Author name: Prasanna

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. आंतरिक प्रवास की कितनी धाराएँ हैं?
(A) 3
(B) 4
(C) 5
(D) 6
उत्तर:
(B) 4

2. गाँव से पहले छोटे नगर और वहाँ से बाद में बड़े नगर की ओर प्रवास क्या कहलाता है?
(A) आप्रवास
(B) उत्प्रवास
(C) सोपानी प्रवास
(D) अंतर्राष्ट्रीय प्रवास
उत्तर:
(C) सोपानी प्रवास

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

3. राज्य के एक भाग से उसी राज्य के दूसरे भाग में प्रवास कहलाता है-
(A) अंतःराज्यीय प्रवास
(B) अंतर्राज्यीय प्रवास
(C) सोपानी प्रवास
(D) बाह्य प्रवास
उत्तर:
(A) अंतःराज्यीय प्रवास

4. एक राज्य से दूसरे राज्य में प्रवास कहलाता है-
(A) अंतःराज्यीय प्रवास
(B) अंतर्राज्यीय प्रवास
(C) सोपानी प्रवास
(D) बाह्य प्रवास
उत्तर:
(B) अंतर्राज्यीय प्रवास

5. निम्नलिखित में से कौन-सा एक विरल जनसंख्या वाला क्षेत्र नहीं है?
(A) अटाकामा
(B) भूमध्यरेखीय प्रदेश
(C) दक्षिण-पूर्वी एशिया
(D) ध्रुवीय प्रदेश
उत्तर:
(D) ध्रुवीय प्रदेश

6. निम्नलिखित में से किस राज्य में विवाह स्त्रियों के प्रवास का मुख्य कारण नहीं है?
(A) हरियाणा
(B) पंजाब
(C) बिहार
(D) मेघालय
उत्तर:
(D) मेघालय

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

7. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में स्त्रियों के प्रवास का मुख्य कारण है?
(A) व्यवसाय
(B) विवाह
(C) शिक्षा
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) विवाह

8. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक प्रतिकर्ष कारक नहीं है?
(A) गरीबी
(B) अमीरी
(C) जनसंख्या दबाव
(D) आपदा
उत्तर:
(C) जनसंख्या दबाव

9. कौन-सा/से राज्य अपने अंतर्राष्ट्रीय प्रवासियों से महत्त्वपूर्ण राशि प्राप्त करता करते है/हैं?
(A) पंजाब
(B) केरल
(C) तमिलनाडु
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

10. प्रवास होता है
(A) गाँव से गाँव की ओर
(B) गाँव से नगर की ओर
(C) नगर से नगर की ओर
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

11. स्थानिक स्तर पर होने वाले प्रवास …………… कहलाते हैं।
(A) स्थानिक प्रवास
(B) अंतर्राष्ट्रीय प्रवास
(C) अंतःराज्यीय प्रवास
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) स्थानिक प्रवास

12. यदि प्रवास राज्य की सीमा के बाहर हो तो उसे …………… प्रवास कहते हैं।
(A) अंतःराज्यीय
(B) अंतर्राष्ट्रीय
(C) अंत राज्यीय
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) अंत राज्यीय

13. स्त्रियों के प्रवास की संख्या किस धारा में अधिक है?
(A) ग्रामीण से नगरीय
(B) ग्रामीण से ग्रामीण
(C) नगरीय से नगरीय
(D) नगरीय से ग्रामीण
उत्तर:
(B) ग्रामीण से ग्रामीण

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

14. परिणामों को किन संदर्भो में देखा जा सकता है?
(A) आर्थिक व सामाजिक
(B) सामाजिक व राजनीतिक
(C) सांस्कृतिक व जनांकिकीय
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

15. निम्नलिखित में से कौन प्रवास को प्रभावित करने वाला कारण है?
(A) विवाह
(B) शिक्षा
(C) रोजगार
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

16. प्रवास का पर्यावरणीय परिणाम नहीं है-
(A) विभिन्न प्रकार के प्रदूषण
(B) अपशिष्ट निपटान की संख्या
(C) काम व रोजगार
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(C) काम व रोजगार

17. देश के बाहर और अन्य देशों से देश के अंदर प्रवास क्या कहलाता है?
(A) उत्प्रवास
(B) आंतरिक प्रवास
(C) अंतर्राष्ट्रीय प्रवास
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) अंतर्राष्ट्रीय प्रवास

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
किस राज्य में सर्वाधिक संख्या में आप्रवासी आते हैं?
उत्तर:
महाराष्ट्र में।

प्रश्न 2.
वह मनुष्य जो जनगणना के समय अपने जन्म-स्थान के अतिरिक्त किसी अन्य स्थान पर गिना जाए, क्या कहलाता है?
उत्तर:
प्रवासी।

प्रश्न 3.
भारत में किस राज्य में सर्वाधिक उत्प्रवासी हैं?
उत्तर:
भारत के उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक उत्प्रवासी हैं।

प्रश्न 4.
गाँव से पहले छोटे नगर और वहाँ से बाद में बड़े नगर की ओर प्रवास क्या कहलाता है?
उत्तर:
सोपानी प्रवास।

प्रश्न 5.
प्रवास के दो मुख्य कारक लिखें।
उत्तर:

  1. सामाजिक कारक
  2. आर्थिक कारक।

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प्रश्न 6.
एक देश से दूसरे देश में प्रवास क्या कहलाता है?
उत्तर:
अंतर्राष्ट्रीय प्रवास।

प्रश्न 7.
भारत में सबसे अधिक प्रवास किस देश से हुआ है?
उत्तर:
बांग्लादेश।

प्रश्न 8.
राज्य के एक भाग से उसी राज्य के दूसरे भाग में प्रवास क्या कहलाता है?
उत्तर:
अंतर्राज्यीय प्रवास।

प्रश्न 9.
ग्रामीण से नगरीय क्षेत्रों में पुरुष प्रवास अधिक क्यों है?
उत्तर:
काम एवं रोजगार के कारण।

प्रश्न 10.
जनगणना 2001 के अनुसार भारत में अन्य देशों से कितने व्यक्तियों का प्रवास हुआ?
उत्तर:
लगभग 50 लाख व्यक्तियों का।

प्रश्न 11.
भारत की जनगणना में प्रवास की गणना कितने आधारों पर की जाती है?
उत्तर:
दो आधारों पर।

प्रश्न 12.
विशिष्ट स्थान पर नगरीय बस्तियों का जमाव क्या कहलाता है?
उत्तर:
नगर-समूहन।

प्रश्न 13.
प्रवास को प्रभावित करने वाले कोई दो कारक बताएँ।
उत्तर:

  1. सुरक्षा
  2. रोजगार।

प्रश्न 14.
किस भूगोलवेत्ता ने सर्वप्रथम प्रवास की प्रवृत्तियों का अध्ययन किया था?
उत्तर:
रैटजेल ने।

प्रश्न 15.
गंतव्य स्थान पर सकारातमक तत्त्वों का अधिक होना किन कारकों के अंतर्गत आता है?
उत्तर:
अपकर्ष कारक या आकर्षित करने वाले कारक (Full Factor)।.

प्रश्न 16.
बड़े नगरों की ओर अधिक प्रवास क्यों होता है?
उत्तर:
रोजगार मिलने की संभावना अधिक होने के कारण।

प्रश्न 17.
प्रतिभा पलायन (Brain Drain) किस प्रकार का प्रवास है?
उत्तर:
स्वैच्छिक प्रवास।

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प्रश्न 18.
भारत के उन राज्यों के नाम बताइए जहाँ सर्वाधिक संख्या में आप्रवासी आते हैं?
उत्तर:
महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, पंजाब।

प्रश्न 19.
भारत के उन राज्यों के नाम बताइए जहाँ से सर्वाधिक संख्या में उत्प्रवासी आते हैं?
उत्तर:
उत्तर प्रदेश और बिहार।

प्रश्न 20.
डायस्पोस का हिंदी भाषा में क्या अर्थ होता है?
उत्तर:
प्रवासी या प्रसार।

प्रश्न 21.
प्रवासी भारतीय दिवस भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष कब मनाया जाता है?
उत्तर:
9 जनवरी को।

प्रश्न 22.
पहला प्रवासी भारतीय दिवस कब मनाया गया?
उत्तर:
सन् 2003 में।

प्रश्न 23.
उच्च शिक्षा प्राप्त कर प्रभावशाली व्यक्तियों का अन्य देशों के लिए पलायन कर जाना क्या कहलाता है?
उत्तर:
ब्रेन ड्रेन या प्रतिभा पलायन।

प्रश्न 24.
जीवन पर्यंत प्रवास क्या है?
उत्तर:
जीवन पर्यंत वह प्रवास है जो जन्म के स्थान, यदि जन्म का स्थान गणना के स्थान से भिन्न है।

प्रश्न 25.
पिछले स्थान प्रवास क्या है?
उत्तर:
पिछले स्थान प्रवास वह प्रवास है जिसमें निवास का स्थान पिछले स्थान से भिन्न होता है।

प्रश्न 26.
सोपानी प्रवास किसे कहते हैं?
उत्तर:
गाँव से पहले छोटे नगर और वहाँ से बाद में बड़े नगर की ओर प्रवास सोपानी प्रवास कहलाता है।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रवास किसे कहते है?
उत्तर:
जनसंख्या का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना प्रवास कहलाता है अर्थात् किसी एक स्थान से जनसंख्या के दूसरे स्थान पर जाकर बसने को प्रवास कहते हैं।

प्रश्न 2.
उत्प्रवास से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
किसी गाँव या नगर में आबादी के अधिक बढ़ने या रोज़गार की कमी के कारण जब लोग उस स्थान को छोड़कर रोज़गार की तलाश में दूसरे स्थान पर चले जाते हैं, तो यह उत्प्रवास प्रक्रिया कहलाती है।

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प्रश्न 3.
आप्रवास से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
यदि व्यक्ति अन्य स्थानों से आकर एक विशिष्ट स्थान पर बस जाता है तो वह आप्रवास कहलाता है। बड़े-बड़े नगरों, व्यापारिक केंद्रों, औद्योगिक नगरों, बंदरगाहों, मंडियों और खनिज क्षेत्रों में रोज़गार की तलाश में लोग आकर बस जाते हैं, यह प्रक्रिया आप्रवास कहलाती है।

प्रश्न 4.
स्थानिक प्रवास क्या है?
उत्तर:
एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर प्रवास स्थानिक प्रवास कहलाता है। यह प्रवास गाँव-से-गाँव, एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश, नगर-से-नगर, एक देश से दूसरे देश में हो सकता है।

प्रश्न 5.
प्रवास के जनांकिकीय परिणाम क्या हैं?
उत्तर:
नगरों की जनसंख्या वृद्धि में ग्रामीण नगरीय प्रवास महत्त्वपूर्ण कारक है। ग्रामीण युवा-वर्ग रोज़गार व सुख-सुविधा के लिए नगरों में प्रवास करता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के जनांकिकीय संघटन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

प्रश्न 6.
प्रवास के सामाजिक परिणाम क्या हैं?
उत्तर:
प्रवास के सामाजिक परिणाम निम्नलिखित हैं-

  1. नवीन प्रौद्योगिकी, परिवार नियोजन तथा शिक्षा से संबंधित नई विचारधारा का उत्पन्न होना।
  2. विविध संस्कृतियों का मिलन होना।
  3. उद्गम प्रदेश से दूर आकर बसना।
  4. रहन-सहन का उच्चस्तर पर निर्वाह करना।

प्रश्न 7.
भारत में किन-किन देशों से व्यक्तियों का प्रवास हुआ है?
उत्तर:

  1. बांग्लादेश
  2. पाकिस्तान
  3. नेपाल
  4. श्रीलंका
  5. ईरान
  6. म्यांमार आदि।

प्रश्न 8.
प्रवास की धाराएँ बताएँ अथवा आंतरिक प्रवास की चार धाराएँ कौन-कौन-सी हैं?
उत्तर:

  1. गाँव से गाँव की ओर प्रवास
  2. गाँव से नगर की ओर प्रवास
  3. नगर से नगर की ओर प्रवास
  4. नगर से गाँव की ओर प्रवास।

प्रश्न 9.
अंतर्राष्ट्रीय प्रवास से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
जब लोग अपना देश छोड़कर अन्य देशों में पलायन कर जाते हैं, तो उसे अंतर्राष्ट्रीय प्रवास कहते हैं। उदाहरण के लिए हरियाणा के लोगों का कनाडा, ऑस्ट्रेलिया व अमेरिका में प्रवास।

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प्रश्न 10.
आंतरिक प्रवास से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
जब लोगों का पलायन मुख्य रूप से देश की राजनीतिक सीमाओं के अंदर होता है, तो उसे आंतरिक प्रवास कहते हैं। उदाहरण के लिए हरियाणा के लोगों का दिल्ली व पंजाब में प्रवास ।

प्रश्न 11.
निवल प्रवास से आप क्या समझते हैं? अथवा प्रवास का संतुलन क्या है?
उत्तर:
प्रवासियों और आप्रवासियों की कुल संख्या में से बाहर जाने वाले प्रवासियों और उत्प्रवासियों की संख्या निकालकर जो शेष संख्या प्राप्त होती हैं, वह निवल प्रवास कहलाता है। इसको प्रवास का संतुलन भी कहते हैं।

प्रश्न 12.
शरणार्थी किसे कहते हैं?
उत्तर:
जो लोग अपने देश में असुरक्षा, युद्ध या मानव अधिकारों के अतिक्रमण के कारण अन्य देशों में शरण लेने के लिए बाध्य हो जाते हैं, वे शरणार्थी कहलाते हैं।

प्रश्न 13.
गाँव से गाँव में प्रवास का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
गाँव से गाँव में प्रवास महिलाओं में अधिक होता है। इसका मुख्य कारण विवाह है। भारतीय समाज के अनुसार विवाहोपरांत महिलाओं को पति के घर जाना पड़ता है।

प्रश्न 14.
गाँव से नगर की ओर प्रवास का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
गाँव से नगर की ओर प्रवास पुरुषों में अधिक होता है। इसका मुख्य कारण काम और रोजगार है। पुरुष परिवार के जीवन स्तर को सुधारने के लिए नगरों की ओर प्रवास करते हैं ताकि यहाँ नौकरी करके पैसा कमाया जा सके।

प्रश्न 15.
दिक् परिवर्तन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जनसंख्या के दैनिक स्थानांतरण अर्थात् दो नगरों के बीच दैनिक आवागमन या गाँव से शहर को दैनिक आवागमन या छोटे नगर से बड़े नगर को प्रत्येक दिन जो आवागमन होता है, उसे दिक्-परिवर्तन कहते हैं।

प्रश्न 16.
भारत में लोग ग्रामीण से नगरीय क्षेत्रों में प्रवास क्यों करते हैं?
उत्तर:
भारत में लोग ग्रामीण से नगरीय क्षेत्रों में गरीबी, कृषि भूमि पर जनसंख्या के अधिक दबाव, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा जैसी आधारभूत अवसंरचनात्मक सुविधाओं के अभाव के कारण प्रवास करते हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अंतःराज्यीय और अंतर्राज्यीय प्रवास से आप क्या समझते हैं?
अथवा
अंतःराज्यीय और अंतर्राज्यीय प्रवास में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अंतःराज्यीय और अंतर्राज्यीय प्रवास में निम्नलिखित अंतर हैं-

अंतःराज्यीय प्रवासअंतर्राज्यीय प्रवास
1. यदि जनसंख्या या लोगों का प्रवास एक ही राज्य की सीमाओं के भीतर होता हो तो उसे अंतःराज्यीय प्रवास कहा जाता है; जैसे करनाल से अम्बाला।1. यदि जनसंख्या या लोगों का प्रवास एक राज्य से दूसरे राज्य में हो तो उसे अंतर्राज्यीय प्रवास कहा जाता है; जैसे हरियाणा (करनाल) से पंजाब (जांलधर)।
2. यह प्रवास अधिक होता है।2. यह अपेक्षाकृत कम होता है।

प्रश्न 2.
प्रवास या स्थानांतरण का अर्थ एवं परिभाषा लिखें। अथवा प्रवास किसे कहते हैं? प्रवास के कितने प्रकार हैं?
उत्तर:
जनसंख्या का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर रहना प्रवास कहलाता है अर्थात् प्रवास का अर्थ मानव समुदाय के एक भौगोलिक इकाई से दूसरी भौगोलिक इकाई में प्राकृतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक आदि कारकों के कारण स्थानांतरण से है। UNO के अनुसार “जनसंख्या स्थानांतरण या प्रवास एक भौगोलिक क्रिया है जो दो भौगोलिक इकाइयों के बीच देखने को मिलती है। इसमें मानव अधिवास में स्थायी बंदलाव हो जाते हैं।”

प्रकार – प्रवास मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं-

  • आंतरिक प्रवास
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रवास।

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प्रश्न 3.
भारतीय डायस्पोरा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
भारतीय डायस्पोरा का अर्थ उन भारतीयों से है जिनका जन्म तो भारत में होता है लेकिन वे किन्हीं कारणों से विदेशों में बस जाते हैं और वहीं की नागरिकता ले लेते हैं। इन्हें ही भारतीय प्रसार या प्रवासी भी कहते हैं।

भारत के प्रवासी लगभग 166 देशों से हैं जिनकी संख्या 1 करोड़ से भी अधिक हैं। ये अपने कौशल से विदेशों में अपनी पहचान बनाने में सफल हुए हैं। उदारीकरण के बाद 90 के दशक में शिक्षा और ज्ञान आधारित भारतीय उत्प्रवासियों ने भारतीय डायस्पोरा को विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली डायस्पोरा में से एक बना दिया। इन सभी देशों में भारतीय डायस्पोरा अपने-अपने नागरिक प्राप्त देशों के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

प्रश्न 4.
भारतीय प्रवासी दिवस के क्या उद्देश्य हैं?
उत्तर:
भारतीय प्रवासी दिवस के निम्नलिखित उद्देश्य हैं-

  1. प्रवासी भारतीय समुदाय की उपलब्धियों को मंच प्रदान करना।
  2. प्रवासियों को भारत में रहने के लिए आकर्षित करना।
  3. भारत में निवेश के अवसरों को बढ़ाना।
  4. सभी भारतीय प्रवासियों को एकत्रित कर आपस में बंधुभाव और राष्ट्रीयता की भावना जागृत करना।
  5. उनकी काम संबंधी समस्याओं को समझना और वहाँ की सरकार द्वारा हल करवाना।

प्रश्न 5.
प्रवास के आर्थिक परिणाम क्या हैं?
अथवा
आर्थिक परिणाम पर संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर:
उद्गम क्षेत्र के लिए मुख्य लाभ अंतर्राष्ट्रीय प्रवासियों द्वारा भेजी गई हुंडी हैं जो विदेशी विनिमय के प्रमुख स्रोतों में से एक हैं। ये आर्थिक विकास एवं वृद्धि में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

हुंडियों का प्रयोग मुख्यतः भोजन, ऋणों की अदायगी, बच्चों की शिक्षा, विवाह समारोहों, बचत निवेश, गृह-निर्माण, कृषीय निवेश आदि के लिए किया जाता है। कई राज्यों; जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश आदि के हजारों गरीब गाँव की अर्थव्यवस्था के लिए ये हुंडियाँ जीवनदायक होती हैं अर्थात् शरीर में धमनियों की तरह कार्य करती हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवास कृषि विकास के लिए, उसकी हरित क्रांति कार्य-योजना की सफलता के लिए उत्तरादायी है।

प्रश्न 6.
उत्प्रवास के लिए उत्तरदायी प्रतिकर्ष कारक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
उत्प्रवास के लिए उत्तरदायी प्रतिकर्ष कारक निम्नलिखित हैं-

  1. गरीबी या निर्धनता-निर्धनता के कारण लोग उन स्थानों की ओर प्रवास करते हैं जहाँ उनको रोजगार प्राप्त होता है।
  2. शिक्षा-शिक्षा सुविधाओं में कमी के कारण युग वर्ग उन स्थानों की ओर प्रस्थान करते हैं जहाँ अच्छी शिक्षा और सुविधाओं की व्यवस्था होती है।
  3. जनसंख्या का अधिक दबाव-जनसंख्या का अधिक दबाव भी प्रवास को बढ़ावा देता है।
  4. सुरक्षा-असुरक्षित स्थानों को छोड़कर लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करते हैं।

प्रश्न 7.
उत्प्रवास और आप्रवास में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
उत्प्रवास और आप्रवास में निम्नलिखित अंतर हैं-

उत्प्रवास (Out Migration)आप्रवास (In-Migration)
1. किसी गाँव या नगर में आबादी के अधिक बढ़ने या रोज़गार की कमी के कारण जब लोग उस स्थान को छोड़कर रोज़गार की तलाश में दूसरे स्थान पर चले जाते हैं, तो यह उत्प्रवास प्रक्रिया कहलाती है।1. बड़े-बड़े नगरों, व्यापारिक केंद्रों, औद्योगिक नगरों, बंदरगाहों, मंडियों और खनिज क्षेत्रों में रोज़गार की तलाश में लोग आकर बस जाते हैं, यह प्रक्रिया आप्रवास कहलाती है।
2. जब एक व्यक्ति एक स्थान को छोड़कर अन्य स्थान पर जाता है, तो उत्प्रवास कहलाता है।2. यदि व्यक्ति अन्य स्थानों से आकर एक विशिष्ट स्थान पर बस जाता है, तो यह आप्रवास कहलाता है।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रवास के प्रकारों के आधारों का वर्णन कीजिए।
अथवा
आंतरिक या स्थानिक प्रवास के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या का एक निवास स्थान से दूसरे स्थान तक आर्थिक, सामाजिक अथवा राजनीतिक दृष्टि अथवा अन्य कारणों से किए गए स्थानांतरण को प्रवास कहा जाता है। औद्योगिक क्रांति से पूर्व मनुष्य की गतिशीलता सीमित थी। शिकार, पशुओं के लिए चारा, पानी, उपजाऊ कृषि भूमि का आकर्षण, प्राकृतिक प्रकोप, सुरक्षा आदि कारण मनुष्य को स्थानांतरण के लिए बाध्य करते थे। औद्योगिक क्रांति के पश्चात् आवागमन के साधनों में वृद्धि ने मनुष्य की गतिशीलता में वृद्धि की है। स्थानांतरण या प्रवास अस्थायी, या स्थायी रूप से किया गया आवास परिवर्तन है। प्रवास के लिए आवास स्थान में परिवर्तन पर्याप्त अवधि के लिए होना चाहिए अर्थात् उसमें कुछ स्थायित्व होना चाहिए। प्रवास एक भौतिक तथा सामाजिक संक्रमण है।

प्रवास के प्रकार (Types of Migration) – प्रवास की समयावधि, दूरी, स्थायित्व, उद्देश्य, क्षेत्र आदि आधारों पर स्थानांतरण अथवा प्रवास अनेक प्रकार के हो सकते हैं-
1. समय के आधार पर समय के आधार पर प्रवास दैनिक, मौसमी अथवा अल्पकालिक या दीर्घकालिक होते हैं।
(i) दैनिक प्रवास-नौकरी करने, औद्योगिक केंद्रों में काम करने, व्यवसाय हेतु अथवा शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाओं के लाभ हेतु प्रतिदिन कस्बों अथवा नगरों व महानगरों की ओर जनसंख्या का जाना तथा शाम को पुनः लौटना आदि दैनिक प्रवास है।

(ii) मौसमी प्रवास-श्रम की मौसमी मांग के कारण फसल काटने के समय भारत में सुंदरवन, उत्तरी भारत में गेहूँ काटने के लिए बिहार तथा उत्तर प्रदेश से जनसंख्या का प्रवास। इसी प्रकार धान कटने के पश्चात् श्रमिकों का उत्तर भारत की ओर, सड़क, गृह-निर्माण तथा ईंट-भट्ठों में कार्य के लिए प्रवास, पर्वतीय भागों में जाड़े में तलहटियों की ओर तथा ग्रीष्मकाल में पुनः . लौटना आदि मौसमी प्रवास हैं।

2. दूरी के आधार पर-गांवों से नगरों तथा नगरों से महानगरों की ओर प्रवास अल्प दूरी के होने वाले प्रवास हैं। इसी तरह में, असम के चाय बागानों में, उत्तरी भारत में कृषि के लिए छत्तीसगढ़ के मजदूरों का स्थाई प्रवास मध्यम दूरी के प्रवास हैं। राजस्थान व हरियाणा से असम, बंगाल तथा ओडिशा की ओर मारवाड़ी व्यापारी का प्रवास भी मध्य दूरी में आता है। भारत में मलाया, मॉरीशस, ग्वायना, फीजी, अफ्रीका आदि देशों में जनसंख्या प्रवास लंबी दूरी के प्रवास हैं।

3. उद्देश्य के आधार पर विभिन्न उद्देश्यों के आधार पर; जैसे आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, सैनिक आदि पर किए गए प्रवास इस श्रेणी में आते हैं। इनमें आर्थिक उद्देश्य से किए गए प्रवास सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण हैं । आर्थिक समस्या, बेरोजगारी, कम मजदूरी आदि आर्थिक विकर्षण; दूसरी ओर अच्छे आर्थिक अवसरों के आकर्षण के कारण होने वाले प्रवास इस श्रेणी के हैं। इसके अलावा इन प्रकारों में विवाह पश्चात् स्त्री प्रवास, राजनीतिक नियोजित प्रवास आदि भी सम्मिलित हैं।

4. क्षेत्र के आधार पर भौगोलिक दृष्टि से क्षेत्र के आधार पर होने वाले प्रवास सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण हैं। यदि यह आवास-प्रवास एक देश से दूसरे देश के मध्य सीमा पार होता है तो अंतर्राष्ट्रीय प्रवास (International Migration) कहलाता है। जब यह स्थानांतरण अथवा प्रवास किसी एक ही देश के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान पर होता है तो उसे आंतरिक अथवा अंतर्देशीय अथवा देशांतरिक (Internal) प्रवास कहते हैं। एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप के मध्य अंतःमहाद्वीपीय प्रवास होते हैं। ये भी अंतर्राष्ट्रीय प्रकार के होते हैं। स्थानिक स्तर पर होने वाले प्रवास स्थानिक प्रवास कहलाते हैं। आंतरिक अथवा स्थानिक प्रवास के चार प्रमुख प्रकार हैं-
(i) गाँव से नगर की ओर प्रवास एक सामान्य तथा सतत् प्रक्रिया है। आर्थिक विपन्नता, बेरोज़गारी, कम पारिश्रमिक, स्वास्थ्य, शिक्षा, मनोरंजन आदि सेवाओं की कमी के कारण अच्छे रोजगार अथवा अन्य आर्थिक अवसरों की तलाश में जनसंख्या गांव से शहर की ओर प्रवास करती है। दूसरे शब्दों में, शहरों में रोजगार के अधिक अवसर, नियमित पारिश्रमिक, अच्छी शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाएं गांव से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। इस प्रकार के प्रवास से नगरीय जनसंख्या में वृद्धि होती है।

(ii) एक नगर से दूसरे नगर में प्रवास को अंतर्नगरीय प्रवास कहते हैं। इस प्रकार का प्रवास अधिकतर छोटे नगरों से बड़े नगरों की ओर होता है क्योंकि बड़े नगर व्यापार, उद्योग तथा अन्य धंधों तथा रोजगार के केंद्र होते हैं। बड़े नगरों से महानगरों की ओर प्रवास भी इसी प्रवास के अंतर्गत आता है। इससे बड़े नगरों की जनसंख्या तेजी से बढ़ती है, परंतु छोटे नगरों का विकास रुकने लगता है।

(iii) एक ग्रामीण क्षेत्र से दूसरे ग्रामीण क्षेत्र में प्रवास के अनेकों कारण हैं; जैसे नवीन रोपण कृषि क्षेत्रों तथा ग्रामीण फार्मों में कार्य करने हेतु तथा कम कीमत पर अधिक उपजाऊ भूमि की उपलब्धि आदि के कारण यह प्रवास होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में वैवाहिक प्रवास भी इसी प्रवास में आते हैं। भारत में कुछ इस प्रकार के मुख्य प्रवास-असम, केरल तथा तमिलनाडु के चाय, कॉफी बगीचों में कार्य हेतु पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश तथा गुजरात में नवीन विकसित भूमि पर कृषि हेतु, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात आदि प्रदेशों के खनिज क्षेत्रों में कार्य हेतु श्रमिकों का प्रवास आदि मुख्य हैं।

(iv) नगर से गांव की ओर प्रवास लगभग स्थानीय प्रकार का होता है। सेवानिवृत्त शासक, सैनिक अथवा अशासकीय कर्मचारी, वृद्धि तथा अकार्यशील व्यापारी आदि लोग शांत जीवन जीने की आशा में ग्रामीण क्षेत्रों की ओर प्रवास करते हैं। कुछ संख्या विवाह उपरांत भी यह प्रवास करती है।

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प्रश्न 2.
प्रवास किसे कहते हैं? भारत में प्रवास को प्रभावित करने वाले कारकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
प्रवास का अर्थ जनसंख्या का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना प्रवास कहलाता है अर्थात् किसी एक स्थान से जनसंख्या के दूसरे स्थान पर जाकर बसने को प्रवास कहते हैं। कुछ प्रवास स्थायी तथा कुछ अस्थायी होते हैं। स्थायी प्रवास में व्यक्ति मूल-स्थान से दूसरे स्थान पर स्थायी रूप से रहने लगता है जबकि अस्थायी प्रवास में मौसमी, वार्षिक तथा दैनिक प्रवास भी हो सकते हैं।

भारत में प्रवास को प्रभावित करने वाले कारक – भारत में जनसंख्या प्रवास के कुछ कारण निम्नलिखित हैं-
1. आजीविका-आजीविका कमाने या अन्य आर्थिक उद्देश्यों से व्यक्ति ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर जाता है। इसमें मुख्य रूप से युवा वर्ग है, क्योंकि यह वर्ग नगरीय क्षेत्रों में उद्योग-धंधे, परिवहन, व्यापार एवं प्रशासनिक प्रतिष्ठानों में धन कमाने के उद्देश्य से प्रवास करता है। नगर इन सुविधाओं के कारण युवा वर्ग को अपनी ओर आकर्षित करता है।

2. सामाजिक कारण-विवाह या शिक्षा ग्रहण करने के उद्देश्य से मनुष्य एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करता है; जैसे प्रत्येक लड़की शादी के बाद अपना पैतृक स्थान छोड़कर दूसरे स्थान पर जाकर रहने लगती है। इसमें दूरी कम भी हो सकती है या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हजारों मील भी हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्र आज भी शिक्षा की दृष्टि से पिछड़े हुए हैं अतः व्यक्ति उच्च शिक्षा (High Education) प्राप्त करने के उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों में स्थानांतरित होता है।

3. सरक्षा कारण सामाजिक सुरक्षा एक महत्त्वपूर्ण कारक है जो व्यक्ति को एक स्थान से दूसरे सुरक्षित स्थान पर प्रवास के लिए मजबूर कर देता है। 1980 के दशक में पंजाब में आतंकवाद के कारण पंजाब की जनसंख्या हरियाणा, दिल्ली तथा सीमावर्ती राज्यों में आकर बसने लगी थी।

प्रश्न 3.
प्रवास के कारणों का वर्णन कीजिए।
अथवा
प्रवास के प्राकृतिक तथा मानवीय कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या के स्थानांतरण के पीछे विकर्षण तथा आकर्षण के कारक एक साथ क्रियाशील होते हैं। प्रवास एक जटिल क्रेया है तथा कई कारकों से जड़ी होती है। हर प्रवास में अनेक कारक सामूहिक रूप से उत्तरदायी होते हैं। विकर्षण तथा आकर्षण के अतिरिक्त अनेकों अन्य कारक; जैसे सामूहिक सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता, आवागमन के साधन, जलवायु की अनुकूलता आदि भी प्रवास के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। प्रवास के कारणों को निम्नलिखित मुख्य वर्गों में बांटा जा सकता है-
1. प्राकृतिक कारण-प्राकृतिक कारणों में जलवायु का प्रभाव सबसे अधिक रहा है। प्रवास अनुकूल जलवायु के क्षेत्रों की ओर होता है। अतिवृष्टि, अनावृष्टि तथा अकाल आदि प्रवास के कारण जलवायु की ही देन है। कठोर शीतकाल में टुन्ड्रा से जनसंख्या दक्षिण की ओर तथा ग्रीष्म में उत्तर की ओर प्रवास करती हैं। इसी तरह नदियों में बाढ़ों के कारण प्रभावित लोग अन्य भागों में प्रवास करते हैं। दूसरी ओर निर्मित उपजाऊ मैदान तथा जल-सुविधा अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इसी प्रकार बार-बार विनाशकारी भूकम्प तथा ज्वालामुखी के कारण जीवन असुरक्षित हो जाता है तथा जनसंख्या सुरक्षित स्थानों की ओर प्रवास करती है।

2. मानवीय कारण स्थानांतरण अथवा प्रवास प्रक्रिया में प्राकृतिक कारणों की अपेक्षा मानवीय कारण अधिक महत्त्वपूर्ण तथा प्रभावी होते हैं। इन कारणों में सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, पारिवारिक तथा व्यक्तिगत कारण मुख्य होते हैं, जो प्रवास को प्रभावित करते हैं।
(i) सामाजिक कारण मानवीय प्रवास को सामाजिक दशाएं सबसे अधिक प्रभावित करती हैं। इनके अंतर्गत सामाजिक रीति-रिवाज, खानपान, शिक्षा-दीक्षा, मेल-मिलाप, सामाजिक क्रियाशीलता व व्यवहार, त्योहार आदि अंतक्रियाएं होती हैं। ये अंतक्रियाएं ही सामाजिक प्रवास के कारण हैं। विवाह से स्त्री प्रवास, भारत-पाक विभाजन के दौरान हिंदु तथा मुसलमानों का स्थानांतरण आदि।

(ii) आर्थिक कारण-आर्थिक कारण अधिकांश प्रवासों के प्रेरक कारण रहे हैं। पूंजी निवेश, व्यापार उतार-चढ़ाव, लाभ की आशा, रोजगार के अवसर, अधिक वेतन का लोभ, कृषि घाटा, बेरोजगारी, कार्यदक्षता आदि असंख्य कारण प्रवास की मात्रा व दर का निर्णय करते हैं। कृषि क्षेत्रों में उपलब्ध अतिरिक्त श्रमिक उद्योगों में काम करने के लिए नगरों की ओर प्रवास करते हैं। हिमालय के तराई क्षेत्र, राजस्थान के उत्तरी भाग, मध्य प्रदेश का बस्तर तथा सरगुजा क्षेत्रों में उत्तम कृषि भूमि की उपलब्धि के कारण प्रवास हुए हैं। भारत के औद्योगिक नगरों; जैसे कोलकाता, मुम्बई, अहमदाबाद, टाटा नगर, भिलाई आदि नगरों में भारी प्रवास हुआ है।

(iii) राजनीतिक कारण-युद्ध के पश्चात् विजेता का भूमि पर कब्जा करके वहां बस जाना; भारत में आर्यों, मुगलों, अंग्रेजों का आगमन तथा यहाँ आकर बस जाना राजनीतिक प्रवास है। अंग्रेजों ने भारत से मॉरीशस, फीजी, पूर्वी अफ्रीका के गन्ने की खेती के लिए बलपूर्वक जनसंख्या का प्रवास किया। आज चकमा शरणार्थियों, कश्मीरी पंडितों का शरणार्थियों के रूप में प्रवास राजनीतिक कारणों से है।

(iv) सांस्कृतिक कारण-सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शिक्षा प्राप्ति के लिए विद्यार्थी, डॉक्टर, शिक्षकों का दूसरे देशों में प्रवास, पर्यटक, कलाकार, राजनीतिज्ञ आदि का अल्पकालीन अथवा स्थाई प्रवास सांस्कृतिक कारणों से है।

(v) धार्मिक कारण-धार्मिक यात्राओं; जैसे हज, कुम्भ आदि के कारण वर्ष भर प्रवास होता है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

प्रश्न 4.
प्रवास के परिणामों की विस्तृत व्याख्या कीजिए।
अथवा
प्रवास के कौन-कौन से परिणाम हैं? वर्णन करें।
उत्तर:
अवसरों के असमान वितरण के परिणामस्वरूप प्रवास होता है। प्रवास के आर्थिक, जनांकिकीय, सामाजिक, पर्यावरणीय परिणाम होते हैं जो निम्नलिखित हैं
I. आर्थिक परिणाम (Economic Consequence)-अन्तर्राष्ट्रीय प्रवासियों द्वारा भेजी गई हुंडियाँ विदेशी विनिमय का प्रमुख स्रोत हैं। इन इंडियों का प्रयोग उद्गम प्रदेश के लोग भोजन, ऋणों की अदायगी, गृह-निर्माण, विवाह, बच्चों की शिक्षा इत्यादि के लिए किया करते हैं जो प्रदेशों की अर्थव्यवस्था के लिए जीवनदायक है।

2. जनांकिकीय परिणाम (Democratic Consequence)-नगरों की जनसंख्या वृद्धि में ग्रामीण नगरीय प्रवास महत्त्वपूर्ण कारक है। ग्रामीण युवा-वर्ग रोज़गार व सुख-सुविधा के लिए नगरों में प्रवास करता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के जनांकिकीय संघटन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

3. सामाजिक परिणाम (Social Consequence) सामाजिक परिवर्तन में प्रवास महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नई प्रौद्योगिकी, तकनीक, परिवार नियोजन, बालिका शिक्षा आदि से संबंधित नए विचार नगरीय क्षेत्रों से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर प्रवास के माध्यम से जाते हैं। प्रवास से ही विभिन्न संस्कृतियों के लोगों का मेल-जोल भी होता है।

4. पर्यावरणीय परिणाम (Environmental Consequence)-ग्रामीण से नगरीय क्षेत्रों की ओर प्रवास से वर्तमान नगरों की भौतिक व सामाजिक संरचना भी प्रभावित होती है। इसके कारण नगरीय बस्तियों की अनियोजित रूप से वृद्धि होती है। परिणामस्वरूप अवैध व मलिन बस्तियाँ बसने लगती हैं। इन बस्तियों में वायु प्रदूषण, पेय जल की समस्या, वाहित मल का निपटान और ठोस कचरे के प्रबंधन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

प्रश्न 5.
भारत में गाँवों से शहरों की ओर जनसंख्या के पलायन के मुख्य कारणों का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत में जनसंख्या प्रवास के मुख्य कारण क्या हैं? वर्णन करें।
उत्तर:
भारत में गाँवों से शहरों की ओर जनसंख्या के पलायन के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-
1. कृषि योग्य भूमि पर दबाव बढ़ती जनसंख्या के कारण कृषि योग्य भूमि पर निरंतर दबाव बढ़ता जा रहा है। इसी दशा में जब कृषि-भूमि ग्रामीण जनसंख्या को जीविका प्रदान करने में असमर्थ रहती है तो लोग शहरों की ओर पलायन करते हैं।

2. औद्योगीकरण-नगरीकरण तथा औद्योगीकरण में परस्पर धनात्मक सहसंबंध पाया जाता है। औद्योगीकरण के साथ नगरों का भी विकास होता है। औद्योगिक इकाइयों में रोजगार प्राप्त होने पर लोग उद्योगों के आसपास निवास करते हैं। इस तरह से गांवों से शहरों की ओर जनसंख्या का प्रवास होता है।

3. ग्रामीण क्षेत्रों में वैकल्पिक रोजगार की कमी-जनसंख्या तो तीव्र गति से बढती रही परंत उसी अनपात में वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था नहीं हो पाई। ग्रामीण क्षेत्रों में वैकल्पिक रोजगार की कमी होने के कारण नगरीय क्षेत्रों की ओर जनसंख्या का प्रवास तेजी से हुआ।

4. नगरों में रोजगार के अवसर-नगरों में नियमित रूप से आर्थिक क्रियाएं वर्ष भर संचालित होती हैं। सरकारी क्षेत्रों, सेवाओं, उद्योग, व्यापार आदि में रोजगार के पर्याप्त अवसर होते हैं। इस प्रकार रोजगार के अवसरों के कारण लोग नगरों की ओर प्रस्थान करते हैं।

5. यातायात के साधन-तेजी से विकसित होते यातायात के साधन तथा परिवहन मार्गों से गांवों तथा नगरों के मध्य सहजता से पहुंचा जा सकता है। यातायात के साधनों के कारण नगर व्यापार तथा वाणिज्यिक गतिविधियों के केंद्र बने। अतः ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्रों के मध्य व्यापार को बढ़ावा मिला।

6. नगरीय जीवन आकर्षण-शहरों में उपलब्ध शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आधुनिक जीवन की सुविधाएं ग्रामीण जनसंख्या को आकर्षित करती हैं। अतः मनोरंजन, आधुनिक सुविधाओं तथा सुरक्षा व्यवस्था से आकर्षित होकर. लोग शहरों की ओर पलायन करते हैं।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. विश्व में जनसंख्या की दृष्टि से भारत का कौन-सा स्थान है?
(A) तीसरा
(B) दूसरा
(C) चौथा
(D) सातवाँ
उत्तर:
(B) दूसरा

2. विश्व में घनत्व की दृष्टि से भारत का कौन-सा स्थान है?
(A) तीसरा
(B) दूसरा
(C) चौथा
(D) सातवाँ
उत्तर:
(A) तीसरा

3. विश्व में क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का कौन-सा स्थान है?
(A) दूसरा
(B) तीसरा
(C) चौथा
(D) सातवाँ
उत्तर:
(D) सातवाँ

4. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कितने प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण है?
(A) 25.50%
(B) 68.84%
(C) 9.42%
(D) 64.41%
उत्तर:
(B) 68.84%

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

5. 2001-2011 में जनसंख्या की औसत वार्षिक वृद्धि कितनी रही?
(A) 9.42%
(B) 3.5%
(C) 13.7%
(D) 17.64%
उत्तर:
(D) 17.64%

6. स्वतंत्र भारत में अब तक कितनी बार जनगणनाएँ हो चुकी हैं?
(A) 4
(B) 7
(C) 12
(D) 14
उत्तर:
(B) 7

7. 1951 में भारत का जनसंख्या घनत्व कितना था?
(A) 117 व्यक्ति/वर्ग कि०मी०
(B) 200 व्यक्ति/वर्ग कि०मी०
(C) 208 व्यक्ति/वर्ग कि०मी०
(D) 185 व्यक्ति/वर्ग कि०मी०
उत्तर:
(B) 200 व्यक्ति/वर्ग कि०मी०

8. भारत में सर्वाधिक दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर निम्नलिखित में से किस दशक में रही?
(A) 1961-71
(B) 1971-81
(C) 1981-91
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) 1961-71

9. भारत का निम्नतम जनसंख्या वाला राज्य है-
(A) सिक्किम
(B) अरुणाचल प्रदेश
(C) केरल
(D) गोवा
उत्तर:
(A) सिक्किम

10. भारत का न्यूनतम जनसंख्या वृद्धि-दर वाला राज्य है-
(A) केरल
(B) अरुणाचल प्रदेश
(C) नगालैण्ड
(D) गोवा
उत्तर:
(C) नगालैण्ड

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

11. भारत का क्षेत्रफल विश्व के कुल भौगोलिक क्षेत्र का कितने प्रतिशत है?
(A) 16.7%
(B) 5.8%
(C) 2.4%
(D) 15.2%
उत्तर:
(C) 2.4%

12. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में जनसंख्या का औसत घनत्व कितना है?
(A) 849 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
(B) 334 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
(C) 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
(D) 129 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
उत्तर:
(C) 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०

13. भारत में कुल कितने राज्य हैं?
(A) 25
(B) 28
(C) 27
(D) 29
उत्तर:
(B) 28

14. वर्तमान में भारत में कितने केंद्र-शासित प्रदेश हैं?
(A) 5
(B) 6
(C) 7
(D) 8
उत्तर:
(D) 8

15. भारत में सबसे अधिक जनसंख्या किस प्रदेश में पाई जाती है?
(A) उत्तर प्रदेश
(B) मध्य प्रदेश
(C) अरुणाचल प्रदेश
(D) पश्चिमी बंगाल
उत्तर:
(A) उत्तर प्रदेश

16. सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या कितनी थी?
(A) 100.2 करोड़
(B) 121 करोड़
(C) 102.8 करोड़
(D) 103.8 करोड़
उत्तर:
(C) 102.8 करोड़

17. निम्नलिखित में से जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करने वाला भौगोलिक कारक नहीं है
(A) धरातल
(B) खनिज
(C) जलवायु
(D) मृदा
उत्तर:
(B) खनिज

18. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में लिंगानुपात कितना है?
(A) 931 प्रति हजार
(B) 932 प्रति हजार
(C) 943 प्रति हजार
(D) 934 प्रति हजार
उत्तर:
(C) 943 प्रति हजार

19. 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में जन्म-दर कितनी थी?
(A) 23 प्रति हजार व्यक्ति
(B) 24 प्रति हजार व्यक्ति
(C) 25 प्रति हजार व्यक्ति
(D) 26 प्रति हजार व्यक्ति
उत्तर:
(D) 26 प्रति हजार व्यक्ति

20. 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में मृत्यु-दर कितनी थी?
(A) 7 प्रति हजार व्यक्ति
(B) 8 प्रति हजार व्यक्ति
(C) 9 प्रति हजार व्यक्ति
(D) 10 प्रति हजार व्यक्ति
उत्तर:
(C) 9 प्रति हजार व्यक्ति

21. सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की ग्रामीण जनसंख्या कितने प्रतिशत थी?
(A) 72.22%
(B) 58.42%
(C) 67.75%
(D) 27.78%
उत्तर:
(A) 72.22%

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

22. सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की नगरीय जनसंख्या कितने प्रतिशत थी?
(A) 72.22%
(B) 58.42%
(C) 67.75%
(D) 27.78%
उत्तर:
(D) 27.78%

23. निम्नलिखित में से भारत के किस राज्य में ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत सबसे अधिक है?
(A) हिमाचल प्रदेश
(B) हरियाणा
(C) केरल
(D) अरुणाचल प्रदेश
उत्तर:
(A) हिमाचल प्रदेश

24. भारत में संपूर्ण जनगणना कब संपन्न हुई थी?
(A) 1880 में
(B) 1980 में
(C) 1881 में
(D) 1981 में
उत्तर:
(C) 1881 में

25. कुल जनसंख्या में कार्यरत जनसंख्या का प्रतिशत अनुपात कहलाता है
(A) आश्रित जनसंख्या
(B) श्रमजीवी जनसंख्या
(C) सहभागिता दर
(D) व्यावसायिक संरचना
उत्तर:
(C) सहभागिता दर

26. भारत में प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या क्या दर्शाती है?
(A) ग्रामीण जनसंख्या
(B) नगरीय जनसंख्या
(C) लिंगानुपात
(D) उत्पादक जनसंख्या
उत्तर:
(C) लिंगानुपात

27. भारत में सर्वाधिक लिंगानुपात वाला राज्य कौन-सा है?
(A) केरल
(B) हरियाणा
(C) महाराष्ट्र
(D) मध्य प्रदेश
उत्तर:
(A) केरल

28. भारत में न्यूनतम लिंगानुपात वाला राज्य कौन-सा है?
(A) केरल
(B) हरियाणा
(C) महाराष्ट्र
(D) मध्य प्रदेश
उत्तर:
(B) हरियाणा

29. श्रमजीवी आयु-वर्ग कहा जाता है-
(A) 0-14 वर्ष
(B) 15-59 वर्ष
(C) 60 वर्ष से ऊपर
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) 15-59 वर्ष

30. मुख्य कामगार वर्ष में कितने दिन काम करता है?
(A) 177 दिन
(B) 180 दिन
(C) 183 दिन
(D) 186 दिन
उत्तर:
(C) 183 दिन

31. आयु-संरचना को किस आरेख द्वारा प्रदर्शित किया जाता है?
(A) सरल आरेख
(B) दण्ड आरेख
(C) बहुदण्ड आरेख
(D) आयु एवं लिंग पिरामिड
उत्तर:
(D) आयु एवं लिंग पिरामिड

32. 2011 की जनगणना के अनुसार हरियाणा में लिंगानुपात कितना है?
(A) 933 प्रति हजार
(B) 1058 प्रति हजार
(C) 877 प्रति हजार
(D) 709 प्रति हजार
उत्तर:
(C) 877 प्रति हजार

33. भारतीय भाषाओं से सम्बन्धित भाषा परिवार कितने हैं?
(A) 2
(B) 3
(C) 4
(D) 5
उत्तर:
(C) 4

34. भारत में राजभाषा हिन्दी के अलावा कितनी प्रादेशिक भाषाओं को मान्यता दी गई है?
(A) 15
(B) 16
(C) 17
(D) 21
उत्तर:
(D) 21

35. जनसंख्या की दृष्टि से अनुसूचित जनजातीय किस राज्य में कम हैं?
(A) मध्य प्रदेश
(B) गोवा
(C) उत्तर प्रदेश
(D) हरियाणा
उत्तर:
(B) गोवा

36. भारत के किस राज्य में मुस्लिम सबसे अधिक हैं?
(A) हिमाचल प्रदेश
(B) उत्तर प्रदेश
(C) मिज़ोरम
(D) केरल
उत्तर:
(B) उत्तर प्रदेश

37. भारत के किस राज्य में हिन्दू सबसे कम हैं?
(A) हिमाचल प्रदेश
(B) उत्तर प्रदेश
(C) मिज़ोरम
(D) केरल
उत्तर:
(C) मिज़ोरम

38. भारत के किस राज्य में ईसाइयों का संकेंद्रण सबसे अधिक है?
(A) हिमाचल प्रदेश
(B) उत्तर प्रदेश
(C) मिज़ोरम
(D) केरल
उत्तर:
(D) केरल

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

39. भारत के किस राज्य में सिक्ख धर्म के अनुयायी सबसे अधिक हैं?
(A) हिमाचल प्रदेश
(B) पंजाब
(C) मिज़ोरम
(D) केरल
उत्तर:
(B) पंजाब

40. सन् 2011 के अनुसार भारत में सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य कौन-सा है?
(A) पश्चिमी बंगाल
(B) उत्तर प्रदेश
(C) बिहार
(D) केरल
उत्तर:
(C) बिहार

41. सन् 2011 के अनुसार भारत में सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाले राज्य का नाम बताइए।
(A) नगालैंड
(B) अरुणाचल प्रदेश
(C) केरल
(D) गोवा
उत्तर:
(B) अरुणाचल प्रदेश

42. भारत में जनगणना कितने वर्षों के बाद की जाती है?
(A) 5
(B) 10
(C) 15
(D) 20
उत्तर:
(B) 10

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
भारत में पहली जनगणना कब हुई?
उत्तर:
सन् 1872 में।

प्रश्न 2.
भारत में पहली पूर्ण जनगणना कब हुई?
उत्तर:
सन् 1881 में।

प्रश्न 3.
जनगणना 1951 के अनुसार भारत की साक्षरता दर कितनी थी?
उत्तर:
18.33%

प्रश्न 4.
जनगणना 1951 के अनुसार भारत में स्त्री प्रत्याशा कितनी थी?
उत्तर:
36.2 वर्ष।

प्रश्न 5.
जनगणना 1951 के अनुसार भारत में पुरुष प्रत्याशा कितनी थी?
उत्तर:
37.1 वर्ष।

प्रश्न 6.
जनगणना 2001 के अनुसार भारत की साक्षरता-दर कितनी थी?
उत्तर:
64.84%।

प्रश्न 7.
जनगणना 2001 के अनुसार भारत की पुरुष साक्षरता-दर कितनी थी?
उत्तर:
75.26%।

प्रश्न 8.
जनगणना 2001 के अनुसार भारत की स्त्री साक्षरता-दर कितनी थी?
उत्तर:
53.67%।

प्रश्न 9.
सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल कितनी जनसंख्या थी?
उत्तर:
102.8 करोड़ (लगभग)।

प्रश्न 10.
2001 की जनगणना के अनुसार भारत का जनसंख्या घनत्व कितना था?
उत्तर:
325 प्रति व्यक्ति।

प्रश्न 11.
जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
दूसरा, पहला स्थान चीन का है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 12.
जनगणना 2011 के अनुसार भारत के किस राज्य में जनसंख्या घनत्व सर्वाधिक है?
उत्तर:
बिहार (1102)।

प्रश्न 13.
जनगणना 2011 के अनुसार भारत की साक्षरता दर कितनी है?
उत्तर:
74.04 प्रतिशत।

प्रश्न 14.
जनगणना 2011 के अनुसार भारत की पुरुष साक्षरता दर कितनी है?
उत्तर:
82.14 प्रतिशत।

प्रश्न 15.
भारत के मैदानी भागों में देश की कितनी जनसंख्या बसी हुई है?
उत्तर:
लगभग 52 प्रतिशत जनसंख्या।

प्रश्न 16.
जनगणना 2011 के अनुसार भारत की स्त्री साक्षरता दर कितनी है?
उत्तर:
65.46 प्रतिशत।

प्रश्न 17.
जनगणना 2011 के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या कितनी है?
उत्तर:
लगभग 121.02 करोड़।

प्रश्न 18.
सन् 2001-2011 में भारत की औसत जनसंख्या वृद्धि-दर कितनी रही?
अथवा
भारत की औसत जनसंख्या वृद्धि दर 2001-2011 के दशक में कितनी रही?
उत्तर:
17.64%।

प्रश्न 19.
जनगणना 2011 के अनुसार भारत का जनसंख्या घनत्व कितना है?
उत्तर:
382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर।

प्रश्न 20.
सर्वाधिक लिंगानुपात वाले राज्य का नाम बताइए।
उत्तर:
केरल। जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 21.
न्यूनतम लिंगानुपात वाले राज्य का नाम बताइए।
उत्तर:
हरियाणा।

प्रश्न 22.
जनगणना 2011 के अनुसार भारत का लिंगानुपात कितना है?
उत्तर:
9431

प्रश्न 23.
बौद्ध धर्म के लोग अधिकांशतः भारत के किस राज्य में केन्द्रित है?
उत्तर:

  1. सिक्किम
  2. अरुणाचल प्रदेश
  3. हिमाचल प्रदेश
  4. महाराष्ट्र।

प्रश्न 24.
भारतीय श्रमिकों का सर्वाधिक अनुपात किस सेक्टर में संलग्न है?
उत्तर:
प्राथमिक सेक्टर में।

प्रश्न 25.
भारत में विशालतम भाषाई समूह का नाम लिखिए।
उत्तर:
भारतीय यूरोपीय भाषा परिवार (आय)।

प्रश्न 26.
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा एवं सबसे छोटा राज्य कौन-सा है?
उत्तर:

  1. सबसे बड़ा उत्तर प्रदेश।
  2. सबसे छोटा-सिक्किम।

प्रश्न 27.
भारतीय संविधान में कितनी भाषाएँ अधिसूचित हैं?
उत्तर:
22 भाषाएँ।

प्रश्न 28.
भारत में न्यूनतम बाल आयु वर्ग का प्रतिशत रखने वाले दो राज्यों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. गोवा
  2. केरल।

प्रश्न 29.
भारत के आयु पिरामिड का आकार किसका घोतक है?
उत्तर:
जनसंख्या की गतिशीलता का।

प्रश्न 30.
भारत जनांकिकीय संक्रमण की किस अवस्था में आता है?
उत्तर:
तीसरी अवस्था में।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 31.
देश में सबसे कम ग्रामीण जनसंख्या किन दो राज्यों अथवा केंद्र-शासित प्रदेशों में पाई जाती है?
उत्तर:
दिल्ली तथा चण्डीगढ़।

प्रश्न 32.
राज्य की जनसंख्या में तीन-चौथाई जन-जातीय जनसंख्या वाले दो राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
मेघालय व मिज़ोरम।

प्रश्न 33.
अनुसूचित जातियों के सर्वाधिक अनुपात वाले दो राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
पंजाब व हिमाचल प्रदेश।

प्रश्न 34.
उत्तर-पूर्वी राज्यों की भाषाएँ किस भाषा परिवार से संबंधित हैं?
उत्तर:
चीनी-तिब्बती भाषा परिवार से।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
‘लिंगानुपात’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जनसंख्या का लिंग-संयोजन अक्सर एक अनुपात के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, जिसे लिंगानुपात कहते हैं। इसे ‘भारत में प्रति हजार पुरुषों के पीछे कितनी स्त्रियाँ हैं’ के द्वारा दर्शाया जाता है। प्रति हजार पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की संख्या का अनुपात लिंगानुपात कहलाता है। भारत में लिंगानुपात लगातार कम हो रहा है। उदाहरण के लिए सन् 1901 में यह लिंगानुपात 972 था जो सन् 2011 में घटकर 943 हो गया।

प्रश्न 2.
भारत में सर्वाधिक तथा न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाले राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य बिहार (1102) तथा न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाला राज्य अरुणाचल प्रदेश (17) है।

प्रश्न 3.
भारत के उच्चतम तथा न्यूनतम जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार उच्चतम जनसंख्या वृद्धि दर मेघालय (27.82%) तथा न्यूनतम जनसंख्या वृद्धि दर नगालैंड (-0.47%) की है।

प्रश्न 4.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत के चार बड़े राज्यों की जनसंख्या प्रतिशत में लिखें।
उत्तर:

क्र०सं०राज्यजनसंख्या (प्रतिशत में)
1उत्तर प्रदेश16.49 %
2महाराष्ट्र9.29 %
3बिहार8.58 %
4पश्चमी बंगाल7.55 %

प्रश्न 5.
भारत में बच्चों के घटते लिंग अनुपात के दो कारण लिखिए।
उत्तर:

  1. देश में कन्या भ्रूण हत्या की घटनाओं से लिंग अनुपात घटता है।
  2. गर्भवती स्त्री के स्वास्थ्य की ओर ध्यान न देने से बच्चे व माँ के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 6.
जनसंख्या की वृद्धि दर से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
दो समय बिंदुओं के बीच हुए जनसंख्या के परिवर्तन को यदि प्रतिशत में व्यक्त किया जाए तो उसे जनसंख्या की वृद्धि दर कहते हैं। इसे सदैव प्रतिशतता में ही व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 7.
भारत को गाँवों का देश क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
भारत की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण है इसलिए भारत को गाँवों का देश कहा जाता है।

प्रश्न 8.
अब तक भारत में कितनी जनगणनाएँ हो चुकी हैं?
उत्तर:
सन् 2011 तक भारत में 15 व स्वतंत्र भारत में 7 जनगणनाएँ हो चुकी हैं।

प्रश्न 9.
सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या कितने-कितने प्रतिशत थी?
उत्तर:
ग्रामीण जनसंख्या 72.22 प्रतिशत तथा नगरीय जनसंख्या 27.78 प्रतिशत थी।

प्रश्न 10.
जनसंख्या वृद्धि क्या है?
उत्तर:
किसी क्षेत्र विशेष में किसी दिए गए समय में जनसंख्या आकार में होने वाले परिवर्तन को जनसंख्या वृद्धि कहते हैं। यह धनात्मक व ऋणात्मक दोनों हो सकती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 11.
जनसंख्या वितरण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जनसंख्या वितरण उस तरीके को प्रदर्शित करता है जिसके अंतर्गत मानव किसी दिए गए क्षेत्र या स्थल में वितरित होता है। इसका संबंध स्थल से होता है।

प्रश्न 12.
भारत में जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के कोई तीन उपाय बताइए।
उत्तर:

  1. कृषि एवं उद्योगों के क्षेत्र में उत्पादन में वृद्धि करना।
  2. शिक्षा का प्रसार करना।
  3. परिवार नियोजन संबंधी कार्यक्रमों का विस्तार करना।

प्रश्न 13.
2001 की जनगणना के अनुसार सर्वाधिक तथा न्यूनतम लिंगानुपात वाले राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
सर्वाधिक : केरल (1058); न्यूनतम : हरियाणा (861)।

प्रश्न 14.
2011 की जनगणना के अनुसार सर्वाधिक तथा न्यूनतम लिंगानुपात वाले केंद्र-शासित प्रदेशों के नाम बताइए।
उत्तर:
सर्वाधिक : पुडुचेरी (1038); न्यूनतम : दमन और दीव (618)।

प्रश्न 15.
आश्रित अनुपात क्या होता है?
उत्तर:
प्रौढ़ों तथा किशोरों और वृद्धों के बीच जनसंख्या के अनुपात को आश्रित अनुपात कहते हैं।

प्रश्न 16.
भारतीय भाषाओं से संबंधित चार भाषा परिवारों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. आग्नेय (आस्ट्रिक) परिवार
  2. चीनी-तिब्बती परिवार
  3. द्रविड़ भाषा परिवार तथा
  4. भारतीय-यूरोपीय (आर्य) परिवार।

प्रश्न 17.
भारत में ईसाई धर्म सबसे पहले कब और कहाँ आया?
उत्तर:
प्रथम शताब्दी में भारत के पश्चिमी तट पर केरल की कोच्चि बंदरगाह पर सीरियाई ईसाइयों ने पहुँचकर ईसाई धर्म का भारत में आरंभ किया।

प्रश्न 18.
सांस्कृतिक विलयन क्या होता है?
उत्तर:
विभिन्न प्रदेशों के बीच सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक गुणों के आपसी संपर्क को सांस्कृतिक विलयन कहा जाता है।

प्रश्न 19.
भारत के सात शास्त्रीय नृत्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
कत्थक, ओडिसी, मणिपुरी, कुचिपुड़ी, कथकली, भरतनाट्यम और मोहिनी अट्टम।

प्रश्न 20.
जनगणना 2011 में भारत की जनसंख्या कितनी थी? विश्व में जनसंख्या एवं क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
वर्ष 2011 में भारतवर्ष की जनसंख्या 121.02 करोड़ थी। जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में दूसरा और क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवाँ स्थान है।

प्रश्न 21.
प्रत्येक उत्तरोत्तर जनगणना में जनसंख्या का घनत्व क्यों बढ़ रहा है?
उत्तर:
भारत की जनसंख्या निरंतर बढ़ रही है, जबकि क्षेत्रफल सदैव निश्चित रहता है। इसलिए प्रत्येक उत्तरोत्तर जनगणना में जनसंख्या का घनत्व बढ़ जाता है।

प्रश्न 22.
जनसंख्या घनत्व क्या है?
उत्तर:
किसी भी प्रदेश की जनसंख्या और उस प्रदेश की भूमि के क्षेत्र फल के पारस्परिक अनुपात को जनसंख्या घनत्व कहते हैं।

प्रश्न 23.
साक्षरता क्या है?
उत्तर:
यद्यपि साक्षरता (Literacy) जनसंख्या का एक सामाजिक पक्ष है तथापि यह जनसंख्या की गुणवत्ता का बोध कराती है। व्यापक रूप से साक्षरता वह ज्ञान है जो लोगों में जागृति लाए। साधारणतया साक्षरता लोगों को किसी भाषा में समझ के साथ लिखने या पढ़ने की योग्यता को कहा जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ जनसंख्या आयोग के अनुसार, “साक्षर वह व्यक्ति है जो किसी भाषा में साधारण संदेश को पढ़, लिख और समझ सकता है।”

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प्रश्न 24.
भारत किन चार प्रमुख धर्मों का जन्म-स्थान है?
उत्तर:

  1. हिंदू धर्म
  2. बौद्ध धर्म
  3. जैन धर्म
  4. सिक्ख धर्म।

प्रश्न 25.
जन-जातियों में सहभागिता दर सबसे अधिक क्यों पाई जाती है?
उत्तर:
जन-जातीय समुदाय एक खुला समाज होता है। इनमें पुरुषों, स्त्रियों और बच्चों की प्रतिष्ठा समान होती है और वे सभी अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार कार्य करते हैं। इसलिए उनमें सहभागिता दर सबसे अधिक होती है।

प्रश्न 26.
देश के किस भाग में ग्रामीण जनसंख्या का अनुपात राष्ट्रीय औसत से अधिक है?
उत्तर:
पंजाब और हरियाणा को छोड़कर उत्तरी भारत के सभी राज्यों, पश्चिमी बंगाल को छोड़कर सभी उत्तर:पूर्वी भागों और मध्य भारत के राज्यों में ग्रामीण जनसंख्या का अनुपात राष्ट्रीय औसत से अधिक है।

प्रश्न 27.
किशोरों, प्रौढ़ों और वृद्धों की आयु सीमाएँ दीजिए।
उत्तर:

  1. किशोर – 15 वर्ष से नीचे।
  2. प्रौढ़ – 15-59 वर्ष।
  3. वृद्ध – 60 वर्ष व इससे ऊपर।

प्रश्न 28.
भारत में आयु पिरामिड की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  1. भारत के आयु पिरामिड का आधार बहुत चौड़ा है जो प्रारंभिक आयु वर्गों तक बना रहता है।
  2. आयु पिरामिड ऊपर की ओर संकरा होता जाता है।

प्रश्न 29.
जनसंख्या संरचना क्या है? अथवा जनसंख्या संघटन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जनसंख्या की भौतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को जनसंख्या की संरचना या संघटन या संयोजन कहा जाता है। जनसंख्या का संयोजन लिंग, आयु, श्रम-शक्ति, आवास, इकाइयों, धर्म, भाषा, वैवाहिक स्थिति, साक्षरता शिक्षा और व्यावसायिक संरचना से होता है।

प्रश्न 30.
सतलुज गंगा के मैदान में जनसंख्या के अधिक गहन होने के कारण बताइए।
उत्तर:
सतलुज गंगा के मैदान में जनसंख्या के अधिक गहन होने के कारण निम्नलिखित हैं-

  1. सर्वाधिक उपजाऊ क्षेत्र
  2. औद्योगिक और नगरीय विकास
  3. सुविधाओं का संकेंद्रण।

प्रश्न 31.
कुल जनसंख्या और जनसंख्या घनत्व में क्या अंतर है?
अथवा
कुल जनसंख्या और जनसंख्या घनत्व क्या है?
उत्तर:
कल जनसंख्या दो समय बिंदुओं के बीच एक क्षेत्र विशेष में रहने वाली जनसंख्या को कुल जनसंख्या कहते हैं। जनसंख्या घनत्व-किसी देश की कुल जनसंख्या और उसके कुल क्षेत्रफल के अनुपात को वहाँ का जनसंख्या घनत्व कहते हैं।

प्रश्न 32.
जनसंख्या की प्रमुख जनांकिकीय विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
जनसंख्या संयोजन की विशेषताओं को जनांकिकीय विशेषताएँ कहते हैं। जनांकिकीय विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. नगरीय तथा ग्रामीण जनसंख्या
  2. लिंग संरचना
  3. श्रमिक तथा आश्रित जनसंख्या।

प्रश्न 33.
‘सहभागिता दर’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
सहभागिता दर श्रम का अनुपात है। इसे कुल जनसंख्या में कार्यरत जनसंख्या के प्रतिशत द्वारा व्यक्त किया जाता है। सहभागिता अनुपात पुरुषों तथा स्त्रियों के लिए अलग-अलग होता है।

प्रश्न 34.
भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में कितनी भाषाओं को राज्य-भाषा का दर्जा प्राप्त है?
उत्तर:
भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को राज्य-भाषा का दर्जा प्राप्त है-

  1. हिन्दी
  2. तेलुगू
  3. बांग्ला
  4. मराठी
  5. तमिल
  6. उर्दू
  7. गुजराती
  8. मलयालम
  9. कन्नड़
  10. ओड़िया
  11. असमिया
  12. पंजाबी
  13. कश्मीरी
  14. सिंधी
  15. संस्कृत
  16. कोंकणी
  17. मणिपुरी
  18. नेपाली
  19. डोगरी
  20. मैथिली
  21. बोडो
  22. संथाली।

प्रश्न 35.
द्रविड़ भाषा परिवार का विवरण दीजिए। अथवा . द्रविड़ भाषा परिवार की कौन-सी चार मुख्य भाषाएँ हैं?
उत्तर:
द्रविड़ भाषा परिवार में दक्षिणी द्रविड़, मध्य द्रविड़ तथा उत्तरी द्रविड़ भाषाएँ सम्मिलित हैं। दक्षिणी द्रविड़ में मुख्य भाषाएँ तमिल, मलयालम, कन्नड़ तथा गौण भाषाओं में तुल, कुरगी तथा येरुकला सम्मिलित हैं। मध्य द्रविड़ की मुख्य भाषाएँ तेलुगू तथा गोंडी तथा उत्तरी द्रविड़ वर्ग में कुरुख तथा मालती हैं। वास्तव में 96% द्रविड़-भाषी जनसंख्या चार भाषाएँ-(1) तमिल, (2) तेलुगू, (3) कन्नड़, (4) मलयालम बोलती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 36.
अनुसूचित जातियों का संकेंद्रण देश के जलोढ़ तथा तटीय मैदानों में अधिक है, कारण बताइए।
उत्तर:
भारत की अनुसूचित जाति का अधिकतम संकेंद्रणं सिंधु-गंगा के मैदान तथा भारत के पूर्वी तथा पश्चिमी तटीय मैदानों में पाया जाता है। इसका कारण यह है कि यहाँ समतल उपजाऊ मैदान हैं, पर्याप्त जल-सुविधा है। मिट्टी कोमल तथा उपजाऊ है तथा अनेक प्रकार की फसलों के लिए उपयुक्त जलवायु है। भारत में अधिकतर अनुसूचित जाति के लोग कृषि-श्रमिक हैं और कृषि पर ही उनकी जीविका निर्भर है। अतः जलोढ़ तथा तटीय मैदान में इस जाति का संकेंद्रण अधिक पाया जाता है।

प्रश्न 37.
भारत के लोगों की भाषाओं तथा बोलियों में अत्यधिक विविधता पाई जाती है, कारण बताइए।
उत्तर:
भारत एक विशाल देश है। यहाँ लगभग हर क्षेत्र में विविधता पाई जाती है। भाषाएँ तथा बोलियाँ भी इस संदर्भ में अछूती नहीं हैं। यहाँ विभिन्न युगों में बाहर से मानव प्रजाति का आगमन होता रहा है। वे अपने साथ विभिन्न क्षेत्रों की भाषाएँ तथा बोलियाँ भी साथ लाए थे। अतः यही कारण है कि आज भी भारत के लोगों की भाषाओं और बोलियों में अत्यधिक विविधताएँ पाई जाती हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत के केंद्र-शासित प्रदेशों की जनसंख्या (प्रतिशत में) और घनत्व (व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०) का विवरण दें।
उत्तर:

केंद्र-शासित प्रदेशजनसंख्या (प्रतिशत में)घनत्व (व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०)
1. दिल्ली1.3811,297
2. चण्डीगद0.099,252
3. पुद्धचेरी0.102,598
4. दमन व दीव0.022169
5. लक्षद्वीप0.012,013
6. दादर व नगर हवेली0.03698
7. अंडमान व निकोबार द्वीप-समूह0.0346

प्रश्न 2.
जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले सामाजिक, आर्थिक कारकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
मनुष्य ने अपने क्रियाकलापों, प्रौद्योगिकी ज्ञान और सामाजिक संगठनों द्वारा भौतिक कारकों को अपने हित मे बदलने का प्रयत्न किया है। विभिन्न प्रकार की अर्थव्यवस्थाओं की पोषण क्षमता में अंतर पाया जाता है। प्राथमिक क्रियाकलापों की पोषण क्षमता कम होती है जबकि द्वितीयक और तृतीयक क्रियाकलापों की पोषण क्षमता अधिक होती है। इसलिए नगरीय और औद्योगिक क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक पाया जाता है। इसी प्रकार आधुनिक कृषि संपन्न क्षेत्रों में भी जनसंख्या का घनत्व अधिक पाया जाता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब ऐसे ही कुछ क्षेत्र हैं जहाँ जनसंख्या का उच्च घनत्व पाया जाता है।

प्रश्न 3.
भारत के उत्तरी मैदान में जनसंख्या का घनत्व समवृष्टि का अनुसरण करता है, कारण दीजिए।
उत्तर:
भारत का उत्तरी विशाल मैदान, कृषि की दृष्टि से बहुत संपन्न क्षेत्र है। यह समतल उपजाऊ मैदान है जो नदियों द्वारा लाए गए पदार्थ के जमाव से बना है। कृषि के लिए जल की उपलब्धि एक महत्त्वपूर्ण कारक है।

भारत के उत्तरी मैदान में ज्यों-ज्यों हम पूर्व से पश्चिम की ओर जाएँ, वर्षा की मात्रा कम होती जाती है। भारत के सुदूर उत्तर:पूर्वी राज्यों में 400 से०मी० से अधिक वार्षिक वर्षा होती है तथा यहाँ से पश्चिम की ओर जाने से वर्षा की मात्रा में कमी आती रहती है। पश्चिमी बंगाल, बिहार तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में वर्षा की मात्रा 100 से 200 सें०मी० वार्षिक है। मध्य उत्तर प्रदेश, पश्चिम उत्तर प्रदेश में 60 से 100 सें०मी० तक वर्षा का औसत पाया जाता है।

फिर हरियाणा और दक्षिणी पंजाब में 40 सें०मी० से 60 सें०मी० तथा पूर्वी राजस्थान में 20 से 40 और पश्चिमी राजस्थान में 20 सें०मी० से कम वर्षा का औसत वितरण पाया जाता है। इस प्रकार पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा कम होती जाती है। इसी प्रकार उत्तरी मैदान में जनसंख्या का घनत्व भी इसी क्रम से पश्चिम की ओर कम होता जाता है। अतः कृषि के लिए जल का महत्त्व ही इस प्रकार के उत्तरी मैदान में जनसंख्या के वितरण का कारण है।

प्रश्न 4.
आदर्श जनसंख्या किसी देश के विकास के लिए क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
आदर्श जनसंख्या वह कहलाती है जब कोई देश पूरी तरह सम्पन्न हो तथा लोगों की प्रति व्यक्ति आय अधिक हो । यदि देश में उपलब्ध संसाधनों का प्रयोग संतुलित रूप से हो तो वहाँ के लोग सुखी और सुविधा सम्पन्न होंगे। इसलिए देश में न तो बहुत अधिक जनसंख्या होनी चाहिए न ही बहुत कम। किसी भी देश में आदर्श जनसंख्या, संसाधनों के उपयोग की विधियों और विकास की स्थिति बदलने के साथ-साथ बदलती रहती है। अतः आदर्श जनसंख्या वही है जिसके द्वारा अधिक-से-अधिक मानव कल्याण हो सके।

प्रश्न 5.
“भारत में जनसंख्या का विषम स्थानिक वितरण उसे प्रभावित करने वाले कारकों में घनिष्ठ संबंध कैसे है?” स्पष्ट करें।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या का विषम स्थानिक वितरण देश की जनसंख्या और भौतिक, सामाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक कारकों के बीच घनिष्ठ संबंध प्रकट करता है। जहाँ तक भौतिक कारकों का संबंध है भू-विन्यास, जल की उपलब्धता, जलवायु जनसंख्या के वितरण को निर्धारित करते हैं। परिणामतः उत्तर भारत के मैदानों, डेल्टा प्रदेशों और तटीय मैदानों में जनसंख्या का अनुपात दक्षिण और मध्य भारत के राज्यों के कुछ भागों हिमालय क्षेत्र, उत्तर:पूर्व की अपेक्षा उच्चतरं है फिर भी सिंचाई के विकास, खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता और परिवहन जाल के विकास के कारण विरल जनसंख्या के कुछ क्षेत्र अब मध्यम से उच्च संकेंद्रण के क्षेत्र हो गए हैं। जनसंख्या वितरण के सामाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक कारकों से महत्त्वपूर्ण कारक स्थायी कृषि का उद्भव, विकास, मानव बस्ती के प्रतिरूप, परिवहन के साधन, औद्योगीकरण और नगरीकरण हैं।

प्रश्न 6.
मुख्य, सीमान्त एवं अकर्मक कामगार (श्रमिक) क्या हैं?
उत्तर:
मुख्य कामगार-सन् 1991 की जनगणना के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो एक वर्ष में 183 दिन तक आर्थिक दृष्टि से लाभकारी कार्य में संलग्न रहा हो, मुख्य कामगार (श्रमिक) कहलाता है।

सीमान्त कामगार-जो श्रमिक वर्ष में 183 दिन से कम रोजगार पाता है, वह सीमान्त कामगार अकर्मक कामगार-जो श्रमिक गैर-कामगार होते हैं वे अकर्मक कामगार कहलाते हैं।

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प्रश्न 7.
ग्रामीण जनसंख्या तथा नगरीय जनसंख्या की तुलना करें।
उत्तर:
ग्रामीण जनसंख्या तथा नगरीय जनसंख्या की तुलना निम्नलिखित प्रकार से है-

ग्रामीण जनसंख्यानगरीय जनसंख्या
1. ग्रामीण लोगों का प्रमुख व्यवसाय कृषि तथा पशुपालन है।1. नगरीय लोगों का प्रमुख व्यवसाय निर्माण उद्योग, व्यापार तथा तृतीयक व्यवसाय है।
2. यहाँ के लोगों को आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होती हैं।2. इन्हें लगभग नई आधुनिक सुविधाएँ; जैसे परिवहन, चिकित्सा, शिक्षा तथा मनोरंजन के साधन आदि उपलब्ध होते हैं।
3. ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक नहीं होता।3. नगरीय क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है।

प्रश्न 8.
उत्पादक और आश्रित जनसंख्या में क्या अंतर है?
अथवा
कार्यशील आयुवर्ग व प्रजनक आयुवर्ग में क्या अंतर है?
उत्तर:
उत्पादक और आश्रित जनसंख्या में निम्नलिखित अंतर हैं-

उत्पादक जनसंख्याअभ्रित जनसंख्या
1. उत्पादक जनसंख्या लाभदायक आर्थिक क्रियाओं में काम करती है।1. आश्रित जनसंख्या, आर्थिक क्रियाओं में विशेष योगदान नहीं देती ।
2. ऐसे लोगों के समुदाय को श्रमिक बल कहा जाता है।2. ऐसे लोगों के समुदाय को अश्रमिक बल कहा जाता है।
3. इस वर्ग में 15 से 59 वर्ष की आयु के लोग आते हैं।3. इस वर्ग में 15 वर्ष से कम तथा 60 वर्ष से ऊपर की आयु के लोग आते हैं।
4. ये लोग स्वयं परिश्रम करके अपना जीवन-निर्वाह करते हैं।4. ये लोग बेरोज़गार होते हैं तथा श्रमिक लोगों पर आश्रित रहते हैं।

प्रश्न 9.
भारत में लिंगानुपात बहुत कम है, कारण बताएँ।
उत्तर:
भारत में लिंगानुपात बहुत कम है। इसके निम्नलिखित कारण हैं-

  1. भारत में लड़कों की अपेक्षा लड़कियों के स्वास्थ्य, शिक्षा आदि पर कम ध्यान दिया जाता है, जिसके कारण स्त्रियों की प्रायः मृत्यु हो जाती है।
  2. भारत के कई भागों में बाल-विवाह की प्रथा प्रचलित है, जिसके कारण छोटी आयु में, प्रायः प्रसूति काल में ही लड़कियों की मृत्यु हो जाती है।
  3. दहेज जैसी कुप्रथा के कारण कई स्त्रियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।
  4. आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति से लोग पहले ही लिंग का पता लगा लेते हैं तथा पुत्र की लालसा में स्त्री-लिंग होने पर गर्भ गिरा देते हैं।

प्रश्न 10.
चंडीगढ़ में लिंगानुपात कम पाया जाता है। कारण बताइए।
उत्तर:
चंडीगढ़ का लिंग अनुपात 773 है अर्थात् हर 1,000 पुरुषों के पीछे 773 स्त्रियाँ हैं। यह अनुपात देश के सभी केंद्र-शासित प्रदेशों में सबसे कम है। इसका मुख्य कारण नगर की प्रकृति है। यह पंजाब तथा हरियाणा की राजधानी भी है। यहाँ बड़ी संख्या जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन में वेतनभोगी लोग सरकारी तथा दूसरे कार्यालयों में काम करते हैं। इनमें कुछ दैनिक यात्री तथा कुछ अस्थायी तौर पर चंडीगढ़ में रहते हैं तथा चंडीगढ़ की जनसंख्या में शामिल कर लिए जाते हैं। ऐसे लोगों में पुरुषों की संख्या अधिक होती है। इस कारण चंडीगढ़ में लिंगानुपात बहुत कम हो गया है। ये लोग अपने परिवारों को गाँवों में ही छोड़कर आते हैं।

प्रश्न 11.
भारतीय जनसंख्या के घनत्व का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या का घनत्व 1901 में 77 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से बढ़कर 2001 में 334 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० . हो गया। इस प्रकार विगत एक शताब्दी में 257 व्यक्ति वर्ग कि०मी० की उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में वर्तमान में जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। भारत में जनसंख्या घनत्व को निम्न तालिका में दर्शाया गया है
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प्रश्न 12.
सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना के मुख्य लक्षणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
2001 की जनगणना के अनुसार भारत की व्यावसायिक संरचना के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं-

  1. सन् 1991 की तुलना में देश में किसानों की जनसंख्या घटी है। 1991 में भारत में किसानों की जनसंख्या 38.41 प्रतिशत थी जबकि 2001 में वो घटकर 31.71 प्रतिशत रह गई।
  2. किसान (31.71%) तथा कृषि मजदूर (26.69%) संयुक्त रूप से (58.4%) साबित करते हैं।
  3. कृषि सेक्टर में श्रमिकों के अनुपात में उतार आने से द्वितीयक और तृतीयक सेक्टर में सहभागिता दर बढ़ी है।
  4. इससे श्रमिकों की खेत आधारित रोजगारों पर निर्भरता से गैर-खेत आधारित रोजगारों पर निर्भरता बढ़ गई है।
  5. इससे द्वितीयक क्षेत्र की खेती में न खप सकने वाली श्रम शक्ति को अधिक रोजगार न दे पाने की असमर्थता भी उजागर होती है।
  6. यदि लिंग के अनुसार देखा जाए तो 72% स्त्रियाँ कृषि कार्यों में लगी हैं, जबकि पुरुष केवल 53% ही हैं।
  7. गैर कृषि कार्यों में 28% स्त्रियाँ तथा 52.16% पुरुष कामगार हैं।
  8. घरेलू उद्योगों का महत्त्व भी बढ़ने लगा है, 2001 के अनुसार इनकी संख्या 5% हो गई है।
  9. विनिर्माण, व्यापार, उद्योग, परिवहन, संचार, भंडारण तथा अन्य गैर-कृषिक कार्यों में देश के लगभग 42% कामगार लगे हुए हैं।
  10. तृतीयक कार्यों का अधिक अनुपात मुख्यतः नगरीकृत जिलों तक सीमित है।

प्रश्न 13.
भारत के लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं को कितने भाषा परिवारों में बांटा गया है? उल्लेख करें।
उत्तर:
भारत में बोली जाने वाली भाषाओं को निम्नलिखित भाषाई-परिवारों में बांटा गया है-

  • आस्ट्रिक भाषा परिवार
  • द्रविड़ भाषा परिवार
  • चीन-तिब्बती परिवार
  • भारतीय यूरोपीय परिवार (आय)।

भारत में अधिकतर आर्य परिवार की बोली पाई जाती है। इनमें हिंदी बोलने वालों की संख्या सबसे अधिक है। हिंदी भाषा बोलने वाले निम्नलिखित हैं

  • हरियाणा
  • हिमाचल प्रदेश
  • राजस्थान
  • बिहार
  • मध्य प्रदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • दिल्ली।

भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा हिंदी है जो देवनागरी लिपि में लिखी जाती है।

प्रश्न 14.
भारत की धार्मिक विविधता में भी एकता है, स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत प्राचीन समय से एक महान् देश रहा है। यहाँ विभिन्न प्रकार के धर्मों ने जन्म लिया। इस समय देश में सात धर्म पाए जाते हैं। हिंदू, सिक्ख, जैन तथा बौद्ध धर्मों ने इसी देश में जन्म लिया। मुस्लिम तथा ईसाई धर्म के अनुयायी भी भारत में काफी समय से रह रहे हैं। पारसी धर्म के लोग विदेशी हैं। इन सब धर्मों ने भारतीय संस्कृति, कला, रीति-रिवाज तथा बस्तियों आदि को बहुत प्रभावित किया। इस प्रकार धर्मों ने भारत में विविधता प्रदान की है, परंतु भारत एक धर्म-निरपेक्ष देश है, जिसने विभिन्न धर्मों के अनयायियों को एकता के सूत्र में बांध रखा है। सभी लोग मिल-जुलकर रहते हैं। एक ही स्थान पर मंदिर, गुरुद्वारा तथा मस्जिद पास-पास पाए जाते हैं तथा उसी जगह के रहने वाले लोग अपने-अपने इष्ट देवता की आराधना करते हैं। ईद, क्रिसमिस आदि के दिन लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं। यह सब एकता का प्रतीक है।

