Class 10

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु Important Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
धातुओं के कुछ भौतिक गुण लिखिए। (RBSE 2017)
उत्तर-
धातुएँ भारी, चमकदार, तन्य तथा आघातवर्ध्य होती हैं। ये ऊष्मा और विद्युत की सुचालक होती हैं।

प्रश्न 2.
आघातवर्ध्यता से क्या तात्पर्य है? –
उत्तर-
किसी पदार्थ को हथौड़े से पीटने पर पतली चादर में परिवर्तित हो जाने के गुण को आघातवर्ध्यता कहते हैं।

प्रश्न 3.
कौन-सी धातु सामान्य ताप पर तरल होती है? (RBSE 2016)
उत्तर-
पारा (Hg)।

प्रश्न 4.
एक्वा-रेजिया क्या है?
उत्तर-
एक्वा रेजिया सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं सान्द्र नाइट्रिक अम्ल को 3 : 1 के अनुपात में मिलाकर बना ताजा मिश्रण है जो सोने व प्लैटिनम को गला सकता है।

प्रश्न 5.
तरल अधातु का नाम बताइए।
उत्तर-
ब्रोमीन।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में सबसे कम क्रियाशील धातुओं को छाँटिए-K, Zn, Ag,Au
उत्तर-
Au.

प्रश्न 7.
आयनिक यौगिकों के कठोर होने का क्या कारण है?
उत्तर-
धनात्मक एवं ऋणात्मक आयनों के बीच मजबूत आकर्षण बल के कारण आयनिक यौगिक ठोस एवं थोड़े कठोर होते हैं।

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प्रश्न 8.
किसी शुद्ध धातु की अपेक्षा उसके मिश्रातु की विद्युत चालकता एवं गलनांक कैसा होता है?
उत्तर-
विद्युत चालकता एवं गलनांक कम होता है।

प्रश्न 9.
किन्हीं दो धातुओं के नाम लिखिए जो हाइड्रोजन से संयुक्त होकर हाइड्राइड बना सकती हैं।
उत्तर-
सोडियम (Na) तथा कैल्सियम (Ca)।

प्रश्न 10.
दो ऑक्साइडों के नाम लिखिए जो न तो अम्लीय हैं और न ही क्षारीय।
उत्तर-
कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) तथा नाइट्रस ऑक्साइड (N2O)।

प्रश्न 11.
किस अधातु का गलनांक तथा क्वथनांक उच्च होता है तथा वह अत्यन्त कठोर भी होती है ?
उत्तर-
हीरा (कार्बन)।

प्रश्न 12.
नाइट्रोजन व क्लोरीन परमाणुओं का इलैक्ट्रोनिक विन्यास लिखिए। (RBSE 2016)
उत्तर-
नाइट्रोजन — परमाणु क्रमांक 7 (2, 5)
क्लोरीन – परमाणु क्रमांक 17 (2, 8, 7)

प्रश्न 13.
नाइट्रोजन व क्लोरीन परमाणुओं के मध्य इलैक्ट्रॉनों के स्थानान्तरण से सोडियम क्लोराइड का बनना दर्शाइए। (RBSE 2017)
उत्तर-
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प्रश्न 14.
मिश्रातु क्या होती है?
उत्तर-
किसी धातु का अन्य धातु या अधातु से बना समांगी मिश्रण मिश्रातु कहलाता है।

प्रश्न 15.
अधातुएँ विद्युत का चालन क्यों नहीं करती हैं?
उत्तर-
अधातुओं के पास मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होते, इस कारण से ये विद्युत का चालन नहीं करती हैं। ये इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करती हैं तथा ऋणायन बनाती हैं।

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प्रश्न 16.
गोल्ड तथा सिल्वर प्रकृति में स्वतन्त्र अवस्था में क्यों पाए जाते हैं?
उत्तर-
गोल्ड तथा सिल्वर बहुत ही कम अभिक्रियाशील हैं, इसलिए ये स्वतंत्र अवस्था में पाए जाते हैं।

प्रश्न 17.
अभी तक कितने तत्व ज्ञात हैं? किन दो वर्गों में इन सभी तत्वों को बाँटा जा सकता है?
उत्तर-
अभी तक कुल 114 तत्व ज्ञात हैं। इन तत्वों को इनके गुणों के आधार पर धातुओं और अधातुओं में बाँटा जा सकता है।

प्रश्न 18.
वायु में रहने पर ऐलुमिनियम की सतह पर कौन-सी परत बन जाती है? इस परत का क्या उपयोग है?
उत्तर-
वायु में रहने पर ऐलुमिनियम की सतह पर ऐलुमिनियम ऑक्साइड की परत बन जाती है। यह परत धातु को संक्षारित होने से बचाती है।

प्रश्न 19.
धातु तथा अधातु किस प्रकार अभिक्रिया करते हैं?
उत्तर-
धातु तथा अधातु एक धातु से दूसरी अधातु पर इलेक्ट्रॉनों के स्थानान्तरण द्वारा अभिक्रिया करते हैं। .धातुओं का निष्कर्षण (Extraction of Metals)

प्रश्न 20.
अयस्क के संवर्धन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
खनिजों से अवांछित अशुद्धियों को दूर करना अयस्कों का संवर्धन कहलाता है।

प्रश्न 21.
उन धातुओं के नाम बताइए जो अपचायक की भाँति प्रयोग पाई जाती हैं।
उत्तर-
उच्च याशील धातुएँ, जैसे-सोडियम, कैल्सियम अपचायक की भाँति प्रयोग में लाई जाती हैं।

प्रश्न 22.
धातु ऑक्साइड का ऐलुमिनियम चूर्ण द्वारा अपचयित होना कौन-सा प्रक्रम कहलाता है?
उत्तर-
ऐलुमिनियम चूर्ण द्वारा धातु ऑक्साइड का अपचयन ऐलुमिनो थर्मिट प्रक्रम अथवा थर्मिट प्रक्रम कहलाता है।

प्रश्न 23.
पृथ्वी की सतह पर सबसे अधिक पायी जाने वाली धातु का नाम बताइए। इस धातु के महत्त्वपूर्ण अयस्क का नाम लिखिए।
उत्तर-
ऐलुमिनियम। इसका महत्त्वपूर्ण अयस्क बॉक्साइट है।

प्रश्न 24.
अशुद्ध धातुओं के शोधन में सर्वाधिक प्रयुक्त होने वाली विधि कौन-सी है?
उत्तर-
विद्युत-अपघटनी शोधन।

प्रश्न 25.
विद्युत-अपघटनी शोधन द्वारा शुद्ध की जाने वाली प्रमुख धातुएँ कौन-सी हैं?
उत्तर-
कॉपर, जिंक, टिन, निकिल, सिल्वर तथा सोना।

प्रश्न 26.
कॉपर के एक अयस्क का नाम लिखिए।
उत्तर-
क्यूप्रस सल्फाइड (Cu2S)।

प्रश्न 27.
विद्युत-अपघटनी परिष्करण द्वारा परिष्कृत की जाने वाले तीन धातुओं के नाम लिखिए।
उत्तर-
ताँबा (Cu), चाँदी (Ag), टिन (Sn).

प्रश्न 28.
उन धातु ऑक्साइडों के नाम बताइए जो कार्बन के साथ गर्म किए जाने पर धात्विक अवस्था में अपचयित नहीं होते हैं।
उत्तर-
Cr2O3, Mn3O4 अपचायक Al है।

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प्रश्न 29.
गालक से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
गालक वे पदार्थ हैं जो अयस्क में उपस्थित अम्लीय अशुद्धियों को गलनीय पदार्थों में परिवर्तित कर देते हैं।

प्रश्न 30.
निस्तापन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
निस्तापन वह प्रक्रम है जिसमें कार्बोनेट अयस्क को वायु की अनुपस्थिति में गर्म किया जाता है।

प्रश्न 31.
सोने के आभूषणों में ताँबा क्यों मिलाया जाता है?
उत्तर-
शुद्ध सोना मुलायम होता है जिससे आभूषण नहीं बनाये जा सकते, इस कारण सोने को कठोरता प्रदान करने के लिए सोने में थोड़ा ताँबा मिलाया जाता है।

प्रश्न 32.
पीतल के अवयव घटक लिखिए।
उत्तर-
ताँबा तथा जस्ता।

प्रश्न 33. नाइट्रोजन के ऑक्साइड के नाम लिखिए।
उत्तर-
नाइट्रोजन के तीन ऑक्साइड N2O, NO एवं NO2, हैं।

प्रश्न 34.
पीतल किन धातुओं से मिलकर बनती है?
उत्तर-
पीतल कॉपर व जिंक धातु से मिलकर बनती है।

प्रश्न 35.
किस प्रकार के अयस्कों का भर्जन करते है?
उत्तर-
सल्फाइड अयस्कों का भर्जन करते हैं जिससे ये ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं।

प्रश्न 36.
धातुकर्म के विभिन्न पदों को लिखें।
उत्तर-
धातुकर्म के विभिन्न पद निम्न हैं –

  1. अयस्क का पीसना (Pulverisation)
  2. सान्द्रण (Concentration)
  3. अपचयन (Reduction)
  4. शोधन (Purification)।

प्रश्न 37.
किसी एक अम्लीय व क्षारीय गालक का उदाहरण दें।
उत्तर-
अम्लीय गालक – SiO2
क्षारीय गालक – CaO.

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
तत्वों को धातुओं अथवा अधातुओं में वर्गीकृत करते समय विचारणीय गुण बताइए।
उत्तर-
तत्वों को धातुओं एवं अधातुओं में वर्गीकृत करते समय निम्नलिखित गुण आवश्यक रूप से विचारणीय होते-

  • चमक,
  • चालकता,
  • कठोरता,
  • वायु में जलना,
  • तन्यता,
  • ध्वनि,
  • अम्लों व जल के साथ अभिक्रिया।

प्रश्न 2.
उपधातुएँ क्या हैं? किन्हीं पाँच उपधातुओं के नाम लिखिए।
उत्तर-
कुछ पदार्थ धातु और अधातु दोनों के गुण प्रदर्शित करते हैं, ऐसे पदार्थों को उपधातु कहते हैं। निम्नलिखित पाँच धातुएँ उपधातुएँ हैं आर्सेनिक (As), पोलोनियम (Po), सिलिकॉन (Si), एंटीमनी (Sb), टेलुरियम (Te)।

प्रश्न 3.
जल में विलेय धातु ऑक्साइडों के उदाहरण दीजिए। जल में घोलने पर धातु ऑक्साइड क्या बनाते हैं?
उत्तर-
सोडियम ऑक्साइड तथा पोटैशियम ऑक्साइड जल में विलेय धातु ऑक्साइड हैं।
Na2O(s)+H2O(l) → 2NaOH
K2O (s) + H2O (l) → 2KOH
धातु ऑक्साइड जल में विलेय होकर क्षार बनाते हैं।

प्रश्न 4.
टाइटेनियम धातु की विशेषता क्या है जिसके कारण इसे सामरिक महत्त्व की धातु कहा जाता है?
उत्तर-
टाइटेनियम धातु अल्प अभिक्रियाशील धातु है इसकी तनाव सहने की क्षमता अत्यधिक होती है, यही कारण है कि इसका प्रयोग नाभिकीय संयन्त्रों, सैन्य उपकरणों, गैस टरबाइनों व जेट इंजनों आदि में होता है। यह धातु शीघ्रता से क्षरित नहीं होती है।

प्रश्न 5.
निम्न अभिक्रियाओं का समीकरण लिखिए
(i) भाप के साथ आयरन की क्रिया
(ii) जल के साथ कैल्सियम तथा पोटैशियम।
उत्तर-
(i) आयरन धातु भाप के साथ क्रिया करके आयरन ऑक्साइड व हाइड्रोजन बनाती है।
3Fe (s) +4H2O (g) → Fe3O4(s) +4H2 (g)
(ii) जल के साथ कैल्सियम व पोटैशियम की क्रिया होने पर सम्बन्धित हाइड्रॉक्साइड बनते हैं तथा हाइड्रोजन गैस निकलती है।
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प्रश्न 6.
सक्रियता श्रेणी किसे कहते हैं? इसकी एक उपयोगिता लिखें।
उत्तर-
सक्रियता श्रेणी (Activity series) धातुओं की क्रियाशीलता को अवरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर जो सूची (श्रेणी) प्राप्त होती है, उसे सक्रियता श्रेणी कहते हैं। सक्रियता श्रेणी निम्नवत् है-
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उपयोगिता-इसकी सहायता से हमें तत्वों की क्रियाशीलता की जानकारी होती है।

प्रश्न 7.
विभिन्न धातुओं की जल के साथ अभिक्रियाओं का वर्णन करो। ..
उत्तर-
विभिन्न धातुओं की जल साथ अभिक्रियाएँ निम्नवत् हैं
(i) सोडियम धातु जल के साथ ताव अभिक्रिया करके सोडियम हाइड्रॉक्साइड तथा हाइड्रोजन बनाती है।
2Na (s) +2H2O(l) → 2NaOH (aq)+H2 (g)
(ii) मैग्नीशियम धातु ठण्डे जल की बजाय गर्म जल से अभिक्रिया करके मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड तथा हाइड्रोजन बनाती है।
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ऐलुमिनियम ठण्डे व गर्म जल से अभिक्रिया नहीं करता है परन्तु यह भाप के साथ अभिक्रिया करके ऐलुमिनियम ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन बनाता है।
2Al (s) +3H2O (g) → Al2O3 (s) +3H2 (g)
रक्त तप्त आयरन भाप से अभिक्रिया करके आयरन (II, III) ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन बनाता है।
3Fe (s) +4H2O (g) → Fe3O4(s) +4H2 (g)
धातुएँ, जैसे-लैड, कॉपर, गोल्ड, चाँदी, जल के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं।

प्रश्न 8.
(a) निम्नलिखित अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण लिखिए
(i) कैल्सियम धातु जल से अभिक्रिया करती है।
(ii) सिनाबार को वायु की उपस्थिति में गर्म किया जाता है।
(iii) मैंगनीज डाइऑक्साइड को ऐलुमिनियम पाउडर के साथ गर्म किया जाता है।
(b) मिश्रधातु क्या हैं? मिश्रधातुओं के दो गुणधर्मों की सूची बनाइए। (CBSE 2019)
उत्तर-
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(b) दो या दो से अधिक धातुओं अथवा एक धातु व एक अधातु के समांगी मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं।

मिश्रधातु के दो गुणधर्म-
(i) मिश्रधातु धातुओं की तुलना में अधिक शक्तिशाली होती है।
(ii) मिश्रधातु वायु में रखने पर संक्षारित नहीं होती है।

प्रश्न 9.
अधातु क्या हैं ? इनका दैनिक जीवन में क्या महत्त्व है?
उत्तर-
वे तत्व जो धातुओं की तरह व्यवहार नहीं करते हैं, अधातु कहलाते हैं। कमरे के ताप पर अधातुएँ या तो ठोस होती हैं या गैस। इनमें केवल ब्रोमीन ही द्रव रूप में होती है। हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, सल्फर, क्लोरीन आदि अधातुओं के उदाहरण हैं।

दैनिक जीवन में अधातुओं का महत्त्व-

  • वायु में ऑक्सीजन की उपस्थिति से ही हम सभी साँस लेते हैं तथा यह गैस ज्वलन में सहायक होती है।
  • हाइड्रोजन का उपयोग वनस्पति घी एवं अमोनिया के निर्माण में किया जाता है।
  • नाइट्रोजन का उपयोग अमोनिया, उर्वरकों तथा नाइट्रिक अम्ल के उत्पादन में किया जाता है।
  • सल्फर का उपयोग बारूद बनाने में तथा कवकनाशी दवाइयाँ बनाने में किया जाता है।

प्रश्न 10.
मिश्रधातु किसे कहते हैं? इसके बनाने के उद्देश्यों का वर्णन कीजिए। अथवा मिश्रधातु किसे कहते हैं? दो उदाहरण दीजिए। (RBSE 2017)
उत्तर-
मिश्रधातु या मिश्रातु-किसी धातु का अन्य धातु या अधातु के साथ मिलकर बनाया गया समांगी मिश्रण, मिश्रातु कहलाता है। उदाहरण के लिए; पीतल, कांसा, सोल्डर, स्टील आदि सभी मिश्रातु हैं।

मिश्रातुओं के उपयोग-

  1. मिश्रातु बनाने से कठोरता बढ़ जाती है, जैसे-लोहे में कार्बन की मात्रा मिलाकर स्टेनलेस स्टील बनाया जाता है जो लोहे से अधिक कठोर होता है। सोने में ताँबा मिलाने से उसकी कठोरता बढ़ जाती है।
  2. संक्षारण रोकने के लिए मिश्रातु उपयोगी है, जैसे-लोहे तथा जिंक से बनी मिश्रातु पर जंग नहीं लगता।
  3. घरों में मिश्रातुओं का उपयोग बहुत अधिक होता है। घरों के बर्तन, पंखे, अलमारी आदि में मिश्रातुओं का प्रयोग होता है।

प्रश्न 11.
निम्नलिखित की व्याख्या कीजिए
(a) सोडियम क्लोराइड एक आयनी यौगिक है जो ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करता है जबकि यह पिघली अवस्था के साथ-साथ जलीय विलयन में विद्युत का चालन करता है।
(b) नाइट्रिक अम्ल में डुबोने पर ऐलुमिनियम की सक्रियता कम हो जाती है।
(c) कैल्सियम और मैग्नीशियम जैसी धातुएँ प्रकृति में मुक्त अवस्था में नहीं पायी जाती हैं। (CBSE 2019)
उत्तर-
(a) सोडियम क्लोराइड ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करता परन्तु पिघली अवस्था के साथ-साथ जलीय विलयन में विद्युत का चालन करता है क्योंकि सोडियम क्लोराइड के आयन उसकी कठोर संरचना के कारण गतिशील नहीं होते। विद्युत चालन के लिए आयनों का गतिशील होना आवश्यक है। पिघली और जलीय अवस्था में आयन गति के लिए मुक्त होते हैं अतः वे विद्युत संचालित करते हैं।

(b) नाइट्रिक अम्ल एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक है इसलिए ऐलुमिनियम को इसमें डुबाने पर, ऐलुमिनियम ऑक्साइड की परत जम जाती है, जिसके कारण इसकी सक्रियता कम हो जाती है।

(c) कैल्सियम और मैग्नीशियम धातुएँ प्रकृति में मुक्तावस्था में नहीं पाई जाती हैं क्योंकि अधिक क्रियाशील होने के कारण ये अन्य तत्वों के साथ अभिक्रिया करके यौगिकों का निर्माण करती हैं।

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प्रश्न 12.
सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित धातुओं के निष्कर्षण की विधि, सक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित धातुओं के निष्कर्षण की विधि से किस प्रकार भिन्न है? उनके लिए भी समान प्रक्रिया क्यों नहीं अपनायी जाती है? इन धातुओं के निष्कर्षण की प्रक्रिया का नाम लिखिए। (CBSE 2019)
उत्तर –

सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित धातुओं का निष्कर्षण (K, Na, Ca, Mg तथा AI)सक्रियता श्रेणी में मध्य में स्थित धातुओं का निष्कर्षण (Zn, Fe, Pb)
1. इस प्रकार की धातुएँ बहुत अधिक क्रिया- शील होती हैं।1. इस प्रकार की वस्तुएँ मध्यम क्रियाशील होती हैं।
2. इन धातुओं को वैद्युत अपघटन विधि द्वारा प्राप्त किया जाता है।2. इन धातुओं के यौगिकों(कार्बोनेट तथा सल्फा- इड) के पहले ऑक्साइड में बदला जाता है फिर उनका अपघटन करके धातु को प्राप्त किया जाता है। इस प्रक्रिया को निस्तापन या भर्जन कहा जाता है।

इन धातुओं के लिए समान प्रक्रिया नहीं अपनाई जा सकती क्योंकि सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित धातुओं के ऑक्साइडों को कार्बन के साथ अपघटित नहीं किया जा सकता। कार्बन के साथ अपघटित होने की अवस्था में ये धातुएँ कार्बन से क्रिया करके कार्बाइड यौगिक बना देंगी जिससे हम धातु प्राप्त नहीं कर पाएंगे।

प्रश्न 13.
वात्या भट्टी में हेमेटाइट अयस्क से आयरन के निष्कर्षण में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
लोहे के अयस्क, कोक, चूने के पत्थर को भट्टी में एक साथ रखकर उच्च ताप दिया जाता है। इस उच्च ताप के कारण चूने का पत्थर निम्न रासायनिक अभिक्रिया के रूप में विघटित हो जाता है-
CaCO3 → CaO+CO2,
कैल्सियम ऑक्साइड, सिलिकन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करता है तथा कैल्सियम सिलिकेट द्रवित रूप में बनाता है।
CaO + SiO2 → CaSiO3
इस प्रकार प्राप्त सिलिकन ऑक्साइड से मुक्त लोहे के ऑक्साइड का अपचयन हो जाता है।

प्रश्न 14.
धातु शोधन की गलनिक पृथक्करण विधि क्या है?
उत्तर-
धातु शोधन की इस विधि में एक ढलावदार भट्टी का प्रयोग किया जाता है, अशुद्ध धातु को भट्टी के ऊपरी भाग में एक जाली के ऊपर रखा जाता है। भट्टी के ताप को इस प्रकार बढ़ाया जाता है कि वह गलनांक के ऊपर स्थिर रहे। ताप के कारण धातु पिघलकर नीचे आ जाती है तथा अशुद्धियाँ जाली पर शेष रह जाती हैं। टिन, लेड बिस्मथ आदि धातुएँ इसी प्रकार शोधित की जाती हैं।

प्रश्न 15.
खनिज तथा अयस्क में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-

खनिजअयस्क
1. उन प्राकृतिक पदार्थों को जिनमें धातुओं के यौगिक पाए जाते हैं, खनिज कहलाते हैं।1. जिन खनिजों से धातुएँ सुविधापूर्वक प्राप्त की जा सकती हैं, उन्हें अयस्क कहते हैं।
2. कुछ खनिजों में आपत्तिजनक अशुद्धियाँ होती हैं जो धातु के निष्कर्षण को बाधित करती हैं।2. इनमें किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक अशुद्धि नहीं होती है।
3. सभी खनिजों को धातु निष्कर्षण के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता।3. सभी अयस्कों को धातु निष्कर्षण के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है।

प्रश्न 16.
कुछ आयनिक यौगिकों के नामों को उनके सूत्र तथा उनमें उपस्थित आयनों के साथ लिखिए। .
उत्तर-
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प्रश्न 17.
Ca, Pb,AI,Na,Mg एवं Cuमें से किन-किन धातुओं को विद्युत अपघटनी विधि द्वारा निष्कर्षित किया जाता है और क्यों?
उत्तर-
ऐसी धातुएँ जो अत्यधिक क्रियाशील एवं अत्यधिक धनविद्युती प्रकृति की होती हैं वह अच्छी अपचायक होती हैं। अतः ऐसी धातुओं का निष्कर्षण रासायनिक अपचयन द्वारा नहीं किया जा सकता है। इनका निष्कर्षण केवल विद्युत अपघटनी विधि से ही करते हैं। इस कारण Ca, AI, Na तथा Mg का निष्कर्षण विद्युत अपघटनी विधि से करते हैं।

प्रश्न 18.
प्रमुख मिश्रातुओं के नाम, उनके घटक तथा उपयोग लिखिए।
उत्तर-
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प्रश्न 19.
जंग लगाना किसे कहते हैं? लोहे पर जंग लगने की परिस्थितियों की जाँच के लिए किसी क्रियाकलाप का नामांकित आरेख सहित वर्णन कीजिए। (CBSE 2020)
उत्तर-
किसी लोहे की वस्तु को काफी समय तक नम वायु में रखने पर, इसके ऊपर भूरे रंग की आयरन ऑक्साइड की परत बनने के प्रक्रम को जंग लगना कहते हैं। (पाठ्य पुस्तक में क्रियाकलाप 3.14 देखिए)।

प्रश्न 20.
जंग लगने से बचाने के कुछ उपायों को बताइए।
उत्तर-
जंग लगने से बचाने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जाते हैं-

  1. तेल या ग्रीस की तह आदि लोहे पर जमा पीतल दी जाए तो नम वायु लोहे के सम्पर्क में नहीं आ पाती जिससे जंग नहीं लगती है।
  2. लोहे की सतह पर रंग-रोगन करके जंग लगने से बचाया जा सकता है। बसों, कारों, स्कूटर आदि पर एनमल की तह जमाई जाती है।
  3. लोहे पर जस्ते की परत जमा कर (यशदलेपन) इसे जंग लगने से बचाया जाता है, जैसे-लोहे की बाल्टियाँ, चादरों आदि पर यह प्रक्रिया अपनायी जाती है।
  4. निकिल, क्रोमियम आदि धातुओं की तह विद्युत् लेपन के द्वारा लोहे की सतह पर चढ़ाने से जंग नहीं लगती है, जैसे-वाहनों के रिम, हैंडिल आदि।

प्रश्न 21.
निस्तापन और भर्जन में अंतर बताइए।
उत्तर-
हवा की सीमित सप्लाई में अयस्क को गलन के ताप तक गर्म करके उसमें से नमी एवं वाष्पशील पदार्थों को अलग करने की क्रिया को निस्तापन कहते हैं जबकि हवा की मुक्त सप्लाई में अयस्क को गलन से कम ताप पर गर्म करके ऑक्सीकृत करना भर्जन कहलाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
धातुओं के महत्त्वपूर्ण गुणधर्म लिखिए।
उत्तर-
धातुओं के महत्त्वपूर्ण गुणधर्म निम्नलिखित हैं-

  • धातुएँ ऊष्मा व विद्युत की सुचालक होती हैं तथा लैड व पारा ऊष्मा के कुचालक होते हैं।
  • धातुओं में चमक होती है, इन पर पॉलिश की जा सकती है।
  • इनमें आघातवर्धनीयता होती है अर्थात् इन्हें पीटकर चादरों में बदला जा सकता है।
  • इनमें तन्यता होती है अर्थात् इन्हें खींचकर इनके तार बनाए जा सकते हैं।
  • इनमें कठोरता होती है परन्तु सोडियम (Na) व पोटैशियम (K) धातुएँ होकर भी नरम हैं।
  • धातुएँ सामान्य ताप पर ठोस अवस्था में रहती हैं। केवल पारा द्रव अवस्था में रहता है।
  • धातुओं का घनत्व उच्च होता है परन्तु सोडियम (Na) व पोटैशियम (K) धातुएँ हल्की हैं।
  • धातुएँ प्रबल होती हैं तथा इनके गलनांक व क्वथनांक उच्च होते हैं। परन्तु सोडियम (Na) व पोटैशियम (K) के गलनांक व क्वथनांक निम्न होते हैं।
  • धातुएँ कठोर सतह से टकराकर ध्वनि उत्पन्न करती हैं।

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु

प्रश्न 2.
धातुओं एवं अधातुओं के बीच कैसे विभेद करेंगे? (CBSE 2017)
उत्तर-
धातुओं एवं अधातुओं के गुणों में विभेद भौतिक गुणों में विभेद –
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रासायनिक गुणों में विभेद

धातुएँअधातुएँ
1. धातुओं द्वारा क्षारीय ऑक्साइड का निर्माण होता है जिसमें से कुछ क्षार बनाती हैं।1. अधातुएँ अम्लीय एवं उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं।
2. धातुएँ धनात्मक आवेश की प्रकृति की होती हैं।2. अधातुएँ ऋणात्मक आवेश की प्रकृति की होती हैं।
3. धातुएँ अपचायक हैं।3. अधातुएँ ऑक्सीकारक हैं।
4. धातुएँ जलीय विलयन में धनायन बनाती हैं।4. अधातुएँ जलीय विलयन में ऋणायन बनाती हैं।

प्रश्न 3.
धातु एवं अधातु किस प्रकार अभिक्रिया करते हैं? समझाइए।
उत्तर-
धातु एवं अधातु अपने संयोजक कक्ष में पाए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर अभिक्रिया करते हैं, उदाहरण के लिए-सोडियम का परमाणु क्रमांक 11 है अतः इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8 1 है। इसके सबसे बाहरी कक्ष में केवल 1 इलेक्ट्रॉन है। यदि यह अपना एक इलेक्ट्रॉन सबसे बाहरी कक्ष से त्याग देता है तब यह Na’ (सोडियम धनायन) प्रदान करता है। दूसरी ओर क्लोरीन का परमाणु क्रमांक 17 है जिसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8 7 है। इस प्रकार क्लोरीन के सबसे बाहरी कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हैं अतः यह 1 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अपना अष्टक पूर्ण कर सकता है। इससे क्लोराइड ऋणायन Cl प्राप्त होता है।
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प्रश्न 4.
अधातु क्या हैं? इनके रासायनिक गुणधर्मों को बताइए।
उत्तर-
जो तत्व धातुओं की तरह व्यवहार नहीं करते हैं, अधातु कहलाते हैं। हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, कार्बन, सल्फर, क्लोरीन आदि अधातुओं के उदाहरण हैं अधातुओं के रासायनिक गुणधर्म-अधातुएँ इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करके, ऋण आवेशित आयन (ऋणायन) बनाती हैं। अतः इनको ऋण विद्युत तत्व कहते हैं।
Cl+e → Cl
0+2e → O2-

(i) ऑक्सीजन से अभिक्रिया-अधातुएँ ऑक्सीजन से क्रिया करके ऑक्साइड बनाती हैं।
C(s) + O2(g) → CO2(g)
अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय या उदासीन होते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड अम्लीय ऑक्साइड है जोकि जल में घुलकर अम्ल बनाती है तथा इसका जलीय विलयन नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है।
CO2(g)+ H2O(l) → H2CO3(aq) (कार्बोनिक अम्ल)

(ii) अम्लों से क्रिया-अधातुएँ तनु अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित नहीं करती हैं। तनु अम्लों से अधातुओं द्वारा हाइड्रोजन का विस्थापन तभी सम्भव है जबकि अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न प्रोटॉनों (H+) को इलेक्ट्रॉनों की पूर्ति की जाए।
H2SO4(aq) → 2H+ (aq) + SO42-(aq)
2H+ (aq) + 2e →H2(g)
धातुएँ इलेक्ट्रान को ग्रहण करने वाली होती हैं।

(iii) क्लोरीन से अभिक्रिया-अधातुएँ क्लोरीन से अभिक्रिया करके क्लोराइड बनाती हैं। ये सह संयोजी यौगिक के रूप में होती हैं जो सामान्यतया वाष्पशील द्रव या गैस होती हैं।
P4(s) + 6Cl2(g) → 4PCl3(g) (फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड)

(iv) हाइड्रोजन से अभिक्रिया-अधातुएँ हाइड्रोजन से क्रिया करके हाइड्राइड बनाती हैं।
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 10

प्रश्न 5.
सन्तुलित रासायनिक समीकरण लिखकर व्याख्या कीजिए कि क्या होता है जब-
(i) मरक्यूरिक ऑक्साइड को गरम किया जाता है।
(ii) क्यूप्रस ऑक्साइड और क्यूप्रस सल्फाइड के मिश्रण को गरम किया जाता है।
(iii) ऐलुमिनियम की मैंगनीज डाइऑक्साइड से अभिक्रिया करायी जाती है।
(iv) फेरिक ऑक्साइड को ऐलुमिनियम के साथ अपचयित किया जाता है।
(v) जिंक कार्बोनेट का निस्तापन होता है। (CBSE 2020)
उत्तर-
(i) जब मरक्यूरिक ऑक्साइड को 300 °C पर गरम किया जाता है तो यह विघटित हो जाती है तथा पारा धातु (Hg) प्राप्त होती है।
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 11

(ii) क्यूप्रस ऑक्साइड और क्यूप्रस सल्फाइड के मिश्रण को जब ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में गरम किया जाता है तो ताँबा धातु और सल्फर डाइऑक्साइड गैस प्राप्त होते हैं।
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 12

(iii) जब ऐलुमिनियम की मैंगनीज डाइऑक्साइड से अभिक्रिया करायी जाती है तो MnO, का अपचयन होता है तथा Mn धातु प्राप्त होती है। A1 धातु एक अपचायक का कार्य करता है।
3MnO2(s) + 4AI(s) →3Mn(1) + 2Al2O3 (s)

(iv) फेरिक ऑक्साइड को जब ऐलुमिनियम के साथ अपचयित किया जाता है तो Fe2O3, का अपचयन होता है तथा पिघला हुआ तरल Fe (लोहा) धातु प्राप्त होती है।
Fe2O3 (s) + 2Al(s) → 2Fe(l) + Al2O3 (s)

(v) जिंक कार्बोनेट की विस्थापन अभिक्रिया से कार्बोनेट अयस्क, जिंक ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है।
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 13

प्रश्न 6.
(i) इलेक्ट्रॉनों के स्थानान्तरण द्वारा मैग्नीशियम क्लोराइड में आबन्ध बनना दर्शाइए तथा इस यौगिक में उपस्थित आयनों की पहचान कीजिए।
(ii) आयनी यौगिक ठोस होते हैं। इसका कारण दीजिए।
(iii) किसी धातु पर भाप की क्रिया को दर्शाने के लिए प्रायोगिक व्यवस्था का नामांकित आरेख खींचिए। (CBSE 2020)
उत्तर-
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 14
(ii) आयनी यौगिकों के विपरीत आवेशित आयन परस्पर – अधिक मात्रा के वैद्युत बल के कारण काफी पास पाए जाते हैं, इसलिए आयनिक यौगिक ठोस होते हैं।
(iii)
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 15

प्रश्न 7.
कारण बताइए-
(a) प्लेटिनम, सोना तथा चाँदी का उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है।
(b) सोडियम पोटैशियम को केरोसिन तेल के अन्दर . संग्रहित किया जाता है।
उत्तर-
(a) प्लेटिनम, सोना एवं चाँदी का उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है, क्योंकि ये धातुएँ सक्रियता श्रेणी में निम्नतम स्थान पर होती हैं तथा जल, ऑक्सीजन अथवा अम्लों से अभिक्रिया नहीं करतीं। ये संक्षारित भी नहीं होती। ये धातएँ आघातवर्ध्यनीय तथा तन्य होती हैं; इसलिए आभूषणों के विभिन्न डिजाइन सरलतापूर्वक बनाए जा सकते हैं।
(b) सोडियम एवं पोटैशियम धातु का ज्वलन ताप (Ignition Temperature) अत्यन्त ही कम होता है, वायु के सम्पर्क में आते ही यह आग पकड़ लेता है। सोडियम, पोटैशियम का वायु से सम्पर्क रोकने के लिए सोडियम एवं पोटैशियम को केरोसिन में डुबोकर रखा जाता है।

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु

प्रश्न 8.
अयस्क किसे कहते हैं? ताँबे के परिष्करण की विद्युत अपघटनी विधि का सचित्र वर्णन करें। (CBSE 2018)
उत्तर-
अयस्क (Ores)-जिन खनिजों में किसी विशेष धातुं की मात्रा अधिक रूप से होती है, जिसे निकालना लाभकारी होता है, उन्हें अयस्क कहते हैं।
तांबे के परिष्करण की विद्युत् अपघटनी विधि-इस विधि में अशुद्ध धातु को ऐनोड बनाते हैं तथा उसी धातु की शुद्ध धातु की पट्टी को कैथोड की तरह प्रयुक्त करते हैं। इन दोनों इलेक्ट्रोडों को एक उपयुक्त वैद्युत अपघटनी विश्लेषित्र में रखते हैं जिसमें उसी धातु का लवण घुला रहता है। अधिक क्षारकीय धातुएँ विलयन में रहती हैं तथा कम क्षारकीय धातुएँ ऐनोड पंक में चली जाती हैं।

उदाहरण-ताँबे का शोधन इस विधि से करते हैं। अशुद्ध कॉपर ऐनोड के रूप में तथा शुद्ध कॉपर पत्ती कैथोड के रूप में लेते हैं। कॉपर सल्फेट का अम्लीय विलयन वैद्युत अपघटनी होता है तथा वैद्युत अपघटन के परिणामस्वरूप शुद्ध कॉपर ऐनोड से कैथोड की तरफ स्थानान्तरित हो जाता है।
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 16
फफोलेदार कॉपर से अशुद्धियाँ ऐनोड पंक के रूप में जमा होती हैं। इनमें ऐण्टिमनी, सिलीनियम, टेल्यूरियम, चाँदी, सोना तथा प्लैटिनम मुख्य धातुएँ होती हैं। इस विधि से प्राप्त धातु में 99.98% शुद्धता होती है।

प्रश्न 9.
(a) थर्मिट प्रक्रिया किसे कहते हैं? इस प्रक्रिया का उपयोग कहाँ किया जाता है? इसमें होने वाली रासायनिक अभिक्रिया का सन्तुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।
(b) इस प्रक्रिया में उपयोग होने वाली धातु ऐलुमिनियम का, धातु की सक्रियता श्रेणी में स्थान कहाँ पर है?
(c) इस प्रक्रिया में उपचयित तथा अपचयित होने वाले पदार्थों के नाम लिखिए।
उत्तर-
(a) जब ऐलुमिनियम धातु को आयरन ऑक्साइड के साथ गर्म करके अभिक्रिया करवाई जाती है तो इसे थर्मिट प्रक्रिया कहते हैं। इस प्रक्रिया में गर्म तरल लोहा धातु प्राप्त होती है। इस प्रक्रिया का उपयोग रेलवे लाइनों की वैल्डिंग करके मरम्मत करने में किया जाता है।
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 17
(b) ऐलुमिनियम धातु, धातुओं की सक्रियता श्रेणी में अधिक क्रियाशील श्रेणी में आती है।
(c) इस प्रक्रिया में आयरन ऑक्साइड का अपचयन होता है तथा आयरन (लोहा) धातु प्राप्त होती है। ऐलुमिनियम धातु का उपचयन होता है और उससे Al2O3 प्राप्त होता है।

प्रश्न 10.
कार्बन, सोडियम, मैग्नीशियम तथा ऐलुमिनियम के ऑक्साइडों से इनकी निजी धातुओं को अपचयित नहीं कर सकती हैं, क्यों? धातुओं की सक्रियता श्रेणी में इन धातुओं को कहाँ रखा गया है? इन धातुओं को इनके अयस्कों से किस प्रकार प्राप्त किया जा सकता है? कोई एक उदाहरण लेकर रासायनिक समीकरणों सहित धातु को निष्कर्षित करने की प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए। (CBSE 2020)
उत्तर-
सोडियम, मैग्नीशियम तथा ऐलुमिनियम धातुएँ, कार्बन से अधिक क्रियाशील हैं, इसलिए इनके ऑक्साइड कार्बन से अपचयित नहीं हो पाते जिसके कारण ये धातुएँ प्राप्त नहीं हो पाती हैं। इन धातुओं को सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर रखा गया है क्योंकि ये अधिक क्रियाशील धातुएँ हैं। इन धातुओं को इनके अयस्कों से वैद्युत अपचयन विधि द्वारा प्राप्त किया जाता है।

ऐलुमिनियम धातु का उसके ऑक्साइड अयस्क से निष्कर्षण करना-एक विशेष प्रकार के विद्युत सैल में तरल ऐलुमिनियम ऑक्साइड में से जब विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो इसके अपचयन से हमें ऐलुमिनियम धातु तरल रूप में ऋण टर्मिनल (कैथोड) पर प्राप्त होती है।
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 18

प्रश्न 11.
कोई धातु X जिसका उपयोग थर्मिट प्रक्रिया में होता है, ऑक्सीजन में गर्म किए जाने पर कोई ऑक्साइड Y बनाती है जो प्रकृति में उभयधर्मी है। X और Y को पहचानिए। ऑक्साइड Y की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रियाओं के सन्तुलित रासायनिक समीकरण लिखिए। (CBSE 2019)
उत्तर-
जब ऐलुमिनियम को ऑक्सीजन में गर्म किया जाता है तो ऐलुमिनियम ऑक्साइड बनता है जो प्रकृति में उभयधर्मी है।
4Al2 + 3O2 → 2Al2O3
‘X’ ऐलुमिनियम धातु है।
‘Y’ ऐलुमिनियम ऑक्साइड (Al2O3) है।
ऐलुमिनियम ऑक्साइड की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया
Al2O3 + 6HCl → 2Alcl3 + 3H2O ऐलुमिनियम ऑक्साइड की सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रिया-
Al2O3 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2O

प्रश्न 12.
(a) आयनिक यौगिकों के कोई दो भौतिक गुण कारण सहित लिखिए।
(b) दो ऐसी धातुओं के नाम लिखिए जो पृथ्वी की ऊपरी परत में स्वतंत्र रूप में पाई जाती हैं। वह धातुओं की क्रियामाला में किस स्थान पर स्थित हैं? (c) जो धातु, धातुओं की क्रियामाला में सबसे ऊपर पायी जाती है उन्हें उनके ऑक्साइडों से कार्बन के साथ क्रिया अपचयित करके प्राप्त क्यों नहीं किया जा सकता?
उत्तर-
(a) आयनिक यौगिकों के कोई दो भौतिक गुण-
(i) इनका गलनांक व क्वथनांक उच्च होता हैं क्योंकि उनके विपरीत आवेशित आयन परस्पर अधिक वैद्युत आकर्षण बल के कारण जुड़े रहते हैं।
(ii) अपने जल के विलयन के रूप में यह विद्युत धारा के सुचालक होते हैं क्योंकि विलयनों के रूप में इनके आयन स्वतन्त्र होकर विद्युत धारा को प्रवाहित कर पाते हैं।
(b) सोना तथा प्लेटिनम धातु पृथ्वी की ऊपरी परत में स्वतंत्र रूप में पाई जाती हैं। ये धातुएँ, धातुओं की क्रियामाला में नीचे की ओर स्थित होती हैं।
(c) इन धातुओं के ऑक्साइड कार्बन के साथ क्रिया करके अपने कार्बाइड यौगिक बनाते हैं, इसलिए इनके ऑक्साइडों का अपचयन कार्बन द्वारा नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 13.
एक धातु M प्रकृति में अपने कार्बोनेट अयस्क के रूप में पाया जाता है। इसका उपयोग लोहे के जस्तीकरण के लिए भी किया जाता है। इस धातु M को पहचानिए तथा इसके इस अयस्क का नाम लिखिए। इस अयस्क से इस धातु को कैसे प्राप्त किया जा सकता है? (CBSE 2018)
उत्तर-
धातु M जस्ता (जिंक) है। इसका संकेत Zn है। इसका कार्बोनेट अयस्क (ZnCO3) है जिसे कैलेमाइन अयस्क कहते हैं।
इस अयस्क से Zn धातु प्राप्त करना-
(i) पहले जिंक कार्बोनेट अयस्क को निस्तापन क्रिया द्वारा जिंक ऑक्साइड यौगिक में बदला जाता है। जब जिंक कार्बोनेट को उच्च ताप पर वायु की अनुपस्थिति में गर्म किया जाता है तो यह विघटित होकर जिंक ऑक्साइड तथा कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है।
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 19
(ii) अब जिंक ऑक्साइड को कार्बन (कोक) के साथ गर्म करने पर ऑक्साइड का अपचयन हो जाता है, तथा जिंक धातु प्राप्त हो जाती है।
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु 20

बहुविकल्पीय प्रश्न (Objective Type Questions)

1. इनमें से सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु कौन-सी है-
(a) सीसा
(b) पारा
(c) सोडियम
(d) लोहा।
उत्तर-
(c) सोडियम।

2. निम्न धातुओं में से कौन-सी धातु प्रकृति में मुक्त अवस्था में पायी जाती है –
(a) सोडियम
(b) गोल्ड
(c) पोटैशियम
(d) ऐलुमिनियम।
उत्तर-
(b) गोल्ड।

3. जब धातुएँ किसी कठोर सतह से टकराती हैं तो एक आवाज उत्पन्न होती है। इन धातुओं को कहते हैं –
(a) ध्वनिक
(b) सोनोरस
(c) उपर्युक्त दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(c) उपर्युक्त दोनों।

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु

4. कौन-सी धातु ठण्डे या गर्म जल से क्रिया नहीं करती
(a) Na
(b) Ca
(c) Mg
(d) Fe.
उत्तर-
(d) Fe.

