Class 8

HBSE 8th Class Hindi रचना अनुच्छेद लेखन

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Rachana Anuchchhed-Lekhan अनुच्छेद लेखन Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Rachana अनुच्छेद लेखन

किसी एक वाक्य, सूक्ति या काव्य-पक्ति के विषय में सात-आठ पंक्तियाँ लिखना ‘अनुच्छेद-लेखन’ कहलाता है। एक अनुच्छेद में एक विचार या भाव का ही विस्तार किया जाता है। सामान्यत: यह 70-80 शब्दों का होता है। अनुच्छेद का रोचक होना आवश्यक है।
उदाहरण के लिए कुछ अनुच्छेद दिए जा रहे हैं :

1. प्रातःकाल का दृश्य

प्रात:काल का दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है। इस समय आकाश के रूप में क्षण-क्षण परिवर्तन होता है। ऐसा लगता है जैसे कोई जादू-सा हो रहा हो। पक्षी अपने घोसलों से बाहर निकलकर चहचहाने लगते हैं। ठंडी हवा बहने लगती है। इससे हमारा मन और तन आनंदित हो उठते हैं। हरी घास पर पड़ी ओस की बूंदै मोती-सी चमकती प्रतीत होती हैं। बाग-बगीचों में रंग-बिरंगे फूल मुस्करा रहे होते हैं। पार्को में लोग सैर और व्यायाम करते दिखाई देते हैं। वास्तव में प्रात:काल का दृश्य मन में आशा और उमंग का संचार कर देता है।

2. पुस्तकालय

पुस्तकालय में पुस्तकों का संग्रह होता है। सभी विद्यालयों में पुस्तकालय तो होते ही हैं, इसके साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों पर लोग पुस्तकालय खोलते हैं। पुस्तकालय ज्ञान के केन्द्र हैं। इनमें मिलने वाली पुस्तकों को पढ़कर जहां हमारा ज्ञान बढ़ता है, वहीं हमारा मनोरंजन भी होता है। पुस्तकालय से निर्धन विद्यार्थी पुस्तकें लेकर पढ़ाई करते हैं। पुस्तकालय के अपने कुछ नियम होते हैं। हमें उनका पालन करना चाहिए। पुस्तकालय में शांति बनाए रखनी चाहिए।

HBSE 8th Class Hindi रचना अनुच्छेद लेखन

3. जैसा करोगे, वैसा भरोगे

इस संसार का नियम है – जैसा करोगे, वैसा भरोगे। यहां व्यक्ति जैसा काम करता है, उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है। अच्छा कार्य करके व्यक्ति अच्छा फल भोगता है और बुरा काम करके उसे दंड भुगतना ही पड़ता है। कई बार ऐसा भी देखने में आता है कि बुरा कर्म करने वाला फल-फूल रहा है। यह स्थिति अधिक समय तक नहीं रहती। बुरे काम का अंत बुरा अवश्य होता है। आम खाने के लिए आम की गुठली ही बोनी पड़ती है। अत: मनुष्य को चाहिए कि ऐसे अच्छे कर्म करे जिससे दूसरों को भी शीतलता मिले और स्वयं भी सुख-शांति पा सके।

4. परिश्रम की महिमा

परिश्रम सफलता की कुंजी है। व्यक्ति को परिश्रम से नहीं घबराना चाहिए। परिश्रम से कठिन से कठिन काम भी आसान हो जाता है। परिश्रम से जी चुराने वाला व्यक्ति आलसी बन जाता है। आलसी व्यक्ति के जीवन का कोई लाभ नहीं होता। उसमे कार्य के प्रति उमंग, उत्साह और जोश नहीं होता। जो व्यक्ति परिश्रम करता है, वह कठिनाइयों से कभी नहीं घबराता। परिश्रमी व्यक्ति सदा सफलता प्राप्त करता है। हमें अपना काम सदैव परिश्रमपूर्वक करना चाहिए।

5. अनेकता में एकता

अनेकता में एकता भारत की विशेषता है। इस विशाल देश में ऊपरी तौर पर अनेक प्रकार की विभिन्नताएं दिखाई देती है। कहीं पर्वत हैं तो कहीं हरे-भरे मैदान और कहां गहरे समुद्र। इस देश में अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। यहां वेशभूषा और खान-पान की दृष्टि से भी अनेक विभिन्नताएँ हैं। विभिन्न प्रांतों में मौसम भी एक समान नहीं होता। धर्म भी अनेक हैं। इन सभी विभिन्नताओं के होते हुए भी भारत एक है। इन विभिन्नताओं की तह में एकता की भावना छिपी हुई है। भारत की संस्कृति एक है। सभी एक-दूसरे का सम्मान करते हैं।

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6. परीक्षा के दिन

परीक्षा के दिन भी बड़े विचित्र होते हैं। ज्यों-ज्यों परीक्षा निकट आती है, त्यों-त्यों दिल की धड़कन तेज हो जाती है। हर काम में जल्दबाजी दिखाई देती है। परीक्षा एक भूत की तरह दिखाई देती है। न पूरी तरह नींद आती है और न दिल को चैन आता है। भूख भी ठीक प्रकार से नहीं लगती। हर समय पुस्तकें और कापियाँ दिखाई देती हैं। कभी एक विषय में कमी रह गई प्रतीत होती है, तो कभी दूसरे विषय में। मस्तिष्क सदा तनाव में रहता है। हाँ, जिनकी तैयारी पूरी होती है, वे अवश्य निश्चित दिखाई देते हैं। परीक्षा के अंतिम दिन ही तनाव से मुक्ति मिलती है।

7. सच्चा मित्र

सच्चा मित्र एक खजाने की तरह होता है। यदि हमने अपने जीवन में एक भी सच्चा मित्र पा लिया तो मानो सब कुछ पा लिया। सच्चा मित्र खोज पाना सरल काम नहीं है। सच्चा मित्र वही है जो विपत्ति के समय आपके काम आता है। ऐसा मित्र स्वार्थी नहीं होता। उसे आपकी धन-सम्पत्ति से कोई मोह नहीं होता। वह अपने मित्र की कमजोरी को किसी के सामने उल्लेख नहीं करता, बल्कि उसके गुणों का बखान करता है। मित्र का चुनाव बहुत सोच-समझ एवं परख कर करना चाहिए।

8. जब मैं बिना टिकट यात्रा करता पकड़ा गया

एक बार की बात है। मैं दिल्ली से आगरा जा रहा था। जब मैं स्टेशन पर पहुंचा तो गाड़ी चलने वाली थी। मुझे उस गाड़ी में जाना अवश्य था. अत: बिना टिकट लिए एक डिब्बे में चढ़ गया। अभी एक स्टेशन ही निकला था कि डिब्बे में टी.टी. आ गया। मेरे तो होश उड़ गए। उसने मेरी स्थिति भांप ली। वह मेरे पास आया। उसने टिकट मांगी। मैंने अपनी समस्या बता दी। पर वह कहां मानने वाला था। टी.टी. ने मुझे लताड़ते हुए सौ रुपये जुर्माने की रसीद थमा दी। मैंने रुपए तो दे दिए, पर इस बात का बड़ा दुख रहा कि मैं सबके सामने बेईमान ठहराया गया। मैंने तभी निश्चय कर लिया कि अब भविष्य में कभी बिना टिकट यात्रा नहीं करूंगा।

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HBSE 8th Class Hindi रचना पत्र-लेखन

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Rachana Patra-Lekhan पत्र-लेखन Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Rachana पत्र-लेखन

1. अवकाश माँगते हुए प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र

सेवा में,
प्रधानाचार्य,
सेंट कोलंबस स्कूल,
चंडीगढ़।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि मुझे कल रात्रि से ज्वर आ रहा है। डॉक्टर ने ‘वायरल फीवर’ बताया है और चार दिन तक पूर्ण विश्राम का परामर्श दिया है। अत: मैं दिनांक…………….. से ………….. तक चार दिन विद्यालय आने में असमर्थ हूँ।
कृपया मुझे इन चार दिनों का अवकाश प्रदान कर कृतार्थ करें।

धन्यवाद सहित,
आपका आज्ञाकारी शिष्य
मेहुल मैदीरत्ता
कक्षा..
दिनांक…………

HBSE 8th Class Hindi रचना पत्र-लेखन

2. विद्यालय छोड़ने का प्रमाण पत्र (S.L.C.) प्राप्त करने के लिए प्रधानाचार्य को आवेदन-पत्र लिखो।

सेवा में,
प्रधानाचार्य,
समरफील्ड पब्लिक स्कूल,
नई दिल्ली।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं इस स्कूल का सातवीं कक्षा का विद्यार्थी हूँ। मेरे पिताजी का स्थानांतरण मुंबई हो गया है। अगले सप्ताह हमारा परिवार मुंबई चला जाएगा। मुझे वहीं के किसी स्कूल में प्रवेश लेना होगा। इस कार्य हेतु मुझे विद्यालय त्यागने का प्रमाण पत्र (S.L.C.) प्रदान करने की कृपा करें।

धन्यवाद सहित,
आपका आज्ञाकारी शिष्य
मंयक
दिनांक…………

3. आर्थिक सहायता हेतु प्रधानाचार्य को आवेदन पत्र

सेवा में,
प्रधानाचार्य,
होली चाइल्ड पब्लिक स्कूल,
टैगोर गार्डन, नई दिल्ली।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं इस विद्यालय की आठवीं कक्षा की अत्रा हूँ। मैं सातवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा में सभी वर्गों में प्रथम स्थान पर रही थी। मैंने चार सौ मीटर की दौड़ में मंडल स्तर पर प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया था।

पिछले तीन मास से हमारा परिवार आर्थिक समस्या से ग्रस्त है। पिताजी दुर्घटनाग्रस्त होकर बिस्तर पर हैं। उनको पूरी तरह ठीक होने में अभी छह मास का समय लगेगा। परिवार में पिताजी ही एकमात्र कमाऊ सदस्य हैं। उनके इलाज पर भी काफी पैसा लग रहा है।

ऐसी विषम स्थिति में मुझे कक्षा की मासिक फीस जमा कराने में अत्यन्त कठिनाई आ रही है। आपसे विनम्र प्रार्थना है कि छ: मास के लिए मेरी फीस माफ की जाए तथा ‘छात्रनिधि’ से मुझे कुछ आर्थिक सहायता दिलाई जाए।

आपकी इस सामयिक सहायता के लिए मैं आपकी सदैव आभारी रहूंगी।

धन्यवाद सहित,
आपकी आज्ञाकारिणी शिष्या
कनिका छाबड़ा
कक्षा –
दिनांक…………

HBSE 8th Class Hindi रचना पत्र-लेखन

4. अपने मोहल्ले की गंदगी हटवाने के लिए स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र

सेवा में,
स्वास्थ्य अधिकारी,
दिल्ली नगर निगम (पश्चिमी क्षेत्र),
राजौरी गार्डन, नई दिल्ली।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि राजौरी गार्डन क्षेत्र में गंदगी का साम्राज्य है। यहां पिछले एक मास से सफाई ही नहीं हुई है। सफाई-कर्मचारियों से कई बार प्रार्थना की, किन्तु उसका कोई प्रभाव नहीं हुआ। सड़कों पर भी गंदगी जमा हो रही है।

कूड़े के ढेरों पर मच्छरों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। मलेरिया फैलने की पूरी आशंका है। आपसे विनम्र प्रार्थना है कि यहां सफाई का उचित प्रबंध करवाएं, ताकि हम स्वच्छ वातावरण में सांस ले सकें।

धन्यवाद सहित,
भवदीय
कुन्दन लाल,
सचिव, बी ब्लॉक, राजौरी गार्डन
निवासी संघ
दिनांक…………

5. डाकपाल को शिकायती पत्र

सेवा में,
डाकपाल महोदय,
मुख्य डाकघर,
रमेश नगर,
नई दिल्ली।

महोदय,
मैं आपका ध्यान रमेश नगर (ई. ब्लाक) के डाकिए की लापरवाही की ओर दिलाना चाहती हूँ।

इस क्षेत्र का डाकिया नियमित रूप से डाक वितरण नहीं करता। दिन में दो बार डाक बाँटने के स्थान पर वह केवल एक ही बार आता है। उसके आने का समय निश्चित नहीं है। वह हमारे पत्र इधर-उधर फेंक जाता है। यद्यपि हमने लैटरबॉक्स लगा रखा है, पर वह पत्र उसमें नहीं डालता। उसकी इस लापरवाही के कारण हमारे अनेक आवश्यक पत्र गुम हो जाते हैं। अनियमित डाक-वितरण के कारण अनेक पत्र विलंब से मिलते हैं।

आपसे विनम्र प्रार्थना है कि आप इस क्षेत्र के डाकिए को तत्परता से काम करने के निर्देश दें, ताकि हमें सुचारू रूप से डाक-वितरण का कार्य हो सके।

धन्यवाद सहित,
भवदीय
रचना मैदीरत्ता
ई-249-250, रमेश नगर, नई दिल्ली।
दिनांक…………

HBSE 8th Class Hindi रचना पत्र-लेखन

6. टेलीफोन की खराबी की शिकायत करते हुए ‘नवभारत टाइम्स’ के संपादक को पत्र।

सेवा में,
संपादक,
नवभारत टाइम्स,
नई दिल्ली।

महोदय,
मैं आपके लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से महानगर टेलीफोन निगम के उच्च अधिकारियों का ध्यान अपनी शिकायत की ओर दिलाना चाहता हूँ।

मेरा टेलीफोन नं. 593219 गत दो सप्ताह से खराब है। इसकी शिकायत कई बार की गई है। क्षेत्रीय कार्यालय में कई बार चक्कर लगाने के बावजूद यह टेलीफोन अभी तक ठीक नहीं हो पाया है। महानगर टेलीफोन निगम दावे तो बहुत लंबे-चौड़े करता है, पर वास्तविकता इससे बिल्कुल भिन्न है। नियमित रूप से सेवा-प्रभार लेने के बावजूद उपभोक्ता को सेवा न देना सरासर अन्याय है। आशा है, यह पत्र पढ़कर निगम की कार्य प्रणाली में कुछ सुधार आ जाए।

धन्यवाद सहित,
भवदीय
रामेश्वर शुक्ल
7/22, जीवन पार्क,
नई दिल्ली।
दिनांक……….

