HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 17 वीर कुवर सिंह

Haryana State Board HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 17 वीर कुवर सिंह Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 17 वीर कुवर सिंह

HBSE 7th Class Hindi वीर कुवर सिंह Textbook Questions and Answers

निबंध से

प्रश्न 1.
वीर कुंवर सिंह के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया ?
उत्तर :
वीर कुंवर सिंह के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताओं ने हमें प्रभावित किया है

  • वीर कुंवर सिंह वीर थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध वीरतापूर्वक युद्ध किए।
  • वे युद्धकला में पूरी तरह कुशल थे। उन्हें छापामार युद्ध में महारत हासिल थी।
  • वे वीर के अलावा चतुर एवं बुद्धिमान भी थे।
  • उनमें बलिदान एवं त्याग की भावना थी।
  • कुँवर सिंह उदार एवं संवेदनशील व्यक्ति थे।
  • वे समाजसेवी एवं परोपकारी भी थे।

प्रश्न 2.
कुँवर सिंह को बचपन में किन कामों में मजा आता था ? क्या उन्हें उन कामों से स्वतंत्रता सेनानी बनने में कुछ मदद मिली?
उत्तर :
कुंवर सिंह को बचपन में घुड़सवारी करने, तलवारबाजी करने तथा कुश्ती लड़ने में मजा आता था। हाँ, उन्हें इन कामों से स्वतंत्रता सेनानी बनने में मदद मिली। वे घुड़सवारी करके युद्ध करते थे। युद्ध में तलवार चलाना उनके खूब काम आया। इनसे वे निर्भीक एवं कुशल योद्धा बन गए।

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प्रश्न 3.
सांप्रदायिक सद्भाव में कुंवर सिंह की गहरी आस्था थी-पाठ के आधार पर कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर :
कुँवर सिंह की सांप्रदायिक सद्भाव में गहरी आस्था थी। उनकी सेना में मुसलमान भी उच्च पदों पर थे। इब्राहीम खाँ तथा किफायत हुसैन उनकी सेना में उच्च पदों पर आसीन थे। इसके अलावा उनके यहाँ हिंदुओं और मुसलमानों के सभी त्योहर एक साथ मिल-जुलकर मनाए जाते थे।

प्रश्न 4.
पाठ के किन प्रसंगों से तुम्हें पता चलता है कि कुँवर सिंह साहसी उदार एवं स्वाभिमानी व्यक्ति थे?
उत्तर :
पाठ के निम्नलिखित प्रसंगों से हमें पता चलता है कि कुंवर सिंह साहसी, उदार एवं स्वाभिमानी व्यक्ति थे
1. साहसी :
कुँवर सिंह ने कई स्थानों पर विजय प्राप्त की, पर वे भी जगदीशपुर के पतन को नहीं रोक पाए परन्तु उन्होंने हारकर भी साहस नहीं खोया। वे भावी संग्राम की योजना में जुट गए। वे बूढ़े हो चले थे, पर साहसी बने हुए थे। 23 अप्रैल, 1858 को विजय पताका फहराते हुए जगदीशपुर पहुंच गए।

2. उदार :
कुँवर सिंह बहुत उदार थे। अपनी आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के बावजूद वे निर्धन व्यक्तियों की सहायता करते रहते थे। उन्होंने परोपकार के अनेक काम किए अर्थात् सड़कें बनवाईं, कुएँ खुदवाए तथा तालाब बनवाए।

3. स्वाभिमानी :
कुँवरसिंह स्वाभिमानी व्यक्ति थे। उन्होंने अंग्रेजों से कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना बाँया हाथ काटकर गंगा मैया को अर्पित कर दिया।

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प्रश्न 5.
आमतौर पर मेले मनोरंजन, खरीद-फरोख्त एवं मेलजोल के लिए होते हैं। वीर कुंवर सिंह ने मेले का उपयोग किस रूप में किया?
उत्तर :
प्रायः मेले का उपयोग मनोरंजन, खरीद-फरोख्त तथा मेल-जोल के लिए किया जाता है, पर कुंवर सिंह ने सोनपुर के मेले का उपयोग स्वाधीनता संग्राम की योजना बनाने के लिए किया। यहाँ लोग गुप्त रूप से एकत्रित होकर क्रांति के बारे में योजनाएँ बनाते थे।