5. निम्न में से कौन-सी धातुएँ मुक्त अवस्था में प्रकृति में पायी जाती हैं –
(i) Cu
(ii) Au
(iii) Zn
(iv) Ag
(a) (i), (ii)
(b)(i), (iii)
(c) (ii), (iv)
(d) (iii), (iv).
उत्तर-
(c) (ii), (iv).

6. सोने और प्लैटिनम को गलाने वाले अम्ल का नाम है
(a) सान्द्र HCL
(b) एक्वा-रेजिया
(c) सान्द्र नाइट्रिक अम्ल
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(b) एक्वा-रेजिया।

7. पृथ्वी की भूपर्पटी में सर्वाधिक मात्रा में मिलने वाली धातु है –
(a) आयरन
(b) कॉपर
(c) ऐलुमिनियम
(d) मर्करी।
उत्तर-
(c) ऐलुमिनियम।

8. कौन-सी अधातु चमकयुक्त होती है ?
(a) सल्फर
(b) ऑक्सीजन
(c) नाइट्रोजन
(d) आयोडीन।
उत्तर-
(d) आयोडीन।

9. कौन-सी अधातु द्रव अवस्था में होती है –
(a) कार्बन
(b) ब्रोमीन
(c) फॉस्फोरस
(d) सल्फर। .
उत्तर-
(b) ब्रोमीन।

10. ऐलुमिनियम पर मोटी ऑक्साइड की परत बनने की प्रक्रिया को कहते हैं –
(a) ऐनोडीकरण
(b) कैथोडीकरण
(c) तन्यता
(d) कठोरता।
उत्तर-
(a) ऐनोडीकरण।

11. Fe2O3 + 2Al → 2Fe + Al2O3 + ऊष्मा, इस अभिक्रिया का क्या नाम है-
(a) ऐनोडीकरण
(b) थर्मिट
(c) यशदलेपन
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(b) थर्मिट।

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु

12.कॉपर को खुला छोड़ देने पर उस पर हरे रंग की परत जम जाती है। इसका कारण है –
(a) CuSO4
(b) CuCO3
(c) Cu(NO3)2
(d)CuO.
उत्तर-
(a) CuSO4

13. यशदलेपन में किस धातु की परत चढ़ाई जाती है –
(a) ताँबा
(b) ऐलुमिनियम
(c) जस्ता.
(d) चाँदी।
उत्तर-
(c) जस्ता।

14. सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में गर्म करने को कहते हैं –
(a) निस्तापन
(b) संयोजन
(c) भर्जन
(d) दहन।
उत्तर-
(c) भर्जन।

15. कार्बोनेट अयस्क को वायु की अनुपस्थिति में गर्म करने को कहते हैं –
(a) निस्तापन
(b) संयोजन
(c) भर्जन
(d) दहन।
उत्तर-
(a) निस्तापन।

16. अमलगम एक मिश्रातु है जो एक या एक से अधिक धातुओं का –
(a) मर्करी के साथ मिश्रण होता है |
(b) सोडियम के साथ मिश्रण होता है |
(c) कैल्सियम के साथ मिश्रण होता है |
(d) पोटैशियम के साथ मिश्रण होता है।
उत्तर-
(a) मर्करी के साथ मिश्रण होता है।

17. निम्न में से उदासीन ऑक्साइड है
(a) कार्बन डाइऑक्साइड
(b) कार्बन मोनोऑक्साइड
(c) सल्फर डाइऑक्साइड
(d) सल्फर ट्राइऑक्साइड।
उत्तर-
(b) कार्बन मोनोऑक्साइड।

18. जंग लगने के लिए
(a) केवल वायु की आवश्यकता होती है
(b) केवल जल की आवश्यकता होती है
(c) वायु एवं जल दोनों की आवश्यकता होती है
(d) वायु एवं जल दोनों की आवश्यकता नहीं होती है।
उत्तर-
(c) वायु एवं जल दोनों की आवश्यकता होती है।

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु

19. अयस्क से गैंग को दूर करने को कहते हैं –
(a) निस्तापन
(b) भर्जन
(c) समृद्धीकरण
(d) अपचयन।
उत्तर-
(c) समृद्धीकरण।

20. सीसा एवं टिन की मिश्रातु को कहते हैं
(a) अमलगम
(b) सोल्डर
(c) काँसा
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(b) सोल्डर।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill In the blanks)

1. ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर धातुएँ ……………………………… बनाती हैं।
उत्तर-
क्षारकीय ऑक्साइड,

2. भू-पर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाये जाने वाले तत्वों या यौगिकों को …………………………….. कहते हैं।
उत्तर-
खनिज,

3. रेल की पटरी और मशीन के पुों की दरारों को …………………………….. द्वारा जोड़ा जाता है।
उत्तर-
थर्मिट अभिक्रिया,

4. सोडियम, मैग्नीशियम तथा ऐलुमिनियम धातुएँ, …………………………….. से अधिक क्रियाशील हैं।
उत्तर-
कार्बन,

5. अधातुएँ ऊष्मा की …………………………….. होती हैं, केवल ग्रेफाइट अधातु ऊष्मा की …………………………….. है।
उत्तर-
कुचालक, सुचालक।

सुमेलन संबंधी प्रश्न (Matrix Type Questions)

प्रश्न 1.
निम्न को सुमेलित कीजिये।

कॉलम (1) (धातु)कॉलम (ii) (धातु के अयस्क)
1. ऐलुमिनियम(a) कैलेमाइन (Calamine)
2. आयरन(b) डोलोमाइट (Dolomite)
3. लेड(c) सिनेबार (Cinnabar)
4. मरकरी(d) हीमेटाइट (Haematite)
5. जिंक(e) गैलेना (Galena)
6. कैल्सियम(f) बॉक्साइट (Bauxite)

उत्तर-

कॉलम (1) (धातु)कॉलम (ii) (धातु के अयस्क)
1. ऐलुमिनियम(f) बॉक्साइट (Bauxite)
2. आयरन (d) हीमेटाइट (Haematite)
3. लेड (e) गैलेना (Galena)
4. मरकरी(c) सिनेबार (Cinnabar)
5. जिंक(a) कैलेमाइन (Calamine)
6. कैल्सियम(b) डोलोमाइट (Dolomite)

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 3 धातु एवं अधातु

प्रश्न 2.
निम्न को समेलित करें –

कॉलम-Iकॉलम-II
1. विद्युत अपघटनी अपचयन(a) एल्युमीनियम
2. कार्बन से अपचयन(b) जिंक
3. एल्युमीनियम से अपचयन(c) सोडियम
(d) आयरन
(e) मैग्नीशियम
(f) क्रोमियम

उत्तर-
1. विद्युत अपघटनी अपचयन → (a) एल्युमीनियम, (c) सोडियम
2. कार्बन से अपचयन → (b) जिंक, (d) आयरन
3. एल्युमीनियम से अपचयन → (e) मैग्नीशियम, (f) क्रोमियम

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HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण Important Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
अम्लों का लिटमस पर प्रभाव क्या होता है?
उत्तर-
अम्ल नीले लिटमस को लाल कर देता है।

प्रश्न 2.
लिटमस किस रंग का रंजक है?
उत्तर-
बैंगनी रंग का।

प्रश्न 3.
लिटमस किससे प्राप्त किया जाता है?
उत्तर-
थैलोफाइटा समूह के लाइकेन (Lichen) पौधे से।

प्रश्न 4.
गंधीय सूचक क्या हैं ?
उत्तर-
जिन पदार्थों की गंध अम्लीय या क्षारकीय माध्यम में बदल जाती है, उन्हें गंधीय सूचक कहते हैं।

प्रश्न 5.
गंधीय सूचकों के तीन उदाहरण लिखिए।
उत्तर-
बारीक कटी प्याज, लौंग का तेल, तनु वैनीला एसेंस।

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण

प्रश्न 6.
हाइड्रोजन गैस किस प्रकार की ध्वनि से जलती
उत्तर-
फट-फट (Pop sound) की ध्वनि से।

प्रश्न 7.
चूने के पानी में CO2 गैस को प्रवाहित करने से क्या होता है ?
उत्तर-
चूने का पानी दूधिया हो जाता है।

प्रश्न 8.
चूने के पानी से अधिक CO2 गुजारने से चूने के पानी का दूधियापन किस कारण समाप्त हो जाता है ?
उत्तर-
जल में विलयशील Ca(HCO3)2 के कारण।

प्रश्न 9.
अधात्विक ऑक्साइड किस प्रकृति के होते हैं ?
उत्तर-
अम्लीय प्रकृति के।

प्रश्न 10.
ताँबे के बर्तन में दूध-दही क्यों नहीं रखने चाहिए?
उत्तर-
ताँबे के बर्तन में दूध-दही रखने पर वे बर्तनों के साथ अम्ल अभिक्रिया करके विषैले यौगिक (लवण) बनाते हैं।

प्रश्न 11.
अम्लों में विद्युत प्रवाह किस कारण होता है?
उत्तर-
आयनों के कारण।

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण

प्रश्न 12.
अधिक आर्द्र गैस को किसकी सहायता से शुष्क किया जाता है ?
उत्तर-
कैल्सियम क्लोराइड की सहायता से।

प्रश्न 13.
हाइड्रोजन आयन को किस रूप में दर्शाया जाता है ?
उत्तर-
H+ (aq) या हाइड्रोनियम आयन (H3O+)।

प्रश्न 14.
अम्लों को तनु करने के लिए क्या करना चाहिए ?
उत्तर-
जल में सान्द्र अम्ल को धीरे-धीरे मिलाना चाहिए।

प्रश्न 15.
जल में अम्ल या क्षार घुलने की प्रक्रिया ऊष्माशोषी है या ऊष्माक्षेपी ?
उत्तर-
ऊष्माक्षेपी।

प्रश्न 16.
तनुकरण किसे कहते हैं ?
उत्तर-
जल में अम्ल या क्षारक मिलाने पर आयन की सान्द्रता (H3O+/OH ) में इकाई आयतन की कमी हो जाती है जिसे तनुकरण कहते हैं।

प्रश्न 17.
अनेक सूचकों के मिश्रण को क्या कहते हैं ?
उत्तर-
सार्वत्रिक सूचक।

प्रश्न 18.
हमारा उदर कौन-सा अम्ल उत्पन्न करता है ?
उत्तर-
हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) ।

प्रश्न 19.
हमारे शरीर में सबसे कठोर पदार्थ कौन-सा
उत्तर-
दाँतों का इनैमल (कैल्सियम फॉस्फेट)।

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण

प्रश्न 20.
अम्लीय ऑक्साइड के नाम लिखिये जिनके द्वारा अम्लीय वर्षा होती है। (RBSE 2016)
उत्तर-
सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO2)।

प्रश्न 21.
अम्ल की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
अम्ल वे यौगिक हैं जो पानी में घुलकर हाइड्रोनियम (H3O+) को उत्पन्न करते हैं।
HCI+H2O → H3O+ + Cl

प्रश्न 22.
क्षार की आधुनिक परिभाषा क्या है?
उत्तर-
वे यौगिक जो पानी में घुलकर OH आयन प्रदान करते हैं, उन्हें क्षार कहते हैं, जैसे
K2O+ H2O → 2K+ + 2OH

प्रश्न 23.
उदासीनीकरण किसे कहते हैं ?
उत्तर-
वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें किसी अम्ल का H+ और क्षार का OH परस्पर मिलकर अनायनित जल अणु तैयार करे, उदासीनीकरण अभिक्रिया कहलाती है।
उदाहरण के लिए- .
HNO3 +KOH → KNO3 + H2O

प्रश्न 24.
किसी क्षार को जल में मिलाने पर क्या होता
उत्तर-
OH जलीय आयनों की वृद्धि।
pH स्केल (pH-Scale)

प्रश्न 25.
दो संश्लेषित सूचकों के नाम लिखिये। [राज. 2015]
उत्तर-
मेथिल ऑरेंज, फीनॉल्फ्थेलिन।

प्रश्न 26.
जठर रस pH स्केल पर क्या मान दिखाता है ?
उत्तर-
लगभग 1.2.

प्रश्न 27.
सोडियम हाइड्रॉक्साइड pH स्केल पर क्या मान दिखाता है ?
उत्तर-
लगभग 14.

प्रश्न 28.
हमारा शरीर कितने pH परास के बीच कार्य करता है?
उत्तर-
हमारा शरीर 7.0 से 7.8 pH परास के बीच काम करता है।

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण

प्रश्न 29.
किसकी pH अधिक होगी
(i) रक्त अथवा आसुत जल?
(ii) जठर रस अथवा नींबू का रस? [राज. 2015]
उत्तर-
(i) आसुत जल (pH = 7)
(ii) जठर रस (pH = 1.2)

प्रश्न 30.
मुँह में दाँतों का क्षय कब आरम्भ होता है ?
उत्तर-
pH का मान 5.5 से कम हो जाने पर दाँतों का क्षय आरम्भ हो जाता है।

प्रश्न 31.
कोई विलयन ‘X’ pH पत्र पर उसकी कोई बूंद गिराने पर नारंगी रंग देता है, जबकि कोई अन्य विलयन ‘Y’ pH पत्र पर उसकी बूंद गिराने पर हल्का नीला रंग देता है। इन दोनों विलयनों की प्रकृति क्या है? ‘X’ और ‘Y’ विलयनों के pH निर्धारित कीजिए। (CBSE 2019)
उत्तर-
‘X’ विलयन की प्रकृति अम्लीय है क्योंकि इसकी बूंदें pH पत्र पर गिराने पर वह नारंगी रंग देता है। ‘X’ विलयन का pH मान 3 से 5 के बीच हो सकता है, तथा यह हल्का अम्लीय है। Y’ विलयन की प्रकृति क्षारीय है क्योंकि इसकी बूंदें pH पत्र पर गिराने पर यह हल्का नीला रंग देता है। Y’ विलयन का pH मान 8 से 11 के बीच हो सकता है तथा यह हल्का क्षारीय है।

प्रश्न 32.
बेकिंग पॉउडर किसे कहते हैं ?(CBSE 2020)
उत्तर-
मीठा सोडा व टारटेरिक अम्ल के मिश्रण को बेकिंग पाउडर कहते हैं।

प्रश्न 33.
अग्निशमन यन्त्रों में किन रसायनों का प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर-
हाइड्रोजन, सोडियम कार्बोनेट व सल्फ्यूरिक अम्ल का ।

प्रश्न 34.
विरंजक चूर्ण किस प्रकार के चूने से तैयार किया जाता है ? _
उत्तर-
विरंजक चूर्ण, बूझे हुए चूने [Ca(OH)2] से तैयार किया जाता है।

प्रश्न 35.
विरंजक चूर्ण को यदि वायु में खुला छोड़ दिया जाए तो क्या होगा?
उत्तर-
वायु के सम्पर्क में आने पर विरंजक चूर्ण अपघटित हो जाता है तथा क्लोरीन मुक्त होती है।

प्रश्न 36.
बिना बुझे हुए चूने का रासायनिक नाम क्या है ?
उत्तर-
कैल्सियम ऑक्साइड (CaO).

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण

प्रश्न 37.
विरंजक चूर्ण को पानी में क्यों मिलाया जाता है ?
उत्तर–
पानी को जीवाणुरहित बनाने के लिए।

प्रश्न 38.
प्लास्टर ऑफ पेरिस बनाने के लिए किसे और कितना गर्म करना पड़ता है ?
उत्तर-
प्लास्टर ऑफ पेरिस को बनाने के लिए जिप्सम को 373 K तक गर्म किया जाता है।

प्रश्न 39.
धावन सोडा किस प्रकार का होता है ?
उत्तर-
धावन सोडा पारदर्शी क्रिस्टलीय ठोस आकार का होता है।

प्रश्न 40.
साधारण नमक किससे बनता है ?
उत्तर-
हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) एवं सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) की अभिक्रिया से।

लघु उत्तरीय प्रश्न (ShortAnswer Type Questions)

प्रश्न 1.
अम्लों के सामान्य गुण लिखिए।
उत्तर-
अम्लों के सामान्य गुण-

  • इनका स्वाद खट्टा होता है।
  • ये नीले लिटमस को लाल कर देते हैं।
  • ये धातुओं के साथ क्रिया करके हाइड्रोजन गैस बनाते हैं।
  • ये कार्बोनेट के साथ क्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्पन्न करते हैं।
  • ये क्षारकों के साथ क्रिया करके लवण एवं पानी बनाते हैं।

प्रश्न 2.
क्षारों के सामान्य गुण लिखिए।
उत्तर-
क्षारों के सामान्य गुण-

  • इनका स्वाद कड़वा होता है।
  • ये लाल लिटमस को नीला कर देते हैं।
  • ये अम्लों के साथ क्रिया करके लवण व पानी बनाते हैं।
  • ये फीनॉल्पथेलीन के घोल को गुलाबी कर देते हैं।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित यौगिकों को दुर्बल एवं प्रबल अम्ल एवं क्षारक में वर्गीकृत कीजिए
(i) CH3COOH
(ii) NH4OH
(iii) NaOH
(iv) Ca(OH)2
(v) HCN
(vi) HClO4
(vii) H3PO4
(viii) H2SO4
(ix) HCl.
उत्तर-
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण 1

प्रश्न 4.
आपको तीन परखनलियाँ A, B तथा C दी गई हैं। उनमें क्रमशः आसुत जल, एक अम्लीय विलयन तथा एक क्षारीय विलयन डाले गए हैं। आपको केवल नीले लिटमस पत्र की कतरनें दी गई हैं, इससे आप तीनों की पहचान किस प्रकार करेंगे? (CBSE 2016)
उत्तर-

  • सबसे पहले तीनों लिटमस पत्र की कतरनों को प्रत्येक परखनली में डाला।
  • परखनली A में रखा विलयन नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है जो यह दर्शाता है कि इस परखनली में रखा विलयन अम्लीय है।
  • यदि शेष दो विलयनों के रंगों में किसी भी तरह का परिवर्तन नहीं होता तो इससे स्पष्ट होता है कि किसी एक विलयन में आसुत जल है तथा अन्य में क्षारीय विलयन है।
  • अब परखनली A का लिटमस पत्र जो नीले रंग से लाल में परिवर्तित हो गया था को शेष दो विलयन में बारी-बारी से डाला।
  • यदि परखनली B में रखा विलयन लाल लिटमस पत्र को पुनः नीले रंग में परिवर्तित कर देता है तो इससे स्पष्ट होता हे कि इस परखनली में क्षारीय विलयन है।
  • परखनली C में लाल लिटमस पत्र के रंग में कोई परिवर्तन नहीं होगा अतः इस परखनली में आसुत जल है।

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण

प्रश्न 5.
नेटल पौधे के डंकनुमा बालों के स्पर्श होने के कारण उत्पन्न पीड़ा को इसी के समीप पाये जाने वाले डॉक पौधे की पत्तियों का रस रगड़कर दूर करते हैं। इसका क्या कारण है?
उत्तर-
नेटल के पौधे में मेथेनॉइक अम्ल होता है जो शरीर में पीड़ा पहुँचाता है। चूंकि डॉक की पत्ती के रस की प्रकृति क्षारीय होती है, यह अम्ल के प्रभाव को समाप्त कर देता है और पीड़ा दूर हो जाती है।
pH- स्केल

प्रश्न 6.
लवण विलयनों के pH मान पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
प्रबल अम्ल एवं प्रबल क्षारक के लवण का pH मान 7 होता है एवं ये उदासीन होते हैं। प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षारक के लवण के pH का मान 7 से कम होता है एवं ये अम्लीय होते हैं तथा प्रबल क्षारक एवं दुर्बल अम्ल के लवण के pH का मान 7 से अधिक होता है एवं ये क्षारकीय होते हैं।
(a) प्रबल अम्ल एवं प्रबल क्षारक के लवण NaCl, NaSO4, KCl व KNO3, आदि हैं। इन्हें जल में घोलने पर प्रबल अम्ल एवं प्रबल क्षारक बनाते हैं तथा ये पूरी तरह एक-दूसरे को उदासीन कर देते हैं।
∴ pH=7 .

(b) प्रबल अम्ल एवं दुर्बल क्षारक के लवण NH4Cl, BaCl2, ZnSO4 व CuSO4 हैं। प्रबल अम्ल दुर्बल क्षारक को प्रभावित करता है। अतः pH<7.

(c) दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षारक के लवण Na2CO3, CH3COONa आदि हैं। प्रबल क्षारक दुर्बल अम्ल को प्रभावित करता है। अतः pH>7
(d) दुर्बल अम्ल और दुर्बल क्षारक के लवण COONH4 का विलयन लगभग उदासीन होता है।
∴ pH = 7 (लगभग)

प्रश्न 7.
उन अम्लों एवं क्षारकों की पहचान कीजिए जिनसे सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट बनता है। अपने उत्तर के समर्थन में रासायनिक समीकरण लिखिए। उल्लेख कीजिए कि क्या यह यौगिक अम्लीय अथवा बारीय अथवा उदासीन है। इसका pH मान भी लिखिए। (CBSE 2019)
उत्तर-सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट; दुर्बल कार्बोनिक अम्ल (H2CO3) तथा प्रबल सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH) के क्षार से बनता है।
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यह यौगिक एक क्षारीय यौगिक है क्योंकि यह प्रबल क्षार NaOH से बनता है। इसका pH मान 7 से थोड़ा सा अधिक है।

प्रश्न 8.
pH स्केल किसे कहते हैं? स्पष्ट करो कि मुँह का pH परिवर्तन दन्तक्षय का कारण है। (RBSE 2016)
उत्तर-
किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता ज्ञात करने हेतु एक स्केल विकसित किया गया है जिसे pH स्केल कहते हैं। . मुँह के pH का मान 5.5 से कम होने पर दाँतों का इनैमल (दन्तवल्क) संक्षारित होने लगता है। दाँतों का इनमल कैल्सियम फॉस्फेट से बना होता है जोकि शरीर का सबसे कठोर पदार्थ है। मुँह में उपस्थित बैक्टीरिया, भोजन के पश्चात् मुँह में अवशिष्ट शर्करा एवं खाद्य पदार्थों का निम्नीकरण करके अम्ल उत्पन्न करते हैं।

प्रश्न 9.
अम्ल एवं क्षारक की शक्ति किस पर निर्भर करती है? प्रबल एवं दुर्बल अम्ल क्या हैं?
उत्तर-
अम्ल एवं क्षारक की शक्ति विलयन में क्रमश: (H+) आयन तथा (OH) आयन की संख्या पर निर्भर करती है। अधिक संख्या में + आयन उत्पन्न करने वाले अम्ल प्रबल अम्ल कहलाते हैं। कम संख्या में H+ आयन उत्पन्न करने वाले अम्ल दुर्बल अम्ल कहलाते हैं।

प्रश्न 10.
धावन सोडा, जलीय विलयन में अम्लीय अथवा क्षारीय कैसे होता है ?
उत्तर-
धावन सोडा आसानी से पानी में घुल जाता है, इससे क्षारीय घोल बनता है। इसकी जाँच के लिए यदि लाल लिटमस के घोल में इसे डाला जाए तो वह नीले रंग का हो जाता है अतः धावन सोडा का घोल क्षारीय होता है।

प्रश्न 11.
खाने के सोडा के दो महत्त्वपूर्ण गुणधर्म दीजिए।
उत्तर-
खाने का सोडा सफेद रंग का क्रिस्टलीय ठोस है जो पानी के साथ क्षारीय घोल बनाता है तथा गर्म करने पर सोडियम कार्बोनेट में बदल जाता है एवं CO2, गैस उत्पन्न होती है।
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प्रश्न 12.
प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक सूत्र एवं इसकी जल के साथ रासायनिक अभिक्रिया को लिखिए। (CBSE 2020)
उत्तर-
प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक सूत्र CaSO4.\(1 / 2\)H2O है। प्लास्टर ऑफ पेरिस एक सफेद चूर्ण है . जो जल में मिलाने पर यह पुनः जिप्सम बनकर कठोर ठोस पदार्थ प्रदान करता है।
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प्रश्न 13.
उत्फुल्लन (Eflorescence) की प्रक्रिया क्या है? एक ऐसे यौगिक का नाम लिखिए जो उत्फुल्लन की क्रिया दर्शाता हो, अभिक्रिया भी लिखें।
उत्तर-
सोडियम कार्बोनेट को जब वायु में खुला छोड़ देने हैं तो सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3, 10H2O) से जल के 9 अणु निकल जाते हैं, यह एकल हाइड्रेट (Na2CO3, H2O) के रूप में शेष रहता है। गर्म करने पर यह अपने सारे क्रिस्टलीय जल को खो देता है तथा Na2CO3, के रूप में शेष रहता है। अतः हवा में खुला रखने पर यौगिक में से जल के अणु की स्वतः मुक्त हो जाने की प्रक्रिया उत्फुल्लन (Efflorescence) कहलाती है।

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प्रश्न 14.
नीचे दिए गए रासायनिक समीकरणों को पूरा और सन्तुलित कीजिये
(i) NaOH (aq) +Zn (s) →
(ii) CaCO3(s)+H20(l) +CO2(g) →
(iii) HCl(aq) + H2O(l)
अथवा
लवण जल (ब्राइन) के विद्युत अपघटन के समय एनोड पर कोई गैस ‘G’ मुक्त होती है। जब इस गैस ‘G’ को बुझे हुए चूने से प्रवाहित किया जाता है, तो कोई यौगिक ‘C’ बनता है जिसका उपयोग पीने के जल को जीवाणुओं से मुक्त करने के लिए किया जाता है।
(i) ‘G’ और ‘C’ के सूत्र लिखिए।
(ii) होने वाली अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
(iii). यौगिक ‘C’ का सामान्य नाम क्या है? इसका रासायनिक नाम लिखिए। (CBSE 2020)
उत्तर-
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अथवा
(i) G का सूत्र = Cl2(क्लोरीन गैस) \
C का सूत्र = CaoCl2
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(iii) यौगिक ‘C’ का सामान्य नाम विरंजक चूर्ण है।
यौगिक ‘C’ का रासायनिक नाम कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड है।

प्रश्न 15.
क्लोर-क्षार प्रक्रिया के महत्त्वपूर्ण उत्पादों की सूची बनाइए। इनमें से प्रत्येक उत्पाद का एक महत्त्वपूर्ण उपयोग लिखिए।
अथवा
सोडियम कार्बोनेट से धोने का सोडा किस प्रकार बनाया जाता है? इसका रासायनिक समीकरण लिखिए। इस लवण के प्रकार का उल्लेख कीजिए। यह जल की जिस प्रकार की कठोरता को दूर करता है, उसका नाम लिखिए। (CBSE 2020)
उत्तर-
क्लोर-क्षार प्रक्रिया के महत्त्वपूर्ण उत्पाद –
(i) सोडियम हाइड्रॉक्साइड (कास्टिक सोडा) NaOH उपयोग-इसका उपयोग साबुन तथा अपमार्जक बनाने में किया जाता है।
(ii) क्लोरीन गैस (Cl2) उपयोग-इसका उपयोग पी.वी.सी. यौगिक (एक प्रकार का प्लास्टिक) बनाने में किया जाता है।
(iii) हाइड्रोजन गैस (H2) उपयोग-इसका उपयोग राकेट ईंधन के रूप में किया जाता है।
अथवा
निर्जल सोडियम कार्बोनेटं को पानी के साथ गर्म करके क्रिस्टलन विधि द्वारा, धोने का सोडा बनाया जाता है।
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धावन सोडा एक क्षारीय लवण है। यह जल की स्थायी कठोरता दूर करता है।

प्रश्न 16.
सामान्यतः बेकरी उत्पादों में प्रयुक्त होने वाला कोईलवण ‘P’ गर्म किए जाने पर किसी अन्य लवण ‘0’ में परिवर्तित हो जाता है जिसका उपयोग जल की
कठोरता को दूर करने में किया जाता है तथा कोई गैस ‘R’ – उत्सर्जित होती है। इस गैस ‘R’ को ताजा बने चूने के पानी में से प्रवाहित करने पर वह दूधिया हो जाता है। ‘P’, ‘Q’ और ‘R’ को पहचानिए और अपने उत्तर की पुष्टि के लिए रासायनिक समीकरण दीजिए। (CBSE 2019)
उत्तर-
जब बेकिंग सोडा (NaHCO) को जल के साथ गर्म किया जाता है या मिलाया जाता है तो निम्नलिखित अभिक्रिया प्राप्त होती है।
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सोडियम कार्बोनेट को जल की कठोरता दूर करने के लिए उपयोग किया जाता है। उत्सर्जित गैस कार्बन डाइऑक्साइड चूने के पानी को दूधिया कर देती है।
अतः लवण ‘P’ बेकिंग सोडा (NaHCO3) है।
लवण ‘Q’ सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3) है जिसका प्रयोग जल की कठोरता को दूर करने के लिए किया जाता गैस ‘R’ कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) है जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है।

प्रश्न 17.
टूटी हड्डियों को सहारा देने के लिए डॉक्टर किसी श्वेत पाउडर का उपयोग करते हैं।
(a) इस पाउडर का नाम और रासायनिक सूत्र लिखिए।
(b) इस पाउडर को किस प्रकार बनाया जाता है।
(c) जब इस श्वेत पाउडर को पानी के साथ गूंथा जाता है, तो एक कठोर ठोस पिण्ड प्राप्त होता है। इस परिवर्तन के लिए सन्तुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।
(d) इस श्वेत पाउडर का कोई एक और उपयोग ‘लिखिए। (CBSE 2019)
उत्तर-
(a) पाउडर का नाम-कैल्सियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट, रासायनिक सूत्र- CaSO4\(\frac{1}{2} \) H2O
(b) जिप्सम को 100° (373 K) पर गर्म करके इस पाउडर को तैयार किया जाता है।
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(d) इसका उपयोग घर के अन्दर की दीवारों तथा छत की सतह को समतल व सुंदर बनाने के लिए किया जाता है।

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प्रश्न 18.
दो परखनलियों A और B जिनमें क्रमशः तनु HCIऔर NaOH विलयन भरे हैं, में नीले लिटमस का विलयन मिलाया गया है। इनमें से किस परखनली के रंग में परिवर्तन दिखाई देगा? इस रंग परिवर्तन का उल्लेख कीजिए और इसका कारण दीजिए। (CBSE 2019)
उत्तर-
परखनली A में नीले लिटमस के विलयन का रंग लाल हो जाएगा क्योंकि इस परखनली में तनु HCl अम्ल है। अम्ल नीले लिटमस को लाल रंग में परिवर्तित कर देते हैं | HCl एक प्रबल अम्ल है। इसी कारण इसे किसी विलयन में मिलाने पर H+ आयन की सांद्रता बढ़ जाती है जिससे pH मान कम हो जाता है।

प्रश्न 19.
पकौड़ों को स्वादिष्ट और खस्ता बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले किसी लवण का pH मान 9 है। इस लवण को पहचानिए तथा इसके निर्माण के लिए रासायनिक समीकरण लिखिए। इसके दो उपयोगों की सूची बनाइए। (CBSE 2018)
उत्तर-
पकौड़ों को स्वादिष्ट तथा खस्ता बनाने के लिए बेकिंग सोडा या सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट लवण (NaHCO3) का उपयोग किया जाता है। लवण के निर्माण का रासायनिक समीकरण- .
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण 10
इस लवण के दो उपयोग

  • इसका उपयोग, धावन सोडा के निर्माण में किया जाता है।
  • इसका उपयोग आग बुझाने के संयंत्र में किया जाता है।

प्रश्न 20.
एसीटिक अम्ल को जब एक परखनली में लिखे गये सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के पाउडर पर डालते हैं तो तेज बुलबुलों के साथ एक गैस निकलती है। इस गैस का नाम लिखिए, तथा इस गैस को पहचानने के लिए एक प्रयोग लिखिए। (CBSE 2017)
उत्तर-
उत्पन्न होने वाली गैस CO2 है। जब CO2 गैस को चूने के पानी में से गुजारते हैं तो यह दूधिया हो जाता है।
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प्रश्न 21.
उस समय आप क्या प्रेक्षण करते हैं जब आप एसीटिक अम्ल की कुछ बूंदें उस परखनली में मिलाते हैं जिसमें भरा है
(i) फिनॉल्पथैलिन
(ii) आसुत जल
(iii) सार्वत्रिक सूचक
(iv) सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट चूर्ण। (CBSE 2016)
उत्तर-
(i) फिनॉल्फ्थैलिन रंगहीन रहता है, क्योंकि फिनॉल्पथैलिन अम्ल क्षारीय पदार्थों के साथ रंग में परिवर्तन • दर्शाता है।
(ii) आसुत जल में ऐसीटिक अम्ल घुल जाता है।
(iii) सार्वत्रिक सूचक नारंगी रूप में बदल जाता है।
(iv) सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट चूर्ण रंगहीन हो जाता
CH3COOH + NaHCO3 → CH3COONa + H2O + CO2

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
किसी अम्ल और किसी क्षार के बीच प्रमुख अन्तर लिखिए।
उपयुक्त उदाहरणों की सहायता से पद उदासीनीकरण की व्याख्या कीजिए तथा-
(i) अम्लीय
(ii) क्षारीय और
(iii) उदासीन लवणों का बनना स्पष्ट कीजिए। (CBSE 2019)
उत्तर-
अम्ल स्वाद में खट्टे होते हैं। ये नीले लिटमस को लाल कर देते हैं। इनका pH मान 7 से कम होता है। क्षार स्वाद में कड़वे होते हैं। ये लाल लिटमस को नीला कर देते हैं। इनका pH मान 7 से अधिक होता है। जब अम्ल क्षार के साथ क्रिया करके लवण तथा जल बनाता है तो इन दोनों के बीच होने वाली इस अभिक्रिया को उदासीनीकरण क्रिया कहते हैं। सामान्यतः उदासीनीकरण अभिक्रिया को इस प्रकार लिखा जा सकता है- .
क्षार + अम्ल → लवण + जल
उदाहरण –
NaOH (aq) + HCI (aq) →NaCl (aq) + H2O (l)

(i) जब एक प्रबल अम्ल एक दुर्बल क्षार से अभिक्रिया करता है, तो बनने वाला लवण अम्लीय लवण होता है।
उदाहरण:
H2SO4+Cuo → CuSO4+ H2O

(ii) जब एक दुर्बल अम्ल एक अधिक प्रबल. क्षार से अभिक्रिया करता है तो बनने वाला लवण क्षारीय लवण होता है।
उदाहरण:
NaOH+CH3COOH → CH3COONa + H2O

(iii) जब एक प्रबल अम्ल एक प्रबल क्षार से अभिक्रिया करता है तो बनने वाला लवण उदासीन लवण होता है। उदाहरण ::… .
NaOH + HCl → NaCl+ H2O

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण

प्रश्न 2.
निम्नलिखित लवणों के रासायनिक सूत्र लिखिए
(i) सोडियम सल्फेट ।
(ii) कैल्सियम सल्फेट
(iii) कॉपर सल्फेट
(iv) सोडियम क्लोराइड
(v) सोडियम नाइट्रेट
(vi) सोडियम कार्बोनेट
(vii) अमोनियम क्लोराइड
(viii) पोटैशियम सल्फेट।
उत्तर-

लवण कारासायनिक सूत्र
(i)  सोडियमा सल्फेटNa2SO4
(ii) कैल्सियम सल्फेटCaSO4
(iii) कॉपर सल्फेटCuSO4
(iv) सोडियम क्लोराइडNacl
(v) सोडियम नाइट्रेट ,NaNO3,
(vi) सोडियम कार्बोनेटNaNO3
(vii) अमोनियम क्लोराइडNa2CO3
(vii) पोटैशियम सल्फेटK2SO4

प्रश्न 3.
केवल रासायनिक समीकरण लिखिए –
(i) बुझे हुए चूने के साथ क्लोरीन क्रिया करती है।
(ii) विरंजक चूर्ण की तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया करायी जाती है।
(iii) जिप्सम को 373 K ताप पर गर्म किया जाता है।
(iv) चूने में पानी डाला जाता है।
(v) धावन सोडा को वायु में रखा जाता है।
उत्तर –
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प्रश्न 4.
क्षारक क्या हैं? क्षारकों के गुण तथा उपयोगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
जल में विलेय होने पर जो यौगिक हाइड्रॉक्साइड आयन उत्पन्न करते हैं, क्षार कहलाते हैं; जैसे-सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH), पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH), कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड [Ca(OH)]2 आदि। सभी क्षारकों को क्षार नहीं कहा जा सकता परन्तु सभी क्षार, क्षारक होते हैं। क्षारकों का एक उदाहरण ऐन्टैसिड है जोकि ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड तथा मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड से बनता है।

मसालेदार तला भुना हुआ भोजन अधिक मात्रा में ग्रहण कर लेने पर आमाशय में अम्लता बढ़ जाती है जिसे ऐन्टैसिड के द्वारा दूर किया जाता है। क्षारकों के सामान्य गुण-क्षारकों का स्वाद तीखा एवं कड़वा होता है, स्पर्श चिकना होता है तथा प्रबल क्षार त्वचा पर संक्षारक प्रभाव डालता है। सूचकों पर इनकी क्रिया निम्न प्रकार होती है-

  • लाल लिटमस को नीला कर देता है तथा नीले लिटमस पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • फिनॉल्पथेलीन तथा हल्दी के विलयन में क्षार मिलाने पर वह लाल रंग के हो जाते हैं एवं मेथिल ऑरेंज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • क्षारक गर्म करने पर जल उत्पन्न करते हैं तथा ऑक्साइड बनाते हैं।

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अम्लों के साथ क्षारक अभिक्रिया करके लवण तथा जल बनाते हैं। अम्ल तथा क्षारकों के बीच यह अभिक्रिया उदासीनीकरण अभिक्रिया कहलाती है।

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क्षारकों के जलीय विलयन हाइड्रॉक्साइड (OH) देते हैं, प्रबल क्षारक जल में पूर्णतया विघटित हो जाते हैं, जबकि तनु क्षारक कम मात्रा में विघटित होते हैं।

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उपयोग-क्षारकों को विभिन्न प्रकार से उपयोग में लाया जाता है, जैसे-ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड का उपयोग वस्त्र उद्योग तथा ऐन्टैसिड बनाने में, अमोनियम हाइड्रॉक्साइड का उपयोग क्लीनिंग एजेण्ट तथा अमोनियम लवण बनाने में, कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड का प्रयोग सफेदी, ब्लीचिंग पाउडर, चमड़ा उद्योग, खारे जल के शोधन आदि में तथा सोडियम हाइड्रॉक्साइड का उपयोग, साबुन, रेयान, कागज आदि उद्योगों में किया जाता है।

प्रश्न 5.
(i) हाइड्रोजन आयन [H+] की सान्द्रता का विलयन की प्रकृति पर क्या प्रभाव पड़ता है?
(ii) अम्ल को तनुकृत करते समय अम्ल को जल में मिलाया जाता है न कि जल को अम्ल में। कारण दीजिये।
(iii) संतरा और इमली में पाये जाने वाले अम्लों के नाम लिखिए।
(iv) क्लोर-क्षार प्रक्रिया किसे कहते हैं। (CBSE, RBSE 2017)
उत्तर-
(i) H+(aq) आयन की सान्द्रता का विलयन की प्रकृति पर प्रभाव पड़ता है। H+(aq) की जितनी सान्द्रता होगी, उतना ही विलयन अधिक अम्लीय होगा। जल की अनुपस्थिति में अम्ल का व्यवहार अम्लीय नहीं होता।

(ii) जल में घुलने की प्रक्रिया अत्यंत ऊष्माक्षेपी होती है। इसलिए जल में किसी सांद्र अम्ल को सावधानीपूर्वक मिलाना चाहिए। अम्ल और जल को धीरे-धीरे हिलाते रहना चाहिए। ऐसा न करने पर अम्ल में जल मिलाने पर उत्पन्न ऊष्मा के कारण मिश्रण आसफलित होकर बाहर आ सकता है। इससे स्थानीय ताप बढ़ जाता है, जिसके कारण उपयोग किया जाने वाला काँच का पात्र भी टूट सकता है।

(iii) संतरा-सिट्रिक अम्ल
इमली-टार्टरिक अम्ल

(iv) सोडियम नोराइड के जलीय विलयन (लवण जल) में विद्युत प्रवाहित करने पर यह वियोजित होकर सोडियम हाइड्रॉक्साइड उत्पन्न करता है, इसे क्लोर-क्षार प्रक्रिया कहते हैं।
2NaCl(aq) + 2H2O (l) → 2NaOH (aq) + Cl2 (g) + H2 (g)

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प्रश्न 6.
हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता ज्ञात करने में प्रयुक्त स्केल का नाम लिखिये। अम्लीय वर्षा का कारण व इसके दो कुप्रभावों को लिखिए।
उत्तर-
हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता ज्ञात करने में pH-स्केल प्रयुक्त किया जाता है। वर्षा के जल की pH मान 5.6 से कम हो जाती है तो वह अम्लीय वर्षा (Acid Rain) कहलाती है।

अम्लीय वर्षा के कुप्रभाव-

  1. अम्लीय वर्षा का जल जब नदी में प्रवाहित होता है तो नदी के जल के pH का मान कम हो जाता है। ऐसी नदी में जलीय जीवधारियों की उत्तरजीविता कठिन हो जाती है।
  2. अम्लीय वर्षा के कारण संगमरमर से बना ताजमहल काला पड़ने लगा है क्योंकि कैल्सियम कार्बोनेट (CaCO3) वर्षा में उपस्थित अम्ल से क्रिया कर लेता है।

बहुविकल्पीय प्रश्न (Objective Type Questions)

1. विलयन में किस आयन के निर्माण के कारण पदार्थ की प्रकृति अम्लीय होती है-
(a) H+
(b) Cl
(c) OH
(d) SO4-2
उत्तर-
(a) H+.