7. पुस्तक-विक्रेता को पत्र

सेवा में,
प्रबंधक महोदय,
जीवन बुक्स इंटरनेशनल (प्रा.) लि.,
मानसरोवर गार्डन,
नई दिल्ली।
मान्यवर,

आपका भेजा सूचीपत्र प्राप्त हुआ। मुझे निम्नलिखित पुस्तकों की शीघ्र आवश्यकता है। कृपया नवीनतम संस्करण की ही पुस्तकें भिजवाएँ। मैं सौ रुपए का बैंक-ड्राफ्ट अग्रिम भेज रहा हूँ। कृपया पुस्तकें वी.पी.पी. द्वारा मेरे पते पर शीघ्र भिजवाने की व्यवस्था करें।

1. जीवन भारती (भाग-8)                               3 प्रति
2. जीवन हिन्दी व्याकरण एवं रचना (भाग-7)     2 प्रति
3. जीवन इंटरएक्टिव गणित (भाग-3)               2 प्रति

सधन्यवाद,
भवदीय
धनालक्ष्मी
44/6, टी नगर, चेन्नई (तमिलनाडु)
दिनांक………..
संलग्न – इंडियन बैंक का ड्राफ्ट – ई-74027

8. जन्मदिन पर आमंत्रित करते हुए मित्र को पत्र

5/62. बैंक स्ट्रीट,
बंगलूर
दिनांक…
प्रिय मित्र राहुल,
सप्रेम नमस्ते।

तुम्हें यह जानकर अत्यंत हर्ष होगा कि दिनांक…………. को मेरा जन्मदिन है। इस अवसर पर एक समारोह का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम निम्नलिखित है :
दिनांक……..
सायं 7 बजे – केक काटने की रस्म
सायं 7.30 से 8.30 तक – सांस्कृतिक कार्यक्रम
रात्रि 8.30 बजे – प्रीतिभोज

इस समारोह में भाग लेने के लिए मैं तुम्हें आमंत्रित करता हूँ। मुझे पूर्ण आशा है कि तुम समय से पूर्व ही आ जाओगे। अपनी बहन चीकू को भी साथ लेते आना।

तुम्हारा प्रिय मित्र
मनोज

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9. मित्र द्वारा निमंत्रण-पत्र का उत्तर

7/452, गनहिल रोड,
मसूरी।
दिनांक …………
प्रिय मित्र निशान्त,
सप्रेम नमस्ते।

तुम्हारा निमंत्रण पत्र मिला। जन्म दिन के पावन अवसर पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करो।

जन्मदिन के अवसर पर मैं एक छोटा-सा उपहार कोरियर द्वारा भेज रहा हूँ। इसे स्वीकार कर कृतार्थ करना। जन्मदिन समारोह में मैं स्वयं तो उपस्थित नहीं हो पाऊँगा। इन दिनों माता जी अस्वस्थ चल रही हैं। उन्हें छोड़कर आना उचित नहीं होगा। आशा है तुम मेरी विवशता को समझोगे।
एक बार पुनः जन्मदिन की शुभकामनाएँ अपने माता-पिता को मेरा चरण-स्पर्श कहना।

तुम्हारा प्रिय मित्र
राहुल

10. आपका मित्र परीक्षा में अच्छे अंक लेकर उत्तीर्ण हुआ, उसे बधाई देते हुए पत्र लिखिए।

सैक्टर-7, कोठी नं. 1218,
पंचकुला।
दिनांक…………
प्रिय नरेंद्र
सप्रेम नमस्ते।

अभी-अभी तुम्हारा पत्र मिला। यह पढ़कर कि तुमने अप विद्यालय में सर्वाधिक 96 प्रतिशत अंक पाए हैं, मुझे कितनी खुश हुई, कैसे लिखू। मेरी बधाई स्वीकार करें।

प्रिय मित्र 96% अंक प्राप्त करना खुशी की बात तो है, परन्तु आश्चर्य की नहीं, क्योंकि तुम्हारी प्रतिभा किसी से छिपी नहीं है। हाँ, इस परिणाम से तुम्हारे ऊपर एक नई जिम्मेदारी आ गई है। । वह यह कि अब भविष्य की परीक्षाओं में तुम इस प्रतिशत को बिल्कुल नीचे नहीं आने दोगे, वरन् ऊँचा ही उठाओगे। इसके लिए तुम्हें चाहे जितना परिश्रम करना पड़े। मेरी शुभकामनाएँ सदा तुम्हारे साथ हैं।

अपने मम्मी-पापा को मेरी ओर से बधाई देना। बच्चों को प्यार।
शेष कुशल है।
तुम्हारा मित्र
भारत मैदीरत्ता

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11. अपने छोटे भाई को पत्र लिखिए, जिसमें परिश्रम का महत्त्व समझाया गया हो।

5/2, कमला नगर,
दिल्ली।
दिनांक………….
प्रिय अनुज,
शुभाशीर्वाद।

आशा है तुम स्वस्थ एवं प्रसन्न होगे। कल माताजी का पत्र प्राप्त हुआ, जिससे पता चला कि इस वर्ष तुम्हें केवल 52% अंक प्राप्त हुए हैं। इतने कम अंक तुम्हें पहले कभी नहीं मिले। संभवत: तुम्हारे परिश्रम में कोई कमी रह गई है।

प्रिय भाई, परिश्रम के बिना जीवन में कोई सफलता नहीं मिलती। परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। किसी कवि ने सच ही कहा-
“विद्या, धन उद्यम बिना, कहो सो पावै कौन?
बिना डुलाए ना मिले, ज्यों पंखा की पौन।”

जो व्यक्ति परिश्रम करने से जी चुराता है, वह कभी आगे नहीं बढ़ सकता। परिश्रम के बलबूते पर तो मूर्ख भी चतुर बन जाता है। कालिदास जैसा वज मूर्ख परिश्रम के बलबूते पर ही संस्कृत का इतना प्रकांड विद्वान बन सका।

आशा है तुम परिश्रम के महत्त्व को समझ गए होगे। अगली कक्षा में तुम्हें 75% अंक प्राप्त करने हैं। इसके लिए अभी से परिश्रम करना आरंभ कर दो।

माता जी को सादर-प्रणाम।
तुम्हारा शुभचिंतक
लवाशीष

12. सखी को ग्रीष्मावकाश साथ-साथ बिताने के लिए पत्र

561, सिविल लाइन,
देहरादून।
दिनांक…
प्रिय सखी गरिमा,
सप्रेम नमस्ते।

तुम्हारा पत्र मिला। हमारी वार्षिक परीक्षाएँ समाप्त हो गई हैं। परीक्षा-परिणाम घोषित होने के पश्चात् हमारा विद्यालय दो मास के ग्रीष्मावकाश के लिए बंद हो जाएगा। तुम्हारे विद्यालय में भी अगले मास ग्रीष्मावकाश हो जाएगा।

तुम्हें स्मरण होगा कि पिछले वर्ष तुमने मेरे यहाँ आकर ग्रीष्मावकाश का एक मास बिताने का वायदा किया था। मेरी भी हार्दिक इच्छा है हम दोनों एक मास साथ-साथ रहें। अगले मास देहरादून का मौसम भी सुहावना हो जाएगा। हम यहाँ से एक सप्ताह के लिए मसूरी भी चलेंगे। हम दोनों नृत्य एवं संगीत की कक्षा में दो सप्ताह के कोर्स में भी प्रवेश लेंगे।

अपने कार्यक्रम से मुझे शीघ्र सूचित करना।

शेष कुशल !
तुम्हारी प्रिय सखी
पूजा भारती

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13. पिताजी से रुपये मंगवाने के लिए पत्र

न्यू कांवेंट स्कूल, कोचीन।
दिनांक…………..
पूज्य पिताजी,
सादर प्रणाम।

मैं यहाँ पर कुशलपूर्वक हूँ और आशा करता हूँ कि घर पर भी सब कुशल होंगे। मेरी पढ़ाई बिल्कुल ठीक चल रही है। मुझे आशा है कि मैं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हो जाऊँगा। अगले सप्ताह हमारे विद्यालय के विद्यार्थियों को भ्रमण के लिए कुछ ऐतिहासिक स्थानों पर ले जाया जाएगा। मैंने भी वहाँ जाने के लिए नाम लिखवा दिया है। इस कार्यक्रम के लिए विद्यालय ने पचास-पचास रुपये प्रति विद्यार्थी जमा करवाए हैं। इसके अतिरिक्त कुछ पैसे और भी खर्च हो जाएँगे। अतः आप सौ रुपये शीघ्र धनादेश द्वारा भेजने की कृपा करें।

आपका स्नेहभाजन,
कपिल

14. मित्र के पिता की मृत्यु पर शोक पत्र

शाम नाथ मुखर्जी मार्ग, दिल्ली-110006
दिनांक…
प्रिय राजेश,

आपका पत्र 23 तारीख का लिखा हुआ मिला। जब मैंने आपके पिताजी की मृत्यु का समाचार उसमें पढ़ा तो मुझे उस पर एकाएक विश्वास न हुआ। पिछले मास की 30 तारीख को तो मैं उनसे मिला था।

मुझे ऐसी स्वप्न में भी कल्पना नहीं थी कि उनकी मृत्यु इतनी निकट है। प्रिय मित्र, यहाँ मनुष्य असमर्थ हो जाता है। धनी या निर्धन, बलवान या निर्बल, राजा या रंक, मूर्ख या विद्वान सभी एक दिन ईश्वर के नियमानुसार काल का ग्रास बन जाते हैं। भगवान की इच्छा बलवती है। अत: धैर्य और सब्र के सिवा चारा ही क्या है ? मुझे आशा है कि तुम धीरज से काम लोगे तथा सब्र के साथ पूज्य माता जी तथा गीता को धीरज तथा सांत्वना दोगे।

ईश्वर से प्रार्थना है कि स्वर्गवासी आत्मा को सद्गति प्रदान करे तथा आप सबको दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करे।

तुम्हारे दुःख में दुःखी
राजनाथ विज

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15. दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित किसी प्रदर्शनी का विवरण देते हुए अपने मित्र को इसे देखने के लिए निमंत्रित कीजिए।

173, गांधी नगर,
नई दिल्ली।
दिनांक …………..
प्रिय मित्र रहीम, नमस्ते। तुमने कई बार यहाँ आने को लिखा है, पर आते नहीं हो। इस पत्र को देखते ही तुम यहाँ के लिए चल पड़ो, क्योंकि यहाँ के प्रगति मैदान में ‘अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक प्रदर्शनी’ लगी हुई है, जो 10 नवम्बर से 9 दिसंबर तक रहेगी।

यह प्रदर्शनी देखने योग्य है। इसमें भारत की भिन्न-भिन्न भाषाओं की एक लाख से अधिक पुस्तकें प्रदर्शन के लिए रखी गई हैं। यहाँ सौ से अधिक प्रकाशकों ने अपने स्टाल लगाए हैं। यहाँ छोटी-बड़ी, लंबी-चौड़ी, मोटी-पतली, भिन्न-भिन्न रंगों की जिल्दों वाली पुस्तकें देखते ही बनती हैं। शायद ही कोई विषय होगा, जिसकी पुस्तक यहां नहीं हो। लोग बड़े चाव से पुस्तकें खरीदते हैं। यहाँ अमेरिका, इंग्लैंड, रूस और जापान के स्टाल देखने योग्य हैं। तुम देखकर हैरान रह जाओगे।

अपनी वालिदा साहिबा को मेरा सलाम कहना।
तुम्हारा स्नेही
राकेश

16. अपने विद्यालय की विशेषताएं बताते हुए अपने मित्र/अपनी सखी को पत्र

ए-5/12, नेहरू छात्रावास,
देहरादून।
दिनांक ……….
प्रिय सखी डायना,
सप्रेम नमस्ते।
तुम्हारा पत्र मिला। तुमने मेरे विद्यालय के बारे में जानने की इच्छा प्रकट की है। मैं इस पत्र में अपने विद्यालय की विशेषताएँ लिख रही हैं।

मेरा विद्यालय ‘दून पब्लिक स्कूल’ के नाम से सारे देश में विख्यात है। यह विद्यालय बहुत पुराना है। इसने देश को अनेक प्रतिभाशाली हस्तियाँ प्रदान की हैं। हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी भी यहाँ पढ़े थे।

हमारा विद्यालय अपने उच्च शैक्षणिक स्तर एवं अनुशासन के लिए प्रसिद्ध है। यह दून घाटी की सुरम्य वादियों में स्थित है। इसका भवन अत्यंत भव्य है। यहाँ लगभग तीन हजार विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं। हमारे विद्यालय में छात्रावास की सुविधा उपलब्ध है। हमारे विद्यालय में छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास पर बल दिया जाता है। खेल-कूद की यहाँ पर्याप्त व्यवस्था है। यहाँ सभी प्रमुख खेलों के कोच हैं। तैराकी और घुड़सवारी के उत्तम प्रशिक्षण की सभी सुविधाएं यहां उपलब्ध हैं।