प्रश्न 15.
भारत में जन-जातियों का वितरण असमान है, क्या कारण है?
उत्तर:
भारतीय जन-जाति प्रायः अनुसूचित जातियों में पाई जाती है। सन् 1991 की जनगणना के अनुसार भारत में जन-जातियों की जनसंख्या 6 करोड़, 77 लाख थी जो कुल भारतीय जनसंख्या का 8% थी, परंतु भारत में इनका वितरण बहुत ही असमान है। इनका अधिकतर संकेंद्रण मिजोरम, नगालैंड, मेघालय के पहाड़ी तथा जंगली क्षेत्रों में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त ये मध्य प्रदेश, बिहार, उड़ीसा आदि राज्यों के ऊबड़-खाबड़ तथा जंगली इलाकों में अधिकतर पाए जाते हैं।

इसका कारण यह है कि पहाड़ी तथा जंगली भाग इन जातियों की सांस्कृतिक मान्यताएँ रहे हैं। दूसरे, ये लोग अधिकतर वहाँ रहते हैं जो क्षेत्र कृषि के लिए अनुकूल नहीं हैं। अतः इनका व्यवसाय तथा जीवन-पद्धति का संबंध इनके निकट के प्राकृतिक वातावरण के काफी निकट होता है। ये जन-जातियाँ कृषि-कार्य करना पसंद करती हैं, इसलिए ये लोग कृषि के उन्नत क्षेत्रों से दूर-दराज के पहाड़ी तथा जंगली क्षेत्रों को स्थानांतरण कर गए हैं। इन्हीं कारणों से इन लोगों का वितरण बहुत ही असमान है।

प्रश्न 16.
उत्तर के जलोढ़ मैदानों में अनुसूचित जातियों के संकेंद्रण की प्रवृत्ति प्रबल क्यों है?
उत्तर:
भारत में अनुसूचित जातियों का संकेंद्रण उत्तर के जलोढ़ मैदानों तथा तटीय मैदानों में है। उत्तरी मैदान में पश्चिमी बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब तथा राजस्थान में इनकी संख्या लगभग चार करोड़ है। पूर्वी तथा पश्चिमी तटीय मैदानों में उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र तथा केरल में अनुसूचित जाति के लोगों की संख्या लगभग दो करोड़ है। इसके निम्नलिखित कारण हैं
(i) इन प्रदेशों में गहन कृषि की जाती है। इसलिए अधिक मजदूरों की आवश्यकता होती है।

(ii) अनुसूचित जाति के अधिकतर लोग खेतीहर मजदूर हैं। यहाँ की उपयुक्त जलवायु, उपजाऊ मिट्टी तथा पर्याप्त मात्रा में जल के कारण इन क्षेत्रों में कृषि का विकास अधिक हआ है। इन श्रमिकों को यहाँ रोजगार मिल जाता है।

(iii) यहाँ आर्थिक विकास अधिक है। इसलिए अनुसूचित जाति के लोग चमड़ा शोधन उद्योग तथा जूता निर्माण उद्योग आदि में कार्यरत हैं।

प्रश्न 17.
“भारत का जन-जातीय समुदाय देश की नृ-जातीय विविधताओं का एक रोचक चित्र प्रस्तुत करता है।” इस कथन पर अपने विचार दीजिए।
उत्तर:
जन-जातीय जनसंख्या भारत की जनसंख्या का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। प्राचीन समय में बाहर से आने वाले प्रजाति समूह द्वारा जो लोग बाहर दूर-दराज जंगली क्षेत्र में खदेड़ दिए गए थे, वे ही आज जन-जातीय जनसंख्या कहलाती हैं। इनको आदिवासी कहते हैं। भारत की वर्तमान जनसंख्या में सांस्कृतिक तथा जातीय विविधता पूर्ण रूप से दिखाई देती है। इसका मुख्य कारण भारतीय महाद्वीप में लंबे समय से मनुष्यों के आबाद होने की प्रक्रिया है। अलग-अलग समयों में अलग-अलग मानव समूह भारत में आए तथा विभिन्न क्षेत्रों में स्थानांतरित होते रहे तथा आपसी तथा स्थानीय जातियों के आपस में मिश्रण के कारण अलग से संस्कृति का जन्म हुआ। विभिन्न जातियों में सामाजिक तथा सांस्कृतिक मिलन होता रहा। प्रत्येक जाति-समूह ने अपनी अलग विशेषता प्राप्त की। इसलिए भारतीय जातियों में विविधताएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 18.
आयु संरचना क्या है? आयु वर्ग की दृष्टि से भारत की जनसंख्या को वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर:
आयु संरचना-किसी दी गई जनसंख्या में विभिन्न आयु वर्ग की जनसंख्या के मिलने वाले अनुपात को आयु संरचना कहते हैं। आयु वर्ग की दृष्टि से जनसंख्या का वर्गीकरण-आयु वर्ग की दृष्टि से भारत की जनसंख्या को निम्नलिखित तीन वर्गों में विभाजित किया गया है
1. बाल आयु वर्ग इसमें 0 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को सम्मिलित किया जाता है। सन् 2011 में भारत की कुल जनसंख्या में बाल आय वर्ग का प्रतिशत 29.5 रहा। यह आय वर्ग आश्रित आय वर्ग होता है।

2. युवा आयु वर्ग इसमें 15-59 वर्ष के आयु समूह को सम्मिलित किया गया है। सन् 2011 में भारत की कुल जनसंख्या में युवा वर्ग का प्रतिशत 62.5 रहा। यह वर्ग देश को विकास की ओर अग्रसर करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

3. वृद्ध आयु वर्ग इसमें 60 वर्ष से अधिक के आयु समूह को सम्मिलित किया गया है। सन् 2011 में भारत की कुल जनसंख्या में वृद्ध वर्ग का प्रतिशत 8 रहा। किसी भी देश के इस वर्ग की अधिक जनसंख्या अधिक महत्त्वपूर्ण नहीं होती।

प्रश्न 19.
भारत में तीव्र जनसंख्या वृद्धि के काल को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
भारत में जनसंख्या वृद्धि के इतिहास को स्पष्ट करें।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या वृद्धि के इतिहास/काल को हम निम्नलिखित तीन युगों में बांट सकते हैं
1. जनसंख्या वृद्धि की धीमी गति का युग-यह समय सन् 1921 से पहले का समय है। सन् 1911 से 1921 के दशक में जनसंख्या में कमी देखने को मिली है। अनुमान है कि सन् 1891 से 1921 के बीच के 30 वर्षों में केवल 6% जनसंख्या ही बढ़ी है।

2. जनसंख्या वृद्धि का मध्यम गतिकाल यह सन् 1921 से 1951 के बीच का काल है। इस काल में सन् 1921 से पहले के दशकों की अपेक्षा थोड़ी तेज गति से वृद्धि हुई, परंतु यह मध्यम गति से बढ़ी।

3. जनसंख्या का तीव्र गति से बढ़ने का युग-सन् 1951 से 1991 के बीच का काल तीव्र गति से जनसंख्या वृद्धि का काल कहलाता है। सन् 1951 से 1981 के बीच भारत की जनसंख्या लगभग दुगुनी और 1991 में यह ढाई गुना हो गई। हालांकि मामूली-सी कमी 1991 में वृद्धि-दर का 24.75% से घटकर 23.50% हो जाना था। सन् 2001 में वृद्धि दर 21.34% एवं सन् 2011 में वृद्धिं-दर 17.64% आंकी गई।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विगत वर्षों में भारत में जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्तियों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
वृद्धि प्राकृतिक है तथा प्रवासी वृद्धि बहुत कम है। अखिल भारतीय स्तर पर सर्वप्रथम सन् 1872 में जनगणना हुई थी, जो देश के अनेक भागों में की गई अलग-अलग जनसंख्या का जोड़ था। सन् 1881 में नियमित जनगणना का आरंभ हुआ, जो प्रत्येक 10 वर्ष के पश्चात् होती है। सन् 1981 की जनगणना के अनुसार, भारत की जनसंख्या 68.5 करोड़ थी। वर्तमान समय में लगभग 1.3 मिलियन व्यक्ति प्रति वर्ष मर जाते हैं। इस प्रकार भारत की वृद्धि दर 15 मिलियन व्यक्ति प्रति वर्ष है जो ऑस्ट्रेलिया की जनसंख्या के बराबर है अर्थात् जनसंख्या की दृष्टि से भारत में एक ऑस्ट्रेलिया प्रतिवर्ष जुड़ जाता है। जनसंख्या वृद्धि निम्नलिखित दो प्रकार की होती है (1) प्राकृतिक वृद्धि-दर, (2) वास्तविक वृद्धि-दर।

भारत की जनसंख्या वृद्धि के इतिहास पर नज़र डालने पर बहुत ही आश्चर्यजनक बातें हमारे सामने आती हैं। अनुमानतः सन् 1600 में भारत की कुल जनसंख्या 10 करोड़ थी। सन् 1800 में यह लगभग 12 करोड़ थी। इसका मतलब यह हुआ कि 200 वर्षों में भारत की जनसंख्या केवल 2 करोड़ बढ़ी, लेकिन सन् 1871 में यह जनसंख्या दोगुनी अर्थात् 25.5 करोड़ हो गई। सन् 1800 से 1871 अर्थात् 71 वर्ष का समय तीव्र जनसंख्या वृद्धि का समय था।

नीचे दी गई तालिका से भारत में जनसंख्या वृद्धि को दशकों में बांटकर रखा गया है-

दशकीय वृद्धि
जनगणना वर्षजनसंख्यानिरपेक्षप्रतिशत
1901238,396,327––
1911252,093,39013,697,0635.75
1921251,321,213-772,177(-) 0.31
1931278,977,23827,656,02511.00
1941318,660,58039,683,34214.22
1951361,088,09042,427,51013.31
1961439,234,77178,146,68121.51
1971548,159,625108,924,88124.80
1981683,329,097135,169,44524.66
1991846,302,688162,973,59123.87
20011,028,737,436182,307,64021.54
20111,210,726,932181,583,09417.64

स्लोत : भारत – 2016

20वीं शताब्दी में भारत की जनसंख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। सन् 1901 में भारत की कुल जनसंख्या 23,83,96,327 व्यक्ति थी, जो 1911 में बढ़कर 25,20,93,390 व्यक्ति हो गई। इस तरह से 1901-11 के दशक में 1,36,97,063 व्यक्तियों की वृद्धि भारत में हुई, जो 5.75% थी। सन् 1921 में, देश की जनसंख्या 25,13,21,213 व्यक्ति रह गई। 1911-21 के दशक को अपवाद माना जाए, जिसमें 7,72,177 व्यक्ति अर्थात् संख्या में 0.31% की कमी हुई। 1921-31 के दशक में 11.00% की वृद्धि हई। 1931-41 में 14.22% वृद्धि देखने को मिली। 1941-51 के दशक में 13.31% वृद्धि हुई। 1951-61 में 21.64% वृद्धि तथा सन् 1971 में 24.80% वृद्धि हुई, जो 20वीं शताब्दी की सर्वाधिक वृद्धि मानी जाती है। सन् 1981 में 24.66 तथा सन् 1991 में 23.8% है, जो सन् 1981 की तुलना में 0.81% कम है। सन् 2011 में जनसंख्या वृद्धि दर 17.64 है, जो सन् 2001 की तुलना में 3.9% कम है।

प्रश्न 2.
भारत में जनसंख्या के असमान वितरण के कारणों का उल्लेख कीजिए। अथवा भारत में जनसंख्या के वितरण की असमानता के कारणों का वर्णन करें।
अथवा
“भारत में जनसंख्या का वितरण बहुत असमान है।” उचित उदाहरण देते हुए इस कथन की व्याख्या करें।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या का प्रादेशिक वितरण बहत-ही असमान पाया जाता है। सन 2011 की जनगणन 121,01,93,422 व्यक्ति देश के सभी भागों में समान रूप से निवास नहीं करते अर्थात् वे समान रूप से वितरित नहीं हैं। एक ओर तो केरल व पश्चिम बंगाल में जनसंख्या का घनत्व 1029 व्यक्ति वर्ग कि०मी० है या उससे अधिक है, जबकि कश्मीर में यह 124, अरुणाचल प्रदेश में मात्र 17 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। गंगा के मैदानी भाग, बंगाल का डेल्टा व मालाबार तट में जनसंख्या अधिक है, जबकि थार के मरुस्थल, कश्मीर की ऊंची घाटियों व रण के दलदल में यह विरल है। भारत में जनसंख्या का घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। दिल्ली में जनसंख्या का घनत्व 11,297, चंडीगढ़ में 9252, लक्षद्वीप में 2013 तथा पुडुचेरी में 2598 है, जबकि 100 से कम घनत्व वाले प्रदेशों की संख्या भी 4 है।

भारत में जनसंख्या के असमान वितरण के कारण भौतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, राजनीतिक, सामाजिक व धार्मिक कारण हैं। भारत में औद्योगिक विकास अभी अपनी यवावस्था में है। औद्योगिक विकास के साथ-साथ जनसंख्या में है। नए औद्योगिक स्थानों की ओर लगातार जनसंख्या का स्थानांतरण हो रहा है क्योंकि जनसंख्या का घनत्व आर्थिक उत्पादन से ही सबसे अधिक प्रभावित होता है।

जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन भारत में जनसंख्या की अधिकता मैदानी भागों में होने का कारण समतल धरातल, अनुकूल जलवायु, उर्वरा मिट्टियाँ, वर्षा अथवा सिंचाई के साधन तथा सघन कृषि, यातायात सुविधाएँ, एक ही वर्ष में कई फसलों का होना, सूती-ऊनी वस्त्र, चीनी, कागज आदि उद्योगों का पाया जाना है। देश की 60% जनसंख्या विस्तृत उपजाऊ मैदान में जहाँ कृषि की सुविधाएँ अधिक हैं तथा समुद्र तल से ऊंचाई 200 कि०मी० कम हो जाती है। इन प्रदेशों में घनत्व 300 से 800 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। उत्तरी मैदान में जनसंख्या का वितरण अधिक होने के कारण-

  • वर्षा, उपजाऊ मिट्टी जो कि नदियों द्वारा बहाकर लाई जाती है
  • वर्षा की मात्रा पर्याप्त व सिंचाई की सुविधा का होना
  • जलवायु का अच्छी होना
  • याताया के साधनों की उपलब्धता
  • उद्योगों का विकास होना
  • व्यापार के लिए समुचित सुविधाएँ होना है।

दक्षिण के पठार में जनसंख्या का घनत्व मध्यम है। इन पठारी प्रदेशों में जनसंख्या का विक्षेपण विषम धरातल पर कम तथा नदी-घाटियों व उच्च समतल मैदानी भागों पर अधिक है। गुजरात व काठियावाड़, नर्मदा घाटी, आंध्र में कर्नाटक, मालवा का पठार, छत्तीसगढ़ का मैदान, छोटा नागपुर का पठार, थार, आंध्र में जनसंख्या का घनत्व सामान्य है। दक्षिण के पठार में जनसंख्या का कम घनत्व, असमान धरातल, सीमित कृषि क्षेत्र, साधारण वर्षा, सिंचाई के साधनों की कमी, यातायात के साधनों का अभाव होने के कारण है। यहाँ जनसंख्या वितरण व घनत्व दोनों मध्यम हैं।

  • भारत के पूर्वी व पश्चिमी तट घने बसे होने का कारण पठारों की नदियों द्वारा बहाकर लाई गई मिट्टी (कांप मिट्टी) से बना होना है
  • शीतकाल व ग्रीष्मकाल में पर्याप्त वर्षा की मात्रा
  • समुद्र के निकट होने के कारण कम जलवायु
  • चावल का अधिक उत्पादन, जो अन्य फसलों की तुलना में सघन घनत्व समेटे रहता है
  • यातायात व उद्योगों का विकास होना है।

भारत के सीमा प्रांतीय भागों में विरल जनसंख्या पाई जाती है। इसका कारण पाकिस्तान सीमा के साथ कच्छ का दलदल, थार का मरुस्थल व कश्मीर के पर्वतीय भागों में उबड़-खाबड़ धरातल तथा जलवायु के कारण ही जनसंख्या न्यून व दूर-दूर तक बिखरी हुई है। उत्तर में हिमालय के कारण पूर्व में अरुणाचल, नगालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम के पहाड़ी वनों से युक्त जंगलों में जनसंख्या कम है। यहाँ पर कृषि भूमि की कमी, यातायात के साधनों में कठिनाई तथा औद्योगिक विकास के न होने से , यहाँ की जनसंख्या का वितरण कम है।

प्रश्न 3.
भारत में लिंग अनुपात के वितरण प्रतिरूपों का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत में लिंग अनुपात की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
लिंगानुपात को प्रति एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है। भारत में लिंगानुपात महिलाओं के लिए हमेशा ही प्रतिकूल रहा है। बीसवीं सदी के शुरू में यह अनुपात 972 था और 1941 के बाद इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई। 1901 से 2011 तक 2001 के मुकाबले 2011 में लिंगानुपात में 10 अंकों की बढ़त दर्ज की गई है। हमारे देश का लिंगानुपात विकसित देशों की तुलना में बहुत कम है। संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया तथा ब्रिटेन आदि देशों में प्रति हजार पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या अधिक है।

भारत में लिंग अनुपात की महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यहाँ सन् 1901 के बाद लगातार लिंग अनुपात घटता जा रहा है जो निम्न तालिका से सिद्ध हो जाता है। केवल 1951 तथा 1981 के वर्ष अपवाद हैं।
तालिका : भारत में लिंगानुपात
(1,000 पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या)

जनगणना वर्षलिंगानुपातजनगणना वर्षलिंगानुपात
19019721961941
19119641971930
19219551981934
19319501991927
19419452001933
19519462011943

भारत में केवल केरल राज्य का अनुपात स्त्रियों के पक्ष में है। केंद्र-प्रशासित प्रदेशों दादरा तथा नगर हवेली, दमन तथा दीव, लक्षद्वीप और पुडुचेरी में लिंग अनुपात भारत के औसत अनुपात से अधिक है। केरल में 1,000 पुरुषों के पीछे 1,084 स्त्रियाँ हैं। शेष देश के हर राज्य में स्त्रियों की संख्या पुरुषों से कम है। सबसे कम लिंगानुपात हरियाणा का है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ 1000 पुरुषों के पीछे 877 महिलाएं हैं।

भारत में नगरीय जनसंख्या का लिंगानुपात बहुत ही कम है। भारत के अधिकांश उत्तरी राज्यों में लिंगानुपात में पुरुषों की प्रमुखता पाई जाती है। 2011 की जनगणना के अनुसार देश के लगभग आधे राज्यों में लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत से अधिक है। ये सभी या तो भारत के तटीय राज्य हैं या पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित हैं।

भारत में लिंगानुपात की महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि जिला स्तर पर, दिल्ली तथा इसके आस-पास के क्षेत्रों; जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, उत्तर:पश्चिमी मध्य प्रदेश में लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत से कम है। उत्तर प्रदेश के पहाड़ी जिलों, हिमाचल प्रदेश, दक्षिण-पूर्वी तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा तथा आंध्र प्रदेश के अधिकतर जिलों में स्त्रियों की संख्या पुरुषों से अधिक है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 4.
भारत में जनसंख्या वृद्धि की प्रावस्थाओं का वर्णन करें।
अथवा
सन् 1901 से 2011 तक भारत में जनसंख्या वृद्धि की प्रावस्थाओं व कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत की जनसंख्या के दोनों दशकीय और वार्षिक वृद्धि-दर बहुत ऊँचे हैं और समय के साथ निरन्तर बढ़ रहे हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या की दशकीय वृद्धि-दर 17.64 प्रतिशत व वार्षिक वृद्धि-दर 2.4 प्रतिशत है। वृद्धि की इस वर्तमान दर से अनुमान लगाया गया है कि अगले लगभग 30-50 वर्षों में देश की जनसंख्या दुगुनी हो जाएगी और यहाँ तक कि चीन की जनसंख्या को भी पार कर जाएगी।

भारत में दशकीय वृद्धि-दर
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन 2
भारत में जनसंख्या की वृद्धि वार्षिक जन्म-दर, मृत्यु-दर तथा प्रवास की दर के कारण हुई है और यह वृद्धि विभिन्न प्रवृत्तियों और प्रावस्थाओं को दर्शाती है। भारत के जनांकिकीय इतिहास को चार सुस्पष्ट प्रावस्थाओं में बाँटा जा सकता है

प्रावस्था ‘क’ – 1901 से 1921 की अवधि को भारत की जनसंख्या की वृद्धि की रूद्ध अथवा स्थिर प्रावस्था (Stagnant phase) कहा जाता है, क्योंकि इस अवधि में वृद्धि-दर अत्यन्त निम्न थी। 1911-21 के दौरान जनसंख्या बढ़ने के स्थान पर 0.31 प्रतिशत कम हो गई।

कारण – इस दौरान जनसंख्या घटने का प्रमुख कारण बीमारियाँ और महामारियाँ थीं। सन् 1918 में अकेले इंफ्लूएंजा से ही देश में सवा करोड़ लोग मर गए।

  • स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाएँ निम्न स्तरीय थीं।
  • प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) में हजारों भारतीय काम आए।
  • लगातार हो रही फसल की खराबी से भी अनेक लोग भुखमरी का शिकार हो गए। भोजन और अन्य आधारभूत जरूरतों की वितरण प्रणाली अदक्ष (Inefficient) थी।
  • इन सभी कारणों के साथ अधिकतर लोगों की निरक्षरता भी मोटे तौर पर उच्च जन्म और मृत्यु-दरों के लिए उत्तरदायी थी।

प्रावस्था ‘ख’ – 1921-1951 के दशकों को जनसंख्या की स्थिर वृद्धि (Steady growth of population) की अवधि के रूप में जाना जाता है, क्योंकि 1921 के बाद भारत की जनसंख्या में सामान्य वृद्धि होने लगी।

कारण-
(i) इस अवधि में चिकित्सा विज्ञान में हुई उन्नति के फलस्वरूप चेचक, हैज़ा, प्लेग, निमोनिया तथा इंफ्लूएंजा जैसी महामारियों पर काफी हद तक काबू पा लिया गया। इससे मृत्यु-दर में उल्लेखनीय कमी आई।

(ii) परिवहन के साधनों के विकास ने – सामग्री पहुंचाने का काम आसान कर दिया। इससे भी मृत्यु-दर को घटाने में सफलता मिली।

(iii) कृषीय अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ। परिणामस्वरूप अशोधित जन्म-दर ऊँची बनी रही। इससे पिछली प्रावस्था की तुलना में वृद्धि-दर . उच्चतर हुई। 1920 के दशक की महान आर्थिक मन्दी और द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि में यह वृद्धि-दर प्रभावशाली थी।

(iv) जनसंख्या की वृद्धि-दर सन् 1941 में 1.42 प्रतिशत से घटकर सन् 1951 में 1.33 प्रतिशत रह गई। इसका कारण देश के विभाजन के फलस्वरूप लाखों लोगों का प्रवास (Migration) और अनेक लोगों का मारा जाना था इसे मृत्यु-प्रेरित वृद्धि कहा गया है।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन 3
प्रावस्था ‘ग’-1951-1981 के दशकों को भारत में जनसंख्या-विस्फोट (Population Explosion) की अवधि के रूप में जाना जाता है। यह देश में मृत्यु-दर में तीव्र ह्रास और जनसंख्या की उच्च प्रजनन-दर के कारण हुआ। इस दौरान जनसंख्या की औसत वार्षिक वृद्धि-दर 2.2 प्रतिशत तक ऊँची रही और जनसंख्या दुगुनी हो गई।

कारण-
(i) स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद यही वह अवधि थी जिसमें केन्द्रीकृत नियोजन प्रक्रिया (Centralised Planning Process) के माध्यम से विकासात्मक कार्यों को आरंभ किया गया। कृषि और उद्योग खण्डों के विकास, रोज़गार में वृद्धि, चिकित्सा सुविधाओं की प्रगति और विस्तार तथा जन्म और मृत्यु-दरों पर नियन्त्रण; जैसी उपलब्धियों के कारण जनसंख्या तेजी से बढ़ने लगी।

(ii) साठ के दशक में देश में आई हरित-क्रान्ति से उपजी खाद्यान्नों में आत्म-निर्भरता से अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ। सुनिश्चित भोजन ने जीवन की दशाओं को बेहतर किया जिससे जनसंख्या की बेतहाशा वृद्धि हुई।

(iii) इसी दौरान तिब्बतियों, नेपालियों, बांग्लादेशियों और पाकिस्तान से आने वाले लागों के बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय प्रवास के कारण भी भारत की जनसंख्या में बढ़ोतरी हुई।

(iv) सन् 1971 के पश्चात्, शिक्षा के प्रचार-प्रसार के प्रभाव तथा चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से जनसंख्या की वृद्धि-दर में कुछ-कुछ कमी आने लगी। सन् 1981 में जनसंख्या की वृद्धि-दर हल्की-सी घटकर 24.66 प्रतिशत रह गई, इसे प्रजनन प्रेरित वृद्धि कहा गया है।
भारत : दशकीय जन्म-दर, मृत्यु-दर और प्राकृतिक वृद्धि-दर, 1901-2011

दशकअशोधित जन्म-दर(प्रति 1000)अशोधित मृत्यु-दर(प्रति 1000)प्राकृतिक वृद्धि-दर(प्रति 1000)
1901-191149.242.66.6
1911-192148.147.20.9
1921-193146.436.210.1
1931-194145.937.214.0
1941-195139.927.412.5
1951-196141.722.818.9
1961-197141.219.022.3
1971-198137.21521.0
1981-199129.59.820.1
1991-200126.29.017.0
2001-201125.08.116.9

[Source : Census of India, Sample Registration System (SRS) Bulletin, April, 2011]
प्रावस्था ‘घ’-1981 के बाद वर्तमान तक देश की जनसंख्या वृद्धि-दर यद्यपि ऊँची बनी रही, परन्तु धीरे-धीरे मन्द-गति से घटने लगी। इसका तात्पर्य यह नहीं कि देश की कुल अथवा निरपेक्ष जनसंख्या घट गई। इसका अभिप्राय केवल यह है कि जनसंख्या बढ़ने की गति पर थोड़े ब्रेक लग गए। लोग तो बढ़े लेकिन कम गति से।

कारण-

  • जनसंख्या की ऐसी वृद्धि के लिए अशोधित जन्म-दर की अधोमुखी प्रवृत्ति (Downward Trend) को उत्तरदायी माना जाता है।
  • देश में विवाह के समय औसत आयु में वृद्धि, जीवन की गुणवत्ता में बढ़ोतरी तथा स्त्री-शिक्षा में सुधार से भी जनसंख्या की वृद्धि-दर में कमी के निश्चित संकेत मिले हैं।

प्रश्न 5.
भारत में ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या के वितरण का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत में ग्रामीण जनसंख्या के वितरण का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत में नगरीय जनसंख्या का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आवास के आधार पर भारतीय जनसंख्या को दो वर्गों में बांटा गया है-

  1. ग्रामीण जनसंख्या तथा
  2. नगरीय जनसंख्या।

ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या की अपनी अलग-अलग विशेषताएँ होती हैं तथा इनको अलग-अलग व्यवसाय संरचना, जीवन-पद्धति आदि के आधार पर पहचाना जा सकता है। गांव के सभी लोग साधारण, सामाजिक संबंधों से ओत-प्रोत तथा अधिकतर कृषि-कार्यों में संलग्न रहते हैं। उनके आचार-विचार तथा सांस्कृतिक दृष्टिकोण नगर में रहने वाले लोगों से भिन्न होते हैं। इसके विपरीत, नगरों में रहने वाले लोग उद्योग तथा व्यापार में संलग्न रहते हैं। इनके आपसी सामाजिक संबंध हैं तथा इनका दृष्टिकोण अपेक्षतया भिन्न होता है।

भारत की अधिकांश जनसंख्या गांवों में रहती है। यहाँ आवासीय इकाइयाँ छोटी-छोटी झोंपड़ियाँ, छोटे-छोटे कच्चे या पक्के मकानों के समूह तथा छोटी बस्तियाँ हैं, जहाँ 30 से 50 लोगों का समुदाय रहता है। कुछ बड़े गांव भी होते हैं, जहाँ कई सौ से कई हज़ार तक लोग निवास करते हैं। चाहे गांव छोटा हो या बड़ा, सभी लोगों का मुख्य धंधा कृषि या इससे संबंधित कार्य करना होता है।

सन् 1981 की जनगणना के अनुसार, भारत में 76.66% जनसंख्या गांवों में तथा 33.34% जनसंख्या शहरों में रहती थी। लेकिन सन 2011 में थोड़ा परिवर्तन आया। गांवों में रहने वाली जनसंख्या का अनुपात घटकर 68.84% रह गया तथा शहरी जनसंख्या का अनुपात बढ़कर 31.16% हो गया। फिर भी ग्रामीण जनसंख्या का आकार तो भारत में बड़ा ही है।

ग्रामीण जनसंख्या का वितरण भारत में कुल जनसंख्या के अनुपात में तथा ग्रामीण जनसंख्या के प्रतिशत अनुपात में अत्यधिक क्षेत्रीय भिन्नताएँ पाई जाती हैं। भारतीय संघ के कुछ राज्यों में ग्रामीण जनसंख्या की बहुलता है; सन् 2011 की जनगणना के अनुसार हिमाचल प्रदेश, असम, बिहार व ओडिशा में 80% से अधिक जनसंख्या गाँवों में रहती है। लगभग यही प्रतिरूप ओडिशा (83.32%), त्रिपुरा (73.82%), नगालैंड (71.03%) और मेघालय (79.92%) में पाया जाता है।

अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखण्ड, राजस्थान, सिक्किम में 75% से 80% जनसंख्या ग्रामीण है। जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तराखंड में ग्रामीण जनसंख्या का अनुपात राष्ट्रीय औसत अनुपात (60%) से अधिक है। राष्ट्रीय औसत से कम ग्रामीण जनसंख्या आध्र प्रदेश, गोआ, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मिजोरम, पंजाब, तमिलनाडु, पश्चिमी बंगाल तथा दादर व नगर हवेली को छोड़कर सभी केंद्र-शासित प्रदेशों में पाई जाती है। देश में सबसे कम ग्रामीण जनसंख्या दिल्ली में 2.5% व चंडीगढ़ में 2.72% पाई जाती है।

दिए गए विवेचन से पता चलता है कि उच्चतम ग्रामीण अनुपात के कारण हमारी अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर करती है। दूसरी बात, जो सामने आई है, वह यह है कि भारत के अधिकांश तटीय राज्यों में नगरीकरण अधिक हुआ है। भारत के कई राज्य ऐसे हैं, जहाँ नगरीकरण बहुत कम हुआ है तथा जिनमें कुछ जिले ऐसे हैं जहाँ 90% से भी अधिक जनसंख्या गांवों में रहती है; जैसे जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में, बिहार के गोपालगंज जिले में, छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में तथा राजस्थान के जलौर। जनसंख्या ग्रामीण है।

अनेक राज्यों में ग्रामीण जनसंख्या का उच्च अनुपात प्रदर्शित करता है कि अर्थव्यवस्था में विविधता न होने के कारण यहाँ कृषि पर निर्भरता अत्यधिक है। परंपरागत सामाजिक ढांचे में कोई विशेष परिवर्तन नहीं आया है। भारत के चार राज्यों बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश व राजस्थान में वास्तव में यही स्थिति है। आर्थिक दृष्टिकोण से अविकसित इन राज्यों में नगरीकरण और औद्योगीकरण दोनों की गति धीमी है। भारत के कम नगरीकरण वाले राज्यों में बहुत-से जिले ऐसे हैं जो लगभग ग्रामीण हैं और जहाँ 90% से अधिक लोग गाँवों में रहते हैं।

ऊपर दिए गए विवरण से पता चलता है कि भारत में ग्रामीण जनसंख्या का अधिक अनुपात होने के कारण हमारी अर्थव्यवस्था अधिकतर कृषि पर निर्भर है तथा यहाँ रूढ़िवादी अर्थव्यवस्था प्रचलित है। नगरीय जनसंख्या का वितरण नगरीकरण यद्यपि भारत में, नगरों में रहने वाले लोगों की संख्या का आकार बहुत बड़ा है तथा संभवतः विश्व में कुल नगरीय जनसंख्या में इसका चौथा स्थान है, परंतु कुल जनसंख्या में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत बहुत कम है। चीन तथा पाकिस्तान की नगरीय जनसंख्या का भी प्रतिशत भारत से अधिक है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या का 31.16% ही नगरीय जनसंख्या है, जबकि 1990 के आंकड़ों के अनुसार विश्व की कुल जनसंख्या का 45% नगरीय है।

विश्व के कई देशों में नगरीकरण इतना अधिक हुआ है कि भारत की तुलना इन देशों से किसी भी दिशा में नहीं की जा सकती; जैसे यू०एस०ए० में 75%, जापान में 77%, ऑस्ट्रेलिया में 85%, न्यूजीलैंड में 84% नगरीय जनसंख्या का अनुपात है। भारत की तुलना तो इस संदर्भ में कुछ विकासशील देशों से ही की जा सकती है। मिस्र तथा पाकिस्तान की भी नगरीय जनसंख्या का अनुपात भारत से अधिक है।

सन् 1911 की जनगणना के अनुसार भारत में जिन राज्यों में राष्ट्रीय औसत से अधिक नगरीकरण है, उनमें महाराष्ट्र (45.23%), गुजरात (42.58%), कर्नाटक (38.57%), पश्चिम बंगाल (31.89%), आंध्र प्रदेश (33.49%) तथा उत्तराखंड (22.28%), गोआ (62.19%), तमिलनाडु (48.45%), पंजाब (37.49%), मध्य प्रदेश (27.63%), मिजोरम (51.51%), हरियाणा (34.79%) अंकित किए गए हैं।

भारत में पिछले 100 वर्षों में नगरीय जनसंख्या में हर दशक में वृद्धि होती रही है, इससे नगरीकरण की प्रवृत्ति का अनुमान लग सकता है। यह बात दी गई तालिका से भी स्पष्ट हो जाती है।।
तालिका : नगरीय जनसंख्या का अनुपात (1901-2011)

वर्षनगरीय जनसंख्या (प्रतिशत में)वर्षनगरीय जनसंख्या (प्रतिशत में)
190110.84196117.97
191110.29197119.90
192111.17198123.31
193111.99199125.72
194113.85200128.2
195117.29201131.16

दी गई तालिका से पता चलता है कि भारत में नगरीकरण में बृद्धि तो हुई है, लेकिन बड़ी मंद गति से। भारत में नगरीकरण की वृद्धि को अगर राज्यों के आधार पर देखा जाए तो भारत की कुल नगरीय जनसंख्या का 54.16% भारत के केवल पांच राज्यों; महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल तथा आंध्र प्रदेश में निवास करता है। भारत के अन्य पांच राज्यों; कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार तथा राजस्थान में देश के नगरीय जनसंख्या के सामान्य अनुपात से कुछ अधिक जनसंख्या (26.03%) नगरों में निवास करती है। केंद्र-शासित प्रदेशों में से दिल्ली तथा चंडीगढ़ में सबसे अधिक नगरीकरण हुआ है। इन दो प्रदेशों का वास्तव में शुरू से ही नगरों के रूप में विकास हुआ है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 6.
भारत में श्रमजीवी जनसंख्या के संघटनों या लक्षणों की व्याख्या करें।
उत्तर:
किसी जनसंख्या में श्रम का अनुपात सहभागिता दर द्वारा व्यक्त किया जाता है जो कुल जनसंख्या में कार्यरत जनसंख्या के प्रतिशत द्वारा व्यक्त किया जाता है। सहभागिता अनुपात पुरुषों तथा स्त्रियों के लिए अलग-अलग होता है। किसी भी अर्थव्यवस्था में ‘कामगार’ की परिभाषा आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सन् 1981 की जनगणना के अनुसार जो व्यक्ति वर्ष में 183 दिन लाभकारी कार्य में लगा रहता हो, उसे कामगार व्यक्ति कहेंगे। इससे कम समय का रोज़गार पाने वाले व्यक्ति को ‘सीमांत कामगार’ कहते हैं। 15 से 59 वर्ष की आयु-वर्ग के लोग सामान्यतः श्रमजीवी कहलाते हैं। श्रमजीवी जनसंख्या का अनुपात जितना अधिक होगा, उतनी ही अधिक सामाजिक तथा आर्थिक खुशहाली होगी।

सन् 1991 में भारत में कुल सहभागिता दर 37.46% थी। इसमें पुरुषों की दर 51.55% तथा स्त्रियों की दर 22.25% थी। अतः सहभागिता दर में पुरुषों का महत्त्व अधिक है। प्रति कामगार के पीछे औसतन दो आर्थिक व्यक्ति पाए गए हैं। इसी प्रकार ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्रों की सहभागिता दर में बहुत अंतर पाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों की सहभागिता दर 53% तथा स्त्रियों की 16% है जो कि नगरीय क्षेत्रों में काफी अधिक है। भारत में नगरीय महिलाओं की औसत सहभागिता दर 7.3% है, अतः अधिकतर महिलाएँ आश्रित हैं।

ग्रामीण श्रमजीवियों का 81% भाग कृषि में कार्यरत है तथा 3% हस्तकलाओं में और 16% अन्य कार्यों में लगा हुआ है। राज्य स्तर पर सहभागिता दर में विषमताएँ पाई जाती हैं। 1991 के जनगणना आंकड़ों के अनुसार पूर्वोत्तर राज्यों में पुरुष सहभागिता दर सिक्किम में 51.26%, मेघालय में 50.07% तथा नगालैंड में 46.86% है। यह दर ओडिशा में 53.79%, कर्नाटक में 54.09% तथा हरियाणा में 48.51% है। यह काफी ऊंची सहभागिता दर है।

महिलाओं की सहभागिता दर पंजाब तथा हरियाणा में भारत के सभी राज्यों से कम है जो क्रमशः 4.40% तथा 10.76% है। उत्तर:पूर्व के जन-जातीय क्षेत्रों में महिला तथा पुरुष सहभागिता दर में विशेष अंतर नहीं पाया जाता। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान तथा ओडिशा में महिलाओं की सहभागिता दर केवल 11% से 28% तक ही है।

प्रश्न 7.
भारत में विभिन्न धार्मिक समुदायों के वितरण प्रतिरूप (2011) का वर्णन कीजिए। अथवा भारत की जनसंख्या के धार्मिक संघटन की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
भारत एक विशाल देश है जिसमें हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, जैन, सिक्ख आदि अनेक महत्त्वपूर्ण धर्म पाए जाते हैं। ईसाई धर्म के लोग भी भारत में बहुत आते रहे हैं तथा यहाँ बसे हुए भी हैं। पारसी भी विदेशों से आकर यहाँ बस गए हैं।
1. हिन्दू-हिन्दू भारत की कुल जनसंख्या का 79.8 प्रतिशत तथा विश्व की कुल जनसंख्या का 1 प्रतिशत है। हिन्दुओं की जनसंख्या विश्व में ईसाइयों की जनसंख्या से कुछ कम व मुस्लिम जनसंख्या के लगभग बराबर है।

देश के अधिकांश भागों में हिंदुओं का बाहल्य है। ओडिशा में केवल 3 जिलों को छोड़कर शेष जिलों में हिंदुओं का अनुपात 95% से 100% तक है। इन तीन जिलों में हिंदुओं का प्रतिशत अनुपात इतना ऊँचा नहीं है। इसी प्रकार मध्य प्रदेश के 17 जिलों में, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश के उपहिमालयी 6 जिलों में, हरियाणा व तमिलनाडु के कुछ जिलों में हिंदुओं की संख्या 95% से ऊपर है। सतलुज-गंगा के मैदान के लगभग 30 जिलों में व मध्य भारत तथा प्रायद्वीपीय भारत के कुछ जिलों में हिंदू जनसंख्या का अनुपात 90% से अधिक है।

पंजाब में सिक्खों, उत्तर-पूर्व में ईसाइयों, जम्मू-कश्मीर, केरल के मालापुरम व पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिलों में मुस्लिम जनसंख्या के अधिक होने के कारण हिंदुओं का अनुपात कम है। मेघालय, मिज़ोरम तथा नगालैंड में हिंदुओं की संख्या 3 से 12% तक है।

2. मुस्लिम-मुसलमान भारत में दूसरे सबसे बड़े धार्मिक समुदाय का निर्माण करते हैं। यह देश का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक वर्ग है। मुस्लिम जनसंख्या भारत की कुल जनसंख्या का 14.2% है। मुस्लिम जनसंख्या की दृष्टि से भारत विश्व में चौथा बड़ा राष्ट्र है। यहाँ की मुस्लिम जनसंख्या पाकिस्तान की कुल जनसंख्या के बराबर है।

उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक मुसलमान हैं और इस प्रदेश में लगभग 19.26% जनसंख्या मुसलमानों की है। ऊपरी गंगा के मैदान के कुछ जिलों में मुस्लिम जनसंख्या का अनुपात 16% से 48% तक है। केरल के मालापुरम् जिले में मुस्लिम जनसंख्या का अनुपात 70% से अधिक है। इसी प्रकार पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में 50% से 60% तथा लक्षद्वीप में सर्वाधिक 96.58% तक जनसंख्या मुसलमानों की है। महाराष्ट्र में 11.54%, आंध्र प्रदेश में 9.56%, कर्नाटक में 12.92%, गुजरात में 9.67% तथा तमिलनाडु में 5.86% मुस्लिम जनसंख्या है। दिल्ली व निकटवर्ती मेवात क्षेत्र में मुसलमानों का संकेंद्रण पाया जाता है। दिल्ली की कुल जनसंख्या में मुसलमानों का अनुपात 12.86% है।

3. ईसाई-ईसाई जनसंख्या अधिकांशत देश के ग्रामीण क्षेत्रों में वितरित हैं। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 2.78 करोड़ ईसाई हैं। केरल में भारत के 18.38% ईसाई रहते हैं। केरल के कोट्टायम में 45% व इडुक्की में 42% जनसंख्या ईसाई है। ईसाइयों के संकेंद्रण के अन्य क्षेत्र गोआ और तमिलनाडु हैं। गोआ में 25.10% जनसंख्या ईसाई है। ओडिशा एवं बिहार के कई जन-जातीय जिलों में ईसाई जनसंख्या का अनुपात काफी अधिक है। ईसाईयों का अधिक संकेंद्रण उत्तर:पूर्वी राज्यों में है। उदाहरणतः मिज़ोरम की 87.16%, नगालैंड की 87.93%, मेघालय की 74.59% तथा मणिपुर की 41.29% जनसंख्या ईसाई है। ईसाइयों की कुल जनसंख्या के आधार पर महत्त्वपूर्ण राज्य केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, बिहार, मिज़ोरम व गोआ आदि है।

4. सिक्ख–भारत में 2.08 करोड़ सिक्ख हैं जो देश की जनसंख्या का कुल 1.7% हैं। क्योंकि सिक्ख धर्म का उद्भव पंजाब में हुआ इसलिए इनका सर्वाधिक सांद्रण पंजाब में है। पंजाब में 57.69% जनसंख्या सिक्खों की है। पंजाब के अधिकांश जिलों में कुल जनसंख्या का 60-65% भाग सिक्खों का है। उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र, राजस्थान के गंगा नगर, अलवर, भरतपुर व दिल्ली में सिक्ख पर्याप्त संख्या में बसे हुए हैं।

5. बौद्धभारत में 84 लाख से अधिक बौद्ध हैं, जो मुख्यतः महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम तथा जम्मू-कश्मीर में केंद्रित हैं। कुछ बौद्ध हिमाचल प्रदेश, मिज़ोरम व त्रिपुरा में भी हैं। भारत के 5.81% बौद्ध महाराष्ट्र में हैं। महाराष्ट्र के 50 लाख बौद्ध वास्तव में डॉ० बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के प्रभाव से धर्म परिवर्तन करके नव-बौद्ध बने हैं। सिक्किम में एक लाख से ऊपर बौद्ध हैं जो राज्य की कुल जनसंख्या का 27.39% हैं। अरुणाचल प्रदेश में भी एक लाख से ऊपर बौद्ध हैं जो राज्य की 11.77% जनसंख्या है।

6. जैन भारत में 45 लाख जैन धर्मावलंबी हैं। भारत में जैन महाराष्ट्र, राजस्थान तथा गुजरात में अधिक है। इन तीनों के लगभग 60% जैन रहते हैं। जैनियों की प्रमुख विशेषता यह है कि ये मुख्यतः व्यापार और सेवाओं में लगे हैं और नगरों में रहते हैं।

7. अन्य धर्म-भारत में अन्य धर्मों को मानने वालों की जनसंख्या 0.7% है। इनकी कुल जनसंख्या 79 लाख से अधिक है।

8. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 0.2% जनसंख्या के धर्म की कोई जानकारी नहीं है।
भारत में सांस्कृतिक संश्लेषण एक विचित्र विशेषता है। यहाँ विभिन्न धर्मों के लोग आपसी भाईचारे.नथा संस्कृति से घनिष्ठता से जुड़े हुए हैं। वे तो प्रादेशिक पहचान ही बनाए हुए हैं, न कि धार्मिक; जैसे पंजाब के लोग सिक्ख न होकर पहले पंजाबी हैं तथा बाद में कछ और हैं। धार्मिक विविधता तो केवल ऊपर से दिखाई देती है।

प्रश्न 8.
भारतीय भाषाओं का वर्गीकरण कीजिए तथा विभिन्न भाषा परिवारों का विस्तृत वर्णन दीजिए। अथवा भारत के भाषाई संघटन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भाषाई संघटन-भारत जैसे विशाल देश में विभिन्न प्रकार की भाषाओं तथा बोलियों का होना स्वाभाविक है। यहाँ नृ-जातीय वर्ग भी अपने साथ बाहर के विभिन्न भागों से भाषाएँ लाए हैं। भाषा की अपनी लिपि होती है, जबकि बोलियों की कोई लिपि नहीं होती। सन् 1961 की जनगणना के अनुसार, भारत में लगभग 187 भाषाएँ बोली जाती थीं, इनमें से 94 भाषाएँ 10,000 से भी कम लोगों द्वारा बोली जाती हैं, जिनमें से अंग्रेज़ी के अतिरिक्त 22 भाषाएँ हमारे संविधान की 8वीं अनुसूची में रखी गई हैं। ये 22 भाषाएँ इस प्रकार हैं-

  • हिन्दी
  • तेलुगू
  • बांग्ला
  • मराठी
  • तमिल
  • उर्दू
  • गुजराती
  • मलयालम
  • कन्नड़
  • ओड़िया
  • असमिया
  • पंजाबी
  • कश्मीरी
  • सिंधी
  • संस्कृत
  • कोंकणी
  • मणिपुरी
  • नेपाली
  • डोगरी
  • मैथिली
  • बोडो
  • संथाली।

भारतीय भाषाओं का वर्गीकरण-भारत में भाषाओं को निम्नलिखित चार मुख्य परिवारों में बांटा गया है-

  • आस्ट्रिक परिवार
  • चीनी-तिब्बती परिवार
  • द्रविड़ परिवार
  • भारतीय-यूरोपीय परिवार।

भारत की कुल जनसंख्या का 73% भाग भारतीय-यूरोपीय परिवार (आय) भाषाओं को बोलने वाले हैं।
1. आस्ट्रिक परिवार की भाषाएँ-इन भाषाओं के बोलने वाले लोगों की संख्या भारत में अधिक नहीं हैं। इनका प्रतिशत कुल वल 0.73 है। भारत में 62 लाख से अधिक लोगों के द्वारा यह भाषा बोली जाती है। इनमें सबसे बड़ा वर्ग संथाली भाषा को बोलने वालों का है। इस भाषा के बोलने वाले लोग आस्ट्रो-एशियाई उप-परिवार के हैं जिसे अन्य शाखाओं में बांटा गया है; जैसे (क) मुंडा, (ख) मान ख्मेर, जिसमें दो वर्ग मिलते हैं-खासी और निकोबारी।

2. चीनी-तिब्बती परिवार की भाषाएँ इस भाषा को तीन शाखाओं में बांटा गया है; जैसे-

  • तिब्बती-हिमालयी
  • उत्तर असमी
  • असमी-बर्मी।

तिब्बती-हिमालयी भाषा के आगे दो वर्ग पाए जाते हैं-

  • भोटिया वर्ग
  • हिमालयी वर्ग।

भोटिया वर्ग की मुख्य भाषाएँ तिब्बती, लद्दाखी, लाहुली तथा शेरपा हैं। इसी प्रकार हिमालयी वर्ग में चम्बा, किन्नौरी तथा लेपचा भाषाएँ आती हैं। उत्तर:असमी भाषा में छह बोलियाँ बोली जाती हैं जिनमें सबसे अधिक प्रचलित बो शाखा के भी आगे पांच वर्ग पाए गए हैं; जैसे-

  • बोडो
  • नागा
  • कांचिन
  • कुकीचन तथा।
  • बर्मी वर्ग।

इनमें नागा वर्ग की संख्या सबसे अधिक है। इन बोलियों के बोलने वाले लोगों की संख्या में भिन्नता पाई जाती है। जिनके बोलने वालों की संख्या 1 से 7 लाख है। मणिपुरी बोली बोलने वालों की संख्या सबसे अधिक है। इस वर्ग की अन्य बोलियाँ गारो, बोरो, त्रिपुरी, मिकिर तथा मिजो हैं।

3. द्रविड़ परिवार की भाषाएँ-द्रविड़ भाषा के आगे पाए जाने वाले वर्ग हैं-(क) दक्षिणी द्रविड़, (ख) मध्य द्रविड़ तथा (ग) उत्तरी द्रविड़। दक्षिणी द्रविड़ वर्ग में तमिल, मलयालम, कन्नड़ जैसी भाषाएँ तथा तुजु, कुरगी एवं येरुकला जैसी गौण भाषाएँ तथा बोलियाँ पाई जाती हैं। इसी प्रकार मध्य द्रविड़ वर्ग में तेलुगू और येरुकला जैसी गौण भाषाएँ तथा बोलियाँ पाई जाती हैं। इसी प्रकार मध्य द्रविड़ वर्ग में तेलुगू और गोंडी मुख्य भाषा के रूप में तथा कुई, पारसी एवं खोड, बोलियों के रूप में पाई जाती हैं। उत्तरी द्रविड़ भाषाओं में अधिकतर यानि 95% जनसंख्या तमिल, मलयालम, कन्नड़ तथा तेलुगू भाषाओं के बोलने वालों की है।

4. भारतीय-यूरोपीय परिवार की भाषाएँ इन्हें आर्य भाषाएँ भी कहा जाता है। देश की लगभग 73% जनसंख्या इसी भाषा का प्रयोग करती है। इस परिवार की भाषा को मुख्य दो वर्गों में बाँटा गया है-

  • भारतीय आर्य भाषाएँ तथा
  • दरदी आर्य भाषाएँ।

(1) भारतीय आर्य भाषाओं को आगे कई उपवर्गों में बांटा गया है; जैसे-

  • उत्तर-पश्चिमी
  • दक्षिणी
  • पूर्वी
  • मध्य-पूर्वी
  • मध्य तथा
  • उत्तरी वर्ग।

उत्तर-पश्चिमी उपवर्ग के अंतर्गत सिंधी, लहंदा तथा कच्छी भाषाएँ; दक्षिणी वर्ग में मराठी तथा कोंकणी भाषाएँ आती हैं। पूर्वी वर्ग बहुत बड़ा है, इसमें बांग्ला, बिहारी, ओडिया तथा असमिया भाषाएँ पाई जाती हैं। इसी वर्ग में अवधी, मैथिली तथा भोजपुरी बोलियाँ बोली जाती हैं। मध्य-पूर्वी वर्ग में तीन उपवर्ग हैं जिनकी भाषा क्रमशः अवधी, बघेली तथा छत्तीसगढ़ी है। मध्य वर्ग में हिंदी, पंजाबी, राजस्थानी तथा गुजराती भाषाएँ शामिल हैं। विभिन्न पहाड़ी बोलियाँ पाई जाती हैं; जैसे नेपाली, मध्य पहाड़ी तथा पश्चिमी पहाड़ी।

(2) दरदी आर्य भाषाओं में कश्मीरी, शिना, कोहिस्तानी तथा दरदी भाषाएँ शामिल हैं। इनमें कश्मीरी बोलने वालों की संख्या लगभग 20 लाख है जो सबसे अधिक है। बाकी भाषाओं के बोलने वालों की संख्या सात-सात हजार से अधिक नहीं है।

प्रश्न 9.
भारत में भाषा परिवारों के भौगोलिक वितरण का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार, अपने परिवर्तित रूपों के साथ हिंदी भारत के लगभग 42.20 करोड़ (41.03) प्रतिशत लोगों की मातृभाषा है। हिंदी के बाद बांग्ला, तेलुगू, मराठी और तमिल भाषा बोलने वाले लोगों की संख्या सर्वाधिक है।
भारतीय भाषाओं का वर्गीकरण-
(i) आग्नेय (ऑस्ट्रिक) परिवार-(निषाद)
(ii) चीनी-तिब्बत परिवार (किरात)
(iii) द्रविड़ भाषा परिवार (द्रविड़)
(iv) भारतीय यूरोपीय भाषा परिवार (आर्य)
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन 4
विवरण-भारतीय भाषाओं का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित हैं
I. आग्नेय (ऑस्ट्रिक) परिवार-(निषाद)-भारत में बोली जाने वाली आग्नेय भाषा ऑस्ट्रो-ऐशियाई उप-परिवार की है। यह उप-परिवार दो शाखाओं में बाँटा जाता है

  • मुंडा- (i) मुंडा आग्नेय भाषाओं की सबसे बड़ी शाखा है। (ii) यह भाषा 14 जन-जातियों में बोली जाती है।
  • खासी-मान ख्मेर-खासी भाषा मेघालय की खासी और जयंतिया पहाड़ियों में रहने वाले आदिवासियों द्वारा बोली जाती है।
  • निकोबारी-निकोबारी भाषा निकोबार द्वीप समूह के आदिवासियों द्वारा बोली जाती है। आस्ट्रो-एशियाई भाषाएँ भारत में 60 लाख से अधिक लोग बोलते हैं।

II. चीनी-तिब्बत परिवार (किरात)-भारत में चीनी-तिब्बती परिवार की भाषाएँ बोलने वाले मुख्यतः तीन शाखाओं में विभाजित हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन 5
(i) तिब्बती हिमालयी-इस शाखा में दो वर्ग हैं – (a) भोटिया वर्ग, (b) हिमालयी वर्ग।
भोटिया वर्ग – इस वर्ग में तिब्बती, बाल्ती, लद्दाखी, लाहुली, शेरपा तथा सिक्किमी-भोटिया इत्यादि भाषाएँ सम्मिलित हैं।
हिमालय वर्ग – इस वर्ग में चंबा, किन्नौरी और लेह भाषाएँ सम्मिलित हैं।

(ii) उत्तर-असमी-उत्तर:असमी या अरुणाचल वर्ग में निम्नलिखित 6 भाषाएँ हैं-(a) अका, (b) डफला, (c) अंबोर, (a) मिरी, (e) मिशमी, ) मिशिंग।

(iii) असम-बर्मी-इस वर्ग में निम्नलिखित पाँच भाषाएँ बोली जाती हैं-(a) बोरो, (b) नागा, (c) काचिन, (d) कुकिचिन, (e) मयनमारी। .

III. द्रविड़ भाषा परिवार (द्रविड़)

  • दक्षिण-द्रविड़-इस वर्ग में तमिल, मलयालम, तुजु, कुरगी तथा कन्नड़ जैसी मुख्य भाषाएँ सम्मिलित हैं।
  • मध्य-द्रविड़-इस वर्ग में मुख्य भाषाएँ तेलुगू एवं गोंडी, कुई, पारजी एवं खोंड भाषाएँ सम्मिलित हैं।
  • उत्तर-द्रविड़-इस वर्ग में कुरूख एवं मालतो भाषाएँ सम्मिलित हैं।

IV. भारतीय यूरोपीय भाषा परिवार (आर्य)-भारत की अधिकांश जनसंख्या आर्य भाषाओं का एक या कोई दूसरा रूप बताती है। इन भाषाओं को मुख्यतः दो वर्गों में बाँटा जाता है।

  • दरदी आर्य भाषाएँ।
  • इंडो-आर्य भाषाएँ।

(1) दरदी-आर्य भाषाएँ-इस वर्ग में दरदी, शिना, कोहिस्तानी तथा कश्मीरी भाषाएँ सम्मिलित हैं। इनमें से कश्मीरी बोलने वालों की संख्या सर्वाधिक अर्थात् 20 लाख है।

(2) इंडो-आर्य भाषाएँ-इन भाषाओं को निम्नलिखित वर्गों में बाँटा जाता है

  • उत्तरी-आर्य भाषाएँ-इस वर्ग में विभिन्न पहाड़ी भाषाएँ सम्मिलित हैं, जिसमें नेपाली, मध्य-पहाड़ी एवं पश्चिमी-पहाड़ी प्रमुख है।
  • उत्तर-पश्चिमी आर्य भाषाएँ-इस वर्ग में लहंदा, कच्छी एवं सिंधी भाषाएँ आती हैं।
  • दक्षिणी आर्य भाषाएँ-इस वर्ग में मराठी और कोंकणी भाषाएँ सम्मिलित की जाती हैं।
  • पूर्वी आर्य भाषाएँ-इस वर्ग में ओडिया, बिहारी, बंगला तथा असमिया भाषाएँ सम्मिलित हैं। इनमें बिहारी भाषा की बोलियों में मैथिली, भोजपुरी तथा मगधी सम्मिलित हैं।।
  • पूर्व-मध्य आर्य भाषाएँ-इस वर्ग में अवधी, बघेली तथा छत्तीसगढ़ी भाषाएँ सम्मिलित की जाती हैं।
  • मध्य आर्य भाषाएँ-इस वर्ग में हिंदी, पंजाबी, राजस्थानी तथा गुजराती भाषाएँ आती हैं। आर्य भाषाओं में हिंदी का महत्त्वपूर्ण स्थान है।

निष्कर्ष – भारत के लोग यहाँ के मूल निवासी नहीं हैं। यहाँ बसने वाले विभिन्न नृ-जातीय वर्ग अपने साथ विभिन्न देशों की भाषाएँ व बोलियाँ भी लेकर आए।

प्रश्न 10.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या राज्य स्तरीय विवरण दें।
अथवा
भारत में जनसंख्या वृद्धि के स्थानिक प्रतिरूपों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या के राज्यवार वितरण में भी अनेक विषमताएँ देखने को मिलती हैं। सामान्यतः अधिक क्षेत्रफल वाले बड़े आकार के राज्यों में जनसंख्या अधिक पाई जाती है, परन्तु यह नियम सर्वत्र लागू नहीं होता, क्योंकि जनसंख्या का संकेन्द्रण प्राकृतिक संसाधनों, विशेषतः भूमि की प्रकृति पर निर्भर करता है।

निम्नलिखित तालिका के अध्ययन से भारत की जनसंख्या के वितरण के बारे में निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण लक्षण उभरते हैं-
तालिका : भारत में जनसंख्या का राज्यवार वितरण (2011)
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन 6
(i) देश की सबसे ज्यादा (19.9 करोड़) जनसंख्या उत्तर प्रदेश में बसी हुई है। यहाँ भारत की 17.64 प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या रहती है। इसके बाद क्रमशः महाराष्ट्र (11.23 करोड़), बिहार (10.38 करोड़), पश्चिम बंगाल (9.13 करोड़) तथा आन्ध्र प्रदेश का स्थान आता है। इन पाँच राज्यों में देश की आधी जनसंख्या रहती है।

(ii) भारत की एक-चौथाई जनसंख्या दो राज्यों उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में रहती है।

(iii) क्षेत्रफल की दृष्टि से देश के दो सबसे बड़े राज्य राजस्थान और मध्य प्रदेश हैं जिनका क्षेत्रफल देश के कुल क्षेत्रफल का क्रमशः 10.4 प्रतिशत और 9.37 प्रतिशत है, परन्तु इन राज्यों में भारत की केवल 5.6 प्रतिशत और 6.00 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है।

(iv) इसके विपरीत उत्तर प्रदेश 7.26 प्रतिशत क्षेत्र पर स्थित है जबकि इस राज्य में देश की 16.49 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है।

(v) देश के 2.86 प्रतिशत क्षेत्रफल वाले राज्य बिहार में 8.58 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है।

(vi) देश के 11 राज्यों और 6 केन्द्र-शासित प्रदेशों में जनसंख्या उनके क्षेत्रफल की तुलना में अधिक है। परिणामस्वरूप इन राज्यों में प्रति इकाई क्षेत्रफल पर जनसंख्या का दबाव राष्ट्रीय औसत से अधिक है।

(vii) दूसरी ओर, जम्मू और कश्मीर (1.04%), अरुणाचल प्रदेश (0.11%) और उत्तराखंड (0.84%); जैसे राज्यों की जनसंख्या का आकार इनके विशाल भौगोलिक क्षेत्र के बावजूद अत्यन्त छोटा है।

(viii) हिमालयी लघु राज्य सिक्किम की जनसंख्या (6.07 लाख) भारत के सभी राज्यों की जनसंख्या से कम है जबकि दिल्ली . की जनसंख्या 1.67 करोड़, जम्मू-कश्मीर की जनसंख्या अथवा सभी केन्द्र-शासित प्रदेशों की संयुक्त जनसंख्या से भी अधिक है।

जनसंख्या वृद्धि के आँकड़ों का विश्लेषण करने पर भारत में निम्नलिखित तीन प्रकार के क्षेत्र मिलते हैं
1. तीव्र जनसंख्या वृद्धि वाले राज्य एवं केंद्र-शासित प्रदेश इस वर्ग में 2001-2011 के दशक के दौरान 30% से अधिक वृद्धि रखने वाले क्षेत्रों को सम्मिलित किया गया है। इस वर्ग में भारत के केवल दो केंद्र-शासित प्रदेश सम्मिलित हैं

  • दादर एवं नगर हवेली (55.5%)
  • दमन व दीव (53.5%)

2. मध्यम जनसंख्या वृद्धि वाले राज्य एवं केंद्र-शासित प्रदेश इस वर्ग में 2001-2011 के दशक के दौरान 20 से 30% तक वृद्धि रखने वाले क्षेत्रों को सम्मिलित किया गया है। इस वर्ग में सम्मिलित क्षेत्र हैं

  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (20.96%)
  • पुडुचेरी (27.72%)
  • मेघालय (27.82%)
  • बिहार (25.07%)
  • जम्मू-कश्मीर (23.7%)
  • मिजोरम (22.34%)
  • छत्तीसगढ़ (22.59%)
  • झारखण्ड (22.34%)
  • राजस्थान (21.44%)
  • मध्य प्रदेश (20.3%)
  • उत्तर प्रदेश (20.09%) आदि।

3. कम जनसंख्या वृद्धि वाले राज्य एवं केंद्र-शासित प्रदेश इस वर्ग में 2001 से 2011 के दशक के दौरान 20% से कम जनसंख्या वृद्धि रखने वाले क्षेत्रों को सम्मिलित किया गया है। इसमें अन्य सभी राज्यों व केन्द्र-शासित प्रदेशों को सम्मिलित किया गया है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 11.
2001 की जनगणना के अनुसार भारत का जनसंख्या घनत्व तालिका की सहायता से दर्शाएँ।
उत्तर:
2001 की जनगणना के अनुसार भारत का जनसंख्या घनत्व निम्न तालिका में दर्शाया गया है-

राज्य/केंद्य-शासित प्रदेशघनत्वकोटि क्रम्म
दिली9,2441
चंडीगढ़7,9032
पांडिचेरी2,0293
लक्षद्वीप1,8944
दमन तथा दीव1,4115
पश्चिमी बंगाल9046
बिह्नर8807
केरल8198
उत्तर प्रदेश6899
पंजाब48210
तमिलनाहु47811
हरियाणा47712
दादरा ब नगर हबेली44913
गोवा36314
असम34015
झारखंड33816
महाराष्ट्र31417
त्रिपुरा30418
आंध्र प्रदेश27519
कर्नाटक27520
गुजरात25821
उड़ीसा23622
मध्य प्रदेश19623
राजस्थान16524
उत्तराखंड15925
छत्तीसगढ़15426
नगालैंड12027
हिमाचल प्रदेश10928
मणिपुर10729
मेघालय10330
जम्मू कश्मीर9931
सिक्किम7632
अंडमान व निकोबार4933
द्वीप समूह4234
मिजोरम1335

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 10 मानव बस्ती

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 10 मानव बस्ती Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 10 मानव बस्ती

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. आर्थिक कार्यों की प्रकृति के आधार पर बस्तियाँ कितने प्रकार की होती हैं?
(A) 2
(B) 3
(C) 4
(D) 6
उत्तर:
(A) 2

2. नदी घाटियों तथा उपजाऊ मैदानों में पाई जाने वाली ग्रामीण बस्तियां किस प्रारूप की होती हैं?
(A) प्रकीर्ण
(B) संहत
(C) रैखिक
(D) गोलाकार
उत्तर:
(B) संहत

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 10 मानव बस्तीी

3. पर्वतीय, पठारी तथा उच्च भूमि के क्षेत्रों में पाई जाने वाली बस्तियां किस प्रारूप की होती हैं?
(A) संहत
(B) गोलाकार
(C) प्रकीर्ण
(D) रैखिक
उत्तर:
(C) प्रकीर्ण

4. 250 से अधिक जनसंख्या वाली बस्ती को किस देश में नगरीय बस्ती कहा जाता है?
(A) डेनमार्क
(B) स्वीडन
(C) फिनलैंड
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

5. निम्नलिखित में कौन-सा नगर सुनियोजित है?
(A) पटना
(B) चंडीगढ़
(C) जम्मू
(D) कानपुर
उत्तर:
(B) चंडीगढ़

6. ‘कैंब्रिज नगर’ प्रसिद्ध है-
(A) उद्योग के लिए
(B) शिक्षण संस्थानों के लिए
(C) आमोद-प्रमोद के लिए
(D) धार्मिक स्थानों के लिए
उत्तर:
(B) शिक्षण संस्थानों के लिए

7. निम्नलिखित में से प्रशासनिक नगर कौन-सा है?
(A) जोधपुर
(B) कोच्चि
(C) वाराणसी
(D) नई दिल्ली
उत्तर:
(D) नई दिल्ली

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 10 मानव बस्तीी

8. मुगलसराय और इटारसी किस प्रकार के नगरों के उदाहरण हैं?
(A) औद्योगिक नगर
(B) परिवहन नगर
(C) सांस्कृतिक नगर
(D) रक्षा नगर
उत्तर:
(B) परिवहन नगर

9. विकासशील देशों में अप्रत्याशित नगरीय वृद्धि का मुख्य कारण है-
(A) औद्योगिक विकास
(B) ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों की कमी
(C) अनाधिकृत बस्तियों की उत्पत्ति
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

10. मनुष्यों की इमारतों सहित व्यवस्थित कालोनी को कहते हैं-
(A) कारखाना
(B) मकबरा
(C) बस्ती
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(C) बस्ती

11. निकृष्ट आवासीय व्यवस्था’ किस प्रकार की बस्ती की विशेषता है?
(A) ग्रामीण बस्ती
(B) नगरीय बस्ती
(C) मलिन बस्ती
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(C) मलिन बस्ती

12. एशिया की सबसे बड़ी मलिन बस्ती कहाँ स्थित है?
(A) दिल्ली
(B) मुंबई
(C) कोलकाता
(D) रंगून
उत्तर:
(B) मुंबई

13. ‘धारावी’ एक सबसे मलिन बस्ती है-
(A) इंग्लैंड की
(B) यू०एस०ए० की
(C) ब्राजील की
(D) भारत की
उत्तर:
(D) भारत की

14. ‘मेगासिटी’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किसने किया था?
(A) पैट्रिक गिडिज ने
(B) एडम्सन ने
(C) जीन गोटमेन ने
(D) लेविस मम्फोर्ड ने
उत्तर:
(C) जीन गोटमेन ने

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 10 मानव बस्तीी

15. निम्नलिखित में से मेगासिटी नहीं है-
(A) दिल्ली
(B) टोक्यो
(C) करनाल
(D) ढाका
उत्तर:
(C) करनाल

16. काहिरा, मनीला व इस्तांबुल आदि नगर किस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं?
(A) शहर
(B) सन्नगर
(C) मेगासिटी
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) मेगासिटी

17. जब किसी नगर की जनसंख्या 10 लाख से अधिक हो जाती है, तो वह क्या कहलाता है?
(A) शहर
(B) विश्वनगरी
(C) कस्बा
(D) मिलियन सिटी
उत्तर:
(D) मिलियन सिटी

18. सन् 1912 में किसने ऑस्ट्रेलिया की राजधानी के लिए ‘केनबेरा’ की योजना बनाई थी?
(A) पैट्रिक गिडिज ने
(B) लेविस मम्फोर्ड ने
(C) वाल्टर बी० ग्रिफिन ने
(D) जीन गोटमेन ने
उत्तर:
(C) वाल्टर बी० ग्रिफिन ने

19. किस शताब्दी में विकसित देशों में नगरीकरण तेजी से हुआ?
(A) 18वीं शताब्दी में
(B) 19वीं शताब्दी में
(C) 20वीं शताब्दी में
(D) 17वीं शताब्दी में
उत्तर:
(B) 19वीं शताब्दी में

20. सांस्कृतिक नगर का उदाहरण है-
(A) मक्का
(B) बनारस
(C) जैरूसलम
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

21. अलबैनी, लंदन व चेन्नई किस प्रकार के नगरों के उदाहरण हैं?
(A) व्यावसायिक नगर के
(B) सांस्कृतिक नगर के
(C) प्रशासनिक नगर के
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) प्रशासनिक नगर के

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22. प्रतिरक्षा नगर का उदाहरण है-
(A) मेरठ छावनी
(B) अम्बाला छावनी
(C) हिसार छावनी
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

23. किस प्रकार की बस्तियों में मकान एक-दूसरे के समीप बनाए जाते हैं?
(A) अवैध बस्तियों में
(B) प्रकीर्ण बस्तियों में
(C) संहत बस्तियों में
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(C) संहत बस्तियों में

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
आर्थिक कार्यों की प्रकृति के आधार पर बस्तियाँ कितने प्रकार की होती हैं?
उत्तर:
2।

प्रश्न 2.
नदी घाटियों तथा उपजाऊ मैदानों में पाई जाने वाली ग्रामीण बस्तियाँ किस प्रारूप की होती हैं?
उत्तर:
संहत।

प्रश्न 3.
सुनियोजित नगर का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
चंडीगढ़।

प्रश्न 4.
प्रशासनिक नगर का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
नई दिल्ली।

प्रश्न 5.
‘निकृष्ट आवासीय व्यवस्था’ किस प्रकार की बस्ती की विशेषता है?
उत्तर:
मलिन बस्ती।

प्रश्न 6.
प्रतिरक्षा नगर का कोई एक उदाहरण दें।
उत्तर:
देहरादून।

प्रश्न 7.
किस प्रकार की बस्तियाँ सड़क, नदी या नहर के किनारे होती हैं?
उत्तर:
रेखीय बस्तियाँ।

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प्रश्न 8.
औद्योगिक नगर का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
जमशेदपुर।

प्रश्न 9.
किसी एक खनन नगर का उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
डिगबोई।

प्रश्न 10.
ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्यतः किस प्रकार की आर्थिक क्रियाएँ होती हैं?
उत्तर:
प्राथमिक क्रियाएँ।

प्रश्न 11.
अत्यधिक नगरीकरण की सबसे बड़ी समस्या क्या है?
उत्तर:
मलिन बस्ती।

प्रश्न 12.
शुष्क बिन्दु बस्तियाँ कहाँ पाई जाती हैं?
उत्तर:
नदी वेदिकाओं के साथ।

प्रश्न 13.
नगरीय जनसंख्या किस वर्ग के देशों में तेजी से बढ़ रही है?
उत्तर:
विकासशील वर्ग के।

प्रश्न 14.
किसी एक आमोद-प्रमोद या मनोरंजन नगर का नाम बताएँ।
उत्तर:
मुम्बई।

प्रश्न 15.
एशिया की सबसे बड़ी मलिन बस्ती कहाँ स्थित है?
उत्तर:
मुम्बई (भारत) में।

प्रश्न 16.
सांस्कृतिक नगर का एक उदाहरण दें।
उत्तर:
हरिद्वार।

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प्रश्न 17.
विश्वनगरी का सबसे अच्छा उदाहरण कौन-सा देश है?
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका।

प्रश्न 18.
सन् 1950 तक विश्व में कितने शहर मिलियन सिटी थे?
उत्तर:
80 शहर।

प्रश्न 19.
विश्व में सबसे अधिक जनसंख्या वाला नगर कौन-सा है?
उत्तर:
टोक्यो।

प्रश्न 20.
कौन-सा नगर सबसे पहले मेगासिटी बना?
उत्तर:
न्यूयॉर्क।

प्रश्न 21.
एशिया पेसिफिक देशों में नगरीय जनसंख्या का कितने प्रतिशत भाग अनाधिकृत बस्तियों में रहता है?
उत्तर:
60 प्रतिशत।

प्रश्न 22.
अदीस अबाबा किस देश की राजधानी है?
उत्तर:
इथोपिया की।

प्रश्न 23.
बड़े नगरों के समीप छोटे-छोटे से नगर बस जाते हैं, उन्हें क्या कहते हैं?
उत्तर:
उपनगर।

प्रश्न 24.
घरों के समूह को क्या कहते हैं?
उत्तर:
बस्ती।

प्रश्न 25.
मैगालोपोलिस का क्या अर्थ है?
उत्तर:
विशाल नगर।

प्रश्न 26.
अदीस अबाबा का क्या अर्थ है?
उत्तर:
नवीन पुष्प।

प्रश्न 27.
केनबेरा किस देश की राजधानी है?
उत्तर:
ऑस्ट्रेलिया की।

प्रश्न 28.
कौन-सा नगर सबसे पहले मिलियन नगर बना?
उत्तर:
लंदन।

प्रश्न 29.
सन्नगरों का समूह क्या कहलाता है?
उत्तर:
विश्वनगरी।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
ग्रामीण बस्तियाँ क्या हैं?
उत्तर:
ग्रामीण बस्तियाँ वे बस्तियाँ होती हैं जिनके निवासी अपने जीवनयापन के लिए भूमि के विदोहन पर निर्भर करते हैं।

प्रश्न 2.
नगरीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
कुल जनसंख्या में नगरीय जनसंख्या के अनुपात में वृद्धि को नगरीकरण कहते हैं।

प्रश्न 3.
ग्रामीण बस्तियों के प्रमुख प्रतिरूप कौन-से होते हैं?
उत्तर:
रैखिक बस्तियाँ, क्रॉस की आकृति वाली बस्तियाँ, तारक बस्तियाँ, T-आकार की बस्तियाँ, वर्गाकार एवं गोलाकार बस्तियाँ, युग्म आकृति की बस्तियाँ इत्यादि।

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प्रश्न 4.
ग्रामीण बस्तियों के प्रतिरूप किन कारकों पर निर्भर करते हैं?
उत्तर:
ग्रामीण बस्तियों का प्रतिरूप यह दर्शाता है कि मकानों की स्थिति किस प्रकार एक-दूसरे से संबंधित है। गाँव की आकृति (Shape) और आकार (Size) को प्रभावित करने वाले कारकों में गाँव की स्थिति (Site), समीपवर्ती स्थलाकृति एवं क्षेत्र का भूभाग प्रमुख स्थान रखते हैं।

प्रश्न 5.
उपनगरीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर:
यह एक नवीन प्रवृत्ति है, जिसमें मनुष्य शहर के घने बसे क्षेत्रों से हटकर रहन-सहन की अच्छी गुणवत्ता की खोज में शहर के बाहर स्वच्छ एवं खुले क्षेत्रों में जा रहे हैं। बड़े शहरों के आसपास ऐसे महत्त्वपूर्ण उपनगर विकसित हो जाते हैं, जहाँ से रोजाना हजारों व्यक्ति अपने घरों से कार्य-स्थलों पर आते-जाते हैं।

प्रश्न 6.
भारतीय जनगणना, 1991 के अनुसार नगर किसे कहते हैं?
उत्तर:
नगर ऐसे सघन व स्थायी बसे मानवीय अधिवास होते हैं जिनमें और कृषिगत क्रियाकलापों; जैसे उद्योग, व्यापार, परिवहन, प्रशासनीय तथा सामुदायिक सेवाओं सम्बन्धी कार्यों की प्रधानता मिलती है।

प्रश्न 7.
पल्ली बस्तियाँ क्या हैं?
उत्तर:
कई बार बस्ती भौतिक रूप से एक-दूसरे से अलग इकाइयों में बँट जाती है। इस प्रकार की बस्ती एक-दूसरे से निश्चित दूरी पर होती है।

प्रश्न 8.
प्रशासनिक नगर क्या है? उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
प्रशासनिक नगर प्रशासन के केन्द्र होते हैं; जैसे राष्ट्र की राजधानियाँ-नई दिल्ली, मास्को, बीजिंग आदि; राज्य-स्तर पर राजधानियाँ-जयपुर, गांधीनगर, लखनऊ आदि प्रशासनिक नगरों के उदाहरण हैं। ऐसे नगरों में बड़ी संख्या में सरकारी कार्यालय तथा सरकारी आवास होते हैं।

प्रश्न 9.
संहत बस्तियाँ क्या हैं? ये कहाँ पाई जाती हैं?
उत्तर:
संहत बस्तियों में कई परिवार समुदाय के रूप में अपने घर बनाकर इकट्ठे निवास करते हैं। ये बस्तियाँ मुख्य रूप से मैदानी क्षेत्रों व नदी घाटियों में पाई जाती हैं।

प्रश्न 10.
शहर की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
शहर आकार तथा जनसंख्या में नगरों (Towns) से बड़े होते हैं। किसी क्षेत्र के अग्रणी नगर को शहर का दर्जा प्राप्त होता है। ममफोर्ड के अनुसार, शहर उच्च एवं अत्यधिक जटिल कार्यों से युक्त जीवन का भौतिक स्वरूप है। शहरों में प्रादेशिक प्रशासनिक कार्यालय, प्रमुख शिक्षण संस्थान, उच्च व्यापारिक तथा वित्तीय संस्थाएँ इत्यादि पाए जाते हैं।

प्रश्न 11.
मलिन बस्तियों से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
मलिन बस्तियाँ वे आवासीय क्षेत्र होते हैं जहाँ भौतिक और सामाजिक परिस्थितियाँ बहुत दयनीय होती हैं। यहाँ के मकान तंग गलियों में, सीलन वाले होते हैं जिनमें पानी, शौचालय और स्नानागार की व्यवस्था नहीं होती। भारत में धारावी (मुंबई) एशिया की सबसे बड़ी मलिन बस्ती है।

प्रश्न 12.
अनाधिकृत या अवैध बस्तियों से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
ये आमतौर पर किसी बड़े शहर के वे रिहायशी इलाके होते हैं जिनमें बहुत गरीब लोग रहते हैं। गरीबी के कारण ये लोग अपनी निजी भूमि खरीदने में असमर्थ होते हैं। ये लोग किसी और की खाली पड़ी ज़मीन पर बस जाते हैं। इन अवैध बस्तियों का जन्म शहरों में गरीबों के आवास की भारी कमी के फलस्वरूप होता है।

प्रश्न 13.
ग्रामीण बस्ती की कोई दो विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:

  1. ग्रामीण बस्तियों का आकार छोटा होता है
  2. यहाँ के निवासियों का प्रमुख व्यवसाय कृषि है।

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प्रश्न 14.
नगरीय अधिवास अथवा बस्तियाँ क्या हैं?
उत्तर:
वान रिक्टोफन के अनुसार, नगर एक संगठित समूह होता है जिससे कृषि कार्यों के विपरीत प्रमुख व्यवसाय वाणिज्य तथा उद्योग से सम्बन्धित होते हैं। अन्य शब्दों में, नगरीय बस्ती मानव का सामूहिक स्थाई अधिवास है जो सघन बसा हुआ होता है तथा वहाँ के अधिकांश निवासी गैर-प्राथमिक कार्यों; जैसे उद्योग, व्यापार तथा परिवहन में संलग्न रहते हुए एक विशिष्ट संस्कृति का विकास करते हैं।

प्रश्न 15.
मानव बस्ती से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
मानव बस्ती का अध्ययन मानव भूगोल का मूल बिंदु है, क्योंकि किसी भी क्षेत्र में बस्तियों का रूप उस क्षेत्र के वातावरण से मानव का संबंध दर्शाता है। एक स्थान जो सामान्यतः स्थायी रूप में बसा हुआ हो, उसे मानव बस्ती कहते हैं।

प्रश्न 16.
प्रतिरक्षा नगर से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
इन नगरों में सैनिकों के प्रशिक्षण तथा अभ्यास की व्यवस्था होती है। नगर में जिस स्थान पर सैनिक रहते हैं, उसे कैंटोनमेंट कहते हैं; जैसे जोधपुर, देहरादून, अम्बाला तथा हिसार आदि।।

प्रश्न 17.
आर्थिक कार्यों की प्रकृति के आधार पर बस्तियाँ कितनी प्रकार की होती हैं?
उत्तर:
आर्थिक कार्यों की प्रकृति के आधार पर बस्तियाँ दो प्रकार की होती हैं-

  1. ग्रामीण बस्तियाँ
  2. नगरीय बस्तियाँ।

प्रश्न 18.
सन्नगर से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
सन्नगर विशाल तथा सतत् नगरीय क्षेत्र होता है जो अलग-अलग नगरों या शहरों के आपस में मिलने से बनता है। जनसंख्या प्रसार तथा आर्थिक विकास के कारण किसी नगर के निकटवर्ती नगरों का आपस में सम्मिलन सन्नगर कहलाता है। कलकत्ता, नई दिल्ली आदि सन्नगरों के उदाहरण हैं।

प्रश्न 19.
विश्व के किन्हीं दस मेगासिटी के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. टोक्यो
  2. मुंबई
  3. न्यूयॉर्क
  4. शंघाई
  5. जकार्ता
  6. मनीला
  7. लंदन
  8. सियोल
  9. मेक्सिको सिटी
  10. बीजिंग।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अनाधिकृत या अवैध बस्तियों की विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:
अनाधिकृत बस्तियों की विशेषताओं को निम्नलिखित तीन वर्गों में बाँटा जा सकता है

  1. भौतिक विशेषताएँ इन बस्तियों में जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की कमी रहती है; जैसे जलापूर्ति, स्वच्छता, बिजली, सड़कें, नालियाँ, स्कूल व स्वास्थ्य केंद्र आदि।
  2. सामाजिक विशेषताएँ इन बस्तियों में अधिकतर निम्न आयु वर्ग के लोग रहते हैं। इनमें अधिकतर निवासी प्रवासी होते हैं।
  3. वैधानिक विशेषताएँ इन बस्तियों के लोगों के पास भू-स्वामित्व का अभाव होता है। यदि किसी एक जगह से इन्हें हटाया जाता है तो वे दूसरे स्थान पर जाकर डेरा जमा लेते हैं।

प्रश्न 2..
नगरीय बस्तियों की पर्यावरणीय समस्याओं की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
नगरों में औद्योगिक बस्तियों के फैलाव, जनसंख्या के बढ़ते घनत्व तथा वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण जल, वायु तथा भूमि तीनों का बड़े पैमाने पर प्रदूषण हुआ है। मिलों और वाहनों से निकलने वाला धुआँ महानगरों के 50 प्रतिशत प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है। आज दिल्ली का हर तीसरा व्यक्ति साँस की बीमारी से ग्रस्त है। महानगरों के मोटर वाहन वायुमंडल को गैस चैंबर बना रहे हैं। जिस वायु के बिना मनुष्य दो पल नहीं जी सकता अब उसमें दो पल गुज़ारना मुश्किल हो रहा है।

यह महानगरीय जीवन की त्रासदी (Tragedy) नहीं तो क्या है? अधिकांश नगरों में कूड़ा-कर्कट तथा फैक्ट्रियों व घरों का जल-मल नदियों में उड़ेल दिया जाता है। इससे पेय जल के स्रोत प्रदूषित होते हैं। नगरों में वाहनों और उत्सवों का शोर एक और समस्या है। नगरों में जनसंख्या एवं आर्थिक क्रियाओं के लिए बनाए गए कंक्रीट के विशाल ढाँचे ‘उष्म द्वीप’ (Heat Islands) बनाने में मदद करते हैं।

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प्रश्न 3.
विकासशील देशों में ग्रामीण बस्तियों से संबंधित समस्याओं का उल्लेख करें। अथवा ग्रामीण बस्तियों की किन्हीं चार समस्याओं का वर्णन करें।
उत्तर:
विकासशील देशों में ग्रामीण बस्तियों की संख्या अधिक है एवं इनका आधारभूत ढाँचा भी अविकसित है। इसलिए यहाँ अनेक समस्याएँ होती हैं-