निबंध से आगे

प्रश्न 1.
सन् 1857 के आंदोलन में भाग लेने वाले किन्हीं चार सेनानियों पर दो-दो वाक्य लिखिए।
उत्तर :
1857 में भाग लेने वाले चार स्वतंत्रता सेनानी :
रानी लक्ष्मीबाई : झाँसी की महारानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के साथ डटकर युद्ध किया। उन्होंने अंग्रेजी सेना को कई स्थानों पर हराया और अंत में अपना अमर बलिदान दे दिया।

तात्या टोपे :
इनका मूल नाम रामचंद्र पांडुरंग था। ये झाँसी की रानी की सेना में सेनापति थे। इन्हें 18 अप्रैल, 1859 को फाँसी पर लटका दिया गया था।

बहादुर शाह जफर :
मई, 1857 में विद्रोहियों ने दिल्ली पर कब्जा करके बहादुरशाह द्वितीय को पुनः भारत का सम्राट घोषित कर दिया। 82 वर्षीय बहादुरशाह ने बख्त खाँ के सहयोग से विद्रोह का नेतृत्व किया था। उन्हें अपना शेष जीवन रंगून की जेल में बिताना पड़ा।

नाना साहब धुंधू पंत :
ये पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र थे। इन्होंने 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया था। नाना साहब ने प्रतिज्ञा की थी- “जब तक मेरे शरीर में प्राण हैं, मेरे और अंग्रेजों के बीच जंग जारी है, चाहे मुझे मार दिया जाए, बंदी बना दिया जाए, फाँसी पर लटका दिया जाए. मैं हर बात का जवाब तलवार से दूँगा।”

प्रश्न 2.
सन् 1857 के क्रांतिकारियों से संबंधित गीत विभिन्न भाषाओं और बोलियों में गाए जाते हैं। ऐसे कुछ गीतों को संकलित कीजिए।
उत्तर :
विद्यार्थी इन गीतों को संकलित करें।

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HBSE 7th Class Hindi वीर कुवर सिंह Important Questions and Answers

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
1857 के सशस्त्र विद्रोह ने क्या किया?
उत्तर :
इसने ब्रिटिश शासन की जड़ों को हिला दिया।

प्रश्न 2.
11 मई को किसे भारत का शासक घोषित किया गया?
उत्तर :
अंतिम मुगल शासक बहादुरशाह जफ़र को भारत का शासक घोषित किया गया।

प्रश्न 3.
दिल्ली के अतिरिक्त भीषण युद्ध के केंद्र कहाँ-कहाँ थे?
उत्तर :
ये केंद्र थे-कानपुर, लखनऊ, बरेली, बुंदेलखंड, आरा।

प्रश्न 4.
कुंवर सिंह का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर :
कुंवर सिंह का जन्म 1782 ई. में शाहाबाद जिले के जगदीशपुर में हुआ।

प्रश्न 5.
कुंवर सिंह ने कब रियासत की ज़िम्मेदारी सँभाली?
उत्तर :
1827 ई. में पिता की मृत्यु के बाद कुंवर सिंह ने रियासत की जिम्मेदारी संभाली।

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प्रश्न 6.
कुंवर सिंह की मृत्यु कब हुई?
उत्तर :
26 अप्रैल, 1858 को।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
1857 के स्वतंत्रता संग्राम का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर :
सन् 1857 में भारतीयों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह किया था। मार्च, 1857 में बैरकपुर में अंग्रेजों के विरुद्ध मंगलपांडे ने बगावत की। उन्हें 8 अप्रैल, 1857 को फाँसी दी गई। 10 मई, 1857 को मेरठ छावनी में भारतीय सैनिकों ने विद्रोह कर दिया। ।। मई को दिल्ली पर कब्जा कर लिया गया। अंतिम मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर को भारत का शासक घोषित कर दिया गया। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों को नाकों चने चबवा दिए। वीर कुंवर सिंह ने अंग्रेजों को कई जगह हराया।