मेरे विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं सभी शिक्षक अत्यंत परिश्रमी हैं। वे हमारे साथ बहुत ही स्नेहपूर्ण व्यवहार करते हैं। वे सभी अपने-अपने विषय के विद्वान हैं। हमारी कक्षा अध्यापिका मिस जोजफ एक सहृदय और अनुशासनप्रिय महिला हैं। हमारे विद्यालय का परीक्षा परिणाम सदैव शत-प्रतिशत आता है।

यहाँ का प्राकृतिक वातावरण सभी का मन मोह लेता है। अगले वर्ष जब तुम भारत-यात्रा पर आओगी तो मेरा विद्यालय देखने अवश्य आना। तुम्हें यहाँ आकर प्रसन्नता होगी।

शेष कुशल।
तुम्हारी प्रिय सखी
चारू

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17. बड़ी बहन की ओर से छोटे भाई को कुसंगति की हानियाँ बताते हुए पत्र

पी.एम.जी., टी नगर,
चेन्नई।
दिनांक ……………
प्रिय रंजन,
शुभाशीर्वाद।

कल माताजी का पत्र मिला। इसे पढ़कर ज्ञात हुआ कि आजकल तुम्हारा मन पढ़ाई में न लगकर बुरे लड़कों की संगति में लगतः है। यही कारण है कि प्रथम सत्र की परीक्षा में अनुत्तीर्ण भी हैं गए हो।

प्रिय भाई ! बुरे लोगों की संगति जीवन को बर्बाद करके रख देत . है। इससे तुम्हारा भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। सभी विद्वानों सत्संगति का बड़ा महत्त्व बताया है। इससे हमारा जीवन निरंतप्रगति की ओर जाता है। हमें सज्जनों के वचनों को सुनकर उनका पालन करना चाहिए। कुसंगति तो कालिमा के समान है जिससे हमारा भविष्य अंधकारमय हो जाता है। कहा गया है-
‘जैसी संगति बैठिए, तैसोई फल होत। ‘
आशा है, तुम सत्संगति में अपना मन लगाओगे और पुन शिकायत का अवसर नहीं दोगे।
माता जी को प्रणाम कहना।
तुम्हारी शुभचिंतिका
वंदना वर्मा

18. छोटी बहन को परीक्षा में सफलता प्राप्त होने पर बधाई-पत्र

एम 28/104, यमुना विहार,
दिल्ली-110062
दिनांक : ………..
प्रिय बहन विमला,
शुभाशीर्वाद।

पूज्य पिताजी के टेलीफोन से अभी-अभी ज्ञात हुआ कि तुम इस वर्ष की परीक्षा में बहुत अच्छे अंकों से सफल हुई हो। इस सुखर समाचार से मेरी प्रसन्नता का पारावार न रहा। मेरी ओर से तुम हार्दिक बधाई। इस परीक्षा के लिए तुमने जो नियमित रूप से जी-तोड़ परिश्रम किया था, उससे मुझे तुम्हारी इस सफलता के पूरी आशा थी। तुमने सिद्ध कर दिया कि परिश्रम तथा दृढ़-संकल्ल के बल पर कोई भी सफलता प्राप्त की जा सकती है।

मुझे पूर्ण आशा एवं विश्वास है कि आगामी परीक्षा में भी तुम इसी प्रकार शानदार सफलता प्राप्त करके अपने परिवार तथ विद्यालय का नाम ऊंचा करोगी। शेष मिलने पर।

तुम्हारा शुभचिंतक
संजय

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19. निमंत्रण-पत्र

[निमंत्रण-पत्र में किसी उत्सव, विवाह अथवा विशिष्ट समारोह में उपस्थित होने के लिए अनुरोध किया जाता है। ऐसे पत्र किसी एक व्यक्ति के लिए न होकर अनेक लोगों के लिए होते हैं। अत: उनमें सामान्य कुशल समाचार नहीं दिया जाता। एक उदाहरण नीचे दिया जा रहा है।]

मेरे सुपुत्र
चि. राजीव
का शुभ विवाह
सौ. रंजना
(आत्मजा श्री शैलेन्द्र श्रीवास्तव, लखनऊ)
के साथ 15 नवंबर, 2004 को संपन्न होगा। इस शुभ अवसर पर आप सपरिवार सादर आमंत्रित हैं।

॥ कार्यक्रम ॥
बारात प्रस्थान………….14 नवंबर, 2004 को रात्रि 11 बजे
पाणिग्रहण संस्कार………..15 नवंबर, 2004 को सायं 6 बजे
विदाई………………………..16 नवंबर, 2004 को प्रात: 5 बजे

दर्शनाभिलाषी
हरि प्रसाद सक्सेना
5/25, नवीन शाहदरा, दिल्ली।

20. उपहार के लिए धन्यवाद देते हुए चाचा जी को

पत्र ए-42, डेम्पियर नगर,
मथुरा (उ.प्र.)।
दिनांक ……..

आदरणीय चाचा जी, सादर प्रणाम। आपके द्वारा मेरे जन्मदिन पर भेजा हुआ उपहार प्राप्त हुआ। यह उपहार मेरे प्रति आपके स्नेह का परिचायक है। शुभकामना एवं उपहार के लिए मैं आपके प्रति कृतज्ञता प्रकट करता हूँ। आशा है आप भविष्य में भी मुझ पर ऐसी कृपा बनाए रखेंगे।

उपहार के रूप में एक शानदार घड़ी पाकर मैं बहुत हर्षित हूँ। यह मेरे सभी मित्रों को बहुत पसंद आई। इससे मुझे नियमित पढ़ाई करने में बहुत सहायता मिलेगी।

एक बार पुनः धन्यवाद।
आपका कृपाकांक्षी
संजय

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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran अलंकार

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Alankar अलंकार Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran अलंकार

‘अलंकार’ शब्द का अर्थ है- आभूषण या गहना। जिस प्रकार आभूषण धारण करने से स्त्री के सौंदर्य में वृद्धि हो जाती है, उसी प्रकार काव्य में अलंकारों के प्रयोग से उसकी सुंदरता में चमत्कार उत्पन्न हो जाता है।
साहित्य में शब्द और अर्थ दोनों का महत्त्व होता है। कहीं शब्द-प्रयोग से तथा कहीं अर्थ के चमत्कार से काव्य में सौंदर्य की वृद्धि हो जाती है। इसी आधार पर अलंकार के दो मुख्य भेद माने जाते हैं :
(1) शब्दालंकार
(2) अर्थालंकार

शब्दालंकार : काव्य में जहाँ किसी विशिष्ट शब्द-प्रयोग के कारण सौंदर्य में वृद्धि होती है अथवा चमत्कार आ जाता है, वहाँ शब्दालंकार माना जाता है। शब्द को बदलकर उसके स्थान पर उसका पर्याय रख देने पर वह चमत्कार समाप्त हो जाता है। जैसे-
तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए
(यहाँ ‘तरनि’ का पर्यायवाची ‘सूर्य’ और तनूजा की जगह ‘पुत्री’ रख देने पर – सूर्य पुत्री तट तमाल सारा चमत्कार जाता रहता है।)

अर्थालंकार : काव्य में जहाँ शब्दों के अर्थ से चमत्कार हो रहा हो, वहाँ अर्थालंकार माना जाता है। जैसे-
‘मखमल के झूल पड़े हाथी-सा टीला’

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran अलंकार

प्रमुख शब्दालंकार

1. अनुप्रास : जिस रचना में व्यंजन वर्णों की आवृत्ति एक या अधिक बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
उदाहरण:

  • ‘कल कानन कुंडल मोरपखा उर पै बनमाल बिराजति है।’ (‘क’ व्यंजन वर्ण की आवृत्ति) (‘व’ वर्ण की आवृत्ति)
  • ‘कालिंदी कूल कदंब की डारिन’ (‘क’ वर्ण की आवृत्ति)
  • ‘मुदित महीपति मंदिर आए’ (‘म’ वर्ण की आवृत्ति)
  • ‘तट तमाल तरुवर बहु छाए’ (‘त’वर्ण की आवृत्ति)
  • ‘विमल वाणी ने वीणा ली’ (‘व’ वर्ण की आवृत्ति)

2. यमक : “वहै शब्द पुनि-पुनि परै, अर्थ भिन्न ही भिन्न” – अर्थात् जब कविता में एक ही शब्द दो या दो से अधिक बार आए और हर बार उसका अर्थ भिन्न हो, वहाँ यमक अलंकार होता है।
उदाहरण:
1. ‘काली घटा का घमंड घटा।’
(घटा – वर्षा काल की मेघमाला, घटा = कम हुआ)

2. ‘कहे कवि बेनी बेनी ब्याल की चुराई लीनी’
(बेनी – कषि का नाम, बेनी – चोटी)

3. कनक कनक तै सौ गुनी मादकता अधिकाय।
वा खाए बौराए जग या पाए बौराए।
(कनक – सोना, कनक – धतूरा)

4. माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका डारि दै, मन का मनका फेर।
(मनका = माला का दाना, मन का – हृदय का)

5. ‘तीन बेर खाती थी वह तीन बेर खाती थी’
(तीन बेर – तीन बार, तीन बेर – तीन बेर के फल)

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran अलंकार

3. श्लेष : श्लेष का अर्थ है-चिपकना।
जहाँ शब्द तो एक ही बार प्रयुक्त किया जाए, पर उसके एक से अधिक अर्थ निकलें, वहाँ श्लेष अलंकार होता है।
उदाहरण:
1. मधुबन की छाती को देखो, सूखी इसकी कितनी कलियाँ।
कली’ शब्द का प्रयोग एक बार है, पर अर्थ दो हैं:
(क) खिलने से पूर्व फूल की दशा
(ख) यौवन पूर्व की अवस्था, बच्चियाँ)

2. जो रहीम गति दीप की कुल कपूत की सोय।
वारे उजियागे करै, बड़े अंधेरो हो।
(यहाँ ‘बारे ‘और ‘बढ़े दोनों शब्दों में श्लेष अलंकार है।)
‘बारे’ – (क) बचपन, (ख) जलाने पर
‘बढ़े’ – (क) बड़ा होने पर, (ख) बुझने पर

3. मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोय।
जा तन की झाँई परै, स्याम हरित दुति होय ॥
(‘हरित’ शब्द के तीन अर्थ है- हर लेना, हर्षित होना, हरे रंग का होना)

4. चिरजीवी जोरी जुरे, क्यों न सनेह गंभीर ।
को घटि या वृषभानुजा, वे हलधर के बीर ।।
(वृषभानु + जा – राधा, वृषभ + अनुजा = बैल की बहन गाय हलधर – बलराम, हलधर – हल के धारण करने वाले)

प्रमुख अर्थालंकार

4. उपमा : जहाँ एक वस्तु या प्राणी की तुलना अत्यंत समानता के कारण किसी अन्य प्रसिद्ध वस्तु या प्राणी से की जाती है, तब वहाँ उपमा अलंकार माना जाता है। जैसे- ‘चाँद-सा सुंदर मुख’।
उपमा के चार अंग (तत्त्व) हैं :
(क) उपमेय : वह वस्तु या प्राणी, जिसकी उपमा दी जाए अथवा काव्य में जिसका वर्णन अपेक्षित हो, उपमेय कहलाता है।।
(ऊपर के उदाहरण में ‘मुख’ उपमेय है।)

(ख) उपमान : वह प्रसिद्ध वस्तु या प्राणी, जिसके साथ उपमेय की तुलना की जाए, उपमान कहलाता है।
(ऊपर के उदाहरण में ‘चाँद ‘ उपमान है।)

(ग) साधारण धर्म : उपमेय तथा उपमान में पाया जाने वाला परस्पर समान गुण साधारण धर्म कहलाता है।
(ऊपर के उदाहरण में ‘सुदर’ साधारण धर्म है।)

(घ) वाचक शब्द : जिस शब्द विशेष से समानता या उपमा का बोध होता है, उसे वाचक शब्द कहते हैं।
जैसा, सम, सी, सा, सरिस आदि शब्द वाचक शब्द कहलाते हैं।

जहाँ ये चारों तत्त्व विद्यमान हों वहाँ पूर्णोपमा अलंकार होता है।
नीचे दिए गए उदाहरण में चारों तत्वों की स्थिति समझो:
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran अलंकार-1
अन्य उदाहरण :

  • हाय ! फूल-सी कोमल बच्ची, हुई राख की ढेरी थी।
  • यह देखिए, अरविंद-से शिशुवृंद कैसे सो रहे।
  • मखमल के झूल पड़े हाथी-सा टीला।
  • उषा सुनहले तीर बरसती जय-लक्ष्मी-सी उदित हुई।
  • मुख बाल रवि सम लाल होकर चाल-सा बोधित हुआ।
  • तब तो बहता समय शिला-सा जम जाएगा।

(एक या अधिक तत्वों के अभाव में लुप्तोपमा अलंकार माना जाता है।)

5. रूपक : जहाँ गुण की अत्यंत समानता के कारण उपमेय में उपमान का अभेद आरोप कर दिया जाए, वहाँ रूपक अलंकार होता है।
(इसमें वाचक शब्द का प्रयोग नहीं होता।)
उदाहरण:

  • ‘मैया मैं तो चंद्र खिलौना लैहों।’
    [यहाँ चंद्रमा (उपमेय) में खिलौना (उपमान) का आरोप होने से रूपक अलंकार है।]
  • ‘चरण-कमल बंदी हरि राई’
    [यहाँ चरणों (उपमेय) में कमल (उपमान) का आरोप हुआ है।]
  • ‘आए महंत बसंत’
  • ‘सब प्राणियों के मत्तमनोमयूर अहा नचा रहा’
  • ‘पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो।’
  • ‘शशि-मुख पर घूघट डाले’
  • राम नाम मनि-दीप धरु, जीह देहरी द्वार।
  • एक राम घनस्याम हित चातक तुलसीदास।

