Author name: Prasanna

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 10 परिवहन तथा संचार

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 10 परिवहन तथा संचार Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 10 परिवहन तथा संचार

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. उत्तर-दक्षिण गलियारा श्रीनगर को दक्षिण के किस शहर से जोड़ता है?
(A) कन्याकुमारी
(B) तूतीकोरिन
(C) तिरुवनन्तपुरम
(D) चेन्नई
उत्तर:
(A) कन्याकुमारी

2. स्वर्णिम चतुर्भुज महामार्ग में लेनों की संख्या कितनी है?
(A) 4
(B) 6
(C) 8
(D) 12
उत्तर:
(B) 6

3. राज्यों की राजधानियों को जिला मुख्यालयों से जोड़ने वाली सड़कों को कहते हैं-
(A) स्वर्णिम चतुर्भुज महा राजमार्ग
(B) राष्ट्रीय राजमार्ग
(C) राज्य राजमार्ग
(D) जिला मार्ग
उत्तर:
(C) राज्य राजमार्ग

4. सीमा सड़क संगठन का निर्माण कब हुआ था?
(A) सन् 1950 में
(B) सन् 1952 में
(C) सन 1960 में
(D) सन् 1966 में
उत्तर:
(C) सन 1960 में

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5. स्वर्णिम चतुर्भुज महा राजमार्गों का निर्माण और रख-रखाव कौन करता है?
(A) राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)
(B) केंद्रीय लोकनिर्माण विभाग (CPWD)
(C) सीमा सड़क संगठन (BRO)
(D) लोक निर्माण विभाग (PWD)
उत्तर:
(A) राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)

6. जहाँ से यातायात प्रारंभ हो, कहलाता है-
(A) उद्गम
(B) गंतव्य
(C) मार्ग
(D) वाहक
उत्तर:
(A) उद्गम

7. वह बिंदु जहाँ पर यातायात समाप्त होता है, कहलाता है
(A) उद्गम
(B) गंतव्य
(C) मार्ग
(D) वाहक
उत्तर:
(B) गंतव्य

8. वह वाहन जो यात्रियों और सामान को ढोता है, कहलाता है-
(A) मार्ग
(B) वाहक
(C) उद्गम
(D) गंतव्य
उत्तर:
(B) वाहक

9. अमृतसर से दिल्ली तक राष्ट्रीय महामार्ग है-
(A) NH-1
(B) NH-3
(C) NH-4
(D) NH-5
उत्तर:
(A) NH-1

10. दिल्ली से मुंबई तक राष्ट्रीय महामार्ग है-
(A) NH-1
(B) NH-3
(C) NH-8
(D) NH-15
उत्तर:
(C) NH-8

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11. ग्रांड ट्रंक रोड (GT. Road) कहा जाता है-
(A) NH-1
(B) NH-2
(C) NH-3
(D) NH4
उत्तर:
(A) NH-1

12. दिल्ली से कोलकाता तक राष्ट्रीय महामार्ग है-
(A) NH-1
(B) NH-2
(C) NH-3
(D) NH-4
उत्तर:
(B) NH-2

13. भारतीय सुदूर संवेदन (IRS) का प्रारंभ कब हुआ?
(A) सन् 1975 में
(B) सन् 1983 में
(C) सन् 1988 में
(D) सन् 1992 में
उत्तर:
(C) NH-7

14. राष्ट्रीय महामार्ग कहाँ-से-कहाँ तक है?
(A) दिल्ली से अमृतसर तक
(B) वाराणसी से कन्याकुमारी तक
(C) दिल्ली से मुंबई तक
(D) दिल्ली से कोलकाता तक
उत्तर:
(B) वाराणसी से कन्याकुमारी तक

15. कोंकण रेलवे का निर्माण कब हुआ?
(A) सन् 1990 में
(B) सन् 1998 में
(C) सन् 1994 में
(D) सन् 1992 में
उत्तर:
(B) सन् 1998 में

16. भारत में वायु परिवहन सेवा की शुरुआत कब हुई?
(A) सन् 1960 में
(B) सन् 1950 में
(C) सन् 1911 में
(D) सन् 1907 में
उत्तर:
(C) सन् 1911 में

17. भारत में पहली रेलगाड़ी कब चलाई गई?
(A) 16 अप्रैल, 1853 को
(B) 20 अप्रैल, 1855 को
(C) 22 अप्रैल, 1872 को
(D) 25 अप्रैल, 1875 को
उत्तर:
(A) 16 अप्रैल, 1853 को

18. ब्रॉड गेज में रेल की पटरियों के बीच कितनी दूरी होती है?
(A) 1.616 मीटर
(B) 1 मीटर
(C) 0.762 मीटर
(D) 0.610 मीटर
उत्तर:
(A) 1.616 मीटर

19. मीटर गेज में रेल की पटरियों के बीच कितनी दूरी होती है?
(A) 0.610 मीटर
(B) 0.762 मीटर
(C) 1 मीटर
(D) 1.676 मीटर
उत्तर:
(C) 1 मीटर

20. नैरो गेज में रेल की पटरियों के बीच कितनी दूरी होती है?
(A) 1.676 मीटर
(B) 1 मीटर
(C) 0.762 मीटर
(D) 0.532 मीटर
उत्तर:
(C) 0.762 मीटर

21. बीस वर्षीय सड़क योजना कब आरंभ की गई?
(A) सन् 1961 में
(B) सन् 1965 में
(C) सन् 1972 में
(D) सन् 1977 में
उत्तर:
(A) सन् 1961 में

22. भारत में राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास और रख-रखाव के लिए भारतीय आंतरिक जलमार्ग प्राधिकरण का गठन किया गया-
(A) सन् 1956 में
(B) सन् 1972 में
(C) सन् 1986 में
(D) सन् 1995 में
उत्तर:
(C) सन् 1986 में

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23. भारत की तटरेखा की लंबाई है-
(A) लगभग 7516 कि०मी०
(B) लगभग 8234 कि०मी०
(C) लगभग 9005 कि०मी०
(D) लगभग 9500 कि०मी०
उत्तर:
(A) लगभग 7516 कि०मी०

24. भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह (INSAT) की स्थापना कब की गई?
(A) सन् 1975 में
(B) सन् 1983 में
(C) सन् 1988 में
(D) सन् 1992 में
उत्तर:
(B) सन् 1983 में

25. सदिया-धुबरी मार्ग कौन-सा जलमार्ग है?
(A) राष्ट्रीय जलमार्ग-1
(B) राष्ट्रीय जलमार्ग-2
(C) राष्ट्रीय जलमार्ग-3
(D) राष्ट्रीय जलमार्ग-4
उत्तर:
(B) राष्ट्रीय जलमार्ग-2

26. “भारतीय रेलवे ने विविध संस्कृति के लोगों को एक-साथ लाकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया है।” यह कथन है-
(A) महात्मा गाँधी
(B) डॉ बी०आर० अम्बेडकर
(C) स्वामी विवेकानंद
(D) जवाहरलाल नेहरू
उत्तर:
(A) महात्मा गाँधी

27. परिवहन का सबसे तेज और महँगा साधन है-
(A) सड़क मार्ग
(B) वायुमार्ग
(C) रेलमार्ग
(D) जलमार्ग
उत्तर:
(B) वायुमार्ग

28. वायु परिवहन का राष्ट्रीयकरण कब किया गया?
(A) सन् 1911 में
(B) सन् 1946 में
(C) सन् 1950 में
(D) सन् 1953 में
उत्तर:
(D) सन् 1953 में

29. पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन का सबसे उत्तम साधन है-
(A) सड़कमार्ग
(B) वायुमार्ग
(C) पाइप लाइन
(D) जलमार्ग
उत्तर:
(C) पाइप लाइन

30. भारत की पहली पाइप लाइन कहाँ-से-कहाँ तक बिछाई गई?
(A) नहारकटिया से नूनमती
(B) नूनमती से बरौनी
(C) बरौनी से कानपुर
(D) लाकवा से बरौनी
उत्तर:
(A) नहारकटिया से नूनमती

31. भारतीय गैस प्राधिकरण लिमिटेड की स्थापना कब की गई?
(A) सन् 1965 में
(B) सन् 1972 में
(C) सन् 1984 में
(D) सन् 1988 में
उत्तर:
(C) सन् 1984 में

32. राष्ट्रीय पावर ग्रिड की स्थापना कब हुई थी?
(A) सन् 1955 में
(B) सन् 1972 में
(C) सन् 1980 में
(D) सन् 1985 में
उत्तर:
(C) सन् 1980 में

33. प्रसार भारती का गठन कब किया गया?
(A) सन् 1980 में
(B) सन् 1985 में
(C) सन् 1992 में
(D) सन् 1997 में
उत्तर:
(D) सन् 1997 में

34. भारत में आकाशवाणी का प्रसारण कब हुआ?
(A) सन् 1927 में
(B) सन् 1936 में
(C) सन् 1945 में
(D) सन् 1957 में
उत्तर:
(A) सन् 1927 में

35. आकाशवाणी को ऑल इंडिया रेडियो का नाम कब दिया गया?
(A) सन् 1927 में
(B) सन् 1936 में
(C) सन् 1945 में
(D) सन् 1957 में
उत्तर:
(B) सन् 1936 में

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36. दूरदर्शन ने राष्ट्रीय चैनल कब शुरू किया था?
(A) सन् 1927 में
(B) सन् 1936 में
(C) सन् 1983 में
(D) सन् 1988 में
उत्तर:
(D) सन् 1988 में

37. भारत में राष्ट्रीय कार्यक्रम और रंगीन टेलीविज़न की शुरुआत हुई
(A) सन् 1936 में
(B) सन् 1983 में
(C) सन् 1992 में
(D) सन् 1996 में
उत्तर:
(C) सन् 1992 में

38. दूरदर्शन का पहला कार्यक्रम कब प्रसारित किया गया?
(A) 15 सितंबर, 1958 को
(B) 15 सितंबर, 1959 को
(C) 15 सितंबर, 1960 को
(D) 15 सितंबर, 1961 को
उत्तर:
(B) 15 सितंबर, 1959 को

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
स्वर्ण चतुष्कोण परम राजमार्ग योजना कब शुरू की गई थी?
अथवा
स्वर्णिम चतुर्भुज महा-राजमार्ग परियोजना कब आरंभ की गई?
उत्तर:
2 जनवरी, 1999 में।

प्रश्न 2.
अमृतसर से दिल्ली तक राष्ट्रीय महामार्ग कौन-सा है?
उत्तर:
NH-1।

प्रश्न 3.
भारत में वायु परिवहन की शुरुआत कब हुई?
उत्तर:
सन् 1911 में।

प्रश्न 4.
भारत में सबसे लंबा राष्ट्रीय महामार्ग/राजमार्ग कौन-सा है?
उत्तर:
राष्ट्रीय महामार्ग नं० 44 भारत का सबसे लम्बा राजमार्ग है। पहले NH-7 था।

प्रश्न 5.
भारत में पहली रेलगाड़ी कब चलाई गई?
उत्तर:
16 अप्रैल, 1853 को।

प्रश्न 6.
पहली रेलगाड़ी कहाँ-से-कहाँ तक चलाई गई?
उत्तर:
मुम्बई-ठाणे।

प्रश्न 7.
परिवहन का सबसे महंगा साधन कौन-सा है?
उत्तर:
वायु परिवहन।

प्रश्न 8.
परिवहन का सबसे सस्ता साधन कौन-सा है?
उत्तर:
जल परिवहन।

प्रश्न 9.
ब्रॉड गेज में रेल की पटरियों के बीच कितनी दूरी होती है?
उत्तर:
1.616 मीटर।

प्रश्न 10.
भारतीय रेलतंत्र का एशिया में कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
पहला।

प्रश्न 11.
वायु परिवहन का राष्ट्रीयकरण कब किया गया?
उत्तर:
सन् 1953 में।

प्रश्न 12.
भारत में पहली पाइप लाइन कब बिछाई गई?
उत्तर:
सन् 1962 में।

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प्रश्न 13.
देश की सबसे बड़ी पाइपलाइन हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर कितनी लंबी है?
उत्तर:
लगभग 1750 किलोमीटर।

प्रश्न 14.
दक्षिण भारत में सड़कों के अधिकतम घनत्व वाले दो राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
केरल और तमिलनाडु।

प्रश्न 15.
भारत की दो प्रमुख नाव्य नदियों के नाम बताइए।
उत्तर:
गंगा और ब्रह्मपुत्र।।

प्रश्न 16.
भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण गैस पाइप लाइन का नाम बताइए।
उत्तर:
एच०वी०जे० गैस पाइप लाइन।

प्रश्न 17.
राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-1 किस नदी पर तथा किन दो स्थानों के बीच पड़ता है?
उत्तर:
गंगा-हल्दिया-इलाहाबाद।

प्रश्न 18.
भारत के किस भौगोलिक क्षेत्र में रेलमार्गों का सर्वाधिक विकास हुआ है?
उत्तर:
उत्तरी भारत के विशाल मैदान में।

प्रश्न 19.
‘स्वर्णिम चतुर्भुज’ किन चार महानगरों को जोड़ता है?
उत्तर:
दिल्ली, मुंबई, चेन्नई तथा कोलकाता को।

प्रश्न 20.
दो राष्ट्रीय जलमार्गों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. इलाहाबाद से हल्दिया
  2. सदिया से धुबरी।

प्रश्न 21.
स्वर्णिम चतर्भज महा-राजमार्ग परियोजना का क्या उद्देश्य है?
उत्तर:
महानगरों के बीच की दूरी और परिवहन समय को कम करना।

प्रश्न 22.
भारत का सबसे लम्बा राष्ट्रीय जलमार्ग कौन-सा है?
उत्तर:
हल्दिया और इलाहाबाद (प्रयागराज) गंगा जलमार्ग।

प्रश्न 23.
संचार का आधुनिकतम साधन कौन-सा है?
उत्तर:
इंटरनेट।

प्रश्न 24.
सीमा सड़क संगठन का गठन कब हुआ?
उत्तर:
सन् 1960 में।

प्रश्न 25.
उत्तर-दक्षिण गलियारा महा-राजमार्ग किन दो शहरों को जोड़ता है?
उत्तर:
उत्तर-दक्षिण गलियारा महा-राजमार्ग श्रीनगर को कन्याकुमारी से जोड़ता है।

प्रश्न 26.
पूर्व-पश्चिम गलियारा महा-राजमार्ग किन दो शहरों को जोड़ता है?
उत्तर:
पूर्व-पश्चिम गलियारा महा-राजमार्ग सिलचर (असम) को पोरबंदर (गुजरात) से जोड़ता है।

प्रश्न 27.
स्वर्णिम चतुर्भुज महा राजमार्गों का निर्माण व रख-रखाव कौन करता है?
उत्तर:
भारत का राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)।

प्रश्न 28.
राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण व रख-रखाव कौन करता है?
उत्तर:
राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण व रख-रखाव केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) करता है।

प्रश्न 29.
राज्य राजमार्गों का निर्माण व रख-रखाव कौन करता है?
उत्तर:
राज्य राजमार्गों के निर्माण व रख-रखाव का कार्य सार्वजनिक निर्माण विभाग (P.W.D.) द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 30.
राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-2 किस नदी पर तथा किन दो स्थानों के बीच पड़ता है?
उत्तर:
बह्मपुत्र नदी तथा सदिया व धुबरी के बीच।

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प्रश्न 31.
मुंबई और ठाणे के बीच चली पहली भारतीय रेल ने कितना सफर तय किया था?
उत्तर:
34 कि०मी०।

प्रश्न 32.
दिल्ली और मुंबई को कौन-सा राष्ट्रीय महामार्ग जोड़ता है?
उत्तर:
राष्ट्रीय महामार्ग-8।

प्रश्न 33.
भारत में ग्रैण्ड ट्रंक रोड़ का निर्माण किसने करवाया था?
उत्तर:
अफगान सम्राट शेरशाह सूरी ने।

प्रश्न 34.
भारत में सर्वप्रथम मैट्रो की शुरुआत कब और कहाँ हुई?
उत्तर:
सन् 1972 में कोलकाता में।

प्रश्न 35.
भारतीय देशीय जलमार्ग प्राधिकरण का गठन कब हुआ?
उत्तर:
27 अक्तूबर, 1986 में।

प्रश्न 36.
मैट्रो रेलवे कोलकाता जोन की घोषण कब की गई?
उत्तर:
25 दिसम्बर, 2010 को।

प्रश्न 37.
भारतीय गैस प्राधिकरण लिमिटेड की स्थापना कब हुई?
उत्तर:
सन् 1984 में।

प्रश्न 38.
निम्नलिखित का पूरा नाम लिखें BOT, BRO, NRSA, INSAT, IRS, NHAI, NH, HVJ, CPWD, SPWD.
उत्तर:

  1. BOT : Built Operate and Transfer
  2. BRO : Border Roads Organisation
  3. NRSA : National Remote Sensing Agency
  4. INSAT : Indian National Satellite System
  5. IRS : Indian Remote Sensing
  6. NHAI : National Highway Authority of India
  7. NH : National Highways
  8. HVJ : Hajira Vijaipur Jagdishpur
  9. CPWD: Central Public Works Department
  10. SPWD : State Public Works Department

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड का क्या उद्देश्य है?
उत्तर:
क्षेत्रीय ग्रिडों को मिलाकर देश में बिजली की आपूर्ति को सतत् व नियमित रखना।

प्रश्न 2.
भारत में संचार के प्रमुख साधन कौन से हैं? संचार के कौन-कौन से साधन होते हैं?
उत्तर:
दूरभाष (टेलीफोन), टेलीग्राम, फैक्स, ई-मेल, इंटरनेट, रेडियो, टेलीविजन, सिनेमा, समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ, पुस्तकें, उपग्रह (सेटेलाइट) जनसभाएँ, सम्मेलन आदि।

प्रश्न 3.
सड़क परिवहन की क्या असुविधाएँ हैं?
उत्तर:

  1. दुर्गम क्षेत्रों में सड़कें बनाना कठिन है
  2. इनसे अधिक तथा भारी माल नहीं ढोया जा सकता
  3. वर्षा ऋतु में सड़क परिवहन में दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है।

प्रश्न 4.
उत्तर-पूर्वी राज्यों में रेलमार्गों का अभाव क्यों है?
उत्तर:
इन राज्यों में ऊबड़-खाबड़ धरातल, नदियाँ, नाले, चट्टानें, सघन चन, आर्थिक पिछड़ापन तथा विरल जनसंख्या रेलों के विकास में बाधा उत्पन्न करती है।

प्रश्न 5.
भारत के विशाल मैदानों में रेलमार्गों का जाल हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों से अधिक क्यों है?
अथवा
भारत के विशाल मैदानों में रेलों का विकास हिमालय प्रदेश की तुलना में अधिक क्यों हुआ है?
उत्तर:
भारत के विशाल मैदान समतल भूमियाँ हैं। इन मैदानों में रेल लाइनें बिछाना आसान है और अधिक खर्चा भी नहीं आता, जबकि हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में पर्वतों को काटकर रेल लाइनें बिछाना बहुत ही कठिन कार्य है और इस पर खर्चा भी बहुत अधिक आ जाता है। इसलिए भारत के विशाल मैदानों में रेलमार्गों का जाल हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों से अधिक है।

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प्रश्न 6.
व्यक्तिगत संचार के साधन से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
व्यक्तिगत संचार के साधन से अभिप्राय उन साधनों से है जिनका प्रयोग कोई व्यक्ति अपने संदेशों के आदान-प्रदान के लिए करता है। उदाहरण-टेलीफोन, पत्र आदि।

प्रश्न 7.
जनसंचार के साधनों से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जनसंचार के साधनों से हमारा अभिप्राय संचार के उन साधनों से है जिनके द्वारा किसी सूचना को हजारों, लाखों लोगों तक एक-साथ पहुँचाया जा सकता है। उदाहरण-रेडियो, समाचार-पत्र आदि।

प्रश्न 8.
परिवहन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
परिवहन एक ऐसा तंत्र है जिसमें यात्रियों और सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाया और ले जाया जाता है।

प्रश्न 9.
स्थल परिवहन के कौन-कौन से प्रकार हैं?
उत्तर:

  1. सड़क परिवहन
  2. रेल परिवहन
  3. पाइपलाइन।

प्रश्न 10.
संचार के साधन किसे कहते हैं?
उत्तर:
जो साधन संदेशों और सूचनाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं, उन्हें संचार के साधन कहते हैं।

प्रश्न 11.
जीवन के लिए संचार के साधन क्यों आवश्यक हैं?
उत्तर:
आपसी मेल-जोल को बढ़ाने के लिए संचार के साधन आवश्यक हैं। इसके अतिरिक्त वर्तमान समय में उद्योगों और व्यापार के लिए भी संचार के साधनों की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 12.
भारत के उत्तर, दक्षिण, पूर्व एवं पश्चिम गलियारों के अन्तिम स्टेशनों/छोरों के नाम लिखें।
अथवा
उत्तर-दक्षिण गलियारे के दो अन्तिम स्टेशनों के नाम लिखें।
अथवा
पूर्व-पश्चिम गलियारे के दो अन्तिम स्टेशनों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. उत्तरी गलियारे का अन्तिम छोर-श्रीनगर
  2. पूर्वी गलियारे का अन्तिम छोर-सिलचर
  3. दक्षिणी गलियारे का अन्तिम छोर-कन्याकुमारी
  4. पश्चिमी गलियारे का अन्तिम छोर-पोरबंदर

प्रश्न 13.
राष्ट्रीय राजमार्ग क्या है?
उत्तर:
राष्ट्रीय राजमार्ग राष्ट्रीय महत्त्व की सड़कें हैं। ये देश के एक राज्य को दूसरे राज्य से मिलाती हैं। इन राजमार्गों के निर्माण का कार्य एवं रख-रखाव केंद्र सरकार द्वारा कराया जाता है।

प्रश्न 14.
‘प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क परियोजना’ क्या है?
उत्तर:
यह परियोजना केंद्र सरकार द्वारा चलाई गई है। इस परियोजना में वे सड़कें आती हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों तथा गाँवों को शहरों से जोड़ती हैं।

प्रश्न 15.
भारत के दो अंतःस्थलीय जलमार्गों के नाम बताइए।
उत्तर:
भारत के दो अंतःस्थलीय जलमार्ग निम्नलिखित हैं-

  1. गंगा नदी जलमार्ग इलाहाबाद और हल्दिया के बीच।
  2. ब्रह्मपुत्र नदी जलमार्ग-सदिया और धुबरी के बीच।।

प्रश्न 16.
भारत में महा राजमार्गों के कोई दो उद्देश्य लिखें।
उत्तर:

  1. भारत के महानगरों के बीच की दूरी व परिवहन समय को कम करना।
  2. तीव्र गति से चलने वाले वाहनों की जरूरतों को पूरा करना।

प्रश्न 17.
सीमांत सड़कों की कोई दो विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:

  1. देश के सीमांत क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण करना।
  2. सीमांत क्षेत्रों के आर्थिक विकास में सहायता प्रदान करना।

प्रश्न 18.
साइबर स्पेस से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
साइबर स्पेस कम्प्यूटर में एक ऐसा काल्पनिक स्पेस है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक संवाद सूचनाओं और चित्रों का आदान-प्रदान होता है।

प्रश्न 19.
मुक्त आकाश नीति के बारे में बताइए।
उत्तर:
सरकार ने अप्रैल, 1992 में मुक्त आकाश नीति को अपनाया। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय निर्यातकों की सहायता करना और उनके निर्यात को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतियोगितापूर्ण बनाना था। इस नीति के अंतर्गत विदेशी निर्यातकों का संगठन कोई भी मालवाहक वायुयान देश में ला सकता है।

प्रश्न 20.
ग्रामीण सड़कें क्या होती हैं?
उत्तर:
वे सड़कें जो ग्रामीण क्षेत्रों और गाँवों को शहरों से जोड़ती हैं, उन्हें ग्रामीण सड़कें कहते हैं। इन सड़कों को प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क परियोजना के तहत विशेष प्रोत्साहन मिलता है।

प्रश्न 21.
दूरदर्शन दूनिया का सबसे बड़ा स्थलीय नैटवर्क कैसे है?
उत्तर:
भारत में दूरदर्शन की शुरुआत सन् 1959 में हुई। दूरदर्शन जनसंचार का सबसे प्रभावशाली दृश्य-श्रव्य साधन है, क्योंकि यह विभिन्न आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए मनोरंजक, ज्ञानवर्धक एवं खेल जगत से संबंधित कार्यक्रम प्रसारित करता है। इसलिए यह दुनिया का सबसे बड़ स्थलीय नैटवर्क है।

प्रश्न 22.
राज्य राजमार्ग क्या होता है?
उत्तर:
राज्यों की राजधानियों को जिला मुख्यालयों से जोड़ने वाली सड़कें राज्य राजमार्ग (State Highways) कहलाती हैं। इनका निर्माण व रख-रखाव राज्य लोक निर्माण विभाग (S.P.W.D.) करता है।

प्रश्न 23.
महासागरीय मार्ग क्या है?
उत्तर:
भारत के पास द्वीपों सहित लगभग 7517 कि०मी० लंबा समुद्री तट है। इन मार्गों में 12 प्रमुख तथा 185 गौण पत्तन हैं। ये महासागरीय मार्ग, परिवहन व्यवस्था में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के साथ-साथ इन मार्गों का उपयोग देश की मुख्य भूमि तथा द्वीपों के बीच परिवहन के लिए भी होता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
परिवहन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
परिवहन-तंत्र देश की अर्थव्यवस्था को एकीकृत करता है। स्वतंत्रता के पश्चात् भारत में परिवहन व्यवस्था के विकास के क्षेत्र में अनेक कार्य किए गए हैं। देश में उत्पादन का विशिष्टीकरण खनिज पदार्थों की उपलब्धता के आधार पर स्थानीय स्तर पर हुआ है तथा इन उत्पादों की खपत के लिए स्थानीय बाजार है। यह विशिष्टीकरण विशेष रूप से स्थानीय वस्त्रों, खाद्य पदार्थों तथा हस्तशिल्प कलाओं में दिखाई देता है। परिवहन के साधन इन स्थानीय बाजारों को राष्ट्रीय बाजारों से तथा राष्ट्रीय बाजार इन्हें अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जोड़ते हैं। औद्योगिक क्षेत्र, व्यापारिक क्षेत्र तथा पिछड़े हुए क्षेत्र सड़कों द्वारा आपस में जुड़े हुए हैं। रेलमार्गों का विकास किया गया है। देश की आर्थिक व्यवस्था में भारी सामान को दूर-दूर के क्षेत्रों में पहुँचाने के लिए रेलें तथा सड़कें एक-दूसरे के पूरक का कार्य करते हैं। प्रादेशिक विकास के लिए विभिन्न प्रकार के परिवहन साधनों को संगठित किया गया है।

सड़क, रेलमार्ग, वायुमार्ग तथा जलमार्ग सभी व्यापार को बढ़ावा देने के लिए आपस में जुड़े हुए हैं। अतः परिवहन का एक सुगठित और समन्वित तंत्र देश के आर्थिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रश्न 2.
सड़क परिवहन के क्या लाभ हैं? अथवा सड़क परिवहन के प्रमुख गुणों का उल्लेख करें।
उत्तर:
सड़क परिवहन यातायात का एक उत्तम साधन है। इसके के निम्नलिखित लाभ हैं-

  1. यह कम दूरियों के लिए माल तथा यात्रियों के ढोने का उत्तम साधन है।
  2. यह ग्रामीण क्षेत्रों को नगरों से जोड़ता है।
  3. सड़क परिवहन द्वारा विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ ग्राहक के घर तक पहुँचाई जा सकती हैं।
  4. शीघ्र खराब होने वाली वस्तुओं को शीघ्रता से उपभोग-क्षेत्रों तक पहुँचाया जाता है।

प्रश्न 3.
भारत में सड़कों के घनत्व में प्रादेशिक भिन्नता का वर्णन कीजिए। अथवा भारत में सड़कों का वितरण समान नहीं है स्पष्ट करें।
उत्तर:
सड़कों के घनत्व में प्रादेशिक अंतर पाया जाता है। प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सड़कों की लंबाई को सड़कों का घनत्व कहा जाता है। सड़कों का राष्ट्रीय घनत्व 75.42 कि०मी० है। लगभग सभी उत्तरी राज्यों और प्रमुख दक्षिणी राज्यों में सड़कों का घनत्व अधिक है। हिमालयी प्रदेश, उत्तर:पूर्वी राज्यों, मध्य प्रदेश और राजस्थान में सड़कों का घनत्व कम है क्योंकि इन राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियाँ सड़क-निर्माण के अनुकूल नहीं हैं। भारत में उच्चावचीय विविधता के कारण सड़कों का वितरण असमान है। ये क्षेत्र निम्नलिखित प्रकार से हैं
1. पर्वतीय और मरुस्थलीय क्षेत्र-इन क्षेत्रों में सड़कों का जाल बहुत ही विरल है। अतः यहाँ पर सड़कों का घनत्व बहुत कम है। सामरिक महत्त्व के कारण इन क्षेत्रों में बहुत-सी सीमावर्ती सड़कों का निर्माण किया गया है। पहाड़ी तथा अधिक ऊबड़-खाबड़ क्षेत्रों में सड़कें बनाना कठिन तथा खर्चीला कार्य है। इसलिए मैदानी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत घनत्व तथा गुणवत्ता अधिक होती है।

2. पठारी क्षेत्र भारत के पठारी क्षेत्र में सड़कों का घनत्व सामान्य (मध्यम स्तर) है। पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश तथा ओडिशा राज्य इस क्षेत्र के अन्तर्गत आते हैं।

3. मैदानी क्षेत्र-उत्तरी भारत में गंगा और पंजाब के मैदान तथा दक्षिणी भारत में केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में सड़कों के जाल का घनत्व सबसे सघन पाया जाता है। कुछ सड़कें दूर-दराज़ के क्षेत्रों को भी मिलती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 10 परिवहन तथा संचार

प्रश्न 4.
निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट कीजिए (i) परिवहन और संचार, (ii) राष्ट्रीय मार्ग और राज्य महामार्ग, (ii) मीटर गेज और ब्रॉड गेज, (iv) व्यक्तिगत संचार और जनसंचार।
उत्तर:
(i) परिवहन और संचार में निम्नलिखित अंतर हैं-

परिवहनसंचार
1. परिवहन यंत्रों तथा संगठनों द्वारा मनुष्य और माल-भार को एक-स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाया जाता है।1. समाचारों, सूचनाओं और ज्ञान के आदान-प्रदान को संचार कहा जाता है।
2. परिवहन के मुख्य साधन हैं-रेलें, सड़के जलमार्ग और वायुमार्ग।2. संचार के मुख्य साधन हैं-रेडियो, दूरदर्शन, दूरभाष तथा उपग्रह।

(ii) राष्ट्रीय मार्ग और राज्य महामार्ग में निम्नलिखित अंतर हैं

राष्ट्रीय महामार्गराज्य महामार्ग
1. ये समस्त देश की प्रमुख सड़कें हैं।1. ये विभिन्न राज्यों की मुख्य सड़कें हैं।
2. ये महामार्ग प्रमुख व्यापारिक, औद्योगिक नगरों और राजधानियों को तथा प्रमुख बंदरगाहों को आपस में मिलाते हैं।2. ये महामार्ग विभिन्न राज्यों की राजधामियों को राज्यों के प्रमुख नगरों व कार्यालयों से मिलाते हैं।
3. ये प्रायः केंद्रीय सरकार द्वारा निर्मित हैं।3. ये राज्य सरकारों द्वारा निर्मित हैं।
4. इनकी कुल लंबाई 1,01,011 कि०मी० है।4. इनकी लंबाई 1,76,166 कि०मी० है।
5. ये आर्थिक तथा सैनिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं।5. ये प्रशासनिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं।

(iii) मीटर गेज और ब्रॉड गेज में निम्नलिखित अंतर हैं

मीटर गेजब्रॉड गेज (बड़ी रेल लाइन)
1. इसमें रेल पटरियों के बीच की दूरी एक मीटर होती है।1. इसमें रेल पटरियों के बीच की दूरी $1.616$ मी० होती है।
2. ये अधिकतर पहाड़ी भागों में पाए जाते हैं।2. ये अधिकतर मैदानी भागों में पाए जाते हैं।
3. ये यात्री तथा हल्के सामान के ढोने के लिए बनाए गए हैं।3. ये अधिक भारी सामान तथा यात्रियों के परिवहन के लिए बनाए गए हैं।
4. मीटर गेज लाइन की कुल लंबाई 2016 में 3,880 कि०मी० है।4. ब्रॉड गेज लाइन की कुल लंबाई 2016 में 60,510 कि०मी० है।

(iv) व्यक्तिगत संचार और जनसंचार में निम्नलिखित अंतर हैं

व्यक्तिगत संचारजनसंचार
1. किसी व्यक्ति विशेष तक संदेश पहुँचाना व्यक्तिगत संचार कहलाता है।1. सामूहिक रूप से लोगों के समूह तक संदेश पहुँचाना जनसंचार कहलाता है।
2. व्यक्तिगत संचार के साधन हैं-डाक सेवा तथा कंप्यूटर, जिसमें इंटरनेट और ई-मेल भी शामिल हैं।2. जनसंचार के माध्यम हैं-अखबार, पत्र पत्रिकाएँ, रेडियो तथा दूरदर्शन।

प्रश्न 5.
उपग्रह संचार पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
दूरदर्शन के कार्यक्रमों को दूर-दूर तक पहुँचाने के लिए उपग्रह का प्रयोग किया जाता है। इस दिशा में भारत का पहला सफल प्रयास SITE था जो अगस्त, 1975 से जुलाई, 1976 तक कार्यरत रहा। इस प्रयोग से राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा, आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक को लाभ हुआ। अब इनसेट-बी (INSAT-B) इस कार्य को सफलता से कर रहा है तथा इन प्रदेशों में दूरदर्शन के कार्यक्रम देखे जाते हैं। इसके द्वारा दिल्ली से 181 उच्च शक्ति तथा निम्न शक्ति के ट्रांसमीटर जुड़े हुए हैं तथा इसके द्वारा सारे भारत में राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं। अब इनसेट-1B का स्थान इनसेट-1D ने ले लिया है।

प्रश्न 6.
भारतीय राष्ट्रीय महामार्ग प्राधिकरण ने किन परियोजनाओं की जिम्मेदारी ले रखी है?
उत्तर:
भारतीय राष्ट्रीय प्राधिकरण ने देश-भर में विभिन्न चरणों में कई प्रमुख परियोजनाओं की जिम्मेदारी ले रखी है।
1. स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना-देश के चार महानगरों दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई को 4/6 गलियों वाले परम राजमार्ग से जोड़ने की योजना को स्वर्ण चतुर्भुज कहा जाता है। इन परम राजमार्गों के बन जाने से भारत के महानगरों के बीच समय-दूरी काफी कम हो गई है।

2. उत्तर-दक्षिण तथा पूर्व-पश्चिम गलियारा-उत्तर:दक्षिण गलियारे का उद्देश्य जम्मू कश्मीर के श्रीनगर से तमिलनाडु के कन्याकुमारी को 4,016 कि०मी० लंबे मार्ग द्वारा जोड़ना है। पूर्व एवं पश्चिम गलियारे का उद्देश्य असम में सिलचर से गुजरात में पोरबंदर को 3,640 कि०मी० लंबे मार्ग द्वारा जोड़ना है।

प्रश्न 7.
रेलवे पटरियों की चौड़ाई के आधार पर भारतीय रेल को कितने वर्गों में बाँटा गया है।
उत्तर:
भारतीय रेल के तीन वर्ग निम्नलिखित हैं-

  1. बड़ी लाइन (Broad Guage)-ब्रॉड गेज में रेल पटरियों के बीच की दूरी 1 616 मी० होती है। ब्रॉड गेज लाइन की कुल लंबाई सन् 2016 में लगभग 60,510 कि०मी० थी।
  2. मीटर लाइन (Meter Guage) मीटर गेज में रेल पटरियों के बीच की दूरी 1 मीटर होती है। इसकी कुल लंबाई सन् 2016 में लगभग 3,880 कि०मी० थी।
  3. छोटी लाइन (Narrow Guage)-नैरो गेज़ में रेल पटरियों के बीच की दूरी 0.762 या 0.610 मीटर होती है। इसकी कुल लंबाई सन् 2016 में लगभग 2,297 कि०मी० थी।

प्रश्न 8.
परिवहन तथा संचार के साधन किसी देश की जीवन रेखा तथा अर्थव्यवस्था क्यों कहे जाते हैं?
अथवा
परिवहन के साधन हमारी अर्थव्यवस्था की मूल धमनियाँ होती हैं इस कथन को स्पष्ट करें।
उत्तर:
वे साधन, जिनके प्रयोग से यात्री और माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाया जाता है, यातायात एवं परिवहन के साधन कहलाते हैं। यातायात तथा संचार के विभिन्न साधनों को देश की जीवन-रेखाएँ कहते हैं, क्योंकि देश के आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विकास में आधुनिक रेल, सड़क, जल एवं वायु-सेवाओं का बहुत बड़ा योगदान है। भारत जैसे विशाल देश में, जहाँ के बीच में विस्तृत दूरियाँ हैं, जहाँ आर्थिक एवं सामाजिक विभिन्नताएँ और विविध प्रकार के प्राकृतिक साधन असमान ढंग से वितरित हैं। आधनिक यातायात और संचार के साधनों का देश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास पर बह प्रभाव पड़ता है। यातायात एवं संचार के विभिन्न साधन किसी राष्ट्र की जीवन-रेखाएँ इसलिए कहे जाते हैं, क्योंकि-

  1. ये देश के दूरवर्ती भागों को समीप ले आते हैं और उनके विकास में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ये किसी प्रदेश के प्राकृतिक साधनों के विकास में सहयोग देते हैं।
  2. ये विभिन्न प्रकार के प्रदेशों के आर्थिक विशिष्टीकरण को विकसित करते हैं।
  3. ये परस्पर निर्भरता को विकसित करते हैं। देश के विभिन्न प्रदेशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध स्थापित करते हैं।
  4. भारत जैसे विशाल देश के आर्थिक विकास की यातायात तथा संचार के साधनों के बिना कल्पना नहीं की जा सकती।
  5. ये देश को एक राजनीतिक व सामाजिक सूत्र में बाँध देते हैं।

प्रश्न 9.
दक्षिणी भारत की तुलना में उत्तरी भारत में रेलों और सड़कों का विकास अधिक हुआ है, क्यों?
उत्तर:
दक्षिणी भारत की अपेक्षा उत्तरी भारत में रेलों तथा सड़कों का विकास अधिक हुआ है क्योंकि
(1) उत्तरी मैदान एक विस्तृत समतल मैदान है। उसकी भूमि नरम है। इसलिए इस भाग में सड़कें बनाना तथा रेल लाइनें बिछाना आसान है। इसके विपरीत, दक्षिणी भारत एक पठारी प्रदेश है। पठारी और ऊँची-नीची भूमि में रेल लाइनें बिछाना बड़ा कठिन तथा महँगा काम है।

(2) उत्तरी मैदान एक उपजाऊ प्रदेश है। इसलिए यहाँ कृषि और उद्योग-धंधों का काफी विकास हुआ है। कच्चे माल को कारखानों तक ले जाने और वहाँ से तैयार माल को बाजारों तक लाने के लिए सड़कों तथा रेलों का काफी विकास हुआ है।

(3) उत्तरी मैदान की जनसंख्या का घनत्व अधिक है। इसलिए यहाँ यात्रियों की संख्या तथा काम करने के लिए मजदूर अधिक मात्रा में उपलब्ध हैं।

प्रश्न 10.
किसी प्रदेश के सामाजिक विकास में सड़कों की क्या भूमिका है?
उत्तर:
सड़कें देश के लिए जीवन-रेखा का कार्य करती हैं। हमारी अर्थव्यवस्था में सड़कों का महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। देश के सुदूर क्षेत्रों तक पहुँचना सड़क परिवहन की सुविधा के द्वारा ही संभव हुआ है। जिस राज्य में सड़कों का अधिक विकास हुआ है वह राज्य औद्योगिक तथा व्यापारिक प्रगति के पथ पर तेजी के साथ अग्रसर हुआ है। सड़कों का जाल सामाजिक प्रगति का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। हमारा राज्य, हरियाणा इसका एक जीता-जागता उदाहरण है। यहाँ गाँव-गाँव को सड़कों के साथ जोड़ दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप ही हमारे गाँवों की काया पलट हो गई है। कृषि विकास, शिक्षा तथा चिकित्सा आदि के क्षेत्रों में भी हमारे राज्य में काफी प्रगति हुई है।

प्रश्न 11.
भारत के जनसंचार साधनों में दूरभाष और रेडियो/आकाशवाणी व दूरदर्शन के महत्त्व का वर्णन करें।
उत्तर:
1. दूरभाष-टेलीफोन संचार का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। भारत में टेलीफोन सुविधा प्रत्येक गांव तक नहीं पहुंच पाई है। अभी तक 70% गांवों में ही सार्वजनिक टेलीफोन सेवा उपलब्ध हो पाई है। भारत में प्रति सौ व्यक्ति टेलीफोन सघनता 2.5 तक ही हुई है। यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर की तुलना में नगण्य है। इसके अलावा नगरीय तथा ग्रामीण टेलीफोन सुविधा में बड़ा अंतराल है। देश में दूरसंचार सुविधा प्रतिवर्ष 20% की दर से बढ़ी है। जिन गांवों में टेलीफोन सुविधा उपलब्ध भी है तो उनमें रख-रखाव तथा व्यवस्थात्मक की कमी के कारण सुविधा प्रभावी नहीं है, जबकि भारत का वास्तविक विकास, कृषि का रोजगार सृजन तथा सकल घरेलू आय में योगदान, गाँव की प्रभावी दूर संचार सुविधा पर ही निर्भर है।

2. आकाशवाणी तथा दूरदर्शन-रेडियो तथा दूरदर्शन न केवल लोकप्रिय हैं, बल्कि इसने लोगों के सामाजिक तथा सांस्कृतिक जीवन में भी बदलाव ला दिया है। इन्होंने थोड़े समय में ही घर-घर में जगह बना ली है। नवीनतम सूचनाओं की प्राप्ति के लिए इनसे सरल तथा उत्तम कोई और साधन नहीं है। दूरदर्शन जनसंचार का न केवल लोकप्रिय, अपितु अत्यंत प्रभावशाली माध्यम बन चुका है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता ध्वनि के साथ-साथ दृश्यता भी है। दूरदर्शन ने लोगों की सोच तथा जीवनशैली पर गहरा प्रभाव डाला है। इससे सामाजिक तथा सांस्कृतिक मूल्यों में गहरा बदलाव हुआ है। समाचार, मौसम, खोज, अनुसंधान, ज्ञान-विज्ञान, संगीत, नाटक, फिल्म, नृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल आदि के प्रसारण के लिए दूरदर्शन का नियमित उपयोग होने लगा है।

प्रश्न 12.
रेल परिवहन के चार गुण बताएँ।
उत्तर:
रेल परिवहन के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं-

  1. रेलें सबसे अधिक संख्या में यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाती हैं।
  2. रेलें प्रतिवर्ष भारी मात्रा में खाद्यान्नों और उर्वरकों की ढुलाई करती हैं।
  3. रेलें कोयले, खनिज तेल और खनिज अयस्क की लंबी दूरी तक ढुलाई करती हैं।
  4. ये अंतःस्थलीय परिवहन का सबसे महत्त्वपूर्ण साधन हैं।

प्रश्न 13.
रेल परिवहन की अपेक्षा सड़क परिवहन अधिक महत्त्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर:
रेल परिवहन की अपेक्षा सड़क परिवहन के अधिक महत्त्वपूर्ण होने के कारण निम्नलिखित हैं-

  1. रेलवे लाइन की अपेक्षा सड़कों की निर्माण लागत बहुत कम है।
  2. अपेक्षाकृत ऊबड़-खाबड़ भू-भागों पर सड़कें बनाई जा सकती हैं।
  3. अधिक ढाल प्रवणता तथा पहाड़ी क्षेत्रों में भी सड़कें निर्मित की जा सकती हैं।
  4. अपेक्षाकृत कम व्यक्तियों, कम दूरी व कम वस्तुओं के परिवहन में सड़क परिवहन सस्ता है।
  5. यह घर-घर सेवाएँ उपलब्ध करवाता है तथा सामान चढ़ाने व उतारने की लागत भी अपेक्षाकृत कम है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 10 परिवहन तथा संचार

प्रश्न 14.
सीमावर्ती सड़कों का क्या महत्त्व है?
उत्तर:
सीमावर्ती सड़कों का निर्माण भारत सरकार द्वारा गठित संस्थान सीमा सड़क संगठन (BRO) के द्वारा किया जाता है। सीमा सड़क संगठन की स्थापना सन् 1960 में की गई थी। यह संगठन देश के उत्तर और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में सामरिक महत्त्व की सड़कों का निर्माण करता है जो दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए रक्षा सामग्री और खाद्य सामग्री भेजने में सहायक रहती है। इन सड़कों के विकास से दुर्गम क्षेत्रों में आने-जाने की सुगमता बढ़ी है तथा ये इन क्षेत्रों के आर्थिक विकास में भी सहायक हुई है।

प्रश्न 15.
भारत में जल परिवहन पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
जलमार्ग परिवहन का सबसे सस्ता साधन है। यह भारी तथा अधिक स्थान घेरने वाले सामानों को ढोने के लिए अधिक त है। भारत में 14,500 किलोमीटर लंबे अंतःस्थलीय जलमार्ग हैं। इनमें से 3700 किलोमीटर लंबे जलमागों में यंत्रीकृत नावें चलाई जा सकती हैं। भारत सरकार ने निम्नलिखित जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया है

  1. गंगा नदी जलमार्ग इलाहाबाद और हल्दिया के बीच (लंबाई 1620 कि०मी)
  2. ब्रह्मपुत्र नदी जलमार्ग-सदिया और धुबरी के बीच (लंबाई 891 कि०मी०)
  3. केरल में पश्चिम-तटीय नहर-कोहापुरम से कोम्मान के बीच उद्योगमंडल तथा चंपक्कारा नहरें (लंबाई 250 कि०मी०), गोदावरी,
  4. कृष्णा, बरक, सुंदरवन बकिंघम नहर, ब्रह्माणी, पूर्व तटीय नहर तथा दामोदर घाटी परियोजना के अंतर्गत निकाली गई नहर की गणना अन्य उपयोगी अंतःस्थलीय जलमार्गों में की जाती है।

प्रश्न 16.
भारत में सड़क परिवहन की प्रमुख समस्याओं का वर्णन करें।
उत्तर:
भारत में सड़क परिवहन की प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं-

  1. यातायात व यात्रियों की संख्या को देखते हुए हमारे देश में सड़कों का जाल अपर्याप्त है।
  2. भारत में लगभग आधी सड़कें कच्ची हैं तथा वर्षा ऋतु के दौरान इनका उपयोग सीमित हो जाता है।
  3. राष्ट्रीय राजमार्गों की संख्या भी पर्याप्त नहीं है।
  4. शहरों में बनी सड़कें अत्यंत तंग तथा भीड़ भरी हैं।
  5. सड़कों पर बने पुल तथा पुलियाँ पुरानी तथा तंग हैं और उन पर आवागमन सुरक्षित नहीं है।
  6. सड़कों का रख-रखाव ठीक नहीं है।

प्रश्न 17.
भारत में जल परिवहन के लाभ व हानि बताएँ।
उत्तर:
लाभ-

  • यह सस्ता साधन है।
  • इसके रख-रखाव की लागत बहुत कम है।
  • यह पर्यावरण अनुकूल परिवहन है।

हानि-

  • यह धीमा परिवहन है।
  • यह अन्य साधनों से अधिक जोखिम-भरा है।

प्रश्न 18.
रेल परिवहन कहाँ पर अत्यधिक सुविधाजनक परिवहन साधन है तथा क्यों?
उत्तर:
रेल परिवहन मैदानी प्रदेशों में अत्यधिक सुविधाजनक परिवहन साधन है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-

  1. मैदानी प्रदेश समतल होने के कारण यहाँ पर रेल लाइनें बिछाना सरल है।
  2. मैदानी प्रदेशों में समतल भूमि होने के कारण रेल लाइनों के बिछाने पर लागत कम आती है।
  3. मैदानी भाग सघन बसे होते हैं और यह सघन जनसंख्या आवागमन के लिए रेलों का प्रयोग करती है जिससे रेलवे को. बहुत आय होती है।

प्रश्न 19.
स्वर्णिम चतुर्भुज महा राजमार्ग से क्या अभिप्राय है?
अथवा
भारत के स्वर्ण चतुर्भुज परम राजमार्ग का उल्लेख करें।
अथवा
एक्सप्रेस राष्ट्रीय राजमार्ग किसे कहते हैं?
उत्तर:
भारत सरकार ने दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई-मुंबई को जोड़ने वाली छः लेन वाली महा राजमार्गों की सड़क परियोजना 2 जनवरी, 1999 में आरंभ की, जिसे स्वर्णिम चतुर्भुज महा राजमार्ग कहते हैं। इस महा राजमार्ग के बन जाने से भारत के महानगरों के बीच समय-दूरी कम हो गई है। इन सड़कों को एक्सप्रेस राष्ट्रीय राजमार्ग भी कहते हैं। इस परियोजना के अन्तर्गत दो गलियारे प्रस्तावित हैं। पहला उत्तर:दक्षिण गलियारा जो श्रीनगर को कन्याकुमारी से जोड़ता है और दूसरा पूर्व-पश्चिम गलियारा जो सिल्वर (असम) को पोरबंदर (गुजरात) से जोड़ता है।

प्रश्न 20.
भारत में रेल जाल वितरण प्रतिरूप किन कारणों से प्रभावित हुआ है? वर्णन करें।
अथवा
“भूमि का प्राकृतिक स्वरूप और जनसंख्या का घनत्व रेलमार्ग के जाल को प्रभावित करता है।” वर्णन कीजिए।
उत्तर:
रेलमार्गों का प्रादेशिक वितरण (Regional Distribution of Railways)-भारत में रेलमार्गों का विकास धरातल के स्वरूप के अनुसार ही हुआ है। स्पष्ट रूप से रेलमार्गों की सघनता के स्वरूप द्वारा प्रभावित हुई है।
1. उत्तरी मैदान (Northern lands)-सतलुज-गंगा के मैदान में रेलों का सर्वाधिक विकास हुआ है। पश्चिम में अमृतसर से लेकर पूर्व में हावड़ा तक रेलों का जाल बिछा हुआ है, जिससे स्पष्ट होता है कि समतल भूमि रेलों के विकास के लिए अनुकूल है। आर्थिक दृष्टि से भी यह क्षेत्र कृषि एवं औद्योगिक रूप से संपन्न है, जिसने रेलों की मांग और विकास को प्रोत्साहित किया है। इस क्षेत्र में दिल्ली, कानपुर, मुगलसराय, पटना, हावड़ा, कोलकाता चारों ओर से रेलमार्गों से जुड़े हुए हैं। ये देश के जंक्शन हैं। दिल्ली और कोलकाता महानगर देश के सभी प्रमुख शहरों से रेलमार्गों द्वारा जुड़े हुए हैं।

2. प्रायद्वीपीय पठार (Continental Plateau)-पठारी भाग अपेक्षाकृत कम विकसित हैं। इस भाग में रेलवे लाइन बिछाने का खर्चा अधिक आता है। इस क्षेत्र में जनसंख्या भी विरल है। इस प्रदेश के मुख्य रेलवे केंद्र भोपाल, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बंगलौर, तिरुवनंतपुरम तथा कोचीन हैं जो दिल्ली तथा कोलकाता महानगरों से रेलवे द्वारा ज़ परिवहन तथा संचार

3. हिमालयी प्रदेश (Himalaya Region) इस क्षेत्र में रेलों का विकास न्यूनतम हुआ है। पर्वतीय एवं पहाड़ी धरातल, पिछड़ी अर्थव्यवस्था एवं विरल जनसंख्या होने के कारण यहाँ रेल लाइनें नहीं बिछाई जा सकीं। इस क्षेत्र में छोटी एवं सीमित रेल लाइनें हैं, जिनमें कालका-शिमला, सिलीगुड़ी-दार्जिलिंग तथा गुवाहाटी-दीमापुर ही मुख्य हैं। उत्तर प्रदेश का पर्वतीय भाग, उत्तर पूर्व का अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर तथा त्रिपुरा रेल सुविधाओं से पूर्ण रूप से वंचित हैं।

4. तटीय मैदान (Coastal Regions)-पूर्वी घाट के पूर्वी तटीय मैदान तथा पश्चिमी घाट के पश्चिमी तटीय मैदानों में प्रायद्वीपीय पठार की तुलना में रेलमार्गों का विकास अधिक हुआ है। इसका प्रमुख कारण धरातल समतल तथा मैदानी है। पूर्वी तट में चेन्नई-कोलकाता रेलमार्ग प्रमुख हैं। पश्चिमी घाट अपेक्षाकृत कटा-फटा है तथा तटीय मैदानी भाग संकरा है, जिससे रेलमार्गों के निर्माण में बाधा उत्पन्न होती है। भारत सरकार की चिर-प्रतीक्षित कोंकण रेलवे जो पश्चिमी तट के साथ-साथ 838 कि०मी० लंबी है, बनकर तैयार हो गई है तथा 26 जनवरी, 1998 को इसका शुभारंभ करके रेलों के आवागमन के लिए खोल दी गई है।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सड़कों के घनत्व से क्या तात्पर्य है? सड़क घनत्व को प्रभावित करने वाले कारक उदाहरण सहित दीजिए।
उत्तर:
सड़कों का घनत्व (Density of Roads)-प्रति 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल की सड़कों की कुल लम्बाई को सड़क मार्ग का घनत्व कहते हैं।
सड़क के घनत्व को प्रभावित करने वाले कारक (Factor-effecting of Density of Road)-देश में सड़कों के घनत्व में बहुत अधिक प्रादेशिक अंतर पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए, जम्मू कश्मीर में यह घनत्व 10.48 कि०मी० है, जबकि केरल में यह 387.24 कि०मी० है। भारत में सड़कों का राष्ट्रीय घनत्व 75.42 कि०मी० प्रति 100 वर्ग कि०मी० है।
1. मैदानी भाग (Part of Land)-उत्तरी भारत का मैदान समतल व सपाट है। वहाँ भूमि नरम है, जिसके कारण सड़कों काण सस्ता व आसान हो जाता है। दूसरी ओर पर्वतीय और पठारी क्षेत्रों में कठोर धरातल, ऊबड़-खाबड़ भूमि तथा घने वन के कारण सड़कों का निर्माण कठिन और महंगा हो जाता है।

2. विकसित उद्योग (Developed Industry)-कच्चे माल को औद्योगिक क्षेत्र तथा तैयार माल को मंडियों लिए सड़कों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है।

3. कच्चा माल (Raw Material)-दक्षिण भारत में उत्तर भारत की अपेक्षा पक्की सड़कों का अनुपात अधिक है। दक्षिण में कठोर धरातल के कारण पक्की सड़कों के निर्माण की अधिक सुविधा प्राप्त है। वहाँ सड़क बनाने के लिए आवश्यक कंकड़-पत्थर भी आसानी से मिल जाते हैं। इसके विपरीत उत्तरी भारत में सड़क-निर्माण के लिए आवश्यक पत्थर की कमी है तथा इसे दूर से लाना पड़ता है।

इसके अतिरिक्त उत्तरी मैदान के राज्यों में सघन जनसंख्या, उत्तम कृषि, बड़े-बड़े नगरों की उपस्थिति भी सड़कों के विकास को प्रोत्साहित करती है। दूसरी ओर, पठारी और पर्वतीय क्षेत्र में पिछड़ी अर्थव्यवस्था, विरल जनसंख्या, अधिक वर्षा तथा नदियों की अधिकता के कारण सड़कों का निर्माण कठिन होता है। दुर्गम भूमियाँ प्रायः सड़क विहीन होती हैं।

प्रश्न 2.
सड़क परिवहन के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
प्राचीनकाल में मनुष्य पगडंडियों तथा कच्ची सड़कों के रास्ते आवागमन करते थे। वे एक स्थान से दूसरे स्थान पर पैदल थे लेकिन प्रौद्योगिक विकास के साथ-साथ आवागमन के लिए पक्की सड़कों तथा महामार्गों का विकास किया गया जिन पर मोटरगाड़ियाँ, बसें, ट्रक, स्कूटर, ट्रैक्टर आदि के द्वारा परिवहन होने लगा। मनुष्य अपनी आवश्यकता की वस्तुओं को विभिन्न स्थानों से मंगवाने लगा। अपने अतिरेक कृषि उत्पादनों को उनकी माँग के अनुसार बाजार तक भेजने लगा। अतः सड़क परिवहन का हमारे लिए बहुत महत्त्व है। इसका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है-

  • सड़कों के द्वारा मनुष्य अपनी आवश्यकता की विभिन्न वस्तुओं को मंगवा सकता है तथा दूसरे स्थान तक पहुँचा सकता है।
  • सड़कें यातायात का सस्ता साधन हैं।
  • सड़कों का निर्माण दुर्गम, पहाड़ी तथा हिमाच्छादित प्रदेशों में भी किया जा सकता है।
  • कम दूरी के लिए सड़कें यातायात के सस्ते साधन हैं।
  • सड़कों द्वारा पदार्थों का परिवहन उत्पादक क्षेत्रों से उपभोक्ता के घर तक किया जा सकता है।
  • सड़कों द्वारा माल को लाने-ले जाने में अधिक सुरक्षा रहती है।
  • शीघ्र खराब होने वाली वस्तुओं; जैसे सब्जी, फल, मछली, दूध, घी आदि को सड़कों द्वारा माँग वाले क्षेत्रों में शीघ्र पहँचाया जा सकता है।
  • छोटी दूरियों के लिए सड़क परिवहन, रेल परिवहन की अपेक्षा आर्थिक दृष्टि से लाभदायक होता है।
  • सड़क परिवहन रेल, जहाज तथा वायु परिवहन का पूरक है क्योंकि रेल जहाज और विमान केवल सीमित स्थानों पर ही जाते हैं, जबकि सड़कें सभी गाँवों, नगरों और बाज़ारों को इन साधनों से जोड़ती है।
  • इससे सम्पूर्ण परिवहन तन्त्र की क्षमता बढ़ती है।
  • दुर्गम क्षेत्रों में जहाँ परिवहन के अन्य साधन नहीं पहुँच सकते। वहाँ केवल सड़कें ही यातायात को सुविधा प्रदान करती हैं।
  • सड़कों द्वारा उद्योगों के लिए कच्चे तथा निर्मित माल का परिवहन आसान हो गया है।
  • गाँवों को नगरों से जोड़कर सड़कें वंचित ग्रामीण समुदाय को शिक्षा व अन्य सुविधाओं तक पहुँचाने का अवसर प्रदान करती हैं।

निष्कर्ष – सड़कें कच्ची भी होती हैं और पक्की भी। कच्ची सड़कों को बनाना आसान व सस्ता पड़ता है। लेकिन इनका प्रयोग सभी ऋतुओं में नहीं किया जा सकता। अत्यधिक भारी वर्षा और बाढ़ के दौरान पक्की सड़कें भी टूट जाती हैं। सड़कें किसी भी देश के व्यापार और वाणिज्य को विकसित करने एवं पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विश्व में परिवहन के अन्य साधनों की तुलना में सड़क परिवहन का विकास एवं प्रसार अधिक हुआ है तथा इसने आर्थिक विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 10 परिवहन तथा संचार

प्रश्न 3.
भारत के आंतरिक जलमार्गों पर एक भौगोलिक लेख लिखिए।
अथवा
भारत के आंतरिक जलमार्गों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
किसी देश के औद्योगिक विकास के लिए जलमार्गों का विकसित होना नितांत आवश्यक है। संसार के लगभग सभी औद्योगिक तथा व्यापारिक राष्ट्रों को उत्तम जलमार्गों की सुविधा उपलब्ध है। जलमार्ग यात्रियों तथा माल के परिवहन का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। कोयला, धातु अयस्क, इस्पात, सीमेंट, उर्वरक, खाद्यान्न आदि भारी सामानों को जलमार्गों से वहन करने में न्यूनतम व्यय होता है अर्थात् भारी तथा कम मूल्य के पदार्थों के लिए जलमार्ग उपयुक्त तथा सस्ते साधन हैं। जलमार्गों के साधनों में ईंधन की खपत कम होने के कारण ये पर्यावरण के अनुकूल प्रणाली भी है। देश में जल परिवहन को दो भागों में बाँटा जा सकता है
1. अंतर्देशीय या आंतरिक जलमार्ग-भीतरी जलमार्गों में नदियों, नहरों तथा बड़ी झीलों को सम्मिलित किया जाता है। भारत में भीतरी जलमार्गों द्वारा केवल 5 से 35 लाख टन सामान प्रतिवर्ष ढोया जाता है। यह देश के परिवहन में लगभग 1 प्रतिशत का योगदान है। देश की विशालता, क्षेत्रफल, जनसंख्या तथा नदियों की दृष्टि से भारत में भीतरी जलमार्गों की सेवाएं नगण्य हैं।

नौ संचालन की दृष्टि से दक्षिणी भारत की अपेक्षा उत्तरी भारत की नदियाँ अधिक उपयोगी हैं क्योंकि ये हिमालय से निकलने के कारण वर्षभर जल से भरी रहती हैं। दक्षिण भारत की नदियों में केवल वर्षाकाल में ही जल उपलब्ध होता है। दक्षिणी भारत में नदियों की अपेक्षा इनसे निकली नहरें परिवहन के लिए अधिक उपयोगी हैं। पश्चिमी तट पर लैगूनों को नहरों द्वारा जोड़कर उपयोगी जलमार्ग तैयार किए गए हैं। भारत की अनेक नहरों को जल परिवहन के लिए उपयोग किया जाता है

  • पंजाब की सरहिंद नहर में हिमालय से लकडियाँ लाई जाती हैं।
  • गोआ से कच्चा लोहा नावों द्वारा मार्मागोआ बंदरगाह तक लाया जाता है।
  • केरल के पश्चिमी तट पर 480 कि०मी० लंबी नहर में जल परिवहन द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 20 लाख टन सामान तथा 18 से 19 लाख यात्रियों का परिवहन होता है।
  • कोलकाता से प्रतिवर्ष लगभग 48 लाख टन चाय, जूट, खनिज, चावल तथा यात्री भारत के विभिन्न भागों में पहुँचाए जाते हैं।गोदावरी में दोलेश्वरम तक तथा कृष्णा नहर में परिवहन होता है।
  • आंध्र प्रदेश में कृष्णा तथा गोदावरी डेल्टा की नहरें काकीनाड़ा तथा मसुलिपट्टनम बंदरगाह के मध्य जल परिवहन के लिए

नदी परिवहन वर्षभर चालू रहने वाले मार्गों पर स्टीमर तथा बड़ी नावें चलती हैं। जलमार्गों की दृष्टि से पश्चिम बंगाल, असम, बिहार तथा तमिलनाडु राज्य महत्त्वपूर्ण हैं। हल्दिया-कोलकाता-पटना के मध्य प्रतिवर्ष लगभग एक लाख यात्री तथा 70 लाख टन माल स्टीमर व कारगो सेवा के द्वारा लगभग 935 कि०मी० की दूरी तक ढोया जाता है। असम, पश्चिम बंगाल तथा बिहार से कोलकाता तक नियमित स्टीमर सेवा उपलब्ध है। इसके द्वारा कृषि तथा बागान उद्योग का सामान तथा खनिज व यात्रियों की ढुलाई होती है।

ब्रह्मपुत्र नदी के मुहाने से डिब्रूगढ़ के मध्य लगभग 1440 कि०मी० तक स्टीमर सेवा उपलब्ध है। कोलकाता से असम तक स्टीमर चलते हैं। अधिकांश जूट, चाय, लकड़ी, चावल आदि सामान बड़े शहरों तक नावों द्वारा पहुंचाया जाता है। आंतरिक जलमार्गों के विकास के लिए सन् 1986 में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण का गठन किया गया। यह प्राधिकरण देश में आंतरिक जलमार्गों तथा परिवहन की उन्नति, विकास, रख-रखाव तथा नियमन के लिए उत्तरदायी होगा। सरकार ने निम्नलिखित जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्गों का दर्जा प्रदान किया है

  • राष्ट्रीय जलमार्ग-1 हल्दिया से इलाहाबाद तक गंगा नदी में 1620 कि०मी० तक फैला है। यह जलमार्ग उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिम बंगाल से गुजरता है।
  • राष्ट्रीय जलमार्ग-2 धुबरी से नादिया तक ब्रह्मपुत्र नदी में 891 कि०मी० तक फैला है। यह जलमार्ग पूर्वोत्तर क्षेत्र को कोलकाता तथा हल्दिया बंदरगाह से जोड़ता है।
  • राष्ट्रीय जलमार्ग-3 केरल में कोलम से कोटापुरम तक 250 कि०मी० तक फैला है।
  • राष्ट्रीय जलमार्ग-4 काकीनाड़ा से मखकानम जलमार्ग 1078 कि०मी० लंबा है। यह जलमार्ग गोदावरी तथा कृष्णा नदियों में फैला है।
  • राष्ट्रीय जलमार्ग-5 ब्रह्माणी नदी से महानदी डेल्टा नदी-तंत्र के साथ छरबतिया से घमारा तक का 588 कि०मी० लंबा है।

2. सामुद्रिक जलमार्ग भारत के 7,516 कि०मी० लंबे समुद्र तट पर 12 मुख्य तथा 185 छोटी बंदरगाहें स्थित हैं। इस तटीय भाग में परिवहन का मुख्य साधन जल परिवहन है। घरेलू माल की ढुलाई
तटीय जल परिवहन द्वारा होती है। देश की अर्थव्यवस्था में विदेशी व्यापार का मुख्य स्थान होता है। लगभग सभी महत्त्वपूर्ण देशों के व्यापारी जहाज भारत के पत्तनों पर आते हैं।

भारत के हिंद महासागर से पूर्व तथा दक्षिण-पूर्व की ओर चीन, जापान, मलेशिया, इण्डोनेशिया तथा ऑस्ट्रेलिया को; दक्षिण तथा पश्चिम में संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप तथा अफ्रीका को तथा दक्षिण में श्रीलंका को सामुद्रिक मार्ग जाते हैं। इस प्रकार भारत, पश्चिम के औद्योगिक व सम्पन्न देशों, दक्षिण-पूर्वी, एशियाई विकासशील तथा कृषि प्रधान देशों के मध्य महत्त्वपूर्ण स्थिति में है। भारत के महत्त्वपूर्ण पत्तनों पर आने वाले महत्त्वपूर्ण जलमार्ग हैं

  • स्वेज जलमार्ग भारत तथा यूरोप के मध्य इस व्यापारिक मार्ग से कच्चा माल और खाद्य पदार्थ यूरोप को और तैयार माल तथा मशीनें भारत को आती हैं।
  • उत्तमाशा अंतरीप जलमार्ग-यह मार्ग भारत को दक्षिणी तथा पश्चिमी अफ्रीका से जोड़ता है।
  • सिंगापुर जलमार्ग यह जलमार्ग भारत को चीन तथा जापान से जोड़ता है। इस मार्ग से भारत, कनाडा तथा न्यूजीलैंड के मध्य भी व्यापार होता है। इस मार्ग से भारत को सूती, रेशमी कपड़ा, लोहे तथा इस्पात का सामान, मशीनें, रासायनिक पदार्थ तथा कागज आता है और बदले में रूई, मैंगनीज, जूट, लोहा, अभ्रक आदि निर्यात होता है।
  • सुदूर-पूर्व का जलमार्ग-यह जलमार्ग भारत तथा ऑस्ट्रेलिया के मध्य स्थित है। इस मार्ग से भारत में ऊन, फल, अयस्क आदि आते हैं तथा जूट, अलसी, चाय, इंजीनियरिंग का सामान तथा परिधान आदि का निर्यात होता है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 10 परिवहन तथा संचार

प्रश्न 4.
भारत में परिवहन के साधन के रूप में तेल और गैस पाइपलाइनों के विकास पर टिप्पणी लिखिए।
अथवा
भारत में तेल और गैस पाइपलाइन परिवहन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
गैस एवं तरल पदार्थों का परिवहन पाइपलाइनों द्वारा किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से गैस, गैसोलिन, पेट्रोलियम, ईंधन तथा जल का परिवहन किया जाता है। तेल उत्पादक क्षेत्रों से खनिज तेल शोधन-शालाओं और फिर खपत के क्षेत्रों तक पहुँचाने में पाइपलाइन सबसे सस्ता तथा सुलभ साधन है। पहले यह कार्य रेल तथा सड़क परिवहन द्वारा किया जाता था, लेकिन जब से पाइपलाइनों का प्रयोग किया जाने लगा, कई समस्याओं का समाधान हो गया।

स्वतंत्रता से पूर्व भारत में तेल पाइपलाइनें बहुत कम थीं, लेकिन 1960 के बाद नए तेल क्षेत्रों का अन्वेषण तथा उत्पादन में वृद्धि के कारण पाइपलाइनों की लंबाई में निरंतर वृद्धि होती गई। 1980 में देश में 5,000 कि०मी० लंबी पाइपलाइनें थीं, जो 1995-96 में लगभग 9,000 कि०मी० लंबी पाइपलाइनें हो गईं। देश में पहली पाइपलाइन सन् 1962 में असम राज्य में बिछाई गई। सन् 1964 में इस पाइपलाइन का विस्तार बिहार में बरौनी तक किया गया।

भारत का दूसरा तेल उत्पादक क्षेत्र गुजरात में कच्छ की खाड़ी के पास स्थित है। यहाँ विभिन्न तेल क्षेत्रों से शोधन-शालाओं को पाइपलाइन द्वारा जोड़ दिया गया है। 1965 में अंकलेश्वर-कोयली पाइपलाइन का निर्माण किया गया। इसके अतिरिक्त यहाँ काकोल-साबरमती, नवगांव-काकोल-कोयली पाइपलाइन, अंकलेश्वर-उत्तरन गैस लाइन, अंकलेश्वर-बडौदरा गैस लाइन, कैम्बे-धुबरन गैस पाइपलाइन तथा कोयली-अहमदाबाद पाइपलाइन का निर्माण कार्य गा, जिससे खाड़ी क्षेत्र के तेल उत्पादन को प्रोत्साहन मिला।

बॉम्बे हाई अरब सागर में महत्त्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्र है, यहाँ का तेल 1,256 कि०मी० लंबी पाइपलाइन द्वारा मथुरा की अति आधुनिक तेल शोधन-शाला में पहुँचाया जा रहा है। एक नई प्रस्तावित पाइपलाइन मथुरा से जालंधर तक है। इस पाइप लाइन से पानीपत की तेल शोधन-शाला को भी लाभ हो रहा है। इस पाइप लाइन को बॉम्बे हाई के अलावा कोयली (कोयली-मथुरा) से भी जोड़ दिया गया है।

गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा विश्व की सबसे लंबी भूमिगत गैस लाइन हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर (H.V.J.) का निर्माण किया गया है जो 1750 कि०मी० लंबी है। इसे दिल्ली महानगर तक बढ़ाने की योजना है। एक पाइपलाइन कांडला से भटिंडा तक बनाने की योजना है जो गुजरात, राजस्थान और पंजाब में लगभग 1454 कि०मी० लंबी होगी तथा इस लाइन को मथुरा से भी जोड़ा जाएगा।

प्रश्न 5.
भारत में वायु परिवहन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
वायु परिवहन, परिवहन का सबसे तेज तथा महंगा साधन है। भारत जैसे बड़े भौगोलिक क्षेत्र वाले देश में बड़े-बड़े औद्योगिक तथा व्यापारिक केंद्रों के मध्य वाय परिवहन की सविधा अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। देश के अत्यं पहुंचने के लिए वायु परिवहन एक उचित माध्यम है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी वायु परिवहन की आवश्यकता अपरिहार्य है।

भारत में वायु परिवहन के विकास के लिए उचित परिस्थितियां पाई जाती हैं। यहाँ की अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियां, तीव्र गति से औद्योगिक विकास, वायुयान बनाने के लिए कच्चे माल व तकनीकी ज्ञान की उपलब्धि तथा कुशल श्रमिकों की उपलब्धि मुख्य अनुकूल कारक हैं। इसके अतिरिक्त अंतर्राष्ट्रीय वायुमार्गों में भारत की स्थिति अत्यंत लाभप्रद है।

भारत में वायु परिवहन की शुरुआत वर्ष 1911 में हुई जब इलाहाबाद से नैनी तक वायुयान डाक सेवा शुरू की गई। पहली अंतर्राष्ट्रीय वायु सेवा वर्ष 1922 में मद्रास से कराची के मध्य शुरू की गई। प्रथम महायुद्ध के पश्चात् भारत में वायु परिवहन का विकास तेजी से हुआ। वर्ष 1953 में भारत की सभी वायु परिवहन कंपनियों का राष्ट्रीयकरण करके इसे दो निगमों में बांट दिया गया

  • इंडियन एयर लाइंस कार्पोरेशन तथा
  • एयर इंडिया इंटरनेशनल कार्पोरेशन जो अब एयर इंडिया के नाम से जानी जाती है।

प्रथम निगम का कार्यक्षेत्र आंतरिक उड़ानों तथा दूसरे निगम का कार्यक्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों से संबंधित है। मार्च, 1994 से निजी कंपनियों को भी वायु परिवहन व्यवसाय में भाग लेने का अधिकार दे दिया गया है। इससे सार्वजनिक क्षेत्र की इन दोनों कंपनियों का एकाधिकार समाप्त हो गया है। वायु परिवहन में निजी कंपनियों का हिस्सा तेजी से बढ़ने के कारण वर्तमान में कुल व्यवसाय का लगभग,63% निजी कंपनियों के हाथ में है। भारत में वायु परिवहन की सुविधाएँ प्रदान करने का दायित्व भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण का है।

प्रश्न 6.
भारत में संचार तंत्र का विस्तृत वर्णन कीजिए।
अथवा
संचार-तंत्र क्या होता है? भारत में संचार के विभिन्न साधनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वे साधन जो समाचारों तथा संदेशों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाते हैं; जैसे समाचार-पत्र, टेलीफोन, रेडियो, संचार, टेलीविजन आदि संचार के साधन कहलाते हैं। संचार साधन किसी देश के व्यापारिक तथा औद्योगिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत के प्रमुख संचार साधन निम्नलिखित हैं
1. डाक सेवाएँ-देश में औसतन 4,700 व्यक्तियों के लिए एक डाकघर है जो सामान्यतया 22 वर्ग कि०मी० में काम करता है। देश में 50 हजार से अधिक गाँवों में चलती-फिरती डाक सेवा उपलब्ध है। लगभग सभी गाँवों में डाक प्रतिदिन वितरित की जाती है। भारत का संसार के लगभग सभी देशों के साथ डाक संचार संपर्क है।

2. टेलीफोन सेवाएँ जब भारत स्वतंत्र हुआ उस समय देश में केवल 321 टेलीफोन एक्सचेंज थे और संपूर्ण देश में 87,000 के लगभग टेलीफोन थे। मार्च, 1990 में देश में 14,300 टेलीफोन एक्सचेंज थे और टेलीफोनों की संख्या 45.91 लाख थी। देश के सभी प्रमुख नगरों के बीच सीधा डायल घुमाकर टेलीफोन किया जा सकता है। अब भारत का 50 से अधिक देशों के साथ सीधा टेलीफोन संपर्क स्थापित किया जा सकता है।

3. टैलेक्स सेवा-भारत में टैलेक्स सेवा 1963 ई० में आरंभ हुई थी। 31 दिसंबर, 1989 को देश के 311 नगरों में टैलेक्स सेवा उपलब्ध थी। अब देश में इसकी स्थापना के बाद तो इस सेवा का अत्यधिक विस्तार हो गया है।

4. टेलीविज़न या दूरदर्शन भारत में पहला दूरदर्शन केंद्र सन् 1959 में दिल्ली में स्थापित किया गया था। अब तो देश में रंगीन टेलीविज़न का भी प्रचलन हो गया है। टेलीविज़न शिक्षा, मनोरंजन तथा विज्ञान का प्रमुख साधन बन गया है। INSAT-IB की स्थापना से तो टेलीविज़न सेवा में एक क्रांति आ गई है। वर्तमान में एल०सी०डी०, एल०ई०डी० का अधिक प्रचलन है।

5. रेडियो और बेतार-इस समय देश में 200 से अधिक रेडियो स्टेशन हैं तथा लगभग 327 ट्रांसमीटर हैं। यह सेवा 94.96% जनसंख्या को प्राप्त है।

6. उपग्रह संचार सेवा भारत ने जून, 1981 में अपना पहला उपग्रह-APPLE SATELLITE अंतरिक्ष में भेजा था। INSAT-IB के अंतरिक्ष में स्थापित किए जाने के बाद तो उपग्रह संचार सेवा में एक क्रांति-सी आ गई है। यह बहु-उद्देशीय संचार उपग्रह है। INSAT-D के अंतरिक्ष में स्थापित किए जाने के बाद तो इस सेवा में और भी सुधार हुआ है।

श्री राकेश शर्मा भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री थे तथा डॉ० कल्पना चावला ने भारत की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री होने का गौरव प्राप्त किया था।

7. समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ-समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं को जनसंचार के साधनों के नाम से जाना जाता है। इनका विभिन्न भाषाओं में दैनिक, साप्ताहिक या मासिक प्रकाशन होता है। ये लोगों तक आसानी से उपलब्ध होने वाले साधन हैं।

प्रश्न 7.
आधुनिक जीवन में ‘उपग्रह व कम्प्यूटर’ से भारत के जनसंचार-तंत्र में क्रांति आ गई वर्णन करें।
उत्तर:
उपग्रहों का उपयोग-भारत में अंतरिक्ष उपग्रह प्रणाली से संबंधित गतिविधियाँ सन् 1962 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (इसरो) के गठन से प्रारंभ होकर वर्तमान समय तक अनवरत जारी हैं। उपग्रह प्रणाली के विकास से संसार और भारत के संचार तंत्र में एक क्रांति आ गई है। भारत की उपग्रह प्रणालियाँ दो प्रकार की हैं

  • भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह प्रणाली (इंडियन नेशनल सेटेलाइट सिस्टम-INSAT)
  • भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह प्रणाली (इंडियन रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट सिस्टम-IRS)।

इन्सेट दूरसंचार, मौसम की जानकारी और पूर्वानुमान विविध प्रकार के आंकड़ों और कार्यक्रमों के लिए एक बहुउद्देशीय उपग्रह प्रणाली है। भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह (आई० आर० एस०) प्रणाली द्वारा अंतरिक्ष में स्थापित उपग्रह अनेक वर्णक्रमीय (स्पेक्ट्रल) बैंडों में आंकड़े एकत्र करते हैं तथा विभिन्न उपयोगों के लिए स्थलीय स्टेशनों को इनका प्रसारण करते हैं। ये उपग्रह प्रकृति के संसाधनों के प्रबंधन में बहुत उपयोगी सिद्ध हुए हैं। भारतीय सुदूर संवेदी एजेंसी हैदराबाद में स्थित है।

कंप्यूटर का उपयोग-आधुनिक युग में कंप्यूटर की भूमिका अत्यंत महत्त्वूपर्ण हो गई है। कंप्यूटर के माध्यम से इंटरनेट और ई-मेल किया जा सकता है। यह सारे संसार में कम लागत पर सूचनाएँ और ज्ञान प्रसारित कर सकता को तीव्र गति और कम लागत पर भेजा और प्राप्त किया जा सकता है। अपनी विशिष्ट सेवाओं और क्षमताओं के कारण कंप्यूटर का विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग बढ़ता जा रहा है। कंप्यूटर की विशिष्ट क्षमताएँ हैं-गति, शुद्धता, भंडारण क्षमता और स्वचालन। शिक्षा और ज्ञान के प्रसार में कंप्यूटर की भूमिका उल्लेखनीय है।

प्रश्न 8.
भारत में रेल परिवहन के विकास तथा वितरण का संक्षेप में वर्णन कीजिए। अथवा भारत में रेलमार्गों के विकास तथा महत्त्व का विस्तार से वर्णन करें।
उत्तर:
रेल परिवहन (Rail Transport) दूरस्थ क्षेत्रों को जोड़ने के लिए एवं आन्तरिक परिवहन की दृष्टि से रेल महत्त्वपूर्ण साधन है। रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा के पश्चात् भारतीय रेलतंत्र विश्व में चौथा बड़ा रेल जाल है। भारत में रेलवे परिवहन का सबसे महत्त्वपूर्ण साधन है। रेलवे भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों; जैसे कृषि, व्यापार, उद्योग तथा सेवा आदि के . विकास में सहयोग करने वाला प्रमुख माध्यम है। भारत में परिवहन साधनों का समुचित विकास के अभाव में कृषि क्षेत्रों से अन्न . को अन्य क्षेत्रों तक पहुंचाने, कोयले का अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरण, कच्चे माल को उद्योगों तक तथा तैयार माल को बाजार तथा पत्तनों तक पहुँचाने का कार्य मुख्यतः रेलों द्वारा ही होता है। भारतीय रेलवे, सुरक्षा, शान्ति व्यवस्था, राष्ट्रीय सांस्कृतिक तथा भौगोलिक एकता स्थापित करने में भी महत्त्वपूर्ण है।

भारत के रेलमार्ग का विकास 19वीं शताब्दी में प्रारम्भ हुआ। देश में पहली रेल मुंबई से थाणे तक 34 कि०मी० मार्ग पर 16 अप्रैल, 1853 को चलाई गई थी। देश के विभाजन से पूर्व भारत में लगभग 65.5 हजार कि०मी० लम्बा रेलमार्ग था, परन्तु विभाजन के पश्चात् लगभग 55000 कि०मी० लंबी लाइन भारत के हिस्से में आई। तब से भारतीय रेलों ने बहुत उन्नति की है और आज यह एक विशाल रेल तंत्र के रूप में विकसित हुआ है। वर्तमान में भारत में रेलमार्गों की कुल लम्बाई लगभग 67,368 कि०मी० है। इसमें दोहरा बहुपथ रेलमार्ग की लम्बाई लगभग 21,237 कि०मी० (कुल का 31.85%) और विद्युतकृत रेलमार्ग की लम्बाई लगभग 25,367 कि०मी० (कुल का 37.65%) है। देश के नियोजन काल में रेल परिवहन का संरचनात्मक तथा गुणात्मक विकास हुआ। रेलवे भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीयकृत सरकारी प्रतिष्ठान है।

रेलमार्गों का महत्त्व (Importance of Railways) भारत में रेलमार्गों का महत्त्व निम्नलिखित हैं-

  • रेल परिवहन संसार के आर्थिक विकास में अकेला सबसे अधिक शक्तिशाली कारक सिद्ध हुआ है। यह सर्वाधिक विभिन्न उत्पादों,
  • सवारियों तथा डाक ले जाने की सुविधा प्रदान करता है।
  • रेल स्थल पर अत्यंत तीव्र गति वाला परिवहन का साधन है।
  • यह मोटर गाड़ियों की अपेक्षा कई गुना अधिक भार ढोने की क्षमता रखता है।
  • रेल भारी तथा सस्ती वस्तुओं को दूर-दूर तक ले जाती है।
  • अधिक दूरी तय करने के लिए रेल सबसे उपयुक्त एवं सुविधाजनक साधन है।
  • स्थल पर पशुओं के परिवहन के लिए रेलों से बढ़कर कोई और सस्ता, सुविधाजनक और विस्तृत साधन उपलब्ध नहीं है।
  • रेल-तंत्र किसी भी देश के आंतरिक परिवहन का आधार होता है।

रेलमागों का वितरण (Distribution of Railways)-भारत में रेलमार्गों का वितरण समान नहीं है। देश में क्षेत्रीय स्तर पर सघन, सामान्य तथा विरल रेखा जाल पाया जाता है। रेलमार्गों के वितरण के तीन विभिन्न प्रतिरूप निम्नलिखित प्रकार से हैं
1. सघन रेलमार्गों वाला क्षेत्र-भारत के उत्तरी मैदान में अमृतसर से कोलकाता के बीच रेलमार्गों का सघन जाल बिछा हुआ है। यहाँ रेलमार्गों की सघनता 40 लाख कि०मी० प्रति 1000 कि०मी० है।

2. सामान्य रेलमार्गों वाला क्षेत्र-तमिलनाडु तथा छोटा नागपुर के क्षेत्रों को छोड़कर लगभग समस्त प्रायद्वीपीय पठार पर रेलों का घनत्व सामान्य है। यहाँ रेलमार्ग उत्तरी मैदान की तुलना में कम हैं। अपेक्षाकृत मध्यम जनसंख्या घनत्व, पहाड़ी तथा पठारी भूप्रदेश के कारण रेलों का आंतरिक भागों में विस्तार कम है।

3. विरल रेलमार्गों वाला क्षेत्र-इसके अंतर्गत निम्नलिखित क्षेत्र आते हैं-

  • हिमालय प्रदेश
  • उत्तरी पूर्वी भारत
  • पश्चिमी राजस्थान।

बिखरी हुई अल्प जनसंख्या, अल्प विकसित अर्थव्यवस्था, कठिन भूप्रदेश तथा रेल विकास की उच्च लागत इन क्षेत्रों की निम्न सघनता के कारण हैं।

रेलवे जोन (Railway Zones) भारतीय रेलवे का संचालन केंद्र सरकार द्वारा होता है। भारतीय रेलवे को नौ प्रखण्डों में बांटकर प्रशासन और संचालन को व्यवस्थित करने का प्रयास सन् 1950 के बाद किया गया। समस्त देश में रेलमार्गों का जाल निरंतर सघन होता जा रहा है।

वर्तमान में भारतीय रेल को 17 रेल मण्डलों (Zones) में विभाजित किया गया है जो निम्नलिखित प्रकार से हैं-

रेल-मण्डलमुख्यालय
1. उत्तरी-पूर्वी सीमांत रेल मण्डलमालेगांव (गुवाहाटी)
2. पूर्वोत्तर रेल मण्डलगोरसपुर
3. पूर्वी रेल मण्डलकोलकाता (हावड़ा)
4. दक्षिणी-पूर्वी रेल मण्डलकोलकाता
5. पूर्वी तटीय रेल मण्डलभुवनेश्वर
6. पूर्वी मध्य रेल मण्डलहाजीपुर
7. दक्षिणी-पूर्वी-मध्य रेल मण्डलबिलासपुर
8. उत्तर-मध्य रेल मण्डलइलाहाबाद
9. पश्चिम-मध्य रेल मण्डलजबत्लपुर
10. उत्तरी रेल मण्डलनई दिल्ली
11. उत्तरी-पश्चिमी रेल मण्डलजयपुर
12. पश्चिमी रेल मण्डलमुंबई (चर्च गेट)
13. दक्षिणी-मध्य रेल मण्डलसिकन्दराबाद
14. मध्य रेल मण्डलमुंबई (विक्टोरिया टर्मिनल)
15. दक्षिणी-पश्चिमी रेल मण्डलहुबली
16. दक्षिणी रेल मण्डलचेन्नई

रेल परिवहन भारत के आंतरिक स्थल परिवहन का आधार है। यह माल और. सवारियों को सुगमतापूर्वक दूर तक ढोने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐतिहासिक दृष्टि से रेल परिवहन भारत के आर्थिक विकास और राष्ट्रीय एकीकरण में अकेला सबसे शक्तिशाली कारक सिद्ध हुआ है। महात्मा गाँधी ने कहा था कि “भारतीय रेलवे ने विविध संस्कृतियों के लोगों को एक साथ लाकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया है।”

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 10 परिवहन तथा संचार

प्रश्न 9.
“भारत के आर्थिक विकास में रेलों और सड़कों का विकसित होना अति आवश्यक है।” इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:
भारत के आर्थिक विकास हेतु रेलों और सड़कों का विकसित होना अति आवश्यक है जिसका विस्तृत वर्णन इस प्रकार है

सड़कों की उपयोगिता-

  • सड़क परिवहन रेल, जहाज और वायुयान यातायात का पूरक है क्योंकि रेल और जहाज केवल सीमित स्थानों पर ही पहुँच सकते हैं जबकि सड़कें सभी गाँवों, नगरों और बाज़ारों को इन साधनों से जोड़ती हैं। इससे संपूर्ण परिवहन तंत्र की क्षमता बढ़ती है।
  • कृषि और ग्रामीण विकास में सड़कों का योगदान सर्वोपरि है। गाँवों तक कृषि यंत्र, खाद, उर्वरक, बीज इत्यादि पहुँचाना तथा कृषि-उत्पादों को मंडियों तक लाना सड़कों द्वारा ही संभव है।
  • सीमावर्ती दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सेनाओं को रसद एवं युद्ध-सामग्री पहुँचाने का एकमात्र कारगर साधन सड़कें ही हैं।
  • सड़कें छोटे-से-छोटे गाँव को भी नगरों से मिलाकर ग्रामीण लोगों को शिक्षा एवं अन्य सुविधाओं तक पहुँचने का अवसर प्रदान करती हैं।
  • रेलमार्गों की तुलना में सड़कों का निर्माण सस्ता और आसान होता है।
  • सड़क यात्रा अधिक लोचदार (Flexible) होती है, जिसमें सवारी को कहीं भी चढ़ाया या उतारा जा सकता है। यह सुविधा रेलों, जहाज़ों और वायुयानों में नहीं है।

भारतीय रेल की उपयोगिता-भारतीय रेल की उपयोगिता निम्नलिखित हैं-

  • रेल परिवहन भारत के आंतरिक स्थल परिवहन का आधार है। यह माल और सवारियों को सुगमतापूर्वक दूर तक ढोने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • रेल परिवहन भारत के आर्थिक विकास और राष्ट्रीय एकीकरण में सबसे शक्तिशाली कारक है।
  • कोयले द्वारा चालित वाष्प इंजनों के प्रतिस्थापन से रेलवे स्टेशनों के पर्यावरण में भी सुधार हुआ है।
  • रेलों का सही विकास सन् 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद आरंभ हुआ जब अंग्रेज़ सरकार ने अनुभव किया कि प्रशासन के शिकंजों को फैलाने और मज़बूत करने के लिए रेल-परिवहन का विकास आवश्यक है।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 9 भारत के संदर्भ में नियोजन और सततपोषणीय विकास

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 9 भारत के संदर्भ में नियोजन और सततपोषणीय विकास Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 9 भारत के संदर्भ में नियोजन और सततपोषणीय विकास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. भारत के आर्थिक विकास के लिए सबसे पहले योजना किसने बनाई?
(A) जवाहरलाल नेहरू ने
(B) एम०एन० राय ने
(C) एम० विश्वेश्वरैया ने
(D) श्री मन्नारायण अग्रवाल ने
उत्तर:
(C) एम० विश्वेश्वरैया ने

2. गाँधीवादी योजना किसने बनाई?
(A) जवाहरलाल नेहरू ने
(B) एम०एन० राय ने
(C) एम० विश्वेश्वरैया ने
(D) श्री मन्नारायण अग्रवाल ने
उत्तर:
(D) श्री मन्नारायण अग्रवाल ने

3. एम० विश्वेश्वरैया ने दसवर्षीय योजना प्रकाशित की थी-
(A) सन् 1936 में
(B) सन् 1944 में
(C) सन् 1951 में
(D) सन् 1956 में
उत्तर:
(A) सन् 1936 में

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4. योजना आयोग की स्थापना हुई
(A) सन् 1936 में
(B) सन् 1944 में
(C) सन् 1950 में
(D) सन् 1956 में
उत्तर:
(C) सन् 1950 में

5. पहली पंचवर्षीय योजना कब शुरू की गई?
(A) सन् 1936 में
(B) सन् 1944 में
(C) सन् 1951 में
(D) सन् 1956 में
उत्तर:
(C) सन् 1951 में

6. योजना आयोग का गठन किसकी अध्यक्षता में हुआ?
(A) जवाहरलाल नेहरू की
(B) एम०एन० राय की
(C) एम० विश्वेश्वरैया की
(D) श्री मन्नारायण अग्रवाल की
उत्तर:
(A) जवाहरलाल नेहरू की

7. पहली पंचवर्षीय योजना में किसे प्राथमिकता दी गई?
(A) उद्योग को
(B) कृषि को
(C) गरीबी हटाने को
(D) रोजगार को
उत्तर:
(B) कृषि को

8. गरीबी हटाना किस योजना का मुख्य उद्देश्य था?
(A) दूसरी
(B) चौथी
(C) पाँचवीं
(D) छठी
उत्तर:
(C) पाँचवीं

9. गहन कृषि विकास कार्यक्रम किस योजना के दौरान लागू किया गया?
(A) दूसरी
(B) तीसरी
(C) चौथी
(D) पाँचवीं
उत्तर:
(B) तीसरी

10. जवाहर रोजगार योजना किस पंचवर्षीय योजना में शुरू की गई?
(A) पाँचवीं
(B) छठी
(C) सातवीं
(D) आठवीं
उत्तर:
(C) सातवीं

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11. उदारीकरण की नीति के बाद किस योजना का प्रारंभ हुआ?
(A) पाँचवीं
(B) छठी
(C) सातवीं
(D) आठवीं
उत्तर:
(D) आठवीं

12. औद्योगीकरण के विकास पर किस योजना में विशेष ध्यान दिया गया?
(A) पहली
(B) दूसरी
(C) तीसरी
(D) चौथी
उत्तर:
(B) दूसरी

13. किस पंचवर्षीय योजना के बाद पहली बार वार्षिक योजनाएँ बनाई गईं?
(A) पहली
(B) दूसरी
(C) तीसरी
(D) चौथी
उत्तर:
(C) तीसरी

14. इंदिरा गाँधी नहर का निर्माण कितने चरणों में पूरा हुआ?
(A) 3
(B) 4
(C) 2
(D) 6
उत्तर:
(C) 2

15. भरमौर क्षेत्र की प्रमुख नदी कौन-सी है?
(A) गंगा
(B) यमुना
(C) रावी
(D) ताप्ती
उत्तर:
(C) रावी

16. गद्दी जनजाति किस प्रदेश के भरमौर क्षेत्र में पाई जाती है?
(A) मणिपुर के
(B) ओडिशा के
(C) हिमाचल प्रदेश के
(D) अरुणाचल प्रदेश के
उत्तर:
(C) हिमाचल प्रदेश के

17. ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना का समय क्या था?
(A) 1998-2002
(B) 2002-2007
(C) 2007-2012
(D) 2012-2017
उत्तर:
(B) 2002-2007

18. बारहवीं पंचवर्षीय योजना का समय क्या था?
(A) 2007-2012
(B) 2012-2017
(C) 2013-2016
(D) 2009-2014
उत्तर:
(B) 2012-2017

19. विकास एक ……………… संकल्पना है।
(A) द्वि-आयामी
(B) त्रि-आयामी
(C) बहु-आयामी
(D) एक-आयामी
उत्तर:
(C) बहु-आयामी

20. राष्ट्रीय समिति का गठन किया गया
(A) वर्ष 1938 में
(B) वर्ष 1940 में
(C) वर्ष 1950 में
(D) वर्ष 1952 में
उत्तर:
(A) वर्ष 1938 में

21. …………….. राष्ट्रीय नियोजन समिति के अध्यक्ष थे
(A) सरदार पटेल
(B) सरदार मनमोहन सिंह
(C) सरदार मोंटेक सिंह
(D) पं० जवाहरलाल नेहरू
उत्तर:
(D) पं० जवाहरलाल नेहरू

22. बॉम्बे योजना का गठन किया गया
(A) वर्ष 1944 में
(B) वर्ष 1942 में
(C) वर्ष 1945 में
(D) वर्ष 1950 में
उत्तर:
(A) वर्ष 1944 में

