Author name: Prasanna

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 5 चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 5 चिट्ठियों की अनूठी दुनिया Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 5 चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

HBSE 8th Class Hindi चिट्ठियों की अनूठी दुनिया Textbook Questions and Answers

पाठ से

प्रश्न 1.
पत्र जैसा संतोष फोन या एस एम एस का संदेश क्यों नहीं दे सकता?
उत्तर:
पत्र में हम अपने हृदय के भावों को स्पष्ट रूप में अभिव्यक्त कर सकते हैं जबकि फोन या एस एम एस में बात संक्षेप में ही कही जाती है। पत्र लिखकर ही पूरी संतुष्टि मिलती है। पत्र में आत्मीयता की भावना समाई रहती है जबकि फोन या एस एम एस केवल कामकाजी बात करते हैं। पत्रों को सहेजकर रखा जा सकता है जबकि फोन या एस एम एस को नहीं।

प्रश्न 2.
पत्र को खत, कागद, उत्तरम, जाबू, लेख, काडिद, पाती, चिट्ठी इत्यादि कहा जाता है। इन शब्दों से संबंधित भाषाओं के नाम बताइए।
उत्तर:

शब्दसंबंधित भाषा
खतउर्दू
कागदकन्नड़
उत्तरम, जाबू, लेखतेलुगु
काडिदतमिल
पाती, चिट्ठी हिंदो पत्रसंस्कृत

प्रश्न 3.
पत्र-लेखन की कला के विकास के लिए क्या-क्या प्रयास हुए? लिखिए।
उत्तर:
पत्र-लेखन की कला के विकास के लिए निम्नलिखित प्रयास हुए:

  • पत्र-संस्कृति विकसित करने के लिए स्कूली पाठ्यक्रमों
  • में पत्र-लेखन का विषय शामिल किया गया।
  • विश्व डाक संघ की ओर से 16 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों के लिए पत्र-लेखन प्रतियोगिताओं का सिलसिला 1972 ई. से शुरू किया गया।

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प्रश्न 4.
पत्र धरोहर हो सकते हैं, लेकिन एस एम एस क्यों नहीं? तर्क सहित अपना विचार लिखिए।
उत्तर:
पत्र प्रेरणा देते हैं अतः लोग उन्हें धरोहर की तरह सहेजकर रखते हैं। पत्र चूँकि लिखित रूप में होते हैं अत: सहेजकर रखे जा सकते हैं। पर एस एम एस को सहेजकर नहीं रखा जाता। इनमें केवल कामकाज की बात होती है। इसे लोग जल्दी ही भूल जाते हैं। भला आप कितने संदेशों को सहेजकर रख सकते हैं। तमाम महान हस्तियों की यादगार तो इनके लिखे पत्रों में होती है अत: उनके लिखे पत्र धरोहर हो सकते हैं।

प्रश्न 5.
क्या चिद्वियों की जगह कभी फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल ले सकते हैं?
उत्तर:
फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल कभी भी चिट्ठियों की जगह नहीं ले सकते। ये सब संचार के आधुनिक साधन अवश्य हैं। इनसे व्यावसायिक कामकाज तो चलाया जा सकता है, पर इनमें पत्रों के गुण नहीं आ सकते। पत्र से आत्मीयता का जो बोध होता है वह इनमें नहीं आ सकता। लोग पत्रों को संभालकर रखते हैं. पर फैक्स, ई-मेल या टेलीफोन और मोबाइल के संदेश अपनी सूचना देकर अर्थहीन हो जाते हैं। पत्रों के संकलन साहित्य का रूप भी ले लेते हैं।

पाठ से आगे

प्रश्न 1.
किसी को बिना टिकट सादे लिफाफे पर सही पता लिखकर पत्र बैरंग भेजने पर कौन-सी कठिनाई आ सकती है? पता कीजिए।
उत्तर:
सही पता लिखने पर पत्र अपने ठिकाने पर तो पहुँच जाएगा पर संबंधित व्यक्ति को तभी मिलेगा जब वह डाक टिकट तथा जुर्माने का भुगतान करेगा। अतः लिफाफे पर उणि डाक टिकट अवश्य लगानी चाहिए।

प्रश्न 2.
पिन कोड भी संख्याओं में लिखा गया एक पता है, कैसे?
उत्तर:
पिन कोड से उस क्षेत्र का पता चल जाता है जहाँ पत्र भेजा गया है।
पहले अंकों में शहर का संकेत है, फिर उस क्षेत्र, नगर या कॉलोनी का पता होता है। जैसे 110059 पिन कोड है।
1100 दिल्ली का संकेत है।
59 पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी- क्षेत्र का कोड है।
पिन कोड संख्याओं में लिखा पता भले ही हो, पर यह पूरा पता नहीं है। इससे किसी निश्चित मकान या व्यक्ति तक नहीं पहुँचाया जा सकता। पिन कोड से पत्र की छंटाई में सुविधा अवश्य
होती है। इससे पत्र जल्दी पहुँचता है।

प्रश्न 3.
ऐसा क्यों होता था कि महात्मा गाँधी को दुनिया भर से पत्र ‘महात्मा गाँधी-इंडिया’ पता लिखकर आते थे?
उत्तर:
ऐसा इसलिए होता था क्योंकि उन दिनों महात्मा गाँधी सर्वाधिक लोकप्रिय एवं चर्चित व्यक्ति थे। वे कहाँ होंगे,
इसका पता सभी को रहता था। अतः पत्र कहीं से आया हो, उन तक पहुंच जाता था। यह उनकी लोकप्रियता का पर्याय था।

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अनुमान और कल्पना

1. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता ‘भगवान के डाकिए’ आपकी पाठ्यपुस्तक में है। उसके आधार पर पक्षी और बादल को डाकिए की भाँति मानकर अपनी कल्पना से लेख लिखिए।
उत्तर:
पक्षी और बादल डाकिए का काम करते हैं। डाकिया वह होता है जो किसी का संदेश किसी तक पहुंचाए। पक्षी और बादल भी प्रकृति का संदेश दूसरों तक पहुँचाते हैं। इनके लाए पत्र भले ही आम आदमी की समझ में न आते हों पर उनके संदेश जिनके लिए होते हैं, वे उन्हें शीघ्र समझ लेते हैं। पक्षी और बादल प्रकृति के संदेश वाहक हैं।

2. संस्कृत साहित्य के महाकवि कालिदास ने बादल को संवादवाहक बनाकर ‘मेघदूत’ नाम का काव्य लिखा है। ‘मेघदूत’ के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर:
संस्कृत के महान कवि कलिदास ने बादल को संवादवाहक बनाकर ‘मेघदूत’ नामक काव्य रचा था।
उस काव्य में बताया गया है कि धनपति कुबेर ने यक्ष को निर्वासन को दंड दिया था। तब यक्ष ने अपनी प्रिया के पास बादल को संदेश वाहक बनाकर अपना संदेश भिजवाया था।

3. पक्षी को संदेशवाहक बनाकर अनेक कविताएँ एवं गीत लिखे गए हैं। एक गीत है-जा-जा रे कागा विदेशवा, मेरे पिया से कहियो संदेशवा। इस तरह के तीन गीतों का संग्रह कीजिए। प्रशिक्षित पक्षी के गले में पत्र बांधकर निर्धारित स्थान तक पत्र भेजने का उल्लेख मिलता है। मान लीजिए आपको एक पक्षी को संदेश वाहक बनाकर का भेजना हो तो आप वह पत्र किसे भेजना चाहेंगे और उसमें क्या लिखना चाहेंगे?
उत्तर:
पक्षियों को और विशेषकर कबूत को अपना संदेशवाहक । बनाकर भेजने की परंपरा प्राचीन काल में रही है। पत्र को उसके गले में बाँध दिया जाता था और वह निर्धारित स्थान तक पत्र पहुँचा देता था।

4. केवल पढ़ने के लिए दी गई रामदरश मिश्र की कविता ‘चिट्ठियाँ’ को ध्यानपूर्वक पढ़िए और विचार कीजिए क्या यह कविता केवल लेटर बॉक्स में पड़ी निर्धारित पते पर जाने के लिए तैयार चिट्ठियों के बारे में है? या रेल के डब्बे बैठी सवारी भी उन्हीं चिट्ठियों की तरह हैं जिनके पास उनके गंतव्य तक की टिकट है पत्र के पते की तरह? और क्या विद्यालय भी एक लेटर बाक्स की भाँति नहीं है जहाँ से उत्तीर्ण होकर विद्यार्थी अनेक क्षेत्रों में चले जाते हैं? अपनी कल्पना को पंख लगाइए और मुक्त मन से इस विषय में विचार-विमर्श कीजिए।
उत्तर:
रामदरथ मिश्र की कविता
चिट्ठियाँ
लेटरबक्स में पड़ी चिट्ठियाँ
अनंत सुख-दुख वाली अनंत चिट्ठियाँ
लेकिन कोई किसी से नहीं बोलती
सभी अकेले-अकेले
अपनी मंजिल पर पहुंचने का इंतजार करती हैं।
कैसा है यह एक साथ होना
दूसरे के साथ हँसना न रोना
क्या हम भी
लेटरबक्स की चिट्ठियाँ हो गए हैं।
(विद्यार्थी अपने मन के विचार लिखें।)

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भाषा की बात

1. किसी प्रयोजन विशेष से संबंधित शब्दों के साथ पत्र शब्द जोड़ने से कुछ शब्द बनते हैं जैसे-प्रशस्ति पत्र, समाचार पत्र। – आप ना पत्र के योग से बनने वाले दस शब्द लिखिए
उत्तर:
व्यापारिक पत्र – चेतावनी पत्र
साहित्यिक पत्र – प्रेरक पत्र
स्मरण पत्र – प्रेम पत्र
घरेलू पत्र – सरकारी पत्र
शोक पत्र – शिकायती पत्र

2. ‘व्यापारिक’ शब्द व्यापार शब्द के साथ ‘इक’ प्रत्यय के. योग से बना है। इक प्रत्यय के योग से बनने वाले शब्दों को अपनी पाठ्यपुस्तक से खोजकर लिखिए।
उत्तर:
पारिवारिक, सामाजिक, नैतिक, धार्मिक, राजनीतिक।

3. दो स्वरों के मेल से होने वाले परिवर्तन को स्वर संधि कहते हैं; जैसे-रवीन्द्र – रवि + इन्द्र। इस संधि में इ+ ई हुई है। इसे दीर्घ संधि कहते हैं। दीर्घ स्वर संधि के और उदाहरण खोजकर लिखिए। मुख्य रूप से स्वर संधियाँ चार प्रकार की मानी गई हैं-दीर्घ, गुण, वृद्धि और यण।
हस्व या दीर्घ अ, इ, उ के बाद हस्व या दीर्घ अ, इ, उ, आ आए तो ये आपस में मिलकर क्रमशः दीर्घ आ, ई, ऊ हो जाते हैं, इसी कारण इस संधि को दीर्ध संधि कहते हैं। जैसे-संग्रह + आलय – संग्रहालय, महा + आत्मा – महात्मा।
इस प्रकार के कम-से-कम दस उदाहरण खोजकर लिखिए और अपनी शिक्षिका/शिक्षक को दिखाइए।
उत्तर:
उदाहरण:
1. दीर्घ संधि:
ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ, से परे क्रमशः ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ आ जाएँ तो दोनों मिलकर क्रमशः आ, ई, ऊ हो जाते हैं
(क) अ + अ = आ
परम + अणु – परमाणु
वेद + अत – वेदांत।
मत + अनुसार = मतानुसार
धर्म + अर्थ – धर्मार्थ।

अ + आ = आ
हिम + आलय = हिमालय
रत्न + आकर = रत्नाकर।
धन + आदेश = धनादेश
परम +. आत्मा = परमात्मा।

आ + अ = आ
विद्या + अर्थी = विद्यार्थी
दीक्षा + अंत = दीक्षांत।
परीक्षा + अर्थी = परीक्षार्थी
रेखा + अंकित – रेखांकित।

आ + आ + आ
विद्या + आलय = विद्यालय
कारा + आवास = कारावास।
मदिरा + आलय = मदिरालय
दया + आनंद = दयानन्द।

(ख) इ + इ = ई
रवि + इन्द्र – रवीन्द्र
अभि + इष्ट = अभीष्ट।
कपि + इन्द्र = कपींद्र
अति + इव = अतीव।

इ + ई = ई
गिरि + ईश = गिरीश
कपि + ईश्वर = कपीश्वर।
हरि + ईश = हरीश
फणि + ईश्वर = फणीश्वर।

ई + इ = ई
मही + इन्द्र = महीन्द्र
नदी + इन्द्र = नदीन्द्र।

ई + ई = ई
मही + ईश = महीश
रजनी + ईश – रजनीश।

(ग) उ + उ = ऊ
लघु + उत्तर = लघूत्तर
गुरु + उपदेश = गुरूपदेश।
सु + उक्ति = सूक्ति
अनु + उदित = अनूदित।

उ + ऊ = ऊ
लघु + ऊर्मि = लघुर्मि
सिन्धु + ऊर्मि = सिन्धूमि।

ऊ + उ = ऊ
वधू + उत्सव = वधूत्सव।

ऊ + ऊ = ऊ
वधू + ऊर्मि = वधूर्मि।

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2. गुण संधि: ‘अ’ और ‘आ’ से परे यदि हस्व या दीर्घ ‘इ’. ‘उ’ या ‘ऋ’ आएँ तो वे क्रमशः ‘ए’, ‘ओ’ और ‘अर्’ हो जाते हैं-
(क) अ + इ = ए
नर + इंद्र – नरेंद्र।
भारत + इंदु – भारतेंदु।

अ + ई = ए
गण + ईश = गणेश।
परम + ईश्वर = परमेश्वर।

आ + इ = ए
महा + इंद्र – महेंद्र।
यथा + इष्ट = यथेष्ट।

आ + ई = ए
रमा + ईश = रमेश।
राका + ईश = राकेश।

(ख) अ + उ = ओ
सूर्य + उदय = सूर्योदय।
पर + उपकार – परोपकार।

अ + ऊ = ओ
नव + ऊढ़ा = नवोढ़ा।

आ + उ = ओ
महा + उत्सव = महोत्सव।

आ + ऊ = ओ
महा + मा = महोमि।

(ग) अ + ऋ = अर्
देव + ऋषि = देवर्षि।
सप्त + ऋषि = सप्तर्षि।

आ + ऋ = अर्
महा + ऋषि = महर्षि।

3. वृद्धि संधि: ‘अ’ या ‘आ’ से परे ‘ए’ या ‘ऐ’ हों तो दोनों को मिलाकर ‘ऐ’ तथा ‘औ’ या ‘औ’ हों तो उन्हें मिलाकर ‘औ’ हो जाता है।
अ + ए = ऐ → एक + एक = एकैक।
आ + ए = ऐ → सदा + एव = सदैव।
अ + ऐ = ऐ → मत + ऐक्य = मतैक्य।
आ + ऐ = ऐ → महा + ऐश्वर – महैश्वर्य।
अ + ओ = औ → जल + ओध = जलौध।
आ + ओ = औ → महा + औध = महौधा
अ + औ = औ → वन + औषध = वनौषध।
आ + औ = औ → महा + औषध = महौषधा

4. यण संधि: ह्रस्व या दीर्घ ‘इ’, ‘उ’, ‘ऋ’ से परे भिन्न जाति का कोई स्वर आ जाए तो इ-ई को ‘य’, उ-3 को ‘व’ और ‘ऋ’ को ‘र’ हो जाता है।
इ + अ = य
अति + अधिक = अत्यधिक।
अति + अंत – अत्यंत।

इ + आ = या
इति + आदि = इत्यादि।
अति + आचार – अत्याचार।

इ + उ = यु
प्रति + उत्तर = प्रत्युत्तर।
उपरि + उक्त = उपर्युक्त।

उ + अ = व → मनु + अंतर = मन्वन्तर।
उ + आ = वा → सु + आगत = स्वागत।
उ + ए = वे → अनु + एषण – अन्वेषण।
ऊ + आ = वा → वधू + आगमन = वध्वागमन।
ऋ + अ = र → पितृ + अनुमति = पित्रनुमति।
ऋ + आ = रा → पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा।

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HBSE 8th Class Hindi चिट्ठियों की अनूठी दुनिया Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
पत्रों की दुनिया कैसी है? साहित्य एवं मानव-सभ्यता के विकास में पत्रों’ की क्या। भूमिका है?
उत्तर:
पत्रों की दुनिया भी अजीबो-गरीब है और उसकी उपयोगिता हमेशा से बनी रही है। पत्र जो काम कर सकते हैं, वह संचार का आधुनिकतम साधन नहीं कर सकता है। पत्र जैसा संतोष फोन या एसएमएस का संदेश कहाँ दे सकता है। पत्र एक नया सिलसिला शुरू करते हैं और राजनीति, साहित्य तथा कला के क्षेत्रों में तमाम विवाद और नयी घटनाओं की जड़ भी पत्र ही – होते हैं। दुनिया का तमाम साहित्य पत्रों पर केंद्रित है और मानव सभ्यता के विकास में इन पत्रों ने अनूठी भूमिका निभाई है।

प्रश्न 2.
पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 1953 में क्या कहा था? पाठ के आधार पर बताइए।
उत्तर:
पंडित जवाहर लाल नेहरू ने सन् 1953 में सही ही कहा था कि-‘हजारों सालों तक संचार का साधन केवल हरकारे (रनर्स) या फिर तेज घोड़े रहे हैं। उसके बाद पहिए आए। पर रेलवे और तार से भारी बदलाव आया। तार ने रेलों से भी तेज गति से संवाद पहुँचाने का सिलसिला शुरू किया। अब टेलीफोन, वायरलस और आगे रेडार-दुनिया बदल रहा है।’

प्रश्न 3.
महात्मा गाँधी के पास पत्र कैसे पहुँचते थे? वे उन पत्रों का जवाब कैसे देते थे? लोग उनके लिखे पत्रों का क्या करते थे?
उत्तर:
महात्मा गाँधी के पास दुनिया भर से तमाम पत्र केवल महात्मा गाँधी-इंडिया लिखे आते थे और वे जहाँ भी रहते थे, वहाँ तक पहुँच जाते थे। आजादी के आंदोलन के कई अन्य दिग्गज हस्तियों के साथ भी ऐसा ही था। गाँधीजी के पास देश दुनिया से बड़ी संख्या में पत्र पहुँचते थे, पर पत्रों का जवाब देने के मामले में उनका कोई जोड़ नहीं था।

कहा जाता है कि जैसे ही उन्हें पत्र मिलता था, उसी समय वे उसका जवाब भी लिख देते थे। अपने हाथों से ही ज्यादातर पत्रों का जवाब देते थे। पत्र भेजने वाले लोग उन पत्रों को किसी प्रशस्तिपत्र से कम नहीं मानते हैं और कई लोगों ने तो पत्रों को फ्रेम करा कर रख लिया है। यह है पत्रों का जादू। यही नहीं, पत्रों के आधार पर ही कई भाषाओं में जाने कितनी किताबें लिखी जा चुकी हैं।

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

1. पिछली शताब्दी में पत्र लेखन ने एक कला का रूप ले लिया। डाक व्यवस्था के सुधार के साथ पत्रों को सही दिशा देने के लिए विशेष प्रयास किए गए। पत्र संस्कृति विकसित करने के लिए स्कूली पाठ्यक्रमों में पत्र लेखन का विषय भी शामिल किया गया। भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में ये प्रयास चले और विश्व डाक संघ ने अपनी ओर से काफी प्रयास किए।

विश्व डाक संघ की ओर से 16 वर्ष से कम आयु वर्ग बच्चों के लिए पत्र लेखन प्रतियोगिताएँ आयोजित करने का सिलसिला सन् 1972 से शुरू किया गया। यह सही है कि खास तौर पर बड़े शहरों और महानगरों में संचार साधनों के तेज विकास तथा अन्य कारणों से पत्रों की आवाजाही प्रभावित हुई है, पर देहाती दुनिया आज भी चिड़ियों से ही चल रही है। फैक्स, ईमेल, टेलीफोन तथा मोबाइल ने चिनियाँ की तेजी को रोका है, पर व्यापारिक डाक की संख्या लगातार बढ़ रही है।
प्रश्न:
1. पत्र लिखने ने पिछली शताब्दी में क्या रूप ले लिया है?
2. पत्र-संस्कृति के विकास के लिए क्या प्रयास किया गया?
3. विश्व डाक संघ ने क्या प्रयास किया?
4. समाचार भेजने के लिए क्या-क्या साधन प्रयोग किए जा रहे हैं?
उत्तर:
1. पिछली शताब्दी में पत्र लिखने ने एक कला का रूप ले लिया है।
2. पत्र-संस्कृति के विकास के लिए स्कूली पाठ्यक्रमों में पत्र लेखन को एक विषय के रूप में शामिल किया गया है।
3. विश्व डाक संघ द्वारा 16 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों के लिए पत्र-लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन 1972 से शुरू किया गया है।
4. समाचार भेजने के लिए फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल आदि माध्यमों का प्रयोग किया जा रहा है।

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 5 चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

2. पत्र व्यवहार की परंपरा भारत में बहुत पुरानी है। पर इसका असली विकास आजादी के बाद ही हुआ है। तमाम सरकारी विभागों की तुलना में सबसे ज्यादा गुडविल डाक विभाग की ही है। इसकी एक खास वजह यह भी है कि यह लोगों को जोड़ने का काम करता है। घर-घर तक इसकी पहुँच है।

संचार के तमाम उन्नत साधनों के बाद भी चिट्ठी-पत्री की हैसियत बरकरार है। शहरी इलाकों में आलीशान हवेलियाँ हों या फिर झोपड़पट्टियों में रह रहे लोग, दुर्गम जंगलों से घिरे गाँव हों या फिर बर्फबारी के बीच जी रहे पहाड़ों के लोग, समुद्र तट पर रह रहे मछुआरे हों या फिर रेगिस्तान की ढाँढियों में रह रहे लोग, आज भी खतों का ही सबसे बेसब्री से इंतजार होता है। एक दो नहीं, करोंड़ों लोग खतों और अन्य सेवाओं के लिए रोज भारतीय डाकघरों के दरवाजों तक पहुँचते हैं और इसकी बहु आयामी भूमिका नजर आ रही है। दूर देहात में लाखों गरीब घरों में चूल्हे मनीआर्डर अर्थव्यवस्था से ही जलते हैं। गाँवों या गरीब बस्तियों में चिट्ठी या मनीआर्डर लेकर पहुंचने वाला डांकिया देवदूत के रूप में देखा जाता है।
प्रश्न:
1. भारत में पत्र-यवहार की परंपरा कैसी है?
2. सबसे ज्यादा गुडविल किस सरकारी विभाग की है? इसका कारण क्या है?
3. कौन खतों का बेसब्री से इंतजार करते हैं?
4. गाँवों में डाकिया को किस रूप से देखा जाता है और क्यों? और क्यों?
उत्तर:
1. भारत में पत्र-व्यवहार की परंपरा बहुत पुरानी है। हाँ, इसका विकास आजादी के बाद ज्यादा हुआ है।
2. सारे सरकारी विभागों में डाक विभाग की गुडविल सबसे ज्यादा है। इसका कारण यह है कि यह पत्रों द्वारा लोगों को जोड़ने का काम करता है।
3. देश के सभी भागों में लोग खतों का बेसब्री से इंतजार. करते हैं, भले ही वह आलीशान हवेलियों में रहते हों अथवा पहाड़ों पर रहते हों या समुद्र तट के मछुआरे हों अथवा रेगिस्तानी या बर्फीले क्षेत्रों में रहने वाले लोग हों।
4. गाँवों में डाकिया को देवदूत के रूप में देखा जाता है क्योंकि उसके द्वारा लाए मनीआर्डर के रुपयों से ही उनके घरों के चूल्हे जलते हैं।

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया Summary in Hindi

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया पाठ का सार

पत्रों की दुनिया बड़ी ही अनोखी है। पत्र जो काम कर सकते हैं वह काम संचार का कोई भी साधन नहीं कर सकता। पत्र लिखने . और पढ़ने से बड़ा संतोष मिलता है। अनेक घटनाओं और विवादों की जड़ में पत्र ही होते हैं। मानव-सभ्यता के विकास में पत्रों ने अनूठी भूमिका निभाई है। पत्रों को विविध भाषाओं में अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है, जैसे उर्दू में खत, संस्कृत में पत्र, कन्नड में कागद, तेलगु मे उत्तरम, तमिल मे कब्दि कहा जाता है। पत्र लिखना भी एक कला है। दुनिया में रोजाना करोड़ों पत्र इधर से उधर जाते हैं।

पिछली शताब्दी में पत्र लिखने ने एक कला का रूप ले लिया। पत्र-लेखन को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया गया। विश्व डाकसंघ की ओर से 16 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों के लिए पत्र-लेखन प्रतियोगिताओं के आयोजन का सिलसिला 1972 में शुरू हुआ। आजकल फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल के प्रयोग ने चिट्ठियों की तेजी को भले ही रोका है, पर व्यापारिक डाक लगातार बढ़ रही है। अब भी लोग पत्रों का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

आज देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो अपने पुरखों की चिट्ठियों को सहेज और सँजोकर रख रहे हैं। बड़े-बड़े लेखक, पत्रकार, उद्यमी, कवि, प्रशासक, संन्यासी या किसान की पत्र रचनाएँ अनुसंधान का विषय हैं। पंडित नेहरू ने अपनी पुत्री इंदिरा गाँधी को भी पत्र लिखे थे। हम पत्रों को तो सहेजकर रख लेते हैं, पर एस एम एस संदेशों को जल्दी ही भूल जाते हैं। महात्मा गाँधी द्वारा लिखे गए पत्र बहुत बड़ी धरोहर के रूप में सुरक्षित हैं। दुनिया के संग्रहालयों में जानी-मानी हस्तियों के पत्रों के अनूठे संकलन हैं। ये पत्र देश, काल और समाज को जानने-समझने का असली पैमाना हैं।

महात्मा गाँधी के पास दुनिया भर से पत्र आते थे। पते के रूप में उन पर केवल महात्मा गाँधी-इंडिया लिखा होता था और वे जहाँ भी होते वहीं पहुँच जाते थे। गाँधीजी के पास दुनिया भर से बड़ी संख्या में पत्र पहुँचते थे। वे उनका जवाब भी भिजवाते थे। वे अपने हाथों से ही अधिकांश पत्रों का जवाब लिखते थे। लिखते-लिखते जब उनका दाहिना हाथ दर्द करने लगता था तब वे बाएँ हाथ से लिखने में जुट जाते थे। पत्र पाने वाले लोग गाँधीजी के पत्रों को प्रशस्तिपत्र से कम नहीं मानते थे। कई लोगों ने तो उन पत्रों को फ्रेम करा लिया था। यह उनके पत्रों को जादू ही तो था। पत्र किसी दस्तावेज से कम नहीं होते। पत्रों से संबंधित कई पुस्तकें मिल जाती हैं। पत्रों के संकलन का काम डाक मंगलमूर्ति ने किया है। पत्रों में प्रेमचंद, नेहरू जी, गाँधी जी तथा रवीन्द्रनाथ टैगोर के पत्र बहत प्रेरक हैं। महात्मा गाँधी और रवीन्द्रनाथ टैगोर के मध्य 1915 से 1941 तक जो पत्राचार हुआ. उनसे नए-नए तथ्यों तथा उनकी मनोदशा का लेखा-जोखा मिलता है।

पत्र-व्यवहार की परंपरा भारत में बहुत पुरानी है। पर इसका असली विकास आजादी के बाद ही हुआ। डाक विभाग की पहुंच घर-घर तक है। आज भी लोग खतों का बेसब्री से इंतजार करते हैं। दूर देहात में लाखों गरीब घरों में चूल्हे मनीआर्डर की अर्थव्यवस्था से ही जलते हैं। गाँवों में आज भी डाकिया देवदूत के रूप में देखा जाता है।

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 5 चिट्ठियों की अनूठी दुनिया

चिट्ठियों की अनूठी दुनिया शब्दार्थ

उपयोगिता = लाभदायी (use), आधुनिकतम = नवीनतम (modern), केंद्रित = टिके होना (centred), तलाशना = ढूंढना (10 search), अहमियत = महत्त्व (importance), प्रयास – कोशिश (Efforts), विकसित = फली-फूली (Developed), व्यापारिक = व्यापार संबंधी (related to bursiness), बेसनी = सन के बिना (restless), मिसाल = उदाहरण (example), पुरखे = पूर्वज (ancestors), संकलन = संग्रह (collection), दिग्गज – बड़ी (Big. great), हस्ती = व्यक्तित्व (personalities), प्रशस्तिपत्र = गुणगान गाने वाला पत्र (letter of praive), दस्तावेज = जरूरी कागज (documents), तथ्यों = सच्चाइयों (facts), मनोदशा = मन की दशा (position of mind), गुडविल = नेकनामी (goodwill), हैसियत = दशा (status), बहुआयामी = अनेक रूपों वाला (malti dimensional), देवदूत = फरिश्ता (angel).

