसानी से शाखाओं को थामे रहते हैं।

प्रश्न 7.
वर्षा वन में पाये जाने वाले किसी पक्षी में अनुकूलन बताइए।
उत्तर:
ट्रकन नामक पक्षी ऐसे वनों के लिए अनुकलित हैं। ये ऐसे स्थानों से भोजन प्राप्त कर सकते हैं जहाँ अन्य जन्तु नहीं पहुँचते। इनकी लम्बी चोंच ऐसी शाखाओं में लगे फलों तक पहुँचकर फल खा सकती है जो बहुत कमजोर होती हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
अधिकतम तापमान में परिवर्तन के लिए एक ग्राफ बनाइए।
उत्तर:
नीचे दिये गये चित्र में 3 अगस्त, 2011 से 9 अगस्त, 2011 तक शिलांग, मेघालय में रिकॉर्ड किये गये अधिकतम तापमान को दिखाया गया है-
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प्रश्न 2.
श्रीनगर और तिरुअनंतपुरम भारतवर्ष के दो विपरीत छोरों के क्षेत्र हैं, इनकी जलवायु में अन्तर के लिए सारणी बनाइए।
उत्तर:
श्रीनगर (जम्मू और कश्मीर) तथा तिरुअनंतपुरम (केरल) की जलवायु में तुलना

प्रश्न 3.
प्रवासी पक्षी प्रवास क्यों और कैसे करते हैं ? समझाइए।
उत्तर:
कुछ प्रवासी पक्षी अपने आवास की चरम जलवायवीय परिस्थितियों से बचने के लिए 15000 किमी तक की यात्रा करते हैं। सामान्यतः ये अधिक ऊँचाई पर उड़ान भरते हैं, जहाँ वायु प्रवाह उड़ान में सहायक होता है। इस ऊँचाई की शीत स्थितियों उनकी उड़ानपेशियों द्वारा उत्पन्न ऊष्मा का विपरंण आसान कर देती हैं। लेकिन आश्चर्य की बात है कि प्रवासी पक्षी वर्ष दर वर्ष एक ही स्थान पर कैसे आते रहते हैं यह एक रहस्य है। ऐसा लगता है कि इन पक्षियों में दिशा का सहज बोध होता है और ये जानते हैं कि किस दिशा में उड़ना है। मार्गदर्शन के लिए सम्भवत: कुछ भूचिन्हों (लैंडमार्क) का उपयोग करते हैं। संभवतः अनेक पक्षियों को दिन में सूर्य और रात्रि में तारों से मार्गदर्शन मिलता है। इसके भी कुछ प्रमाण हैं कि पक्षी दिशा का पता लगाने के लिए पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का उपयोग करते हैं। केवल पक्षी ही ऐसे जन्तु नहीं, जो प्रवास करते हैं। अनेक स्तनधारी जीव, अनेक प्रकार की मछलियाँ और कीट भी अधिक अनुकूल जलवायु की तलाश के लिए मौसमी रूप से प्रवास करते हैं।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 7 मौसम, जलवायु तथा जलवायु के अनुरूप जंतुओं द्वारा अनुकूल

मौसम, जलवायु तथा जलवायु के अनुरूप जंतुओं द्वारा अनुकूल Class 7 HBSE Notes in Hindi

→ किसी स्थान पर तापमान, आर्द्रता, वर्षा, पवन वेग आदि के सम्बन्ध में वायुमण्डल की दिन-प्रतिदिन की स्थिति उस स्थान का मौसम कहलाती है।
→ दिन का अधिकतम तापमान सामान्यतः अपराह्न (दोपहर बाद) में जबकि न्यूनतम तापमान प्रातः (भोर) में होता है।
→ वर्ष भर सूर्योदय और सूर्यास्त का समय भी परिवर्तित होता रहता है। .मौसम के सभी परिवर्तन सूर्य से संचालित होते हैं।
→ दीर्घ अवधि, जैसे 25 वर्ष में लिये गये मौसम के प्राचलों के आधार पर तैयार किये गये प्रतिरूप (पैटर्न), उस स्थान की जलवायु निर्धारित करते हैं।
→ जलवायु का सभी जीवों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जन्तु उन परिस्थितियों के लिए अनुकूलित होते हैं जिनमें वह वास करते हैं।
→ ध्रुवीय क्षेत्रों में चरम जलवायु पायी जाती है। ये क्षेत्र सदैव बर्फ से ढके रहते हैं और यहाँ वर्ष के अधिकांश भाग में अत्यधिक सर्दी रहती है।
→ ध्रुवीय क्षेत्रों में वर्षभर बहुत सर्दी रहती है। ध्रुवों में वर्ष के छः महीने तक सूर्यास्त नहीं होता है और शेष छ: महीने सूर्योदय नहीं होता है।
→ ध्रुवीय भालू और पैंग्विन ध्रुवीय क्षेत्रों में रहने के लिए अनुकूलित होते हैं। इनकी त्वचा के नीचे स्थित वसा की परत तथा त्वचा के ऊपर बाल या फर सर्दी से इनकी सुरक्षा करते हैं।
→ अतिशीत मौसम से बचने के लिए प्रवास एक अन्य साधन है।
→ अनुकूल जलवायवी परिस्थितियों के कारण उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वनों में पादपों और जन्तुओं की विशाल जनसंख्या – पायी जाती है।
→ उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वनों में जन्तु इस प्रकार अनुकूलित होते हैं कि उन्हें अन्य प्रकार के जन्तुओं से भिन्न भोजन एवं आश्रय की आवश्यकता होती है। ताकि उनमें परस्पर स्पर्धा कम से कम हो।
→ मौसम – किसी स्थान पर, तापमान, आर्द्रता, बर्फ, वायु वेग आदि के सन्दर्भ में वायुमण्डल की प्रतिदिन की परिस्थिति उस स्थान का मौसम कहलाती है।
→ मौसम के घटक – तापमान, वर्षा, प्रकाश, आर्द्रता, वायु आदि।
→ आर्द्रता – वायु में जलवाष्प के रूप में उपस्थित नमी।
→ अधिकतम तापमान – दोपहर के बाद मापा गया तापमान।
→ न्यूनतम तापमान – प्रातः के समय मापा गया तापमान।
→ धुवीय क्षेत्र – पृथ्वी के ध्रुव/यहाँ जलवायु की चरम स्थितियाँ होती है।
→ जलवायु – दीर्घ अवधि में लिया गया मौसम का प्रारूप ही उस स्थान की जलवायु कहलाता है।
→ अनुकूलन – वे सभी गुण तथा लक्षण जो जन्तुओं को उनके आवास एवं परिवेश में सही ढंग से रहने योग्य बनाते हैं, अनुकूलन कहलाते हैं।
→ उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्र – पृथ्वी के वह स्थान जहाँ गर्म एवं नम जलवायु होती हैं।
→ उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वन – वर्षा की अधिकता वाले क्षेत्र में पाए जाने वाले वन।
→ प्रवास – किसी जीव का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाना।

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HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

Haryana State Board HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

HBSE 7th Class Science भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन InText Questions and Answers

बूझो/पहेली

प्रश्न 1.
अध्याय 1 में हमने पढ़ा कि पादप (पौधे) अपना भोजन प्रकाश संश्लेषण नामक प्रक्रम द्वारा स्वयं बनाते हैं। क्या हम प्रकाश संश्लेषण को रासायनिक परिवर्तन कह सकते हैं ?
उत्तर:
हाँ। क्योंकि इसमें भी नये पदार्थ बनते हैं।

प्रश्न 2.
पहेली ने कहा पाचन भी एक रासायनिक परिवर्तन है ?
उत्तर:
हाँ। क्योंकि इसमें पदार्थों के रासायनिक गुण परिवर्तित हो जाते हैं।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

HBSE 7th Class Science भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रक्रमों के अन्तर्गत होने वाले परिवर्तनों को भौतिक अथवा रासायनिक परिवर्तन के रूप में वर्गीकृत कीजिए
(क) प्रकाश संश्लेषण
(ख) जल में शक्कर को घोलना
(ग) कोयले को जलाना
(घ) मोम को पिघलाना
(च) ऐलुमिनियम के टुकड़े को पीटकर उसका पतला पत्र (फॉइल) बनाना
(छ) भोजन का पाचन।
उत्तर:
रासायनिक परिवर्तन – (क) प्रकाश संश्लेषण, (ग) कोयले को जलाना, (छ) भोजन का पाचन ।
भौतिक परिवर्तन – (ख) जल में शक्कर को घोलना, (घ) मोम को पिघलाना, (च) ऐलुमिनियम के टुकड़े को पीटकर उसका पतला पत्र (फॉइल) बनाना।

प्रश्न 2.
बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं अथवा असत्य। यदि कथन असत्य हो तो,अपनी अभ्यास पुस्तिका में उसे सही करके लिखिए
(क) लकड़ी के लढे को टुकड़ों में काटना एक रासायनिक परिवर्तन है। (सत्य/असत्य)
(ख) पत्तियों से खाद का बनना एक भौतिक परिवर्तन (सत्य/असत्य)
(ग) जस्ते (जिंक) लेपित लोहे के पाइपों में आसानी से जंग नहीं लगती है। (सत्य/असत्य)
(घ) लोहा और जंग एक ही पदार्थ हैं। (सत्य/असत्य)
(च) भाप का संघनन रासायनिक परिवर्तन नहीं है। (सत्य/असत्य)
उत्तर:
(क) असत्य – क्योंकि लकड़ी के लट्ठे को टुकड़ों में काटना एक भौतिक परिवर्तन है।
(ख) असत्य – क्योंकि पत्तियों से खाद बनना एक रासायनिक परिवर्तन है।
(ग) सत्य – क्योंकि जस्ता जंग का प्रतिरोधी है।
(घ) असत्य – क्योंकि लोहा और जंग अलग-अलग पदार्थ हैं।
(च) सत्य – क्योंकि रासायनिक परिवर्तनों में नए पदार्थ बनते है।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित कथनों में रिक्त स्थानों को भरिए
(क) जब कार्बन डाइऑक्साइड को चूने के पानी में प्रवाहित किया जाता है, तो यह ………………. के बनने के कारण दूधिया हो जाता है।
(ख) खाने के सोडे का रासायनिक नाम ………………. है।
(ग) ऐसी दो विधियाँ, जिनके द्वारा लोहे को जंग लगने से बचाया जा सकता है ………………. और ………………. हैं।
(घ) ऐसे परिवर्तन भौतिक परिवर्तन कहलाते हैं, जिनमें किसी पदार्थ के केवल ………………. गुणों में परिवर्तन होता है।
(च) ऐसे परिवर्तन जिनमें नये पदार्थ बनते हैं, ………………. परिवर्तन कहलाते हैं।
उत्तर:
(क) कैल्सियम कार्बोनेट ।
(ख) सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट।
(ग) पेंटिंग और यशद्-लेपन।
(घ) भौतिक।
(च) रासायनिक।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

प्रश्न 4.
जब नींबू के रस में खाने का सोडा मिलाया जाता है, तो बुलबुले बनते हैं और गैस निकलती है। यह किस प्रकार का परिवर्तन है ? समझाइए।
उत्तर:
नींबू के रस में सिट्रिक अम्ल होने के कारण जब खाने का सोडा इसमें मिलाया जाता है तो बुलबुले उठते हैं। यहाँ कार्बन डाइऑक्साइड गैस निर्मुक्त होती है। यह एक रासायनिक परिवर्तन है।

प्रश्न 5.
जब कोई मोमबत्ती जलती है, तो भौतिक और रासायनिक परिवर्तन दोनों होते हैं। इन परिवर्तनों की पहचान कीजिए। ऐसे ही किसी ज्ञात प्रक्रम का एक और उदाहरण दीजिए, जिसमें भौतिक और रासायनिक परिवर्तन दोनों होते हैं।
उत्तर:
किसी मोमबत्ती के जलाने पर पहले मोमबत्ती पिघलती है फिर वाष्पीकृत होती है तथा बाद में जलती है। मोम का पिघलना भौतिक परिवर्तन कहलाता है जब तक कि उस पिघले मोम से कोई नयी वस्तु न बने। मोमबत्ती की भाप जलने पर धुओं और कार्बन डाइऑक्साइड दो नये पदार्थ बनते हैं। अत: यह एक रासायनिक प्रक्रम है।
उदाहरण शुष्क सेल की सहायता से टार्च के बल्ब को जलाना भौतिक तथा रासायनिक दोनों प्रक्रियाओं का उदाहरण है। इस प्रक्रम में बल्ब का जलना भौतिक परिवर्तन है क्योंकि इसमें कोई नया पदार्थ नहीं बनता। सेल से धारा का उत्पन्न होना रासायनिक परिवर्तन है। इस परिवर्तन में सेल के भीतर स्थित रसायन अन्य पदार्थों में परिवर्तित हो जाते हैं। अत: नये पदार्थों के बनने के कारण यह एक रासायनिक प्रक्रिया है।

प्रश्न 6.
आप यह कैसे दिखायेंगे कि दही का जमना एक रासायनिक परिवर्तन है?
उत्तर:
दूध का स्वाद मीठा होता है। जब इसमें खट्टा पदार्थ (जामन) डाला जाता है तो कुछ घण्टे बाद यह दही में परिवर्तित हो जाता है। अर्थात् दूध से एक नया पदार्थ दही बनता है। दही को पुनः दूध में नहीं बदला जा सकता। इसलिए यह एक रासायनिक परिवर्तन है।

प्रश्न 7.
समझाइए कि लकड़ी के जलने और उसे छोटे टुकड़ों में काटने को दो भिन्न प्रकार के परिवर्तन क्यों माना जाता है?
उत्तर:
(1) लकड़ी जलने पर भस्म (राख) तथा धुआँ दो अलग पदार्थ बनते हैं। इसलिए यह एक रासायनिक परिवर्तन है।
(2) लकड़ी के लढे को छोटे टुकड़ों में काटना एक भौतिक प्रक्रिया है, क्योंकि इसमें लकड़ी के गुणधर्म में कोई परिवर्तन नहीं होता है। इसलिए लकड़ी का जलना तथा कटना दो भिन्न-भिन्न परिवर्तन हैं।

प्रश्न 8.
कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल कैसे बनाते हैं, इसका वर्णन कीजिए।
उत्तर:
किसी बीकर में लगभग एक कप जल लेकर उसमें तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की कुछ बूंदें मिलाते हैं। अब जल को गर्म करते हैं। जब जल उबलना आरम्भ कर दे तो इसमें धीरे-धीरे कॉपर सल्फेट का चूर्ण मिलाना तब तक जारी रखते हैं जब तक उसमें कॉपर सल्फेट घोलना मुश्किल हो जाए। विलयन को फिल्टर पेपर की सहायता से छान लेते हैं और इसे ठंडा होने देते है। ठंडा होते समय इससे किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करते हैं। कुछ समय बाद हमें कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल दिखाई देते हैं।

प्रश्न 9.
समझाइए कि लोहे के गेट को पेण्ट करने से उसका जंग लगने से बचाव किस कारण से होता है ?
उत्तर:
लोहा जब नमी एवं वायु के सम्पर्क में आता है तो इस पर गेरुई रंग की जंग लग जाती है। पेण्टं लोहे को हवा तथा नमी के सम्पर्क में नहीं आने देता अत: पेण्ट लोहे को जंग लगने से बचाता है।

प्रश्न 10.
समझाइए कि रेगिस्तानी क्षेत्रों की अपेक्षा समुद्रतटीय क्षेत्रों में लोहे की वस्तुओं में जंग अधिक क्यों लगती है?
उत्तर:
(i) समुद्रतटीय क्षेत्रों में हवा में नमी की मात्रा अधिक होती है।
(ii) रेगिस्तान में जल की कमी के कारण वायु शुष्क होती है। इसलिए समुद्रतटीय क्षेत्रों में लोहे की वस्तुओं में अधिक जंग लगती है।

प्रश्न 11.
हम रसोई में जिस गैस का उपयोग करते हैं, वह द्रवित पेट्रोलियम गैस (LPG) कहलाती है। सिलिंडर में LPG द्रव के रूप में होती है। सिलिंडर से बाहर आते ही यह गैस में परिवर्तित हो जाती है (परिवर्तन A); फिर यही गैस जलती है (परिवर्तन B)। निम्नलिखित कथन इन परिवर्तनों से सम्बन्धित हैं। सही कथन का चयन कीजिए।
(क) प्रक्रम-A एक रासायनिक परिवर्तन है।
(ख) प्रक्रम-B एक रासायनिक परिवर्तन है।
(ग) प्रक्रम-A और प्रक्रम-B दोनों ही रासायनिक परिवर्तन हैं।
(घ) इनमें से कोई भी प्रक्रम रासायनिक परिवर्तन नहीं
उत्तर:
(ख) प्रक्रम-B एक रासायनिक परिवर्तन है।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

प्रश्न 12.
अवायवीय जीवाणु जैविक अपशिष्ट पदार्थों को अपघटित कर जैव गैस (बायोगैस) बनाते हैं (परिवर्तन-A)। फिर जैव गैस ईंधन के रूप में जलाई जाती है (परिवर्तन-B)। निम्नलिखित कथन इन परिवर्तनों से सम्बन्धित हैं। सही कथन चुनिए।
(क) प्रक्रम-A एक रासायनिक परिवर्तन है।
(ख) प्रक्रम-B एक रासायनिक परिवर्तन है।
(ग) प्रक्रम-A और प्रक्रम-B दोनों ही रासायनिक परिवर्तन हैं।
(घ) इनमें से कोई प्रक्रम रासायनिक परिवर्तन नहीं है।
उत्तर:
(ग) प्रक्रम-A और प्रक्रम-B दोनों ही रासायनिक परिवर्तन हैं।

HBSE 7th Class Science भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन Important Questions and Answers

I. वस्तुनिष्ठ प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न निम्नलिखित प्रश्नों में से सही विकल्प का चयन कीजिए

1. निम्नलिखित में से कौन-सा भौतिक परिवर्तन है?
(क) जल का बर्फ बनना
(ख) गीले कपड़े का सूखना
(ग) नमक को पानी में घोलना
(घ) ये सभी।
उत्तर:
(घ) ये सभी।

2. निम्नलिखित में से कौन-सा रासायनिक परिवर्तन है?
(क) चाय पत्ती से चाय बनाना
(ख) दही को मथकर मक्खन बनाना
(ग) फलों का पकना
(घ) ये सभी
उत्तर:
(घ) ये सभी

3. जंग लगने के लिए आवश्यक परिस्थिति/परिस्थितियाँ हैं
(क) केवल नमी
(ख) केवल वायु
(ग) नमी व वायु दोनों
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ग) नमी व वायु दोनों

4. मैग्नीशिमय रिबन को वायु में जलाने पर बनता है
(क) Mg
(ख) MgO
(ग) MgSO4
(घ) [Mg (OH)2]
उत्तर:
(ख) MgO

5. फेरस सल्फेट विलयन का रंग होता है
(क) हरा
(ख) नीला
(ग) सफेद
(घ) पीला
उत्तर:
(क) हरा

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II. रिक्त स्थान

निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थान भरिए
1. रासायनिक परिवर्तन को ………… भी कहते हैं।
2. जब कार्बन डाइऑक्साइड को चूने के पानी में प्रवाहित किया जाता है, तो चूने के पानी का रंग ……………….. हो जाता है।
3. पटाखों का विस्फोट एक ………… परिवर्तन है।
4. जंग लगने के लिए ………… और ………… दोनों की उपस्थिति अनिवार्य है।
उत्तर:
1. रासायनिक अभिक्रिया,
2. दूधिया,
3. रासायनिक,
4. ऑक्सीजन, जल।

III. सुमेलन

कॉलम A तथा कॉलम B के शब्दों का मिलान कीजिए

कॉलम Aकॉलम B
1. भोजन का विकृत होना(a) भौतिक परिवर्तन
2. बर्फ का पिघलना(b) आयरन ऑक्साइड
3. जंग(c) रासायनिक परिवर्तन
4. यशद लेपन(d) जंग रोधन

उत्तर:

कॉलम Aकॉलम B
1. भोजन का विकृत होना(c) रासायनिक परिवर्तन
2. बर्फ का पिघलना(a) भौतिक परिवर्तन
3. जंग(b) आयरन ऑक्साइड
4. यशद लेपन(d) जंग रोधन

V. सत्य/असत्य

निम्नलिखित वाक्यों में से सत्य एवं असत्य कथन छाँटिए
1. रासायनिक परिवर्तन में ऊष्मा उत्पन्न या अवशोषित हो सकती है।
2. भौतिक परिवर्तन में रासायनिक गुणों में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
3. मैग्नीशियम रिबन का जलना एक भौतिक परिवर्तन है।
4. कटे हुए सेब का कुछ समय बाद भूरा होना एक रासायनिक परिवर्तन है।
उत्तर:
1. सत्य
2. सत्य
3. असत्य
4. सत्य।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

अतिलयु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
कागज का फाड़ा जाना रासायनिक परिवर्तन है या भौतिक, क्यों ? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
भौतिक परिवर्तन, क्योंकि इसमें कागज के रासायनिक गुणों में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

प्रश्न 2.
चॉक को चूर्ण में पानी मिलाकर क्या इससे पुन: चॉक बनाया जा सकता है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
नहीं, चौक के चूर्ण से पुन: चाक नहीं बनाया जा सकता।

प्रश्न 3.
एक पात्र में थोड़ा-सा जल लेकर उसे उबालिए। क्या आपको जल की सतह से भाप निकलती दिखाई देती है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
हाँ, जल की सतह से भाप निकलती दिखाई देती है।

प्रश्न 4.
उबलते हुए जल से कुछ दूरी पर भाप के ऊपर किसी बर्तन को उलटा करके रखिए। बर्तन की भीतरी सतह को देखिए। क्या आपको वहाँ जल की कोई बूंद दिखाई देती है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
हाँ, उल्टे रखे बर्तन के भीतर पानी की बूंदें दिखाई देती हैं।

प्रश्न 5.
क्रिस्टलीकरण भौतिक परिवर्तन के अन्तर्गत क्यों रखा जाता है?
उत्तर:
क्योंकि इसमें कोई नया पदार्थ नहीं बनता।

प्रश्न 6.
लोहे में जंग लगना एक रासायनिक परिवर्तन क्यों है ?
उत्तर:
जंग लगने के दौरान लोहा आयरन ऑक्साइड बनाता है इसीलिए जंग लगना एक रासायनिक परिवर्तन है।

प्रश्न 7.
मोमबत्ती का जलना एक रासायनिक परिवर्तन क्यों है ?
उत्तर:
क्योंकि मोमबत्ती को जलने के बाद पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता।

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प्रश्न 8.
आरी में ब्लेड के अगले भाग को स्टोव की ज्वाला में रखने पर क्या होता है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
ज्वाला वाले भाग का रंग लाल हो जाता है और ठंडा होने पर पुनः वैसा ही हो जाता है।

प्रश्न 9,
मैग्नीशियम फीते को साफ करके ज्वाला में जलाने पर क्या होता है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
यह तीव्र प्रकाश के साथ जलती है तथा अन्त में भस्म (राख) बचती है।

प्रश्न 10.
मैग्नीशियम के फीते को जलना कैसा परिवर्तन है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
रासायनिक परिवर्तन।।

प्रश्न 11.
कोई विलयन लाल लिटमस को नीला कर देता है? यह विलयन कैसा है। अम्लीय/क्षारीय। (क्रियाकलाप)
उत्तर:
क्षारीय।

प्रश्न 12.
जब भोजन सामग्री बासी हो जाती है अथवा सड़-गल जाती है, तो उसमें से दुर्गन्ध आने लगती है। क्या इस परिवर्तन को रासायनिक परिवर्तन कह सकते हैं ?
उत्तर:
हाँ, क्योंकि रंग तथा गन्ध में परिवर्तन होना रासायनिक परिवर्तन कहलाता है।

प्रश्न 13.
पादप अपना भोजन प्रकाश संश्लेषण द्वारा बनाते हैं ? क्या हम इस प्रक्रम को रासायनिक परिवर्तन कह सकते हैं, क्यों?
उत्तर:
हाँ, क्योंकि प्रकाश संश्लेषण में नये पदार्थ बनते

प्रश्न 14.
नीला थोथा के जलीय विलयन में कुछ बूंदें सल्फ्यूरिक अम्ल की डालने के पश्चात् इस विलयन में लोहे की एक कील डाल दी गई। कुछ समय पश्चात कील और विलयन का रंग कैसा हो जाएगा? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
विलयन नीले से रंगहीन तथा कील पर भूरी परत चढ़ जाती है।

प्रश्न 15.
यशद्-लेपन क्या है?
उत्तर:
धातुओं को जंग से बचाने के लिए परत चढ़ाने की प्रक्रिया।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

प्रश्न 16.
रासायनिक परिवर्तन को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
वह परिवर्तन जिसमें एक अथवा एक से अधिक नये पदार्थ बनते हैं, रासायनिक परिवर्तन कहलाते हैं।

प्रश्न 17.
पटाखों का विस्फोट एक रासायनिक परिवर्तन क्यों है ?
उत्तर:
विस्फोट से, ऊष्मा, ध्वनि, प्रकाश व गैसें उत्पन्न होती हैं।

प्रश्न 18.
जल का जल वाष्य में बदलना तथा जल वाष्प का पुनः जल में या बर्फ में बदलना कौन-सा परिवर्तन है ?
उत्तर:
भौतिक परिवर्तन।

प्रश्न 19.
किसी रासायनिक परिवर्तन का समीकरण लिखिए।
उत्तर:
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन -1

प्रश्न 20.
अम्ल का प्रयोग करते समय सावधानी क्यों बरतनी चाहिए?
उत्तर:
अम्ल हानिकारक होते हैं। त्वचा पर पड़ने पर ये जला सकते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन छाँटिए लकड़ी का जलना, मिट्टी को पानी में घोलना, कागज का जलना, चीनी को पीसना, चाय बनाना, दही से मक्खन बनाना।
उत्तर:
भौतिक परिवर्तन : मिट्टी को पानी में घोलना, चीनी को पीसना।
रासायनिक परिवर्तन : लकड़ी का जलना, कागज का जलना, चाय बनाना, दही से मक्खन बनाना।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

प्रश्न 2.
भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तनों में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तनों में अन्तर
Table 3

प्रश्न 3.
किसी रासायनिक परिवर्तन को समीकरण सहित समझाइए।
उत्तर:
(i) जब किसी परखनली में ऐसीटिक अम्ल तथा सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट मिलाया जाता है तो कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है। समीकरण
सिरका (ऐसीटिक अम्ल) + खाने का सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट) → कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) + अन्य पदार्थ।

(ii) जब CO, गैस को चूने के पानी में प्रवाहित किया जाता है तो चूने का पानी दूधिया हो जाता है। समीकरण
CO2 + चूने का पानी [Ca(OH)2] → कैल्सियम कार्बोनेट (CaCO3) + जल।
उपरोक्त दोनों क्रियाएँ रासायनिक परिवर्तन हैं।

प्रश्न 4.
रासायनिक परिवर्तन में नये उत्पादों के अतिरिक्त सम्भव घटनाओं को लिखिए।
उत्तर:
(i) ऊष्मा, प्रकाश अथवा किसी अन्य विकिरण का निर्मुक्त होना।
(ii) ध्वनि का उत्पन्न होना।
(iii) रंग में परिवर्तन ।
(iv) किसी गैस का बनना।

प्रश्न 5.
क्या होता है? जब- (क्रियाकलाप)
(क) सिरका विलयन में एक चुटकी खाने का सोडा डाला जाता है।
(ख) CO2 गैस को चूने के पानी में गुजारा जाता है।
(ग) सिरके की खाने के सोडे से क्रिया कराने पर कौनसा नया पदार्थ बनता है।
उत्तर:
(क) बुद बुदाहट के साथ CO2 गैस निकलती
(ख) चूने के पानी को दूधिया कर देती है। (ग) कैल्सियम कार्बोनेट।

दीर्य उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
आपके आस-पास होने वाले दस भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तनों की सूची बनाइए।
उत्तर:
भौतिक परिवर्तन – रासायनिक परिवर्तन
(1) पंखे का चलना। – (1) फूल खिलना।
(2) बल्ब का जलना। – (2) आटा गूंथना।
(3) बर्फ का पिघलना। – (3) लकड़ी का जलना।
(4) रेडियो का बजना। – (4) दूध से दही बनना।
(5) दिन और रात का होना। – (5) चाय बनाना।
(6) बिजली का चमकना। – (6) कैरोसिन का जलना।
(7) भाप का बनना। – (7) अम्ल में क्षार मिलाना।
(8) कपड़े का सूखना। – (8) पेट्रोल का इंजन में जलना।
(9) पेन से कागज पर लिखना। – (9) खाने में सूक्ष्म जीव लगना।
(10) काँच का टूटना। – (10) CO2 को चूने के पानी में घोलना।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 6 भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन

प्रश्न 2.
निम्नलिखित को समझाइए
(a) ओजोन का निर्माण एवं विघटन भौतिक परिवर्तन है।
(b) मैग्नीशियम फीते का जलना रासायनिक परिवर्तन है।
उत्तर:
(a) ओजोन का निर्माण एवं विघटन भौतिक परिवर्तन है ओजोन का निर्माण ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं के मिलने से होता है। जब इसका विघटन होता है तो ऑक्सीजन के परमाणु मुक्त हो जाते हैं। अत: यह भौतिक परिवर्तन है। ओजोन परत हमारे वायुमण्डल में स्थित होती है। यह परत हमें सूर्य की पराबैंगनी किरणों से बचाती है। यह परत इन हानिकारक किरणों को अवशोषित कर लेती है।

(b) जब मैग्नीशियम के फीते को आग की लौ के सम्पर्क में लाया जाता है तो यह श्वेत प्रकाश के साथ जलने लगता है और अन्त में एक प्रकार की भस्म शेष रह जाती है।
यह भस्म मैग्नीशियम ऑक्साइड होती है।

जब मैग्नीशियम ऑक्साइड की क्रिया जल से कराई जाती है तो मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड बनता है।

हाइड्रॉक्साइड) उपरोक्त दोनों क्रियाओं में नये पदार्थ बनते हैं। अत: यह रासायनिक परिवर्तन है।

भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन Class 7 HBSE Notes in Hindi

