Author name: Bhagya

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran संधि

Haryana State Board HBSE 7th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Sandhi संधि Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Hindi Vyakaran संधि

संधि शब्द का अर्थ है जोड़ या मिलन। जब दो शब्द एक दूसरे से मिलते हैं और मिलने के कारण उनमें ध्वनि अथवा ध्वनियों का परिवर्तन होता है, तो उन शब्दों में संधि होना माना जाता है। जैसे
राम + अवतार = रामावतार सधि तीन प्रकार की होती है :
1. स्वर संधि
2. व्यंजन संधि
3. विसर्ग संधि

1. स्वर संधि : स्वर से परे स्वर आने पर शब्दों के मेल में उनमें जो परिवर्तन होता है, उसे स्वर संधि कहते हैं, जैसे-
हिम + आलय = हिमालय
मुनि + ईश्वर = मुनीश्वर

स्वर संधियां पांच प्रकार की होती हैं :
1. दीर्घ संधि
2. गुण संधि
3. वृद्धि संधि
4. यण संधि
5. अयादि संधि

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(क) दीर्घ संधि : अ-आ से परे अ-आ होने पर दोनों मिलकर आ, इ-ई से परे इ-ई होने पर दोनों मिलकर ई, उ, ऊ होने पर दोनों मिलकर ऊ हो जाता है। इस संधि का परिणाम दीर्घ स्वर होता है, अत: इसे दीर्घ संधि कहते हैं। जैसे –
अ + आ = आ
भाव + अर्थ = भावार्थ
चरण + अमृत = चरणामृत
परम + अर्थ = परमार्थ
देह + अंत = देहात

अ + आ + आ
हिम + आलय = हिमालय
सचिव + आलय = सचिवालय
छात्र + वास = छात्रावास
धर्म + आत्मा = धर्मात्मा

आ + अ = आ
शिक्षा + अर्थी = शिक्षार्थी
रेखा + अंश = रेखांश
विद्या + अर्थी = विद्यार्थी
यथा + अर्थ = यथार्थ

आ + आ = आ
विद्या + आलय = विद्यालय
महा + आशय = महाशय
मुनि + ईश = मुनीश
गिरि + ईश = गिरीश
कपि + ईश = कपीश
हरि + ईश = हरीश
नदी + ईश = नदीश
रजनी + ईश = रजनीश

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran संधि

उ+ उ = ऊ
बहु + उद्देशीय = बहुद्देशीय
सु + उक्ति = सूक्ति
भानु + उदय = भानूदय
लघु + उत्तर = लघूत्तर
वधू + उत्सव = वधूत्सव

(ख) गुण संधि : अ अथवा आ के बाद इ अथवा ई हो तो दोनों मिलकर ए, अ अथवा आ के बाद 3 अथवा ऊ हो तो दोनों मिलकर ओ तथा अ अथवा आ के बाद ऋ हो तो दोनों मिलकर अर हो जाते हैं। जैसे – अ, आ + ई, ई = ए
स्व + इच्छा = स्वेच्छा
दिन + ईश = दिनेश
नर + इंद्र = नरेंद्र
रम + ईश्वर = परमेश्वर
महा + इंद्र – महेंद्र
महा + ईश = महेश
यथा + इष्ट – यथेष्ट
लंका + ईश = लंकेश

अ, आ + उ, ऊ = ओ
बहु + उद्देशीय – बहुद्देशीय
सु + उक्ति = सूक्ति
चंद्र + उदय = चंद्रोदय
वीर + उचित = वीरोचित
महा + उत्सव = महोत्सव
पूर्व + उक्त = पूर्वोक्त

अ, आ + ऋ = अर्
ब्रह्म + ऋषि – ब्रह्मर्षि
महा + ऋषि = महर्षि
सप्त + ऋषि = सप्तर्षि
राजा + ऋषि = राजर्षि

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(ग) वृद्धि संधि : अ अथवा आ के बाद ए अथवा ऐ हो तो दोनों मिलकर ऐ तथा अ अथवा आ के बाद ओ अथवा औ हो तो दोनों को मिलाकर औ हो जाता है।

अ, आ + ए, ऐ = ऐ
एक + एक = एकैक
लोक + एषणा = लोकेषणा
सदा + एव = सदैव
तथा + एव = तथैव

अ, आ + ओ, औ = औ
अधर + गोष्ठ = अधरोष्ठ
परम + औषध = परमौषध
महा + औषध = महौषध

(घ) यण संधि : इ अथवा ई के बाद हु और ई को छोड़कर यदि कोई अन्य स्वर हो तो इ अथवा ई के स्थान पर ‘यु’, उ अथवा ऊ को छोड़कर कोई अन्य स्वर हो तो उनके स्थान पर ‘व्’ और ऋ को छोड़कर कोई अन्य स्वर हो तो उसके स्थान पर ‘र’ हो जाता है। ‘इ’ के स्थान पर ‘य’ यदि + अपि = यद्यपि
प्रति + उत्तर = प्रत्युत्तर
इति + आदि = इत्यादि
प्रति + एक = प्रत्येक

‘उ’ के स्थान पर ‘व’
सु + अल्प = स्वल्प
सु + आगत = स्वागत
अनु + एषण = अन्वेषण

‘ऋ’ के स्थान पर ‘र’
पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा

(ङ) अयादि संधि : ए, ऐ, ओ, औ के बाद यदि कोई भी स्वर हो तो ‘ए’ का ‘अय’, ‘ऐ’ का ‘आय’, ‘ओ’ का ‘अव्’ और का ‘आव’ हो जाता है।
ने + अन = नयन
पो + अन = पवन
गै + अक = गायक
पौ + अक = पावक

टिप्पणी : हिन्दी में ये शब्द रूढ़ या तत्सम माने जाएंगे। संस्कृत के समान इनमें संधि नहीं मानी जाएगी। आजकल इन शब्दों को हिंदी में संधियुक्त नहीं माना जाता।

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2. व्यंजन संधि : व्यंजन से परे व्यंजन या स्वर आने पर जो संधि होती है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं। व्यंजन संधि के प्रमुख नियम ये हैं-
(क) वर्ग का तृतीय वर्ण : वर्गों के प्रथम वर्ण से परे वर्गों का तृतीय-चतुर्थ वर्ण, कोई स्वर अधवा य, र, ल, व, ह आदि वर्णों में से कोई वर्ण हो तो पहले वर्ण को अपने वर्ग का तृतीय-वर्ण हो जाता है:
दिक् + अंबर = दिगंबर
भगवत् + गौता = भगवद्गीता
घट् + दर्शन = षड्दर्शन
कृत् + अंत = कृदंत
वाक् + ईश = वागीश
सत् + धर्म = सद्धर्म

(ख) वर्ग का पंचम वर्ण : वर्ग के प्रथम या तृतीय वर्ण से परे पाँचवा वर्ण हो, तो उसके स्थान पर उसी का पाँचवा वर्ण हो जाता है –
वाक् + मय = वाङ्मय
चित् + मय = चिन्मय
षट् + मास = षण्मास
षड् + मुख = षण्मुख
जगत् + नाथ = जगन्नाथ
सत् + मार्ग = सन्मार्ग

(ग) त् के बाद ज या झ हो तो ‘त्’ के स्थान पर ‘ज’ हो जाता है:
सत् + जन = सज्जन
उत् + ज्वल = उज्ज्वल
जगत् + जननी = जगज्जननी
विपत् + जाल = विपज्जाल

(घ) त् के बाद ड या ढ हो तो ‘त्’ के स्थान पर ‘ज’ हो जाता है :
उत् + डयन = उड्डयन
वृहत् + टीका = वृहट्टीका

(ङ) त् के बाद ल हो तो ‘त्’ के स्थान पर ‘ल’ हो जाता है:
उत् + लास = उल्लास
उत् + लेख = उल्लेख
तत् + लीन – तल्लीन

(च) त् के बाद यदि श हो तो ‘त्’ के स्थान पर ‘च’ और ‘श’ के स्थान पर ‘छ’ हो जाता है।
सत् + शास्त्र = सच्छास्त्र
उत् + श्वास = उच्छवास
उत् + शिष्ट = उच्छिष्ट
तत् + शिव = तच्छिव

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(छ) यदि ‘त्’ के बाद च/छ हो तो ‘त्’ का ‘च’ हो जाता है
उत् + चारण = उच्चारण
सत् + चरित्र = सच्चरित्र

(ज) त् के बाद ह हो तो ‘त्’ का ‘द्’ और ‘ह’ का ‘ध’ हो जाता है:
तत् + हित = तद्धित
उत् + हार = उद्धार

(झ) ‘म्’ के बाद यदि कोई स्पर्श व्यंजन हो तो ‘म्’ के स्थान पर उसी वर्ग का अंतिम वर्ण हो जाता है:
सम् + कल्प = सइकल्प (संकल्प)
सम् + तोष = सन्तोष (संतोष)
सम् + चय = संचय (संचय)
सम् + भाषण = सम्भाषण (संभाषण)

टिप्पणी : हिन्दी में अब संकल्प, संतोष आदि का प्रयोग ही अधिक हो रहा है। इन्हीं को मानक प्रयोग स्वीकार किया गया है।

(अ) म् के बाद य, र, ल, व, स, श, ह हो तो म् का अनुस्वार हो जाता है:
सम् + योग = संयोग
सम् + वाद = संवाद
सम् + रक्षक = संरक्षक
सम् + शय = संशय
सम् + लग्न = संलग्न
सम् + हार = संहार

अपवाद : यदि सम् के बाद ‘राट्’ हो तो म् का म् ही रहता है। सम् + राट् = सम्राट

(ट) ‘छ’ से पूर्व स्वर हो तो ‘छ’ से पूर्व ‘च’ आ जाता
परि + छेद = परिच्छेद
आ + छादन् = आच्छादन

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(ठ) हुस्व स्वर इ, उ के बाद यदि ‘र’ हो और ‘र’ के बाद फिर ‘र’ हो तो ह्रस्व स्वर दीर्घ हो जाता है। ‘र’ का लोप हो जाता है।
निर + रस = नीरस
निर + रोग = नीरोग

(ङ) न् का ण होना : यदि ऋ, र, ष के बाद ‘न’ व्यंजन – आता है तो ‘न’ का ‘ण’ हो जाता है। जैसे-
राम + अयन = रामायण
परि + नाम = परिणाम

3. विसर्ग संधि : विसर्ग से परे स्वर या व्यंजन आने पर जो संधि होती है उसे विसर्ग संधि कहते हैं। विसर्ग संधि के प्रमुख नियम ये हैं-
(क) विसर्ग के पहले ‘अ’ हो और बाद में कोई घोष व्यंजन (वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवां वर्ण, य, र, ल, व, ह) हो तो, विसर्ग का ‘ओ’ हो जाता है :
मनः + बल = मनोबल
मनः + रंजन- मनोरंजन
तमः + गुण = तमोगुण
तपः + वन = तपोवन
रज: + गुण = रजोगुण
मनः + हर = मनोहर
अधः + गति = अधोगति
पयः + धर = पयोधर

(ख) विसर्ग के बाद यदि च, छ हो तो विसर्ग का ‘श’ हो जाता है:
निः + चिंत = निश्चित
निः + छल = निश्छल
दु: + चरित्र = दुश्चरित्र

(ग) विसर्ग के बाद यदि ट्, ठ् हो तो विसर्ग का ष हो जाता है :
धनुः + टंकार = धनुष्टंकार

