Author name: Prasanna

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 4 कठपुतली

Haryana State Board HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 4 कठपुतली Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 4 कठपुतली

HBSE 7th Class Hindi कठपुतली Textbook Questions and Answers

कविता से

प्रश्न 1.
कठपुतली को गुस्सा क्यों आया?
उत्तर:
कठपुतली को गुस्सा इसलिए आया क्योंकि उसे चारों ओर से धागों के बंधन में बांध रखा गया था। वह इस बंधन से तंग आ गई थी। वह स्वतंत्र होना चाहती थी।

प्रश्न 2.
कठपुतली को अपने पाँबों पर खड़ी होने की इच्छा है, लेकिन क्यों नहीं खड़ी होती ?
उत्तर:
कठपुतली अपने पाँवों पर खड़ी होने की इच्छा तो रखती है लेकिन वह खड़ी नहीं होती। इसका कारण है उसके पैरों में स्वतंत्र रूप से खड़े होने की शक्ति नहीं है। इच्छा के साथ अपनी शक्ति और प्रयास की भी आवश्यकता होती है।

प्रश्न 3.
पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को कैसी लगी और क्यों?
उत्तर:
पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को बहुत अच्छी लगी। वे भी स्वतंत्र होना चाहती थीं और अपने मन के अनुसार चलना चाहती थीं।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 4 कठपुतली

प्रश्न 4.
पहली कठपुतली ने स्वयं कहा कि- ‘ये धागे / क्यों हैं मेरे पीछे आगे ? इन्हें तोड़ दो/ मुझे मेरे पैरों पर छोड़ दो’-तो फिर वह चिंतित क्यों हुई कि…’यह कैसी इच्छा/ मेरे मन में जगी?’ नीचे दिए वाक्यों की सहायता से अपना विचार व्यक्त कीजिए

  • उसे दूसरी कठपुतलियों की जिम्मेदारी महसूस होने लगी।
  • उसे शीघ्र स्वतंत्र होने की चिंता होने लगी।
  • वह स्वतंत्रता की इच्छा को साकार करने और स्वतंत्रता को हमेशा बनाए रखने के उपायों को सोचने लगी।
  • वह डर गई, क्योंकि उसकी उम्र कम थी।

उत्तर:
कहने और करने में बहुत अंतर होता है। पहली ‘कठपुतली ने स्वतंत्र होने की इच्छा तो प्रकट कर दी, पर फ़िर उसे स्वतंत्र होने की चिंता होने लगी कि वह किस प्रकार स्वतंत्र हो पाएगी। अभी उसकी उम्र कम थी अत: उसे अभी दूसरे के सहारे की जरूरत थी। स्वतंत्रता पाकर उसे बनाए रखने के लिए विशेष उपाय करने पड़ते हैं। अब उसके ऊपर अन्य कठपुतलियों की स्वतंत्रता की जिम्मेदारी भी आ गई थी। दूसरों की आजादी के लिए काम करना बहुत सरल नहीं होता।

कविता से आगे

1. ‘बहुत दिन हुए/हमें अपने मन के छंद छुए।’ इस पंक्ति का अर्थ और क्या हो सकता है? अगले पृष्ठ पर दिए हुए वाक्यों की सहायता से सोचिए और अर्थ लिखिए-
(क) बहुत दिन हो गए. मन में कोई उमंग नहीं आई।
(ख) बहुत दिन हो गए. मन के भीतर कविता-सी कोईबात नहीं उठी, जिसमें छंद हो, लय हो।
(ग) बहुत दिन हो गए. गाने-गुनगुनाने का मन नहीं हुआ।
(घ) बहुत दिन हो गए, मन का दुख दूर नहीं हुआ और न मन में खुशी आई।
उत्तर:
(ख) बहुत दिन हो गए, मन के भीतर कविता-सी कोईबात नहीं उठी, जिसमें छंद हो, लय हो।

2. नीचे दो स्वतंत्रता आंदोलनों के वर्ष दिए गए हैं। इन दोनों आंदोलनों के दो-दो स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखिए
(क) सन् 1857 ……………..
(ख) सन् 1947 ……………..
उत्तर:
(क) सन् 1857 1. महारानी लक्ष्मीबाई 2. तात्या टोपे।
(ख) सन् 1947, 1. भगतसिंह 2. नेताजी सुभाषचंद्र बोस।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 4 कठपुतली

HBSE 7th Class Hindi कठपुतली Important Questions and Answers

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कठपुतलियाँ किसका प्रतीक है?
उत्तर:
कठपुतलियाँ सामान्य जनों की प्रतीक हैं। वे अपनी मर्जी का जीवन नहीं जी पा रहीं।

प्रश्न 2.
एक कठपुतली क्या हो सकती है?
उत्तर:
एक कठपुतली नेता हो सकती है। प्रश्न 3, धागे किसके प्रतीक है? उत्तर: धागे गुलामी के बधन के प्रतीक हैं

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
‘कठपुतली’ कविता के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर:
कठपुतली’ कविता के माध्यम से कवि स्वतंत्रता का महत्त्व बताना चाहता है। परतंत्रता के बंधन व्यक्ति को बहुत दुःखी करते हैं। वह इनसे मुक्ति चाहता है। वह बंधनों को तोड़ना चाहता है। बंधनों में जकड़कर व्यक्ति मन की इच्छा को प्रकट नहीं कर पाता है। स्वतंत्र होना और उसे बनाए रखना बहुत जरूरी है, भले ही यह कठिन क्यों न हो।

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कठपुतली गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. कठपुतली ………………….. छोड़ दो।

शब्दार्थ: बली: खाली, जोश में आई (Excited)। पाँव: पैर (Feer)|

प्रसंग: प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘वसंत भाग-2’ में संकलित कविता ‘कठपुतली’ से लिया गया है। इस कविता के रचयिता भवानीप्रसाद मिश्र हैं।

व्याख्या:
इस काव्यांश में एक कठपुतली अपनी हालत को देखकर गुस्से में उबल पड़ी। वह गुस्से में आकर बोल पड़ी–मेरे आगे-पीछे ये धागे क्यों बाँध रखे हैं अर्थात् तुम लोगों ने मुझे धागों में बाँधकर गुलाम बना रखा है। मुझे आजादी चाहिए अत: इन धागों (बंधनों) को तोड़ दिया जाना चाहिए। मुझे अपने पैरों पर खड़ा होने दिया जाए। मैं अपने पैरों से ही चलना चाहती हूँ. धागों के सहारे नहीं।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. कठपुतली क्यों गुस्से से उबल पड़ी?
2 कठपुतली ने क्या कहा?
3. ‘मुझे मेरे पाँव पर छोड़ दो’-से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
1. कठपुतली स्वयं को धागों से बंधे देखकर तथा दूसरे के इशारे पर नाचते देखकर गुस्से से उबल पड़ी।
2. कठपुतली ने कहा कि मेरे आगे-पीछे धागे क्यों है? इन्हें तोड़ दिया जाए।
3. कठपुतली आत्मनिर्भर होना चाहती है। वह अपनी इच्छानुसार नाचना या कार्य करना चाहती है। वह स्वयं चलना चाहती है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चनकर लिखिए

1. इस कविता के रचयिता कौन हैं?
(क) मैथिलीशरण गुप्त
(ख) भवानीप्रसाद मिश्र
(ग) सुमित्रानंदन पंत
(घ) अन्य
उत्तर:
(ख) भवानीप्रसाद मिश्र

2. कठपुतली को किनसे परेशानी थी?
(क) धागों से
(ख) गुस्से से
(घ) किसी से नहीं
उत्तर:
(क) धागों से

3. इस काव्यांश में कठपुतली के मन का कौन-सा भाव प्रकट होता है-
(क) स्वतंत्रता का
(ख) गुस्से का
(ग) खड़े होने का
(घ) तोड़ने का
उत्तर:
(ख) गुस्से का

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2. सुनकर बोली.. ………………….. में जगी?

शब्दार्थ: छंद = कविता, मन की इच्छा (Desire)|

प्रसंग: प्रस्तुत पक्तियाँ भवानीप्रसाद मिश्र की कविता ‘कठपुतली’ से अवतरित हैं। एक कठपुतली की बात का प्रभाव अन्य कठपुतलियों पर भी पड़ता है।

व्याख्या:
जब एक कठपुतली विद्रोह कर आजाद होने की बात कहती है तो अन्य कठपुतलियों को भी उसकी बात अच्छी लगती है। वे भी बंधन तोड़कर स्वतंत्र होना चाहती हैं। अन्य कठपुतलियाँ भी कहने लगती हैं-हमें भी अपने मन की इच्छा को प्रकट किए हुए बहुत दिन हो गए अर्थात् हम भी काफी समय से पराधीनता का जीवन जी रही हैं। हम भी स्वतंत्र होना चाहती हैं।

जब पहली कठपुतली पर अन्य सभी कठपुतलियों की स्वतंत्रता की ज़िम्मेदारी आती है तो वह सोचने लगती है कि यह मेरे मन में कैसी इच्छा जाग गई? अब वह सोच-समझकर कदम उठाना जरूरी समझती है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. किसकी बात सुनकर कौन बोली?
2 उन्होंने क्या कहा?
3. पहली कठपुतली मन में क्या सोचने लगी?
उत्तर:
1. पहली कठपुतली की बात सुनकर अन्य कठपुतलियाँ बोली।
2 अन्य कठपुतलियों ने भी अपनी आजादी की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि हम बहुत दिनों से अपने मन की बात नहीं कर पाई हैं। हम भी स्वतंत्रता चाहती हैं।
3. पहली कठपुतली सोचने लगी कि उसके मन में यह स्वतंत्रता की कैसी इच्छा जग गई है? इसका क्या परिणाम होगा?

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. अन्य कठपुतलियाँ क्या बोलीं?
(क) हमें आजादी नहीं चाहिए
(ख) बहुत दिनों से हमने अपने मन के छंद नहीं छुए
(ग) हमारे मन की बात मन में ही है
(घ) तुम ठीक कहती हो
उत्तर:
(ख) बहुत दिनों से हमने अपने मन के छंद नहीं छुए

2. ‘पहली कठपुतली’-रेखांकित शब्द क्या है?
(क) संज्ञा
(ख) सर्वनाम
(ग) क्रिया
(घ) विशेषण
उत्तर:
(घ) विशेषण

3. ‘कठपुतलियाँ’ किसकी प्रतीक हैं?
(क) खिलौनों की
(ख) आम लोगों की
(ग) स्वतंत्रता की
(घ) पता नहीं
उत्तर:
(ख) आम लोगों की

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कठपुतली Summary in Hindi

कठपुतली पाठ का सार

प्रश्न: भवानी प्रसाद मिश्र के जीवन और कवित्व के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर:
भवानी प्रसाद मिश्र का जन्म 1914 में होशंगाबाद (मध्य प्रदेश) में हुआ। इनकी रचनाओं में ऐसी नवीनता, अम्लानता और सरलता पाई जाती है, जो आज के किसी दूसरे कवि में दृष्टिगोचर नहीं होती। विषय का चयन और वर्णन करने का ढंग इनका अपना है। इनके काव्य की शक्ति किसी असाधारण तत्त्व पर निर्भर न रहकर साधारण को ही असाधारण बनाने में है। इनकी रचनाएँ हृदय प्रेरित हैं।

प्रारंभ में इनकी ख्याति ‘गीत-फरोश’ शीर्षक कविता के कारण अचानक हुई। यह कविता एकालाप नाटकीय कथोपकथन का विलक्षण आकर्षण और माधुर्य लिए हुए है। यह रचना आज के पाठक की गिरी हुई रुचि और काव्य के मूल्यों की डांवाडोल स्थिति की सूचक है। एक प्रकार से आज के युग में यह एक तीखा व्यंग्य है, जब कविता का उचित मूल्य और महत्त्व नहीं आँका जाता।

श्री मिश्र की रचनाओं को पढ़कर पहला प्रभाव जो पाठक के मन पर पड़ता है, वह यह कि ये प्रकृति के बड़े प्रेमी थे। प्रकृति के साथ इन्होंने कुछ ऐसी गहरी आत्मीयता स्थापित कर ली थी कि ये उसे स्थान-स्थान पर संबोधित करते पाए जाते हैं। मध्य प्रदेश तो जैसे इनकी रचनाओं में सोते से जाग उठा। विंध्याचल, नर्मदा और रेवा इनकी साँसों में बसते थे। दुःख है कि मार्च, 1985 में इनका देहांत हो गया।

इनकी कविताएँ जीवन के प्रेम की कविताएँ हैं, जीवन के दुःख संघर्ष की कविताएँ, जीवन के आनंद की कविताएँ, सुख-ढूँढ़ने से ही सुख मिलता है और दुख ढूँढने से दुख, यह बात इन्होंने अपनी रचनाओं में हजार तरह से समझाई है। अत: इनकी कविताएँ मूल रूप से आस्तिक भाव की, जीवन के आनंद की और कर्म-प्रेरणा की रचनाएँ हैं। वे जीवन की आलोकमयी दृष्टि की परिचायिका हैं।

भवानीप्रसाद मिश्र के विचारों पर भारतीय विचारधारा का गंभीर प्रभाव पाया जाता है-विशेष रूप से गाँधीवाद का। बीसवीं शताब्दी में प्रचलित अन्य लोक-कल्याणकारी विचारधाराओं से भी ये किसी सीमा तक प्रभावित रहे। विशेष बल इन्होंने इस बात पर दिया कि हमारा जीवन सहज और सरल होना चाहिए। इस प्रकार भवानीप्रसाद मिश्र की रचनाओं में प्राणों की पूरी ऊष्मा, जीवन की पूरी गंभीरता, सहज प्रसन्नता तथा सहजता पाई जाती है।

रचनाएँ: गीतफरोश, चकित है दु:ख, अँधेरी कविताएँ, बुनी हुई रस्सी, खुशबू के शिलालेख, अनाम तुम आते हो, इदं न मम।

कठपुतली कविता का सार

इस कविता में कठपुतलियाँ अपनी स्वतंत्रता की इच्छा प्रकट करती हैं। एक कठपुतली गुस्से में आकर बोली कि मेरे आगे-पीछे धागे क्यों बंधे हैं ? इन धागों को तोड़कर मुझे आजाद कर दो ताकि मैं अपने पैरों पर खड़ी हो सकूँ और चल सकूँ। उसकी बात सुनकर अन्य कठपुतलियों ने भी उसकी हाँ में हाँ मिलाई। वे भी आजाद होना चाहती थीं। फिर पहली कठपुतली यह सोचने लगी कि यह मेरे मन में कैसी इच्छा उत्पन्न हो गई। अब उस पर नई जिम्मेदारी आ गई थी। वह सोचने लगती है कि मेरी इस इच्छा का क्या परिणाम होगा? क्या वह अपनी स्वतंत्रता को सँभाल पाएगी? क्या वह पूरी तरह से अपने पैरों पर खड़ी हो पाएगी? क्या वह आजादी का सही उपयोग कर पाएगी? पहली कठपुतली सोच-समझ कर ज़रूरी कदम उठाना चाहती है।

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HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 हिमालय की बेटियाँ

Haryana State Board HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 हिमालय की बेटियाँ Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 हिमालय की बेटियाँ

HBSE 7th Class Hindi हिमालय की बेटियाँ Textbook Questions and Answers

लेख से

प्रश्न 1.
नदियों को माँ मानने की परंपरा हमारे यहाँ काफी पुरानी है लेकिन लेखक नागार्जुन उन्हें और किन रूपों में देखते हैं?
उत्तर:
नदियों को माँ मानने की परंपरा भारतीय संस्कृति में अत्यंत पुरानी है। प्रायः ‘गंगा मैया, यमुना मैया’ कहा जाता है। इसके बावजूद लेखक नदियों को और भी कई रूपों में देखता है। वे रूप हैं-

  • बेटी के रूप में: नागार्जुन नदियों को हिमालय पर्वत की बेटियों के रूप में देखता है।
  • प्रेयसी के रूप में: कालिदास के मेघदूत का प्रसंग बताकर नागार्जुन इन्हें प्रेयसी का रूप देता है। वैसे नदियाँ समुद्र की प्रेयसियाँ हैं क्योंकि नदियाँ उसी की बाँहों में समाने को बेचैन रहती हैं।
  • बहन के रूप में: अनेक कवियों ने भी नदियों का वर्णन बहन के रूप में किया है।

प्रश्न 2.
सिंधु और ब्रह्मपुत्र की क्या विशेषताएँ बताई
उत्तर:
सिंधु और ब्रह्मपुत्र स्वयं में कुछ नहीं है। दयालु हिमालय के पिघले दिल की एक-एक बूंद इकट्ठा होकर ये महानद बनी है। ये नदियाँ लुभावनी है।

प्रश्न 3.
काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता क्यों कहा है?
उत्तर:
काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता इसलिए कहा है क्योंकि ये नदियाँ लोगों के लिए माता के समान पवित्र एवं कल्याणकारी है। इनमें ममता की भावना होती है।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 हिमालय की बेटियाँ

प्रश्न 4.
हिमालय की यात्रा में लेखक ने किन-किन की प्रशंसा की है?
उत्तर:
हिमालय की यात्रा में लेखक ने इनकी प्रशंसा की है:

  • गंगा-यमुना
  • पौधों से भरी घाटियाँ
  • उपत्यकाएँ
  • विभिन्न प्रकार के पेड़।

लेख से आगे

प्रश्न 1.
नदियों और हिमालय पर अनेक कवियों ने कविताएँ लिखी हैं। उन कविताओं का चयन कर उनकी तुलना पाठ में निहित नदियों के वर्णन से कीजिए।
उत्तर:
नदी पर कविता

नदी: कामधेनु

-त्रिलोचन

नदी ने कहा था: मुझे बाँधो
मनुष्य ने सुना और
तैरकर धारा को पार किया।
नदी ने कहा था: मुझे बाँधो
मनुष्य ने सुना और
सपरिवार धारा को
नाव से पार किया।
नदी ने कहा था: मुझे बांधो
मनुष्य ने सुना और
आखिर उसे बाँध लिया
बाँध कर नदी को
मनुष्य दुह रहा है
अब वह कामधेनु है।

प्रश्न 2.
गोपालसिंह नेपाली की कविता ‘हिमालय और हम’ पढ़िए। हिमालय को कवि किस रूप में प्रस्तुत करता है, उसकी तुलना प्रस्तुत पाठ के हिमालय वर्णन से कीजिए।
उत्तर:
हिमालय और हम-गोपाल सिंह नेपाली
[1] गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है।
इतनी ऊंची इसकी चोटी कि सकल धरती का ताज यही,
पर्वत-पहाड़ से भरी धरा पर केवल पर्वत राज यही,
अंबर में सिर, पाताल चरन
मन इसका गंगा का बचपन
तन वरन-वरन, मुख निरावरन
इसकी छाया में जो भी है, वह मस्तक नहीं झुकाता है।
गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है।।

[2] अरुणोदय की पहली लाली, इसको ही चूम निखर जाती,
फिर संध्या की आँतम लाली, इस पर ही झूम बिखर जाती।
इन शिखरों की माया ऐसी,
जैसा प्रभात संध्या वैसी,
अमरों को फिर चिंता कैसी,
इस धरती का हर लाल खशी से उदय-अस्त अपनाता है।
गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है।।

[3] हर संध्या को इसकी छाया, सागर सो लंबी होती है,
हर सुबह वही फिर गंगा की, चादर सी लंबी होती है।
इसकी छाया में रंग गहरा,
है दंश हरा, परदेश हरा,
हर मौसम है, संदेश भरा।
इसका पद-तल छूने वाला, वेदों की गाथा गाता है।
गिरिराज हिमालय से भारत का, कुछ ऐसा ही नाता है।।

[4] जैसा वह अटल, अविचल, वैसे ही हैं भारतवासी,
हैं अमर हिमालय धरती पर, तो भारतवासी अविनाशी।
कोई क्या हमको ललकारे
हम कभी न हिंसा से हारे
दु:ख देकर तुमको क्या मारे
गंगा का जल जो भी पी ले, वह दुःख में भी मुसकांता है।
गिरिराज हिमालय से भारत का, कुछ ऐसा ही नाता है।।

इस कविता में कवि बताता है कि हिमालय पर्वत पर्वतों का राजा है और उसका भारत के साथ विशेष संबंध है। इस पर्वत की चोटी विश्व भर में सबसे ऊँची है। यही कारण है कि यह इस पृथ्वी का ताज है। पहाड़ों से भरी हुई इस पृथ्वी पर हिमालय ही पर्वतों का राजा है। इस पर्वत का सिर आकाश में है तो इसके चरण समुद्र में हैं। सागर इसके चरण धोता है। इसी से गंगा नदी निकलती है जो इसके मन के समान है। इसका शरीर तो ढका हुआ है पर इसका मुख उपड़ा हुआ है। शरीर पर हरियाली ही इसका आवरण है। इस पर्वत की छाया में भारत देश है जो कभी किसी के सामने सिर नहीं झुकाता है। भारत का इस पर्वत के साथ विशेष नाता है।

हिमालय पर्वत इतना बड़ा है कि शाम के समय इसकी छाया समुद्र के समान बड़ी होती है। प्रात:काल होते ही गंगा नदी चादर के समान बहती दिखाई देती है। इसकी छाया गहरी होती है। देश-परदेश सभी जगह हरियाली छाई रहती है। प्रत्येक मौसम संदेश देता सा जान पड़ता है। इसके पैरों में बसा भारत वेदों की गाथा गाता रहता है अर्थात् वेदों की कहानी कहता है। पर्वतराज हिमालय से भारत का विशेष नाता है।

प्रात:काल जब सूर्य निकलता है तो उसकी पहली लालिमा इस हिमालय की चोटी को चूमकर ही निखरती है अर्थात् पहली किरण इसी पर पड़ती है। शाम के समय भी छिपते सूर्य की लाली इसी चोटी पर बिखर कर अपनी छटा दिखाती है। इन चोटियों की विशेषता ही कुछ ऐसी है कि यहाँ सवेरे और शाम का वातावरण एक समान प्रतीत होता है। यहाँ किसी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है। इस पृथ्वी पर रहने वाला हर व्यक्ति इस सूर्य के उगने और छिपने अर्थात् सुख-दुःख को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करता है। भारत का इस हिमालय के साथ विशेष प्रकार का रिश्ता है।

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प्रश्न 3.
यह लेख 1947 में लिखा गया था। तब से हिमालय से निकलनेवाली नदियों में क्या-क्या बदलाव आए हैं?
उत्तर:
हिमालय से निकलने वाली नदियाँ अब प्रदूषण का शिकार हो गई। गंगा और यमुना नदियाँ अब अपनी पवित्रता खो बैठी हैं।

प्रश्न 4.
अपने संस्कृत शिक्षक से पूछिए कि कालिदास ने हिमालय को देवात्मा क्यों कहा है?
उत्तर:
हिमालय में देवताओं का वास है अतः कालिदास हिमालय को देवात्मा कहा है।

HBSE 7th Class Hindi हिमालय की बेटियाँ Important Questions and Answers

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखक ने इस पाठ में किनका वर्णन किया है?
उत्तर:
लेखक ने इस पाठ में हिमालय से निकलने वाली नदियों का वर्णन किया है।

प्रश्न 2.
हिमालय पर्वत पर नदियों का रूप कैसा दिखाई देता है?
उत्तर:
हिमालय पर्वत पर नदियों का रूप दुबला-पतला दिखाई देता है।

प्रश्न 3.
नदियाँ कहाँ भागी जाती है?
उत्तर:
नदियाँ समुद्र की ओर भागी जाती हैं।

प्रश्न 4.
कौन-सी दो नदियाँ महानदों के रूप में समुद्र की ओर प्रवाहित होती रही हैं?
उत्तर:
सिंधु और ब्रह्मपुत्र।

प्रश्न 5.
हिमालय और समुद्र में क्या रिश्ता है?
उत्तर:
हिमालय और समुद्र में ससुर और दामाद का रिश्ता है।

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प्रश्न 6.
काका कालेलकर ने नदियों को क्या कहा है?
उत्तर:
काका कालेलकर ने नदियों को ‘लोकमाता’ कहा है।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखक ने किन्हें हिमालय की बेटियाँ कहा है और क्यों?
उत्तर:
लेखक ने हिमालय से निकलने वाली नदियों को हिमालय की बेटियाँ कहा है। ये नदियाँ हिमालय से निकली है तथा इनका बचपन हिमालय की गोद में ही बीता है। अत: ये उसी की बेटियाँ हैं।

प्रश्न 2.
हिमालय पर चढ़कर लेखक ने नदियों का क्या रूप देखा?
उत्तर:
जब लेखक हिमालय के कंधे पर चढ़ा तब उसने देखा कि वहाँ ये नदियाँ दुबले-पतले रूप में थीं। वहाँ ये नदियाँ उछलती-कूदती, हँसती थीं। मैदान में उतरकर ये विशाल रूप धारण कर लेती हैं।

प्रश्न 3.
नदियाँ कहाँ भागी जाती हैं?
उत्तर:
नदियाँ पर्वत की गोद से निकल कर मैदानों (समतल) की ओर भागी जाती हैं, पर यहीं इनकी भाग-दौड़ समाप्त नहीं हो जाती। ये समुद्र से मिलने के लिए उसी की ओर भागी चली जाती हैं।

प्रश्न 4.
सिंधु और ब्रह्मपुत्र क्या हैं?
उत्तर:
सिंधु और ब्रह्मपुत्र दो महानद हैं। इन्हें नदी कहा जाता है। ये स्वयं में कुछ नहीं हैं। दयालु हिमालय के पिघले हुए दिल की एक-एक बूंद को इकट्ठा करके इन दोनों नदियों में जल-दान किया है। ये दोनों समुद्र की ओर प्रवाहित होती हैं।

प्रश्न 5.
कालिदास के विरही यक्ष ने क्या कहा था?
उत्तर:
विरही यक्ष ने मेघदूत से कहा था कि वेत्रवती (बेतवा) नदी को प्रेम का प्रतिदान देते जाना। तुम्हारी प्रेयसी तुम्हें पाकर बहुत प्रसन्न होगी।

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हिमालय की बेटियाँ गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. अभी तक ……………….. हो जाती है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. लेखक ने अभी तक किन्हें दूर से देखा था?
2 दूर से वे कैसी लगती थी?
3. लेखक के मन में नदियों के प्रति कैसे भाव थे?
4. हिमालय के कंधे पर चढ़कर लेखक को क्या अनुभव हुआ?
उत्तर:
1. लेखक ने अभी तक हिमालय की बेटियों अर्थात् नदियों को दूर से देखा था।
2. दूर से ये नदियाँ एक संभ्रांत महिला के समान शांत प्रतीत होती थीं।
3. लेखक के मन में इन नदियों के प्रति आदर और श्रद्धा के भाव थे। वह उनकी धारा में डुबकियाँ लगाया करता था।
4. हिमालय के कंधे पर चढ़कर लेखक को पता चला कि वहाँ तो गंगा-यमुना, सतलुज आदि नदियाँ दुबली-पतली हैं, पर समतल मैदान में पहुंचकर इनका आकाश विशाल हो जाता है। उनके रूप में यह एक बड़ा परिवर्तन है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. अभी तक लेखक ने नदियों को कैसे देखा था?
(क) पास से
(ख) दूर से
(ग) पहाड़ से
(घ) मैदान से
उत्तर:
(ख) दूर से

2. लेखक को नदियाँ कैसी लगती थीं?
(क) शांत
(ख) गंभीर
(ग) संभ्रांत महिला के समान
(घ) ये सभी रूप
उत्तर:
(घ) ये सभी रूप

3. लेखक नदियों की धारा में क्या करता था?
(क) डुबकियाँ लगाता था
(ख) नाव चलाता था
(ग) खेलता था
(घ) कुछ नहीं करता था
उत्तर:
(क) डुबकियाँ लगाता था

4. समतल मैदान में पहुँचकर नदियाँ कैसी हो जाती हैं?
(क) दुबली
(ख) पतली
(ग) विशाल
(घ) टेडी
उत्तर:
(ग) विशाल

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 हिमालय की बेटियाँ

2. कहाँ ये …………… क्या है?

