Author name: Prasanna

HBSE 10th Class Social Science Solutions History Chapter 6 काम, आराम और जीवन

Haryana State Board HBSE 10th Class Social Science Solutions History Chapter 6 काम, आराम और जीवन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Social Science Solutions History Chapter 6 काम, आराम और जीवन

HBSE 10th Class History काम, आराम और जीवन Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
अठारहवीं सदी के मध्य से लंदन की आबादी क्यों फैलने लगी? कारण बताइए।
उत्तर-
लंदन हमेशा से ही अधिक जनसंख्या वाला शहर बनता चला गया। आठाहरवीं सदी के मध्य तक तो नौ में से एक आदमी लंदन का निवासी था। लंदन विशाल फैक्ट्रियों का शहर नहीं था। इसका कारण था-लंदन में प्रत्येक व्यवसाय के व्यक्ति के लिए स्थान था। मजदूर से लेकर किसान, क्लर्क, दुकानदार, वकील, सिपाही सभी लंदन के निवासी थे। इसके अतिरिक्त लंदन में पाँच उद्योग भी थे। जिनमें लोग काम करने आते थे। 1880 तक लंदन की आबादी 40 लाख हो गई।

प्रश्न 2.
उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के बीच लंदन में औरतों के लिए उपलब्ध कामों में किस तरह के बदलाव आए? ये बदलाव किन कारणों से आए?
उत्तर-
19वीं सदी के आरंभ में फैक्ट्रियों में महिलाएँ काम करती थीं। तकनीकी सुधारों के कारण उनकी नौकरियाँ छिनने लगीं। अब वे घरेलू नौकरों के रूप में काम करने लगीं। कई घर में ही सिलाई-बुनाई, माचिस बनाना आदि व्यवसाय करने लगीं या अपने घरों को किराए पर देतीं। परंतु 20वीं सदी से फिर परिवर्तन होने लगा। युद्ध के समय उस समय के उद्योगों तथा दफ्तरों में औरतें काम करने लगीं। यह परिवर्तन युद्ध के समय और तकनीकी परिवर्तनों के कारण आए।

प्रश्न 3.
विशाल शहरी आबादी होने से निम्नलिखित पर क्या असर पड़ता है? ऐतिहासिक उदाहरणों के साथ समझाइए।
उत्तर-
(क) जमींदार-जब भी शहरों में आबादी बढ़ती हैं तब गाँवों में लोग शहरो की ओर चल पड़ते हैं। इस कारण जमींदारी पर भी प्रभाव पड़ता है। अक्सर किसान, मजदूर आदि जमींदारों से कर्जे पर धन लेते थे। इसके अतिरिक्त ये लोग इनकी जमीनों पर काम भी करते। शहरीकरण के कारण लोग शहरों में काम ढूँढ़ने लगे जिससे जमींदारों की आमदनी तथा काम करने वाले मजदूरों में कमी आई।
(ख) कानून व्यवस्था सँभालने वाला पुलिस अधीक्षक-जब शहरीकरण होता है जो जनसंख्या में भी वृद्धि होती है। इसके कारण अपराध तथा अपराधियों में वृद्धि होती है। पुलिस अधीक्षक का ऐसे समय में काम बढ़ जाता है। जैसे 1870 के दशक में लंदन में लगभग 20,000 अपराधी रहते थे। इनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पुलिस अधीक्षकों के काम में वृद्धि हुई।
(ग) राजनीतिक दल का नेता-शहरों में राजनीति का जोर अधिक होता है। भारत में शहरीकरण के साथ औपनिवेशक काल में कई राजनीतिक दल 19वीं सदी में उत्पन्न हुए, जैसेकांग्रेस आदि। इन दलों के नेताओं ने राष्ट्रीयता का प्रचार किया। उनके राजनीतिक दलों के नेताओं, जैसे-महात्मा गाँधी आदि का शहरों की जनता पर बहुत प्रभाव रहा।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित की व्याख्या करें
(क) उन्नीसवीं सदी में धनी लंदनवासियों ने गरीबों के लिए मकान बनाने की जरूरत का समर्थन क्यों किया?
(ख) बंबई की बहुत सारी फिल्में शहर में बाहर से आने वालों की जिंदगी पर आधारित क्यों होती थीं?
(ग) उन्नीसवीं सदी के मध्य में बंबई की आबादी में भारी वृद्धि क्यों हुई?
उत्तर-
(क) 19वीं सदी तक लंदन में गरीबों की जनसंख्या बहुत अधिक हो गई थी। 1887 में लगभग 10 लाख लोग गरीब रह रहे थे। उनके लिए लगभग चार लाख कमरों की आवश्यकता थी। कुछ समय तक अमीर लोग झोंपड़पट्टियाँ खत्म करने की माँग करते रहे। परंतु धीरे-धीरे यह समझा जाने लगा कि उनके लिए घरों की जरूरत हैं। एक कमरे वाले घर स्वास्थ्य के लिए सही नहीं थे। हल्के घरों में आग लगाने का खतरा बना रहता था। वह भी डर था गरीब लोग विद्रोह भी कर सकते थे।
(ख) बंबई में आरंभ से ही जीवन अत्यन्त कठिन रहा है इन्हीं कठिनाइयों को दिखाने के लिए फिल्मकारों ने फिल्मों का प्रयोग किया। कई गीतों में बंबई के अन्त:विरोधी आयामों को उजागर किया।
(ग) अंग्रेज-मराठा युद्ध के बाद बंबई शहर तेजी से बढ़ने लगा। बंबई में हर क्षेत्र में लोग आकर रहने लगे, जैसे-व्यापारी, महाजन तथा दुकानदार आदि कपड़ा मिल खुलने के बाद उसमें काम करने वाले आकर बंबई में बसने लगे। यहाँ आबादी बढ़ने का मुख्य कारण था-सभी प्रकार के व्यवसायों तथा कामों की उपलब्धि होना।

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HBSE 10th Class Social Science Solutions History Chapter 5 औद्योगीकरण का युग

Haryana State Board HBSE 10th Class Social Science Solutions History Chapter 5 औद्योगीकरण का युग Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Social Science Solutions History Chapter 5 औद्योगीकरण का युग

HBSE 10th Class History औद्योगीकरण का युग Textbook Questions and Answers

1. निम्नलिखित की व्याख्या करें

(क) ब्रिटेन की महिला कामगारों ने स्पिनिंग जेनी मशीनों पर हमले किए।
उत्तर-
स्पिनिंग जेनी (Spinning Jenny) का अविष्कार जेम्स हरग्रीज ने 1764 ईन ने किया। इस मशीन ने कताई की प्रव्यिा तेज कर दी जिसके कारण अब मजदूरों की मांग घट गई। एक ही पहिये को घुमाकर एक मजदूर एक सारी स्पिडलस को घुमा देता था और एक साथ कई धागे बनने लगते थे। बेरोजगारी के डर से महिला-कारीगर, जो हाथ से धागा कातकर गुजारा करती थीं, घबरा गई। इसलिये उन्होनें इन नई मशीनों को लगाने का विरोध किया और जहाँ-जहाँ ये मशीनें लगाई गई उनपर आक्रमण करके उनको तोड़-फोड़ दिया। महिलाओं का विरोध और तोड़-फोड़ काफी समय तक चलती रही।

(ख) सत्रहवीं शताब्दी में यूरोपीय शहरों के सौदागर गाँवों में किसानों और कारीगरों से काम करवाने लगे।
उत्तर-
औद्योगिक वन्ति इंग्लैंड को मिलाकर, यूरोप के बहुत से देशों में 18वीं शताब्दी में फैली। इससे पहले यूरोप में नए व्यापारी वर्ग को नगरों में अपनी औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित करने में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस प्रकार उन्होनें अपने व्यापार और औद्योगिक इकाइयों को गा!व में स्थापित करने का प्रयत्न किया। निम्नलिखित कारणों और परिस्थितियों ने उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों की ओर जाने के लिए मजबूर किया।
(क) उस समय विश्व-व्यापार के विस्तार और उपनिवेशों की स्थापना के कारण चीज़ों की मांग बढ़ने लगी थी, इसलिये उद्योगपति और व्यापारी अपना उत्पादन बढ़ाना चाहते थे। परन्तु शहरों में रहकर वे ऐसा नहीं कर सकते थे क्योंकि वहाँ मजदूर संघो व्यापारिक गिल्ड्स काफी शक्तिशाली थे जो उनके लिये अनेक समस्याएँ पैदा कर सकते थे।
(ख) शासकों ने भी विभिन्न गिल्ड्स को खास चीजों के उत्पादन और व्यापार का एकाधिकार दे रखा था। इसलिये व्यापारी लोग नगरों में अपनी इच्छानुसार कार्य नहीं कर सकते थे।
(ग) ग्रामीण क्षेत्रों में किसान लोग और कारीगर वर्ग ऐसे सौदागरों के लिये काम करने को तैयार थे क्योंकि खुले खेत खत्म होने और कामन्स भूमियों की बाड़ाबंदी होने के कारण उनके पास जीने के अब बहुत कम साधन बचे थे।

(ग) सूरत बंदरगाह अठारहवीं सदी के अंत तक हाशिये पर पहुँच गया था।
उत्तर-
भारत में पश्चिमी तट पर स्थित सरत की बन्दरगाह मशीन युग से पहले, भारत को पश्चिमी देशों से मिलाने और व्यापारिक गतिविधियों को अंजाम देने वाली सबसे प्रसिद्ध बन्दरगाह थी। परन्तु 19वीं सदी के आते-आते विभिन्न यूरोपीय कम्पनियों विशेषकर अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कम्पनी ने इसके बहुत से व्यापार पर अधिकार कर लिया और इसके पहले ही शान और महत्व जाता रहा। उन्होंने पश्चिमी तट पर अपनी-अपनी बन्दरगाहें स्थापित कर ली, जैसे अंग्रेजों ने बम्बई की बन्दरगाह का निर्माण कर अपना सारा व्यापार इस बन्दरगाह से करना शुरु कर दिया। ऐसे में भारत की पुरानी बन्दरगाहें, जैसे सूरत की बन्दरगाह द्वारा होने वाले विदेशी व्यापार की मात्रा बहुत कम हो गई। एक अनुमान के अनुसार 17वीं शताब्दी के अंत में सूरत से जहाँ 16 मिलियन मूल्य का माल आता जाता था। वह 1740 के दशक में घटकर केवल 3मिलियन ही रह गया।