  1.  जल की आपूर्ति-विकासशील देशों में ग्रामीण बस्तियों में जल की आपूर्ति भी पर्याप्त नहीं है। पर्वतीय एवं शुष्क क्षेत्रों में निवासियों को पेयजल के लिए लंबी दूरियाँ तय करनी पड़ती हैं।
  2. जल जनित समस्या-इन क्षेत्रों में जल जनित बीमारियाँ; जैसे हैजा, पीलिया आदि सामान्य समस्याएँ हैं।
  3. परिवहन के साधनों की कमी कच्ची सड़कें एवं आधुनिक संचार के साधनों की कमी भी यहाँ की प्रमुख समस्या है। वर्षा ऋतु में इन क्षेत्रों का संपर्क आसपास के क्षेत्रों और नगरों से कट जाता है जिससे उन्हें गंभीर कठिनाइयाँ उत्पन्न हो जाती हैं।
  4. गृह-निर्माण सामग्री मकानों के लिए प्रयुक्त होने वाली सामग्री हर पारिस्थितिक प्रदेश में भिन्न होती है जो मकान, मिट्टी, लकड़ी एवं छप्पर के बनाए जाते हैं, उन्हें भारी वर्षा और बाढ़ के समय काफी नुकसान पहुँचता है।

प्रश्न 4.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक स्वस्थ शहर क्या है?
अथवा
WHO के अनुसार एक स्वस्थ शहर कैसा होता है?
उत्तर:
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक स्वस्थ शहर में निम्नलिखित सुविधाएँ अवश्य होनी चाहिएँ-

  1. स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण
  2. आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति
  3. स्थानीय सरकार में समुदाय की भागीदारी
  4. सभी के लिए

आसानी से उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाएँ।

प्रश्न 5.
नगरों की सामाजिक-सांस्कृतिक समस्याओं का वर्णन करें।
उत्तर:
विकासशील देशों के शहर विभिन्न प्रकार की सामाजिक-सांस्कृतिक बुराइयों से ग्रस्त हैं। अपर्याप्त वित्तीय संसाधनों के कारण लोगों की आधारभूत आवश्यकताएँ भी पूरी नहीं हो पाती हैं। उपलब्ध स्वास्थ्य एवं शिक्षा संबंधी सुविधाएँ गरीब नगरवासियों की पहुँच से बाहर रहती हैं। विकासशील देशों में बेरोजगारी एवं शिक्षा की कमी के कारण अपराध अधिक होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से पुरुषों के अधिक प्रवास के कारण नगरों में जनसंख्या का लिंग अनुपात असंतुलित हो जाता है।

प्रश्न 6.
संहत बस्तियों तथा प्रकीर्ण बस्तियों में क्या अंतर हैं?
उत्तर:
संहत बस्तियों तथा प्रकीर्ण बस्तियों में निम्नलिखित अंतर हैं-

संहत बस्तियाँप्रकीर्ण बस्तियाँ
1. संहत बस्तियों में कई परिवार समुदाय के रूप में अपने घर बनाकर इकट्टे निवास करते हैं।1. प्रकीर्ण बस्तियों में मकान अलग-अलग तथा बिखरे हुए होते हैं।
2. इन बस्तियों में निवास स्थान के लिए कम स्थान होता है।2. इन बस्तियों में कृषि तथा निवास के लिए स्थान होता है।
3. ये बस्तियाँ मुख्य रूप से मैदानी क्षेत्रों में तथा नदी घाटियों में स्थित हैं।3. ये बस्तियाँ मुख्य रूप से पर्वतीय, पठारी तथा उच्च भूमियों के क्षेत्र में स्थित हैं।
4. संहत बस्तियाँ भारत के उत्तरी मैदान में पाई जाती हैं।4. ये बस्तियाँ हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तर प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित हैं।

प्रश्न 7.
अवैध बस्तियों तथा मलिन बस्तियों में क्या अंतर हैं?
उत्तर:
अवैध बस्तियों तथा मलिन बस्तियों में निम्नलिखित अंतर हैं-

अवैध बस्तियाँमलिन बस्तियाँ
1. ये बस्तियाँ किसी खाली पड़ी सार्वजनिक भूमि पर बसी हुई होती है।1. ये ऐसी बस्तियाँ हैं जहाँ न्यूनतम आवश्यक स्तर की सुविधाएँ भी नहीं पाई जातीं।
2. इन बस्तियों में भू-स्वामित्व का अभाव होता है।2. इनमें भू-स्वामित्व कानूनी भी हो सकता है और गैर-कानूनी भी।

प्रश्न 8.
ग्रामीण बस्तियों के आधारों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
ग्रामीण अधिवासों अथवा बस्तियों का वर्गीकरण करने के लिए अनेक विधियाँ प्रस्तुत की गई हैं। इन्हें कई आधारों पर वर्गीकृत किया गया है; जैसे

  • आकार के आधार पर बृहद, मध्यम तथा लघु बस्तियाँ।
  • स्थिति के आधार पर घाटी समीप्र, नदी समीप तथा सड़क समीप बस्तियाँ।
  • समय के आधार पर-पूर्व ऐतिहासिक, प्राचीन, मध्यकालीन तथा आधुनिक बस्तियाँ।
  • प्रकार्य के आधार पर-कृषीय, मत्स्य तथा बाजार बस्तियाँ।
  • घरों की सापेक्षिक दूरी के आधार पर-संहत तथा प्रकीर्ण बस्तियाँ।

बस्तियों के वर्गीकरण का सबसे महत्त्वपूर्ण आधार घरों की सापेक्षिक दूरी है। ग्रामीण घरों के मध्य दूरियाँ, ग्रामीण बस्ती को एक विशिष्ट आकृति प्रदान करती है जिसके आधार पर बस्तियाँ मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं

  • संहत अथवा नाभिक बस्तियाँ
  • प्रकीर्ण बस्तियाँ।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 10 मानव बस्तीी

प्रश्न 9.
ग्रामीण बस्तियों तथा नगरीय बस्तियों में क्या अंतर हैं?
उत्तर:
ग्रामीण बस्तियों तथा नगरीय बस्तियों में निम्नलिखित अंतर हैं-

ग्रामीण बस्तियाँनगरीय बस्तियाँ
1. ग्रामीण बस्तियों का आकार छोटा होता है तथा यहाँ कम जनसंख्या निवास करती है।1. नगरीय बस्तियों का आकार,बड़ा होता है तथा यहाँ जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है।
2. यहाँ के निवासियों का प्रमुख व्यवसाय कृषि है।2. यहाँ के निवासियों का प्रमुख व्यवसाय व्यापार एवं विभिन्न उद्योग-धंधे हैं।
3. ये क्षेत्र कृषि प्रधान होने के कारण नगरों को कृषि तथा पशु उत्पाद भेजते हैं।3. ये क्षेत्र उद्योग प्रधान होते हैं इसलिए गाँवों को उत्पादित वस्तुएँ भेजते हैं।
4. यहाँ आधुनिक सुविधाओं का अभाव होता है।4. यहाँ सभी प्रकार की आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं।
5. इनकी जनसंख्या 5000 से कम होती है।5. इनकी जनसंख्या 5000 से अधिक होती है।

प्रश्न 10.
नगरीय बस्ती की कोई चार विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:
नगरीय बस्ती की चार विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. जनसंख्या का आकार-नगरीय बस्तियों में अपेक्षाकृत अधिक जनसंख्या होती है।

2. जनसंख्या घनत्व-नगरों में अपेक्षाकृत जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है। कारण यह है कि नगर में छोटे क्षेत्र पर बने बड़े व्यापारिक क्षेत्र में अधिक जनसंख्या कार्यरत होती है। अतः जनसंख्या घनत्व अधिक हो जाता है।

3. प्रकार्यात्मक विशेषता नगरीय बस्तियों के निवासी प्रायः गैर-प्राथमिक कार्यों; जैसे व्यापार, उद्योग, परिवहन, प्रशासन आदि कार्यों में संलग्न रहते हैं। नगरीय बस्तियाँ इन कार्यों का केन्द्र होती हैं। यहाँ किसी एक या दो कार्यों की प्रधानता पाई जाती है।

4. विभिन्न समुदायों का समूह-नगरीय बस्तियों में अनेक धार्मिक, व्यावसायिक तथा सांस्कृतिक समुदायों के लोग रहते हैं। यहाँ सामुदायिक भावना का अभाव मिलता है।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
ग्रामीण बस्तियों की स्थिति को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते हैं? वर्णन करें।
उत्तर:
ग्रामीण बस्तियों की स्थिति को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं-
1. जल आपूर्ति – साधारणतया ग्रामीण बस्ती जल स्रोतों; जैसे नदियाँ, झीलों एवं झरनों आदि के पास स्थित होती है, जहाँ से जल आसानी से उपलब्ध हो सके। अधिकांश जल आधारित नम बिंदु बस्तियों में पीने, खाना बनाने, वस्त्र धोने आदि के लिए जल की प्राप्ति जैसे अनेक लाभ उपलब्ध होते हैं। फार्म भूमि की सिंचाई के लिए नदियों और झीलों का उपयोग किया जा सकता है। इन्हीं स्रोतों से वहाँ के निवासी भोजन के लिए मछली पकड़ते हैं और यह जल यातायात के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है।

2. भूमि मनुष्य बसने के लिए उस जगह का चुनाव करता है जहाँ की भूमि कृषि कार्य के लिए उपयुक्त व उपजाऊ हो। जैसे दक्षिणी-पूर्वी एशिया में रहने वाले लोग नदी घाटियों के निम्न भागों एवं तटवर्ती मैदानों के निकट बस्ती बसाते हैं।

3. उच्च भूमि के क्षेत्र – मानव ने अपने अधिवास के लिए उच्च भूमि के क्षेत्रों को इसलिए चुना ताकि वहाँ पर बाढ के समय होने वाली क्षति से बचा जा सके और मकान व जीवन सुरक्षित रह सके। नदी बेसिन के निम्न भाग में बस्तियाँ नदी वेदिकाओं एवं तटबंधों पर बसाई जाती हैं, क्योंकि ये भाग शुष्क बिंदु होते हैं। उष्ण कटिबंधीय देशों के दलदली क्षेत्रों के निकट रहने वाले लोग अपने मकान स्तंभों पर बनाते हैं जिससे कि बाढ़ एवं कीड़े-मकौड़ों से बचा जा सके।

4. सुरक्षा-राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध या पड़ोसी समूहों के उपद्रवी होने की स्थिति में गाँवों को सुरक्षात्मक पहाड़ियों एवं द्वीपों पर बसाया जाता था। भारत में अधिकतर दुर्ग ऊँचे स्थानों अथवा पहाड़ियों पर स्थित हैं।

5. गृह-निर्माण सामग्री-मानव बस्ती के विकसित होने में गृह-निर्माण सामग्री की उपलब्धता भी एक बड़ा कारक होती है जहाँ आसानी से लकड़ी, पत्थर आदि प्राप्त होते हैं। मनुष्य वहीं अपनी बस्तियाँ बसाता है। वनों को काटकर प्राचीन गाँवों को बनाया गया था जहाँ लकड़ी बहुतायत में थी।

6. नियोजित बस्तियाँ इस प्रकार की बस्तियाँ सरकार द्वारा बसाई जाती हैं। सरकार द्वारा अधिगृहित की गई ऐसी भूमि पर निवासियों को सभी प्रकार की सुविधाएँ; जैसे आवास, पानी और अन्य अवसंरचना आदि उपलब्ध कराकर बस्तियों को विकसित किया जाता है। भारत में इंदिरा गाँधी नहर क्षेत्र में नहरी बस्तियों का विकास इसका एक अच्छा उदाहरण है।

प्रश्न 2.
ग्रामीण बस्तियों की आकृति के आधार पर बस्तियों का वर्गीकरण करें।
उत्तर:
ग्रामीण बस्तियों के प्रतिरूप विभिन्न भौतिक तथा सांस्कृतिक लक्षणों द्वारा निर्धारित होते हैं। विभिन्न आधार पर ये प्रतिरूप कई प्रकार के होते हैं जिसमें से मुख्य निम्नलिखित प्रकार से हैं
1. आयताकार प्रतिरूप ग्रामीण बस्तियों का यह प्रतिरूप समतल क्षेत्रों तथा चौड़ी पर्वतीय घाटियों में पाया जाता है। अधिकांश सघन बस्तियों (Compact Settlements) का आकार आयताकार होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि-मापन बीघा एवं एकड़ के आधार पर किया जाता है जिससे कृषि भूमि की सीमा का निर्धारण भी आयताकार रूप ले लेता है। कृषकों का प्रयास रहता है कि उपजाऊ भूमि कम-से-कम नष्ट हो। इस बात को ध्यान में रखते हुए घरों तथा गलियों का निर्माण खेत की आकृति के अनुरूप होता है। गंगा के मैदान में यह प्रतिरूप विशेष रूप से पाया जाता है।

2. वर्गाकार प्रतिरूप-विशेष परिस्थितियों में आयताकार प्रतिरूप वर्गाकार आकृति धारण कर लेते हैं। इस प्रकार के प्रतिरूप वाली बस्तियाँ स्थल मार्गों के चौराहों पर भी विकसित हो सकती हैं। आयताकार बस्तियों के सामान्य विकास की परिस्थिति में एक तरफ अवरोध उत्पन्न हो जाने पर भी बस्ती की आकृति वर्गाकार हो जाती है। बस्तियों के चारों ओर स्थित बगीचों, तालाबों अथवा मार्गों के कारण भी ग्राम-विस्तार में रुकावट आती है। चौराहे की तरफ आवास निर्माण की प्रकृति से भी बस्ती वर्गाकार हो जाती है।

3. रेखीय प्रतिरूप-ये बस्तियाँ एक सीधी रेखा के रूप में होती हैं। ऐसी बस्तियाँ ज्यादातर किसी सड़क के दोनों किनारों पर, रेलमार्गों, नदी के किनारों पर अथवा किसी संकरी घाटी के समानान्तर विकसित होती हैं। यह प्रतिरूप आयताकार बस्ती का ही विशेष रूप है। यदि बस्ती का विस्तार एक दिशा की ओर अधिक हो जाए तो सड़क या नहर के साथ-साथ उसका प्रतिरूप रेखीय आकृति का हो जाता है।

4. गोलाकार प्रतिरूप-किसी झील या तालाब के चारों ओर घरों के निर्माण के फलस्वरूप इस प्रकार के गोलाकार प्रतिरूप का निर्माण होता है।

5. त्रिभुजाकार प्रतिरूप-इनका आकार त्रिभुजाकार बस्तियों की भाँति होता है। इस प्रकार की बस्तियों का विकास प्रायः दो नदियों अथवा दो सड़कों पर होता है। इस अवस्था में बस्ती का प्रसार मिलना प्रतिबन्धित हो जाता है। इस आकार के अधिवास उन स्थानों पर भी विकसित हो जाते हैं जहाँ कोई सड़क दूसरी सड़क से जाकर मिले, परन्तु चौराहा न बनाए। सड़कों के द्वारा त्रिभुज की दो भुजाएँ बन जाती हैं और त्रिभुज के आधार की ओर खुली भूमि पर बस्ती फैलती रहती है।

6. खोखला आयताकार अथवा वर्गाकार प्रतिरूप-इस प्रतिरूप की बस्ती आकृति में आयताकार या वर्गाकार होते हुए अपने मध्य क्षेत्र में खाली स्थान रखे हुए होती है। ऐसे प्रतिरूप का विकास मुख्य रूप से उन प्रदेशों में हुआ है जहाँ बस्ती की स्थापना हवेलीनुमा आवास के चारों तरफ की गई थी। बाद में यह आवास नष्ट हो जाने पर बस्ती के मध्य में खण्डहर के रूप में रह जाते हैं। कभी-कभी बस्ती के मध्य में तालाब या छायादार वृक्षों से युक्त स्थल होते हैं।

7. नाभिक वृत्ताकार प्रतिरूप-नाभिक ग्रामीण बस्तियाँ अत्यन्त ही संगठित रूप से स्थित आवासों द्वारा निर्मित पाई जाती हैं। बस्ती के बाह्य भागों में मकानों की दीवारें इस प्रकार एक-दूसरे से जुड़ी रहती हैं कि बस्ती बाहर से दीवारों द्वारा घिरी नजर आती है। बस्ती में प्रवेश करने वाले मार्गों की संख्या कम होती है। इनका बाहरी आकार लगभग वृत्ताकार होता है।

8. नीहारकीय वृत्ताकार प्रतिरूप-वृत्ताकार बस्ती के मध्यवर्ती भाग जब खाली रह जाते हैं तो इस प्रकार के वृत्ताकार गाँव का प्रतिरूप नीहारकीय माना जाता है।

9. चापाकार प्रतिरूप दक्षिणी भारत के पहाड़ी प्रदेशों में ढलानों पर बसे हुए बस्तियों की आकृति अपने-आप चापाकार हो जाती है। सरिताओं के मार्गों को रोककर कृत्रिम तालाबों का निर्माण किया जाता है, उनके समीप स्थित बस्तियों का प्रतिरूप भी चापाकार हो जाता है।

10. प्रतिरूप इस प्रकार की बस्तियाँ किसी अन्तरीप के सिरे पर या नदी के नोकीले मोड़ पर बसी होती हैं। इनके अग्र भाग में मकानों की संख्या कम और पृष्ठ भाग में अधिक होती है।।

11. तारा प्रतिरूप-इस प्रतिरूप की बस्ती शुरू में त्रिज्या के आकार की होती है और बाद में मार्गों के किनारे-किनारे विस्तार होने के कारण बस्ती तारा आकार ग्रहण कर लेती है।

12. हार्स-शू प्रतिरूप-इस प्रकार की बस्ती छोटी-सी पहाड़ी या गोल टीले के एक भाग के चारों और इस प्रकार से फैली होती है कि उसका आकार अंग्रेजी के अक्षर ‘U’ जैसा हो जाता है।

13. पंख प्रतिरूप-पंख आकार की बस्तियाँ नदियों के डेल्टाओं पर बसी हुई होती हैं। भारत में महानदी, गोदावरी और कृष्णा नदियों के डेल्टाओं पर इस प्रकार की बस्तियाँ पाई जाती हैं। हिमालय के पाद-प्रदेशों (Piedmont Areas) में भी काँप-पंखों (Alluvial fans) पर भी ऐसे प्रतिरूप विकसित हुए हैं।

14. बहुकोणीय प्रतिरूप यह बड़ी तथा वर्गाकार प्रतिरूपों के मध्य की अवस्था है। इन बस्तियों का प्रतिरूप वर्गाकार से बदलकर बहुकोणीय हो जाता है।

प्रश्न 3.
नगरीय बस्तियों के विभिन्न प्रकारों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
अथवा
नगरीय बस्तियों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
नगरीय बस्तियों को अपने आकार, उनमें उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं तथा इनमें किए जा रहे कार्यों के आधार पर अनेक प्रकारों में विभक्त किया जा सकता है। नगरीय बस्तियों के विभिन्न प्रकार निम्नलिखित हैं-
1. नगर-नगर ग्रामीण बस्ती से बड़ी एक ऐसी संहत बस्ती है जिसमें जन-समुदाय नगरीय जीवन-यापन करता है। ग्रामीण बस्ती से नगर को अलग करने के लिए जनसंख्या के आकार के साथ-साथ नगरों तथा ग्रामीण बस्तियों के कार्यों की विषमता पर भी ध्यान दिया जाता है। अपने विशिष्ट कार्यों के आधार पर नगरों को अनेक प्रकार से बाँटा जा सकता है खनन नगर तथा पत्तन नगर आदि नगरों में निर्माण, उद्योग, थोक तथा खुदरा व्यापार तथा विभिन्न व्यावसायिक सेवाएँ उपलब्ध होती हैं।

2. शहर-शहर आकार तथा जनसंख्या में नगरों से बड़े होते हैं। उनके आर्थिक कार्य भी अधिक तथा जटिल होते हैं। अतः किसी क्षेत्र में अनेक नगरों में से सबसे अग्रणी नगर को शहर का दर्जा प्राप्त होता है। यह प्रादेशिक तथा स्थानीय स्तर पर अनेक नगरों को पीछे छोड़ देता है। मम्फोर्ड के अनुसार, शहर उच्च एवं अत्यधिक जटिल प्रकार के जीवन का भौतिक स्वरूप है। शहरों में प्रादेशिक, प्रशासनिक कार्यालय, प्रमुख शिक्षण संस्थान, उच्च व्यापारिक कार्यालय, वित्तीय संस्थाएँ एवं मनोरंजन स्थल इत्यादि होते हैं।

3. महानगर-दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगर महानगर कहलाते हैं। यह प्रादेशिक राजधानी अथवा बड़ी व्यापारिक तथा औद्योगिक क्षेत्र होता है। सन् 1810 में इस श्रेणी में आने वाला पहला शहर लंदन था। सन् 1850 में पेरिस तथा सन् 1860 में न्यूयॉर्क शहर ने इस श्रेणी में प्रवेश किया।

4. सन्नगर-सबसे पहले इस शब्द का प्रयोग सन् 1915 में पैट्रिक गिडिज़ ने किया था। सन्नगर में कई फैलते हुए कस्बे, परस्पर मिलकर एक इकाई बनाते हैं। इनके केन्द्र में भी कई नगरीय बस्ती होती है। सन्नगर विशाल तथा सतत् नगरीय क्षेत्र होता है जो अलग-अलग नगरों या शहरों के आपस में मिलने से बनता है। जनसंख्या प्रसार तथा आर्थिक विकास के कारण किसी नगर के निकटवर्ती नगरों का आपस में सम्मिलन सन्नगर कहलाता है। कोलकाता, नई दिल्ली आदि सन्नगरों के उदाहरण हैं।

5. विश्व नगरी-मैगालोपोलिस का शाब्दिक अर्थ होता है विशाल नगर (Great City)। ये अत्यन्त बड़े नगर होते हैं जिनकी जनसंख्या प्रायः 50 लाख से अधिक होती है। मेगा सिटी शब्द का प्रयोग दक्षिणी हैंपशायर से उत्तरी वर्जीनिया तक फैले हुए क्षेत्र के लिए सर्वप्रथम जीन गोटमेन ने किया था। यह एक फैलता हुआ बड़ा महानगरीय क्षेत्र होता है जिसमें सन्नगरों का समूह तथा जनसंख्या का सतत् विस्तार पाया जाता है। टोकियो, न्यूयॉर्क, मास्को, शंघाई आदि विशाल नगरों को मम्फोर्ड ने मैगालोपोलिस की संज्ञा दी है। मैगालोपोलिस की कुल जनसंख्या मुख्य नगर व उपनगरों को मिलाकर एक करोड़ से अधिक होती है। न्यूयॉर्क को विश्व का पहला मैगालोपोलिस होने का श्रेय प्राप्त है।

प्रश्न 4.
नगरों के प्रकार्यात्मक वर्गीकरण का वर्णन कीजिए।
अथवा
कार्य के आधार पर नगरों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
विशेष व्यवसाय एवं कार्य की प्रधानता के आधार पर नगरों का वर्गीकरण निम्नलिखित प्रकार से किया जाता है-
1. औद्योगिक नगर इन नगरों में निर्माण उद्योग से सम्बन्धित कार्यों की प्रधानता होती है। औद्योगिक नगरों में कच्चे मालों से सामान तैयार किया जाता है। उदाहरणार्थ कच्चे लोहे से इस्पात (Steel) तैयार करना, रूई से वस्त्र तैयार करना, रबड़ के टायर, बिजली के तार तथा सीमेन्ट तैयार करना आदि निर्माण उद्योग हैं। शुरू में ये औद्योगिक नगर कोयले की खानों के नजदीक स्थापित किए जाते थे परन्त अब बिजली पर निर्भरता के कारण औद्योगिक नगर कोयले की खानों से दर भी विकसित हो रहे हैं। औद्योगिक नगर के उदाहरण-टाटा नगर, हावड़ा, भिलाई, बर्मिंघम, कानपुर आदि।

2. व्यापारिक नगर अथवा व्यापारिक केन्द्र-विश्व के अधिकतर नगर व्यापार के दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण रहे हैं। व्यापारिक नगर के विकास का मुख्य आधार परिवहन (Transport) की सुविधा होती है। व्यापारिक नगर का मुख्य कार्य किसी क्षेत्र के उत्पादन को एकत्रित करके दूसरे क्षेत्रों की माँग की पूर्ति करना है। इन्हें बाजार तथा मंडियाँ भी कहा जाता है। इन बाजारों में व्यापारी बैंक, बीमा कम्पनियाँ, स्टॉक एक्सचेंज तथा अन्य वित्तीय संस्थान भी पर्याप्त मात्रा में होते हैं। ऐसे नगरों में छोटी मात्रा में उद्योग भी होते हैं। स्थानीय कच्चे मालों को निर्मित रूप देने के लिए उद्योग भी स्थापित हो सकते हैं। व्यापारिक नगरों का विकास निम्न स्थितियों में होता है

  • किसी सड़क या रेलमार्ग के समीप
  • दो विपरीत प्रकार के क्षेत्र जैसे पर्वत व मैदान की सीमा पर
  • सड़क या मार्गों के मिलने के स्थान पर
  • समुद्र पत्तनों पर।

कनाडा का विनिपेग, भारत का आगरा, इराक का बगदाद, पाकिस्तान का लाहौर आदि व्यापारिक नगर के उदाहरण हैं। इसी प्रकार दिल्ली में आजादपुर मण्डी, हापुड़, मुजफ्फरनगर तथा मेरठ आदि प्रमुख वितरण केन्द्र के रूप में प्रसिद्ध हैं।

3. परिवहन नगर परिवहन नगर परिवहन की विशेष सुविधाओं के कारण विकसित होते हैं। परिवहन नगर का विकास दो प्रकार की स्थितियों (Locations) में होता है-

  • मार्ग में बाधा के कारण
  • दो या दो से अधिक व्यापारिक मार्गों के मिलने के स्थान पर। कोई ऐसी बाधा जहाँ परिवहन को रोका जाए तथा वहाँ से सामान अन्य साधन द्वारा आगे ले जाया जाए, ऐसे स्थानों पर नगर बस जाता है।

उदाहरण-

  • रेलमार्ग समाप्त होकर आगे सड़क मार्ग से जाना
  • समुद्री मार्ग समाप्त होकर आगे सड़क अथवा रेलमार्ग से जाना।

दो या अधिक व्यापारिक मार्गों के मिलने के स्थान पर परिवहन नगरों का विकास प्रत्येक देश में हुआ है। उदाहरण-भटिण्डा, आगरा, नागपुर, पेरिस, बर्लिन, मास्को आदि यूरोप के बड़े परिवहन नगर इसी प्रकार के हैं। परिवहन नगरों में निर्माण उद्योग की अत्यधिक उन्नति के कारण ये औद्योगिक नगरों में भी परिवर्तित हो जाते हैं।

4. प्रशासनिक नगर-ये नगर प्रशासन के केन्द्र होते हैं; जैसे राष्ट्र की राजधानियाँ-नई दिल्ली, मास्को, बीजिंग आदि; राज्य-स्तर पर राजधानियाँ-जयपुर, गांधीनगर, लखनऊ आदि प्रशासनिक नगरों के उदाहरण हैं। ऐसे नगरों में बड़ी संख्या में सरकारी कार्यालय तथा सरकारी आवास होते हैं।

5. सांस्कृतिक नगर-इन नगरों में सांस्कृतिक गतिविधियों; जैसे शिक्षा, ज्ञान-विज्ञान, मनोरंजन तथा धर्म के विकास एवं प्रसार को महत्त्व दिया जाता है। ये मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं

  • शिक्षा नगर-इनमें महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, छात्रावास, खेलकूद तथा प्रशिक्षण केन्द्रों की अधिकता होती है; जैसे इलाहाबाद, पंतनगर, पिलानी, ऑक्सफोर्ड, हारवर्ड, कुरुक्षेत्र, रुड़की, सोनीपत आदि शिक्षा नगरों के उदाहरण हैं।
  • धार्मिक नगर-विश्व के कई नगर धार्मिक क्रियाकलापों के कारण विख्यात हो जाते हैं; जैसे वेटिकन सिटी, धर्मशाला, हरिद्वार, अमृतसर, मथुरा, वाराणसी, बालाजी, अजमेर आदि।

6. प्रतिरक्षा नगर-इन नगरों में सैनिकों के प्रशिक्षण तथा अभ्यास की व्यवस्था होती है। नगर में जिस स्थान पर सैनिक रहते हैं, उसे कैंटोनमेंट कहते हैं; जैसे जोधपुर, देहरादून, अम्बाला तथा हिसार आदि।

7. संग्रह नगर-इन नगरों में प्राकृतिक वस्तुओं के संग्रह करने की सुविधा होती है। इनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं

  • खनन केन्द्र-ये नगर खानों के आसपास विकसित हो जाते हैं। ये छोटी-छोटी बस्तियों के समूह होते हैं जिनका विकास वहाँ मिलने वाले खनिजों के कारण होता है; जैसे खेतड़ी, रानीगंज, जोहांसबर्ग, झरिया आदि।
  • मत्स्य पत्तन-ये नगर मछली संग्रह के केन्द्र होते हैं। ये केन्द्र मछली के संग्रह से वितरण तक के सभी कार्य करते हैं; जैसे कालीकट, कोचीन, पुद्दचेरी आदि।
  • काष्ठ बर्तन नगर-ये नगर वनों के निकट विकसित होते हैं। इन नगरों में आरा मिलें, कागज के कारखाने तथा फर्नीचर बनाने के कारखाने स्थापित हो जाते हैं; जैसे नेपानगर, हलद्वानी, काठगोदाम आदि।

8. मनोरंजन नगर (Recreation Towns)-ये नगर अपने पर्यावरण अथवा किसी विशेष कार्य के कारण आमोद-प्रमोद की सभी सुविधाओं से सम्पन्न होते हैं। ये नगर अपनी इन सुविधाओं के कारण पर्यटकों को आकर्षित करते हैं; जैसे जयपुर, आगरा, शिमला, मंसूरी, गोवा, मुम्बई आदि।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 10 मानव बस्तीी

प्रश्न 5.
बस्ती किसे कहते हैं? ग्रामीण बस्तियों तथा नगरीय बस्तियों को कैसे अलग किया जा सकता है?
अथवा
बस्तियों के वर्गीकरण के आधारों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
बस्ती (Settlement) – बस्ती अंग्रेजी के शब्द ‘Settlement’ का रूपांतरण है और इस शब्द की उत्पत्ति ‘Settle’ से हुई है। Settle का तात्पर्य है ठहरना या स्थायी, जिसका अर्थ कुछ समय का घूमना-फिरना, ठहर जाना या स्थायी जीवन से है। इस प्रकार मानव के स्थायी आश्रय या निवास बस्ती कहलाते हैं। जोन्स बूंश (Brunches) ने बस्ती को भूगोल में इस प्रकार से परिभाषित किया है-“अधिवास स्थायी हो या अस्थायी, वह एकल हो या संकुल, उसका महत्त्वपूर्ण उपयोग मानव-आवास है।” समस्त प्रदेश में आवास-क्षेत्र दूर से ही पहचाने जाते हैं।” उनकी सज्जा, निर्माण सामग्री, रचना तथा निर्माण में उस विशेष क्षेत्र की छाप होती है।

वहाँ की सांस्कृतिक एवं भौतिक लक्षणों का एक सामूहिक प्रतिबिंब होता है। भौतिक एवं सांस्कृतिक विशेषताएँ उसके हर लक्षण में परिलक्षित होती हैं। बस्ती में सभी प्रकार के आश्रय (Shelter) सम्मिलित होते हैं, चाहे वह झोंपड़ी हो या मिट्टी का बना मकान और चाहे वह सीमेंट और लोहे की बनी भव्य इमारत हो या महल । बस्ती में व्यापारिक, औद्योगिक, सार्वजनिक, सामाजिक एवं व्यक्तिगत सभी को शामिल किया जाता है। आकार की दृष्टि से बस्ती एकाकी मकान भी हो सकता है दो चार घर भी हो सकते हैं, कुछ परिवारों का समूह या पुरवा (Hamlet) भी हो सकता है, एक बड़ा गाँव या शहर अथवा महानगर (Metropolitan) भी हो सकता है।

बस्तियों के वर्गीकरण के आधार-ग्रामीण बस्तियों तथा नगरीय बस्तियों को निम्नलिखित लक्षणों के आधार पर अलग-अलग किया गया है-
1. जनसंख्या का आधार (Population’s Base) नगरीय तथा ग्रामीण बस्तियों को उनकी जनसंख्या के आधार पर अलग-अलग भागों में बाँटा गया है, लेकिन विश्व के भिन्न-भिन्न देशों में जनसंख्या का आधार अलग-अलग है। डेनमार्क तथा स्वीडन जैसे छोटे देशों में 250 तक की जनसंख्या वाली बस्ती को ग्रामीण तथा 250 से अधिक जनसंख्या वाली बस्ती को, नगरीय बस्ती माना है। कनाडा तथा वेनेजुएला में 1000 से अधिक की जनसंख्या वाली बस्ती को नगरीय बस्ती माना है। संयुक्त राज्य अमेरिका तथा थाइलैंड में 2500 से अधिक जनसंख्या वाली बस्ती को नगरीय बस्ती माना गया है तथा 400 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से अधिक जनसंख्या का घनत्व जिस बस्ती में हो, उसे नगरीय बस्ती की संज्ञा दी गई है।

2. आर्थिक आधार-कुछ देशों ने ग्रामीण तथा नगरीय बस्ती का आधार विभिन्न आर्थिक क्रियाओं को माना है। आर्थिक व्यवसायों के आधार पर दोनों को अलग-अलग भागों में बाँटा जाता है। भारत में बस्तियों के वर्गीकरण के लिए दूसरा आधार व्यावसायिक है। जो बस्ती प्राथमिक व्यवसायों जैसे कृषि, पशपालन, आखेट, मत्स्य, लकड़ी काटना तथा खनन व्यवसायों में लगी है, उसे ग्रामीण तथा जिस बस्ती में अधिकांश लोग द्वितीयक तथा तृतीयक कार्यों; जैसे उद्योग, व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन आदि कार्यों में लगे हैं, उन्हें नगरीय बस्ती कहा जाता है।

3. प्रशासनिक आधार-कुछ देशों में नगरीय तथा ग्रामीण बस्तियों के विभाजन का आधार प्रशासनिक भी है; जैसे भारत में जहाँ पंचायत तथा ग्राम सभाएँ हैं, उन्हें गाँव तथा जिन बस्तियों में नोटीफाईड टाउन एरिया, कंटोनमेंट बोर्ड, नगरपालिकाएँ, नगर परिषद्, महानगरपालिकाएँ आदि हैं, उन्हें नगर की संज्ञा दी है। अमेरिकी देशों; जैसे ब्राजील तथा बोलविया में छोटे-छोटे प्रशासनिक केंद्रों को भी नगर माना गया है।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के आयात-निर्यात को क्या कहते हैं?
(A) स्थानीय व्यापार
(B) अनुकूल व्यापार
(C) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
(D) क्षेत्रीय व्यापार
उत्तर:
(C) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

2. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कितने प्रकार का होता है?
(A) 2
(B) 3
(C) 4
(D) 5
उत्तर:
(A) 2

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

3. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के द्वार हैं-
(A) समुद्री बंदरगाह
(B) हवाई पत्तन
(C) जहाजों की रक्षा
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(B) हवाई पत्तन

4. जब एक ही क्षेत्र के निवासी वस्तु विनिमय करते हैं, तो यह कौन-सा व्यापार है?
(A) स्थानीय व्यापार
(B) क्षेत्रीय व्यापार
(C) राष्ट्रीय व्यापार
(D) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
उत्तर:
(A) स्थानीय व्यापार

5. क्षेत्रीय व्यापार को कहते हैं-
(A) स्थानीय व्यापार
(B) देशी व्यापार
(C) बहुपक्षीय व्यापार
(D) द्विपक्षीय व्यापार
उत्तर:
(B) देशी व्यापार

6. दो देशों के बीच वस्तुओं का विनिमय क्या कहलाता है?
(A) व्यापार
(B) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
(C) क्षेत्रीय व्यापार
(D) द्विपक्षीय व्यापार
उत्तर:
(D) द्विपक्षीय व्यापार

7. आयात और निर्यात के बीच मूल्य के अंतर को क्या कहा जाता है?
(A) व्यापार संतुलन
(B) अनुकूल व्यापार संतुलन
(C) विलोम व्यापार संतुलन
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) व्यापार संतुलन

8. जब निर्यात की जाने वाली वस्तुओं की अपेक्षा आयात की जाने वाली वस्तुओं का मूल्य ज्यादा होता है तो व्यापार कहलाता है-
(A) व्यापार संतुलन
(B) अनुकूल व्यापार संतुलन
(C) ऋणात्मक व्यापार संतुलन
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) ऋणात्मक व्यापार संतुलन

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

9. ओपेक में सम्मिलित देश नहीं है-
(A) ईरान
(B) कुवैत
(C) भारत
(D) इराक
उत्तर:
(C) भारत

10. एक देश द्वारा दूसरे देश से वस्तुओं और सेवाओं की खरीद कहलाती है-
(A) व्यापार
(B) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
(C) आयात
(D) निर्यात
उत्तर:
(C) आयात

11. एक देश द्वारा दूसरे देश को वस्तुओं का भेजना, क्या कहलाता है?
(A) व्यापार
(B) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
(C) निर्यात
(D) आयात
उत्तर:
(C) निर्यात

12. निम्नलिखित में से कौन-सा देश सार्क (SAARC) का सदस्य नहीं है?
(A) भारत
(B) चीन
(C) पाकिस्तान
(D) भूटान
उत्तर:
(B) चीन

13. गैट व्यापारिक समझौता लागू हुआ था
(A) सन् 1948 में
(B) सन् 1959 में
(C) सन् 1994 में
(D) सन् 2005 में
उत्तर:
(A) सन् 1948 में

14. निम्नलिखित देशों में से कौन-सा सार्क का नया सदस्य बना है?
(A) भूटान
(B) नेपाल
(C) श्रीलंका
(D) अफगानिस्तान
उत्तर:
(D) अफगानिस्तान

15. विश्व व्यापार संगठन का मुख्यालय कहाँ है?
(A) न्यूयार्क
(B) जेनेवा
(C) पेरिस
(D) शंघाई
उत्तर:
(B) जेनेवा

16. सार्क (SAARC) के सदस्य देशों की संख्या कितनी है?
(A) 6
(B) 7
(C) 8
(D) 9
उत्तर:
(C) 8

17. अंतर्राष्ट्रीय तेल उत्पादक राष्ट्रों का समूह है-
(A) सार्क (SAARC)
(B) आसियान (ASEAN)
(C) 311406 (OPEC)
(D) इ०यू० (यूरोपीय संघ)
उत्तर:
(C) 311406 (OPEC)

18. आसियान का मुख्यालय है-
(A) जकार्ता में
(B) पेरिस में
(C) जेनेवा में
(D) लंदन में
उत्तर:
(A) जकार्ता में

19. जो पत्तन समुद्री मार्गों के मध्य विकसित होते हैं, उन्हें कहा जाता है-
(A) पोर्ट ऑफ कॉल पत्तन
(B) बाह्य पत्तन
(C) आंतरिक पत्तन
(D) सवारी पत्तन
उत्तर:
(A) पोर्ट ऑफ कॉल पत्तन

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

20. गहरे समुद्र में बनाए गए पत्तन को कहा जाता है-
(A) आंतरिक पत्तन
(B) बाह्य पत्तन
(C) तैल पत्तन
(D) सवारी पत्तन
उत्तर:
(B) बाह्य पत्तन

21. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के महत्त्वपूर्ण पक्ष में सम्मिलित है-
(A) व्यापार का परिमाण
(B) व्यापार की दिशा
(C) व्यापार का संयोजन
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

22. हगली नदी पर बना कोलकाता पत्तन निम्नलिखित में से किस प्रकार का है?
(A) बाह्य पत्तन
(B) आंत्रेपो पत्तन
(C) आंतरिक पत्तन
(D) सवारी पत्तन
उत्तर:
(C) आंतरिक पत्तन

23. जिन पत्तनों पर तेल का आयात-निर्यात और परिष्करण होता है, उन्हें कहा जाता है-
(A) वाणिज्यिक पत्तन
(B) बाह्य पत्तन
(C) आंतरिक पत्तन
(D) तैल पत्तन
उत्तर:
(D) तैल पत्तन

24. फारस की खाड़ी पर स्थित अबादान निम्नलिखित में किस प्रकार का पत्तन है?
(A) वाणिज्यिक पत्तन
(B) नौ सैनिक पत्तन
(C) तैल पत्तन
(D) आंत्रेपो पत्तन
उत्तर:
(C) तैल पत्तन

25. कौन-से देश ने इलैक्ट्रॉनिक के सामान के व्यापार में विशिष्ट दक्षता प्राप्त की है तथा जिसकी मांग अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर है?
(A) भारत
(B) चीन
(C) अमेरिका
(D) जापान
उत्तर:
(D) जापान

26. छोटे-छोटे कल पुों के विशिष्टीकरण के व्यापार को कहा जाता है-
(A) क्षैतिज व्यापार
(B) उर्ध्वाधर व्यापार
(C) द्विपक्षीय व्यापार
(D) बहुपक्षीय व्यापार
उत्तर:
(B) उर्ध्वाधर व्यापार

27. व्यापारिक अनुबंधों में सामान्यीकृत प्रणाली से कार्य करने वाले देशों के समूह को कहा जाता है-
(A) व्यापार संघ
(B) प्रादेशिक व्यापार संघ
(C) यूरोपीय संघ
(D) दक्षिण एशिया प्रादेशिक सहयोग संघ
उत्तर:
(A) व्यापार संघ

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28. बंदरगाह जो जंगी जहाजों के लिए काम करता है, उसे कहते हैं-
(A) तेल बंदरगाह
(B) आंतरिक पत्तन
(C) पोर्ट ऑफ काल
(D) नौ सैनिक पत्तन
उत्तर:
(D) नौ सैनिक पत्तन

29. जब आयात की जाने वाली वस्तुओं की अपेक्षा निर्यात की जाने वाली वस्तुओं का मूल्य ज्यादा होता है, तो व्यापार कहलाता है-
(A) व्यापार संतुलन
(B) ऋणात्मक व्यापार संतुलन
(C) धनात्मक व्यापार संतुलन
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) धनात्मक व्यापार संतुलन

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के आयात-निर्यात को क्या कहते हैं?
उत्तर:
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार।

प्रश्न 2.
विश्व व्यापार संगठन (W.T.0.) की स्थापना कब हुई?
उत्तर:
सन् 1995 में।

प्रश्न 3.
जब एक ही क्षेत्र के निवासी वस्तु-विनिमय करते हैं, तो यह कौन-सा व्यापार है?
उत्तर:
स्थानीय व्यापार।

प्रश्न 4.
दो देशों के बीच वस्तुओं का विनिमय क्या कहलाता है?
उत्तर:
द्विपक्षीय व्यापार।

प्रश्न 5.
एक देश द्वारा दूसरे देश को वस्तुओं का भेजना, क्या कहलाता है?
उत्तर:
निर्यात।

प्रश्न 6.
विश्व व्यापार संगठन का मुख्यालय कहाँ है?
उत्तर:
जेनेवा में।

प्रश्न 7.
किस महाद्वीप में विश्व व्यापार का सर्वाधिक प्रवाह होता है?
उत्तर:
उत्तरी अमेरिका में।

प्रश्न 8.
सार्क (SAARC) के सदस्य देशों की संख्या कितनी है?
उत्तर:
आठ।

प्रश्न 9.
आसियान के कोई दो सदस्य देशों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. मलेशिया
  2. इण्डोनेशिया।

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प्रश्न 10.
जो पत्तन समुद्री मार्गों के मध्य विकसित होते हैं, उन्हें क्या कहा जाता है?
उत्तर:
पोर्ट ऑफ कॉल पत्तन।

प्रश्न 11.
हुगली नदी पर बना कोलकाता पत्तन किस प्रकार का पत्तन है?
उत्तर:
आंतरिक प्रकार का।

प्रश्न 12.
जिन पत्तनों पर तेल का आयात-निर्यात और परिष्करण होता है, उन्हें क्या कहा जाता है?
उत्तर:
तैल पत्तन।

प्रश्न 13.
कौन-से देश ने इलेक्ट्रॉनिक के सामान के व्यापार में विशिष्ट दक्षता प्राप्त की है?
उत्तर:
जापान ने।

प्रश्न 14.
जो पत्तन जंगी जहाजों के लिए काम करता है, उसे क्या कहते हैं?
उत्तर:
नौ सैनिक पत्तन।

प्रश्न 15.
सार्क देशों का मुख्यालय कहाँ है?
उत्तर:
काठमाण्डू (नेपाल) में।

प्रश्न 16.
व्यापार के दो प्रकार बताइए।
उत्तर:

  1. घरेलू व्यापार
  2. विदेशी व्यापार।

प्रश्न 17.
यूरोपीय संघ का मुख्यालय कहाँ है?
उत्तर:
ब्रूसेल्स में।

प्रश्न 18.
भारत किस प्रादेशिक व्यापार समूह का सदस्य है?
उत्तर:
साफ्टा (SAFTA)।

प्रश्न 19.
उस देश का नाम लिखें जहाँ व्यापारिक रूप से हर किसान सहकारी संस्था का सदस्य है?
उत्तर:
डेनमार्क।

प्रश्न 20.
आसियान का गठन कब हुआ और इसका मुख्यालय कहाँ है?
अथवा
आसियान समूह का मुख्यालय कहाँ है?
उत्तर:
गठन-वर्ष 1967 में; मुख्यालय-जकार्ता में।

प्रश्न 21.
विश्व व्यापार संगठन (W.T.0.) की स्थापना कब हुई?
उत्तर:
15 अप्रैल, 1997 को।

प्रश्न 22.
यूरोपीय आर्थिक समुदाय (E.E.C.) का गठन कब हुआ?
उत्तर:
मार्च, 1957 में।

प्रश्न 23.
यूरोपीय आर्थिक समुदाय को कब ‘यूरोपीय संघ’ नाम दिया गया?
अथवा
यूरोपीय संघ का गठन कब हुआ?
उत्तर:
सन् 1992 में।

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प्रश्न 24.
नाफ्टा का गठन कब हुआ?
उत्तर:
सन् 1988 में।

प्रश्न 25.
साफ्टा का गठन कब हुआ?
उत्तर:
सन् 2006 में।

प्रश्न 26.
ओपेक का गठन कब हुआ और इसका मुख्यालाय कहाँ है?
अथवा
ओपेक देशों के समूह का मुख्यालय कहाँ है?
उत्तर:
गठन-सन् 1949 में; मुख्यालय-वियना में।

प्रश्न 27.
किन्हीं दो प्रादेशिक व्यापार समूहों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. आसियान
  2. साफ्टा।

प्रश्न 28.
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का तोरण या अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का प्रवेश द्वारा किसे कहा जाता है?
उत्तर:
पत्तन (Port) को।

प्रश्न 29.
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार किसका परिणाम है?
उत्तर:
उत्पादन में विशिष्टीकरण का।

प्रश्न 30.
रेशम मार्ग किन दो देशों को आपस में जोड़ता है?
उत्तर:
चीन तथा दक्षिणी-पश्चिमी एशिया को।

प्रश्न 31.
अनुकूल व्यापार संतुलन से क्या तात्पर्य है?
अथवा
किसी देश का व्यापार संतुलन धनात्मक कब होता है?
उत्तर:
जब निर्यात का मूल्य आयात के मूल्य से अधिक हो तो उसे धनात्मक या अनुकूल व्यापार संतुलन कहते हैं।

प्रश्न 32.
गैट (GATT) को कब विश्व व्यापार संगठन (WTO) में रूपांतरित किया गया?
उत्तर:
सन् 1995 में।

प्रश्न 33.
निम्नलिखित का पूर्ण रूप लिखें-

  1. WTO
  2. GATT
  3. OPEC
  4. EEC
  5. SAARC
  6. CIS
  7. COMECON
  8. EFTA
  9. ASEAN
  10. NAFTA
  11. SAFTA
  12. LAIA

उत्तर:

  1. WTO : World Trade Organisation
  2. GATT : General Agreement on Trade and Tariffs
  3. OPEC : Organisation of Petroleum Exporting Countries
  4. EEC : European Economics Community
  5. SAARC : South Asian Association of Regional Co-operation
  6. CIS : Common Wealth of Independent States
  7. COMECON : Council for Mutual Economic Assistance
  8. EFTA : European Free Trade Association
  9. ASEAN : Association of South East Asian Nations
  10. NAFTA : North American Free Trade Agreement
  11. SAFTA: South Asian Free Trade Area
  12. LAIA : Latin American Integration Association

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार क्या है?
उत्तर:
विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के आयात और निर्यात को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहते हैं।

प्रश्न 2.
तटीय व्यापार क्या है?
उत्तर:
एक ही देश की बंदरगाहों के बीच होने वाला व्यापार तटीय व्यापार कहलाता है।

प्रश्न 3.
आयात क्या है?
उत्तर:
किसी दूसरे देश से किसी वस्तु या सेवा का अपने देश के लिए खरीदना आयात कहलाता है।

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प्रश्न 4.
निर्यात क्या है?
उत्तर:
किसी वस्तु या सेवा का दूसरे देश में बेचना निर्यात कहलाता है।

प्रश्न 5.
उर्ध्वाधर व्यापार किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब कोई देश एक वस्तु का दूसरे देश से आयात कर अपने यहाँ उपभोग कर किसी अन्य वस्तु का निर्माण कर उसे किसी दूसरे देश को निर्यात करे तो उसे उर्ध्वाधर व्यापार कहते हैं।

प्रश्न 6.
क्षैतिज व्यापार किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब किसी उत्पाद का संपूर्ण कार्य एक ही देश में हो और उसे दूसरे देश में निर्यात किया जाए तो उसे क्षैतिज व्यापार कहते हैं।

प्रश्न 7.
संसार के पाँच सबसे बड़े व्यापारिक देशों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. संयुक्त राज्य अमेरिका
  2. युनाइटेड किंगडम
  3. फ्रांस
  4. जर्मनी
  5. जापान।

प्रश्न 8.
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के चार महत्त्वपूर्ण पक्ष कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1. व्यापार की मात्रा
  2. व्यापार की संरचना या संगठन
  3. व्यापार की दिशा
  4. व्यापार संतुलन।

प्रश्न 9.
व्यापार संघ क्या है?
उत्तर:
व्यापार संघ ऐसे देशों का समूह होता है जिनके बीच व्यापारिक शर्तों की सामान्यीकृन प्रणाली काम करती है।

प्रश्न 10.
ओपेक देशों के नाम बताइए।
उत्तर:
ओपेक देश 13 हैं इरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब, वेनेजुएला, अल्जीरिया, इक्वेडोर, इंडोनेशिया, लीबिया, नाइजीरिया, कतर, गैबन व संयुक्त अरब अमीरात (UAE)।

प्रश्न 11.
सार्क (SAARC) देशों के नाम बताइए।
उत्तर:
सार्क देश भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव और अफगानिस्तान हैं। ये आठ दक्षिण एशियाई देश हैं।

प्रश्न 12.
प्रतिकूल व्यापार संतुलन से क्या तात्पर्य है?
अथवा
किसी देश का व्यापार संतुलन ऋणात्मक कब होता है?
उत्तर:
जब निर्यात का मूल्य आयात के मूल्य से कम हो तो ऋणात्मक या प्रतिकूल व्यापार संतुलन कहते हैं।

प्रश्न 13.
‘सैलेरी’ शब्द से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
‘सैलेरी’ शब्द लैटिन भाषा के शब्द “सैलेरिअम’ से बना है, जिसका अर्थ है-नमक के द्वारा भुगतान। क्योंकि उस समय समुद्र के जल से नमक बनाने का पता नहीं था : यही वजह है कि यह भुगतान का एक माध्यम बना।

प्रश्न 14.
विदेशी मुद्रा विनिमय क्या है?
उत्तर:
यह एक ऐसी प्रणाली है जिसके अंतर्गत एक देश की मुद्रा का दूसर देश की मुद्रा से अदल-बदल किया जाता है।

प्रश्न 15.
अंतर्देशीय पत्तन किसे कहते हैं? दो उदाहरण दें।
उत्तर:
ये पत्तन समुद्री तट से दूर अवस्थित होते हैं। ये समुद्र से एक नदी अथवा नहर द्वारा जुड़े होते हैं। ऐसे पत्तन चौरस तल वाले जहाज़ द्वारा ही गम्य होते हैं; जैसे मानचेस्टर, कोलकाता।

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प्रश्न 16.
बाह्य पत्तन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
ये गहरे जल के पत्तन हैं जो वास्तविक पत्तन से दूर बने होते हैं। ये उन जहाजों, जो अपने बड़े आकार के कारण उन तक पहुँचने में असमर्थ हैं, को ग्रहण करके पैतृक पत्तनों को सेवाएँ प्रदान करते हैं।

प्रश्न 17.
धनात्मक व्यापार संतुलन क्या होता है?
उत्तर:
किसी समयावधि में आयात एवं निर्यात के बीच मूल्यों के अंतर को व्यापार संतुलन कहते हैं। यदि किसी देश में आयात की जाने वाली वस्तुओं की अपेक्षा निर्यात की जाने वाली वस्तुओं का मूल्य ज्यादा होता है तो ऐसे देशों के व्यापार संतुलन को धनात्मक कहा जाता है। इसे अनुकूल व्यापार संतुलन कहते हैं।

प्रश्न 18.
रेशम मार्ग किसे कहते हैं?
उत्तर:
रेशम मार्ग एक स्थलीय मार्ग है जो प्राचीनकाल में चीन तथा दक्षिणी पश्चिमी एशिया को व्यापारिक दृष्टि से जोड़ता था। इस मार्ग द्वारा कारवां रेशम, दाल चीनी, लोहे का सामान आदि अपने साथ व्यापार के लिए लेकर चलते थे। इस मार्ग पर प्राचीन नगरों के अवशिष्ट क्षेत्र अब भी दिखाई पड़ते हैं।

प्रश्न 19.
पारस्परिक आर्थिक सहयोग परिषद् (COMECON) के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
इस परिषद् का गठन पूर्वी यूरोप के सात देशों रूस, बुल्गेरिया, चेको-स्लोवाकिया, हंगरी, जर्मनी, पोलैंड तथा रोमानिया ने किया। इन देशों की परिषद् ने आर्थिक नियोजन के अंतर्गत ही व्यापार की नीतियों का निर्धारण किया है।

प्रश्न 20.
प्रादेशिक व्यापार समूह क्या होता है?
उत्तर:
प्रादेशिक व्यापार समूहों का जन्म भौगोलिक सामीप्य एवं समरूपता वाले देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने तथा विकासशील देशों के व्यापार पर लगे प्रतिबन्धों को हटाने के लिए हुआ है। वर्तमान में 120 व्यापार समूह विश्व के लगभग 52 प्रतिशत व्यापार का जनन कर रहे हैं। इन व्या समूहों का विकास प्रादेशिक व्यापार को गति देने में वैश्विक संगठनों के असफल होने के प्रत्युत्तर में हुआ है।

प्रश्न 21.
मुक्त व्यापार अथवा व्यापारिक उदारीकरण से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
व्यापार के लिए बिना किसी शर्त के अर्थव्यवस्थाओं को खोलने की प्रक्रिया को मुक्त व्यापार कहते हैं। इसको व्यापारिक उदारीकरण भी कहा जाता है।

प्रश्न 22.
व्यापारिक समूहों के निर्माण द्वारा राष्ट्रों को क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
उत्तर:

  1. व्यापार की मदों में भौगोलिक समीपता, समरूपता व पूरकता प्राप्त होना।
  2. विभिन्न राष्ट्रों के बीच व्यापार बढ़ने व व्यापार पर प्रतिबंध हटाने में सहायता मिलना।

प्रश्न 23.
प्रादेशिक व्यापार समूहों का क्या उद्देश्य है?
उत्तर:

  1. व्यापार शुल्क को समाप्त करना या हटाना।
  2. मुक्त व्यापार को बढ़ावा देना।
  3. व्यापार की मदों में भौगोलिक समीपता, समरूपता व पूरकता लाना।
  4. व्यापार को बढ़ावा देना और विकासशील देशों के व्यापार पर लगे प्रतिबंध हटाना आदि।

प्रश्न 24.
यूरोपीय संघ व्यापार समूह में कौन-से पाँच देश शामिल हैं?
उत्तर:

  1. ऑस्ट्रिया
  2. बेल्जियम
  3. डेनमार्क
  4. फ्रांस
  5. फिनलैंड आदि।

प्रश्न 25.
साफ्टा व्यापार समूह में शामिल किन्हीं पाँच देशों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. बांग्लादेश
  2. मालदीव
  3. भूटान
  4. नेपाल
  5. भारत

प्रश्न 26.
आसियान व्यापार समूह में शामिल किन्हीं पाँच देशों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. ब्रुनेई
  2. इंडोनेशिया
  3. मलेशिया
  4. सिंगापुर
  5. थाइलैंड।

प्रश्न 27.
प्रादेशिक व्यापार समूह के कोई चार संगठन बताएँ।
उत्तर:

  1. ओपेक
  2. आसियान
  3. साफ्टा
  4. नाफ्टा।

प्रश्न 28.
विनिमय व्यवस्था (Barter System) क्या होती है?
अथवा
वस्तु विनिमय से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
आदिम समाज में व्यापार का आरम्भिक रूप विनिमय व्यवस्था (Barter System) थी जिसमें बिना मुद्रा के वस्तुओं के विनिमय द्वारा ही व्यापार होता था अर्थात् वस्तु के बदले वस्तु ही दी जाती थी। यह व्यवस्था आज भी विश्व की आदिवासी जातियों में प्रचलित है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
व्यापार कितने प्रकार के होते हैं? वर्णन करें।
उत्तर:
व्यापार निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं-

  1. स्थानीय व्यापार-इसमें एक ही क्षेत्र के निवासी वस्तुओं का आदान-प्रदान करते हैं।
  2. क्षेत्रीय व्यापार-इसमें एक से दूसरे क्षेत्र में वस्तुओं का आदान-प्रदान होता है। इसे देशी व्यापार भी कहते हैं।
  3. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार-इसमें विभिन्न देश आपस में व्यापार करते हैं।

प्रश्न 2.
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कितने प्रकार के होते हैं? वर्णन करें।
उत्तर:
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार दो प्रकार का हो सकता है-

  1. द्विपक्षीय व्यापार-इसमें दो देशों के बीच वस्तुओं का विनिमय होता है। ऐसा तभी संभव होता है जब एक देश औद्योगिक उत्पादों के बदले कच्चे माल या ऊर्जा का विनिमय करे।
  2. बहुपक्षीय व्यापार-इसमें वस्तुओं और सेवाओं का कई देशों के बीच विनिमय होता है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

प्रश्न 3.
व्यापार संतुलन क्या है? यह कितने प्रकार का होता है?
उत्तर:
व्यापार संतुलन-किसी समयावधि में आयात एवं निर्यात के बीच मूल्यों के अंतर को व्यापार संतुलन कहते हैं। प्रकार-व्यापार संतुलन दो प्रकार का होता है-

  1. धनात्मक व्यापार संतुलन-यदि किसी देश में आयात की जाने वाली वस्तुओं की अपेक्षा निर्यात की जाने वाली वस्तुओं का मूल्य ज्यादा होता है तो ऐसे देशों के व्यापार संतुलन को धनात्मक कहा जाता है। इसे अनुकूल व्यापार संतुलन कहते हैं।
  2. ऋणात्मक व्यापार संतुलन यदि किसी देश में निर्यात की जाने वाली वस्तुओं की अपेक्षा आयात की जाने वाली वस्तुओं का मूल्य ज्यादा होता है तो उस देश का व्यापार संतुलन ऋणात्मक कहा जाता है। इसे विलोम व्यापार संतुलन या प्रतिकूल व्यापार संतुलन कहते हैं।

प्रश्न 4.
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार किसी राष्ट्र के आर्थिक विकास का मापदंड क्यों होता है?
उत्तर:
वर्तमान युग व्यापार का युग है। किसी भी देश का आर्थिक विकास उस देश द्वारा किए गए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर निर्भर करता है। प्रौद्योगिकी तथा यातायात के साधनों में विकास के कारण व्यापार में काफी वृद्धि हुई है। जब कोई राष्ट्र अपनी उत्पादक वस्तुओं का निर्यात करता है तो विदेशी मुद्रा अर्जित करता है तथा संपन्नता को प्राप्त करता है। इसलिए अब विश्व में बड़े-बड़े व्यापारिक देश उन्नति के शिखर पर पहुँचकर विकसित देश बन गए हैं। औद्योगिक विकास होने के कारण कई देश दूसरे देशों का कच्चा माल निर्यात करते हैं तथा विदेशी मुद्रा प्राप्त करते हैं जिससे उस देश के लोगों के रहन-सहन तथा जीवन-स्तर में प्रगति होती है। कच्चा माल आयात करने वाले देश निर्मित वस्तुओं का निर्यात कर मुद्रा अर्जित करते हैं। इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार किसी भी देश की आर्थिक संपन्नता का मापदंड है।

प्रश्न 5.
पत्तन को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रवेश द्वार कहते हैं। क्यों?
उत्तर:
पत्तन आयात तथा निर्यात करने के क्षेत्र हैं। ये अपने पृष्ठ क्षेत्र से यातायात के साधनों द्वारा जुड़े होते हैं। यहाँ स्थल मार्गों द्वारा विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ आती हैं जिन्हें सागरीय मार्ग द्वारा दूसरे देशों में भेजा जाता है तथा अन्य देशों से आयात किया गया माल इन पत्तनों द्वारा ही पृष्ठ देश में भेजा जाता हैं। इसलिए पत्तन अन्य देशों से आए माल के लिए प्रवे: देश के माल को अन्य देशों में भेजने के लिए निकास द्वार का कार्य करता है। इस प्रकार पत्तन के द्वारा ही आयात-निर्यात का कार्य होता है। इसलिए पत्तन को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के द्वार कहते हैं। .

प्रश्न 6.
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का जन-जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का जन-जीवन पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ता है-

  1. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से कुछ देशों का शोषण होने लगता है और वाणिज्यिक प्रतिस्पर्धा कई बार राष्ट्रों को युद्धों की ओर धकेल देती है।
  2. वैश्विक व्यापार पर्यावरण, लोगों के स्वास्थ्य व कल्याण के साथ-साथ जीवन के अन्य अनेक पक्षों को प्रभावित करता है। आज ज्यादातर देश विश्व व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बरकरार रखने अथवा उसे बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्धी बनते जा
  3. उपभोगवादी जीवन-शैली के चलते समुद्री जीवन तेजी से नष्ट हो रहा है। वनों की अंधाधुंध कटाई हो रही है और नदी बेसिन पेयजल कंपनियों को बेचते जा रहे हैं।
  4. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों को बढ़ावा मिलता है। प्रदूषण से जन-जीवन बहुत प्रभावित होता है।

प्रश्न 7.
दक्षिण-एशियाई मुक्त व्यापार समझौते (SAFTA) का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर:
दक्षिण एशियाई देशों में आपसी सहयोग, सहभागिता तथा समन्वय बढ़ाने के उद्देश्य से जिस प्रकार आठ देशों (भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, मालदीव, नेपाल, श्रीलंका व भूटान) का ‘सार्क’ (SAARC) संगठन वर्ष 1985 में अस्तित्व में आया था। उसी तर्ज पर इस क्षेत्र में परस्पर आर्थिक तथा व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए मई, 1995 में नई दिल्ली में सार्क देशों की बैठक के दौरान ‘दक्षिण एशियाई वरीयता व्यापार समझौता’ (South Asian Preferential Trading Agreement-SAPTA) अस्तित्व में आया। इसके तहत सार्क देशों के बीच प्रारम्भ में 226 वस्तुओं के व्यापार पर 10 फीसदी से 100 फीसदी तक की रियायत प्रशुल्क दरें लगाने की व्यवस्था की गई है, जबकि सर्वाधिक 106 वस्तुओं पर रियायत भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत की गई।

सार्क बैठक के दौरान सदस्य देशों के शासनाध्यक्षों द्वारा 5-7 जनवरी, 2004 को इस्लामाबाद में हस्ताक्षरित एक संधि के द्वारा ‘दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार संधि’ (SAFTA) अस्तित्व में आया, जबकि 1 जनवरी, 2006 से SAFTA’ को प्रभावी माना गया। इसके अन्तर्गत प्रशुल्कों को न्यूनतम दर पर लाकर गैर-प्रशुल्कीय बाधाओं को दूर किया जाना शामिल है। प्रतिवर्ष तकरीबन 20 बिलियन डॉलर व्यापार वाले क्षेत्र सार्क में तमाम ऐसी सम्भावनाएँ तथा विशेषताएँ मौजूद हैं जिनका दोहन कर आपसी सामाजिक-आर्थिक विषमताओं तथा समस्याओं को दूर किया जा सकता है। मगर क्षेत्र में लम्बे समय से चल रहे राजनीतिक गतिरोध के कारण इस समझौते के अधिकतम लाभ नहीं मिल पाए हैं।

दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार संधि के तहत समस्त सदस्य देशों को संवेदनशील सूची में क्रमबद्ध तरीके से कमी लाने पर सहमति बनी है। मालदीव अपनी संवेदनशील सूची में 681 प्रशुल्क लाइनों (Tariff Lines) को 78 प्रतिशत कम करके 152 प्रशुल्क लाइनों पर ले आया है। भारत द्वारा क्षेत्र के अल्पविकसित देशों के लिए संवेदनशील सूची की 480 प्रशुल्क लाइनों को 95 प्रतिशत कम करके 25 प्रशुल्क लाइनों के स्तर पर लाया गया है।

प्रश्न 8.
विश्व व्यापार संगठन (WTO) का वर्णन कीजिए।
अथवा
विश्व व्यापार संगठन क्या है? इसके आधारभूत कार्य कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
सन् 1994 में सदस्य देशों द्वारा राष्ट्रों के बीच मुक्त एवं निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देने के लिए स्थायी संस्था के गठन का निर्णय लिया गया तथा 1 जनवरी, 1995 से गैट (GATT) को विश्व व्यापार संगठन में रूपान्तरित कर दिया गया। इस प्रकार विश्व व्यापार संगठन एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है जो संयुक्त राष्ट्र के अधीन है। सन् 1995 में इसके सदस्य देशों की संख्या 124 थी जो वर्तमान में बढ़कर 164 हो गई है।

विश्व व्यापार संगठन के कार्य-विश्व व्यापार संगठन के कार्य निम्नलिखित हैं-

  1. यह एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो राष्ट्रों के मध्य वैश्विक नियमों को लागू करता है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न सदस्य देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को निबोध रूप से विकसित करना है।
  2. यह विश्वव्यापी व्यापार तंत्र के लिए टैरिफ और गैर टैरिफ बाधाओं को दूर करने के लिए नियम बनाता है।
  3. विश्व व्यापार संगठन वस्तु व्यापार, सेवा व्यापार; जैसे दूरसंचार व बैंकिंग, आदि विषयों को अपने कार्यों में सम्मिलित करता है।
  4. यदि कोई सदस्य देश समझौतों और नियमों का पालन नहीं करता तो उसकी शिकायत विवाद निपटारा समिति को की जाती है।
  5. यह संगठन विश्व व्यापार नीति निर्माण में समन्वय लाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा विश्व बैंक को सहयोग करता है।

प्रश्न 9.
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार आयातक एवं निर्यातक दोनों देशों के लिए लाभदायक होता है। व्याख्या करें।
उत्तर:
दो या दो से अधिक देशों का आपस में वस्तुओं तथा सेवाओं का आदान-प्रदान करना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहलाता है। एक देश दूसरे देश को उसकी आवश्यकता की वस्तुएँ भेजता है तथा बदले में उससे अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ मंगवा लेता है। कोई भी देश जो किसी विशिष्ट वस्तु का उत्पादन अधिक करता है, वह उन्हें अन्य देशों को निर्यात करता है, जिससे उसे विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। कुछ देशों में वस्तुओं की खपत की तुलना में उत्पादन कम होता है। वे अन्य देशों से उन वस्तुओं का आयात कर लेते हैं। उन देशों की अर्थव्यवस्था आयात किए गए कच्चे माल पर आधारित होती है। इस कच्चे माल से वे निर्मित वस्तुएँ बनाकर निर्यात कर देते हैं जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार आयातक एवं निर्यातक देशों के लिए लाभदायक होता है।

प्रश्न 10.
पत्तनों का नौभार के आधार पर वर्गीकरण करें।
उत्तर:
नौभार के आधार पर पत्तनों का वर्गीकरण निम्नलिखित है-

  1. सवारी पत्तन-ये सवारी लाइनर के ठहरने के पत्तन होते हैं जो आन्तरिक भाग से रेल व सड़क मार्गों से जुड़े होते हैं। मुम्बई, लंदन व न्यूयॉर्क ऐसे ही सवारी पत्तन हैं।
  2. वाणिज्यिक पत्तन-इन पत्तनों से आयात-निर्यात किया जाता है। इनमें से कुछ पत्तनों पर सवारियाँ भी उतारी-चढ़ाई जाती हैं। कई वाणिज्य पत्तन मत्स्यन जलपोतों को भी आश्रय देते हैं।
  3. विस्तृत पत्तन-ये वे पत्तन हैं जो बड़े परिमाण वाले तथा सामान्य नौभार को थोक में हैण्डल करते हैं। विश्व के अधिकांश महान् पत्तन विस्तृत पत्तनों के रूप में वर्गीकृत किए गए हैं।
  4. औद्योगिक पत्तन-ये पत्तन थोक नौभार के लिए विशेषीकृत होते हैं।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

प्रश्न 11.
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के कारण होने वाली किन्हीं चार हानियों का उल्लेख करें।
उत्तर:
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के कारण होने वाली हानियाँ निम्नलिखित हैं-

  1. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से प्राकृतिक संसाधनों का उत्पादन बढ़ जाता है। इससे इनका इतनी तेजी से दोहन होता है कि इनकी पुनः पूर्ति नहीं हो पाती।
  2. इससे विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों को बढ़ावा मिलता है।
  3. शोषण और व्यापारिक प्रतिद्वन्द्विता से विश्व में युद्ध की आशंका रहती है।
  4. इससे विकास के वितरण में असमानता हो जाती है।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट करें-
(क) उर्ध्वाधर व्यापार और क्षैतिज व्यापार
(ख) बाह्य पत्तन और आंतरिक पत्तन
(ग) अनुकूल व्यापार संतुलन और प्रतिकूल व्यापार संतुलन
(घ) द्विपक्षीय व्यापार और बहुपक्षीय व्यापार।।
उत्तर:
(क) उर्ध्वाधर व्यापार और क्षैतिज व्यापार में अन्तर-

उर्ध्वाधर व्यापारक्षैतिज व्यापार
जब कोई देश एक वस्तु का दूसरे देश से आयात कर अपने यहाँ उपभोग कर किसी अन्य वस्तु का निर्माण कर उसे किसी दूसरे देश को निर्यात करे उसे उर्ध्वाधर व्यापार कहते हैं।जब किसी उत्पाद का संपूर्ण कार्य एक ही देश में हो और उसे दूसरे देश में निर्यात किया जाए तो उसे क्षैतिज व्यापार कहते हैं।

(ख) बाह्य पत्तन और आंतरिक पत्तन में अन्तर-

बाह्य पत्तनआंतरिक पत्तन
1. ये गहरे समुद्र में बनाए जाते हैं।1. ये पत्तन समुद्र तट से दूर होते हैं। परंतु किसी नदी या नहर द्वारा समुद्र से जुड़े होते हैं।
2. इनका आकार बड़ा होता है। ऐसे जहाज जो वास्तविक पत्तन तक नहीं पहुंच पाते, उन्हें बाह्य पत्तन लंगर डालने की सुविधा प्रदान कर वास्तविक पत्तन तक पहुंचाने में सहायता करता है।2. इनका आकार छोटा होता है। ये पत्तन चपटे तलों वाले जहाजों के लिए बनाए जाते हैं।

(ग) अनुकूल व्यापार संतुलन और प्रतिकूल व्यापार संतुलन में अन्तर-

अनुकूल व्यापार संतुलनप्रतिकूल व्यापार संतुलन
जब किसी देश का निर्यात उसके आयात से अधिक हो तो इसे उस देश का अनुकूल व्यापार संतुलन कहा जाएगा।जब किसी देश का आयात उसके निर्यात से अधिक हो तो इसे उस देश का प्रतिकूल संतुलन व्यापार कहा जाएगा।

(घ) द्विपक्षीय व्यापार और बहुपक्षीय व्यापार में अन्तर-

द्विपक्षीय व्यापारबहुपक्षीय व्यापार
1. इसमें दो देशों के बीच व्यापार होता है।1. ये पत्तन समुद्र तट से दूर होते हैं। परंतु किसी नदी या नहर द्वारा समुद्र से जुड़े होते हैं।
2. इसमें एक देश अपने दूसरे मित्र व्यापारिक देश से ही व्यापार करता है।2. इसमें एक देश अनेक देशों से व्यापार कर सकता है।
3. द्विपक्षीय व्यापार में लगभग व्यापार दो देशों के अन्तर्गत ही सीमित है।3. विकासशील देश अनेक देशों में अपना व्यापार बढ़ाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं।

प्रश्न 13.
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के इतिहास पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
प्राचीन समय में व्यापार स्थानीय बाज़ार तक ही सीमित था। लोग तब अपने संसाधनों का अधिकांश भाग अपनी मूलभूत आवश्यकताओं-रोटी, कपड़ा और मकान पर खर्च करते थे। केवल धनी लोग ही आभूषण और महंगे वस्त्र खरीदते थे। रोमन साम्राज्य के विखंडन के बाद 12वीं व 13वीं शताब्दी के दौरान यूरोपीय वाणिज्य को बढ़ावा मिला। 15वीं शताब्दी से यूरोपीय उपनिवेशवाद शुरू हुआ और विदेशी वस्तुओं के साथ जो व्यापार आरंभ हुआ उसे दास व्यापार कहा गया।

औद्योगिक क्रान्ति के पश्चात् कच्चे माल; जैसे अनाज, मांस, ऊन की माँग बढ़ने लगी, लेकिन विनिर्माण की वस्तुओं की तुलना में उनका मौद्रिक मूल्य कम हो गया। औद्योगिक राष्ट्रों ने कच्चे माल के रूप में प्राथमिक उत्पादों का आयात किया व तैयार माल को अनौद्योगीकृत राष्ट्र को निर्यात कर दिया।

19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में प्राथमिक वस्तुओं का उत्पादन करने वाले प्रदेश अधिक महत्त्वपूर्ण नहीं रहे और औद्योगिक राष्ट्र एक-दूसरे के मुख्य ग्राहक बन गए। प्रथम व द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली बार राष्ट्रों ने व्यापार कर और प्रतिबंध लगाए। विश्वयुद्ध के बाद के समय के दौरान विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने शुल्क घटाने में सहायता की।

प्रश्न 14.
व्यापार का परिमाण अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का महत्त्वपूर्ण पक्ष क्यों है? वर्णन करें।
उत्तर:
व्यापार की गई वस्तुओं के वास्तविक तौल को व्यापार का परिमाण कहा जाता है। हालांकि तौल से मूल्य का सही-सही ज्ञान कभी नहीं हो पाता और न ही व्यापारिक सेवाओं को तौल में मापा जा सकता है। इसलिए व्यापार की गई कुल वस्तुओं तथा सेवाओं के कल मूल्य को व्यापार के परिमाण के रूप में जाना जाता है। इस परिमाण प्रक्रिया से ही व्यापार की स्थिति का पता चलता है। इसी कारण यह पक्ष अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का महत्त्वपूर्ण पक्ष है।

प्रश्न 15.
पत्तन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
समुद्र तट पर स्थित वह स्थलीय भाग जहाँ जहाजों को ठहरने, उनमें सामान लादने तथा उतारने, यात्रियों को ठहरने तथा सामान को सुरक्षित रखने के लिए माल गोदाम आदि सुविधाएँ होती हैं, उन्हें पत्तन कहते हैं। इन स्थानों पर जहाजों को खड़ा करने की सुरक्षित जगह होती है। वास्तव में ये अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रवेश द्वार होते हैं, जहाँ से जहाजों की यात्रा आरंभ होती है तथा पुनः इसी जगह पर समाप्त होती है। ये स्थल तथा समुद्र के संगम पर द्वार की भांति होते हैं। किसी भी पत्तन का विकास उसके पृष्ठ प्रदेश (Winter Land) पर आधारित होता है। उसका पृष्ठ प्रदेश जितना अधिक समृद्धशाली होगा, वह पत्तन उतना ही अधिक वस्तुओं का व्यापार करेगा तथा उसका आकार भी विस्तृत होगा। पत्तन देश के आंतरिक भागों से सड़कों, रेलमार्गों तथा वायुमार्गों द्वारा भी जुड़े हैं। उदाहरणार्थ, न्यूयार्क, मुंबई (बंबई), कोलकाता, शंघाई, सिडनी आदि। विश्व में व्यापार की बढ़ती हुई प्रवृत्ति तथा जनसंख्या वृद्धि के कारण पत्तनों की भी विशिष्टता है।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार क्या होता है? इसे प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
अथवा
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के क्या आधार हैं? उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं-
1. प्राकृतिक संसाधनों की विविधता-विश्व में धरातलीय एवं भूगर्भिक संरचना, जलवायु तथा मिट्टी आदि की विभिन्नताओं के कारण प्राकृतिक संसाधनों में भी विभिन्नताएँ मिलती हैं। इस कारण कुछ देशों में आवश्यकता से अधिक संसाधन मिलते हैं और कुछ देशों में बहुत कम संसाधन मिलते हैं, इस प्रकार संसाधनों की विभिन्न मात्रा में उपलब्धि व्यापार का महत्त्वपूर्ण आधार है।

2. वस्तुओं का अतिरेक उत्पादन-किसी देश में यदि वस्तु का उत्पादन अधिक होता है तो उसे दूसरे देशों को निर्यात किया जाता है तथा बदले में अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ आयात की जाती हैं; जैसे भारत में चाय, ब्राजील में कहवा, बांग्लादेश में पटसन, मलाया में रबड़, ऑस्ट्रेलिया में ऊन तथा नार्वे और स्वीडन में कागज आदि। इसलिए ये देश इन वस्तुओं का निर्यात करते हैं तथा निर्मित वस्तुएँ यूरोपीय देशों तथा अमेरिका से आयात करते हैं।

3. वस्तुओं तथा सेवाओं का अभाव आज विश्व का कोई भी देश आत्म-निर्भर नहीं है। उसको किसी-न-किसी वस्तु या सेवा के लिए दूसरे देश पर निर्भर रहना पड़ता है। जापान तथा ब्रिटेन जैसे विकसित देशों को भी कच्चे माल के लिए विदेशों का मंह ताकना पड़ता है। जापान तथा ब्रिटेन को उद्योगों के लिए कोयला, खनिज तेल, लोहा, चाय तथा चीनी के लिए विकासशील देशों पर आश्रित रहना पड़ता है। 12 मई तथा 13 मई 1998 को भारत ने पोखरण में 5 परमाणु परीक्षण किए तो संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की धमकी दी। इससे साफ जाहिर है कि भारत को प्रौद्योगिकी तथा अन्य वस्तुओं के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका पर निर्भर रहना पड़ता है। हमारे पास पर्याप्त संसाधन होते हुए भी हमारी कुछ-न-कुछ निर्भरता विदेशों पर है।

4. परिवहन तथा संचार के साधनों का विकास वस्तुओं तथा सेवाओं के आदान-प्रदान के लिए विकसित यातायात तथा संचार के साधनों का होना आवश्यक है। देश के आंतरिक भागों से बंदरगाहों तक पहुंचने के लिए सड़क तथा रेल यातायात तथा विदेशों में भेजने के लिए समुद्री परिवहन तथा वायु परिवहन का विकास आवश्यक है। भारी वस्तुएँ; जैसे खनिज पदार्थ (कोयला, लोहा आदि) को जलपोतों द्वारा तथा हल्की एवं बहुमूल्य वस्तुओं को वायु यातायात द्वारा भेजा जाता है; जैसे दूध, घी, मक्खन, फल, सब्जी इनके लिए वायु यातायात के साधनों का विकास करके अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है।

5. आर्थिक विकास तथा जीवन-स्तर-विश्व के औद्योगिक रूप से संपन्न देशों में कच्चे माल की कमी है लेकिन वे विदेशों से मंगवाकर इसकी पूर्ति करते हैं क्योंकि उनकी क्रय-शक्ति अधिक है। जापान तथा जर्मनी विदेशों से कच्चा माल आयात कर उद्योग संचालित करते हैं तथा ऊंचे दामों पर मशीनें तथा अन्य निर्मित सामान विकासशील देशों को बेचते हैं जिससे अधिक लाभ कमाते हैं और जीवन-स्तर ऊंचा रखते हैं।

6. सांस्कृतिक विशेषताएँ दुनिया के कुछ देश ऐसे हैं जो अपनी सांस्कृतिक विशेषताओं के आधार पर कुछ विशिष्ट वस्तुओं का उत्पादन करते हैं तथा निर्यात भी करते हैं तथा उन वस्तुओं की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मांग अधिक है; जैसे भारत का हथकरघा तथा हौजरी का सामान, चीन का रेशम, जापान के खिलौने, ईरान के कालीन आदि। इन वस्तुओं की विदेशों में अधिक मांग है और यदि ये देश इन वस्तुओं का उत्पादन बढ़ाएँ तो बहुत बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा अर्जित कर सकते हैं।

7. युद्ध और शांति युद्ध और शांति का भी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। युद्ध के दौरान कोई भी देश उस देश से व्यापार संबंध तथा वस्तुएँ नहीं भेजता क्योंकि उसे सामान के लूटे जाने तथा क्षतिग्रस्त होने का भय रहता है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को शांति से ही प्रोत्साहन मिलता है। खाड़ी युद्ध के दौरान कोई भी देश इराक से व्यापारिक संबंध बनाने तथा अपनी वस्तुओं को आसानी से निर्यात करने को सहमत नहीं था।

8. व्यापारिक नीति-व्यापार पर प्रतिबंध लगाने से व्यापार पर प्रतिकल प्रभाव पड़ता है। जो देश स्वतंत्र व्यापार की नीति अपनाते हैं, उनका व्यापार बहुत बढ़ जाता है। भारत ने तिलहनों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसी प्रकार अनेक उद्योगों को प्रोत्साहन तथा संरक्षण देने के उद्देश्य से भारत सरकार ने कई वस्तुओं के आयात पर भारी कर लगाए हैं जिससे उनका आयात बंद या बहुत कम मात्रा में होता है।

9. राजनीतिक संपर्क-राजनीतिक संपर्क एवं मित्रता का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर प्रभाव पड़ता है। विश्व के साम्यवादी देश, चीन, हंगरी, यूगोस्लाविया तथा पूर्व सोवियत संघ आपस में ही व्यापारिक संबंध रखना चाहते थे। इन देशों का आपसी लेन-देन होता था। इसी प्रकार मध्य पूर्व के देशों में पहले ब्रिटेन का प्रभाव अधिक था। उसके साथ व्यापारिक संबंध थे लेकिन अब ये देश संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रभाव में अधिक हैं। उससे ही अधिकांश व्यापार करना चाहते हैं। इसलिए अमेरिका बार-बार खाड़ी के देशों को आर्थिक प्रतिबंधों की धमकी देता है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

प्रश्न 2.
पत्तनों (Port) का वर्गीकरण कीजिए।
अथवा
विभिन्न आधारों में पत्तनों का वर्गीकरण कीजिए।
अथवा
पत्तन कितने प्रकार के होते हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पत्तनों का वर्गीकरण निम्नलिखित आधारों पर किया जाता है-
I. अवस्थिति के आधार पर पत्तनों का वर्गीकरण/प्रकार – अवस्थिति के आधार पर पत्तनों के प्रकार निम्नलिखित हैं

  • अंतर्देशीय पत्तन-ये पत्तन समुद्री तट से दूर अवस्थित होते हैं। ये समुद्र से एक नदी अथवा नहर द्वारा जुड़े होते हैं। ऐसे पत्तन चौरस तल वाले जहाज़ द्वारा ही गम्य होते हैं। उदाहरणतया मानचेस्टर, कोलकाता।
  • बाह्य पत्तन-ये गहरे जल के पत्तन हैं जो वास्तविक पत्तन से दूर बने होते हैं। ये उन जहाजों, जो अपने बड़े आकार के कारण उन तक पहुँचने में असमर्थ हैं, को ग्रहण करके पैतृक पत्तनों को सेवाएँ प्रदान करते हैं।