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1, नदियों का हृदय कैसा प्रतीत होता है और यह कैसे पता चलता है?
2 नदियों का लीला निकेतन क्या है?
3. इन्हें कब बीती बातें याद करने का मौका मिलता होगा?
4. हिमालय का चित्रण किस रूप में किया गया है? वह क्या करता होगा?
उत्तर:
1. नदियों का हृदय अतृप्त प्रतीत होता है। इसका पता इससे चलता है कि अपने पिता (हिमालय) का प्यार पाकर भी ये बेचैन हैं और निरंतर आगे भागी जा रही हैं।
2. नदियों के लीला निकेतन हैं-बरफ जली नंगी पहाड़ियाँ, पौधों से भरी घाटियाँ, टेबललैंड हरी-भरी घाटियाँ।
3. ये नदियाँ जब खेलते-खेलते दूर निकल जाती हैं तब देवदार, चीड़, सरो, चिनार, सफेदा, कैल के जंगलों में पहुँच कर इन्हें बीती बातों को याद करने का मौका मिल जाता होगा।
4. हिमालय का चित्रण एक बूढ़े पिता के रूप में किया गया है। वह अपनी इन शैतान बेटियों (नदियों) के लिए अपना सिर धुनता होगा।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. कौन भाग रहा है?
(क) हिमालय
(ख) नदियाँ
(ग) मैदान
(घ) लेखक
उत्तर:
(ख) नदियाँ

2. ‘अतृप्त’ शब्द का अर्थ है
(क) असंतुष्ट
(ख) प्यासा
(ग) भरना
(घ) भूखा
उत्तर:
(क) असंतुष्ट

3. ‘बुड्ढा हिमालय’ में रेखांकित शब्द क्या है?
(क) संज्ञा
(ख) विशेषण
(ग) सर्वनाम
(घ) क्रिया
उत्तर:
(ख) विशेषण

4. हिमालय की बेटियाँ कैसी हैं?
(क) शांत
(ख) नटखट
(ग) तेज
(घ) गंभीर
उत्तर:
(ख) नटखट

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 हिमालय की बेटियाँ

3. जिन्होंने मैदानों …………………………… होती है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1, मैदान में इन नदियों के किस रूप की कल्पना करना कठिन है?
2 माँ-बाप की गोद में खेलने वाली बालिकाएं कौन हैं?
3. पहाड़ी आदमियों को क्या आकर्षक प्रतीत नहीं होता और क्यों?
4. गद्यांश में किसे ससुर और किसे दामाद कहा गया है और क्यों?
उत्तर:
1. मैदान में नदियों के उस रूप की कल्पना करना कठिन है कि ये बूढ़े हिमालय की गोद में बच्चियाँ बनकर कैसे खेला करती थीं।
2 माँ-बाप की गोद में खेलने वाली बालिकाएँ हिमालय पर्वत से निकलने वाली नदियाँ ही हैं।
3. पहाड़ों से निकलने वाली नदियों (बालिकाओं के समान) का रूप पहाड़ी आदमियों को आकर्षक प्रतीत नहीं होता।
4. गद्यांश में हिमालय को ससुर और समुद्र को दामाद कहा गया है। नदी हिमालय की पुत्री है और समुद्र में जा मिलती है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. ‘बूढ़े हिमालय’ में रेखांकित शब्द क्या है?
(क) संज्ञा
(ख) सर्वनाम
(ग) विशेषण
(घ) क्रिया।
उत्तर:
(क) संज्ञा

2. इस पाठ के लेखक हैं
(क) नागार्जुन
(ख) मुकार्जन
(ग) नीलकंठ
(घ) अर्जुन
उत्तर:
(क) नागार्जुन

3. हिमालय की बेटियाँ कौन हैं?
(क) हिमालय से निकलने वाली नदियाँ
(ख) हिमालय की चोटियाँ
(ग) बालिकाएँ
(घ) समुद्र
उत्तर:
(क) हिमालय से निकलने वाली नदियाँ

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 हिमालय की बेटियाँ

4. काका कालेलकर ……………. हो गया।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. काका कालेलकर ने नदियों को क्या कहा है?
2 लेखक नदियों को और किन-किन रूपों में देखने को कहता है?
3. एक दिन लेखक की कैसी भावना हुई?
4. किस काम से लेखक का मन ताजा हो गया?
उत्तर:
1. काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता कहा है।
2. लेखक नदियों को बेटी, प्रेयसी, बहन के रूपों में भी देखने को कहता है।
3, एक दिन थो-लिङ् (तिब्बत) में लेखक का मन उचट गया, तबीयत ढीली थी।
4. लेखक सतलुज के किनारे बैठ गया। पैर लटका दिए। इससे तन-मन ताज़ा हो गया और वह गुनगुनाने लगा।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. नदी को लोकमाता किसने कहा?
(क) काका
(ख) कालेलकर
(ग) काका कालेलकर
(घ) नागार्जुन
उत्तर:
(ख) कालेलकर

2. कवियों ने नदियों को किसका स्थान दिया है?
(क) प्रेयसी का
(ख) बेटी का
(ग) बहन का
(घ) अन्य का
उत्तर:
(ग) बहन का

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 हिमालय की बेटियाँ

हिमालय की बेटियाँ Summary in Hindi

हिमालय की बेटियाँ पाठ का सार

इस पाठ में लेखक हिमालय पर्वत से निकलने वाली नदियों को उसकी बेटियाँ बताता है। अभी तक उसने इन्हें दूर से ही देखा था। उनके प्रति लेखक के मन में आदर-सम्मान का भाव था। एक बार जब वह हिमालय के कंधे पर चढ़ा तो उसे उनका भिन्न रूप सामने आया। हिमालय पर्वत पर गंगा-यमुना-सतलुज दुबली-पतली दिखाई देती है और मैदानों में पहुँचकर विशाल रूप धारण कर लेती हैं। इन नदियों की बाल लीला देखकर उसे आश्चर्य होता है। उसे ये नदियाँ भागती प्रतीत होती हैं।

पिता (हिमालय) का भरपूर प्यार पाकर भी ये अतृप्त बनी रहती हैं। लगता है ये अपने प्रियतम (समुद्र) से मिलने को बेचैन रहती हैं। ये घाटियों, उपजाऊ भूमि, तरह-तरह के वृक्षों के जंगलों में से गुजर जाती हैं। हो सकता है बूढ़ा हिमालय इन अपनी नटखट लड़कियों (नदियों) के सिर धुनता होगा। सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियों के ऐसे नाम हैं जिनके सुनते ही रावी, सतलुज, व्यास, चिनाव, झेलम, काबुल, कपिशा, गंगा, यमुना, सरय, गंडक, कोसी आदि नदियाँ बेटियों के रूप में सामने नाचने लगती हैं। वह समुद्र बड़ा भाग्यशाली है जिसे सिंधु और ब्रह्मपुत्र-दोनों बेटियों का हाथ पकड़ने का श्रेय मिला है। लेखक हिमालय को समुद्र (दामाद) का ससुर बताता है।

कालिदास के विरही यक्ष ने मेघदूत से कहा था-वेत्रवती (वेतवा) नदी को प्रेम का फल देते जाना. इससे तुम्हारी प्रेयसी खुश हो जाएगी। महाकवि को भी नदियों का सचेतक रूप पसंद था। काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता कहा है। लेखक का कहना है कि उन्हें बेटियों के रूप में देखने में कोई हर्ज नहीं है। इनमें प्रेयसी की भावना उत्पन्न करनी चाहिए। अनेक कवियों ने इन्हें बहन का स्थान दिया है। एक बार की बात है कि लेखक धो-लिङ् (तिब्बत) गया था। तब उसका मन उचाट था, तबीयत भी ढीली थी अत: वह सतलज नदी के पानी में पैर लटका कर बैठ गया। थोड़ी ही देर में उसका मन ताजा हो गया। वह गुनगुनाने लगा..

जय हो सतलज बहन तुम्हारी
लीला अचरज बहन तुम्हारी
हुआ मुदित मन हटा खुमारी
जाऊँ मैं तुम पर बलिहारी
तुम बेटी यह बाप हिमालय
चिंतित पर, चुपचाप हिमालय
प्रकृति नटी के चित्रित पट पर
अनुपम अद्भुत छाप हिमालय
जय हो सतलज बहन तुम्हारी!

हिमालय की बेटियाँ शब्दार्थ

अधित्यकाएँ (स्वी.) = पहाड़ के ऊपर की समतल भूमि, ‘टेबुललैंड’ (Table land)। उपत्यकाएँ (स्वी.) = पहाड़ के पास की जमीन, तराई, घाटी (Valley)। खुमारी = आलस (Lociness)। चित्रित = बना हुआ चित्र (Picuteri)। नटी = नृत्य करने वाली (Dancer lach)। प्रगतिशील = आगे की ओर बढ़ने वाला (Progressive)। प्रतिदान = बदले में (Inexchange)। प्रेयसी (स्त्री.)- प्रेमिका, पत्नी, प्रियतमा (Beloved)। बंधुर (पु.) – भाई (Brother)। बलिहारी (स्त्री) = निछावर होना (Offering) भाव-भंगी – हाव-भाव (Pasture)। मुदित – प्रसन्न (Happy)। विराट – बड़ा (Big)। विस्मय – आश्चर्य (Surprise)। संभ्रांत = अच्छे कुल का (Ofgood family)। सरसब्ज (वि.) = हराभरा, लहलहाता (Green)। प्रतीत = मालूम (Looks)। कौतूहल – जानने की इच्छा (Curiosity)। मौन = चुप (Silent)। श्रेय – यश (Credit)। जुदा-जुदा = अलग-अलग (Seperate)। सचेतन = जानदार, जागरुक (Conscious)। लुभावना = मनमोहन (Attracting)। अतृप्त = संतुष्ट न होना (Unsatisfier).

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HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 दादी माँ

Haryana State Board HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 दादी माँ Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 दादी माँ

HBSE 7th Class Hindi दादी माँ Textbook Questions and Answers

कहानी से

प्रश्न 1.
लेखक को अपनी दादी माँ की याद के साथ-साथ बचपन की और किन-किन बातों की याद आ जाती है?
उत्तर :
लेखक को अपनी दादी माँ की याद के साथ-साथ बचपन की अन्य निम्नलिखित बातों की याद आ जाती है:

  • अपने उन शुभचिंतक मित्रों की जो उसे प्रसन्न करने के लिए छुट्टियों की सूचना देते हैं और पीठ पीछे उसका मजाक उड़ाते हैं।
  • क्वार के महीने की जब रास्ते का कीचड़ विचित्र गंध के साथ सूख जाता है।
  • बचपन में ज्वर का चढ़ना और उसमें दादी माँ की सेवा।
  • किशन भैया की शादी का मौका और उस समय औरतों का चार-पाँच दिन तक गीत और अभिनय का कार्यक्रम।
  • रामी चाची की घटना।

प्रश्न 2.
दादा की मृत्यु के बाद लेखक के घर की आर्थिक स्थिति खराब क्यों हो गई थी ?
उत्तर :
दादा की मृत्यु के बाद लेखक के घर की आर्थिक स्थिति इसलिए खराब हो गई थी क्योंकि उनके श्राद्ध पर पिताजी ने काफी धन खर्च कर दिया था। धोखेबाज और दिखावी मित्रों ने स्थिति को और भी खराब कर दिया था।

प्रश्न 3.
दादी के स्वाभाव कौन-सा पक्ष आपको सबसे अच्छा लगता है और क्यों ?
उत्तर :
दादी के स्वाभाव का वह पक्ष हमें सबसे अच्छा लगता है जिसमें वे दूसरों के प्रति अपनी चिंता रखती है। वे बीमार के पास बैठकर उसकी पूरी देखभाल करती थी, उसकी दवा का प्रबंध अपने ढंग से करती थी। मुँह से भले ही कडवी लगती थीं, पर दूसरों की आर्थिक मदद भी करती थीं। रामी चाची का कर्ज माफ कर नकद रुपए भी दिए ताकि उसकी बेटी का विवाह निर्विघ्न हो जाए। पिताजी को भी अपना स्वर्ण-कंगन देकर आर्थिक चिंता से उबारा था।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 दादी माँ

कहानी से आगे

प्रश्न 1.
आपने इस कहानी में महीनों के नाम पढ़े, जैसे-क्वार, आषाढ़, माघ। इन महीनों में मौसम कैसा रहता है?
उत्तर :

  1. क्वार : गरमी का अंत हो रहा होता है। हल्की-हल्की ठंड शुरू हो जाती है। दशहरा इस मास का प्रमुख त्योहार है।
  2. आषाढ़ : यह भास वर्षा का है। इस महीने खूब वर्षा होती है। वर्षा न होने पर गरमी रहती है।
  3. माघ : यह महीना सर्दी का है। माघ के पहले पंद्रह दिन भयंकर सर्दी पड़ती है। फिद सर्दी का जोर घटता चला जाता है।

प्रश्न 2.
‘अपने-अपने मौसम की अपनी-अपनी बातें होती हैं’-लेखक के इस कथन के अनुसार यह बताइए कि किस मौसम में कौन-कौन सी चीजें विशेष रूप से मिलती हैं?
उत्तर :
गरमी के मौसम में तेज गरमी पड़ती है। इस मौसम में तरबूज-खरबूज खूब होते हैं। इनके खाने से गरमी का प्रभाव शरीर पर कम पड़ता है। वर्षा के मौसम बारिश होती है। दिन धूप से तपता है। ज्यादा गरमी वर्षा ले आती है। खाने को आम मिलते हैं।

सर्दी : इस मौसम के आते ही गर्मी-वर्षा से छुटकारा मिल जाता है। यह मौसम स्वास्थ्यवर्धक होता है। खाने को सेब, अमरूद, केले. अंगूर आदि फल मिलते हैं।

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HBSE 7th Class Hindi दादी माँ Important Questions and Answers

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लेखक की क्या कमजोरी है?
उत्तर :
लेखक की यह कमजोरी है कि वह थोड़ी सी भी मुश्किल पड़ने पर घबरा उठता है।

प्रश्न 2.
लेखक को हल्की-सी बीमारी क्यों अच्छी लगती है?
उत्तर :
लेखक को हल्का ज्वर या सिर पर हल्का सिरदर्द इसलिए अच्छा लगता है क्योंकि इसमें खाने के लिए दिन भर नींबू और साबू मिलता है।

प्रश्न 3.
दादी माँ को किनके पचासों नाम याद थे?
उत्तर :
दादी माँ को मुंबई-गाँव की पचासों किस्म की दवाओं के नाम याद थे।

प्रश्न 4.
तब बुखार किसके डर से भाग जाता था?
उत्तर :
तब कुनैन मिक्सचर की शीशी की तिताई के डर से बुखार भाग जाता था।

प्रश्न 5.
दादी माँ का उत्साह और आनंद कब देखते बनता था?
उत्तर :
किशन भैया की शादी के अवसर पर दादी माँ का उत्साह और आनंद देखते बनता था।

प्रश्न 6.
दादी माँ किशन के विवाह पर औरतों की किस बात पर बिगड़ी
उत्तर :
जय रात के समय औरतें अभिनय कर रहीं थी तब औरतों ने लेखक व राघव के वहाँ होने पर ऐतराज किया था। इस पर दादी उन पर बिगड पडी।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 दादी माँ

प्रश्न 7.
देबू की माँ ने चादर खींचकर क्या कहा?
उत्तर :
देबू की माँ ने कहा-“कहो दादी, यह कौन बच्चा सोया है? बेचारा रोता है शायद, दूध तो पिला दूं।”

प्रश्न 8.
धन किसमें खर्च हो गया था? वह कहाँ का था?
उत्तर :
दादा के श्राद्ध में पिताजी ने काफी धन खर्च कर दिया था। वह घर का नहीं, कर्ज का था।

प्रश्न 9.
दादी नेसंदूकखोलकर क्या वस्तु निकाल कर दी?
उत्तर :
दादी ने संदूक खोलकर सोने का कंगन निकाल कर दिया।

प्रश्न 10.
लेखक को किस सूचना पर सहज विश्वास नहीं हुआ?
उत्तर :
लेखक को दादी माँ की मृत्यु की सूचना पर सहज विश्वास नहीं हुआ।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
क्वार के महीने में गाँव के वातावरण में क्या परिवर्तन आ जाता है?
उत्तर :
क्वार के आते ही रास्तों का कीचड़ सूख जाता है। मोथा और साई की अधगली घासें, बनप्याज की जड़ें तथा अन्य प्रकार की घासों के बीच सूरज की गर्मी में सड़कर विचित्र गंध देने लगते हैं। गाँव के लड़के झाग भरे जलाशयों में कूदते रहते हैं।

प्रश्न 2.
दादी माँ को बीमारियों का ज्ञान कैसा था तथा वे दवा करने के क्या उपाय करती थीं?
उत्तर :
दादी माँ हाथ, माथा, पेट छूकर भूत, मलेरिया सरसाम, निमोनिया तक का अनुमान लगा लेती थीं। वे लौंग, गुड़-मिश्रित जलधार, गुग्गल और धूप से इलाज करती थीं।

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प्रश्न 3.
दादी माँ के दो रूप इस कहानी में विखाई देते हैं? वे कौन-कौन से हैं?
उत्तर :
दादी माँ का एक रूप तो वह है जब वे रामी की चाची से मय सूद के अपनी रकम वसूलने की धमकी देती हैं। दूसरा रूप वह है जब वे रामी की चाची की बिटिया की शादी के लिए सारा कर्ज माफ कर देती हैं तथा उसे दस रुपये भी दे देती हैं।

प्रश्न 4.
पिताजी और किशन भैया मन मारे क्यों बैठे थे?
उत्तर :
पिताजी और किशन भैया मन मारे कुछ सोच रहे थे। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। जिन पर रुपये थे, वे लौटाते नहीं थे। लोगों पर काफी बकाया था। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था।

दादी माँ गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. कमजोरी ही है ……….. उठती है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. यह गद्यांश किस पाठ से लिया गया है?
2 लेखक की कमजोरी क्या है?
3. मित्र किस प्रकार का दोमुंहा व्यवहार करते हैं?
4. लेखक के सामने क्या नाच उठती है?
उत्तर:
1. यह गद्यांश ‘दादी माँ’ पाठ से लिया गया है।
2. लेखक की कमजोरी यह है कि जरा-सी मुश्किल के आने पर उसका मन प्राय: अनमना हो जाता है। अर्थात वह घबरा जाता है।
3. लेखक के मित्र उसे प्रसन्न करने के लिए मुंह पर तो आने वाली छुट्टियों की सूचना देते हैं और पीठ पीछे उसे कमजोर और घबराने वाला कहकर उसका मजाक उड़ाते हैं। इस प्रकार वे दोमुँहा व्यवहार करते हैं।
4. लेखक की आँखों के सामने शरद ऋतु की शीतल किरणों के समान स्वच्छ, शीतल किसी की धुंधली छाया नाच उठती है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. कौन-सा नाम ऋतु का नाम नहीं है?
(क) गरमी
(ख) बरसात
(ग) विकलता
(घ) मेघ
उत्तर :
(घ) मेघ

2. शुभचिंतक कौन होते हैं?
(क) शोभाकारक
(ख) भला सोचने वाले
(ग) चिंतन करने वाले
(घ) अशुभ
उत्तर :
(ख) भला सोचने वाले

3. ‘प्रतिकूलता’ का विलोम शब्द है
(क) अनुकूलता
(ख) विकलता
(ग) व्याकुलता
(घ) विकूलता
उत्तर :
(क) अनुकूलता

4. ‘धुंधली छाया’ में रेखांकित शब्द है
(क) संज्ञा
(ख) सर्वनाम
(ग) विशेषण
(घ) क्रिया
उत्तर :
(ग) विशेषण

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 दादी माँ

2. दिन में …………… अनुमान करती।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. कौन, क्यों चादर लपेटे सोया था?
2. दादी माँ किस रूप में आई थीं?
3. दादी ने आते ही क्या किया?
4. वे चारपाई के पास बैठकर क्या करती?
उत्तर:
1. लेखक को बुखार चढ़ा था। दिन में कम था अतः वह चादर लपेटे हुए सोया हुआ था।
2. दादी माँ झागवाले जल में नहाकर आई थी। उसने अपने दुबले-पतले शरीर पर बिना किनारी की धोती पहन रखी थी। उसके सफेद बालों के सिरों से पानी की बूंदें टपक रहीं थीं।
3. दादी ने आते ही लेखक का सिर और पेट छुआ। आँचल की गाँठ खोलकर किसी शक्तिधारी चबूतरे की कुछ मिट्टी मुँह में डाली और कुछ माथे पर लगाई।
4. दादी माँ दिन-रात चारपाई के पास बैठी रहतीं। कभी पंखा से हवा करती, कभी हाथ-पैर को कपड़े से सहलाती, कभी सिर पर दालचीनी का लेप करती और कभी हाथ से छूकर बुखार का अंदाजा लगातीं।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. दादी माँ कैसे जल में नहा कर आईं थी?
(क) ठंडे
(ख) गरम
(ग) झागवाले
(घ) सफेद
उत्तर :
(ग) झागवाले

2. दादी माँ की धोती कैसी थी?
(क) सफेद
(ख) बिना किनारी की
(ग) दोनों तरह की
(घ) लाल
उत्तर :
(ग) दोनों तरह की

3. दादी माँ के बाल किसके समान सफेद थे?
(क) सन के
(ख) कपड़े के
(ग) धूप के
(घ) साबुन के
उत्तर :
(क) सन के

4. दादी माँ की क्रियाओं से उसका क्या झलकता था?
(क) डर
(ख) स्नेह
(ग) चिंता
(घ) दिखावा
उत्तर :
(ख) गरम मसाले का

5. दालचीनी किसका नाम है?
(क) चीनी का
(ख) गरम मसाले का
(ग) मिठाई का
(घ) दवा का
उत्तर :
(ख) गरम मसाले का

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 दादी माँ

3. किशन के ……………. जा सका था।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. किसको शादी की बात का उल्लेख है?
2 विवाह के चार-पाँच रोज पहले क्या किया जाता है?
3. इसमें क्या दृश्य दिखाए जाते हैं?
4. लेखक बारात में क्यों नहीं जा सका?
उत्तर:
1. लेखक के बड़े भैया किशन की शादी का उल्लेख है।
2 विवाह के चार-पाँच रोज़ पहले से ही औरतें रात-रातभर जागकर गीत गाती हैं। विवाह की रात को अभिनय भी किया जाता है।
3. उसमें विवाह से लेकर पुत्रोत्पत्ति तक के सभी दृश्य दिखाए जाते हैं। इनमें सभी पार्ट औरतें करती हैं।
4. लेखक बीमार था अतः वह बारात में नहीं जा सका था।

बहुविकल्पी प्रश्न सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. किसके विवाह के दिनों की बात है?
(क) लेखक के
(ख) किशन के
(ग) राघव के
(घ) ममेरे भाई के
उत्तर :
(ख) किशन के

2. विवाह से चार-पाँच रोज पहले औरतें क्या करती है?
(क) रातभर गीत गाती हैं
(ख) अभिनय करती हैं
(ग) खाना पकाती हैं
(घ) तैयारियां करती हैं
उत्तर :
(क) रातभर गीत गाती हैं

3. ‘पुत्रोत्पत्ति’ का सही संधि-विच्छेद है
(क) पुत्र + उत्पत्ति
(ख) पुत्रो + उत्तपत्ति
(ग) पुत्रो + त्पति
(घ) पुत्र + उत्तपत्ति
उत्तर :
(क) पुत्र + उत्पत्ति

4. विवाह की रात को क्या होता है?
(क) गायन
(ख) अभिनय
(ग) वादन
(घ) खाना
उत्तर :
(ख) अभिनय

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4. स्नेह और …………………………… करते थे।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
प्रश्न:
1. दादी माँ कैसी थी?
2. दादी माँ क्या बात खूब जानतीं थीं?
3. वे क्यों उदास रहती थीं?
4. दादी माँ को यह संसार कैसा प्रतीत होता था? क्यों?
उत्तर:
1. दादी माँ स्नेह और ममता की मूर्ति थीं।
2 दादी माँ यह बात भली प्रकार जानती थी कि परिस्थितियों का घटनाचक्र जीवन को सूखे पत्ते के समान नचाता है अर्थात् मनुष्य का जीवन परिस्थितियों और घटनाओं के वशीभूत होकर चलता है।
3. दादाजी की मृत्यु के बाद दादी माँ बहुत उदास रहती थीं।
4. दादी माँ को यह संसार धोखे की टट्टी मालूम होता था क्योंकि यहाँ कदम-कदम पर धोखा था। दादाजी भी उनको धोखा देकर इस संसार से चले गए थे।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. दादी माँ किसकी मूर्ति प्रतीत होती थीं?
(क) स्नेह की
(ख) ममता की
(ग) स्नेह-ममता की
(घ) दया की
उत्तर :
(ग) स्नेह-ममता की

2. ‘वात्याचक्र’ कैसा शब्द है?
(क) तत्सम
(ख) तद्भव
(ग) देशज
(घ) विदेशी
उत्तर :
(ग) देशज

3. दादी माँ की उदासी का कारण था
(क) दादा की मृत्यु
(ख) धन की कमी
(ग) लेखक की बीमारी
(घ) संसार का रवैया
उत्तर :
(क) दादा की मृत्यु

4. संसार दादी माँ को कैसा प्रतीत होता था?
(क) अच्छा
(ख) बुरा
(ग) धोखे की टट्टी
(घ) मिला-जुला
उत्तर :
(ग) धोखे की टट्टी

5. सचमुच मुझे ………………………….. नहीं रहीं?