→ भौतिक परिवर्तन – वह परिवर्तन जिससे पदार्थ के भौतिक गुणों में परिवर्तन होता है, रासायनिक गुणों में नहीं भौतिक परिवर्तन कहलाता है।
→ रासायनिक परिवर्तन – वह परिवर्तन जिससे एक या एक से अधिक नये पदार्थ बनते हैं, रासायनिक परिवर्तन कहलाता है।
→ रासायनिक अभिक्रिया – वह अभिक्रिया जिसके द्वारा रासायनिक परिवर्तन से नये पदार्थ बनते हैं।
→ भस्म – मैग्नीशियम रिबन को ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलाने के पश्चात् बचा शेष पदार्थ।
→ जंग लगना – नमी के प्रभाव से लोहे पर गेरुई रंग की परत बनना जंग लगना कहलाती है।
→ यशद्-लेपन – लोहे पर जिंक की एक पतली परत चढ़ाने की प्रक्रिया को यशद्-लेपन कहते हैं।
→ क्रिस्टलीकरण – किसी पदार्थ के उसके विलयन से क्रिस्टल प्राप्त करने की प्रक्रिया क्रिस्टलीकरण कहलाती है।
→ शक्कर का विलयन बनाना एक परिवर्तन है, दूध से दही जमना भी एक परिवर्तन है, इसी प्रकार दूध का खट्टा होना भी एक परिवर्तन है।
→ पदार्थ के आकार, आमाप, रंग और अवस्था जैसे गुण उसके भौतिक गुण कहलाते हैं।
→ वह परिवर्तन जिसमें किसी पदार्थ के भौतिक गुणों में परिवर्तन तो होता है, किन्तु कोई नया पदार्थ नहीं बनता है, भौतिक परिवर्तन कहलाता है।
→ भौतिक परिवर्तन सामान्यतया उत्क्रमणीय होता है।
→ कागज के टुकड़े करना, जल का वाष्प बनना आदि भौतिक परिवर्तन है।
→ लोहे के टुकड़े को खुले में छोड़ देने पर उसके ऊपर भूरे रंग की एक पर्त जम जाती है, यह पदार्थ जंग है और इसे जंग लगना कहते हैं।
→ जब मैग्नीशियम के तार को ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलाया जाता है तो चमकदार श्वेत प्रकाश के साथ यह जलने लगता है तथा मैग्नीशियम ऑक्साइड शेष बचता है।
→ मैग्नीशियम ऑक्साइड को जल में घोलने पर मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड बनता है।
→ वह परिवर्तन जिसमें एक अथवा एक-से अधिक नए पदार्थ बनते हैं, रासायनिक परिवर्तन कहलाता है।
→ लोहे में जंग लगना, प्रकाश संश्लेषण तथा भोजन का पाचन, रासायनिक परिवर्तन के उदाहरण हैं।
→ लोहे को जंग से बचाने के लिए उस पर एक प्रकार की जिंक की पतली परत चढ़ाना यशद्-लेपन (गैल्वेनाइजेशन) कहलाता है। विज्ञान ।
→ स्टेनलेस स्टील लोहे में कार्बन और क्रोमियम, निकिल तथा मैंगनीज जैसी धातुओं को मिलाकर बनाया जाता है। इससे जंग नहीं लगती।
→ किसी पदार्थ के शुद्ध तथा बड़ी आमाप के क्रिस्टल उनके विलयन से प्राप्त किये जा सकते हैं। यह प्रक्रिया क्रिस्टलीकरण कहलाती है।

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HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 5 अम्ल, क्षारक और लवण

Haryana State Board HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 5 अम्ल, क्षारक और लवण Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Science Solutions Chapter 5 अम्ल, क्षारक और लवण

HBSE 7th Class Science अम्ल, क्षारक और लवण InText Questions and Answers

बूझो/पहेली

प्रश्न 1.
बूझो जानना चाहता है कि, क्या मैं सभी पदार्थों का स्वाद ज्ञात करने के लिए उन्हें चख सकता हूँ?
उत्तर:
नहीं, अज्ञात पदार्थों को नहीं चखना चाहिए क्योंकि ये हमें हानि पहुँचा सकते हैं।

प्रश्न 2.
हल्दी का दाग साबुन से धोने पर लाल क्यों हो जाता है?
उत्तर:
साबुन का विलयन क्षारकीय होता है जो हल्दी (प्राकृतिक सूचक) का रंग लाल कर देता है।

प्रश्न 3.
जब शुष्क लिटमस पत्र पर खाने के सोडे के ठोस कण रखे जाते हैं तो इससे किसी तरह का परिणाम प्राप्त नहीं होता। क्यों?
उत्तर:
लिटमस पत्र किसी अम्ल या क्षारक का परीक्षण प्रायः विलयन अवस्था में ही देते हैं।

प्रश्न 4.
पहेली आपके लिए निम्नलिखित समस्या लेकर आई हैकॉफी का रंग भूरा है, और स्वाद है कड़वा, अम्ल है यह, या है क्षार, प्रश्न बड़ा ही है दुश्वार, स्वाद के कारण से अनजान, बिना परीक्षण हो ना ज्ञान। उत्तर:
अम्लीय।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 5 अम्ल, क्षारक और लवण

HBSE 7th Class Science अम्ल, क्षारक और लवण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
अम्लों और क्षारकों के बीच अन्तर बताइए।
उत्तर:
अम्लों और क्षारकों में अन्तर

अम्लक्षारक
(i) अम्ल स्वाद में खट्टे होते हैं।क्षार स्वाद में कड़वे होते हैं।
(ii) ये नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं।ये लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं।

प्रश्न 2.
अनेक घरेलू उत्पादों, जैसे खिड़की साफ करने के मार्जकों आदि में अमोनिया पाया जाता है। ये लाल लिटमस को नीला कर देते हैं। इनकी प्रकृति क्या है?
उत्तर:
इसकी प्रकृति क्षारीय है। क्योंकि क्षारक लाल लिटमस को नीला करने का गुण रखते हैं।

प्रश्न 3.
उस स्रोत का नाम बताइए, जिससे लिटमस विलयन को प्राप्त किया जाता है। इस विलयन का क्या उपयोग है?
उत्तर:
लाइकेन नामक पौधे से लिटमस विलयन प्राप्त किया जाता है। इस विलयन को सूचक के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 4.
क्या आसुत जल अम्लीय/क्षारकीय/उदासीन होता है ? आप इसकी पुष्टि कैसे करेंगे?
उत्तर:
आसुत जल उदासीन होता है। इसकी उदासीनता की पुष्टि लिटमस पेपर से कर सकते हैं। यह जल लिटमस पत्र पर कोई प्रभाव नहीं डालता है।

प्रश्न 5.
उदासीनीकरण के प्रक्रम को एक उदाहरण देते हुए समझा
उत्तर:
अम्ल तथा क्षारक के बीच होने वाली क्रिया को उदासीनीकरण कहते हैं। इस क्रिया में ऊष्मा निर्मुक्त होने के साथ-साथ लवण और जल भी निर्मित होते हैं।
अम्ल + क्षारक → लवण + जल (ऊर्जा निर्मुक्त होती है।)
जब हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा सोडियम हाइड्रॉक्साइड की क्रिया कराई जाती है तो सोडियम क्लोराइड एवं जल बनता है साथ ही ऊष्मा निकलती है।
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 5 अम्ल, क्षारक और लवण -1

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 5 अम्ल, क्षारक और लवण

प्रश्न 6.
निम्नलिखित कथन यदि सही हैं, तो (T) अथवा गलत हैं, तो (F) लिखिए
(क) नाइट्रिक अम्ल लाल लिटमस को नीला कर देता
(ख) सोडियम हाइड्रॉक्साइड नीले लिटमस को लाल कर देता है।
(ग) सोडियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एक-दूसरे को उदासीन करके लवण और जल बनाते हैं।
(घ) सूचक वह पदार्थ है, जो अम्लीय और क्षारकीय विलयनों में भिन्न रंग दिखाता है।
(च) दंत क्षय, क्षार की उपस्थिति के कारण होता है।
उत्तर:
(क) नाइट्रिक अम्ल लाल लिटमस को नीला कर देता है। (F)
(ख) सोडियम हाइड्रॉक्साइड नीले लिटमस को लाल कर देता है। (F)
(ग) सोडियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एक-दूसरे को उदासीन करके लवण और जल बनाते हैं। (T)
(घ) सूचक वह पदार्थ है, जो अम्लीय और क्षारकीय विलयनों में भिन्न रंग दिखाता है। (T)
(च) दंत क्षय, क्षार की उपस्थिति के कारण होता है। (F)

प्रश्न 7.
दोरजी के रैस्टोरेन्ट में शीतल (मृदु) पेय की कुछ बोतलें हैं। लेकिन दुर्भाग्य से वे चिन्हित नहीं हैं। उसे ग्राहकों की मांग के अनुसार पेय परोसने हैं। एक ग्राहक अम्लीय पेय चाहता है, दूसरा क्षारकीय और तीसरा उदासीन पेय चाहता है। दोरजी यह कैसे तय करेगा, कि कौन-सी बोतल किस ग्राहक को देनी है।
उत्तर:
(i) दोरजी सूचक की सहायता से तय कर सकता है।
(ii) क्षारीय होने पर पेय का नमूना लाल लिटमस पत्र को नीला कर देगा।
(iii) अम्लीय होने पर यह नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है।
(iv) उदासीन होने पर पेय लिटमस पर कोई रंग उत्पन्न नहीं करेगा।

प्रश्न 8.
समझाइए, ऐसा क्यों होता है
(क) जब आप अतिअम्लता से पीड़ित होते हैं, तो प्रति अम्ल की गोली लेते हैं।
(ख) जब चींटी काटती है, तो त्वचा पर कैलेमाइन का विलयन लगाया जाता है।
(ग) कारखाने के अपशिष्ट को जलाशयों में बहाने से पहले उसे उदासीन किया जाता है।
उत्तर:
(क) जब हम अतिअम्लता से पीड़ित होते हैं, तो प्रतिअम्ल की गोली लेते हैं। क्योंकि उदर में अम्ल की मात्रा बढ़ती है तो प्रतिअम्ल की गोली क्षारकीय होने के कारण इसे उदासीन कर देती है और हमें आराम मिलता है।
(ख) चींटी एक अम्ल त्वचा में छोड़ती है। कैलेमाइन का विलयन, इसके प्रभाव को उदासीन करता है इसलिए दर्द में राहत मिलती है।
(ग) अम्लीय तथा क्षारीय दोनों प्रकृति के अपशिष्ट कारखानों से जलाशयों में बहाये जाते हैं। ये अम्ल जलीय जीवों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसलिए उन्हें उदासीन कर दिया जाता है।

प्रश्न 9.
आपको तीन द्रव दिये गये हैं, जिनमें से एक हाइड्रोक्लोरिक अम्ल है, दूसरा सोडियम हाइड्रॉक्साइड और तीसरा शक्कर का विलयन है। आप हल्दी को सूचक के रूप में उपयोग करके उनकी पहचान कैसे करेंगे?
उत्तर:
(1) हल्दी का विलयन क्षारकों के सम्पर्क में आने पर लाल हो जाता है। अम्ल तथा उदासीन पदार्थ इसके सम्पर्क में आने पर प्रभावित नहीं होते।
(2) सबसे पहले हल्दी में अम्ल मिलाया जाता है। अम्ल के सम्पर्क में आने पर यह लाल हो जाता है।
(3) अब हल्दी तथा अम्ल के मिश्रण में तीनों में से एक विलयन धीरे-धीरे डाला जाता है।
(4) यदि विलयन पुन: पीला हो जाता है तो डाला गया विलयन हाइड्रोक्लोरिक अम्ल है। अन्यथा डाला गया द्रव्य शक्कर का विलयन है।

प्रश्न 10.
नीले लिटमस पत्र को एक विलयन में डुबोया गया। यह नीला ही रहता है। विलयन की प्रकृति क्या है ? समझाइए।
उत्तर:
(1) विलयन उदासीन या क्षारीय कोई भी हो सकता है।
(2) नीले लिटमस पत्र पर उदासीन या क्षारीय विलयन का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित वक्तव्यों को ध्यान से पढ़ें
(क) अम्ल और क्षारक दोनों सभी सूचकों के रंगों को परिवर्तित कर देते हैं।
(ख) यदि कोई सूचक अम्ल के साथ रंग परिवर्तित कर देता है, तो वह क्षारक के साथ रंग परिवर्तन नहीं करता।
(ग) यदि कोई सूचक क्षारक के साथ रंग परिवर्तित करता है, तो वह अम्ल के साथ रंग परिवर्तन नहीं करता।
(घ) अम्ल और क्षारक में रंग परिवर्तन सूचक के प्रकार पर निर्भर करता है।
ऊपर लिखे वक्तव्यों में से कौन-से वक्तव्य सही हैं?
(i) सभी चार
(ii) (क) और (घ)
(iii) (ग) और (घ)
(iv) सिर्फ (घ)
उत्तर:
(iv) सिर्फ (घ)।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 5 अम्ल, क्षारक और लवण

HBSE 7th Class Science अम्ल, क्षारक और लवण Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. बहुविकल्पीय प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों में से सही विकल्प का चयन कीजिए

1. निम्न में से किसमें अम्ल उपस्थित है?
(क) आँवला
(ख) साबुन
(ग) खाने का सोडा
(घ) वाशिंग पाउडर
उत्तर:
(क) आँवला

2. एसिड शब्द की उत्पत्ति एसियर शब्द से हुई है। यह किस भाषा का शब्द है?
(क) अंग्रेजी
(ख) हिन्दी
(ग) लैटिन
(घ) फ्रेंच
उत्तर:
(ग) लैटिन

3. निम्नलिखित में से कौन-सा प्राकृतिक सूचक नहीं है?
(क) हल्दी
(ख) लिटमस
(ग) गुड़हल की पंखुड़ियाँ
(घ) पालक की पत्तियाँ
उत्तर:
(घ) पालक की पत्तियाँ

4. उदासीन विलयन
(क) क्षारीय होता है
(ख) अम्लीय होता है
(ग) मीठा होता है
(घ) न उदासीन और न अम्लीय होता है
उत्तर:
(घ) न उदासीन और न अम्लीय होता है

5. क्षारीय विलयन के साथ फिनॉल्फथेलिन रंग देता है
(क) लाल
(ख) गुलाबी
(ग) नीला
(घ) बैंगनी
उत्तर:
(ख) गुलाबी

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II. रिक्त स्थान

निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थान भरिए-
1. ऐसे पदार्थ जिनका स्वाद कड़वा होता है और स्पर्श करने पर साबुन जैसे लगते हैं, ………… कहलाते हैं।
2. ………… को जब अम्लीय या क्षारकीय पदार्थ युक्त विलयन में मिलाया जाता है तो उनका रंग बदल जाता हैं।
3. कागज की पट्टियों के रूप में उपलब्ध सूचक को …………. कहते हैं।
4. अपाचन से मुक्ति पाने के लिए हम प्रतिअम्ल लेते हैं जिसमें …………. होता है।
उत्तर:
1. क्षारक
2. सूचकों
3. लिटमस पत्र
4. मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड।

III. सुमेलन
कॉलम A तथा कॉलम B के शब्दों का मिलान कीजिए

कॉलम Aकॉलम B
1. चूने का पानी(a) लिटमस
2. चींटी का डंक(b) उदासीन
3. लाइके(c) क्षारक
4. आसुत जल(d) अम्ल

उत्तर:

कॉलम Aकॉलम B
1. चूने का पानी(c) क्षारक
2. चींटी का डंक(d) अम्ल
3. लाइके(a) लिटमस
4. आसुत जल(b) उदासीन

IV. सत्य/असत्य

निम्नलिखित वाक्यों में से सत्य एवं असत्य छाँटिए
1. शैम्पू के विलयन में अम्ल उपस्थित होता है।
2. उदासीन विलयन न अम्लीय होते हैं और न क्षारकीय।
3. चींटी काटने के स्थान पर चूने का पानी लगाने से लाभ होता है।
4. अम्ल एवं क्षारक की अभिक्रिया लवणीकरण कहलाती
उत्तर:
1. असत्य
2. सत्य
3. सत्य
4. असत्य।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उदासीनीकरण के तत्काल बाद परखनली को स्पर्श करें। आप क्या अनुभव करते हैं ?
उत्तर:
परखनली गर्म अनुभव होती है। इसका अर्थ है, इस क्रिया में ऊष्मा निर्मुक्त होती है।

प्रश्न 2.
जब नींबू के रस के जलीय विलयन की एक बूंद को लाल लिटमस पर डाला जाता है तो क्या होता है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
लाल लिटमस नीला हो जाता है।

प्रश्न 3.
सूचक क्या होते हैं ?
उत्तर:
कोई पदार्थ अम्लीय है अथवा क्षारकीय, इसका परीक्षण करने के लिए विशेष प्रकार के पदार्थों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें सूचक कहते हैं।

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प्रश्न 4.
अम्लों एवं क्षारकों के रखरखाव में क्यों सावधानी बरतनी चाहिए ?
उत्तर:
ये संक्षारक प्रकृति के होते हैं, जो त्वचा में जलन उत्पन्न करते हैं तथा हानि पहुँचाते हैं।

प्रश्न 5.
जब किसी अम्लीय विलयन को क्षारीय विलयन में मिलाया जाता है तो क्या होता है ?
उत्तर:
उदासीन विलयन बनता है।

प्रश्न 6.
जब चूने के पानी में तनु सल्फ्यूरिक अम्ल मिलाया जाता है तो मिश्रण गर्म होगा या ठंडा?
उत्तर:
गर्म हो जायेगा।

प्रश्न 7.
दो प्राकृतिक अम्ल सूचकों के नाम बताइए।
उत्तर:
हल्दी, गुड़हल के फूल की पंखुड़ियाँ।

प्रश्न 8.
लवण क्या होते हैं ?
उत्तर:
उदासीनीकरण अभिक्रिया में नया पदार्थ बनता है जो लवण कहलाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
चार खनिज अम्लों के नाम तथा उनके सूत्र बताइए।
उत्तर:
(i) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl)
(ii) नाइट्रिक अम्ल (HNO3)
(iii) सल्फ्यू रिक अम्ल (H2SO4)
(iv) ऐसीटिक अम्ल (CH3COOH)।

प्रश्न 2.
चार सूचकों के नाम लिखिए।
उत्तर:
(i) हल्दी
(ii) लिटमस
(iii) गुड़हल की पंखुड़ियाँ
(iv) फिनॉल्फथेलिन।

प्रश्न 3.
लिटमस को कैसे तैयार किया जाता है ?
उत्तर:
सबसे सामान्य रूप से उपयोग किया जाने वाला प्राकृतिक सूचक लिटमस है। इसे लाइकेन (शैक) से निष्कर्षित किया जाता है। आसुत जल में इसका रंग मॉव (नीलशोण) होता है। जब इसे अम्लीय विलयन में मिलाया जाता है, तो यह लाल हो जाता है और जब क्षारीय विलयन में मिलाया जाता है तो यह नीला हो जाता है। यह विलयन के रूप में अथवा कागज की पट्टियों के रूप में उपलब्ध होता है जिन्हें लिटमस पत्र कहते हैं। सामान्यतः यह लाल और नीले लिटमस पत्र के रूप में उपलब्ध होता है।

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प्रश्न 4.
हल्दी पत्रक कैसे बनाते हैं? इसको कैसे सूचक की तरह प्रयोग करेंगे? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
एक चम्मच हल्दी पाउडर में थोड़ा पानी मिलाकर उसका पेस्ट बनाते है। ब्लोटिंग पेपर पर इस पेस्ट को लगाकर सुखा लेते हैं। अब इसकी पतली पट्टियाँ काट लेते हैं। जब हल्दी पत्रक पर साबुन के विलयन की बूंदे डालते हैं तो पत्रक का रंग लाल हो जाता है।

प्रश्न 5.
अम्ल वर्षा से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर:
कुछ गैसें, जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (जो वायु में प्रदूषकों के रूप में निर्मुक्त होती हैं) वर्षा के साथ क्रिया करके क्रमशः काबौनिक अम्ल, सल्फ्यूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल बनाती हैं। वर्षा के साथ ये अम्ल जमीन पर आते हैं, जिसे अम्ल वर्षा कहते हैं। अम्ल वर्षा, भवनों, ऐतिहासिक इमारतों, पौधों और जन्तुओं को क्षति पहुँचा सकती है।

प्रश्न 6.
चींटी के डंक में कौन-सा अम्ल होता है ? इसे कैसे उदासीन किया जा सकता है?
उत्तर:
चींटी के डंक में फॉर्मिक अम्ल होता है। जब चींटी काटती है तो त्वचा में फार्मिक अम्ल छोड़ देती है। इसके अम्लीय प्रभाव को उदासीन करने के लिए डंक के स्थान की त्वचा पर नमी युक्त खाने का सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट) अथवा कैलेमाइन विलयन मलकर उदासीन किया जा सकता है।

प्रश्न 7.
मृदा उपचार क्या है ? अम्लीय एवं क्षारीय मृदा को कैसे उपचारित किया जाता है ?
उत्तर:
रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग मृदा को अम्लीय बना देता है। यदि मृदा अत्यधिक अम्लीय अथवा अत्यधिक क्षारीय हो तो पादपों की वृद्धि अच्छी नहीं होती। जब मृदा अत्यधिक अम्लीय होती है तो उसमें बिना बुझा चूना (कैल्सियम ऑक्साइड) अथवा बुझा हुआ चूना (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) जैसे धारक मिलाकर उदासीन किया जा सकता है। यदि मृदा क्षारकीय हो तो इसमें जैव पदार्थ मिलाये जाते हैं। जैव पदार्थ मृदा में अम्ल निर्मुक्त करते हैं, जो उसकी क्षारीय प्रकृति को उदासीन कर देते हैं।

प्रश्न 8.
कारखानों के अपशिष्ट पदार्थों को कैसे उदासीन किया जाता है?
उत्तर:
अनेक कारखानों के अपशिष्ट (कचरे) में अम्लीय पदार्थ मिश्रित होते हैं। यदि ऐसे अपशिष्ट पदार्थों को सीधे ही जलाशयों में बहने दिया (विसर्जित किया जाए तो मछली और अन्य जलीय जीवों को अम्ल नष्ट कर सकते हैं। अत: कारखानों के अपशिष्ट को जलाशयों में विसर्जित करने से पहले क्षारकीय पदार्थ मिलाकर उदासीन किया जाता है।

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दीर्य उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
नल का पानी, अपमार्जक (डिटरजेंट) का घोल, वातित पेय पदार्थ, साबुन का विलयन, शैम्पू, सामान्य नमक का विलयन, शक्कर का विलयन, सिरका, बेकिंग सोडे का विलयन, दूधिया मैग्नीशियम, धावन सोडे का विलयन तथा चूने का पानी, (यदि सम्भव हो, तो विलयन आसुत जल में बनायें)। अपने प्रेक्षणों को सारणी में नोट कीजिए।
उत्तर:

विलयन का नामनीले लिटमस पर प्रभावलाल लिटमस पर प्रभाव
1. नल का पानी
2. अपमार्जक का घोलनीला
3. वातित पेय पदार्थलाल
4. साबुन का विलयननीला
5. शैम्पूनीला
6. समान्य नमक का विलयन
7. शक्कर का विलयन
8. सिरकालाल
9. बैंकिंग सोड़े का विलयननीला
10. दूधिया मैगनीशियमनीला
11. धावन सोडे का विलयननीला
12. चूने का पानीनीला

प्रश्न 2.
अपाचन (अम्लता) से आप क्या समझते हैं? इसे कैसे दूर किया जा सकता है? इसके समाधान में कौन-सी क्रिया होती है?
उत्तर:
अपाचन (अम्लता)-हमारे आमाशय से भोजन में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल स्रावित होता है। यह हमारे भोजन को पचाने में सहायता करता है। किन्तु कभी-कभी इस अम्ल की आवश्यकता से अधिक मात्रा हो जाती है जिसे अपाचन या अम्लता कहते हैं। कभी-कभी यह अत्यधिक कष्टदायक होता है। अम्लता के प्रभाव को किसी प्रतिअम्ल जिसमें मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड होता है, को देकर कम किया जा सकता है। मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड, आमाशय में उत्पन्न अम्ल के प्रभाव को उदासीन कर देता है। इस क्रिया को उदासीनीकरण कहते हैं।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से अम्ल एवं क्षारक पहचान कर बताइए कि ये किसमें पाये जाते हैं?
ऐसीटिक अम्ल, कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड, फॉर्मिक अम्ल,अमोनियम हाइड्रॉक्साइड, सोडियम हाइड्रॉक्साइड, साइट्रिक अम्ल, टार्टरिक अम्ल, विटामिन C, पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड, लैक्टिक अम्ल, मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड तथा ऑक्सेलिक अम्ल।
उत्तर:

अम्ल का नामकिसमें पाया जाता है।
(i) ऐसीटिक अम्लसिरका
(ii) फॉर्मिक अम्लचींटी का डंक
(iii) साइट्रिक अम्लनींबू कल के फल, जैसे संतरा, नींबू
(iv) ऑक्सेलिक अम्लपालक
(v) एस्कॉर्बिक अम्ल या विटामिन-Cआँवला, सिट्रस फल
(vi) लैक्टिक अम्लदही
(vii) टार्टरिक अम्लइमली, कच्चे आम, अंगूर
क्षारक का नामकिसमें पाया जाता है
(i) कैल्सियम हाइड्रॉक्साइडचूने का पानी
(ii) अमोनियम हाइड्रॉक्साइडखिड़की के काँच साफ करने में प्रयुक्त मार्जक
(iii) सोडियम हाइड्रॉक्साइडसाबुन
(iv) पोटैशियम हाइड्रॉक्साइडसाबुन
(v) मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइडदूधिया मैग्नीशियम (मिल्क ऑफ मैग्नीशिया)

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 5 अम्ल, क्षारक और लवण

प्रश्न 4.
गुड़हल के पुष्य की कुछ पंखुड़ियाँ लीजिए और उन्हें किसी बीकर में रख दीजिए। इसमें थोड़ा गरम जल मिलाइए। मिश्रण को कुछ समय तक रखिए, जब तक जल रंगीन न हो जाए। रंगीन जल को सूचक के रूप में प्रयोग कीजिए। इस सूचक की पाँच-पाँच बूंदें निम्न सारणी में दिए गए प्रत्येक विलयन में मिलाइए। अब निम्न सारणी को पूरा कीजिए।

परीक्षण विलयनआरसिभक रंगअन्तिम रंग
शैम्पू ( तनु विलयन)
नीबू का रस
सोडा जल
सोडियम हाइड्रोजन
कार्बोनेट का विलयन सिरका
शक्कर का विलयन

उत्तर:

परीक्षण विलयनआरसिभक रंगअन्तिम रंग
शैम्पू ( तनु विलयन)लालहरा
नीबू का रसलालमेजेन्टा
सोडा जललालहरा
सोडियम हाइड्रोजनलालहरा
कार्बोनेट का विलयन सिरकालालमेजेन्टा
शक्कर का विलयनलाललाल

अम्ल, क्षारक और लवण Class 7  HBSE Notes in Hindi

→ अम्ल – पदार्थ जो स्वाद में खट्टे होते हैं और नीले लिटमस को लाल कर देते हैं।
→ क्षारक – स्वाद में कसैले और छूने पर साबुन जैसे पद । जो लाल लिटमस को नीला कर देते हैं।
→ सूचक – सूचक वह पदार्थ है जो अम्लीय तथा क्षारीय पदार्थों को विभिन्न रंगों में बदल देते हैं।
→ लिटमस – एक प्राकृतिक सूचक जो लाइकेन (शैक) से प्राप्त किया जाता है।
→ लाइकेन – कवक एवं शैवाल के सहयोग से बने एक प्रकार के छोटे पौधे।
→ उदासीन विलयन – ऐसा विलयन जो न अम्लीय होता है और न क्षारीय।
→ उदासीनीकरण – अम्ल और क्षार की अभिक्रिया जिसमें लवण तथा जल बनते हैं।
→ लवण – उदासीनीकरण क्रिया में बना नया पदार्थ।
→ अपाचन – आमाशय में अत्यधिक अम्ल बनने की स्थिति।
→ दही, नींबू का रस, सन्तरे का रस और सिरके का स्वाद खट्टा होता है। इन पदार्थों का स्वाद खट्टा इसलिए होता है, क्योंकि इनमें अम्ल (एसिड) होते हैं।
→ ऐसे पदार्थ जिनका स्वाद कड़वा होता है और स्पर्श करने पर साबुन जैसे लगते हैं, क्षारक कहलाते हैं।
→ कोई पदार्थ अम्लीय है अथवा क्षारकीय, इसका परीक्षण करने के लिए विशेष प्रकार के पदार्थों का उपयोग किया जाता है। ये पदार्थ सूचक कहलाते हैं।
→ हल्दी, लिटमस, गुड़हल की पंखुड़ियाँ आदि कुछ प्राकृतिक रूप से पाये जाने वाले सूचक हैं।
→ सबसे सामान्य रूप से उपयोग किया जाने वाला प्राकृतिक सूचक लिटमस है। इसे लाइकेनों (शैक) से निष्कर्षित किया जाता है।
→ लिटमस या तो विलयन के रूप में होता है अथवा कागज की पट्टियों (लिटमस पत्र) के रूप में होता है।
→ अम्ल नीले लिटमस को लाल कर देते हैं। श्री क्षारक लाल लिटमस को नीला कर देते हैं।
→ वे पदार्थ जो न तो अम्लीय होते हैं और न क्षारकीय, उदासीन कहलाते हैं।
→ किसी अम्ल और किसी क्षारक के बीच होने वाली अभिक्रिया उदासीनीकरण कहलाती है। इस प्रक्रम में ऊष्मा के निर्मुक्त होने के साथ-साथ लवण और जल बनते हैं।
→ उदासीनीकरण अभिक्रिया में नया पदार्थ बनता है, वह लवण कहलाता है।
→ हमारे आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल पाया जाता है। यह भोजन के पाचन में सहायता करता है।
→ जब चींटी काटती हैं तो यह त्वचा में अम्लीय द्रव डाल देती है। डंक के प्रभाव को नमीयुक्त खाने का सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट अथवा कैलेमाइन विलयन) मलकर उदासीन किया जा सकता है।
→ यदि मृदा अत्यधिक अम्लीय अथवा क्षारीय हो तो उसे बुझा हुआ या बिना बुझा हुआ चूना जैसे क्षारकों से उपचारित किया जाता है।
→ कारखानों के अपशिष्ट को जलाशयों व नदियों में विसर्जित करने से पहले क्षारकीय पदार्थ मिलाकर उदासीन किया जाता है।