(घ) विसर्ग के बाद यदि त, थ हो तो विसर्ग का ‘स्’ हो जाता है :
दु: + तर = दुस्तर
नमः + ते = नमस्ते

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran संधि

(ङ) विसर्ग के पहले कोई स्वर हो या बाद में कोई घोष ध्वनि (स्वर, वर्ग का तीसरा, चौथा और पाँचवां वर्ण) एवं य, र, ल, व, ह हो तो विसर्ग का ‘र’ होता है :
निः + जन = निर्जन
निः + यात = निर्यात
निः + बल = निर्बल
निः + लिप्त = निर्लिप्त
निः + विकार = निर्विकार
पुनः + जन्म = पुनर्जन्म
दुः + गुण = दुर्गुण
निः + लोभ = निर्लोभ

(च) विसर्ग से परे श, ष, स हो तो विसर्ग के विकल्प से परे वाला वर्ण हो जाता है।
निः + संदेह = निस्संदेह
दु: + शासन = दुश्शासन

(छ) यदि विसर्ग से पूर्व ‘इ’ अथवा ‘उ’ हो बाद बाद में क, ख, प, फ हो तो विसर्ग श, ष, स् का ‘ए’ हो जाता
निः + कलंक = निष्कलंक
दुः + कर = दुष्कर
निः + पाप = निष्पाप
निः + फल = निष्फल

(ज) विसर्ग से परे क, ख, प, फ हो तो विसर्ग ज्यों का त्यों बना रहता है:

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HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार : उच्चारण और वर्तनी

Haryana State Board HBSE 7th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Varn-Vichar : Uchchaaran Aur Vartani वर्ण-विचार : उच्चारण और वर्तनी Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार : उच्चारण और वर्तनी

इस अध्याय के अंतर्गत निम्नलिखित का अध्ययन किया जाएगा :

  • स्वर एवं स्वरों के भेद
  • व्यंजन एवं व्यंजनों के भेद
  • अक्षर
  • व्यंजन गुच्छ 00 बलाघात
  • अनुतान
  • संगम
  • उच्चारण संबंधी अशुद्धियां और उनमें सुधार

वर्ण :
वर्ण क्या है ? : भाषा की सबसे छोटी इकाई ध्वनि है। इसके लिखित रूप को वर्ण कहते हैं। वर्ण शब्द का प्रयोग ध्वनि और ध्वनि-चिह्न (लिपि-चिह्न) दोनों के लिए होता है। इस प्रकार वर्ण भाषा के मौखिक और लिखित दोनों रूपों के प्रतीक हैं। इसे हम अक्षर भी कह सकते हैं। अक्षर का अर्थ है-उसके और टुकड़े नहीं किए जा सकते।
वर्ण या अक्षर वह छोटी-से-छोटी ध्वनि है, जिसके टुकड़े नहीं किए जा सकते।

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार : उच्चारण और वर्तनी

वर्णमाला (Alphabet) : वर्गों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं।
मानक देवनागरी वर्णमाला (Standard Hindi Alphabet) :
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-1

अनुस्वार : ं अं
विसर्ग : : अ:
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-2
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-3

हल् चिह्न ( ) : सभी व्यंजन वर्णों के लिपि चिह्नों में ‘अ’ स्वर रहता है, जैसे – क – क् + अ । जब स्वर रहित व्यंजन का प्रयोग करना हो तो उसके नीचे हल चिह्न लगाया जाता है। वर्णों के भेद (Kinds of Alphabet) : वर्णों को दो भागों में बाँटा जाता है :
1. स्वर (Vowels)
2. व्यंजन (Consonants)

स्वर (Vowels) :
जिन ध्वनियों के उच्चारण में श्वास-वायु बिना किसी रुकावट के मुख से निकलती है, उन्हें स्वर कहते हैं।
हिंदी में निम्नलिखित स्वर हैं :
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-4
यद्यपि ‘ऋ’ को लिखित रूप में स्वर माना जाता है, परंतु आजकल हिंदी में इसका उच्चारण ‘रि’ के समान होता है।
आजकल अंग्रेजी प्रभाव के कारण ‘ऑ’ ध्वनि हिंदी में अपनी जगह बना चुकी है। यह ‘आ’ और ‘ओ’ के बीच की ध्वनि है। इसका लिपि-चिह्न (ऑ) है।
जैसे – बॉल, डॉक्टर, हॉकी आदि।

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार : उच्चारण और वर्तनी

स्वर के भेद (Kinds of Vowels) :
(क) उच्चारण में लगने वाले समय के आधार पर स्वरों को दो भागों में बाँट सकते हैं :
1. हस्व स्वर (Short vowels)।
2. दीर्घ स्वर (Long vowels)

आइए, अब हम इनके बारे में जानें :
1. ह्रस्व स्वर : जिन स्वरों को सबसे कम समय (एक मात्रा) में उच्चरित किया जाता है, उन्हें हस्व स्वर कहते हैं। ये हैं – अ इ उ (ऋ)
हस्व ‘ऋ’ का प्रयोग केवल संस्कृत के तत्सम शब्दों में होता है, जैसे-
ऋषि, ऋतु, कृषि आदि।
ह्रस्व स्वरों को ‘मूल स्वर’ भी कहते हैं।

2. दीर्घ स्वर : जिन स्वरों के उच्चारण में हस्व स्वरों से अधिक (लगभग दुगुना) समय लगता है, उन्हें दीर्घ स्वर कहते हैं। ये स्वर हैं : आ ई ऊ ए ऐ ओ औ
ये स्वर हस्व स्वरों के दीर्घ रूप नहीं हैं, वरन् स्वतंत्र ध्वनियाँ हैं। इन स्वरों में ए तथा औ का उच्चारण संयुक्त स्वर रूप में भी है, जैसे-‘ऐ’ में ‘अ+इ’ दो स्वरों का संयुक्त रूप है। यह उच्चारण तब होता है जब बाद में क्रमशः ‘य’ और ‘व’ आएँ ; जैसे- भैया = भइया, कौआ – कउवा
शेष स्थिति में ‘ऐ’ और ‘औ’ का उच्चारण शुद्ध स्वर की भाँति होता है । जैसे- मैल, कैसा, औरत, कौन आदि।

व्यंजन (Consonants) :
जिन ध्वनियों के उच्चारण में वायु रूकावट के साथ मुँह से बाहर आती है, उन्हें व्यंजन कहते हैं।
हिंदी वर्णमाला में मूलतः 33 व्यंजन हैं। दो व्यंजन ‘ड’ और ‘ढ़’ क्रमशः ‘ड’ ‘ढ’ से विकसित हुए हैं।
हिंदी में अरबी, फारसी, तुर्की आदि के शब्द आ जाने के कारण आने वाली ध्वनियों के लिए जो व्यंजन बनाए गए हैं, वे हैं-क, ख, ग, फ, ज़ ।

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार : उच्चारण और वर्तनी

प्रयत्न और स्थान की विविधता के अनुसार हिंदी-व्यंजनों की तालिका
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-5

व्यंजनों का वर्गीकरण (Classification of Consonants) :
उच्चारण की दृष्टि से व्यंजन वर्णों को दो प्रकार से विभाजित किया जाता है :
(1) स्थान के आधार पर
(2) प्रयल के आधार पर।
1. स्थान के आधार पर (Places of Pronunciation) :
व्यंजनों का उच्चारण मुख के विभिन्न अवयवों-कंठ, तालु, मूर्धा आदि से किया जाता है। जो वर्ण मुख के जिस भाग से बोला जाता है, वही उस वर्ण का ‘उच्चारण स्थान’ कहलाता है। वर्गों के उच्चारण स्थान इस प्रकार हैं :

वर्ण का नामउच्चारण स्थानवर्ण
कंठ्यकंठ (गले)क, ख, ग, घ, ङ
तालव्यतालुत, छ, ज, झ, ञ, य, श
मूर्धन्यतालु का मूर्धा भागट, ठ, ड, ढ, ण, ड, ढ, ष
दंत्यदाँतों का मूलत, थ, द, ध, न
वर्त्यदंतमूलन, स, ज, र, ल
ओष्ठ्यदोनों होंठप, फ, ब, भ, म
दंतोष्ठ्यनिचले होंठ और ऊपर के दाँतव, फ
स्वरयंत्रीयस्वरयंत्र

2. प्रयत्न के आधार पर (Manner of Articulation) :
व्यंजन ध्वनियों के उच्चारण में श्वास का कंपन, श्वास की मात्रा तथा जिह्वा आदि अवयवों द्वारा श्वास के अवरोध की प्रक्रिया का नाम प्रयत्न है।
प्रायः यह प्रयत्न तीन प्रकार से होता है :
1. स्वरतंत्री में साँस के कंपन के रूप में।
2. श्वास (प्राण) की मात्रा के रूप में।
3. मुख-अवयवों द्वारा श्वास रोकने के रूप में।
अब हम इन तीनों रूपों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त करेंगे।

1. स्वरतंत्री में श्वास का कंपन : हमारे गले में दो झिल्लियाँ होती हैं, जो वायु के वेग से काँपकर बजने लगती हैं, इन्हें स्वरतंत्री कहते हैं। स्वर-तंत्रियों में होने वाले कंपन के आध र पर व्यंजन वर्णों के दो भेद हैं- अघोष और सघोष।
(क) अघोष (Non-wavering Sound) : जिन ध्वनियों के उच्चारण में स्वरतंत्रियों में कंपन नहीं होता, उन्हें अघोष कहते हैं। हिंदी की अघोष ध्वनियाँ ये हैं :
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-6.1
प्रथम तथा द्वितीय व्यंजन तथा
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-6.2
(ख) सघोष (Wavering Sound) : जिन ध्वनियों के उच्चारण में स्वरतंत्रियों में कंपन होता है, उनको सघोष कहते हैं। हिंदी के सघोष व्यंजन हैं :
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-6.3
ब भ म – वर्गों के तीसरे, चौथे और पाँचवें व्यंजन
तथा HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-6.4
सभी स्वर सघोष होते हैं।

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार : उच्चारण और वर्तनी

2. श्वास की मात्रा : इस आधार पर व्यंजनों के दो भेद किए जाते हैं :
(क) अल्पप्राण (Non-Aspirated)
(ख) महाप्राण (Aspirated)।

(क) अल्पप्राण (Non-Aspirated) : जिन ध्वनियों के उच्चारण में श्वास (प्राण वायु) कम मात्रा में बाहर निकलती है, उन्हें अल्पप्राणं व्यंजन कहते हैं। ये हैं :
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-6.5 ← वर्गों के पहले, तीसरे और पाँचवें वर्ण
तथा HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-6.7

(ख) महाप्राण (Aspirated) : जिन ध्वनियों के उच्चारण में श्वास वायु अधिक मात्रा में बाहर निकलती है, उन्हें महाप्राण कहते हैं। ये हैं :
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-6.6 ← वर्गों के दूसरे और चौथे वर्ण तथा

व्यंजन-गुच्छ :
जब दो या दो से अधिक व्यंजन एक साथ एक श्वास के झटके में बोले जाते हैं, तब उनको ‘व्यंजन-गुच्छ’ कहा जाता है। जैसे-प्यास। शब्द के आदि में प्राय: दो प्रकार के व्यंजन-गुच्छ मिलते हैं :
1. व्यंजन + य, र, ल, व
2. स + य र ल से भिन्न व्यंजन

1.क् + य = क्य (क्यारी)