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
प्रश्न:
1. लेखक को दादी माँ कैसी लगों? क्यों?
2 लेखक ने क्या देखा?
3. हाथ में क्या काँप रहा है?
4. पत्र में क्या सूचना दी गई होगी?
उत्तर:
1. लेखक को दादी माँ शापभ्रष्ट देवी-सी लगी। वैसे तो दादी माँ त्याग और ममता की देवी थीं, पर किसी शाप के कारण धरती पर कष्टपूर्ण जीवन जीने आ गई थीं।
2 लेखक ने देखा कि दिन काफी चढ़ आया है, खजूर के पेड़ से उड़कर एक कौआ काले पंख फैलाकर उसकी खिड़की पर बैठ गया था। (अपशकुन की सूचना)
3. लेखक के हाथ में किशन भैया का पत्र काँप रहा है।
4. पत्र में दादी माँ की मृत्यु की सूचना दी गई होगी।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. लेखक को दादी माँ कैसी लगी?
(क) देवी
(ख) शापध्रष्ट देवी-सी
(ग) सामान्य
(घ) विशिष्ट
उत्तर :
(ख) शापध्रष्ट देवी-सी

2. कौआ पहले कहाँ बैठा था?
(क) खजूर के पेड़ पर
(ख) खिड़की पर
(ग) नीम के पेड़ पर
(घ) दरवाजे पर
उत्तर :
(ख) खिड़की पर

3. ‘पाँख’ शब्द कैसा है?
(क) तत्सम
(ख) तद्भव
(ग) दशज
(घ) विदेशी
उत्तर :
(ख) तद्भव

4. लेखक को किस पर विश्वास नहीं होता?
(क) आँखों पर
(ख) दादी की मृत्यु की सूचना पर
(ग) पत्र पर
(घ) किसी पर नहीं
उत्तर :
(ख) दादी की मृत्यु की सूचना पर

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दादी माँ Summary in Hindi

दादी माँ पाठ का सार

लेखक की एक कमजोरी है कि जरा सी कठिनाई पड़ते ही प्रायः उसका मन अनमना-सा हो जाता है। लेखक के मित्र और शुभचिंतक उसे आने वाली छुट्टियों की सूचना देकर प्रसन्न करने
का प्रयास करते हैं, पर पीछे से उसका मजाक उड़ाते हैं। लेखक ‘को लगता है कि क्वार के दिन आ गए हैं। चारों ओर पान हिलोरें ले रहा है। मोथा और साई की अधगली घासें, बनप्याज की जड़ें तथा तरह-तरह की बरसाती घासे विचित्र गंध छोड़ती जान पड़ती हैं। रास्तों का कीचड़ सूख गया है।

क्वार के दिनों में गंधपूर्ण झाग भरे जल में कूदकर नहाने के कारण वह बीमार हो गया। वैसे हलकी बीमारी लेखक को अच्छी लगती है। पर इस बार बुखार चढ़ा तो चढ़ता ही चला गया। रजाई पर रजाई ओढ़ी तब रात बारह बजे के बाद उतरा। दिन में चादर लपेटकर सोया था। दादी माँ नहाकर आई थीं। उनके दुबले-पतले शरीर पर सफेद विना किनारी की धोती थी। बाल सफेद सन जैसे थे तथा उनसे पानी की बूंदें टपक रही थीं। उन्होंने आते ही लेखक का सिर और पेट को छुआ।

आँचल की गाँठ खोलकर और चबूतरे की मिद्री मँह में डाली और माथे से लगाई। वह रात-दिन चारपाई के पास बैठी रहती और कभी पंखा झलती, कभी सिर पर दाल-चीनी का लेप करतीं और बार-बार छूकर बुखार का अनुमान लगातीं। वे अनेक प्रकार की जानकारियाँ लेती-जैसे हाँडी में पानी आया कि नहीं? उसे पीपल की छाल से छौंका या नहीं? खिचड़ी में मूंग की दाल एकदम मिल तो नहीं गई? कोई बीमार घर में सीधे तो नहीं चला आया ? आदि।

दादी माँ को गाँव में प्रयुक्त होने वाली पचासों किस्म की दवाओं के नाम याद थे। जब भी गाँव में कोई बीमार होता, वे वहाँ पहुँच जाती और यही सब बातें करती और दोहरातीं। सफाई की सीख उनसे ली जा सकती थी, दवा में देरी उनसे सहन नहीं होती थी। लेखक को बुखार तो अब भी आता है पर अब वह बात कहाँ ? मेस-महाराज अपने मन से पकाकर खिचड़ी या साबू दे जाता है, डॉक्टर नाड़ी देखकर कुनैन मिक्सर दे जाता है। पर अब बुखार बुलाने का मन नहीं करता।।

किशन भैया की शादी के मौके पर दादी माँ का उत्साह देखते – ही बनता था। उन्होंने घर को सिर पर उठा लिया था। वे सारा काम अपने हाथ से करना चाहती थीं। एक दिन दोपहर को दादी माँ किसी पर बिगड़ रही थी। वे धन्नों से अपने रुपए ब्याज सहित माँग रही थी। रामी की चाची दया की भीख माँग रही थी। बाद में उसी दादी ने पिछला सारा रुपया छोड़ दिया और दस रुपए को नोट देकर कहा-“धन्नो, जैसी तेरी बेटी, वैसी मेरी। दस-पाँच रुपए के लिए हँसाई न हो। देवता है बेटा, देवता।”

किशन के विवाह की बात है। चार-दिन पहले से ही गीत गाने लगे थे। लेखक बीमार होने के कारण बारात में न जा सका था। लेखक को एक चारपाई पर चादर उढ़ाकर सुला दिया। देबू की माँ ने चादर खींच ली। स्नेह और ममता की मूर्ति दादी माँ की एक-एक बात बड़ी अनोखी लगती है। दादा की मृत्यु के बाद से ही वे उदास रहती थी। दादा के श्राद्ध में दादी माँ के मना करने पर भी पिताजी ने जो अतुल संपत्ति व्यय की थी, वह घर की तो नहीं। एक माघ मास के कड़कती ठंड में दादी माँ गीली धोती पहने एक संदूक पदउ दिया जलाए हाथ जोड़कर बैठी थी। लेखक ने उनसे गीली धोती बदलने को कहा तो वे बोली-मुझे सरदी-गरमी नहीं लगती। लेखक ने एक सुबह पिताजी को किशन भैया के साथ उदास बैठे देखा। दादी ने पिताजी की आर्थिक समस्या को सुलझाने के लिए अपना कंगन निकालकर दे दिया।

दादी माँ शब्दार्थ

कठिनाई = मुश्किल (dificulty), शुभचिंतक = भला सोचने वाले (well-wisher),शीत = ठंड (cold), स्वच्छ = साफ (clear), विचित्र = अनोखी (strange), जलाशय = तालाब (pond), शीतलता = ठंडक (coleiness), ज्वर = बुखार (fever), किस्म = प्रकार (type), विश्रचिका = संक्रामक रोग (epedemic), उत्साह = जोश (zeal), निकसार = निकास, निकलने का दरवाजा (exit), निस्तार – छुटकारा (to get rid off), विह्वल – बैचेन (restless), पत्रोत्पत्ति = पत्र + उत्पत्ति बेटा पैदा होना (birth of son),आपत्ति – ऐतराज (objection), अप्रिय जो अच्छा न लगे (not good), सन्नाटा = चुप्पी (silence), विलीन = गायब (disappear).

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HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 1 हम पंछी उन्मुक्त गगन के

Haryana State Board HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 1 हम पंछी उन्मुक्त गगन के Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 1 हम पंछी उन्मुक्त गगन के

HBSE 7th Class Hindi हम पंछी उन्मुक्त गगन के Textbook Questions and Answers

कविता से

प्रश्न 1.
हर तरह की सुख-सुविधाएँ पाकर भी पक्षी पिंजरे में बंद क्यों नहीं रहना चाहते?
उत्तर:
यद्यपि पिंजरे में खाने-पीने तथा सुरक्षा की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, फिर भी पक्षी पिंजरे में बंद नहीं रहना चाहते। इसका कारण यह है कि उन्हें स्वतंत्रता प्रिय है। वे खुले आकाश में उड़ान भरकर अधिक प्रसन्न रहते हैं। उन्हें अपनी उड़ान में कोई बाधा पसंद नहीं है। उन्हें बंधन प्रिय नहीं लगता।

प्रश्न 2.
पक्षी उन्मुक्त रहकर अपनी कौन-कौन सी इच्छाएं पूरी करना चाहते हैं?
उत्तर:
पक्षी उन्मुक्त रहकर अपनी इन इच्छओं को पूरा करना चाहते हैं:

  • वे नदी-झरनों का बहता जल पीना चाहते हैं।
  • वे अपनी गति से उड़ान भरना चाहते हैं।
  • वे अपनी इच्छा से प्रकृति से वस्तुएँ लेकर खाना चाहते हैं।

प्रश्न 3.
भाव स्पष्ट कीजिएया तो क्षितिज मिलन बन जाता/या तनती साँसों की डोरी।
उत्तर:
पक्षी क्षितिज में लंबी उड़ान भरने को इच्छुक रहते हैं। वे दोनों स्थितियों को सहने को तैयार रहते हैं-या तो वे अपने लक्ष्य तक पहुंच जाते अर्थात् क्षितिज तक जा पहुँचते अथवा उड़ते-उड़ते उनकी साँस फूल जाती।

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कविता से आगे

प्रश्न 1.
बहुत से लोग पक्षी पालते हैं
(क) पक्षियों को पालना उचित है अथवा नहीं? अपने विचार लिखिए।
(ख) क्या आपने या आपकी जानकारी में किसी ने कभी कोई पक्षी पाला है?
उसकी देखरेख किस प्रकार की जाती होगी, लिखिए।
उत्तर:
(क) हमारी दृष्टि से पक्षियों को पालना उचित नहीं है क्योंकि इससे हम उनकी स्वतंत्रता पर पाबंदी लगा देते हैं। पक्षियों को प्रकृति में स्वच्छंद विचरण करने देना चाहिए। उन्हें वहीं प्रसन्नता मिलती है।

(ख) हमारे एक पड़ोसी ने तोता पाला था। उसे उसने एक पिंजरे में रखा हुआ था। उसके पिंजरे में ही एक कटोरी रखी हुई थी। वह उसी में उसका खाना रख देता था। हम देखते कि तोता बाहर निकलकर उड़ने के लिए बेचैन रहता था।

प्रश्न 2.
पक्षियों को पिंजरे में बंद करने से केवल उनकी आजादी का हनन ही नहीं होता, अपितु पर्यावरण भी प्रभावित होता है। इस विषय पर दस पंक्तियों में अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
पक्षियों को पिंजरे में बंद करके रखना सभी दृष्टियों से गलत है। यह हम केवल अपने मनोरंजन हेतु करते हैं। इससे पक्षियों का कुछ भी भला नहीं होता।

पिंजरे में बंद करके रखने से पक्षियों की आजादी छिनती है। वे तो खले आकाश में उड़ान भरना चाहते हैं। पिंजरे में रखने से उनकी आजादी छिनती है। । इसके साथ-साथ पर्यावरण भी प्रभावित है। पर्यावरण को शुद्ध और प्राकृतिक बनाए रखने के लिए पक्षियों को प्रकृति के मध्य रहना आवश्यक है। वे इस प्रकार पर्यावरण को शुद्ध एवं संतुलित बनाते हैं। पर्यावरण में पक्षियों का अपना विशेष महत्त्व होता है।

HBSE 7th Class Hindi हम पंछी उन्मुक्त गगन के Important Questions and Answers

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पक्षी किस प्रकार का जीवन जीना चाहते हैं?
उत्तर:
पक्षी उन्मुक्त अर्थात् स्वतंत्र बंधनरहित जीवन जीना चाहते हैं।

प्रश्न 2.
कहाँ रहकर पक्षी ठीक प्रकार से गा नहीं पाते?
उत्तर:
पिंजरे में बंद रहकर पक्षी ठीक प्रकार से गा नहीं पाते।

प्रश्न 3.
पक्षी कहाँ का पानी पीकर खुश रहते हैं?
उत्तर:
पक्षी नदी-झरने का बहता पानी पीकर खुश रहते हैं।

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प्रश्न 4.
पक्षियों का क्या अरमान होता है?
उत्तर:
पक्षियों का अरमान होता है कि वे नीले आसमान में दूर-दूर तक उड़ान भरें।

प्रश्न 5.
यह क्षितिज कैसा है?
उत्तर:
यह क्षितिज सीमाहीन अर्थात् असीम है।

प्रश्न 6.
पक्षियों को क्या पसंद नहीं है?
उत्तर:
पक्षियों को अपनी उड़ान में बाधा डालना पसंद नहीं है।

प्रश्न 7.
“लाल किरण-सी चोंच खोल चुगते तारक-अनार के दाने।” इस पंक्ति में किरण और तारक शब्दों का प्रयोग किसलिए हुआ है?
उत्तर:
‘किरण’ शब्द का प्रयोग ‘तोते की चोंच’ के लिए किया गया है क्योंकि दोनों का रंग लाल होता है। तारों का प्रयोग कवि ने ‘अनार के दानों’ के लिए किया है।

प्रश्न 8.
पिंजरे में बंद पक्षी किस प्रकार के स्वप्न देखते हैं?
उत्तर:
पिंजरे में बंद पक्षी यह स्वप्न देखते हैं कि वे पेड़ की चोटी पर झूला झूलते या आकाश में ऊँचे उड़ते रहते।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
पक्षी सोने की कटोरी की मैदा से कड़वी निबौरी को क्यों अच्छा बताता है?
उत्तर:
गुलामी का जीवन अच्छा नहीं होता। ऐसे समय में मन की स्वतंत्रता समाप्त हो जाती है। स्वतंत्र जीवन में कठिनाइयाँ भी क्यों न हों, वह बंधन के जीवन से अच्छा होता है। अत: पक्षी भी खुले रहकर सोने की कटोरों की मैदा की अपेक्षा नौम के कड़वे फल खाना अधिक पसंद करते हैं।

प्रश्न 2.
पक्षी हम मनुष्यों से क्या प्रार्थना करते हैं?
उत्तर:
पक्षी हम लोगों से यह प्रार्थना करते हैं कि उन्हें चाहे सलों में न रहने दिया जाए, उनकी टहनियों के सहारे को छीन लिया ॥ए. परंतु भगवान ने जब उन्हें उड़ने के लिए पंख दिए हैं तो उनकी वतंत्र उड़ान में किसी भी प्रकार की रुकावट न डाली जाए।

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प्रश्न 3.
इस कविता की उन पंक्तियों को चुनो जिनमें पक्षी की स्वच्छंद रहने की भावना का वर्णन है।
उत्तर:
पक्षी को स्वच्छंद रहने की भावना का वर्णन कवि की इन पंक्तियों में है:
हम पंछी उन्मुक्त गगन के, पिंजरबद्ध न गा पाएंगे। कनक-तीलियों से टकरा कर, पुलकित पंख टूट जाएंगे।

प्रश्न 4.
इस कविता से तुम्हें क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर:
इस कविता से हमें यही प्रेरणा मिलती है कि पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं। अर्थात् स्वतंत्रता सबसे अच्छी है। दूसरों के अधीन रहकर सुख का जीवन बिताने में स्वतंत्र रहकर रूखी-सूखी रोटी खाना अधिक अच्छा है

प्रश्न 5.
इस कविता से पक्षियों की किस विशेषता का परिचय मिलता है?
उत्तर:
इस कविता से पता चलता है कि पक्षियों को स्वतंत्रता प्रिय है। वे बंधन के वातावरण में रहना पसंद नहीं करते। वे सोने के पिंजरों में बंद रहकर पकवान आदि खाना नहीं चाहते। वे खुले आकाश में रहना पसंद करते हैं, चाहे उन्हें कड़वे फल ही क्यों न खाने पड़ें।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित पंक्तियों का भावार्थ लिखो
(क) या तो क्षितिज मिलन बन जाता
या तनती साँसों की डोरी।

(ख) लाल किरण सी चोंच खोल
चुगते तारक-अनार के दान।।
उत्तर:
(क) पक्षी उड़कर या तो क्षितिज के पार तक पहुँच जाते अथवा उड़ते-उड़ते उनकी साँस ही फूल जाती अर्थात् उड़ते ही चले जाते और जब तक क्षितिज के पार न पहुँच पाते तब तक उड़ते चले जाते।

(ख) पक्षियों की लाल-लाल चोंच सूर्य की किरण के समान प्रतीत होती है और तारे अनार के दाने के समान लगते हैं। पक्षी तारों को अनार के दाने समझ कर चुगने का प्रयास करते हैं।

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प्रश्न 7.
तोते की आत्मकथा लिखो।
उत्तर:
पिंजरे में बंद तोते की आत्मकथा:
मैं एक तोता हूँ। तुम मेरे रंग-रूप पर मोहित हो रहे हो। मैं राम-राम पुकारता भी हूँ, पर तुम मेरे मन की व्यथा को नहीं समझते। मैं इस पिंजरे में कैद होकर बड़ा दुःखी रहता हूँ। यह ठीक है कि मुझे खाने की कोई कमी नहीं है, पर बंदी जीवन की यातना तो मुझे झेलनी ही पड़ती है। मेरा मन खुले आकाश में उड़ने को ललचाता रहता है. पर मन मसोस कर रह जाता हूँ। मुझे स्वतंत्र जीवन ही प्रिय है।

हम पंछी उन्मुक्त गगन के काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. हम पंछी ……………………. पंख टूट जाएँगे।

शब्दार्थ: पंछी = पक्षी (Birds)। उन्मुक्त – स्वतंत्र (Free)। पिंजरबद्ध – पिंजरे में बँधकर (In the cage)। कनक – सोना (Gold)। पुलकित – प्रसन्नचित्त (Happy)।

सप्रसंग व्याख्या :
प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘वसंत भाग-2’ में संकलित कविता ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ से ली गई हैं। इस कविता के रचयिता प्रसिद्ध कवि श्री शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ हैं। इस कविता में कवि ने पक्षियों के जीवन के माध्यम से स्वतंत्रता का महत्त्व दर्शाया है। पक्षी स्वतंत्र उड़ान भरने की इच्छा रखते हैं।

व्याख्या:
पक्षी कहते हैं कि हम तो खुले आकाश में उड़ने वाले पक्षी हैं। हम पिंजरे में बंद रहकर नहीं गा सकते। हमें तो स्वतंत्र जीवन पसंद है। हमें पिंजरे में रहना अच्छा नहीं लगता। यह पिंजरा चाहे सोने का ही क्यों न हो। सोने के पिंजरे की तीलियों से हमारे कोमल पंख टकरा कर टूट जाएंगे। हमें पिंजरा कोई सुख नहीं दे सकता। हमारे लिए स्वतंत्रता सबसे महत्वपूर्ण है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. इस कविता का नाम तथा कवि का नाम लिखो।
2 इस काव्यांश में पक्षी अपनी क्या इच्छा प्रकट करते हैं?
3. पक्षी कहाँ रहकर गा नहीं पाएंगे?
4. पक्षियों के पंख कब टूट जाते हैं?
उत्तर:
1. कविता का नाम-‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ कवि का नाम-शिवमंगल सिंह ‘सुमन’
2 इस काव्यांश में पक्षी अपनी यह इच्छा प्रकट करते हैं कि हमें खुले आसमान में उड़ान भरने दी जाए।
3. पक्षी पिंजरे में बंद होकर गा नहीं पाएंगे अर्थात् अपनी स्वाभाविक भावनाओं को अभिव्यक्त नहीं कर पाएंगे।
4. जब पक्षियों को पिंजरे में कैद कर दिया जाता है, तब उनके पुलकित पंख उस पिंजरे की तीलियों से टकरा-टकरा कर टूट जाते हैं, भले ही यह पिंजरा कितना भी कीमती क्यों न हो।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए :

1. कौन सा शब्द ‘गगन’ का पर्यायवाची नहीं है
(क) आसमान
(ख) नभ
(ग) रवि
(घ) व्योम
उत्तर:
(ग) रवि

2. पक्षी किस रूप में रहना चाहते हैं?
(क) उन्मुक्त
(ख) पिंजरबद्ध
(ग) व्याकुल
(घ) पुलकित
उत्तर:
(क) उन्मुक्त

3. ‘पुलकित’ शब्द में किस प्रत्यय का प्रयोग है?
(क) पुल
(ख) कित
(ग) इत
(घ) त
उत्तर:
(ग) इत

4. ‘कनक’ शब्द का अर्थ है
(क) सोना
(ख) चाँदी
(ग) मिट्टी
(घ) तांबा
उत्तर:
(क) सोना

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2. हम बहता ……………………….. की मैदा से।

शब्दार्थ: कटुक – कड़वी (Bitter)। निबौरी = नीम का फल (Fruit of margase or neem)। कनक – सोना (Gold).

सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग: प्रस्तुत पोक्तयाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘वसंत भाग-2’ की कविता ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ से अवतरित हैं। इनके लेखक श्री शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ हैं। इन पंक्तियों में पक्षियों की स्वतंत्रता की इच्छा प्रकट की गई है।

व्याख्या:
हम स्वतंत्रता से बहने वाले जल को पीने वाले हैं। पिंजरे में बंद रहकर भूखे-प्यासे मर जाएंगे। हमें पिंजरे में भले ही सोने की कटोरी में मैदे का पकवान मिले परंतु स्वतंत्र रहकर कड़वी निबौरी खाना हमारे लिए उससे कहीं अच्छा है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. पक्षी केसा जल पीना पसंद करते हैं?
2. किस स्थिति में पक्षी भूखे-प्यासे मर जाएँगै?
3. पक्षी कनक कटोरी की मैदा की जगह क्या खाना पसंद करते हैं और क्यों?
उत्तर:
1. पक्षी बहता हुआ जल अर्थात् नदियों–झरनों का जल पीना पसंद करते हैं।
2. जब पक्षियों को पिंजरे में बंद कर दिया जाएगा तब वे भूखे-प्यासे मर जाएंगे। उन्हें बंधन का जीवन पसंद नहीं होता।
3. पिंजरे में रखी सोने की कटोरी से मैदा (अच्छा खाना) पक्षियों को पसंद नहीं होता। वे तो पेड़ की डाली की कड़वी निबौरी खाकर संतुष्ट रह लेते हैं। इसका कारण यह है निबौरी खाने में उनकी स्वतंत्रता बनी रहती है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए:

1. पक्षियों को पीने के लिए कैसा पानी चाहिए?
(क) कटोरी में रखा
(ख) बहता पानी
(ग) ठंडा पानी
(घ) कैसा भी
उत्तर:
(ख) बहता पानी

2. निबौरी का स्वाद कैसा होता है?
(क) कड़वा
(ख) मीठा
(ग) तीखा
(घ) पता नहीं
उत्तर:
(क) कड़वा

3. ‘कनक कटोरी’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) यमक
(ख) अनुप्रास
(ग) उपमा
(घ) रूपक
उत्तर:
(ख) अनुप्रास

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3. स्वर्ण-शृंखला ……………………. पर के झूले।

शब्दार्थ: स्वर्ण-शृंखला – सोने की जंजीर (Chain of gold): गति – चाल (Speec)। तरु – वृक्ष (Tree)। फुनगी . वृक्ष का ऊपरी सिरा (Top of tree or branch)।

सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग: प्रस्तुत पक्तियाँ श्री शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की कविता ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन से ली गई हैं। बंधनों में पड़कर पक्षी अपनी स्वतंत्र उड़ान तक भूल बैठते हैं।

व्याख्या:
पक्षी कहते हैं कि सोने की जंजीरों में बंधकर हम अपनी चाल और खुले आकाश में उड़ने की सारी बातें ही भूल गए हैं। अब तो केवल स्वप्न में ही पेड़ की डालियों पर बैठना और उन पर झूला झूलना दिखाई देता है अर्थात् बंदी जीवन में व्यक्ति अपनी स्वाभाविक क्रीड़ाएँ भूल जाता है। स्वतंत्र जीवन की बातें मात्र स्वप्न बनकर रह जाती हैं।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. पक्षी कब अपनी स्वाभाविक उड़ान भूल जाते हैं?
2. पक्षी किस झूले की बात कर रहे हैं?
3. पक्षी सपने में क्या देखते हैं और क्यों?
उत्तर:
1. पक्षी तब अपनी स्वाभाविक उड़ान भूल जाते हैं जब उन्हें पिंजरे में कैद कर दिया जाता है।
2 पक्षी पेड़ की डालियों की फुनगी के झूले की बात कर रहे हैं। उस पर बैठकर उन्हें झूले में झूलने का-सा आनंद आता है।
3. जब पक्षियों को पिंजरे में कैद कर दिया जाता है तब वे पेड़ की डाली की फुनगी के झूले को केवल सपने में ही देख पाते हैं। यह आनंद उनसे छिन जाता है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. बंधन किसका है?
(क) स्वर्ण का
(ख) श्रृंखला का
(ग) स्वर्ण श्रृंखला का
(घ) मनुष्य का
उत्तर:
(ग) स्वर्ण श्रृंखला का

2. पिंजरे में पक्षी क्या-क्या भूल जाते हैं?
(क) अपनी गति
(ख) अपनी उड़ान
(ग) गति-उड़ान दोनों
(घ) कुछ नहीं
उत्तर:
(ग) गति-उड़ान दोनों

3. कौन-सा शब्द ‘तरु’ का पर्यायवाची नहीं है?
(क) वृक्ष
(ख) पेड़
(ग) पुष्प
(घ) पादप
उत्तर:
(ग) पुष्प

4. ‘स्वर्ण’ शब्द कैसा है?
(क) तत्सम
(ख) तद्भव
(ग) देशज
(घ) विदेशी
उत्तर:
(क) तत्सम

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4. ऐसे थे …………. के दाने

शब्दार्थ: अरमान – दिल की इच्छा (Ambition)। नभ = आकाश (Sky).तारक = तारे (Stars)। अनार = एक फल का नाम (Pomegranate)।

सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘वसंत भाग-2’ की कविता ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के से लिया गया है। इसमें पक्षियों द्वारा इच्छा प्रकट की गई है।

व्याख्या:
पक्षी कहते हैं कि हमारी यह बड़ी इच्छा थी कि हम नीले आकाश की सीमाओं तक जाकर उन्हें छुएं। हम चाहते थे कि हम सूर्य की लाल किरण के समान अपनी चोंच खोलकर तारों रूपी अनार के लाल-लाल दोनों को चुनें। हमारी यह इच्छा तभी पुरी हो सकती है जब हमें उड़ने की पूरी आजादी मिले।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. किसके, क्या अरमान थे?
2 चोंच को किसके समान बताया गया है?
3. पक्षी क्या चुगना चाहते हैं?
उत्तर:
1, पक्षियों के ये अरमान थे कि वे नीले आसमान में दूर-दूर तक उड़ते। वे आकाश की सीमा तक जाना चाहते थे।
2. पक्षी की चोंच को सूर्य की लाल किरण के समान बताया गया है।
3. पक्षी तारों को अनार के दाने के समान समझकर चुगना चाहते हैं।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. पक्षी किसकी सीमा पाना चाहते हैं?
(क) नीले नभ की
(ख) उड़ान की
(ग) अनार की
(घ) तारों की
उत्तर:
(क) नीले नभ की

2. ‘लाल किरण-सी चोंच’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) अनुप्रास
(ख) उपमा
(ग) रूपक
(घ) यमक
उत्तर:
(ख) उपमा

3. अनार के दाने किन्हें बताया गया है?
(क) तारों को
(ख) चोंच को
(ग) नभ को
(घ) किसी को नहीं
उत्तर:
(क) तारों को

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5. होती सीमाहीन ……………………… की डोरी।

शब्दार्थ: सीमाहीन सीमा न होना (Boundless)। क्षितिज – जहाँ धरती-आकाश मिलते प्रतीत हों (Horizon)।

सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग: प्रस्तुत पक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘वसंत भाग-2’ से ली गई हैं। इस कविता के रचयिता प्रसिद्ध कवि श्री शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ हैं।