प्रश्न 2.
जुलाई, 1857 में क्या हुआ?
उत्तर :
25 जुलाई, 1857 को दानापुर की टुकड़ी ने भी विद्रोह कर दिया। सैनिक सोन नदी को पार करके आरा की ओर बढ़ गए। वहाँ पहुँचकर उन्होंने जेल की सलाखें तोड़ दी और कैदियों को आजाद कर दिया।

27 जुलाई, 1857 को कुंवर सिंह ने आरा पर विजय प्राप्त कर ली। सिपाहियों ने उन्हें फौजी सलामी दी। कुंवर सिंह बूढ़े हो चले थे, पर वे पूरी हिम्मत से युद्ध में जुटे रहे थे।

प्रश्न 3.
कुंवर सिंह और डगलस की टक्कर का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
कुंवर सिंह को अपनी सेना के साथ गंगा पार करनी थी। अंग्रेजी सेना डगलस के नेतृत्व में उनका पीछा कर रही थी। कुंवर सिंह ने यह अफवाह फैला दी कि वह अपनी सेना के साथ हाथियों पर चढ़कर बलिया के पास गंगा पार करेगा। सेनापति डगलस वहीं पहुँच गया, पर कुंवर सिंह ने बलिया की जगह शिवराजपुर नामक स्थान से नावों पर बैठकर गंगा पार कर ली। अंतिम नाव में कुंवर सिंह थे। डगलस की गोली उनकी बाई कलाई को भेदती निकल गई। कुंवर सिंह ने अपना बायाँ हाथ काटकर गंगा मैया को भेंट चढ़ा दिया।

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प्रश्न 4.
आजमगढ़ की ओर जाने का कँवर सिंह का क्या उद्देश्य था?
उत्तर :
कुँवर सिंह का आजमगढ़ आने का उद्देश्य था-इलाहाबाद एवं बनारस पर आक्रमण कर शत्रुओं को परास्त करना और अंततः जगदीशपुर पर अधिकार जमाना। उन्होंने 22 मार्च, 1858 को आजमगढ़ पर कब्जा भी कर लिया। उन्होंने अंग्रेजों को दो बार हराया। वे 23 अप्रैल, 1858 को स्वाधीनता की विजय-पताका फहराते हुए जगदीशपुर तक पहुंच गए।

प्रश्न 5.
बिहार के प्रसिद्ध कवि मनोरंजन प्रसाद सिंह ने कुँवरसिंह का प्रशस्ति गायन किन शब्दों में किया है?
उत्तर :
उन्होंने प्रशस्ति गायन करते हुए लिखा हैचला गया यो कुँअर अमरपुर, साहस से सब अरिंदल जीत। उसका चित्र देखकर अब भी, दुश्मन होते हैं भयभीत। वीर-प्रसविनी-भूमि धन्य वह, धन्यवीर वह धन्य अतीत। गाते थे और गाँवेंगे हम, हरदम उसकी जय का गीत। स्वतंत्रता का सैनिक था, आजादी का दीवाना था, सब कहते हैं कुँअर सिंह भी, बडा वीर मरदाना था।

वीर कुवर सिंह गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

1. वीर कुँवर …………… भी पड़ा।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. कुंवर सिंह का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
2 उनके माता-पिता के नाम बताइए।
3. कुंवर सिंह की देखभाल ठीक से क्यों नहीं हो पाई?
4. कुंवर सिंह के पिता कैसे व्यक्ति थे?
उत्तर :
1. कुंवर सिंह का जन्म 1782 ई. में बिहार के शाहाबाद जिले के जगदीशपुर में हुआ था।
2. कुंवर सिंह के पिता का नाम साहबजादा सिंह तथा माता का नाम पंचरतन कुँवर था।
3. कुंवर सिंह की देखभाल ठीक से इसलिए नहीं हो पाई क्योंकि कुँवर सिंह के पिता जगदीशपुर रियासत के जमींदार थे। उन्हें अपनी जमींदारी हासिल करने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा था।
4. कुंवर सिंह के पिता वीर होने के साथ-साथ स्वाभिमानी एवं उदार स्वभाव के व्यक्ति थे।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. कुंवर सिंह का जन्म किस राज्य में हुआ था?
(क) बिहार
(ख) शाहाबाद
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) राजस्थान
उत्तर :
(क) बिहार