23. 2017 तक कितनी पंचवर्षीय योजनाएँ पूरी हो चुकी थीं?
(A) 11
(B) 8
(C) 9
(D) 12
उत्तर:
(D) 12

24. भारत में योजना आयोग का गठन किस वर्ष में हुआ?
(A) वर्ष 1950 में
(B) वर्ष 1951 में
(C) वर्ष 1952 में
(D) वर्ष 1953 में
उत्तर:
(A) वर्ष 1950 में

25. भारत में पहली योजना कब लागू हुई?
(A) वर्ष 1951 में
(B) वर्ष 1952 में
(C) वर्ष 1953 में
(D) वर्ष 1954 में
उत्तर:
(A) वर्ष 1951 में

26. नवगठित नीति आयोग का गठन हुआ
(A) सन् 2015 में
(B) सन् 2014 में
(C) सन् 2013 में
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) सन् 2015 में

27. नियोजन सर्वप्रथम किस देश में अपनाया गया?
(A) जापान में
(B) अमेरिका में
(C) भारत में
(D) सोवियत रूस में
उत्तर:
(D) सोवियत रूस में

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28. योजनाबद्ध विकास की प्रेरणा भारत को मिली-
(A) ब्रिटेन से
(B) अमेरिका से
(C) चीन से
(D) सोवियत रूस से
उत्तर:
(D) सोवियत रूस से

29. विकास का उद्देश्य है-
(A) प्रकृति का दोहन
(B) रोजगार देना
(C) जीवन-स्तर को ऊँचा उठाना
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

30. सोवियत रूस में कौन-सा विकास का मॉडल अपनाया गया था?
(A) कल्याणकारी मॉडल
(B) समाजवादी मॉडल
(C) मिश्रित मॉडल
(D) पूँजीवादी मॉडल

(B) समाजवादी मॉडल

31. भारत में विकास का कौन-सा मॉडल अपनाया गया है?
(A) समाजवादी मॉडल
(B) मिश्रित मॉडल
(C) पूँजीवादी मॉडल
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) मिश्रित मॉडल

32. जनता योजना के जनक थे
(A) मोंटेक सिंह
(B) एम०एन० राय
(C) लास्की
(D) ल्युसियन पाई
उत्तर:
(A) मोंटेक सिंह

33. बंबई प्लॉन को टाटा-बिरला ने कब बनाया?
(A) सन् 1936 में
(B) सन् 1940 में
(C) सन् 1943 में
(D) सन् 1944 में
उत्तर:
(C) सन् 1943 में

34. वह संकल्पना जिसमें वर्तमान और भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रावधान हो, कहलाती है-
(A) विकास
(B) नियोजन
(C) सतत विकास
(D) विकास नियोजन
उत्तर:
(C) सतत विकास

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
गाँधीवादी योजना किसने बनाई?
उत्तर:
श्री मन्नारायण अग्रवाल ने।

प्रश्न 2.
उदारीकरण की नीति के बाद किस पंचवर्षीय योजना का प्रारंभ हुआ?
उत्तर:
आठवीं पंचवर्षीय योजना का।

प्रश्न 3.
औद्योगीकरण के विकास पर किस पंचवर्षीय योजना में विशेष ध्यान दिया गया?
उत्तर:
दूसरी पंचवर्षीय योजना।

प्रश्न 4.
अब तक कितनी पंचवर्षीय योजनाएँ पूरी हो चुकी हैं?
उत्तर:
12।

प्रश्न 5.
किस पंचवर्षीय योजना के बाद पहली बार वार्षिक योजनाएँ बनाई गईं?
उत्तर:
तीसरी।

प्रश्न 6.
भारत में किस तरह की अर्थव्यवस्था अपनाई गई है?
उत्तर:
मिश्रित अर्थव्यवस्था।

प्रश्न 7.
अमेरिका की टेनेसी वैली अथॉर्टी के अनुसार भारत में कौन-सी परियोजना बनाई गई?
उत्तर:
दामोदर नदी घाटी परियोजना।

प्रश्न 8.
वह संकल्पना जिसमें वर्तमान और भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रावधान हो, क्या कहलाती है?
उत्तर:
सतत विकास।

प्रश्न 9.
जन योजना के प्रस्तुतकर्ता कौन थे?
उत्तर:
एम०एन० राय।

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प्रश्न 10.
योजना आयोग की स्थापना कब हुई?
उत्तर:
सन् 1950 में।

प्रश्न 11.
दसवीं पंचवर्षीय योजना कब शुरू की गई?
उत्तर:
सन् 2002 में।

प्रश्न 12.
योजना आयोग का गठन किसकी अध्यक्षता में हुआ?
उत्तर:
जवाहरलाल नेहरू की।

प्रश्न 13.
भरमौर जन-जातीय क्षेत्र किस राज्य में स्थित है?
उत्तर:
हिमाचल प्रदेश में।

प्रश्न 14.
पहली पंचवर्षीय योजना में किसे प्राथमिकता दी गई?
उत्तर:
कृषि को।

प्रश्न 15.
जवाहर रोजगार योजना किस पंचवर्षीय योजना में शुरू की गई?
उत्तर:
सातवीं पंचवर्षीय योजना में।

प्रश्न 16.
निजी क्षेत्र की भूमिका को किस पंचवर्षीय योजना में बढ़ावा दिया गया?
उत्तर:
दसवीं पंचवर्षीय योजना में।

प्रश्न 17.
सामुदायिक विकास कार्यक्रम की शुरुआत कब हुई?
उत्तर:
सन् 1952 में।

प्रश्न 18.
सामुदायिक विकास कार्यक्रम की शुरुआत किस पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत की गई?
उत्तर:
प्रथम पंचवर्षीय योजना के।

प्रश्न 19.
भारत में पंचवर्षीय योजना अथवा नियोजन की शुरुआत कब हुई?
अथवा
पहली पंचवर्षीय योजना कब शुरू की गई?
उत्तर:
1 अप्रैल, 1951 में।

प्रश्न 20.
नियोजन के दो आयाम कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1. खंडीय नियोजन
  2. प्रादेशिक क्षेत्रीय नियोजन।

प्रश्न 21.
‘निर्धनता का उन्मूलन’ और ‘आर्थिक आत्मनिर्भरता’ किस पंचवर्षीय योजना के उद्देश्य थे?
उत्तर:
पाँचवीं पंचवर्षीय योजना के।

प्रश्न 22.
पर्वतीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किसी एक उद्योग का नाम लिखें।
उत्तर:
हथकरघा उद्योग।

प्रश्न 23.
भारत में पर्वतीय क्षेत्र का कितना विस्तार है?
उत्तर:
लगभग 17%।

प्रश्न 24.
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का शुभारंभ कब हुआ?
उत्तर:
2 फरवरी, 2006 को।

प्रश्न 25.
जनजातीय विकास कार्यक्रम का कोई एक उद्देश्य बताएँ।
उत्तर:
जनजातीय जीवन की गुणवत्ता में आवश्यक सुधार करना।

प्रश्न 26.
‘सतत् विकास’ शब्द का प्रथम बार कब और कहाँ प्रयोग हुआ था?
उत्तर:
सन् 1987 में ब्रटलैंड कमीशन रिपोर्ट में।

प्रश्न 27.
सतत् विकास की आवश्यकता का उद्देश्य किस योजना में रखा गया?
उत्तर:
नौवीं पंचवर्षीय योजना में।

प्रश्न 28.
‘द पापुलेशन बम’ पुस्तक किसने लिखी?
उत्तर:
एहरलिच ने।

प्रश्न 29.
‘द लिमिट टू ग्रोथ’ पुस्तक किसने लिखी?
उत्तर:
मीडोस और अन्य ने।

प्रश्न 30.
अन्नपूर्णा योजना कब शुरू की गई?
उत्तर:
1 अप्रैल, 2001 को।

प्रश्न 31.
काम के बदले अनाज योजना कब शुरू की गई?
उत्तर:
14 नवम्बर, 2004 को।

प्रश्न 32.
महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम/मनरेगा कब शुरू हुआ?
उत्तर:
2 फरवरी, 2006 को आंध्र प्रदेश से।

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प्रश्न 33.
निम्नलिखित का पूरा नाम लिखें ITDP, IRDP, NITI, MFDA, SFDA.
उत्तर:

  1. ITDP : Integrated Tribal Development Programme
  2. IRDP : Integrated Rural Development Programme
  3. NITI : National Institute for Transforming India
  4. MFDA : Marginal Farmers Development Agency
  5. SFDA : Small Farmers Development Agency

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत के किन्हीं छः राज्यों के नाम बताइए जहाँ जनजातियों की संख्या राष्ट्रीय औसत से अधिक है?
उत्तर:

  1. मणिपुर
  2. त्रिपुरा
  3. असम
  4. ओडिशा
  5. छत्तीसगढ़
  6. झारखण्ड
  7. सिक्किम।

प्रश्न 2.
पर्वतीय क्षेत्रों के विकास कार्यक्रमों में किन क्षेत्रों पर अधिक जोर दिया जाता है?
उत्तर:
पर्वतीय क्षेत्रों के विकास कार्यक्रमों में बागवानी, पशुपालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, वानिकी और ग्रामीण उद्योग आदि पर अधिक जोर दिया जाता है।

प्रश्न 3.
स्वतंत्रता के समय भारतीय अर्थव्यवस्था किस प्रकार की थी?
उत्तर:
स्वतंत्रता के समय भारतीय अर्थव्यवस्था को गरीबी ने घेर रखा था और भारत विश्व के निम्नतम आय स्तर और प्रति व्यक्ति निम्नतम उपभोग करने वाले राज्यों में से एक था।

प्रश्न 4.
प्रथम पंचवर्षीय योजना का क्या लक्ष्य था?
उत्तर:
प्रथम पंचवर्षीय योजना का लक्ष्य विकास के लिए घरेलू बचत में वृद्धि के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को औपनिवेशिक शासन के स्वरूप से पुनर्जीवित करना था।

प्रश्न 5.
खंडीय नियोजन से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
खंडीय नियोजन से अभिप्राय है अर्थव्यवस्था के विभिन्न सेक्टरों; जैसे कृषि, सिंचाई, विनिर्माण, ऊर्जा, परिवहन और संचार सेवाओं के विकास के लिए कार्यक्रम बनाना और उनको लागू करना।

प्रश्न 6.
क्षेत्रीय नियोजन से आप क्या समझते हैं?
अथवा
प्रादेशिक नियोजन से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
कोई भी देश सभी क्षेत्रों में समान रूप से विकसित नहीं हुआ है। अतः विकास के इस असमान प्रतिरूप में प्रादेशिक असंतुलन को कम करने के लिए योजना बनाना प्रादेशिक नियोजन कहलाता है। इस प्रकार के नियोजन को क्षेत्रीय नियोजन भी कहा जाता है।

प्रश्न 7.
भारत में नियोजन का कार्य किसे सौंपा गया है?
उत्तर:
भारत में पहले नियोजन का कार्य योजना आयोग’ करता था परंतु सन् 2016 में भारत सरकार ने नीति आयोग का गठन किया और इसी आयोग को नियोजन का कार्य सौंपा गया है।

प्रश्न 8.
नीति आयोग का गठन कब हुआ? इसका अध्यक्ष कौन होता है?
उत्तर:
केंद्र सरकार ने सन् 2015 में योजना आयोग की जगह नीति आयोग का गठन किया। देश का प्रधानमंत्री इसका अध्यक्ष होता है।

प्रश्न 9.
प्रादेशिक असंतुलन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
प्रादेशिक असंतुलन से तात्पर्य प्रादेशिक स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों में प्राप्त विकास की विषमताओं से है। प्रादेशिक स्तर पर देश में कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जो विकासात्मक कार्यों में आगे हैं और कुछ बहुत पीछे हैं।

प्रश्न 10.
भारत में नियोजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
भारत में नियोजन का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक स्वतंत्रता को आर्थिक आधार प्रदान करना है। इसका लक्ष्य सामाजिक एवं आर्थिक विकास है।

प्रश्न 11.
विकास का क्या अर्थ है?
उत्तर:
विकास को आधुनिकीकरण का सूचक माना जाता है। विकास ऐसी प्रक्रिया है जो ऐसी संरचनाओं या संस्थाओं का निर्माण करती है, जो समाज की समस्याओं का समाधान निकालने में समर्थ हो।

प्रश्न 12.
विकास का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
विकास का मुख्य उद्देश्य लोगों के रहन-सहन के स्तर का विकास करना है। इसका तात्पर्य यह है कि लोगों के जीवन का स्तर न केवल ऊँचा हो, बल्कि उन्हें वे सुविधाएँ भी मिलनी चाहिएँ, जिन्हें वे प्राप्त
करके अपने जीवन में सुखी व सम्पन्न बन सकें।

प्रश्न 13.
बॉम्बे योजना क्या थी?
उत्तर:
सन् 1944 में आठ प्रमुख उद्योगपतियों ने एक योजना तैयार की जो बॉम्बे योजना (Bombay Plan) के नाम से जानी जाती है। इसमें कहा गया कि आर्थिक विकास के लिए सरकार को बड़े उद्योगों में अधिक पूँजी लगानी चाहिए; जैसे बीमा व्यवस्था, बीमा कंपनियाँ आदि।

प्रश्न 14.
योजना आयोग का गठन करने का उद्देश्य क्या था?
उत्तर:
स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात् देश का सामाजिक-आर्थिक विकास तेज और सुनियोजित ढंग से करने के लिए योजना आयोग का गठन किया गया था।

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प्रश्न 15.
नियोजन के क्या लक्ष्य हैं?
उत्तर:
नियोजन के मुख्य लक्ष्य निम्नलिखित हैं-

  1. आत्मनिर्भरता प्राप्त करना।
  2. आर्थिक असमानता या विषमता कम करना।
  3. लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना।

प्रश्न 16.
लक्ष्य क्षेत्र नियोजन क्या है?
उत्तर:
आर्थिक विकास में क्षेत्रीय असंतलन को रोकने व क्षेत्रीय आर्थिक और सामाजिक विषमताओं की प्रबलता को काबू में रखने के क्रम में योजना आयोग ने लक्ष्य-क्षेत्र तथा लक्ष्य-समूह योजना उपागमों को प्रस्तुत किया है। लक्ष्य क्षेत्र कार्यक्रमों में कमान नियंत्रित क्षेत्र विकास कार्यक्रम, सूखाग्रस्त क्षेत्र विकास कार्यक्रम, पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम है।

प्रश्न 17.
गरीबी क्या है? इसके प्रकार बताएँ।
उत्तर:
गरीबी से अभिप्राय विकास की कमी, अल्प विकास और पिछड़ेपन से है। प्रतिदिन 2300 कैलोरी से कम वाले व्यक्ति को गरीब माना जाता है। प्रकार-

  1. निरपेक्ष गरीबी
  2. सापेक्ष गरीबी।

प्रश्न 18.
भारत में गरीबी उन्मूलन रोजगार किन्हीं छः कार्यक्रमों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. स्वरोजगार हेतु ग्रामीण युवक कार्यक्रम (ट्राइसेस)।
  2. जवाहर रोजगार योजना (JRY)
  3. प्रधानमंत्री आवास योजना (PAY)
  4. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी कार्यक्रम (मनरेगा)
  5. संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (SGRY)
  6. राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम।

प्रश्न 19.
गहन कृषीय विकास कार्यक्रम कब लागू किया गया?
उत्तर:
सन् 1966 से सन् 1969 के बीच तीन वार्षिक योजनाएँ चलाई गई थीं। इन वार्षिक योजनाओं में ही गहन कृषीय विकास कार्यक्रम चलाया गया था।

प्रश्न 20.
नियोजन किसे कहते हैं?
उत्तर:
किसी देश के भविष्य की समस्याओं का समाधान करने के लिए बनाए गए कार्यक्रमों और प्राथमिकताओं के क्रम को विकसित करने की प्रक्रिया को नियोजन कहा जाता है। ये समस्याएँ मुख्य रूप से आर्थिक और सामाजिक ही होती हैं जो समय के साथ-साथ बदलती रहती हैं।।

प्रश्न 21.
किसी देश के विकास के लिए नियोजन क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
नियोजन के बिना कोई भी देश अपनी अर्थव्यवस्था का विकास नहीं कर सकता। वर्तमान युग नियोजन का युग है और नियोजन ही विकास का मूल मंत्र है। किसी देश को गरीबी, भूख, निरक्षरता और बेरोजगारी जैसी समस्याओं का समाधान करना है तो उसे नियोजन का सहारा लेना पड़ेगा।

प्रश्न 22.
उन क्षेत्रों के नाम बताइए जहाँ जन-जातीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम शुरू किए गए थे।
उत्तर:
जन जातीय विकास कार्यक्रम मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, आन्ध्र प्रदेश, झारखंड और राजस्थान; जैसे राज्यों के ऐसे क्षेत्रों में आरंभ किए गए थे जहाँ की जनसंख्या 50 प्रतिशत या इससे अधिक जन-जातीय है।

प्रश्न 23.
जन-जातीय विकास कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य क्या थे?
उत्तर:

  1. जन-जातीय और अन्य लोगों के विकास के स्तरों के अंतर को कम करना।
  2. जन-जातीय लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना।

प्रश्न 24.
भारत की आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-97) का संक्षिप्त उल्लेख करें।
उत्तर:
राष्ट्रीय विकास परिषद् द्वारा 29 मार्च, 1992 को स्वीकृति मिलने के पश्चात् आठवीं पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल, 1992 से लागू की गई। इस योजना में गरीबी को दूर करने तथा ग्रामीण विकास पर विशेष बल दिया गया था। इस योजना पर कुल परिव्यय ₹ 4,95,670 करोड़ था। योजना अवधि के दौरान सकल घरेलू उत्पादन 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जबकि लक्ष्य 5.6 प्रतिशत का था।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
टिकाऊ विकास की संकल्पना का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
टिकाऊ विकास का अर्थ है, वंचित लोगों की बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी हों और सभी लोगों को बेहतर जीवन बिताने का मौका मिल सके तथा पारितंत्र को कम-से-कम हानि पहुँचे। इस संकल्पना के अनुसार, मनुष्य की वर्तमान और भावी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्यावरण की क्षमता का ध्यान अवश्य रखा जाना चाहिए। संसाधनों का उनकी पुनर्भरण की क्षमता के अनुसार उपयोग होना चाहिए ताकि उनकी निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। टिकाऊ विकास में समान हित की भावना जगा पाने की हमारी क्षमता परिलक्षित होनी चाहिए ताकि आय का न्यायपूर्ण वितरण तथा शक्ति और सुविधाओं का न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित हो सके।

प्रश्न 2.
भारत में टिकाऊ विकास या सतत् विकास की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर:
1960 के दशक के अंत में पश्चिम के विकसित राष्ट्रों में तीव्र औद्योगीकरण के पर्यावरण पर अवांछित परिणाम सामने आने लगे थे। इससे चिंतित लोगों की पर्यावरण संबंधी सामान्य जागरूकता भी बढ़ने लगी। सन् 1968 में प्रकाशित एहरलिच (Ehrlich) की पुस्तक द पापुलेशन बम और सन् 1972 में प्रकाशित भीडोस (Meadows) व अन्यों द्वारा लिखित पुस्तक द लिमिट टू ग्रोथ ने पर्यावरण निम्नीकरण पर लोगों व विशेष रूप से पर्यावरणविदों की चिंता को बढ़ा दिया। इस समस्त घटनाक्रम के संदर्भ में विकास के एक नए मॉडल का विकास हुआ जिसे सतत् पोषणीय विकास कहा गया।

पर्यावरणीय मुद्दों पर विश्व समुदाय की बढ़ती चिंता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ ने नार्वे के प्रधानमंत्री हरलेम ब्रटलैंड की अध्यक्षता में पर्यावरण और विकास पर विश्व आयोग का गठन किया। सन् 1987 में इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट ‘आवर कॉमन फ्यूचर’ के नाम से प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट को ब्रटलैंड रिपोर्ट भी कहते हैं। इसके अनुसार, “सतत् पोषणीय विकास वह विकास है ज भावी पीढ़ियों को अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने की योग्यता के साथ समझौता किए बिना ही वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करें।” समय के साथ यह परिभाषा भी अपर्याप्त मानी जाने लगी, क्योंकि यह वर्तमान तथा भावी दोनों पीढ़ियों की आवश्यकताओं को परिभाषित नहीं करती। सन् 1987 के बाद एक और बेहतर तथा अधिक सार्थक परिभाषा सामने आई। श्री कुमार चट्टोपाध्याय के अनुसार, “सतत पोषणीय विकास पारिस्थितिक तंत्र की पोषण क्षमता के अंदर रहकर मानव-जीवन के स्तर को ऊँचा करना है।”

प्रश्न 3.
सतत् पोषणीय विकास के प्रमुख तत्त्वों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
सतत पोषणीय विकास के प्रमुख तत्त्व निम्नलिखित हैं-

  1. मानव व जीवन के अन्य सभी रूपों का जीवित रहना।
  2. सभी जीवों, मुख्यतः मनुष्य की आधारभूत आवश्यकताओं का पूरा होना।
  3. जीवों की भौतिक उत्पादकता का अनुरक्षण।
  4. मनुष्य की आर्थिक क्षमता एवं विकास।
  5. पर्यावरण तथा पारिस्थितिक तंत्र का संरक्षण।
  6. सामाजिक न्याय और स्वावलंबन।
  7. आम लोगों की प्रतिभागिता।
  8. जनसंख्या की वृद्धि दर में स्थिरता।
  9. जीवन मूल्यों का पालन।

प्रश्न 4.
सन 1966-1969 के दौरान वार्षिक योजनाओं के विशिष्ट लक्षण कौन-कौन से थे?
अथवा
तीन वर्षीय योजनाओं (1966-1969) पर संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर:
सन् 1966-1969 के दौरान तीन वार्षिक योजनाएँ बनाई गई थीं। इन योजनाओं में पैकेज कार्यक्रमों को अपनाया गया था। पैकेज कार्यक्रमों के अंतर्गत सुनिश्चित वर्षा और सिंचाई वाले क्षेत्रों में अधिक उपज देने वाले बीज, उर्वरक, कीटनाशक दवाइयाँ और ऋण की सुविधाएँ उपलब्ध करवाना था। इसे गहन कृषीय जिला कार्यक्रम के नाम से जाना जाता था। इससे खाद्यान्नों के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और देश में हरित क्रांति का सूत्रपात हुआ। वर्ष 1968-1969 में औद्योगिक उत्पादों में भी वृद्धि होने लगी।

प्रश्न 5.
सखा संभावी क्षेत्र विकास कार्यक्रम के उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:
सूखा संभावी क्षेत्र विकास कार्यक्रम के निम्नलिखित उद्देश्य थे-

  1. इस कार्यक्रम के उद्देश्य के अतंर्गत अभावग्रस्त लोगों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना।
  2. सूखा संभावी क्षेत्र में जहाँ अपर्याप्त प्राकृतिक संसाधन हों, वहाँ के गाँवों की गरीबी कम करने के लिए उत्पादक परिसंपत्तियों का निर्माण करना।
  3. भूमि और मजदूर की उत्पादकता बढ़ाने के लिए विकासात्मक कार्य आरंभ करना।
  4. सूखा प्रवण क्षेत्र के समन्वित विकास पर बल देना।

प्रश्न 6.
जनजातीय विकास परियोजना का वर्णन करें।
उत्तर:
सन् 1974 में पाँचवीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत जनजातीय उप-योजना प्रारम्भ हुई और हिमाचल प्रदेश में भरमौर को पाँच में से एक समन्वित जनजातीय विकास परियोजना का दर्जा मिला। इस योजना में परिवहन, संचार, कृषि और उससे संबंधित क्रियाओं को सामाजिक विकास, सामुदायिक सेवाओं के विकास को प्राथमिकता दी गई। इस उपयोजना के लागू होने से सामाजिक लाभ में साक्षरता दर में तेजी से वृद्धि, लिंग अनुपात में सुधार, बाल-विवाह में कमी आई है। जनजातीय क्षेत्रों में जलवायु कठोर होती है। संसाधनों की कमी रहती है। आर्थिक-सामाजिक विकास भी नहीं हो पाया है। इन क्षेत्रों का आर्थिक आधार मुख्य रूप से कृषि और उससे जुड़ी आर्थिक क्रियाएँ जैसे भेड़ व बकरी पालन शामिल है। इन क्षेत्रों में आज भी कृषि परम्परागत तकनीकों से की जाती है।

प्रश्न 7.
पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम पर संक्षिप्त नोट लिखें।
अथवा
पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम कहाँ-कहाँ पर आरंभ किए गए?
उत्तर:
पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में प्रारंभ किया गया। इसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश के सभी पर्वतीय जिले, मिकिड़ व असम उत्तरी कछार की पहाड़ियाँ, पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग और तमिलनाडु के नीलगिरी को मिलाकर कुल 15 जिले शामिल हैं। पहाड़ी एवं पर्वतीय क्षेत्रों को संरक्षण एवं उनके रख-रखाव के लिए केन्द्रीय एवं राज्य सरकार द्वारा विशेष कार्य किए गए। इसका मुख्य कार्य वहाँ की वनस्पति एवं कृषि योग्य जमीन का संरक्षण करना था और वहाँ से गए हुए लोगों को उन्हीं के स्थान पर रोजगार प्राप्त करवाना था।

पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए बनी राष्ट्रीय समिति ने निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखकर पहाड़ी क्षेत्रों में विकास के लिए सुझाव दिए थे

  1. केवल प्रभावशाली नहीं, सभी लोगों को लाभ मिले
  2. स्थानीय संसाधनों और प्रतिभाओं का विकास
  3. जीविका निर्वाह अर्थव्यवस्था को निवेश-उन्मुखी बनाना
  4. अंतः प्रादेशिक व्यापार में पिछड़े क्षेत्रों का शोषण न हो
  5. पिछड़े क्षेत्रों की बाज़ार व्यवस्था में सुधार करके श्रमिकों को लाभ पहुँचाना
  6. पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना।

प्रश्न 8.
आर्थिक योजना के लिए तीन स्तरीय प्रादेशिक विभाजन का वर्णन करें।
उत्तर:
1. बृहत स्तरीय प्रदेश-ये सबसे उच्च स्तर के प्रदेश होते हैं। इनमें एक से अधिक राज्य सम्मिलित होते हैं। इस प्रकार के प्रदेश अपनी सीमा के अंदर पूर्ण विकास की क्षमता रखते हैं। ये क्षेत्र भौगोलिक सम्पदा, कच्चे माल, शक्ति के साधनों में आत्मनिर्भर होते हैं।

2. मध्यम स्तरीय प्रदेश यह प्रदेश एक या एक से अधिक राज्यों के कुछ जिलों का संगठित स्वरूप होता है। 3. अल्पार्थक स्तरीय प्रदेश ये सबसे छोटे और निम्न स्तर के योजना प्रदेश होते हैं। इनमें कई विकास केन्द्र शामिल होते हैं।

प्रश्न 9.
भारत के विकास में प्रादेशिक विषमताओं की तीन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भारत में नियोजित विकास की प्रक्रिया में प्रादेशिक विषमताओं की झलक प्रस्तुत होती है। विकास का फल आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों को उस हिसाब से नहीं मिल पाया जितना अपेक्षित था। इस सन्दर्भ में कुछ उदाहरण उल्लेखनीय हैं जो निम्नलिखित हैं
(1) वर्ष 1999-2000 में बिहार में प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 6,328 रुपए थी, जबकि दिल्ली में यह आय 35,705 रु० थी। इस प्रकार राज्यों में न्यूनतम और अधिकतम आय का अनुपात 1:56 था।

(2) देश के विभिन्न भागों में गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के अनुपात में भी अंतर पाया जाता है। वर्ष 1999-2000 में जम्मू और कश्मीर में गरीबों का प्रतिशत 3.48 था, जबकि ओडिशा में यह 47.95 प्रतिशत था।

(3) नगरीकरण की प्रक्रिया भी विकास का प्रमुख संकेतक माना जाता है। राज्यों में नगरीय जनसंख्या के अनुपात में पर्याप्त अंतर पाया जाता है। अरुणाचल प्रदेश में नगरीय जनसंख्या का अनुपात 5.50 प्रतिशत है, जबकि गोवा में यह 49.77 प्रतिशत है।

प्रश्न 10.
पंचवर्षीय योजनाओं के कोई चार मुख्य उद्देश्य बताएँ।
उत्तर:
पंचवर्षीय योजनाओं के मुख्य चार उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

  1. राष्ट्रीय आय एवं प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करना।
  2. कृषि उत्पादकता को बढ़ाना और रोजगार में वृद्धि करना।
  3. आर्थिक असमानता समाप्त या कम करना।
  4. आत्मनिर्भरता और औद्योगिक विकास में वृद्धि करना।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 9 भारत के संदर्भ में नियोजन और सततपोषणीय विकास

प्रश्न 11.
योजना आयोग के कोई चार कार्य बताइए।
उत्तर:
योजना आयोग के कोई चार कार्य निम्नलिखित हैं-

  1. देश के संसाधनों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए देश के विकास के लिए योजनाएँ तैयार करना।
  2. विभिन्न कार्यक्रमों के लिए प्राथमिकताओं को निर्धारित करना।
  3. योजनाओं की प्रगति का समय-समय पर मूल्यांकन करना।
  4. आर्थिक विकास में बाधक कारकों का पता लगाना। इन कारकों को ध्यान में रखकर आयोग उन उपायों तथा मशीनरी को भी निश्चित करता है जिनका उपयोग करके आर्थिक विकास की प्राप्ति हो।

प्रश्न 12.
भरमौर क्षेत्र की कोई चार विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:
भरमौर क्षेत्र की चार मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. भरमौर क्षेत्र पर्वतीय होते हैं।
  2. ये क्षेत्र आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े होते हैं।
  3. यहाँ की जलवायु कठोर होती है।
  4. इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर निम्न होता है।

प्रश्न 13.
स्वतंत्रता मिलने के पश्चात् भारत में नियोजन (Planning) को क्यों अपनाया गया? अथवा भारत में योजना पद्धति को क्यों चुना गया?
अथवा
नियोजन की आवश्यकता के कोई चार कारण लिखें।
उत्तर:
भारत में आर्थिक नियोजन को अपनाने के मुख्य चार कारण निम्नलिखित हैं
1. पिछड़ी हुई कृषि प्रणाली-भारत की स्वतंत्रता के समय देश में कृषि की अवस्था बहुत खराब थी, खाने तक के लिए भी अनाज विदेशों से मंगवाना पड़ता था। खाद्य वस्तुओं में आत्मनिर्भरता लाने के लिए नियोजन की बहुत आवश्यकता थी।

2. रोज़गार-स्वतंत्रता-प्राप्ति के समय भारत में बहुत बेरोज़गारी थी। लोगों को रोज़गार दिलाने के लिए एक ओर तो बड़े उद्योगों को लगाना आवश्यक था और दूसरी ओर लघु-उद्योगों के लिए आर्थिक सहायता देकर लोगों को रोजगार दिलाना था।

3. औद्योगिकीकरण भारत में उद्योग भी बहुत पिछड़े हुए थे। लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नए उद्योगों को लगाने और पहले से चल रहे उद्योगों में सुधार करने के लिए भी नियोजन आवश्यक था।

4. शिक्षा-उद्योगों के संचालन के लिए तकनीकी कर्मचारी तथा वित्त प्रशासक मिल सकें, इसके लिए शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना आवश्यक था। भारत में छोटे तथा बड़े स्तर पर अनेक संस्थाएँ स्थापित करने की आवश्यकता थी जिससे विद्यार्थी इंजीनियरिंग, डॉक्टरी तथा अन्य व्यवस्था के बारे में शिक्षा प्राप्त कर सकें।

प्रश्न 14.
भारत में नियोजन के मुख्य उद्देश्य बताएँ?
अथवा
भारत में नियोजन की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
भारत में आर्थिक नियोजन के मुख्य चार उद्देश्य निम्नलिखित हैं-
1. राष्ट्रीय आय में वृद्धि-नियोजन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय आय में वृद्धि करना है। इस उद्देश्य हेतु विभिन्न योजनाओं में राष्ट्रीय आय में वार्षिक वृद्धि दर का लक्ष्य निश्चित किया गया। जैसे दसवीं पंचवर्षीय योजना में आठ प्रतिशत का लक्ष्य निर्धारित . किया गया। नियोजन के कारण ही प्रथम पंचवर्षीय योजना से ग्यारहवीं योजना तक राष्ट्रीय आय में वृद्धि के लक्ष्यों में तीन गुणा . तक वृद्धि हुई थी।

2. रोजगार के अवसरों में वृद्धि-सभी को रोजगार उपलब्ध कराना नियोजन का दूसरा प्रमुख उद्देश्य है। इसलिए प्रत्येक योजना में रोज़गार के अवसरों को बढ़ाने तथा अर्द्धबेरोजगारी को दूर करने के कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

3. समाजवादी ढंग के समाज की स्थापना-नियोजन का उद्देश्य देश में समाजवादी ढंग से समाज की स्थापना करना है। यह समाज सामाजिक न्याय ( Social Justice) पर आधारित होता है। यह समाज शोषण-रहित सिद्धांत पर आधारित होता है जिसमें लोगों की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति होती है।

4. निर्धनता दूर करना–पाँचवीं योजना का प्रमुख लक्ष्य ‘गरीबी हटाओ’ था। इसलिए देश में न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम पर जोर दिया जा रहा है ताकि गरीब लोगों की आय में वृद्धि हो और उनकी न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

प्रश्न 15.
राष्ट्रीय विकास परिषद् के मुख्य कार्य कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
राष्ट्रीय विकास परिषद् के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं-

  1. सभी पंचवर्षीय योजनाओं अथवा वार्षिक योजनाओं के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत (Guidelines) निर्धारित करना।
  2. योजना आयोग ने योजनाओं का जो प्रारूप तैयार किया है, उस पर विचार-विमर्श करना और उसको अंतिम स्वीकृति प्रदान करना।
  3. सामाजिक-आर्थिक विकास की दिशा और उसके लक्ष्य निर्धारित करना।
  4. योजनाओं के कार्यान्वयन पर निगाह रखना और योजना-अवधि के दौरान हुई प्रगति का समय-समय पर मूल्यांकन करना।
  5. लक्ष्य से कम हुई प्रगति के कारणों की समीक्षा करना और ऐसे सुझाव देना अथवा उपाय बतलाना जिनसे कि योजना-लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिले।

प्रश्न 16.
अच्छे नियोजन के लिए आवश्यक चार बातें लिखें।
अथवा
अच्छे नियोजन की चार विशेषताओं पर प्रकाश डालें।
उत्तर:
अच्छे नियोजन के लिए निम्नलिखित बातों की आवश्यकता होती है-

  1. नियोजन के उद्देश्यों की स्पष्ट रूप से व्याख्या की जानी चाहिए।
  2. उद्देश्यों को केवल मात्र निर्धारित करने से काम नहीं चलता। इन्हें प्राप्त करने के लिए आवश्यक साधनों तथा उपायों की भी व्यवस्था होनी चाहिए।
  3. नियोजन कठोर नहीं होना चाहिए। इसे इतना लचीला होना चाहिए ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनमें संशोधन किया जा सके।
  4. नियोजन के विभिन्न भागों में संतुलन होना आवश्यक है।

प्रश्न 17.
भारत के विकास में पहली एवं दूसरी योजनाओं की भूमिका का उल्लेख कीजिए। अथवा पहली और दूसरी पंचवर्षीय योजनाओं पर संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर:
नियोजन द्वारा विकास का प्रारंभ सर्वप्रथम सोवियत संघ में हुआ और वहाँ पर इसको शानदार सफलता मिली। भारत में नियोजित विकास का सन् 1951 में आरंभ हुआ।
1. पहली पंचवर्षीय योजना (1951-56)-इस योजना में कृषि के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी। योजना काल के दौरान कृषि, सामुदायिक विकास तथा सिंचाई कार्यक्रम पर लगभग ₹ 724 करोड़ खर्च किए गए। साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में भी संतोषजनक प्रगति हुई। सार्वजनिक क्षेत्र में कई नए कारखाने लगाए गए; जैसे चितरंजन में रेलवे इंजन बनाने का तथा सिंदरी में खाद बनाने का कारखाना आदि।।

2. दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-61) इस योजना में समाजवादी समाज की अवधारणा पर बल देते हए सभी वर्गों के विकास पर बल दिया गया। इस योजना के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र में ₹ 4800 करोड़ का निवेश प्रस्तावित किया गया था जिसमें से करीब ₹ 4600 करोड़ व्यय किए गए। इस योजना में भारी उद्योगों के विकास पर विशेष बल दिया गया था।

प्रश्न 18.
भारत की चौथी पंचवर्षीय योजना (1969-74) का संक्षिप्त उल्लेख करें।
उत्तर:
इस योजना में सघन खेती (Intensive Agriculture), पौध संरक्षण (Plant Conservation) तथा उन्नत बीजों (Improved Seeds) के प्रयोग पर विशेष बल के अतिरिक्त समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के आर्थिक उत्थान के लिए उन्हें शिक्षा तथा रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध करवाने पर भी विशेष बल दिया गया। इसके साथ ही बड़े उद्योगों तथा खनिजों के विकास के लिए ₹ 3630 करोड़ की धनराशि निर्धारित की गई थी। इस योजना में आर्थिक विकास दर को 5.7 प्रतिशत के स्तर पर लाना निर्धारित किया गया था, लेकिन इसे केवल 2.1 प्रतिशत ही प्राप्त किया जा सका। इस दौरान 1971 में भारत-पाक युद्ध और इससे पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए लाखों शरणार्थियों के चलते अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था।

प्रश्न 19.
भारत की नौवीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002) का संक्षिप्त उल्लेख करें।
उत्तर:
नौवीं पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल, 1997 को लागू की गई और इसकी अवधि 31 मार्च, 2002 तक की थी। इस योजना में प्रस्तावित निवेश ₹ 8,59,200 करोड़ था, जबकि वास्तविक निवेश ₹ 9,41,041 करोड़ रहा। इस योजना के अंतर्गत कृषि और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ रोजगार के अवसरों पर जोर दिया गया। आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ कीमतों को स्थिर रखने, सभी को खाद्यान्न उपलब्ध कराने, पेयजल तथा बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करने और प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इस योजना में 6.5 प्रतिशत की प्रस्तावित दर के विपरीत 5.4 प्रतिशत की विकास दर प्राप्त की जा सकी।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत की पंचवर्षीय योजनाओं की प्रमुख उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत की पंचवर्षीय योजनाओं की मुख्य सफलताओं का वर्णन करें। अथवा भारत में नियोजित विकास की उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत बारह पंचवर्षीय और छः वार्षिक योजनाएँ पूरी कर चुका है। नियोजन के इतने वर्षों में, हमारी उपलब्धियाँ श्रेष्ठ (Outstanding) नहीं रही। फिर भी, इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता कि पंचवर्षीय योजनाओं के दौरान हमारे जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि हुई है। सन् 1951 की तुलना में (जब प्रथम पंचवर्षीय योजना आरम्भ हुई थी) आज भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति बहुत बेहतर है। उपलब्धियों का विश्लेषण योजनाओं के लक्ष्यों तथा उद्देश्यों के सन्दर्भ में किया जाता है। निम्नलिखित तथ्य भारत में पंचवर्षीय योजनाओं की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हैं
1. राष्ट्रीय आय में वृद्धि राष्ट्रीय आय आर्थिक संवृद्धि का सूचक है। भारत में राष्ट्रीय आय में वृद्धि निश्चित रूप से नियोजन योजन के पहले दशक (1950-51 से 1960-61) के बीच राष्ट्रीय आय में 3.8 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से औसत वृद्धि हुई। दूसरे दशक (1960-61 से 1970-71) में यह घटकर 3 प्रतिशत रह गई। तीसरे दशक (1970-71 से 1980-81) के दौरान यह बढ़कर 3.3 प्रतिशत हो गई। सन् 1980-81 से 2006-07 के बीच यह बढ़कर 6.3 प्रतिशत हो गई। दसवीं तथा ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान राष्ट्रीय आय की वृद्धि दर बहुत उत्साहवर्द्धक रही। दसवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान यह 7.8 प्रतिशत तथा ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के पहले दो वर्षों के दौरान यह लगभग 8 प्रतिशत रही। वर्ष 2008-09 के दौरान विश्व मन्दी के कारण वृद्धि दर बहुत कम रही है। फिर भी हमें आशा है कि हम विश्व मन्दी की मार से बचे रहेंगे। हमें 6.7 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर बनाए रहने की उम्मीद है जबकि संसार की उन्नत अर्थव्यवस्थाएँ गतिहीनता की ओर बढ़ रही हैं।

2. प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि योजनाओं के अधीन आर्थिक विकास को उत्साहित करने वाले तत्त्वों का विकास होने के कारण कृषि तथा उद्योगों के उत्पादन में सराहनीय वृद्धि हुई है तथा रोज़गार सुविधाओं का विस्तार हुआ है। भारत में सम्पूर्ण योजनाकाल में प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि दर में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। सम्पूर्ण नियोजन की अवधि के दौरान, प्रति व्यक्ति आय की औसत वृद्धि दर स्थिर कीमतों पर 2.9 प्रतिशत प्रतिवर्ष रही है। यह इस तथ्य का संकेत है कि विकास की प्रक्रिया पूरी तरह से जड़ पकड़ नहीं पाई है, यद्यपि विकास की गति को अभी उड़ान भरनी है।

3. पूँजी निर्माण की दर में वृद्धि-पूँजी निर्माण आर्थिक विकास का मूल निर्धारक है। एक देश का आर्थिक विकास पूँजी निर्माण की दर पर निर्भर करता है। पूँजी निर्माण की दर बचत तथा निवेश पर निर्भर करती है। पंचवर्षीय योजनाओं के दौरान, बचत तथा निवेश की दर में काफी वृद्धि हुई है। सन् 1950-51 में, भारत में बचत की दर राष्ट्रीय आय का 5.5% थी जो 2010-11 में बढ़कर 32.3% हो गई। 10वीं योजना के अन्त में भारत में निवेश दर का अनुमान 32.5% था, 2010-11 में यह 35.1% अनुमानित है।

4. कृषि का विकास-कृषि विकास के लिए भारत सरकार ने बहुत-सी योजनाएँ चालू की हैं, जिनका कृषि उत्पादन पर अच्छा प्रभाव पड़ा है। आज भारतीय कृषि में ऊँची उपज वाले बीज, रासायनिक खाद, मशीनों तथा नए ढंगों का प्रयोग किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप कृषि उत्पादन में सराहनीय वृद्धि हुई है, जिसको हरित-क्रान्ति का नाम दिया गया है।

उदाहरणस्वरूप अनाज का उत्पादन 1951-52 में 550 लाख टन से बढ़कर 2011-12 में 2448 लाख टन हो गया था। नियोजन की अवधि के दौरान कृषि उत्पादन की औसत वृद्धि दर 2.8 प्रतिशत प्रतिवर्ष थी। हमने देखा कि कृषि उत्पादन के स्तर में स्पष्ट परिवर्तन हुआ है किन्तु कृषि उत्पादन की वृद्धि दर इन सभी वर्षों में स्थिर (Stable) नहीं रही। इसमें एक वर्ष से दूसरे वर्ष उतार-चढ़ाव होता रहा है जो कि देश में जलवायु सम्बन्धी संवेदनशीलता का प्रतीक है। उपयुक्त मानसून के कारण अच्छी फसल तथा खराब मानसून के कारण खराब फसल का उत्पादन हुआ है।

5. औद्योगिक विकास योजनाओं के अधीन औद्योगिक क्षेत्र में कारखानों की संख्या, पूँजी निवेश तथा औद्योगिक उत्पादन में तीव्रता से वृद्धि हुई है। पूँजीगत वस्तु उद्योग; जैसे लोहा तथा इस्पात, मशीनरी, रासायनिक खादें आदि का बहुत सन्तोषजनक विकास हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों का भी पर्याप्त विकास हुआ है। उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में देश ने लगभग आत्मनिर्भरता प्राप्त कर ली है।

उद्योग के पर्याप्त आधुनिकीकरण तथा विविधीकरण के फलस्वरूप आज भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की अर्थव्यवस्था में दसवीं सबसे बड़ी औद्योगिक अर्थव्यवस्था बन गई है। नियोजन की अवधि (1951-2012) के दौरान औद्योगिक उत्पादन की औसत वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत प्रतिवर्ष रही है। अतः योजना के काल में औद्योगिक उत्पादन में निरन्तर वृद्धि हुई है। औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर (यद्यपि उतार-चढ़ाव से मुक्त नहीं थी) कृषि उत्पादन की वृद्धि दर से काफी अधिक स्थिर रही है।

6. आर्थिक आधारिक संरचना का विकास योजना अवधि में आर्थिक आधारिक संरचना में काफी प्रगति हुई है। इसमें मुख्य रूप से यातायात, संचार के साधन, सिंचाई की सुविधाएँ, बिजली की उत्पादन क्षमता आदि शामिल किए जाते हैं। अर्थव्यवस्था में ऊर्जा निर्माण (Power-generation) में बहुत वृद्धि हुई है। सड़कों, रेलवे, बन्दरगाहों, हवाई अड्डों, दूर-संचार, बैंकिंग, बीमा आदि सभी में बहुत विकास हुआ है। योजना अवधि में बेहतर आधारिक संरचना के उपलब्ध होने से आर्थिक विकास की गति में तेजी आई है। नियोजन काल में नए बिजली-घर स्थापित किए गए हैं। बिजली आपूर्ति में तीव्रता से वृद्धि हुई है।

देश के भिन्न-भिन्न भागों में गाँवों को शहरों के साथ सड़कों तथा रेलों के द्वारा जोड़ दिया गया है, जिसके कारण देश में कृषि तथा औद्योगिक विकास की तथा श्रम की गतिशीलता में वृद्धि हुई है, जिसका लोगों के जीवन-स्तर पर अच्छा प्रभाव पड़ा है। कृषि विकास, नए उद्योगों की स्थापना तथा पुराने उद्योगों का आधुनिकीकरण करने के लिए कर्जे की सुविधाएँ देने के लिए सरकार ने व्यापारिक बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं की स्थापना की है। बैंकों को पिछड़े भागों में शाखाएँ खोलने के लिए आदेश दिए गए हैं, जिसके कारण देश में बैंकों की शाखाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

7. सामाजिक आधारिक संरचना का विकास-सामाजिक आधारिक संरचना में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा चिकित्सा, परिवार कल्याण आदि सेवाओं को सम्मिलित किया जाता है। इस क्षेत्र में भी पंचवर्षीय योजनाओं ने बहुत विकास किया है, जैसा कि जीवन की गुणवत्ता से सम्बन्धित आँकड़ों से स्पष्ट होता है

  • मृत्यु-दर-सन् 1951 में मृत्यु दर 27 प्रति हजार थी जो कि सन् 2011 में घटकर 7.2 प्रति हजार रह गई।
  • औसत आयु-सन् 1951 में 32 वर्ष से बढ़कर 2010-11 में 65.4 वर्ष हो गई।
  • शिक्षा सुविधाएँ-स्कूली बच्चों की संख्या सन् 1951 से तीन गुना तथा कॉलेज के विद्यार्थियों की संख्या पाँच गुना बढ़ गई है।
  • इंजीनियरिंग कॉलेजों में वार्षिक दाखिलों की संख्या जो सन् 1950 में 7,100 थी अब बढ़कर 1,33,000 हो गई है।

8. रोज़गार योजनाओं की अवधि में रोज़गार के अवसर बढ़ाने के बहुत प्रयत्न किए गए हैं। प्रथम योजना में 70 लाख, दूसरी योजना में 100 लाख तथा तीसरी योजना में 145 लाख लोगों को रोज़गार प्रदान किया गया। चौथी योजना में 180 लाख लोगों को तथा पाँचवीं योजना में 190 लाख लोगों को रोजगार प्रदान किया गया। सातवीं तथा आठवीं योजनाओं में क्रमशः 340 लाख तथा 398 लाख लोगों को रोजगार दिया गया। एक अनुमान के अनुसार नौवीं योजना के अन्त तक लगभग 41 करोड़ 64 लाख लोगों को रोज़गार दिया गया। ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में 5.8 करोड़ रोज़गार के अवसरों का सजन करने का लक्ष्य था।

9. आधुनिकीकरण-योजनाओं की अवधि में अर्थव्यवस्था में जो संरचनात्मक तथा संस्थागत परिवर्तन हुए हैं वे इस बात के सूचक हैं कि अर्थव्यवस्था का काफी आधुनिकीकरण हुआ है। कुछ महत्त्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन इस प्रकार हैं-
(i) राष्ट्रीय आय की संरचना में उद्योगों तथा सेवाओं का योगदान काफी बढ़ गया है

(ii) आधुनिक तकनीकी का प्रयोग करने वाले उद्योगों की संख्या

(iii) कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकी का प्रयोग निरन्तर बढ़ा है। संस्थागत परिवर्तनों में उदारीकरण, निजीकरण तथा वैश्वीकरण सम्मिलित हैं, जो कि विकास की रणनीति, छोटे पैमाने के उद्योगों के अन्तर-क्षेत्रीय विस्तार एकाधिकारी व्यवहार पर ‘ प्रतिबन्ध इत्यादि के मुख्य तत्त्व हैं।

10. आत्म-निर्भरता-नियोजन काल में देश में आत्मनिर्भरता के सम्बन्ध में काफी प्रगति देखी जा सकती है। विभिन्न योजनाओं में विदेशी सहायता में निरन्तर कमी हुई है। आयातों की वृद्धि दर भी निरन्तर गिरावट की ओर है। निर्यातों ने खूब उन्नति की है। इनमें निरन्तर बढ़ने की प्रवृत्ति देखी जा सकती है। अतः भारत में योजनाएँ अर्थव्यवस्था को आत्म-निर्भरता की ओर बढ़ाने में सफल रही हैं।

संक्षेप में, भारत ने नियोजन की अवधि में विशेष प्रगति की है। देश को औद्योगिक विकास, कृषि के आधुनिकीकरण, व्यापारीकरण एवं सेवा-क्षेत्र के बहुमुखी विस्तार की ओर एक नींव स्थापित करने में सफलता मिली है। किन्तु हमारे नियोजित विकास कार्यक्रमों में गम्भीर दोष भी पाए गए हैं। इन दोषों के कारण ही हमारी उपलब्धियाँ विकास के लक्ष्य को पूरी तरह से प्राप्त नहीं कर सकी। काफी कुछ प्राप्त किया जा चुका है, किन्तु बहुत कुछ करना अभी बाकी है, अतः कड़ा प्रयास करना होगा।

प्रश्न 2.
भारत की विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं के उद्देश्य बताइए।
उत्तर:
पहली पंचवर्षीय योजना (1951-56)-पहली योजना में समग्र विकास पर बल दिया गया था फिर भी मलतः यह एक कृषि प्रधान योजना थी। इस योजना में बिजली को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी। संयुक्त राज्य अमेरिका की टेनेसी वैली अथॉर्टी का अनुकरण करते हुए ऐसी अनेक बहुउद्देशीय योजनाओं को आरम्भ किया गया जिनसे बाढ़ नियन्त्रण, सिंचाई, बिजली उत्पादन, मछली-पालन और मृदा अपरदन के नियन्त्रण को बल मिलता था। भाखड़ा नंगल, कोसी, दामोदर व हीराकुड परियोजनाएँ इसके उदाहरण हैं। ग्रामीण समुदायों के विकास के लिए अनेक सामुदायिक विकास कार्यक्रम भी चलाए गए। उन्हें निवेश, वित्त और सेवाओं के बारे में तथा तकनीकी जानकारियाँ दी गईं।

दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-61)-इस योजना का मुख्य उद्देश्य समाजवादी समाज की स्थापना करना था। इस योजना के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार थे-

  • राष्ट्रीय आय में 25% की वार्षिक वृद्धि।
  • आधारभूत और भारी उद्योगों के विकास के साथ तीव्र औद्योगिकीकरण।
  • रोजगारों के अवसरों को बढ़ाना।
  • राष्ट्रीय आय के असमान बंटवारे और आर्थिक शक्ति के केन्द्रीयकरण को कम करना।

तीसरी पंचवर्षीय योजना (1961-66) इस योजना का मुख्य उद्देश्य आत्म-निर्भरता का विकास करना था। इसके लिए निम्नलिखित उद्देश्य निर्धारित किए गए थे

  • राष्ट्रीय आय में 5% की वृद्धि करना तथा निवेश को बढ़ावा देना ताकि विकास की यह दर कायम रह सके।
  • खाद्यान्नं में आत्म-निर्भरता प्राप्त करना तथा कृषि उत्पादन में इतनी बढ़ोत्तरी करना कि उद्योगों और निर्यात की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
  • रोजगार के अवसरों को बढ़ाना।
  • आय और सम्पत्ति के वितरण की विषमताओं को कम करना।

चौथी पंचवर्षीय योजना (1969-74) इस योजना का मुख्य लक्ष्य ‘स्थिरता के साथ विकास’ था। इस योजना के अन्य मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे

  • विकास की प्रक्रिया को तेज करना।
  • कृषि उत्पादन में उतार-चढ़ाव को कम करना।
  • विदेशी सहायता की अनिश्चितता के प्रभाव को कम करना।
  • अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए औद्योगीकरण।

पाँचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-79)-इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीबी हटाना और आत्म-निर्भरता प्राप्त करना था। मुद्रा स्फीति को नियंत्रित करना और आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ता प्रदान करना। छठी पंचवर्षीय योजना (1980-85)-इस योजना के मुख्य उद्देश्य बेरोजगारी और अर्द्धबेरोजगारी को दूर करना व जनसंख्या के निर्धन वर्ग के जीवन-स्तर में प्रशंसनीय वृद्धि करना।

सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985-90) इस योजना के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे-

  • अन्न के उत्पादन में वृद्धि।
  • सामाजिक न्याय व रोजगार के अवसरों का निर्माण।
  • आत्म-निर्भरता तथा बेहतर कुशलता और उत्पादकता।

आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-97) यह योजना नई आर्थिक उदारीकरण की नीतियों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य निजी क्षेत्र को महत्त्वपूर्ण भूमिका प्रदान करना, उद्योग, कृषि तथा संबद्ध क्षेत्रों में तीव्र वृद्धि, आयात और निर्यात में भरपूर वृद्धि तथा भुगतान शेष का घटना।

नौवीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002)-इस योजना के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे-

  • सभी के लिए भोजन उपलब्ध कराना और देश को भूख से मुक्ति दिलाना।
  • न्यूनतम आवश्यकताएँ; जैसे स्वच्छ जल, प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएँ, शिक्षा तथा आवास की सुविधा प्रदान करना।
  • सतत् पोषणीय विकास।
  • जनसंख्या वृद्धि को रोकना।
  • सूचना प्रौद्योगिकी का विकास।

दसवीं पंचवर्षीय योजना(2002-07) इस योजना के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे-

  • आर्थिक विकास की दर को 8% निर्धारित करना।
  • औद्योगिक उत्पादन को बढ़ाकर निर्यात और विश्व व्यापार में अपना हिस्सा बढ़ाने का लक्ष्य रखना।
  • अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र की भूमिका को बढ़ावा देना।
  • सतत् और टिकाऊ विकास के लिए अवसंरचना में वृद्धि करना।।
  • वित्तीय और मौद्रिक नीति में अधिक लचीलापन लाना।

ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना(2007-12)-इस योजना के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे-

  • तीव्र तथा अधिक समावेशी विकास।
  • कृषि की विकास दर को दुगुना करना।
  • सामाजिक क्षेत्र-शिक्षा तथा स्वास्थ्य का विकास करना।
  • ग्रामीण आधारिक संरचना का विकास करना।

बारहवीं पंचवर्षीय योजना(2012-17)-इस योजना के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

  • तीव्र टिकाऊ एवं अधिक समावेशी विकास करना।
  • सकल घरेलू उत्पाद की दर 9% निर्धारित करना।

प्रश्न 3.
नियोजन से आप क्या समझते हैं? विकसित योजना का क्या महत्त्व है?
अथवा
नियोजन से क्या अभिप्राय है? भारत में इसकी क्या आवश्यकता है?
अथवा
भारत में आर्थिक नियोजन अपनाने के कारणों का वर्णन करें।
उत्तर:
नियोजन का अर्थ (Meaning of Planning) साधारण शब्दों में, किसी भी देश के सभी साधनों और शक्तियों द्वारा पूर्व निश्चित अवधि के भीतर निर्धारित लक्ष्यों और उद्देश्यों को प्राप्त करना नियोजन (Planning) कहलाता है। नियोजित अर्थव्यवस्था के द्वारा देश का इस प्रकार समुचित आर्थिक विकास किया जाता है जिससे उसका लाभ सारे देश को पहुँच सके।

विभिन्न विद्वानों द्वारा नियोजन की भिन्न-भिन्न परिभाषाएँ दी गई हैं, जो इस प्रकार हैं-
1. भारत के योजना आयोग के अनुसार, “योजना मुख्य रूप से समस्याओं के तर्कशील हल ढूँढने का यत्न है तथा आर्थिक योजना का अर्थ समाज में पाए जाने वाले संभावित साधनों का प्रभावशाली प्रयोग है।”

2. साइमन स्मिथबर्ग तथा थॉमसन के अनुसार, “योजना वह गतिविधि है जिसका संबंध भविष्य के सुझावों के मूल्यांकन तथा उन गतिविधियों से होता है जिनके द्वारा प्रस्तावों को प्राप्त किया जा सके।”

3. टेरी के अनुसार, “वांछित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक समझे जाने वाले तथ्यों, साधनों तथा गतिविधियों का सोच-समझकर चयन, प्रयोग और उन्हें एक-दूसरे के साथ संबद्ध करना ही नियोजन है।”

भारत में सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए नियोजन की आवश्यकता (Need of Planning for Socio-economic Development in India)-स्वतंत्र भारत के नेताओं ने इस बात को महसूस किया कि देश का सामाजिक तथा आर्थिक विकास एक योजनाबद्ध तरीके से किया जाए। जब रूस में सन् 1917 में साम्यवादी शासन स्थापित हुआ तो वहाँ भी भारत जैसी विषम आर्थिक परिस्थितियाँ मौजूद थीं और रूस ने इन समस्याओं को नियोजित अर्थव्यवस्था के द्वारा सुलझाया। इसके परिणामस्वरूप उसे देश की आर्थिक उन्नति तथा समृद्धि में आशातीत सफलता मिली। इससे प्रभावित होकर भारत में भी नियोजित अर्थव्यवस्था की योजना बनाई गई। भारत में आर्थिक नियोजन को अपनाने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-
1. पिछड़ी हुई कृषि प्रणाली (Backward Agricultural System)-भारत की स्वतंत्रता के समय देश में कृषि की अवस्था बहुत खराब थी, खाने तक के लिए भी अनाज विदेशों से मंगवाना पड़ता था। खाद्य वस्तुओं में आत्मनिर्भरता लाने के लिए नियोजन की बहुत आवश्यकता थी।

2. रोज़गार (Employment)-स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत में बहुत बेरोज़गारी थी। लोगों को रोज़गार दिलाने के लिए एक ओर तो बड़े उद्योगों को लगाना आवश्यक था और दूसरी ओर लघु-उद्योगों के लिए आर्थिक सहायता देकर लोगों को रोज़गार दिलाना था।

3. औद्योगीकरण (Industrialisation)-भारत में उद्योग भी बहुत पिछड़े हुए थे। लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नए उद्योगों को लगाने और पहले से चल रहे उद्योगों में सुधार करने के लिए भी नियोजन आवश्यक था।

4. शिक्षा (Education)-उद्योगों के संचालन के लिए तकनीकी कर्मचारी तथा वित्त प्रशासक मिल सकें, इसके लिए शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना आवश्यक था। भारत में छोटे तथा बड़े स्तर पर अनेक संस्थाएँ स्थापित करने की आवश्यकता थी जिससे विद्यार्थी इंजीनियरिंग, डॉक्टरी तथा अन्य व्यवस्था के बारे में शिक्षा प्राप्त कर सकें।

5. आर्थिक संकट में उपयोगी (Useful in Economic Emergency)-भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति के समय से ही आर्थिक संकट बना हुआ है, जिसने वर्तमान समय में और भी भयंकर रूप धारण कर लिया है। नियोजन द्वारा ही देश में उपस्थित आर्थिक समस्याओं को सुलझाया जा सकता है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 9 भारत के संदर्भ में नियोजन और सततपोषणीय विकास

प्रश्न 4.
भारत की दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002-2007) का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
1 सितंबर, 2001 को राष्ट्रीय विकास परिषद् की 49वीं बैठक में 10वीं पंचवर्षीय योजना के दृष्टिकोण पत्र को मंजूरी प्रदान की गई। तत्पश्चात् योजना आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अध्यक्षता में 5 अक्तूबर, 2001 को योजना आयोग की पूर्ण बैठक में 10वीं पंचवर्षीय योजना के प्रारूप को स्वीकृति प्रदान की गई थी। 29 अक्तूबर, 2001 को योजना आयोग के दस्तावेज़ को मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित कर दिया गया।

दसवीं पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल, 2002 को लागू हुई और इसकी अवधि 31 मार्च, 2007 तक रही। दसवीं योजना के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र का परिव्यय 2001-02 की कीमतों पर ₹ 15,92,300 करोड़ रखा गया जिसमें केंद्रीय योजना का अंश 9,21,291 करोड़ रुपए तथा राज्यों एवं केंद्र-शासित क्षेत्रों का अंश ₹ 6,71,009 करोड़ था। योजना को केंद्र सरकार द्वारा ₹ 7,06,000 करोड़ का बजटीय समर्थन भी प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त दसवीं पंचवर्षीय योजना में जो लक्ष्य निश्चित किए गए थे, उनमें मुख्य निम्नलिखित थे

  • इस योजना में निर्धनता अनुपात को सन् 2007 तक 20 प्रतिशत तक तथा 2012 तक 10 प्रतिशत तक लाना था।
  • इस योजना के अंतर्गत सन् 2007 तक सभी के लिए प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था।
  • इस योजना में जनसंख्या वृद्धि को भी 2001-2011 के दशक तक 16.2 प्रतिशत तक सीमित रखना था।
  • इस योजना में भारत में साक्षरता दर को सन् 2007 तक 72 प्रतिशत तथा 2012 तक 80 प्रतिशत रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
  • इस योजना में सन् 2007 तक सभी प्रदूषित नदियों की सफाई का लक्ष्य रखा गया था।
  • इस योजना में शिशु मृत्यु दर को सन् 2007 तक 45 प्रति हजार तक लाने का लक्ष्य निश्चित किया गया था।
  • इस योजना के अंतर्गत प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया था।

इसके अतिरिक्त जिन नीतिगत सुधारों की अपेक्षा योजना आयोग ने 10वीं योजना के दृष्टिकोण पत्र में की थी, उनमें से कुछ प्रमुख निम्नलिखित थे
(i) योजना के लिए सकल बजटीय समर्थन में निरंतर वृद्धि ताकि योजना के अंतिम वर्ष (2006-2007) तक इसे सकल घं उत्पाद के 5 प्रतिशत तक लाया जा सके। इसके लिए इसमें 18.3 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि की गई थी।

(ii) सरकारी कर्मचारियों की संख्या में प्रति वर्ष 3 प्रतिशत बिंदु की कटौती। योजना के पाँच वर्षों की अवधि में कोई नई नियुक्ति नहीं।

(iii) सुरक्षा व्यय एवं ब्याज भुगतान को छोड़कर शेष समस्त गैर-योजना व्यय को पाँच वर्षों की अवधि में वास्तविक अर्थों में (In Real Terms) यथावत् बनाए रखना। इसका अर्थ है कि मौद्रिक
रूप में इसमें वृद्धि को 5 प्रतिशत वार्षिक के स्तर तक सीमित रखना था।

(iv) सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में सकल कर राजस्व (डीज़ल उपकर सहित) को 2001-2002 में 9.16 प्रतिशत से बढ़ाकर 2006-2007 तक 11.7 प्रतिशत करना था। कर राजस्व में वृद्धि को मुख्यतः कराधार में वृद्धि द्वारा ही प्राप्त किया जाना चाहिए।

(v) सेवा कर के दायरे में व्यापक विस्तार।

(vi) विनिवेश (Disinvestment) में वृद्धियाँ। 10वीं योजना के पहले तीन वर्षों में ₹ 16-17 हजार करोड़ की वार्षिक विनिवेश प्राप्तियाँ।

(vii) राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 5 प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत तक लाना था।
यद्यपि इस अवधि में आर्थिक विकास की औसत वार्षिक दर 8 प्रतिशत निर्धारित की गई जिसे बाद में घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया था। निर्धारित विकास दर को प्राप्त करने के लिए दसवीं योजना में निम्नलिखित चार उपायों पर बल दिया गया था

  • ढाँचागत और सामाजिक क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश बढ़ाना।
  • स्रोतों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना।
  • देश में निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करना।
  • गवर्नेस या सुशासन को बेहतर बनाना।

प्रश्न 5.
भारत की ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना (2007-2012) का वर्णन करें।
उत्तर:
भारत की ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के दृष्टिकोण-पत्र को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में 19 अक्तूबर, 2006 को मंजूरी योजना आयोग द्वारा दी गई। दृष्टिकोण-पत्र में आगामी योजना के निर्धारित लक्ष्य निम्नलिखित थे
(1) विकास दर, आय एवं निर्धनता-

  • 9 प्रतिशत वार्षिक विकास दर प्राप्त करना तथा विकास दर को 2011-12 के अन्त तक बढ़ाकर 10 प्रतिशत के स्तर तक लाना था।
  • वर्ष 2016-17 तक प्रति व्यक्ति आय को दोगुना तक लाने के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वार्षिक संवृद्धि दर को 8% से बढ़ाकर 10% करना था तथा इसे 10% से 12% के बीच बनाए रखना था।
  • उच्च विकास दर के लाभों को व्यापक स्तर पर लाने के लिए कृषि जीडीपी की वार्षिक संवृद्धि दर को 4% तक बढ़ाना।
  • रोजगार के 70 मिलियन नए अवसर सृजित करना।
  • शैक्षिक बेरोजगारी को 5% से नीचे लाना।
  • अकुशल श्रमिकों की वास्तविक मजदूरी दर में 20% तक की वृद्धि करना।
  • उपयोग निर्धनता के हेडकाउंट अनुपात में 10 प्रतिशतांक तक की कमी लाना।

(2) शिक्षा-

  • प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर विद्यालय छोड़कर घर बैठ जाने वाले बालकों की दर (ड्रॉप आउट रेट) को वर्ष 2003-04 में 52.2% से घटाकर वर्ष 2011-12 तक 20% के स्तर पर लाना था।
  • प्राथमिक विद्यालयों में शैक्षणिक ज्ञान प्राप्त करने के न्यूनतम मानक स्तरों को प्राप्त करना एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा की प्रभावशीलता के मूल्यांकन हेतु नियमित रूप से जाँच करते रहना।
  • 7 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में साक्षरता दर को बढ़ाकर 85% करना।
  • साक्षरता में लिंग-अंतराल (जेंडर गैप) को 10 प्रतिशतांक तक नीचे लाना।
  • प्रत्येक आयु वर्ग में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालों के अनुपात को वर्तमान में 10 प्रतिशत से बढ़ाकर ग्यारहवीं योजना के अंत तक 15% करना था।

(3) स्वास्थ्य-

  • शिशु मृत्यु दर को घटाकर 28 तथा मातृत्व मृत्यु दर को घटाकर, 30 प्रति दस हज़ार जीवित जन्म के स्तर पर लाना।
  • कुल प्रजनन दर को 2-1 तक नीचे लाना।
  • सन् 2009 तक सभी को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराना तथा ग्यारहवीं योजना के अंत तक यह सुनिश्चित करना था कि इसमें कमी न आए।
  • 0-3 वर्ष आयु वर्ग के बालकों में कुपोषण को वर्तमान के स्तर से आधा करना।
  • महिलाओं एवं लड़कियों में रक्ताल्पता को ग्यारहवीं योजना के अंत तक 50% तक घटाना था।

(4) महिलाएँ एवं बालिकाएँ-

  • 0-6 आयु वर्ग में लिंगानुपात को वर्ष 2011-12 तक बढ़ाकर 935 तथा 2016-17 तक 950 करना था।
  • यह सुनिश्चित करना कि सभी सरकारी योजनाओं के कुल प्रत्यक्ष एवं परोक्ष लाभार्थियों में महिलाओं एवं बालिकाओं का हिस्सा कम-से-कम 33 प्रतिशत हो।
  • यह सुनिश्चित करना कि काम करने की किसी बाध्यता के बिना सभी बच्चे सुरक्षित बाल्यकाल का आनंद उठाते हैं।

(5) आधारिक अवसंरचना-

  • सभी गाँवों एवं निर्धनता रेखा से नीचे के सभी परिवारों में सन् 2009 तक विद्युत् संयोजन सुनिश्चित करना तथा ग्यारहवीं योजना के अंत तक इनमें 24 घंटे विद्युत् आपूर्ति प्रवाहित कराना था।
  • सन् 2009 तक 1000 जनसंख्या वाले सभी गाँवों (पर्वतीय एवं जनजातीय क्षेत्रों में 500 जनसंख्या) तक सभी मौसमों के लिए उपयुक्त पक्की सड़कें सुनिश्चित करना तथा सन् 2015 तक सभी महत्त्वपूर्ण अधिवासों तक पक्की सड़कें बनवाना था।
  • 2007 तक देश के सभी गाँवों तक टेलीफोन पहुँचाना तथा 2012 तक सभी गाँवों में ब्रॉड-बैंड सुविधा मुहैया कराना था।
  • सन् 2012 तक सभी को घर बनाने के लिए भूमि उपलब्ध कराना तथा सन् 2016-17 तक सभी ग्रामीण निर्धनों को आवास मुहैया कराने के लिए आवास निर्माण की गति में तेजी लाना था।

(6) पर्यावरण-

  • वनों एवं पेड़ों के अंतर्गत क्षेत्रफल में 5 प्रतिशतांक की वृद्धि करना।
  • वर्ष 2011-12 तक देश के सभी बड़े शहरों में वायु गुणवत्ता के विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक प्राप्त करना था।
  • नदियों के जल को स्वच्छ बनाने के लिए समस्त शहरी तरल कचरे को उपचारित करना।

योजना आयोग की स्वीकृति के बाद ग्यारहवीं योजना के इस दृष्टिकोण-पत्र को राष्ट्रीय विकास परिषद् द्वारा 9 दिसंबर, 2006 को स्वीकृति प्राप्त हो गई। परिषद् की यह 52वीं बैठक नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई थी। इस 11वीं योजना में कृषि, सिंचाई, जल संसाधनों के विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि क्षेत्रों पर विशेष बल दिया गया था।\

प्रश्न 6.
भारत की बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017) का वर्णन करें।
उत्तर:
भारत की बारहवीं योजना के दृष्टिकोण-पत्र को प्रधानमन्त्री की अध्यक्षता में योजना आयोग द्वारा मंजूरी दी गई। योजना आयोग द्वारा बारहवीं पंचवर्षीय योजना के कार्यकाल में जिन वैकल्पिक लक्ष्यों को पूरा करना था, वे निम्नलिखित थे-

  • घरेलू मामलों का निपटारा करना और महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक दशा सुधारना भी इस योजना का लक्ष्य है।
  • 9.0 फीसदी की विकास दर ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य के साथ है जो हासिल करनी है।
  • बारहवीं पंचवर्षीय योजना के लिए 9.5 फीसदी औसत विकास वृद्धि दर इस योजना का लक्ष्य है।
  • इस योजना के तहत कई स्थूल आर्थिक मॉडल के सन्दर्भ में इन लक्ष्यों को प्राप्त करना है।
  • कृषि क्षेत्र के विकास में एक महत्त्वपूर्ण त्वरण की आवश्यकता है; जैसे बिजली और पानी की आपूर्ति।
  • खनन क्षेत्र में कोयला और प्राकृतिक गैस का अतिरिक्त उत्पादन करना और उपभोक्ताओं की जरूरत को पूरा करना।
  • 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान बेरोजगारी को दूर करना, बढ़ती श्रम शक्ति के लिए रोजगार उपलब्ध कराना, सेवा-क्षेत्रों पर आराम की सुविधा का प्रबन्ध करवाना, 10 फीसदी गरीबी कम करने का इरादा है, 2 फीसदी गरीबी अनुमान सालाना योजना अवधि के दौरान एक स्थायी आधार पर कम करना है।
  • सन् 2017 तक सभी को घर बनाने के लिए भूमि उपलब्ध कराना था तथा सन 2016-17 तक सभी ग्रामीण निर्धनों को आवास मुहैया कराने के लिए आवास-निर्माण की गति में तेजी लाना।

संक्षेप में, यह कहा जा सकता है कि योजना आयोग के द्वारा प्रायः प्रत्येक योजना के संबंध में निम्नलिखित घोषणाएँ की जाती थीं

  • आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देना और राष्ट्रीय आय में वृद्धि लाना।
  • विदेशी पूँजी पर देश की निर्भरता को कम करना तथा देश को आत्मनिर्भर बनाना।
  • सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना-जो लोग गरीबी रेखा से नीचे का जीवन बिता रहे हैं, उनके जीवन-स्तर में सुधार लाना।
  • जनसंख्या की वृद्धि पर रोक लगाना।
  • रोज़गार के अवसरों में वृद्धि तथा बेरोज़गारों को रोजगार दिलाना।

उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति के लिए योजना आयोग देश के भौतिक साधनों और मानवीय संसाधनों (Human Resources) की जाँच करके ऐसी योजनाएँ बनाता है जिससे कि समस्त साधनों का सर्वोत्तम एवं संतुलित उपयोग किया जा सके।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 निर्माण उद्योग

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 निर्माण उद्योग Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 निर्माण उद्योग

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. भारत का पहला सूती वस्त्र उद्योग कब और कहाँ स्थापित किया गया?
(A) दुर्गापुर में, सन् 1845 में
(B) कोलकाता में, सन् 1852 में
(C) मुम्बई में, सन् 1854 में
(D) अहमदाबाद में, सन् 1875 में
उत्तर:
(C) मुम्बई में, सन् 1854 में

2. निम्नलिखित में से उद्योगों का भौगोलिक कारक है
(A) कच्चे माल की प्राप्ति
(B) पूँजी व बैंकिंग
(C) सरकार की नीति
(D) प्रारम्भिक संवेग
उत्तर:
(A) कच्चे माल की प्राप्ति

3. जब उद्योगों का स्वामित्व कुछ व्यक्तियों के हाथ में हो तो वह कहलाता है
(A) सार्वजनिक उद्योग
(B) निजी उद्योग
(C) सहकारी उद्योग
(D) बहुराष्ट्रीय उद्योग
उत्तर:
(B) निजी उद्योग

4. निम्नलिखित में से वन आधारित उद्योग का उदाहरण है-
(A) चीनी
(B) सीमेंट
(C) चमड़ा रंगने का उद्योग
(D) एल्यूमीनियम
उत्तर:
(C) चमड़ा रंगने का उद्योग

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 निर्माण उद्योग

5. निम्नलिखित में से किसे आधारभूत उद्योग कहा जाता है-
(A) चीनी उद्योग को
(B) वस्त्र उद्योग को
(C) लौह-इस्पात उद्योग को
(D) खाद्य उद्योग को
उत्तर:
(C) लौह-इस्पात उद्योग को

6. चीनी उद्योग का प्रमुख उत्पादक राज्य है-
(A) अहमदाबाद
(B) महाराष्ट्र
(C) उत्तर प्रदेश
(D) मिज़ोरम
उत्तर:
(B) महाराष्ट्र

7. गुजरात का प्रमुख सही वस्त्र उत्पादन केन्द्र कौन-सा है?
(A) सूरत
(B) कोटा
(C) अहमदाबाद
(D) वडोदरा
उत्तर:
(C) अहमदाबाद

8. TISCO की स्थापना कब की गई?
(A) सन् 1875 में
(B) सन् 1907 में
(C) सन् 1912 में
(D) सन् 1919 में
उत्तर:
(B) सन् 1907 में

9. जर्मनी के सहयोग से किस लौह-इस्पात कारखाने की स्थापना की गई?
(A) SAIL
(B) VISL
(C) TISCO
(D) IISCO
उत्तर:
(A) SAIL

10. वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र में स्थापित लौह इस्पात उद्योग के विकास की देख-रेख करती है-
(A) TISCO
(B) IISCO
(C) VISL
(D) SAIL
उत्तर:
(D) SAIL

11. सोवियत संघ (वर्तमान रूस) की आर्थिक व तकनीकी सहायता से किस कारखाने की स्थापना हुई?
(A) बोकारो
(B) दुर्गापुर
(C) भिलाई
(D) राउरकेला
उत्तर:
(B) दुर्गापुर

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 निर्माण उद्योग

12. ब्रिटिश पूँजी व तकनीक से किस स्टील प्लांट का विकास हुआ?
(A) बोकारो
(B) दुर्गापुर
(C) भिलाई
(D) राउरकेला
उत्तर:
(B) दुर्गापुर

13. भारत का पहला समुद्र तटीय लौह-इस्पात कारखाना कहाँ लगाया गया था?
(A) रांची में
(B) बंगलौर में
(C) विशाखापट्टनम में
(D) तमिलनाडु में
उत्तर:
(C) विशाखापट्टनम में

14. हीरापुर में लौह-इस्पात संयंत्र की स्थापना कब हुई?
(A) सन् 1908 में
(B) सन् 1913 में
(C) सन् 1923 में
(D) सन् 1927 में
उत्तर:
(A) सन् 1908 में

15. हुगली औद्योगिक प्रदेश में मुख्य उद्योग स्थापित है-
(A) पेट्रो-रसायन उद्योग
(B) चीनी उद्योग
(C) पटसन उद्योग
(D) लौह-इस्पात उद्योग
उत्तर:
(C) पटसन उद्योग

16. भारत में इलेक्ट्रॉनिक उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र है-
(A) मुंबई
(B) बंगलौर
(C) अहमदाबाद
(D) चेन्नई
उत्तर:
(B) बंगलौर

17. भारत का पहला नैप्था आधारित रसायन उद्योग कब और कहाँ स्थापित किया गया?
(A) सन् 1855 में, रिशरा में
(B) सन् 1961 में, मुंबई में
(C) सन् 1875 में, कुल्टी में
(D) सन् 1972 में, बोकारो में
उत्तर:
(B) सन् 1961 में, मुंबई में

18. उत्पादों के उपयोग के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कितने भागों में किया जाता है-
(A) 2
(B) 3
(C) 4
(D) 5
उत्तर:
(C) 4

19. एशिया का सबसे बड़ा उर्वरक का कारखाना है-
(A) बोकारो
(B) सिंद्री
(C) मुंबई
(D) बर्नपुर
उत्तर:
(B) सिंद्री

20. अनुकूल दशाओं के कारण जब एक ही स्थान पर अनेक प्रकार के उद्योग स्थापित हो जाएँ तो वह कहलाता है-
(A) औद्योगिक गुच्छ
(B) बहुसंयंत्र कंपनी
(C) बहुराष्ट्रीय कंपनी
(D) मिश्रित अर्थव्यवस्था
उत्तर:
(A) औद्योगिक गुच्छ

21. नई औद्योगिक नीति की घोषणा कब की गई?
(A) सन् 1951 में
(B) सन् 1975 में
(C) सन् 1985 में
(D) सन् 1991 में
उत्तर:
(D) सन् 1991 में

22. भारत का सबसे पुराना औद्योगिक प्रदेश है-
(A) गुजरात प्रदेश
(B) दिल्ली गुड़गाँव मेरठ प्रदेश
(C) बंगलौर तमिलनाडु प्रदेश
(D) हुगली औद्योगिक प्रदेश
उत्तर:
(D) हुगली औद्योगिक प्रदेश

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 निर्माण उद्योग

23. ऑयल इंडिया लिमिटेड एक है-
(A) निजी उद्योग
(B) सार्वजनिक उद्योग
(C) सहकारी उद्योग
(D) संयुक्त उद्योग
उत्तर:
(B) सार्वजनिक उद्योग

24. लोहा और इस्पात उद्योग है-
(A) सार्वजनिक क्षेत्र उद्योग
(B) भारी उद्योग
(C) सहकारी क्षेत्र उद्योग
(D) निजी क्षेत्र उद्योग
उत्तर:
(B) भारी उद्योग

25. विजाग इस्पात संयंत्र में उत्पादन कब शुरू हुआ?
(A) सन् 1990 में
(B) सन् 1991 में
(C) सन् 1992 में
(D) सन् 1993 में
उत्तर:
(C) सन् 1992 में

26. कौन-सा स्टील संयंत्र भारत में सन् 1965 में जर्मनी के सहयोग से शुरू हुआ था?
(A) बोकारो स्टील संयंत्र
(B) दुर्गापुर स्टील संयंत्र
(C) राउरकेला स्टील संयंत्र
(D) जमशेदपुर टाटा स्टील संयंत्र
उत्तर:
(C) राउरकेला स्टील संयंत्र

27. भिलाई इस्पात संयंत्र किसकी मदद से स्थापित किया गया?
(A) रूस के
(B) जर्मनी के
(C) फ्रांस के
(D) इंग्लैंड के
उत्तर:
(A) रूस के

28. दुर्गापुर लौह-इस्पात संयंत्र किस देश के सहयोग से स्थापित किया गया?
(A) ब्रिटेन
(B) फ्रांस
(C) रूस
(D) जर्मनी
उत्तर:
(A) ब्रिटेन

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29. भारत में चीनी का प्रमुख उत्पादक राज्य कौन-सा है?
(A) महाराष्ट्र
(B) पंजाब
(C) राजस्थान
(D) गोवा
उत्तर:
(A) महाराष्ट्र

30. विनिर्माण उद्योग का उदाहरण है
(A) कागज उद्योग
(B) चीनी उद्योग
(C) कपड़ा उद्योग
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

31. कृषि आधारित उद्योग का उदाहरण है-
(A) सूती वस्त्र उद्योग
(B) पटसन उद्योग
(C) चीनी उद्योग
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

32. निम्नलिखित में से कौन-सी एजेंसी सार्वजनिक क्षेत्र में स्टील को बाज़ार में उपलब्ध कराती है?
(A) हेल (HAIL)
(B) सेल (SAIL)
(C) टाटा स्टील
(D) एम० एन० सी० सी० (MNCC)
उत्तर:
(B) सेल (SAIL)

33. निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग दूरभाष, कंप्यूटर आदि संयंत्र निर्मित करता है?
(A) स्टील
(B) एल्यूमिनियम
(C) इलेक्ट्रोनिक
(D) सूचना प्रौद्योगिकी
उत्तर:
(C) इलेक्ट्रोनिक

34. खनिज आधारित उद्योग का उदाहरण है-
(A) लोहा
(B) इस्पात
(C) सीमेंट
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
कच्चे माल की उपलब्धि पर आधारित एक उद्योग का नाम लिखें।
उत्तर:
कच्चे माल की उपलब्धि पर आधारित उद्योग चीनी उद्योग है।

प्रश्न 2.
शक्ति के उत्पादन पर आधारित एक उद्योग का नाम लिखें।
उत्तर:
विद्युत धातुकर्मी तथा विद्युत रसायन उद्योग।

प्रश्न 3.
बाजार की निकटता पर आधारित एक उद्योग का नाम लिखें।
उत्तर:
बाजार की निकटता पर आधारित उद्योग भारी मशीन उद्योग व पेट्रोलियम परिशोधन शालाएँ हैं।

प्रश्न 4.
तमिलनाडु राज्य का प्रमुख सूती वस्त्र उत्पादन केन्द्र कौन-सा है?
उत्तर:
तमिलनाडु राज्य का प्रमुख सूती वस्त्र उत्पादन केन्द्र कोयंबटूर है।

प्रश्न 5.
भारत में चीनी बनाने का आधुनिक कारखाना कब लगाया गया?
उत्तर:
सन् 1903 में।

प्रश्न 6.
टाटा लौह-इस्पात कंपनी (TISCO) की स्थापना कब की गई?
उत्तर:
सन् 1907 में।

प्रश्न 7.
भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (SAIL) की स्थापना कब की गई?
उत्तर:
सन् 1973 में।

प्रश्न 8.
वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र में स्थापित लौह-इस्पात उद्योग के विकास की देख-रेख कौन-सी संस्था करती है?
उत्तर:
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL)।

प्रश्न 9.
भारत के कोई दो औद्योगिक प्रदेश बताएँ।
उत्तर:
तमिलनाडु और गुजरात।

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प्रश्न 10.
ब्रिटिश पूँजी व तकनीक से किस स्टील प्लांट (इस्पात संयंत्र) का विकास हुआ?
उत्तर:
दुर्गापुर इस्पात संयंत्र।

प्रश्न 11.
भारत में किस उद्योग में सबसे अधिक लोग कार्यरत हैं?
उत्तर:
कपड़ा उद्योग में।

प्रश्न 12.
भारत का पहला समुद्र तटीय लौह-इस्पात कारखाना कहाँ लगाया गया था?
उत्तर:
विशाखापट्टनम में।

प्रश्न 13.
हीरापुर में लौह-इस्पात संयंत्र की स्थापना कब हुई?
उत्तर:
सन् 1908 में।

प्रश्न 14.
भिलाई स्टील कारखाना किस राज्य में स्थित है?
उत्तर:
भिलाई स्टील कारखाना छत्तीसगढ़ में स्थित है।

प्रश्न 15.
ज्ञान आधारित उद्योग का कोई एक उदाहरण दें।
उत्तर:
कंप्यूटर सॉफ्टवेयर।

प्रश्न 16.
किस उद्योग को आधारभूत उद्योग कहते हैं?
उत्तर:
लौह-इस्पात को आधारभूत उद्योग कहते हैं।

प्रश्न 17.
नई औद्योगिक नीति की घोषणा कब की गई?
उत्तर:
सन् 1991 में।

प्रश्न 18.
हिंदुस्तान मशीन टूल्स (HMT) किस औद्योगिक प्रदेश के अंतर्गत आता है?
उत्तर:
बंगलौर-तमिलनाडु।

प्रश्न 19.
भारत का सबसे पहला बड़ा गैर-सरकारी लौह-इस्पात उद्योग कौन-सा था?
उत्तर:
टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (सांकची), जमशेदपुर।

प्रश्न 20.
छोटा नागपुर औद्योगिक प्रदेश के अंतर्गत आने वाले किन्हीं दो औद्योगिक केंद्रों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. रांची
  2. हजारीबाग।

प्रश्न 21.
हुगली औद्योगिक प्रदेश के अंतर्गत आने वाले किन्हीं दो औद्योगिक केंद्रों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. हल्दिया
  2. कोलकाता।

प्रश्न 22.
भारत का सबसे बड़ा तेल शोधक कारखाना कहाँ स्थित है?
उत्तर:
जामनगर (गुजरात) में।

प्रश्न 23.
विजयनगर इस्पात संयंत्र कहाँ विकसित किया गया?
उत्तर:
हॉस्पेट (कर्नाटक) में।

प्रश्न 24.
भारत के कोई दो मुख्य औद्योगिक प्रदेशों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. हगली औद्योगिक प्रदेश
  2. मंबई-पणे औद्योगिक प्रदेश।

प्रश्न 25.
भारत के कोई दो लघु औद्योगिक प्रदेशों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. दुर्ग-रायपुर औद्योगिक प्रदेश
  2. अंबाला-अमृतसर औद्योगिक प्रदेश।

प्रश्न 26.
भारत की पहली जूट मिल की स्थापना कब और कहाँ की गई?
उत्तर:
सन् 1855 में रिशरा में।

प्रश्न 27.
सेलम इस्पात संयंत्र कहाँ स्थित है?
उत्तर:
तमिलनाडु में।

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प्रश्न 28.
भारत का सबसे बड़ा उद्योग कौन-सा है?
उत्तर:
कपड़ा उद्योग।

प्रश्न 29.
हरियाणा में चीनी मिलों के कोई दो केंद्र बताएँ।
उत्तर:

  1. यमुनानगर
  2. +रोहतक।

प्रश्न 30.
भारत की पहली आधुनिक सूती मिल कब और कहाँ स्थापित की गई?
उत्तर:
सन् 1854 में मुंबई में।

प्रश्न 31.
झारखण्ड राज्य के एक लौह-इस्पात उत्पादन केंद्र का नाम लिखें।
उत्तर:
बोकारो।

प्रश्न 32.
आंध्र प्रदेश राज्य के एक लौह-इस्पात उत्पादन केंद्र का नाम लिखें।
उत्तर:
विशाखापट्टनम।

प्रश्न 33.
कर्नाटक राज्य का प्रमुख लौह-इस्पात केंद्र कहाँ है?
उत्तर:
भद्रावती में।

प्रश्न 34.
छत्तीसगढ़ राज्य के एक लौह-इस्पात उत्पादन केंद्र का नाम लिखें।
उत्तर:
भिलाई।

प्रश्न 35.
चीनी उद्योग में प्रयुक्त कच्चे पदार्थ का नाम लिखें।
उत्तर:
गन्ना।

प्रश्न 36.
भारत की इलेक्ट्रोनिक राजधानी के रूप में किस शहर को जाना जाता है?
उत्तर:
बंगलुरु को।

प्रश्न 37.
भारत में सूती वस्त्र बनाने का पहला कारखाना कब और कहाँ लगा था?
उत्तर:
सन् 1854 में मुंबई में।

प्रश्न 38.
भारतीय लोहा और इस्पात कंपनी ने अपना पहला कारखाना कहाँ स्थापित किया?
उत्तर:
हीरापुर में।

प्रश्न 39.
विश्वेश्वरैया आयरन एंड स्टील वर्क्स प्रारंभ में किस नाम से जाना जाता था?
उत्तर:
मैसूर लोहा और इस्पात वर्क्स के नाम से।

प्रश्न 40.
दुर्गापुर इस्पात संयंत्र किस देश की सरकार के सहयोग से स्थापित किया गया था?
उत्तर:
यूनाइटेड किंगडम की सरकार के सहयोग से।

प्रश्न 41.
दुर्गापुर इस्पात संयंत्र (पश्चिमी बंगाल) में उत्पादन कब आरंभ हुआ?
उत्तर:
सन् 1962 में।

प्रश्न 42.
भारत का पहला पत्तन आधारित इस्पात संयंत्र कौन-सा है?
उत्तर:
विजाग इस्पात संयंत्र (विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश)।

प्रश्न 43.
विजाग इस्पात संयंत्र किस राज्य में स्थित है?
उत्तर:
विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश में।

प्रश्न 44.
विजयनगर इस्पात संयंत्र की स्थापना किस पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत की गई?
उत्तर:
चौथी पंचवर्षीय योजना के।

प्रश्न 45.
राउरकेला इस्पात संयंत्र की स्थापना किस पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत की गई?
उत्तर:
दूसरी पंचवर्षीय योजना के।

प्रश्न 46.
हिंदुस्तान स्टील लिमिटेड, दुर्गापुर की स्थापना कब की गई?
उत्तर:
सन् 1956 में।

प्रश्न 47.
भारत के किस राज्य में सर्वाधिक चीनी मिलें स्थापित हैं?
उत्तर:
उत्तर प्रदेश में।

प्रश्न 48.
निम्नलिखित का पूरा नाम लिखें SAIL, TISCO, HSL, FDI, IISCO, VISW, NOCIL, CIPET, BHEL
उत्तर:

  1. SAIL : Steel Authority of India Limited
  2. TISCO : Tata Iron and Steel Company
  3. HSL : Hindustan Steel Limited
  4. FDI : Foreign Direct Investment
  5. IISCO : Indian Iron Steel Company
  6. VISW : Visvesvaraya Iron and Steel Works
  7. NOCIL : National Organic Chemical Industries Limited
  8. CIPET : Central Institute of Plastics Engineering & Technology
  9. BHEL : Bharat Heavy Electricals Limited

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कच्चे माल के आधार पर वर्गीकृत उद्योगों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. कृषि आधारित उद्योग
  2. वन आधारित उद्योग
  3. खनिज आधारित उद्योग एवं
  4. चरागाह आधारित उद्योग।

प्रश्न 2.
उद्यमशीलता अथवा स्वामित्व के आधार पर वर्गीकृत उद्योगों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. सार्वजनिक उद्योग
  2. निजी उद्योग
  3. सहकारी उद्योग एवं
  4. बहुराष्ट्रीय उद्योग।

प्रश्न 3.
वन आधारित उद्योगों के उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
कागज़, गत्ता, चमड़ा रंगने का उद्योग, लाख, बीड़ी, रेजिन व टोकरी उद्योग।

प्रश्न 4.
स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद अपनाई गई पहली औद्योगिक नीति में किन उद्देश्यों पर बल दिया गया था?
उत्तर:
सन 1948 में अपनाई गई इस औद्योगिक नीति में रोजगार जनन, उच्चतर उत्पादकता तथा आर्थिक विकास में क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना जैसे उद्देश्यों पर बल दिया गया था।

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प्रश्न 5.
वर्तमान में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) के अंतर्गत कौन-कौन से इस्पात संयंत्र सम्मिलित हैं?
उत्तर:

  1. भिलाई
  2. दुर्गापुर
  3. राउरकेला
  4. बोकारो
  5. सेलम
  6. TISCO
  7. विश्वेश्वरैया तथा
  8. महाराष्ट्र इलेक्ट्रोस्मेल्ट आदि इस्पात संयंत्र SAIL के अंतर्गत सम्मिलित हैं।

प्रश्न 6.
पेट्रो-रसायन उद्योग कौन-सा कच्चा माल उपयोग में लाते हैं?
उत्तर:
पेट्रो-रसायन उद्योग खनिज तेल और प्राकृतिक गैस को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं।

प्रश्न 7.
भारत में सूती वस्त्र उद्योग की अवस्थिति के कारकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भारत में सूती वस्त्र उद्योग की अवस्थिति के कारण निम्नलिखित हैं-

  1. कच्चे माल की प्राप्ति
  2. यांत्रिक उपकरण या मशीनें
  3. ऊर्जा या शक्ति
  4. बाजार स्थिति
  5. श्रमिक
  6. परिवहन आदि।

प्रश्न 8.
आधारभूत उद्योग क्या है? उदाहरण दें।
उत्तर:
वे उद्योग जिनसे निर्मित माल दूसरे सभी उद्योगों का आधार होता है, उन्हें आधारभूत उद्योग कहते हैं।
उदाहरण – लोहा तथा इस्पात उद्योग एक आधारभूत उद्योग है, क्योंकि अन्य सभी भारी, हल्के और मध्यम उद्योग इनसे बनी मशीनरी पर निर्भर हैं। विविध प्रकार के इंजीनियरिंग सामान, निर्माण सामग्री, रक्षा, चिकित्सा, टेलिफोन, वैज्ञानिक उपकरण और विभिन्न प्रकार की उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माण के लिए इस्पात की जरूरत होती है।

प्रश्न 9.
बड़े पैमाने के उद्योग किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
जिन उद्योगों में बहुत बड़ी संख्या में श्रमिकों को रोजगार मिला होता है उन्हें बड़े पैमाने के उद्योग कहते हैं; जैसे सूती वस्त्र उद्योग।

प्रश्न 10.
छोटे पैमाने के उद्योग किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
वे उद्योग जो व्यक्ति विशेष के स्वामित्व एवं संचालन में छोटी संख्या में श्रमिकों की सहायता से चलाए जाते हैं, उन्हें छोटे पैमाने के उद्योग कहते हैं; जैसे गुड़ और खांडसारी उद्योग।