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HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 4 दीवानों की हस्ती

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 4 दीवानों की हस्ती Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 4 दीवानों की हस्ती

HBSE 8th Class Hindi दीवानों की हस्ती Textbook Questions and Answers

कविता से

प्रश्न 1.
कवि ने अपने आने को ‘उल्लास’ और जाने को ‘आँसू बनकर बह जाना’ क्यों कहा है?
उत्तर:
कवि अपने आने को उल्लास इसलिए कहता है क्योंकि किसी भी नए स्थान पर बड़े उत्साह के साथ जाता है। वहाँ जाकर उसे प्रसन्नता होती है। पर जब वह उस स्थान को छोड़कर आगे जाता है तब उसे दु:ख होता है। विदाई के क्षणों में उसकी आँखों से आँसू बह निकलते हैं।

प्रश्न 2.
भिखमंगों की दुनिया में बेरोक प्यार लुटाने वाला कवि ऐसा क्यों कहता है कि वह अपने हृदय पर असफलता का एक निशान भार की तरह लेकर जा रहा है? क्या वह निराश है या प्रसन्न है?
उत्तर:
कवि इस दुनिया को भिखमंगों की दुनिया बताता है। यह दुनिया केवल लेना जानती है, देना नहीं। कवि दुनिया के लोगों को अपना समझकर उन पर अपना प्यार लुटाता है, पर उसे बदले में वैसा प्यार नहीं मिलता। अतः वह अपने हृदय पर असफलता का भार लेकर जा रहा है। कवि निराश है।

प्रश्न 3.
कविता में ऐसी कौन-सी बात है जो आपको सबसे अच्छी लगी?
उत्तर:
कविता में हमें कवि का जीवन के प्रति दृष्टिकोण अच्छा लगा। ऐसा दृष्टिकोण रखने वाला व्यक्ति ही सुखी रह सकता है।

कविता से आगे

प्रश्न 1.
जीवन में मस्ती होनी चाहिए, लेकिन कब मस्ती हानिकारक भी हो सकती है? सहपाठियों के बीच चर्चा कीजिए।
उत्तर:
‘जीवन में मस्ती’ विषय पर विद्यार्थी अपने सहपाठियों के मध्य चर्चा करें। दोनों पक्षों पर विचार करें।

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 4 दीवानों की हस्ती

अनुमान और कल्पना

1. एक पंक्ति में कवि ने यह कहकर अपने अस्तित्व को नकारा है कि “हम दीवानों की क्या हस्ती है आज यहाँ, कल वहाँ चले।” दूसरी पंक्ति में उसने यह कहकर अपने अस्तित्व को महत्त्व दिया है कि “मस्ती का आलम साथ चला, हम धूल उड़ाते जहाँ चले।” यह फाकामस्ती का उदाहरण है। अभाव में भी खुश रहना फाकामस्ती कही जाती है। कविता में इस प्रकार की अन्य पंक्तियाँ भी हैं, उन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और अनुमान लगाइए कि कविता में परस्पर विरोधी बातें क्यों की गई हैं?
→ अन्य विरोधी बातों वाली काव्य-पंक्तियाँ
आए बनकर उल्लास अभी,
आँसू बनकर बह चले अभी।
(उल्लास भी आँसू भी)
हम भिखमंगों की दुनिया में,
स्वच्छंद लुटाकर प्यार चले।
हम एक निसानी-सी उर पर
ले असफलता का भार चले।
(प्यार लुटाना-असफलता का भार)

भाषा की बात

संतुष्टि के लिए कवि ने ‘छककर’, “जी भरकर’ और ‘खुलकर’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया है। इसी भाव को व्यक्त करने वाले कुछ और शब्द सोचकर लिखिए, जैसे-हँसकर, गाकर।

  • पढ़कर – खिलकर
  • सुनकर – तृप्त होकर

HBSE 8th Class Hindi दीवानों की हस्ती Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
इस कविता में प्रयुक्त ‘दीवाना’ शब्द के निम्नलिखित अर्थों में सर्वोपयुक्तं अर्थ को चुनिए:
(क) पागल
(ख) लगनशील
(ग) आवारा
(घ) मनमौजी।
उत्तर:
मनमौजी।

प्रश्न 2.
कवि ने इस कविता में दीवानों की क्या विशेषताएँ बताईं?
उत्तर:
कवि ने इस कविता में बताया है कि दीवाने मनमौजी स्वभाव के होते हैं। वे एक जगह टिककर नहीं बैठते। वे लोगों के सुख-दुख के साथी होते हैं। विशेषकर गरीबों के लिए अपना प्यार लुटाते हैं। दीवाने मान-अपमान, भलाई-बुराई, अपने-पराए की भावना से ऊपर उठे होते हैं। वे किसी दूसरे के बनाए बंधन में बंधकर रहना नहीं जानते। वे किसी को बद्दुआ नहीं देते। सब को समान दृष्टि से देखते हैं।

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प्रश्न 3.
इस कविता में जीवन के प्रति कौन-सा दृष्टिकोण झलकता है?
उत्तर:
इस कविता में जीवन को पूरी मस्ती के साथ जीने का दृष्टिकोण झलकता है। हमें स्वच्छंद जीवन जीना चाहिए। किसी के बंधन में बंधकर जीना ठीक नहीं है। गरीबों के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए। किसी के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित भाव कविता की किन पंक्तियों में व्यक्त हुए हैं?
1. हम बंधनों में रहकर भी आजाद रहने लगे।
2. हमने संसार को कुछ दिया और संसार से कुछ लिया भी।
3. हम मन में असफलता के बोझ को वहन करते चले।
उत्तर:
कविता की निम्नलिखित पंक्तियों में ये भाव व्यक्त हुए हैं:
1. हम स्वयं बंधे थे, और स्वयं हम अपने बंधन तोड़ चले
2. जग से उसका कुछ लिए चले, – जग को अपना कुछ दिए चले।
3. ले एक निशानी सी उर पर, ले असफलता का भार चले।

प्रश्न 5.
इस कविता से आपको क्या प्रेरणा मिलती
उत्तर:
इस कविता में हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें मनमौजी प्रवृत्ति का होना चाहिए। हमें बंधनों में बंधकर नहीं रहना चाहिए। स्वच्छंद जीवन जीना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। लोगों के दीवानों की हस्ती [वसंत-भाग-3] सुख-दुःख में साझीदार होने की प्रेरणा भी हमें इस कविता से मिलती है।

प्रश्न 6.
सारी कविता पढ़कर कवि की किस मनःस्थिति का बोध होता है?
(क) वैराग्य की
(ख) संतोष की
(ग) जीवन से भागने की
(घ) सुख-दुख में समान भाव से मस्त रहने की।
उत्तर:
सारी कविता पढ़कर कवि की “सुख-दुःख में समान भाव से मस्त रहने की” पुनः स्थिति का बोध होता है।

प्रश्न 7.
दीवाने टिककर क्यों नहीं बैठते?
उत्तर:
दीवानों का जीवन स्वच्छंद होता है। वे जहाँ-तहाँ घूमते रहते हैं। एक जगह टिकने में वे बंधनों का अनुभव करते हैं। किसी के बंधन स्वीकार नहीं कर सकते। वे कभी यहाँ तो कभी वहाँ जा पहुँचते हैं।

प्रश्न 8.
इस कविता का प्रतिपाद्य लिखो।
उत्तर:
‘दीवानों की हस्ती’ शीर्षक कविता का प्रतिसाद्य है कि हमें सुख-दुःख में समान भाव, से मस्त बने रहना चाहिए। मनमौजी जीवन आनंद से परिपूर्ण होता , सी में जीवन का सच्चा रूप झलकता है। हमें सभी प्रकार के भदों से ऊपर उठकर जीवन बिताना चाहिए। सामाजिकता का बोध भी हमारे अंदर बमा रहना चाहिए। त्याग और परोपकार की भावना अपनानी चाहिए। आजादी और गतिशीलता जीवन में आवश्यक है। संसार की स्वार्थ भावना से हमें कभी दुःखी नहीं होना चाहिए। सभी को अपना प्यार बाँटना चाहिए। बंधनों में बंधकर नहीं रहना चाहिए।

दीवानों की हस्ती Summary in Hindi

दीवानों की हस्तीपाठ का सार

जीवन-परिचय : भगवतीचरण वर्मा का जन्म 30 अगस्त 1903 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के शफीपुर ग्राम में हुआ था। पाँच वर्ष की उम्र में ही पिता का देहान्त हो जाने के कारण छोटी उम्र में ही इनके कंधे पर परिवार का भार आ गया। जीवन संघर्ष में जूझते हुए इन्होंने बी.एल.एल.बी. की शिक्षा प्राप्त की और कानपुर में वकालत करने लगे। लेकिन वकालत में इनका दिल न लगा

और ये अधिकांश समय साहित्य-सृजन को देने लगे। आठवीं कक्षा में पढ़ते समय इनकी पहली कविता ‘प्रताप’ में छपी थी। वकालत करते समय तक ये कवि के रूप में विख्यात हो गए थे। कविता से प्रारंभ करके इन्होंने कहानी, उपन्यास, निबन्ध, नाटक आदि बहुत कुछ लिखा।

जीविका के लिए उन्होंने रेडियो स्टेशनों में नौकरी की, सिनेमा के लिए कहानियाँ और संवाद लिखे, पत्रों का संपादन एवं प्रकाशन किया। काफी समय तक ये संसद सदस्य भी रहे। इनका देहान्त 1980 में दिल्ली में हुआ।

रचनाएँ : भगवती जी के कहानी संग्रह इस प्रकार हैं : ‘दो बाँके’, ‘इन्स्टालमेंट’, ‘राख और चिनगारी’। ‘मोर्चा बन्दी’ नाम से चित्रलेखा, सामर्थ्य और सीमा, रेखा, सबहि बचावत राम गुसाईं, प्रश्न और मरीचिका, पतन, भूले बिसरे चित्र। ‘चित्रलेखा’ उपन्यास पर बनी फिल्म बड़ी प्रसिद्ध हुई थी। इन्हें साहित्य अकादमी का पुरस्कार भी मिल चुका है।

आपने कविताएँ, रेडियो रूपक तथा नाटक भी लिखे हैं। इनकी जिन काव्य-कृतियों ने ख्याति पाई है, इनमें प्रमुख हैं-‘मधुकण’, ‘मानव’, ‘प्रेम संगीत’।

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विशेषताएँ : वर्मा जी छायावादोत्तर काल के कवि हैं, अतः उनके काव्य पर छायावादी संस्कारों की स्पष्ट छाया है। परंतु वर्मा जी की विशिष्टता इस बात में है कि इन्होंने छायावाद के कल्पना अतिरेक और वायवीय सूक्ष्मता के विरुद्ध ऐसी कविताएँ दीं, जिनका संबंध पृथ्वी के ठोस जीवन से है और जो मर्म को छूती हैं, मात्र चमत्कृत नहीं करतीं। इन कविताओं में कोमलता है, कामना की मोहिनी है, सौन्दर्य की लालसा है। परन्तु इन अलबेले भावों को इस प्रकार व्यक्त किया गया है कि वे तत्काल चेतना को मुग्ध कर देते हैं।

आधुनिक कवि होने के कारण वर्मा जी समाजवादी विचारधारा से अछूते नहीं रहे, परंतु उनमें कम्युनिस्ट कट्टरता और भावावेश नहीं है, उनमें भी मानव और समाज के दलित वर्गों के प्रति सहानुभूति उपलब्ध होती है और इस भाव को. इन्होंने अपनी कई मार्मिक कविताओं में व्यक्त किया है। परंतु यह मनोदृष्टि उतनी समाजवाद की आभारी नहीं, जितनी गाँधीवाद की। उनकी कविताएँ ‘ भैसा गाड़ी’, ‘ट्राम’, ‘राजा साहिब का वायुयान’ अपने परिवेश पर यथार्थ-निष्ठ दृष्टि डालती हैं व वह मनोमुद्रा कई बार बेधक व्यंग्य से भरी कविताओं को भी जन्म देती है।

दीवानों की हस्ती कविता का सार

“दीवानों की हस्ती’ शीर्षक कविता में भगवतीचरण वर्मा ने बताया है कि दीवाने कभी किसी बंधन को स्वीकार नहीं करते। वे एक जगह टिककर नहीं रहते। वे कभी यहाँ तो कभी दूसरी जगह पहुंच जाते हैं। संसार के लोगों के मध्य सुख-दुख को बाँटते चलते हैं। गरीबों के मध्य अपना प्यार लुटाते चलते हैं। उनका जीवन मान-अपमान की भावना से परे होता है। वे तो हँस-हंस कर आगे बढ़ते चले जाते हैं। उन्हें अच्छे मतों की परवाह भी नहीं होती। सब लोग उनके अपने होते हैं। दीवाने अपने बनाए बंधनों में बंधे होते हैं, जिन्हें वे जब चाहे तोड़ देते हैं। उनका जीवन पूरी तरह अपना होता है।

दीवानों की हस्ती काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. हम दीवानों की क्या हस्ती,
हैं आज यहाँ कल वहाँ चले,
मस्ती का आलम साथ चला,
हम धूल उड़ाते जहाँ चले।
आए बनकर उल्लास अभी,
आँसू बनकर बह चले अभी,
सब कहते ही रह गए, अरे,
तुम कैसे आए, कहाँ चले?

शब्दार्थ : दीवानों = मस्त रहने वाला (Carefree), मस्ती का आलम = मस्ती से भरा संसार (World with joy), उल्लास = खुशी (Joy), आँसू बनकर बह गए – दुःख के आँसू बहने लगे।

प्रसंग : प्रस्तुत पद्यांश भगवंतीचरण वर्मा द्वारा रचित कविता ‘दीवानों की हस्ती’ से उद्धत है। मनमौजी स्वभाव वाले, निश्चित रहने वाले व्यक्ति जहाँ भी जाते हैं, मस्तियाँ उनके साथ रहती हैं। इसी बात का वर्णन करते हुए कवि कहता है:

व्याख्या : हम मन-मौजी मनुष्यों की कोई हस्ती नहीं है। कोई खास विशेषता या योग्यता भी नहीं है। बस, अपनी मस्ती ही हमारा सब-कुछ है। जब मौज आयी, कहीं भी चल दिए। आज अगर यहाँ हैं, तो कल किसी दूसरे स्थान पर जा सकते हैं। हमारी विशेषता केवल इतनी ही है कि हम अपने पाँवों से धूल उड़ाते हुए जहाँ कहीं भी चले जाते हैं, मस्ती का एक संसार, अपने मनमौजीपन का एक निश्चिंत वातावरण हमारे साथ रहा करता है।

हम मस्तों के जीवन में अभी-अभी आनंद और खुशी का भाव है। अगले क्षण वही आनंद आँसू बनकर बहता हुआ भी दिखाई देता है, अर्थात् पल में आनन्द-में मुस्कराना, पल में किसी दुःख से रो देना, इस प्रकार कोई भी भाव स्थिर नही रह पाता। लोग पूछते रह जाते हैं कि तुम लोग कहाँ से आ रहे हो, किधर जा रहे हो, पर हमारे पास इसका कोई उत्तर नहीं होता।

भाव यह है कि निश्चिंत रहना, अपने मन की मौज के अनुसार कार्य करना ही सच्चे मस्तों का जीवन है, उनकी हस्ती का परिचय है।

काव्य-सौंदर्य:

  • धूल उड़ाता चलना’ एक मुहावरा है, जिसका अर्थ होता है धूम मचाते हुए जाना।
  • कवि के अनुसार जन्म-मृत्यु, आने-जाने, सुख-दुःख का अपना एक क्रम है।
  • मनमौजी लोगों की प्रकृति का सुदर परिचय मिलता है।

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2. किस ओर चले ? मत यह पूछो,
चलना है, बस इसलिए चले,
जग से उसका कुछ लिए चले,
जग को अपना कुछ दिए चले।
दो बात कही, दो बात सुनी,
कुछ हँसे और फिर कुछ रोए।
छककर सुख-दुख के घूटों को,
हम एक भाव से पिए चले।

शब्दार्थ : जग = संसार (World), छककर = तृप्त होकर (Satisfied)

प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ भगवतीचरण वर्मा की कविता ‘दीवानों की हस्ती’ से अवतरित हैं। इनमें कवि बताता है कि मनमौजी और निश्चिंत रहने वालों का जीवन के प्रति अलग दृष्टिकोण रहता है। वे हर दशा का भोग जी भरकर करते हैं। इन भावों को स्पष्ट करते हुए कवि कहता है:

व्याख्या : हम लोग किस ओर जा रहे हैं, यह पता नहीं। बस इतना जानते हैं कि हमें चलते रहना है, हँसते-रोते चलतें जाने का नाम ही जीवन है, अतः हमेशा चलते रहते हैं। सारे संसार से ताने सुनते हैं। बदले में संसार को अपनी मस्ती का दान देते हैं। इस प्रकार हर हाल में चलना, यही हमारे जीवन का क्रम है। मन की मौज में आकर हम लोग दुनियावालों से दो बातें कह लेते हैं। बदले में उनकी बातें चुपचाप सुन भी लेते हैं। बात अच्छी लगी तो जी-भर हँस भी लेते हैं। बात बुरी लगी तो संसार के बुरे व्यवहार पर रो लेते हैं। इस प्रकार जीवन में चाहे सुख आए, चाहे दुःख आए, दोनों के घुट हम खूब जी भरकर एक ही भाव से पी लेते हैं। इसी में हमारी मस्ती है। भाव यह है कि सुख-दुःख, आशा-निराशा में एक सा रह पाना सरल काम नहीं है। कोई मनमौजी स्वभाव वाला व्यक्ति ही ऐसा कर सकता है। सुख-दुख को समान रूप से स्वीकार करते हैं।

विशेष:

  • दीवानों की सामाजिकता की भावना अभिव्यक्त
  • जीवन में सुख और दुख दोनों का महत्त्व स्वीकारा गया है।
  • सरल एवं प्रवाहपूर्ण भाषा का प्रयोग किया गया है।

3. हम भिखमंगों की दुनिया में,
स्वच्छंद लुटाकर प्यार चले,
हम एक निशानी-सी उर पर,
ले असफलता का भार चले।

शब्दार्थ : भिखमंगों = भिखारियों (Beggars), स्वच्छंद = मुक्त (Free), उर = हृदय (Heart), असफलता = हार (Defeat), मान = आदर (Respect), अपमान = बेइज्जती (Insult)।

प्रसंग : ‘दीवानों की हस्ती’ शीर्षक कविता की इन पंक्तियों में बताया गया है कि मनमौजी स्वभाव वालों की दुनिया अलग होती है। हार या जीत, प्रत्येक दशा में मनमौजी लोग प्रसन्न रहते हैं, इस भाव को प्रकट करते हुए कवि कह रहा है।

व्याख्या : यह दुनिया भिखारियों जैसी है। वह केवल लेना ही जानती है, देना नहीं। अतः हम इसको समझकर भी अपना प्यार सबके लिए स्वतंत्रतापूर्वक लुटाते हैं। बदले में कुछ भी न चाहकर अपने रास्ते पर चल देते हैं। हाँ, हम अपने जैसा मस्तमौला दुनिया को नहीं बना पाए, इस असफलता का भार हमारे मन पर अवश्य रह जाता है। फिर भी अपनी हार की चिंता न करके हम अपने रास्ते पर निश्चिंत बढ़ जाते हैं।  कवि का भाव यह है कि हर हाल में प्रसन्न रहना और अपने दिमाग पर बोझ न पड़ने देना चाहिए। यही मस्ती का वास्तविक जीवन है।

काव्य-सौन्दर्य : दुनिया स्वार्थी है। स्वार्थ ही ईर्ष्या-द्वेष तथा विषाद का कारण है। दीवाने स्वार्थ से ऊपर उठ चुके हैं। उनके अनुकरण करने पर जीवन प्रेममय बन जाएगा। मान-अपमान की विशेष चिंता नहीं करनी चाहिए। ‘एक निशानी-सी उर पर’ में उपमा अलंकार है। ‘प्राणों की बाजी हार चले’ मुहावरे का भी सुंदर प्रयोग हुआ है।

4. अब अपना और पराया क्या ?
आबाद रहें रुकने वाले।
हम स्वयं बँधे थे, और स्वयं
हम अपने बंधन तोड़ चले।

शब्दार्थ : नतमस्तक = सिर झुकाना (To blow head), अभिशाप = बुराई (Bad), वरदान = आशीर्वाद (Blessing), दृगों = आँखों (Eyes)।

प्रसंग : मस्त लोग अपने को दुःख देने वालों को भी शाप .. नहीं देते, इन भावों को प्रकट करते हुए कवि कह रहा है :

व्याख्या : दुनिया ने हमारे साथ भला व्यवहार किया या बुरा व्यवहार किया, हम लोग उनको याद नहीं रखते। सभी को समान मानकर एक ही भाव से भुला देते हैं। इस प्रकार अपना मस्ती-भरा जीवन बिताने के बाद, अब यहाँ. से (इस दुनिया से) जाने के समय हमारे लिए अपने-पराए का कोई भेद-भाव नहीं रह गया। हमारी तो यही शुभकामना है- हमारे … पीछे यहाँ रहने वाले हमेशा आबाद रहें, प्रसन्न रहें। हमने संसार के बंधनों में अपने-आपको खुद ही बाँधा था। आज खुद ही उन बंधनों को तोड़कर जा रहे हैं।

भाव यह है कि हम मनमौजी जीवों के लिए किसी बात का कोई बंधन नहीं। हम चाहते हैं कि दुनिया हमारी तरह ही मस्ती से जीवन काट ले।

विशेष:

  • दीवाने ‘भला-बुरा’ और ‘अपना-पराया’ के भेद-भाव से ऊपर उठ जाते हैं। संसार में . राग-विराग, ईर्ष्या-द्वेष की भावना सदा से रही है। इसे मिटाया नहीं जा सकता।
  • सरल एवं प्रवाहमयी भाषा-शैली का अनुसरण किया गया है।

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HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 बस की यात्रा

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 बस की यात्रा Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 बस की यात्रा

HBSE 8th Class Hindi बस की यात्रा Textbook Questions and Answers

कारण बताएँ

प्रश्न 1.
“मैंने उस कंपनी के हिस्सेदार की तरफ पहली बार श्रद्धाभाव से देखा।”
लेखक के मन में हिस्सेदार साहब के लिए श्रद्धा क्यों जग गई ?
उत्तर:
लेखक के मन में बस कंपनी के हिस्सेदार साहब के लिए श्रद्धा इसलिए जाग गई कि वह इतनी खटारा बस को चलाने का साहस जुटा रहा था। कंपनी का हिस्सेदार अपनी पुरानी बस की खूब तारीफ कर रहा था। ऐसे व्यक्ति के प्रति श्रद्धा भाव ही उमड़ता है।

प्रश्न 2.
“लोगों ने सलाह दी कि समझदार आदमी इस शाम वाली बस से सफर नहीं करते।”
लोगों ने यह सलाह क्यों दी?
उत्तर:
लोगों ने लेखक को यह सलाह इसलिए दी क्योंकि इस बस का कोई भरोसा नहीं है कि यह कब और कहाँ रुक जाए, शाम बीतते ही रात हो जाती है और रात रास्ते में कहाँ बितानी पड़ जाए। कुछ पता नहीं रहता। उनके अनुसार यह बस डाकिन की तरह है।

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प्रश्न 3.
“ऐसा जैसे सारी बस ही इंजन है और हम इंजन के भीतर बैठे हैं।”
लेखक को ऐसा क्यों लगा ?
उत्तर:
जब बस का इंजन स्टार्ट हुआ तब सारी बस झनझनाने लगी। लेखक को ऐसा प्रतीत हुआ कि पूरी बस ही इंजन है। मानो वह बस के भीतर न बैठकर इंजन के भीतर बैठा हुआ हो।

प्रश्न 4.
“गजब हो गया। ऐसी बस अपने आप चलती है।”
लेखक को यह सुनकर हैरानी क्यों हुई ?
उत्तर:
लेखक ने बस की बुरी हालत देखकर बस-कंपनी के हिस्सेदार से पूछा था कि क्या यह बस चलती भी है। तब उसने उत्तर दिया था कि हाँ, यह बस भली प्रकार चलती है और अपने आप चलती है। यह सुनकर लेखक को हैरानी हुई कि इतनी जर्जर बस बिना धक्का दिए अपने आप चलती है।

प्रश्न 5.
“मैं हर पेड़ को अपना दुश्मन समझ रहा था।”
लेखक पेड़ों को दुश्मन क्यों समझ रहा था?
उत्तर:
लेखक को पेड़ों से डर इसलिए लग रहा था कि कहीं उसकी बस किसी पेड़ से टकरा न जाए। एक पेड़ के निकल जाने पर वह दसरे पेड़ का इंतजार करता कि बस कहीं इस पेड़ से न टकरा जाए। उसे हर पेड़ अपना दुश्मन लग रहा था।

पाठ से आगे

प्रश्न 1.
‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ किसके नेतृत्व में, किस उद्देश्य से तथा कब हुआ था? इतिहास की उपलब्धत पुस्तकों के आधार पर लिखिए।
उत्तर:
सविनय अवज्ञा आंदोलन महात्मा गाँधी के नेतृत्व में 1930 में अंग्रेजी सरकार से असहयोग करने तथा स्वराज पारित के लिए किया गया था।