2. हमारा उदर कौन-सा अम्ल उत्पन्न करता है –
(a) H2SO4
(b) HNO3
(c) HCl
(d)NaOH.
उत्तर-
(c) HCl.

3. अम्ल –
(a) का स्वाद कड़वा होता है
(b) लाल लिटमस को नीला करता है
(c) कार्बोनेट को विघटित करता है
(d) का स्पर्श फिसलने वाला होता है।
उत्तर-
(c) कार्बोनेट को विघटित्त करता है।

4. तनु अम्ल से अभिक्रिया कर कौन-सा पदार्थ CO2 उत्पन्न नहीं करेगा –
(a) संगमरमर
(b) चूना
(c) चूना पत्थर
(d) मीठा सोडा।
उत्तर-
(b) चूना।

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण

5. हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के जलीय विलयन में उपस्थित है –
(a) H3O+ + Cl
(b) Cl+OH
(c) अनायनित HCl
(d) H3O+ + OH
उत्तर-
(b) Cl+OH.

6. निम्न में से कौन-सा क्षार नहीं है-
(a)NaOH
(b) KOH
(c)NH4OH
(d) C2H5OH.
उत्तर-
(d) C2H5OH.

7. जब पानी में थोड़ी मात्रा में किसी अम्ल को मिलाते हैं तो होने वाली परिघटनाएँ हैं –
(A) तनुकरण
(B) उदासीनीकरण
(C) H3O+ आयन बनना
(D) लवण निर्मित होना
इनमें से सही कथन है-
(a)A और C
(b)B और D
(c) A और B
(d) C और D
उत्तर-
(a) A और C

8. वे पदार्थ जिनकी गंध अम्लीय या क्षारीय माध्यम में बदल जाती है, कहलाते हैं –
(a) गंधीय सूचक
(b) संश्लेषित सूचक
(c) लिटमस
(d) ये सभी सूचक।
उत्तर-
(a) गंधीय सूचक।

9. अम्ल तथा क्षारक की परस्पर क्रिया से लवण तथा पानी बनता है, यह क्रिया है-
(a) जल-अपघटन
(b) संयोजन
(c) उदासीनीकरण
(d) वैद्युत अपघटन।
उत्तर-
(c) उदासीनीकरण।

10. किसी विलयन की pH किसकी माप है
(a) हाइड्रोजन आयन सान्द्रता
(b) हाइड्रोनियम आयन सान्द्रता
(c) दोनों (a) व (b)
(d) इनमें से कोई नहीं।
उत्तर-
(c) दोनों (a) व (b).

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण

11. रक्त का pH मान है-
(a) 0
(b) 2
(c) 4
(d) 7.4.
उत्तर-
(d) 7.4.

12. pH चार्ट के अन्तिम सिरों पर दिखने वाले दो रंग हैं
(a) लाल और नीला
(b) लाल तथा हरा
(c) हरा और लाल
(d) नारंगी तथा हरा (CBSE 2016)
उत्तर-
(a) लाल और नीला।

13. चार छात्र A,B,C,D जल,नींबू पानी तथा तनुसोडियम बाइकार्बोनेट के विलयनों का pH निकालते हैं। उन्होंने प्रेक्षणों द्वारा प्राप्त pH के नामों को अवरोही क्रम में इस प्रकार व्यवस्थित किया विलयन
A . जल, नींबू पानी, सोडियम बाइकार्बोनेट विलयन जल, सोडियम बाइकार्बोनेट विलयन, नींबू पानी – नींबू पानी, जल, सोडियम बाइकार्बोनेट
विलयन D
सोडियम बाइकार्बोनेट विलयन, जल,
नींबू पानी छात्र द्वारा सही क्रम है
(CBSE 2016)
(a) A
(b) B
(c) C
(d) D
उत्तर-
(d) D

14. आपके विद्यालय के आस-पड़ोस में प्रयोग के लिए आवश्यक कठोर जल उपलब्ध नहीं है। आपके विद्यालय में उपलब्ध लवणों के नीचे दिए गए समूहों में से वह एक समूह चुनिए जिसके प्रत्येक सदस्य को आसुत जल में घोलने पर, वह उसे कठोर जल बना देगा –
(a) सोडियम क्लोराइड, कैल्सियम क्लोराइड
(b) पौटेशियम क्लोराइड, सोडियम क्लोराइड
(c) सोडियम क्लोराइड, मैग्नीशियम क्लोराइड
(d) कैल्सियम क्लोराइड, मैग्नीशियम क्लोराइड (CBSE 2016)
उत्तर-
(d) कैल्सियम क्लोराइड, मैग्नीशियम क्लोराइड

15. कोई छात्र 25 mL धारिता की चार परखनलियों P, Q, R और S लेकर प्रत्येक परखनली में 10 mL आसुत जल भरता है। वह इन परखनलियों में चार भिन्न लवणों का एक-एक चम्मच इस प्रकार मिलाता है-P में KCl; Q में NaCl; Rमें CaCl, तथा S में MgCl, I तत्पश्चात वह प्रत्येक परखनली में साबुन के विलयन के नमूने का लगभग 2 ml डालता है। प्रत्येक परखनली के पदार्थों की भली-भाँति हिलाने पर उसे जिन परखनलियों में भरपूर झाग मिलने की सम्भावना है, वे परखनलियाँ हैं-
(a) P और Q
(b) R और S
(c) P, Q और R
(d) P, Q और S (CBSE 2016)
उत्तर-
(a) P और Q

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill In the blanks)

1. चूना-पत्थर, खड़िया और संगमरमर ………………….. के विभिन्न रूप हैं।
उत्तर-
कैल्सियम कार्बोनेट,

2. जलीय कॉपर सल्फेट का सूत्र ………………….. है।
उत्तर-
CuSO4.5H2O,

3. जिप्सम का सूत्र ………………….. है।
उत्तर-
CaSO4 . 2H2O,

4. क्षार वे पदार्थ होते हैं जो जलीय विलयन में ………………….. उत्सर्जित करते हैं।
उत्तर-
हाइड्रॉक्साइड आयन (OH),

5. वर्षा के जल की pH मान 5.6 से कम हो जाता है तो वह ………………….. कहलाती है।
उत्तर-
अम्लीय वर्षा।

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 2 अम्ल, क्षारक एवं लवण

सुमेलन संबंधी प्रश्न (Matrix Type Questions)

प्रश्न 1.
निम्न को सुमेलित करें

AB
(1) जिप्सम(a) CaoCl2
(2) बेकिंग सोडा(b) MgSO4.7H2O
(3) ब्लीचिंग पाउडर(c) CasO4. \(\frac{1}{2}\)H2O
(4) एप्सम लवण(d) CaO
(5) बिना बुझा हुआ चूना(e) CaSO4.2H2O
(6) प्लास्टर ऑफ पेरिस(f) NaHCO3,

उत्तर-

AB
(1) जिप्सम(e) CaSO4.2H2O
(2) बेकिंग सोडा(f) NaHCO3,
(3) ब्लीचिंग पाउडर(a) CaoCl2
(4) एप्सम लवण(b) MgSO4.7H2O
(5) बिना बुझा हुआ चूना(c) CasO4. \(\frac{1}{2}\)H2O
(6) प्लास्टर ऑफ पेरिस(d) CaO

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HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण Important Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (Veryshort Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
द्रव्यमान के संरक्षण नियम को लिखिए।
उत्तर-
किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो निर्माण होता है और न ही विनाश, यही द्रव्यमान के संरक्षण का नियम है।

प्रश्न 2.
सन्तुलित रासायनिक समीकरण क्या है ?
उत्तर-
रासायनिक अभिक्रिया के पहले और उसके पश्चात् प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या यदि समान रहती है तो उसे सन्तुलित समीकरण कहते हैं।

प्रश्न 3.
जल के निर्माण के लिए संयोजन अभिक्रिया लिखिए।
उत्तर-
2H2 (g) + O2 (g) → 2H2O (l)

प्रश्न 4.
2Mg + O2 →? उपरोक्त अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए। (RBSE 2017)
उत्तर-
2Mg +O2 → 2MgO

प्रश्न 5.
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 1
उपर्युक्त अभिक्रिया का प्रयोग कहाँ होता है ?
उत्तर-
श्वेत-श्याम फोटोग्राफी में।

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

प्रश्न 6.
संक्षारण के कारण चाँदी व ताँबे पर कैसे रंग की परत चढ़ जाती है?
उत्तर-
चाँदी पर-काली तथा ताँबे पर-हरी।

प्रश्न 7.
क्यूप्रिक सल्फेट विलयन में लोहे का टुकड़ा डालने पर किस प्रकार की रासायनिक अभिक्रिया होती है ?
उत्तर-
प्रतिस्थापन अभिक्रिया
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 2

प्रश्न 8.
दी गई अभिक्रिया किस प्रकार की है
Na2SO4 + BaCl2 → BaSO4 + 2NaCl
उत्तर-
यह एक द्विविस्थापन अभिक्रिया है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन

प्रश्न 9.
जंग लगने के लिए आवश्यक कारक कौन-कौन से होते हैं ?
उत्तर-

  • धातु की खुली सतह,
  • ऑक्सीजन की उपस्थिति,
  • नमी की उपस्थिति।

प्रश्न 10.
भोजन के पाचन में किस प्रकार की अभिक्रिया होती है ?
उत्तर-
भोजन के पाचन में वियोजन अभिक्रिया होती है।

‘प्रश्न 11.
रेडॉक्स अभिक्रिया का एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
MnO2 +4HCl → MnCl2 + 2H2O+Cl2

प्रश्न 12.
फेरस सल्फेट के क्रिस्टलों को गर्म करने पर होने वाली अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
उत्तर-
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 3

प्रश्न 13.
प्राकृतिक गैस का दहन करने पर क्या प्राप्त होता है ?
उत्तर-
CO2, H2O और ऊर्जा।

प्रश्न 14.
जंग क्या है ? इसका सूत्र लिखिए।
उत्तर-
जंग मुख्यतः हाइड्रेटेड आयरन (HI) ऑक्साइड (Fe2O3,xH2O) है।

प्रश्न 15.
उस अभिक्रिया का नाम बताइए जिसमें अविलेय लवण प्राप्त होता है?
उत्तर-
अवक्षेपण अभिक्रिया।

प्रश्न 16.
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 4
उत्तर-
आयनिक वियोजन (क्योंकि यौगिक आयनों में अपघटित हो रहा है)

प्रश्न 17.
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 5
उत्तर-
योगात्मक अभिक्रिया (क्योंकि दो यौगिकों का संयोजन हो रहा है)।

प्रश्न 18.
CH4 + Cl2 →CH3Cl + HCI
उत्तर-
प्रतिस्थापन अभिक्रिया (क्योंकि इसमें एक परमाणु दूसरे के द्वारा विस्थापित हो रहा है)।

प्रश्न 19.
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 6
उत्तर-
ऊष्मीय वियोजन (क्योंकि इसमें NH4Cl गर्म करने पर विघटित हो रहा है)।

प्रश्न 20.
NH4Cl ⇌ NH4+ + Cl
उत्तर-
आयनिक वियोजन अभिक्रिया (क्योंकि NH4Cl का आयनों में वियोजन हो रहा है)।

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
रासायनिक अभिक्रियाओं के कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
रासायनिक अभिक्रियाओं के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं-

  • भोजन पकाना,
  • अंगूर का किण्वन,
  • श्वसन क्रिया,
  • शरीर द्वारा भोजन को पचाना,
  • गर्मियों में कमरे के ताप पर दूध का फट जाना।

प्रश्न 2.
नीचे दिए गए रासायनिक समीकरणों को पूरा और संतुलित कीजिए
(i) NaOH(aq) +Zn(s)
(ii) CaCO3(s) +H2O(l) +CO2(g) →
(iii) HCl(aq) +H2O → (CBSE 2020)
उत्तर –
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 7

प्रश्न 3.
निम्नलिखित समीकरणों को सन्तुलित कीजिए
(i) H2SO4 (aq) + NaOH (ag) →NaSO4 (aq) +H2O(l)
(ii) Ba(OH)2 (aq) + HBr (aq) → BaBr2 (aq) +H2O(l)
(iii) BaCl2 (aq) +Al2(SO4)3 (aq) → AlCl3 (aq) + BaSO4(↓)
(iv) Pb(NO3)2 (aq) + Fe2(SO4)3 (aq) → Fe(NO3)3 (aq) + PbSO4,(↓)
(v) CH4 (g) + O2 (g) →CO2 (g) + H2O(l)
उत्तर-
(i) H2SO4 (aq) + 2NaOH (ag) →Na2SO4 (aq) +2H2O(l)
(ii) Ba(OH)2 (aq) + 2HBr (aq) → BaBr2 (aq) + 2H2O(l)
(iii) 3BaCl2 (aq) +Al2(SO4)3 (aq) → 2AlCl3 (aq) + 3BaSO4(↓)
(iv) 3Pb(NO3)2 (aq) + Fe2(SO4)3 (aq) → 2Fe(NO3)3 (aq) + 3PbSO4(↓)
(v) CH4 (g) + 2O2 (g) → CO2 (g) + 2H2O(l)

प्रश्न 4.
जिंक की सल्फ्यूरिक अम्ल से क्रिया पर गैस X बनती है|
(i) गैस X का नाम दीजिए।
(ii) अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
(iii) गैस X की पहचान कैसे करेंगे ? [राज. 2015]
उत्तर-
(i) गैस X = H2, गैस
(ii) Zn + H2SO4 →ZnSO4 +H2
(iii) जब जलती हुई मोमबत्ती को हाइड्रोजन गैस के पास ले जाते हैं, तो यह फट-फट की ध्वनि के साथ जलती गर्म करने पर है|

प्रश्न 5.
किसी चायना डिश में 1 ग्राम कॉपर चूर्ण को लेकर गर्म किया गया। इसे गर्म करने पर क्या परिवर्तन होते हैं? क्या गर्म पदार्थ पर हाइड्रोजन गैस प्रवाहित करने पर इसमें कोई दिखाई देने योग्य परिवर्तन होता है? प्रत्येक प्रकरण में बनने वाले पदार्थों के नाम और रंग तथा होने वाली अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण लिखिए। (CBSE 2020)
उत्तर-
कॉपर चूर्ण गर्म करने पर ठोस काले रंग के कॉपर ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। ” कॉपर ऑक्साइड में H2 गैस प्रवाहित करने पर पुन: भूरे रंग की कॉपर धातु प्राप्त होती है।
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 8

प्रश्न 6.
किसी चायना डिश में 2g सिल्वर क्लोराइड लेकर उसे कुछ समय के लिए सूर्य के प्रकाश में रखा जाता है। इस प्रकरण में आप क्या प्रेक्षण करेंगे? होने वाली रासायनिक अभिक्रिया का सन्तुलित रासायनिक समीकरण दीजिये। इस रासायनिक अभिक्रिया के प्रकार को पहचानकर लिखिए। (CBSE 2019)
उत्तर-
चायना डिश में रखे सिल्वर क्लोराइड का विघटन हो जायेगा तथा चमकदार सिल्वर प्राप्त होगी।
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 9

प्रश्न 7.
प्रकाश-रासायनिक अभिक्रियाएँ किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित समझाइए। ‘
उत्तर-
वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें प्रकाश का अवशोषण होता है, प्रकाश-रासायनिक अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। ये अभिक्रियाएँ प्रकाश की उपस्थिति में ही होती हैं।
उदाहरण के लिए-
(i) प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया में सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में हरे पौधे जल व CO2 की सहायता से कार्बोहाइड्रेट का निर्माण करते हैं।
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 10
(ii) H2 तथा Cl2 की क्रिया द्वारा HCl का बनना।
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 11

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

प्रश्न 8.
दिखाई देने वाले रंग में होने वाले परिवर्तन का उल्लेख कारण सहित कीजिए जबकि-
(i) सिल्वर क्लोराइड को सूर्य के प्रकाश में खुला रखा जाता है।
(ii) ऑक्सीजन की उपस्थिति में कॉपर के चूर्ण को अत्यधिक गर्म किया जाता है।
(iii) कॉपर सल्फेट विलयन में जिंक का टुकड़ा गिराया जाता है। (CBSE 2020)
उत्तर-
(i) जब सिल्वर क्लोराइड को सूर्य के प्रकाश में खुला रखा जाता है तो चमकदार सफेद चाँदी प्राप्त होती है। यह एक विघटन अभिक्रिया है।
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 12
(ii) कॉपर चूर्ण का भूरा रंग काले रंग वाले कॉपर ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। यह एक संयोजन अभिक्रिया है।
2Cu(s)+O2(g) →2CuO(s) कॉपर (II) ऑक्साइड (काला)

(iii) नीले रंग का कॉपर सल्फेट विलयन, रंगहीन जिंक सल्फेट में बदल जाता है तथा जिंक के टुकड़े पर कुछ मात्रा में भूरे रंग का कॉपर धातु जमा हो जाता है। यह एक प्रतिस्थापन अभिक्रिया है।
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 13

प्रश्न 9.
नीचे दी गई प्रत्येक अभिक्रिया के प्रकार को पहचानिए तथा प्रत्येक अभिक्रिया के लिए सन्तुलित रासायनिक समीकरण भी लिखिए-
(i) वह अभिक्रिया जिसमें मिश्रण गरम हो जाता है।
(ii) वह अभिक्रिया जिसमें कोई अविलेय पदार्थ बनता है। [CBSE 2020]
उत्तर-
(i) ऊष्माक्षेपी रासायनिक अभिक्रिया _
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 14
(ii) अवक्षेपण अभिक्रिया
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 15

प्रश्न 10.
CuO+H2O →Cu+H2O अभिक्रिया में कारण सहित बताइए [राज. 2015]
(i) उपचयित पदार्थ
(ii) अपचयित पदार्थ
(iii) उपचायक पदार्थ
(iv) अपचायक पदार्थ।
उत्तर-
(i) H2, उपचयित पदार्थ है क्योंकि हाइड्रोजन में ऑक्सीजन का संयोग हो रहा है।
(ii) अपचयित पदार्थ Cuo है क्योंकि ऑक्सीजन, कॉपर ऑक्साइड में से निष्कासित हो रही है।
(iii) Cuo उपचायक पदार्थ है क्योंकि Cuo हाइड्रोजन के उपचयन हेतु आवश्यक ऑक्सीजन दे रहा है।
(iv) H3 अपचायक पदार्थ है क्योंकि हाइड्रोजन, कॉपर . ऑक्साइड के निष्कासन के लिए उत्तरदायी है।

प्रश्न 11.
(a) निम्नलिखित अभिक्रियाओं का विभिन्न प्रकारों में वर्गीकरण कीजिए
(i) AgNO3(aq) + NaCl(aq) →AgCI(s) +NaNO3(aq)
(ii) Cao(s) + H2O → Ca(OH)2(aq)
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 16
(iv) Zn + CuSO4 → ZnSO4 +Cu
(b) निम्नलिखित कथन को सन्तुलित रासायनिक समीकरण के रूप में रूपान्तरित कीजिए – “बेरियम क्लोराइड, ऐल्युमिनियम सल्फेट से अभिक्रिया करके ऐलुमिनियम क्लोराइड और बेरियम सल्फेट बनाता है।” (CBSE 2019)
उत्तर-
(a)
(i) द्विविस्थापन अभिक्रिया,
(ii) संयोजन अभिक्रिया,
(iii) अपघटन अभिक्रिया,
(iv) विस्थापन अभिक्रिया।

(b)
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 17

प्रश्न 12.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को संयोजन, वियोजन, विस्थापन तथा द्विविस्थापन के रूप में वर्गीकृत कीजिए
(i)2KClO3 (s) →2KCl(s) +3O2,(g)
(ii) 2KNO3 (s) → 2KNO2 (s) +O2(g)
(iii) MgO (s)+C(s) →CO (g)+Mg(s)
(iv) Zn (s) + 2HCl(aq) →ZnCl2 (aq) + H2(g)
(v) Zn (s) + 2AgNO3 (aq) → Zn(NO3)2 (aq) +2Ag(s)
उत्तर-
(i) वियोजन अभिक्रिया,
(ii) वियोजन अभिक्रिया,
(iii) प्रतिस्थापन अभिक्रिया,
(iv) प्रतिस्थापन अभिक्रिया,
(v) प्रतिस्थापन अभिक्रिया।

प्रश्न 13.
जब किसी परखनली में लेड (II) नाइट्रेट का विलयन लेकर उसमें पौटेशियम आयोडाइड का विलयन मिलाते हैं, तो कोई अवक्षेप बनता है-
(a) इस अवक्षेप का क्या रंग होता है? अवक्षेपित यौगिक का नाम लिखिए।
(b) इस अभिक्रिया का सन्तुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।
(c) अभिक्रिया के इन दो प्रकारों की सूची बनाइए जिनमें इस अभिक्रिया को रखा जा सकता है। [CBSE 2019]
उत्तर-
(a) पीले रंग का अवक्षेप प्राप्त होता है। अवक्षेपित यौगिक का नाम लैड आयोडाइड (PbI2) है।
(b) Pb(NO3)2(aq) + 2KI(aq) → PbI2↓ + 2KNO3(aq)
(c) अभिक्रिया के दो प्रकार जिनमें इस अभिक्रिया को रखा जा सकता है।
(i) द्विविस्थापन अभिक्रिया
(ii) अवक्षेपण अभिक्रिया

प्रश्न 14.
नीचे दिए गए प्रत्येक प्रकरण में होने वाली अभिक्रिया के प्रकार को पहचानिए और उसके लिए सन्तुलित रासायनिक समीकरण लिखिए-
(a) जिंक सिल्वर नाइट्रेट से अभिक्रिया करके जिंक नाइट्रेट और सिल्वर बनाता है।
(b) पोटैशियम आयोडाइड लैड नाइट्रेट से अभिक्रिया करके पौटेशियम नाइट्रेट और लैड आयोडाइड बनाता है। [CBSE 2019]
उत्तर-
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 18

प्रश्न 15.
दी गई अभिक्रिया
MnO2,+4HCl → MnCl2 + 2H2O+Cl2
(a) उपरोक्त के उस यौगिक का नाम लिखिए जिसका
(i) उपचयन,
(ii) अपचयन हुआ है।
(b) उपरोक्त के आधार पर उपचयन और अपचयन की परिभाषा लिखिए। [CBSE 2018]
उत्तर-
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 19
(a)
(i) HCl यौगिक का उपचयन .
(ii) MnO2 यौगिक का अपचयन
(b) उपचयन-जब किसी रासायनिक अभिक्रिया में किसी पदार्थ में ऑक्सीजन का योग अथवा हाइड्रोजन की हानि हो तो ऐसी अभिक्रिया को उपचयन कहते हैं। अपचयन-जब किसी रासायनिक अभिक्रिया में किसी पदार्थ में हाइड्रोजन का योग अथवा ऑक्सीजन की हानि होती है तो ऐसी अभिक्रिया को अपचयन कहते हैं।

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

प्रश्न 16.
क्या होता है, जब सोडियम सल्फेट का विलयन बेरियम क्लोराइड के विलयन में मिलाया जाता है। इसका सन्तुलित रासायनिक समीकरण लिखिए। यह अभिक्रिया किस प्रकार की है? [CBSE 2017]
उत्तर-
इस अभिक्रिया में BaSO4, (बेरियम सल्फेट) के सफेद अवक्षेप बनते हैं।
Na2So (aq) + BaCl2(aq) → BaSO4(s) + 2NaCl(aq)
यह एक द्विविस्थापन अभिक्रिया है।

प्रश्न 17.
संयोजन अभिक्रिया किसे कहते हैं? बिन बुझे चूने व जल की संयोजन अभिक्रिया लिखिए। [RBSE 2016]
उत्तर-
वह अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक प्रकार के पदार्थों के अणु परस्पर जुड़कर केवल एक ही प्रकार के अणु बनाते हैं, संयोजन या योगात्मक अभिक्रिया कहलाती है।
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 20

प्रश्न 18.
संयोजन अभिक्रिया किसे कहते हैं? कोयले के दहन की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए। राज.2015]
उत्तर-
संयोजन अभिक्रिया- जब किसी अभिक्रिया में दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं, तो ऐसी अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया कहते हैं। उदाहरणार्थ- कोयले का दहन
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 21

प्रश्न 19.
वियोजन अभिक्रिया किसे कहते हैं? कैल्सियम कार्बोनेट के ऊष्मीय वियोजन की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए। [राज. 2015]
उत्तर-
वियोजन अभिक्रियाएँ-ऐसी रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें कोई पदार्थ छोटे-छोटे पदार्थों या यौगिकों में विघटित हो जाता है, वियोजन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। उदाहरणार्थ- कैल्सियम कार्बोनेट ऊष्मा के द्वारा विघटित होकर कैल्सियम ऑक्साइड तथा कार्बन डाइ
ऑक्साइड बनाता है।
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 22

प्रश्न 20.
(a) वसायुक्त खाद्य पदार्थों को विकृतगंधिता से बचाने के लिए क्या किया जाता है?
(b) CuO+H2 → Cu+H2O
उपरोक्त अभिक्रिया में किस पदार्थ का उपचयन हो रहा है व किसका अपचयन? [RBSE 2017]
उत्तर-
(a) वसायुक्त खाद्य पदार्थ को विकृतगंधिता से बचाने के लिए नाइट्रोजन गैस का इस्तेमाल किया जाता है।
(b) इस अभिक्रिया में हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण व कॉपर का अपचयन हो रहा है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
प्रस्तुत अभिक्रियाओं के प्रकार लिखिए-
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 23
उत्तर-
(i) आयनिक वियोजन अभिक्रिया,
(ii) योगात्मक अभिक्रिया,
(iii) प्रतिस्थापन अभिक्रिया,
(iv) ऊष्मीय वियोजन अभिक्रिया,
(v) आयनिक वियोजन अभिक्रिया,
(vi) उभय अपघटन अभिक्रिया,
(vii) ऊष्मीय अपघटन अभिक्रिया,
(viii) ऊष्मीय वियोजन अभिक्रिया,
(ix) योगात्मक अभिक्रिया,
(x) प्रतिस्थापन अभिक्रिया।

प्रश्न 2.
संयोजन तथा वियोजन अभिक्रियाओं में क्या अन्तर है ? प्रत्येक अभिक्रिया का एक-एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
संयोजन तथा वियोजन अभिक्रियाओं में अन्तर-

संयोजन अभिक्रियावियोजन अभिक्रिया
1. इन अभिक्रियाओं में दो या दो से अधिक पदार्थ परस्पर संयोग करके एक पदार्थ बनाते हैं।1. इन अभिक्रियाओं में एक यौगिक वियोजित होकर दो या दो से अधिक सरल पदार्थ बनाता है।
2. ये अभिक्रियाएँ एक या अनेक तत्वों के आपसी संयोजन से विभिन्न ऊर्जाओं की उपस्थिति में पूर्ण होती हैं।
उदाहरण- (i) NH3 + HCl →NH4Cl
2. ये अभिक्रियाएँ प्रायः ऊष्मा, प्रकाश, विद्युत् या उत्प्रेरकों के कारण ही सम्भव हो पाती हैं; परन्तु ये संयोजन अभिक्रियाओं के विपरीत होती हैं। उदाहरण-
(i) CaCO3 → CaO + CO2

प्रश्न 3.
निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं के लिए सन्तुलित समीकरण लिखिए तथा अभिक्रिया के प्रकार को पहचानिए-
(i) पोटैशियम ब्रोमाइड (aq) + बेरियम आयोडाइड (aq) → पोटैशियम आयोडाइड (aq) + बेरियम ब्रोमाइड (aq)
(ii) जिंक का नेट (s) → जिंक ऑक्साइड (s) + कार्बन डाइऑक्साइड (g)
(iii) हाइड्रोजन (g) + क्लोरीन (g) → हाइड्रोजन क्लोराइड (g)
उत्तर-
(i) 2KBr (aq) + Bal2, (aq) → 2KI (aq) + BaBr2, (aq) (द्विविस्थापन अभिक्रिया)
HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण 24
(iii) H2(g) + Cl2(g) → 2HCl(g) (संयोजन अभिक्रिया)

प्रश्न 4.
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को सन्तुलित करके प्रत्येक अभिक्रिया के प्रकार बताइए
(i) CH4Cl+ Cl2 → CH3Cl + HCl
(ii) Na + Cl2 → NaCl
(iii) H2SO4 + NaOH →Na2SO4 + H2O
(iv) Ba(OH)2, + HBr → BaBr2 + H2O
(v) BaCl2 + Al2 (SO4)3 → AlCl3 + BaSO4
उत्तर-
(i) 2CH4Cl+ Cl2 → 2CH3Cl + HCl (प्रतिस्थापन अभिक्रिया)
(ii) 2Na + Cl2 → 2NaCl (योगात्मक अभिक्रिया)
(iii) H2SO4 + 2NaOH → Na2SO4 + 2H2O (उदासीनीकरण अभिक्रिया)
(iv)Ba(OH)2 + 2HBr → BaBr2 + 2H2O (उदासीनीकरण अभिक्रिया)
(v) 3BaCl2 + Al2(SO4)3 →2AlCl2 + 2BaSO4 (द्विविस्थापन अभिक्रिया)

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

बहुविकल्पीय प्रश्न (Objective Type Questions)

1. किस गैस के उपस्थित होने पर मैग्नीशियम रिबन का दहन होता है –
(a) CO2
(b) CO
(c) H2
(d) O2.
उत्तर-
(d) O2

2. अभिक्रिया के तीर का सिरा किस ओर होता है –
(a) अभिकारक
(b) अवक्षेप
(c) गैस
(d) उत्पाद।
उत्तर-
(a) अभिकारक।

3. दानेदार जिंक पर तनु HCl डालने पर कौन-सी गैस उत्पन्न होती है –
(a) H2
(b) SO2
(c) Cl2
(d) O2
उत्तर-
(a) H2.

4. कौन-सा चिह्न उत्पाद के अवक्षेप के रूप में प्राप्त होने पर लगाया जाता है –
(a) ↑
(b) →
(c) ←
(d)↓.
उत्तर-
(d) ↓

5. दाब, उत्प्रेरक, ताप आदि को अभिक्रिया में तीर के निशान के साथ कैसे दिखाया जाता है –
(a) ऊपर
(b) नीचे
(c) आगे
(d) ऊपर या नीचे।
उत्तर-
(d) ऊपर या नीचे।

6. आयरन की भाप के साथ अभिक्रिया करने पर प्राप्त यौगिक है/हैं –
(a) Fe2O3
(b) Fe3O4.
(c) Feo
(d) Fe2O3 और Fe3SO4
उत्तर-
(b) Fe3O4.

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

7. कैल्सियम ऑक्साइड जल के साथ तीव्र अभिक्रिया करके बुझा हुआ चूना बनाता है।
CaO(s) + H2 O(I)→ Ca(OH)2 (aq)
इस अभिक्रिया का वर्गीकरण अभिक्रियाओं के किस प्रकार में किया जा सकता है? (A) संयोजन अभिक्रिया (B) ऊष्मा उन्मोची अभिक्रिया (C) ऊष्माशोषी अभिक्रिया (D) उपचयन अभिक्रिया। निम्न में से सही विकल्प कौन-सा है?
(a) A और C
(b) C और D
(c) A, C और D
(d)A और B
उत्तर-
(d) A और B.

8. जब हाइड्रोजन सल्फाइड गैस को कॉपर सल्फेट के नीले विलयन से प्रवाहित किया जाता है तो कॉपर सल्फाइड का काला अवक्षेप प्राप्त होता है तथा इस प्रकार बना सल्फ्यूरिक अम्ल विलयन में रह जाता है यह अभिक्रिया निम्नलिखित में से किसका उदाहरण है?
(a) संयोजन अभिक्रिया
(b) विस्थापन अभिक्रिया
(c) वियोजन अभिक्रिया
(d) द्विविस्थापन अभिक्रिया
उत्तर-
(d) द्विविस्थापन अभिक्रिया।

9. CaO+H2O → Ca(OH)2 उपर्युक्त अभिक्रिया है-
(a) अपघटन अभिक्रिया
(b) वियोजन अभिक्रिया
(c) संयोजन अभिक्रिया
(d) विस्थापन अभिक्रिया।
उत्तर-
(c) संयोजन अभिक्रिया।

10. CuSO4 (aq) +Zn(s) → ZnSO4 (aq) + Cu (s) उपर्युक्त अभिक्रिया है –
(a) संयोजन अभिक्रिया
(b) विस्थापन अभिक्रिया
(c) अपघटन अभिक्रिया
(d) द्विविस्थापन अभिक्रिया।
उत्तर-
(b) विस्थापन अभिक्रिया।

11. शाक-सब्जियों का विघटित होकर कम्पोस्ट बनाना कैसी अभिक्रिया है ?
(a) ऊष्माशोषी
(b) ऊष्मासंवेदी
(c) ऊष्माक्षेपी
(d) ऊष्मारोधी।
उत्तर-
(c) ऊष्माक्षेपी।

12. नम वायु में ताँबे की बाहरी सतह पर किस रंग की परत चढ़ जाती है –
(a) भूरी
(b) काली
(c) लाल
(d) हरी।
उत्तर-
(d) हरी।

13. निम्न अभिक्रिया Fe2O3, +3CO → 2 Fe + 3CO2, में अपचयित पदार्थ है-
(a) CO
(b) Fe
(c) CO2
(d) Fe2O3.
उत्तर-
(d) Fe2O3.

14. C2H12O6 (aq) + 6O6 (aq) + 6H2O(l) → 6CO2(aq) +12H2O (l) + ऊर्जा, इस रासायनिक अभिक्रिया का विशेष नाम है –
(a) उत्सर्जन
(b) पाचन
(c) श्वसन
(d) प्रजनन
उत्तर-
(c) श्वसन।

15. अपघटन अभिक्रिया का उदाहरण है
(a) 2SO2+O2 → 2SO3
(b) 2KClO3 → 2KCl+3O2
(c) Mg + 2HCl → MgCl2+H2
(d) HCl + NaOH→ NaCl+H2O.
उत्तर-
(b) 2KCIO3, → 2KCl+3O2.

16. Cl2 +2KI → 2KCI+I2 एक-
(a) संयोजन अभिक्रिया है
(b) अपघटन अभिक्रिया है
(c) विस्थापन अभिक्रिया है
(d) द्विविस्थापन अभिक्रिया है।
उत्तर-
(c) विस्थापन अभिक्रिया है।

HBSE 10th Class Science Important Questions Chapter 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (Fill In the blanks)

1. सफेदी करने के दो-तीन दिन बाद ………………………. की परत का निर्माण होता है।
उत्तर-
कैल्सियम कार्बोनेट,

2. श्वसन एक ……………………. रासायनिक अभिक्रिया है।
उत्तर-
ऊष्माक्षेपी,

3. लोहे की वस्तुओं पर जंग उनकी खुली सतह पर …………………. एवं ……………….. के कारण लगती है।
उत्तर-
ऑक्सीजन, नमी,

4. तेल एवं वसायुक्त खाद्य पदार्थों के उपचयन से बचाव हेतु हम इनमें………..प्रवाहित कर देते हैं।
उत्तर-
नाइट्रोजन,

5. मैग्नीशियम को वायु की उपस्थिति में जलाने पर ………….. प्राप्त होगा।
उत्तर-
मैग्नीशियम ऑक्साइड।

सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न (Matrix Type Questions)

निम्न को सुमेलित कीजिए-
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HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास Textbook Exercise Questions, and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Solutions Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास

HBSE 10th Class Science अनुवांशिकता एवं जैव विकास Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
मेण्डल के एक प्रयोग में लम्बे मटर के पौधे जिनके बैंगनी पुष्प थे, का संकरण बौने पौधों जिनके सफेद पुष्प थे, से कराया गया। इनकी संतति के सभी पौधों में पुष्य बैंगनी रंग के थे, परन्तु उनमें से लगभग आधे बौने थे। इससे कहा जा सकता है कि लम्बे जनक पौधों की आनुवंशिक रचना निम्न थी –
(a) TT WW
(b) TT WW
(c) Tt WW
(d) Tt Ww.