2. कुंवर सिंह के पिता क्या थे?
(क) राजा
(ख) जमींदार
(ग) जागीरदार
(घ) कुछ नहीं
उत्तर :
(क) राजा

3. कुंवर सिंह के पिता कैसे थे?
(क) वीर
(ख) स्वाभिमानी
(ग) उदार
(घ) ये सभी बातें
उत्तर :
(घ) ये सभी बातें

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2. जगदीशपुर के ………….. बनाते थे।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. इस गद्यांश में किस संत का नामोल्लेख हुआ है और क्यों?
2 उन्होंने कहाँ-कहाँ किस प्रकार की योजनाएं बनाई?
3. सोनपुर का मेला क्यों प्रसिद्ध है?
4. इस मेले का क्रांतिकारी क्या उपयोग करते थे?
उत्तर:
1. इस गद्यांश में ‘बसुरिया बाबा’ नामक सिद्ध संत का उल्लेख हुआ है। उन्होंने ही कुंवर सिंह के मन में देशभक्ति और स्वाधीनता की भावना उत्पन्न की थी।
2. वे बनारस, मथुरा, कानपुर, लखनऊ आदि स्थानों पर रहकर अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विद्रोह करने की सक्रिय योजनाएँ बनाते थे। 3. सोनपुर का मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है। यह मेला कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगता है। यह मेला हाथियों की खरीद-बिक्री के लिए भी प्रसिद्ध है।
4. एक ऐतिहासिक मेले का उपयोग क्रांतिकारी क्रांति की योजना बनाने के लिए एकत्रित होने के लिए करते थे। यहीं वे स्वाधीनता की योजनाएँ बनाते थे।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. बसुरिया बाबा क्या थे?
(क) सिद्ध संत
(ख) सैनिक
(ग) वीर
(घ) अध्यापक
उत्तर :
(क) सिद्ध संत

2. किस स्थान को गुप्त बैठकों के लिए चुना गया?
(क) बिहार को
(ख) सोनपुर के मेले को
(ग) नालंदा को
(घ) पुष्कर मेले को
उत्तर :
(ख) सोनपुर के मेले को

3. मेला किसके क्रय-विक्रय के लिए विख्यात है?
(क) घोड़ों
(ख) ऊँटों
(ग) हाथियों
(घ) सामान
उत्तर :
(ग) हाथियों

3. दानापुर और ……………….. उड़ गए।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. जगदीशपुर का पतन क्यों हुआ?
2. कुंवर सिंह की सेना के हारने पर कँवर सिंह पर क्या प्रभाव पड़ा?
3. कुंवर सिंह कहाँ से कहाँ जा पहुँचे?
4. कुंवर सिंह की वीरता और यात्रा का अंग्रेजों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
1. जगदीशपुर के पतन के कई कारण थे –

  • देशी सैनिकों में अनुशासन की कमी
  • स्थानीय जमींदारों का अंग्रेजों का साथ देना
  • आधुनिक शस्त्रों की कमी।

2 कुंवर सिंह की सेना 13 अगस्त को अंग्रेजों से हार गई पर इस हार का कुंवर सिंह पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा। उनका आत्मबल नहीं टूटा। वे अगली योजना बनाने में जुट गए।
3. कुंवर सिंह सासाराम से मिर्जापुर होते हुए रीवा, कालपी, कानपुर, लखनऊ तक गए। लखनऊ की अशांति को देख कर वे आजमगढ़ की ओर चले गए।
4. कुंवर सिंह की वीरता और उनकी विजय-यात्रा ने अंग्रेजों के होश उड़ा दिए।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. जगदीशपुर का पतन का कारण था
(क) सैनिकों में अनुशासन की कमी
(ख) जमींदारों का अग्रेजों के साथ सहयोग करना
(ग) नए शस्त्रों की कमी
(घ) ये सभी कारण
उत्तर :
(घ) ये सभी कारण

2. अंग्रेजों से परास्त होने पर कुंवर सिंह का आत्मबल
(क) टूट गया
(ख) बढ़ गया
(ग) जाँचा गया
(घ) ठीक रहा
उत्तर :
(ख) बढ़ गया