प्रश्न 2.
सविनय अवज्ञा का उपयोग व्यंग्यकार ने किस रूप में किया है? लिखिए।
उत्तर:
सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 में सरकारी आदेशों का पालन न करने के लिए किया गया था। इसमें अंग्रेजी सरकार के साथ सहयोग न करने की भावना थी। 12 मार्च 1930 को इसी कड़ी में दांडी मार्च किया गया। नमक कानून 1930 में तोड़ा गया। लेखक ने इसका उपयोग इस संदर्भ में किया है कि आंदोलन के दौरान जिस प्रकार अंग्रेजों के दमन पूर्वक कार्यों से भारतीय जनता झकी नहीं विनम्रपूर्वक अपने संघर्ष में बढ़ी रही उसी प्रकार यह बस भी अपने खटारा और टूटी-फूटी होने के बावजूद चल ही रही है या कहें कि चलाई जा रही है। बस का ढाँचा जवाब दे रहा था, किंतु वह चल ही रही थी।

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 बस की यात्रा

प्रश्न 3.
आप अपनी किसी यात्रा के खट्टे-मीठे अनुभवों को याद करते हुए एक लेख लिखिए।
उत्तर:
कुछ समय पूर्व की बात है चाचा जी के बुलावे पर मैं और मेरा मित्र रोहित ऊधमपुर जाने के लिए तैयार हुए। तैयारी अचानक बन गई अतः आरक्षण की व्यवस्था नहीं हो पाई। सामान्य डिब्बे से ही सफर करना पड़ा। यह विचार बना कि गाड़ी से पठानकोट तक चला जाए। उसके बाद सांबा तक बस द्वारा व वहाँ से उधमपुर। अधिक सामान की आवश्यकता नहीं थी अतः एक बैग लेकर दिल्ली जंक्शन के प्लेटफार्म नं. 11 की ओर रुख किया। T.V. स्क्रीन से पता चला कि गाड़ी प्लेटफार्म पर पहुँचने वाली है। हमने टिकट लिए। खुले पैसे की कमी से 6 रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। गाड़ी प्लेटफार्म पर लग चुकी थी। हम पुल से नीचे उतरकर जनरल डिब्बे की ओर चल पड़े। बोतल का पानी रास्ते में ही समाप्त हो चुका था।

अतः यह तय हुआ कि रोहित पानी ले आए। ठंडे पानी की मशीन पर लगर खाने जैसी भीड़ हो रही थी। जैसे तैसे पानी भरकर डिब्बे में सवार हो गए। यह देखकर हम खुश थे कि अधिक भीड़ नहीं थी। लेकिन हमारी यह खुशी पश्चिम बंगाल के मार्क्सवादी शासन (कुशासन) की तरह स्थायी नहीं थी। पता चला कि हाथों में झंडे, डंडे तथा जेब पर बिल्ले लगाए किसान यूनियन के लोग इसी डिब्बे पर नजरे गड़ाए लपके आ रहे थे। महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने थोड़ी ही देर में डिब्बे को रैली स्थल में बदल दिया। हालत यह थी कि अब हम चाहकर बाहर भी नहीं जा सकते थे। शाहरूख खान के ‘छैयाँ-छैयाँ’ वाले गाने के स्मरण ने मन को कुछ-कुछ राहत दी।

मन बहलाना

अनुमान कीजिए यदि बस जीवित प्राणी होती, वह बोल सकती तो वह अपनी बुरी हालत और भारी बोझ के कष्ट को किन शब्दों में व्यक्त करती? लिखिए।
मैं एक बहुत पुरानी और बूढी बस हूँ। मेरी हालत जर्जर हो चुकी है। अब मैं लंबी यात्रा करने लायक नहीं रह गई हूँ। मैं तो थोड़ा-बहुत टहल ही सकती हूँ। मुझ पर सवारियों का बोझ मत लादो। मैं तुम्हारा बोझ सहन नहीं कर सकती। मैं इस बोझ से दबकर दम तोड़ दूंगी। अब तो मैं एक वृद्धा की तरह हूँ। तुम्हें तो मेरा सम्मान करना चाहिए। तुम मेरे कष्टों को बढ़ाओ मत। अब मुझे चलने में तकलीफ होती है। अब मैं आराम करना चाहती हूँ। मुझे चैन से रहने दो।

भाषा की बात

1. बस, वश, बस तीन शब्द हैं-इनमें बस सवारी के अर्थ में, वश अधीनता के अर्थ में और बस पर्याप्त (काफी) के अर्थ में प्रयुक्त होता है जैसे- बस से चलना होगा। मेरे वश में नहीं है। अब बस करो।
उपर्युक्त वाक्य के समान तीनों शब्दों से युक्त आप भी दो-दो वाक्य बनाइए।
बस : 1. यह बस बहुत सुविधाजनक है।
2. मेरठ से बस का सफर दो घंटे का है।

वश : 1. इस स्थिति पर मेरा वश नहीं है।
2. यह काम सरकार के वश में ही है।

बस : 1. तुम्हें बस झगड़ना ही आता है।
2. बस मैं नहीं जा सकता।

2. “हम पाँच मित्रों ने तय किया कि शाम चार बजे की बस से चलें। पन्ना से इसी कंपनी की बस सतना के लिए घंटे भर बाद मिलती है।” ने, की, से आदि शब्द वाक्य के दो शब्दों के बीच संबंध स्थापित कर रहे हैं। ऐसे शब्दों को कारक कहते हैं। इसी तरह जब दो वाक्यों को एक साथ जोड़ना होता है ‘कि’ का प्रयोग होता है।

कहानी में से दोनों प्रकार के चार वाक्यों को चुनिए।
→ बस को देखा तो श्रद्धा उमड़ पड़ी।

  • हमें बेटों की तरह प्यार से गोद में लेकर चलेगी।
  • मालूम हुआ कि पेट्रोल की टंकी में छेद हो गया है
  • झील दिखती तो सोचता कि इसमें बस गोता लगा जाएगी।

3. “हम फौरन खिड़की से दूर सरक गए। चाँदनी में रास्ता टटोलकर वह रेंग रही थी।” ‘सरकना’ और ‘रेंगना’ जैसी क्रिया दो प्रकार की गति बताती है। ऐसी कुछ और क्रियाएँ एकत्र कीजिए जो गति के लिए प्रयुक्त होती हैं, जैसे-घूमना इत्यादि। उन्हें वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

  • पकड़ना – हमने गाड़ी पकड़नी चाही।
  • धड़कना – दिल तेजी से धड़क रहा था।

4. “काँच बहुत कम बचे थे। जो बचे थे, उनसे हमें बचना था।”
इस वाक्य में ‘बच’ शब्द को दो तरह से प्रयोग किया गया है। एक ‘शेष’ के अर्थ में और दूसरा सुरक्षा के अर्थ में।
नीचे दिए गए शब्दों को वाक्यों में प्रयोग करके देखो। ध्यान रहे, एक ही शब्द वाक्य में दो बार आना चाहिए, और शब्दों के अर्थ में कुछ बदलाव होना चाहिए।
(क) जल
(ख) फल
(ग) हार।
जल : नदियों का जल पवित्र होता है।
वह आग से जल गया।

फल : फल खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है।
अच्छे काम का अच्छा फल मिलता है।

हार : गले का हार सुंदर है।
हम मैच हार गए।

5. भाषा की दृष्टि से देखें तो हमारी बोलचाल में प्रचलित अंग्रेजी शब्द फर्स्ट क्लास में दो शब्द हैं-फर्स्ट और क्लास। क्लास का विशेषण है फर्स्ट। चूँकि फर्स्ट संख्या है, फर्स्ट क्लास संख्यावाचक विशेषण का उदाहरण है। महान आदमी में किसी आदमी की विशेषता है महान। यह गुणवाचक विशेषण है। संख्यावाचक विशेषण और गुणवाचक विशेषण के उदाहरण खोजकर लिखिए।
चतुर व्यक्ति, सुंदर स्त्री, सच्चा आदमी। – गुणवाचक विशेषण
तीसरा आदमी, चार अमरूद। संख्यावाचक विशेषण

बस की यात्रा Summary in Hindi

बस की यात्रा पाठ का सार

लेखक और उसके मित्रों ने तय किया कि वे शाम चार बजे की बस से पन्ना जाएँगे। वहाँ से इसी कंपनी की बस सतना के लिए एक घंटे बाद मिलती है जो जबलपुर की ट्रेन मिला (पकड़ा) देती है। दो लोगों को सुबह काम पर हाजिर होना था अतः यह रास्ता अपनाना ठीक समझा गया। यद्यपि समझदार लोगों ने शाम की बस से सफर करने को मना किया था, पर वे माने नहीं। बस बहुत बूढी अर्थात् पुरानी थी। उन लोगों को लगा कि यह बस तो पूजा के योग्य है क्योंकि इसकी दशा वृद्धा स्त्री के समान थी। बस कंपनी के हिस्सेदार ने बताया कि यह बस भली प्रकार चलती है। डॉक्टर मित्र ने कहा कि यह बस अनुभवी है और हमें बेटों की तरह गोद में लेकर चलेगी। लेखक को विदा करने आए लोगों ने ऐसा भाव प्रकट किया कि मानो वे उन्हें अंतिम विदा दे रहे हों।

खैर बस का इंजन स्टार्ट हो गया। बस के अधिकांश शीशे टूटे हुए थे। उन लोगों को लगा कि इंजन उनकी सीट के नीचे है। वैसे बस के सभी हिस्से एक-दूसरे से असहयोग कर रहे थे। एकाएक बस रुक गई। पता चला पेट्रोल की टंकी में छेद हो गया है। बस का ड्राइवर बाल्टी में पेट्रोल निकाल कर उसे नली से इंजन में पहुँचाने लगा। लेखक को अब बस के किसी हिस्से का भरोसा नहीं था। उसे डर लगने लगा कि बस किसी पेड़ से टकरा जाएगी। बस फिर रुक गई। उसका इंजन खोलकर ठीक किया गया तो वह बहुत धीमी रफ्तार से चलने लगी। बस पुलिया पर पहुंची ही थी उसका एक टायर फट गया। वह तो बस की स्पीड कम थी अन्यथा वह नाले में जा गिरती। लेखक बस को श्रद्धाभाव से देखने लगा। काफी देर में एक पुराना घिसा हुआ टायर लगाया गया तब वह कहीं चली। लेखक ने समय पर पन्ना पहुँचने की उम्मीद छोड़ दी थी। अब तो हँसी-मजाक चालू हो गया।

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 3 बस की यात्रा

बस की यात्रा शब्दार्थ

तय = निश्चित (Fix), वयोवृद्ध = आयु से बूढ़े (Old person), वृद्धावस्था = वृद्ध अवस्था = बुढ़ापा (Old age), विश्वसनीय = विश्वास (भरोसा) करने लायक (Faithful), अंतिम = आखिरी (Last), निमित्त = बहाना (Cause), स्टार्ट = चालू (Start),रंक = गरीब (Poor), असहयोग = अ+असहयोग = सहयोग न करना (Non co-operation), सविनय = स+विनय = विनयपूर्वक (Respectfully), अवज्ञा = आज्ञा न मानना (Not obey order), ब्रेक फेल = ब्रेकों का काम न करना (Brake fail), दृश्य = नजारा (Scene), इत्तफाक = संयोग (By chance), अंत्येष्टि = अंतिम संस्कार (Last ceremony), उत्सर्ग = बलिदान (Sacrifice), बेताबी = बेचैनी (Restlessness).।

बस की यात्रा गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. बस को देखा तो श्रद्धा उमड़ पड़ी। खूब वयोवृद्ध थी। सदियों के अनुभव के निशान लिए हुए थी। लोग इसलिए इससे सफर नहीं करना चाहते कि वृद्धावस्था में इसे कष्ट होगा। यह बस पूजा के योग्य थी। उस पर सवार कैसे हुआ जा
प्रसंग:
प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘वसंत. भाग-3’ में संकलित पाठ ‘बस की यात्रा’ से अवतरित है। यह पाठ हास्य-व्यंग्य में रचा गया है। इसके लेखक हैं प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई।।

व्याख्या : इस गद्यांश में लेखक ने बस की जीर्ण-शीर्ण दशा पर व्यंग्य किया है। बस बहुत पुरानी थी। इस बस को देखकर वृद्ध स्त्री का दृश्य सामने आ रहा था। इस बस को देखकर लेखक के पान में श्रद्धा भावना उत्पन्न हुई। यह बस बहुत बूढ़ी अर्थात् पुरानी (कबाड़) थी। इसकी हालत देखकर लगता था कि यह सदियों का अनुभव अपने अंदर समेटे हुए है। जिस प्रकार कोई नूढी स्त्री अनुभवी होती है, वही दशा इस बस की थी। लेखक व्यंग्य करते हुए कहता है कि लोग इसमें सफर करने से इसलिए कतराते थे कि बुढ़ापे में चलते समय इसे कष्ट होगा। वृद्ध व्यक्ति तो पूजा करने के योग्य होता है अतः इस पुरानी बस की भी पूजा ही की जानी चाहिए। भला इस पर सवारी कैसे की जा सकती है।

यहाँ व्यंग्य यह है कि बस की हालत इतनी जर्जर थी कि वह सामान्य ढंग से चल ही नहीं सकती थी। उसकी हालत खस्ता थी।

2. बस सचमुच चल पड़ी और हमें लगा कि यह गाँधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों के वक्त अवश्य जवान रही होगी। उसे ट्रेनिंग मिल चुकी थी। हर हिस्सा दूसरे से असहयोग कर रहा था। पूरी बस सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौर से गुजर रही थी। सीट का बॉडी से असहयोग चल रहा था। कभी लगता सीट बॉडी को छोड़कर आगे निकल गई है। कभी लगता कि सीट को छोड़कर बॉडी आगे भागी जा रही है। आठ-दस मील चलने पर सारे भेदभाव मिट गए। यह समझ में नही आता था कि सीट पर हम बैठे हैं या सीट हम पर बैठी है।

प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हरिशंकर परसाई की व्यंग्य रचना ‘बस की यात्रा’ से लिया गया है। लेखक पुरानी बस में यात्रा के अनुभव को व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत करता है।

व्याख्या : लेखक और उसके मित्र पुरानी खटारा बस में सवार हो गए। बस का चलना कठिन लग रहा था, पर वह बस चल ही पड़ी। लेखक को लगा कि यह बस उस समय जरूर जवान रही होगी जब महात्मा गाँधी का असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन चल रहा था। (व्यंग्य यह है कि बस की खस्ता हालत को देखकर लेखक ने इसे असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय बताया अर्थात् बस बहुत पुरानी थी) मानो इसे इस प्रकार की पूरी ट्रेनिंग मिल चुकी थी। बस भलीभाँति जानती थी। कि किस प्रकार असहयोग किया जाता है। बस का हर कल-पुर्जा एक दूसरे से असहयोग कर रहा था अर्थात् उनमें कोई तालमेल न था। बस की सीटें बस की बॉडी से अलग हो रही थीं। कभी सीट बस की बॉडी से आगे निकल जाती थी तो कभी बॉडी सीट को पीछे छोड़कर आगे चली जाती थी। यह आँख-मिचौली का खेल 8-10 मील तक चलता रहा। फिर सारे अंतर मिट गए। लेखक की समझ में यह नहीं आ रहा था कि वह सीट पर बैठा है अथवा सीट उसके ऊपर चढ़ी है।

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HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 लाख की चूड़ियाँ

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 लाख की चूड़ियाँ Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 लाख की चूड़ियाँ

HBSE 8th Class Hindi लाख की चूड़ियाँ Textbook Questions and Answers

कहानी से

प्रश्न 1.
बचपन में लेखक अपने मामा के गाँव चाव से क्यों जाता था और बदलू को ‘बदलू मामा’ न कहकर ‘बदलू काका’ क्यों कहता था? ..
उत्तर:
बचपन में लेखक अपने मामा के गाँव बड़े चाव के साथ जाता था। उसके चाव का कारण यह था कि वहाँ उसे ढेर सारी लाख की रंग-बिरंगी गोलियाँ मिलती थीं। ये गोलियाँ उसका मन मोह लेती थीं। बदलू लेखक के मामा के गाँव का था अतः उसे उसको ‘बदलू मामा’ कहना चाहिए था, पर वह ‘बदलू मामा’ न कहकर ‘बदलू काका’ कहता था। इसका कारण यह था कि गाँव के सभी बच्चे उसे ‘बदलू काका’ ही कहा करते थे। लेखक भी उनकी देखा-देखी उसे ‘बदलू काका’ ही कहता था।

प्रश्न 2.
वस्तु विनिमय क्या है? विनिमय की प्रचलित पद्धति क्या है?
उत्तर:
‘वस्तु विनिमय’ में एक वस्तु को दूसरी वस्तु देकर लिया जाता था। वस्तु के लिए पैसे नहीं लिए जाते थे। वस्तु के बदले वस्तु ली-दी जाती थी। लोग अनाज देकर चूड़ियाँ ले लेते थे।

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 लाख की चूड़ियाँ

प्रश्न 3.
“मशीनी युग ने कितने हाथ काट दिए हैं।’-पंक्ति में लेखक ने किस व्यथा की ओर संकेत किया है?
उत्तर:
इस पंक्ति में लेखक ने इस व्यथा की ओर संकेत किया है कि मशीनों के आगमन के साथ कारीगरों के हाथों से काम-धंधा छिन गया। मानो उनके हाथ ही कट गए हों। मशीनों ने लोगों को बेरोजगार बना दिया। .

प्रश्न 4.
बदलू के मन में ऐसी कौन-सी व्यथा थी, जो लेखक से छिपी न रह सकी?
उत्तर:
बदलू के मन में इस बात की व्यथा की मशीनी युग के प्रभावस्वरूप उस जैसे अनेक कारीगरों को बेरोजगारी और उपेक्षा का शिकार होना पड़ा है। अब लोग कारीगरी की कद्र न करके दिखावटी चमक पर अधिक ध्यान देते हैं। ।

प्रश्न 5.
मशीनी युग से बदलू के जीवन में क्या बदलाव आया?
उत्तर:
मशीनी युग से बदलू के जीवन में यह बदलाव आया कि वह बेरोजगार हो गया। काम न करने से उसका शरीर भी ढल गया, उसके हाथों-माथे पर नसें उभर आईं। अब वह बीमार रहने लगा।

कहानी से आगे

प्रश्न 1.
आपने मेले-बाजार आदि में हाथ से बनी चीजों को बिकते देखा होगा। आपके मन में किसी चीज को बनाने की कला को सीखने की इच्छा हुई हो और आपने कोई कारीगरी सीखने का प्रयास किया हो तो उसके विषय में लिखिए।
उत्तर:
मैंने मेले-बाजार में तरह-तरह की रंग-बिरंगी काँच के छोटे-छोटे बीकरों में रखी मोमबत्तियाँ बिकती देखीं। मेरे मन में भी यह इच्छा उत्पन्न हुई कि मैं भी इनको बनाने की कला सीखू। मैंने हस्तशिल्प कार्यशाला में एक सप्ताह का प्रशिक्षण लिया। अब मैं स्वयं इस प्रकार की कलात्मक मोमबत्तियाँ आसानी से बना लेता हूँ। मैं इनकी बिक्री करके कुछ धन भी कमा लेता हूँ।

प्रश्न 2.
लाख की वस्तुओं का निर्माण भारत के किन-किन राज्यों में होता है? लाख से चूड़ियों के अतिरिक्त क्या-क्या चीजें बनती हैं? ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
लाख की वस्तुओं का निर्माण राजस्थान में सबसे अधिक होता है। यह काम गुजरात में भी होता है क्योंकि यह राज्य राजस्थान से सटा हुआ है। – लाख से चूड़ियाँ बनती हैं। – लाख से खिलौने बनते हैं।

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1.
घर में मेहमान आने पर आप उसका अतिथि-सत्कार कैसे करेंगे?
उत्तर:
घर में मेहमान आने पर हम उन्हें आदर सहित बिठाएँगे।

  • उनके आने पर प्रसन्नता प्रकट करेंगे।
  • उन्हें पीने के लिए चाय, कॉफी, लस्सी या शर्बत देंगे।
  • बाद में उन्हें खाना खिलाएँगे।
  • उनके साथ प्रेमपूर्वक बातचीत करेंगे।

प्रश्न 2.
आपको अपनी छुट्टियों में किसके घर जाना सबसे अच्छा लगता है? वहाँ की दिनचर्या लिखिए। अलग कैसे होती है?
उत्तर:
हमें छुट्टियों में अपने नाना-नानी के घर जाना सबसे अच्छा लगता है, क्योंकि वे हमें बहुत प्यार करते हैं। वहाँ की दिनचर्या बहुत ही मस्ती भरी होती है। वहाँ हमें स्कूल जाने की चिंता नहीं होती। अतः हम वहाँ देर तक सोते हैं और धूप निकल आने पर उठते हैं। वहाँ हम आस-पास के बच्चों के साथ घूमने जाते हैं। घर पर हमें नाश्ता भी बड़ा मजेदार मिलता है। नाश्ता करके हम खेलने निकल जाते हैं। दोपहर का खाना काफी देर से होता है। घर के आँगन में खेलते-कूदते और मस्ती करते हैं। इस प्रकार दिन भर मौज-मस्ती चलती रहती है।

प्रश्न 3.
मशीनी युग में अनेक परिवर्तन आए दिन होते रहते हैं। आप अपने आस-पास से इस प्रकार के किसी परिवर्तन का उदाहरण चुनिए और उसके बारे में लिखिए।
उत्तर:
मशीनी युग में अनेक परिवर्तन आए दिन होते रहते हैं। हमारे आस-पास भी इस प्रकार के परिवर्तन होते रहते हैं। पहले हमारे घर के पास कई स्त्रियाँ दाल पीसने का काम करती थीं। वे बड़ी-बड़ी सिलों पर पत्थर के बट्टों से दाल पीसकर कुछ रुपए कमा लेती थीं। प्रायः हलवाई उनसे दाल पिसवाते थे। अब दाल पीसने की मशीनें आ गई हैं। अब वही काम मशीन थोड़ी ही देर में कर देती है। इससे उनका काम छिन गया है।

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प्रश्न 4.
बाजार में बिकने वाले सामानों की डिज़ाइनों में हमेशा परिवर्तन होता रहता है। आप इन परिवर्तनों को किस प्रकार देखते हैं। आपस में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
बाजार में अनेक प्रकार के सामान बिकते हैं। इनमें खाने-पीने के सामानों के अतिरिक्त पहनने-ओढ़ने के कपड़े भी होते हैं। मनोरंजन के भी बहुत सामान बाजार में मिलते हैं। इन सामानों में डिजाइनों में हमेशा परिवर्तन आता रहता है, विशेषकर कपड़ों के डिजाइनों में।

प्रश्न 5.
हमारे खान-पान, रहन-सहन और कपड़ों में भी बदलाव आ रहा है। इस बदलाव के पक्ष-विपक्ष में बातचीत कीजिए और बातचीत के आधार पर लेख तैयार कीजिए।
उत्तर:
आज के युग में हमारे खान-पान, रहन-सहन तथा कपड़ों में अनेक प्रकार के बदलाव आ रहे हैं। इस बदलाव के पक्षविपक्ष में बड़े लोगों से बातचीत करने पर यह कहा जा सकता है: बदलाव प्रकृति का नियम है। हर युग में बदलाव आता रहा है और आता रहेगा। इस बदलाव को कोई रोक नहीं सकता। यद्यपि बड़े लोग इसे देर से स्वीकार करते हैं, पर युवा पीढ़ी इसे तुरंत अपना लेती है। बड़े लोग इसे फैशन का नाम दे देते हैं तथा प्रारंभ में इसका विरोध करते हैं, पर कुछ समय बीत जाने के उपरांत वे भी इसे स्वीकार कर लेते हैं।

भाषा की बात

1. ‘बदलू को किसी बात से चिढ़ थी तो काँच की चूड़ियों से’ और बदलू स्वयं कहता है।-“जो सुंदरता काँच की चूड़ियों में होती है लाख में कहाँ संभव है?” ये पंक्तियाँ बदलू की दो प्रकार की मनोदशाओं को सामने लाती हैं। दूसरी पंक्ति में उसके मन की पीड़ा है। इसमें व्यंग्य भी है। हारे हुए मन.से, या दुखी मन से अथवा व्यंग्य में बोले गए वाक्यों के अर्थ सामान्य नहीं होते। कुछ व्यंग्य वाक्यों को ध्यानपूर्वक समझकर एकत्र कीजिए और उनके भीतरी अर्थ की व्याख्या करके लिखिए।

‘वहाँ की औरतें अपने मरद का हाथ पकड़कर सड़कों पर घूमती भी हैं और फिर उनकी कलाइयाँ नाजुक होती हैं। लाख की चूड़ियाँ पहनें तो मोच न आ जाए।’
→ इस कथन में शहरी स्त्रियों पर व्यंग्य किया गया है। शहर की औरतों को बेशर्म बताया गया है क्योंकि वे सड़कों पर अपने मर्द (पति) का हाथ पकड़कर घूमती हैं।

→ दूसरा व्यंग्य उनकी कलाई की नाजुकता पर किया गया है कि वे लाख की चूड़ियों का बोझ झेल ही नहीं सकती।

→ ‘आजकल सब काम मशीन से होता है। जो सुंदरता काँच की चूड़ियों में होती है, लाख में कहाँ संभव है?

→ बदलू मशीनी युग पर व्यंग्य करता है। मशीनों ने लोगों को बेरोजगार बना दिया। लोग सुंदरता के पीछे भागते हैं, मजबूती की परवाह किसे है।

2. बदलू कहानी में दृष्टि से पात्र है और भाषा की बात (व्याकरण) की दृष्टि से संज्ञा है। किसी भी व्यक्ति, स्थान, वस्तु, विचार अथवा भाव को संज्ञा कहते हैं। संज्ञा को तीन भेदों में बांटा गया है –
(क) व्यक्तिवाचक संज्ञा जैसे-शहर, गाँव, पतली-मोटी, गोल, चिकना इत्यादि

(ख) जातिवाचक संज्ञा जैसे–चरित्र, स्वभाव, वजन, आकार आदि द्वारा जानी जाने वाली संज्ञा।

(ग) भाववाचक संज्ञा, जैसे–सुंदरता, नाजुक, प्रसन्नता इत्यादि जिसमें कोई व्यक्ति नहीं है और न आकार, वचन परंतु उसका अनुभव होता है। पाठ से तीनों प्रकार की संज्ञाएँ चुनकर लिखिए।

  • व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ – रज्जो, बदलू
  • जातिवाचक संज्ञाएँ – चूड़ियाँ, स्त्रियाँ, काँच, सड़क, काका, मशीन, चारपाई, गोली।
  • भाववाचक संज्ञाएँ – पढ़ाई, सुंदरता, व्यथा
  • गाँव की बोली के शब्द : मरद (मर्द), लला (लाल), बखत (वक्त), मचिया (खाट), पियाज (प्याज), तमाखू (तंबाकू) आदि।

3. गाँव की बोली में कई शब्दों के उच्चारण बदल जाते हैं। कहानी में बदलू बक्त (समय) को बखत, उम्र (वय/आयु) को उमर कहता है। इस तरह के अन्य शब्दों को खोजिए जिनके रूप में परिवर्तन हुआ हो, अर्थ में नहीं।
विद्यार्थी स्वयं करों

HBSE 8th Class Hindi लाख की चूड़ियाँ Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
बदलू कौन था? उसका व्यवसाय क्या था?
उत्तर:
बदलू मनिहार था। चूड़ियाँ बनाना उसका पैतृक पेशा था और वास्तव में वह बहुत ही सुंदर चूड़ियाँ बनाता था। उसकी बनाई हुई चूड़ियों की खपत भी बहुत. थी। उस गाँव में तो सभी स्त्रियाँ उसकी बनाई हुई चूड़ियाँ पहनती ही थीं आस-पास के गाँवों के लोग भी उससे चूड़ियाँ ले जाते थे परंतु वह कभी भी चूड़ियों को पैसों से बेचता न था। उसका अभी तक वस्तु-विनिमय का तरीका था और लोग अनाज के बदले उससे चूड़ियाँ ले जाते थे। बदलू स्वभाव से बहुत सीधा था। कभी भी उसे किसी से झगड़ते नहीं देखा गया।

प्रश्न 2.
जब कई वर्ष बाद लेखक बदलू से मिलने गया तब उसने क्या शिकायत की?
उत्तर:
बदलू ने लेखक को बताया कि उसका काम तो कई साल से बंद है। उसकी बनाई हुई चूड़ियाँ कोई पूछे तब तो। गाँव-गाँव में काँच का प्रचार हो गया है। वह कुछ देर चुप रहा, फिर बोला, मशीन युग है न यह, लला! आजकल सब काम मशीन से होता है। खेत भी मशीन से जोते जाते हैं और फिर जो सुंदरता काँच की चूड़ियों में होती है, लाख में कहाँ संभव है?

