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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran पद-परिचय

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Pad Parichay पद-परिचय Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran पद-परिचय

शब्द और पद का अंतर आप पहले. ही समझ चुके हैं। ‘शब्द’ भाषा की अर्थवान स्वतंत्र इकाई है, तो वाक्य में प्रयुक्त शब्द पद हैं। वाक्य में प्रयुक्त शब्दों को पद कहते हैं।
इन शब्दों का व्याकरणिक परिचय पद-परिचय कहलाता है। पद-परिचय बताने के लिए शब्दों के भेद, उपभेद, लिंग, वचन, कारक आदि का परिचय देना आवश्यक है।
पद-परिचय के लिए आवश्यक संकेत-तालिका :

पद का नामबताई जाने वाली बातें
संज्ञासंज्ञा के भेद, लिंग, वचन, कारक, क्रिया के साथ संबंधा
सर्वनामसर्वनाम का भेद, पुरुष, लिंग, वचन, कारक, क्रिया के साथ संबंध।
विशेषणविशेषण का भेद, लिंग, वचन, विशेष्य का निर्देश।
क्रियाक्रिया का भेद (अकर्मक-सकर्मक) लिंग, वचन, पुरुष, धातु, काल, वाच्य, प्रयोग, कर्ता और कर्म का संकेत
क्रिया-विशेषणक्रिया-विशेषण का भेद, जिस क्रिया की विशेषता बताई जा रही है उसका निर्देश।
समुच्चयबोधकभेद (संयोजक-विकल्पक), किन पदों या वाक्यों को मिला रहा है, निर्देश।
संबंधबोधकभेद, जिससे संबंध दर्शा रहा है उसका निर्देश।
विस्मयादिबोधककिस भाव (विस्मय, हर्ष, शोक, घृणा, भय, क्रोध आदि) को प्रकट कर रहा है, निर्देश।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran पद-परिचय

उपर्युक्त दिशा-निर्देश के आधार पर पद-परिचय के कुछ उदाहरण प्रस्तुत हैं :
1. सोहन यहाँ दसवीं कक्षा में पढ़ता था।
सोहन : व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक, ‘पढ़ता था’ क्रिया का कर्ता।
यहाँ : स्थानवाचक क्रिया-विशेषण, ‘पढ़ता था’ क्रिया के स्थान का निर्देश।
दसवीं : संख्यावाचक विशेषण, क्रमसूचक, स्त्रीलिंग, एकवचन, ‘कक्षा’ विशेष्य का विशेषण।
कक्षा में : जातिवाचक संज्ञा (समूहवाचक), स्त्रीलिंग, एकवचन, अधिकरण कारक (‘म कारक चिह्न) ‘पढ़ना’ क्रिया से संबद्ध।
पढ़ता था : अकर्मक क्रिया, ‘पढ़’ धातु, पुल्लिग, एकवचन, अन्य पुरुष, निश्चयार्थ, कर्तृवाच्य, कर्तरि प्रयोग (कर्ता-सोहन)।

2. सचिन यहाँ दूसरे बंगले में रहता था।
सचिन : व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक, ‘रहना’ क्रिया का कर्ता!
यहाँ : क्रिया-विशेषण (स्थानवाचक), ‘रहना’ क्रिया के स्थान का द्योतका
दूसरे : संख्यावाचक विशेषण (क्रमसूचक), पुल्लिंग, एकवचन, विशेष्य-बंगला।
बंगले में : जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिग, एकवचन, अधिकरण कारक (में-कारक-चिह्न)
रहता था : क्रिया (अकर्मक) ‘रह’ धातु, एकवचन, अन्य पुरुष, भूतकाल, कर्तृवाच्य, कर्तरि प्रयोग (क्रिया का कर्ता – सचिन)

3. हम बाग में गए, परंतु वहाँ कोई आम नहीं मिला।
हम : पुरुषवाचक सर्वनाम (उत्तम पुरुष), पुल्लिग, बहुवचन, कर्ताकारक, ‘गए’ क्रिया का कर्ता।
बाग में : जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिग, एकवचन, अधिकरण कारक (‘में” कारक-चिहन)
गए : अकर्मक क्रिया, ‘जा’ धातु, उत्तम पुरुष, पुल्लिग, बहुवचन, भूतकाल, निश्चयार्थ, कर्तृवाच्य, कर्तरि प्रयोग, ‘हम’ सर्वनाम इसका कर्ता है।
परंतु : व्यधिकरण समुच्चयबोधक (अव्यय), दो वाक्यों को जोड़ता है।
वहाँ : स्थानवाचक क्रिया विशेषण।
कोई : संख्यावाचक विशेषण (अनिश्चित संख्यावाचक), पुल्लिग, एकवचन, ‘आम’ विशेष्य का विशेषण।
आम : जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्म कारक।
नहीं : अव्यय, रीतिवाचक क्रिया-विशेषण (निषेध वाचक), ‘मिला’ क्रिया की रीति।
मिला : सकर्मक क्रिया (आम-कम), ‘मिल’ धातु, अन्य पुरुष, पुल्लिग, एकवचन, भूतकाल, निश्चयार्थ, कर्तृवाच्य, कमरि प्रयोग।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran पद-परिचय

4. आह ! उपवन में सुंदर फूल खिले हैं।
आह : अव्यय, विस्मयादिबोधक, हर्षसूचका
उपवन में : जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, अधिकरण कारक (में परसग)।
सुंदर : गुणवाचक विशेषण (गुणबांधक), पुल्लिग, बहुवचन, एकवचन, ‘फूल’-विशेष्य।
खिले हैं : अकर्मक क्रिया, बहुवचन, पुल्लिग, कर्तृवाच्य, कर्तरि प्रयोग।
फूल : जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, बहुवचन, कर्ता कारक, ‘खिले हैं’-क्रिया का कर्ता।

5. मैं रोज सवेरे धीरे-धीरे चलता हूँ।
मैं : पुरुषवाचक सर्वनाम (उत्तम पुरुष), पुल्लिग, एकवचन, कर्ता कारक, ‘चलता हूँ’ क्रिया का कर्ता।
रोज सवेरेः क्रिया-विशेषण (कालवाचक), ‘चलता हूँ’ क्रिया का काल बताता है।
धीरे-धीरे : अव्यय, रीतिवाचक क्रिया-विशेषण, ‘चलता हूँ’ क्रिया की रीति बताता है।
चलता हूँ : अकर्मक क्रिया, सामान्य वर्तमान काल, पुल्लिंग, एकवचन, ‘मैं’ कर्ता की क्रिया।

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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाच्या

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Vachya वाच्या Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran वाच्या

हम जब कभी भाषा का प्रयोग करते हैं तब हमारे पास कुछ कथ्य अर्थात् कही जाने वाली बात अवश्य होती है। हर वाक्य में कथ्य का कोई-न-कोई बिंदु अवश्य होता है, जिसे वक्ता कुछ प्रधानता से स्पष्ट करना चाहता है। वाच्य (शाब्दिक अर्थ-बोलने का विषय) की भूमिका यहीं आती है। “वाच्य इस बात का संकेत देता है कि वक्ता इस वाक्य में किस कथ्यबिंदु को प्रध निता दे रहा है।”
उदाहरणार्थ :
‘स्वाति पढ़ रही है।’ – इस वाक्य से स्पष्ट होता है कि कथ्यबिंदु ‘स्वाति’ के विषय में कुछ बोला जा रहा है।
इसी प्रकार : ‘गिलास टूट गया’ – वाक्य में कथ्यबिंदु ‘गिलास’ है।
इस प्रकार वाक्य में वाच्य यह बताता है कि वाक्य में स्थित कर्ता, कर्म या क्रिया – इनमें से किसे वक्ता ने कथ्यबिंदु बनाया है तथा प्रधानता दी है।

क्रिया के जिस रूप से यह जाना जाए कि क्रिया का मुख्य विषय कर्ता है, कर्म है अथवा भाव है, उसे वाच्य’ कहते हैं।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाच्या