3. लखनऊ से कुंवर सिंह ने कहाँ प्रस्थान किया?
(क) आजमगढ़
(ख) कानपुर
(ग) मिर्जापुर
(प) कही नहीं
उत्तर :
(क) आजमगढ़

4. ‘वीरता’ में ‘ता’ क्या है?
(क) उपसर्ग
(ख) प्रत्यय
(ग) मूलशब्द
(घ) अन्य
उत्तर :
(ख) प्रत्यय

4. स्वाधीनता सेनानी …………………….. प्रचलित हैं।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. कुंवर सिंह किस विद्या में कुशल थे?
2. उनके रण-कौशल को समझने में कौन असमर्थ थे?
3. उन्होंने अंग्रेजों के साथ क्या किया?
4. क्या बात इतिहास के पृष्ठों पर ऑकत है?
उत्तर:
1. कुंवर सिंह युद्ध कला में अत्यंत कुशल थे। वे छापामार युद्ध में तो बहुत कुशल थे।
2. कुंवर सिंह के रण-कौशल को पूरी तरह समझने में अंग्रेजी सेनापति भी पूरी तरह असमर्थ थे।
3. उन्होंने अंग्रेजों को मौत के घाट उतार दिया। अंग्रेजों को या तो युद्धस्थल से भाग जाना पड़ता था या वे मारे जाते
4. वीर कुंवर सिंह ने अंग्रेजी सेना को जिस तलवार की धर से मौत के घाट उतारा उसकी चमक आज भी भारतीय इतिहास के पृष्ठों पर अंकित है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. कुंवर सिंह युद्धकला में कैसे थे?
(क) कुशल
(ख) अकुशल
(ग) ठीक-ठीक
(घ) पता नहीं
उत्तर :
(क) कुशल

2. अंग्रेजी सेनानायक क्या समझने में असमर्थ थे?
(क) कुंवर सिंह की चालों को
(ख) युद्ध कला को
(ग) कुंवर सिंह के रण कौशल को
(घ) कुंवर सिंह को
उत्तर :
(ग) कुंवर सिंह के रण कौशल को

3. ‘अंकित’ शब्द में कौन-सा प्रत्यय है?
(क) अंक
(ख) कित
(ग) इत
(घ) त
उत्तर :
(ग) इत

4. ‘मौत के घाट उतारा’ का सही अर्थ है
(क) मार दिया
(ख) नदी घाट पर छोड़ दिया
(ग) घाट के पार भेजा
(घ) मौत के निकट ला दिया।
उत्तर :
(क) मार दिया

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5. वीर कुंवर ……………………… जाती है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. वीर कुंवर सिंह ने क्या-क्या काम किए?
2 कुंवर सिंह के व्यक्तित्व में अन्य क्या-क्या गुण थे?
3. उनकी धर्मनिरपेक्षता किन कामों से पता चलती है?
4. कुंवर सिंह की लोकप्रियता का पता किससे चलता है?
उत्तर:
1. वीर कुंवर सिंह ने निम्नलिखित काम किए-

  • ब्रिटिश हुकूमत से टक्कर ली।
  • आरा स्कूल के लिए जमीन दान दी।
  • गरीबों की आर्थिक मदद की।
  • सड़कें बनवाई।
  • कुएँ खुदवाए।
  • तालाब बनवाए।

2 कुंवर सिंह के व्यक्तित्व में वीरता के अलावा उदारता एवं संवेदनशीलता के गुण विद्यमान थे।
3. कुंवर सिंह की धमनिरपेक्षता इन कामों से पता चलती है-

  • उनकी सेना में हिंदुओं के साथ-साथ मुसलमान भी उच्च पदों पर आसीन थे।
  • उन्होंने पाठशालाओं के साथ मकतब (मदरसे) भी बनवाए।
  • उनके यहाँ हिंदुओं और मुसलमानों के सभी त्योहार एक साथ मिलकर मनाए जाते थे।

4. वीर कुंवर सिंह की लोकप्रियता का पता उन गीतों से मिलता है जो बिहार की लोकभाषाओं में उनकी प्रशस्ति के रूप में गाए जाते हैं।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. ‘सामाजिक’ शब्द में किस प्रत्यय का प्रयोग है?
(क) समाज
(ख) जिक
(ग) इक
(घ) क
उत्तर :
(ग) इक