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 लाख की चूड़ियाँ

प्रश्न 3.
बदलू लेखक को मलाई क्यों नहीं खिला पाया?
उत्तर:
पहले बदलू के पास एक गाय थी। वह उसके दूध की मलाई लेखक को खिलाया करता था। अब वह गाय बिक चुकी थी क्योंकि बदलू के पास उसको खिलाने को कुछ नहीं था अतः अब मलाई होती ही न थी।

लाख की चूड़ियाँ गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

1. वैसे तो मेरे मामा के गाँव का होने के कारण मुझे बदलू को ‘बदलू मामा’ कहना चाहिए था परंतु मैं उसे ‘बदलू मामा’ न कहकर बदलू काका कहा करता था जैसा कि गाँव के सभी बच्चे उसे कहा करते थे। बदलू का मकान कुछ ऊँचे पर बना था। मकान के सामने बड़ा-सा सहन था जिसमें एक पुराना नीम का वृक्ष लगा था। उसी के नीचे बैठकर बदलू अपना काम किया करता था। बगल में भट्ठी दहकती रहती जिसमें वह लाख पिघलाया करता।

सामने एक लकड़ी की चौखट पड़ी रहती जिस पर लाख के मुलायम होने पर वह उसे सलाख के समान पतला करके चूड़ी का आकार देता। पास में चार-छह विभिन्न आकार की बेलननुमा मुंगेरियाँ रखो रहतीं जो आगे से कुछ पतली और पीछे से मोटी होतीं। लाख की चूड़ी का आकार देकर वह उन्हें मुंगेरियों पर चढ़ाकर गोल और चिकना बनाता और तब एक-एक कर पूरे हाथ की चूड़ियाँ बना चुकने के पश्चात वह उन पर रंग करता।
प्रश्न:
1. लेखक को बदलू को किस संबोधन से पुकारना चाहिए था पर वह किस संबोधन से पुकारता था और क्यों?
2. बदलू का मकान कैसा था?
3. बदलू अपना काम कहाँ करता था?
4. वह अपना काम कैसे करता था?
5. वह किससे चूड़ी बनाता था तथा कैसे?
उत्तर:
1. लेखक को बदलू को ‘मामा’ से संबोधित करना चाहिए था क्योंकि वह उसके मामा के गाँव से था, पर वह उसे ‘बदलू काका’ कहकर संबोधित करता था क्योंकि गाँव के सभी बच्चे उसे ‘बदलू काका’ ही कहते थे।
2. बदलू का मकान कुछ ऊँचाई पर बना था। उसके मकान के सामने बड़ा सा आँगन था और उसमें नीम का पेड़ लगा हुआ था।
3. बदलू नीम के पेड़ के नीचे बैठकर अपना काम करता था।
4. वह दहकती भट्ठी पर लाख पिघलाता रहता था। वह लाख को मुलायम करके चूड़ी का आकार देता। इसके लिए वह विभिन्न आकार की मुंगरियों पर चढ़ाकर गोल करता था?
5. वह लाख से चूड़ी बनाता था। इसके बाद वह चूड़ियों पर रंग करता था।

2. मैं बहुधा हर गर्मी की छुट्टी में अपने मामा के यहाँ चला जाता और एक-आध महीने वहाँ रहकर स्कूल खुलने के समय तक वापस आ जाता। परंतु दो-तीन बार ही मैं अपने मामा के यहाँ गया होऊँगा। जब मेरे पिता की एक दूर के शहर में बदली हो गई और एक लंबी अवधि तक मैं अपने मामा के गाँव न जा सका। तब लगभग आठ-दस वर्षों के बाद जब मैं वहाँ गया तो इतना बड़ा हो चुका था कि लाख की गोलियों में मेरी रूचि नहीं रह गई थी। अत: गाँव में होते हुए भी कई दिनों तक मुझे बदलू का ध्यान न आया।

इस बीच मैंने देखा कि गाँव में लगभग सभी स्त्रियाँ काँच की चूड़ियाँ पहने हैं। विरले ही हाथों में मैंने लाख की चूड़ियाँ देखीं। तब एक दिन सहसा मुझे बदलू का ध्यान हो आया। बात यह हुई कि बरसात में मेरे मामा की छोटी लड़की आँगन में फिसलकर गिर पड़ी और उसके हाथ की काँच की चूड़ी टूटकर उसकी कलाई में घुस गई और उससे खून बहने लगा। मेरे मामा उस समय घर पर न थे। मुझे ही उसकी मरहम-पट्टी करनी पड़ी। तभी सहसा मुझे बदलू का ध्यान हो आया और मैंने सोचा कि उससे मिल आऊँ। अतः शाम को मैं घूमते-घूमते उसके घर चला गया। बदलू वहीं चबूतरे पर नीम के नीचे एक खाट पर लेटा था।
प्रश्न:
1. लेखक काफी समय तक मामा के गाँव क्यों नहीं जा सका?
2. वहाँ जाकर लेखक ने स्त्रियों में क्या परिवर्तन देखा?
3. लेखक को बदलू की याद कैसे आई?
4. लेखक को बदलू कहाँ मिला?
उत्तर:
1. लेखक के पिता की बदली किसी दूर के शहर में हो गई थी। इसी कारण वह 8-10 वर्षों तक मामा के गाँव नहीं जा सका।
2. लंबे समय के बाद जब लेखक मामा के गाँव गया तो उसने देखा कि अब वहाँ की अधिकांश स्त्रियाँ लाख की चूड़ियों के स्थान पर काँच की चूड़ियाँ पहने हुए हैं। किसी-किसी स्त्री ने ही लाख की चूड़ी पहन रखी थी।
3. लेखक की मामा की छोटी लड़की के हाथ की काँच की चूड़ी टूटकर उसकी कलाई में घुस गई थी और खून बहने लगा था। उस समय उसके मामा घर पर नहीं थे और लेखक को ही उसकी मरहम-पट्टी करनी पड़ी थी। तभी उसे बदलू की याद हो आई।
4. जब लेखक बदलू से मिलने उसके घर गया तब वह उसे | चबूतरे पर नीम के पेड़ के नीचे एक खाट पर लेटा हुआ मिला।

लाख की चूड़ियाँ Summary in Hindi

लाख की चूड़ियाँ पाठ का सार

लेखक को सारे गाँव में बदलू सबसे अच्छा लगता था क्योंकि वह उसे लाख की सुंदर-सुंदर गोलियाँ बनाकर देता था। लेखक उसे ‘बदलू काका’ कहा करता था। बदलू काका नीम के पेड़ के नीचे बैठकर दहकती भट्ठी पर लाख पिघला कर उसे चूड़ी का आकार देता था। वह बेलननुमा मुँगेरियों पर लाख को चढ़ाकर उसे चूड़ियों का आकार देता था और बाद में उन पर रंग करता था। वह बीच-बीच में हुक्का पीता रहता था। वह बचपन में लेखक को ‘लला’ कहता था और एक मचिया पर बिठाता था। वहीं लेखक उसे चूड़ियाँ बनाते देखता रहता था। बदलू मनिहार था। चूड़ियाँ बनाना उसका पैतृक पेशा था। गाँव की सभी स्त्रियाँ उसी की बनाई चूड़ियाँ पहनती थीं। बदलू स्वभाव से बहुत सीधा था। विवाह के अवसर पर उसकी चूड़ियों का मूल्य बढ़ जाता था। वह काँच की चूड़ियों से चिढ़ता था।

वह लेखक से बचपन में उसकी पढ़ाई के बारे में पूछता रहता था। कभी-कभी बदलू उसकी अच्छी खातिर भी करता था। बदलू उसके लिए लाख की एक-दो गोलियाँ बना देता था। बदलू लेखक के मामा के गाँव में रहता था। लेखक के पिता की बदली दूर के शहर में हो गई थी। अतः वह लंबे समय तक मामा के गाँव न जा सका। जब वह गाँव गया तो उसने गाँव की लगभग सभी स्त्रियों को काँच की चूड़ियाँ पहने देखा। एक शाम को वह बदलू से मिला तो सहसा उसने लेखक को पहचाना नहीं। फिर लेखक ने अपना नाम जनार्दन बताकर गोलियों की बात याद दिलाई, लेकिन वह फिर भी चुप रहा। बदलू ने उसे बताया कि अब उसका लाख की चूड़ियाँ बनाने का काम कई साल से बंद है क्योंकि अब उसकी बनाई चूड़ियों की पूछ नहीं होती। सभी को काँच की सुंदर चूड़ियाँ चाहिए। अब तक बदलू का शरीर भी ढल चुका था। उसे बुरी तरह खाँसी आ रही थी। उसके मन में व्यथा छिपी थी, जिसे लेखक ने भाँप लिया।

लेखक ने विषय बदलने के लिए पूछा-काका, अब की आम की फसल कैसी है? उसने जवाब दिया-अच्छी है और यह कहकर उसके लिए अपनी बेटी से कहकर आम मँगवाए। फिर लेखक ने गाय के बारे में पूछा तो वह बोला-गाय को दो साल पहले बेच दिया, कहाँ से खिलाता उसे? तभी उसकी बेटी रज्जो एक डलिया में ढेर से आम ले आई। बेटी ने चार-पाँच सिंदूरी आम छाँटकर उसे दे दिए। लेखक ने देखा कि रज्जो की गोरी-गोरी कलाइयों पर लाख की चूड़ियाँ फब रही थीं। बदलू बोला-यही आखिरी जोड़ा बनाया था, जमींदार साहब की बेटी के लिए। वे दस आने दे रहे थे, बदलू ने वह जोड़ा नहीं दिया और कह दिया-शहर से ले आओ। लेखक को यह सुनकर प्रसन्नता हुई कि बदलू ने हारकर भी हार नहीं मानी। उसका व्यक्तित्व टूटने वाला नहीं था।

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 लाख की चूड़ियाँ

लाख की चूड़ियाँ शब्दार्थ

विभिन्न = तरह-तरह की (Different), पैतृक = पिता का (Paternal), विनिमय = बदल-बदल (Exchange), नाजुक = कोमल (Tender), विरले = कोई-कोई (not common), स्मृति पटल = मस्तिष्क में याद (Memory), अतीत = पुराना समय (old period), व्यथा = मन की तकलीफ (Agony)।

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HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 1 ध्वनि

Haryana State Board HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 1 ध्वनि Textbook Exercise Questions and Answers.

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HBSE 8th Class Hindi ध्वनि Textbook Questions and Answers

कहानी से

प्रश्न 1.
कवि को ऐसा विश्वास क्यों है कि उसका अंत अभी नहीं होगा?
उत्तर:
कवि को ऐसा विश्वांस इसलिए है कि अभी उसके जीवन में काफी उत्साह और ऊर्जा है। वह युवा पीढ़ी को आलस्य की दशा से उबारना चाहता है। अभी उसे का काम करना है। वह स्वयं को काम के सर्वथा उपयुक्त माना है।

प्रश्न 2.
फूलों को अनंत तक विकसित करने के लिए कवि कौन-कौन-सा प्रयास करता है?
उत्तर:
फूलों को अनंत तक विकसित करने के लिए कवि उन्हें कलियों की स्थिति से निकालकर खिले फूल बनाना चाहता है। वह कलियों पर वासंती स्पर्श का हाथ फेरकर खिला देगा। वह युवकों को काव्य-प्रेरणा से अनंत का द्वारं दिखा देमा।

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 1 ध्वनि

प्रश्न 3.
कवि पुष्पों की तन्द्रा और आलस्य दूर हटाने के लिए क्या करना चाहता है?
उत्तर:
कवि पुष्पों की तन्द्रा (नींद) और आलस्य को दूर | हटाने के लिए उन पर हाथ फेरेगा और उनको खिला देगा। जो काम वसंत करता है, वही काम कवि भी करेगा। कलियाँ आलस्य में पड़े युवकों की प्रतीक हैं। वह उनके आलस्य को दूर भगा देगा।

कविता से आगे

प्रश्न 1.
वसंत को ऋतुराज क्यों कहा जाता है? आपस में चर्चा कीजिए।
उत्तर:
वसंत को ऋतुराज कहा जाता है क्योंकि यह सभी ऋतुओं का राजा है। वसंत को सर्वश्रेष्ठ ऋतु माना जाता है। इस ऋतु में प्रकृति पूरे यौवन पर होती है। इस ऋतु में उसकी छटा देखते ही बनती है। यह ऋतु मुर्दो में भी जान डाल देती है। यह ऋतु सभी को अच्छी लगती है।

प्रश्न 2.
वसंत ऋतु में आने वाले त्योहारों के विषय में जानकारी एकत्र कीजिए और किसी एक त्योहार पर निबंध लिखिए।
उत्तर:
वसंत ऋतु में आने वाले त्योहार – वसंत पंचमी : वसंत पंचमी पर सर्दी घटने लगती है। लोग पीले वस्त्र पहनते हैं तथा पीली वस्तुएँ खाते हैं। बागों में बहार चरम सीमा पर होती है।

महाशिवरात्रि : भगवान शंकर की पूजा-अर्जना की जाती है। यज्ञ तथा मेलों आदि का आयोजन होता है।

होली : यह फागुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह मस्ती भरा त्योहार है। यह रंगों का त्योहार है। भारत विभिन्न ऋतुओं का देश है। वसंत को ऋतुराज की संज्ञा दी जाती है। रंगों का त्योहार होली ऋतुराज वसंत के आने का सूचक है। शीत ऋतु के उपरांत वसंत में प्रकृति अनगिनत रंगों के फूलों से सज जाती है। सर्वत्र प्रकृति के रंग-बिरंगे का ही साम्राज्य होता है। रंग-बिरंगे पुष्प एवं सरसों के पीले पुष्पों को देखकर मन प्रसन्न हो जाता है

और मस्ती में झूम उठता है। इस रंग-बिरंगे वसंत में ही होली का शुभागमन होता है। होली का त्योहार प्रति वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली का त्योहार दो दिन तक प्रमुख रूप से मनाया जाता है। पूर्णिमा की रात्रि को होलिका दहन होता है। लोग रात को अपने घरों में ही होली जलाते हैं तथा रबी की फसल की जौ और गेहूँ आदि की बालियाँ भूनते हैं। परस्पर भूने अन्न के दानों का आदान-प्रदान करते हुए अभिवादन करते हैं। अगले दिन प्रातः से ही सभी आबाल वृद्ध एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाते हैं। एक दूसरे के गले मिलते हैं। सभी भेद-भाव भुलाकर रंग डालते हैं। लोगों के चेहरे और कपड़े रंग-बिरंगे हो जाते हैं। लोग मस्ती में गाते, बजाते, नाचते हैं। इस प्रकार होली पारस्परिक प्रेम और सौहार्द का परिचायक है।

रंगों के पर्व होली का पौराणिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से भी विशेष महत्त्व हैं। एक पौराणिक आख्यान के अनुसार हिरण्यकश्यप नामक दैत्यराज था। वह अत्यंत अत्याचारी एवं क्रूर था। उसने भक्त स्वभाव के अपने पुत्र प्रह्लाद पर अनेक अत्याचार किए। हिरण्यकश्यप चाहता था कि प्रह्लाद अपने पिता को ही भगवान् माने। इसलिए वह ईश्वर भक्त प्रहलाद से सदैव कुद्ध रहता था। अनेक अत्याचारों के असफल होने पर उसने एक अंतिम उपाय किया। हिरण्यकश्यप की एक होलिका नाम की बहन थी जिसे आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। उसने होलिका के सहयोग से प्रहलाद को जलाने की बात सोची। वह फाल्गुन मास की पूर्णिमा को प्रह्लाद की गोद में लेकर आग में बैठ गई। भगवान् की कृपा से होलिका तो जल गई परंतु प्रहलाद सकुशल बच गया। कहते हैं कि तभी से इस दिन होलिका का दहन किया जाता है। एक ऐसी भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने तीसरा नेत्र खोलकर कामदेव को भस्म किया था। अतः यह पर्व मदन-दहन पर्व बन गया।

रंगों का त्योहार होली हमें पारस्परिक प्रेम एवं सौहार्द का संदेश देता है। इस दिन शत्रु भी अपनी शत्रुता भूलकर मित्र बन जाते हैं, परंतु कुछ लोग अपनी विकृत मानसिकता का प्रयोग होली में करते हैं। वे शराब पीकर ऊद्यम मचाते हैं, कई बार प्रदूषित रंगों से आँखों एवं चमड़ी के रोग हो जाते हैं। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। हमें शालीनता के साथ गुलाल लगाकर प्रेमपूर्वक होली खेलनी चाहिए ताकि समाज में स्नेह एवं प्रेम का सौहार्द बढ़े।

प्रश्न 3.
“ऋतु परिवर्तन का जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है”-इस कथन की पुष्टि आप किन-किन बातों से कर सकते हैं? लिखिए।
उत्तर:
लोगों के जीवन पर ऋतु-परिवर्तन का बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है। शीत ऋतु में हम काँपते रहते हैं तो वसंत ऋतु का आगमन हमें मस्ती एवं उल्लास से भर देता है। फिर ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है। धरती तपने लगती है। पसीना छूटता है। लोग वर्षा की कामना करते हैं। वर्षा ऋतु जीवन में उल्लास लेकर आती है। अन्न उपजाने के लिए वर्षा ऋतु की बड़ी आवश्यकता होती है। इस प्रकार सभी ऋतुओं से लोगों का जीवन प्रभावित होता है।

अनुमान और कल्पना

1. कविता की निम्नलिखित पंक्तियाँ पढ़कर बताइए कि इनमें किस ऋतु का वर्णन है?
फूटे हैं आमों में बौर
भौंर वन-वन टूटे हैं।
होली मची ठौर-ठौर
सभी बंधन छूटे हैं।

कविता की इन पंक्तियों में वसंत ऋत का वर्णन है। वसंत में ही होली का त्योहार आता है। आमों के बौर भी इसी ऋतु में फूटते हैं।

2. स्वप्न भरे कोमल-कोमल हाथों को अलसाई कलियों पर फेरते हुए कवि कलियों को प्रभात के आने का संदेश देता है, उन्हें जगाना चाहता है और खुशी-खुशी अपने जीवन के अमृत से उन्हें सींचकर हरा-भरा करना चाहता है। फूलों-पौधों के लिए आप क्या-क्या करना चाहेंगे?
हम फूल-पौधों के लिए ये काम करना चाहेंगे:

  • उन्हें पानी से सीचेंगे।
  • उनमें समय-समय पर खाद डालना चाहेंगे।
  • फूलों को पूरी तरह खिलने देंगे। उनको तोड़ेंगे नहीं।

3. कवि अपनी कविता में एक कल्पनाशील कार्य की बात बता रहा है। अनुमान कीजिए और लिखिए कि उसके बताए कार्यों का और किन-किन संदों से संबंध जुड़ सकता है? जैसे नन्हे-मुन्ने बालक को माँ जगा रही हो…
माँ अपने नन्हें-नन्हें बालक को जगाती है। उस पर प्यार भरा हाथ फेरती है।
→ माली भी पौधों पर अपना प्यार भरा हाथ फेरता है, उन्हें सींचता है, उनका विकास करता है।

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 1 ध्वनि

भाषा की बात

1. ‘हरे-भरे’, ‘पुष्प-पुष्प’ में एक शब्द की एक ही अर्थ में पुनरावृत्ति हुई है। कविता के ‘हरे-हरे ये पात’ वाक्यांश में ‘हरे-हरे’ शब्द युग्म पत्तों के लिए विशेषण के रूप में प्रयुक्त हुए हैं। यहाँ पात शब्द बहुवचन में प्रयुक्त है। ऐसा प्रयोग भी होता है, जब कर्ता या विशेष्य एकवचन में हो और कर्म या क्रिया या विशेषण बहुवचन में; जैसे-वह लंबी-चौड़ी बातें करने लगा। कविता में एक ही शब्द का एक से अधिक अर्थों में प्रयोग होता है-तीन बेर खाती है तीन बेर खाती है।” जो तीन बार खाती थी वह तीन बेर खाने लगी है। एक शब्द ‘बेर’ का दो अर्थ में प्रयोग करने से वाक्य में चमत्कार आ गया। इसे यमक अलंकार कहा जाता है।

कभी-कभी उच्चारण की समानता से शब्दों की पुनरावृत्ति का आभास होता है। जबकि दोनों दो प्रकार के शब्द होते हैं, जैसे-मन का मनका।

ऐसे वाक्यों को एकत्र कीजिए जिनमें एक ही शब्द की पुनरावृत्ति हो। ऐसे प्रयोगों को ध्यान से देखिए और निम्नलिखित पुनरावृत शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए-बातों-बातों में, रह-रहकर, लाल-लाल, सुबह-सुबह, रातों-रात, घड़ी-घड़ी।।

काली घटा का घमंड घटा (घटा बादल की घटा, कम हुआ)

  • माँ का लाल गुस्से में लाल हो गया।
  • रात में घड़ी प्रातःकालीन घड़ी की ओर जा रही थी।
  • कनक कनक तै सौ गुनी मादकता अधिकाय।

2. ‘कोमल गात, मृदुल वसंत, हरे-हरे ये पात’:
विशेषण जिस संज्ञा (या सर्वनाम) की विशेषता बताता है, उसे विशेष्य कहते हैं। ऊपर दिए गए वाक्यांशों में गात, वसंत और पात शब्द विशेष्य हैं, क्योंकि इनकी विशेषता (विशेषण) क्रमशः कोमल, मृदुल और हरे-हरे शब्द बता रहे हैं।

हिंदी विशेषणों के सामान्यतया चार प्रकार माने गए हैं – गुणवाचक विशेषण, परिमाणवाचक विशेषण, संख्यावाचक विशेषण और सार्वनामिक विशेषण।

  • गुणवाचक विशेषण – सुंदर बालक, लंबी मेज
  • परिमाणवाचक विशेषण – दो किलो चीनी, थोड़ा चावल
  • संख्यावाचक विशेषण – चार केले, पाँचवाँ बालक
  • सार्वनामिक विशेषण – वह घर, यह बोतल

कविता से आगे

1. वसंत पर अनेक सुंदर कविताएँ हैं। कुछ कविताओं का संकलन तैयार कीजिए।

2. शब्दकोश में ‘वसंत’ शब्द का अर्थ देखिए। शब्दकोश में शब्दों के अर्थों के अतिरिक्त बहुत-सी अलग तरह की जानकारियाँ भी मिल सकती हैं। उन्हें अपनी कॉपी में लिखिए।

वसंत पर कविताएँ:
ब्रजभाषा के श्रेष्ठ कवि पद्ममाकर ने अपने शब्दों में वसंत की शोभा का वर्णन करते हुए कहा है –
कूलन में केलिन में कछारन में
कंजन में क्यारिन में कलित कलीन किलकत है।
कहै पद्ममाकर पराग हूँ मैं, पोन हूँ मैं
पानन में, पीकन में, पलाशन पगंत है।
कछार में, दिशा में, दूनी में, देश-देशन में
बनन में, बागन में बगरयो वसंत है।
श्री सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ने तो वसंत की समृद्धता और ऐश्वर्यता की तुलना मठ के प्रधान महंत से की है :
आए महंत वसंत
मखमल के झले पड़े हाथी-सा टीला
बैठे किंशुक छत्र लगा बाँध पाग पीला
चँवर सदृश डोल रहे सरसों के सर अनंत
आए महंत वसंत।

शब्दकोश में वसंत के अर्थ:

  • छह ऋतुओं में से एक ऋतु जो चैत्र-वैशाख में आती है
  • कामदेव का सहचर
  • अतिसार
  • एक वृत्त
  • एक राग।

ध्वनि Summary in Hindi

ध्वनि कवि-परिचय

प्रश्न: सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला’ का जीवन एवं साहित्य का परिचय दीजिए।
उत्तर:
जीवन-परिचय : निराला जी का जन्म सन् 1897 ई. में बंगाल के महिषादल राज्य में मेदिनीपुर नामक गाँव में हुआ था। इनके पिता श्री रामसहाय त्रिपाठी उत्तर प्रदेश के जिला उन्नाव के निवासी थे और आजीविका के लिए महिषादल (बंगाल) चले गये थे। निराला की आरंभिक शिक्षा घर पर ही हुई। इन्होंने संस्कृत, बंगला और अंग्रेजी का अध्ययन घर पर ही किया। उनकी साहित्य के अतिरिक्त-दर्शनशास्त्र व संगीत के प्रति रुचि थी। इनकी विचारधारा पर स्वामी रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद का गहरा प्रभाव पड़ा। अपने निराले व्यक्तित्व के कारण ये हिंदी साहित्य जगत में ‘निराला’ उपनाम से प्रसिद्ध हुए।

रचनाएँ : ‘परिमल’, ‘अनामिका’, ‘गीतिका’, ‘अपरा’, ‘नये पत्ते’, ‘राम की शक्ति-पूजा’, ‘तुलसीदास’ (काव्य) अलका’, ‘निरुपमा’, ‘चोटी की पकड़’ (उपन्यास) ‘लिली’, ‘सखी’, ‘चतुरी चमार’ (कहानी संग्रह) प्रबंध की प्रतिमा’, ‘प्रबंध पद्म’ (निबंध : संग्रह) ‘रवींद्र-कविता-कानन’, ‘पतन और पल्लव’ (आलोचना) ‘समन्वय’, ‘मतवाला’, ‘सुधा’ (पत्रिका) आदि।

साहित्यगत विशेषताएँ : यद्यपि निराला हिंदी-साहित्य में कवि के रूप में प्रसिद्ध हैं तथापि वे गद्य पर समान अधिकार रखते हैं। उनकी बहुमुखी प्रतिभा के दर्शन उनकी काव्य रचनाओं एवं उपन्यास, कहानी, निबंध, रेखाचित्र और आलोचना के क्षेत्र में दिखाई देते हैं। पत्र-संपादक के क्षेत्र में भी लौह-लेखनी ने प्रसिद्धि पाई। उनकी आरंभिक कविताओं में छायावाद के दर्शन होते हैं। इसके अतिरिक्त उनकी गणना उच्च कोटि के रहस्यवादी और प्रगतिवादी कवियों में की जाती है। उन्होंने शृंगार, प्रेम, प्रकृति सौंदर्य, राष्ट्र-प्रेम आदि विषयों पर काव्य रचना की। उनके साहित्य में जहाँ दलित समाज के प्रति सहानुभूति का भाव है, वहाँ शोक शोषक वर्ग पर कटु व्यंग्य है।