क् + व = क्व (क्वारा)

क् + र = क्र (क्रम)

2.श् + र = श्र (श्रम)

श् + य = श्य (श्याम)

स् + र = स्र (स्रोत)

3.स् + क = स्क (स्कंध)

स् + त = स्त (स्तन)

स् + न = स्न (स्नान)

स् + फ = स्फ (स्फूर्ति)

4.ग् + य = ग्या (ग्यारह)

ग् + व = ग्व (ग्वाला)

ग् + र = ग्र (ग्राम)

5.स् + ल = स्ल (स्लेट)

स् + ट = स्ट (स्टेशन)

स् + थ = स्थ (स्थल)

शब्द के मध्य तथा अंत में भी अनेक व्यंजन-गुच्छ मिलते हैं ; जैसे- न् + त = अंत, र + म – मार्ग, प् + त – लुप्त आदि।

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार : उच्चारण और वर्तनी

व्यंजन-संयोग :
जब एक व्यंजन के साथ दूसरा व्यंजन आता है और दोनों का उच्चारण अलग-अलग किया जाए तो व्यंजन-संयोग होता है। व्यंजन-संयोग में व्यंजनों को अलग-अलग लिखना चाहिए।
जैसे- जनता = जन् + ता में न् + त का संयोग है।
उलटा = उल्+ टा में ल् + ट का संयोग है।

व्यंजन-द्वित्व :
जब कोई व्यंजन अपने समरूप व्यंजन से मिलता है तो ऐसे रूप को व्यंजन-द्वित्व कहते हैं। जैसेइक्का, पक्का, बच्चा, कट्टर, लड्डू, दिल्ली, लटू, उद्देश्य, थप्पड़, उत्तेजित आदि। Is इन्हें भी समझो : ‘र’ व्यंजन युक्त।

  • जब ‘र’ (स्वर रहित) किसी व्यंजन के पूर्व हो, जैसे – कर्म, धर्म, वर्ष आदि।
  • जब ‘र’ (स्वर सहित) किसी व्यंजन के बाद हो, जैसे – प्रेम, क्रम आदि।
  • यही स्वर सहित ‘र’ ट और ड के साथ वर्तनी के साथ कुछ भिन्न रूप ले लेता है, जैसे-ट्रेन, ट्रक, ड्रम आदि।

दो व्यंजनों के त और श के साथ इसके विशिष्ट रूप बन जाते हैं-
त् + र =त्र त्रिशूल, त्रिभुज, यंत्र
श् + र = श्र श्रम, श्री, आश्रय अन्य

संयुक्त व्यंजन :
क् + ष = क्ष क्षमा, क्षेत्र, क्षत्रिय
ज् + अ = ज्ञ ज्ञान, यज्ञ, विज्ञान
(‘ज्ञ’ का उच्चारण प्रायः ग् + य – ग्य के रूप में किया जाता है।)

वर्ण-विच्छेद :
जब किसी शब्द में प्रयुक्त वर्णों को अलग-अलग किया जाता है, तो उसे ‘वर्ण-विच्छेद’ कहते हैं।
उदाहरण-

विद्यालयव् + इ + द् + य् + आ + ल् + अ + य् + अ
भारतीयभ् + आ + र् + अ + त् + ई + य् + अ
योग्यताय् + ओ + ग् + य् + अ + त् + आ

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार : उच्चारण और वर्तनी

बलाघात (Stress):
किसी शब्द के उच्चारण में किसी अक्षर पर जो बल दिया जाता है, उसे बलाघात कहते हैं। किसी भी अक्षर के सभी शब्द समान बल से नहीं बोले जाते। जैसे- ‘राम’ शब्द में ‘रा’ पर बल है। – ‘कबीर’ शब्द में ‘बी’ पर बल है। * बलाघात शब्द स्तर पर भी देखा जाता है, जैसे –
रोको, मत जाने दो।
आज मैं रामायण पढूंगा।
मैं रामायण कल पढूँगा ।

अनुतान (Intonation) :
बोलने में जो सुर का उतार-चढ़ाव (आरोह-अवरोह) होता है, उसे अनुतान कहते हैं। इसका महत्व शब्द एवं वाक्य दोनों स्तरों पर है। ‘अच्छा’ शब्द की विभिन्न अनुतान से –
अच्छा – सामान्य कथन/स्वीकृति
अच्छा ? – प्रश्नवाचक
अच्छा ! – आश्चर्य

संगम (Juncture) :
पदों का सीमा-संकेत संगम कहलाता है। संगम अक्षरों के बीच के हल्के-से विराम को जानना है। दो भिन्न स्थानों पर संगम से दो भिन्न अर्थ निकलते हैं ; जैसे –
सिरका – एक प्रकार का तरल पदार्थ
सिर + का – सिर से संबद्ध
जलसा – उत्सव
जल + सा – जल की तरह
मनका – माला का दाना
मन + का – मन का (भाव)

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार : उच्चारण और वर्तनी

उच्चारण संबंधी अशधियाँ और उनका निराकरण (Correction in Pronunciation):
शुद्ध भाषा लिखने-पढ़ने में शुद्ध उच्चारण का बहुत महत्त्व है। हिंदी में वर्तनी की जो अशुद्धियाँ पाई जाती हैं, उनका एक प्रधान कारण अशुद्ध उच्चारण है। आगे ऐसे शब्दों के उदाहरण दिए जा रहे हैं जिनके उच्चारण में प्रायः अशुद्धि होती है :

तालिका :
1. ह्रस्व स्वर के स्थान पर दीर्घ तथा दीर्घ स्वर के स्थान पर हस्व
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-7.1
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-7.2
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-7.3
2. नासिक्य व्यंजन संबंधी अशुद्धियाँ
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-8
3. अल्पप्राण-महाप्राण संबंधी अशुद्धियाँ
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-10
4. व-ब की अशुद्धियाँ
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-9

HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार : उच्चारण और वर्तनी

5. श, ष, स संबंधी अशुद्धियाँ
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-11
6. छ-क्ष संबंधी अशुद्धियाँ
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-12
7. ऋ-र संबंधी अशुद्धियाँ
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-13
8. चंद्रबिंदु और अनुस्वार की अशुद्धियाँ
HBSE 7th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार उच्चारण और वर्तनी-14

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HBSE 6th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार : उच्चारण और वर्तनी

Haryana State Board HBSE 6th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Varn-Vichar : Uchchaaran Aur Vartani वर्ण-विचार : उच्चारण और वर्तनी Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार : उच्चारण और वर्तनी

इस अध्याय के अंतर्गत निम्नलिखित का अध्ययन किया जाएगा :

  • स्वर एवं स्वरों के भेद
  • व्यंजन एवं व्यंजनों के भेद
  • अक्षर
  • व्यंजन गुच्छ 00 बलाघात
  • अनुतान
  • संगम
  • उच्चारण संबंधी अशुद्धियां और उनमें सुधार

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran वर्ण-विचार : उच्चारण और वर्तनी

वर्ण :
वर्ण क्या है ? : भाषा की सबसे छोटी इकाई ध्वनि है। इसके लिखित रूप को वर्ण कहते हैं। वर्ण शब्द का प्रयोग ध्वनि और ध्वनि-चिह्न (लिपि-चिह्न) दोनों के लिए होता है। इस प्रकार वर्ण भाषा के मौखिक और लिखित दोनों रूपों के प्रतीक हैं। इसे हम अक्षर भी कह सकते हैं। अक्षर का अर्थ है-उसके और टुकड़े नहीं किए जा सकते।
वर्ण या अक्षर वह छोटी-से-छोटी ध्वनि है, जिसके टुकड़े नहीं किए जा सकते।

वर्णमाला (Alphabet) :
वर्गों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं।
मानक देवनागरी वर्णमाला (Standard Hindi Alphabet) :
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अनुस्वार : ं अं
विसर्ग : : अ:
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हल् चिह्न ( ) : सभी व्यंजन वर्णों के लिपि चिह्नों में ‘अ’ स्वर रहता है, जैसे – क – क् + अ । जब स्वर रहित व्यंजन का प्रयोग करना हो तो उसके नीचे हल चिह्न लगाया जाता है। वर्णों के भेद (Kinds of Alphabet) : वर्णों को दो भागों में बाँटा जाता है :
1. स्वर (Vowels)
2. व्यंजन (Consonants)

स्वर (Vowels) :
जिन ध्वनियों के उच्चारण में श्वास-वायु बिना किसी रुकावट के मुख से निकलती है, उन्हें स्वर कहते हैं। हिंदी में निम्नलिखित स्वर हैं :
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यद्यपि ‘ऋ’ को लिखित रूप में स्वर माना जाता है, परंतु आजकल हिंदी में इसका उच्चारण ‘रि’ के समान होता है।
आजकल अंग्रेजी प्रभाव के कारण ‘ऑ’ ध्वनि हिंदी में अपनी जगह बना चुकी है। यह ‘आ’ और ‘ओ’ के बीच की ध्वनि है। इसका लिपि-चिह्न (ऑ) है।
जैसे – बॉल, डॉक्टर, हॉकी आदि।

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स्वर के भेद (Kinds of Vowels) :
(क) उच्चारण में लगने वाले समय के आधार पर स्वरों को दो भागों में बाँट सकते हैं :

  • हस्व स्वर (Short vowels)।
  • दीर्घ स्वर (Long vowels)

आइए, अब हम इनके बारे में जानें :
1. ह्रस्व स्वर : जिन स्वरों को सबसे कम समय (एक मात्रा) में उच्चरित किया जाता है, उन्हें हस्व स्वर कहते हैं। ये हैं – अ इ उ (ऋ)
हस्व ‘ऋ’ का प्रयोग केवल संस्कृत के तत्सम शब्दों में होता है, जैसे-
ऋषि, ऋतु, कृषि आदि।
ह्रस्व स्वरों को ‘मूल स्वर’ भी कहते हैं।

2. दीर्घ स्वर : जिन स्वरों के उच्चारण में हस्व स्वरों से अधिक (लगभग दुगुना) समय लगता है, उन्हें दीर्घ स्वर कहते हैं। ये स्वर हैं : आ ई ऊ ए ऐ ओ औ
ये स्वर हस्व स्वरों के दीर्घ रूप नहीं हैं, वरन् स्वतंत्र ध्वनियाँ हैं। इन स्वरों में ए तथा औ का उच्चारण संयुक्त स्वर रूप में भी है, जैसे-‘ऐ’ में ‘अ+इ’ दो स्वरों का संयुक्त रूप है। यह उच्चारण तब होता है जब बाद में क्रमशः ‘य’ और ‘व’ आएँ ; जैसे- भैया = भइया, कौआ – कउवा
शेष स्थिति में ‘ऐ’ और ‘औ’ का उच्चारण शुद्ध स्वर की भाँति होता है । जैसे- मैल, कैसा, औरत, कौन आदि।

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व्यंजन (Consonants) :
जिन ध्वनियों के उच्चारण में वायु रूकावट के साथ मुँह से बाहर आती है, उन्हें व्यंजन कहते हैं।
हिंदी वर्णमाला में मूलतः 33 व्यंजन हैं। दो व्यंजन ‘ड’ और ‘ढ़’ क्रमशः ‘ड’ ‘ढ’ से विकसित हुए हैं।
हिंदी में अरबी, फारसी, तुर्की आदि के शब्द आ जाने के कारण आने वाली ध्वनियों के लिए जो व्यंजन बनाए गए हैं, वे हैं-क, ख, ग, फ, ज़ ।