व्याख्या:
पक्षी चाहते हैं कि उनके पंखों का मुकाबला आकाश की सीमा से पार क्षितिज से होता। पक्षी उस स्थल तक पहुँचना चाहते हैं जहाँ धरती और आकाश मिलते प्रतीत होते हैं। इस प्रकार या तो क्षितिज से हमारा मिलन हो जाता अर्थात् उड़ते-उड़ते हम क्षितिज तक जा पहुँचते अथवा हम थककर चूर हो जाते अर्थात् साँस फूलकर दम ही निकल जाता।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. पक्षी किससे होड़ा-होड़ी करना चाहते हैं?
2 ‘क्षितिज मिलन बन जाता’ का क्या अर्थ है?
3. ‘सांसों की डोरी तनने’ का क्या आशय है?
उत्तर:
1. पक्षी इस असीम क्षितिज (आसमान) से होड़ा-होड़ी करना चाहते हैं अर्थात् लंबी उड़ान भरना चाहते हैं।
2. क्षितिज मिलन तब बन जाता जब पक्षी उड़कर वहाँ पहुँचने में सफल हो जाते।
3. ‘साँसों की डोरी तनने’ से आशय है इतना साँस फूल जाता कि दम ही निकल जाता अर्थात् पक्षी उड़ते-उड़ते बेदम हो जाते।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. ‘क्षितिज’ को कैसा बताया गया है?
(क) सीमित
(ख) सीमाहीन
(ग) बंद
(घ) बड़ा
उत्तर:
(ख) सीमाहीन

2. लंबी उड़ान में क्या-क्या संभावनाएं हो सकती थी?
(क) क्षितिज की सीमा मिल जाती
(ख) साँसों की डोरी तन जाती
(ग) ये दोनों बातें हो सकती थीं
(घ) कुछ नहीं होता
उत्तर:
(ग) ये दोनों बातें हो सकती थीं

3. ‘होड़ा-होड़ी’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) अनुप्रास
(ख) पुनरुक्ति
(ग) यमक
(घ) रूपक
उत्तर:
(क) अनुप्रास

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6. नीड़ नदो …….. न डालो ।

शब्दार्थ: नीड़ – घोंसला (Nest)। आश्रय = सहारा (Shelter)। छिन्न-भिन्न – तोड़-फोड़ (Destroy)। आकुल = बेचैन (Restless)। विघ्न = रुकावट (Hurdle)।

सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग: प्रस्तुत पक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘वसंत भाग-2’ की कविता ‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ से ली गई हैं।

व्याख्या: हे मनुष्यो! हमें भले ही नीड़ (घोंसले) मत दो और बेशक पेड़ की डाली का सहारा तोड़ डालो; परंतु जब ईश्वर ने हमें उड़ने को पर (पंख) दिए हैं तो हमें पिंजरे का कैदी बनाकर हमारी स्वतंत्र उड़ानों में बाधा मत डालो। हमें पिंजरे में रहना पसंद नहीं, स्वतंत्र उड़ानें भरना ही प्रिय है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. पक्षी क्या नहीं चाहते?
2 पंख किसने दिए हैं?
3. पक्षियों को क्या बात पसंद नहीं है?
उत्तर:
1. पक्षी न तो घोंसला चाहते हैं और न टहनी का आश्रय। इन्हें भले ही छीन लिया जाए।
2. पक्षियों को पंख ईश्वर ने दिए हैं।
3. पक्षियों को यह बात कतई पसंद नहीं है कि कोई उनकी उड़ान में बाधा डाले। वे उन्मुक्त उड़ान भरना चाहते हैं।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. इस कविता के रचयिता हैं
(क) गणेश शंकर
(ख) शिवमंगल सिंह सुमन
(ग) रवि मंगल
(घ) सुमित्रानंदन पंत
उत्तर:
(ख) शिवमंगल सिंह सुमन

2. किसे छिन्न-भिन्न कर डालो?
(क) टहनी को
(ख) नीड़ को
(ग) आश्रय को
(घ) फुनगी को
उत्तर:
(ग) आश्रय को

3. ‘उड़ान’ व्याकरण में क्या है?
(क) क्रिया
(ख) भाववाचक संज्ञा
(ग) विशेषण
(घ) जातिवाचक संज्ञा
उत्तर:
(ख) भाववाचक संज्ञा

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 1 हम पंछी उन्मुक्त गगन के

हम पंछी उन्मुक्त गगन के Summary in Hindi

हम पंछी उन्मुक्त गगन के कवि-परिचय

प्रश्न: शिवमंगलसिंह ‘सुमन’ के जीवन और कवित्व के विषय में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
जीवन-परिचय:
डॉ. शिवमंगलसिंह ‘सुमन’ का जन्म 1916 ई. में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के झगरपुर नामक गाँव में हुआ था। ग्वालियर से बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् कुछ समय तक शिक्षण कार्य किया। 1940 ई. में काशी विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिंदी) की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसी विश्वविद्यालय से 1950 ई. में डी.लिट् की उपाधि प्राप्त की। इंदौर और उज्जैन के महाविद्यालयों में प्राध्यापक रहने के पश्चात ये नेपाल में भारतीय दुतावास में सांस्कृतिक सचिव बने। बाद में ये विक्रम विश्वविद्यालय के उपकुलपति नियुक्त हुए।

रचनाएँ: इनके कई काव्य-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। जैसे-हिल्लोल, जीवन का गान, प्रलय सजन, विंध्य हिमालय, पर आँखें नहीं भरी, विश्वास बढ़ता ही गया, मिट्टी की बारात।

साहित्यिक विशेषताएँ: प्रारंभ इन्होंने प्रेम की रचनाओं से किया, पर आगे चलकर ये क्रांति का आह्वान करने वाले कवि बन गए। क्रांति के इस ओजस्वी स्वर में राष्ट्रीयता भी सम्मिलित है। राष्ट्रीय चेतना आगे चलकर मानवतावाद में परिवर्तित हो जाती है। कवि को जनता के व्यापाक दुःख का मूल सामाजिक विषमता में दिखाई देता है।

हम पंछी उन्मुक्त गगन के कविता का सार

‘हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ शीर्षक कविता प्रसिद्ध कवि शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ द्वारा रचित है। इस कविता में कवि ने पक्षियों के माध्यम से मनुष्य के जीवन में स्वतंत्रता का महत्त्व दर्शाया है। पक्षियों को खुले आसमान में विचरण करना पसंद होता है। वे पिंजरे में बंद हो कर गा नहीं पाते अर्थात् अपनी प्रसन्नता प्रकट नहीं पाते, भले ही यह पिंजरा सोने का क्यों न हो और इसमें सोने की कटोरी में मैदा क्यों न रखी हो। पक्षी तो नदी-झरनों का बहता जल पीने वाले होते हैं।

पिंजरे में तो वे भूखे-प्यासे मर जाएँगे। वे कड़वी निबौरी खाकर जी लेते हैं, पर बंधन में रहकर सुख-सुविधाएँ पसंद नहीं करते। सोने का पिंजरा तो बंधन है और इसमें रह कर वे अपनी स्वाभाविक गति और उडान तक को भल जाते हैं। ऐसी स्थिति में तो पेड़ की डालियों के झूले केवल स्वप्न में ही रह जाते हैं। पक्षियों के अरमान तो उड़ कर आकाश की सीमा को छूने के होते हैं। वे तो अपनी लाल चोंच से तारों रूपी अनार के दानों को चुगना चाहते हैं। वे तो सीमाहीन क्षितिज में लंबी उड़ान भरने को उत्सुक रहते हैं। इसमें उन्हें चाहे जितना परिश्रम क्यों न करना पड़े।

पक्षी मनुष्यों से विनती करते हैं कि वे उन्हें भले ही उनका घोंसला नष्ट कर दें. टहनी का आश्रय भी न दें. पर उनकी आकुल उड़ान में बाधा उपस्थित न करें क्योंकि ईश्वर ने उन्हें उड़ने के लिए पंख दिए है। यह उड़ान ही उनका जीवन है, इसे छीनने का प्रयास न करें। पक्षी उड़ान की स्वतंत्रता चाहते हैं।

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HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 17 साँस-साँस में बाँस

Haryana State Board HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 17 साँस-साँस में बाँस Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 17 साँस-साँस में बाँस

HBSE 6th Class Hindi साँस-साँस में बाँस Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
पाठ में बताई गई बाँस की चीजों के अलावा और क्या-क्या उपयोग हैं?
उत्तर :
बाँस से घर बनाया जा सकता है, सूखे बाँस को ईंधन की तरह प्रयोग किया जा सकता है। बाँस का कोयला जलाया जा सकता है। बाँस का मचान बनता है। बाँस का पालना बनता है।

प्रश्न 2.
भारत में बाँस कहाँ बहुतायत से होता है?
उत्तर :
भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के सातों राज्यों में बाँस बहुत उगता है। इनमें प्रमुख हैं-असम, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा आदि।

प्रश्न 3.
बाँस से क्या-क्या चीजें बनाई जाती हैं?
उत्तर :
बाँस से चटाइयाँ, टोकरियाँ, बरतन, बैलगाड़ियाँ, फर्नीचर, खिलौने, सजावटी सामान, जाल, मकान, पुल आदि चीजें बनाई जाती हैं।

प्रश्न 4.
असम में इसका क्या विशेष उपयोग किया जाता है?
उत्तर :
असम में ऐसे ही एक जाल, जकाई से मछली पकड़ते हैं। छोटी मछलियों को पकड़ने के लिए पानी की सतह पर रखा जाता है या फिर धीरे-धीरे चलते हुए खींचा जाता है। बाँस की खपच्चियों को इस तरह बाँधा जाता है कि वे एक शंकु का आकार ले लें। इस शंकु का ऊपरी सिरा अंडाकार होता है।

निचले नुकीले सिरे पर खपच्चियाँ एक-दूसरे में गुंथी हुई होती हैं। खपच्चियों से तरह-तरह की टोपियाँ भी बनाई जाती हैं। असम के चाय-बागानों के चित्रों में लोग ऐसी टोपियाँ पहने दिख जाएंगे और हाँ, उनकी पीठ पर टंगी बाँस की बड़ी-बड़ी टोकरी भी होती है।

HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 16 वन के मार्ग में

प्रश्न 5.
बाँस एकत्र करने का मौसम कौन-सा होता है?
उत्तर :
जुलाई से अक्टूबर तक वर्षा का मौसम बाँस एकत्र करने के लिए अच्छा होता है। यह समय लोगों के पास खाली होता है। इस समय में लोग जंगलों से बाँस एकत्र कर सकते हैं।

प्रश्न 6.
बाँस कैसे काटे जाते हैं? क्यों?
उत्तर :
एक से तीन साल की उम्रवाले बाँस अधिक काटे जाते हैं। बूढ़े बाँस सख्त होते हैं और टूट भी जाते हैं।

प्रश्न 7.
बाँसों को कैसे साफ किया जाता है?
उत्तर :
पहले बाँस से शाखाएँ और पत्तियों को साफ किया जाता है। इसके बाद ऐसे बाँसों को चुना जाता है जिनमें गठानें दूर-दूर होती हैं। फिर चाकू से छीलकर खपच्चियाँ तैयार की जाती हैं। चौड़े फाल वाले चाकू को दाओ कहा जाता है।

प्रश्न 8.
खपच्चियों को तैयार करने में किस बात का ध्यान रखा जाता है?
उत्तर :
खपच्चियों के लिए ऐसे बाँसों को चुना जाता है जिनमें गठानें दूर-दूर होती हैं। दाओ यानी चौडे, जैसी फाल वाले चाकू से इन्हें छीलकर खपच्चियाँ तैयार की जाती हैं। खपच्चियों की लंबाई पहले से ही तय कर ली जाती है। मसलन, आसन जैसी छोटी चीजें बनाने के लिए बाँस को हरेक गठान से काटा जाता है। लेकिन टोकरी बनाने के लिए हो सकता है कि दो या तीन या चार गठानों वाली लंबी खपच्चियाँ काटी जाएँ। यानी कहाँ से काटा जाएगा, यह टोकरी की लंबाई पर निर्भर करता है।

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प्रश्न 9.
टोकरी बनाने से पहले क्या जरूरी है?
उत्तर :
टोकरी बनाने से पहले खपच्चियों को चिकना बनाना बहुत जरूरी है। यहाँ फिर दाओ काम में लाया जाता है। खपच्ची बाएँ हाथ में होती है और दाओ दाएँ हाथ में। दाओ का धारदार सिरा खपच्ची को दबाए रहता है जबकि तर्जनी दाओ के एकदम नीचे होती है। इस स्थिति में बाएँ हाथ से खपच्ची को बाहर की ओर खींचा जाता है। इस दौरान दायाँ अँगूठा दाओ को अंदर की ओर दबाता है और दाओ खपच्ची पर दबाव बनाते हुए घिसाई करता है।

प्रश्न 10.
बाँस की बुनाई कैसे होती है?
उत्तर :
बाँस की बुनाई वैसे ही होती है जैसे कोई और बुनाई। पहले खपच्चियों को आड़ा-तिरछा रखा जाता है। फिर बाने को बारी-बारी से ताने के ऊपर-नीचे किया जाता है। इससे चेक का डिजाइन बनता है, पलंग निवाड़ की बुनाई की तरह।

प्रश्न 11.
खपच्चियों की चौड़ाई के बारे में क्या बात ध्यान रखनी चाहिए?
उत्तर :
आमतौर पर खपच्चियों की चौड़ाई एक इंच से ज्यादा नहीं होती है। चौड़ी खपच्चियाँ किसी काम की नहीं होती। इन्हें चीरकर पतली खपच्चियाँ बनाई जाती हैं। पतली खपच्चियाँ लचीली होती हैं। खपच्चियाँ उस्तादी का काम है। हाथों की कलाकारी के बिना खपच्चियों की मोटाई बराबर बनाए रखना आसान नहीं है। हुनर को पाने में काफी समय लगता है।

प्रश्न 12.
टोकरी कैसे तैयार करते हैं?
उत्तर :
टोकरी के सिरे पर खपच्चियों को या तो चोटी की तरह गूंथ लिया जाता है या फिर कटे सिरों को नीचे की ओर मोड़कर फँसा दिया जाता है और हमारी टोकरी तैयार है। चाहो तो बेचो या घर पर ही काम में ले लो।

HBSE 6th Class Hindi साँस-साँस में बाँस Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
असम में बाँस का क्या विशेष उपयोग किया जाता है?
उत्तर :
असम में बाँस के ऐसे ही एक जाल, जकाई से मछली पकड़ते हैं। छोटी मछलियों को पकड़ने के लिए इसे पानी की सतह पर रखा जाता है या फिर धीरे-धीरे चलते हुए खींचा जाता है। बाँस की खपच्चियों को इस तरह बाँधा जाता है कि वे एक शंकु का आकार ले लें। इस शंकु का ऊपरी सिरा अंडाकार होता है।

निचले नुकीले सिरे पर खपच्चियाँ एक-दूसरे में गुंथी हुई होती हैं। खपच्चियों से तरह-तरह की टोपियाँ भी बनाई जाती हैं। असम के चाय-बागानों के चित्रों में लोग ऐसी टोपियाँ पहने दिख जाएँगे। और हाँ, उनकी पीठ पर टंगी बाँस की बड़ी-सी टोकरी भी होती है।

प्रश्न 2.
बाँस इकट्ठा करने का मौसम कौन-सा होता
उत्तर :
जुलाई से अक्टूबर तक वर्षा का मौसम बाँस इकट्ठा करने के लिए अच्छा होता है। यह समय लोगों के पास खाली होता है। इस समय में लोग जंगलों से बाँस इकट्ठा कर सकते हैं।

HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 16 वन के मार्ग में

प्रश्न 3.
बाँसों को कैसे साफ किया जाता है?
उत्तर :
पहले बाँस से शाखाएँ और पत्तियों को साफ किया जाता है। इसके बाद ऐसे बाँसों को चुना जाता है जिनमें गठानें दूर-दूर होती हैं। फिर चाकू से छील कर खपच्चियाँ तैयार की जाती हैं। चौड़े फाल वाले चाकू को दाओ कहा जाता है।

प्रश्न 4.
खपच्चियों को तैयार करने में किस बात का ध्यान रखा जाता है?
उत्तर :
खपच्चियों के लिए ऐसे बाँसों को चुना जाता है जिनमें गठानें दूर-दूर होती हैं। दाओ यानी चौड़े, चाँद जैसी फाल वाले चाकू से इन्हें छील कर खपच्चियाँ तैयार की जाती हैं। खपच्चियों की लंबाई पहले से ही तय कर ली जाती है। मसलन, आसन जैसी छोटी चीजें बनाने के लिए बाँस को हरेक गठान से काटा जाता है। लेकिन टोकरी बनाने के लिए हो सकता है कि दो या तीन या चार गठानों वाली लंबी खपच्चियाँ काटी जाएँ। यानी कहाँ से काटा जाएगा, यह टोकरी की लंबाई पर निर्भर करता है।

प्रश्न 5.
टोकरी बनाने से पहले क्या ज़रूरी है?
उत्तर :
टोकरी बनाने से पहले खपच्चियों को चिकना बनाना बहुत ज़रूरी है। यहाँ फिर दाओ काम आता है। खपच्ची बाएँ हाथ में होती है और दाओ दाएँ हाथ में। दाओ का धारदार सिरा खपच्ची को दबाए रहता है, जबकि तर्जनी दाओ के एकदम नीचे होती है। इस स्थिति में बाएँ हाथ से खपच्ची को बाहर की ओर खींचा जाता है। इस दौरान दायाँ अंगूठा दाओ को अंदर की ओर दबाता है और दाओ खपच्ची पर दबाव बनाते हुए घिसाई करता है।

प्रश्न 6.
बाँस की बुनाई कैसे होती है?
उत्तर :
बाँस की बुनाई वैसे ही होती है जैसे कोई और बुनाई। पहले खपच्चियों को आड़ा-तिरछा रखा जाता है। फिर बाने को बारी-बारी से ताने के ऊपर-नीचे किया जाता है। इससे चेक का डिजाइन बनता है, पलंग की निवाड़ की बुनाई की तरह।

प्रश्न 7.
खपच्चियों की चौड़ाई के बारे में क्या बात ध्यान रखनी चाहिए?
उत्तर :
आमतौर पर खपच्चियों की चौड़ाई एक इंच से ज्यादा नहीं होती है। चौडी खपच्चियाँ किसी काम की नहीं होती। इन्हें चीर कर पतली खपच्चियाँ बनाई जाती हैं। पतली खपच्चियाँ लचीली होती हैं। खपच्चियाँ चीरना उस्तादी का काम है। हाथों की कलाकारी के बिना खपच्चियों की मोटाई बराबर बनाए रखना आसान नहीं। इस हुनर को पाने में काफी समय लगता है।

प्रश्न 8.
पाठ में बताई गई बाँस की चीजों के अलावा और क्या-क्या उपयोग हैं?
उत्तर :
बाँस से घर बनाया जा सकता है, सूखे बाँस को ईंधन की तरह प्रयोग किया जा सकता है। बाँस का कोयला जलाया जा सकता है। बाँस का अचार बनता है। बाँस का पालना बनता है।

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प्रश्न 9.
भारत में बाँस कहाँ बहुतायत से होता है?
उत्तर :
भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के सातों राज्यों में बाँस बहुत उगता है। इनमें प्रमुख हैं-असम, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा आदि।

प्रश्न 10.
टोकरी कैसे तैयार करते हैं?
उत्तर :
टोकरी के सिर पर खपच्चियों को या तो चोटी की तरह गूंथ लिया जाता है या फिर कटे सिरों को नीचे की ओर मोड़कर फंसा दिया जाता है और हमारी टोकरी तैयार है। चाहो तो बेचो या घर पर ही काम में ले लो।

प्रश्न 11.
बाँस से क्या-क्या चीजें बनाई जाती हैं?
उत्तर :
बाँस से चटाइयाँ, टोकरियाँ, बरतन, बैलगाडियाँ, फर्नीचर, खिलौने, सजावटी सामान, जाल, मकान, पुल आदि चीजे बनाई जाती हैं।

साँस-साँस में बाँस Summary in Hindi

साँस-साँस में बाँस पाठ का सार

इस पाठ में बाँस के विविध उपयोग बताए गए हैं। एक जादूगर थे-‘चंगकीचंगलनबा’। वे जब मरने लगे तो बोले-“मुझे दफनाए जाने के छठे दिन मेरी कब्र खोदकर देखोगे तो कुछ नया-सा पाओगे।” छठे दिन जब उनकी कब्र खोदी गई तो उसमें से बाँस की टोकरियों के कई डिजाइन निकले। लोगों ने उनकी नकल करके और नए डिजाइन बनाए।

भारत के अनेक हिस्सों में बाँस बहुत अधिक मात्रा में होते हैं। भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के सातों राज्यों में बाँस बहुत उगता है। वहाँ बाँस की चीजें बनाने का बहुत रिवाज है। नागालैंड का प्रत्येक नागा बाँस की चीजें बनाने में उस्ताद होता है। बाँस और इंसान का रिश्ता बहुत पुराना है। बॉस से केवल टोकरियाँ ही नहीं बनाई जातीं, बल्कि बाँस की खपच्चियों से चटाइयाँ, टोपियाँ, टोकरियाँ, बरतन, बैलगाड़ियाँ, फर्नीचर, सजावटी सामान, जाल, मकान, पुल और बहुत सी चीजें बनाई जाती हैं।

असम में एक ऐसे ही जाल, जकाई से मछली पकड़ते हैं। छोटी मछलियों को पकड़ने के लिए इसे पानी की सतह पर रखा जाता है। बाँस की खपच्चियों को इस तरह बाँधा जाता है कि वे एक शंकु का आकार ले लें। इसका ऊपरी सिरा अंडाकार होता है। खपच्चियों से तरह-तरह की टोपियाँ भी बनाई जाती हैं। असम के चाय बागानों में लोग ऐसी ही टोपियाँ पहनते हैं तथा उनकी पीठ पर टोकरी टॅगी होती हैं।

जुलाई से अक्टूबर तक बारिश के महीने होते हैं। तब वहाँ के लोगों को खाली वक्त मिल जाता है। इस वक्त में वे जंगलों से बाँस इकट्ठा करते हैं। वे प्रायः एक से तीन साल की उम्र वाले बाँस काटते हैं। बूढ़े बाँस सख्त होते हैं और टूट भी जाते हैं। बाँस की शाखाएँ पत्तियों से अलग कर दी जाती हैं। दूर-दूर गठानों वाले बाँस चुने जाते हैं। इन्हें छीलकर खपच्चियाँ तैयार की जाती हैं। खपच्चियों की लंबाई पहले से तय कर ली जाती है। आमतौर पर खपच्चियों की चौड़ाई एक इंच से ज्यादा नहीं होती।

चौड़ी खपच्चियों को चीरकर पतली खपच्चियाँ बनाई जाती हैं। पतली खपच्चियाँ लचीली होती हैं। खपच्चियाँ बाएँ हाथ में होती हैं और दाओ दाएँ हाथ में। दाओ का धारदार सिरा खपच्ची को दबाए रहता है। दायाँ अँगूठा दाओ को अंदर की ओर दबाता है। खपच्ची को घिसकर चिकना किया जाता है। खपच्चियों की रँगाई के लिए गुड़हल तथा इमली की पत्तियों का प्रयोग किया जाता है।

काले रंग के लिए उन्हें आम की छाल में लपेटकर कुछ दिनों के लिए मिट्टी में दबाकर रखा जाता है। बाँस की बुनाई वैसे ही होती है जैसे कोई और बुनाई। चेक का डिजाइन भी बनाया जाता है। पलंग की निवाड़ की तरह बुनाई की जाती है। अनेक तरह के डिजाइन भी बनाए जाते हैं। टोकरी के सिरे पर खपच्चियों को या तो चोटी की तरह गूंथ लिया जाता है या फिर कटे सिरों को नीचे की ओर मोड़कर फँसा दिया जाता है। बस टोकरी तैयार हो गई।

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HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 16 वन के मार्ग में

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HBSE 6th Class Hindi वन के मार्ग में Textbook Questions and Answers

कविता से

प्रश्न 1.
प्रथम सवैये में कवि ने राम-सीता के किस प्रसंग का वर्णन किया है?
उत्तर :
प्रथम सवैये में कवि तुलसी ने राम-सीता के उस प्रसंग का वर्णन किया है जब वे चौदह वर्ष का बनवास बिताने के लिए अयोध्या से निकलकर वन-मार्ग की ओर बढ़ते हैं।

प्रश्न 2.
वन के मार्ग में सीता को क्या कठिनाइयाँ हुई?
उत्तर :
वन के मार्ग में सीता को निम्नलिखित कठिनाइयाँ हुई :
1. वे थक गईं। उनके माथे पर पसीने की बूंदें दिखाई देने लगीं तथा होंठ सूख गए।
2. उन्हें प्यास लगी।
3. उनके पैरों में काँटे चुभ गए।

प्रश्न 3.
सीता की आतुरता देखकर राम की क्या प्रतिक्रिया होती है?
उत्तर :
सीता की आतुरता देखकर राम भी व्याकुल हो गए। उनकी आँखों में आँसू आ गए।

प्रश्न 4.
राम बैठकर काँटे क्यों निकालने लगे?
उत्तर :
राम बैठकर पैरों से काँटे इसलिए निकालने लगे क्योंकि उन्हें लक्ष्मण की प्रतीक्षा करनी थी। पैरों में लगे काँटे वन-मार्ग पर चलने में कष्ट दे रहे होंगे।

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प्रश्न 5.
सवैये के आधार पर बताओ, दो कदम चलने के बाद सीता का ऐसा हाल क्यों हुआ?
उत्तर :
दो कदम चलने के बाद सीता का ऐसा हाल इसलिए हो गया क्योंकि वे अत्यंत सुकुमारी थीं। उन्हें इस प्रकार चलने का अभ्यास न था।

प्रश्न 6.
‘धरि-धीर दए’ का आशय क्या है?
उत्तर :
‘धरि-धीर दए’ का आशय है-धीरज धारण करके अर्थात् मन में हिम्मत बाँधकर कोई काम करना।

भाषा की बात

1. लखि – देखकर
धरि – रखकर
पोंछि – पोंछकर
जानि- जानकर
ऊपर लिखे शब्दों और उनके अर्थ को ध्यान से देखो। हिंदी में जिस उद्देश्य के लिए हम क्रिया में ‘कर’ जोड़ते हैं, उसी के लिए अवधी में क्रिया में ि (इ) को जोड़ा जाता है, जैसे अवधी में बैठ + ि – बैठि और हिंदी में बैठ + कर = बैठकर। तुम्हारी भाषा या बोली में क्या होता है? अपनी भाषा के ऐसे छह शब्द लिखो, उन्हें ध्यान से देखो और कक्षा में बताओ।
उत्तर :
हमारी भाषा/बोली में भी ‘कर’ जोड़ते हैं; जैसे-
पढ़कर सोकर देखकर लिखकर जाकर सुनकर

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HBSE 6th Class Hindi वन के मार्ग में Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
अपनी किसी यात्रा का कोई हिस्सा अपने शिक्षक को सुनाओ।
उत्तर :
हम एक बार गाँव की यात्रा पर गए। यह गाँव शहर से लगभग 20 किमी. दूर था। हम वहाँ बस से पहुँचे। बस ने दो किमी. पहले ही उतार दिया था। वहाँ हम पैदल चलकर गए। गाँव के बाहर खेतों को देखकर हमारा मन प्रसन्न हो गया। खेतों में पीली-पीली सरसों की शोभा छाई हुई थी। कहीं-कहीं गन्ने को पेरकर गुड़ बनाने का काम चल रहा था। हमारे लिए यह एक नया अनुभव था। वहाँ हमने ताजा बना गुड़ खाया। इस यात्रा में हमें बहुत आनंद आया।

प्रश्न 2.
जब हम कहीं जाते हैं तो क्या-क्या तैयारी करते हैं? अपने दोस्तों को सुनाओ।
उत्तर :
जब हम कहीं जाते हैं तो ये तैयारियां करते हैं :

  • कपड़े छाँटकर बैग में रखते हैं।
  • टूथपेस्ट, ब्रुश, साबुन-तेल, कंघी-शीशा आदि चीजें संभालकर रखते हैं।
  • जहाँ जाना होता है वहाँ की टिकटें बुक कराते हैं।
  • प्रातःकाल जल्दी उठकर खाद्य वस्तुएँ भी जमा करते हैं।

प्रश्न 3.
अनुभव या अनुमान के आधार पर सोचो कि पैदल और किसी वाहन (बस, रेल आदि) में यात्रा करने के
(क) क्या फायदे हो सकते हैं?
(ख) क्या नुकसान हो सकते हैं?
(ग) किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए?