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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran मुहावरे-लोकोक्तियाँ

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Muhavare-Lokoktiyan मुहावरे-लोकोक्तियाँ Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran मुहावरे-लोकोक्तियाँ

‘मुहावरा’ शब्द अरबी भाषा का है। जिसका अर्थ है-अभ्यास। वस्तुतः शब्दों का ऐसा समुच्चय मुहावरा है जो अपने साधारण अर्थ को छोड़कर किसी विशिष्ट अर्थ को प्रकट करें। प्रयोग के धरातल पर एक ही मुहावरा कई बार अलग-अलग अर्थ दे सकता है। जैसे-
‘आँख लगना’ – मुहावरा
(क) सारी रात जगने के बाद उसकी आँख अभी लगी है।-(अभी नीद आई है।)
(ख) मेरी किताब पर उसकी आँख लगी हुई है। = (पाने की इच्छा)
‘लोकोक्तियां’ या ‘कहावतें’ लोक अनुभव का परिणाम होती हैं। इसे लोक की उक्ति कहा गया है। इसकी उत्पत्ति के लिए विशेष व्यक्ति, स्थान अथवा काल का निर्देश नहीं किया जा सकता। लोकोक्तियाँ स्वयं सिद्ध होती हैं।

लोकोक्ति एवं मुहावरे में अंतर:
(क) लोकोक्ति पूर्ण वाक्य है, जबकि मुहावरा खंड वाक्य है।
(ख) पूर्ण वाक्य होने के कारण लोकोक्ति का प्रयोग स्वतंत्र एवं अपने आप में पूर्ण इकाई के रूप में होता है जबकि मुहावरा किसी वाक्य का अंश बनकर रह जाता है।
(ग) लोकोक्ति में कोई परिवर्तन नहीं होता जबकि मुहावरों में वाक्य के अनुसार परिवर्तन होता है।
(घ) लोकोक्ति किसी बात के समर्थन अथवा खंडन के लिए प्रयुक्त की जाती है, जबकि मुहावरा वाक्य में चमत्कार उत्पन्न करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।

मुहावरे (Idioms):
प्रमुख मुहावरों के अर्थ एवं प्रयोग नीचे दिए जा रहे हैं-

1. अंग-अंग ढीला होना = थक जाना।
दिन-भर की भाग-दौड़ होने के कारण अब मेरा अंग-अंग ढीला हो रहा है।

2. अंधे की लाठी = एकमात्र सहारा।
पिता के देहांत के बाद अब तो पुत्र गोपाल ही अपनी माँ के लिए अंधे की लाठी है।

3. अक्ल का दुश्मन = मूर्ख व्यक्ति।
तुम तो पूरे अक्ल के दुश्मन हो, तुम्हें सलाह देने का कोई फायदा नहीं।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran मुहावरे-लोकोक्तियाँ

4. अंग-अंग मुस्कराना = बहुत प्रसन्न होना।
अपना नंबर मेधावी छात्रों की सूची में पाकर रवि का अंग-अंग मुस्कराने लगा।

5. अपने पैरों पर खड़ा होना = स्वावलंबी होना।
पिता की अचानक मौत के पश्चात् रमेश शीघ्र ही अपने पैरों पर खड़ा हो गया।

6. अंगूठा दिखाना = साफ इंकार करना।
मैंने सुधा से दो दिन के लिए पुस्तक माँगी तो उसने अंगूठा दिखा दिया।

7. अगर-मगर करना = टाल-मटोल करना।
जब हम संस्था की सहायतार्थ सेठ जी के पास चंदा मांगने गए तो वे अगर-मगर करने लगे।

8. आग में घी डालना = क्रोध को भड़काना।
तुम्हारी बातों ने तो रमा और सुधा की लड़ाई में आग में घी डाल दिया।

9. आसमान से बातें करना = बहुत ऊँचा होना।
कनॉट प्लेस की भव्य इमारतें आसमान से बातें करती प्रतीत होती हैं।

10. आकाश-पाताल एक करना = बहुत परिश्रम करना।
परीक्षा में अच्छे अंक पाने के लिए राजेश ने आकाश पाताल एक कर दिया।

11. आँखें बिछाना = प्रेम से स्वागत करना।
अभिनेता के स्वागत-समारोह में प्रशंसकों ने आँखें बिछा दीं।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran मुहावरे-लोकोक्तियाँ

12. आँखें चुराना = सामने न आना।
अब बेरोजगार पंकज अपने परिचितों से आँखें चुराने लगा

13. आँखें खुलना = होश में आना।
जब सुरेशचन्द्र को उसके साझीदार ने व्यापार में धोखा दिया तब ही उसकी आँखें खुली।

14. आँखों में धूल झोंकना = धोखा देना।
वह ठग मेरी आँखों में धूल झोंककर मेरा रुपयों से भरा बैग ले भागा।

15. आँखें दिखाना = क्रांध प्रकट करना।
अध्यापक द्वारा छात्र को जरा-सा डाँटने पर छात्र आँखें दिखाने लगा।

16. आस्तीन का साँप = विश्वासघाती मित्र।।
राजबीर को क्या मालूम था कि उसका मित्र सुरेश आस्तीन का साँप निकलेगा।

17. आँसू पोंछना = सांत्वना देना।
सड़क दुर्घटना में रमा के माता-पिता की मृत्यु होने पर उसके आँसू पोछने वालों की कतार लग गई।

18. आटे-दाल का भाव मालूम होना = वास्तविक स्थिति का पता चलना।
विवाह के पश्चात् ही तुम्हें आटे-दाल का भाव मालूम पड़ेगा।

19. इधर-उधर की हाँकना = व्यर्थ बोलना।
पिता द्वारा परीक्षा में फेल होने के कारण पूछने पर रमेश इधर-उधर की हाँकने लगा।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran मुहावरे-लोकोक्तियाँ

20. ईद का चाँद होना = बहुत दिनों बाद दिखना।
अरे मित्र ! कहाँ रहे इतने दिन ? तुम तो ईद का चाँद हो गए हो।

21, ईंट से ईंट बजाना = नष्ट-भ्रष्ट कर देना।
युद्ध में सैनिक अपने शत्रु की ईंट से ईंट बजा देने को तत्पर रहते हैं।

22. उल्टी गंगा बहाना = नियम के विपरीत कार्य करना।
पंजाब को दिल्ली से गेहूँ भेजना तो उल्टी गंगा बहाना हुआ।

23. उँगली उठाना = दोषारोपण करना।
पर्याप्त सबूत के बिना किसी पर उँगली उठाना तुम्हें शोभा नहीं देता।

24. कफन सिर पर बाँधना = मरने को तैयार रहना।
राजपूतों के लिए कहा जाता था कि वे कफन सिर पर बांधकर युद्ध-क्षेत्र में जाते थे।

25. कंठहार होना = बहुत प्रिय होना।
कांता तो अपने पति के लिए कंठ-हार बनी हुई है।

26. कलई खुलना = भेद खुल जाना।।
आखिरकार सेठ रामलाल के कालाबाजारी होने की कलई खुल ही गई।

27. कलेजे का टुकड़ा = बहुत प्रिय।
सभी बच्चे अपने माता-पिता के कलेजे का टुकड़ा होते

28. कटे पर नमक छिड़कना = दु:खी व्यक्ति को और दु:खी करना।
तुम्हें उस विधवा के कटे पर नमक छिड़कते शर्म आनी चाहिए।

29. कमर टूटना = हिम्मत टुट जाना।
जवान पुत्र की दुर्घटना में मृत्यु होने से रमाकांत जी की तो मानो कमर ही टूट गई है।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran मुहावरे-लोकोक्तियाँ

30. कान का कच्चा होना = चुगली पर ध्यान देने वाला।
हमारे अफसर ईमानदार होने के बावजूद कान के कच्चे

31. कान पर जूं न रेंगना = कुछ असर न होना।
राम को उसके पिता ने काफी समझाया, पर उसके कान पर तक न रेंगी।

32. कंगाली में आटा गीला होना = अभाव में अधिक हानि होना।
एक तो प्रदेश में पहले ही बाढ़ से स्थिति खराब थी, अब महामारी फैल गई। इसी को कंगाली में आटा गीला होना कहते हैं।

33. काम आना = वीरगति प्राप्त करना।
देश की सीमाओं पर रक्षा करते हुए कितने ही वीर काम आ गए।

34. खाला जी का घर होना = आसान काम।
आज के युग में सरकारी नौकरी पाना खाला जी का घर नहीं है।

35. खरी-खोटी कहना = बुरा भला कहना।
लड़ाई में सास-बहू ने एक-दूसरे को खूब खरी-खोटी सुनाई।

36. खून-पसीना एक करना = कठोर परिश्रम करना।
परीक्षा में अच्छे अंक पाने के लिए मैंने खून-पसीना एक कर दिया।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran मुहावरे-लोकोक्तियाँ

37. गाल बजाना = बहुत अधिक बोलना।
मधु की बातों पर ध्यान मत दो, उसे तो गाल बजाने का शौक है।

38. गागर में सागर भरना = थोड़े शब्दों में बहुत अधिक कहना।
बिहारीलाल ने अपने दोहों में गागर में सागर भर दिया है।

39. गड़े मुर्दे उखाड़ना = बीती बातों को छेड़ना।
गड़े मुर्दे उखाड़ने से अच्छा है कि भविष्य की सुध ली जाए।

40. गुदड़ी का लाल = देखने में सामान्य, भीतर से गुणी व्यक्ति।
लाल बहादुर शास्त्री वास्तव में गुदड़ी के लाल थे।

41. गुड़-गोबर होना = बात बिगड़ जाना।
सारा कार्यक्रम पूरी शानो-शौकत से चल रहा था कि अचानक बारिश आ जाने से सारा गुड़-गोबर हो गया।

42. घी के दीए जलाना = बहुत खुश होना।
विकलांग रमेश जब परीक्षा में प्रथम आया तो उसकी माँ ने घी के दीए जलाए।

43. घर सिर पर उठाना = बहुत शोर करना।
अरे बच्चो, शांत हो जाओ। घर सिर पर क्यों उठा रखा

44. घाट-घाट का पानी पीना = जगह-जगह का अनुभव
प्राप्त करना। तुम रतनलाल को इतनी आसानी से नहीं फंसा सकते, उसने घाट-घाट का पानी पी रखा है।

45. घोड़े बेचकर सोना = निश्चित होकर गहरी नींद सोना।
जब से कमल की परीक्षाएँ समाप्त हुई हैं, वह घोड़े बेचकर सो रहा है।

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46. घाव पर नमक छिड़कना = दु:खी को और सताना।
एक तो रमाकांत को पहले ही पुत्र के देहांत का शोक है, तुम ऊपर से ज्यादा पूछताछ करके क्यों उनके घाव पर नमक छिड़क रहे हो।

47. चेहरे पर हवाइयाँ उड़ना = डर जाना।
पुलिस द्वारा चारों तरफ से घेर लेने के कारण चोरों के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगीं।

48. चिकना घड़ा होना = जिस पर कुछ असर न हो।
रीना तो चिकना घड़ा हो गई है, माँ-बाप की बातों का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

49. चादर से बाहर पैर फैलाना = सामर्थ्य से अधिक खर्च
करना। सोच-समझकर ही खर्च करने में अक्लमंदी है क्योंकि चादर से बाहर पैर फैलाना ठीक नहीं।

50. चोली-दामन का साथ होना = घना संबंधा
परिश्रम और सफलता का तो चोली-दामन का साथ है।

51. छाती पर साँप लोटना = दूसरे की तरक्की देखकर जलना।
पड़ोसिन के पास सोने के जेवरात देखकर पूनम की छाती पर साँप लोटने लगे।

52. छठी का दूध याद आना = कठिनाई का अनुभव होना।
बिना परिश्रम के परीक्षा में बैठने से अनिल को छठी का दूध याद आ गया।

53. छाती पर मूंग दलना = बहुत तंग करना।
रामलाल के मेहमान साल भर उसकी छाती पर मूंग दलते रहते हैं।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran मुहावरे-लोकोक्तियाँ

54. छोटा मुँह बड़ी बात = अपनी सीमा से बढ़कर बोलना।
कमल तो छोटा मुँह बड़ी बात ही करता है, उसकी बातों का बुरा मत मानना।

55. जूती चाटना = खुशामद करना।
आज के युवा नौकरी पाने के लिए दूसरों की जूती चाटते फिरते हैं।

56. जान पर खेलना = जोखिम उठाना।
बच्चे को शेर से बचाने के लिए वह बहादुर नौजवान जान पर खेल गया।

57. टका सा जवाब देना = साफ इंकार करना।
मैंने कुछ दिनों के लिए विमल से साइकिल माँगी तो उसने टका सा जवाब दे दिया।

58. तूती बोलना = बहुत प्रभाव होना।
कृष्णकांत के समाज-सेवी होने की तृती सारे शहर में बोल रही है।

59. तिल धरने की जगह न होना = बहुत भीड़ होना।
आज की सभा में इतनी भीड़ थी कि तिल धरने की जगह भी नहीं थी।

60. दाँत काटी रोटी होना = पक्की दोस्ती होना।
रमेश और सुरेश के बीच दाँत काटी रोटी वाली बात है, कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran मुहावरे-लोकोक्तियाँ

61. दाँत खट्टे करना = बुरी तरह हराना।
हमारी सेना ने दुश्मन सेना के दाँत खट्टे कर दिए।

62. दाहिना हाथ होना = बहुत बड़ा सहायक होना।
पुलिस ने एक मुठभेड़ में उस कुख्यात अपराधी के दाहिने हाथ सुक्खा को मार गिराया।

63. दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति करना = अधिकाधिक उन्नति।
भगवान करे, तुम दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति करो।