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HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 4 ऊष्मा

Haryana State Board HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 4 ऊष्मा Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Science Solutions Chapter 4 ऊष्मा

HBSE 7th Class Science ऊष्मा InText Questions and Answers

बूझो / पहेली

प्रश्न 1.
बूझो कहता है, “मेरा बायाँ हाथ कहता है कि मग C में पानी गर्म है तथा दाहिना हाथ उसी पानी को ठण्डा बताता है। मैं क्या निष्कर्ष निकालूं।”
उत्तर:
दोनों हाथों से सम्बन्धित दोनों निष्कर्ष सही हैं लेकिन दी हुई सूचना से एक अकेला निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

प्रश्न 2.
बूझो के मस्तिष्क में एक नटखट विचार आया। वह डॉक्टरी थर्मामीटर से गर्म दूध का ताप मापना चाहता था। पहेली ने उसको ऐसा करने से क्यों रोक दिया?
उत्तर:
क्योंकि डॉक्टरी थर्मामीटर को केवल मानव शरीर का ताप मापने के लिए ही डिजाइन किया गया है। धूप तथा आग के पास ले जाने पर यह चटक सकता है।

प्रश्न 3.
बूझो को अब समझ में आ गया है कि उच्च तापों को मापने के लिए डॉक्टरी थर्मामीटर का उपयोग क्यों नहीं करना चाहिए। लेकिन वह अब भी उलझन में है कि क्या प्रयोगशाला तापमापी द्वारा उसके शरीर का ताप मापा जा सकता है?
उत्तर:
प्रयोगशाला तापमापी द्वारा शरीर का ताप मापा तो जा सकता है किन्तु ऐसा करना सुविधाजनक नहीं है और सही ताप नोट करना कठिन है।

प्रश्न 4.
बूझो यह जानने के लिए उत्सुक है कि जब तापमापी का बल्ब किसी वस्तु के सम्पर्क में आता है, तो पारे के तल में परिवर्तन क्यों होता है?
उत्तर:
अनेक बार वस्तुओं का तापमान तापमापी के बल्ब जितना नहीं होता। ऐसी स्थिति में जब बल्ब को वस्तु के सम्पर्क में लाया जाता है तो बल्य अपना तापमान बदलता है जिससे पारे का तल भी परिवर्तित हो जाता है।’

प्रश्न 5.
पहेली जानना चाहती है “क्या इसका यह अर्थ है कि यदि दो वस्तुओं का ताप समान हो तो ऊष्मा स्थानान्तरित नहीं होगी?”
उत्तर:
हाँ, दो वस्तुओं का ताप समान होने पर इनके बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता है।

प्रश्न 6.
बूझो दुविधा में है कि चित्र 4.1 में दर्शाए दो मापक्रमों में से वह किसे पढ़े। पहेली ने उसे बताया कि भारत में हमने सेल्सियस स्केल को अपनाया है और हमें इसी स्केल का उपयोग करना चाहिए। दूसरा मापक्रम फारेनहाइट स्केल (F) है जिसका परिसर 94 -108 डिग्री तक है, इसे पहले प्रयोग किया जाता था।
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 4 ऊष्मा -1
डॉक्टरी थर्मामीटर
उत्तर:
बूझो को सेल्सियस स्केल पर ताप पढ़ना चाहिए।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 4 ऊष्मा

HBSE 7th Class Science ऊष्मा Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
प्रयोगशाला तापमापी तथा डॉक्टरी थर्मामीटर के बीच समानताएँ तथा अन्तर लिखिए।
उत्तर:
समानताएँ

प्रयोगशाला तापमापीडॉक्टरी थर्मामीटर
(i) इसमें पारा होता है।इसमें भी पारा होता है।
(ii) इस थर्मामीटर में उपयोग किया जाने वाला मापक्रम सेल्सियस स्केल है।इस थर्मामीटर में भी उपयोग किया जाने वाला मापक्रम सेल्सियस स्केल है।

असमानताएँ

प्रयोगशाला तापमापीडॉक्टरी थर्मामीटर
(i) यह थर्मामीटर शरीर के ताप को मापने के अलावा अन्य वस्तुओं के ताप को भी मापने में काम आता है।यह सिर्फ मानव शरीर का तापमान मापने के काम आता है।
(ii) इसकी तापमापन क्षमता 10°C से 100°C तक होती है।इसकी तापमापन क्षमता 35°C से 42°C तक होती है।

प्रश्न 2.
ऊष्मा चालक तथा ऊष्मारोधी, प्रत्येक के दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
ऊष्मा चालक ताँबा, ऐलुमिनियम। ऊष्मारोधी-लकड़ी, प्लास्टिक।

प्रश्न 3.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) कोई वस्तु कितनी गरम है, इसकी जानकारी …………… द्वारा प्राप्त होती है।
(ख) उबलते हुए पानी का ताप …………… तापमापी से नहीं मापा जा सकता।
(ग) ताप को डिग्री …………… में मापते हैं।
(घ) बिना किसी माध्यम द्वारा ऊष्मा स्थानान्तरण के प्रक्रम को …………… कहते हैं।
(च) स्टील की एक ठंडी चम्मच गर्म दूध के प्याले में रखी गई है। यह अपने दूसरे सिरे तक ऊष्मा का स्थानान्तरण …………… प्रक्रम द्वारा करेगी।
(छ) हल्के रंग के वस्त्रों की अपेक्षा …………… रंग के वस्त्र ऊष्मा का अधिक अवशोषण करते हैं।
उत्तर:
(क) तापमान
(ख) डॉक्टरी
(ग) सेल्सियस
(घ) विकिरण
(च) चालन
(छ) काले।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 4 ऊष्मा

प्रश्न 4.
कॉलम A में दिये कथनों का कॉलम B के शब्दों से मिलान कीजिए-

कॉलम Aकॉलम B
(क) थल समीर के बहने का समय(i) गर्मियों
(ख) समुद्र समीर के बहने का समय(ii) सर्दियाँ
(ग) गहरे रंग के कपड़े पसन्द करने का समय(iii) दिन
(घ) हल्के रंग के कपड़े पसन्द करने का समय(iv) रात

उत्तर:

कॉलम Aकॉलम B
(क) थल समीर के बहने का समय(iv) रात
(ख) समुद्र समीर के बहने का समय(iii) दिन
(ग) गहरे रंग के कपड़े पसन्द करने का समय(ii) सर्दियाँ
(घ) हल्के रंग के कपड़े पसन्द करने का समय(i) गर्मियों

प्रश्न 5.
सर्दियों में एक मोटा वस्त्र पहनने की तुलना में उसी मोटाई का कई परतों का बना वस्त्र अधिक उष्णता क्यों प्रदान करता है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सर्दियों में एक मोटा वस्त्र पहनने की तुलना में उसकी मोटाई का कई परतों का बना वस्त्र अधिक ऊष्णता प्रदान करता है क्योंकि

  • हवा कपड़ों की दो परतों के बीच फंसी होती हैं।
  • हवा ऊष्मा की कुचालक होती है जिससे शरीर की ऊष्मा बाहर नहीं निकल पाती है और शरीर एवं वस्त्र के बीच गर्माहट महसूस होती है।

प्रश्न 6.

को देखिए। अंकित कीजिए कि कहाँ-कहाँ चालन, संवहन तथा विकिरण द्वारा ऊष्मा स्थानान्तरित हो रही है?
उत्तर:

प्रश्न 7.
गरम जलवायु के स्थानों पर यह परामर्श दिया जाता है कि घरों की बाहरी दीवारों पर श्वेत (सफेद) पेंट किया जाये। व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
गरम जलवायु के स्थानों पर यह परामर्श दिया जाता है कि घरों की बाहरी दीवारों पर श्वेत (सफेद) पेंट किया जाये क्योंकि श्वेत रंग ऊष्मा का परावर्तन करता है। यह कम मात्रा में ऊष्मा का अवशोषण करता है। अत: बाहर से कम से कम ऊष्मा घर में भीतर प्रवेश करती है।

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प्रश्न 8.
30°C के एक लिटर जल को 50°C के एक लिटर जल के साथ मिलाया गया। मिश्रण का ताप होगा।
(क) 80°C
(ख) 50°C से अधिक लेकिन 80°C से कम ।
(ग) 20°C
(घ) 30°C तथा 500C के बीच।
उत्तर:
(घ) 30°C तथा 50°C के बीच। ।

प्रश्न 9.
40°C ताप की लोहे की किसी गोली को कटोरी में भरे 40°C ताप के जल में डुबाया गया। इस प्रक्रिया में ऊष्मा
(क) लोहे की गोली से जल की ओर स्थानान्तरित होगी।
(ख) न तो लोहे की गोली से जल की ओर और न ही जल से लोहे की गोली की ओर स्थानान्तरित होगी।
(ग) जल से लोहे की गोली की ओर स्थानान्तरित होगी।
(घ) दोनों के ताप में वृद्धि कर देगी।
उत्तर:
(ख) न तो लोहे की गोली से जल की ओर और न जल से लोहे की गोली की ओर स्थानान्तरित होगी।

प्रश्न 10.
लकड़ी की एक चम्मच को आइसक्रीम के प्याले में डुबोया गया है। इसका दूसरा सिरा
(क) चालन के कारण ठंडा हो जायेगा।
(ख) संवहन के कारण ठंडा हो जायेगा।
(ग) विकिरण के कारण ठंडा हो जायेगा।
(घ) ठंडा नहीं होगा।
उत्तर:
(घ) ठंडा नहीं होगा।

प्रश्न 11.
स्टेनलेस इस्पात की कड़ाही में प्रायः कॉपर (ताँबे) की तली लगाई जाती है। इसका कारण हो सकता
(क) ताँबे की तली कड़ाही को अधिक टिकाऊ बना देती है।
(ख) ऐसी कड़ाही देखने में सुन्दर लगती है।
(ग) स्टेनलेस इस्पात की अपेक्षा ताँबा ऊष्मा का अच्छा चालक है।
(घ) स्टेनलेस इस्पात की अपेक्षा ताँबा को साफ करना अधिक आसान है।
उत्तर:
(ग) स्टेनलेस इस्पात की अपेक्षा ताँबा ऊष्मा का अच्छा चालक है।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 4 ऊष्मा

HBSE 7th Class Science ऊष्मा Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. बहुविकल्पीय प्रश्न निम्नलिखित प्रश्नों में से सही विकल्प का चयन कीजिए

1. जब हम किसी गर्म वस्तु को छूते हैं तो हमें जलने का आभास क्यों होता है?
(क) ऊष्मा हमारे हाथ से गर्म वस्तु में चली जाती है।
(ख) ऊष्मा गर्म वस्तु से तीव्रता से हमारे हाथ में प्रवेश करती है।
(ग) ऊष्मा का कोई स्थानान्तरण नहीं होता है।
(घ) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर:
(ख) ऊष्मा गर्म वस्तु से तीव्रता से हमारे हाथ में प्रवेश करती है।

2. हम बुखार का मापन कर सकते हैं
(क) प्रयोगशाला तापमापी से
(ख) डाक्टरी तापमापी से
(ग) सेल्सियस मापी से
(घ) ये सभी
उत्तर:
(ख) डाक्टरी तापमापी से

3. मानव शरीर का फारेनहाइट पैमाने पर ताप कितना होता हैं?
(क) 37°C
(ख) 50°C
(ग) 37°F
(घ) 97°F
उत्तर:
(घ) 97°F

4. निम्न में से ऊष्मा का कुचालक है
(क) लोहे की कील
(ख) ऐल्यूमिनियम की कढ़ाही
(ग) लकड़ी का हत्था
(घ) स्टील की कटोरी
उत्तर:
(ग) लकड़ी का हत्था

II. रिक्त स्थान

निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थान भरिए
1. किसी वस्तु की ऊष्णता की विश्वसनीय माप उसके ………… से की जाती है।
2. थर्मामीटर को धोने के लिए किसी ………… घोल का उपयोग करना सुरक्षित रहता है।
3. ………… तापमापी का उपयोग शरीर ताप मापन के लिए उचित नहीं है।
4. किसी ठोस वस्तु में ऊष्मा का स्थानान्तरण ……………. कहलाता है।
उत्तर:
1. ताप
2. रोगाणुरोधी (प्रतिरोधी)
3. प्रयोगशाला
4. चालन।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 4 ऊष्मा

III. सुमेलन
कॉलम A तथा कॉलम B के शब्दों का मिलान कीजिए

कॉलम Aकॉलम B
1. धातु की ठोस वस्तु(a) संवहन
2. बर्तन में उबलता पानी(b) चालन
3. प्लास्टिक का तार(c) लकड़ी का हत्था
4. ऊष्मा रोधी(d) कुचालक

उत्तर:

कॉलम Aकॉलम B
1. धातु की ठोस वस्तु(b) चालन
2. बर्तन में उबलता पानी(a) संवहन
3. प्लास्टिक का तार(d) कुचालक
4. ऊष्मा रोधी(c) लकड़ी का हत्था

IV. सत्य / असत्य

निम्नलिखित वाक्यों में से सत्य एवं असत्य छाँटिए
1. ठोसों में ऊष्मा का चालन प्रायः संवहन द्वारा होता है।
2. बर्तन में रखे पानी को गर्म करने पर वह संवहन द्वारा उबलता है।
3. सुचालक पदार्थों में ऊष्मा का स्थानान्तरण आसानी से नहीं होता है।
4. तवे में लकड़ी का हत्था लगाने से हमारा हाथ जलता नहीं क्योंकि लकड़ी ऊष्मा की कुचालक है।
उत्तर:
1. असत्य
2. सत्य
3. असत्य
4. सत्य।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सूर्य से हमें ऊष्मा कैसे प्राप्त होती है?
उत्तर:
सूर्य से हमें ऊष्मा विकिरण द्वारा प्राप्त होती है?

प्रश्न 2.
जब आप धूप में बाहर जाते हैं, आपको छाता प्रयोग करने की सलाह क्यों दी जाती है?
उत्तर:
छाता हमें सूर्य की तेज किरणों से बचाता है?

प्रश्न 3.
जल में ऊष्मा का वितरण किस प्रक्रम द्वारा होता है?
उत्तर:
संवहन द्वारा।

प्रश्न 4.
किसी बीकर या मग में थोड़ा गर्म जल लेकर तापमापी के बल्ब को इसमें डुबोया जाता है। थोड़ी देर पश्चात् आप क्या प्रेक्षण करेंगे? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
तापमापी में पारे का तल ऊपर उठा हुआ दिखाई देता है।

प्रश्न 5.
किसी वस्तु के ताप को ज्ञात करने के लिए क्या तापमापी का बल्ब उस वस्तु के सम्पर्क में आना आवश्यक होता है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
हाँ, तापमापी किसी वस्तु का ताप तभी बताएगा जब उसका बल्ब वस्तु के सम्पर्क में हो।

प्रश्न 6.
डॉक्टरी थर्मामीटर को मुँह से बाहर निकाल लेने पर पारे का तल नीचे या ऊपर क्यों नहीं जाता है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
डॉक्टरी थर्मामीटर में एक विभंग होता है जो पारे के तल को नीचे या ऊपर जाने से रोकता है।

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प्रश्न 7.
किसी डॉक्टरी थर्मामीटर का फिर से प्रेक्षण कीजिए। क्या आप बल्ब के पास कोई विभंग (किंक) देखते हैं? विभंग का क्या लाभ है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
हाँ, डॉक्टरी थर्मामीटर में विभंग होता है। यह पारे के तल को अपने आप नीचे गिरने से रोकता है।

प्रश्न 8.
डॉक्टरी थर्मामीटर में वह कौन-सी युक्ति होती है जो पारे को नीचे जाने से रोकती है?
उत्तर:
थर्मामीटर का विभंग।

प्रश्न 9.
हमें किसी वस्तु के गर्म होने का अनुभव कैसे होता है?
उत्तर:
गर्म वस्तु की ऊष्मा हमारे शरीर में स्थानान्तरित होने लगती है।

प्रश्न 10.
मानव शरीर का तापमान कितना होता है?
उत्तर:
मानव शरीर का सामान्य तापमान 37°C होता

प्रश्न 11.
प्रयोगशाला तापमापी का परिसर कितना होता है?
उत्तर:
प्रयोगशाला तापमापी का परिसर प्रायः – 10°C से 110°C होता है।

प्रश्न 12.
चालन किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह प्रक्रम जिसमें ऊष्मा किसी वस्तु के गर्म सिरे से ठंडे सिरे की ओर स्थानान्तरित होती है, चालन कहलाता है।

प्रश्न 13.
क्या सभी प्रकार के पदार्थों में ऊष्मा का संचरण समान होता है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
नहीं, सभी पदार्थों में ऊष्मा का संचरण समान नहीं होता है।

प्रश्न 14.
वायु में ऊष्मा का स्थानान्तरण किस प्रकार होता है? धुआँ किस दिशा में जाता है?
उत्तर:
वायु में ऊष्मा का स्थानान्तरण संवहन द्वारा होता है। धुआँ ऊपर की ओर जाता है।

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लयु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हमें गर्म एवं ठंडे पानी का अनुभव कैसे होता (क्रियाकलाप)
उत्तर:
जब हम अपने शरीर ताप से कम ताप की वस्तु को छूते हैं तब वह हमें ठंडी महसूस होती है क्योंकि हमारे हाथ से ऊष्मा वस्तु में जाने लगती है। जब हम शरीर ताप से अधिक ताप की वस्तु को छूते हैं तो वह हमें गर्म महसूस होती है क्योंकि ऊष्मा हमारे हाथ में प्रवेश करने लगती है।

प्रश्न 2.
यदि सर्दियों में आपको ‘एक मोटे कम्बल’ अथवा एक के ऊपर एक जुड़े दो पतले कम्बलों’ में से किसी एक का चुनाव करके उपयोग करने की छूट हो तो आप इनमें से किसे चुनेंगे और क्यों?
उत्तर:
हमें एक के ऊपर एक जुड़े दो पतले कम्बलों का चुनाव करना चाहिए। इसका कारण है कि दो कम्बलों को जोड़ने पर उनके बीच के स्थान में हवा भर जाती है। अर्थात् दोनों कम्बलों के बीच हवा की एक पर्त बन जाती है। हवा ऊष्मारोधी होती है। ऐसे कम्बल को ओढ़ने पर हवा की परत के कारण शरीर की ऊष्मा बाहर नहीं निकल पाती और हमारा शरीर गर्म रहता है।

प्रश्न 3.
सर्दियों में वस्त्र हमें गर्म बनाए रखते हैं क्यों?
उत्तर:
सर्दियों में हम ऊनी वस्त्र पहनते हैं। ऊन के अन्दर वायु फैसी होती है और वायु ऊष्मारोधी होती है। जब हम ऊनी वस्त्र पहनते हैं तो हमारे शरीर से निकलने वाली ऊष्मा बाहर स्थानान्तरित नहीं हो पाती। इसलिए ऊनी वस्त्र हमें गर्म बनाए रखते हैं।

प्रश्न 4.
किसी वस्तु का ताप क्यों बढ़ जाता है?
उत्तर:
सभी गर्म पिण्ड विकिरणों के रूप में ऊष्मा विकरित करते हैं। जब ये ऊष्मा विकिरण किसी अन्य वस्तु से टकराते हैं, तो इनका कुछ भाग परावर्तित हो जाता है, कुछ भाग अवशोषित हो जाता है तथा कुछ भाग पारगत हो सकता है। ऊष्मा के अवशोषित भाग के कारण वस्तु का ताप बढ़ जाता है।

प्रश्न 5.
खाना बनाने के बर्तनों की तली (बाहरी पृष्ठ) को प्रायः काला बनाया जाता है। क्यों? ।
उत्तर:
काला रंग ऊष्मा का सर्वाधिक अवशोषण करता है, इसीलिए खाना बनाने वाले बर्तनों को बाहर से काला कर दिया जाता है। जब इन बर्तनों को आग पर रखा जाता है तो काला पुता हुआ बर्तन अधिक से अधिक ऊष्मा अवशोषित करता है। फलस्वरूप खाना शीघ्र पक जाता है।

प्रश्न 6.
क्या ऐसे भवन बनाना सम्भव है, जिन पर बाहरी गर्मी या सर्दी का कोई प्रभाव न हो?
उत्तर:
हाँ, ऐसे भवन बनाना सम्भव है, जिन पर बाहरी गर्मी या सर्दी का प्रभाव न पड़े।

  • भवन को इस प्रकार बनवाया जाए कि दीवारों के बीच एक हवा की परत बन जाए।
  • भवन के अन्दर खोखली ईंटों का प्रयोग किया जाये।
  • गर्मी में भवन की बाहर से हल्के रंग से तथा सर्दी में गहरे रंग से पुताई की जाए।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
थर्मामीटर को पढ़ने की विधि बताइए। (क्रियाकलाप)
उत्तर:
थर्मामीटर को पढ़ने के लिए सबसे पहले इसके किन्हीं दो क्रमागतं (एक के बाद एक) बड़े चिह्नों द्वारा निरूपित ताप के अंतर को नोट करते है। इन दोनों चिों के बीच भागों की संख्या (छोटे चिों द्वारा दर्शाए गए) को नोट करते हैं। मान लें कि दो बड़े चिह्नों के बीच एक डिग्री का अंतर है तथा इन चिह्नों के बीच पाँच भाग हैं। तब एक छोटे भाग का मान 1/5 °C अर्थात 0.2°C होगा।

उपयोग करने से पहले थर्मामीटर को अच्छी प्रकार धो लेते हैं। धोने के लिए किसी पूतिरोधी (रोगाणुरोधक) घोल का उपयोग करना सुरक्षित रहता है। अब इसे अपने हाथ में कसकर पकड़ते हैं और कुछ झटके देते हैं। झटके देने से पारे का तल नीचे आ जाएगा। सुनिश्चित करते हैं कि यह 35°C से नीचे आ गया है। अब थर्मामीटर के बल्ब को अपनी जीभ के नीचे रखते हैं। एक मिनट के पश्चात् थर्मामीटर को बाहर निकालते हैं और उसका पाठ्यांक नोट कर लेते हैं। यह हमारे शरीर का ताप है। ताप को सदैव इसके मात्रक, °C के साथ व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 2.
विभिन्न प्रकार के तापमापी उपकरणों को प्रयोग करते समय क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए ?
उत्तर:
(1) डॉक्टरी थर्मामीटर का उपयोग मानव शरीर का ताप मापने को छोड़कर किसी अन्य वस्तु का ताप मापने के लिए कभी नहीं करना चाहिए।
(2) थर्मामीटर को धूप तथा आग के पास नहीं ले जाना चाहिए।
(3) विभिन्न प्रयोजनों के लिए भिन्न-भिन्न तापमापी उपयोग करने चाहिए।
(4) प्रयोगशाला तापमापी का बल्ब चारों ओर से उस पदार्थ से घिरा होना चाहिए जिसका ताप मापना है। बल्ब बर्तन को नहीं छूना चाहिए। तापमापी को सदैव उर्ध्वाधर रखना चाहिए।
(5) यदि किसी कारण तापमापी टूट जाए तो उसके अन्दर के पारे का तुरन्त निस्तारण करना चाहिए क्योंकि पारा बहुत विषाक्त होता है।
(6) डॉक्टरी थर्मामीटर का प्रयोग करने से पहले एवं बाद में इसे किसी प्रतिरोधी द्रव से धोना चाहिए।
(7) थर्मामीटर को उसके बल्ब की ओर से नहीं पकड़ना चाहिए।

प्रश्न 3.
स्थल समीर एवं समुद्र समीर का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग एक मनोरंजक परिघटना का अनुभव करते हैं। दिन के समय स्थल (धरती) जल की अपेक्षा अधिक गर्म होता है। स्थल के ऊपर की वायु गर्म होकर ऊपर उठती है। इसका स्थान लेने के लिए समुद्र की ओर से ठंडी वायु स्थल की ओर बहती है। चक्र को पूरा करने के लिए स्थल की ओर से गर्म वायु समुद्र की ओर बहती है। समुद्र की ओर से आने वाली वायु को समुद्र समीर कहते हैं।

रात्रि में यह प्रक्रम ठीक विपरीत होता है। समुद्र का जल स्थल की अपेक्षा धीमी गति से ठंडा होता है। इसलिए स्थल की ओर से ठंडी वायु समुद्र की ओर बहती है और समुद्र की गर्म वायु स्थल की ओर आती है। इसे थल समीर कहते हैं।

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ऊष्मा Class 7  HBSE Notes in Hindi

→ ताप – किसी वस्तु की ऊष्णता की कोटि को ताप कहते हैं।
→ तापमापी – ताप मापने के लिए उपयोग की जाने वाली युक्ति को तापमापी (थर्मामीटर) कहते हैं।
→ सेल्सियस स्केल – ताप मापने का एक मापक्रम जिसमें ताप °C में दर्शाया जाता है।
→ अधिकतम-न्यूनतम तापमापी – मौसम की रिपोर्ट में दिए गए अधिकतम तथा न्यूनतम तापों की जानकारी देने के लिए अधिकतम-न्यूनतम तापमापी का उपयोग किया जाता है।
→ अंकीय तापमापी – वह तापमापी जिस पर ताप अंकों में मापा जाता है।
→ चालन – वह प्रक्रिया जिसमें ऊष्मा गर्म वस्तु से ठंडी वस्तु की ओर प्रवाहित होती है।
→ चालक – ऐसे पदार्थ जो ऊष्मा को अपने से होकर प्रवाहित होने देते हैं, सुचालक कहलाते हैं।
→ कुचालक – ऐसे पदार्थ जो ऊष्मा को अपने से होकर प्रवाहित नहीं होने देते हैं। कुचालक कहते है। इन पदार्थों को ऊष्मारोधी भी कहते हैं।
→ संवहन – द्रवों में ऊष्मा के स्थानान्तरण को संवहन कहते
→ थल समीर – रात्रि में समुद्र के ऊपर की गर्म हवा ऊपर उठती है, इससे उत्पन्न कम दबाव के स्थल की ओर से समुद्र की ओर वायु बहना थल समीर कहलाता है।
→ समुद्र समीर – दिन के समय स्थल को गर्म हवा ऊपर उठती है और समुद्री हवा तेजी से स्थल की ओर आती है, -इसे समुद्र समीर कहते हैं।
→ विकिरण – विकिरण ऊष्मा का स्थानान्तरण है परन्तु इसके लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।
→ पूतिरोधी – रोगाणु रोधक (ऐंटीसेप्टिक) ।
→ ताप किसी वस्तु की ऊष्णता की कोटि की माप है।
→ किसी वस्तु की उष्णता की कोटि ज्ञात करने के लिए हम सदैव अपनी स्पर्श-इंद्रिय पर विश्वास नहीं कर सकते।
→ तापमापी वह यंत्र है जिससे ताप मापा जाता है।
→ मानव शरीर का सामान्य ताप 37°C होता है।
→ डॉक्टरी थर्मामीटर का उपयोग शरीर का ताप मापने के लिए किया जाता है। इस थर्मामीटर का परिसर 35°C से 42°C होता है। अन्य कार्यों के लिए हम प्रयोगशाला तापमापी का उपयोग करते हैं। इन तापमापियों का परिसर प्रायः -10°C से 110°C होता है।
→ प्रयोगशाला तापमापी का उपयोग हमारे शरीर के तापमान को मापने के लिए उपयुक्त नहीं है।
→ कष्मा उच्च ताप के पिण्ड से निम्न ताप के पिण्ड की ओर स्थानान्तरित होती है। एक वस्तु से दूसरी वस्तु को ऊष्मा तीन प्रक्रों द्वारा स्थानांतरित हो सकती है। ये है, चालन, संवहन तथा विकिरण।
→ ठोसों में ऊष्मा, चालन द्वारा तथा द्रव व गैसों में उष्मा संवहन द्वारा स्थानान्तरित होती है।
→ जो पदार्थ अपने से होकर ऊष्मा को आसानी से प्रवाहित होने देते हैं, उन्हें ऊष्मा का चालक कहते हैं। जैसे-ऐलुमिनियम, आयरन, कॉपर आदि।
→ वे पदार्थ जो अपने से होकर ऊष्मा को आसानी से नहीं जाने देते, ऊष्मा के कुचालक कहलाते हैं।
→ कुचालकों को ऊष्मारोधी पदार्थ भी कहते हैं।
→ द्रवों में ऊष्मा के स्थानान्तरण को संवहन कहते हैं।
→ समुद्र की ओर से थल की ओर आने वाली वायु को समुद्र समीर कहते हैं तथा थल से समुद्र की ओर जाने वाली वायु को थल समीर कहते हैं।
→ सूर्य से ऊष्मा, पृथ्वी तक जिस प्रक्रम से आती है, उसे विकिरण कहते हैं।
→ गहरे रंग की वस्तुएँ हल्के रंग की वस्तुओं की अपेक्षा ऊष्मीय विकिरणों की अच्छी अवशोषक होती हैं। यही कारण है कि हम गर्मियों में हल्के रंग के वस्त्रों में अधिक आराम का अनुभव करते हैं।
→ सर्दियों में कनी वस्त्र हमें गरम रखते हैं। इसका कारण यह है कि ऊन ऊष्मारोधी है तथा इसके रेशों के बीच में वायु फंसी (ट्रैप) होती है।

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HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 3 रेशों से वस्त्र तकग

Haryana State Board HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 3 रेशों से वस्त्र तकग Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Science Solutions Chapter 3 रेशों से वस्त्र तकग

HBSE 7th Class Science रेशों से वस्त्र तकग InText Questions and Answers

बूझो / पहेली

प्रश्न 1.
बूझो को आश्चर्य होता है कि जब कोई उसके बालों को खींचता है, तो दर्द होता है, परन्तु जब वह बाल कटवाता है, तब दर्द नहीं होता है। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर:
यदि कोई हमारे बाल खींचता है तो इससे दर्द इसलिए होता है, क्योंकि बालों की जड़ें त्वचा से जुड़ी होती हैं। लेकिन बालों को कटवाने में सिर्फ इनके सिरे ही काटे जाते हैं, जो कि मृत हैं इसलिए बाल कटवाने में दर्द का अनुभव नहीं होता है।