तीन-तीन के समूह में बात करके प्रत्येक किस्म की यात्रा की अलग-अलग तालिका बनाओ। उदाहरण के तौर पर नीचे तालिका दी गई है :
फायदा नुकसान ध्यान रखने की बातें
(क) इनमें यात्रा शीघ्र एवं सुरक्षित होती है।
(ख) दुर्घटना की भी आशंका बनी रहती है।
(ग) खस्ताहाल बस में यात्रा नहीं करनी चाहिए। बस अच्छी हालत में होनी चाहिए। टिकट लेकर यात्रा करनी चाहिए।

प्रश्न 4.
वन के मार्ग में सीता को क्या कठिनाइयाँ हुई?
उत्तर :
वन के मार्ग में सीता को निम्नलिखित कठिनाइयाँ हुई

  • वे थक गई। उनके माथे पर पसीने की बूंदें दिखाई देने लगी तथा होंठ सूख गए।
  • उन्हें प्यास लगी।
  • उनके पैरों में काँटे चुभ गए।

प्रश्न 5.
सीता की आतुरता देख कर राम की क्या प्रतिक्रिया होती है?
उत्तर :
सीता की आतुरता देख कर राम भी व्याकुल हो गए। उनकी आँखों में आँसू आ गए।

प्रश्न 6.
राम बैठ कर काँटे क्यों निकालने लगे?
उत्तर :
राम बैठ कर पैरों से काँटे इसलिए निकालने लगे क्योंकि उन्हें लक्ष्मण की प्रतीक्षा करनी थी। पैरों में लगे काँटे वन-मार्ग पर चलने में कष्ट दे रहे होंगे।

प्रश्न 7.
सवैये के आधार पर बताओ, दो कदम चलने के बाद सीता का ऐसा हाल क्यों हुआ?
उत्तर :
दो कदम चलने के बाद सीता का ऐसा हाल इसलिए हो गया क्योंकि वे अत्यंत सुकुमारी थीं। उन्हें इस प्रकार चलने का अभ्यास न था।

प्रश्न 8.
प्रथम सवैये में कवि ने राम-सीता के किस प्रसंग का वर्णन किया है?
उत्तर :
प्रथम सवैये में कवि तुलसी ने राम-सीता के उस प्रसंग का वर्णन किया है जब वे चौदह वर्ष का बनवास बिताने के लिए अयोध्या से निकल कर वन-मार्ग की ओर बढ़ते हैं।

प्रश्न 9.
‘धरि-धीर दए’ का आशय क्या है?
उत्तर :
‘धरि-धीर दए’ का आशय है-धीरज धारण करके अर्थात् मन में हिम्मत बाँध कर कोई काम करना।

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वन के मार्ग में सवैयों की सप्रसंग व्याख्या

1. पुर तें निकसी रघुबीर-बधू, धरि धीर दए मग में डग द्वै।
झलकी भरि भाल कनी जल की, पुट सूखि गए मधुराधर द्वै।
फिरि बूझति हैं, ‘चलनो अब केतिक, पर्न कुटी करिहौ कित वै?
तिय की लखि आतुरता पिय की, अँखियाँ अति चारु चली जल च्चै॥

शब्दार्थ :
पुर-नगर, किला (City or fort)। निकसी-निकली (Come out)। धरि-धारण करके (To keep)। धीर-धैर्य (Courage)। मग-रास्ता (Path)। डग-कदम (Feet)। द्वै-दो (Tivo)। झलकी-दिखाई दी (Showed)। भाल-माथा (Forehead)। कनी-बूंदें (Drops)। पुट-होंठ (Lips)। बूझति-पूछती (To ask)। केतिक-कितना (How much)। पर्न कुटी-पत्तों से बनी कुटिया (Hut made of leaves)। कित है-कहाँ है? (Where is)। तिय-स्त्री, पत्नी (Wife) लखि-देखकर (To see)। आतुरता-बेचैनी (Restlessness)। चारु-सुंदर (Beautifull

प्रसंग : प्रस्तुत सवैया तुलसीदास द्वारा रचित काव्य ‘कवितावली’ के अयोध्याकांड से अवतरित है। सीताजी वन-मार्ग की कठिनाइयों से व्यथित हो जाती हैं और पति राम से पछती हैं

व्याख्या :
अयोध्या नगर से बाहर निकलकर राम की पत्नी सीता ने बड़े धैर्यपूर्वक मार्ग पर दो कदम आगे बढ़ाए। इसकी थकान से उनके माथे पर पसीने की बूंदें झलकने लगीं और उनके दोनों मधुर होंठ सूख गए। फिर वे थककर पति राम से पूछने लगी-अभी हमें कितना चलना है और वह पत्तों से बनी कुटिया कहाँ है, जहाँ हमें रहना है? उनके प्रश्न से उनकी व्याकुलता स्पष्ट झलक रही थी। पत्नी की व्याकुलता को देखकर पति राम की आँखों से आँसू की बूंदें चू पड़ीं। अर्थात् श्रीराम पत्नी सीता के कष्ट का अनुमान करके व्यथित हो गए।

विशेष :
1. सीता की कोमलता तथा व्याकुलता का मार्मिक चित्रण हुआ है।
2. प्रश्न शैली अपनाई गई है।
3. सवैया छंद है।
4. ब्रजभाषा का प्रयोग है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. थोड़ा-सा चलने के उपरांत ही सीता की क्या दशा हो गई ?
2. सीता राम से क्या पूछने लगीं?
3. सीता की व्याकुलता देख कर राम की क्या दशा हुई?
उत्तर:
1. अयोध्या नगर से थोड़ा चलने के उपरांत ही सीता जी बुरी तरह थक गईं। थकान से उनके माथे पर पसीने की बूंदें झलकने लगीं।
2. सीता थक कर अपने पति राम से पूछने लगी-अभी हमें कितनी दूर चलना है और हमें रहने के लिए पत्तों की कुटिया कहाँ बनानी है?
3. अपनी पत्नी सीता की व्याकुलता देख कर श्री राम की आँखों से आँसू की बूंदें चू पड़ी। वे भी व्यथित हो गए।

बहुविकल्पी प्रश्न सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. यह सवैया किसके द्वारा रचित है?
(क) तुलसीदास द्वारा
(ख) सूरदास द्वारा
(ग) कबीर द्वारा
(घ) अन्य द्वारा
उत्तर :
(क) तुलसीदास द्वारा

2. सीता की थकान किससे झलक रही थी?
(क) माथे पर पसीने की बूंदों से
(ख) होठों के सूखने से
(ग) व्याकुलता से
(घ) उपर्युक्त सभी लक्षणों से
उत्तर :
(घ) उपर्युक्त सभी लक्षणों से

3. किसकी आँखों से आँसू की बूंदें चू पड़ीं?
(क) सीता की
(ख) राम की
(ग) दोनों की
(घ) किसी की नहीं
उत्तर :
(ख) राम की

2. जल को गए लक्खन हैं लरिका, परिखौ, पिय! छाँह घरीक है ठाढ़े।
पोंछि पसेउ बयारि करौं, अरु पाँय पखारिहौँ भूभुरि-डाढ़े।
तुलसी रघुबीर प्रिया सम जानि के बैठि बिलंब लौ कटक काढ़े।
जानकी नाह को नेह लख्यौ, पुलको तनु, बारि बिलोचन बाढ़े।

शब्दार्थ :
लरिका-लड़का (Boy)। परिखौ-प्रतीक्षा करो (To wait)1 छाँह-छाया (Shadow)। घरीक-घड़ी भर (For sometime)। ठाढ़े-खड़े होना (To stand)। पसेउ-पसीना (Sweat)। बयारि-हवा (Wind)। पाँय-पैर (Feet)। पखारिहौं-धोना (To wash)। भूभुरि-गरम रेत (Warm sand)। सम-श्रम (Labour)। बिलंब-देर (Late)। कंटक-काँटा (Thorn)। काढ़े-निकाले (To catch out)। नेह-स्नेह, प्रेम (Love)। लख्यौ -देखा (Saw)। पुलको-हर्षित हुआ (Happy)। तनु-शरीर (Body)। बारि-पानी, आँसू (Tears)। बिलोचन-नेत्रों (Eyes)।

प्रसंग : प्रस्तुत सवैया रामभक्त कवि तुलसीदास द्वारा रचित ‘कवितावली’ से लिया गया है। राम-सीता के वन-गमन के समय का यहाँ उल्लेख हुआ है।

व्याख्या :
सीता जी अपने पति राम से कहती हैं-लक्ष्मण पानी लेने गए हैं, अतः किसी पेड़ की छाया में खड़े होकर प्रतीक्षा कीजिए। अपना पसीना पोंछकर हवा कर लो। आप गरम रेत पर खड़े हुए हैं अतः पाँवों को धोकर ठंडा कर लो। तुलसीदास कहते हैं कि सीता को थकी हुई जानकर श्रीराम बैठ गए और काफी देर तक पैरों के काँटे निकालते रहे। जानकी (सीता जी) ने उन्हें प्रेमपूर्वक देखा। इससे उनका शरीर पुलकित हो गया और आँखों में आँसू आ गए।

विशेष :
1. इस सवैये में मार्ग के कष्टों का वर्णन है।
2. पोंछि पसारि, पाँय पखारिहौं, बारि बिलोचन में अनुप्रास अलंकार है।
3. ब्रजभाषा का प्रयोग है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. सीता जी अपने पति राम से क्या कहती हैं?
2. श्रीराम ने सीता के कथन पर क्या प्रतिक्रिया व्यक्त की?
3. सीता की दशा का वर्णन करो।
उत्तर:
1. सीता जी अपने पति राम से कहती हैं-अभी लक्ष्मण पानी लेने गए हैं। अतः आप किसी पेड़ की छाया में खड़े होकर उनकी प्रतीक्षा कीजिए। अपना पसीना पोंछ कर हवा कर लो तथा पाँवों को धोकर ठंडा कर लो।
2. सीता के कथन के बाद श्रीराम बैठ गए और काफी देर तक सीता के पैरों के काँटे निकालते रहे।
3. सीता अपने पति राम को प्रेमपूर्वक देखती रहीं। उनका शरीर पुलकित हो गया तथा आँखों में अश्नु आ गए।

बहुविकल्पी प्रश्न सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. लक्ष्मण कहाँ गए थे?
(क) जल लेने
(ख) भोजन लेने
(ग) कुटिया बनाने
(घ) रास्ता देखने
उत्तर:
(क) जल लेने

2. ‘भूभुरि’ क्या होता है?
(क) अनुप्रास
(ख) गरम रेत
(ग) ठंडी रेत
(घ) घास
उत्तर :
(ख) गरम रेत

3. ‘बारि बिलोचन’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) अनुप्रास
(ख) यमक
(ग) रूपक
(घ) उपमा
उत्तर :
(क) अनुप्रास

HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 16 वन के मार्ग में

वन के मार्ग में Summary in HIndi

वन के मार्ग में कवि का परिचय

जीवन-परिचय :
महाकवि तुलसीदास का जन्म 1532 ई. में राजापुर, जिला बाँदा (उत्तर प्रदेश) माना जाता है। कुछ विद्वान उनका जन्मस्थान सोरों (जिला एटा) मानते हैं। तुलसीदास का बचपन अत्यंत कष्टपूर्ण रहा। उन्हें माता-पिता का विछोह सहना पड़ा था। वे भिक्षा माँगकर उदर-पूर्ति करते थे। उनके गुरु का नाम बाबा नरहरिदास था।

कहा जाता है कि उनका विवाह पंडित दीनबंधु पाठक की पुत्री रत्नावली से हुआ था। वे उससे अत्यधिक प्रेम करते थे और एक बार उससे मिलने के लिए साँप को रस्सी समझकर छत पर चढ़ गए थे। पत्नी से धिक्कार भरे स्वर सुनकर उन्हें घर-संसार से विरक्ति हो गई थी। वे अयोध्या, काशी, चित्रकूट आदि तीर्थों का भ्रमण करते रहे। सन् 1632 ई. में काशी के असीघाट पर उन्होंने प्राण त्याग दिए।

विशेषताएँ :
तुलसी रामभक्त कवि थे। उन्होंने प्रभु राम को ही अपना सर्वस्व माना। ब्रज और अवधी दोनों भाषाओं पर तुलसी का समान अधिकार था। उन्होंने अपनी बहुचर्चित रचना ‘रामचरितमानस’ की रचना अवधी भाषा में की तथा ‘विनयपत्रिका’ और ‘कवितावली’ की रचना ब्रज भाषा में की। ‘रामचरितमानस’ उच्च कोटि का महाकाव्य है। ‘विनयपत्रिका’ में गीत हैं तथा ‘कवितावली’ में कवित्त-सवैया रचे गए हैं। तुलसी की काव्य प्रतिभा अनन्य है। प्रबंध एवं मुक्तक दोनों शैलियों में उनकी समान गति है। उनका काव्य लोक-मंगलकारी, लोक-कल्याणकारी एवं समन्वयवादी है।

रचनाएँ :

  • रामचरितमानस।
  • कवितावली।
  • गीतावली।
  • विनयपत्रिका।

वन के मार्ग में सवैयों का सार

  • पहले सवैये में वन जाते समय सीताजी की व्याकुलता एवं थकान का वर्णन है। वे अपने गंतव्य के बारे में जानना चाहती हैं। पत्नी सीता की ऐसी बेहाल अवस्था देखकर रामचंद्रजी भी दुःखी हो जाते हैं।
  • दूसरे सवैये में श्रीराम और सीता की दशा का मार्मिक चित्रण है। राम के शरीर पर पसीना आ रहा है तथा सीता जी के पैर काँटों से भर गए हैं। श्रीराम उन्हें निकालते हैं।

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HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 15 नौकर

Haryana State Board HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 15 नौकर Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 15 नौकर

HBSE 6th Class Hindi नौकर Textbook Questions and Answers

निबंध से

प्रश्न 1.
आश्रम में कॉलेज के छात्रों से गाँधी जी ने कौन-सा काम करवाया और क्यों?
उत्तर :
आश्रम में कॉलेज के छात्रों से गाँधी जी ने थाली के गेहूँ बीनने का काम करवाया। उन्हें तो यह उम्मीद थी कि गाँधी जी उन्हें लिखने-पढ़ने का काम देंगे। गाँधी जी उनके मन की बात ताड़ गए थे।

प्रश्न 2.
‘आश्रम में गाँधी जी कई ऐसे काम भी करते थे, जिन्हें आमतौर पर नौकर-चाकर करते हैं।’ पाठ से तीन अलग-अलग प्रसंग अपने शब्दों में लिखो जो इस बात के प्रमाण हों।
उत्तर :
1. साबरमती आश्रम में गाँधी जी आटा पीसने का काम खुद करते थे जबकि इसे आमतौर पर नौकर-चाकर करते हैं।
2. वे आश्रम में सब्जियाँ स्वयं छीलते थे और उनकी सफाई का पूरा-पूरा ध्यान रखते थे।
3. गाँधी जी आश्रम के बड़े-बड़े पतीलों को स्वयं साफ करते ये सभी काम प्राय: नौकर-चाकर करते हैं।

प्रश्न 3.
लंदन में भोज पर बुलाए जाने पर गाँधी जी ने क्या किया?
उत्तर :
लंदन में भारतीय छात्रों ने गाँधी जी को शाकाहारी भोज पर बुलाया था। छात्र स्वयं भोजन बनाने के काम में लगे थे। तीसरे पहर समय से पहले पहुंचकर गाँधी जी भी उनके कामों में मदद देने जा पहुंचे। छात्रों ने उन्हें पहचाना नहीं। शाम को ही वे जान पाए कि यही महाशय उनके अतिथि हैं।

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प्रश्न 4.
गाँधी जी ने श्रीमती पोलक के बच्चे का दूध कैसे छुड़वाया?
उत्तर :
श्रीमती पोलक का बच्चा माँ का दूध पीना छोड़ता ही नहीं था। इससे वे काफी कमजोर हो गई थीं। बच्चा उन्हें रात-भर जगाए रहता था। गाँधी जी ने बच्चे की देखभाल का काम अपने हाथों में ले लिया। वे बच्चे को श्रीमती पोलक के बिस्तर से उठाकर अपने बिस्तर पर लिटा लेते थे। उनके पास बच्चा कभी रोता नहीं था और आराम से सोता रहता था। एक पखवाड़े तक माँ से अलग सुलाने के बाद बच्चे ने माँ का दूध पीना छोड़ दिया।

प्रश्न 5.
आश्रम में काम करने या करवाने का कौन-सा तरीका गाँधी जी अपनाते थे? इसे पाठ पढ़कर लिखो।
उत्तर :
आश्रम में गाँधी जी स्वयं काम करते थे तथा दूसरों से काम करवाने में सख्ती बरतते थे। पर वे अपना काम किसी और से करवाना पसंद नहीं करते थे। वे किसी के पूछने पर उसे तुरंत काम बता देते थे। गाँधी जी को स्वयं काम करते देखकर कोई भी काम करने से मना नहीं कर पाता था। वे काम करने वालों को कभी नौकर नहीं समझते थे, वरन् उन्हें भाई या बहन मानते थे। वे काम करने वालों को धन्यवाद देना भी नहीं भूलते थे।

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निबंध से आगे

1. गाँधी जी इतना पैदल क्यों चलते थे? पैदल चलने के क्या लाभ हैं? लिखो।
उत्तर :
गाँधी जी बहुत पैदल चलते थे। दक्षिण अफ्रीका में जब वे टालस्टॉय बाड़ी में रहते थे तब पास के शहर में कोई काम होने पर दिन में प्राय: 42 मील तक पैदल चल लेते थे। वे घर में बना कुछ नाश्ता लेकर सुबह दो बजे ही निकल पड़ते थे। पैदल चलने के बहुत लाभ हैं। यह शरीर का सबसे अच्छा व्यायाम है। इससे शरीर चुस्त-दुरुस्त रहता है। हमारा काम समय पर हो जाता है। पैदल चलना हमें स्वस्थ रखता है।

2. अपने घर के किन्हीं दस कामों की सूची बनाकर लिखो कि ये काम घर के कौन-से सदस्य अक्सर करते हैं? तुम नीचे बनी तालिका की सहायता ले सकते हो।

काममेंमाँपिताभाईबहनचाचादादीअन्य
1. घर का सामान लाना।
2. घर की सफाई करना
3. बिस्तर रखना
4. खाना बनाना

अब यह देखो कि कौन सबसे ज्यादा काम करता है और कौन सबसे कम। कामों का बराबर बँटवारा हो सके, इसके लिए तुम क्या कर सकते हो? सोचकर शिक्षक को बताओ।
उत्तर :
सबसे ज्यादा काम करती है- माँ
सबसे कम काम करता हूँ- मैं
घर के सभी कामों के लिए लोगों को जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए।

भाषा की बात

1.(क) ‘पिसाई’ संज्ञा है, जो ‘पीस’ क्रिया के अंत में ‘ई’ प्रत्यय जोड़ने से बनी है। किसी शब्द के अंत में कुछ जोड़ा जाए, तो उसे प्रत्यय कहते हैं।
नीचे ऐसी कुछ और संज्ञाएँ लिखी हैं। बताओ कि ये किन क्रियाओं से बनी हैं

बुआईबोनाकटाईकाट
सिंचाईसौंचरोपाईंरोप
कताईकातरंगाईरंग

(ख) हर काम-धंधे और हर क्षेत्र की अपनी अलग भाषा और शब्द-भंडार होता है। ऊपर लिखे शब्दों का संबंध दो अलग-अलग कामों से है। पहचानो कि वे क्षेत्र कौन-से हैं।
उत्तर :
1. खेती का क्षेत्र।
2. कपड़े रँगने का क्षेत्र।

2. हमारे आसपास ऐसे कई घरेलू काम हैं, जिन्हें अब काम नहीं समझा जाता और कम महत्त्व दिया जाता है। कपड़े सिलना इनमें से एक है। नीचे इस काम से जुड़े कुछ शब्द दिए गए हैं। आसपास के बड़ों से या दर्जी से पूछो और प्रत्येक शब्द को एक-दो वाक्यों में समझाओ। इस सूची में और शब्द भी जोड़ो।
तुरपाई – ………………..
कच्ची सिलाई – ………………..
बखिया – ………………..
चोर सिलाई – ………………..
उत्तर :
तुरपाई – इस कमीज की तुरपाई कौन करेगा?
बखिया – इस कपड़े की बखिया उधड़ गई है।
कच्ची सिलाई – कच्ची सिलाई देर तक नहीं चलती।
चोर सिलाई – चोर सिलाई दिखाई नहीं देगी।

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3. नीचे लिखे गए शब्द पाठ से लिए गए हैं। इन्हें पाठ में खोजकर बताओ कि ये स्त्रीलिंग हैं या पुल्लिंग?
कालिख, भराई, चक्की, रोशनी, जेल, सेवा, पतीला.
उत्तर :
कालिख – स्त्रीलिंग
जेल – स्त्रीलिंग
भराई – स्त्रीलिंग
चक्की – स्त्रीलिंग
पतीला – पुल्लिग
रोशनी – स्त्रीलिंग
यह हमने वाक्य-प्रयोग द्वारा जाना।

HBSE 6th Class Hindi नौकर Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
गाँधी जी आश्रम के भंडार में क्या-क्या काम करते थे?
उत्तर :
कुछ वर्षों तक गाँधी ने आश्रम के भंडार का काम सँभालने में मदद दी। सवेरे की प्रार्थना के बाद वे रसोईघर में जाकर सब्जियाँ छीलते थे। रसोईघर या भंडार में अगर वे कहीं गंदगी या मकड़ी का जाला देख पाते थे तो अपने साथियों को आड़े हाथों लेते। उन्हें सब्जी, फल और अनाज के पौष्टिक गुणों का ज्ञान था। एक बार एक आश्रमवासी ने बिना धोए आलू काट दिए। गाँधी ने उसे समझाया कि आलू और नींबू को बिना धोए नहीं काटना चाहिए।

प्रश्न 2.
आश्रम में बरतनों के बारे में क्या नियम था? गाँधी जी इसका पालन कैसे करते थे?
उत्तर :
आश्रम का एक नियम यह था कि सब लोग अपने बरतन खुद साफ करें। रसोई के बरतन बारी-बारी से कुछ लोग दल बाँधकर धोते थे। एक दिन गाँधी ने बड़े-बड़े पतीलों को खुद साफ करने का काम अपने ऊपर लिया। इन पतीलों की पेंदी में खूब कालिख लगी थी। राख भरे हाथों से वह एक पतीले को खूब जोर-जोर से रगड़ने लगे।

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प्रश्न 3.
आश्रम के निर्माण के समय क्या समस्या आई? इससे जुड़ी एक घटना का उल्लेख कीजिए।
उत्तर :
जब आश्रम का निर्माण हो रहा था उस समय वहाँ आने वाले कुछ मेहमानों को तंबुओं में सोना पड़ता था। एक नवागत को पता नहीं था कि अपना बिस्तर कहाँ रखना चाहिए, इसलिए उसने बिस्तर को लपेटकर रख दिया और यह पता लगाने गया कि उसे कहाँ रखना है। लौटते समय उसने देखा कि गाँधीजी खुद उसका बिस्तर कंधे पर उठाए रखे चले जा रहे हैं।

प्रश्न 4.
गाँधी जी को क्या बात बिल्कुल पसंद नहीं थी? पाठ के आधार पर बताइए।
उत्तर :
शरीर से जब तक बिल्कुल लाचारी न हो तब तक गाँधी को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं थी कि महात्मा या बूढ़े होने के कारण उनको अपने हिस्से का दैनिक शारीरिक श्रम न करना पड़े। हर प्रकार का काम करने की उनमें अद्भुत क्षमता और शक्ति थी। वह थकान का तो नाम भी नहीं जानते थे। दक्षिण अफ्रीका में बोअर-युद्ध के दौरान उन्होंने घायलों को स्ट्रेचर पर लादकर एक-एक दिन में पच्चीस-पच्चीस मील तक ढोया था।

प्रश्न 5.
तालाब की भराई के समय गाँधी जी ने अपने साथियों की आवभगत किस प्रकार की?
उत्तर :
एक बार किसी तालाब की भराई का काम चल रहा था, जिसमें गाँधी के साथी लगे हुए थे। एक सुबह काम खत्म करके वे लोग फावड़े, कुदाल और टोकरियाँ लिए जब वापस लौटे तो देखते हैं कि गाँधी ने उनके लिए तश्तरियों में नाश्ते के लिए फल आदि तैयार करके रखे हैं। एक साथी ने पूछा, ‘आपने हम लोगों के लिए यह सब कष्ट क्यों किया? क्या यह उचित है कि हम आपसे सेवा कराएँ?’ गाँधी जी ने मुस्कराकर उत्तर दिया, क्यों नहीं। मैं जानता था कि तुम लोग थके-माँदे लौटोगे। तुम्हारा नाश्ता तैयार करने के लिए मेरे पास खाली समय था।’

प्रश्न 6.
गाँधी जी गाँवों के दौरे के समय पत्र कब लिखते थे?
उत्तर :
जब गाँधी गाँवों का दौरा कर रहे होते, उस समय रात को यदि लिखते समय लालटेन का तेल खत्म हो जाता तो वे चंद्रमा की रोशनी में ही पत्र पूरा कर लेना ज्यादा पसंद करते थे, लेकिन सोते हुए अपने किसी थके हुए साथी को नहीं जगाते थे।

प्रश्न 7.
आश्रम में किसी सहायक को रखते समय गाँधी जी का क्या आग्रह रहता था? क्यों?
उत्तर :
जब कभी आश्रम में किसी सहायक को रखने की आवश्यकता होती थी, तब गाँधी किसी हरिजन को रखने का आग्रह करते थे। उनका कहना था, ‘नौकरों को हमें वेतनभोगी मजदूर नहीं, अपने भाई के समान मानना चाहिए। इसमें कुछ कठिनाई हो सकती है, कुछ चोरियाँ हो सकती हैं, फिर भी हमारी कोशिश सर्वथा निष्फल नहीं जाएगी।’

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प्रश्न 8.
गाँधी जी घर के लिए आटा कैसे तैयार करते थे?
उत्तर :
गाँधी जी जरूरत का महीन या बारीक आटा सुबह हाथ की चक्की पीस कर तैयार कर लेते थे।