64. धरती पर पाँव न पड़ना = अभिमान से भरा होना।
जब से रोता का पति प्रबंधक के पद पर नियुक्त हुआ है, तभी से उसके पाँव धरती पर नहीं पड रहे।

65. नमक हलाल होना = कृतज्ञ होना।
मुझे अपने मालिक के लिए यह कार्य करके उनका नमक हलाल बनना है।

66. निन्यानवे के फेर में पड़ना = रुपये की चिंता करते रहना।
तुम जब से निन्यानवे के फेर में पड़े हो, घर की तरफ से लापरवाह होते जा रहे हो।

67. नौ-दो ग्यारह होना = भाग जाना।
पुलिस को देखते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गया।

68. पर निकलना = स्वच्छदं हो जाना।
कॉलेज में दाखिला लेते ही सारिका के पर निकलने लगे हैं।

69. पहाड़ टूटना = बहुत भारी कष्ट आ जाना।
पिता की आकस्मिक मृत्यु से विमल पर तो मानो पहाड़ ही टूट पड़ा है।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran मुहावरे-लोकोक्तियाँ

70. पगड़ी उछालना = अपमानित करना।
बड़े-बूढ़ों की पगड़ी उछालना अच्छी बात नहीं है।

71, पाँव उखड़ जाना = स्थिर न रह पाना।
पुलिस की गोलियों की बौछार के आगे आतंकवादियों के पाँव जल्दी ही उखड़ गए।

72. पारा उतरना = क्रोध शांत होना।
जब तुम्हारा पारा उतरेगा, तभी तुम्हें अपनी गलती का अहसास होगा।

73. पानी-पानी हो जाना = अत्यंत लन्जित होना।
कक्षा में जब सरिता की कलई खुल गई तो वह पानी-पानी हो गई।

74. फूंक-फूंक कर कदम रखना = बड़ी सावधानी से काम करना।
जब से वीरेन्द्र ने अपने साझीदार से व्यापार में धोखा खाया है, वह हर कदम फूंक-फूंक कर रखता है।

75, फूला न समाना = बहुत प्रसन्न होना।
जब से भूपेश का नाम मैडिकल कालेज की प्रवेश-सूची में आया है, वह फूला नहीं समा रहा।

76. बाग-बाग होना = बहुत प्रसन्न होना।
रीता और कांता जब भी मिलती हैं, तो उनके दिल बाग-बाग हो जाते हैं।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran मुहावरे-लोकोक्तियाँ

77. बहती गंगा में हाथ धोना = अवसर का फायदा उठाना।
तुम भी क्यों नहीं बहती गंगा में हाथ धो लेते, आखिर तुम्हारा मित्र मंत्री जो बन गया है।

78. बाल बांका न होना = कुछ हानि न होना।
मेरे रहते कोई तुम्हारा बाल भी बांका नहीं कर पाएगा।

79. मुंह की खाना = सबके सामने पराजित होना।
औरंगजेब ने कई बार शिवाजी पर चढ़ाई की, पर सदा मुँह की खाई।

80. मुंह में पानी भर आना = जी ललचाना।
विवाह में अनेकों प्रकार के व्यंजन देखकर बारातियों के मुँह में पानी भर आया।

81. मुट्ठी गरम करना = रिश्वत देना।
कचहरी में काम करवाने के लिए मुझे क्लों की मुट्ठी गरम करनी पड़ी।

82. लहू का चूंट पीकर रह जाना = अपमान सहन कर लेना।
द्रौपदी का अपमान होते देखकर भीम लहू का यूंट पीकर रह गया।

83. लकीर का फकीर होना = रूढ़िवादी होना।
श्यामलाल तो लकीर का फकीर है, बेटी के विवाह में सारी पुरानी रस्में निभाएगा।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran मुहावरे-लोकोक्तियाँ

84. लाल-पीला होना = क्रोध करना।
परीक्षा में बेटे की असफलता से पिताजी लाल-पीले होने लगे।

85. सोने पर सुहागा होना = अच्छी चीज का और अच्छा होना।
साधना सुंदर होने के साथ-साथ गुणवती भी है, सोने पर सुहागा है।

86. हाथ मलना = पछताना।
अवसर का फायदा उठाने में ही समझदारी है वरना बाद में हाथ मलते रह जाओगे।

87. हथेली पर सरसों उगाना = असंभव काम को संभव करना।
हिम्मती लोगों के लिए हथेली पर सरसों उगाना बाएं हाथ का काम है।

88. हवाई किले बनाना = काल्पनिक इरादे प्रकट करना।
हवाई किले बनाने से जीवन में सफलता नहीं मिलती, कुछ ठोस काम करके दिखाओ।

89. हवा लगना = शोक लगना।
सीधे-सादे सुनील को भी कॉलेज पहुँचते ही वहाँ की हवा लग गई।

90. हुक्का-पानी बंद करना = मेल-जोल या व्यवहार बंद करना।
गलत आचरण के कारण समाज ने विनोद का हुक्का-पानी बंद कर दिया।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran मुहावरे-लोकोक्तियाँ

लोकोक्तियाँ

1. अंत भला सो भला = अच्छे काम का अंत अच्छा ही
होता है। मनोज तुम्हें कितना भी परेशान करे मगर तुम उसका काम कर दो। अंत भला सो भला।

2. अधजल गगरी छलकत जाए = ओछा मनुष्य दिखावा अधिक करता है।
अनिल ने थोड़ा बहुत कंप्यूटर चलाना क्या सीख लिया, स्वयं को इंजीनियर मानने लगा है – अधजल गगरी छलकत जाए।

3. अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग = सब की अलग-अलग राय होना।
यहाँ अनेक विरोधी दल हैं कोई किसी की बात का समर्थन नहीं करता – सब की अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग जो ठहरा।

4. अंधा क्या चाहे दो आंखें = मुंहमांगी वस्तु मिलना।
रामपाल को पढ़ाई में परेशानी हो रही थी, एक दिन एक अध्यापक उसके किराएदार के रूप में आ गया। बस अंधा क्या चाहे दो आंखें।

5. अब पछताए क्या होत जब चिड़ियां चुग गई खेत = नुकसान होने के बाद पछताने से क्या लाभा।
पूरे साल तो पढ़ाई की बजाय आवारागर्दी की और अब फेल होने पर रोते हो, अब पछताए क्या होत है जब चिड़ियाँ चुग गई खेत।

6. अंधा क्या जाने बसंत की बहार = अनभिज्ञ आदमी को आनंद नहीं मिल सकता।
अजय को कामायनी में क्या दिलचस्पी होगी क्योंकि वह तो पांचवी पास है, अंधा क्या जाने बसंत की बहार।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran मुहावरे-लोकोक्तियाँ

7. आम के आम गुठलियों के दाम = दुगुना लाभ।
मैंने जितने में पुस्तक खरीदी थी, उतने ही मूल्य में साल भर पढ़ने के बाद बेच दी। इसी को कहते हैं – आम के आम गुठलियों के दाम।

8. आँख के अंधे नाम नैनसुख = काम के प्रतिकूल नाम होना।
नाम तो तुम्हारा सर्वप्रिय है मगर सबसे लड़ते रहे हो। तुम्हारे लिए ठीक ही कहा गया है – आँख के अंधे नाम नैनसुख।

9. आगे कुआँ पीछे खाई = दोनों ओर मुसीबत।
अगर दोस्त की मदद करता हूं तो पत्नी नाराज होती है और अगर नहीं करता तो दोस्त नाराज होता है। मेरे लिए तो आगे कुऔं पीछे खाई है।

10. आधा तीतर, आधा बटेर = बेमेल वस्तुओं का एक साथ होना।
अरे ! ये क्या फैशन है, धोती कुर्ते के साथ हैट-बूट। लगता है, आधा तीतर, आधा बटेर।

11. आ बैल मुझे मार = जान-बूझकर मुसीबत मोल लेना।
पहले तो सभी को बुला लिया, अब खर्चे का रोना रोते हो। सच है – आ बैल मुझे मार।।

12. आग लगने पर कुआँ खोदना = मुसीबत पूरी तरह से
आ जाने पर बचाव के उपाय करना। पूरे साल तो बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया और जब परीक्षा सिर पर है तो अध्यापक से ट्यूशन के लिए कहते हो। आग लगने पर कुआँ खोदते हो।

13. आँख के अंधे, गाँठ के पूरे = मूर्ख परन्तु धनी।
राजकुमार जी तो पूरी तरह से इस कहावत को चरितार्थ करते हैं कि आँख के अंधे, गाँठ के पूरे।

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14. उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे = दोषी व्यक्ति ही निदोष को डाटने लगे।
एक तो मेरे रुपये लौटाते नहीं हो और ऊपर से पुलिस को बुलाने की धमकी देते हो। यह भी खूब रही उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे।

15. ऊँची दुकान फीका पकवान = दिखावा अधिक, पर भीतर से खोखला।
सेठ रामदयाल की दानवीरता के चर्चे सुनकर हम अपनी संस्था के लिए चंदा माँगने गए तो उन्होंने मात्र पांच रुपये में टरका दिया। सच है – ऊँची दुकान फीका पकवान।

16. एक अनार सौ बीमार = चीज कम, पर चाहने वाले अधिक।
गाँव भर में डॉक्टर एक है और मरीज हर घर में। एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति है।

17. एक पंथ दो काज = एक ही उपाय से दो लाभा
ऑफिस के काम से कानपुर जा रहा हूँ, वहाँ बड़े भाई साहब से भी मिल लूँगा – एक पंथ दो काज हो जाएंगे।

18, ओस चाटे प्यास नहीं बुझती = बड़े काम के लिए विशेष
प्रयत्न की आवश्यकता होती है। कारखाना लगाना चाहते हो और वह भी चार-पाँच हजार रुपयों में, ओस चाटे प्यास नहीं बुझती।

19. ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डर = कठिन काम को करने में कष्ट सहने पड़ते हैं।
जब तुमने समाज-सेवा करने की ठान ही ली है तो छोटे-मोटे कष्टों से क्या घबराना, जब ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डर।

20. कंगाली में आटा गीला = एक कष्ट पर दूसरा कष्ट।
एक तो बेरोजगारी से मैं वैसे ही परेशान था, उस पर चोरी ने मेरे लिए तो कंगाली में आटा गीला करने वाली बात कर

21. का वर्षा जब कृषि सुखाने = अवसर बीत जाने पर सहायता व्यर्थ है।
जब मुझे रुपयों की आवश्यकता थी तब आपने दिए नहीं, अब मैं इन रुपयों का क्या करूँ ? का वर्षा जब कृषि सुखाने।

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22. काठ की हाँडी बार-बार नहीं चढ़ती = बेईमानी बार-बार नहीं फलती।
मसालों में मिलावट करके रतनलाल कई बार ग्राहकों को ठग चुका था, अब की बार रंगे हाथों पकड़ा गया। आखिर काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती।

23. कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली = दो व्यक्तियों की प्रतिष्ठा में जमीन-आसमान का अंतर।
मात्र दो कहानियाँ लिखकर अपनी तुलना प्रेमचंद से करते हो = अरे, कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगू तेली।

24. खग ही जाने खग की भाषा = साथी ही साधी का स्वभाव जानता है।
मेरी अपेक्षा तुम ही भूपेश से बात करो, वह तुम्हारा दोस्त भी है। ठीक है न, खग ही जाने खग की भाषा।

25. खोदा पहाड़ी निकली चुहिया = अधिक मेहनत करने पर कम फल मिलना।
सारा दिन मेहनत करने पर मजदुरी मात्र दस रुपये मिली. सोचा था कि बीस मिलेंगे। यह तो वही हुआ खोदा पहाड़ निकली चुहिया।

26. गंगा गए गंगादास, जमुना गए जमुनादास = अवसरवादी होना।
तुम्हारी बात पर कैसे विश्वास किया जाए, तुम एक बात पर तो टिकते नहीं। तुम्हारे लिए ही किसी ने कहा है – गंगा गए गंगादास, जमुना गए जमुनादास।

27. घर की मुर्गी दाल बराबर = घर की चीज की कद्र नहीं होती।
तुम्हारे बड़े भाई साहब खुद एक वकील हैं और तुम सलाह लेने दूसरों के पास जाते हो। यह तो वही बात हुई घर की मुर्गी दाल बराबर।

28. चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए = बहुत कंजूस होना।
मोहनलाल एक सप्ताह से बीमार है, पर खर्चे के कारण डॉक्टर को नहीं बुलाना चाहता। उसके लिए तो चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए वाली बात होती है।

29. दाल-भात में मूसरचंद = हर बात में टांग अड़ाने वाला।
हम अपना झगड़ा खुद सुलझा रहे थे कि कमल ने बीच में आकर दाल-भात में मूसरचन्द वाली बात कर दी।

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30. दुविधा में दोनों गए, माया मिली न राम = संशय के कारण दोनों तरफ से हानि।
बेटे को या तो दुकान पर बिठा लो या पढ़ाई पूरी करने दो, वरना उसकी हालत भी ‘दुविधा में दोनों गए, माया मिली न राम’ वाली हो जाएगी।

31. नौ नकद न तेरह उधार = काफी उधार देने के स्थान पर थोड़ा नकद अच्छा है।
अगले महीने तीन हजार देने के वायदे से अच्छा है कि अभी दो हजार दे दो, नौ नकद न तेरह उधार।

32. न रहेगा बाँस, न बजेगी बाँसुरी = झगड़े की जड़ ही नष्ट कर देना।
अगर दोनों परिवारों के बीच झगड़ा इस पेड़ को ही लेकर है तो इसे काट डालो या बेच दो, न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी।

33. बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद = अयोग्य को किसी गुणवान की पहचान नहीं होती।
तुमने कभी कश्मीर के सेब खाए हैं जो उन्हें खट्टा बता रहे हो – बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद।