प्रश्न 11.
भारी उद्योग किसे कहते हैं?
उत्तर:
ऐसे उद्योग जिनका कच्चा और तैयार माल भारी और अधिक परिमाणु वाला होता है, उन्हें भारी उद्योग कहते हैं।

प्रश्न 12.
कृषि आधारित उद्योग किसे कहते हैं?
उत्तर:
जो उद्योग अपने उत्पादन के लिए पूर्ण रूप से कृषि उत्पादों से प्राप्त कच्चे माल पर निर्भर होते हैं, उन्हें कृषि आधारित उद्योग कहते हैं; जैसे वस्त्र उद्योग, चीनी उद्योग और वनस्पति तेल उद्योग।

प्रश्न 13.
भारत में रूस के सहयोग से स्थापित दो लोहा इस्पात कारखानों के नाम बताइए।
उत्तर:
भिलाई स्टील प्लांट, छत्तीसगढ़, बोकारो स्टील प्लांट, झारखंड।

प्रश्न 14.
भारत में जर्मनी तथा ब्रिटेन के सहयोग से स्थापित एक-एक लोहा इस्पात उद्योग का नाम बताइए।
उत्तर:

  1. जर्मनी के सहयोग से राउरकेला स्टील प्लांट, ओडिशा।
  2. ब्रिटेन के सहयोग से दुर्गापुर स्टील प्लांट, पश्चिम बंगाल।

प्रश्न 15.
उद्योग किन चार प्रकार के प्रदूषण के लिए उत्तरदायी हैं?
उत्तर:
वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, भूमि प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण।

प्रश्न 16.
खनिज आधारित उद्योग किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
वे उद्योग जो खनिज पदार्थों को अपने कच्चे माल के रूप में प्रयोग करते हैं, उन्हें खनिज आधारित उद्योग कहते है . जैसे लोहा एवं इस्पात, सीमेंट, एल्यूमिनियम उद्योग इत्यादि।

प्रश्न 17.
महाराष्ट्र के चार महत्त्वपूर्ण सूती वस्त्र उद्योग केन्द्रों के नाम बताइए।
उत्तर:
मुम्बई, पूणे, सतारा व कोल्हापुर।

प्रश्न 18.
सार्वजनिक क्षेत्र के दो उपक्रमों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (BHEL)
  2. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL)।

प्रश्न 19.
भारत में इलेक्ट्रॉनिक सामान के तीन उत्पादक केन्द्रों के नाम बताइए।
उत्तर:
मुम्बई, बंगलुरु व हैदराबाद।

प्रश्न 20.
उद्योगों का वर्गीकरण, निर्मित उत्पादकों की प्रकृति के आधार पर कीजिए।
उत्तर:
उद्योगों के इस वर्गीकरण में 8 प्रकार के उद्योग हैं-

  1. धातुकर्म उद्योग
  2. यांत्रिक इंजीनियरी उद्योग
  3. रासायनिक और संबंद्ध उद्योग
  4. वस्त्र उद्योग
  5. खाद्य संसाधन उद्योग
  6. विद्युत उत्पादन उद्योग
  7. इलेक्ट्रॉनिक
  8. संचार उद्योग।

प्रश्न 21.
ज्ञान आधारित उद्योग का क्या अर्थ है?
उत्तर:
ऐसे उद्योग जिनके लिए उच्च-स्तरीय विशिष्ट ज्ञान, उच्च प्रौद्योगिकी तथा निरंतर शोध अनुसंधान और सुधार की आवश्यकता रहती है, ज्ञान आधारित उद्योग कहलाते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी ज्ञान आधारित उद्योग का एक उदाहरण है। भारतीय सॉफ्टवेयर उद्योग भी ज्ञान आधारित उद्योग है, जो अर्थव्यवस्था में सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्र के रूप में उभरा है।

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प्रश्न 22.
औद्योगिक जड़त्व क्या है?
उत्तर:
किसी उद्योग की उस स्थान पर अपनी क्रिया बनाए रखने की प्रवृत्ति, जहाँ पर उसके स्थापित होने के कारण महत्त्वहीन हैं या समाप्त हो चुके हैं, औद्योगिक जड़त्व कहलाता है।

प्रश्न 23.
वैश्वीकरण की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
वैश्वीकरण का अर्थ देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत करना है; जैसे विदेशी कम्पनियों को ऐसी सुविधाएँ देना कि वे भारत के विभिन्न आर्थिक क्रियाकलापों में निवेश कर सकें। उदार आयात कार्यक्रम को लागू करना निर्माण उद्योग

तथा भारतीय कम्पनियों का विदेशी कम्पनियों को सहयोग देने की अनुमति देना तथा बाहर के मुल्कों में संयुक्त उद्यम लगाने के लिए प्रोत्साहित करना।

प्रश्न 24.
आजादी से पहले भारत के औद्योगिक विकास के दो लक्षण बताइए।
उत्तर:

  1. आजादी से पूर्व भारत का औद्योगिक विकास बहुत धीमा था।
  2. भारतीय उद्योग केवल ब्रिटिश उद्योगों के उत्पादों की कमी को पूरा करने वाले थे।

प्रश्न 25.
आजादी के बाद भारत के औद्योगिक विकास के दो लक्षण बताइए।
उत्तर:

  1. औद्योगिक आधार का व्यापक विविधिकरण किया गया।
  2. सार्वजनिक क्षेत्र का विकास किया गया।

प्रश्न 26.
औद्योगिक समूहन की पहचान के लिए उपयोग में लाए गए चार सूचकों के नाम बताइए।
उत्तर:
उद्योगों के समूहन की पहचान के लिए प्रमुख चार सूचक निम्नलिखित हैं-

  1. औद्योगिक इकाइयों की संख्या
  2. औद्योगिक कामगारों की संख्या
  3. औद्योगिक उद्देश्यों के लिए प्रयुक्त ऊर्जा की मात्रा
  4. कुल औद्योगिक उत्पादन।

प्रश्न 27.
राउरकेला इस्पात संयंत्र कब, कहाँ और किस देश के सहयोग से स्थापित किया गया था?
उत्तर:
राउरकेला इस्पात संयंत्र (स्टील प्लांट) सन् 1959 में ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में जर्मनी के सहयोग से स्थापित किया गया था।

प्रश्न 28.
द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-57) के अंतर्गत कौन-से तीन इस्पात संयंत्र विदेशी सहयोग से स्थापित किए गए थे?
उत्तर:

  1. राउरकेला इस्पात संयंत्र-ओडिशा
  2. भिलाई इस्पात संयंत्र-छत्तीसगढ़
  3. दुर्गापुर इस्पात संयंत्र-पश्चिम बंगाल।

प्रश्न 29.
भिलाई इस्पात संयंत्र कब, कहाँ और किस देश के सहयोग से स्थापित किया गया था?
उत्तर:
भिलाई इस्पात संयंत्र सन् 1959 में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में रूस के सहयोग से स्थापित किया गया था।

प्रश्न 30.
भारत के कोई चार सूती वस्त्र केंद्रों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. मैसूर सूती वस्त्र केंद्र-कर्नाटक
  2. मुंबई सूती वस्त्र केंद्र महाराष्ट्र
  3. अहमदाबाद सूती वस्त्र केंद्र-गुजरात
  4. हुगली सूती वस्त्र केंद्र-पश्चिम बंगाल

प्रश्न 31.
भारत के किन्हीं छः औद्योगिक जिलों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. आगरा – उत्तर प्रदेश
  2. भोपाल – मध्य प्रदेश
  3. कानपुर – उत्तर प्रदेश
  4. नागपुर – महाराष्ट्र
  5. कोटा – राजस्थान
  6. ग्वालियर – मध्य प्रदेश

प्रश्न 32.
औद्योगिक गुच्छ क्या है?
उत्तर:
अनुकूल दशाओं के कारण जब एक ही स्थान पर अनेक प्रकार के उद्योग स्थापित हो जाएँ तो उसे ‘औद्योगिक गुच्छ’ कहा जाता है।

प्रश्न 33.
सूती वस्त्र उद्योग मुम्बई से अहमदाबाद की ओर क्यों बढ़ रहा है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मुम्बई की अपेक्षा अहमदाबाद में जमीन सस्ती है। इसके अतिरिक्त सूती वस्त्र उद्योग के विकास के लिए आवश्यक सभी कारक मुम्बई की तरह अहमदाबाद में भी उपलब्ध हैं। अहमदाबाद में मुम्बई की तरह औद्योगिक झगड़े व तालाबन्दी जैसी समस्याएँ भी नहीं हैं। गुजरात का औद्योगिक माहौल भी श्रेष्ठ है। इन कारणों से सूती वस्त्र उद्योग मुम्बई से अहमदाबाद की ओर बढ़ रहा है।

प्रश्न 34.
औद्योगिक क्रांति क्या है?
उत्तर:
यूरोपीय इतिहास में सन् 1750 से आधुनिक समय तक का काल जिसमें महत्त्वपूर्ण आविष्कारों के परिणामस्वरूप अधिकाधिक औद्योगिक विकास हुआ है।

प्रश्न 35.
चीनी उद्योग एक मौसमी उद्योग क्यों है?
उत्तर:
भारत में चीनी की मिलें गन्ने की कटाई के बाद केवल 4-5 महीने अर्थात् नवंबर से अप्रैल तक चलती हैं। वर्ष के बाकी 7-8 महीने से मिलें बंद रहती हैं। इसलिए चीनी उद्योग को मौसमी उद्योग कहा जाता है।

प्रश्न 36.
भारत का चीनी उद्योग उत्तर से दक्षिण की ओर क्यों स्थानान्तरित हो रहा है?
उत्तर:
प्रायद्वीपीय भारत का गन्ना मोटा और उसमें रस अधिक होता है। उपजाऊ काली मिट्टी के कारण वहाँ गन्ने की प्रति हैक्टेयर उपज भी अधिक है। आर्द्र जलवायु के कारण वहाँ गन्ने की पिराई की अवधि भी लम्बी है। इन्हीं बेहतर दशाओं का लाभ उठाने के लिए चीनी उद्योग दक्षिण की ओर स्थानान्तरित हो रहा है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 निर्माण उद्योग

प्रश्न 37.
किस नगर को “तमिलनाडु का मानचेस्टर” कहते हैं?
उत्तर:
भारत में सबसे अधिक सूती कपड़े की मीलें तमिलनाडु में है, परंतु ये मीलें छोटी हैं। अतः यहाँ कुल उत्पादन भी कम है। कोयंबटूर में सबसे बड़ा सूती वस्त्र उद्योग का केंद्र है। यहाँ तमिलनाडु की आधे से ज्यादा मीलें लगी हुई हैं। इसी कारण कोयंबटूर को तमिलनाडु का मानचेस्टर कहा जाता है।

प्रश्न 38.
औद्योगिक क्षेत्र या प्रदेश किसे कहते हैं?
उत्तर:
जिस प्रदेश में आर्थिक, सामाजिक, भौगोलिक तथा राजनैतिक कारणों से एक से अधिक श्रृंखलाबद्ध उद्योग स्थापित हो जाते हैं, उसे औद्योगिक प्रदेश कहते हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
हुगली औद्योगिक प्रदेश की किन्हीं तीन विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हगली औद्योगिक प्रदेश की तीन विशेषताएँ हैं-

  1. यह देश का सबसे पुराना और दूसरा सबसे बड़ा औद्योगिक प्रदेश है। कोलकाता और हावड़ा इस प्रदेश के हृदय स्थल हैं और हुगली नदी इसकी रीढ़ की हड्डी है
  2. सघन जनसंख्या के कारण देश के इस भाग में निर्मित वस्तुओं की माँग अधिक रहती है
  3. इस क्षेत्र में औद्योगिक विकास के लिए आरंभिक लाभ प्राप्त हैं। इससे एक पर्यावरण बन जाता है जो उद्योगों की स्थापना को आकर्षित करता है।

प्रश्न 2.
स्वामित्व के आधार पर भारत में कितने प्रकार के उद्योग हैं?
उत्तर:
स्वामित्व के आधार पर भारत में तीन प्रकार के उद्योग पाए जाते हैं जो निम्नलिखित हैं-

  1. सार्वजनिक उद्योग-इन उद्योगों का संचालन सरकार करती है; जैसे भिलाई लौह-इस्पात केंद्र, नंगल उर्वरक कारखाना, टेलीफोन उद्योग आदि।
  2. निजी उद्योग-ये उद्योग व्यक्ति-विशेष चलाते हैं; जैसे टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी।
  3. सहकारी उद्योग-इन उद्योगों का संचालन कुछ व्यक्ति किसी सहकारी समिति के सहयोग से करते हैं; जैसे भारतीय चीनी उद्योग।

प्रश्न 3.
भारी उद्योग तथा हल्के उद्योग में अंतर बताइए।
उत्तर:
भारी उद्योग तथा हल्के उद्योग में निम्नलिखित अंतर हैं-

भारी उद्योगहल्के उद्योग
1. ये प्रायः खनिज संसाधनों पर आधारित हैं।1. ये उद्योग खनिज़ संसाधनों तथा कृषि पर आधारित होते हैं।
2. इनमें बड़े पैमाने पर मशीनें तथा यंत्र बनाए जाते हैं।2. इनमें प्रायः दैनिक प्रयोग की वस्तुओं का निर्माण होता है।
3. इन उद्योगों में अधिक पूँजी की आवश्यकता पड़ती है।3. इन उद्योगों में कम पूँजी से कार्य आरंभ किया जा सकता है।
4. ये उद्योग प्रायः विकसित देशों में स्थापित किए जाते हैं।4. ये उद्योग विकासशील देशों में स्थापित होते हैं।
5. ये बड़े वर्ग के उद्योग हैं।5. ये मध्यम तथा छोटे वर्ग के उद्योग हैं।

प्रश्न 4.
निजी उद्योग तथा सार्वजनिक उद्योग में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
निजी उद्योग तथा सार्वजनिक उद्योग में निम्नलिखित अंतर हैं-

निज़ी उद्योगसार्वजनिक उद्योग
1. इस वर्ग में उपभोग्य वस्तुओं तथा छोटे यंत्रों के उद्योग आते हैं।1. इनमें भारी तथा आधारभूत उद्योग शामिल हैं।
2. ऐसे उद्योग में सारी पूँजी, लाभ तथा हानि एक ही व्यक्ति की होती है।2. इन उद्योगों में सारी पूँजी, लाभ तथा हानि सरकार की होती है।
3. ऐसे उद्योग अधिकतर संयुक्त राज्य अमेरिका तथा जापान में प्रचलित हैं।3. ये उद्योग समाजवादी देशों; जैसे रूस तथा भारत में प्रचलित हैं।

प्रश्न 5.
उपभोक्ता तथा उत्पादक वस्तुओं के उद्योग में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
उपभोक्ता तथा उत्पादक वस्तुओं के उद्योग में निम्नलिखित अंतर हैं-

उपभोक्ता वस्तु उदोगउत्पादक वस्तु उधोग
1. ये उद्योग मुख्य रूप से कृषि पर आधारित हैं।1. ये उद्योग खनिज पदार्थों पर आधारित हैं।
2. इनमें उन वस्तुओं का निर्माण किया जाता है जिनका. प्रयोग प्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ता करते हैं।2. इनमें मुख्य रूप से मशीनों का निर्माण किया जाता है।
3. इन उद्योगों में कम पूँजी की आवश्यकता पड़ती है।3. इन उद्योगों में अधिक पूँजी आवश्यक है।
4. इन उद्योगों में अधिक श्रमिकों की आवश्यकता है।4. इन उद्योगों में आधुनिक प्रौद्योगिकी की आवश्यकता है।
5. ये छोटे पैमाने के उद्योग हैं।5. ये बड़े पैमाने के उद्योग हैं।

प्रश्न 6.
भारी तथा कृषि उद्योगों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारी तथा कृषि उद्योगों में निम्नलिखित अंतर हैं-

भारी उद्योगकृषि उद्योग
1. ये गौण उद्योग होते हैं।1. ये प्राथमिक उद्योग होते हैं।
2. ये प्रायः खनिज संसाधनों पर आधारित हैं तथा इनमें बड़े पैमाने पर मशीनें एवं यंत्र बनाए जाते हैं।2. ये उद्योग कृषि पदार्थों पर आधारित हैं जिनमें कृषि की उपजों का रूप तथा रंग बदलकर उपयोगिता लाई जाती है।
3. इन उद्योगों में अधिक पूँजी की जरूरत पड़ती है।3. इन उद्योगों में अधिक श्रम की जरूरत पड़ती है।
4. ये उद्योग अधिकतर विकसित देशों में पाए जाते हैं।4. ये उद्योग अधिकतर विकासशील देशों में पाए जाते हैं।
5. ये बड़े वर्ग के उद्योग होते हैं।5. ये छोटे तथा मध्यम वर्ग के उद्योग होते हैं।

प्रश्न 7.
मुंबई में सूती वस्त्र उद्योग की उन्नति के क्या कारण हैं?
अथवा
मुंबई में सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण के मुख्य भौगोलिक कारण क्या हैं?
उत्तर:
मुंबई शहर में सूती वस्त्र उद्योग की उन्नति के निम्नलिखित कारण हैं-

  1. यहाँ की जलवायु आर्द्र है जिस कारण धागा बार-बार नहीं टूटता।
  2. यह एक महत्त्वपूर्ण बंदरगाह है तथा बाहर से मशीनें आदि आसानी से मंगवाई जा सकती हैं।
  3. पश्चिमी घाट पर तैयार पनबिजली से सस्ती शक्ति इन उद्योगों को मिल जाती है।
  4. मुंबई की पृष्ठ-भूमि काली मिट्टी की बनी हुई है, अतः यहाँ बहुत कपास उगती है।
  5. मुंबई के आस-पास के क्षेत्रों में सस्ते तथा कुशल मज़दूर मिल जाते हैं। यहाँ कपड़ों की धुलाई तथा रंगाई की सुविधाएँ प्राप्त हैं।

अतः उपर्युक्त कारणों से यहाँ सूती वस्त्र उद्योग बहुत उन्नत है।

प्रश्न 8.
क्या कारण है कि चीनी उद्योग की दक्षिणी भारत की ओर स्थानांतरण की प्रवृत्ति पाई जाती है?
उत्तर:
पहले, उत्तर प्रदेश तथा बिहार राज्यों में देश की 90% चीनी तैयार की जाती थी, किंतु अब ये प्रदेश 60% से 65 % ही चीनी पैदा करते हैं। पिछले 30 वर्षों से चीनी उद्योगों की दक्षिण की ओर स्थानांतरण की प्रवृत्ति पाई गई है। इसके निम्नलिखित कारण हैं-

  • गर्म जलवायु के कारण दक्षिण भारत के गन्ने में चीनी का अंश अधिक मिलता है, जिससे चीनी निर्माण में कम लागत आती है।
  • दक्षिण भारत में गन्ना पेरने का मौसम उत्तर भारत से अधिक लंबा होता है, यहाँ यह 8 मास तक पेरा जा सकता है, जबकि उत्तर भारत में यह अवधि केवल 4 मास तक है।
  • दक्षिण भारत में अधिकांश मिलें नई हैं, जिसके कारण उत्पादकता अधिक है। ये मिलें सहकारी क्षेत्र में हैं, इसलिए इनका संचालन ठीक ढंग से किया जाता है।

प्रश्न 9.
छोटा नागपुर पठार के एक औद्योगिक संकुल के रूप में उभरने के क्या कारण हैं?
उत्तर:
छोटा नागपुर का पठार भारत का एक महत्त्वपूर्ण औद्योगिक प्रदेश है। इस क्षेत्र को ‘भारत का रूर’ कहा जाता है। इस प्रदेश की औद्योगिक उन्नति के निम्नलिखित कारण हैं

  • झरिया, रानीगंज, बोकारो तथा गिरडीह आदि क्षेत्रों से कोयला प्राप्त होता है जोकि यहाँ औद्योगिक शक्ति का मुख्य आधार है
    बिहार और उड़ीसा की खदानों से उत्तम कोटि का लोहा प्राप्त होता है
  • छोटा नागपुर के पठार से भारी मात्रा में बांस प्राप्त होता है, जोकि यहाँ कागज के उद्योग के लिए कच्चा माल है
  • इस क्षेत्र में रेल-मार्गों की सुविधाएँ प्राप्त हैं जो कि इसे कोलकाता बंदरगाह से जोड़ती हैं
  • इस क्षेत्र को सरकारी प्रोत्साहन की भी सुविधा प्राप्त है। इस कारण यह क्षेत्र बहुत उन्नत है।

प्रश्न 10.
सूती वस्त्र उत्पादन उद्योग मुंबई प्रदेश से अहमदाबाद की ओर बढ़ रहे हैं, क्यों?
अथवा
वस्त्रोत्पादन उद्योग मंबई प्रदेश से अहमदाबाद की ओर क्यों बढ़ रहा है? उपयुक्त उदाहरणों सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
भारत में सूती वस्त्र उद्योग सबसे पहले बंबई (मुंबई) में स्थापित हुआ, क्योंकि यहाँ पर्याप्त मात्रा में पूँजी तथा विदेशों से आधुनिक मशीनरी मंगवाने की सुविधाएँ उपलब्ध थीं, परंतु कपास पंजाब, मध्य प्रदेश तथा गुजरात राज्यों से मंगवाई जाती थी। श्रमिकों की मज़दूरी बढ़ने तथा हड़तालों के कारण सूती वस्त्र उद्योग मुंबई से अहमदाबाद की ओर बढ़ा। इसके निम्नलिखित कारण हैं

  • अहमदाबाद में कपास की पर्याप्त उपलब्धता
  • पर्याप्त मात्रा में पूँजी का होना
  • कारखानों के लिए खुले स्थानों की उपलब्धता।

प्रश्न 11.
कच्चे माल पर आधारित उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
कच्चे माल पर आधारित उद्योगों को निम्नलिखित वर्गों में बांटा जा सकता है-

  1. कृषि पर आधारित उद्योग-सूती वस्त्र, चीनी उद्योग
  2. खनिज पर आधारित उद्योग-लौह-अयस्क, सीमेंट उद्योग
  3. वन पर आधारित उद्योग-कागज, लाख उद्योग
  4. चरागाह पर आधारित उद्योग-खाल, हड्डी, सींग उद्योग।

प्रश्न 12.
भारत के औद्योगिक विकास पर उदारीकरण के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में नई औद्योगिक नीति की घोषणा सन् 1991 में की गई थी। इस नीति की तीन प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  • उदारीकरण
  • निजीकरण
  • वैश्वीकरण।

उदारीकरण की नीति से भारत के औद्योगिक विकास पर अनुकूल प्रभाव पड़ा। इस प्रक्रिया से औद्योगिक विकास में तेजी आई। सुरक्षा, सामरिक और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील केवल छः उद्योगों को छोड़कर अन्य सभी वस्तुओं के लिए लाइसेंस निर्माण उद्योग की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सरकारी शेयरों में से कुछ भाग वित्तीय संस्थाओं तथा

आम लोगों को देने के फैसले से सरकार का नियंत्रण और निष्क्रियता कम हुई है। इसके साथ काम की क्षमता और निष्पादन बढ़े हैं। लाइसेंस मुक्त किसी भी उद्योग में निवेश के लिए सरकार से पूर्व अनुमति न लेने से उद्योगों के विकेंद्रीकरण को बढ़ावा मिला है। इससे दुर्गम और अविकसित क्षेत्रों में भी उद्योग लगने लगे हैं।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 निर्माण उद्योग

प्रश्न 13.
शुद्ध कच्चे पदार्थ तथा कुल कच्चे पदार्थ में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
शुद्ध कच्चे पदार्थ तथा कुल कच्चे पदार्थ में निम्नलिखित अंतर हैं-

शुद्ध कच्चे पदार्थकुल कच्चे पदार्थ
1. पृथ्वी से वास्तविक रूप से उपलब्ध तथा खनन किए गए पदार्थों को शुद्ध कच्चे पदार्थ कहते हैं।1. पृथ्वी में कुल उपस्थित प्राकृतिक संसाधनों को कुल कच्चे पदार्थ कहते हैं।
2. इनकी मात्रा निश्चित होती है।2. इनकी मात्रा अनिश्चित होती है।
3. इनका प्रयोग वर्तमान काल में विभिन्न उद्योगों में होता है।3. इनका उपयोग भविष्य में संभव है।
4. इनमें अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होती है।4. इनमें वैज्ञानिक अनुसंधानों की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 14.
नई औद्योगिक नीति के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं?
उत्तर:
नई औद्योगिक नीति के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

  1. उद्योगों की कमियों और विकृतियों को सुधारना।
  2. उत्पादन वृद्धि की निरंतरता को बनाए रखना।
  3. रोजगार के ज्यादा-से-ज्यादा अवसर पैदा करना।
  4. उत्पादन को विश्व बाजार की प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना।
  5. उद्योगों से मिलने वाले लाभों को बनाए रखना।

प्रश्न 15.
चीनी उद्योग की मुख्य समस्याओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
चीनी उद्योग की मुख्य समस्याएँ निम्नलिखित हैं-

  1. यह एक मौसम उद्योग है जो वर्ष में 4 या 5 महीने ही चीनी का उत्पादन करता है।
  2. भारत में गन्ने का प्रति हैक्टेयर उत्पादन कम है।
  3. चीनी में गंधक का प्रयोग किया जाता है जो कि भारत में बहत कम मिलती है।
  4. भारत में इन मिलों का उचित स्थानीयकरण नहीं है।
  5. इसके परिवहन पर अधिक व्यय आता है क्योंकि गन्ना ह्रासमान पदार्थ है।
  6. भारत में इस उद्योग को स्थापित करने के लिए तकनीकी ज्ञान की कमी है।
  7. इस उद्योग पर सरकार ने ऊँचे कर लगा रखे हैं।

प्रश्न 16.
स्पष्ट कीजिए कि कृषि और उद्योग किस प्रकार साथ-साथ बढ़ रहे हैं?
उत्तर:
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि और उद्योग का घनिष्ठ संबंध है। ये दोनों एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं। दोनों का विकास साथ-साथ हो रहा है।

कृषि ने उद्योगों को सुदृढ़ आधारशिला प्रदान की है। कृषि अनेक उद्योगों के लिए कच्चे माल की पूर्ति का स्रोत है। गन्ना, तिलहन, कच्चा पटसन और कच्चा कपास ऐसे प्रमुख कृषि उत्पाद हैं जो खाद्य तेल उद्योग, चीनी उद्योग, पटसन उद्योग और कपड़ा उद्योग के लिए कच्चे माल का काम करते हैं।

उद्योगों के विकास के कारण ही कृषि का विकास भी संभव हो पाया है। कृषि के लिए ट्रैक्टर, कम्बाइन, हार्वेस्ट जलपम्प और स्प्रिंग कलर इत्यादि उद्योगों से ही प्राप्त होते हैं। उर्वरक, कीटनाशक दवाइयाँ, पेट्रोल, डीजल और बिजली आदि का कृषि में उपयोग उद्योगों पर आधारित है।

स्पष्ट है कि कृषि और उद्योग दोनों का विकास एक-दूसरे के विकास पर निर्भर करता है।

प्रश्न 17.
उद्योगों का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में क्या योगदान है?
उत्तर:
पिछले दो दशकों से सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण उद्योग का योगदान 27 प्रतिशत में से 17 प्रतिशत ही रह गया है क्योंकि 10 प्रतिशत भाग खनिज खनन, गैस तथा विद्युत ऊर्जा का योगदान है।

भारत की तुलना में अन्य पूर्वी एशियाई देशों में विनिर्माण का योगदान सकल घरेलू उत्पाद का 25 से 35 प्रतिशत है। पिछले एक दशक से भारतीय विनिर्माण क्षेत्र में 7 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से वृद्धि हुई है। वृद्धि की यह दर अगले दशक में 12 प्रतिशत अपेक्षित है। वर्ष 2003 से विनिर्माण क्षेत्र का विकास 9 से 10 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से हुआ है। उपयुक्त सरकारी नीतियों तथा औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि की नई कोशिशों से अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि विनिर्माण उद्योग अगले एक दशक में अपना लक्ष्य पूरा कर सकता है।

प्रश्न 18.
लोहा और इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
लोहा-इस्पात उद्योग आधारभूत उद्योग माना जाता है। इसे समस्त उद्योगों की कुंजी कहा जाता है क्योंकि इस पर अन्य सभी उद्योग आधारित हैं। इसलिए लोहा-इस्पात उद्योग भारत के तीव्र औद्योगिकीकरण की आधारशिला है।

कारण-लोहा-इस्पात उद्योग को आधारभूत उद्योग कहने के निम्नलिखित कारण हैं-

  1. लगभग सभी उद्योगों के लिए मशीनें और उपकरण लोहा-इस्पात से ही बनाए जाते हैं।
  2. सभी प्रकार के हल्के, मध्यम, कुटीर एवं भारी उद्योग लोहा-इस्पात पर आधारित हैं।
  3. संचार एवं परिवहन भी लोहा-इस्पात पर आधारित हैं।
  4. भवन-निर्माण में भी लोहा-इस्पात का प्रयोग किया जाता है।
  5. कृषि के लिए विभिन्न प्रकार के यंत्र एवं उपकरण; जैसे ट्रैक्टर, पम्प-सेट, हल, खुरपा और दराँती आदि सभी लोहा-इस्पात से ही बनाए जाते हैं।

प्रश्न 19.
महाराष्ट्र और गुजरात में सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण के कारणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
महाराष्ट्र और गुजरात में सती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण के निम्नलिखित कारण हैं-

  1. इन राज्यों की काली मिट्टी कपास की उपज के लिए अति उत्तम है। इसीलिए यहाँ अधिक कपास पैदा होती है।
  2. अधिक जनसंख्या के कारण यहाँ मजदूर और कारीगर सस्ते व आसानी से मिल जाते हैं।
  3. इन राज्यों में बैंकिंग प्रणाली विकसित है। यहाँ बहुत-से पूंजीपति रहते हैं। इसलिए इस उद्योग के विकास के लिए पूँजी प्राप्त हो जाती है।
  4. यहाँ यातायात एवं संचार के साधन विकसित हैं।
  5. यहाँ श्रम और बिजली दोनों ही आसानी से तथा सस्ती दर पर मिल जाती हैं।
  6. मुम्बई इस क्षेत्र का एक बहुत बड़ा प्राकृतिक पत्तन है। यहाँ मिश्र और संयुक्त राष्ट्र से लंबे रेशे की कपास मँगवाई जाती है। देश की मिलों में तैयार सूती कपड़ा विदेशों में भेजा जाता है।

प्रश्न 20.
विनिर्माण उद्योग का क्या महत्त्व है?
अथवा
“किसी भी देश की आर्थिक शक्ति को वहाँ के विनिर्माण उद्योग के विकास से मापा जाता है।” इस कथन की पुष्टि करें।
अथवा
“विनिर्माण उद्योग आर्थिक विकास की रीढ़ है।” उदाहरण सहित व्याख्या करें।
उत्तर:
विनिर्माण उद्योग आर्थिक विकास की रीढ़ है। यह बात इसके महत्त्वों से स्पष्ट होती है; जैसे

  1. रोजगार-विनिर्माण उद्योग भारी मात्रा में प्रशिक्षित और अप्रशिक्षित श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध करवाता है। इससे देश की गरीबी और बेरोजगारी कम हो रही है।
  2. विदेशी मुद्रा विनिर्मित उत्पादों के निर्यात से वाणिज्य और व्यापार बढ़ता है और आवश्यक विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।
  3. प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग-प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से देश का विनिर्माण उद्योग विकसित हो गया है। इससे देश का आर्थिक विकास होता है।
  4. रोजमर्रा की जरूरतें विनिर्माण उद्योग रोजमर्रा की जरूरत की चीजें उत्पादित करता है, जिससे सामान्य व्यक्ति अपनी मूल जरूरतें पूरी कर सकता है।

प्रश्न 21.
राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड पर एक भौगोलिक निबन्ध लिखिए।
उत्तर:
राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड देश के एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में बिजली के वितरण की अवसंरचना अथवा साधन है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में विद्युत उत्पादन की दशाएँ एक-जैसी नहीं हैं और न ही विद्युत के स्रोत एक-जैसे हैं। परिणामस्वरूप कहीं तो विद्युत अधिशेष है और कहीं भारी माँग के कारण विद्युत की कमी है।

बिजली की कमी के कारण-बिजली की कमी के कारण निम्नलिखित हैं-

  • देश में विद्युत के उत्पादन की क्षमता बहुत ही कम है।
  • हमारे पास विद्युत के लिए एक भी राष्ट्रीय ग्रिड नहीं है।

राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड के लाभ-जब एक राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड बन जाएगा तो उसके निम्नलिखित लाभ होंगे

  • आपातकाल और अत्यधिक माँग के समय बिजली के अधिशेष क्षेत्रों से बिजली की कमी वाले क्षेत्रों में स्थानान्तरण किया जा सकेगा।
  • क्षेत्रों के भीतर और विभिन्न क्षेत्रों के बीच बिजली की आपूर्ति नियमित हो जाएगी।
  • विद्युत उत्पादन केन्द्रों का इष्टतम उपयोग होगा।

राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय पावर ग्रिड देश में बिजली की समस्या का स्थाई समाधान खोजने के लिए केंद्र सरकार ने सन 1980 में सिद्धान्त के रूप में अपने स्वामित्व और नियन्त्रण में राष्ट्रीय पावर ग्रिड की स्थापना को मंजूरी दी थी, जिसके विकास का दायित्व पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया को सौंपा गया। देश में पाँच क्षेत्रीय विद्युत ग्रिड हैं। इनका संचालन अलग-अलग होता है, एकीकृत ढंग से नहीं। ये ग्रिड हैं-

  • उत्तरी ग्रिड
  • पश्चिमी ग्रिड
  • दक्षिणी ग्रिड
  • पूर्वी ग्रिड
  • उत्तर-पूर्वी ग्रिड।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में उद्योगों के स्थानीयकरण को प्रभावित करने वाले भौगोलिक तथा आर्थिक कारकों की उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।
अथवा
भारत में उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारकों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर:
इतिहास साक्षी है कि भारत की औद्योगिक प्रगति पश्चिमी देशों से अधिक थी। भारत में बनी वस्तुएँ विशेषकर वस्त्र और दस्तकारी, विश्व विख्यात थीं। विश्व के अनेक राष्ट्र भारत की वस्तुएँ लेने के लिए लालायित रहते थे। भारत धन-धान्य से परिपूर्ण तथा संपन्न था, इसी कारण भारत ‘सोने की चिड़िया’ कहलाता था।

अंग्रेजी साम्राज्य की स्थापना तथा उनकी गलत औद्योगिक नीति के फलस्वरूप भारतीय कुटीर उद्योगों को बहुत हानि यूरोप की औद्योगिक क्रांति के कारण मशीनी युग का श्रीगणेश हुआ और हमारे देश के परंपरागत उद्योग धीरे-धीरे लुप्त होते गए। भारत का कच्चा माल ब्रिटेन को भेजा जाने लगा और भारत मात्र कच्चे माल का उत्पादक क्षेत्र बनकर रह गया। ब्रिटेन में जो माल तैयार होकर आता था, उसको ऊँची कीमतों पर बेचा जाता था।

भारत में आधुनिक उद्योग सन् 1854 में प्रारंभ हुआ जब मुंबई में सूती वस्त्र की मिल स्थापित की गई। उसके बाद चीनी, सीमेंट, रसायन तथा अन्य उद्योग भी संचालित किए गए, लेकिन 1947 तक औद्योगिक विकास की दर धीमी रही।

एक उद्योग किसी स्थान पर उसी समय स्थापित होता है, जब वहाँ अधिक-से-अधिक भौगोलिक परिस्थितियाँ उपलब्ध हो जाती हैं। उद्योगों को स्थापित करने के लिए भौगोलिक, आर्थिक तथा राजनीतिक कारक महत्त्वपूर्ण होते हैं।

1. भौगोलिक कारक (Geographical Factors) उद्योगों को प्रभावित करने वाले प्रमुख भौगोलिक कारक निम्नलिखित हैं
(क) कच्चे माल की प्राप्ति (Availability of Raw Material) कच्चा माल उद्योगों के लिए एक आधारभूत कारक है। कच्चे माल की प्राप्ति उद्योगों के केंद्रीयकरण को आकर्षित करती है; जैसे उत्तर प्रदेश में चीनी उद्योग, महाराष्ट्र और गुजरात में सूती वस्त्र उद्योग तथा छोटा नागपुर के पठार में लौह-इस्पात उद्योग के स्थानीयकरण के लिए कच्चा माल उपलब्ध है।

(ख) शक्ति (Force)-उद्योगों को संचालित करने के लिए ऊर्जा या शक्ति के साधनों; जैसे कोयला, जल-विद्युत्, पेट्रोलियम तथा परमाणु ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है; जैसे जमशेदपुर में लौह-इस्पात उद्योग की स्थापना का कारण रानीगंज और झरिया से प्राप्त कोयले की शक्ति पर निर्भर है। पंजाब में औद्योगिक विकास में भाखड़ा नंगल जल-विद्युत् परियोजना का महत्त्वपूर्ण योगदान है।

(ग) परिवहन एवं संचार (Transportation and Communication) कच्चे माल को उद्योगों तक पहुँचाने तथा निर्मित माल को बाजार तक उपलब्ध कराने के लिए परिवहन के साधनों का विकास आवश्यक है। सड़कों, रेलों तथा समुद्री यातायात के द्वारा औद्योगिक विकास प्रभावित होता है। कोलकाता, मुंबई, चेन्नई तथा दिल्ली जैसे महानगरों का औद्योगिक विकास वहाँ के यातायात के साधनों के कारण ही हुआ है। संचार के साधनों; जैसे डाक, टेलीफोन आदि का भी औद्योगिक विकास में महत्त्वपूर्ण स्थान है।

(घ) श्रम (Labour)-उद्योग-धंधों में कुशल एवं सस्ते श्रमिकों के कारण औद्योगिक विकास को बल मिलता है। कानपुर, फरीदाबाद, लुधियाना, जालंधर एवं मेरठ के औद्योगिक विकास में वहाँ के सस्ते एवं कुशल कारीगरों का महत्त्वपूर्ण योगदान है।

(ङ) जलवायु (Climate)-उद्योग-धंधों के कुशल संचालन के लिए वहाँ काम करने वाले कारीगरों के लिए जलवायु का स्वास्थ्यवर्धक होना आवश्यक है। कई उद्योग ऐसे हैं, जिनमें जलवायु का महत्त्वपूर्ण हाथ होता है, जैसे कपड़ा उद्योग के लिए नम जलवायु आवश्यक है, क्योंकि आर्द्र जलवायु में धागा कम टूटता है।

(च) सस्ती भूमि एवं बाजार (Easy availability of Land and Market)-उद्योगों की स्थापना के लिए सस्ती तथा पर्याप्त भूमि आवश्यक है। यही कारण है कि बड़े-बड़े नगरों से दूर उद्योग केंद्रित किए जाते हैं। दिल्ली, मुंबई तथा कोलकाता में भूमि की कीमतें अधिक होने से आस-पास के क्षेत्रों में औद्योगिक केंद्र विकसित हो गए हैं। उद्योगों में निर्मित माल की पूर्ति के लिए बाजार की निकटता भी आवश्यक है, जिससे कम परिवहन लागत पर उपभोक्ताओं को वस्तुएँ प्राप्त हो सकें।

2. आर्थिक कारक (Economic Factors)-प्रौद्योगिक विकास एवं विश्व-व्यापी उदारीकरण की नीति के कारण भौगोलिक कारकों से अधिक आर्थिक कारक महत्त्वपूर्ण हो चुके हैं।
(क) पूंजी (Capital) किसी भी उद्योग या कारखाने को स्थापित करने के लिए बहुत बड़ी मात्रा में पूंजी की आवश्यकता होती है। दिल्ली, मुंबई एवं कोलकाता के समीपवर्ती क्षेत्रों में उद्योगों के केंद्रीयकरण का कारण इन महानगरों में बड़े-बड़े पूंजीपति तथा उद्योगपतियों का होना है।

(ख) बैंकिंग सुविधा (Banking Facility)-उद्योगों के केंद्रीयकरण में बैंकिंग सुविधा होना आवश्यक है, क्योंकि उद्योगपतियों को पैसा जमा करने तथा निकालने की सुविधा होनी चाहिए। आजकल अधिकांश लेन-देन बैंकों के माध्यम से ही होता है। छोटे उद्योगपतियों को पूंजी उचित ब्याज की दर पर बैंकों से प्राप्त हो जाती है।

(ग) बीमे की सुविधा (Facility of Insurance)-उद्योगपति जब करोड़ों रुपए का निवेश करते हैं, तो वे किसी प्रकार का जोखिम नहीं उठाना चाहते। कई बार भारी मशीनों या कारखानों में आग लग जाए या अन्य क्षति हो जाए या अन्य कोई दुर्घटना हो जाए तो इसके लिए वे बीमे की भी व्यवस्था करते हैं।

3. राजनीतिक कारक (Political Factors)-राजनीतिक कारक उद्योगों की स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।
(क) सरकारी नीति (Government Policy)-भारत में 1991 के बाद जो उदारीकरण आया वह सरकार की नीति का परिणाम ही था। इससे अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों का भारत में प्रवेश हुआ तथा उससे भारत के अनेक भागों में उद्योग-धंधों की स्थापना हुई, जिससे स्थानीय जनता को रोजगार मिला तथा हमारा आर्थिक विकास अधिक हुआ। इसी प्रकार सरकार ने महानगरों में बढ़ते हुए प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से कई उद्योगों को वहाँ से हटाकर समीपवर्ती क्षेत्रों में उद्योगों के स्थानीयकरण को प्रोत्साहित किया जिससे प्रादेशिक असंतुलन भी कम होगा और महानगरों में बढ़ते हुए प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा।

(ख) राजनीतिक स्थिरता (Political Stability) उद्योगपति हमेशा यही प्रयास करते हैं कि उन क्षेत्रों या देशों में उद्योग स्थापित किए जाएँ जहाँ राजनीतिक रूप से स्थिरता हो, सरकारें स्थिर हों, जिससे उन्हें उनके उत्पादनों का अधिकतम लाभ मिल सके।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 निर्माण उद्योग

प्रश्न 2.
भारत में पेट्रो-रसायन उद्योग का वर्णन करें।
उत्तर:
पेट्रो-रसायन उद्योग-कच्चे खनिज तेल और प्राकृतिक गैस से अनेक प्रकार के रसायन और चिकने पदार्थ प्राप्त . होते हैं जिनका प्रयोग अनेक उद्योगों में कच्चे माल के रूप में किया जाता है। इन सभी उद्योगों को सम्मिलित रूप से पेट्रो-रसायन उद्योग कहा जाता है। इन उद्योगों को निम्नलिखित चार उपवर्गों में बाँटा जाता है

  • बहुलक (पालिमस)
  • कृत्रिम रेशे
  • प्रत्याथस्लक
  • पृष्ठ सक्रियक मध्यवर्ती।

विकास (Development)-भारत में यह एक अपेक्षाकृत नया उद्योग है। सन् 1960 में देश में कार्बनिक रसायनों की माँग इतनी ज्यादा बढ़ गई कि कोयला, एल्कोहल और कैल्शियम कार्बाइड द्वारा तैयार किए गए रसायनों से उसे पूरा करना मुश्किल हो गया। इसी समय पेट्रोलियम परिष्करण उद्योग का तेजी से विस्तार हुआ। देश में व्याप्त इसी अनुकूल वातावरण के चलते सन् 1966 में यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड ने मुंबई के निकट ट्रांबे नामक स्थान पर पेट्रो-रसायन का पहला कारखाना लगाया।

सन् 1969 में कोयली तेल परिष्करणशाला पर एक ऐसा ही दूसरा कारखाना लगाया गया। वडोदरा में इंडियन पेट्रोकैमिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (-IPCL) नामक सार्वजनिक क्षेत्र का पहला पेट्रो-रसायन संयंत्र लगाया गया। सार्वजनिक क्षेत्र का दूसरा पेट्रो-रसायन कारखाना बोंगई गाँव में स्थापित किया गया है। हल्दिया और बरौनी में भी पेट्रो-रसायन के दो संयंत्र लगाए गए हैं।

उद्योग का संकेंद्रण-तेल शोधन खनिज तेल आधारित सबसे महत्त्वपूर्ण आर्थिक क्रिया है। सभी पेट्रो-रसायन उद्योग तेल शोधन-शालाओं के निकट अवस्थित मिलते हैं। भारत में मुंबई पेट्रो-रसायने उद्योग का केंद्र माना जाता है।

प्रशासनिक नियंत्रण-भारत में पेट्रो-रसायन उद्योग के विकास, दिशा-निर्देश और नियंत्रण के लिए निम्नलिखित संगठन कार्यरत हैं
1. इंडियन पेट्रोकैमिकल्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (IPCL) सार्वजनिक क्षेत्र का यह प्रतिष्ठान पालिमर्स, रसायन रेशों और रेशों के मध्यवर्ती जैसी वस्तुओं का उत्पादन और वितरण करता है। लगातार घाटे में चलने के कारण मार्च, 2001 में इसका विनिवेश करके इसे बंद कर दिया गया है। 4 जून, 2002 के बाद IPCL सरकारी कंपनी नहीं रही।

2. पेट्रोफिल्स को-ऑपरेटिव लिमिटेड (PCL)-यह देश की बुनकर सहकारी समितियों और भारत सरकार का संयुक्त उद्यम है। यह संगठन गुजरात के वडोदरा और नलधारी में स्थित कारखानों में पोलिएस्टर, फिलामैंट धागा व नायलान चिप्स का उत्पादन करता है।

3. सेन्ट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी (CIPET) यह संगठन प्लास्टिक के ज्ञान-विज्ञान के विकास हेतु विद्यार्थियों को प्रशिक्षण सेवाएँ प्रदा

प्रश्न 3.
भारत की नई औद्योगिक नीति की तीन प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करें।
उत्तर:
नई औद्योगिक नीति की घोषणा सन् 1991 में की गई थी। इस नीति की तीन प्रमुख विशेषताएँ हैं जो निम्नलिखित हैं-

  • उदारीकरण (Liberalisation)
  • निजीकरण (Privatisation)
  • वैश्वीकरण (Globalisation)।

1. उदारीकरण-नियंत्रित अर्थव्यवस्था के स्थान पर केंद्र सरकार ने उदारीकरण की नीति अपनाई है। इससे अभिप्राय नियमों व प्रतिबंधों में ढील देने से है, जो उद्योगों के विकास में सहायक हो। उदारीकरण के लिए निम्नलिखित उपाय बताए गए हैं

  • उद्योगों की स्थापना के लिए लाइसेंस प्रणाली खत्म करना
  • बिना सरकार की अनुमति के औद्योगिक क्षमता का विस्तार करना
  • सार्वजनिक क्षेत्र के लिए सुरक्षित उद्योगों की संख्या कम कर देना
  • विदेशी कंपनियों को भारत में उद्योग स्थापित करने की अनुमति देना
  • मुक्त व्यापार को बढ़ावा देना तथा विदेशी निवेश को प्रोत्साहन देना।

2. निजीकरण-सार्वजनिक क्षेत्र सक्षम और कुशल नहीं होता, यह सारे संसार में अनुभव किया जाने लगा था। सार्वजनिक क्षेत्र के प्रति मोह भंग की प्रक्रिया तब तेज हुई जब सन् 1980 के दशक में समाजवादी अर्थव्यवस्थाओं का तिलिस्म बिखरने लगा। दूसरी ओर, विश्व की विकसित अर्थव्यवस्थाओं में निजी क्षेत्र के कारण हो रही आर्थिक वृद्धि के कारण लोगों का निजीकरण में स बढ़ने लगा। निजीकरण वह सामान्य प्रक्रिया है जिसके द्वारा निजी लोग किसी सरकारी उद्यम के मालिक बन जाते हैं या उसका प्रबंध करते हैं। सार्वजनिक क्षेत्र में उद्यमों में सुधार की प्रक्रिया के उपाय निम्नलिखित हैं-

  • बीमार उद्योगों को बंद करना
  • भविष्य में सफल हो सकने वाले उद्योगों की पुनर्संरचना तथा पुनर्जीवन
  • कामगारों के हितों की पूरी रक्षा करना।

3. वैश्वीकरण-वैश्वीकरण का अर्थ देश की अर्थव्यवस्था का विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत करना है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय सुझाए गए हैं

  • विदेशी कंपनियों को ऐसी सुविधाएँ देना कि वे भारत के विभिन्न आर्थिक क्रियाकलापों में निवेश कर सकें
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियों के भारत में प्रवेश करते समय आने वाली दिक्कतों और प्रतिबंधों को हटाना
  • भारतीय कंपनियों का विदेशी कंपनियों को सहयोग देने की अनुमति देना तथा विदेशियों को संयुक्त उद्यम लगाने के लिए प्रोत्साहित करना
  • उदार आयात कार्यक्रम को लागू करना
  • पूँजी, वस्तुओं, सेवाओं, श्रमिक और संसाधनों को एक देश से दूसरे देश में स्वतंत्रतापूर्वक आ-जा सकने की अनुमति देना।

प्रश्न 4.
निम्नलिखित औद्योगिक प्रदेशों का संक्षेप में वर्णन करें
(क) गुजरात औद्योगिक प्रदेश
(ख) बंगलौर-तमिलनाडु औद्योगिक प्रदेश
(ग) छोटा नागपुर औद्योगिक प्रदेश
(घ) गुड़गांव-दिल्ली-मेरठ औद्योगिक प्रदेश
उत्तर:
(क) गुजरात औद्योगिक प्रदेश-यह औद्योगिक प्रदेश उत्तर में साबरमती के किनारे से दक्षिण में वडोदरा तक फैला हुआ है अर्थात् खंभात की खाड़ी के इर्द-गिर्द फैला यह क्षेत्र सूती वस्त्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। इस प्रदेश में देश की लगभग 120 सूती मिलें हैं। अहमदाबाद स्वयं सूती वस्त्र का एक बहुत बड़ा केंद्र है। अहमदाबाद के अलावा वडोदरा तथा सूरत भी सूती वस्त्र का उत्पादन करते हैं।

सूती वस्त्र उद्योग के अतिरिक्त रेशमी वस्त्र, कागज, रसायन तथा दियासलाई उद्योग इस प्रदेश की प्रमुख औद्योगिक इकाइयाँ हैं। वडोदरा सूती वस्त्र के साथ-साथ रसायन तथा दवाइयों के लिए भी विख्यात है। खंभात की खाड़ी में खनिज तेल के अपार भंडार हैं, जिससे यहाँ पेट्रो-रसायन उद्योगों का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। कच्छ की खाड़ी के सिरे पर स्थित कांडला बंदरगाह का इस क्षेत्र के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान है। इस औद्योगिक प्रदेश के विकास में निम्नलिखित सुविधाओं का योगदान है

  • इस क्षेत्र में कच्चे माल के रूप में कपास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
  • यहाँ मुम्बई की तुलना में भूमि सस्ती है, जिससे उद्योगों को स्थापित करने एवं उसके विकास की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।
    पूर्वी गुजरात एवं राजस्थान में सस्ता श्रम उपलब्ध है।
  • कांडला तथा मुम्बई बंदरगाहों से आयात एवं निर्यात की सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
  • यहाँ रेल तथा सड़क यातायात की सुविधाएँ सुलभ हैं, जिससे कच्चे माल एवं निर्मित माल को लाने तथा ले जाने में सुविधा रहती है।
  • खंभात की खाड़ी में पेट्रोलियम की उपलब्धता से अनेक पेट्रो-रसायन उद्योगों की स्थापना में मदद मिली है।
  • इस प्रदेश में अनेक देशी तथा विदेशी कंपनियों के कारण अनेक बैंकों तथा बीमा कंपनियों की स्थापना हुई है।

(ख) बंगलौर-तमिलनाडु औद्योगिक प्रदेश-इस औद्योगिक प्रदेश का विस्तार तमिलनाडु तथा कर्नाटक राज्यों में है। यह दक्षिण में मदुरई से लेकर उत्तर में बंगलुरु (बंगलौर) तक विस्तृत है। तीन महत्त्वपूर्ण केंद्रों मदुरई, कोयंबटूर तथा बंगलुरु में अधिक उद्योग-धंधे स्थापित हैं।

मदुरई वस्त्र उद्योग का बड़ा केंद्र है जो भारत के महत्त्वपूर्ण कपास क्षेत्र में स्थित है। कोयंबटूर तमिलनाडु का सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र है। इसे ‘तमिलनाडु का मानचेस्टर’ भी कहते हैं। यहाँ का दूसरा प्रमुख उद्योग चीनी उद्योग है, क्योंकि समीपवर्ती क्षेत्रों में गन्ना पर्याप्त मात्रा में उगाया जाता है। यहाँ केंद्रीय गन्ना अनुसंधान केंद्र स्थापित है जो गन्ने की गुणवत्ता और विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है। इस औद्योगिक प्रदेश में इन दो उद्योगों के अतिरिक्त इंजीनियरिंग, सीमेंट, चमड़ा, सिगरेट तथा फिल्म उद्योग भी विकसित हैं। पाइकारा जल-विद्युत केंद्र उद्योगों के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है।

लौर इस औद्योगिक प्रदेश का तीसरा महत्त्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ पर भारत के कुछ विशिष्ट उद्योग; जैसे हिंदुस्तान वायुयान निर्माण (HAL), हिंदुस्तान मशीन टूल्स (HMT), दूरभाष उद्योग और भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) हैं। इनके अतिरिक्त यहाँ कांच का सामान, चीनी-मिट्टी के बर्तन तथा ऊनी एवं रेशमी वस्त्र उद्योग भी विकसित हैं।

(ग) छोटा नागपुर औद्योगिक प्रदेश-इसे बिहार और पश्चिमी बंगाल का औद्योगिक प्रदेश भी कहते हैं। इस औद्योगिक प्रदेश में भारत के विविध तथा विशाल खनिजों के भंडार हैं, इसलिए इस प्रदेश को भारत का रूर (Ruhr) भी कहा जाता है। इस प्रदेश में दामोदर घाटी के कोयले और बिहार तथा ओडिशा के लौह-अयस्क का महत्त्वपूर्ण योगदान है। यहाँ भारी इंजीनियरिंग उद्योग, रसायन उद्योग आदि स्थापित हैं। इस क्षेत्र के विकसित होने के निम्नलिखित कारण हैं

  • उत्तम किस्म का लौह-अयस्क छोटा नागपुर के पठार में उपलब्ध है।
  • रानीगंज, झरिया और बोकारो के विशाल कोयला भंडार शक्ति के साधन के रूप में प्रयुक्त किए जाते हैं।
  • यह क्षेत्र परिवहन के साधनों के रूप में दक्षिणी एवं पूर्वी रेलवे से जुड़ा है।
  • बिहार के संथाल परगना का सस्ता श्रम उद्योगों के लिए उपलब्ध है।
  • दामोदर और उसकी सहायक नदियों से स्वच्छ जल की सुविधा प्राप्त है।
  • दामोदर घाटी परियोजना के विकास के फलस्वरूप सस्ती जल-विद्युत शक्ति उद्योगों के विकास में सहायक है।

(घ) गड़गांव-दिल्ली-मेरठ औद्योगिक प्रदेश-इस औद्योगिक प्रदेश का विस्तार दिल्ली तथा उसके समीपवर्ती राज्यों; जैसे हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश में हुआ है। इस औद्योगिक प्रदेश का विस्तार 1947 में हुआ। यह औद्योगिक प्रदेश आगरा, मथुरा, मेरठ, सहारनपुर के मध्य विकसित है और इस क्षेत्र की दूसरी पेटी हरियाणा में फरीदाबाद, गुड़गांव, सोनीपत तथा पानीपत तक फैली है। इस औद्योगिक पेटी के विकास में भाखड़ा-नंगल बांध की जल-विद्युत् तथा फरीदाबाद, नरेला और पानीपत की ताप-विद्युत् योजनाओं का विशेष योगदान है।

दिल्ली तथा समीपवर्ती औद्योगिक प्रदेश में चीनी, वस्त्र, रसायन, इंजीनियरिंग, कागज, इलेक्ट्रॉनिक्स और साइकिल उद्योग प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त फरीदाबाद में ट्रैक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग, गुड़गांव (गुरुग्राम) में कार उद्योग, अंबाला में वैज्ञानिक मेरठ में खेल के सामान से संबंधित उद्योग तथा मथुरा में तेल परिष्करण-शाला इस प्रदेश की प्रमुख औद्योगिक इकाइयाँ हैं। गाजियाबाद, सहारनपुर और यमुनानगर कृषि पर आधारित उद्योगों के केंद्र हैं। सोनीपतं साइकिल तथा रेवाड़ी पीतल के बर्तनों के लिए प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न 5.
हुगली औद्योगिक प्रदेश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
हुगली औद्योगिक प्रदेश भारत का सबसे बड़ा तथा प्रमुख औद्योगिक प्रदेश है जो हुगली नदी के किनारे 100 कि०मी० की लंबाई तथा 3 कि०मी० की चौड़ाई में पश्चिम बंगाल में फैला हुआ है। इसे कोलकाता औद्योगिक प्रदेश भी कहते हैं। इस औद्योगिक प्रदेश का विकास अंग्रेजों द्वारा किया गया। 17वीं शताब्दी में ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में बंगाल से आई और इन्होंने कोलकाता को अपनी सुविधानुसार विकसित किया। हुगली नदी के दोनों किनारों पर उद्योगों का केंद्रीयकरण हुआ है। नदी के दाएँ किनारे पर सिरामपुर, रिशरा, बांसबरिया, चांपदानी, वैद्यवारी, वेली, बैलूर, हावड़ा, शिवपुर, सौकरैल और बाएँ किनारे पर नेहाटी, काकीनाड़ा, टीटागढ़, अगरपाढ़ा, बेलगुरिया, आलम बाजार, कोलकाता, बजबज तथा बिलासपुर आदि स्थित हैं।

हुगली औद्योगिक प्रदेश में पटसन उद्योग सबसे महत्त्वपूर्ण उद्योग है। भारत की 90% पटसन मिलें इसी क्षेत्र में स्थापित हैं, दूसरा प्रमुख उद्योग कागज उद्योग है, जो नेहाटी, काकीनाड़ा और टीटागढ़ में है। सूती वस्त्र उद्योग के प्रमुख केंद्र हावड़ा, मुर्शीदाबाद, हुगली, श्यामनगर, श्रीरामपुर आदि हैं। इस प्रदेश में इंजीनियरिंग उद्योग भी विकसित हैं। यहाँ डीजल इंजन, कपड़ा बुनने की मशीनें, सिलाई मशीनें तथा साइकिल आदि के कारखाने भी हैं। इसके अतिरिक्त बिजली का सामान बनाने और रसायन उद्योग भी उन्नत अवस्था में हैं।

उपरोक्त उद्योगों के अतिरिक्त इस प्रदेश में फिल्म उद्योग, जिनमें बांग्ला तथा हिंदी फिल्में बनाई जाती हैं, भी प्रसिद्ध हैं। इस औद्योगिक प्रदेश के विकास के निम्नलिखित कारण हैं –

  • इस औद्योगिक प्रदेश में कच्चा माल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। पटसन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होती है। साथ-ही-साथ लोहा, कोयला और अन्य खनिज पदार्थ भी इस प्रदेश की पृष्ठभूमि में उपलब्ध हैं।
  • इस औद्योगिक प्रदेश में शक्ति के साधन के रूप में कोयला तथा दामोदर घाटी परियोजना से जल-विद्युत् की सुविधा प्राप्त है।
    कोलकाता स्वयं एक विकसित बंदरगाह है, जिसमें सामान के आयात-निर्यात की सुविधा उपलब्ध है।
  • इस क्षेत्र में रेल तथा सड़कों का जाल बिछा है। यातायात की कोई समस्या नहीं है।
  • बिहार तथा पश्चिम बंगाल के पिछड़े हुए क्षेत्रों से सस्ते तथा कुशल श्रमिक मिल जाते हैं।
  • हुगली नदी के जल द्वारा पटसन उद्योग, कागज उद्योग तथा अन्य उद्योगों के लिए स्वच्छ एवं पर्याप्त जल की सुविधा उपलब्ध हो जाती है।
  • कोलकाता इस प्रदेश का ही नहीं, अपितु देश का दूसरा बड़ा नगर है, जहाँ पूंजी, बीमा तथा बैंकिंग की सुविधाएँ हैं।
    यह संपूर्ण क्षेत्र सघन जनसंख्या वाला है, जिससे निर्मित माल की बड़ी मांग है।

हुगली औद्योगिक प्रदेश की समस्याएँ एवं समाधान-
(1) सन् 1947 में देश के विभाजन के समय पटसन उत्पादक क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) में चला गया, जिससे यहाँ के पटसन उद्योग को बहुत बड़ा धक्का लगा, लेकिन धीरे-धीरे पटसन के उत्पादन में वृद्धि से इस समस्या का कुछ समाधान निकाल लिया गया है।

(2) हुगली नदी में मिट्टी के निक्षेप के कारण पानी की गहराई निरंतर कम हो रही है। अतः खाड़ी के शीर्ष से कोलकाता पोताश्रय तक 97 कि०मी० लंबे मार्ग में बड़े जहाजों को आने-जाने के लिए कम-से-कम 9 मीटर गहरे पानी की आवश्यकता होती है। अतः पानी की गहराई बनाए रखने के लिए निक्षेपित मिट्टी को लगातार निकालते रहना चाहिए, इस समस्या के समाधान के लिए गंगा नदी पर फरक्का बांध का निर्माण किया गया।

(3) पूर्वी पाकिस्तान के विभाजन के कारण कोलकाता और असम के बीच जल संबंध टूट गए हैं, जिसके कारण परिवहन की लागत अधिक आती है।

(4) कोलकाता बंदरगाह पर पोताश्रय छोटा होने के कारण जहाजों को माल उतारने तथा लादने के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इस समस्या के समाधान के लिए कोलकाता के दक्षिण में हल्दिया पोताश्रय का निर्माण किया गया है।

प्रश्न 6.
भारत में पाए जाने वाले उद्योगों का वर्गीकरण किन-किन आधारों पर किया जाता है?
उत्तर:
उद्योगों के वर्गीकरण के विभिन्न आधार इस प्रकार से हैं-
1. प्रयुक्त कच्चे माल के स्रोत के आधार पर

  • कृषि आधारित-इन उद्योगों को चलाने के लिए कच्चा माल कृषि क्षेत्र से प्राप्त होता है। इनमें सूती वस्त्र, ऊनी वस्त्र, पटसन, रेशमी वस्त्र, रबर, चीनी, चाय, कॉफी तथा वनस्पति तेल उद्योग आदि शामिल हैं।
  • खनिज आधारित-इन उद्योगों को चलाने के लिए कच्चा माल खनिजों से प्राप्त होता है। लोहा तथा इस्पात, सीमेंट, एल्यूमिनियम, मशीन, औजार तथा पेट्रो-रसायन उद्योग इसके उदाहरण हैं।

2. प्रमुख भूमिका के आधार पर

  • भूत उद्योग-ये वे उद्योग होते हैं जिनके उत्पादन या कच्चे माल पर दूसरे उद्योग निर्भर हैं; जैसे लोहा इस्पात, ताँबा प्रगलन व एल्यूमिनियम प्रगलन उद्योग।
  • उपभोक्ता उद्योग-ये वे उद्योग होते हैं जो अपना उत्पादन उपभोक्ताओं के सीधे उपयोग हेतु करते हैं; जैसे चीनी, दंतमंजन, कागज, पंखे, सिलाई मशीन आदि।

3. श्रम एवं पूँजी निवेश के आधार पर
(क) श्रम-प्रधान उद्योग-

  • जिन उद्योगों में मजदूरों की एक बहुत बड़ी संख्या काम करती है और पूँजी का कम महत्त्व होता है, उन्हें श्रम-प्रधान उद्योग कहते हैं।
  • इन उद्योगों में अधिक मजदूर काम करते हैं और मशीनों का कम प्रयोग होता है।
  • पटसन उद्योग, रेल, डाक और वस्त्र उद्योग श्रम-प्रधान उद्योग हैं।

(ख) पूँजी-प्रधान उद्योग-

  • जिन उद्योगों की स्थापना और विकास में बड़े पैमाने पर पूँजी की जरूरत होती है और श्रम का इतना अधिक महत्त्व नहीं होता, उन्हें पूँजी-प्रधान उद्योग कहते हैं।
  • इन उद्योगों में अधिकतर काम मशीनों द्वारा किया जाता है।
  • लोहा-इस्पात उद्योग, जलयान-निर्माण उद्योग, तेल परिष्करणशाला उद्योग पूँजी-प्रधान उद्योग हैं।

4. स्वामित्व के आधार पर
(क) सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग-वे उद्योग, जिनका स्वामित्व राज्य सरकार या केंद्रीय सरकार के किसी संगठन के पास होता है, उन्हें सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग कहते हैं; जैसे भारतीय रेल उद्योग, भिलाई, दुर्गापुर और राउरकेला के इस्पात उद्योग।

(ख) निजी क्षेत्र के उद्योग-वे उद्योग, जिनका स्वामित्व किसी एक या कुछ व्यक्तियों या कंपनियों के पास होता है, उन्हें निजी क्षेत्र के उद्योग कहते हैं; जैसे-जमशेदपुर में टाटा लौह-इस्पात उद्योग।

(ग) सम्मिलित क्षेत्र के उद्योग-वे उद्योग, जिनका स्वामित्व राज्य एवं कुछ लोगों या निजी फर्मों के पास सम्मिलित रूप से होता है, उन्हें सम्मिलित क्षेत्र के उद्योग कहते हैं; जैसे इंडियन ऑयल कम्पनी लिमिटेड।

(घ) सहकारी क्षेत्र के उद्योग-वे उद्योग, जिनका स्वामित्व और प्रबंध एक वर्ग के लोगों के हाथ में होता है और यह वर्ग उस उद्योग के लिए कच्चे माल का उत्पादक भी होता है, उन्हें सहकारी क्षेत्र के उद्योग कहते हैं; जैसे महाराष्ट्र के चीनी उद्योग।

5. कच्चे तथा तैयार माल की मात्रा व भार के आधार पर
(क) भारी उद्योग-

  • ये वे उद्योग हैं, जिनका कच्चा और तैयार माल दोनों ही भारी होते हैं तथा अधिकांश कार्य मशीनों की सहायता से किया जाता है।
  • लोहा-इस्पात उद्योग, सीमेंट उद्योग आदि भारी उद्योगों के उदाहरण हैं।
  • इनमें तैयार माल और कच्चे माल का परिवहन खर्च अधिक होता है।

(ख) हल्के उद्योग-

  • ये वे उद्योग हैं, जिनका कच्चा और तैयार माल दोनों ही हल्के होते हैं तथा इनमें महिला श्रमिक भी काम करती हैं।
  • बिजली के पंखे, सिलाई मशीनें, रेडियो आदि बनाने वाले उद्योग हल्के उद्योगों की श्रेणी में आते हैं।
  • इनमें परिवहन खर्च कम आता है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 निर्माण उद्योग

प्रश्न 7.
भारत में लोहा-इस्पात उद्योग की प्रगति की समीक्षा कीजिए तथा उन तत्त्वों की विवेचना कीजिए जिन्होंने इसके स्थानीयकरण को प्रभावित किया है।
अथवा
भारत में लौह एवं इस्पात के प्रमुख कारखानों का संक्षिप्त विवरण दीजिए तथा प्रत्येक कारखाने के स्थानीयकरण की विवेचना कीजिए।
अथवा
भारत में लौह-इस्पात उद्योग का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लोहा-इस्पात उद्योग (Iron and Steel Industry) प्रगतिशील राष्ट्र में प्रत्येक उद्योग के लिए लोहा एवं इस्पात की आवश्यकता होती है। भारी मशीनों से लेकर छोटे-छोटे पुों तक में इसका उपयोग होता है, इसलिए इसे आधारभूत उद्योग (Key Industry) कहते हैं।

भारत का यह उद्योग अत्यंत प्राचीन है। इतिहास में इस बात के प्रमाण हैं कि दमिश्क की तलवारों के लिए लोहा भारत से जाता था। दिल्ली में स्थित कुतुबमीनार के निकट लौह-स्तम्भ इस बात का प्रमाण है कि भारत में इस्पात बनाने की कला कितनी उन्नत थी, क्योंकि अभी तक भी इस पर जंग नहीं लगा। अंग्रेजी साम्राज्य के दौरान न तो अंग्रेजों ने चाहा कि भारत में कोई आधारभूत उद्योग पनपे और न ही उन्होंने इस दिशा में कारीगरों को प्रोत्साहित किया, जिसके कारण उद्योगों का विकास 19वीं और 20वीं शताब्दी के मध्य तक बहुत मंद रहा।

देश में आधुनिक लौह-इस्पात का कारखाना पश्चिमी-बंगाल में कुल्टी नामक स्थान पर सन् 1870 में ‘बंगाल आयरन वर्क्स’ के नाम से खोला गया, लेकिन 40 वर्षों तक उत्पादन में कोई विशेष वृद्धि नहीं हुई। सन् 1907 में बिहार में सांची नामक स्थान पर जमशेद जी टाटा के प्रयासों से टाटा आयरन एण्ड स्टील कंपनी (TISCO) की स्थापना से इस उद्योग को काफी बल मिला। इस कंपनी का उत्पादन निरंतर बढ़ता गया और अब जमशेदपुर (TISCO) देश के इस्पात उत्पादन में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इण्डियन आयरन एण्ड स्टील कंपनी (IISCO) ने सन् 1919 में बर्नपुर में तथा सन् 1923 में कर्नाटक में भद्रावती में इस्पात कारखाने स्थापित किए। भद्रावती का कारखाना पहले निजी क्षेत्र में था, लेकिन अब संयुक्त रूप से केंद्र सरकार तथा कर्नाटक सरकार के स्वामित्व में प्रसिद्ध इंजीनियर डॉ० विश्वेश्वरैया के नाम पर ‘विश्वेश्वरैया आयरन एण्ड स्टील वर्क्स लिमिटेड’ के नाम से कार्यरत है।

प्रमुख इस्पात इकाइयाँ (Main Steel Plants) सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के लिए सन् 1973 में एक नई कंपनी ‘भारतीय इस्पात प्राधिकरण’ (SAIL) की स्थापना की गई। वर्तमान में SAIL पाँच इस्पात कारखानों भिलाई, बोकारो, दुर्गापुर, राउरकेला तथा बर्नपुर का प्रबंधन तथा संचालन कर रहा है। निजी क्षेत्र में टाटा आयरन एण्ड स्टील कंपनी, जमशेदपुर देश का सबसे बड़ा इस्पात कारखाना है। इसके अलावा जिंदल विजयनगर इस्पात लिमिटेड, बेल्लारी, इस्पात इण्डस्ट्रीज लिमिटेड, रायगढ़, एस्सार इस्पात लिमिटेड, हजीरा आदि मुख्य हैं।
1. टाटा आयरन एण्ड स्टील कंपनी (TISCO)-जमशेद जी टाटा द्वारा सन् 1907 में जमशेदपुर में आधुनिक किस्म का कारखाना स्थापित किया गया। द्वितीय विश्वयुद्ध तक इस कारखाने ने विशेष उन्नति नहीं की। इस कारखाने में लौह-इस्पात का उत्पादन सन् 1911 से शुरू हुआ। इस उद्योग के स्थानीयकरण में अनेक भौगोलिक सुविधाओं की उपलब्धता है।

  • कच्चा लोहा झारखंड में सिंहभूम जिले की नोआमुण्डी और ओडिशा की गुरुमहिसानी से प्राप्त होता है। ये दोनों खाने 100 वर्ग कि०मी० के क्षेत्र में स्थित हैं, इनमें उत्तम कोटि का हैमेटाइट लोहा उपलब्ध है।
  • कोयला 270 कि०मी० की दूरी पर रानीगंज तथा झरिया से प्राप्त होता है।
  • चना एवं डोलोमाइट ओडिशा के गंगपर से तथा मैंगनीज बिहार व कछ मध्य प्रदेश से मंगवाया जाता है।
  • जमशेदपुर नगर स्वर्ण रेखा तथा खोरकाई नदियों के निकट स्थित होने से लोहे को ठण्डा करने तथा कारखाने के अन्य उपयोग के लिए यहाँ जल की उचित सुविधा उपलब्ध है।

2. इण्डियन आयरन एण्ड स्टील कंपनी (IISCO) इस कंपनी के कारखाने पश्चिमी बंगाल में कुल्टी, बर्नपुर तथा हीरापुर में हैं। कुल्टी बाराकर नदी के तट पर कोलकाता से 215 कि०मी० की दूरी पर उत्तर पश्चिम में तथा हीरापुर आसनसोल से दक्षिण में 6 कि०मी० की दूरी पर स्थित है। दूसरी इकाई कुल्टी में हीरापुर से 16 कि०मी० पश्चिम में तथा तीसरी इकाई बर्नपुर में आसनसोल से 5 कि०मी० दक्षिण पश्चिम में है। कुल्टी के कारखाने में इस्पात-पिण्ड तथा हीरापुर में लौह-पिण्ड और बर्नपुर में तैयार इस्पात बनाया जाता है। ये तीनों कारखाने संगठित रूप से कार्य करते हैं। सन 1976 से इनका प्रबंधन भारतीय इस्पात प्राधिकरण कर रहा है।

इन केंद्रों में निम्नलिखित सुविधाएँ उपलब्ध हैं-

  • लोहा झारखण्ड की सिंहभूम तथा ओडिशा की म्यूरभंज की बादाम पहाड़ियों से प्राप्त होता है।
  • कोयला निकटवर्ती झरिया एवं रानीगंज की खानों से मंगवाया जाता है।
  • चूने का पत्थर पाराघाट तथा गंगपुर से उपलब्ध हो जाता है।
  • इस कारखाने को दामोदर नदी से जल की सुविधा प्राप्त है।
  • बिहार एवं पश्चिमी बंगाल से सस्ता श्रम उपलब्ध है।
  • यातायात की सुविधा आसनसोल जंक्शन से प्राप्त है।

कोलकाता तथा हुगली के औद्योगिक क्षेत्र यहाँ से 200 कि०मी० दूर हैं। इसकी उत्पादन क्षमता एक लाख टन की है। बर्नपुर संयंत्र की इस्पात उत्पादन क्षमता लगभग 3.5 लाख टन प्रतिवर्ष है।।

3. विश्वेश्वरैया आयरन एण्ड स्टील वर्क्स लिमिटेड (VISWL)-कर्नाटक राज्य में भद्रावती के किनारे सन् 1923 में मैसूर आयरन एण्ड स्टील कंपनी के नाम से कारखाने की स्थापना हुई, लेकिन अब यह संयुक्त उपक्रम है, जिसका संचालन केंद्र सरकार तथा कर्नाटक सरकार करती है। इस उद्योग के लिए निम्नलिखित सुविधाएँ प्राप्त हैं

  • लोहा (अयस्क) कादूर जिले के बाबाबूदान की पहाड़ियों से प्राप्त होता है।
  • यहाँ कोयले की सविधा उपलब्ध नहीं है, लेकिन समीपवर्ती क्षेत्रों से लकडी के ईंधन का प्रयोग किया जाता है, लेकिन अब शिमसा विद्युत केंद्र से शक्ति के रूप में विद्युत भी प्राप्त है।
  • चूने का पत्थर भद्रावती से केवल 10 कि०मी० की दूरी पर भण्डीगुड्डा से प्राप्त होता है।
  • माल लाने तथा ले जाने के लिए यातायात, के साधन, विशेषकर रेल यातायात उपलब्ध है। यहाँ उत्तम किस्म का मिश्रित इस्पात बनाया जाता है। वर्तमान में यह कंपनी कर्नाटक सरकार तथा SAIL के स्वामित्व में है।

4. हिन्दुस्तान स्टील लिमिटेड (Hindustan Steel Limited) स्वतंत्रता के पश्चात् देश में औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि के उद्देश्य से भारत सरकार ने तीन कारखानों की स्थापना, राउरकेला, भिलाई एवं दुर्गापुर में की। ये सभी कारखाने विदेशी सहायता से चलाए जाते हैं। प्रारंभ में इन सभी कारखानों की उत्पादकता का लक्ष्य 10 लाख टन प्रति कारखाना निर्धारित किया गया था।
(क) राउरकेला – राउरकेला स्टील प्लांट ओडिशा राज्य में सारन तथा कोयना नदियों के संगम पर स्थित है। इस केंद्र को जर्मनी के सहयोग से स्थापित किया गया है। प्रारंभ में इसकी उत्पादन क्षमता 10 लाख टन इस्पात तैयार करने की थी, लेकिन अब यह 18 लाख टन से अधिक लोहा तथा इस्पात तैयार करता है।

इस केंद्र को निम्नलिखित सुविधाएँ प्राप्त हैं-

  • लौह-अयस्क 80 कि०मी० की दूरी पर बरसुआ की खानों से प्राप्त होता है।
  • कोयला झरिया, बोकारो तथा करगली की खानों से मंगवाया जाता है।
  • 150 कि०मी० की दूरी पर हीराकुण्ड बांध से जल-विद्युत प्राप्त की जाती है।
  • डोलोमाइट मध्य प्रदेश की हीरा खानों से उपलब्ध है।
  • चूना पत्थर 25 कि०मी० दूर हाथीबाड़ी से प्राप्त किया जाता है।
  • दक्षिणी-पूर्वी रेल मार्ग पर स्थित होने के कारण यातायात की पूर्ण सुविधा है।

(ख) भिलाई-इस लौह-इस्पात केंद्र की स्थापना सन् 1957 में तत्कालीन सोवियत रूस की सहायता से की गई। यह कारखाना छत्तीसगढ़ में भिलाई नामक स्थान पर रायपुर से पश्चिम में 22 कि०मी० दूर दुर्ग-रायपुर रेलमार्ग पर बनाया गया है। यह भारत का सबसे आदर्श संयंत्र माना जाता है। यह देश का सबसे बड़ा इस्पात संयंत्र भी है। इस कारखाने में लगभग 40 लाख टन इस्पात तथा लगभग 31.53 लाख टन तैयार इस्पात का निर्माण होता है। इस केंद्र को निम्नलिखित सुविधाएँ प्राप्त हैं

  • लौह-अयस्क 80 कि०मी० दक्षिण में डाली-राझरा लौह-क्षेत्र से प्राप्त होता है।
  • कोयला झरिया तथा कोरवा की खानों से आता है।
  • चूने का पत्थर 25 कि०मी० की दूरी पर नंदनी क्षेत्र से प्राप्त होता है।
  • तेंदुला नहर से जल की सुविधाएँ प्राप्त हैं।
  • मैंगनीज़ वारसियोनी की खानों से प्राप्त होता है।
  • निकटवर्ती क्षेत्रों में सस्ता तथा कुशल श्रम उपलब्ध है।

(ग) दुर्गापुर-यह केंद्र पश्चिमी बंगाल में आसनसोल के निकट सन् 1959 में स्थापित किया गया है। यह ब्रिटिश सरकार की आर्थिक एवं तकनीकी सहायता से संचालित है। सन् 1987-88 में इस कारखाने की उत्पादन क्षमता 9.36 लाख टन इस्पात पिण्ड तथा 8.3 लाख टन तैयार इस्पात उत्पादन करने की थी, लेकिन इस समय में यह केंद्र लगभग 16 लाख टन इस्पात पिण्ड तथा लगभग 12.5 लाख टन तैयार इस्पात का उत्पादन करता है। इस केंद्र को निम्नलिखित सुविधाएं प्राप्त हैं

  • लौह-अयस्क बिहार की खानों से प्राप्त होता है।
  • कोयला झरिया की खानों से मंगवाया जाता है।
  • चूना-पत्थर हाथीबाड़ी की खानों से प्राप्त किया जाता है, लेकिन सुंदरगढ़ से भी भविष्य में चूना पत्थर प्राप्त होने की संभावना है।
  • मैंगनीज़ ओडिशा के बराविल क्षेत्र से प्राप्त होता है।
  • जल की सुविधा दामोदर नदी पर बने दुर्गापुर बैराज से प्राप्त है।
  • कोलकाता आसनसोल रेलमार्ग पर स्थित होने के कारण यातायात की अच्छी सुविधा प्राप्त है।

(घ) बोकारो-हिन्दुस्तान स्टील लिमिटेड का यह चौथा कारखाना है। यह केंद्र सन् 1964 में बिहार राज्य के हजारीबाग जिले में बोकारो तथा दामोदर नदी के संगम पर स्थापित किया गया है। इस कारखाने को भी आर्थिक एवं तकनीकी सहायता तत्कालीन सोवियत रूस से प्राप्त थी। प्रारंभ में इसकी उत्पादन क्षमता 10 लाख टन निर्धारित की गई थी, लेकिन बाद में चार गुना बढ़ा दी गई। वर्तमान में इस केंद्र में 7.80 लाख टन कच्ची इस्पात तथा लगभग 30 लाख टन बिक्री योग्य इस्पात तैयार की गई। इस केंद्र को निम्नलिखित सुविधाएँ उपलब्ध हैं

  • लौह-अयस्क ओडिशा के क्योंझर जिले में 250 कि०मी० की दूरी से मंगवाया जाता है।
  • बोकारो स्वयं कोयले का क्षेत्र है तथा कुछ कोयला झरिया से भी मंगवाया जाता है।
  • दामोदर घाटी परियोजना (DVC) से सस्ती जल-विद्युत भी उपलब्ध है।
  • बिहार के पलामू जिले से चूने का पत्थर मंगवाया जाता है।
  • यह केंद्र कोलकाता बंदरगाह से 300 कि०मी० की दूरी पर स्थित होने के कारण व्यापार के लिए भी सुविधाजनक है।
  • रेल यातायात एवं श्रमिकों की सुविधाएँ भी इस केंद्र को प्राप्त हैं।

उपर्युक्त कारखानों के अतिरिक्त हिंदुस्तान स्टील लिमिटेड ने 3 इस्पात केंद्रों की योजना पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में तैयार की, जिनमें तमिलनाडु में सेलम, आंध्र प्रदेश में विशाखापट्टनम तथा कर्नाटक में विजयनगर क्षेत्र मुख्य हैं। तमिलनाडु के सेलम केंद्र ने सन् 1982 से उत्पादन शुरू कर दिया है। विशाखापट्टनम् का केंद्र अति आधुनिक मशीनों एवं सुविधाओं के साथ स्थापित है।

प्रश्न 8.
भारत में सूती वस्त्र उद्योग के विकास तथा वितरण का विस्तृत वर्णन करें।
अथवा
भारत में सूती वस्त्र उद्योग का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत में सूती वस्त्र उद्योग के वितरण व उत्पादन का वर्णन करें।
उत्तर:
जिन उद्योगों को कच्चा माल कृषि से प्राप्त होता है, उन्हें कृषि पर आधारित उद्योग कहते हैं। इनमें वस्त्र उद्योग, चीनी उद्योग, चमड़ा उद्योग तथा तेल उद्योग प्रमुख हैं। वस्त्र उद्योग के अंतर्गत सूती वस्त्र, रेशमी वस्त्र, ऊनी कृत्रिम रेशम के वस्त्र सम्मिलित हैं।

सूती वस्त्र उद्योग (Cotton Textile Industry) भारतीय सूती वस्त्र उद्योग अत्यंत प्राचीन है। ईसा से 4,000 वर्ष पूर्व यहाँ के वस्त्रों की विश्व में ख्याति थी। ‘ढाका की मलमल’ संपूर्ण विश्व में विख्यात थी, किंतु उस समय यह उद्योग घरेलू उद्योग के रूप में विकसित था। साधारण उपकरणों की सहायता से वस्त्र बनाए जाते थे। श्रम तथा समय अधिक लगने के कारण कपड़े की उत्पादन लागत अधिक थी। यूरोप में मशीनी क्रांति के कारण विद्युत संचालित यंत्रों से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय कपड़े की कीमतें अधिक होने के कारण भारतीय कपड़ा विश्व बाजार में प्रतिस्पर्धा से हट गया। भारत में अंग्रेजी शासन के दौरान इस उद्योग की अत्यंत क्षति हुई। भारतीय कपास मानचेस्टर (ब्रिटेन) सूती वस्त्र उद्योग के लिए भेजी जाने लगी और भारतीय वस्त्र का गौरवशाली इतिहास लुप्त हो गया।

सन् 1851 में भारत में मुंबई में पहली आधुनिक मिल की स्थापना हुई। मुंबई की अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों (कपास तथा अनुकूल जलवायु) ने इस उद्योग के विकास को प्रोत्साहित किया। सन् 1861 में अहमदनगर में शाहपुर मिल तथा सन् 1863 में कैलिकों मिल की स्थापना की गई। स्वतंत्रता के बाद भारत में इस उद्योग को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए गए। भारत पुनः कपडे के उत्पादन में विश्व में अपना प्रमुख स्थान बनाने के प्रयास में है। आज भारत में अनेक किस्मों का कपड़ा तैयार किया जाता है, जिसकी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मांग है।

उत्पादन एवं वितरण (Production and Distribution) देश की अर्थव्यवस्था में सूती वस्त्र की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। वर्ष 2012 में 2708 सूती वस्त्र निर्माण मिलें थीं। इनमें से 192 मिलें सार्वजनिक क्षेत्र में, 153 मिलें निगम अथवा सहकारी क्षेत्र .. में तथा अन्य 2,363 मिलें निजी क्षेत्र में थीं। 1951 में संगठित सेक्टर का उत्पादन 81% था। देश में उत्पादित सूती वस्त्र का 83.1% विकेन्द्रित सेक्टर में पावरलूम द्वारा व 12.2% हैंडलूम द्वारा व 1.4% अन्य द्वारा उत्पादित किया जाता है। हमारे देश में असंगठित क्षेत्र में सूती वस्त्र बनाने के 3,500 से अधिक छोटे-छोटे कारखाने हैं जहाँ लगभग एक करोड़ श्रमिक काम करते हैं। 2016-17 में देश में सूती वस्त्र का उत्पादन लगभग 33.09 मिलियन टन हुआ। 2017-18 में यह उत्पादन घटकर लगभग 32.27 मिलियन टन हो गया।

राष्ट्र महाराष्ट्र राज्य सूती वस्त्र के उत्पादन में भारत का प्रथम राज्य है, जो भारत का 38% कपड़ा तैयार करता है। इस राज्य में सूती वस्त्र की लगभग 125 मिलें हैं, जिनमें से 65 मिलें अकेले मुंबई महानगर में हैं, इसलिए मुंबई को ‘भारत का मानचेस्टर’ कहते हैं। मुंबई में सूती वस्त्र उद्योग के विकास के लिए निम्नलिखित अनुकूल भौगोलिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं

  • मुंबई के पृष्ठ प्रदेश में काली मिट्टी का क्षेत्र है जो कपास के उत्पादन के लिए सर्वोत्तम क्षेत्र है अर्थात् कच्चे माल की पूर्ति आसानी से पर्याप्त रूप से हो जाती है
  • समुद्र तट पर स्थित होने के कारण मुंबई की जलवायु नम तथा आर्द्र है, जिसमें धागा आसानी से टूटता नहीं है तथा वस्त्र बनाने में आसानी रहती है
  • मुंबई के निकट पश्चिमी घाट में कई जल विद्युत् केंद्र स्थापित हैं, जिससे ऊर्जा का संकट नहीं है
  • मुंबई स्वयं भारत की एक प्रमुख बंदरगाह है जिससे भारी मशीनों के आयात एवं निर्मित माल को भेजने में सुविधा रहती है
  • मुंबई महानगर देश के विभिन्न भागों से रेल लाइनों तथा सड़कों से जुड़ा हुआ है, जिससे यातायात की पूर्ण सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

2. गुजरात-सूती वस्त्र के उत्पादन में गुजरात का दूसरा स्थान है। अहमदाबाद सूती वस्त्र का सबसे बड़ा केंद्र है। यहाँ सूती कपड़े की लगभग 73 मिलें हैं। अन्य महत्त्वपूर्ण केंद्र भावनगर, पोरबंदर, राजकोट आदि हैं। संपूर्ण गुजरात में सूती कपड़े की 120 से अधिक मिलें हैं। अहमदाबाद में सूती वस्त्र उद्योग के विकास के लिए निम्नलिखित अनुकूल सुविधाएँ उपलब्ध हैं

  • अहमदाबाद कपास उत्पादक क्षेत्र के निकट स्थित है
  • आर्द्र एवं नम जलवायु है
  • मुंबई तथा अन्य महानगरों की तुलना में यहाँ भूमि सस्ती है जिससे उद्योगों के स्थानीयकरण को बढ़ावा मिलता है
  • सस्ती जल-विद्युत् उपलब्ध है
  • सस्ते एवं कुशल श्रमिक उपलब्ध हैं
  • अहमदाबाद यातायात एवं संचार के साधनों द्वारा देश के महत्त्वपूर्ण महानगरों से जुड़ा हुआ है।

3. मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश में कपास बहुतायत में उत्पन्न होती है। शक्ति के साधन के रूप में कोयले की खाने हैं तथा सस्ते श्रमिक भी उपलब्ध हैं। मध्य प्रदेश राज्य में इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, इंदौर, जबलपुर एवं भोपाल प्रमुख सूती वस्त्र के उत्पादक केंद्र हैं।

4. उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश में कच्चा माल (कपास) उत्पन्न नहीं होता फिर भी यहाँ सती वस्त्र के कारखाने हैं। कच्चे माल के आ राज्य में अन्य सभी भौगोलिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। कानपुर राज्य सूती वस्त्र का सबसे बड़ा उत्पादक केंद्र है। यहाँ सूती वस्त्र की 17 मिलें हैं। इसे उत्तर प्रदेश का ‘मानचेस्टर’ कहा जाता है। उत्तर प्रदेश में जनसंख्या सघन होने के कारण श्रमिक पर्याप्त मात्रा में मिल जाते हैं। कानपुर के अतिरिक्त आगरा, वाराणसी, मुरादाबाद, बरेली, मोदीनगर, रामपुर और मिर्जापुर में भी सूती वस्त्र की मिलें हैं।

5. पश्चिमी बंगाल-मुंबई की तरह कोलकाता भी भारत की प्रमुख बंदरगाह है। यहाँ की जलवायु सूती वस्त्र उद्योग के लिए आदर्श है। कोलकाता स्वतंत्रता के पूर्व से ही विकसित महानगर रहा है। अनेक पूंजीपतियों एवं उद्योगपतियों का केंद्र कोलकाता, निवेश के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ उपलब्ध करवाता है तथा सूती वस्त्र उद्योग की स्थापना में भी इनका मुख्य हाथ रहा है। कोलकाता बंदरगाह से दक्षिणी-पूर्वी एशियाई देशों से आयात-निर्यात की सुविधा है। कोलकाता हुगली, हावड़ा, मुर्शीदाबाद, सेरमपुर, पानीहर आदि वस्त्र उद्योग के केंद्र हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 निर्माण उद्योग 1

6. तमिलनाडु-तमिलनाडु दक्षिणी भारत का प्रमुख सूती वस्त्र उत्पादक राज्य है। यहाँ देश की सबसे अधिक 208 सूती वस्त्र की मिलें हैं, लेकिन ये छोटी-छोटी मिलें हैं, जिसके कारण उत्पादन अधिक नहीं है। तमिलनाडु में कोयंबटूर सबसे बड़ा केंद्र है। इसके अतिरिक्त चेन्नई, मदुरै, त्रिनेवली, सेलम, पैरांबूर, कोकनाडा आदि प्रमुख केंद्र हैं।

7. अन्य राज्य-

  • आंध्र प्रदेश व तेलंगाना हैदराबाद, सिकंदराबाद, गुंटूर, वारंगल तथा देवगिरी।
  • कर्नाटक मैसूर, बंगलौर, बिलारी, मंगलौर, चित्तल दुर्ग।
  • बिहार-पटना, गया, भागलपुर, भदानी।
  • केरल-त्रिवेंद्रम, अलगप्पा, चलापुरम, पापनीसेरी।
  • पंजाब-फगवाड़ा, अमृतसर, लुधियाना।
  • हरियाणा-भिवानी, रोहतक, हिसार।

प्रश्न 9.
मुंबई-पुणे औद्योगिक प्रदेश का वर्णन कीजिए।
औद्योगिक क्षेत्र से आप क्या समझते हैं? भारत में मुंबई-पुणे औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार से वर्णन करें।
उत्तर:
औद्योगिक क्षेत्र या प्रदेश का अर्थ (Meaning of Industrial Region)-भारत में उद्योगों का केंद्रीकरण कुछ विशिष्ट स्थानों या प्रदेशों में हुआ है। उसके कई कारण हैं, जहाँ पर उद्योगों की स्थापना के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ मिल जाती हैं, वहीं उद्योगों का जमघट या समूह मिलता है, जिन्हें औद्योगिक क्षेत्र, समूह अथवा औद्योगिक प्रदेश कहते हैं। भारत औद्योगिक दृष्टि से विकासोन्मुख राष्ट्र है, लेकिन औद्योगिक विकास कुछ विशिष्ट क्षेत्रों या प्रदेशों तक सीमित रह गया है। देश में समान रूप से इनका वितरण नहीं है। औद्योगिक प्रदेश या गुच्छ को पहचानने के अग्रलिखित आधार हैं

  • उद्योग पास-पास तथा अधिक संख्या में हों।
  • विशाल जनसंख्या तथा श्रमिकों को रोजगार की सुविधाएँ उपलब्ध हों।
  • किसी प्रमुख उद्योग के साथ-साथ उस पर निर्भर कुछ अन्य छोटे उद्योग भी हों।

मुंबई-पुणे औद्योगिक प्रदेश यह देश का दूसरा प्रमुख औद्योगिक प्रदेश है। इस प्रदेश का प्रमुख उद्योग सूती वस्त्र उद्योग है। यहाँ देश का लगभग 40% सूती वस्त्र तैयार किया जाता है। इस औद्योगिक प्रदेश की पृष्ठभूमि में कपास पर्याप्त मात्रा में मिलती है। मुंबई में सूती वस्त्र उद्योग के अतिरिक्त रेशमी तथा ऊनी वस्त्र उद्योग भी विकसित हैं। औषधि-निर्माण उद्योग, इंजीनियरिंग उद्योग, रसायन उद्योग, वनस्पति तेल और बिजली का सामान तैयार करने के उद्योग भी इस प्रदेश में विकसित हैं। फिल्म उद्योग के लिए मुंबई विश्व भर में प्रसिद्ध है, इसलिए इसे भारत का हॉलीवुड भी कहते हैं। इस औद्योगिक प्रदेश के विकास में निम्नलिखित कारकों का योगदान है-

  • इस औद्योगिक प्रदेश में अंग्रेजी शासन-काल से ही उद्योग स्थापित थे।
  • इस प्रदेश की पृष्ठभूमि में काली मिट्टी का क्षेत्र, जो कपास के लिए वरदान है, सूती वस्त्र उद्योग के लिए कच्चे माल की पूर्ति करने में सक्षम है।
  • पश्चिमी घाट की पहाड़ियों में जल-विद्युत् से उद्योगों के लिए ऊर्जा की पूर्ण व्यवस्था है।
  • मुंबई भारत की व्यापारिक एवं व्यावसायिक राजधानी है, जहाँ बैंकिंग, बीमा तथा बड़े-बड़े पूंजीपति और विदेशी कंपनियाँ भी रहती हैं, जिससे औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन मिला है। इस औद्योगिक प्रदेश में यातायात की सभी सुविधाएँ, सड़क, रेल, जल और वायु मौजूद हैं। मुंबई देश के सभी प्रमुख नगरों में परिवहन इन सुविधाओं द्वारा जुड़ा है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 8 निर्माण उद्योग