वाच्य के भेद (Kinds of Voice) :
चूँकि वाच्य कर्ता या कर्म या क्रिया के भाव के संबंध में ही बताता है इसलिए वाच्य के तीन भेद होते हैं :
1. कर्तृवाच्य (Active Voice)
2. कर्मवाच्य (Passive Voice)
3. भाववाच्य (Impersonal Voice)
आइए, अब हम इनके बारे में सोदाहरण जानकारी प्राप्त करें।

1. कर्तृवाच्य (Active Voice) : जहाँ वाच्य-केन्द्र अर्थात् वक्ता का कथ्यबिंदु कर्ता हो, वहाँ कर्तृवाच्य होता है।
जैसे- बच्चे खेल रहे हैं।
राकेश ने पढ़ ली है।
कविता गाना गाएगी।
[इन तीनों वाक्यों में बच्चे, राकेश और कविता-कर्ता है और वाक्य का केंद्र बिंदु हैं। अतः ये कर्तृवाच्य वाक्य हैं।]

2. कर्मवाच्य (Passive Voice) : जहाँ वाच्य केंद्र अर्थात् वक्ता का कथ्य-बिंदु कर्म हो, वहाँ कर्मवाच्य होता है।
जैसे- राम से रोटी खाई गई।
दवाई दे दी गई है।
सोनिया से गीत गाया गया।
[इन तीनों वाक्यों में क्रमशः रोटी, दवाई और गीत कम है। ये ही अपने-अपने वाक्यों में केंद्र बिंदु भी हैं। अतः ये कर्मवाच्य वाक्य है।]

3. भाववाच्य (Impersonal Voice) : जहाँ वाच्य-केंद्र अर्थात् वक्ता का कथ्यबिंदु क्रिया हो, वहाँ भाववाच्य होता है। इसमें कर्ता या कर्म की प्रधानता न होकर क्रिया का भाव ही प्रध न होता है।
जैसे-
मुझसे अब चला नहीं जाता।
गरमियों में खूब नहाया जाता है।
[इन वाक्यों में ‘चला’ और ‘नहाया’ क्रियाएँ ही प्रमुख हैं। अतः ये भाववाच्य के उदाहरण हैं।]

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाच्या

वाच्य परिवर्तन (Change of Voice)
1. कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाने की विधि :
1. कर्मवाच्य में कर्ता को प्रधानता नहीं दी जाती है, अतएव उसे गौण स्थान मिलता है। यह गौणता दो प्रकार से हो सकती है:
(क) कर्ता को करण या माध्यम के रूप में से, के द्वारा, द्वारा आदि लगाकर व्यक्त किया जाए।
जैसे- राम के द्वारा पत्र पढ़ा गया।

(ख) कर्ता का लोप ही कर दिया जाए।
जैसे- ‘पतंग उड़ रही है। इसमें पतंग के उड़ाने वाले (कता) का उल्लेख ही नहीं है।

2 कर्मवाच्य बनाते समय संयोजी क्रिया जाना का (पुरुष, लिंग, वचन के अनुसार) प्रयोग किया जाता है।
जैसे- दूध पिया जा रहा है।

3. कर्तृवाच्य की मुख्य क्रिया को सामान्य भूतकाल में परिवर्तित कर दिया जाता है।
4. यदि कर्म के साथ कोई विभक्ति चिह्न लगा हो तो उसे हटा दिया जाता है।
उदाहरण:

कर्तृवाच्यकर्मवाच्य
1. मोहन शिकार करता है।मोहन के द्वारा शिकार किया जाता है।
2. मैंने पत्र लिखा।मेरे द्वारा पत्र लिखा गया।
3. प्रधानमंत्री ने इस भवन का उद्घाटन किया।तरुण द्वारा दूध पिया जाएगा।
4. तरुण दूध पीएगा।रमेश से चाय पी जा रही है।
5. रमेश चाय पी रहा है।कर्मवाच्य

2. कर्तृवाच्य से भाववाच्य बनाने की विधि :
भाववाच्य में कर्म होता ही नहीं है। मूल कर्ता की दो स्थितियाँ होती हैं :
1. उसके आगे ‘से’ लगता है।
2. उसका उल्लेख ही नहीं होता।
जैसे – मैं अब चल नहीं सकता → मुझसे अब चला नहीं जाता।

ध्यान दें : भाववाच्य में क्रिया सम एकवचन, पुल्लिग, अकर्मक तथा अन्य पुरुष में रहती है।
उदाहरण:

कर्तृवाच्यकर्मवाच्य
1. हम इतना कष्ट नहीं सह सकते।हमसे इतना कष्ट नहीं सहा जाता।
2. मैं खड़ा नहीं हो सकता।मुझसे खड़ा नहीं हुआ जाता।
3. आओ, अब चलें।आओ, अब चला जाए।

हिंदी में वाच्यों का प्रयोग :
हिंदी में प्रायः कर्तृवाच्य का प्रयोग होता है। जिन परिस्थितियों में कर्मवाच्य और भाववाच्य का प्रयोग होता है, वे इस प्रकार हैं:
कर्मवाच्य के प्रयोग-स्थल :
1. जब आपको स्वयं पता न हो कि निश्चित रूप से कर्ता कौन है या आपको पता तो हो, पर भयवश, संकोचवश या अन्यथा बताना नहीं चाहते।
जैसे- लैटरबक्स में चिट्ठी डाल दी गई है।
उसकी घड़ी मेज़ पर से चुरा ली गई है।

2. जब आपने स्वयं किया है, किंतु वह अचानक बिना आपके चाहे हुआ हो, जैसे-
शीशा गिर गया और टूट गया।
शीशे का गिलास छूट गया।

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3. जब कर्ता कोई स्वतंत्र रूप से व्यक्ति न हो बल्कि कोई व्यवस्था या तंत्र हो, जैसे-
सरकार द्वारा गरीबों के लिए बहुत काम किया जा रहा है। आपको सूचित किया जाता है कि ……………

4. सूचना, विज्ञप्ति आदि में जहाँ कर्ता निश्चित न हो, जैसे-
लाल बत्ती पार करने वालों को सज़ा दी जाएगी।

5. अधिकार, दर्प या गर्व जताने के लिए, जैसे-
अपराधी को पेश किया जाए।

6. कानूनी या कार्यालयी भाषा में, जैसे-
एक माह का अर्जित अवकाश स्वीकृत किया जाता है।

7. असमर्थता जताने के लिए, जैसे –
अब अधिक दूध नहीं पिया जाता।

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भाववाच्य के प्रयोग-स्थल :
1. प्राय: असमर्थता या विवशता प्रकट करने के लिए नहीं के साथ भाववाच्य का प्रयोग होता है।
जैसे-
अब खड़ा नहीं हुआ जाता।
अब मुझसे बैठा नहीं जाता।

2. जब ‘नहीं’ का प्रयोग नहीं होता, तो मूल कर्ता जन-सामान्य होता है।
जैसे-
गरमियों में छत पर सोया जाता है।

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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य-रचना की अशुद्धियाँ

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Vakya-Rachana ki Ashudhiyan वाक्य-रचना की अशुद्धियाँ Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य-रचना की अशुद्धियाँ

वाक्य-रचना की अशुद्धधियाँ निम्नलिखित प्रकार की हो सकती हैं :