प्रयत्न और स्थान की विविधता के अनुसार हिंदी-व्यंजनों की तालिका
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उच्चारण संबंधी अशधियाँ और उनका निराकरण (Correction in Pronunciation):
शुद्ध भाषा लिखने-पढ़ने में शुद्ध उच्चारण का बहुत महत्त्व है। हिंदी में वर्तनी की जो अशुद्धियाँ पाई जाती हैं, उनका एक प्रधान कारण अशुद्ध उच्चारण है। आगे ऐसे शब्दों के उदाहरण दिए जा रहे हैं जिनके उच्चारण में प्रायः अशुद्धि होती है :

तालिका
1. ह्रस्व स्वर के स्थान पर दीर्घ तथा दीर्घ स्वर के स्थान पर हस्व
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2. नासिक्य व्यंजन संबंधी अशुद्धियाँ
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3. अल्पप्राण-महाप्राण संबंधी अशुद्धियाँ
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4. व-ब की अशुद्धियाँ
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5. श, ष, स संबंधी अशुद्धियाँ
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6. छ-क्ष संबंधी अशुद्धियाँ
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7. ऋ-र संबंधी अशुद्धियाँ
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8. चंद्रबिंदु और अनुस्वार की अशुद्धियाँ
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HBSE 6th Class Hindi Vyakaran संज्ञा

Haryana State Board HBSE 6th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Sangya संज्ञा Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Hindi Vyakaran संज्ञा

नीचे लिखे वाक्यों को पढ़िए और रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए :
1. दिव्या खड़ी है।
2. वह गन्ना चूस रही है।
3. गन्ने में मिठास है।
पहले वाक्य में ‘दिव्या‘ एक लड़की (व्यक्ति) का नाम है।
दूसरे वाक्य में ‘गन्ना‘ एक वस्तु का नाम है।
तीसरे वाक्य में ‘मिठास‘ एक गुण का नाम है।
इन वाक्यों में दिव्या, गन्ना, मिठास शब्द संज्ञाएं हैं।

किसी व्यक्ति (प्राणी), वस्तु, स्थान, गुण या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं।

संज्ञा के कुछ उदाहरण देखिए :

  • व्यक्तियों (प्राणियों) के नाम – स्वाति, गौरव, सौरभ, बालक, हाथी, शेर, गाय आदि।
  • वस्तुओं के नाम – मेज़, कुर्सी, कमीज़, ताजमहल आदि।
  • स्थानों के नाम – आगरा, दिल्ली, मुम्बई, नगर आदि।
  • गुणों या भावों के नाम – मिठास, ईमानदारी, बुढ़ापा, सच्चाई आदि।

संज्ञा के कार्य : वाक्य में संज्ञा शब्द कई कार्य करते हैं :

  • कर्ता के रूप में – रमेश पुस्तक पढ़ता है।
  • कर्म के रूप में – रमेश ने पुस्तक को पढ़ा।
  • पूरक के रूप में – रमेश डाक्टर है।
  • क्रिया विशेषण के रूप में – रमेश घर पर है।

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संज्ञा के भेद (Kinds of Noun) :
मुख्य रूप से संज्ञा के तीन भेद हैं : व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक संज्ञा।
1. व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun): जिस संज्ञा से किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु अथवा स्थान का बोध हो, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं।
जैसे- महात्मा गांधी, ताजमहल, लाल किला।

2. जातिवाचक संज्ञा (Common Noun) : जो संज्ञा शब्द किसी विशेष व्यक्ति या स्थान को न बताकर सम्पूर्ण जाति का बोध कराए, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।
जैसे- गाय, बालक, पुस्तक, घर।

व्यक्तिवाचक संज्ञा का जातिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग
जयचंदों के कारण ही देश को गुलाम होना पड़ा।
[यहाँ ‘जयचंद’ व्यक्ति विशेष न रहकर देशद्रोहियों का प्रतीक बन गया है, अतः यह प्रयोग जातिवाचक संज्ञा का है।]

जातिवाचक संज्ञा का व्यक्तिवाचक संज्ञा के रूप में प्रयोग गांधीजी ने भारत को स्वतंत्र कराया।
[‘गांधी’ जातिसूचक शब्द होते हुए भी यहां महात्मा गांधी के लिए प्रयुक्त हुआ है, अत: यह व्यक्तिवाचक संज्ञा का प्रयोग माना जाएगा।]

3. भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun) :
जो संज्ञा शब्द किसी गण, दशा या भाव का बोध कराएँ, भाववाचक संज्ञा कहलाते हैं। जैसे- बुढ़ापा, सुंदरता, मित्रता, गरीबी आदि।

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भाववाचक संज्ञाएँ बनाना (Formation of Abstract Noun) :
भाववाचक संज्ञाएँ पांच प्रकार के शब्दों से बनाई जाती हैं :
1. जातिवाचक संज्ञा से
सज्जन – सज्जनता
विद्वान – विद्वत्ता
मनुष्य – मनुष्यता
पशु – पशुता
शत्रु – शत्रुता
मित्र -मित्रता
साधु – साधुता
कवि – कवित्व
चोर – चोरी

2. विशेषण से-
सुंदर – सुंदरता
आलसी – आलस्य
मीठा -मिठास
सफेद – सफेदी
काला – कालिमा
हरा – हरियाली
चतुर – चतुरता/चतुराई
भोला – भोलापन
मधुर – मधुरता

3. सर्वनाम से-
अपना – अपनापन
मम – ममता
आप – आपा
सर्व – सर्वस्व
अहं – अहंकार
निज – निजत्व

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran संज्ञा

4. क्रिया से
उठना – उठान
पढ़ना – पढ़ाई
भूलना – भूल
धकना – थकावट
उतरना – उतराई
हारना – हार

5. अव्यय से
समीप – समीपता
निकट – निकटता

विशेष :
अंग्रेजी व्याकरण के प्रभावस्वरूप संज्ञा के दो अन्य भेद भी माने जाते हैं :
1. समुदायवाचक संज्ञा (Collective Noun) : समूह, गिरोह, झुंड या दल का बोध कराने वाले शब्द समूहवाचक संज्ञा कहलाते हैं। जैसे- सभा, सेना, कक्षा।
2. द्रव्यवाचक संज्ञा (Material Noun) : जिन संज्ञा शब्दों से किसी द्रव्य, पदार्थ, धातु आदि का बोध होता है, उन्हें द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं।
जैसे- सोना, चाँदी, घी, तेल, कोयला, लोहा।

अभ्यास

1. सही कथनों के लिए ✓ चिह्न तथा गलत कथनों के लिए ✗ चिह्न लगाइए :
(क) ‘मौता’ जातिवाचक संज्ञा है। ।
(ख) ‘मिठास’ भाववाचक संज्ञा है।
(ग) ‘नगर’ व्यक्तिवाचक संज्ञा है।
(घ) ‘सोना’ द्रव्यवाचक संज्ञा है।
(ङ) ‘सेना’ समुदायवाचक संज्ञा है।

2. सही उत्तर के चारों ओर गोल दायरा लगाओ
(क) जो शब्द किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध कराए, उसे- जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।

  • व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं।
  • भाववाचक संज्ञा कहते हैं।
  • द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं।

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran संज्ञा

(ख) जो शब्द किसी जाति का बोध कराए उसे- व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं।

  • जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।
  • समुदायवाचक संज्ञा कहते हैं।

(ग) जिसमें किसी वस्तु/व्यक्ति के भाव अथवा गुण की बात होती है, उसे-

  • जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।
  • भाववाचक संज्ञा कहते हैं।
  • द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं।

3. निम्नलिखित शब्दों में से व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक, व्यवाचक, समुदायवाचक छांटकर लिखें:
बुढ़ापा, गीता, विद्यार्थी, नारी, अध्यापक, उत्तम, ताजमहल, गंगा, कोमलता, बहन, नदी, पर्वत, हिमालय, सेना, सोना, घी, दल।

4. भाववाचक संज्ञा बनाओ : चोर, साधु, युवक, नारी, काला

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HBSE 6th Class Hindi Vyakaran संज्ञा के विकार

Haryana State Board HBSE 6th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Sangya ke Vikar संज्ञा के विकार Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Hindi Vyakaran संज्ञा के विकार

हमने पढ़ा कि संज्ञा एक विकारी शब्द है। संज्ञा में विकार (परिवर्तन) तीन कारणों से होता है:

  1. लिंग (Gender)
  2. वचन (Number)
  3. कारक (Case)

यद्यपि आप पिछली कक्षा में इनके बारे में जान चुके हैं पर अब हम इनके बारे में अधिक विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त करेंगे।

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran संज्ञा के विकार

1. लिंग (Gender) :
शब्द के जिस रूप में यह जाना जाए कि यह पुरुष जाति के लिए प्रयुक्त हुआ है अथवा स्त्री जाति के लिए उसे लिंग कहते हैं। भाषा के शुद्ध प्रयोग के लिए संज्ञा के लिंग का ज्ञान होना आवश्यक है। हिन्दी में लिंग दो माने जाते हैं :

  • पुल्लिग (Masculine Gender)
  • स्त्रीलिंग (Feminine Gender)।

पुल्लिग पुरुष जाति का बोध कराते हैं और स्त्रीलिंग स्त्री जाति को बोध कराते हैं। जैसे- घोड़ा-घोड़ी, शेर-शेरनी।

हिन्दी भाषा के ठीक प्रयोग के लिए संज्ञा शब्दों के लिंग का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि संज्ञा शब्दों के लिंग का प्रभाव सर्वनाम, विशेषण, क्रिया तथा क्रिया विशेषण पर पड़ता है। जैसे-

  1. सर्वनाम पर – (पुल्लिग) अपना कमरा खोलो। – (स्त्रीलिंग) अपनी कोठरी खोलो।
  2. विशेषण पर – (पुल्लिंग) मुझे नीला कोट चाहिए। – (स्त्रीलिंग) मुझे नीली साड़ी चाहिए।
  3. क्रिया पर – (पुल्लिग) लड़का दौड़ा। – (स्त्रीलिंग) लड़की दौड़ी।
  4. क्रिया-विशेषण पर- (पुल्लिंग) राम दौड़ता हुआ आया। – (स्त्रीलिंग) सीता दौड़ती हुई आई।

लिंग पहचान के कुछ सामान्य नियम
(क) पुल्लिग : निम्नलिखित शब्द प्रायः पुल्लिग होते हैं :
1. देशों के नाम : चीन, भारत, अमेरिका, फ्रांस आदि।
2. पेड़ों के नाम : आम, केला, संतरा, अमरूद आदि। [अपवाद : इमली, नारंगी, इलायची आदि]
3. पर्वतों के नाम : हिमालय, विंध्याचल, सतपुड़ा आदि।
4. सागरों के नाम : हिन्द महासागर, प्रशांत महासागर आदि।
5. दिनों के नाम : सोमवार, रविवार, मंगलवार आदि।
6. महीनों के नाम : चैत, वैशाख, मार्च, जून आदि। [अपवाद : जनवरी, फरवरी, मई, जुलाई]
7. तारों तथा ग्रहों के नाम : सूर्य, चन्द्र, शुक्र, मंगल आदि। [अपवाद : पृथ्वी]
8. धातुओं के नाम : ताँबा, लोहा, सोना, राँगा आदि। [अपवाद : चाँदी, पीतल]
9. शरीर के कुछ अंगों के नाम : सिर, गाल, कान, होंठ आदि।
10. भाववाचक संज्ञाएं : प्रेम, क्रोध, आनंद, दुख आदि।
11. अकारांत शब्द : शेर, लेखक, पर्वत, पत्र आदि।