प्रश्न 9.
दक्षिण अफ्रीका की जेल में महात्मा गाँधी क्या कार्य कर चुके थे?
उत्तर :
दक्षिण अफ्रीका की जेल में महात्मा गाँधी सैकड़ों कैदियों को दो बार का भोजन परोसने का काम कर चुके थे।

प्रश्न 10.
गाँधी जी को क्या बात पसंद नहीं थी?
उत्तर :
गाँधी जी को यह बात पसंद नहीं थी कि उन्हें बूढ़ा या महात्मा होने के कारण कोई उनका काम करे।

प्रश्न 11.
गाँधी जी लिखते समय किस बात का ध्यान रखते थे?
उत्तर :
गाँधी जी रात को लालटेन की रोशनी में पत्र लिखते थे। जब तेल खत्म हो जाता तब वे चंद्रमा की रोशनी में पत्र पूरा करते थे।

प्रश्न 12.
बच्चों के बारे में गाँधीजी क्या मानते थे?
उत्तर :
गाँधी जी मानते थे कि बच्चे के विकास में माँ-बाप का प्यार और देखभाल अनिवार्य है।

प्रश्न 13.
गाँधी जी ने श्रीमती पोलक के बच्चे की देखभाल कैसे की?
उत्तर :
रात के समय गाँधी जी श्रीमती पोलक के बच्चे को उसके बिस्तर से उठा कर अपने बिस्तर पर लिटा देते थे। वह चारपाई के पास एक बरतन में पानी भरकर रख लेते थे ताकि बच्चे को प्यास लगने पर पानी पिला सकें।

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नौकर गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. आश्रम में गाँधी कई ऐसे काम भी करते थे जिन्हें आमतौर पर नौकर-चाकर करते हैं। जिस जमाने में वे बैरिस्टरी से हजारों रुपये कमाते थे, उस समय भी वे प्रतिदिन सुबह अपने हाथ से चक्की पर आटा पीसा करते थे। चक्की चलाने में कस्तूरबा और उनके लड़के भी हाथ बंटाते थे। इस प्रकार घर में रोटी बनाने के लिए महीन या मोटा आटा वे खुद पीस लेते थे। साबरमती आश्रम में भी गाँधी ने पिसाई का काम जारी रखा। वह चक्की को ठीक करने में कभी-कभी घंटों मेहनत करते थे।

प्रसंग : प्रस्तुत पक्तियाँ अनु बंद्योपाध्याय द्वारा रचित लेख ‘नौकर’ से ली गई हैं। इनमें गाँधी जी की कर्मठता पर प्रकाश डाला गया है।

व्याख्या :
आश्रम में रहते हुए गाँधी जी अनेक ऐसे परिश्रम के काम स्वयं करते थे जिन्हें प्रायः नौकर-चाकर करते हैं। एक समय था जब गाँधी जी वकालत से हजारों रुपये कमाते थे। उनके पास रुपयों की कोई कमी नहीं थी। इसके बावजूद वे प्रतिदिन सुबह अपने हाथ से चक्की पर आटा पीसते थे।

इस काम में उनकी पत्नी कस्तूरबा तथा उनके लड़के भी उनकी मदद करते थे। वे घर में ही आवश्यकता के अनुसार मोटा या बारीक आटा खुद पीस लेते थे। साबरमती आश्रम में पहुँचकर भी उन्होंने आटा पीसने का काम जारी रखा। वे चक्की को ठीक भी कर लेते थे। इसमें वे घंटों मेहनत करते थे। इस प्रकार वे परिश्रम के कामों से कभी पीछे नहीं हटते थे।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. आश्रम में गाँधी जी किस तरह के काम करते थे?
2. गाँधी जी प्रतिदिन सुबह क्या काम करते थे?
3. साबरमती आश्रम में गांधीजी किस काम में घंटों मेहनत करते थे?
उत्तर:
1. आश्रम में गाँधी जी ऐसे अनेक काम करते थे जिन्हें आमतौर पर नौकर-चाकर करते थे।
2. गाँधी जी प्रतिदिन सुबह अपने हाथ से चक्की पर आटा पीसने का काम करते थे।
3. साबरमती आश्रम में गाँधी जी आटा पीसने की चक्की को ठीक करने में घंटों मेहनत करते थे।

बहुविकल्पी प्रश्न सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. इस गद्यांश में किस व्यवसाय का उल्लेख हुआ है?
(क) बैरिस्टरी का
(ख) डॉक्टरी का
(ग) इंजीनियरिंग का
(घ) अन्य
उत्तर :
(क) बैरिस्टरी का

2. चक्की चलाने में गाँधीजी का हाथ कौन बँटाता था?
(क) कस्तूरबा
(ख) लड़के
(ग) दोनों
(घ) कोई नहीं
उत्तर :
(ग) दोनों

3. इस गद्यांश में किस आश्रम का उल्लेख है ?
(क) साबरमती
(ख) वर्धा
(ग) सेवाग्राम
(घ) अन्य
उत्तर :
(क) साबरमती

नौकर Summary in Hindi

नौकर पाठ का सार

लेखक बताता है कि महात्मा गाँधी जी आश्रम में ऐसे कई काम करते थे जिन्हें प्राय: नौकर-चाकर करते हैं। जब वे बैरिस्टरी से हजारों रुपये कमाते थे, तब भी वे प्रतिदिन सुबह अपने हाथ से चक्की पर आटा पीसा करते थे। साबरमती आश्रम में भी उन्होंने पिसाई का काम जारी रखा। इस महान् व्यक्ति को आटा पीसते देखकर उनसे मिलने आए व्यक्ति हैरत में पड़ जाते थे। पर गाँधी जी को शारीरिक श्रम के काम में कोई शर्म नहीं आती थी।

वे मिलने आने वाले लोगों को भी इसी प्रकार के काम करने को दे देते थे। कुछ वर्षों तक गाँधी जी ने आश्रम के भंडार को सँभाला। वे रसोईघर में जाकर सब्जियाँ छीलते थे। वे सब्जियों की सफाई का पूरा ध्यान रखते थे। वे आश्रमवासियों को स्वयं भोजन परोसते थे। आश्रम का एक नियम यह था कि सब लोग अपने बरतन स्वयं साफ करें। तब गाँधीजी ने बड़े-बड़े पतीलों को साफ करने का काम अपने ऊपर ले लिया। वे बरतनों को पूरी तरह चमकाकर ही चैन लेते थे।

जब आश्रम का निर्माण हो रहा था तब वहाँ आने वाले कुछ मेहमानों को तंबुओं में सोना पड़ता था। एक नए आए व्यक्ति को बिस्तर रखने की जगह का पता न था तो गाँधी जी स्वयं उसका बिस्तर उठाकर नियत स्थान पर ले गए। आश्रम के कुएँ से पानी खींचने का काम भी वे स्वयं करते थे। एक दिन गाँधीजी कुछ अस्वस्थ थे।

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इसके बावजूद वे एक टब में पानी भरकर सिर पर उठाकर आश्रम में ले आए। वे अपने हिस्से का काम किसी दूसरे से करवाना पसंद नहीं करते थे। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में बोअर-युद्ध के दौरान घायलों को स्ट्रेचर पर लादकर काफी दूर तक ढोया था। वे वहाँ काफी दूरी तक पैदल चलते थे।

एक बार किसी तालाब की भराई का काम चल रहा था। गाँधीजी ने काम करने वाले साथियों के लिए तश्तरियों में फल आदि तैयार करके रखे। दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले भारतीयों के जाने-माने नेता के रूप में उनकी मांगें ब्रिटिश सरकार के सामने रखने के लिए एक बार लंदन गए।

वहां उन्हें भारतीय अत्रों ने शाकाहारी भोजन पर आमंत्रित किया। उन छात्रों ने स्वयं ही भोजन बनाने का निश्चय किया था। दोपहर दो बजे एक दुबला-पतला और छरहरा व्यक्ति उनमें शामिल होकर बरतन धोने और सब्जी साफ करने में मदद करने लगा। वह व्यक्ति स्वयं सम्मानित अतिथि गाँधीजी ही थे।

गाँधीजी दूसरों से काम लेने में सख्त थे, पर अपना काम दूसरों से नहीं कराते थे। वे रात को लिखते समय लालटेन का तेल खत्म होने पर चंद्रमा की रोशनी में ही पत्र पूरा कर लेते थे, पर किसी सोए हुए व्यक्ति को जगाते न थे। बच्चों से गाँधी जी को बहुत प्रेम था। वे मानते थे कि बच्चे के विकास के लिए माँ-बाप का प्यार और देखभाल, जरूरी है।

उन्होंने श्रीमती पोलक के बच्चे की देखभाल का काम अपने हाथों में ले लिया। कभी-कभी वे रात को एक बजे घर पहुंचते थे. फिर भी बच्चे को श्रीमती पोलक के बिस्तर से उठाकर अपने बिस्तर पर लिटा लेते थे। रात में बच्चा उनकी चारपाई में आराम से सोता था। इस तरह बच्चे ने माँ का दूध छोड़ दिया।

गाँधी जी अपने से बड़ों का बड़ा आदर करते थे। दक्षिण अफ्रीका में वे गोखले का बिस्तर ठीक करते थे, भोजन परोसते थे और उनके पैर दबाने को भी तैयार रहते थे। दक्षिण अफ्रीका से भारत आने पर कांग्रेस अधिवेशन में उन्होंने गंदे पाखाने साफ किए। जब कभी आश्रम में किसी सहायक को रखने की आवश्यकता होती थी तब गाँधी जी किसी हरिजन को रखने का आग्रह करते थे। वे उन्हें भाई मानते थे। गाँधी जी ने देखा कि इंग्लैंड में ऊँचे घरानों में घरेलू नौकर को परिवार का आदमी माना जाता था। गाँधी जी नौकरों को नौकर न मानकर भाई या बहन मानते थे।

नौकर शब्दार्थ

बैरिस्टरी = वकालत (Barrister)। फौरन = तुरंत (Immediate)| आमतौर पर = प्रायः (Generally)। मुश्किल = कठिनाई (Difficulty)| भंडार = स्टोर (Store)| बेस्वाद = बिना स्वाद (Without taste)। मददगार = मदद करने वाला (Helper)| अस्वस्थ = बीमार (Sick)। सम्मानित = आदर के योग्य (Respected)। अतिथि = मेहमान (Guest)| समाप्त = खत्म (Finished)। कंपनीधारी = यह विशेषण गाँधी जी के लिए प्रयुक्त किया गया है। वे जिस धोती को धारण करते थे उसका कुछ हिस्सा ऊपर से ओढ़ लेते थे (A word used for Gandhiji’s half dhoti)। बीनना = चुनना, छाँटना (To select)। हैरत = अचंभा, विस्मय (Surprise)| आगंतुक = आने वाला (Guest)| चारा = उपाय (I Way our)| विदा माँगना = जाने के लिए अनुमति माँगना (To seek permission)। हाजमा = पाचन शक्ति (Digestion)। माँजना = रगड़कर साफ करना, चमकाना (To shine)| अद्भुत = अनोखा, आश्चर्यजनक (Strange)। अनुकरण = नकल, किसी की देखा-देखी करना (Follow up)| तश्तरी = थालीनुमा प्लेट (A plate)। छरहरा = चुस्त, फुर्तीला (Active)| सख्त = कठोर, प्रचंड, दुष्कर (Hard) बुहारी = बुहारने वाली चीज, झाड़ (Groom)| शिविर = अस्थायी विश्राम स्थल (Camp)| खाखरा = एक गुजराती व्यंजन (Adish of Gujarat)| चैन = आराम (Rest)| पखवाड़ा = पंद्रह दिन का समय, महीने का आधा भाग (Fortnight)| कारकुन = कारिंदा, काम करने वाला (Worker)| निष्फल = जिसका कोई फल न हो (Useless)। प्रतिदान = किसी ली हुई वस्तु के बदले दूसरी वस्तु देना (Return)। सामर्थ्य = ताकत, शक्ति. (Capability)।

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HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 14 लोकगीत

Haryana State Board HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 14 लोकगीत Textbook Exercise Questions and Answers.

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HBSE 6th Class Hindi लोकगीत Textbook Questions and Answers

निबंध से

प्रश्न 1.
निबंध में लोकगीतों के किन पक्षों की चर्चा की गई है? बिंदुओं के रूप में उन्हें लिखो।
उत्तर :
लेख में लोकगीतों के निम्नलिखित पक्षों की चर्चा की गई है :

  1. लोकगीतों का महत्त्व
  2. लोकगीतों में संगीत के विविध उपकरण
  3. लोकगीत और शास्त्रीय संगीत
  4. लोकगीतों के प्रकार
  5. लोकगीतों में स्त्रियों की सहभागिता
  6. लोकगीतों को गाने के अवसर
  7. लोकगीतों की लोकप्रियता
  8. लोकगीतों में नाच का पुट।

प्रश्न 2.
हमारे यहाँ स्त्रियों के खास गीत कौन-कौन से
उत्तर :
हमारे यहाँ स्त्रियों के खास गीत ये हैं :

  1. त्योहारों पर नदियों में नहाते समय के गीत
  2. नहाने जाते हुए रास्ते के गीत
  3. विवाह के अवसर पर गाए जाने वाले गीत
  4. मटकोड एवं ज्यौनार संबंधी गीत
  5. संबंधियों के लिए प्रेमयुक्त गालियों वाले गीत
  6. जन्म आदि के अवसर पर गाए जाने वाले गीत।

प्रश्न 3.
निबंध के आधार पर और अपने अनुभव के आधार पर (यदि तुम्हें लोकगीत सुनने के कई मौके मिले हैं तो) तुम लोकगीतों की कौन-सी विशेषताएँ बता सकते हो?
उत्तर :
हम लोकगीतों की निम्नलिखित विशेषताएँ बता सकते हैं:

  1. लोकगीतों में जन-जीवन की झलक मिलती है।
  2. इनमें विशेष उत्साह प्रदर्शित होता है।
  3. इन लोकगीतों में समूह गीतों की अधिकता होती है।
  4. लोकगीतों में लोकनृत्य की भी भागीदारी हो जाती है।
  5. लोकगीतों को गाने वाले गायकों में गलेबाजी का विशेष स्थान रहता है।

प्रश्न 4.
‘पर सारे देश के….. अपने-अपने विद्यापति हैं’ इस वाक्य का क्या अर्थ है? पाठ पढ़कर मालूम करो और लिखो।
उत्तर :
इस वाक्य का यह अर्थ है कि विद्यापति जैसे लोकगीतों की रचना करने वाले अन्य क्षेत्रों में भी होते हैं। वे अपनी आवश्यकता तथा क्षेत्रीय प्रभाव के अनुसार लोकगीतों की रचना करते हैं। ऐसे स्थानीय कवियों से देश भरा पड़ा है।

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भारत के मानचित्र में

1. भारत के नक्शे में पाठ में चर्चित राज्यों के लोकगीत और नृत्य दिखाओ।
उत्तर :
HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 14 लोकगीत-1

भाषा की बात

1. ‘लोक’ शब्द में कुछ जोड़कर जितने शब्द तुम्हें सूझें, उनकी सूची बनाओ। इन शब्दों को ध्यान से देखो और समझो कि उनमें अर्थ की दृष्टि से क्या समानता है। इन शब्दों से वाक्य भी बनाओ। जैसे-लोककला।
उत्तर :
लोक + मंच = लोकमंच
लोक + मत = लोकमत
लोक + पाल = लोकपाल
लोक + तंत्र = लोकतंत्र

2. ‘बारहमासा’ गीत में साल के बारह महीनों का वर्णन होता है। नीचे विभिन्न अंकों से जुड़े कुछ शब्द दिए गए हैं। इन्हें पढ़ों और अनुमान लगाओ कि इनका क्या अर्थ है और वह अर्थ क्यों है। इस सूची में तुम अपने मन से सोचकर भी कुछ शब्द जोड़ सकते हो।
इकतारा सरपंच चारपाई सप्तर्षि अठन्नी तिराहा दोपहर छमाही नवरात्र
उत्तर :
इकतारा = एक तार वाला वाद्य यंत्र
तिराहा = जहाँ तीन राह (रास्ते) मिलते हैं
सरपंच = पंचों में प्रमुख
दोपहर = दो पहरों का मिलन
चारपाई = चार पायों वाली
छमाही = छह महीने में होने वाली
सप्तर्षि = सात ऋषियों का समूह
नवरात = नौ रातों का समूह
अठन्नी = आठ आने का समूह (सिक्का)।

3. को, में, से आदि वाक्य में संज्ञा का दूसरे शब्दों के साथ संबंध दर्शाते हैं। पिछले पाठ (झाँसी की रानी) में तुमने का के बारे में जाना। नीचे मंजरी जोशी की पुस्तक ‘भारतीय संगीत की परंपरा’ से भारत के एक लोकवाद्य का वर्णन दिया गया है। इसे पढ़ो और रिक्त स्थानों में उचित शब्द लिखो-
तुरही भारत के कई प्रांतों में प्रचलित है। यह दिखने….अंग्रेजी के एस या सी अक्षर…..तरह होती है। भारत…..विभिन्न प्रांतों में पीतल या काँसे…..बना यह वाद्य अलग-अलग नामों….से जाना जाता है। धातु की नील….को….घुमाकर एस….आकार इस तरह दिया जाता है कि उसका एक सिरा संकरा रहे और दूसरा सिरा घंटीनुमा चौड़ा रहे। फूंक मारने….एक छोटी नली अलग….जोड़ी जाती है। राजस्थान….इसे ब’ कहते हैं। उत्तर प्रदेश….यह तूरी मध्य प्रदेश और गुजरात….रणसिंघा और हिमाचल प्रदेश.. नरसिंघा…. नाम से जानी जाती है। राजस्थान और गुजरात में इसे काकड़सिंधी भी कहते हैं।
उत्तर :
तुरही भारत के कई प्रांतों में प्रचलित है। यह दिखने में अंग्रेजी के एस या सी अक्षर की तरह होती है। भारत के विभिन्न प्रांतों में पीतल या काँसे से बना यह वाद्य अलग-अलग नामों से जाना जाता है। धातु की नली को घुमाकर एस का आकार इस तरह दिया जाता है कि उसका एक सिरा संकरा रहे और दूसरा सिरा घंटीनुमा चौड़ा रहे। फूंक मारने पर एक छोटी नली अलग से जोड़ी जाती है। राजस्थान में इसे बनू कहते हैं। उत्तर प्रदेश में यह तरी, मध्य प्रदेश और गुजरात में रणसिंघा और हिमाचल प्रदेश में नरसिंघा के नाम से जानी जाती है। राजस्थान और गुजरात में इसे काकड़सिंघी भी कहते हैं।

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HBSE 6th Class Hindi लोकगीत Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
जंगल की जातियों के गीत कैसे होते हैं? ये कैसे गाए जाते हैं?
उत्तर :
जंगल की जातियों आदि के भी दल-गीत होते हैं जो अधिकतर बिरहा आदि में गाए जाते हैं। पुरुष एक ओर और स्त्रियाँ दूसरी ओर एक-दूसरे के जवाब के रूप में दल बाँधकर गाते हैं और दिशाएँ [जा देते हैं। पर इधर कुछ काल से इस प्रकार के दलीय गायन का ह्रास हुआ है।

प्रश्न 2.
स्त्रियों का गीतों से क्या संबंध है? भारतीय और अन्य देशों के गीतों में क्या अंतर है?
उत्तर :
अपने देश में स्त्रियों के गीतों की संख्या बहुत है। ये गीत भी लोकगीत ही हैं और अधिकतर इन्हें औरतें ही गाती हैं। इन्हें सिरजती भी अधिकतर वही हैं। वैसे मर्द रचने वालों या गाने वालों की भी कमी नहीं है, पर इन गीतों का संबंध विशेषतः स्त्रियों से है। इस दृष्टि से भारत इस दिशा में सभी देशों से भिन्न है क्योंकि संसार के अन्य देशों में स्त्रियों के अपने गीत मर्दो या जनगीतों से अलग और भिन्न नहीं हैं, मिले-जुले ही हैं।

प्रश्न 3.
लोकगीतों की भाषा के बारे में बताइए। इनकी क्या विशेषता है?
उत्तर :
लोकगीतों की भाषा के संबंध में कहा जा सकता है कि ये सभी लोकगीत गाँवों और इलाकों की बोलियों में गाए जाते हैं। इसी कारण वे बड़े आह्लादकारी और आनंददायक होते हैं। राग तो इन गीतों के आकर्षक होते ही हैं, इनकी समझी जा सकने वाली भाषा भी इनकी सफलता का कारण है।

प्रश्न 4.
स्त्रियों द्वारा गाए जाने वाले गीत प्रमुख रूप से कौन-कौन से हैं?
उत्तर :
त्योहारों पर, नदियों में नहाते समय के, नहाने जाते हुए राह के, विवाह के, मटकोड़, ज्यौनार के, संबंधियों के लिए प्रेमयुक्त गाली के, जन्म आदि सभी अवसरों के अलग-अलग गीत हैं, जो स्त्रियाँ गाती हैं। इन अवसरों पर कुछ आज से ही नहीं, बड़े प्राचीनकाल से वे गाती रही हैं। महाकवि कालिदास आदि ने भी अपने ग्रंथों में उनके गीतों का हवाला दिया है। सोहर, बानी, सेहरा आदि उनके अनंत गानों में से कुछ हैं। बारहमासे पुरुषों के साथ नारियाँ भी गाती हैं।

प्रश्न 5.
पहाड़ियों के गीतों के बारे में बताइए।
उत्तर :
पहाड़ियों के अपने-अपने गीत हैं। उनके अपने-अपने भिन्न रूप होते हुए भी अशास्त्रीय होने के कारण उनमें अपनी एक समान भूमि है। गढ़वाल, किन्नौर, काँगड़ा आदि के अपने-अपने गीत और उन्हें गाने की अपनी-अपनी विधियाँ हैं। उनका अलग नाम ही ‘पहाड़ी’ पड़ गया है।

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प्रश्न 6.
इन लोकगीतों के विषय कहाँ से लेते हैं? इनके रागों के नाम भी बताइए।
उत्तर :
इन देहाती गीतों के रचयिता कोरी कल्पना को इतना मान न देकर अपने गीतों के विषय रोजमर्रा के बहते जीवन से लेते हैं, जिससे वे सीधे मर्म को छू लेते हैं। उनके राग भी साधारणतः पीलू, सारंग, दुर्गा, सावन, सोरठ आदि हैं। कहरवा, बिरहा, धोबिया आदि देहात में बहुत गाए जाते हैं और बड़ी भीड़ आकर्षित करते

प्रश्न 7.
भोजपुरी में कौन-सा लोकगीत अधिक प्रचार पा गया है? इन गीतों की क्या विशेषता होती है?
उत्तर :
भोजपुरी में करीब तीस-चालीस बरसों से ‘बिदेसिया’ का प्रचार हुआ है। गाने वालों के अनेक समूह इन्हें गाते हुए देहात में फिरते हैं। उत्तर के जिलों में, विशेषकर बिहार में बिदेसिया से बढ़कर दूसरे गाने लोकप्रिय नहीं हैं। इन गीतों में अधिकतर रसिकप्रियों और प्रियाओं की बात रहती है, परदेशी प्रेमी की और इनसे करुणा और विरह का रस बरसता है।

प्रश्न 8.
पहले लोकगीतों की क्या अवस्था थी? अब इनके बारे में क्या परिवर्तन आया है?
उत्तर :
एक समय था जब शास्त्रीय संगीत के सामने लोकगीतों को हेय समझा जाता था। अभी हाल तक इनकी बड़ी उपेक्षा की जाती थी। पर इधर साधारण जनता की ओर जो लोगों की नजर फिरी है तो साहित्य और कला के क्षेत्र में भी परिवर्तन हुआ है। अनेक लोगों ने विविध बोलियों के लोक-साहित्य और लोकगीतों के संग्रह पर कमर बाँधी है और इस प्रकार के अनेक संग्रह अब प्रकाशित भी हो गए हैं।
अब इनकी लोकप्रियता बढ़ती चली जा रही है।

प्रश्न 9.
लोकगीत किस अर्थ में शास्त्रीय संगीत से भिन्न हैं?
उत्तर :
लोकगीत अपनी लोच, ताज़गी तथा लोकप्रियता की दृष्टि से शास्त्रीय संगीत से भिन्न हैं।

प्रश्न 10.
लोकगीत को गाने में किनकी जरूरत नहीं होती?
उत्तर :
लोकगीत को गाने में वाद्यों (बाजों) जैसे-ढोलक, झाँझ, करताल और बाँसुरी की जरूरत नहीं होती।

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प्रश्न 11.
पहले लोकगीतों को शास्त्रीय संगीत की तुलना में कैसा समझा जाता था?
उत्तर :
पहले लोकगीतों को शास्त्रीय संगीत की तुलना में हेय (घटिया) समझा जाता था तथा इनकी उपेक्षा की जाती थी।

प्रश्न 12.
वास्तविक लोकगीतों का संबंध कहाँ से है?
उत्तर :
वास्तविक लोकगीतों का संबंध देश के गाँवों और देहातों से है।

प्रश्न 13.
भोजपुरी में किस लोकगीत का ज्यादा प्रचार हुआ है?
उत्तर :
पिछले तीस-चालीस वर्ष से भोजपुरी के ‘बिदेसिया’ का काफी प्रचार हुआ है।

प्रश्न 14.
आल्हा का जनक किस कवि को माना जाता
उत्तर :
कवि जगनिक को आल्हा का जनक माना जाता है। वह चंदेल राजाओं का राजकवि था।

प्रश्न 15.
स्त्रियाँ लोकगीत गाते समय किस वाद्य का प्रयोग करती हैं?
उत्तर :
स्त्रियाँ प्रायः ढोलक की मदद से लोकगीत गाती हैं।

प्रश्न 16.
होली के अवसर पर ब्रज में कौन सा लोकगीत गाय जाता है?
उत्तर :
ब्रज में रसिया गाया जाता है।

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लोकगीत गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. लोकगीत अपनी लोच, ताजगी और लोकप्रियता में शास्त्रीय संगीत से भिन्न हैं। लोकगीत सीधे जनता के संगीत हैं। घर, गाँव और नगर की जनता के गीत हैं ये, इनके लिए साधना की जरूरत नहीं होती। त्योहारों और विशेष अवसरों पर ये गाए जाते हैं। सदा से ये गाए जाते रहे हैं और इनके रचने वाले भी अधिकतर गाँव के लोग ही हैं। स्त्रियों ने भी इनकी रचना में विशेष भाग लिया है। ये गीत बाजों की मदद के बिना ही या साधारण ढोलक, झाँझ, करताल, बाँसुरी आदि की मदद से गाए जाते हैं।

प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ भगवतशरण उपाध्याय द्वारा रचित पाठ ‘लोकगीत’ से ली गई हैं। इनमें लेखक लोकगीतों के बारे में बताता है।

व्याख्या :
लेखक बताता है कि लोकगीत शास्त्रीय संगीत से अलग होते हैं। लोकगीतों में लोच, ताजगी और लोकप्रियता होती है। लोकगीतों का सीधा संबंध जनता से होता है। इन्हें घर, गाँवों और नगर का जनता गाती है। ये गीत स्वत: ही उभरते हैं अत: इनके लिए किसी साधना की आवश्यकता नहीं होती।

ये गीत त्योहारों और विशेष अवसरों पर गाए जाते हैं। ये शुरू से ही गाए जाते रहे हैं। इन गीतों को रचने वाले भी गाँव में रहने वाले ही होते हैं। इन गीतों की रचना में स्त्रियों की विशेष भागीदारी रहती है। इन गीतों को गाने के लिए किन्हीं विशेष प्रकार के वाद्य-यंत्रों की आवश्यकता नहीं पड़ती। इन्हें साधारण ढोलक,झाँझ, करताल और बाँसुरी की मदद से गा लिया जाता है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. लोकगीत शास्त्रीय संगीत से किस दृष्टि से भिन्न हैं?
2.लोकगीत किससे जुड़े हैं?
3. लोकगीत कब गाए जाते हैं?
4. लोकगीतों की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर :
1. लोकगीत अपनी लोच, ताजगी और लोकप्रियता की दृष्टि से शास्त्रीय संगीत से भिन्न हैं।
2. लोकगीत सीधे आम जनता से जुड़े हैं। ये घर, गाँव और नगर की जनता के गीत हैं।
3. लोकगीत त्योहारों और विशेष अवसरों पर गाए जाते हैं।
4.