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य-रचना की अशुद्धियाँ

अशुद्धशुद्ध
1. हमारा लक्ष्य देश की चहुमुखी प्रगति होनी चाहिए।हमारा लक्ष्य देश की चहुंमुखी प्रगति होना चाहिए।
2. क्या आप पढ़ लिए हैं?क्या आपने पड़ लिया है?
3. क्या आप आ सकोगे?क्या आप आ सकेंग?
4. प्रधानाचार्य अध्यापक को बुलाए।प्रधानाचार्य ने अध्यापक को बुलाया।
5. सुरेश को योगेश को और मोहन को कल मैंने साथ-साथ देखा था।मैंने सुरेश, योगेश और मोहन को कल साथसाथ देखा था।
6. यहाँ पर कल एक लड़का और लड़की बैठी थी।यहाँ पर कल एक लड़का और लड़की बैठे थे।
7. तुम मेरे मित्र हो मैं आपको भली-भाँति जानता हूँ।तुम मेरे मित्र हो मैं तुम्हें भली-भाँति जानता हूँ।
8 उत्तम चरित्र-निर्माण हमारे लक्ष्य होने चाहिए।उत्तम चरित्र-निर्माण हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
9. सावित्री जो सत्यवान की पत्नी थी, वह एक पतिव्रता नारी थी।सत्यवान की पत्नी सावित्री एक पतिव्रता नारी थी।
10. महात्मा गांधी का देश सदा आभारी रहेगा।देश महात्मा गांधी का सदा आभारी रहेगा।
11. केवल यहाँ दो पुस्तकें रखी हैं।यहाँ केवल दो पुस्तकें रखी हैं।
12. खरगोश को काटकर गाजर खिलाओ।गाजर काटकर खरगोश को खिलाओ।
13. हमारे बैल इधर-उधर भटकते हुए पड़ोसियों के खेत में जा पहुंचे।इधर-उधर भटकते हुए हमारे बैल पड़ोसियों के खेत में जा पहुंचे।
14. एक फूलों की माला ले आइए।फूलों की एक माला ले आइए।
15. पुस्तकें ये किसकी हैं ?ये पुस्तकें किसकी हैं?
16. प्रस्तुत पंक्तिया सरोज स्मृति से ली हैं।प्रस्तुत पंक्तियाँ सरोज स्मृति से ली गई हैं।
17. प्रयोग के आधार पर हिंदी शब्दों को दो भागों में विभक्त किया है।प्रयोग के आधार पर हिंदी शब्दों को दो भागों में विभक्त किया गया है।
18. अध्यापक से हिंदी पढ़ाई है।अध्यापक से हिंदी पड़ी है।
19. पुलिस ने डाकुओं का पीछा किया गया।पुलिस के द्वारा डाकुओं का पीछा किया गया।
20. अध्यापक ने हमसे लेख लिखाया।अध्यापक ने हमसे लेख लिखवाया।
21. डाकुओं ने चौकी लूटी गई।डाकुओं द्वारा चौकी लूटी गई।
22. मैं आम खाया गया।मुझसे आम खाया गया।
23. अध्यापक ने कहा गया कि कल सभी छात्र पुस्तकें न लाओ।अध्यापक दवारा कहा गया कि कल सभी छात्र पुस्तकें न लाएँ।
24. हन ने घर गया और सोया।मोहन घर गया और सो गया।
25. सभा में क्रोध प्रकट किया गया।सभा में रोष प्रकट किया गया।
26. पिछले वर्ष यहाँ भूख की भारी घटनाएँ हुईं।पिछले वर्ष यहाँ भुखमरी की भारी घटनाएँ हुईं।
27. जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कथा चरितार्थ होती है।जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली कहावत चरितार्थ होती है।
28. विष्णु पद में चंद्रमा को देखो।आकाश में चंद्रमा को देखो।
29. उनका मूड़ काट दिया।उसका सिर काट दिया।
30. मकान गिर जाने का संदेह है।मकान गिर जाने का डर है।
31. मैंने उसे एक पुस्तक समर्पण की।मैंने उसे एक पुस्तक समर्पित की।
32. मैंने ऐसा करना पहले से निश्चय कर रखा था।मैंने ऐसा करना पहले से निश्चित कर रखा था।
33. फसल नाश हो गई।फसल नष्ट हो गई। मुझे ईश्वर पर विश्वास है।
34. मुझे ईश्वर पर आत्म-विश्वास है।यह बात निश्चित रूप से नहीं कही जा सकती।
35. यह बात निश्चय रूप से नहीं कही जा सकती।यह शब्द लुप्त हो गया।
36 ह शब्द लोप हो गया।तुम सबसे सुन्दर हो।
37. तुम सबसे सुन्दरतम हो।वहाँ कोई जगह नहीं है।
38. वहाँ कोई एक जगह नहीं है।किसी और लड़के को भेज दो।
39. किसी और दूसरे लड़के को भेज दो।पुरुषों ने साहस न छोड़ा।
40. पुरुषों ने अपना साहस न छोड़ा।यह उत्तम है।
41. यह सबसे उत्तम है।इसमें प्राणीमात्र का कल्याण है।
42. इसमें समस्त प्राणीमात्र का कल्याण है।प्रायः लोग ऐसा मानते हैं।
43. प्राय: सभी लोग ऐसा मानते हैं।मुझे बहुत प्यास लगी है।
44. मुझे भारी प्यास लगी है।उसे बहुत कष्ट उठाना पड़ा।
45. उसे बेशुमार कष्ट उठाना पड़ा।जीवन और साहित्य का घनिष्ठ संबंध है।
46. जीवन और साहित्य का घोर संबंध है।वह नीरोग हो गया।
47. वह आरोग्य हो गया।वे बहुत अच्छे अध्यापक हैं।
48. वे बड़े अच्छे अध्यापक हैं।वहाँ बहुत भीड़ जमा थी।
49. वहाँ भारी-भरकम भीड़ जमा थी।गोपाल तो पूरा खिलाड़ी है।
50. गोपाल तो निपट खिलाड़ी है।यह एक गंभीर समस्या है।
51. यह एक गहरी समस्या है।वह अपना शेष जीवन यहीं बिताएँगे।
52. वह अपना भावी जीवन यहीं बिताएँगे।उसकी तबीयत नासाज है।
53. उसकी तबीयत नाशाद है।डाकुओं द्वारा चौकी लूटी गई।

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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य-विचार

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Vakya-Vichar वाक्य-विचार Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य-विचार

मनुष्य अपने भावों या विचारों को वाक्य में ही प्रकट करता है। वाक्य में शब्दों का निश्चित क्रम होता है। कभी-कभी एक शब्द को भी वाक्य के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। जैसे-

  • राकेश – शशंक, तुम कहां जा रहे हो ?
  • शशांक – स्कूल।

यहां शशांक ने केवल ‘स्कूल’ कहकर उत्तर दिया है।

वाक्य के अंग (Parts of Sentence) : वाक्य के दो अंग होते हैं :
1. उद्देश्य (Subject)
2. विधेय (Predicate)

1. उद्देश्य (Subject) : वाक्य में जिसके बारे में कुछ कहा जाता है, उसे उद्देश्य कहते हैं। जैसे-

  • मोहन खेलता है।
  • पक्षी डाल पर बैठा है।

इन वाक्यों में ‘मोहन’ और ‘पक्षी’ उद्देश्य हैं।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य विचार

2. विधेय (Predicate) : उद्देश्य के विषय में जो कुछ – कहा जाता है, उसे विधेय कहते हैं। जैसे-

  • मोहन खेलता है।
  • पक्षी डाल पर बैठा है।

इन वाक्यों में ‘खेलता है’ और ‘डाल पर बैठा है’ विधेय हैं।

यह भी जानें : उद्देश्य में कर्ता मूल होता है तथा कभी-कभी उसका विस्तार भी किया जाता है। जैसे-
मेरा पुत्र मोहन खेलता है।
यहाँ भी कर्ता ‘मोहन’ ही है। पर ‘मेरा पुत्र’ कर्ता का विस्तार है।

विधेय में क्रिया मूल होता है। सकर्मक क्रिया में कर्म भी विधेय का विस्तार ही अंश होता है। कर्म और क्रिया दोनों का विस्तार ‘विधेय का विस्तार’ कहलाता है। जैसे-

  • मोहन पत्र लिखता है।
  • मोहन लंबा पत्र लिखता है।
  • मोहन लंबा पत्र नित्य लिखता है।

इन तीनो वाक्यों में रेखांकित अंश विधेय हैं। दूसरे और तीसरे वाक्यों में विधेय का विस्तार किया गया है।

निम्नलिखित वाक्यों में उद्देश्य और विधेय की ओर ध्यान दीजिए :

उद्देश्यविधेय
श्रीकृष्ण नेकंस का वध किया।
आपक्या कर रहें हैं ?
प्रतापी सम्राट अशोक नेयुद्ध न करने की शपथ लो।
मेरा बड़ा भाई रामकल कोलकाता जाएगा।
मैंमंत्री को पत्र लिख रहा हूँ।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य विचार

वाक्य-रचना (Construction of Sentence):
वाक्य शब्दों या पदों का मात्र समूह नहीं होता है। प्रत्येक वाक्य में प्रयुक्त प्रत्येक पद किसी-न-किसी संबंध से परस्पर जुड़ा रहता है। यह संबंध ही पदों के समूह को वाक्य का रूप प्रदान करता है। इस संबंध को दो प्रकार से समझा जा सकता है।
1. पदक्रम और
2. अन्विति। वाक्य-रचना की दृष्टि से ये दोनों तत्त्व अनिवार्य हैं। ॥

वाक्य के भेद (Kinds of Sentence) :
(क) अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ भेद हैं :
1. विधानवाचक (Assertive) : इसमें क्रिया करने का सामान्य कथन होता है।
जैसे- सौरभ पढ़ता है।
2. निषेधवाचक (Negative) : इसमें किसी कार्य के न होने का भाव प्रकट होता है।
जैसे- वह आज काम नहीं करेगा।

3. प्रश्नवाचक (Interrogative) : इस वाक्य में प्रश्न के पूछे जाने का बोध होता है।
जैसे- वह क्या कर रहा है?