प्रश्न 10.
भारत में चीनी उद्योग के वितरण व उत्पादन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में चीनी उद्योग का वितरण-भारत में विश्व का सबसे अधिक गन्ना उत्पन्न होने के बावजूद भी चीनी के उत्पादन में हमारा क्यूबा के बाद दूसरा स्थान है। हमारे देश में चीनी के अतिरिक्त गन्ने से खांड तथा गुड़ भी बनाए जाते हैं। कारखाने पुराने तथा उनकी क्षमता कम है। गन्ने की प्रजाति उन्नत किस्म की नहीं है। चीनी उद्योग मौसमी उद्योग होने के कारण इसमें श्रमिकों को स्थायी रूप से रोजगार नहीं दिया जा सकता तथा पिराई के समय श्रमिकों का अभाव बहुत बड़ी समस्या है। चीनी उद्योग के स्थानीयकरण में गन्ने की महत्त्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए चीनी मिलें गन्ने के उत्पादन क्षेत्रों में लगाई जाती हैं। गन्ना भारी होने के कारण इसका परिवहन व्यय अधिक आता है। भारत की लगभग 90% चीनी देश के 6 राज्यों में उत्पन्न होती हैं। ये राज्य हैं महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र
प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक।
1. महाराष्ट्र-चीनी के उत्पादन की दृष्टि से महाराष्ट्र का स्थान देश में प्रथम है। देश की लगभग 37% चीनी महाराष्ट्र राज्य में उत्पन्न होती है। महाराष्ट्र में अहमदनगर, कोल्हापुर, पुणे, सतारा, शोलापुर, औरंगाबाद और सांगली राज्य में चीनी की मिलें हैं।

2. उत्तर प्रदेश-चीनी मिलों की संख्या की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का दूसरा स्थान है। इस राज्य में चीनी मिलें दो क्षेत्रों में फैली हैं-

  • गंगा-यमुना के दोआब (सहारनपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद),
  • तराई क्षेत्र-गोरखपुर, बस्ती, देवरिया, सीतापुर, गोंडा, फैजाबाद आदि।

3. आंध्र प्रदेश-यहाँ गन्ने के उत्पादन के लिए उत्तम जलवायु है, लेकिन वाणिज्यिक फसलों में रुचि लेने के कारण पिछले कुछ वर्षों में यहाँ गन्ने का उत्पादन घटा है। आंध्र प्रदेश में विशाखापट्टनम, पूर्वी तथा पश्चिमी गोदावरी, कृष्णा, हैदराबाद, चित्तूर आदि जिलों में चीनी मिलें हैं।।

4. कर्नाटक-यहाँ बेलगांव, हापेरट, पांडवपुरा, गंगावती, कोलार आदि जिलों में लगभग 11 चीनी मिलें हैं। 5. बिहार-बिहार में चीनी की मिलें चम्पारन, सारन, पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया, शाहबाद तथा भागलपुर जिलों में हैं।

अन्य राज्य-उपर्युक्त राज्यों के अलावा तमिलनाडु में कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली, अर्काट, रामनाथपुरम, पंजाब में गुरदासपुर, अमृतसर, पटियाला। हरियाणा में यमुनानगर, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, अंबाला तथा जींद में चीनी मिलें हैं।

उत्पादन (Production)-भारत में गन्ना चीनी तैयार करने का मुख्य स्रोत है। चीनी के अतिरिक्त गन्ने से गुड़ और खांड भी तैयार की जाती है। सन् 1931 तक भारत में चीनी उद्योग विकसित नहीं था। हमें विदेशों से चीनी का आयात करना पड़ता था। सन् 1932 में सरकार ने स्वदेशी चीनी को प्रोत्साहन देकर आयात शुल्क में वृद्धि की, जिससे चीनी उद्योग का विकास हुआ। सन् 1931 में भारत में कुल 21 चीनी मिलें थीं। वर्ष 1950-51 देश में जहाँ 139 चीनी मिलें थीं, वहाँ 2011-12 में चीनी मिलों की संख्या बढ़कर 506 हो गई और चीनी का उत्पादन बढ़कर 177 लाख टन से अधिक हो गया।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. भारत में खनिज मुख्यतः कितनी विस्तृत पट्टियों में सांद्रित हैं? ।
(A) तीन
(B) पाँच
(C) चार
(D) आठ
उत्तर:
(A) तीन

2. राजस्थान भवन निर्माण के किस प्रकार के पत्थरों में समृद्ध है?
(A) संगमरमर
(B) ग्रेनाइट
(C) बलुआ पत्थर
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

3. धात्विक खनिज का उदाहरण नहीं है-
(A) ताँबा
(B) अभ्रक
(C) बॉक्साइट
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(B) अभ्रक

4. अधात्विक खनिज का उदाहरण नहीं है-
(A) जिप्सम
(B) नमक
(C) बॉक्साइट
(D) कोयला
उत्तर:
(C) बॉक्साइट

5. एल्यूमिनियम का मुख्य स्रोत है-
(A) ताँबा
(B) सोना
(C) बॉक्साइट
(D) अभ्रक
उत्तर:
(C) बॉक्साइट

6. भारत का कौन-सा राज्य बॉक्साइट उत्पादन में अग्रणी है?
(A) हरियाणा
(B) झारखंड
(C) ओडिशा
(D) महाराष्ट्र
उत्तर:
(C) ओडिशा

7. बाबाबदून की पहाड़ियों में किस खनिज पदार्थ का उत्पादन होता है-
(A) ताँबा
(B) सोना
(C) अभ्रक
(D) बॉक्साइट
उत्तर:
(C) अभ्रक

8. भारत में वर्तमान में कितने तेल शोधन कारखाने कार्यरत हैं?
(A) 13
(B) 17
(C) 22
(D) 28
उत्तर:
(C) 22

9. झारखंड में स्थित कोडरमा निम्नलिखित में से किस खनिज का अग्रणी उत्पादक है?
(A) बॉक्साइट
(B) अभ्रक
(C) लौह अयस्क
(D) ताँबा
उत्तर:
(B) अभ्रक

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

10. निम्नलिखित चट्टानों में से किस चट्टान के स्तरों में खनिजों का निक्षेपण और संचयन होता है?
(A) तलछटी चट्टानें
(B) कायांतरित चट्टानें
(C) आग्नेय चट्टानें
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) कायांतरित चट्टानें

11. मोनाजाइट रेत में निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज पाया जाता है?
(A) खनिज तेल
(B) यूरेनियम
(C) थोरियम
(D) कोयला
उत्तर:
(C) थोरियम

12. भारत में तेल उत्पादक क्षेत्र है-
(A) गुजरात तट
(B) पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र
(C) पूर्वी अपतटीय क्षेत्र
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

13. मुंबई हाई और बेसीन तेल क्षेत्र किस क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं?
(A) पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र
(B) पूर्वी अपतटीय क्षेत्र
(C) गुजरात तट
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र

14. नामचिक-नामफुक कोयला क्षेत्र अवस्थित हैं-
(A) महाराष्ट्र में
(B) झारखण्ड में
(C) छत्तीसगढ़ में
(D) अरुणाचल प्रदेश में
उत्तर:
(D) अरुणाचल प्रदेश में

15. भारत में किस राज्य में कोयले के सर्वाधिक भंडार पाए जाते हैं?
(A) पंजाब में
(B) ओडिशा में
(C) झारखण्ड में
(D) केरल में
उत्तर:
(C) झारखण्ड में

16. इंदिरा गाँधी परमाणु ऊर्जा संयंत्र नाम से जाना जाता है?
(A) तारापुर परमाणु केंद्र
(B) नरोरा परमाणु केंद्र
(C) कलपक्कम परमाणु केंद्र
(D) कैगा परमाणु केंद्र
उत्तर:
(C) कलपक्कम परमाणु केंद्र

17. भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर कहाँ हैं
(A) केरल में
(B) कर्नाटक में
(C) झारखण्ड में
(D) महाराष्ट्र में
उत्तर:
(D) महाराष्ट्र में

18. अमरकंटक किस खनिज के लिए प्रसिद्ध है?
(A) सोना
(B) लोहा
(C) बॉक्साइट
(D) ताँबा
उत्तर:
(C) बॉक्साइट

19. सूर्य की गर्मी से प्राप्त ऊर्जा को कहा जाता है
(A) सौर ऊर्जा
(B) पवन ऊर्जा
(C) ज्वारीय ऊर्जा
(D) नाभिकीय ऊर्जा
उत्तर:
(A) सौर ऊर्जा

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

20. छत्तीसगढ़ की बेलाडिला पहाड़ियाँ किस अयस्क के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं?
(A) लौह अयस्क
(B) बॉक्साइट
(C) लौह-इस्पात
(D) अभ्रक
उत्तर:
(A) लौह अयस्क

21. ऊर्जा का परम्परागत स्रोत नहीं है
(A) कोयला
(B) बायोगैस
(C) पेट्रोलियम
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(B) बायोगैस

22. हजीरा-विजयपुर जगदीशपुर गैस पाइप लाइन की लंबाई है?
(A) 1750 कि०मी०
(B) 1500 कि०मी०
(C) 1220 कि०मी०
(D) 900 कि०मी०
उत्तर:
(A) 1750 कि०मी०

23. निम्नलिखित में से कौन-सा ऊर्जा खनिज है?
(A) कोयला
(B) पेट्रोलियम
(C) प्राकृतिक गैस
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

24. सबसे उत्तम किस्म का लोहा कौन-सा होता है?
(A) मैग्नेटाइट
(B) हेमेटाइट
(C) लिमोनाइट
(D) सिडेराइट
उत्तर:
(A) मैग्नेटाइट

25. उद्योगों में सबसे अधिक किस प्रकार के लोहे का उपयोग किया जाता है?
(A) मैग्नेटाइट का
(B) हेमेटाइट का
(C) लिमोनाइट का
(D) सिडेराइट का
उत्तर:
(B) हेमेटाइट का

26. मैंगनीज़ का उपयोग किस धातु का विनिर्माण करने में किया जाता है?
(A) इस्पात
(B) सोना
(C) चाँदी
(D) एल्यूमिनियम
उत्तर:
(A) इस्पात

27. निम्नलिखित में से कौन-सा ऊर्जा का गैर-परंपरागत स्रोत है?
(A) सौर ऊर्जा
(B) परमाणु ऊर्जा
(C) भू-तापीय ऊर्जा
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

28. ‘रैट होल’ उत्खनन किस राज्य में किया जाता है?
(A) गुजरात में
(B) राजस्थान में
(C) झारखण्ड में
(D) मेघालय में
उत्तर:
(D) मेघालय में

29. कृष्णा-गोदावरी बेसिन किस खनिज के भण्डारों के लिए प्रसिद्ध है?
(A) लौह-अयस्क के
(B) अभ्रक के
(C) प्राकृतिक गैस के
(D) कोयले के
उत्तर:
(C) प्राकृतिक गैस के

30. पृथ्वी से खनिज किस अवस्था में पाए जाते हैं?
(A) ठोस
(B) द्रव
(C) गैसीय
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

31. कोयला किन चट्टानों में बनता है?
(A) कायांतरित
(B) अवसादी
(C) आग्नेय
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) अवसादी

32. डिगबोई, नहारकटिया भारत के किस राज्य के महत्त्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्र हैं?
(A) महाराष्ट्र के
(B) गुजरात के
(C) मध्य प्रदेश के
(D) असम के
उत्तर:
(D) असम के

33. धात्विक खनिज का उदाहरण है
(A) नमक
(B) गंधक
(C) जिप्सम
(D) सोना
उत्तर:
(D) सोना

34. अधात्विक खनिज का उदाहरण है-
(A) टिन
(B) ऐल्यूमीनियम
(C) गंधक
(D) बॉक्साइट
उत्तर:
(C) गंधक

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

35. भारत के किस राज्य में सर्वाधिक थोरियम निकाला जाता है?
(A) कर्नाटक
(B) केरल
(C) तमिलनाडु
(D) आंध्र प्रदेश
उत्तर:
(B) केरल

36. भारत में उत्तम किस्म का लोहा कहाँ से प्राप्त होता है?
(A) जादूगुड़ा से
(B) बैलाडिला से
(C) किरीबुरु से
(D) क्योंझर से
उत्तर:
(B) बैलाडिला से

37. सबसे उत्तम किस्म का लौह-अयस्क होता है-
(A) सिडेराइट
(B) हैमेटाइट
(C) मैग्नेटाइट
(D) लिमोनाइट
उत्तर:
(C) मैग्नेटाइट

38. सबसे उत्तम किस्म का कोयला होता है
(A) लिग्नाइट
(B) एंथ्रासाइट
(C) बिटुमिनस
(D) पीट
उत्तर:
(B) एंथ्रासाइट

39. टरशरी किस्म का कोयला कितने वर्ष पुराना है?
(A) लगभग 2.5 करोड़ वर्ष
(B) लगभग 3.5 करोड़ वर्ष
(C) लगभग 4.5 करोड़ वर्ष
(D) लगभग 5.5 करोड़ वर्ष
उत्तर:
(D) लगभग 5.5 करोड़ वर्ष

40. गोंडवाना समूह का कोयला कितने वर्ष पुराना है?
(A) लगभग 10 करोड़ वर्ष
(B) लगभग 20 करोड़ वर्ष
(C) लगभग 25 करोड़ वर्ष
(D) लगभग 30 करोड़ वर्ष
उत्तर:
(B) लगभग 20 करोड़ वर्ष

41. एक ऐसा खनिज, जिसका भारत को सबसे अधिक आयात करना पड़ता है-
(A) कोयला
(B) पेट्रोलियम
(C) मैगनीज़
(D) लोहा
उत्तर:
(B) पेट्रोलियम

42. भारत में लौह-अयस्क का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है-
(A) गुजरात
(B) ओडिशा
(C) कर्नाटक
(D) राजस्थान
उत्तर:
(B) ओडिशा

43. मुंबई (बॉम्बे) हाई किसलिए प्रसिद्ध है?
(A) परमाणु रिएक्टर के लिए
(B) पेट्रोलियम भंडार के लिए
(C) पनडुब्बी निर्माण के लिए
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) पेट्रोलियम भंडार के लिए

44. बिजली के उपकरण बनाने में सबसे अधिक कौन-सी धातु का प्रयोग किया जाता है?
(A) लोहा
(B) ताँबा
(C) सीसा
(D) जस्ता
उत्तर:
(B) ताँबा

45. राष्ट्रीय ताप बिजली निगम की स्थापना कब की गई?
(A) सन् 1952 में
(B) सन् 1954 में
(C) सन् 1975 में
(D) सन् 1988 में
उत्तर:
(C) सन् 1975 में

46. मैंगनीज़ उत्पादन में कौन-सा राज्य अग्रणी है?
(A) राजस्थान
(B) ओडिशा
(C) गुजरात
(D) छत्तीसगढ़
उत्तर:
(B) ओडिशा

47. नरोरा परमाणु ऊर्जा केंद्र स्थित है
(A) तमिलनाडु
(B) कर्नाटक
(C) उत्तर प्रदेश
(D) पंजाब
उत्तर:
(C) उत्तर प्रदेश

48. नेवेली तापीय शक्ति केंद्र स्थित है-
(A) आंध्र प्रदेश
(B) महाराष्ट्र
(C) मध्य प्रदेश
(D) तमिलनाडु
उत्तर:
(D) तमिलनाडु

49. पेरियार जल विद्युत् उत्पादन केंद्र कहाँ स्थित है?
(A) आंध्र प्रदेश
(B) केरल
(C) कर्नाटक
(D) तमिलनाडु
उत्तर:
(B) केरल

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
महाराष्ट्र राज्य में पेट्रोकैमिकल का मुख्य उत्पादन केंद्र कहाँ है?
उत्तर:
पुणे में।

प्रश्न 2.
सर्वप्रथम अपतटीय क्षेत्र में कहाँ तेल खोजा गया?
उत्तर:
गुजरात के अलियाबेट नामक द्वीप पर।

प्रश्न 3.
सर्वोत्तम किस्म का लौह अयस्क कौन-सा होता है?
उत्तर:
मैग्नेटाइट अयस्क।

प्रश्न 4.
किस प्रकार के लौह अयस्क का खनन अनार्थिक माना जाता है?
उत्तर:
सिडेराइट अयस्क का।

प्रश्न 5.
राजस्थान राज्य में परमाणु शक्ति केंद्र कहाँ है?
उत्तर:
रावतभाटा परमाणु शक्ति केंद्र (कोटा)।

प्रश्न 6.
ऊर्जा खनिज संसाधनों के कोई दो उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. कोयला
  2. पेट्रोलियम

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

प्रश्न 7.
बॉक्साइट किस काम आता है?
उत्तर:
बॉक्साइट से एल्यूमिनियम धातु बनाई जाती है।

प्रश्न 8.
केरल के कोई दो अभ्रक उत्पादक क्षेत्रों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. पुन्नालूर
  2. नय्यूर।

प्रश्न 9.
भारत के किस राज्य का अभ्रक उत्पादन में प्रथम स्थान है?
उत्तर:
आंध्र प्रदेश का।

प्रश्न 10.
भारत में विश्व का कितने प्रतिशत अभ्रक निकाला जाता है?
उत्तर:
लगभग 80%

प्रश्न 11.
पुरुलिया व बांकुरा में किस धातु का उत्पादन होता है?
उत्तर:
अभ्रक का।

प्रश्न 12.
भारत का सबसे बड़ा और सबसे पुराना परमाणु ऊर्जा केंद्र कौन-सा है?
उत्तर:
तारापुर परमाणु ऊर्जा केंद्र (महाराष्ट्र)।

प्रश्न 13.
धात्विक खनिजों के कोई दो उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. लोहा
  2. ताँबा।

प्रश्न 14.
अधात्विक खनिजों के कोई दो उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. अभ्रक
  2. पोटाश।

प्रश्न 15.
भारत में एक प्रकार के लौह-अयस्क का नाम लिखें।
उत्तर:
मेग्नेटाइट।

प्रश्न 16.
भारत के दो परमाणु शक्ति गृहों केंद्रों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. तारापुर
  2. कैगा।

प्रश्न 17.
भारत में डोलोमाइट के दो उत्पादक राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. राजस्थान
  2. गुजरात।

प्रश्न 18.
भारत में कल्पक्कम और हीराकुड किसलिए प्रसिद्ध है?
उत्तर:
अणु शक्ति और जल विद्युत के कारण।

प्रश्न 19.
भारत की पहली पाइपलाइन कहाँ बिछाई गई?
उत्तर:
भारत की पहली पाइपलाइन असम में नाहरकटिया से बरोनी तक बिछाई गई जिसकी लम्बाई लगभग 152 कि०मी० है।

प्रश्न 20.
भारत में पवन ऊर्जा के उत्पादन में किस राज्य का प्रथम स्थान है?
उत्तर:
तमिलनाडु का।

प्रश्न 21.
भारत में परमाणु कार्यक्रम के शुभारंभकर्ता कौन थे?
उत्तर:
डॉ० होमी जहाँगीर भाभा।

प्रश्न 22.
ओडिशा के कोरापुट जिले में पंचपतमाली निक्षेप किस धातु के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर:
बॉक्साइट के।

प्रश्न 23.
कौन-सा कोयला सबसे उत्तम किस्म का होता है?
उत्तर:
एंथेसाइट।

प्रश्न 24.
कौन-सा कोयला निम्न किस्म का होता है?
उत्तर:
लिग्माइट।

प्रश्न 25.
परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना कब की गई?
उत्तर:
सन् 1948 में।

प्रश्न 26.
भारतीय परमाणु विद्युत निगम की स्थापना कब की गई?
उत्तर:
सन् 1987 में।

प्रश्न 27.
भारत का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र कहाँ स्थित है?
उत्तर:
गुजरात में भुज के निकट माधापुर में।

प्रश्न 28.
भारत के किस राज्य में एशिया का सबसे बड़ा पवन ऊर्जा संयंत्र स्थित है?
उत्तर:
गुजरात में।

प्रश्न 29.
तमिलनाडु में पवन ऊर्जा संयंत्र कहाँ है?
उत्तर:
तूतीकोरिन में।

प्रश्न 30.
भारत में ज्वारीय ऊर्जा संयंत्र कहाँ स्थित है?
उत्तर:
गुजरात के कच्छ क्षेत्र में।

प्रश्न 31.
भारत में प्राकृतिक गैस के भंडार कहाँ पाए जाते हैं?
उत्तर:
कृष्णा-गोदावरी नदी बेसिन में।

प्रश्न 32.
राजस्थान में खेतड़ी की खानें किस खनिज के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं?
उत्तर:
ताँबा के लिए।

प्रश्न 33.
भारत के दो पेट्रोलियम उत्पादक राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. महाराष्ट्र
  2. गुजरात।

प्रश्न 34.
ओडिशा के कोई दो लौह अयस्क क्षेत्रों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. मयूरभंज
  2. सुंदरगढ़।

प्रश्न 35.
कर्नाटक के कोई दो लौह अयस्क क्षेत्रों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. बेलारी
  2. शिमोगा।

प्रश्न 36.
ओडिशा के दो मुख्य कोयला उत्पादन क्षेत्रों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. तलचर
  2. रामपुर।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

प्रश्न 37.
कोयला किस काम आता है?
उत्तर:
इसका उपयोग विद्युत उत्पादन और लौह अयस्क के प्रगलन के लिए किया जाता है।

प्रश्न 38.
महाराष्ट्र के एक अपतटीय पेट्रोलियम उत्पादन केंद्र का नाम लिखें।
उत्तर:
मुंबई हाई।

प्रश्न 39.
तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (ONGC) की स्थापना कब की गई?
उत्तर:
सन् 1956 में।

प्रश्न 40.
खनिजों की आत्मनिर्भरता में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
दूसरा।

प्रश्न 41.
भारत में ताँबा उत्पादन में किस राज्य का प्रथम स्थान है?
उत्तर:
मध्य प्रदेश का।

प्रश्न 42.
गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (GAIL) की स्थापना कब की गई?
उत्तर:
सन् 1984 में।

प्रश्न 43.
राणा प्रताप सागर ज उत्पादन केंद्र किस नदी पर स्थित है?
उत्तर:
चम्बल नदी पर।

प्रश्न 44.
भारत की किस नदी घाटी में गोंडवाना कोयला क्षेत्र है?
उत्तर:
दामोदर नदी घाटी में।

प्रश्न 45.
भारत में पहला परमाणु शक्ति केन्द्र कहाँ लगाया गया?
उत्तर:
मुम्बई में।

प्रश्न 46.
भारत में कोयला क्षेत्रों के दो समूहों के नाम लिखिए।
अथवा
कोयला मुख्यतः किन दो भूगर्मिक कालों की शैल क्रमों में पाया जाता है?
उत्तर:

  1. गोंडवाना निक्षेप समूह
  2. टर्शियरी निक्षेप समूह।

प्रश्न 47.
कलपक्कम परमाणु ऊर्जा केंद्र किस राज्य में स्थित है?
उत्तर:
तमिलनाडु में।

प्रश्न 48.
किस खनिज को ‘भूरा हीरा’ के नाम से भी जाना जाता है?
उत्तर:
लिग्नाइट।

प्रश्न 49.
भारत में लौह-अयस्क का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
ओडिशा।

प्रश्न 50.
मैंगनीज उत्पादन करने वाले दो राज्य बताएँ।
उत्तर:

  1. ओडिशा
  2. मध्यप्रदेश।

प्रश्न 51.
नाभिकीय ऊर्जा उत्पादन में प्रयुक्त दो खनिजों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. यूरेनियम
  2. थोरियम।

प्रश्न 52.
झरिया किस खनिज उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर:
कोयला उत्पादन।

प्रश्न 53.
झारखण्ड का कोई एक अभ्रक उत्पादक क्षेत्र का नाम बताएँ।
उत्तर:
हजारीबाग।

प्रश्न 54.
काकरापाड़ा परमाणु ऊर्जा केंद्र किस राज्य में स्थित है?
उत्तर:
गुजरात में।

प्रश्न 55.
नरोरा परमाणु ऊर्जा केंद्र किस राज्य में स्थित है?
उत्तर:
उत्तर प्रदेश में।

प्रश्न 56.
पेरियार जल विद्युत उत्पादन केंद्र किस राज्य में स्थित है?
उत्तर:
केरल में।

प्रश्न 57.
अंकलेश्वर में किस खनिज पदार्थ का उत्पादन होता है?
उत्तर:
खनिज तेल (पेट्रोलियम)।

प्रश्न 58.
रानीगंज में किस खनिज पदार्थ का उत्पादन होता है?
उत्तर:
कोयले का।

प्रश्न 59.
कोलार क्षेत्र में किस धातु का उत्पादन होता है?
उत्तर:
सोने (Gold) का।

प्रश्न 60.
हरियाणा में तेल परिष्करणशाला कहाँ है?
उत्तर:
पानीपत में।

प्रश्न 61.
असम राज्य के दो पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्रों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  1. डिगबोई
  2. नहारकटिया।

प्रश्न 62.
मुम्बई हाई कहाँ स्थित है?
उत्तर:
मुम्बई हाई मुम्बई के उत्तर:पश्चिम में लगभग 160 कि०मी० दूर अरब सागर में स्थित है।

प्रश्न 63.
निम्नलिखित का पूरा नाम लिखें GAIL, GSI, NMDC, BGML, NPCIL, NALCO, ONGC, MECL, HVJ, IBM, NTPC, IOCL
उत्तर:

  1. GAIL : Gas Authority of India Limited
  2. GSI : Geological Survey of India
  3. NMDC : National Mineral Development Corporation
  4. BGML : Bharat Gold Mines Limited
  5. NPCIL : Nuclear Power Corporation of India Limited
  6. NALCO : National Aluminium Company Limited
  7. ONGC : Oil and Natural Gas Corporation
  8. MECL : Mineral Exploration Corporation Limited
  9. HVJ : Hazira-Vijapur-Jagdishpur
  10. IBM : Indian Bureau of Mines
  11. NTPC : National Thermal Power Corporation Limited
  12. IOCL : Indian Oil Corporation Limited

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र कहाँ स्थित हैं?
उत्तर:
कर्नाटक में कैगा नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र। उत्तर प्रदेश में नरोरा नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र।

प्रश्न 2.
भारत के चार मुख्य कोयला उत्पादक राज्यों के नाम लिखें। अथवा झारखण्ड के चार कोयला उत्पादक क्षेत्रों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. झारखण्ड-रानीगंज, झरिया, बोकारो, गिरीडीह।
  2. महाराष्ट्र-वर्धा, काम्पटी, बांदेर।
  3. ओडिशा-तलचर, रामपुर।
  4. छत्तीसगढ़-कोरबा।

प्रश्न 3.
लौह में किन तत्त्वों का मिश्रण कर विभिन्न प्रकार का इस्पात बनाया जाता है?
उत्तर:
लौह में मैंगनीज, टंगस्टन और निकिल आदि तत्त्वों का मिश्रण कर विभिन्न प्रकार का इस्पात बनाया जाता है।

प्रश्न 4.
भारत के प्रमुख मैंगनीज उत्पादक राज्यों के नाम लिखें।
अथवा
ओडिशा व कर्नाटक के प्रमुख मैंगनीज उत्पादक क्षेत्रों के नाम लिखें।
अथवा
महाराष्ट्र के कोई दो मैंगनीज उत्पादक क्षेत्रों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. ओडिशा-कालाहंडी, केंदुझर, सुंदरगढ़, बोनाई।
  2. मध्य प्रदेश-बालाघाट, झाबुआ।
  3. कर्नाटक-बेल्लारी, बेलगाम, चित्रदुर्ग, तुमकुर।
  4. महाराष्ट्र-नागपुर, रत्नागिरी, भंडारा।

प्रश्न 5.
भारत के कोई चार ताँबा उत्पादक राज्यों के नाम लिखें।
अथवा
राजस्थान के कोई चार ताँबा उत्पादक क्षेत्रों के नाम लिखें।
अथवा
मध्य प्रदेश एवं झारखंड के दो-दो ताँबा उत्पादक क्षेत्रों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. मध्य प्रदेश-बालाघाट, बेतूल।
  2. राजस्थान-खेतड़ी, सिंघाना, झुंझुनु।
  3. झारखण्ड-सिंहभूम, हजारीबाग, परगना।
  4. कर्नाटक-चित्रदुर्ग, हासन।

प्रश्न 6.
भारत के कोई चार बॉक्साइट उत्पादक क्षेत्रों या राज्यों के नाम लिखें।
अथवा
ओडिशा (उड़ीसा) के कोई तीन बॉक्साइट उत्पादक क्षेत्रों के नाम लिखें।
अथवा
महाराष्ट्र के कोई चार बॉक्साइट उत्पादक क्षेत्रों के नाम लिखें। अथवा गुजरात के कोई चार बॉक्साइट उत्पादक क्षेत्रों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. ओडिशा-कालाहांडी, संभलपुर, कोरापुर।
  2. महाराष्ट्र-कोल्हापुर, सतारा, पुणे, रत्नागिरी।
  3. गुजरात-जामनगर, भावनगर, पोरबंदर, सूरत।
  4. मध्य प्रदेश-बालाघाट, कटनी, जबलपुर।

प्रश्न 7.
एल्यूमिनियम के कोई दो उपयोग लिखें।
उत्तर:

  1. इसका उपयोग कलपुर्जे बनाने में किया जाता है।
  2. इसका उपयोग दरवाजे, खिड़कियाँ और शटर आदि बनाने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 8.
खनिज ईंधन या शक्ति संसाधनों के मुख्य स्रोत बताइए।
उत्तर:

  1. कोयला
  2. खनिज तेल
  3. अणु शक्ति वाले खनिज; जैसे यूरेनियम, थोरियम आदि।

प्रश्न 9.
खनिज कितने प्रकार के होते हैं? नाम बताएँ।
अथवा
धात्विक खनिजों के कोई चार उदाहरण दें।
अथवा
अधात्विक खनिजों के कोई चार उदाहरण दें।
उत्तर:
खनिज मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं-

  1. धात्विक खनिज लौह अयस्क, मैंगनीज, सोना, ताँबा, बॉक्साइट आदि।
  2. अधात्विक खनिज-अभ्रक, पोटाश, जिप्सम, कोयला, पेट्रोलियम आदि।

प्रश्न 10.
भारत में कोई चार कोयला उत्पादक या भंडारक राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. झारखण्ड
  2. ओडिशा
  3. छत्तीसगढ़
  4. पश्चिम बंगाल।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

प्रश्न 11.
जैव ऊर्जा किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह ऊर्जा जो जैविक उत्पादों से प्राप्त होती है, जैव ऊर्जा कहलाती है। इसमें कृषि अवशेष, औद्योगिक व अन्य अपशिष्ट शामिल होते हैं।

प्रश्न 12.
पवन ऊर्जा के लिए भारत के किन राज्यों में अनुकूल परिस्थितियाँ पाई जाती हैं?
उत्तर:
पवन ऊर्जा के लिए राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु व कर्नाटक आदि में अनुकूल परिस्थितियाँ पाई जाती हैं।

प्रश्न 13.
मैंगनीज के प्रमुख उपयोग क्या हैं?
उत्तर:

  1. मैंगनीज का उपयोग इस्पात बनाने में किया जाता है।
  2. इससे चीनी मिट्टी के बर्तन बनाए जाते हैं।
  3. इसका उपयोग रासायनिक उद्योग में भी किया जाता है।

प्रश्न 14.
ऊर्जा के परंपरागत या अनवीकरणीय स्रोत कौन-से हैं?
उत्तर:
ऊर्जा के परंपरागत स्रोत कोयला, लकड़ी, उपले, पेट्रोलियम/पेट्रोल आदि हैं। ये ऊर्जा के ऐसे अनवीकरणीय स्रोत हैं जो वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण फैलते हैं।

प्रश्न 15.
खनिज क्या है?
अथवा
खनिज की परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
भू-वैज्ञानिकों के अनुसार खनिज एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप तत्त्व है जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना होती है। खनिज प्रकृति में अनेक रूपों में पाए जाते हैं, जिनमें कठोर हीरा व नरम चूना तक सम्मिलित हैं।

प्रश्न 16.
ऑयल इण्डिया लिमिटेड क्या कार्य करता है?
उत्तर:
ऑयल इण्डिया लिमिटेड खनिज तेल व प्राकृतिक गैस की खोज व उत्पादन करके उन्हें तेल शोधक कम्पनियों और उपभोक्ताओं तक पहुँचाने का कार्य करता है।

प्रश्न 17.
भारत के शीर्ष चार जल विद्युत एवं पवन ऊर्जा उत्पादक राज्यों के नाम लिखें।
अथवा
भारत के कोई चार जल विद्युत उत्पादक राज्यों के नाम लिखें।
अथवा
भारत के कोई चार पवन ऊर्जा उत्पादक राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर:
जल विद्युत उत्पादक राज्य-

  • कर्नाटक
  • पंजाब
  • आंध्र प्रदेश
  • महाराष्ट्र
  • केरल।

पवन ऊर्जा उत्पादक राज्य-

  • तमिलनाडु
  • महाराष्ट्र
  • कर्नाटक
  • गुजरात
  • राजस्थान।

प्रश्न 18.
मुंबई (बॉम्बे) हाई और सागर सम्राट से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
मुंबई हाई, जो मुंबई नगर से 160 कि०मी० दूर अपतटीय क्षेत्र में पड़ता है, को सन् 1973 में खोजा गया था। इस तेल क्षेत्र में 19 फरवरी, 1974 को ‘सागर सम्राट’ नामक जहाज द्वारा खुदाई की गई। यह तेल क्षेत्र भारत में सबसे अधिक तेल का उत्पादन करता है।

प्रश्न 19.
भारत के किन्हीं तीन तेल शोधन कारखानों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. पानीपत इण्डियन ऑयल रिफाइनरी।
  2. डिगबोई इण्डियन ऑयल रिफाइनरी।
  3. चेन्नई पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड।

प्रश्न 20.
खनिजों की दो विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:

  1. खनिजों की निश्चित आंतरिक संरचना होती है।
  2. खनिजों का मूल्य होता है।

प्रश्न 21.
खनिजों के दो उपयोग लिखें।
उत्तर:

  1. खनिज मशीनों के निर्माण में प्रयोग किए जाते हैं।
  2. खनिज हमारी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं।

प्रश्न 22.
प्लेसर निक्षेप किसे कहते हैं?
उत्तर:
पहाड़ियों के आधार तथा घाटी तल की रेत में जलोढ़ जमाव के रूप में पाए जाने वाले खनिजों को प्लेसर निक्षेप कहते हैं।

प्रश्न 23.
वाणिज्यिक ऊर्जा के स्रोत क्या हैं?
उत्तर:
कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस तथा जल विद्युत वाणिज्यिक ऊर्जा के स्रोत हैं।

प्रश्न 24.
मुंबई हाई क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर:
भारत में कुल पेट्रोलियम उत्पादन का लगभग 60 प्रतिशत भाग मुंबई हाई में पाया जाता है जिसके कारण मुंबई हाई प्रसिद्ध है।

प्रश्न 25.
कोयले को काला सोना क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
कोयला एक अति महत्त्वपूर्ण ऊर्जा संसाधन है। यह कई उद्योगों का आधार है। इसके काले रंग और अत्यधिक उपयोगिता के कारण इसे काला सोना कहा जाता है।

प्रश्न 26.
गैर-परंपरागत ऊर्जा संसाधनों के दो लाभ बताइए।
उत्तर:

  1. इनके प्रयोग से पर्यावरण प्रदूषण नहीं होता
  2. इनकी उत्पादन लागत अपेक्षाकृत कम होती है।

प्रश्न 27.
बायोगैस कैसे बनाई जाती है?
उत्तर:
झाड़ियों, कृषि से पैदा कचरा, पशुओं और मानव द्वारा जनित अपशिष्ट पदार्थों को एक वैज्ञानिक विधि द्वारा गलाने, सड़ाने से बायोगैस बनाई जाती है।

प्रश्न 28.
गोबर गैस प्लांट के दो लाभ लिखिए।
उत्तर:

  1. इससे घरेलू कार्यों में ईंधन के रूप में ऊर्जा मिलती है
  2. इससे उन्नत प्रकार का उर्वरक मिलता है।

प्रश्न 29.
मैंगनीज़ को ‘Jack Mineral’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
अपने बहु-आयामी गुणों के कारण मैंगनीज़ को ‘Jack Mineral’ कहा जाता है। मैंगनीज़ का उपयोग इस्पात उद्योग, ब्लीचिंग पाउडर, कीटाणुनाशक दवाइयाँ, रंग-रोगन व शुष्क बैटरियाँ आदि बनाने में किया जाता है।

प्रश्न 30.
मैंगनीज के कोई दो लाभ लिखिए।
उत्तर:

  1. इसका प्रयोग लौह-अयस्क को गलाने व लौह-मिश्रधातुओं को बनाने में किया जाता है।
  2. शक दवाइयाँ, रंग-रोगन, शष्क बैटरियाँ तथा चीनी मिट्टी के बर्तन बनाने में प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 31.
उन चार नदी घाटियों के नाम बताइए जिनमें गोंडवाना कोयला पाया जाता है?
उत्तर:

  1. दामोदर घाटी
  2. सोन घाटी
  3. महानदी घाटी
  4. गोदावरी घाटी।

प्रश्न 32.
भारत की प्रमुख खनिज पट्टियों के नाम बताइए।
उत्तर:
भारत के पठारी भाग में पाई जाने वाली तीन प्रमुख खनिज पट्टियाँ निम्नलिखित हैं-

  1. उत्तर-पूर्वी पठार
  2. दक्षिण-पश्चिमी पठार
  3. उत्तर-पश्चिमी प्रदेश।

प्रश्न 33.
भारत में लौह अयस्क उत्पादन करने वाले चार राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. झारखंड
  2. ओडिशा
  3. मध्यप्रदेश
  4. कर्नाटक।

प्रश्न 34.
अपरंपरागत ऊर्जा स्रोत से आप क्या समझते हैं?
अथवा
गैर-परंपरागत या नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
ऊर्जा के वे स्रोत जिनके प्रयोग की पहले से परंपरा न रही हो वे अपरंपरागत ऊर्जा स्रोत कहलाते हैं। इसमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय तरंगों की ऊर्जा, बायोगैस आदि सम्मिलित हैं।

प्रश्न 35.
भारत की चार तेल परिष्करणशालाओं के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. पानीपत
  2. मथुरा
  3. मुम्बई
  4. बरौनी।

प्रश्न 36.
लौह अयस्क की मुख्य विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:

  1. उद्योगों के विकास को आधार प्रदान करना।
  2. इस्पात बनाने के उत्तम गुण उपस्थित होना।
  3. विद्युत उद्योग के लिए आवश्यक चुम्बकीय गुण होना।

प्रश्न 37.
बहुमूल्य खनिज तथा ऊर्जा खनिज से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:

  1. बहुमूल्य खनिज – वे खनिज जिनका आर्थिक महत्त्व बहुत अधिक होता है, उन्हें बहुमूल्य खनिज कहते हैं। उदाहरण सोना, चाँदी, प्लेटिनम आदि।
  2. ऊर्जा खनिज – वे खनिज जो हमें ऊर्जा एवं शक्ति प्रदान करते हैं, उन्हें ऊर्जा खनिज कहते हैं। उदाहरण-कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस आदि।

प्रश्न 38.
भारत में अपारंपरिक ऊर्जा के स्रोतों के विकास की आवश्यकता अधिक क्यों है?
उत्तर:
कोयला, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस और परमाणु आदि परंपरागत ऊर्जा के स्रोतों पर हम सदैव निर्भर नहीं रह सकते, क्योंकि ये संसाधन प्रकृति में अनंत नहीं हैं, बल्कि समाप्य हैं। इसलिए गैर-परंपरागत ऊर्जा के साधनों को विकास आवश्यक है। सौर-ऊर्जा, ज्वारीय तरंगें, भू-तापीय ऊर्जा तथा जैव भार (Biomass) आदि अपारंपरिक ऊर्जा के महत्त्वपूर्ण उदाहरण हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
धात्विक खनिज तथा अधात्विक खनिज में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

धात्विक खनिजअधात्विक खनिज
1. ऐसे खनिज पदार्थों को, जिनके गलाने से विभिन्न प्रकार की धातुएँ प्राप्त होती हैं, धात्विक खनिज कहते हैं।1. ऐसे खनिज, जिनको गलाने से किसी प्रकार की कोई धातु प्राप्त नहीं होती, उसे अधात्विक खनिज कहते हैं।
2. लोहा, तांबा, मैगनीज़ तथा बॉक्साइट धात्विक खनिज हैं।2. कोयला, नमक, पोटाश तथा संगमरमर आदि अधात्विक खनिज हैं।
3. धात्विक खनिज प्राय: आग्नेय चट्टानों में पाए जाते हैं।3. अधात्विक खनिज परतदार चट्टानों में पाए जाते हैं।

प्रश्न 2.
लौह और लौह खनिज में क्या अंतर है?
उत्तर:
लौह तथा लौह खनिज में निम्नलिखित अंतर हैं-

लौह खनिजलौह खनिज
1. इन खनिज पदार्थों में लौह-अंश पाए जाते हैं।1. इनमें लौह-अंश का अभाव होता है।
2. इन खनिजों का प्रयोग लोहा-इस्पात उद्योग में होता है। लोहे को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न धातुओं को मिलाया जाता है।2. इन खनिजों की अपनी-अपनी उपयोगिता होती है।
3. इनके मुख्यं उदाहरण लोहा, मैंगनीज़, क्रोमाइट तथा कोबाल्ट आदि हैं।3. इनके मुख्य उदाहरण सोना, तांबा, सीसा तथा निकिल आदि हैं।

प्रश्न 3.
ताप विद्युत और जल विद्युत में क्या अंतर है?
उत्तर:
ताप विद्युत और जल विद्युत में निम्नलिखित अंतर हैं-

ताप विद्युतजल विद्युत
1. इसमें बिजली बनाने के लिए कोयले, डीज़ल और प्राकृतिक गैस का उपयोग किया जाता है।1. इसमें बिजली बनाने के लिए प्रवाहित जल की उपलब्धता आवश्यक है।
2. ताप विद्युत उत्पादन में पर्यावरण दूषित होता है।2. जल विद्युत उत्पादन पर्यावरण हितैषी परियोजना है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

प्रश्न 4.
गोंडवाना और टरशरी कोयले में क्या अंतर है?
उत्तर:
गोंडवाना और टरशरी कोयले में निम्नलिखित अंतर हैं-

गोडवाना कोयलाटरशरी कोयला
1. यह कोयला गोंडवाना काल की चट्टानों में पाया जाता है।1. यह कोयला टरशरी युग की चट्टानों में मिलता है।
2. यह चट्टानें 20 करोड़ वर्ष पुरानी हैं।2. ये चट्टानें 5.5 करोड़ वर्ष पुरानी हैं।
3. भारत का 98.5% कोयला गोंडवाना काल की चट्टानों में पाया जाता है।3. इनमें भारत का 1.5% कोयला पाया जाता है।

प्रश्न 5.
हमें खनिजों के संरक्षण की क्यों आवश्यकता है?
उत्तर:
खनिज हमारे उद्योगों और कृषि का एक आधार हैं। खनिजों के भंडार सीमित हैं। यदि हम लापरवाहीपूर्वक और बिना नियोजन के खनिजों का प्रयोग करते रहे तो इनके वास्तविक भंडार अतिशीघ्र समाप्त हो जाएँगे और खनिजों का अकाल पड़ जाएगा। इससे हमारा औद्योगिक विकास रुक जाएगा और अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो जाएगी। अतः आर्थिक गतिविधियों के समुचित संचालन के लिए हमें खनिजों के संरक्षण की आवश्यकता है।

प्रश्न 6.
ऊर्जा के किन्हीं चार स्रोतों/साधनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ऊर्जा के चार स्रोत निम्नलिखित हैं-
1. कोयला-यह शक्ति का प्रारंभिक साधन है। यह औद्योगिक कच्चे माल के रूप में भी प्रयोग होता है। विद्युत उत्पादन और अन्य उद्योगों में कोयले का प्रयोग किया जाता है।

2. जल-विद्युत-इसे पैदा करने के लिए गिरते हुए पानी की शक्ति प्राप्त करके टरबाइन को गतिमान किया जाता है। अभी तक शक्ति के साधनों में यह सबसे सस्ता साधन है। जल-विद्युत का सबसे बड़ा लाभ यह है कि निरंतर प्रयोगों के बावजूद भी इसके स्रोत समाप्त नहीं होते क्योंकि जल-संसाधन नवीकरण योग्य हैं।

3. खनिज तेल-यह अति दहनशील पदार्थ है। इसका प्रयोग अंतर्दहन इंजन में किया जाता है। खनिज तेल का परिष्करण करके डीज़ल, मिट्टी का तेल, पेट्रोल, उड्डयन स्पिरिट आदि प्राप्त किए जाते हैं। इससे सड़क परिवहन, जहाजों, वायुयानों आदि को चालक शक्ति प्राप्त होती है।

4. परमाणु ऊर्जा-इसे प्राप्त करने के लिए अणु पदार्थों को नियंत्रित परिस्थितियों में विखंडित करते हैं। इससे असीम ऊर्जा उत्पन्न होती है, जिसका उपयोग विविध उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

प्रश्न 7.
ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोतों का महत्त्व बताइए।
उत्तर:
ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोतों में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोगैस तथा कूड़े-कचरे से प्राप्त ऊर्जा सम्मिलित हैं। इनका महत्त्व निम्नलिखित है

  1. ये स्रोत नवीकरण योग्य हैं, इनका पुनः उपयोग किया जा सकता है।
  2. ये स्रोत प्रदूषण मुक्त और पारिस्थितिक अनुकूल हैं।
  3. ये साधन अपेक्षाकृत कम खर्चीले हैं।
  4. ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोत; जैसे सौर ऊर्जा का प्रयोग घरों में पानी गरम करने, खाना पकाने, बिजली का उत्पादन करने के लिए किया जाता है।
  5. इसी तरह पवन ऊर्जा का उपयोग खेतों में सिंचाई करने, बिजली पैदा करने तथा पानी खींचने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 8.
भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल है। कारण स्पष्ट करें।
उत्तर:
भारत एक उष्ण-कटिबंधीय देश है। यहाँ की जलवायु गर्म होने के कारण यहाँ पर सौर ऊर्जा के दोहन की अत्यन्त संभावनाएँ हैं। फोटोवोल्टाइक प्रौद्योगिकी द्वारा धूप को सीधे विद्युत में बदला जाता है। भारत के ग्रामीण तथा सुदूर क्षेत्रों में सौर ऊर्जा तेजी से लोकप्रिय हो रही है। भारत का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र भज के निकट माधापर में स्थित है. ज के बड़े बर्तनों को कीटाणुमुक्त किया जाता है। ऐसी अपेक्षा है कि सौर ऊर्जा के प्रयोग से ग्रामीण घरों में उपलों तथा लकड़ी पर निर्भरता को न्यूनतम किया जा सकेगा। फलस्वरूप यह पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगा और कृषि में भी खाद्य की पर्याप्त आपूर्ति होगी। अतः हम कह सकते हैं कि भविष्य में सौर ऊर्जा भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रही है।

प्रश्न 9.
खनिज पदार्थ हमारे उद्योगों के लिए रीढ़ की हड्डी हैं स्पष्ट करें।
उत्तर:
किसी भी राष्ट्र के लिए खनिज पदार्थ अत्यधिक महत्त्वपूर्ण होते हैं। खनिज उद्योग-धंधों का जीवन-आधार हैं। इनकी उपयोगिता को देखते हुए ही तो किसी ने कहा है, “खनिज पदार्थ हमारे उद्योगों के लिए रीढ़ की हड्डी हैं।” किसी भी देश के आर्थिक विकास में खनिजों का महत्त्वपूर्ण योगदान है। इसके बिना राष्ट्र विकास नहीं कर सकता; जैसे मध्य-पूर्व के आज पेट्रोलियम उत्पादन में धनी होकर औद्योगिक विकास की ओर बढ़ रहे हैं और उनके निवासियों का जीवन-स्तर ऊपर उठ रहा है।

खनिजों का शोषण बड़ी सावधानी से किया जाता है क्योंकि ये अनापूर्ति साधन हैं। एक बार प्रयोग कर लेने के पश्चात् इनका कोई मूल्य नहीं। हमारे देश में इनकी उपयोगिता और आवश्यकता को देखते हुए देश में ‘राष्ट्रीय खनिज विकास समिति’ की स्थापना की गई है। यह समिति देश में उपयोगी खनिजों की खोज के लिए प्रयत्नशील है।

प्रश्न 10.
मुंबई हाई का देश की अर्थव्यवस्था में क्या योगदान है?
उत्तर:
मुंबई हाई भारत का सबसे बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है। इस स्थान से तेल निकालने के लिए बहुत ही विकसित एवं उच्च स्तर की प्रौद्योगिकी का प्रयोग किया गया है। भारतीय अर्थव्यवस्था में ‘मुंबई हाई’ का बहुत बड़ा योगदान है। यह हमारे पेट्रोलियम उत्पादों की आवश्यकताओं की बहुत बड़े भाग की पूर्ति करता है। इससे हमें बहुत बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा की बचत होती है।

प्रश्न 11.
खनिजों के वर्गीकरण की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
रासायनिक एवं भौतिक गुणधर्मों के आधार पर खनिजों को निम्नलिखित प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है
1. धात्विक खनिज-वे खनिज जिनसे हमें धातुएँ प्राप्त होती हैं, उन्हें धात्विक खनिज कहते हैं। लौह-अयस्क, ताँबा, सोना, चाँदी आदि इसके उदाहरण हैं।

लौह-खनिज-वे धात्विक खनिज जिनमें लोहे का अंश पाया जाता है, उन्हें लौह खनिज कहते हैं; जैसे लौह-अयस्क, निकिल, कोबाल्ट आदि।
अलौह खनिज-वे धात्विक खनिज जिनमें लौह का अंश नहीं पाया जाता, उन्हें अलौह खनिज कहते हैं; जैसे तांबा, जस्ता, बॉक्साइट आदि।

2. अधात्विक खनिज-वे खनिज जिनसे हमें धातुएँ नहीं प्राप्त होती, उन्हें अधात्विक खनिज कहते हैं। खनिज तेल, नमक, अभ्रक, पोटाश, चूना पत्थर आदि इसके उदाहरण हैं।

प्रश्न 12.
“कोयला ऊर्जा का महत्त्वपूर्ण स्रोत है।”-व्याख्या करें।
उत्तर:
कोयला महत्त्वपूर्ण खनिजों में से एक है। भारत अपनी व्यापारिक ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए कोयले पर निर्भर है। इसका मुख्य उपयोग ताप विद्युत उत्पादन और लौह अयस्क के प्रगलन के लिए किया जाता है। रेलवे और उद्योगों में भाप का इंजन चलाने के लिए इसे ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है। खाना बनाने वाले कोयले का प्रयोग लोहे की प्रगलन भट्टी में किया जाता है।

प्रश्न 13.
ऊर्जा के संरक्षण हेतु आप क्या सुझाव देंगे?
उत्तर:
ऊर्जा के संरक्षण हेतु निम्नलिखित सुझावों पर अमल करना चाहिए-

  1. सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का अधिक-से-अधिक और निजी वाहनों का कम-से-कम उपयोग करना चाहिए।
  2. आवश्यकता न होने पर बिजली के स्विच बंद कर देने चाहिएँ।
  3. शक्ति बचाने की युक्तियाँ अपनानी चाहिएँ।
  4. अपने बिजली के उपकरणों को नियमित रूप से जाँचते रहना चाहिए।
  5. ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोतों के उपयोग पर अधिक-से-अधिक बल देना चाहिए।

प्रश्न 14.
सौर संयंत्र पर एक संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर:
सौर संयंत्र, सौर ऊर्जा के सीधे अवशोषण से चलते हैं। इसमें परावर्तन करने वाली दर्पण प्रणाली का प्रयोग किया जाता है। कई गतिशील दर्पण, सूर्य की किरणों को केंद्रीय ऊंची मीनार के शीर्ष पर परावर्तित करते हैं, जहां भाप बायलर तथा विद्युत उत्पन्न करने वाले संयंत्र स्थापित होते हैं। सौर सैलों का उपयोग करके सौर विकिरण से सीधे विद्युत बनाई जा सकती है। यह सूर्य से विद्युत उत्पन्न करने का दूसरा तरीका है। इन सैलों में रवेदार सिलीकॉन जैसे पदार्थों का उपयोग होता है, जो सौर विकिरण को अवशोषित करके उसे सीधे विद्युत में बदल देते हैं।

प्रश्न 15.
प्राकृतिक गैस और बायोगैस में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
प्राकृतिक गैस और बायोगैस में निम्नलिखित अंतर हैं-

प्राकृतिक गैसबायोगैस
1. प्राकृतिक गैस एक खनिज है और यह धरातल के नीचे से निकाली जाती है।1. बायोगैस पशुओं के गोबर, मल-मूत्र और गली-सड़ी वस्तुओं से प्राप्त की जाती है।
2. यह प्रायः पेट्रोलियम के कुओं में पेट्रोलियम के ऊपर पाई जाती है।2. इस गैस का संयंत्र किसान अपने घर के पास आसानी से लगा सकता है।
3. यह गैस बायोगैस की तुलना में अधिक महंगी है।3. यह एक सस्ता ईंधन है।
4. यह स्वतन्त्र रूप से मिलती है।4. इसे बनाना पड़ता है।

प्रश्न 16.
परम्परागत और गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधनों में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
परम्परागत और गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधनों में निम्नलिखित अंतर हैं-

परम्परागत/अनवीकरणीय ऊर्जा संसाधनगैर-परम्परागत/नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन
1. परम्परागत ऊर्जा संसाधनों का विकास लम्बे समय पहले हुआ।1. गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधनों का विकास अभी किया गया है।
2. ये ऊर्जा के अनवीकरणीय संसाधन हैं।2. ये ऊर्जा के नवीकरणीय संसाधन हैं।
3. ये वायु एवं जल प्रदूषण फैलाते हैं।3. ये किसी भी प्रकार का प्रदूषण नहीं फैलाते।
4. उदाहरण-कोयला, पेट्रोलियम, लकड़ी, उपले आदि।4. उदाहरण-सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा आदि।

प्रश्न 17.
भारत में खनिज के अन्वेषण में संलग्न अधिकरण कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
भारत में खनिजों का व्यवस्थित सर्वेक्षण, पूर्वेक्षण तथा अन्वेषण के कार्य भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), तेल व प्राकृतिक गैस कार्पोरेशन लिमिटेड (ONGC), खनिज अन्वेषण निगम लिमिटेड (MECL), राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC), इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंज (IBM), भारत गोल्डमाइंस लिमिटेड (BGML), राष्ट्रीय ऐल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO) और विभिन्न राज्यों के खदान एवं भू-विज्ञान विभाग करते हैं।

प्रश्न 18.
भारत में जल विद्युत् शक्ति के विकास के लिए पाई जाने वाली अनुकूल दशाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में जल विद्युत शक्ति के विकास के लिए निम्नलिखित अनुकूल परिस्थितियाँ पाई जाती हैं-
1. भूमि का स्वभाव-भारत में पर्वतीय तथा पठारी क्षेत्र उपलब्ध हैं। जल विद्युत के उत्पादन के लिए तीव्र ढालू भूमि की आवश्यकता है। इसलिए भारत के पर्वत तथा पठार जल विद्युत उत्पन्न करने के लिए उचित क्षेत्र हैं। अधिक ऊंचाई से गिरने वाले जल से अधिक जल विद्युत उत्पन्न की जा सकती है।

2. जल की उपलब्धता-भारत अधिकतर नदियों का उद्गम पर्वतीय क्षेत्र है। यहाँ मानसून पवनों से काफी वर्षा होती है। इसलिए सारा वर्ष नदियों में जल उपलब्ध रहता है।

3. जल-प्रपातों की उपस्थिति-दक्षिणी भारत की अधिकतर नदियाँ जल-प्रपात बनाती हैं इसलिए वहाँ जल विद्युत उत्पन्न करने के लिए आदर्श परिस्थितियाँ हैं। उदाहरण के लिए उत्तरी अमेरिका में नियाग्रा जल-प्रपात से विद्युत उत्पन्न के

4. खपत क्षेत्रों की निकटता-जल विद्युत को प्रयोग में लाने वाले क्षेत्र जल विद्युत उत्पादित क्षेत्रों के निकट होने चाहिएँ, इससे जल विद्युत का ह्रास कम होता है।

5. विद्युत की मांग-जल विद्युत के विकास के लिए अधिक मांग का होना आवश्यक है। उदाहरण के लिए अफ्रीका महाद्वीप में विद्यत की मांग कम है। इसीलिए वहाँ उत्पादन भी कम होता है।

6. पूंजी-नदियों पर बांध बनाने तथा विद्युत निर्माण करने के लिए पर्याप्त पूंजी की आवश्यकता होती है। जल विद्यत विकास के लिए तकनीकी ज्ञान तथा विकसित यातायात के साधनों की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 19.
भारत में मैंगनीज़ के वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मैंगनीज़ एक महत्त्वपूर्ण खनिज पदार्थ है, जिसका उपयोग अधिकतर लोहा गलाने के लिए किया जाता है। एक टन इस्पात बनाने के लिए लगभग 6 किलोग्राम मैंगनीज़ की जरूरत पड़ती है। इसके अतिरिक्त इस पदार्थ का उपयोग रासायनिक उद्योगों में ब्लीचिंग पाउडर, रंग-रोगन, कीटनाशक दवाइयों, चीनी-मिट्टी के बर्तन तथा शुष्क बैटरियों के बनाने में किया जाता है। इसमें अनेक अशुद्धियाँ होती हैं। उनको दूर करके ही इसका प्रयोग किया जाता है। भारत में मैंगनीज का वितरण अग्रलिखित हैं

  1. ओडिशा यहाँ के मुख्य उत्पादक क्षेत्र सुंदरगढ़, संबलपुर, क्योंझर, कालाहांडी, कोरापुट तथा धेनकनाल जिले हैं।
  2. कर्नाटक यहाँ के महत्त्वपूर्ण उत्पादक जिले उत्तरी कनारा, चित्रदुर्ग, शिमोगा, बेल्लारी हैं। यहाँ की प्रमुख खानें उसकोंडा, लोंडा, सदरहली, शंकरगुधा, शीदरहली, कुसमी, रामदुर्ग तथा बीजापुर हैं।
  3. मध्य प्रदेश-इसके मुख्य उत्पादक क्षेत्र छिंदवाड़ा तथा बालाघाट हैं। अन्य उत्पादक जिले बस्तर, नीमाड, धार मांडला तथा जबलपुर हैं।
  4. महाराष्ट्र-यहाँ के मुख्य उत्पादक जिले नागपुर तथा भंडारा हैं। यहाँ उच्चकोटि का मैंगनीज मिलता है।
  5. आंध्र प्रदेश यहाँ के मुख्य उत्पादक जिले श्रीकाकुलम, विशाखापट्टनम, कुडप्पा, विजयनगर तथा गंटूर हैं।
  6. अन्य राज्य झारखंड (चाईबासा), गुजरात, गोवा व राजस्थान में भी मैंगनीज प्राप्त होता है।

प्रश्न 20.
भारत में बॉक्साइट के उत्पादन व वितरण पर एक संक्षिप्त लेख लिखें।
उत्तर:
बॉक्साइट का प्रयोग एल्यूमीनियम बनाने के लिए किया जाता है। वर्ष 2011-12 में भारत ने 116.97 लाख टन बॉक्साइट उत्पन्न किया। पहले भारत अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए बॉक्साइट आयात करता था, परंतु अब भारत बॉक्साइट को आयात करने के स्थान पर निर्यात करता है। भारत में बॉक्साइट के प्रमुख उत्पादक राज्य इस प्रकार हैं

  1. ओडिशा-ओडिशा भारत का सबसे बड़ा बॉक्साइट उत्पादक राज्य है। यहाँ के कालाहांडी व संभलपुर ज़िले बॉक्साइट उत्पादन में अग्रणी हैं। सुंदरगढ़ और कोरापुट अन्य महत्त्वपूर्ण उत्पादक जिले हैं।
  2. झारखंड इस राज्य के लोहारड़ागा जिले की पैटलैंडस में बॉक्साइंट के समृद्ध भंडार हैं। राँची और पलामु यहाँ के प्रमुख उत्पादक जिले हैं।
  3. गुजरात-यह राज्य भारत देश का 20.1% बॉक्साइट पैदा करता है। इसके मुख्य क्षेत्र जामनगर, साबरकंठा, कच्छ तथा सूरत आदि हैं।
  4. महाराष्ट्र-यह राज्य भारत का लगभग 12% बॉक्साइट पैदा करता है। यहाँ कोलाबा, रत्नागिरि तथा कोल्हापुर जिले इसके मुख्य उत्पादक क्षेत्र हैं।
  5. अन्य उत्पादक क्षेत्र अन्य उत्पादक क्षेत्रों में कर्नाटक का बेलगांव जिला, तमिलनाडु में नीलगिरि, सेलम तथा मदुरै, उत्तर प्रदेश में चांदा तथा जम्मू कश्मीर में पुंछ तथा उद्धमपुर में बॉक्साइट के उत्पादक क्षेत्र हैं।

प्रश्न 21.
भारत में तांबा के उत्पादन तथा वितरण का संक्षिप्त वर्णन करें।
उत्तर:
तांबे का उपयोग हमारे देश में प्राचीनकाल से ही होता आ रहा है। तांबे के सिक्के तथा बर्तन काफी समय पहले से प्रचलन में रहे हैं लेकिन वर्तमान समय में विद्युत की बढ़ती हुई माँग के कारण इसका उपयोग अधिक बढ़ गया है।

भारत में तांबे का खनन तथा परिष्करण कार्य हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड करता है। जब से इस प्रतिष्ठान की स्थापना हुई है, देश में तांबे के उत्पादन में वृद्धि हुई है लेकिन अब भी हमें अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है।

उत्पादन एवं वितरण-देश में तांबे का उत्पादन झारखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश तथा कर्नाटक आदि राज्यों में होता है। झारखंड में सिंहभूम प्रमुख उत्पादक ज़िला है। इसके अतिरिक्त हजारीबाग में भी थोड़ा तांबा निकाला जाता है। राजस्थान तांबे की खानें झुंझुनु ज़िले में सिंघाणा से खेतड़ी तक विस्तृत हैं। खेतड़ी नगर में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड का कारखाना तांबे का परिष्करण करके तांबे का उत्पादन करता है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

प्रश्न 22.
भारत में खनिजों के संरक्षण पर नोट लिखिए।
उत्तर:
खनिज पृथ्वी पर पाए जाने वाले अनवीकरणीय संसाधन हैं। इनको एक बार प्रयोग कर लिए जाने के बाद लंबे समय तक इनकी पूर्ति नहीं हो सकती। जिन खनिजों के निर्माण में लाखों वर्ष लग गए हैं हम उनका शीघ्रता से और लापरवाही के साथ प्रयोग कर रहे हैं। निम्नलिखित बातों से खनिजों का संरक्षण अनिवार्य है

  1. खनिज संसाधनों के भण्डार सीमित हैं और ये अनवीकरणीय हैं।
  2. खनिज हमारे उद्योगों और कृषि का आधार हैं। इनकी अनुपस्थिति में देश का आर्थिक विकास रुक जाएगा।
  3. हमारे देश में खनिजों के भण्डारों की कमी है।
  4. खनिज अयस्कों के लगातार खनन से इनकी उपलब्धता की गहराई बढ़ती जाती है जिससे उत्खनन की लागत बढ़ जाती है।
  5. ज्यों-ज्यों हम गहराई में उत्खनन करते जाते हैं तो खनिजों की गुणवत्ता कम होती जाती है।
  6. खनिज संसाधनों की कमी के कारण मानवता के विकास की गति रुक जाएगी।

दिए गए तथ्यों के आधार पर हम कह सकते हैं कि खनिज पदार्थों का संरक्षण आज हमारी सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण आवश्यकता बन गया है।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में कोयले के उत्पादन तथा वितरण का वर्णन कीजिए।
अथवा
कोयले की विभिन्न किस्मों का वर्णन कीजिए तथा भारत में कोयले के उत्पादन व वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कोयला ऊर्जा शक्ति का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है। पहले-पहल कोयला घरेलू कामों के प्रयोग में लाया जाता था। 18वीं शताब्दी में इंजन के आविष्कार से यह एक महत्त्वपूर्ण ईंधन बन गया। यह एक ज्वलनशील ईंधन है जिसका निर्माण वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं के नीचे दबने, आंतरिक दबाव तथा ताप के कारण रूप परिवर्तन से होता है। कोयले का प्रयोग अनेक उद्योगों में कच्चे माल के रूप में किया जाता है। भारत में कोयला मुख्यतः गोंडवानालैण्ड तथा टरश्यरी प्रकार की चट्टानों से प्राप्त किया जाता है। कोयले को काला सोना भी कहा जाता है। अमोनिया सल्फेट कोयले का महत्त्वपूर्ण गौण पदार्थ है जिसको रेफ्रिजरेशन, विस्फोटक पदार्थ तथा रासायनिक उद्योगों में इस्तेमाल किया जाता है।

कोयले के प्रकार (किस्में) (Types of Coal) कार्बन और आर्द्रता के आधार पर कोयले को निम्नलिखित वर्गों में बांटा गया है
1. एन्थ्रासाइट कोयला–एन्थ्रासाइट लकड़ी से कोयला बनने की अन्तिम अवस्था को दर्शाता है। यह काला, कठोर, चमकीला, रवेदार तथा सर्वोत्तम श्रेणी का कोयला होता है। इसमें कार्बन की मात्रा 90 से 96 प्रतिशत होती है तथा आर्द्रता न्यूनतम होती है। यह अत्यन्त सख्त कोयला है तथा इसके खनन पर भी बहुत खर्च आता है। एन्थ्रासाइट कोयला शुरू में धीरे आग पकड़ता है लेकिन जलने पर यह अत्यधिक ऊष्मा देता है। जलते समय यह नीली लौ देता है तथा कम धुआँ छोड़ता है। जलने के बाद इसकी राख भी बहुत कम होती है। इससे उत्तम किस्म का कोक बनाया जाता है। विश्व में इस कोयले के भण्डार सीमित हैं।

2. बिटुमिनस कोयला-एन्थ्रासाइट के बाद यह एक उच्चकोटि का कोयला है जिसमें कार्बन का अंश 70 से 90 प्रतिशत तक होता है। इसमें थोड़ा-सा अंश नमी का भी पाया जाता है। काले रंग का यह कठोर कोयला जल्दी आग पकड़ता है। यह पीली लौ के साथ जलता है तथा धुआँ और राख छोड़ता है। कारखानों व रेलों में इसी कोयले का प्रयोग होता है। इससे कोक बनाकर लौह-भट्ठियों में जलाया जाता है। बिटुमिनस कृत्रिम रबड़ बनाने का कच्चा माल है। विश्व में इस कोयले के भण्डार अधिक हैं। प्रायद्वीपीय भारत के अधिकांश भागों में बिटुमिनस कोयला पाया जाता है।

3. लिग्नाइट कोयला-इसे भूरा कोयला (Brown Coal) कहते हैं क्योंकि इसमें मूल वनस्पति के रेशे विद्यमान होते हैं। इस कोयले में कार्बन का अंश 45 से 70 प्रतिशत तक होता है। इसमें आर्द्रता अधिक होती है। इसकी दहन क्षमता कम है तथा यह जलने पर धुआँ व राख दोनों अधिक छोड़ता है। इस कोयले का प्रयोग तारकोल, कृत्रिम पेट्रोल व कृत्रिम रबड़ बनाने तथा ताप-विद्युत् भट्ठियों में किया जाता है।

4. पीट कोयला-पीट लकड़ी से कोयला बनने की पहली अवस्था है। कहने को तो यह कोयला है लेकिन यह लकड़ी से अधिक मिलता-जुलता है। इसमें नमी व गैसों की मात्रा अधिक होती है। इसे सुखाकर जलाया जाता है और यह लकड़ी की तरह काबेन का अंश 40 से 60 प्रतिशत तक होता है। यह अधिक धुआं छोड़ता है और इसकी राख भी बहुत ज्यादा होती है। निम्न जलन क्षमता के कारण पीट कोयले का कम प्रयोग किया जाता है।

वितरण तथा उत्पादन (Production and Distribution)-भारत में कोयले की पहली खान सन् 1774 में पश्चिम बंगाल के रानीगंज में खोदी गई थी। सन् 1900 तक कोयले के उत्पादन में कोई खास वृद्धि नहीं हुई। सन् 1900 तक देश में कोयले का कुल उत्पादन मात्र 60 लाख टन था। इसका कारण था उद्योगों की कमी और माँग का अभाव। दो विश्व युद्धों में कोयला खनन के दिन फिरे। प्रथम विश्व युद्ध (1914) के आरम्भ होते ही कोयले का उत्पादन बढ़कर 160 लाख टन हो गया।

दूसरे विश्व युद्ध में कोयले की माँग और बढ़ी और सन् 1945 में भारत में 290 लाख टन कोयले का उत्पादन हुआ। स्वतन्त्रता-प्राप्ति तक कोयले का उत्पादन 300 लाख टन हो गया। स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद उद्योग-धन्धों में प्रगति के कारण कोयला उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई जो सन् 2014-2015 में लगभग 3821.37 लाख टन तथा सन् 2017-18 में लगभग 56.74 करोड़ टन हो गई। इस प्रकार पिछले कुछ वर्षों में कोयला उत्पादन में ग्यारह गुना से अधिक वृद्धि हुई है। विश्व में कोयला उत्पादन में भारत का तीसरा स्थान है। यह विश्व उत्पादन का लगभग 7.2% भाग पैदा करता है।

भारत में कोयले के दो क्षेत्र हैं-

  • प्रायद्वीपीय गोंडवाना क्षेत्र
  • उत्तरी भारत का टर्शियरी क्षेत्र।

भारत का अधिकांश कोयला गोंडवाना क्षेत्र में तथा शेष टरश्यरी क्षेत्र में मिलता है। गोंडवाना क्षेत्र के अंतर्गत भारत में निम्नलिखित राज्यों में कोयले का उत्पादन होता है
1. मध्यप्रदेश मध्य प्रदेश में सिंगरौली, झबुआ, विजयपुर प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं।

2. झारखण्ड-कोयला उत्पादन में झारखण्ड का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस प्रदेश के महत्त्वपूर्ण कोयला क्षेत्र रानीगंज, झरिया, बोकारो, गिरीडीह एवं करनपुरा हैं।

3. पश्चिम बंगाल-उत्पादन तथा संचित राशि की दृष्टि से पश्चिम बंगाल भारत का तीसरा राज्य है, जहां देश का लगभग 8% कोयला उत्पन्न किया जाता है। बर्दमान, पुरुलिया तथा बांकुरा यहाँ के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं।

4. ओडिशा-ओडिशा राज्य में भारत का लगभग 23% कोयला संचित है। यह भारत का लगभग 18% कोयला उत्पन्न करता है। तलचर की खाने कोयला उत्पादन के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। यह क्षेत्र ब्राह्मणी नदी की घाटी में 520 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है।

5. आंध्र प्रदेश-यह क्षेत्र गोदावरी की घाटी में फैला है। यहां पर पाण्डूर तथा कोटागुंडम प्रमुख खानें हैं। यह क्षेत्र ऊपरी गोंडवाना क्रम की चट्टानों में स्थित है। यहां पर कोयले की सतह की मोटाई 1 मीटर से 2 मीटर तक है।

उपर्युक्त कोयला क्षेत्र के अतिरिक्त तृतीय कल्प (Tertiary Era) में कोयला क्षेत्रों में देश का 3% कोयला उत्पन्न किया जाता है। इस प्रकार का कोयला असम, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु में मिलता है।

प्रश्न 2.
भारत में लौह-अयस्क की किस्मों/प्रकारों, उत्पादन तथा वितरण का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत में लौहा-अयस्क के उत्पादन तथा वितरण का वर्णन करें।
उत्तर:
लोहे को उद्योगों की रीढ़ की हड्डी कहा जाता है तथा किसी देश का औद्योगिक विकास का स्तर वहाँ लोहे के उपयोग की मात्रा पर आंका जाता है। यह अयस्क के रूप में पाया जाता है।

लौह-अयस्क के प्रकार (Types of Iron-ore)-लौह-अयस्क में लोहे की मात्रा के आधार पर इसको निम्नलिखित वर्गों में बांटा जाता है

  • मैग्नेटाइट-यह सबसे बढ़िया किस्म का लोहा होता है। इसमें 72 प्रतिशत शुद्ध लोहा होता है। इसमें चुंबकीय लक्षण होते हैं तथा यह तमिलनाडु तथा कर्नाटक में मिलता है।
  • हैमेटाइट-इस अयस्क में 60 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक शुद्ध लोहा होता है। भारत में अधिकतर यह लोहा पाया जाता है।
  • लिमोनाइट-इस लोहे में 40 से 60 प्रतिशत तक शुद्ध लोहा होता है तथा यह अधिकतर पश्चिमी बंगाल में मिलता है।
  • सिडेराइट-इस अयस्क में 40 से 50 प्रतिशत लोहांश होता है। इसका उपयोग कम होता है, क्योंकि इसमें अशुद्धियाँ अधिक पाई जाती हैं। यह चाकू, छुरियाँ आदि बनाने के काम आता है।

उत्पादन तथा वितरण (Production and Distribution) अनुमान है कि भारत में लगभग 2,017 करोड़ टन लोहे के भंडार दबे पड़े हैं, जो विश्व का लगभग 20 प्रतिशत भाग है। इसमें 68.2 प्रतिशत हैमेटाइट किस्म का लोहा है। सन् 1990 में इसका उत्पादन 4.9 करोड़ टन हुआ। सन् 2014-15 में लौह अयस्क का उत्पादन 1544 लाख टन हुआ और 2017-18 में यह उत्पादन बढ़कर लगभग 200 मिलियन टन हो गया। लोहे-उत्पादन में भारत वर्तमान में विश्व में चौथे स्थान पर है और विश्व उत्पादन का लगभग 10% पैदा करता है। लोहे के मुख्य उत्पादक राज्य निम्नलिखित हैं
1. झारखण्ड-ओडिशा की ही लौहयुक्त पहाड़ियों का विस्तार झारखण्ड में है जहाँ देश की सबसे प्राचीन लौह खदानें स्थित हैं। भारत के अधिकतर स्टील प्लांट भी इन्हीं खदानों के आसपास अवस्थित हैं। यहाँ पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में अवस्थित कोल्हन श्रृंखला में नोटूबुरु, नोआमुंडी, पंसारीबुरू, गुआ और सासगंडा खानों से हैमेटाइट लोहा निकाला जाता है। पलामु ज़िले के डाल्टनगंज, धनबाद, हज़ारीबाग, रांची तथा संथाल परगना ज़िलों से भी मैग्नेटाइट लोहा प्राप्त होता है। कुल्टी व बर्नपुर के इस्पात कारखानों को लोहा झारखंड की गुआ खान से ही प्राप्त होता है। यहाँ का थोड़ा-सा लोहा निर्यात भी होता है।

2. ओडिशा-यह राज्य देश का लगभग लगभग 25 प्रतिशत लोहा पैदा करता है तथा उत्तम किस्म का लोहा उत्पन्न करता है। मुख्य उत्पादक जिले क्योंझर, मयूरभंज, संबलपुर, कटक तथा सुंदरगढ़ हैं।
खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

3. मध्य प्रदेश यहाँ के महत्त्वपूर्ण जिले हैं रायगढ़, जबलपुर, बिलासपुर, मांडला, बालाघाट तथा सरगुजा। इस राज्य की महत्त्वपूर्ण खाने बोलाडिला, डाली तथा रंपारा हैं।

4. गोवा-लोहे के उत्पादन में गोवा का महत्त्व बढ़ा है। सन् 1988-89 में यहाँ 130 लाख टन लोहा पैदा किया गया। यहाँ का लोहा घटिया किस्म का है, जिसके अयस्क में 40 से 60 प्रतिशत लोहांश होता है। यह लिमोनाइट तथा सिडेराइट किस्म का लोहा है। इस राज्य में 300 से अधिक लोहे की खानें हैं, जिनमें पीरना-अदोल, पाले-ओनडा तथा कुंदनेमसरूला आदि महत्त्वपूर्ण हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन 1
5. कर्नाटक यहाँ लोहे के विस्तृत भंडार हैं। यहाँ के प्रमुख उत्पादक जिले बेलारी तथा चिकमंगलूर हैं। इनके अतिरिक्त चित्रदुर्ग, धारवाड़ तथा शिमोगा में भी लोहा प्राप्त होता है ।

6. महाराष्ट्र-यह राज्य भारत का कुछ प्रतिशत लोहा उत्पादन करता है। मुख्य उत्पादक जिले चंद्रपुर, भंडारा तथा रत्नागिरि हैं।

7. अन्य उत्पादक क्षेत्र अन्य उत्पादक राज्यों में तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा, गुजरात तथा केरल हैं। यह सब मिलकर भारत का 2 प्रतिशत लोहा पैदा करते हैं।

प्रश्न 3.
भारत में ऊर्जा के नवीकरणीय एवं अनवीकरणीय साधनों/स्रोतों का वर्णन करें।
अथवा
भारत में ऊर्जा के परम्परागत ऊर्जा साधनों या स्रोतों का वर्णन कीजिए। अथवा भारत में अपरम्परागत ऊर्जा के साधनों पर एक नोट लिखें।
अथवा
परम्परागत ऊर्जा स्रोतों से आप क्या समझते हैं? भारत में इसके साधनों/स्रोतों का वर्णन करें। अथवा अपरम्परागत या गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों से आप क्या समझते हैं? भारत में इसके साधनों/स्रोतों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
परम्परागत ऊर्जा स्रोत-ऊर्जा के वे स्रोत जिनके प्रयोग की पहले से परंपरा चल रही हो वे परंपरागत ऊर्जा स्रोत कहलाते हैं। इनको अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत भी कहा जाता है।
परम्परागत ऊर्जा के साधन-ऊर्जा के परंपरागत साधन/स्रोत इस प्रकार हैं-
1. कोयला, लकड़ी व उपले-कोयला शक्ति का एक प्राचीन तथा प्रमुख साधन है। इसका प्रयोग उद्योगों, यातायात तथा विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है। इसे औद्योगिक क्रांति का आधार कहा जाता है। रेलों, जलयानों आदि के चलाने में भी इसका उपयोग किया जाता है। लकड़ी व उपले भी परम्परागत ऊर्जा के स्रोत हैं।

2. खनिज तेल यह शक्ति का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण साधन है। इसका उपयोग यातायात सड़क, रेल और वायु परिवहन तथा उद्योग-धंधों को चलाने के लिए किया जाता है।

3. जल-विद्यत-यह नदियों के जल से प्राप्त की जाती है। इसका उपयोग यातायात उद्योग, घरेल खपत आदि में होता है।

4. परमाणु शक्ति-परमाणु ऊर्जा को प्राप्त करने के लिए अणु पदार्थों को नियंत्रित परिस्थितियों में विखंडित किया जाता है और परमाणु विद्युत प्राप्त की जाती है। इसका उपयोग उद्योगों तथा अन्य कार्यों में किया जाता है।

अपरम्परागत ऊर्जा स्रोत-अपरम्परागत ऊर्जा स्रोत वे स्रोत हैं जिनका प्रयोग करना हमने हाल ही के वर्षों या कुछ वर्षों पहले शुरू किया है। इनको नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत भी कहा जाता है।
अपरम्परागत ऊर्जा के साधन-अपरम्परागत ऊर्जा के साधन निम्नलिखित हैं-
1. पवन ऊर्जा-यह स्रोत असमाप्य और प्रदूषण मुक्त स्रोत है। इसमें बहती पवनों से ऊर्जा उत्पन्न की जाती है । बहती पवन की गतिज ऊर्जा को टरबाइन के जरिए विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है। इसमें सभी प्रकार की पवनों; जैसे सन्मार्गी पवनें, पछुवा पवनें, मानसून पक्नें, स्थलीय पवनें तथा जलीय पवनों को विद्युत उत्पन्न करने के लिए उपयोग किया जाता है।

2. सौर ऊर्जा-सौर तापीय ऊर्जा अन्य सभी ऊर्जा स्रोतों से अधिक लाभदायक है। इस ऊर्जा को पैदा करना बहुत आसान है। इसमें लागत भी कम आती है और पर्यावरण के अनुकूल है। सूर्य किरणों को फोटोवोल्टाइक सैलों में इकट्ठा करके ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। इस ऊर्जा का प्रयोग फसलों को सुखाने, पानी गर्म करने, विद्युत उत्पादन जैसी कई प्रक्रियाओं में उपयोग किया जा
सकता है।

3. ज्वारीय तथा तरंग ऊर्जा-ज्वारीय तथा तरंग ऊर्जा का उत्पादन समुद्रों पर बाँध बनाकर किया जाता है। ज्वार के समय उठे जल को ऊर्जा बनाने के काम में लाया जाता है। इन तरंगों के पानी को टरबाइन द्वारा विद्युत उत्पादन के काम में लाया जाता है।

4. भू-तापीय ऊर्जा-धरती के निचले भाग में स्थित गर्मी से जो ऊर्जा प्राप्त होती है उसे भू-तापीय ऊर्जा कहा जाता है। पृथ्वी में स्थित लावा तथा मैगमा जब बाहर आता है तो उसमें से ऊष्मा निकलती है। उस ऊष्मा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। भू-तापीय ऊर्जा का उत्पादन तपोवन और छोटा नागपुर में किया जाता है।

5. जैव ऊर्जा-जैविक उत्पादनों से प्राप्त की जाने वाली ऊर्जा को जैव ऊर्जा कहा जाता है। कृषि अवशेष, एकत्रित अवशेष, औद्योगिक व अन्य किसी प्रकार के अपशिष्ट। इन अपशिष्टों को बिजली, ताप ऊर्जा, खाना पकाने के लिए गैस में परिवर्तित किया जाता है।

प्रश्न 4.
भारत में खनिज तेल या पेट्रोलियम के वितरण तथा उत्पादन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पेट्रोलियम लेटिन भाषा के दो शब्दों-पेट्रो तथा ओलियम से मिलकर बना है, जिसका अर्थ क्रमशः चट्टान व तेल है, अर्थात चट्टानों से प्राप्त तेल को ही खनिज तेल या पेट्रोलियम कहते हैं। खनिज तेल की उत्पत्ति टरश्यरी यग की चट्टानों के बीच करोड़ों वर्षों तक दबी हुई वनस्पति अंश तथा सागरीय जीवों से हुई है। इसलिए खनिज तेल अधिकतर डेल्टाई प्रदेशों, झीलों तथा सागरीय भागों में अवसादी शैलों के बीच मिलता है।

आज के युग में पेट्रोलियम का अत्यधिक महत्त्व है। युद्ध और शांति दोनों काल में पेट्रोलियम हमारे लिए प्रकृति द्वारा प्रदत्त एक अमूल्य संसाधन है जो आधुनिक जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक तथा परिहार्य है। कृषि, उद्योग तथा परिवहन में काम आने वाली आधुनिक मशीनों की क्षमता का श्रेय उच्चकोटि के तेलों की उपलब्धि को जाता है। नए प्रकार के इंजनों के आविष्कार से
खनिज तथा ऊर्जा संसाधन चालक शक्ति के रूप में खनिज तेल की उपयोगिता अत्यधिक बढ़ गई है। तरल ईंधन ठोस ईंधन की अपेक्षा सदैव श्रेष्ठ होता है। खनिज तेल का परिवहन भी कोयले की अपेक्षा सरल व सस्ता होता है।

पेट्रोलियम स्थान भी कम घेरता है तथा प्रति इकाई अधिक ताप प्रदान करता है। कच्चे माल के लिए अनेक रसायनिक उद्योग पेट्रोलियम पर निर्भर करते हैं। दुनिया के सभी शक्तिशाली राष्ट्रों के मध्य पैट्रोलियम क्षेत्रों पर अधिकार के लिए होड़ मची है। संसार के लगभग 60% खनिज तेल के सुरक्षित भण्डार एशिया के दक्षिणी पश्चिमी भाग में स्थित हैं।

वितरण तथा उत्पादन देश में सबसे पहली बार सन् 1967 में असम के माकुम क्षेत्र में 36 मीटर गहराई पर तेल मिला। सन् 1956 में तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग की स्थापना के पश्चात् तेल की खोज का अभियान तेज हुआ।

खनिज तेल के ज्ञात स्रोतों की दृष्टि से भारत की स्थिति अब संतोषजनक कही जा सकती है क्योंकि असम के अतिरिक्त खम्भात की खाड़ी तथा अरब सागर के क्षेत्रों में भी पर्याप्त मात्रा में खनिज तेल का उत्पादन हो रहा है। अब पश्चिमी राजस्थान एवं गोदावरी बेसिन में भी नवीन क्षेत्रों का पता लगा है। भारत का सबसे महत्त्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्र अपतटीय मुंबई हाई एवं बसीन क्षेत्र है।

भारत के विभिन्न राज्यों में खनिज तेल का वितरण तथा उत्पादन निम्न प्रकार से है-
1. असम तथा पूर्वी भारत-यह ब्रह्मपुत्र घाटी में लगभग 60000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। प्रमुख तेल क्षेत्र उत्तरी पूर्वी असम से सुरमा घाटी तक फैला है। इनमें नगालैंड, मेघालय के उत्तरी पठार, दक्षिणी मेघालय पठार, सिल्चर तथा कछार जिले, .. मणिपुर, मिजोरम तथा त्रिपुरा आते हैं। असम भारत का अग्रणी तेल उत्पादक राज्य है। यहां तेल सामान्यतया 500 से 300 मीटर की गहराई से प्राप्त किया जाता है। इस समय भारतीय खनिज तेल में असम का स्थान गुजरात तथा मुंबई हाई के पश्चात आता है। असम व पूर्वी भारत के मुख्य तेल क्षेत्र निम्नलिखित हैं

(i) डिगबोई क्षेत्र-वर्ष 1890 में पहली बार इस स्थान पर तेल मिला। लगभग 13 किलोमीटर लंबा तथा 1 किलोमीटर चौड़ा यह क्षेत्र नागा पहाड़ियों में लखीमपुर जिले की टीपम पहाड़ियों के पूर्व में फैला है। यहां तेल विभिन्न स्तरों में लगभग 1200 मीटर की गहराई तक पाया जाता है। यहां प्रमुख तेल केंद्र हस्सांपांग, बप्पापांग, डिगबोई और पानीटोला हैं। इस तेल को डिगबोई तेल शोधनशाला में साफ किया जाता है। यह शोधनशाला असम ऑयल कंपनी के अधिकार में है।

(ii) नहारकटिया क्षेत्र-डिगबोई के दक्षिण-पश्चिम में 40 किलोमीटर दूर दिहिंग नदी के किनारे नहारकटिया में 4000 से 5000 मीटर गहरे कुएं खोदे गए। इनकी उत्पादन क्षमता लगभग 25 लाख टन है। यहां से खनिज तेल को पाइप लाईन द्वारा बरौनी तथा नूनमती भेजा जाता है।

(iii) शिवसागर क्षेत्र-यह क्षेत्र नहारकटिया से 40 किलोमीटर दूर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यहाँ के मोरान तथा हुगरीजन मुख्य क्षेत्र हैं। यहां से तेल बरौनी भेजा जाता है।

(iv) सुरमा नदी घाटी क्षेत्र इस क्षेत्र में तेल बदरपुर तथा पथरिया में निकाला जाता है। यह तेल हल्की श्रेणी का है।

2. गुजरात के तेल क्षेत्र-यह भारत का दूसरा महत्त्वपूर्ण राज्य है जहां से तेल प्राप्त किया जाता है। यहां खम्भात की खाड़ी का तटीय क्षेत्र तथा अंकलेश्वर क्षेत्र प्रधान है। खम्भात या लुनेज तेल क्षेत्र बड़ोदा से 50 किलोमीटर पश्चिम में बाड़सर में स्थित है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस क्षेत्र में कम से कम 3 करोड़ टन तेल के सुरक्षित भण्डार हैं। यहां से लगभग 15 लाख टन तेल प्रतिवर्ष सरलता से निकाला जा सकता है। तेल के अतिरिक्त यहां से प्राकृतिक गैस भी प्राप्त की जाती है।

अंकलेश्वर क्षेत्र बड़ोदा के दक्षिण-पश्चिम में 30 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां तेल तथा प्राकृतिक गैस समुद्री धरातल से : लगभग 1200 मीटर की गहराई से प्राप्त होती है। यहां की तेल उत्पादन क्षमता लगभग 25 लाख टन वार्षिक है। यहां से कच्चा तेल कोयला शोधनशाला में भेजा जाता है। गुजरात में ही अहमदाबाद तथा उसके निकट कोसम्बा, सनन्द, कदी, ओल्पाद, महसाना आदि स्थानों पर भी तेल के नए स्रोतों का पता लगा है।

3. मुम्बई अपतटीय क्षेत्र भारत के पश्चिमी तट पर मुम्बई के निकट 160 किलोमीटर दूर समुद्र में मुंबई (बॉम्बे) हाई क्षेत्र तथा बसीन अपतटीय क्षेत्र विकसित हैं। इस क्षेत्र में वर्ष 1976 से तेल प्राप्त किया जा रहा है। यह भारत का सबसे बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है। वर्तमान में मुंबई (बॉम्बे) हाई से 2 करोड़ टन कच्चा खनिज तेल प्राप्त किया जा रहा है जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 60% है।

4. राजस्थान-जैसलमेर जिले में खोदे गए आठ कुओं में 1100 मीटर की गहराई पर खनिज तेल पाया गया है। ये कूप बाघेवाला, तावरीवाला तथा कालरेवाला में स्थित हैं। बाडमेर जिले के गुढामलानी तथा मग्गा की ढाणी में दोहन योग्य पैट्रोलियम के विशाल भण्डारों का पता लगा है। यह तेल 1800 मीटर गहराई पर 2000 मीटर मोटी परत के रूप में विद्यमान है।

5. अन्य क्षेत्र-पंजाब के लुधियाना, होशियारपुर तथा दासूजा क्षेत्र, हिमाचल प्रदेश के ज्वालामुखी, धर्मशाला, नूरपुर तथा बिलासपुर सम्भावित क्षेत्र हैं। तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग के अनुसार देश के अन्य सम्भावित क्षेत्रों में कावेरी नदी घाटी, तमिलनाडु की पाक की खाड़ी, ओडिशा के अठगड़, पुरी, बालासोर, महानदी के डेल्टा, गोदावरी नदी बेसिन, पश्चिमी तट पर केरल राज्य, अण्डमान निकोबार द्वीपों के तटीय क्षेत्र, कोरोमण्डल तटीय भाग आदि प्रमुख हैं।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

प्रश्न 5.
भारत में खनिज पेटियों के वितरण का वर्णन करें।
उत्तर:
खनिज हमेशा कुछ निश्चित भूगर्भिक संरचनाओं में ही मिलते हैं और ऐसी संरचनाएँ कुछ निश्चित क्षेत्रों में ही पाई जाती हैं। भारत में ज्यादातर खनिज प्राचीन चट्टानों वाले इलाकों में पाए जाते हैं।

उदाहरणतया-

  • पेट्रोलियम टर्शियरी शैलों में पाया जाता है।
  • चूने का पत्थर, जिप्सम और डोलोमाइट ऊपरी शैल समूहों में पाए जाते हैं।
  • देश का लगभग 97 प्रतिशत कोयला, दामोदर, सोन, महानदी और गोदावरी बेसिन में संचित है।

वितरण-औद्योगिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण कुछ खनिज भारत में बहत कम मात्रा में पाए जाते हैं। भारत में खनिजों की तीन विस्तृत पेटियाँ हैं तथा एक का हाल ही में पता चला है।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 7 खनिज तथा ऊर्जा संसाधन 2
1. उत्तर-पूर्वी पठार-

  • इस पट्टी में तीन क्षेत्र आते हैं-(i) छोटा नागपुर का पठार, (ii) ओडिशा का पठार तथा, (iii) पूर्वी आंध्र प्रदेश पठार।
  • यहाँ धातु उद्योग में काम आने वाले अनेक प्रकार के खनिज व्यापक रूप से पाए जाते हैं।
  • यहाँ उच्चतम कोटि का लोहा, मैंगनीज़, चूना पत्थर, अभ्रक पाए जाते हैं।
  • इसी क्षेत्र में स्थित दामोदर घाटी और छत्तीसगढ़ के कोयला भंडार ने देश के विकास में योगदान दिया।
  • भारत में अधिकतर लौह-इस्पात इसी पेटी में स्थित है।

2. दक्षिण-पश्चिमी पठार-

  • यह पेटी मुख्यतः लौह-अयस्क, मैंगनीज़ और बॉक्साइट के भंडार से भरपूर है।
  • इस खनिज पेटी का विस्तार कर्नाटक और निकटवर्ती तमिलनाडु के पठार पर है।
  • केरल में मोनाजाइट, थोरियम और बॉक्साइट क्ले के संचय पाए जाते हैं।
  • उत्तर पूर्वी पठारी प्रदेश की भाँति इस प्रदेश में अधिक विविधता नहीं पाई जाती है।
  • इसी पेटी में ही सोने की तीन खाने हैं।

3. उत्तर-पश्चिमी प्रदेश-

  • इस खनिज पेटी का विस्तार गुजरात में खंभात की खाड़ी से राजस्थान की अरावली श्रेणी तक है।
  • इस पेटी की चट्टानों में ताँबा और जस्ता प्रमुख रूप से पाए जाते हैं।
  • इमारती पत्थर, बलुआ पत्थर, ग्रेनाइट, मार्बल, जिप्सम, मुल्तानी मिट्टी पाई जाती है।
  • गुजरात में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के भंडार पाए जाते हैं।
  • यह पेटी अलौह धातुओं के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ अन्य खनिजों के भंडार कम और बिखरे हुए मिलते हैं।

4. प्रायद्वीपीय पठारी क्षेत्र-

  • इस पेटी में कहीं-कहीं खनिज पाए जाते हैं।
  • ऊपरी ब्रह्मपुत्र घाटी पेट्रोलियम उत्पादन के लिए विख्यात है।
  • हिमाचल के पूर्वी और पश्चिमी भागों में ताँबा, शीशा, जस्ता, कोबाल्ट और टंगस्टन पाए जाते हैं।

प्रश्न 6.
भारत में नाभिकीय ऊर्जा तथा उसके विकास का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जीवाश्म ईंधनों के विभिन्न भण्डारों में तेजी से होती हुई कमी के कारण देश में ऊर्जा की आवश्यकता की पूर्ति हेतु नाभिकीय ऊर्जा का महत्त्व तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान में देश की कुल विद्युत क्षमता का केवल 2.4% भाग नाभिकीय अथवा परमाणु ऊर्जा से प्राप्त होता है। नाभिकीय ऊर्जा अथवा अणुशक्ति परमाणु खनिजों के विखण्डन से उत्पन्न होती है। एक अनुमान के अनुसार एक औंस यूरेनियम से उत्पन्न ऊर्जा सौ मीट्रीक टन कोयले की क्षमता के बराबर होती है। नाभिकीय ऊर्जा के उत्पादन तथा विकास के लिए अनेकों खनिजों की आवश्यकता होती है। इनमें प्रमुख रूप से यूरेनियम, थोरियम, मोनाजाइट आदि आते हैं।
1. यूरेनियम-यूरेनियम एक कठोर तथा भारी रेडियोधर्मी धातु है जो मुख्यतः पिचब्लैण्ड तथा यूरेनाइट खनिज अयस्कों से प्राप्त होती है। पिचब्लैण्ड (Pitchblende) में यूरेनियम की मात्रा 50 से 80% तक होती है जबकि यूरेनाइट में यह मात्रा 65 से 80% तक होती है। यूरेनियम गोल आकार के पिण्डों के रूप में मिलता है जो गहरे काले रंग का होता है।