II. निपटाए गए नौभार के आधार पर पत्तनों का वर्गीकरण/प्रकार-निपटाए गए नौभार के आधार पर पत्तनों के प्रकार निम्नलिखित हैं

  • सवारी पत्तन-ये सवारी लाइनर के ठहरने के पत्तन होते हैं जो आन्तरिक भाग से रेल व सड़क मार्गों से जुड़े होते हैं। मुम्बई, लंदन व न्यूयॉर्क ऐसे ही सवारी पत्तन हैं।
  • वाणिज्यिक पत्तन-इन पत्तनों से आयात-निर्यात किया जाता है। इनमें से कुछ पत्तनों पर सवारियाँ भी उतारी-चढ़ाई जाती हैं। कई वाणिज्य पत्तन मत्स्यन जलपोतों को भी आश्रय देते हैं।
  • विस्तृत पत्तन-ये वे पत्तन हैं जो बड़े परिमाण वाले तथा सामान्य नौभार को थोक में हैण्डल करते हैं। विश्व के । अधिकांश महान् पत्तन विस्तृत पत्तनों के रूप में वर्गीकृत किए गए हैं।
  • औद्योगिक पत्तन-ये पत्तन थोक नौभार के लिए विशेषीकृत होते हैं।

III. विशिष्टीकृत कार्यकलापों के आधार पर पत्तनों का वर्गीकरण/प्रकार-विशिष्टीकृत कार्यकलापों के आधार पर पत्तनों के प्रकार निम्नलिखित हैं
1. आंत्रपो पत्तन ये पत्तन एक देश के माल को दूसरे देश में भेजने का कार्य करते हैं। इन पत्तनों पर जो माल आता है, उसका गंतव्य अन्य देश होते हैं।

2. मार्ग या विश्राम पत्तन ये ऐसे पत्तन होते हैं जो मूल रूप से मुख्य समुद्री मार्गों पर विश्राम केंद्र के रूप में विकसित हुए।

3. पैकेट स्टेशन इन पत्तनों का प्रयोग छोटे समुद्री मार्ग वाले यात्रियों को उतारने तथा चढ़ाने के लिए किया जाता है। इनमें डाक लाने तथा ले जाने की भी सुविधा होती है। इन्हें नौका पत्तन (Ferry Port) भी कहा जाता है। इनका नामकरण छोटे जहाजों के आधार पर पैकेट स्टेशन रखा गया : ब्रिटिश चैनल के एक ओर डोबर (इंग्लैंड) तथा दूसरी ओर कैलेस (फ्रांस) इस प्रकार के पैकेट स्टेशन पोर्ट हैं।

4. नौ सेना पत्तन-सामरिक दृष्टि से इनका अत्यधिक महत्त्व होता है। इनमें नौसेना के लड़ाकू विमानों के ठहरने तथा उनके प्रशिक्षण और मुरम्मत की व्यवस्था होती है।

5. तैल पत्तन-20वीं शताब्दी में तेल का ऊर्जा के रूप में अधिक महत्त्व होने के कारण ऐसे पत्तन विकसित किए गए जहाँ तेल वाहक टैंकर ठहर सकें। इन्हें टैंकर पोर्ट भी कहते हैं। इन पत्तनों से तेल का आयात-निर्यात किया जाता है। कुछ तैल पत्तनों पर परिष्करण शालाएँ (तल शोधन शालाएँ) भी स्थापित की गई हैं। ये पत्तन तेल की पाइप लाइनों द्वारा तेल क्षेत्र से जुड़े होते हैं। वेनेजुएला में माराकायबो, लेबनॉन में ट्रिपोली तथा फारस की खाड़ी पर परिष्करणशाला या तैल पत्तन हैं।

प्रश्न 3.
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की नूतन प्रवृत्तियों का वर्णन कीजिए। अथवा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रवृत्तियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की नूतन प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं-
(1) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के स्वरूप में अत्यधिक परिवर्तन आए हैं। पहले जनसंख्या कम थी तथा लोगों की आवश्यकताएँ भी सीमित थीं। देश या क्षेत्र उत्पादित वस्तुओं से ही अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर लेते थे, लेकिन जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ आत्म-निर्भरता कम होती गई। पहले व्यापार बहुत कम या सीमित वस्तुओं का होता था जिनमें अधिकांश बहुमूल्य वस्तुएँ: जैसे हीरा, सोना, चांदी. जवाहरात आदि का ही या विलासिता की वस्तुएँ; जैसे कहवा, चाय तथा चीनी का व्यापार होता था।

17वीं और 18वीं शताब्दी में उपनिवेशवाद के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का स्वरूप भी परिवर्तित हुआ। शासकों ने उपनिवेशों से प्राकृतिक संसाधनों का (कच्चे माल के रूप में) शोषण कर अपने देश ले जाना आरंभ किया तथा अपना औद्योगिक विकास मजबूत किया और निर्मित वस्तुओं को ऊँची कीमत पर उपनिवेशों को बेचना आरंभ किया।

(2) 18वीं शताब्दी की औद्योगिक क्रांति ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की संरचना में मूलभूत परिवर्तन किए। विलासिता एवं बहुमूल्य वस्तुओं के स्थान पर खनिज पदार्थो तथा ऊजा के संसाधनों (कोयला, पेट्रोल) आदि का व्यापार होने लगा। औद्योगिक देशों से निर्मित माल कम विकसित और विकासशील देशों को भेजा जाने लगा। विकासशील देश इन औद्योगिक देशों से मशीनें, इंजीनियरिंग का सामान तथा इलेक्ट्रॉनिक्स सामान आयात करने लगे। विकासशील देश विभिन्न कृषि उपजें; जैसे रबड़, कहवा, चाय, चीनी, मसाले, रेशम आदि का निर्यात कर अपनी राष्ट्रीय आय में वृद्धि करने लगे। व्यापार संतुलन बनाने के प्रयास जारी किए गए। इससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रोत्साहन मिला।

(3) 20वीं शताब्दी में उपनिवेश देशों को स्वतंत्रता मिल गई। इन देशों में आर्थिक विकास के स्तर को ऊँचा करने, लोगों के जीवन-स्तर में सुधार के अनेक प्रयास किए गए। प्राथमिक व्यवसायों के अतिरिक्त उद्योगों को भी प्रोत्साहित करने के प्रयास किए गए। ताकि अधिकतर कच्चा माल निर्यात करने की बजाय उद्योगों में वस्तुओं का निर्माण किया जाए। औद्योगिक विकास के लिए अनेक प्रोत्साहन तथा संरक्षण दिए गए जिससे औद्योगिक विकास की गति भी तीव्र हुई और अब विकासशील देश अपना सारा कच्चा माल विदेशों में भेजने की बजाय स्वयं उसका अधिकतर उपयोग करने लगे तथा वस्तुओं का निर्माण शुरू किया जिससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का स्वरूप परिवर्तित हो गया।

(4) परिणामस्वरूप अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का एक ऐसा स्वरूप सामने आया जिसमें उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों से शीतोष्ण कटिबन्धीय औद्योगिक देशों की और कम मूल्य वाले प्राथमिक उत्पादों; जैसे कपास, वनस्पति, खाद्यान्न, ऊन, रबड़, चाय, तेल, खनिज व कहवा आदि का निर्यात तथा शीतोष्ण कटिबन्धीय देशों से उष्ण कटिबन्धीय देशों को अधिक मूल्य वाले पदार्थो; जैस रासायनिक उत्पाद, मशीनरी, वस्त्र, मोटर, दवाइयों आदि का निर्यात होने लगा।

(5) कच्चा तेल, मशीनें तथा खनिज पदार्थ एवं परिवहन उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में महत्त्वपूर्ण बनते जा रहे हैं।

(6) विकसित गष्ट्रों का आयात-निर्यात बढ़ रहा है तथा अधिकांश देशों में व्यापार-सन्तुलन धनात्मक है जबकि विकासशील देशों का व्यापार-सन्तुलन निरन्तर बिगड़ रहा है। किंतु विश्व के पेट्रोल निर्यातक देश इसके अपवाद हैं।

(7) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के संवर्धन (Promotion) के लिए अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं; जैसे विश्व व्यापार संगठन (WTO) एवं राष्ट्र व्यापार संघ व्यापार एवं विकास संस्था (UNCTAD) के होने के बाद भी विभिन्न राष्ट्रों द्वारा अपने हितों की रक्षा के लिए व्यापार संघों तथा क्लबों में लामबन्द होना अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की एक नई प्रवृत्ति सामने आई है।

प्रश्न 4.
विश्व के विभिन्न प्रादेशिक व्यापार समूहों का वर्णन कीजिए।
अथवा
विश्व के किन्हीं चार प्रादेशिक व्यापार समूहों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विश्व के विभिन्न प्रादेशिक व्यापार समूह संघ/समूह निम्नलिखित हैं-
1. गैट-गैट (General Agreement on Trade and Tariffs-GATT) की स्थापना सन् 1948 में जेनेवा में हुई थी जिसका मुख्य उद्देश्य व्यापार के प्रतिबंधों को कम करके अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि करना था। दूसरे विश्वयुद्ध के पश्चात् गैट ने भूमंडलीय
आर्थिक क्रान्ति को बढ़ावा दिया।

2. विश्व व्यापार संगठन-सन् 1995 में GATT का नाम बदलकर WTO (World Trade Organisation-WTO) हो गया। यह व्यापारिक झगड़ों का निपटारा करता है। सेवाओं के व्यापार को भी नियंत्रित करता है।

3. ओपेक-विश्व में 13 ऐसे देश हैं जो संपूर्ण निर्यात का लगभग 85 प्रतिशत तेल निर्यात करते हैं। इन्होंने सन् 1949 में एक संगठन गठित किया जिसे ओपेक (Organisation of Petroleum Exporting Countries-OPEC) के नाम से जाना जाता है। ये देश विश्व में तेल के सम्बन्ध में अपने संगठन की नीति बनाते हैं, उनका कार्यान्वयन करते हैं। इसमें जो 13 सदस्य देश हैं, उनके नाम इस प्रकार हैं-अल्जीरिया, सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, इंडोनेशिया, इक्वेडोर, गैबन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, लीबिया, नाइजीरिया तथा वेनेजुएला। इस संगठन का उद्देश्य अपने सदस्य देशों के मध्य समन्वय, एकीकरण तथा तेल सम्बन्धी नीतियों का निर्धारण करना है।

4. यूरोपीय आर्थिक समुदाय-यूरोप के देशों का समुदाय ‘European Economic Community’ का गठन सन् 1957 में किया गया। प्रारंभ में इसमें फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम, लैग्जमबर्ग, नीदरलैंड तथा इटली 6 देश थे, लेकिन सन् 1973 में 3 देश डेनमार्क, ब्रिटेन तथा आयरिश गणराज्य भी सम्मिलित किए गए। इस समुदाय का उद्देश्य अपने सदस्य देशों के साथ स्वतंत्र व्यापार स्थापित करना तथा व्यापार प्रतिबंधों को समाप्त करना है। अब इन 9 देशों के बीच कोई व्यापारिक प्रतिबंध नहीं है।

स्वतंत्र व्यापार की नीति के अंतर्गत एक देश-दूसरे देश से व्यापार करता है। सन् 1995 में यूरोपीय आर्थिक समुदाय यूरोपीय संघ में परिवर्तित हो गया। इसने कई उत्पादन एवं व्यापार नीतियों का सामंजस्यीकरण किया। सन् 1999 के प्रारंभ में सभी सदस्य देशों में समान रूप से चलने वाली मुद्रा-‘यूरो’ को भी प्रचलन में लाया गया, ताकि सभी देशों को एक आर्थिक व्यवस्था के अंतर्गत प्रभावशाली ढंग से एक सूत्र में बाँधा जा सके। यह संघ विश्व का अकेला सबसे बड़ा बाजार है।

5. यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ-इस संघ का निर्माण सन् 1994 में हुआ। प्रारंभ में इसके 7 सदस्य देश-ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, नार्वे, पुर्तगाल, स्वीडन, ग्रेट ब्रिटेन व स्विटज़रलैंड थे, लेकिन ग्रेट ब्रिटेन, डेनमार्क व पुर्तगाल इस संघ को छोड़ गए व फिनलैंड व आइसलैंड इसमें शामिल हो गए।

6. उत्तरी अमेरिकन स्वतन्त्र व्यापार संघ-इसका संगठन सन 1988 में विश्व के दो बड़े व्यापारिक सहयोगियों-संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा के बीच व्यापारिक प्रतिबंधों को समाप्त करने के लिए किया गया था। सन् 1994 में इसका व्यापक विस्तार किया गया और मैक्सिको को भी इसका सदस्य बनाया गया। यह ऐसा पहला अवसर था, जब किसी विकासशील देश को विकसित देशों के व्यापारिक संघ में सदस्यता मिली थी। अब इस संघ में लैटिन अमेरिकी देशों को भी सम्मिलित कर लिया गया है। इससे एक ऐसे स्वतन्त्र व्यापार क्षेत्र का निर्माण हुआ है, जो अलास्का से टिएरा डेल फ्यूगो तक फैला हुआ है। कृषि उत्पाद, मोटरगाड़ियाँ, स्वचालित पुजे, कम्प्यूटर, वस्त्र आदि इन देशों के मध्य प्रमुख व्यापारिक वस्तुएँ हैं।

7. दक्षिणी-पूर्वी एशियाई देशों का संगठन-आसियान देशों का गठन सन् 1967 में हुआ। इसके सदस्य देश हैं इंडोनेशिया, थाइलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, फिलीपींस और सिंगापुर। भारत भी आसियान देशों का सह-सदस्य है। जापान, यूरोपीय संघ तथा ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से व्यापारिक बातचीत करते समय आसियान देश एक संयुक्त वार्ता करके उनकी मदद करता है।

8. दक्षिण एशिया प्रादेशिक सहयोग संगठन-सात दक्षिण एशियाई देशों-भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव ने मिलकर सार्क का गठन किया है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार विकसित करना है। वर्तमान में इसके सदस्य देशों की संख्या आठ है।

9. स्वतंत्र राष्ट्रों का संघ इस व्यापार समूह का गठन तत्कालीन सोवियत संघ के विघटन के बाद मिस्क (बेलारूस) में किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य अर्थव्यवस्था, प्रतिरक्षण तथा विदेश नीति के मामलों पर समन्वय एवं सहयोग स्थापित करना है। बेलारूस, जॉर्जिया, आरमीनिया, अज़रबैजान, कजाकिस्तान, रूस, तजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, यूक्रेन, खिरगिस्तान, मॉल्डोवा तथा उज्बेकिस्तान इस संगठन के सदस्य हैं। इन देशों के मध्य अशोधित तेल, प्राकृतिक गैस, सोना, कपास, रेशे, एल्यूमिनियम आदि मुख्य व्यापारिक वस्तुओं का व्यापार होता है।

10. लैटिन अमेरिकन इंटीग्रेशन एसोसिएशन इस व्यापारिक समूह का गठन सन् 1960 में किया गया था। इसका मुख्यालय मॉण्टोविडियो (उरुग्वे) में है। इसका मुख्य उद्देश्य दक्षिण अमेरिका के देशों के बीच आपसी व्यापार को बढ़ाना है। ब्राजील, कोलंबिया, अर्जेंटाइना, बोलीविया, इक्वाडोर, मैक्सिको, पराग्वे, पेरू, उरुग्वे तथा वेनेजुएला इसके सदस्य देश हैं।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

प्रश्न 5.
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के परिमाण, व्यापार संयोजन व व्यापार की दिशा का वर्णन करें।
अथवा
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रतिरूप को निर्धारित करने वाले महत्त्वपूर्ण पक्षों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रतिरूप को निर्धारित करने वाले महत्त्वपूर्ण चार पक्ष होते हैं जिनका वर्णन निम्नलिखित हैं
1. व्यापार का परिमाण-व्यापार की गई वस्तुओं के वास्तविक तौल को व्यापार का परिमाण कहा जाता है। हालांकि तौल से मूल्य का सही-सही ज्ञान कभी नहीं हो पाता और न ही व्यापारिक सेवाओं को तौल में मापा जा सकता है। इसलिए व्यापार की गई कुल वस्तुओं तथा सेवाओं के कुल मूल्य को व्यापार के परिमाण के रूप में जाना जाता है। इस परिमाण प्रक्रिया से ही व्यापार की स्थिति का पता चलता है। इसी कारण यह पक्ष अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का महत्त्वपूर्ण पक्ष है। विभिन्न देशों के बीच व्यापार के परिमाण की भिन्नता उत्पादित पदार्थों, सेवाओं की प्रकृति, द्विपक्षीय सन्धियों व व्यापार निषेधों पर निर्भर करती है।

2. व्यापार का संयोजन-अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में जगह पाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के प्रकार भी बदलते रहते हैं। 20वीं शताब्दी के आरम्भ में आयात और निर्यात की वस्तुओं में प्राथमिक उत्पादों की प्रधानता थी। बाद में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में विनिर्मित वस्तुओं ने प्रमुखता प्राप्त कर ली। वर्तमान समय में यद्यपि विश्व व्यापार के अधिकांश भाग पर विनिर्माण क्षेत्र का आधिपत्य है, सेवा क्षेत्र जिसमें परिवहन तथा अन्य व्यावसायिक सेवाएँ शामिल हैं। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि की प्रवृत्ति दिखा रहा है। इस प्रकार वस्तुओं के उत्पादन की अपेक्षा सेवाओं का उत्पादन ज्यादा लाभदायक होता है।

3. व्यापार की दिशा-18वीं सदी तक विकासशील देश यूरोप को विनिर्मित वस्तुएँ निर्यात किया करते थे। 19वीं सदी में व्यापार की दिशा बदली और यूरोप से विनिर्मित माल तीन दक्षिणी महाद्वीपों-दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका व ऑस्ट्रेलिया की ओर आने लगा। बदले में ये महाद्वीप कच्चे माल व खाद्य पदार्थों को यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच होने लगा। अब भारत, चीन व अन्य विकासशील देश भी विनिर्मित वस्तुओं के व्यापार में विकासशील देशों से प्रतिस्पर्धा करने लगे हैं।

4. व्यापार संतुलन-किसी समयावधि में आयात एवं निर्यात के बीच मूल्यों के अंतर को व्यापार संतुलन कहते हैं।
(i) धनात्मक व्यापार संतुलन यदि किसी देश में आयात की जाने वाली वस्तुओं की अपेक्षा निर्यात की जाने वाली वस्तुओं का मूल्य ज्यादा होता है तो ऐसे देशों के व्यापार संतुलन को धनात्मक कहा जाता है। इसे अनुकूल व्यापार संतुलन कहते हैं।

(ii) ऋणात्मक व्यापार संतुलन यदि किसी देश में निर्यात की जाने वाली वस्तुओं की अपेक्षा आयात की जाने वाली वस्तुओं का मूल्य ज्यादा होता है तो उस देश का व्यापार संतुलन ऋणात्मक कहा जाता है। इसे विलोम व्यापार संतुलन या प्रतिकूल व्यापार संतुलन कहते हैं।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 परिवहन एवं संचार

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 परिवहन एवं संचार Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 परिवहन एवं संचार

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. वस्तुओं और यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना, क्या कहलाता है?
(A) संचार
(B) व्यापार
(C) परिवहन
(D) परिवहन और संचार
उत्तर:
(C) परिवहन

2. विश्व में सड़कों की लंबाई रेलमार्गों की लंबाई से कितने गुना अधिक है?
(A) लगभग 12
(B) लगभग 14
(C) लगभग 24
(D) लगभग 34
उत्तर:
(B) लगभग 14

3. विश्व में सड़कों की सबसे कम लंबाई यूरोप के कौन-से देश में है?
(A) ब्रिटेन
(B) जर्मनी
(C) फ्रांस
(D) मनाको
उत्तर:
(D) मनाको

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 परिवहन एवं संचार

4. कैनेडियन-पैसिफिक रेलमार्ग है-
(A) उत्तरी अमेरिका में
(B) दक्षिणी अमेरिका में
(C) यूरोप में
(D) अफ्रीका में
उत्तर:
(A) उत्तरी अमेरिका में

5. विश्व का सबसे लंबा रेलमार्ग कौन-सा है?
(A) ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग
(B) कैनेडियन-पैसिफिक रेलमार्ग
(C) ऑस्ट्रेलियाई अंतर्महाद्वीपीय रेलमार्ग
(D) अफ्रीकी अंतर्महाद्वीपीय रेलमार्ग
उत्तर:
(A) ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग

6. सूचनाओं को उनके उद्गम स्थल से लक्ष्य तक किसी चैनल के माध्यम से पहुंचाने का अर्थ है-
(A) परिवहन
(B) संचार
(C) व्यापार
(D) व्यापार और संचार
उत्तर:
(D) व्यापार और संचार

7. स्थूल और भरकम सामानों के परिवहन के लिए कौन-सा मार्ग अधिक उपयुक्त रहता है?
(A) जलमार्ग
(B) वायु मार्ग
(C) सड़क मार्ग
(D) रेलमार्ग
उत्तर:
(A) जलमार्ग

8. खनिज तेल और तरल पदार्थों के लिए परिवहन का उपयुक्त साधन कौन-सा है?
(A) रेलमार्ग
(B) सड़क मार्ग
(C) पाइपलाइन परिवहन
(D) जलमार्ग
उत्तर:
(C) पाइपलाइन परिवहन

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 परिवहन एवं संचार

9. अमेरिका में महामार्गों को किस नाम से जाना जाता है?
(A) आटोवान
(B) मोटरवेज
(C) हाइवेज
(D) ट्रांस मार्ग
उत्तर:
(B) मोटरवेज

10. निम्नलिखित में से भारत का सबसे लंबा महामार्ग कौन-सा है?
(A) राष्ट्रीय महामार्ग संख्या 1
(B) राष्ट्रीय महामार्ग संख्या 2
(C) राष्ट्रीय महामार्ग संख्या 7
(D) राष्ट्रीय महामार्ग संख्या 10
उत्तर:
(C) राष्ट्रीय महामार्ग संख्या 7

11. स्वर्णिम चतुष्कोण नामक महामार्ग निम्नलिखित में कौन-से चार महानगरों को जोड़ता है-
(A) दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बंगलौर
(B) दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और कन्याकुमारी
(C) दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई
(D) श्रीनगर, दिल्ली, कोलकाता और मुंबई
उत्तर:
(D) श्रीनगर, दिल्ली, कोलकाता और मुंबई

12. भारी मात्रा में सामान को अधिक दूरी तक ले जाने के लिए कौन-सा परिवहन मार्ग अधिक सुविधाजनक है?
(A) सड़क मार्ग
(B) जलमार्ग
(C) वायु मार्ग
(D) रेलमार्ग
उत्तर:
(D) रेलमार्ग

13. एशिया महाद्वीप में रेलों का सघनतम जाल किस देश में पाया जाता है?
(A) जापान
(B) चीन
(C) भारत
(D) कोरिया
उत्तर:
(C) भारत

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 परिवहन एवं संचार

14. पाइपलाइन ‘बिग इंच’ का संबंध किस देश से है?
(A) जर्मनी से
(B) फ्रांस से
(C) रूस से
(D) संयुक्त राष्ट्र अमेरिका से
उत्तर:
(D) संयुक्त राष्ट्र अमेरिका से

15. राइन जलमार्ग का संबंध किस देश से है?
(A) जर्मनी से
(B) फ्रांस से
(C) रूस से
(D) संयुक्त राष्ट्र अमेरिका से
उत्तर:
(A) जर्मनी से

16. ऊबड़-खाबड़ और दुर्गम प्रदेशों के लिए कौन-से मार्ग विकसित किए गए हैं?
(A) महामार्ग
(B) राष्ट्रीय मार्ग
(C) रज्जू मार्ग
(D) स्वर्णिम मार्ग
उत्तर:
(C) रज्जू मार्ग

17. दक्षिण अमेरिका, मध्य अमेरिका और संयुक्त राज्य अमेरिका को जोड़ने वाली सड़क का नाम है-
(A) ट्रांस कैनेडियन महामार्ग
(B) अलास्का महामार्ग
(C) अंतर्राष्ट्रीय महामार्ग
(D) पैन-अमेरिका महामार्ग
उत्तर:
(D) पैन-अमेरिका महामार्ग

18. कनाडा के एडमाटन और अलास्का के एंकरेज नगर को जोड़ने वाले महामार्ग का क्या नाम है?
(A) कनाडा पारीय महामार्ग
(B) पैन-अमेरिका महामार्ग
(C) अलास्का महामार्ग
(D) महाद्वीपीय पारीय महामार्ग
उत्तर:
(C) अलास्का महामार्ग

19. जर्मनी के महामार्गों को किस नाम से जाना जाता है?
(A) मोटरवेज
(B) ऑटोवान
(C) हाइवेज
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) ऑटोवान

20. भारत का राष्ट्रीय महामार्ग नं0 7 किन दो शहरों को जोड़ता है?
(A) जम्मू-कन्याकुमारी
(B) श्रीनगर-कन्याकुमारी
(C) दिल्ली-कन्याकुमारी
(D) वाराणसी-कन्याकुमारी
उत्तर:
(D) वाराणसी-कन्याकुमारी

21. विश्व की पहली रेलगाड़ी कब चली थी?
(A) सन् 1830 में
(B) सन् 1825 में
(C) सन् 1853 में
(D) सन् 1835 में
उत्तर:
(B) सन् 1825 में

22. विश्व में रेलों का सबसे बड़ा जाल कहाँ है?
(A) यूरोप
(B) एशिया
(C) उत्तर अमेरिका
(D) दक्षिण अमेरिका
उत्तर:
(C) उत्तर अमेरिका

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23. संसार का सबसे अधिक व्यस्त जलमार्ग कौन-सा है?
(A) वोल्गा जलमार्ग
(B) मिसीसिपी जलमार्ग
(C) राइन जलमार्ग
(D) सीन जलमार्ग
उत्तर:
(C) राइन जलमार्ग

24. संसार की सबसे लंबी नदी कौन-सी है?
(A) राइन नदी
(B) वोल्गा नदी
(C) गंगा नदी
(D) अमेजन नदी
उत्तर:
(D) अमेजन नदी

25. स्वेज नहर जोड़ती है-
(A) अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर को
(B) भूमध्य सागर और लाल सागर को
(C) भूमध्य सागर और कैस्पियन सागर को
(D) काला सागर और लाल सागर को
उत्तर:
(B) भूमध्य सागर और लाल सागर को

26. पनामा नहर जोड़ती है-
(A) भूमध्य सागर और लाल सागर को
(B) भूमध्य सागर और कैस्पियन सागर को
(C) अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर को
(D) हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को
उत्तर:
(C) अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर को

27. उत्तरी अटलांटिक समुद्री मार्ग द्वारा विश्व के कुल माल का कितने प्रतिशत भाग ढोया जाता है?
(A) 20 प्रतिशत
(B) 25 प्रतिशत
(C) 30 प्रतिशत
(D) 40 प्रतिशत
उत्तर:
(B) 25 प्रतिशत

28. उत्तरी अटलांटिक महासागर मार्ग मिलाता है-
(A) दक्षिणी अमेरिका के पूर्वी भाग तथा अफ्रीका के पश्चिमी भाग को
(B) अफ्रीका के पूर्वी भाग तथा भारत के पश्चिमी भाग को
(C) कनाडा, यू०एस०ए० के पूर्वी भाग तथा यूरोप के पश्चिमी भाग को
(D) आस्ट्रेलिया के पश्चिमी भाग तथा अफ्रीका के पूर्वी भाग को
उत्तर:
(C) कनाडा, यू०एस०ए० के पूर्वी भाग तथा यूरोप के पश्चिमी भाग को

29. भारत का अंतरिक्ष में स्थापित होने वाला प्रथम संचार उपग्रह कौन-सा है?
(A) भास्कर
(B) इनसैट
(C) आर्य भट्ट
(D) एप्पल
उत्तर:
(C) आर्य भट्ट

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए।

प्रश्न 1.
वस्तुओं और यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना क्या कहलाता है?
उत्तर:
परिवहन।

प्रश्न 2.
संचार के कोई दो साधन बताएँ।
उत्तर:

  1. टेलीफोन
  2. इंटरनेट

प्रश्न 3.
जो पत्तन जंगी जहाजों के लिए काम करता है, उसे क्या कहते हैं?
उत्तर:
नौसैनिक पत्तन।

प्रश्न 4.
‘ओरिएंट एक्सप्रेस रेलमार्ग’ किन स्थानों को जोड़ता है?
उत्तर:
ओरिएंट एक्सप्रेस रेलमार्ग पेरिस और इस्तांबुल को जोड़ता है।

प्रश्न 5.
विश्व का सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग कौन-सा है?
उत्तर:
अटलाण्टिक महासागरीय मार्ग।

प्रश्न 6.
बिग इंच पाइपलाइन के द्वारा क्या प्रवाहित होता है?
उत्तर:
पेट्रोलियम।

प्रश्न 7.
पार कैनेडियन रेलमार्ग के अन्तिम स्टेशनों के नाम लिखें।
उत्तर:
बैंकूवर और हैलीफैक्स।

प्रश्न 8.
पार-महाद्वीपीय स्टुआर्ट महामार्ग किनके मध्य से गुजरता है?
उत्तर:
डार्विन और मेलबोर्न के।

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प्रश्न 9.
किस देश में रेलमार्गों के जाल का सघनतम घनत्व पाया जाता है?
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका।

प्रश्न 10.
वृहद ट्रंक मार्ग किन दो क्षेत्रों को मिलाता है?
उत्तर:
उत्तर पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका और पश्चिमी यूरोप को मिलाता है।

प्रश्न 11.
स्वेज नहर की लम्बाई व गहराई कितनी है?
उत्तर:
लम्बाई लगभग 160 कि०मी०, गहराई 11 से 15 मीटर।

प्रश्न 12.
पनामा नहर की लम्बाई कितनी है?
उत्तर:
लगभग 72 कि०मी०

प्रश्न 13.
विश्व की पहली रेलगाड़ी कब चली थी?
उत्तर:
1825 ई० में।

प्रश्न 14.
चैनल टनल किन दो देशों को जोड़ती है?
उत्तर:
फ्रांस और इंग्लैण्ड।

प्रश्न 15.
स्वेज नहर का निर्माण कब हुआ?
उत्तर:
अप्रैल, 1859 में।

प्रश्न 16.
कैनेडियन-पैसेफिक रेलमार्ग कहाँ है?
उत्तर:
उत्तरी अमेरिका में।

प्रश्न 17.
दक्षिणी अमेरिका, मध्य अमेरिका और संयुक्त राज्य अमेरिका को जोड़ने वाला महामार्ग बताएँ।
उत्तर:
पैन-अमेरिका महामार्ग।

प्रश्न 18.
‘ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग’ के पूर्वी छोर पर स्थित स्टेशन का नाम लिखें।
उत्तर:
‘ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग’ के पूर्वी छोर पर स्थित स्टेशन मॉस्को है।

प्रश्न 19.
पनामा नहर किन दो महासागरों को मिलाती है?
उत्तर:
अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर को।

प्रश्न 20.
अमेरिका में महामार्गों को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
मोटरवेज के।

प्रश्न 21.
विश्व में रेलों का सबसे बड़ा जाल कहाँ है?
उत्तर:
उत्तरी अमेरिका में।

प्रश्न 22.
वैश्विक संचार तंत्र ने किस तंत्र में क्रांति ला दी है?
उत्तर:
विद्युतीय प्रौद्योगिकी तंत्र में।

प्रश्न 23.
आंतरिक जलमार्ग के दो उदाहरण दें।
उत्तर:
गंगा-ब्रह्मपुत्र नदियाँ, फ्रांस में सीन व राइन नदियाँ।

प्रश्न 24.
स्वेज नहर किस देश में अवस्थित है?
उत्तर:
मिस्र में।

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प्रश्न 25.
पनामा नहर का निर्माण कब पूर्ण हुआ?
उत्तर:
सन् 1914 में।

प्रश्न 26.
स्वेज नहर के दो छोरों पर स्थित पत्तनों के नाम लिखें।
उत्तर:
पोर्ट सईद और पोर्ट स्वेज।

प्रश्न 27.
पनामा नहर के दो छोरों पर स्थित नगरों के नाम लिखें।
उत्तर:
कोलोन और पनामा सिटी।

प्रश्न 28.
सर्वप्रथम सार्वजनिक रेलमार्ग किन क्षेत्रों के बीच आरंभ हुआ?
उत्तर:
उत्तरी इंग्लैंड के स्टॉकटन और डर्लिंटन के बीच।

प्रश्न 29.
अलास्का राजमार्ग किन स्थानों को जोड़ता है?
उत्तर:
कनाडा के एडमंटन को अलास्का के एंकॉरेज से।

प्रश्न 30.
उत्तरी अमेरिका में विश्व का कितने प्रतिशत रेलमार्ग तंत्र है?
उत्तर:
40%

प्रश्न 31.
एशिया एवं यूरोप दोनों महाद्वीपों के लिए वाणिज्य द्वार के रूप में सेवा करने वाली नहर का क्या नाम है?
उत्तर:
स्वेज नहर।

प्रश्न 32.
पाइपलाइनों के माध्यम से किसका परिवहन व्यापक रूप से किया जाता है?
उत्तर:
जल, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस आदि का।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
महामार्ग क्या होते हैं?
उत्तर:
महामार्ग वे पक्की सड़कें होती हैं जो किसी देश के दूरस्थ स्थानों को मिलाती हैं। अत्यंत चौड़ी इन सड़कों पर दोनों तरफ बाधा-रहित यातायात चलता है। वाहनों की तेज गति के लिए इन सड़कों पर कई लेन, पुल, फ्लाईओवर तथा किनारों पर पुश्ते बनाए जाते हैं।

प्रश्न 2.
परिवहन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
परिवहन वह साधन है जिसके माध्यम से उपयोगी वस्तुओं तथा यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जाता है।

प्रश्न 3.
संचार सेवा क्या है?
उत्तर:
संचार सेवा वह सेवा है जिसके माध्यम से संचार के विभिन्न साधनों द्वारा संदेश तथा विचार को अन्य स्थानों पर भेजा जाता है।

प्रश्न 4.
बिग इंच क्या है?
उत्तर:
बिग इंच अमेरिका की सबसे प्रसिद्ध पाइपलाइन है जो खाड़ी के तटीय कुँओं से प्राप्त तेल को उत्तरी-पूर्वी भाग में पहुँचाती है।

प्रश्न 5.
पाइपलाइन परिवहन से क्या लाभ है?
उत्तर:
पाइपलाइन परिवहन का प्रयोग जल, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे तरल पदार्थों एवं गैसीय पदार्थों के परिवहन के लिए किया जाता है।

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प्रश्न 6.
पाइपलाइन परिवहन के कोई दो दोष बताएँ।
उत्तर:

  1. पाइपलाइनों को बिछाने के बाद इसकी क्षमता को घटाया या बढ़ाया नहीं जा सकता।
  2. लोचशीलता के अभाव के कारण पाइपलाइन परिवहन को निश्चित स्थानों के लिए ही प्रयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 7.
तटीय नौपरिवहन से क्या लाभ हैं?
उत्तर:
तटीय नौपरिवहन लंबी तटरेखा वाले देशों के लिए एक सुगम विधि है जो विभिन्न देशों को समुद्रीय मार्गों से जोड़ने का कार्य करती है।

प्रश्न 8.
पाइपलाइनों का विस्तृत उपयोग खनिज तेल और प्राकृतिक गैस जैसी सामग्रियों का परिवहन करने के लिए क्यों होता है?
उत्तर:
क्योंकि पाइपलाइनों में इन तरल पदार्थों का प्रवाह सतत् बना रहता है। सामान चढ़ाने-उतारने का भी झंझट नहीं रहता और वस्तु का अपव्यय भी नहीं होता।

प्रश्न 9.
उत्तर प्रशांत मार्ग किन प्रमुख पत्तनों को जोड़ता है?
उत्तर:
यह मार्ग उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित पत्तनों बैंकुवर, सियाटिल, पोर्टलैंड, सान फ्रांसिस्को आदि को सुदूरपूर्व एशिया के याकोहामा, कोबे, शंघाई, हाँगकांग, मनीला तथा सिंगापुर आदि से मिलाता है।

प्रश्न 10.
ट्रांस कैनेडियन महामार्ग किन दो नगरों के बीच फैला हुआ है?
उत्तर:
ट्रांस कैनेडियन महामार्ग कनाडा के पूर्व में अटलांटिक महासागर के तट पर स्थित सेंट जॉन नगर तथा पश्चिम में प्रशांत महासागर के तट पर स्थित बैंकूवर नगर के बीच फैला हुआ है।

प्रश्न 11.
अंतःस्थलीय जलमार्ग किसे कहते हैं?
उत्तर:
परिवहन के उपयोग में आने वाली नदियों, झीलों और नहरों को अंतःस्थलीय जलमार्ग कहते हैं।

प्रश्न 12.
विश्व की सबसे पहली रेलगाड़ी कब और कहाँ-से-कहाँ तक चली थी?
उत्तर:
विश्व की सबसे पहली रेलगाडी सन 1825 में उत्तरी इंग्लैंड के स्टॉकटन और डार्लिंगटन के बीच चली थी।

प्रश्न 13.
अंतःमहाद्वीपीय रेलमार्ग क्या होते हैं?
उत्तर:
अंतःमहाद्वीपीय रेलमार्ग वे रेलमार्ग होते हैं जो किसी महाद्वीप के एक छोर को उसके दूसरे छोर से जोड़ते हैं।

प्रश्न 14.
कैनेडियन-पैसेफिक रेलवे कहाँ-से-कहाँ तक विस्तृत है?
उत्तर:
यह रेलमार्ग कनाडा के पूर्व में अटलांटिक महासागर के तट पर स्थित सेंट जॉन व हेलिफैक्स बंदरगाहों को पश्चिम में प्रशांत तट पर स्थित बैंकूवर बंदरगाह से मिलाता है।

प्रश्न 15.
परिवहन जाल क्या होता है?
उत्तर:
अनेक स्थान जिन्हें परस्पर मार्गों की श्रेणियों द्वारा जोड़ दिए जाने पर जिस प्रारूप का निर्माण होता है, उसे परिवहन जाल कहते हैं।

प्रश्न 16.
साइबर स्पेस क्या है?
उत्तर:
साइबर स्पेस विद्युत द्वारा कम्प्यूटरीकृत स्पेस का संसार है। यह वर्ल्ड वाइड वेब (www) जैसे इंटरनेट द्वारा आवृत है।

प्रश्न 17.
साइबर स्पेस के दो उपयोग बताइए।
उत्तर:

  1. इसका उपयोग उड़ते जहाजों में हो सकता है।
  2. यह विद्युत द्वारा कम्प्यूटरीकृत किया गया स्पेस का संसार है।

प्रश्न 18.
विश्व के वायुमार्गों के अति सघन जाल वाले तीन मुख्य प्रदेश कौन-से हैं?
उत्तर:

  1. पश्चिमी यूरोप
  2. संयुक्त राज्य अमेरिका
  3. दक्षिणी-पूर्वी एशिया।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 परिवहन एवं संचार

प्रश्न 19.
सीमावर्ती सड़क से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं के सहारे बनाई गई सड़कों को सीमावर्ती सड़कें कहा जाता है। ये सड़कें सुदुर क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्रमुख नगरों से जोड़ने और प्रतिरक्षा प्रदान करने में प्रमुख भूमिका निभाती हैं। प्रायः सभी देशों में गाँवों और सैन्य शिविरों तक वस्तुओं को पहुँचाने के लिए ऐसी सड़कें बनाई जाती हैं।

प्रश्न 20.
आंतरिक जलमार्ग के दो उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. स्वेज़ नहर मार्ग
  2. पनामा नहर मार्ग।

प्रश्न 21.
‘स्वर्णिम चतुर्भुज’ किन चार महानगरों को जोड़ता है?
उत्तर:
स्वर्णिम चतुर्भुज’ दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई तथा कोलकाता को जोडता है।

प्रश्न 22.
इंटरनेट क्या है?
उत्तर:
इंटरनेट एक इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली है जिसके द्वारा कोई भी प्रयोगकर्ता माइक्रो कंप्यूटर और मोडम के माध्यम से साइबर स्पेस (सूचना संसार) से जुड़ सकता है और विविध प्रकार की नवीनतम जानकारी हासिल कर सकता है।

प्रश्न 23.
पार-साइबेरियन रेलमार्ग किस देश से गुजरता है?
उत्तर:
रूस का यह प्रमुख रेलमार्ग पश्चिम में सेंट पीट्सबर्ग से पूर्व में प्रशान्त महासागर तट पर स्थित ब्लाडीवॉस्टक तक मॉस्को, टुला, नोवोस्प्रिंस्क, चीता और खबरोस्क से होते हुए जाता है।

प्रश्न 24.
उपग्रहण संचार का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
उपग्रह संचार (इंटरनेट) पृथ्वी पर सबसे बड़ा विद्युतीय जाल है। इसने मानव-जीवन को अनेक प्रकार से प्रभावित किया है। दूरदर्शन के माध्यम से मौसम की जानकारी एक वरदान बन गई है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
परिवहन तथा संचार में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
परिवहन तथा संचार में निम्नलिखित अंतर हैं

परिवहनसंचार
1. परिवहन के विभिन्न साधनों द्वारा उपयोगी वस्तुओं तथा यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जाता है।1. संचार के विभिन्न साधनों द्वारा संदेश तथा विचार को अन्य स्थानों पर भेजा जाता है।
2. परिवहन के उदाहरण-जल मार्ग, स्थल मार्ग व वायु मार्ग हैं।2. संचार के उदाहरण-टेलीविजन, रेडियो, तार, टेलीफोन आदि हैं।
3. ये साधन पेट्रोल, डीजल व विद्युत शक्ति से चलते हैं।3. ये साधन विद्युत तरंगों से चलते हैं।

प्रश्न 2.
सड़क परिवहन सुविधाजनक क्यों होता है?
उत्तर:
सड़क परिवहन निम्नलिखित कारणों से सुविधाजनक होता है-

  1. सड़कें यातायात का सस्ता साधन हैं।
  2. सड़कों द्वारा पदार्थों या चीजों को उत्पादित क्षेत्रों से उपभोक्ता क्षेत्र तक आसानी से पहुँचाया जाता है।
  3. सड़कों द्वारा माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाने एवं ले जाने में अधिक सुरक्षा है।
  4. इनका निर्माण दुर्गम, पहाड़ी एवं हिमाच्छादित क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।

प्रश्न 3.
वायु परिवहन की कोई चार हानियाँ बताएँ।
उत्तर:
वायु परिवहन की चार हानियाँ निम्नलिखित हैं-

  1. वायुयान केवल निश्चित मार्गों पर ही चल सकते हैं।
  2. हवाई अड्डों के निर्माण पर अधिक धन खर्च करना पड़ता है।
  3. परिवहन के अन्य साधनों की तुलना में वायु परिवहन पर मौसम का प्रभाव अधिक पड़ता है।
  4. हवाई मार्गों पर धूल-भरी आंधियों का प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 4.
सड़क परिवहन की कोई चार विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:
सड़क परिवहन की चार विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. सड़कों के द्वारा मनुष्य अपनी आवश्यकता की विभिन्न वस्तुओं को मँगवा सकता है तथा दूसरे स्थान तक पहुँचा सकता है।
  2. सड़कें यातायात का सस्ता साधन हैं।
  3. सड़कों का निर्माण दुर्गम, पहाड़ी तथा हिमाच्छादित प्रदेशों में भी किया जा सकता है।
  4. सड़कों द्वारा पदार्थों का परिवहन उत्पादक क्षेत्रों से उपभोक्ता के घर तक किया जा सकता है।

प्रश्न 5.
उत्तरी तथा दक्षिणी अटलांटिक जलमार्गों की तुलना करें।
उत्तर:
उत्तरी तथा दक्षिणी अटलांटिक जलमार्गों में निम्नलिखित अंतर हैं-

उत्तरी अटलांटिक जलमार्गदक्षिणी अटलांटिक जलमार्ग
1. यह जलमार्ग पश्चिमी यूरोपीय देशों तथा उत्तरी अमेरिका के देशों को मिल्याता है।1. यह जलमार्ग पश्चिमी यूरोपीय देशों तथा दक्षिणी अमेरिका के देशों को मिलाता है।
2. इस जलमार्ग के दोनों अंतिम भागों में विकसित देश स्थित हैं।2. इस जलमार्ग के एक तरफ यूरोप के विकसित देश तथा दूसरी तरफ दक्षिणी अमेरिका के कम विकसित देश स्थित है।
3. इस जलमार्ग द्वारा विश्व का सबसे अधिक व्यापार होता है।3. इस जलमार्ग द्वारा कम व्यापार होता है।
4. इस मार्ग से औद्योगिक निर्मित वस्तुएँ निर्यात की जाती हैं।4. इस जलमार्ग द्वारा मुख्य रूप से खाद्य पदार्थ तथा कच्चा माल दक्षिणी अमेरिका के देशों में निर्यात किया जाता है।

प्रश्न 6.
पत्तन तथा पोताश्रय में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
पत्तन तथा पोताश्रय में निम्नलिखित अंतर हैं-

पत्तनपोताश्रय
1. ये सागरीय तट पर जलयानों के ठहरने के स्थान हैं।1. ये जलयानों के सागर में प्रवेश करने के प्राकृतिक स्थान शोते है।
2. यहाँ जलयानों से सामान को उतारने तथा लादने की सुविधाएँ रपलब्ध हैं।2. यहाँ जलयानों की समुद्री तुफानों तथा लहरों से रक्षा होती है।
3. यहाँ कर्ई बस्तियां तथा गोदाम होते हैं।3. यहाँ बस्तियां तथा गोदाम नहीं होते। ज्वारनदमुख तथा कडे-फटे तट पोताश्रय का निर्माण करते हैं; जैसे मुंबई।
4. ये व्यापार के द्वार हैं। यहाँ स्थलीय क्षेत्र तथा सागरीय तट आपस में मिलते हैं।4. कृत्रिम पोताश्रय का निर्माण जलतोड़ दीवार बनाकर किया जाता है।
5. ये रेलमार्गों तथा सड़कों द्वारा अपनी पृष्ठभूमि से मिले ग्हते हैं।5. यहाँ केवल जलयानों के आवागमन की सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं।

प्रश्न 7.
पाइपलाइन परिवहन का वर्णन करें।
उत्तर:
खनिज तेल, पेट्रोलियम उत्पादों तथा बड़ी मात्रा में गैस इत्यादि के परिवहन के लिए पाइपलाइन, परिवहन की एक नई व सुगम तकनीक है। पाइपलाइनों को ऊबड़-खाबड़ भू-भागों तथा पानी के नीचे भी बिछाया जा सकता है। एक बार बिछ जाने के बाद इसके रख-रखाव व संचालन पर खर्च भी कम आता है। इससे ऊर्जा का उपयोग भी कम मात्रा में होता है। लेकिन इसमें कुछ खामियाँ भी हैं। एक बार पाइपलाइन बिछा देने के बाद उसकी क्षमता में वृद्धि नहीं की जा सकती। भूमिगत पाइपलाइन की मुरम्मत करना भी कठिन होता है। रिसाव होने पर रिसाव के स्थान का पता लगाना भी कठिन होता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में उत्पादक क्षेत्रों और उपभोग क्षेत्रों के बीच तेल पाइपलाइनों का सघन जाल पाया जाता है। बिग इंच ऐसी ही एक प्रसिद्ध पाइपलाइन है जो मैक्सिको की खाड़ी में स्थित तेल के कुँओं से उत्तर:पूर्वी राज्यों में तेल ले जाती है। यूरोप, रूस, पश्चिम एशिया और भारत में पाइपलाइनों का प्रयोग तेल के कुँओं को तेल परिष्करणशालाओं और पत्तनों या घरेलू बाज़ारों से जोड़ने के लिए किया जाता है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 परिवहन एवं संचार

प्रश्न 8.
राष्ट्रीय महामार्ग तथा राज्य महामार्ग में क्या अंतर है?
उत्तर:
राष्ट्रीय महामार्ग तथा राज्य महामार्ग में निम्नलिखित अंतर हैं-

राष्ट्रीय महामार्गराज्य महामार्ग
1. ये महामार्ग किसी भी देश के राज्यों की राजधानियों तथा मुख्य नारों को आपस में मिलाते हैं।1. ये महामार्ग किसी भी रंज्य के प्रमुख नगरों को आपस में मिलाते हैं।
2. इन महामार्गों की देख-रेख केंद्रीय सरकार कग्ती है।2. इन महामागों की देख-रेख राज्य सरकारें करती हैं।
3. अमृतसर से मुंबई को मिलाने वाला महामार्ग गष्ट्रीय महामार्ग है।3. चंडीगढ़ तथा हिसार महामार्ग ग़ज़्य महामार्ग है।

प्रश्न 9.
स्वेज़ नहर तथा पनामा नहर के मार्गों के आर्थिक महत्त्व की तुलना करें।
अथवा
स्वेज तथा पनामा नहरों में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
स्वेज़ नहर तथा पनामा नहर के मार्गों के आर्थिक महत्त्व निम्नलिखित प्रकार से हैं-

स्वेज़ नहरपनामा नहर
1. यह नहर लाल सागर और भूमध्य सागर को मिलाती है।1. यह नहर अटलांटिक महासागर तथा प्रशात महासागर को मिलाती है।
2. इस नहर पर मिस्र का अधिकार है।2. इस नहर पर संयुक्त राज्य अभोरंका का आधकार है।
3. इस नहर के एक तरफ व्यापार होता है।3. इस नहर के दोनों ओर व्यापार होता है।
4. इस नहर की लंबाई 160 कि०मी० है।4. इस नहर की लंबाई 72 कि०मी० है।
5. इस नहर का भू-तल समतल है।5. इस नहर का भू-तल पर्वर्ताय है।
6. इस नहर से गुजरने वाले जलयानों को अधिक कर देने पड़ते हैं।6. इस नहर से गुजरने वाले जलयानों को कम कः देने पड़ते हैं।
7. इस नहर में यातायात अधिक होता है।7. इस नहर में यातायात कम होता है।
8. इस मार्ग पर कोयला पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।8. इस मार्ग पर कोयला कम मात्रः में उपल्बब्ध है।
9. इस मार्ग पर बंदरगाहों की संख्या अधिक है।9. इस मार्ग पर बंदरगाहां की संख्या कम है।
10. स्वेज़ नहर द्वारा फारस की खाड़ी के देशों से पेट्रोलियम एशियाई देशों में आयात होता है तथा गेहुं, चावल. रबड़, जूट, सूती वस्त्र आदि का नियांत खाड़ी के टेशों को किया जाता है।10. इस मार्ग द्वारा उत्तरी अमेरिका से खाद्य पदार्थ तथा कोयला, ब्राजील से कॉफी, वेनेगुएला से पेट्रोलियम. जमैका से एल्युर्मानियम यूरोपीय तया एंशियाई देशों को निर्यात की जातो है तथा रबड़, खाद्य सभग्री, कोयला, रेशम, चाय आदि अमेरिकी देशों कों भेर्जा जार्ता है।

प्रश्न 10.
जल परिवहन का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
जल परिवहन का महत्त्व निम्नलिखित है-

  1. जलमार्गों को बनाना नहीं पड़ता और न ही इनके रख-रखाव में कोई खर्चा आता है।
  2. महासागर आपस में जुड़े हैं। इनमें विभिन्न आकार के जहाज चल सकते हैं। समुद्री मागों का उपयोग कोई भी देश कर सकता है।
  3. जल का वर्षण स्थल की अपेक्षा कम होता है। परिणामस्वरूप जल परिवहन की ऊर्जा लागत अपेक्षा त कम होती है।
  4. कम मूल्य वाली, भारी व अधिक स्थान घेरने वाली स्थूल वस्तुओं; जैसे कोयला, अयस्क, लकड़ा इत्यादि के लम्बी दूरी तक परिवहन के लिए समुद्री मार्ग सर्वाधिक उपयुक्त और सस्ते पड़ते हैं।
  5. महासागरों का जहाजों द्वारा मार्गों के रूप में प्रयोग करना मनुष्य के मौतिक पर्यावरण के साथ अनुकूलन का एक श्रेष्ठ उदाहरण है।

प्रश्न 11.
रेल परिवहन के लाभ एवं दोषों का उल्लेख करें।
अथवा
रेल परिवहन का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
रेल परिवहन के लाभ/महत्त्व-

  • यह लम्बी दूरियों के यात्रियों और सामान ढोने का सबसे सस्ता साधन है।
  • रेल कृषि उत्पादों को उपभोक्ताओं तक और कच्चे माल को कारखानों तक पहुँचाने में सुविधाजनक साधन है।
  • रेल परिवहन का देश के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान होता है।

रेल परिवहन के दोष-

  • रेल परिवहन के रख-रखाव के लिए भारी पूँजी और कर्मचारियों की आवश्यकता होती है।
  • पर्वतीय और मरुस्थलीय क्षेत्रों में रेलमार्गों का निर्माण करना कठिन होता है और यहाँ निर्माण कार्य में अधिक लागत आती है।

प्रश्न 12.
ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग का भौगोलिक महत्त्व क्या है?
उत्तर:
ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग बनने से कभी पिछड़ा हुआ पूर्वी-साइबेरिया, जिसे ‘काला पानी’ भी कहा जाता था, आज प्राकृतिक संपदाओं का खजाना माना जा रहा है। इसी के कारण ही साइबेरिया और मध्य एशिया की प्राकृतिक एवं कृषि सम्पत्तियों का दोहन संभव हो सका है। इसी के माध्यम से पश्चिम की ओर धातु, चमड़ा, लकड़ी आदि मँगवाए जा रहे हैं और पूर्व की ओर मशीनरी एवं औद्योगिक उत्पाद भेजे जा रहे हैं।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सड़क परिवहन के महत्त्व का वर्णन करें।
अथवा
स्थल या सड़क परिवहन की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्राचीनकाल में मनुष्य पगडंडियों तथा कच्ची सड़कों के रास्ते आवागमन करते थे। वे एक स्थान से दूसरे स्थान पर पैदल या बैलगाड़ियों में जाते थे लेकिन प्रौद्योगिकी विकास के साथ-साथ आवागमन के लिए पक्की सड़कों तथा महामार्गों का विकास किया गया जिन पर मोटरगाड़ियाँ, बसें, ट्रक, स्कूटर, ट्रैक्टर आदि के द्वारा परिवहन होने लगा। मनुष्य अपनी आवश्यकता की वस्तुओं को विभिन्न स्थानों से मंगवाने लगा। अपने अतिरेक कृषि उत्पादनों को उनकी माँग के अनुसार बाजार तक भेजने लगा। सड़क मार्ग की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. सड़कों के द्वारा मनुष्य अपनी आवश्यकता की विभिन्न वस्तुओं को मंगवा सकता है तथा दूसरे स्थान तक पहुँचा सकता है।
  2. सड़कें यातायात का सस्ता साधन हैं।
  3. सड़कों का निर्माण दुर्गम, पहाड़ी तथा हिमाच्छादित प्रदेशों में भी किया जा सकता है।
  4. कम दूरी के लिए सड़कें यातायात के सस्ते साधन हैं।
  5. सड़कों द्वारा पदार्थों का परिवहन उत्पादक क्षेत्रों से उपभोक्ता के घर तक किया जा सकता है।
  6. सड़कों द्वारा माल को लाने-ले जाने में अधिक सुरक्षा रहती है।
  7. शीघ्र खराब होने वाली वस्तुओं; जैसे सब्जी, फल, मछली, दूध, घी आदि को सड़कों द्वारा माँग वाले क्षेत्रों में शीघ्र पहुँचाया जा सकता है।
  8. छोटी दूरियों के लिए सड़क परिवहन, रेल परिवहन की अपेक्षा आर्थिक दृष्टि से लाभदायक होता है
  9. सडक परिवहन रेल. जहाज तथा वाय परिवहन का पुरक है क्योंकि रेल, जहाज और विमान केवल सीमित स्थानों पर ही जाते हैं जबकि सड़कें सभी गाँवों, नगरों और बाज़ारों को इन साधनों से जोड़ती है।
  10. इससे सम्पूर्ण परिवहन तन्त्र की क्षमता बढ़ती है।
  11. दुर्गम क्षेत्रों में जहाँ परिवहन के अन्य साधन नहीं पहुँच सकते। वहाँ केवल सड़कें ही यातायात को सुविधा प्रदान करती हैं।
  12. सड़कों द्वारा उद्योगों के लिए कच्चे तथा निर्मित माल का परिवहन आसान हो गया है।
  13. गाँवों को नगरों से जोड़कर सड़कें वंचित ग्रामीण समुदाय को शिक्षा व अन्य सुविधाओं तक पहुँचाने का अवसर प्रदान करती हैं।

निष्कर्ष – सड़कें कच्ची भी होती हैं और पक्की भी। कच्ची सड़कों को बनाना आसान व सस्ता पड़ता है। लेकिन इनका प्रयोग सभी ऋतुओं में नहीं किया जा सकता। अत्यधिक भारी वर्षा और बाढ़ के दौरान पक्की सड़कें भी टूट जाती हैं। सड़कें किसी भी देश के व्यापार और वाणिज्य को विकसित करने एवं पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

विश्व में परिवहन के अन्य साधनों की तुलना में सड़कों का विकास एवं प्रसार अधिक हुआ है तथा इन्होंने आर्थिक विकास मे महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

प्रश्न 2.
विश्व के विभिन्न भागों में सड़कों के वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विश्व में सड़कों का विकास अन्य साधनों की तुलना में अधिक हुआ है। सड़कें उन देशों में अधिक विकसित तथा संख्या में अधिक हैं जो आर्थिक रूप से समृद्ध हैं। सड़कों की लंबाई रेलमार्गों की तुलना में लगभग तेरह गुनी अधिक है। विश्व में उत्तरी अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया तथा एशिया में भारत, चीन एवं जापान में सड़कें अधिक विकसित अवस्था में हैं। विश्व के विभिन्न देशों में सड़कों के वितरण की स्थिति निम्नलिखित प्रकार से है
1. संयुक्त राज्य अमेरिका-सड़कों के विकास एवं लंबाई की दृष्टि से संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व का महत्त्वपूर्ण राष्ट्र है। यहाँ कुल सड़कों की लंबाई लगभग 60 लाख किलोमीटर है जो विश्व का लगभग एक-तिहाई सड़क मार्ग है। संयुक्त राज्य अमेरिका का पूर्वी भाग सड़कों के विकास की दृष्टि से देश का प्रमुख क्षेत्र है। देश के पूर्वी भाग में औद्योगिक तथा आर्थिक विकास अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक हुआ है। मोटरगाड़ियों की दृष्टि से संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व का प्रथम देश ही नहीं, बल्कि विश्व की आधी मोटरगाड़ियाँ भी उसी देश में हैं। देश के उत्तरी भाग में कनाडा की सीमा के साथ-साथ सड़कों का विकास अपेक्षाकृत कम हुआ है। संयुक्त राज्य अमेरिका में सड़कों का जाल बिछा हुआ है।

2. यूरोप-यूरोप में औद्योगिक एवं नगरीय विकास 19वीं शताब्दी से ही शुरू हो गया था। यूरोप की लगभग 70% जनसंख्या नगरों में रहती है। ब्रिटेन, फ्रांस तथा जर्मनी तीनों देश सड़क परिवहन के क्षेत्र में यूरोप के अग्रणी देश हैं। यूरोप का प्रत्येक नगर वहाँ के बंदरगाहों से सड़कों द्वारा जुड़ा हुआ है जिससे वस्तुओं के आदान-प्रदान की सुविधा तथा आयातित माल को आंतरिक भागों तक आसानी से भेजा जा सकता है।

3. रूसरूस में यूरोपीय भाग सड़कों की दृष्टि से अधिक विकसित हैं। यूरोपीय रूस का प्रत्येक नगर सड़कों द्वारा आपस में जुड़ा हुआ है। मास्को सड़क-जाल का केंद्र-बिंदु है। एशियाई रूस में सड़कें अपेक्षाकृत कम हैं। साइबेरिया की कठोर शीतल जलवायु के कारण यहाँ सड़कों का विकास नहीं हो पाया है।

4. चीन-एशिया महाद्वीप में चीन में सड़कों का जाल बिछा हुआ है। चीन का भौगोलिक क्षेत्र अधिक होने के कारण सारे देश में सड़कों का संतुलित विकास नहीं हो पाया है। अधिकांश सड़कें देश के पूर्वी तथा दक्षिणी भाग में हैं। बीजिंग प्रमुख सड़कों का केंद्र है, जहाँ से सभी प्रमुख नगरों को सड़कों से जोड़ दिया गया है।

5. भारत-भारत में सड़कों का अधिकतर विस्तार एवं विकास स्वतंत्रता के बाद हुआ। दक्षिणी भारत में अधिकांशतः सड़कें पक्की हैं, जबकि उत्तरी भारत में सतलुज-गंगा के मैदान में कच्ची तथा पक्की दोनों प्रकार की सड़कें हैं। भारत में सड़कों की कुल लंबाई लगभग 15 लाख किलोमीटर है जिनमें कुछ राष्ट्रीय राजमार्ग हैं जिनका निर्माण तथा देख-रेख केंद्रीय सरकार करती है तथा कुछ राज्य मार्ग हैं जिनका नियंत्रण राज्य सरकारों के पास है। भारत का सबसे महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग शेरशाह सूरी महामार्ग (जी०टी० रोड) है जिसको राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-1 कहते हैं।

इसका निर्माण शेरशाह सूरी ने करवाया था जो कोलकाता से अमृतसर तक देश के महत्त्वपूर्ण नगरों को जोड़ता है। स्वतंत्रता से पूर्व यह कोलकाता से पेशावर तक था। इस राष्ट्रीय राजमार्ग को अब दो भागों में बांट दिया गया है। दिल्ली से अमृतसर तक राष्ट्रीय राजमार्ग नं० 1 तथा दिल्ली से कोलकाता के बीच के मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग नं० 2 बना दिया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग नं0 3 आगरा से मुंबई (बंबई) को जोड़ता है। भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग प्रमुख शहरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बंगलुरु, लखनऊ, कानपुर, पटना, अमृतसर, जयपुर, अहमदाबाद आदि को आपस में जोड़ते हैं।

6. ऑस्ट्रेलिया ऑस्ट्रेलिया में सड़कों का जाल पूर्वी तटीय क्षेत्र में फैला है। देश का यह भाग नगरीकरण एवं औद्योगिक रूप से भी संपन्न है। यहाँ के मुख्य मार्ग बंदरगाहों को आपस में जोड़ते हैं। ऑस्ट्रेलिया का स्टुआर्ट महामार्ग उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में स्थित बिरदुम को एलिस स्प्रिंग तथा टेनेंट क्रीक से होता हुआ दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया में स्थित ऊनादत्ता को मिलाता है।

7. अफ्रीका-अफ्रीका महाद्वीप में सड़कों का अपेक्षाकृत कम विकास हुआ है। यहाँ मिस्र तथा दक्षिणी अफ्रीका में अधिकतर सड़कों का जाल बिछा है।

8. दक्षिणी अमेरिका दक्षिणी अमेरिका में ब्राज़ील, अर्जेंटाइना तथा पेरू में सड़कों का विकास हुआ है। दक्षिणी अमेरिका का सबसे महत्त्वपूर्ण महामार्ग पैन-अमेरिकन महामार्ग है जो 24,000 कि०मी० लंबा है। दक्षिणी अमेरिका में बंदरगाहों को आंतरिक भाग के नगरों से जोड़ा गया है। दक्षिणी अमेरिका की लगभग सभी प्रमुख बंदरगाहों को उनके पृष्ठ प्रदेश से सड़कों द्वारा मिलाया गया है।

प्रश्न 3.
विश्व के प्रमुख अंतःमहाद्वीपीय रेलमार्गों/पार महाद्वीपीय रेलमार्गों का संक्षिप्त वर्णन करें।
अथवा
रेलमार्ग कितने प्रकार के होते हैं? रेलमार्गों के विश्व वितरण का वर्णन करें।
अथवा
किन्हीं दो प्रायद्वीपीय रेलमार्ग का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अंतःमहाद्वीपीय रेलमार्गों का निर्माण किसी महाद्वीप के दो किनारों को जोड़ने के उद्देश्य से किया जाता है। इन मार्गों के निर्माण के पीछे वहाँ के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन तथा पिछड़े क्षेत्रों को राष्ट्र की मुख्य धारा में जोड़ना है। इससे राष्ट्रीय या महाद्वीपीय एकता के विकास को प्रोत्साहन मिलता है। विश्व के प्रमुख अंतःमहाद्वीपीय रेलमार्ग निम्नलिखित हैं
1. ऑस्ट्रेलियन अंतःमहाद्वीपीय रेलमार्ग-ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में रेलमार्गों का विकास अभी शैशव अवस्था में है। पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में एक महत्त्वपूर्ण रेलमार्ग है जो उत्तर से दक्षिणी तट को जोड़ता है। यहाँ एक ही अंतःमहाद्वीपीय रेलमार्ग है जो पूर्व में सिडनी से आरंभ होकर पश्चिम में पर्थ को जोड़ता है। यह रेलमार्ग देश के महत्त्वपूर्ण नगरों को आपस में जोड़ता है।

2. अफ्रीकन अंतःमहाद्वीपीय रेलमार्ग-अफ्रीका महाद्वीप में भी रेलमार्गों का विकास प्रारंभिक अवस्था में है। एक बड़ा रेलमार्ग निर्माणाधीन है जो उत्तर से दक्षिणी छोर को आपस में जोडेगा। यह रेलमार्ग उत्तर में मिस्र की राजधानी काहिरा से दक्षिणी अफ्रीका के बंदरगाह केपटाउन को आपस में मिलाएगा। इस रेलमार्ग द्वारा अफ्रीका के महत्त्वपूर्ण नगरों को आपस में मिलाने की योजना है।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 परिवहन एवं संचार 1

3. ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग यह विश्व का सबसे लंबा रेलमार्ग है जो पश्चिम में यूरोपीय रूस के लेनिनग्राड से पूर्व में प्रशांत महासागर के तट पर स्थित ब्लाडीवॉस्टक तक है। इस मार्ग की लंबाई 9,332 किलोमीटर है। यह रेलमार्ग सन् 1905 में बनकर तैयार हुआ और इसके निर्माण में 14 वर्ष लगे।

यह रेलमार्ग पश्चिम में बाल्टिक सागर में स्थित फिनलैंड की खाड़ी के नगर एवं बंदरगाह लेनिनग्राड से दक्षिण में देश की राजधानी मास्को से होता हुआ ओमस्क, इरकूटस्क, खांबरोस्कं को जोड़ते हुए प्रशांत महासागर के तट ब्लाडीवॉस्टक तक लंबी दूरी तय करता है। यह इकहरी रेलवे लाइन है। चीता नगर से इस रेलमार्ग की दो शाखाएँ हो जाती हैं। यहाँ से इसकी एक शाखा दक्षिण में मंचूरिया होती हुई ब्लाडीवॉस्टक तक पहुंचती है।

ट्रांस साइबेरियन रेलमार्ग के निर्माण का उद्देश्य सैनिक तथा प्रशासनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना था लेकिन इस रेलमार्ग ने रूस के आर्थिक, सामाजिक एवं व्यापारिक क्षेत्र के विकास में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। रूस का साइबेरिया क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से धनी है। यहाँ संसाधनों की विविधता है। इन संसाधनों के दोहन और देश के आर्थिक विकास में इस रेलमार्ग की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। यहाँ से उद्योगों के लिए कच्चा माल रेलमार्ग द्वारा यूरोपीय रूस के उद्योगों को भेजा जाता है तथा निर्मित वस्तुएँ साइबेरिया क्षेत्र में आती हैं। साइबेरिया के खनिजों, वनों एवं कृषि क्षेत्र के उपयोग में रेलमार्ग वरदान सिद्ध हुआ है। इस रेलमार्ग से विशाल क्षेत्र वाला साइबेरिया राष्ट्र की मुख्य धारा से जुड़कर राष्ट्रीय एकता को सबल बनाने में सक्षम रहा है।

4. कैनेडियन पैसेफिक रेलमार्ग यह रेलमार्ग पूर्व में कनाडा की सीमा पर स्थित सेंट जॉन (St. John) बंदरगाह से आरंभ होकर संयुक्त राज्य अमेरिका को पार करके कनाडा के प्रमुख व्यापारिक नगर मांट्रियल तथा पोर्ट विलियम से होता हुआ पश्चिम में प्रशांत महासागर तट पर वेंकूवर तक जाता है। यह प्रशांत महासागर तथा अटलांटिक महासागर को जोड़ने वाला विश्व का प्रमुख रेलमार्ग है जिसका निर्माण सन् 1886 में किया गया। इस रेलमार्ग की लंबाई 7,050 किलोमीटर है।

इस रेलमार्ग का आरंभ कनाडा की सीमा से होता है तथा कुछ दूर संयुक्त राज्य अमेरिका में पहुंचने पर फिर यह मार्ग सेंट लारेंस नदी को पार करने के बाद कनाडा की राजधानी ओटावा पहुंचता है। इस रेलमार्ग के द्वारा देश के प्रमुख नगर सेंट जॉन, मांट्रियल, सडबरी, विनिपेग, रेगिना, मेडिसनहैट तथा वेंकवर आदि देश की राजधानी (ओटावा) से जुड़ गए हैं, जिससे प्रशासनिक एवं राजनीतिक गतिविधियों में विशेष सहायता मिली है।

इस रेलमार्ग का प्रशासनिक एवं राजनीतिक महत्त्व होने के क्यबैक मि साथ-साथ इसने कनाडा के प्रेयरीज़ वेंकूवर कालाग्री मेडिसनहैट प्रदेश में गेहूँ के उत्पादन तथा खनिजों के दोहन तथा उन्हें पूर्व में अटलांटिक सडबरी तक पहुंचाने में सहायता की है। विनिपेग कनाडा के बंदरगाह शीतकाल में जम जाते हैं जिसके कारण समुद्री यातायात ट्रियल हा एंटलांटिक कुछ महीनों के लिए बंद हो जाता है
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 परिवहन एवं संचार 2
महासागर और इस रेलमार्ग द्वारा निर्यात की जाने वाली वस्तुओं को अटलांटिक तट तक पहुँचाया जाता है, जहाँ से पश्चिमी यूरोप के देशों को इनका निर्यात किया जाता है। कनाडा में पश्चिमी भाग के आर्थिक विकास में इस रेलमार्ग की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है।

प्रश्न 4.
आंतरिक जल परिवहन अथवा अंतःस्थलीय जल मार्ग किसे कहते हैं? आंतरिक जलमार्गों के विश्व-वितरण का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
परिवहन के क्षेत्र में आंतरिक या अंतःस्थलीय जलमार्गों का प्राचीनकाल से ही महत्त्व रहा है। मनुष्य लकड़ी के लट्ठों … को बांधकर जल में तैरते हुए यात्रा करते तथा सामान ढोते थे, तत्पश्चात् नावें बनाई गईं और अब स्टीमरों से परिवहन होता है। जब नदियों, झीलों तथा नहरों का प्रयोग परिवहन के रूप में किया जाता है, तो उसे आंतरिक जल परिवहन कहते हैं।

आंतरिक जलमार्गों का विश्व-वितरण-आंतरिक जलमार्गों का विश्व-वितरण निम्नलिखित है-
1. यूरोप के आंतरिक जलमार्ग-यूरोप में आंतरिक जलमार्गों का जाल बिछा हुआ है। यूरोप के उत्तरी मैदान की महत्त्वपूर्ण नदियों; जैसे सीन, राइन, वेजर, एल्ब, ऑडर आदि नदियों को नहरों के द्वारा बीच-बीच में जोड़ दिया गया है। कच्चे तथा निर्मित माल को लाने-ले . जाने तथा व्यापारिक माल को बंदरगाहों तक पहुंचाने में इंन भागों का बड़ा महत्त्व है।

यूरोप में राइन नदी व्यापार की दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण है। इसमें बड़े-बड़े जलपोत जर्मनी के आंतरिक भागों तक प्रवेश कर जाते हैं। इस नदी द्वारा जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, स्विट्ज़रलैंड और बेल्जियम के आयात-निर्यात में सहायता मिलती है। इस नदी द्वारा आयातित वस्तुओं को आंतरिक भागों तक आसानी से पहुँचाया जाता है तथा निर्यात की जाने वाली वस्तुओं को वापसी में जहाजों द्वारा विदेशों को भेजा जाता है। राइन, वेजर तथा ऑडर नदियों को पूर्व-पश्चिम दिशा में नहरों के द्वारा जोड़ दिया गया है, स्टीमर तथा जलपोत चलते हैं। डेन्यूब नदी द्वारा ऑस्ट्रिया, हंगरी, रोमानिया और यूगोस्लाविया का परिवहन होता है। डेन्यूब नदी जर्मनी में ब्लैक फोरेस्ट पर्वत से निकलकर पूर्व में आस्ट्रिया की राजधानी वियना तथौं हंगरी होती हुई उत्तर:पूर्वी भाग में रोमानिया तथा बुल्गारिया से होती हुई पूर्व में काला सागर में गिरती है।

2. मानसूनी एशिया-मानसूनी एशिया में भारत तथा चीन की नदियाँ ही अधिकांशतः जल परिवहन में प्रयोग की जाती हैं। चीन की यांगसी-क्यांग तथा भारत की गंगा, ब्रह्मपुत्र, हुगली, बर्मा की इरावती आदि नदियों में प्रमुख रूप से जल परिवहन होता है। यांगसी-क्यांग की गिनती विश्व की लंबी नदियों में की जाती है। यह चीन की सबसे लंबी नदी है जो पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होती है। इसके अतिरिक्त इसमें अनेक छोटी-बड़ी नावें भी चलती हैं। भारी सामान देश के आंतरिक भागों में कम लागत पर इस नदी द्वारा पहुँचाया जाता है। इन नदियों के अतिरिक्त ह्वांगहो, मीमांग, सालविन आदि नदियों में भी जल परिवहन होता है। उत्तरी भारत में गंगा, यमुना तथा ब्रह्मपुत्र नदियों को परिवहन के उद्देश्य से अधिक विकसित किया जा सकता है जिससे कोलकाता बंदरगाह से माल आंतरिक भागों में कम लागत पर पहुंच सके।

3. उत्तरी अमेरिका-उत्तरी अमेरिका का महान् झील क्षेत्र साल भर परिवहन के लिए खुला रहता है। सुपीरियर, मिशिगन, हयूरन, ईरी तथा ओष्टारियों ने यहाँ के औद्योगिक विकास एवं नगरीकरण में प्रमुख भागीदारी निभाई है। इन झीलों के तटवर्ती भागों न मात्रा में लोहा पाया जाता है। बड़े-बड़े जहाज़ों द्वारा लोहा देश के कोयला क्षेत्रों एवं औद्योगिक नगरों तक पहुंचाया जाता है। इन झीलों के अतिरिक्त मिसीसिपी आंतरिक जलमार्ग भी महत्त्वपूर्ण है। मिस्सौरी, ओहापो, इलिनाए और उमोहियो नाव्य-नदियाँ हैं जो कच्चे माल आदि का परिवहन करती हैं।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 परिवहन एवं संचार

प्रश्न 5.
विश्व के किन्हीं चार समुद्री जलमार्गों या महासागरीय मार्ग का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विश्व में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सबसे अधिक महासागरीय भागों द्वारा होता है। द्वितीय विश्वयुद्ध से पूर्व भाप से चलने वाले जलयानों की संख्या अधिक थी, लेकिन अब डीज़ल से चलने वाले जलपोतों द्वारा एक देश का दूसरे देश से व्यापार होता है। महासागरीय भागों के द्वारा ही विश्व बाजार में विभिन्न देशों की वस्तुएँ सुलभ हो जाती हैं। भारी वजन वाले सामान को जलपोतों द्वारा ही एक देश से दूसरे देश में पहुंचाया जाता है। महासागरीय जलमार्ग परिवहन के अन्य साधनों की तुलना में सस्ता साधन है। इसमें सड़कें तथा रेल पटरी आदि बिछाने का खर्चा नहीं है। केवल पोताश्रयों के लिए टर्मिनल बनाने पड़ते हैं। विश्व के प्रमुख महासागरीय मार्ग निम्नलिखित हैं-
1. उत्तरी अटलांटिक मार्ग-यह मार्ग संसार का सबसे व्यस्त मार्ग है। यह मार्ग उत्तरी अमेरिका तथा यूरोपीय देशों के मध्य स्थित है। यह मार्ग विश्व के औद्योगिक देशों को आपस में जोड़ता है। विश्व का लगभग एक-चौथाई व्यापार इसी मार्ग द्वारा होता है। इस मार्ग पर पहला स्टीमर सन् 1938 में प्रारंभ हुआ। आज इस मार्ग पर लगभग 300 कंपनियों के जलपोत चलते हैं। इस मार्ग पर विश्व के लगभग 28 बड़े बंदरगाह स्थित हैं। यूरोप के प्रमुख पोताश्रय लंदन, लीवरपूल, बर्ग, रोटरडम, एम्सटर्डम, दी हेग, बेस्ट नान्टीज़, रोम, नेपिल्स आदि और संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क, बोस्टन, फिलाडेलफिया, बाल्टीमोर, चार्ल्सटन, न्यू आयलिस तथा हॉस्टन प्रमुख हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका से गेहूँ, कपास, कोयला, पेट्रोलियम, तेल, मशीनरी, कृषि यंत्र, वैज्ञानिक उपकरण, वस्त्र तथा मोटरगाड़ियाँ
आदि का निर्यात होता है, जबकि यूरोप से वैज्ञानिक उपकरण, मशीनों तथा वस्त्रों का निर्यात होता है।

2. आशा अंतरीप मार्ग-यह एक महत्त्वपूर्ण महासागरीय मार्ग है जो विश्व के सभी महाद्वीपों को आपस में जोड़ता है। यह उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका, यूरोप, एशिया तथा ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के देशों को आपस में जोड़ता है। यूरोप से आने वाले जहाज केपवर्ड द्वीपों के समीप से अफ्रीका के दक्षिण में केपटाउन पहुंचते हैं तथा इंडोनेशिया जाने वाले जहाज वृहत् वृत्त के मार्ग से जाते हैं तथा ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड जाने वाले जहाज वृहत् वृत्त के उत्तर की ओर से जाते हैं और केपटाउन ईंधन लेने के लिए रुकते हैं। स्वेज़ नहर के निर्माण के बाद से इस मार्ग का महत्त्व कम हो गया है। दक्षिण-पूर्वी एशिया से रबड़, ऊन, तेल, चीनी, नारियल, मसाले, ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूज़ीलैंड से दुग्ध तथा ऊन का सामान निर्यात किया जाता है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका तथा यूरोप से मशीनरी, तेल, वैज्ञानिक उपकरण, मोटरगाड़ियाँ आदि का निर्यात इस मार्ग से होता है।

3. प्रशांत महासागरीय मार्ग यह समुद्री मार्ग सबसे बड़ा है लेकिन अधिक विकसित नहीं हुआ है। इस मार्ग द्वारा उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका का एशियाई देशों तथा ऑस्ट्रेलिया से व्यापार होता है। एशियाई देशों से कच्चा माल तथा संयुक्त राज्य अमेरिका को निर्मित माल यहाँ से निर्यात होता है। अमेरिका से मशीनरी, वैज्ञानिक उपकरण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान निर्यात होता है। दक्षिणी-पूर्वी एशिया से चाय, रबड़, चीनी तथा अन्य कृषिगत उपजें निर्यात की जाती हैं। इस मार्ग के प्रसिद्ध एशियाई बंदरगाह कोबे, टोकियो, याकोहामा, हांगकांग, शंघाई, सिंगापुर, मनीला, ऑस्ट्रेलिया के सिडनी, अमेरिका के वेंकूवर, सान फ्रांसिस्को तथा लॉस एंजिल्स हैं।

4. दक्षिणी अटलांटिक मार्ग यह महासागरीय मार्ग पश्चिमी यूरोप तथा दक्षिणी अमेरिका के देशों के मध्य है। इस व्यापारिक मार्ग से दक्षिणी अमेरिका की बंदरगाहों तथा यूरोप की बंदरगाहों के मध्य व्यापार होता है। अर्जेंटाइना, ब्राज़ील तथा उरुग्वे विशाल मात्रा में कहवा, गेहूं, मक्का, मांस, ऊन, चमड़ा तथा खालें यूरोपीय देशों को निर्यात करते हैं। लौह अयस्क, मैंगनीज़, टंगस्टन, बॉक्साइट, अभ्रक आदि खनिजों का भी दक्षिणी अमेरिका के देशों से इस मार्ग द्वारा निर्यात किया जाता है।

प्रश्न 6.
वायु परिवहन की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वायु परिवहन की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) स्थल तथा जल परिवहन की तुलना में वायु परिवहन, परिवहन का तीव्रतम साधन है, परन्तु यह अत्यन्त महँगा भी है।

(2) विश्व की दूरियों को जितनी जल्दी वायु परिवहन ने घटाया है उतनी जल्दी किसी और साधन ने नहीं। वर्षों और महीनों के स्थान पर वायुमार्ग द्वारा की गई यात्रा को अब घण्टों और मिनटों में मापा जा सकता है। आज विश्व में कोई भी स्थान 35 घण्टे से अधिक दूरी पर नहीं है। चौंकाने वाली यह बात वायुयान बनाने और उड़ाने वालों की वजह से संभव हुई है।

(3) कम वजन की कीमती वस्तुओं; जैसे हीरे-जवाहरात, पत्र एवं दस्तावेज तथा शीघ्र खराब होने वाली खाद्य वस्तुओं; जैसे भारत का आम, इज़रायल का टमाटर, स्विट्ज़रलैंड के चॉकलेट व न्यूज़ीलैंड के दूध को वायु परिवहन द्वारा यूरोप और अमेरिका के बाज़ारों में शीघ्र पहुँचाया जा सकता है।

(4) वायु परिवहन ने सम्पर्क क्रान्ति ला दी है, जिन अगम्य क्षेत्रों तक स्थल मार्ग विकसित नहीं किए जा सकते; जैसे सघन वन, पर्वत, दलदल, हिमक्षेत्र व मरुभूमि इत्यादि, वहाँ वायु परिवहन ही एकमात्र विकल्प बच जाता है। ऐसे स्थानों पर केवल हवाई अड्डे अथवा हवाई पट्टियाँ बनानी पड़ती हैं। उदाहरणतः वायुयान जमी हुई भूमि (Frozen Ground) के अवरोध से प्रभावित हुए बिना कनाडा के एस्किमो के लिए अनेक प्रकार की वस्तुएँ लाते हैं।

(5) ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में भू-स्खलन, ऐवेलांश अथवा भारी हिमपात और मैदानी भागों में बाढ़ के कारण प्रायः मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं। ऐसी प्राकृतिक विपदाओं या संकट में फंसे लोगों की सहायता वायु परिवहन के द्वारा ही की जा सकती है। ऐसे समय में लोगों को शीघ्रातिशीघ्र दवाइयाँ, कपड़े, भोजन इत्यादि वायु सेवा द्वारा मुहैया कराए जा सकते हैं।

(6) विश्व में राजनीतिक व सामरिक संतुलन को बनाए रखने में वायु परिवहन अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ है। आधुनिक युद्ध कला में वायु सेना निर्णायक भूमिका निभाती है। संयुक्त राज्य अमेरिका एवं ब्रिटिश सेनाओं द्वारा ईरान में किए गए हवाई हमले इस बात के साक्षी हैं।

(7) वायु परिवहन के संचालन के लिए भारी पूँजी व ऊँची तकनीक की ज़रूरत होती है। अतः इसका विकास उन देशों में अधिक हो पाता है जहाँ प्रति-व्यक्ति आय और आर्थिक स्तर ऊँचा है।

(8) जिन लोगों के लिए समय ही सब कुछ है, उनके लिए वायु परिवहन वरदान है।

(9) आजकल धनाढ्य लोग सैर-सपाटे व पर्यटन के उद्देश्य से भी वायु परिवहन का उपयोग करते हैं।

प्रश्न 7.
विश्व के दो महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों का वर्णन कीजिए।
अथवा
स्वेज़ एवं पनामा नहर मार्गों का वर्णन कीजिए। इनका भौगोलिक महत्त्व क्या है?
अथवा
निम्नलिखित पर संक्षिप्त नोट लिखें
(क) स्वेज़ नहर मार्ग,
(ख) पनामा नहर मार्ग।
उत्तर:
विश्व के दो महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग हैं-
(क) स्वेज़ नहर मार्ग-स्वेज़ नहर लाल सागर और भूमध्य सागर को मिलाती है। इस नहर का निर्माण सन् 1859 में फ्रांसीसी इंजीनियर फर्डिनेंड-डी-लेसेप्स के निर्देशन में प्रारंभ किया गया। इसका निर्माण कार्य 10 साल में पूरा हुआ और सन् 1869 में स्वेज़ नहर का शुभारंभ हुआ। लाल सागर और भूमध्य सागर के मध्य नहर की लंबाई 160 कि०मी० है। सन् 1956 में मिस्र सरकार ने इसका राष्ट्रीयकरण किया और सन् 1967 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा इस राष्ट्रीयकरण को मान्यता दी गई।