4. आज्ञावाचक (Command or Order) : इसमें आज्ञा या अनुमति देने का भाव होता है।
जैसे- तुम अभी चले जाओ। (आज्ञा)
अब आप जा सकते हैं। (अनुमति)

5. संदेहवाचक (Doubr) : इस प्रकार के वाकय में किसी कार्य के होने के बारे में संदेह प्रकट किया जाता है।
जैसे- वह शायद ही यह काम करे।

6, इच्छावाचक (Will or Hope) : इस प्रकार के वाक्यों में वक्ता की इच्छा, आशीर्वाद, शुभकामना आदि का बोध होता है।
जैसे- ईश्वर तुम्हें दीर्घायु बनाए।

7. संकेतवाचक (Conditional) : इस वाक्य में एक क्रिया दूसरी पर निर्भर होती है।
जैसे- यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य विचार

8. विस्मयादिवाचक (Exclamatory) : इन वाक्यों में घृणा, शोक, हर्ष, विस्मय आदि के भाव प्रकट होते हैं।
जैसे :

  • वाह ! तुमने तो कमाल कर दिया।
  • छिः छि कितनी गंदी जगह है ?

रचना के आधार पर वाक्य तीन प्रकार के होते हैं :
1. सरल वाक्य (Simple Sentence)
2. संयुक्त वाक्य (Compound Sentence)
3. मिश्र वाक्य (Complex Sentence)

1. सरल वाक्य (Simple Sentence) : जिस वाक्य में एक – उद्देश्य और एक विधेय हो उसे सरल या साधारण वाक्य कहते हैं। उदाहरण :

  • लड़के खेल रहे हैं।
  • तेज़ वर्षा हो रही है।

2. संयुक्त वाक्य (Compound Sentence) : समान स्तर के दो या अधिक सरल वाक्य जिस वाक्य में जुड़े हों, उसे संयुक्त वाक्य कहते हैं। उदाहरण :

  • वर्षा हो रही है और धूप निकली हुई है।
  • आप चाय लेंगे अथवा शर्बत मंगवाऊँ।

3. मिश्र वाक्य (Complex Sentence) : जिस वाक्य में एक सरल वाक्य (मुख्य उप वाक्य) हो तथा एक या अधिक आश्रित उपवाक्य हों, उसे मिश्र वाक्य कहते हैं। उदाहरण :

  • उसने कहा कि मैं स्कूल जाऊंगा। (संज्ञा उपवाक्य)
  • वह छात्र प्रथम आएगा, जो पीछे बैठा है। (विशेषण उपवाक्य)
  • जब भी जाना चाहें, आप चले जाइए। (क्रिया विशेषण उपवाक्य)

आश्रित उपवाक्य तीन प्रकार के होते हैं :

  1. संज्ञा उपवाक्य (Noun Clause)
  2. विशेषण उपवाक्य (Adjective Clause)
  3. क्रिया-विशेषण उपवाक्य (Adverb Clause)

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran वाक्य विचार

1. संज्ञा उपवाक्य : जो उपवाक्य वाक्य में संज्ञा का काम करते हैं, वे संज्ञा उपवाक्य कहलाते हैं। इस उपवाक्य से पहले ‘कि’ का प्रयोग होता है और कभी-कभी ‘कि’ का लोप भी हो जाता है। जैसे-

  • मुझे विश्वास है कि आप दीवाली हर घर जरूर आएँगे।
  • तुम नहीं आओगे, मैं जानता था।

2. विशेषण उपवाक्य : विशेषण उपवाक्य मुख्य उपवाक्य में प्रयुक्त किसी संज्ञा की विशेषता बताता है। हिंदी में ‘जो’ (जिस, जिसे आदि) वाले उपवाक्य प्रायः विशेषण उपवाक्य होते हैं। जैसे

  • आपकी वह पुस्तक कहां है, जो आप कल लाए
  • जो आदमी पत्र बांटता है, वह डाकिया होता है।
  • जिसे आप ढूंढ रहे हैं, वह मैं नहीं हूँ।
    अधिकतर विशेषण उपवाक्य के प्रारम्भ या अंत में प्रयुक्त होते हैं ; जैसे
  • जो पैसे मुझे मिले थे, वे खर्च हो गए। (प्रारंभ में)
  • वे पैसे खर्च हो गए, जो मुझे मिले थे। (अंत में)

3. क्रिया विशेषण उपवाक्य : यह उपवाक्य सामान्यत: मुख्य उपवाक्य की क्रिया की विशेषता बताता है। ये क्रिया विशेषण उपवाक्य किसी काल, स्थान, रीति, परिमाण, कार्य-कारण आदि का द्योतन करते हैं। इसमें जब, जहां, जैसा, ज्यों-ज्यों आदि समुच्चयबोधक अव्यय प्रयुक्त होते हैं; जैसे-

  • जब बारिश हो रही थी, तब मैं घर में था। (कालवाची)
  • जहाँ तुम पढ़ते थे, वहीं मैं पढ़ता था। (स्थानवाची)
  • जैसा आप ने बताया था, वैसा मैंने किया। (रीतिवाची)

 

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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Shabd-Gyan (Bhandar) शब्द-ज्ञान (भंडार) Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

शब्द: प्रयोग में प्रवीणता प्राप्त करने के लिए उसके विभिन्न रूपों का ज्ञान होना आवश्यक है। अर्थ की दृष्टि से विभिन्न शब्द-रूप निम्नांकित हैं :
(क) पर्यायवाची शब्द
(ख) विलोम शब्द
(ग) अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
(घ) समरूपी भिन्नार्थक शब्द
(ङ) अनेकार्थी शब्द

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

(क) पर्यायवाची शब्द (Synonyms) :
जो शब्द अर्थ की दृष्टि से समान होते हैं, पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं। परंतु स्मरणीय बात यह है कि अर्थ में समानता होते हुए भी पर्यायवाची शब्द प्रयोग में सर्वथा एक-दूसरे का स्थान नहीं ले सकते। जैसे
मृतात्माओं के तर्पण के लिए ‘जल’ शब्द का प्रयोग उपयुक्त है, ‘पानी’ का नहीं, जबकि दोनों समानार्थक (पर्यायवाची) हैं। प्रत्येक पर्यायवाची अपनी अर्थगत विशिष्टता लिए हुए होता है। यहाँ कुछ शब्दों के पयार्यवाची शब्द दिए जा रहे हैं :
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-1
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-2
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-3

(ख) विलोम शब्द (Antonyms) :
किसी शब्द से विपरीत अर्थ देने वाला शब्द उसका विलोम या विपरीतार्थक कहा जाता है। इन्हें उल्टे अर्थ वाले शब्द भी कहा जाता है। तत्सम शब्द का विलोम तत्सम और तद्भव शब्द का विलोम तद्भव में ही देना चाहिए।
यहाँ कुछ विलोम शब्दों की सूची दी जा रही है :
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-4