यूरेनियम भारत में बहुत पहले से उपलब्ध था, परंतु द्वितीय विश्व युद्ध से पूर्व समाप्त हो गया था। 1950 में इसके दो नए क्षेत्रों का पता लगा। पहला क्षेत्र झारखण्ड के सिंहभूम में तांबा खनिज क्षेत्र से सम्बद्ध है जो 97 किलोमीटर लंबी पट्टी के रूप में है। दूसरा क्षेत्र राजस्थान के उदयपुर के निकट अमरा में स्थित है। भारत में ये खनिज मुख्यतः चार स्रोतों से मिलते हैं
(i) निम्न श्रेणी की धातु झारखण्ड के सिंहभूम तथा मध्य राजस्थान की धारवाड़ तथा आर्कियन चट्टानों से प्राप्त की जाती है। इनमें यूरेनियम की मात्रा 0.03 से 0.1% तक होती है। सामान्यतया यह धातु 1 टन चट्टानों में 300 ग्राम तक पाई जाती है।

(ii) पैग्मेटाइट्स शैलों से मिश्रित यूरेनियम प्राप्त किया जाता है। इन शैलों में यरेनियम 10% से 30% तक मिलता है। ये शैलें उत्तरी बिहार तथा मध्य राजस्थान के अभ्रक क्षेत्रों तथा आंध्र प्रदेश के नैलोर में मिलती हैं। झारखण्ड के सिंहभूम जिले में कुल अनुमानित भण्डार 40 लाख टन हैं। कर्नाटक तथा केरल राज्यों में भी ये चट्टानें मिलती हैं। राजस्थान के उदयपुर के निकट अमरा नामक स्थान पर उत्तम किस्म के निक्षेप पाए गए हैं। राजस्थान में दूसरा क्षेत्र भीलवाड़ा में भूनास के निकट है।

(iii) केरल तथा तमिलनाडु के तटीय भागों में मिलने वाली मोनाजाइट बालू मिट्टी से भी यूरेनियम प्राप्त किया जाता है। कुमारी अंतरीप तट के दोनों ओर लगभग 160 किलोमीटर की लंबाई में इस प्रकार की बालू मिट्टी पाई जाती है। केरल राज्य के तटीय भागों में मोनाजाइट के लगभग 25 लाख टन भण्डार का अनुमान है। भारतीय मोनाजाइट उत्तम श्रेणी का मोनाजाइट माना जाता है।

(iv) चैरालाइट भी यूरेनियम मिलने का स्रोत है जो केरल प्रदेश की बालू में पाया जाता है। इसमें यूरेनियम 2-4% तथा थोरियम 19 से 33% तक पाया जाता है। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले तथा उत्तराखण्ड के चमोली जिले में भी यूरेनियम के नए भण्डारों का पता चला है।

2. थोरियम-थोरियम प्राप्ति के मुख्य रूप से तीन खनिज हैं-
(i) थोरियेनाइट जो भारत में बिल्कुल नहीं मिलता।

(ii) एलैनाइट कई स्थानों पर मिलता है परंतु इसमें थोरियम की मात्रा बहुत कम लगभग 3% तक ही होती है। इसके प्रमुख क्षेत्रों में तमिलनाडु के मदुरै जिले का मलूर तालुका, आंध्र प्रदेश के मेंढक, करीमनगर, वारंगल तथा हैदराबाद जिलों में बालागुड़बा, तोरनाल, तीमापुर तथा बसावापुरम क्षेत्र, झारखण्ड के हजारीबाग जिले के पैटो, परसाबाद, बंसोधारवा क्षेत्र तथा राजस्थान के पाली जिले के भद्रावन तथा भीतवाड़ा और भीलवाड़ा जिले का सरदारपुर क्षेत्र सम्मिलित हैं।

(iii) थोरियम के लिए मोनाजाइट तमिलनाडु के कन्याकुमारी, थंजावूर तथा तिरुनलवैली जिलों में, आंध्रप्रदेश के वाल्टेयर, नरसीपट्टनम तथा विशाखापट्टनम जिलों में, ओडिशा में महानदी तथा चिल्का झील के मध्य तथा गंजाम जिले तथा झारखण्ड के रांची तथा पश्चिम बंगाल के पुरूलिया जिलों में पाया जाता है।

परमाणु ऊर्जा केंद्र (परमाणु विद्युत गृह)-भारत में नाभिकीय ऊर्जा के विकास के लिए 1948 में भारतीय नाभिकीय ऊर्जा आयोग की स्थापना की गई। भारत में अणुशक्ति के विकास का श्रेय डॉ० होमी जहाँगीर भाभा को जाता है। भारत का पहला आणविक अभिक्रियक मुम्बई के नजदीक ट्राम्बे द्वीप पर 1955 में स्थापित किया गया जिसका मुख्य उद्देश्य विद्युत शक्ति उत्पन्न करना तथा कृषि और उद्योग के लिए अणुशक्ति का उपयोग करना था। वर्तमान में भारत में परमाणु ऊर्जा से प्राप्त होता है। भारत में अभी तक परमाणु शक्ति पर आधारित पांच विद्युत गृह स्थापित किए गए हैं
1. तारापुर विद्युत गृह भारत के पहले तथा एशिया के सबसे बड़े परमाणु विद्युत गृह की स्थापना सन् 1969 में अमेरिका के सहयोग से की गई थी। यह केंद्र महाराष्ट्र तथा गुजरात की सीमा पर तारापुर नामक स्थान पर स्थित है। इस विद्युत गृह में दो परमाणु भट्टियां हैं जिसमें प्रत्येक की विद्युत उत्पादन क्षमता 200 मेगावाट से अधिक है। शुरू में अमेरिका से आयातित यूरेनियम के द्वारा विद्युत उत्पादन होता था, परंतु अब प्लूटोनियम का उपयोग किया जा रहा है।

2. राजस्थान अणुशक्ति गृह भारत का दूसरा परमाणु विद्युत गृह राजस्थान राज्य के कोटा शहर के दक्षिण पश्चिम में 42 किलोमीटर दूर तथा राणा प्रताप सागर बांध के उत्तर पूर्व में 22 मील दूर पहाड़ियों के मध्य रावतभाटा नामक स्थान पर बनाया गया है। पास में बहने वाली चम्बल नदी से इस विद्युत गृह को जल प्राप्त होता है। इस विद्युत गृह में 220 मेगावाट क्षमता की दो परमाणु भट्टियां हैं। इस शक्ति केंद्र में राजस्थान में उपलब्ध यूरेनियम का उपयोग करने की योजना है। इस विद्युत गृह की तीसरी तथा चौथी इकाइयों की उत्पादन क्षमता 225 मेगावाट है।

3. कलपक्कम अणुशक्ति गृह-यह भारत का तीसरा परमाणु विद्युत गृह है जिसे तमिलनाडु में चेन्नई के निकट कलपक्कम में बनाया गया है। इसे 1983 में पूरा किया गया। यह भारत की पहली स्वदेशी परियोजना है जिसमें पूर्णतया स्वदेशी सामान तथा तकनीक का उपयोग हुआ है। इसमें दो परमाणु भट्टियां हैं तथा प्रत्येक की उत्पादन क्षमता 235 मेगावाट है।

4. नरौरा अणुशक्ति गृह-यह भारत का चौथा परमाणु विद्युत गृह है जो उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर के निकट नरौरा नामक स्थान पर स्थापित किया गया। इसमें भी दो परमाणु भट्टियां हैं जिसमें प्रत्येक की उत्पादन क्षमता 235 मेगावाट है। इसे 1986 में शुरू किया गया।

5. काकरापारा अणुशक्ति गृह-भारत का पांचवां परमाणु विद्युत गृह गुजरात राज्य के काकरापारा नामक स्थान पर बनाया गया। इस शक्ति गृह में भी दो परमाणु भट्टियां हैं जिनकी कुल क्षमता 470 मेगावाट होगी। यह शक्ति गृह भी पूर्णतया स्वदेशी तकनीक पर आधारित हैं।

6. कैगा अणुशक्ति गृह-कर्नाटक राज्य में स्थापित इस परमाणु शक्ति पर आधारित विद्युत गृह की भी कुल उत्पादन क्षमता 470 मेगावाट होगी।

इसके अलावा भी भारतीय नाभिकीय ऊर्जा निगम द्वारा अन्य स्थानों पर भी नाभिकीय ऊर्जा केंद्र स्थापित करने की योजनाएं हैं। इनमें से तमिलनाडु के कुडनकुलम तथा महाराष्ट्र के रत्नागिरि जिले के जैतपुर में संयत्र स्थापित करना प्रस्तावित है। एक अनुमान के अनुसार भारत में परमाणु शक्ति पर आधारित विद्युत शक्ति का उत्पादन वर्तमान में लगभग 25 लाख किलोवाट हैं।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 जल-संसाधन

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 जल-संसाधन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 जल-संसाधन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. भारत में सबसे अधिक वर्षा होती है?
(A) अम्बाला में
(B) मॉसिनराम में
(C) कोलकाता में
(D) इलाहाबाद में
उत्तर:
(B) मॉसिनराम में

2. भारत में सिंचाई का सबसे बड़ा स्रोत है-
(A) तालाब
(B) नहरें
(C) भूमिगत जल
(D) जलाशय
उत्तर:
(B) नहरें

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 जल-संसाधन

3. प्रायद्वीपीय पठारी भाग में सिंचाई का महत्त्वपूर्ण स्रोत है-
(A) नहरें
(B) तालाब
(C) कुएँ
(D) नलकूप
उत्तर:
(B) तालाब

4. नीरू-मीरू (जल और आप) कार्यक्रम का संबंध किस राज्य से है?
(A) आंध्र प्रदेश से
(B) पंजाब से
(C) उत्तर प्रदेश से
(D) पश्चिमी बंगाल से
उत्तर:
(A) आंध्र प्रदेश से

5. भारत में भौम जल संसाधनों की कुल संभावित क्षमता कौन-से राज्य में सबसे अधिक है?’
(A) हिमाचल प्रदेश में
(B) पंजाब में
(C) उत्तर प्रदेश में
(D) पश्चिमी बंगाल में
उत्तर:
(B) पंजाब में

6. सुखोमाजरी जल संभर विकास मॉडल किस राज्य में स्थित है?
(A) हरियाणा में
(B) पंजाब में
(C) हिमाचल प्रदेश में
(D) उत्तर प्रदेश में
उत्तर:
(A) हरियाणा में

7. देश में सबसे कम शुद्ध सिंचित क्षेत्र किस राज्य में है?
(A) उत्तर प्रदेश में
(B) हरियाणा में
(C) पंजाब में
(D) मिज़ोरम में
उत्तर:
(D) मिज़ोरम में

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 जल-संसाधन

8. भारत में सबसे अधिक शुद्ध सिंचित क्षेत्र किस राज्य में है?
(A) पंजाब में
(B) हरियाणा में
(C) उत्तर प्रदेश में
(D) मिज़ोरम में
उत्तर:
(A) पंजाब में

9. निम्नलिखित में से किस राज्य में भौम जल का उपयोग बहुत अधिक होता है?
(A) पंजाब
(B) हरियाणा
(C) तमिलनाडु
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

10. भारत में कौन-सी नदी के जल की उपयोग योग्य क्षमता अधिक है?
(A) गंगा
(B) कावेरी
(C) ब्रह्मपुत्र
(D) कृष्णा
उत्तर:
(A) गंगा

11. आधुनिक जल संभर योजना कब प्रारंभ हुई?
(A) 1985-86 में
(B) 1988-89 में
(C) 1990-91 में
(D) 1995-96 में
उत्तर:
(A) 1985-86 में

12. राष्ट्रीय जल नीति कब लागू की गई?
(A) सन् 1999 में
(B) सन् 2000 में
(C) सन् 2001 में
(D) सन् 2002 में
उत्तर:
(D) सन् 2002 में

13. पृथ्वी का कितना प्रतिशत भाग धरातलीय पानी से आच्छादित है?
(A) लगभग 60%
(B) लगभग 65%
(C) लगभग 71%
(D) लगभग 90%
उत्तर:
(C) लगभग 71%

14. धरातलीय जल संसाधन के स्रोत हैं-
(A) नदियाँ
(B) झीलें
(C) तालाब
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

15. भारत में जल अधिनियम कब बना था?
(A) सन् 1972 में
(B) सन् 1974 में
(C) सन् 1976 में
(D) सन् 1980 में
उत्तर:
(B) सन् 1974 में

16. भारत में किन नदियों के जल ग्रहण क्षेत्र बहुत बड़े हैं?
(A) गंगा-सिन्धु-ब्रह्मपुत्र
(B) नर्मदा-ताप्ती-कृष्णा
(C) व्यास-चिनाब-यमुना
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) गंगा-सिन्धु-ब्रह्मपुत्र

17. भारत में विश्व जल संसाधन का कितने प्रतिशत भाग पाया जाता है?
(A) 10%
(B) 5%
(C) 8%
(D) 4%
उत्तर:
(D) 4%

18. घरेलू क्षेत्र में किस प्रकार का जल अधिक उपयोग किया जाता है?
(A) भौम जल
(B) खारा जल
(C) धरातलीय जल
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) धरातलीय जल

19. जल प्रदूषण के निवारण का उपाय है
(A) जन जागरुकता
(B) प्रदूषण निवारण के नियमों का पालन
(C) औद्योगिक इकाइयों के प्रदूषकों पर नियंत्रण
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

20. केंद्र सरकार द्वारा प्रवर्तित जल-संभर विकास परियोजना है-
(A) हरियाली
(B) विवेक
(C) बागवानी
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) हरियाली

21. निम्नलिखित में से कौन-सा सुमेल सही नहीं है?
(A) अहमदाबाद-साबरमती
(B) यमुनानगर-गंगा
(C) लखनऊ-गोमती
(D) हैदराबाद-मूसी
उत्तर:
(B) यमुनानगर-गंगा

22. निम्नलिखित में से किस स्थान पर गंगा नदी नहीं बहती?
(A) कानपुर
(B) दिल्ली
(C) वाराणसी
(D) पटना
उत्तर:
(B) दिल्ली

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23. किन राज्यों में अधिक जल निकालने के कारण भूमिगत जल में फ्लुओराइड का संकेंद्रण बढ़ गया है?
(A) केरल व कर्नाटक में
(B) हिमाचल व पंजाब में
(C) राजस्थान व महाराष्ट्र में
(D) असम व मणिपुर में
उत्तर:
(C) राजस्थान व महाराष्ट्र में

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
भारत के किस भाग में नहरों द्वारा सिंचित क्षेत्रफल अधिकतम है?
उत्तर:
उत्तरी भारत में।

प्रश्न 2.
भारत के किस भाग में तालाबों द्वारा सिंचित क्षेत्रफल अधिकतम है?
उत्तर:
दक्षिणी भारत में।

प्रश्न 3.
किन नदियों के जल ग्रहण क्षेत्र में वर्षा अपेक्षाकृत अधिक होती है?
उत्तर:
गंगा और ब्रह्मपुत्र आदि नदियों के।

प्रश्न 4.
उत्तर भारत की किन्हीं दो नदियों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. गंगा
  2. यमुना।

प्रश्न 5.
दक्षिण भारत की किन्हीं दो नदियों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. नर्मदा
  2. कावेरी।

प्रश्न 6.
दक्षिण भारत की किन नदियों में वार्षिक जल प्रवाह का अधिकतर भाग काम में लाया जाता है?
उत्तर:
कावेरी, कृष्णा और गोदावरी नदियों में।

प्रश्न 7.
किस राज्य में भौम जल का उपयोग सबसे अधिक है? तीन उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. हरियाणा
  2. पंजाब
  3. तमिलनाडु

प्रश्न 8.
किस राज्य में भौम जल का उपयोग सबसे कम है? तीन उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. छत्तीसगढ़
  2. ओडिशा
  3. केरल।

प्रश्न 9.
लैगूनों और झीलों में सामान्यतः किस प्रकार का जल है?
उत्तर:
खारा जल।

प्रश्न 10.
पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवल (शुद्ध) बोए गए क्षेत्र का कितना प्रतिशत भाग सिंचाई के अंतर्गत है?
उत्तर:
लगभग 85 प्रतिशत।

प्रश्न 11.
हरियाणा में कुओं और नलकूपों द्वारा कुल शुद्ध सिंचित क्षेत्र कितना प्रतिशत है?
उत्तर:
लगभग 51.3 प्रतिशत।

प्रश्न 12.
भारत के किस राज्य में कुओं और नलकूपों द्वारा कुल शुद्ध सिंचित क्षेत्र सबसे अधिक है?
उत्तर:
गुजरात में।

प्रश्न 13.
भारत में जल की प्रति व्यक्ति उपलब्धता में कमी का कोई एक कारण बताइए।
उत्तर:
बढ़ती जनसंख्या।

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प्रश्न 14.
नीरू-मीरू (जल व आप) कार्यक्रम का संबंध किस राज्य से है?
उत्तर:
आंध्र प्रदेश से।

प्रश्न 15.
‘अखारी पानी संसद’ का संबंध किस राज्य से है?
उत्तर:
राजस्थान (अलवर) से।

प्रश्न 16.
भौम जल का सर्वाधिक उपयोग किसमें किया जाता है?
उत्तर:
सिंचाई कार्य में।

प्रश्न 17.
वर्षा का जल बहकर नदियों, झीलों और तालाबों में चला जाता है, तो उसे क्या कहते हैं?
उत्तर:
पृष्ठीय जल।

प्रश्न 18.
पृष्ठीय जल का मूल स्रोत क्या है?
उत्तर:
वर्षा।

प्रश्न 19.
वर्षा से प्राप्त जल कैसा होता है?
उत्तर:
अलवणीय जल।

प्रश्न 20.
गंगा और ब्रह्मपुत्र बेसिनों में कितना प्रतिशत कुल पुनः पूर्ति योग्य भौम जल संसाधन पाया जाता है?
उत्तर:
लगभग 46 प्रतिशत।

प्रश्न 21.
C.P.C.B. का पूरा नाम लिखें।
उत्तर:
Central Pollution Control Board (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड)।

प्रश्न 22.
भारत की कोई दो सबसे अधिक प्रदूषित नदियों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. यमुना
  2. साबरमती।

प्रश्न 23.
अहमदाबाद का घरेलू व औद्योगिक अपशिष्ट किस नदी में डाला जाता है?
उत्तर:
साबरमती नदी में।

प्रश्न 24.
दिल्ली का घरेलू व औद्योगिक अपशिष्ट किस नदी में डाला जाता है?
उत्तर:
यमुना नदी में।

प्रश्न 25.
हीराकुड बाँध किस नदी पर स्थित है?
उत्तर:
महानदी।

प्रश्न 26.
कानपुर औद्योगिक अपशिष्ट किस नदी में डाला जाता है?
उत्तर:
गंगा नदी में।

प्रश्न 27.
लखनऊ का घरेलू व औद्योगिक अपशिष्ट किस नदी में डाला जाता है?
उत्तर:
गोमती नदी में।

प्रश्न 28.
राष्ट्रीय जल नीति कब लागू की गई?
उत्तर:
सन् 2002 में।

प्रश्न 29.
भारत में विश्व के धरातलीय क्षेत्र का कितने प्रतिशत जल पाया जाता है?
उत्तर:
लगभग 2.45%

प्रश्न 30.
भारत में विश्व के जल संसाधनों का कितने प्रतिशत जल पाया जाता है?
उत्तर:
लगभग 4%

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प्रश्न 31.
ओडिशा में किस बाँध और डेल्टा से नहरें निकालकर सिंचाई का काम लिया जाता है?
उत्तर:
ओडिशा में हीराकुड बाँध और महानदी डेल्टा से नहरें निकालकर सिंचाई का काम लिया जाता है।

प्रश्न 32.
भारत की प्रमुख किन्हीं चार नदियों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. गंगा
  2. यमुना
  3. गोदावरी
  4. कृष्णा।

प्रश्न 33.
भारत में कौन-सी नदी के जल की उपयोग योग्य क्षमता सबसे अधिक है?
उत्तर:
गंगा।

प्रश्न 34.
सुखोमाजरी जल-संभर विकास मॉडल किस राज्य में स्थित है?
उत्तर:
हरियाणा में।

प्रश्न 35.
देश में सबसे कम शुद्ध सिंचित क्षेत्र वाला राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
मिज़ोरम।

प्रश्न 36.
भारत में सबसे अधिक शुद्ध सिंचित क्षेत्र वाला राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
पंजाब।

प्रश्न 37.
जल किस प्रकार का संसाधन है?
उत्तर:
प्राकृतिक संसाधन।

प्रश्न 38.
आधुनिक सिंचाई का आरंभ कब से माना जाता है?
उत्तर:
सन् 1831 से।

प्रश्न 39.
‘हरियाली’ क्या है?
उत्तर:
‘हरियाली’ केंद्र सरकार द्वारा प्रवर्तित जल-संभर विकास परियोजना है।

प्रश्न 40.
धरातलीय एवं भौम जल का सबसे अधिक उपयोग किस में होता है?
उत्तर:
कृषि में।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
धरातलीय जल के प्रमुख स्रोत कौन-से हैं?
अथवा
धरातलीय जल कहाँ-कहाँ से प्राप्त होता है?
उत्तर:
धरातलीय जल के प्रमुख स्रोत हैं-

  1. झीलें
  2. तालाब
  3. नदियाँ
  4. अन्य जलाशय आदि।

प्रश्न 2.
भारत में सिंचाई की अनिवार्यता के कोई तीन कारण बताइए।
उत्तर:

  1. वर्षा की अनिश्चित मात्रा
  2. वर्षा का अनियमित आगमन
  3. वर्षा ऋतु की अल्प अवधि

प्रश्न 3.
उत्तरी भारत में नहरों से सिंचाई अधिक क्यों होती है?
उत्तर:
उत्तरी भारत की नरम व मुलायम मिट्टी, समतल मैदान के कारण उत्तरी भारत में नदियों से सिंचाई अधिक होती है।

प्रश्न 4.
राष्ट्रीय जल नीति के दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:

  1. जल के अपव्यय को कम करना।
  2. जल संसाधन प्रबंधन व संरक्षण सुनिश्चित करना।

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प्रश्न 5.
जल संभर प्रबंधन के अधीन चलाए गए कोई तीन कार्यक्रम बताइए।
उत्तर:

  1. हरियाली
  2. नीरू-मीरू
  3. अरकरी पानी संसद।

प्रश्न 6.
मृदा की गुणवत्ता के घटने के कोई दो कारण लिखिए।
उत्तर:

  1. अत्यधिक फसलों को उगाना अर्थात् एक ही वर्ष में एक ही खेत में बार-बार फसलें उगाना।
  2. पशु चराई।

प्रश्न 7.
जल गुणवत्ता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जल गुणवत्ता से तात्पर्य जल की शुद्धता या अनावश्यक बाहरी पदार्थों से रहित जल से है। जल इन बाहरी पदार्थों से प्रदूषित होता है और मानव के उपयोग योग्य नहीं रहता। जब विषैले पदार्थ झीलों, नदियों, समुद्रों और अन्य जलाशयों में प्रवेश करते हैं तो जल प्रदूषण बढ़ता है और जल के गुणों में कमी आने से जलीय तंत्र प्रभावित होते हैं। कभी-कभी प्रदूषक नीचे तक पहुँचकर भौम-जल को प्रदूषित करते हैं।

प्रश्न 8.
सिंचाई (Irrigation) किसे कहते हैं?
उत्तर:
वर्षा के अभाव में शुष्क खेतों या क्षेत्रों तक कृत्रिम रूप से पानी पहुँचाने को सिंचाई कहते हैं।

प्रश्न 9.
जल संभर या जल विभाजक किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह उत्थित सीमा जो विभिन्न अपवाह तंत्रों में बहने वाली सरिताओं के शीर्ष भागों को अलग करती है, जल विभाजक कहलाती है।

प्रश्न 10.
भूमिगत जल किसे कहते हैं? अथवा भौम जल क्या है?
उत्तर:
जब वर्षा का जल भूमि द्वारा सोख लिया जाता है अर्थात् मिट्टी में प्रवेश कर भूमिगत से जाता है उसे भूमिगत या भौम जल कहते हैं।

प्रश्न 11.
पृष्ठीय जल के कोई दो उपयोग बताएँ।
उत्तर:

  1. पृष्ठीय जल पीने और खाना बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।
  2. कृषि एवं उद्योगों के लिए भी इनका उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 12.
जल संभर प्रबंधन का क्या उद्देश्य है?
उत्तर:
जल संभर प्रबंधन का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों और समाज के बीच संतुलन लाना है।

प्रश्न 13.
वर्षा जल संग्रहण के मुख्य उद्देश्य बताएँ।
उत्तर:
वर्षा जल संग्रहण के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

  1. यह पानी की उपलब्धता को बढ़ाता है
  2. यह भूमिगत जल स्तर को नीचा होने से रोकता है व भूमिगत जल की गुणवत्ता को बढ़ाता है
  3. यह मृदा अपरदन को रोकता है।

प्रश्न 14.
जल संभर प्रबंधन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जल संभर प्रबंधन से अभिप्राय धरातलीय और भौम-जल संसाधनों के दक्ष प्रबंधन से है। विस्तृत अर्थ में जल संभर प्रबंधन के अंतर्गत प्राकृतिक संसाधन और जल संभर सहित मानवीय संसाधनों के संरक्षण, पुनःउत्पादन और विवेकपूर्ण उपयोग को शामिल किया जाता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जल संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
जल संसाधनों का संरक्षण निम्नलिखित कारणों से आवश्यक है-

  1. जल की कमी, विशेष रूप से प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता घट रही है।
  2. स्थानिक और ऋतुवत असमानता, कुछ प्रदेशों में जल का बाहुल्य है तथा कुछ में कमी है। इसलिए कमी वाले क्षेत्रों में जल संरक्षण नितांत आवश्यक हो जाता है।
  3. जल की बढ़ती मांग और तेजी से फैलते प्रदूषण के कारण जल संसाधन का संरक्षण आवश्यक हो गया है।

प्रश्न 2.
वर्षा जल संग्रहण की विधियों या तकनीकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
वर्षा जल संग्रहण वास्तव में जल भंडारों के पुनर्भरण को पर्यावरण अनुकूल (Eco-friendly) बनाने की तकनीक है। इस तकनीक में वर्षा जल को एकत्र करके भूमि जल भण्डारों में संग्रहित करना शामिल है, जिससे स्थानीय घरेलू मांग को पूरा किया जा सके। इसकी मुख्य तकनीकें अग्रलिखित हैं

  • छत के वर्षा जल का संग्रहण।
  • बंद व बेकार पड़े कुओं का पुनर्भरण।
  • खुदे हुए कुओं का पुनर्भरण।
  • रिसाव गड्ढों का निर्माण।
  • खेतों के चारों ओर खाइयाँ बनाना।
  • पुनर्भरण शाफ्ट द्वारा जल संग्रहण।
  • बोर कुएँ सहित क्षैतिज शाफ्ट द्वारा जल संग्रहण।

प्रश्न 3.
उत्तर भारत और दक्षिण भारत की नदियों में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
उत्तर भारत तथा दक्षिण भारत की नदियों में निम्नलिखित अंतर हैं-

उत्तर भारत की नदियाँदक्षिण भारत की नदियाँ
1. ये नदियाँ अधिक लंबी व बड़े बेसिन वाली हैं।1. ये नदियाँ कम लंबी व छोटे बेसिन वाली हैं।
2. ये नदियाँ हिमाच्छादित प्रदेशों से निकलती हैं।2. ये नदियाँ वर्षा पर निर्भर करती हैं। –
3. इन नदियों में सारा वर्ष जल बहता है।3. ये नदियाँ ग्रीष्म ऋतु में सूख जाती हैं।
4. ये नदियाँ गहरे गॉर्ज बनाती हैं।4. ये नदियाँ चौड़ी व उथली घाटियों का निर्माण करती हैं।
5. ये नदियाँ विसर्प बनाती हैं।5. ये नदियाँ सीधा मार्ग अपनाती हैं।
6. ये नदियाँ जहाजरानी तथा सिंचाई के लिए उचित हैं।6. ये नदियाँ जहाजरानी तथा सिंचाई के लिए उचित नहीं हैं।
7. ये नदियाँ अपने विकास की बाल्यावस्था में हैं।7. ये नदियाँ प्रौढ़ अवस्था में हैं।
8. ये नदियाँ पूर्ववर्ती हैं।8. ये नदियाँ अनुवर्ती हैं।

प्रश्न 4.
जल संरक्षण के प्रमुख उपायों का वर्णन करें।
उत्तर:
जल संरक्षण के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं-

  1. नदियों पर बाँध निर्माण द्वारा-नदियों पर बाँधों का निर्माण करके जल संरक्षण की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।
  2. प्रदूषित जल का पुनःचक्रण-प्रदूषित जल को आधुनिक तकनीकों द्वारा साफ करके पीने योग्य बनाया जा सकता है। पुनःचक्र और पुनःउपयोग के द्वारा अलवणीय जल की उपलब्धता को सुधारा जा सकता है।
  3. सिंचाई की आधुनिक पद्धतियाँ-सिंचाई की नई पद्धतियाँ; जैसे फव्वारा विधि को अपनाकर मृदा के उपजाऊपन को बचाया जा सकता है और खरपतवार पैदा नहीं होते।

प्रश्न 5.
प्रायद्वीपीय भारत की अपेक्षा विशाल मैदानों में सिंचाई अधिक विकसित क्यों है?
उत्तर:
क्योंकि भारत के विशाल मैदानों का धरातल समतल है तथा यहाँ की अधिकांश नदियाँ हिमाच्छादित प्रदेशों से निकलती हैं जिसके कारण इनमें पानी की कमी नहीं रहती। यहाँ की मिट्टी कोमल तथा मुलायम है जिस पर नहरें आसानी से खोदी जा सकती हैं। मंद ढाल होने के कारण पानी दूर तक पहुँचाया जा सकता है। इन्हीं कारणों से विशाल मैदानों में सिंचाई अधिक विकसित पाई जाती है, जबकि धरातलीय बाधाओं के कारण प्रायद्वीपीय भारत में सिंचाई अधिक विकसित नहीं हो सकी।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 जल-संसाधन

प्रश्न 6.
उत्तर भारत के मैदान में नहरों का विस्तृत जाल है। वर्णन करें।
उत्तर:
उत्तरी भारत में अधिकांश नदियाँ हिमाच्छादित प्रदेशों से निकलती हैं, जिनमें सारा साल जल प्रवाहित होता रहता है। भारत की कुल सिंचित भूमि का लगभग 39 प्रतिशत क्षेत्र नहरों द्वारा सिंचित किया जाता है। ज्यादातर नहरें उत्तर:पश्चिमी भारत जल संसाधन के मैदानी भागों में हैं। शीतकाल में हिमीकरण के कारण जल की मात्रा कुछ कम अवश्य हो जाती है, परंतु बांध से एकत्रित जल के द्वारा इस कमी को पूरा किया जाता है।

अतः उत्तर:पश्चिमी भारत के मैदानी भागों में जल के वितरण को नहरों द्वारा व्यवस्थित किया जाता है। यहाँ की मिट्टी कोमल एवं मुलायम होने के कारण नहरें आसानी से खोदी जा सकती हैं। उत्तर प्रदेश में ऊपरी गंगा नहर, निचली गंगा नहर, शारदा नहर, पूर्वी यमुना नहर तथा आगरा नहर के द्वारा सिंचाई की जाती है। पंजाब में सरहिंद नहर, भाखड़ा नहर, बीकानेर नहर, ब्यास नहर तथा हरियाणा में यमुना नहर, जुई नहर, गुड़गांव नहर प्रमुख हैं। बिहार, पश्चिमी बंगाल तथा राजस्थान में भी नहरों द्वारा सिंचाई की जाती है। इनमें सोन नहर, कोसी बांध, त्रिवेणी नहर, राजस्थान नहर, चंबल नहर, दामोदर नहर आदि प्रमुख सिंचाई के साधन हैं।

प्रश्न 7.
जल के मुख्य उपयोग क्या हैं?
उत्तर:
जल के मख्य उपयोग निम्नलिखित हैं-

  1. जल सिंचाई के लिए आवश्यक है।
  2. जल विद्युत उत्पादन में काम आता है।
  3. औद्योगिक इकाइयों में पर्याप्त जल की आपूर्ति पहली आवश्यकता है।
  4. परिवहन, सफाई तथा मनोरंजन के लिए भी जल का उपयोग होता है।
  5. जल जीवन का आधार है। यह जीव-जंतु तथा पेड़-पौधों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

प्रश्न 8.
कुओं व नलकूपों द्वारा होने वाली सिंचाई के लाभ बताएँ।
उत्तर:
कुओं तथा नलकूपों द्वारा होने वाली सिंचाई के लाभ निम्नलिखित हैं-

  1. कुओं तथा नलकूपों के निर्माण में व्यय बहुत कम आता है।
  2. इनके पानी से भूमि में उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है।
  3. पानी का आवश्यकतानुसार प्रयोग किया जाता है।
  4. कृषि उत्पादन में बढ़ोत्तरी होती है।
  5. वर्ष में दो या इससे अधिक फसलें उगाई जा सकती हैं।
  6. इनको खोदने से भूमि बहुत कम बेकार होती है।
  7. क्षार फूटने की समस्या उत्पन्न नहीं होती।

प्रश्न 9.
तालाबों द्वारा सिंचाई करने के लाभ बताएँ। अथवा प्रायद्वीपीय भारत में तालाबी सिंचाई क्यों महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर:
तालाबों द्वारा सिंचाई करने के लाभ निम्नलिखित हैं-

  1. प्राकृतिक तालाब सिंचाई के सस्ते और सरल साधन हैं।
  2. कठोर चट्टानी इलाकों के होने के कारण तालाब शीघ्र नष्ट नहीं होते।
  3. रुके हुए पानी में गंदगी का सम्मिश्रण होता है, जिसकी सिंचाई से भूमि में उर्वरा शक्ति बढ़ती है।
  4. तालाबों में मछलियाँ होती हैं जो खाद्य समस्या को कम करती हैं।
  5. इनमें पानी का उपयुक्त उपयोग होता है।

प्रश्न 10.
पृष्ठीय जल और भौम जल में क्या अंतर हैं?
उत्तर:
पृष्ठीय जल और भौम जल में निम्नलिखित अंतर हैं-

पृष्ठीय जलभौम जल
1. ताल-तलैयों, नदियों, झीलों, सरिताओं और जलाशयों में पाए जाने वाले जल को पृष्ठीय जल कहा जाता है।1. वर्षा से प्राप्त जल का जो भाग रिसकर भूमि द्वारा सोख लिया जाता है, उसे भौम जल कहते हैं।
2. भारत में पृष्ठीय जल की अनुमानित मात्रा 1869 अरब घन मीटर है।2. भारत में भौम जल की अनुमानित मात्रा 433.8 अरब घन मीटर है।
3. देश के संपूर्ण पृष्ठीय जल का 60 प्रतिशत भाग सिंधु-गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों से होकर बहता है।3. देश का अधिकांश भौम जल उत्तरी विशाल मैदान में पाया जाता है।

प्रश्न 11.
राष्ट्रीय जल नीति-2002 की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
राष्ट्रीय जल नीति-2002 की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. सिंचाई तथा बहुउद्देशीय परियोजनाओं में पीने का जल घटक में शामिल करना चाहिए जहाँ पेय-जल के स्रोत का कोई भी विकल्प नहीं है।
  2. सभी मनुष्य जाति और प्राणियों को पेय-जल प्रदान करना प्रथम प्राथमिकता होनी चाहिए।
  3. भौम जल के शोषण को नियमित और सीमित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
  4. जल की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक चरणाबद्ध कार्यक्रम शुरू किया जाना चाहिए।
  5. जल के विविध प्रयोगों की कार्यक्षमता में सुधार करना चाहिए।
  6. उपक्रमणों, प्रेरकों तथा अनुक्रमणों, शिक्षा विनिमय द्वारा सरंक्षण चेतना बढ़ानी चाहिए।

प्रश्न 12.
जल संभर प्रबंधन के कोई चार उद्देश्य बताएँ।
उत्तर:
जल संभर प्रबंधन के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

  1. वर्षा निर्भर और संसाधनों की कमी वाले क्षेत्रों में कृषि की उत्पादकता में वृद्धि करना।
  2. भू-जल के स्तर को ऊँचा उठाकर जल की लवणता को नियंत्रित करना।
  3. पर्यावरण और जल संसाधन के ह्रास को नियंत्रित करना।
  4. मृदा अपरदन और प्रकृति प्रकोप; जैसे बाढ़ को कम करना।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में सिंचाई क्यों आवश्यक है?
अथवा
भारत में कृषि के लिए सिंचाई की आवश्यकता क्यों है? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में कृषि के लिए भौगोलिक परिस्थितियाँ सभी जगहों पर एक-समान नहीं हैं। इसलिए कृषि को विकसित करने के लिए सिंचाई का विकास बहुत जरूरी है। भारत में सिंचाई के निम्नलिखित कारण हैं
1. मानसून वर्षा की अनिश्चितता-भारत में वर्षा अनिश्चित होती है। भारतीय कृषि मानसून पर निर्भर है। मानसून वर्षा यदि ठीक समय पर हो जाती है तो कृषि अच्छी होती है और यदि मानसून ठीक समय पर नहीं आता तो कृषि व्यवस्था बिगड़ जाती है। मानसून की अनिश्चितता का ज्यादा प्रभाव पड़ता है। हरियाणा और राजस्थान में 70 प्रतिशत कृषि मानसून पर आधारित है। इन राज्यों में मानसून की अनिश्चितता से सूखे की स्थिति आ जाती है।

2. वर्षा की अनियमितता भारत में वर्षा निश्चित मात्रा में कभी नहीं होती। कभी-कभी तो बहुत ज्यादा वर्षा हो जाती है और कभी-कभी बहत कम। इससे कृषि का संतुलन बिगड़ जाता है। कम वर्षा होने की वजह से हमें सिंचाई की आवश्यकता होती है।

3. वर्षा का असमान वितरण-भारत में वर्षा का वितरण हर जगह समान नहीं है। एक तरफ तो मॉसिनराम (चेरापूंजी के निकट) में वर्षा 1140 सेंटीमीटर से भी अधिक होती है, जबकि दूसरी ओर राजस्थान के जैसलमेर में 10 सेंटीमीटर से भी कम वर्षा होती है। किसी भी दो जगहों पर समान वर्षा नहीं होती।

4. विशेष फसलें-चावल तथा गन्ने की फसलों के लिए नियमित रूप से सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है, जबकि बाजरे की खेती के लिए सिंचाई की ज्यादा आवश्यकता नहीं होती।

5. शीतकाल की फसलें-भारत में शीतकाल में वर्षा नहीं होती, इसलिए रबी की फसलों के लिए सिंचाई बहुत आवश्यक है।

6. खाद्यान्नों में आत्म-निर्भरता-देश में खाद्यान्न संकट को समाप्त करने के लिए खाद्यान्नों के अतिरिक्त उत्पादन की आवश्यकता है। इसलिए सिंचाई की आवश्यकता होती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 6 जल-संसाधन

प्रश्न 2.
देश में सिंचाई के विभिन्न साधनों के सापेक्षिक महत्त्व का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत में सिंचाई के प्रमुख साधनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सिंचाई के साधन-भारत के विभिन्न भागों में विभिन्न प्रकार की स्थलाकृतियाँ हैं जिनके परिणामस्वरूप सिंचाई के साधनों के भी अनेक रूप हैं। उत्तरी भारत में नहरों तथा कुओं से ज्यादा सिंचाई होती है। इसके विपरीत दक्षिणी भारत में ज्यादातर सिंचाई तालाबों द्वारा की जाती है। भारत में सिंचाई के साधन इस प्रकार हैं-
1. नहरें-उत्तरी भारत में अधिकांश नदियाँ हिमाच्छादित प्रदेशों से निकलती हैं, जिनमें सारा साल जल प्रवाहित होता रहता है। इसलिए उत्तरी भारत में नहरें सिंचाई का प्रमुख साधन हैं। भारत की कुल सिंचित भूमि का लगभग 39 प्रतिशत क्षेत्र नहरों द्वारा सिंचित किया जाता है। ज्यादातर नहरें उत्तर:पश्चिमी भारत के मैदानी भागों में हैं।

शीतकाल में हिमीकरण के कारण जल की मात्रा कुछ कम अवश्य हो जाती है, परंतु बांध से एकत्रित जल के द्वारा इस कमी को पूरा किया जाता है। अतः उत्तर:पश्चिमी भारत के मैदानी भागों में जल के वितरण को नहरों द्वारा व्यवस्थित किया जाता है। यहाँ की मिट्टी कोमल एवं मुलायम होने के कारण नहरें आसानी से खोदी जा सकती हैं। उत्तर प्रदेश में ऊपरी गंगा नहर, निचली गंगा नहर, शारदा नहर, पूर्वी यमुना नहर तथा आगरा नहर के द्वारा सिंचाई की जाती है। पंजाब में सरहिंद नहर, भाखड़ा नहर, बीकानेर नहर, ब्यास नहर तथा हरियाणा में यमुना नहर, जुई नहर, गुड़गांव नहर प्रमुख हैं। बिहार, पश्चिमी बंगाल तथा राजस्थान में भी नहरों द्वारा सिंचाई की जाती है। इनमें सोन नहर, कोसी बांध, त्रिवेणी नहर, राजस्थान नहर, चंबल नहर, दामोदर नहर आदि प्रमुख सिंचाई के साधन हैं। दक्षिणी भारत में तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश तथा ओडिशा के ‘डेल्टाई’ भागों में नहरों द्वारा सिंचाई की जाती है।

नहरों के क्षेत्रीय वितरण की विशेषताएँ-नहरों के क्षेत्रीय वितरण की विशेषताएँ हैं-

  • नहरों का निर्माण केवल समतल भूमि तथा मुलायम मिट्टी में हो सकता है
  • मंद ढाल वाले भागों में नहरों का विकास अधिक होता है
  • उत्तरी भारत की अधिकांश नदियाँ हिमाच्छादित प्रदेशों से निकलती हैं जिस कारण उनमें वर्ष भर जल प्रवाहित होता रहता है।
  • उत्तरी भारत में नहरों के विकास का यह प्रमुख कारण है
  • भारत में सरिता प्रवाह जल सभी भागों में भिन्न-भिन्न मिलता है। अतः नहरों का प्रतिरूप भी भिन्न-भिन्न रूप से मिलता है।

नहरों का सिंचाई के लिए महत्त्व-

  • नहरों के कारण सिंचित भूमि के क्षेत्रफल में वृद्धि हुई, जिस कारण खेती ऐसे स्थानों पर भी होने लगी, जो पहले पानी के अभाव में बेकार पड़े थे। अब वर्ष में कई फसलें उगाई जाने लगी हैं। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होनी शुरू हो गई है
  • बहु-उद्देश्यीय परियोजना के अंतर्गत नहरों से सिंचाई के साथ-साथ जल विद्युत् का उत्पादन किया जाता है
  • नहरी पानी में अनेक रासायनिक पदार्थ होते हैं जो भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि करते हैं
  • यह एक सस्ता और सरल साधन है
  • नहरों द्वारा बाढ़ पर नियंत्रण किया जा सकता है
  • नहरों के विकास से किसानों की आर्थिक व्यवस्था में सुधार हुआ है
  • इससे सरकार की आय में भी वृद्धि हुई है।

2. कुएँ तथा नलकूप-प्राचीनकाल से हमारे देश में सिंचाई तथा पेय जल प्राप्त करने के लिए कुओं का प्रयोग हो रहा है। रचना के आधार पर कुएँ तीन प्रकार के होते हैं-

  • कच्चा कुआँ
  • पक्का कुआँ तथा
  • नलकूप।

कुओं द्वारा सिंचाई उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र, हरियाणा तथा आंध्र प्रदेश में की जाती है। भारत में नलकूप तमिलनाडु, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक तथा पंजाब में अधिक पाए जाते हैं।

कुओं तथा नलकूपों का सिंचाई के लिए महत्त्व-

  • कुओं तथा नलकूपों के निर्माण में व्यय बहुत कम आता है।
  • इनके पानी से भूमि में उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है।
  • पानी का आवश्यकतानुसार प्रयोग किया जाता है।
  • कृषि उत्पादन में बढ़ोत्तरी होती है।
  • वर्ष में दो या इससे अधिक फसलें उगाई जा सकती हैं।
  • इनको खोदने से भूमि बहुत कम बेकार होती है।
  • क्षार फूटने की समस्या उत्पन्न नहीं होती।

3. तालाबों द्वारा सिंचाई-दक्षिणी भारत में झीलों एवं तालाबों में एकत्रित जल के द्वारा सिंचाई की व्यवस्था आसानी से की जा सकती है। पर्याप्त जलापूर्ति की दशाओं में तालाबों में संचित जल-राशि का प्रयोग प्राचीनकाल से चला आ रहा है। तालाब दो प्रकार के होते हैं-

  • प्राकृतिक तथा
  • कृत्रिम।

दक्षिणी भारत के ऊबड़-खाबड़ भाग जहाँ नहरें अथवा कुएँ खोदना असंभव है, वहाँ तालाबों द्वारा सिंचाई की जाती है। नदियों ने तंग घाटियों का निर्माण किया है, जिनको बांधकर तालाब आसानी से बनाए जा सकते हैं। दक्षिणी भारत में प्राकृतिक गर्मों की संख्या अधिक है जो जलापूर्ति के कारण तालाब बन जाते हैं। आंध्र प्रदेश में तालाबों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई की जाती है। भारत में निजाम सागर (आंध्र प्रदेश), कृष्णराज सागर (कर्नाटक), जप समुद्र, उदय सागर एवं फतेह सागर (राजस्थान) प्रमुख तालाब हैं।

तालाबों का सिंचाई के लिए महत्त्व-

  • प्राकृतिक तालाब सिंचाई के सस्ते और सरल साधन हैं
  • कठोर चट्टानी इलाकों के होने के कारण तालाब शीघ्र नष्ट नहीं होते
  • रुके हुए पानी में गंदगी का सम्मिश्रण होता है, जिसकी सिंचाई से भूमि में उर्वरा शक्ति बढ़ती है
  • तालाबों में मछलियाँ होती हैं जो खाद्य समस्या को कम करती हैं
  • इनमें पानी का उपयुक्त उपयोग होता है।

प्रश्न 3.
वर्षा जल संग्रहण से आपका क्या अभिप्राय है? इसके उद्देश्य एवं तकनीकों या विधियों का वर्णन करें।
अथवा
वर्षा जल संग्रहण की विस्तृत व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
वर्षा जल संग्रहण-वर्षा जल संग्रहण विभिन्न उपयोगों के लिए वर्षा के जल को रोकने और एकत्र करने की प्रक्रिया है अर्थात् वर्षा के जल को भविष्य के उपयोग के लिए इक्ट्ठा करना ही वर्षा जल संग्रहण कहलाता है। इसका उपयोग भूमिगत जलमृतों के पुनर्भरण के लिए भी किया जाता है।

वर्षा जल संग्रहण एक पारिस्थितिकी अनुकूल प्रक्रिया है जिसके माध्यम से पानी की प्रत्येक बिंदु को संरक्षित करने के लिए वर्षा के जल को कुओं, तालाबों और नलकूपों में इक्ट्ठा किया जाता है। वास्तव में यह जल भंडारों के पुनर्भरण को पर्यावरण अनुकूल (Eco-friendly) बनाने की तकनीक है।

वर्षा जल संग्रहण के उद्देश्य-वर्षा जल संग्रहण के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

  • यह पानी की उपलब्धता को बढ़ाता है।
  • यह भूमिगत जल स्तर को नीचा होने से रोकता है व भूमिगत जल की गुणवत्ता को बढ़ाता है।
  • यह मृदा अपरदन को रोकता है।
  • यह तटीय क्षेत्रों में लवणीय जल के प्रवेश को रोकता है।
  • यह एकत्रित वर्षा जल को भूमि जल भंडारों में संग्रहित करता है।
  • यह बाढ़ को रोकता है और वर्षा के पानी को सड़कों पर फैलने से रोकता है।
  • यह जल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करता है जिससे सूखे या अनावृष्टि के हालातों में सामना किया जा सके।
  • यह भौम जल के भंडारों में वृद्धि करता है।

वर्षा जल संग्रहण की विभिन्न विधियाँ या तकनीकें देश में विभिन्न समुदायों द्वारा अनेक विधियों की सहायता से वर्षा जल संग्रहण किया जा रहा है। इनमें से कुछ विधियाँ या तकनीकें निम्नलिखित हैं

  • छत के वर्षा जल का संग्रहण
  • बंद व बेकार पड़े कुओं का पुनर्भरण
  • खुदे हुए कुओं का पुनर्भरण
  • रिसाव गड्ढों का निर्माण
  • खेतों के चारों ओर खाइयाँ बनाना
  • पुनर्भरण शाफ्ट द्वारा जल संग्रहण
  • बोर कुएँ सहित क्षैतिज कूप द्वारा जल संग्रहण
  • सर्विस कूप द्वारा जल संरक्षण।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. संसाधनों के संरक्षण के आधार पर रैनर ने कब वर्गीकरण प्रस्तुत किया?
(A) सन् 1921 में
(B) सन् 1951 में
(C) सन् 1961 में
(D) सन् 1981 में
उत्तर:
(B) सन् 1951 में

2. भौतिक पर्यावरण से प्राप्त संसाधन कहलाते हैं
(A) भौतिक संसाधन
(B) समाप्य संसाधन
(C) असमाप्य संसाधन
(D) संरक्षित भंडार
उत्तर:
(A) भौतिक संसाधन

3. वे संसाधन जिनका बार-बार उपयोग किया जा सकता है, कहलाते हैं-
(A) भौतिक संसाधन
(B) नवीकरणीय संसाधन
(C) संरक्षित भंडार
(D) समाप्य संसाधन
उत्तर:
(B) नवीकरणीय संसाधन

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि

4. सौर ऊर्जा किस संसाधन के अंतर्गत आता है?
(A) प्राकृतिक संसाधन
(B) समाप्य संसाधन
(C) असमाप्य संसाधन
(D) संरक्षित भंडार
उत्तर:
(C) असमाप्य संसाधन

5. ज्ञान और कौशल किस प्रकार के संसाधनों के अंतर्गत आते हैं?
(A) सांस्कृतिक संसाधन
(B) समाप्य संसाधन
(C) भौतिक संसाधन
(D) चक्रीय संसाधन
उत्तर:
(A) सांस्कृतिक संसाधन

6. वे संसाधन जिनका आर्थिक दृष्टि से विकास संभव है, कहलाते हैं-
(A) भौतिक संसाधन
(B) संरक्षित संसाधन
(C) समाप्य संसाधन
(D) नवीकरणीय संसाधन
उत्तर:
(B) संरक्षित संसाधन

7. भारत में सबसे अधिक शस्य गहनता वाला राज्य है-
(A) उत्तर प्रदेश
(B) कर्नाटक
(C) पंजाब
(D) मिज़ोरम
उत्तर:
(C) पंजाब

8. भारत में सबसे कम शस्य गहनता वाला राज्य है-
(A) उत्तर प्रदेश
(B) कर्नाटक
(C) पंजाब
(D) मिज़ोरम
उत्तर:
(D) मिज़ोरम

9. कौन-सी खाद्य फसल देश में प्रथम स्थान पर है?
(A) चावल
(B) गेहूँ
(C) मक्का
(D) ज्वार
उत्तर:
(A) चावल

10. हरित क्रान्ति से सबसे अधिक लाभ किस फसल को हुआ?
(A) चावल
(B) गेहूँ
(C) चाय
(D) गन्ना
उत्तर:
(B) गेहूँ

11. भारत में गेहूँ उत्पादक सबसे बड़ा राज्य कौन-सा है?
(A) पंजाब
(B) हरियाणा
(C) उत्तर प्रदेश
(D) पश्चिमी बंगाल
उत्तर:
(C) उत्तर प्रदेश

12. रबड़ उत्पादन में भारत का कौन-सा राज्य अग्रणी है?
(A) केरल
(B) असम
(C) हरियाणा
(D) कर्नाटक
उत्तर:
(A) केरल

13. भारत किस फसल का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है?
(A) चावल
(B) गेहूँ
(C) चाय
(D) गन्ना
उत्तर:
(C) चाय

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि

14. भारत में चावल का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है-
(A) पंजाब
(B) हरियाणा
(C) उत्तर प्रदेश
(D) पश्चिमी बंगाल
उत्तर:
(D) पश्चिमी बंगाल

15. कृषि क्षेत्र की नई तकनीक है-
(A) पैकेज टेक्नोलॉजी
(B) जैव-प्रौद्योगिकी
(C) वैश्वीकरण
(D) ड्रीप इरीगेशन
उत्तर:
(B) जैव-प्रौद्योगिकी

16. भारत का संसार में कपास उत्पादन में कौन-सा स्थान है?
(A) पहला
(B) दूसरा
(C) तीसरा
(D) चौथा
उत्तर:
(D) चौथा

17. 75 सें०मी० से अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में की जाने वाली कृषि कहलाती है
(A) वर्धनकाल
(B) आर्द्र भूमि कृषि
(C) शुष्क भूमि कृषि
(D) शस्य गहनता
उत्तर:
(B) आर्द्र भूमि कृषि

18. 75 सें०मी० से कम वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में की जाने वाली कृषि कहलाती है-
(A) वर्धनकाल
(B) आर्द्र भूमि कृषि
(C) शुष्क भूमि कृषि
(D) शस्य गहनता
उत्तर:
(C) शुष्क भूमि कृषि

19. गहन कृषि की विशेषता है-
(A) भूमि पर जनसंख्या का अधिक दबाव
(B) रासायनिक निवेश
(C) सिंचाई का प्रयोग
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

20. निम्नलिखित में से कौन-सी रोपण फसल नहीं है?
(A) चाय
(B) गेहूँ
(C) कॉफी
(D) रबड़
उत्तर:
(B) गेहूँ

21. भारत में कौन-सी फसल शस्य ऋतु में पाई जाती है?
(A) रबी
(B) खरीफ़
(C) जायद
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

22. रबी की फसलें कब बोई जाती हैं?
(A) अक्तूबर से मध्य दिसंबर
(B) नवंबर से मध्य जनवरी
(C) दिसंबर से मध्य फरवरी
(D) अप्रैल से मई
उत्तर:
(A) अक्तूबर से मध्य दिसंबर

23. ‘काटो व जलाओ’ और ‘झाड़-झंकार परत’ वाली खेती के रूप में निम्नलिखित में से किसे जाना जाता है?
(A) स्थानांतरी कृषि
(B) रोपण कृषि
(C) बागानी कृषि
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(A) स्थानांतरी कृषि

24. खरीफ की फसलें कब बोई जाती हैं?
(A) जून-जुलाई में
(B) अगस्त-सितंबर में
(C) मार्च-अप्रैल में
(D) अप्रैल-मई में
उत्तर:
(A) जून-जुलाई में

25. निम्नलिखित में से कौन-सी खरीफ की फसल नहीं है?
(A) मक्का
(B) ज्वार-बाजरा
(C) सरसों
(D) अरहर
उत्तर:
(C) सरसों

26. भारत की प्रमुख खाद्य फसल निम्नलिखित में से कौन-सी है?
(A) गेहूँ
(B) चावल
(C) बाजरा
(D) जौ
उत्तर:
(B) चावल

27. भारत की दूसरी मुख्य खाद्य फसल निम्नलिखित में से कौन-सी है?
(A) गेहूँ
(B) चावल
(C) जो
(D) बाजरा
उत्तर:
(A) गेहूँ

28. निम्नलिखित में से कौन-सा उस कृषि प्रणाली को दर्शाता है जिसमें एक ही फसल लंबे-चौड़े क्षेत्र में उगाई जाती है?
(A) बागवानी कृषि
(B) रोपण कृषि
(C) झूम कृषि
(D) गहन कृषि
उत्तर:
(B) रोपण कृषि

29. भारत का विश्व में गन्ना उत्पादन में कौन-सा स्थान है?
(A) प्रथम
(B) दूसरा
(C) सातवाँ
(D) आठवाँ
उत्तर:
(B) दूसरा

30. भारत में गन्ने का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है?
(A) बिहार
(B) उत्तर प्रदेश
(C) पंजाब
(D) हरियाणा
उत्तर:
(B) उत्तर प्रदेश

31. निम्नलिखित में से कौन-सी फसल तिलहन है?
(A) सरसों
(B) सूरजमुखी
(C) तिल
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

32. भारत का विश्व में मूंगफली उत्पादन में कौन-सा स्थान है?
(A) पहला
(B) दूसरा
(C) तीसरा
(D) पाँचवाँ
उत्तर:
(A) पहला

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि

33. इनमें से कौन-सी फसल फलीदार है?
(A) दालें
(B) कपास
(C) ज्वार
(D) मक्का
उत्तर:
(A) दालें

34. कौन-सी फसलें शीत ऋतु की शुरुआत के साथ अक्तूबर से दिसंबर में बोई जाती हैं?
(A) रबी की फसलें
(B) खरीफ की फसलें
(C) जायद फसलें
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(A) रबी की फसलें

35. कौन-सी फसलें मानसून की शुरुआत के साथ जून-जुलाई में बोई जाती हैं?
(A) रबी की फसलें
(B) खरीफ की फसलें
(C) जायद फसलें
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(B) खरीफ की फसलें

36. सुनहरा रेशा कहा जाता है
(A) जूट को
(B) कपास को
(C) शहतूत को
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) जूट को

37. शुष्क फसल है-
(A) बाजरा
(B) मूंग
(C) चना
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

38. झूम कृषि भारत के किस क्षेत्र में होती है?
(A) उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में
(B) दक्षिणी-पूर्वी क्षेत्र में
(C) उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में
(D) दक्षिणी-पश्चिमी क्षेत्र में
उत्तर:
(A) उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में

39. निम्नलिखित में से कौन-सी फसल खरीफ की फसल के अंतर्गत आती है?
(A) गेहूँ
(B) कपास
(C) चना
(D) सरसों
उत्तर:
(B) कपास

40. निम्नलिखित में से कौन-सी फसल रबी की फसल के अंतर्गत आती है?
(A) चावल
(B) गेहूँ
(C) खरबूजा
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(B) गेहूँ

41. इनमें से कौन-सी फसल सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण अनाज है?
(A) मक्का
(B) बाजरा
(C) जौ
(D) चावल
उत्तर:
(D) चावल

42. इनमें से कौन-सी फसल जायद ऋतु में उगाई जाती है?
(A) मूंगफली
(B) खरबूजा
(C) सोयाबीन
(D) सरसों
उत्तर:
(B) खरबूजा

43. भारत किस फसल का विश्व का सबसे बड़ा निर्यातक है?
(A) जूट
(B) चाय
(C) कॉफी
(D) रबड़
उत्तर:
(B) चाय

44. फलों और सब्जियों की कृषि को क्या कहा जाता है?
(A) कृषि उत्पादन
(B) बागवानी फसलें
(C) रेशम उत्पादन
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) बागवानी फसलें

45. वह भूमि जिस पर फसलें उगाई व काटी जाती हैं, वह कहलाता है-
(A) निवल बोया क्षेत्र
(B) स्थायी चरागाह क्षेत्र
(C) वनों के अधीन क्षेत्र
(D) वर्तमान परती भूमि
उत्तर:
(A) निवल बोया क्षेत्र

46. कृषि किस आर्थिक क्रियाकलाप के अंतर्गत आती है?
(A) चतुर्थ क्रियाकलाप
(B) तृतीयक क्रियाकलाप
(C) द्वितीयक क्रियाकलाप
(D) प्राथमिक क्रियाकलाप
उत्तर:
(D) प्राथमिक क्रियाकलाप

47. भारतीय अर्थव्यवस्था है-
(A) कृषि प्रधान
(B) पूँजी प्रधान
(C) उद्योग प्रधान
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) कृषि प्रधान

48. पश्चिम बंगाल में चावल की बोई जाने वाली फसल है-
(A) औस
(B) अमन
(C) बोरो
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
वे संसाधन जिनका बार-बार उपयोग किया जा सकता है, क्या कहलाते हैं?
उत्तर:
नवीकरणीय संसाधन।

प्रश्न 2.
संसाधनों के संरक्षण के आधार पर रैनर ने कब वर्गीकरण प्रस्तुत किया?
उत्तर:
सन् 1951 में।

प्रश्न 3.
सौर ऊर्जा किस संसाधन के अंतर्गत आती है?
उत्तर:
असमाप्य संसाधन।

प्रश्न 4.
पेट्रोलियम किस प्रकार का संसाधन है?
उत्तर:
समाप्य संसाधन।

प्रश्न 5.
भारत व विश्व में अजैविक संसाधनों का वितरण कैसा है?
उत्तर:
असमान।

प्रश्न 6.
भारत में कॉफी का अधिकतम उत्पादक राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
कर्नाटक।

प्रश्न 7.
ज्ञान और कौशल किस प्रकार के संसाधनों के अंतर्गत आते हैं?
उत्तर:
सांस्कृतिक संसाधन।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि

प्रश्न 8.
वे संसाधन जिनका आर्थिक दृष्टि से विकास संभव है, क्या कहलाते हैं?
उत्तर:
संरक्षित संसाधन।

प्रश्न 9.
75 सें०मी० से कम वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में की जाने वाली कृषि क्या कहलाती है?
उत्तर:
शुष्क भूमि कृषि।

प्रश्न 10.
फ़सल (शस्य) गहनता ज्ञात करने का सूत्र क्या है?
उत्तर:
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि 1

प्रश्न 11.
औस, अमन और बोरो किस खाद्य फसल के नाम हैं?
उत्तर:
चावल (पश्चिम बंगाल)।

प्रश्न 12.
देश के सर्वाधिक शस्य गहनता वाले राज्य का नाम बताइए।
उत्तर:
पंजाब।

प्रश्न 13.
भारत में अधिकतम गेहूँ पैदा करने वाला राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
भारत में अधिकतम गेहूँ पैदा करने वाला राज्य उत्तर प्रदेश है।

प्रश्न 14.
भारत में चाय का अधिकतम उत्पादन करने वाला राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
भारत में चाय का अधिकतम उत्पादन करने वाला राज्य असम है।

प्रश्न 15.
सन् 2001 में देश की कितने प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर निर्भर थी?
उत्तर:
लगभग 53 प्रतिशत।

प्रश्न 16.
फल-सब्जियों के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
दूसरा।

प्रश्न 17.
भारतीय कृषि में विशेषकर असिंचित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किस प्रकार की बेरोजगारी पाई जाती है?
उत्तर:
अल्प बेरोजगारी।

प्रश्न 18.
अंग्रेज़ी शासन के दौरान की कोई दो भू-राजस्व प्रणालियाँ बताएँ।
उत्तर:

  1. महालवाड़ी
  2. रैयतवाड़ी।

प्रश्न 19.
अरेबिका, रोबस्ता व लिबेरिका किस फसल की किस्में हैं?
उत्तर:
कॉफी।

प्रश्न 20.
भारत अधिकतर किस किस्म की कॉफी का अधिक उत्पादन करता है?
अथवा
सबसे उत्तम किस्म की कॉफी का क्या नाम है?
उत्तर:
अरेबिका।

प्रश्न 21.
भारत के किस राज्य में सोयाबीन की खेती का सर्वाधिक क्षेत्रफल है?
उत्तर:
मध्य प्रदेश में।

प्रश्न 22.
भारत का कौन-सा (राज्य) सबसे बड़ा मुँगफली उत्पादक राज्य है?
उत्तर:
गुजरात।

प्रश्न 23.
ग्रीन गोल्ड किस फसल की किस्म है?
उत्तर:
चाय की।

प्रश्न 24.
भारत का मुख्य खाद्यान्न कौन-सा है?
उत्तर:
चावल।

प्रश्न 25.
सोयाबीन उत्पादक किन्हीं दो राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. मध्य प्रदेश
  2. महाराष्ट्र।

प्रश्न 26.
चना उत्पादक किन्हीं दो राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. मध्य प्रदेश
  2. राजस्थान।

प्रश्न 27.
वह कौन-सी फसल है जो महाराष्ट्र में ‘श्वेत स्वर्ण’ के नाम से जानी जाती है?
उत्तर:
कपास।

प्रश्न 28.
भारत में किस फसल को सर्वाधिक क्षेत्रफल में पैदा किया जाता है?
उत्तर:
धान या चावल को।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि

प्रश्न 29.
राजस्थान में स्थानांतरित कृषि को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
वालरा के नाम से।

प्रश्न 30.
जैविक खाद एवं परम्परागत तरीकों से की जाने वाली कृषि को क्या कहते हैं?
उत्तर:
जैविक कृषि।

प्रश्न 31.
रबी की फसल ऋतु के कोई दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. गेहूँ
  2. जौ।

प्रश्न 32.
खरीफ की फसल ऋतु के कोई दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. चावल
  2. कपास।

प्रश्न 33.
जायद की फसल ऋतु के कोई दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. तरबूज
  2. खीरा।

प्रश्न 34.
रेशेदार फसलों के कोई दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर:

  1. कपास
  2. जूट।

प्रश्न 35.
किस फसल को हरित क्रांति का सर्वाधिक लाभ हुआ?
उत्तर:
गेहूँ।

प्रश्न 36.
किस दाल को लाल चना तथा पिजन पी० के नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
अरहर (तुर) को।

प्रश्न 37.
केरल में स्थानांतरित कृषि को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
पोनम।

प्रश्न 38.
चावल किस प्रकार के क्षेत्र की फसल है?
उत्तर:
उष्ण आर्द्र कटिबंधीय क्षेत्र।

प्रश्न 39.
चना किस प्रकार के क्षेत्र की फसल है?
उत्तर:
उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र।

प्रश्न 40.
कौन-सी फसल गर्म एवं शुष्क जलवायु में बोई जाती है? एक उदाहरण दें।
उत्तर:
बाजरा।

प्रश्न 41.
भारत की प्रमुख तिलहन फसलों के उदाहरण दें।
उत्तर:
तोरिया, सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी आदि।

प्रश्न 42.
मध्य प्रदेश में स्थानांतरित कृषि को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
बेवर के नाम से।

प्रश्न 43.
आंध्र प्रदेश में स्थानांतरित कृषि को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
पोदू के नाम से।

प्रश्न 44.
चावल के उत्पादन में देश का प्रथम राज्य कौन-सा है?
अथवा
भारत में चावल का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
पश्चिम बंगाल।

प्रश्न 45.
गन्ने के उत्पादन में देश के किस राज्य का प्रथम स्थान है?
उत्तर:
उत्तर-प्रदेश का।

प्रश्न 46.
चावल के उत्पादन में तमिलनाडु का कौन-सा जिला अग्रणी है?
उत्तर:
तंजावूर।

प्रश्न 47.
केंद्र सरकार ने गहन कृषि विकास कार्यक्रम कब आरंभ किया?
उत्तर:
सन् 1960 में।

प्रश्न 48.
भारत में सब्जी का अधिकतम उत्पादक राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
पश्चिम बंगाल।

प्रश्न 49.
भारत में कपास का अधिकतम उत्पादक राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
महाराष्ट्र।

प्रश्न 50.
भारत के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थानांतरित कृषि को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
झूम कृषि के नाम से।

प्रश्न 51.
हरित क्रांति का जनक किसे माना जाता है?
उत्तर:
नॉर्मन अर्नेस्ट बोरलॉग को।

प्रश्न 52.
हरियाणा के दो प्रमुख कपास उत्पादक जिलों के नाम बताइए।
उत्तर:
हिसार, सिरसा।

प्रश्न 53.
राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान कहाँ स्थित है?
उत्तर:
कटक (ओडिशा) में।

प्रश्न 54.
राष्ट्रीय गन्ना अनुसंधान संस्थान कहाँ स्थित है?
उत्तर:
कोयम्बटूर।

प्रश्न 55.
भारत के किस राज्य में प्रति हैक्टेयर चावल का उत्पादन सर्वाधिक है?
उत्तर:
पंजाब का।

प्रश्न 56.
किस रूसी विद्वान ने भारत को एक कृषि उद्भव केंद्र माना है?
उत्तर:
वेविलोव ने।

प्रश्न 57.
अप्रैल से जून के मध्य का समय किस कृषि ऋतु का होता है?
उत्तर:
जायद का।

प्रश्न 58.
भारत में मानसून का जुआ किसे कहा जाता है?
उत्तर:
भारतीय कृषि को।

प्रश्न 59.
भारत का प्रथम पूर्ण जैविक कृषि वाला राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
सिक्किम।

प्रश्न 60.
भारत का कपास के उत्पादन में विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
चौथा।

प्रश्न 61.
भारत में मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है?
उत्तर:
गुजरात।

प्रश्न 62.
तीन ऐसी फसलों के नाम बताइए जिनके उत्पादन में संसार में भारत को प्रथम स्थान प्राप्त है।
उत्तर:
चाय, पटसन और मसाले।

प्रश्न 63.
कच्चा माल किन दो प्रकार के संसाधनों से प्राप्त किया जाता है?
उत्तर:

  1. खनिज
  2. वनस्पति।

प्रश्न 64.
भारतीय कृषि को मानसन का जआ क्यों कहते हैं?
उत्तर:
मानसून या वर्षा पर निर्भरता के कारण।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
संसाधन क्या है?
उत्तर:
कोई भी वस्तु अथवा पदार्थ जिसका उपयोग संभव हो और उसके रूपांतरण से उसकी उपयोगिता और मूल्य बढ़ जाए, संसाधन कहलाता है।

प्रश्न 2.
जैव-भौतिक पर्यावरण के ‘उदासीन उपादान’ संसाधन कैसे बन जाते हैं?
उत्तर:
इन उदासीन उपादानों को वस्तुओं और सेवाओं में बदलकर उनका प्राकृतिक संसाधन के रूप में उपयोग करके।

प्रश्न 3.
अहस्तांतरणीय संसाधनों से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
वे प्राकृतिक संसाधन जिन्हें अपनी जगह से हटाया नहीं जा सकता और उनका वहीं विकास किया जा सकता है जहाँ वे विद्यमान हैं; जैसे भूमि, भू-दृश्य, समुद्री तट इत्यादि।

प्रश्न 4.
जैव और अजैव संसाधनों के तीन-तीन उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
जैव संसाधन-वन्य पशु, पक्षी तथा वन। अजैव संसाधन-जल, चट्टानें तथा खनिज पदार्थ।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि

प्रश्न 5.
खाद्य पदार्थ प्रदान करने वाले संसाधनों के तीन वर्ग बताएँ।
उत्तर:

  1. खनिज जैसे नमक
  2. वनस्पति जैसे खाद्यान्न
  3. पशु एवं जीव-जंतु जैसे मांस और अंडे।

प्रश्न 6.
शुष्क कृषि किसे कहते हैं?
उत्तर:
75 सें०मी० से कम वार्षिक वर्षा वाले प्रदेशों में की जाने वाली कृषि शुष्क कृषि कहलाती है। इस कृषि की मुख्य फसलें गेहूँ, चना, ज्वार, बाज़रा आदि हैं।

प्रश्न 7.
शस्य गहनता का क्या अर्थ है?
उत्तर:
एक खेत में एक कृषि वर्ष में जितनी फसलें उगाई जाती हैं, उसे फसलों की गहनता अथवा शस्य गहनता कहते हैं।

प्रश्न 8.
चकबंदी से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
किसान को उसके कई छोटे-छोटे खेतों के बदले एक ही स्थान पर बड़ा खेत दे दिए जाने को चकबंदी कहा जाता है।

प्रश्न 9.
शस्यावर्तन क्यों किया जाना चाहिए?
उत्तर:
बार-बार एक ही फसल बोते रहने से मिट्टी की उर्वरा-शक्ति क्षीण हो जाती है। फसलों को हेर-फेर करके बोने से पहली फसल द्वारा समाप्त किए गए मिट्टी के पोषक तत्त्वों की भरपाई दूसरे प्रकार की फ़सल बोने से हो जाती है।

प्रश्न 10.
मिश्रित शस्यन से किसानों को क्या लाभ पहुँचता है?
उत्तर:
दो या तीन फसलों को एक-साथ मिलाकर बोने से मिट्टी में जिन पोषक तत्त्वों को एक फसल कम करती है तो दूसरी फ़सल उन्हें पूरा कर देती है।

प्रश्न 11.
भूमि उपयोग को कौन-से तत्त्व निर्धारित करते हैं?
उत्तर:
किसी देश के भूमि उपयोग को स्थलाकृति, जलवायु, मृदा तथा अनेक प्रकार के सामाजिक-आर्थिक कारक निर्धारित करते हैं।

प्रश्न 12.
वर्तमान परती भूमि किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह भूमि जो उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए वर्तमान में खाली पड़ी हो वर्तमान परती भूमि कहलाती है। इस प्रकार की भूमि में निरंतर बदलाव होते रहते हैं।

प्रश्न 13.
जायद क्या है?
उत्तर:
जायद एक अल्पकालिक ग्रीष्मकालीन फसल ऋत है जिसमें तरबूज, खीरा, ककडी व चारे की फसलें उगाई जाती हैं।

प्रश्न 14.
प्राकृतिक संसाधन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
आर्थिक तंत्र के बाहर से प्राप्त होने वाले जैव और अजैव पदार्थ ही प्राकृतिक संसाधन हैं जिन्हें मनुष्य अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कच्चे माल के रूप में उपयोग करता है। भौतिक लक्षण; जैसे भूमि, जलवायु, जल तथा जैविक पदार्थ; जैसे प्राकृतिक वनस्पति, वन्य-जीव, मत्स्य क्षेत्र आदि।

प्रश्न 15.
मानव संसाधन तथा सांस्कृतिक संसाधन में क्या अंतर है?
उत्तर:

  1. मानव संसाधन-लोगों की संख्या और गुणवत्ता से मानव संसाधन का निर्माण होता है। निरक्षरं और कुपोषित जनसंख्या विकास में बाधा बन जाती है।
  2. सांस्कृतिक संसाधन – ज्ञान, अनुभव, कौशल और प्रौद्योगिकी के माध्यम से हम अपने उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं। इन्हें सांस्कृतिक संसाधन कहते हैं।

प्रश्न 16.
जैव उर्वरक क्या है?
उत्तर:
ऐसे सूक्ष्म जीवाणु जो पौधों के विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्त्व उपलब्ध करवाते हैं, जैव उर्वरक कहलाते हैं।

प्रश्न 17.
भारत में रोपण कृषि की शुरुआत कब हुई? इसकी मुख्य फसलें कौन-कौन-सी हैं?
उत्तर:
भारत में रोपण कृषि की शुरुआत ब्रिटिश सरकार द्वारा 19वीं शताब्दी में की गई। इस कृषि में नकदी फसलों को उगाया जाता है। इसमें उगाई जाने वाली मुख्य फसलें हैं-रबड़, चाय या कॉफी, कोको, मसाले आदि।

प्रश्न 18.
झूम खेती उत्पादक क्षेत्र और फसलों के नाम बताएँ।
उत्तर:
झूम खेती मुख्यतः असम, मेघालय, नागालैण्ड, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम, ओडिशा, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश में रहने वाली जनजातियों द्वारा अपनाई जाती है। इसके अंतर्गत धान, बाजरा, गन्ना, मक्का आदि की खेती की जाती है।

प्रश्न 19.
भारत के ज्वार एवं मक्का उत्पादक तीन-तीन प्रमुख राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर:
ज्वार उत्पादक राज्य-

  • महाराष्ट्र
  • कर्नाटक
  • मध्य प्रदेश।

मक्का उत्पादक राज्य-

  • कर्नाटक
  • आंध्र प्रदेश
  • महाराष्ट्र।

प्रश्न 20.
भारत के गेहूँ एवं चावल उत्पादक तीन-तीन प्रमुख राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर:
गेहूँ उत्पादक राज्य-

  • उत्तर प्रदेश
  • पंजाब
  • हरियाणा।

चावल उत्पादक राज्य-

  • पश्चिम बंगाल
  • उत्तर प्रदेश
  • पंजाब।

प्रश्न 21.
भारत के चाय एवं कहवा उत्पादक तीन-तीन प्रमुख राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर:
चाय उत्पादक राज्य-

  • असम
  • पश्चिम बंगाल
  • तमिलनाडु।

कहवा उत्पादक राज्य-

  • कर्नाटक
  • केरल
  • तमिलनाडु।

प्रश्न 22.
भारत के जूट एवं कपास उत्पादक तीन-तीन प्रमुख राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर:
जूट उत्पादक राज्य-

  • पश्चिम बंगाल
  • बिहार
  • असम

कपास उत्पादक राज्य-

  • महाराष्ट्र
  • गुजरात
  • आंध्र प्रदेश।

प्रश्न 23.
भारत के गन्ना एवं बाजरा उत्पादक तीन-तीन प्रमुख राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर:
गन्ना उत्पादक राज्य-

  • उत्तर प्रदेश
  • महाराष्ट्र
  • कर्नाटक।

बाजरा उत्पादक राज्य-

  • राजस्थान
  • उत्तर प्रदेश
  • गुजरात।

प्रश्न 24.
नकदी फसल क्या है?
उत्तर:
नकदी फसल वह फसल है जो व्यापार के उद्देश्य से किसानों द्वारा उगाई जाती है; जैसे कपास, गन्ना, जूट आदि।

प्रश्न 25.
गैर जैविक या रासायनिक कृषि क्या है?
उत्तर:
रासायनिक खादों और कीटनाशक दवाइयों के प्रयोग से की जाने वाली खेती, रासायनिक कृषि कहलाती है। इसको गैर जैविक कृषि भी कहते हैं।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि

प्रश्न 26.
जैविक कृषि क्या है?
उत्तर:
जैविक खाद और परम्परागत तरीकों से की जाने वाली कृषि को जैविक कृषि कहते हैं।

प्रश्न 27.
भारतीय अर्थव्यवस्था को मानसून का जुआ क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
भारतीय अर्थव्यवस्था कषि प्रधान है। यहाँ की जलवाय मानसनी है और कषि मानसन या वर्षा पर निर्भर करती है। भारतीय मानसूनी वर्षा अनियमित एवं अनिश्चित है, जिससे वर्षा के आरंभ का समय निश्चित नहीं है। कहीं पर वर्षा बहुत अधिक और कहीं पर बहुत कम होती है। इससे कुछ क्षेत्रों में बाढ़ तो कुछ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति पैदा हो जाती है। ये परिस्थितियाँ प्रतिवर्ष बदलती रहती हैं। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव बना रहता है। इसलिए भारतीय अर्थव्यवस्था को मानसून का जुआ कहते हैं।

प्रश्न 28.
भारत में कृषि उत्पादन के कम होने के कोई दो कारण बताइए।
उत्तर:

  • कृषि पर मौसम या जलवायु की मार
  • सिंचाई साधनों का सीमित विकास।

प्रश्न 29.
भूमि उपयोग से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
किसी भू-भाग का उसकी वर्तमान उपयोगिता के आधार पर किया जाने वाला वर्गीकरण भूमि उपयोग कहलाता है।

प्रश्न 30.
भारतीय कृषि की कोई दो समस्याएँ लिखें।
उत्तर:

  1. अनिश्चित मौसम या वर्षा पर निर्भरता
  2. कृषि भूमि का निम्नीकरण

प्रश्न 31.
गेहूँ की कृषि के लिए आवश्यक दशा कैसी होनी चाहिए?
उत्तर:
गेहूँ की कृषि के लिए सामान्यतः तापमान 10°-15°C के मध्य होना चाहिए। इसके लिए 50-75 सें०मी० वार्षिक वर्षा की और हल्की-दोमट, बलुआ व चिकनी मिट्टी की आवश्यकता होती है?

प्रश्न 32.
उपयोग के आधार पर फसलों को कितने वर्गों में बाँटा गया है?
अथवा
फसलों का संक्षेप में वर्गीकरण करें।
उत्तर:
उपयोग के आधार पर फसलों को चार वर्गों में बाँटा गया है-

  1. खाद्यान्न फसलें-चावल, गेहूँ, ज्वार, बाजरा आदि।
  2. रोपण फसलें-चाय, कहवा, रबड़, मसाले आदि।
  3. बागानी फसलें सेब, आम, केला आदि।
  4. नकदी व रेशेदार फसलें-कपास, जूट, गन्ना, मूंगफली आदि।

प्रश्न 33.
झूम या कर्तन दहन कृषि प्रणाली किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब किसान जमीन के टुकड़े साफ करके उन पर अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए अनाज उत्पन्न करता है, उसे झूम या कर्तन दहन कृषि प्रणाली कहते हैं।

प्रश्न 34.
आर्द्र कृषि किसे कहते हैं?
उत्तर:
जिस कृषि को करने के लिए अधिक मात्रा में जल की आवश्यकता होती है उसे आर्द्र कृषि कहते हैं। चावल तथा गन्ना इस प्रकार की कृषि उपज के प्रमुख उदाहरण हैं।

प्रश्न 35.
रोपण कृषि किसे कहते हैं?
उत्तर:
रोपण कृषि एक प्रकार की वाणिज्यिक खेती है। इस प्रकार की कृषि में लंबे-चौड़े क्षेत्र में एक ही फसल बोई जाती है। चाय, कॉफी, रबड़ इस प्रकार की कृषि की प्रमुख उपजें हैं।

प्रश्न 36.
रबी फसलें किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
रबी फसलों को शीत ऋतु में अक्तूबर से दिसम्बर के मध्य बोया जाता है और ग्रीष्म ऋतु में अप्रैल से जून के मध्य काट लिया जाता है। गेहूँ, जौ, मटर, चना तथा सरसों रबी की मुख्य फसलें हैं।

प्रश्न 37.
खरीफ फसलें किन्हें कहते हैं?
उत्तर:
खरीफ फसलें देश के विभिन्न क्षेत्रों में मानसून आगमन के साथ जून-जुलाई में बोई जाती हैं और सितम्बर-अक्तूबर में काट ली जाती हैं। चावल, मक्का, कपास, ज्वार तथा बाजरा खरीफ की मुख्य फसलें हैं।

प्रश्न 38.
श्वेत क्रांति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
पशुओं में नस्ल सुधार करके और उत्तम चारा देने वाली फसलें पैदा करके दूध के उत्पादन में अप्रत्याशित वृद्धि करने को श्वेत क्रांति कहा जाता है।

प्रश्न 39.
हरित क्रांति या पैकेज टेक्नोलॉजी किसे कहते हैं?
उत्तर:
हरित क्रांति का अर्थ कृषि उत्पादन में हुई उस वृद्धि से है जो नई तकनीक तथा अधिक उपज देने वाले बीजों के उपयोग से हो रही है। यद्यपि हरित क्रांति शब्द का सर्वप्रथम उपयोग विलियम गॉड ने सन् 1968 में किया था किन्तु हरित क्रांति के जन्मदाता होने का श्रेय नोबल पुरस्कार विजेता डॉ० नॉर्मन ई० बोरलॉग को जाता है। भारत में हरित क्रांति की शुरूआत सन् 1966-67 से हुई। भारत में यह क्रांति लाने का रेय एम० स्वामी नाथन को जाता है।

प्रश्न 40.
प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि भूमि के छोटे टुकड़ों परं आदिम कृषि औजारों; जैसे लकड़ी के हल, डाओ और खुदाई करने वाली छड़ी के साथ परिवार के सदस्यों के द्वारा की जाती है।

प्रश्न 41.
चाय की कृषि पहाड़ियों के निचले ढालों पर क्यों की जाती है?
उत्तर:
चाय उष्ण कटिबंधीय रोपण कृषि है। चाय की कृषि पहाड़ियों के निचले ढालों पर इसलिए की जाती है, क्योंकि चाय के पौधों की जड़ों के लिए एकत्रित पानी हानिकारक है। पहाड़ी ढालों पर इसकी खेती करने से वर्षा का पानी आसानी से बह जाता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
‘प्राकृतिक संसाधनों की संकल्पना संस्कृतिबद्ध है।’ चर्चा कीजिए।
उत्तर:
प्रकृति ने मनुष्य को जल, वाय, भूमि, वन, खनिज पदार्थ तथा शक्ति के साधन निःशुल्क उपहार के रूप में दिए हैं। सांस्कृतिक विकास तथा संसाधनों में परस्पर गहरा संबंध है। प्राचीनकाल में आदिमानव प्रौद्योगिकी के ज्ञान से वंचित होने के कारण खनिज पदार्थों तथा जल-विद्यत का प्रयोग नहीं कर सका। उदाहरणतया चीन निवासियों के लिए कोयला एकमात्र कठोर चट्टान था तथा पेंसिलवेनिया तथा असम में खनिज तेल का कोई महत्त्व नहीं था। यद्यपि आधुनिक मनुष्य ने अपनी बद्धि तथा कार्य-कशलता से इन्हें अपने उपयोग के लिए विकसित कर लिया।

सांस्कृतिक विकास के कारण ही संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस तथा जापान उन्नत देश हैं, जबकि एशिया के विकासशील देश तथा अफ्रीका महाद्वीप पिछड़े हुए क्षेत्र हैं। प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किसी देश द्वारा प्राप्त प्रौद्योगिकी की उन्नति पर निर्भर है। इस तरह संसाधनों का विकास प्रकृति, मानव तथा संस्कृति के संयोग पर आधारित है। मनुष्य अपनी क्षमता के अनुसार प्राकृतिक संसाधनों को आर्थिक संसाधनों में बदल सकता है। उदाहरण के लिए, प्रौद्योगिकी की अविकसितता के कारण ही भारत में बस्तर तथा छोटा नागपुर का पठार संसाधन से धनाढ्य होते हुए भी पिछड़े हुए हैं। इस प्रकार यह कथन सत्य है कि प्राकृतिक संसाधनों की संकल्पना संस्कृतिबद्ध है।

प्रश्न 2.
संसाधन संरक्षण की संकल्पना की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
वातावरण के वे सभी तत्त्व, जो मानव के लिए उपयोगी हैं, प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं। ये मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। प्राकृतिक संसाधन वह बहुमूल्य संपत्ति है, जो हमारे पास आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है। विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के विकास के कारण वर्तमान युग में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन काफी मात्रा में हो रहा है तथा इनका उपयोग बढ़ रहा है। इससे भविष्य में समाप्य संसाधनों के समाप्त होने का भय बना हुआ है। इसलिए यह हमारा कर्त्तव्य बनता है कि हम संसाधनों का प्रयोग इस प्रकार योजना-बद्ध ढंग से करें कि ये कम-से-कम नष्ट हों तथा अधिक समय तक मानव के हित के लिए इनका प्रयोग हो सके तथा आधुनिक सभ्यता का अस्तित्व बना रहे। मानव की सभी आर्थिक क्रियाएँ इन संसाधनों पर निर्भर करती हैं। तेल, कोयला, खनिज पदार्थों आदि प्राकृतिक संसाधनों के बिना मानव सभ्यता की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसलिए इसे मूल रूप से सुरक्षित रखने के लिए संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता है।

प्रश्न 3.
यह कहना कहाँ तक सही है कि संसाधन केवल प्राकृतिक पदार्थ हैं?
उत्तर:
वातावरण के वे सभी तत्त्व, जो मनुष्य के लिए उपयोगी हैं, उन्हें प्राकृतिक संसाधन कहते हैं। वायु, भूमि, जल, प्राकृतिक वनस्पति, खनिज पदार्थ, मिट्टी, जलवायु तथा वन्य प्राणी मुख्य प्राकृतिक संसाधन हैं, जो मनुष्य को बिना किसी मूल्य के प्राप्त होते हैं। इसलिए इन्हें प्राकृतिक उपहार भी कहते हैं।

प्राकृतिक संसाधन किसी राष्ट्र की आधारशिला हैं, क्योंकि ये राष्ट्र के विकास में सहायक हैं। वनों से लकड़ी तथा कई उद्योगों को कच्चा माल प्राप्त होता है। जल तथा उपजाऊ मिट्टी कृषि के विकास में सहायक हैं। मानव की सभी आर्थिक क्रियाएँ प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित हैं।

प्रश्न 4.
संसाधन और आर्थिक विकास के अंतर्संबंधों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
किसी भी देश की आर्थिक विकास प्रक्रिया अनेक कारकों पर निर्भर करती है और प्राकृतिक संसाधन उनमें से एक महत्त्वपूर्ण कारक हैं। संसाधनों के दोहन और उपयोग के आधार पर विश्व में निम्नलिखित तीन प्रकार की परिस्थितियाँ पाई जाती हैं

  • ऐसे देश जिनमें संसाधनों के विशाल भंडार होते हुए भी आर्थिक विकास कम है। इनमें भारत सहित अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के अधिकतर देश इस वर्ग में सम्मिलित किए जाते हैं।
  • कुछ देश प्राकृतिक संसाधनों में संपन्न नहीं हैं। फिर भी अत्यधिक विकसित हैं; जैसे जापान, युनाइटेड किंगडम और स्विट्जरलैंड इत्यादि।
  • कुछ देश ऐसे हैं जिनमें संसाधनों की संपन्नता के साथ-साथ अत्यधिक विकसित अर्थव्यवस्था पाई जाती है; जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस तथा दक्षिणी अफ्रीका इत्यादि।

आर्थिक विकास की प्रारंभिक अवस्था में स्थानीय संसाधनों की उपलब्धता एक महत्त्वपूर्ण कारक है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि संसाधनों का दोहन और उपयोग आर्थिक विकास के अनिवार्य कारक हैं। प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता ही विकास की गारंटी नहीं है। कई बार संपन्न देश बाहर से संसाधनों का आयात करने में समर्थ होते हैं और आर्थिक विकास के क्षेत्र में आगे निकल जाते हैं।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि

प्रश्न 5.
संसाधन संरक्षण और संसाधन प्रबंधन में क्या अंतर है?
अथवा
संसाधन प्रबंधन के संरक्षण का नवीन रूप क्यों मानना चाहिए?
उत्तर:
संरक्षण एक व्यापक संकल्पना है जिसमें न केवल वैज्ञानिक अपितु नैतिक, आर्थिक और राजनीतिक पहल भी शामिल हैं। संरक्षण का अर्थ है-मितव्ययिता और बिना बर्बादी के उपयोग। संरक्षण संसाधनों के विवेकपूण अत्यधिक उपयोग, दुरुपयोग और असामयिक उपयोग को छोड़ने के लिए प्रेरित करता है।

आजकल ‘संसाधन संरक्षण’ के स्थान पर ‘संसाधन प्रबंधन’ वाक्यांश अधिक प्रयुक्त किया जाता है। संसाधन प्रबंधन संसाधनों को दीर्घायु और इसका उपयोग प्रारूप में सुधार लाने के लिए किया जाता है। प्रबंधन संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर बल दिया जाता है। इसका उद्देश्य वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करना तथा पारितंत्रीय संतुलन को भी बनाए रखना है। इसके अतिरिक्त भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं को भी पूरा करना है। संसाधन प्रबंधन संरक्षण का एक नवीन रूप है। इसमें भावुकता के स्थान पर विवेक, अर्थशास्त्र की जगह नैतिकता और इंजिनियरी के स्थान पर पारिस्थितिकी पर बल दिया जाता है।

प्रश्न 6.
भारत के भू-उपयोग के परिवर्तन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
किसी क्षेत्र में भू-उपयोग मुख्यतः वहाँ की आर्थिक क्रियाओं की प्रवृत्ति पर निर्भर है। समय के साथ-साथ आर्थिक क्रियाएँ बदलती रहती हैं लेकिन भूमि संसाधन क्षेत्रफल की दृष्टि से स्थायी है। भू-उपयोग को प्रभावित करने वाले अर्थव्यवस्था के परिवर्तन निम्नलिखित हैं
(1) अर्थव्यवस्था का आकार समय के साथ बढ़ता है; जो बढ़ती जनसंख्या, बदलता हुआ आय का स्तर, प्रौद्योगिकी की उपलब्धता जैसे कारकों पर निर्भर करता है। फलस्वरूप समय के साथ भूमि पर दबाव बढ़ता है और सीमांत भूमि को भी प्रयोग में लाया जाता है।

(2) अर्थव्यवस्था की संरचना भी समय के साथ बदलती है। प्राथमिक सेक्टर की अपेक्षा द्वितीयक और तृतीयक सेक्टर में तेजी से वृद्धि होती है। इस प्रकार कृषि भूमि, गैर-कृषि संबंधी कार्यों में प्रयुक्त होती है।

(3) समय के साथ कृषि क्रियाकलापों का अर्थव्यवस्था में योगदान कम होता जा रहा है, जबकि भूमि पर कृषि क्रियाकलापों का दबाव कम नहीं होता।

प्रश्न 7.
भारत में कितनी फसल ऋतएँ या शस्य मौसम पाए जाते हैं?
अथवा
भारत में तीन ऋतु फसलों के नाम लिखें।
खरीफ, रबी और जायद फसल ऋतुओं का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
भारत में तीन प्रमुख फसल ऋतुएँ पाई जाती हैं-
1. खरीफ-खरीफ की फसलें अधिकतर दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के साथ बोई जाती हैं। इसकी प्रमुख फसलें चावल, कपास, जूट, ज्वार, बाजरा, अरहर आदि होती हैं। इस ऋतु का समय जून से सितम्बर के मध्य माना जाता है।

2. रबी-रबी की ऋतु अक्तूबर-नवंबर में शरद ऋतु से आरंभ होकर मार्च-अप्रैल में समाप्त होती है। इसकी प्रमुख फसलें गेहूँ, चना, सरसों, जौ, मूंगफली आदि होती हैं। इस ऋतु में वे फसलें उगाई जाती हैं जो कम तापमान और कम वर्षा में उगती है।

3. ज़ायद यह एक अल्पकालिक ग्रीष्मकालीन फसल ऋतु है जो रबी की कटाई के बाद प्रारंभ होती है। इस ऋतु में तरबूज, खीरा, ककड़ी, सब्जियाँ व चारे आदि की फसलें उगाई जाती हैं। इस ऋतु में विभिन्न फसलों की कृषि सिंचित भूमि पर की जाती है।

प्रश्न 8.
कृषि के प्रकारों का वर्गीकरण आर्द्रता के प्रमुख उपलब्ध स्रोत के आधार पर कीजिए।
उत्तर:
आर्द्रता के स्रोत की उपलब्धता के आधार पर कृषि को निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किया जा सकता है-
1. सिंचित कृषि में सिंचाई के उद्देश्य के आधार पर अंतर पाया जाता है; जैसे-रक्षित व उत्पादक सिंचाई कृषि। रक्षित सिंचाई का मुख्य उद्देश्य आर्द्रता की कमी के कारण फसलों को नष्ट होने से बचाना है अर्थात् वर्षा के अतिरिक्त जल की कमी को सिंचाई के साधनों द्वारा पूरा किया जाता है। उत्पादक सिंचाई का उद्देश्य फसलों का पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध कराकर अधिकतम उत्पादकता प्राप्त करना है।

2. वर्षा निर्भर कृषि को कृषि ऋतु में उपलब्ध आर्द्रता की मात्रा के आधार पर दो वर्गों में विभाजित किया जाता है; जैसे (i) शुष्क भूमि कृषि (ii) आर्द्र भूमि कृषि। शुष्क भूमि कृषि क्षेत्रों में वार्षिक वर्षा 75 सें०मी० से कम होती है। इन क्षेत्रों में मुख्यतः रागी, बाजरा, मूंग, चना आदि फसलें उगाई जाती हैं। आर्द्र भूमि कृषि क्षेत्र में मुख्यतः वे फसलें उगाई जाती हैं जिनको अधिक मात्रा में पानी की जरूरत होती है; जैसे-चावल, गन्ना, जूट आदि।