प्रश्न 2.
बूझो यह जानने को उत्सुक है कि सर्दियों में सूती कपड़े हमें उतना गर्म क्यों नहीं रख पाते हैं, जितना ऊनी स्वेटर रखता है।
उत्तर:
सूती कपड़े पतले होने के कारण इनमें हवा नहीं भरती। ऊन सूती कपड़ों की अपेक्षा मोटी होती है और इसके बीच जगह होती है जिसमें हवा भर जाती है। हवा ऊष्मा की कुचालक होने के कारण शरीर की ऊष्मा को बाहर नहीं जाने देती। इसलिए हमें सर्दियों में ऊनी कपड़े आरामदायक लगते हैं।

प्रश्न 3.
पहेली जानना चाहती है कि क्या कपास के धागे और रेशम के धागे की कताई और बुनाई एक ही प्रकार से की जाती है?
उत्तर:
नहीं, रेशम के धागे स्वतः ही काफी लम्बे होते

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण

HBSE 7th Class Science रेशों से वस्त्र तकग Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
सम्भवतः आपने नर्सरी कक्षा में निम्नलिखित पंक्तियाँ पढ़ी होंगी
(क) ‘बा बा ब्लेक शीप हेव यू एनी वूल’
(ख) ‘मेरी हेड ए लिट्ल लैम्ब, हूज फ्लीस वाज व्हाइट एज स्नो’
ऊपर लिखी पंक्तियों के आधार पर यह बताइए कि
(1) ब्लैक शीप (काली भेड़) के किन भागों में ऊन होती है?
(i) मेमने (लैम्ब) के सफेद रोमों का क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
(क) (i) सामान्यतः भेड़ों की पीठ तथा पेट पर ऊन होती है।
(ख) (ii) मेमने के शरीर पर सफेद बाल पाए जाते हैं। इन्हें सफेद रोम भी कहते हैं। इनसे ऊन तैयार की जाती है।

प्रश्न 2.
रेशम कीट (अ) कैटरपिलर, (ब) लार्वा हैं। सही विकल्प चुनिए।
(क) केवल (अ)
(ख) केवल (ब)
(ग) (अ) और (ब)
(घ) न ही (अ) और न (ब)।
उत्तर:
(क) केवल (अ)।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से किससे ऊन प्राप्त नहीं होती?
(क) याक
(ख) ऊँट
(ग) बकरी
(घ) घने बालों वाला कुत्ता।
उत्तर:
(घ) घने बालों वाला कुत्ता।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित शब्दों का क्या अर्थ है?
(क) पालन
(ख) ऊन कटाई
(ग) रेशम कीट पालन
उत्तर:
(क) पालन-जन्तुओं को उनसे कुछ वस्तुओं की प्राप्ति के लिए उनकी देखभाल करना पालन कहलाता है।
(i) भेड़ो का पालना भड़ पालन है।
(ii) गड़रिए भड़ा को चराने ले जाते हैं।
(iii) भेड़ों को खिलाना, पिलाना, गर्मी, सर्दी से बचाना, इनकी सुरक्षा करना पालन के अंतर्गत आता है।

(ख) ऊन कटाई-भेड़ों के बालों को त्वचा से उतारने की प्रक्रिया ऊन की कटाई कहलाती है। भेड़ के बाल उतारने के लिए मशीन का प्रयोग किया जाता है। प्रायः बालों को गर्मी के मौसम में काटा जाता है। ऊन काटने से भेड़ को कोई हानि नहीं होती है।

(ग) रेशम कीट पालन-रेशम प्राप्त करने के लिए रेशम के कीटों का पाला जाना रेशम कीट पालन कहलाता है। रेशम कीट पालन एक पुराना व आर्थिक महत्व का व्यवसाय है।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण

प्रश्न 5.
ऊन के संसाधन के विभिन्न चरणों के क्रम में कुछ चरण नीचे दिये गये हैं। शेष चरणों को उनके सही क्रम में लिखिए।
ऊन कटाई, ………….., छंटाई …………, …………..।
उत्तर:
1, ऊन कटाई, 2, अभिमार्जन, 3. छैटाई, 4. रीलिंग, 5. रंगाई।

प्रश्न 6.
रेशम कीट के जीवन-चक्र की उन दो अवस्थाओं के चित्र बनाइए जो प्रत्यक्ष रूप से रेशम के उत्पादन से सम्बन्धित हैं।
उत्तर:
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 3 रेशों से वस्त्र तकग -1

प्रश्न 7.
निम्नलिखित में से कौन-से दो शब्द रेशम उत्पादन से सम्बन्धित हैं?
रेशम कीट पालन, पुष्प कृषि, शहतूत कृषि, मधुमक्खी पालन, वनवर्धन।
संकेत :
(i) रेशम उत्पादन में शहतूत की पत्तियों की खेती और रेशम कीटों को पालना सम्मिलित है।
(ii) शहतूत का वैज्ञानिक नाम मोरस एल्बा है।
उत्तर:
(i) रेशम कीट पालन
(ii) शहतूत की खेती।

प्रश्न 8.
कॉलम A में दिये शब्दों को कॉलम B में दिये गये वाक्यों से मिलाइए-

कॉलम Aकॉलम B
(क) अभिमार्जन(i) रेशम फाइबर उत्पन्न
(ख) शहतूत की पत्तियाँ(ii) ऊन देने वाला जंतु
(ग) याक(iii) रेशम कीट का भोजन
(घ) कोकून(iv) रीलिंग
(v) काटी गई ऊन की सफाई

उत्तर:

कॉलम Aकॉलम B
(क) अभिमार्जन(v) काटी गई ऊन की सफाई
(ख) शहतूत की पत्तियाँ(iii) रेशम कीट का भोजन
(ग) याक(ii) ऊन देने वाला जंतु
(घ) कोकून(i) रेशम फाइबर उत्पन्न

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण

प्रश्न 9.
इस पाठ पर आधारित एक वर्ग पहेली दी गई है। रिक्त स्थानों को उन अक्षरों से भरने । के लिए संकेतों का उपयोग करिए, जो अक्षर को पूरा करते है।
सीधे
2. कार्तित ऊन को अच्छी तरह से धोने का प्रक्रम
3. एक प्रकार का जांतव रेशा
6. लम्बी धागे जैसी संरचना जिससे बुनकर वस्त्र बनाते हैं।

ऊपर से नीचे
1. इससे बुने वस्त्र शरीर को गरम रखते हैं।
4. इसकी पत्तियों को रेशम कीट खाते हैं
5. रेशम कीट के अंडे से निकलते हैं।
उत्तर:
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 3 रेशों से वस्त्र तकग -2

HBSE 7th Class Science प्राणियों में पोषण Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों में से सही विकल्प का चयन कीजिए

I. बहुविकल्पीय प्रश्न

1. निम्न में से कौन-सा जान्तव रेशा नहीं है?
(क) ऊन
(ख) रेशम
(ग) पटसन
(घ) ये सभी
उत्तर:
(ग) पटसन

2. भेड़ की रोंयेदार त्वचा पर कितने प्रकार के बाल होते
(क) एक प्रकार के
(ख) दो प्रकार के
(ग) तीन प्रकार के
(घ) चार प्रकार के
उत्तर:
(ख) दो प्रकार के

3. पश्मीना शालों को बनाने के लिए ऊन प्राप्त होती है
(क) भेड़ से
(ख) याक से
(ग) बकरी से
(घ) ऊँट से
उत्तर:
(ग) बकरी से

4. लामा एवं ऐल्पेको पाए जाते हैं
(क) भारत में
(ख) अफगानिस्तान में
(ग) चीन में
(घ) दक्षिण अमेरिका में
उत्तर:
(घ) दक्षिण अमेरिका में

5. कैटरपिलर का भोजन है
(क) सूक्ष्म कीट
(ख) फलों का रस
(ग) शहतूत की पत्तियाँ
(घ) मकरन्द
उत्तर:
(ग) शहतूत की पत्तियाँ

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण

II. रिक्त स्थान निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थान भरिए

1. उन्नत नश्ल की भेड़ों को ………… द्वारा उत्पन्न किया जाता है।
2. आजकल अभिमार्जन ………… द्वारा किया जाता है।
3. कैटरपिलर अपने जीवन चक्र की अगली अवस्था में प्रवेश करने के लिए तैयार होता है तब यह …………. कहलाता है।
4. सबसे सामान्य रेशम कीट ………… है।
उत्तर:
1. वरणात्मक प्रजनन
2. मशीनों
3. प्यूपा/कोशित
4. शहतूत रेशम कीट।

III. सुमेलन कॉलम A तथा कॉलम B के शब्दों का मिलान कीजिए-

कॉलम Aकॉलम B
1. प्यूपा(a) सिल्क
2. मादा रेशम कीट(b) अण्डे
3. कैटरपिलर(c) रेशम
4. रेशम(d) शहतूत की पत्ती

उत्तर:

कॉलम Aकॉलम B
1. प्यूपा(c) रेशम
2. मादा रेशम कीट(b) अण्डे
3. कैटरपिलर(d) शहतूत की पत्ती
4. रेशम(a) सिल्क

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IV. सत्य / असत्य

निम्नलिखित वाक्यों में से सत्य एवं असत्य कथन छाँटिए
1, भेड़ शाकाहारी होती है और वह घास व पत्तियाँ खाना पसंद करती है।
2. कैटरपिलर को भोजन की आवश्यकता नहीं होती है।
3. ऊन ऊष्मा की कुचालक होती है।
4. रेशम स्टील के तार के समान ही मजबूत होता है।
उत्तर:
1. सत्य
2. असत्य
3. सत्य
4. सत्य।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हमें शरीर के कौन से बाल रूखे तथा कौन-से बाल मुलायम प्रतीत होते हैं? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
हमें सिर के बाल रूखे और शरीर के बाल मुलायम प्रतीत होते हैं।

प्रश्न 2.
क्या हमारी तरह जन्तुओं के शरीर पर भी दो प्रकार के बाल पाए जाते हैं? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
हाँ, जन्तुओं के शरीर पर भी दो प्रकार के बाल होते हैं।

प्रश्न 3.
जन्तुओं के इन दो प्रकार के बालों के नाम बताइए।
उत्तर:
(i) दाड़ी के रूखे बाल
(ii) त्वचा के मुलायम बाल।

प्रश्न 4.
हमें अंगोरा ऊन किस जानवर से प्राप्त होती है?
उत्तर:
अंगोरा ऊन अंगोरा नस्ल की बकरियों से प्राप्त की जाती है।

प्रश्न 5.
पश्मीना शॉलें कहाँ बनायी जाती हैं?
उत्तर:
कश्मीर में।

प्रश्न 6.
सर्दियों में भेड़ों से बाल क्यों नहीं उतारने चाहिए? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
बाल भेड़ों को सर्दियों में ठंड से बचाते हैं। सर्दी में बाल उतरवाने के कारण भेड़ों को ठंड लग सकती है।

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प्रश्न 7.
कैटरपिलर किसे कहते हैं?
उत्तर:
रेशम कीट के अण्डों में से निकले हुए लार्वा – कैटरपिलर कहलाते हैं।

प्रश्न 8.
प्यूपा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जब कैटरपिलर अपने जीवन-चक्र की अगली अवस्था में प्रवेश करने के लिए तैयार होता है तो यह एक खोल में बंद हो जाता है, इसे प्यूपा कहते हैं।

प्रश्न 9.
रेशम के रेशे किस प्रकार उपयोगी हैं?
उत्तर:
रेशम फाइबर को रेशमी वस्त्र बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 10.
कृत्रिम रेशम और शुद्ध रेशम ऊन किन पदार्थों की बनी होती है। (क्रियाकलाप)
उत्तर:
कृत्रिम रेशम रासायनिक पदार्थों की बनी होती है। जबकि शुद्ध रेशम तथा ऊन प्रोटीन की बनी होती है।

प्रश्न 11.
वरणात्मक प्रजनन किसे कहते हैं?
उत्तर:
जनकों के चयन करके प्रजनन कराने की प्रक्रिया को वरणात्मक प्रजनन कहते हैं।

प्रश्न 12.
जन्तुओं के शरीर पर घने बालों का क्या लाभ है?
उत्तर:
बाल जन्तुओं को ठंड से बचाते हैं।

प्रश्न 13.
सेरीकल्चर किसे कहते हैं?
उत्तर:
रेशम कीट पालन को सेरीकल्चर कहते हैं?

प्रश्न 14.
अभिमार्जन किसे कहते हैं?
उत्तर:
भेड़ से उतारे गये बालों की सफाई को अभिमार्जन कहते हैं?

प्रश्न 15.
रीलिंग किसे कहते हैं?
उत्तर:
कोकून से रेशे निकालने के बाद धागे बनाने की प्रक्रिया रीलिंग कहलाती है।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में पायी जाने वाली भेड़ों की कुछ प्रजातियों के नाम बताइए। उनसे प्राप्त होने वाली ऊन का प्रकार तथा किस राज्य में पायी जाती हैं? बताइए। (क्रियाकलाप)
उत्तर:
भेड़ों की भारतीय नस्ल

नस्लउन की गुणवत्ताराज्य जहाँ पाई जाती हैं
1. मारवाड़ीमोटी/रुक्ष ऊनगुजरात
2. लोहीअच्छी गुणवत्ता की ऊनराजस्थान, पंजाब
3. रामपुर बुशायरभूरी ऊनउत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश

प्रश्न 2.
कृत्रिम रेशम और प्राकृतिक रेशम में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
कृत्रिम रेशम एवं प्राकृतिक रेशम में अन्तर

कृत्रिम रेशमप्राढृतिक रेशम
(i) कृत्रिम रेशम रासायनिक पदार्थों से बनता है।(i) प्राकृतिक रेशम, कीटों से प्राप्त होता है।
(ii) यह बहुत रूक्ष होता है।(ii) यह बहुत मुलायम होता है।
(iii) यह प्राकृतिक रेशम की अपेक्षा कमजोर होता है।(iii) यह बहुत मजबूत होता है।
(iv) इसे बनाने में कम समय लगता है।(iv) इसे बनाने में अधिक समय लगता है।
(v) इसे वृर्तिम रूप से चमकाया जाता है।(v) इसमें प्राकृतिक चमक होती है।

प्रश्न 3.
रेशम कीट पालन पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
मादा रेशम कीट एक बार में सैकड़ों अण्डे देती है। अण्डों को सावधानी से कपड़े की पट्टियों अथवा कागज पर संग्रहीत किया जाता है। संग्रहीत अण्डे रेशम कीट पालकों को बेच दिये जाते हैं। रेशम कीट पालक इन अण्डों को अनुकूल दशाओं एवं उचित ताप तथा आर्द्रता की स्थितियों में रखते हैं। अण्डों से निकले लार्वाओं को शहतूत की पत्तियाँ खिलाई जाती हैं।

प्रश्न 4.
कोकून से रेशम किस प्रकार प्राप्त किया जाता है?
उत्तर:
सबसे पहले रेशम कीट के कोकूनों का सावधानीपूर्वक चयन कर लिया जाता है। ध्यान रखा जाना चाहिए कि यदि कोकून से कीट कोकून को तोड़कर बाहर आ जाता है तो रेशम बेकार हो जाता है। एकत्र कोकून को गर्म पानी में डुबो दिया जाता है जिससे उनके अन्दर कीट मर जाते हैं। अब रेशम के तारों की रीलिंग कर ली जाती है।

प्रश्न 5.
ऊन उद्योग में व्यावसायिक संकट क्या है?
उत्तर:
ऊन उद्योग हमारे देश में अनेक व्यक्तियों के लिए जीविकोपार्जन का एक महत्वपूर्ण साधन है। लेकिन छंटाई करने वालों का कार्य जोखिम भरा है क्योंकि कभी-कभी वे एन्थ्रेक्स नामक जीवाणु द्वारा संक्रमित हो जाते हैं, जो एक घातक रक्त रोगकारक है। जिसे सॉर्टर्स रोग कहते हैं। किसी भी उद्योग में कारीगरों द्वारा ऐसे जोखिमों को झेलना व्यावसायिक संकट कहलाता है।

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प्रश्न 6.
भेड़ के अलावा किन-किन जन्तुओं से ऊन प्राप्त की जाती है? ये कहाँ पाए जाते हैं?
उत्तर:
ऊन प्रदान करने वाले जन्तु
याक-यह तिब्बत और लद्दाख में पाया जाता है। अंगोरा बकरी-जम्मू एवं कश्मीर में पायी जाती है। ऊँट राजस्थान में पाया जाता है। लामा और ऐल्पेको ये दक्षिणी अमेरिका में पाए जाते हैं।

दीर्य उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रेशों से ऊन संसाधित करने की प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर:
रेशों से ऊन एक लम्बी प्रक्रिया द्वारा तैयार की जाती है। इसके प्रमुख चरण निम्न प्रकार हैं.
1. कटाई – सबसे पहले भेड़ के बालों को त्वचा की पतली परत के साथ शरीर से उतार लिया जाता है। इसके लिए मशीनें उपयोग की जाती हैं।
2. अभिमार्जन – त्वचा सहित उतारे गये बालों को टंकियों में डालकर अच्छी तरह से धोया जाता है जिससे उनकी चिकनाई, धूल और गर्द निकल जाए। यह क्रिया अभिमार्जन कहलाती है। आजकल मशीनों द्वारा भी अभिमार्जन किया जाता है।
3. छंटाई – इस प्रक्रिया के लिए बालों को कारखानों में भेज दिया जाता है। जहाँ विभिन्न गठन वाले बालों को छाँटा जाता है।
4. रेशों को छाँटना – बालों को सुखाने से पहले उनमें से कोमल व फूले हुए रेशों को छाँट लिया जाता है जो बर कहलाते हैं। इन्हें सुखाकर धागों के रूप में कातकर ऊन तैयार की जाती है।
5. रंगाई – अब रेशों की विभिन्न रंगों से रंगाई की जाती है।

प्रश्न 2.
रेशम कीट के जीवन-चक्र का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
रेशम कीट के नर एवं मादा कोट अलग-अलग होते हैं। ये दोनों ही पंख वाले होते हैं। मादा कीट शहतूत की पत्तियों पर एक बार में सौ से अधिक अण्डे देती है। अण्डों से रेशम कीट का लार्वा निकलता है जिसे कैटरपिलर कहते हैं। कैटरपिलर शहतूत की पत्तियों को खाता है और आकार में वृद्धि करता है। खूब पत्तियाँ खाकर यह अब शिथिल होने लगता है। अपनी उदर ग्रन्थि से यह प्रोटीन से बना पदार्थ स्रावित करके स्वयं को लगातार ढकता जाता है। इस प्रकार यह अपने ऊपर एक गोलाकार खोल बना लेता है। इस खोल सहित कीट को कोकून कहते हैं। कुछ समय पश्चात् पंखों वाला रेशम कीट कोकून को तोड़कर बाहर निकल आता है तथा पुनः अपना जीवन-चक्र प्रारम्भ करता है।
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 3 रेशों से वस्त्र तकग -3

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण

प्रश्न 3.
रेशम का संसाधन कैसे किया जाता है?
उत्तर:
रेशम का संसाधन:
रेशम फाइबर प्राप्त करने के लिए कोकूनों की बड़ी ढेरी का उपयोग किया जाता है। वयस्क कीट में विकसित होने से पहले ही कोकूनों को धूप में रखा जाता है अथवा पानी में उबाला जाता है या गर्म भाप में रखा जाता है। इस प्रक्रम में रेशम के फाइबर पृथक् हो जाते हैं। रेशम के रूप में उपयोग के लिए कोकून में से रेशे निकालने के पश्चात् उनसे धागे बनाने की प्रक्रिया रेशम की रीलिंग कहलाती है। रीलिंग विशेष मशीनों से की जाती है जो कोकून में से फाइबर या रेशों को निकालती हैं। फिर रेशम के फाइबरों की कताई की जाती है, जिससे रेशम के धागे प्राप्त हो जाते हैं। बुनकरों द्वारा रेशम के इन्हीं धार्गों से वस्त्र बुने जाते हैं।

रेशों से वस्त्र तकग Class 7  HBSE Notes in Hindi

→ जांतव रेशे – जन्तुओं से प्राप्त रेशे, जान्तव रेशे कहलाते हैं।
→ कर्तित ऊन – भेड़ की त्वचा के निकट अवस्थित तन्तु रूपी मुलायम बाल।
→ वरणात्मक प्रजनन – तंतुरूपी मुलायम बालों जैसे गुणों वाली भेड़ों के उत्पादन के लिए जनकों के चयन की प्रक्रिया।
→ ऊन कटाई – भेंड़ एवं अन्य जन्तुओं से बाल उतारना।
→ अभिमार्जन – जन्तुओं की त्वचा से उतारे गए बालों को साफ करने की प्रक्रिया।
→ रीलिंग – रेशों को सीधा करके उन्हें सुलझाने तथा लपेटकर धागे बनाने की प्रक्रिया।
→ रेशम कीट – एक प्रकार का कीट जिससे रेशम प्राप्त होता है।
→ सेरीकल्चर – रेशम कीट पालन।
→ कैटरपिलर – रेशम कीट के अण्डे से निकलने वाली इल्ली।
→ प्यूपा/कोशित/कोकून – रेशम कीट लार्वा स्वयं को सिल्क के रेशों से पूर्णतः ढक लेता है। यह आवरण प्यूपा/ कोशित/कोकून कहलाता है।
→ संसाधन – कोकून से रेशम के रेशों को पृथक् करके उनको साफ करना।

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Haryana State Board HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण

HBSE 7th Class Science प्राणियों में पोषण InText Questions and Answers

बूझो / पहेली

प्रश्न 1.
बूझो पाठ्य-पुस्तक के
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण -1
में दिखाई गई अत्यधिक कुण्डलित क्षुद्रांत्र को देखकर आश्चर्यचकित है। वह इसकी लम्बाई जानना चाहता है। क्या आप इसका अनुमान लगा सकते हैं? पाठ्य पुस्तक पृष्ठ संख्या 17 में इसकी सन्निकट लम्बाई दी गई है। कल्पना कीजिए कि इतनी लम्बी संरचना हमारे शरीर के छोटे से हिस्से में किस प्रकार समायी हुई है?
उत्तर:
1. क्षुद्रान्त्र की लम्बाई लगभग 7.5 मीटर होती है।
2. यह अत्यधिक कुण्डलित होने के कारण ही शरीर के छोटे से हिस्से में समाई हुई है।

प्रश्न 2.
पहेली जानना चाहती है कि वमन के समय भोजन विपरीत दिशा में किस प्रकार जाता है?
उत्तर:
आमाशय में होने वाली क्रमाकुंचन गति के कारण वमन के समय भोजन की विपरीत दिशा में गति होती है।

प्रश्न 3.
पहेली जानना चाहती है कि ये जन्तु (भेड़, भैंस, बकरी) भोजन करते समय इसे भली-भाँति क्यों नहीं चबा पाते?
उत्तर:
1.रूमिनेन्टस का मुख्य भोजन घास तथा झाड़ियाँ हैं।
2. घास में सेलुलोस की प्रचुरता के कारण उसे काफी देर तक चबाने के लिए लार की आवश्यकता होती है।
3. ये जन्तु भोजन को दो बार में चबाते हैं।
4. यदि ये जन्तु खाते समय इसे देर तक चबाते रहेंगे तो उन्हें बहुत समय बर्बाद करना पड़ेगा इसलिए ये आराम के समय ऐसा करते हैं।

प्रश्न 4.
बूझो जानना चाहता है कि मनुष्य मवेशियों की तरह सेलुलोज को क्यों नहीं पचा सकता?
उत्तर:
रूमिनैन्ट में क्षुद्रांत्र एवं बृहदांत्र के बीच एक थैलीनुमा संरचना होती है जिसे अंधनाल कहते हैं। इसमें सेलुलोज का पाचन कुछ जीवाणुओं द्वारा आसानी से किया जाता है। मनुष्य की आहार नाल में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होती इसलिए वह सेलुलोज नहीं पचा सकता।

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HBSE 7th Class Science प्राणियों में पोषण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
उचित शब्द द्वारा रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) मानव पोषण के मुख्य चरण ………… ।
(ख) मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रन्थि का नाम …..” है।
(ग) आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं …………” का साव होता है, जो भोजन पर क्रिया करते हैं।
(घ) क्षुद्रांत्र की आन्तरिक भित्ति पर अंगुली के समान अनेक प्रवर्ध होते हैं, जो ……..” कहलाते हैं।
(ङ) अमीबा अपने भोजन का पाचन ………” में करता है।
उत्तर:
(क) अन्तर्ग्रहण, पाचन, अवशोषण, स्वांगीकरण, निष्कासन
(ख) यकृत
(ग) पाचक रस
(घ) दीर्घ रोम
(ङ) खाद्यधानी।

प्रश्न 2.
सत्य एवं असत्य कथनों को चिन्हित कीजिए:
(क) मंड का पाचन आमाशय से प्रारम्भ होता है।
(ख) जीभ लार-ग्रन्थि के रस को भोजन के साथ मिलाने में सहायता करती है।
(ग) पित्ताशय में पित्त रस अस्थायी रूप से भण्डारित होता है।
(घ) रूमिनेन्ट निगली हुई घास को अपने मुख में वापस लाकर धीरे-धीरे चबाते रहते हैं।
उत्तर:
(क) असत्य
(ख) सत्य
(ग) सत्य
(घ) सत्य।

प्रश्न 3.
निम्न में से सही विकल्प पर (✓) का चिन्ह लगाइए
(क) वसा का पूर्णरूपेण पाचन जिस अंग में होता है, वह है
(i) आमाशय
(ii) मुख
(iii) क्षुद्रांत्र
(iv) बृहदांत्र।
उत्तर:
(ii) मुख ✓

(ख) जल का अवशोषण मुख्यतः जिस अंग द्वारा होता है, वह है
(i) आमाशय
(ii) ग्रसिका
(iii) क्षुद्रांत्र
(iv) बृहदांत्र ।
उत्तर:
(iv) बृहदांत्र । ✓

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प्रश्न 4.
कॉलम A में दिये गये कथनों का मिलान कॉलम B में दिये गये कथनों से कीजिए।

कॉलम Aकॉलम B
खाद्य घटकपाचन के उत्पाद
(क) कार्बोहाइड्रेट(i) वसा अम्ल एवं ग्लिसरॉल
(ख) प्रोटीन(ii) शर्करा।
(ग) वसा(iii) एमीनो अम्ल

उत्तर:

कॉलम Aकॉलम B
खाद्य घटकपाचन के उत्पाद
(क) कार्बोहाइड्रेट(ii) शर्करा।
(ख) प्रोटीन(iii) एमीनो अम्ल
(ग) वसा(i) वसा अम्ल एवं ग्लिसरॉल

प्रश्न 5.
दीर्घरोम क्या हैं? वह कहाँ पाए जाते हैं एवं उनके कार्य क्या हैं?
उत्तर:
दीर्घरोम-छोटी आंत (क्षुद्रांत्र) की भीतरी दीवार पर हजारों की संख्या में अँगुली के समान प्रवर्ध पाए जाते हैं जिन्हें दीर्घरोम कहते हैं।
दीर्घरोम के निम्न कार्य हैं-
(i) दीर्घरोम क्षुद्रांत्र में अवशोषण के क्षेत्र को बढ़ा देते हैं।
(ii) इसकी सतह से पचे हुए भोजन का अवशोषण होता है।
(iii) प्रत्येक दीर्घरोम में सूक्ष्म रुधिर वाहिकाओं का जाल फैला रहता है, जो अवशोषित पदार्थों को शरीर के विभिन्न भागों में स्थानान्तरित करता है।

प्रश्न 6.
पित्त कहाँ निर्मित होता है? यह भोजन के ‘किस घटक के पाचन में सहायता करता है?
उत्तर:
पित्त का निर्माण यकृत में होता है तथा यह पित्ताशय में संचित रहता है। पित्त वसा के पाचन में सहायक होता है। यह वसा को छोटे-छोटे खण्डों में तोड़कर इसका पायसीकरण (इमल्सीकरण) कर देता है।

प्रश्न 7.
उस कार्बोहाइडेट का नाम लिखिए जिनका पाचन रूमिनेन्ट द्वारा किया जाता है परन्तु मानव द्वारा नहीं। इसका कारण बताइए।
उत्तर;
सेलुलोज नामक कार्बोहाइड्रेट का पाचन रूमिनेन्ट द्वारा कर लिया जाता है किन्तु मानव द्वारा नहीं।
रूमिनेन्ट (जुगाली करने वाले मवेशी) की आहार नाल में क्षुद्रांत्र तथा बृहदांत्र के बीच एक थैली जैसी रचना होती है जिसे अन्धनाल कहते हैं। इसमें विशेष प्रकार के जीवाणु उपस्थित रहते हैं जो सेलुलोज के पाचन को सुगम बनाते हैं। मनुष्य में ऐसी कोई संरचना नहीं पायी जाती है इसलिए वह सेलुलोज का पाचन नहीं कर सकता है।

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प्रश्न 8.
क्या कारण है कि हमें ग्लूकोस से ऊर्जा तुरन्त प्राप्त होती है?
उत्तर:
ग्लूकोस कार्बोहाइड्रेट का सरलतम रूप है। इसे ऊर्जा प्राप्ति के लिए सरलता से तोड़ा जा सकता है इसलिए हमें ग्लूकोस से सरलता से ऊर्जा की प्राप्ति होती है। इसे त्वरित ऊर्जा दाता भी कहा जाता है। .