(घ) ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में बुनकरों पर निगरानी रखने के लिए गुमाश्तों को नियुक्त किया था।
उत्तर-
ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भारतीय व्यापारियों और दलालों की भूमिका समाप्त करने तथा बुनकरों पर अधिक नियन्त्रण स्थापित करने के विचार से वेतनभोगी कर्मचारी तैनात कर दिये जिन्हें गुमाशता कहा जाता था। इन गुमाशतों को अनेक प्रकार के काम सौंपे गए।

(क) वे बुनकरों को कर्ज देते थे ताकि वे किसी और को अपना माल तैयार करके न दे सकें।
(ख) वे ही बुनकरों से तैयार किये हुए माल को इकट्ठा करते थे।
(ग) वे बने हुए सामान विशेषकर बने हुए कपड़ों की गुणवना की जांच करते थे।

क्योंकि ये गुमाशता लोग बुनकरों के बीच में नहीं रहते थे इसलिये किसी न किसी बात पर उनका बुनकर से टकराव हो जाता था। कई बुनकर तो इन गुमाशतों के कठोर व्यवहार से तंग आकर अपना गा!व तक छोड़ जाते थे और दूसरे स्थानों पर जाकर वहाँ अपना करघा लगा लेते थे और वहाँ अपना काम शुरु कर देते थे।

प्रश्न 2. प्रत्येक वक्तव्य के आगे ‘सही’ या ‘गलत’ लिखें-

(क) उन्नीसवीं सदी के आखिर में यूरोप की कुल श्रम शक्ति का 80 प्रतिशत तकनीकी रूप से विकसित औद्योगिक क्षेत्र में काम कर रहा था।
उत्तर-
गलत।

(ख) अठारहवीं सदी तक महीन कपड़े के अंतराष्ट्रीय बाजार पर भारत का दबदबा था।
उत्तर-
सही।

(ग) अमेरिकी गृह युद्ध के फलस्वरूप भारत के कपास निर्यात में कमी आई।
उत्तर-
गलत।

(घ) ल्लाई शटल के आगे से हथकरथा कामगारों की उत्पादकता में सुधार हुआ।
उत्तर-
सही।

प्रश्न 3.
आदि-औद्योगिक का मतलब बताएँ।
उत्तर-
आदि-औद्योगिक से हमारा अभिप्राय उन उद्योगों से है जो फैक्ट्रियां लगने से पहले पनप रहे थे। अभी जब इंग्लैड़ और यूरोप में फैक्ट्रिया शुरु नहीं हुई थीं तब भी वहाँ अन्तराष्ट्रीय माँग को पूरा करने के लिये बहुत-सा माल बनता था। यह उत्पादन फैक्ट्रियों में नहीं होता था। परन्तु घर-घर में हाथों से माल तैयार होता था और वह भी काफी मात्रा में।

बहुत से इतिहासकार फैक्ट्रियों की स्थापना से पहले की औद्योगिक गतिविधियों को आदि औद्योगिकरण (ProtoIndudtrialisation) के नाम से पुकारते हैं। शहरों में अनेक व्यापारिक गिल्ड्स थीं जो विभिन्न प्रकार की चीजों का,
फैक्ट्रियों की स्थापना से पहले, उत्पादन करती थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत से सौदागार यही काम किसानों और मजदूरों से हाथ द्वारा करवाते थे। यह आदि-औद्योगिक की व्यवस्था इंग्लैंड और यूरोप में फैक्ट्रियाँ लगने से पहले के काल में व्यापारिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण अंग बनी हुई थी।

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HBSE 10th Class Social Science Solutions History Chapter 4 भूमंडलीकृत विश्व का बनना

Haryana State Board HBSE 10th Class Social Science Solutions History Chapter 4 भूमंडलीकृत विश्व का बनना Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Social Science Solutions History Chapter 4 भूमंडलीकृत विश्व का बनना

HBSE 10th Class History भूमंडलीकृत विश्व का बनना Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
सत्रहवीं सदी से पहले होने वाले आदान-प्रदान के दो उदाहरण दीजिए। एक उदाहरण एशिया से और एक उदाहरण अमेरिकी महाद्वीपों के बारे में चुनें।
उत्तर-
17वीं शताब्दी से पहले के वैश्विक आदान-प्रदान का एक लाभकारी उदाहरण-17वीं शताब्दी से पहले के काल में जो यात्री, व्यापारी, पुजारी और तीर्थयात्री आपसी मेल-मिलाप के अग्रदूत बनकर एक देश से दूसरे देश गए, विशेषकर एशिया से दूसरे देशों की ओर गये वे अपने साथ अनेक चीजों, पैसे-मान्यताओं, विचारों, अनेक प्रकार की कलाओं को भी ले गए और उन्होंने दूसरे लोगों के जीवन को सुखमय बना दिया। ऐसे प्रायः एशिया के भारत और चीन जैसे देशों द्वारा ही हुआ।

17वीं शताब्दी से पहले वैश्विक आदान-प्रदान का एक विनाशकारी उदाहरण-17वीं शताब्दी से पूर्व के वैश्विक आदान-प्रदान कई बार नए लोगों के लिये विनाश कर कारण भी बन गए। जैसे पुर्तगाल और स्पेन से जब लोग अमेरिका पहु!चे तो वे अपने साथ अनेक बीमारियों विशेषकर चेचक के कीटाणु भी ले गये जिन्होंने अमेरिका के मूल निवासियों के अनेक कबीलों का सफाया ही कर दिया।

प्रश्न 2.
बताएँ कि पाक-आधुनिक विश्व में बीमारियों के वैश्विक प्रसार के अमेरिकी भूभागों के उपनिवेशीकरण में किस मदद दी।
उत्तर-
17वीं शताब्दी के पहले के वैश्विक आदान-प्रदान के जहाँ कुछ प्रभाव पड़े जैसे लोगो की नई चीजों और नए विचारों कर ज्ञान हुआ। वहाँ उसके कुछ बुरे प्रभाव भी पड़े। कुछ लोग दूसरे देशों में बीमारियों के ऐसे कीटाणु भी ले गये जिन्होंने उनका नाश कर दिया। एक ऐसा उदाहरण यूरोपवासियों द्वारा अमेरिका में बीमारी के कीटाणु ले जाकर उनको बर्बाद करना है।

कहा जाता है कि यूरोपिय लोगों ने अमेरिका को केवल अपने सैनिक बल पर ही नहीं जीता वरन् उन चेचक के कीटाणुओं के कारण जीता जो स्पेन के सैनिक और अफसर अपने साथ वहाँ ले गए। इस बीमारी का इलाज यूरोप-निवासी तो जानते थे परन्तु अमेरिका के निवासी इससे अनभिज्ञ थे। अमेरिका के लोगों के शरीर में यूरोप से अपने वाली इन बीमारियों से बचने की रोग-प्रतिरोधी क्षमता नहीं थी इसलिये बहुत से अमेरिकी आदिवासी मौत का शिकार हुए। कहीं-कहीं तो चेचक से समुदाए के समुदाय खत्म हो गए।

इस प्रकार यह ठीक ही कहा गया है कि चेचक की बीमारी ने अमेरिकी भूभागों के उपनिवेशीकरण में बहुत सहायता की अन्यथा अमेरिका विजय का कार्य काफी कठिन हो जाता।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित के प्रभावों को व्याख्या करते हुए संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखें:
(क) कॉर्न लॉ के समाप्त करने के बारे में ब्रिटिश सरकार का फैसला।
उत्तर-
ब्रिटिश पार्लियामेंट ने 19वीं शताब्दी में जो कानून अपने भूस्वामियों के हितों की रक्षा के लिये पास किये उन्हें कार्न लॉ (Corn Laws) कहा जाता है। इन कानूनों द्वारा विदेशो से खाद्य-पदार्थो के आयात पर पाबन्दी लगा दी गई। इस पाबन्दी के परिणास्वरुप जब ब्रिटेन में खाद्य पदार्थो के मूल्य बढ़ने लगे तो लोगों में हा हा कार मच गई और विवश होकर सरकार को ये कानून हटाने के बहुत महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेः
(क) खाद्य-सामग्री सस्ती हो गई जिससे साधारण और गरीब जनता को खूब लाभ रहा।
(ख) जब बाहर से खाद्य पदार्थ सस्ते दामों में इंग्लैंड आने तो वहाँ के भू-स्वामी बर्बाद हो गए।
(ग) बहुत-सी भूमि। पर हो गई और खेती करने वाले बहुत से किसान बेरोजगार हो गए।
(घ) ऐसे बहुत से ग्रामीण लोग नौकरी की तलाश में शहरों की ओर भागने लगे। जिससे शहरों की हालात भी खराब हो गई

(ख) अफ्रीका में रिंडररपेस्ट का आना।
उत्तर-
अफ्रीका में रिंडरपेस्ट का आना (The Coming of Rinderpest to Africa)-रिंडपेस्ट पशुओं में फैलने वाली उन खतरनाक बीमारी है जो 1890 के दशक में अफ्रीका में प्लेग की तरह फैली। अफ्रीका में यह बीमारी उन पशुओं के कारण फैली जो अफ्रीक में ब्रिटिश साम्राज्य के लिए लड़ रहे भारतीय सिपाहियों के भोजन के लिये अनेक पूर्वी देशों से मंगवाए गए। जैसे ही ये पशु पूर्वी अफ्रीका पहुँचे इन्होंने वहाँ के पशुओं को भी रिंडरपेस्ट की बीमारी में लपेट लिया। 1892से शुरु होकर अगले पाँच वर्षों में पशुओं को यह घातक बीमारी दक्षिणी और पश्चिमी अफ्रीका की सीमाओं तक फैल गई। इस बीमारी के बड़ी दूरगामी प्रभाव पड़ेः
(क) इस बीमारी के कारण अफ्रीका के पशु मौत के शिकार हुए।
(ख) इस बीमारी से अफ्रीका के लोगों की आजीविका और अर्थव्यवस्था पर बड़ा गहरा असर पड़ा।
(ग) और बिलकुल बर्बाद और बेसहारा होने के कारण अफ्रीका के लोगों को विदेशी साम्राज्यवादियों के पास न मजदूरी करने के लिये मजबूर होना पड़ा। यदि उनके पास अपने पशु होते वे कभी भी यह काम करने को तैयार न होते।
(घ) अफ्रीका के लोगों के इस विनाश और उनके साध नों के बर्बाद हो जाने के कारण यूरोपीय उपनिवेशवादियों को अफ्रीका को जीतना और अपने अमीन करना काफी आसान हो गया।