प्रश्न 2. समजात अंगों का उदाहरण है –
(a) हमारा हाथ तथा कुत्ते का अग्रपाद
(b) हमारे दाँत तथा हाथी के दाँत
(c) आलू तथा घास के उपरिभूस्तारी
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 3.
विकासीय दृष्टि से हमारी किससे अधिक समानता है
(a) चीन के विद्यार्थी
(b) चिम्पैंजी
(c) मकड़ी
(d) जीवाणु।
उत्तर-
1. (c),
2. (d),
3. (a)

प्रश्न 4.
एक अध्ययन से पता चला कि हल्के रंग की आँखों वाले बच्चों के जनक (माता-पिता) की आँखें भी हल्के रंग की होती हैं। इसके आधार पर क्या हम कह सकते हैं कि आँखों के हल्के रंग का लक्षण प्रभावी है अथवा अप्रभावी? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
उपर्युक्त परिस्थिति में नेत्रों का हल्का रंग प्रभावी लक्षण है। अत: यह लक्षण जनकों से भावी पीढ़ी की सन्तानों में स्थानान्तरित हो सकता है। प्रभावी लक्षण उसी अवस्था में अथवा कुछ परिवर्तन के साथ भावी पीढ़ी में चले जाते हैं। इनमें अप्रभावी लक्षण भी उपस्थित होते हैं। ये अप्रभावी लक्षण प्रभावी लक्षणों की अनुपस्थिति में सन्तान में प्रदर्शित हो सकते हैं।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास

प्रश्न 5.
जैव विकास तथा वर्गीकरण का अध्ययन क्षेत्र किस प्रकार परस्पर संबंधित है?
उत्तर-
दो जातियों के बीच जितने अधिक अभिलक्षण समान होंगे उनका सम्बन्ध भी उतना ही निकट का होगा। जितनी अधिक समानताएँ उनमें होंगी उनका उद्भव भी निकट अतीत में समान पूर्वजों से हुआ होगा। उदाहरण के लिए; एक भाई एवं बहिन अति निकट सम्बन्धी हैं। उनसे पहली पीढ़ी में उनके पूर्वज समान थे अर्थात् वे एक ही माता-पिता की सन्तान हैं। लड़की के चचेरे/ममेरे भाई बहिन भी उनसे सम्बन्धित हैं लेकिन उसके अपने भाई से कम निकट का सम्बन्ध है। इसका मुख्य कारण है कि उनके पूर्वज समान हैं, अर्थात् दादा-दादी जो उनसे दो पीढ़ी पहले के हैं, न कि एक पीढ़ी पहले के। अब हम इस बात को भली प्रकार समझ सकते हैं कि जाति/जीवों का वर्गीकरण उनके विकास के सम्बन्धों का प्रतिबन्ध है।

प्रश्न 6.
समजात तथा समरूप अंगों को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर-
समजात अंग-ऐसे अंग जो उत्पत्ति एवं मूल रचना में समान होते हैं तथा जिनके कार्य भिन्न-भिन्न होते हैं, समजात अंग कहलाते हैं। उदाहरण-घोड़े के अग्रपाद, चमगादड़ एवं पक्षी के पंख, मनुष्य के हाथ आदि। समरूप अंग-ऐसे अंग जिनकी उत्पत्ति तथा मूल रचना भिन्न-भिन्न होती हैं किन्तु कार्य समान होते हैं, समवृत्ति अंग कहलाते हैं।
उदाहरण-तितली के पंख एवं चमगादड़ के पंख, आदि।

प्रश्न 7.
कुत्ते की खाल का प्रभावी रंग ज्ञात करने के उद्देश्य से एक प्रोजेक्ट बनाइए।
उत्तर-
माना कुत्ते की त्वचा का काला रंग (W), भूरे रंग (w) पर प्रभावी लक्षण है। इसे निम्न प्रकार प्रदर्शित किया जा सकता है-
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास 1
अत: F2 पीढ़ी में तीन कुत्ते काले एवं एक कुत्ता भूरा है। यह प्रोजेक्ट दर्शाता है कि काला रंग भूरे पर प्रभावी है।

प्रश्न 8.
विकासीय सम्बन्ध स्थापित करने में जीवाश्म का क्या महत्त्व है?
उत्तर-
जीवाश्म विकास के पक्ष में प्रमाण उपलब्ध कराते हैं। ये किसी जीव के विकास काल की सापेक्ष जानकारी एवं विकास की विलुप्त कड़ियों की भी जानकारी प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए; आर्कियोप्टेरिक्स नामक जीवाश्म में पक्षियों एवं सरीसृपों दोनों के गुण पाये जाते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि पक्षियों का विकास सरीसृपों से हुआ है। अतः जीवाश्म विकास की कड़ियों को खोलने में सहायक हैं। जीवाश्मों की आयु का निर्धारण चट्टान में पाये जाने वाले रेडियोधर्मी तत्वों और इसके रेडियोधर्मिताविहीन समस्थानिक तत्वों के अनुपात से किया जाता है।

प्रश्न 9.
किन प्रमाणों के आधार पर हम कह सकते हैं कि जीवन की उत्पत्ति पदार्थों से हुई है?
उत्तर-
हम जानते हैं कि अनेकों अकार्बनिक पदार्थ तथा कार्बनिक पदार्थ विशिष्ट परिस्थितियों में मिलकर जीन का निर्माण करते हैं जो आनुवंशिकता की इकाई हैं। हाल्डेन तथा मिलर एवं यूरे ने अपने प्रयोग द्वारा प्रयोगशाला में यह सिद्ध कर दिया कि प्रारम्भिक जीव की उत्पत्ति अकार्बनिक पदार्थों से हुई। अकार्बनिक अणुओं से कुछ जटिल कार्बनिक अणुओं का संश्लेषण हुआ जिसके फलस्वरूप वे सरल कार्बनिक यौगिकों में परिवर्तित हुये तथा अमीनों अम्ल जैसे पदार्थों का निर्माण हुआ जो जीवन का आधार होते हैं।

प्रश्न 10.
अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न विभिन्नताएँ अधिक स्थायी होती हैं, व्याख्या कीजिए। यह लैंगिक प्रजनन करने वाले जीवों के विकास को किस प्रकार प्रभावित करता है ?
उत्तर-
लैंगिक जनन की प्रक्रिया में संयुग्मन करने वाले युग्मक (gametes) विभिन्न जनकों से आते हैं। इनके मिलने से युग्मनज (zygote) का निर्माण होता है। युग्मनज से सम्पूर्ण संतति जीव विकसित होता है। युग्मकों का निर्माण डी. एन. ए. के प्रतिकृतिकरण के द्वारा सम्भव होता है और डी. एन. ए. के प्रतिकृति होने के समय इसमें अनेक विभिन्नताएँ उत्पन्न हो जाती हैं जो नये जीव में वंशानुगत होती हैं। इसीलिए लैंगिक जनन द्वारा उत्पन्न विभिन्नताएँ अधिक स्थायी होती हैं।

अलैंगिक जनन में उत्पन्न विभिन्नताएँ जीव के जनन द्रव्य में न होकर केवल प्लाज़्मा द्रव्य में होती हैं अतः ये स्थायी नहीं होती हैं। यदि किसी प्रकार की विभिन्नता उत्तम है तो यह जीव के विकास व उत्तरजीविता के अधिक अवसर प्रदान करेगी। यह नयी स्पीशीज के उद्भव का मुख्य कारक है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास

प्रश्न 11.
संतति में नर एवं मादा जनकों द्वारा आनुवंशिक योगदान में बराबर की भागीदारी किस प्रकार सुनिश्चित की जाती है?
उत्तर-
सामान्यतया विकसित जीवधारियों की कोशिकाओं में विभिन्न प्रकार के गुणसूत्रों के दो जोड़े होते हैं। इसे 2n से प्रदर्शित करते हैं और ऐसी कोशिकाओं को द्विगुणित कहते हैं। द्विगुणित जनन कोशिकाओं में युग्मक निर्माण के समय अर्द्धसूत्री विभाजन होता है। इसके फलस्वरूप अगुणित (n) युग्मकों का निर्माण होता है।

संतति निर्माण के समय जनक युग्मक मिलकर द्विगुणित युग्मनज (Zygote) बनाते हैं। युग्मनज से सन्तान का विकास होता है। इसमें एक युग्मक माता (मादा) से तथा दूसरा युग्मक पिता (नर) से आता है। अतः स्पष्ट है कि सन्तान की उत्पत्ति में नर एवं मादा द्वारा आनुवंशिक योगदान में बराबर की हिस्सेदार होती है तथा ये युग्मक ही आनुवंशिक पदार्थ का वहन करते हैं।

प्रश्न 12.
केवल वे विभिन्नताएँ जो किसी एकल जीव (व्यष्टि) के लिए उपयोगी होती हैं, समष्टि में अपना अस्तित्व बनाए रखती हैं। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? क्यों एवं क्यों नहीं ? |
उत्तर-
हाँ, हम इस कथन से सहमत हैं क्योंकि जो विभिन्नताएँ एकल जीव (व्यष्टि) के लिए उपयोगी हैं, वे वर्तमान पर्यावरण के अनुकूल हैं और प्राकृतिक चयन द्वारा अपने अस्तित्व को बनाये रखती हैं। ये विभिन्नताएँ समय व्यतीत होने के साथ-साथ समष्टि की मुख्य विशेषता के रूप में स्थापित हो जाती हैं। जीवधारी इन विभिन्नताओं के कारण स्वयं को वातावरण से अनुकूलित किए रहते हैं। यह जीवधारी सफल होते हैं और अपनी संतति को निरन्तर सृष्टि में बनाये रखते हैं।

HBSE 10th Class Science अनुवांशिकता एवं जैव विकास  InText Questions and Answers

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 157)

प्रश्न 1.
यदि एक ‘लक्षण-A’ अलैंगिक प्रजनन वाली समष्टि के 10 प्रतिशत सदस्यों में पाया जाता है तथा ‘लक्षण-B’ उसी समष्टि में 60 प्रतिशत जीवों में पाया जाता है, तो कौन-सा लक्षण पहले उत्पन्न हुआ होगा?
उत्तर-
लक्षण-B’ अलैंगिक प्रजनन वाली समष्टि में 60 प्रतिशत जीवों में पाया जाता है। यह लक्षण-A’ प्रजनन वाली समष्टि से 50 प्रतिशत अधिक है इसलिए ‘लक्षण-B’ पहले उत्पन्न हुआ होगा।

प्रश्न 2.
विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज का अस्तित्व किस प्रकार बढ़ जाता है?
उत्तर-
विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी जाति (species) की उत्तरजीविता की सम्भावना बढ़ जाती है। जाति की उत्तरजीविता का आधार वातावरण में घटने वाला प्राकृतिक चयन ही होता है। समय के साथ उनमें जो प्रगति की प्रवृत्ति दिखाई देती है उसके साथ उनके शारीरिक अधिकल्प में जटिलता की वृद्धि भी हो जाती है। विभिन्नताएँ जैव विकास का आधार हैं।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 161)

प्रश्न 1.
मेण्डल के प्रयोगों द्वारा कैसे पता चला कि लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी होते हैं?
उत्तर-
मेण्डल ने अपने प्रयोग के लिए मटर के दो विपर्यासी लक्षणों को चुना, जैसे कि मटर के लम्बे पौधे जो लम्बे पौधों को उत्पन्न करते थे तथा बौने पौधे जो बौने पौधों को ही उत्पन्न करते थे। जब मेण्डल ने लम्बे पौधे तथा बौने पौधे के बीच संकरण कराया तो प्रथम संतति (F) में सभी पौधे लम्बे थे। इससे स्पष्ट हो गया कि पौधे के लम्बेपन का लक्षण बौनेपन लक्षण पर प्रभावी हो गया तथा बौनापन अप्रभावी होने के कारण छिपा रह गया।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास 3
जब F1 पीढ़ी के पौधों में मेण्डल ने स्वपरागण होने दिया और इससे प्राप्त बीजों को उगाने पर देखा कि लम्बे और बौने पौधे 3 : 1 के अनुपात में उत्पन्न हुए। इस प्रयोग से ज्ञात हो गया कि लक्षण प्रभावी एवं अप्रभावी होते हैं। उपर्युक्त विवरण के आधार पर ही मेण्डल का प्रथम नियम, प्रभाविता का नियम स्थापित हुआ।

प्रश्न 2.
मेण्डल के प्रयोगों से कैसे पता चला कि विभिन्न लक्षण स्वतन्त्र रूप से वंशानुगत होते हैं? [CBSE 2015]
उत्तर-
मेण्डल ने अपने प्रयोगों में दो जोड़ी विपर्यासी (contrasting) लक्षणों का चयन किया, जैसे-पीले एवं गोल तथा हरे एवं झुर्शीदार बीज वाले पौधे। जब उन्होंने पीले एवं गोल (RRYY) बीज वाले पौधे का क्रॉस हरे एवं झुर्शीदार (rryy) बीज वाले पौधे के साथ कराया तो प्रथम पुत्री पीढ़ी में सभी पौधे पीले तथा गोल बीज वाले थे। जब F, पीढ़ी के पौधों के बीच उन्होंने स्वपरागण होने दिया तो F, पीढ़ी में चार प्रकार के पौधे उत्पन्न हुए-

  • पीले एवं गोल बीज वाले,
  • पीले एवं झुरींदार बीज वाले,
  • हरे एवं गोल बीज वाले,
  • हरे एवं झुर्रादार बीज वाले।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास 4
F2 पीढ़ी में उपर्युक्त पौधों का अनुपात 9: 3:3:1 था। इस प्रयोग से स्पष्ट होता है कि बीजों के रंग एवं आकृति की वंशानुगत पीढ़ी एक-दूसरे से प्रभावित नहीं होती। ये लक्षण स्वतन्त्र रूप से वंशानुगत होते हैं। इसे मेण्डल का स्वतन्त्र अपव्यूहन का नियम भी कहते हैं।

प्रश्न 3.
एक ‘A’ रुधिर वर्ग वाला पुरुष एक स्त्री जिसका रुधिर वर्ग ‘0’ है से विवाह करता है। उनकी पुत्री का रुधिर वर्ग ‘0’ है। क्या यह सूचना पर्याप्त है? यदि आपसे कहा जाए कि कौन-सा विकल्प लक्षण-रुधिर वर्ग ‘A’ अथवा ‘0’ प्रभावी लक्षण है? अपने उत्तर का स्पष्टीकरण दीजिए। .
उत्तर-
‘A’ तथा ‘0’ रुधिर वर्ग में कौन-सा लक्षण प्रभावी है, यह बताने के लिए यह सूचना कि पुत्री का रुधिर वर्ग ‘O’ है, पर्याप्त नहीं है। रुधिर वर्ग का निर्धारण रुधिर में उपस्थित प्रतिजन (Antigen) तथा प्रतिरक्षी (antibody) की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर किया जाता है। ‘A’ रुधिर वर्ग में ‘A’ प्रतिजन व ‘b’ प्रतिरक्षी पाया जाता है, जबकि ‘O’ रुधिर वर्ग में कोई प्रतिजन नहीं पाया जाता परन्तु ‘a’ एवं ‘b’ दोनों प्रतिरक्षी अवश्य पाए जाते हैं। al, a तथा a° जीन प्रतिजन के लिए उत्तरदायी होते हैं।

a bb क्रमशः a° पर प्रभावी होते हैं।’A’ रुधिर वर्ग वाले पुरुष की जीन संरचना a° a° तथा ‘0’ रुधिर वाली स्त्री की जीन संरचना a° a° होने पर पुत्री पिता से a° तथा माता से a° जीन अर्थात् दोनों सुप्त जीन प्राप्त करने के कारण ‘O’ रुधिर वर्ग वाली होती है। उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि ‘A’ प्रभावी होगा।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 9 अनुवांशिकता एवं जैव विकास

प्रश्न 4.
मानव में बच्चे का लिंग निर्धारण कैसे होता
उत्तर-
मानव में उपस्थित लिंग गुणसूत्रों (Sex chromosomes) द्वारा बच्चे के लिंग का निर्धारण किया जाता है

  • पुरुषों में दोनों लिंग गुणसूत्रों में से एक गुणसूत्र X तथा दूसरा गुणसूत्र Y होता है।
  • स्त्री में दोनों लिंग गुणसूत्र समान अर्थात् XX होते
  • पुरुष दो प्रकार के शुक्राणु उत्पन्न करते हैं। आधे शुक्राणु X गुणसूत्रों को तथा आधे शुक्राणु Y गुणसूत्रों को धारण करते हैं।
  • स्त्री में केवल एक अण्डाणु बनता है, जिसमें X गुणसूत्र होता है।
  • जब X गुणसूत्र युक्त शुक्राणु, अण्डाणु (X) में संलयन करता है तो उत्पन्न होने वाली सन्तान लड़की (XX) होती है।
  • जब Y गुणसूत्र युक्त शुक्राणु, अण्डाणु (X) से संलयन करता है तो उत्पन्न होने वाली सन्तान लड़का (XY) होता है।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 165)

प्रश्न 1.
वे कौन-से विभिन्न तरीके हैं जिनके द्वारा एक विशेष लक्षण वाले व्यष्टि जीवों की संख्या समष्टि में बढ़ सकती है?
उत्तर-
किसी एक विशेष लक्षण वाले व्यष्टि जीवों की समष्टि में संख्या निम्नलिखित तरीकों से बढ़ सकती है-
(i) यदि व्यष्टि में विशिष्ट लक्षण पर्यावरण के अनुकूल हो और इसका प्राकृतिक चयन होता रहे तब इस लक्षण वाले जीवों की संख्या समष्टि में बढ़ सकती है। उदाहरणार्थ, लाल शृंग की समष्टि में हरे रंग वाले भृग का उत्पन्न होना। पक्षी हरे रंग के भंगों को पत्तियों के बीच में पहचान नहीं पाते हैं और भंग शिकार होने से बच जाते हैं, जबकि लाल भुंग आसानी से पहचाने जा सकते हैं और पक्षियों के शिकार हो जाते हैं। इस प्रकार हरे रंग के ,गों की संख्या समष्टि में बढ़ जाती है।

(ii) आकस्मिक दुर्घटना के कारण जब किसी समष्टि के अत्यधिक सदस्य समाप्त हो जाते हैं तो जीन पूल (gene pool) सीमित रह जाता है। इससे समष्टि का रूप बदल जाता है। इसे जीनी अपवहन (Genetic Drift) कहते हैं। ऐसा प्रायः महामारियों, परभक्षण, प्रलय आदि के कारण होता है।

प्रश्न 2.
एक एकल जीव द्वारा उपार्जित लक्षण सामान्यतया अगली पीढ़ी में वंशानुगत नहीं होते, क्यों ?
उत्तर-
उपार्जित लक्षणों के प्रभाव केवल कायिक कोशिकाओं पर ही होते हैं अर्थात् इनका समावेशन आनुवंशिक पदार्थ (डी. एन. ए.) में नहीं होता है। आनुवंशिक पदार्थ में होने वाले परिवर्तन ही अगली पीढ़ी में वंशानुगत हो सकते हैं, अतः उपार्जित लक्षण सामान्यतया अगली पीढ़ी में वंशानुगत नहीं होते हैं।

प्रश्न 3.
बाघों की संख्या में कमी आनुवंशिकता की दृष्टि से चिन्ता का विषय क्यों है ? ..
उत्तर-
बाघों की संख्या में लगातार हो रही कमी यह दर्शाती है कि बाघ प्राकृतिक चयन में पिछड़ रहे हैं अर्थात् उनमें प्रकृति के अनुकूल परिवर्तन नहीं हो रहे हैं जो कि समष्टि में इनकी संख्या बढ़ा सके। छोटी समष्टि पर दुर्घटनाओं का प्रभाव अधिक पड़ता है जिससे जीवों की आवृत्ति प्रभावित हो सकती है। अतः बाघों की घटती संख्या चिन्ता का विषय है क्योंकि इनका प्रकृति के अनुकूल परिवर्तन न कर सकने के कारण बाघों की प्रजाति कभी भी विलुप्त हो सकती है। बाघों के संरक्षण हेतु टाइगर प्रोजेक्ट के अन्तर्गत इन्हें सुरक्षित राष्ट्रीय उद्यानों में रखा गया है।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 166)

प्रश्न 1.
वे कौन से कारक हैं, जो नई स्पीशीज के उद्भव में सहायक हैं? [CBSE 2015]
उत्तर-
नई जाति के उद्भव (speciation) में निम्नलिखित कारक सहायक हैं-

  • लैंगिक प्रजनन के फलस्वरूप उत्पन्न परिवर्तन,
  • दो उपसमष्टियों का एक-दूसरे से भौगोलिक पृथक्करण। इसके कारण समष्टियों के सदस्य परस्पर प्रजनन नहीं कर पाते हैं।
  • आनुवंशिक अपवहन।
  • प्राकृतिक चयन।

प्रश्न 2.
क्या भौगोलिक पृथक्करण स्वपरागित स्पीशीज के पौधों के जाति उद्भव का प्रमुख कारण हो सकता है? क्यों या क्यों नहीं ?
उत्तर-
जाति उद्भव (speciation) में भौगोलिक पृथक्करण (Geographical isolation) ही प्रमुख कारण है। विशेष रूप से अलैंगिक जनन करने वाले पादपों में एक जीवधारी भौतिक परिस्थितियों में जीवित रहता है परन्तु कुछ जीवधारी यदि निकटवर्ती भौगोलिक पर्यावरण में विस्थापित हो जाते हैं जिनमें विभिन्न भौतिक परिवर्तनीय लक्षण हों तो वे जीवित नहीं रहेंगे। यदि जीवित रह रहे जीवधारियों में अलैंगिक जनन होता है तत्पश्चात् वे अन्य पर्यावरण में विस्थापित होते हैं तो भी भिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में जीवित नहीं रह पाएँगे।

प्रश्न 3.
क्या भौगोलिक पृथक्करण स्वपरागित स्पीशीज के पौधों के जाति उद्भव का प्रमुख कारण हो सकता है? क्यों या क्यों नहीं?
उत्तर-
नहीं, क्योंकि अलैंगिक जनन के लिए दूसरे जीव की आवश्यकता नहीं है। यह एकल जीव द्वारा ही सम्पन्न होता है। अतः भौगोलिक पृथक्करण का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 171)

प्रश्न 1.
उन अभिलक्षणों का एक उदाहरण दीजिए जिनका उपयोग हम दो स्पीशीज के विकासीय सम्बन्ध निर्धारण के लिए करते हैं?
उत्तर-
लगभग 2000 वर्ष पूर्व जंगली बन्दगोभी को खाद्य पौधे के रूप में उगाया जाने लगा था, यह एक कृत्रिम चयन था न कि प्राकृतिक चयन। इसलिए कुछ किसानों का अनुमान था कि इस गोभी में पत्तियाँ आपस में निकट होनी चाहिए। अतः उन्होंने परस्पर संकरण द्वारा उस बंदगोभी को प्राप्त किया जिसका हम आजकल प्रयोग करते हैं। कुछ किसानों ने पत्तियों को पुष्पों के निकट प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त की। अतः उन्होंने प्रयास करके इस प्रकार का पौधा प्राप्त किया। इस पौधे को आधुनिक फूलगोभी का नया नाम दिया गया। इस प्रकार बन्दगोभी एवं फूलगोभी दोनों निकट स्पीशीज हैं जो उद्विकास से विकसित स्पीशीज हैं।

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प्रश्न 2.
क्या एक तितली और चमगादड़ के पंखों को समजात अंग कहा जा सकता है? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
उत्तर-
ऐसे अंग जिनकी उत्पत्ति एवं मूल रचना समान होती है किन्तु कार्य भिन्न होते हैं, समजात (homologous) अंग कहलाते हैं। चूँकि तितली एवं चमगादड़ के पंखों के कार्य (उड़ना) तो समान हैं लेकिन उनकी उत्पत्ति एवं मूल रचना समान नहीं है अतः ये समजात अंग नहीं हैं। ये समवृत्ति अंग है।

प्रश्न 3.
जीवाश्म क्या हैं? वह जैव-विकास प्रक्रम के विषय में क्या दर्शाते हैं? [CBSE 2015]
उत्तर-
प्राचीनकाल के जीवों के अवशेष, जो प्राचीन काल में पृथ्वी पर पाये जाते थे, किन्तु अब जीवित नहीं हैं, जीवाश्म कहलाते हैं। ये अवशेष प्राचीन समय में मृत जीवों के सम्पूर्ण, अपूर्ण, अंग या अन्य भाग के अवशेष या उन अंगों के ठोस मिट्टी, शैल तथा चट्टानों पर बने चिन्ह होते हैं जिन्हें पृथ्वी को खोदने से प्राप्त किया गया है।

ये चिन्ह इस बात का प्रतीक हैं कि ये जीव करोड़ों वर्ष पूर्व जीवित थे लेकिन वर्तमान में विलुप्त हो चुके हैं-

  • जीवाश्म उन जीवों के पृथ्वी पर अस्तित्व की पुष्टि करते हैं।
  • इन जीवाश्मों की तुलना वर्तमान काल में उपस्थित समतुल्य जीवों से कर सकते हैं।

इनकी तुलना से अनुमान लगाया जा सकता है कि वर्तमान में उन जीवाश्मों के जीवित स्थिति के काल के सापेक्ष क्या विशेष परिवर्तन हुए हैं, जो जीवधारियों को जीवित रखने के प्रतिकूल हो गए हैं।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 173)

प्रश्न 1.
क्या कारण है कि आकृति, आकार, रंग-रूप में इतने भिन्न दिखाई देने वाले मानव एक ही स्पीशीज के सदस्य हैं?
उत्तर-
मानव में आकृति, आकार, रंग-रूप आदि भिन्नता का कारण भौतिक पर्यावरण के कारकों से भौतिक लक्षणों में होने वाले परिवर्तन हैं। उनकी जैविक संरचना के लक्षणों में कोई परिवर्तन नहीं होता है इसीलिए उनके अंगों में कोई परिवर्तन नहीं आता। परन्तु भौगोलिक परिस्थितियों में परिवर्तनों के कारण उनके आकार, रंग तथा दिखाई देने वाली आकृति में परिवर्तन दिखाई पड़ते हैं, जबकि वे एक ही स्पीशीज के सदस्य हैं।

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प्रश्न 2.
विकास के आधार पर क्या आप बता सकते हैं कि जीवाणु, मकड़ी, मछली तथा चिम्पैंजी में किसका शारीरिक अभिकल्प उत्तम है? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
जीवाणु, मकड़ी, मछली तथा चिम्पैंजी आदि में उद्विकास के आधार पर इनके शरीरों में जीवधारियों के वंशों की विविधता के अस्तित्व के लक्षण विद्यमान होते हैं। यद्यपि चिम्पैंजी का शारीरिक अभिकल्प अन्य की अपेक्षा अधिक विकसित है; लेकिन अन्य जीवाणु, जैसे-मकड़ी, मछली आदि के अभिकल्पों को अविकसित नहीं कहा जा सकता ये शरीर की प्रतिकूलता को अनुकूलता में परिवर्तित कर देते हैं, जैसे-गर्म झरने, गहरे समुद्रों के गर्म स्रोत तथा अन्टार्कटिका में बर्फ आदि में उपस्थित जीवधारियों के लक्षण जो उन्हें उत्तरजीविता के योग्य बनाते हैं। जैव विकास के आधार पर यह इनकी विशेषतायें हैं। अभिकल्प को उत्तम या अधम नहीं कहा जा सकता।

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क्रियाकलाप 9.1 (पा. पु. पृ. सं. 157)

प्रेक्षण (Observation)-कक्षा में बहुत कम छात्र/छात्राओं की कर्ण पालि जुड़ी हुई है। इसका कारण उनके माता-पिता से प्राप्त वंशानुगत गुण हैं।

क्रियाकलाप 9.2 (पा. पु. पृ. सं. 158)

प्रेक्षण एवं निष्कर्ष (Observation and Result)-हम मेंण्डल के द्वारा किए गए प्रयोग को दोहराकर मटर में भिन्न-भिन्न प्रकार के बीजों के इस संयोजन से इस अनुपात को प्राप्त कर सकते हैं।
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HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन Textbook Exercise Questions, and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Solutions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन

HBSE 10th Class Science प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
अपने घर को पर्यावरण-मित्र बनाने के लिए आप उसमें कौन-कौन से परिवर्तन सुझा सकते हैं ?
उत्तर-
अपने आवास को पर्यानुकूलित या पर्यावरण मित्र बनाने के लिए हम निम्न परिवर्तन कर सकते हैं-

  • हम अपने घर के आस-पास कूड़ा करकट, गंदगी, जल एकत्रण आदि न होने दें।
  • बिजली से चलने वाले उपकणों का प्रयोग न करने की स्थिति में उनके स्विच ऑफ कर दें जिससे विद्युत अपव्यय रोका जा सके।
  • हम अपने घर में नलों से टपकते पानी को बन्द करना चाहिए। व्यर्थ ही पानी को खर्च न करें।
  • प्रयोग किये गए प्लास्टिक के डिब्बे, बोतलों एवं अन्य सामान को पुनः प्रयोग करें या उन्हें पुनः चक्रण के लिए भेज दें।
  • आवासीय कूड़े एवं व्यर्थ पदार्थों को कूड़ादान में ही डालें।
  • लकड़ी, कोयला के स्थान पर LPG का प्रयोग भोजन बनाने के लिए करें।

प्रश्न 2.
क्या आप अपने विद्यालय में कुछ परिवर्तन सुझा सकते हैं जिनसे इसे पर्यानुकूलित बनाया जा सके।
उत्तर-
हम अपने विद्यालय में निम्नलिखित परिवर्तन करके इसे पर्यानुकूलित बना सकते हैं-

  • अपने विद्यालय भवन को साफ-सुथरा रखें तथा इसके आस-पास कूड़ा-करकट व गन्दगी एकत्र न होने दें।
  • इससे निकलने वाले कूड़े को कहीं दूर खाली भूमि में गड्ढा खोदकर उसमें दबा दें, जिससे इसका विघटन हो जाए।
  • विद्यालय में बगीचे की स्थापना करें और इसमें उत्पन्न पत्तियाँ एवं कूड़े-करकट की खाद बनाकर पौधों के पोषण के लिए प्रयोग करें।
  • हम अपने साथियों को पेड़-पौधों की रक्षा के लिए जाग्रत करें।
  • शौचालय तथा मूत्रालय की नियमित सफाई कराएँ।
  • अनावश्यक विद्युत खर्च न होने दें।
  • पानी का अपव्यय न होने दें।
  • विद्यालय भवन हवादार एवं प्रकाश आने योग्य हो जिससे पंखे एवं बल्बों की कम से कम आवश्यकता हो।
  • विद्यालय प्रांगण में ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएँ।
  • पॉलीथीन का प्रयोग न करें।

प्रश्न 3.
इस अध्याय में हमने देखा कि जब हम वन एवं वन्य जन्तुओं की बात करते हैं तो चार मुख्य दावेदार सामने आते हैं। इनमें किसे वन उत्पाद प्रबंधन हेतु निर्णय लेने के अधिकार दिए जा सकते हैं ?
उत्तर-
वन एक प्राकृतिक संसाधन हैं जो हमारे जीवन के लिए प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से अनिवार्य हैं। वन के प्रमुख चार दावेदार हैं-
1. वन के अन्दर तथा इनके आस-पास रहने वाले लोग जो वन तथा वन्य उत्पादों पर निर्भर रहते हैं। कुछ उत्पादों को वे प्रत्यक्ष रूप से जीवन यापन हेतु प्रयोग कर लेते हैं तथा कुछ उत्पादों को बेचकर अपनी जीवन सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं |

2. उद्योगपति जो वन में उत्पन्न एक प्रकार के उत्पाद पर अपना प्रभुत्व एवं नियंत्रण रखते हैं वे इन उत्पादों को अपने नियंत्रण में चल रहे उद्योगों में कच्चे पदार्थों के रूप में प्रयोग करते हैं।

3. सरकारी वन विभाग वन की भूमि पर अपना अधिकार रखते हैं तथा वन तथा उसके उत्पादों पर अपना नियंत्रण रखते हैं। वनों में सभी उत्पाद उन्हीं के माध्यम से विक्रय किए जाते हैं जिनसे प्राप्त धनराशि सरकार के पास चली जाती है।

4. ऐसे व्यक्ति जो प्रकृति एवं वन्य प्राणियों से स्नेह रखते हैं, उसे उसी प्राकृतिक रूप में बनाए रखना चाहते हैं। उपर्युक्त सभी चारों प्रकार के दावेदारों (Stake holder) में से चौथे प्रकार के दावेदार जो प्रकृति के प्रेमी हैं और वे वन्य प्राणियों एवं प्राकृतिक वनस्पति को अपनी प्राकृतिक अवस्था में ही बनाए रखना चाहते हैं को ही प्रबन्धन एवं वन एवं उसके उत्पादों के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार देना चाहिए। दूसरे शब्दों में वे ही वास्तव में पृथ्वी पर जीवन को सुरक्षित रखने के अधिकारी हैं।

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प्रश्न 4.
अकेले व्यक्ति के रूप में आप निम्न के प्रबन्धन में क्या योगदान दे सकते हैं (a) वन एवं वन्य जन्तु, (b) जल संसाधन, (c) कोयला एवं पेट्रोलियम। राज. 2015]
उत्तर-
(a) वन एवं वन्य जन्तु-मैं व्यक्तिगत रूप से वन एवं वन्य जन्तु प्रबंधन में स्थानीय नागरिकों की सहभागिता को सुनिश्चित करना चाहूँगा। उन्हें वन एवं वन्य जीवन के महत्व के बारे में अवगत कराना चाहूँगा। इसके साथ यह प्रबन्ध भी करूँगा कि वन सम्पदा को अनावश्यक क्षति न हो एवं इन संसाधनों का दरुपयोग न हो। स्थानीय नागरिकों की सहमति एवं सक्रिय भागीदारी से वन सम्पदा को समृद्ध करने का मेरा उद्देश्य है।

(b) जल संसाधन-हम अपनी दैनिक आवश्यकता से कहीं अधिक जल व्यय करते हैं। नलों से पानी का रिसाव होता रहता है, नलों को खुला छोड़ देते हैं। पाइप लाइनों के फट जाने से जल की बहुत बर्बादी होती है इस अपव्यय को बचाने के लिए मैं प्रयास करूंगा। मैं अपने घर में इस अपव्यय को रोकने का प्रयास करूँगा तथा लोगों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करूँगा।

(c) कोयला एवं पेट्रोलियम-ऊर्जा की बचत के लिए मैं निम्न प्रयास करूंगा-

  • मैं अपनी मोटर बाइक के स्थान पर बस से यात्रा करूँगा।
  • मैं यह चाहूँगा कि हम कई साथी पैदल विद्यालय तक जाएँ।
  • घर में ऊर्जा की बचत के लिए बल्ब के स्थान पर ट्यूबलाइटें एवं CFL का प्रयोग करूँगा।
  • मैं दिन के समय अधिकतर कार्य करूँगा जिससे रात में अधिक समय तक प्रकाश की आवश्यकता न हो।
  • मैं लोगों को यह समझाऊँगा कि वे अपने वाहनों के इंजनों को लाल बत्ती होने पर चालू न रखें।
  • मै अपने घर के जनरेटर को अनावश्यक रूप से नहीं चलाने दूँगा।
  • ठंड के दिनों में सिगड़ी का प्रयोग न करके गर्म कपड़े पहनूँगा जिससे कोयले की खपत कम होगी।

प्रश्न 5.
अकेले व्यक्ति के रूप में आप विभिन्न प्राकृतिक उत्पादों की खपत कम करने के लिए क्या कर सकते हैं?
उत्तर-
विभिन्न प्राकृतिक उत्पादों की खपत को कम करने के लिए हम निम्नलिखित युक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं-

  • हम अनावश्यक ऊर्जा खपत को रोकने के लिए बल्ब के स्थान पर CFL का प्रयोग कर सकते हैं, ठंड से बचने के लिए हीटर या कोयले की सिगड़ी के स्थान पर ऊनी कपड़ों का प्रयोग कर सकते हैं।
  • जल की खपत कम करने के लिए इसके अपव्यय को रोक सकते हैं, हम पाइपों का रिसना बन्द कर सकते हैं।
  • छोटी-छोटी दूरियाँ तय करने के लिए पैदल या साइकिल से जा सकते हैं।
  • स्वचालित वाहनों का इंजन लाल बत्ती होने पर बन्द कर सकते हैं।
  • लिफ्ट के स्थान पर सीढ़ियों द्वारा जा सकते हैं।
  • सोलर उपकरणों का प्रयोग खाना पकाने, पानी गर्म करने आदि कार्यों के लिये सकते हैं।
  • खाद्य पदार्थों के अपव्यय को रोक सकते हैं। .
  • घरों में लकड़ी जलाने के स्थान पर LPG का प्रयोग कर सकते हैं।

प्रश्न 6.
निम्न से सम्बन्धित ऐसे पाँच कार्य लिखिए जो आपने पिछले एक सप्ताह में किए हैं
(a) अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण,
(b) अपने प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव को और बढ़ाया है
उत्तर-
(a) अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण

  • पानी के संरक्षण के लिए टपकने वाली नल की टोटियों को बदलवाया है तथा पाइपों की मरम्मत कराई है।
  • अनावश्यक बल्ब एवं लाइटें बन्द करा दी हैं।
  • अनेक कार्यों के लिए सोलर ऊर्जा का प्रयोग किया है।
  • कई स्थानों तक पैदल गए हैं।
  • हर लाल बत्ती पर बाइक का इंजन बन्द किया है।

(b) प्राकृतिक संसाधनों का अपव्यय

  • कई रातों में बिजली जलाकर सो गया।
  • सुबह-सुबह मार्निंग वाक पर न जाकर टी.वी. देखता रहा।
  • टी.वी. चलाकर बाहर काफी देर तक बातें करता रहा।
  • बस से जाने के बजाय दूसरे शहर अपनी बाइक से गया।
  • मैंने कई जगह लाल बत्ती होने पर अपनी बाइक का इंजन बंद नही किया।

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प्रश्न 7.
इस अध्याय में उठाई गई समस्याओं के आधार पर आप अपनी जीवन शैली में क्या परिवर्तन लाना चाहेंगे जिससे हमारे संसाधनों के संपोषण को प्रोत्साहन मिल सके?
उत्तर-
संसाधनों के संपोषण के लिए हम तीन आर (3’R’) की संकल्पना का पालन करेंगे। 3 ‘R’ संकल्पना के पालन का अर्थ है

  • कम उपयोग (Reduce)-किसी संसाधन का कम-से कम प्रयोग करेंगे।
  • पुनः चक्रण (Recycle)-प्लास्टिक, कागज, धातु, काँच आदि को पुनः चक्रण के लिए भेजेंगे।
  • पुनः उपयोग (Reuse)-कुछ वस्तुओं को कई बार कई कार्यों में प्रयोग किया जा सकता है। जैसे-प्रयोग की गई बोतलें, डिब्बे आदि।

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(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 303)

प्रश्न 1.
पर्यावरण मित्र बनने के लिए आप अपनी आदतों में कौन से परिवर्तन ला सकते हैं ?
उत्तर-
पर्यावरण मित्र बनने के लिए हमें तीन प्रकार के ‘R’ को अपनाना होगा। ये हैं-
(i) कम उपयोग (Reduce)
(ii) पुनः चक्रण (Recycle)
(iii) पुनः प्रयोग (Reuse)।

(i) कम उपयोग (Reduce)-इसका अर्थ है हमें कम से कम वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए। हम बिजली के पंखे बंद करके बिजली बचा सकते हैं। व्यर्थ बहते हुए पानी की बचत कर सकते हैं। हमें भोजन भी नष्ट नहीं होने देना चाहिए।

(ii) पुनः चक्रण (Recycle)- इसका अर्थ है कि हमें प्लास्टिक, कागज, काँच, धातु की वस्तुएँ तथा ऐसे ही पदार्थो का पुनः चक्रण करके उपयोगी वस्तुएँ बनानी चाहिए।

(iii) पुनः प्रयोग (Reuse)-पुनः उपयोग के तरीके में हम किसी वस्तु का बार-बार प्रयोग कर सकते हैं। लिफाफों को फेंकने की अपेक्षा हम इनको फिर से उपयोग में ला सकते हैं। प्लास्टिक की बोतलों तथा डिब्बों का उपयोग रसोईघर में वस्तुओं को रखने के लिए कर सकते हैं।

प्रश्न 2.
संसाधनों के दोहन के लिए कम अवधि के उद्देश्य की परियोजना के क्या लाभ हो सकते हैं ?
उत्तर-
प्राकृतिक संसाधनों जैसे पेट्रोलियम, जल, वन आदि के अत्यधिक उपयोग से केवल कुछ ही लोग लाभान्वित होंगे और संपूर्ण पर्यावरण असंतुलित हो जाएगा जिसके परिणाम लंबे समय तक रहेंगे। संसाधनों के दोहन के लिए कम अवधि के उद्देश्य की परियोजनाओं से अधिक से अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है लेकिन पर्यावरण की दृष्टि से ये योजनाएँ सफल नहीं होती हैं।

प्रश्न 3.
कम अवधि की परियोजनाओं के लाभ, लम्बी अवधि को ध्यान में रखकर बनाई गई परियोजनाओं के लाभ से किस प्रकार भिन्न हैं ?
उत्तर-
1. कम अवधि के उद्देश्य से लाभ केवल व्यक्तिगत होता है परन्तु लम्बी अवधि के उद्देश्य का लाभ संपूर्ण समुदाय को होता है। उदाहरण के लिए अल्पावधि के लाभ में वृक्षों को काट दिया जाता है परन्तु दीर्घ अवधि में लाभ हेतु वहाँ वृक्षों की पुनः स्थापना की जाती है।

2. अल्पावधि के लाभ में वृक्षों को काटकर समतल भूमि प्राप्त की जा सकती है परन्तु दीर्घावधि में वन अपने अस्तित्व में बने रहकर और पर्यावरण में गैसीय संतुलन एवं वर्षा के स्रोत का कारण बनते हैं।

3. अल्पावधि के लाभ में वन की भूमि को आवासीय एवं औद्योगिक अथवा कृषि के रूप में प्रयोग किया जा सकता है परंतु दीर्घावधि में वन भूमि की उर्वरा शक्ति नियमित रहती है तथा मृदा अपरदन नहीं होता।

प्रश्न 4.
क्या आपके विचार में संसाधनों का समान वितरण होना चाहिए ? संसाधनों के समान वितरण के विरुद्ध कौन-कौन सी ताकतें कार्य कर सकती हैं?
उत्तर-
हमारा देश एक विकासशील देश है, इसमें संसाधनों का समान वितरण बहुत आवश्यक है। समान वितरण से हमारा अभिप्राय है कि प्राकृतिक संसाधनों का सभी के लिए समान लाभ हेतु वितरण, चाहे व्यक्ति गरीब हों या अमीर। सरकारी एजेंट तथा कुछ स्वार्थी तत्व संसाधनों के समान वितरण के विरुद्ध कार्य करते हैं वे अपने अधिकतम लाभ के लिए ही प्रयास करते हैं। स्थानीय निवासियों की आवश्यकताओं को नजरंदाज किया जाता है।

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(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 308)

प्रश्न 1.
हमें वन एवं वन्य जीवन का संरक्षण क्यों करना चाहिए?
उत्तर-
हमें वनों का संरक्षण निम्न कारणों से करना चाहिए-

  • हमें वनों से इमारती लकड़ी एवं जलाने की लकड़ी प्राप्त होती है।
  • वनों से हमें फल, मेवे, सब्जियाँ, औषधियाँ आदि प्राप्त होती हैं।
  • अनेक उद्योगों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति होती है, जैसे-कागज उद्योग।
  • वन पर्यावरण में गैसीय संतुलन बनाने में सहायता करते हैं।
  • वृक्षों के वायवीय भागों से पर्याप्त मात्रा में जल का वाष्पन होता है जो बादलों का निर्माण एवं आकर्षण करते हैं।
  • ये मृदा अपरदन एवं बाढ़ नियंत्रण में सहायता करते