34. भागते चोर की लंगोटी भली = सब कुछ नष्ट होता देख, कुछ बचा लेना अच्छा है।
किरायेदार एक साल का किराया दिए बिना ही भाग गया, मगर गिरवी पड़े जेवर छोड़ गया। मैंने सोचा-भागते चोर की लंगोटी भली।

35. साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे = ऐसी युक्ति, जिससे काम भी बन जाए और हानि भी न हो।
उस पहलवान से सीधे क्यों लड़ते हो, कोई ऐसी युक्ति निकालो कि पॉप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।

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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran विराम-चिह्न

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Viram-Chinh विराम-चिह्न Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran विराम-चिह्न

‘विराम’ शब्द का अर्थ है – रुकना या ठहरना। चलते-चलते या काम करते हुए व्यक्ति थोड़ा आराम करना चाहता है। इसी प्रकार लिखते समय लेखक अपने विचारों एवं भावों को सरल और सुबोध बनाने के लिए जहाँ कहीं रुकता है, वहीं विराम-चिह्न का प्रयोग करता है। इससे वाक्य-विन्यास और भावों की अभिव्यक्ति में स्पष्टता आ जाती है और सौंदर्य भी बढ़ जाता है।

नीचे दिए वाक्य पड़िए:
1. रोको मत जाने दो।
2. रोको, मत जाने दो।
3. रोको मत, जाने दो।
पहले वाक्य में अर्थ स्पष्ट नहीं होता। दूसरे और तीसरे वाक्य में अर्थ तो स्पष्ट है पर अल्प विराम की स्थिति के कारण अर्थ एक-दूसरे से उलट है।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran विराम-चिह्न

हिन्दी में प्रमुख विराम-चिह्न निम्नलिखित हैं :
1. पूर्ण विराम (Full Stop) [।]
2. अल्प विराम (Comma) [,]
3. अर्थ विराम (Semi Colon) [:]
4. प्रश्नसूचक (Question Mark) [?]
5. विस्मयादिबोधक (Sign of Erclamation) [!]
6. अवतरण या उद्धरण चिह्न (Inverted Commas) [” “]
7. योजक (Hyphen) [-]
8. निर्देशक (Dash) [_]
9. कोष्ठक (Bracket) [()]
10. हंसपद (Sign of left out) [^]

इनमें से कुछ विराम-चिह्न वाक्य के अंत में लगते हैं और कुछ वाक्य के बीच में।
1. पूर्ण विराम (1) (Full Stop) : सामान्य कथन वाले सभी प्रकार के वाक्यों – सरल, संयुक्त और मिश्र वाक्य के अंत में पूर्ण विराम लगाया जाता है, जैसे
(क) आओ।
(ख) राम अच्छां लड़का है।
(ग) उसने कहा कि राम कल आ जाएगा।
(घ) प्रात:काल होगा और चिड़िया चहचहा उठेंगी।

2. अल्प विराम (,)(Comma) : अल्प विराम वाक्य के बीच में लगाया जाता है। इसके विभिन्न प्रयोग देखिए :
(क) दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता और चेन्नई भारत के महानगर हैं।
(ख) कश्मीर की झीलें, बरफ से ढकी चोटियाँ, उद्यान और वहाँ के सीधे-सादे लोग पर्यटकों को आकृष्ट करते हैं।
(ग) हाँ, तुम ठीक कहते हो।
(घ) नहीं, वह ऐसा नहीं कर सकता।
(छ) 15 अगस्त, 1947 को देश स्वतंत्र हुआ।
(च) महोदय, पूज्य पिताजी।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran विराम-चिह्न

3. अर्थ विराम (;)(Semi Colon) : पूर्ण विराम से कम देर रुकने के लिए अर्ध विराम का प्रयोग होता है। इसका प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में होता है:
(क) अब खूब परिश्रम करो ; परीक्षा सिर पर आ गई है।
(ख) मुझे बाजार से कपड़े, जूते, मोजे ; किताबें, कापियाँ ; कुछ मसाले खरीदने हैं।

4. प्रश्नसूचक चिह्न (?) (Sign of Interrogatiion) : प्रश्नसूचक चिह्न का प्रयोग प्रश्नवाचक वाक्यों के अंत में किया जाता है,
जैसे- तुम्हारा क्या नाम है?

5. विस्मयादिबोधक या संबोधन घिन (!)(Sign of Exclamation) : हर्ष, विषाद, घृणा, आश्चर्य, भय, प्रार्थना आदि सूचक पदों, पदबंधों, उपवाक्यों के अंत में इसे लगाया जाता है, जैसे-
(क) आह ! उसे कितनी पीड़ा हो रही है।
(ख) इतनी लंबी दीवार !
(ग) कैसा सुंदर दृश्य है!
(घ) साथियो ! अब बलिदान का समय आ गया है।

6. अवतरण या उद्धरण चिह्न (“..”) (Inverted Commas): अवतरण चिह्न के दो रूप हैं-
इकहरा (‘….’) और दुहरा (….”)। दोनों के प्रयोग की स्थिति देखिए :
इकहरे अवतरण चिह्न (……) का प्रयोग
1. सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’।
2. इस कवि की रचना ‘परिमल’ लोकप्रिय है।
3. ‘नंदन’ बच्चों की पत्रिका है।
4. इस बालक पर यह कहावत लागू होती है-‘होनहार बिरवान के होत चीकने पात’।
दुहरे अवतरण चिह्न (“…”) का प्रयोग- गाँधी जी ने कहा, “सत्य ही ईश्वर है।”

7. योजक चिह्न (-) (Hyphen) : इस चिह्न का प्रयोग सामासिक पदों या पुनरुक्त और युग्म शब्दों के मध्य किया जाता है,
जैसे- भारत-रत्न, सुख-दुख, घर-घर, देश-विदेश।

8. निर्देशक चिह्न (_)(Dash) : यह चिह्न योजक से थोड़ा बड़ा होता है। इसका प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में होता
(क) तुलसीदास का कथन है-“राम की महिमा अपार है।”
(ख) राम ने कहा -“लक्ष्मण, मेरा धनुष-बाण लाओ।”
(ग) उसकी किसी से नहीं बनती-न मित्रों से, न कर्मचारियों से और न घर के लोगों से।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran विराम-चिह्न

9. कोष्ठक () (Bracket) : कोष्ठक का प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में होता है:
(क) दिशाएँ चार होती हैं-
(1) पूर्व
(2) पश्चिम
(3) उत्तर
(4) दक्षिण।

(ख) संज्ञा के तीन भेद हैं-
(क) व्यक्तिवाचक
(ख) जातिवाचक
(ग) भाववाचक।
(ग) भरत (दशरथ के पुत्र) महा तपस्वी थे।

10. हंसपद (त्रुटिपूरक) (^) (Sign of left out) : लिखते समय जब कोई अंश छूट जाता है तब उसके लिए इस चिह्न का प्रयोग करके छूटा अंश ऊपर लिख दिया जाता है, जैसे
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran विराम-चिह्न-1

अभ्यास

1. निम्नलिखित वाक्यों में उचित स्थान पर सही विराम-चिह्न का प्रयोग कीजिए :
1. कौन गा रहा है
2. सभी एक साथ चिल्ला उठे हम भी चलेंगे
3. विशेषण के चार भेद हैं गुणवाचक संख्यावाचक परिमाणवाचक संकेतवाचक
4. सूरदास की प्रसिद्ध रचना सूरसागर है।
5. जीवन क्या है सोचता हूँ तो एक ही उत्तर मिलता है युद्ध

2. विराम चिह्न लिखो-संबोधन, अल्प विराम, हंसपद, योजक चिह्न।

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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran पद-परिचय

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Pad Parichay पद-परिचय Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran पद-परिचय

शब्द और पद का अंतर आप पहले. ही समझ चुके हैं। ‘शब्द’ भाषा की अर्थवान स्वतंत्र इकाई है, तो वाक्य में प्रयुक्त शब्द पद हैं। वाक्य में प्रयुक्त शब्दों को पद कहते हैं।
इन शब्दों का व्याकरणिक परिचय पद-परिचय कहलाता है। पद-परिचय बताने के लिए शब्दों के भेद, उपभेद, लिंग, वचन, कारक आदि का परिचय देना आवश्यक है।
पद-परिचय के लिए आवश्यक संकेत-तालिका :

पद का नामबताई जाने वाली बातें
संज्ञासंज्ञा के भेद, लिंग, वचन, कारक, क्रिया के साथ संबंधा
सर्वनामसर्वनाम का भेद, पुरुष, लिंग, वचन, कारक, क्रिया के साथ संबंध।
विशेषणविशेषण का भेद, लिंग, वचन, विशेष्य का निर्देश।
क्रियाक्रिया का भेद (अकर्मक-सकर्मक) लिंग, वचन, पुरुष, धातु, काल, वाच्य, प्रयोग, कर्ता और कर्म का संकेत
क्रिया-विशेषणक्रिया-विशेषण का भेद, जिस क्रिया की विशेषता बताई जा रही है उसका निर्देश।
समुच्चयबोधकभेद (संयोजक-विकल्पक), किन पदों या वाक्यों को मिला रहा है, निर्देश।
संबंधबोधकभेद, जिससे संबंध दर्शा रहा है उसका निर्देश।
विस्मयादिबोधककिस भाव (विस्मय, हर्ष, शोक, घृणा, भय, क्रोध आदि) को प्रकट कर रहा है, निर्देश।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran पद-परिचय

उपर्युक्त दिशा-निर्देश के आधार पर पद-परिचय के कुछ उदाहरण प्रस्तुत हैं :
1. सोहन यहाँ दसवीं कक्षा में पढ़ता था।
सोहन : व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक, ‘पढ़ता था’ क्रिया का कर्ता।
यहाँ : स्थानवाचक क्रिया-विशेषण, ‘पढ़ता था’ क्रिया के स्थान का निर्देश।
दसवीं : संख्यावाचक विशेषण, क्रमसूचक, स्त्रीलिंग, एकवचन, ‘कक्षा’ विशेष्य का विशेषण।
कक्षा में : जातिवाचक संज्ञा (समूहवाचक), स्त्रीलिंग, एकवचन, अधिकरण कारक (‘म कारक चिह्न) ‘पढ़ना’ क्रिया से संबद्ध।
पढ़ता था : अकर्मक क्रिया, ‘पढ़’ धातु, पुल्लिग, एकवचन, अन्य पुरुष, निश्चयार्थ, कर्तृवाच्य, कर्तरि प्रयोग (कर्ता-सोहन)।

2. सचिन यहाँ दूसरे बंगले में रहता था।
सचिन : व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक, ‘रहना’ क्रिया का कर्ता!
यहाँ : क्रिया-विशेषण (स्थानवाचक), ‘रहना’ क्रिया के स्थान का द्योतका
दूसरे : संख्यावाचक विशेषण (क्रमसूचक), पुल्लिंग, एकवचन, विशेष्य-बंगला।
बंगले में : जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिग, एकवचन, अधिकरण कारक (में-कारक-चिह्न)
रहता था : क्रिया (अकर्मक) ‘रह’ धातु, एकवचन, अन्य पुरुष, भूतकाल, कर्तृवाच्य, कर्तरि प्रयोग (क्रिया का कर्ता – सचिन)

3. हम बाग में गए, परंतु वहाँ कोई आम नहीं मिला।
हम : पुरुषवाचक सर्वनाम (उत्तम पुरुष), पुल्लिग, बहुवचन, कर्ताकारक, ‘गए’ क्रिया का कर्ता।
बाग में : जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिग, एकवचन, अधिकरण कारक (‘में” कारक-चिहन)
गए : अकर्मक क्रिया, ‘जा’ धातु, उत्तम पुरुष, पुल्लिग, बहुवचन, भूतकाल, निश्चयार्थ, कर्तृवाच्य, कर्तरि प्रयोग, ‘हम’ सर्वनाम इसका कर्ता है।
परंतु : व्यधिकरण समुच्चयबोधक (अव्यय), दो वाक्यों को जोड़ता है।
वहाँ : स्थानवाचक क्रिया विशेषण।
कोई : संख्यावाचक विशेषण (अनिश्चित संख्यावाचक), पुल्लिग, एकवचन, ‘आम’ विशेष्य का विशेषण।
आम : जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्म कारक।
नहीं : अव्यय, रीतिवाचक क्रिया-विशेषण (निषेध वाचक), ‘मिला’ क्रिया की रीति।
मिला : सकर्मक क्रिया (आम-कम), ‘मिल’ धातु, अन्य पुरुष, पुल्लिग, एकवचन, भूतकाल, निश्चयार्थ, कर्तृवाच्य, कमरि प्रयोग।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran पद-परिचय

4. आह ! उपवन में सुंदर फूल खिले हैं।
आह : अव्यय, विस्मयादिबोधक, हर्षसूचका
उपवन में : जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, अधिकरण कारक (में परसग)।
सुंदर : गुणवाचक विशेषण (गुणबांधक), पुल्लिग, बहुवचन, एकवचन, ‘फूल’-विशेष्य।
खिले हैं : अकर्मक क्रिया, बहुवचन, पुल्लिग, कर्तृवाच्य, कर्तरि प्रयोग।
फूल : जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, बहुवचन, कर्ता कारक, ‘खिले हैं’-क्रिया का कर्ता।