प्रश्न 9.
आहार नाल के कौन-से भाग द्वारा निम्न क्रियाएँ संपादित होती हैं-
(i) पचे भोजन का अवशोषण …………..।
(ii) भोजन को चबाना ……………..।
(iii) जीवाणु नष्ट करना ……………|
(iv) भोजन का सम्पूर्ण पाचन ………….. |
(v) मल का निर्माण ……………।
उत्तर:
(i) क्षुद्रान्त्र
(ii) मुख गुहा
(iii) आमाशय
(iv) क्षुद्रात्र
(v) बृहदात्र।

प्रश्न 10.
मानव एवं अमीबा के पोषण में कोई एक समानता एवं एक अन्तर लिखिए।
उत्तर:
समानता – मानव एवं अमीबा दोनों ही भोजन को पचाने के लिए पाचक रसों का प्रयोग करते हैं।
अन्तर – अमीबा को जब भोजन का आभास होता है तो वह खाद्य कण के चारों ओर पादाभ विकसित करके उसका अन्तर्ग्रहण करता है, जबकि मनुष्य भोजन को मुख गुहा में लेकर पहले चबाता है।

प्रश्न 11.
कॉलम A में दिये गये शब्दों का मिलान कॉलम B के उचित कथन से कीजिए।

कॉलम Aकॉलम B
(क) लाला-ग्रंथि(i) पित्त रस का स्रवण
(ख) आमाशय(ii) बिना पचे भोजन का भण्डारण
(ग) यकृत(iii) लाला रस नावित करना
(घ) मलाशय(iv) अम्ल का निर्मोचन
(च) क्षुद्रांत(v) पाचन का पूरा होना
(छ) बृहदांत्र(vi) जल का अवशोषण
(vii) मल त्याग

उत्तर:

कॉलम Aकॉलम B
(क) लाला-ग्रंथि(iii) लाला रस नावित करना
(ख) आमाशय(iv) अम्ल का निर्मोचन
(ग) यकृत(i) पित्त रस का स्रवण
(घ) मलाशय(ii) बिना पचे भोजन का भण्डारण, (vii) मल त्याग
(च) क्षुद्रांत(v) पाचन का पूरा होना
(छ) बृहदांत्र(vi) जल का अवशोषण

प्रश्न 12.
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण -2
में दिये हुए पाचन तन्त्र के आरेख को नामांकित कीजिए।
उत्तर:
नामांकित चित्र-
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण -3

प्रश्न 13.
क्या हम केवल हरी सब्जियों/घास का भोजन कर जीवन निर्वाह कर सकते हैं? चर्चा कीजिए।
उत्तर:
नहीं, हम केवल हरी सब्जियाँ/घास का भोजन कर जीवन निर्वाह नहीं कर सकते। क्योंकि स्वस्थ जीवन जीने के लिए सभी पोषक पदार्थों की सन्तुलित मात्रा में आवश्यकता होती है। हरी कच्ची सब्जियों में सेलुलोज की भी कुछ मात्रा होती है जिसे हम नहीं पचा सकते। इनमें प्रायः वसा, प्रोटीन एवं पूर्ण कार्बोहाइड्रेट का अभाव होता है।

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HBSE 7th Class Science पादपों में पोषण Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. बहुविकल्पीय प्रश्न निम्नलिखित प्रश्नों में से सही विकल्प का चयन कीजिए

1. हमारे भोजन के संघटक हैं
(क) वसा
(ख) कार्बोहाइड्रेट्स
(ग) प्रोटीन
(घ) ये सभी
उत्तर:
(घ) ये सभी

2. भोजन के अन्तर्ग्रहण की विधि पायी जाती है
(क) मनुष्य में
(ख) अजगर में
(ग) गाय में
(घ) सभी में
उत्तर:
(घ) सभी में

3. जीभ का कार्य है
(क) स्वाद ग्रहण करना
(ख) भोजन में लार मिलाना
(ग) निगलने में सहायता करना
(घ) ये सभी।
उत्तर:
(घ) ये सभी।

4. हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का स्रावण आहार नाल के किस भाग से होता है?
(क) ग्रसिका से
(ख) आमाशय से
(ग) अग्न्याशय से
(घ) यकृत से
उत्तर:
(ख) आमाशय से

5. ऊर्जा प्रदान करता है
(क) ग्लूकोज
(ख) खनिज
(ग) विटामिन
(घ) एमीनो अम्ल
उत्तर:
(क) ग्लूकोज

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II. रिक्त स्थान निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए

1. ….जटिल पदार्थों को उसके सरल रूप में बदल देते हैं।
2. हमारे मुख में ………….. प्रकार के दाँत पाए जाते हैं।
3. लाला रस चावल के मण्ड को ……. में बदल देता है।
4. पित्त रस का स्रावण यकृत से होता है तथा यह ……… में संग्रहित होता है।
उत्तर:
1, पाचक रस
2. चार
3. शर्करा
4. पित्ताशय।

III. सुमेलन कॉलम A तथा कॉलम B के शब्दों का मिलान कीजिए

कॉलम Aकॉलम B
1. मर्मर पक्षी(a) मांसाहार
2. मनुष्य(b) शाकाहार
3. अजगर(c) मकरन्द
4. गाय(d) सर्वाहार

उत्तर:

कॉलम Aकॉलम B
1. मर्मर पक्षी(c) मकरन्द
2. मनुष्य(d) सर्वाहार
3. अजगर(a) मांसाहार
4. गाय(b) शाकाहार

IV. सत्य / असत्य निम्नलिखित वाक्यों में से सत्य एवं असत्य छाँटिए

1. आमाशय में उपस्थित रसांकुर भोजन का अवशोषण करते हैं।
2. यकृत मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रन्थि है।
3. पित्ताशय से पित्त रस स्रावित होता है।
4. अपचित पदार्थों का संग्रहण मलाशय में होता है।
उत्तर:
1. असत्य
2. सत्य
3. असत्य
4. सत्य।

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
एक वयस्क व्यक्ति में दांतों की संख्या कितनी होती है?
उत्तर:
32 दाँत।

प्रश्न 2.
दाँत कितने प्रकार के होते हैं? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
दाँत चार प्रकार के होते हैं।

प्रश्न 3.
काटने तथा दंशन के लिए दाँतों के कौन-से प्रकार का प्रयोग किया जाता है? (क्रिया कलाप)
उत्तर:
कृतक।

प्रश्न 4.
भोजन को चबाने तथा पीसने के लिए कौन-से दाँत प्रयोग होते हैं? (क्रिया कलाप)
उत्तर:
चर्वणक तथा अग्रचर्वणक।

प्रश्न 5.
कौन-से दाँत चीरने फाड़ने के काम आते हैं? (क्रिया कलाप)
उत्तर:
रदनक।

प्रश्न 6.
क्षुद्रांत्र तथा बृहदांत्र की लम्बाइयाँ बताइए।
उत्तर:
क्षुद्रांत्र लगभग 7.5 मीटर तथा वृहदांत्र लगभग 1.5 मीटर।

प्रश्न 7.
मधुमक्खी एवं मर्मर पक्षी का भोजन क्या
उत्तर:
पौधों का मकरंद।

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प्रश्न 8.
मुख गुहा में लाला-रस की एक क्रिया बताइए।
उत्तर:
लाला-रस मुखगुहा में भोजन के मण्ड को शर्करा में बदल देता है।

प्रश्न 9.
मण्ड क्या होता है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
मण्ड, कार्बोहाइड्रेट का एक प्रकार है।

प्रश्न 10.
मण्ड आयोडीन के साथ क्या परीक्षण देता (क्रियाकलाप)
उत्तर:
मण्ड विलयन का रंग नीला हो जाता है।

प्रश्न 11.
ग्रसिका में भोजन कैसे-कैसे बढ़ता है?
उत्तर:
ग्रसिका की दीवारों की क्रमाकुंचन गति के कारण।

प्रश्न 12.
अग्न्याशयी रस भोजन के किस भाग पर क्रिया करता है ?
उत्तर:
अग्न्याशयी रस कार्बोहाइड्रेट्स एवं प्रोटीन पर क्रिया करता है।

प्रश्न 13.
अमीबा क्या है?
उत्तर:
अमीबा एक कोशिकीय प्राणी है?

प्रश्न 14.
अमीबा का मुख्य भोजन क्या है?
उत्तर:
सूक्ष्म कण।

प्रश्न 15.
हमारे लिए मुख्य ऊर्जा स्रोत क्या है?
उत्तर:
कार्बोहाइड्रेट।

प्रश्न 16.
अन्धनाल किसे कहते हैं?
उत्तर:
जानवरों जैसे-घोड़ा, खरगोश आदि में क्षुद्रांन्त्र एवं बृहदांत्र के बीच एक थैली जैसी बड़ी संरचना होती है जिसे अन्धनाल कहते हैं।

प्रश्न 17.
पादाभ क्या होते हैं?
उत्तर:
अमीबा अपने शरीर से एक अथवा अधिक अंगुलीनुमा प्रवर्ध निकालता रहता है, जिन्हें पादाभ कहते हैं।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
हमें पाचन की आवश्यकता क्यों होती है? समझाइए।
उत्तर:
हम अपने भोजन में विभिन्न जटिल पदार्थों जैसे कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन आदि को सम्मिलित करते हैं। इन पदार्थों को शरीर में सीधे नहीं मिलाया जा सकता। अतः उन्हें सरल पदार्थों में बदलना आवश्यक है, जैसा कि निम्न आरेख में दर्शाया गया है
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण -4
सरल पदार्थ जटिल खाद्य पदार्थों का सरल पदार्थों में परिवर्तित होना पाचन कहलाता है।

प्रश्न 2.
जीभ पर स्वाद निम्नलिखित के स्वाद के विभिन्न क्षेत्रों को चित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए। (क्रियाकलाप)
(क) चीनी का विलयन (मीठा)
(ख) नमक का विलयन (नमकीन)
(ग) नींबू का रस (खट्टा)
(घ) नीम की पत्ती अथवा करेले का रस (कड़वा)।
उत्तर:
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण -5

प्रश्न 3.
दंतक्षय क्या है और यह क्यों होता है?
उत्तर:
सामान्यतः हमारे मुख में जीवाणु पाए जाते हैं, परन्तु उनसे हमें कोई हानि नहीं होती है। यदि दाँत एवं मुख को सही ढंग से साफ न किया जाये तो मुख में अनेक हानिकारक जीवाणु पैदा हो जाते हैं। ये जीवाणु दाँतों के बीच फैंसे भोजन की शर्करा को विघटित कर अम्ल निर्मोचित करते हैं। यह अम्ल धीरे-धीरे दाँतों को क्षति पहुँचाते हैं। इसे दंतक्षय कहते हैं। चॉकलेट, ठण्डे पेय तथा चीनी युक्त मिठाइयाँ व अन्य पदार्थ दंतक्षय के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी होते हैं।
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण -6

प्रश्न 4.
स्टारफिश में भोजन ग्रहण किस प्रकार होता है?
उत्तर:
स्टारफिश (तारा मछली) कैल्शियम कार्बोनेट के कठोर कवच वाले जन्तुओं का आहार करती है। कवच खोलने के बाद यह अपने मुख से अपना आमाशय बाहर निकालती… है तथा जन्तु के कोमल भागों को खाती है। आमाशय वापस शरीर : में चला जाता है तथा आहार
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स्टारफिश

प्रश्न 5.
दूध के दाँत तथा स्थायी दाँत क्या हैं?
उत्तर:
हमारे दाँतों का प्रथम सेट शैशवकाल में निकलता है तथा लगभग 8 वर्ष की आयु तक ये सभी दाँत गिर जाते हैं। इन्हें दूध के दाँत (अस्थायी दाँत) कहते हैं। इन दाँतों के स्थान पर दूसरे दाँत निकलते हैं जिन्हें स्थायी दाँत कहते हैं। सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के स्थायी दाँत पूरे जीवन भर बने रहते हैं तथा वृद्धावस्था में ये प्रायः गिरने लगते हैं।

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प्रश्न 6.
भोजन नली (ग्रसिका) में भोजन की गति किस प्रकार होती है? चित्र द्वारा समझाइए।
उत्तर:
निगला हुआ भोजन भोजन ग्रासनली अथवा ग्रसिका में जाता. है। ग्रसिका गले एवं वक्ष से होती प्रसिका हुई जाती है। ग्रसिका की भित्ति के संकुचन से भोजन नीचे की ओर सरकता जाता है। वास्तव में सम्पूर्ण आहार नाल संकुचित होती रहती है आमाशयतथा यह गति भोजन को नीचे की ओर धकेलती रहती है। कभी-कभी हमारा आमाशय खाए हुए भोजन को स्वीकार नहीं करता, फलस्वरूप चित्र : ग्रसिका में वमन द्वारा बाहर निकाल दिया जाता है।
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण -8

प्रश्न 7.
यकृत एवं पित्ताशय के कार्य लिखिए।
उत्तर:
यकृत : यह हमारे शरीर की सबसे बड़ी ग्रन्थि है जो उदर के ऊपरी भाग में दाँयी ओर स्थित होती है। यह ग्रन्थि पित्त रस का स्रावण करती है जो भोजन के साथ आयी वसा का पाचन करता है।
पित्ताशय :पित्ताशय आहारनाल के ग्रहणी भाग में स्थित पत्ती के आकार की ग्रन्थि है। यह पित्त रस का नावण करती है जो भोजन की प्रोटीन एवं कार्बोहाइड्रेट का पाचन करता

प्रश्न 8.
हमें खाना खाते समय जल्दबाजी या बातें क्यों नहीं करनी चाहिए?
उत्तर:
कभी-कभी हम जल्दी-जल्दी खाना खाते हैं अथवा खाते समय बातें करते हैं। तो ऐसा करने से खाँसी उठ आती है या ठसका लग जाता है। यह खाद्यकों के श्वास नली में प्रवेश करने के कारण होता है। श्वास नली नासिका से आने वाली वायु को फेफड़ों तक ले जाती है। यह ग्रसिका के साथ-साथ स्थित होती है परन्तु ग्रसनी में वायु एवं भोजन मार्ग एक ही होते हैं। भोजन निगलने के समय एक माँसल रचना वाल्व का कार्य करती है जो श्वास नली को ढक लेती है तथा भोजन को ग्रसनी में भेजती है। संयोगवश यदि भोजन के कण श्वासनली में प्रवेश कर जाते हैं, तो हमें घुटन का अनुभव होता है तथा हिचकी आती है या खाँसी उठती है या ठसका लग जाता है।

प्रश्न 9.
निम्न पाचक रसों को स्रावित करने वाले अंगों के नाम तथा इनका एक-एक कार्य लिखिए
(क) जठर रस,
(ख) पित्त रस,
(ग) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल,
(घ) अग्न्याशयी रस।
उत्तर:
(क) जठर रस : आमाशय यह प्रोटीन को सरल पदार्थों में बदलता है।
(ख) पित्त रस-यकृत : यह वसा का पाचन करता है।
(ग) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल : आमाशय-जीवाणुओं को नष्ट करता है।
(घ) अग्न्याशयी रस अग्न्याशय : यह कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन का पाचन करता है।

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण

दीर्य उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
जन्तुओं के भोजन के प्रकार तथा पोषण प्राप्त करने की विधि कौन-सी हैं? अपने प्रेक्षण सारणी में लिखिए।
(आहार की विधियाँ-छीलना, चबाना, काटना (वेधन), पकड़ना तथा निगलना, साइफनी, स्पंजी, चूषण इत्यादि) (क्रियाकलाप)
उत्तर:
सारणी : अन्तर्ग्रहण की विभिन्न विधियाँ

जन्तु का नामआहार का प्रकारआहार की विधि
1. घोंषापादपों का निचला भागचूषण
2. चीटीभोजनकण, शर्करा, अन्नकणखुरचना
3. चौलछोटे पक्षी, चूहे. साँपपकड़ना और निगलना
4. मर्मर पक्षीमकरन्दचूसना
5. जूंरुधिरचूसना
6. मच्छरपुष्पों का रस, रक्तचूसना
7. तितलीफुलों का मकरंदचूसना
8. मक्खीशर्करा, अन्य पदार्थचूसना

प्रश्न 2.
दाँतों के प्रकार एवं उनके कार्य को सारणी में संख्या बताते हुए लिखिए। (क्रियाकलाप)
सारणी : दाँत के प्रकार एवं उनके कार्य ।

दाँतों के प्रकारदाँतों के कार्य

 

दाँतों की संख्या
निचला जबड़ाऊपरी जबड़ायोग
(i) कृंतककाटना एवं दंशन करना448
(ii) रदनकचीरना एवं फाड़ना224
(iii) अग्रचर्वणक एवं चर्वणकचबाना एवं पीसना101020

प्रश्न 3.
मानव में पाचन क्रिया का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानव में पाचन क्रिया-मानव के पाचन तंत्र के निम्नलिखित अंग होते हैं-
(i) मुख गुहिका,
(ii) ग्रासनली,
(iii) आमाशय,
(iv) क्षुद्रांत्र,
(v) बृहदांत्र तथा
(vi) मल द्वार ।
इसके अलावा पाचन तंत्र से सम्बन्धित सहायक पाचक ग्रन्थियाँ यकृत, अग्न्याशय तथा जठर ग्रन्थियाँ।

1. मुख गुहा में पाचन : मुख गुहा में भोजन का अन्तर्ग्रहण किया जाता है तथा दाँतों द्वारा भोजन को चबाया जाता है। मुख गुहा में नावित लार भोजन को लसलसा बनाती है तथा भोजन की कुछ मण्ड को शर्करा में बदलती है।

2. ग्रसिका में पाचन : ग्रसिका में कोई पाचन क्रिया नहीं होती है।

3. आमाशय में पाचन : आमाशय U आकार की सबसे चौड़ी संरचना है। इसकी भीतरी दीवारों से जठर रस नावित होता है। इसमें हाइड्रोक्लोरिक अम्ल भोजन के साथ आए जीवाणुओं को नष्ट करता है तथा भोजन को अम्लीय बनाता है। आमाशय में भोजन का आंशिक पाचन होता है और भोजन छोटे-छोटे कणों में विखण्डित हो जाता है।

4. क्षुद्रांत्र में पाचन : क्षुद्रांत्र में भोजन का पूर्ण पाचन एवं अवशोषण होता है। इसमें अग्न्याशयी रस के प्रभाव से कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन का पाचन होता है। पित्त रस वसा के पाचन में सहायता करता है। क्षुद्रांत्र की दीवारों में स्थित दीर्घरोम पचे भोजन का अवशोषण करते हैं।

5. बृहदांत्र वृहदांत्र में कोई पाचन : क्रिया नहीं होती परन्तु इसमें जल का अवशोषण अवश्य होता है। वहदांत्र में अपचित भोजन आता है जिसे मलाशय में धकेल दिया जाता है। मलाशय से अपचित भोजन (मल) को समय-समय पर गुदा द्वार से बाहर निकाल दिया जाता है।

प्रश्न 4.
मण्ड पर लार के प्रभाव को दर्शाने के लिए एक क्रियाकलाप लिखिए। (क्रियाकलाप)
उत्तर:
मण्ड पर लार का प्रभाव : दो परखनलियाँ लेकर उन पर ‘A’ तथा ‘B’ अंकित करते हैं। परखनली ‘A’ में एक चम्मच उबले चावल तथा परखनली ‘B’ में 2-3 मिनट तक मुँह में चबाए हुए चावल लेते हैं। दोनों परखनलियों में 3-4 मिली. पानी डालते हैं। अब दोनों परखनलियों में आयोडीन विलयन की 2-3 बूंदें डालते हैं।
प्रेक्षण : परखनली ‘A’ के विलयन का रंग नीला हो जाता है।
निष्कर्ष : परखनली ‘A’ के उबले चावलों में मण्ड उपस्थित रहता है जोकि आयोडीन डालने पर नीला रंग देता है। मुँह से चबाए गए चावलों का मण्ड अन्य पदार्थ में लार के कारण परिवर्तित हो गया। अतः परखनली में आयोडीन परीक्षण नहीं आता।
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण -9
चित्र : मंड पर लार का प्रभाव

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण

प्रश्न 5.
घास खाने वाले (रोमन्थी) जन्तुओं में भोजन के पाचन का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
गाय, भैंस, बकरी आदि घास खाने वाले जन्तु (रोमन्थी-जुगाली करने वाले) कहलाते हैं। जब ये जन्तु भोजन का अन्तर्ग्रहण करते हैं तो जल्दी-जल्दी इसका आमाशय के एक भाग में भण्डारण कर लेते हैं। इस आमाशयी भाग को रूमेन (प्रथम आमाशय) कहते हैं। इन जन्तुओं (रूमिनेन्ट) के आमाशय में चार कक्ष होते हैं। रूमेन में भोजन का आंशिक पाचन होता है जिसे जुगाल (कड) कहते हैं। जब जन्तु आराम कर रहा होता है तो रूमेन में एकत्र भोजन के छोटे-छोटे पिण्ड मुखगुहा में वापस आते हैं, जिन्हें खूब चबाया जाता है। इस प्रक्रम को रोमन्थन (जुगाली करना) कहते हैं। घास में सेलुलोज की प्रचुरता होती है जो एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट है। इसका पाचन जन्तु की अन्धनाल में उपस्थित जीवाणुओं द्वारा होता है।
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण -10
चित्र : किसी रोमन्थी का आमाशय

प्रश्न 6.
अमीबा में संभरण एवं पाचन का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अमीबा जलाशयों में पाया जाने वाला एक कोशिकीय जीव है। अमीबा की कोशिका एक झिल्ली द्वारा घिरी होती है। इसके अन्दर एक केन्द्रक तथा अनेक खाद्य धानियाँ होती हैं। अमीबा की झिल्ली द्वारा निरन्तर पदार्थों का निर्माण होता रहता है जो प्रचलन तथा भोजन पकड़ने में सहायता करते हैं।
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण -11
अमीबा कुछ सूक्ष्म जीवों का आहार करता है। जब इसे. भोजन का आभास होता है तो यह खाद्य कण के चारों ओर पादाभ बनाकर इसे घेर लेता है। इस प्रकार एक खाद्यधानी बन जाती है। खाद्यधानी में कुछ पाचक रसों का साव होता है जिससे भोजन अपने अवयों में टूट जाता है। अब भोजन के अवयव सम्पूर्ण कोशिका में वितरित कर दिये जाते हैं तथा अपचित भाग बाहर छोड़ दिया जाता है।

प्रश्न 7.
आमाशय की कार्य प्रणाली की खोज किस प्रकार हुई?
उत्तर:
सन् 1822 ई. में ऐलेक्सिस सेंट मार्टिन नामक व्यक्ति गोली लगने के कारण बुरी तरह से घायल हुआ। गोली से वक्ष क्षतिग्रस्त हो गया तथा आमाशय में एक छिद्र हो गया। उसे विलियम ब्यूमॉण्ट नामक अमरीकी सैनिक चिकित्सक के पास ले जाया गया। चिकित्सक ने उसकी जान तो बचा ली परन्तु वह आमाशय का छिद्र भली-भाँति बंद न कर सका तथा उसने छिद्र को पट्टी से ढक दिया (चित्र)। ब्यूमॉण्ट को छिद्र में से आमाशय के अदर झाँकने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ। उसने कुछ रोचक प्रेक्षण किए।

ब्यूमॉण्ट ने देखा कि आमाशय भोजन का मंथन कर रहा था। इसकी भित्ति से तरल स्रावित हो रहा था, जो भोजन को पचा सकता था। उसने यह भी देखा कि आमाशय क्षुद्रांत्र में तभी खुलता है, जब आमाशय में भोजन का पाचन पूरा हो जाता है।
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण -12

HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 2 प्राणियों में पोषण

पादपों में पोषण Class 7  HBSE Notes in Hindi

→ पोषक – भोजन के वे घटक जो हमारे शरीर के लिए आवश्यक हैं, पोषक कहलाते हैं।
→ पोषण -भोज्य पदार्थों को ग्रहण करके इनके उपयोग की प्रक्रिया पोषण कहलाती है।
→ पाचन – जटिल भोज्य पदार्थों को अवशोषण योग्य सरल पदार्थों में परिवर्तन करने की प्रक्रिया पाचन कहलाती है।
→ पाचन तंत्र – वे सभी अंग जो पाचन क्रिया में भाग लेते हैं, सामूहिक रूप से पाचन तंत्र बनाते हैं।
→ मुख – गुहिका वह स्थान जहाँ से भोजन का अन्तर्ग्रहण होता है, मुख कहलाता है तथा मुख के पीछे का भाग गुहिका कहलाता है।
→ ग्रासनली – मुख गुहिका पीछे की ओर एक नली में खुलती है जिसे ग्रास नली कहते हैं।
→ आमाशय – ग्रासनली के पीछे थैली जैसी रचना जिसमें भोजन कुछ घंटे ठहरता है।
→ क्षुद्रान्त्र – आंत का अगला एवं संकरा भाग। वृहद्रांत्र आंत का पिछला एवं चौड़ा भाग।
→ मलाशय – आहार नाल का अन्तिम थैली समान भाग जिसमें मल एकत्र रहता है तथाजो गुदा द्वार द्वारा बाहर की ओर खुलता है।
→ लाला – ग्रन्थि लार का स्रावण करने वाली ग्रन्धि/लार ग्रन्थि ।
→ यकृत – पित्त रस का स्रावण करने वाली शरीर की सबसे बड़ी ग्रन्थि।
→ अग्न्याशय – पाचक रसों का स्रावण करने वाली ग्रन्थि।
→ अन्तर्ग्रहण – भोजन को शरीर के अन्दर लेना अन्तर्ग्रहण कहलाता है।
→ रदनक – दाँतों का एक प्रकार जो भोजन को चीरने-फाड़ने का काम करते हैं।
→ कृन्तक – दाँतों का एक प्रकार जो भोजन को काटने/ कुतरने का काम करते हैं।
→ अग्रचर्वणक – रदनक दंत के पीछे स्थित चबाने वाले तीन दाँत।
→ पश्चचर्वणक – अग्र चर्वणक दाँतों के पीछे स्थित दाँत ।
→ स्वाद ग्रंथि – जीभ पर पायी जाने वाली ग्रन्थियाँ जो भोजन का स्वाद लेती हैं।
→ वमन – उल्टी होना।
→ जठर रस – आमाशय से स्रावित होने वाला रस जिसमें हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, श्लेष्म तथा कुछ पाचक पदार्थ होते हैं।
→ अवशोषण – पचे हुए भोजन से पोषक तत्वों को क्षुद्रान्त की दीवारों द्वारा रूधिर में लेना।
→ रसांकुर – क्षुद्रान्त की दीवारों पर बाल के समान संरचनाएँ।
→ स्वांगीकरण – पोषक तत्वों को शरीर का भाग बनाया जाना।
→ निष्कासन – अपचित पदार्थों को शरीर से बाहर निकालना।
→ रोमन्थी – जुगाली करने वाले पशु। रूमेन रोमन्थी पशुओं की आहार नाल का एक भाग।
→ सेलुलोज – घास एवं पत्तियों में पाया जाने वाला पदार्थ जो पशुओं का भोजन होता है।
→ खाद्य धानी – अमीबा का एक कोशिकांग जिसमें भोजन पचाया जाता है।
→ पादाभ – अमीबा की प्रचलन संरचनाएँ।
→ पौधे अपना भोजन प्रकाश संश्लेषण द्वारा स्वयं बना लेते हैं किन्तु प्राणी ऐसा नहीं कर सकते। प्राणी अपना भोजन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पौधों से ही प्राप्त करते हैं।
→ प्राणियों के पोषण में पोषक तत्वों की आवश्यकता, आहार के अंतर्ग्रहण (भोजन ग्रहण करने) की विधि और शरीर में इसके उपयोग की विधि सन्निहित (सम्मिलित) है।
→ कार्बोहाइडेट जैसे कुछ संघटक जटिल पदार्थ हैं। अनेक जन्तु इन जटिल पदार्थों का उपयोग सीधे इसी रूप में नहीं कर सकते। अत: इन्हें सरल पदार्थों में बदलना आवश्यक है, जटिल खाद्य पदार्थों का सरल पदार्थों में परिवर्तन होना या टूटना विखण्डन कहलाता है तथा इस प्रक्रम को पाचन कहते हैं।
→ मनुष्य मुख द्वारा भोजन का अन्तर्ग्रहण करता है, इसे पचाता है तथा फिर इस पचे भोजन से आवश्यक पदाधी को शरीर का अवयव बनाता है। आहार का बिना पचा भाग मल के रूप में बाहर निकाल दिया जाता है।
→ मानव के पाचन तंत्र में भोजन एक सतत् नली से गुजरता है जो मुख गुहिका से प्रारम्भ होकर गुदा तक जाती है।
→ मनुष्य की आहार नाल (पाचन तंत्र) के प्रमुख भाग हैं-

  • मुख-गुहिका
  • ग्रासनली या ग्रसिका
  • आमाशय
  • क्षुद्रांन्त (छोटी आँत),
  • बृहदांत्र
  • मलद्वार या गुदा।।

→ लार ग्रन्थियाँ, यकृत एवं अग्नाशय पाचन से सम्बन्धित ग्रन्थियाँ हैं।
→ विभिन्न जीवों में भोजन अन्तर्ग्रहण करने की विभिन्न विधियाँ हैं।
→ आहार को शरीर के अन्दर लेने की क्रिया अन्तर्ग्रहण कहलाती है।
→ हम अपने मुख द्वारा भोजन का अन्तर्ग्रहण करते हैं, उसे दाँतों से चबाते हैं, पचाते हैं तथा बिना पचे भाग को मल के रूप में निष्कासित कर देते हैं।
→ पाचन क्रिया के मुख्य पाँच चरण होते हैं

  • भोजन का अन्तर्ग्रहण,
  • पाचन,
  • अवशोषण,
  • स्वांगीकरण एवं
  • निष्कासन।

→ भोजन को काटने एवं चबाने के लिए मुख गुहिका में 32 दाँत होते हैं जिन्हें निम्न चार समूहों में बांटा गया है-

  • कृन्तक (8),
  • रदनक (4),
  • अग्र चर्वणक (12) तथा
  • चर्वणक (8)।

→ जल एवं कुछ लवण बृहदांत्र में अवशोषित होते हैं। अवशोषित पदार्थ शरीर के विभिन्न भागों को स्थानान्तरित कर दिये जाते हैं।
→ पोषक पदार्थों का शरीर के पदार्थ में मिश्रित होना स्वांगीकरण कहलाता है।
→ बिना पचे अपशिष्ट जिनका अवशोषण नहीं होता, मल के रूप में गुदा द्वारा शरीर के बाहर निकाल दिए जाते हैं।

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HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 पादपों में पोषण

Haryana State Board HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 पादपों में पोषण Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Science Solutions Chapter 1 पादपों में पोषण