हमें वन्य जीवन का संरक्षण निम्न कारणों से करना चाहिए-

  • वन्य प्राणी स्थलीय खाद्य श्रृंखला की निरंतरता के लिए उत्तरदायी हैं।
  • वन्य प्राणियों से हमें अनेक बहुमूल्य पदार्थ जैसे-कस्तूरी, खाल, ऊन, सींग, फर, मधु, दाँत, वसा आदि प्राप्त होते हैं।
  • वन्य प्राणी पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रश्न 2.
संरक्षण के लिए कुछ उपाय सुझाइए।
उत्तर-
वनों एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं जिनमें से कुछ निम्न प्रकार हैं

  1. वनों में अन्दर तथा वनों के समीप रहने वाले लोगों को वनों एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा के कार्यक्रमों में शामिल किया जाना चाहिए और उन्हें, इनसे होने वाले लाभों एवं इनकी कमी से होने वाली हानियों के बारे में जाग्रत करना चाहिए।
  2. जहाँ से वनों को काटा जा चुका है वहाँ नये वनों का विकास करना चाहिए तथा उसमें विभिन्न वन्य जीवों को छोड़ना चाहिए।
  3. हमें वनों एवं वन्य उत्पादों के विकल्पों की खोज करनी चाहिए जिससे वनों पर कम से कम निर्भर रहना पड़े।
  4. वनों के काटे जाने तथा वन्य प्राणियों के शिकार पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 311)

प्रश्न 1.
अपने निवास क्षेत्र के आस-पास जल संग्रहण की परंपरागत पद्धति का पता लगाइए।
उत्तर-
वर्षा के जल को एकत्रित करना “जल संग्रहण” कहलाता है, इसे जल प्रबन्धन के नाम से भी जाना जाता है। हमारे देश में विभिन्न राज्यों में जल संग्रहण के लिए अलग-अलग प्रणालियाँ अपनाई जाती हैं। इसमें से कुछ तो बहुत प्राचीन हैं। भूमि के अन्दर गड्ढे खोदकर वर्षा का जल एकत्र करना. कुएँ बनाकर. छत पर गिरे वर्षा जल को बड़े टैकों में एकत्र करके, तालाब बनाकर, चैकडैम बनाकर जल का संग्रहण किया जा सकता है।

प्रश्न 2.
इस पद्धति की पेय जल व्यवस्था (पर्वतीय क्षेत्रों में, मैदानी क्षेत्र अथवा पठार क्षेत्र) से तुलना कीजिए।
उत्तर-
पर्वतीय क्षेत्रों में जल व्यवस्था मैदानी क्षेत्रों से भिन्न होती है। जैसे-हिमाचल प्रदेश की जल वितरण प्रणाली को कुल्ह कहते हैं। पहाड़ी नदियों में बहने वाले जल को मानव निर्मित छोटी-छोटी नालियों से पहाड़ी पर निचले इलाकों तक ले जाया जाता है। कुल्हों में बहने वाले पानी का प्रबन्धन गाँवों के निवासियों की आपसी सहमति से किया जाता है। इस व्यवस्था के अन्तर्गत कृषि के मौसम में जल सबसे दूरस्थ गाँवों को दिया जाता है फिर उत्तरोत्तर ऊँचाई पर स्थित इलाके उस जल का प्रयोग करते हैं। मैदानी इलाकों में बड़ी-बड़ी नदियों से नहरें निकाल कर या तालाबों में संचित जल द्वारा या फिर नलकूपों द्वारा जल की व्यवस्था की जाती है।

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प्रश्न 3.
अपने क्षेत्र में जल के स्त्रोत का पता लगाइए। क्या इस स्त्रोत से प्राप्त जल उस क्षेत्र के सभी निवासियों को उपलब्ध है ?
उत्तर-
हमारा क्षेत्र एक बड़ा नगर है, अतः यहाँ की जल प्रणाली के अनुसार जल का स्थानीय स्रोत बड़ी टंकी है जिसमें नदी से पंपिंग स्टेशन द्वारा पानी पाइप लाइन द्वारा संग्रहित किया जाता है। इस जल का वितरण पाइप लाइनों द्वारा सम्पूर्ण क्षेत्र को किया जाता है। इसी से सभी लोगों की आवश्यकताएँ पूरी होती हैं।

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क्रियाकलाप 16.1. (पा. पु.पृ. सं. 298)

प्रश्न 1.
कार्बनडाइऑक्साइड के उत्सर्जन के नियमन के लिए अन्तर्राष्ट्रीय मानक का पता लगाइए।
उत्तर-
क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol दिसम्बर 1997) जिस पर भारत ने अगस्त 2002 में हस्ताक्षर किए। भारतवर्ष को 1990 के स्तर पर पहुँचने के लिए 2008-12 की अवधि में CO2, तथा अन्य ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 5.2% की कमी लाकर इन मानकों को प्राप्त करना है।

प्रश्न 2.
इस विषय पर कक्षा में चर्चा कीजिए कि हम इन मानकों को प्राप्त करने हेतु क्या कर सकते हैं ?
उत्तर-
CO2, उत्पन्न करने वाले उद्योगों को सीमित करके, उद्योगों में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करके जिससे CO2, तथा अन्य ग्रीन हाउस गैसें उत्पन्न न हों। कार्बनिक अपशिष्टों को जलाना बन्द करके तथा अधिक से अधिक वन रोपण द्वारा इन मानकों को प्राप्त किया जा सकता है।

क्रियाकलाप 16.2. (पा. पु. पृ. सं. 299)

प्रश्न 1.
अपने क्षेत्र शहर/गाँव में कार्य करने वाले संगठनों के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर-
अनेक गैर सरकारी संगठनों में (NGOs), ऐसी एक अन्तर्राष्ट्रीय पर्यावरणविदों की संस्था ग्रीन पीस मूवमेण्ट (Green Peace Movement) है। भारत का ‘चिपको आन्दोलन’ पर्यावरण संघ आदि भी ऐसी ही गैर सरकारी संस्थायें हैं। प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड, नगर महापालिका, क्षेत्रीय पालिका आदि पर्यावरण के प्रति जागरूकता के प्रचार-प्रसार हेतु सराहनीय कार्य कर रहे हैं।

प्रश्न 2.
पता लगाइए कि इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आप क्या योगदान कर सकते हैं ?
उत्तर-
हम इसमें अपनी सहभागिता बनाकर, पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं। वृक्षारोपण अभियान चलाकर अनेक स्थानों पर पौधे लगा सकते हैं। हम 3R तकनीक का प्रयोग कर सकते हैं। विद्यालयों, कॉलेजों में ईको क्लब (Eco Clubs) बन हैं जो इस प्रकार के कार्यों में सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

क्रियाकलाप 16.3. (पा. पु. पृ. सं. 300)

प्रश्न 1.
सार्वसूचक (universal indicator) लिटमस कागज की सहायता से अपने घर में आपूर्ति किये जा रहे पानी का pH ज्ञात करना।
उत्तर-
यूनिवर्सल इण्डीकेटर अथवा लिटमस कागज की सहायता से ज्ञात होता है कि हमारे घर के पानी का pH लगभग 7 है।

प्रश्न 2.
अपने अड़ोस-पड़ोस के जलाशय (तालाब, झील, नदी, झरने) का pH भी ज्ञात करना। ताकि यह बताया जा सके कि जल प्रदषित है अथवा नहीं।
उत्तर-
नगरों में वितरित किये जाने वाले जल में विरंजक चूर्ण या क्लोरीन मिलाई जाती है जिससे जल का pH 7 के लगभग हो जाता है। तालाबों के पानी का pH 7 से कम 5-6 है।

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प्रश्न 3.
क्या अपने प्रेक्षणों के आधार पर आप बता सकते हैं कि जल प्रदूषित है अगवा नहीं।
उत्तर-
pH 7 से कम से कम जल अम्लीय होता है तथा इसे प्रदूषित माना जाता है।

क्रियाकलाप 16.4. (पा. पु. पृ. सं. 301)

प्रश्न 1.
क्या कई वर्षों के अंतराल पर आप किसी गाँव अथवा शहर में गए हैं ? यदि हाँ, क्या पिछले बार की अपेक्षा नए घर एवं सड़कें बन गई हैं ? आपके विचार में इनके निर्माण के लिए आवश्यक वस्तुएँ कहाँ से प्राप्त हुई होंगी?
उत्तर-
हाँ। पिछली बार की अपेक्षा कुछ नए घर एवं सड़कों का निर्माण हुआ है। इनके निर्माण में ईंट, पत्थर, लोहा, सीमेण्ट, लकड़ी, कोलतार, काँच आदि का प्रयोग किया गया है, जो विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त किए गए हैं।

प्रश्न 2.
उन पदार्थों की सूची बनाइए तथा उनके स्रोत का भी पता लगाइए।
उत्तर-
ईंट – मृदा से
पत्थर – खानों से
लोहा – खानों से संशोधित करके
सीमेण्ट – चट्टानों, रेत, कंकड़ों से उद्योगों द्वारा निर्मित
काँच – खानों में
जल – मृदा से
लकड़ी – वनों से
प्लास्टिक – उद्योगों से

प्रश्न 3.
अपने द्वारा बनाई गई सूची की चर्चा अपने सहपाठियों के साथ कीजिए। क्या आप ऐसे उपाय सुझा सकते हैं जिनसे इन वस्तुओं के उपयोग में कमी लाई जा सके।
उत्तर-
इन वस्तुओं के उपयोग में कमी लाई जा सकती है। ईंटों की दीवारों पर प्लास्टर न किया जाए। संगमरमर के स्थान पर सीमेंट फर्श डाला जाए, बड़ी खिड़कियों के स्थान पर ईंटों की जाली बनवायी जाए इत्यादि।

क्रियाकलाप 16.5. (पा. पु. पृ. सं. 302)

प्रश्न 1.
अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोगी व प्रकृति संरक्षण के लिए परंपरागत तरीकों का अवलोकन करें।
उत्तर-
विद्यार्थी स्वयं करें।

क्रियाकलाप 16.6. (पा. पु. पृ. सं. 304)

प्रश्न 1.
जिन वन उत्पादों का आप प्रयोग करते हैं उनकी एक सूची बनाइए।
उत्तर-
फल, पुष्प, शुष्क फल, लकड़ी, मधु, पशुओं का चारा तथा औषधियाँ।

प्रश्न 2.
आपके विचार में वन के निकट रहने वाला कोई व्यक्ति किन वस्तुओं का उपयोग करता होगा?
उत्तर-
वन के निकट रहने वाला व्यक्ति पशुओं के लिए चारा, फल, पुष्प, शुष्क फल, लकड़ी, औषधियाँ आदि का प्रयोग करता होगा।

प्रश्न 3.
वन के अन्दर रहने वाला व्यक्ति किन वस्तुओं का उपयोग करता होगा?
उत्तर-
वन के अन्दर रहने वाला व्यक्ति वनों से आवास, पत्तों के वस्त्र, ईंधन, झोंपड़ी बनाने के लिए घास-पात, भोजन के लिए फल, शिकार आदि वस्तुओं को प्राप्त करता होगा।

क्रियाकलाप 16.7. (पा. पु. पृ. सं. 305)

प्रश्न 1.
किन्हीं दो वन उत्पादों का पता लगाना जो किसी उद्योग के आधार हैं।
उत्तर-
वृक्ष, इमारती लकड़ी एवं प्लाईवुड उद्योग तथा कागज उद्योग के आधार हैं।

प्रश्न 2.
चर्चा करना कि यह उद्योग लंबे समय तक संपोषित हो सकता है। अथवा क्या हमें इन उत्पादों की खपत को नियंत्रित करने की आवश्यकता है?
उत्तर-
ये उद्योग लंबे समय तक संपोषित हो सकते हैं यदि कच्चे माल को उचित रूप से प्रयोग किया जाए। प्लाइवुड के लिए कच्चा माल एवं इमारती लकड़ी को हम जिन वनों से प्राप्त करते है यदि उन्हें काटा गया है तो इनके स्थान पर नये पौधों को लगाया जाए। इसके साथ ही हमें इन उत्पादों की खपत को भी कम करना चाहिए जिससे इन उद्योगों से हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर अधिक दबाव उत्पन्न न हो।

क्रियाकलाप 16.8. (पा. प. प.सं. 307)

प्रश्न 1.
राष्ट्रीय उद्यानों में पर्यटकों के लिए ‘आराम गृह’ (Rest house) का निर्माण करना।
उत्तर-
राष्ट्रीय उद्यानों में आराम गृह बनवाने से पर्यावरण की क्षति होगी। पर्यटकों के आने-जाने से जंगली जीवों के प्राकृतिक जीवन में हस्तक्षेप होगा। पर्यटकों द्वारा फैलाया गया प्रदूषण जीवों के लिए घातक होगा।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन

प्रश्न 2.
राष्ट्रीय उद्यानों में पालतू पशुओं को चराना।
उत्तर-
राष्ट्रीय उद्यान में पशुओं के चराने से एक ओर उद्यान की वनस्पति नष्ट होगी और वन्य शाकाहारी प्राणियों के लिए भोजन में कमी होगी वहीं दूसरी ओर पालतू पशु वन्य माँसाहारी जन्तुओं के शिकार हो जाएँगे।

प्रश्न 3.
पर्यटकों द्वारा प्लास्टिक बोतल, थैलियाँ तथा अन्य कचरा राष्ट्रीय उद्यान में फेंकना।
उत्तर-
पर्यटक प्लास्टिक बोतल, थैलियाँ, कूड़ा-कचरा फेंकेंगे जिससे उद्यान गंदा हो जाएगा और प्रदूषण फैलेगा।

क्रियाकलाप 16.9. (पा. पु. पृ. सं. 308)

प्रश्न 1.
महाराष्ट्र के एक गाँव में जल की कमी की दीर्घकालीन समस्या से जूझ रहे ग्रामीण एक जल मनोरंजन पार्क का घेराव कर लेते हैं। इस पर चर्चा करना कि क्या यह उपलब्ध जल का समुचित उपयोग है।
उत्तर-
यह जल का समुचित उपयोग नहीं हैं। ग्रामीणों की जल समस्या का निराकरण पहले होना चाहिए इसके बाद मनोरंजन की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए।

क्रियाकलाप 16.10. (पा. पु. पृ. सं. 308)

प्रश्न 1.
एटलस की सहायता से भारत में वर्षा के पैटर्न का अध्ययन करना।
उत्तर-
वर्षा का पैटर्न-
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 16 प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन 1

प्रश्न 2.
ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना जहाँ पर जल की प्रचुरता है तथा ऐसे क्षेत्रों की जहाँ जल की बहुत कमी है।
उत्तर-
लद्दाख, राजस्थान और गुजरात के पश्चिमी क्षेत्र में वर्षा की कमी है। उत्तर-पूर्व क्षेत्रों में तथा पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में वर्षा की अधिकता है। पशु

क्रियाकलाप 16.11. (पा. पु. प्र. सं. 312)

प्रश्न 1.
कोयले का उपयोग ताप-बिजलीघरों में एवं पेट्रोलियम उत्पाद जैसे कि डीजल एवं पेट्रोल का यातायात के विभिन्न साधन जैसे मोटर वाहन, जलयान एवं वायुयान में प्रयोग किया जाता है। आज के युग में विद्युत् साधित्रों एवं यातायात में विद्युत के प्रयोग के कारण वास्तव में हम इसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। अतः क्या हम कुछ ऐसी युक्ति सोच सकते हैं जिससे कोयला एवं पेट्रोलियम के उपयोग को कम किया जा सके ?
उत्तर-

  • विद्युत चलित वाहनों के अधिक प्रयोग से।
  • सौर ऊर्जा चलित वाहनों से।
  • मेट्रो गाड़ियाँ चला कर ।
  • प्राइवेट वाहनों की संख्या कम करके।
  • सरकारी यातायात को बढ़ावा देकर।

क्रियाकलाप 16.12. (पा. पु. पृ. सं. 313)

प्रश्न 1.
आपने वाहनों से निकलने वाली गैसों के यूरोI(Euro-I), एवं यूरो-II एवं यूरो-III मानक के विषय में तो अवश्य ही सुना होगा। यह पता लगाना कि यह मानक वायु प्रदूषण कम करने में किस प्रकार सहायक हैं ?
उत्तर-
ये मानक सभी वाहन उद्योगों को वायु प्रदूषण कम करने हेतु ऐसे वाहन निर्मित करने हेतु विवश करते हैं जो कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, NOX.आदि पर नियंत्रण रखने हेतु प्रबंध करते हैं। इससे वाहन प्रदूषण कम फैलाते हैं।

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HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण Textbook Exercise Questions, and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण

HBSE 10th Class Science हमारा पर्यावरण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन से समूहों में केवल जैव निम्नीकरणीय पदार्थ हैं?
(a) घास, पुष्प तथा चमड़ा
(b) घास, लकड़ी तथा प्लास्टिक
(c) फलों के छिलके, केक एवं नीबू का रस
(d) केक, लकड़ी एवं घास।
उत्तर-(c) एवं (d)।

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन आहार श्रृंखला का निर्माण करते हैं?
(a) घास, गेहूँ तथा आम
(b) घास, बकरी तथा मानव
(c) बकरी, गाय तथा हाथी
(d) घास, मछली तथा बकरी
उत्तर-
(b) घास, बकरी तथा मानव।

प्रश्न 3.
निम्न में से कौन पर्यावरण-मित्र व्यवहार कहलाते हैं?
(a) बाजार जाते समय सामान के लिए कपड़े का थैला ले जाना।
(b) कार्य समाप्त हो जाने पर लाइट (बल्ब) तथा पंखे का स्विच बंद करना।
(c) माँ द्वारा स्कूटर विद्यालय छोड़ने की बजाय तुम्हारा विद्यालय तक पैदल जाना।
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 4.
क्या होगा यदि हम एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दें (मार डाले)?
उत्तर-
एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर देने से पारिस्थितिक असंतुलन उत्पन्न हो जाएगा। प्रकृति में सभी आहार श्रृंखलाएँ अनेक कड़ियों से मिलकर बनी हैं। इसकी प्रत्येक कड़ी एक पोषी स्तर कहलाती है। यदि आहार श्रृंखला की किसी भी कड़ी (पोषी स्तर) को समाप्त कर दें तो उससे पहले के पोषी स्तर में जीवों की संख्या अत्यधिक बढ़ जाएगी और उसके बाद के पोषी स्तर के लिए भोजन अनुपलब्ध होने के कारण संख्या घट जाएगी। उदाहरण के लिए यदि हम प्रथम पोषी स्तर (हरी घास) को नष्ट कर दें तो इन पर निर्भर करने वाले सभी जीव भूखे मर जाएँगे।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण

प्रश्न 5.
क्या किसी पोषी स्तर के सभी सदस्यों को हटाने का प्रभाव भिन्न-भिन्न पोषी स्तरों के लिए अलगअलग होगा? क्या किसी पोषी स्तर के जीवों को पारितंत्र को प्रभावित किए बिना हटाना संभव है ?
उत्तर-
नहीं, यदि एक पोषी स्तर के जीवों को नष्ट कर दिया जाए तो पहले तथा बाद के पोषी स्तरों में आने वाले जीवधारी प्रभावित होंगे और पहले तीव्रता से तत्पश्चात् धीमी गति से सभी पोषी स्तर प्रभावित होंगे। किसी भी पोषी स्तर (trophic level) के सभी जीवधारी पारितंत्र में बिना किसी हानि के अथवा क्षति के समाप्त नहीं होते।

प्रश्न 6.
जैविक आवर्धन (Biological Magnification) क्या है ? क्या पारितंत्र के विभिन्न स्तरों पर जैव आवर्धन का प्रभाव भी भिन्न-भिन्न होगा?
उत्तर-
फसलों में अनेक रसायनों जैसे-कीटनाशी, पीड़कनाशी, शाकना ी तथा उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है। इनका कुछ भाग मृदा में मिल जाता है जो पौधों द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है. जबकि इनका कछ भाग वर्षा जल के साथ घुल कर जलाशयों में चला जाता है। जलीय पौधे इन्हें अवशोषित करते हैं जिससे यह खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर जाते हैं। ये रसायन अजैव निम्नीकरणीय होते हैं जो आहार श्रृंखला के विभिन्न पोषीस्तरों में संचित होते जाते हैं, इस प्रक्रम को जैव आवर्धन कहते हैं। हाँ, विभिन्न पोषी स्तरों में रसायनों की सान्द्रता भिन्न-भिन्न होती है। जैसे-जैसे आहार श्रृंखला की श्रेणी बढ़ती जाती है रसायनों की सांद्रता में भी अधिकता होती रहती है और उसका प्रभाव भी बढ़ता जाता है।

प्रश्न 7.
हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरे से कौन-कौन सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं ? .
उत्तर-
हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों जैसे-प्लास्टिक, चमड़ा, काँच, डी. डी. टी. आदि से युक्त कचरे से अनेक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं-

  • प्लास्टिक जैसे पदार्थों को निगल लेने से शाकाहारी जन्तुओं की मृत्यु हो सकती है।
  • नाले-नालियों में अवरोध उत्पन्न होता है।
  • मृदा प्रदूषण बढ़ता है।
  • जीवधारियों में जैविक आवर्धन होता है।
  • जल एवं वायु प्रदूषण बढ़ता है।
  • पर्यावरण अस्वच्छ होता है।
  • पारिस्थितिक संतुलन में अवरोध उत्पन्न होता है।
  • भूमि की उत्पादकता कम होती है।

प्रश्न 8.
यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय ही, तो क्या इनका हमारे पर्यावरण पर कोई प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर-
यदि हमारे द्वारा (उत्पादित) सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय हो तो निपटान आसानी से कर दिया जाएगा। जैव निम्नीकरणीय पदार्थ सरलता से सूक्ष्म जीवों द्वारा अपघटित कर दिए जाते हैं। अतः इनसे हमारे पर्यावरण पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

प्रश्न 9.
ओजोन परत की क्षति हमारे लिए चिंता का विषय क्यों है ? इस क्षति को सीमित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं ? (CBSE 2016)
उत्तर-
ओजोन परत सूर्य की पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है। यह सूर्य से आने वाले हानिकारक विकिरण को सोख लेती है। यह विकिरण हमारे शरीर में विभिन्न व्याधियों जैसे-कैंसर, त्वचा रोग, आँखों के रोग आदि उत्पन्न कर सकता है। रेफ्रिजरेशन वक्स, एरोसोल, जेट यानों आदि से उत्सर्जित रसायन जैसे-क्लोरोफ्लुओरो कार्बन्स (CFCs) ओजोन परत का क्षरण करते हैं जिससे सूर्य की पराबैगनी किरणों (UV-rays) के पृथ्वी पर आने की सम्भावना बढ़ रही है अतः ओजोन परत की क्षति हमारे लिए चिन्ता का विषय है।

ओजोन परत की क्षति को रोकने के लिए 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) में सर्वसम्मति से यह पारित हुआ कि क्लोरोफ्लुओरो कार्बन का उत्पादन 1986 के स्तर पर सीमित रखा जाए। मांट्रियल प्रोटोकॉल में 1987 में यह पारित हुआ कि 1998 तक इसके प्रयोग में 50% तक की कमी लायी जाए। धीरे-धीरे सभी देश इस समस्या से निपटने के लिए अग्रसर हो रहे हैं।

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(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 292)

प्रश्न 1.
पोषी-स्तर क्या है? एक आहार श्रृंखला का उदाहरण दीजिए तथा इसमें विभिन्न पोषी स्तर बताइए। (RBSE 2016) (नमूना प्रश्न पत्र 2012)
उत्तर-
पोषी-स्तर (Trophic Level) हरे पौधे सौर ऊर्जा की सहायता से अपना भोजन बनाते हैं। इन पौधों को शाकाहारी प्राणियों द्वारा खाया जाता है जिन्हें मांसाहारी प्राणियों द्वारा भोजन के रूप में ग्रहण किया जाता है। इस प्रकार से खाद्य के आहार के अनुसार विभिन्न प्राणियों में एक श्रृंखला निर्मित होती जाती है जिसे आहार श्रृंखला कहते है। आहार श्रृंखला की प्रत्येक कड़ी पोषी स्तर कहलाती है। एक आहार श्रृंखला नीचे दी गई है-
घास → कीट → मेंढ़क → सर्प → बाज

उपरोक्त आहार श्रृंखला में पाँच पोषी स्तर हैं –

  • प्रथम पोषी स्तर घास है जो कि स्वयंपोषी है और उत्पादक कहलाती है।
  • द्वितीय पोषी स्तर कीट है जो शाकाहारी है और प्राथमिक उपभोक्ता कहलाता है।
  • तृतीय पोषी स्तर मेंढ़क है जो मांसाहारी है और द्वितीयक उपभोक्ता कहलाता है।
  • चतुर्थ पोषी स्तर सर्प है जो मांसाहारी है और तृतीयक उपभोक्ता कहलाता है।
  • पंचम पोषी स्तर बाज़ है जो मांसाहारी है और चतुर्थ उपभोक्ता कहलाता है।

प्रश्न 2.
पारितंत्र में अपमार्जकों की क्या भूमिका है ?
उत्तर-
पारितंत्र में अपमार्जकों (scavengers) का प्रमुख स्थान है। जीवाणु तथा अन्य सूक्ष्म जीव अपमार्जकों का कार्य करते हैं। ये पेड़-पौधों एवं जीव-जन्तुओं के मृत शरीरों पर आक्रमण कर जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में बदल देते हैं। इसी प्रकार कचरा जैसे- सब्जियों एवं फलों के छिलके, जन्तुओं के मल-मूत्र, पौधों के सड़े-गले भाग अपमार्जकों द्वारा ही विघटित कर दिए जाते हैं। इस प्रकार पदार्थों के पुनः चक्रण में अपमार्जक सहायता करते हैं और वातावरण को स्वच्छ रखते हैं।

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(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 295)

प्रश्न 1.
क्या कारण है कि कुछ पदार्थ जैव निम्नीकरणीय होते हैं तथा कुछ अजैव-निम्नीकरणीय ?
उत्तर-
ऐसे अपशिष्ट पदार्थ जो सूक्ष्म जीवधारियों द्वारा अपघटित होकर अपेक्षाकृत सरल एवं अहानिकारक पदार्थों में बदल दिए जाते हैं, जैव निम्नीकरणीय पदार्थ कहलाते हैं। उदाहरण के लिए शाक-सब्जियों, फलों आदि के अवशेष तथा मल-मूत्र आदि पदार्थों को सूक्ष्म जीवों द्वारा अपघटित कर दिया जाता है। कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं जो इन सूक्ष्म जीव धारियों द्वारा अपघटित नहीं किये जा सकते हैं। ये लम्बे समय तक प्रकृति में बने रहते हैं। यह पदार्थ अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ कहलाते हैं जैसे-प्लास्टिक, पॉलीथीन, काँच, डी. डी. टी. आदि।

प्रश्न 2.
ऐसे दो तरीके सुझाइए जिनमें जैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
उत्तर-
जैव निम्नीकरणीय पदार्थ निम्न प्रकार से पर्यावरण को प्रभावित करते हैं-

  • जैव निम्नीकरणीय पदार्थों के सूक्ष्म जीवों द्वारा विघटन से मुक्त विषाक्त एवं दुर्गन्धमय गैसें पर्यावरण को प्रदूषित करती हैं।
  • कार्बनिक जैव निम्नीकरणीय पदार्थों की अधिकता से ऑक्सीजन की कमी हो जाने से सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। इसके फलस्वरूप अपघटन क्रिया प्रभावित होती है और पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है।

प्रश्न 3.
ऐसे दो तरीके बताइए जिनमें अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
उत्तर-
अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ निम्न प्रकार से पर्यावरण को प्रभावित करते हैं-

  • अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ लम्बे समय तक पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। ये पदार्थ विभिन्न पदार्थों के चक्रण में रुकावट उत्पन्न करते हैं।
  • अनेक कीटनाशक तथा पीड़कनाशक रसायन खाद्य श्रृंखला के माध्यम से जीवधारियों तथा मनुष्य के शरीर में पहुँचकर उसे क्षति पहुचाते हैं।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 296)

प्रश्न 1.
ओजोन क्या है तथा यह किसी पारितंत्र को किस प्रकार प्रभावित करती है ? (CBSE 2016)
उत्तर-
ओजोन एक गैस है जिसका अणुसूत्र ‘o,’ है तथा इसका प्रत्येक अणु ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनता है। ओजोन गैस की परत वायुमंडल के समताप मण्डल में पायी जाती है। यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को रोकती है। अतः पृथ्वी के जीवों को पराबैंगनी किरणों के घातक प्रभाव से बचाती है। पराबैंगनी किरणें ऑक्सीजन अणुओं को विघटित करके स्वतंत्र ऑक्सीजन (Nascent Oxygen; O) परमाणु बनाती हैं। ऑक्सीजन के ये स्वतंत्र परमाणु संयुक्त होकर ओजोन बनाते हैं।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 1
यदि वायुमण्डल में ओजोन परत नहीं होती तो हानिकारक पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर पहुँच जाती और मानव सहित विभिन्न जीवधारियों में घातक रोग जैसे कैंसर, आँख के रोग आदि उत्पन्न करती।

प्रश्न 2.
आप कचरा निपटान की समस्या कम करने में क्या योगदान कर सकते हैं ?
उत्तर-
कचरा निपटान की समस्या कम करने में हम निम्नलिखित योगदान कर सकते हैं-

  • हमें जैव निम्नीकरणीय तथा अजैव निम्नीकरणीय कचरे को अलग-अलग कर लेना चाहिए। अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों को पुनः चक्रण हेतु कारखाने भेज देना चाहिए जिससे इन्हें पुनः प्रयोग में लाया जा सके।
  • जैव निम्नीकरणीय पदार्थों का प्रयोग ह्यूमस या खाद बनाने के लिए करना चाहिए जिससे पौधों को उच्च कोटि की खाद उपलब्ध हो सके।

HBSE 10th Class Science हमारा पर्यावरण InText Activity Questions and Answers

क्रियाकलाप 15.1. (पा. पु. पृ. सं. 289)

प्रश्न 1.
जल जीवशाला बनाते समय हमें किन बातों का ध्यान रखना होगा ?
उत्तर-
मछलियों को तैरने के लिए स्थान, जल, ऑक्सीजन एवं भोजन।

प्रश्न 2.
यदि हम इसमें कुछ पौधे लगा दें तो यह एक स्व निर्वाह तंत्र बन जाएगा। क्या आप सोच सकते हैं कि यह कैसे होता है ?
उत्तर-
पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में 02 निकाल कर जल को स्वच्छ बनाते रहेंगे तथा श्वसन में छोड़ी गई CO2, को भोजन बनाने में काम लेते रहेंगे।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण

प्रश्न 3.
क्या हम जल जीवशाला बनाने के उपरान्त इसे ऐसे ही छोड़ सकते हैं ? कभी-कभी इसकी सफाई की क्या आवश्यकता है ?
उत्तर-
नहीं, हमें जलजीवशाला की समय-समय पर देख-रेख करनी होगी। इसमें जीवाणु उत्पन्न हो सकते हैं जिन्हें हटाने के लिए कभी-कभी जल भी बदलना होगा।

प्रश्न 4.
क्या हमें इसी प्रकार तालाबों एवं झीलों की सफाई भी करनी चाहिए ? क्यों और क्यों नहीं ?
उत्तर-
तालाबों एवं झीलों की भी यदि सम्भव हो तो सफाई करनी चाहिए, क्योंकि तालाबों एवं झीलों में सुपोषण (eutrophication) की संभावना बनी रहती है।

क्रियाकलाप 15.2. (पा. पु. पृ. सं. 289)

प्रश्न 1.
जल जीवशाला बनाते समय क्या आपने इस बात का ध्यान रखा कि ऐसे जन्तुओं को साथ न रखें जो दूसरों को खा जाएँ।
उत्तर-
माँसाहारी मछलियाँ अन्य मछलियों को खा जाएँगी। कृत्रिम पारितंत्र में वे अपनी वंश वृद्धि भी नहीं कर सकती हैं।

प्रश्न 2.
समूह बनाइए तथा चर्चा करें कि उपर्युक्त समूह एक दूसरे पर निर्भर करते हैं?
उत्तर-
मछलियाँ भोजन खाती हैं। उत्सर्जन करती हैं जिससे जलीय पादपों और काई का पोषण होता है और वे मछलियों का भोजन बनते हैं। इससे वे एक-दूसरे पर निर्भर हैं।

प्रश्न 3.
जलीय जीवों के नाम उसी क्रम में लिखिए जिसमें एक जीव दूसरे जीव को खाता है तथा एक ही श्रृंखला की स्थापना कीजिए जिसमें कम से कम तीन चरण हों।
उत्तर-
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 2

प्रश्न 4.
क्या आप किसी एक समूह को सबसे अधिक महत्व का मानते हैं? क्यों एवं क्यों नहीं ?
उत्तर-
सभी समूह महत्वपूर्ण हैं परन्तु उत्पादक (पादप) सबसे महत्वपूर्ण हैं। उनके बिना अन्य प्राणियों का जीवन संभव नहीं है।

क्रियाकलाप 15.3. (पा. पु. पृ. स. 292)

प्रश्न 1.
समाचार पत्रों में, तैयार सामग्री अथवा भोज्य पदार्थों में पीड़क एवं रसायनों की मात्रा के विषय में अक्सर ही समाचार छपते रहते हैं। कुछ राज्यों ने इन पदार्थों पर रोक भी लगा दी है। इस प्रकार की रोक के औचित्य पर चर्चा कीजिए।
उत्तर-
पीड़कनाशी जैव आवर्धन द्वारा आहार श्रृंखला में प्रवेश कर जाते हैं और अन्ततः मानव में प्रवेश करके अनेक बीमारियों का कारण बनते हैं। विभिन्न प्रकार के शीतल पेय पदार्थों में इनकी उपस्थिति प्रायः समाचार पत्रों में छपती रहती है। अनेक राज्यों ने इनके प्रयोग पर रोक लगा दी है।

प्रश्न 2.
आपके विचार में इन खाद्य पदार्थों में पीड़क नाशियों का स्रोत क्या है ? क्या यह पीड़कनाशी अन्य खाद्य स्त्रोतों के माध्यम से हमारे शरीर में पहुँच सकते हैं ?
उत्तर-
खेत-खलिहानों में फसलों की सुरक्षा की दृष्टि से विभिन्न कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है। ये फसल के माध्यम से धान्यों में पहुँच जाते हैं, साथ ही पशुओं द्वारा खाये गये ‘चारे से उनके मांस एव दूध में भी पहुँच जाते हैं। फल, सब्जियाँ, दालों आदि में भी इनकी मात्रा संचित हो जाती है। जब ये वस्तुएँ मानव द्वारा खायी जाती हैं तो मानव के शरीर में वे संचित हो जाते हैं।

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प्रश्न 3.
किन उपायों द्वारा शरीर में इन पीड़कनाशियों की मात्रा कम की जा सकती है ? चर्चा कीजिए।
उत्तर-
फलों एवं सब्जियों को भली भाँति धो लेने से, इन्हें छीलकर इस्तेमाल करने से इन कीटनाशकों से कुछ बचाव किया जा सकता है। विभिन्न स्रोतों से प्राप्त खाद्य पदार्थों के प्रयोग से भी कुछ बचाव हो सकता है।

क्रियाकलाप 15.4. (पा. पु. पृ. सं. 293)

प्रश्न 1.
पुस्तकालय, इंटरनेट अथवा समाचार-पत्रों से पता लगाइए कि वे कौन से रसायन हैं जो ओजोन परत की क्षीणता के लिए उत्तरदायी हैं ?
उत्तर-
क्लोरो-फ्लुओरो कार्बन, नाइट्रोजन ऑक्साइड तथा हाइड्रोकार्बन, ओजोन परत की क्षीणता के लिए उत्तरदायी हैं |

प्रश्न 2.
पता लगाइए इन पदार्थों के उत्पादन एवं उत्सर्जन के नियमन संबंधी कानून ओजोन क्षरण कम करने में सफल रहे हैं? क्या पिछले कुछ वर्षों में ओजोन छिद्र के आकार में कुछ परिवर्तन आया है?
उत्तर-
रेफ्रिजरेटर्स, अग्निशामकों, ऐरोसोल आदि से उत्सर्जित क्लोरो-फ्लुओरो कार्बन के कारण ओजोन क्षरण होता है। मांट्रियल प्रोटोकोल के प्रयासों से पिछले कुछ वर्षों में ओजोन-छिद्र के आकार में कुछ परिवर्तन आया है।

क्रियाकलाप 15.5. (पा. पु. पृ. सं. 294)

प्रश्न 1.
वे कौनसे पदार्थ हैं जो लम्बे समय बाद भी अपरिवर्तित रहते हैं ?
उत्तर-
लंबे समय तक दूध की खाली थैलियाँ, दवा की खाली बोतलें, स्ट्रिप्स, टूटे जूते आदि अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ अपरिवर्तित रहते हैं।

प्रश्न 2.
वे कौन-से पदार्थ हैं जिनके स्वरूप व संरचना में परिवर्तन होता है ?
उत्तर-
संदूषित भोजन, सब्जियों के छिलके, चाय की उपयोग की गयी पत्तियाँ, रद्दी कागज आदि पदार्थों की संरचना में परिवर्तन होते हैं।

प्रश्न 3.
जिन पदार्थों के स्वरूप में समय के साथ परिवर्तन आया है, कौन-से पदार्थ अल्पतम समय में अतिशीघ्र परिवर्तित हुए हैं ?
उत्तर-
सबसे कम समय में सूती कपड़े, सब्जियों के छिलके, संदूषित भोजन और चाय की उपयोग की गई पत्तियों का स्वरूप परिवर्तित हुआ है।

क्रियाकलाप 15.6 (पा. पु. पृ. सं. 294)

प्रश्न 1.
अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ कितने समय तक पर्यावरण में इसी रूप में बने रह सकते हैं ?
उत्तर-
जैव और अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों को अपनी संरचना बदलने में अलग-अलग समय लगता है। सूती कपड़ों के चीथड़े प्रायः 1-6 माह, कागज 2-6 माह, फलों व सब्जियों के छिलके 6 माह, ऊनी कपड़े 1-5 वर्ष, लेमिनेटेड डिब्बे 5 वर्ष, चमड़े के जूते 25-40 वर्ष, नाइलॉन/टेरीलीन 30-40 वर्ष, धातुएँ 50 से 100 वर्ष और काँच की बोतलें/बर्तन दस लाख वर्ष में अपनी संरचना बदल लेते हैं। प्लास्टिक का सामान कभी भी विकृत नहीं होता है।

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प्रश्न 2.
आजकल ‘जैव निम्नीकरणीय प्लास्टिक’ उपलब्ध हैं। इन पदार्थों के विषय में अधिक जानकारी प्राप्त कीजिए तथा पता लगाइए कि क्या उनसे पर्यावरण को हानि हो सकती है अथवा नहीं।
उत्तर-
गेहूँ, मकई या आलू से प्राप्त स्टार्च की लैक्टिक अम्ल से जीवाणुओं की उपस्थिति में क्रिया से जैव निम्नीकरणीय प्लास्टिक बनाया जा रहा है। इसे पॉलीलैक्टाइड (Polylactide) कहते हैं। इनसे पर्यावरण की हानि नहीं होती।

क्रियाकलाप 15.7. (पा. पु. पृ.सं. 295)

प्रश्न 1.
पता लगाइए कि घरों में उत्पादित कचरे का क्या होता है? क्या किसी स्थान से इसे एकत्र करने का कोई प्रबन्ध है?
उत्तर-
आमतौर पर घरों से उत्पन्न कूड़ा-कर्कट किसी बन्द बाल्टी में एकत्र कर लिया जाता है जिसे स्थानीय निकायों के कर्मचारी किसी बड़े स्थान पर ले जाते हैं।

प्रश्न 2.
पता लगाइए कि स्थानीय निकायों (पंचायत, नगर पालिका, आवास कल्याण समिति ‘RWA’) द्वारा इसका निपटान किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर-
स्थानीय निकाय एकत्र किए गए कचरे को गाड़ियों द्वारा व्यर्थ भूमि के भराव के लिए या खाद बनाने के लिए भेजते हैं।

प्रश्न 3.
क्या वहाँ जैव अपघटित तथा अजैव अपघटित कचरे को अलग-अलग करने की व्यवस्था है?
उत्तर-
हाँ। जैव निम्नीकरणीय कचरे को खाद निर्माण के लिए तथा अजैव निम्नीकरणीय कचरे को पुनः चक्रण हेतु भेज दिया जाता है।

प्रश्न 4.
गणना कीजिए कि एक दिन में घर से कितना कचरा उत्पादित होता है ?
उत्तर-
सामान्यतया एक दिन में घर से 2 से 3 किग्रा कचरा उत्पन्न होता है।

प्रश्न 5.
इसमें से कितना कचरा जैव निम्नीकरणीय है?
उत्तर-
इसका अधिकांश भाग जैव निम्नीकरणीय है।

प्रश्न 6.
गणना कीजिए कि कक्षा में प्रति दिन कितना कचरा उत्पादित होता है ?
उत्तर-
कक्षा में उत्पन्न कचरा प्रायः फटे कागज, धूल, बचे-खुचे खाद्य पदार्थ, पेंसिल की छीलन, चॉक के टुकड़े आदि होता है।

प्रश्न 7.
इसमें कितना कचरा जैव निम्नीकरणीय है और कितना अजैव निम्नीकरणीय है ?
उत्तर-
अधिकांश भाग जैव निम्नीकरणीय होता है।

प्रश्न 8.
इस कचरे से निपटने के कुछ उपाय सुझाइए।
उत्तर-
कचरे को स्कूल में बगीचे में गड्ढा खोदकर दबा देना चाहिए।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण

क्रियाकलाप 15.8. (पा. पु. पृ. सं. 295)