5. मैं रोज सवेरे धीरे-धीरे चलता हूँ।
मैं : पुरुषवाचक सर्वनाम (उत्तम पुरुष), पुल्लिग, एकवचन, कर्ता कारक, ‘चलता हूँ’ क्रिया का कर्ता।
रोज सवेरेः क्रिया-विशेषण (कालवाचक), ‘चलता हूँ’ क्रिया का काल बताता है।
धीरे-धीरे : अव्यय, रीतिवाचक क्रिया-विशेषण, ‘चलता हूँ’ क्रिया की रीति बताता है।
चलता हूँ : अकर्मक क्रिया, सामान्य वर्तमान काल, पुल्लिंग, एकवचन, ‘मैं’ कर्ता की क्रिया।

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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाच्या

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Vachya वाच्या Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran वाच्या

हम जब कभी भाषा का प्रयोग करते हैं तब हमारे पास कुछ कथ्य अर्थात् कही जाने वाली बात अवश्य होती है। हर वाक्य में कथ्य का कोई-न-कोई बिंदु अवश्य होता है, जिसे वक्ता कुछ प्रधानता से स्पष्ट करना चाहता है। वाच्य (शाब्दिक अर्थ-बोलने का विषय) की भूमिका यहीं आती है। “वाच्य इस बात का संकेत देता है कि वक्ता इस वाक्य में किस कथ्यबिंदु को प्रध निता दे रहा है।”
उदाहरणार्थ :
‘स्वाति पढ़ रही है।’ – इस वाक्य से स्पष्ट होता है कि कथ्यबिंदु ‘स्वाति’ के विषय में कुछ बोला जा रहा है।
इसी प्रकार : ‘गिलास टूट गया’ – वाक्य में कथ्यबिंदु ‘गिलास’ है।
इस प्रकार वाक्य में वाच्य यह बताता है कि वाक्य में स्थित कर्ता, कर्म या क्रिया – इनमें से किसे वक्ता ने कथ्यबिंदु बनाया है तथा प्रधानता दी है।

क्रिया के जिस रूप से यह जाना जाए कि क्रिया का मुख्य विषय कर्ता है, कर्म है अथवा भाव है, उसे वाच्य’ कहते हैं।

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वाच्य के भेद (Kinds of Voice) :
चूँकि वाच्य कर्ता या कर्म या क्रिया के भाव के संबंध में ही बताता है इसलिए वाच्य के तीन भेद होते हैं :
1. कर्तृवाच्य (Active Voice)
2. कर्मवाच्य (Passive Voice)
3. भाववाच्य (Impersonal Voice)
आइए, अब हम इनके बारे में सोदाहरण जानकारी प्राप्त करें।

1. कर्तृवाच्य (Active Voice) : जहाँ वाच्य-केन्द्र अर्थात् वक्ता का कथ्यबिंदु कर्ता हो, वहाँ कर्तृवाच्य होता है।
जैसे- बच्चे खेल रहे हैं।
राकेश ने पढ़ ली है।
कविता गाना गाएगी।
[इन तीनों वाक्यों में बच्चे, राकेश और कविता-कर्ता है और वाक्य का केंद्र बिंदु हैं। अतः ये कर्तृवाच्य वाक्य हैं।]

2. कर्मवाच्य (Passive Voice) : जहाँ वाच्य केंद्र अर्थात् वक्ता का कथ्य-बिंदु कर्म हो, वहाँ कर्मवाच्य होता है।
जैसे- राम से रोटी खाई गई।
दवाई दे दी गई है।
सोनिया से गीत गाया गया।
[इन तीनों वाक्यों में क्रमशः रोटी, दवाई और गीत कम है। ये ही अपने-अपने वाक्यों में केंद्र बिंदु भी हैं। अतः ये कर्मवाच्य वाक्य है।]

3. भाववाच्य (Impersonal Voice) : जहाँ वाच्य-केंद्र अर्थात् वक्ता का कथ्यबिंदु क्रिया हो, वहाँ भाववाच्य होता है। इसमें कर्ता या कर्म की प्रधानता न होकर क्रिया का भाव ही प्रध न होता है।
जैसे-
मुझसे अब चला नहीं जाता।
गरमियों में खूब नहाया जाता है।
[इन वाक्यों में ‘चला’ और ‘नहाया’ क्रियाएँ ही प्रमुख हैं। अतः ये भाववाच्य के उदाहरण हैं।]

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाच्या

वाच्य परिवर्तन (Change of Voice)
1. कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाने की विधि :
1. कर्मवाच्य में कर्ता को प्रधानता नहीं दी जाती है, अतएव उसे गौण स्थान मिलता है। यह गौणता दो प्रकार से हो सकती है:
(क) कर्ता को करण या माध्यम के रूप में से, के द्वारा, द्वारा आदि लगाकर व्यक्त किया जाए।
जैसे- राम के द्वारा पत्र पढ़ा गया।

(ख) कर्ता का लोप ही कर दिया जाए।
जैसे- ‘पतंग उड़ रही है। इसमें पतंग के उड़ाने वाले (कता) का उल्लेख ही नहीं है।

2 कर्मवाच्य बनाते समय संयोजी क्रिया जाना का (पुरुष, लिंग, वचन के अनुसार) प्रयोग किया जाता है।
जैसे- दूध पिया जा रहा है।

3. कर्तृवाच्य की मुख्य क्रिया को सामान्य भूतकाल में परिवर्तित कर दिया जाता है।
4. यदि कर्म के साथ कोई विभक्ति चिह्न लगा हो तो उसे हटा दिया जाता है।
उदाहरण:

कर्तृवाच्यकर्मवाच्य
1. मोहन शिकार करता है।मोहन के द्वारा शिकार किया जाता है।
2. मैंने पत्र लिखा।मेरे द्वारा पत्र लिखा गया।
3. प्रधानमंत्री ने इस भवन का उद्घाटन किया।तरुण द्वारा दूध पिया जाएगा।
4. तरुण दूध पीएगा।रमेश से चाय पी जा रही है।
5. रमेश चाय पी रहा है।कर्मवाच्य

2. कर्तृवाच्य से भाववाच्य बनाने की विधि :
भाववाच्य में कर्म होता ही नहीं है। मूल कर्ता की दो स्थितियाँ होती हैं :
1. उसके आगे ‘से’ लगता है।
2. उसका उल्लेख ही नहीं होता।
जैसे – मैं अब चल नहीं सकता → मुझसे अब चला नहीं जाता।

ध्यान दें : भाववाच्य में क्रिया सम एकवचन, पुल्लिग, अकर्मक तथा अन्य पुरुष में रहती है।
उदाहरण:

कर्तृवाच्यकर्मवाच्य
1. हम इतना कष्ट नहीं सह सकते।हमसे इतना कष्ट नहीं सहा जाता।
2. मैं खड़ा नहीं हो सकता।मुझसे खड़ा नहीं हुआ जाता।
3. आओ, अब चलें।आओ, अब चला जाए।

हिंदी में वाच्यों का प्रयोग :
हिंदी में प्रायः कर्तृवाच्य का प्रयोग होता है। जिन परिस्थितियों में कर्मवाच्य और भाववाच्य का प्रयोग होता है, वे इस प्रकार हैं:
कर्मवाच्य के प्रयोग-स्थल :
1. जब आपको स्वयं पता न हो कि निश्चित रूप से कर्ता कौन है या आपको पता तो हो, पर भयवश, संकोचवश या अन्यथा बताना नहीं चाहते।
जैसे- लैटरबक्स में चिट्ठी डाल दी गई है।
उसकी घड़ी मेज़ पर से चुरा ली गई है।

2. जब आपने स्वयं किया है, किंतु वह अचानक बिना आपके चाहे हुआ हो, जैसे-
शीशा गिर गया और टूट गया।
शीशे का गिलास छूट गया।

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3. जब कर्ता कोई स्वतंत्र रूप से व्यक्ति न हो बल्कि कोई व्यवस्था या तंत्र हो, जैसे-
सरकार द्वारा गरीबों के लिए बहुत काम किया जा रहा है। आपको सूचित किया जाता है कि ……………

4. सूचना, विज्ञप्ति आदि में जहाँ कर्ता निश्चित न हो, जैसे-
लाल बत्ती पार करने वालों को सज़ा दी जाएगी।

5. अधिकार, दर्प या गर्व जताने के लिए, जैसे-
अपराधी को पेश किया जाए।

6. कानूनी या कार्यालयी भाषा में, जैसे-
एक माह का अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है।

7. असमर्थता जताने के लिए, जैसे –
अब अधिक दूध नहीं पिया जाता।

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भाववाच्य के प्रयोग-स्थल :
1. प्राय: असमर्थता या विवशता प्रकट करने के लिए नहीं के साथ भाववाच्य का प्रयोग होता है।
जैसे-
अब खड़ा नहीं हुआ जाता।
अब मुझसे बैठा नहीं जाता।

2. जब ‘नहीं’ का प्रयोग नहीं होता, तो मूल कर्ता जन-सामान्य होता है।
जैसे-
गरमियों में छत पर सोया जाता है।

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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य-रचना की अशुद्धियाँ

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Vakya-Rachana ki Ashudhiyan वाक्य-रचना की अशुद्धियाँ Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य-रचना की अशुद्धियाँ

वाक्य-रचना की अशुद्धधियाँ निम्नलिखित प्रकार की हो सकती हैं :

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य-रचना की अशुद्धियाँ

अशुद्धशुद्ध
1. हमारा लक्ष्य देश की चहुमुखी प्रगति होनी चाहिए।हमारा लक्ष्य देश की चहुंमुखी प्रगति होना चाहिए।
2. क्या आप पढ़ लिए हैं?क्या आपने पड़ लिया है?
3. क्या आप आ सकोगे?क्या आप आ सकेंग?
4. प्रधानाचार्य अध्यापक को बुलाए।प्रधानाचार्य ने अध्यापक को बुलाया।
5. सुरेश को योगेश को और मोहन को कल मैंने साथ-साथ देखा था।मैंने सुरेश, योगेश और मोहन को कल साथसाथ देखा था।
6. यहाँ पर कल एक लड़का और लड़की बैठी थी।यहाँ पर कल एक लड़का और लड़की बैठे थे।
7. तुम मेरे मित्र हो मैं आपको भली-भाँति जानता हूँ।तुम मेरे मित्र हो मैं तुम्हें भली-भाँति जानता हूँ।
8 उत्तम चरित्र-निर्माण हमारे लक्ष्य होने चाहिए।उत्तम चरित्र-निर्माण हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
9. सावित्री जो सत्यवान की पत्नी थी, वह एक पतिव्रता नारी थी।सत्यवान की पत्नी सावित्री एक पतिव्रता नारी थी।
10. महात्मा गांधी का देश सदा आभारी रहेगा।देश महात्मा गांधी का सदा आभारी रहेगा।
11. केवल यहाँ दो पुस्तकें रखी हैं।यहाँ केवल दो पुस्तकें रखी हैं।
12. खरगोश को काटकर गाजर खिलाओ।गाजर काटकर खरगोश को खिलाओ।
13. हमारे बैल इधर-उधर भटकते हुए पड़ोसियों के खेत में जा पहुंचे।इधर-उधर भटकते हुए हमारे बैल पड़ोसियों के खेत में जा पहुंचे।
14. एक फूलों की माला ले आइए।फूलों की एक माला ले आइए।
15. पुस्तकें ये किसकी हैं ?ये पुस्तकें किसकी हैं?
16. प्रस्तुत पंक्तिया सरोज स्मृति से ली हैं।प्रस्तुत पंक्तियाँ सरोज स्मृति से ली गई हैं।
17. प्रयोग के आधार पर हिंदी शब्दों को दो भागों में विभक्त किया है।प्रयोग के आधार पर हिंदी शब्दों को दो भागों में विभक्त किया गया है।
18. अध्यापक से हिंदी पढ़ाई है।अध्यापक से हिंदी पड़ी है।
19. पुलिस ने डाकुओं का पीछा किया गया।पुलिस के द्वारा डाकुओं का पीछा किया गया।
20. अध्यापक ने हमसे लेख लिखाया।अध्यापक ने हमसे लेख लिखवाया।
21. डाकुओं ने चौकी लूटी गई।डाकुओं द्वारा चौकी लूटी गई।
22. मैं आम खाया गया।मुझसे आम खाया गया।
23. अध्यापक ने कहा गया कि कल सभी छात्र पुस्तकें न लाओ।अध्यापक दवारा कहा गया कि कल सभी छात्र पुस्तकें न लाएँ।
24. हन ने घर गया और सोया।मोहन घर गया और सो गया।
25. सभा में क्रोध प्रकट किया गया।सभा में रोष प्रकट किया गया।
26. पिछले वर्ष यहाँ भूख की भारी घटनाएँ हुईं।पिछले वर्ष यहाँ भुखमरी की भारी घटनाएँ हुईं।
27. जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कथा चरितार्थ होती है।जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत चरितार्थ होती है।
28. विष्णु पद में चंद्रमा को देखो।आकाश में चंद्रमा को देखो।
29. उनका मूड़ काट दिया।उसका सिर काट दिया।
30. मकान गिर जाने का संदेह है।मकान गिर जाने का डर है।
31. मैंने उसे एक पुस्तक समर्पण की।मैंने उसे एक पुस्तक समर्पित की।
32. मैंने ऐसा करना पहले से निश्चय कर रखा था।मैंने ऐसा करना पहले से निश्चित कर रखा था।
33. फसल नाश हो गई।फसल नष्ट हो गई। मुझे ईश्वर पर विश्वास है।
34. मुझे ईश्वर पर आत्म-विश्वास है।यह बात निश्चित रूप से नहीं कही जा सकती।
35. यह बात निश्चय रूप से नहीं कही जा सकती।यह शब्द लुप्त हो गया।
36 ह शब्द लोप हो गया।तुम सबसे सुन्दर हो।
37. तुम सबसे सुन्दरतम हो।वहाँ कोई जगह नहीं है।
38. वहाँ कोई एक जगह नहीं है।किसी और लड़के को भेज दो।
39. किसी और दूसरे लड़के को भेज दो।पुरुषों ने साहस न छोड़ा।
40. पुरुषों ने अपना साहस न छोड़ा।यह उत्तम है।
41. यह सबसे उत्तम है।इसमें प्राणीमात्र का कल्याण है।
42. इसमें समस्त प्राणीमात्र का कल्याण है।प्रायः लोग ऐसा मानते हैं।
43. प्राय: सभी लोग ऐसा मानते हैं।मुझे बहुत प्यास लगी है।
44. मुझे भारी प्यास लगी है।उसे बहुत कष्ट उठाना पड़ा।
45. उसे बेशुमार कष्ट उठाना पड़ा।जीवन और साहित्य का घनिष्ठ संबंध है।
46. जीवन और साहित्य का घोर संबंध है।वह नीरोग हो गया।
47. वह आरोग्य हो गया।वे बहुत अच्छे अध्यापक हैं।
48. वे बड़े अच्छे अध्यापक हैं।वहाँ बहुत भीड़ जमा थी।
49. वहाँ भारी-भरकम भीड़ जमा थी।गोपाल तो पूरा खिलाड़ी है।
50. गोपाल तो निपट खिलाड़ी है।यह एक गंभीर समस्या है।
51. यह एक गहरी समस्या है।वह अपना शेष जीवन यहीं बिताएँगे।
52. वह अपना भावी जीवन यहीं बिताएँगे।उसकी तबीयत नासाज है।
53. उसकी तबीयत नाशाद है।डाकुओं द्वारा चौकी लूटी गई।