(ग) विश्वयुद्ध के कारण यूरोप में कामकाजी उम्र के पुरुषों की मौतें।
उत्तर-
प्रथम विश्वयुद्ध (1914-1918) के मुख्य परिणाम निम्नलिखित थे:

  1. प्रथम विश्वयुद्ध (1914-1918) एक बहुत विनाशकारी युद्ध था। प्रथम महायुद्ध में लाखों व्यक्ति माने गए, घायल हुए और जीवन भर के लिए निकम्मे हो गए। इन मरने वालों और घायल होने वालों में अधिकतर कामकाजी उम्र के पुरुष थे इसलिये विभिन्न उद्योगों को कामकाजी लोगों के बिना चलाना काफी कठिन हो गया।
  2. आर्थिक दृष्टि से यह बहुत हानिकारक सिद्ध हुआ। ऐसा अनुमान लगाया जाता हैकि इस युद्ध में कुल खर्च लगभग 186,00.000,000 डालर हुआ। इस युद्ध के कारण हज़ारों नगर,खेत और कारखाने तबाह हो गए और व्यापार भी नष्ट हो गया।
  3. इस युद्ध ने जर्मनी में नाजीवाद के उत्थान को प्रोत्साहित किया। वर्साय का सन्धिपत्र जर्मनी के लिये बड़ा हानिकारक और अपमानजनक था। उसकी सारी बस्तियां उससे छीन ली गई। इस सारे अन्याय के विरुद जर्मनी में बड़ा रोष पैदा हुआ देखते ही देखते हिटलर ने वहा! एक तानाशाही राज्य की स्थापना कर ली।
  4. प्रथम युद्ध के ही परिणामस्वरुप इटली में फासीवाद का जन्म हुआ। इटली ने मित्र राष्ट्रों का साथ इसलिये दिया था कि युद्ध के पश्चात् उसे बड़े लाभ मिलेंगे। परन्तु उसे प्रथम महायुद्ध की लूट में से कुछ भी न मिला। इस से जो इटली में निराशा फैली। उसने वहाँ फासीवाद या तानाशाही को जन्म दिया।
  5. प्रथम विश्वयुद्ध का एक अन्य परिणाम था। राष्ट्र संघ (League of Nations) की स्थापना जिसने अगले कोई 20 वर्ष तक विश्व में शान्ति स्थापित करने का प्रयत्न किया।

(घ) भारतीय अर्थव्यवस्था पर महामंदी का प्रभाव।
उत्तर-
(क) इस महामन्दी (1929-1934) के काल में भारत के आयात और निर्यात व्यापार में कोई 50% की कमी आ गई।
(ख) इस महामंदी का बंगाल के पटसन पैदा करने वाले लोगों पर विशेष रुप से बड़ा विनाशकारी प्रभाव पड़ा। पटसन के मूल्यों में कोई 60% की गिरावट आ गई जिससे बंगाल के पटसन उत्पादक बर्बाद हो गए और वे कर्ज के बोझ तले दबे गए।
(ग) छोटे- छोटे किसान भी बर्बादी से न बच सके। चाहे उनकी आर्थिक दशा खराब होती जा रही थी। सरकार ने उनके भूमिकर तथा अन्य करो में कोई कमी न की।
(घ) 1930 में शुरु होने वाले सिविल अवज्ञा आन्दोलन (Civil Disobedience Movement) इस आर्थिक मन्दी का सीधा परिणाम था। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र अशान्ति का क्षेत्र बन चुके थे।

(5) बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अपने उत्पादन को एशियाई देशों में स्थानांतरित करने का फैसला।
उत्तर-
बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने 1970 के दशक में अपना रुख एशिया के देशों की ओर किया, जिसके अनेक महत्वपूर्ण परिणाम निकले–
(क) एशिया देशों में नौकरी के अवसरों में काफी वृद्धि हुई और इस प्रकार बेरोजगारी के मसलों को हल करने में काफी आसानी, रही।
(ख) इन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने विकासशील देशों को उनके पुराने उपनिवेशी देशों के चंगुल से निकलने में काफी सहयोग दिया।
(ग) इन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने अपनी उत्पादक और व्यापारिक गतिविधियों के कारण वैश्विक व्यापार ओर पूंजी प्रवाही को भी काफी प्रभावित किया।

प्रश्न 4.
खाद्य उपलब्धता पर तकनीक के प्रभाव को दर्शाने के लिए इतिहास से दो उदाहरण दें।
उत्तर-
‘कॉर्न लॉ’ 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश में ब्रिटिश पार्लियामेंट द्वारा पास किये ताकि भूमि-स्वामियों के हितों की रक्षा की जा सके परन्तु इन कानूनों के परिणामस्वरुप जब इंग्लैंड में बाहर से अनाज आना बन्द हो गया तो वहाँ खाद्य-पदार्थो के मूल्य आकाश को छूने लगे । ऐसे में शीघ्र ही इन कानूनों को निरस्त या हटा दिया गया। धीरे-धीरे विदेशों में अनाज आने लगा जिसके परिणामस्वरूप वहाँ की खाद्य समस्या ठीक होने लगी। नि:सन्देह तकनीकी विकास ने खाद्य समस्या को हल करने में बहुत योगदान दिया। तकनीकी या विभिन्न प्रकार के आविष्कारों. जैसे रेलवे, भाप के जहाजों, टेलिग्राफ और रेफ्रिजरेटर-युक्त जहाजों का खाद्य पदार्थो की उपलब्धता पर बड़ा गहरा प्रभाव पड़ा।

(क) यातायात के विभिन्न साधनों-जैसे तेज़ चलने वाली रेलगाड़ियो, हलकी बग्धियों, बड़े आकार के जलपोतों द्वारा अब खाद्य पदार्थो को दूर-दूर के बाजारों में कम लागात पर और आसानी से पहुँचाना आसान हो गया।
(ख) रेफ्रिजरेटर कर तकनीक युक्त जहाज़ों के कारण अब जल्दी खराब होने वाली चीज़ों-मांस, फल आदि को भी लम्बी यात्राओं में लाया-ले जाया जा सकता था।

प्रश्न 5.
ब्रेटन वुड्स समझौते का क्या अर्थ है।
उत्तर-
ब्रेटन वुड्स समझौता-ब्रेटन वुड्स का समझौता विश्व के विभिन्न देशों में जुलाई 1944 ई. को संयुक्त राष्ट्र संघ के मौद्रिक एवं वित्तीय सम्मेलन में हुआ। जो अमेरिका स्थित न्यू हैम्पशर के ब्रेटन वुड्स नामक स्थान पर हुआ। इस सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र संघ की दो संस्थाओं-अन्तराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की स्थापना हुई।

उन दोनों संस्थाओं ने 1947 ई. में अपना काम करना शुरु कर दिया जो आज तक बड़ी बखूबी से कर रही है। अन्तराष्ट्रीय ‘मौद्रिक व्यवस्था ने राष्ट्रीय मुद्राओं और मौद्रिक व्यवस्थाओं को एक-दूसरे से जोड़ने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। इस सारी प्रक्रिया से पश्चिमी औद्योगिक देशों और जापान को विशेष रुप से लाभ रहा है और उनके व्यापार और आय में काफी वृद्धि हुई है। तकनीक और उद्यम का विश्व-व्यापी विस्तार हुआ।

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HBSE 10th Class Social Science Solutions History Chapter 3 भारत में राष्ट्रवाद

Haryana State Board HBSE 10th Class Social Science Solutions History Chapter 3 भारत में राष्ट्रवाद Textbook Exercise Questions and Answers.

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HBSE 10th Class History भारत में राष्ट्रवाद Textbook Questions and Answers

1. व्याख्या करें
(क) उपनिवेशों में राष्ट्रवाद के प्रक्रिया उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन से जुड़ी हुई क्यों थी।
उत्तर-
‘राष्टीयता’ या ‘राष्ट्रवाद’ एकता की वह शक्तिशाली भावना है जो लोग तब अनुभव करते है जब वे एक जैसी राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक अवस्थाओं में रहते है, जब वे एक जैसी आंकाक्षायें रखते हैं और जब वे विशेष भू- भाग में एक विशेष राजनितिक व्यवस्था के अधीन रहते हैं और एक नियमों का पालन करते हैं। राष्टीयता एक ऐसी भावना है जो विश्व के इतिहास में मध्य-युग के पश्चात् दृष्टिगोचर हुई। यह उन्हीं सामाजिक एवं आर्थिक कारणों का परिणाम है जिन्होंने सामंतवाद का अन्त किया था।

साधारणतया यह देखा गया है कि उपनिवेशों में राष्ट्रवाद के उदय की प्रक्रिया उपनिवेशवाद-विरोधी आन्दोलन से जुड़ी हुई होती है। उपनिवेशवाद शोषण पर आधारित होता है। उपनिवेशवाद शोषण पर आधारित होता है इसलिये समाज के सभी प्रकार के लोग इस लूट-खसूट से इतने तंग आ जाते है कि वे विदेशी उपनिवेशवाद को समाप्त करने और अपने देश को स्वतन्त्र कराने का दृढ़ संकल्प कर लेते हैं। बहुत बार शोषण और अन्याय ही बड़े-बड़े और आंदोलनों का कारण बनता है।