स्वेज नहर का महत्त्व – स्वेज नहर का निर्माण समतल मरुस्थली क्षेत्र पर किया गया है। स्वेज़ मार्ग के बनने से दक्षिणी-पूर्वी एशिया और यूरोपीय देशों के बीच की दूरी कम हुई है और व्यापार को प्रोत्साहन मिला है। इस नहर से मुंबइ (बंबई) तथा लीवरपूल के बीच की दूरी 200 कि०मी० कम हुई है। । ऑस्ट्रेलिया एवं एशिया के व्यापारिक संबंध यूरोपीय देशों से विशेषकर ब्रिटेन
स्वेज नहर तथा फ्रांस के साथ प्रगाढ़ हुए हैं।
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स्वेज नहर द्वारा फारस की खाड़ी के देशों से पेट्रोलियम पदार्थों का जजकन्तरा आयात एशियाई देशों को होता है तथा विभिन्न कृषिगत पदार्थ गेहूँ, चावल, इस्लामिय रबड़, जूट, सूती वस्त्र आदि का निर्यात खाड़ी के देशों को किया जाता है। ब्रिटेन को इस नहर से एशियाई देशों से कच्चा माल मंगाने में विशेष सुविधा हुई है।

(ख) पनामा नहर मार्ग-स्वेज़ नहर की आशातीत सफलता के बाद पनामा नहर का निर्माण किया गया। यह नहर अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर को मिलाती है। इस नहर का उद्घाटन 15 अगस्त, 1914 को हुआ। नहर बनाने की योजना 16वीं शताब्दी में हुई थी लेकिन कार्यान्वित नहीं की जा सकी क्योंकि लाल पनामा जल संयोजक की भूमि पथरीली एवं पर्वतीय थी इसलिए सरकार को कई स्वेज की बाड़ी सागर स्थानों पर लॉक बनाने पड़े।

इस नहर के अटलांटिक तट पर कोलोन बंदरगाह तथा प्रशांत तट पर पनामा बंदरगाह स्थित है। इस नहर की लंबाई 72 कि०मी० है। पनामा जल संयोजक समुद्र की सतह से लगभग 25 मीटर ऊंचा है इसलिए पानी को चढ़ाने के लिए लॉक प्रणाली बनानी पड़ी। इसमें प्रतिदिन 30 जलपोतों के आने-जाने की सुविधा है। जहाजों को इस नहर से गुजरने में 7 से 8 घंटे लगते हैं।

पनामा नहर का महत्त्व पनामा नहर के निर्माण से पूर्व उत्तरी अमेरिका तथा यूरोप के जहाजों को दक्षिणी पजामा नहर अमेरिका के केपहार्न का चक्कर लगाना पड़ता था। इसके बनने के बाद न्यूयॉर्क तथा सान फ्रांसिस्को के बीच की दूरी में 13,000 कि०मी० की कमी आई है। इस मार्ग से लीवरपूल और सान फ्रांसिस्को के बीच की 9,100 किलोमीटर की दूरी कम हुई है। यह मार्ग तूफानों और हिमशैलों से भी सुरक्षित है। इस मार्ग के निर्माण से समय पनामा पोर्ट तथा धन की काफी बचत हुई है। इसके निर्माण से प्रशांत महासागर तटीय देशो तथा अटलांटिक तटीय देशों के बीच व्यापारिक संबंध बढ़े हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 परिवहन एवं संचार 3
पनामा मार्ग के निमाण से उत्तरी अमेरिका के खाद्य पदार्थ और कोयला, ब्राज़ील से कॉफी, वेनेजुएला से पेट्रोलियन यूरोपीय तथा एशियाई देशों को निर्यात किए जाते हैं। एशियाई देशों से रबड, खाद्य-सामग्री कोयला, रेशम, चाय आदि अमेरिकी देशों को निर्यात की जाती है।

प्रश्न 8.
जनसंचार में रेडियो, टेलीविजन, उपग्रह, कम्प्यूटर के महत्त्व की विवेचना कीजिए। अथवा जनसंचार के साधनों की उपयोगिता महत्त्व) पर प्रकाश डालें।
उत्तर:
हमारे जीवन में जनसंचार के साधनों का विशेष महत्त्व है। आधुनिक युग में निम्नलिखित जनभचार के सशक्त माध्यम हैं-
1. रेडियो का महत्त्व भारत में सन् 1927 में रेडियो प्रसारण आरंभ हुआ था। सन् 1936 में इसे ‘आल इंडिया रेडियो’ का नाम दिया गया। अब इसे आकाशवाणी भी कहा जाता है। आकाशवाणी सूचना, शिक्षा और मनोरंजन से संबंधित विविध प्रकार के कार्यक्रम प्रसारित करता है। आकाशवाणी की समाचार सेवा भारतीय और विदेशी श्रोताओं के लिए समाचार और समीक्षाएँ प्रसारित करती है। राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय महत्त्व के विशिष्ट अवसरों पर विशेष समाचार बुलेटिन भी प्रसारित किए जाते हैं। आकाशवाणी से व्यावसायिक कार्यक्रम भी प्रसारित किए जाते हैं। विविध भारती के चैनल व्यावसायिक प्रसारण के लिए देश-भर में प्रसिद्ध हैं। ग्रामीण श्रोताओं के लिए स्वास्थ्य परिवार कल्याण और कृषि संबंधित कायक्रम प्रातदिन प्रसारित किए जाते हैं।

2. टेलीविजन का महत्त्व दूरदर्शन भारत का राष्ट्रीय चैनल है। भारत में दूरदर्शन का पहला कार्यक्रम 15 दिसंबर, 1959 को प्रसारित किया गया जिसे केवल दिल्ली में ही देखा जा सकता था। इसके बाद दूरदर्शन की सेवाओं में बड़ी तेजी से विस्तार हुआ।

दूरदर्शन तीन स्तर के कार्यक्रम प्रसारित करता है-राष्ट्रीय, प्रादेशिक और स्थानीय । दूरदर्शन के प्रसारित कार्यक्रमों में समाचार, समसामयिक विषय, विज्ञान, सांस्कृतिक पत्रिकाएँ, संगीत, नृत्य, नाटक, धारावाहिक और फीचर फिल्में शामिल हैं। सरकारी नीतियों, समाचारों, विकास कार्यक्रमों और सामयिक विषयों का नियमित प्रसारण किया जाता है। दूरदर्शन राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय महत्त्व के अनेक कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण भी करता है। यह स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए शैक्षिक कार्यक्रम भी प्रसारित करता है। आजकल विभिन्न चैनलों के उपयोग से दूरदर्शन ने गाँव और नगर दोनों में ही लोगों के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को बदल दिया है।

3. उपग्रह संचार का महत्त्व भारत के अंतरिक्ष उपग्रह प्रणालो से संबंधित गतिविधियाँ सन् 1962 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (इसरो) के गठन से प्रारंभ होकर वर्तमान समय तक अनवरत जारी हैं। उपग्रह प्रणाली के विकास से मसार और भारत के संचार तंत्र में एक क्रांति आ गई है। भारत की उपग्रह प्रणालियाँ दो प्रकार की हैं

  • भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह प्रणाला (इंडियन नेशनल सेटेलाइट सिस्टम)।
  • भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह प्रणाली (इंडियन रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट सिस्टम)।

इन्सेट दूरसंचार, मौसम की जानकारी और पूर्वानुमान विविध प्रकार के आंकड़ों और कार्यक्रमों के लिए एक बहुउद्देशीय उपग्रह प्रणाली है।

भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह (आई०आर०एस०) प्रणाली द्वारा अंतरिक्ष में स्थापित उपग्रह अनेक वर्णक्रमीय (स्पेक्ट्रल) बैंडों के आँकड़े एकत्र करते हैं तथा विभिन्न उपयोगों के लिए स्थलीय स्टेशनों से इनका प्रसारण करते हैं ये उपग्रह प्रकात के संसाधनों क प्रबंधन में बहुत उपयोगी सिद्ध हुए हैं। भारतीय सुदूर संवेदी एजेसी हैदराबाद में स्थित है।

4. कंप्यूटर का महत्त्व आधुनिक युग में कंप्यूटर की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो गई है। कंप्यूटर के माध्यम से इंटरनेट और ई-मेल किया जा सकता है। कंप्यूटर सारे संसार में कम लागत पर सूचनाएँ और ज्ञान प्रसारित कर सकता है। कंप्यूटर द्वारा दस्तावेजों को तीव्र गति और कम लागत पर भेजा और प्राप्त किया जा सकता है। अपनी विशिष्ट सेवाओं और क्षमताओं के कारण कंप्यूटर का विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग बढ़ता जा रहा है। कंप्यूटर की विशिष्ट क्षमताएँ हैं-गति, शुद्धता, भंडारण क्षमता और स्वचालन। शिक्षा और ज्ञान के प्रसार में कंप्यूटर की भूमिका उल्लेखनीय है।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

1. तृतीयक क्रियाकलाप संबंधित है-
(A) कृषि से
(B) विनिर्माण उद्योगों से
(C) बुद्धि तथा कुशलता से जुड़ी सेवाओं से
(D) बौद्धिक व्यवसाय से
उत्तर:
(C) बुद्धि तथा कुशलता से जुड़ी सेवाओं से

2. वकील और शिक्षक किस प्रकार के क्रियाकलाप के अंतर्गत आते हैं?
(A) प्राथमिक
(B) द्वितीयक
(C) तृतीयक
(D) चतुर्थक
उत्तर:
(C) तृतीयक

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

3. सेवाएँ किस प्रकार का क्रियाकलाप हैं?
(A) प्राथमिक
(B) द्वितीयक
(C) तृतीयक
(D) चतुर्थक
उत्तर:
(C) तृतीयक

4. आधुनिक युग में महिलाओं की संख्या किस क्रियाकलाप में अधिक है?
(A) प्राथमिक
(B) द्वितीयक
(C) तृतीयक
(D) चतुर्थक
उत्तर:
(C) तृतीयक

5. विश्व में रोजगार के अवसरों में वृद्धि किस व्यवसाय में बढ़ रही है?
(A) प्राथमिक
(B) द्वितीयक
(C) तृतीयक
(D) चतुर्थक
उत्तर:
(C) तृतीयक

6. उच्च बौद्धिक व्यवसाय में लगे लोग किस प्रकार के क्रियाकलाप के अंतर्गत आते हैं?
(A) प्राथमिक
(B) द्वितीयक
(C) तृतीयक
(D) चतुर्थक
उत्तर:
(C) तृतीयक

7. विज्ञापन, कानूनी सेवाएँ, जनसंपर्क और परामर्श किस प्रकार की सेवाएँ हैं?
(A) मनोरंजन सेवाएँ
(B) वाणिज्यिक सेवाएँ
(C) विनिर्माण सेवाएँ
(D) परिवहन और संचार सेवाएँ
उत्तर:
(B) वाणिज्यिक सेवाएँ

8. वैश्विक कंपनियों के सर्वाधिक मुख्यालय कहाँ हैं?
(A) लंदन
(B) टोकियो
(C) पेरिस
(D) न्यूयार्क
उत्तर:
(D) न्यूयार्क

9. निम्नलिखित में से कौन-सा देश इंटरनेट द्वारा अच्छी तरह जुड़ा हुआ नहीं है?
(A) स्कैंडिनेविया
(B) भारत
(C) ऑस्ट्रेलिया
(D) कनाडा
उत्तर:
(B) भारत

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

10. उत्तरी अमेरिका का वैश्विक नगर कौन-सा है?
(A) पेरिस
(B) न्यूयार्क
(C) टोकियो
(D) शंघाई
उत्तर:
(B) न्यूयार्क

11. यूरोप का प्रमुख वैश्विक नगर कौन-सा है?
(A) न्यूयार्क
(B) लंदन
(C) लास एंजिल्स
(D) टोकियो
उत्तर:
(B) लंदन

12. एशिया का प्रमुख वैश्विक नगर कौन-सा है?
(A) टोकियो
(B) लंदन
(C) न्यूयार्क
(D) टोरंटो
उत्तर:
(A) टोकियो

13. विश्व के प्रमुख वैश्विक नगर हैं-
(A) लंदन, पेरिस, काहिरा
(B) लंदन, रोम, कोलंबो
(C) लंदन, सिंगापुर, सिडनी
(D) लंदन, न्यूयार्क, टोकियो
उत्तर:
(D) लंदन, न्यूयार्क, टोकियो

14. सबसे कम वैश्विक कंपनियों के मुख्यालय कहाँ है?
(A) न्यूयार्क
(B) लंदन
(C) टोकियो
(D) मैक्सिको
उत्तर:
(D) मैक्सिको

15. बाह्यस्रोतन का व्यावसायिक क्रियाकलाप है-
(A) मानव संसाधन
(B) सूचना प्रौद्योगिकी
(C) उपभोक्ता सेवाएँ
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

16. निम्नलिखित में से तृतीयक क्रियाकलाप का उदाहरण नहीं है-
(A) शिक्षक
(B) वकील
(C) चिकित्सा
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(C) चिकित्सा

17. निम्नलिखित में से चतुर्थ क्रियाकलाप का उदाहरण नहीं है
(A) चिकित्सा
(B) अनुसंधान
(C) शिक्षक
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(C) शिक्षक

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

18. निम्नलिखित में से पंचम क्रियाकलाप का उदाहरण नहीं है-
(A) निर्णयकर्ता
(B) परामर्शदाता
(C) नीति-निर्धारक
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
किसी एक तृतीयक क्रियाकलाप का उदाहरण दें।
उत्तर:
व्यापार।

प्रश्न 2.
यूरोप का प्रमुख वैश्विक नगर कौन-सा है?
उत्तर:
लंदन।

प्रश्न 3.
एशिया का प्रमुख वैश्विक नगर कौन-सा है?
उत्तर:
टोकियो।

प्रश्न 4.
वे काम जिनमें उच्च परिमाण और स्तर वाले अन्वेषण सम्मिलित होते हैं, उन्हें क्या कहते हैं?
उत्तर:
उन्हें पंचम क्रियाकलाप कहते हैं।

प्रश्न 5.
सेवाएँ किस प्रकार का क्रियाकलाप हैं?
उत्तर:
तृतीयक क्रियाकलाप।

प्रश्न 6.
विश्व में रोजगार के अवसरों में वृद्धि किस व्यवसाय में बढ़ रही है?
उत्तर:
तृतीयक व्यवसाय में।

प्रश्न 7.
विज्ञापन, कानूनी सेवाएँ, जनसंपर्क और परामर्श किस प्रकार की सेवाएँ हैं?
उत्तर:
वाणिज्यिक सेवाएँ।

प्रश्न 8.
उत्तरी अमेरिका का वैश्विक नगर कौन-सा है?
उत्तर:
न्यूयॉर्क।

प्रश्न 9.
विश्व के प्रमुख वैश्विक नगर कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
विश्व के प्रमुख वैश्विक नगर लंदन, न्यूयॉर्क, टोकियो हैं।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

प्रश्न 10.
वैश्विक कंपनियों के मुख्यालय कहाँ हैं?
उत्तर:
मैक्सिको में।

प्रश्न 11.
वाणिज्यिक सेवाओं का कोई एक उदाहरण दें।
उत्तर:
विज्ञापन।

प्रश्न 12.
परिवहन सेवाओं का कोई एक उदाहरण दें।
उत्तर:
रेल।

प्रश्न 13.
ज्ञानोन्मुखी व्यक्ति किस क्रियाकलाप में आते हैं?
उत्तर:
चतुर्थक व पंचम क्रियाकलाप में।

प्रश्न 14.
सूचना का संग्रहण किस प्रकार के क्रियाकलाप में आता है?
उत्तर:
चतुर्थक क्रियाकलाप में।

प्रश्न 15.
पर्यटन किस प्रकार का क्रियाकलाप है?
उत्तर:
तृतीयक क्रियाकलाप।

प्रश्न 16.
बाह्यस्रोतन का क्या उद्देश्य है?
उत्तर:
दक्षता को सुधारना और लागतों को कम करना।

प्रश्न 17.
सूचना का संग्रहण, उत्पादन व प्रकीर्णन किस प्रकार के क्रियाकलाप के अंतर्गत आता है?
उत्तर:
चतुर्थ क्रियाकलाप के।

प्रश्न 18.
पर्यटन उद्योग द्वारा पोषित दो उद्योगों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. फुटकर व्यापार
  2. शिल्प उद्योग।

प्रश्न 19.
उच्च स्तरीय सेवाओं के कोई दो उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. परामर्शदाता
  2. विशेषज्ञ।

प्रश्न 20.
नोड क्या होता है?
उत्तर:
दो या अधिक मार्गों का संधि-स्थल, एक उद्गम बिंदु, एक गंतव्य बिंदु या मार्ग के सहारे कोई बड़ा कस्बा नोड होता है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

प्रश्न 21.
लाल कॉलर श्रमिक किन क्रियाओं को कहते हैं?
उत्तर:
प्राथमिक क्रियाओं को।

प्रश्न 22.
व्यापार किस प्रकार का क्रियाकलाप है?
उत्तर:
तृतीयक।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विनिर्माण और सेवाओं में क्या अंतर होता है?
उत्तर:
विनिर्माण में वस्तुओं का उत्पादन होता है जो मूर्त होता है अर्थात् उसे देखा, छुआ या मापा जा सकता है लेकिन सेवाओं का उत्पाद अमूर्त होता है व उसे प्रत्यक्ष रूप से मापा भी नहीं जा सकता।

प्रश्न 2.
वाणिज्यिक सेवाएँ क्या होती हैं?
उत्तर:
विज्ञापन बनाना, बिक्री बढ़ाने के तरीके निकालना, कर्मचारियों का चयन, अधिकारियों का प्रशिक्षण, ग्राहकों की अभिरुचियों का सर्वेक्षण इत्यादि वाणिज्यिक सेवाएँ हैं। ये सेवाएँ दूसरी कंपनियों की उत्पादन
क्षमता व बिक्री को बढ़ाती हैं।

प्रश्न 3.
असंगठित क्षेत्र क्या होता है?
उत्तर:
बिना किसी औपचारिक माध्यम से नौकरियाँ पाना व करना असंगठित क्षेत्र कहलाता है। ऐसी नौकरियों के चयन व नियंत्रण इत्यादि पर किसी सरकारी या अर्ध-सरकारी संगठन की भूमिका नहीं होती।

प्रश्न 4.
उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में विनिर्माण का ह्रास क्यों हुआ?
उत्तर:
मशीनों के घिसकर पुराना पड़ने, उनकी उत्पादकता घटने, कोयले के भंडारों के लगभग समाप्त होने तथा मनुष्य की जगह कंप्यूटर व आधुनिक मशीनों के आ जाने से उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में निरौद्योगीकरण की प्रक्रिया आरंभ हुई।

प्रश्न 5.
इंटरनेट द्वारा सबसे अच्छी तरह जुड़े विश्व के दो देशों के नाम बताइए।
उत्तर:
कनाडा और ऑस्ट्रेलिया इंटरनेट द्वारा सबसे अच्छी तरह जुड़े हुए देश हैं।

प्रश्न 6.
व्यापारिक केंद्र किसे कहते हैं?
उत्तर:
फुटकर और थोक व्यापार अथवा वाणिज्य की सभी सेवाओं का उद्देश्य लाभ कमाना है। यह सारा काम कस्बों और नगरों में होता है, जिन्हें व्यापारिक केंद्र कहा जाता है।

प्रश्न 7.
ग्रामीण विपणन केंद्र क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
ये अर्ध-नगरीय केंद्र होते हैं जो निकटवर्ती बस्तियों का पोषण करते हैं। यहाँ व्यक्तिगत सेवाएँ और व्यावसायिक सेवाएँ ठीक प्रकार से विकसित नहीं होती, परंतु ये ग्रामीण लोगों की अधिक माँग वाली वस्तुएँ और सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं।

प्रश्न 8.
चिकित्सा पर्यटन क्या है?
उत्तर:
चिकित्सा उपचार को अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन से संबद्ध कर दिया जाए तो यह पर्यटन चिकित्सा पर्यटन कहलाता है।

प्रश्न 9.
तृतीयक क्रियाकलाप के कोई चार उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. व्यापारी
  2. वकील
  3. डॉक्टर
  4. इंजीनियर।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

प्रश्न 10.
तृतीयक क्रियाकलाप के कौन-कौन से क्षेत्र हैं?
उत्तर:

  1. व्यापार
  2. परिवहन
  3. संचार
  4. सेवाएँ।

प्रश्न 11.
अपतटन (offshoring) क्या है?
उत्तर:
जब बाह्यस्रोतन का कार्य समुद्र-पार के क्षेत्रों से करवाया जाता है तो इसे अपतटन कहा जाता है।

प्रश्न 12.
पर्यटन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
पर्यटन एक ऐसी यात्रा है जो मनोरंजन या फुरसत के क्षणों का आनंद उठाने के उद्देश्यों से की जाती है। इस यात्रा का उद्देश्य व्यापार करना या पैसा कमाना नहीं होता।

प्रश्न 13.
परिवहन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
परिवहन एक ऐसी सेवा या सुविधा है जिससे व्यक्तियों, विनिर्मित माल और संपति को भौतिक रूप से एक स्थान से दसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। यह हमारी गतिशीलता की मल आवश्यकताओं को परा करने हेत एक संगठित उद्योग है।

प्रश्न 14.
संचार क्या है?
उत्तर:
संचार सेवाओं में शब्दों, संदेशों, तथ्यों और विचारों का प्रेषण सम्मिलित है। एक स्थान से दूसरे स्थान पर सूचना एवं संदेश भेजने या प्राप्त करने की विस्तृत व्यवस्था को संचार कहा जाता है।

प्रश्न 15.
बाह्यस्रोतीकरण कितने प्रकार का होता है?
उत्तर:
बाह्यस्रोतीकरण तीन प्रकार का होता है-

  1. उत्पादन का बाह्यस्रोतीकरण।
  2. सेवाओं का बाह्यस्रोतीकरण।
  3. नवाचार का बाह्यस्रोतीकरण।

प्रश्न 16.
थोक व्यापार सेवाओं की कोई दो विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:

  1. भारी मात्रा में वस्तुओं का व्यापार होना।
  2. फुटकर बिक्री न होना।

प्रश्न 17.
फुटकर व्यापार सेवाओं की कोई दो विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:

  1. ये एक निश्चित स्थान से संबंधित होती हैं। ये एक स्थानीय व्यापारिक सेवाएँ हैं।
  2. ये वे व्यापारिक सेवाएँ हैं जो उपभोक्ताओं को वस्तु के प्रत्यक्ष विक्रय से संबंधित होती हैं।

प्रश्न 18.
सेवा क्षेत्र प्रायः विकसित देशों पर क्यों केन्द्रित होता है?
उत्तर:
विकसित देशों की अर्थव्यवस्था अच्छी होती है। इन देशों में लोगों की आय के बढ़ने से प्रति व्यक्ति आय बढ़ती है। इससे सेवा क्षेत्र की माँग में वृद्धि हो जाती है। इसलिए सेवा क्षेत्र विकसित देशों पर केन्द्रित होता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
तृतीयक क्रियाकलाप/ क्रियाएँ किसे कहते हैं?
उत्तर:
तृतीयक व्यवसाय में समुदाय को दी जाने वाली व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक सेवाएँ सम्मिलित हैं। यातायात, संचार, व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा प्रशासनिक सेवा तृतीयक व्यवसाय के महत्त्वपूर्ण उदाहरण हैं। इस व्यवसाय में लगे हुए लोग प्रत्यक्ष रूप से किसी वस्तु का उत्पादन नहीं करते, बल्कि अपनी कार्य-कुशलता तथा तकनीकी क्षमता से समाज की सेवा करते हैं। इस व्यवसाय को ‘सेवा श्रेणी’ भी कहा जाता है।

प्रश्न 2.
बाह्यस्रोतन पर एक टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
बाह्यस्रोतन अथवा ठेका देना दक्षता को सधारने अथवा लागतों को घटाने के लिए किसी बाहरी अभिकरण को काम सौंपना है। जब बाह्यस्रोतन में कार्य समद्र पार के स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया जाता है तो इसे अपतरण कहा जाता है। यद्यपि दोनों अपतरण और बाह्यस्रोतन का प्रयोग इकट्ठा किया जाता है। जिन व्यापारिक क्रियाकलापों को बाह्यस्रोतन किया जाता है, उनमें सूचना प्रौद्योगिकी, मानव संसाधन, ग्राहक सहायता तथा काल सेंटर सेवाएँ और कई बार विनिर्माण तथा अभियांत्रिकी भी सम्मिलित की जाती है। बाह्यस्रोतन उन देशों में आ रहा है जहाँ सस्ता और कुशल श्रम उपलब्ध है। बाह्यस्रोतन के द्वारा काम उपलब्ध होने पर इन देशों से प्रवास कम हो जाता है। बाह्यस्रोतन के बने रहने का मुख्य कारक तुलनात्मक लाभ है। चतुर्थक सेवाओं की नवीन प्रवृत्तियों में ज्ञान प्रक्रमण बाह्यस्रोतन (के०पी०ओ०) और होम शोरिंग है, जो बाह्यस्रोतन का विकल्प है।

प्रश्न 3.
सेवाओं के प्रमुख घटक कौन से हैं?
उत्तर:
सेवाओं के प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं-

  1. वाणिज्यिक सेवाएँ विज्ञापन, कानूनी सेवाएँ, जनसंपर्क और परामर्श।
  2. परिवहन और संचार-रेल, सड़क, जहाज, वायुयान सेवाएँ तथा डाक तार सेवाएँ।
  3. मनोरंजन दूरदर्शन, रेडियो, फिल्म और साहित्य।
  4. विभिन्न स्तरीय प्रशासन स्थानीय, राज्य एवं राष्ट्रीय प्रशासन, अधिकारी वर्ग पुलिस सेना तथा अन्य जन सेवाएँ।
  5. गैर-सरकारी संगठन-शिशु चिकित्सा, पर्यावरण, ग्रामीण विकास।
  6. वित्त, बीमा, वाणिज्यिक और आवासीय भूमि और भवनों जैसी अचल संपत्ति का क्रय-विक्रय।
  7. उत्पादक और उपभोक्ता को जोड़ने वाले कार्य करने जैसी सेवाएँ।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

प्रश्न 4.
भंडारों के प्रकार कौन-कौन से हैं? वर्णन करें। अथवा विभागीय तथा श्रृंखला भंडारों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
भंडारों के मुख्यतः दो प्रकार होते हैं, जो इस प्रकार हैं-
1. विभागीय भंडार वस्तुओं की खरीद और भंडारों के विभिन्न अनुभागों में बिक्री के सर्वेक्षण के लिए विभागीय प्रमुखों को उत्तरदायित्व और प्राधिकार सौंप देते हैं।

2. श्रृंखला भंडार-अत्यधिक मितव्ययता से व्यापारिक माल खरीदे जाते हैं। यहाँ तक कि अपने विनिर्देश पर सीधे वस्तुओं का निर्माण करा लेते हैं। वे अनेक कार्यकारी कार्यों में अत्यधिक कुशल विशेषज्ञ नियुक्त कर लेते हैं। उनके पास एक भंडार के अनुभव के परिणामों को अनेक भंडारों में लागू करने की योग्यता होती है।

प्रश्न 5.
दूरसंचार के कारण कैसे परिवर्तन आए हैं?
उत्तर:
दूरसंचार का प्रयोग विद्युतीय प्रौद्योगिकी के विकास से जुड़ा है। संदेशों के भेजे जाने की गति के कारण इसने संचार में क्रान्ति ला दी है। समय सप्ताहों से मिनटों में घट गया है और मोबाइल दूरभाष जैसी नूतन उन्नति ने किसी भी समय कहीं से भी संचार को प्रत्यक्ष और तत्काल बना दिया है।

प्रश्न 6.
पंचम क्रियाकलाप का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पंचम क्रियाकलाप वे सेवाएँ हैं जो नवीन और वर्तमान विचारों की रचना, उनके पुनर्गठन और व्याख्या, आँकड़ों की व्याख्या और प्रयोग तथा नई प्रौद्योगिकी के मूल्यांकन पर केंद्रित होती हैं। ये व्यवसाय तृतीयक क्षेत्र में स्वर्ण-कॉलर कहे जाने वाले व्यवसायों का एक और उप-विभाग हैं जिसमें अनुसंधान वैज्ञानिक, वित्त एवं विधि परामर्शदाता, सरकारी अधिकारी आदि आते हैं। ये वर्ग उच्च वेतन वाले तथा कुशल होते हैं। उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की संरचना में उनका महत्त्व उनकी संख्या से अधिक होता है।

प्रश्न 7.
पंचम क्रियाकलापों की प्रमुख विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
पंचम क्रियाकलापों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. पंचम गतिविधियाँ सर्वोच्च निर्णय-निर्माता होती हैं।
  2. विशेषज्ञ, निर्णयकर्ता, परामर्शदाता एवं नीति-निर्धारक इन क्रियाओं क्रियाकलापों के अंतर्गत आते हैं।
  3. ये गतिविधियाँ मुख्य रूप से आउटसोर्सिंग से संबंधित होती हैं।
  4. इनमें शोध, विकास, व्यापार अन्वेषण, कानूनी व्यवसाय एवं बैंकिंग आदि क्षेत्र सम्मिलित हैं।

प्रश्न 8.
ग्रामीण विपणन केन्द्र की प्रमुख विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
ग्रामीण विपणन केन्द्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. ये अर्ध-नगरीय केन्द्र होते हैं और बहुत ही प्रारम्भिक प्रकार से व्यापारिक केन्द्रों के रूप में कार्य करते हैं।
  2. इन केन्द्रों में व्यावसायिक सेवाएँ सुविकसित नहीं होती।
  3. ये स्थानीय संग्रहण एवं वितरण के केन्द्र होते हैं।
  4. ये ग्रामीण लोगों की अधिक माँग वाली वस्तुओं एवं सेवाओं को उपलब्ध कराने वाले केन्द्र हैं।
  5. अधिकांश केन्द्रों में मण्डियाँ एवं फुटकर व्यापार क्षेत्र (दुकानें) भी होते हैं।

प्रश्न 9.
उन्नत आर्थिक व्यवस्था में विनिर्माण का ह्रास क्यों हुआ?
उत्तर:
उन्नत अर्थव्यवस्था में अधिकतर लोग तृतीयक और चतुर्थक व्यवसायों में आकर्षित होते हैं क्योंकि विनिर्माण के क्षेत्र में रोजगार के अवसर धीरे-धीरे घटने लगते हैं जबकि सूचना और प्रौद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप तृतीयक और चतुर्थक व्यवसाय में रोजगार के अवसर बढ़ते जा रहे हैं। इसलिए उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों में विनिर्माण का ह्रास हो रहा है। इस क्रिया को निरोद्यौगीकरण कहा जाता है।

प्रश्न 10.
तृतीयक क्रियाकलापों में उत्पादन और विनिमय दोनों सम्मिलित होते हैं। व्याख्या करें।
उत्तर:
तृतीयक क्रियाकलापों में उत्पादन और विनिमय दोनों शामिल होते हैं। उत्पादन में उपलब्ध सेवाओं का उपभोग किया जाता है। उत्पादन को अप्रत्यक्ष रूप से मजदूरी और वेतन के रूप में मापा जाता है। विनिमय में व्यापार, संचार और परिवहन की सुविधाएँ शामिल होती हैं, जिनका उपयोग दूरी को कम करने के लिए किया जाता है। इसलिए इन क्रियाकलापों में सेवाओं का व्यावसायिक उत्पादन शामिल होता है। ये भौतिक कच्चे माल के प्रयोग में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं होतीं। बिजली का मिस्त्री, तकनीशियन, धोबी, नाई, दुकानदार, चालक इत्यादि का काम करना तृतीयक क्रियाकलाप के प्रमुख उदाहरण हैं। तृतीयक क्रियाकलापों की विशेषता यह है कि ये कर्मियों की विशिष्टीकृत कुशलताओं, अनुभव और ज्ञान पर निर्भर करती है।

प्रश्न 11.
पर्यटन के मुख्य आकर्षणों का वर्णन करें।
उत्तर:
पर्यटन के मुख्य आकर्षण निम्नलिखित हैं-

  1. जलवायु-ठंडे प्रदेशों की जलवायु उष्ण क्षेत्रों के लोगों को आकर्षित करती है; जैसे बर्फ से ढके क्षेत्र आदि।
  2. भू-दृश्य कई लोग आकर्षित करने वाले भू-दृश्यों में अवकाश बिताना पसंद करते हैं; जैसे पर्वत, झीलें, समुद्री तट आदि।
  3. इतिहास एवं कला इतिहास और कला का आनंद उठाने के लिए लोग प्राचीन नगरों, किलों, महलों, गिरजाघरों को देखने जाते हैं।
  4. संस्कृति और अर्थव्यवस्था मानव जातीय और स्थानीय रीतियों को पसंद करने वालों को पर्यटन लुभाता है। यदि कोई प्रदेश सस्ते दामों में पर्यटकों की जरूरतों को पूरा करता है तो वह बहुत लोकप्रिय हो जाता है। घरों में रुकना एक लाभदायक व्यापार बनकर उभरा है; जैसे गोआ के हैरीटेज़ होम्स आदि।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

प्रश्न 12.
चतुर्थक क्रियाकलापों के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चतुर्थक क्रियाकलाप अनुसंधान और विकास पर केन्द्रित होते हैं। इन्हें ऐसी उन्नत सेवाओं के रूप में देखा जा सकता है जो विशिष्टीकृत ज्ञान, प्रौद्योगिक कुशलता और प्रशासकीय सामर्थ्य से जुड़ी हुई हैं। बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, चिकित्सकीय प्रतिलेखक (Medical Transciptionist), म्यूचुअल फण्ड के प्रबन्धक, परामर्शदाता, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, प्रारंभिक विद्यालयों, विश्वविद्यालयी कक्षाओं, रंगमंचों, लेखाकार्य, अस्पतालों व कार्यालय भवनों में काम करने वाले लोग इस वर्ग की सेवाओं से जुड़े हुए हैं। अतः चतुर्थक क्रियाकलापों का अर्थ मूलभूत रूप से बौद्धिक व्यवसाय है जिसका मुख्य कार्य सोचना, चिन्तन करना, अन्वेषण करना आदि है। इस वर्ग के लोग आर्थिक विकास में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसकी महत्ता को देखते हुए आज विकसित व विकासशील राष्ट्रों में इस क्रियाकलाप का अनुपात बढ़ रहा है।

प्रश्न 13.
चतुर्थक क्रियाएँ अन्य आर्थिक क्रियाओं को प्रतिस्थापित कर रही हैं। वर्णन कीजिए।
अथवा
चतुर्थक क्रियाएँ तृतीयक क्रियाओं का स्थान लेती जा रही हैं। वर्णन करें।
उत्तर:
तृतीयक क्रियाकलाप बुद्धि तथा कुशलता से जुड़ी सेवाएँ है जिसका उत्पादन अमूर्त होता है। चतुर्थक क्रियाकलाप भी उच्च बौद्धिक व्यवसाय जो चिंतन तथा शोध के लिए विचार देते हैं। इनका उत्पादन भी अमूर्त होता है। आर्थिक वृद्धि के आधार पर तृतीयक क्षेत्र के सभी रोजगारों को चतुर्थ क्षेत्र ने प्रतिस्थापित कर दिया है। विकसित अर्थव्यवस्था के आधे से अधिक कर्मी ज्ञान के इस क्षेत्र में कार्यरत हैं तथा पारस्परिक कोष प्रबन्धकों से लेकर परामर्शदाताओं, सॉफ्टवेयर सेवाओं की माँग में उच्च वृद्धि हुई है।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विकासशील देशों में सेवा क्षेत्र विकसित देशों से किस प्रकार भिन्न है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
विकासशील तथा विकसित देशों की अर्थव्यवस्था के विकास में सेवा क्षेत्रों का महत्त्व बढ़ता जा रहा है। दोनों प्रकार के देशों के सेवा क्षेत्रों में मूलभूत अंतर पाया जाता है जो निम्नलिखित प्रकार से है विकासशील देशों का सेवा क्षेत्र-विकासशील देशों का सेवा क्षेत्र भी तेजी से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय संपदा में भी इनके योगदान में वृद्धि हो रही है। परंतु इन सेवाओं का आकलन या लेखा-जोखा अच्छी तरह नहीं रखा जा सकता क्योंकि इन देशों के असंख्य लोग अब भी असंगठित सेवाओं में लगे हैं। इनके अंतर्गत गृहणियाँ, बाल मजदूर, रिक्शाचालक, मिस्त्री तथा अकुशल श्रमिक आते हैं। इनकी मजदूरी घटती-बढ़ती रहती है। इसलिए इन लोगों की सेवाओं का कोई लेखा-जोखा नहीं रखा जा सकता।

विकसित देशों का सेवा क्षेत्र विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों में सेवाओं पर आधारित विकास में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इन देशों में रोजगार के अवसर निरंतर बढ़ रहे हैं। इन देशों के लोग संगठित सेवा क्षेत्रों में लगे हुए हैं जिनका आसानी से लेखा-जोखा रखा जा सकता है।

प्रश्न 2.
संसार में चतुर्थक सेवाओं की प्रकृति तथा वृद्धि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
विगत कुछ वर्षों से आर्थिक क्रियाकलापों में अति विशिष्टता और जटिलता का समावेश होता जा रहा है जिसके परिणामस्वरूप सेवाओं का एक नया वर्ग बन गया है जिन्हें चतुर्थक क्रियाकलाप कहा जाता है। इस वर्ग में शिक्षा, सूचना, शोध और विकास जैसे क्रियाकलापों को रखा गया है। अतः चतुर्थक क्रियाकलाप उन उच्च कोटि के बौद्धिक व्यवसायों को कहते हैं जिनका दायित्व चिंतन, बोध और विकास के लिए नए विचार देना है। आर्थिक दृष्टि से अत्यधिक विकसित देशों में चतुर्थक क्रियाकलाप में लगे लोगों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। इस वर्ग में कार्यरत लोगों के उच्च वेतनमान तथा पदोन्नति के पर्याप्त अवसर उपलब्ध होते हैं। इसलिए इन लोगों में गतिशीलता पाई जाती है। सूचना प्रौद्योगिकी में आई क्रांति के फलस्वरूप ज्ञान पर आधारित उद्योगों में वृद्धि हो रही है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर आधारित औद्योगिक संकुल स्थापित होते जा रहे हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका में ऐसे अनेक औद्योगिक संकुलों का विकास हुआ है जिन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी पार्क कहा जाता है। सॉफ्टवेयर पर आधारित उद्योग इसका प्रमुख उदाहरण है। सूचना प्रौद्योगिकी में सूक्ष्म इलैक्ट्रॉनिकी, कंप्यूटर, दूरसंचार, प्रसारण तथा ऑटो इलैक्ट्रॉनिक्स संयुक्त रूप से सम्मिलित हैं। प्रौद्योगिकी में नए-नए आविष्कार होते जा रहे हैं। आनुवंशिक इंजीनियरिंग ऐसा ही एक नया क्षेत्र है जिसका अनुप्रयोग विविध क्षेत्रों; जैसे चिकित्सा, स्वास्थ्य, परिवहन आदि में किया जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी को परिवर्तन का केंद्र बिंदु कहा जाता है। तेजी से होने वाले प्रौद्योगिक परिवर्तनों के कारण उत्पादन में लगने वाला समय घट रहा है। वैश्वीकरण और उदारीकरण के कारण वस्तुओं के उत्पादन और विपणन को अधिक सूचना प्रधान बना दिया गया है।

प्रश्न 3.
सूचना प्रौद्योगिकी का अर्थ बताते हुए भूमंडलीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सूचना प्रौद्योगिकी-सूचना प्रौद्योगिकी अनेक प्रकार की प्रौद्योगिकी का संयुक्त रूप है। इसमें कंप्यूटर, सूक्ष्म इलैक्ट्रॉनिकी, दूरसंचार, प्रसारण और ऑटो-इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल है। सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग से प्रौद्योगिकी में अनेक नए आविष्कार हुए हैं। सूचना प्रौद्योगिकी परिवर्तन का केंद्र-बिंदु है। कृषि क्रांति और औद्योगिक क्रांति के बाद सूचना प्रौद्योगिकी तीसरी महत्त्वपूर्ण क्रांति है। इसकी प्रमुख विशेषता “ज्ञान का उत्पादन तथा सूचना प्रसंस्करण की युक्तियों में ज्ञान व सूचना का अनुप्रयोग है।”

सूचना प्रौद्योगिकी का भूमंडलीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव-सूचना प्रौद्योगिकी का अर्थ बताते हुए भूमंडलीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव निम्नलिखित हैं

  1. औद्योगिक देशों में उच्च वेतन वाली नौकरियाँ, सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उपलब्ध हैं।
  2. सूचना के प्रवाह से प्रौद्योगिक परिवर्तन तेजी से हो रहे हैं। उत्पादन में लगने वाला समय घट रहा हैं।
  3. दूरसंचार के विकसित तंत्र के कारण आज आर्थिक क्रियाकलाप पृथ्वी पर दूर-दूर तक फैल गए हैं।
  4. कंप्यूटर और दूरसंचार के मिल जाने से संचार का एक समन्वित नेटवर्क विकसित हुआ है जिससे दूर बैठे लोगों से प्रत्यक्ष संपर्क करके बेहतर परिणाम लिया जा सकता है।
  5. इलैक्ट्रॉनिक माध्यम से लेन-देन अब अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था का केंद्र-बिंदु बन गया है। इस व्यवस्था के द्वारा बैंक क्षण भर में पूँजी को विश्व के किसी भी कोने में भेजा जा सकता है।
  6. सूचना प्रौद्योगिकी के द्वारा घर बैठे वस्तुएँ खरीदी जा सकती हैं।
  7. विश्व में स्टॉक एक्सचेंज व मुद्रा बाजार का सारा काम सूचना प्रौद्योगिकी पर निर्भर है।

प्रश्न 4.
चतुर्थ क्रियाकलाप की संकल्पना का वर्णन कीजिए।
अथवा
चतुर्थ सेवाओं की नवीन प्रवृत्तियों का वर्णन कीजिए। अथवा चतुर्थ सेवाओं से आपका क्या अभिप्राय है? विभिन्न प्रकार की चतुर्थ क्रियाओं का वर्णन करें।
उत्तर:
चतुर्थ सेवा या क्रियाकलाप का अर्थ यह क्रियाएँ आर्थिक स्थिति को ओर मजबूत बनाने वाली क्रियाएँ होती हैं। इस प्रकार की क्रियाओं में तकनीकी प्रयोग का सबसे अधिक महत्त्व है। यह प्रक्रियाएँ सभी प्रकार की श्रेणी क्रियाओं में मशीनी प्रयोग पर प्रबल बल देती हैं। इस प्रकार की क्रियाओं में मस्तिष्क, बुद्धि, ज्ञान और कौशल मुख्य हिस्सा हैं।

चतुर्थ सेवाओं की नवीन प्रवृत्तियाँ या क्रियाएँ चतुर्थ सेवाओं की नवीन प्रवृत्तियाँ या क्रियाएँ निम्नलिखित हैं-
1. बाह्यस्रोतन व अपतटन-बाह्यस्रोतन का अर्थ है-किसी बाहरी अभिकरण को कार्य सौंपना अथवा ठेके पर काम देना। इसका उद्देश्य दक्षता में सुधार करना और लागतों में कमी करना है। जब बाह्यस्रोतन का कार्य समुद्र-पार के स्थानों से करवाया जाता है तो उसे अपतटन कहा जाता है। इनके अंतर्गत प्रमुख क्षेत्र हैं-सूचना प्रौद्योगिकी, मानक संसाधन, कॉल सेंटर, विनिर्माण एवं अभियांत्रिकी आदि।

2. ज्ञान प्रकमण बाह्यस्रोतन-यह सूचना प्रेरित ज्ञान पर आधारित सेवा है जोकि चतुर्थ सेवाओं की नवीन प्रवृत्ति है। इसके अंतर्गत अनुसंधान, विकास कार्य, व्यवसाय अनुसंधान, बौद्धिक सम्पदा आदि क्षेत्र आते हैं। अतः यह एक नई प्रणाली है जो ज्ञान से संबंधित है। इसमें ज्ञान देने और लेने की नई प्रणालियों का उद्गम हुआ है।

3. मेडिकल टूरिज्म वर्तमान में भारत ने चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत उपलब्धि हासिल कर ली है। बाहरी देशों से लोग भारत में सस्ते एवं आरामदायक मेडिकल सुविधाओं के लिए आते हैं।

4. सूचना प्रौद्योगिकी-इसमें कंप्यूटर, दूरसंचार, प्रसारण आदि शामिल हैं। अनेक प्रकार के नए आविष्कारों को प्रयोग में लाना सूचना प्रौद्योगिकी परिवर्तन का केंद्र-बिंदु है।।

निष्कर्ष – तेजी से उभरता चतुर्थ क्रियाओं का वृत्त उद्योगों में क्रान्ति का कार्य करेगा। ज्यादातर चतुर्थ क्रियाएँ विकसित देशों में अधिक होती हैं तथा विकासशील और अल्प विकसित देशों में चतुर्थ क्रियाओं को शामिल करने से उनकी आर्थिक व्यवस्था का सुधारा जा सकता है।

प्रश्न 5.
तृतीयक क्रियाकलापों के वर्गीकरण का वर्णन करें।
उत्तर:
तृतीयक क्रियाकलाप बुद्धि और कुशलता से जुड़ी सेवाएँ हैं; जैसे मिस्त्री से हम अपनी बाइक या स्कूटी ठीक कराते हैं। बीमार होने पर डॉक्टर से इलाज कराते हैं। इन सभी प्रकार की सेवाओं को कुशलता, अन्य सैद्धान्तिक ज्ञान एवं क्रियात्मक प्रशिक्षण की जरूरत होती है। तृतीयक क्रियाकलापों में उत्पादन और विनिमय दोनों शामिल होते हैं। इसमें वस्तुओं का उत्पादन नहीं, बल्कि सेवाओं का व्यावसायिक उत्पादन होता है जिनका उपभोग किया जाता है। इसको परोक्ष रूप से वेतन और पारिश्रमिक के रूप में मापा जाता है। इन सेवाओं के बिना विनिर्माण नहीं हो सकता। विनिमय के अन्तर्गत व्यापार, परिवहन और संचार सुविधाएँ शामिल होती हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप 1
तृतीयक क्रियाकलापों के प्रकार-तृतीयक क्रियाकलाप निम्नलिखित प्रकार के होते हैं-
1. व्यापार एवं वाणिज्य उत्पादित वस्तओं के खरीदने और बेचने को व्यापार कहते हैं। व्यापार फटकर और थोक दो प्रकार का होता है। थोक व्यापार से जुड़े वित्तीय लेन-देन को वाणिज्य कहा जाता है। व्यापार से जुड़ी सभी प्रकार की सेवाओं का एक ही उद्देश्य होता है लाभ कमाना।

फुटकर व्यापार सेवाएँ-फुटकर व्यापार उसे कहते हैं जिसमें वस्तुएँ सीधे उपभोक्ता को बेची जाती हैं।
थोक व्यापार सेवाएँ थोक व्यापार फुटकर भंडारों द्वारा न होकर सौदागरों, बड़े व्यापारिक घरानों आदि द्वारा होता है।

2. परिवहन सेवाएँ परिवहन एक सेवा है जिसमें व्यक्तियों, कच्चे पदार्थों और विनिर्मित माल को एक-स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता है।

3. संचार सेवाएँ-संचार सेवाओं में शब्दों और संदेशों, तथ्यों और विचारों तथा संगीत का प्रेषण शामिल किया जाता है।

4. सेवाएँ-वित्त, बीमा व बैंकिंग आदि सेवाएँ मौद्रिक सेवाओं में आती हैं। दूरदर्शन, फिल्म, रेडियो, साहित्य जैसी मनोरंजनात्मक और प्रमोद सेवाओं में शामिल हैं। पुलिस, सेना आदि प्रशासिनक सेवाओं में आते हैं।

निष्कर्ष – वर्तमान में अनेक सेवाएँ नियमित और व्यवस्थित हो गई हैं जिनका पर्यवेक्षण और निष्पादन सरकारें, निगम एवं कम्पनियाँ करती हैं। केन्द्र तथा राज्य सरकारों ने परिवहन, दूर-संचार, बिजली तथा जलापूर्ति जैसी सेवाओं के लिए निगमों का गठन किया हुआ है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

प्रश्न 6.
पर्यटन का क्या अभिप्राय है? पर्यटन को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन करें।
उत्तर:
पर्यटन का अर्थ-पर्यटन एक ऐसी यात्रा है जो मनोरंजन या फुरसत के क्षणों का आनंद उठाने के उद्देश्यों से की जाती है। इस यात्रा का उद्देश्य व्यापार करना या पैसा कमाना नहीं होता। विश्व पर्यटन संगठन (World Tourism Organisation) के अनुसार पर्यटक वे लोग हैं जो यात्रा करके अपने सामान्य वातावरण से बाहर के स्थानों में कुछ दिनों के लिए रहने जाते हैं। वर्तमान में पर्यटन दुनिया भर में एक आरामपूर्ण गतिविधि के रूप में लोकप्रिय हो गया है।
पर्यटन को प्रभावित करने वाले कारक-पर्यटन को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं-
1. माँग-पिछली एक शताब्दी से जीवन में बड़ी व्यस्तता और जीवन-स्तर में हुए सुधार के कारण लोगों में छुट्टियों की माँग तेजी से बड़ी है। विकसित देशों के साथ-साथ आज भारत जैसे विकासशील देशों में भी सप्ताहांत अथवा छुट्टी के दिन ज्यादा मौज-मस्ती व घूमने-फिरने वालों की संख्या बढ़ रही है।

2. विकसित परिवहन-पर्यटन का आरम्भ और अन्त दोनों विकसित परिवहन सुविधाओं पर निर्भर करते हैं। आवागमन की दिक्कतें व परिवहन बाधाएँ पर्यटन को हतोत्साहित करती हैं। बेहतर सड़क व्यवस्था अथवा महामार्गों से जुड़े पर्यटक स्थलों पर लोग अपनी गाड़ियों से जाना पसन्द करते हैं।

3. पैकेज व प्रबन्धन-आज विश्व में ऐसी अनेक टूर एवं ट्रेवल कम्पनियाँ विकसित हो गई हैं जो घर से वापिस तक की यात्रा का सम्पूर्ण प्रबन्ध करती हैं।

4. वातावरण एवं जलवायु-वातावरण एवं जलवायु भी पर्यटन को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं। उदाहरणतः ठण्डे प्रदेशों के अधिकांश लोग खिली धूप का आनन्द लेने हेतु गर्म प्रदेशों की ओर आगमन करते हैं। इसी प्रकार गर्म प्रदेशों के लोग ठण्डे प्रदेशों की ओर आगमन करते हैं।

5. भू-दृश्य-मनमोहक दृश्यों वाले स्थानों पर अवकाश बिताना सभी को अच्छा लगता है। सुन्दर भू-दृश्य का तात्पर्य होता है झीलें, पर्वत, प्रपात, दर्शनीय समुद्री तट इत्यादि।

6. इतिहास एवं स्थापत्य कला-बहुत-से पर्यटक जिन्हें इतिहास एवं प्राचीन कलाओं का बोध होता है वे प्राचीन नगरों, किलों, स्मारकों, मीनारों व परातत्व के स्थानों पर जाकर अतीत को अनुभव करते हैं।
निष्कर्ष-वर्तमान में पर्यटन में एक नई प्रवृत्ति उभरकर सामने आई है। ऐसी सुविधा गोवा में हेरीटेज़ होम्स व कर्नाटक में कूर्ग और मैडीकेरे के नाम से उपलब्ध है।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. आकार के आधार पर उद्योग कितने प्रकार के होते हैं?
(A) 2
(B) 3
(C) 4
(D) 5
उत्तर:
(B) 3

2. निम्नलिखित में कौन-सा लौह धातु उद्योग है?
(A) तांबे पर आधारित उद्योग
(B) पेट्रोकेमिकल्स इद्योग
(C) ऐलुमिनियम पर आधारित उद्योग
(D) कृषि औजार उद्योग
उत्तर:
(D) कृषि औजार उद्योग

3. निम्नलिखित में आधारभूत उद्योग कौन-सा है?
(A) वस्त्र निर्माण उद्योग
(B) लौह-इस्पात उद्योग
(C) औषधि निर्माण उद्योग
(D) सीमेंट उद्योग
उत्तर:
(B) लौह-इस्पात उद्योग

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ

4. निम्नलिखित में कृषि आधारित उद्योग कौन-सा है?
(A) कागज उद्योग
(B) फर्नीचर उद्योग
(C) चीनी उद्योग
(D) औषधि निर्माण उद्योग
उत्तर:
(C) चीनी उद्योग

5. पेट्रो-रसायन उद्योग में कौन-सा देश अग्रणी है?
(A) रूस
(B) सऊदी अरब
(C) भारत
(D) संयुक्त राज्य अमेरिका
उत्तर:
(D) संयुक्त राज्य अमेरिका

6. निम्नलिखित में कौन-सा उद्योगों की अवस्थिति में अभौगोलिक कारक है?
(A) उच्चावच
(B) जलवायु
(C) कच्चा माल
(D) सरकारी नीतियाँ
उत्तर:
(D) सरकारी नीतियाँ

7. ऊर्जा स्रोत के निकट स्थापित होने वाला उद्योग कौन-सा है?
(A) चीनी उद्योग
(B) कागज उद्योग
(C) ऐलुमिनियम उद्योग
(D) चाय उद्योग
उत्तर:
(C) ऐलुमिनियम उद्योग

8. निम्नलिखित में से कौन-सा उपभोक्ता उद्योग के अंतर्गत आता है?
(A) लौह-इस्पात उद्योग
(B) टेलीविजन उद्योग
(C) चीनी उद्योग ।
(D) कागज उद्योग
उत्तर:
(B) टेलीविजन उद्योग

9. हल्के उद्योग का सर्वोत्तम उदाहरण है
(A) कागज उद्योग
(B) चाय उद्योग
(C) इलैक्ट्रॉनिक उद्योग
(D) प्लास्टिक उद्योग
उत्तर:
(C) इलैक्ट्रॉनिक उद्योग

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ

10. सिलिकन घाटी कहाँ स्थित है?
(A) केरल
(B) कैलिफोर्निया
(C) टोकियो
(D) मास्को
उत्तर:
(B) कैलिफोर्निया

11. बड़े पैमाने के उत्पादन तथा श्रम के अत्यधिक विभाजन के मॉडल को कहा जाता है
(A) पोस्ट फोर्डिज्म
(B) फोर्डिज्म
(C) लोचयुक्त उत्पादन
(D) लोचयुक्त विशिष्टिकरण
उत्तर:
(B) फोर्डिज्म

12. निम्नलिखित में से कौन-सा लौह अयस्क क्षेत्र नहीं है?
(A) अमेरिका में महान् झीलों का क्षेत्र
(B) रूहर
(C) छोटा नागपुर
(D) सिलिकन घाटी
उत्तर:
(D) सिलिकन घाटी

13. सार्वजनिक उद्योग वह होता है, जिसका
(A) प्रबंधन राजकीय सरकार के हाथ में होता है
(B) मालिक एक व्यक्ति होता है
(C) स्वामित्व सहकारी संस्थाओं के हाथ में होता है
(D) प्रबंध कार्पोरेशन करती है
उत्तर:
(A) प्रबंधन राजकीय सरकार के हाथ में होता है

14. सर्वाधिक लौह-अयस्क के भंडार किस देश में हैं?
(A) ब्राजील
(B) भारत
(C) चीन
(D) फ्रांस
उत्तर:
(C) चीन

15. विश्व में तांबे का सबसे बड़ा उत्पादक देश कौन-सा है?
(A) इंडोनेशिया
(B) भारत
(C) मैक्सिको
(D) चिली
उत्तर:
(D) चिली

16. ऐलुमिनियम किस अयस्क से प्राप्त किया जाता है?
(A) हैमेटाइट
(B) बॉक्साइट
(C) मैग्नेटाइट
(D) लिमोनाइट
उत्तर:
(B) बॉक्साइट

17. निम्नलिखित में कौन-सा अधात्विक खनिज है?
(A) चांदी
(B) सोना
(C) तांबा
(D) गंधक
उत्तर:
(D) गंधक

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18. निम्नलिखित में कौन-सा धात्विक खनिज है?
(A) चांदी
(B) कोयला
(C) नमक
(D) गंधक
उत्तर:
(A) चांदी

19. निम्नलिखित में से कौन द्वितीयक क्रियाकलाप से संबंधित नहीं है?
(A) विनिर्माण
(B) संग्रहण
(C) प्रसंस्करण
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(B) संग्रहण

20. …………….. का अभिप्राय किसी भी वस्तु के उत्पादन से है-
(A) बाजार
(B) आखेट
(C) विनिर्माण
(D) संग्रहण
उत्तर:
(C) विनिर्माण

21. कौन-से उद्योग सरकार के नियंत्रण में होते हैं?
(A) कुटीर उद्योग
(B) सार्वजनिक उद्योग
(C) निजी उद्योग
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(B) सार्वजनिक उद्योग

22. किन क्रियाओं द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य बढ़ जाता है?
(A) प्राथमिक क्रियाओं द्वारा
(B) द्वितीयक क्रियाओं द्वारा
(C) तृतीयक क्रियाओं द्वारा
(D) चतुर्थक क्रियाओं द्वारा
उत्तर:
(B) द्वितीयक क्रियाओं द्वारा

23. उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाला कारक है-
(A) बाजार
(B) श्रम आपूर्ति
(C) कच्चा माल
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

24. वन आधारित उद्योग का उदाहरण है-
(A) फर्नीचर उद्योग
(B) कागज उद्योग
(C) लाख उद्योग
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

25. किन उद्योगों पर व्यक्तिगत निवेशकों का स्वामित्व होता है?
(A) सार्वजनिक उद्योग
(B) सरकारी उद्योग
(C) निजी उद्योग
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) निजी उद्योग

26. कृषि आधारित उद्योग का उदाहरण है-
(A) चीनी उद्योग
(B) वस्त्र उद्योग
(C) इस्पात उद्योग
(D) (A) व (B) दोनों
उत्तर:
(D) (A) व (B) दोनों

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27. हथकरघा क्षेत्र की विशेषता है-
(A) अधिक श्रमिकों की आवश्यकता
(B) कम पूँजी निवेश की आवश्यकता
(C) अर्द्धकुशल श्रमिकों को रोजगार
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

28. सहर औद्योगिक क्षेत्र का संबंध किस देश से है?
(A) जर्मनी से
(B) इंग्लैण्ड से
(C) फ्रांस से
(D) चीन से
उत्तर:
(A) जर्मनी से

29. विनिर्माण की सबसे छोटी इकाई कौन-सा उद्योग है?
(A) कुटीर उद्योग
(B) लघु उद्योग
(C) सार्वजनिक उद्योग
(D) निजी उद्योग
उत्तर:
(A) कुटीर उद्योग

30. सिलिकॉन घाटी किस उद्योग के लिए प्रसिद्ध है?
(A) इस्पात उद्योग
(B) लोहा उद्योग
(C) सॉफ्टवेयर
(D) रसायन उद्योग
उत्तर:
(C) सॉफ्टवेयर

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
रूहर औद्योगिक प्रदेश किस देश में है?
उत्तर:
रूहर औद्योगिक प्रदेश जर्मनी में है।

प्रश्न 2.
पेट्रो-रसायन उद्योग में कौन-सा देश अग्रणी है?
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका।

प्रश्न 3.
बड़े पैमाने के उत्पादन तथा श्रम के अत्यधिक विभाजन के मॉडल को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
फोर्डिज्म।

प्रश्न 4.
सिलिकन घाटी कहाँ स्थित है?
उत्तर:
अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में।

प्रश्न 5.
महान् झीलों का लोहा-इस्पात क्षेत्र कहाँ स्थित है?
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका में।

प्रश्न 6.
सूती वस्त्र उद्योग किसका उदाहरण है?
उत्तर:
विनिर्माण उद्योग का।

प्रश्न 7.
कुशल श्रमिक प्रधान उद्योगों के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. अलीगढ़ का ताला उद्योग
  2. मेरठ का कैंची उद्योग।

प्रश्न 8.
किस उद्योग को आधारभूत उद्योग कहते है?
उत्तर:
लौह-इस्पात को।

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प्रश्न 9.
कौन-सी अर्थव्यवस्था में उत्पादन का स्वामित्व व्यक्तिगत होता है?
उत्तर:
पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में।

प्रश्न 10.
जापान का कौन-सा औद्योगिक प्रदेश घना बसा है?
उत्तर:
जापान का टोक्यो प्रदेश औद्योगिक दृष्टिकोण से घना बसा है। यह जापान के होन्शू द्वीप पर बसा हुआ है।

प्रश्न 11.
किन गतिविधियों द्वारा प्राकृतिक संसाधनों या प्राथमिक उत्पादों का मूल्य बढ़ जाता है?
उत्तर:
द्वितीयक गतिविधियों द्वारा।

प्रश्न 12.
सभी आर्थिक गतिविधियों का क्या कार्य-क्षेत्र है?
उत्तर:
संसाधनों की प्राप्ति और उनके उपभोग का अध्ययन करना।

प्रश्न 13.
जहाँ कम जनसंख्या निवास करती है, उसे क्या कहते हैं?
उत्तर:
दूरस्थ क्षेत्र।

प्रश्न 14.
कुटीर या घरेलू उद्योग का कोई एक उदाहरण दें।
उत्तर:
कलाकृति।

प्रश्न 15.
कृषि आधारित उद्योगों के कोई दो उदाहरण या उत्पाद दें।
उत्तर:

  1. चीनी
  2. वनस्पति तेल।

प्रश्न 16.
खनिज आधारित उद्योगों के कोई दो उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. ताँबा
  2. आभूषण।

प्रश्न 17.
रसायन आधारित उद्योगों के कोई दो उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. प्लास्टिक
  2. पेट्रो रसायन।

प्रश्न 18.
पशु आधारित उद्योगों के कोई दो उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. ऊन
  2. चमड़ा।

प्रश्न 19.
उपभोक्ता सामान के कोई दो उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. बिस्कुट
  2. कपड़ा।

प्रश्न 20.
सीमेंट और मिट्टी के बर्तन आदि उद्योगों में किन खनिजों का प्रयोग होता है?
उत्तर:
अधात्विक खनिजों का।।

प्रश्न 21.
अफ्रीका का एक खनिज क्षेत्र बताइए जहाँ घनी जनसंख्या है।
उत्तर:
नाइजीरिया।

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प्रश्न 22.
जर्मनी के कोई दो औद्योगिक प्रदेशों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. रूहर औद्योगिक प्रदेश
  2. बेवरिया औद्योगिक प्रदेश।

प्रश्न 23.
रूस के कोई दो औद्योगिक प्रदेशों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. मॉस्को औद्योगिक प्रदेश
  2. यूराल औद्योगिक प्रदेश।

प्रश्न 24.
ब्रिटेन के कोई दो औद्योगिक प्रदेशों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. दक्षिणी वेल्स औद्योगिक प्रदेश
  2. मिडलैंड औद्योगिक प्रदेश।

प्रश्न 25.
प्राथमिक गतिविधियों के कोई दो उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. आखेट
  2. पशुचारण।।

प्रश्न 26.
द्वितीयक गतिविधियों के कोई दो उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. कपास द्वारा सूती वस्त्र बनाना
  2. लौह अयस्क से मशीनों का निर्माण।

प्रश्न 27.
भोजन प्रसंस्करण के कोई दो उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. डिब्बा बंद भोजन
  2. क्रीम उत्पादन।

प्रश्न 28.
धातु उद्योग कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
दो प्रकार के-

  1. लौह धातु उद्योग
  2. अलौह धातु उद्योग।

प्रश्न 29.
अधातु उद्योग के कोई दो उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. कोयला
  2. गंधक।

प्रश्न 30.
धातु उद्योग के कोई दो उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. लोहा
  2. इस्पात।

प्रश्न 31.
‘विनिर्माण’ का शाब्दिक अर्थ क्या है?
उत्तर:
हस्त एवं मशीनों से बनाना।

प्रश्न 32.
किन उद्योगों को ‘शिल्प उद्योग’ भी कहा जाता है?
उत्तर:
कुटीर उद्योगों को।

प्रश्न 33.
औद्योगिक क्रांति के समय विश्व की जनसंख्या कितनी थी?
उत्तर:
50 करोड़।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
निर्माण उद्योग किसे कहते हैं?
उत्तर:
कच्चे और अर्ध-निर्मित माल को हाथ अथवा मशीनों की सहायता से उपयोगी निर्मित माल में बदलने वाले उद्योग निर्माण उद्योग कहलाते हैं।

प्रश्न 2.
उद्योगों के वर्गीकरण के आधार क्या हैं?
उत्तर:
उद्योगों को अनेक आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है; जैसे-

  1. आकार के आधार पर
  2. कार्य के आकार एवं उत्पादों के स्वरूप के आधार पर
  3. कच्चे माल की प्रवृत्ति के आधार पर
  4. निर्मित माल की प्रकृति के आधार पर
  5. स्वामित्व एवं प्रबंधन के आधार पर।

प्रश्न 3.
आधारभूत एवं उपभोक्ता उद्योगों के दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
लौह-इस्पात निर्माण तथा विद्युत उत्पादन आधारभूत उद्योगों के उदाहरण हैं जबकि कागज़ निर्माण तथा टेलीविज़न निर्माण उपभोक्ता उद्योगों के उदाहरण हैं।

प्रश्न 4.
लौह-इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
लौह-इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग इसलिए कहा जाता है क्योंकि अन्य सभी उद्योगों की मशीनें व परिवहन के साधन इसी से बनाए गए इस्पात से बनते हैं।

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प्रश्न 5.
संयुक्त राज्य अमेरिका में पेट्रो-रसायन संकल अधिकतर तटों पर क्यों स्थित होते हैं?
उत्तर:
आयातित खनिज तेल पर आधारित होने के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका के पेट्रो-रसायन उद्योग तटों पर स्थित हैं। अगर ये आंतरिक भागों में होते तो परिवहन की लागत तो बढ़ती ही साथ ही सामान और समय दोनों का अपव्यय भी होता।

प्रश्न 6.
प्रौद्योगिक-ध्रुव किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रौद्योगिक-ध्रुव एक सीमांकित क्षेत्र के भीतर नई प्रौद्योगिकी व उद्योगों से संबंधित उत्पादन के लिए नियोजित विकास है। इसके अंतर्गत विज्ञान व प्रौद्योगिकी पार्क, विज्ञान नगर तथा अन्य उच्च तकनीकी औद्योगिक संकुल शामिल किए जाते हैं।

प्रश्न 7.
उपभोक्ता उद्योग क्या है?
उत्तर:
जिन उद्योगों में वस्तुओं का निर्माण सीधे उपभोग या उपभोक्ता के लिए किया जाता है; जैसे बेकरी उद्योग जिसमें निर्मित ब्रैड तथा बिस्कुट सीधे उपयोग के काम आ

प्रश्न 8.
कुटीर उद्योग किसे कहते हैं? उदाहरण दें।
उत्तर:
कुटीर उद्योग वस्तुओं के निर्माण का प्रारंभिक रूप है जो बहुत प्राचीन है। इसमें दक्षता के आधार पर वस्तुओं का निर्माण होता है। ये उद्योग मानवीय श्रम पर आधारित होते हैं। मिट्टी के बर्तन बनाना, टोकरियाँ बनाना, चमड़े के जूते बनाना आदि इस उद्योग के उदाहरण हैं।

प्रश्न 9.
लघु उद्योग किसे कहते हैं? उदाहरण दें।
उत्तर:
लघु उद्योगों में उत्पादकों का निर्माण करने के लिए छोटी-छोटी मशीनों का प्रयोग किया जाता है अर्थात् इसमें मानवीय श्रम के साथ-साथ छोटी मशीनों का भी प्रयोग किया जाता है। कागज बनाना, कपड़े बनाना, फर्नीचर बनाना आदि इस उद्योग के उदाहरण हैं।

प्रश्न 10.
सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग किसे कहते हैं?
उत्तर:
जिन उद्योगों का प्रबंध एवं स्वामित्व केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार के अधीन होता है, उन्हें सार्वजनिक उद्योग कहते हैं; जैसे भारत में रेल उद्योग।

प्रश्न 11.
निजी उद्योग किसे कहते हैं?
उत्तर:
जिन उद्योगों का स्वामित्व एवं प्रबंधन व्यक्ति या व्यक्तियों के हाथ में होता है, उन्हें निजी उद्योग कहते हैं; जैसे जमशेदपुर का लौह-इस्पात उद्योग।

प्रश्न 12.
भार हासमान पदार्थ क्या है?
उत्तर:
जिस कच्चे पदार्थ का भार निर्माण की प्रक्रिया में कम हो, उसे भार ह्रासमान पदार्थ कहते हैं।

प्रश्न 13.
यूरोप के प्रमुख औद्योगिक प्रदेशों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. ब्रिटेन के औद्योगिक प्रदेश
  2. फ्रांस के औद्योगिक प्रदेश
  3. जर्मनी के औद्योगिक प्रदेश
  4. नार्वे के औद्योगिक प्रदेश।

प्रश्न 14.
संयुक्त राज्य अमेरिका के कोई चार लोहा-इस्पात केन्द्रों/क्षेत्रों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. शिकागो गैरी क्षेत्र
  2. पिट्सबर्ग-यंग्सटाउन क्षेत्र
  3. ईरी झील तटीय क्षेत्र
  4. मध्य अटलांटिक तटीय क्षेत्र।

प्रश्न 15.
विनिर्माण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार, “विनिर्माण जैविक अथवा अजैविक पदार्थों का एक नए उत्पाद के रूप में यांत्रिक एवं रासायनिक परिवर्तन है। चाहे यह कार्य स्वचालित मशीन द्वारा सम्पन्न होता है अथवा हाथ द्वारा, चाहे यह कार्य कारखाने में किया जाता है अथवा कामगारों के घर में तथा उत्पाद चाहे थोक में बेचे जाएँ अथवा फुटकर में।”

प्रश्न 16.
द्वितीयक क्रियाओं का क्या महत्त्व है? अथवा द्वितीयक गतिविधियाँ क्यों महत्त्वपूर्ण होती हैं?
उत्तर:
द्वितीयक क्रियाओं या गतिविधियों का महत्त्व इसलिए है क्योंकि इन क्रियाओं द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य बढ़ जाता है और ये अधिक मूल्यवान एवं उपयोगी हो जाती हैं।

प्रश्न 17.
धातु उद्योग से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जिन उद्योगों में विभिन्न प्रकार की धातुओं को कच्चे माल के रूप में प्रयोग किया जाता है, तो उन्हें धातु उद्योग कहते हैं।

प्रश्न 18.
भोजन प्रसंस्करण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
भोजन प्रसंस्करण उद्योग वर्तमान में तेजी से बढ़ रहा है। इसमें डिब्बाबन्द भोजन, क्रीम उत्पादन, फल प्रसंस्करण एवं मिठाइयाँ सम्मिलित की जाती हैं। भोजन को सुरक्षित रखने की अनेक विधियाँ प्राचीन समय से अपनाई जा रही हैं; जैसे अनाज को सुखाकर रखना, आचार बनाना आदि। औद्योगिक क्रांति के बाद ये विधियाँ कम ही अपनाई जा रही हैं, क्योंकि इनमें अधिक समय लगता है। पारम्परिक खाद्य संरक्षण की विधियों का स्थान अब मशीनों ने ले लिया है। इस प्रक्रिया में भोजन प्रसंस्करण का बहुत अधिक योगदान है।

प्रश्न 19.
औद्योगिक प्रदेश या औद्योगिक संकुल किसे कहते हैं?
उत्तर:
विश्व में कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ उद्योगों की स्थापना के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ मिल जाती हैं और वहाँ कई उद्योग स्थापित हो जाते हैं। धीरे-धीरे वहाँ उद्योगों का जमघट या पुंज बन जाता है, इसे ही औद्योगिक प्रदेश या संकुल कहते हैं।

प्रश्न 20.
कुटीर उद्योगों की कोई दो विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:

  1. इन उद्योगों का व्यापारिक महत्त्व अधिक नहीं होता।
  2. ये विनिर्माण की सबसे छोटी इकाई होते हैं।

प्रश्न 21.
लघु उद्योगों की कोई दो विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:

  1. इन उद्योगों में स्थानीय कच्चे माल का उपयोग होता है।
  2. इन उद्योगों से स्थानीय लोगों की क्रयशक्ति में वृद्धि होती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ

प्रश्न 22.
कुटीर उद्योग एवं लघु उद्योग में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कुटीर उद्योग एवं लघु उद्योग में निम्नलिखित अंतर हैं-

कुटीर उद्योगलघु उद्योग
1. कुटीर उद्योगों में स्थानीय कच्चे माल का प्रयोग किया जाता है।1. लघु उद्योगों में स्थानीय कच्चे माल के साथ-साथ बाहर से भी कच्चा माल मँंगवाया जाता है।
2. अधिकांश तैयार उत्पाद घर में ही खप जाते हैं।2. समस्त तैयार उत्पाद बाजारों में बेचे जाते हैं।
3. इन उद्योगों में दस्तकार परिवार के सदस्य ही होते हैं।3. इन उद्योगों में श्रमिकों एवं मशीनों द्वारा कार्य किया जाता है।

प्रश्न 23.
आधुनिक समय में बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण की कोई चार विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:

  1. कौशल या उत्पादन की विधियों का विशिष्टीकरण।
  2. मशीनीकरण या यंत्रीकरण।
  3. प्रौद्योगिक नवाचार।
  4. संगठनात्मक ढाँचा एवं स्तरीकरण।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारी उद्योग तथा हल्के उद्योग में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
भारी उद्योग तथा हल्के उद्योग में निम्नलिखित अंतर हैं-

भारी उद्योगहल्के उद्योग
1. ये उद्योग प्राय: खनिज संसाधनों पर आधारित होते हैं।1. ये उद्योग खनिज संसाधनों तथा कृषि पर आधारित होते हैं।
2. इनमें बड़े पैमाने पर मशीनें तथा यंत्र बनाए जाते हैं।2. इनमें प्राय: दैनिक प्रयोग की वस्तुओं का निर्माण होता है।
3. इनमें अधिक पूँजी की जरूरत होती है।3. इनमें कम पूँजी की जरूरत होती है।
4. ये उद्योग प्रायः विकसित देशों में स्थापित किए जाते हैं।4. ये उद्योग विकासशील देशों में स्थापित होते हैं।

प्रश्न 2.
मूलभूत उद्योग एवं उपभोग वस्तु विनिर्माण उद्योग में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
मूलभूत उद्योग एवं उपभोग वस्तु विनिर्माण उद्योग में निम्नलिखित अंतर हैं-

मूलभूत उद्योगउपभोग वस्तु विनिर्माण उद्योग
1. इन उद्योगों के उत्पादों का प्रयोग अन्य प्रकार के उत्पादन प्राप्त करने के लिए किया जाता है।1. इन उद्योगों के उत्पादों को प्रत्यक्ष रूप से उपभोग के लिए प्रयोग किया जाता है।
2. ये उद्योग उत्पादन प्रक्रम के अगले चरण में सहायक हैं। ये औद्योगिक क्रांति में सहायक हैं।2. इनके उत्पाद प्रयोग के पश्चात् समाप्त हो जाते हैं।
3. लौह-इस्पात उद्योग इसका प्रमुख उदाहरण है।3. खाने के तेल, चाय, कॉफी, ब्रेड, बिस्कुट, रेडियो, टेलीविज़न आदि उद्योग इनके प्रमुख उदाहरण हैं।

प्रश्न 3.
उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।
अथवा
विभिन्न आधारों पर उद्योगों को कितने वर्गों में बाँटा जाता है?
उत्तर:
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ 1

प्रश्न 4.
कृषि उद्योग और भारी उद्योगों में क्या अंतर हैं?
उत्तर:
कृषि उद्योग और भारी उद्योगों में निम्नलिखित अंतर हैं-

कृषि उद्योगभारी उद्योग
1. ये उद्योग कृषि फसलों से कच्चा माल प्राप्त करते हैं।1. ये उद्योग विभिन्न खनिज पदार्थों पर आधारित होते हैं।
2. ये प्राथमिक उद्योग होते हैं।2. ये गौण उद्योग होते हैं।
3. इनमें मानवीय श्रम के साथ-साथ मशीनों का भी प्रयोग किया जाता है।3. ये पूर्ण रूप से ऊर्जा चलित भारी मशीनों पर आधारित होते हैं।
4. इन उद्योगों में श्रम की प्रधानता होती है।4. इन उद्योगों में पूँजी की प्रधानता होती है।
5. इनमें लघु तथा मध्यम वर्ग के उद्योग स्थापित किए जाते हैं।5. इन उद्योगों में भारी उद्योग स्थापित किए जाते हैं।
6. चीनी उद्योग, पटसन उद्योग, सूती वस्त्र उद्योग, चाय उद्योग, बनस्पति घी उद्योग आदि इनके प्रमुख उदाहरण हैं।6. लौह-इस्पात उद्योग, जलयान उद्योग, वायुयान उद्योग आदि भारी उद्योगों के प्रमुख उदाहरण हैं।

प्रश्न 5.
उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
अथवा
उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों की संकल्पना की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. इन उद्योगों के उत्पाद अत्यंत परिष्कृत होते हैं जिनका विकास गहन वैज्ञानिक शोध पर आधारित होता है।
  2. इन उद्योगों में उच्च कुशलता प्राप्त श्रमिकों को नौकरी पर रखा जाता है।
  3. ये उद्योग बाज़ार की बदलती माँग के अनुसार अपने उत्पादों में तेजी से सुधार करते हैं।
  4. इन उद्योगों में श्रम की गतिशीलता बहुत अधिक होती है क्योंकि ये उद्योग योग्यता, अनुभव, अधिक आय, बेहतर सुविधा – व सामाजिक स्तर के प्रति संवेदनशील होते हैं।
  5. इन उद्योगों को स्वच्छंद उद्योग कहते हैं क्योंकि अवस्थिति का चुनाव करने में ये उद्योग अपेक्षाकृत स्वतंत्र होते हैं।

प्रश्न 6.
लघु उद्योग तथा बड़े पैमाने के उद्योग में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
लघु उद्योग तथा बड़े पैमाने के उद्योग में निम्नलिखित अंतर हैं-

लघु उद्योगबड़े पैमाने के उद्योग
1. इन उद्योगों में उत्पादन छोटे पैमाने पर होता है।1. इन उद्योगों में उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है।
2. इनमें ऊर्जा से चलने वाली छोटी व साधारण मशीनों का प्रयोग किया जाता है।2. इनमें ऊर्जा से चलने वाली बड़ी-बड़ी जटिल मशीनों का प्रयोग किया जाता है।
3. इनमें कम पूँजी व कम श्रम की आवश्यकता होती है।3. इनमें भारी पूँजी व हज़ारों श्रमिकों की आवश्यकता होती है।
4. इनमें उत्पादित वस्तुओं की गुणवत्ता का कोई विशेष ध्यान नहीं रखा जाता।4. इनमें उत्पादन की गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाता है।
5. लघु उद्योगों की प्रबंध प्रणाली साधारण होती है।5. बड़े उद्योगों का प्रबंध जटिल होता है।

प्रश्न 7.
स्वच्छंद उद्योगों की प्रमुख विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:
स्वच्छंद उद्योगों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. स्वच्छंद उद्योग हल्के उद्योग होते हैं।
  2. इन उद्योगों में कम लोग ही कार्यरत होते हैं।
  3. ये उद्योग स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त होते हैं।
  4. ये उद्योग संसाधन एवं बाजार उन्मुख नहीं होते।
  5. इन उद्योगों के उत्पाद छोटे और आसानी से परिवहन के योग्य होते हैं।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ

प्रश्न 8.
उत्पाद के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण करें। अथवा आधारभूत उद्योग तथा उपभोक्ता उद्योग से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
उत्पाद के आधार पर उद्योगों को दो वर्गों में बाँटा गया है-

  • आधारभूत या मूलभूत उद्योग
  • उपभोक्ता उद्योग।

(i) आधारभूत या मूलभूत उद्योग-जिन उद्योगों में उत्पादित वस्तुएँ दूसरे उद्योग के लिए निर्मित होती हैं, उन्हें आधारभूत उद्योग कहते हैं; जैसे लौह-इस्पात उद्योग। लौह-इस्पात उद्योग में जो मशीनें बनती हैं उनका प्रयोग अन्य उद्योगों में वस्तुओं के उत्पादन के लिए किया जाता है। अतः लौह-इस्पात उद्योग मूलभूत या आधारभूत उद्योग है जो अन्य उद्योगों के लिए मशीनें बनाता है।

(ii) उपभोक्ता उद्योग-जिन उद्योगों में वस्तुओं का निर्माण सीधे उपभोग या उपभोक्ता के लिए किया जाता है; जैसे बेकरी उद्योग-जिसमें निर्मित ब्रैड तथा बिस्कुट सीधे उपयोग के काम आते हैं। तेल उद्योग, वस्त्र उद्योग, चाय एवं काफी उद्योग, रेडियो या टेलीविज़न उद्योग आदि ऐसे ही उद्योग हैं।

प्रश्न 9.
निरौधोगीकरण तथा पुनरोद्योगीकरण में क्या अंतर हैं?
उत्तर:
निरौद्योगीकरण और पुनरौद्योगीकरण में निम्नलिखित अंतर हैं-

निरौद्योगीकरणपुनरौद्योगीकरण
1. विनिर्माण उद्योगों के ह्मास को निरौद्योगीकरण कहा जाता है।1. नए उद्योगों के कुछ खंडों का विकास करना जहाँ परंपरागत उद्योगों का ह्रास हुआ पुनरौद्योगीकरण कहलाता है।
2. मनुष्य के स्थान पर मशीन तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजार में औद्योगिक उत्पादों में प्रतिस्पर्धा से निरौद्योगीकरण हुआ।2. उच्च प्रौद्योगिकी तथा उच्च वैज्ञानिक शोध एवं विकास पर आधारित उन्नत उत्पादों के कारण पुनरौद्योगीकरण हुआ।

प्रश्न 10.
संयुक्त राज्य अमेरिका में पेट्रो-रसायन संकुल अधिकतर तटों पर क्यों स्थित हैं?
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका में पेट्रो-रसायन संकुलों के तटीय क्षेत्रों में स्थित होने के निम्नलिखित कारण हैं-

  1. यहाँ जल विद्युत का पूर्ण रूप से विकास हुआ है।
  2. खनिज तेलों का परिवहन बड़े-बड़े टैंकरों तथा पाइपलाइनों द्वारा देश के आंतरिक भागों तक किया जाता है।
  3. यहाँ आयात और निर्यात की सुविधाएँ पर्याप्त मात्रा में मिलती हैं।

प्रश्न 11.
द्वितीयक क्रियाकलापों की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
द्वितीयक गतिविधियों या क्रियाकलापों द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य बढ़ जाता है। प्रकृति में पाए जाने वाले कच्चे माल का रूप बदलकर ये उसे मूल्यवान बना देती हैं। जैसे कपास से वस्त्र बनाना, लौह अयस्क से लौह-इस्पात बनाना। इस प्रकार निर्मित वस्तुएँ अधिक मूल्यवान हो जाती हैं। खेतों, वनों, खदानों एवं समुद्रों से प्राप्त वस्तुओं के बारे में भी यही बात लागू होती है। इस प्रकार द्वितीयक क्रियाएँ विनिर्माण, प्रसंस्करण और निर्माण उद्योग से संबंधित हैं। सभी निर्माण उद्योग-धंधे गौण व्यवसाय हैं। गौण व्यवसायों पर भौतिक तथा सांस्कृतिक वातावरण का भी प्रभाव पड़ता है। संसार के विकसित देशों; जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ, ग्रेट ब्रिटेन, पश्चिमी जर्मनी तथा जापान में अभूतपूर्व मूल्यवृद्धि हुई है।

प्रश्न 12.
ब्रिटेन के औद्योगिक प्रदेशों पर संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर:
ब्रिटेन में निम्नलिखित प्रमुख औद्योगिक प्रदेश स्थित हैं-
1. मिडलैंड औद्योगिक प्रदेश यह इंग्लैंड का महत्त्वपूर्ण औद्योगिक प्रदेश है, जिसका केंद्र बर्किंघम है। यहाँ छोटी-सी सूई से लेकर वायुयान तथा जलयान तक निर्मित होते हैं। यहाँ मोटरगाड़ी, लौह-इस्पात, इंजीनियरिंग, बिजली का सामान तथा हौजरी के औद्योगिक प्रतिष्ठान विकसित अवस्था में हैं। यहाँ लीड्स, बैडफोर्ड, नाटिंघम आदि सूती वस्त्र उद्योग के प्रमुख केंद्र हैं। लौह-इस्पात का बर्किंघम एक बड़ा एवं विकसित केंद्र है। कावेंट्री मोटरगाड़ियों के उद्योगों के लिए प्रसिद्ध है।