भाषा-शैली : निराला ने काव्य की पुरानी परंपराओं को त्याग कर काव्य-शैली को नई दिशा प्रदान की। हिंदी काव्य में ‘स्वच्छंद-छंद’ निराला जी की देन है। निराला की कविताओं में संगीतात्मकता है। यद्यपि उनके साहित्य की भाषा तत्सम प्रधान है, तथापि उनकी प्रगतिवादी रचनाएँ बोलचाल की भाषा में हैं।

ध्वनि कविता का सार

इस कविता में कवि निराला कहते हैं कि अभी उनका अंत नहीं होने वाला है। जो आलोचक यह कह रहे थे कि अब निराला के कवि-जीवन का अंत होने वाला है कवि उनको इस कविता के माध्यम से करारा उत्तर देता है। कवि कहता है कि अभी तो उसके कवि-जीवन का उत्कर्ष हुआ है। उसके जीवन में वसंत की बहार आई हुई है। वह अपनी कविताओं के माध्यम से निद्रामग्न युवा पीढ़ी को आशा का संदेश देकर जागृत करेगा। वह एक-एक फूल अर्थात् एक-एक युवक से आलस्य को दूर भगा देगा और उनके जीवन में अमृत सींच देगा। वह उनको स्वर्ग जैसे सुखों का द्वार दिखा देगा। अभी उसे बहुत कुछ करना है। अभी उसका अंत नहीं आया है।

HBSE 8th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 1 ध्वनि

ध्वनि काव्याशों की सप्रसंग व्याख्या

1. अभी न होगा मेरा अंत
अभी-अभी ही तो आया है
मेरे वन में मृदुल वसंत
अभी न होगा मेरा अंत।
हरे-हरे ये पात,
डालियाँ, कलियाँ, कोमल गात।
मैं ही अपना स्वप्न-मृदुल-कर
फेरूँगा निद्रित कलियों पर
जगा एक प्रत्यूष मनोहर।

शब्दार्थ : मृदुल – कोमल सुखद (Tender), वन = जंगल, बगीचा, जीवन (Garden), अंत = समाप्ति (End), पात – पत्ते (Leaves), गात – शरीर (Body), निद्रित = नींद में (Drowsy), प्रत्यूष = प्रातःकालीन समय (time of early morning), मनोहर = सुंदर (Beautiful), कर * हाथ (Hands)।

प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित कविता ‘ध्वनि’ से अवतरित है। इसमें कवि अपने कवि जीवन के उत्कर्ष काल का वर्णन करता है।

व्याख्या : कवि आलोचकों को उत्तर देते हुए कहता है कि अभी मेरे कवि-जीवन का अंत नहीं होने वाला है। अभी-अभी तो मेरे जीवन में वसंत की बहार आई है अर्थात् मेरे कवि-जीवन का उत्कर्ष हुआ है। कवि के वन में अर्थात् जीवन में कोमल वसंत का आगमन अभी ही हुआ है। अतः अभी उसका अंत नहीं होने वाला। – अभी उसका शरीरं यौवन की मस्ती से भरपूर है। कवि अपने कोमल हाथों को इन कलियों पर फेरकर उनमें एक प्रात:कालीन सवेरे को जागृत कर देगा। कवि के कहने का भाव यह है कि जो युवक नींद में पड़े हुए हैं, वह उनको प्रेरित करके उनमें नए उत्कर्ष के स्वप्न जगा देगा। वह उनका आलस्य दूर या गलथा उनमें उत्साह का संचार कर देगा।

विशेष :
1. ‘अभी-अभी’, ‘हरे-हरे’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
2. ‘कलियाँ कोमल’ में अनुप्रास अलंकार है।

2. पुष्प-पुष्प से तंद्रालस लालसा खींच लूँगा मैं,
अपने नव जीवन का अमृत सहर्ष सींच दूंगा मैं,
द्वार दिखा दूंगा फिर उनको।
हैं मेरे वे जहाँ अनंत
अभी न होगा मेरा अंत।

शब्दार्थ : पुष्प – फूल (Flower), तंद्रालस = आलस्य (Laziness sleepness), नव = नया (New), सहर्ष = खुशी के साथ (withjoy), द्वार = दरवाजा (Door), अनंत = जिसका अंत न हो (Endless)।

प्रसंग : प्रस्तुत काव्यांश सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित कविता ‘ध्वनि’ से अवतरित है। इसमें कवि अपने कवि-कर्म का परिचय देते हुए कहता है :

व्याख्या : कवि कहता है कि मैं एक-एक फूल से आलस्य . को खींच लूँगा अर्थात् आलस्य में पड़े प्रत्येक युवक के मन से आलस्य की भावना को दूर कर दूंगा और उनके मन में नए जीवन का अमृत प्रसन्नतापूर्वक भर दूंगा। (वसंत भी यही काम करता है। वह लोगों में नव जीवन का संचार करता है।)

कवि युवा वर्ग के मन से आलस्य, निराशा की भावना को दूर करके उनको अमरता का द्वार दिखा देगा। कवि के जीवन में अभी वसंत आया ही है। अतः उसका अभी अंत नहीं होने वाला है।

विशेष:
1. ‘पुष्प-पुष्प’ में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है।
2. ‘सहर्ष सींच’ में अनुप्रास अलंकार है।
3. खड़ी बोली का प्रयोग किया गया है।

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HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 20 विप्लव गायन

Haryana State Board HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 20 विप्लव गायन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 20 विप्लव गायन

HBSE 7th Class Hindi विप्लव गायन Textbook Questions and Answers

कविता से

प्रश्न 1.
‘कण-कण में है व्याप्त वही स्वर कालकूट फणि की चिंतामणि’
(क) वही स्वर, वह ध्वनि एवं वही तान किसके लिए/किस भाव के लिए प्रयुक्त हुआ है ?
(ख) वही स्वर, वह ध्वनि एवं वही तान से संबंधित भाव का ‘रुद्ध-गीत की क्रुद्ध तान है/निकली मेरी अंतरतर से’- पंक्तियों से क्या कोई संबंध बनता है।
उत्तर :
(क) वही स्वर, वह ध्यानि एवं वही तान क्रांति के भाव के लिए प्रयुक्त है।
(ख) हाँ, इनका आपस में संबंध बनता है। उसकी यह तान उसके हृदय की गहराइयों से निकली है।

प्रश्न 2.
नीचे दी गई पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-
‘सावधान! मेरी वीणा में दोनों मेरी ऐंठी हैं।’
उत्तर :
कवि सरस्वती के उपासकों का आह्वान करते हुए उनसे एक ऐसा गीत सुनाने का आग्रह करता है जिससे सब जगह उथल-पुथल मच जाए अर्थात् क्रांति आ जाए। उन्होंने अब तक मधुर गीत तो बहुत गा लिए, अब ऐसे गीत की आवश्यकता है जिससे क्रांति की ज्वाला निकले। कवि देश के सभी भागों से विचारों और भावों की लहरें उठने की कामना करता है।

कवि शोषकों और दमन-चक्र चलाने वालों को सावधान करते हुए कहता है कि अब मेरी वीणा (कंठ रूपी वीणा) में स्वतंत्रता की चिनगारियाँ आ बैठी हैं अर्थात् क्रांति के स्वर उभर रहे हैं। अब उससे प्रेम और श्रृंगार के मधुर स्वर नहीं निकलेंगे। अब तो केवल क्रांति के स्वर गूंजेंगे। यदि वीणावादक की उँगलियाँ अकड़ जाएँ अर्थात् ऐंठ जाएँ तो मिजराबें टूट जाती है और तब अपेक्षित स्वर नहीं निकल पाते। कवि की भी यही स्थिति हो गई है। कवि के मन में भी क्रांति के स्वर उभर रहे हैं।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 20 विप्लव गायन

कविता से आगे

1. स्वाधीनता संग्राम के दिनों में अनेक कवियों ने स्वाधीनता को मुखर करनेवाली ओजपूर्ण कविताएँ लिखीं। माखनलाल चतुर्वेदी, मैथिलीशरण गुप्त और सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला’ की ऐसी कविताओं की चार-धार पंक्तियाँ इकट्ठा कीजिए जिनमें स्वाधीनता के भाव ओज से मुखर हुए हैं।
उत्तर :
माखनलाल चतुर्वेदी
मुझे तोड़ लेना वनमाली,
उस पथ में देना तम फेंक,
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने,
जिस पथ जावें वीर अनेक।
जिनके मस्तक पर मातृभूमि का रस बरसे
जिनकी रग-रग में दूध भरा हो माता का।
सागर की बाँह मिलनोत्सुका प्रचंड बढ़ी
सूरज पूरब काटी का बना विधाता का।
उनकी सत्याग्रह-भरी विजय का बल जानो।
उनकी अजेय अनुराग-शक्ति को पहचानो।

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
बाधाएँ आएँ तन पर,
देखू तुझे नयन मन भर,
मुझे देख तू सजल दुगों से
अपलक, उर के शतदल पर;
क्लेद-युक्त, अपना तन दूंगा,
मुक्त करूंगा तुझे अटल,
तेरे चरणों पर देकर बलि,
सकल श्रेय-श्रम सचित फल।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 20 विप्लव गायन

HBSE 7th Class Hindi विप्लव गायन Important Questions and Answers

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कवि क्या चाहता है?
उत्तर :
कवि क्रांति लाना चाहता है।

प्रश्न 2.
कवि कैसी तान सुनना चाहता है?
उत्तर :
जिस तान को सुनकर उथल-पुथल मच जाए।

प्रश्न 3.
कवि के हृदय से कैसी तान निकली है?
उत्तर :
कवि के हृदय से कुद्ध तान निकली है।

प्रश्न 4.
कैसा गीत समाज में क्रांति ला सकता है?
उत्तर :
महानाश का मारक गीत समाज में क्रांति ला सकता है

प्रश्न 5.
विप्लव-गायन कैसी कविता है?
उत्तर :
‘विप्लव-गायन’ जड़ता के विरुद्ध विकास एवं गतिशीलता की कविता है।

प्रश्न 6.
कवि संघर्ष करके क्या करना चाहता है?
उत्तर :
कवि संघर्ष करके नया सृजन (निर्माण) करना चाहता है।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 20 विप्लव गायन

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कवि ने यह विप्लव गीत क्यों लिखा होगा?
उत्तर :
कवि अपने गीत के माध्यम से समाज में क्रांति के लिए चेतना जगाना चाहता था। अत: उसने विप्लव गीत लिखा।

प्रश्न 2.
‘विप्लव-गायन’ का प्रतिपाद्य लिखो।
उत्तर :
‘विप्लव-गायन’ जड़ता के विरुद्ध विकास एवं गतिशीलता की कविता है। विकास और गतिशीलता को अवरुद्ध करनेवाली प्रवृत्ति से संघर्ष करके कवि नया सृजन करना चाहता है। इसलिए कवि विप्लव के माध्यम से परिवर्तन की हिलोर लाना चाहता है।

विप्लव गायन काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. कवि, कुछ ……………… ऐंठी हैं।

शब्दार्थ: तान = लय, स्वर (Rhythem)। उथल-पुथल = ऊपर-नीचे होना, परिवर्तन (Change)। हिलोर = लहर (Wave)। मिजराबें = वीणा के तारों को छोड़ने के लिए उँगली में पहने जाने वाला छल्ला (Ring in finger)।

सप्रसंग व्याख्या :
प्रसंग :
यह काव्यांश प्रसिद्ध देशभक्त कवि बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ द्वारा रचित कविता ‘विप्लव-गायन’ से लिया गया है। इसे हमारी पाठ्यपुस्तक ‘वसंत भाग-2’ में संकलित किया गया है। यह एक क्रांतिगीत है। इसे नवीन जी ने स्वयं बीसियों बार गाया था। कवि एक नए समाज के निर्माण का आह्वान करता है।

व्याख्या :
कवि सरस्वती के उपासकों का आह्वान करते हुए उनसे एक ऐसा गीत सुनाने का आग्रह करता है जिससे सब जगह उथल-पुथल मच जाए अर्थात् क्रांति आ जाए। उन्होंने अब तक मधुर गीत तो बहुत गा लिए, अब ऐसे गीत की आवश्यकता है जिससे क्रांति की ज्वाला निकले। कवि देश के सभी भागों से विचारों और भावों की लहर उठने की कामना करता है।

कवि शोषकों और दमन-चक्र चलाने वालों को सावधान करते हुए कहता है कि अब मेरी वीणा (कंठ रूपी वीणा) में स्वतंत्रता की चिनगारियाँ आ बैठी हैं अर्थात् क्रांति के स्वर उभर रहे हैं। अब उससे प्रेम और श्रृंगार के मधुर स्वर नहीं निकलेंगे। अब तो केवल क्रांति के स्वर गूंजेंगे। यदि वीणावादक की उँगलियाँ अकड़ जाएँ अर्थात् ऐंठ जाएँ तो मिजरा टूट जाती हैं और तब अपेक्षित स्वर नहीं निकल पाते। कवि की भी यही स्थिति हो गई है। कवि के मन में भी क्रांति के स्वर उभर रहे हैं।

विशेष :
1. कवि ने क्रांति का आह्वान किया है।
2. भाषा ओजपूर्ण है।
3. ‘कवि कुछ’ में अनुप्रास अलंकार है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. कवि और कविता का नाम लिखो।
2. कवि से कैसी तान सुनाने के लिए कहा जा रहा है?
3. कवि की वीणा में से कैसे स्वर निकल रहे हैं?
4. कवि किनका पक्षधर हे?
उत्तर:
1. कवि का नाम – बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’
कविता का नाम – विप्लव-गायन
2. कवि से ऐसी तान सुनाने के लिए कहा जा रहा है जिससे चारों ओर उथल-पुथल मच जाए अर्थात् क्रांति का आगमन हो जाए।
3. कवि की वीणा से चिनगारी जैसे क्रांतिकारी स्वर निकल रहे हैं।
4. कवि शोषितों (किसान-मजदूरों) का पक्षधर है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. यह कविता किस वाद से प्रभावित है?
(क) छायावाद
(ख) प्रगतिवाद
(ग) साम्यवाद
(घ) प्रयोगवाद
उत्तर :
(ख) प्रगतिवाद

2. ‘उथल-पुथल मचने’ से कवि का क्या आशय है?
(क) क्रांति का आगमन हो जाए
(ख) समाज में परिवर्तन हो जाए
(ग) विद्रोह हो जाए
(घ) पानी बह जाए
उत्तर :
(क) क्रांति का आगमन हो जाए

3. “मिज़राबें” का अर्थ है
(क) वीणा बजान का छल्ला
(ख) वीणा के तार
(ग) वीणा के स्वर
(घ) अँगुली
उत्तर :
(क) वीणा बजान का छल्ला

4. इस कविता के रचयिता हैं
(क) मैथिलीशरण गुप्त
(ख) बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’
(ग) सुमित्रानंदन पंत
(घ) मनोहर लाल
उत्तर :
(ख) बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 20 विप्लव गायन

2. कंठ रुका ………………… अंतरतर से।

शब्दार्थ : कंठ = गला (Threatty) महानाश = पूरी बर्बादी (Toteil deestruction)। मारक = मारने वाला (Killery)। रुद्ध = रुका हुआ (Stopped)। हृत्तल = हृदय (Hearior) क्षुब्ध = कुपित (Angry)। दग्ध = जना हुआ (Burmy। कुद्ध = क्रोध में (Angry)। अंतर = हृदय (Heartyl

सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ द्वारा रचित क्राति गीत ‘विप्लव-गायन’ से अवतरित हैं। क्रांति आने पर पहले नाश होता है और फिर नव-निर्माण होता है।

व्याख्या :
कवि कहता है कि पहले मेरा कंठ रुका हुआ था। मैं चाहकर भी मारक गीत नहीं लिख पाता था। अब यह स्थिति समाप्त हो गई है। अब मेरे हृदय के अंदर वर्तमान शासन के प्रति क्रोध, आक्रोश और घृणा के भाव जाग गए हैं और मैंने क्रांति – गीत लिखने का निश्चय कर लिया है। इन गीतों से लोगों के हृदयों में आग लग कर रहेगी। अब एक प्रकार का युद्ध छिड़ गया है।

मेरे क्रांति गीत से जो आग निकलेगी उससे झाड़-झंखाड़ अर्थात् गलत रूढ़ियाँ परंपराएँ जलकर नष्ट हो जाएंगी। मेरे मन में अब तक जो गीत रुका हुआ था. अब उसकी क्षुब्ध (दुखी) तान विद्रोह की ज्वाला भड़काकर रहेगी क्योंकि यह तान मेरे हृदय की गहराई से निकली है। मेरा यह गीत मधुर एवं कोमल न होकर विद्रोह की ज्याला भड़काने वाला होगा। इसका प्रभाव व्यापक होगा।

विशेष :
1. तत्सम शब्दों का प्रयोग है।
2. ओज गुण का समावेश है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. कवि की स्थिति क्या हो गई है?
2. अब वह कैसे गीत लिखना चाह रहा है?
3. क्रांति गीत से क्या होगा?
उत्तर:
1. कवि का कंठ रुक गया है और वह चाहकर भी मारक गीत नहीं लिख पा रहा है। अब उसके हृदय में शासन के प्रति क्रोध, आक्रोश और घृणा के भाव जाग गए हैं।
2. अब कवि क्रांति गीत लिखना चाह रहा है।
3. इस क्रांति गीत से विद्रोह की ज्वाला भड़केगी। इसका प्रभाव व्यापक होगा।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. आग कहाँ लगेगी?
(क) लोगों में
(ख) हृदय में
(ग) शासन में
(घ) कहीं नहीं
उत्तर :
(ख) हृदय में

2. ‘दग्य’ शब्द कैसा है?
(क) तत्सम
(ख) तद्भव
(ग) देशज
(घ) विदेशी
उत्तर :
(क) तत्सम

3. कवि कैसा गीत नहीं लिख पा रहा है?
(क) मारक गीत
(ख) रुद्ध गीत
(ग) क्रांति गीत
(घ) सामान्य गीत
उत्तर :
(क) मारक गीत

4. यह काव्यांश किस कविता से लिया गया है?
(क) विप्लव से
(ख) विप्लव-गायन से
(ग) क्रांति गीत से
(घ) मारक गीत से
उत्तर :
(ख) विप्लव-गायन से

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 20 विप्लव गायन

3. कण – कण …………… आया हूँ।

शब्दार्थ : व्याप्त = समाया हुआ (Spread over)। ध्वनि = आवाज़ (Sound)। कालकूट = जहर (Poison)। फणि = साँप (Snake)। भू-विलास = भौहें टेढ़ी होना, क्रोध (Anger)। पोषक = पालने वाले (Nourishing)। परख = जाँच (Test)

सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘वसंत भाग-2’ में संकलित कविता ‘विप्लव-गायन’ से ली गई हैं। इस कविता के रचयिता बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ हैं।

व्याख्या :
कवि अपने कंठ से निकले गीत की व्यापकता को बताते हुए कहता है कि यह गीत सारे संसार के कण-कण में समाया हुआ है। आज प्रत्येक व्यक्ति का रोम-रोम इसी गीत को गा रहा है। केवल इस जगत के प्राणी ही नहीं, भयंकर विष को धारण करने वाले शेषनाग के सिर पर विद्यमान चिंतामणि भी इसी प्रलय-गीत का गायन कर रही है। वह भी क्रांति का आह्वान कर रहा है। शेषनाग भी मेरा क्रांति-गीत सुनकर मस्ती में अपना फन हिलाकर झूम रहा है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. कण-कण में कौन-सा स्वर व्याप्त है?
2. कवि को जीवन का क्या राज समझ आ गया है?
3. कवि को महानाश के पोषक सूत्र कहाँ दिखाई दिए?
उत्तर:
1. कण-कण में क्रांति के स्वर व्याप्त हैं।
2. कवि को जीवन का यह रारा समझ में आ गया है कि क्रांति के बिना नव-निर्माण या परिवर्तन संभव नहीं है।
3. कवि को महानाश के पोषक सूत्र भौंहों के एक इशारे में दिखाई दिए अर्थात् जब लोग अपनी भृकुटि टेढ़ी करते हैं तब महानाश होता है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. ‘सेम-रोम’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) अनुप्रास
(ख) पुनरुक्ति
(ग) यमक
(घ) उपमा
उत्तर :
(ख) पुनरुक्ति

2. ‘भ्रू’ शब्द कैसा है?
(क) तत्सम
(ख) तद्भव
(ग) देशज
(घ) विदेशी
उत्तर :
(क) तत्सम

3. ‘कालकूट’ शब्द का अर्थ है
(क) ज़हर
(ख) अमृत
(ग) दूध
(घ) पानी
उत्तर :
(क) ज़हर

4. इस कविता का मूल स्वर कैसा है?
(क) क्रांति का
(ख) विद्रोह का
(ग) परिवर्तन का
(घ) इन सभी का
उत्तर :
(घ) इन सभी का

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 20 विप्लव गायन

विप्लव गायन Summary in Hindi

विप्लव गायन कवि-परिचय

प्रश्न : बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ का जीवन परिचय देते हुए उनका साहित्यिक परिचय भी दीजिए।
उत्तर :
जीवन-परिचय :
बालकृष्ण शर्मा नवीन स्वतंत्रता संग्राम के एक निर्भीक पत्रकार, कवि, गद्यकार एवं स्वतंत्रता सेनानी थे। उनका जन्म 8 दिसंबर, 1897 ई. को ‘ग्वालियर’ राज्य के शाजापुर नामक परगने के भयाना नामक गाँव में हुआ था। पिता बहुत निर्धन थे। वैष्णव माता-पिता के साथ उदयपुर राज्य में स्थित ‘नाथद्वारा’ मंदिर में बचपन की धमाचौकड़ी मचाने के बाद पढ़ाई के लिए पुनः शाजापुर आ गए। शाजापुर से मिडिल पास करने के बाद वे उज्जैन चले गए जहाँ उन्हरने माधव कॉलेज में प्रवेश लिया। युवा नवीन को राजनीति ने तीव्रता से आकृष्ट किया।

1916 ई. में लोकमान्य तिलक के आह्वान पर अखिल भारतीय कांग्रेस का अधिवेशन देखने लखनऊ जा पहुँचे। इसी अधिवेशन में उनकी भेंट माखनलाल चतुर्वेदी, मैथिलीशरण गुप्त और गणेशशंकर विद्यार्थी से हुई। 1917 ई. में हाई स्कूल पास करने के बाद वे गणेश शंकर विद्यार्थी के बुलावे पर कानपुर पहुँच गए, जहाँ विद्यार्थी ‘प्रताप’ नामक अखबार का प्रकाशन कर रहे थे। उन्होंने नवीन को ‘प्रताप’ में रख लिया और पढ़ाई के लिए ‘क्राइस्ट चर्च कॉलेज’ में भर्ती करा दिया।

1920 ई. में गाँधी जी के आह्वान पर सत्याग्रही बन गए और कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। 1931 ई. में गणेशशंकर विद्यार्थी की मृत्यु के बाद नवीन ही ‘प्रताप’ के मुख्य संपादक बने। 1960 ई. तक वे देश की राजनीति में बराबर सक्रिय रहे। 1952 ई. में प्रथम लोक सभा के सदस्य बने और मृत्युपर्यंत (1960 तक) भारतीय संसद के वरिष्ठ सदस्य भी रहे। वे फक्कड़ मनमौजी और अलमस्त किस्म के व्यक्ति थे। वे पक्के वैष्णव थे।

साहित्यिक परिचय :
1917 से वे गणेशशंकर विद्यार्थी के पत्र ‘प्रताप’ से जुड़े और इससे उनका संपर्क अंत तक बना रहा। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी की ‘खंडवा’ (म.प्र.) से प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘प्रभा’ का संपादन कार्य भी 1921-23 तक किया था। इन पत्रों में उनकी लिखी संपादकीय टिप्पणियाँ अपने ओज, खरेपन और अभिव्यंजना शैली की विशिष्टता के कारण आज भी पठनीय हैं। वे एक निर्भीक पत्रकार थे। रचनाएँ : कुमकुम, रश्मिरेखा, अपलक, हम विषायी जनम के।

विप्लव गायन कविता का सार

‘विप्लव-गायन’ शीर्षक कविता एक क्रांति-गीत है। इसमें जड़ता के विरुद्ध विकास एवं गतिशीलता की बात कही गई है। विकास के मार्ग को रोकने वाली प्रवृत्ति से संघर्ष करने की भावना का आह्वान किया गया है। इस गीत में कवि ने कवियों से ऐसे गीत के सृजन की कामना की है जो क्रांति का मार्ग प्रशस्त करे।

कवि चाहता है कि अन्याय और शोषण से भरी व्यवस्था नष्ट-भ्रष्ट हो जाए। कवि नए समाज का निर्माण करना चाहता है। कवि अपने गीत के माध्यम से समाज में उथल-पुथल लाना चाहता है। वह अपने मन के भावों को कंठ से निकले गीत में प्रकट करना चाहता है। इससे क्रांति की ज्वाला निकलेगी और सब बुरा-बुरा जल कर नष्ट हो जाएगा। कवि को यह बात समझ आ गई है कि नव-निर्माण से पहले नाश अवश्य होता है।

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HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 19 आश्रम का अनुमानित व्यय

Haryana State Board HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 19 आश्रम का अनुमानित व्यय Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 19 आश्रम का अनुमानित व्यय

HBSE 7th Class Hindi आश्रम का अनुमानित व्यय Textbook Questions and Answers

लेखा – जोखा

प्रश्न 1.
हमारे यहाँ बहुत से काम लोग खुद नहीं करके किसी पेशेवर कारीगर से करवाते हैं। गांधी जी छेनी, हथौड़े, वसूले क्यों खरीदना चाहते होंगे?
उत्तर :
यह सही है कि हमारे यहाँ लोग काम खुद न करके किसी पेशेवर कारीगर से काम करवाना पसंद करते हैं और उनके पास अपने औजार होते हैं। गाँधी जी आश्रम के लिए छेनी, हथौड़े. बसूले इसलिए खरीदना चाहते थे ताकि आश्रम के लोग अपने हाथों से काम कर सकें। वे आश्रम में रहने वाले लोगों को काम करने के लिए प्रेरित करना चाहते थे। वे आश्रम को स्वावलंबी बनाना चाहते थे।

प्रश्न 2.
गाँधी जी ने अखिल भारतीय कांग्रेस सहित कई संस्थाओं व आंदोलनों का नेतृत्व किया। उनकी जीवनी या उन पर लिखी गई किताबों से उन अंशों को चुनिए जिनसे गाँधी जी की हिसाब-किताब में चुस्ती का पता चलता है ?
उत्तर :
गाँधी जी ने अखिल भारतीय कांग्रेस, कई संस्थाओं (खादी ग्रामोद्योग आदि) तथा आंदोलनों का सफल नेतृत्व किया। वे हिसाब-किताब रखने में प्रारंभ से ही चुस्त थे। इंग्लैंड में भी पढ़ाई के दौरान वे पाई-पाई का हिसाब रखते थे और प्रतिदिन अपनी रोकड़ मिला लेते थे। इसका उनकी आत्मकथा में भी उल्लेख है। वे इसी आदत के कारण सभी आंदोलनों को सफलतापूर्वक चला पाए, उन्हें कभी पैसे की कमी नहीं हुई।