अंग्रेज़ी उपनिवेशवादियों ने भारत को ऐसे लूटा कि हर वर्ष पड़ने वाले अकाल की लपेट में आने लगे और उनके मन में अत्याचारी सरकार के विरुद्ध आक्रोश के भाव जागृत होने लगे। ‘मरता क्या न करता’ वाली कहावत के अनुसार लोगों को यह एहसास हो गया कि वे जब तक अपने देश को स्वतन्त्र नहीं करा लेंगे उनके दुखों को तब तक अंत नहीं हो सकता।

जीवन के हर क्षेत्र में उपनिवेशवादियों द्वारा झूठ-फरेब, नीच और अन्यायपूर्ण हथकंडे अपनाने के कारण वे जनता में शीघ्र ही बदनाम हो गए। अब वे जान चुके थे कि जब तक वे अपने देश को स्वतन्त्र नहीं करा लेते वे चैन की नींद सो नहीं सकते। इस नरक से निकलने का एक ही तरीका है कि उपनिवेशवाद को खत्म किया जाए और देश को स्वतन्त्र कराया जाए।

(ख) पहले विश्व युद्ध ने भारत में राष्टीय आंदोलन के विकास में किस प्रकार योगदान दिया।
उत्तर-
(1) प्रथम विश्व युद्ध लाए गए आर्थिक संकट के कारण भारतीयों में रोष और विरोध की भावना-ज्योंही 1914 ई. में यह युद्ध में शुरु हुआ भारत में उथल-पुथल पैदा हो गई। पहले तो अंग्रेजों ने भारतीयों से पूछे बिना युद्ध में भारत को भी एक पार्टी बना दिया और दूसरे, भारत के संसाधनों का धड़ाधड़ प्रयोग ब्रिटिश सरकार अपनी विदेशी हितों की पूर्ति के लिए कर रही थी। इससे चीजों के मूल्य बढ़ गए और लोगों के लिये जीना कठिन हो गया। इसीलिए भारतीयों में अंग्रेजों के प्रति बड़ा रोष पैदा हुआ।

(2) राजनीतिक गतिविधियों का तेज़ हो जाना और होमरुल आन्दोलनों का ज़ोर पकड़ना–प्रथम विश्व युद्ध में फंसे देखकर भारतीयों ने अंग्रेजों से कुछ अधिकार प्राप्त करने के प्रयत्न किए। श्रीमती एनी बेसेंट 1914 ईद में कांग्रेस में शामिल हुई थीं। दो वर्ष बाद गंगाधर तिलक के साथ मिलकर उन्होंने होमरुल आंदोलन की नींव रखी और होमरुल लीग की स्थापना की जिसका लक्ष्य भारतीयों के लिए होमरुल या स्वराजय प्राप्त करना था। किन्तु ब्रिटिश सरकार इसके लिए तैयार नहीं थी इसलिये उसने एनी बेसेंट को गिरफ्तार कर लिया और इस आंदोलन को कुचलने के लिए दमनचक्र चलाया।

(3) मुस्लिम लींग और कांग्रेस का एक-दूसरे के निकट आना और इस प्रकार राष्ट्रीयता को बल मिलना-यद्यपि मुस्लिम लींग अंग्रेजी सरकार की बांदी थी तथापि प्रथम महायुद्ध की घटनाओं के कारण इसे कांग्रेस के समीप आना पड़ा। तुर्की ने प्रथम महायुद्ध में मित्र राष्ट्रों के विरुद्ध जर्मनी का साथ दिया था। युद्ध की समाप्ति पर अंग्रेजों ने उसके साथ कठोर व्यवहार किया जिससे भारत के मुसलमान, विशेष रुप से मुस्लिम लींग, – ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध हो गए कांग्रेस के साथ 1916 ईद में उन्होने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

(4) नरमदल और गरमदल में पुनः मैत्री स्थापित होना और स्वतन्त्रता संग्राम को मजबूती से मिलना-सरकार की दमन नीति के कारण नर्मदल और गर्मदल के नेताओं में 1916 ई. में पुनः मेल-मिलाप हो गया।

(5) प्रथम विश्व युद्ध द्वारा फैलाए गए रोष के कारण वातावरण में गांधी जी द्वारा राष्ट्रीयता की बागडोर संभालना आसान हो जाना-प्रथम महायुद्ध के दौरान ही गांधी जी का भारत के राष्ट्रवादी आंदोलन के नेता के रूप में उदय हुआ।

(ग) भारत के लोग रोलट एक्ट के विरोध में क्यों थे।
उत्तर-
रौलट ऐक्ट, 1919 ई.-1919 ई. के गवर्नमेंट ऑफ इण्डिया ऐक्ट में दी गई रियासतों से काँग्रेस असन्तुष्ट थी और समस्त भारत में निराशा का वातावरण छाया हुआ था। सरकार को डर था कि अवश्य कोई नया आन्दोलन प्रारम्भ होगा। इस ऐक्ट के अनुसार सरकार की किसी भी व्यक्ति को बिना अभियोग चलाए अनिश्चित समय के लिए बन्द कर सकती थी और उसे अपील, दलील या वकील करने का कोई अधिकार नहीं था।

इस ऐक्ट के प्रति भारतीय प्रतिक्रिया और सरकारी दमन-इस ऐक्ट के विरुद्ध सभी भारतीय एक-साथ खड़े हो गए। उन्होंने इसे ‘काले बिल का’ नाम का नाम दिया। यह राष्ट्रीय सम्मान पर ऐसा धब्बा था जिसे भारतीयों के लिए सहना बड़ा कठिन था। ऐसे कठिन समय में महात्मा गाँधी ने राष्ट्रीय आन्दोलन की बागडोर सम्भाली और इसे नवीन कार्यक्रम और कार्यविधि प्रदान की। उन्होंने इस ऐक्ट के विरुद्ध सत्य और अहिंसा के आधार पर सत्याग्रह आन्दोलन शुरु किया। दिल्ली में एक भीड़ पर पुलिस ने गोली दी जिसमें पाँच व्यक्ति मारे गए और 20 घायल हुए। इसके विरोध में बड़े-बड़े शहरों में हड़ताले हुई और दुकानें बन्द कर दल गयीं। अनेक लोगों को सरकार ने पकड़ कर जेल में डाल दिया। महात्मा गाँधी ने भी जब वास्तविक स्थिति का अमययन करने के लिए दिल्ली और पंजाब की ओर जाने का प्रयत्न किया तो उन्हें भी पकड़ लिया गया।

इस प्रकार ऐक्ट ने भारत की राजनीति में उनर भर दी अंग्रजी सरकार और भारतीयों में टकराव का वातावरण पैदा कर दिया।

(घ) गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फैसला क्यों लिया।
उत्तर-
महात्मा गांधी ने असहयोग आन्दोलन को क्यों वापस ले लिया-असहयोग आन्दोलन अपने पूरे जोरों पर चल रहा था जब महात्मा गांधी ने 1922 ई. को उसे वापस ले लिया। इस आंदोलन के वापिस लिये जाने के कारण थे जिनमें से मुख्य निम्नलिखित है:

(1) महात्मा गांधी अहिंसा और शांति के पूर्ण समर्थक थे – इसलिए जब उन्हें यह सूचना मिली कि उत्तेजित भीड़ ने चौरी-चौरा के पुलिस थाने को आग लगा कर 22 सिपाहियों की हत्या कर डाली है तो वह परेशान हो उठे। उन्हें अब विश्वास न रहा कि वे लोगो को शान्त रख सकेंगे। ऐसे में उन्होंने असहयोग आन्दोलन को वापिस ले लेना ही उचित समझा।
(2) दूसरे वे सोचने लगे कि यदि लोग हिसंक को जायेंगे तो अंग्रेजी सरकार भी उत्तेजित हो उठेगी और आंतक का राज्य स्थापित हो जायेगा और अनेक निर्दोष लोग मारे जायेंगे। महात्मा गांधी जलियाँवाला बाग जैसे हत्याकांड की पुनरावृति नहीं करना चाहते थे इसलिए 1922 ई. में उन्होंने असहयोग आंदोलन वापिस ले लिया।

प्रश्न 2.
सत्याग्रह के विचार का क्या मतलब है?
उत्तर-
गाँधी जी ने सत्याग्रह के विचार के संदर्भ में चार बिन्दु निम्नलिखित है:
(1) सत्याग्रह सच्चाई और अहिंसा का एक ढंग है जिसे अपनाकर महात्मा गान्धी ने दक्षिण अफ्रीका की नस्लभेदी सरकार से सफलतापूर्वक लोहा लिया था बाद में यही पद्धति उन्होंने भारत की ब्रिटिश सरकार के अन्यायपूर्ण कार्यो का विरोध करने में अपनाई।
(2) यदि आपका उद्देश्य सच्चा और न्यायपूर्ण है तो आपको अन्त में सफलता अवश्य मिलेगी, ऐसा महात्मा गाँधी का विचार था।
(3) प्रतिरोध की भावना या आक्रमक्ता का सहारा लिये बिना सत्याग्रही केवल अहिंसा के सहारे अपने संघर्ष में सफल हो सकता है।
(4) बाद में सत्याग्रह के इसी सिद्धान्त का प्रयोग उन्होंने अनेक स्थानों पर किया जैसे 1916 में बिहार में चंपारन इलाके में दमनकारी बागान मालिकों के विरुद्ध किसानों को बचाने में,1917 ई. में गुजरात के खेड़ा जिले के किसानो को फसल खराब हो जाने के कारण सरकारी करों से बचाने में और 1918 में गुजरात के अहमदाबाद के सूती कपड़ा के कारखानों के मजदूरों को उचित वेतन दिलाने आदि में किया, परन्तु उन्हें हर बार सफलता प्राप्त हुई।
न्याय और सच्चाई पर आधारित सत्याग्रह का सिद्धान्त बाद में कांग्रेस के संघर्ष का मूल मंत्र बन गया।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित पर अख़बार के लिए रिर्पोट लिखें
(क) जलियाँवाला बाग हत्याकांड
उत्तर-
जलियाँवाला बाग हत्याकांड 13 अप्रैल, 1919 ई. -1918 ई. में प्रथम विश्व युद्ध समाप्त हो गया और उसके साथ ही भारत में होने वाली वस्तुओं की मांग भी बहुत कम हो गई जिससे किसान वर्ग (Peasants) को बहुत हानि हुई। बेकारी भी बहुत बढ़ गई, क्योंकि युद्ध समाप्त होने पर कइयों को नौकरी से छुट्टी मिल गई। जब चीजों की माँग कम हो गयी तो भारतीय व्यापारियों को भी बहुत कठिनाइयाँ उठानी पड़ी। जमीदारों का भी बहुत बुरा हाल था, क्योंकि किसानों से उन्हें लगान तो. मिल रहा था लेकिन सरकार उनसें पूरा लगान मा!गती थी। संक्षेप में प्रत्येक व्यक्ति बड़ा परेशान था। उधर जनवरी 1919 ई. को अंग्रेजी सरकार ने रौलट ऐक्ट पास करके लोगो में और भी रोष पैदा कर दिया। उधर महात्मा गाँधी ने इसके विरुद्ध सत्याग्रह प्रारम्भ कर दिया। सारे देश में हड़तालें होने लगीं, जलसे और जलूस निकलने लगे। अमृतसर में अंग्रेजी सरकार ने डॉन सतपाल और डॉन किचलू को पकड़ लिया। कोई 20,000 लोगों ने इसके विरोध में 13 अप्रैल, 1919 ई. को जलियाँवाला बाग (Jallianwala Bagh) में एक जलसा किया। शीघ्र ही एक अंग्रेज़ अधिकारी जनरल डायर (General Dyer) ने बाग को चारों ओर से घेर लिया और गोली चलाना प्रारम्भ कर दिया जिससे सहस्त्रों स्त्री-पुरुष मारे गये और अनेकों घायल हुए। इस हत्याकाण्ड का भारतीय राजनीति पर प्रभाव-जलियाँवाला बाग के हत्याकांड ने भारतीयों पर बड़ा गहरा प्रभाव डाला। अब लोगो का अंग्रेजी शासन से विश्वास जाता रहा और वे ऐसे शासन से छुटकारा पाने के लिए उग्र और क्रान्तिकारी मार्ग पर चल पड़े। सरकार ने भी अपना दमन-चक्र और तेज कर दिया।