2. कुंवर सिंह की आर्थिक स्थिति कैसी थी?
(क) अच्छी
(ख) बहुत अच्छी
(ग) बहुत अच्छी नहीं
(घ) सामान्य
उत्तर :
(ग) बहुत अच्छी नहीं

3. कुंवर सिंह किस प्रकार के व्यक्ति थे?
(क) उदार
(ख) संवेदनशील
(ग) परोपकारी
(घ) ये सभी प्रकार
उत्तर :
(घ) ये सभी प्रकार

4. कुंवर सिंह की प्रशस्ति का गायन किन में होता है?
(क) बिहार के लोकगीतों में
(ख) दिल्ली की सभाओं में
(ग) पाठशालाओं में
(घ) जन-जन में
उत्तर :
(क) बिहार के लोकगीतों में

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वीर कुवर सिंह Summary in Hindi

वीर कुवर सिंह पाठ का सार

1857 के स्वतंत्रता सेनानियों में ठाकुर कुँवर सिंह का नाम उल्लेखनीय है। सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता ‘खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी’ में भी उनके नाम का उल्लेख है। 1857 के सशस्त्र विद्रोह ने भारत में ब्रिटिश शासन की जड़ों को हिलाकर रख दिया था।

मार्च, 1857 में बैरकपुर में अंग्रेजों के विरुद्ध बगावत करने पर 8 अप्रैल, 1857 को मंगल पांडे को फाँसी दे दी गई थी। 10 मई, 1857 को मेरठ में भारतीय सैनिकों ने दिल्ली ‘के सैनिकों के साथ मिलकर 11 मई को दिल्ली पर कब्जा कर लिया था और अंतिम मुगल शासक बहादुरशाह जफर को भारत का शासक घोषित कर दिया था।

इस विद्रोह की आग दूर-दूर तक फैल गई। दिल्ली के अलावा कानपुर, लखनऊ, बरेली, बुंदेलखंड और आरा में भी भीषण युद्ध हुआ। इस विद्रोह में भाग लेने वाले प्रमुख नेता थे-नाना साहेब, तात्या टोपे, बख्त खान, अजीमुल्ला खाँ, रानी लक्ष्मीबाई, बेगम हजरत महल, कुँवर सिंह, मौलवी अहमदुल्लाह, बहादुर खान और राव तुलाराम। भारत में सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ाने में इस आंदोलन की बड़ी भूमिका थी।

वीर कुंवर सिंह के बचपन के बारे में अधिक जानकारी नहीं मिलती। उनका जन्म बिहार में शाहाबाद जिले के जगदीशपुर में सन् 1782 में हुआ था। उनके पिता का नाम साहबजादा सिंह और माता का नाम पंचरतन कुँवर था। उनके पिता जगदीशपुर रियासत के जमींदार थे। उनके पिता वीर एवं स्वाभिमानी तथा उदार स्वभाव के थे।

उनके व्यक्तित्व का असर कुंवर सिंह पर भी पड़ा। कुँवर सिंह की शिक्षा-दीक्षा घर पर ही हुई। उन्होंने हिंदी, संस्कृति एवं फारसी भाषाएँ सीखीं, पर उनका मन पढ़ाई की जगह घुड़सवारी, तलवारबाजी एवं कुश्ती में लगता था। पिता की मृत्यु के बाद 1827 में कुंवर अली ने रियासत की जिम्मेदारी संभाली। उन दिनों ब्रिटिश सरकार के अत्याचार चरम सीमा पर थे। कुंवर सिंह ने ब्रिटिश हकूमत से टक्कर लेने का निश्चय किया।

जगदीशपुर के जंगलों में ‘बसुरिया बाबा’ नाम के एक सिद्ध संत रहते थे। उन्होंने कुंवर सिंह के मन में देशभक्ति और स्वाधीनता की भावना उत्पन्न की थी। उन्होंने अनेक स्थानों पर जाकर विद्रोह की योजनाएँ बनाईं। उन्होंने बिहार के सोनपुर मेले को अपनी गुप्त बैठकों की योजना के लिए चुना। यह मेला कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगता है। 25 जुलाई, 1857 को दानापुर की सैनिक टुकड़ी ने विद्रोह कर दिया। सैनिक कुंवर सिंह का जयघोष करते हुए आरा पहुँच गए और वहाँ की जेल की सलाखें तोड़ दीं। कैदी आजाद हो गए। 27 जुलाई, 1857 को कुंवर सिंह ने आरा पर विजय प्राप्त की।