प्रश्न 1.
पता लगाइए कि आपके क्षेत्र में मल व्ययन की क्या व्यवस्था है? क्या वहाँ इस बात का प्रबंध है कि स्थानीय जलाशय एवं जल के अन्य स्रोत जल मल से प्रभावित न हों?
उत्तर-
हमारे क्षेत्र में मल व्ययन के लिए भूमिगत सीवरेज की व्यवस्था है। सड़क के एक ओर जलवाही पाइप लाइनें हैं तो दूसरी ओर सीवेज पाइपलाइनें हैं इसलिए पेय जल मल प्रभावित नहीं हो सकता।

प्रश्न 2.
अपने क्षेत्र में पता लगाइए कि स्थानीय उद्योग अपने अपशिष्ट (कूड़े-कचरे एवं तरल अपशिष्ट) के निपटान का क्या प्रबन्ध करते हैं? क्या वहाँ इस बात का प्रबन्धन है जिससे सुनिश्चित हो सके कि इन पदार्थों से भूमि तथा जल का प्रदूषण नहीं होगा।
उत्तर-
गंदे प्रदूषित जल को साफ करके विभिन्न रासायनिक पदार्थों द्वारा उपचारित किया जाता है और नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है।

क्रियाकलाप 15.9. (पा. पु. पृ. सं. 296)

प्रश्न 1.
इंटरनेट अथवा पुस्तकालय की सहायता से पता लगाएँ कि इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के निपटान के समय किन खतरनाक वस्तुओं से आपको सुरक्षापूर्वक छुटकारा पाना है। यह पदार्थ पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
उत्तर-
इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं में सीसा, कैडमियम, सिलिकॉन, प्लास्टिक आदि आते हैं जो मृदा को प्रदूषित करते हैं। इसका हमारे स्वास्थ्य तथा अन्य जीवों पर कुप्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 2.
पता लगाइए कि प्लास्टिक का पुनः चक्रण किस प्रकार होता है? क्या प्लास्टिक के पुनः चक्रण का पर्यावरण पर कोई प्रभाव होता है ?
उत्तर-
प्लास्टिक को पिघलाकर खिलौने, मग, कंघे, बाल्टियाँ आदि तैयार किए जाते हैं। पुनः चक्रण के समय प्लास्टिक से अनेक हानिकारक गैसें उत्पन्न होती हैं जो वाय को प्रदूषित करती हैं। प्रदूषित वायु से हमारे स्वास्थ्य तथा अन्य जीवों पर बुरा प्रभाव होता है।

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HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत Textbook Exercise Questions, and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

HBSE 10th Class Science उर्जा के स्रोत Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
गर्म जल प्राप्त करने के लिए हम सौर जल तापक का उपयोग किस दिन नहीं कर सकते?
(a) धूप वाले दिन
(b) बादलों वाले दिन
(c) गरम दिन
(d) पवनों (वायु) वाले दिन।
उत्तर-
(b) बादलों वाले दिन।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन जैव-मात्रा ऊर्जा स्त्रोत का उदाहरण नहीं है?
(a) लकड़ी
(b) गोबर गैस
(c) नाभिकीय ऊर्जा
(d) कोयला।
उत्तर-
(c) नाभिकीय ऊर्जा।

प्रश्न 3.
जितने ऊर्जा स्रोत हम उपयोग में लाते हैं, उनमें से अधिकांश सौर ऊर्जा को निरूपित करते हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा ऊर्जा स्रोत अन्ततः सौर ऊर्जा से व्युत्पन्न नहीं है?
(a) भूतापीय ऊर्जा
(b) पवन ऊर्जा
(c) नाभिकीय ऊर्जा
(d) जैवमात्रा।
उत्तर-
(c) नाभिकीय ऊर्जा।

प्रश्न 4.
ऊर्जा स्त्रोत के रूप में जीवाश्मी ईंधनों तथा सूर्य की तुलना कीजिए और उनमें अन्तर लिखिए।
उत्तर-
जीवाश्मी ईंधनों तथा सूर्य की तुलना-

जीवाश्मी ईंधनसूर्य
1.यह ऊर्जा का अनवीकरणीय स्रोत हैं।यह ऊर्जा का नवीकरणीय स्रोत है।
2. जीवाश्म ईंधन प्रदूषण फैलाते हैं।सूर्य से प्राप्त ऊर्जा में कोई प्रदूषण नहीं होता।
3. जीवाश्म ईंधन से हमारी सभी ऊर्जाओं की पूर्ति हो सकती है।सौर ऊर्जा से हमारी सभी ऊर्जा सम्बन्धी आवश्य कताओं की पूर्ति सम्भव नहीं है।
4. इससे ऊर्जा प्रत्येक समय, प्रत्येक परिस्थिति में प्राप्त की जा सकती है।बादलों से घिरे आकाश वाले दिन तथा रात्रि में सूर्य से ऊर्जा प्राप्त नहीं की जा सकती।

प्रश्न 5.
जैव मात्रा तथा ऊर्जा स्रोत के रूप में जल विद्युत की तुलना कीजिए और उनमें अन्तर लिखिए।
उत्तर-
जैव मात्रा तथा जल विद्युत की तुलना-

जैव मात्राजल विद्युत
1. जैव मात्रा से ऊर्जा प्राप्त करने के प्रक्रम में प्रदूषण फैलता है।जल विद्युत ऊर्जा का स्वच्छ स्रोत है।
2. जैव मात्रा द्वारा प्राप्त ऊर्जा को सीमित स्थान में ही प्रयोग किया जा सकता है।जल विद्युत ऊर्जा को लाइनों द्वारा कहीं भी संचरित किया जा सकता है।
3. जैव मात्रा केवल सीमित मात्रा में ही ऊर्जा प्रदान कर सकती है।जल विद्युत ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से ऊर्जा निष्कर्षित करने की सीमाएँ लिखिए
(a) पवनें,
(b) तरंगें,
(c) ज्वार-भाटा।
उत्तर-
(a) पवन ऊर्जा की सीमाएँ-
1. पवन ऊर्जा के निष्कर्षण हेतु पवन ऊर्जा फार्म की स्थापना के लिये बहुत अधिक बड़े स्थान की आवश्यकता होती है।
2. हवा की तेज गति के कारण टूट-फूट और नुकसान की संभावनाएँ अधिक होती हैं।
3. पवन ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए हवा की गति 15 km/h से अधिक होनी चाहिए।

(b) तरंगों से प्राप्त ऊर्जा की सीमाएँ-समुद्र तल पर जल तरंगें तीव्र वेग से चलने वाली समुद्री हवाओं के कारण उत्पन्न होती हैं। केवल कुछ ही स्थानों पर ये तरंगें इतनी शक्तिशाली होती हैं कि उनसे सम्बद्ध ऊर्जा का दोहन किया जा सके।

(c) ज्वार-भाटा ऊर्जा की सीमाएँ-प्रत्येक ज्वार के समय जल का चढ़ाव इतना पर्याप्त नहीं हो पाता है कि उससे विद्युत उत्पन्न की जा सके। इसके अतिरिक्त समुद्र तट का केवल कुछ ही स्थान बाँध बनाने के लिए अच्छा रहता है। इस कारण से ज्वारीय ऊर्जा को विश्वसनीय ऊर्जा स्रोत के रूप में नहीं मान सकते।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

प्रश्न 7.
ऊर्जा स्रोतों का वर्गीकरण निम्नलिखित वर्गों में किस आधार पर करेंगे
(a) नवीकरणीय तथा अनवीकरणीय
(b) समाप्य तथा अक्षय क्या (a) तथा (b) के विकल्प समान हैं ?
उत्तर-
(a) नवीकरणीय तथा अनवीकरणीय स्रोतयदि कोई ऊर्जा स्रोत एक बार अपनी ऊर्जा दे देने के उपरान्त पुनः ऊर्जा देने की स्थिति में आ सकता है तो ऐसे स्रोतों को नवीकरणीय स्रोतों के वर्ग में रखा जाता है उदाहरण के लिए-जल विद्युत, जैव मात्रा। – यदि कोई ऊर्जा स्रोत अपनी सम्पूर्ण ऊर्जा दे चुकने के पश्चात् पुनर्जीवित नहीं हो सकता तो ऐसे स्रोत को अनवीकरणीय स्रोतों के वर्ग में रखा जाएगा। उदाहरण के लिएजीवाश्मी ईंधन।

(b) समाप्य तथा अक्षय स्रोत-यदि कोई ऊर्जा स्रोत निश्चित समय तक ऊर्जा प्रदान करने के पश्चात् समाप्त हो जाए तथा उसे पुनः प्राप्त न किया जा सके तो उसे समाप्य ऊर्जा स्रोत माना जाएगा। उदाहरण के लिए जीवाश्मी ईंधन।

यदि किसी ऊर्जा स्रोत को प्रयोग करने के पश्चात् बार-बार फिर से प्राप्त किया जा सकता हो तो उसे अक्षय ऊर्जा स्रोत कहते हैं। पवन ऊर्जा अक्षय ऊर्जा स्रोत है। ऊपर दिए गए विवरणों से स्पष्ट है कि (a) तथा (b) विकल्प एक जैसे हैं।

प्रश्न 8.
ऊर्जा के आदर्श स्त्रोत में क्या गुण होते हैं ?
उत्तर-

  • पर्याप्त मात्रा में स्त्रोत द्वारा ऊर्जा प्रदान करने की क्षमता होनी चाहिए।
  • सरलता से प्रयोग करने की सुविधा से संपन्न होना चाहिए।
  • यह पर्यावरण के लिए हितकारी होना चाहिए।
  • ऊर्जा स्रोत ऐसा होना चाहिए जो दीर्घकाल तक नियत दर पर ऊर्जा प्रदान कर सके।
  • यह आर्थिक रूप से सस्ता होना चाहिए।

प्रश्न 9.
सौर कुकर का उपयोग करने के क्या लाभ तथा हानियाँ हैं? क्या ऐसे भी क्षेत्र हैं जहाँ सौर कुकरों की सीमित उपयोगिता है ?
उत्तर-
सौर कुकर के लाभ-
1. ईंधन का कोई खर्च नहीं होता तथा इससे प्रदूषण नहीं होता है।
2. इसमें धीमी गति से खाना पकता है इसलिए इसके द्वारा पके भोजन, से पोषक तत्व नष्ट नहीं होते।
3. इसमें निरन्तर देखभाल की आवश्यकता नहीं होती है।

सौर कुकर से हानियाँ-
1. यह बहुत अधिक तापमान उत्पन्न नहीं कर सकता है।
2. यह रात्रि में, बरसात में तथा बादल वाले दिनों में काम नहीं करते।
3. सौर कुकर से खाना धीमी गति से पकता है, अतः खाना पकाने में बहुत अधिक समय लगता है।
4. यह 100°C -140°C तापमान प्राप्त करने के लिए 2-3 घंटे ले लेता है। ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जहाँ सौर कुकरों का प्रयोग सीमित अवधि में हो पाता है। जिन क्षेत्रों में आकाश में बादल रहते हैं वहाँ यह ठीक से कार्य नहीं कर पाता है वहाँ इनकी सीमित उपयोगिता है।

प्रश्न 10.
ऊर्जा की बढ़ती माँग के पर्यावरणीय परिणाम क्या हैं ? ऊर्जा की खपत को कम करने के उपाय लिखिए।
उत्तर-
ऊर्जा की माँग जनसंख्या वृद्धि के साथ निरंतर बढ़ती जाती है। ऊर्जा किसी प्रकार की हो उसका पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। जीवाश्मी ईंधनों को जलाने पर ये वायु प्रदूषण फैलाते हैं फलस्वरूप पृथ्वी का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। नाभिकीय रिऐक्टर से निकलने वाले कचरे द्वारा खतरनाक विकिरण उत्सर्जित होते हैं जो पर्यावरण के लिए नुकसानदेय हैं।

ऊर्जा की खपत को कम करने के उपाय-
1. घरों में विद्युत के उपकरणों को आवश्यकता होने पर ही प्रयोग में लाया जाना चाहिए।
2. जीवाश्मी ईंधन का प्रयोग कम से कम करना चाहिए। अलग-अलग वाहनों की बजाय सामूहिक वाहन (सार्वजनिक परिवहन प्रणाली) का प्रयोग करना चाहिए।

HBSE 10th Class Science उर्जा के स्रोत InText Questions and Answers

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 273)

प्रश्न 1.
ऊर्जा का उत्तम स्त्रोत किसे कहते हैं ?
उत्तर-
ऊर्जा का उत्तम स्रोत वह स्रोत है जिसमें निम्नलिखित गुण होते हैं-

  • जिसके प्रति एकांक द्रव्यमान से अधिक ऊर्जा प्राप्त हो सके।
  • जो सरलता से उपलब्ध हो सके।
  • जिसका भण्डारण आसान व परिवहन में आसानी हो।
  • सस्ता हो।

प्रश्न 2.
उत्तम ईंधन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
उत्तम ईंधन के निम्नलिखित गुण होते हैं-

  • ईंधन के जलाने पर प्रति एकांक द्रव्यमान से अधिक ऊष्मा प्राप्त हो सके।
  • जलने पर उससे कम से कम धुआँ उत्पन्न हो। ]
  • आसानी से उपलब्ध हो।

प्रश्न 3.
यदि आप अपने भोजन को गरम करने के लिए किसी भी ऊर्जा-स्रोत का उपयोग कर सकते हैं तो आप किसका उपयोग करेंगे और क्यों?
उत्तर-
हम रसोई गैस या माइक्रोवेव ओवन का प्रयोग करेंगे क्योंकि उपर्युक्त दोनों स्रोत उपयोग में आसान हैं, आर्थिक रूप से सस्ते हैं तथा प्रदूषण भी नहीं फैलाते हैं।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 279)

प्रश्न 1.
जीवाश्मी ईधन की क्या हानियाँ हैं ?
उत्तर-
जीवाश्मी ईंधन से निम्नलिखित हानियाँ हैं-

  • पृथ्वी पर जीवाश्मी ईंधन का सीमित भण्डार उपलब्ध है अतः इनका संरक्षण आवश्यक है। .
  • जीवाश्मी ईंधन, जलाए जाने पर प्रदूषण फैलाते हैं।
  • ये अम्ल वर्षा करने में भागीदार होते हैं।

प्रश्न 2.
हम ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर क्यों ध्यान दे रहे हैं ?
उत्तर-
हमारे जीवन के लिए प्रत्येक कार्य में ऊर्जा की आवश्यकता होती है। खाना पकाने, बिजली उत्पन्न करने, कल कारखानों को चलाने हेतु ऊर्जा की आवश्यकता होती है जिसे हम आजकल अधिकतर पेट्रोलियम पदार्थों से पूरा कर रहे हैं। इनका प्रयोग होने पर इन्हें पुनः उत्पन्न नहीं किया जा सकता इस कारण से इनका संरक्षण आवश्यक है। अतः हमें ऐसे नवीकरणीय स्रोतों की ओर ध्यान देना होगा जो कि आसानी से उपलब्ध हैं और जिनका असीमित तथा व्यापक उपयोग किया जा सकता है।

सौर ऊर्जा एक ऐसा स्रोत है जो विभिन्न माध्यमों से ऊर्जा प्रदान करता है। सौर ऊर्जा का सीधा प्रयोग युगों से किया जा रहा है। हमारी आवश्यकताएँ निरंतर बढ़ने के कारण उन्हें पूरा करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग में वृद्धि करनी चाहिए ताकि भविष्य में हमें ऊर्जा संकट का सामना न करना पड़े। नवीकरणीय ऊर्जा से वातावरण का प्रदूषण भी रोका जा सकता है।

प्रश्न 3.
हमारी सुविधा के लिए पवनों तथा जल ऊर्जा के पारंपरिक उपयोग में किस प्रकार सुधार किए गए हैं ?
उत्तर-
प्राचीनकाल में पवन ऊर्जा का उपयोग पालदार नावों को चलाने में एवं पवनचक्की की सहायता से यान्त्रिक कार्य करने के लिए किया जाता था परन्तु अन्य प्रकार की ऊर्जा की तुलना में विद्युत ऊर्जा का उपयोग सबसे अधिक सुविधाजनक है। इसलिए पवन ऊर्जा का उपयोग विद्युत उत्पादन में किया जाने लगा है। इसके लिए समुद्र तट के समीप के स्थानों में बहुत सी पवन चक्कियाँ एक साथ लगाकर बड़े-बड़े ऊर्जा फार्म स्थापित किये गये हैं जहाँ पर्याप्त विद्युत ऊर्जा का उत्पादन होता है। इसी प्रकार जल ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा के रूप में प्रयोग करने के लिए पहाड़ी ढालों पर बाँध बनाकर जल को एकत्रित किया जाता है। एकत्रित जल को जनित्र की टरबाइन पर डालकर विद्युत ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 285)

प्रश्न 1.
सौर कुकर के लिए कौन सा दर्पण अवतल, उत्तल अथवा समतल सर्वाधिक उपयुक्त होता है ? क्यों ?
उत्तर-
अवतल दर्पण सर्वाधिक उपयुक्त होता है क्योंकि यह अपने ऊपर गिरने वाली सम्पूर्ण सौर ऊर्जा को अपने फोकस पर सूक्ष्म बिन्दु के रूप में केन्द्रित कर देता है।

प्रश्न 2.
महासागरों से प्राप्त हो सकने वाली ऊर्जाओं
उत्तर-

  • ज्वार-भाटा की ऊर्जा का उपयोग करने के लिए बाँध बनाने योग्य स्थान सीमित हैं|
  • तरंग ऊर्जा भी केवल उन्हीं स्थानों पर उपयोग की जा सकती है जहाँ तरंगें पर्याप्त शक्तिशाली हों।
  • महासागरीय तापीय ऊर्जा के दोहन की तकनीक बहुत ही कठिन है।

प्रश्न 3.
भूतापीय ऊर्जा क्या होती है ?
उत्तर-
पृथ्वी के आन्तरिक भाग में स्थित, पिघली हुई चट्टानें भूगर्भीय हलचल के कारण केन्द्रीय भाग से सतह की ओर विस्थापित हो जाती हैं तथा गर्म क्षेत्रों का निर्माण करती हैं। जब कभी भूगर्भीय जल इस प्रकार के गर्म क्षेत्रों के संपर्क में आता है तो वाष्प में बदल जाता है तथा इस जल वाष्प को पाइपों की सहायता से बाहर लाकर टरबाइन चलाकर विद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है। पृथ्वी के गर्भ में स्थित उच्च ताप क्षेत्रों से सम्बद्ध ऊर्जा को भूतापीय ऊर्जा कहते हैं।

प्रश्न 4.
नाभिकीय ऊर्जा का क्या महत्व है ?
उत्तर-
अन्य परम्परागत ऊर्जा स्रोत सीमित तथा शीघ्र समाप्त हो जाने वाले हैं जबकि नाभिकीय ऊर्जा बहुत लम्बे समय तक हमारी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है। जीवाश्मी ईंधन से प्राप्त ऊर्जा की तुलना में यूरेनियम के विखण्डन से बहुत अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 285)

प्रश्न 1.
क्या कोई ऊर्जा स्त्रोत प्रदूषण मुक्त हो सकता है? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
उत्तर-
नहीं, कोई भी ऊर्जा स्रोत पूर्ण रूप से प्रदूषण मुक्त नहीं हो सकता, चाहे ऊर्जा स्रोत कितना ही विकसित क्यों न हो फिर भी वह पर्यावरण को किसी न किसी प्रकार से नुकसान पहुंचाता ही है। सौर सेल को प्रायः प्रदूषण मुक्त कहते हैं परन्तु इस युक्ति के निर्माण में पर्यावरणीय क्षति होती ही है।

प्रश्न 2.
राकेट ईधन के रूप में हाइड्रोजन का उपयोग न किया जाता रहा है ? क्या आप इसे CNG की तुलना में अधिक स्वच्छ ईंधन मानते हैं ? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
उत्तर-
हाइड्रोजन CNG से स्वच्छ ईंधन है क्योंकि यह दहन क्रिया में CO2, को उत्पन्न नहीं करती और न ही इसका अपूर्ण दहन होता है। इसके जलने से केवल जल उत्पन्न होता है। CNG के जलने से CO2, उत्पन्न होती है जो कि ग्रीन हाऊस गैस है और पर्यावरण के लिए हानिकारक है।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 286)

प्रश्न 1.
ऐसे दो ऊर्जा स्रोतों के नाम लिखिए जिन्हें आप नवीकरणीय मानते हैं। अपने चयन के लिए तर्क दीजिए।
उत्तर-
वायु ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा एवं सागरीय ऊर्जा नवीकरणीय स्रोत हैं क्योंकि इनका प्रयोग तब तक किया जा सकता है जब तक हमारे सौर परिवार की समान परिस्थितियाँ बनी रहेंगी।

प्रश्न 2.
ऐसे दो ऊर्जा स्रोतों के नाम लिखिए जिन्हें आप समाप्य मानते हैं। अपने चयन के लिए तर्क दीजिए।
उत्तर-
कोयला तथा पेट्रोलियम, दोनों ऊर्जा के दो समाप्य स्रोत हैं। कोयला तथा पेट्रोलियम, दोनों के पृथ्वी पर उपलब्ध भण्डार सीमित हैं तथा जल्दी ही समाप्त हो जाने वाले हैं तथा इन्हें कभी भी पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता, अतः ये दोनों ऊर्जा के समाप्य स्रोत हैं।

HBSE 10th Class Science उर्जा के स्रोत InText Activity Questions and Answers

क्रियाकलाप 14.1 (पा. पु. पृ. सं. 272)

प्रश्न 1.
प्रातःकाल सोकर उठने से विद्यालय पहुँचने तक आप जिन ऊर्जाओं का उपयोग करते हैं उनमें से ऊर्जा के किन्हीं चार रूपों की सूची बनाइए।
उत्तर-
हम अग्रलिखित ऊर्जा का उपयोग करते हैं

  • ऊष्मीय ऊर्जा खाना पकाने के लिए।
  • घर को प्रकाशित करने के लिए प्रकाशीय ऊर्जा ।
  • साइकिल चलाने और बैग होने के लिए वेशीय ऊर्जा।
  • मित्रों को बुलाने के लिए ध्वनि ऊर्जा।

प्रश्न 2.
इन विभिन्न रूपों की ऊर्जाओं को हम कहाँ से प्राप्त करते हैं?
उत्तर-
इस विभिन्न रूपों की ऊर्जाओं के स्रोत इस प्रकार हैं-
सौर ऊर्जा – सूर्य
ऊष्मीय ऊर्जा – सूर्य,
LPG पेशीय ऊर्जा – भोजन
प्रकाश ऊर्जा – विद्युत, सूर्य

प्रश्न 3.
क्या हम इन्हें ऊर्जा का स्रोत’ कह सकते हैं ? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
उत्तर-
सूर्य ऊर्जा का स्रोत है परन्तु अन्य स्रोत ऊर्जा के रूपान्तरण से प्राप्त होते हैं।

क्रियाकलाप 14.2. (पा. पु. पृ. सं. 272)

प्रश्न 1.
उन विविध विकल्पों पर विचार कीजिए जो भोजन पकाने के लिए ईंधन का चयन करते समय हमारे पास होते हैं तथा किसी ईंधन को अच्छे ईंधन की श्रेणी में रखने का प्रयास करते समय आप किन मानदंडों पर विचार करेंगे?
उत्तर-
कोयला, कोक, कैरोसीन, लकड़ी, L.P.G. ईंधन का अच्छा स्रोत होने के कारण इसका कैलोरी मान अधिक होता है। ईंधन प्रदूषण रहित, सस्ता एवं सुलभ होना चाहिए।

प्रश्न 2.
क्या तब आपकी पसंद अलग होती जब आप
(a) वन में जीवन निर्वाह कर रहे होते?
(b) किसी सुदूर पर्वतीय ग्राम अथवा छोटे द्वीप पर जीवन निर्वाह कर रहे होते ?
(c) नई दिल्ली में जीवन निर्वाह करते ?
(d) पाँच शताब्दियों पहले जीवन निर्वाह करते ?
उत्तर-
हाँ प्रत्येक स्थिति में पसंद भिन्न-भिन्न होती।
(a) वन में निर्वाह करते समय ईंधन के रूप में लकड़ी, ऊष्मा और प्रकाश के लिये सूर्य और शारीरिक ऊर्जा के लिए फलों आदि पर निर्भर करना पड़ता ।
(b) किसी पर्वतीय ग्राम अथवा छोटे द्वीप पर भी वन में जीवन निर्वाह के समान ऊर्जा के स्रोतों पर निर्भर करना पड़ता।
(c) नई दिल्ली में विद्युत चलित उपकरणों एवं पेट्रोलियम पदार्थों पर निर्भर करते।
(d) पाँच शताब्दी पहले जीवन निर्वाह के लिये, सूर्य से प्राप्त ऊर्जा, वनों की लकड़ी आदि पर निर्भर रहते।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

प्रश्न 3.
उपर्युक्त प्रत्येक परिस्थिति ईंधन की उपलब्धता की दृष्टि से किस प्रकार भिन्न थी ?
उत्तर-
पहले आबादी कम थी और ऊर्जा के सीमित स्रोत उपलब्ध थे। परन्तु जैसे-जैसे विकास हुआ, औद्योगिक क्रांति आई, आबादी बढ़ी, वैसे-वैस मानव ने ऊर्जा के नए स्रोतों को ढूँढना शुरू किया। आज ऊर्जा के परम्परागत स्रोतों की उपलब्धता धीरे-धीरे कम हो रही है तथा गैर-परम्परागत स्त्रोतों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

क्रियाकलाप 14.3. (पा. पु. पृ. सं. 274)

प्रश्न-क्या आप देखते हैं?
उत्तर-
इस प्रयोग में हम यह देखते हैं कि भाप द्वारा पंखुड़ियाँ घूमती हैं जिससे वह यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित करने के लिए डायनेमो के शैफ्ट को घुमाती है जिससे बल्ब जलने लगता है।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत 1

क्रियाकलाप 14.4. (पा. पु. पृ. सं. 279)

प्रश्न 1.
अपने दादा-दादी अथवा अन्य वयोवृद्धों से पता लगाइए कि वे
(a) अपने विद्यालय कैसे जाते थे ?
(b) अपने बचपन में दैनिक आवश्यकताओं के लिए जल कैसे प्राप्त करते थे ?
(c) मनोरंजन कैसे करते थे ?
उत्तर-
(a) हमारे दादा-दादी अपने विद्यालय पैदल या साइकिल से जाते थे, हम बस या स्कूटर से स्कूल जाते हैं।
(b) वे पानी को कुओं व हैण्डपम्प तथा नदियों से प्राप्त करते थे। हम जल की प्राप्ति नलों से करते हैं। चूँकि ऊर्जा की आवश्यकता बढ़ गयी है अतः अधिक ऊर्जा उपभुक्त हो रही है।

प्रश्न 2.
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तरों की तुलना इस प्रश्न के उत्तर से कीजिए कि “अब आप इन कार्यों को कैसे करते हैं ?”
उत्तर-
दादा दादी के युग में मनोरंजन के साधन रामलीला, लोक संगीत, रेडियो आदि थे। आधुनिक युग में मनोरंजन के अनेक साधन, जैसे—मल्टीमीडिया, कम्प्यूटर, मोबाइल, इन्टरनेट आदि मौजूद हैं।

प्रश्न 3.
क्या इन उत्तरों में कोई अन्तर है? यदि हाँ तो किस स्थिति में बाह्य स्रोतों से अधिक ऊर्जा उपभुक्त हुई।
उत्तर-
हाँ, इन उत्तरों में काफी अन्तर है। आधुनिक युग में बाह्य स्त्रोतों से अधिक ऊर्जा उपभुक्त हुई है। क्योंकि वाहनों को चलाने, जल प्राप्ति तथा मनोरंजन के लिए ऊर्जा (ईंधन) की आवश्यकता होती है।

क्रियाकलाप 14.5. (पा. पु. पृ. सं. 280)

प्रश्न 1.
दोनों फ्लास्कों को स्पर्श कीजिए। इनमें कौन तप्त है। आप इन दोनों फ्लास्कों के जल के ताप तापमापी द्वारा भी माप सकते हैं।
उत्तर-
वह फ्लास्क जिसे काले रंग से पेंट किया गया है वह तप्त है।

प्रश्न 2.
क्या आप कोई ऐसा उपाय सोच सकते है जिसके द्वारा इस ज्ञान का उपयोग आप अपने दैनिक जीवन में कर सकें।
उत्तर-
इस ज्ञान का उपयोग हम अपने दैनिक जीवन में निम्न रूपों से कर सकते हैं-

  • खाना बनाने के बर्तन के आधार को काला पेंट करके।
  • जाड़ों में गहरे रंग के कपड़े पहनकर ।
  • पानी गर्म करने में।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

क्रियाकलाप 14.6. (पा. पु. पृ. सं. 281)

प्रश्न 1.
किसी सौर कुकर/अथवा सौर जल तापक की संरचना तथा कार्य प्रणाली का विशेषकर इस दृष्टि से अध्ययन कीजिए कि उसमें ऊष्मारोधन कैसे किया जाता है तथा अधिकतम ऊष्मा अवशोषण कैसे सुनिश्चित करते
उत्तर-
अधिकतम ऊष्मा अवशोषण के लिए काँच के टुकड़े का उपयोग करते हैं। सामान्य सौर कुकर से लगभग 100°C से 120°C का तापमान उत्पन्न हो सकता है। सौर कुकर
और सौर जल तापक का उपयोग रात के समय नहीं किया जा सकता है। इनसे बहुत अधिक तापमान प्राप्त नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 2.
सस्ती सुलभ सामग्री का उपयोग करके किसी सौर कुकर अथवा सौर जल तापक का डिजाइन बनाकर उसकी संरचना प्राप्त करके यह जाँच कीजिए कि आपके इस निकाय में अधिकतम कितना ताप प्राप्त किया जा सकता है।
उत्तर-
सौर सेल, सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं। धूप में रखे जाने पर किसी सौर सेल से 0.5 – 1.0 V तक वोल्टता विकसित होती है तथा यह लगभग 0.7 W विद्युत ऊर्जा उत्पन्न कर सकते हैं। जब बहुत अधिक संख्या में सौर सेलों को संयोजित करते हैं तो यह व्यवस्था सौर पैनल कहलाती है जिनसे उपयोग के लिए पर्याप्त विद्युत की प्राप्ति हो जाती है। सौर सेलों का रख-रखाव सस्ता है तथा इन्हें कहीं भी स्थापित किया जा सकता है। सौर सेलों को बनाने के लिए सिलिकॉन का उपयोग किया जाता है सौर सेलों के उत्पादन की प्रक्रिया बहुत महँगी है, इसे परस्पर संयोजित करके सौर पैनल बनाने में सिल्वर (चाँदी) का उपयोग होता है जिसके कारण इसकी लागत में वृद्धि हो जाती है।

प्रश्न 3.
सौर कुकरों अथवा सौर जल तापकों के उपयोग की सीमाओं एवं विशेषताओं पर चर्चा कीजिए।
उत्तर-
सौर कुकर-परावर्तक पृष्ठ अथवा श्वेत (सफेद) पृष्ठ की तुलना में काला पृष्ठ अधिक ऊष्मा अवशोषित करता है। सौर कुकरों में सूर्य की किरणों को फोकसित करने के लिए दर्पणों का उपयोग किया जाता है जिससे इनका ताप . उच्च हो जाता है। सौर कुकरों में काँच की शीट का एक ढक्कन होता है।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत 2

ट्रैफिक सिग्नलों, परिकलकों तथा बहुत से खिलौनों में सौर सेल लगे होते हैं। अधिक महँगा होने के कारण सौर सेलों का घरेलू उपयोग अभी तक सीमित है।

क्रियाकलाप 14.7. (पा. पु. पृ. सं. 284)

प्रश्न 1.
कक्षा में इस प्रश्न पर चर्चा कीजिए कि महासागरीय तापीय ऊर्जा, पवनों तथा जैव मात्रा की ऊर्जाओं का अंतिम स्त्रोत क्या है ?
उत्तर-
इन सभी ऊर्जाओं का अंतिम स्रोत सूर्य है इसकी ऊर्जा से ही अन्य ऊर्जाओं का रूपांतरण होता है।

प्रश्न 2.
क्या इस संदर्भ में भूतापीय ऊर्जा तथा नाभिकीय ऊर्जा भिन्न है? क्यों ?
उत्तर-
भूतापीय ऊर्जा के लिए भूमिगत लावा से उत्पन्न ऊष्मा आधार है तो नाभिकीय ऊर्जा भारी नाभिक तत्वों के नाभिको के विखंडन से उत्पन्न ऊर्जा का आधार है।

प्रश्न 3.
आप जल विद्युत ऊर्जा को किस श्रेणी में रखेंगे?
उत्तर-
जल विद्युत एवं तरंग ऊर्जा भी अंततः सूर्य की ऊष्मा द्वारा ही प्राप्त होते हैं।

क्रियाकलाप 14.8. (पा. पु. पृ. सं. 285)

प्रश्न-
1. विविध ऊर्जा स्त्रोतों के विषय में जानकारी एकत्र करके उसके बारे में ज्ञात कीजिए कि उसमें से प्रत्येक पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करता है।
2. प्रत्येक ऊर्जा स्रोत के लाभ तथा हानियों पर वाद-विवाद कीजिए तथा इस आधार पर ऊर्जा का सर्वोतम स्रोत चुनिए।
उत्तर-
स्रोत द्वारा पर्यावरण का नुकसान नहीं होना चाहिए तथा सर्वोतम स्रोत उसी को माना जाना चाहिए जिससे पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो तथा उच्च स्तरीय ऊर्जा सस्ते में प्राप्त हो सके तथा उसका भंडारण संभव हो।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

क्रियाकलाप 14.9. (पा. पु. पृ. सं. 286)
प्रश्न-कक्षा में निम्नलिखित समस्याओं पर वादविवाद कीजिए –
(a) यह कहा जाता है कि अनुमानतः कोयले के भंडार आने वाले दो सौ वर्ष के लिए पर्याप्त हैं। क्या इस प्रकरण में हमें चिंता करने की आवश्यकता है कि हमारे कोयले के भंडार रिक्त होते जा रहे हैं? क्यों अथवा क्यों नहीं?
(b) ऐसा अनुमान है कि सूर्य आगामी 5 करोड़ वर्ष तक जीवित रहेगा। क्या हमें यह चिन्ता करनी चाहिए कि सौर ऊर्जा समाप्त हो रही है? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
(c) वाद-विवाद के आधार पर यह निर्णय लीजिए कि कौन सा ऊर्जा स्रोत (a) समाप्य, (b) अक्षय, (c) नवीकरणीय तथा (d) अनवीकरणीय है। प्रत्येक चयन के लिए अपना तर्क दीजिए।
उत्तर-
अध्यापक/अध्यापिकाओं की सहायता से कक्षा में वाद-विवाद कीजिए।

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HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव Textbook Exercise Questions, and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

HBSE 10th Class Science विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन किसी लम्बे विद्युत धारावाही तार के निकट चुम्बकीय क्षेत्र का सही वर्णन करता है?
(a) चुम्बकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के लम्बवत् होती हैं।
(b) चुम्बकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के समान्तर होती हैं।
(c) चुम्बकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ अरीय होती हैं जिनका उद्भव तार से होता है।
(d) चुम्बकीय क्षेत्र की संकेन्द्रीय क्षेत्र रेखाओं का केन्द्र तार होता है।
उत्तर-
(d) चुम्बकीय क्षेत्र की संकेन्द्रीय क्षेत्र रेखाओं का केन्द्र तार होता है।

प्रश्न 2.
वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण की परिघटना
(a) किसी वस्तु को आवेशित करने की प्रक्रिया है।
(b) किसी कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित होने के कारण चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने की प्रक्रिया है।
(c) कुंडली तथा चुम्बक के बीच आपेक्षिक गति के कारण कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न करना है।
(d) किसी विद्युत मोटर की कुंडली को घूर्णन कराने की प्रक्रिया है।
उत्तर-
(c) कुंडली तथा चुम्बक के बीच आपेक्षिक गति के कारण कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न करना है।

प्रश्न 3.
विद्युत धारा उत्पन्न करने की युक्ति को कहते हैं-
(a) जनित्र
(b) गैल्वेनोमीटर
(c) ऐमीटर
(d) मोटर।
उत्तर-
(a) जनित्र।

प्रश्न 4.
किसी ac जनित्र तथा dc जनित्र में एक मूलभूत अन्तर यह है कि- .
(a) ac जनित्र में विद्युत चुम्बक होता है जबकि dc मोटर में स्थायी चुम्बक होता है।
(b) dc जनित्र उच्च वोल्टता का जनन करता है।
(c) ac जनित्र उच्च वोल्टता का जनन करता है।
(d) ac जनित्र में सी वलय होते हैं, जबकि dc जनित्र में दिक्परिवर्तक होता है।
उत्तर-
(d) ac जनित्र में सी वलय होते हैं, जबकि dc जनित्र में दिक्परिवर्तक होता है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

प्रश्न 5.
लघुपथन के समय, परिपथ में विद्युत धारा का मान
(a) बहुत कम हो जाता है
(b) परिवर्तित नहीं होता
(c) बहुत अधिक बढ़ जाता है
(d) निरन्तर परिवर्तित होता है।
उत्तर-
(c) बहुत अधिक बढ़ जाता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रकथनों में कौन-सा सही है तथा कौन-सा गलत है? इसे प्रकथन के सामने अंकित कीजिए
(a) विद्युत मोटर यान्त्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित करता है।
(b) विद्युत जनित्र विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धान्त पर कार्य करता है।
(c) किसी लम्बी वृत्ताकार विद्युत धारावाही कुंडली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र समान्तर सीधी क्षेत्र रेखाएँ होता है।
(d) हरे विद्युतरोधन वाला तार प्रायः विद्युन्मय तार होता है।
उत्तर-
(a) असत्य,
(b) सत्य,
(c) सत्य,
(d) असत्य।

प्रश्न 7.
चुम्बकीय क्षेत्र के तीन स्त्रोतों की सूची बनाइए।
उत्तर-
चुम्बकीय क्षेत्र के स्रोत हैं-
(1) स्थायी चुम्बक,
(2) विद्युत धारा तथा
(3) गतिमान आवेश।

प्रश्न 8.
परिनालिका चुम्बक की भाँति कैसे व्यवहार करती है? क्या आप किसी छड़ चुम्बक की सहायता से किसी विद्युत धारावाही परिनालिका के उत्तर ध्रुव तथा दक्षिण ध्रुव का निर्धारण कर सकते हैं।
उत्तर-
धारावाही परिनालिका एक छड़ चुम्बक की भाँति ही व्यवहार करती है। इनमें निम्नलिखित समानताएँ होती हैं-

  • धारावाही परिनालिका एवं छड़ चुम्बक दोनों को स्वतन्त्रतापूर्वक लटकाए जाने पर दोनों के अक्ष उत्तर एवं दक्षिण दिशा में ठहरते हैं।
  • धारावाही परिनालिका एवं छड़ चुम्बक दोनों के समान ध्रुवों में प्रतिकर्षण एवं असमान ध्रुवों में आकर्षण होता है।
  • दोनों ही लोहे के छोटे-छोटे टुकड़ों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं तथा दिक्सूचक सुई लाने पर सुई विक्षेपित हो जाती है।

दण्ड चुम्बक की सहायता से परिनालिका के ध्रुवों का निर्धारण-दण्ड चुम्बक द्वारा परिनालिका के ध्रुवों का निर्धारण निम्न प्रकार से किया जा सकता है-

  • परिनालिका को उसके केन्द्र पर धागा बाँधकर स्वतन्त्रतापूर्वक लटका देते हैं।
  • दण्ड चुम्बक के उत्तरी ध्रुव को परिनालिका के एक सिरे के पास लाते हैं। यदि परिनालिका का यह सिरा चुम्बक की ओर आकर्षित होता है तो परिनालिका का यह सिरा दक्षिणी ध्रुव होगा तथा विपरीत सिरा उत्तरी ध्रुव होगा।
  • यदि दण्ड चुम्बक का उत्तरी ध्रुव समीप लाने पर परिनालिका विक्षेपित हो जाती है तब दण्ड चुम्बक के उत्तरी ध्रुव के सामने वाला परिनालिका का सिरा उत्तरी ध्रुव होगा तथा विपरीत सिरा दक्षिणी ध्रुव होगा।

प्रश्न 9.
किसी चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित विद्युत धारावाही चालक पर आरोपित बल कब अधिकतम होता है?
उत्तर-
जब चालक चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् रखा गया हो तब आरोपित बल अधिकतम होता है।

प्रश्न 10.
मान लीजिए आप किसी चैम्बर में अपनी पीठको किसी एक दीवार से लगाकर बैठे हैं। कोई इलेक्ट्रॉन पुंज आपके पीछे की दीवार से सामने की ओर क्षैतिजतः गमन करते हुए किसी प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा आपके दाईं ओर विक्षेपित हो जाता है। चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा क्या है?
उत्तर-
फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम के अनुसार चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा ऊर्ध्वाधरतः नीचे की ओर होगी।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

प्रश्न 11.
विद्युत मोटर का नामांकित आरेख खींचिए। इसका सिद्धान्त तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। विद्युत मोटर में विभक्त वलय का क्या महत्त्व है? (CBSE 2018)
उत्तर-
विद्युत मोटर (Electric Motor) विद्युत मोटर द्वारा विद्युत ऊर्जा को यान्त्रिक ऊर्जा में बदला जाता है।
सिद्धान्त (Principle)-यदि किसी चुम्बकीय क्षेत्र में एक बन्द कुंडली रखकर उसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाए तो कुंडली विक्षेपित हो जाती है। यदि कुंडली में धारा का प्रवाह एक ही दिशा में होता रहे तो कुंडली भी एक दिशा में घूमती रहेगी। इस तथ्य का उपयोग विद्युत मोटर बनाने में किया जाता है। इसे विद्युत मोटर का सिद्धान्त कहा जाता है।