सारे पंजाब में मार्शल-ला (Martial Law) लगा दिया और बड़े अत्याचार किए। महात्मा गाँधी को भी कैद कर लिया गया। जेल से आते ही उन्होंने पंजाब के हत्याकाण्ड और मार्शल-ला के विरुद्ध खिलाफत आन्दोलन चलाया हुआ था, को अपने साथ मिलाकर 1920 ई. में पहला असहयोग आन्दोलन चलाया। उनके कहने पर हजारों व्यक्तियों ने सरकारी नौकरियाँ छोड़ दी और सरकार से मिले हुए पदक और उपाधियाँ त्याग दी। वकीलों ने वकालत छोड़ दी और विद्यार्थियों ने अपने स्कूल तथा कॉलिज छोड़ दिए। इस प्रकार हम कह सकते है कि जलियाँवाला बाग के हत्याकाण्ड की घटना भारत के इतिहास में अपना विशेष महत्व रखती है। इसके परिणामस्वरूप जहाँ एक ओर अंग्रेजी सरकार के नैतिक सम्मान और गौरव को धक्का लगा, वहाँ जनता और सरकार के अच्छे सम्बन्ध सदा के लिए खराब हो गए। इस घटना से राष्ट्रीय एकता और सुदृढं हुई जब सभी जातियों के लोग सरकार के अत्याचारों के सम्मान रूप से शिकार हुए। परन्तु जब सरकार की दमनकारी नीति भारतीयों को भयभीत करने में असफल रही तो निश्चित रूप से भारतीयों का धैर्य और मनोबल कई गुना बढ़ गया और वे अधिक शक्ति से भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में जुट गए।

(ख) साइमन कमीशन
उत्तर-
असहयोग आन्दोलन के वापस लेने के पश्चात् जब प्रसिद्ध नेता सी.आर.दास (C.R.Dass) की मृत्यु हो गई तो देश में एक प्रकार का सन्नाटा छा गया। केवल क्रान्तिकारी ही इधर-उधर अपना क्रान्तिकारी कार्य करते रहे। इस रातनीतिक सन्नाटे को तोड़ने के लिए ब्रिटिश सरकार ने 1927 ईन में जॉन साइमन (John Simon) की अध्यक्षकता में एक कमीशन नियुक्त किया जिसके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे:

(क) इसका मुख्य उद्देश्य तो यह था कि 1919 के गर्वनमेंट आफ इण्डिया ऐक्ट की समीक्षा की जा सके ताकि यह सुझाव दिए जा सके कि भारतीय प्रशासन में क्या नए सुधार लाए जा सकते हैं।
(ख) इसका एक अन्य उद्देश्य यह भी था कि भारत में पैदा तत्कालीन राजनीतिक सन्नाटे और गतिरोध को दूर किया जा सके। क्योंकि इस कमीशन का अध्यक्ष जॉन साइमन को बनाया गया इसलिए साधारणतया इसे साइमन कमीशन के नाम से पुकारा जाता है।
साइमन कमीशन में सात सदस्य थे और वे सबके सब अंग्रेज थे। इसलिए जब यह कमीशन 1928 ई. में भारत आया तो सभी स्थानों पर लोगों ने इसका बहिष्कार किया। जहाँ भी यह कमीशन जाता था वहाँ हड़ताले होती थीं, काली झण्डियाँ दिखाई जाती थीं और ‘साइमन लौट जाओ’ (Simon Go Back) के नारे लगाए जाते थे।

साइमन का बहिष्कार क्यों किया गया? अब प्रशन यह है कि इस साइमन कमीशन का बहिष्कार क्यों किया गया। इसके कारणों को ढूँढना कोई कठिन नही:

(1) इस कमीशन के बहिष्कार का पहला कारण यह था कि इसका कोई भी सदस्य भारतीय नहीं था। लोगों का विश्वास था कि भारत के विषय में कोई भी कमीशन ठीक नहीं सोच सकता जब तक उसमें कोई भी भारतीय सदस्य न हो।
(2) दूसरे, इस कमीशन की धाराओं में भारतीयों को स्वराज दिए जाने की कोई भी सम्भावना नहीं थी।
(3) तीसरे, जब भारतीयों ने इस बात की मांग की कि इस कमीशन में कोई भारतीय सदस्य भी होना चाहिए क्योंकि एक भारतीय ही उनकी समस्याओं को भली-भाँति समझ सकता है। भारतीयों का कहना था कि ब्रिटेन के ‘हाउस आफ कॉमस’ (House of Commons) के किसी भारतीय सदस्य, विशेषकर श्री एस.पी.सिन्हा (S.P.Sinha) का कमीशन में सम्मिलित कर लिया जाए ब्रिटिश सरकार ने इस मांग को भी अस्वीकृत कर दिया। इससे भारतीय उत्तेजित हो उठे।
(4) चौथा, अन्त में यह कहा जाता है कि यह मामला इतना तूल न पकड़ता यदि भारत सचिव लार्ड बैकन हैड (Lord Birken Head) भारतीयों का यह कह कर अपमान किया होता कि भारतीय लोग न तो संवैधानिक मामलों पर विचार विमर्श करने की क्षमता रखते है और न ही वे कोई एक ऐसे ढाँचे की रूप-रेखा प्रस्तुत कर सकते हैं जो सभी लोगों को मान्य हो।

प्रश्न. 4
इस अमयाय में दी गई भारत माता की छवि और अध्याय 1 में दी गई जर्मेनिया की छवि की तुलना कीजिए।
उत्तर-
विश्व भर में कलाकारों की यह प्रवृति रही है कि वे स्वतन्त्रता न्याय, गणतन्त्र आदि विचारों की व्यक्त करने के लिए नारी रूपक का प्रयोग करते हैं। उन्होने राष्ट्र को भी नारी रूप में प्रस्तुत किया। 1848 ई. में जर्मन चित्रकार फिलिप वेट (Philip Veit) ने अपने राष्ट्र को पन्नों को जर्मेनिया के रुप में प्रस्तुत किया। वे बलूत वृक्ष के पनों का मुकुट पहने दिखाई गई हैं क्योंकि जर्मन बलूत वीरता का प्रतीक है। भारत में भी अबनिंद्रनाथ टैगोर अनेक कलाकारों ने भारत राष्ट्र को भारत माता के रूप में दिखाया। एक चित्र में उन्होंने भारत माता के शिक्षा, भोजन और कपड़े देती हुई दिखाया हैं। शिक्षा’, भोजन और कपड़े दे रही है।

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HBSE 10th Class Social Science Solutions History Chapter 2 इंडो-चाइना में राष्ट्रवादी आंदोलन

Haryana State Board HBSE 10th Class Social Science Solutions History Chapter 2 इंडो-चाइना में राष्ट्रवादी आंदोलन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Social Science Solutions History Chapter 2 इंडो-चाइना में राष्ट्रवादी आंदोलन