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-5

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

(ग) अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (One word substitution) :
हिंदी भाषा में अनेक शब्दों, पदबंधों या वाक्यांशों के लिए प्रायः एक शब्द का प्रयोग किया जाता है। इससे लेखन में संक्षिप्तता आती है तथा लेख सुगठित हो जाता है।
यहाँ कुछ ऐसे ही उदाहरण दिए जा रहे हैं :
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-6
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-7

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

(घ) समरूपी भिन्नार्थक शब्द (शब्द-युग्म) (Pair of Similar words – Distinguished) :
कुछ शब्द उच्चारण की दृष्टि से समान प्रतीत होते हैं, परंतु अर्थ की दृष्टि से उनमें पर्याप्त भिन्नता होती है। ऐसे ही कुछ शब्दों को यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है :
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-8
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-9
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-10
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-11
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-12

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

(ङ) एकार्थी शब्द (Words having One meaning) :
जिन शब्दों का अर्थ सभी परिस्थितियों में एक-सा रहता है, उन्हें एकार्थी या एकार्थक शब्द कहते हैं। ऐसे कुछ शब्दों के उदाहरण प्रस्तुत हैं:
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-13

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

(च) अनेकार्थी शब्द (Words with various meanings) :
हिंदी में ऐसे अनेक शब्द हैं, जिनके एक से अधिक अर्थ होते हैं। इनका प्रयोग संदर्भ के अनुसार किया जाता है। प्रयोग के अनुसार विभिन्न परिस्थितियों में भिन्न-भिन्न अर्थ देने वाले शब्द अनेकार्थी कहलाते हैं।
ऐसे कुछ शब्दों के उदाहरण प्रस्तुत हैं :
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-14
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-15

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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran अव्यय (अविकारी शब्द)

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Avyay (Avikaari Shabd) अव्यय (अविकारी शब्द) Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran अव्यय (अविकारी शब्द)

अव्यय (अविकारी शब्द):
हमने संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया पदों का अध्ययन किया और देखा कि इन पदों के रूपों में परिवर्तन होता है, अत: इन्हें विकारी पद कहते हैं। अब उन पदों का अध्ययन किया जाएगा जिनका रूप सदैव एक ही बना रहता है और उनमें परिवर्तन नहीं होता। एक ही रूप बने रहने के कारण इन्हें अव्यय कहते हैं। अव्यय शब्द का अर्थ है जिसका व्यय न हो अर्थात् जिनमें विकार न आए। इन्हें अविकारी पद भी कहते हैं।

अव्यय वे शब्द हैं जिनमें लिंग, वचन, पुरुष, काल आदि से मिलकर विकार या रूप-परिवर्तन नहीं होता।।

अव्यय के भेद (Indeclinable Words) :
अव्यय के पांच मुख्य भेद माने जाते हैं-
1. क्रिया विशेषण (Adverb)
2. संबंधबोधक (Post Position)
3. समुच्चयबोधक (Conjunction)
4. विस्मयादिबोधक (Interjection)
5. निपात (Stress)

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran अव्यय (अविकारी शब्द)

1. क्रिया विशेषण (Adverb) :
जो पद क्रिया की विशेषता बताता है उसे क्रिया विशेषण अव्यय कहते हैं ; जैसेधीरे-धीरे, आजकल, के पास, बिल्कुल।
क्रिया विशेषण के चार भेद माने गए हैं :
(क) कालवाचक क्रियाविशेषण (Adverb of Time) : जो पद क्रिया के काल या समय की विशेषता बताता है उसे कालवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं; जैसे

  • तुम चेन्नै कब जाओगे।
  • संजय परसों जयपुर से आया था।
  • शीला प्रतिदिन स्कूल जाती है।
  • महँगाई आजकल बढ़ती जा रही है।

(ख) स्थानवाचक क्रियाविशेषण (Adverb of Place): जो पद क्रिया के स्थान का बोध कराता है, उसे स्थानवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं; जैसे-

  • वह यहां रहता है।
  • माता जी बाहर गई हैं।
  • तुम इधर-उधर मत जाओ।
  • वर्षा में कहां जाओगे ?

(ग) रीतिवाचक क्रियाविशेषण (Adverb of Manner): जो पद क्रिया के होने की रीति या विधि संबंधी विशेषता बताता है, उसे रीतिवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं ; जैसे-

  • कार तेज़ दौड़ती है।
  • साइकिल धीरे-धीरे चलती है।
  • मुदिता ध्यानपूर्वक पढ़ती है।

(घ) परिमाणवाचक क्रियाविशेषण (Adverb of Quantity) : जो पद क्रिया की मात्रा या परिमाण बताए, वह परिमाणवाचक क्रियाविशेषण है; जैसे

  • मैं बिल्कुल थक गया हूँ।
  • बंगाल में चावल अधिक खाया जाता है।
  • थोड़ा खाओ, खूब चबाओ।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran अव्यय (अविकारी शब्द)

2. संबंधबोधक अव्यय (Post Position) :
संबंधबोधक अव्यय अपने पूर्वपद के साथ संबध जोड़ता है। इस पद के पहले किसी-न-किसी परसर्ग की अपेक्षा रहती है; जैसे- से दूर, के साथ, के कारण, के वास्ते, की अपेक्षा, की जगह, के अनुसार, की तरफ। उदाहरण के लिए :

  • मैं घर से दूर पहुंच गया था।
  • इस मकान के पीछे शिव मंदिर है।
  • मोहन बाज़ार की ओर गया है।
  • उसके सामने तुम कहीं नहीं ठहर सकते।

3. समुच्चयबोधक अव्यय (Conjunction) :
जो अव्यय पदों, पदबंधों और उपवाक्यों को जोड़ते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं; जैसे- और, कि, अथवा, क्योंकि, इसलिए।
समुच्चयबोधक अव्यय के दो भेद हैं :
(क) समानाधिकरण समुच्चयबोधक : जो दो या उससे अधिक समान पदों, पदबंधों, उपवाक्यों को जोड़ता है, वह समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय कहलाता है। जैसे-

  • नरेन्द्र शाम को रोटी और दाल खाता है।
  • जोगेन्द्र रसमलाई या गुलाबजामुन खाता है।

(ख) व्यधिकरण समुच्चबोधक : जो पद किसी वाक्य के एक या अधिक आश्रित उपवाक्यों को जोड़ता है, वह व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय कहलाता है; जैसे-

  • शेख घर चला गया है क्योंकि उसके सिर में दर्द था।
  • उसने परिश्रम किया फिर भी सफल नहीं हो पाया।

4. विस्मयादिबोधक अव्यय (Interjection) :
विस्मयादिबोधक अव्यय वे रूप हैं जो आश्चर्य, हर्ष, शोक, व्यथा, घृणा आदि मनोभावों के उद्गार को व्यक्त करते हैं। उद्गार प्रायः अपने-आप मुँह से निकल जाते हैं और इनका उद्देश्य प्रायः सुनने वाले को कोई सूचना देना नहीं होता; जैसे-

  • वाह ! क्या सुंदर दृश्य है। (आश्चर्य)
  • अरे ! गाड़ी से बचो। (चेतावनी)
  • क्या बोलूँ ! (व्यथा)
  • शाबाश ! बहुत बड़ा काम किया तुमने। (प्रशंसा)
  • छिः ! ऐसी गंदी बात करता है। (घृणा)

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran अव्यय (अविकारी शब्द)

5. निपात (Stress) :
वाक्य में जो अव्यय किसी शब्द या पद के बाद लगकर उसके अर्थ में विशेष प्रकार का बल या भाव पैदा करने में सहायता करते हैं, उन्हें निपात या अवधारणामूलक शब्द कहते हैं; जैसे
1. राम ही कल जाएगा।
2. राम कल ही जाएगा।
3. कल राम भी जाएगा।
4. मैंने तो कुछ नहीं किया।
5. तुम्हारे बारे में बच्चे तक जानते हैं।

अभ्यास

1. अव्यय किसे कहते हैं ? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
2. अव्यय के भेद बताते हुए प्रत्येक के दो-दो उदाहरण दीजिए।
3. क्रिया विशेषण का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसके प्रकारों का विवेचन उदाहरण सहित कीजिए।
4. निम्नलिखित अनुच्छेद में प्रयुक्त अव्ययों के नीचे रेखा खींचो तथा उसका भेद भी बताओ।
राम और श्याम तेज दौड़ रहे थे। वे पेड़ के पास रुक गए। अरे ! इतना लंबा सांप कहां से आ गया ? राम बोला कि मैं अब नहीं दौडूंगा। श्याम भी चला गया।
5. क्रिया-विशेषण छांटो :