2. स्कॉटलैंड ग्लासगो क्षेत्र इस क्षेत्र में ग्लासगो नगर जलयान निर्माण के लिए विश्वविख्यात है। अन्य उद्योगों में लौह-इस्पात, इंजीनियरिंग तथा वस्त्र उद्योग प्रमुख हैं। ग्लासगो के अतिरिक्त एडिनबरा तथा एबरडीन यहाँ के प्रमुख औद्योगिक केंद्र हैं।

3. लंदन औद्योगिक प्रदेश-लंदन ब्रिटेन की राजधानी होने के साथ-साथ एक प्रमुख औद्योगिक नगर भी है। इसके आसपास अनेक उद्योग स्थापित हैं, जिनमें छपाई, सीमेंट, तेल शोधन, इंजीनियरिंग, वस्त्र निर्माण, फर्नीचर, विद्युत उपकरण, खाद्य परिष्करण तथा शृंगार प्रसाधन प्रमुख हैं।

4. दक्षिणी वेल्स औद्योगिक प्रदेश इस क्षेत्र के मुख्य औद्योगिक नगर कारडिफ, न्यूपोर्ट तथा स्वानसी हैं। यहाँ लौह-इस्पात, रसायन, तेल शोधन तथा कृत्रिम रेशे आदि उद्योग विकसित हैं।
उपर्युक्त क्षेत्रों के अतिरिक्त ब्रिटेन में नाटिंघमशायर, यार्कशायर, डर्बीशायर, लंकाशायर आदि अन्य औद्योगिक केंद्र हैं।

प्रश्न 13.
फ्रांस के औद्योगिक प्रदेशों पर संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर:
फ्राँस में निम्नलिखित प्रमुख औद्योगिक प्रदेश स्थित हैं-
1. पेरिस औद्योगिक प्रदेश-पेरिस यूरोप के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। यहाँ कोयले की कमी है इसलिए भारी उद्योगों की स्थापना कम हो पाई है। यहाँ रसायन उद्योग, कागज उद्योग, मुद्रण उद्योग, काँच की वस्तुएँ, आभूषण आदि के उद्योग विकसित हैं। पेरिस शहर फैशन के लिए विश्वविख्यात है। इसे विश्व का फैशन केंद्र कहा जाता है। यहाँ आमोद-प्रमोद एवं फैशन की अनेक वस्तुएँ निर्मित होती हैं।

2. लॉरेन सार प्रदेश-यह प्रदेश लौह-इस्पात का प्रमुख केंद्र है। यहाँ सार बेसिन में कोयले की उपलब्धता के कारण लौह-इस्पात उद्योग विकसित हुआ है। लौह-इस्पात के अतिरिक्त रासायनिक उर्वरक, वस्त्र उद्योग तथा काँच उद्योग यहाँ के प्रमुख उद्योग-धंधे हैं।

प्रश्न 14.
जर्मनी के औद्योगिक प्रदेशों पर संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर:
जर्मनी में निम्नलिखित प्रमुख औद्योगिक प्रदेश स्थित हैं-
1. रूहर औद्योगिक प्रदेश यह औद्योगिक प्रदेश विश्व के प्रमुख औद्योगिक प्रदेशों में गिना जाता है। रूहर क्षेत्र में कोयला पर्याप्त मात्रा में मिलता है, जिसके कारण भारी उद्योगों की स्थापना में सहायता मिली है। यहाँ लौह-इस्पात तथा भारी इंजीनियरिंग उद्योग विकसित अवस्था में हैं। इनके अतिरिक्त यहाँ वस्त्र उद्योग तथा रसायन उद्योग भी स्थापित हैं। इस क्षेत्र के प्रमुख औद्योगिक केंद्र राइन, बोचम, डलसडर्फ, डारमण्ड तथा आखेन हैं।

2. बेवरिया औद्योगिक प्रदेश-इस क्षेत्र में हल्के उद्योग; जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान, घड़ी, हौजरी, रसायन पदार्थ, शराब, खाद्य-सामग्री तथा औषधियों से संबंधित उद्योग हैं।

3. सार प्रदेश-यह प्रदेश सार नदी के बेसिन में फैला है। यहाँ भारी इंजीनियरिंग, लौह-इस्पात, काँच का सामान, चीनी-मिट्टी के बर्तन तथा चमड़े के सामान बनाने के केंद्र हैं। यह क्षेत्र फ्रांस तथा जर्मनी की सीमा पर लगा औद्योगिक केंद्र है।

प्रश्न 15.
स्वामित्व एवं प्रबंध के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण करें।
उत्तर:
उद्योगों को स्वामित्व एवं प्रबंधन की व्यवस्था के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, सहकारी क्षेत्र तथा बहु-राष्ट्रीय । उद्योग आदि वर्गों में बांटा जा सकता है-
1. सार्वजनिक उद्योग-वे उद्योग जिनका प्रबंध एवं स्वामित्व केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार के अधीन होता है, उन्हें सार्वजनिक उद्योग कहते हैं; जैसे भारत के भिलाई, दुर्गापुर तथा राऊरकेला में लौह-इस्पात उद्योग के केंद्र तथा भारतीय रेल सार्वजनिक उद्योग के उदाहरण हैं।

2. निजी क्षेत्र के उद्योग-वे उद्योग जिनका स्वामित्व या प्रबंध व्यक्ति या व्यक्तियों अथवा फर्म या कंपनी के पास होता है, उन्हें निजी उद्योग कहते हैं; जैसे जमशेदपुर का लौह-इस्पात उद्योग (TISCO)।

3. सहकारी उद्योग-किसी निगम अथवा कुछ लोगों के संघ द्वारा जो उद्योग संचालित किए जाते हैं, उन्हें सहकारी उद्योग कहते हैं; जैसे उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल, हरियाणा राज्य सहकारी चीनी मिल, आनंद डेयरी सहकारी समिति आदि।

4. सम्मिलित उद्योग-ऐसे उद्योग जिनका संचालन राज्य सरकारों, कुछ लोगों तथा निजी फर्मों द्वारा किया जाता है, उन्हें सम्मिलित उद्योग कहते हैं। इनका स्वामित्व तथा प्रबंध सम्मिलित रूप से होता है।

5. बहु-राष्ट्रीय उद्योग-जब कोई उद्योग या कंपनी अथवा उद्यम किसी दूसरे राष्ट्र के सहयोग से चलाए जाते हैं तो उन्हें बहु-राष्ट्रीय उद्योग कहते हैं। इनमें पूँजी तथा तकनीक विदेशों की होती है तथा कच्चा माल, श्रम तथा बाजार की सुविधा उस देश द्वारा दी जाती है, जहाँ ये स्थापित किए जाते हैं।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ

प्रश्न 16.
लौह-अयस्क के चार प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लौह-अयस्क के चार प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं-
1. मैग्नेटाइट-यह उत्तम कोटि का लौह-अयस्क माना जाता है। इसमें 70% से 75% लोहे की मात्रा मिलती है। इसका रंग काला होता है। यह आग्नेय तथा रूपांतरित चट्टानों में पाया जाता है। इसमें कुछ चुंबकीय लक्षण होते हैं। इस प्रकार का लोहा स्वीडन तथा रूस के यूरोप क्षेत्र में अधिक पाया जाता है।

2. हैमेटाइट-इस लोहे में लोहांश की मात्रा 50% से 65% के मध्य पाई जाती है। इसका रंग प्रायः लाल होता है तथा यह लोहा अवसादी चट्टानों में पाया जाता है। संसार में यह लौह-अयस्क विस्तृत क्षेत्र में पाया जाता है। यह लौह-अयस्क संयुक्त राज्य अमेरिका के सुपीरियल झील क्षेत्र स्पेन तथा ब्राजील में अधिक पाया जाता है।

3. लिमोनाइट-इस लोहे में 40% के लगभग लोहांश पाया जाता है। इस अयस्क का रंग भूरा होता है। यह भी तलछटी चट्टानों में पाया जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका के अल्बामा क्षेत्र, फ्रांस के लारेन प्रदेश तथा इंग्लैंड में पाया जाता है।

4. सिडेराइट-इस लौह-अयस्क में 20%-30% तक लोहा पाया जाता है। इसमें अशुद्धियों की मात्रा अधिक होती है। इसका रंग राख की तरह अथवा भूरा होता है। इसके प्रधान क्षेत्र नार्वे, स्वीडन तथा इंग्लैंड हैं।

प्रश्न 17.
खनिजों की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
अभी तक वैज्ञानिकों ने लगभग 2000 खनिजों का पता लगाया है लेकिन उपयोग में केवल 200 खनिज ही आते हैं। सभी खनिजों की अपनी-अपनी विशेषताएँ हैं। सामान्यतया सभी खनिजों में कुछ विशेषताएँ एक जैसी होती हैं जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं

  1. खनिजों का जमाव सीमित क्षेत्रों में मिलता है तथा इनका वितरण भी असमान है।
  2. सभी खनिज पदार्थ समाप्य या अनवीकरण योग्य संसाधन हैं।
  3. खनिजों का दोहन जनसंख्या की वृद्धि एवं औद्योगीकरण के कारण बढ़ता जा रहा है।
  4. आर्थिक विकास में खनिजों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है।
  5. सभी खनिजों का दोहन प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है।
  6. खनिजों का उत्पादन बाजार की माँग पर निर्भर करता है।
  7. कोई भी देश खनिजों के उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं है।

प्रश्न 18.
कोयला कितने प्रकार का होता है? प्रत्येक प्रकार के कोयले के मुख्य लक्षणों का वर्णन करें।
उत्तर:
कोयले में कार्बन की मात्रा के अनुसार उसकी ऊर्जा की क्षमता भिन्न-भिन्न होती है। गुणों के आधार पर कोयला निम्नलिखित चार प्रकार का होता है-
1. एन्ट्रासाइट कोयला यह उत्तम कोटि का कोयला है। इसमें कार्बन की मात्रा 90% होती है। इसमें ताप अधिक तथा धुआँ कम होता है। इसका रंग काला तथा चमकदार है।

2. बिटुमिनस कोयला इसमें कार्बन की मात्रा 70% से 90% होती है। यह कोयला जल्दी आग पकड़ता है तथा इसकी लौ पीली होती है। यह जलते समय धुआँ अधिक देता है तथा अधिक मात्रा में राख छोड़ता है। बिटुमिनस कोयले के भंडार विश्व में सबसे अधिक हैं।

3. लिग्नाइट कोयला इसमें कार्बन की मात्रा 45% से 70% तक होती है। यह भूरे रंग का होता है तथा जलते समय धुएँदार लंबी लपटें छोड़ता है। इसमें वनस्पति का अंश होता है। इसमें नमी की मात्रा अधिक होती है।

4. पीट कोयला यह नवीनतम कोयला है। इसमें नमी की मात्रा अधिक होने के कारण यह सुखाने पर ही जलता है। इसमें कार्बन की मात्रा 30% से 60% तक होती है। यह घरों में जलाने के काम लाया जाता है। इसका रंग भूरा होता है। यह सबसे घटिया होता है।

प्रश्न 19.
ऊर्जा के संसाधन के रूप में खनिज तेल कोयले से बेहतर क्यों है?
उत्तर:
खनिज तेल कोयले से बेहतर ऊर्जा का संसाधन माना जाता है। इसके निम्नलिखित कारण हैं-

  1. खनिज तेल का निष्कर्षण कोयले की अपेक्षा सरल और सस्ता है।
  2. खनिज तेल का परिवहन पाइप लाइनों द्वारा आसानी से दूर-दूर तक किया जा सकता है।
  3. खनिज तेल कोयले की अपेक्षा कम स्थान घेरता है।
  4. खनिज तेल द्वारा विभिन्न उद्योगों का विकेंद्रीकरण संभव है, जबकि कोयले पर आधारित उद्योग कोयला क्षेत्रों में ही पाए जाते हैं।

प्रश्न 20.
कोयले का निर्माण किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
कोयला मुख्य रूप से अवसादी चट्टानों में पाया जाता है। यह एक जीवाश्म ईंधन है जो वनस्पति के गलने-सड़ने तथा अपघटित होने से बना है। आज से 30 करोड़ वर्ष पूर्व कार्बोनिफेरस युग में पृथ्वी के अधिकांश निम्न स्थलीय वन प्रदेश पृथ्वी की आंतरिक हलचलों के कारण नीचे दब गए। वायु की अनुपस्थिति में तथा उच्च ताप और दाब के कारण यह वनस्पति गल-सड़ कर अपघटित (Decomposed) हो गई और बाद में कोयले में परिवर्तित हो गई। प्राकृतिक वनस्पति से कोयला बनने में लाखों वर्ष लगे तथा यह परिवर्तन बहुत ही धीमी गति से हुआ।

प्रश्न 21.
खनन क्या है? इसको प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन करें।
उत्तर:
खनन (Mining) – खानों से खनिजों को निकालने की क्रिया को खनन कहते हैं। मनुष्य भूपर्पटी से प्राचीनकाल से ही खनिजों का दोहन करता आया है और आज यह एक महत्त्वपूर्ण आर्थिक क्रिया है।
खनन को प्रभावित करने वाले कारक मानव ज्ञान, प्रयास, प्रौद्योगिकी और अत्यधिक पूँजी से ही खनन क्रिया को आर्थिक क्रिया में बदला जा सकता है। खनन को निम्नलिखित कारक प्रभावित करते हैं

  1. धरातल के नीचे खनिज निक्षेपों की गहराई, आकार और मात्रा
  2. खनिज अयस्कों में मिलने वाली धातु की मात्रा
  3. उपयोग के स्थान से खनिजों की दूरी
  4. खनन कार्य के लिए आवश्यक पूँजी
  5. उन्नत प्रौद्योगिकी व तकनीकी ज्ञान
  6. परिवहन के साधन
  7. खनिजों की माँग।

प्रश्न 22.
खनिजों का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
वैज्ञानिक अनुसंधान एवं तकनीकी विकास के साथ वर्तमान युग में खनिज पदार्थों का महत्त्व बढ़ गया है। खनिज प्रकृति का अमूल्य उपहार है। आज के युग में इस व्यवसाय की अत्यधिक महत्ता है। खनिजों पर समस्त निर्माण उद्योग आधारित हैं। खनिजों में ऊर्जा के संसाधन के रूप में कोयला, प्राकृतिक गैस, पेट्रोलियम, यूरेनियम तथा प्लेटिनियम का मुख्य स्थान है। इसी प्रकार लौह इस्पात उद्योग किसी भी देश की औद्योगिक प्रगति के लिए रीढ़ की हड्डी का काम करता है। इसके लिए लौह अयस्क, चूना पत्थर, मैग्नीशियम, मैंगनीज, निकल, कार्बन आदि धात्विक व अधात्विक खनिजों की आवश्यकता पड़ती है। रासायनिक खाद के निर्माण में जिप्सम तथा चूना पत्थर आदि खनिजों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। ऐलुमिनियम, तांबा, जस्ता, सीसा तथा टिन आदि अन्य धातुएँ हैं जिनका खनन आज के युग में आवश्यक है।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
अथवा
उद्योगों की स्थापना को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते हैं? वर्णन करें।
अथवा
उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले पाँच कारकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
किसी क्षेत्र में उद्योगों की अवस्थिति या स्थापना में निम्नलिखित कारक प्रभावी होते हैं-
1. कच्चा माल-कच्चा माल विनिर्माण उद्योगों के लिए एक मूलभूत आवश्यकता है। अतः उद्योगों की स्थापना प्रायः कच्चे माल के क्षेत्रों के निकट होती है। भारी उद्योग जैसे लौह-इस्पात को प्रायः कोयला तथा लोहे की खानों के निकट स्थापित किया जाता है अन्यथा परिवहन लागत में वृद्धि हो जाती है तथा वस्तुएँ प्रतिस्पर्धा में नहीं रहतीं। यही कारण है कि विश्व के अधिकांश भारी उद्योग कच्चे माल की आपूर्ति के निकट स्थापित हैं। भारत का लौह-इस्पात उद्योग छोटा नागपुर के पठार के आसपास ही स्थापित है, क्योंकि लौह-अयस्क तथा कोयला वहाँ प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।

इसी प्रकार संयुक्त राज्य अमेरिका में लौह-इस्पात उद्योग महान झीलों के आसपास, जर्मनी में रूहर क्षेत्र में स्थापित है। कागज, दियासलाई तथा फर्नीचर उद्योग वनों के आसपास, चीनी उद्योग गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में स्थापित किया जाता है। कुछ उद्योग ऐसे हैं जिनका कच्चा माल हल्का होता है, परिवहन व्यय कम आता है इसलिए उनको कहीं भी स्थापित किया जा सकता है; जैसे घड़ी बनाने का उद्योग, इलैक्ट्रॉनिक्स उद्योग तथा सूती वस्त्र उद्योग जैसे ब्रिटेन में सूती वस्त्र उद्योग मिस्र से आयातित कपास से चलाया जाता है लेकिन भारत में अधिकांश सूती वस्त्र मिलें कपास उत्पादक क्षेत्रों के आसपास ही स्थित हैं।

2. ऊर्जा-उद्योगों में मशीनों को संचालित करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऊर्जा के साधनों में कोयला, पेट्रोलियम, जल विद्युत्, प्राकृतिक गैस, परमाणु ऊर्जा प्रमुख हैं। लौह-इस्पात उद्योग में कोयला शक्ति का प्रमुख साधन है, इसलिए विश्व के अधिकांश लौह-इस्पात उद्योग कोयला क्षेत्रों के निकट ही स्थापित हैं; जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका में अप्लेशियन कोयला क्षेत्र के निकट महान झील औद्योगिक प्रदेश, भारत में जमशेदपुर स्टील प्लांट, झरिया और रानीगंज के कोयला क्षेत्रों पर तथा ब्रिटेन में दक्षिणी वेल्स, मिडलैंड और लंकाशायर के उद्योग आदि। एल्यूमिनियम उद्योग में जल विद्युत् की अधिक आवश्यकता होती है, इसलिए इसे जल विद्युत् ऊर्जा के क्षेत्रों में स्थापित किया जाता है। वर्तमान समय में पारंपरिक ऊर्जा के अनेक विकल्प निकाले जा रहे हैं, जिनसे उद्योगों को संचालित करने तथा उन्हें समाप्य ऊर्जा प्रदान करने के लिए ऊर्जा के संसाधनों पर अधिक निर्भर न रहना पड़े।

3. श्रम-कुछ उद्योगों में बहुत कुशल तथा अधिक संख्या में श्रमिकों की आवश्यकता होती है; जैसे पटसन उद्योग, कांच उद्योग, चाय उद्योग आदि। यद्यपि आजकल मशीनी युग में संचालित मशीनों तथा कंप्यूटरों का प्रयोग आरंभ हो गया है जिसने श्रम शक्ति के प्रभाव को कम कर दिया है लेकिन फिर भी कई उद्योगों में मानवीय श्रम का आज भी महत्त्व है। श्रमिकों की दक्षता एवं कुशलता भी उद्योगों में आवश्यक है; जैसे इलैक्ट्रॉनिक घड़ी निर्माण उद्योग आदि भारत में बिहार तथा बंगाल में अधिक जनसंख्या के कारण हुगली तथा छोटा नागपुर के पठार के औद्योगिक प्रदेशों के लिए सस्ता एवं कुशल श्रम उपलब्ध होने के कारण उद्योगों के संचालन में कोई समस्या नहीं आती हैं।

4. परिवहन तथा संचार के साधन-विश्व के जिन देशों में यातायात तथा संचार वाहनों के साधनों का विकास नहीं हुआ है, वे औद्योगिक रूप से पिछड़े हुए हैं। दक्षिणी अमेरिका तथा अफ्रीका के देशों में परिवहन के साधनों के अभाव से उद्योग स्थापित नहीं हो पाए हैं। यातायात के साधन उद्योगों के लिए धमनियों की तरह कार्य करते हैं। उद्योगों के लिए जल यातायात, सड़क परिवहन तथा रेल यातायात का विकास होना आवश्यक है। ब्रिटेन तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में यातायात के साधनों के विकास के कारण औद्योगिक विकास को गति मिली है।

जापान में कच्चे माल की कमी होते हुए भी परिवहन के साधनों के विकास ने औद्योगीकरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत में कोलकाता, मुंबई (बंबई), अहमदाबाद तथा दिल्ली के आसपास औद्योगिक विकास का कारण परिवहन की सुविधाएँ हैं। वर्तमान समय में उद्योगपति टेलीफोन, फैक्स, पेजर आदि के प्रयोग से कच्चे माल तथा निर्मित माल को घर बैठे ही मंगवा लेते हैं। कच्चे माल को उद्योगों तक पहुंचाने तथा निर्मित माल को बाजार तक पहुंचाने के लिए परिवहन के सभी साधनों (सड़क, जल यातायात, रेल परिवहन, वायु परिवहन आदि) की सुविधाएँ आवश्यक हैं।

5. बाजार-उद्योग-धंधों में निर्मित माल की आपूर्ति के लिए बाजार का होना आवश्यक है जहाँ उसकी मांग तथा खपत हो सके। उद्योगों का बड़े नगरों या उसके आसपास केंद्रित होने का कारण बाजार की निकटता है। शीघ्र खराब होने वाली वस्तुएँ; जैसे सब्जी, दूध, फल, मांस आदि का विकास महानगरों तथा औद्योगिक नगरों के निकट विकसित होने के कारण उन वस्तुओं की अधिक मांग है।

6. पूँजी उद्योग चाहे छोटा हो या बड़ा, उसके संचालन के लिए पूँजी की आवश्यकता होती है। उद्योगों के लिए कच्चा माल, मशीनें, श्रम आदि के लिए पूँजी आवश्यक है। आज जो बड़े पैमाने के उद्योग-धंधे स्थापित किए जाते हैं, उनमें करोड़ों रुपए की पूँजी की आवश्यकता होती है। यूरोप तथा अमेरिका के धनी देशों में पूँजी का अभाव नहीं है इसलिए वहाँ औद्योगिक विकास उन्नत अवस्था में है।

एशिया तथा अफ्रीका के निर्धन देश पूँजी के अभाव में औद्योगिक विकास नहीं कर पाए। प्राकृतिक संसाधनों के रूप में कच्चा माल, श्रम के रूप में अधिक जनसंख्या तथा बाजार की उपलब्धता होने के बावजूद भी यह देश औद्योगिक विकास में पिछड़े हुए हैं। भारत में पूँजीपति बड़े-बड़े नगरों में रहते हैं इसलिए वे अपनी पूँजी बड़े-बड़े नगरों में उद्योगों के केंद्रीयकरण पर लगाते हैं।

7. बैंकिंग सुविधा उद्योगों की स्थापना के लिए बैंकिंग सुविधा का होना आवश्यक है। उद्योगपतियों को प्रतिदिन लाखों रुपयों का लेन-देन करना पड़ता है जिससे पैसे जमा करवाने तथा निकालने एवं पूँजी की सुरक्षा के लिए बैंकों का होना आवश्यक है। कई उद्योगों को स्थापित करने के लिए सरकार सस्ते ब्याज की दर पर बैंकों के द्वारा ऋण की सुविधा देती है।

8. जलवायु-कुछ उद्योगों के लिए जलवायु एक महत्त्वपूर्ण कारक होता है; जैसे सूती वस्त्र उद्योग के लिए नम एवं आर्द्र जलवायु आवश्यक है जिससे उसका धागा टूटता नहीं है। शुष्क जलवायु में कृत्रिम नमी पैदा की जाती है जिससे उत्पादन व्यय बढ़ता है। दूसरा श्रमिकों एवं इंजीनियरों के स्वास्थ्य के लिए अनुकूल जलवायु आवश्यक है। कठोर शीत तथा झुलसने वाली गर्मी में श्रमिकों की कार्यक्षमता कम हो जाती है।

9. राजनीतिक स्थिरता-राजनीतिक स्थिरता का उद्योगों की स्थापना पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। जहाँ सरकारें अस्थिर होती हैं तथा जहाँ आतंकवाद का प्रभाव होता है, वहाँ कोई भी उद्योगपति उद्योग लगाना नहीं चाहता। जहाँ राजनीतिक रूप से बार-बार सरकारें बदलती हैं वहाँ भी उद्योगपति उद्योग नहीं लगाते। 1980 के दशक में पंजाब में आतंकवाद के कारण कोई भी उद्योगपति वहाँ उद्योग लगाने को सहमत नहीं था, बल्कि वहाँ से उद्योगों का पलायन दिल्ली, जयपुर तथा मुंबई (बंबई) में हुआ लेकिन शांति-व्यवस्था कायम हो जाने पर अब दोबारा से उद्योगपति वहाँ आकर्षित हो रहे हैं। यही स्थिति आज जम्मू-कश्मीर की है।

वहाँ आतंकवाद के प्रभाव के कारण कोई भी उद्योगपति उद्योग लगाना पसंद नहीं करता। इसी प्रकार सरकार की नीति का भी उद्योगों की स्थापना पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जो सरकारें उद्योगों पर अधिक कर लगाती हैं तथा सुविधाएँ नहीं देतीं, वहाँ उद्योगपति आकर्षित नहीं होते। वहाँ विदेशी कंपनियाँ भी अपना उद्योग स्थापित नहीं करती। जिन देशों में सरकारें उद्योगों को विभिन्न रियायतें एवं सुविधाएँ प्रदान करती हैं, वहाँ अधिकतर उद्योग आकर्षित होते हैं और औद्योगिक विकास की दर बढ़ती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ

प्रश्न 2.
विश्व के विभिन्न लौह-इस्पात उद्योग के वितरण का वर्णन करें।
अथवा
एशिया के विभिन्न लौह-इस्पात उद्योगों का विवरण दें।
उत्तर:
लौह-इस्पात उद्योग औद्योगिक विकास की धुरी है। किसी भी देश के औद्योगिक विकास के लिए सर्वप्रथम लौह-इस्पात उद्योग को विकसित किया जाना आवश्यक है। एक सुई से लेकर विशाल आकार के जलयानों का निर्माण लौह-इस्पात द्वारा ही होता है। भारत तथा चीन में औद्योगिक विकास लौह-इस्पात उद्योग के विकास के बाद ही संभव हुआ।

ईसा से 400 वर्ष पूर्व लोहा गलाने की कला विकसित हुई थी। उस समय लकड़ी की आंच या कोयले में लोहा गलाकर कृषि के यंत्र बनाए जाते थे। धीरे-धीरे कोयले का प्रयोग किया जाने लगा। 19वीं शताब्दी में लोहा गलाने की परिवर्तन आए। कुकिंग कोयले का प्रयोग लोहे को गलाने के लिए किया जाने लगा। लौह-इस्पात बनाने के लिए लौह-अयस्क, कोक कोयला, मैगनीज़ तथा चूना पत्थर आदि मिलाकर भट्टी में गलाने के लिए ऑक्सीजन, गर्म हवा तथा तेल के तीव्र झोंकों द्वारा भट्टी में डाला जाता है इसलिए इन आधुनिक भट्टियों को झोंका भट्टी (Blast Furnace) कहते हैं।

विश्व में लौह-इस्पात उत्पन्न करने वाले देशों में संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, जापान, भारत, जर्मनी, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस आदि प्रमुख देश हैं।
(क) संयुक्त राज्य अमेरिका – संयुक्त राज्य अमेरिका में लौह-इस्पात उद्योग का संकेंद्रण देश के पूर्वी भार्ग में हुआ है। यह देश विश्व का 15% लौह-इस्पात उत्पन्न कर विश्व में प्रथम स्थान पर है। देश के पूर्वी भाग में इस उद्योग की स्थापना में यहाँ की अनुकूल सुविधाओं का होना है जो निम्नलिखित हैं

  • अप्लेशियन का कोयला क्षेत्र
  • सुपीरियर झील के दक्षिण-पश्चिम में लोहे की खानें हैं
  • महान् झीलों का सस्ता एवं सुलभ यातायात उपलब्ध है
  • सड़कों तथा रेल-मार्गों का इस क्षेत्र में पर्याप्त विकास हुआ है
  • विकसित बाजार जिससे खपत बनी रहती है।

संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रमुख लौह-इस्पात के निम्नलिखित केंद्र हैं-
1. शिकागो गैरी क्षेत्र-यह संयुक्त राज्य अमेरिका का महत्त्वपूर्ण एवं बड़ा इस्पात क्षेत्र है जो फ्रांस के कुल इस्पात उत्पादन से भी अधिक उत्पन्न करता है। इस क्षेत्र में कोयले तथा लोहे के पर्याप्त भंडार हैं। झील का सस्ता परिवहन, मिशिगन राज्य से चूना पत्थर तथा शिकागो देश के विभिन्न भागों से रेलों तथा सड़कों द्वारा जुड़ा है जिससे निर्मित माल को भेजने की व्यवस्था है। यह क्षेत्र संयुक्त राज्य अमेरिका का 35% इस्पात तैयार करता है।

2. पिट्सबर्ग-यंग्सटाउन क्षेत्र-यहाँ संयुक्त राज्य अमेरिका का एक-तिहाई इस्पात तैयार होता है। पिट्सबर्ग क्षेत्र में इस्पात के केंद्र पश्चिम तथा दक्षिण में विकसित हुए हैं जिनमें जोहंसटाउन, कारनेगी, हिंगस्टन तथा ब्रडोक आदि प्रमुख हैं।

3. ईरी झील तटीय क्षेत्र-इस क्षेत्र में लौह-अयस्क के पर्याप्त भंडार हैं लेकिन कोयला खाने दूर स्थित हैं। लौह-अयस्क से लदे जलपोत भट्टियों में लोहा उतारते हैं और कोयला रेलमार्गों द्वारा पहुँचाया जाता है। इस क्षेत्र में बफैलो, क्लीवलैंड, डेट्राइट, ईरी तथा लारेन प्रमुख केंद्र हैं।

4. मध्य अटलांटिक तटीय क्षेत्र-न्यू इंग्लैंड राज्य बर्जीनिया तक फैला है। इस क्षेत्र में कोयला तथा चूना पत्थर के अलावा यातायात की सर्वोत्तम व्यवस्था तथा यातायात के साधन सभी सुलभ हैं। इस क्षेत्र में लौह-अयस्क की कमी है जो चिली, लैब्रेडोर तथा वेनेजुएला से आयात किया जाता है। मुख्य केंद्र फिलाडेलफिया तथा दूरस्टर हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ 2

5. दक्षिणी इस्पात क्षेत्र यहाँ लौह-इस्पात की सभी सुविधाएँ लौह-अयस्क, कोयला, चूना पत्थर, मैगनीज़ तथा यातायात के साधन आदि उपलब्ध हैं। बकिंघम संयुक्त राज्य अमेरिका के महत्त्वपूर्ण इस्पात केंद्रों में गिना जाता है।

(ख) यूरोपीय देशों में लौह-इस्पात उद्योग-यूरोपीय देशों के अंतर्गत निम्नलिखित देशों में लौह-इस्पात उद्योग स्थापित हैं
1. ग्रेट ब्रिटेन-ब्रिटेन में रोमन साम्राज्य काल से ही लकड़ी से लोहा पिघलाने की कला विकसित थी लेकिन औद्योगिक क्रांति के बाद मांग बढ़ने के कारण आधुनिक मशीनों तथा भट्टियों द्वारा लौह-इस्पात का निर्माण आरंभ हुआ। 19वीं शताब्दी में 50 वर्षों तक ब्रिटेन विश्व का प्रमुख लौह-इस्पात उत्पादक देश रहा है। यहाँ लौह-इस्पात के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं

  • दक्षिणी वेल्स-कार्डिफ, स्वानसी, लानेले, पोर्ट टालबट, न्यूपोर्ट।
  • उत्तरी-पूर्वी तटीय क्षेत्र-रेडकार, मिडिल्सबरो, डालिंगटन तथा कॉनसैट।
  • दक्षिणी यार्कशायर-चेस्टरफील्ड और फ्रोडिंन्धम।
  • मध्य स्कॉटलैंड-ग्लासगो, कैरन, कोटब्रिज, मदरवैल विशौ।
  • मिडलैंड-बर्किंघम, विल्सटन, राउंड ओक आदि।

2. जर्मनी-जर्मनी का रूहर क्षेत्र कोयले के लिए विश्वविख्यात है लेकिन लौह-अयस्क की देश में कमी है जिसकी पूर्ति फ्रांस, स्वीडन तथा स्पेन से आयात करके की जाती है। रूहर क्षेत्र देश का आधे से अधिक लौह-इस्पात का निर्माण करता है। इस क्षेत्र के प्रमुख केंद्र बोखम तथा आखेन हैं। फ्रेंकफर्ट, स्टटगार्ड तथा बूशन अन्य केंद्र हैं। जर्मनी में लौह-अयस्क की कमी के बावजूद भी यातायात की सुविधाओं के कारण लौह-इस्पात उद्योग विकसित अवस्था में है।

3. फ्रांस-फ्रांस का लारेन क्षेत्र संपूर्ण यूरोप का एक बृहत् तथा महत्त्वपूर्ण लौह-इस्पात उत्पादक क्षेत्र है। यहाँ उच्चकोटि का लौह-अयस्क प्राप्त है। 90% लौह-अयस्क इसी क्षेत्र से प्राप्त होता है। कोयला जर्मनी के रूहर क्षेत्र से मंगवाया जाता है। जो जहाज लोहा लेकर जर्मनी जाते हैं, वे वापसी में कोयला लाते हैं इसलिए परिवहन लागत अधिक नहीं आती। कुछ कोयला सार क्षेत्र से प्राप्त हो जाता है। फ्रांस के लारेन क्षेत्र के प्रमुख केंद्र मेट्ज़, ब्रिये, नांसी, थयोनविले तथा लोंगवे हैं। लारेन क्षेत्र के अतिरिक्त साम्ब्रेयूज तथा सार बेसिन अन्य उत्पादक क्षेत्र हैं।

4. यूक्रेन यूक्रेन का डोनबास क्षेत्र सोवियत रूस के सबसे बड़े लौह-इस्पात क्षेत्रों में गिना जाता है लेकिन यूक्रेन के पृथक्कीकरण से यह क्षेत्र यूक्रेन में स्थित है। इस देश में लौह-अयस्क क्रिवोई राग तथा कर्च प्रायद्वीप से मिलता है। कोयला डोनेत्ज बेसिन से तथा चूना पत्थर समीप ही स्थित है। कच्चे तथा तैयार माल को लाने व ले जाने के लिए यातायात की सुविधाएँ हैं। बाजार की सुविधाओं के रूप में चारों ओर बड़े-बड़े नगर हैं जिसके कारण यूक्रेन का लौह-इस्पात उद्योग विकसित अवस्था में है।

(ग) एशिया में लौह-इस्पात उद्योग – जापान का लौह-इस्पात के उत्पादन में विश्व में तीसरा स्थान है। पिछले चार दशकों में इसने फ्रांस, जर्मनी तथा ब्रिटेन को पीछे छोड़ दिया है। यहाँ पर लौह अयस्कों तथा कोयले की कमी के बावजूद भी लौह-इस्पात का तीव्र गति से विकास हुआ है। यहाँ सस्ती जल विद्युत् तथा यातायात के साधनों के विकास ने औद्योगिक वृद्धि में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। जापान लौह-अयस्क कोरिया, भारत, वेनेजुएला, पेरू तथा ब्राज़ील से आयात करता है। यहाँ लौह-इस्पात के केंद्र समुद्र तटवर्ती भागों में स्थापित हुए हैं क्योंकि कच्चे माल को सुगमता से जलयानों द्वारा केंद्रों तक पहुँचाया जा सकता है। यहाँ यावाता-तोबाता, मौजी, शिमोनोसेकी तथा नागासाकी प्रमुख लौह-इस्पात के केंद्र हैं। ओसाका तथा कोबे आंतरिक सागर के पूर्वी सिरे पर हैं। एशिया में लौह-इस्पात उद्योग के प्रमुख केंद्र निम्नलिखित हैं
1. चीन-पिछले 20 वर्षों में चीन में लौह-इस्पात के उत्पादन में तीव्र वृद्धि हुई है। सन् 1935 में चीन का उत्पादन बहुत कम था जो सन् 1973 में बढ़कर जर्मनी तथा फ्रांस से अधिक हो गया है। चीन में उच्चकोटि का एंथ्रासाइट कोयला शेंसी शासी क्षेत्र से तथा लौह-अयस्क मंचूरिया से प्राप्त होता है। मंचूरिया क्षेत्र देश का प्रमुख लौह-इस्पात क्षेत्र है जो लगभग एक-तिहाई उत्पादन करता है। मंचूरिया क्षेत्र में अन्शान, फुथुन और मुकडेन प्रमुख लौह-इस्पात केंद्र हैं। यांगटीसिक्यांग की घाटी में शंघाई मनशान, हैंकाऊ तथा तामेह हैं। शांसी में पाओटाऔ, टिटसिन, टानशान तथा शिट्टचिंगसांग लौह-इस्पात केंद्र हैं।

2. भारत में यह उद्योग अत्यंत प्राचीन है। इतिहास इस बात का प्रमाण है कि दमिश्क की तलवारों के लिए लोहा भारत से जाता था। दिल्ली में स्थित कुतुबमीनार के निकट लौह स्तंभ इस बात का प्रमाण है कि भारत में इस्पात बनाने की कला कितनी उन्नत थी, क्योंकि अभी तक भी इस पर जंग नहीं लगा। भारत के प्रभुत्व उद्योगों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित हैं
(i) टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी यह केंद्र बिहार राज्य में जमशेदपुर में 1907 ई० में स्थापित किया गया। यह आधुनिक लौह-इस्पात का पहला कारखाना है। इस केंद्र को निम्नलिखित सुविधाएँ उपलब्ध हैं

  • उच्चकोटि का हैमेटाइट लोहा बिहार की सिंहभूम तथा उड़ीसा के मयूरभंज से प्राप्त होता है।
  • कोयला झरिया तथा रानीगंज की खानों से मिलता है।
  • मैगनीज़, नोआमंडी से तथा चूना पत्थर सुंदरगढ़ से प्राप्त होता है।
  • कोलकाता-नागपुर रेलमार्ग यहाँ से गुजरता है जो यातायात की सुविधा प्रदान करता है।

(ii) इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी इस कंपनी के कारखाने पश्चिमी बंगाल में कुल्टी, बर्नपुर तथा हीरापुर में हैं। कुल्टी के कारखाने में इस्पात पिंड तथा हीरापुर में लौह-पिंड और बर्नपुर में तैयार इस्पात बनाया जाता है। इन केंद्रों में निम्नलिखित सुविधाएँ उपलब्ध हैं

  • इस कंपनी को लोहा बिहार की सिंहभूम तथा उड़ीसा की मयूरभंज बादाम पहाड़ियों से प्राप्त होता है।
  • इस कंपनी के लिए कोयला निकटवर्ती झरिया एवं रानीगंज की खानों से मंगवाया जाता है।
  • इस कंपनी को चूने का पत्थर पाराघाट तथा गंगापुर से उपलब्ध हो जाता है।
  • इस कंपनी को दामोदर नदी से जल की सुविधा प्राप्त है।
  • इस कंपनी को बिहार एवं पश्चिमी बंगाल से सस्ता श्रम उपलब्ध है।
  • इस कंपनी को यातायात की सुविधा आसनसोल जंक्शन से प्राप्त है।

(iii) विश्वेश्वरैया आयरन एंड स्टील वर्क्स कर्नाटक राज्य में भद्रावती के किनारे 1923 ई० में मैसूर आयरन एंड स्टील कंपनी के नाम से एक कारखाने की स्थापना हुई, लेकिन अब यह संयुक्त उपक्रम है, जिसका संचालन केंद्र सरकार तथा कर्नाटक सरकार करती है। इस क्षेत्र में उद्योग के लिए अग्रलिखित सुविधाएँ प्राप्त हैं

  • इस क्षेत्र को लोहा (अयस्क) कादूर जिले के बाबाबूदान की पहाड़ियों से प्राप्त होता है।
  • इस क्षेत्र को कोयले की सुविधा उपलब्ध नहीं है, लेकिन समीपवर्ती क्षेत्रों से लकड़ी (ईंधन) का प्रयोग किया जाता है, लेकिन अब शिमला विद्युत्-केंद्र से शक्ति के रूप में विद्युत् भी प्राप्त है।
  • इस क्षेत्र में माल लाने तथा ले जाने के लिए यातायात के साधन, विशेषकर रेल यातायात उपलब्ध है।

प्रश्न 3.
पेट्रो-रसायन उद्योगों के विश्व वितरण का विवरण दीजिए।
उत्तर:
जो उद्योग पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस पर आधारित होते हैं, उन्हें पेट्रो-रसायन उद्योग कहते हैं। इन उद्योगों की स्थापना तेल शोधन शालाओं (Oil Refineries) के निकट की जाती है। इनमें प्लास्टिक, कृत्रिम रेशे, खाद, कृत्रिम रबड़ तथा विस्फोटक (Explosive) सम्मिलित हैं। पेट्रो-रसायन उद्योगों के प्रमुख केंद्र निम्नलिखित हैं
1. संयुक्त राज्य अमेरिका संयुक्त राज्य अमेरिका में पिछले तीन दशकों में इस उद्योग ने काफी प्रगति की है। यहाँ यह उद्योग विदेशों से आयातित खनिज तेल पर आधारित है। इस उद्योग के अधिकांश केंद्र तटवर्ती भागों में स्थापित किए गए हैं। मैक्सिको की खाड़ी के आसपास तेल परिष्करण के अनेक प्लांट लगे हैं जहाँ मध्यपूर्व के देशों से खनिज तेल लाकर परिष्कृत किया जाता है इसलिए यहाँ पेट्रो-कैमिकल्स उद्योगों की स्थापना की गई है। पूर्वी तटीय भाग तथा महान् झील के आसपास के क्षेत्रों में भी अनेक परिष्करणशालाएँ कार्यरत हैं इसलिए यहाँ भी संयुक्त राज्य अमेरिका के 15% पेट्रो-रसायन उद्योग केंद्रित हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में पेट्रो-रसायन उद्योग के प्रमुख केंद्र फिलाडेलफिया, डेलवियर, शिकागो, टोलेडो, लॉस एंजिल्स, डेट्राइट, सैंट लुहस पोर्टलैंड आदि हैं।

2. यूरोप के पेट्रो-रसायन उद्योग-यूरोप में पेट्रो-रसायन उद्योग मुख्य रूप से ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस तथा नीदरलैंड में स्थापित हैं। इन देशों में खनिज तेल की कमी के बावजूद भी यह उद्योग स्थापित हैं। जर्मनी में पेट्रो-रसायन उद्योग रूहर क्षेत्र में स्थापित है। ब्रिटेन में इंग्लिश चैनल के तटीय भागों में पेट्रो-कैमिकल्स उद्योगों का केंद्रीयकरण हुआ है। ब्रिटेन में साउथहैंपटन, नीदरलैंड में रॉटरड्रम, बेल्जियम में एंटवर्प में तथा फ्रांस में सोन नदी की घाटी में ये उद्योग स्थापित हुए हैं। यूरोपीय देशों में पेट्रो-रसायन से निर्मित पदार्थों की माँग अधिक है।

रूस में पेट्रो-रसायन उद्योग वोल्गा, यूराल तथा ग्रोजनी क्षेत्रों में अधिक विकसित है। यहाँ खनिज तेल तथा कोयला पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। यहाँ के प्रमुख पेट्रो-रसायन उद्योग के केंद्र मास्को, गोर्की, लेनिनग्राड तथा बाक हैं।

3. दक्षिण-पश्चिमी एशिया दक्षिण-पश्चिमी एशिया में खनिज तेल के अपार भंडारों के बावजूद भी यहाँ पेट्रो-रसायन उद्योग का विकास नहीं हो पाया है। इसका कारण यहाँ इस उद्योग के उत्पादनों की मांग नहीं है। तटीय क्षेत्रों में जो पेट्रो-रसायन उद्योग स्थापित किए गए हैं, उनके उत्पाद विदेशों को निर्यात किए जाते हैं। लेबनान तथा अन्य देशों में तेल शोधनशालाएँ स्थापित होने के कारण भी इस उद्योग के विकास को प्रोत्साहन नहीं मिल पाया है। यहाँ अदनान (ईरान) सऊदी अरब में रास तनूरा तथा कुवैत में मिना-अल-अहमदी प्रमुख पेट्रो-रसायन उद्योग के केंद्र हैं।

4. भारत-भारत में पेट्रो-रसायन उद्योगों का आरंभ कुछ दशक पूर्व ही हुआ। सर्वप्रथम यूनियन कार्बाईड द्वारा इस क्षेत्र में उद्योग स्थापित किया गया। सार्वजनिक क्षेत्र में इंडियन कैमिकल्स लिमिटेड की स्थापना से पेट्रो-रसायन उद्योगों की स्थापना में सहयोग मिला। गुजरात में कोयली ब्रटेल परिष्करणशाला के विकास के कारण बड़ौदरा के निकट जवाहरनगर में पेट्रो-कैमिकल्स की स्थापना की गई। पेट्रो-कैमिकल्स का दूसरा सार्वजनिक क्षेत्र का कारखाना असम में बोगाईगांव में है। हल्दिया और बरौनी कारखानों की स्थापना का उद्देश्य भी पेट्रो-कैमिकल्स तैयार करना है। जगदीशपुर, बिजयपुर, सवाई माधोपुर में गैस पर आधारित उर्वरक के कारखाने लगाए जा रहे हैं। तीन परिष्करणशालाएँ हरियाणा में पानीपत, कर्नाटक में मंगलौर तथा असम में नूमालीगढ़ में बनाई गईं हैं, जिससे उनके आसपास के क्षेत्रों में पेट्रो-रसायन उद्योग भी स्थापित हो सकेंगे।

दक्षिणी महाद्वीपों में इन उद्योगों का कोई विशेष विस्तार नहीं हुआ। ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप में ब्रिसवेन, सिडनी, मेलबोर्न, पर्थ तथा एडीलेड में पेट्रो-रसायन उद्योग स्थापित हैं। दक्षिणी अमेरिका तथा अफ्रीका महाद्वीप में पेट्रो-रसायनों के क्षेत्र में कोई विशेष प्रगति नहीं हुई है। कुछ गिने-चुने उद्योग दक्षिणी अफ्रीका तथा ब्राज़ील में हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ 3

प्रश्न 4.
आकार के आधार पर उद्योगों के वर्गीकरण की व्याख्या।
अथवा
आकार पर आधारित उद्योग कौन-कौन से हैं? वर्णन करें।
उत्तर:
उद्योगों को उनके आकार के आधार पर निम्नलिखित तीन वर्गों में रखा जाता है-

  • कुटीर उद्योग (Cottage Industry)
  • लघु उद्योग या छोटे पैमाने के उद्योग (Small Scale Industry)
  • बड़े पैमाने के उद्योग (Large Scale Industry)

1. कुटीर उद्योग-यह वस्तुओं के निर्माण का प्रारंभिक रूप है, जो प्राचीनतम भी है। इसमें न्यूनतम पूँजी का निवेश तथा कभी-कभी यह केवल मानवीय श्रम द्वारा भी लगाया जाता है। इसमें वस्तुओं का निर्माण स्थानीय रूप से उपलब्ध कच्चे माल के आधार पर घरों में ही किया जाता है। इसलिए इन्हें घरेलू या ग्राम उद्योग भी कहा जाता है। इनमें अधिकांश कार्य हाथ से किए जाते हैं, इसलिए इन्हें हस्तशिल्प उद्योग भी कहा जाता है। यह उद्योग ग्रामीण किसानों द्वारा खाली समय में किया जाता है।

किसानों को जब खेत के काम से फुरसत मिलती है तो उस समय ये उद्योग संचालित किए जाते हैं। इन उद्योगों में मिट्टी के बर्तन बनाना, मूर्तियां बनाना, चटाइयां बनाना, टोकरियां बनाना, सूत कातना, चमड़े से जूते बनाना, रस्सी बनाना, ईंट बनाना, धातुओं से सजावट का सामान तथा हथियार बनाना, लकड़ी से फर्नीचर तथा इमारती सामान बनाना आदि कार्य सम्मिलित हैं। आज के विकसित तथा विकासशील देशों में कुटीर उद्योग जीवित हैं, लेकिन विकसित देशों में उद्योगों को पुनर्जीवित करने तथा प्रोत्साहन देने के लिए सरकारें अनेक रियायतें दे रही हैं, जिससे प्राचीन संस्कृति को संजोए रखा जा सके।

2. लघु उद्योग या छोटे पैमाने के उद्योग-ये उद्योग-धंधे कुटीर उद्योगों का ही विस्तृत रूप है। मानवीय आवश्यकताओं में वृद्धि के फलस्वरूप कुटीर उद्योग जब सभी आवश्यकताओं को पूरी करने में असक्षम रहे, तब कुशल कारीगरों एवं छोटी मशीनों के द्वारा उत्पादन में वृद्धि करनी पड़ी। इन उद्योगों में कम पूँजी, कुशल श्रमिकों तथा मशीनों से कार्य होता है। इन उद्योगों में दूर-दूर के क्षेत्रों से कच्चा माल मंगवाया जाता है तथा निर्मित वस्तुएँ भी दूर-दूर तक बेची जाती हैं।

ये उद्योग अधिक लोगों को रोजगार की सुविधा प्रदान करते हैं, क्योंकि इन उद्योगों में श्रमिकों की अधिक आवश्यकता होती है। विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था में इन उद्योगों का विशेष योगदान है। लघु उद्योगों में कागज बनाना, कपड़े बनाना, बर्तन, फर्नीचर, बिजली तथा इलैक्ट्रॉनिक्स का सामान बनाना, धातु के द्वारा बर्तन बनाना, तेल की पिराई, साबुन बनाना, पुस्तकें, छापना आदि सम्मिलित हैं।

3. बड़े पैमाने के उद्योग-बड़े पैमाने के उद्योग-धंधे औद्योगिक क्रांति की देन हैं। इसमें बड़ी-बड़ी मशीनें तथा बड़ी मात्रा में पूँजी का निवेश किया जाता है। मशीनों के आविष्कार ने मानव का कार्य आसान कर दिया। इन उद्योगों में मशीनी शक्ति को महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया। कम समय में अधिक वस्तुओं का उत्पादन बड़े उद्योगों के कारण ही संभव हुआ है। बड़े पैमाने के उद्योगों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • इन उद्योगों में बड़ी मात्रा में पूँजी लगती है।
  • इन उद्योगों के संचालन के लिए ऊर्जा की अधिक आवश्यकता होती है।
  • इन उद्योगों में श्रमिकों की संख्या अधिक तथा श्रमिक कुशल होते हैं।
  • इन उद्योगों के लिए दूर-दूर से कच्चा माल मंगवाया जाता है।
  • इन उद्योगों में उत्पादित माल का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार होता है।
  • उन उद्योगों में वस्तुओं की गुणवत्ता तथा किस्म पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

बड़े पैमाने के उद्योग आज अधिकांशतः विकसित देशों में स्थापित हैं, जिसके कारण उनका औद्योगिक एवं आर्थिक विकास का स्तर ऊँचा है। अमेरिका, जापान, रूस तथा यूरोपीय देशों में बड़े पैमाने के उद्योग, विद्युत् उपकरण, चीनी, वस्त्र तथा विभिन्न रासायनिक उद्योग आते हैं। भारत में स्वतंत्रता के बाद बड़े उद्योगों का विकास तथा विस्तार किया गया।

प्रश्न 5.
कच्चे माल पर आधारित उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
कच्चे माल पर आधारित उद्योगों का वर्गीकरण पाँच शीर्षकों के अंतर्गत किया जाता है-

  • कृषि आधारित उद्योग
  • खनिज आधारित उद्योग
  • रसायन आधारित उद्योग
  • वन आधारित उद्योग
  • पशु आधारित उद्योग

1. कृषि आधारित उद्योग जो उद्योग-धंधे कृषि की फसलों पर आधारित होते हैं या कृषि की फसलों से कच्चा माल प्राप्त करते हैं, उन्हें कृषि आधारित उद्योग कहते हैं। कृषि या खेतों से प्राप्त कच्चे माल को विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा तैयार करके बाजारों में भेजा जाता है; जैसे चीनी, शक्कर, आचार, फलों के रस, मसाले, तेल, रबड़, वस्त्र आदि।

2. खनिज आधारित उद्योग-ऐसे उद्योग जिनमें खनिजों को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, खनिज आधारित उद्योग कहलाते हैं। कुछ उद्योग लौह अंश वाले धात्विक खनिजों; जैसे लौह इस्पात का इस्तेमाल करते हैं, तो कुछ उद्योग अलौह धात्विक खनिजों; जैसे ताँबा, एल्युमीनियम का इस्तेमाल करते हैं। इस प्रकार खनिज आधारित उद्योग दो प्रकार के होते हैं

  • लौह धात उद्योग-लौह धात उद्योग ऐसी धातुओं पर आधारित होते हैं जिनमें लौहांश की मात्रा विद्यमान होती है। लौह-इस्पात उद्योग, मशीन व औजार उद्योग, तेल इंजन, मोटरकार, कृषि उपकरण उद्योग आदि इसके उदाहरण हैं।
  • अलौह धातु उद्योग-अलौह धातु उद्योग ऐसी धातुओं पर आधारित होते हैं जिनमें लौहांश विद्यमान नहीं होता। ताँबा, ऐल्युमीनियम, जवाहरात उद्योग आदि इसके उदाहरण हैं।

3. रसायन आधारित उद्योग-रसायन उद्योगों में विभिन्न प्रकार के रासायनिक खनिजों का उपयोग होता है; जैसे पेट्रो रसायन उद्योग में खनिज तेल या पैट्रोलियम का उपयोग होता है। रसायन उद्योगों में नमक, पोटाश, गंधक, कोयला व पेट्रोलियम आदि का उपयोग किया जाता है।

4. वन आधारित उद्योग-वनों पर आधारित उद्योगों को कच्चा माल वनों से प्राप्त होता है। फर्नीचर उद्योग के लिए इमारती लकड़ी, कागज उद्योग के लिए लकड़ी तथा लाख उद्योग के लिए लाख वनों से ही प्राप्त होती है।

5. पशु आधारित उद्योग-पशु आधारित उद्योगों को कच्चा माल पशुओं से ही प्राप्त होता है; जैसे चमड़ा उद्योग के लिए चमड़ा एवं ऊन उद्योग के लिए ऊन पशुओं से ही प्राप्त होती है।

6. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक सत्य नहीं है?
(A) बाह्यस्रोतन दक्षता को बढ़ाता है और लागतों को घटाता है।
(B) कभी-कभार अभियांत्रिकी और विनिर्माण कार्यों की भी बाह्यस्रोतन की जा सकती है।
(C) बी०पी०ओज़ के पास के०पी०ओज़ की तुलना में बेहतर व्यावसायिक अवसर होते हैं।
(D) कामों के बाह्यस्रोतन करने वाले देशों में काम की तलाश करने वालों में असंतोष पाया जाता है।
उत्तर:
(D) कामों के बाह्यस्रोतन करने वाले देशों में काम की तलाश करने वालों में असंतोष पाया जाता है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
फुटकर व्यापार सेवा को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ये वे व्यापारिक क्रियाकलाप हैं जो उपभोक्ताओं की वस्तुओं के प्रत्यक्ष विक्रय से संबंधित हैं। अधिकांश फुटकर व्यापार केवल विक्रय के लिए तय दुकानों और भंडारों में संपन्न होते हैं। उदाहरणतया फेरी, रेहड़ी, ट्रक, द्वार से द्वार डाक आदेश, दूरभाष, इंटरनेट, फुटकर बिक्री आदि।

प्रश्न 2.
चतुर्थ सेवाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चतुर्थ सेवाएँ अनुसंधान एवं विकास पर केंद्रित होती हैं और विशिष्टीकृत ज्ञान प्रौद्योगिक कुशलता और प्रशासकीय सामर्थ्य से संबद्ध सेवाओं के उन्नत नमूने के रूप में देखी जाती हैं। उच्च कोटि के बौद्धिक व्यवसायों को चतुर्थ सेवाओं के अंतर्गत रखा जाता है। अध्यापन, चिकित्सा, वकालत, अनुसंधान, सूचना आधारित ज्ञान आदि चतुर्थ सेवाओं के उदाहरण हैं।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ

प्रश्न 3.
विश्व में चिकित्सा पर्यटन के क्षेत्रों में तेजी से उभरते हुए देशों के नाम लिखिए।
उत्तर:
विश्व में चिकित्सा पर्यटन के क्षेत्रों में तेजी से उभरते हुए देशों में भारत तेजी से उभर रहा है। इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र में उभरते हुए देश हैं-थाइलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, स्विट्ज़रलैंड, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस आदि।

प्रश्न 4.
अंकीय विभाजन क्या है?
उत्तर:
सूचना और संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित विकास से मिलने वाले अवसरों का वितरण पूरे ग्लोब पर असमान रूप से वितरित है। देशों में विस्तृत आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक भिन्नताएँ पाई जाती हैं। विकसित देश, सामान्य रूप से इस दिशा में आगे बढ़ गए हैं जबकि विकासशील देश पिछड़ गए हैं। यही अंकीय विभाजन कहलाता है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
आधुनिक आर्थिक विकास में सेवा सेक्टर की सार्थकता और वृद्धि की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
आधुनिक युग में आर्थिक विकास के लिए सेवाओं का महत्त्व बढ़ता जा रहा है। कुछ वर्ष पूर्व सेवाओं की अपेक्षा वस्तुओं के उत्पादन पर अधिक बल दिया जाता था लेकिन विकसित अर्थव्यवस्था में सेवाओं पर आधारित विकास में तेजी आई है। आधुनिक आर्थिक विकास में सेवा सेक्टर की सार्थकता के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं

  • सेवा सेक्टर में फुटकर बिक्री और परिवहन के साधन सम्मिलित हैं जो विक्रेताओं एवं उपभोक्ताओं को जोड़ते हैं।
  • सेवा सेक्टर कच्चे माल को कारखाने तक और निर्मित माल को कारखाने से बाजार तक ले जाने में सहायता करते हैं।
  • सेवा सेक्टर वाणिज्यिक सेवा कम्पनियों की उत्पादकता एवं क्षमता में वृद्धि लाते हैं।

आधुनिक आर्थिक विकास में सेवा सेक्टर की वृद्धि – विकसित देशों के सेवा क्षेत्र में रोज़गार के अवसरों में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। विकासशील देशों में भी विनिर्माण क्षेत्र की तुलना में सेवा क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है लेकिन इन देशों में बहुत-से लोग असंगठित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जिनका लेखा-जोखा अच्छी तरह से नहीं रखा जाता।

अधिकतर देशों में विकास की प्रक्रिया का एक निश्चित क्रम होता है। पहले प्राथमिक क्षेत्र का वर्चस्व होता है, उसके बाद द्वितीयक क्षेत्र का महत्त्व बढ़ने लगता है। अंतिम अवस्थाओं में तृतीयक और चतुर्थक क्रियाकलाप महत्त्वपूर्ण बन जाते हैं। बहुत-से देशों में विनिर्माण उद्योगों में रोज़गार के अवसर घटते जा रहे हैं तथा सकल घरेलू उत्पाद में उनका अनुपात कम होता जा रहा है। आधुनिक आर्थिक विकास में सेवाओं का महत्त्व इतना बढ़ गया है कि उन्हें उत्पादक कार्यों की श्रेणी में रखा जाने लगा है। सेवाएँ अब निर्यातक बन गई हैं। कुछ देश; जैसे स्विट्ज़रलैंड तथा यूनाइटिड किंगडम सेवा क्षेत्र में उद्योगों से आगे निकल गए हैं।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. मानव के आर्थिक क्रियाकलापों को कितने प्रमुख वर्गों में बांटा गया है?
(A) 2
(B) 3
(C) 4
(D) 5
उत्तर:
(C) 4

2. मानव की नितांत आवश्यकताएँ हैं
(A) भोजन, आवास, वस्त्र
(B) भोजन, लकड़ी, आग
(C) जल, वस्त्र, आग
(D) वायु, आवास, भोजन
उत्तर:
(A) भोजन, आवास, वस्त्र

3. संसार के विकसित राष्ट्रों में कितने प्रतिशत लोग प्राथमिक क्रियाकलापों में संलग्न हैं?
(A) 2 प्रतिशत
(B) 3 प्रतिशत
(C) 5 प्रतिशत
(D) 7 प्रतिशत
उत्तर:
(C) 5 प्रतिशत

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

4. कालाहारी के आखेटक-संग्राहक को किस नाम से जाना जाता है?
(A) पिग्मी
(B) इनुइट
(C) सान
(D) पिंटुपी
उत्तर:
(C) सान

5. अफ्रीका के आखेटक-संग्राहक को किस नाम से जाना जाता है?
(A) सान
(B) इनुइट
(C) पिंटुपी
(D) पिग्मी
उत्तर:
(D) पिग्मी

6. दक्षिण भारत के आखेटक-संग्राहक को किस नाम से जाना जाता है?
(A) सेमांग
(B) पालियान
(C) ऐनु
(D) टोबा
उत्तर:
(B) पालियान

7. ‘पिंटुपी’ आखेटक तथा संग्राहक निम्नलिखित में किस क्षेत्र से संबंधित है?
(A) ऑस्ट्रेलिया
(B) अफ्रीका
(C) दक्षिण अमेरिका
(D) कालाहारी
उत्तर:
(A) ऑस्ट्रेलिया

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

8. लैब्रेडोर के आखेटक-संग्राहक को किस नाम से जाना जाता है?
(A) इन्नू
(B) इनुइट
(C) खेकी
(D) ऐनु
उत्तर:
(A) इन्नू

9. निम्नलिखित में से कौन-सा प्राथमिक व्यवसाय नहीं है?
(A) आखेट
(B) संग्रहण
(C) मत्स्य पकड़ना
(D) सूती वस्त्र बनाना
उत्तर:
(D) सूती वस्त्र बनाना

10. निम्नलिखित में से कौन-से देश में चलवासी पशुचारण पाया जाता है?
(A) सऊदी अरब
(B) उत्तरी अमेरिका
(C) दक्षिणी अफ्रीका
(D) न्यूजीलैंड
उत्तर:
(A) सऊदी अरब

11. ऑस्ट्रेलिया में विश्व की कितने प्रतिशत भेड़ें पाली जाती हैं?
(A) 20 प्रतिशत
(B) 35 प्रतिशत
(C) 50 प्रतिशत
(D) 65 प्रतिशत
उत्तर:
(C) 50 प्रतिशत

12. ‘डियर’ कहाँ पाला जाता है?
(A) विकसित चरागाहों में
(B) कम घास वाले क्षेत्रों में
(C) शीत तथा टुंड्रा प्रदेशों में
(D) शुष्क प्रदेशों में
उत्तर:
(C) शीत तथा टुंड्रा प्रदेशों में

13. खनिज तेल का सबसे बड़ा उत्पादक देश कौन-सा है?
(A) इराक
(B) सऊदी अरब
(C) ईरान
(D) कुवैत
उत्तर:
(B) सऊदी अरब

14. गुज्जर तथा बकरवाल किस प्रदेश के निवासी हैं?
(A) पठारी प्रदेश
(B) पर्वतीय प्रदेश
(C) तटीय प्रदेश
(D) मैदानी प्रदेश
उत्तर:
(B) पर्वतीय प्रदेश

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

15. निम्नलिखित में हिमालय के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाने वाला प्रमुख जानवर कौन-सा है?
(A) लामा
(B) यॉक
(C) घोड़ा
(D) रेडियर
उत्तर:
(B) यॉक

16. उत्तर:पूर्वी भारत में स्थानांतरी कृषि को किस नाम से जाना जाता है?
(A) रोका
(B) चेनगिन
(C) झूमिंग
(D) मसोले
उत्तर:
(C) झूमिंग

17. मलेशिया में स्थानांतरी कृषि को किस नाम से जाना जाता है?
(A) रोका
(B) झूमिंग
(C) लदांग
(D) मसोले
उत्तर:
(C) लदांग

18. कौन-सी स्थानांतरित कृषि नहीं है?
(A) झूमिंग
(B) चेनगिन
(C) रोका
(D) रेशम-कृषि
उत्तर:
(D) रेशम-कृषि

19. फलों व सब्जियों की कृषि को कहा जाता है-
(A) डेयरी कृषि
(B) ट्रक कृषि
(C) रोपण कृषि
(D) स्थानांतरी कृषि
उत्तर:
(B) ट्रक कृषि

20. पृथ्वी के सबसे अधिक क्षेत्र पर पैदा की जाने वाली फसल कौन-सी है?
(A) गेहूं
(B) चावल
(C) मक्का
(D) गन्ना
उत्तर:
(A) गेहूं

21. निम्नलिखित में कौन-सी खाद्य फसल नहीं है?
(A) गेहूं
(B) आलू
(C) चावल
(D) कपास
उत्तर:
(D) कपास

22. निम्नलिखित में से किस खाद्य फसल की उपज सर्वाधिक है?
(A) गेहूं
(B) चावल
(C) मक्का
(D) आलू
उत्तर:
(D) आलू

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

23. निम्नलिखित में से किस फसल को तैयार होते समय बादल रहित आकाश की आवश्यकता होती है?
(A) कहवा
(B) कपास
(C) चाय
(D) गन्ना
उत्तर:
(B) कपास

24. निम्नलिखित में से कौन-सी फसल श्रम प्रधान है?
(A) गेहूं
(B) चावल
(C) मक्का
(D) गन्ना
उत्तर:
(B) चावल

25. मक्का का सर्वाधिक उत्पादन किस देश में होता है?
(A) संयुक्त राज्य अमेरिका
(B) चीन
(C) भारत
(D) ब्राजील
उत्तर:
(A) संयुक्त राज्य अमेरिका

26. सस्ते और कुशल श्रम की उपलब्धता किस फसल के लिए महत्त्वपूर्ण है?
(A) कहवा
(B) गेहूं
(C) चाय
(D) गन्ना
उत्तर:
(C) चाय

27. पहाड़ी ढलानों पर उगाई जाने वाली फसल कौन-सी है?
(A) चाय
(B) कहवा
(C) तंबाकू
(D) मक्का
उत्तर:
(A) चाय

28. जब एक ही खेत में एक ही वर्ष में दो या दो से अधिक फसलें उत्पन्न की जाएँ तो ऐसी कृषि को क्या कहा जाता है?
(A) उद्यान कृषि
(B) बहुफसली कृषि
(C) जीविकोपार्जी कृषि
(D) वाणिज्यिक कृषि
उत्तर:
(B) बहुफसली कृषि

29. ‘पाला’ किस फसल के लिए हानिकारक है?
(A) चाय
(B) तंबाकू
(C) कहवा
(D) गन्ना
उत्तर:
(C) कहवा

30. निम्नलिखित में से कौन-सी फसल उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में उगाई जाती है?
(A) गेहूं
(B) चुकंदर
(C) गन्ना
(D) आलू
उत्तर:
(C) गन्ना

31. गेहूँ मुख्य रूप से फसल है-
(A) उष्णकटिबन्धीय क्षेत्र की
(B) टुण्ड्रा क्षेत्र की
(C) मरुस्थल की
(D) शीतोष्ण कटिबन्ध की
उत्तर:
(D) शीतोष्ण कटिबन्ध की

32. कौन-सी फसल रेशेदार है?
(A) रबड़
(B) तंबाकू
(C) कसावा
(D) कपास
उत्तर:
(D)

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में उगाई जाने वाली कोई एक फसल का नाम बताएँ।
उत्तर:
गन्ना।

प्रश्न 2.
विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि संसार के किन क्षेत्रों में की जाती है?
उत्तर:
मध्य अक्षांशों के आंतरिक अर्द्ध शुष्क प्रदेशों में।

प्रश्न 3.
किस प्रकार की कृषि में खट्टे रसदार फलों की कृषि की जाती है?
उत्तर:
भूमध्य-सागरीय कृषि।

प्रश्न 4.
किस देश में सहकारी कृषि का सफल परीक्षण किया गया है?
उत्तर:
डेनमार्क में।

प्रश्न 5.
फूलों की कृषि क्या कहलाती है?
उत्तर:
पुष्पोत्पादन।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

प्रश्न 6.
संसार के विकसित राष्ट्रों में कितने प्रतिशत लोग प्राथमिक क्रियाकलापों में संलग्न हैं?
उत्तर:
5 प्रतिशत लोग।

प्रश्न 7.
मलेशिया में स्थानांतरी कृषि को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
लदांग।

प्रश्न 8.
प्राथमिक व्यवसाय में लगे हुए श्रमिक किस रंग वाले श्रमिक कहलाते हैं?
उत्तर:
लाल।

प्रश्न 9.
सहारा व एशिया के मरुस्थलों में कौन-से पशु पाले जाते हैं?
उत्तर:
भेड़, बकरी, ऊँट।

प्रश्न 10.
आदिमकालीन मानव का जीवन-निर्वाह किन दो कार्यों पर निर्भर था?
उत्तर:
आखेट, संग्रहण।

प्रश्न 11.
उष्ण कटिबन्धीय अफ्रीका में कौन-से पशु पाले. जाते हैं?
उत्तर:
गाय, बैल।

प्रश्न 12.
आर्कटिक व उत्तरी उप-ध्रुवीय क्षेत्रों में कौन-सा पशु पाला जाता है?
उत्तर:
रेडियर।

प्रश्न 13.
सोवियत संघ में सामूहिक कृषि को क्या कहते हैं?
उत्तर:
कालेखहोज।

प्रश्न 14.
दक्षिणी-पूर्वी एशिया, मध्य अफ्रीका तथा दक्षिण अमेरिका की प्रमुख खाद्यान्न फसल कौन-सी है?
उत्तर:
कसावा।

प्रश्न 15.
सब्जियों की कृषि को क्या कहते हैं?
उत्तर:
ट्रक कृषि।

प्रश्न 16.
मक्का का सर्वाधिक उत्पादन किस देश में होता है?
उत्तर:
संयुक्त राज्य अमेरिका।

प्रश्न 17.
रोपण कृषि विश्व के किन क्षेत्रों में की जाती है?
उत्तर:
यूरोपीय देशों के उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

प्रश्न 18.
विश्व की प्राचीनतम आर्थिक क्रिया कौन-सी है?
उत्तर:
आखेट व संग्रहण।

प्रश्न 19.
किस प्रदेश में विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि नहीं की जाती?
उत्तर:
अमेजन बेसिन में।

प्रश्न 20.
भारत व श्रीलंका में चाय बागानों का विकास सर्वप्रथम किस देश ने किया?
उत्तर:
ब्रिटेन ने।

प्रश्न 21.
आदिमकालीन मानव के दो क्रियाकलाप बताइए।
उत्तर:
आखेट व संग्रहण।

प्रश्न 22.
कालाहारी के आखेटक-संग्राहक को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
सान।

प्रश्न 23.
अफ्रीका के आखेटक-संग्राहक को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
पिग्मी।

प्रश्न 24.
ऑस्ट्रेलिया में विश्व की कितने प्रतिशत भेड़ें पाली जाती हैं?
उत्तर:
50 प्रतिशत।

प्रश्न 25.
भूमध्यसागरीय कृषि की मुख्य फसल क्या है?
उत्तर:
अंगूर की फसल।

प्रश्न 26.
उत्तर-पूर्वी भारत में स्थानांतरी कृषि को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
झूमिंग।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राथमिक आर्थिक क्रियाकलाप क्या होता है?
अथवा
प्राथमिक क्रियाएँ क्या हैं?
उत्तर:
प्राथमिक आर्थिक क्रियाकलाप वे क्रियाएँ होती हैं जो प्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण पर निर्भर होती हैं क्योंकि ये पृथ्वी के संसाधनों; जैसे-भूमि, जल, वनस्पति, भवन-निर्माण सामग्री एवं खनिजों के उपयोग के विषय में बताती हैं। इस प्रकार की क्रियाओं के अंतर्गत आखेट, भोजन संग्रह, पशुचारण, मछली पकड़ना, वनों से लकड़ी काटना, कृषि एवं खनन कार्य आदि शामिल किए जाते हैं।

प्रश्न 2.
कृषि पद्धति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
किसी खास उद्देश्य को लेकर की जाने वाली खेती के लिए जिन तौर-तरीकों व विधियों को अपनाया जाता है, उन्हें कृषि पद्धति कहा जाता है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

प्रश्न 3.
स्थानांतरी कृषि को विभिन्न क्षेत्रों में किन-किन नामों से जाना जाता है?
उत्तर:
भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में स्थानांतरी कृषि को झूम, मलेशिया में लदांग, इंडोनेशिया में हुआ, मध्य अमेरिका व मैक्सिको में मिल्पा, ब्राजील में रोका, जायरे व मध्य अमेरिका में मसोले तथा फिलीपींस में चेनगिन कहा जाता है।

प्रश्न 4.
स्थानबद्ध कृषि क्या होती है?
उत्तर:
स्थानबद्ध कृषि खेती की वह पद्धति होती है जिसमें किसान अथवा किसान समूह अपने परिवारों के साथ एक निश्चित स्थान पर स्थाई रूप से रहकर कृषि का व्यवसाय करते हैं।

प्रश्न 5.
विशिष्टीकरण वाणिज्यिक कृषि की प्रमख विशेषता क्यों होती है?
उत्तर:
इस कृषि में फ़सलों को बेचने के लिए पैदा किया जाता है। कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए आवश्यक है कि फसलों का विशिष्टीकरण हो।

प्रश्न 6.
लोहे को उन्नति का बैरोमीटर क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
क्योंकि लोहे से ही विकास के लिए जरूरी अवसंरचना का निर्माण होता है; जैसे-औज़ार, मशीनें, कारखाने, परिवहन के साधन, जहाज इत्यादि।

प्रश्न 7.
आर्थिक क्रियाओं या क्रियाकलापों से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
ऐसी क्रियाएँ जिनमें वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण एवं उपभोग का संबंध हो और जिनसे आर्थिक वृद्धि होती हो, आर्थिक क्रियाएँ कहलाती हैं।

प्रश्न 8.
मानव क्रियाकलापों के प्रमुख वर्गों के नाम लिखिए। अथवा
आर्थिक
क्रियाकलाप कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:

  1. प्राथमिक क्रियाकलाप
  2. द्वितीयक क्रियाकलाप
  3. तृतीयक क्रियाकलाप
  4. चतुर्थक क्रियाकलाप
  5. पंचम क्रियाकलाप।

प्रश्न 9.
प्राथमिक व्यवसायों के प्रमुख क्षेत्र बताएँ।
उत्तर:
आखेट, एकत्रीकरण, पशुपालन, मत्स्य पालन, वानिकी, खनन तथा कृषि इत्यादि प्राथमिक व्यवसायों के उदाहरण हैं।

प्रश्न 10.
आखेट (Hunting) किसे कहते हैं?
उत्तर:
वनों से जंगली जानवरों का शिकार करना तथा जल से मछली आदि जंतुओं को पकड़ना आखेट कहलाता है।

प्रश्न 11.
मनुष्य के विभिन्न व्यवसायों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. कृषि व्यवसाय
  2. खनन व्यवसाय
  3. मत्स्यन व्यवसाय
  4. पशु-पालन व्यवसाय आदि।

प्रश्न 12.
चलवासी पशुचारण के तीन प्रमुख क्षेत्रों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. मध्य एशिया
  2. दक्षिण-पश्चिमी एशिया
  3. टुंड्रा प्रदेश।

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प्रश्न 13.
संग्रहण (Gathering) किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार का होता है?
उत्तर:
संग्रहण का अभिप्राय एकत्रीकरण करना है। वनों में रहने वाली आदिम जातियों द्वारा अपने निर्वाह के लिए वनों से विभिन्न वस्तुओं को इकट्ठा करने के व्यवसाय को संग्रहण कहते हैं।

संग्रहण के प्रकार-यह तीन प्रकार का है-

  1. साधारण पैमाने पर जीविकोपार्जन संग्रहण
  2. वाणिज्यिक संग्रहण
  3. संगठित पैमाने पर संग्रहण।

प्रश्न 14.
विश्व की कोई चार खाद्य फसलों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. चावल
  2. गेहूँ
  3. मक्का
  4. आलू।

प्रश्न 15.
चावल की फसल बोने की प्रमुख विधियाँ बताएँ।
उत्तर:

  1. छिड़ककर या छिड़काव विधि
  2. हल चलाने वाली विधि
  3. प्रतिरोपण विधि।

प्रश्न 16.
वाणिज्य फसलों के कोई तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. रबड़
  2. कपास
  3. गन्ना।

प्रश्न 17.
रोपण फसलों के कोई तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. चाय
  2. केला
  3. कहवा।

प्रश्न 18.
चावल को खुरपे की कृषि क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
चावल की खेती में मशीनों का प्रयोग नगण्य है। भूमि की जुताई, बुआई, पौधों का प्रतिरोपण, फसल की कटाई, धान का छिलका हटाना तथा इसे कूटने आदि का सारा काम हाथों से किया जाता है। समय की अधिकता के कारण चावल की खेती को खुरपे की कृषि (Hoe Agriculture) कहा जाता है।

प्रश्न 19.
गहन कृषि संसार के किन देशों में की जाती है?
उत्तर:
जापान, बांग्लादेश, फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया, थाइलैंड, वियतनाम व भारत इत्यादि मानसून एशिया के देशों में गहन कृषि की जाती है।

प्रश्न 20.
गन्ने की खेती के लिए किस प्रकार की मिट्टी की आवश्यकता होती है?
उत्तर:
गन्ने की खेती के लिए चूना तथा फॉस्फोरस युक्त गहरी, सुप्रवाहित तथा उपजाऊ दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 21.
चलवासी पशुचारण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
चलवासी पशुचारण एक जीवन निर्वाह पद्धति है। इस पद्धति में चारा प्राकृतिक रूप से विकसित होता है। इस पद्धति में पशुओं को चराने वाले चारे व पानी की तलाश में इधर-उधर घूमते रहते हैं। ये स्थायी निवास नहीं कर पाते, इसी कारण इन्हें चलवासी कहा जाता है।

प्रश्न 22.
डेयरी कृषि के लिए अनुकूल कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
डेयरी कृषि का कार्य नगरीय एवं औद्योगिक केंद्रों के समीप किया जाता है क्योंकि ये क्षेत्र दूध एवं अन्य डेयरी उत्पाद के अच्छे बाजार होते हैं। पशुओं के उन्नत पालन-पोषण के लिए पूँजी की भी अधिक आवश्यकता होती है। वाणिज्य डेयरी के मुख्य क्षेत्र उत्तरी-पश्चिमी यूरोप, कनाडा, दक्षिणी-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड हैं।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

प्रश्न 23.
कहवा का पौधा बड़े वृक्षों की छाया में लगाया जाता है, क्यों?
उत्तर:
कहवा भी चाय की तरह ही एक पेय पदार्थ है। यह एक झाड़ीनुमा पेड़ के फलों से प्राप्त बीज का चूर्ण बनाकर तैयार किया जाता है। अधिक धूप एवं पाला कहवे के लिए हानिकारक है। इसलिए कहवे के वृक्षों को धूप तथा पाले से बचाने के लिए बड़े-बड़े छायादार वृक्ष उगाए जाते हैं।

प्रश्न 24.
शीतकालीन गेहूँ क्या है?
उत्तर:
शीतकालीन गेहूँ शीत ऋतु के आगमन पर बोया जाता है तथा ग्रीष्म ऋतु के आरंभ में काट दिया जाता है। यह उन क्षेत्रों में बोया जाता है जहाँ साधारण शीत ऋतु होती है। विश्व का अधिकांश गेहूँ (लगभग 80%) इसी मौसम में बोया जाता है।

प्रश्न 25.
सहकारी कृषि किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब कृषकों का एक समूह अपनी कृषि से अधिक लाभ कमाने के लिए स्वेच्छा से एक सहकारी संस्था बनाकर कृषि कार्य संपन्न करे, उसे सहकारी कृषि कहते हैं। सहकारी संस्था कृषकों को सभी प्रकार से सहायता उपलब्ध कराती है। इस प्रकार की कृषि का उपयोग डेनमार्क, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्वीडन एवं इटली जैसे देशों में सफलतापूर्वक किया जाता है।

प्रश्न 26.
कृषि क्या है?
उत्तर:
मिट्टी को जोतने, गोड़ने, उसमें विभिन्न फसलें एवं फल-फूल उगाने तथा पशुपालन से जुड़ी कला या विज्ञान को कृषि कहा जाता है।

प्रश्न 27.
प्रेयरी तथा स्टेपीज प्रदेश में गेहूँ की पैदावार अधिक क्यों होती है?
उत्तर:
जिस मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा अधिक होती है, उसमें गेहूँ की पैदावार अच्छी एवं अधिक होती है। प्रेयरी तथा स्टेपीज प्रदेश की मिट्टी में पर्याप्त ह्यूमस उपलब्ध है। ये ही कारण है कि यहाँ गेहूँ की पैदावार अधिक या अच्छी होती है।

प्रश्न 28.
गेहूँ की उपज के लिए कितने तापमान व वर्षा की आवश्यकता होती है?
उत्तर:
गेहूँ के लिए उगते समय 10° सेल्सियस तथा पकते समय 20° सेल्सियस तापमान तथा 50 से०मी० से 75 से०मी० तक वर्षा अनुकूल होती है।

प्रश्न 29.
शीतकालीन गेहूँ एवं बसंतकालीन गेहूँ में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:

  1. शीतकालीन गेहूँ शीत ऋतु के आगमन पर बोई जाती है, जबकि बसंतकालीन गेहूँ बसंत ऋतु में बोई जाती है।
  2. शीतकालीन गेहँ ग्रीष्म ऋत के आरंभ में काटी जाती है, जबकि बसंतकालीन गेहँ शीत ऋत के आगमन पर काटी जाती है।

प्रश्न 30.
भूमध्यसागरीय कृषि के क्षेत्र व प्रमुख फसलें कौन-सी हैं?
उत्तर:
भूमध्यसागर के समीपवर्ती क्षेत्र जो दक्षिणी यूरोप से उत्तरी अफ्रीका में टयूनीशिया से एटलांटिक तट तक फैला है। दक्षिणी कैलीफोर्निया, मध्यवर्ती चिली, दक्षिणी अफ्रीका का दक्षिणी-पूर्वी भाग एवं ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण-जैसे-अंगूर की कृषि यहाँ की विशेषता है। अंजीर, जैतून भी यहाँ उत्पन्न होता है।

प्रश्न 31.
विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि के प्रमुख मैदानों के नाम लिखिए।
उत्तर:
मध्य अक्षांशों के आंतरिक अर्धशुष्क प्रदेशों में इस प्रकार की कृषि की जाती है। इस प्रकार की कृषि के मैदान हैं यूरेशिया के स्टेपीज, उत्तरी अमेरिका के प्रेयरीज, अर्जेन्टाइना के पंपाज, दक्षिणी अफ्रीका के वैल्डस, ऑस टरबरी के मैदान। इसकी मुख्य फसल गेहँ है। अन्य फसलें जैसे-मक्का, जई, जौ, राई भी बोई जाती है। इस कषि में खेतों का आकार बहुत बड़ा होता है एवं खेत जोतने से फसल काटने तक सभी कार्य यंत्रों द्वारा सम्पन्न किए जाते हैं।

प्रश्न 32.
संसार के पाँच प्रमुख कपास उत्पादक देशों के नाम लिखिए।
उत्तर:
कपास एक महत्त्वपूर्ण अखाद्य फसल है व एक विश्वव्यापी रेशा है। वनस्पति के औद्योगिक रेशेदार उत्पादों में कपास सबसे महत्त्वपूर्ण है। भारत और मिस्र इसके प्राचीन उत्पादक देश हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका व प्यूरटोरिको में लम्बे रेशे वाली कपास पाई जाती है। मिस्र की नील नदी की घाटी, मध्य एशिया, ब्राजील में कपास का उत्पादन किया जाता है।

प्रश्न 33.
कपास की फसल पकते समय बादल रहित आकाश क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
कपास की फसल के पकते समय शुष्क मौसम आवश्यक है। कपास में डोडी आने के पश्चात स्वच्छ आकाश आवश्यक है तथा तेज धूप लाभदायक है, जिससे तेज धूप में डोडी के फूल आसानी से खिल सकें तथा कपास की चुनाई आसानी से हो सके। इसलिए कपास की फसल के पकते समय वर्षा नहीं होनी चाहिए।