HBSE 10th Class History इंडो-चाइना में राष्ट्रवादी आंदोलन Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें
(क) उपनिवेशकारों के ‘सभ्यता मिशन’ का क्या मतलब था।
(ख) हुइन फू सो।
उत्तर-फ्रांसीसी नीति निर्माता वियतनाम के लोगों को दो उपेश्यों से शिक्षित करना चाहते थे।
(1) वे रास्ते क्लर्क चाहते थे जो उन्हें समझ सकें और प्रशासन व्यवस्था में उनकी सहायता करें।
(2) उनका दूसरा उपेश्य शिक्षा द्वारा वहा! के लोगों को सभ्य बनाना था जो उनके विचार में सभ्य नहीं थे। वे यह सोचने लगे थे कि उन्होंने अन्य देशों को अपने लाभ के लिए विजय नहीं किया। वरन् अपने अधीन लोगों का सुधार करने के लिये किया है। इसी उपेश्य को उन्होंने ‘सभ्यता मिशन’ (Civilizing Mission) का नाम दिया। वास्तव में यह साम्राज्यवादी देशों की अपने स्वार्थों और आर्थिक शोषण को ढांपने की एक सोची-समझी योजना थी। ऐसा कहकर वे आसानी से शोषण की चक्की को भी चला सकते थे और ईसाई पादरियों को भी खुश कर सकते थे। जिनमें अन्य धर्म वालों को ईसाई बनाने की बड़ी लालसा थी।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित की व्याख्या करें
(क) वियतनाम के केवल एक तिहाई विद्यार्थी की स्कूली पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी कर पाते थे।
उत्तर-
वियतनाम के लोगों को शिक्षा देने के बारे में फ्रांसीसी अधिकारी असमंजस में थे। उनमें से कुछ फ्रांसीसी भाषा को लागू करना चाहते थे ताकि वियतनाम के लोग उनकी सभ्यता और संस्कृति के प्रशंसक बन जायें और उन्हें सस्ते क्लर्क भी मिल सकें। कुछ अन्य फ्रांसीसी लोग इस शिक्षा के विरुद्ध थे। उनका कहना था कि यदि वियतनाम के लोग पढ़-लिख जायेंगे तो वे राजनीतिक चेतना के उत्पन्न हो जाने के कारण स्वतन्त्रता की माँग करने लगेंगे। बहुत से फ्रांसीसी लोग जो वियतनाम में बस गए थे, वे भी वियतनाम के लोगों को फ्रांसीसी भाषा में शिक्षा दिये जाने के विरुद्ध थे क्योंकि उन्हें डर था कि ऐसे में अमयापकों, क्लर्को और सिपाहियों के रुप उनकी नौकरियाँ जाती रहेंगी।

ऐसे में यही सोचा गया कि वियतनामी विद्यार्थियों को शिक्षा तो दी जाए परन्तु उनमें से दो-तिहाई विद्यार्थियों को फेल कर दिया जाए ताकि न वे पास हो सकें और न ही वे नौकरियाँ माँग सकें।

(ख) फ्रांसीसियों ने मेकाँग डेल्टा क्षेत्र में नहरें बनवाना – और जमीन को सुखना आरम्भ किया।
उत्तर-
फ्रांसिसियों ने मेकाँग डेल्टा में नहरें बनवाई और दलदली जमीनों का सुखाना शुरु किया। इसके पीछे उनका मुख्य उदेश्य यह था कि नहरी पानी के इलाके में चावल उगाया जा सके और उसे विश्व के बाजारों में बेचकर जल्दी धनाढ्य बना जा सके। वास्तव में फ्रांसिसी कम्पनी एक व्यापारिक कम्पनी थी इसलिये उसका मुख्य उदेश्य वियतनाम के साधनों का प्रयोग करके अपने आर्थिक साधनों का अधिक से अधिक विस्तार करना था।

(ग) सरकार ने आदेश दिया कि साइगॉन नेटिव गर्ल्स स्कूल उस लड़की को वापस कक्षा में ले, जिसे स्कूल से निकाल दिया गया था।
उत्तर-
एक घटना जो साइगॉण नेटिव गर्ल्स स्कूल (Saigon Native Girls School) में हुई उसने वियतनाम में काफी तैनाव का-सा वातावरण बना दिया। विवाद तब शुरु हुआ जब अगली सीट पर बैठी वियतनामी लड़की को उठाकर पिछली सीट पर बैठने के लिये कहा गया और उस सीट पर एक फ्रांसिसी छात्रा को बैठा दिया जाए। जब उस पर वियतनामी लड़की ने सीट छोड़ने से इंकार कर दिया तो स्कूल की प्रिंसिपल ने उस छात्रा को स्कूल से निकाल दिया।

जब वियतनामी विद्यार्थियों ने इसका विरोध किया तो उन्हें भी स्कूल से निकाल दिया गया । इस बात ने तूल पकड़ लिया
और लोगों ने खुले रूप में जुलूस निकालने शुरु कर दिये। जब हालात बेकाबू होने लगे तो सरकार ने आदेश दिया कि लड़की को आदेश दोबारा स्कूल में वापस-लिया जाए।

(घ) हनोई के आधुनिक, नवनिर्मित इलाकों में चूहे अधिक थे।
उत्तर-
आधुनिकता लाने के नशे में फ्रांसिसियों ने हेनोई के एक भाग को आधुनिकता नगर में बदल डाला। वहाँ बढ़-चढ़ कर वास्तुकला के नवीनतम विचारों और इंजीनियरिंग के ढंगो को प्रयोग में लाया गया। ज़मीन के अन्दर ल्लश की नई-नई नालियों का निर्माण किया गया ताकि गन्दा पानी बाहर निकल जाए। परन्तु हेनोई का नया नगर भी बच न सका। चुहे पुराने नगर को छोड़ कर नए नगर की ओर बड़ी तेजी से बढ़ते चले गए और ल्लश की नई नालियों में घुलकर उन्होंने नगर के फ्रांसिसी भाग में प्लेग को एक बड़े पैमाने में फैला दिया।

इस मुसीबत को दूर करने के लिए फ्रांसिसियों ने 1902 ई. में चूहे पकड़ने की एक मुहिम चलाई। चूहे पकड़ने या मारने वालों को ईनाम दिए जाने की घोषणा की गई। परिणामस्वरुप एक ही दिन (20मई 1902 को) कोई 20,000 चूहे पकड़े गए। परन्तु जब चूहे पकड़ने का काम खत्म ही नही हुआ और उसमें धोखा होने लगा तो फ्रांसिसी सरकार ने इस मुहिम को बन्द कर दिया परन्तु ऐसा करने से फ्रांसिसी लोगों और वियतनामी लोगों में एक टकराव की सी स्थिति पैदा कर दी। उधर जब हेनोई के पुराने नगर की प्लेग को दूर करने के लिये कोई मयान न दिया गया तो बात और अधिक बिगड़ गई। इस प्रकार एक घटना के बाद दूसरी घटना ने वियतनाम के लोगों को साम्राज्यवाद का विरोध करने के लिए तैयार कर दिया।

प्रश्न 3.
टोकिन फ्री स्कूल की स्थापना के पीछे कौन से विचार थे। वियतनाम में औपनिवेशिक विचारों के लिहाज़ से यह उदाहरण कितना सटीक है?
उत्तर-
वियतनाम में पश्चिमी ढंग की शिक्षा देने के लिए 1907 ई. में टोफिन फ्री स्कूल खोला गया। इसकी तीन मुख्य विशेषतायें निम्नलिखित थीं।

(1) अन्य सम्राज्यवादियों की भाँति फ्रांसीसी यह चाहते _थे कि उनके अधीन स्थानीय लोग उनकी संस्छति और सभ्यता
में रंग जायें। यही उपेश्य उन्होंने टोंकिन फ्री स्कूल जैसे अनेक शिक्षा संस्थानों को खोलकर पूरा करने की सोची।
(2) इस स्कूल में विज्ञान, फ्रांसीसी भाषा और पश्चिमी विचारों की शिक्षा पर जोर दिया गया।
(3) इसके अतिरिक्त आधुनिक बनने के लिए वियतनामी छात्रों को पश्चिमी शैलियो को अपनाने के लिए भी उकसाया जाता था।

प्रश्न 4.
वियतनाम के बारे में फान यू त्रिन्ह का उपेश्य क्या था? फान बोई चा। और उनके विचारों में क्या भिन्नता थी?
उत्तर-
फान चू त्रिन्ह (phan Chu Trinh) और फान बोई चा। (phan Boi Chau) दोनों ही वियतनाम के महान् राष्टीय नेता थे परन्तु दोनों के वियतनाम राष्ट्रवाद के बारें में विभिन्न विचार थे।
फान चू त्रिन्ह (1871-1926) राजशाही/राजतन्त्र के कमकर विरोधी थे। वे इस बात के समर्थक नहीं थे कि फ्रासिसियों को देश से प्रजातन्त्रीय नियमों पर आधारित एक गणतन्त्र स्थापित होना चाहिए।

इसके विपरीत फान बोई चा (1867-1940) ने राजकुमार कुआंग ने (Cuong De) के नेतृत्व में एक क्रान्तिकारी संस्था की नींव रखी। इस प्रकार वह राजतन्त्र के पक्ष में था जबकि फान चू त्रिन्ह एक गणतन्त्र के पक्ष में था। पर दोनों ही अपने देश को स्वतन्त्र देखना चाहते थे। फान बोई चा की पुस्तक ‘द हिस्ट आफ द लॉस आफ वियतनाम’ (The History of the Loss of Vietnam) ने वियतनाम में राष्ट्रवाद के उत्थान में काफी सहयोग दिया।

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HBSE 10th Class Social Science Solutions History Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

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Haryana Board 10th Class Social Science Solutions History Chapter 1 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय

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प्रश्न 1.
निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखें-
(क) ज्युसेपे मेसिनी
(ख) काउंट कैमिलो दे कावूर
(ग) यूनानी स्वतंत्रता युग ।
(घ) फ्रेंकफर्ट संसद
(ङ) राष्ट्रवादी संघर्षों में महिलाओं की भूमिका
उनर-
(क) मेजिनी का योगदान-गिसीपी मेजिनी ने इटली का एकीकारण करने में बहुत अधिक प्रयत्न किये। उसे इटली के एकीकरण का आत्मबल कहा जाता है। उसने गैरीबाल्डी की सहायता से इटली में क्रांतिकारी कार्य करने के लिए ‘यंग इटली’ आन्दोलन आरम्भ किया। उसने इटली के ही नहीं वरन् समस्त यूरोप के नवयुवकों में स्वतन्त्रता प्राप्ति की भावना जागृत की। उसने 1848 ईन में रोम पहुँचकर पोप से उसके पैपल राज्य के नवयुवकों में स्वतन्त्रता प्राप्ति की भावना जागृत की। उसने 1848 ईन में रोम पहुँचकर पोप से उसके पैपल राज्य को स्वतन्त्र होने के लिये प्रोत्साहित किया। परन्तु फ्रांस के सम्राट नैपालियन तृतीय ने उसके साथियों को हराकर रोम तथा इटली पर पोप का पुनः अधिकार करवा दिया। चाहे अपने उपेश्य में उसे पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं हुई परन्तु उसके प्रचार के फलस्वरूप बाद में कैवूर को जनता का पूरा सहयोग प्राप्त हुआ। अपने प्रयत्नों से उसने यूरोप के लोगों को प्रोत्साहित किया कि वे अपने देशों की स्वतन्त्रता के लिये सब कुछ न्योछावर कर दें।