आरा क्रांति का महत्त्वपूर्ण केंद्र बन गया। जमींदारों ने अंग्रेजों का साथ दिया। अत: जगदीशपुर के पतन को रोका न जा सका। 13 अगस्त को जगदीशपुर में कुंवर सिंह की सेना हार गई, पर कुंवर सिंह का आत्मबल न टूटा। वे आगे की योजनाएँ बनाने में जुट गए। उन्होंने आजमगढ़ की ओर प्रस्थान किया। इससे अंग्रेजों के होश उड़ गए।

अंग्रेजों और कुँवर सिंह के बीच घमासान युद्ध हुआ। उन्होंने 22 मार्च, 1858 को आजमगढ़ पर कब्जा कर लिया। वे 23 अप्रैल, 1858 को विजय पताका फहराते हुए जगदीशपुर पहुँच गए। लोगों ने विजय-उत्सव मनाते हुए यूनियन जैक को उतार कर अपना झंडा फहरा दिया। इसके तीन दिन बाद ही 26 अप्रैल, 1858 को यह वीर इस संसार से विदा हो गया।

कुँवर सिंह युद्धकला में पूरी तरह कुशल थे। उन्हें छापामार युद्ध में महारत हासिल थी। 1857 में उन्होंने तलवार की जिस धार से अंग्रेजी सेना को मौत के घाट उतारा था, उसकी चमक आज तक भारतीय इतिहास के पृष्ठों पर अंकित है। कहा जाता है एक बार कुंवर सिंह को अपनी सेना के साथ गंगा पार करनी थी। अंग्रेजी सेना उनका पीछा कर रही थी। कँवर सिंह भी कम चतुर नहीं थे। उन्होंने अफवाह फैला दी कि वे अपनी सेना को बलिया के पास हाथियों पर चढ़ाकर पार कराएंगे।

अंग्रेज सेनापति डगलस बलिया के गंगा-तट पर जा पहुँचा। कुँवर सिंह ने बलिया से सात मील दूर शिवराजपुर नामक स्थान पर सेना नावों से पार करा दी। डगलस मन मसोसकर रह गया। अंतिम नाव पर कुँवर सिंह थे। डगलस ने गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी। एक गोली उनके बाएँ हाथ की कलाई को भेदती निकल गई। कुंवर सिंह ने बाएँ हाथ को काटकर गंगा मैया को अर्पित कर दिया।

वीर कुंवर सिंह ने अनेक सामाजिक काम भी किए। आरा स्कूल के लिए जमीन दान दी, स्कूल भवन का निर्माण कराया। आर्थिक स्थिति अच्छी न होने पर भी वे गरीबों की सहायता करते थे। उन्होंने आरा-जगदीशपुर सड़क तथा आरा-बलिया सड़क का निर्माण भी कराया। उन्होंने अनेक कुएँ खुदवाए तथा तालाब बनवाए। वे एक संवेदनशील व्यक्ति थे। उनके यहाँ हिंदुओं और मुसलमानों के सभी त्योहार मिलकर मनाए जाते थे। लोकगीतों में उनका गुणगान आज भी किया जाता है।

वीर कुवर सिंह शब्दार्थ

विद्रोह = बगावत (Revolt)। घोषित = घोषणा करना (Declared)। भीषण = भयंकर (Terrible)। निर्मित = बना हुआ (Constructed)। पारिवारिक = परिवार की (Family)। स्वाभिमानी = आत्मसम्मानी (Self respectful)। व्यवस्था = इंतजाम (Arrangement)। गुप्त = छिपा हुआ (Secret)। तत्पर = तैयार (Ready)। विजय = जीत (Victory)। पताका = झंडा (Flag)। रणकौशल = युद्ध कुशलता (Efficiency in war)। चतुर – होशियार (Clever)। जलाशय = तालाब (Pond)। संवेदनशील = संवेदना वाला (Sensitive)। शौर्य = वीरता (Bravery)

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