(ख) स्वीलिंग : निम्नलिखित शब्द प्रायः स्त्रीलिंग होते हैं :
1. भाषाओं के नाम : हिंदी, अंग्रेजी, रूसी, जापानी आदि।
2. नदियों के नाम : गंगा, यमुना, सरस्वती, सरयू आदि।
3. ईकारांत : नदी, पोथी, रोटी, मिठाई, लाठी आदि।
4. आकारांत शब्द : प्रार्थना, आशा, कला, परीक्षा आदि।
5. बोलियों के नाम : ब्रजभाषा, खड़ी बोली, अवधी, मैथिली आदि।
6. तिथियों के नाम : पूर्णिमा, अष्टमी, चतुर्थी, तीज आदि।

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran संज्ञा के विकार

लिंग परिवर्तन-तालिका (Change of Gender):
HBSE 6th Class Hindi Vyakaran संज्ञा के विकार-1

कुछ सर्वथा भिन्न रूप:
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2. वचन (Number) :
वचन का संबंध गिनती से ही होता है।
एक या अनेक के भाव का बोध जिस रूप से कराया जाता है, उसे वचन कहते हैं।
हिन्दी में दो वचन होते हैं :

  1. एकवचन (Singular Number)
  2. बहुवचन (Plural Number)

1. एकवचन (Singular Number): किसी एक ही व्यक्ति का बोध कराने वाले शब्द के रूप को ‘एकवचन’ कहते हैं। जैसेलड़का, नदी, पुस्तक आदि।
2. बहुवचन (Plural Number) : एक से अधिक व्यक्तियों या वस्तुओं का बोध कराने वाले शब्दों के रूप को बहुवचन कहते हैं। जैसे- लड़के, नदियाँ, पुस्तकें आदि।

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran संज्ञा के विकार

एकवचन से बहुवचन बनाने के नियम (Change of Gender):
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कुछ अन्य नियम :
1. सम्मान या आदर प्रकट करने के अर्थ में एक व्यक्ति के लिए भी बहुवचन का प्रयोग किया जाता है, जैसे-
(क) गांधीजी सत्य और अहिंसा के पुजारी थे।
(ख) आज गुरुजी नहीं आए।

2. हस्ताक्षर, प्राण, दर्शन, होश, लोग आदि शब्द प्रायः बहुवचन रूप में ही प्रयुक्त होते हैं। जैसे-
(क) आपने हस्ताक्षर कर दिए ?
(ख) उसके प्राण निकल गए।
(ग) आपके दर्शन दुर्लभ हैं।

3. जनता, वर्षा, पानी शब्द एकवचन में ही प्रयुक्त होते हैं। जैसे-
(क) जनता बड़ी चली जा रही है।
(ख) बहुत तेज वर्षा हो रही है।
(ग) चारों ओर पानी भर गया।

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran संज्ञा के विकार

कभी-कभी संज्ञा शब्दों के वचन का प्रभाव सर्वनाम, विशेषण, क्रिया तथा क्रिया-विशेषण पर भी पड़ता है। जैसे-
सर्वनाम पर – (एकवचन) मेरा बेटा पास हो गया। – (बहुवचन) मेरे बेटे पास हो गए।
विशेषण पर – (एकवचन) अच्छा लड़का आदर करता है। – (बहुवचन) अच्छे लड़के आदर करते हैं।
क्रिया पर – (एकवचन) घोड़ा तेज दौड़ा। – (बहुवचन) घोड़े तेज दौड़े।
क्रिया-विशेषण पर – (एकवचन) लड़का दौड़ता हुआ आया। – (बहुवचन) लड़के दौड़ते हुए आए।

3. कारक (Case) :
कारक का शाब्दिक अर्थ है-‘क्रिया को करने वाला’ अर्थात् क्रिया को पूरी करने में किसी-न-किसी भूमिका को निभाने वाला। क्रिया को संपन्न अर्थात् पूरा करने में जो संज्ञा आदि शब्द संलग्न होते हैं, वे अपनी अलग-अलग प्रकार की भूमिकाओं के अनुसार अलग-अलग कारकों में वाक्य में दिखाई पड़ते हैं।
नीचे लिखे वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़ो :
1. राहुल ने केला खाया।
2. रवि ने सचिन को पीटा।
3. गरिमा चाकू से फल काटती है।
4. मोहन बच्चों के लिए खिलौने लाया।
5. पेड़ से पत्ते गिर रहे हैं।
6. पुस्तक मेज पर रखी है।

उपर्युक्त वाक्यों में
वाक्य (1) में ‘खाना’ क्रिया है। किसने खाया ? राहुल ने।
वाक्य (2) में रवि ने किसको पीटा ? सचिन को।
वाक्य (3) में गरिमा ने फल किससे काटा ? चाकू से।
वाक्य (4) में मोहन किसके लिए खिलौने लाया ? बच्चों के लिए।
वाक्य (5) में पत्ते कहाँ से गिरे ? पेड़ से।
वाक्य (6) में पुस्तक कहाँ रखी है ? मेज़ पर।
इन सभी वाक्यों में संज्ञा-पदों का क्रिया-पद के साथ एक निश्चित संबंध होता है। अत: किसी वाक्य में प्रयुक्त संज्ञा या सर्वनाम पदों का उस वाक्य की क्रिया से जो संबंध होता है, उसे कारक कहते हैं।

इन संज्ञाओं का क्रियाओं से संबंध को बताने के लिए ने, को, से, में, पर, के लिए आदि चिह्नों का प्रयोग किया जाता है। इन चिह्नों को ‘कारक चिह्न’ कहते हैं। हिंदी में ये कारक-चिह्न ‘परसर्ग’ कहलाते हैं। कभी-कभी वाक्यों में कुछ शब्दों के साथ परसों का प्रयोग नहीं होता है। जैसे- राम गया।

कारक वह व्याकरणिक कोटि है जो यह स्पष्ट करती है कि संज्ञा आदि शब्द वाक्य में स्थित क्रिया के साथ किस प्रकार की भूमिका से संबद्ध है।

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कारक के भेद (Kinds of Case):
कारक के मुख्य भेद छह हैं:
1. कर्ता कारक (Nominative Case)
2. कर्म कारक (Objective Case)
3. करण कारक (Instrumental Case)
4. संप्रदान कारक (Dative Case)
5. अपादान कारक (Ablative Case)
6. अधिकरण कारक (Locative Case)
कुछ लोग निम्नलिखित दो भेदों को भी कारक के अंतर्गत रखते हैं :
7. संबंध कारक (Possessive Case)
8. संबोधन कारक (Vocative Case)
इनका विवरण इस प्रकार है :

1, कर्ता कारक [ने] : किसी क्रिया को करने वाला ही कर्ता है। प्रत्येक क्रिया के साथ कर्ता अवश्य होता है, बिना कर्ता के क्रिया हो ही नहीं सकती। जैसे-

  • गीता खाना पका रही है।
  • नीहारिका ने कहानी लिखी।
  • राम चला गया।

इन वाक्यों में गीता, नीहारिका और राम कर्ता कारक हैं। जब सकर्मक क्रिया भूतकाल में हो तो कर्ता कारक के साथ ‘ने’ परसर्ग का प्रयोग होता है। कभी-कभी कर्ता के साथ ‘को’ कारक-चिह्न का भी प्रयोग होता है ; जैसे- मोहन को मुंबई जाना है।

निम्नलिखित स्थितियों में ‘ने’ परसर्ग (कारक-चिह्न) का प्रयोग नहीं होता-

  • वर्तमान काल की सकर्मक क्रिया के साथ-मैं पुस्तक पढ़ता हूँ।
  • भूतकाल को अकर्मक क्रिया के साथ-वह चला गया।

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran संज्ञा के विकार

2. कर्म कारक [को] : वाक्य में जिस संज्ञा/सर्वनाम पर क्रिया का फल या प्रभाव पड़ता है और जिसकी अपेक्षा क्रिया करती है, उसे कर्म कहते हैं।
प्रायः कर्म की पहचान क्रिया पर ‘क्या’, ‘किसे’ प्रश्न करके की जाती है। इसके उत्तर में जो संज्ञा प्राप्त होती है, वही कर्म होती हैं।
कर्म कारक के साथ ‘को’ परसर्ग का प्रयोग होता है; परंतु कई अवस्थाओं में इसका प्रयोग नहीं भी होता है। ‘को’ परसर्ग का प्रयोग प्रायः प्राणिवाचक संज्ञा के साथ होता है। जैसे –
1. राजश न माहन का पढ़ाया। किसको पढ़ाया ?
(परसर्ग को) – मोहन (कम), परसर्ग – को।

2 माँ ने बच्चे को सुलाया। किसको सुलाया ?
(परसर्ग को) – बच्चे (कम), परसर्ग – को।

3. वह पुस्तक पढ़ रहा है ? क्या पड़ रहा है?
पुस्तक – (कम), परसर्ग-को, परसर्ग – कोई नहीं।

जब वाक्य में दो कर्म हों (मुख्य और गौण), तब ‘को’ का प्रयोग गौण कर्म के साथ होता है; जैसे-मैंने राम को पत्र लिखा। (राम गौण कर्म, पत्र मुख्य कम)।

3. करण कारक [से, के द्वारा ] : जिसकी सहायता से कोई कार्य संपन्न हो, वह संज्ञा/सर्वनाम पद करण कारक होता है। करण कारक का विभक्ति-चिह्न (परसर्ग) है -से, के द्वारा। जैसे-

  • मैं पैन से चिट्ठी लिख रहा हूँ।
  • राधा ने चाकू से छेद किया।
  • उसे पत्र के द्वारा समाचार मिला।

4. संप्रदान कारक [को, के लिए] : संज्ञा या सर्वनाम के उस रूप को संप्रदान कहते हैं जिसके लिए कर्ता द्वारा कुछ किया जाए या उसे कुछ दिया जाए। संप्रदान कारक का चिह्न को, के लिए है। जैसे-

  • मोहन ने गरीबों को धन दिया।
  • मैं आपके लिए दवा लाया हूँ।
  • वह यह मिठाई बहन के लिए लाया था।

‘को’ परसर्ग का प्रयोग कर्म कारक और संप्रदान कारक दोनों में होता है। कर्म कारक में ‘को’ To के अर्थ में होता है, जबकि संप्रदान कारक में ‘को’ For के अर्थ में। जैसे-

  • वह मोहन को पत्र लिखेगा। (कर्म कारक)
  • वह दीन-दुखियों को कपड़े देता है। (संप्रदान कारक)

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5. अपादान कारक [से] : जिस पद से अलग होने या निकलने का बोध होता है, उसे अपादान कारक कहते हैं। इसका परसर्ग ‘से’ है। जैसे-

  • गंगा हिमालय से निकलती है।
  • पेड़ से पत्ते गिरते हैं।
  • मोहन घोड़े से गिर पड़ा।

ध्यान दें : ‘से’ परसर्ग का प्रयोग करण कारक और अपादान कारक दोनों में होता है, पर दोनों स्थितियों में अंतर है। करण कारक में ‘से’ सहायक साधन के रूप में (with) तथा अपादान कारक में यह अलग (depart) होने का सूचक है।