रचना-विद्युत मोटर के निम्नांकित मुख्य भाग होते हैं
(i) क्षेत्र चुम्बक,
(ii) आर्मेचर,
(iii) विभक्त वलय,
(iv) ब्रुश।

(i) क्षेत्र चुम्बक (Field magnet)-यह एक शक्तिशाली स्थायी चुम्बक होता है, जिसके ध्रुव खण्ड N व S हैं। इस चुम्बक के ध्रुवों के बीच उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र में आर्मेचर कुंडली घूमती है।

(ii) आर्मेचर (Armature) यह अनेक फेरों वाली एक आयताकार कुंडली ABCD होती है जो कच्चे लोहे के क्रोड पर ताँबे के पृथक्कित तार लपेटकर बनायी जाती है।

(iii) विभक्त वलय (Split rings) यह दो अर्द्ध-वृत्ताकार वलयों L व M के रूप में होता है। कुंडली के सिरे A व B इन भागों में अलग-अलग जुड़े रहते हैं। यह कुंडली में प्रवाहित होने वाली धारा की दिशा को इस प्रकार परिवर्तित करता है कि कुंडली सदैव एक ही दिशा में क्षैतिज अक्ष पर घूमती है।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 1

(iv) बुश (Brush) विभक्त वलय L व M धातु की बनी दो पत्तियों को स्पर्श करते हैं। इन्हें ब्रुश कहते हैं। इन ब्रुशों का सम्बन्ध दो संयोजक पेचों से कर दिया जाता है। बाह्य परिपथ से आने वाली धारा को इन्हीं पेचों से सम्बन्धित कर देते हैं।

कार्यविधि (Working)-जब बैटरी से कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तब फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियमानुसार, कुंडली की भुजाओं AB तथा CD पर बराबर, परन्तु विपरीत दिशा में दो बल कार्य करने लगते हैं। ये बल एक बलयुग्म का निर्माण करते हैं, जिसके कारण कुंडली दक्षिणावर्त दिशा में घूमने लगती है। आधे चक्कर के बाद कुंडली की भुजाएँ AB तथा CD अपना स्थान बदल देती हैं तथा साथ ही साथ विभक्त वलय L व M भी अपनी स्थितियाँ बदल देते हैं। इन विभक्त वलयों की सहायता से धारा की दिशा इस प्रकार रखी जाती है कि कुंडली पर बलयुग्म एक ही दिशा में कार्य करे अर्थात् कुंडली एक ही दिशा में घूमती रहे।

कुंडली के घूमने की दर निम्नलिखित उपायों से बढ़ाई जा सकती है-

  • कुंडली में प्रवाहित धारा को बढ़ाकर,
  • कुंडली में फेरों की संख्या बढ़ाकर,
  • कुंडली का क्षेत्रफल बढ़ाकर तथा
  • चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ाकर।

प्रश्न 12.
ऐसी कुछ युक्तियों के नाम लिखिए जिनमें विद्युत मोटर उपयोग किए जाते हैं?
उत्तर-
विद्युत मोटर का उपयोग बिजली के पंखे, विद्युत मिश्रकों, वाशिंग मशीनों, कम्प्यूटरों आदि में किया जाता है।

प्रश्न 13.
कोई विद्युतरोधी ताँबे के तार की कुंडली किसी गैल्वेनोमीटर से संयोजित है। क्या होगा यदि कोई छड़ चुम्बक-
(i) कुंडली में धकेला जाता है।
(ii) कुंडली के भीतर से बाहर खींचा जाता है।
(iii) कुंडली के भीतर स्थिर रखा जाता है।
उत्तर-
(i) कुंडली में एक प्रेरित धारा उत्पन्न होगी तथा धारामापी विक्षेप प्रदर्शित करेगा।
(ii) प्रेरित धारा उत्पन्न होने से धारामापी में विक्षेप होगा, विक्षेप की दिशा पहले से विपरीत होगी।
(iii) कोई प्रेरित धारा उत्पन्न नहीं होगी, धारामापी में कोई विक्षेप नहीं आएगा।

प्रश्न 14.
दो वृत्ताकार कुंडली A तथा B एक-दूसरे के निकट स्थित हैं। यदि कुंडली A में विद्युत धारा में कोई परिवर्तन करें तो क्या कुंडली B में कोई विद्युत धारा प्रेरित होगी? कारण लिखिए।
उत्तर-
कुंडली B में धारा प्रेरित होगी। इसका कारण यह है कि जब कुंडली A में प्रवाहित धारा में बदलाव किया जाता है तो इसके चारों ओर स्थित चुम्बकीय क्षेत्र में भी परिवर्तन होता है। इस क्षेत्र की बल रेखाओं के कुंडली B से गुजरते समय बल रेखाओं की संख्या में परिवर्तन होने के कारण कुंडली B में प्रेरित धारा उत्पन्न हो जाती है।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित की दिशा को निर्धारित करने वाला नियम लिखिए
(i) किसी विद्युत धारावाही सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र,
(ii) किसी चुम्बकीय क्षेत्र में, क्षेत्र के लम्बवत् स्थित, विद्युत धारावाही सीधे चालक पर आरोपित बल, तथा
(iii) किसी चुम्बकीय क्षेत्र में किसी कुंडली के घूर्णन करने पर उस कुंडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत धारा।
उत्तर-
(i) किसी धारावाही चालक के चारों ओर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम द्वारा निर्धारित होती है, इस नियम के अनुसार, “यदि दाएँ हाथ की अंगुलियों को धारावाही चालक के चारों ओर मोड़कर, अंगूठे को धारावाही चालक में प्रवाहित धारा के अनुदिश रखें तो मुड़ी हुई अंगुलियाँ चुम्बकीय बल रेखाओं की दिशा को प्रदर्शित करेंगी।”

(ii) चुम्बकीय क्षेत्र में रखे गये धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम द्वारा निर्धारित की जाती है।
फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम-इस नियम के अनुसार, “यदि हम बाएँ हाथ के अंगूठे तथा पहली दो अंगुलियों को इस प्रकार फैलाएँ कि तीनों परस्पर लम्बवत् रहें तब यदि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा, मध्यमा चालक में प्रवाहित धारा की दिशा को प्रदर्शित करे तो अँगूठा चालक पर लगने वाले बल की दिशा को प्रदर्शित करेगा।”

(iii) किसी चुम्बकीय क्षेत्र में किसी कुंडली की गति के कारण उसमें उत्पन्न प्रेरित धारा की दिशा फ्लेमिंग के दाएँ हाथ के नियम से ज्ञात की जाती है- फ्लेमिंग का दाएँ हाथ का नियम-इस नियम के अनुसार, “यदि दाएँ हाथ का अंगूठा, उसके पास वाली तर्जनी अंगुली तथा मध्यमा अंगुली को परस्पर एक-दूसरे के लम्बवत् फैलाकर इस प्रकार रखें कि तर्जनी अंगुली चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में तथा अंगूठा चालक की गति की दिशा में हो तो मध्यमा अंगुली चालक में धारा की दिशा बताएगी।”

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

प्रश्न 16.
नामांकित आरेख खींचकर किसी विद्युत जनित्र का मूल सिद्धान्त तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। इसमें ब्रुशों का क्या कार्य है?
उत्तर-
विद्युत जनित्र अथवा प्रत्यावर्ती धारा डायनमो (Electric Generator or Alternating Current Dynamo)- विद्युत जनित्र (डायनमो) एक ऐसा यन्त्र है जो कि यान्त्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।

सिद्धान्त (Principle)-जब किसी शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र में किसी बन्द कुंडली को घुमाया जाता है, तो उसमें से होकर गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स में लगातार परिवर्तन होता रहता है, जिसके कारण कुंडली में एक विद्युत वाहक बल तथा विद्युत धारा प्रेरित हो जाती है। कुंडली को घुमाने में जो कार्य किया जाता है वह विद्युत ऊर्जा के रूप में परिणित हो जाता है।

संरचना (Construction)-इसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं-
(i) क्षेत्र चुम्बक,
(ii) आर्मेचर,
(iii) सपी वलय,
(iv) ब्रुश।

(i) क्षेत्र चुम्बक (Field magnet)-यह एक अति शक्तिशाली नाल चुम्बक होता है जिसके ध्रुवों के मध्य शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र में एक कुंडली को तीव्र गति से घुमाया जाता है।
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(ii) आर्मेचर या कुंडली (Armature)-यह मुलायम लोहे के एक क्रोड पर लिपटी अत्यधिक संख्या में पृथक्कृत तारों की कुंडली है जिसे चुम्बकीय क्षेत्र में तीव्र गति से घुमाया जाता है। यह सामान्य रूप से 50 चक्कर प्रति सेकण्ड की दर से चक्कर लगाती है जो प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति. कहलाती है।

(iii) सी वलय (Slip rings)-कुंडली के सिरे A व D क्रमशः अलग-अलग पृथक्कृत धात्विक वलयों C, व C, से जोड़ दिए जाते हैं। ये कुंडली के साथ-साथ घूमते हैं।

(iv) बुश (Brushes)-ये कार्बन या किसी धातु की पत्तियों से बने दो ब्रुश होते हैं। इनका एक सिरा सी वलयों को स्पर्श करता है एवं शेष दूसरे सिरों को बाह्य परिपथ से सम्बन्धित कर दिया जाता है। ब्रुश कुंडली के साथ नहीं घूमते हैं।

कार्यविधि (Working)-माना कि कुंडली ABCD दक्षिणावर्त दिशा में घूम रही है, जिससे भुजा CD नीचे की ओर व भुजा AB ऊपर की ओर आ रही होती है तब फ्लेमिंग के दाएँ हाथ के नियमानुसार, इन भुजाओं में प्रेरित धारा की दिशा चित्रानुसार होगी। अतः बाह्य परिपथ में धारा B2, से जाएगी तथा B1, से वापस आएगी। जब कुंडली अपनी
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ऊर्ध्वाधर स्थिति से गुजरेगी, तब भुजा AB नीचे की ओर तथा CD ऊपर की ऊपर की ओर जाने लगेगी। इस कारण AB तथा CD में धारा की दिशाएँ पहले से विपरीत हो जाएँगी। इस प्रकार की धारा को प्रत्यावर्ती धारा (alternating current) कहते हैं, क्योंकि प्रत्येक आधे चक्कर के बाद बाह्य परिपथ में धारा की दिशा बदल जाती है।

प्रश्न 17.
किसी विद्युत परिपथ में लघुपथन कब होता
उत्तर-
जब विद्युन्मय तार एवं उदासीन तार परस्पर सम्पर्कित हो जाते हैं तो परिपथ लघुपथित हो जाता है। इस स्थिति में परिपथ का प्रतिरोध अचानक शून्य हो जाता है तथा धारा का मान अचानक बहुत अधिक बढ़ जाता है।

प्रश्न 18.
भूसंपर्क तार का क्या कार्य है? धातु के आवरण वाले विद्युत साधित्रों को भूसंपर्कित करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर-
भूसंपर्क तार-घरेलू विद्युत परिपथ में विद्युन्मय एवं उदासीन तारों के साथ एक तीसरा तार भी लगा होता है, इस तार का सम्पर्क घर के निकट जमीन के नीचे दबी धातु के प्लेट के साथ होता है। इस तार को भूसंपर्क तार कहते हैं। धातु के साधित्रों जैसे बिजली की प्रेस, फ्रिज, टोस्टर आदि को भूसंपर्क तार से जोड़ देने पर साधित्र के आवरण से विद्युत धारा का क्षरण होने पर आवरण का विभव भूमि के बराबर हो जाता है। इससे साधित्र का उपयोग करने वाले व्यक्ति को तीव्र विद्युत आघात लगने का खतरा समाप्त हो जाता है।

HBSE 10th Class Science विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव InText Questions and Answers

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 250)

प्रश्न 1.
चुम्बक के निकट लाने पर दिक्सूचक की सुई विक्षेपित क्यों हो जाती है?
उत्तर-
चुम्बक के समीप लाए जाने पर, चुम्बक के चुम्बकीय क्षेत्र के कारण दिक्सूचक सुई पर एक बलयुग्म कार्य करने लगता है जो सुई को विक्षेपित कर देता है।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 255)

प्रश्न 1.
किसी छड़ चुम्बक के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ खींचिए।
उत्तर-
किसी छड़ चुम्बक के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ –
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प्रश्न 2.
चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं के गुणों की सूची बनाइए।
उत्तर-
चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं के निम्नलिखित गुण हैं-

  • चुम्बक के बाहर इन बल रेखाओं की दिशा उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर तथा चुम्बक के अन्दर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होती है। ये बन्द वक्र के रूप में होती हैं।
  • चुम्बकीय बल रेखा के किसी बिन्दु पर खींची गयी स्पर्श रेखा उस बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करती है!
  • चुम्बकीय बल रेखाएँ एक-दूसरे को कभी नहीं काटती, क्योंकि एक बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ सम्भव नहीं हैं।
  • एक समान चुम्बकीय क्षेत्र की चुम्बकीय बल रेखाएँ, परस्पर समान्तर एवं बराबर दूरियों पर होती हैं।

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प्रश्न 3.
दो चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद क्यों नहीं करती?
उत्तर-
यदि दो चुम्बकीय बल रेखाएँ एक-दूसरे को परस्पर काटेंगी तो उस बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ होंगी जोकि असम्भव है।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 256)

प्रश्न 1.
मेज के तल में पड़े तार के वृत्ताकार पाश पर विचार कीजिए। मान लीजिए इस पाश में दक्षिणावर्त विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम को लागू करके पाश के भीतर तथा बाहर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात कीजिए। .
उत्तर-
चित्र के अनुसार, यदि दाहिने हाथ की अंगुलियाँ तार के ऊपर इस प्रकार लपेटी जाएँ कि अँगूठा तार में प्रवाहित धारा की दिशा में हों, तब अंगुलियों के मुड़ने की दिशा चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करेगी।
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अतः पाश के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा पाश के तल (मेज के तल) के लम्बवत् नीचे की ओर होगी, जबकि पाश के बाहर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा पाश (मेज) के तल के लम्बवत् ऊपर की ओर होगी।

प्रश्न 2.
किसी दिए गए क्षेत्र में चुम्बकीय क्षेत्र एक समान है। इसे निरूपित करने के लिए आरेख खींचिए।
उत्तर-
एक समान चम्बकीय क्षेत्र परस्पर समान्तर बल रेखाओं द्वारा प्रदर्शित किया जाएगा जैसा कि निम्न चित्र में प्रदर्शित किया गया है।
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प्रश्न 3.
सही विकल्प चुनिए
किसी विद्युत धारावाही सीधी लम्बी परिनालिका के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र
(a) शून्य होता है।
(b) इसके सिरे की ओर जाने पर घटता है।
(c) इसके सिरे की ओर जाने पर बढ़ता है।
(d) सभी बिन्दुओं पर समान होता है।
उत्तर-
(b) इसके सिरे की ओर जाने पर घटता है।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 259)

प्रश्न 1.
किसी प्रोटॉन का निम्नलिखित में से कौन-सा गुण चुम्बकीय क्षेत्र में मुक्त गति करते समय परिवर्तित हो जाता है?
(a) द्रव्यमान
(b) चाल
(c) वेग
(d) संवेग।
उत्तर-
(c) वेग तथा (d) संवेग।

प्रश्न 2.
क्रियाकलाप 13.7 में, हमारे विचार से छड़ AB का विस्थापन किस प्रकार प्रभावित होगा, यदि
(a) छड़ AB में प्रवाहित विद्युत धारा में वृद्धि हो जाए
(b) अधिक प्रबल नाल चुम्बक प्रयोग किया जाए और
(c) छड़ AB की लम्बाई में वृद्धि कर दी जाए?
उत्तर-
(a) छड़ का विस्थापन बढ़ जाएगा; क्योंकि इस पर कार्यरत बल प्रवाहित विद्युत धारा के अनुक्रमानुपाती होता है।
(b) छड़ का विस्थापन बढ़ जाएगा; क्योंकि इस पर कार्यरत बल चुम्बकीय क्षेत्र के अनुक्रमानुपाती होता है।
(c) छड़ का विस्थापन बढ़ जाएगा; क्योंकि इस पर कार्यरत बल छड़ की लम्बाई के अनुक्रमानुपाती होता है।

प्रश्न 3.
पश्चिम की ओर प्रक्षेपित कोई धनावेशित कण (अल्फा-कण) किसी चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा उत्तर की ओर विक्षेपित हो जाता है। चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा क्या
(a) दक्षिण की ओर
(b) पूर्व की ओर
(c) अधोमुखी
(d) उपरिमुखी।
उत्तर-
(d) उपरिमुखी।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 261)

प्रश्न 1.
फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम लिखिए।
उत्तर-
फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम-इस नियम के अनुसार, “यदि हम अपने बाएँ हाथ के अंगूठे तथा पहली दो चुम्बकीय क्षेत्र
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अंगुलियों को इस प्रकार फैलाएँ कि तीनों परस्पर लम्बवत् रहें, तब यदि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करे, मध्यमा चालक में प्रवाहित धारा की दिशा को प्रदर्शित करे तो अँगूठा चालक पर लगने वाले बल की दिशा को प्रदर्शित करेगा।

प्रश्न 2.
विद्युत मोटर का क्या सिद्धान्त है?
उत्तर-
विद्युत मोटर का सिद्धान्त-जब किसी कुंडली को चुम्बकीय क्षेत्र में रखकर उसमें धारा प्रवाहित की जाती है तो कुंडली पर एक बलयुग्म कार्य करता है जो कुंडली को उसकी अक्ष पर घुमाने का प्रयास करता है। यदि कुंडली अपनी अक्ष पर घूमने के लिए स्वतन्त्र हो तो वह घूमने लगती है। यही विद्युत मोटर का सिद्धान्त है।

प्रश्न 3.
विद्युत मोटर में विभक्त वलय की क्या भूमिका है?
उत्तर-
विद्युत मोटर में विभक्त वलय दिक्परिवर्तक का कार्य करता है। वह युक्ति जो परिपथ में विद्युत धारा के प्रवाह को उत्क्रमित कर देती है, उसे दिक्परिवर्तक कहते हैं।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 264)

प्रश्न 1.
किसी कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित करने के विभिन्न ढंग स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-

  • यदि कुंडली को स्थिर रखकर, दण्ड चुम्बक को कुण्डली की ओर लाएँ या कुण्डली से दूर ले जाएँ, तो कुंडली में प्रेरित धारा उत्पन्न की जा सकती है।
  • चुम्बक को स्थिर रखकर कुंडली को चुम्बक के समीप या उससे दूर ले जाकर कुण्डली में विद्युत धारा प्रेरित की जा सकती है।
  • कुंडली को किसी चुम्बकीय क्षेत्र में घुमाकर उसमें धारा प्रेरित की जा सकती है।
  • कुंडली के समीप रखी किसी अन्य कुण्डली में प्रवाहित धारा में परिवर्तन करके भी पहली कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित की जा सकती है।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 265)

प्रश्न 1.
विद्युत जनित्र का सिद्धान्त लिखिए।
उत्तर-
विद्युत जनित्र का सिद्धान्त-जब किसी बन्द कुंडली को किसी शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र में तेजी से घुमाया जाता है तब उसमें से होकर गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स में लगातार परिवर्तन होने के कारण कुंडली में एक विद्युत धारा प्रवाहित हो जाती है। कुंडली को घुमाने में किया गया कार्य ही कुंडली में विद्युत-ऊर्जा के रूप में परिणित हो जाता है।

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प्रश्न 2.
दिष्ट धारा के कुछ स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर-

  1. विद्युत सेल या बैटरी तथा
  2. दिष्ट धारा जनित्र।

प्रश्न 3.
प्रत्यावर्ती विद्युत धारा उत्पन्न करने वाले स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर-
प्रत्यावर्ती धारा जनित्र द्वारा प्रत्यावर्ती धारा उत्पन्न होती है।

प्रश्न 4.
सही विकल्प का चयन कीजिए-ताँबे के तार की एक आयताकार कुंडली किसी चुम्बकीय क्षेत्र में घूर्णी गति कर रही है। इस कुंडली में प्रेरित विद्युत् धारा की दिशा में कितने परिभ्रमण के पश्चात् परिवर्तन होता है।
(a) दो
(b) एक
(c) आधे
(d) चौथाई।
उत्तर-
(c) आधे।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 267)

प्रश्न 1.
विद्युत परिपथों तथा साधित्रों में सामान्यतया उपयोग होने वाले दो सुरक्षा उपायों के नाम लिखिए।
उत्तर-
(i) विद्युत फ्यूज,
(ii) भू सम्पर्क तार ।

प्रश्न 2.
2kW शक्ति अनुमतांक का एक विद्युत तन्दूर किसी घरेलू विद्युत परिपथ (220V) में प्रचालित किया जाता है जिसका विद्युत धारा अनुमतांक 5A है, इससे आप किस परिणाम की अपेक्षा करते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
विद्युत तन्दूर की शक्ति
P=2kW =2000w
V=220V
I = \(\frac{\mathrm{P}}{\mathrm{V}}=\frac{2000 \mathrm{~W}}{200 \mathrm{~V}}\)
=9.09A
विद्युत धारा का अनुमतांक 5A है, विद्युत तन्दूर इससे बहुत अधिक धारा ले रहा है जिससे अतिभारण हो जाएगा तथा फ्यूज गल जाएगा एवं विद्युत पथ अवरोधित हो जाएगा।

प्रश्न 3.
घरेलू विद्युत परिपथों में अतिभारण से बचाव के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
उत्तर-
घरेलू विद्युत परिपथों में अतिभारण से बचाव के लिए मेन स्विच के पास, विद्युन्मय तार में उचित सामर्थ्य का फ्यूज तार जोड़ना चाहिए।

HBSE 10th Class Science विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव InText Activity Questions and Answers

क्रियाकलाप 13.1. (पा. पु. पृ. सं. 249)

प्रेक्षण (Observation)-दिक्सूचक सुई विक्षेपित हो जाती है, इसका अर्थ है कि ताँबे के तार से प्रवाहित विद्युत धारा ने एक चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न किया है। इस प्रकार यह ज्ञात होता है कि विद्युत तथा चुम्बकत्व एक दूसरे से सम्बन्धित

क्रियाकलाप 13.2. (पा. पु. पृ. सं. 250)

प्रश्न 1.
आप क्या प्रेक्षण करते हैं ?
उत्तर-
लौह-चूर्ण चित्र में दर्शाए गए पैटर्न के अनुसार व्यवस्थित हो जाते हैं।

प्रश्न 2.
यह पैटर्न क्या निर्देशित करता हैं ?
उत्तर-
लौह-चूर्ण एक बल का अनुभव करता है जो उस चुम्बक के चारों ओर होता है। इसे चुम्बकीय क्षेत्र कहते हैं।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 8

प्रश्न 3.
लौह-चूर्ण किस स्थान पर अधिक आकर्षित होता है ?
उत्तर-
दोनों ध्रुवों पर।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

क्रियाकलाप 13.3. (पा. पु. पृ. सं. 251)
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 9
प्रेक्षण (Observation) चुम्बकीय क्षेत्र में परिमाण एवं दिशा दोनों होते हैं, किसी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा वह मानी जाती है जिसके अनुदिश दिक्सूची का उत्तरी ध्रुव उस क्षेत्र के भीतर गमन करता है। अतः चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ चुम्बक के उत्तरी ध्रुव से प्रकट होती हैं तथा दक्षिणी ध्रुव पर विलीन हो जाती हैं। चुम्बक के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा उसके दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होती है अतः चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक बन्द वक्र के रूप में होती हैं।

क्रियाकलाप 13.4. (पा. पु. पृ. सं. 252)

प्रश्न 1.
दिक्-सूचक सुई के ऊपर यदि धारावाही चालक रखा जाए तो क्या होगा ?
उत्तर-
दिक्-सूचक सुई की भुजाओं में विचलन होगा। यह दिशा SNOW नियम की मदद से ज्ञात कर सकते हैं।

प्रश्न 2.
SNOW नियम क्या है ?
उत्तर-
यदि चालक में धारा की दिशा दक्षिण से उत्तर दिशा की तरफ हो तो दिक्सूचक सुई की दिशा के पश्चिम दिशा में विक्षेपण होगा।

प्रश्न 3.
क्या होगा यदि धारावाही चालक में धारा की दिशा को उल्टा कर दिया जाए ?
उत्तर-
दिक्सूचक सुई की भुजाओं में विक्षेपण की दिशा उल्टी हो जाएगी।

प्रश्न 4.
यदि सीधे तार में प्रवाहित विद्युत धारा की दिशा को उत्क्रमित कर दिया जाए, तो क्या चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा भी उत्क्रमित हो जाएगी?
उत्तर-
हाँ, चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा भी उत्क्रमित हो जाएगी।

क्रियाकलाप 13.5. (पा. पु. पृ. सं. 253)

प्रश्न 1.
लौह-चूर्ण किस प्रकार व्यवस्थित होते हैं? .
उत्तर-
लौह-चूर्ण संरेखित होकर तार के चारों ओर संकेन्द्री वृत्तों के रूप में व्यवस्थित होते हैं।

प्रश्न 2.
ये संकेन्द्री वृत्त क्या निरूपित करते हैं ? ।
उत्तर-
ये संकेन्द्री वृत्त, चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं को निरूपित करते हैं।

प्रश्न 3.
इस प्रकार उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा आप कैसे ज्ञात करेंगे?
उत्तर-
दिक्सूची द्वारा ज्ञात करेंगे। वृत्त के किसी बिंदु P पर दिक्सूची का उत्तर ध्रुव विद्युत धारा द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र रेखा की दिशा बताता है।

प्रश्न 4.
विद्युत धारा की दिशा उत्क्रमित करने पर क्या होता है ?
उत्तर-
चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा भी उत्क्रमित हो जाती है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

प्रश्न 5.
क्या दिक्सूची के विक्षेप पर धारा के परिमाप – में वृद्धि और तार से दूरी का प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
हाँ, धारा के परिमाप में वृद्धि होने पर विक्षेप में भी वृद्धि होती है तथा तार के दूसरे किसी बिंदु Q पर दिक्सूची रखने पर इसका विक्षेप घट जाता है।

क्रियाकलाप 13.6. (पा. पु. पृ. सं. 256)

प्रश्न 1.
कार्ड बोर्ड को हल्के से कुछ बार थपथपाइए। कार्ड बोर्ड पर जो पैटर्न बनता दिखाई दे उसका प्रेक्षण कीजिए।
उत्तर-
दोनों छिद्रों के पास लौह-चूर्ण संकेन्द्रीय वृत्ताकार पैटर्न में व्यवस्थित हो जाते है। इसका अर्थ हुआ कि धारावाही वृत्ताकार चालक का प्रत्येक भाग चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है जो संकेन्द्रीय वृत्ताकार होते हैं।

प्रश्न 2.
क्या धारावाही वृत्ताकार चालक के आस-पास चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है ?
उत्तर-
हाँ, धारावाही वृत्ताकार चालक के आसपास चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।

प्रश्न 3.
धारावाही वृत्ताकार चालक के दो विपरीत बिन्दुओं पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की प्रकृति में अन्तर बताइए।
उत्तर-
दोनों ही बिन्दुओं पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा विपरीत होती है। इन दोनों बिन्दुओं पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ संकेन्द्रीय वृत्ताकार होती हैं।

प्रश्न 4.
धारावाही वृत्ताकार चालक द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का मान सबसे अधिक कहाँ पर होता है?
उत्तर-
धारावाही वृत्ताकार चालक के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान सबसे अधिक होता है।

क्रियाकलाप 13.7. (पा. पु. पृ. सं. 257)

प्रश्न 1.
आप क्या देखते हैं ?
उत्तर-
हम देखते हैं कि विद्युत धारा प्रवाहित होते ही छड़ बाईं दिशा में विस्थापित होती है।

प्रश्न 2.
अब छड़ में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा की दिशा उत्क्रमित कीजिए और छड़ के विस्थापन की दिशा नोट कीजिए। अब यह दाईं ओर विस्थापित होती है। छड़ क्यों विस्थापित होती है?
उत्तर-
फ्लेमिंग के अनुसार धारावाही चालक पर चुम्बकीय क्षेत्र में बल लगता है। इसलिए धारावाही चालक की चुम्बक के ध्रुवों के बीच स्थिर रखने पर अपनी स्थिति से विस्थापित हो जाता है। इस छड़ पर लगने वाला बल छड़ पर लम्बवत दिशा में होता है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

प्रश्न 3.
जब एक धारावाही चालक को चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो क्या होता है ?
उत्तर-
ज़ब धारावाही चालक को चुम्बकीय क्षेत्र में रखते हैं तो उस पर एक बल आरोपित होता है।

प्रश्न 4.
उस नियम का मात्र नाम लिखो जिसकी मदद से धारावाही चालक पर चुम्बकीय क्षेत्र में लगने वाले बल की दिशा ज्ञात करते हैं ?
उत्तर-
फ्लेमिंग का वामहस्त का नियम।

प्रश्न 5.
किन कारकों पर चालक पर आरोपित बल का मान निर्भर करता है ?
उत्तर-

  • चुम्बकीय क्षेत्र के मान पर,
  • चालक की लम्बाई पर,
  • चालक में प्रवाहित धारा के मान पर।

प्रश्न 6.
क्या होगा यदि चुम्बकीय क्षेत्र में रखे चालक में प्रवाहित धारा की दिशा को विपरीत दिशा में प्रवाहित किया जाए ?
उत्तर-
चालक पर आरोपित बल की दिशा विपरीत दिशा में हो जाती है।

क्रियाकलाप 13.8. (पा. पु. पृ. सं. 261)

प्रश्न-इस क्रियाकलाप से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं ? ..
उत्तर-
इस क्रियाकलाप से यह स्पष्ट होता है कि कुंडली के सापेक्ष चुंबक की गति एक प्रेरित विभवान्तर उत्पन्न करती है, जिसके कारण परिपथ में प्रेरित विद्युत धारा प्रवाहित होती है। याद रखिए गैल्वेनोमीटर एक ऐसा उपकरण है, जो किसी परिपथ में विद्युत् धारा की उपस्थिति संसूचित करता है।

क्रियाकलाप 13.9. (पा. पु. पृ. सं. 263)

प्रश्न 1.
जब एक धारावाही कुण्डली को दूसरी कुण्डली के पास लाते है तो क्या होता है ?
उत्तर-
दूसरी कुण्डली में धारा प्रेरित होती है।

प्रश्न 2.
प्राथमिक कुंडली में स्थिर धारा प्रवाहित होने पर द्वितीय कुण्डली में धारा का मान क्या होगा ?
उत्तर-
शून्य।

प्रश्न 3.
धारावाही कुंडली एवं प्रेरित धारा कुण्डली का क्या नाम है ?
उत्तर-
धारावाही कुण्डली को प्राथमिक कुण्डली एवं प्रेरित धारा कुण्डली को द्वितीयक कुण्डली कहते हैं।

प्रश्न 4.
कौन-सी कुण्डली से चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है ?
उत्तर-
प्राथमिक कुण्डली से चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है क्योंकि यह धारावाही कुण्डली होती है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

प्रश्न 5.
कुण्डली 2 में प्रेरित धारा की प्रबलता को कौन से कारक प्रभावित करते हैं ?
उत्तर-

  1. प्राथमिक कुण्डली में धारा की प्रबलता।
  2. प्राथमिक कुण्डली में तार के फेरों की संख्या।

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HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत Textbook Exercise Questions, and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

HBSE 10th Class Science विद्युत Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
प्रतिरोध R के किसी तार के टुकड़े को पाँच बराबर भागों में काटा जाता है। इन टुकड़ों को फिर पार्श्वक्रम में संयोजित कर देते हैं। यदि संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R’ है तो R/R’ अनुपात का मान क्या है
(a) 1/25
(b) 1/5
(c) 5
(d) 25.
उत्तर-
(d) 25.

संकेत-प्रत्येक कटे भाग का प्रतिरोध R/5 होगा।
अतः तुल्य प्रतिरोध
\(\frac{1}{R^{\prime}}=\frac{1}{R / 5}+\frac{1}{R / 5}+\frac{1}{R / 5}+\frac{1}{R / 5}+\frac{1}{R / 5}\)
\(\frac{1}{R^{\prime}}=\frac{5}{R}+\frac{5}{R}+\frac{5}{R}+\frac{5}{R}+\frac{5}{R}=\frac{25}{R}\)
अतः \(\frac{R}{R^{\prime}}\) = 25

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सा पद विद्युत परिपथ में विद्युत शक्ति को निरूपित नहीं करता ?
(a) PR
(b) IR2
(c)VI
(d)V2/R.
उत्तर-
(b) IR2

प्रश्न 3.
किसी विद्युत बल्ब का अनुमंताक 220 v; 100 w है। जब इसे 110V पर प्रचालित करते हैं तब इसके द्वारा उपभुक्त शक्ति कितनी होती है?
(a) 100W
(b) 75w
(c) 50 W
(d) 25 W
उत्तर-
(d) 25 W.
संकेतसूत्र P= \(\frac{\mathrm{v}^2}{\mathrm{R}}\) अतः बल्ब का प्रतिरोध R = \(\frac{v^2}{P}\)
R = \(\frac{220 \times 220}{100}\) = 484Ω
∴ द्वितीय स्थिति में शक्ति खर्च P1 = \(\frac{v_1^2}{R}\)
= \(\frac{110 \times 110}{484}\) =25 W

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

प्रश्न 4.
दो चालक तार जिनके पदार्थ, लम्बाई तथा व्यास समान हैं किसी विद्युत परिपथ में पहले श्रेणीक्रम में और फिर पावक्रम में संयोजित किए जाते हैं। श्रेणीक्रम तथा पार्श्वक्रम संयोजन में उत्पन्न ऊष्माओं का अनुपात क्या होगा?
(a) 1:2
(b) 2:1
(c) 1:4
(d) 4:1.
उत्तर-
(c) 1 : 4.

संकेत-यदि एक तार का प्रतिरोध R हो तो श्रेणी संयोजन का प्रतिरोध R1 = 2R व पार्श्व संयोजन का प्रतिरोध R2 = \( \frac{\mathrm{R}}{2}\) होगा।
यदि विभवान्तर V है तो ऊष्माओं का अनुपात
\(\frac{\mathrm{H}_1}{\mathrm{H}_2}=\frac{\mathrm{V}^2 / \mathrm{R}_1}{\mathrm{~V}^2 / \mathrm{R}_2}=\frac{\mathrm{R}_2}{\mathrm{R}_1}=\frac{\mathrm{R} / 2}{2 \mathrm{R}}=\frac{1}{4}\)

प्रश्न 5.
किसी विद्युत परिपथ में दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर मापने के लिए वोल्टमीटर को किस प्रकार संयोजित किया जाता है ?
उत्तर-
दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर मापने के लिए वोल्टमीटर को दोनों बिन्दुओं के बीच में पार्श्वक्रम में संयोजित किया जाता है।

प्रश्न 6.
किसी ताँबे के तार का व्यास 0.5 mm तथा प्रतिरोधकता 1.6 x 10-8Ωm है। 100 प्रतिरोध का प्रतिरोधक बनाने के लिए कितने लम्बे तार की आवश्यकता होगी? यदि इससे दोगुना व्यास का तार लें तो प्रतिरोध में क्या अन्तर आएगा?
हल : दिया है प्रतिरोधकता ρ = 1.6 x 10-8 Ωm,
प्रतिरोध R=10Ω
व्यास 2r= 0.5 mm
∴ त्रिज्या r = \(\frac{0.5}{2}\) mm = 2.5 x 10-4m
∵ R = ρ \(\frac{l}{\mathrm{~A}}\)
∴ तार की लम्बाई l = \(\frac{R \times A}{\rho}\)
= \(\frac{10 \times \pi \mathrm{r}^2}{\rho}\)
= \(\frac{10 \times 3.14 \times\left(2.5 \times 10^{-4}\right)^2}{1.6 \times 10^{-8} \Omega \mathrm{m}} \)
= 12.26 x 103m = 122.6 m
व्यास दोगुना करने पर त्रिज्या r दोगुनी तथा अनुप्रस्थं क्षेत्रफल (A = πr²) चार गुना हो जाएगा।
∵ R ∝ \(\frac{1}{\mathrm{~A}}\)
∴ क्षेत्रफल चार गुना होने पर प्रतिरोध एक चौथाई रह जाएगा।
अतः नया प्रतिरोध R1 = \(\frac{1}{4}\) R = \(\frac{1}{4} \times 10\) = 2.5 Ω

प्रश्न 7.
किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवान्तर v के विभिन्न मानों के लिए उससे प्रवाहित विद्युत धाराओं I के संगत मान आगे दिए गए हैं –
I(ऐम्पियर),: 0.5 1.0 2.0 3.0 4.0
v(वोल्ट): 1.6 3.4 6.7 10.2 13.2
V और I के बीच ग्राफ खींचकर इस प्रतिरोधक का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 1
हल : अभीष्ट ग्राफ के लिए उपयुक्त चित्र देखिए। प्रतिरोधक का प्रतिरोध, ग्राफ के ढाल के बराबर होगा।
R= \(\frac{\Delta V}{\Delta I}\)
अर्थात्
दिए गए आँकड़ों से,
V 1 =3.4V, V2 = 10.2V
तथा संगत धाराएँ I1 = 1.0A
I2 = 3.0A
ΔV=V2 -V1
= 10.2 – 3.4=6.8V

ΔI= I2 -I1
= 3.0 – 1.0=2.0A
∴ प्रतिरोध R = \( \frac{\Delta \mathrm{V}}{\Delta \mathrm{I}}=\frac{6.8 \mathrm{~V}}{2.0 \mathrm{~A}}\) = 3.4Ω

प्रश्न 8.
किसी अज्ञात प्रतिरोध के प्रतिरोधक के सिरों से 12V की बैटरी को संयोजित करने पर परिपथ में 2.5 mA विद्युत धारा प्रवाहित होती है। प्रतिरोधक का प्रतिरोध परिकलित कीजिए।
हल : दिया है : V= 12 V, I = 2.5 mA= 2.5 x 10-3A
प्रतिरोध R = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{I}}=\frac{12 \mathrm{~V}}{2.5 \times 10^{-3} \mathrm{~A}}\)
=4.8 x 103 Ω या R=4.8kΩ

प्रश्न 9.
9v की किसी बैटरी को 0.2Ω, 0.3Ω, 0.4Ω, 0.5Ω तथा 122 के प्रतिरोधकों के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया गया है, 122 के प्रतिरोधक से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होगी ?
हल : दिया है-
R1 = 0.2Ω, R2 = 0.3Ω, R3 = 0.4Ω, R4 = 0.5Ω तथा R5 = 12Ω
श्रेणी संयोजन का कुल प्रतिरोध
R =R1 +R2+R3 + R4 + R5
= 0.2+0.3+0.4+0.5+ 12
R =13.4Ω

∴ परिपथ में प्रवाहित कुल धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}=\frac{9}{13.4}\) = 0.67A
श्रेणी संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोध से होकर इतनी ही धारा प्रवाहित होगी।
∴ 122 के प्रतिरोध में धारा = 0.67A

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

प्रश्न 10.
176 Ω प्रतिरोध के कितने प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में संयोजित करें कि 220 V के विद्युत स्रोत के संयोजन से 5A विद्युत धारा प्रवाहित हो ?
हल : I=5A, V= 220 V
परिपथ की प्रतिरोधकता R=\(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{I}}=\frac{220}{5} \) = 44Ω
प्रत्येक प्रतिरोधक का प्रतिरोध r = 176Ω
यदि n प्रतिरोधक, प्रत्येक की प्रतिरोधकताको पार्श्वक्रम में संयोजित करें तो इच्छित प्रतिरोध होगा R = r/n
या 44 = \(\frac{176}{n}\) or n=\(\frac{176}{44}\) = 4

प्रश्न 11.
यह दर्शाइए कि आप 6Ω प्रतिरोध के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि प्राप्त संयोजन का प्रतिरोध
(i) 9Ω, (ii) 4Ω हो।
हल :
(i) 9Ω का प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए, पहले दो प्रतिरोधकों को पार्यक्रम में और इसके बाद तीसरे प्रतिरोध को श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 2
पार्श्व संयोजन का प्रतिरोध \(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{6}+\frac{1}{6}=\frac{2}{6}\)
या R = \(\frac{6}{2}\) = 3Ω
यह 3 Ω का प्रतिरोध 6Ω के तीसरे प्रतिरोध के साथ श्रेणीक्रम में जुड़कर 3 + 6 = 9Ω का प्रतिरोध हो जाएगा।

(ii) 4Ω का प्रतिरोध पाने के लिए पहले 6-60 के दो प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा और फिर इसके पश्चात् तीसरा प्रतिरोधक इनके पार्श्वक्रम में जोड़ना होगा।
6Ω – 6 Ω के दो प्रतिरोधकों के श्रेणी संयोजन का प्रतिरोध 6 + 6 = 12 Ω होगा।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 3
∴ \(\frac{1}{R}=\frac{1}{6}+\frac{1}{12}=\frac{2+1}{12}=\frac{3}{12}\)
अत: R=\(\frac{12}{3}\) =4Ω