  • गीता मधुर गाती है।
  • वह ऊपर बैठा है।
  • रवि आज आएगा।

6. संबंधबोधक छांटो:

  • पेड़ के नीचे विश्राम कर लो।
  • गाँव के परे एक मठ है।
  • भवन के ऊपर झंडा फहरा रहा है।
  • सेना के आगे घुड़सवार थे।

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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran काल

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran kaal काल Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran काल

क्रिया किस समय हुई, इसका बोध कराने का काम काल करता है। हम कह सकते हैं :

क्रिया के जिस रूप से काम के होने के समय का बोध होता है, उसे काल कहते हैं।

काल के भेद (Kinds of Tense) :
काल के मुख्य रूप से तीन भेद हैं-
1. वर्तमान काल (Present Tense)
2. भूतकाल (Past Tense)
3. भविष्यत काल (Future Tense)

1. वर्तमान काल (Present Tense) : क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि काम अभी चल रहा है, वर्तमान काल कहलाता है।
जैसे-
वह पढ़ रहा है।
रवि खाना खाता है।

वर्तमान काल के तीन उपभेद हैं :
(क) सामान्य वर्तमान (Present Indefinite) : इसमें क्रिया का वर्तमान काल में सामान्य रूप से होने का पता चलता है।
जैसे- बच्चा दूध पीता है।
(ख) अपूर्ण वर्तमान (Present Continuous) : क्रिया के जिस रूप से जाना जाए कि काम अभी चल रहा है, अपूर्ण वर्तमान काल कहलाता है,
जैसे- नीलिमा पढ़ रही है।
(ग) संदिग्ध वर्तमान (Present Doubtful) : क्रिया के जिस रूप से उसके वर्तमान काल के होने में संदेह का बोध हो, संदिग्ध वर्तमान काल कहलाता है।
जैसे- राधा आती होगी।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran काल

2. भूतकाल (Past Tense) : क्रिया के जिस रूप से बीते हुए समय का बोध हो, वह भूतकाल कहलाता है। जैसे
तुमने पुस्तक पढ़ी।

भूतकाल के छ: उपभेद हैं :
(क) सामान्य भूत (Past Indefinite) : इसमें बीते हुए समय की क्रिया का सामान्य रूप होता है।
जैसे- मैं गया। रवि ने पत्र पढ़ा।

(ख) आसन्न भूत (Recent Past) : इसमें यह जाना जाता है कि काम भूतकाल में आरंभ होकर अभी-अभी समाप्त हुआ है।
जैसे-
मैंने अपना पाठ याद कर लिया है।
लड़कों ने फल खाए हैं।

(ग) पूर्ण भूत (Past Perfect) : इसमें यह पता चलता है कि काम भूतकाल में पूरा हो चुका था।
जैसे- मैंने पत्र लिखा था।

(घ) अपूर्ण भूत (Past Continuous) : जहां बीते हुए समय में चल रहा काम अभी पूरा नहीं हुआ हो, वहां अपूर्ण भूतकाल होता है।
जैसे- मोहन पुस्तक पढ़ रहा था।

(ङ) संदिग्ध भूत (Past Doubtful) : जहां बीते हुए समय में काम के बारे में संदेह हो, वहां संदिग्ध भूतकाल होगा।
जैसे- वह घर गया होगा।

(च) हेतुहेतुमद्भूत (Past Conditional) : जहां भूतकाल की एक क्रिया दूसरे पर आश्रित हो, वहां हेतुहेतुमद् भूतकाल होता है।
जैसे- यदि वर्षा होती तो फसल अच्छी होती।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran काल

3. भविष्यत् काल (Future Tense) : क्रिया के जिस रूप से आने वाले समय का बोध हो, उसे भविष्यत्काल कहते हैं।
मैं कल मुम्बई जाऊँगा।

भविष्यत् काल के दो उपभेद हैं :
(क) सामान्य भविष्यत् (Future Indefinite) : आने वाले काल की क्रिया के सामान्य रूप को सामान्य भविष्यत् काल कहते हैं।
जैसे- हम खेलने जाएंगे।

(ख) संभाव्य भविष्यत् (Future Doubtful) : जहां आने वाले समय में कार्य के होने की संभावना हो, वहाँ संभाव्य ‘भविष्यत् काल होता है।
जैसे- शायद आज वर्षा हो।

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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran क्रिया

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran kriya क्रिया Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran क्रिया

क्रिया का अर्थ है- ‘काम’। काम या तो होता है या किया जाता है।

परिभाषा- क्रिया वह विकारी शब्द है जिससे काम के करने या होने का बोध होता है।
क्रिया के मूल रूप को धातु (Root) कहते हैं। क्रिया के रूप धातु से बनते हैं। जैसे –
‘खा’ धातु से – खाऊँगा, खाता, खाऊँ, खाई आदि।
इसी प्रकार ले, दे, जा, पढ़ आदि धातुओं से विभिन्न क्रिया-रूप बनते हैं।

क्रिया के भेद (Kinds of Verb) :
मुख्य रूप से क्रिया के दो भेद हैं-
1. अकर्मक क्रिया (Intransitive Verb)
2. सकर्मक क्रिया (Transitive Verb)

1. अकर्मक क्रिया (Intransitive Verb) :
जिन क्रियाओं में कर्म की आवश्यकता नहीं होती, उन्हें सकर्मक क्रियाएँ कहा जाता है। ऐसे वाक्यों में क्रिया के व्यापार का फल कर्ता में ही रहता है। जैसे-
स्वाति दौड़ती है। बच्चा रोता है।
इन वाक्यों में ‘स्वाति’ और ‘बच्चा’ कर्ता हैं तथा ‘दौडना’ और ‘रोना’ क्रियाएँ हैं। इनके साथ कर्म है ही नहीं और न उसकी आवश्यकता है।

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2. सकर्मक क्रिया (Transitive Verb):
जिन क्रियाओं के व्यापार का फल सीधे कर्म पर पड़ता है, उन्हें सकर्मक क्रिया कहते हैं। कर्म के बिना ये वाक्य अधूरे प्रतीत होते हैं। जैसे-
मैंने खाया। (क्या खाया ?)
मैंने आम खाया। (आम-कर्म)
दूसरा वाक्य पूरा है तथा इसकी क्रिया ‘खाया’ सकर्मक है।

सकर्मक क्रिया की पहचान कर्ता और क्रिया के बीच ‘क्या’ और ‘किसे’ आदि प्रश्न करने से हो जाती है। यदि प्रश्न का उत्तर मिले तो क्रिया सकर्मक और न मिले तो क्रिया अकर्मक होती है।
जैसे- वह दूध पीता है।
प्रश्न – वह क्या पीता है ?
उत्तर – दूध। अतः ‘पीता है’ क्रिया सकर्मक है।

द्विकर्मक क्रिया : द्विकर्मक क्रिया वाले वाक्यों में दो-दो कर्म होते हैं। इनमें पहला कर्म प्रायः प्राणीवाचक होता है। इसे ‘गौण कर्म’ कहते हैं। दूसरा कर्म प्रायः अप्राणीवाचक होता है और यह मुख्य कर्म कहलाता है।
मुख्य कर्म विभक्ति-चिह्न (परसर्ग) रहित होता है और गौण कर्म के साथ प्रायः ‘को’ परसर्ग लगता है।
उदाहरण :
मैं राम को पत्र लिखता हूँ। इस वाक्य में दो कर्म हैं-
(i) राम को – प्राणीवाचक – गौण कर्म।
(ii) पत्र – अप्राणीवाचक – मुख्य कर्म।

संरचना की दृष्टि से क्रिया के पांच भेद हैं :
1. सामान्य क्रिया (Ordinary Verb)
2. संयुक्त क्रिया (Compound Verb)
3. नामधातु क्रिया (Nominal Verb)
4. प्रेरणार्थक क्रिया (Causal Verb)
5. पूर्वकालिक क्रिया (Absolutive Verb)