प्रश्न 9.
भारत में कृषि का क्या महत्त्व है? अथवा भारतीय कृषि के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार व धूरी कृषि है, क्योंकि यह भारतवासियों का प्रमुख व्यवसाय है। भारत की 50 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या कृषि से ही आजीविका कमाती है अर्थात् यह सर्वाधिक रोजगार का साधन प्रदान करती है। देश की कुल राष्ट्रीय आय का काफी भाग कृषि से प्राप्त होता है। कृषि देश के सामाजिक और आर्थिक जीवन का आधार है। कृषि से भोजन ही नहीं, बल्कि उद्योग-धंधों के लिए कच्चा माल भी प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त कृषि उपजों के निर्यात से विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होती है। यह पौष्टिक तत्त्वों की प्रमुख स्रोत है।

प्रश्न 10.
भारत में उद्यान कृषि की फसलों के वितरण प्रतिरूप का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कृषि जलवायु में विविधता के कारण भारत में अनेक प्रकार की उद्यान कृषि की जाती है। भारत की प्रमुख उद्यान फसलें हैं-फल, सब्जियाँ, कंद फसलें, औषधीय पौधे, सुगंधित पौधे और मसाले । भारत विश्व में फलों और सब्जियों का दूसरा बड़ा उत्पादक देश है। आम के उत्पादन में उत्तर प्रदेश का मुख्य स्थान है। नागपुर को संतरों का शहर कहा जाता है। तमिलनाडु, महाराष्ट्र और अनेक दक्षिणी राज्य केलों के लिए प्रसिद्ध हैं। उत्तर:प्रदेश और बिहार के लीची और अमरूद बहुत प्रसिद्ध हैं।

आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में अंगूर का उत्पादन बढ़ रहा है। कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में सेब, नाशपाती, खुबानी तथा अखरोट आदि बहुतायत में होते हैं। केरल का पश्चिमी घाट काली मिर्च के लिए प्रसिद्ध है। अदरक देश के पूर्वी राज्यों में होता है। केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश काजू तथा नारियल के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। भारत काजू का सबसे बड़ा निर्यातक देश है तथा संसार का सबसे अधिक नारियल उत्पादक देश है।

प्रश्न 11.
फसलों की गहनता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
एक खेत में एक कृषि-वर्ष में जितनी फसलें उगाई जाती हैं, उसे फसलों की गहनता अथवा शस्य गहनता कहते हैं। यदि किसी खेत में एक वर्ष में केवल एक ही फसल उगाई जाती है, तो फसल का सूचकांक 100% होगा। मान लो 5 एकड़ के एक खेत में रबी की फसल पूरे 5 एकड़ में की जाती है तथा उसी वर्ष खरीफ की फसल उसी खेत में 3 एकड़ में की जाती है, तो कुल बोया क्षेत्र 8 एकड़ होगा और सूचकांक 160% हो जाएगा। इसको अग्रलिखित सूत्र से निकाला जाता है
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि 2
शस्य गहनता का सूचकांक जितना अधिक होगा, भूमि उपयोग की क्षमता भी उतनी ही अधिक होगी। सन् 1983-84 में समस्त भारत के लिए शस्य सूचकांक 126% था तथा अधिकतम पंजाब में 160%, हरियाणा में 158% तथा गुजरात में केवल 109% शस्य सूचकांक था। सूचकांक को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक सिंचाई, उर्वरक, उन्नत बीज, यंत्रीकरण और कीटनाशक दवाइयों का फसलों में प्रयोग है।

प्रश्न 12.
शस्य गहनता को प्रभावित करने वाले कारक कौन-से हैं?
उत्तर:
शस्य गहनता के बढ़ने से फसलों के उत्पादन में वृद्धि होती है। यह निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है-

  1. एक बार से अधिक बोए हुए क्षेत्र का विस्तार
  2. सिंचाई क्षेत्र का विस्तार
  3. उर्वरक का प्रयोग
  4. शीघ्र पकने वाली फसलों के उगाने से कृषि-वर्ष में अधिक फसलें उगाना
  5. कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग
  6. यंत्रीकरण कृषि।

प्रश्न 13.
परती भूमि का क्या अर्थ है? यह कितने प्रकार की होती है?
उत्तर:
यह वह भूमि है जिस पर पहले कृषि की जाती थी, परंतु अब इस भाग पर कृषि नहीं की जाती। इस जमीन पर यदि लगातार खेती की जाए तो भूमि की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है और ऐसी जमीन पर कृषि करना आर्थिक दृष्टि से लाभदायक नहीं रहता। अतः इसे कुछ समय के लिए खाली छोड़ दिया जाता है। इस प्रक्रिया से जमीन में फिर से उपजाऊ शक्ति आ जाती है और यह कृषि के लिए उपयुक्त हो जाती है। परती भूमि दो प्रकार की होती है-

  1. वर्तमान परती भूमि
  2. पुरानी परती भूमि।

प्रश्न 14.
खाद्यान्न और खाद्य-फसलों में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
खाद्यान्न और खाद्य-फसलों में निम्नलिखित अंतर हैं-

खाद्यान्नखाद्य-फसल
1. खाद्यान्न मनुष्य के भोजन का प्रमुख अंग हैं।1. खाद्य-फसल फसलों का प्रयोग मनुष्य के भोजन में कम होता है।
2. ये मुख्य रूप से खरीफ तथा रबी के मौसम में बोए जाते हैं।2. दालें खरीफ के मौसम में तथा तिलहन रबी के मौसम में बोए जाते हैं।
3. खाद्यान्न के मुख्य उदाहरण गेहूँ, ज्वार, बाजरा, रागी आदि हैं।3. खाद्य फसल के प्रमुख उदाहरण दालें, तिलहन, चना, मूँगफली, फल आदि हैं।

प्रश्न 15.
खरीफ तथा रबी की फसलों में क्या अंतर है?
उत्तर:
खरीफ तथा रबी की फसलों में निम्नलिखित अंतर हैं-

खरीफ की फसलेंरबी की फसलें
1. खरीफ की फसलें वर्षा ऋतु के प्रारंभ में ग्रीष्म काल में बोई जाती हैं।1. रबी की फसलें वर्षा ऋतु के पश्चात् शीत ऋतु में बोई जाती हैं।
2. ये फसलें शीत ऋतु से पहले पक जाती हैं।2. ये फसलें ग्रीष्म ऋतु में पक जाती हैं।
3. ये फसलें उष्ण जलवायु प्रदेशों की महत्त्वपूर्ण फसलें हैं।3. ये फसलें शीतोष्ण जलवायु प्रदेशों की महत्त्वपूर्ण फसलें हैं।
4. इनके प्रमुख उदाहरण चावल, मक्का, कपास, तिलहन आदि हैं।4. इनके प्रमुख उदाहरण गेहूँ, जौ, चना आदि हैं।

प्रश्न 16.
गन्ने की उपज उत्तर भारत में अधिक है, जबकि भौगोलिक परिस्थितियाँ दक्षिण भारत में गन्ने के अनुकूल हैं, कारण दें।
अथवा
भारत में उत्तर प्रदेश गन्ने का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है? कारण स्पष्ट करें।
उत्तर:
गन्ने की खेती के लिए जलवायु संबंधी परिस्थितियाँ दक्षिण भारत में अनुकूल पाई जाती हैं, क्योंकि वहाँ सारा साल उच्च तापमान रहता है तथा गन्ने के लिए वर्धनकाल भी काफी मिल जाता है। कर्नाटक, तमिलनाडू तथा आंध्र प्रदेश राज्य 15° उत्तरी अक्षांश के दक्षिण में स्थित हैं तथा गन्ने की उपज के लिए उपयुक्त हैं। यहाँ 80 क्विंटल प्रति हैक्टेयर से भी अधिक गन्ना पैदा होता है, जबकि उत्तर भारत में 40 क्विंटल प्रति हैक्टेयर की दर से उपज होने के बावजूद भी भारत का 60% गन्ना उत्तर भारत में ही पैदा होता है। इसके निम्नलिखित कारण हैं
(1) गन्ने की उपज के लिए बहुत उपजाऊ मिट्टी की जरूरत होती है जो उत्तर भारत के मैदान में हर जगह उपलब्ध है तथा सिंचाई की विस्तृत सुविधाएँ भी प्राप्त हैं, जबकि दक्षिण भारत में इन दोनों सुविधाओं की कमी है।

(2) गन्ना एक भारी तथा भारह्रास वस्तु है। इसको उद्योगों तक पहुँचाने के लिए गहन तथा तीव्र परिवहन के साधनों की जरूरत है। उत्तर भारत के मैदानों में परिवहन का गहन जाल बिछा हुआ है। ये सुविधाएँ दक्षिणी भारत में नहीं हैं।

(3) गन्ने की कृषि के लिए समतल मैदानों का होना जरूरी है, क्योंकि इसको लगातार सिंचाई की आवश्यकता रहती है। यह परिस्थिति उत्तर भारत के मैदान में है, इसलिए यहाँ गन्ना अधिक पैदा होता है।

प्रश्न 17.
भारत के पूर्वी भाग में जूट (पटसन) तथा पश्चिमी भाग में कपास पैदा होती है, क्यों?
उत्तर:
भारत के पूर्वी राज्यों-पश्चिमी बंगाल तथा असम में जूट (पटसन) की खेती खूब की जाती है। इसका कारण यह है कि यहाँ उच्च तापमान है, भारी वर्षा होती है तथा गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी से ये क्षेत्र निर्मित हैं, जो बहुत उपजाऊ हैं। इन नदियों के डेल्टों में खूब जूट पैदा होता है। अतः जूट के लिए सभी अनुकूल दशाएँ मिलने के कारण यहाँ जूट अधिक पैदा होता है।

इसके विपरीत, भारत के पश्चिमी भाग-महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब तथा हरियाणा के कुछ भागों में कपास खूब पैदा होती है। यहाँ की जलवायु आर्द्र-शुष्क है। महाराष्ट्र तथा गुजरात की काली मिट्टी इसके लिए बहुत अनुकूल है। सिंचाई की सुविधाएँ तथा उचित वर्धनकाल उपलब्ध हैं, इसलिए यहाँ कपास अधिक पैदा की जाती है।

प्रश्न 18.
गेहूँ की उत्पादकता कुछ प्रदेशों में अधिक तथा कुछ प्रदेशों में कम है, क्यों?
उत्तर:
गेहूँ मुख्य रूप से उत्तरी तथा पश्चिमी भारत की फसल है। भारत की कुल गेहूँ का लगभग 50% भाग पंजाब तथा उत्तर प्रदेश उत्पन्न करते हैं। पंजाब में गेहूँ की प्रति हैक्टेयर उपज 30 क्विंटल के लगभग है जो देश की सबसे अधिक उत्पादकता है। इसके अतिरिक्त उपजाऊ मिट्टी, जल सिंचाई के विकसित साधन, शीतकालीन वर्षा तथा अधिक उर्वरक के प्रयोग के कारण हरियाणा, गंगा-यमुना दोआब तथा उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में गेहूँ की उत्पादकता अधिक है। परंतु दक्षिणी भारत में अधिक गर्मी के कारण तथा पूर्वी भारत में अधिक आर्द्र जलवायु के कारण गेहूँ की उत्पादकता बहुत कम है।

प्रश्न 19.
पंजाब तथा हरियाणा में वार्षिक वर्षा कम होते हुए भी चावल की खेती की जाती है, क्यों?
उत्तर:
पंजाब तथा हरियाणा में वार्षिक वर्षा कम होती है। परंतु पिछले कुछ वर्षों में यहाँ चावल के कृषि-क्षेत्र में आधारभूत वृद्धि हुई है। ये प्रदेश देश के अन्य प्रदेशों को चावल भेजते हैं। इसलिए ये ‘चावल का कटोरा’ कहलाते हैं। पंजाब तथा हरियाणा में वर्षा की कमी को जल सिंचाई द्वारा पूरा कर लिया जाता है। यहाँ की मिट्टी उपजाऊ है। उत्तम किस्म के बीजों, अपेक्षाकृत अधिक खाद व कीटनाशकों का प्रयोग और शुष्क जलवायु के कारण फसलों में रोग प्रतिरोधकता आदि कारकों ने इन राज्यों में चावल की पैदावार बढ़ाने में सहायता की है। इसलिए यहाँ चावल की उत्पादकता प्रति हैक्टेयर अधिक है।

प्रश्न 20.
“हरित क्रांति का प्रभाव भारत के सभी भागों में एक जैसा नहीं पड़ा।” व्याख्या कीजिए।
अथवा
हरित क्रांति की योजना भारत में हर जगह क्यों नहीं लागू की जा सकती?
उत्तर:
हरित क्रांति की योजना के भारत में हर जगह न लागू किए जाने के निम्नलिखित कारण हैं-

  1. यह योजना सिंचित क्षेत्रों तक ही सीमित है और बहुत-से भारत के लोगों में सिंचाई के साधन कम हैं।
  2. उर्वरकों का उत्पादन, मांग की पूर्ति के लिए अपर्याप्त है।
  3. नए कृषि साधनों पर अधिक खर्च करने के लिए पूंजी की कमी है, अतः यह योजना केवल बड़े जमींदारों तक ही सीमित रही है। छोटे किसान इससे अप्रभावित हैं।
  4. जहां जल-सिंचाई के पर्याप्त साधन थे, वहीं पर यह योजना सफल रही है।
  5. भारत में अधिकतर खेत बहुत छोटे आकार के हैं। इन पर कृषि यंत्रों का प्रयोग सफल नहीं हो सकता।
  6. अधिक उपज प्रदान करने वाली विधियाँ केवल कुछ ही फसलों के लिए प्रयोग में लाई गई हैं। इसलिए यह योजना भारत में हर जगह नहीं लागू की जा सकती।

प्रश्न 21.
हरित क्रांति के कोई चार सकारात्मक परिणाम बताइए।
अथवा
हरित क्रांति की मुख्य उपलब्धियाँ लिखें।
उत्तर:
हरित क्रांति के चार सकारात्मक परिणाम निम्नलिखित हैं-

  1. देश के सकल घरेलू उत्पाद (G.D.P.) में वृद्धि हुई है।
  2. हरित क्रान्ति से औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिला, रोज़गार उत्पन्न हुआ और ग्रामवासियों के जीवन में गुणात्मक परिवर्तन हुआ।
  3. भारत की साख विश्व बैंक एवं अन्य कर्ज देने वाली संस्थाओं की नज़रों में बढ़ी क्योंकि भारत ने कर्ज को समय रहते चुका दिया था।
  4. भारत खाद्यान्न निर्यात करने वाले देश के रूप में उभरा, जिससे विश्व में उसकी प्रतिष्ठा बढ़ी।

प्रश्न 22.
हरित क्रांति के कोई चार नकारात्मक परिणाम बताइए।
उत्तर:
हरित क्रान्ति के चार नकारात्मक परिणाम निम्नलिखित हैं-

  1. हरित क्रान्ति से किसानों और भू-स्वामियों के बीच का अन्तर मुखर हो उठा।
  2. हरित क्रान्ति से किसानों और कृषि मजदूरों को कोई विशेष लाभ नहीं पहुंचा।
  3. हरित क्रान्ति से कुछ राज्यों को अधिक आर्थिक लाभ पहुँचा जिससे क्षेत्रीय असन्तुलन की समस्या उत्पन्न हो गई।
  4. इससे देश के विभिन्न हिस्सों में वामपंथी संगठनों के लिए किसानों को लाभबन्द करने की दृष्टि से अनुकूल स्थिति पैदा हुई।

प्रश्न 23.
भारत में कृषि क्षेत्र में हुए नवीनतम विकास का उल्लेख कीजिए।
अथवा
कृषि उत्पादन में वृद्धि और प्रौद्योगिकी के विकास के महत्त्व का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
देश में सन् 1980 के बाद कृषि क्षेत्र में अनेक विकासात्मक परिवर्तन हुए। इन नवीन परिवर्तनों, प्रगति एवं उपलब्धियों को निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत रखा जा सकता है

  1. हरित क्रान्ति के फलस्वरूप फसलों की उत्पादकता में काफी वृद्धि हुई। खाद्यान्न के उत्पादन में अपार वृद्धि के कारण भारत ने आत्म-निर्भरता की ओर कदम बढ़ाया।
  2. सिंचाई साधनों में निरंतर वृद्धि हो रही है। सिंचाई की नई पद्धति ‘ड्रिप सिंचाई’ और स्प्रिंकल सिंचाई द्वारा कृषि क्षेत्र और उत्पादन में सुधार हआ है।
  3. कृषि साख व्यवस्था की ओर ध्यान दिया जा रहा है। यह कार्य अनेक वाणिज्यिक बैंकों एवं संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है।
  4. किसान क्रेडिट कार्ड योजना और राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना को लागू किया गया है। इसके अंतर्गत किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  5. नई राष्ट्रीय कृषि नीति-2000 को लागू किया गया। इसके अंतर्गत कृषि क्षेत्र में हर वर्ष 4% की वृद्धि का लक्ष्य रखा गया।
  6. कृषि खाद्यान्नों के उत्पादन बढ़ाने के साथ अन्य सहायक खाद्य पदार्थों के उत्पादन में वृद्धि हेतु भी अनेक प्रयास किए गए-
    • दूध के उत्पादन में तीव्र वृद्धि को ऑपरेशन फ्लड कहते हैं। यह सबसे बड़ा समन्वित डेयरी विकास कार्यक्रम है।
    • श्वेत क्रांति।
    • नीली क्रांति।
    • पीली क्रांति आदि।

प्रश्न 24.
फसलों का समूह या फसल संयोजन से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
फसल संयोजन से तात्पर्य उस भौगोलिक इकाई अथवा कृषि क्षेत्र से है, जहाँ एक कैलेंडर वर्ष के अंतर्गत उत्पन्न की गई फसलों की संख्या का पता चलता है। इसके निर्धारण के लिए एक वर्ष में उत्पन्न फसलों की सूची बनाना आवश्यक है। इसी सूची के आधार पर फसल संयोजन निर्धारित किया जाता है। कृषि प्रादेशीकरण के निर्धारण में फसल संयोजन एक ऐसी प्रक्रिया है जो उत्पन्न हो रही फसलों में अनुकूलतम समूह को निर्धारित करता है।

प्रश्न 25.
भारतीय कृषि के पिछड़ेपन के क्या कारण हैं?
उत्तर:
भारतीय कृषि के पिछड़ेपन के निम्नलिखित कारण हैं-

  1. भूमि पर लगातार एक ही कृषि के परिणामस्वरूप मिट्टियों की उर्वरा शक्ति कम हो गई है।
  2. वनों की अंधाधुंध कटाई के परिणामस्वरूप मिट्टियों का कटाव हुआ है।
  3. खेतों का आकार अधिक छोटा है जिससे वे आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं रहीं।
  4. खेती के ढंग एवं उपकरण पुराने हैं जिसके कारण प्रति हैक्टेयर उपज बहुत कम है।

प्रश्न 26.
गहन कृषि और झूम कृषि में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
गहन कृषि और झूम कृषि में निम्नलिखित अंतर हैं-

गहन कृषिझूम कृषि
1. कृषि करने का ऐसा ढंग जिसमें किसान भूमि के छोटे-छोटे टुकड़ों पर अधिक परिश्रम करके और अच्छे कृषि-साधनों का प्रयोग करके अधिक-से-अधिक उत्पादन करता है, उसे गहन कृषि कहते हैं।1. कृषि करने का ऐसा ढंग जिसमें किसान भूमि के नए-नए तथा विस्तृत क्षेत्रों को हल के नीचे लाकर अधिक उत्पादन करता है, उसे झूम कृषि कहते हैं।
2. गहन कृषि उन भू-भागों में की जाती है, जो घने आबाद हों और कृषि कार्य के लिए जहां नई भूमियाँ उपलब्ध न हों।2. झूम कृषि उन भू-भागों में की जाती है जहाँ जनसंख्या कम हो और कृषि करने के लिए नई भूमि उपलब्ध हो।
3. इस प्रकार की कृषि में जोतों का आकार छोटा होता है।3. इस प्रकार की कृषि में जोतों का आकार बड़ा होता है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि

प्रश्न 27.
भारत में फलों की खेती पर संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर:
भारत संसार में सबसे अधिक फलों और सब्जियों का उत्पादन करता है। भारत उष्ण और शीतोष्ण कटिबंधीय दोनों ही प्रकार के फलों का उत्पादन करता है। भारतीय फलों जिनमें महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बंगाल के आम, नागपुर और चेरापूँजी के संतरे, केरल, मिजोरम, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के केले, उत्तर प्रदेश और बिहार की लीची, मेघालय के अनानास, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के अंगूर तथा हिमाचल प्रदेश और जम्मू व कश्मीर के सेब, नाशपाती, खूबानी और अखरोट की सारे संसार में बहुत माँग है।

प्रश्न 28.
भारत में तिलहन उत्पादन पर संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर:
भारत संसार में सबसे बड़ा तिलहन उत्पादक देश है। देश में कुल बोए गए क्षेत्र के 12 प्रतिशत भाग पर तिलहन की कई फसलें उगाई जाती हैं। मूंगफली, सरसों, नारियल, तिल, सोयाबीन, अरंडी, बिनौला, अलसी और सूरजमुखी भारत में उगाई जाने वाली मुख्य तिलहन फसलें हैं। इनमें से ज्यादातर खाद्य हैं और खाना बनाने में प्रयोग में लाए जाते हैं, किंतु इनमें से कुछ बीज के तेलों को साबुन, श्रृंगार का सामान और ज्यादातर उबटन उद्योग में कच्चे माल के रूप में भी प्रयोग में लाया जाता है।

प्रश्न 29.
एक पेय फसल का नाम बताएँ तथा उसको उगाने के लिए अनुकूल भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करें।
उत्तर:
चाय एक प्रमुख पेय फसल है। चाय की फसल को उगाने के लिए निम्नलिखित अनुकूल भौगोलिक दशाओं की आवश्यकता है

  1. चाय के पौधों के लिए उष्ण और उपोष्ण जलवायु की आवश्यकता होती है।
  2. ह्यूमस और जीवांश युक्त गहरी मिट्टी होनी चाहिए।
  3. भूमि ढलानदार होनी चाहिए जिससे पौधों की जड़ों में पानी न ठहरे।
  4. वर्ष भर नम और पालारहित जलवायु होनी चाहिए।
  5. वर्ष भर समान रूप से वर्षा की हल्की बौछारें पड़ती रहनी चाहिएँ।

प्रश्न 30.
जैविक एवं गैर जैविक कृषि में क्या अंतर है?
अथवा
जैविक तथा रासायनिक कृषि में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जैविक एवं गैर जैविक कृषि में निम्नलिखित अंतर हैं-

जैविक कृषिरासायनिक/गैर जैविक कृषि
1. जैविक खाद और परम्परागत तरीकों से की जाने वाली कृषि को जैविक कृषि कहते हैं।1. रासायनिक खादों और कीटनाशक दवाइयों के प्रयोग से की जाने वाली खेती को रासायनिक कृषि या गैर जैविक कृषि कहते हैं।
2. इसमें जैव पदार्थों से प्राप्त खादों का प्रयोग किया जाता है।2. इसमें रासायनिक एवं वैज्ञानिक विधियों से निर्मित खाद का प्रयोग किया जाता है।
3. जैव पदार्थों वाली खाद घर या फार्म पर तैयार की जाती है।3. रसायनिक खाद कारखानों में तैयार की जाती है।
4. जैविक कृषि मानव श्रम प्रधान कृषि है।4. रासायनिक कृषि वैज्ञानिक तकनीक प्रधान कृषि है।
5. यह प्रकृति पर आधारित होती है।5. यह पूर्णतः बाजार पर निर्भर करती है।
6. इसमें पानी की कम आवश्यकता होती है।6. इसमें पानी की अधिक आवश्यकता होती है।

प्रश्न 31.
भारत में सब्जियों की कृषि पर संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर:
भारत का सब्जियों के उत्पादन में विश्व में दूसरा स्थान है। भारत में प्राकृतिक विविधता के कारण लगभग सभी तरह की सब्जियाँ उगाई जाती हैं। इनमें प्रमुख सब्जियाँ हैं–आलू, प्याज, गाजर, भिण्डी, मटर, पालक, लौकी, करेला, बैंगन, शलगम, धनियाँ, पुदीना, फूलगोभी आदि। कुछ सब्जियों के उत्पादन में भारत का विश्व में प्रथम स्थान है; जैसे मटर।

प्रश्न 32.
स्थानांतरित तथा स्थाई कृषि में क्या अंतर है?
उत्तर:
स्थानांतरित तथा स्थाई कृषि में निम्नलिखित अंतर हैं-

स्थानांतरित कृषिस्थाई कृषि
1. इस कृषि में केवल परिवार की जरूरतों के अनुसार खेती की जाती है।1. इस कृषि में आवश्यकता से अधिक कृषि या खेती की जाती है।
2. इसमें कृषि करने की जगह बदलती रहती है।2. इसमें कृषि करने की जगह नहीं बदलती।
3. इसमें वनों को जलाकर खाद प्राप्त की जाती है।3. इसमें पशुओं से खाद प्राप्त की जाती है।

प्रश्न 33.
भारत में शुष्क भूमि कृषि की मुख्य विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
भारत में शुष्क भूमि कृषि की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. इसमें वर्षा से खेत जोत दिए जाते हैं।
  2. प्रत्येक वर्षा के बाद गहरी जुताई की जाती है।
  3. इसमें शुष्कता को सहन करने वाली फसलों को ही बोया जाता है।
  4. जोती हुई भूमि में नमी बनाए रखने के लिए उसके ऊपर सूखी मिट्टी की एक परत बिछा दी जाती है।

प्रश्न 34.
चावल की प्रमुख किस्में बताइए।
उत्तर:
भारत में मुख्य रूप से चावल की दो प्रकार की किस्में पाई जाती हैं-

  1. पहाड़ी चावल-यह पहाड़ी क्षेत्रों में सीढ़ीदार खेत बनाकर उगाया जाता है। इसकी उपज वर्षा पर निर्भर है। यह जल्दी पक जाता है। यह खाने में सख्त लगता है। इसको उच्च भूमि चावल भी कहते हैं।
  2. मैदानी चावल मैदानी भागों में उत्पन्न किया गया चावल स्वादिष्ट होता है। इसकी प्रति हैक्टेयर उपज जल की पूर्ति के कारण अधिक होती है। इसको निम्न भूमि चावल भी कहते हैं। भारत का अधिकांश चावल इसी किस्म का होता है।

प्रश्न 35.
भारतीय कृषि की कोई चार विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
भारतीय कृषि की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. भारतीय कृषि पर अधिक जनसंख्या की निर्भरता।
  2. इसकी मानसून या वर्षा पर अधिक निर्भरता।
  3. सिंचाई सुविधाओं और तकनीकी का अभाव।
  4. कृषि जोतों का छोटा आकार।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
हरित क्रांति से आपका क्या अभिप्राय है? इसकी विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:
हरित क्रांति का अर्थ हरित क्रांति का अर्थ कृषि उत्पादन में हुई उस वृद्धि से है जो नई तकनीक तथा अधिक उपज देने वाले बीजों के उपयोग से हो रही है। यद्यपि हरित क्रांति शब्द का सर्वप्रथम उपयोग विलियम गॉड ने सन् 1968 में किया था किन्तु हरित क्रांति के जन्मदाता होने का श्रेय नोबल पुरस्कार विजेता डॉ० नॉर्मन ई० बोरलॉग को जाता है। भारत में हरित क्रांति की शुरुआत सन् 1966-67 से हुई। भारत में यह क्रांति लाने का श्रेय एम० स्वामी नाथन को जाता है।

हरित क्रांति की विशेषताएँ इस क्रांति की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) अधिक उपज देने वाली तथा शीघ्र पकने वाली फसलों के बीज तैयार करना।

(2) नई कृषि नीति के अंतर्गत रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को प्रोत्साहन देना। भारत अपनी आवश्यकता के 50% उर्वरक पैदा करता है तथा शेष का आयात करता है। सिंचाई क्षेत्र के विस्तार से हरित-क्रांति को बहुत सफलता मिली है। भारत जैसे मानसून प्रदेश में सिंचाई का बड़ा महत्त्व है। भारत में नहरें, कुएँ, नलकूप तथा तालाब सिंचाई के महत्त्वपूर्ण कारक हैं।

(3) अधिक उत्पादन लेने के लिए फसलों को कीड़ों तथा बीमारियों से बचाना है।

(4) आधुनिक मशीनों के प्रयोग को बढ़ावा देना।

(5) भूमि कटाव को रोकने तथा भूमि की उर्वरता शक्ति को बनाए रखने के प्रयास करना।

प्रश्न 2.
भारत में निम्नलिखित फसलों या कृषि उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करते हुए प्रमुख उत्पादक राज्यों का उल्लेख कीजिए
(क) जूट या पटसन
(ख) कहवा या कॉफी
(ग) रबड़।
उत्तर:
(क) जूट या पटसन-जूट (पटसन) भारत की कपास के पश्चात् दूसरी महत्त्वपूर्ण रेशेदार फसल है। इसका रेशा सस्ता तथा मजबूत होता है। जूट (पटसन) के लिए निम्नलिखित दशाएँ आवश्यक हैं

  • तापमान-जूट की कृषि के लिए 25° से 35° सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। यह एक खरीफ की फसल है।
  • वर्षा-जूट की फसल के लिए 90° सापेक्षित आर्द्रता तथा 150 से 200 सें०मी० तक वर्षा की आवश्यकता होती है।
  • मिट्टी-जूट के लिए चीकायुक्त मिट्टी लाभदायक है। नदियों के बाढ़ क्षेत्र तथा डेल्टा प्रदेश जूट के लिए उपयोगी हैं। जूट की फसल मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को शीघ्र क्षीण कर देती है। इसलिए खाद का भी अधिक प्रयोग किया जा है।
  • श्रम-जूट की कृषि के लिए अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होती है। इसलिए सस्ते एवं कुशल श्रमिक आवश्यक हैं।

प्रमुख उत्पादक राज्य-जूट पैदा करने वाले प्रमुख उत्पादक राज्य हैं-

  • पश्चिमी बंगाल-यहाँ जूट मुर्शिदाबाद, नादिया, चौबीस-परगना, मालदा, बर्दमान, कूचबिहार, वीरभूम, हुगली आदि जिलों में उत्पादित किया जाता है।
  • असम यहाँ जूट ब्रह्मपुत्र घाटी में बोया जाता है। यहाँ के प्रमुख जूट उत्पादक क्षेत्र हैं-कामरूप, गोलपाड़ा आदि।
  • अन्य राज्य–बिहार में तराई प्रदेश, दक्षिणी भारत में महानदी, गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी नदियों के डेल्टा, उत्तर प्रदेश में गोरखपुर क्षेत्र, आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम क्षेत्र, मध्य प्रदेश में रायपुर क्षेत्र, केरल में मालाबार तट तथा उत्तर पूर्वी भारत में मेघालय, त्रिपुरा, मणिपुर राज्यों में जूट उगाया जाता है।

(ख) कहवा या कॉफी-कहवा चाय की भांति एक पेय पदार्थ है। यह उष्ण कटिबंध प्रदेश का पौधा है। यह एक प्रकार की झाड़ी के फलों से बीजों को निकालकर तथा सुखाकर पीसकर बनाया जाता है। इसके लिए निम्नलिखित दशाओं की आवश्यकता है

  • तापमान-कहवा के लिए सारा वर्ष उच्च तापमान की आवश्यकता होती है। कहवा के लिए 15° से 20° सेल्सियस तापमान आवश्यक है।
  • वर्षा-कहवा के लिए 150 सें०मी० से 200 सें०मी० वर्षा उपयुक्त है।
  • छायादार वृक्ष कहवे की उपज के लिए सूर्य की सीधी तथा तेज प्रकाश की किरणें हानिकारक होती हैं। इसलिए कहवे के पौधों के आस-पास छाया के लिए केले तथा अन्य छायादार वृक्ष लगाए जाते हैं।
  • मिट्टी कहवा के लिए लोहा, चूना तथा ह्यूमस-युक्त मिट्टी लाभदायक है। लावा की मिट्टी तथा दोमट मिट्टी भी कहवे के लिए अनुकूल होती है।
  • धरातल कहवे के वृक्ष पठारों तथा पर्वतीय ढलानों पर लगाए जाते हैं।
  • श्रमिक कहवे के पेड़ों को छांटने, बीज तोड़ने तथा कहवा तैयार करने के लिए सस्ते तथा कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है।

प्रमुख उत्पादक राज्य कहवा या कॉफी के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं-

  • कर्नाटक-भारत में सबसे अधिक कहवा कर्नाटक में होती है। यहाँ कहवा के प्रमुख उत्पादक जिले काटूर, शिमोगा, हसन, मैसूर, कुर्ग तथा चिकमंगलूर हैं।
  • तमिलनाडु-यहाँ कहवा नीलगिरी की पहाड़ियों तथा पलनी की पहाड़ियों में उगाया जाता है। यहाँ कहवा के प्रमुख उत्पादक जिले कोयंबटूर, सेलम, उत्तरी अर्काट तथा नीलगिरी हैं।
  • केरल-यहाँ कहवा की खेती कोजीकोड़, इदुक्की तथा पालाघाट जिलों में की जाती है।
  • अन्य राज्य-महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश तथा ओडिशा में भी कुछ मात्रा में कहवा की खेती की जाती है।

(ग) रबड़ रबड़ एक लेसदार पदार्थ है जो हैविया वृक्ष के दूध से प्राप्त होता है। इससे वाहनों (मोटर-साइकिल) के ट्यूब, टायर, खिलौने तथा बिजली का सामान आदि बनाया जाता है। इसके लिए निम्नलिखित भौगोलिक परिस्थितियों की आवश्यकता है

  • तापमान रबड़ के पौधों के उत्पादन के लिए 25° से 32° सेल्सियस तापमान की आवश्यकता है।
  • वर्षा-रबड़ के पौधे के लिए 200 सें०मी० से 250 सें०मी० वर्षा की आवश्यकता है।
  • मिट्टी-रबड़ के पौधे के लिए गहरी, चिकनी तथा दोमट मिट्टी उपयुक्त है।
  • धरातल-साधारण ढाल वाले मैदानी क्षेत्र रबड़ के पौधे के लिए उचित हैं। दलदली भूमि रबड़ के पौधों के लिए हानिकारक है।
  • श्रम-रबड़ इकट्ठा करने के लिए कुशल तथा सस्ते श्रमिकों की आवश्यकता होती है।

प्रमुख उत्पादक राज्य-रबड़ पैदा करने वाले प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।

  • केरल-यहाँ भारत की सबसे अधिक रबड़ उत्पन्न होती है। यहाँ रबड़ मालाबार तट पर उत्पन्न होती है।
  • तमिलनाडु-यहाँ रबड़ कन्याकुमारी जिले में उत्पन्न की जाती है।
  • अन्य राज्य-कर्नाटक, असम, पश्चिमी बंगाल तथा अंडमान द्वीप में भी कुछ मात्रा में रबड़ की खेती की जाती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि

प्रश्न 3.
भारत में निम्नलिखित फसलों या कृषि के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का उल्लेख कर प्रमुख उत्पादक राज्यों का उल्लेख कीजिए
(क) मक्का, (ख) ज्वार, (ग) बाजरा।
अथवा
भारत में मक्का के विकास के लिए किस प्रकार की भौगोलिक परिस्थितियों की आवश्यकता होती हैं?
उत्तर:
(क) मक्का-मक्का एक खाद्य तथा चारा फसल है जो निम्न कोटिं मिट्टी व अर्ध-शुष्क जलवायवी परिस्थितियों में उगाई जाती है। इसके लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएँ निम्नलिखित हैं

  • तापमान मक्का की फसल के लिए 25°-30° सेल्सियस तक तापमान की आवश्यकता होती है। अधिक तापमान और अधिक सर्दी मक्का की फसल के लिए हानिकारक है।
  • वर्षा भारत में मक्का खरीफ की फसल के रूप में उगाया जाता है। इसके लिए 50-75 सें०मी० वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है।
  • मिट्टी-इसकी फसल के लिए हल्की दोमट या बलुई मिट्टी की आवश्यकता होती है। जिस मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा अधिक होती है। वह मिट्टी इसके लिए उपयुक्त मानी जाती है।

प्रमुख उत्पादक राज्य – मक्का उत्तर-पूर्वी भाग को छोड़कर देश के लगभग सभी भागों में उगाया जाता है परन्तु उत्तर व मध्य भारत में देश का 80% मक्का उगाया जाता है। इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं

  • महाराष्ट्र देश का सबसे अधिक मक्का महाराष्ट्र में होता है। परन्तु प्रत्येक वर्ष इसके उत्पादन में उतार-चढ़ाव होता रहता है।
  • आंध्र प्रदेश-आंध्र प्रदेश का मक्का उत्पादन में देश में महत्त्वपूर्ण स्थान है। यहाँ देश का लगभग 24% मक्का पैदा होता है।
  • कर्नाटक कर्नाटक में देश का लगभग 19% मक्का की पैदावार होती है।
  • अन्य राज्य मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब आदि हैं।

(ख) ज्वार-ज्वार दक्षिण व मध्य भारत के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों की प्रमुख फसल है। यह रबी और खरीफ दोनों ऋतुओं में होती है। जिन क्षेत्रों में आर्द्रता की कमी है, उनमें ज्वार की खेती की जाती है। प्रायद्वीपीय भारत के आंतरिक भागों में जहाँ गेहूँ व चावल नहीं उगाए जा सकते, वहाँ ज्वार की खेती की जाती है। इसका प्रयोग खाद्यान्नों के अतिरिक्त पशुओं के चारे के रूप में भी किया जाता है। ज्वार की फसल के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएँ निम्नलिखित हैं

  • तापमान-ज्वार उष्ण एवं शुष्क प्रदेशों की फसल है। इसके लिए 25°- 30° सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है।
  • वर्षा-ज्वार की खेती के लिए 30-100 सें०मी० वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। इसकी खेती अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में नहीं की जाती।
  • मिट्टी-इसकी फसल के लिए हल्की दोमट और काली चिकनी मिट्टी की आवश्यकता होती है।

उत्पादक राज्य – ज्वार उत्पादक राज्यों में प्रथम स्थान महाराष्ट्र का है। यहाँ देश की उपज की लगभग 38% ज्वार की पैदावार होती है। इसके बाद मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश आदि हैं। ज्वार की सर्वाधिक उत्पादकता आंध्र प्रदेश में पाई जाती है।

(ग) बाजरा-यह अफ्रीकी मूल का पौधा है। भारत के पश्चिम तथा उत्तर:पश्चिम भागों में गर्म और शुष्क जलवायु में बाजरा बोया जाता है। यह एकल एवं मिश्रित फसल के रूप में बोया जाता है। इसकी फसल के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएँ निम्नलिखित हैं

  • तापमान-बाजरे की फसल के लिए 25-30 सेल्सियस तक तापमान की आवश्यकता होती है। इसके लिए ज्वार की अपेक्षा गर्म शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है।
  • वर्षा-इसकी फसल के लिए 30-60 सें०मी० तक वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है।
  • मिट्टी–इसकी उपज के लिए मरुस्थलीय एवं अर्द्ध-मरुस्थलीय क्षेत्रों की हल्की रेतीली मिट्टी उपयुक्त रहती है।

उत्पादक राज्य – देश में बाजरे के सिंचित क्षेत्र की दृष्टि से राजस्थान का प्रथम स्थान है और उत्पादन की दृष्टि से गुजरात का प्रथम स्थान है। अन्य उत्पादक राज्य -उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पंजाब, हरियाणा आदि हैं।

प्रश्न 4.
भारत के भूमि संसाधनों का वर्णन कीजिए।
अथवा
भू-उपयोग संसाधनों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
भूमि एक सीमित किंतु अत्यंत महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। इस भूक्षेत्र में मैदान, पर्वत, पठार, वन, नदियाँ तथा अन्य जलीय इकाइयों को सम्मिलित किया जाता है। जीव-जंतु इस पर अपना जीवनयापन करते हैं। भूमि पर रहते हुए मानव अनेक प्रकार की सामाजिक तथा आर्थिक क्रियाएँ करता है। अनेक उद्देश्यों के लिए भूमि का उपयोग किया जाता है जिसमें आवास, परिवहन, कृषि, खनन, उद्योग आदि प्रमुख हैं।

भूमि संसाधन की वृद्धि संभव नहीं, अतः इसका उपयोग अत्यंत सावधानीपूर्वक तथा योजनाबद्ध तरीके से होना चाहिए। भारत के कल भक्षेत्र का 43% भाग मैदानी, 28% भाग पठारी तथा शेष भाग में पर्वत, पहाड़ियाँ तथा अन्य आते हैं। कुल मिलाकर समस्त भू-क्षेत्रफल का 62% भाग स्थलाकृति के विचार से काम में आने के लिए उपयुक्त है।

किसी भूभाग का उसकी उपयोगिता के आधार पर किया जाने वाला उपयोग भूमि उपयोग कहलाता है। किसी क्षेत्र का भूमि उपयोग उस क्षेत्र के भौतिक तत्त्वों; जैसे स्थलाकृति, जलवायु, मृदा तथा सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था का परिणाम होता है। किसी क्षेत्र के भूमि उपयोग से उस क्षेत्र की आर्थिक दशा का अनुमान लगाया जा सकता है।

देश के विभिन्न भागों में प्राकृतिक तथा मानवीय परिस्थितियों में भिन्नता के कारण भूमि उपयोग के विभिन्न संवर्गों के अंतर्गत क्षेत्रफल के पारस्परिक अनुपात में भी तदानुसार प्रादेशिक भिन्नता मिलती है। भू-राजस्व विभाग द्वारा अपनाए गए सामान्य भूमि उपयोग के प्रमुख संवर्गों के अंतर्गत भूमि का वितरण तथा उसका स्वरूप निम्नलिखित प्रकार से है

1. वनों के अधीन क्षेत्र भारत के लगभग 7,50,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर किसी-न-किसी प्रकार के वन फैले हुए हैं जो देश के समस्त क्षेत्रफल का लगभग 21% से कुछ ही अधिक हैं। विगत वर्षों में वनाच्छादित भूमि में काफी कमी हुई है। भारत की वन नीति के अनुसार, परिस्थिति का संतुलन बनाए रखने के लिए देश के समतल क्षेत्र में एक-तिहाई तथा पर्वतीय क्षेत्र में लगभग 66% भूभाग पर वन का होना आवश्यक है।

इस नीति के अनुसार देश में वन क्षेत्र की अत्यंत कमी है। भारत के उत्तरी-पूर्वी राज्यों; जैसे सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, मेघालय, मणिपुर, मिज़ोरम, नागालैंड एवं अण्डमान निकोबार तथा ओडिशा आदि राज्यों में वनाच्छादित भूमि अधिक है, जबकि उत्तरी मैदान के राज्यों पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में वन भूमि देश के औसत के आधे से भी कम है।

2. गैर-कृषि कार्यों में प्रयुक्त भूमि या गैर-कृषित भूमि इस संवर्ग में वह भूमि आती है जो कृषि-कार्यों के अलावा अन्य कार्यों में उपयोग आ रही है; जैसे नगरीय तथा ग्रामीण अधिवास, औद्योगिक क्षेत्र, सड़कें, रेलमार्ग, नहरें तथा अन्य अवसंरचनात्मक विकास संबंधी क्रियाएँ। भूमि उपयोग के इस संवर्ग में तेजी से वृद्धि हो रही है।

3. बंजर तथा अकृषित भूमि मरुस्थल, बंजर, पहाड़ी क्षेत्र, खड्ड, पथरीला अथवा मृदा रहित भूभाग आदि को इस संवर्ग में शामिल किया जाता है। यद्यपि किसी भी प्रकार से यह भूमि कृषि योग्य नहीं बनाई जा सकती, परंतु इसे गैर-कृषि कार्यों के लिए तैयार किया जा रहा है, जिसके फलस्वरूप भारत में यह भूमि कम हो रही है।

4. परती भूमि-यह वह भूमि है जिसे एक लंबे कृषि उपयोग के पश्चात् कुछ समय के लिए खाली छोड़ दिया जाता है। खाली छोड़ने से इस भूमि की उपजाऊ शक्ति तथा नमी आदि में वृद्धि होती है, परती भूमि कहलाती है। यह भी दो प्रकार की होती है
(i) वर्तमान परती भूमि-इस संवर्ग में उस कृषि भूमि को शामिल किया जाता है जिसे पिछले एक अथवा उससे कम समय से कृषि के उपयोग में नहीं लिया गया हो। बीच-बीच में भूमि को परती रखने की विधि से भूमि की क्षीण हुई पौष्टिकता तथा उर्वरकता प्राकृतिक रूप से बनी रहती है।

(ii) पुरातन परती भूमि-इस संवर्ग में उस कृषि योग्य भूमि को सम्मिलित किया जाता है जो एक वर्ष से अधिक किंतु पांच वर्षों से कम समय तक कृषि रहित रहती है। इस प्रकार भूमि को इतने लंबे समय तक कृषिविहीन रखने के अनेकों कारण हैं।

5. निवल बोया क्षेत्र-वह क्षेत्र या भूमि जिस पर फसलें उगाई व काटी जाती हैं, निवल बोया क्षेत्र कहलाता है।

6. परती भूमि के अलावा अन्य अकृषित भूमि-न तो इस भूमि पर कृषि अथवा कृषि कार्य किए जाते हैं न ही इस भूमि को परती भूमि में शामिल किया जा सकता है। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन संवर्ग शामिल हैं

  • स्थाई चरागाह तथा अन्य गोचर भूमि
  • विविध वृक्षों तथा कुंजों के अधीन भूमि
  • कृषि योग्य बंजर भूमि।

प्रश्न 5.
चावल उगाने के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए तथा भारत में इसके उत्पादन एवं वितरण का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत में चावल की कृषि का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत में चावल की कृषि के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करते हुए इसके प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
चावल एक उष्ण आर्द्र कटिबंधीय फसल है। यह भारत की मुख्य खाद्य फसल है। विश्व में इसके उत्पादन में भारत का चीन के बाद दूसरा स्थान है। यह देश के कुल बोए क्षेत्र के एक-चौथाई भाग पर बोया जाता है। दक्षिणी और पूर्वी भागों के अधिकांश निवासियों का मुख्य भोजन चावल है।

रूसी विद्वान वेविलोव के अनुसार चावल का मूल स्थान भारत है, यहाँ से इसका प्रसार पूर्व व चीन की ओर हुआ। वैदिक काल से चावल भारत में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यों में उपयोग किया जा रहा है।

भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions)-इसकी उपज के लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ अनुकूल हैं-
1. तापमान-चावल की बुआई के समय 20° – 21° सेंग्रे०, बढ़ने के समय 22° – 25° सेंग्रे० और पकते समय 27° सेंग्रे० तापमान की आवश्यकता होती है। यही मौसम पौधे के विकास के लिए उपयुक्त है।

2. जल व वर्षा-चावल एक अंकुरित पौधा होने के कारण इसके बोते समय खेत में लगभग 20-30 सें०मी० गहरा जल भरा होना चाहिए। इसकी फसल के समय 100-200. सें०मी० वर्षा होनी चाहि वर्षा कम होती है वहाँ पानी की पूर्ति सिंचाई द्वारा की जाती है।

3. मिट्टी-चावल की कृषि के लिए चिकनी, दोमट मृदा बहुत अच्छी होती है क्योंकि इसमें अधिक समय तक नमी धारण ‘करने की शक्ति होती है और क्षारयुक्त मृदाओं को भी सहन कर सकता है। भारत के डेल्टाई व तटवर्ती भाग इसकी खेती के लिए बहुत उत्तम हैं।

4. भूमि या धरातल-चावल की कृषि के लिए भूमि समतल या हल्के ढाल वाली होनी चाहिए। समतल भूमि में पानी रोकने के लिए मेढ़बंदी करनी पड़ती है। पहाड़ी इलाकों में सीढ़ीदार खेत बनाए जाते हैं।

5. श्रम चावल की कृषि में मशीनी शक्ति की बजाय मानवीय शक्ति की अधिक आवश्यकता होती है, इसलिए श्रम सस्ता होना चाहिए। इसमें ज्यादातर काम हाथों से किया जाता है।

उत्पादन (Production) – चावल के उत्पादन में भारत का विश्व में चीन के बाद दूसरा स्थान है। भारत में कल कृषित भूमि के लगभग 25% भाग पर चावल पैदा होता है। भारत विश्व का लगभग 22% चावल उत्पन्न करता है। भारत की कुल कृषि-भूमि के 23% भाग पर तथा खाद्यान्नों के क्षेत्र के 33.6% भाग पर चावल की खेती की जाती है। चावल के कृषित क्षेत्र का लगभग 47% भाग सिंचित है। 2015-16 में चावल उत्पादन क्षेत्र 434.99 लाख हैक्टेयर था जो 2017-18 में बढकर 437.89 लाख हैक्टेयर हो गया है।

देश में 104.41 मिलियन टन का उत्पादन हुआ जो 2017-18 में बढ़कर 112.91 मिलियन टन हो गया। 2018-19 में चावल का उत्पादन 116.50 मिलियन टन हुआ जो अब तक का रिकॉर्ड है। 2019-20 के दौरान चावल का उत्पादन लगभग 117.40 मिलियन टन होने का अनुमान है।

वितरण (Distribution) – भारत में बोई गई भूमि के अंतर्गत सबसे अधिक क्षेत्रफल चावल का है। भारत के ऊंचे भागों को छोड़कर समस्त भारत में यदि जल उपलब्ध हो तो कृषि की जा सकती है। भारत के मुख्य उत्पादक क्षेत्र उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, पंजाब, मध्य प्रदेश आदि हैं। कई भागों में चावल वर्ष में दो बार उगाया जाता है। गंगा-सतलुज मैदान इसका प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है।
1. पश्चिम बंगाल-पश्चिम बंगाल में चावल का उत्पादन सबसे अधिक होता है। इस राज्य की तीन-चौथाई कृषि भूमि पर देश का 14% से अधिक चावल पैदा होता है। उत्पादन की दृष्टि से इसका भारत में प्रथम स्थान है। जलपाईगुड़ी, बाँकुड़ा, मिदनापुर, पश्चिमी दीनाजपुर, बर्दमान, दार्जिलिंग आदि में चावल का उत्पादन होता है। यहाँ कई क्षेत्रों में चावल की कृषि वर्ष में तीन बार की जाती है जिन्हें अमन, ओस तथा ब्योरो कहा जाता है।

2. उत्तर प्रदेश-देश में चावल के उत्पादन में उत्तर प्रदेश का दूसरा स्थान है। यहाँ देश का लगभग 12% चावल उत्पन्न होता है। प्रमुख उत्पादक जिलों में सहारनपुर, देवरिया, लखनऊ, गोंडा, बलिया, पीलीभीत, गोरखपुर आदि हैं। हर वर्ष इसके कुल उत्पादन में उतार-चढ़ाव होता रहता है।

3. आंध्र प्रदेश-यह राज्य भारत का लगभग 11% चावल पैदा करता है। यहाँ कृष्णा और गोदावरी नदियों के डेल्टाई और निकटवर्ती तटीय मैदानी क्षेत्रों में चावल की पैदावार अच्छी होती है।

4. पंजाब-पंजाब में पिछले कुछ सालों में गेहूँ की तुलना में चावल का उत्पादन बढ़ा है। हरित क्रांति के बाद चावल उत्पादन में देश में सबसे ज्यादा वृद्धि यही दर्ज की गई। सन् 2011-12 में पंजाब में लगभग 108.3 लाख टन चावल पैदा किया गया था। होशियारपुर, गुरदासपुर, अमृतसर, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना आदि पंजाब के प्रमुख चावल उत्पादक जिले हैं।

5. बिहार-बिहार में वर्ष में चावल की दो फसलें बोई जाती हैं। यहाँ लगभग 40% सिंचित कृषि पर चावल की पैदावार होती है। यहाँ के प्रमुख उत्पादक जिले हैं सारन, चम्पारन, गया, दरभंगा, मुंगेर, पूर्णिया आदि।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि 3

6. तमिलनाडु-चिंगलेपुर, दक्षिणी अर्काट, नीलगिरि, रामनाथपुरम्, तंजावूर, कोयम्बटूर, सेलम आदि जिलों में चावल पैदा किया जाता है। कावेरी नदी का डेल्टा इसका प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है। राज्य का 25% चावल अकेला तंजावूर जिला पैदा करता है।

7. ओडिशा इस राज्य में भारत का लगभग 6-7% चावल पैदा किया जाता है। कटक, पुरी, सम्बलपुर, बालासोर, मयूरभंज .. आदि जिलों में इसका उत्पादन होता है। कटक में तो भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान स्थित है।

8. मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़-रायपुर, जबलपुर, बस्तर, दुर्ग, गोदिया, देवास आदि जनपदों में चावल की कृषि की जाती है। यहाँ भारत का लगभग 5-7% चावल पैदा होता है। नर्मदा नदी, ताप्ती नदी की घाटियाँ और छत्तीसगढ़ का मैदान चावल की कृषि के लिए बहुत उपयोगी है।

9. अन्य राज्य–अन्य उत्पादक राज्यों में महाराष्ट्र, असम, कर्नाटक, हरियाणा, राजस्थान, गोवा, मणिपुर तथा केरल प्रमुख हैं। हरियाणा में अम्बाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, जींद मुख्य उत्पादक क्षेत्र हैं।

प्रश्न 6.
गेहूँ की कृषि के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का वर्णन करें। भारत में इसके उत्पादन व वितरण की व्याख्या करें।
अथवा
भारत में गेहूँ की कृषि का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में गेहूँ चावल के बाद अन्य प्रमुख खाद्यान्न फसल है। इसकी देश की कुल 14% भाग पर खेती की जाती है। यह मुख्यतः शीतोष्ण कटिबंधीय फसल है इसे शरद् अर्थात् खरीफ ऋतु में बोया जाता है। इस फसल का 85% क्षेत्र भारत के उत्तरी मध्य भाग तक केंद्रित है।

भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions)-भौगोलिक दशाएँ निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करती हैं-
1. तापमान-गेहूँ की कृषि के लिए अधिक तापमान एवं वर्षा की आवश्यकता नहीं होती। इसको ते समय औसत तापमान 10° सेंटीग्रेड और बढ़ते व पकते समय 15°-25° सेंटीग्रेड तक होना चाहिए।

2. वर्षा इसकी खेती के लिए वार्षिक वर्षा 50-75 सें०मी० तक होनी चाहिए। अधिक वर्षा इसकी खेती के लिए नुकसानदायक है। लेकिन पौधों की वृद्धि के लिए मृदा में पर्याप्त नमी होनी चाहिए।

3. मिट्टी-इसको उगाने के लिए जलोढ़, दोमट व चिकनी मिट्टी की आवश्यकता होती है। इसे काली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है।

4. भूमि या धरातल-इसकी खेती के लिए समतल तथा लगातार उतार-चढ़ाव वाले मैदानी भाग उपयुक्त हैं।

5. श्रम विभिन्न कार्यों हेतु सस्ते श्रम की आवश्यकता होती है, लेकिन गेहूँ की कृषि यांत्रिक होने के कारण अब अधिक श्रम की आवश्यकता नहीं है।

उत्पादन (Production) – गेहूँ की कृषि में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। भारत विश्व के कुल गेहूँ क्षेत्र के लगभग 12% एवं कुल उत्पादन का लगभग 11.7% उत्पादन करता है। देश के कुल बोए क्षेत्र के लगभग 14% भाग पर गेहूँ की कृषि की जाती हैं। 2003-04 में देश में गेहूँ का उत्पादन लगभग 72.16 मिलियन टन था। 2015-16 में देश में उत्पादन क्षेत्र 304.18 लाख हैक्टेयर था जो 2017-18 में घटकर 295.76 लाख हैक्टेयर रह गया। 2015-16 में देश में गेहूँ का उत्पादन 92.29 मिलियन टन था जो र 99.70 मिलियन टन हुआ। 2018-19 में देश में गेहूँ का कुल उत्पादन 103.6 मिलियन टन हुआ। कृषि मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2019-20 के दौरान देश में गेहूँ का कुल उत्पादन 106.2 मिलियन टन होने का अनुमान है।

वितरण (Distribution) – भारत में सबसे ज्यादा गेहूँ की कृषि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा तथा मध्य प्रदेश में की जाती है। यहाँ देश का तीन-चौथाई भाग गेहूँ उत्पन्न होता है। इनके अलावा राजस्थान, बिहार एवं उनके निकटवर्ती क्षेत्रों में गेहूँ की अच्छी कृषि की जाती है।
1. उत्तर प्रदेश गेहूँ के उत्पादन में उत्तर प्रदेश का देश में प्रथम स्थान है। गंगा, घाघरा, दोआब यहाँ के महत्त्वपूर्ण उत्पादक क्षेत्र हैं। इस राज्य के मुख्य उत्पादक जिले मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, रामपुर, बुलंदशहर, इटावा, कानपुर आदि हैं। उत्तर प्रदेश में गंगा-यमुना दोआब तथा गंगा-घाघरा दोआब गेहूँ की खेती के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ राज्य का 75% गेहूँ पैदा होता है।

2. पंजाब हरित क्रांति के पश्चात् से पंजाब में गेहूँ की कृषि में बहुत उन्नति हो रही है। गेहूँ की कृषि अब पंजाब की अर्थव्यवस्था का महत्त्वपूर्ण अंग बन गई है। गेहूँ के उत्पादन में इस राज्य का भारत में दूसरा स्थान है। यहाँ कुल कृषि भूमि के 30% भाग पर गेहूँ की कृषि की जाती है। इसके मुख्य उत्पादक जिले अमृतसर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर, जालंधर, भटिण्डा, फिरोजपुर हैं।

3. मध्य प्रदेश-गेहूँ उत्पादन में मध्य प्रदेश का देश में तीसरा स्थान है। राज्य के मालवा क्षेत्र में उपजाऊ मिट्टी और नर्मदा घाटी की गहरी कछारी मिट्टी होने के कारण गेहूँ की अच्छी कृषि की जाती है। ग्वालियर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर आदि जिले प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं।

4. हरियाणा सिंचाई सुविधाओं के कारण यहाँ भी पंजाब की तरह प्रति हैक्टेयर उपज अधिक है। इस राज्य के मुख्य उत्पादक जिले रोहतक, हिसार, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी हैं। देश के कुल उत्पादन में इस राज्य का महत्त्वपूर्ण योगदान है।

5. राजस्थान राजस्थान की कुल भूमि के लगभग 18% भाग पर गेहूँ की खेती की जाती है। इन्दिरा गाँधी नहर बनने के बाद यहाँ गेहूँ की उपज में वृद्धि हुई है। श्रीगंगानगर, अलवर, भरतपुर, कोटा, जयपुर, भीलवाड़ा, सवाई, माधोपुर आदि यहाँ के प्रमुख गेहूँ उत्पादक जिले हैं।

6. बिहार-बिहार के उत्तरी मैदानी भागों में गेहूँ उत्पादन किया जाता है। इस राज्य की कृषीय भूमि के 14% भाग पर गेहूँ की खेती होती है। यहाँ के प्रमुख गेहूँ उत्पादक जिले चम्पारन, दरभंगा, पटना, सहरसा, गया, मुजफ्फरपुर व शाहबाद इत्यादि हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि 4

7. अन्य राज्य-भारत के अन्य गेहूँ उत्पादक राज्यों में छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और कर्नाटक आदि हैं। इन राज्यों में समतल उपजाऊ भू-भागों में गेहूँ की कृषि की जाती है।

प्रश्न 7.
गन्ने की कृषि के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का वर्णन करें। भारत में इसके उत्पादन व वितरण की व्याख्या करें।
अथवा
भारत में गन्ने की फसल के लिए आवश्यक परिस्थितियों का वर्णन करते हुए इसके उत्पादन एवं वितरण का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
गन्ने के उत्पादन में भारत का संसार में बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। हमारा देश संसार के कुल उत्पादन का लगभग एक-चौथाई भाग पैदा करता है। गन्ना एक उष्ण कटिबंधीय फसल है और यह देश की सबसे महत्त्वपूर्ण नकदी फसल है। इस फसल की बुआई का समय फरवरी से मई तथा कटाई का समय नवम्बर से मार्च तक का है। कच्चे माल के रूप में कई उद्योगों में इसका प्रयोग होता है; जैसे चीनी उद्योग, गत्ता उद्योग आदि।

भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions)-गन्ने की कृषि के लिए जरूरी भौगोलिक दशाएँ निम्नलिखित हैं-
1. तापमान-गन्ने का वर्धनकाल लगभग 1 वर्ष होता है। इसके लिए 20° से 30° सेल्सियस तापमान की आवश्यकता रहती है। 40° सेंटीग्रेड से अधिक और 15° सेंटीग्रेड से कम तापमान पर गन्ना पैदा नहीं होता। अत्यधिक सर्दी, पाला इसके लिए हानिकारक होता है।

2. वर्षा-गन्ना 100 से 150 सें०मी० वर्षा वाले क्षेत्रों में खूब उगाया जाता है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में यह सिंचाई की सहायता से उगाया जाता है। इसकी कटाई के समय शुष्क मौसम होना चाहिए।

3. मिट्टी-गहरी दोमट और लावायुक्त काली मिट्टी इसके लिए उपयुक्त होती है। मिट्टी में चूने की मात्रा होनी चाहिए। बाढ़ के मैदानों तथा डेल्टाई प्रदेशों में यह खब पैदा होता है। इसके लिए बड़ी मात्रा में खाद की जरूरत रहती है, क्योंकि यह मिट्टी के पोषक तत्त्वों को अधिक समाप्त करता है।

4. भूमि-गन्ने की खेती के लिए मैदानी भाग उपयुक्त होते हैं, क्योंकि यहाँ परिवहन के सस्ते साधन सुलभ होते हैं तथा मशीनों का भी इसकी कटाई में प्रयोग हो सकता है।

5. श्रम गन्ने की खेती का अधिकांश काम हाथों से होता है। अतः सस्ते श्रम की जरूरत पड़ती है।

उत्पादन (Production)-भारत में उत्पादित गन्ने का 40% गुड़ और 50% चीनी बनाने में प्रयुक्त होता है। भारत में गन्ने। की प्रति हैक्टेयर उपज बहुत कम है। इसका कारण यह है कि भारत का अधिकांश गन्ना उत्तर भारत में पैदा किया जाता है, जबकि इसके लिए भौगोलिक दशाएँ दक्षिण भारत में अधिक पाई जाती हैं। विश्व में गन्ना उत्पादन में भारत का दूसरा स्थान है।

यहाँ लगभग 22% गन्ना पैदा किया जाता है। 2015-16 में देश में गन्ने की खेती या उत्पादन क्षेत्र 49.27 लाख हैक्टेयर और 2017-18 में 47.32 लाख हैक्टेयर था। सन् 2015-16 में देश में गन्ने का उत्पादन 348.45 मिलियन टन और 2017-18 में 376.90 मिलियन टन था। वर्ष 2018-19 के दौरान गन्ने का उत्पादन 380.83 मिलियन टन अनुमानित है।

वितरण (Distribution)-भारत का लगभग 75% गन्ना उत्तरी मैदानों में पैदा होता है। भारत में प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्र हैं-
1. उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश भारत का लगभग 40% गन्ना पैदा करता है। इसके मुख्य उत्पादक जिले सहारनपुर, मुरादाबाद, मेरठ, फैजाबाद, बुलंदशहर, शाहजहाँपुर, बलिया, आजमगढ़ और गोरखपुर आदि हैं। यहाँ के तराई क्षेत्र और दोआब क्षेत्र में गन्ने की अच्छी पैदावार होती है।

2. महाराष्ट्र महाराष्ट्र देश का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है। यहाँ उच्च कोटि का गन्ना पैदा होता है और मुख्य उत्पादक जिले नासिक, पुणे, शोलापुर, रत्नागिरि तथा अहमदनगर, सतारा आदि हैं।

3. कर्नाटक यहाँ गन्ने की कृषि नदी-घाटियों में की जाती है। यह राज्य भारत का लगभग 13% गन्ना पैदा करता है। यहाँ के महत्त्वपूर्ण जिले मैसूर, कोलार, रायचूर, बेलारी, तुमकुर तथा बेलगाँव आदि हैं।

4. तमिलनाड-तमिलनाड़ कल उत्पादन और प्रति हैक्टेयर उत्पादन की दृष्टि से देश में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ देश का लगभग 10% गन्ना पैदा होता है। यहाँ के मुख्य उत्पादक जिले कोयम्बटूर, मदुरई, उत्तरी अर्काट, दक्षिणी अर्काट तथा चेन्नई आदि हैं।

5. आंध्र प्रदेश-यहाँ गन्ने की कृषि गोदावरी तथा कृष्णा नदियों के डेल्टाई क्षेत्रों में की जाती है। यहाँ के मुख्य उत्पादक जिले पश्चिमी गोदावरी, श्री काकुलम, निजामाबाद, विशाखापट्टनम तथा चित्तूर आदि हैं।

6. पंजाब-पंजाब की मिट्टी उपजाऊ है। यह राज्य देश का लगभग 2% गन्ना पैदा करता है। यहाँ के मुख्य उत्पादक जिले जालंधर, अमृतसर, फिरोजपुर तथा गुरदासपुर आदि हैं।

7. हरियाणा-पंजाब की तरह हरियाणा में भी उपजाऊ मृदा और सिंचाई साधनों की सुविधाओं के कारण गन्ना क्षेत्र, उत्पादन और प्रति हैक्टेयर में निरंतर वृद्धि हो रही है। यहाँ के मुख्य उत्पादक जिले अम्बाला, करनाल, रोहतक, सोनीपत, पानीपत और यमुनानगर आदि हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि 5
8. गुजरात-सूरत, जामनगर, जूनागढ़, राजकोट तथा भावनगर गुजरात के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिले हैं।

9. बिहार-निम्न गंगा के मैदान में स्थित होने के कारण बिहार में गन्ने की खेती के लिए सभी अनुकूल दशाएँ विद्यमान हैं। गोपालगंज, सिवान, बक्सर, रोहतास, गया, औरंगाबाद, सारन व वैशाली बिहार के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिले हैं।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि

प्रश्न 8.
कपास की कृषि के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का वर्णन करें। भारत में कपास के उत्पादन व वितरण की व्याख्या करें।
अथवा
भारत में कपास की कृषि का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत में कपास की फसल के लिए आवश्यक भौगोलिक परिस्थितियों और वितरण का वर्णन कीजिए। अथवा भारत में कपास की खेती के लिए तीन भौगोलिक दशाओं और तीन उत्पादक राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर:
कपास के पौधे का मूल स्थान भारत है। यहाँ प्राचीनकाल से लोग सूती कपड़ों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऋग्वेद में भी कई जगहों पर कपास के बारे में वर्णन मिलता है। कपास एक उष्ण कटिबंधीय फसल है जो देश के अर्ध-शुष्क भागों में खरीफ ऋतु में बोई जाती है।

भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions)-कपास की कृषि के लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ आवश्यक हैं-
1. तापमान-कपास के लिए ऊँचे तापमान की आवश्यकता रहती है। इसके लिए 20° से 25° सेल्सियस तापमान उपयुक्त रहता है। पाला इसके लिए हानिकारक होता है।

2. वर्षा कपास की खेती के लिए 50 से 80 सें०मी० तक वर्षा अधिक उपयोगी रहती है। कपास पर फूल आने के समय आकाश बादल रहित होना चाहिए। इसके पकते समय शुष्क मौसम होना चाहिए। कम वर्षा वाले क्षेत्र में सिंचाई की सहायता से इसे उगाया जाता है।

3. मिट्टी-जल को अधिक सोख लेने वाली दोमट मिट्टी इसके लिए उपयुक्त होती है। मिट्टी में चूने के अंश होने चाहिएँ। इसकी उपज के लिए लावा से बनी मिट्टी सर्वोत्तम होती है। कपास की खेती के लिए गहरी एवं मध्यम काली मिट्टी आदर्श मानी जाती है। देश में इसकी उपज गंगा मैदान की काँप मिट्टी और लाल या लैटेराइट मिट्टी में भी की जाती है।

4. श्रम कपास की खेती के लिए सस्ते तथा कुशल श्रम की आवश्यकता होती है। कपास डोंडियों से इसको चुनने का काम हाथों से ही किया जाता है।

उत्पादन (Production) – भारत का कपास के उत्पादन में विश्व में चौथा स्थान है। यह विश्व के समस्त कपास उत्पादन के 8.3% भाग का उत्पादन करता है। देश के समस्त बोए क्षेत्र के लगभग 4.7% क्षेत्र पर कपास बोया जाता है। भारत दो प्रकार की छोटे रेशे वाली (भारतीय) और लंबे रेशे वाली (अमेरिकी) कपास का उत्पादन करता है। अमेरिकी कपास को देश के उत्तर:पश्चिमी भाग में ‘नरमा’ के नाम से जाना जाता है। भारत की लगभग 60% से अधिक कपास दक्षिण भारत में उगाई जाती है।

2015-16 में देश में कपास की खेती उत्पादन क्षेत्र 122.92 लाख हैक्टेयर था और 2017-18 में यह 124.29 लाख हैक्टेयर हो गया। 2019-20 में कपास का उत्पादन क्षेत्र 127.67 लाख हैक्टेयर हो गया। 2015-16 में कपास का उत्पादन 30.01 मिलियन गाँठ था और 2017-18 में यह 34.89 मिलियन गाँठ हो गया। 2019-20 के दौरान कपास का उत्पादन 36.0 मिलियन गाँठ होने की उम्मीद की जा रही है।

1. महाराष्ट्र महाराष्ट्र में देश की लगभग 21% कपास की पैदावार होती है। यहाँ लम्बे रेशे वाली कपास भी उगाई जाती है। यहाँ लावा निर्मित मिट्टी कपास की कृषि के लिए बहत उपयुक्त है। यहाँ के मुख्य कपास उत्पादक जिले नागपर, अमरावती, अंकोला, जलगाँव, वर्धा, शोलापुर और नांदेड़ आदि हैं।

2. गुजरात यह राज्य देश की लगभग 35% कपास का उत्पादन करता है। यहाँ के महत्त्वपूर्ण जिले अहमदाबाद, बड़ौदा, सूरत, साबरमती, भावनगर, राजकोट, पंचमहल, भड़ौंच तथा सुरेंद्रनगर आदि हैं।

3. पंजाब-पंजाब में दोमट तथा उपजाऊ मिट्टी पाई जाती है तथा सिंचाई की सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं। यहाँ के महत्त्वपूर्ण उत्पादक जिले फिरोजपुर, भटिण्डा, लुधियाना, अमृतसर तथा संगरूर आदि हैं। .

4. हरियाणा-पश्चिमी हरियाणा में बलुई मिट्टी में सिंचाई की व्यवस्था हो जाने से यहाँ कपास की कृषि में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। हिसार और सिरसा हरियाणा की लगभग 80 प्रतिशत कपास पैदा करते हैं। जींद, फतेहाबाद और भिवानी कपास के अन्य उत्पादक जिले हैं।

5. कर्नाटक यहाँ भारत की लगभग 4% कपास पैदा होती है। यहाँ भी काली मिट्टी और लाल मिट्टी का कुछ क्षेत्र है जो कपास के लिए उपयुक्त है। महत्त्वपूर्ण उत्पादक जिले धारवाड़, बेलगाँव, बीजापुर तथा बेलारी आदि हैं।

6. राजस्थान-सिंचाई की सहायता से यहाँ कपास पैदा की जाती है। यहाँ के मुख्य उत्पादक जिले भीलवाड़ा, अलवर, श्री गंगानगर, बूंदी, टोंक, कोटा और झालावाड़ आदि हैं।

7. आंध्र प्रदेश-सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि तथा सरकार की अनुकूल नीतियों के कारण आंध्र प्रदेश में कपास के उत्पादन स वर्ष अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। यहाँ छोटे तथा लम्बे दोनों प्रकार के रेशों वाली कपास उगती है। यहाँ के प्रमुख कपास उत्पादक जिले गुंटूर, कृष्णा, पश्चिमी गोदावरी व कर्नूल आदि हैं।

8. मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश के पश्चिमी और दक्षिणी भाग कपास की खेती के लिए उपयुक्त हैं। यहाँ के मुख्य उत्पादक जिले हैं-देवास, छिदवाड़ा, खलाम, पश्चिमी नीमाड़ और धार आदि।

9. अन्य उत्पादक क्षेत्र अन्य उत्पादक राज्य तमिलनाडु, केरल, बिहार, ओडिशा, असम आदि हैं जो सभी मिलकर देश की 4% से अधिक कपास पैदा करते हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि 6

प्रश्न 9.
हरित क्रांति के भारतीय समाज पर पड़े सामाजिक और आर्थिक प्रभावों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
कृषि क्षेत्र में नई कृषि नीति और तकनीकी परिवर्तनों के कारण उत्पादन में होने वाली वृद्धि को ‘हरित क्रांति’ कहते हैं। यह भारतीय कृषि में उन्नति का प्रतीक है। हरित क्रांति के भारतीय समाज पर निम्नलिखित सामाजिक व आर्थिक प्रभाव पड़े हैं
1. कृषि उत्पादन में वृद्धि हरित क्रांति के फलस्वरूप कृषि उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि हुई है। हरित क्रांति के कारण ही देश खाद्यान्नों के उत्पादन में आत्म-निर्भर बन सका है।

2. कृषि का मशीनीकरण हरित क्रांति के परिणामस्वरूप ही भारतीय कृषि का मशीनीकरण हो रहा है। जुताई से लेकर गहाई तक के लगभग सारे कार्यों का पूरी तरह मशीनीकरण हो चुका है।

3. सुनिश्चित सिंचाई विद्युत् चालित नलकूपों द्वारा सिंचाई को सुनिश्चित कर लिया गया है। अब पूरा साल किसानों को केवल वर्षा की ओर नहीं देखना पड़ता। इन नलकूपों द्वारा कुल सिंचित क्षेत्र में भी अत्यधिक मात्रा में वृद्धि हुई है।

4. ग्रामीण आय में वृद्धि हरित क्रांति के फलस्वरूप कृषि उत्पादन में वृद्धि से ग्रामीण लोगों की आय में अधिक मात्रा में वृद्धि हुई है।

5. ग्रामीण जीवन-स्तर में सुधार हरित क्रांति के कारण लोगों की आय में काफी वृद्धि हुई है, जिससे ग्रामीण जीवन में बहुत ज्यादा सुधार हुआ है। वे अब पक्के, अच्छे, साफ-सुथरे मकानों में रहते हैं। उनमें साक्षरता भी बढ़ी है।

6. कृषि का व्यवसायीकरण भारतीय कृषि अब निर्वाह कृषि का रूप त्यागकर व्यापारिक कृषि बन गई है। किसानों की व्यापारिक फसलों के उत्पादन में काफी रुचि बढ़ी है। उनका उत्पादन सरकार की विभिन्न एजेंसियों द्वारा खरीद लिया जाता है।

7. किसानों के दृष्टिकोण में परिवर्तन हरित क्रांति के कारण किसानों के दृष्टिकोण में महान परिवर्तन आया है। अब किसान कृषि की नई तकनीक अपनाने लगे हैं। अच्छी उपज देने वाले बीजों का ज्यादा-से-ज्यादा प्रयोग होने लगा है। किसानों ने फसलों के वैज्ञानिक हेर-फेर को अपना लिया है।

8. प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हरित क्रांति के फलस्वरूप प्रति व्यक्ति आय में काफी वृद्धि हुई है।

9. कीटनाशकों का प्रयोग हरित क्रांति के कारण कृषि में उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग में काफी वृद्धि हुई है।

प्रश्न 10.
‘भारतीय कृषि निर्वाह का स्वरूप त्यागकर व्यापारिक कृषि बन गई है’ इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
पहले किसानों की निर्धनता, साधारण खादों और बीजों की पुरानी किस्मों का उपयोग, सिंचाई की सुविधाओं का अभाव और जोतों के छोटे आकार के कारण उत्पादन बहुत कम होता था, जो उत्पादन होता था, वह उसके परिवार में ही खप जाता था। परंतु जनसंख्या की तीव्र वृद्धि के कारण अब कृषि उत्पादों की माँग बढ़ रही है। इसलिए कृषि अपने निर्वाह स्वरूप को त्यागकर व्यापारिक कृषि बन रही है। इसके बारे में अनेक संकेत मिल रहे हैं।
1. जोतों के आकार में परिवर्तन-चकबंदी ने छोटी जोतों को बड़ी जोतों में बदल दिया है। छोटी जोतों में भारी कमी हुई है। बड़ी जोतें व्यापारिक कृषि के लिए उपयुक्त होती हैं।

2. भूमि संबंधी अधिकार-सरकार ने जमींदारी प्रथा का उन्मूलन करके किसानों को भूमि संबंधी अधिकार दे दिए। इससे कृषि में उनकी रुचि बढ़ गई और अधिक उत्पादन होने लगा।

3. कृषि का मशीनीकरण-कृषि-कार्यों में पशुओं का स्थान मशीनों ने ले लिया। जुताई, बुआई, कटाई, सिंचाई आदि का मशीनीकरण हो गया है। कृषि के आधुनिक उपकरणों, ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, ट्रैक्टर-ट्रॉली, जलपंप और स्प्रिंकलर आदि ने न केवल उपज में वृद्धि की है बल्कि समय की भी बहुत बचत की है।

4. नए बीजों और उर्वरकों का उपयोग–अब अधिक उपज देने वाले नए-नए बीजों का प्रयोग किया जा रहा है। अब उर्वरकों के उपयोग में वृद्धि के कारण अधिक उपज होने लगी।

5. कृषि में वैज्ञानिक तकनीक का प्रयोग-व्यापारिक कृषि के लिए वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी और उसका प्रयोग जरूरी होता है। इस तकनीक के प्रयोग में काफी वृद्धि हुई है। यही व्यापारिक कृषि का संकेत है। कृषि के नए-नए ढंगों ने उपज में काफी ज्यादा वृद्धि की है।

6. कीटनाशकों का प्रयोग फसलों को खरपतवार, फफूंदी और अनेक प्रकार के कीड़ों से बचाने के लिए आजकल कीटनाशक आदि दवाइयों का प्रयोग किया जा रहा है।

7. सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद-अब मंडियों में कृषि उत्पादन की खरीद सरकारी एजेंसियों द्वारा की जाती है। इससे किसानों को अपनी उपज के ठीक दाम मिलते हैं। यह कदम कृषि के व्यापारिक स्वरूप की ओर संकेत है।

प्रश्न 11.
भारतीय कृषि की समस्याओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारतीय कृषि निम्नलिखित समस्याओं से ग्रस्त है
1. अनियमित व अनिश्चित मानसून पर निर्भरता भारतीय कृषि मानसूनी वर्षा पर निर्भर है। भारत में कृषि क्षेत्र का केवल एक-तिहाई भाग ही सिंचित है। शेष क्षेत्र मानसूनी वर्षा पर निर्भर है। दक्षिणी-पश्चिमी मानसून अनिश्चित व अनियमित होने से नहरों में जल की आपूर्ति प्रभावित होती है। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति व कम वर्षा वाले स्थानों में सूखा एक सामान्य परिघटना है।

2. निम्न उत्पादकता भारत में फसलों की उत्पादकता कम है। भारत में अधिकतर फसलें: जैसे चावल, गेहूँ. कपास व तिलहन की प्रति हैक्टेयर उपज अमेरिका, रूस, जापान से कम है। देश के विस्तृत वर्षा पर निर्भर शुष्क क्षेत्रों में अधिकतर मोटे अनाज, दालें, तिलहन की खेती की जाती है। इनकी उत्पादकता बहुत कम है।

3. छोटी जोतें भारत में छोटे किसानों की संख्या अधिक है। बढ़ती जनसंख्या के कारण खेतों का आकार और भी सिकुड़ रहा है। कुछ राज्यों में तो चकबंदी भी नहीं हुई है। विखंडित व छोटी जोतें आर्थिक दृष्टि से लाभकारी नहीं हैं।

4. भूमि सुधारों की कमी-भूमि के असमान वितरण के कारण भारतीय किसान लंबे समय से शोषण का शिकार रहे है। स्वतन्त्रता से पूर्व किसानों का बहुत शोषण हुआ। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् भूमि सुधारों को प्राथमिकता दी गई, लेकिन ये सुधार पूरी तरह से फलीभूत नहीं हुए। भूमि सुधारों के लागू न होने के कारण कृषि योग्य भूमि का असमान वितरण जारी रहा जिससे कृषि विकास में बाधा रही है।

5. कृषि योग्य भूमि का निम्नीकरण-निम्नीकरण एक गंभीर समस्या है, क्योंकि इससे मृदा का उपजाऊपन कम होता है। सिंचित क्षेत्रों में यह समस्या और भी अधिक भयंकर है। कृषि भूमि का एक बड़ा भाग लवणता और मृदा क्षारता के कारण बंजर हो चुका है। कीटनाशक रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से भी मृदा का उपजाऊपन नष्ट होता है।

6. वाणिज्यीकरण का अभाव-भारतीय किसान अपनी जीविका के लिए फसलें उगाते हैं, क्योंकि इन किसानों के पास अपनी जरूरत से अधिक फसल उत्पादन के लिए पर्याप्त भू-संसाधन नहीं है इसलिए अधिकतर किसान खाद्यान्नों की कृषि करते हैं ताकि वे अपने परिवार की जरूरतों को पूरा कर सकें। वर्तमान समय में सिंचित क्षेत्रों का कृषि का आधुनिकीकरण तथा वाणिज्यीकरण हो रहा है।

प्रश्न 12.
भारत में चाय की कृषि का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत में चाय की कृषि के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन कीजिए। भारत में इसका उत्पादन और विवरण का उल्लेख करें।
अथवा
भारत में चाय की खेती के लिए तीन भौगोलिक दशाओं और तीन उत्पादक राज्यों के नाम लिखें।
उत्तर:
चाय-भारत संसार की कुल उत्पादित चाय का लगभग एक-तिहाई भाग का उत्पादन करता है। संसार की उत्पादित होने वाली चाय का लगभग 21.1% भाग भारत उत्पादन करता है। चाय का पौधा झाड़ीदार होता है जिसकी कृषि बागानी कृषि कहलाती है। इसके पत्तों में थीन (Theine) नामक तत्त्व होता है जिसके इस्तेमाल से हमारे शरीर में स्फूर्ति आ जाती है। भारत में चाय के पौधे को चीन से लाया गया है। इसके पौधे को शुरू में किसी स्थान पर अंकुरित करके पर्वतीय ढलानों में प्रत्यारोपित किया जाता है। इसे डेढ़ मीटर की दूरी पर लगाया जाता है। कभी-कभी इस पौधे की ऊंचाई 2 मीटर से भी ऊँची हो जाती है। समय-समय पर इसकी पत्तियों की कटाई-छटाई होती रहती है। समय पर कटाई-छटाई करने से इसका पौधा अधिक पत्तियाँ प्रदान करता है।

भौगोलिक दशाएँ (Geographical Conditions) चाय की कृषि के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएँ निम्नलिखित हैं-
1. तापमान-चाय उष्ण एवं आर्द्र जलवायु का पौधा है। इस पौधे के लिए औसत 25° से 30° सेंग्रे० तापमान उपयुक्त रहता है। चाय के पौधों की वृद्धि के लिए अनुकूल व शुष्क हवा प्रतिकूल रहती है।

2. वर्षा-चाय के पौधे के लिए अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है। सामान्यतः इसके लिए 200 से 250 सें०मी० वर्षा उपयुक्त रहती है। बौछारों वाली वर्षा में पौधों में निरंतर नई कोपलें फूटती रहती हैं।

3. भूमि-चाय के पौधे की कृषि के लिए भूमि ढलवाँ होनी चाहिए ताकि पानी इसकी जड़ों में न ठहर सके। पहाड़ी प्रदेश इसकी कृषि के लिए उपयुक्त होते हैं। इसके लिए ऐसी उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है, जिसमें लोहे का अंश पर्याप्त मात्रा में हो और पानी सोखने की क्षमता अधिक हो।

4. श्रम-इसके लिए अधिक श्रमिकों की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि अधिकतर कार्य हाथों से करना पड़ता है।
उत्पादन (Production)-भारत विश्व की 21.1 प्रतिशत से अधिक चाय का उत्पादन करता है। चाय-निर्यातक देशों में भारत का चीन के बाद दूसरा स्थान आता है। चाय के उत्पादन में चीन की भूमिका भी भारत के लगभग समान है। भारत में सबसे अधिक चाय की पैदावार असम में होती है। इसके बाद पश्चिम बंगाल का स्थान आता है। सन 2014-15 में देश का औसत उत्पादन 2170 कि०ग्रा० था। बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय चाय का हिस्सा कम हुआ है।

वितरण (Distribution)-भारत में चाय की खेती लगभग 16 राज्यों में की जाती है। इनमें से प्रमुख उत्पादक राज्य हैं-
1. असम यह चाय के उत्पादन में देश का सबसे बड़ा राज्य है। यहाँ देश की लगभग 53.2% चाय का उत्पादन होता है। कुल चाय-क्षेत्र का 50% भाग पाया जाता है। इस राज्य के मुख्य उत्पादक जिले शिवसागर, लखीमपुर, दरांग, नौगाँव, कामरूप, गोलपाड़ा तथा सिलचर आदि हैं। असम में कृषि पर आधारित उद्योग में चाय का प्रमुख स्थान है।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 5 भूसंसाधन तथा कृषि 7

2. पश्चिम बंगाल-यहाँ भारत की लगभग 22% चाय पैदा होती है तथा मुख्य उत्पादक जिले दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी तथा कूच बिहार आदि हैं। यहाँ बढ़िया किस्म की चाय पैदा की जाती है तथा देश में इसकी माँग अधिक है।

3. तमिलनाडु-यह राज्य भारत की लगभग 15% चाय का उत्पादन करता है। यहाँ नीलगिरि तथा अन्नामलाई की पहाड़ियों में चाय के बागान लगे हुए हैं। यहाँ के मुख्य उत्पादक जिले नीलगिरि, अन्नामलाई, मदुरई, कोयम्बटूर तथा कन्याकुमारी आदि हैं। नीलगिरि की चाय सर्वोत्तम मानी जाती है। इसकी माँग यूरोप में बहुत अधिक है।

4. केरल-इस राज्य में देश की लगभग 8% चाय का उत्पादन होता है।

5. यहाँ प्रमुख उत्पादक जिले पालघाट, मालापुरम, त्रिवेंद्रम, वायनाड और मालाबार आदि हैं।

6. अन्य राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, कर्नाटक, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश में चाय का उत्पादन लगभग 1.04% होता है।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव बस्तियाँ

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव बस्तियाँ Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव बस्तियाँ

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. बस्तियाँ कितने प्रकार की होती हैं-
(A) 2
(B) 3
(C) 4
(D) 5
उत्तर:
(A) 2

2. ग्रामीण बस्तियों के लोग किस प्रकार के क्रियाकलाप करते हैं?
(A) प्राथमिक
(B) द्वितीयक
(C) तृतीयक
(D) चतुर्थक
उत्तर:
(A) प्राथमिक

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव बस्तियाँ

3. ग्रामीण बस्तियों में लोगों का मुख्य व्यवसाय क्या है?
(A) आखेट
(B) मत्स्य न
(C) कृषि
(D) संग्रहण
उत्तर:
(C) कृषि

4. पास-पास बने घरों वाली ग्रामीण बस्तियाँ कहलाती हैं-
(A) संहत बस्तियाँ
(B) प्रकीर्ण बस्तियाँ
(C) अर्द्ध-गुच्छित बस्तियाँ
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(A) संहत बस्तियाँ

5. बड़े तथा एक-दूसरे से दूर बने मकानों वाली बस्तियाँ कहलाती हैं-
(A) संहत बस्तियाँ
(B) प्रकीर्ण बस्तियाँ
(C) अर्द्ध-गुच्छित बस्तियाँ
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(B) प्रकीर्ण बस्तियाँ

6. भारत के उत्तरी मैदान में किस प्रकार की ग्रामीण बस्तियाँ पाई जाती हैं?
(A) गुच्छित बस्तियाँ
(B) परिक्षिप्त बस्तियाँ
(C) अर्द्ध-गुच्छित बस्तियाँ
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(A) गुच्छित बस्तियाँ

7. नगरीय बस्तियाँ किस प्रकार के क्रियाकलाप में संलग्न नहीं होती?
(A) प्राथमिक
(B) द्वितीयक
(C) तृतीयक
(D) चतुर्थक
उत्तर:
(A) प्राथमिक

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव बस्तियाँ

8. उच्च भूमियों, पर्वतीय क्षेत्रों और मरुस्थलीय भागों में किस प्रकार की बस्तियाँ पाई जाती हैं?
(A) गुच्छित बस्तियाँ
(B) अर्द्ध-गुच्छित बस्तियाँ
(C) परिक्षिप्त बस्तियाँ
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(C) परिक्षिप्त बस्तियाँ

9. उत्तरी भारत के किस राज्य में गाँवों के मध्य दूरी सबसे अधिक है?
(A) हरियाणा
(B) हिमाचल प्रदेश
(C) पंजाब
(D) महाराष्ट्र
उत्तर:
(B) हिमाचल प्रदेश

10. दक्षिणी भारत के किस राज्य में गाँवों के मध्य दूरी सबसे अधिक है?
(A) कर्नाटक
(B) केरल
(C) आंध्र प्रदेश
(D) तमिलनाडु
उत्तर:
(B) केरल

11. गुजरात राज्य में बस्तियाँ पाई जाती हैं-
(A) गुच्छित बस्तियाँ
(B) परिक्षिप्त बस्तियाँ
(C) अर्द्ध-गुच्छित बस्तियाँ
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर:
(C) अर्द्ध-गुच्छित बस्तियाँ

12. किसी तालाब के किनारे बसी बस्ती की आकृति होती है-
(A) रैखिक
(B) गोलाकार
(C) क्रॉस
(D) तारक
उत्तर:
(B) गोलाकार

13. किसी नदी या रेलवे लाइन के किनारे बसी बस्ती की आकृति होती है-
(A) रैखिक
(B) गोलाकार
(C) क्रॉस
(D) तारक
उत्तर:
(A) रैखिक

14. एक लाख से कम जनसंख्या वाला केंद्र कहलाता है-
(A) महानगर
(B) नगर
(C) कस्बा
(D) विराट नगर
उत्तर:
(B) नगर

15. जिन नगरों की जनसंख्या 10 से 50 लाख तक हो, कहलाते हैं-
(A) महानगर
(B) संवैधानिक नगर
(C) जनगणना नगर
(D) विराट नगर
उत्तर:
(A) महानगर

16. 50 लाख से अधिक जनंसख्या वाले नगर कहलाते हैं-
(A) महानगर
(B) नगर
(C) वृहत् नगर
(D) जनगणना नगर
उत्तर:
(C) वृहत् नगर

17. भारत के जनगणना विभाग के अनुसार किसी नगर की न्यूनतम जनसंख्या कितनी होनी चाहिए?
(A) कम-से-कम 2500
(B) कम-से-कम 3500
(C) कम-से-कम 4000
(D) कम-से-कम 5000
उत्तर:
(D) कम-से-कम 5000

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव बस्तियाँ

18. भारत के जनगणना विभाग के अनुसार किसी नगर में जनसंख्या का न्यूनतम घनत्व कितना होना चाहिए?
(A) 400 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
(B) 450 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
(C) 475 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
(D) 500 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
उत्तर:
(A) 400 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०

19. प्रथम वर्ग के नगर में कितनी जनसंख्या होनी चाहिए?
(A) 10,000-19,999
(B) 20,000-49,999
(C) 50,000-99,999
(D) 1,00,000 से अधिक
उत्तर:
(D) 1,00,000 से अधिक

20. कौन-सा नगर मध्यकालीन नगर है?
(A) दिल्ली
(B) मुंबई
(C) चण्डीगढ़
(D) पाटलिपुत्र
उत्तर:
(A) दिल्ली

21. इलाहाबाद किस प्रकार के युग का नगर है?
(A) प्रागैतिहासिक युग
(B) प्राचीन युग
(C) मध्य युग
(D) आधुनिक युग
उत्तर:
(C) मध्य युग

22. पाटलिपुत्र किस प्रकार के युग का नगर है?
(A) प्रागैतिहासिक युग
(B) प्राचीन युग
(C) मध्य युग
(D) आधुनिक युग
उत्तर:
(B) प्राचीन युग

23. दार्जिलिंग किस प्रकार का नगर है?
(A) खनन नगर
(B) धार्मिक नगर
(C) पर्यटन नगर
(D) छावनी नगर
उत्तर:
(C) पर्यटन नगर

24. निम्नलिखित में से कौन-सा औद्योगिक नगर का उदाहरण है?
(A) जमशेदपुर
(B) शिमला
(C) अम्बाला
(D) दिल्ली
उत्तर:
(A) जमशेदपुर

25. विशाखापत्तनम किस प्रकार के नगरों का उदाहरण है?
(A) पर्यटन नगर
(B) धार्मिक नगर
(C) परिवहन नगर
(D) छावनी नगर
उत्तर:
(C) परिवहन नगर

26. भारत में मलिन बस्तियों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक कहाँ है?
(A) पटना में
(B) जमशेदपुर में
(C) वृहत्तर मुंबई में
(D) गुड़गाँव में
उत्तर:
(C) वृहत्तर मुंबई में

27. भारत में मलिन बस्तियों की जनसंख्या का अनुपात सबसे कम कहाँ है?
(A) पटना में
(B) जमशेदपुर में
(C) वृहत्तर मुंबई में
(D) करनाल में
उत्तर:
(A) पटना में

28. देश का सर्वाधिक जनसंख्या वाला महानगर जो भारत की सबसे बड़ी बंदरगाह भी है-
(A) कोलकाता
(B) गोवा
(C) महाराष्ट्र
(D) कालीकट
उत्तर:
(C) महाराष्ट्र

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29. नगरीय संकुल का उदाहरण है-
(A) कोलकाता
(B) हैदराबाद
(C) पूणे
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

30. सोनीपत व रूड़की किस प्रकार के नगर हैं?
(A) प्रशासनिक नगर
(B) पर्यटन नगर
(C) शैक्षिक नगर
(D) छावनी नगर
उत्तर:
(C) शैक्षिक नगर

31. रानीगंज व अंकलेश्वर किस प्रकार के नगर हैं?
(A) प्रशासनिक नगर
(B) खनन नगर
(C) शैक्षिक नगर
(D) परिवहन नगर
उत्तर:
(B) खनन नगर

32. कांडला व कोच्चि किस प्रकार के नगर हैं?
(A) औद्योगिक नगर
(B) परिवहन नगर
(C) खनन नगर
(D) धार्मिक नगर
उत्तर:
(B) परिवहन नगर

33. निम्नलिखित में से प्रशासनिक नगर का उदाहरण नहीं है।
(A) इम्फाल
(B) गाँधीनगर
(C) पटियाला
(D) जयपुर
उत्तर:
(C) पटियाला

34. निम्नलिखित में से औद्योगिक नगर का उदाहरण है-
(A) हुगली
(B) भिलाई
(C) मुंबई
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

35. किस प्रकार के नगर आयात एवं निर्यात कार्यों में संलग्न रहते हैं?
(A) परिवहन नगर
(B) खनन नगर
(C) गैरिसन नगर
(D) धार्मिक नगर
उत्तर:
(A) परिवहन नगर

36. गैरिसन या छावनी नगर का उदाहरण नहीं है-
(A) अम्बाला
(B) करनाल
(C) जालंधर
(D) महू
उत्तर:
(B) करनाल

37. धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरों के उदाहरण हैं-
(A) पूरी, अजमेर, पुष्कर, तिरुपति, कुरुक्षेत्र
(B) दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता
(C) चण्डीगढ़, देहरादून, करनाल, शिमला
(D) अम्बाला, हिसार, महू, जालंधर
उत्तर:
(A) पूरी, अजमेर, पुष्कर, तिरुपति, कुरुक्षेत्र