HBSE 7th Class Science पादपों में पोषण InText Questions and Answers

बूझो / पहेली

प्रश्न 1.
बूझो जानना चाहता है कि पादप अपना भोजन किस प्रकार बनाते हैं?
उत्तर:
पौधे अपना भोजन सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में, जल, कार्बन डाइऑक्साइड तथा खनिजों द्वारा बनाते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।

प्रश्न 2.
पहेली जानना चाहती है कि पादपों की तरह हमारा शरीर भी कार्बन डाइऑक्साइड, जल एवं खनिज से अपना भोजन स्वयं क्यों नहीं बना सकता?
उत्तर:
हमारे पास प्रकाश ग्रहण करने वाला वर्णक क्लोरोफिल नहीं है इसलिए हमारा शरीर स्वयं भोजन नहीं बना पाता है।

प्रश्न 3.
बूझो जानना चाहता है कि जड़ द्वारा अवशोषित जल एवं खनिज पत्ती तक किस प्रकार पहुंचते
उत्तर:
पौधे जड़ द्वारा अवशोषित जल एवं खनिज लवण पत्ती तक वाहिकाओं द्वारा पहुँचाते हैं। ये वाहिकाएँ नली के समान रचनाएँ होती हैं तथा जड़, तना, शाखाओं एवं पत्तियों तक फैली होती हैं।

प्रश्न 4.
पहेली जानना चाहती है कि पत्तियों में ऐसी क्या विशेषताएँ हैं कि वे खाद्य पदार्थों का संश्लेषण कर सकती हैं परन्तु पादप के दूसरे भाग नहीं?
उत्तर:
पत्तियों में हरे रंग का वर्णक क्लोरोफिल होता है, जिसके कारण पत्तियाँ खाद्य पदार्थों का संश्लेषण कर सकती हैं। परन्तु हरे तनों एवं हरी शाखाओं में भी प्रकाश संश्लेषण होता है।

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 18 वायु तथा जल का प्रदूषण

प्रश्न 5.
बूझो ने देखा कि कुछ पादपों की पत्तियाँ गहरी लाल, बैंगनी अथवा भूरे रंग की होती हैं। वह जानना चाहता है कि क्या इन पत्तियों में भी प्रकाश संश्लेषण होता
उत्तर:
नहीं, क्लोरोफिल के अभाव के कारण ये पत्तियाँ प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पाती हैं।

प्रश्न 6.
पहेली जानना चाहती है क्या हमारा रक्त चूसने वाले मच्छर, खटमल, जूं एवं जोंक जैसे जीव भी परजीवी
उत्तर:
जूं परजीवी है। मच्छर परजीवी नहीं कहलाते हैं, क्योंकि वे अपने अण्डों के भरण-पोषण के लिए ही खुन चूसते हैं न कि भोजन के लिए।

प्रश्न 7.
बूझो भ्रमित है। यदि घटपर्णी हरा होता है और प्रकाश संश्लेषण संपादित करता है, तो यह कीटों का भक्षण क्यों करता है?
उत्तर:
घटपर्णी पौधा ऐसे स्थान पर उगता है जहाँ मिट्टी में नाइट्रोजन नहीं होती है। नाइट्रोजन प्रोटीन निर्माण के लिए आवश्यक होती है। इसकी पूर्ति के लिए ही घटपर्णी कीटों का भक्षण करता है। शेष भोजन यह प्रकाश संश्लेषण द्वारा स्वयं बना लेता है।

प्रश्न 8.
बूझो जानना चाहता है कि ये जीव अपना भोजन किस प्रकार प्राप्त करते हैं? इनमें प्राणियों के समान मुख नहीं होता। ये हरे पादपों के समान भी नहीं होते। इनमें क्लोरोफिल अनुपस्थित होता है। अतः ये प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन का संश्लेषण भी नहीं कर सकते।
उत्तर:
ये जीव अपना भोजन मृत जीवों या उनके अवशेषों को सड़ा-गलाकर अवशोषण द्वारा प्राप्त करते हैं।

प्रश्न 9.
पहेली को याद है कि उसके सुन्दर जूते, जिन्हें वह विशेष अवसरों पर पहनती थी, वर्षा ऋतु में कवक के कारण खराब हो गये। वह जानना चाहती है कि वर्षा ऋतु में कवक अचानक कैसे प्रकट हो जाते हैं ?
उत्तर:
कवक नम एवं उष्ण स्थानों पर उगते हैं। इनके बीजाणु लम्बे समय तक, हवा, जल एवं मृदा में जीवित रह सकते हैं। जैसे ही वर्षा होती है इन्हें अनुकूल दशाएँ उपलब्ध हो जाती हैं और ये अंकुरण करके बड़ी संख्या में प्रकट हो जाते हैं।

प्रश्न 10.
बूझो को याद है कि उसके दादाजी ने बताया था कि एक बार उनकी गेहूं की फसल कवक द्वारा नष्ट हो गई थी। वह जानना चाहता है कि क्या कवक रोग कारक भी होते हैं?
उत्तर:
हाँ, कवकों से बहुत से रोग भी उत्पन्न हो सकते हैं, जैसे गेहूँ का कंडुआ, पशुओं में आंतों के रोग, मनुष्य में दाद रोग, त्वचा के रोग आदि।

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 18 वायु तथा जल का प्रदूषण

HBSE 7th Class Science पादपों में पोषण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
जीवों को खाद्य की आवश्यकता क्यों होती
उत्तर:
जीवों को खाद्य की आवश्यकता निम्न कार्यों के लिए होती है
(i) जीवित रहने के लिए,
(ii) शरीर की विभिन्न क्रियाओं के संचालन के लिए,
(iii) कार्य-क्षमता बनाए रखने के लिए,
(iv) शरीर में हुई टूट-फूट की मरम्मत के लिए,
(v) वृद्धि के लिए।

प्रश्न 2.
परजीवी एवं मृतजीवी में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
परजीवी एवं मृतजीवी में अन्तर

परजीवीमृतजीवी
1. परजीवी दूसरे जीवों से अपना पोषण प्राप्त करते है।मृतजीवी सड़े-गले पदार्थों से पोषण प्राप्त करते हैं।
2. अधिकांश परजीवी पोषक जीव के अन्दर या उनके ऊपर रहते हैं।ये मृत एवं सड़े गले पदार्थों पर रहते हैं।

प्रश्न 3.
आप पत्ती में मण्ड (स्टार्च) की उपस्थिति का परीक्षण कैसे करेंगे?
उत्तर:
पत्ती में मण्ड की उपस्थिति का परीक्षण करना
(i) एक ऐसे पौधे का चयन करते हैं जो कुछ घंटे से सूर्य के प्रकाश में रखा गया हो।
(ii) एक स्वस्थ पत्ती लेकर उसे स्प्रिट से भरी परखनली में रखते हैं।
(iii) अब इस स्प्रिट से भरी परखनली को जलयुक्त बीकर में रखते हैं।।
(iv) बीकर को तिपाई स्टैण्ड पर रखकर तब तक गर्म करते हैं जब तक परखनली में रची पत्ती का सारा हरा रंग स्प्रिट में न घुल जाए।
(v) अब रंगहीन पत्ती को निकाल कर एक वाचग्लास में रख लेते हैं।
(vi) पत्ती पर दो-तीन बूंदें आयोडीन विलयन की डालते हैं।
(vii) पत्ती का रंग नीला-काला हो जाता है।
(viii) पत्ती का नीला-काला होना मण्ड की उपस्थिति की पुष्टि करता है।

प्रश्न 4.
हरे पादपों में खाद्य संश्लेषण प्रक्रम का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
हरे पादपों में खाद्य संश्लेषण प्रक्रम हरे पादपों में खाद्य संश्लेषण प्रक्रम को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं। यह प्रक्रम सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में होता है। इस क्रिया में पौधे मृदा से अवशोषित जल तथा वायुमण्डल से ली गई Co, द्वारा क्लोरोफिल की सहायता से कार्बोहाइड्रेट बनाते हैं। इस प्रक्रिया को निम्न समीकरण द्वारा दर्शाया जाता है-
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 पादपों में पोषण -1
इस क्रिया में उत्पन्न ऑक्सीजन वायुमण्डल में चली जाती है तथा कार्बोहाइड्रेट मण्ड में परिवर्तित हो जाता है। मण्ड भी कार्बोहाइड्रेट का ही रूप है।

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 18 वायु तथा जल का प्रदूषण

प्रश्न 5.
किसी प्रवाह चित्र की सहायता से दर्शाइए कि पादप भोजन के मूलभूत स्रोत हैं।
उत्तर:
प्रवाह चित्र
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 पादपों में पोषण -2
(i) घास सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में भोजन बनाती है।
(ii) घास को टिड्डा खाता है।
(iii) टिड्डे को मेढ़क खाता है।
(iv) मेढ़क को सर्प खाता है।
(v) सर्प को बाज खाता है।

प्रश्न 6.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(क) क्योंकि हरे पादप अपना खाद्य स्वयं बनाते हैं, इसलिए उन्हें ………………….. कहते हैं।
(ख) पादपों द्वारा संश्लेषित खाद्य का भण्डारण ………………….. के रूप में किया जाता है।
(ग) प्रकाश संश्लेषण के प्रक्रम में जिस वर्णक द्वारा सौर ऊर्जा संग्रहीत की जाती है, उसे ………………….. कहते हैं।
(घ) प्रकाश संश्लेषण में पादप वायुमण्डल से ………………….. लेते हैं तथा ………………….. का उत्पादन करते हैं।
उत्तर:
(क) स्वपोषी,
(ख) मंड,
(ग) क्लोरोफिल,
(घ) कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन।

प्रश्न 7.
निम्न कथनों से सम्बद्ध पारिभाषिक शब्द बताइए
(क) पीत दुर्बल तने वाला परजीवी पादप।
(ख) एक पादप जिसमें स्वपोषण तथा विषमपोषण दोनों ही प्रणाली पायी जाती हैं।
(ग) वे रन्ध्र, जिनके द्वारा पत्तियों में गैसों का आदान-प्रदान (विनिमय) होता है।
उत्तर:
(क) अमरबेल,
(ख) घटपर्णी,
(ग) पर्ण रन्ध्र।

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 18 वायु तथा जल का प्रदूषण

प्रश्न 8.
सही उत्तर पर (✓) का चिन्ह लगाइए(क) अमरबेल उदाहरण है किसी
(i) स्वपोषी का
(ii) परजीवी का
(iii) मृतजीवी का
(iv) परपोषी का
उत्तर:
(ii) परजीवी का ✓

(ख) कीटों को पकड़कर अपना आहार बनाने वाले पादप का नाम है
(i) अमरबेल
(ii) गुड़हल
(iii) घटपर्णी (पिचर पादप)
(iv) गुलाब।
उत्तर:
(iii) घटपर्णी (पिचर पादप) ✓

प्रश्न 9.
कॉलम ‘A’ में दिये गये शब्दों का मिलान कॉलम ‘B’ के शब्दों से कीजिए-

कॉलम Aकॉलम B
(क) क्लोरोफिल(i) जीवाणु
(ख) नाइट्रोजन(ii) परपोषित
(ग) अमरबेल(iii) घटपर्णी (पिचर पादप)
(घ) जन्तु(iv) पत्ती
(ङ) कीटभक्षी(v) परजीवी

उत्तर:

कॉलम Aकॉलम B
(क) क्लोरोफिल(iv) पत्ती
(ख) नाइट्रोजन(i) जीवाणु
(ग) अमरबेल(v) परजीवी
(घ) जन्तु(ii) परपोषित
(ङ) कीटभक्षी(iii) घटपर्णी (पिचर पादप)

प्रश्न 10.
निम्न कथनों में से सत्य एवं असत्य कथनों का चयन कीजिए
(क) प्रकाश संश्लेषण में कार्बन डाइऑक्साइड मुक्त होती है।
(ख) ऐसे पादप, जो अपना भोजन स्वयं संश्लेषित करते हैं, मृतजीवी कहलाते हैं।
(ग) प्रकाश संश्लेषण का उत्पाद प्रोटीन नहीं है।
(घ) प्रकाश संश्लेषण में सौर ऊर्जा का रासायनिक कर्जा में रूपान्तरण हो जाता है।
उत्तर:
(क) असत्य
(ख) असत्य
(ग) सत्य
(घ) सत्य।

सही विकल्प चुनिए

प्रश्न 11.
पादप के किस भाग द्वारा प्रकाश संश्लेषण हेतु वायु से कार्बन डाइऑक्साइड ली जाती है?
(क) मूल रोम
(ख) रंभ
(ग) पर्णशिराएँ
(घ) बाह्य दल।
उत्तर:
(ख) रंभ

प्रश्न 12.
वायुमण्डल से मुख्यतः जिस भाग द्वारा पादप कार्बन डाइऑक्साइड प्राप्त करते हैं, वह है
(क) जड़
(ख) तना
(ग) पुष्प
(घ) पत्तियाँ।
उत्तर:
(घ) पत्तियाँ।

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 18 वायु तथा जल का प्रदूषण

HBSE 7th Class Science पादपों में पोषण Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

I. बहुविकल्पीय प्रश्न

1. जीवों को भोजन की आवश्यकता होती है
(क) वृद्धि के लिए
(ख) ऊर्जा पूर्ति के लिए
(ग) शरीर की मरम्मत के लिए
(घ) ये सभी।
उत्तर:
(ग) शरीर की मरम्मत के लिए

2. सभी जीवों के लिए ऊर्जा का चरम स्रोत क्या है?
(अ) लकड़ी
(ख) कोयला
(ग) सूर्य
(घ) पौधे।
उत्तर:
(ख) कोयला

3. स्टार्च है, एक
(क) प्रोटीन
(ख) कार्बोहाइड्रेट
(ग) तेल
(घ) खनिज
उत्तर:
(ख) कार्बोहाइड्रेट

4. अमरबेल है
(क) परजीवी
(ख) मृत जीवी
(ग) सहजीवी
(घ) परभक्षी
उत्तर:
(क) परजीवी

5. मशरूम में पाषण का प्रकार होता है
(क) सहजीवी
(ख) स्वपोषी
(ग) परजीवी
(घ) मृतजीवी।
उत्तर:
(घ) मृतजीवी।

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 18 वायु तथा जल का प्रदूषण

II. रिक्त स्थान निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थान भरिए

1. …………..पादप की खाद्य फैक्ट्रियाँ हैं।
2. रन्ध्र ………….. द्वारा घिरे होते हैं।
3. लाइकेन में एक भागीदार कवक तथा दूसरा ……….. होता है।
4. पौधे नाइट्रोजन को ………….. में ही अवशोषित कर सकते हैं।
उत्तर:
1. पत्तियाँ,
2. द्वार कोशिकाओं,
3. शैवाल,
4. विलेय रूप।

III. सुमेलन स्तम्भ A तथा स्तम्भ B के शब्दों का मिलान कीजिए-

स्तम्भ Aस्तम्भ B
1. मटर(a) कवक
2. क्लोरोफिल(b) सहजीवी
3. मशरूम(c) राइजोबियम
4. लाइकेन(d) प्रकाश संश्लेषण

उत्तर:

स्तम्भ Aस्तम्भ B
1. मटर(c) राइजोबियम
2. क्लोरोफिल(d) प्रकाश संश्लेषण
3. मशरूम(a) कवक
4. लाइकेन(b) सहजीवी

IV. सत्य / असत्य निम्नलिखित वाक्यों में सत्य एवं असत्य कथन छोटिए

1. सभी हरे पौधे स्वपोषी कहलाते हैं।
2. पौधे प्रकाश संश्लेषण के लिए वायुमण्डल से ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं।
3. घटपर्णी नाइट्रोजन प्राप्त करने के लिए कीटों का भक्षण करता है।
4. राइजोबियम जीवाणु कवकों के साथ सहजीवी सम्बन्ध बनाते हैं।
उत्तर:
1. सत्य
2. असत्य
3. सत्य
4. असत्य।

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अतिलयु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
स्वपोषी किसे कहते हैं? एक उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
वे जीव जो अपना भोजन स्वयं संश्लेषित कर लेते हैं (बना लेते हैं), स्वपोषी कहलाते हैं। उदाहरणआम, सरसों।

प्रश्न 2.
विषमपोषी किसे कहते हैं? एक उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
वे जीव जो अपना भोजन दूसरों से प्राप्त करते हैं, विषमपोषी कहलाते हैं, उदाहरण-कुत्ता, शेर।

प्रश्न 3.
क्या पौधे हवा के बिना किसी प्रक्रिया से नाइट्रोजन प्राप्त कर सकते हैं?
उत्तर:
नहीं।

प्रश्न 4.
पत्तियों के अतिरिक्त पादपों के कौन-कौन से दूसरे भागों में प्रकाश-संश्लेषण होता है?
उत्तर:
कुछ पादपों के हरे तने तथा हरी शाखाओं में।

प्रश्न 5.
सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में पौधे क्लोरोफिल की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल द्वारा किस पदार्थ का निर्माण करते हैं? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
भोज्य पदार्थों (मण्ड) का।

प्रश्न 6.
पत्ती में स्थित मण्ड आयोडीन के साथ क्या परीक्षण देता है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
जब मण्डयुक्त पत्ती पर आयोडीन डाला जाता है तो पत्ती का रंग नीला हो जाता है।

प्रश्न 7.
कीटभक्षी पौधे प्रोटीन कहाँ से प्राप्त करते हैं?
उत्तर:
कीटभक्षी पौधे प्रोटीन कीटों का भक्षण करके प्राप्त करते हैं?

प्रश्न 8.
सहजीवी सम्बन्ध क्या है?
उत्तर:
जब दो जीव साथ-साथ रहते हैं तथा एक-दूसरे को लाभ पहुंचाते हैं, तो ऐसे सम्बन्ध को सहजीवी सम्बन्ध कहते हैं।

प्रश्न 9.
दो ऐसे जीवों के नाम लिखिए जिनमें सहजीवी सम्बन्ध होता है।
उत्तर:
मटर का पौधा एवं राइजोबियम जीवाणु।

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प्रश्न 10.
राइजोबियम जीवाणु भोजन कहाँ से प्राप्त करता है?
उत्तर:
मटर, चना, अरहर आदि पौधों की जड़ों से।

प्रश्न 11.
वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को विलेय पदार्थों में परिवर्तित करने वाले जीवाण का नाम लिखिए।
उत्तर:
राइजोबियम।

प्रश्न 12.
कई दिन पहले रखी ब्रेड को आवर्धक लेंस में देखने पर क्या दिखाई देता है? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
रूई के धागों के समान संरचनाएँ। ये संरचनाएँ कवक जाल कहलाती हैं।

प्रश्न 13.
कवक अपना भोजन स्वयं क्यों नहीं बना पाते हैं?
उत्तर:
कवकों में हरा पदार्थ क्लोरोफिल अनुपस्थित होता है।

प्रश्न 14.
लाइकेन कहे जाने वाले जीवों के दो भागीदारों के नाम लिखिए।
उत्तर:
(i) कवक
(ii) शैवाल।

प्रश्न 15.
मशरूम क्या है?
उत्तर:
मशरूम एक प्रकार का कवक है।

प्रश्न 16.
दो जन्तु परजीवी जीवों के नाम लिखिए।
उत्तर:
(i) i
(ii) खटमल।

प्रश्न 17.
दो कीटभक्षी पौधों के नाम लिखिए।
उत्तर:
(i) वीनस फ्लाई ट्रैप तथा
(ii) सनड्यू।

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लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
पोषक तथा पोषण में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
पोषक तथा पोषण में अन्तर

पोषकपोषण
1. कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन तथा खनिज पदार्थ पोषक कहलाते हैं।पोषण एक क्रिया है जिस में पोषक पदार्थ ग्रहण किए जाते हैं।
2. ये पदार्थ हमारे शरीर को पोषण देने के कारण पोषक कहलाते हैं।भोजन के उपयोग की विधि को पोषण कहते हैं।

प्रश्न 2.
अंधेरे में रखे पौधे की पत्तियों में मण्ड का निर्माण क्यों नहीं हुआ? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
पौधे केवल सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में ही कार्बोहाइड्रेट बनाते हैं जो बाद में मण्ड में परिवर्तित हो जाता है। अंधेरे में रखे पौधे में प्रकाश संश्लेषण नहीं हुआ। अतः इसमें मण्ड का निर्माण भी नहीं हुआ।

प्रश्न 3.
प्रकाश संश्लेषण की क्रिया का महत्व लिखिए।
उत्तर:
(i) प्रकाश संश्लेषण द्वारा पौधे अपना भोजन बनाते हैं।
(ii) पौधों द्वारा संचित भोजन जन्तुओं के पोषण के काम आता है।
(iii) प्रकाश संश्लेषण में ऑक्सीजन उत्पन्न होती है जो सभी जीवों के लिए श्वसन में काम आती है।
(iv) प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण की जाती है जिससे वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड तथा ऑक्सीजन में सन्तुलन बना रहता है।

प्रश्न 4.
लाइकेन किस प्रकार भोजन प्राप्त करते
उत्तर:
लाइकेन दो भिन्न प्रकार के जीवों से बनी संरचना है, इसमें दो सहभागी होते हैं जिनमें से एक सहभागी कवक तथा दूसरा सहभागी शैवाल होता है। शैवाल प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बना लेता है, जबकि कवक, जल एवं खनिज अवशोषित कर सकता है। इस प्रकार सहभागिता से दोनों का जीवन सुगम हो जाता है।

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 18 वायु तथा जल का प्रदूषण

प्रश्न 5.
कोशिका क्या है? सचित्र विवरण दीजिए।
उत्तर:
सजीव शरीर की सूक्ष्म इकाइयाँ जिनसे सम्पूर्ण शरीर बना होता है कोशिकाएँ कहलाती हैं। कोशिकाओं को सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखा जा सकता है। कुछ जीव मात्र एक कोशिका के बने होते हैं। कोशिका एक पतली बाह्य संरचना द्वारा घिरी होती है जिसे कोशिका झिल्ली कहते हैं। इसमें केन्द्र में स्थित एक सुस्पष्ट संरचना होती है जिसे केन्द्रक कहते हैं। केन्द्रक चारों ओर से जेली के समान एक पदार्थ से घिरा होता है जिसे कोशिका द्रव्य कहते हैं।
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 पादपों में पोषण -3
चित्र-कोशिका का आरेख चित्र

प्रश्न 6.
परजीवी क्या होते हैं? एक उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर:
कुछ जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते तथा दूसरे जीवों से अपना भोजन प्राप्त करते हैं। ऐसे जीव परपोषी जीव कहलाते हैं। परजीवी जीव भी परपोषी जीवों का एक रूप हैं, ये अन्य जीव से उसकी जीवित अवस्था में भोजन प्राप्त करते हैं। इसका एक उत्तम उदाहरण अमरबेल है। अमरबेल का पौधा तन्तुवत् होता है। इसमें जड़ों एवं पत्तियों का अभाव होता है। क्लोरोफिल के अभाव के कारण यह अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकता। यह अपना भोजन उस पौधे से प्राप्त करता है जिस पर यह रहता है।

प्रश्न 7.
पादप नाइट्रोजन को कैसे प्राप्त करते हैं? समझाइए।
उत्तर:
नाइट्रोजन पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व है। यह प्रोटीन के संश्लेषण के लिए अति आवश्यक होता है। पौधे वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को सीधे ही ग्रहण नहीं कर सकते। मृदा में उपस्थित कुछ विशेष जीवाणु वायुमण्डल की स्वतन्त्र नाइट्रोजन को इसके विलेय यौगिकों में बदल देते हैं। जिन्हें पौधे अपनी जड़ों द्वारा आसानी से अवशोषित कर लेते हैं।

प्रश्न 8.
कवक क्या होते हैं? ये अपना भोजन कैसे प्राप्त करते हैं?
उत्तर:
कवक सरल प्रकार के पौधे होते हैं। इनका शरीर अनेक महीन धागे जैसी संरचनाओं का बना होता है। कवक अथवा फंजाई में हरे रंग का वर्णक क्लोरोफिल नहीं पाया जाता है इसलिए ये अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते। कवक मृतोपजीवी या मृतजीवी कहलाते हैं क्योंकि ये अपना भोजन मृत एवं सड़े-गले पदार्थों से अवशोषित करते हैं। मशरूम, छत्रक, ब्रेड पर लगी फफूंद आदि कवक होते हैं।
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 पादपों में पोषण -4

प्रश्न 9.
कवक अथवा फंजाई ब्रेड पर कहाँ से आए? (क्रियाकलाप)
उत्तर:
कवक अत्यंत सूक्ष्म बीजाणुओं का निर्माण करते हैं जो वायु में काफी समय तक उड़ते रहते हैं और उपयुक्त दशाएँ प्राप्त होने पर अंकुरित होकर नया कवक जाल बनाते हैं।

प्रश्न 10.
उस संरचना का आरेख चित्र बनाइए जो आपको बेड पर आवर्धक लेंस में दिखाई देती है। (क्रियाकलाप)
उत्तर:
आवर्धक लेंस में हमें कई दिन की बासी ब्रेड पर निम्न संरचनाएँ दिखाई देती हैं।
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 पादपों में पोषण -5
चित्र-ब्रेड पर लगी कवक

प्रश्न 11.
मृदा में पोषक पदार्थों की पुनः पूर्ति किस प्रकार होती है?
उत्तर:
पादप मृदा से विभिन्न खनिज पदार्थ प्राप्त करते हैं, जिससे मृदा में इन पदार्थों की मात्रा लगातार कम होती जाती है। उर्वरक एवं खाद में नाइट्रोजन, पोटैशियम, फास्फोरस जैसे पादप पोषक होते हैं, मृदा को इन पोषक तत्वों से समृद्ध करने के लिए भूमि में सर्वरक तथा खाद मिलाने की आवश्यकता होती है। जीवाणुओं द्वारा मृत जीवों के विघटन से भी इन पदार्थों की पूर्ति होती है।

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 18 वायु तथा जल का प्रदूषण

दीर्य उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
रन्ध क्या होते हैं? पत्ती में इनकी उपस्थिति दर्शाने के लिए चित्र बनाइए। रन्धों के क्या कार्य हैं?
उत्तर:
रन्ध्र-रन्ध्र पत्तियों में पाए जाने वाले विशेष प्रकार के छिद्र हैं जो द्वारक कोशिकाओं से घिरे होते हैं। पत्तियों के अतिरिक्त हरे एवं कोमल तनों में भी रन्ध्र उपस्थित होते हैं।
रन्धों के कार्य रन्ध्रों के निम्न कार्य हैं-
(i) रन्ध्र वायुमण्डल एवं पत्ती के ऊतकों के बीच कार्बन डाइऑक्साइड तथा ऑक्सीजन के आदान-प्रदान करने में सहायता करते हैं।
(ii) वाष्पोत्सर्जन में सहायता करते हैं।
(iii) विभिन्न गैसों के आदान-प्रदान में सहायता करते हैं।
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 पादपों में पोषण -6

प्रश्न 2.
कीटभक्षी पौधे कीटों का भक्षण क्यों करते हैं ? किसी कीटभक्षी पौधे का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कीटभक्षी पौधे ऐसे स्थानों पर उगते हैं जहाँ की मृदा में नाइट्रोजन की कमी होती है। इन पौधों को जड़ द्वारा नाइट्रोजन उपलब्ध नहीं हो पाती है। नाइट्रोजन प्रोटीन निर्माण के लिए अति आवश्यक होती है। अतः प्रोटीन की प्राप्ति के लिए कीटभक्षी पौधे कीटों का भक्षण करते हैं।

घटपर्णी या पिचर पादप एक कीटभक्षी पौधा है। इसकी कुछ पत्तियाँ घड़े के आकार की हो जाती हैं जिसके मुँह पर एक छोटी पत्ती होती है जो एक ढक्कन का कार्य करती है। घड़े के अन्दर एक पाचक रस भरा रहता है। घड़े के अन्दर रोम होते हैं जो नीचे की ओर उन्मुख होते हैं। जब कोई कीट घड़े में प्रवेश करता है तो वह फिसलकर घड़े में भरे द्रव में गिर जाता है। रोम कीट को वापस ऊपर नहीं चढ़ने देते। कुछ समय में पाचक रस कीट की प्रोटीन को पचा लेता है। इस प्रोटीन से पौधे को नाइट्रोजन की पूर्ति हो जाती है।
HBSE 7th Class Science Solutions Chapter 1 पादपों में पोषण -7

प्रश्न 3.
निम्नलिखित के दो-दो उदाहरण लिखिए-
(क) स्वपोषी
(ख) विषमपोषी
(ग) परजीवी
(घ) मृतजीवी
(ङ) सहजीवी
(च) कीटभक्षी पादप।
उत्तर:
(क) स्वपोषी – सरसों, गेहूँ। सम्पूर्ण पौधा –
(ख) विषमपोषी – बिल्ली, कुत्ता।
(ग) परजीवी – अमरबेल, खटमल।
(घ) मृतजीवी – कवक, कुछ जीवाणु।
(ङ) सहजीवी – लाइकेन, राइजोबियम।
(च) कीटभक्षी – पादप सनड्यू, वीनस फ्लाइ ट्रैप।