6. अधिकरण कारक [ में, पर ] : जिस संज्ञा/सर्वनाम पद से क्रिया के आधार का बोध हो, उसे अधिकरण कारक कहते हैं। इससे क्रिया के स्थान, काल, अवसर आदि का ज्ञान होता है। अधिकरण कारक के परसर्ग हैं- में, पर। जैसे-

  • थैले में फल हैं।
  • पुस्तक मेज पर रखी है।
  • माताजी घर में हैं।

कभी-कभी अधिकरण कारक का परसर्ग लुप्त भी हो जाता है। जैसे-

  • बगीचे के किनारे छायादार वृक्ष लगे हैं। (किनारे पर)
  • बच्चे घर हैं ? (घर पर या घर में)

कभी-कभी अधिकरण कारक के परसर्ग के बाद दूसरे कारक का परसर्ग भी आ जाता है, जैसे-

  • पुस्तक में से पढ़ लो।
  • वह पेड़ पर से उतर रहा था।

7. संबंध कारक [का, के, की/रा, रे, री] : संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से एक वस्तु व्यक्ति का संबंध दूसरी वस्तु व्यक्ति के साथ जाना जाए, उसे संबंध कारक कहते हैं। इसमें का, के, की, रा, रे, री परसर्गों का प्रयोग किया जाता है। जैसे-

  • यह राम का भाई हैं।
  • वह शशि की बहन है।
  • मेरा भाई, तेरी बहन आदि।

8. संबोधन कारक [हे, अरे, ओ] : यह ध्यान आकर्षित करते समय अथवा चेतावनी देते समय प्रयुक्त होता है। शब्द के पूर्व प्रायः विस्मयादिबोधक अव्यय [हे ! अरे !] आदि लगते हैं। जैसे-

  • अरे मोहन ! यहाँ आना।
  • सज्जनो और देवियो ! चुप हो जाओ।

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran संज्ञा के विकार

कारक तालिका:
HBSE 6th Class Hindi Vyakaran संज्ञा के विकार-4

समझो:
1. कर्म कारक और संप्रदान कारक में अंतर : इन दोनों में ‘को’ परसर्ग का प्रयोग होता है; जैसे-

  • मैं राम को समझाऊँगा। (कर्म कारक)
  • मैंने गीता को पुस्तक दी। (संप्रदान कारक)

पहले वाक्य में ‘समझाने’ क्रिया का फल ‘राम’ पर पड़ रहा है, अत: वह कर्म है। दूसरे वाक्य में देने का भाव है, अत: संप्रदान कारक है।

2. करण कारक और अपादान कारक में अंतर : इन दोनों कारकों में ‘से’ परसर्ग का प्रयोग होता है। जैसे-

  • वह कलम से लिखती है।
  • गंगा हिमालय से निकलती है।

पहले वाक्य में ‘लिखने’ की क्रिया ‘कलम से’ हो रही है अर्थात् ‘कलम’ लिखने की क्रिया का साधन है, अतः ‘करण कारक’ है।
दूसरे वाक्य में गंगा का हिमालय से पृथक होने का पता चल रहा है। अतः अपादान कारक लें।

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HBSE 6th Class Hindi Vyakaran विशेषण

Haryana State Board HBSE 6th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Visheshan विशेषण Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Hindi Vyakaran विशेषण

संज्ञा की विशेषता बताने वाले शब्दों को ‘विशेषण’ कहते हैं। जिस शब्द की विशेषता बताई जाती है उसे ‘विशेष्य’ कहा जाता है।
जैसे- काला घोड़ा।
इसमें काला – विशेषण है।
घोड़ा – विशेष्य है।

कभी-कभी विशेष्य के अनुसार विशेषण के लिंग-वचन बदल जाते हैं। जैसे-
अच्छा लड़का – अच्छे लडके
अच्छी लड़की – अच्छी लड़कियाँ

विशेषण के भेद (Kinds of Adjective):
1. गुणवाचक विशेषण (Qualitative Adjective)
2. संख्यावाचक विशेषण (Numeral Adjective)
3. परिमाणवाचक विशेषण (Quantitative Adjective)
4. सार्वनामिक विशेषण (Demonstrative Adjective)

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran विशेषण

1. गुणवाचक विशेषण (Qualitative Adjective) :
जो विशेषण शब्द किसी व्यक्ति या वस्तु के गुण, दोष, रंग, आकार, अवस्था, स्थिति आदि की विशेषता का बोध कराए, उसे गुणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे-
लंबी सड़क, ताजा आम, सच्ची बात, हरे पत्ते आदि।
यह विशेषण कई प्रकार की विशेषताओं का बोधक हो सकता हैं-
गुण बोधक : अच्छा, बुरा, सुन्दर, लाल, शिष्ट आदि।
काल बोधक : पुराना, नया, दैनिक, वार्षिक आदि।
स्थान बोधक : बनारसी, लखनवी, राष्ट्रीय, देसी आदि।
दिशा बोधक : पूर्वी, पश्चिमी, भीतरी, बाहरी आदि।
आकार बोधक : लंबा, विशाल, चौकोर, चौड़ा आदि।
स्वाद बोधक : खट्टा, मीठा, कड़वा, नमकीन आदि।

2. संख्यावाचक विशेषण (Numeral Adjective) :
जो विशेषण किसी संज्ञा की संख्या या क्रम का बोध कराए, उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। जैसे- चार केले, पांचवां व्यक्ति।
संख्यावाचक विशेषण के दो भेद हैं :
(क) निश्चित संख्यावाचक : इनसे निश्चित संख्या का बोध होता है।
जैसे- दस पुस्तकें, तीसरा बालक।

(ख) अनिश्चित संख्यावाचक : इनसे निश्चित संख्या का बोध नहीं होता।
जैसे- कुछ लोग, थोड़े आदमी।।

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran विशेषण

3. परिमाणवाचक विशेषण (Quantitative Adjective) : नाप-तोल बताने वाले विशेषण परिमाणवाचक विशेषण कहलाते हैं।
जैसे- दार मीटर कपड़ा, दो किलो चीनी। . परिमाणवाचक विशेषण के भी दो भेद हो सकते हैं –
(क) निश्चित परिमाणवाचक : इसमें निश्चित मात्रा का ज्ञान होता है।
जैसे- तीन लीटर दूध।

(ख) अनिश्चित परिमाणवाचक : इसमें निश्चित मात्रा का ज्ञान नहीं होता।
जैसे- थोड़ा दूध, कुछ फल।

4. सार्वनामिक विशेषण (Demonstrative Adjective) : जो सर्वनाम विशेषण के रूप में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें सार्वनामिक विशेषण कहते हैं। जैसे-
यह पुस्तक मेरी है। कोई आदमी रो रहा है। ऐसे विशेषण तीन प्रकार के होते हैं –

(क) सर्वनाम से बने जैसे- ‘कौन’ सर्वनाम से सार्वनामिक विशेषण है- कैसे, कितना, कितने।

(ख) मूल सर्वनाम का विशेषण के रूप में प्रयोग : इन्हें संकेतवाचक विशेषण भी कहते हैं। ये सदा संज्ञा से पहले आते हैं। जैसे
यह पुस्तक, वे लोग।

(ग) सर्वनाम के संबंधकारकीय रूप
जैसे- ‘मैं’ से ‘मेरा’ ‘तुम’ से ‘तुम्हारा’ ‘वह’ से ‘उसका’ ‘हम’ से ‘हमारा’

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran विशेषण

विशेषणों की रचना (Formations of Adjective):
HBSE 6th Class Hindi Vyakaran विशेषण-1

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran विशेषण

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran विशेषण-2

2. सर्वनाम शब्दों से विशेषण बनाना
HBSE 6th Class Hindi Vyakaran विशेषण-3

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran विशेषण

3. क्रिया शब्दों से विशेषण बनाना
HBSE 6th Class Hindi Vyakaran विशेषण-4

4. अव्यय शब्दों से विशेषण बनाना
HBSE 6th Class Hindi Vyakaran विशेषण-5

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HBSE 6th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम

Haryana State Board HBSE 6th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Sarvanam सर्वनाम Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम

‘सर्वनाम’ का शाब्दिक अर्थ है – सर्व (सब) का नाम। व्याकरण में सर्वनाम ऐसे शब्दों को कहते हैं, जिनका प्रयोग सब प्रकार के नामों (संज्ञाओं) के लिए अथवा उनके स्थान पर हो सके। सर्वनामों का सबसे अधिक प्रयोग वाक्यों में एक ही संज्ञा को बार-बार उसी रूप में आने से बचाने के लिए होता है।

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए :
स्वाति एक परिश्रमी लड़की है। स्वाति प्रतिदिन स्कूल जाती है। स्वाति की छोटी बहन दिव्या है। स्वाति के पिताजी इंजीनियर हैं। स्वाति सबकी मदद करती है। स्वाति को सभी प्रेम करते हैं।

उपर्युक्त गद्यांश में स्वाति का नाम छह बार आया है। बार-बार वही नाम लिखना या बोलना अटपटा-सा लगता है। इसे ठीक नहीं माना जाता है। इसे इस प्रकार लिखा जाना चाहिए :
स्वाति एक परिश्रमी लड़की है। वह प्रतिदिन स्कूल जाती है। उसकी छोटी बहन दिव्या है। उसके पिताजी इंजीनियर हैं। वह सबकी मदद करती है। उसको सभी प्रेम करते हैं।

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम

इस गद्यांश में ‘स्वाति’ नाम केवल पहले वाक्य में ही आया है। उसके बाद के वाक्यों में उसके लिए – वह, उसकी, उसके, उसको – का प्रयोग हुआ है। स्वाति’ संज्ञा है और उसके स्थान पर प्रयुक्त होने वाले ये शब्द सर्वनाम हैं।
संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द ‘सर्वनाम’ कहलाते हैं।

मुख्य सर्वनाम शब्द हैं – मैं, हम, तुम, तू, वह, वे, कौन, कोई, क्या आदि।

सर्वनाम के भेद (Kinds of Pronoun):

1. पुरुषवाचक सर्वनाम (Personal Pronoun)
2. निश्चयवाचक सर्वनाम (Demonstrative Pronoun)
3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम (Indefinite Pronoun)
4. प्रश्नवाचक सर्वनाम (Interrogative Pronoun)
5. संबंधवाचक सर्वनाम (Relative Pronoun)
6. निजवाचक सर्वनाम (Reflexive Pronoun)

1. पुरुषवाचक सर्वनाम (Personal Pronoun):
जो सर्वनाम शब्द किसी पुरुष के नाम के बदले प्रयुक्त किया जाए उसे पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं। इसमें वक्ता अपने लिए, सुनने वाले के लिए और अन्य किसी के लिए जिन सर्वनामों का प्रयोग करता है, वे पुरुषवाचक सर्वनाम होते हैं। इस प्रकार पुरुषवाचक सर्वनाम तीन प्रकार के होते हैं :
HBSE 6th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम-1
(क) उत्तम पुरुष (First Person) : वक्ता/लेखक अपने नाम के स्थान पर जिस सर्वनाम का प्रयोग करता है, उसे उत्तम पुरुष कहते हैं। जैसे- मैं, हम और इनके रूप।

(ख) मध्यम पुरुष (Second Person) : जो सर्वनाम सुनने वाले के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं, उन्हें मध्यम पुरुष कहते हैं। जैसे- तू, तुम, आप और इनके रूप ।