प्रश्न 12.
220 V की विद्युत लाइन पर उपयोग किए जाने वाले बहुत से बल्बों का अनुमतांक 10 w है। यदि 220 V लाइन से अनुमत अधिकतम विद्युत धारा 5A है तो इस लाइन के दो तारों के बीच कितने बल्ब पार्श्वक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं ?
हल : माना n बल्बों को पार्यक्रम में जोड़ा जाता है, तब परिपथ में कुल शक्ति व्यय
P=n x एक बल्ब की शक्ति
=n x 10 W = 10 nw होगी।
दिया है : V= 220 V, I = 5A
तब P= VI से, (10 nw = 220 V x 5A)
n = \(\frac{220 \times 5}{10}\) = 110
अर्थात् 110 बल्बों को पार्यक्रम में जोड़ा जा सकता है।

प्रश्न 13.
किसी विद्युत भट्टी की तप्त प्लेट दो प्रतिरोधक कुंडलियोंA तथा B की बनी हैं जिनमें प्रत्येक का प्रतिरोध 24 0 है तथा इन्हें पृथक्-पृथक्, श्रेणीक्रम में अथवा पार्श्वक्रम में संयोजित करके उपयोग किया जा सकता है। यदि यह भट्टी 220 V विद्युत स्रोत से संयोजित की जाती है तो तीनों प्रकरणों में प्रवाहित विद्युत धाराएँ क्या हैं ?
हल : दिया है : V = 220 V, कुंडलियों का प्रतिरोध
R1 = R2 = 24Ω
प्रथम स्थिति में : जब किसी एक कुण्डली का प्रयोग किया जाता है तो कुल प्रतिरोध
R1 = R2 = 24Ω
∴ ली गई धारा 1= \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}=\frac{220}{24}\) = 9.17A
द्वितीय स्थिति में : जब दोनों कुण्डलियों को श्रेणीक्रम में प्रयोग किया जाता है तब कुल प्रतिरोध
R= R1 + R2 = 48 Ω
∴ ली गई धारा I= \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}=\frac{220}{48}\) = 4.58 A

तृतीय स्थिति में : जब कुण्डलियों को पार्यक्रम में संयोजित किया जाता है, तब
\(\frac{1}{R}=\frac{1}{R_1}+\frac{1}{R_2}=\frac{1}{24}+\frac{1}{24}=\frac{2}{24}\)
R = \(\frac{24}{2}\) = 120
∴ ली गई धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}=\frac{220}{12}\) = 18.33 A

प्रश्न 14.
निम्नलिखित परिपथों में प्रत्येक में 2Ω प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्तियों की तुलना कीजिए :
(i) 6 V की बैटरी से संयोजित 1Ω तथा 2Ω श्रेणीक्रम संयोजन,
(ii) 4 V बैटरी से संयोजित 12Ω तथा 2Ω का पावक्रम संयोजन।
हल :
(i) दिया है, V=6V 1Ω, 2Ω के श्रेणी संयोजन का प्रतिरोध R= 1+2=3Ω
परिपथ में धारा I= \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}=\frac{6}{3}\) = 2A
श्रेणीक्रम में प्रत्येक प्रतिरोध में धारा 2A ही प्रवाहित होगी अत: 2 Ω के प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्ति
P1, =I2 R = (2)2 x 2 =8 W
(ii) ∵ दोनों प्रतिरोध पार्श्वक्रम में जुड़े हैं ; अतः प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों के बीच एक ही विभवान्तर 4 V होगा।
∴ 2Ω के प्रतिरोध द्वारा उपभुक्त शक्ति
P2 = \(\frac{\mathrm{V}^2}{\mathrm{R}}\)
P2 = \(\frac{(4 \mathrm{~V})^2}{2 \Omega}\) = 8W
अतः दोनों दशाओं में 2Ω प्रतिरोधक में समान शक्ति खर्च होगी।

प्रश्न 15.
दो विद्युत लैम्प जिनमें से एक का अनुमतांक 100 W; 220 V तथा दूसरे का 60 W; 220 V है, विद्युत मेन्स के साथ पार्श्वक्रम में संयोजित हैं। यदि विद्युत आपूर्ति की वोल्टता 220 V है तो विद्युत मेन्स से कितनी धारा ली जाती है ?
हल : प्रथम बल्ब के लिए V1, = 220 V, P1, = 100 W
माना इसका प्रतिरोध R1, है ता P = V2/R से, .
R1 = \(\frac{\mathrm{V}_1^2}{\mathrm{P}_1}=\frac{(220 \mathrm{~V})^2}{100 \mathrm{~W}}\) = 484 Ω
दूसरे बल्ब के लिए
V2 = 220V, P2= 60W
∴ इसका प्रतिरोध R2 = \(\frac{\mathrm{V}_2^2}{\mathrm{P}_2} \) = \(\frac{(220 \mathrm{~V})^2}{60}=\frac{2420}{3} \Omega\)
माना कि दोनों को पार्श्वक्रम में जोड़ने पर संयोजन का प्रतिरोध R है, तो \(\frac{1}{R}=\frac{1}{R_1}+\frac{1}{R_2}=\frac{1}{484}+\frac{8}{2420}\)
\(\frac{1}{R}=\frac{5+3}{2420}=\frac{8}{2420}\)
∴ \(\frac{1}{R}=\frac{2420}{8}\) = 302.5 Ω
∴ लाइन वोल्टेज V = 220 v
∴ लाइन से ली गई धारा I= \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}=\frac{220}{302.5}\) = 0.73A

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

प्रश्न 16.
किसमें अधिक विद्युत ऊर्जा उपभुक्त होती है : 250 w का टी.वी. सेट जो एक घण्टे तक चलाया जाता है अथवा 120 W का विद्युत हीटर जो 10 मिनट के लिए चलाया जाता है ?
हल : T.V. सेट के लिए P1, = 250 W
t1, = 1h= 60 x 60s
खर्च की गई ऊर्जा = P1 t1 = 250 x 60 x 60
=9x 105 जूल
तथा विद्युत हीटर के लिए P2 = 120 W, t2, = 10 min =600s
∴ खर्च की गई ऊर्जा = P2 x t2 = 120 x 600=7.2 x 104 जूल
अतः T.V. सेट द्वारा खर्च की गई ऊर्जा अधिक है।

प्रश्न 17.
8Ω प्रतिरोध का कोई विद्युत हीटर विद्युत मेन्स से 2 घण्टे तक 15A विद्युत धारा लेता है। हीटर में उत्पन्न ऊष्मा की दर परिकलित कीजिए।
हल : दिया है R=8Ω, I = 15A .
विद्युत हीटर में ऊष्मा उत्पन्न होने की दर या विद्युत हीटर की शक्ति
P=I2R
=(15)2 x 8= 1800W .

प्रश्न 18.
निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए
(a) विद्युत लैम्पों के तन्तुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र टंगस्टन का ही उपयोग क्यों किया जाता है ?
(b) विद्युत तापन युक्तियों जैसे ब्रेड-टोस्टर तथा विद्युत इस्तरी के चालक शुद्ध धातुओं के स्थान पर मिश्रातुओं के क्यों बनाए जाते हैं ?
(c) घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है ?
(d) किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल में परिवर्तन के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता
(e) विद्युत संचारण के लिए प्रायः कॉपर तथा ऐलुमिनियम के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर-(a) विद्युत लैम्पों के तन्तुओं में प्रायः एकमात्र टंगस्टन का ही उपयोग किया जाता है, क्योंकि टंगस्टन के बहत पतले तार बनाए जा सकते हैं तथा टंगस्टन का गलनांक 3400°C होता है जो अन्य धातुओं की तुलना में बहुत अधिक होता है।
(b) ब्रेड-टोस्टर, विद्युत इस्तरी आदि के चालक मिश्रधातुओं के इसलिए बनाए जाते हैं, क्योंकि मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता, शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक होती है तथा ताप वृद्धि के साथ इनकी प्रतिरोधकता में नगण्य परिवर्तन होता है। इसके अलावा मिश्रधातुओं का ऑक्सीकरण भी कम होता है। फलतः मिश्रधातुओं से बने चालकों की उम्र शुद्ध धात्विक चालकों की तुलना में अधिक होती है।
(c) श्रेणीक्रम में प्रतिरोध बढ़ने पर अलग-अलग प्रतिरोधकों के सिरों के बीच उपलब्ध विभवान्तर घटता जाता है। अतः परिपथ में धारा भी घटती जाती है। यदि घरों में प्रकाश करने के लिए श्रेणी सम्बद्ध व्यवस्था प्रयोग की जाए तो परिपथ में जितने अधिक संयन्त्र (बल्ब), जुड़े होंगे उनका प्रकाश उतना ही कम हो जाएगा। इसके अतिरिक्त श्रेणीक्रम में सभी संयन्त्र एक साथ एक ही स्विच से कार्य करेंगे व एक साथ एक ही स्विच से बंद होंगे एवं यदि कोई एक भी संयन्त्र खराब हो जाएगा तो शेष सभी उपकरण कार्य करना बन्द कर देंगे। इस कारण से घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग नहीं किया जाता ।
(d) तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है, अर्थात् RA
(e) कॉपर तथा एलुमिनियम के तारों का प्रतिरोध न्यूनतम है। इस कारण से इनका प्रयोग विद्युत संचारण के लिए प्रयुक्त तारों में किया जाता है। ये दोनों धातुएँ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं एवं सस्ती भी हैं।

HBSE 10th Class Science विद्युत InText Questions and Answers

(पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 222)

प्रश्न 1.
विद्युत परिपथ का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
किसी विद्युत धारा के सतत तथा बन्द पथ को विद्युत परिपथ कहते हैं।

प्रश्न 2.
विद्युत धारा के मात्रक की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
विद्युत धारा का S.I. मात्रक ऐम्पियर है। इसे A से प्रदर्शित करते हैं।
सूत्र I = \(\frac{\mathrm{Q}}{t}\) से यदि Q = 1C, 1 = 1s तब I = 1A
अतः यदि आवेश 1 कूलॉम/सेकण्ड की दर से प्रवाहित होता है तब उस चालक में प्रवाहित होने वाली धारा 1A होगी।

प्रश्न 3.
एक कूलॉम आवेश की रचना करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या परिकलित कीजिए।
हल : दिया है
Q = 1C
∵ सूत्र Q = n e से,
n = \(\frac{\mathrm{Q}}{e}=\frac{1}{1.6 \times 10^{-19}}\)
= \(\frac{10 \times 10^{18}}{1.6}\) = 6.25 × 1018
अतः 1 कूलॉम आवेश में 6.25 x 1018 इलेक्ट्रॉन होंगे।

(पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 224)

प्रश्न 1.
उस युक्ति का नाम लिखिए जो किसी चालक के सिरों पर विभवान्तर बनाए रखने में सहायता करती है।
उत्तर-
विद्युत सेल।

प्रश्न 2.
यह कहने का क्या तात्पर्य है कि दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर 1V है?
उत्तर-
इस कथन का अर्थ है कि 1C के आवेश को एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ले जाने में 1J कार्य करना होगा।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

प्रश्न 3.
6 V बैटरी से गुजरने वाले हर एक कूलॉम आवेश को कितनी ऊर्जा दी जाती है ?
उत्तर-
बैटरी का विभवान्तर 6V अर्थात 6J/C है, अतः । हर एक कूलॉम आवेश को 6J ऊर्जा दी जाएगी।

(पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 232)

प्रश्न 1.
किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है ?
उत्तर-
किसी चालक का प्रतिरोध R उसकी लम्बाई 1, उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल A तथा उसके पदार्थ पर निम्न प्रकार से निर्भर करता है
R ∝ l, R ∝ \(\frac{1}{\mathrm{~A}}\) अत: R= ρ\(\frac{1}{\mathrm{~A}}\)
जहाँ p चालक के पदार्थ की प्रतिरोधकता है।

प्रश्न 2.
समान पदार्थ के दो तारों में यदि एक पतला तथा दूसरा मोटा हो तो इनमें से किसमें विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होगी जबकि उन्हें समान विद्युत स्रोत से संयोजित किया जाता है ? क्यों ?
उत्तर-
∵ तार का प्रतिरोध RC अतः मोटे तार का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल अधिक है अतः इसका प्रतिरोध कम होगा, इसलिए मोटे तार से धारा आसानी से प्रवाहित हो जाएगी।

प्रश्न 3.
मान लीजिए किसी वैद्युत अवयव के दो सिरों के बीच विभवान्तर को उसके पूर्व के विभवान्तर की तुलना में घटाकर आधा कर देने पर भी उसका प्रतिरोध नियत रहता है। तब उस अवयव से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा में क्या परिवर्तन होगा ?
उत्तर-
धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\) जब R नियत है तब I∝ V अर्थात् विभवान्तर का मान आधा कर देने पर धारा भी आधी हो जाएगी।

प्रश्न 4.
विद्युत टोस्टरों तथा विद्युत इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रातु के क्यों बनाए जाते हैं ?
उत्तर-
मिश्रातुओं की प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक होती है तथा तापवृद्धि के साथ इनकी प्रतिरोधकता में नगण्य परिवर्तन होता है, इसके अतिरिक्त मिश्रातुओं का ऑक्सीकरण भी कम होता है, इस कारण से टोस्टर, इस्त्री आदि के चालक मिश्रातुओं के बनाए जाते हैं।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तालिका (पृ. 298) में दिए गए आँकड़ों के आधार पर दीजिए-
(a) आयरन (Fe) तथा मर्करी (Hg) में कौन अच्छा वैद्युत चालक है ?
(b) कौन-सा पदार्थ सर्वश्रेष्ठ चालक है?
उत्तर-
(a) आयरन की प्रतिरोधकता 10 x 10-8 Ω m
तथा मर्करी (Hg) की प्रतिरोधकता 94 x 10-8Ω m है। अतः आयरन (Fe), मर्करी (Hg) की अपेक्षा विद्युत का अच्छा चालक है।
(b) सारणी के आधार पर सिल्वर (Ag) की प्रतिरोधकता 1.6 x 10-8Ω m अर्थात् सबसे कम है ; अतः यह सर्वश्रेष्ठ चालक है।

(पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 237)

प्रश्न 1.
किसी विद्युत परिपथ का व्यवस्था आरेख खींचिए जिसमें 2 V के तीन सेलों की बैटरी, एक 5Ω प्रतिरोधक, एक 8Ω प्रतिरोधक, एक 12Ω प्रतिरोधक तथा प्लग कुंजी सभी श्रेणीक्रम में संयोजित हों।
हल:
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 4

प्रश्न 2.
प्रश्न 1 का परिपथ दुबारा खींचिए तथा इसमें प्रतिरोधकों से प्रवाहित विद्युत धारा को मापने के लिए ऐमीटर तथा 12Ω के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवान्तर मापने के लिए वोल्टमीटर लगाइए। ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के क्या पाठ्यांक होंगे?
हल:
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 5
परिपथ में जुड़े 5Ω , 8Ω , व 12Ω का तुल्य प्रतिरोध
R=R1,+R2,+R3,
=5+8+ 12 = 25Ω
∵ बैटरी में तीन सेल श्रेणीक्रम में जुड़ी हैं अतः बैटरी का विभवान्तर V=2 + 2 + 2 = 6V
∵ परिपथ में धारा I = \(\frac{V}{R}=\frac{6}{25}\) = 0.24 A
अतः अमीटर का पाठ्यांक 0.24 A होगा।
12Ω के सिरों पर जुड़े वोल्टमीटर का पाठ्यांक
V3 =IR3, = 0.24 x 12
V3= 2.88 V
अत: वोल्टमीटर का पाठ्यांक 2.88 V होगा।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

(पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 240)

प्रश्न 1.
जब (a) 1Ω तथा 106 Ω
(b) 1Ω , 103 तथा 106Ω के प्रतिरोध पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं तो इनके तुल्य प्रतिरोध के सम्बन्ध में आप क्या निर्णय करेंगे?
हल :
(a) दिया है R1, = 12,R2, = 106 = 1000000Ω
समान्तर संयोजन के सूत्र \(\frac{1}{R}=\frac{1}{R_1}+\frac{1}{R_2}\) स
\(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{1}+\frac{1}{1000000}\)
= \(\frac{1000000+1}{1000000}=\frac{1000001}{1000000}\)
अतः तुल्य प्रतिरोध R = \(\frac{1000000}{1000001} \) = 0.9999 Ω
अतः तुल्य प्रतिरोध, संयोजन में जुड़े अल्पतम प्रतिरोध से भी कम प्राप्त होता है।

(b) दिया है, R1 = 1Ω, R2, = 103Ω = 1000Ω
R3= 1000000Ω
समान्तर संयोजन के सूत्र
\(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{\mathrm{R}_1}+\frac{1}{\mathrm{R}_2}+\frac{1}{\mathrm{R}_3}\)
\(\frac{1}{R}=\frac{1}{1}+\frac{1}{1000}+\frac{1}{1000000}\)
\(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{1}+\frac{1}{1000}+\frac{1}{1000000}\)
\(\frac{1}{R}=\frac{1000000+1000+1}{1000000}\)
\(\frac{1}{R}=\frac{1001001}{1000000}\)
∴ तुल्य प्रतिरोध R = \(\frac{1000000}{1001001}\) = 0.999Ω
अतः तुल्य प्रतिरोध, संयोजन में जुड़े अल्पतम प्रतिरोध से भी कम होता है।

प्रश्न 2.
100Ω का एक विद्युत लैम्प, 50Ω का एक विद्युत टोस्टर तथा 500 Ω का एक जल फिल्टर 200 V के विद्युत स्रोत से पार्श्वक्रम में संयोजित हैं। उस विद्युत इस्तरी का प्रतिरोध क्या है जिसे यदि समान स्रोत के साथ संयोजित कर दें तो वह उतनी ही विद्युत धारा लेती है जितनी तीनों युक्तियाँ लेती हैं। यह भी ज्ञात कीजिए कि इस विद्युत इस्तरी से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होती है ?
हल : विद्युत इस्तरी, तीनों उपकरणों के बराबर धारा लेती है; अत इस्तरी का प्रतिरोध, उपकरणों के समान्तर संयोजन के तुल्य प्रतिरोध के बराबर होगा।

यहाँ R1, = 100 Ω, R2,= 50 Ω तथा R3, =500 Ω
माना कि इस्तरी का प्रतिरोध R है तो समान्तर संयोजन के सूत्र से,
\(\frac{1}{R}=\frac{1}{R_1}+\frac{1}{R_2}+\frac{1}{R_3}=\frac{1}{100}+\frac{1}{50}+\frac{1}{500}\)
= \(\frac{5+10+1}{500}=\frac{16}{500}\)
∴ विद्युत इस्तरी का प्रतिरोध R= \(\frac{500}{16}\) = 31.25 Ω
तथा विद्युत इस्तरी द्वारा ली गई धारा
I = \(\frac{V}{R}=\frac{220}{(500 / 16)}\) = 7.04 A

प्रश्न 3.
श्रेणीक्रम में संयोजित करने के स्थान पर वैद्युत युक्तियों को पार्श्वक्रम में संयोजित करने के क्या लाभ हैं ?
उत्तर-
उपकरणों को पार्यक्रम में जोड़ने से निम्नलिखित लाभ होते हैं
(i) पार्श्वक्रम में जोड़ने पर किसी भी चालक में स्विच का उपयोग करके स्वतन्त्रतापूर्वक विद्युतधारा भेजी जा सकती
(ii) उपकरणों को पार्यक्रम में जोड़ने पर सभी उपकरणों को समान विभवान्तर प्राप्त हो जाता है।

प्रश्न 4.
2Ω,3Ω तथा 6Ω के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि संयोजन का कुल प्रतिरोध (a) 4Ω, (b) 1Ω हो ?
हल :
(a) यहाँ R1 = 2Ω,R2,=3Ω तथा R3, =6Ω,4Ω तुल्य प्रतिरोध प्राप्ति हेतु 3Ω व 6Ω के प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में जोड़कर उन्हें श्रेणीक्रम में चित्रानुसार जोड़ना होगा
अतः3Ω व 6Ω के पार्श्व संयोजन का प्रतिरोध यदि R’ हो, तब
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 6
\(\frac{1}{R^{\prime}}=\frac{1}{3}+\frac{1}{6}=\frac{2+1}{6}=\frac{3}{6}\)
∴ R’ = \(\frac{6}{3}\) = 2Ω
यह R’ = 2Ω का प्रतिरोध 20 के साथ श्रेणीक्रम में जुड़ा है अतः तुल्य प्रतिरोध R= R1, + R’ = 2 + 2 = 4Ω

(b) 1 Ω तुल्य प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए तीनों प्रतिरोधकों को पार्यक्रम में जोड़ना होगा।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 7
चित्र-तुल्य प्रतिरोध प्राप्त करने हेतु पार्श्व क्रम संयोजन
∴ \(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{\mathrm{R}_1}+\frac{1}{\mathrm{R}_2}+\frac{1}{\mathrm{R}_3}\)
\(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{2}+\frac{1}{3}+\frac{1}{6}\)
\(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{3+2+1}{6}=\frac{6}{6}\)
अतः R= 1Ω

प्रश्न 5.
4Ω,8Ω, 12 Ω तथा 24 Ω प्रतिरोध की चार कुंडलियों को किस प्रकार संयोजित करें कि संयोजन से (a) अधिकतम, (b) निम्नतम प्रतिरोध प्राप्त हो सके ?
उत्तर-
(a) यदि इन चारों प्रतिरोधों को श्रेणीक्रम में रखा जाए तो अधिकतम प्रतिरोध प्राप्त होगा
Rs=4Ω+8Ω+ 12Ω + 24Ω=48Ω
(b) न्यूनतम प्रतिरोध पाने के लिए उपर्युक्त चारों प्रतिरोधों को पार्यक्रम में रखा जाएगा।
\(\frac{1}{R_P}=\frac{1}{4}+\frac{1}{8}+\frac{1}{12}+\frac{1}{24}=\frac{6+3+2+1}{24}=\frac{12}{24}\)
Rp = \(\frac{24}{12}\) = 2 Ω

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 242) .

प्रश्न 1.
किसी विद्युत हीटर की डोरी क्यों उत्तप्त नहीं होती, जबकि उसका तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है ?
उत्तर-
विद्युत हीटर की कुण्डली मिश्रधातु नाइक्रोम की बनी होती है। नाइक्रोम की प्रतिरोधकता ताँबे से बहुत अधिक होने के कारण कुण्डली का प्रतिरोध डोरी में प्रयुक्त ताँबे के प्रतिरोध से बहुत अधिक होता है।
विद्युत हीटर में व्यय शक्ति P = I2 R के अनुसार समान धारा I के लिए P ∝ R
अतः विद्युत हीटर कुण्डली में डोरी की तुलना में अधिक शक्ति व्यय होती है जिससे उसकी कुण्डली उत्तप्त हो जाती है जबकि डोरी उत्तप्त नहीं होती है।

प्रश्न 2.
एक घण्टे में 50 w विभवान्तर से 96000 कूलॉम आवेश को स्थानान्तरित करने में उत्पन्न ऊष्मा का परिकलन कीजिए।
हल : दिया है; V = 50 W, स्थानान्तरित आवेश
Q=96000 कूलॉम
आवेश के स्थानान्तरण में खर्च की गई ऊर्जा
W =OV
=96000×50=4800000J
=4.8x 106J

प्रश्न 3.
202 प्रतिरोध की कोई विद्युत इस्तरी 5 A विद्युत धारा लेती है। 30s में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए।
हल : दिया है R = 20Ω, I = 5A, t=30s
∴उत्पन्न ऊष्मा (H) = I2Rt
= (5)2 x 20 x 30 = 15000 जूल
= 1.5 x 104 जूल

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 245)

प्रश्न 1.
विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण कैसे किया जाता है ?
उत्तर-
विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण विद्युत शक्ति द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 2.
`कोई विद्युत मोटर 220 V के विद्युत स्रोत से 5.0 A विद्युत धारा लेता है। मोटर की शक्ति निर्धारित कीजिए तथा 2 घण्टे में मोटर द्वारा उपभुक्त ऊर्जा परिकलित कीजिए।
हल : दिया है : V = 220 V, I = 5A, समय t=2 घंटे
∴ मोटर की शक्ति P= VI= 220 x 5 = 1100 W
अत: 2 घंटे में मोटर द्वारा व्यय ऊर्जा W = Pt
∴ W = 1100 Wx 2 h = 2200 Wh
W = 2.2 kWh

HBSE 10th Class Science विद्युत InText Activity Questions and Answers

क्रियाकलाप 12.1 (पा. पु. पृ. सं. 226)

प्रश्न 1.
विभवान्तर V तथ विद्युत धारा I के प्रत्येक युगल के लिए अनुपात V/I परिकलित कीजिए।
उत्तर –
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 8

प्रश्न 2.
V तथा I के बीच ग्राफ खींचिए तथा इस ग्राफ की प्रकृति का प्रेक्षण कीजिए।
उत्तर-
इस क्रियाकलाप में हम यह पाते हैं कि प्रत्येक प्रकरण में VII का मान लगभग एक समान प्राप्त होता है। इस प्रकार V-I ग्राफ मूल बिन्दु से गुजरने वाली एक सरल रेखा होती है। 1827 में जर्मन वैज्ञानिक जार्ज साइमन ओम ने यह बताया कि “किसी धातु के तार में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा उस तार के सिरों के बीच विभवान्तर के अनुक्रमानुपाती होती है, परन्तु तार का ताप समान रहना चाहिए” इसे ही ओम का नियम कहते हैं । ग्राफ चित्र में प्रदर्शित है। ।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 9
चित्र निक्रोम तार के लिए V-I ग्राफ। सरल रेखीय ग्राफ यह दर्शाता है कि जैसे-जैसे तार में प्रवाहित विद्युत धारा बढ़ती है विभवान्तर रैखिकतः बढ़ता है। यही ओम का नियम है।

क्रियाकलाप 12.2. (पा. पु. पृ.सं. 228)

क्रिया विधि (Procedure)-
1. एक निक्रोम तार, एक टॉर्च बल्ब, एक 10 W का बल्ब तथा एक ऐमीटर (0-5A परिसर), एक प्लग कुंजी तथा कुछ संयोजी तार लेकर चार शुष्क सेलों (प्रत्येक 1.5 V का) को श्रेणीक्रम में संयोजित करके परिपथ में XY एक अन्तराल छोड़ देते हैं।
2. अन्तराल XY में निक्रोम के तार को जोड़कर परिपथ पूरा करके कुंजी लगाकर ऐमीटर का पाठ्यांक नोट करके प्लग कुंजी को बाहर निकाल लेते हैं।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 10

3. अब निक्रोम तार के स्थान पर XY में टार्च बल्ब को परिपथ में जोड़कर ऐमीटर का पाठ्यांक लेकर बल्ब में प्रवाहित विद्युत धारा मापते हैं तथा XY में विभिन्न अवयवों को जोड़ने पर ऐमीटर के पाठ्यांक के भिन्न-भिन्न होने का अवलोकन करते हैं।

प्रेक्षण (Observation)-इस क्रियाकलाप से यह पता चलता है कि किसी चालक से होकर इलेक्ट्रानों की गति उसके प्रतिरोध द्वारा मन्द हो जाती है। एक ही आकार के चालकों में जिसमें प्रतिरोध कम होता है वह अच्छा चालक होता है। पर्याप्त आकार के चालकों में जो पर्याप्त प्रतिरोध आरोपित करता है, प्रतिरोधक कहलाता है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

क्रियाकलाप 12.3. (पा. पु. पृ. सं. 229)

प्रश्न 1.
क्या विद्युत धारा चालक की लम्बाई पर निर्भर करती है?
उत्तर-
हाँ, चालक में प्रवाहित विद्युत धारा चालक की लंबाई के व्युक्रमानुपाती होती है। क्योंकि लंबाई बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ जाता है व धारा की मात्रा कम हो जाती है।

प्रश्न 2.
क्या विद्युत धारा उपयोग किए जान वाले तार के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर निर्भर करती है?
उत्तर-
हाँ, विद्युत धारा चालक के तार के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के समानुपाती होती है।
I ∝ \(\frac{1}{\mathrm{~L}}\)
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल बढ़ने पर प्रतिरोध कम हो जाता है अत: धारा का मान बढ़ जाता है।

क्रियाकलाप 12.4. (पा. पु. पृ. सं. 234)

प्रश्न-क्या आप एमीटर के द्वारा विद्युत धारा के मान में कोई अंतर पाते हैं?
उत्तर-
ऐमीटर के पाठ्यांक में कोई भी परिवर्तन नहीं होता है अतः प्रत्येक स्थिति में धारा का मान समान रहता है। अथात् श्रणी क्रम में जुड़े सभा प्रतिरोधका से समान धारा प्रवाहित होती है।

क्रियाकलाप 12.5. (पा. पु. पृ. सं. 234)

प्रश्न-श्रेणी में x वY के बीच वोल्टमीटर V1,V2, V3, लगाने पर कुल विभवान्तर क्या होगा?
उत्तर-
विभवान्तर V, अन्य विभवान्तरों V1,V2, व V3, के योग के बराबर प्राप्त होता है।
V= V1+V2 + V3,

क्रियाकलाप 12.6. (पा. पु. पृ. सं. 237)
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 11

प्रेक्षण (Observation)-प्रेक्षण करने पर यह पाया गया कि कुल विद्युत धारा 1, संयोजन की प्रत्येक शाखा में प्रवाहित होने वाली पृथक् धाराओं के योग के बराबर है।
∴ I= I1+I2+I3

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HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार Textbook Exercise Questions, and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार

HBSE 10th Class Science मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
मानव नेत्र अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी को समायोजित करके विभिन्न दूरियों पर रखी वस्तुओं को फोकसित कर सकता है। ऐसा हो पाने का कारण है
(a) जरा-दूरदृष्टिता
(b) समंजन
(c) निकट-दृष्टि
(d) दीर्घ-दृष्टि।
उत्तर-
(b) समंजन।

प्रश्न. 2.
मानव नेत्र जिस भाग पर किसी वस्तु का प्रतिबिम्ब बनाते हैं, वह है-
(a) कॉर्निया
(b) परितारिका
(c) पुतली
(d) दृष्टि पटल।
उत्तर-
(d) दृष्टि पटल।

प्रश्न 3.
सामान्य दृष्टि के वयस्क के लिए सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी होती है, लगभग –
(a) 25 m
(b)2.5 cm
(c)25 cm
(d)2.5 m.
उत्तर-
(c)25 cm.

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार

प्रश्न 4.
अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी में परिवर्तन किया जाता है
(a) पुतली द्वारा
(b) दृष्टि पटल द्वारा
(c) पक्ष्माभी द्वारा
(d) पारितारिका द्वारा।
उत्तर-
(c) पक्ष्माभी द्वारा।

प्रश्न 5.
किसी व्यक्ति को अपनी दूर की दृष्टि को संशोधित करने के लिए -5.5 डाइऑप्टर क्षमता के लेंस की आवश्यकता है। अपनी निकट की दृष्टि को संशोधित करने के लिए उसे +1.5 डाइऑप्टर क्षमता के लेंस की आवश्यकता है। संशोधित करने के लिए आवश्यक लेंस की फोकस दूरी क्या होगी-(i) दूर की दृष्टि के लिए, (ii) निकट की दृष्टि के लिए।
हल :
(i) दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देखने के लिए आवश्यक लेंस की क्षमता
∴ सूत्र P = \(\frac{1}{f \text { (मी० में })} \text { से }\)
f = \(\frac{1}{p}\)m
f = \(\frac{1}{-5.5}=-\frac{100}{5.5} \mathrm{~cm}=\frac{200}{11}\) cm

(ii) दिया है-निकट की वस्तुओं को स्पष्ट देखने के लिए अवश्यक लेंस की क्षमता P = +1.5 D
∴ f = \(\frac{100}{\mathrm{P}} \mathrm{cm} \text { में }=\frac{100}{1.5}=\frac{200}{3} \mathrm{~cm}\)

प्रश्न 6.
किसी निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति का दूर बिन्दु नेत्र के सामने 80 cm दूरी पर है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लेंस की प्रकृति तथा क्षमता क्या होगी?
हल: व्यक्ति को ऐसे लेंस की आवश्यकता है जो कि अनन्त पर रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब आँख के सामने 80 cm दूरी पर बना सके।
अतः u= – 20, v=-80 cm,f = ?
सूत्र \(\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\) \(\text { से } \frac{1}{-80}-\frac{1}{-\infty}=\frac{1}{f} \)
अतः f=80 cm = -0.8m
∴ लेंस की क्षमता P = \(\frac{1}{f}=\frac{1}{-0.8} \mathrm{D}\) =-1.25 D
अतः आवश्यक लेंस की प्रकृति अपसारी तथा क्षमता -1.25 D है।

प्रश्न 7.
चित्र बनाकर दर्शाइए कि दीर्घ-दृष्टि दोष कैसे संशोधित किया जाता है? एक दीर्घ-दृष्टि दोष युक्त नेत्र का निकट बिन्दु 1 m है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लेंस की क्षमता क्या होगी? यह मान लीजिए कि सामान्य नेत्र का निकट बिन्दु 25cm है।
उत्तर-
दूर दृष्टि दोष में व्यक्ति का निकट बिन्दु दूर खिसक जाता है तथा मनुष्य समीप की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता है। इस दोष को दूर करने के लिए उत्तल लेंस का प्रयोग किया जाता है। चित्र आरेख इस प्रकार है-
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 1
मनुष्य के नेत्र का निकट बिन्दु 25 cm से दूर खिसक कर 100 cm दूर पहुँच गया है।
अतः u=-25 cm,v=-100 cm
∴ लेंस के सूत्र से, \(\frac{1}{f}=\frac{1}{v}-\frac{1}{u}\)
= \(\frac{1}{-100}-\frac{1}{-25}=\frac{1}{25}-\frac{1}{100}\)
= \(\frac{1}{f}=\frac{4-1}{100}=\frac{3}{100}\)
∴ f= \(\frac{100}{3} \mathrm{~cm} \text { या } \frac{1}{3} \mathrm{~m} \)
∴ आवश्यक लेंस की क्षमता P = \(\frac{1}{f(\mathrm{~m} \text { में })}=\frac{1}{1 / 3} \)
P= + 3D.

प्रश्न 8.
सामान्य नेत्र 25 cm से निकट रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट क्यों नहीं देख पाते ?
उत्तर-
25 cm की दूरी पर स्थित वस्तु का प्रतिबिम्ब बनाने के लिए नेत्र द्वारा अपनी सम्पूर्ण समंजन क्षमता का प्रयोग कर लिया जाता है तथा वस्तु स्पष्ट दिखायी पड़ने लगती है। यदि वस्तु को 25 cm से कम दूरी पर रख दिया जाए तो नेत्र लेंस वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना पर नहीं बना पाता तथा वस्तु स्पष्ट दिखाई नहीं देती है।

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प्रश्न 9.
जब हम नेत्र से किसी वस्तु की दूरी को बढ़ा देते हैं तो नेत्र में प्रतिबिम्ब दूरी का क्या होता है?
उत्तर-
नेत्र से वस्तु की दूरी बढ़ा देने पर नेत्र के समंजन गुण के कारण रेटिना पर ही प्रतिबिम्ब बनता है अतः नेत्र में बने प्रतिबिम्ब की दूरी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

प्रश्न 10.
तारे क्यों टिमटिमाते हैं?
उत्तर-
तारों से आने वाला प्रकाश हमारी आँख तक पहुँचने से पहले वायुमण्डल से होकर गुजरता है, वायुमण्डल की विभिन्न परतों का घनत्व अनियमित रूप से परिवर्तित होता रहता है, इस कारण से उनका अपवर्तनांक भी परिवर्तित होता रहता है। अपवर्तनांक परिवर्तन के कारण तारे से आने वाली किरणें लगातार अपना मार्ग बदलती रहती हैं तथा हमारी आँख तक पहुँचने वाले प्रकाश की मात्रा भी बदलती रहती है। इस कारण से तारे टिमटिमाते दिखाई पड़ते हैं।

प्रश्न 11.
व्याख्या कीजिए कि ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते?
उत्तर-
तारों की अपेक्षा ग्रह हमारी पृथ्वी के बहुत निकट हैं, उन्हें विस्तृत स्रोत की भाँति माना जा सकता है। यदि ग्रह को बिन्दु आकार के अनेक प्रकाश स्रोतों का संग्रह मान लें तो उन सभी से हमारे नेत्रों में प्रवेश करने वाली प्रकाश की मात्रा में कुल परिवर्तन का औसत मान शून्य होगा, यही कारण है कि वे टिमटिमाते प्रतीत नहीं होते।

प्रश्न 12.
सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ क्यों प्रतीत होता है?
उत्तर-
दिन के समय प्रात:काल सूर्य क्षितिज के निकट होता है, सूर्य की किरणों को हम तक पहुँचने के लिए वातावरणीय मोटी परतों से गुजर कर पहुँचना पड़ता है। नीले
और कम तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का अधिकांश भाग वहाँ उपस्थित कणों के द्वारा प्रकीर्णित कर दिया जाता है। हमारी आँखों तक पहुँचने वाला प्रकाश अधिक तरंगदैर्ध्य का होता है। इसलिए सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य रक्ताभ प्रतीत होता है।

प्रश्न 13.
किसी अंतरिक्ष यात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला क्यों प्रतीत होता है ?
उत्तर-
अंतरिक्ष यात्री आकाश में उस ऊँचाई पर होते हैं जहाँ वह वायुमण्डल से बाहर हो जाते हैं तथा वहाँ प्रकाश का प्रकीर्णन होकर प्रकाश नहीं पहुँच पाता है। प्रकीर्णन की क्रिया न होने के कारण अंतरिक्ष यात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला प्रतीत होता है।

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(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 211)

प्रश्न 1.
नेत्र की समंजन क्षमता से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
नेत्र के लेंस की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित कर लेता है, समंजन क्षमता कहलाती है।

प्रश्न 2.
निकट दृष्टि दोष का कोई व्यक्ति 1.2 m से अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख सकता। इस दोष को दूर करने के लिए प्रयुक्त लेंस किस प्रकार का होना चाहिए ?
उत्तर-
अवतल लेंस।

प्रश्न 3.
मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिए दूर बिन्दु तथा निकट बिन्दु नेत्र से कितनी दूरी पर होते हैं ?
उत्तर-
सामान्य दृष्टि के लिए दूर बिन्दु अनन्त पर तथा निकट बिन्दु नेत्र से 25 cm की दूरी पर होता है।

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प्रश्न 4.
अन्तिम पंक्ति में बैठे किसी विद्यार्थी को श्यामपट पढ़ने में कठिनाई होती है। यह विद्यार्थी किस दृष्टि दोष से पीड़ित है ? इसे किस प्रकार संशोधित किया जा सकता है?
उत्तर-
छात्र श्यामपट को दूर से नही पढ़ पाता है, परन्तु निकट से पढ़ लेता है, अतः छात्र की आँखों में निकट दृष्टि दोष है। इस दोष को दूर करने के लिए अपसारी लेन्स का प्रयोग करना पड़ेगा।

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क्रियाकलाप 11.1 (पा. पु. पृ. सं. 213)

प्रश्न 1.
आपतित किरण, अपवर्तित किरण, निर्गत किरण तथा विचलन कोण को दर्शाने के लिए एक चित्र बनाइए।
उत्तर-
PE-आपतित किरण
Li- आपतन कोण
EF-अपवर्तित किरण
Lr- अपवर्तन कोण
FS-निर्गत किरण
Le – निर्गत कोण
LA-प्रिज्म कोण.
LD- विचलन कोण
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प्रश्न 2.
एक प्रकाश की किरण कितनी बार अपवर्तित होती है और प्रत्येक बार अपवर्तित किरण की दिशा क्या होगी?
उत्तर-
जब प्रकाश की किरण प्रिज्म से गुजरती हैं तो यह दो बार अपवर्तित होती हैं। एक बार तब, जब यह हवा से काँच में प्रवेश करती है तथा दूसरी बार तब, जब यह काँच से हवा में प्रवेश करती है। प्रत्येक बार यह प्रिज्म के आधार की तरफ मुड़ती है।

प्रश्न 3.
विचलन कोण क्या है?
उत्तर-
आपतित किरण की दिशा तथा निर्गत किरण की दिशा के बीच बनने वाले कोण को विचलन कोण कहते हैं।

क्रियाकलाप 11.2 (पा. पु. पृ. सं. 214)

प्रश्न-आप क्या देखते हैं? आप वर्णों की एक आकर्षक पट्टी देखेंगे। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर-
ऐसा प्रकाश के विक्षेपण के कारण होता है। काँच में प्रकाश के अलग-अलग अवयवी वर्गों की चाल अलग-अलग होने से ये अलग-अलग कोणों पर विक्षेपित हो जाते हैं।

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क्रियाकलाप 11.3 (पा. पु. पृ. सं. 218)

प्रश्न-टैंक में लगभग 2 L स्वच्छ जल लेकर 200 g सोडियम थायोसल्फेट (हाइपो) घोलिए। जल में लगभग 1 से 2 mL सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल डालिए। आप क्या देखते हैं?
उत्तर-
2-3 मिनट के बाद सल्फर के कण बनते हैं तथा काँच के टैंक के तीनों पाश्वॉ (side) से नीला प्रकाश दिखाई देता है। इसका कारण सल्फर के सूक्ष्म कणों द्वारा कम तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का प्रकीर्णन होना है। काँच के टैंक के चौथे पार्श्व से, वृत्ताकार छिद्र की ओर से पारगत प्रकाश का रंग पहले नारंगी लाल तथा बाद में किरमिजी लाल दिखाई देता है।

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