उत्तर-
(ख) कावूर का योगदान-इटली के एकीकरण का वास्तविक श्रेय कावूर को ही जाता हैं 1852 ईन में वह सार्डनिया का प्रधानमंत्री बना तथा इटली के एकीकरण के कार्य में जुट गया। उसने अपनी कूटनीतिक चालों द्वारा इस कार्य को पूर्ण किया। उसने कई युद्धों में भाग लेकर इटली के राज्यों को सार्डनिया के साथ मिलने को अवसर प्रदान किया। लोम्बार्डी, माडेना, पार्मा, टस्कनी आदि राज्य धीरे-धीरे विदेशी सना से छुटकारा प्राप्त कर सार्डनिया में आ मिले। उसकी मृत्यु के समय रोम तथा वेनेशिया के राज्यों को छोड़कर इटली के एकीकरण का काम पूर्ण हो चुका था। इतिहासकार से इटली का बिस्मार्क’ कहते हैं।

उत्तर-
(ग) यूनानी स्वतंत्रता युद्ध-15वीं शताब्दी से ही यूनान आटोमन साम्राज्य का एक भाग था। परन्तु 19वीं शताब्दी में यूरोप में उठने वाले वन्तिकारी राष्टंवाद ने यूनानियों को टर्की से आजाद होने के लिए उकसाया। इस कार्य में यूरोप के ईसाई जगत के अनेक लोगों ने भी यूनानियों का साथ दिया।

यूनानियों द्वारा स्वतन्त्रता के लिए संघर्ष 1821 ईन में शुरू किया गया। कई स्थानों पर ईसाई लोगों का एक बड़ी मात्रा में वध कर दिया गया जिससे सारा यूरोप काँप उठा। फिर क्या था इंगलैंड, फ्राँस और रूस ने आगे बढ़कर यूनान का साथ दिया। संघर्ष चलता रहा और अन्त में 1832 की कुस्तुनतुनिया की संधि के अनुसार टर्की को यूनान को स्वतन्त्र करना पड़ा। इस प्रकार यूनान को एक स्वतन्त्र राष्ट्र के रूप में मान्यता प्राप्त हुई।

उत्तर-(घ) फ्रैंकफर्ट संसद-1848 ईन में जब यूरोप में एक क्रांति की लहर उठी तो जर्मनी में भी क्रांतिकारियों ने विद्रोह शुरू किये तथा वैधानिक सुधारों की मांग की।

क्रांतिकारी यह अच्छी तरह जानते थे कि ऑस्ट्रिया उनका साथ नहीं दे सकता क्योंकि ऑस्टिंया का शासक तथा उसका मंत्री दोनों ही निरंकुश शासन के पक्षपाती थे। इस कारण वंतिकारियों ने 28 मार्च 1848 को फ्रैंकफोर्ट में एक राष्ट्रीय पार्लियामैंट बुलाई जिसमें प्रशिया के सम्राट फ्रेडरिक विलियम चतुर्थ (Frederick William IV) को जर्मनी का सम्राट-पद स्वीकार करने को कहा गया। परन्तु सम्राट फ्रडरिक ने ऑस्ट्रिया के डर के कारण यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। इस प्रकार जर्मनी के एकीकरण का यह प्रयास असफल रहा।

उत्तर-(ङ) राष्ट्रवादी संघषों में महिलाओं की भूमिका- यूरोप के लगभग सभी राज्यों-फ्रांस, जर्मनी, इटली, आस्ट्रिया-हंगरी में महिलाओं ने राष्ट्रीय आन्दोलनों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। उन्होंने देश के एकीकरण, प्रजातन्त्रीय संघर्षों एवं संवैधानिक प्रयत्नों में पूर्ण सहयोग दिया। महिलाओं ने अपने अलग राजनीतिक संगठनों का निर्माण किया और देश में होने वाली राजनीतिक गतिविमिायों और विरोध सभाओं और जलूसों में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

फिर भी महिलाओं को वोट के अधिकार से काफी समय तक वंचित रखा गया। वास्तव में महिलाओं को अधिकार दिये जाने के पक्ष में उदारवादी लोग भी नहीं थे।

उदारवादी राजनीतिक कार्ल वेल्कर (Carl Welcker) के शब्द, जो स्वयं फ्रैंकफर्ट संसद के एक निर्वाचित सदस्य थे, पुरुषों और महिलाओं में पायी जाने वाली असमानता की प्रकृति को कैसे स्पष्ट करते हैं: ‘प्रकृति ने पुरुषों और महिलाओं को अलग-अलग कार्य करने के लिए निर्मित किया है-पुरुष जो ज्यादा ताकतवर है, दोनों में से ज्यादा निर्भीक और मुक्त है उसे परिवार का रखवाला और भरण-पोषण करने वाला बनाया गया है और कानून, उत्पादन और प्रतिरक्षा के क्षेत्र में सार्वजनिक कार्यो के लिए है। महिला जो कमजोर, निर्भर और दब्बू हैं, उसे पुरुष की सुरक्षा की आवश्यकता है। उसका क्षेत्र घर, बच्चों की देखभाल और परिवार का पालन-पोषण है………।

प्रश्न 2.
फ्रासीसी लोगों के बीच सामूहिक पहचान का भाव पैदा करने के लिए फ्रासीसी क्रांतिकारियों ने क्या कदम उठाए?
उत्तर-
फ्रांस के क्रांतिकारियों द्वारा लोगों में एकता और संगठन बनाए रखने की दिशा में उठाए गए कदम-फ्रांस की क्रांति 1789 ईन में शुरू हुई। शीघ्र ही लोगों ने राजा और रानी से छुटकारा पाकर सना की सारी बागडोर अपने हाथ में ले ली। फिर उन्होंने लोगों में एकता और संगठन बनाए रखने के लिए अनेक कदम उठाए।

प्रश्न 3.
मैरियान और जर्मेनिया कौन थे? जिस तरह उन्हें चित्रित किया गया उसका क्या महन्व था?
उत्तर-
फ्रांस की क्रान्ति के दिनों में कलाकारों ने नारी-रूपकों का प्रयोग अमूर्त विचारों (स्वतन्त्रता, मुक्ति, ईर्ष्या, लालच आदि) को प्रकट करने के लिये किया। कुंछ कलाकारों ने इन महिला-रूपकों का प्रयोग एकता के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में किया। फ्रांस में राष्ट्र के प्रतीक के रूप में लोकप्रिय ईसाई नाम माराआन दिया गया। उसे लाल टोपी, तिरंगा और कलगी के साथ दिखाया गया और उसकी प्रतिमाएँ सार्वजनिक चौराहों पर लगाई गई ताकि लोगों को एकता के राष्ट्रीय प्रतीक की याद आती रहे।
इसी प्रकार जर्मनी में, जर्मन राष्ट्र के प्रतीक के रूप में जर्मेनिया को रूपक माना गया। उसे बलूत वृक्ष के तनों के मुकट से सजाया गया क्योंकि जर्मनी में बलूत को वीरता का प्रतीक माना जाता है।

प्रश्न 4.
जर्मन एकीकरण की प्रव्यिा का संक्षेप में पता लगाएँ।
उत्तर-
जर्मनी का एकीकरण जिन-जिन सोपानों में हुआ उसका विवरण इस प्रकार है और उन सभी सोपानों में प्रशिया के चान्सलर बिस्मार्क की महत्वपूर्ण भूमिका रही:

(1) पहली अवस्था-18वीं शताब्दी से जर्मनी अनेक राज्यों-प्रशिया, बावेरिया, सैकसनी आदि में बंटा हुआ था। इसलिए इसका आर्थिक विकास बहुत धीमा था। राष्ट्रीय चेतना के जागृत होने पर जर्मनी के विभिन्न राज्यों के लोगों ने एकीकरण की मांग करना आरम्भ कर दी। 1815 ईन में जर्मनी के राज्यों को आस्ट्रिया के साथ मिलाकर एक जर्मन महासंघ की स्थापना की कोशिश की। विवश फ्रेकफर्ट में एक राष्ट्रीय पार्लियामेंट बुलाई गयी जिसे संविधान का कार्य सौंपा गया। परन्तु इस पार्लियामेंट को आस्ट्रिया के विरोध के कारण सफलता नहीं मिली।

(2) दूसरी अवस्था-इस क्रान्ति की असफलता के पश्चात् जर्मनी के एकीकरण का काम लोकतंत्र के रूप में न होकर बिस्मार्क द्वारा सैन्यशक्ति एवं कूटनीति के सहारे होने लगा। बिस्मार्क ने अपनी ‘रक्त और लौह’ की नीति द्वारा इस एकीकरण के काम को पूरा किया। सबसे पहले 1864 ईन में बबबिस्मार्क के नेतृत्व में प्रशिया और डेनमार्क में एक युद्ध हुआ जिसमें प्रशिया की जीत हुई और उसे शैल्सविग का प्रदेश मिला।

(3) तीसरी अवस्था-1866 ईन में प्रक्रिया (या जर्मनी) का आस्ट्रिया के साथ युद्ध हुआ। इस युद्ध में विजय के पश्चात् प्रक्रिया के साथ अनेक प्रदेश (जैसे हैनोवर, होल्सटीन, लक्समवर्ग, कैसल तथा फ्रेंकफर्ट आदि) आ मिले। जर्मनी से आस्ट्रिया का प्रभाव अब सदा के लिए समाप्त हो गया और इससे जर्मनी के एकीकरण का काम काफी आसान हो गया।