1. सामान्य क्रिया : इसमें केवल क्रिया का प्रयोग किया जाता है।
जैसे- राम गया, मैंने पढ़ा।

2. संयुक्त क्रिया : इसमें दो या दो से अधिक क्रियाओं को मिलाकर प्रयोग किया जाता है। जैसे
मैं खाना खा चुका हूँ। – वह अब सो गया है।

3. नामधातु क्रिया : संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि से बनी क्रियाएं नामधातु क्रिया कहलाती हैं। जैसे-
संज्ञा से- बात-से ‘बतियाना’, हाथ-से ‘हथियाना’। सर्वनाम से- मैं-से ‘मिमियाना’ ; अपना-से ‘अपनाना’। विशेषण से- गर्म-से ‘गर्माना’ ; नरम-से ‘नरमाना’।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran क्रिया

4. प्रेरणार्थक क्रिया : जब कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी अन्य को प्रेरणा देकर काम करवाता है, तब क्रिया का वह रूप प्रेरणाथक क्रिया कहलाता है। जैसे-

क्रिया का सामान्य रूपप्रथम प्रेरणार्थकद्वितीय प्रेरणार्थक
पीनापिलानापिलवाना
पढ़नापढ़ानापढ़वाना
धोनाधुलनाधुलवाना
लिखनालिखानालिखवाना
सुननासुनानासुनवाना
सोनासुलानासुलवाना

[वास्तव में द्वितीय कोटि की प्रेरणार्थक क्रियाएँ ही सही अर्थों में प्रेरणार्थक क्रियाएँ हैं।]

5. पूर्वकालिक क्रिया : मुख्य क्रिया से पूर्व होने वाली क्रिया पूर्वकालिक क्रिया कहलाती है। जैसेवह दूध पीकर चला गया। मैं नहाकर पुस्तक पढूंगा।

अभ्यास

1. अन्तर स्पष्ट करो:

(क) धातु और क्रिया में।
(ख) अकर्मक और सकर्मक क्रिया में।
(ग) सामान्य और संयुक्त क्रिया में।

2. नीचे लिखे वाक्यों में प्रयुक्त क्रियाओं के नीचे रेखा खींचो :

(क) सोहन ने खाना खाया।
(ख) वह अपनी जगह से उठ गया।
(ग) दिव्या पुस्तक पढ़ रही है।
(घ) बालक खेलकर सो गया।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran क्रिया

3. इन वाक्यों में से अकर्मक और सकर्मक क्रियाएं छांटकर तालिका लिखें :

(क) वह हंस रहा है।
(ख) वह पत्र लिख रहा है।
(ग) दूध उबल रहा है।
(घ) भारती दूध उबाल रही है।
(ङ) मैंने पुस्तक पढ़ी।
(च) बालक चिल्लाया

4. तीन मूल धातुएं लिखकर उनसे दो-दो क्रिया-रूप बनाकर लिखो।

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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran विशेषण

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Visheshan विशेषण Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran विशेषण

संज्ञा की विशेषता बताने वाले शब्दों को ‘विशेषण’ कहते हैं। जिस शब्द की विशेषता बताई जाती है उसे ‘विशेष्य’ कहा जाता है।
जैसे- काला घोड़ा।
इसमें काला – विशेषण है।
घोड़ा – विशेष्य है।

कभी-कभी विशेष्य के अनुसार विशेषण के लिंग-वचन बदल जाते हैं। जैसे-
अच्छा लड़का – अच्छे लडके
अच्छी लड़की – अच्छी लड़कियाँ

विशेषण के भेद (Kinds of Adjective):
1. गुणवाचक विशेषण (Qualitative Adjective)
2. संख्यावाचक विशेषण (Numeral Adjective)
3. परिमाणवाचक विशेषण (Quantitative Adjective)
4. सार्वनामिक विशेषण (Demonstrative Adjective)

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran विशेषण

1. गुणवाचक विशेषण (Qualitative Adjective) :
जो विशेषण शब्द किसी व्यक्ति या वस्तु के गुण, दोष, रंग, आकार, अवस्था, स्थिति आदि की विशेषता का बोध कराए, उसे गुणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे-
लंबी सड़क, ताजा आम, सच्ची बात, हरे पत्ते आदि।
यह विशेषण कई प्रकार की विशेषताओं का बोधक हो सकता हैं-
गुण बोधक : अच्छा, बुरा, सुन्दर, लाल, शिष्ट आदि।
काल बोधक : पुराना, नया, दैनिक, वार्षिक आदि।
स्थान बोधक : बनारसी, लखनवी, राष्ट्रीय, देसी आदि।
दिशा बोधक : पूर्वी, पश्चिमी, भीतरी, बाहरी आदि।
आकार बोधक : लंबा, विशाल, चौकोर, चौड़ा आदि।
स्वाद बोधक : खट्टा, मीठा, कड़वा, नमकीन आदि।

2. संख्यावाचक विशेषण (Numeral Adjective) :
जो विशेषण किसी संज्ञा की संख्या या क्रम का बोध कराए, उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसे- चार केले, पांचवां व्यक्ति।
संख्यावाचक विशेषण के दो भेद हैं :
(क) निश्चित संख्यावाचक : इनसे निश्चित संख्या का बोध होता है।
जैसे- दस पुस्तकें, तीसरा बालक।

(ख) अनिश्चित संख्यावाचक : इनसे निश्चित संख्या का बोध नहीं होता।
जैसे- कुछ लोग, थोड़े आदमी।।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran विशेषण

3. परिमाणवाचक विशेषण (Quantitative Adjective) : नाप-तोल बताने वाले विशेषण परिमाणवाचक विशेषण कहलाते हैं।
जैसे- दार मीटर कपड़ा, दो किलो चीनी। . परिमाणवाचक विशेषण के भी दो भेद हो सकते हैं –
(क) निश्चित परिमाणवाचक : इसमें निश्चित मात्रा का ज्ञान होता है।
जैसे- तीन लीटर दूध।

(ख) अनिश्चित परिमाणवाचक : इसमें निश्चित मात्रा का ज्ञान नहीं होता।
जैसे- थोड़ा दूध, कुछ फल।

4. सार्वनामिक विशेषण (Demonstrative Adjective) : जो सर्वनाम विशेषण के रूप में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें सार्वनामिक विशेषण कहते हैं। जैसे-
यह पुस्तक मेरी है। कोई आदमी रो रहा है। ऐसे विशेषण तीन प्रकार के होते हैं –

(क) सर्वनाम से बने जैसे- ‘कौन’ सर्वनाम से सार्वनामिक विशेषण है- कैसे, कितना, कितने।

(ख) मूल सर्वनाम का विशेषण के रूप में प्रयोग : इन्हें संकेतवाचक विशेषण भी कहते हैं। ये सदा संज्ञा से पहले आते हैं। जैसे
यह पुस्तक, वे लोग।

(ग) सर्वनाम के संबंधकारकीय रूप
जैसे- ‘मैं’ से ‘मेरा’ ‘तुम’ से ‘तुम्हारा’ ‘वह’ से ‘उसका’ ‘हम’ से ‘हमारा’

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran विशेषण

विशेषणों की रचना (Formations of Adjective):
HBSE-8th-Class-Hindi-Vyakaran-विशेषण-1

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran विशेषण

HBSE-8th-Class-Hindi-Vyakaran-विशेषण-2

2. सर्वनाम शब्दों से विशेषण बनाना
HBSE-8th-Class-Hindi-Vyakaran-विशेषण-3

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran विशेषण

3. क्रिया शब्दों से विशेषण बनाना
HBSE-8th-Class-Hindi-Vyakaran-विशेषण-4

4. अव्यय शब्दों से विशेषण बनाना
HBSE-8th-Class-Hindi-Vyakaran-विशेषण-5

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HBSE 8th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Sarvanam सर्वनाम Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम

‘सर्वनाम’ का शाब्दिक अर्थ है – सर्व (सब) का नाम। व्याकरण में सर्वनाम ऐसे शब्दों को कहते हैं, जिनका प्रयोग सब प्रकार के नामों (संज्ञाओं) के लिए अथवा उनके स्थान पर हो सके। सर्वनामों का सबसे अधिक प्रयोग वाक्यों में एक ही संज्ञा को बार-बार उसी रूप में आने से बचाने के लिए होता है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए :
स्वाति एक परिश्रमी लड़की है। स्वाति प्रतिदिन स्कूल जाती है। स्वाति की छोटी बहन दिव्या है। स्वाति के पिताजी इंजीनियर हैं। स्वाति सबकी मदद करती है। स्वाति को सभी प्रेम करते हैं।

उपर्युक्त गद्यांश में स्वाति का नाम छह बार आया है। बार-बार वही नाम लिखना या बोलना अटपटा-सा लगता है। इसे ठीक नहीं माना जाता है। इसे इस प्रकार लिखा जाना चाहिए :
स्वाति एक परिश्रमी लड़की है। वह प्रतिदिन स्कूल जाती है। उसकी छोटी बहन दिव्या है। उसके पिताजी इंजीनियर हैं। वह सबकी मदद करती है। उसको सभी प्रेम करते हैं।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम

इस गद्यांश में ‘स्वाति’ नाम केवल पहले वाक्य में ही आया है। उसके बाद के वाक्यों में उसके लिए – वह, उसकी, उसके, उसको – का प्रयोग हुआ है। स्वाति’ संज्ञा है और उसके स्थान पर प्रयुक्त होने वाले ये शब्द सर्वनाम हैं।
संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द ‘सर्वनाम’ कहलाते हैं।

मुख्य सर्वनाम शब्द हैं – मैं, हम, तुम, तू, वह, वे, कौन, कोई, क्या आदि।

सर्वनाम के भेद (Kinds of Pronoun):

1. पुरुषवाचक सर्वनाम (Personal Pronoun)
2. निश्चयवाचक सर्वनाम (Demonstrative Pronoun)
3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम (Indefinite Pronoun)
4. प्रश्नवाचक सर्वनाम (Interrogative Pronoun)
5. संबंधवाचक सर्वनाम (Relative Pronoun)
6. निजवाचक सर्वनाम (Reflexive Pronoun)

1. पुरुषवाचक सर्वनाम (Personal Pronoun):
जो सर्वनाम शब्द किसी पुरुष के नाम के बदले प्रयुक्त किया जाए उसे पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। इसमें वक्ता अपने लिए, सुनने वाले के लिए और अन्य किसी के लिए जिन सर्वनामों का प्रयोग करता है, वे पुरुषवाचक सर्वनाम होते हैं। इस प्रकार पुरुषवाचक सर्वनाम तीन प्रकार के होते हैं :
HBSE 8th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम-1
(क) उत्तम पुरुष (First Person) : वक्ता/लेखक अपने नाम के स्थान पर जिस सर्वनाम का प्रयोग करता है, उसे उत्तम पुरुष कहते हैं। जैसे- मैं, हम और इनके रूप।

(ख) मध्यम पुरुष (Second Person) : जो सर्वनाम सुनने वाले के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं, उन्हें मध्यम पुरुष कहते हैं। जैसे- तू, तुम, आप और इनके रूप ।

(ग) अन्य पुरुष (Third Person) : जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग बोलने वाले और सुनने वाले व्यक्ति के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति के लिए किया जाए, उन्हें अन्य पुरुष कहते हैं। जैसे- वह, वे, उसे, उसका, उनका, उनके आदि।

HBSE 8th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम

समझो:
आदर के अर्थ में प्रयुक्त ‘आप’ प्रायः मध्यम पुरुष के लिए आता है जैसे आप, इधर बैठिए। किंतु कभी-कभी यह अन्य पुरुष के लिए भी प्रयुक्त होता है; जैसे-महात्मा गांधी हमारे राष्ट्रपिता हैं। आपका (उनका) जन्म पोरबंदर मैं हुआ था।
आपका प्रयोग सदा बहुवचन में होता है।

‘तू’ (मध्यम पुरुष एकवचन) का विशेष प्रयोग :
1. प्यार-दुलार और अति आत्मीयता दिखाने में होता है।
2. निरादर या हीनता दिखाने में होता है।
सामान्य व्यवहार में श्रोता/पाठक के लिए ‘तुम’ का ही प्रयोग होता है।

2. निश्चयवाचक सर्वनाम (Demonstrative Pronoun):
जिस सर्वनाम से दूरवर्ती या समीपवर्ती व्यक्तियों, प्राणियों, वस्तुओं और घटना-व्यापारों का बोध होता है, उसे निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।
दूरवर्ती के लिए – वह – वह रहा मेरा मकान।
समीपवर्ती के लिए – यह – इन पुस्तकों में मेरी यह है।

समझो:

  • रूप-रचना की दृष्टि से अन्य पुरुष और निश्चयवाचक में कोई भेद नहीं है। दोनों में एक समान ‘यह, वह’ का प्रयोग होता है।
  • निश्चयवाचक सर्वनाम में पास अथवा दूर की वस्तुओं के लिए संकेत किया जाता है, अत: इसे संकेतवाचक सर्वनाम भी कहते हैं।

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3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम (Indefinite Pronoun):
जिस सर्वनाम से किसी निश्चित व्यक्ति, प्राणी या वस्तु का बोध नहीं होता है, उसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।
ऐसी स्थिति तब आती है जब किसी व्यक्ति आदि का आभास तो आपको है किंतु उसके संज्ञा-नाम के संबंध में निश्चित नहीं है। ऐसी दशा में व्यक्ति के लिए कोई और अप्राणी के लिए कुछ का प्रयोग करते हैं।
जैसे –

  • कोई दरवाजा खटखटा रहा है।
  • दूध में कुछ पड़ा है।
  • मोहन का कुछ खो गया है।

4. प्रश्नवाचक सर्वनाम (Interrogative Pronoun):
जिस सर्वनाम से किसी व्यक्ति, प्राणी, वस्तु आदि के विषय में प्रश्न का बोध होता है, उसे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं। ये हैं – कौन और क्या।
किसी व्यक्ति/प्राणी के विषय में प्रश्न करने के लिए ‘कौन’ का प्रयोग करते हैं। ‘क्या’ का प्रयोग किसी वस्तु के लिए करते हैं। जैसे –

  • देखो, कौन आया है ?
  • घर पर कौन रुकेगा?
  • खाने में आप क्या लेंगे?
  • दूध में क्या पड़ा है?

⇒ ‘कौन-सा’ का प्रयोग अप्राणियों के साथ भी होता है,
जैसे – यहाँ कई कमरे हैं, आप कौन-सा पसंद करोगे ?

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5. संबंधवाचक सर्वनाम (Relative Pronoun):
मिश्र वाक्य की रचना में जिस सर्वनाम से अन्य उपवाक्य में आई संज्ञा/सर्वनाम से संबंध स्थापित होता है, उसे संबंधवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे – जो, जिसको आदि।

1. मेरी वह कलम खो गई जो मुझे जन्मदिन पर मिली थी।
2. यह मेरा वह मित्र है जो अमेरिका गया हुआ था।
3. यह वही फिल्म है जिसे तुम देखना चाहते थे।
4. जो करेगा, सो भरेगा।
5. जैसी करनी, वैसी भरनी।

6. निजवाचक सर्वनाम (Reflexive Pronoun):
जो सर्वनाम निज के लिए अर्थात् स्वयं अपने लिए प्रयुक्त होता है, उसे निजवाचक सर्वनाम कहते हैं।
इसके संबंधवाची रूप अपना, अपनी, अपने हैं। जैसे-
1. मैं आप (स्वय) आ जाऊँगा।
2. मैं अपना काम आप करता हूँ।
3. मैं आप ही बोले जा रहा था।

‘आप’ शब्द का प्रयोग पुरुषवाचक (आदरसूचक) तथा निजसूचक, दोनों प्रकार के सर्वनामों के रूप में किया जाता है।
जैसे-
1. आप कृपया बैठिए। (पुरुषवाचक सर्वनाम)
2. यह समस्या मैं आप ही हल करूँगा। (निजवाचक सर्वनाम)

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