प्रश्न 3.
मान लीजिए आपको कोई बाल आश्रम खोलना है। इस बजट से प्रेरणा लेते हुए उसका अनुमानित बजट बनाइए। इस बजट में दिए गए किन-किन मदों पर आप कितना खर्च करना चाहोगे। किन नए मदों को जोड़ना-हटाना चाहोगे?
उत्तर :
यदि हमें बाल-आश्रम खोलना है तो हमें निम्नलिखित मदों पर खर्च करना पड़ेगा
(100 बालकों का आश्रम)

  • जमीन एवं मकानों की व्यवस्था पर : दो लाख रुपए
  • बालकों के वस्त्रों पर खर्च : 20 हजार रुपए
  • बच्चों के बिस्तरों पर खर्च : 10 हजार रुपए
  • बच्चों की पुस्तकों पर खर्च : 10 हजार रुपए
  • बच्चों के खाने पर खर्च : 20 हजार रुपए मासिक
  • नौकरों के वेतन पर खर्च : 15 हजार रुपया मासिक (2 आया, 2 रसोइए. 1 चपरासी, 1 चौकीदार, 1 सफाई कर्मचारी)।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 19 आश्रम का अनुमानित व्यय

प्रश्न 4.
आपको कई बार लगता होगा कि आप कई छोटे-मोटे काम (जैसे-घर की पुताई. दूध दुहना, खाट बुनने का काम) करना चाहें तो कर सकते हैं। ऐसे कामों की सूची बनाइए जिन्हें आप चाहकर भी नहीं सीख पाए। कौन-से कारण रहे होंगे ? उन कामों की सूची भी बनाइए जिन्हें आप सीखकर ही दम लेंगे।
उत्तर :
वे काम जिन्हें हम चाहकर भी नहीं सीख पाए कारण

  • खाना बनाने का काम : सिखाने वाला नहीं मिला।
  • सिलाई करने का काम : सिखाने वाला नहीं मिला।
  • पढ़न का काम : स्वयं ज्यादा न पढ़ सके।

पर मैं इन कामों के सीखने में पूरी तरह लगा हुआ हूँ। मैं इन कामों को सीखकर ही दम लूँगा।

प्रश्न 5. इस अनुमानित बजट को गहराई से पढ़ने के बाद आश्रम के उद्देश्यों और कार्यप्रणाली के बारे में क्या-क्या अनुमान लगाए जा सकते हैं ?
उत्तर :
इस अनुमानित बजट को गहराई से पढ़ने पर आश्रम के उद्देश्यों एवं कार्यप्रणाली के बारे में निम्नलिखित अनुमान लगाए जा सकते हैं
उद्देश्य :

  • स्वावलंबन की भावना उत्पन्न करना।
  • श्रम के प्रति सम्मान का भाव जगाना।
  • सादा जीवन : उच्च विचार।
  • कृषि कार्य में दक्षता लाना।

कार्यप्रणाली :
आश्रम की कार्यप्रणाली के बारे में कहा जा सकता है कि यह आपसी सहयोग- पर चलेगी। यहाँ रहकर सभी हाथ से काम करेंगे। यहाँ का जीवन सरल एवं प्राकृतिक होगा।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 19 आश्रम का अनुमानित व्यय

HBSE 7th Class Hindi आश्रम का अनुमानित व्यय Important Questions and Answers

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
गाँधी जी अहमदाबाद में कौन-सा आश्रम स्थापित कर रहे थे?
उत्तर :
वे अहमदाबाद में साबरमती आश्रम स्थापित कर रहे थे।

प्रश्न 2.
आश्रम में कितने रसोईघर बनाने की सोची गई?
उत्तर :
तीन रसोईघर।

प्रश्न 3.
पुस्तकालय में कितनी पुस्तकें रखी जाती थीं?
उत्तर :
तीन हजार पुस्तकें।

प्रश्न 4.
स्टेशन से मेहमानों को कैसे लाया जाएगा?
उत्तर :
बैलगाड़ी द्वारा।

प्रश्न 5.
शिक्षण के सामान में कितने हथकरघों की आवश्यकता होगी?
उत्तर :
पाँच-छह देशी हथकरघों की आवश्यकता होगी।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 19 आश्रम का अनुमानित व्यय

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आश्रम कहाँ स्थापित होने वाला था? इस आश्रम का नाम बताओ।
उत्तर :
यह आश्रम गुजरात के अहमदाबाद में स्थापित होने वाला था। यह साबरमती आश्रम था।

प्रश्न 2.
इस आश्रम में आरंभ में कितने व्यक्तियों के रहने की संभावना थी और बाद में कितने?
उत्तर :
इस आश्रम में आरंभ में चालीस व्यक्तियों के रहने की संभावना थी। बाद में इनकी संख्या 50 होने वाली थी।

प्रश्न 3.
आश्रम में गाँधी जी इतने सारे औजारों को एकत्रित करना क्यों चाह रहे थे ?
उत्तर :
गाँधी जी आश्रम की पांच एकड़ जमीन पर खेती कराना चाहते थे। इसके साथ-साथ वे अनेक प्रकार की दस्तकारियाँ वहाँ चलाना चाहते थे। इन सभी कामों के लिए काफी संख्या में औजारों की आवश्यकता पड़ने वाली थी।

आश्रम का अनुमानित व्यय गद्यांश पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

1. आरंभ में ……………….. एक साथ।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. आरंभ में आश्रम में कितने लोगों की व्यवस्था की गई?
2 हर महीने कितने अतिथियों के आने की संभावना जवाई गई?
3. किस प्रकार की व्यवस्था होने की बात सोची गई?
उत्तर:
1. आरंभ में आश्रम में 40 लोगों की व्यवस्था की गई।
2. हर महीने औसतन 10 अतिथियों के आने की संभावना जताई गई।
3. अतिथियों में 3 या 5 सपरिवार अलग रखने की तथा शेष के एक साथ रहने की संभावना जताई गई।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. कुछ समय बाद कितनी संख्या होने की संभावना थी?
(क) 30
(ख) 40
(ग) 50
(घ) 60
उत्तर :
(ग) 50

2. सपरिवार रहने वाले कितने अतिथि होंगे?
(क) 2
(ख) 3
(ग) 5
(घ) 3 से 5
उत्तर :
(घ) 3 से 5

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 19 आश्रम का अनुमानित व्यय

2. मुझे मालूम ………………… सकती है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. किसे क्या बात मालूम हुई?
2 किसकी, क्या मांग थी?
3. विचार बदलने पर क्या लगता है?
4. इस विवरण में क्या संभव है?
उत्तर:
1. मोहनदास कर्मचंद गाँधी को यह बात मालूम हुई कि प्रमुख लोगों की यह इच्छा है कि अहमदाबाद में आश्रम स्थापित कर चलाने का प्रयोग एक वर्ष तक किया जाए।
2. गाँधी जी की मांग तो यह भी थी कि यदि अहमदाबाद की पूरी ज़मीन और मकान आदि दे दे तो वे बाकी खर्च कहीं और से जुटा लेंगे।
3. विचार बदलने पर ऐसा लगता है कि वर्ष या इससे कुछ कम दिनों का खर्च अहमदाबाद को उठाना चाहिए।
4. खर्च के इस विवरण में यह संभव है कि कुछ मदें उनसे छूट गई हों। उन्हें खाने के खर्च के अलावा स्थानीय स्थितियों की भी जानकारी नहीं है। अत: अनुमान में भूल संभव है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. प्रमुख लोगों की क्या इच्छा थी?
(क) अहमदाबाद में यह प्रयोग नहीं किया जाए
(ख) अहमदाबाद में यह प्रयोग एक वर्ष तक किया जाए
(ग) अहमदाबाद ज़मीन और मकान दे दे।
(घ) पूरा खर्च अहमदाबाद को उठाना चाहिए।
उत्तर :
(ख) अहमदाबाद में यह प्रयोग एक वर्ष तक किया जाए

2. यदि अहमदाबाद एक वर्ष का खर्च उठाने को तैयार न हो तब क्या होगा?
(क) गाँधी जी खाने का इंतजाम कर सकते हैं
(ख) रहने का इंतजाम लोगों को स्वयं करना होगा
(ग) स्थानीय स्थितियों की जानकारी ली जाएगी
(घ) पूरा खर्च गाँधी जी उठाएँगे।
उत्तर :
(क) गाँधी जी खाने का इंतजाम कर सकते हैं

आश्रम का अनुमानित व्यय Summary in Hindi

आश्रम का अनुमानित व्यय पाठ का सार

महात्मा गाँधी जी ने दक्षिण अफ्रीका से लौटकर अहमदाबाद में एक आश्रम की स्थापना की। गाँधी जी ने इस आश्रम के प्रारंभिक सदस्यों एवं खर्चे का विवरण तैयार किया। इस संस्था में आरंभ में 40 लोग होंगे। हर महीने दस अतिथियों के आने की संभावना प्रकट की गई। इनमें तीन या पाँच सपरिवार रहेंगे। उनके लिए अलग से स्थान की जरूरत होगी। आश्रम में तीन रसोईघर तथा रहने के लिए मकान के लिए 50 000 वर्ग फुट क्षेत्रफल की आवश्यकता समझी गई। इसके अलावा 3000 पुस्तकों के रखने के लिए पुस्तकालय और अलमारियों की भी आवश्यकता थी।

कम-से-कम पाँच एकड़ जमीन खेती के लिए भी चाहिए। तीस आदमियों को काम करने के लिए खेती के औजार, कुदालियाँ, फावड़ों और खुरपों की भी जरूरत होगी।

इन चीजों में 5 हथौड़े, 3 बसूले. 5 छोटी हथौड़ियाँ, 2 एरन, 3 बम, 10 छेनियाँ, 4 रंदे, 1 सालनी, 4 केतियाँ, 4 बेधनियाँ, 4 आरियाँ, 65 संडासियों, 1 मोंगरा की जरूरत आँकी गई। इन पर कुल व्यय 500 रु. आँका गया। रसोई के लिए आवश्यक सामान पर 150 रु. खर्च होने थे। खाने का खर्च 10 रुपए मासिक प्रति व्यक्ति लगाया गया। वर्ष भर में औसतन 50 लोगों का खर्च 6,000 रुपए होगा। गाँधी जी को पता चला कि प्रमुख लोगों को यह इच्छा है कि अहमदाबाद में यह प्रयोग एक वर्ष तक किया जाए।

अहमदाबाद को ऊपर बताया सब खर्च उठाना चाहिए। यदि अहमदाबाद एक वर्ष के खर्च का बोझ उठाने को तैयार न हो तो गाँधी जी खाने के इंतजाम का खर्च उठाने की व्यवस्था कर सकते थे। गाँधी जी यह मानते हैं कि यह संभव है कि उनसे खर्च की कुछ मदें छूट गई हों।

यदि अहमदाबाद सब खर्च उठाए तो विभिन्न मदों पर खर्च इस प्रकार होगा

  • किराया : बंगला और खेत की जमीन
  • किताबों की अलमारियों का खर्च
  • बढ़ई के औजार
  • मांची के औजार
  • चौके का सामान
  • एक बैलगाड़ी या घोड़ा गाड़ी
  • एक वर्ष के लिए खाने का खर्च : 6,000 रु.।

गाँधी जी का ख्याल था कि उन्हें लुहार और राज के औजारों की भी जरूरत होगी किंतु उनका खर्च और शिक्षण-संबंधी सामान का खर्च इसमें शामिल नहीं किया गया है। शिक्षण के सामान में 5-6 देशो हाथ-करघों की जरूरत होगी।

उनके घरेलू सामान की सूची:
4 पतीले-चालीस आदमियों का खाना बनाने के योग्य; 2 छोटी पतौलियाँ दस आदमियों के योग्य; 3 पानी भरने के पतीले या ताँबे के कलशे; 4 मिट्टी के घड़े; 4 तिपाइयाँ; 1 कढ़ाई दस रतल खाना पकाने योग्य; 3 कलछियाँ; 2 आटा गूंधने की परातें;। पानी गर्म करने का बड़ा पतीला; 3 केतलियाँ: 5 बाल्टियाँ या नहाने का पानी रखने के बर्तन; 5 पतोरने के ढक्कन; 5 अनाज रखने के लिए बर्तन: 3 तइयाँ; 10 थालियाँ 10 कटोरिया; 10 गिलास; 10 प्याले; 4 कपड़े धोने के टय; 2 छलनियाँ;। पीतल की छलनी; 3 चक्कियाँ; 10 चम्मच;। का; हमामदस्तामसूली; 3 झाडू; 6 कुर्सियाँ; 3 मेज; 6 किताबें रखने की अलमारियाँ; 30 दवातें; 6 काले तख्ते; 6 रैक; 3 भारत के नक्शे; 3 दुनिया के नक्शे; 2 बंबई अहाते क नक्शे;। गुजरात का नक्शा; 5 हाथ-करघेः बढ़ई के औजार मोची के औजार, खेती के औजार; 4 चारपाइयाँ;। गाड़ी; 5 लालटेन: 3 कमोड; 10 गद्दे; 3 चैंबर पॉट; 4 सड़क की बत्तियाँ। (वैशाख बदी 13, मंगलवार, 11 मई 1915)

अहमदाबाद में स्थापित आश्रम का संविधान स्वयं गाँधीजी ने तैयार किया था। इस संविधान के मसविदे से पता चलता है कि वह भारतीय जीवन का निर्माण किस प्रकार करना चाहते थे।

आश्रम का अनुमानित व्यय शब्दार्थ

आनुमानिक = अंदाजे से (Estimated) व्यय = खर्च (Expenditure)। आरंभ = शुरू (Starting)।अतिथि = मेहमान (Guest)।व्यवस्था = इंतजाम (Arrangement) आवश्यक = जरूरी (Necessary)। प्रमुख = खास (Inspartav)। स्थानीय = स्थान विशेष की (Local)। विभिन्न = अलग अलग (Different)। मद = शीर्ष (Head)।

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HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 18 संघर्ष के कराण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया धनराज

Haryana State Board HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 18 संघर्ष के कराण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया धनराज Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 18 संघर्ष के कराण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया धनराज

HBSE 7th Class Hindi संघर्ष के कराण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया धनराज Textbook Questions and Answers

भेंटवार्ता से

प्रश्न 1.
साक्षात्कार पढ़कर आपके मन में धनराज पिल्लै की कैसी छवि उभरती है? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
साक्षात्कार पढ़कर हमारे मन में धनराज पिल्ले की जो छवि उभरती है, वह इस प्रकार है धनराज पिल्लै गरीबी में पला-बढ़ा एक स्वाभिमानी व्यक्ति है। उसने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया है। यह स्वयं को बहुत असुरक्षित अनुभव करता रहा है अतः उसके स्वभाव में तुनुकमिजाजी आ गई है। वह अपनी माँ तथा भाभी का बहुत सम्मान करता है। वह देश के लिए खेलने में गर्व का अनुभव करता है। पहले वह अपने रंग-रूप को लेकर हीन भावना का शिकार था, पर अब वह इससे उबर चुका है।

प्रश्न 2.
धनराज पिल्लै ने जमीन से उठकर आसमान का सितारा बनने तक का सफर तय किया है। लगभग सौ शब्दों में इस सफर का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
धनराज पिल्ले ने जमीन से उठकर आसमान का सितारा बनने तक का सफर धैर्यपूर्वक संपन्न किया है। उनका जन्म पुणे की तंग गलियों में हुआ। उनका परिवार बहुत गरीब था अत: उनका बचपन मुश्किलों में बीता उन्हें हॉकी खेलने का शौक ता था, पर हांका की स्टिक खरीदने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे।

वे दोस्तों से स्टिक मांगकर खेलते थे। उन्हें अपनी पहली स्टिक अपने भाई से मिली। वे पढ़ने में भी फिसड्डी थे, पर हॉकी के शौक ने उन्हें जमीन से उठाकर आसमान की सितारा बना दिया। इस सफर में उन्हें जूनियर-सीनियर टीमों में खेलना पड़ा। उन्हें पहली कार महिंद्रा ग्रुप ने दी थी जो सेकंड हैंड थी।

अब तक हॉकी का -यह सितारा मुंबई की लोकल ट्रेनों तथा बसों में ही सफर करता था। बाद में उसने अपनी कमाई और लोन से फोर्ड आइकॉन कार खरीदी। हॉकी ने उन्हें काफी कुछ दिया। धन मिला, महाराष्ट्र सरकार ने पवई में एक फ्लैट दिया। वे लोगों में अत्याधिक लोकप्रिय हो गए। राष्ट्रपति से भी उन्हें मिलने का अवसर मिला। अनेक अभिनेताओं तथा अभिनेत्रियों ने उनके खेल की प्रशंसा की। इस प्रकार व आसमान का सितारा बन गए।

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प्रश्न 3.
“मेरी माँ ने मुझे अपनी प्रसिद्धि को विनम्रता से सँभालने की सीख दी है”- धनराज पिल्लै की इस बात का क्या अर्थ है?
उत्तर:
धनराज पिल्लै की इस बात का यह अर्थ है कि उनकी माँ ने उन्हें विनम्र बने रहने के संस्कार दिए हैं। प्राय: लोग प्रसिद्धि में पगला जाते हैं और इसे सहज भाव से स्वीकार नहीं कर पाते। धनराज पिल्लै के व्यक्तित्व के निर्माण में उनकी माँ का बहुत बड़ा योगदान है और माँ ने उन्हें विनम्रता का संस्कार दिया है। वे अपनी माँ के प्रति बहुत सम्मान का भाव रखते हैं।

साक्षात्कार से आगे

प्रश्न 1.
ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता। क्यों? पता लगाइए।
उत्तर:
ध्यानचंद हॉकी के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी थे। उनकी स्टिक से हॉकी की बाल करिश्मा कर दिखाती थी। उनके समय में भारत ने हॉकी का स्वर्णपदक कई बार जीता। सारा संसार उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ मानता था।

प्रश्न 2.
किन विशेषताओं के कारण हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल माना जाता है?
उत्तर:
हॉकी का खेल सारे भारत में खेला जाता है। यह सभी जगह अत्यंत लोकप्रिय है। भारत इस खेल में कई बार स्वर्ण पदक भी जीत चुका है। अत: इसे राष्ट्रीय खेल माना जाता है।

प्रश्न 3.
आप समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं में छपे हुए साक्षात्कार पढ़ें और अपनी रुचि से किसी व्यक्ति को चुने, उसके बारे में जानकारी प्राप्त कर कुछ प्रश्न तैयार करें और साक्षात्कार लें।
उत्तर:
यह काम विद्यार्थी स्वयं करें।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 18 संघर्ष के कराण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया धनराज

HBSE 7th Class Hindi संघर्ष के कराण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया धनराज Important Questions and Answers

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
धनराज पिल्लै किस खेल के प्रसिद्ध खिलाड़ी हैं?
उत्तर:
धनराज पिल्लै हॉकी के प्रसिद्ध खिलाड़ी हैं।

प्रश्न 2.
साक्षात्कार से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
साक्षात्कार में एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के आमने-सामने बैठकर प्रश्नों द्वारा बातचीत करता है।

प्रश्न 3.
धनराज पढ़ाई में कैसे थे?
उत्तर:
धनराज पढ़ने में एकदम फिसइडी थे।

प्रश्न 4.
धनराज ने कृत्रिम घास पर सबसे पहले हॉकी कब खेली?
उत्तर:
1988 में जब वे राष्ट्रीय खेलों में भाग लेने नई दिल्ली आए।

प्रश्न 5.
धनराज की पहली कार कौन-सी थी?
उत्तर:
धनराज की पहली कार एक सेंकेंड हैंड महेन्द्रा अरमाड़ा थी।

प्रश्न 6.
धनराज को सबसे अधिक प्रेरणा किससे मिली?
उत्तर:
उन्हें सबसे अधिक प्रेरणा अपनी माँ से मिली।

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लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
धनराज का बचपन कैसा बीता?
उत्तर:
धनराज का बचपन बहुत गरीबी में बीता। उनका बचपन मुश्किलों से भरा था। उन्हें तथा उनके भाइयों के पालन-पोषण में उनकी माँ को भारी संघर्ष करना पड़ा था। धनराज हॉकी खेलने के लिए एक स्टिक तक नहीं खरीद पाते थे। वे पढ़ाई में भी फिसड्डी थे।

प्रश्न 2.
धनराज के व्यक्तित्व की क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर:
धनराज का व्यक्तित्व कुछ इस प्रकार का है कि वह कभी हमें हंसाता है तो कभी रुलाता है। वह कभी विस्मय से भर देता है तो कभी खीझ उत्पन्न करता है। उनके व्यक्तित्व में कई रंग और कई भाव हैं।

प्रश्न 3.
धनराज ने विधिवत् रूप से हॉकी खेलना कब शुरू किया?
उत्तर:
जब धनराज केवल 16 वर्ष के थे तभी उन्होंने 1985 में मणिपुर में जूनियर राष्ट्रीय हॉकी खेली। 1986 में उसे सीनियर टीम में डाल दिया गया। इसके एक साल बाद उन्हें ऑलविन एशिया कप के कैंप के लिए चुन लिया गया। तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

प्रश्न 4.
धनराज ने अपनी माँ के बारे में क्या कहा?
उत्तर:
धनराज ने कहा कि उन्हें सबसे अधिक प्रेरणा अपनी माँ से ही मिली। उन्होंने हम सब भाई-बहनों में अच्छे संस्कार डालने की कोशिश की। मैं उनके सबसे अधिक निकट हूँ। मैं कहीं भी हूँ, रात सोने से पहले माँ से बात अवश्य कर लेता हूँ।

प्रश्न 5.
अभिनेत्री रेखा ने धनराज को क्या बात कही?
उत्तर:
प्रसिद्ध अभिनेत्री रेखा ने धनराज को कहा- “यह कभी मत सोचना कि हॉकी खिलाड़ियों को कोई नहीं पहचानता। हम लोग बड़े चाव से तुम लोगों का खेल देखते हैं।”

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प्रश्न 6.
व्यावसायिक खेल एक जुनून जैसा होता है। धनराज पिल्लै में ये जुनून कैसे पैदा हुआ होगा?
उत्तर:
जब कोई खिलाड़ी किसी खेल को व्यावसायिक मानकर खेलता है तब यह एक जुनून का रूप ले लेता है। वह हर समय उस खेल को खेलता रहना चाहता है। धनराज स्वयं को काला और बदसूरत मानते थे। उसे लड़कियाँ विशेष पसंद नहीं करती थीं। जब उसके बाकी साथी महिला मित्रों के साथ घूमने-फिरने जाते थे, तब उसे बहुत बुरा लगता था। वह हीन भावना का शिकार हो जाता था। इससे उबरने के लिए उसने 1986 से 1996 तक स्वयं को हॉकी के जुनून में डुबो दिया होगा।

संघर्ष के कराण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया धनराज गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

1. मैंने अपनी ……………. नहीं देखा।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. धनराज ने अपनी जूनियर राष्ट्रीय हॉकी कब खेली? उस समय उनका शरीर कैसा था?
2. धनराज का व्यक्तित्व कैसा था?
3. 1986 में धनराज और उसके भाई ने क्या किया?
4. धनराज को किस बात से मायूसी हुई? यह कैसे खत्म हुई?
उत्तर:
1. धनराज ने अपनी जूनियर राष्ट्रीय हॉकी 1985 में मणिपुर में खेली। उस समय उनका शरीर बहुत दुबला-पतला था और चेहरा छोटे बच्चे जैसा था।
2. धनराज का व्यक्तित्व लड़ाकू का था। वे मैदान पर भी और मैदान से बाहर भी लड़ते थे। उनका दबदबा बना रहता था।
3. 1986 में धनराज और उनके बड़े भाई रमेश ने मुंबई लीग में श्रेष्ठ खेल खेला और खूब धूम मचाई।
4. धनराज को विश्वास था कि उन्हें 1988 के ओलंपिक कैप का बुलावा जरूर आएगा, पर 57 खिलाड़ियों की सूची में उनका नाम नहीं था। इससे उन्हें मायूसी हुई। यह मायूसी अगले साल ऑलविन एशिया कप के कैंप के चुनाव पर दूर हुई।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. जब धनराज ने अपनी पहली जूनियर राष्ट्रीय हॉकी खेली तब उनकी आयु कितनी थी?
(क) 14 वर्ष
(ख) 15 वर्ष
(ग) 16 वर्ष
(घ) 18 वर्ष
उत्तर:
(ग) 16 वर्ष

2. ‘लड़ाकू’ शब्द में किस प्रत्यय का प्रयोग है?
(क) लड्
(ख) डाकू
(ग) आकू
(घ) कू
उत्तर:
(ग) आकू

3. धनराज को किस बात से मायूसी हुई?
(क) 1988 के ओलंपिक के नेशनल कैंप से बुलावा न आने पर
(ख) एशियन कप के कैंप से बुलावा न आने पर
(ग) बेहतरीन न खेल पाने पर
(घ) 57 खिलाड़ियों की लिस्ट में नाम होने पर
उत्तर:
(क) 1988 के ओलंपिक के नेशनल कैंप से बुलावा न आने पर

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2. मैं हमेशा ………………. नहीं होती।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. किस बात का सम्बन्ध किससे है?
2. धनराज ने अपने स्वभाव के बारे में क्या सफाई दी?
3. वे अपनी तुनकमिजाजी का क्या कारण बताते हैं?
4. उनके व्यक्तित्व की क्या विशेषता है?
उत्तर:
1. विनीता पांडे ने पूछा था कि वे इतने तुनकमिजाज क्यों हैं तथा वे कभी-कभी हिंसक भी क्यों हो जाते हैं। इस बात का सम्बन्ध धनराज पिल्ले से है।
2. धनराज ने अपने स्वभाव के बारे में यह सफाई दी कि वे बचपन से हो स्वयं को असुरक्षित महसूस करते रहे हैं। उन्होंने अपनी माँ को बहुत संघर्ष करते देखा है।
3. उन्होंने अपनी तुनकमिजाजी का कारण यह बताया कि वे अपनी बात बिना लाग–लपेट के कहने वाले इंसान हैं। उनकी बुद्धि में जो आती है, उसे तुरंत कह डालते हैं। वे कई बार इसके लिए पछताते भी हैं।
4. उनके व्यक्तित्व की यह विशेषता है कि वे भावुक हैं और दूसरों की तकलीफ को नहीं देख सकते। वे अपने दोस्तों और परिवारजनों की बहुत इज्जत करते हैं। वे गलती होने पर माफी भी माँग लेते हैं।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. धनराज हमेशा से अपने आपको कैसा इंसान महसूस करते आए हैं?
(क) सुरक्षित
(ख) असुरक्षित
(ग) क्रोधी
(घ) अच्छा
उत्तर:
(ख) असुरक्षित

2. ‘जेहन’ शब्द कैसा है?
(क) तत्सम
(ख) तद्भव
(ग) देशज
(घ) विदेशी
उत्तर:
(ख) तद्भव

3. धनराज के स्वभाव में इनमें से क्या है?
(क) तुनकमिजाजी
(ख) भावुकता
(ग) चिड़चिड़ापन
(घ) ये सभी बातें
उत्तर:
(ग) चिड़चिड़ापन