38. कौन-सा नगर प्राचीन कालीन नगर है?
(A) वाराणसी
(B) प्रयागराज/इलाहाबाद
(C) जयपुर
(D) (A) व (B) दोनों
उत्तर:
(D) (A) व (B) दोनों

39. कौन-सा नगर आधुनिक नगर है?
(A) चेन्नई
(B) मुंबई
(C) कोलकाता
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
भारत के उत्तरी विशाल मैदान में किस प्रकार की ग्रामीण बस्तियों की बहुलता है?
उत्तर:
गुच्छित या समूहित बस्तियों की।

प्रश्न 2.
सामान्यतया दक्षिणी पठारों पर गाँवों के मध्य कितनी दूरी होती है?
उत्तर:
सामान्यतया दक्षिणी पठारों पर गाँवों के मध्य दूरी 3 कि०मी० होती है।

प्रश्न 3.
परिक्षिप्त बस्तियाँ प्रायः किस प्रकार के पर्यावरण में पाई जाती हैं?
उत्तर:
परिक्षिप्त बस्तियाँ प्रायः उच्च भूमियों, पर्वतीय क्षेत्रों और मरुस्थली भागों में पाई जाती हैं।

प्रश्न 4.
बृहत् नगरों को अन्य किन नामों से जाना जाता है?
उत्तर:
विश्वनगरी, मेगा सिटी, मेगालोपोलिस आदि।

प्रश्न 5.
भारत के किसी एक नियोजित नगर का नाम लिखिए।
उत्तर:
चण्डीगढ़।

प्रश्न 6.
मध्य युग के किन्हीं दो नगरों का नाम बताइए।
उत्तर:
इलाहाबाद, आगरा।

प्रश्न 7.
2001 की जनगणना के अनुसार भारत में कितने महानगर थे?
उत्तर:
2001 की जनगणना के अनुसार भारत में 35 महानगर थे।

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प्रश्न 8.
स्वतन्त्रता के बाद ऐसे पुराने किन्हीं दो नगरों के नाम बताइए जो उपनगरों के रूप में विकसित हुए हैं।
उत्तर:
नोएडा, गुरुग्राम।

प्रश्न 9.
भारत के दो मध्यकालीन नगरों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. जयपुर
  2. आगरा।

प्रश्न 10.
किस वर्ग के नगरों में भारत की जनसंख्या का सबसे अधिक प्रतिशत निवास करता है?
उत्तर:
प्रथम वर्ग के नगरों में।

प्रश्न 11.
भारत के दो आधुनिक नगरों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. मुंबई
  2. कोलकाता।

प्रश्न 12.
ग्रामीण बस्तियाँ जीवन-यापन के लिए किन व्यवसायों पर निर्भर करती हैं?
उत्तर:
ग्रामीण बस्तियाँ मुख्यतः आजीविका के लिए कृषि अथवा संबंधित प्राथमिक व्यवसायों पर निर्भर करती हैं।

प्रश्न 13.
उत्तर भारतीय मैदान में किस प्रकार की बस्तियाँ बहुतायत में पाई जाती हैं?
उत्तर:
उत्तर भारतीय मैदान में पंजाब से पश्चिमी बंगाल तक बहुतायत केंद्रीकृत ग्रामीण बस्तियाँ पाई जाती हैं।

प्रश्न 14.
बृहत् तौर पर भारत की ग्रामीण बस्तियों को कितने प्रकारों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर:
चार प्रकारों में।

प्रश्न 15.
गुच्छित बस्तियों को अन्य कौन-कौन से नामों से जाना जाता है?
उत्तर:
संकुलित, समूहित, केंद्रीकृत या आकेंद्रित, सघन/संहत बस्तियाँ आदि।

प्रश्न 16.
पल्लीकृत बस्तियों को अन्य कौन-कौन से नामों से जाना जाता है?
उत्तर:
पाली, पुरवा, पान्ना, पाड़ा, नंगला, ढाणी आदि।

प्रश्न 17.
उपजाऊ जलोढ़ मैदानों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में सामान्यतः किस प्रकार की बस्तियाँ पाई जाती हैं?
उत्तर:
गुच्छित या संहत बस्तियाँ।

प्रश्न 18.
किस राज्य में जल के अभाव में उपलब्ध जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग ने संहत बस्तियों को अनिवार्य बना दिया है?
उत्तर:
राजस्थान में।

प्रश्न 19.
किस प्रकार की बस्ती किसी सीमित क्षेत्र में गुच्छित होने की प्रवृत्ति का परिणाम है?
उत्तर:
विखंडित या अर्द्ध-गुच्छित बस्ती।

प्रश्न 20.
मध्य व निम्न गंगा के मैदानों और हिमालय की निचली घाटियों में किस प्रकार की बस्तियाँ अधिक पाई जाती हैं?
उत्तर:
पल्लीकृत बस्तियाँ।

प्रश्न 21.
किस प्रकार की बस्तियाँ अकृषि, आर्थिक एवं प्रशासकीय प्रकार्यों में संलग्न होती हैं?
उत्तर:
नगरीय बस्तियाँ।

प्रश्न 22.
भारत के दो प्राचीन नगरों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. प्रयाग (प्रयागराज/इलाहाबाद)
  2. पाटलिपुत्र (पटना)।

प्रश्न 23.
भारत के 20 लाख से अधिक जनसंख्या वाले दो महानगरों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. दिल्ली
  2. मुंबई।

प्रश्न 24.
भारत में प्रथम श्रेणी के नगरों की जनसंख्या का आकार क्या है?
उत्तर:
1 लाख से अधिक।

प्रश्न 25.
10 से 50 लाख की जनसंख्या वाले नगरों को क्या कहते हैं?
उत्तर:
महानगर।

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प्रश्न 26.
एकाकी या प्रविकीर्ण बस्तियों को किस प्रकार की बस्तियाँ कहा जाता है?
उत्तर:
परिक्षिप्त बस्तियाँ।।

प्रश्न 27.
50 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों को क्या कहते हैं?
उत्तर:
मेगा नगर।

प्रश्न 28.
भारत के धार्मिक व सांस्कृतिक नगरों के कोई दो उदाहरण लिखें।
उत्तर:

  1. वाराणसी
  2. पूरी।

प्रश्न 29.
भारत के दो गैरिसन या छावनी नगरों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. अम्बाला
  2. बबीना।

प्रश्न 30.
भारत के दो शैक्षिक नगरों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. रुड़की
  2. अलीगढ़।

प्रश्न 31.
भारत में प्रथम श्रेणी के नगरों की जनसंख्या का आकार क्या है?
उत्तर:
1,00,000 से अधिक।

प्रश्न 32.
भारत में छठी श्रेणी के नगरों की जनसंख्या का आकार क्या है?
उत्तर:
50,000 से कम।

प्रश्न 33.
उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े महानगरों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. लखनऊ
  2. कानपुर
  3. आगरा
  4. मेरठ
  5. वाराणसी आदि।

प्रश्न 34.
पंजाब के सबसे बड़े महानगरों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. अमृतसर
  2. लुधियाना।

प्रश्न 35.
गुजरात के सबसे बड़े महानगरों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. राजकोट
  2. अहमदाबाद
  3. वडोदरा
  4. सूरत।

प्रश्न 36.
महाराष्ट्र के सबसे बड़े महानगरों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. बृहत मुंबई
  2. नासिक
  3. पुणे।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत की ग्रामीण बस्तियों के चार मुख्य प्रकार लिखिए।
उत्तर:
भारत की ग्रामीण बस्तियों के कोई चार प्रकार इस प्रकार हैं-

  1. गुच्छित अथवा केंद्रीकृत बस्ती
  2. अर्द्ध-गुच्छित अथवा विखंडित बस्ती
  3. पल्लीकृत बस्ती
  4. परिक्षिप्त अथवा एकाकी बस्ती।

प्रश्न 2.
गुच्छित बस्ती किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह बस्ती जिसमें घर एक-दूसरे से सटे हुए होते हैं तथा घरों के संहत खंड बनाए जाते हैं।

प्रश्न 3.
भारत के किन भागों में पुरवे अधिवास पाए जाते हैं?
उत्तर:
पुरवे अधिवास भारत में गंगा के मध्यवर्ती और निचले मैदान, छत्तीसगढ़ और हिमालय की निचली घाटियों में पाए जाते हैं।

प्रश्न 4.
संवैधानिक नगरों से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
वे नगर जहाँ नगरपालिका या नगर निगम या कैंटोनमेंट बोर्ड या नोटीफाइड टाऊन एरिया कमेटी हो, सवैधानिक नगर कहलाते हैं।

प्रश्न 5.
भारत के औद्योगिक नगरों के छः उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
हुगली, भिलाई, जमशेदपुर, मोदीनगर, सेलम तथा फरीदाबाद।

प्रश्न 6.
कस्बा किसे कहते हैं?
उत्तर:
एक लाख से कम जनसंख्या वाले नगर को कस्बा कहते हैं।

प्रश्न 7.
विराट नगर क्या होते हैं? वर्तमान में भारत में कितने विराट नगर हैं?
उत्तर:
50 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगर विराट नगर कहलाते हैं। वर्तमान में भारत में छः विराट नगर हैं।

प्रश्न 8.
महानगर या मेगासिटी (Megacity) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
एक मेगासिटी आमतौर पर एक महानगरीय क्षेत्र के रूप में परिभाषित की जाती है जिसमें दस लाख की आबादी होती है। एक मेगासिटी एक महानगरीय क्षेत्र या दो या दो से अधिक महानगरीय क्षेत्रों में हो सकती है जो एकजुट होती है।

प्रश्न 9.
बस्ती किसे कहते हैं?
उत्तर:
मानव निवास की मूलभूत इकाई को घर कहते हैं। एक क्षेत्र के घरों के समूह को बस्ती कहते हैं।

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प्रश्न 10.
नम बिन्दु बस्तियाँ क्या हैं? इनके दो लाभ लिखिए।
उत्तर:
नम बिन्दु बस्तियाँ-निचले क्षेत्रों में स्थित नदी किनारों या दलदल से घिरे द्वीपों में बसी बस्तियाँ नम बिन्दु बस्तियाँ (Point Settlements) कहलाती हैं।

लाभ-

  • पीने, खाना बनाने, वस्त्र धोने आदि के लिए जल की उपलब्धता होती है।
  • कषि भमि की सिंचाई के लिए नदियों और झीलों के पानी का उपयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 11.
भारत के दस बड़े महानगरों/शहरों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. अमृतसर
  2. गुरुग्राम
  3. फरीदाबाद
  4. लखनऊ
  5. भोपाल
  6. मुंबई
  7. पटना
  8. हैदराबाद
  9. बंगलुरु
  10. चेन्नई।

प्रश्न 12.
भारत में सघन बस्तियाँ कहाँ पाई जाती हैं?
उत्तर:
भारत में सघन बस्तियाँ गंगा सतलुज के मैदान, मालवा के पठार, नर्मदा घाटी और राजस्थान के मैदानी भागों में पाई जाती हैं।

प्रश्न 13.
बस्ती प्रतिरूप किसे कहते हैं?
उत्तर:
बस्तियों के बसाव की आकृति के आधार पर बस्तियों का जो स्वरूप सामने आता है उसे बस्ती प्रतिरूप कहते हैं।

प्रश्न 14.
नगरीय बस्तियों से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
मानव निर्मित ऐसे निवास स्थान जिनमें अधिकांश लोग द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थक आर्थिक क्रियाओं में संलग्न होते हैं और वहाँ अनेक सुख-सुविधाएँ देखने को मिलती हैं, उन्हें नगरीय बस्तियाँ कहते हैं।

प्रश्न 15.
निवास की मूलभूत इकाई क्या है?
उत्तर:
मानव समस्त पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के गांवों या नगरों में निवास करता है। मानव निवास की मूलभूत इकाई को ‘घर’ कहते हैं। घर एक झोंपड़ी से लेकर भव्य बंगला, कोठी या महल हो सकता है। मानव के रहने के स्थान को अधिवास या घर कहते हैं।

प्रश्न 16.
प्रशासनिक नगर किसे कहते हैं? उदाहरण दें।
उत्तर:
इस प्रकार के नगर प्रशासनिक कार्यों के लिए विकसित होते हैं। देश की राजधानी तथा राज्यों की राजधानियाँ इन नगरों के अंतर्गत आती हैं। चंडीगढ़, दिल्ली, शिमला, भोपाल तथा शिलांग आदि ऐसे नगरों के उदाहरण हैं।

प्रश्न 17.
औद्योगिक नगर किसे कहते हैं? उदाहरण दें।
उत्तर:
अनेक प्रकार के उद्योगों की अवस्थिति ही ऐसे नगरों की प्रेरक-शक्ति होती है; जैसे मुंबई, कोयंबटूर, भिलाई, हुगली, जमशेदपुर, सेलम तथा फरीदाबाद इत्यादि।

प्रश्न 18.
धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरों के कोई पाँच उदाहरण दें।
उत्तर:

  1. अमृतसर
  2. कुरुक्षेत्र
  3. हरिद्वार
  4. पुरी
  5. उज्जैन।

प्रश्न 19.
परिवहन नगर किसे कहते हैं? उदाहरण दें।
उत्तर:
वे नगर जो मुख्यतः आयात एवं निर्यात कार्यों में संलग्न रहते हैं, परिवहन नगर कहलाते हैं; उदाहरण-जैसे कांडला, कोच्चि, विशाखापट्टनम आदि।

प्रश्न 20.
भारत के औद्योगिक एवं खनन नगरों के चार-चार उदाहरण दें।
उत्तर:
औद्योगिक नगर-

  • मुंबई
  • कोयंबटूर
  • जमशेदपुर
  • हुगली।

खनन नगर-

  • रानीगंज
  • डिगबोई
  • सिंगरौली
  • अंकलेश्वर

प्रश्न 21.
भारत के वाणिज्यिक एवं पर्यटन नगरों के चार-चार उदाहरण दें।
उत्तर:
वाणिज्यिक नगर-

  • कोलकाता
  • मुंबई
  • सहारनपुर
  • सतना।

पर्यटन नगर-

  • नैनीताल
  • शिमला
  • माउंट आबू
  • जोधपुर।

प्रश्न 22.
भारत के किन्हीं आठ प्रशासकीय नगरों के नाम लिखें।
उत्तर:

  1. नई दिल्ली
  2. चण्डीगढ़
  3. जयपुर
  4. भोपाल
  5. चेन्नई
  6. कोलकाता
  7. श्रीनगर
  8. देहरादून।

प्रश्न 23.
मिलियन सिटी और मेगा सिटी में क्या अंतर है?
अथवा
महानगर और बृहत नगर में अंतर बताएँ।
उत्तर:
महानगर की जनसंख्या 10 से 50 लाख तक होती है, जबकि बृहत नगर की जनसंख्या 50 लाख से अधिक होती है।

प्रश्न 24.
भारतीय गाँवों के आकार और उनके बीच की दूरियों को निर्धारित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1. भूमि की उत्पादकता
  2. उस क्षेत्र की गैर-कृषि क्रियाएँ
  3. परिवहन तंत्र
  4. सामाजिक कारक
  5. तकनीकी आर्थिक संगठन
  6. ऐतिहासिक और राजनीतिक प्रक्रियाएँ।।

प्रश्न 25.
गाँव और नगर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ग्रामीण क्षेत्र नगरीय क्षेत्रों को कच्चा माल व खाद्य-पदार्थ उपलब्ध कराते हैं। इसके विपरीत नगरीय क्षेत्र वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन न केवल अपने लिए वरन् ग्रामीण क्षेत्रों को भी प्रदान करते हैं। यह क्रिया परिवहन और संचार के साधनों के माध्यम से पूरी होती है।

प्रश्न 26.
अर्द्ध-गुच्छित बस्तियाँ क्या होती हैं?
उत्तर:
ऐसी बस्तियों में सामान्यतया एक छोटा, परंतु सुसंहत केंद्रक होता है, जिसके चारों ओर छोटे आवास मुद्रिका (Ring) के रूप में बिखरे होते हैं। यदि मकान किसी सड़क के दोनों ओर स्थित होते हैं तो इसे रैखिक कहते हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
ग्रामीण आबादी की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
ग्रामीण आबादी की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-

  1. ग्रामीण क्षेत्र के लोग आजीविका के लिए कृषि व अन्य प्राथमिक कार्यों पर निर्भर होते हैं।
  2. ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के घर प्रायः मिट्टी, लकड़ी व घास-फूस या एक-मंजिले होते हैं।
  3. इनके सामाजिक सम्बन्ध प्रगाढ़ होते हैं।
  4. ये लोग कम गतिशील होते हैं।

प्रश्न 2.
गुच्छित एवं परिक्षिप्त बस्तियों में अंतर स्पष्ट करें।
अथवा
संहत बस्तियों तथा प्रकीर्ण बस्तियों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
गुच्छित एवं परिक्षिप्त बस्तियों में निम्नलिखित अंतर हैं-

गुच्छित (संहत) बस्तियाँपरिक्षिप्त बस्तियाँ
1. संहत बस्तियाँ उपजाऊ समतल मैदानों तथा नदी-घाटियों में पाई जाती हैं।1. परिक्षिप्त बस्तियाँ पहाड़ी प्रदेशों, जंगलों तथा पठारी प्रदेशों में पाई जाती हैं।
2. यहाँ लोगों का मुख्य धंधा कृषि होता है।2. यहाँ लोगों का मुख्य धंधा पशु पालना तथा लकड़ी काटना होता है।
3. यहाँ खेत छोटे होते हैं।3. यहाँ खेत बड़े होते हैं।
4. ये बस्तियाँ किसी केंद्रीय स्थल के चारों तरफ बाहर की ओर बढ़ी हुई होती हैं।4. ये बस्तियाँ दूर-दूर होती हैं जिनमें दो-दो या तीन-तीन मकान बिखरे हुए पाए जाते हैं।
5. पानी के निकास की उचित व्यवस्था न होने के कारण ये बस्तियाँ गंदी रहती हैं।5. यहाँ पानी के निकास की उचित व्यवस्था होती है अतः ये साफ-सुथरी बस्तियाँ होती हैं।
6. यहाँ मकान एक-दूसरे से सटे हुए होते हैं।6. यहाँ मकान एक-दूसरे से दूर-दूर होते हैं।

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प्रश्न 3.
पल्ली बस्तियाँ अथवा पुरवा बस्तियाँ क्या होती हैं?
उत्तर:
कई बार बस्ती भौतिक रूप से एक-दूसरे से अलग इकाइयों में बँट जाती है। इस प्रकार की बस्ती एक-दूसरे से स्पष्ट दूरी पर होती है। इन इकाइयों को देश के विभिन्न भागों में स्थानीय स्तर पर पान्ना, पाड़ा, पाली, नंगला या ढाँणी इत्यादि कहा जाता है। किसी विशाल गाँव का ऐसा खंडी भवन प्रायः सामाजिक और मानव जातीय कारकों द्वारा अभिप्रेरित होता है। ऐसे गाँव मध्य और निम्न गंगा के मैदान, छत्तीसगढ़ और हिमालय की निचली घाटियों में अधिकतर पाए जाते हैं।

प्रश्न 4.
भारत में नगरों का विकास किस प्रकार हुआ?
उत्तर:
भारत में नगरों का अभ्युदय प्रागैतिहासिक काल से हुआ है। सिंधु घाटी की सभ्यता के युग में भी हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसे नगरों का अस्तित्व था। अंग्रेजों और अन्य यूरोपियों के भारत आने तक की अवधि में अनेक उतार-चढ़ाव आए। विभिन्न युगों में भारतीय नगरों का विकास भिन्न रहा। भारतीय नगरों को विकास के आधार पर निम्नलिखित तीन वर्गों में बाँटा जा सकता है-
1. प्राचीन नगर – भारत में 2 हजार से अधिक वर्षों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाले अनेक नगर हैं; जैसे वाराणसी, प्रयागराज (इलाहाबाद), पटना (पाटलिपुत्र) आदि।

2. मध्यकालीन नगर-भारत के लगभग 100 नगरों का विकास मध्यकाल में हुआ; जैसे हैदराबाद, जयपुर, आगरा, नागपुर आदि।

3. आधुनिक नगर-भारत में आधुनिक नगरों का विकास अंग्रेजों ने किया। इन्होंने सूरत, गोवा, दमन आदि नगर विकसित किए।

प्रश्न 5.
जनगणना नगर क्या हैं?
उत्तर:
जो नगर जनसंख्या संबंधी निम्नलिखित शर्ते पूरी करते हों, उनको जनगणना नगर कहते हैं-

  1. न्यूनतम जनसंख्या 5,000 हो
  2. कम-से-कम 75% पुरुषों का श्रमिक बल कृषि से संबंधित कार्यों में न लगा हुआ हो
  3. जनसंख्या का घनत्व कम-से-कम 400 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० हो।

प्रश्न 6.
भारतीय जनगणना के अनुसार नगरों या शहरों को कितने वर्गों में बाँटा गया है?
अथवा
जनसंख्या के आधार पर भारत के नगरों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
भारतीय जनगणना के अनुसार नगरों या शहरों को छः वर्गों में बाँटा गया है-

वर्ग/श्रेणीजनसंख्या आकार2011 की जनगणना के अनुसार शहरों/नगरों की जनसंख्या
प्रथम1 लाख से अधिक2,27,899
द्वितीय50,000 से 99,999 तक41,328
तृतीय20,000 से 49,999 तक58,174
चतुर्थक10,000 से 19,999 तक31,866
पंचम5,000 से 9,999 तक15,883
षष्टम5,000 से कम1956

प्रश्न 7.
भारतीय ग्रामीण घर का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण लक्षण क्या है?
उत्तर:
भारतीय घर का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण लक्षण आँगन है। यह सार्वभौमिक होता है। आँगन में ही अधिकतर कार्य संपन्न किए जाते हैं। कमरे का प्रयोग सर्दियों में सोने के लिए या धन आदि रखने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 8.
ग्रामीण और नगरीय बस्तियों में अंतर स्पष्ट करें।
अथवा
ग्रामीण और नगरीय बस्तियों की विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:
ग्रामीण और नगरीय बस्तियों में निम्नलिखित अंतर हैं-

ग्रामीण बस्तियाँनगरीय बस्तियाँ
1. ग्रामीण बस्तियों में लोगों का व्यवसाय मुख्यतः खेती होता है।1. नगरीय बस्तियों में लोगों का व्यवसाय निर्माण-उद्योग, व्यापार तथा प्रशासन होता है।
2. इन बस्तियों का आकार छोटा होता है।2. इन बस्तियों का आकार बड़ा होता है।
3. इनमें जनसंख्या कम होती है, इनमें 10-20 से लेकर 1,000 तक व्यक्ति रहते हैं।3. इनमें कम-से-कम 5,000 की जनसंख्या होती है।
4. यहाँ जनसंख्या का घनत्व कम होता है।4. यहाँ जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है।
5. यहाँ आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होतीं।5. यहाँ आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं।

प्रश्न 9.
भारत के नगरों की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारतीय नगरों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. भारत के अधिकांश नगरों में गाँवों की झलक स्पष्ट दिखाई पड़ती है। वास्तव में नगर विस्तृत गाँव ही हैं।
  2. अधिकांश नगरीय जनसंख्या अपनी आदतों और व्यवहार से ग्रामीण ही प्रतीत होती है।
  3. अधिकतर नगरों में मलिन बस्तियों का विकास भारतीय नगरों की प्रमुख विशेषता है। ये प्रवास के प्रतिकर्ष कारकों का . परिणाम है।
  4. अनेक नगरों में पूर्व शासकों और प्राचीन कलाकृतियों के चिहन स्पष्ट देखने को मिलते हैं।
  5. भारतीय नगरों का प्रकार्यात्मक पृथक्करण स्पष्ट तथा प्रारंभिक अवस्था में है।

प्रश्न 10.
गुच्छित ग्रामीण बस्तियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
गुच्छित अथवा केंद्रीकृत बस्तियाँ सिंधु-गंगा के मैदान में पंजाब से लेकर पश्चिमी बंगाल तक खूब पाई जाती हैं। इस प्रकार असम, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश की महानदी घाटी, ओडिशा, कर्नाटक का मैदानी भाग, आंध्र-प्रदेश के रायल सीमा, कावेरी बेसिन आदि में गुच्छित ग्रामीण बस्तियाँ पाई जाती हैं। इन बस्तियों में सड़कें एक-दूसरे को विभिन्न कोणों पर काटती हैं तथा गलियों का निर्माण करती हैं। इस प्रकार की बस्तियाँ उपजाऊ तथा सिंचित क्षेत्रों की विशेषताएँ हैं। इन बस्तियों की आकृति प्रायः आयताकार होती है। जाति-व्यवस्था के कारण उत्पन्न सामाजिक बिखराव कभी-कभी गुच्छित बस्तियों को विखंडित कर देता है। बस्तियों की इन गौण इकाइयों को डाणी, पल्ली, नगला तथा पाढा आदि कहते हैं। कई राज्यों में निम्न जातियों की बस्तियाँ गांव से हटकर बनाई जाती हैं।

प्रश्न 11.
ग्रामीण बस्तियों को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ग्रामीण बस्तियों को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं-
1. भौतिक कारक-बस्तियों के आकार तथा विस्तार पर अनेक भौतिक कारक; जैसे धरातल की बनावट, मिट्टी, जल-स्तर, जलवायु, ढलान, अपवाह तंत्र आदि गहरा प्रभाव डालते हैं। पहाड़ी भागों में विरल तथा मरुस्थलीय भागों में किसी तालाब के चारों ओर बस्तियों का विकास होता है।

2. सांस्कृतिक कारक-एक ही जाति या जनजाति या धर्म के लोग एक ही गांव में रहते हैं। बस्ती के मध्य में गांव के मुखिया या ज़मींदारों के मकान होते हैं तथा बाहर की ओर सेवा करने वाले समुदायों के मकान या झोंपड़े होते हैं।

3. ऐतिहासिक कारक-मध्य युग में बाहर से होने वाले आक्रमणों तथा सेना के आतंक से बचने के लिए संहत बस्तियाँ बनाई जाती थीं। इनमें सुरक्षा और इकट्ठा रहने की स्थिति बनती थी।

प्रश्न 12.
बस्ती किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार की होती हैं? ग्रामीण और नगरीय बस्तियों से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
मानव निवास की मूलभूत इकाई को घर कहते हैं। किसी क्षेत्र में घरों के समूह को बस्ती कहते हैं। बस्ती नगरों या शहरों की तरह घरों के छोटे-बड़े दोनों तरह के समूह में हो सकती हैं। बस्ती के प्रकार-बस्ती मुख्यतः दो प्रकार की होती है
1. ग्रामीण बस्ती-ग्रामीण बस्ती उसे कहते हैं जिसमें लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती करना होता है। ये बस्तियाँ अपने जीवन का पोषण या आधारभूत आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति भूमि या कृषि आधारित प्राथमिक आर्थिक क्रियाकलापों से करती हैं। अपने आकार-प्रकार के अनुसार ये बस्तियाँ विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न प्रकार की होती हैं।

2. नगरीय बस्ती-नगरीय बस्तियाँ ग्रामीण बस्तियों की अपेक्षा सामान्यतः संहत एवं विशाल आकार की होती हैं। ये अनेक प्रकार के आकृषि, आर्थिक व प्रशासकीय प्रकार्यों में संलग्न होती हैं। इनमें अनेक प्रकार की सुख-सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं।

प्रश्न 13.
गुच्छित या संहत बस्तियों की कोई चार विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
गुच्छित या संहत बस्तियों की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. गुच्छित बस्तियों में मकान छोटे और एक-दूसरे से सटे हुए होते हैं।
  2. ये बस्तियाँ नदी, घाटियों और जलोढ़, उपजाऊ मैदानों में पाई जाती हैं।
  3. इन बस्तियों में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होती।
  4. इन बस्तियों में रहने वालों को सुख-दुःख में एक-दूसरे से मदद मिलती है।

प्रश्न 14.
अर्ध-गुच्छित या विखंडित बस्तियों की कोई चार विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:

  1. अर्घ-गुच्छित बस्तियों में मकान एक-दूसरे से दूर होते हैं परंतु एक ही बस्ती में होते हैं।
  2. इनमें बस्तियाँ अनेक पुरवों में बंटी होती हैं।
  3. निम्न कार्यों में संलग्न लोग इन बस्तियों में रहते हैं।
  4. इनमें अलग-अलग पुरवों में अलग-अलग जातियों के लोग रहते हैं।

प्रश्न 15.
पल्लीकृत बस्तियों की कोई चार विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:

  1. पल्लीकृत बस्तियों में मकान अधिक सटे होते हैं।
  2. इन बस्तियों को देशों के विभिन्न भागों में स्थानीय स्तर पर पान्ना, पाड़ा, पाली, नगला, ढाँणी आदि कहा जाता है।
  3. इन बस्तियों का विस्तार अपेक्षाकृत बड़े क्षेत्र में होता है।
  4. ये बस्तियाँ अधिकतर मध्य व निम्न गंगा के मैदान और हिमालय की निचली घाटियों में पाई जाती हैं।

प्रश्न 16.
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार किन्हीं आठ दस लाखी नगरों या नगरीय संकुलों को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
दस लाखी नगरों या नगरीय संकुलों को निम्नलिखित ढंग से सूचीबद्ध किया गया है-

भारत – दस लाखी नगरों/नगरीय संकुलों की जनसंख्या, 2011
क्र०सं०नगर संकुल/नगरों का नामजनसंख्या
1.श्रीनगर1273312
2.लुधियाना1613878
3.अमृतसर1183705
4.चण्डीगढ़1025682
5.फरीदाबाद1404653
6.दिल्ली16814838
7.जयपुर3073350
8.जोधपुर1137815

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव बस्तियाँ

प्रश्न 17.
‘घर अपने डिज़ाइन अथवा आंतरिक नियोजन में लोगों के सामाजिक तथा सांस्कृतिक मूल्यों को परिलक्षित करता है।’ उपयुक्त उदाहरण देते हुए इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मानव का मूलभूत निवास स्थान घर होता है। इसका मनुष्य के सामाजिक तथा सांस्कृतिक कारकों के साथ निकट का संबंध है तथा भारतीय सभ्यता के मूलभूत तत्त्वों को परिलक्षित करता है। घर अपने डिजाइन अथवा आंतरिक नियोजन में लोगों के सामाजिक तथा सांस्कृतिक मूल्यों को परिलक्षित करता है। किसी क्षेत्र के सामाजिक जीवन की छाप वहाँ के घरों के प्रकार पर पड़ती है। हमारे घर, परिवार की संकल्पना, मित्रों तथा बंधओं से संबंध तथा हमारे धार्मिक विश्वास के प्रतीक हैं। आंगन भारतीय घर का एक विशिष्ट लक्षण है।

इस आंगन में कृषि पर आधारित कार्य तथा अन्य कार्य किए जाते हैं। दक्षिणी भारत के घरों में कई आंगन होते हैं। इनके डिजाइन पर मंदिरों का विशेष प्रभाव दिखाई पड़ता है। केरल के मछुआरे अपने आंगन का एक छोर खुला रखते हैं। उत्तरी भारत में संपन्न परिवार दो या दो से अधिक मंजिल के घर बनाते हैं। शीत तथा आर्द्र प्रदेशों में घर के आगे एक बरसाती बनाई जाती है। इस तरह घर के डिजाइन, दीवारों तथा छतों की बनावट, मुख्य दरवाजे की दिशा तथा आंगन का आकार व विस्तार लोगों के सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित हैं।

प्रश्न 18.
निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए (क) महानगर (ख) मध्यवर्ती व्यापार क्षेत्र (सी.बी.डी.) (ग) प्रकार्यात्मक क्षेत्र।
उत्तर:
(क) महानगर-जिन नगरों की जनसंख्या 10 से 50 लाख तक होती है, उन्हें महानगर कहा जाता है। 1991-2001 के दशक में दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों की संख्या 23 से बढ़कर 35 हो गई है। दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, बंगलौर, अहमदाबाद, हैदराबाद, पुणे, सूरत, जयपुर, कानपुर, लखनऊ और नागपुर आदि ऐसे महानगर हैं जिनकी जनसंख्या 20 लाख से अधिक है। सन् 1991 में इन नगरों की जनसंख्या कुल नगरीय जनसंख्या का 32.5 प्रतिशत थी जो 2011 में बढ़कर 40 प्रतिशत से अधिक हो गई।

(ख) मध्यवर्ती व्यापार क्षेत्र (सी०बी०डी०) मध्यवर्ती व्यापार क्षेत्र या सी०बी०डी० किसी भी नगर का अत्यंत महत्त्वपूर्ण क्षेत्र होता है। यह नगर की विविध गतिविधियों का केंद्र-बिंदु होता है। इसलिए इसे नगर का हृदय-स्थल भी कहते हैं। इस क्षेत्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • यहाँ भूमि का मूल्य अधिक पाया जाता है।
  • यह क्षेत्र घना बसा, भीड़-भाड़ वाला और तंग गलियों वाला बना होता है।
  • यह नगर की प्रमुख व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र होता है।
  • यह क्षेत्र यातायात के द्वारा नगर के सभी भागों से जुड़ा होता है।
  • औद्योगिक क्षेत्र कुछ दूरी पर स्थित होते हैं।
  • इस क्षेत्र में प्रकार्यात्मक पृथक्करण स्पष्ट दिखाई देता है।

(ग) प्रकार्यात्मक क्षेत्र अधिकांश कस्बों और नगरों में अनेक प्रकार के भूमि उपयोग क्षेत्र विकसित हो जाते हैं, जिन्हें प्रकार्यात्मक क्षेत्र कहा जाता है। ये विशिष्ट क्षेत्र व्यापार, उद्योग, प्रशासन, संस्थागत परिवहन तथा आवास जैसी गतिविधियों के केंद्र बन जाते हैं। नगर में विशिष्ट कार्यों के लिए अलग-अलग केंद्र विकसित हो जाते हैं; जैसे व्यापारिक क्षेत्र, औद्योगिक क्षेत्र, थोक व्यापार तथा हल्का विनिर्माण क्षेत्र तथा आवासीय क्षेत्र इत्यादि । इस प्रकार प्रकार्यात्मक पृथक्करण अथवा भूमि उपयोग की विविधता नगरों की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता होती है।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में ग्रामीण बस्तियों के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
अथवा
ग्रामीण अधिवास क्या है? इसके प्रकारों का उल्लेख कीजिए।
अथवा
ग्रामीण बस्तियों को कितने प्रकारों में बाँटा गया है? वर्णन करें।
उत्तर:
ग्रामीण बस्ती/अधिवास (Rural Settlements)-ग्रामीण बस्तियों में लोग मुख्यतः प्राथमिक कार्यों में लगे होते हैं। इनमें कृषक, चरवाहे, मछुआरे, लकड़हारे आदि वर्गों का वर्चस्व रहता है। यहाँ के निवासी कृषि अथवा कृषि से संबंधित कार्यों से जुड़े रहते हैं। भारत की लगभग 70% जनसंख्या ग्रामीण अधिवासों (बस्तियों) में निवास करती है।

बस्तियों के प्रकार-बसाव की सघनता तथा प्रकीर्णन के आधार पर ग्रामीण अधिवासों (बस्तियों) को मुख्यतः चार प्रकारों में विभाजित किया जाता है-
1. सघन ग्रामीण बस्तियाँ-इन्हें गुच्छित, सकेंद्रित तथा सामूहित आदि कई नामों से जाना जाता है। सघन बस्ती एकल केंद्रीय होती है जिसमें मकान या झोपड़ियाँ पास-पास सटे होते हैं। घरों के सघन खण्ड पाए जाते हैं। इनके चारों ओर खेत, खलिहान या बगीचे स्थित होते हैं। घरों की दो कतारों को संकरी, तंग तथा टेढ़ी-मेढ़ी गलियाँ अलग करती हैं। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं उत्तरी राजस्थान के नहरी क्षेत्रों में सघन बस्तियाँ मिलती हैं। ये बस्तियाँ प्रायः उपजाऊ जलोढ़ मैदानों तथा शिवालिक की घाटियों में पाई जाती हैं।

2. अर्द्ध-गुच्छित या अति सघन ग्रामीण बस्तियाँ-ये बस्तियाँ प्रविकीर्ण तथा सघन अधिवासों के बीच की अवस्था को प्रदर्शित करती हैं। ऐसा प्रकार किसी बड़े, सघन गाँव के विखंडन अथवा पृथकन के परिणामस्वरूप उत्पन्न होता है। इसमें गाँव के मूल अधिवास के अतिरिक्त उसकी सीमा पर कुछ दूरी पर एक या अनेक बस्तियाँ होती हैं। समाज का एक वर्ग अपनी मर्जी या मजबूरी से मुख्य बस्ती से दूर रहता है। इसमें प्रायः प्रभावशाली लोग गाँव में तथा निम्न वर्ग के या सेवक जातियों के लोग बाहरी भागों में रहते हैं। भारत के गंगा के मैदान, गुजरात के मैदान में ऐसी बस्तियाँ व्यापक रूप से देखने को मिलती हैं।

3. पल्लीकृत/पुरवा ग्रामीण बस्तियाँ-इस प्रकार के अधिवास में समूचा गाँव का क्षेत्र छोटे-छोटे कई नगलों/पुरवों में बंटा होता है। इस बिखराव के बावजूद भी गाँव के सामुदायिक जीवन में परस्पर सहयोग रहता है। इन इकाइयों में एक से अधिक जातियों के लोग रहते हैं। ऐसे अधिवास सघन तथा प्रविकीर्ण अधिवासों के संक्रमण क्षेत्र में विशेष रूप से देखे जाते हैं। भारत में ऐसे अधिवास गंगा-घाघरा दोआब के पूर्वी भाग, मध्य तथा निम्न गंगा के मैदान, छत्तीसगढ़, हिमालय की निचली घाटियां तथा विंध्य उच्च भू-भाग में देखे जा सकते हैं।

4. प्रविकीर्ण ग्रामीण बस्तियाँ इस प्रकार के अधिवासों में आठ-दस लघु आकार के आवास गृह एक-दूसरे से दूर-दूर समूचे क्षेत्र में बिखरे होते हैं। इनके बीच-बीच में खेत, बाग-बगीचा अथवा गैर-आवासीय क्षेत्र होता है। भारत में ऐसे अधिवास सुदूर वनों अथवा छोटी पहाड़ियों पर एकांकी झोंपड़ी अथवा झोंपड़ियों के समूह के रूप में मिलते हैं। अधिवासों का यह प्रकार हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, केरल तथा मेघालय के अनेक क्षेत्रों में पाया जाता है।

प्रश्न 2.
ग्रामीण बस्तियों के प्रमख प्रतिरूपों का विस्तत वर्णन कीजिए।
उत्तर:
गांव में मकानों की स्थानिक व्यवस्था ही इसका प्रतिरूप निर्धारित करती है। बस्ती के प्रतिरूप निर्धारण में सड़कों तथा गली-तंत्र का महत्त्व बहुत अधिक है। इनके अतिरिक्त गांव के कुएँ, मंदिर, मस्जिद आदि भी किसी बस्ती के प्रतिरूप को प्रभावित करते हैं।

सामान्यतया भारत में बस्तियों के प्रमुख प्रतिरूप निम्नलिखित हैं-
1. रैखिक प्रतिरूप (Linear Pattern)-इस प्रकार की बस्तियों का विकास प्रायः सड़कों, रेलमार्गों तथा नदियों के किनारों के साथ-साथ पाया जाता है। इस प्रकार इन बस्तियों में मकान सड़कों और रेलवे लाइनों के दोनों ओर तथा सागर तटीय किनारों पर पाए जाते हैं। मणिपुर, मध्य प्रदेश के बालाघाट, मांडला तथा रायगढ़ जिलों में ऐसी बस्तियाँ नदी किनारों के साथ-साथ पाई जाती हैं। नागालैंड तथा छोटा नागपुर के पठार में भी ऐसी बस्तियाँ पाई जाती हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव बस्तियाँ 1

2. गोलाकार प्रतिरूप (Circular Pattern)-ऐसी बस्तियों का विकास झीलों तथा तालाबों के चारों ओर होता है। लोग झील तथा तालाब के रास्ते से एक-दूसरे के पास पहुंचते हैं। इस प्रकार के गांव गंगा-यमुना दोआब के ऊपरी भाग, मध्य प्रदेश, पंजाब, गुजरात आदि राज्यों में पाए जाते हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव बस्तियाँ 2

3. त्रिज्या अथवा अरीय प्रतिरूप (Radial Pattern) इन गांवों में कई दिशाओं से आकर मार्ग मिलते हैं या फिर इन गांवों से मार्ग चारों ओर बाहर जाते हैं। इन गांवों की गलियाँ भी गांव के केंद्रीय भाग पर आकर मिलती हैं। ऊपरी गंगा के मैदान तथा तमिलनाडु में इस प्रकार के गांव पाए जाते हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव बस्तियाँ 3

4. पंखा प्रतिरूप (Fan Pattern) यदि गांव के एक सिरे पर कोई आकर्षण बिंदु; जैसे कोई पूजा-स्थल, नदी या सड़क स्थित हो तो उसी दिशा में मकान बनने शुरू हो जाते हैं और बस्ती का आकार पंखानुमा हो जाता है। ऐसे गांव महानदी, गोदावरी, कृष्णा नदी आदि के डेल्टों में पाए जाते हैं।

5. सीढ़ीनुमा प्रतिरूप (Terrace Pattern)-ऐसे गांव पर्वतीय ढलानों पर पाए जाते हैं। इनमें मकानों की पंक्तियाँ सीढ़ीनुमा प्रतीत होती हैं। पर्वतीय भागों में खेत भी सीढ़ीनुमा होते हैं जो समोच्च रेखाओं का अनुसरण करते हैं। इस प्रकार के गांव हिमालय क्षेत्र की ढलानों पर पाए जाते हैं। पश्चिमी घाट की ढलानों पर | रेलवे भी इसी प्रकार के गांव हैं।

6. चौक-पट्टी प्रतिरूप (Checker Board Pattern) इस प्रकार के गांव दो सड़क – मार्गों के मिलन-स्थल पर विकसित होते हैं। इन गांवों की गलियाँ परस्पर लंबवत् व समानांतर होती हैं और आयताकार प्रतिरूप बनाती हैं। गंगा-यमुना के दोआब में ये बहुतायत में पाए जाते हैं। दक्षिणी भारत में तमिलनाडु, कर्नाटक एवं आंध्र प्रदेश में भी ऐसे गाँव मिलते हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव बस्तियाँ 4

7. अनाकार प्रतिरूप (Amorphous Pattern) इन गांवों का कोई नियमित प्रतिरूप नहीं होता। भारत के अधिकांश गांव इसी श्रेणी में आते हैं। अधिकतर छोटा नागपुर के पठार तथा बिहार के चंपारन जिले तथा मध्य प्रदेश के भोपाल, जबलपुर, उज्जैन तथा बीना और तमिलनाडु में इस प्रकार के गांव पाए जाते हैं।

प्रश्न 3.
भारत के ग्रामीण घरों की आकृति तथा आकारिकी का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ग्रामीण घर एक कमरे की छोटी-सी झोपड़ी से लेकर कई कमरों का मकान हो सकता है। बड़े मकानों की आकारिकी में बड़ा-सा एक बढ़िया आंगन होता है तथा मुख्य द्वार आकर्षक होता है, जो दहलीज पर होता है। अतः किसी ग्रामीण घर के मुख्य स्थान आंगन, दहलीज तथा एक सुंदर मुख्य द्वार होता है। मकानों का वर्गीकरण विभिन्न आधारों पर किया गया है

  • भारत की जलवायु को ध्यान में रखते हुए भारत के हर क्षेत्र में मकानों में आंगन जरूर होते हैं।
  • एक ग्रामीण घर में कृषि उपज के भंडारण तथा पशुओं के रखने के स्थानों का विशेष प्रबंध होता है।
  • मकान की दीवारें तथा छत स्थानीय तौर पर उपलब्ध पदार्थों से बनाई जाती हैं।

लगभग सभी जगह भारत में ग्रामीण घर का महत्त्वपूर्ण लक्षण घर में आंगन का होना है। इस आंगन में अधिकांश काम किए जाते हैं। कमरे का प्रयोग या तो सर्दियों में सोने के लिए या धन आदि रखने के लिए किया जाता है। भारत के उत्तरी पहाड़ी प्रदेशों में मकान में आंगन के स्थान पर मुख्य मकान के विस्तार के रूप में आगे निकली हुई एक बरसाती बना दी जाती है। एकत्रण, संग्रहण तथा स्थानांतरी कृषि के क्षेत्रों में लोग एक कमरे की झोपड़ी में रहते हैं। इनकी छतें गोलाकार या शंक्वाकार होती हैं। इन्हीं झोपड़ियों में पशुओं को रखने, अनाज रखने तथा रसोई की व्यवस्था होती है।

भारत में उत्तरी मैदान में घरों की आकारिकी में बहुत अंतर पाया जाता है। इन घरों के चारों ओर से एक लंबा-चौड़ा आंगन मिट्टी की दीवारों या मकानों से घिरा होता है। कई जगह कई झोपड़ियों से घिरा हुआ एक सामान्य आंगन होता है। कई बार झोपड़ियाँ एक-दूसरे के आमने-सामने बनाई हुई होती हैं तथा उनके बीच में एक गली या सड़क होती है। केरल में मछुआरों के गांव के आंगन प्रायः एक छोर पर खुलते हैं। उत्तर प्रदेश, पंजाब तथा हरियाणा में दो या तीन मंजिली मकान होते हैं। मकानों की छत से आंगन साफ दिखाई देते हैं।

कुछ परिवारों की झोपड़ियाँ एक-दूसरे के समकोण पर बनाई जाती हैं तथा एक घेरा बनाकर एक आयताकार आंगन बना लिया जाता है। ऐसे घर प्रायद्वीप के आंतरिक भागों में मिलते हैं। केरल, उड़ीसा, पश्चिमी बंगाल, असम, त्रिपुरा तथा मणिपुर में दो झोपड़ियाँ आमने-सामने बनाकर तथा दोनों भुजाओं में घेरा डालकर आंगन बना लिया जाता है। दक्षिणी भारत के घरों की आकारिकी तथा उनके नियोजन में मंदिरों का प्रभाव पड़ा है तथा वहाँ मकानों में कई आंगन होते हैं।

प्रश्न 4.
विकास के आधार पर भारत के नगरों के प्रकारों का वर्णन करें।
उत्तर:
भारत में नगरों के विकास को निम्नलिखित तीन प्रकारों में बाँटा गया है-
1. प्राचीन नगर-इस युग का अस्तित्व 2000 वर्षों से भी अधिक समय से है। इसमें लगभग 45 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाले नगर पाए जाते थे। अधिकांश नगरों का विकास धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में हुआ था। वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज (इलाहाबाद), पाटलिपुत्र (पटना), मथुरा और मदुरै इस युग के कुछ प्राचीन महत्त्वपूर्ण नगर हैं।

2. मध्यकालीन नगर-मध्य युगीन भारत में अधिकांश नगरों का विकास राज्यों या रियासतों की राजधानियों के रूप में हुआ। लगभग 101 वर्तमान नगरों का विकास इस युग में हुआ। ये अधिकतर दुर्ग नगर हैं। दिल्ली, हैदराबाद, जयपुर, आगरा, लखनऊ और नागपुर इस युग के कुछ प्रसिद्ध नगर हैं।

3. आधुनिक नगर-अंग्रेज़ों और अन्य यूरोपवासियों ने भारत के नगरीय परिदृश्य को पूर्णतया बदल दिया। ये व्यापारिक इरादे से भारत आए और इन्होंने अनेक तटीय नगरों का विकास किया; जैसे सूरत, गोआ, दमन और पुदुचेरी इत्यादि । तत्पश्चात् अंग्रेजों ने देश के तीन महत्त्वपूर्ण नगरों मुंबई, चेन्नई और कोलकाता पर अपना प्रशासनिक अधिकार जमाया। उन्होंने इन नगरों का निर्माण अंग्रेजी वास्तुकला के अनुसार किया। इस दौरान उन्होंने अनेक प्रशासनिक नगरों, पर्यटन केंद्रों और पर्वतीय नगरों का विकास किया तथा पहले से विद्यमान नगरों के क्षेत्रों को और विस्तृत किया। सन् 1850 के बाद इन्होंने उद्योगों पर आधारित अनेक नगरों का विकास किया जिसमें जमशेदपुर उल्लेखनीय है।

स्वतंत्रता के पश्चात् अनेक प्रशासनिक नगरों और औद्योगिक केंद्रों का विकास हुआ। चंडीगढ़, भुवनेश्वर, गांधीनगर आदि प्रशासनिक मुख्यालय के रूप में तथा दर्गापुर, भिलाई, सिंदरी, बरौनी आदि औद्योगिक नगरों के रूप में विकसित हुए।

प्रश्न 5.
भारत में कस्बों और नगरों के वितरण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ऐतिहासिक दृष्टि से भारत के उत्तरी मैदान में सबसे अधिक कस्बे और नगर थे। पश्चिमी और पूर्वी तट के समुद्री पत्तनों की पृष्ठभूमि में भी अनेक कस्बे और नगर स्थित थे। मध्य भारत और दक्षिणी पठार की विस्तृत भूमि पर अपेक्षाकृत कम नगर थे जो दूर-दूर स्थित थे। प्राचीन भारत के ये कस्बे और नगर देश के आंतरिक भागों में मुख्यतः प्रशासनिक मुख्यालय व्यापारिक केंद्र या धार्मिक महत्त्व के स्थान थे।
1. पंजाब-हरियाणा-गंगा का ऊपरी मैदान-उत्तरी भारत के उपजाऊ मैदान के पश्चिमी भाग में विभिन्न आकार के कस्बों और नगरों की संख्या अधिक है। इस क्षेत्र में दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले महानगरों की एक श्रृंखला अमृतसर से वाराणसी तक फैली है।

2. कोलकाता-रांची पट्टी-दक्षिण-पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के उत्तरी भाग में खनिजों के विपुल भंडार हैं। इसलिए इस क्षेत्र को भारत का सार कहा जाता है। इस खनिज बाहुल क्षेत्र का प्रमुख केंद्र कोलकाता तथा इसकी पत्तन सेवाएँ हैं। आसनसोल, धनबाद और जमशेदपुर इस पट्टी के अन्य महत्त्वपूर्ण और प्रमुख नगर हैं।

3. मुंबई-गुजरात प्रदेश-इस क्षेत्र के चार प्रमुख महानगर; राजकोट, अहमदाबाद, बड़ोदरा और सूरत हैं। इस क्षेत्र के अधिकतर नगरों का विकास पेट्रोलियम पर आधारित उद्योगों के विकास से हुआ। एक अन्य नगरीय पेटी है जो मुंबई से पुणे तक फैली है तथा मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग के साथ-साथ विस्तृत है।

4. केरल तट केरल के तट पर माहे से कन्याकुमारी तक नगरों की एक निरंतर पट्टी है जिसमें कोच्चि तथा तिरूवनंतपुरम महत्त्वपूर्ण नगर हैं।

5. तमिलनाडु-दक्षिण कर्नाटक पट्टी-इस पेटी में चेन्नई और बंगलौर दो औद्योगिक महानगर हैं। इनके अतिरिक्त कोयंबटूर, तिरूचिरापल्ली, मदुरई, सेलम और पांडिचेरी अन्य प्रमुख औद्योगिक नगर हैं।

6. ऊपरी कृष्णा द्रोणी-महाराष्ट्र में सतारा से लेकर कर्नाटक के शिमोगा तथा पश्चिमी घाट के समानांतर कस्बों और नगरों की एक अविछिन्न पेटी है। जल विद्युत विकास और खनिज भंडारों ने यहाँ औद्योगीकरण और नगरीकरण में बहुत सहायता की है।

7. कष्णानगोदावरी डेल्टा पर्वी तट पर कष्णा-गोदावरी देल्टा तशा नमकी निम्न तट पर कृष्णा-गोदावरी डेल्टा तथा उसकी निम्न भूमियों में कस्बों और नगरों की एक विस्तृत पेटी है। यह विजयवाड़ा, वारंगल और हैदराबाद तक विस्तृत है। इसका विस्तार आंध्र प्रदेश के तटीय मैदान में विशाखापत्तनम तक है।

प्रश्न 6.
प्रकार्यों के आधार पर नगरों का वर्गीकरण कीजिए। अथवा नगरों का प्रकार्यात्मक वर्गीकरण का वर्णन करें।
उत्तर:
नगरों का वर्गीकरण उनके आकार के अतिरिक्त उनके कार्यों के आधार पर भी किया जाता है। कुछ कस्बों और नगरों ने कुछ निश्चित प्रकार्यों में विशिष्टता ग्रहण कर ली है और ये नगर अपनी विशिष्ट सेवाओं के लिए अलग से जाने जाते हैं। यद्यपि प्रत्येक नगर अनेक प्रकार के कार्य करता है परंतु प्रमुख या विशिष्ट कार्यों के आधार पर नगरों को निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किया गया है
1. प्रशासनिक नगर-इस प्रकार के नगर प्रशासनिक कार्यों के लिए विकसित होते हैं। देश की राजधानी तथा राज्यों की राजधानियाँ इन नगरों के अन्तर्गत आती हैं। चंडीगढ़, दिल्ली, शिमला, भोपाल तथा शिलांग आदि ऐसे नगरों के उदाहरण हैं।

2. औद्योगिक नगर-अनेक प्रकार के उद्योगों की अवस्थिति ही ऐसे नगरों की प्रेरक शक्ति होती है; जैसे मुंबई, कोयंबटूर, भिलाई, हुगली, जमशेदपुर, सेलम तथा फरीदाबाद इत्यादि।

3. परिवहन नगर-ये नगर मुख्य रूप से आयात और निर्यात की गतिविधियों के कार्यों में सक्रिय रहते हैं; जैसे, कोच्चि, विशाखापत्तनम तथा कालीकट इत्यादि। कुछ नगर आंतरिक परिवहन के केंद्र भी होते हैं; जैसे आगरा, इटारसी तथा कटनी आदि।

4. व्यापारिक नगर-व्यापार में विशिष्टता प्राप्त करने वाले नगरों और कस्बों को इस वर्ग में सम्मिलित किया जाता है, जैसे कोलकाता, मुंबई, सहारनपुर, सतना इत्यादि।

5. खनन नगर-खनन कार्यों में विशिष्टता प्राप्त नगर हैं रानीगंज, झरिया, अंकलेश्वर, डिगबोई तथा सिंगरौली आदि।

6. छावनी नगर-सुरक्षा की दृष्टि से विकसित नगर छावनी नगर कहलाते हैं; जैसे अंबाला, जालंधर, मेरठ आदि।

7. शैक्षिक नगर इस वर्ग के नगरों में शैक्षिक कार्यों की विशिष्टता होती है; जैसे रुड़की, पिलानी, कुरुक्षेत्र, अलीगढ़ तथा वाराणसी आदि।

8. धार्मिक और सांस्कृतिक नगर-ऐसे नगरों में धार्मिक व सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रधानता रहती है; जैसे वाराणसी, मथुरा, अमृतसर, हरिद्वार तथा तिरूपति आदि।

9. पर्यटन नगर-ये नगर अपने मनोरम दृश्यों, प्राकृतिक सौंदर्य और स्वास्थ्यवर्धक जलवायु के लिए जाने जाते हैं; जैसे शिमला, नैनीताल, मसूरी, ऊटी, मांउट आबू इत्यादि।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव बस्तियाँ

प्रश्न 7.
‘नगर’ की परिभाषा दीजिए। पिछले चार दशकों में बड़े शहरों की जनसंख्या में वृद्धि की समीक्षा कीजिए।
अथवा
वर्तमान सदी में भारत में नगरीकरण की प्रवृत्तियों की विस्तारपूर्वक व्याख्या कीजिए।
अथवा
नगर क्या है? भारत में नगरीकरण की प्रवृत्तियों का उल्लेख करें।
उत्तर:
रेटजल ने नगर को एक लगातार घना, लोगों एवं मकानों का ऐसा जमघट कहा है, जिसके अंदर वृहद् व्यापारिक मार्गों का संगम हो, लोगों का जीवन वाणिज्य एवं उद्योग पर आधारित होता है। वॉन रिचथोपेफन के अनुसार, “नगर के अंदर एक ऐसा सुव्यवस्थित वर्ग निहित है, जहां का मुख्य धंधा वाणिज्य और उद्योग से संबंधित होता है और ये धंधे कृषि कार्यों से सर्वथा भिन्न होते हैं।”

भारत के जनगणना विभाग ने नगर की निम्नलिखित विशेषताएं बताई हैं-

  • वे सभी स्थान जहां नगरपालिका, महापालिका, छावनी या नोटीफाइड क्षेत्रीय समिति स्थापित हो।
  • जनसंख्या कम-से-कम 5000 हो।
  • कार्यशील जनसंख्या का कम से कम 75% भाग अकृषि कार्यों में संलग्न हो।
  • जनसंख्या का घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से कम न हो।

नगरीकरण की प्रवृत्तियाँ (Trends of Urbanisation) – बढ़ता हुआ नगरीकरण आर्थिक स्थिति का द्योतक माना जाता है। स्वतंत्रता से पूर्व भारत में नगरीकरण की गति बहुत धीमी थी। जैसे-जैसे देश में आर्थिक विकास हुआ वैसे-वैसे देश में नगरों की संख्या तथा नगरीयं जनसंख्या में बढ़ोत्तरी होती गई। विश्व के अन्य देशों की तरह भारत में भी नगरीकरण तेजी से हो रहा है। जनसंख्या में भारी वृद्धि के साथ-साथ भारत में नगरीय जनसंख्या में भी वृद्धि हुई। नगरीय जनसंख्या का कुल जनसंख्या में प्रतिशत उतनी तेजी से नहीं बढ़ा, जितना कि उसकी कुल जनसंख्या में वृद्धि हुई है।

सन् 1901 में भारत के कुल नगरों की संख्या 1827 तथा नगरीय जनसंख्या 2.59 करोड़ थी जो कुल जनसंख्या का 10.84% थी जो बढ़कर 2011 में क्रमशः 7935 तथा 37.71 करोड़ हो गई जो कुल जनसंख्या का 31.2% है अर्थात् पिछले 110 वर्षों में नगरों की संख्या में चार से साढे चार गुणा तथा नगरीय जनसंख्या में लगभग 14 से 15 गुणा वृद्धि हुई। भारत में नगरीकरण का यह स्तर विकसित देशों की तुलना में बहुत कम है क्योंकि विश्व की कुल 45% जनसंख्या नगरों में रहती है। नगरीय जनसंख्या की प्रवृत्ति को अग्रलिखित तालिका में दर्शाया गया है
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 4 मानव बस्तियाँ 5
इस तालिका के अनुसार, हम नगरीकरण के विकास को निम्नलिखित तीन युगों में बाँट सकते हैं-
1. नगरीकरण की मंद वृद्धि का युग (Era of Low Growth of Urbanisation)- सन् 1901 से 1921 के बीच भारत की कुल जनसंख्या तथा नगरीय जनसंख्या में कोई खास परिवर्तन नहीं आया। नगरीकरण के विकास की दर काफी धीमी थी। इस दौरान भयंकर बीमारी; जैसे प्लेग, इन्फ्लूएंजा आदि के फैलने से नगरीकरण में काफी कमी आई। नगरीय जनसंख्या 2.5 करोड़ से बढ़कर 2.7 करोड़ ही हो पाई। नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत भी बहुत कम बढ़ा। अतः भारत की कुल जनसंख्या तथा नगरीय जनसंख्या दोनों ही इस काल में मंद गति से बढ़ी।

2. नगरीकरण की मध्यम वृद्धि का युग (Era of Medium Growth of Urbanisation)- सन् 1921 के बाद यद्यपि प्राकृतिक विपदाओं के प्रभाव से देश मुक्त रहा, लेकिन फिर भी नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत 17.62 ही रहा। इसमें केवल 2/2 गुना वृद्धि हुई। इस समय मध्यम वृद्धि का कारण राजनीतिक अस्थिरता तथा धीमा आर्थिक विकास रहा है। सन् 1921 में नगरीय जनसंख्या 3.2 करोड़ थी जो सन् 1951 में 6.1 करोड़ हो गई।

3. नगरीकरण की तीव्र वृद्धि का युग (Era of Speed Growth of Urbanisation)- इस युग में नगरीय जनसंख्या में काफी वृद्धि हुई। इन बीस वर्षों में वृद्धि पिछले 60 वर्षों से भी अधिक थी। भारत की कुल जनसंख्या सन् 1991 में सन् 1951 की तुलना में ढाई गुना हो गई, जबकि नगरीय जनसंख्या तीन गुना हुई। सन् 1961 में नगरों की जनसंख्या 7.89 करोड़ से बढ़कर सन् 2011 में 37 करोड़ 71 लाख हो गई। भारत के नगरों की जनसंख्या विश्व के नगरों की जनसंख्या से अभी कम है। भारत में नगरीकरण प्रारंभिक अवस्था में है। इस युग में नगरीकरण वृद्धि के कारण हैं-

  • देश में भारी मात्रा में औद्योगिक विकास हुआ।
  • नए-नए व्यवस्थित नगरों का निर्माण हो गया।
  • नगरों में सुख-सुविधाएं गांवों की तुलना में अधिक हैं।
  • नगरों के आकार में भारी वृद्धि हो गई है।
  • अनेक ग्रामीण क्षेत्र नगरों में परिवर्तित हो गए हैं।
  • नगरों में रोजगार के अधिक अवसर हैं।
  • सुरक्षा की दृष्टि से नगर उपयुक्त हैं, क्योंकि यहां पुलिस की विशेष व्यवस्था रहती है।

भारत की आधी से अधिक नगरीय जनसंख्या महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिमी बंगाल तथा आंध्र प्रदेश में निवास करती है। सबसे अधिक नगरीकरण चण्डीगढ़ (97.25%), दिल्ली (97.50%), पुडुचेरी (68.31%), लक्षद्वीप (78.08%) में हुआ। केरल में नगरीकरण की प्रवृत्ति अन्य राज्यों की तुलना में अधिक पाई गई है। बिहार, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम व राजस्थान में नगरीकरण की प्रवृत्ति कम देखी गई है। सिक्किम में पांच राज्यों के पुनर्गठन के कारण नगरीय जनसंख्या 1,51,726 हो गई है। सन् 1981-91 की अवधि में सिक्किम की नगरीय जनसंख्या में 27.67% ह्रास हुआ। बड़े राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक आदि में अधिक नगरीकरण हुआ।

भारत के विभिन्न राज्यों में नगरीय जनसंख्या का वितरण बहुत ही असमान है। पंजाब, हरियाणा, मिजोरम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गोआ, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु राज्यों में नगरीकरण का स्तर भारतीय औसत से अधिक है। इसके विपरीत अन्य उत्तर पूर्वी राज्य, बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश आदि में यह स्तर भारतीय औसत से कम है। दादर एवं नगर हवेली को छोड़कर शेष सभी केंद्रशासित प्रदेशों में नगरीय जनसंख्या भारतीय औसत से अधिक है।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 मानव विकास

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 मानव विकास Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 मानव विकास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. मानव के समग्र विकास के लिए अवसरों की प्राप्ति तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार कहलाता है
(A) जनगणना
(B) साक्षरता
(C) सकल घरेलू उत्पाद
(D) मानव विकास
उत्तर:
(D) मानव विकास

2. मानव विकास सूचकांक के कितने मापदंड हैं?
(A) 2
(B) 3
(C) 4
(D) 5
उत्तर:
(B) 3

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 मानव विकास

3. मानव विकास के पहले प्रतिवेदन में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम कब प्रस्तुत किया गया?
(A) वर्ष 1970 में
(B) वर्ष 1975 में
(C) वर्ष 1985 में
(D) वर्ष 1990 में
उत्तर:
(D) वर्ष 1990 में

4. सन् 2018 में भारत का मानव विकास सूचकांक मूल्य कितना था?
(A) 0.533
(B) 0.790
(C) 0.582
(D) 0.568
उत्तर:
(B) 0.790

5. सन् 2011 की जनगणना के अनुसार सबसे अधिक साक्षरता दर किस राज्य में थी?
(A) बिहार में
(B) केरल में
(C) हरियाणा में
(D) जम्मू-कश्मीर में
उत्तर:
(B) केरल में

6. सन् 2011 की जनगणना के अनुसार सबसे कम साक्षरता दर किस राज्य में है?
(A) बिहार में
(B) केरल में
(C) हरियाणा में
(D) जम्मू-कश्मीर में
उत्तर:
(A) बिहार में

7. कौन-सा केंद्र-शासित प्रदेश साक्षरता दर के साथ प्रथम स्थान पर है?
(A) चण्डीगढ़
(B) लक्षद्वीप
(C) दमन और दीव
(D) दादरा और नगर हवेली
उत्तर:
(B) लक्षद्वीप

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 मानव विकास

8. सन् 2011 के अनुसार, भारत के किस राज्य में सबसे अधिक मानव विकास सूचकांक (0.600 से अधिक) था?
(A) बिहार में
(B) केरल में
(C) उत्तर प्रदेश में
(D) सिक्किम में
उत्तर:
(B) केरल में

9. सन् 2011 के अनुसार, भारत के किस राज्य में सबसे कम मानव विकास सूचकांक (0.300 से 0.400) था?
(A) बिहार में
(B) केरल में
(C) उत्तर प्रदेश में
(D) सिक्किम में
उत्तर:
(A) बिहार में

10. सन् 2011 के अनुसार, भारत में कितने प्रतिशत लोग साक्षर हैं?
(A) 74.04%
(B) 65.38%
(C) 59.4%
(D) 80.30%
उत्तर:
(A) 74.04%

11. भारत में औसत जीवन प्रत्याशा कितनी है?
(A) 62 वर्ष
(B) 63 वर्ष
(C) 65 वर्ष
(D) 68 वर्ष
उत्तर:
(C) 65 वर्ष

12. 1999-2000 के आँकड़ों के अनुसार भारत में निर्धनता का प्रतिशत कितना था?
(A) 25.3%
(B) 26.1%
(C) 27.2%
(D) 28.5%
उत्तर:
(B) 26.1%

13. मानव विकास का प्रमुख तत्त्व नहीं है?
(A) शिक्षा
(B) दीर्घ व स्वस्थ जीवन
(C) उच्च जीवन स्तर
(D) बेरोज़गारी
उत्तर:
(D) बेरोज़गारी

14. सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में जन्म-दर कितनी थी?
(A) लगभग 22 प्रति हजार
(B) लगभग 24 प्रति हजार
(C) लगभग 26 प्रति हजार
(D) लगभग 28 प्रति हजार
उत्तर:
(C) लगभग 26 प्रति हजार

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 मानव विकास

15. प्रजनन दर, मानव विकास के कौन-से संकेतक से संबंधित है?
(A) सामाजिक संकेतक
(B) स्वास्थ्य संकेतक
(C) आर्थिक संकेतक
(D) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(B) स्वास्थ्य संकेतक

16. जन्म के समय संभावित आयु क्या कहलाती है?
(A) जन्म-दर
(B) जनगणना
(C) जीवन प्रत्याशा
(D) साक्षरता
उत्तर:
(C) जीवन प्रत्याशा

17. निम्न जीवन स्तर का प्रतीक है-
(A) गरीबी
(B) कुपोषण
(C) निरक्षरता
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

18. उच्च जीवन स्तर का प्रतीक है
(A) शिक्षा
(B) रोजगार
(C) आय
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

19. निम्नलिखित में से मानव विकास सूचकांक मापना का आर्थिक संकेतक नहीं है-
(A) आय
(B) वेतन
(C) शिक्षा
(D) रोजगार
उत्तर:
(C) शिक्षा

20. निम्नलिखित में से मानव विकास सूचकांक मापना का स्वास्थ्य संकेतक है-
(A) अशोधित जन्म-दर
(B) अशोधित मृत्यु-दर
(C) शिशु मृत्यु-दर
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

21. स्वस्थ जीवन का सूचक है-
(A) जीवन प्रत्याशा
(B) कुल प्रजनन दर
(C) अशोधित मृत्यु-दर व जन्म-दर
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

22. किसके विचार में व्यक्तिगत मितव्ययता, सामाजिक धन की न्यासधारिता और अहिंसा एक व्यक्ति और एक राष्ट्र के जीवन में उच्चतर लक्ष्य प्राप्त करने की कुंजी है?
(A) महात्मा गाँधी
(B) विवेकानंद
(C) यू०एन०डी०पी०
(D) शूमाकर
उत्तर:
(A) महात्मा गाँधी

23. भारत को ……………… मानव विकास दर्शाने वाले देशों में रखा गया है।
(A) निम्न
(B) मध्यम
(C) उच्च
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(B) मध्यम

24. विकास का प्रतीक समझा जाता है-
(A) औद्योगीकरण व कंप्यूटरीकरण
(B) उन्नत व आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ
(C) वैयक्तिक सुरक्षा
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
मानव विकास सूचकांक (2001) के अनुसार अधिकतम सूचकांक (0.600 से अधिक) वाले भारत के एक राज्य का नाम लिखें।
उत्तर:
केरल।

प्रश्न 2.
सन् 2001 के मानव विकास सूचकांक के औसत सूचकांक वाले भारत के एक राज्य का नाम लिखें।
उत्तर:
तमिलनाडु।

प्रश्न 3.
कौन-सा केंद्र-शासित प्रदेश साक्षरता-दर के साथ प्रथम स्थान पर है?
उत्तर:
लक्षद्वीप।

प्रश्न 4.
मानव विकास सूचकांक के कितने मापदंड हैं?
उत्तर:
तीन।

प्रश्न 5.
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार सबसे कम साक्षरता दर किस राज्य में है?
उत्तर:
बिहार में।

प्रश्न 6.
सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत के किस राज्य में सबसे अधिक मानव विकास सूचकांक है?
उत्तर:
केरल में।

प्रश्न 7.
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार सबसे अधिक साक्षरता दर किस राज्य में है?
उत्तर:
केरल में।

प्रश्न 8.
भारत के किस राज्य में सबसे कम मानव विकास सूचकांक है?
उत्तर:
बिहार में।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 मानव विकास

प्रश्न 9.
सन् 2011 के अनुसार भारत में कितने प्रतिशत (%) लोग साक्षर हैं?
उत्तर:
74.04 प्रतिशत।

प्रश्न 10.
सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की साक्षरता दर कितनी थी?
उत्तर:
64.84% या 65.38%।

प्रश्न 11.
सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में पुरुषों की साक्षरता दर कितनी थी?
उत्तर:
75.26%।

प्रश्न 12.
सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में महिलाओं की साक्षरता दर कितनी थी?
उत्तर:
53.67% या 54.16%।

प्रश्न 13.
सन 2001 की जनगणना के अनुसार भारत का कौन-सा राज्य सर्वाधिक साक्षर है?
उत्तर:
केरल (90.92%)।

प्रश्न 14.
सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत का कौन-सा राज्य न्यूनतम साक्षर है?
उत्तर:
बिहार (47.53%)।

प्रश्न 15.
सन् 1993 की मानव विकास रिपोर्ट का प्रमुख मुद्दा क्या था?
उत्तर:
लोगों की प्रतिभागिता एवं उनकी सुरक्षा।

प्रश्न 16.
‘स्माल इज़ ब्यूटीफुल’ पुस्तक के लेखक कौन हैं?
उत्तर:
शूमाकर।

प्रश्न 17.
‘मानव विकास सूचकांक’ के लिए एक सामाजिक संकेतक का नाम लिखें।
उत्तर:
साक्षरता।

प्रश्न 18.
मानव विकास सूचकांक’ मापने के लिए एक स्वास्थ्य संकेतक का नाम लिखें।
उत्तर:
अशोधित जन्म-दर।

प्रश्न 19.
मानव विकास सूचकांक मापने के लिए एक आर्थिक संकेतक का नाम लिखें।
उत्तर:
वेतन।

प्रश्न 20.
भारत में औसत जीवन प्रत्याशा कितनी है?
उत्तर:
लगभग 65 वर्ष।

प्रश्न 21.
यू०एन०डी०पी० मानव विकास रिपोर्ट (2018) के अनुसार भारत का मानव विकास सूचकांक मूल्य कितना है?
उत्तर:
भारत का मानव विकास सूचकांक मूल्य 0.790 है।

प्रश्न 22.
मानव विकास रिपोर्ट (2018) के अनुसार भारत के किस राज्य में मानव सूचकांक अधिकतम है?
उत्तर:
केरल में।

प्रश्न 23.
मानव विकास का क्या लक्ष्य है?
उत्तर:
मानव का कल्याण करना।

प्रश्न 24.
एक स्वस्थ जीवन के सूचक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:

  1. रोग व पीड़ा से मुक्त जीवन
  2. यथोचित दीर्घायु।

प्रश्न 25.
भारत राष्ट्रीय मानव विकास रिपोर्ट (2011) के अनुसार भारत में कितने प्रतिशत व्यक्ति गरीबी रेखा से नीचे हैं?
उत्तर:
लगभग 21.92%।

प्रश्न 26.
भारत का विश्व में मानव विकास सूचकांक-2011 में कौन-सा स्थान था?
उत्तर:
134वाँ।

प्रश्न 27.
भारत का विश्व में मानव विकास सूचकांक-2001 में कौन-सा स्थान था?
उत्तर:
126वाँ।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 मानव विकास

प्रश्न 28.
किसी एक राज्य का नाम लिखें जहाँ गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली जनसंख्या (5% से कम) न्यूनतम है।
उत्तर:
गोवा।

प्रश्न 29.
किसी एक राज्य का नाम लिखें जहाँ गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली जनसंख्या (10% से कम) न्यूनतम है।
उत्तर:
हरियाणा।

प्रश्न 30.
किसी एक राज्य का नाम लिखें जिसमें 40% से अधिक जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे है?
उत्तर:
बिहार।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मानव विकास से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
मानव के समग्र विकास के लिए अवसरों की प्राप्ति तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार मानव विकास कहलाता है।

प्रश्न 2.
मानव विकास को ‘साध्य’ क्यों कहा गया है?
उत्तर:
क्योंकि हर प्रकार का विकास मनुष्य के लिए किया जाता है। इसलिए मानव विकास साध्य है।

प्रश्न 3.
मानव विकास सूचकांक में कौन-से तीन मापदंड हैं?
उत्तर:

  1. दीर्घायु
  2. ज्ञान तथा
  3. उच्च जीवन-स्तर।

प्रश्न 4.
मानवीय विकास को मापने के लिए प्रयोग किए जाने वाले सूचकांक बताएँ।
उत्तर:

  1. स्वास्थ्य संबंधी सूचकांक
  2. आर्थिक सूचकांक
  3. सामाजिक सूचकांक।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 मानव विकास

प्रश्न 5.
भारत में गरीबी के कोई चार कारण बताएँ।
उत्तर:

  1. अज्ञानता
  2. गरीबी
  3. निरक्षरता
  4. बीमारी व कुपोषण।

प्रश्न 6.
सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में जन्म-दर और मृत्यु-दर कितनी थी?
उत्तर:
सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में जन्म-दर 26 प्रति हजार तथा मृत्यु-दर 8 प्रति हजार।

प्रश्न 7.
प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय कैसे निकाली जाती है?
उत्तर:
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 मानव विकास 1

प्रश्न 8.
जनसंख्या कारक का पर्यावरण पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या का संसाधनों पर दबाव पड़ता है जिससे या तो वे समाप्त हो जाते हैं या उनका अभाव हो जाता है या उनका अतिशोषण होता है। इससे पर्यावरण का ह्रास होता है।

प्रश्न 9.
भारत में ग्रामीण गरीबी क्यों घट रही है?
उत्तर:
शिक्षा के प्रसार के कारण ग्रामीण गरीबी घट रही है। पढ़े-लिखे ग्रामीण आजीविका या रोजगार के लिए नगरों की ओर जा रहे हैं। रोजगार मिलने पर वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार रहे हैं। अब पढ़े-लिखे ग्रामीण सरकारी नौकरी हेतु अच्छी तैयारी कर स्थायी रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। इस कारण भारत में ग्रामीण गरीबी घट रही है।

प्रश्न 10.
मानव संसाधन विकास और मानव विकास में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मानव संसाधन विकास और मानव विकास में निम्नलिखित अंतर हैं-

मानव संसाधन विकासमानव विकास
1. मानव संसाधन विकास का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों के उचित दोहन से है।1. मानव विकास का उद्देश्य मानव के समग्र विकास से है।
2. इसमें केवल आर्थिक विकास ही सम्मिलित है।2. इसमें सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विकास को सम्मिलित किया जाता है।

प्रश्न 11.
मानव विकास और आर्थिक विकास में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
मानव विकास और आर्थिक विकास में निम्नलिखित अंतर हैं-

मानव विकासआर्थिक विकास
1. मानव विकास का उद्देश्य मानव के समग्र विकास से है।1. आर्थिक विकास को प्रति व्यक्ति आय तथा सकल राष्ट्रीय उत्पाद जैसे संकेतकों के द्वारा मापा जाता है।
2. इसमें सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विकास को सम्मिलित किया जाता है।2. आर्थिक विकास एक साधन है।

प्रश्न 12.
शिशु मृत्यु-दर क्या है?
उत्तर:
प्रति हजार जीवित जन्में बच्चों में से वर्ष में एक वर्ष से कम आयु वाले मृत बच्चों की संख्या को शिशु मृत्यु-दर कहते हैं।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 मानव विकास

प्रश्न 13.
मानव विकास रिपोर्ट-2011 के अनुसार भारत के उच्च मानव विकास सूचकांक मूल्य वाले किन्हीं आठ राज्यों को सूचीबद्ध करें।
उत्तर:

  1. केरल (0.790)
  2. हिमाचल प्रदेश (0.652)
  3. गोवा (0.617)
  4. पंजाब (0.605)
  5. महाराष्ट्र (0.572)
  6. तमिलनाडु (0.570)
  7. हरियाणा (0.552)
  8. गुजरात (0.527)।

प्रश्न 14.
दक्षिणी भारत के अधिकांश राज्यों में मानव विकास के उच्च स्तरों के दो कारण बताइए।
उत्तर:
दक्षिणी भारत के अधिकांश राज्यों में मानव विकास के उच्च स्तरों के कारण निम्नलिखित हैं-
1. साक्षरता अधिकांश दक्षिणी भारत के राज्यों की साक्षरता दर उत्तरी भारत के राज्यों से अधिक है। यहाँ शिक्षा का प्रसार व्यापक रूप से है जिस कारण इनका जीवन स्तर अच्छा है।

2. धनी एवं सीमांत वर्ग-यहाँ धनी एवं सीमांत वर्गों की जनसंख्या अधिक है। कम ही राज्य ऐसे हैं जहाँ की अर्थव्यवस्था पिछड़ी हुई है। अधिकांश राज्यों की अर्थव्यवस्था अच्छी है। इसी कारण यहाँ मानव विकास के उच्च स्तर हैं।

प्रश्न 15.
मानव विकास सूचकांक मापने के कौन-कौन-से संकेतक हैं?
अथवा
मानव विकास सूचकांक को मापने वाले संकेतकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
मानव विकास सूचकांक मापने वाले संकेतक निम्नलिखित हैं-

  1. स्वास्थ्य संकेतक-अशोधित जन्म-दर, अशोधित मृत्यु-दर, कुल प्रजनन दर, जीवन प्रत्याशा आदि।
  2. सामाजिक संकेतक-साक्षरता, शिक्षा, स्त्री साक्षरता आदि।
  3. आर्थिक संकेतक आय, वेतन, रोजगार, सकल घरेलू उत्पाद, प्रति व्यक्ति आय आदि।
  4. मानव संकेतक-ज्ञान, कौशल, योग्यता आदि।

प्रश्न 16.
मानव विकास की कुंजी क्या है?
उत्तर:
मानव विकास की कुंजी भूख, गरीबी, अज्ञानता, निरक्षरता और अन्य प्रकार के विकारों से मुक्ति है।

प्रश्न 17.
वर्तमान में विकास का प्रतीक किसे समझा जाता है?
उत्तर:

  1. औद्योगीकरण
  2. कम्प्यूटरीकरण
  3. बृहत् शिक्षा प्रणाली
  4. उन्नत व वैज्ञानिक चिकित्सा सुविधाएँ
  5. वैयक्तिक सुरक्षा आदि।

प्रश्न 18.
भारत में आर्थिक दृष्टि से निम्न मानव विकास के तीन प्रतीक क्या हैं?
उत्तर:
भारत में आर्थिक दृष्टि से निम्न मानव विकास के प्रतीक निम्नलिखित हैं-

  1. बेरोजगारी
  2. प्रति व्यक्ति आय कम होना
  3. गरीबी।

प्रश्न 19.
भारत के किस राज्य में गरीबों की संख्या सबसे कम तथा किसमें सबसे अधिक है?
उत्तर:
भारत के गोवा में गरीबों की संख्या सबसे कम है तथा ओडिशा व बिहार में सबसे अधिक है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 मानव विकास

प्रश्न 20.
केरल और लक्षद्वीप में साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत से अधिक क्यों है?
उत्तर:
केरल और लक्षद्वीप में साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत से अधिक होने का मुख्य कारण अधिक नगरीकरण होना है और यहाँ की अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक व धार्मिक संस्थाओं का शिक्षा प्रसार में अधिक योगदान देना है। इनके अतिरिक्त कुछ ईसाई मिशनरियों ने भी शिक्षा-प्रसार में योगदान दिया है।

प्रश्न 21.
भारत राष्ट्रीय मानव विकास रिपोर्ट 2001 एवं 2011 के अनुसार भारत के कोई तीन सर्वोच्च मानव विकास सूचकांक मूल्य वाले राज्यों के नाम बताएँ।
उत्तर:
भारत राष्ट्रीय मानव विकास रिपोर्ट-2001 के अनुसार-

  • केरल (0.638)
  • पंजाब (0.537)
  • तमिलनाडु (0.531)।

भारत राष्ट्रीय मानव विकास रिपोर्ट-2011 के अनुसार-

  • केरल (0.790)
  • हिमाचल प्रदेश (0.652)
  • गोवा (0.617)।

प्रश्न 22.
भारत राष्ट्रीय मानव विकास रिपोर्ट 2001 एवं 2011 के अनुसार भारत के कोई तीन न्यूनतम मानव विकास सूचकांक मूल्य वाले राज्यों के नाम बताएँ।
उत्तर:
भारत राष्ट्रीय मानव विकास रिपोर्ट-2001 के अनुसार-

  • बिहार (0.367)
  • असम (0.386)
  • उत्तर प्रदेश (0.388)।

भारत राष्ट्रीय मानव विकास रिपोर्ट-2011 के अनुसार-

  • छत्तीसगढ़ (0.358)
  • ओडिशा (0.362)
  • बिहार (0.367)।

प्रश्न 23.
भारत में जीवन प्रत्याशा बढ़ने के कोई दो कारण बताएँ।
उत्तर:

  1. बढ़ती खाद्य सुरक्षा
  2. चिकित्सा व स्वास्थ्य सेवाओं का फैलाव।

प्रश्न 24.
भारत में मानव विकास में पाई जाने वाली कोई दो असमानताएँ बताएँ।
उत्तर:

  1. जिन राज्यों का मानव विकास सूचकांक उच्च है उनकी साक्षरता दर अधिक है तथा जिन राज्यों का मानव विकास सूचकांक निम्न है उनकी साक्षरता दर कम है।
  2. उच्च मानव सूचकांक वाले राज्यों का आर्थिक विकास अच्छा है और निम्न मानव सूचकांक वाले राज्यों का आर्थिक विकास कम है।

प्रश्न 25.
स्वच्छ भारत मिशन के कोई दो उद्देश्य लिखें।
उत्तर:

  1. अपरम्परागत ईंधन के साधनों; जैसे पवन व सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना।
  2. जल से होने वाले रोगों की रोकथाम के लिए प्रत्येक घर में पीने लायक पानी की उचित व्यवस्था करना।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
मानव विकास के अंतर्गत जनसंख्या संसाधनों और विकास के बीच संघर्ष और अंतर्विरोधों का प्रमुख कारण क्या है?
उत्तर:
सर रॉबर्ट माल्थस पहले ऐसे विद्वान् थे जिन्होंने मानव जनसंख्या की तुलना में संसाधनों के अभाव के विषय में चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार संसाधनों की उपलब्धता का होना इतना महत्त्वपूर्ण नहीं है जितना कि उनका सामाजिक वितरण, क्योंकि संसाधनों का वितरण असमान है। विकसित और समृद्ध देश और लोग संसाधनों के विशाल भंडारों तक पहुँच सकते हैं और उनका अधिकाधिक संसाधनों पर नियंत्रण करने के लिए किए गए प्रयत्नों और विशेषता को प्रदर्शित करने के लिए प्रयोग करना ही जनसंख्या संसाधनों और विकास के बीच संघर्ष और अंतर्विरोधों का प्रमुख कारण है।

भारतीय संस्कृति लंबे समय से ही जनसंख्या संसाधनों और विकास के प्रति संवेदनशील रही है तभी तो यहाँ के प्राचीन ग्रंथ भी प्रकृति के तत्त्वों के बीच संतुलन के प्रति चिंतित थे।

प्रश्न 2.
जीवन प्रत्याशा पर संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर:
जन्म के समय संभावित आयु लोगों की आयु में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
(1) 1951 में पुरुष जीवन प्रत्याशा 37.1 वर्ष थी जो बढ़कर 2011 में 62.6 वर्ष हो गई है।

(2) इसी प्रकार स्त्री जीवन प्रत्याशा 1951 में 36.2 वर्ष से बढ़कर 2011 में 64.6 वर्ष हो गई है। स्त्रियों में जीवन प्रत्याशा की वृद्धि एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। जीवन प्रत्याशा का बढ़ना जहां एक ओर बढ़ती खाद्य सुरक्षा की ओर इशारा करता है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रसार का भी सूचक है।

(3) 1951 में भारत में अनाजों व दालों की प्रति व्यक्ति व प्रतिदिन उपलब्धि 394.9 ग्राम थी, वह 2011 में बढ़कर 444.5 ग्राम हो गई।

प्रश्न 3.
मानव विकास क्यों आवश्यक है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मानव विकास निम्नलिखित कारणों से आवश्यक माना जाता है

  1. मानव विकास से संबंधित सभी प्रक्रियाओं का अंतिम उद्देश्य मानवीय दशाओं को सुधारना तथा लोगों के लिए विकल्पों को बढ़ाना है।
  2. मानव विकास उच्चतर उत्पादकता का साधन है। स्वस्थ, शिक्षित और कुशल श्रमिक अधिक उत्पादन करने में सक्षम होते हैं।
  3. इसलिए मानव विकास में विनिवेश न्याय-संगत माना जाता है।
  4. मानव विकास परिवार के आकार को छोटा करने में सहायक है।
  5. मानव विकास भौतिक पर्यावरण के संरक्षण में सहायक है, क्योंकि गरीबी के घटने से वनों की कटाई, मरुस्थलीकरण तथा मृदा-अपरदन को रोका जा सकता है।
  6. मानव विकास स्वस्थ, सुदृढ़ और सभ्य समाज के निर्माण में सहायक होता है जिससे लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होती हैं और सामाजिक स्थिरता बढ़ती है।
  7. मानव विकास सांप्रदायिक सौहार्द्र को बढ़ाता है तथा सामाजिक अशांति को कम करने में सहायक है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 मानव विकास

प्रश्न 4.
भारत में संपूर्ण साक्षरता में प्रादेशिक भिन्नताओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
सन 2001 में भारत की साक्षरता-दर 64.84% थी। इसमें पुरुष साक्षरता 75.3% तथा स्त्रियों की साक्षरता 53.7% थी। भारत की साक्षरता-दर में प्रादेशिक विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। सन् 2011 के आँकड़ों के अनुसार भारत की साक्षरता में प्रादेशिक विभिन्नताओं के लक्षण निम्नलिखित हैं

  1. केरल की साक्षरता दर 93.9% है जो भारत में सर्वाधिक साक्षरता दर वाला राज्य है, जबकि बिहार में साक्षरता दर 63.8% है जो भारत के सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों का तुलना में सबसे कम है।
  2. लक्षद्वीप (92.3%) तथा मिजोरम (91.6%) का साक्षरता दर में क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान है।
  3. कुल 22 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
  4. कुल 13 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत से कम है।
  5. ऊँची साक्षरता दर वाले (72% से अधिक) राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश हैं केरल, मिजोरम, लक्षद्वीप, गोवा, दिल्ली, चंडीगढ़, पुद्दुचेरी, अण्डेमान और निकोबार द्वीप समूह तथा दमन व दीव।

प्रश्न 5.
भारत में 1951 से 2001 की अवधि में साक्षरता दर में प्रगति हुई है। वर्णन करें।
उत्तर:
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में साक्षरता दर तेजी से बढ़ी है। इसका वर्णन इस प्रकार है-
(1) साक्षरता दर 1951 में 18.33 प्रतिशत थी जो बढ़कर 2001 में 64.84 प्रतिशत हो गई। भारत के इतिहास में पहली बार 2001 की जनगणना में साक्षर लोगों की संख्या निरक्षर लोगों से अधिक है। पिछले दशक में 3.20 करोड़ निरक्षरों की संख्या कम हुई है।

(2) भारत में 80.30 प्रतिशत नगरीय जनसंख्या तथा केवल 59.4 प्रतिशत ग्रामीण जनसंख्या साक्षर है।

(3) 82.14 प्रतिशत पुरुष तथा 65.46 प्रतिशत स्त्रियाँ साक्षर हैं। स्पष्ट है कि देश में स्त्रियों और पुरुषों की साक्षरता दर में काफी अंतर है।

(4) ग्रामीण और शहरी स्त्रियों की साक्षरता दर में तो और भी अधिक अंतर है। उदाहरणतः ग्रामीण क्षेत्रों में स्त्री साक्षरता दर केवल 46.70 प्रतिशत है जबकि नगरीय स्त्री साक्षरता दर 73.20 प्रतिशत है।

(5) 1991-2001 के दौरान भारत में 7 वर्षों से अधिक आयु की जनसंख्या में 17.16 करोड़ की वृद्धि हुई है। जबकि इसी दशक में 20.36 करोड़ अतिरिक्त व्यक्ति साक्षर हुए हैं (20.36–17.16 =
3.20 करोड़ निरक्षर पिछले दशक में कम हुए हैं)

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में मानव विकास के सामाजिक संकेतकों की व्याख्या कीजिए।
अथवा
मानव विकास के सामाजिक सशक्तीकरण के सूचकों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
मानव विकास तभी संभव है जब लोगों को भूख, गरीबी, अज्ञानता व निरक्षरता से छुटकारा मिले। सामाजिक संकेतकों के अंतर्गत साक्षरता, विशेष रूप से महिला साक्षरता, छात्र-अध्यापक अनुपात और स्कूल जाने वाले बच्चों का नामांकन बिम्ब आदि को शामिल किया जाता है। शिक्षा से प्राप्त विवेक मनुष्य को गरीबी के दुष्चक्र से निकालने की राह दिखाता है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में साक्षरता दर तेजी से बढ़ी है। साक्षरता दर 1951 में 18.33 प्रतिशत थी जो बढ़कर 2011 में लगभग 74 प्रतिशत हो गई।

प्रादेशिक भिन्नताओं के अतिरिक्त ग्रामीण क्षेत्रों और स्त्रियों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, कृषि मज़दूर इत्यादि जैसे हमारे समाज के सीमांत या कमज़ोर तबकों में साक्षरता का प्रतिशत कम है। यद्यपि सीमांत वर्गों में साक्षरों का प्रतिशत सुधरा है तथापि धनी और सीमांत वर्गों की जनसंख्या के बीच साक्षरता के अनुपात का अन्तर समय के साथ बढ़ा है।

भारत में प्रारम्भिक शिक्षा को सर्वशिक्षा अभियान बनाकर राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया गया है। भारत में प्रारम्भिक शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया है। सशक्तीकरण का अर्थ है कि लोगों में अपने विकल्प चुनने की ताकत पैदा की जाए। यह ताकत बढ़ती हुई स्वतंत्रता, क्षमता और उत्पादकता से आती है। सुशासन और लोकोन्मुखी नीतियों से लोगों को सशक्त किया जा सकता है। मानव विकास के लिए जरूरी है कि सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए वर्गों और विशेष रूप से महिलाओं का सशक्तीकरण हो।

प्रश्न 2.
“विकास और पर्यावरण हास एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।
अथवा
जनसंख्या पर्यावरण और विकास में संबंध का वर्णन करें।
उत्तर:
विकास बीसवीं सदी की अनुपम देन माना जाता है। उपभोगवाद की संस्कृति ने अधिक उत्पादन का दौर आरंभ किया। अधिक उत्पादन के लिए हमने प्राकृतिक संसाधनों का तीव्र गति से शोषण किया। आज संसाधनों के अति दोहन और अधिक उत्पादन के फलस्वरूप पृथ्वी की उष्णता बढ़ रही है, ओजोन परत में छिद्र हो रहा है, वनों का विनाश हो रहा है, मृदा अपरदन हो रहा है तथा मरुस्थलीकरण बढ़ रहा है। अधिकतम विकास के नाम पर हमने प्रकृति की सीमाओं को खंडित कर दिया है।

विकास का परिणाम असहनीय बनता जा रहा है। औद्योगिक क्रांति के दौरान अनेक उद्योगों की स्थापना हुई जिससे वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि हुई। औद्योगिक क्रांति के बाद विज्ञान एवं तकनीकी विकास ने पर्यावरण को अत्यधिक प्रभावित किया जिसके परिणामस्वरूप आज ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन छिद्रीकरण, जलवायु परिवर्तन तथा पारिस्थितिकीय असंतुलन जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

जनसंख्या, पर्यावरण और विकास के बीच अटूट संबंध है। पर्यावरण के निम्नीकरण से तथा संसाधनों के लगातार कम होने की स्थिति में विकास जारी नहीं रह सकता। जनसंख्या का पर्यावरण संसाधनों पर दबाव पड़ता है जिससे या तो वे समाप्त हो जाते हैं या उनका अभाव हो जाता है या उनका अतिशोषण होता है। इससे पर्यावरण का ह्रास होता है जबकि मानव विकास में पर्यावरण का अहम् योगदान है। उचित अवसरों की प्राप्ति तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार के बिना मानव विकास संभव नहीं है। दूसरे शब्दों में, विकास और पर्यावरण ह्रास एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

प्रश्न 3.
भारत के गरीबी अनुपात में प्रादेशिक विषमताओं का वर्णन करें।
उत्तर:
भारत के गरीबी अनुपात में प्रादेशिक विषमताओं का वर्णन निम्नलिखित है
(1) 1973-74 में लगभग 55 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन गुज़ार रहे थे जो घटकर 1999-2000 में 26.1 प्रतिशत रह गए अर्थात् आज भी भारत के लगभग 26 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन गुज़ार रहे हैं।

(2) ग्रामीण तथा नगरीय गरीबी में व्यापक असमानताएँ पाई जाती हैं। उदाहरणतः निर्धनता का अनुपात गाँवों में 27.09 प्रतिशत तथा नगरों में 23.62 प्रतिशत और संपूर्ण भारत में (औसत) 26.10% है।

(3) सामान्यतः गरीब वर्ग में बेरोजगार, भूमिहीन, कृषि मजदूर, अनियमित मजदूर, आदिवासी और शारीरिक रूप से चुनौती झेल रहे व्यक्ति आते हैं। देश में गरीबी के स्थानिक अथवा प्रादेशिक विवरण में भारी विषमताएँ हैं जिन्हें अभी कम करना बाकी है। देश के लगभग 75% गरीब ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। राज्य स्तर पर गरीबी के अनुपात तथा इसके कम होने की दर में अत्यधिक विषमताएँ पाई जाती हैं। बड़े राज्यों में ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु महत्त्वपूर्ण हैं जहाँ 1983 में आधी से अधिक जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे रह रही थी, लेकिन सन् 2019 के आते-आते तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों का अनुपात बहुत कम रह गया जबकि ओडिशा व बिहार में इतना सुधार नहीं हुआ। मध्य प्रदेश, सिक्किम, असम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नगालैण्ड इत्यादि राज्यों की 20 प्रतिशत से ज़्यादा जनसंख्या गरीबी की रेखा से नीचे बसर कर रही है। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर तथा गोवा में गरीबी कम है।

प्रश्न 4.
पर्यावरण पर मानव के प्रभाव को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पर्यावरण पर मानव का प्रभाव प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से पड़ता है। संसाधनों के दोहन और उपयोग से वायु, जल तथा मिट्टी प्रदूषित होती है जिससे पर्यावरण के विभिन्न संघटकों पर असर पड़ता है। प्राकृतिक संसाधनों के ग्रहण और उपयोग दोनों से पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ता है। पर्यावरण की गुणवत्ता पर निम्नलिखित तीन कारकों का प्रभाव है

उपयोग किए गए संसाधनों की मात्रा तथा उत्पादन की प्रति इकाई के अनुसार प्रदूषण की उत्पत्ति
प्रति व्यक्ति उत्पादन और उपभोग तथा जनसंख्या।

उपरोक्त कारकों के पर्यावरण पर प्रभाव के विश्लेषण को निम्नलिखित सूत्र द्वारा दर्शाया गया है
I = PAT
यहाँ पर, I = पर्यावरणीय प्रभाव, P = जनसंख्या (वृद्धि और घनत्व), A = प्रचुरता (प्रति व्यक्ति आय और प्रति व्यक्ति उपभोग), T = उत्पादन में प्रयुक्त हानिकारक प्रौद्योगिकी।
इसमें जनसंख्या की वृद्धि और घनत्व को पर्यावरण प्रदूषण का प्रमुख कारक माना जाता है।

जनसंख्या के तेजी से बढ़ने की स्थिति में संसाधनों का दोहन और उपयोग बढ़ जाता है जिससे पर्यावरण दुष्प्रभावित होता है। इसी प्रकार प्रौद्योगिकी के कारण भी पृथ्वी के संसाधनों का अंधा-धुंध दोहन हुआ है जिसने पर्यावरण को अत्यधिक प्रभावित किया – है। मानवीय गतिविधियों का पर्यावरण पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार का प्रभाव पड़ सकता है। जीवाश्म ईंधनों के उपयोग से वायु, जल और भूमि प्रभावित होते हैं। इसी प्रकार ताप बिजली-घरों में कोयला जलाने से वायु प्रदूषण तीव्र गति से होता है। अतः आज उन्नत प्रौद्योगिकी वाले मानव समाज से पृथ्वी के अस्तित्व को ही खतरा हो गया है।

प्रश्न 5.
देश में मानव विकास के आर्थिक संकेतकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आर्थिक संकेतक मानव विकास का एक महत्त्वपूर्ण संकेतक है। यह वेतन, आय और रोजगार से संबंधित है। प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद, गरीबी का विस्तार तथा रोजगार के अवसर इसके महत्त्वपूर्ण भाग हैं। इनका वर्णन अग्रलिखित प्रकार से है
1. सकल राष्ट्रीय उत्पाद-अर्थव्यवस्था और उत्पादकता में विकास का मूल्यांकन सकल राष्ट्रीय उत्पाद तथा प्रति व्यक्ति आय के द्वारा किया जाता है। सन् 1950-51 में सकल घरेलू उत्पाद स्थिर कीमत (1993-94) पर 1404.66 अरब रुपए था। वर्तमान में . इसमें काफी वृद्धि हो गई है।

2. प्रति व्यक्ति आय–सन् 1950-51 में प्रति व्यक्ति आय स्थिर कीमत पर 3,687 रुपए थी जो बढ़कर 2003 में 10,254 रुपए हो गई। यह वृद्धि 3.4% प्रति वर्ष थी फिर भी निर्धारित दरों में बहुत कम थी।

3. गरीबी उन्मूलन-जीवन की निम्न गुणवत्ता, अभावग्रस्तता, कुपोषण और निरक्षरता आदि गरीबी के प्रमुख लक्षण हैं। गरीबी निम्न मानव जीवन के विकास का प्रतीक है। नवीनतम आँकड़ों के अनुसार भारत में 26% से लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन कर रहे हैं। इसमें प्रादेशिक असमानताएँ भी पाई जाती हैं।

4. रोजगार मानव विकास का महत्त्वपूर्ण आयाम कार्य के अवसर की उपलब्धता है। भारत में संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों की कुछ रोजगार की औसत वार्षिक वृद्धि-दर में निरंतर कमी आ रही है। सन् 1999-2000 में कुल 39.7 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ था। इसमें से 5% सार्वजनिक क्षेत्र में कार्यरत थे।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 3 मानव विकास

प्रश्न 6.
स्वस्थ जीवन के सूचकों की व्याख्या कीजिए।
अथवा
भारत में मानव विकास सूचकांक मापने के स्वास्थ्य संकेतकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्वास्थ्य मानव विकास का मुख्य आधार हैं। रोग और पीड़ा से मुक्त जीवन और यथोचित दीर्घायु एक स्वस्थ जीवन के सूचक हैं। शिशु मर्त्यता, प्रजनन दर, जन्म-दर, स्वास्थ्य सेवाएँ व पर्याप्त पोषण आदि मानव विकास सूचकांक मापने के मुख्य स्वास्थ्य संकेतक हैं। जिन स्वास्थ्य संकेतकों में भारत ने सराहनीय कार्य किया है, वे निम्नलिखित हैं
1. अशोधित मृत्यु-दर-किसी देश में एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों/बच्चों पर मरने वाले बच्चों की संख्या अशोधित मृत्यु-दर कहलाती है। सन् 1951 में मृत्यु-दर 25.1 प्रति हजार थी जो सन् 2011 में घटकर 6.5 रह गई। भारत में मृत्यु-दर तेजी से कम हुई है।

2. अशोधित जन्म-दर-किसी देश में एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों/बच्चों पर जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या अशोधित जन्म-दर कहलाती है। सन् 1951 में जन्म-दर 40.8 प्रति हजार थी जो सन् 2011 में घटकर 20.8 रह गई अर्थात् इसमें 19 अंकों की कमी आई है।

3. जीवन प्रत्याशा-जन्म के समय से लेकर संभावित आयु काल को जीवन प्रत्याशा कहते हैं। सन् 1951 में पुरुष जीवन प्रत्याशा 37.1 वर्ष थी जो सन् 2011 में बढ़कर 62.6 वर्ष हो गई। इसी प्रकार सन् 1951 में स्त्री जीवन प्रत्याशा 36.2 वर्ष थी जो सन् 2011 में बढ़कर 64.6 वर्ष हो गई है। इसके बढ़ने का मुख्य कारण निरंतर बढ़ती खाद्य-सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ हैं।

4. कुल प्रजनन दर-भारत ने कुल प्रजनन दर में भी काफी सुधार किया है। सन् 1951 में बच्चा पैदा करने की आयु छः बच्चे प्रति स्त्री थी जो सन् 2011 में घटकर 2.9 रह गई।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. आंतरिक प्रवास की कितनी धाराएँ हैं?
(A) 3
(B) 4
(C) 5
(D) 6
उत्तर:
(B) 4

2. गाँव से पहले छोटे नगर और वहाँ से बाद में बड़े नगर की ओर प्रवास क्या कहलाता है?
(A) आप्रवास
(B) उत्प्रवास
(C) सोपानी प्रवास
(D) अंतर्राष्ट्रीय प्रवास
उत्तर:
(C) सोपानी प्रवास

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

3. राज्य के एक भाग से उसी राज्य के दूसरे भाग में प्रवास कहलाता है-
(A) अंतःराज्यीय प्रवास
(B) अंतर्राज्यीय प्रवास
(C) सोपानी प्रवास
(D) बाह्य प्रवास
उत्तर:
(A) अंतःराज्यीय प्रवास

4. एक राज्य से दूसरे राज्य में प्रवास कहलाता है-
(A) अंतःराज्यीय प्रवास
(B) अंतर्राज्यीय प्रवास
(C) सोपानी प्रवास
(D) बाह्य प्रवास
उत्तर:
(B) अंतर्राज्यीय प्रवास

5. निम्नलिखित में से कौन-सा एक विरल जनसंख्या वाला क्षेत्र नहीं है?
(A) अटाकामा
(B) भूमध्यरेखीय प्रदेश
(C) दक्षिण-पूर्वी एशिया
(D) ध्रुवीय प्रदेश
उत्तर:
(D) ध्रुवीय प्रदेश

6. निम्नलिखित में से किस राज्य में विवाह स्त्रियों के प्रवास का मुख्य कारण नहीं है?
(A) हरियाणा
(B) पंजाब
(C) बिहार
(D) मेघालय
उत्तर:
(D) मेघालय

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

7. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में स्त्रियों के प्रवास का मुख्य कारण है?
(A) व्यवसाय
(B) विवाह
(C) शिक्षा
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) विवाह

8. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक प्रतिकर्ष कारक नहीं है?
(A) गरीबी
(B) अमीरी
(C) जनसंख्या दबाव
(D) आपदा
उत्तर:
(C) जनसंख्या दबाव

9. कौन-सा/से राज्य अपने अंतर्राष्ट्रीय प्रवासियों से महत्त्वपूर्ण राशि प्राप्त करता करते है/हैं?
(A) पंजाब
(B) केरल
(C) तमिलनाडु
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

10. प्रवास होता है
(A) गाँव से गाँव की ओर
(B) गाँव से नगर की ओर
(C) नगर से नगर की ओर
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

11. स्थानिक स्तर पर होने वाले प्रवास …………… कहलाते हैं।
(A) स्थानिक प्रवास
(B) अंतर्राष्ट्रीय प्रवास
(C) अंतःराज्यीय प्रवास
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) स्थानिक प्रवास

12. यदि प्रवास राज्य की सीमा के बाहर हो तो उसे …………… प्रवास कहते हैं।
(A) अंतःराज्यीय
(B) अंतर्राष्ट्रीय
(C) अंत राज्यीय
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) अंत राज्यीय

13. स्त्रियों के प्रवास की संख्या किस धारा में अधिक है?
(A) ग्रामीण से नगरीय
(B) ग्रामीण से ग्रामीण
(C) नगरीय से नगरीय
(D) नगरीय से ग्रामीण
उत्तर:
(B) ग्रामीण से ग्रामीण

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

14. परिणामों को किन संदर्भो में देखा जा सकता है?
(A) आर्थिक व सामाजिक
(B) सामाजिक व राजनीतिक
(C) सांस्कृतिक व जनांकिकीय
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

15. निम्नलिखित में से कौन प्रवास को प्रभावित करने वाला कारण है?
(A) विवाह
(B) शिक्षा
(C) रोजगार
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

16. प्रवास का पर्यावरणीय परिणाम नहीं है-
(A) विभिन्न प्रकार के प्रदूषण
(B) अपशिष्ट निपटान की संख्या
(C) काम व रोजगार
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(C) काम व रोजगार

17. देश के बाहर और अन्य देशों से देश के अंदर प्रवास क्या कहलाता है?
(A) उत्प्रवास
(B) आंतरिक प्रवास
(C) अंतर्राष्ट्रीय प्रवास
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) अंतर्राष्ट्रीय प्रवास

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
किस राज्य में सर्वाधिक संख्या में आप्रवासी आते हैं?
उत्तर:
महाराष्ट्र में।

प्रश्न 2.
वह मनुष्य जो जनगणना के समय अपने जन्म-स्थान के अतिरिक्त किसी अन्य स्थान पर गिना जाए, क्या कहलाता है?
उत्तर:
प्रवासी।

प्रश्न 3.
भारत में किस राज्य में सर्वाधिक उत्प्रवासी हैं?
उत्तर:
भारत के उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक उत्प्रवासी हैं।

प्रश्न 4.
गाँव से पहले छोटे नगर और वहाँ से बाद में बड़े नगर की ओर प्रवास क्या कहलाता है?
उत्तर:
सोपानी प्रवास।

प्रश्न 5.
प्रवास के दो मुख्य कारक लिखें।
उत्तर:

  1. सामाजिक कारक
  2. आर्थिक कारक।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

प्रश्न 6.
एक देश से दूसरे देश में प्रवास क्या कहलाता है?
उत्तर:
अंतर्राष्ट्रीय प्रवास।

प्रश्न 7.
भारत में सबसे अधिक प्रवास किस देश से हुआ है?
उत्तर:
बांग्लादेश।

प्रश्न 8.
राज्य के एक भाग से उसी राज्य के दूसरे भाग में प्रवास क्या कहलाता है?
उत्तर:
अंतर्राज्यीय प्रवास।

प्रश्न 9.
ग्रामीण से नगरीय क्षेत्रों में पुरुष प्रवास अधिक क्यों है?
उत्तर:
काम एवं रोजगार के कारण।

प्रश्न 10.
जनगणना 2001 के अनुसार भारत में अन्य देशों से कितने व्यक्तियों का प्रवास हुआ?
उत्तर:
लगभग 50 लाख व्यक्तियों का।

प्रश्न 11.
भारत की जनगणना में प्रवास की गणना कितने आधारों पर की जाती है?
उत्तर:
दो आधारों पर।

प्रश्न 12.
विशिष्ट स्थान पर नगरीय बस्तियों का जमाव क्या कहलाता है?
उत्तर:
नगर-समूहन।

प्रश्न 13.
प्रवास को प्रभावित करने वाले कोई दो कारक बताएँ।
उत्तर:

  1. सुरक्षा
  2. रोजगार।

प्रश्न 14.
किस भूगोलवेत्ता ने सर्वप्रथम प्रवास की प्रवृत्तियों का अध्ययन किया था?
उत्तर:
रैटजेल ने।

प्रश्न 15.
गंतव्य स्थान पर सकारातमक तत्त्वों का अधिक होना किन कारकों के अंतर्गत आता है?
उत्तर:
अपकर्ष कारक या आकर्षित करने वाले कारक (Full Factor)।.