(ग) अन्य पुरुष (Third Person) : जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग बोलने वाले और सुनने वाले व्यक्ति के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति के लिए किया जाए, उन्हें अन्य पुरुष कहते हैं। जैसे- वह, वे, उसे, उसका, उनका, उनके आदि।

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम

समझो:
आदर के अर्थ में प्रयुक्त ‘आप’ प्रायः मध्यम पुरुष के लिए आता है जैसे आप, इधर बैठिए। किंतु कभी-कभी यह अन्य पुरुष के लिए भी प्रयुक्त होता है; जैसे-महात्मा गांधी हमारे राष्ट्रपिता हैं। आपका (उनका) जन्म पोरबंदर मैं हुआ था।
आपका प्रयोग सदा बहुवचन में होता है।

‘तू’ (मध्यम पुरुष एकवचन) का विशेष प्रयोग :
1. प्यार-दुलार और अति आत्मीयता दिखाने में होता है।
2. निरादर या हीनता दिखाने में होता है।
सामान्य व्यवहार में श्रोता/पाठक के लिए ‘तुम’ का ही प्रयोग होता है।

2. निश्चयवाचक सर्वनाम (Demonstrative Pronoun):
जिस सर्वनाम से दूरवर्ती या समीपवर्ती व्यक्तियों, प्राणियों, वस्तुओं और घटना-व्यापारों का बोध होता है, उसे निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।
दूरवर्ती के लिए – वह – वह रहा मेरा मकान।
समीपवर्ती के लिए – यह – इन पुस्तकों में मेरी यह है।

समझो:

  • रूप-रचना की दृष्टि से अन्य पुरुष और निश्चयवाचक में कोई भेद नहीं है। दोनों में एक समान ‘यह, वह’ का प्रयोग होता है।
  • निश्चयवाचक सर्वनाम में पास अथवा दूर की वस्तुओं के लिए संकेत किया जाता है, अत: इसे संकेतवाचक सर्वनाम भी कहते हैं।

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम

3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम (Indefinite Pronoun):
जिस सर्वनाम से किसी निश्चित व्यक्ति, प्राणी या वस्तु का बोध नहीं होता है, उसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।
ऐसी स्थिति तब आती है जब किसी व्यक्ति आदि का आभास तो आपको है किंतु उसके संज्ञा-नाम के संबंध में निश्चित नहीं है। ऐसी दशा में व्यक्ति के लिए कोई और अप्राणी के लिए कुछ का प्रयोग करते हैं।
जैसे –

  • कोई दरवाजा खटखटा रहा है।
  • दूध में कुछ पड़ा है।
  • मोहन का कुछ खो गया है।

4. प्रश्नवाचक सर्वनाम (Interrogative Pronoun):
जिस सर्वनाम से किसी व्यक्ति, प्राणी, वस्तु आदि के विषय में प्रश्न का बोध होता है, उसे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं। ये हैं – कौन और क्या।
किसी व्यक्ति/प्राणी के विषय में प्रश्न करने के लिए ‘कौन’ का प्रयोग करते हैं। ‘क्या’ का प्रयोग किसी वस्तु के लिए करते हैं। जैसे –

  • देखो, कौन आया है ?
  • घर पर कौन रुकेगा?
  • खाने में आप क्या लेंगे?
  • दूध में क्या पड़ा है?

⇒ ‘कौन-सा’ का प्रयोग अप्राणियों के साथ भी होता है,
जैसे – यहाँ कई कमरे हैं, आप कौन-सा पसंद करोगे ?

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran सर्वनाम

5. संबंधवाचक सर्वनाम (Relative Pronoun):
मिश्र वाक्य की रचना में जिस सर्वनाम से अन्य उपवाक्य में आई संज्ञा/सर्वनाम से संबंध स्थापित होता है, उसे संबंधवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे – जो, जिसको आदि।

1. मेरी वह कलम खो गई जो मुझे जन्मदिन पर मिली थी।
2. यह मेरा वह मित्र है जो अमेरिका गया हुआ था।
3. यह वही फिल्म है जिसे तुम देखना चाहते थे।
4. जो करेगा, सो भरेगा।
5. जैसी करनी, वैसी भरनी।

6. निजवाचक सर्वनाम (Reflexive Pronoun):
जो सर्वनाम निज के लिए अर्थात् स्वयं अपने लिए प्रयुक्त होता है, उसे निजवाचक सर्वनाम कहते हैं।
इसके संबंधवाची रूप अपना, अपनी, अपने हैं। जैसे-
1. मैं आप (स्वय) आ जाऊँगा।
2. मैं अपना काम आप करता हूँ।
3. मैं आप ही बोले जा रहा था।

‘आप’ शब्द का प्रयोग पुरुषवाचक (आदरसूचक) तथा निजसूचक, दोनों प्रकार के सर्वनामों के रूप में किया जाता है।
जैसे-
1. आप कृपया बैठिए। (पुरुषवाचक सर्वनाम)
2. यह समस्या मैं आप ही हल करूँगा। (निजवाचक सर्वनाम)

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HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

Haryana State Board HBSE 6th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Shabd-Gyan (Bhandar) शब्द-ज्ञान (भंडार) Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

शब्द: प्रयोग में प्रवीणता प्राप्त करने के लिए उसके विभिन्न रूपों का ज्ञान होना आवश्यक है। अर्थ की दृष्टि से विभिन्न शब्द-रूप निम्नांकित हैं :
(क) पर्यायवाची शब्द
(ख) विलोम शब्द
(ग) अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
(घ) समरूपी भिन्नार्थक शब्द
(ङ) अनेकार्थी शब्द

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

(क) पर्यायवाची शब्द (Synonyms) :
जो शब्द अर्थ की दृष्टि से समान होते हैं, पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं। परंतु स्मरणीय बात यह है कि अर्थ में समानता होते हुए भी पर्यायवाची शब्द प्रयोग में सर्वथा एक-दूसरे का स्थान नहीं ले सकते। जैसे
मृतात्माओं के तर्पण के लिए ‘जल’ शब्द का प्रयोग उपयुक्त है, ‘पानी’ का नहीं, जबकि दोनों समानार्थक (पर्यायवाची) हैं। प्रत्येक पर्यायवाची अपनी अर्थगत विशिष्टता लिए हुए होता है। यहाँ कुछ शब्दों के पयार्यवाची शब्द दिए जा रहे हैं :
HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-1
HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-2

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-3

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

(ख) विलोम शब्द (Antonyms) :
किसी शब्द से विपरीत अर्थ देने वाला शब्द उसका विलोम या विपरीतार्थक कहा जाता है। इन्हें उल्टे अर्थ वाले शब्द भी कहा जाता है। तत्सम शब्द का विलोम तत्सम और तद्भव शब्द का विलोम तद्भव में ही देना चाहिए।
यहाँ कुछ विलोम शब्दों की सूची दी जा रही है :
HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-1

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-5

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

(ग) अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (One word substitution) :
हिंदी भाषा में अनेक शब्दों, पदबंधों या वाक्यांशों के लिए प्रायः एक शब्द का प्रयोग किया जाता है। इससे लेखन में संक्षिप्तता आती है तथा लेख सुगठित हो जाता है।
यहाँ कुछ ऐसे ही उदाहरण दिए जा रहे हैं :
HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-6

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-7

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

(घ) समरूपी भिन्नार्थक शब्द (शब्द-युग्म) (Pair of Similar words – Distinguished) :
कुछ शब्द उच्चारण की दृष्टि से समान प्रतीत होते हैं, परंतु अर्थ की दृष्टि से उनमें पर्याप्त भिन्नता होती है। ऐसे ही कुछ शब्दों को यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है :
HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-8

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-9
HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-10

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-11
HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-12

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

(ङ) एकार्थी शब्द (Words having One meaning) :
जिन शब्दों का अर्थ सभी परिस्थितियों में एक-सा रहता है, उन्हें एकार्थी या एकार्थक शब्द कहते हैं। ऐसे कुछ शब्दों के उदाहरण प्रस्तुत हैं:
HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-13

HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)

(च) अनेकार्थी शब्द (Words with various meanings) :
हिंदी में ऐसे अनेक शब्द हैं, जिनके एक से अधिक अर्थ होते हैं। इनका प्रयोग संदर्भ के अनुसार किया जाता है। प्रयोग के अनुसार विभिन्न परिस्थितियों में भिन्न-भिन्न अर्थ देने वाले शब्द अनेकार्थी कहलाते हैं।
ऐसे कुछ शब्दों के उदाहरण प्रस्तुत हैं :
HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-14
HBSE 6th Class Hindi Vyakaran शब्द-ज्ञान (भंडार)-15

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HBSE 6th Class Hindi Vyakaran क्रिया

Haryana State Board HBSE 6th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran kriya क्रिया Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Hindi Vyakaran क्रिया

क्रिया का अर्थ है- ‘काम’। काम या तो होता है या किया जाता है।

परिभाषा- क्रिया वह विकारी शब्द है जिससे काम के करने या होने का बोध होता है।
क्रिया के मूल रूप को धातु (Root) कहते हैं। क्रिया के रूप धातु से बनते हैं। जैसे –
‘खा’ धातु से – खाऊँगा, खाता, खाऊँ, खाई आदि।
इसी प्रकार ले, दे, जा, पढ़ आदि धातुओं से विभिन्न क्रिया-रूप बनते हैं।

क्रिया के भेद (Kinds of Verb) :
मुख्य रूप से क्रिया के दो भेद हैं-
1. अकर्मक क्रिया (Intransitive Verb)
2. सकर्मक क्रिया (Transitive Verb)

1. अकर्मक क्रिया (Intransitive Verb) :
जिन क्रियाओं में कर्म की आवश्यकता नहीं होती, उन्हें सकर्मक क्रियाएँ कहा जाता है। ऐसे वाक्यों में क्रिया के व्यापार का फल कर्ता में ही रहता है। जैसे-
स्वाति दौड़ती है। बच्चा रोता है।
इन वाक्यों में ‘स्वाति’ और ‘बच्चा’ कर्ता हैं तथा ‘दौडना’ और ‘रोना’ क्रियाएँ हैं। इनके साथ कर्म है ही नहीं और न उसकी आवश्यकता है।

HBSE 6th Class Hindi रचना क्रिया

2. सकर्मक क्रिया (Transitive Verb):
जिन क्रियाओं के व्यापार का फल सीधे कर्म पर पड़ता है, उन्हें सकर्मक क्रिया कहते हैं। कर्म के बिना ये वाक्य अधूरे प्रतीत होते हैं। जैसे-
मैंने खाया। (क्या खाया ?)
मैंने आम खाया। (आम-कर्म)
दूसरा वाक्य पूरा है तथा इसकी क्रिया ‘खाया’ सकर्मक है।

सकर्मक क्रिया की पहचान कर्ता और क्रिया के बीच ‘क्या’ और ‘किसे’ आदि प्रश्न करने से हो जाती है। यदि प्रश्न का उत्तर मिले तो क्रिया सकर्मक और न मिले तो क्रिया अकर्मक होती है।
जैसे- वह दूध पीता है।
प्रश्न – वह क्या पीता है ?
उत्तर – दूध। अतः ‘पीता है’ क्रिया सकर्मक है।