4. धनराज किसकी कद्र करता है?
(क) परिवार की
(ख) दोस्तों की
(ग) माँ की
(घ) इन सभी की
उत्तर:
(घ) इन सभी की

3. कुछ रुपये ………………. हो पाती।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. पहले खिलाड़ी को कितना इनाम मिलता था?
2 धनराज किसे अपनी पहली जिम्मेदारी मानते थे?
3. 1994 में खरीदा फ्लैट कैसा है?
4. बाद में उसे कहाँ और कैसा फ्लैट मिला?
उत्तर:
1. पहले खिलाड़ी को इनाम में बहुत थोड़े रुपये मिलते थे जबकि आज काफी मिलते हैं।
2 धनराज अपनी पहली जिम्मेदारी अपने परिवार की आर्थिक तंगी को दूर करना मानते थे। वे परिवार को बेहतर ज़िदगी देना चाहते थे।
3. खेलों की कमाई से धनराज ने 1994 में पुणे के भाऊ पाटिल रोड पर दो बेडरूम का एक छोटा-सा फ्लैट खरीदा। यह छोटा ज़रूर था, पर उनके परिवार के लिए काफी था।
4. बाद में महाराष्ट्र सरकार ने उसे पवई में एक अच्छा पलेट दिया। यह फ्लैट उनकी हैसियत से बढ़ कर है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. धनराज की पहली ज़िम्मेदारी क्या थी?
(क) परिवार की आर्थिक तंगी दूर करना
(ख) घर वालों को एक बेहतर जिंदगी देना
(ग) क ख दोनों
(घ) कुछ नहीं
उत्तर:
(क) परिवार की आर्थिक तंगी दूर करना

2. धनराज ने अपना पहला फ्लैट कहाँ खरीदा?
(क) मुंबई में
(ख) पवई में
(ग) पुणे में
(घ) दिल्ली में
उत्तर:
(ग) पुणे में

3. बाद में किस सरकार ने धनराज को एक फ्लैट दिया?
(क) महाराष्ट्र सरकार ने
(ख) केन्द्र सरकार ने
(ग) गुजरात सरकार ने
(घ) केरल सरकार ने
उत्तर:
(क) महाराष्ट्र सरकार ने

4. धनराज किस खेल का प्रसिद्ध खिलाड़ी है?
(क) क्रिकेट
(ख) हॉकी
(ग) फुटबॉल
(घ) कबड्डी
उत्तर:
(ख) हॉकी

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संघर्ष के कराण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया धनराज Summary in Hindi

संघर्ष के कराण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया धनराज पाठ का सार

यह पाठ साक्षात्कार विधा में रचित है। धनराज पिल्लै हॉकी के प्रसिद्ध खिलाड़ी हैं। जब उनकी आयु 35 वर्ष हो गई तब उनका साक्षात्कार (Interview) विनीता पाण्डेय ने लिया था।

साक्षात्कार का संक्षिप्त रूप इस प्रकार है –
विनीता ने धनराज पिल्ले से पुणे की तंग गलियों से लेकर मुंबई तक के उनके सफर के बारे में पूछा तो धनराज ने बताया कि उनका बचपन मुश्किलों से भरा था। वे बहुत गरीब थे। उनके बड़े भाई हॉकी खेलते थे। उसी से उन्हें भी खेलने का शौक पैदा हुआ, पर तब उनके पास हॉकी की स्टिक खरीदने के लिए पैसे नहीं होते थे अतः वे अपने साथियों से स्टिक माँगकर काम चलाते थे। उन्हें पहली स्टिक उनके भाई ने तब दी जब भाई-भाई को भारतीय कैंप के लिए चुन लिया गया।

वह स्टिक उनके लिए इस दृष्टि से बेशकीमती थी क्योंकि वह उनकी अपनी थी, उन्होंने 1985 में मणिपुर में जूनियर राष्ट्रीय हॉकी खेली थी तब वे 16 साल के दुबले-पतले थे। 1986 में उन्हें सीनियर टीम में डाल दिया गया और वे बोरिया-बिस्तर बाँधकर मुंबई चले आए। उस साल उन्होंने बड़े भाई के साथ मिलकर मुंबई लीग में खूब धूम मचाई। एक साल बाद ही ऑलविन एशिया कप के कैंप के लिए उनका चुनाव हो गया तब से अब तक पीछे मुड़कर नहीं देखा।

फिर विनीता ने उनके विद्यार्थी जीवन के बारे में पूछा। धनराज ने बताया कि वे पढ़ने में एकदम फिसड्डी थे। मुश्किल से दसवीं तक पहुँचा। हॉकी की बदौलत ही उन्हें सब कुछ मिला। जब विनीता ने उनकी तुनकमिजाजी के बारे में पूछा तो धनराज ने उत्तर दिया कि वे बचपन से ही अपने आपको असुरक्षित महसूस करने वाले इंसान रहे हैं। उनकी माँ ने उनके पालने में बहुत संघर्ष किया। वे बिना लाग लपेट के ही अपनी बात कहते हैं। कई बार उन्हें बाद में पछताना पड़ता है पर वे अपना गुस्सा नहीं रोक पाते। वे बहुत भावुक इंसान हैं। वे अपने दोस्तों और परिवार की बहुत कद्र करते हैं।

उनसे पूछा कि उनके लिए उनके परिवार की क्या अहमियत है तो वे बोले- मुझे सबसे अधिक प्रेरणा अपनी माँ से मिली। वे कहीं भी रहें, रोज रात को सोने से पहले माँ से अवश्य बात करते हैं। उनकी सबसे बड़ी भाभी कविता भी उनके लिए माँ के समान है। फिर विनीता ने उनसे पूछा कि उनके पास पहली कार कब आई?

– धनराज ने बताया कि उनकी पहली कार एक सेकेंड हैंड महिंद्रा अरमाड़ा थी जिसे उनके पहले मालिक महिंद्रा ग्रुप ने दिया था। वे तब मुंबई की लोकल ट्रेनों और बसों में सफर करते थे। जब एक अखबार ने उनकी तस्वीर छाप दी तब उन्होंने लोकल ट्रेनों में सफर करने से बचने की बात सोची। धीरे-धीरे पैसे जमा किए। बहन की शादी थी।

अब उनके पास एक फोर्ड आइकॉन है जिसे उन्होंने 2000 में खरीदा था। उसके लिए पाँच लाख रुपये लोन लिया, जिसकी किश्तें वे आज भी चुका रहे हैं। 1964 में उन्होंने पुणे के भाऊ पाटिल रोड पर दो बेडरूम का एक छोटा-सा फ्लैट खरीदा। 1999 में महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें पवई में एक फ्लैट दिया।

धनराज स्वयं मानते हैं कि वे काले और बदसूरत हैं, पर अब लोग उन्हें खेलते हुए देखना पंसद करते हैं। वे अपने देश के लिए खेलना पसंद करते हैं। लोग उन्हें घमंडी समझते हैं जबकि ऐसा नहीं है। सेलेब्रिटीज के साथ एक मंच पर बैठना अच्छा लगता है। राष्ट्रपति से मिलते समय अपने खास होने का अनुभव हुआ। अनेक अभिनेताओं-जैकी श्रॉफ, नाना पाटेकर, प्रेम चोपड़ा, अभिनेत्री रेखा भी उनके प्रशंसकों में हैं। जैकी श्रॉफ ने उनका परिचय जूही चावला से कराया और उसकी तारीफ की।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 18 संघर्ष के कराण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया धनराज

संघर्ष के कराण मैं तुनुकमिज़ाज हो गया धनराज शब्दार्थ

साक्षात्कार = आमने-सामने बातचीत (Interview)। विस्मय = हैरानी (Surprise)। कष्टसाध्य मुश्किलों भरा (Difficult) धीरज = धैर्य (Patience)। दबदबा = रौब (Control)। हिंसक = हिंसा करने वाला (Violence)। संघर्ष = टक्कर लेना (Struggle)। भावुक = भावनाओं में बहने वाला (Emotional)। विनम्रता = नरमी के साथ (With humbly)। कृत्रिम = बनावटी (Artificial)। शोहरत = प्रसिद्धि (Fame)। आर्थिक = धन संबंधी (Financial)। उत्साहित = उत्साह में भर जाना (Excited)। फैन = प्रशंसक (Fan)

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HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 17 वीर कुवर सिंह

Haryana State Board HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 17 वीर कुवर सिंह Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 17 वीर कुवर सिंह

HBSE 7th Class Hindi वीर कुवर सिंह Textbook Questions and Answers

निबंध से

प्रश्न 1.
वीर कुंवर सिंह के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया ?
उत्तर :
वीर कुंवर सिंह के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताओं ने हमें प्रभावित किया है

  • वीर कुंवर सिंह वीर थे। उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध वीरतापूर्वक युद्ध किए।
  • वे युद्धकला में पूरी तरह कुशल थे। उन्हें छापामार युद्ध में महारत हासिल थी।
  • वे वीर के अलावा चतुर एवं बुद्धिमान भी थे।
  • उनमें बलिदान एवं त्याग की भावना थी।
  • कुँवर सिंह उदार एवं संवेदनशील व्यक्ति थे।
  • वे समाजसेवी एवं परोपकारी भी थे।

प्रश्न 2.
कुँवर सिंह को बचपन में किन कामों में मजा आता था ? क्या उन्हें उन कामों से स्वतंत्रता सेनानी बनने में कुछ मदद मिली?
उत्तर :
कुंवर सिंह को बचपन में घुड़सवारी करने, तलवारबाजी करने तथा कुश्ती लड़ने में मजा आता था। हाँ, उन्हें इन कामों से स्वतंत्रता सेनानी बनने में मदद मिली। वे घुड़सवारी करके युद्ध करते थे। युद्ध में तलवार चलाना उनके खूब काम आया। इनसे वे निर्भीक एवं कुशल योद्धा बन गए।

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प्रश्न 3.
सांप्रदायिक सद्भाव में कुंवर सिंह की गहरी आस्था थी-पाठ के आधार पर कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर :
कुँवर सिंह की सांप्रदायिक सद्भाव में गहरी आस्था थी। उनकी सेना में मुसलमान भी उच्च पदों पर थे। इब्राहीम खाँ तथा किफायत हुसैन उनकी सेना में उच्च पदों पर आसीन थे। इसके अलावा उनके यहाँ हिंदुओं और मुसलमानों के सभी त्योहर एक साथ मिल-जुलकर मनाए जाते थे।

प्रश्न 4.
पाठ के किन प्रसंगों से तुम्हें पता चलता है कि कुँवर सिंह साहसी उदार एवं स्वाभिमानी व्यक्ति थे?
उत्तर :
पाठ के निम्नलिखित प्रसंगों से हमें पता चलता है कि कुंवर सिंह साहसी, उदार एवं स्वाभिमानी व्यक्ति थे
1. साहसी :
कुँवर सिंह ने कई स्थानों पर विजय प्राप्त की, पर वे भी जगदीशपुर के पतन को नहीं रोक पाए परन्तु उन्होंने हारकर भी साहस नहीं खोया। वे भावी संग्राम की योजना में जुट गए। वे बूढ़े हो चले थे, पर साहसी बने हुए थे। 23 अप्रैल, 1858 को विजय पताका फहराते हुए जगदीशपुर पहुंच गए।

2. उदार :
कुँवर सिंह बहुत उदार थे। अपनी आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के बावजूद वे निर्धन व्यक्तियों की सहायता करते रहते थे। उन्होंने परोपकार के अनेक काम किए अर्थात् सड़कें बनवाईं, कुएँ खुदवाए तथा तालाब बनवाए।

3. स्वाभिमानी :
कुँवरसिंह स्वाभिमानी व्यक्ति थे। उन्होंने अंग्रेजों से कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना बाँया हाथ काटकर गंगा मैया को अर्पित कर दिया।

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प्रश्न 5.
आमतौर पर मेले मनोरंजन, खरीद-फरोख्त एवं मेलजोल के लिए होते हैं। वीर कुंवर सिंह ने मेले का उपयोग किस रूप में किया?
उत्तर :
प्रायः मेले का उपयोग मनोरंजन, खरीद-फरोख्त तथा मेल-जोल के लिए किया जाता है, पर कुंवर सिंह ने सोनपुर के मेले का उपयोग स्वाधीनता संग्राम की योजना बनाने के लिए किया। यहाँ लोग गुप्त रूप से एकत्रित होकर क्रांति के बारे में योजनाएँ बनाते थे।

निबंध से आगे

प्रश्न 1.
सन् 1857 के आंदोलन में भाग लेने वाले किन्हीं चार सेनानियों पर दो-दो वाक्य लिखिए।
उत्तर :
1857 में भाग लेने वाले चार स्वतंत्रता सेनानी :
रानी लक्ष्मीबाई : झाँसी की महारानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के साथ डटकर युद्ध किया। उन्होंने अंग्रेजी सेना को कई स्थानों पर हराया और अंत में अपना अमर बलिदान दे दिया।

तात्या टोपे :
इनका मूल नाम रामचंद्र पांडुरंग था। ये झाँसी की रानी की सेना में सेनापति थे। इन्हें 18 अप्रैल, 1859 को फाँसी पर लटका दिया गया था।

बहादुर शाह जफर :
मई, 1857 में विद्रोहियों ने दिल्ली पर कब्जा करके बहादुरशाह द्वितीय को पुनः भारत का सम्राट घोषित कर दिया। 82 वर्षीय बहादुरशाह ने बख्त खाँ के सहयोग से विद्रोह का नेतृत्व किया था। उन्हें अपना शेष जीवन रंगून की जेल में बिताना पड़ा।

नाना साहब धुंधू पंत :
ये पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र थे। इन्होंने 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया था। नाना साहब ने प्रतिज्ञा की थी- “जब तक मेरे शरीर में प्राण हैं, मेरे और अंग्रेजों के बीच जंग जारी है, चाहे मुझे मार दिया जाए, बंदी बना दिया जाए, फाँसी पर लटका दिया जाए. मैं हर बात का जवाब तलवार से दूँगा।”

प्रश्न 2.
सन् 1857 के क्रांतिकारियों से संबंधित गीत विभिन्न भाषाओं और बोलियों में गाए जाते हैं। ऐसे कुछ गीतों को संकलित कीजिए।
उत्तर :
विद्यार्थी इन गीतों को संकलित करें।

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HBSE 7th Class Hindi वीर कुवर सिंह Important Questions and Answers

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
1857 के सशस्त्र विद्रोह ने क्या किया?
उत्तर :
इसने ब्रिटिश शासन की जड़ों को हिला दिया।

प्रश्न 2.
11 मई को किसे भारत का शासक घोषित किया गया?
उत्तर :
अंतिम मुगल शासक बहादुरशाह जफ़र को भारत का शासक घोषित किया गया।

प्रश्न 3.
दिल्ली के अतिरिक्त भीषण युद्ध के केंद्र कहाँ-कहाँ थे?
उत्तर :
ये केंद्र थे-कानपुर, लखनऊ, बरेली, बुंदेलखंड, आरा।

प्रश्न 4.
कुंवर सिंह का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर :
कुंवर सिंह का जन्म 1782 ई. में शाहाबाद जिले के जगदीशपुर में हुआ।

प्रश्न 5.
कुंवर सिंह ने कब रियासत की ज़िम्मेदारी सँभाली?
उत्तर :
1827 ई. में पिता की मृत्यु के बाद कुंवर सिंह ने रियासत की जिम्मेदारी संभाली।

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प्रश्न 6.
कुंवर सिंह की मृत्यु कब हुई?
उत्तर :
26 अप्रैल, 1858 को।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
1857 के स्वतंत्रता संग्राम का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर :
सन् 1857 में भारतीयों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह किया था। मार्च, 1857 में बैरकपुर में अंग्रेजों के विरुद्ध मंगलपांडे ने बगावत की। उन्हें 8 अप्रैल, 1857 को फाँसी दी गई। 10 मई, 1857 को मेरठ छावनी में भारतीय सैनिकों ने विद्रोह कर दिया। ।। मई को दिल्ली पर कब्जा कर लिया गया। अंतिम मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर को भारत का शासक घोषित कर दिया गया। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों को नाकों चने चबवा दिए। वीर कुंवर सिंह ने अंग्रेजों को कई जगह हराया।

प्रश्न 2.
जुलाई, 1857 में क्या हुआ?
उत्तर :
25 जुलाई, 1857 को दानापुर की टुकड़ी ने भी विद्रोह कर दिया। सैनिक सोन नदी को पार करके आरा की ओर बढ़ गए। वहाँ पहुँचकर उन्होंने जेल की सलाखें तोड़ दी और कैदियों को आजाद कर दिया।

27 जुलाई, 1857 को कुंवर सिंह ने आरा पर विजय प्राप्त कर ली। सिपाहियों ने उन्हें फौजी सलामी दी। कुंवर सिंह बूढ़े हो चले थे, पर वे पूरी हिम्मत से युद्ध में जुटे रहे थे।

प्रश्न 3.
कुंवर सिंह और डगलस की टक्कर का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
कुंवर सिंह को अपनी सेना के साथ गंगा पार करनी थी। अंग्रेजी सेना डगलस के नेतृत्व में उनका पीछा कर रही थी। कुंवर सिंह ने यह अफवाह फैला दी कि वह अपनी सेना के साथ हाथियों पर चढ़कर बलिया के पास गंगा पार करेगा। सेनापति डगलस वहीं पहुँच गया, पर कुंवर सिंह ने बलिया की जगह शिवराजपुर नामक स्थान से नावों पर बैठकर गंगा पार कर ली। अंतिम नाव में कुंवर सिंह थे। डगलस की गोली उनकी बाई कलाई को भेदती निकल गई। कुंवर सिंह ने अपना बायाँ हाथ काटकर गंगा मैया को भेंट चढ़ा दिया।

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प्रश्न 4.
आजमगढ़ की ओर जाने का कँवर सिंह का क्या उद्देश्य था?
उत्तर :
कुँवर सिंह का आजमगढ़ आने का उद्देश्य था-इलाहाबाद एवं बनारस पर आक्रमण कर शत्रुओं को परास्त करना और अंततः जगदीशपुर पर अधिकार जमाना। उन्होंने 22 मार्च, 1858 को आजमगढ़ पर कब्जा भी कर लिया। उन्होंने अंग्रेजों को दो बार हराया। वे 23 अप्रैल, 1858 को स्वाधीनता की विजय-पताका फहराते हुए जगदीशपुर तक पहुंच गए।

प्रश्न 5.
बिहार के प्रसिद्ध कवि मनोरंजन प्रसाद सिंह ने कुँवरसिंह का प्रशस्ति गायन किन शब्दों में किया है?
उत्तर :
उन्होंने प्रशस्ति गायन करते हुए लिखा हैचला गया यो कुँअर अमरपुर, साहस से सब अरिंदल जीत। उसका चित्र देखकर अब भी, दुश्मन होते हैं भयभीत। वीर-प्रसविनी-भूमि धन्य वह, धन्यवीर वह धन्य अतीत। गाते थे और गाँवेंगे हम, हरदम उसकी जय का गीत। स्वतंत्रता का सैनिक था, आजादी का दीवाना था, सब कहते हैं कुँअर सिंह भी, बडा वीर मरदाना था।

वीर कुवर सिंह गद्यांशों पर आधारित अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न

1. वीर कुँवर …………… भी पड़ा।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. कुंवर सिंह का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
2 उनके माता-पिता के नाम बताइए।
3. कुंवर सिंह की देखभाल ठीक से क्यों नहीं हो पाई?
4. कुंवर सिंह के पिता कैसे व्यक्ति थे?
उत्तर :
1. कुंवर सिंह का जन्म 1782 ई. में बिहार के शाहाबाद जिले के जगदीशपुर में हुआ था।
2. कुंवर सिंह के पिता का नाम साहबजादा सिंह तथा माता का नाम पंचरतन कुँवर था।
3. कुंवर सिंह की देखभाल ठीक से इसलिए नहीं हो पाई क्योंकि कुँवर सिंह के पिता जगदीशपुर रियासत के जमींदार थे। उन्हें अपनी जमींदारी हासिल करने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा था।
4. कुंवर सिंह के पिता वीर होने के साथ-साथ स्वाभिमानी एवं उदार स्वभाव के व्यक्ति थे।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. कुंवर सिंह का जन्म किस राज्य में हुआ था?
(क) बिहार
(ख) शाहाबाद
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) राजस्थान
उत्तर :
(क) बिहार

2. कुंवर सिंह के पिता क्या थे?
(क) राजा
(ख) जमींदार
(ग) जागीरदार
(घ) कुछ नहीं
उत्तर :
(क) राजा

3. कुंवर सिंह के पिता कैसे थे?
(क) वीर
(ख) स्वाभिमानी
(ग) उदार
(घ) ये सभी बातें
उत्तर :
(घ) ये सभी बातें

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2. जगदीशपुर के ………….. बनाते थे।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. इस गद्यांश में किस संत का नामोल्लेख हुआ है और क्यों?
2 उन्होंने कहाँ-कहाँ किस प्रकार की योजनाएं बनाई?
3. सोनपुर का मेला क्यों प्रसिद्ध है?
4. इस मेले का क्रांतिकारी क्या उपयोग करते थे?
उत्तर:
1. इस गद्यांश में ‘बसुरिया बाबा’ नामक सिद्ध संत का उल्लेख हुआ है। उन्होंने ही कुंवर सिंह के मन में देशभक्ति और स्वाधीनता की भावना उत्पन्न की थी।
2. वे बनारस, मथुरा, कानपुर, लखनऊ आदि स्थानों पर रहकर अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विद्रोह करने की सक्रिय योजनाएँ बनाते थे। 3. सोनपुर का मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है। यह मेला कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगता है। यह मेला हाथियों की खरीद-बिक्री के लिए भी प्रसिद्ध है।
4. एक ऐतिहासिक मेले का उपयोग क्रांतिकारी क्रांति की योजना बनाने के लिए एकत्रित होने के लिए करते थे। यहीं वे स्वाधीनता की योजनाएँ बनाते थे।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. बसुरिया बाबा क्या थे?
(क) सिद्ध संत
(ख) सैनिक
(ग) वीर
(घ) अध्यापक
उत्तर :
(क) सिद्ध संत

2. किस स्थान को गुप्त बैठकों के लिए चुना गया?
(क) बिहार को
(ख) सोनपुर के मेले को
(ग) नालंदा को
(घ) पुष्कर मेले को
उत्तर :
(ख) सोनपुर के मेले को

3. मेला किसके क्रय-विक्रय के लिए विख्यात है?
(क) घोड़ों
(ख) ऊँटों
(ग) हाथियों
(घ) सामान
उत्तर :
(ग) हाथियों

3. दानापुर और ……………….. उड़ गए।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. जगदीशपुर का पतन क्यों हुआ?
2. कुंवर सिंह की सेना के हारने पर कँवर सिंह पर क्या प्रभाव पड़ा?
3. कुंवर सिंह कहाँ से कहाँ जा पहुँचे?
4. कुंवर सिंह की वीरता और यात्रा का अंग्रेजों पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
1. जगदीशपुर के पतन के कई कारण थे –

  • देशी सैनिकों में अनुशासन की कमी
  • स्थानीय जमींदारों का अंग्रेजों का साथ देना
  • आधुनिक शस्त्रों की कमी।

2 कुंवर सिंह की सेना 13 अगस्त को अंग्रेजों से हार गई पर इस हार का कुंवर सिंह पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा। उनका आत्मबल नहीं टूटा। वे अगली योजना बनाने में जुट गए।
3. कुंवर सिंह सासाराम से मिर्जापुर होते हुए रीवा, कालपी, कानपुर, लखनऊ तक गए। लखनऊ की अशांति को देख कर वे आजमगढ़ की ओर चले गए।
4. कुंवर सिंह की वीरता और उनकी विजय-यात्रा ने अंग्रेजों के होश उड़ा दिए।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. जगदीशपुर का पतन का कारण था
(क) सैनिकों में अनुशासन की कमी
(ख) जमींदारों का अग्रेजों के साथ सहयोग करना
(ग) नए शस्त्रों की कमी
(घ) ये सभी कारण
उत्तर :
(घ) ये सभी कारण

2. अंग्रेजों से परास्त होने पर कुंवर सिंह का आत्मबल
(क) टूट गया
(ख) बढ़ गया
(ग) जाँचा गया
(घ) ठीक रहा
उत्तर :
(ख) बढ़ गया

3. लखनऊ से कुंवर सिंह ने कहाँ प्रस्थान किया?
(क) आजमगढ़
(ख) कानपुर
(ग) मिर्जापुर
(प) कही नहीं
उत्तर :
(क) आजमगढ़

4. ‘वीरता’ में ‘ता’ क्या है?
(क) उपसर्ग
(ख) प्रत्यय
(ग) मूलशब्द
(घ) अन्य
उत्तर :
(ख) प्रत्यय

4. स्वाधीनता सेनानी …………………….. प्रचलित हैं।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. कुंवर सिंह किस विद्या में कुशल थे?
2. उनके रण-कौशल को समझने में कौन असमर्थ थे?
3. उन्होंने अंग्रेजों के साथ क्या किया?
4. क्या बात इतिहास के पृष्ठों पर ऑकत है?
उत्तर:
1. कुंवर सिंह युद्ध कला में अत्यंत कुशल थे। वे छापामार युद्ध में तो बहुत कुशल थे।
2. कुंवर सिंह के रण-कौशल को पूरी तरह समझने में अंग्रेजी सेनापति भी पूरी तरह असमर्थ थे।
3. उन्होंने अंग्रेजों को मौत के घाट उतार दिया। अंग्रेजों को या तो युद्धस्थल से भाग जाना पड़ता था या वे मारे जाते
4. वीर कुंवर सिंह ने अंग्रेजी सेना को जिस तलवार की धर से मौत के घाट उतारा उसकी चमक आज भी भारतीय इतिहास के पृष्ठों पर अंकित है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. कुंवर सिंह युद्धकला में कैसे थे?
(क) कुशल
(ख) अकुशल
(ग) ठीक-ठीक
(घ) पता नहीं
उत्तर :
(क) कुशल

2. अंग्रेजी सेनानायक क्या समझने में असमर्थ थे?
(क) कुंवर सिंह की चालों को
(ख) युद्ध कला को
(ग) कुंवर सिंह के रण कौशल को
(घ) कुंवर सिंह को
उत्तर :
(ग) कुंवर सिंह के रण कौशल को

3. ‘अंकित’ शब्द में कौन-सा प्रत्यय है?
(क) अंक
(ख) कित
(ग) इत
(घ) त
उत्तर :
(ग) इत

4. ‘मौत के घाट उतारा’ का सही अर्थ है
(क) मार दिया
(ख) नदी घाट पर छोड़ दिया
(ग) घाट के पार भेजा
(घ) मौत के निकट ला दिया।
उत्तर :
(क) मार दिया

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 17 वीर कुवर सिंह

5. वीर कुंवर ……………………… जाती है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. वीर कुंवर सिंह ने क्या-क्या काम किए?
2 कुंवर सिंह के व्यक्तित्व में अन्य क्या-क्या गुण थे?
3. उनकी धर्मनिरपेक्षता किन कामों से पता चलती है?
4. कुंवर सिंह की लोकप्रियता का पता किससे चलता है?
उत्तर:
1. वीर कुंवर सिंह ने निम्नलिखित काम किए-