प्रश्न 34.
व्यापारिक पशुपालन क्या है?
उत्तर:
जब बड़े पैमाने पर आय प्राप्त करने के उद्देश्य से तथा व्यापारिक दृष्टिकोण से पशुपालन किया जाए, उसे व्यापारिक पशुपालन कहा जाता है। उत्तरी अमेरिका के विस्तृत घास के मैदानों में यह व्यवसाय बड़ी तेजी से विकसित हुआ। इसमें पशुओं को . बड़े-बड़े बाड़ों (Ranches) में रखा जाता है।

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प्रश्न 35.
चावल की बहत बड़ी मात्रा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए उपलब्ध नहीं है, क्यों?
उत्तर:
चावल उत्पादक देशों की जनसंख्या का घनत्व बहुत अधिक है। इसलिए चावल की उपज का अधिकतर भाग उत्पादक देशों में ही खप जाता है। इसलिए चावल के विश्व के कुल उत्पादन का केवल पांच प्रतिशत भाग ही व्यापार के लिए अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध है। इसलिए चावल की बहुत बड़ी मात्रा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए उपलब्ध नहीं है।

प्रश्न 36.
विस्तृत कृषि अधिकांशतः मशीनों की सहायता से की जाती है, क्यों?
उत्तर:
विस्तृत कृषि में खेतों का आकार बड़ा होता है। इसमें कृषि योग्य भूमि तथा मनुष्य का अनुपात अधिक होता है। इस प्रकार की कृषि विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में होती है। इसलिए यहाँ श्रम आसानी से उपलब्ध नहीं होता। इसलिए विस्तृत कृषि अधिकांशतः मशीनों की सहायता से की जाती है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कृषि क्रांति और औद्योगिक क्रांति में क्या अंतर है?
उत्तर:
कृषि क्रांति और औद्योगिक क्रांति में निम्नलिखित अंतर हैं-

कृषि क्रांतिऔद्योगिक क्रांति
1. यह प्रकृति में उपलब्ध जैविक उत्पादों के अधिक संगठित तरीके से उपयोग करने से शुरू हुई।1. यह प्रकृति में कोयला एवं पैट्रोल के रूप में संचित ऊर्जा शक्ति के प्रयोग पर निर्भर थी।
2. कृषि कार्य शारीरिक दृष्टि से बहुत कष्टपूर्ण थे।2. औद्योगिक क्रांति ने लोगों को श्रम की पीड़ा से मुक्ति दिलाई।

प्रश्न 2.
धान की गहन जीविकोपार्जी कृषि के क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक क्यों है?
उत्तर:
छोटे खेतों पर अधिक पूँजी तथा श्रम का प्रयोग करके अधिक उपज प्राप्त करने वाली कृषि गहन कृषि कहलाती है। इसमें बोई जाने वाली प्रमुख फसल धान अर्थात् चावल है। धान की कृषि मुख्य रूप से मानसूनी प्रदेशों में की जाती है। धान की कृषि में मुख्य रूप से सभी कार्य मनुष्य अपने हाथों से करता है। इसलिए इस कार्य के लिए सस्ते तथा अधिक मज़दूरों की आवश्यकता होती है। श्रम की अधिक माँग होने के कारण यहाँ रोजगार मिल जाता है। इसलिए धान की गहन जीविकोपार्जी कृषि के क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है।

प्रश्न 3.
रोपण कृषि का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर:
रोपण कृषि एक लाभ देने वाली उत्पादन प्रणाली है। इस कृषि की प्रमुख विशेषता यह है कि इस कृषि में क्षेत्र का आकार बहुत बड़ा होता है। इसमें अधिक पूँजी, उन्नत तकनीक व वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है। यह एक फसली कृषि है। इसके लिए अधिक श्रम की व विकसित यातायात के साधनों की आवश्यकता होती है। यूरोपीय उपनिवेशों ने अपने अधीन उष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों में चाय, कॉफी, कोको, रबड़, कपास, गन्ना, केले व अनानास आदि फसलों का उपयोग करके रोपण कृषि का विस्तार किया है।

प्रश्न 4.
मिश्रित कृषि की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मिश्रित कृषि जिसमें फसलों को उगाने के साथ-साथ पशुओं को पालने का कार्य भी किया जाता है, उसे मिश्रित कृषि कहा जाता है। इस कृषि में खाद्यान्न फसलों के साथ-साथ चारे और नकदी फसलों को भी उसी पैमाने पर उगाया जाता है। मिश्रित कृषि का अधिक प्रचलन पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका, अर्जेन्टाइना, पश्चिमी यूरोप, दक्षिणी अफ्रीका, न्यूजीलैंड व दक्षिण-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में है। संयुक्त राज्य अमेरिका में मिश्रित कृषि मक्के की पेटी (Maize Belt) में की जाती है। इसके अतिरिक्त मिश्रित कृषि में राई, गेहूँ व घास भी पैदा की जाती है। रूस में मिश्रित खेती में गेहूँ, आलू, चुकंदर, सूरजमुखी जैसी फसलों के साथ-साथ पशु-पालन किया जाता है।

प्रश्न 5.
गहन निर्वाह कृषि का संक्षेप में वर्णन करें।
उत्तर:
गहन निर्वाह कृषि मानसून एशिया के घनी बसी आबादी वाले देशों में की जाती है। यह कृषि दो प्रकार की है-
1. चावल प्रधान गहन निर्वाह कृषि-इस प्रकार की कृषि की मुख्य फसल चावल होती है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों के कारण इसमें जोतों का आकार छोटा होता है और किसान का पूरा परिवार इस काम में लगा होता है। मानवीय श्रम, गोबर की खाद व हरी खाद का उपयोग किया जाता है। इस कृषि में प्रति कृषक उत्पादन कम होता है।

2. चावल रहित गहन निर्वाह कृषि-मानसून एशिया में अनेक भौगोलिक कारकों की भिन्नता के कारण धान की फसल हर जगह उगाना संभव नहीं है। इस प्रकार की कृषि में सिंचाई की आवश्यकता होती है।

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प्रश्न 6.
खनन के प्रकारों/विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अयस्कों की प्रकृति के आधार पर खनन के दो प्रकार हैं-

  • धरातलीय खनन
  • भूमिगत खनन।

1. धरातलीय खनन-इसे विवृत खनन भी कहा जाता है। यह खनन का सबसे सस्ता तरीका है क्योंकि इस विधि में सुरक्षा, कम खर्च व उत्पादन शीघ्र और अधिक होता है।

2. भूमिगत खनन-जब अयस्क धरातल के नीचे गहराई में होता है तब भूमिगत खनन का प्रयोग किया जाता है। यह खनन जोखिम भरा होता है क्योंकि जहरीली गैस, आग और बाढ़ के कार टिना का भय
बना रहता है। खदानों में काम करने वाले श्रमिकों को विशेष प्रकार की लिफ्ट बेधक, वायु संचार प्रणाली और माल ढोने की गाड़ियों की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 7.
चलवासी पशुचारण क्षेत्रों के प्रमुख उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
चलवासी पशुचारण के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं-

  1. इसका प्रमुख क्षेत्र उत्तरी अफ्रीका के अटलांटिक तट से सहारा मरुस्थल, अफ्रीका के पूर्वी तटीय भाग, अरब प्रायद्वीप, इराक, ईरान, अफगानिस्तान होता हुआ मंगोलिया एवं मध्य चीन तक फैला हुआ है।
  2. दूसरा क्षेत्र यूरेशिया में टुंड्रा के दक्षिणी सीमांत पर स्थित है जो पश्चिम में नार्वे व स्वीडन से होता हुआ रूस के पूर्वी भाग में स्थित कमचटका प्रायद्वीप तक फैला है।
  3. तीसरा क्षेत्र अपेक्षाकृत टा है जो दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका तथा मेडागास्कर के पश्चिमी भाग में फैला हुआ है।

प्रश्न 8.
व्यापारिक पशुचारण क्षेत्रों के प्रमुख उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
व्यापारिक पशुपालन के प्रमुख क्षेत्र हैं-

  1. उत्तरी अमेरिका का प्रेयरी क्षेत्र
  2. दक्षिणी अमेरिका में वेनेजुएला का लानोस क्षेत्र
  3. ब्राज़ील के पठारी भाग से अर्जेंटीना की दक्षिणी सीमा तक का क्षेत्र
  4. दक्षिणी अफ्रीका का वेल्ड क्षेत्र
  5. ऑस्ट्रेलिया व न्यूज़ीलैंड की शीतोष्ण घास भूमि
  6. कैस्पियन सागर के पूर्व में स्थित क्षेत्र
  7. अरब सागर के उत्तर में स्थित क्षेत्र आदि।

प्रश्न 9.
मिश्रित कृषि एवं डेयरी कृषि में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मिश्रित कृषि एवं डेयरी कृषि में निम्नलिखित अंतर हैं-

मिश्रित कृषिडेयरी कृषि
1. मिश्रित कृषि में फसलों का उत्पादन तथा पशुपालन साथ-साथ किया जाता है।1. डेयरी कृषि में मुख्य रूप से दुधारु पशुओं को पाला जाता है।
2. इसमें खाद्यान्न के खपत क्षेत्र उत्पादन क्षेत्र से दूर होते हैं।2. यह व्यवसाय बड़े नगरों तथा औद्योगिक केंद्रों के निकट स्थापित होते हैं।
3. यहाँ पशुओं के लिए चारा कृषि योग्य भूमि के कुछ भाग पर बोया जाता है।3. यहाँ पशुओं के लिए चारे के लिए कृषि फार्मों तथा चारे की मिलों की व्यवस्था की जाती है।

प्रश्न 10.
आदिम जीविकोपार्जी कृषि एवं गहन जीविकोपार्जी कृषि में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आदिम जीविकोपार्जी कृषि एवं गहन जीविकोपार्जी कृषि में निम्नलिखित अंतर हैं-

आदिम जीविकोपार्जी कृषिगहन जीविकोपार्जी कृषि
1. इस प्रकार की कृषि में उत्पादन बहुत कम होता है।1. इस प्रकार की कृषि में उत्पादन अधिक होता है।
2. यह कृषि विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में की जाती है।2. यह कृषि बढ़ती हुई जनसंख्या वाले क्षेत्रों में की जाती है।
3. इसमें फसलों का और खेतों का हेर-फेर नहीं होता।3. इसमें फसलों का हेर-फेर किया जाता है।
4. इस कृषि में खादों का प्रयोग नहीं किया जाता।4. इसमें उत्तम बीज, रासायनिक उर्वरकों तथा सिंचाई के साधनों का प्रयोग किया जाता है।
5. इसमें मुख्य रूप से खाद्य फसलें बोई जाती हैं।5. इसमें आय की वृद्धि के लिए अधिक मूल्य वाली फसलों को उगाने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

प्रश्न 11.
रोपण कृषि एवं उद्यान कृषि में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
रोपण कृषि एवं उद्यान कृषि में निम्नलिखित अंतर हैं-

रोपण कृषिउद्यान कृषि
1. यह कृषि बड़े-बड़े फार्मों पर की जाती है।1. इस कृषि में फार्मों का आकार छोटा होता है।
2. इस प्रकार की कृषि की उपजों का अधिकतर भाग निर्यात किया जाता है।2. इसमें मुख्य रूप से उत्पादित वस्तुएँ स्थानीय बाज़ारों में बिक जाती हैं।
3. रोपण कृषि की मुख्य फसलें रबड़, चाय, कहवा, गन्ना, नारियल, केला हैं।3. उद्यान कृषि में मुख्य रूप से सब्जियाँ, फल तथा फूल बोए जाते हैं।
4. यह कृषि विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में की जाती है।4. यह कृषि सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों में की जाती है।
5. इस कृषि में वैज्ञानिक विधियों, मशीनों, उर्वरकों तथा अधिक पूँजी का प्रयोग होता है।5. इस कृषि में केवल पशुओं की नस्ल सुधार तथा दुग्ध दोहने के यंत्रों का प्रयोग होता है।

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प्रश्न 12.
जीविकोपार्जी कृषि एवं वाणिज्यिक कृषि में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जीविकोपार्जी कृषि एवं वाणिज्यिक कृषि में निम्नलिखित अंतर हैं-

जीविकोपार्जी कृषिवाणिज्यिक कृषि
1. इस कृषि का मुख्य उद्देश्य अपने परिवार का भरण-पोषण करना है।1. इस कृषि में व्यापार के उद्देश्य से फसलों का उत्पादन किया जाता है।
2. इस कृषि में कृषि फार्म या खेत का आकार छोटा होता है।2. इसमें खेतों का आकार बड़ा होता है।
3. इस कृषि में मशीनों, कीटनाशकों तथा रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग नहीं किया जाता।3. इस कृषि में उन्नत बीज, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक तथा मशीनों का अधिक प्रयोग किया जाता है।
4. यह कृषि अधिकतर अल्पविकसित और विकासशील देशों में की जाती है।4. यह कृषि मुख्यतः विकसित देशों में की जाती है।

प्रश्न 13.
व्यापारिक पशुपालन की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
व्यापारिक पशुपालन की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-

  1. चरवाहे स्थाई रूप से पशुपालन करते हैं तथा बड़ी संख्या में पशुओं को रखते हैं।
  2. व्यापारिक पशुपालन का उद्देश्य दूध, घी, मक्खन, पनीर, मांस तथा ऊन का अधिक-से-अधिक उत्पादन करके उसे बाजार में बेचकर अधिक लाभ कमाना है।
  3. कृषक पशुओं के लिए चारा उगाते हैं तथा उन्हें चारे की तलाश में इधर-उधर नहीं भटकना पड़ता।
  4. पशुओं के लिए पशुशालाएँ तथा स्थायी निवास बनाए जाते हैं।
  5. पशुओं के पीने के लिए स्वच्छ जल की व्यवस्था की जाती है।
  6. व्यापारिक पशुपालन में पशुओं के प्रजनन, नस्ल-सुधार तथा बीमारियों के उपचार की उचित व्यवस्था की जाती है।
  7. पश पदार्थों के विशिष्टीकरण पर बल दिया जाता है।
  8. पशुओं से प्राप्त पदार्थों का राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार किया जाता है।

प्रश्न 14.
ऋतु प्रवास (Transhumance) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
अथवा
ऋतु प्रवास से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
चलवासी पशुचारण का व्यवसाय चलवासी चरवाहों (Nomadic Pastoral Population) द्वारा किया जाता है। इन लोगों का प्राकृतिक चरागाहों तथा पशुओं दोनों से घनिष्ठ संबंध है। पशुचारण उन क्षेत्रों में किया जाता है जहाँ पर्याप्त मात्रा में चरागाह (घास के मैदान) तथा पानी की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। जहाँ चरागाहों का अच्छा विकास हुआ है, वहाँ गाय, बैल पाले जाते हैं, जबकि कम घास वाले क्षेत्रों में भेड़, बकरियां पाली जाती हैं। शुष्क तथा अर्द्धशुष्क प्रदेशों में घोड़े, गधे और ऊँट पाले जाते हैं तथा शीत तथा टुंड्रा प्रदेशों में रेडियर मुख्य पशु है। पर्वतीय क्षेत्रों में चलवासी चरागाहों द्वारा यह पशुचारण किया जाता है। शीत ऋतु में ये लोग अपने पशुओं को लेकर घाटियों में आ जाते हैं तथा ग्रीष्म ऋतु में ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में जहाँ बर्फ पिघल जाती है, अपने पशओं को लेकर चले जाते हैं। कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश में इस प्रकार का मौसमी स्थानांतरण होता है। कश्मीर के गज्जर इस प्रकार का पशुपालन करते हैं। इस प्रकार के चलवासी पशुचारण को ऋतु-प्रवास (Transhumance) कहते हैं।

प्रश्न 15.
गहन निर्वाह कृषि से क्या अभिप्राय है? इसके दो मुख्य प्रकारों व विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर:
गहन निर्वाह कृषि-यह कृषि की वह पद्धति है जिसमें अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए प्रति इकाई भूमि पर पूँजी और श्रम का अधिक मात्रा में निवेश किया जाता है। छोटी-छोटी जोतों और मशीनों के अभाव के कारण यद्यपि प्रति व्यक्ति उपज कम होती है। इस प्रकार की कृषि मानसून एशिया के घने बसे देशों में की जाती है।
प्रकार-गहन निर्वाह कृषि के दो प्रकार हैं-
1. चावल प्रधान गहन निर्वाह कृषि-मानसून एशिया के उन देशों में जहाँ गर्मी अधिक और वर्षायुक्त लंबा वर्धनकाल पाया जाता है, वहाँ चावल एक महत्त्वपूर्ण फसल होती है। अधिक जनसंख्या घनत्व के कारण खेतों का आकार छोटा होता है और कृषि कार्य में कृषक का पूरा परिवार लगा रहता है। यहाँ के भारत, चीन, जापान, म्याँमार, कोरिया, फिलीपींस, मलेशिया, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों में चावल की माँग अधिक है। इस कृषि में अधिक वर्षा के कारण सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2. चावल रहित गहन निर्वाह कृषि-मानसून एशिया के अनेक भागों में उच्चावच जलवायु, मृदा तथा भौगोलिक दशाएँ चावल की खेती के लिए अनुकूल नहीं हैं । ऐसे ठंडे और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में उत्तरी चीन, मंचूरिया, उत्तरी कोरिया एवं उत्तरी जापान में चावल की फसल उगाना संभव नहीं है। यहाँ चावल की अपेक्षा गेहूँ, सोयाबीन, जौ एवं सोरघम बोया जाता है। इसमें सिंचाई द्वारा कृषि की जाती है।

गहन निर्वाह कृषि की विशेषताएँ-

  • जनसंख्या के अधिक घनत्व के कारण खेतों का आकार छोटा होता है।
  • कृषि की गहनता इतनी अधिक है कि एक वर्ष में तीन या चार फसलें उगाई जाती हैं।
  • अंतर्फसली कृषि यहाँ कृषि की गहनता का एक अन्य उदाहरण प्रस्तुत करती है।
  • इस प्रकार की कृषि में खेत व पशु समूह आत्म-निर्भर होते हैं।

निष्कर्ष-गहन कृषि के क्षेत्रों में रासायनिक खादों, फफूंदी नाशक एवं कीटनाशक दवाओं तथा सिंचाई सुविधाओं का प्रयोग होने से परंपरागत जीविका कृषि से वाणिज्यिक कृषि की कुछ विशेषताएँ विकसित हो गई हैं।

प्रश्न 16.
गेहूँ सबसे अधिक विस्तृत क्षेत्र में उगाया जाने वाला खाद्यान्न क्यों है?
उत्तर:
गेहूँ एक शीतोष्ण कटिबंधीय तथा संसार की प्रमुख खाद्यान्न फसल है। गेहूँ की कृषि 25 सें०मी० से 100 सें०मी० वार्षिक वर्षा वाले प्रदेशों में सफलतापूर्वक हो जाती है। विश्व के आधे भू-भाग पर 25 सें०मी० से 100 सें०मी० वर्षा होती है। इसलिए गेहूँ सबसे अधिक विस्तृत क्षेत्र में उगाया जाता है। दूसरे गेहूँ की अत्यधिक किस्में होने के कारण इसे संसार के किसी न किसी भाग पर बोया या काटा जा रहा होता है।

प्रश्न 17.
वाणिज्यिक कृषि में फसलों का विशिष्टीकरण क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
वाणिज्यिक कृषि का मुख्य उद्देश्य कृषि उत्पादों को बाजार में बेचने के लिए उत्पन्न करना है। इसमें मुख्य रूप से व्यापारिक दृष्टिकोण होता है। इस प्रकार की कृषि में खाद्यान्नों का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है। यह कृषि विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में की जाती है। इस प्रकार की कृषि में एक प्रकार की फसल पर अधिक बल दिया जाता है जिससे उत्पाद का निर्यात किया जा सके। इसमें अधिकतर कार्य मशीनों से किए जाते हैं तथा कृषि में आधुनिक तकनीकों को अपनाकर फसलों का विशिष्टीकरण करना आवश्यक होता है जिससे अधिक-से-अधिक उपज उत्पन्न करके अधिक-से-अधिक लाभ कमाया जा सके।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मानव क्रियाकलापों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानव समाज अपने विकास के लंबे दौर में अपनी आवश्यकताओं और अस्तित्व के लिए भौतिक पर्यावरण पर निर्भर रहा है। हिमयुगों के प्रतिकूल वातावरण में आदिमानव गुफाओं में रहने को विवश था। धीरे-धीरे पत्थरों की रगड़ से आदि मानव ने आग का आविष्कार किया। तत्पश्चात जलवायु में परिवर्तन हुए और पाषाण युग में मनुष्य पूर्णतया प्रकृति पर निर्भर रहा। मानव की आवश्यकताएँ सीमित थीं परंतु फिर भी जीवन बड़ा कठिन था। मानव समाज अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए तथा पेट भरने के लिए जंगलों में आखेट करता था। इस युग में मानव ने पत्थरों के हथियार व सामान्य औजार बनाने सीख लिए थे।

बाद में कृषि आधारित समाज का विकास हुआ जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई। नदी-घाटियों की उपजाऊ मिट्टी में मानव ने कृषि प्रारंभ की। हल के आविष्कार से घास के मैदानों का खेती के लिए प्रयोग शुरु हुआ। कृषि से उत्पादित पदार्थों पर पशुपालन को प्रोत्साहन मिला। इस प्रकार मानव ने पशुओं से दूध और दुग्ध पदार्थ प्राप्त किए। धीरे-धीरे पशुओं की खाल से वस्त्र तथा जूते आदि बनाने आरंभ किए। इस प्रकार आखेटी मानव अब कृषक बन गया। कृषि की नींव डालने में निम्नलिखित चार घटक महत्त्वपूर्ण थे

  • भोजन बनाने तथा उसे पकाने के लिए आग का आविष्कार
  • फसलों की खेती के लिए हल का आविष्कार
  • पशुपालन अर्थात् पशुओं को घरेलू बनाना
  • स्थायी जीवन के परिणामस्वरूप गाँवों का बसाव।

कृषि क्रांति के साथ सामाजिक परिवर्तन हुए। कृषि ने मानव को सुरक्षा, स्थायित्व और व्यवस्थित जीवन दिया। खेती से काफी मात्रा में खाद्य सामग्री उपलब्ध होने से लोगों को शिल्प विकसित करने के लिए पर्याप्त समय और सुविधा मिली। मानव को सौंदर्यात्मक बोध होने लगा। शिल्पियों ने अपनी बनाई वस्तुओं का भोजन तथा अन्य वस्तुएँ प्राप्त करने के लिए व्यापार किया। व्यापार से नए मार्ग खुले, जनसंख्या बढ़ी। परिणाम यह हुआ कि लोग छोटे-मोटे शिल्प कार्यों तथा विभिन्न वस्तुओं के छोटे स्तर के उत्पादन कार्यों में लग गए। जीवन-यापन की दशा सुधरी और गाँवों का आकार बढ़ने लगा तथा उपजाऊ मैदानों व नदियों के तट पर अनेक बड़े व सुव्यवस्थित नगरों का उदय हुआ।

औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) ईसा से लगभग 10,000 वर्ष पूर्व धातु युग का आरंभ हुआ। इस युग में मानव ने धातुओं का प्रगलन, शोधन तथा उनके यंत्र बनाने की कला सीख ली थी। हाथ से काम करके छोटे पैमाने पर वस्तुओं के उत्पादन के तरीके की समाप्ति और मशीनों के जरिए बड़े पैमाने पर उत्पादन की शुरुआत ही औद्योगिक क्रांति है। 1763 में जेम्स वाट द्वारा भाप के इंजन के आविष्कार ने औद्योगिक क्रांति की आधारशिला रखी। औद्योगिक समाज में उत्पादन और उपभोग में भारी वृद्धि हुई। ऊर्जा के गैर-नवीकरणीय संसाधनों के इस्तेमाल में भारी बढ़ोतरी हुई। साथ ही प्रदूषण, संसाधनों का लगातार कम होना, जनसंख्या का बढ़ना तथा अमीरों द्वारा गरीबों के शोषण जैसी समस्याएँ बढ़ती चली गईं। परिणामस्वरूप औद्योगिक ढांचे से लोगों की आस्था डगमगाने लगी।

20वीं शताब्दी के अंत में ज्ञान का प्रचार और प्रसार एक महत्त्वपूर्ण व्यवसाय बनने लगा। फलस्वरूप विश्व में सूचना क्रांति का आगमन हआ। सचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रयोग ने लोगों को रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर प्रदान किए।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

प्रश्न 2.
कृषि विकास की प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण दिशाओं तथा परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कृषि विकास की प्रक्रिया में आदिकाल से आधुनिक काल तक अनेक महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आए। प्राचीन एवं आदिमकालीन कृषि में स्थानांतरी कृषि की जाती थी जो अब भी संसार के कुछ भागों में प्रचलित है। इस प्रकार की कृषि में जंगलों में आग लगाकर उसकी राख को मिट्टी के साथ मिलाकर फसलें बोई जाती हैं। सामान्यतः तीन चार साल तक फसलों का उत्पादन करने के बाद जब इन खेतों की मिट्टी अनुपजाऊ हो जाती है, तब इन खेतों को खाली छोड़ दिया जाता है। स्थानांतरी कृषि ने लोगों को एक स्थान पर अधिक समय के लिए स्थाई रूप से रहने को प्रेरित किया। तत्पश्चात् अनुकूल जलवायु एवं उपजाऊ मिट्टी वाले क्षेत्रों में स्थाई कृषि प्रणाली का प्रारंभ हुआ। इसमें किसान एक निश्चित स्थान पर स्थाई रूप से रह कर निश्चित भूमि में कृषि करने लगा।

अठारहवीं शताब्दी में यूरोप में जन्मी औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप कृषि के मशीनीकरण में वृद्धि हुई। कृषि उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। अनेक देशों में फसलं प्रतिरूप बदल गए। कृषि का विशिष्टीकरण किया गया। प्रमुख फसलें; जैसे कपास, गन्ना, चावल, चाय तथा रबड़ इत्यादि को यूरोपीय कारखानों में संशोधित किया गया। तब यूरोप में इन फसलों की मांग तेजी से बढ़ने लगी। इनमें से कुछ फसलों की बड़े पैमाने पर व्यापारिक कृषि प्रारंभ की गई जिसे रोपण कृषि कहते हैं। रोपण कृषि में एक फसल के उत्पादन के लिए बड़े-बड़े बागान बनाए गए जिनका वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन किया गया। इनका मुख्य उद्देश्य व्यापार द्वारा धन अर्जित करना था।

उत्तरी अमेरिका में यंत्रीकरण के प्रभाव से कृषकों को उन वस्तुओं के उत्पादन को बढ़ाने तथा विशिष्टीकरण के योग्य बनाने पर जोर दिया गया, जिन्हें अधिकतम लाभ के साथ बेचा जा सके। इस प्रकार विशिष्ट व्यापारिक कृषि प्रणाली का उदय हुआ जिससे अनेक फसल प्रदेशों का सीमांकन हुआ; जैसे गेहूं पेटी, कपास पेटी, मक्का पेटी तथा डेयरी कृषि इत्यादि । इसके अतिरिक्त रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशक दवाओं तथा उत्तम बीजों के प्रयोग से फसलों के प्रति एकड़ उत्पादन में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई।

प्रश्न 3.
संसार में फसलों के वितरण प्रतिरूप को भौतिक पर्यावरण कैसे प्रभावित करता है? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भौतिक पर्यावरण फसलों के वितरण प्रतिरूप के लिए कुछ विस्तृत सीमाएँ निर्धारित करता है, जिनके भीतर किसी खास फसल को अच्छे ढंग से उगाया जा सकता है। भौतिक पर्यावरण के वे तत्त्व, जो फसलों के वितरण प्रतिरूप को प्रभावित करते हैं, निम्नलिखित हैं
1. जलवायु (Climate) – किसी निश्चित फसल के क्षेत्र को सीमांकित करने में जलवायु के दो महत्त्वपूर्ण कारक तापमान और वर्षा हैं।
(i) तापमान (Temperature) – यह फसलों के वितरण को प्रभावित करने वाला महत्त्वपूर्ण कारक है। उपयुक्त तापमान बीजों को अंकुरण से लेकर फसलों के पकने तक आवश्यक है। तापमान की आवश्यकता के आधार पर फसलों को दो वर्गों में बांटा गया है
(क) उष्ण कटिबंधीय अर्थात् ऊंचे तापमान में उगने वाली फसलें; जैसे चावल, चाय, कहवा, गन्ना इत्यादि। (ख) शीतोष्ण कटिबंधीय अर्थात् निम्न तापमान की दशाओं में उगने वाली फसलें; जैसे गेहूं, जौं, राई इत्यादि।

(ii) वर्षा (Rainfall) – मिट्टी में नमी की मात्रा फसलों की वृद्धि के लिए आवश्यक है। यह नमी वर्षा से प्राप्त होती है। विभिन्न . फसलों के लिए जल की आवश्यकता में अंतर पाया जाता है; जैसे गेहूं की खेती के लिए 75 सें०मी० वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। जबकि चावल की खेती के लिए 125 से 200 सें०मी० वार्षिक वर्षा आवश्यक है। अतः फसलों के लिए जल की एक आदर्श मात्रा की आवश्यकता होती है। जल की कमी को सिंचाई के साधनों द्वारा भी पूरा किया जा सकता है।

गेहूं को 25 सें०मी० वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में भी उगाया जा सकता है क्योंकि सिंचाई द्वारा आवश्यक जलापूर्ति फसल के लिए संभव हो सकती है। . 2. मृदा (Soil)-मिट्टी भूपर्पटी की ऊपरी सतह का आवरण है। चट्टानों के अपक्षय तथा जीव-जंतुओं के अवशेषों से मिट्टी का निर्माण होता है। मिट्टी एक धरातलीय पदार्थ है जिसमें परतें पाई जाती हैं। मिट्टी जैविक तथा अजैविक दोनों पदार्थों के मिश्रण से बनती है।

एच० रॉबिंसन के अनुसार, “मिट्टी से आशय चट्टानों पर बिछी धरातल की सबसे ऊपरी परत से है जो असंगठित या ढीले पदार्थों से निर्मित होती है तथा जिन पर पौधों की वृद्धि हो सकती है।” मिट्टी में बारीक कण, ह्यूमस तथा विभिन्न खनिज पदार्थ मिले होते हैं।

मिट्टी एक प्राकृतिक संसाधन है। मिट्टी की उपजाऊ शक्ति पर कृषि तथा विभिन्न फसलों की उत्पादकता आधारित है। मिट्टी की परत के नष्ट होने से इसकी उत्पादकता शक्ति कम हो जाती है जिससे फसलों का उत्पादन कम हो जाता है।

मिट्टी में फसलों के लिए आवश्यक प्रमुख पोषक तत्त्व नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम तथा सल्फर आदि होते हैं। इसके अतिरिक्त मिट्टी में कुछ गौण पोषक तत्त्व; जैसे जिंक और बोरोन आदि भी पाए जाते हैं। मिट्टी का उपजाऊपन मूल चट्टानों की सरंचना तथा जलवायुवीय तत्त्वों द्वारा निर्धारित होता है। उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में भारी वर्षा के कारण मिट्टी के पोषक तत्त्व बह जाते हैं जबकि शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में मिट्टी के पोषक तत्त्व अधिक पाए जाते हैं। अधिक उपजाऊ और गहरी मिट्टी में उत्पादन अधिक होता है। फलस्वरूप इन क्षेत्रों में सघन जनसंख्या निवास करती है। इसके विपरीत अनुपजाऊ और कम गहरी मिट्टी में कृषि उत्पादन कम होता है तथा जनसंख्या घनत्व और लोगों का जीवन स्तर दोनों निम्न होते हैं।

3. उच्चावच (Relief) – उच्चावच के तीन प्रमुख तत्त्व होते हैं जो कृषि क्रियाओं के प्रतिरूप को प्रभावित करते हैं। ये हैं-

  • ऊंचाई तथा कृषि
  • ढाल और
  • धरातल।

(i) ऊंचाई तथा कृषि (Height and Agriculture) – ऊंचाई बढ़ने पर वायुदाब घटता है तथा तापमान भी कम होता जाता है। ऊंचाई के साथ मिट्टी की परत पतली हो जाती है तथा वह कम उपजाऊ होती है। इसलिए यहाँ कृषि क्रियाएँ सीमित हो जाती हैं।

(ii) ढाल (Slope) – ढाल की दिशा कृषि को अत्यधिक प्रभावित करती है। उत्तरी गोलार्द्ध में दक्षिणवर्ती ढाल उत्तरवर्ती ढाल की अपेक्षा अधिक समय तक तेज धूप प्राप्त करते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में तीव्र ढाल वाले क्षेत्रों में मृदा अपरदन का जोखिम बना रहता है।

(ii) धरातल (Surface) – सामान्यतः कृषि क्रियाओं के लिए समतल भूमि को आदर्श माना जाता है। ऊबड़-खाबड़ धरातल पर कृषि क्रियाएँ असुविधाजनक होती हैं। सामान्य ढाल वाला धरातल जल निकासी के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 4.
चावल की फसल के लिए भौगोलिक दशाओं का वर्णन करें। विश्व में इसके वितरण प्रतिरूप का वर्णन करें।
अथवा
विश्व में चावल की फसल के स्थानिक वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चावल विश्व की लगभग आधी जनसंख्या का भोज्य पदार्थ है। यह एशिया महाद्वीप की एक प्रमुख फसल है। एशिया महाद्वीप में चावल प्रमुख खाद्यान्न है। एशिया के बड़े देशों; जैसे चीन, भारत, जापान, म्यांमार, थाइलैंड आदि में चावल एक प्रमुख खाद्यान्न है। इतिहासकार चावल की कृषि का शुभारंभ चीन से मानते हैं। चीन से ही यह भारत तथा अन्य दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों में विकसित हुआ। 15वीं शताब्दी से यूरोपीय देशों में तथा 17वीं शताब्दी से संयुक्त राज्य अमेरिका में इसका उत्पादन प्रारंभ हुआ। धीरे-धीरे विश्व के अनेक देशों में भी इसका विस्तार हुआ।

उपज की भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions of Yield) – चावल उष्ण कटिबन्धीय पौधा है जिसके लिए उच्च तापमान तथा अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है। चावल की फसल के लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ अनुकूल होती हैं
1. तापमान (Temperature) – चावल की कृषि के सफल उत्पादन के लिए 21° सेल्सियस से 27° सेल्सियस के मध्य तापमान की आवश्यकता होती है। चावल की फसल के पकते समय तापमान अपेक्षाकृत अधिक होना चाहिए और बोते समय 21° सेल्सियस तापमान पर्याप्त रहता है।

2. वर्षा (Rainfall) – वर्षा चावल के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। चावल की कृषि के लिए 125 सें०मी० से 200 सें०मी० तक वर्षा की आवश्यकता होती है। चावल के पौधे का जब क्यारियों में रोपण करते हैं तो प्रारंभ के एक महीने तक खेत में लगभग 15 सें०मी० पानी भरा होना चाहिए। फसल के पकने से पूर्व खेत को पानी से मुक्त रखा जाना चाहिए। पकते समय तेज धूप तथा स्वच्छ आकाश आवश्यक है। जिन क्षेत्रों में वर्षा की कमी रहती है, वहाँ जल की कमी को सिंचाई द्वारा पूरा किया जाता है।

3. मिट्टी (Soil) – विश्व के अनेक भागों में चावल विभिन्न प्रकार की मिट्टी में पैदा होता है लेकिन इसके लिए जलोढ़ मिट्टी सर्वोत्तम मानी जाती है। नदियों के डेल्टाओं तथा बाढ़ के मैदानों में इस प्रकार की मिट्टी पाई जाती है। जलोढ़ मिट्टी में पानी धारण करने की क्षमता अधिक होती है। लंबे समय तक मिट्टी में नमी रहती है जो चावल की पैदावार के लिए आवश्यक है।

4. श्रम (Labour) – चावल की कृषि में अधिकांश कार्य हाथ से किया जाता है। इसलिए पर्याप्त श्रम की आवश्यकता होती है। चावल को खुरपे की कृषि (Hoe Agriculture) भी कहते हैं। इसमें बीज बोना, उनका प्रतिरोपण करना, निराई-गुड़ाई आदि सभी कार्य हाथ से किए जाते हैं। विगत वर्षों में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने धान के पौधों के प्रतिरोपण के लिए मशीन का आविष्कार किया है लेकिन अभी यह प्रचलन में नहीं है।

चावल बोने की विधियाँ (Methods of Sowing Rice)-विश्व में चावल निम्नलिखित तीन विधियों से बोया जाता है-
1. छिड़ककर या छिड़काव विधि (Broadcasting Method) – यह विधि उन क्षेत्रों में प्रयोग में लाई जाती है, जहाँ सिंचाई के साधनों का अभाव हो। चावल की कृषि वर्षा पर ही निर्भर है। इस विधि में खेत में हाथ से बीज छिड़ककर फिर हल चलाते हैं। इस विधि में पैदावार कम होती है।

2. हल चलाकर (Drilling Method) – इस विधि में एक व्यक्ति हल चलाता है तथा दूसरा व्यक्ति उसके पीछे नाली में बीज डालता जाता है। यह विधि शुष्क प्रदेशों में प्रयुक्त की जाती है। इसमें भी पैदावार अपेक्षाकृत कम होती है।

3. प्रतिरोपण विधि (Transplantation Method) – इस विधि में पहले नर्सरी में पौध तैयार की जाती है। पौध 30 से 40 दिन में तैयार हो जाती है। उसके बाद खेत में पानी डालकर हल चलाया जाता है तथा पौध का रोपण तैयार किए गए खेत में किया जाता है। यह विधि प्रायः अधिक वर्षा या सिंचाई के साधनों की सुलभता वाले प्रदेशों में अपनाई जाती है। दक्षिणी-पूर्वी एशिया में अधिकांशतः यही विधि अपनाई जाती है। इस विधि में प्रति हेक्टेयर पैदावार अधिक होती है। पौधों के प्रतिरोपण के बाद लगभग . 20-30 दिन तक खेत में पर्याप्त पानी रहना चाहिए।

चावल का विश्व वितरण (World Distribution of Rice)-विश्व का लगभग 92% चावल दक्षिणी पूर्वी एशिया में उत्पन्न किया जाता है। पिछले कछ वर्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका तथा ब्राजील में भी चावल के उत्पादन में तेजी से वृद्धि हुई है। दक्षिणी पूर्वी एशिया के देशों में चीन, भारत, इंडोनेशिया और बांग्लादेश विश्व का लगभग 70% चावल उत्पन्न करते हैं। इन चा थाइलैंड, जापान, वियतनाम, फिलीपींस, कोरिया आदि प्रमुख चावल उत्पादक देश हैं।

1. चीन (China) – चीन चावल का प्रमुख उत्पादक देश है जो विश्व का लगभग 36% चावल उत्पन्न करता है। यहाँ प्रतिवर्ष लगभग 17 करोड़ मीट्रिक टन चावल पैदा किया जाता है। चीन में चावल उत्पादन के प्रमुख चार क्षेत्र निम्नलिखित हैं

  • जेच्चान बेसिन
  • ह्यांग-हो घाटी का निचला मैदान
  • सिक्यांग तथा यांग्त्सी बेसिन प्रांत
  • दक्षिणी-पूर्वी तटीय प्रांत।

चीन में नदियों की घाटियों तथा डेल्टाई भागों में चावल की कृषि अधिक विकसित अवस्था में है। दक्षिणी तटीय मैदान में वर्ष में चावल की तीन फसलें पैदा की जाती हैं। इसी कारण दक्षिणी चीन को चावल का कटोरा (Rice Bowl) भी कहते हैं। पिछले कुछ दशकों में चीन में चावल के क्षेत्र में वृद्धि के साथ-साथ प्रति हेक्टेयर उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। चीन में भारत की अपेक्षा चावल के अंतर्गत कम क्षेत्रफल होने के बावजूद भी चावल का उत्पादन भारत से अधिक है।

2. भारत (India) – चीन के बाद भारत दूसरा प्रमुख चावल उत्पादक देश है। यहाँ विश्व का लगभग 17% चावल उत्पन्न किया जाता है। भारत में कुल कृषि योग्य भूमि के लगभग 24% भाग पर चावल की खेती की जाती है। भारत में जहाँ वर्षा 150 सें०मी० से अधिक होती है, उन क्षेत्रों में चावल उगाया जाता है। भारत में प्रति हेक्टेयर उत्पादन चीन, जापान तथा अन्य कई देशों से कम है। भारत में चावल के उत्पादन क्षेत्रों को चार वर्गों में रखा जा सकता है

  • पूर्वांचल में असम, मेघालय व मणिपुर राज्य।
  • मध्य गंगा तथा निचला मैदान (पूर्व उत्तर प्रदेश, बिहार तथा बंगाल)।
  • पूर्वी तट (ओडिशा, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु के तटीय मैदान)।
  • पश्चिमी तट (केरल, कर्नाटक तथा महाराष्ट्र के तटीय मैदान)।

3. इंडोनेशिया (Indonesia) – चावल इंडोनेशिया की प्रमुख फसल है। यहाँ देश की कल कृषि योग्य भूमि के 45% भाग पर चावल की कृषि की जाती है। इंडोनेशिया विश्व का लगभग 8% चावल उत्पन्न करने वाला विश्व का तीसरा प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। इसके अतिरिक्त सुमात्रा, कालिमंटन और सुलावेसी द्वीपों पर भी चावल की कृषि की जाती है। चावल अधिकांशतः तटीय तथा दलदली भू-भागों में पैदा किया जाता है। जावा द्वीप की लावा युक्त मिट्टी तथा संवहनीय वर्षा चावल की पैदावार के लिए विशेषतया अनुकूल है। चावल यहाँ के निवासियों का मुख्य भोजन होने के कारण यह देश अपनी आवश्यकता का पूरा चावल उत्पन्न नहीं कर पाता, इसलिए यह विदेशों से भी चावल आयात करता है।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ 1

4. बांग्लादेश (Bangladesh) – बांग्लादेश विश्व का चौथा प्रमुख चावल उत्पादक देश है। यहाँ विश्व का लगभग 5% चावल उत्पन्न होता है। यहाँ लगभग सभी जिलों में चावल की खेती की जाती है लेकिन गंगा ब्रह्मपुत्र का डेल्टाई भाग चावल के उत्पादन में विशेष स्थान रखता है। इस क्षेत्र में चावल तथा जूट दो ही प्रमुख फसलें हैं। गंगा ब्रह्मपुत्र के डेल्टाई भाग में लगभग 60% भाग पर चावल की कृषि की जाती है। डेल्टाई भाग में वर्ष में चावल की तीन फसलें उगाई जाती हैं।

5. थाइलैंड (Thailand) – थाइलैंड में विश्व का लगभग 4% चावल उत्पन्न किया जाता है। देश की कुल कृषि योग्य भूमि के लगभग 90% क्षेत्र में चावल की कृषि की जाती है। इस देश में मीकांग नदी की घाटी तथा डेल्टा की घाटी चावल के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं। थाइलैंड विश्व के प्रमुख चावल निर्यातक देशों में से एक है। बैंकॉक बंदरगाह द्वारा देश का लगभग 33% चावल निर्यात किया जाता है। इस देश के चावल के प्रमुख ग्राहक बांग्लादेश, इंडोनेशिया, जापान तथा मलेशिया हैं। थाइलैंड में सिंचाई की सुविधाओं का अभाव है। इस कारण अधिकांश चावल की कृषि वर्षा पर आधारित है। इसलिए जहाँ सिंचाई की सुविधा नहीं है, वहाँ प्रति हेक्टेयर पैदावार कम है।

6. जापान (Japan) – चावल जापान की प्रमुख कृषि फसल है। यहाँ के लोगों का मुख्य भोजन चावल ही है। इस देश में विश्व का लगभग 3% चावल उत्पन्न होता है। चावल की कृषि समुद्री तटीय भागों तथा नदियों की घाटियों में की जाती है। देश की कुल कृषि योग्य भूमि के लगभग 60% क्षेत्र में चावल उत्पन्न होता है लेकिन फिर भी यह अपनी आवश्यकता की पूर्ति नहीं कर पाता और इसे चावल विदेशों से आयात करना पड़ता है। जापान में चावल उत्पन्न करने की विधि सर्वोत्तम है। इसलिए विश्व के अन्य चावल उत्पादक देश इस विधि को अपनाते हैं। जापान के अधिकांश चावल उत्पादक क्षेत्र होंशू द्वीप का दक्षिणी भाग, क्यूशू तथा शिकोक द्वीप हैं। जापान में वर्ष में चावल की दो फसलें उगाई जाती हैं।

उपर्युक्त प्रमुख चावल उत्पादक देशों के अतिरिक्त म्याँमार, वियतनाम, कोरिया, ब्राज़ील, फिलीपींस, द्वीप समूह तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में भी चावल की खेती होती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

प्रश्न 5.
गेहूँ के उत्पादन की भौगोलिक दशाओं का वर्णन करें। विश्व में गेहूँ उत्पादन व वितरण की व्याख्या करें।
अथवा
विश्व में गेहूँ की फसल के स्थानिक (Spatial) वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
खाद्यान्नों में गेहूँ एक महत्त्वपूर्ण तथा उपयोगी खाद्यान्न है जिसकी कृषि प्राचीनकाल से होती आ रही है। प्रस्तर युग में भी स्विट्जरलैंड की झीलों के आसपास के क्षेत्रों में गेहूँ उगाया जाता था। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की खोजों से प्रमाणित हो चुका है कि आज से 4000 वर्ष पूर्व भी सिंधु घाटी में गेहूँ उगाया जाता था। गेहूँ एक पौष्टिक खाद्यान्न है जिसमें प्रोटीन तथा कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है।

उपज की भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions of Yield) – गेहूँ उत्तरी गोलार्ध में 30° से 55° उत्तरी अक्षांशों तथा दक्षिणी गोलार्ध में 30° से 40° दक्षिणी अक्षांशों के मध्य उगाया जाता है। गेहूँ शीतोष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों की उपज है जो मध्य अक्षांशों में उत्पन्न होती है। इसके लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ अनुकूल होती हैं-
1. तापमान (Temperature) – गेहूँ को बोते समय 10° सेल्सियस तथा पकते समय 20° सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। औसत रूप से गेहूँ के लिए 15° से 20° सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। गेहूँ के पकते समय आकाश स्वच्छ (बादलों रहित) होना चाहिए।

2. वर्षा (Rainfall) – गेहूँ शुष्क प्रदेशों की उपज है। इसकी पैदावार के लिए 50 सें०मी० से 75 सें०मी० वर्षा अनुकूल रहती है। 100 सें०मी० से अधिक वर्षा गेहूँ की फसल के लिए हानिकारक होती है।

3. मिट्टी (Soil) – गेहूँ अनेक प्रकार की मिट्टियों में पैदा किया जाता है लेकिन हल्की चिकनी मिट्टी तथा भारी दोमट मिट्टी और बलुई दोमट मिट्टी गेहूँ के लिए अधिक उपयोगी रहती हैं। जिस मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा अधिक हो, उसमें गेहूँ की पैदावार अच्छी होती है।

4. भूमि तथा श्रम (Land and Labour) – गेहूँ के लिए लगभग समतल भूमि की आवश्यकता है। मशीनी कृषि के लिए समतल तथा बड़े-बड़े फार्मों का होना आवश्यक है। गेहूँ के लिए अधिक श्रम की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि अधिकांश कृषि मशीनों से की जाती है। इसकी कृषि विरल जनसंख्या वाले क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक की जाती है।

गेहूँ की किस्में (Kinds of Wheat)-विश्व में गेहूँ विभिन्न जलवायु प्रदेशों में बोया जाता है। साइबेरिया से लेकर उष्ण कटिबंधीय जलवायु प्रदेशों तक गेहूँ की कृषि की जाती है। इसलिए गेहूँ को मुख्य रूप से दो वर्गों में रखा जा सकता है
1. शीतकालीन गेहूँ यह गेहूँ शीत ऋतु के आगमन पर बोया जाता है तथा ग्रीष्म ऋतु के आरंभ में काट दिया जाता है। यह उन क्षेत्रों में बोया जाता है जहाँ साधारण शीत ऋतु होती है। विश्व का अधिकांश गेहूँ (लगभग 80%) इसी मौसम में बोया जाता है।

2. बसंतकालीन गेहूँ यह गेहूँ बसंत ऋतु में बोया जाता है तथा शीत ऋतु के आगमन पर काट लिया जाता है। जहाँ कठोर शीत ऋतु होती है, वहाँ इस प्रकार का गेहूँ बोया जाता है। ऊंचे अक्षांशों में जहाँ शीत ऋतु में बर्फ पड़ती है, वहाँ बसंत ऋतु में गेहूँ बोया जाता है।

गेहूँ का विश्व वितरण (World Distribution of Wheat)-गेहूँ की खेती का विस्तार धरातल के बहुत बड़े क्षेत्र पर है। गेहूँ उत्पादक देशों में मुख्य रूप से चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, रूस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि हैं।
1. चीन (China) – चीन विश्व का प्रथम बड़ा गेहूँ उत्पादक देश है। यह देश विश्व का लगभग 19.6% गेहूँ पैदा करता है। चीन में शीतकालीन तथा बसंतकालीन दोनों प्रकार का गेहूँ पैदा किया जाता है। बसंतकालीन गेहूँ मंचूरिया तथा आंतरिक मंगोलिया में पैदा किया जाता है, जबकि शीतकालीन गेहूँ ह्यांग-हो तथा यांगटीसिक्यांग घाटी में पैदा किया जाता है।

2. भारत (India) – वर्ष 1965 तक भारत का गेहूँ के उत्पादन में विश्व में छठा स्थान था, लेकिन वर्तमान समय में भारत विश्व का दूसरा उत्पादक राष्ट्र है। विश्व के कुल उत्पादन का लगभग 12% गेहूँ भारत उत्पन्न करता है। भारत में गेहूँ की पैदावार 100 सें०मी० वर्षा तक के क्षेत्रों में सफलतापूर्वक की जाती है। जहाँ वार्षिक वर्षा 50 सें०मी० से कम है, वहाँ सिंचाई के साधनों के विकास से गेहूँ उत्पन्न किया जाता है। देश के कुल उत्पादन का लगभग 50% गेहूँ पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब तथा हरियाणा में पैदा किया जाता है। उत्तर प्रदेश भारत का गेहूँ उत्पन्न करने वाला सबसे प्रमुख राज्य है जो देश का लगभग एक-तिहाई गेहूँ पैदा करता है।

3. संयुक्त राज्य अमेरिका (U.S.A.) – संयुक्त राज्य अमेरिका में विश्व का लगभग 10.7% गेहूँ उत्पन्न होता है। अमेरिका में दोनों प्रकार का गेहूँ (बसंतकालीन तथा शीतकालीन) बोया जाता है। बसंतकालीन गेहूँ का क्षेत्र उत्तरी डेकोटा से मोंटाना तक है। यहाँ शीत ऋतु में तापमान कम हो जाने के कारण बर्फ पड़ जाती है। इसलिए इस क्षेत्र में शीतकालीन गेहूँ बोना सम्भव नहीं है। दक्षिणी भाग में शीतकालीन गेहूँ की पेटी है जिसका विस्तार कंसास से पूर्वी कोलोरैडो तथा ओक्लाहोमा तक है।

4. कनाडा (Canada) – कनाडा विश्व का प्रमुख गेहूँ उत्पादक देश है। इस देश में अधिकांश बसंतकालीन गेहूँ उगाया जाता है। गेहूँ मुख्य रूप से प्रेयरी प्रदेश में उत्पन्न किया जाता है। देश का वितरण लगभग 75% गेहूँ इसी क्षेत्र में पैदा किया जाता है। बसंतकालीन गेहूँ का क्षेत्र सास्केच्चान, मैनीटोबा तथा अलबर्टा प्रांत में है। इस क्षेत्र में विनिपेग नगर विश्व की सबसे बड़ी गेहूँ की मंडी है। शीतकालीन गेहूँ के क्षेत्र ओंटारियो तथा क्यूबेक राज्यों के दक्षिणी पूर्वी भाग में स्थित हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ 2

5. रूस (Russia) – रूस में गेहूँ की खेती सहकारी पद्धति से की जाती है। यहाँ शीतकालीन तथा बसंतकालीन दोनों प्रकार का गेहूँ दक्षिणी भाग में अधिक उत्पन्न किया जाता है। गेहूँ की पेटी वोल्गा नदी बेसिन से यूराल क्षेत्र तथा साइबेरिया में बेकॉल झील तक फैली हुई है। साइबेरिया में बसंतकालीन गेहूँ पैदा किया जाता है।

रूस के अतिरिक्त गेहूँ पैदा करने वाले यूरोपीय देशों में यूक्रेन, स्पेन, इटली, हंगरी, रोमानिया, यूगोस्लाविया, फ्रांस, डेनमार्क, नीदरलैंड तथा ग्रेट ब्रिटेन आदि हैं। यूक्रेन तथा फ्रांस यूरोपीय देशों में महत्त्वपूर्ण निर्यातक देश हैं। प्रमुख गेहूँ आयातक देशों में इटली, जर्मनी, ब्रिटेन तथा नीदरलैंड आदि हैं।

6. ऑस्ट्रेलिया (Australia)-दक्षिणी गोलार्द्ध में ऑस्ट्रेलिया गेहूँ का महत्त्वपूर्ण उत्पादक देश है। ऑस्ट्रेलिया विश्व का लगभग 3.6% गेहूँ पैदा करता है। गेहूँ ऑस्ट्रेलिया का प्रमुख खाद्यान्न है तथा यह निर्यातक देश भी है। यहाँ गेहूँ का उत्पादन दो क्षेत्रों में होता है-

  • दक्षिणी-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में मुर्रे-डार्लिंग का बेसिन
  • दक्षिणी-पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया।

प्रश्न 6.
कपास के उत्पादन की भौगोलिक दशाएँ तथा विश्व वितरण का वर्णन करें। अथवा कपास की फसल की भौगोलिक दशा और प्रकार का वर्णन करते हुए विश्व वितरण पर प्रकाश डालें।
उत्तर:
वस्त्र मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है। वस्त्रों के निर्माण में रेशेदार पदार्थों का विशिष्ट योगदान है। रेशेदार पदार्थ विभिन्न प्रकार की वनस्पति तथा जीवों से प्राप्त होते हैं। वनस्पति या कृषिगत फसलों में कपास का महत्त्वपूर्ण स्थान है। सूती कपड़े का निर्माण कपास से ही होता है। सूती कपड़े का प्रचलन विश्व में सबसे अधिक है। कपास एक रेशेदार फूल होता है जो एक झाड़ीनुमा वनस्पति पर लगता है। उस फूल से सूत काता जाता है तथा कपड़े तैयार किए जाते हैं। फूल के अंदर बीज होता है, जिसे बिनौला कहते हैं। यह पशुओं की खली (चारे) के काम आता है तथा दूध में वसा की मात्रा को बढ़ाता है। कपास के पौधे की सूखी लकड़ी ईंधन के रूप में प्रयोग की जाती है।

उपज की भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions of Yield) कपास शुष्क मानसूनी जलवायु की उपज है। इसके लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ अनकल होती हैं-
1. तापमान (Temperature) – कपास के लिए अधिक तापमान वाले क्षेत्र अनुकूल रहते हैं। यह ग्रीष्म ऋतु में बोया जाता है तथा शीत ऋतु के आगमन पर इसका फूल तैयार हो जाता है। कपास का वर्धनकाल लगभग 6 महीने का होता है। कपास के लिए 21° सेल्सियस से 27° सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है।

2. वर्षा (Rainfall) – 50 सें०मी० से 100 सें०मी० वर्षा वाले क्षेत्र कपास के लिए उपयुक्त रहते हैं। इससे कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई से कपास की खेती की जाती है। अंतिम दिनों में मेघ-रहित तथा वर्षा-रहित मौसम आवश्यक है।

3. मिट्टी (Soil) कपास के लिए लावा – युक्त मिट्टी, जिसमें चूने का अंश अधिक मात्रा में हो, अनुकूल रहती है। चीका प्रधान दोमट मिट्टी कपास के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। भारत में लावा-युक्त मिट्टी का क्षेत्र मालवा के पठार में है जिसे कपास की मिट्टी कहते हैं, वहाँ पर्याप्त मात्रा में कपास उत्पन्न होती है। जहाँ मिट्टी में चूने की मात्रा कम हो, वहाँ उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है।

कपास की किस्में (Kinds of Cotton) कपास की प्रायः चार किस्में होती हैं जिन्हें लंबाई के अनुसार बाँटा गया है-
1. अधिक लंबे रेशे वाली कपास (Very Long Staple Cotton)-इसके रेशे की लंबाई 5 सें०मी० से अधिक होती है। ऐसी कपास संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिणी पूर्वी तट, प्यूरिटोरिको तथा पश्चिमी द्वीप समूह के अन्य द्वीपों में बोई जाती है। इसे ‘समुद्र-द्वीपीय कपास’ भी कहते हैं।

2. लंबे रेशे वाली कपास (Long Staple Cotton)-इस प्रकार की कपास का रेशा 3.75 सें०मी० से 5 सें०मी० तक लंबा होता है। इससे उत्तम किस्म का कपड़ा तैयार किया जाता है। ऐसी कपास संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, पेरू तथा चीन में उगाई जाती है।

3. मध्यम रेशे वाली कपास (Medium Staple Cotton)-इस प्रकार की कपास का रेशा 2.5 सें०मी० से 3.75 सें०मी० तक लंबाई वाला होता है। इस प्रकार की कपास मुख्यतः मिस्र में नील घाटी, ब्राज़ील तथा चीन में उगाई जाती है।

4. छोटे रेशे वाली कपास (Small Staple Cotton)-इस प्रकार की कपास का रेशा 2.5 सें०मी० से छोटा होता है। इस प्रकार की कपास मुख्य रूप से भारत, ब्राजील तथा चीन में उगाई जाती है।

कपास का विश्व वितरण (World Distribution of Cotton) – संसार में कपास के क्षेत्र साधारणतया 40° उत्तरी और दक्षिणी अक्षाशों के मध्य फैले हैं। विश्व में कपास के उत्पादन में 19वीं शताब्दी की औद्योगिक क्रांति के बाद वृद्धि हुई। संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, मिस्र, चीन तथा भारत प्रमुख कपास उत्पादक देश हैं।

1. चीन (China) – चीन विश्व का सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है जो लगभग 21% कपास उत्पन्न करता है। इस देश में कपास की खेती प्राचीनकाल से ही हो रही है लेकिन पिछले कुछ दशकों से इसके उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। चीन के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र यांग्टीसिक्यांग की निचली घाटी, हांग-हो और उसकी सहायक नदियों की घाटी तथा सिक्यांग का सिंचित क्षेत्र है। चीन की अधिकांश कपास देश में ही खप जाती है क्योंकि यहाँ सूती वस्त्रों की माँग अधिक है।

2. संयुक्त राज्य अमेरिका (U.S.A.) – संयुक्त राज्य अमेरिका में कपास की पेटी का विस्तार 37° उत्तरी अक्षांश लंबाई में 100° पश्चिमी देशांतर तक फैली है जिसको संयुक्त राज्य अमेरिका की कपास की मेखला के नाम से जाना जाता है। इस पेटी के अंतर्गत कैरोलीना, मिसीसीपी, जोर्जिया, अलाबामा, लुसियाना, अर्कनासौस, टैक्सास तथा ओक्लाहामा राज्य सम्मिलित हैं। टैक्सास संयुक्त राज्य अमेरिका का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।

3. भारत (India) भारत में लंबे रेशे की कपास का उत्पादन कम होता है। भारत में अधिकांशतः छोटे रेशे की कपास ही उत्पन्न होती है। भारत में विश्व के कुल कपास क्षेत्र का लगभग 20% भाग है लेकिन उत्पादन लगभग 11% है। भारत में गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा प्रमुख कपास उत्पादक राज्य हैं। इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में
भी कपास उत्पन्न की जाती है।

4. ब्राज़ील (Brazil) ब्राज़ील में साओ – पालो मुख्य कपास उत्पादक राज्य है। ब्राज़ील कुछ कपास का निर्यात भी करता है।

5. मिस्र (Egypt) – मिस्र की कपास अपने गुण तथा लंबे रेशे के लिए विश्व-भर में प्रसिद्ध है। यहाँ आसवान बाँध के निर्माण के बाद सिंचाई की सुविधाओं के कारण कपास की खेती का निरंतर विस्तार हुआ है और उत्पादन में वृद्धि हुई है। कपास की खेती का विस्तार दक्षिणी मिस्र में अधिक हुआ है। मिस्र की अर्थव्यवस्था में कपास का महत्त्वपूर्ण योगदान है। इन प्रमुख उत्पादक देशों के अतिरिक्त पाकिस्तान, टर्की तथा सूडान कपास के उत्पादक देश हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ 3

प्रश्न 7.
गन्ने के उत्पादन की भौगोलिक दशाओं तथा विश्व में इसके वितरण का वर्णन करें।
उत्तर:
गन्ना दक्षिणी एशिया में उगने वाला सेकेरम ऑफिसिनरस (Saccharum Officinarus) नामक वनस्पति का वंशज है। इसका पौधा लगभग 2 मीटर तक लंबा होता है जो बांस के पौधे से मिलता-जुलता है। इस पौधे का मूल स्थान भारत बताया जाता है। इस पौधे की घास जंगली अवस्था में बंगाल की खाड़ी के तट पर उगी हुई मिली। यहीं से यह घास सतलुज गंगा के मैदान तथा दक्षिणी एशिया के देशों में ले जाई गई। पृथ्वी पर पाई जाने वाली कई वनस्पतियों में चीनी का अंश है जिनमें चुकंदर, ताड़, खजूर, नारियल, अंगूर तथा आड़ प्रमुख हैं, लेकिन गन्ना चीनी का सबसे बड़ा स्रोत है जो विश्व की लगभग 65% चीनी तैयार करता है। प्राचीनकाल में गन्ने से गुड़ तथा शक्कर घरों में कोल्हू से रस निकालकर बनाई जाती थी लेकिन अब वैज्ञानिक तरीके से मिलों में चीनी तैयार की जाती है।

उपज की भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions ofYield) गन्ना उष्णार्द्ध जलवायु का पौधा है, जिसके लिए ऊंचा तापमान तथा अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है। धरातल पर गन्ने की खेती उष्ण कटिबन्धीय प्रदेशों में भूमध्य रेखा से 30° उत्तरी तथा दक्षिणी अक्षांशों के मध्य होती है। गन्ने की कृषि के लिए निम्नलिखित दशाएँ अनुकूल होती हैं
1. तापमान (Temperature) – गन्ने की उपज के लिए 20° सेल्सियस से 30° सेल्सियस तक तापमान की आवश्यकता होती है। जिन क्षेत्रों में तापमान कम होता है, वहाँ वर्धनकाल अपेक्षाकृत बड़ा होता है। 15° सेल्सियस से कम तापमान वाले प्रदेशों में इसकी वृद्धि अवरुद्ध हो जाती है।

2. वर्षा (Rainfall) – गन्ने की कृषि के लिए पर्याप्त मात्रा में वर्षा की आवश्यकता होती है। गन्ने के विकास के समय जितनी अधिक वर्षा होगी, गन्ने में उतना ही रस का संचार होगा। गन्ने की कृषि के लिए 75 सें०मी० से 150 सें०मी० वर्षा की आवश्यकता होती है। जिन क्षेत्रों में वर्षा का औसत कम है, वहाँ सिंचाई द्वारा गन्ने की कृषि की जाती है।

3. भूमि तथा मिट्टी (Land and Soil) – गन्ने की कृषि के लिए समतल मैदानी भाग अनुकूल रहते हैं। दोमट मिट्टी, जिसमें चूने का अंश अधिक हो गन्ने के विकास के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। मिट्टी में नाइट्रोजन तथा पर्याप्त नमी धारण करने की क्षमता होनी चाहिए।

4. श्रम एवं यातायात (Labour and Transport) – गन्ने की खेती में अधिकांश कार्य हाथ से किया जाता है। गन्ने की रोपाई करने, निराई-गुड़ाई करने, उसे काटने तथा मिलों तक पहुँचाने का कार्य मानव श्रम द्वारा ही किया जाता है। इसलिए गन्ने की कृषि में सस्ता श्रम आवश्यक है। गन्ना एक भारी वस्तु है जिसकी परिवहन लागत अधिक आती है क्योंकि खेतों से चीनी मिलों तक गन्ना पहुँचाने के लिए सस्ते तथा सुलभ यातायात के साधनों का होना आवश्यक है। गन्ने को काटने के बाद जल्दी-से-जल्दी मिलों में भेजना पड़ता है वरना इसका रस सूख जाता है तथा चीनी की मात्रा कम निकलती है। गन्ने की खेती को अधिकांशतः बहुत-सी बीमारियाँ लग जाती हैं। अतः कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग किया जाना चाहिए तथा कीड़ा लगे पौधों को खेतों से बाहर जला देना चाहिए।

गन्ने का विश्व वितरण (World Distribution of Sugarcane) विश्व में गन्ने का अधिकांश उत्पादन तीन देशों-ब्राजील, भारत तथा क्यूबा में होता है। इंडोनेशिया, चीन, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया तथा संयुक्त राज्य अमेरिका भी गन्ने के उत्पादक देश हैं।
1. ब्राज़ील (Brazil) ब्राज़ील विश्व का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक देश है। यह देश लगभग एक-चौथाई गन्ना उत्पन्न करता है। गन्ने की कृषि को सरकार द्वारा काफी प्रोत्साहन मिला है। ब्राज़ील में गन्ना उत्पादन निम्नलिखित क्षेत्रों में होता है

  • उत्तरी-पूर्वी तटीय क्षेत्र
  • दक्षिणी मिनास की उच्च भूमि
  • रियो-डी-जेनेरियो का उत्तर-पूर्वी तथा उत्तरी तटीय मैदान
  • साओ-पोलो क्षेत्र।

2. भारत (India) – भारत में संपूर्ण विश्व की अपेक्षा सबसे अधिक क्षेत्रफल पर गन्ना बोया जाता है, लेकिन उत्पादन की दृष्टि से भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। गन्ने का प्रति हेक्टेयर उत्पादन भारत में बहुत कम है। भारत में गन्ने का उत्पादन दो क्षेत्रों में होता है-(i) उत्तरी क्षेत्र इसमें गन्ने के उत्पादन का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश है, (ii) दक्षिणी क्षेत्र उत्पादन के दृष्टिकोण से इस क्षेत्र में तमिलनाडु सबसे प्रमुख राज्य है। इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक अन्य उत्पादक राज्य हैं।

3. क्यूबा (Cuba) – क्यूबा में गन्ने के बड़े-बड़े फार्म हैं। यह देश विश्व में चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। क्यूबा की अर्थव्यवस्था में चीनी का बहुत बड़ा योगदान है। क्यूबा में चीनी की लगभग 160 मिलें हैं। क्यूबा वर्ष 1959 से पूर्व संयुक्त राज्य अमेरिका को अधिकांश चीनी का निर्यात करता था, लेकिन अब अधिकांश निर्यात पश्चिमी यूरोपीय देशों; जैसे रूस तथा चीन को किया जाता है। क्यूबा में गन्ने की खेती सभी द्वीपों में की जाती है। क्यूबा में गन्ने की खेती वैज्ञानिक स्तर पर मशीनों द्वारा की जाती है। क्यूबा चीनी का बहुत बड़ा निर्यातक देश है। इसका अधिकांश निर्यात रूस को किया जाता है।
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4. चीन (China) – चीन में विश्व का लगभग 7% गन्ना पैदा किया जाता है। चीन का तटीय क्षेत्र तथा सिक्यांग बेसिन गन्ने के प्रमुख उत्पादक प्रदेश हैं। देश के उत्तरी भागों में अधिक सर्दी के कारण गन्ना नहीं उगाया जाता।

5. संयुक्त राज्य अमेरिका (U.S.A.) – संयुक्त राज्य अमेरिका में गन्ने का उत्पादन मिसीसिपी नदी के डेल्टाई भाग, लुसियाना राज्य तथा हवाई द्वीपों में किया जाता है। यहाँ की कृषि मशीनी कृषि है। यहाँ चुकंदर से भी चीनी तैयार की जाती है।

6. ऑस्ट्रेलिया (Australia) – ऑस्ट्रेलिया में गन्ने का उत्पादन न्यू साउथ वेल्स के तटीय मैदानों में किया जाता है।

7. पाकिस्तान (Pakistan) – पाकिस्तान में गन्ने की अधिकांश कृषि नहरी सिंचाई द्वारा की जाती है। लाहौर, मुल्तान, लायलपुर, सियालकोट, क्वेटा और रावलपिंडी गन्ने के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं।

प्रश्न 8.
चाय के लिए भौगोलिक दशाएँ तथा विश्व वितरण का वर्णन करें।
उत्तर:
चाय विश्व का प्रमुख पेय पदार्थ है जिसको करोड़ों लोग प्रतिदिन पीते हैं। चाय का प्रयोग बहुत समय से हो रहा है लेकिन पहले इसे औषधि के रूप में प्रयोग में लाया जाता था। चाय का प्रयोग सर्वप्रथम चीन में ईसा से छठी शताब्दी में प्रचलित के निवासियों को इसका पता बहुत बाद में लगा। प्राचीनकाल में चीन के व्यापारी यात्रा के दौरान अपनी थकान मिटाने के लिए चाय का प्रयोग करते थे। यूरोप में 17वीं शताब्दी तक चाय एक विलासिता की वस्तु मानी जाती थी क्योंकि इसका मूल्य बहुत अधिक था। सन् 1664 में ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारियों ने चाय के पैकेट भारत से ले जाकर सम्राट चार्ल्स को उपहार के रूप में प्रस्तुत किए। धीरे-धीरे इसकी रोपण कृषि आरंभ हुई और उत्पादन में वृद्धि होने से यह सर्वसुलभ वस्तु बन गई।

चाय में थीन (Thein) नामक तत्त्व है जो हल्का नशा तथा स्फूर्ति देता है। यह एक सदापर्णी झाड़ी है जिसकी पत्तियों को सुखाकर, पीसकर चाय तैयार की जाती है। चाय की कृषि बागानी कृषि है। पहले इसकी पौध तैयार की जाती है। जब पौध 20 सें०मी० ऊंची हो जाती है, तब इसे प्रतिरोपण करके दूर-दूर लगा दिया जाता है। जब पौधा बड़ा हो जाता है तो उसकी कटाई-छंटाई की जाती है। इसको 40-50 सें०मी० से अधिक नहीं बढ़ने दिया जाता है। जितनी अधिक छंटाई की जाएगी, उतनी अधिक चाय की पत्तियाँ आती हैं। चाय की पत्तियों को छाया में या मशीनों द्वारा गर्म हवा देकर सुखाया जाता है। कई देशों में हरी पत्तियों की चाय भी प्रयोग की जाती है।

उपज की भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions of Yield) चाय एक उपोष्ण जलवायु का पौधा है जो मानसून प्रदेश में पैदा होता है। इस पौधे के लिए अधिक तापमान तथा वर्षा की आवश्यकता होती है। इसके लिए. निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ अनुकूल होती हैं
1. तापमान (Temperature)-चाय की कृषि के लिए सामान्यतया 25° से 30° सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। चाय की कृषि के लिए वर्षा की अधिकता के साथ-साथ अधिक तापमान अनुकूल रहता है।

2. वर्षा (Rainfall)-चाय के पौधों के लिए 200 सें०मी० से 250 सें०मी० औसत वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। अगर वर्षा बार-बार बौछारों के रूप में होती रहे तो अधिक अनुकूल रहती है। वर्षा का वितरण साल भर समान रूप से होता रहना चाहिए, जिससे चाय की पत्तियाँ निरंतर विकसित होती रहें। चाय के लिए ओस तथा धुंध वाला मौसम अच्छा रहता है। आर्द्रता वाला मौसम चाय की पत्तियों की प्रचुरता के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

3. धरातल (Relief)-चाय के लिए ढलावदार भूमि का होना आवश्यक है क्योंकि चाय आर्द्र जलवायु वाले प्रदेशों में उगती है और यदि पानी खड़ा रहा तो इसके पौधे की जड़ें गल जाती हैं और पौधे की वृद्धि रुक जाती है। इसलिए हल्के ढलान वाले पहाड़ी क्षेत्र चाय के लिए उपयुक्त रहते हैं।

4. मिट्टी (Soil) चाय की कृषि के लिए बलवी दोमट मिट्टी, जिसमें ह्यूमस की मात्रा अधिक हो, उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी में पोटाश, फास्फोरस, लोहा आदि तत्त्वों का पर्याप्त मात्रा में होना आवश्यक है। नाइट्रोजन तथा पोटैशियम युक्त उर्वरकों के प्रयोग से चाय का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

5. श्रम एवं पूँजी (Labour and Money)-चाय की कृषि में श्रम का महत्त्वपूर्ण योगदान है क्योंकि चाय के पौधों का प्रतिरोपण, उसकी कटाई-छंटाई, निराई तथा पत्तियों को चुनने के लिए पर्याप्त मात्रा में श्रमिकों की आवश्यकता होती है। स्त्रियों तथा बच्चों द्वारा चाय की पत्तियों को चुनने में अत्यधिक मदद मिलती है। पत्तियों को चुनने के बाद मशीनों से पत्तियों को सुखाया तथा पीसा जाता है। चाय की कृषि के लिए अधिक पूँजी तथा परिवहन की उचित व्यवस्था आवश्यक है।

चाय का विश्व वितरण (World Distribution of Tea)-जलवायु की अनुकूलता की दृष्टि से चाय सामान्यतया उत्तरी गोलार्द्ध में 45° अक्षांश तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में 30° अक्षांशों के मध्य उगाई जाती है। चाय आज भी दक्षिणी पूर्वी एशिया की महत्त्वपूर्ण उपज है जबकि ब्रिटेन इसका सबसे बड़ा उपभोक्ता है। चाय के प्रमुख उत्पादक देशों में भारत, चीन, श्रीलंका, जापान, रूस तथा इंडोनेशिया हैं। इनके अतिरिक्त केन्या तथा टर्की में भी चाय उत्पन्न की जाती है।
1. भारत (India)-विश्व में चाय के उत्पादन में भारत का प्रथम स्थान है। भारत देश में लगभग 4 लाख हेक्टेयर भूमि पर चाय की कृषि की जाती है। संसार की लगभग 26% चाय अकेला भारत उत्पन्न करता है। भारत में चाय के बागान उत्तर:पूर्व में हिमालय के पर्वतीय ढलानों तथा दक्षिण में नीलगिरि की पहाड़ियों में पाए जाते हैं। भारत का उत्तर:पूर्वी क्षेत्र, जिसमें असम राज्य अग्रणी है, चाय का प्रमुख उत्पादक राज्य है। असम के ब्रह्मपुत्र तथा सुरमा नदियों की घाटी चाय के उत्पादन के लिए विश्वविख्यात है। असम के अतिरिक्त पश्चिमी बंगाल में दार्जिलिंग तथा जलपाईगुडी चाय के विशिष्ट उत्पादक क्षेत्र हैं। दार्जिलिंग की चाय अपने रंग तथा स्वाद के लिए विश्वविख्यात है। उत्तर:पश्चिम में हिमाचल प्रदेश तथा देहरादून और दक्षिणी भारत में नीलगिरि की पहाड़ियों में भी चाय के बागान हैं।

2. चीन (China) – चीन चाय का दूसरा महत्त्वपूर्ण उत्पादक देश है। यहाँ विश्व की लगभग 25% चाय उत्पन्न की जाती है। यहाँ चाय के प्रमुख तीन क्षेत्र हैं-(i) पूर्वी तटीय क्षेत्र, (ii) यांग्टीसिक्यांग की घाटी, (iii) जेच्वान बेसिन। यहाँ चाय का उत्पादन निजी ‘क्षेत्र तथा छोटे-छोटे बागानों में किया जाता है। चीन में अधिकांश उत्पादन घरेलू कार्यों के लिए ही होता है।

3. श्रीलंका (Sri Lanka) – श्रीलंका विश्व की लगभग 10% चाय उत्पन्न करता है। श्रीलंका के मध्यवर्ती पर्वतीय ढलानों पर केंडी के दक्षिण की ओर चाय के बागान हैं। श्रीलंका चाय का प्रमुख निर्यातक देश है। पिछले कुछ वर्षों से तमिल समस्या और आतंकवाद के कारण चाय के उत्पादन में कुछ कमी आई है।

इन प्रमुख देशों के अतिरिक्त इंडोनेशिया, जापान, रूस, टर्की, केन्या, युगांडा तथा मोजांबिक में भी चाय की कृषि की जाती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

प्रश्न 9.
रबड़ की फसल के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं व विश्व वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
रबड़ भूमध्य-रेखीय वनों में उगने वाला पेड़ है, जिसका दूध या रस चिपचिपा होता है, जिसे लैटेक्स (Latex) कहते हैं। सबसे पहले रबड़ का प्रयोग पेन्सिल के निशान को मिटाने (Rub) के लिए किया गया था। इसलिए इसका ना का वृक्ष सर्वप्रथम दक्षिणी अमेरिका के अमेजन बेसिन में खोजा गया। रबड़ का वृक्ष बहुत लम्बा होता है है। जब यह वृक्ष छह-सात साल का हो जाता है तब इसके तनों पर चाकू से V आकार का खाँचा लगाकर नीचे गमला लटकाकर दूध या रस प्राप्त किया जाता है।

बीसवीं शताब्दी में रबड़ की माँग बढ़ने से इसके बागानों का विस्तार हुआ। रबड़ में लोच, जल-प्रतिरोधी तथा विद्युत का कुचालक जैसे विशेष गुण होने से इसका प्रयोग दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। वाहनों के टायरों (साइकिल से लेकर वायुयान तक), विद्युत के सामान में तथा अन्य अनेक वस्तुओं के निर्माण में इसका प्रयोग किया जाता है। वर्तमान समय में कृत्रिम रबड़ का प्रयोग भी अत्यधिक बढ़ रहा है क्योंकि प्राकृतिक रबड़ से आवश्यकताओं की पूर्ति सम्भव नहीं रही। इस समय विश्व में लगभग 60% रबड़ की पूर्ति कृत्रिम रबड़ से होती है।

उपज की भौगोलिक दशाएँ (GeographicalConditions of Yield) रबड़ ऊष्णार्द्ध प्रदेशों का पौधा है, जिसके लिए साल भर ऊँचा तापमान तथा अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है। इसलिए इसकी खेती भूमध्य रेखा के आस-पास के क्षेत्रों में, जहाँ सारा साल सूर्य की किरणें लम्बवत् पड़ती हैं तथा प्रत्येक दिन वर्षा होती है, वहाँ सफलतापूर्वक की जाती है।
1. तापमान (Temperature) रबड़ की कृषि के लिए 21° से 30° सेल्सियस औसत तापमान की आवश्यकता होती है। किसी भी माह का तापमान 18° सेल्सियस से कम नहीं होना चाहिए।

2. वर्षा (Rainfall) रबड़ की कृषि के लिए 200 सें०मी० से 250 सें०मी० औसत वर्षा की आवश्यकता होती है। वर्षा वर्ष-भर निश्चित अन्तराल पर होनी आवश्यक है। भूमध्य रेखीय प्रदेशों में पर्याप्त वर्षा के कारण रबड़ एक सदाबहारी वनस्पति है, जो वर्ष-भर हरा-भरा रहता है। रबड़ के विकास के लिए भूमि में जल के निकास की पूर्ण व्यवस्था होनी चाहिए। सामान्य ढाल वाले मैदानी भाग इसके लिए उपयुक्त रहते हैं।

3. मिट्टी (Soil)-जलोढ़ मिट्टी रबड़ की कृषि के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। लावा-निर्मित काली मिट्टी भी इसकी कृषि के लिए उपयुक्त रहती है।

4. श्रम (Labour)-रबड़ के बागान लगाने, उनकी देखभाल करने, दूध एकत्रित करने तथा उसे कारखानों तक पहुँचाने के लिए पर्याप्त एवं सस्ते श्रमिकों की आवश्यकता होती है।
रबड़ का विश्व वितरण (World Distribution of Rubber)-संसार में उत्पन्न होने वाले प्राकृतिक रबड़ का लगभग 90% दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों, जिनमें मलेशिया, इंडोनेशिया, थाइलैंड, भारत तथा श्रीलंका सम्मिलित हैं, में मिलता है।
1. मलेशिया (Malasia) मलाया प्रायद्वीप का दक्षिण पश्चिमी तथा दक्षिणी भाग रबड़ के बागानों के लिए प्रसिद्ध है। देश की कुल कृषि योग्य भूमि के दो-तिहाई भाग पर रबड़ के बागान लगे हैं। इस देश में विश्व के कुल उत्पादन का लगभग 50% रबड़ उत्पन्न होता है। यहाँ के रबड़ के बागानों में मलय, चीनी तथा तमिल लोग कार्य करते हैं।

2. इंडोनेशिया (Indonesia)-इंडोनेशिया विश्व का दूसरा बड़ा उत्पादक देश है, जो विश्व का लगभग एक-चौथाई (24%) रबड़ उत्पन्न करता है। यहाँ पर रबड़ के तीन क्षेत्र हैं

जावा द्वीप का दक्षिणी तथा पश्चिमी तट
सुमात्रा का मध्य भाग,
बोर्नियो तथा सेलीबीज आदि द्वीपों के विषुवत् रेखा पर स्थित होने के कारण वर्षभर ऊँचा तापमान तथा अधिक वर्षा के कारण रबड़ की कृषि सफलतापूर्वक होती है।

3. थाइलैंड (Thailand)-थाइलैंड विश्व का तीसरा उत्पादक देश है तथा कुल उत्पादन में थाइलैंड की भागीदारी लगभग 15% है। रबड़ के उत्पादन में अधिकतर भाग देश के प्रायद्वीपीय भाग में है, जहाँ पर मुख्य रूप से चीनी वंश के छोटे कृषक रबड़ का उत्पादन करते हैं।

4. भारत (India) भारत विश्व का लगभग 4% रबड़ उत्पन्न करता है। भारत में केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक तथा अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह में रबड़ की कृषि की जाती है।

5. श्रीलंका (Sri Lanka)-श्रीलंका में दक्षिणी-पश्चिमी तटों तथा मध्यवर्ती उच्च भूमि के वर्षानुमुखी ढाल रबड़ की कृषि के लिए अनुकूल हैं तथा श्रीलंका का अधिकांश रबड़ इसी भाग में उत्पन्न होता है।
अन्य रबड़ उत्पादक देशों में नाइजीरिया, वियतनाम, साइबेरिया तथा ब्राज़ील आदि हैं।

प्रश्न 10.
कहवा के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं तथा विश्व वितरण का विवरण दीजिए।
उत्तर:
कहवा भी चाय की तरह एक पेय पदार्थ है। यह एक झाड़ीनुमा पेड़ के फलों से प्राप्त बीज का चूर्ण बनाकर तैयार किया जाता है। इसमें ‘बैफिन’ नामक नशीला पदार्थ होता है जिसके पीने से थकान दूर होती है तथा स्फूर्ति आती है। अरब के मोचा क्षेत्र से यह 11वीं शताब्दी में दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों में लाया गया। कहवे का पौधा तीन वर्ष बाद फल देता है तथा 25-30 वर्षों तक फल देता रहता है।

कहवा दक्षिण-पूर्वी अफ्रीका में इथोपिया के पठारी प्रदेश में जंगली अवस्था में उगा पाया गया। वहाँ इसका नाम ‘काफा’ था। अरब सौदागरों द्वारा 11वीं शताब्दी में इसे यहाँ लाया गया तथा दक्षिणी अमेरिका तथा दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में उगाया गया। यह एक सदाबहारी वृक्ष है जो 3-4 मीटर तक ऊँचा होता है।

उपज की भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions of Yield) कहवे की उपज के लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ अनुकूल होती हैं-
1. तापमान (Temperature)-कहवा उष्ण कटिबन्धीय पौधा है जिसके लिए ऊँचा तापमान तथा अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है। कहवे की उपज के लिए 20° सेल्सियस से 27° सेल्सियस तक तापमान उपयुक्त होता है तथा पाला हानिकारक होता है। अधिक धूप एवं पाले से बचाने के लिए कहवे का पौधा बड़े-बड़े वृक्षों के नीचे लगाया जाता है जिससे उसे छाया मिलती रहे। सबसे ठंडे माह का तापमान 11° सेल्सियस से कम नहीं होना चाहिए।

2. वर्षा (Rainfall) कहवे के पौधे के लिए 100 सें०मी० से 200 सें०मी० वर्षा की आवश्यकता पड़ती है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई करके इसकी कृषि की जाती है। शुष्क मौसम तथा अति-वृष्टि दोनों ही कहवे की खेती के लिए हानिकारक हैं। वृक्षों पर फल आते समय कम वर्षा की आवश्यकता होती है, क्योंकि अधिक वर्षा से फल गिर जाता है।