द्विकर्मक क्रिया : द्विकर्मक क्रिया वाले वाक्यों में दो-दो कर्म होते हैं। इनमें पहला कर्म प्रायः प्राणीवाचक होता है। इसे ‘गौण कर्म’ कहते हैं। दूसरा कर्म प्रायः अप्राणीवाचक होता है और यह मुख्य कर्म कहलाता है।
मुख्य कर्म विभक्ति-चिह्न (परसर्ग) रहित होता है और गौण कर्म के साथ प्रायः ‘को’ परसर्ग लगता है।
उदाहरण :
मैं राम को पत्र लिखता हूँ। इस वाक्य में दो कर्म हैं-
(i) राम को – प्राणीवाचक – गौण कर्म।
(ii) पत्र – अप्राणीवाचक – मुख्य कर्म।

संरचना की दृष्टि से क्रिया के पांच भेद हैं :
1. सामान्य क्रिया (Ordinary Verb)
2. संयुक्त क्रिया (Compound Verb)
3. नामधातु क्रिया (Nominal Verb)
4. प्रेरणार्थक क्रिया (Causal Verb)
5. पूर्वकालिक क्रिया (Absolutive Verb)

1. सामान्य क्रिया : इसमें केवल क्रिया का प्रयोग किया जाता है।
जैसे- राम गया, मैंने पढ़ा।

2. संयुक्त क्रिया : इसमें दो या दो से अधिक क्रियाओं को मिलाकर प्रयोग किया जाता है। जैसे
मैं खाना खा चुका हूँ। – वह अब सो गया है।

3. नामधातु क्रिया : संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि से बनी क्रियाएं नामधातु क्रिया कहलाती हैं। जैसे-
संज्ञा से- बात-से ‘बतियाना’, हाथ-से ‘हथियाना’। सर्वनाम से- मैं-से ‘मिमियाना’ ; अपना-से ‘अपनाना’। विशेषण से- गर्म-से ‘गर्माना’ ; नरम-से ‘नरमाना’।

HBSE 6th Class Hindi रचना क्रिया

4. प्रेरणार्थक क्रिया : जब कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी अन्य को प्रेरणा देकर काम करवाता है, तब क्रिया का वह रूप प्रेरणाथक क्रिया कहलाता है। जैसे-

क्रिया का सामान्य रूपप्रथम प्रेरणार्थकद्वितीय प्रेरणार्थक
पीनापिलानापिलवाना
पढ़नापढ़ानापढ़वाना
धोनाधुलनाधुलवाना
लिखनालिखानालिखवाना
सुननासुनानासुनवाना
सोनासुलानासुलवाना

[वास्तव में द्वितीय कोटि की प्रेरणार्थक क्रियाएँ ही सही अर्थों में प्रेरणार्थक क्रियाएँ हैं।]

5. पूर्वकालिक क्रिया : मुख्य क्रिया से पूर्व होने वाली क्रिया पूर्वकालिक क्रिया कहलाती है। जैसेवह दूध पीकर चला गया। मैं नहाकर पुस्तक पढूंगा।

अभ्यास

1. अन्तर स्पष्ट करो:

(क) धातु और क्रिया में।
(ख) अकर्मक और सकर्मक क्रिया में।
(ग) सामान्य और संयुक्त क्रिया में।

2. नीचे लिखे वाक्यों में प्रयुक्त क्रियाओं के नीचे रेखा खींचो :

(क) सोहन ने खाना खाया।
(ख) वह अपनी जगह से उठ गया।
(ग) दिव्या पुस्तक पढ़ रही है।
(घ) बालक खेलकर सो गया।

HBSE 6th Class Hindi रचना क्रिया

3. इन वाक्यों में से अकर्मक और सकर्मक क्रियाएं छांटकर तालिका लिखें :

(क) वह हंस रहा है।
(ख) वह पत्र लिख रहा है।
(ग) दूध उबल रहा है।
(घ) भारती दूध उबाल रही है।
(ङ) मैंने पुस्तक पढ़ी।
(च) बालक चिल्लाया

4. तीन मूल धातुएं लिखकर उनसे दो-दो क्रिया-रूप बनाकर लिखो।

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HBSE 6th Class Hindi Vyakaran अव्यय (अविकारी शब्द)

Haryana State Board HBSE 6th Class Hindi Solutions Hindi Vyakaran Avyay (Avikaari Shabd) अव्यय (अविकारी शब्द) Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Hindi Vyakaran अव्यय (अविकारी शब्द)

अव्यय (अविकारी शब्द):
हमने संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया पदों का अध्ययन किया और देखा कि इन पदों के रूपों में परिवर्तन होता है, अत: इन्हें विकारी पद कहते हैं। अब उन पदों का अध्ययन किया जाएगा जिनका रूप सदैव एक ही बना रहता है और उनमें परिवर्तन नहीं होता। एक ही रूप बने रहने के कारण इन्हें अव्यय कहते हैं। अव्यय शब्द का अर्थ है जिसका व्यय न हो अर्थात् जिनमें विकार न आए। इन्हें अविकारी पद भी कहते हैं।

अव्यय वे शब्द हैं जिनमें लिंग, वचन, पुरुष, काल आदि से मिलकर विकार या रूप-परिवर्तन नहीं होता।।

अव्यय के भेद (Indeclinable Words) :
अव्यय के पांच मुख्य भेद माने जाते हैं-
1. क्रिया विशेषण (Adverb)
2. संबंधबोधक (Post Position)
3. समुच्चयबोधक (Conjunction)
4. विस्मयादिबोधक (Interjection)
5. निपात (Stress)

HBSE 6th Class Hindi रचना अव्यय (अविकारी शब्द)

1. क्रिया विशेषण (Adverb) :
जो पद क्रिया की विशेषता बताता है उसे क्रिया विशेषण अव्यय कहते हैं ; जैसेधीरे-धीरे, आजकल, के पास, बिल्कुल।
क्रिया विशेषण के चार भेद माने गए हैं :
(क) कालवाचक क्रियाविशेषण (Adverb of Time) : जो पद क्रिया के काल या समय की विशेषता बताता है उसे कालवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं; जैसे

  • तुम चेन्नै कब जाओगे।
  • संजय परसों जयपुर से आया था।
  • शीला प्रतिदिन स्कूल जाती है।
  • महँगाई आजकल बढ़ती जा रही है।

(ख) स्थानवाचक क्रियाविशेषण (Adverb of Place): जो पद क्रिया के स्थान का बोध कराता है, उसे स्थानवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं; जैसे-

  • वह यहां रहता है।
  • माता जी बाहर गई हैं।
  • तुम इधर-उधर मत जाओ।
  • वर्षा में कहां जाओगे ?

(ग) रीतिवाचक क्रियाविशेषण (Adverb of Manner): जो पद क्रिया के होने की रीति या विधि संबंधी विशेषता बताता है, उसे रीतिवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं ; जैसे-

  • कार तेज़ दौड़ती है।
  • साइकिल धीरे-धीरे चलती है।
  • मुदिता ध्यानपूर्वक पढ़ती है।

(घ) परिमाणवाचक क्रियाविशेषण (Adverb of Quantity) : जो पद क्रिया की मात्रा या परिमाण बताए, वह परिमाणवाचक क्रियाविशेषण है; जैसे

  • मैं बिल्कुल थक गया हूँ।
  • बंगाल में चावल अधिक खाया जाता है।
  • थोड़ा खाओ, खूब चबाओ।

HBSE 6th Class Hindi रचना अव्यय (अविकारी शब्द)

2. संबंधबोधक अव्यय (Post Position) :
संबंधबोधक अव्यय अपने पूर्वपद के साथ संबध जोड़ता है। इस पद के पहले किसी-न-किसी परसर्ग की अपेक्षा रहती है; जैसे- से दूर, के साथ, के कारण, के वास्ते, की अपेक्षा, की जगह, के अनुसार, की तरफ। उदाहरण के लिए :

  • मैं घर से दूर पहुंच गया था।
  • इस मकान के पीछे शिव मंदिर है।
  • मोहन बाज़ार की ओर गया है।
  • उसके सामने तुम कहीं नहीं ठहर सकते।

3. समुच्चयबोधक अव्यय (Conjunction) :
जो अव्यय पदों, पदबंधों और उपवाक्यों को जोड़ते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं; जैसे- और, कि, अथवा, क्योंकि, इसलिए।
समुच्चयबोधक अव्यय के दो भेद हैं :
(क) समानाधिकरण समुच्चयबोधक : जो दो या उससे अधिक समान पदों, पदबंधों, उपवाक्यों को जोड़ता है, वह समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय कहलाता है। जैसे-

  • नरेन्द्र शाम को रोटी और दाल खाता है।
  • जोगेन्द्र रसमलाई या गुलाबजामुन खाता है।

(ख) व्यधिकरण समुच्चबोधक : जो पद किसी वाक्य के एक या अधिक आश्रित उपवाक्यों को जोड़ता है, वह व्यधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय कहलाता है; जैसे-

  • शेख घर चला गया है क्योंकि उसके सिर में दर्द था।
  • उसने परिश्रम किया फिर भी सफल नहीं हो पाया।

4. विस्मयादिबोधक अव्यय (Interjection) :
विस्मयादिबोधक अव्यय वे रूप हैं जो आश्चर्य, हर्ष, शोक, व्यथा, घृणा आदि मनोभावों के उद्गार को व्यक्त करते हैं। उद्गार प्रायः अपने-आप मुँह से निकल जाते हैं और इनका उद्देश्य प्रायः सुनने वाले को कोई सूचना देना नहीं होता; जैसे-

  • वाह ! क्या सुंदर दृश्य है। (आश्चर्य)
  • अरे ! गाड़ी से बचो। (चेतावनी)
  • क्या बोलूँ ! (व्यथा)
  • शाबाश ! बहुत बड़ा काम किया तुमने। (प्रशंसा)
  • छिः ! ऐसी गंदी बात करता है। (घृणा)

HBSE 6th Class Hindi रचना अव्यय (अविकारी शब्द)

5. निपात (Stress) :
वाक्य में जो अव्यय किसी शब्द या पद के बाद लगकर उसके अर्थ में विशेष प्रकार का बल या भाव पैदा करने में सहायता करते हैं, उन्हें निपात या अवधारणामूलक शब्द कहते हैं; जैसे
1. राम ही कल जाएगा।
2. राम कल ही जाएगा।
3. कल राम भी जाएगा।
4. मैंने तो कुछ नहीं किया।
5. तुम्हारे बारे में बच्चे तक जानते हैं।

अभ्यास

1. अव्यय किसे कहते हैं ? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
2. अव्यय के भेद बताते हुए प्रत्येक के दो-दो उदाहरण दीजिए।
3. क्रिया विशेषण का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसके प्रकारों का विवेचन उदाहरण सहित कीजिए।
4. निम्नलिखित अनुच्छेद में प्रयुक्त अव्ययों के नीचे रेखा खींचो तथा उसका भेद भी बताओ।
राम और श्याम तेज दौड़ रहे थे। वे पेड़ के पास रुक गए। अरे ! इतना लंबा सांप कहां से आ गया ? राम बोला कि मैं अब नहीं दौडूंगा। श्याम भी चला गया।
5. क्रिया-विशेषण छांटो :

  • गीता मधुर गाती है।
  • वह ऊपर बैठा है।
  • रवि आज आएगा।

6. संबंधबोधक छांटो:

  • पेड़ के नीचे विश्राम कर लो।
  • गाँव के परे एक मठ है।
  • भवन के ऊपर झंडा फहरा रहा है।
  • सेना के आगे घुड़सवार थे।

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