  • ब्रिटिश हुकूमत से टक्कर ली।
  • आरा स्कूल के लिए जमीन दान दी।
  • गरीबों की आर्थिक मदद की।
  • सड़कें बनवाई।
  • कुएँ खुदवाए।
  • तालाब बनवाए।

2 कुंवर सिंह के व्यक्तित्व में वीरता के अलावा उदारता एवं संवेदनशीलता के गुण विद्यमान थे।
3. कुंवर सिंह की धमनिरपेक्षता इन कामों से पता चलती है-

  • उनकी सेना में हिंदुओं के साथ-साथ मुसलमान भी उच्च पदों पर आसीन थे।
  • उन्होंने पाठशालाओं के साथ मकतब (मदरसे) भी बनवाए।
  • उनके यहाँ हिंदुओं और मुसलमानों के सभी त्योहार एक साथ मिलकर मनाए जाते थे।

4. वीर कुंवर सिंह की लोकप्रियता का पता उन गीतों से मिलता है जो बिहार की लोकभाषाओं में उनकी प्रशस्ति के रूप में गाए जाते हैं।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. ‘सामाजिक’ शब्द में किस प्रत्यय का प्रयोग है?
(क) समाज
(ख) जिक
(ग) इक
(घ) क
उत्तर :
(ग) इक

2. कुंवर सिंह की आर्थिक स्थिति कैसी थी?
(क) अच्छी
(ख) बहुत अच्छी
(ग) बहुत अच्छी नहीं
(घ) सामान्य
उत्तर :
(ग) बहुत अच्छी नहीं

3. कुंवर सिंह किस प्रकार के व्यक्ति थे?
(क) उदार
(ख) संवेदनशील
(ग) परोपकारी
(घ) ये सभी प्रकार
उत्तर :
(घ) ये सभी प्रकार

4. कुंवर सिंह की प्रशस्ति का गायन किन में होता है?
(क) बिहार के लोकगीतों में
(ख) दिल्ली की सभाओं में
(ग) पाठशालाओं में
(घ) जन-जन में
उत्तर :
(क) बिहार के लोकगीतों में

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 17 वीर कुवर सिंह

वीर कुवर सिंह Summary in Hindi

वीर कुवर सिंह पाठ का सार

1857 के स्वतंत्रता सेनानियों में ठाकुर कुँवर सिंह का नाम उल्लेखनीय है। सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता ‘खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी’ में भी उनके नाम का उल्लेख है। 1857 के सशस्त्र विद्रोह ने भारत में ब्रिटिश शासन की जड़ों को हिलाकर रख दिया था।

मार्च, 1857 में बैरकपुर में अंग्रेजों के विरुद्ध बगावत करने पर 8 अप्रैल, 1857 को मंगल पांडे को फाँसी दे दी गई थी। 10 मई, 1857 को मेरठ में भारतीय सैनिकों ने दिल्ली ‘के सैनिकों के साथ मिलकर 11 मई को दिल्ली पर कब्जा कर लिया था और अंतिम मुगल शासक बहादुरशाह जफर को भारत का शासक घोषित कर दिया था।

इस विद्रोह की आग दूर-दूर तक फैल गई। दिल्ली के अलावा कानपुर, लखनऊ, बरेली, बुंदेलखंड और आरा में भी भीषण युद्ध हुआ। इस विद्रोह में भाग लेने वाले प्रमुख नेता थे-नाना साहेब, तात्या टोपे, बख्त खान, अजीमुल्ला खाँ, रानी लक्ष्मीबाई, बेगम हजरत महल, कुँवर सिंह, मौलवी अहमदुल्लाह, बहादुर खान और राव तुलाराम। भारत में सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ाने में इस आंदोलन की बड़ी भूमिका थी।

वीर कुंवर सिंह के बचपन के बारे में अधिक जानकारी नहीं मिलती। उनका जन्म बिहार में शाहाबाद जिले के जगदीशपुर में सन् 1782 में हुआ था। उनके पिता का नाम साहबजादा सिंह और माता का नाम पंचरतन कुँवर था। उनके पिता जगदीशपुर रियासत के जमींदार थे। उनके पिता वीर एवं स्वाभिमानी तथा उदार स्वभाव के थे।

उनके व्यक्तित्व का असर कुंवर सिंह पर भी पड़ा। कुँवर सिंह की शिक्षा-दीक्षा घर पर ही हुई। उन्होंने हिंदी, संस्कृति एवं फारसी भाषाएँ सीखीं, पर उनका मन पढ़ाई की जगह घुड़सवारी, तलवारबाजी एवं कुश्ती में लगता था। पिता की मृत्यु के बाद 1827 में कुंवर अली ने रियासत की जिम्मेदारी संभाली। उन दिनों ब्रिटिश सरकार के अत्याचार चरम सीमा पर थे। कुंवर सिंह ने ब्रिटिश हकूमत से टक्कर लेने का निश्चय किया।

जगदीशपुर के जंगलों में ‘बसुरिया बाबा’ नाम के एक सिद्ध संत रहते थे। उन्होंने कुंवर सिंह के मन में देशभक्ति और स्वाधीनता की भावना उत्पन्न की थी। उन्होंने अनेक स्थानों पर जाकर विद्रोह की योजनाएँ बनाईं। उन्होंने बिहार के सोनपुर मेले को अपनी गुप्त बैठकों की योजना के लिए चुना। यह मेला कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगता है। 25 जुलाई, 1857 को दानापुर की सैनिक टुकड़ी ने विद्रोह कर दिया। सैनिक कुंवर सिंह का जयघोष करते हुए आरा पहुँच गए और वहाँ की जेल की सलाखें तोड़ दीं। कैदी आजाद हो गए। 27 जुलाई, 1857 को कुंवर सिंह ने आरा पर विजय प्राप्त की।

आरा क्रांति का महत्त्वपूर्ण केंद्र बन गया। जमींदारों ने अंग्रेजों का साथ दिया। अत: जगदीशपुर के पतन को रोका न जा सका। 13 अगस्त को जगदीशपुर में कुंवर सिंह की सेना हार गई, पर कुंवर सिंह का आत्मबल न टूटा। वे आगे की योजनाएँ बनाने में जुट गए। उन्होंने आजमगढ़ की ओर प्रस्थान किया। इससे अंग्रेजों के होश उड़ गए।

अंग्रेजों और कुँवर सिंह के बीच घमासान युद्ध हुआ। उन्होंने 22 मार्च, 1858 को आजमगढ़ पर कब्जा कर लिया। वे 23 अप्रैल, 1858 को विजय पताका फहराते हुए जगदीशपुर पहुँच गए। लोगों ने विजय-उत्सव मनाते हुए यूनियन जैक को उतार कर अपना झंडा फहरा दिया। इसके तीन दिन बाद ही 26 अप्रैल, 1858 को यह वीर इस संसार से विदा हो गया।

कुँवर सिंह युद्धकला में पूरी तरह कुशल थे। उन्हें छापामार युद्ध में महारत हासिल थी। 1857 में उन्होंने तलवार की जिस धार से अंग्रेजी सेना को मौत के घाट उतारा था, उसकी चमक आज तक भारतीय इतिहास के पृष्ठों पर अंकित है। कहा जाता है एक बार कुंवर सिंह को अपनी सेना के साथ गंगा पार करनी थी। अंग्रेजी सेना उनका पीछा कर रही थी। कँवर सिंह भी कम चतुर नहीं थे। उन्होंने अफवाह फैला दी कि वे अपनी सेना को बलिया के पास हाथियों पर चढ़ाकर पार कराएंगे।

अंग्रेज सेनापति डगलस बलिया के गंगा-तट पर जा पहुँचा। कुँवर सिंह ने बलिया से सात मील दूर शिवराजपुर नामक स्थान पर सेना नावों से पार करा दी। डगलस मन मसोसकर रह गया। अंतिम नाव पर कुँवर सिंह थे। डगलस ने गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी। एक गोली उनके बाएँ हाथ की कलाई को भेदती निकल गई। कुंवर सिंह ने बाएँ हाथ को काटकर गंगा मैया को अर्पित कर दिया।

वीर कुंवर सिंह ने अनेक सामाजिक काम भी किए। आरा स्कूल के लिए जमीन दान दी, स्कूल भवन का निर्माण कराया। आर्थिक स्थिति अच्छी न होने पर भी वे गरीबों की सहायता करते थे। उन्होंने आरा-जगदीशपुर सड़क तथा आरा-बलिया सड़क का निर्माण भी कराया। उन्होंने अनेक कुएँ खुदवाए तथा तालाब बनवाए। वे एक संवेदनशील व्यक्ति थे। उनके यहाँ हिंदुओं और मुसलमानों के सभी त्योहार मिलकर मनाए जाते थे। लोकगीतों में उनका गुणगान आज भी किया जाता है।

वीर कुवर सिंह शब्दार्थ

विद्रोह = बगावत (Revolt)। घोषित = घोषणा करना (Declared)। भीषण = भयंकर (Terrible)। निर्मित = बना हुआ (Constructed)। पारिवारिक = परिवार की (Family)। स्वाभिमानी = आत्मसम्मानी (Self respectful)। व्यवस्था = इंतजाम (Arrangement)। गुप्त = छिपा हुआ (Secret)। तत्पर = तैयार (Ready)। विजय = जीत (Victory)। पताका = झंडा (Flag)। रणकौशल = युद्ध कुशलता (Efficiency in war)। चतुर – होशियार (Clever)। जलाशय = तालाब (Pond)। संवेदनशील = संवेदना वाला (Sensitive)। शौर्य = वीरता (Bravery)

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HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 16 भोर और बरखा

Haryana State Board HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 16 भोर और बरखाके Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 16 भोर और बरखा

HBSE 7th Class Hindi भोर और बरखा Textbook Questions and Answers

कविता से

प्रश्न 1.
‘बंसीवारे ललना’, ‘मोरे प्यारे’, ‘लाल जी’ कहते हुए यशोदा किसे जागने का प्रयास करती हैं और वे कौन-कौन सी बातें कहती हैं ?
उत्तर :
इन शब्दों का प्रयोग करते हुए यशोदा बाल कृष्ण को जगाने का प्रयास करती है। वे यह भी कहती हैं :

  • रात बीत गई है, सवेरा हो गया है।
  • घर-घर के किवाड़ खुल गए हैं।
  • गोपियाँ दही बिलो रही है, उनके कंगन झनक रहे हैं।
  • दरवाजे पर लोग खड़े हैं।
  • बालक शोर मचा रहे हैं। जय-जय का उच्चारण कर रहे हैं।
  • उन्होंने हाथ में माखन-रोटी ले रखी है।

प्रश्न 2.
नीचे दी गई पंक्ति का आशय अपने शब्दों में लिखिए
‘माखन-रोटी हाथ मैंह लीनी, गउवन के रखवारे।’
उत्तर :
ग्वाल-बालों अपने हाथों में ‘माखन-रोटी ले रखी है। वे गायों को चराने ले जा रहे है। वे उनके रखवाले हैं।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 16 भोर और बरखा

प्रश्न 3.
पढ़े हुए पद के आधार पर ब्रज की भोर का वर्णन कीजिए।
उत्तर :
सुबह होते ही ब्रज के घरों के दरवाजों के किवाड़ खुल जाते हैं और लोगों का आना-जाना शुरू हो जाता है। सुबह होते ही ब्रज के घरों में गोपियाँ दही मथना प्रारंभ कर देती हैं। वे मक्खन निकालती हैं। उनके हाथों के कंगनों की झनकार झनकने लगती है। नंद बाबा के घर के दरवाजे पर लोग खडे होने लगते हैं। ग्वाल-बाल कोलाहल करना प्रारंभ कर देते हैं और कृष्ण की जय-जयकार शुरू हो जाती है। बाल-कृष्ण हाथ में माखन-रोटी ले लेते हैं।

प्रश्न 4.
मीरा को सावन मनभावन क्यों लगने लगा?
उत्तर :
मीरा का सावन मनभावन इसलिए लंगने लगा क्योंकि सावन की फुहारों में मन उमंग लेने लगता है। इस मास में बिजली चमकती है तथा झर-झर कर वर्षा होती है। नन्ही-नन्ही बूंदे बड़ी अच्छी प्रतीत होती है।

प्रश्न 5.
पाठ के आधार पर सावन की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर :
सावन मास अत्यंत मनमोहक होता है। सांबन की बदरिया बरस कर तन-मन को हर्षित कर देती है। इस मास में मन उमंग भरने लगता है। वर्षा ऋतु में चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर आते हैं, बिजली चमकती है और बूंदों की झड़ी लग जाती है। नन्हीं-नन्हीं बूंदें पड़ती हैं और शीतल वायु चलने लगती है। ऋतु अत्यंत सुहावनी हो जाती है। यह ऋतु तन-मन को हर्षित कर देती है।

कविता से आगे

प्रश्न 1.
मीरा भक्तिकाल की प्रसिद्ध कवयित्री थीं। इस काल के दूसरे कवियों के नामों की सूची बनाइए तथा उनकी एक-एक रचना का नाम लिखिए।
उत्तर :

  1. कबीरदास – रचना बीजक
  2. सूरदास – रचना सूरसागर
  3. तुलसीदास – रचना रामचरितमानस
  4. जायसी – रचना पद्मावत

प्रश्न 2.
सावन वर्षा ऋतु का महीना है, वर्षा ऋतु से संबंधित दो अन्य महीनों के नाम लिखिए।
उत्तर :
आषाढ़, भादो।

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 16 भोर और बरखा

HBSE 7th Class Hindi भोर और बरखा Important Questions and Answers

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मीरा की भक्ति किसके प्रति थी?
उत्तर :
मीरा की भक्ति कृष्ण के प्रति थी।

प्रश्न 2.
गोपियाँ दही क्यों मथ रही हैं?
उत्तर :
गोपियाँ दही मथकर मक्खन निकलना चाह रही हैं।

प्रश्न 3.
ग्वालों ने हाथ में क्या वस्तु ले रखी है?
उत्तर :
ग्वालों ने हाथ में माखन-रोटी ले रखी है।

प्रश्न 4.
कवयित्री का मन क्यों उमग रहा है?
उत्तर :
क्योंकि कवयित्री को हरि (कृष्ण) के आने की भनक लग गई है।

प्रश्न 5.
कैसी बूंदें पड़ रही हैं?
उत्तर :
नन्ही-नन्ही बूंद पड़ रही हैं।

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लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मीरा ने सावन का वर्णन किस प्रकार किया है?
उत्तर :
मीरा बताती है कि सावन की बदली बरस रही है। चारों ओर से बादल उमड़-घुमड़ कर आ रहे हैं, बिजली चमक रही है, नन्ही-नन्ही बूंदें पड़ रही हैं तथा शीतल वायु चल रही है।

प्रश्न 2.
माता यशोदा अपने ललना को किस प्रकार ‘जगाती है?
उत्तर :
माता यशोदा अपने ललना कृष्ण को तरह-तरह के संकेत देकर जगाती हैं। वह कहती हैं-रात बीत गई है, घरों के किवाड़ खुल गए हैं, ग्वाल-बाल कोलाहल कर रहे हैं, ग्वालों ने हाथों में माखन-रोटी ले रखी है अर्थात् वं गायों को लेकर वन जान की तैयारी में हैं।

प्रश्न 3.
मीराबाई का एक अन्य पद लिखिए।
उत्तर :
मीराबाई द्वारा रचित एक अन्य पद पायो जी म्हँ तो राम रतन धन पायो। वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो। जनम-जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो। खरचैं नहिं कोई चोर न लेवै, दिन-दिन बढ़त सवायौ।। सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भव-सागर तर आयो।। मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरख-हरख जस गायो।।

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भोर और बरखा काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या

1. जागो बंसीवारे ………….. को तारै॥

शब्दार्थ : ललना = प्रिय बालक (Dear son)। रजनी = रात (Night)। भोर = सवेरा (Morning)। किंवारे = किवाड़ (Door)। सुर = देवता (God) द्वारे = दरवाजे (Door)। कुलाहल = शोर (Noise)। उचारै = उच्चारण करना (Speak)। सरण = शरण (Shelter)।

सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग : प्रस्तुत पद कृष्ण भक्त कवयित्री मीराबाई द्वारा रचित है। इसे हमारी पाठ्यपुस्तक ‘वसंत भाग-2’ में संकलित किया गया है। इस पद में भोर अर्थात् प्रात:काल का वर्णन है।

व्याख्या :
बालक कृष्ण अभी तक सो रहे हैं। उनकी माँ यशोदा उन्हें जगाते हुए कहती हैं-हे प्यारे, बंसीवाले बालक! जाग जाओ। तुम मुझे बहुत प्रिय हो। अब रात बीत चुकी है और सवेरा हो गया है। प्रत्येक घर के किवाड़ खुल गए हैं अर्थात् लोगों का आना-जाना शुरू हो गया है। गोपियाँ दही मथने (चलाने) लगी हैं। उनके हाथों के कंगनों की झनकार सुनाई पड़ रही है। हे मेरे लाल, अब सवेरा हो चुका है। दरवाजे पर देवता और मनुष्य खड़े हुए हैं। वे तुम्हारे दर्शन करना चाहते हैं।

ग्वाल-बाल भी कोलाहल कर रहे हैं। वे सभी तुम्हारी जय-जयकार कर रहे हैं। यह सुनकर बाल-कृष्ण ने अपने हाथ में माखन-रोटी ले ली। वे तो गायों के रखवाले हैं। मीराबाई कहती हैं कि कृष्ण तो गिरधर नागर हैं और उसके प्रभु (भगवान) हैं। जो भी व्यक्ति या प्राणी उनकी शरण में आता है, वे उसी का बेड़ा पार लगा देते हैं अर्थात् उसका उद्धार कर देते हैं।

विशेष :
1. कृष्ण की बाल्यावस्था का वर्णन है।
2. वात्सल्य रस का प्रयोग है।
3. ‘भोर भयो’, ‘करत कुलाइल’ में अनुप्रास अलंकार है।
4. ‘घर-घर’, ‘जय-जय’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
5. ब्रज भाषा का प्रयोग है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:
1. कौन, किसको जगाने का उपक्रम कर रही है?
2. जगाने वाली रात बीतने का क्या-क्या संकेत बता रही है?
3. ग्वाल-बाल क्या कर रहे हैं?
4. श्रीकृष्ण की शरण में आने पर क्या होता है?
उत्तर:
1. माता यशोदा बालक कृष्ण को नींद से जगाने का उपक्रम कर रही हैं।
2. जगाने वाली कवयित्री बालक कृष्ण को रात बीतने का संकेत ये बता रही है

  • घर-घर के दरवाजों के किवाड़ खुल गए हैं।
  • गोपियाँ दही मथने लगी हैं, उनके कंगनों की झनकार सुनाई पड़ रही है।
  • दरवाजे पर सुर-नर खड़े हैं।

3. ग्वाल-बाल कोलाहल कर रहे हैं और जय-जय का उद्घोष कर रहे हैं, उनके हाथ में माखन-रोटी है।
4. जो भी श्रीकृष्ण की शरण में आता है, श्रीकृष्ण उसका उद्धार कर देते हैं अर्थात् बेड़ा पार कर देते हैं।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुन कर लिखिए

1. इस पद में किसको जगाया जा रहा है?
(क) बालक कृष्ण को
(ख) कवयित्री को
(ग) ग्वाल-बालों को
(घ) ग्वालों को
उत्तर :
(क) बालक कृष्ण को

2. दही कौन मथ रहा है?
(क) गोपियाँ
(ख) राधा
(ग) लालजी
(घ) माता यशोदा
उत्तर :
(क) गोपियाँ

3. माखन-रोटी कहाँ है?
(क) ग्वालों के हाथ में
(ख) ग्वालों के मुँह में
(ग) कवयित्री के पास
(घ) बाल कृष्ण के पास
उत्तर :
(घ) बाल कृष्ण के पास

4. ‘भोर भयो’ में किस अलंकार का प्रयोग है?
(क) अनुप्रास
(ख) यमक
(ग) श्ले ष
(घ) पुनरुक्ति
उत्तर :
(क) अनुप्रास

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 16 भोर और बरखा

2. बरस वदरिया ……………….. गावण की।

शब्दार्थ :
वदरिया = बादलों की घटा (Clouds)। मन-भावण = मन को भाने वाला (Pleasing)। मनवा = मन (Heart)। सुणी = सुनी (Heard)। आवण = आना (Coming)। चहुँ दिसि = चारों दिशा (From all sides)। दामण = बिजली (Light of sky)। मेहा = वर्षा (Rain)। सीतल = शीतल (ठंडा) (Cool)। पवन = हवा (Wind)। सुहावण = सुहावनी (Beautiful).

प्रसंग : प्रस्तुत पद कृष्ण भक्त कवयित्री मीराबाई द्वारा रचित है। इसे हमारी पाठ्यपुस्तक ‘वसंत भाग-2’ में संकलित किया गया है। इसमें वर्षा ऋतु का वर्णन है।।

व्याख्या :
कवयित्री बताती है कि सावन का महीना है। सावन की बदली को बरसना चाहिए। इससे मन को प्रसन्नता मिलती है। कवयित्री कहती है कि सावन के महीने में मेरे मन में उमंग आती है। इसका कारण यह भी है कि मैंने कृष्ण के आने की भनक सुनी है। सावन मास में कृष्ण आते हैं। उमड़-घुमड़ कर चारों दिशाओं से बादल आते हैं, बिजली चमकती है और इससे झड़ी लगती है। वर्षा की नन्ही-नन्ही बूंदें बरसती हैं और इससे हवा ठंडी हो जाती है जो अत्यंत सुहावनी लगती है।

मीराबाई कहती है कि उसके प्रभु गिरधर नागर (कृष्ण) हैं। उनके आने की खुशी में मंगल गीत गाने का अवसर है। इससे सर्वत्र आनंद हो जाएगा।

विशेष :
1. प्रकृति का मनोहारी चित्रण है।
2. सावन मास की वर्षा मनभावन प्रतीत होती है।
3. ‘घुमड़-घुमड़’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
4. ‘दामण दमक’ में अनुप्रास अलंकार है।
5. राजस्थानी भाषा का प्रयोग है।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. ‘बरस बदरिया’ में किस ऋतु और किस मास के बारे में बताया गया है?
2. किसका मन उमंग गया है और क्यों?
3. पद के आधार पर प्राकृतिक वातावरण का चित्रण कीजिए।
उत्तर:
1. इसमें वर्षा ऋतु और उसके प्रमुख मास-सावन के बारे में बताया गया है।
2. कवयित्री के मन में उमंग है क्योंकि उसे हरि (कृष्ण) के आने की भनक पड़ गई है।
3. वर्षा ऋतु में चारों ओर बादल उमड़-घुमड़ रहे हैं, बिजली चमक रही है, नन्ही-नन्ही बूंदें पड़ रही हैं शीतल वायु चल रही है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही उत्तर चुनकर लिखिए

1. ‘बरस बदरिया’ में कौन-सा अलंकार है?
(क) अनुप्रास
(ख) यमक
(ग) श्ले ष
(घ) पुनरुक्ति
उत्तर :
(क) अनुप्रास

2. इस पद में किस मास का उल्लेख है?
(क) आषाढ़
(ख) सावन
(ग) कार्तिक
(घ) फागुन
उत्तर :
(ख) सावन

3. इस पद की रचना किसने की है?
(क) मीराबाई ने
(ख) सूरदास ने
(ग) कबीर ने
(घ) रहीम ने
उत्तर :
(क) मीराबाई ने

HBSE 7th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 16 भोर और बरखा

भोर और बरखा Summary in Hindi

भोर और बरखा कवयित्री-परिचय

प्रश्न : मीराबाई का संक्षिप्त जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
जीवन-परिचय :
मीराबाई का जन्म सन् 1504 ई. के लगभग राजस्थान में मेड़ता के पास कुडकी ग्राम में हुआ था। मीरा के पिता का नाम रत्नसिंह था। बाल्यकाल में ही माता की मृत्यु हो जाने के कारण उनका लालन-पालन दादा ने किया था, जो वैष्णव भक्त थे। मीरा का विवाह उदयपुर के राणा सांगा के पुत्र भोजराज के साथ हुआ। विवाह के कुछ समय बाद उनके पति की मृत्यु हो गई। बचपन में माता की मृत्यु और यौवन में पति की मृत्यु ने मीरा को संसार से विमुख कर दिया और उन्होंने अपने आपको कृष्णमय बना लिया। मीरा मंदिरों में कृष्ण की मूर्ति के आगे नाचतीं और साधु-संतों का निःसंकोच स्वागत-सत्कार करती थीं। उनके ऐसे कार्यों से रुष्ट होकर उनके देवर ने उन्हें मारने के यत्न भी किए, परंतु उसे सफलता न मिली। प्रौढ़ावस्था में घर-बार छोड़कर मीरा वृंदावन चली गईं और वहाँ से द्वारिका जहाँ अंत तक वे रणछोड़ जी के मंदिर में रहीं। 1546 ई. में मीरा का निधन हो गया।

रचनाएँ :
मीरा के नाम से अनेक रचनाओं का उल्लेख मिलता है- ‘नीरस जी का मायरा’, ‘राग गोबिन्द’, ‘राग सोरठ के पद’, ‘गीत-गोविन्द की टीका’, ‘मीराबाई का मलार’, ‘राग-बिराग’ आदि लेकिन विद्वानों के अनुसार ‘पदावली’ ही उनका प्रामाणिक ग्रंथ है।

विशेषताएँ :
मीरा ने गीतिकाव्य की रचना की और कृष्णभक्त कवियों की परंपरागत पदशैली को अपनाया। मीरा के सभी पद संगीत के स्वरों में बँधे हुए हैं। जीवन के कटु अनुभवों के कारण उनके पदों में वेदना-भाव की प्रधानता है। वे विशेष पढ़ी-लिखी नहीं थी, इसलिए उनके पदों में पांडित्य के स्थान पर सरलता है। इनके गीतों में इनकी आवेशपूर्ण आत्माभिव्यक्ति मिलती है। प्रियतम के समक्ष आत्म-समर्पण की भावना तथा तन्मयता ने इनके काव्य को मार्मिक तथा प्रभावोत्पादक बना दिया है। कृष्ण के प्रति प्रेमभाव की व्यंजना ही इनकी कविता का मुख्य उद्देश्य रहा। जीवनभर मीरा कृष्ण की वियोगिनी बनी रहीं। इनके काव्य में हृदय की आवेशपूर्ण विह्वलता देखने को मिलती है।

मीराबाई के पदों में कृष्ण की रूप-माधुरी के वर्णन के साथ ही उनके प्रति अनन्य भक्ति-भावना की अभिव्यक्ति भी मिलती है। भक्तिकाल के अनेक अन्य कवियों की भाँति मीराबाई के पदों में भी कुछ पौराणिक कथाओं के उद्धरण देखे जा सकते हैं। यद्यपि मीरा स्थान-स्थान पर गिरधर-गोपाल, नंदलाल, हरि आदि नामों का उल्लेख करती हैं, परंतु उनकी दृष्टि में राम और कृष्ण में कोई अंतर नहीं है।

भाषा-शैली :
मीरां की काव्य-भाषा शुद्ध साहित्यिक ब्रज-भाषा के निकट है तथा उस पर राजस्थानी, गुजराती, पश्चिमी हिंदी और पंजाबी का प्रभाव दृष्टिगोचर होता है। इनकी काव्य-भाषा अत्यंत मधुर, सरस और प्रभावपूर्ण है।

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