3. भूमि एवं मिट्टी (Land and Soil)-कहवे की कृषि के लिए चाय की तरह ढलवां भूमि की आवश्यकता होती है क्योंकि पानी इसकी जड़ों में रुकने से नुकसान पहुंचाता है। इसलिए कहवा पहाड़ी ढलानों या पठारी भागों में लगाया जाता है। कहवे की खेती के लिए उपजाऊ दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है। मिट्टी में लोहे का अंश तथा चूने की मात्रा अधिक होनी चाहिए। मिट्टी की गहराई पर्याप्त होनी चाहिए जिससे इसकी जड़ें गहराई तक प्रवेश कर सकें।

4. अधिक श्रम (More Labour)-चाय की भाँति कहवे की कृषि के लिए अधिक श्रम की आवश्यकता होती है क्योंकि कहवे की पौध लगाने व बीज एकत्रित करने तथा उन्हें सुखाने के लिए निपुण श्रमिकों की आवश्यकता होती है।

कहवा का विश्व वितरण (World Distribution of Coffee) विश्व में कहवा उत्पन्न करने वाले देशों में ब्राज़ील, कोलंबिया, इक्वेडोर, वेनेजुएला, गुयाना, ग्वाटेमाला, एल्व-सल्वाडोर, मैक्सिको, क्यूबा हैरी, जमैका, अंगोला, आइवरी कोस्ट, युगांडा, इथोपिया, कैमरून, मालागैसी, भारत, इंडोनेशिया तथा श्रीलंका हैं।

1. ब्राज़ील (Brazil) ब्राज़ील विश्व का सबसे बड़ा कहवा उत्पादक देश है। यहाँ विश्व का लगभग 20% कहवा उत्पन्न किया जाता है। यहाँ कहवे की कृषि के लिए सभी भौगोलिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। ब्राज़ील में रियो-डि-जनेरो के पृष्ठ-प्रदेश में इसे पैदा करने की आदर्श दशाएँ मिलती हैं। यहाँ बड़े-बड़े बागानों को फैजेंडा कहते हैं। कहवा उत्पादक राज्यों में साओ-पालो तथा मिनास गेरास प्रमुख हैं। यहाँ के ढलावदार पठारी भागों में बड़े-बड़े बागान लगाए गए हैं। यहाँ कहवा के लिए रस्सी मार्ग द्वारा परिवहन की व्यवस्था की गई है।

2. कोलंबिया (Columbia) यह देश विश्व का लगभग 10% कहवा उत्पन्न करता है। यहाँ प्रतिवर्ष लगभग 7 लाख टन कहवा उत्पन्न किया जाता है। यहाँ का उत्पादक क्षेत्र कोलंबिया की राजधानी बोगोटा के पश्चिम में फैला हुआ है। दूसरा उत्पादक क्षेत्र एंटीकुआ है। कोलंबिया के कहवा का रंग तथा स्वाद में अच्छा होने के कारण विश्व बाजार में इसकी माँग अधिक है।

3. मैक्सिको (Maxico) मैक्सिको विश्व का तीसरा कहवा उत्पादक देश है। यहाँ लगभग 5% कहवा उत्पन्न किया जाता है। यहाँ का कहवा उत्पादक क्षेत्र प्रशांत महासागर के तटवर्ती भाग की ढालनों से मध्यवर्ती उच्च भूमि तक फैला हुआ है।

4. मध्य अमेरिकी तथा कैरेबियन द्वीप (Mid-American and Caribean Continent) इस क्षेत्र के उत्पादक देश ग्वाटेमाला एल-सल्वाडोर, हैरी, जमैका, क्यूबा, पोर्टोरीको तथा त्रिनिदाद हैं।

5. अफ्रीका के मुख्य उत्पादक देश (Major Productive Countries of Africa)-इस क्षेत्र के उत्पादक देश आइबरी कोस्ट, युगांडा, अंगोला, केन्या, केमरुन तथा तंजानिया हैं।

6. दक्षिण-पूर्वी एशिया (South-East Asia) इस क्षेत्र के उत्पादक देश श्रीलंका, जावा, सुमात्रा, भारत में कर्नाटक एवं तमिलनाडु हैं।

प्रश्न 11.
कृषि को परिभाषित कीजिए। विश्व में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की कृषि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कृषि का अर्थ व परिभाषा (Meaning and Definition of Agriculture) कृषि (Agriculture) शब्द अंग्रेजी के Ager + Culture, दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘Ager’ का अर्थ है-मिट्टी या खेत और ‘Culture’ का अर्थ है-देखभाल या जोतना अर्थात् मिट्टी को जोतना तथा उसमें फसलें उगाना कृषि है, लेकिन यह इसका संकुचित अर्थ है। विस्तृत अर्थ में कृषि के अंतर्गत फसलें उगाना, पशुपालन, फलों की खेती करना आदि सभी क्रियाएँ सम्मिलित हैं। दूसरे शब्दों में, कृषि वह कला तथा विज्ञान है, जिसमें मनुष्य भूमि से भोज्य पदार्थ प्राप्त करने के लिए उसका उपयोग करता है। प्रो० जिम्मरमैन के अनुसार, “कृषि में वे मानवीय प्रयास सम्मिलित हैं, जिनके द्वारा मानव भूमि पर निवास करता है तथा यदि सम्भव हुआ तो पौधों तथा पशुओं की प्राकृतिक रूप से हो रही वृद्धि को नियन्त्रित करता है, जिससे इन उत्पादों और मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके।”

विश्व में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की कृषि (Different Types of Agriculture Found in World) विश्व में पाई जाने वाली विभिन्न भौतिक, सामाजिक एवं आर्थिक दशाएँ कृषि कार्य को प्रभावित करती हैं एवं इसी प्रभाव के कारण विभिन्न प्रकार की कृषि देखी जाती हैं। विश्व में निम्नलिखित प्रकार की कृषि पाई जाती हैं
1. निर्वाह कृषि (Subsistence Agriculture) इस प्रकार की कृषि में कृषि क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय उत्पादों का संपूर्ण अथवा लगभग का उपयोग करते हैं। इसे दो भागों में बाँटा जा सकता है
(1) आदिकालीन निर्वाह कृषि (Primitive Subsistence Agriculture)-आदिकालीन निर्वाह कृषि उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में की जाती है जहाँ आदिम जाति के लोग कृषि करते हैं। इसका क्षेत्र अफ्रीका, दक्षिणी एवं मध्य अमेरिका का उष्ण कटिबन्धीय भाग एवं दक्षिणी-पूर्वी एशिया है। इन क्षेत्रों की वनस्पति को जला दिया जाता है एवं जली हुई राख की परत उर्वरक का कार्य करती है। इस प्रकार यह कृषि कर्तन एवं दहन कृषि भी कहलाती है। कुछ समय पश्चात् जब मिट्टी का उपजाऊपन समाप्त हो जाता है तो वे नए क्षेत्र में वन जलाकर कृषि के लिए भूमि तैयार करते हैं।

(2) गहन निर्वाह कृषि (Intensive Subsistence Agriculture) इस प्रकार की कृषि मानसून एशिया के घने बसे देशों में की जाती है। यह भी दो प्रकार की है
(i) चावल प्रधान गहन निर्वाह कृषि (Intensive Subsistence Agriculture with Rice)-इसमें चावल प्रमुख फसल है। अधिक जनसंख्या घनत्व के कारण खेतों का आकार छोटा होता है और कृषि कार्य में कृषक का पूरा परिवार लगा रहता है। इस कृषि में प्रति इकाई उत्पादन अधिक होता है, परंतु प्रति कृषक उत्पादन कम है।

(ii) चावल रहित गहन निर्वाह कृषि (Intensive Subsistence Agriculture without Rice)-मानसून एशिया के अनेक भागों में भौगोलिक दशाओं में भिन्नता के कारण धान की फसल उगाना प्रायः संभव नहीं है। इसमें सिंचाई द्वारा कृषि की जाती है।

2. रोपण कृषि (Plantation Agriculture) रोपण कृषि में कृषि क्षेत्र का आकार बहुत विस्तृत होता है। इसमें अधिक पूँजी निवेश, उच्च प्रबंध एवं तकनीकी और वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है। यह एक फसली कृषि है। यूरोपीय उपनिवेशों ने अपने अधीन उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में चाय, कॉफी, कोको, रबड़, कपास, गन्ना, केले एवं अनानास आदि फसलों का उपयोग करके रोपण कृषि का विस्तार किया है।

3. विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि (Extensive Commercial Grain Cultivation) मध्य अक्षांशों के आंतरिक अर्द्ध-शुष्क प्रदेशों में इस प्रकार की कृषि की जाती है। इसकी मुख्य फसल गेहूँ है। इसके अलावा मक्का, जौ, राई, जई भी बोई जाती है। इस कृषि में खेतों का आकार बहुत बड़ा होता है और सभी कार्य यंत्रों द्वारा संपन्न किए जाते हैं। इसमें प्रति एकड़ उत्पादन कम होता है और प्रति व्यक्ति उत्पादन अधिक होता है।

4. मिश्रित कृषि (Mixed Farming)-इस प्रकार की कृषि विश्व के अत्यधिक विकसित भागों में की जाती है। उत्तरी-पश्चिमी यूरोप, उत्तरी अमेरिका का पूर्वी भाग, यूरेशिया के कुछ भाग एवं दक्षिणी महाद्वीपों के समशीतोष्ण अक्षांश वाले भागों में इसका विस्तार है। इसमें फसल उत्पादन एवं पशुपालन दोनों को समान महत्त्व दिया जाता है।

5. डेयरी कृषि (Dairy Farming)-डेयरी कृषि का कार्य नगरीय एवं औद्योगिक केंद्रों के समीप किया जाता है क्योंकि ये क्षेत्र दूध एवं अन्य डेयरी उत्पाद के अच्छे बाजार होते हैं। पशुओं के उन्नत पालन-पोषण के लिए पूँजी की भी अधिक आवश्यकता होती है। वाणिज्य डेयरी के मुख्य क्षेत्र उत्तरी-पश्चिमी यूरोप, कनाडा, दक्षिणी-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड हैं।

6. भूमध्य-सागरीय कृषि (Meditterranean Agriculture)- यह अति-विशिष्ट प्रकार की कृषि है। इसका विस्तार भूमध्य-सागर के समीपवर्ती क्षेत्रों में है। अंगूर की कृषि भूमध्य-सागरीय क्षेत्र की विशेषता है। खट्टे फलों की आपूर्ति करने में यह क्षेत्र महत्त्वपूर्ण है।

7. सहकारी कृषि (Co-operative Farming)-जब कृषकों का एक समूह अपनी कृषि से अधिक लाभ कमाने के लिए स्वेच्छा से एक सहकारी संस्था बनाकर कृषि कार्य संपन्न करे, उसे सहकारी कृषि कहते हैं। सहकारी संस्था कृषकों को सभी प्रकार से सहायता उपलब्ध कराती है। इस प्रकार की कृषि का उपयोग डेनमार्क, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्वीडन एवं इटली जैसे देशों में सफलतापूर्वक किया जाता है।

8. सामूहिक कृषि (Collective Farming) इस प्रकार की कृषि में उत्पादन के साधनों का स्वामित्व संपूर्ण समाज एवं सामूहिक श्रम पर आधारित होता है। कृषि का यह प्रकार पूर्व सोवियत संघ में प्रारंभ हुआ था। इस प्रकार की सामूहिक कृषि को सोवियत संघ में कालेखहोज का नाम दिया गया। सभी कृषक अपने संसाधन; जैसे भूमि, पशुधन एवं श्रम को मिलाकर कृषि कार्य करते हैं। सरकार उत्पादन का वार्षिक लक्ष्य निर्धारित करती है और उत्पादन को सरकार ही निर्धारित मूल्य पर खरीदती है।

9. ट्रक कृषि (Truck Farming)-जिन प्रदेशों में कृषक केवल सब्जियाँ पैदा करता है। वहाँ इसे ट्रक कृषि का नाम दिया जाता है। ट्रक फार्म एवं बाजार के मध्य की दूरी, जो एक ट्रक रात-भर में तय करता है उसी आधार पर इसे ट्रक कृषि कहा जाता है।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने विकास के स्तर को मापने के लिए किस एक आकांक्षा को आधार नहीं बनाया?
(A) दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन
(B) शिक्षित एवं ज्ञानवान होना
(C) समृद्ध एवं धनाढ्य होना
(D) उत्तम जीवन के लिए सभी संसाधनों का होना
उत्तर:
(C) समृद्ध एवं धनाढ्य होना

2. विकास का तात्पर्य है-
(A) व्यक्ति की शिक्षा में सुधार
(B) संपत्ति में वृद्धि
(C) जीवन की गुणवत्ता
(D) शारीरिक बल में वृद्धि
उत्तर:
(C) जीवन की गुणवत्ता

3. मानव विकास को जिस पैमाने पर मापा जाता है, उसका मान कितना होता है?
(A) 0-10
(B) 0-1
(C) 1-100
(D) A से Z
उत्तर:
(B) 0-1

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4. मानव विकास के मध्यम वर्ग का पैमाना कितना माना जाता है?
(A) 0.6 से 0.7
(B) 0.5 से 0.65
(C) 0.5 से 0.8
(D) 0.550 से 0.700
उत्तर:
(D) 0.550 से 0.700

5. मानव विकास सूचकांक के सबसे निचले पायदान पर कौन-सा देश बैठा है?
(A) बुरूंडी
(B) केन्या
(C) सियरालियोन
(D) नाइजीरिया
उत्तर:
(D) नाइजीरिया

6. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक मानव विकास में उन्नति नहीं करता?
(A) पौष्टिक भोजन की उपलब्धता
(B) कल्याणकारी योजनाएँ
(C) महिला सशक्तीकरण
(D) युद्ध एवं अराजकता
उत्तर:
(D) युद्ध एवं अराजकता

7. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक मानव विकास का ह्रास नहीं करता?
(A) एड्स की बीमारी
(B) लगातार सूखा एवं अकाल
(C) उच्च प्रौद्योगिकी
(D) आर्थिक विकास की जड़ता
उत्तर:
(C) उच्च प्रौद्योगिकी

8. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम कब से मानव विकास प्रतिवेदन प्रकाशित कर रहा है?
(A) सन् 1988 से
(B) सन् 1990 से
(C) सन् 1992 से
(D) सन् 1999 से
उत्तर:
(B) सन् 1990 से

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9. विश्व का कौन-सा एकमात्र देश है जिसने सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता को देश की प्रगति का अधिकारिक माप घोषित किया है?
(A) श्रीलंका
(B) भूटान
(C) नेपाल
(D) अमेरिका
उत्तर:
(B) भूटान

10. डॉ० महबूब-उल-हक कहाँ के अर्थशास्त्री थे?
(A) भारत के
(B) पाकिस्तान के
(C) इंग्लैण्ड के
(D) अफगानिस्तान के
उत्तर:
(B) पाकिस्तान के

11. मानव गरीबी सूचकांक और मानव विकास सूचकांक किसके द्वारा प्रयुक्त किए जाते हैं?
(A) UNDP द्वारा
(B) UNICEF GRT
(C) UNESCO ART
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) UNDP द्वारा

12. मानव विकास मापन का सूचकांक है-
(A) मानव विकास सूचकांक
(B) मानव गरीबी सूचकांक
(C) (A) व (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) (A) व (B) दोनों

13. निम्नलिखित में से कौन-सी प्रक्रिया जीवन-पर्यंत चलती है?
(A) वृद्धि
(B) विकास
(C) स्वास्थ्य
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(B) विकास

14. किस प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ने विकास का मुख्य ध्येय स्वतंत्रता में वृद्धि के रूप में देखा है?
(A) अभिजीत बनर्जी
(B) डॉ० महबूब-उल-हक
(C) प्रो० अमर्त्य सेन
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) प्रो० अमर्त्य सेन

15. मानव विकास का स्तंभ नहीं है-
(A) समता
(B) सशक्तीकरण
(C) स्वतंत्रता
(D) सतत् पोषणीयता
उत्तर:
(C) स्वतंत्रता

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
मानव विकास सूचकांक का अधिकतम संभावित मान लिखें।
उत्तर:
1.

प्रश्न 2.
मानव विकास सूचकांक का प्रतिपादन कब किया गया?
उत्तर:
मानव विकास सूचकांक का प्रतिपादन सन् 1990 में किया गया।

प्रश्न 3.
भारत के किस राज्य में सबसे अधिक मानव विकास सूचकांक है?
उत्तर:
केरल में।

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प्रश्न 4.
मानव विकास की अवधारणा किस विद्वान की देन है?
उत्तर:
डॉ० महबूब-उल-हक की।

प्रश्न 5.
मानव विकास को जिस पैमाने पर मापा जाता है, उसका मान कितना होता है?
अथवा
मानव विकास सूचकांक का स्कोर क्या है?
उत्तर:
0-1।

प्रश्न 6.
मानव विकास के अति उच्च वर्ग का पैमाना कितना होता है?
उत्तर:
अति उच्च वर्ग का पैमाना 0.800 से ऊपर।

प्रश्न 7.
मानव विकास रिपोर्ट किसके द्वारा दी जाती है?
अथवा
विश्व मानव विकास रिपोर्ट का प्रकाशन करने वाली संस्था का नाम लिखिए।
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP)।

प्रश्न 8.
कौन-सा कारक मानव विकास का ह्रास नहीं करता?
उत्तर:
उच्च प्रौद्योगिकी।

प्रश्न 9.
मानव विकास सूचकांक सर्वाधिक विश्वसनीय माप क्यों नहीं है?
उत्तर:
क्योंकि यह बिना आय वाला माप है।

प्रश्न 10.
मानव विकास सूचकांक की गणना में भारत किस श्रेणी में आता है?
उत्तर:
मध्यम श्रेणी में।

प्रश्न 11.
मानव विकास सूचकांक को कितने सूचकों से प्रदर्शित किया जाता है?
उत्तर:
मानव विकास सूचकांक को तीन सूचकों से प्रदर्शित किया जाता है।

प्रश्न 12.
मानव विकास सूचकांक के सर्वोच्च पायदान पर कौन-सा देश है?
उत्तर:
नार्वे।

प्रश्न 13.
HDI का पूरा नाम लिखें।
उत्तर:
Human Development Index.

प्रश्न 14.
GNH का पूरा नाम लिखें।
उत्तर:
Gross National Happiness.

प्रश्न 15.
HPI का पूरा नाम लिखें।
उत्तर:
Human Poverty Index.

प्रश्न 16.
UNDP का पूरा नाम लिखें।
उत्तर:
United Nations Development Programme.

प्रश्न 17.
किस देश ने सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता की अवधारणा प्रस्तुत की?
उत्तर:
भूटान ने।

प्रश्न 18.
मानव विकास के कितने स्तंभ हैं?
उत्तर:
मानव विकास के चार स्तंभ हैं।

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प्रश्न 19.
मानव विकास के सबसे निचले पायदान पर कौन-सा देश है?
उत्तर:
नाइजीरिया।

प्रश्न 20.
किन देशों का स्कोर 0.550 से 0.700 के बीच होता है?
उत्तर:
मध्यम सूचकांक वाले देशों का।

प्रश्न 21.
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम कब से मानव विकास रिपोर्ट (प्रतिवेदन) प्रकाशित कर रहा है?
उत्तर:
वर्ष 1990 से।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विकास से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
गुणवत्ता में हुए सकारात्मक परिवर्तन को विकास कहते हैं।

प्रश्न 2.
मानव विकास को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
सन् 1990 की मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार मानव विकास को इस प्रकार परिभाषित किया गया है, “मानव विकास मनुष्य की आकांक्षाओं एवं उन्हें उपलब्ध जीवन-यापन की सुविधाओं के स्तर को विकसित करने की प्रक्रिया है।”

प्रश्न 3.
मानव विकास का मूल उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
मानव विकास का मूल उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों को उत्पन्न करना है जिनमें लोग सार्थक जीवन जी सकें।

प्रश्न 4.
1990 की रिपोर्ट के अनुसार मानव विकास के तीन सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पक्ष कौन-से हैं?
अथवा
मानव विकास के सूचक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1. दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन या स्वास्थ्य
  2. शिक्षा व ज्ञान का प्रसार
  3. संसाधनों तक पहुँच।

प्रश्न 5.
दक्षिण-पूर्वी एशिया के दो अर्थशास्त्रियों के नाम लिखें जिन्होंने मानव विकास की अवधारणा सर्वप्रथम प्रस्तुत की।
उत्तर:
डॉ० महबूब-उल-हक एवं डॉ० अमर्त्य सेन।

प्रश्न 6.
मानव विकास के उपागम कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1. आय उपागम
  2. कल्याण उपागम
  3. क्षमता उपागम
  4. न्यूनतम आवश्यकता उपागम।

प्रश्न 7.
सशक्तीकरण (Empowerment) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सशक्तीकरण का अर्थ है कि लोगों में अपने विकल्प चुनने की ताकत पैदा की जाए। यह ताकत बढ़ती हुई स्वतंत्रता, क्षमता और उत्पादकता से आती है। सुशासन और लोकोन्मुखी नीतियों से लोगों को सशक्त किया जा सकता है। मानव विकास के लिए जरूरी है कि सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए वर्गों और विशेष रूप से महिलाओं का सशक्तीकरण हो।

प्रश्न 8.
मानव गरीबी सूचकांक क्या है?
उत्तर:
मानव गरीबी सूचकांक मानव विकास से संबंधित है जो मानव विकास में कमियों को दर्शाता है।

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प्रश्न 9.
मानव विकास सूचकांक के चार वर्ग कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1. अति उच्च वर्ग 0.800 से ऊपर
  2. उच्च वर्ग 0.701 से 0.799 के बीच
  3. मध्यम वर्ग 0.550 से 0.700 के बीच तथा
  4. निम्न वर्ग 0.549 से नीचे।

प्रश्न 10.
कल्याण उपागम क्या है?
उत्तर:
कल्याण उपागम के अनुसार सरकार द्वारा लोगों के कल्याणकारी कार्यक्रमों; जैसे-शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और सुख-साधनों पर अधिक खर्च करके मानव विकास के स्तरों को बढ़ा सकती है। यह उपागम मनुष्य को सभी विकासात्मक गतिविधियों के केंद्र के रूप में देखता है।

प्रश्न 11.
विकासहीन वृद्धि से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
किसी निश्चित अवधि में किसी नगर की जनसंख्या 5 लाख से 10 लाख हो जाती है तो कहा जाता है कि नगर की वृद्धि हुई। लेकिन यदि उस नगर में आवास, पेय जल, ऊर्जा, परिवहन, शिक्षा, चिकित्सा और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएँ पहले जैसी रहती हैं और उनमें कोई बेहतरी नहीं होती तो इसे विकासहीन वृद्धि माना जाएगा।

प्रश्न 12.
सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता (GNH) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
प्रसन्नता की कीमत पर भौतिक प्रगति नहीं की जा सकती। सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता हमें विकास के आध्यात्मिक, भौतिकता एवं गुणात्मक पक्षों को सोचने के लिए प्रोत्साहित करती है। भूटान विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जिसने सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता को देश की प्रगति का अधिकारिक माप घोषित किया है।

प्रश्न 13.
अति उच्च सूचकांक वाले किन्हीं चार देशों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. नार्वे
  2. ऑस्ट्रेलिया
  3. स्विट्ज़रलैंड
  4. जर्मनी।

प्रश्न 14.
मध्यम सूचकांक वाले किन्हीं चार देशों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. मलेशिया
  2. बहामस
  3. कुवैत
  4. बेलारूस।

प्रश्न 15.
निम्न सूचकांक वाले किन्हीं चार देशों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. माली
  2. नाइजीरिया
  3. मोजांबिक
  4. बरूंडी।

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प्रश्न 16.
मानव विकास सूचकांक क्या है?
उत्तर:
मानव विकास सूचकांक (HDI) मानव विकास में प्राप्तियों का मापन करता है। यह स्वास्थ्य, शिक्षा एवं संसाधनों में निष्पादन के आधार पर देशों का क्रम तैयार करता है। यह क्रम 0 से 1 के बीच के स्कोर/अंक पर आधारित है। यह प्रदर्शित करता है कि मानव विकास के प्रमुख क्षेत्रों में क्या उपलब्धि हुई है।

प्रश्न 17.
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रयुक्त मानव विकास मापन के दो महत्त्वपूर्ण सूचकांक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा प्रयुक्त मानव विकास मापन के दो महत्त्वपूर्ण सूचकांक हैं-

  1. मानव विकास सूचकांक (Human Development Index)
  2. मानव गरीबी सूचकांक (Human Poverty Index)।

प्रश्न 18.
मानव विकास सूचकांक तथा मानव गरीबी सूचकांक में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
मानव विकास सूचकांक तथा मानव गरीबी सूचकांक में निम्नलिखित अंतर हैं-

मानव विकास सूचकांकमानव गरीबी सूचकांक
1. मानव विकास सूचकांक मानव विकास में उपलब्धियों को मापता है।1. मानव गरीबी सूचकांक मानव विकास में कमियों को मापता है।
2. यह वितरण के बारे में कुछ नहीं कहता।2. यह शिक्षा, स्वास्थ्य एवं संसाधनों के वितरण के स्तर को मापता है।
3. यह एक आय उपाय है।3. यह एक गैर-आय उपाय है।

प्रश्न 19.
सार्थक जीवन की मुख्य विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:
सार्थक जीवन केवल दीर्घ नहीं होता। जीवन का कोई उद्देश्य होना भी आवश्यक है। लोग स्वस्थ हों, अपने विवेक व बुद्धि का विकास कर सकते हों, वे समाज में प्रतिभागिता करें और वे अपने उद्देश्यों को पूरा करने में स्वतंत्र हों।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विकास और वृद्धि में अंतर बताइए।
उत्तर:
विकास और वृद्धि दोनों समय के संदर्भ में परिवर्तन को दर्शाते हैं। अंतर बस इतना है कि वृद्धि में परिवर्तन मात्रात्मक होता है। वृद्धि हमेशा मूल्य निरपेक्ष होती है। यदि मात्रा बढ़ जाए तो यह धनात्मक कहलाती है और यदि हास को इंगित करे तो यह ऋणात्मक कहलाती है। इसके विपरीत विकास में परिवर्तन गुणात्मक होता है। विकास तभी संभव है जब वर्तमान दशाओं में वृद्धि हो अर्थात् विकास उस समय होता है जब वृद्धि सकारात्मक हो।

प्रश्न 2.
मानव विकास अवधारणा के अन्तर्गत सतत् पोषणीयता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
सतत् पोषणीयता अथवा निर्वहन का मतलब है कि लोगों को विकास करने के अवसर लगातार मिलते रहें। सतत् पोषणीय मानव विकास तभी होगा जब प्रत्येक पीढ़ी को समान अवसर मिलें। अतः यह जरूरी है कि हम पर्यावरणीय, वित्तीय और मानव संसाधनों का आने वाली पीढ़ियों को ध्यान में रखते हुए सुविचारित उपयोग करें। यदि हम इन बहुमूल्य संसाधनों का अंधा-धुंध प्रयोग अथवा दुरुपयोग करेंगे तो भावी पीढ़ियों के विकल्प कम हो जाएंगे।

प्रश्न 3.
मानव विकास के हास के कारकों का उल्लेख करें।
उत्तर:
मानव विकास के ह्रास के कारक निम्नलिखित हैं-

  1. एड्स जैसी बीमारियों के प्रसार से जीवन-प्रत्याशा में कमी होना।
  2. लगातार सूखा व अकाल पड़ना।
  3. आर्थिक विकास की जड़ता।
  4. युद्ध और अराजकता।

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प्रश्न 4.
मानव विकास की अवधारणा में दक्षिण एशियाई अर्थशास्त्रियों का क्या योगदान रहा?
अथवा
मानव विकास की संकल्पना के विकास में डॉ० अमर्त्य सेन के योगदान का वर्णन कीजिए।
अथवा
मानव विकास की संकल्पना के विकास में डॉ० महबूब-उल-हक के योगदान का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
मानव विकास की अवधारणा का प्रतिपादन पाकिस्तानी अर्थशास्त्री डॉ० महबूब-उल-हक ने किया था। उन्होंने मानव विकास की कल्पना एक ऐसे विकास के रूप में की जिसका संबंध लोगों के विकल्पों (Choices) में बढ़ोतरी से है ताकि वे आत्म-सम्मान के साथ दीर्घ जीवन जी सकें। डॉ० अमर्त्य सेन ने भी विकास का मुख्य ध्येय स्वतंत्रता में वृद्धि अथवा परतंत्रता में कमी के रूप में देखा। स्वतंत्रताओं में वृद्धि विकास का प्रभावशाली उपाय है। ये दोनों अर्थशास्त्री लोगों को विकास पर होने वाली किसी भी चर्चा की केन्द्र में लाने में सफल हुए। उन्होंने कहा कि विकल्प स्थिर नहीं हैं बल्कि आवश्यकताओं और हालातों के मुताबिक परिवर्तनशील हैं।

प्रश्न 5.
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा परिभाषित मानव विकास की संकल्पना का उल्लेख कीजिए और इसे मापने की विधियाँ बताइए।
अथवा
मानव विकास की संकल्पना को परिभाषित कीजिए। इसके मापने के आधारों का वर्णन करें।
अथवा
मानव विकास की संकल्पना की विवेचना कीजिए।
अथवा
मानव विकास का विचार किन संकल्पनाओं पर आश्रित है? वर्णन करें।
उत्तर:
प्रकृति के संसाधनों का उपयोग तब तक पूर्णतया से नहीं किया जा सकता, जब तक मनुष्य की क्षमताओं का विकास नहीं किया जाता। केवल धन के द्वारा मानव विकास संभव नहीं है। विकास का लक्ष्य लोगों का कल्याण होना चाहिए। आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास जन-कल्याण के प्रमुख आधार हैं।

संयुक्त राष्ट्र विकास (UNDP) के अनुसार, “विकास केवल लोगों की आय तथा पूँजी की ही वृद्धि नहीं बल्कि यह मानव की कार्यप्रणाली तथा क्षमताओं में वृद्धि की प्रक्रिया है। मानव विकास लोगों की आकांक्षाओं और उन्हें उपलब्ध जीवन-यापन की सुविधाओं के स्तर को विकसित करने की प्रक्रिया है।”
मानव विकास संकल्पना की विधियाँ/आधार-UNDP के मानव विकास को मापने के लिए तीन महत्त्वपूर्ण आकांक्षाओं को आधार माना है, जो निम्नलिखित हैं
1. दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन-मनुष्य के जीवन-काल को जन्म के समय संभावित आयु या जीवन-प्रत्याशा से मापा जाता है। उच्च जीवन प्रत्याशा उच्च जीवन स्तर का और निम्न जीवन प्रत्याशा निम्न जीवन स्तर का अभिलक्षण है। विकासशील देशों की जीवन प्रत्याशा 40-65 वर्ष पाई जाती है जबकि विकसित देशों में यह 60-75 वर्ष पाई जाती है।

2. शिक्षित एवं ज्ञानवान होना-शिक्षा और विकास का घनिष्ठ सम्बन्ध है। शिक्षा मनुष्य को विवेकशील बनाकर उसमें आत्मविश्वास जगाती है। विकसित देशों में उच्च साक्षरता दर पाई जाती है जबकि विकासशील देशों में निम्न या मध्यम साक्षरता दर पाई जाती है।

3. संसाधनों की उपलब्धता आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता भी उत्तम जीवन स्तर का आधार माना जाता है। जीवन स्तर को प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद में भी व्यक्त किया जाता है।
इस प्रकार मानव विकास की अवधारणा का प्रतिपादन किया गया और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा मानव विकास को इस प्रकार परिभाषित किया गया। “लोगों के विकल्पों के परिवर्द्धन की प्रक्रिया और जन-कल्याण के स्तर को ऊंचा उठाना ही मानव विकास है।”

स्त्री, पुरुष और बच्चे विकास की प्रक्रिया के केंद्र-बिंदु होने चाहिएँ। “विकास लोगों के लिए हो, न कि लोग विकास के लिए।” प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने की अपेक्षा प्रति व्यक्ति सुविधाएँ बढ़ाने पर बल दिया जाना चाहिए। राष्ट्र की वास्तविक संपदा लोग हैं। इसलिए विकास का मुख्य लक्ष्य मानव-जीवन की समृद्धि होना चाहिए।

प्रश्न 6.
मानव विकास सूचकांक के अनुसार विश्व के उच्च सूचकांक वाले देशों का वर्गीकरण करें।
उत्तर:
उच्च मानव विकास सूचकांक वाले 59 देश हैं। इनका सूचकांक 0.800 से ऊपर है। सर्वोच्च सूचकांक वाले देश क्रमशः हैं नार्वे, आइसलैंड, ऑस्ट्रेलिया, लग्जमबर्ग, कनाडा, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, आयरलैंड, बेल्जियम, संयुक्त राज्य अमेरिका आदि।

इन देशों में सामाजिक खंड में बहुत निवेश हुआ है। लोगों और सुशासन में उच्चतर निवेश ने इस वर्ग के देशों को अन्य देशों से अलग कर दिया है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को उपलब्ध कराना सरकार की महत्त्वपूर्ण प्राथमिकता है। इन देशों में उच्च स्तरीय औद्योगिकीकरण पाया जाता है। उच्च मानव स्कोर वाले देश यूरोप में अवस्थित हैं फिर भी गैर-यूरोपीय देशों की संख्या आश्चर्यचकित करने वाली है उन्होंने भी इस सूची में अपना स्थान बनाया है।

प्रश्न 7.
मानव विकास सूचकांक के अनुसार विश्व के मध्यम सूचकांक वाले देशों का वर्गीकरण करें।
उत्तर:
मध्यम सूचकांक वाले देश 39 हैं जिनका स्कोर 0.550 से 0.700 के बीच है। मध्यम मूल्य सूचकांक वाले देश हैं बहामस, कुवैत, भारत, मकदूनिया, एंटीगुआ और बारबाडोस, मलेशिया, रोमानिया, मॉरीशस, ग्रेनेडा, बेलारूस आदि।

इनमें से अधिकांश देशों का विकास द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की अवधि में हुआ है। इस वर्ग के कुछ देश पूर्वकालीन उपनिवेश थे। अन्य अनेक देशों का विकास 1990 ई० में तत्कालीन सोवियत संघ के विघटन के पश्चात् हुआ है। इनमें से अनेक देश लोकोन्मुखी नीतियों को अपनाकर स्था सामाजिक भेदभाव को दूर करके अपने मानव विकास स्कोर में सुधार कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश देशों में उच्चतर मानव विकास के स्कोर वाले देशों की तुलना में सामाजिक विविधता अधिक पाई जाती है।

प्रश्न 8.
मानव विकास सूचकांक के अनुसार विश्व के निम्न सूचकांक वाले देशों का वर्गीकरण करें।
उत्तर:
निम्न सूचकांक वाले देशों की संख्या 38 है जिनका मानव विकास सूचकांक का स्कोर 0.549 से नीचे है। निम्नतम मूल्य सूचकांक वाले देश हैं नाइजीरिया, सियरा लियोन, बुस्कीनो फासो, माली, चाड, गिनी बिसाऊ, मध्य अफ्रीकन गणराज्य, इथोपिया, बरूंडी, मोजांबिक आदि।

इनमें से अधिकांश देश छोटे हैं जो राजनीतिक उपद्रव, गृहयुद्ध के रूप में सामाजिक स्थिरता, अकाल अथवा बीमारियों की अधिक घटनाओं के दौर से गुजर रहे हैं। इन देशों में सुशासन, सुरक्षा तथा कल्याणकारी योजनाओं में सरकारी निवेश की तत्काल आवश्यकता है।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मानव विकास अवधारणा के चार स्तंभ कौन-से हैं? स्पष्ट करें।
अथवा
मानव विकास अवधारणा के कौन-कौन से स्तंभ हैं? विस्तारपूर्वक वर्णन करें।
उत्तर:
मानव विकास का ध्येय लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है। यह संसाधनों के उपयोग के लिए मनुष्यों के काम करने के तरीकों तथा क्षमताओं में उन्नयन की प्रक्रिया है। मानव विकास की सारी सोच चार स्तंभों पर टिकी हुई है। ये हैं-
1. समता (Equity) – समता का आशय ऐसी व्यवस्था करने से है जिससे प्रत्येक व्यक्ति की उपलब्ध संसाधनों तक समान पहुँच हो सके। लोगों को उपलब्ध अवसर धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म-स्थान तथा आय के भेदभाव के विचार के बिना समान होने चाहिएँ। भारत के संविधान में अनुच्छेद 14-18 के अंतर्गत लोगों को समानता के मूल अधिकार प्रदान किए गए हैं। इसके बावजूद भी लगभग प्रत्येक समाज में भेदभाव की घटनाएँ कभी-न-कभी देखने को मिलती रहती हैं।

2. सतत् पोषणीयता (Sustainability) – यहाँ सतत् पोषणीयता अथवा निर्वहन का मतलब है कि लोगों को विकास करने के अवसर लगातार मिलते रहें। सतत् पोषणीय मानव विकास तभी होगा जब प्रत्येक पीढ़ी को समान अवसर मिलें। अतः यह जरूरी है कि हम पर्यावरणीय, वित्तीय और मानव संसाधनों का आने वाली पीढ़ियों को ध्यान में रखते हुए सुविचारित उपयोग करें। यदि हम इन बहुमूल्य संसाधनों का अंधाधुंध प्रयोग अथवा दुरुपयोग करेंगे तो भावी पीढ़ियों के विकल्प कम हो जाएँगे।

3. उत्पादकता (Productivity) – यहाँ उत्पादकता से तात्पर्य मानव श्रम उत्पादकता से है। मनुष्यों के काम करने के तरीकों को बेहतर बनाकर तथा उनमें क्षमताओं का निर्माण करके उत्पादकता में निरंतर वृद्धि की जा सकती है। स्वस्थ शरीर से युक्त हुनरमंद लोग ही किसी राष्ट्र का वास्तविक धन होते हैं। अतः लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने एवं उनके ज्ञान को बढ़ाने के प्रयासों से ही लोगों की कार्य क्षमता बढ़ेगी।

4. सशक्तीकरण (Empowerment) इसका अर्थ है कि लोगों में अपने विकल्प चुनने की ताकत पैदा की जाए। यह ताकत बढ़ती हुई स्वतंत्रता, क्षमता और उत्पादकता से आती है। सुशासन और लोकोन्मुखी नीतियों से लोगों को सशक्त किया जा सकता है। मानव विकास के लिए जरूरी है कि सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए वर्गों और विशेष रूप से महिलाओं का सशक्तीकरण हो।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव विकास

प्रश्न 2.
मानव विकास के चार प्रमुख उपागमों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मानव विकास को देखने और समझने के अनेक ढंग अथवा उपागम हैं जिनमें चार महत्त्वपूर्ण हैं-
1. आय उपागम (Income Approach) यह मानव विकास के अध्ययन के सबसे पुराने उपागमों में से एक है जिसमें आमदनी के बढ़ने को विकास का होना माना जाता है। इस उपागम में यह माना जाता है कि आय का स्तर किसी व्यक्ति द्वारा भोगी जा रही स्वतंत्रता के स्तर को परिलक्षित करता है। आय के स्तर के ऊँचा या नीचा होने पर मानव विकास का स्तर भी उसी अनुरूप ऊँचा या नीचा होता है।

2. कल्याण उपागम (Welfare Approach)-इस उपागम के अनुसार सरकार द्वारा लोगों के कल्याणकारी कार्यक्रमों; जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और सुख-साधनों पर अधिक खर्च करके मानव विकास के स्तरों को, बढ़ा सकती है। यह उपागम मनुष्य को सभी विकासात्मक गतिविधियों के केंद्र के रूप में देखता है। लोग विकास के प्रतिभागी नहीं हैं, अपितु वे केवल निष्क्रिय लाभार्थी हैं।

3. आधारभूत/न्यूनतम आवश्यकता उपागम (Basic/Minimum Needs Approach)-मूल रूप से यह उपागम अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (I.L.O.) की देन है जिसमें मानव विकास के लिए जरूरी छः न्यूनतम आवश्यकताओं की पहचान की गई है। वे हैं-

  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • भोजन
  • जलापूर्ति
  • स्वच्छता और
  • आवास।

इस उपागम में परिभाषित वर्गों की मूलभूत आवश्यकताओं पर तो बल दिया गया है, किंतु मानव विकल्पों की ओर ध्यान नहीं दिया गया।

4. क्षमता उपागम (Capability Approach)-इस उपागम का समर्थन प्रो० अमर्त्य सेन ने किया है। इसके अनुसार क्षमताओं को विकसित किए बिना मनुष्य संसाधनों तक नहीं पहुँच सकता। क्षमताओं का निर्माण ही मानव विकास की कुंजी है।

प्रश्न 3.
मानव विकास की अंतर्राष्ट्रीय तुलनाएँ रुचिकर हैं। व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मानव विकास की अंतर्राष्ट्रीय तुलनाएँ रुचिकर हैं। प्रायः मानव विकास में बड़े देशों की अपेक्षा छोटे देशों का कार्य अच्छा रहा है। इसी तरह मानव विकास में अपेक्षाकृत गरीब राष्ट्रों का कोटि-क्रम अमीर पड़ोसियों से उच्च रहा है। उदाहरण के लिए श्रीलंका, त्रिनिदाद, टोबैगो का मानव विकास सूचकांक भारत के मानव विकास सूचकांक से ऊँचा है। इसी प्रकार प्रति व्यक्ति आय कम होते हुए भी मानव विकास में केरल का प्रदर्शन पंजाब और गुजरात से बेहतर है। मानव विकास सूचकांक के आधार पर देशों को चार समूहों में बाँटा जा सकता है

मानव विकास के स्तरमानव विकास सूचकांक के स्कोर/अंकदेशों की संख्या
अति उच्च0.800 से ऊपर– 59
उच्च0.701 से 0.799 के मध्य53
मध्यम0.550 से 0.700 के मध्य39
निम्न0.549 से नीचे38

मानव विकास की अंतर्राष्ट्रीय तुलनाएँ कुछ अत्यंत रुचिकर परिणाम दर्शाती हैं। प्रायः लोग मानव विकास के निम्न स्तर के लिए लोगों की संस्कृति को दोष देते हैं। मानव विकास के उच्च स्तरों वाले देश सामाजिक क्षेत्रों में अधिक निवेश करते हैं और ये राजनीतिक दृष्टिकोण से स्थिर होते हैं। दूसरी ओर, निम्न स्तरों वाले देश प्रतिरक्षा पर अधिक खर्च करते हैं।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. सबसे कम परिवर्तनशील अनुपात किस जनसंख्या वर्ग का होता है?
(A) बाल वर्ग का
(B) प्रौढ़ वर्ग का
(C) वृद्ध वर्ग का
(D) युवा वर्ग का
उत्तर:
(C) वृद्ध वर्ग का

2. आयु और लिंग पिरामिड से क्या प्रदर्शित किया जाता है?
(A) आयु संरचना
(B) लिंग संरचना
(C) आयु और लिंग संरचना
(D) लिंग अनुपात
उत्तर:
(C) आयु और लिंग संरचना

3. आर्थिक दृष्टि से सर्वाधिक उत्पादक आयु वर्ग कौन-सा है?
(A) बाल वर्ग
(B) प्रौढ़ वर्ग
(C) वृद्ध वर्ग
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) वृद्ध वर्ग

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

4. बौद्धिकतापूर्ण व्यवसाय किस वर्ग में आते हैं?
(A) प्राथमिक व्यवसाय
(B) द्वितीयक व्यवसाय
(C) तृतीयक व्यवसाय
(D) चतुर्थक व्यवसाय
उत्तर:
(C) तृतीयक व्यवसाय

5. विश्व का सर्वाधिक नगरीकृत महाद्वीप कौन-सा है?
(A) यूरोप
(B) एशिया
(C) ऑस्ट्रेलिया
(D) उत्तरी अमेरिका
उत्तर:
(C) ऑस्ट्रेलिया

6. लिंगानुपात = HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन 2
(A) कुल जनसंख्या
(B) मृत्यु-दर
(C) जन्म-दर
(D) स्त्रियों की जनसंख्या
उत्तर:
(D) स्त्रियों की जनसंख्या

7. चौड़ा आधार तथा पतला होता शीर्ष आकृति वाला पिरामिड क्या दर्शाता है?
(A) स्थिर जनसंख्या
(B) विकासशील जनसंख्या
(C) घटती जनसंख्या
(D) कोई नहीं
उत्तर:
(D) कोई नहीं

8. बच्चे, वृद्ध, सेवानिवृत्त व्यक्ति, गृहणियां तथा विद्यार्थियों को जनसंख्या के किस वर्ग में रखा गया है?
(A) सक्रिय जनसंख्या
(B) नगरीय जनसंख्या
(C) पराश्रित जनसंख्या
(D) कोई नहीं
उत्तर:
(C) पराश्रित जनसंख्या

9. निम्नलिखित में कौन-सा घटक जनसंख्या के संघटन को प्रदर्शित नहीं करता-
(A) आयु
(B) लिंग
(C) साक्षरता
(D) प्रजननशीलता
उत्तर:
(D) प्रजननशीलता

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

10. एशिया का कौन-सा देश उच्च मानव विकास की श्रेणी में है?
(A) जापान
(B) भारत
(C) श्रीलंका
(D) चीन
उत्तर:
(A) जापान

11. 1951 में भारत की साक्षरता दर कितनी थी?
(A) 16%
(B) 17%
(C) 18%
(D) 19%
उत्तर:
(C) 18%

12. जनसंख्या की आयु संरचना का अर्थ है-
(A) विभिन्न आयु वर्ग के लिंग अनुपात की जनसंख्या
(B) आयु और लिंग अनुपात का विवरण
(C) विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की संख्या
(D) 60 वर्ष से ऊपर की आयु के लोगों की संख्या
उत्तर:
(C) विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की संख्या

13. ऋणात्मक वार्षिक जनसंख्या वृद्धि-दर दिखलाने वाला देश कौन-सा है?
(A) बेल्जियम
(B) इंग्लैंड
(C) रूस
(D) अमेरिका
उत्तर:
(C) रूस

14. जनसंख्या की आयु-लिंग संरचना सबसे अच्छी प्रदर्शित होती है-
(A) सममान रेखा द्वारा
(B) वृत्त आरेख द्वारा
(C) छाया आरेख द्वारा
(D) पिरामिड आरेख द्वारा
उत्तर:
(D) पिरामिड आरेख द्वारा

15. जनांकिकीय संक्रमण की दूसरी अवस्था में कौन-सा देश है?
(A) चिली
(B) कनाडा
(C) फ्रांस
(D) अफ्रीका
उत्तर:
(D) अफ्रीका

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16. जनांकिकीय संक्रमण की तीसरी अवस्था में कौन-सा देश है?
(A) चिली
(B) कनाडा
(C) फ्रांस
(D) अफ्रीका
उत्तर:
(A) चिली

17. जनांकिकीय संक्रमण की चौथी अवस्था में कौन-सा देश है?
(A) चिली
(B) कनाडा
(C) फ्रांस
(D) अफ्रीका
उत्तर:
(B) कनाडा

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
कृषि अथवा प्राथमिक क्रियाकलापों में संलग्न जनसंख्या को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
ग्रामीण जनसंख्या।

प्रश्न 2.
चौड़ा आधार तथा पतला होता शीर्ष आकृति वाला पिरामिड क्या दर्शाता है?
उत्तर:
विकासशील जनसंख्या को।

प्रश्न 3.
गैर-कृषि कार्यों में संलग्न जनसंख्या को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
नगरीय जनसंख्या।

प्रश्न 4.
वर्ष 1951 में भारत की साक्षरता दर कितने प्रतिशत थी?
उत्तर:
18 प्रतिशत।

प्रश्न 5.
ऋणात्मक वार्षिक जनसंख्या वृद्धि-दर दिखलाने वाला देश कौन-सा है?
उत्तर:
रूस।

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प्रश्न 6.
सबसे कम परिवर्तनशील अनुपात किस जनसंख्या वर्ग का होता है?
उत्तर:
वृद्ध वर्ग।

प्रश्न 7.
बच्चे, वृद्ध, सेवानिवृत्त व्यक्ति, गृहणियाँ तथा विद्यार्थियों को जनसंख्या के किस वर्ग में रखा गया है?
उत्तर:
पराश्रित जनसंख्या वर्ग।

प्रश्न 8.
किसी जनसंख्या के आयु-लिंग पिरामिड का आधार संकीर्ण है, तो उस जनसंख्या की वृद्धि-दर कितनी होगी?
उत्तर:
कम जनसंख्या वृद्धि-दर।

प्रश्न 9.
किसी जनसंख्या में उच्च जन्म-दर होने पर आयु-लिंग पिरामिड का आकार कैसा होगा?
उत्तर:
त्रिभुज के आकार का।

प्रश्न 10.
किसी जनसंख्या में जन्म-दर व मृत्यु-दर समान होने पर आयु-लिंग पिरामिड का आकार कैसा होगा?
उत्तर:
घण्टी के आकार का।

प्रश्न 11.
जनांकिकीय संक्रमण की तीसरी अवस्था में शामिल कोई एक देश बताएँ।
उत्तर:
चिली।

प्रश्न 12.
प्रति सौ व्यक्तियों के अनुपात में साक्षर व्यक्तियों की संख्या क्या कहलाती है?
उत्तर:
साक्षरता दर।

प्रश्न 13.
विस्तृत जनसंख्या पिरामिड किस आकार का होता है?
उत्तर:
चौड़े आकार का।

प्रश्न 14.
ऑस्ट्रेलिया का जनसंख्या पिरामिड किस प्रकार का है?
उत्तर:
विस्तृत प्रकार का।

प्रश्न 15.
कार्यशील जनसंख्या का आयु वर्ग कौन-सा है?
उत्तर:
15 से 59 वर्ष।

प्रश्न 16.
किसी जनसंख्या के आयु लिंग पिरामिड का आधार संकीर्ण है, तो उस जनसंख्या की वृद्धि दर कितनी होगी?
उत्तर:
ह्रासमान जनसंख्या।

प्रश्न 17.
किसी जनसंख्या में उच्च जन्म-दर होने पर आयु लिंग पिरामिड का आकार कैसा होगा?
उत्तर:
विस्तारित होती जनसंख्या।

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प्रश्न 18.
किसी जनसंख्या में जन्म-दर व मृत्यु-दर समान होने पर आयु लिंग पिरामिड का आकार कैसा होगा?
उत्तर:
स्थिर जनसंख्या।

प्रश्न 19.
आयु और लिंग पिरामिड से क्या प्रदर्शित किया जाता है?
उत्तर:
आयु और लिंग संरचना।

प्रश्न 20.
आर्थिक दृष्टि से सर्वाधिक उत्पादक आयु वर्ग कौन-सा है?
उत्तर:
प्रौढ़ वर्ग।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
आयु संरचना को प्रभावित करने वाले तीन कारकों के नाम बताएँ।
उत्तर:
आयु संरचना को प्रभावित करने वाले तीन कारक निम्नलिखित हैं-

  1. जन्म-दर या प्रजननशीलता
  2. मृत्यु-दर या मर्त्यता
  3. प्रवास।

प्रश्न 2.
जनसंख्या के तीन बड़े आयु वर्ग कौन से हैं?
उत्तर:

  1. बाल तरुण आयु वर्ग (0 से 14 वर्ष)
  2. प्रौढ़ आयु वर्ग (15 से 59 वर्ष)
  3. वृद्ध आयु वर्ग (60 वर्ष व इससे ऊपर)।

प्रश्न 3.
नगरीय जनसंख्या की वृद्धि किन तीन तरीकों से होती है?
उत्तर:

  1. प्राकृतिक वृद्धि द्वारा
  2. गाँव से नगर की ओर प्रवास द्वारा तथा
  3. किसी ग्रामीण क्षेत्र के नगरीय घोषित हो जाने से।

प्रश्न 4.
जनसंख्या पिरामिड (Population Pyraimid) क्या होता है?
उत्तर:
जनसंख्या पिरामिड विभिन्न आयु वर्ग की जनसंख्या का एक त्रिकोणात्मक प्रदर्शन है। इसका प्रतिपादन डब्ल्यू एम० थॉमसन तथा ऑर्थर लेविस ने किया था। इस पिरामिड में सबसे नीचे के आधार पर निम्नतम आयु वर्ग की जनसंख्या (पुरुष एवं महिला) को प्रदर्शित करते हैं, जो सबसे बड़ी संख्या होती है। क्रमशः घटते हुए आयु वर्ग पर चलते हैं। उच्चतम आयु वर्ग की जनसंख्या जो आकार में सबसे कम होगी, सबसे ऊपर प्रदर्शित होती है। इस प्रकार बनी आकृति पिरामिड की तरह होगी। यही जनसंख्या पिरामिड कहलाता है।

प्रश्न 5.
लिंगानुपात किसे कहते हैं?
उत्तर:
प्रति हजार पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की संख्या के अनुपात को लिंगानुपात कहा जाता है। यह भारत के संदर्भ में है क्योंकि विभिन्न देशों में लिंगानुपात की परिभाषा अलग-अलग है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

प्रश्न 6.
ह्रासमान जनसंख्या को प्रदर्शित करने वाले आयु-लिंग पिरामिड का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ह्रासमान या घटती हुई जनसंख्या के पिरामिड का आधार संकीर्ण और शीर्ष शुण्डाकार होता है। यह निम्न जन्म-दर तथा मृत्यु-दर को दर्शाता है। इसमें जनसंख्या वृद्धि दर शून्य अथवा ऋणात्मक होती है। जापान, ऑस्ट्रेलिया के जनसंख्या पिरामिड इसी प्रकार के हैं।

प्रश्न 7.
विस्तारित होती या विकासशील जनसंख्या को प्रदर्शित करने वाले आयु-लिंग पिरामिड का उल्लेख कीजिए।
अथवा
किसी क्षेत्र का विस्तारित होती जनसंख्या को प्रदर्शित करने वाले आयु लिंग पिरामिड की व्याख्या करें।
उत्तर:
अल्पविकसित या विकासशील देशों में आयु-लिंग पिरामिड का आधार चौड़ा और शीर्ष तेजी से पतला होता जाता है। यह उच्च जन्म दर तथा मृत्यु दर को दर्शाता है। इसमें जनसंख्या वृद्धि दर धनात्मक होती है। अल्पविकसित या विकासशील देशों में वृद्धों की जनसंख्या कम और बच्चों की जनसंख्या बढ़ती जाती है। नाइजीरिया, बांग्लादेश के जनसंख्या पिरामिड इसी प्रकार के हैं।

प्रश्न 8.
उत्पादक और आश्रित जनसंख्या में क्या अंतर है?
उत्तर:
उत्पादक और आश्रित जनसंख्या में निम्नलिखित अंतर हैं-

उत्पादक जनसंख्याआश्रित जनसंख्या
1. उत्पादक जनसंख्या लाभदायक आर्थिक क्रियाओं में काम करती है।1. आश्रित जनसंख्या आर्थिक क्रियाओं में विशेष योगदान नहीं देती।
2. ऐसे लोगों के समुदाय को श्रमिक बल कहा जाता है।2. ऐसे लोगों के समुदाय को अश्रमिक बल कहा जाता है।
3. ये लोग स्वयं परिश्रम करके अपना जीवन-निवर्वाह करते हैं।3. ये लोग बेरोज़गार होते हैं तथा श्रमिक लोगों पर आश्रित रहते हैं।

प्रश्न 9.
विकासशील और हासशील जनसंख्या में क्या अंतर है?
उत्तर:
विकासशील और ह्रासशील जनसंख्या में निम्नलिखित अंतर हैं-

विकासशील जनसंख्याहासशील जनसंख्या
1. विकासशील जनसंख्या में जन्म-दर तथा मृत्यु-दर दोनों उच्च होती हैं।1. ह्रसशील जनसंख्या में जन्म-दर तथा मृत्यु-दर दोनों निम्न होती हैं।
2. जनसंख्या पिरामिड का आधार चौड़ा तथा शीर्ष पतला होता जाता है।2. जनसंख्या पिरामिड का आधार पतला तथा शीर्ष संकीर्ण होता जाता है।

प्रश्न 10.
जनसंख्या के घटते लिंगानुपात के कारण क्या हैं?
उत्तर:

  1. पुरुष और स्त्री मृत्यु-दर में अंतर होने के कारण लिंगानुपात कम हो रहा है।
  2. स्त्री-पुरुष के जन्म-दर में अंतर होने के कारण भी लिंगानुपात कम हो रहा है।
  3. प्रवास भी लिंगानुपात को प्रभावित करने वाला महत्त्वपूर्ण कारक है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विकासशील देशों में नगरीकरण की दर तेजी से क्यों बढ़ रही है?
उत्तर:
विकासशील देशो में तेजी से बढ़ते नगरीकरण के निम्नलिखित कारण हैं-

  1. इन देशों में भारी मात्रा में औद्योगीकरण हुआ है जिससे रोजगार के अवसर अधिक उपलब्ध हैं। फलस्वरूप इन देशों के गांवों से लोग नगरों की ओर स्थानांतरित हुए।
  2. इन देशों के गांवों में जीवन की आवश्यक सुविधाएँ; जैसे-चिकित्सा तथा शिक्षा आदि का अभाव पाया जाता है। इसलिए अधिक-से-अधिक लोग नगरो की ओर प्रवास करते हैं जिससे इन देशों के नगरों के आकार में भारी वृद्धि हो गई।

प्रश्न 2.
आयु संरचना पर मृत्यु-दर के प्रभाव का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
आयु संरचना पर मृत्यु-दर के प्रभाव निम्नलिखित हैं-

  1. किसी भी देश में निम्न शिशु मृत्यु-दर होने पर वहाँ बच्चों की संख्या का अनुपात घट जाता है।
  2. वृद्ध मृत्यु-दर निम्न होने पर उनकी संख्या बढ़ जाती है और बच्चों की संख्या कम हो जाती है।
  3. युवा व वृद्ध आयु वर्ग में मृत्यु-दर कम होने पर उच्च आयु वर्ग की जनसंख्या का अनुपात बढ़ जाता है। विकसित देशों में ऐसा ही हो रहा है।।

प्रश्न 3.
आयु-संरचना पर जन्म-दर के प्रभाव का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
जन्म-दर किसी देश की जनसंख्या के विभिन्न आयु वर्गों में लोगों के अनुपात को प्रभावित करती है। आयु-संरचना पर जन्म-दर के प्रभाव निम्नलिखित हैं

  1. एशिया, अफ्रीका तथा लैटिन अमेरिकी अल्पविकसित देशों में उच्च जन्म-दर पाई जाती है इसलिए वहाँ निम्न आयु वर्ग तथा युवा वर्ग की प्रधानता होती है।
  2. जब निम्न आयु वर्ग संतान पैदा करने की उम्र में शामिल होते हैं तो जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ती है।
  3. निम्न आयु वर्ग (0-14 वर्ष) और 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की अधिक संख्या आश्रित जनसंख्या को प्रदर्शित करती है।
  4. जिन देशों में जन्म-दर कम तथा जीवन प्रत्याशा अधिक होती है, वहाँ बच्चों की संख्या कम और वृद्धों की संख्या अधिक होती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

प्रश्न 4.
स्त्री-पुरुष की भिन्न मृत्यु-दर लिंगानुपात को कैसे प्रभावित करती है?
उत्तर:
विकासशील और अल्प-विकसित देशों में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों की मृत्यु-दर अधिक होती है। इन देशों में स्त्रियों का सामाजिक और आर्थिक रूप से निम्न स्तर तथा स्त्रियों के प्रति उपेक्षापूर्ण दृष्टिकोण के कारण स्त्री मृत्यु-दर अधिक पाई जाती है।

विकसित देशों में जीवन के सभी आयु वर्गों में पुरुष मृत्यु-दर, स्त्री मृत्यु-दर से अधिक होती है। फलस्वरूप पुरुषों की संख्या उत्तरोतर समाप्त होती जाती है। इसका एक कारण और भी हो सकता है कि जैविक दृष्टि से स्त्रियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पुरुषों से अधिक होती है।

प्रश्न 5.
ग्रामीण जनसंख्या की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
ग्रामीण जनसंख्या की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. गाँवों में रहने वाली जनसंख्या को ग्रामीण जनसंख्या कहते हैं। इनका मुख्य व्यवसाय कृषि होता है।
  2. ये लोग अपनी आजीविका के लिए प्राथमिक व्यवसाय; जैसे-कृषि, पशुपालन, खनन, मत्स्यपालन, संग्रहण व कुटीर उद्योग पर निर्भर करते हैं।
  3. गाँव के लोग सरल, धर्मनिष्ठ व सामुदायिक भावना से ओत-प्रोत होते हैं।
  4. ग्रामीण जनसंख्या भावनात्मक होती है।

प्रश्न 6.
नगरीय जनसंख्या की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
नगरीय जनसंख्या की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. नगरों में रहने वाली जनसंख्या को नगरीय जनसंख्या कहते हैं। इनका मुख्य व्यवसाय उद्योग एवं व्यापार होता है।
  2. ये लोग अपनी आजीविका के लिए द्वितीयक, तृतीयक व चतुर्थक व्यवसाय; जैसे विनिर्माण उद्योग, परिवहन, व्यापार, सेवाओं आदि पर निर्भर करते हैं।
  3. नगरीय लोगों के जीवन की तीव्र गति व सम्बन्ध बनावटी होते हैं।
  4. नगरीय जनसंख्या व्यावसायिक होती है।

प्रश्न 7.
किसी देश की जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना से उस देश के आर्थिक विकास के स्तर का पता कैसे लगता है?
उत्तर:
किसी भी देश की जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना को चार भागों में बाँटा जा सकता है प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थक। किसी भी राष्ट्र के आर्थिक विकास का स्तर उसकी कार्यशील जनसंख्या के आधार पर होता है। जिस देश की जनसंख्या द्वितीयक, तृतीयक, चतुर्थक क्रियाकलापों में लगी होती है, वह देश विकसित अवस्था में होता है।

प्रश्न 8.
आयु-लिंग पिरामिड से क्या अभिप्राय है? इसके विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आयु-लिंग पिरामिड का अर्थ-जनसंख्या की आयु लिंग संरचना का अभिप्राय विभिन्न आयु वर्गों में स्त्रियों और पुरुषों की संख्या से है। आयु लिंग संरचना को दर्शाने के लिए एक विशेष प्रकार का रेखाचित्र बनाया जाता है, जिस कारण इसे आयु-लिंग अथवा जनसंख्या पिरामिड कहा जाता है।

आयु-लिंग पिरामिड के प्रकार-आयु-लिंग पिरामिड के विभिन्न प्रकार निम्नलिखित हैं-
1. विस्तारित होती जनसंख्या-यह विस्तृत आकार वाला त्रिभुजाकार पिरामिड है जो कम विकसित देशों का प्रतिरूपी है। इस पिरामिड में उच्च जन्म-दर के कारण निम्न आयु वर्गों में विशाल जनसंख्या पाई जाती है। उदाहरणतया-नाइजीरिया, बांग्लादेश, मैक्सिको के लिए ऐसे पिरामिड की रचना होगी।

2. स्थिर जनसंख्या इस आयु-लिंग पिरामिड का आकार घंटी के आकार का है जो शीर्ष की ओर शुंडाकार होता जाता है। यह दर्शाता है कि जन्म-दर और मृत्यु-दर लगभग समान है जिसके परिणामस्वरूप जनसंख्या स्थिर हो जाती है। उदाहरणतया ऑस्ट्रेलिया का आयु-लिंग पिरामिड।

3. हासमान जनसंख्या-इस पिरामिड का संकीर्ण आधार और शुंडाकार शीर्ष निम्न जन्म-दर और मृत्यु-दर को दर्शाता है। इन देशों में जनसंख्या वृद्धि ऋणात्मक या शून्य होती है।

प्रश्न 9.
ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ग्रामीण जनसंख्या तथा नगरीय जनसंख्या में निम्नलिखित अंतर हैं-

ग्रामीण जनसंख्यानगरीय जनसंख्या
1. ग्रामीण लोग अपनी व्यवसाय-संरचना, जीवन-पद्धति, विचारों तथा दृष्टिकोणों से नगरों की जनसंख्या से भिन्न होते हैं। ये लोग छोटी बस्तियों तथा छोटे मकानों में रहते हैं। इनके आपसी संबंध घनिष्ठ होते हैं।1. ये लोग बड़े मकानों में रहते हैं तथा इनके आपसी संबंध औपचारिक ही होते हैं।
2. इन लोगों का मुख्य धंधा ‘कृषि’ है।2. ये लोग अधिकतर उद्योगों तथा व्यापार में काम करते हैं।
3. गाँवों में यातायात, स्वास्थ्य तथा शैक्षणिक सुविधाएँ अच्छी नहीं हैं।3. शहरों में ये सभी सुविधाएँ पर्याप्त हैं।
4. ग्रामीण क्षेत्रों की जनसंख्या 5,000 से कम होती है।4. नगरीय क्षेत्रों की जनसंख्या 5,000 से अधिक होती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

प्रश्न 10.
विश्व के विभिन्न भागों में आयु-लिंग में असंतुलन के लिए उत्तरदायी कारकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
आयु-लिंग में असंतुलन के लिए निम्नलिखित कारक उत्तरदायी हैं-
1. स्त्री-पुरुष के जन्म-दर में अंतर-प्रत्येक समाज में जन्म के समय नर बच्चे, मादा बच्चों से अधिक पैदा होते हैं। साधारणतया इनका अनुपात क्रमशः 107 से 100 का है किंतु जन्म के पहले और बाद की दशाएँ कभी-कभी इस स्थिति को परिवर्तित कर देती हैं।

2. स्त्री-पुरुष की मृत्यु-दर में अंतर-स्त्री-पुरुष की मृत्यु-दर में अंतर होने के कारण भी लिंगानुपात में अंतर आ जाता है। विकसित देशों में जीवन की सभी अवस्थाओं में पुरुष मृत्यु-दर, स्त्री मृत्यु-दर से अधिक होती है जबकि विकासशील देशों में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में मृत्यु-दर अधिक होती है। ऐसे समाज में स्त्री भ्रूण हत्या, स्त्री शिशु हत्या और स्त्रियों के प्रति घरेलू हिंसा की प्रथा प्रचलित होती है। इन देशों में न केवल स्त्रियों की मृत्यु-दर ऊँची होती है बल्कि उनकी जीवन प्रत्याशा भी कम हो जाती है।

3. प्रवास-स्त्रियों और पुरुषों का प्रवास भी लिंगानुपात को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। अधिकांश विकासशील देशों में विशेषतया एशियाई और अफ्रीकी देशों में बड़ी संख्या में पुरुष ग्रामीण इलाकों से नगरों की ओर आजीविका की तलाश में प्रवास करते हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विकासशील देशों में नगरीकरण की दर तेजी से क्यों बढ़ रही है?
उत्तर:
विकासशील देशो में तेजी से बढ़ते नगरीकरण के निम्नलिखित कारण हैं-

  1. इन देशों में भारी मात्रा में औद्योगीकरण हुआ है जिससे रोजगार के अवसर अधिक उपलब्ध हैं। फलस्वरूप इन देशों के गांवों से लोग नगरों की ओर स्थानांतरित हुए।
  2. इन देशों के गांवों में जीवन की आवश्यक सुविधाएँ; जैसे-चिकित्सा तथा शिक्षा आदि का अभाव पाया जाता है। इसलिए अधिक-से-अधिक लोग नगरों की ओर प्रवास करते हैं जिससे इन देशों के नगरों के आकार में भारी वृद्धि हो गई।

प्रश्न 2.
आयु संरचना पर मृत्यु-दर के प्रभाव का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
आयु संरचना पर मृत्यु-दर के प्रभाव निम्नलिखित हैं-

  1. किसी भी देश में निम्न शिशु मृत्यु-दर होने पर वहाँ बच्चों की संख्या का अनुपात घट जाता है।
  2. वृद्ध मृत्यु-दर निम्न होने पर उनकी संख्या बढ़ जाती है और बच्चों की संख्या कम हो जाती है।
  3. युवा व वृद्ध आयु वर्ग में मृत्यु-दर कम होने पर उच्च आयु वर्ग की जनसंख्या का अनुपात बढ़ जाता है। विकसित देशों में ऐसा ही हो रहा है।

प्रश्न 3.
आयु-संरचना पर जन्म-दर के प्रभाव का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
जन्म-दर किसी देश की जनसंख्या के विभिन्न आयु वर्गों में लोगों के अनुपात को प्रभावित करती है। आयु-संरचना पर जन्म-दर के प्रभाव निम्नलिखित हैं-

  1. एशिया, अफ्रीका तथा लैटिन अमेरिकी अल्पविकसित देशों में उच्च जन्म-दर पाई जाती है इसलिए वहाँ निम्न आयु वर्ग तथा युवा वर्ग की प्रधानता होती है।
  2. जब निम्न आयु वर्ग संतान पैदा करने की उम्र में शामिल होते हैं तो जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ती है।
  3. निम्न आयु वर्ग (0-14 वर्ष) और 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की अधिक संख्या आश्रित जनसंख्या को प्रदर्शित करती है।
  4. जिन देशों में जन्म-दर कम तथा जीवन प्रत्याशा अधिक होती है, वहाँ बच्चों की संख्या कम और वृद्धों की संख्या अधिक होती है।

प्रश्न 4.
स्त्री-पुरुष की भिन्न मृत्यु-दर लिंगानुपात को कैसे प्रभावित करती है?
उत्तर:
विकासशील और अल्प-विकसित देशों में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों की मृत्यु-दर अधिक होती है। इन देशों में स्त्रियों का सामाजिक और आर्थिक रूप से निम्न स्तर तथा स्त्रियों के प्रति उपेक्षापूर्ण दृष्टिकोण के कारण स्त्री मृत्यु-दर अधिक पाई जाती है।

विकसित देशों में जीवन के सभी आयु वर्गों में पुरुष मृत्यु-दर, स्त्री मृत्यु-दर से अधिक होती है। फलस्वरूप पुरुषों की संख्या उत्तरोतर समाप्त होती जाती है। इसका एक कारण और भी हो सकता है कि जैविक दृष्टि से स्त्रियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पुरुषों से अधिक होती है।

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प्रश्न 5.
ग्रामीण जनसंख्या की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
ग्रामीण जनसंख्या की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

  1. गाँवों में रहने वाली जनसंख्या को ग्रामीण जनसंख्या कहते हैं। इनका मुख्य व्यवसाय कृषि होता है।
  2. ये लोग अपनी आजीविका के लिए प्राथमिक व्यवसाय; जैसे-कृषि, पशुपालन, खनन, मत्स्यपालन, संग्रहण व कुटीर उद्योग पर निर्भर करते हैं।
  3. गाँव के लोग सरल, धर्मनिष्ठ व सामुदायिक भावना से ओत-प्रोत होते हैं।
  4. ग्रामीण जनसंख्या भावनात्मक होती है।

प्रश्न 6.
नगरीय जनसंख्या की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
नगरीय जनसंख्या की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. नगरों में रहने वाली जनसंख्या को नगरीय जनसंख्या कहते हैं। इनका मुख्य व्यवसाय उद्योग एवं व्यापार होता है।
  2. ये लोग अपनी आजीविका के लिए द्वितीयक, तृतीयक व चतुर्थक व्यवसाय; जैसे विनिर्माण उद्योग, परिवहन, व्यापार, सेवाओं आदि पर निर्भर करते हैं।
  3. नगरीय लोगों के जीवन की तीव्र गति व सम्बन्ध बनावटी होते हैं।
  4. नगरीय जनसंख्या व्यावसायिक होती है।

प्रश्न 7.
किसी देश की जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना से उस देश के आर्थिक विकास के स्तर का पता कैसे लगता है?
उत्तर:
किसी भी देश की जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना को चार भागों में बाँटा जा सकता है प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थक। किसी भी राष्ट्र के आर्थिक विकास का स्तर उसकी कार्यशील जनसंख्या के आधार पर होता है। जिस देश की जनसंख्या द्वितीयक, तृतीयक, चतुर्थक क्रियाकलापों में लगी होती है, वह देश विकसित अवस्था में होता है।

प्रश्न 8.
आयु-लिंग पिरामिड से क्या अभिप्राय है? इसके विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आयु-लिंग पिरामिड का अर्थ-जनसंख्या की आयु लिंग संरचना का अभिप्राय विभिन्न आयु वर्गों में स्त्रियों और पुरुषों की संख्या से है। आयु लिंग संरचना को दर्शाने के लिए एक विशेष प्रकार का रेखाचित्र बनाया जाता है, जिस कारण इसे आयु-लिंग अथवा जनसंख्या पिरामिड कहा जाता है।

आयु-लिंग पिरामिड के प्रकार-आयु-लिंग पिरामिड के विभिन्न प्रकार निम्नलिखित हैं-
1. विस्तारित होती जनसंख्या-यह विस्तृत आकार वाला त्रिभुजाकार पिरामिड है जो कम विकसित देशों का प्रतिरूपी है। इस पिरामिड में उच्च जन्म-दर के कारण निम्न आयु वर्गों में विशाल जनसंख्या पाई जाती है। उदाहरणतया नाइजीरिया, बांग्लादेश, मैक्सिको के लिए ऐसे पिरामिड की रचना होगी।

2. स्थिर जनसंख्या इस आयु-लिंग पिरामिड का आकार घंटी के आकार का है जो शीर्ष की ओर शुंडाकार होता जाता है। यह दर्शाता है कि जन्म-दर और मृत्यु-दर लगभग समान है जिसके परिणामस्वरूप जनसंख्या स्थिर हो जाती है। उदाहरणतया ऑस्ट्रेलिया का आयु-लिंग पिरामिड।

3. हासमान जनसंख्या-इस पिरामिड का संकीर्ण आधार और शुंडाकार शीर्ष निम्न जन्म-दर और मृत्यु-दर को दर्शाता है। इन देशों में जनसंख्या वृद्धि ऋणात्मक या शून्य होती है।

प्रश्न 9.
ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ग्रामीण जनसंख्या तथा नगरीय जनसंख्या में निम्नलिखित अंतर हैं-

ग्रामीण जनसंख्यानगरीय जनसंख्या
1. ग्रामीण लोग अपनी व्यवसाय-संरचना, जीवन-पद्धति, विचारों तथा दृष्टिकोणों से नगरों की जनसंख्या से भिन्न होते हैं। ये लोग छोटी बस्तियों तथा छोटे मकानों में रहते हैं। इनके आपसी संबंध घनिष्ठ होते हैं।1. ये लोग बड़े मकानों में रहते हैं तथा इनके आपसी संबंध औपचारिक ही होते हैं।
2. इन लोगों का मुख्य धंधा ‘कृषि’ है।2. ये लोग अधिकतर उद्योगों तथा व्यापार में काम करते हैं।
3. गाँवों में यातायात, स्वास्थ्य तथा शैक्षणिक सुविधाएँ अच्छी नहीं हैं।3. शहरों में ये सभी सुविधाएँ पर्याप्त हैं।
4. ग्रामीण क्षेत्रों की जनसंख्या 5,000 से कम होती है।4. नगरीय क्षेत्रों की जनसंख्या 5,000 से अधिक होती है।

प्रश्न 10.
विश्व के विभिन्न भागों में आयु-लिंग में असंतुलन के लिए उत्तरदायी कारकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
आयु-लिंग में असंतुलन के लिए निम्नलिखित कारक उत्तरदायी हैं-
1. स्त्री-पुरुष के जन्म-दर में अंतर प्रत्येक समाज में जन्म के समय नर बच्चे, मादा बच्चों से अधिक पैदा होते हैं। साधारणतया इनका अनुपात क्रमशः 107 से 100 का है किंतु जन्म के पहले और बाद की दशाएँ कभी-कभी इस स्थिति को परिवर्तित कर देती हैं।

2. स्त्री-पुरुष की मृत्यु-दर में अंतर-स्त्री-पुरुष की मृत्यु-दर में अंतर होने के कारण भी लिंगानुपात में अंतर आ जाता है। विकसित देशों में जीवन की सभी अवस्थाओं में पुरुष मृत्यु-दर, स्त्री मृत्यु-दर से अधिक होती है जबकि विकासशील देशों में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में मृत्यु-दर अधिक होती है। ऐसे समाज में स्त्री भ्रूण हत्या, स्त्री शिशु हत्या और स्त्रियों के प्रति घरेलू हिंसा की प्रथा प्रचलित होती है। इन देशों में न केवल स्त्रियों की मृत्यु-दर ऊँची होती है बल्कि उनकी जीवन प्रत्याशा भी कम हो जाती है।

3. प्रवास स्त्रियों और पुरुषों का प्रवास भी लिंगानुपात को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। अधिकांश विकासशील देशों में विशेषतया एशियाई और अफ्रीकी देशों में बड़ी संख्या में पुरुष ग्रामीण इलाकों से नगरों की ओर आजीविका की तलाश में प्रवास करते हैं।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जनसंख्या की आयु लिंग संरचना पर एक भौगोलिक निबंध लिखिए।
उत्तर:
जनसंख्या की आयु लिंग संरचना (Age composition of Population) इसे आयु एवं लिंग पिरामिड द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। यह वास्तव में एक विशेष वर्ष का दंड ग्राफ होता है जिसमें प्रत्येक अनुप्रस्थ पट्टी जनसंख्या के एक विशेष आयु वर्ग को दर्शाती है। बाईं ओर के दंड की लंबाई पुरुषों की संख्या के प्रतिशत को दर्शाती है तथा दाईं ओर यह स्त्रियों के लिए दर्शाई गई है।
(क) विकासशील देशों के आयु एवं लिंग पिरामिड का आधार व्यापक होता है। इसका अर्थ है प्रति 5 वर्ष पहले 5 वर्ष के मुकाबले जनसंख्या में और अधिक बच्चे शामिल हो रहे हैं। इस प्रकार पिरामिड का आधार विस्तृत हो रहा है और उच्च आयु वर्ग के लोगों की संख्या में कम वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही जब अधिक बच्चे संतान पैदा करने की आयु में आते हैं, तब पैदा होने वाले बच्चों की संख्या बढ़ जाती है।

(ख) संयुक्त राज्य अमेरिका के आयु लिंग पिरामिड का आधार छोटा पाया जाता है अर्थात् यहाँ प्रत्येक अगले 5 वर्षों में कम बच्चे पैदा होते रहे हैं, परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि यहाँ की जनसंख्या में वृद्धि नहीं हो रही है; जैसे ही बच्चों की संख्या उच्च आयु समूह में शामिल होती है वैसे ही पूरी जनसंख्या में वृद्धि हो जाती है।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन 1

(ग) तीसरी प्रकार के पिरामिड का आधार पतला तथा शीर्ष संकीर्ण होता जाता है। ऐसी जनसंख्या में बिल्कुल वृद्धि नहीं होती। ऐसी स्थिति स्वीडन में पाई जाती है।

प्रश्न 2.
आयु-संरचना क्या है? आयु-संरचना पर जन्म-दर तथा मृत्यु-दर के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आयु-संरचना किसी भी जनसंख्या की एक आधारभूत विशेषता होती है। किसी क्षेत्र की जनसंख्या में विभिन्न आयु के लोग रहते हैं। किसी भी व्यक्ति की आयु उसकी जन्म-तिथि तथा वर्तमान तिथि के बीच का समय होता है। किसी क्षेत्र की आयु-संरचना में समस्त मनुष्यों की आयु को पूर्ण वर्षों में ज्ञात किया जा सकता है, न कि महीनों अथवा दिनों में।

आयु-संरचना पर जन्म-दर का प्रभाव (Effect of Birth Rate on Age Composition) – जन्म-दर किसी देश की जनसंख्या के विभिन्न आयु वर्गों में लोगों के अनुपात को प्रभावित करती है। आयु-संरचना पर जन्म-दर के प्रभाव निम्नलिखित हैं

  • एशिया, अफ्रीका तथा लैटिन अमेरिकी अल्प विकसित देशों में उच्च जन्म-दर पाई जाती है इसलिए वहाँ निम्न आयु वर्ग तथा युवा वर्ग की प्रधानता होती है।
  • जब निम्न आयु वर्ग संतान पैदा करने की उम्र में शामिल होते हैं तो जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ती है।
  • युवा वर्ग का जनसंख्या में अधिक पाए जाने का अर्थ है कि वहाँ श्रम की उपलब्धता अधिक है।
  • निम्न आयु वर्ग (0-14 वर्ष) और 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की अधिक संख्या आश्रित जनसंख्या को प्रदर्शित करती है।
  • जिन देशों में जन्म-दर कम तथा जीवन प्रत्याशा अधिक होती है, वहाँ बच्चों की संख्या कम और वृद्धों की संख्या अधिक होती है।

आयु-संरचना पर मृत्यु-दर का प्रभाव (Effect of Death Rate on Age Composition)-आयु संरचना पर मृत्यु-दर के प्रभाव निम्नलिखित हैं

  • शिशु मृत्यु-दर में सुधार होने पर जनसंख्या में बच्चों का अनुपात बढ़ जाता है तथा बड़ी आयु वाले लोगों का अनुपात घट जाता है।
  • यदि वृद्धों की मृत्यु-दर में सुधार होता है तो उनकी संख्या बढ़ जाती है और बच्चों की संख्या कम हो जाती है।
  • इसी प्रकार यदि युवा व वृद्ध आयु-वर्गों में मृत्यु-दर कम हो जाती है तो उच्च आयु वर्ग की जनसंख्या का अनुपात बढ़ जाता है जैसा कि विकसित देशों में होता है।
  • यदि निम्न आयु वर्गों में मृत्यु-दर में तेज़ गिरावट उच्च आयु वर्गों की अपेक्षा अधिक है तो युवा वर्ग की जनसंख्या बढ़ जाती है जैसा कि विकासशील देशों में होता है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 जनसंख्या संघटन

प्रश्न 3.
साक्षरता से क्या तात्पर्य है? साक्षरता को प्रभावित करने वाले कारकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
साक्षरता (Literacy) यद्यपि साक्षरता (Literacy) जनसंख्या का एक सामाजिक पक्ष है तथापि यह जनसंख्या की गुणवत्ता का बोध कराती है। व्यापक रूप से साक्षरता वह ज्ञान है जो लोगों में जागृति लाए। साधारणतया साक्षरता लोगों को किसी भाषा में समझ के साथ लिखने या पढ़ने की योग्यता को कहा जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ जनसंख्या आयोग के अनुसार, “साक्षर वह व्यक्ति है जो किसी भाषा में साधारण संदेश को पढ़, लिख और समझ सकता है।”

विश्व स्तर पर अधिकांश देशों में साक्षरता की गणना की जाती हैं। प्रति सौ व्यक्तियों के अनुपात में साक्षर व्यक्तियों की संख्या को साक्षरता दर कहा जाता है।
साक्षरता को प्रभावित करने वाले कारक (Factory affecting Literacy) साक्षरता को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं
1. अर्थव्यवस्था (Economy)-विश्व के विभिन्न भागों में साक्षरता की दरों में विभिन्नता पाई जाती है। किसी भी देश के आर्थिक विकास के स्तर और साक्षरता दर में घनिष्ठ संबंध पाया जाता है। ऊंची अर्थव्यवस्था वाले देशों में उच्च साक्षरता दर पाई जाती है जबकि कम विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों में निम्न साक्षरता दर पाई जाती है।

2. नगरीकरण (Urbanization) साक्षरता को प्रभावित करने वाले कारकों में किसी देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ उस देश के नगरीकरण का स्तर भी प्रमुख है। उच्च नगरीकृत देशों में साक्षरता भी अधिक है। क्योंकि नगरीय क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था उपयुक्त होती है। इसके अतिरिक्त नगरों में विभिन्न स्तर की शिक्षा सुविधाओं के अवसर भी उपलब्ध होते हैं।

3. समाज में स्त्रियों का स्तर (Level of Female in Society)-विभिन्न समाजों में साक्षरता उनकी अपनी विशेषताओं द्वारा भी निर्धारित होती है। समाज में स्त्रियों का स्तर और उनकी जनसंख्या भी साक्षरता दर को प्रभावित करती है। विकासशील तथा पिछड़े राष्ट्रों में स्त्रियों के निम्न सामाजिक स्तर के कारण स्त्रियों में साक्षरता दर कम पाई जाती है जबकि ईसाई समुदाय की स्त्रियों
के उच्च सामाजिक स्तर के कारण उनमें साक्षरता दर उच्च पाई जाती है।

4. यातायात एवं संचार के साधन (Source of Transport and Communication) यातायात एवं संचार के साधनों का अल्प विस्तार भी विकासशील समाज में ग्रामीण समाज को अलग-थलग कर देता है और ग्रामीण समाज ज्ञान से वंचित रह जाता है।

5. प्रशासकीय नीतियाँ (Administrial Policies)-सरकारी नीतियाँ भी साक्षरता दर की वृद्धि में सहायक सिद्ध होती हैं। विशेष रूप से प्राथमिक शिक्षा की मुफ्त व्यवस्था और उसका प्रसार सरकारी नीति पर ही निर्भर करता है।

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