  • लोकगीतों की रचना गाँव के लोगों ने ही की है।
  • स्त्रियों ने भी इनकी रचना में भाग लिया है।
  • इन्हें बिना बाजों (वाद्यों) के भी गाया जा सकता है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. लोकगीत में कौन सी विशेषता नहीं होती?
(क) लोच
(ख) ताजगी
(ग) लोकप्रियता
(घ) शास्त्रीयता
उत्तर :
(घ) शास्त्रीयता

2. लोकगीतों की रचना करने वाले
(क) गाँव के लोग होते हैं।
(ख) शहर के लोग होते हैं।
(ग) नामी कवि होते हैं।
(घ) संगीतकार होते हैं।
उत्तर :
(क) गाँव के लोग होते हैं।

3. इनमें से कौन सी वस्तु वाद्य नहीं है
(क) बाँसुरी
(ख) ढोलक
(ग) करताल
(घ) माइक
उत्तर :
(घ) माइक

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2. एक दूसरे प्रकार के बड़े लोकप्रिय गाने आल्हा के हैं। अधिकतर ये बुंदेलखंडी में गाए जाते हैं। आरंभ तो इसका चंदेल राजाओं के राज कवि जगनिक से माना जाता है जिसने आल्हा-ऊदल की वीरता का अपने महाकाव्य में बखान किया, पर निश्चय ही उसके छंद को लेकर जनबोली में उसके विषय को दूसरे देहाती कवियों ने भी समय-समय पर अपने गीतों में उतारा और ये गीत हमारे गाँवों में आज भी बहुत प्रेम से गाए जाते हैं।

इन्हें गाने वाले गाँव-गाँव ढोलक लिए गाते फिरते हैं। इसी की सीमा पर उन गीतों का भी स्थान है जिन्हें नट रस्सियों पर खेल करते हुए गाते हैं। अधिकतर ये गद्य-पद्यात्मक हैं और इनके अपने बोल हैं।

प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश भगवतशरण उपाध्याय द्वारा रचित लेख ‘लोकगीत’ से अवतरित है।

व्याख्या :
लेखक लोकगीतों के प्रकार बताते हुए कहता है कि ‘आल्हा’ भी अत्यंत लोकप्रिय गीत है। आल्हा को बुदेलखंडी में गाया जाता है। आल्हा की शुरुआत चंदेल राजाओं के राजकवि जगनिक से मानी जाती है। उसने अपने महाकाव्य में आल्हा-ऊदल की वीरता का बखान किया है। इस महाकाव्य में जिस छंद को अपनाया गया है, उसी छंद को लेकर जनता की बोली में उसके विषय को अन्य ग्रामीण कवियों ने समय-समय पर अपने गीतों के माध्यम से प्रकट किया है।

आज भी ये गीत बड़े प्रेमपूर्वक गाए जाते हैं। इन गीतों को गाने वाले कवि ढोलक लेकर इन्हें गाँव-गाँव गाते फिरते हैं। इसी की सीमा पर उन लोकगीतों का भी स्थान है जिन्हें नट रस्सियों पर खेल दिखाते हुए गाते हैं। प्रायः इस प्रकार के गीत गद्य-पद्य का मिश्रण होते हैं। इन गीतों के बोल अपने ही होते हैं।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. आल्हा किसमें गाए जाते हैं?
2. ‘आल्हा’ लोकगीतों की क्या विशेषता है?
3. आल्हा गाने वाले कहाँ मिलते हैं?
4. नटों के गीत किस प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
1. आल्हा अधिकतर बुंदेलखंडी में गाए जाते हैं। ये काफी लोकप्रिय हैं।
2. आल्हा लोकगीतों का आरंभ चंदेल राजाओं के राजकवि जगनिक से माना जाता है। उसने आल्हा-ऊदल की वीरता का बखान अपने महाकाव्य में किया। बाद में देहाती कवियों ने जनबोली में गीतों की रचना की। इन्हें गाँवों में बड़े प्रेम से गाया जाता है।
3. आल्हा गाने वाले गाँव-गाँव में ढोलक लिए आल्हा गाते फिरते हैं।
4. नटों के गीत रस्सियों पर खेल दिखाते हुए गाए जाते हैं। ये गद्य-पद्य का मिला-जुला रूप होते हैं।

बहुविकल्पी प्रश्न सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. आल्हा का आरंभ किस कवि से माना जाता है?
(क) जगनिक से
(ख) चंदेल से
(ग) ऊदल से
(घ) सभी से
उत्तर :
(क) जगनिक से

2. इन गीतों में किसकी वीरता का वर्णन है?
(क) चंदेल की
(ख) आल्हा की
(ग) ऊदल की
(घ) आल्हा-ऊदल की
उत्तर :
(घ) आल्हा-ऊदल की

3. ‘देहाती कवियों’-रेखांकित शब्द व्याकरण में क्या है?
(क) संज्ञा
(ख) सर्वनाम
(ग) विशेषण
(घ) क्रिया
उत्तर :
(ग) विशेषण

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3. वास्तविक लोकगीत देश के गाँवों और देहातों में है। इनका संबंध देहात की जनता से है। बड़ी जान होती है इनमें। चैता, कजरी, बारहमासा, सावन आदि मिर्जापुर, बनारस और उत्तर प्रदेश के अन्य पूरबी और बिहार के पश्चिमी जिलों में गाए जाते हैं। बाउल और भतियाली बंगाल के लोकगीत हैं। पंजाब में माहिया आदि इसी प्रकार के हैं। हीर-रांझा, सोहनी-महीवाल संबंधी गीत पंजाबी में और ढोला-मारू आदि के गीत राजस्थानी में बड़े चाव से गाए जाते हैं।

प्रसंग : प्रस्तुत पक्तियाँ भगवतशरण उपाध्याय द्वारा रचित लेख ‘लोकगीत’ से ली गई हैं।

व्याख्या :
लेखक बताता है कि लोकगीतों की वास्तविक भूमि गाँवों में, देहातों में है। इन गीतों का संबंध गाँवों से है। इन गीतों में बहुत दम होता है। कुछ गीत जैसे चैता, कजरी, बारहमासा, सावन आदि मिर्जापुर, बनारस और उत्तर प्रदेश के अन्य पूर्वी तथा बिहार के पश्चिमी जिलों में गाए जाते हैं। इसी प्रकार बाउल और भतियाली बंगाल में गाए जाने वाले लोकगीत हैं। पंजाब का प्रसिद्ध लोकगीत माहिया है। हीर-राँझा, सोहनी-महीवाल संबंधी लोकगीत पंजाबी में और ढोला-मारू आदि लोकगीतों को राजस्थानी भाषा में बड़े उत्साहपूर्वक गाया जाता है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. वास्तविक लोकगीत कहाँ हैं? इनका संबंध किनसे है?
2. चैता, कजरी, बारहमासा, सावन कहाँ गाए जाते हैं?
3. बंगाल के लोकगीत कौन से हैं?
4. पंजाबी और राजस्थानी लोकगीतों के नाम लिखो।
उत्तर:
1. वास्तविक लोकगीत देश के गाँवों और देहातों में हैं। इनका संबंध देहात की जनता के साथ है।
2. चैता, कजरी, बारहमासा और सावन आदि लोकगीतों को मिर्जापुर, बनारस, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के पश्चिमी जिलों में गाया जाता है।
3. बाउल और भतियाली बंगाल के लोकगीत हैं।
4. पंजाबी लोकगीत हैं-हीर-रांझा, सोहनी-महीवाल तथा माहिया राजस्थानी लोकगीत हैं-ढोला-मारू।

बहुविकल्पी प्रश्न सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. ‘वास्तविक’ शब्द में किस प्रत्यय का प्रयोग है?
(क) वा
(ख) वास्तव
(ग) इक
(घ) क
उत्तर :
(ग) इक

2. इनमें से कौन-सा लोकगीत पूर्वी उत्तर प्रदेश का नहीं हैं।
(क) चैता
(ख) कजरी
(ग) बाउल
(घ) बारहमासा
उत्तर :
(ग) बाउल

3. ‘ढोला-मारू’ किस प्रदेश का लोकगीत है?
(क) राजस्थान का
(ख) पंजाब का
(ग) बिहार का
(घ) उत्तर प्रदेश का
उत्तर :
(क) राजस्थान का

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लोकगीत Summary in Hindi

लोकगीत पाठ का सार

इस पाठ में लेखक लोकगीत की विशेषता तथा उसके भेदों के बारे में बताता है। लोकगीत अपनी लोच, ताजगी और लोकप्रियता के कारण शास्त्रीय संगीत से भिन्न होता है। यह सीधे जनता का संगीत होता है। इसके लिए साधना की जरूरत नहीं होती। त्योहारों और विशेष अवसरों पर इन्हें सदा से गाया जाता रहा है। इनकी रचना भी गाँव के लोग ही करते हैं। स्त्रियों ने भी इसमें भाग लिया है। ये गीत साधारण ढोलक, झाँझ, करताल और बाँसुरी आदि की मदद से ही गाए जाते हैं।

पहले इन्हें शास्त्रीय संगीत की तुलना में घटिया समझा जाता था, पर अब इनकी ओर विशेष ध्यान दिया गया है। अब विविध बोलियों में लोक-साहित्य और लोकगीतों के संग्रह प्रकाशित हो गए हैं। लोकगीतों के कई प्रकार हैं। आदिवासियों के लोकगीत बड़े ओजस्वी और सजीव हैं। मध्य प्रदेश, दक्कन, छोटा नागपुर में गोंड-खोंड, ओराँव-मुंडा, भील-संताल आदि फैले हुए हैं। इनके गीत 20-20, 30-30 आदमियों और औरतों के दल के साथ एक-दूसरे के जवाब में गाए जाते हैं। पहाड़ियों के अपने गीत हैं।

गढ़वाल, किन्नौर, काँगड़ा आदि के गीतों को गाने की अपनी-अपनी विधियाँ हैं। इनका नाम ‘पहाड़ी’ पड़ गया है। लोकगीतों का संबंध आम जनता से है। चैता, कजरी, बारहमासा, सावन आदि मिर्जापुर, बनारस और उत्तर प्रदेश के अन्य पूर्वी और बिहार के पश्चिमी जिलों में गाए जाते हैं। बाउल और भतियाली बंगाल के लोकगीत हैं।

पंजाब में माहिया, हीर-रांझा, सोहनी-महीवाल गीत हैं तो राजस्थान में ढोला-मारू हैं। ये गीत सीधे मर्म को छू लेते हैं। ये सभी गीत गांवों और इलाकों की बोलियों में गाए जाते हैं। इनकी भाषा सरल होती है। भोजपुरी में 30-40 सालों से ‘बिदेसिया’ का प्रचार हुआ है। इन गीतों में अधिकतर रसिकप्रियों और प्रियाओं की बात रहती है, परदेशी प्रेमी की और इनमें करुणा एवं विरह का रस बरसता है।

जंगल की जातियों के दल-गीत होते हैं। एक-दूसरे प्रकार के लोकप्रिय गाने आल्हा हैं। ये बुंदेलखंडी में गाए जाते हैं। इनका संबंध आल्हा-ऊदल से माना जाता है। इनका प्रारंभ चंदेल राज्य के राजकवि जगनिक से माना जाता है। अपने देश में स्त्रियों के गीतों की भी बड़ी संख्या है। त्योहारों पर नदियों में नहाते समय, विवाह के अवसर पर, त्यौहार पर, संबंधियों को प्रेमयुक्त गाली देने, जन्म आदि अवसरों पर स्त्रियाँ अलग-अलग प्रकार के गीत गाती हैं।

स्त्रियों के द्वारा गाए जाने वाले गीत अकेले नहीं गाए जाते। गाँवों और नगरों में गायिकाएँ भी होती हैं। सभी ऋतुओं में स्त्रियाँ उल्लसित होकर दल बाँधकर गाती हैं। होली और बरसात की कजरी सुनते ही बनती है। पूरब की बोलियों में मैथिल-कोकिल विद्यापति के गीत गाए जाते हैं। स्त्रियाँ ढोलक की मदद से गाती हैं।

उनके गाने के साथ नाच का भी पुट होता है। इसी प्रकार का दलीय गायन है-गुजरात का गरबा। इसे औरतें घूम-घूमकर गाती हैं तथा साथ ही डंडे भी बजते हैं। होली के अवसर पर ब्रज में रसिया चलता है। गाँवों में गीतों के अनंत प्रकार हैं। इनमें ग्रामीण जीवन इठलाता-लहराता है।

लोकगीत शब्दार्थ

लोच = लचीलापन, लचक (Flexibility)। झाँझ = दो काँसे की तश्तरियों से बना हुआ एक प्रकार का वाद्य यंत्र (A musical instrument)। करताल = एक प्रकार का वाद्य यंत्र (A kind of musical instrument)। हेय = हीन, तुच्छ (Inferior)। ओजस्वी = ओज भरा, प्रभावकारी (Effective) सिरजती = बनाती, सृजन करती (Creative)। आह्वावकर = हर्षकर (Amusing)। कृत्रिम = बनावटी (Artificial)। अबूझ = जो समझने योग्य न हो, क्लिष्ट (Difficult to understand)। बखान = वर्णन, बड़ाई, गुण-कथन (Description)। उल्लसित = खुश (Happy)। उद्दाम = बंधन रहित, बहुत ज्यादा (Boundless)। शास्त्रीय संगीत = नियम-सुर-ताल में बँधे (Classical music)। संग्रह = इकट्ठा (Collection)। परिवर्तन = बदलाव (Changes)। देहात = aग्रामीण (Rural)। ह्रास-गिरावट (Downfall)। दलीय गायन-मिलकर गाना (Group song)। कंठ-गला (Throat)1 लोकप्रिय-लोगों में प्रसिद्ध (Popular)। स्रोत-साधन (Source)।

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HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 13 मैं सबसे छोटी होऊँ

Haryana State Board HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 13 मैं सबसे छोटी होऊँ Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 13 मैं सबसे छोटी होऊँ

HBSE 6th Class Hindi मैं सबसे छोटी होऊँ Textbook Questions and Answers

कविता से

प्रश्न 1.
कवि सबसे छोटे होने की कल्पना क्यों करता है?
उत्तर :
कवि सबसे छोटे होने की कल्पना इसलिए करता है ताकि वह अधिक दिनों तक माँ का सानिध्य एवं स्नेह पा सके।

प्रश्न 2.
कविता में ‘ऐसी बड़ी न होऊँ मैं’ क्यों कहा गया है?
उत्तर :
कविता में ऐसा इसलिए कहा गया है ताकि वह अधिक समय तक माँ के साथ रह सके। बड़ी होने पर माँ छोटे बच्चे के साथ लग जाती है. बडी पिछड जाती है।

HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 13 मैं सबसे छोटी होऊँ

प्रश्न 3.
कवि किसके आँचल की छाया में छिपा रहना चाहता है और क्यों ?
उत्तर :
कवि माँ के आँचल की छाया में छिपा रहना चाहता है ताकि वह इच्छा रहित और निडर बन सके।

प्रश्न 4.
आशय स्पष्ट कीजिएहाथ पकड़ फिर सदा हमारे साथ नहीं फिरती दिन-रात!
उत्तर :
इस काव्यांश का आशय यह है कि माँ बड़े बच्चे की उपेक्षा कर देती है। वह सबसे छोटे बच्चे का हाथ पकड़कर फिरती रहती है। बड़ा बच्चा छूट जाता है।

कविता से आगे

1. कविता से पता करके लिखो कि माँ बच्चों के लिए क्या-क्या काम करती है ? तुम स्वयं सोचकर भी लिखो कि बच्चों को माँ के लिए क्या-क्या करना चाहिए ?
उत्तर :
माँ बच्चों को गोदी में सुलाती है, अपने हाथ से खाना खिलाती है, उन्हें नहलाती-धुलाती तथा शरीर को सुंदर बनाती है। हम भी ये सभी बातें सोचते हैं। इसके साथ-साथ उसे हमें पढाना भी चाहिए तथा अच्छी बातें भी सिखानी चाहिएँ।

2. बच्चों को प्रायः सभी क्षेत्रों में बड़ा होने के लिए कहा जाता है। इस कविता में कवि सबसे छोटा बना रहना क्यों चाहता है ?
उत्तर :
कवि सबसे छोटा बनकर माँ का स्नेह अधिक दिनों तक पाना चाहता है।

भाषा की बात

1. ‘पकड़-पकड़कर’ की तरह नीचे लिखे शब्दों को पूरा करो और उनसे वाक्य भी बनाओ-
छोड़ – …………….
बना – …………….
फिर – …………….
खिला – …………….
पोंछ – …………….
थमा – …………….
सुना – …………….
कह – …………….
छिपा – …………….
उत्तर :
छोड़ – छोड़कर
बना – बनाकर
फिर – फिरकर
खिला – खिलाकर
पोंछ – पोंछकर
थमा – थमाकर
सुना – सुनाकर
कह – कहकर
दिखा – दिखाकर
छिपा – छिपाकर

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2. इन शब्दों के समान अर्थ वाले दो-दो शब्दों को लिखो
हाथ – …………….
सदा – …………….
मुख – …………….
माता – …………….
स्नेह – …………….
उत्तर :
हाथ – हस्त, कर
सदा – हमेशा, सर्वदा
मुख – मुँह, आनन
माता – माँ, जननी
स्नेह – प्रेम, प्यार

3. कविता में “दिन-रात’ शब्द आया है। तुम ऐसे ही पाँच शब्दों को सोचकर लिखो, जिसमें किसी शब्द का विलोम शब्द भी शामिल हो और उससे वाक्य बनाओ।
उत्तर :
आगे-पीछे : तुम मेरे आगे-पीछे मत चलो।
पाप-पुण्य : धर्म पाप-पुण्य के बारे में बताते हैं।
अच्छा-बुरा : क्या अच्छा है क्या बुरा है, मत सोचो।
ऊपर-नीचे : सूचकांक कभी ऊपर जाता है तो कभी नीचे।
हल्का-भारी : तौलकर ही हल्का-भारी का पता चलता है।

4. ‘निर्भय’ शब्द में ‘नि’ उपसर्ग लगाकर शब्द बनाया गया है। तुम भी ‘नि’ उपसर्ग से पाँच शब्दों को बनाओ।
उत्तर :
नि – निसंतान
निडर
निर्गुण
निरोग
निकम्मा

5. कविता की किन्हीं चार पंक्तियों को गद्य के रूप में लिखो।
प्रारंभ की चार पंक्तियाँ गद्य रूप में-
उत्तर :
मैं सबसे छोटी होना चाहती हूँ और तेरी गोद में सोना चाहती हूँ। माँ, तेरा आँचल पकड़कर सदा तेरे साथ फिरना चाहती हूँ।

HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 13 मैं सबसे छोटी होऊँ

HBSE 6th Class Hindi मैं सबसे छोटी होऊँ Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
क्या आप भी माँ के साथ ही रहना चाहते हैं?
उत्तर :
हाँ, पर हर समय नहीं। उसे काम करने की छूट तो होनी चाहिए।

प्रश्न 2.
क्या माँ रात को परियों की कहानी सुनाती है?
उत्तर :
हाँ, पर कभी-कभी, रोजाना नहीं।

मैं सबसे छोटी होऊँ काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. मैं सबसे छोटी होऊँ,
तेरी गोदी में सोऊँ,
तेरा अंचल पकड़-पकड़कर
फिरूँ सदा माँ! तेरे साथ,
कभी न छोडूं तेरा हाथ!
बड़ा बनाकर पहले हमको,
तू पीछे छलती है मात!
हाथ पकड़ फिर सदा हमारे
साथ नहीं फिरती दिन-रात!

शब्दार्थ : अंचल-साड़ी का छोर (A part of saree)। छलती-धोखा देती (To break belief)

प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ सुमित्रानंदन पंत द्वारा रचित कविता ‘मैं सबसे छोटी होऊँ’ से ली गई हैं। बालिका सबसे छोटी बनकर रहना चाहती है।

व्याख्या :
बालिका कहती है कि वह सबसे छोटी बनना चाहती है ताकि वह माँ की गोद में सो सके। वह यह भी चाहती है कि वह माँ की साड़ी का पल्लू पकड़कर उसके साथ-साथ फिरे। वह माँ का साथ नहीं छोड़ना चाहती। माँ हमें पहले तो बड़ा बनाती है और फिर हमें छलती है। जब हम बड़े हो जाते हैं तब माँ हमारा हाथ नहीं पकड़ती और न हमारे साथ फिरती है। इसलिए मैं तो सबसे छोटी बनना चाहती हूँ ताकि माँ से मेरा साथ न छूट पाए।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. किसकी क्या इच्छा है?
2. वह अंचल पकड़ कर क्यों फिरना चाहती है?
3. माता किस प्रकार छलती है?
उत्तर:
1. छोटी बालिका की यह इच्छा है कि वह सबसे छोटी हो जाए और सदा माँ की गोद में सोए।
2. बालिका अपनी माँ का अंचल पकड़ कर सदा उसके साथ-साथ फिरना चाहती है ताकि उसे माँ का सान्निध्य प्राप्त होता रहे।
3. माता बच्ची को बड़ा बना कर उसका हाथ छोड़ देती है और उसके साथ-साथ नहीं फिरती।

बहुविकल्पी प्रश्न सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. बालिका क्या होना चाहती है?
(क) सबसे बड़ी
(ख) सबसे छोटी
(ग) प्रिय बालिका
(घ) सामान्य
उत्तर :
(ख) सबसे छोटी

2. बालिका क्या नहीं छोड़ना चाहती?
(क) माँ का अंचल
(ख) माँ का हाथ
(ग) माँ का साथ
(घ) सभी कुछ
उत्तर :
(क) माँ का अंचल

3. क्या माँ सदा बालिका का हाथ पकड़ कर फिर सकती
(क) हाँ
(ख) नहीं।
(ग) कभी-कभी
(घ) पता नहीं
उत्तर :
(ख) नहीं।

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2. अपने कर से खिला, धुला मुख,
धूल पोंछ, सज्जित कर गात,
थमा खिलौने, नहीं सुनाती
हमें सुखद परियों की बात!
ऐसी बड़ी न होऊँ मैं
तेरा स्नेह न खोऊँ मैं,
तेरे अंचल की छाया में
छिपी रहूँ निस्पृह, निर्भय,
कहूँ-दिखा दे चंद्रोदय!