HBSE 8th Class Science Solutions Chapter 18 वायु तथा जल का प्रदूषण

पादपों में पोषण Class 7  HBSE Notes in Hindi

→ पोषक – पोषण देने वाले पदार्थ।
→ स्वपोषी – अपना भोजन स्वयं बनाने वाले जीव स्वपोषी कहलाते हैं।
→ क्लोरोफिल – पत्तियों में पाया जाने वाला हरे रंग का वर्णक।
→ विषमपोषी – ऐसे जीव जो अपने पोषण के लिए विभिन्न विधियों को अपनाते हैं, विषमपोषी कहलाते हैं।
→ प्रकाश संश्लेषण – वह प्रक्रिया जिसमें हरे पौधे अपना भोजन निर्माण करते हैं।
→ रन्ध – पत्तियों एवं कोमल तनों में उपस्थित विशेष प्रकार के छिद्र जिनसे गैसों का आदान-प्रदान होता है।
→ परपोषी – दूसरे पौधे या प्राणी पर निर्भर रहकर भोजन प्राप्त करने वाले जीव परपोषी कहलाते हैं।
→ कीटभक्षी पादप – नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए कीटों का भक्षण करने वाले पादप।
→ परजीवी – ऐसे जीव जो दूसरे जीवों पर आश्रित होकर भोजन प्राप्त करते हैं।
→ मृतजीवी – मृत एवं सड़े-गले पदार्थों से भोजन प्राप्त करने वाले।
→ सहजीवी सम्बन्ध – जब दो जीव साथ-साथ रहकर एक दूसरे को लाभ पहुंचाते हैं तो यह सम्बन्ध सहजीवी सम्बन्ध कहलाता है, जैसे- लाइकेन।
→ कवक – विषमपोषी सरल प्रकार के पादप, जैसेमशरूम।
→ राइजोबियम – जीवाणु जो मटर कुल के पौधों की जड़ों में सहजीवी के रूप में पाए जाते हैं।
→ भोजन के वे घटक जो हमारे शरीर के लिए आवश्यक हैं, उन्हें पोषक कहते हैं।
→ कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन एवं खनिज लवण हमारे भोजन के पोषक घटक होते हैं।
→ पौधे अपना भोजन स्वयं बना लेते हैं, इसलिए इन्हें स्वपोषी कहा जाता है।
→ मानव एवं अन्य प्राणी विभिन्न विधियों से पोषण प्राप्त करते हैं, इसलिए इन्हें विषमपोषी कहा जाता है।
→ सभी हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड से अपना भोजन बनाते हैं, इस क्रिया में ऑक्सीजन मुक्त होती है जो वायुमण्डल में चली जाती है।
→ पादपों को कार्बोहाइड्रेट के अलावा अन्य पदार्थों के निर्माण के लिए भी कुछ तत्वों की आवश्यकता होती है जिन्हें पौधे अपनी जड़ों द्वारा जल के साथ मदा से ग्रहण करते हैं।
→ कुछ ऐसे पौधे भी होते है जो अपना भोजन नहीं बना पाते अथवा आंशिक रूप से बना पाते हैं, वे भी प्राणियों की भाँतिविषमपोषी पौधे कहलाते हैं।
→ कुछ पौधे जो दूसरे पौधों पर आश्रित रहकर उनकी जीवित अवस्था में अपना भोजन प्राप्त करते हैं, परजीवी कहलाते हैं।
→ कीटभक्षी पौधे नाइट्रोजन तत्व की पूर्ति के लिए कीटों को पकड़ कर उन्हें पचा लेते हैं।
→ कुकुरमुत्ता, मशरूम, म्यूकर आदि कवकों के उदाहरण हैं। ये सड़ी-गली कार्बनिक वस्तुओं से अपना भोजन प्राप्त करते
→ कुछ जीव एक-दूसरे के साथ रहते हैं तथा अपना आवास एवं पोषक तत्व एक-दूसरे के साथ बाँटते हैं, इसे सहजीवी । संबंध कहते हैं। लाइकेन सहजीवी सम्बन्ध का एक उत्तम उदाहरण है।
→ मृदा में पोषक तत्वों की कमी होने पर इसमें उर्वरक तथा खाद मिलाए जाते हैं।

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HBSE 12th Class Sanskrit Solutions Shashwati Chapter 12 किन्तोः कुटिलता

Haryana State Board HBSE 12th Class Sanskrit Solutions Shashwati Chapter 12 किन्तोः कुटिलता Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Sanskrit Solutions Shashwati Chapter 12 किन्तोः कुटिलता

HBSE 12th Class Sanskrit किन्तोः कुटिलता Textbook Questions and Answers

1. संस्कृतेन उत्तरं दीयताम्
(क) भूमिविषयके अभियोगे ‘किन्तु’-ना का बाधा उपस्थापिता ?
(ख) वाक्यमध्ये प्रविश्य सर्वं कार्यं केन विनाश्यते ?
(ग) लेखकस्य देशसेवायाः विचारस्य कथम् इतिश्रीरभूत् ?
(घ) नेतृमहोदयः पुस्तकप्रशंसां कुर्वन् ‘किन्तु’ प्रयोगेन कं परामर्शम् अददात् ?
(ङ) भोजन-गोष्ठीस्थले कीदृशी प्रदर्शनी समायोजिता आसीत् ?
(च) भोजनगोष्ठ्यां लेखकस्य कण्ठनलिकां क: अरुधत् ?
(छ) धर्मव्यवस्थापक: विधवायाः पुनर्विवाहमुचितं मन्यमानोऽपि व्यवस्थां किमर्थं न ददौ ?
(ज) गृहिणी पत्युः कर्णसमीपे आगत्य शनैः किम् अवदत् ?
(झ) लोकाः किन्तु-युक्तां वार्ता केन कारणेन विगुणां गणयन्ति ?
(ञ) किन्तोः सार्वदिकः प्रभावः कः ?
उत्तरम्:
(क) ‘राजस्वविभागस्य प्रधानः अधिकारी तद्-विरोधे एकं पत्रं प्रेषितवान्’- इति बाधा किन्तुना उपस्थापिता।
(ख) वाक्यमध्ये प्रविश्य सर्वं कार्यं किन्तुना विनाश्यते।
(ग) “किन्तु किञ्चित् स्वगृहाभिमुखं विलोकनीयम्’ इति अध्यापकवचनेन लेखकस्य देशसेवायाः विचारस्य इति श्रीः अभूत्।
(घ) नेतृमहोदयः परामर्शम् अददात्- “यदि इदं पुस्तकं हिन्दीभाषायाम् अलिखिष्यत् तर्हि सम्यग् अभविष्यत्।”
(ङ) भोजन-गोष्ठीस्थले भोज्य-व्यञ्जनानां प्रदर्शनी समायोजिता आसीत्।
(च) लेखकमहोदयस्य कण्ठनलिकां स्वामिमहोदयस्य ‘किन्तुः’ अरुधत्।
(छ) यतः धर्मव्यवस्थापक: प्राचीनमर्यादाम् अपि रक्षितुम् इच्छति स्म, अतः सः पुनर्विवाहस्य व्यवस्थां न ददौ।
(ज) सा अवदत्-“अन्धकारेऽस्मिन् त्वम् अवश्यं यासि, ‘किन्तु’ दृश्यताम्, स शस्त्रं न प्रहरेत्।”
(झ) यतः किन्तुयुक्तायाः वार्तायाः सिद्धौ किन्तुना बाधा अवश्यमेव स्थाप्यते, अतः लोकाः किन्तुयुक्तां वार्ता विगुणां गणयन्ति।
(ञ) एषः किन्तुः सर्वासां वार्तानां मध्ये प्रविश्य वार्तायाः विच्छेदम् अवश्यं करोति इत्येव किन्तोः सार्वदिकः प्रभावः ।

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2. उपयुक्तशब्दान् चित्वा रिक्तस्थानानां पूर्तिः विधेया
(दुर्घटा, अवधानम्, सन्दानितः, स्वामिमहोदयम्, संस्कृते, विवाहस्य, शान्तम्, पलायांचक्रे, कालात्, संकटे)
(क) अहं…………….. अप्राक्षं किमहं तत्र गन्तुं शक्नोमि।
(ख) अस्य ‘किन्तोः’ कारणात् कस्मिन्नपि कार्ये सफलता…………. अस्ति।
(ग) तस्य स्वादसूत्रेण ……………अहं यथैव द्वितीयं ग्रासमगृह्णम्, तथैव ‘किन्तुः’ मम कण्ठनलिकामरुधत्।
(घ) गरिष्ठवस्तुनो भोजने……………..अत्यावश्यकम्।
(ङ) विगुणः कार्षापणः कुत्सितश्च पुत्रः……………..कदाचिदुपयुक्तो भवेत् ।
(च) राज्यतो लब्धाया भूमेरभियोगो बहोः……………..न्यायालये चलति स्म।
(छ) मम सर्वोऽप्युत्साहः………………..
(ज) अहं निश्चिन्तताया एकं……………..निःश्वासममुचम्।
(झ) जातस्य तस्या …………….. अद्य तृतीयो दिवसः ।
(ञ) बहुकालानन्तरं…………….. एवं विधा नवीनता दृष्टिगताऽभवत्।
उत्तरम्:
(क) अहं स्वामिमहोदयम् अप्राक्षं किमहं तत्र गन्तुं शक्नोमि ।
(ख) अस्य ‘किन्तोः’ कारणात् कस्मिन्नपि कार्यै सफलता दुर्घटा अस्ति ।
(ग) तस्य स्वादसूत्रेण सन्दानितः अहं यथैव द्वितीयं ग्रासमगृह्णम्, तथैव ‘किन्तुः’ मम कण्ठनलिकामरुधत्।
(घ) गरिष्ठवस्तुनो भोजने अवधानम् अत्यावश्यकम्।
(ङ) विगुणः कार्षापणः कुत्सितश्च पुत्रः संकटे कदाचिदुपयुक्तो भवेत्।
(च) राज्यतो लब्धाया भूमेरभियोगो बहो: कालात् न्यायालये चलति स्म।
(छ) मम सर्वोऽप्युत्साहः पलायाञ्चक्रे।
(ज) अहं निश्चिन्तताया एकं शान्तं नि:श्वासममुचम्।
(झ) जातस्य तस्या विवाहस्य अद्य तृतीयो दिवसः।
(ब) बहुकालानन्तरं संस्कृते एवं विधा नवीनता दृष्टिगताऽभवत्।

HBSE 12th Class Sanskrit Solutions Shashwati Chapter 12 किन्तोः कुटिलता

3. अधोलिखितैः उचितक्रियापदैः रिक्तस्थानानि पूरयत परिगण्येत, परावर्तिषि, आच्छिनत्ति, मन्यामहे, दीयेत, अलिखिष्यत्।
(क) प्रधानः एकं पत्रं प्रेषितवानस्ति। एतदुपर्यपि लक्ष्यदानमावश्यकं ………… ।
(ख) गृहाभिमुखं मुखं कुर्वन् तस्मात् स्थानादेव …………. ।
(ग) यदि हिन्दीभाषायाम् …………. तर्हि सम्यगभविष्यत्।
(घ) इदमेवोचितं प्रतीयते यत् एवंविधस्थले पुनर्विवाहस्य व्यवस्था ………….।
(ङ) कदाचित् कदाचित्त्वयं क्रूरः ‘किन्तुः’ मुखस्य कवलमपि ………… ।
(च) नाद्यापि चतुर्थीकर्म सम्पन्नं येन विवाहः पूर्णः ……….. ।
उत्तरम्:
(क) प्रधानः एकं पत्रं प्रेषितवानस्ति। एतदुपर्यपि लक्ष्यदानमावश्यकं मन्यामहे।
(ख) गृहाभिमुखं मुखं कुर्वन् तस्मात् स्थानादेव परावर्तिषि।
(ग) यदि हिन्दीभाषायाम् अलिखिष्यत् तर्हि सम्यगभविष्यत्।
(घ) इदमेवोचितं प्रतीयते यत् एवंविधस्थले पुनर्विवाहस्य व्यवस्था दीयेत।
(ङ) कदाचित् कदाचित्त्वयं क्रूर: ‘किन्तुः’ मुखस्य कवलमपि आच्छिनत्ति।
(च) नाद्यापि चतुर्थीकर्म सम्पन्नं येन विवाहः पूर्णः परिगण्येत।

4. सन्धिच्छेदं कुरुत
उत्तरसहितम्
(क) तत्रैवास्य = तत्र + एव + अस्य
(ख) सर्वाण्येव = सर्वाणि + एव
(ग) मन्निर्मितमेकम् = मत् + निर्मितम् + एकम्
(घ) किलैकोऽधिकारी = किल + एकः + अधिकारी
(ङ) द्वयोरुपर्येव = द्वयोः + उपरि + एव।

HBSE 12th Class Sanskrit Solutions Shashwati Chapter 12 किन्तोः कुटिलता

5. प्रकृति-प्रत्ययविभागः क्रियताम्
उत्तरसहितम्
(क) निर्मुच्य = निर् + √मुच् + क्त्वा > ल्यप्
(ख) आदाय = आ + √दा + क्त्वा > ल्यप्
(ग) प्रविष्टः = प्र + √विश् + क्त (पुंल्लिङ्गम्, प्रथमा-एकवचनम्)
(घ) आगत्य = आ + √गम् + क्त्वा > ल्यप्
(ङ) परिज्ञातम् = परि + √ज्ञा + क्त (नपुंसकलिङ्गम् प्रथमा-एकवचनम्)

HBSE 12th Class Sanskrit Solutions Shashwati Chapter 12 किन्तोः कुटिलता

6. अधोलिखितेषु पदेषु विभक्तिं वचनं च दर्शयत
उत्तरसहितम्
(क) कार्ये कार्य-सप्तमी विभक्तिः , एकवचनम्
(ख) अभियोक्तुः अभियोक्तृ-पञ्चमी/षष्ठी विभक्तिः, एकवचनम्
(ग) बालिकायाः बालिका – पञ्चमी/षष्ठी विभक्तिः, एकवचनम्
(घ) न्यायालयेन न्यायालय-तृतीया विभक्तिः, एकवचनम्
(ङ) नेतुः नेतृ – सप्तमी विभक्तिः , एकवचनम्
(च) शक्तौ शक्ति – सप्तमी विभक्तिः, एकवचनम्
(छ) औषधिम् औषधि – द्वितीया विभक्तिः, एकवचनम्

7. स्वरचितवाक्येषु अधोलिखितपदानां प्रयोगं कुरुत
किन्तु, गन्तुम, मह्यम्, विभीषिका, भरणपोषणम्, दृष्ट्वा
उत्तरम्:
(क) किन्तु-अहं धावनप्रतियोगितायां सर्वतो अग्रे आसम्, किन्तु सहसा मम पादस्खलनम् अभवत्।
(ख) गन्तुम्-अहं विद्यालयं गन्तुम् इच्छामि।
(ग) मह्यम्-मयं पठनम् अतीव रोचते।
(घ) विभीषिका-परीक्षायाः विभीषिका मनः उद्वेलयति।
(ङ) भरणपोषणम्-परिवारस्य भरणपोषणं तु सर्वेषां कर्तव्यम् अस्ति।
(च) दृष्ट्वा-अधः दृष्ट्वा कथं न गच्छसि ?

8. विलोमशब्दान् लिखत
उत्तरसहितम्: – विलोमपदम्
(क) विगुणः – सगुणः
(ख) शौर्यम् – अशौर्यम्
(ग) सुरक्षितः – विनष्टः
(घ) शत्रुता – मित्रता
(ङ) धीरः – अधीरः
(च) भयम् – निर्भयम्

HBSE 12th Class Sanskrit Solutions Shashwati Chapter 12 किन्तोः कुटिलता

योग्यताविस्तारः
1. स्वकल्पनया वाक्यपूर्तिं कुरुत
उत्तरम्
(क) अहम् उच्चाध्ययनं कर्तुमिच्छामि, किन्तु आर्थिकस्थितिः न अनुमन्यते।
(ख) छात्राः कक्षायामुपस्थिताः किन्तु अध्यापकः एव नास्ति।
(ग) सः गन्तुमिच्छति, किन्तु बसयानम् एव निर्गतम्।
(घ) वयं तर्तुच्छिामः, किन्तु क्लिन्नाः भवितुं न इच्छामः ।
(ङ) ते कार्यं कर्तुमिच्छन्ति, किन्तु अवसरः एव न लभन्ते।
(च) अर्वाचीनाः जना अपि प्राचीनां भाषां पठितुमिच्छन्ति, किन्तु यदि तया आजीविका सिध्येत तदैव ।
(छ) निर्धना अपि धनमिच्छन्ति, किन्तु धनेन एव धनम् अर्च्यते इति समस्या।
(ज) सर्वे जना आजीविकामिच्छन्ति, किन्तु सर्वेभ्यः सा सुलभा न भवति।
(झ) मूकोऽपि वक्तुमिच्छति, किन्तु असमर्थः अस्ति। ..
(ञ) अध्यापका अध्यापनं कर्तुमिच्छन्ति, किन्तु केचन छात्राः एव पठितुं न इच्छन्ति।

2. अधोलिखितानाम् आभाणकानां समानार्थकानि वाक्यानि पाठात् अन्वेष्टव्यानि
(क) मुँह का कौर छीनना।
(ख) कुछ दिन पहले की बात है।
(ग) खोटा सिक्का और खोटा बेटा भी समय पर काम आते हैं।
(घ) नाक-भौंह सिकोड़ना।
उत्तरम्:
(क) मुखस्य कवलमपि आच्छिनत्ति।
(ख) स्वल्पदिनानामेव वार्तास्ति।
(ग) विगुणः कार्षापणः कुत्सितश्च पुत्रः संकटे कदाचित् उपयुक्तो भवेत्।
(घ) नासा-भ्रूसकोचः।

HBSE 9th Class Sanskrit किन्तोः कुटिलता Important Questions and Answers

I. पुस्तकानुसारं समुचितम् उत्तरं चित्वा लिखत
(i) भोजनगोष्ठ्यां लेखकस्य कण्ठनलिकां क: अरुधत् ?
(A) पत्नी
(B) स्वामिमहोदस्य किन्तुः
(C) मन्त्रिमहोदयस्य किन्तुः
(D) शिक्षकः।
उत्तराणि
(B) स्वामिमहोदयस्य किन्तुः ।

(ii) वाक्यमध्ये प्रविश्य सर्वं कार्य केन विनाश्यते ?
(A) स्वामिना
(B) सेवकेन
(C) अधिकारिणा
(D) किन्तुना।
उत्तराणि
(C) किन्तुना

(iii) गरिष्ठवस्तुनो भोजने किम् अत्यावश्यकम् ?
(A) मिष्ठान्नम्
(B) तिक्त-व्यञ्जनम्
(C) अवधानम्
(D) क्षीरम्।
उत्तराणि
(B) अवधानम्

(iv) गहिणी कस्य कर्णसमीगे आगत्य शनैः अवदत् ?
(A) पत्युः
(B) अधिकारिणः
(C) किन्तोः
(D) मन्त्रिणः।
उत्तराणि
(A) पत्युः

(v) कस्य कारणात् कस्मिन्नपि कार्ये सफलता दुर्घटा अस्ति ?
(A) पत्न्याः
(B) न्युः
(C) किन्तोः
(D) स्वामिनः।
उत्तराणि
(A) किन्तोः

(vi) भूमेः अभियोगः कुत्र चलति स्म ?
(A) ग्रामपञ्चायते
(B) न्यायालये
(C) नगरे
(D) ग्रामे।
उत्तराणि
(D) न्यायालये।

HBSE 12th Class Sanskrit Solutions Shashwati Chapter 12 किन्तोः कुटिलता

II. रेखाकितपदम् आधृत्य-प्रश्ननिर्माणाय समुचितं पदं चित्वा लिखत
(i) क्रूरः किन्तुः मध्ये प्रविश्य सर्वं विनाशयति।
(A) कः
(B) काः
(C) के
(D) किम्।
उत्तराणि:
(D) किम्

(ii) राजस्वविभागस्य एक: अधिकारी एतद्विरोधे पत्रं प्रेषितवान्।
(A) काः
(B) कस्मात्
(C) कस्य
(D) कस्मिन्।
उत्तराणि:
(C) कस्य

(iii) कन्यायाः पतिः सहसा अम्रियत।
(A) कस्याः
(B) कः
(C) कथम्
(D) को।
उत्तराणि:
(B) कः

(iv) मानवाः क्षणमपि परपीडनात् न विरमन्ति।
(A) किम्
(B) कुत्र
(C) कस्मात्
(D) कस्य।
उत्तराणि:
(B) कुत्र

(v) स्वामिमहाभागस्य औषधिं निषेव्य अधुना अहं नीरोगः अभवम्।
(A) कीदृशः
(B) काः
(C) के
(D) कथम्।
उत्तराणि:
(A) कीदृशः।

HBSE 12th Class Sanskrit Solutions Shashwati Chapter 12 किन्तोः कुटिलता

किन्तोः कुटिलता पाठ्यांशः

1. कुटिलेनामुना ‘किन्तु’-ना कियत्कालात् क्लेशितोऽस्मि। यत्र यत्राहं गच्छामि तत्र तत्रैवास्य शत्रुता सम्मुखस्थिता भवति। अस्य ‘किन्तोः’ कारणात् कस्मिन्नपि कार्ये सफलता दुर्घटास्ति। बहून् वारान् दृष्टवानस्मि यत्कार्यं सर्वथा सज्जं सम्पद्यते, सर्वप्रकारैः सिद्धिहस्तगता भवति, यथैव सफलताया मूर्तिः सम्मुखमागच्छन्ती विलोक्यते तथैव क्रूरोऽयं किन्तुर्मध्ये प्रविश्य सर्वं विनाशयति।

हिन्दी-अनुवादः इस कुटिल ‘किन्तु’ शब्द से मैं कितने ही समय से पीड़ित हूँ। मैं जहाँ-जहाँ जाता हूँ, वहाँ-वहाँ ही इसकी शत्रुता सामने आ खड़ी होती है। इस ‘किन्तु’ के कारण किसी भी कार्य में सफलता अति-कठिन है। मैंने बहुत बार देखा है कि जो काम पूरी तरह से तैयार होता है, सब प्रकार से सफलता हाथ में आने वाली होती है, जैसे ही सफलता की मूर्ति सामने आती हुई दिखाई पड़ती है, वैसे ही यह क्रूर ‘किन्तु’ बीच में घुसकर सब नष्ट-भ्रष्ट कर देता है।

शब्दार्थाः टिप्पण्यश्च क्लेशितः = दुःखी; कष्टापन्नः, √क्लेिश + क्त । दुर्घटा = असम्भव, कठिन; दुःखेन घटयितुं शक्या, दुर् + √घट् + आ। बहून् वारान् = बहुत बार; अनेकवारम्। आगच्छन्ती = आती हुई; आयान्ती, आ + √गम् + शतृ + ङीप्।

2. राज्यतो लब्धाया भूमेरभियोगो बहोः कालान्यायालये चलति स्म। अस्मिन्नभियोगे प्राविवाकमहोदयो निर्णयं श्रावयन् अवोचत् … वयं पश्यामो यदभियोक्तुः पक्षादावश्यकानि सर्वाण्येव प्रमाणान्युपस्थितानि सन्ति। राज्यतो लब्धाया भूमेर्दानपत्रमप्युपस्थापितमस्ति। न्यायालयेन परिज्ञातं यत् इयं भूमिरभियोक्तुरधिकारभुक्ताऽस्ति……..।’
अहं निश्चिन्तताया एकं शान्तं निःश्वासममुचम्। मया सर्वथा स्थिरीकृतं यद्भाग्य-लक्ष्मीरनुपदमेव मे कन्धरायां विजयमाल्यं प्रददातीति। परं प्राविवाकमहोदयः पुनरग्रे प्रावोचत्- ……… किन्तु राजस्व-विभागस्य प्रधानः किलैकोऽधिकारी एतद्विरोधे एकं पत्रं प्रेषितवानस्ति। एतदुपर्यपि लक्ष्यदानमावश्यकं मन्यामहे।’ मम सर्वोऽप्युत्साहः पलायाञ्चक्रे। किन्तु’-कुन्तो ममान्तः-करणं समन्तात् कृन्तति स्म। निजहृदयमवष्टभ्य न्यायं प्रशंसन् गृहमागमम्।

हिन्दी-अनुवादः राज्य से प्राप्त भूमि का अभियोग बहुत समय से न्यायालय में चल रहा था। इस अभियोग में जज महोदय ने निर्णय सुनाते हुए कहा-‘हम देखते हैं कि अभियोक्ता के पक्ष की ओर से सभी आवश्यक प्रमाण उपस्थित कर दिए गए हैं। राज्य से प्राप्त भूमि का दानपत्र भी उपस्थित कर दिया गया है। न्यायालय ने अच्छी तरह जान लिया है कि यह भूमि अभियोक्ता के अधिकार वाली है………….।

मैंने निश्चिन्तता से एक शान्त श्वास छोड़ी। मैंने पूरी तरह से निश्चय कर लिया कि भाग्यलक्ष्मी तुरन्त ही मेरे गले में विजयमाला पहनाने वाली है। परन्तु जज महोदय ने फिर आगे कहा-‘…………किन्तु राजस्व विभाग के एक मुख्य अधिकारी ने इसके विरोध में एक पत्र भेजा है। इस पर भी एक नज़र डालना मैं आवश्यक समझता हूँ।’ मेरा सारा उत्साह फुर्र हो गया (गायब हो गया)। किन्तु’ रूपी भाला मेरे चित्त को चारों तरफ से काट रहा था। मैं अपने हृदय को सान्त्वना देकर न्याय की प्रशंसा करते हुए घर वापस आ गया।

शब्दार्थाः टिप्पण्यश्च अभियोगः = मुकद्दमा; अभि + √युज् + घञ्, पुंल्लिङ्ग, प्रथम पुरुष एकवचन। अभियोक्तुः = मुद्दई का, मुकद्दमा चलाने वाले का; अभि + √युज् + तृ। ऋकारान्त पुंल्लिङ्ग, पञ्चमी एकवचन। कुन्तः = भाला। मुद्रा = मुखाकृति । प्राबल्यस्य = प्रबलता का, वेगपूर्वक; प्र + √बल + ष्यञ्, नपुंसकलिङ्ग, षष्ठी एकवचन। निर्वाणा = समाप्त हो चुकी; निर् + √वा + क्त, स्त्रीलिङ्ग, प्रथमपुरुष, एकवचन। इतिश्रीः = समाप्ति। मार्मिकः = तत्त्वज्ञ, विषयज्ञ; मर्म + ठक्, प्रथमपुरुष एकवचन। कन्धरायाम् = गले में, गर्दन पर। प्राड्विवाकः = जज, न्यायाधीश। लक्ष्यदानम् = दृष्टिपात, ध्यानदेना; लक्ष्यस्य दानम्, षष्ठी-तत्पुरुष। कृन्तति स्म = काट रहा था। अवष्टभ्य = रोककर; अव + √स्तम्भ (अवरोध) + ल्यप्।

HBSE 12th Class Sanskrit Solutions Shashwati Chapter 12 किन्तोः कुटिलता

3. दृष्टं मया यदेष ‘किन्तुः’ दयाधर्मादिष्वपि अनधिकारचेष्टातो न विरतो भवति। प्रातः कालस्यैव कथास्ति…. धर्मव्यवस्थापकमहोदयस्य समीपे एको दीनः करुणक्रन्दनपुरःसरं न्यवेदयत्-“महाराज! नववार्षिकी मे कन्या। जातस्य तस्या विवाहस्य अद्य तृतीयो दिवसः। नाद्यापि चतुर्थीकर्म सम्पन्नं येन विवाहः पूर्णः परिगण्येत। तस्याः पतिः सहसाऽम्रियत। हा हन्त! तस्या अबोधबालिकाया अग्रे किं भावि? अस्तकर्मसंख्यावृद्धौ किं ममोच्चकुलमपि सहायकं भविष्यति? आज्ञापयन्तु श्रीमन्तः किं मया साम्प्रतं कर्तव्यम्।” पण्डितमहोदयो गभीरतममुद्रयाऽवोचत्… “अवश्यमिदं दयास्थानम्। वर्तमानकाले समाजस्य भीषणपरिस्थितेः पर्यालोचन इदमेवोचितं प्रतीयते यत् एवं विधस्थले पुनर्विवाहस्य व्यवस्था दीयेत…. किन्तु’ वयं मुखेन कथमेतत् कथयितुं शक्नुमः। प्राचीनमर्यादापि तु रक्षितव्या स्यात्।”

हिन्दी-अनुवादः मैंने देखा है कि यह ‘किन्तु’ दया धर्म आदि में भी अपनी अनधिकार चेष्टा से रुकता नहीं है। प्रातः काल की ही बात है……. धर्मव्यवस्थापक महोदय के पास एक गरीब ने करुणक्रन्दन पूर्वक निवेदन किया-“महाराज! नौ वर्ष की मेरी कन्या है। उसका विवाह हुए तीन दिन बीत गए। आज भी ‘चतुर्थी कर्म’ पूरा नहीं हुआ, जिससे विवाह पूर्ण गिना जाए। उसका पति अचानक मर गया। हाय! उस अबोध बालिका का अब आगे क्या होगा? ‘अस्तकर्म’ की संख्या बढ़ाने में क्या मेरा उच्च कुल भी सहायक होगा ? आप आज्ञा कीजिए कि मुझे क्या करना है?” पण्डित महोदय ने गम्भीरतम मुद्रा में कहा-“यह तो अवश्य ही दयनीय स्थिति है। वर्तमान समय में समाज की
भीषण परिस्थिति को देखते हुए यही उचित प्रतीत होता है कि ऐसी दशा में पुनर्विवाह की व्यवस्था दे दी जाए (नियम बना दिया जाए)। ‘किन्तु हम अपने मुख से यह बात कैसे कह सकते हैं? प्राचीन मर्यादा की रक्षा भी तो की जानी चाहिए।”

शब्दार्थाः टिप्पण्यश्च विरतः = विरत, पृथक्, अलग; वि + √रम् + क्त। चतुर्थीकर्म = विवाहोपरान्त चौथे दिन किया जाने वाला कर्म, चतुर्थे अहनि क्रियमाणं कर्म, मध्यमपदलोपी समास। न्यवेदयत् = निवेदन किया, नि + अवेदयत्, √विद् (ज्ञाने) लङ् लकार णिजन्त, प्रथमपुरुष, एकवचन । नववार्षिकी = नौ वर्ष की आयु वाली। परिगण्येत = गिना जाए; परि + √गण (संख्याने) + विधिलिङ् प्रथमपुरुष, एकवचन। साम्प्रतम् = अभी, वर्तमान में, सम्प्रति एव साम्प्रतम्। गभीरतमम् = गम्भीरतम; गभीर + तमप्। पर्यालोचने = देखने पर, समग्र दृष्टिपात करने पर; परि + आ + √लोच् + ल्युट् सप्तमी विभक्ति, एकवचन (दर्शन, अंकन)।