(4) चौथी अवस्था-अन्त में 1870 ईन में फ्रांस के साथ जर्मनी का एक भयंकर युद्ध हुआ जिसमें फ्रांस की करारी हार हुई और उससे आल्सेस और लारेन वे महत्वपूर्ण प्रदेश छीन लिए गए। इन विजयों से प्रभावित होकर बाकी बचे हुए जर्मन प्रदेश भी (जैसे बावेरिया, बर्टमबर्ग, बेडन और दक्षिणी हैस) जर्मन महासंघ में शामिल हो गए और प्रशिया के शासक विलियम प्रथम को 1871 ई. में संयुक्त जर्मनी का सम्राट घोषित कर दिया गया।
इस प्रकार बिस्मार्क के प्रयत्नों से 1871 ईन में जर्मनी के एकीकरण का कार्य पूरा हुआ।

प्रश्न 5.
अपने शासन वाले क्षेत्रों में शासन व्यवस्था को ज्यादा कुशल बनाने के लिए नेपोलियन ने क्या बदलाव किए?
उत्तर-
फ्रांस की क्रांति के समय (1789-1815) जहाँ कहीं भी फ्रांसीसी सेनाएँ गईं उन्होंने राष्ट्रवाद की विचारधारा को अवश्य फैलाया अपने साम्राज्य के इस विस्तृत क्षेत्र-जिसमें हालैंड, बेल्जियम, स्विटजरलैंड, इटली और जर्मनी आदि सम्मिलित थे-नैपालियन ने अनेक प्रशासनिक सुधार किए जो वह पहले अपने देश फ्रांस में कर चुका था। ये सब कुछ उसने प्रशासन व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने और उसमें कुशलता लाने के लिए किया। उसके यह सुधार 1804 के सिविल कोड के नाम से प्रसिद्ध हैं। कई इतिहासकार इस कानून-संहिता को नैपोलियन कोड (Napolean Code) के नाम से भी पुकारते हैं।

नैपोलियन द्वारा किए गए प्रमुख प्रशासनिक सुधारों में निम्नलिखित विशेषकर उल्लेखनीय है।

(क) जन्म पर आधारित विशेषाधिकार समाप्त कर दिए गए और कानून के सामने सबकी बराबरी के नियम को लागू किया गया।
(ख) प्रशासनिक विभाजनों को सरल बनाया गया, सामंती व्यवस्था को खत्म किया गया और किसानों को भू-दासत्व और जागीरदारी शुल्कों से मुक्ति दिलाई गई।
(ग) यातायात और संचार व्यवस्था में सुधार किया गया।
(घ) किसानों, मजदूरों कारीगरों और नए उद्योगपतियों को अपने-अपने क्षेत्रों में स्वतन्त्रता प्रदान की गई।
(ङ) मानक नापतोल के पैमाने चलाए गए और एक राष्ट्रीय मुद्रा चलाई गई।
(च) एक इलाके से दूसरे इलाके में वस्तुओं और पूंजी के आवागमन में सहूलतें दी गई।

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HBSE 11th Class History Important Questions and Answers

Haryana Board HBSE 11th Class History Important Questions and Answers

HBSE 11th Class History Important Questions in Hindi Medium

HBSE 11th Class History Important Questions in English Medium

  • Chapter 1 From the Beginning of Time Important Questions
  • Chapter 2 Writing and City Life Important Questions
  • Chapter 3 An Empire Across Three Continents Important Questions
  • Chapter 4 Rise and Spread of Islam: About 570-1200 C.E. Important Questions
  • Chapter 5 Nomadic Empires Important Questions
  • Chapter 6 Three Orders Important Questions
  • Chapter 7 Changing Cultural Traditions Important Questions
  • Chapter 8 Confrontation of Cultures Important Questions
  • Chapter 9 The Industrial Revolution Important Questions
  • Chapter 10 Displacing Indigenous Peoples Important Questions
  • Chapter 11 Paths to Modernization Important Questions

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HBSE 11th Class History Solutions Haryana Board

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HBSE 11th Class History Solutions in Hindi Medium

  • Chapter 1 समय की शुरुआत से
  • Chapter 2 लेखन कला और शहरी जीवन
  • Chapter 3 तीन महाद्वीपों में फैला हुआ एक साम्राज्य
  • Chapter 4 इस्लाम का उदय और विस्तार : लगभग 570-1200 ई०
  • Chapter 5 यायावर साम्राज्य
  • Chapter 6 तीन वर्ग
  • Chapter 7 बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ
  • Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव
  • Chapter 9 औद्योगिक क्रांति
  • Chapter 10 मूल निवासियों का विस्थापन
  • Chapter 11 आधुनिकीकरण के रास्ते

HBSE 11th Class History Solutions in English Medium

  • Chapter 1 From the Beginning of Time
  • Chapter 2 Writing and City Life
  • Chapter 3 An Empire Across Three Continents
  • Chapter 4 Rise and Spread of Islam: About 570-1200 C.E.
  • Chapter 5 Nomadic Empires
  • Chapter 6 Three Orders
  • Chapter 7 Changing Cultural Traditions
  • Chapter 8 Confrontation of Cultures
  • Chapter 9 The Industrial Revolution
  • Chapter 10 Displacing Indigenous Peoples
  • Chapter 11 Paths to Modernization

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HBSE 11th Class Geography Important Questions and Answers

Haryana Board HBSE 11th Class Geography Important Questions and Answers

HBSE 11th Class Geography Important Questions in Hindi Medium

HBSE 11th Class Geography Important Questions: भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत

HBSE 11th Class Geography Important Questions: भारत-भौतिक पर्यावरण

HBSE 11th Class Geography Important Questions in English Medium

HBSE 11th Class Geography Important Questions: Fundamentals of Physical Geography

  • Chapter 1 Geography as a Discipline
  • Chapter 2 The Origin and Evolution of the Earth
  • Chapter 3 Structure of the Earth’s Interior
  • Chapter 4 Distribution of Oceans and Continents
  • Chapter 5 Minerals and Rocks
  • Chapter 6 Geomorphic Processes
  • Chapter 7 Landforms and Their Evolution
  • Chapter 8 Composition and Structure of Atmosphere
  • Chapter 9 Solar Radiation, Heat Balance and Temperature
  • Chapter 10 Atmospheric Circulation and Weather Systems
  • Chapter 11 Water in the Atmosphere
  • Chapter 12 World Climate and Climate Change
  • Chapter 13 Oceanic Water
  • Chapter 14 Movement of the Ocean Water
  • Chapter 15 Life on the Earth
  • Chapter 16 Biodiversity and Conservation

HBSE 11th Class Geography Important Questions: India: Physical Environment

  • Chapter 1 India-Location
  • Chapter 2 Structure and Physiography
  • Chapter 3 Drainage System
  • Chapter 4 Climate
  • Chapter 5 Natural Vegetation
  • Chapter 6 Soils
  • Chapter 7 Natural Hazards and Disasters

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HBSE 11th Class Geography Solutions Haryana Board

Haryana Board HBSE 11th Class Geography Solutions

HBSE 11th Class Geography Solutions in Hindi Medium

HBSE 11th Class Geography Part 1 Fundamentals of Physical Geography (भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत भाग-1)

HBSE 11th Class Geography Part 2 India: People and Economy (भारत-भौतिक पर्यावरण भाग-2)

HBSE 11th Class Geography Part 3 Practical Work in Geography (भूगोल में प्रयोगात्मक कार्य)

HBSE 11th Class Geography Solutions in English Medium

HBSE 11th Class Geography Part 1 Fundamentals of Physical Geography

  • Chapter 1 Geography as a Discipline
  • Chapter 2 The Origin and Evolution of the Earth
  • Chapter 3 Structure of the Earth’s Interior
  • Chapter 4 Distribution of Oceans and Continents
  • Chapter 5 Minerals and Rocks
  • Chapter 6 Geomorphic Processes
  • Chapter 7 Landforms and Their Evolution
  • Chapter 8 Composition and Structure of Atmosphere
  • Chapter 9 Solar Radiation, Heat Balance and Temperature
  • Chapter 10 Atmospheric Circulation and Weather Systems
  • Chapter 11 Water in the Atmosphere
  • Chapter 12 World Climate and Climate Change
  • Chapter 13 Oceanic Water
  • Chapter 14 Movement of the Ocean Water
  • Chapter 15 Life on the Earth
  • Chapter 16 Biodiversity and Conservation

HBSE 11th Class Geography Part 2 India – Physical Environment

  • Chapter 1 India-Location
  • Chapter 2 Structure and Physiography
  • Chapter 3 Drainage System
  • Chapter 4 Climate
  • Chapter 5 Natural Vegetation
  • Chapter 6 Soils
  • Chapter 7 Natural Hazards and Disasters

HBSE 11th Class Geography Part 3 Practical Work in Geography

  • Chapter 1 Introduction to Maps
  • Chapter 2 Map Scale
  • Chapter 3 Latitude, Longitude and Time
  • Chapter 4 Map Projections
  • Chapter 5 Topographical Maps
  • Chapter 6 Introduction to Air Photos
  • Chapter 7 Introduction to Remote Sensing
  • Chapter 8 Weather Instruments, Maps and Charts

HBSE 11th Class Geography Question Paper Design

Class: 11th
Subject: Geography
Paper: Annual or Supplementary
Marks: 60
Time: 3 Hours

1. Weightage to Objectives:

ObjectiveKUASTotal
Percentage of Marks40252510100
Marks241515660

2. Weightage to Form of Questions:

Forms of QuestionsESAVSAOTotal
No. of Questions44415+128
Marks Allotted2012815+560
Estimated Time80502525180

3. Weightage to Content:

Units/Sub-UnitsMarks
1. भूगोल एक विषय के रूप में4
2. पृथ्वी10
3. भू-आकृतियां8
4. जलवायु6
5. जल (महासागर)6
6. पृथ्वी पर जीवन4
7. भारत स्थिति4
8. भू आकृति विज्ञान6
9. जलवायु, वनस्पति एवं मृदा8
10. प्राकृतिक संकट एवं आपदाएं : कारण, परिणाम तथा प्रबन्ध4
Total60

4. Scheme of Sections:

5. Scheme of Options: Internal Choice in Long Answer Question i.e. Essay Type

6. Difficulty Level:
Difficult: 10% Marks
Average: 50% Marks
Easy: 40% Marks

Abbreviations: K (Knowledge), U (Understanding), A (Application), E (Essay Type), SA (Short Answer Type), VSA (Very Short Answer Type), O (Objective Type)

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