शब्दार्थ : कर-हाथ (Hand)। मुख-मुँह (Mouth)| गात-शरीर (Body)| सुखद-सुख देने वाली (Amusing)। निस्पृह-इच्छा रहित (Without wish)। निर्भर-निडर (Fearless)।

प्रसंग : प्रस्तुत काव्यांश पंत जी द्वारा रचित कविता ‘मैं सबसे छोटी होऊँ’ से अवतरित है।

व्याख्या :
बालिका चाहती है कि वह सबसे छोटी संतान हो ताकि लंबे समय तक माँ का साथ पा सके। ऐसी स्थिति में माँ अपने हाथ से मुझे खाना खिलाएगी, मुँह धोएगी तथा मेरी धूल पोंछकर सजाएगी, सँवारेगी। अब वह हमारे हाथों में खिलौने थमा देती है तथा परियों की सुख देने वाली कहानियाँ नहीं सुनाती। बालिका इतनी बड़ी नहीं होना चाहती कि वह माँ का प्रेम खो बैठे। वह तो माँ के आँचल की छाया में छिपी रहना चाहती है। वह इच्छा रहित और निडर होना चाहती है तथा चंद्रमा का उदय देखने के लिए कहना चाहेगी।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. माँ बच्ची के क्या-क्या काम करती है।
2. बच्चे क्या सुनना चाहते हैं?
3. बालिका क्या चाहती है?
उत्तर:
1. माँ बच्ची को अपने हाथ से खाना खिलाती है, मुँह धोती है, धूल पोंछती है तथा उसके शरीर को वस्त्रों से सजाती है।
2. बच्चे परियों की कहानी सुनना चाहते हैं।
3. बालिका बड़ी बन कर माँ की स्नेह नहीं खोना चाहती। वह माँ के अंचल की छाया में निडर होकर छिपी रहना चाहती है। वह चंद्रोदय देखना चाहती

बहुविकल्पी प्रश्न सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. ‘सज्जित’ शब्द में कौन-सा प्रत्यय है?
(क) स
(ख) जित
(ग) इत
(घ) त
उत्तर :
(ग) इत

2. ‘सुखद’ का विलोमार्थी है
(क) दुखद
(ख) अखद
(ग) निखद
(घ) विखद
उत्तर :
(क) दुखद

3. चंद्रोदय का सही संधि-विच्छेद है
(क) चंद्र + उदय
(ख) चंद्रा + उदय
(ग) चंद्रो + दय
(घ) चंद्र + दय
उत्तर :
(क) चंद्र + उदय

4. “निस्पृह’ शब्द का अर्थ है
(क) इच्छा
(ख) इच्छा रहित
(ग) स्पर्श
(घ) प्रथा
उत्तर :
(ख) इच्छा रहित

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मैं सबसे छोटी होऊँ Summary in Hindi

मैं सबसे छोटी होऊँ कवि का संक्षिप्त परिचय

जीवन-परिचय : श्री सुमित्रानंदन पंत का जन्म 1900 ई. में अल्मोड़ा जिले के कौसानी नामक स्थान पर हुआ था। सात वर्ष की आयु में उनकी शिक्षा गाँव की पाठशाला में प्रारंभ हुई। वहाँ 4-5 वर्ष पढ़ने के पश्चात् अल्मोड़ा के गवर्नमेंट स्कूल में पढ़ने चले गए। 1919 ई. में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। 1922 ई. में जब इंटर में पढ़ रहे थे तभी गाँधी जी के ‘असहयोग आंदोलन’ से प्रभावित होकर पढ़ाई छोड़ दी और स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए।

पंत जी बचपन से ही प्रकृति-प्रेमी रहे। उन्होंने बँगला साहित्य का भी अध्ययन किया। वे अंग्रेजी के भी अच्छे ज्ञाता थे। उनका व्यक्तित्व बहुत कोमल एवं मृदुल था। 1950 में पंत जी आकाशवाणी (रेडियो) से संबद्ध हुए। पंत जी ने पहले छायावादी और फिर प्रगतिवादी कविताओं की रचना की। उनकी कविताओं में प्रकृति का मनोहारी चित्रण है। देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत कविताएँ भी उन्होंने रची हैं। उन्हें ‘चिदंबरा’ काव्य-रचना पर ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ मिला। 28 दिसंबर, 1977 को उनका देहांत हुआ।

प्रमुख रचनाएँ : पंत जी की प्रमुख रचनाएँ हैं
काव्य : पल्लव, वीणा, ग्रंथि, ग्राम्या, युगवाणी, चिदंबरा।
नाटक : ज्योत्सना, परी, क्रीड़ा और रानी।

मैं सबसे छोटी होऊँ कविता का सार

प्रस्तुत कविता एक बालगीत है। इसमें एक बालिका अपनी माँ की सबसे छोटी संतान बनने की कामना प्रकट करती है ताकि वह लंबे समय तक माँ का स्नेह पा सके। वह माँ का हाथ नहीं छोड़ना चाहती। बड़ी बनने में उसे घाटा ही घाटा है, तब माँ उसे खिलौने थमाकर दूसरे छोटे बच्चे के स्नेह में लग जाती है। तब वह उसके साथ-साथ नहीं फिर पाती, जबकि बालिका ऐसा चाहती है। वह माँ से परियों की कहानी सुनना चाहती है। वह इच्छा रहित और निडर बनना चाहती है।

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HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 12 संसार पुस्तक है

Haryana State Board HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 12 संसार पुस्तक है Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 12 संसार पुस्तक है

HBSE 6th Class Hindi संसार पुस्तक है Textbook Questions and Answers

पत्र से

प्रश्न 1.
लेखक ने ‘प्रकृति के अक्षर’ किन्हें कहा है?
उत्तर:
लेखक ने प्रकृति की विविध चीजों को ही प्रकृति के अक्षर कहा है। पहाड़, पत्थर, नदी, मैदान, रोड़ा, पक्षी ये सभी प्रकृति के अक्षर हैं। इनको पढ़ने-समझने से बहुत बातें स्वयं पता चल जाती हैं।

प्रश्न 2.
लाखों-करोड़ों वर्ष पहले हमारी धरती कैसी थी?
उत्तर:
लाखों-करोड़ों वर्ष पहले इस धरती पर कोई आदमी नहीं रहता था। तब जानवर भी नहीं थे। तब यह धरती बहुत गर्म थी।

HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 12 संसार पुस्तक है

प्रश्न 3.
दुनिया का पुराना हाल किन चीजों से जाना जाता है? उनके कुछ नाम लिखो।
उत्तर:
दुनिया का पुराना हाल इन चीजों से जाना जाता है

  • पहाड़
  • समुद्र
  • सितारे
  • नदियाँ
  • जंगल
  • जानवरों की हड्डियाँ।

प्रश्न 4.
गोल चमकीला रोड़ा अपनी क्या कहानी बताता है?
उत्तर:
गोल चमकीला रोड़ा अपनी कहानी बताता है कि बहुत समय पहले वह चट्टान का एक टुकड़ा था। उसके किनारे और कोने भी थे। वह पहाड़ के दामन में पड़ा रहा। जब पानी आया और उसे बहाकर छोटी घाटी तक ले गया। वहाँ से एक पहाड़ी नाले ने ढकेलकर उसे एक छोटे दरिया में पहुंचा दिया. फिर वह बड़े दरिया में पहुंचा और उसके पेंदे में लुढ़कता रहा। इससे उसके किनारे घिस गए और वह चिकना तथा चमकदार हो गया।

प्रश्न 5.
गोल चमकीले रोड़े को यदि दरिया और आगे ले जाता तो क्या होता? विस्तार से उत्तर लिखो।
उत्तर:
गोल चमकीले रोड़े को यदि दरिया और आगे ले जाता तो वह और छोटा होता चला जाता और अंत में बालू का एक कण बन जाता। इस प्रकार वह नदी या समुद्र की रेत बन जाता। तब वह बालू का किनारा होता, जिसमें छोटे-छोटे बच्चे खेलते हैं और घरौंदे बनाते हैं।

प्रश्न 6.
नेहरूजी के इस बात का हलका-सा संकेत दिया है कि दुनिया कैसे शुरू हुई होगी? उन्होंने क्या बताया है? पाठ के आधार पर लिखो।
उत्तर:
नेहरूजी ने बताया है कि यह पृथ्वी लाखों-करोड़ों वर्ष पुरानी है। पहले यहाँ न कोई आदमी था, न जानवर। एक समय ऐसा भी था कि जब इस पृथ्वी पर कोई जानदार चीज न थी। तब धरती बेहद गर्म थी। धीरे-धीरे यह धरती कम गर्म होती चली गई और जानवर अस्तित्व में आए। बाद में आदमी इस धरती पर आए।

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पत्र से आगे

1. लगभग हर जगह दुनिया की शुरुआत को समझाती हुई कहानियाँ प्रचलित हैं। तुम्हारे यहाँ कौन-कौन सी कहानी प्रचलित है?
उत्तर:
हमारे यहाँ एक कहानी प्रचलित है कि इस दुनिया की शुरुआत भगवान ने की। उसी ने इस सृष्टि के क्रम को आगे बढ़ाया।

2. तुम्हारी पसंदीदा किताब कौन-सी है/हैं और क्यों?
उत्तर:
हमारी पसंदीदा किताब तुलसीदास द्वारा रचित ‘रामचरितमानस’ है। इसमें नीति, धर्म, व्यवहार, कर्तव्य-अकर्तव्य आदि सभी के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया है।

3. मसूरी और इलाहाबाद शहर भारत के कौन-से प्रदेश/प्रदेशों में हैं?
उत्तर:
मसूरी – उत्तरांचल प्रदेश में।
इलाहाबाद – उत्तर प्रदेश में।

4. तुम जानते हो, दो पत्थरों को रगड़कर आदि मानव ने आग की खोज की थी। उस युग में पत्थरों का और क्या-क्या उपयोग होता था?
उत्तर:
उस युग में पत्थरों का निम्नलिखित रूपों में उपयोग होता था-

  • हथियार बनाने में।
  • मकान बनाने में।

5. यदि प्रकृति का एक अक्षर किसी पेड़ को मानें, तो क्या उसे पढ़ने के लिए सिर्फ आँखों का इस्तेमाल करना होगा?
उत्तर:
उसे आँखों के अतिरिक्त हाथों से छूकर तथा मस्तिष्क से सोचकर भी पढ़ना होगा।

भाषा की बात

1. ‘इस बीच वह दरिया में लटकता रहा।’ नीचे लिखी क्रियाएँ पढ़ो। क्या इनमें और ‘लुढ़कना’ में तुम्हें कोई समानता नजर आती है?
ढकेलना, सरकना, खिसकना.
उत्तर:
इन चारों क्रियाओं का अंतर समझाने के लिए इनसे वाक्य बनाओ।
ढकेलना – दूसरों को ढकेलना ठीक नहीं है।
ढकेलता – वह लोगों को ढकेलता चला गया।
सरकना – हमें धीरे-धीरे सरकना होगा।
सरकता – वह सरकता चला गया।
खिसकना – हमें धीरे-धीरे खिसकना चाहिए।
खिसकता – वह आगे खिसकता चला गया।

2. चमकीला रोड़ा – यहाँ रेखांकित विशेषण ‘चमक’ संज्ञा में ‘ईला’ प्रत्यय जोड़ने पर बना है। निम्नलिखित शब्दों में यही प्रत्यय जोड़कर विशेषण बनाओ और इनके साथ उपयुक्त संज्ञाएँ लिखो-
पत्थर ………..
काँटा ………….
रस ………….
जहर ………….
उत्तर:
पत्थर + ईला = पथरीला
रस + ईला = रसीला
काँटा + ईला = कँटीला
जहर + ईला = जहरीला

3, ‘जब तुम मेरे साथ रहती हो, तो अक्सर मुझसे बहुत-सी बातें पूछा करती हो।’ यह वाक्य दो वाक्यों को मिलाकर बना है। इन दोनों वाक्यों को जोड़ने का काम जब-तो (तब) कर रहे हैं, इसलिए इन्हें योजक कहते हैं। योजक के रूप में कभी कोई बदलाव नहीं आता, इसलिए ये अव्यय का एक प्रकार होते हैं। नीचे वाक्यों को जोड़ने वाले कुछ और अव्यय दिए गए हैं। उन्हें रिक्त स्थानों में लिखो। इन शब्दों से तुम भी एक-एक वाक्य बनाओ।
उत्तर:
(क) कृष्णन् फिल्म देखना चाहता है …… मैं मेले में जाना चाहती हूँ।
(ख) मुनिया ने सपना देखा ……….. वह चंद्रमा पर बैठी है।
(ग) छुट्टियों में हम सब ……….. दुर्गापुर जाएँगे ……….. जालंधर।
(घ) सब्जी कटवाकर रखना ……….. घर आते ही मैं खाना बना लूँ।
(ङ) ……….. मुझे पता होता कि शमीम बुरा मान जाएगा …….. मैं यह बात न कहता।
(च) मालती ने तुम्हारी शिकायत नहीं ……….. तारीफ ही की थी।
(छ) इस वर्ष फसल अच्छी नहीं हुई है ……….. अनाज महँगा है।
(ज) विमल जर्मन सीख रहा है ……….. फ्रेंच।
बल्कि / इसलिए / परंतु / कि / यदि / तो कि / या / ताकि
उत्तरः
(क) कृष्णन् फिल्म देखना चाहता है परंतु में मेले में जाना चाहती हूँ।
(ख) मुनिया ने सपना देखा कि वह चंद्रमा पर बैठी है।
(ग) छुट्टियों में हम सब तो दुर्गापुर जाएँगे न कि जालंधर।
(घ) सब्बी कटवाकर रखना ताकि घर आते ही में खाना बना लूँ।
(ङ) यदि मुझे पता होता कि शमीम बुरा मान जाएगा तो मैं यह बात न कहता।
(च) मालती ने तुम्हारी शिकायत नहीं बल्कि तारीफ ही की
(छ) इस वर्ष फसल अच्छी नहीं हुई है इसलिए अनाज महँगा है।
(ज) विमल जर्मन सीख रहा है न कि फ्रेंच।

HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 12 संसार पुस्तक है

सुनना और सुनाना

1. एन.सी.ई.आर.टी. की श्रव्य श्रृंखला ‘पिता के पत्र पुत्री के नाम’।
2. एन.सी.ई.आर.टी. का श्रव्य कार्यक्रम ‘पत्थर और पानी की कहानी’।

HBSE 6th Class Hindi संसार पुस्तक है Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
रोड़ा कैसे चमकीला और चिकना तथा गोल बना?
उत्तर:
एक समय जब रोड़ा एक चट्टान का टुकड़ा था, उसमें किनारे और कोने थे। वह किसी पहाड़ के दामन में पड़ा रहा। तब पानी आया और उसे बहाकर छोटी घाटी तक ले गया। वहाँ से एक पहाड़ी नाले ने ढकेलकर उसे एक छोटे-से दरिया में पहुंचा दिया। इस छोटे-से दरिया से वह बड़े दरिया में पहुंचा। इस बीच वह दरिया के पेदे में लुढ़कता रहा, उसके किनारे घिस गए और वह चिकना तथा चमकदार हो गया।

प्रश्न 2.
नेहरू जी ने पुत्री को क्या सलाह दी?
उत्तर:
नेहरू जी ने पुत्री को कहा कि इंग्लैंड केवल एक छोटा-सा टापू है और हिंदुस्तान, जो एक बहुत बड़ा देश है, फिर भी दुनिया का एक छोटा-सा हिस्सा है। अगर तुम्हें इस दुनिया का कुछ हाल जानने का शौक है, तो तुम्हें सब देशों का और उन सब जातियों का, जो इसमें बसी हुई हैं, ध्यान रखना पड़ेगा, केवल उस एक छोटे-से देश का नहीं जिसमें तम पैदा हुई हो।

प्रश्न 3.
धरती के बारे में इस पाठ में क्या बताया गया है?
उत्तर:
धरती के बारे में इस पाठ में बताया गया है कि यह लाखों-करोड़ों वर्ष पुरानी है। सबसे पहले यहाँ न आदमी थे न जानवर। तब जानदार चीजें न थीं। बाद में जानवर और आदमी इस धरती पर आ गए।

प्रश्न 4.
किन चीजों से दुनिया का पुराना हाल मालूम हो सकता है?
उत्तर:
किताबों से, पहाड़ों से, समुद्रों से, नदियों से, सितारों से, जंगलों से, जानवरों की पुरानी हड्डियों से दुनिया का पुराना हाल मालूम हो सकता है।

HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 12 संसार पुस्तक है

प्रश्न 5.
हमें कौन-सी पुस्तक पढ़नी चाहिए?
उत्तर:
हमें संसार रूपी पुस्तक पढ़नी चाहिए।

प्रश्न 6.
एक रोड़ा दरिया में लुढ़कता-लुढ़कता किस रूप में बदल जाता है?
उत्तर:
रोड़ा दरिया में लुढ़कते-लुढ़कते छोटा होता जाता है और अंत में बालू रेत का कण बन जाता है।

संसार पुस्तक है गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. मुझे मालूम है कि इन छोटे-छोटे खतों में बहुत थोड़ी-सी बातें ही बतला सकता हूँ। लेकिन मुझे आशा है कि इन थोड़ी-सी बातों को भी तुम शौक से पढ़ोगी और समझोगी कि दुनिया एक है और दूसरे लोग जो इसमें आबाद हैं हमारे भाई-बहन हैं। जब तुम बड़ी हो जाओगी तो तुम दुनिया और उसके आदमियों का हाल मोटी-मोटी किताबों में पढ़ोगी। उसमें तुम्हें जितना आनंद मिलेगा, उतना किसी कहानी या उपन्यास में भी न मिला होगा।

प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखित पत्र से अवतरित है। यह पत्र उन्होंने अपनी पुत्री को लिखा है।

व्याख्या:
नेहरूजी उस समय इलाहाबाद में थे और पुत्री मसूरी में थी, अत: पत्रों के माध्यम से ही वे अपनी बात कहते थे। वे यह बात भली प्रकार जानते थे कि पत्रों की एक सीमा है और पत्रों द्वारा थोड़ी सी बातें ही बताई जा सकती हैं। नेहरूजी को विश्वास है कि उनकी पुत्री उनके द्वारा बताई गई बातों को ध्यानपूर्वक और रुचि के साथ पढ़कर समझेगी।

उसे यह समझना होगा कि यह सारी दुनिया एक है और दुनिया भर के लोग हमारे भाई-बहन हैं। पुत्री जब बड़ी हो जाएगी तब उसे लोगों द्वारा लिखी गई मोटी-मोटी किताबें पढ़ने को मिलेंगी। उन पुस्तकों को पढ़ने में बड़ा आनंद आएगा। ऐसा आनंद कहानी या उपन्यास में भी नहीं आता।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. किसे, क्या मालूम है?
2. लेखक अपनी पुत्री से क्या उम्मीद करता है?
3. बड़ी होने पर पुत्री क्या करेगी?
4. किताबों का आनंद किससे ज्यादा होगा?
उत्तर:
1. लेखक को यह मालूम है कि छोटे-छोटे पत्रों में थोड़ी-सी बातें ही बताई जा सकती हैं।
2. लेखक अपनी पुत्री इंदिरा से यह उम्मीद करता है कि वह पत्रों में बताई थोड़ी-सी बातों को भी शौक से पढ़ेगी और यह बात समझेगी कि यह दुनिया सारी एक है।
3. बड़ी होने पर पुत्री दुनिया के आदमियों का हाल मोटी-मोटी किताबों में पढ़ेगी।
4. उन मोटी किताबों में जो आनंद मिलेगा वह कहानी या उपन्यास से ज्यादा होगा।

बहुविकल्पी प्रश्न सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. खतों में कितनी बातें बताई जा सकती हैं?
(क) काफी
(ख) थोड़ी
(ग) बहुत
(घ) कुछ नहीं
उत्तर:
(ख) थोड़ी

2. कौन लोग हमारे भाई-बहन हैं?
(क) दुनिया के देशों में बसे लोग
(ख) अपने देश के लोग
(ग) बाहर के लोग
(घ) घर के लोग
उत्तर:
(क) दुनिया के देशों में बसे लोग

3. इस पाठ के लेखक हैं
(क) पं. जवाहरलाल नेहरू
(ख) प्रेमचंद
(ग) इंदिरा गाँधी
(घ) मोतीलाल
उत्तर:
(क) पं. जवाहरलाल नेहरू

2. कोई जबान, उर्दू, हिंदी या अंग्रेजी सीखने के लिए तुम्हें उसके अक्षर सीखने होते हैं। इसी तरह पहले तुम्हें प्रकृति के अक्षर पढ़ने पड़ेंगे, तभी तुम उसकी कहानी उसकी पत्थरों और चट्टानों की किताब से पड़ सकोगी। शायद अब भी तुम उसे थोड़ा-थोड़ा पढ़ना जानती हो। जब तुम कोई छोटा-सा गोल चमकीला रोड़ा देखती हो, तो क्या वह तुम्हें कुछ नहीं बतलाता है? यह कैसे गोल, चिकना और चमकीला हो गया और उसके खुरदरे किनारे या कोने क्या हुए?

प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ पॉडत जवाहरलाल नेहरू द्वारा अपनी पुत्री को लिखे एक पत्र का अंश हैं।

व्याख्या:
नेहरू जी का कहना है कि प्रकृति को समझने के लिए उसकी भाषा को पढ़ना और समझना होगा। किसी भी भाषा को पढ़ने और समझने के लिए उसके अक्षरों को सीखना पड़ता है। प्रकृति को पढ़ने के लिए पत्थरों और चट्टानों को जानना होगा। इसे हम पहले से भी थोड़ा-बहुत तो जानते ही हैं।

लेखक पुत्री से कहता है कि जब वह कोई छोटा-सा गोल चमकीला रोड़ा देखती होगी तो वह तुम्हें बहुत कुछ बतलाता होगा। वह यह बताता है कि वह कैसे गोल, चिकना और चमकीला हो गया और उसके खुरदरे किनारे या कोने किस प्रकार मिट गए।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. किसी भी भाषा को सीखने के लिए क्या सीखना पड़ता है?
2. पत्थर और चट्टानों के बारे में क्या पढ़ सकते हैं?
3. एक छोटा-सा गोल चमकीला रोड़ा क्या बतलाता है?
उत्तर:
1. किसी भी भाषा को सीखने के लिए उस भाषा के अक्षरों को सीखना पड़ता है।
2. पत्थर और चट्टानों की किताब को पढ़ने के लिए प्रकृति के अक्षरों से पढ़ सकते हैं।
3. एक छोटा-सा गोल चमकीला रोड़ा यह बतलाता है कि वह कैसे गोल, चिकना और चमकीला हो गया। उसके खुरदरे किनारे कहाँ चले गए।

बहुविकल्पी प्रश्न सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. इस गद्यांश में किस भाषा का उल्लेख है?
(क) उर्दू
(ख) हिंदी
(ग) अंग्रेजी
(घ) ये सभी
उत्तर:
(घ) ये सभी

2. ‘गोल चमकीला रोड़ा’- रेखांकित शब्द व्याकरण में क्या है?
(क) संज्ञा
(ख) सर्वनाम
(ग) विशेषण
(घ) क्रिया
उत्तर:
(ग) विशेषण

3. ‘खुरदरे’ का विलोमार्थी है
(क) चिकना
(ख) चमकीला
(ग) गोल
(घ) टेड़ा
उत्तर:
(क) चिकना

HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 12 संसार पुस्तक है

3. यह धरती लाखों-करोड़ों वर्ष पुरानी है और बहुत दिनों तक इसमें कोई आदमी न था। आदमियों के पहले सिर्फ जानवर थे और जानवरों से पहले एक ऐसा समय था जब इस धरती पर कोई जानदार चीज न थी। आज जब यह दुनिया हर तरह के जानवरों और आदमियों से भरी हुई है, उस जमाने का खयाल करना भी मुश्किल है, जब यहाँ कुछ था।

लेकिन विज्ञान जानने वालों और विद्वानों ने, जिन्होंने इस विषय को खूब सोचा और पढ़ा है, लिखा है कि एक समय ऐसा था जब वह धरती बेहद गर्म थी और इस पर कोई जानदार चीज नहीं रह सकती थी और अगर हम उनकी किताबें पढ़ें और पहाड़ों और जानवरों की पुरानी हड्डियों को गौर से देखें तो हमें खुद मालूम होगा कि ऐसा समय जरूर रहा होगा।

प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश पडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा अपनी पुत्री को लिखे पत्र का एक अंश है।

व्याख्या:
लेखक बताता है कि यह धरती लाखों-करोड़ों वर्ष पुरानी है। उस समय इस पर कोई आदमी नहीं रहता था। आदमियों से पहले इस धरती पर केवल जानवर थे। जानवरों से पहले इस धरती पर जानदार, प्राणी भी नहीं रहते थे। आज दुनिया जानवरों और आदमियों से भरी पड़ी है। अब तो उस जमाने का खयाल करना भी कठिन है। वैज्ञानिकों और विद्वानों ने इस बारे में बहुत सोचा, पढ़ा और लिखा है। एक समय यह भी था कि यह धरती बेहद गरम थी।

तब इस धरती पर कोई जानदार चीज नहीं रह सकती थी। उस जमाने के बारे में उस समय की किताबों, पहाड़ों तथा जानवरों की पुरानी हड्डियों को ध्यानपूर्वक देखने से भली प्रकार पता चल सकता है। हम जान जाएंगे कि कभी ऐसा समय जरूर रहा होगा।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. यह धरती कितनी पुरानी है?
2. आदमियों से पहले धरती पर कौन थे?
3. वैज्ञानिकों और विद्वानों का धरती के बारे में क्या कहना था?
4. हमें खुद क्या मालूम हो जाएगा?
उत्तर:
1. यह धरती लाखों-करोड़ों वर्ष पुरानी है।
2. आदमियों से पहले इस धरती पर केवल जानवर थे। जानवरों से पहले धरती पर कोई जानदार चीज न थी।
3. वैज्ञानिकों और विद्वानों ने लिखा है कि एक समय ऐसा था जब यह धरती बेहद गर्म थी और इस पर कोई जानदार चीज़ नहीं रह सकती थी।
4. किताबों को पढ़ने तथा पहाड़ों और जानवरों की हड्डियों देखने पर हमें यह मालूम हो जाएगा कि ऐसा समय जरूर रहा होगा।

बहुविकल्पी प्रश्न सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. आज यह धरती किनसे भरी पड़ी है?
(क) आदमियों से
(ख) जानवरों से
(ग) दोनों से
(घ) किसी से नहीं
उत्तर:
(ग) दोनों से

2. एक समय यह धरती कैसी थी?
(क) बेहद गर्म
(ख) बेहद ठंडी
(ग) सामान्य
(घ) मिली-जुली
उत्तर:
(क) बेहद गर्म

3. धरती के बारे में जानने के लिए किस काम की सलाह दी गई है?
(क) किताबें पढ़ने की
(ख) पहाड़ों को देखने की
(ग) जानवरों की पुरानी हड्डियों को देखने की
(घ) उपर्युक्त सभी काम
उत्तर:
(घ) उपर्युक्त सभी काम

HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 12 संसार पुस्तक है

संसार पुस्तक है Summary in Hindi

संसार पुस्तक है पाठ का सार

यह पाठ मूल रूप से एक पत्र है, जो भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी पुत्री इंदिरा को लिखा है। लेखक के पत्रों का संकलन ‘पिता के पत्र पुत्री के नाम’ से प्रकाशित हुआ। लेखक अपनी पुत्री को संबोधित करते हुए कहता है कि जब वह उसके साथ रहती थी, तब वह अनेक प्रकार के प्रश्न पूछा करती थी और वह उनके जवाब देने की कोशिश किया करते थे।

अब पुत्री मसूरी में है और लेखक इलाहाबाद में है, अतः आमने-सामने तो कोई बातचीत नहीं हो सकती। अब तो पत्रों के द्वारा ही दुनिया की बातें बताई जा सकती हैं। पुत्री ने भारत और इंग्लैंड का इतिहास पढ़ा है। इंग्लैंड एक छोटा-सा टापू है जबकि हिंदुस्तान एक बहुत बड़ा देश है। अभी तो वह छोटी है पर बड़ी होने पर उसे दुनिया के बारे में मोटी-मोटी किताबों में बहुत कुछ पढ़ने को मिलेगा।

लेखक पुत्री को बताता है यह धरती करोड़ों वर्ष पुरानी है। यहाँ आदमियों से पहले सिर्फ जानवर थे। उनसे भी पहले यहाँ कोई जानदार चीज न थी। आज की दुनिया हर तरह के जानवरों और आदमियों से भरी पड़ी है। एक समय ऐसा भी था जब यह धरती बहुत गर्म थी और इस पर कोई जानदार चीज नहीं रह सकती थी। उस समय के बारे में हमें पहाड़ों और जानवरों की पुरानी हड्डियों से पता चल जाता है।

अब प्रश्न उठता है कि जब उस पुराने जमाने में आदमी ही न था तब भला किताबें कौन लिखता था? पर उस जमाने की कुछ चीजें ऐसी हैं जिनसे हमें दुनिया का पुराना हाल मालूम हो सकता है। हमें संसार रूपी पुस्तक को स्वयं पढ़ना होगा। एक छोटा-सा रोड़ा, जिसे हम सड़क पर या पहाड़ के नीचे पड़ा हुआ देखते हैं, वह भी संसार की पुस्तक का एक छोटा-सा पृष्ठ है और उससे कोई नई बात मालूम हो सकती है। पर हमें उसे पढ़ना आना चाहिए। किसी भी भाषा को सीखने के लिए उसके अक्षर सीखने होते हैं।

अत: हमें पहले प्रकृति के अक्षर पढ़ने होंगे। जब तुम कोई छोटा-सा गोल चमकीला रोड़ा देखती हो तब वह तुम्हें बहुत कुछ बतलाता है कि वह कैसे चमकीला और चिकना बन गया। तुम उसकी कहानी सुन सकती हो। चट्टान के टुकड़े को पानी बहाकर घाटी तक ले गया। वहाँ से एक पहाड़ी नाले ने ढकेलकर उसे छोटे-से दरिया में पहुंचा दिया।

वह दरिया के पेंदे में लुढ़कता रहा, उसके किनारे घिस गए और वह चिकना और चमकदार हो गया। अगर वह दरिया उसे और आगे ले जाता तो वह छोटा होते-होते अंत में बालू का एक कण बन जाता। इसी बालू रेत से छोटे-छोटे बच्चे खेलते और घरौंदे बनाते हैं। एक छोटा-सा रोड़ा हमें इतनी बातें बता सकता है तो पहाड़ और दूसरी चीजें तो हमें न जाने कितनी बातें बता सकती हैं।

संसार पुस्तक है शब्दार्थ

अक्सर = प्रायः (Generally)। दामन = पहाड़ों के नीचे की जमीन (Land under mountain)। खत = पत्र, चिट्टी (Letter)। आबाद = बसा हुआ (Populated)। गढ़ना = निर्माण करना (To construct)। शत = प्रतिज्ञा, वह बात जिस पर बात का होना, किया जाना, कायम रहना निर्भर हो (Condition)। खुरदरा = जिसकी सतह चिकनी न हो (Nor even)। बरिया = नदी (River)। मुश्किल = कठिन (Difficulty। बेहद = बहुत अधिक (Too much)।

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