HBSE 12th Class Sanskrit Solutions Shashwati Chapter 12 किन्तोः कुटिलता

4. कुत्रचित् सोऽयं ‘किन्तुः’ नितान्तमनुतापं जनयति। अनेकवर्षाणां परिश्रमस्य फलस्वरूपं मन्निर्मितमेकं नवीनसंस्कृतपुस्तकमादाय साहित्यमर्मज्ञस्य एकस्य देशनेतुः समीपेऽगच्छम्। ‘नेतृ’-महोदयः पुस्तकस्य गुणान् सम्यक् परीक्ष्य प्रसन्नः सन्नवोचत्… “पुस्तकं वास्तव एव अद्भुतं निर्मितमस्ति बहुकालानान्तरं संस्कृते एवंविधा नवीनता दृष्टिगताऽभवत्।… ‘किन्तु’ मत्सम्मत्यां तदिदं पुस्तकं भवान् संस्कृते न विलिख्य यदि हिन्दीभाषायामलिखिष्यत् तर्हि सम्यगभविष्यत्।” अनेन ‘किन्तु’-ना मह्यं सा शिक्षा दत्तास्ति यद्यहं सत्पुरुषः स्यां तर्हि पुनरस्मिन् मार्गे पदनिक्षेपस्य नामापि न गृह्णीयाम्।

हिन्दी-अनुवादः – कहीं पर तो यह ‘किन्तु’ अत्यधिक दुःख पैदा करता है। अनेक वर्षों के परिश्रम के फलस्वरूप अपने द्वारा रचित एक नवीन संस्कृत पुस्तक लेकर एक साहित्य-मर्मज्ञ देश के नेता के समीप पहुँचा। नेता जी ने पुस्तक के गुणों की उचित परीक्षा करके प्रसन्न होते हुए कहा-“पुस्तक तो वास्तव में अद्भुत लिखी गई है। बहुत समय के पश्चात् संस्कृत में इस प्रकार की नवीनता देखी गई है।…….. किन्तु’ मेरी सम्मति में आप इस पुस्तक को संस्कृत में न लिखकर यदि हिन्दी भाषा में लिखते तो बहुत अच्छा होता।”

घर वापस लौटते हुए मैं ‘किन्तु’ द्वारा दी गई इस मर्मवेधक शिक्षा पर, घर के पूरे रास्ते कान मसलता हुआ चला गया। इस ‘किन्तु’ ने मुझे वह शिक्षा दी थी कि यदि मैं सत्पुरुष हूँ तो फिर इस रास्ते पर पाँव रखने का नाम भी न लूँ।

शब्दार्थाः टिप्पण्यश्च नितान्तम् = अत्यधिक। अनुतापम् = पश्चात्ताप, पछतावा; अनु + तापम्। परीक्ष्य = परीक्षा करके, परि + √ईक्ष् + ल्यप्। निवर्तमानः = लौटता हुआ; नि + √वृत् + शानच । मर्मवेधकशिक्षायाः = मर्मभेदी शिक्षा के। मर्दयन् = मसलता हुआ। पदनिक्षेपः = कदम रखना; पदयोः निक्षेपः (षष्ठी-तत्पुरुष)

5. कदाचित् कदाचित्त्वयं क्रूरः ‘किन्तुः’ मुखस्य कवलमप्याच्छिनत्ति। स्वल्प-दिनानामेव वार्तास्ति। आयुर्वेदमार्तण्डस्य श्रीमतः स्वामिमहाभागस्य औषधिं निषेव्य अधुनैवाहं नीरोगोऽभवम्।अस्मिन्नेव समये मित्रगोष्ठ्या अहं स्वामिमहोदयमप्राक्षम्… ‘किमहं तत्र गन्तुं शक्नोमि।’ उत्तरमलभ्यत… ‘तादृशी हानिस्तु नास्ति। ‘किन्तु’ गरिष्ठवस्तुनो भोजने अवधानमत्यावश्यकम् अधुनापि दौर्बल्यमस्ति।

हिन्दी-अनुवादः कभी-कभी तो यह क्रूर किन्तु मुख के कवल (ग्रास) को भी छीन लेता है। थोड़े ही दिनों की बात है। आयुर्वेद मार्तण्ड श्री स्वामी जी महाराज की औषधि का सेवन करके अब मैं स्वस्थ हो गया हूँ। इसी समय मित्र मण्डली की ओर से निमन्त्रण प्राप्त हुआ। भोजनगोष्ठी (पार्टी) में सम्मिलित होने के लिए मेरी इच्छा शक्ति की प्रबलता का प्रवाह पूरी तरह से बढ़ रहा था। मैंने स्वामी जी महाराज से पूछा-“क्या मैं वहाँ जा सकता हूँ।” उत्तर मिला-“वैसे तो कोई हानि नहीं है, ‘किन्तु’ गरिष्ठ पदार्थों के सेवन में बड़ी सावधानी की आवश्यकता है, अभी भी कमजोरी है।”

शब्दार्थाः टिप्पण्यश्च कवलम् = ग्रास। आच्छिनत्ति = छीन लेता है; आ + √छिद् + लट्लकार, प्रथमपुरुष, एकवचन। स्वल्पदिनानाम् एव वार्ता = थोड़े दिनों की ही बात। निषेव्य = सेवन करके; नि + √सेव् + ल्यप् । समवेतुम् = सम्मिलित होने के लिए; सम्मिलितुम्, सम् + अव + √इ + तुमुन्। प्रवर्द्धमानः = अत्यधिक बढ़ा हुआ; प्र + √वृध् + शानच्। अप्राक्षम् = पूछा। अवधानम् = सावधानी, परहेज; अव + √धा + ल्युट > अन। दौर्बल्यम् = दुर्बलता, कमज़ोरी; दुर्बल + ण्यत्।

HBSE 12th Class Sanskrit Solutions Shashwati Chapter 12 किन्तोः कुटिलता

6. उत्साहस्य ज्वाला या पूर्वं प्रचण्डतमा आसीत् अर्द्धमात्रायां तु तत्रैव निर्वाणाभवत्। अस्तु येन केनापि प्रकारेण भोजनगोष्ठ्याविशेषाधिवेशनेऽस्मिन् सम्मिलितस्त्वभवमेव। भोजनपीठे अधिकारं कुर्वन्नेवाहमपश्यं यत् सर्वागपूर्णा एका भोज्य-व्यञ्जनानां प्रदर्शनी सम्मुखे वर्तत इति।धीरगम्भीरक्रमेणाहं भोजनकाण्डस्यारम्भमकरवम्। अहं मोदकस्यैकं ग्रासमगृह्णम्। तस्य स्वादसूत्रेण सन्दानितोऽहं यथैव द्वितीय ग्रासमगृह्ण तथैव ‘स्वामिमहोदयस्य ‘किन्तुः’ मम कण्ठनलिकामरुधत्। मुखस्य ग्रासो मुख एवाऽभ्राम्यत् अग्रे गन्तुं नाशक्नोत्। ‘किन्तोः’ भीषणविभीषिका प्रत्येकवस्तुनि गरिष्ठतां सम्पाद्य भोजनं तत्रैव समाप्तमकरोत्।

हिन्दी-अनुवादः – उत्साह की जो ज्वाला पहले अत्यधिक प्रचण्ड हो रही थी, आधे ही मिनट में वहीं बुझ गई। भोजन के आसन पर अधिकार जमाते हुए मैंने देखा कि एक सर्वांगपूर्ण भोज्य व्यंजनों की प्रदर्शनी सामने लगी हुई है। धीर-गम्भीर क्रम से मैंने भोजनकाण्ड की शुरुआत कर दी। मैंने लड्डू का एक ग्रास लिया। उसके स्वाद सूत्र से बँधे हुए मैंने जैसे ही दूसरा ग्रास ग्रहण किया तभी स्वामी महोदय की ‘किन्तु’ से मेरी कण्ठनली ही रुंध गई। मुख का ग्रास मुख में ही घूम गया, आगे जा ही न सका। ‘किन्तु’ के भीषण भय ने प्रत्येक वस्तु में गरिष्ठता बता कर भोजन वहीं समाप्त कर दिया।”

शब्दार्थाः टिप्पण्यश्च अर्द्धमात्रायाम् = आधे मिनट में। निर्वाणा = शान्त हो गई, बुझ गई। सम्मिलितस्त्व- भवमेव = सम्मिलितः + तु + अभवम् + एव। स्वादसूत्रेण = स्वाद रूपी रस्सी से। सन्दानितः = बँधा हुआ; सन्दान + इतच् । अभ्राम्यत् = घूम गया। विभीषिका = भय, डर; वि + √भी + णिच् + ण्वुल् + टाप, षुक्, आगम और इत्व।

HBSE 12th Class Sanskrit Solutions Shashwati Chapter 12 किन्तोः कुटिलता

7. अहं देशसेवां कर्तुं गृहाद बहिरभवम्। मया निश्चितमासीत् ‘एतावन्ति दिनानि स्वोदरसेवायै क्लिष्टोऽभवम। इदानीं कियन्तं कालं देशसेवायामपि लक्ष्यं ददामि। यथैवाहं मार्गेऽग्रेसरो भवामि, तथैव मम बाल्याध्यापकमहोदयः सम्मुखोऽभवत्। मास्टरमहोदयेन प्रस्थानहेतौ पृष्टे सति सम्पूर्णसमाचारनिवेदनं ममाऽऽवश्यकमभूत्। अध्यापकमहोदयः प्रावोचत्… “तात, सर्वमिदं सम्यक्। किन्तु स्वगृहाभिमुखमपि किञ्चिद्विलोकनीयं भवेत्। येषां भरणपोषणं भवत्येवायत्तम् तान् किं भवान् निराधारमेव निर्मुच्य स्वैरं गन्तुमर्हेत्।”
पुनः किमासीत्। अत्रैव परोपकारविचाराणाम् इतिश्रीरभूत्। किन्तु’-महोदयेन देशसेवायाः सर्वापि विचारपरम्परा परपारे परावर्त्यत गृहाभिमुखं मुखं कुर्वन् तस्मात् स्थानादेव परावर्तिषि।

हिन्दी-अनुवादः मैं देशसेवा करने के लिए घर से बाहर हुआ। मैंने निश्चय किया था कि इतने दिनों तक अपनी पेट-पूजा के लिए कष्ट उठाया है। अब कुछ समय देशसेवा में भी लगाता हूँ। जैसे ही मैं रास्ते में आगे-आगे हुआ, तभी मेरे बचपन के अध्यापक मेरे सामने आ गए। मास्टर महोदय द्वारा प्रस्थान का कारण पूछने पर मेरे लिए सारा समाचार निवेदन करना आवश्यक हो गया था। अध्यापक महोदय ने कहा-“पुत्र, यह सब तो ठीक है। ‘किन्तु’ अपने घर की तरफ भी थोड़ा ध्यान देना चाहिए। जिनके भरण-पोषण की आपने ज़िम्मेदारी ली है, क्या आप उन्हें बेसहारा छोड़कर अपनी इच्छानुसार जा सकते हो?” फिर क्या था, यहीं पर परोपकार के विचार की इतिश्री हो गई। ‘किन्तु’ जी महाराज ने देशसेवा की सारी विचार परम्परा को परले पार कर (लौटा) दिया। घर की ओर मुँह करते हुए उसी स्थान से वापस लौट गया।

शब्दार्थाः टिप्पण्यश्च स्वोदरसेवायै = अपनी पेट-पूजा के लिए। क्लिष्टः = दुःखी। कियन्तं कालम् = कुछ समय। अग्रेसरः = आगे चलने वाला। आयत्तम् = प्राप्त किया गया, स्वीकार किया गया। निराधारम् = व्यर्थ। निर्मुच्य = छोड़कर; परित्यज्य, निः + √मुच् + ल्यप्। स्वैरम् = स्वेच्छानुसार। गन्तुम् अर्हेत् = जा सकते हो; ‘तुमुन्’ प्रत्ययान्त शब्दों के साथ √अर्ह धातु का प्रयोग √शक् धातु (= सकना) के अर्थ में होता है। परपारे = परले पार, दूसरी ओर। परावर्त्यत = लौटा दिया।

HBSE 12th Class Sanskrit Solutions Shashwati Chapter 12 किन्तोः कुटिलता

8. मयानुभूतमस्ति यदयं कुटिलः ‘किन्तुः’ नानादेशेषु नानारूपाणि सन्धार्य गुप्तं विचरति। यथैव लोकानां कार्यसिद्धेरवसरः समुपतिष्ठते तथैवायं प्रकटीभूय लोकानां कार्याणि यथावस्थितमवरुणद्धि। अहमेतस्य ‘किन्तु’कुठारस्य कठोरतया नितान्तमेव तान्तोऽस्मि। अहं वाञ्छामि यदेतस्याक्रमणात् सुरक्षितो भवेयम्। परं नायं मां त्यक्तुमिच्छति। बहवो मार्मिका मामबोधयन् यत् ‘त्वम् एतं सम्मुखमायान्तं दृष्ट्वैव कथं वित्रस्यसि, कुतश्च एनमपसारयितुं प्रयतसे ? किमेनं सर्वथा अहितकारिणमेव निश्चितवानसि ? नेदं सम्यक् पशुघातकस्य छुरिकापि पाश-पतितस्य गलबन्धनं छित्त्वा समये प्राणरक्षां कुर्वती दृष्टा।’ अहमपि सत्यस्यैकान्ततोऽपलापं न करिष्यामि। एतस्य कथनस्य सत्यताया मयापि परिचयः कदाचित् कदाचित् प्राप्तोऽस्ति।

हिन्दी-अनुवादः मैंने अनुभव किया कि यह कुटिल ‘किन्तु’ अनेक स्थानों पर अनेक रूप धारण करके गुप्त रूप से विचरण करता है। जैसे ही लोगों की कार्य सिद्धि का अवसर समीप होता है, तभी यह प्रकट होकर लोगों के कार्यों को उसी स्थिति में रोक देता है। मैं इस ‘किन्तु’ के कुल्हाड़े की कठोरता से बुरी तरह पीड़ित हूँ। मैं चाहता हूँ कि इसके आक्रमण से बच जाऊँ। परन्तु यह मुझे छोड़ना ही नहीं चाहता। बहुत से मर्मज्ञों ने मुझे समझाया कि तुम इसे सामने आता हुआ देखकर ही क्यों डर जाते हो और क्यों इसे दूर करने के लिए यत्नशील रहते हो ? क्यों इसे सर्वथा अहितकर ही मानते हो ? यह ठीक नहीं। पशुघातक की छुरी भी जाल में बँधे हुए के गले का बन्धन काटकर, अवसर आने पर प्राण रक्षा करती हुई देखी गई है। मैं भी सच्चाई को पूरी तरह से नहीं झुठलाऊँगा। इस कथन की सत्यता का परिचय मुझे भी कभी कभी प्राप्त हुआ है।

शब्दार्थाः टिप्पण्यश्च सन्धार्य = धारण करके; सम् + √धृ + णिच् + ल्यप्। तान्तः = पीड़ित, परेशान। वित्रस्यसि = डर रहे हो; वि + √त्रस, लट्लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन। अपसारयितुम् = दूर भागने के लिए; अप + √सृ + णिच् + तुमुन्। पाशपतितस्य = जाल में फंसे हुए के। अपलापम् = झुठलाना, सत्य को असत्य और असत्य को सत्य करना।

HBSE 12th Class Sanskrit Solutions Shashwati Chapter 12 किन्तोः कुटिलता

9. ‘शब्दैः प्रतीयते यद गहे चौरः प्रविष्टोऽस्ति’ इति सभयमनुलपन्ती गहिणी रात्रौ मामबोधयत् । अहं निजशौर्य प्रकाशयन् महता वीरदर्पण लगुडमात्रमादाय अन्धकार एव चौरनिग्रहाय प्रचलितोऽभवम्। गृहिणी कर्णसमीप आगत्य शनैरवदत्… “अन्धकारे-ऽस्मिन् यासि त्वमवश्यम्, ‘किन्तु’ दृश्यताम् स शस्त्रं न प्रहरेत्।” पुनः किमासीत्। मम वीरदर्पस्य शौर्यस्य च प्रज्वलितं ज्योतिस्तत्रैव निर्वाणमभूत। चौरनिग्रहः कीदृशः, निजप्राणपरित्राणमेव मे अन्वेषणीयमभवत्। लगडं प्रक्षिप्य कोष्ठके निलीनोऽभवम्। तत एव च कम्पित-कण्ठेन चीत्कारमकरवम्-“लोका: ! आगच्छत, चौरः प्रविष्टोऽस्ति।

हिन्दी-अनुवादः ‘आवाजों से प्रतीत होता है कि घर में चोर घुस आया है’-इस प्रकार भयपूर्वक कहती हुई मेरी घरवाली ने रात्री में मुझे जगाया। मैं अपनी शूरवीरता प्रकट करते हुए बड़े घमण्ड से लाठी मात्र लेकर अन्धकार में ही चोर को पकड़ने के लिए चल पड़ा। पत्नी ने कान के पास आकर धीरे से कहा-“अन्धकार में तुम जाना ज़रूर, ‘किन्तु’ देखना, कहीं वह शस्त्रप्रहार न कर दे।” फिर क्या था। मेरे वीरोचित घमण्ड और शूरता की जली हुई ज्योति वहीं बुझ गई। चोर का पकड़ना कैसा, मैं अपनी प्राणरक्षा ही खोजने लगा। लाठी फैंक कर कोठे (कमरे) में छिप गया। तभी काँपते हुए स्वर से मैं चीखा-“लोगो ! आओ, चोर घुस आया है।”

शब्दार्थाः टिप्पण्यश्च अनुलपन्ती = कहती हुई; अनु + √लप् + शतृ + ङीप्। चौरनिग्रहाय = चोर को पकड़ने के लिए; चौरस्य निग्रहाय (चतुर्थी तत्पुरुष)। परित्राणम् = रक्षण, बचाव, परि + √त्रैङ् (पालने) + ल्युट नपुंसकलिङ्ग प्रथमपुरुष एकवचन। अन्वेषणीयम् = ढूँढने योग्य, खोजने योग्य; अनु + √इष् + अनीयर् प्रत्यय। लगुडम् = लाठी, दण्ड। निलीनः = छुपा हुआ; नि + √ली + क्त प्रत्यय।

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10. एकेन अमुना ‘किन्तु’-ना चौरस्य चपेटाभ्योऽवमुच्य सौख्यस्य सुरक्षिते प्रकोष्ठकेऽहं प्रवेशितः। अनेन किन्तुना कस्मिन्नपि संकटसमये कदाचित् किञ्चित्कार्यं कामं कृतं स्यात् परं भूयसा तु अस्माद् भयमेव भवति। अस्य हि सार्वदिकः स्वभाव एव यत् वार्ता काममुत्तमास्तु अधमा वा परमयं मध्ये प्रविश्य तस्याः कथाया विच्छेदमवश्यं करिष्यति। एतएव कस्मिन्नपि समये कार्यसाधकत्वेऽपि लोका अस्माद् वित्रस्यन्त्येव।वैरिणां भारावताराय कदाचित् हिताधराऽपि करवालधारा क्रूराकारा प्रखरप्रकारा एव प्रसिद्धा लोकेषु। विगुणः कार्षापणः, कुत्सितश्च पुत्रः संकटे कदाचिदुपयुक्तो भवेत् परन्तु जनसमाजे द्वयोरुपर्येव नासा-भूसकोचो जातो जनिष्यते च। इदमेव कारणं यत् यस्यां वार्तायां ‘किन्तुः’ उत्पद्यते तां वार्ता लोका विगुणां गणयन्ति।

हिन्दी-अनुवादः इस एक किन्तु ने चोर की चपेटों से छुड़वाकर मुझे सुख के सुरक्षित कोठे (कमरे) में प्रविष्ट करवा दिया। इस किन्तु ने किसी संकट के समय कभी कोई कार्य शायद किया हो, परन्तु अधिकतर तो इससे भय ही होता है। इसका सदा-सदा रहने वाला स्वभाव ही है कि चाहे बात अच्छी हो बुरी परन्तु यह बीच में प्रविष्ट होकर उस बात को अवश्य ही काट देगा। इसीलिए किसी भी समय कार्य सिद्धि में लोग इससे डरते ही हैं। वैरियों का भार उतारने के लिए शायद हितकारक तलवार की धार भी क्रूर आकार तथा तीखे रूप वाली ही संसार में प्रसिद्ध होती है। खोटा सिक्का तथा निन्दित पुत्र संकट में कभी काम भले ही आ जाए, परन्तु जनसमाज में तो दोनों के ऊपर ही नाक-भौंह सिकोड़ी जाती रही है और आगे भी सिकोड़ी जाती रहेगी। यही कारण है कि जिस किसी बात में ‘किन्तु’ लग लग जाता है, उस बात को लोग खटाई में पड़ी हुई बात ही समझते हैं।

शब्दार्थाः टिप्पण्श्च चपेटाभ्यः = थप्पड़ों से। अवमुच्य = छुड़ाकर। प्रकोष्ठके = घर में। कामम् = भले ही। सार्वदिकः = सर्वदा होने वाला। भारावताराय = भार उतारने के लिए। कदाचित् = शायद। करवालधारः = तलवार की धार। विगुणः कार्षापणः = खोटा सिक्का। कुत्सितः = निन्दित, कुत्स + इतच्। नासा-भ्रूसकोचः = नाक-भौंह सिकोड़ना। विगुणाम् = गुण रहित, खटाई में पड़ी हुई।

किन्तोः कुटिलता (किन्तु’ की कुटिलता) Summary in Hindi

किन्तोः कुटिलता पाठ परिचय

प्रस्तुत पाठ ‘किन्तोः कुटिलता’ देवर्षि श्रीकलानाथ शास्त्री द्वारा सम्पादित पं० श्री भट्ट मथुरानाथ शास्त्री के निबन्धसंग्रह ‘प्रबन्धपारिजातः’ से संकलित किया गया है।

पं० भट्ट मथुरानाथ शास्त्री के पिता पं० भट्ट द्वारकानाथ जयपुर निवासी थे। पं० भट्ट मथुरानाथ का जन्म जयपुर में सन् 1889 ई० में हुआ और निधन भी 4 जून, 1964 ई० को जयपुर में ही हुआ। श्री भट्ट की पूर्वज परम्परा अत्यन्त प्रतिभा सम्पन्न रही। इन्होंने महाराजा संस्कृत कॉलेज से साहित्याचार्य की उपाधि प्राप्त की और वहीं व्याख्याता बन गए। आप जयपुर से प्रकाशित ‘संस्कृतरत्नाकर’ पत्रिका के सम्पादक रहे। भट्ट मथुरानाथ शास्त्री द्वारा प्रणीत संस्कृत की रचनाओं में ‘जयपुरवैभवम्’, ‘गोविन्दवैभवम्’, ‘संस्कृतगाथासप्तशती’ और ‘साहित्यवैभवम्’ विशेष उल्लेखनीय हैं। इनके अतिरिक्त इन्होंने चालीस कथाएँ और सौ से भी अधिक निबन्ध संस्कृत में लिखे। इनकी ‘सुरभारती’, ‘सुजनदुर्जन-सन्दर्भः’ और ‘युद्धमुद्धतम्’ नामक पद्य रचनाएँ भी उल्लेखनीय हैं।

यहाँ संकलित पाठ में श्री भट्ट जी ने दिखाया है कि जब कभी किसी कथन के साथ ‘किन्तु’ लग जाता है, तब बहुधा वह पहले कथन के अच्छे भाव को समाप्त कर उसे दोषपूर्ण और सम्बोधित व्यक्ति के लिए दुःख पैदा करने वाला, उसके उत्साह का नाशक और शत्रुरूप बना देता है। ऐसे अवसर विरल होते हैं जहाँ ‘किन्तु’ सम्बोधित व्यक्ति के लिए सुखदायक सिद्ध होता है।

लेख की भाषा सरल व सुबोध है, अलंकारों और दीर्घ समासों आदि का प्रयोग नहीं किया गया है। भाव सुस्पष्ट और सामान्य जीवन में जनसाधारण द्वारा अनुभूत हैं।

HBSE 12th Class Sanskrit Solutions Shashwati Chapter 12 किन्तोः कुटिलता

किन्तोः कुटिलता पाठस्य सारः

‘किन्तोः कुटिलता’ यह पाठ पं० श्री भट्ट मथुरानाथ शास्त्री के निबन्ध संग्रह ‘प्रबन्धपारिजात:’ से संकलित किया गया है। इस पाठ में दिखाया गया है कि जब कभी किसी कथन के साथ ‘किन्तु’ लग जाता है तब प्रायः पहले कथन के अच्छे भाव को समाप्त कर वह ‘किन्तु’ उसे दोषपूर्ण बना देता है। तथा सम्बोधित व्यक्ति के लिए कष्टकारी, उत्साहनाशक तथा शत्रुरूप बन जाता है। ऐसे अवसर बहुत कम होते हैं जहाँ ‘किन्तु’ शब्द संबोधित व्यक्ति के लिए सुखकारी सिद्ध होता है। लेखक ने अपने जीवन में घटित तीन- चार घटनाओं के अनुभव से ‘किन्तु’ के इस षड्यन्त्र को प्रमाणपूर्वक पाठकों के समक्ष-प्रस्तुत किया है।

एक बार लेखक का राज्य से प्राप्त हुई भूमि के सम्बन्ध में लम्बे समय से एक मुकदमा न्यायालय में चल रहा था। जज महोदय ने लेखक के पक्ष में निर्णय सुनाया और कहा अभियोक्ता की ओर से सभी आवश्यक प्रमाण उपस्थित कर किन्तोः कुटिलता दिए गए। राज्य से प्राप्त भूमि का दानपत्र भी प्रस्तुत कर दिया गया और न्यायालय को इस बात का पूरा निश्चय हो गया है कि यह भूमि अभियोक्ता के अधिकार वाली है।” जज महोदय के निर्णय से लेखक बड़ा प्रसन्न हो रहा था कि भूमि मेरे पास आ ही गई है। तभी जज महोदय ने आगे कहा-“किन्तु राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने इसके विरोध में एक पत्र भेजा है, उस पर दृष्टिपात करना भी हम अपना कर्तव्य समझते हैं।” किन्तु शब्द के इस भाले ने लेखक के हृदय को चीरकर रख दिया।

इसी प्रकार की एक अन्य घटना में लेखक बताता है कि एक बार धर्माधिकारी के पास एक ग़रीब आदमी चीख पुकार करता हुआ कहने लगा कि मेरी नौ वर्ष की कन्या के विवाह को तीन ही दिन हुए हैं। चतुर्थी कर्म (गौना) न होने से विवाह भी पूरा नहीं हुआ और उसके पति की मृत्यु हो गई। ऐसी दशा में मैं क्या करूँ। धर्माधिकारी ने कहा कि यह तो अवश्य ही दयनीय स्थिति है, वर्तमान समय में समाज की भयंकर दशा पर विचार करते हुए इसके पुनर्विवाह की व्यवस्था दी जानी चाहिए।..किन्तु हम अपने मुँह से कैसे कहे, हमें प्राचीन मर्यादा की रक्षा भी तो करनी है। यहाँ भी किन्तु ने उस अबोध बालिका के जीवन को नरक बना दिया।

लेखक ने एक बहुत ही उत्तम पुस्तक संस्कृत में लिखी और एक साहित्य प्रेमी देश के नेता को समीक्षा के लिए दी। नेता जी ने पुस्तक की प्रशंसा करते हुए अंतिम वाक्य कहा-“बहुत समय के पश्चात् संस्कृत में इस प्रकार की अद्भुत पुस्तक लिखी गई है।……..किन्तु ये हिन्दी में लिखी जाती तो उचित होता।” नेताजी के किन्तु शब्द ने लेखक को मार्मिक पीड़ा दी और वह अपना कान मसलता हुआ घर की ओर निकल गया।

लेखक एक बार बीमार हो गया। एक वैद्य की औषध सेवन से वह स्वस्थ हो गया। तभी लेखक के पास मित्रों की ओर से भोजन गोष्ठी का निमंत्रण आया। लेखक ने वैद्य से उसमें सम्मिलित होने के लिए पूछा। उत्तर में वैद्य ने कहा”कोई खास हानि तो नहीं है…किन्तु गरिष्ठ वस्तुओं के सेवन से परहेज करना।” लेखक प्रीतिभोज में सम्मिलित हुआ, स्वादिष्ट व्यंजन सामने आए। जैसे ही लेखक ने एक ग्रास गले के नीचे उतारा वैद्य के किन्तु ने सारा मजा किरकिरा कर दिया। लेखक ने एक बार देशसेवा करने के लिए घर छोड़ने का निश्चय किया। रास्ते में बचपन के मास्टर जी मिल गए। उन्होंने पूछा तो बताना पड़ा। मास्टर जी ने कहा-“बेटा यह सब तो ठीक है…….किन्तु जिस परिवार का भार तुम्हारे सिर पर है उसे निराधार छोड़कर अकेले कैसे जा सकते हो।”

मास्टर जी के किन्तु ने लेखक के सिर से देशसेवा का भूत उतार दिया। एक बार लेखक की पत्नी ने भयपूर्वक कहा-“शायद घर में कोई चोर घुस आया है।” लेखक बड़ी वीरता से अंधेरे में ही लाठी लेकर चोर को पकड़ने चल पड़ा तभी पत्नी ने कान के पास आकर बुदबुदाया, “अन्धकार में अकेले जा तो रहे हो……. किन्तु देखना कहीं वह शस्त्र का प्रहार न कर दे।” लेखक की वीरता तुरन्त गायब हो गई और वह प्राण बचाने के लिए लाठी फैंककर घर के अन्दर छिप गया और वहीं से चीखते स्वर में बोला- लोगो ! आओ, चोर घुस आया है। पत्नी की इस एक किन्तु ने चोर के थप्पड़ों से छुड़वाकर लेखक को सुरक्षित घर में भेज दिया था। विचारने वाली बात यह है कि यह किन्तु ऐसा कल्याणकारी कार्य भूले भटके ही करता है। खोटा सिक्का तथा नालायक बेटा संकट में कभी भले ही काम आ जाते हों, परन्तु अधिकांश में तो समाज इन दोनों पर नाक भौंह सिकोड़ता रहा है और सिकोड़ता रहेगा। यही दशा ‘किन्तु’ की है। यह ‘किन्तु’ जीवन में एक आध बार ही सुखदायी होता है, संकट से बचाता है और सुखदायी होती है। अधिकांश में तो जिस कथन के साथ ‘किन्तु’ महाराज लग जाते हैं। समझिए वह काम खटाई में पड़ गया। कोई न कोई बाधा आ पड़ी और काम बीच में अटक गया।

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