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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य-विचार

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Vakya-Vichar वाक्य-विचार Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य-विचार

मनुष्य अपने भावों या विचारों को वाक्य में ही प्रकट करता है। वाक्य में शब्दों का निश्चित क्रम होता है। कभी-कभी एक शब्द को भी वाक्य के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। जैसे-

  • राकेश – शशंक, तुम कहां जा रहे हो ?
  • शशांक – स्कूल।

यहां शशांक ने केवल ‘स्कूल’ कहकर उत्तर दिया है।

वाक्य के अंग (Parts of Sentence) : वाक्य के दो अंग होते हैं :
1. उद्देश्य (Subject)
2. विधेय (Predicate)

1. उद्देश्य (Subject) : वाक्य में जिसके बारे में कुछ कहा जाता है, उसे उद्देश्य कहते हैं। जैसे-

  • मोहन खेलता है।
  • पक्षी डाल पर बैठा है।

इन वाक्यों में ‘मोहन’ और ‘पक्षी’ उद्देश्य हैं।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य विचार

2. विधेय (Predicate) : उद्देश्य के विषय में जो कुछ – कहा जाता है, उसे विधेय कहते हैं। जैसे-

  • मोहन खेलता है।
  • पक्षी डाल पर बैठा है।

इन वाक्यों में ‘खेलता है’ और ‘डाल पर बैठा है’ विधेय हैं।

यह भी जानें : उद्देश्य में कर्ता मूल होता है तथा कभी-कभी उसका विस्तार भी किया जाता है। जैसे-
मेरा पुत्र मोहन खेलता है।
यहाँ भी कर्ता ‘मोहन’ ही है। पर ‘मेरा पुत्र’ कर्ता का विस्तार है।

विधेय में क्रिया मूल होता है। सकर्मक क्रिया में कर्म भी विधेय का विस्तार ही अंश होता है। कर्म और क्रिया दोनों का विस्तार ‘विधेय का विस्तार’ कहलाता है। जैसे-

  • मोहन पत्र लिखता है।
  • मोहन लंबा पत्र लिखता है।
  • मोहन लंबा पत्र नित्य लिखता है।

इन तीनो वाक्यों में रेखांकित अंश विधेय हैं। दूसरे और तीसरे वाक्यों में विधेय का विस्तार किया गया है।

निम्नलिखित वाक्यों में उद्देश्य और विधेय की ओर ध्यान दीजिए :

उद्देश्यविधेय
श्रीकृष्ण नेकंस का वध किया।
आपक्या कर रहें हैं ?
प्रतापी सम्राट अशोक नेयुद्ध न करने की शपथ लो।
मेरा बड़ा भाई रामकल कोलकाता जाएगा।
मैंमंत्री को पत्र लिख रहा हूँ।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य विचार

वाक्य-रचना (Construction of Sentence):
वाक्य शब्दों या पदों का मात्र समूह नहीं होता है। प्रत्येक वाक्य में प्रयुक्त प्रत्येक पद किसी-न-किसी संबंध से परस्पर जुड़ा रहता है। यह संबंध ही पदों के समूह को वाक्य का रूप प्रदान करता है। इस संबंध को दो प्रकार से समझा जा सकता है।
1. पदक्रम और
2. अन्विति। वाक्य-रचना की दृष्टि से ये दोनों तत्त्व अनिवार्य हैं। ॥

वाक्य के भेद (Kinds of Sentence) :
(क) अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ भेद हैं :
1. विधानवाचक (Assertive) : इसमें क्रिया करने का सामान्य कथन होता है।
जैसे- सौरभ पढ़ता है।
2. निषेधवाचक (Negative) : इसमें किसी कार्य के न होने का भाव प्रकट होता है।
जैसे- वह आज काम नहीं करेगा।

3. प्रश्नवाचक (Interrogative) : इस वाक्य में प्रश्न के पूछे जाने का बोध होता है।
जैसे- वह क्या कर रहा है?

4. आज्ञावाचक (Command or Order) : इसमें आज्ञा या अनुमति देने का भाव होता है।
जैसे- तुम अभी चले जाओ। (आज्ञा)
अब आप जा सकते हैं। (अनुमति)

5. संदेहवाचक (Doubr) : इस प्रकार के वाकय में किसी कार्य के होने के बारे में संदेह प्रकट किया जाता है।
जैसे- वह शायद ही यह काम करे।

6, इच्छावाचक (Will or Hope) : इस प्रकार के वाक्यों में वक्ता की इच्छा, आशीर्वाद, शुभकामना आदि का बोध होता है।
जैसे- ईश्वर तुम्हें दीर्घायु बनाए।

7. संकेतवाचक (Conditional) : इस वाक्य में एक क्रिया दूसरी पर निर्भर होती है।
जैसे- यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य विचार

8. विस्मयादिवाचक (Exclamatory) : इन वाक्यों में घृणा, शोक, हर्ष, विस्मय आदि के भाव प्रकट होते हैं।
जैसे :

  • वाह ! तुमने तो कमाल कर दिया।
  • छिः छि कितनी गंदी जगह है ?

रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं :
1. सरल वाक्य (Simple Sentence)
2. संयुक्त वाक्य (Compound Sentence)
3. मिश्र वाक्य (Complex Sentence)

1. सरल वाक्य (Simple Sentence) : जिस वाक्य में एक – उद्देश्य और एक विधेय हो उसे सरल या साधारण वाक्य कहते हैं। उदाहरण :

  • लड़के खेल रहे हैं।
  • तेज़ वर्षा हो रही है।

2. संयुक्त वाक्य (Compound Sentence) : समान स्तर के दो या अधिक सरल वाक्य जिस वाक्य में जुड़े हों, उसे संयुक्त वाक्य कहते हैं। उदाहरण :

  • वर्षा हो रही है और धूप निकली हुई है।
  • आप चाय लेंगे अथवा शर्बत मंगवाऊँ।

3. मिश्र वाक्य (Complex Sentence) : जिस वाक्य में एक सरल वाक्य (मुख्य उप वाक्य) हो तथा एक या अधिक आश्रित उपवाक्य हों, उसे मिश्र वाक्य कहते हैं। उदाहरण :

  • उसने कहा कि मैं स्कूल जाऊंगा। (संज्ञा उपवाक्य)
  • वह छात्र प्रथम आएगा, जो पीछे बैठा है। (विशेषण उपवाक्य)
  • जब भी जाना चाहें, आप चले जाइए। (क्रिया विशेषण उपवाक्य)

आश्रित उपवाक्य तीन प्रकार के होते हैं :

  1. संज्ञा उपवाक्य (Noun Clause)
  2. विशेषण उपवाक्य (Adjective Clause)
  3. क्रिया-विशेषण उपवाक्य (Adverb Clause)

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य विचार

1. संज्ञा उपवाक्य : जो उपवाक्य वाक्य में संज्ञा का काम करते हैं, वे संज्ञा उपवाक्य कहलाते हैं। इस उपवाक्य से पहले ‘कि’ का प्रयोग होता है और कभी-कभी ‘कि’ का लोप भी हो जाता है। जैसे-

  • मुझे विश्वास है कि आप दीवाली हर घर जरूर आएँगे।
  • तुम नहीं आओगे, मैं जानता था।

2. विशेषण उपवाक्य : विशेषण उपवाक्य मुख्य उपवाक्य में प्रयुक्त किसी संज्ञा की विशेषता बताता है। हिंदी में ‘जो’ (जिस, जिसे आदि) वाले उपवाक्य प्रायः विशेषण उपवाक्य होते हैं। जैसे

  • आपकी वह पुस्तक कहां है, जो आप कल लाए
  • जो आदमी पत्र बांटता है, वह डाकिया होता है।
  • जिसे आप ढूंढ रहे हैं, वह मैं नहीं हूँ।
    अधिकतर विशेषण उपवाक्य के प्रारम्भ या अंत में प्रयुक्त होते हैं ; जैसे
  • जो पैसे मुझे मिले थे, वे खर्च हो गए। (प्रारंभ में)
  • वे पैसे खर्च हो गए, जो मुझे मिले थे। (अंत में)

3. क्रिया विशेषण उपवाक्य : यह उपवाक्य सामान्यत: मुख्य उपवाक्य की क्रिया की विशेषता बताता है। ये क्रिया विशेषण उपवाक्य किसी काल, स्थान, रीति, परिमाण, कार्य-कारण आदि का द्योतन करते हैं। इसमें जब, जहां, जैसा, ज्यों-ज्यों आदि समुच्चयबोधक अव्यय प्रयुक्त होते हैं; जैसे-

  • जब बारिश हो रही थी, तब मैं घर में था। (कालवाची)
  • जहाँ तुम पढ़ते थे, वहीं मैं पढ़ता था। (स्थानवाची)
  • जैसा आप ने बताया था, वैसा मैंने किया। (रीतिवाची)

 

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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Shabd-Gyan (Bhandar) शब्द-ज्ञान (भंडार) Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

शब्द: प्रयोग में प्रवीणता प्राप्त करने के लिए उसके विभिन्न रूपों का ज्ञान होना आवश्यक है। अर्थ की दृष्टि से विभिन्न शब्द-रूप निम्नांकित हैं :
(क) पर्यायवाची शब्द
(ख) विलोम शब्द
(ग) अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
(घ) समरूपी भिन्नार्थक शब्द
(ङ) अनेकार्थी शब्द

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

(क) पर्यायवाची शब्द (Synonyms) :
जो शब्द अर्थ की दृष्टि से समान होते हैं, पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं। परंतु स्मरणीय बात यह है कि अर्थ में समानता होते हुए भी पर्यायवाची शब्द प्रयोग में सर्वथा एक-दूसरे का स्थान नहीं ले सकते। जैसे
मृतात्माओं के तर्पण के लिए ‘जल’ शब्द का प्रयोग उपयुक्त है, ‘पानी’ का नहीं, जबकि दोनों समानार्थक (पर्यायवाची) हैं। प्रत्येक पर्यायवाची अपनी अर्थगत विशिष्टता लिए हुए होता है। यहाँ कुछ शब्दों के पयार्यवाची शब्द दिए जा रहे हैं :
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-1
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-2
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-3

(ख) विलोम शब्द (Antonyms) :
किसी शब्द से विपरीत अर्थ देने वाला शब्द उसका विलोम या विपरीतार्थक कहा जाता है। इन्हें उल्टे अर्थ वाले शब्द भी कहा जाता है। तत्सम शब्द का विलोम तत्सम और तद्भव शब्द का विलोम तद्भव में ही देना चाहिए।
यहाँ कुछ विलोम शब्दों की सूची दी जा रही है :
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-4

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-5

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

(ग) अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (One word substitution) :
हिंदी भाषा में अनेक शब्दों, पदबंधों या वाक्यांशों के लिए प्रायः एक शब्द का प्रयोग किया जाता है। इससे लेखन में संक्षिप्तता आती है तथा लेख सुगठित हो जाता है।
यहाँ कुछ ऐसे ही उदाहरण दिए जा रहे हैं :
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-6
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-7

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

(घ) समरूपी भिन्नार्थक शब्द (शब्द-युग्म) (Pair of Similar words – Distinguished) :
कुछ शब्द उच्चारण की दृष्टि से समान प्रतीत होते हैं, परंतु अर्थ की दृष्टि से उनमें पर्याप्त भिन्नता होती है। ऐसे ही कुछ शब्दों को यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है :
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-8
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-9
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-10
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-11
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-12

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

(ङ) एकार्थी शब्द (Words having One meaning) :
जिन शब्दों का अर्थ सभी परिस्थितियों में एक-सा रहता है, उन्हें एकार्थी या एकार्थक शब्द कहते हैं। ऐसे कुछ शब्दों के उदाहरण प्रस्तुत हैं:
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-13

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

(च) अनेकार्थी शब्द (Words with various meanings) :
हिंदी में ऐसे अनेक शब्द हैं, जिनके एक से अधिक अर्थ होते हैं। इनका प्रयोग संदर्भ के अनुसार किया जाता है। प्रयोग के अनुसार विभिन्न परिस्थितियों में भिन्न-भिन्न अर्थ देने वाले शब्द अनेकार्थी कहलाते हैं।
ऐसे कुछ शब्दों के उदाहरण प्रस्तुत हैं :
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-14
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-15

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