प्रश्न 16.
बड़े नगरों की ओर अधिक प्रवास क्यों होता है?
उत्तर:
रोजगार मिलने की संभावना अधिक होने के कारण।

प्रश्न 17.
प्रतिभा पलायन (Brain Drain) किस प्रकार का प्रवास है?
उत्तर:
स्वैच्छिक प्रवास।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

प्रश्न 18.
भारत के उन राज्यों के नाम बताइए जहाँ सर्वाधिक संख्या में आप्रवासी आते हैं?
उत्तर:
महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, पंजाब।

प्रश्न 19.
भारत के उन राज्यों के नाम बताइए जहाँ से सर्वाधिक संख्या में उत्प्रवासी आते हैं?
उत्तर:
उत्तर प्रदेश और बिहार।

प्रश्न 20.
डायस्पोस का हिंदी भाषा में क्या अर्थ होता है?
उत्तर:
प्रवासी या प्रसार।

प्रश्न 21.
प्रवासी भारतीय दिवस भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष कब मनाया जाता है?
उत्तर:
9 जनवरी को।

प्रश्न 22.
पहला प्रवासी भारतीय दिवस कब मनाया गया?
उत्तर:
सन् 2003 में।

प्रश्न 23.
उच्च शिक्षा प्राप्त कर प्रभावशाली व्यक्तियों का अन्य देशों के लिए पलायन कर जाना क्या कहलाता है?
उत्तर:
ब्रेन ड्रेन या प्रतिभा पलायन।

प्रश्न 24.
जीवन पर्यंत प्रवास क्या है?
उत्तर:
जीवन पर्यंत वह प्रवास है जो जन्म के स्थान, यदि जन्म का स्थान गणना के स्थान से भिन्न है।

प्रश्न 25.
पिछले स्थान प्रवास क्या है?
उत्तर:
पिछले स्थान प्रवास वह प्रवास है जिसमें निवास का स्थान पिछले स्थान से भिन्न होता है।

प्रश्न 26.
सोपानी प्रवास किसे कहते हैं?
उत्तर:
गाँव से पहले छोटे नगर और वहाँ से बाद में बड़े नगर की ओर प्रवास सोपानी प्रवास कहलाता है।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रवास किसे कहते है?
उत्तर:
जनसंख्या का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना प्रवास कहलाता है अर्थात् किसी एक स्थान से जनसंख्या के दूसरे स्थान पर जाकर बसने को प्रवास कहते हैं।

प्रश्न 2.
उत्प्रवास से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
किसी गाँव या नगर में आबादी के अधिक बढ़ने या रोज़गार की कमी के कारण जब लोग उस स्थान को छोड़कर रोज़गार की तलाश में दूसरे स्थान पर चले जाते हैं, तो यह उत्प्रवास प्रक्रिया कहलाती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

प्रश्न 3.
आप्रवास से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
यदि व्यक्ति अन्य स्थानों से आकर एक विशिष्ट स्थान पर बस जाता है तो वह आप्रवास कहलाता है। बड़े-बड़े नगरों, व्यापारिक केंद्रों, औद्योगिक नगरों, बंदरगाहों, मंडियों और खनिज क्षेत्रों में रोज़गार की तलाश में लोग आकर बस जाते हैं, यह प्रक्रिया आप्रवास कहलाती है।

प्रश्न 4.
स्थानिक प्रवास क्या है?
उत्तर:
एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर प्रवास स्थानिक प्रवास कहलाता है। यह प्रवास गाँव-से-गाँव, एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश, नगर-से-नगर, एक देश से दूसरे देश में हो सकता है।

प्रश्न 5.
प्रवास के जनांकिकीय परिणाम क्या हैं?
उत्तर:
नगरों की जनसंख्या वृद्धि में ग्रामीण नगरीय प्रवास महत्त्वपूर्ण कारक है। ग्रामीण युवा-वर्ग रोज़गार व सुख-सुविधा के लिए नगरों में प्रवास करता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के जनांकिकीय संघटन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

प्रश्न 6.
प्रवास के सामाजिक परिणाम क्या हैं?
उत्तर:
प्रवास के सामाजिक परिणाम निम्नलिखित हैं-

  1. नवीन प्रौद्योगिकी, परिवार नियोजन तथा शिक्षा से संबंधित नई विचारधारा का उत्पन्न होना।
  2. विविध संस्कृतियों का मिलन होना।
  3. उद्गम प्रदेश से दूर आकर बसना।
  4. रहन-सहन का उच्चस्तर पर निर्वाह करना।

प्रश्न 7.
भारत में किन-किन देशों से व्यक्तियों का प्रवास हुआ है?
उत्तर:

  1. बांग्लादेश
  2. पाकिस्तान
  3. नेपाल
  4. श्रीलंका
  5. ईरान
  6. म्यांमार आदि।

प्रश्न 8.
प्रवास की धाराएँ बताएँ अथवा आंतरिक प्रवास की चार धाराएँ कौन-कौन-सी हैं?
उत्तर:

  1. गाँव से गाँव की ओर प्रवास
  2. गाँव से नगर की ओर प्रवास
  3. नगर से नगर की ओर प्रवास
  4. नगर से गाँव की ओर प्रवास।

प्रश्न 9.
अंतर्राष्ट्रीय प्रवास से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
जब लोग अपना देश छोड़कर अन्य देशों में पलायन कर जाते हैं, तो उसे अंतर्राष्ट्रीय प्रवास कहते हैं। उदाहरण के लिए हरियाणा के लोगों का कनाडा, ऑस्ट्रेलिया व अमेरिका में प्रवास।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

प्रश्न 10.
आंतरिक प्रवास से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
जब लोगों का पलायन मुख्य रूप से देश की राजनीतिक सीमाओं के अंदर होता है, तो उसे आंतरिक प्रवास कहते हैं। उदाहरण के लिए हरियाणा के लोगों का दिल्ली व पंजाब में प्रवास ।

प्रश्न 11.
निवल प्रवास से आप क्या समझते हैं? अथवा प्रवास का संतुलन क्या है?
उत्तर:
प्रवासियों और आप्रवासियों की कुल संख्या में से बाहर जाने वाले प्रवासियों और उत्प्रवासियों की संख्या निकालकर जो शेष संख्या प्राप्त होती हैं, वह निवल प्रवास कहलाता है। इसको प्रवास का संतुलन भी कहते हैं।

प्रश्न 12.
शरणार्थी किसे कहते हैं?
उत्तर:
जो लोग अपने देश में असुरक्षा, युद्ध या मानव अधिकारों के अतिक्रमण के कारण अन्य देशों में शरण लेने के लिए बाध्य हो जाते हैं, वे शरणार्थी कहलाते हैं।

प्रश्न 13.
गाँव से गाँव में प्रवास का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
गाँव से गाँव में प्रवास महिलाओं में अधिक होता है। इसका मुख्य कारण विवाह है। भारतीय समाज के अनुसार विवाहोपरांत महिलाओं को पति के घर जाना पड़ता है।

प्रश्न 14.
गाँव से नगर की ओर प्रवास का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर:
गाँव से नगर की ओर प्रवास पुरुषों में अधिक होता है। इसका मुख्य कारण काम और रोजगार है। पुरुष परिवार के जीवन स्तर को सुधारने के लिए नगरों की ओर प्रवास करते हैं ताकि यहाँ नौकरी करके पैसा कमाया जा सके।

प्रश्न 15.
दिक् परिवर्तन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जनसंख्या के दैनिक स्थानांतरण अर्थात् दो नगरों के बीच दैनिक आवागमन या गाँव से शहर को दैनिक आवागमन या छोटे नगर से बड़े नगर को प्रत्येक दिन जो आवागमन होता है, उसे दिक्-परिवर्तन कहते हैं।

प्रश्न 16.
भारत में लोग ग्रामीण से नगरीय क्षेत्रों में प्रवास क्यों करते हैं?
उत्तर:
भारत में लोग ग्रामीण से नगरीय क्षेत्रों में गरीबी, कृषि भूमि पर जनसंख्या के अधिक दबाव, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा जैसी आधारभूत अवसंरचनात्मक सुविधाओं के अभाव के कारण प्रवास करते हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
अंतःराज्यीय और अंतर्राज्यीय प्रवास से आप क्या समझते हैं?
अथवा
अंतःराज्यीय और अंतर्राज्यीय प्रवास में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अंतःराज्यीय और अंतर्राज्यीय प्रवास में निम्नलिखित अंतर हैं-

अंतःराज्यीय प्रवासअंतर्राज्यीय प्रवास
1. यदि जनसंख्या या लोगों का प्रवास एक ही राज्य की सीमाओं के भीतर होता हो तो उसे अंतःराज्यीय प्रवास कहा जाता है; जैसे करनाल से अम्बाला।1. यदि जनसंख्या या लोगों का प्रवास एक राज्य से दूसरे राज्य में हो तो उसे अंतर्राज्यीय प्रवास कहा जाता है; जैसे हरियाणा (करनाल) से पंजाब (जांलधर)।
2. यह प्रवास अधिक होता है।2. यह अपेक्षाकृत कम होता है।

प्रश्न 2.
प्रवास या स्थानांतरण का अर्थ एवं परिभाषा लिखें। अथवा प्रवास किसे कहते हैं? प्रवास के कितने प्रकार हैं?
उत्तर:
जनसंख्या का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर रहना प्रवास कहलाता है अर्थात् प्रवास का अर्थ मानव समुदाय के एक भौगोलिक इकाई से दूसरी भौगोलिक इकाई में प्राकृतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक आदि कारकों के कारण स्थानांतरण से है। UNO के अनुसार “जनसंख्या स्थानांतरण या प्रवास एक भौगोलिक क्रिया है जो दो भौगोलिक इकाइयों के बीच देखने को मिलती है। इसमें मानव अधिवास में स्थायी बंदलाव हो जाते हैं।”

प्रकार – प्रवास मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं-

  • आंतरिक प्रवास
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रवास।

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प्रश्न 3.
भारतीय डायस्पोरा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
भारतीय डायस्पोरा का अर्थ उन भारतीयों से है जिनका जन्म तो भारत में होता है लेकिन वे किन्हीं कारणों से विदेशों में बस जाते हैं और वहीं की नागरिकता ले लेते हैं। इन्हें ही भारतीय प्रसार या प्रवासी भी कहते हैं।

भारत के प्रवासी लगभग 166 देशों से हैं जिनकी संख्या 1 करोड़ से भी अधिक हैं। ये अपने कौशल से विदेशों में अपनी पहचान बनाने में सफल हुए हैं। उदारीकरण के बाद 90 के दशक में शिक्षा और ज्ञान आधारित भारतीय उत्प्रवासियों ने भारतीय डायस्पोरा को विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली डायस्पोरा में से एक बना दिया। इन सभी देशों में भारतीय डायस्पोरा अपने-अपने नागरिक प्राप्त देशों के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

प्रश्न 4.
भारतीय प्रवासी दिवस के क्या उद्देश्य हैं?
उत्तर:
भारतीय प्रवासी दिवस के निम्नलिखित उद्देश्य हैं-

  1. प्रवासी भारतीय समुदाय की उपलब्धियों को मंच प्रदान करना।
  2. प्रवासियों को भारत में रहने के लिए आकर्षित करना।
  3. भारत में निवेश के अवसरों को बढ़ाना।
  4. सभी भारतीय प्रवासियों को एकत्रित कर आपस में बंधुभाव और राष्ट्रीयता की भावना जागृत करना।
  5. उनकी काम संबंधी समस्याओं को समझना और वहाँ की सरकार द्वारा हल करवाना।

प्रश्न 5.
प्रवास के आर्थिक परिणाम क्या हैं?
अथवा
आर्थिक परिणाम पर संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर:
उद्गम क्षेत्र के लिए मुख्य लाभ अंतर्राष्ट्रीय प्रवासियों द्वारा भेजी गई हुंडी हैं जो विदेशी विनिमय के प्रमुख स्रोतों में से एक हैं। ये आर्थिक विकास एवं वृद्धि में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

हुंडियों का प्रयोग मुख्यतः भोजन, ऋणों की अदायगी, बच्चों की शिक्षा, विवाह समारोहों, बचत निवेश, गृह-निर्माण, कृषीय निवेश आदि के लिए किया जाता है। कई राज्यों; जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश आदि के हजारों गरीब गाँव की अर्थव्यवस्था के लिए ये हुंडियाँ जीवनदायक होती हैं अर्थात् शरीर में धमनियों की तरह कार्य करती हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवास कृषि विकास के लिए, उसकी हरित क्रांति कार्य-योजना की सफलता के लिए उत्तरादायी है।

प्रश्न 6.
उत्प्रवास के लिए उत्तरदायी प्रतिकर्ष कारक कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
उत्प्रवास के लिए उत्तरदायी प्रतिकर्ष कारक निम्नलिखित हैं-

  1. गरीबी या निर्धनता-निर्धनता के कारण लोग उन स्थानों की ओर प्रवास करते हैं जहाँ उनको रोजगार प्राप्त होता है।
  2. शिक्षा-शिक्षा सुविधाओं में कमी के कारण युग वर्ग उन स्थानों की ओर प्रस्थान करते हैं जहाँ अच्छी शिक्षा और सुविधाओं की व्यवस्था होती है।
  3. जनसंख्या का अधिक दबाव-जनसंख्या का अधिक दबाव भी प्रवास को बढ़ावा देता है।
  4. सुरक्षा-असुरक्षित स्थानों को छोड़कर लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करते हैं।

प्रश्न 7.
उत्प्रवास और आप्रवास में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
उत्प्रवास और आप्रवास में निम्नलिखित अंतर हैं-

उत्प्रवास (Out Migration)आप्रवास (In-Migration)
1. किसी गाँव या नगर में आबादी के अधिक बढ़ने या रोज़गार की कमी के कारण जब लोग उस स्थान को छोड़कर रोज़गार की तलाश में दूसरे स्थान पर चले जाते हैं, तो यह उत्प्रवास प्रक्रिया कहलाती है।1. बड़े-बड़े नगरों, व्यापारिक केंद्रों, औद्योगिक नगरों, बंदरगाहों, मंडियों और खनिज क्षेत्रों में रोज़गार की तलाश में लोग आकर बस जाते हैं, यह प्रक्रिया आप्रवास कहलाती है।
2. जब एक व्यक्ति एक स्थान को छोड़कर अन्य स्थान पर जाता है, तो उत्प्रवास कहलाता है।2. यदि व्यक्ति अन्य स्थानों से आकर एक विशिष्ट स्थान पर बस जाता है, तो यह आप्रवास कहलाता है।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
प्रवास के प्रकारों के आधारों का वर्णन कीजिए।
अथवा
आंतरिक या स्थानिक प्रवास के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या का एक निवास स्थान से दूसरे स्थान तक आर्थिक, सामाजिक अथवा राजनीतिक दृष्टि अथवा अन्य कारणों से किए गए स्थानांतरण को प्रवास कहा जाता है। औद्योगिक क्रांति से पूर्व मनुष्य की गतिशीलता सीमित थी। शिकार, पशुओं के लिए चारा, पानी, उपजाऊ कृषि भूमि का आकर्षण, प्राकृतिक प्रकोप, सुरक्षा आदि कारण मनुष्य को स्थानांतरण के लिए बाध्य करते थे। औद्योगिक क्रांति के पश्चात् आवागमन के साधनों में वृद्धि ने मनुष्य की गतिशीलता में वृद्धि की है। स्थानांतरण या प्रवास अस्थायी, या स्थायी रूप से किया गया आवास परिवर्तन है। प्रवास के लिए आवास स्थान में परिवर्तन पर्याप्त अवधि के लिए होना चाहिए अर्थात् उसमें कुछ स्थायित्व होना चाहिए। प्रवास एक भौतिक तथा सामाजिक संक्रमण है।

प्रवास के प्रकार (Types of Migration) – प्रवास की समयावधि, दूरी, स्थायित्व, उद्देश्य, क्षेत्र आदि आधारों पर स्थानांतरण अथवा प्रवास अनेक प्रकार के हो सकते हैं-
1. समय के आधार पर समय के आधार पर प्रवास दैनिक, मौसमी अथवा अल्पकालिक या दीर्घकालिक होते हैं।
(i) दैनिक प्रवास-नौकरी करने, औद्योगिक केंद्रों में काम करने, व्यवसाय हेतु अथवा शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाओं के लाभ हेतु प्रतिदिन कस्बों अथवा नगरों व महानगरों की ओर जनसंख्या का जाना तथा शाम को पुनः लौटना आदि दैनिक प्रवास है।

(ii) मौसमी प्रवास-श्रम की मौसमी मांग के कारण फसल काटने के समय भारत में सुंदरवन, उत्तरी भारत में गेहूँ काटने के लिए बिहार तथा उत्तर प्रदेश से जनसंख्या का प्रवास। इसी प्रकार धान कटने के पश्चात् श्रमिकों का उत्तर भारत की ओर, सड़क, गृह-निर्माण तथा ईंट-भट्ठों में कार्य के लिए प्रवास, पर्वतीय भागों में जाड़े में तलहटियों की ओर तथा ग्रीष्मकाल में पुनः . लौटना आदि मौसमी प्रवास हैं।

2. दूरी के आधार पर-गांवों से नगरों तथा नगरों से महानगरों की ओर प्रवास अल्प दूरी के होने वाले प्रवास हैं। इसी तरह में, असम के चाय बागानों में, उत्तरी भारत में कृषि के लिए छत्तीसगढ़ के मजदूरों का स्थाई प्रवास मध्यम दूरी के प्रवास हैं। राजस्थान व हरियाणा से असम, बंगाल तथा ओडिशा की ओर मारवाड़ी व्यापारी का प्रवास भी मध्य दूरी में आता है। भारत में मलाया, मॉरीशस, ग्वायना, फीजी, अफ्रीका आदि देशों में जनसंख्या प्रवास लंबी दूरी के प्रवास हैं।

3. उद्देश्य के आधार पर विभिन्न उद्देश्यों के आधार पर; जैसे आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, सैनिक आदि पर किए गए प्रवास इस श्रेणी में आते हैं। इनमें आर्थिक उद्देश्य से किए गए प्रवास सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण हैं । आर्थिक समस्या, बेरोजगारी, कम मजदूरी आदि आर्थिक विकर्षण; दूसरी ओर अच्छे आर्थिक अवसरों के आकर्षण के कारण होने वाले प्रवास इस श्रेणी के हैं। इसके अलावा इन प्रकारों में विवाह पश्चात् स्त्री प्रवास, राजनीतिक नियोजित प्रवास आदि भी सम्मिलित हैं।

4. क्षेत्र के आधार पर भौगोलिक दृष्टि से क्षेत्र के आधार पर होने वाले प्रवास सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण हैं। यदि यह आवास-प्रवास एक देश से दूसरे देश के मध्य सीमा पार होता है तो अंतर्राष्ट्रीय प्रवास (International Migration) कहलाता है। जब यह स्थानांतरण अथवा प्रवास किसी एक ही देश के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान पर होता है तो उसे आंतरिक अथवा अंतर्देशीय अथवा देशांतरिक (Internal) प्रवास कहते हैं। एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप के मध्य अंतःमहाद्वीपीय प्रवास होते हैं। ये भी अंतर्राष्ट्रीय प्रकार के होते हैं। स्थानिक स्तर पर होने वाले प्रवास स्थानिक प्रवास कहलाते हैं। आंतरिक अथवा स्थानिक प्रवास के चार प्रमुख प्रकार हैं-
(i) गाँव से नगर की ओर प्रवास एक सामान्य तथा सतत् प्रक्रिया है। आर्थिक विपन्नता, बेरोज़गारी, कम पारिश्रमिक, स्वास्थ्य, शिक्षा, मनोरंजन आदि सेवाओं की कमी के कारण अच्छे रोजगार अथवा अन्य आर्थिक अवसरों की तलाश में जनसंख्या गांव से शहर की ओर प्रवास करती है। दूसरे शब्दों में, शहरों में रोजगार के अधिक अवसर, नियमित पारिश्रमिक, अच्छी शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाएं गांव से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। इस प्रकार के प्रवास से नगरीय जनसंख्या में वृद्धि होती है।

(ii) एक नगर से दूसरे नगर में प्रवास को अंतर्नगरीय प्रवास कहते हैं। इस प्रकार का प्रवास अधिकतर छोटे नगरों से बड़े नगरों की ओर होता है क्योंकि बड़े नगर व्यापार, उद्योग तथा अन्य धंधों तथा रोजगार के केंद्र होते हैं। बड़े नगरों से महानगरों की ओर प्रवास भी इसी प्रवास के अंतर्गत आता है। इससे बड़े नगरों की जनसंख्या तेजी से बढ़ती है, परंतु छोटे नगरों का विकास रुकने लगता है।

(iii) एक ग्रामीण क्षेत्र से दूसरे ग्रामीण क्षेत्र में प्रवास के अनेकों कारण हैं; जैसे नवीन रोपण कृषि क्षेत्रों तथा ग्रामीण फार्मों में कार्य करने हेतु तथा कम कीमत पर अधिक उपजाऊ भूमि की उपलब्धि आदि के कारण यह प्रवास होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में वैवाहिक प्रवास भी इसी प्रवास में आते हैं। भारत में कुछ इस प्रकार के मुख्य प्रवास-असम, केरल तथा तमिलनाडु के चाय, कॉफी बगीचों में कार्य हेतु पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश तथा गुजरात में नवीन विकसित भूमि पर कृषि हेतु, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात आदि प्रदेशों के खनिज क्षेत्रों में कार्य हेतु श्रमिकों का प्रवास आदि मुख्य हैं।

(iv) नगर से गांव की ओर प्रवास लगभग स्थानीय प्रकार का होता है। सेवानिवृत्त शासक, सैनिक अथवा अशासकीय कर्मचारी, वृद्धि तथा अकार्यशील व्यापारी आदि लोग शांत जीवन जीने की आशा में ग्रामीण क्षेत्रों की ओर प्रवास करते हैं। कुछ संख्या विवाह उपरांत भी यह प्रवास करती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

प्रश्न 2.
प्रवास किसे कहते हैं? भारत में प्रवास को प्रभावित करने वाले कारकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
प्रवास का अर्थ जनसंख्या का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना प्रवास कहलाता है अर्थात् किसी एक स्थान से जनसंख्या के दूसरे स्थान पर जाकर बसने को प्रवास कहते हैं। कुछ प्रवास स्थायी तथा कुछ अस्थायी होते हैं। स्थायी प्रवास में व्यक्ति मूल-स्थान से दूसरे स्थान पर स्थायी रूप से रहने लगता है जबकि अस्थायी प्रवास में मौसमी, वार्षिक तथा दैनिक प्रवास भी हो सकते हैं।

भारत में प्रवास को प्रभावित करने वाले कारक – भारत में जनसंख्या प्रवास के कुछ कारण निम्नलिखित हैं-
1. आजीविका-आजीविका कमाने या अन्य आर्थिक उद्देश्यों से व्यक्ति ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर जाता है। इसमें मुख्य रूप से युवा वर्ग है, क्योंकि यह वर्ग नगरीय क्षेत्रों में उद्योग-धंधे, परिवहन, व्यापार एवं प्रशासनिक प्रतिष्ठानों में धन कमाने के उद्देश्य से प्रवास करता है। नगर इन सुविधाओं के कारण युवा वर्ग को अपनी ओर आकर्षित करता है।

2. सामाजिक कारण-विवाह या शिक्षा ग्रहण करने के उद्देश्य से मनुष्य एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करता है; जैसे प्रत्येक लड़की शादी के बाद अपना पैतृक स्थान छोड़कर दूसरे स्थान पर जाकर रहने लगती है। इसमें दूरी कम भी हो सकती है या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हजारों मील भी हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्र आज भी शिक्षा की दृष्टि से पिछड़े हुए हैं अतः व्यक्ति उच्च शिक्षा (High Education) प्राप्त करने के उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों में स्थानांतरित होता है।

3. सरक्षा कारण सामाजिक सुरक्षा एक महत्त्वपूर्ण कारक है जो व्यक्ति को एक स्थान से दूसरे सुरक्षित स्थान पर प्रवास के लिए मजबूर कर देता है। 1980 के दशक में पंजाब में आतंकवाद के कारण पंजाब की जनसंख्या हरियाणा, दिल्ली तथा सीमावर्ती राज्यों में आकर बसने लगी थी।

प्रश्न 3.
प्रवास के कारणों का वर्णन कीजिए।
अथवा
प्रवास के प्राकृतिक तथा मानवीय कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या के स्थानांतरण के पीछे विकर्षण तथा आकर्षण के कारक एक साथ क्रियाशील होते हैं। प्रवास एक जटिल क्रेया है तथा कई कारकों से जड़ी होती है। हर प्रवास में अनेक कारक सामूहिक रूप से उत्तरदायी होते हैं। विकर्षण तथा आकर्षण के अतिरिक्त अनेकों अन्य कारक; जैसे सामूहिक सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता, आवागमन के साधन, जलवायु की अनुकूलता आदि भी प्रवास के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। प्रवास के कारणों को निम्नलिखित मुख्य वर्गों में बांटा जा सकता है-
1. प्राकृतिक कारण-प्राकृतिक कारणों में जलवायु का प्रभाव सबसे अधिक रहा है। प्रवास अनुकूल जलवायु के क्षेत्रों की ओर होता है। अतिवृष्टि, अनावृष्टि तथा अकाल आदि प्रवास के कारण जलवायु की ही देन है। कठोर शीतकाल में टुन्ड्रा से जनसंख्या दक्षिण की ओर तथा ग्रीष्म में उत्तर की ओर प्रवास करती हैं। इसी तरह नदियों में बाढ़ों के कारण प्रभावित लोग अन्य भागों में प्रवास करते हैं। दूसरी ओर निर्मित उपजाऊ मैदान तथा जल-सुविधा अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इसी प्रकार बार-बार विनाशकारी भूकम्प तथा ज्वालामुखी के कारण जीवन असुरक्षित हो जाता है तथा जनसंख्या सुरक्षित स्थानों की ओर प्रवास करती है।

2. मानवीय कारण स्थानांतरण अथवा प्रवास प्रक्रिया में प्राकृतिक कारणों की अपेक्षा मानवीय कारण अधिक महत्त्वपूर्ण तथा प्रभावी होते हैं। इन कारणों में सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, पारिवारिक तथा व्यक्तिगत कारण मुख्य होते हैं, जो प्रवास को प्रभावित करते हैं।
(i) सामाजिक कारण मानवीय प्रवास को सामाजिक दशाएं सबसे अधिक प्रभावित करती हैं। इनके अंतर्गत सामाजिक रीति-रिवाज, खानपान, शिक्षा-दीक्षा, मेल-मिलाप, सामाजिक क्रियाशीलता व व्यवहार, त्योहार आदि अंतक्रियाएं होती हैं। ये अंतक्रियाएं ही सामाजिक प्रवास के कारण हैं। विवाह से स्त्री प्रवास, भारत-पाक विभाजन के दौरान हिंदु तथा मुसलमानों का स्थानांतरण आदि।

(ii) आर्थिक कारण-आर्थिक कारण अधिकांश प्रवासों के प्रेरक कारण रहे हैं। पूंजी निवेश, व्यापार उतार-चढ़ाव, लाभ की आशा, रोजगार के अवसर, अधिक वेतन का लोभ, कृषि घाटा, बेरोजगारी, कार्यदक्षता आदि असंख्य कारण प्रवास की मात्रा व दर का निर्णय करते हैं। कृषि क्षेत्रों में उपलब्ध अतिरिक्त श्रमिक उद्योगों में काम करने के लिए नगरों की ओर प्रवास करते हैं। हिमालय के तराई क्षेत्र, राजस्थान के उत्तरी भाग, मध्य प्रदेश का बस्तर तथा सरगुजा क्षेत्रों में उत्तम कृषि भूमि की उपलब्धि के कारण प्रवास हुए हैं। भारत के औद्योगिक नगरों; जैसे कोलकाता, मुम्बई, अहमदाबाद, टाटा नगर, भिलाई आदि नगरों में भारी प्रवास हुआ है।

(iii) राजनीतिक कारण-युद्ध के पश्चात् विजेता का भूमि पर कब्जा करके वहां बस जाना; भारत में आर्यों, मुगलों, अंग्रेजों का आगमन तथा यहाँ आकर बस जाना राजनीतिक प्रवास है। अंग्रेजों ने भारत से मॉरीशस, फीजी, पूर्वी अफ्रीका के गन्ने की खेती के लिए बलपूर्वक जनसंख्या का प्रवास किया। आज चकमा शरणार्थियों, कश्मीरी पंडितों का शरणार्थियों के रूप में प्रवास राजनीतिक कारणों से है।

(iv) सांस्कृतिक कारण-सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शिक्षा प्राप्ति के लिए विद्यार्थी, डॉक्टर, शिक्षकों का दूसरे देशों में प्रवास, पर्यटक, कलाकार, राजनीतिज्ञ आदि का अल्पकालीन अथवा स्थाई प्रवास सांस्कृतिक कारणों से है।

(v) धार्मिक कारण-धार्मिक यात्राओं; जैसे हज, कुम्भ आदि के कारण वर्ष भर प्रवास होता है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

प्रश्न 4.
प्रवास के परिणामों की विस्तृत व्याख्या कीजिए।
अथवा
प्रवास के कौन-कौन से परिणाम हैं? वर्णन करें।
उत्तर:
अवसरों के असमान वितरण के परिणामस्वरूप प्रवास होता है। प्रवास के आर्थिक, जनांकिकीय, सामाजिक, पर्यावरणीय परिणाम होते हैं जो निम्नलिखित हैं
I. आर्थिक परिणाम (Economic Consequence)-अन्तर्राष्ट्रीय प्रवासियों द्वारा भेजी गई हुंडियाँ विदेशी विनिमय का प्रमुख स्रोत हैं। इन इंडियों का प्रयोग उद्गम प्रदेश के लोग भोजन, ऋणों की अदायगी, गृह-निर्माण, विवाह, बच्चों की शिक्षा इत्यादि के लिए किया करते हैं जो प्रदेशों की अर्थव्यवस्था के लिए जीवनदायक है।

2. जनांकिकीय परिणाम (Democratic Consequence)-नगरों की जनसंख्या वृद्धि में ग्रामीण नगरीय प्रवास महत्त्वपूर्ण कारक है। ग्रामीण युवा-वर्ग रोज़गार व सुख-सुविधा के लिए नगरों में प्रवास करता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के जनांकिकीय संघटन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

3. सामाजिक परिणाम (Social Consequence) सामाजिक परिवर्तन में प्रवास महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नई प्रौद्योगिकी, तकनीक, परिवार नियोजन, बालिका शिक्षा आदि से संबंधित नए विचार नगरीय क्षेत्रों से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर प्रवास के माध्यम से जाते हैं। प्रवास से ही विभिन्न संस्कृतियों के लोगों का मेल-जोल भी होता है।

4. पर्यावरणीय परिणाम (Environmental Consequence)-ग्रामीण से नगरीय क्षेत्रों की ओर प्रवास से वर्तमान नगरों की भौतिक व सामाजिक संरचना भी प्रभावित होती है। इसके कारण नगरीय बस्तियों की अनियोजित रूप से वृद्धि होती है। परिणामस्वरूप अवैध व मलिन बस्तियाँ बसने लगती हैं। इन बस्तियों में वायु प्रदूषण, पेय जल की समस्या, वाहित मल का निपटान और ठोस कचरे के प्रबंधन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

प्रश्न 5.
भारत में गाँवों से शहरों की ओर जनसंख्या के पलायन के मुख्य कारणों का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत में जनसंख्या प्रवास के मुख्य कारण क्या हैं? वर्णन करें।
उत्तर:
भारत में गाँवों से शहरों की ओर जनसंख्या के पलायन के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं-
1. कृषि योग्य भूमि पर दबाव बढ़ती जनसंख्या के कारण कृषि योग्य भूमि पर निरंतर दबाव बढ़ता जा रहा है। इसी दशा में जब कृषि-भूमि ग्रामीण जनसंख्या को जीविका प्रदान करने में असमर्थ रहती है तो लोग शहरों की ओर पलायन करते हैं।

2. औद्योगीकरण-नगरीकरण तथा औद्योगीकरण में परस्पर धनात्मक सहसंबंध पाया जाता है। औद्योगीकरण के साथ नगरों का भी विकास होता है। औद्योगिक इकाइयों में रोजगार प्राप्त होने पर लोग उद्योगों के आसपास निवास करते हैं। इस तरह से गांवों से शहरों की ओर जनसंख्या का प्रवास होता है।

3. ग्रामीण क्षेत्रों में वैकल्पिक रोजगार की कमी-जनसंख्या तो तीव्र गति से बढती रही परंत उसी अनपात में वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था नहीं हो पाई। ग्रामीण क्षेत्रों में वैकल्पिक रोजगार की कमी होने के कारण नगरीय क्षेत्रों की ओर जनसंख्या का प्रवास तेजी से हुआ।

4. नगरों में रोजगार के अवसर-नगरों में नियमित रूप से आर्थिक क्रियाएं वर्ष भर संचालित होती हैं। सरकारी क्षेत्रों, सेवाओं, उद्योग, व्यापार आदि में रोजगार के पर्याप्त अवसर होते हैं। इस प्रकार रोजगार के अवसरों के कारण लोग नगरों की ओर प्रस्थान करते हैं।

5. यातायात के साधन-तेजी से विकसित होते यातायात के साधन तथा परिवहन मार्गों से गांवों तथा नगरों के मध्य सहजता से पहुंचा जा सकता है। यातायात के साधनों के कारण नगर व्यापार तथा वाणिज्यिक गतिविधियों के केंद्र बने। अतः ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्रों के मध्य व्यापार को बढ़ावा मिला।

6. नगरीय जीवन आकर्षण-शहरों में उपलब्ध शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आधुनिक जीवन की सुविधाएं ग्रामीण जनसंख्या को आकर्षित करती हैं। अतः मनोरंजन, आधुनिक सुविधाओं तथा सुरक्षा व्यवस्था से आकर्षित होकर. लोग शहरों की ओर पलायन करते हैं।

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HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन Important Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

A. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. विश्व में जनसंख्या की दृष्टि से भारत का कौन-सा स्थान है?
(A) तीसरा
(B) दूसरा
(C) चौथा
(D) सातवाँ
उत्तर:
(B) दूसरा

2. विश्व में घनत्व की दृष्टि से भारत का कौन-सा स्थान है?
(A) तीसरा
(B) दूसरा
(C) चौथा
(D) सातवाँ
उत्तर:
(A) तीसरा

3. विश्व में क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का कौन-सा स्थान है?
(A) दूसरा
(B) तीसरा
(C) चौथा
(D) सातवाँ
उत्तर:
(D) सातवाँ

4. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कितने प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण है?
(A) 25.50%
(B) 68.84%
(C) 9.42%
(D) 64.41%
उत्तर:
(B) 68.84%

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

5. 2001-2011 में जनसंख्या की औसत वार्षिक वृद्धि कितनी रही?
(A) 9.42%
(B) 3.5%
(C) 13.7%
(D) 17.64%
उत्तर:
(D) 17.64%

6. स्वतंत्र भारत में अब तक कितनी बार जनगणनाएँ हो चुकी हैं?
(A) 4
(B) 7
(C) 12
(D) 14
उत्तर:
(B) 7

7. 1951 में भारत का जनसंख्या घनत्व कितना था?
(A) 117 व्यक्ति/वर्ग कि०मी०
(B) 200 व्यक्ति/वर्ग कि०मी०
(C) 208 व्यक्ति/वर्ग कि०मी०
(D) 185 व्यक्ति/वर्ग कि०मी०
उत्तर:
(B) 200 व्यक्ति/वर्ग कि०मी०

8. भारत में सर्वाधिक दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर निम्नलिखित में से किस दशक में रही?
(A) 1961-71
(B) 1971-81
(C) 1981-91
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) 1961-71

9. भारत का निम्नतम जनसंख्या वाला राज्य है-
(A) सिक्किम
(B) अरुणाचल प्रदेश
(C) केरल
(D) गोवा
उत्तर:
(A) सिक्किम

10. भारत का न्यूनतम जनसंख्या वृद्धि-दर वाला राज्य है-
(A) केरल
(B) अरुणाचल प्रदेश
(C) नगालैण्ड
(D) गोवा
उत्तर:
(C) नगालैण्ड

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

11. भारत का क्षेत्रफल विश्व के कुल भौगोलिक क्षेत्र का कितने प्रतिशत है?
(A) 16.7%
(B) 5.8%
(C) 2.4%
(D) 15.2%
उत्तर:
(C) 2.4%

12. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में जनसंख्या का औसत घनत्व कितना है?
(A) 849 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
(B) 334 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
(C) 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
(D) 129 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
उत्तर:
(C) 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०

13. भारत में कुल कितने राज्य हैं?
(A) 25
(B) 28
(C) 27
(D) 29
उत्तर:
(B) 28

14. वर्तमान में भारत में कितने केंद्र-शासित प्रदेश हैं?
(A) 5
(B) 6
(C) 7
(D) 8
उत्तर:
(D) 8

15. भारत में सबसे अधिक जनसंख्या किस प्रदेश में पाई जाती है?
(A) उत्तर प्रदेश
(B) मध्य प्रदेश
(C) अरुणाचल प्रदेश
(D) पश्चिमी बंगाल
उत्तर:
(A) उत्तर प्रदेश

16. सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या कितनी थी?
(A) 100.2 करोड़
(B) 121 करोड़
(C) 102.8 करोड़
(D) 103.8 करोड़
उत्तर:
(C) 102.8 करोड़

17. निम्नलिखित में से जनसंख्या घनत्व को प्रभावित करने वाला भौगोलिक कारक नहीं है
(A) धरातल
(B) खनिज
(C) जलवायु
(D) मृदा
उत्तर:
(B) खनिज

18. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में लिंगानुपात कितना है?
(A) 931 प्रति हजार
(B) 932 प्रति हजार
(C) 943 प्रति हजार
(D) 934 प्रति हजार
उत्तर:
(C) 943 प्रति हजार

19. 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में जन्म-दर कितनी थी?
(A) 23 प्रति हजार व्यक्ति
(B) 24 प्रति हजार व्यक्ति
(C) 25 प्रति हजार व्यक्ति
(D) 26 प्रति हजार व्यक्ति
उत्तर:
(D) 26 प्रति हजार व्यक्ति

20. 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में मृत्यु-दर कितनी थी?
(A) 7 प्रति हजार व्यक्ति
(B) 8 प्रति हजार व्यक्ति
(C) 9 प्रति हजार व्यक्ति
(D) 10 प्रति हजार व्यक्ति
उत्तर:
(C) 9 प्रति हजार व्यक्ति

21. सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की ग्रामीण जनसंख्या कितने प्रतिशत थी?
(A) 72.22%
(B) 58.42%
(C) 67.75%
(D) 27.78%
उत्तर:
(A) 72.22%

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

22. सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की नगरीय जनसंख्या कितने प्रतिशत थी?
(A) 72.22%
(B) 58.42%
(C) 67.75%
(D) 27.78%
उत्तर:
(D) 27.78%

23. निम्नलिखित में से भारत के किस राज्य में ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत सबसे अधिक है?
(A) हिमाचल प्रदेश
(B) हरियाणा
(C) केरल
(D) अरुणाचल प्रदेश
उत्तर:
(A) हिमाचल प्रदेश

24. भारत में संपूर्ण जनगणना कब संपन्न हुई थी?
(A) 1880 में
(B) 1980 में
(C) 1881 में
(D) 1981 में
उत्तर:
(C) 1881 में

25. कुल जनसंख्या में कार्यरत जनसंख्या का प्रतिशत अनुपात कहलाता है
(A) आश्रित जनसंख्या
(B) श्रमजीवी जनसंख्या
(C) सहभागिता दर
(D) व्यावसायिक संरचना
उत्तर:
(C) सहभागिता दर

26. भारत में प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या क्या दर्शाती है?
(A) ग्रामीण जनसंख्या
(B) नगरीय जनसंख्या
(C) लिंगानुपात
(D) उत्पादक जनसंख्या
उत्तर:
(C) लिंगानुपात

27. भारत में सर्वाधिक लिंगानुपात वाला राज्य कौन-सा है?
(A) केरल
(B) हरियाणा
(C) महाराष्ट्र
(D) मध्य प्रदेश
उत्तर:
(A) केरल

28. भारत में न्यूनतम लिंगानुपात वाला राज्य कौन-सा है?
(A) केरल
(B) हरियाणा
(C) महाराष्ट्र
(D) मध्य प्रदेश
उत्तर:
(B) हरियाणा

29. श्रमजीवी आयु-वर्ग कहा जाता है-
(A) 0-14 वर्ष
(B) 15-59 वर्ष
(C) 60 वर्ष से ऊपर
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) 15-59 वर्ष

30. मुख्य कामगार वर्ष में कितने दिन काम करता है?
(A) 177 दिन
(B) 180 दिन
(C) 183 दिन
(D) 186 दिन
उत्तर:
(C) 183 दिन

31. आयु-संरचना को किस आरेख द्वारा प्रदर्शित किया जाता है?
(A) सरल आरेख
(B) दण्ड आरेख
(C) बहुदण्ड आरेख
(D) आयु एवं लिंग पिरामिड
उत्तर:
(D) आयु एवं लिंग पिरामिड

32. 2011 की जनगणना के अनुसार हरियाणा में लिंगानुपात कितना है?
(A) 933 प्रति हजार
(B) 1058 प्रति हजार
(C) 877 प्रति हजार
(D) 709 प्रति हजार
उत्तर:
(C) 877 प्रति हजार

33. भारतीय भाषाओं से सम्बन्धित भाषा परिवार कितने हैं?
(A) 2
(B) 3
(C) 4
(D) 5
उत्तर:
(C) 4

34. भारत में राजभाषा हिन्दी के अलावा कितनी प्रादेशिक भाषाओं को मान्यता दी गई है?
(A) 15
(B) 16
(C) 17
(D) 21
उत्तर:
(D) 21

35. जनसंख्या की दृष्टि से अनुसूचित जनजातीय किस राज्य में कम हैं?
(A) मध्य प्रदेश
(B) गोवा
(C) उत्तर प्रदेश
(D) हरियाणा
उत्तर:
(B) गोवा

36. भारत के किस राज्य में मुस्लिम सबसे अधिक हैं?
(A) हिमाचल प्रदेश
(B) उत्तर प्रदेश
(C) मिज़ोरम
(D) केरल
उत्तर:
(B) उत्तर प्रदेश

37. भारत के किस राज्य में हिन्दू सबसे कम हैं?
(A) हिमाचल प्रदेश
(B) उत्तर प्रदेश
(C) मिज़ोरम
(D) केरल
उत्तर:
(C) मिज़ोरम

38. भारत के किस राज्य में ईसाइयों का संकेंद्रण सबसे अधिक है?
(A) हिमाचल प्रदेश
(B) उत्तर प्रदेश
(C) मिज़ोरम
(D) केरल
उत्तर:
(D) केरल

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

39. भारत के किस राज्य में सिक्ख धर्म के अनुयायी सबसे अधिक हैं?
(A) हिमाचल प्रदेश
(B) पंजाब
(C) मिज़ोरम
(D) केरल
उत्तर:
(B) पंजाब

40. सन् 2011 के अनुसार भारत में सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य कौन-सा है?
(A) पश्चिमी बंगाल
(B) उत्तर प्रदेश
(C) बिहार
(D) केरल
उत्तर:
(C) बिहार

41. सन् 2011 के अनुसार भारत में सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाले राज्य का नाम बताइए।
(A) नगालैंड
(B) अरुणाचल प्रदेश
(C) केरल
(D) गोवा
उत्तर:
(B) अरुणाचल प्रदेश

42. भारत में जनगणना कितने वर्षों के बाद की जाती है?
(A) 5
(B) 10
(C) 15
(D) 20
उत्तर:
(B) 10

B. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दीजिए

प्रश्न 1.
भारत में पहली जनगणना कब हुई?
उत्तर:
सन् 1872 में।

प्रश्न 2.
भारत में पहली पूर्ण जनगणना कब हुई?
उत्तर:
सन् 1881 में।

प्रश्न 3.
जनगणना 1951 के अनुसार भारत की साक्षरता दर कितनी थी?
उत्तर:
18.33%

प्रश्न 4.
जनगणना 1951 के अनुसार भारत में स्त्री प्रत्याशा कितनी थी?
उत्तर:
36.2 वर्ष।

प्रश्न 5.
जनगणना 1951 के अनुसार भारत में पुरुष प्रत्याशा कितनी थी?
उत्तर:
37.1 वर्ष।

प्रश्न 6.
जनगणना 2001 के अनुसार भारत की साक्षरता-दर कितनी थी?
उत्तर:
64.84%।

प्रश्न 7.
जनगणना 2001 के अनुसार भारत की पुरुष साक्षरता-दर कितनी थी?
उत्तर:
75.26%।

प्रश्न 8.
जनगणना 2001 के अनुसार भारत की स्त्री साक्षरता-दर कितनी थी?
उत्तर:
53.67%।

प्रश्न 9.
सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल कितनी जनसंख्या थी?
उत्तर:
102.8 करोड़ (लगभग)।

प्रश्न 10.
2001 की जनगणना के अनुसार भारत का जनसंख्या घनत्व कितना था?
उत्तर:
325 प्रति व्यक्ति।

प्रश्न 11.
जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
दूसरा, पहला स्थान चीन का है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 12.
जनगणना 2011 के अनुसार भारत के किस राज्य में जनसंख्या घनत्व सर्वाधिक है?
उत्तर:
बिहार (1102)।

प्रश्न 13.
जनगणना 2011 के अनुसार भारत की साक्षरता दर कितनी है?
उत्तर:
74.04 प्रतिशत।

प्रश्न 14.
जनगणना 2011 के अनुसार भारत की पुरुष साक्षरता दर कितनी है?
उत्तर:
82.14 प्रतिशत।

प्रश्न 15.
भारत के मैदानी भागों में देश की कितनी जनसंख्या बसी हुई है?
उत्तर:
लगभग 52 प्रतिशत जनसंख्या।

प्रश्न 16.
जनगणना 2011 के अनुसार भारत की स्त्री साक्षरता दर कितनी है?
उत्तर:
65.46 प्रतिशत।

प्रश्न 17.
जनगणना 2011 के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या कितनी है?
उत्तर:
लगभग 121.02 करोड़।

प्रश्न 18.
सन् 2001-2011 में भारत की औसत जनसंख्या वृद्धि-दर कितनी रही?
अथवा
भारत की औसत जनसंख्या वृद्धि दर 2001-2011 के दशक में कितनी रही?
उत्तर:
17.64%।

प्रश्न 19.
जनगणना 2011 के अनुसार भारत का जनसंख्या घनत्व कितना है?
उत्तर:
382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर।

प्रश्न 20.
सर्वाधिक लिंगानुपात वाले राज्य का नाम बताइए।
उत्तर:
केरल। जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 21.
न्यूनतम लिंगानुपात वाले राज्य का नाम बताइए।
उत्तर:
हरियाणा।

प्रश्न 22.
जनगणना 2011 के अनुसार भारत का लिंगानुपात कितना है?
उत्तर:
9431

प्रश्न 23.
बौद्ध धर्म के लोग अधिकांशतः भारत के किस राज्य में केन्द्रित है?
उत्तर:

  1. सिक्किम
  2. अरुणाचल प्रदेश
  3. हिमाचल प्रदेश
  4. महाराष्ट्र।

प्रश्न 24.
भारतीय श्रमिकों का सर्वाधिक अनुपात किस सेक्टर में संलग्न है?
उत्तर:
प्राथमिक सेक्टर में।

प्रश्न 25.
भारत में विशालतम भाषाई समूह का नाम लिखिए।
उत्तर:
भारतीय यूरोपीय भाषा परिवार (आय)।

प्रश्न 26.
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा एवं सबसे छोटा राज्य कौन-सा है?
उत्तर:

  1. सबसे बड़ा उत्तर प्रदेश।
  2. सबसे छोटा-सिक्किम।

प्रश्न 27.
भारतीय संविधान में कितनी भाषाएँ अधिसूचित हैं?
उत्तर:
22 भाषाएँ।

प्रश्न 28.
भारत में न्यूनतम बाल आयु वर्ग का प्रतिशत रखने वाले दो राज्यों के नाम बताएँ।
उत्तर:

  1. गोवा
  2. केरल।

प्रश्न 29.
भारत के आयु पिरामिड का आकार किसका घोतक है?
उत्तर:
जनसंख्या की गतिशीलता का।

प्रश्न 30.
भारत जनांकिकीय संक्रमण की किस अवस्था में आता है?
उत्तर:
तीसरी अवस्था में।

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प्रश्न 31.
देश में सबसे कम ग्रामीण जनसंख्या किन दो राज्यों अथवा केंद्र-शासित प्रदेशों में पाई जाती है?
उत्तर:
दिल्ली तथा चण्डीगढ़।

प्रश्न 32.
राज्य की जनसंख्या में तीन-चौथाई जन-जातीय जनसंख्या वाले दो राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
मेघालय व मिज़ोरम।

प्रश्न 33.
अनुसूचित जातियों के सर्वाधिक अनुपात वाले दो राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
पंजाब व हिमाचल प्रदेश।

प्रश्न 34.
उत्तर-पूर्वी राज्यों की भाषाएँ किस भाषा परिवार से संबंधित हैं?
उत्तर:
चीनी-तिब्बती भाषा परिवार से।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
‘लिंगानुपात’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जनसंख्या का लिंग-संयोजन अक्सर एक अनुपात के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, जिसे लिंगानुपात कहते हैं। इसे ‘भारत में प्रति हजार पुरुषों के पीछे कितनी स्त्रियाँ हैं’ के द्वारा दर्शाया जाता है। प्रति हजार पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की संख्या का अनुपात लिंगानुपात कहलाता है। भारत में लिंगानुपात लगातार कम हो रहा है। उदाहरण के लिए सन् 1901 में यह लिंगानुपात 972 था जो सन् 2011 में घटकर 943 हो गया।

प्रश्न 2.
भारत में सर्वाधिक तथा न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाले राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य बिहार (1102) तथा न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाला राज्य अरुणाचल प्रदेश (17) है।

प्रश्न 3.
भारत के उच्चतम तथा न्यूनतम जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
सन् 2011 की जनगणना के अनुसार उच्चतम जनसंख्या वृद्धि दर मेघालय (27.82%) तथा न्यूनतम जनसंख्या वृद्धि दर नगालैंड (-0.47%) की है।

प्रश्न 4.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत के चार बड़े राज्यों की जनसंख्या प्रतिशत में लिखें।
उत्तर:

क्र०सं०राज्यजनसंख्या (प्रतिशत में)
1उत्तर प्रदेश16.49 %
2महाराष्ट्र9.29 %
3बिहार8.58 %
4पश्चमी बंगाल7.55 %

प्रश्न 5.
भारत में बच्चों के घटते लिंग अनुपात के दो कारण लिखिए।
उत्तर:

  1. देश में कन्या भ्रूण हत्या की घटनाओं से लिंग अनुपात घटता है।
  2. गर्भवती स्त्री के स्वास्थ्य की ओर ध्यान न देने से बच्चे व माँ के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 6.
जनसंख्या की वृद्धि दर से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
दो समय बिंदुओं के बीच हुए जनसंख्या के परिवर्तन को यदि प्रतिशत में व्यक्त किया जाए तो उसे जनसंख्या की वृद्धि दर कहते हैं। इसे सदैव प्रतिशतता में ही व्यक्त किया जाता है।

प्रश्न 7.
भारत को गाँवों का देश क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
भारत की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण है इसलिए भारत को गाँवों का देश कहा जाता है।

प्रश्न 8.
अब तक भारत में कितनी जनगणनाएँ हो चुकी हैं?
उत्तर:
सन् 2011 तक भारत में 15 व स्वतंत्र भारत में 7 जनगणनाएँ हो चुकी हैं।

प्रश्न 9.
सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या कितने-कितने प्रतिशत थी?
उत्तर:
ग्रामीण जनसंख्या 72.22 प्रतिशत तथा नगरीय जनसंख्या 27.78 प्रतिशत थी।

प्रश्न 10.
जनसंख्या वृद्धि क्या है?
उत्तर:
किसी क्षेत्र विशेष में किसी दिए गए समय में जनसंख्या आकार में होने वाले परिवर्तन को जनसंख्या वृद्धि कहते हैं। यह धनात्मक व ऋणात्मक दोनों हो सकती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 11.
जनसंख्या वितरण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जनसंख्या वितरण उस तरीके को प्रदर्शित करता है जिसके अंतर्गत मानव किसी दिए गए क्षेत्र या स्थल में वितरित होता है। इसका संबंध स्थल से होता है।

प्रश्न 12.
भारत में जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के कोई तीन उपाय बताइए।
उत्तर:

  1. कृषि एवं उद्योगों के क्षेत्र में उत्पादन में वृद्धि करना।
  2. शिक्षा का प्रसार करना।
  3. परिवार नियोजन संबंधी कार्यक्रमों का विस्तार करना।

प्रश्न 13.
2001 की जनगणना के अनुसार सर्वाधिक तथा न्यूनतम लिंगानुपात वाले राज्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
सर्वाधिक : केरल (1058); न्यूनतम : हरियाणा (861)।

प्रश्न 14.
2011 की जनगणना के अनुसार सर्वाधिक तथा न्यूनतम लिंगानुपात वाले केंद्र-शासित प्रदेशों के नाम बताइए।
उत्तर:
सर्वाधिक : पुडुचेरी (1038); न्यूनतम : दमन और दीव (618)।

प्रश्न 15.
आश्रित अनुपात क्या होता है?
उत्तर:
प्रौढ़ों तथा किशोरों और वृद्धों के बीच जनसंख्या के अनुपात को आश्रित अनुपात कहते हैं।

प्रश्न 16.
भारतीय भाषाओं से संबंधित चार भाषा परिवारों के नाम बताइए।
उत्तर:

  1. आग्नेय (आस्ट्रिक) परिवार
  2. चीनी-तिब्बती परिवार
  3. द्रविड़ भाषा परिवार तथा
  4. भारतीय-यूरोपीय (आर्य) परिवार।

प्रश्न 17.
भारत में ईसाई धर्म सबसे पहले कब और कहाँ आया?
उत्तर:
प्रथम शताब्दी में भारत के पश्चिमी तट पर केरल की कोच्चि बंदरगाह पर सीरियाई ईसाइयों ने पहुँचकर ईसाई धर्म का भारत में आरंभ किया।

प्रश्न 18.
सांस्कृतिक विलयन क्या होता है?
उत्तर:
विभिन्न प्रदेशों के बीच सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक गुणों के आपसी संपर्क को सांस्कृतिक विलयन कहा जाता है।

प्रश्न 19.
भारत के सात शास्त्रीय नृत्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
कत्थक, ओडिसी, मणिपुरी, कुचिपुड़ी, कथकली, भरतनाट्यम और मोहिनी अट्टम।

प्रश्न 20.
जनगणना 2011 में भारत की जनसंख्या कितनी थी? विश्व में जनसंख्या एवं क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
वर्ष 2011 में भारतवर्ष की जनसंख्या 121.02 करोड़ थी। जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में दूसरा और क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवाँ स्थान है।

प्रश्न 21.
प्रत्येक उत्तरोत्तर जनगणना में जनसंख्या का घनत्व क्यों बढ़ रहा है?
उत्तर:
भारत की जनसंख्या निरंतर बढ़ रही है, जबकि क्षेत्रफल सदैव निश्चित रहता है। इसलिए प्रत्येक उत्तरोत्तर जनगणना में जनसंख्या का घनत्व बढ़ जाता है।

प्रश्न 22.
जनसंख्या घनत्व क्या है?
उत्तर:
किसी भी प्रदेश की जनसंख्या और उस प्रदेश की भूमि के क्षेत्र फल के पारस्परिक अनुपात को जनसंख्या घनत्व कहते हैं।

प्रश्न 23.
साक्षरता क्या है?
उत्तर:
यद्यपि साक्षरता (Literacy) जनसंख्या का एक सामाजिक पक्ष है तथापि यह जनसंख्या की गुणवत्ता का बोध कराती है। व्यापक रूप से साक्षरता वह ज्ञान है जो लोगों में जागृति लाए। साधारणतया साक्षरता लोगों को किसी भाषा में समझ के साथ लिखने या पढ़ने की योग्यता को कहा जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ जनसंख्या आयोग के अनुसार, “साक्षर वह व्यक्ति है जो किसी भाषा में साधारण संदेश को पढ़, लिख और समझ सकता है।”

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 24.
भारत किन चार प्रमुख धर्मों का जन्म-स्थान है?
उत्तर:

  1. हिंदू धर्म
  2. बौद्ध धर्म
  3. जैन धर्म
  4. सिक्ख धर्म।

प्रश्न 25.
जन-जातियों में सहभागिता दर सबसे अधिक क्यों पाई जाती है?
उत्तर:
जन-जातीय समुदाय एक खुला समाज होता है। इनमें पुरुषों, स्त्रियों और बच्चों की प्रतिष्ठा समान होती है और वे सभी अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार कार्य करते हैं। इसलिए उनमें सहभागिता दर सबसे अधिक होती है।

प्रश्न 26.
देश के किस भाग में ग्रामीण जनसंख्या का अनुपात राष्ट्रीय औसत से अधिक है?
उत्तर:
पंजाब और हरियाणा को छोड़कर उत्तरी भारत के सभी राज्यों, पश्चिमी बंगाल को छोड़कर सभी उत्तर:पूर्वी भागों और मध्य भारत के राज्यों में ग्रामीण जनसंख्या का अनुपात राष्ट्रीय औसत से अधिक है।

प्रश्न 27.
किशोरों, प्रौढ़ों और वृद्धों की आयु सीमाएँ दीजिए।
उत्तर:

  1. किशोर – 15 वर्ष से नीचे।
  2. प्रौढ़ – 15-59 वर्ष।
  3. वृद्ध – 60 वर्ष व इससे ऊपर।

प्रश्न 28.
भारत में आयु पिरामिड की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  1. भारत के आयु पिरामिड का आधार बहुत चौड़ा है जो प्रारंभिक आयु वर्गों तक बना रहता है।
  2. आयु पिरामिड ऊपर की ओर संकरा होता जाता है।

प्रश्न 29.
जनसंख्या संरचना क्या है? अथवा जनसंख्या संघटन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जनसंख्या की भौतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को जनसंख्या की संरचना या संघटन या संयोजन कहा जाता है। जनसंख्या का संयोजन लिंग, आयु, श्रम-शक्ति, आवास, इकाइयों, धर्म, भाषा, वैवाहिक स्थिति, साक्षरता शिक्षा और व्यावसायिक संरचना से होता है।

प्रश्न 30.
सतलुज गंगा के मैदान में जनसंख्या के अधिक गहन होने के कारण बताइए।
उत्तर:
सतलुज गंगा के मैदान में जनसंख्या के अधिक गहन होने के कारण निम्नलिखित हैं-

  1. सर्वाधिक उपजाऊ क्षेत्र
  2. औद्योगिक और नगरीय विकास
  3. सुविधाओं का संकेंद्रण।

प्रश्न 31.
कुल जनसंख्या और जनसंख्या घनत्व में क्या अंतर है?
अथवा
कुल जनसंख्या और जनसंख्या घनत्व क्या है?
उत्तर:
कल जनसंख्या दो समय बिंदुओं के बीच एक क्षेत्र विशेष में रहने वाली जनसंख्या को कुल जनसंख्या कहते हैं। जनसंख्या घनत्व-किसी देश की कुल जनसंख्या और उसके कुल क्षेत्रफल के अनुपात को वहाँ का जनसंख्या घनत्व कहते हैं।

प्रश्न 32.
जनसंख्या की प्रमुख जनांकिकीय विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर:
जनसंख्या संयोजन की विशेषताओं को जनांकिकीय विशेषताएँ कहते हैं। जनांकिकीय विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  1. नगरीय तथा ग्रामीण जनसंख्या
  2. लिंग संरचना
  3. श्रमिक तथा आश्रित जनसंख्या।

प्रश्न 33.
‘सहभागिता दर’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
सहभागिता दर श्रम का अनुपात है। इसे कुल जनसंख्या में कार्यरत जनसंख्या के प्रतिशत द्वारा व्यक्त किया जाता है। सहभागिता अनुपात पुरुषों तथा स्त्रियों के लिए अलग-अलग होता है।

प्रश्न 34.
भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में कितनी भाषाओं को राज्य-भाषा का दर्जा प्राप्त है?
उत्तर:
भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को राज्य-भाषा का दर्जा प्राप्त है-

  1. हिन्दी
  2. तेलुगू
  3. बांग्ला
  4. मराठी
  5. तमिल
  6. उर्दू
  7. गुजराती
  8. मलयालम
  9. कन्नड़
  10. ओड़िया
  11. असमिया
  12. पंजाबी
  13. कश्मीरी
  14. सिंधी
  15. संस्कृत
  16. कोंकणी
  17. मणिपुरी
  18. नेपाली
  19. डोगरी
  20. मैथिली
  21. बोडो
  22. संथाली।

प्रश्न 35.
द्रविड़ भाषा परिवार का विवरण दीजिए। अथवा . द्रविड़ भाषा परिवार की कौन-सी चार मुख्य भाषाएँ हैं?
उत्तर:
द्रविड़ भाषा परिवार में दक्षिणी द्रविड़, मध्य द्रविड़ तथा उत्तरी द्रविड़ भाषाएँ सम्मिलित हैं। दक्षिणी द्रविड़ में मुख्य भाषाएँ तमिल, मलयालम, कन्नड़ तथा गौण भाषाओं में तुल, कुरगी तथा येरुकला सम्मिलित हैं। मध्य द्रविड़ की मुख्य भाषाएँ तेलुगू तथा गोंडी तथा उत्तरी द्रविड़ वर्ग में कुरुख तथा मालती हैं। वास्तव में 96% द्रविड़-भाषी जनसंख्या चार भाषाएँ-(1) तमिल, (2) तेलुगू, (3) कन्नड़, (4) मलयालम बोलती है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 36.
अनुसूचित जातियों का संकेंद्रण देश के जलोढ़ तथा तटीय मैदानों में अधिक है, कारण बताइए।
उत्तर:
भारत की अनुसूचित जाति का अधिकतम संकेंद्रणं सिंधु-गंगा के मैदान तथा भारत के पूर्वी तथा पश्चिमी तटीय मैदानों में पाया जाता है। इसका कारण यह है कि यहाँ समतल उपजाऊ मैदान हैं, पर्याप्त जल-सुविधा है। मिट्टी कोमल तथा उपजाऊ है तथा अनेक प्रकार की फसलों के लिए उपयुक्त जलवायु है। भारत में अधिकतर अनुसूचित जाति के लोग कृषि-श्रमिक हैं और कृषि पर ही उनकी जीविका निर्भर है। अतः जलोढ़ तथा तटीय मैदान में इस जाति का संकेंद्रण अधिक पाया जाता है।

प्रश्न 37.
भारत के लोगों की भाषाओं तथा बोलियों में अत्यधिक विविधता पाई जाती है, कारण बताइए।
उत्तर:
भारत एक विशाल देश है। यहाँ लगभग हर क्षेत्र में विविधता पाई जाती है। भाषाएँ तथा बोलियाँ भी इस संदर्भ में अछूती नहीं हैं। यहाँ विभिन्न युगों में बाहर से मानव प्रजाति का आगमन होता रहा है। वे अपने साथ विभिन्न क्षेत्रों की भाषाएँ तथा बोलियाँ भी साथ लाए थे। अतः यही कारण है कि आज भी भारत के लोगों की भाषाओं और बोलियों में अत्यधिक विविधताएँ पाई जाती हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत के केंद्र-शासित प्रदेशों की जनसंख्या (प्रतिशत में) और घनत्व (व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०) का विवरण दें।
उत्तर:

केंद्र-शासित प्रदेशजनसंख्या (प्रतिशत में)घनत्व (व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०)
1. दिल्ली1.3811,297
2. चण्डीगद0.099,252
3. पुद्धचेरी0.102,598
4. दमन व दीव0.022169
5. लक्षद्वीप0.012,013
6. दादर व नगर हवेली0.03698
7. अंडमान व निकोबार द्वीप-समूह0.0346

प्रश्न 2.
जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले सामाजिक, आर्थिक कारकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
मनुष्य ने अपने क्रियाकलापों, प्रौद्योगिकी ज्ञान और सामाजिक संगठनों द्वारा भौतिक कारकों को अपने हित मे बदलने का प्रयत्न किया है। विभिन्न प्रकार की अर्थव्यवस्थाओं की पोषण क्षमता में अंतर पाया जाता है। प्राथमिक क्रियाकलापों की पोषण क्षमता कम होती है जबकि द्वितीयक और तृतीयक क्रियाकलापों की पोषण क्षमता अधिक होती है। इसलिए नगरीय और औद्योगिक क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक पाया जाता है। इसी प्रकार आधुनिक कृषि संपन्न क्षेत्रों में भी जनसंख्या का घनत्व अधिक पाया जाता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब ऐसे ही कुछ क्षेत्र हैं जहाँ जनसंख्या का उच्च घनत्व पाया जाता है।

प्रश्न 3.
भारत के उत्तरी मैदान में जनसंख्या का घनत्व समवृष्टि का अनुसरण करता है, कारण दीजिए।
उत्तर:
भारत का उत्तरी विशाल मैदान, कृषि की दृष्टि से बहुत संपन्न क्षेत्र है। यह समतल उपजाऊ मैदान है जो नदियों द्वारा लाए गए पदार्थ के जमाव से बना है। कृषि के लिए जल की उपलब्धि एक महत्त्वपूर्ण कारक है।

भारत के उत्तरी मैदान में ज्यों-ज्यों हम पूर्व से पश्चिम की ओर जाएँ, वर्षा की मात्रा कम होती जाती है। भारत के सुदूर उत्तर:पूर्वी राज्यों में 400 से०मी० से अधिक वार्षिक वर्षा होती है तथा यहाँ से पश्चिम की ओर जाने से वर्षा की मात्रा में कमी आती रहती है। पश्चिमी बंगाल, बिहार तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में वर्षा की मात्रा 100 से 200 सें०मी० वार्षिक है। मध्य उत्तर प्रदेश, पश्चिम उत्तर प्रदेश में 60 से 100 सें०मी० तक वर्षा का औसत पाया जाता है।

फिर हरियाणा और दक्षिणी पंजाब में 40 सें०मी० से 60 सें०मी० तथा पूर्वी राजस्थान में 20 से 40 और पश्चिमी राजस्थान में 20 सें०मी० से कम वर्षा का औसत वितरण पाया जाता है। इस प्रकार पूर्व से पश्चिम की ओर वर्षा कम होती जाती है। इसी प्रकार उत्तरी मैदान में जनसंख्या का घनत्व भी इसी क्रम से पश्चिम की ओर कम होता जाता है। अतः कृषि के लिए जल का महत्त्व ही इस प्रकार के उत्तरी मैदान में जनसंख्या के वितरण का कारण है।

प्रश्न 4.
आदर्श जनसंख्या किसी देश के विकास के लिए क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
आदर्श जनसंख्या वह कहलाती है जब कोई देश पूरी तरह सम्पन्न हो तथा लोगों की प्रति व्यक्ति आय अधिक हो । यदि देश में उपलब्ध संसाधनों का प्रयोग संतुलित रूप से हो तो वहाँ के लोग सुखी और सुविधा सम्पन्न होंगे। इसलिए देश में न तो बहुत अधिक जनसंख्या होनी चाहिए न ही बहुत कम। किसी भी देश में आदर्श जनसंख्या, संसाधनों के उपयोग की विधियों और विकास की स्थिति बदलने के साथ-साथ बदलती रहती है। अतः आदर्श जनसंख्या वही है जिसके द्वारा अधिक-से-अधिक मानव कल्याण हो सके।

प्रश्न 5.
“भारत में जनसंख्या का विषम स्थानिक वितरण उसे प्रभावित करने वाले कारकों में घनिष्ठ संबंध कैसे है?” स्पष्ट करें।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या का विषम स्थानिक वितरण देश की जनसंख्या और भौतिक, सामाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक कारकों के बीच घनिष्ठ संबंध प्रकट करता है। जहाँ तक भौतिक कारकों का संबंध है भू-विन्यास, जल की उपलब्धता, जलवायु जनसंख्या के वितरण को निर्धारित करते हैं। परिणामतः उत्तर भारत के मैदानों, डेल्टा प्रदेशों और तटीय मैदानों में जनसंख्या का अनुपात दक्षिण और मध्य भारत के राज्यों के कुछ भागों हिमालय क्षेत्र, उत्तर:पूर्व की अपेक्षा उच्चतरं है फिर भी सिंचाई के विकास, खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता और परिवहन जाल के विकास के कारण विरल जनसंख्या के कुछ क्षेत्र अब मध्यम से उच्च संकेंद्रण के क्षेत्र हो गए हैं। जनसंख्या वितरण के सामाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक कारकों से महत्त्वपूर्ण कारक स्थायी कृषि का उद्भव, विकास, मानव बस्ती के प्रतिरूप, परिवहन के साधन, औद्योगीकरण और नगरीकरण हैं।

प्रश्न 6.
मुख्य, सीमान्त एवं अकर्मक कामगार (श्रमिक) क्या हैं?
उत्तर:
मुख्य कामगार-सन् 1991 की जनगणना के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो एक वर्ष में 183 दिन तक आर्थिक दृष्टि से लाभकारी कार्य में संलग्न रहा हो, मुख्य कामगार (श्रमिक) कहलाता है।

सीमान्त कामगार-जो श्रमिक वर्ष में 183 दिन से कम रोजगार पाता है, वह सीमान्त कामगार अकर्मक कामगार-जो श्रमिक गैर-कामगार होते हैं वे अकर्मक कामगार कहलाते हैं।

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प्रश्न 7.
ग्रामीण जनसंख्या तथा नगरीय जनसंख्या की तुलना करें।
उत्तर:
ग्रामीण जनसंख्या तथा नगरीय जनसंख्या की तुलना निम्नलिखित प्रकार से है-

ग्रामीण जनसंख्यानगरीय जनसंख्या
1. ग्रामीण लोगों का प्रमुख व्यवसाय कृषि तथा पशुपालन है।1. नगरीय लोगों का प्रमुख व्यवसाय निर्माण उद्योग, व्यापार तथा तृतीयक व्यवसाय है।
2. यहाँ के लोगों को आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होती हैं।2. इन्हें लगभग नई आधुनिक सुविधाएँ; जैसे परिवहन, चिकित्सा, शिक्षा तथा मनोरंजन के साधन आदि उपलब्ध होते हैं।
3. ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक नहीं होता।3. नगरीय क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है।

प्रश्न 8.
उत्पादक और आश्रित जनसंख्या में क्या अंतर है?
अथवा
कार्यशील आयुवर्ग व प्रजनक आयुवर्ग में क्या अंतर है?
उत्तर:
उत्पादक और आश्रित जनसंख्या में निम्नलिखित अंतर हैं-

उत्पादक जनसंख्याअभ्रित जनसंख्या
1. उत्पादक जनसंख्या लाभदायक आर्थिक क्रियाओं में काम करती है।1. आश्रित जनसंख्या, आर्थिक क्रियाओं में विशेष योगदान नहीं देती ।
2. ऐसे लोगों के समुदाय को श्रमिक बल कहा जाता है।2. ऐसे लोगों के समुदाय को अश्रमिक बल कहा जाता है।
3. इस वर्ग में 15 से 59 वर्ष की आयु के लोग आते हैं।3. इस वर्ग में 15 वर्ष से कम तथा 60 वर्ष से ऊपर की आयु के लोग आते हैं।
4. ये लोग स्वयं परिश्रम करके अपना जीवन-निर्वाह करते हैं।4. ये लोग बेरोज़गार होते हैं तथा श्रमिक लोगों पर आश्रित रहते हैं।

प्रश्न 9.
भारत में लिंगानुपात बहुत कम है, कारण बताएँ।
उत्तर:
भारत में लिंगानुपात बहुत कम है। इसके निम्नलिखित कारण हैं-

  1. भारत में लड़कों की अपेक्षा लड़कियों के स्वास्थ्य, शिक्षा आदि पर कम ध्यान दिया जाता है, जिसके कारण स्त्रियों की प्रायः मृत्यु हो जाती है।
  2. भारत के कई भागों में बाल-विवाह की प्रथा प्रचलित है, जिसके कारण छोटी आयु में, प्रायः प्रसूति काल में ही लड़कियों की मृत्यु हो जाती है।
  3. दहेज जैसी कुप्रथा के कारण कई स्त्रियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।
  4. आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति से लोग पहले ही लिंग का पता लगा लेते हैं तथा पुत्र की लालसा में स्त्री-लिंग होने पर गर्भ गिरा देते हैं।

प्रश्न 10.
चंडीगढ़ में लिंगानुपात कम पाया जाता है। कारण बताइए।
उत्तर:
चंडीगढ़ का लिंग अनुपात 773 है अर्थात् हर 1,000 पुरुषों के पीछे 773 स्त्रियाँ हैं। यह अनुपात देश के सभी केंद्र-शासित प्रदेशों में सबसे कम है। इसका मुख्य कारण नगर की प्रकृति है। यह पंजाब तथा हरियाणा की राजधानी भी है। यहाँ बड़ी संख्या जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन में वेतनभोगी लोग सरकारी तथा दूसरे कार्यालयों में काम करते हैं। इनमें कुछ दैनिक यात्री तथा कुछ अस्थायी तौर पर चंडीगढ़ में रहते हैं तथा चंडीगढ़ की जनसंख्या में शामिल कर लिए जाते हैं। ऐसे लोगों में पुरुषों की संख्या अधिक होती है। इस कारण चंडीगढ़ में लिंगानुपात बहुत कम हो गया है। ये लोग अपने परिवारों को गाँवों में ही छोड़कर आते हैं।

प्रश्न 11.
भारतीय जनसंख्या के घनत्व का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या का घनत्व 1901 में 77 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० से बढ़कर 2001 में 334 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० . हो गया। इस प्रकार विगत एक शताब्दी में 257 व्यक्ति वर्ग कि०मी० की उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में वर्तमान में जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। भारत में जनसंख्या घनत्व को निम्न तालिका में दर्शाया गया है
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प्रश्न 12.
सन् 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना के मुख्य लक्षणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
2001 की जनगणना के अनुसार भारत की व्यावसायिक संरचना के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं-

  1. सन् 1991 की तुलना में देश में किसानों की जनसंख्या घटी है। 1991 में भारत में किसानों की जनसंख्या 38.41 प्रतिशत थी जबकि 2001 में वो घटकर 31.71 प्रतिशत रह गई।
  2. किसान (31.71%) तथा कृषि मजदूर (26.69%) संयुक्त रूप से (58.4%) साबित करते हैं।
  3. कृषि सेक्टर में श्रमिकों के अनुपात में उतार आने से द्वितीयक और तृतीयक सेक्टर में सहभागिता दर बढ़ी है।
  4. इससे श्रमिकों की खेत आधारित रोजगारों पर निर्भरता से गैर-खेत आधारित रोजगारों पर निर्भरता बढ़ गई है।
  5. इससे द्वितीयक क्षेत्र की खेती में न खप सकने वाली श्रम शक्ति को अधिक रोजगार न दे पाने की असमर्थता भी उजागर होती है।
  6. यदि लिंग के अनुसार देखा जाए तो 72% स्त्रियाँ कृषि कार्यों में लगी हैं, जबकि पुरुष केवल 53% ही हैं।
  7. गैर कृषि कार्यों में 28% स्त्रियाँ तथा 52.16% पुरुष कामगार हैं।
  8. घरेलू उद्योगों का महत्त्व भी बढ़ने लगा है, 2001 के अनुसार इनकी संख्या 5% हो गई है।
  9. विनिर्माण, व्यापार, उद्योग, परिवहन, संचार, भंडारण तथा अन्य गैर-कृषिक कार्यों में देश के लगभग 42% कामगार लगे हुए हैं।
  10. तृतीयक कार्यों का अधिक अनुपात मुख्यतः नगरीकृत जिलों तक सीमित है।

प्रश्न 13.
भारत के लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं को कितने भाषा परिवारों में बांटा गया है? उल्लेख करें।
उत्तर:
भारत में बोली जाने वाली भाषाओं को निम्नलिखित भाषाई-परिवारों में बांटा गया है-

  • आस्ट्रिक भाषा परिवार
  • द्रविड़ भाषा परिवार
  • चीन-तिब्बती परिवार
  • भारतीय यूरोपीय परिवार (आय)।

भारत में अधिकतर आर्य परिवार की बोली पाई जाती है। इनमें हिंदी बोलने वालों की संख्या सबसे अधिक है। हिंदी भाषा बोलने वाले निम्नलिखित हैं

  • हरियाणा
  • हिमाचल प्रदेश
  • राजस्थान
  • बिहार
  • मध्य प्रदेश
  • उत्तर प्रदेश
  • दिल्ली।

भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा हिंदी है जो देवनागरी लिपि में लिखी जाती है।

प्रश्न 14.
भारत की धार्मिक विविधता में भी एकता है, स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत प्राचीन समय से एक महान् देश रहा है। यहाँ विभिन्न प्रकार के धर्मों ने जन्म लिया। इस समय देश में सात धर्म पाए जाते हैं। हिंदू, सिक्ख, जैन तथा बौद्ध धर्मों ने इसी देश में जन्म लिया। मुस्लिम तथा ईसाई धर्म के अनुयायी भी भारत में काफी समय से रह रहे हैं। पारसी धर्म के लोग विदेशी हैं। इन सब धर्मों ने भारतीय संस्कृति, कला, रीति-रिवाज तथा बस्तियों आदि को बहुत प्रभावित किया। इस प्रकार धर्मों ने भारत में विविधता प्रदान की है, परंतु भारत एक धर्म-निरपेक्ष देश है, जिसने विभिन्न धर्मों के अनयायियों को एकता के सूत्र में बांध रखा है। सभी लोग मिल-जुलकर रहते हैं। एक ही स्थान पर मंदिर, गुरुद्वारा तथा मस्जिद पास-पास पाए जाते हैं तथा उसी जगह के रहने वाले लोग अपने-अपने इष्ट देवता की आराधना करते हैं। ईद, क्रिसमिस आदि के दिन लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं। यह सब एकता का प्रतीक है।

प्रश्न 15.
भारत में जन-जातियों का वितरण असमान है, क्या कारण है?
उत्तर:
भारतीय जन-जाति प्रायः अनुसूचित जातियों में पाई जाती है। सन् 1991 की जनगणना के अनुसार भारत में जन-जातियों की जनसंख्या 6 करोड़, 77 लाख थी जो कुल भारतीय जनसंख्या का 8% थी, परंतु भारत में इनका वितरण बहुत ही असमान है। इनका अधिकतर संकेंद्रण मिजोरम, नगालैंड, मेघालय के पहाड़ी तथा जंगली क्षेत्रों में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त ये मध्य प्रदेश, बिहार, उड़ीसा आदि राज्यों के ऊबड़-खाबड़ तथा जंगली इलाकों में अधिकतर पाए जाते हैं।

इसका कारण यह है कि पहाड़ी तथा जंगली भाग इन जातियों की सांस्कृतिक मान्यताएँ रहे हैं। दूसरे, ये लोग अधिकतर वहाँ रहते हैं जो क्षेत्र कृषि के लिए अनुकूल नहीं हैं। अतः इनका व्यवसाय तथा जीवन-पद्धति का संबंध इनके निकट के प्राकृतिक वातावरण के काफी निकट होता है। ये जन-जातियाँ कृषि-कार्य करना पसंद करती हैं, इसलिए ये लोग कृषि के उन्नत क्षेत्रों से दूर-दराज के पहाड़ी तथा जंगली क्षेत्रों को स्थानांतरण कर गए हैं। इन्हीं कारणों से इन लोगों का वितरण बहुत ही असमान है।

प्रश्न 16.
उत्तर के जलोढ़ मैदानों में अनुसूचित जातियों के संकेंद्रण की प्रवृत्ति प्रबल क्यों है?
उत्तर:
भारत में अनुसूचित जातियों का संकेंद्रण उत्तर के जलोढ़ मैदानों तथा तटीय मैदानों में है। उत्तरी मैदान में पश्चिमी बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब तथा राजस्थान में इनकी संख्या लगभग चार करोड़ है। पूर्वी तथा पश्चिमी तटीय मैदानों में उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र तथा केरल में अनुसूचित जाति के लोगों की संख्या लगभग दो करोड़ है। इसके निम्नलिखित कारण हैं
(i) इन प्रदेशों में गहन कृषि की जाती है। इसलिए अधिक मजदूरों की आवश्यकता होती है।

(ii) अनुसूचित जाति के अधिकतर लोग खेतीहर मजदूर हैं। यहाँ की उपयुक्त जलवायु, उपजाऊ मिट्टी तथा पर्याप्त मात्रा में जल के कारण इन क्षेत्रों में कृषि का विकास अधिक हआ है। इन श्रमिकों को यहाँ रोजगार मिल जाता है।

(iii) यहाँ आर्थिक विकास अधिक है। इसलिए अनुसूचित जाति के लोग चमड़ा शोधन उद्योग तथा जूता निर्माण उद्योग आदि में कार्यरत हैं।

प्रश्न 17.
“भारत का जन-जातीय समुदाय देश की नृ-जातीय विविधताओं का एक रोचक चित्र प्रस्तुत करता है।” इस कथन पर अपने विचार दीजिए।
उत्तर:
जन-जातीय जनसंख्या भारत की जनसंख्या का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। प्राचीन समय में बाहर से आने वाले प्रजाति समूह द्वारा जो लोग बाहर दूर-दराज जंगली क्षेत्र में खदेड़ दिए गए थे, वे ही आज जन-जातीय जनसंख्या कहलाती हैं। इनको आदिवासी कहते हैं। भारत की वर्तमान जनसंख्या में सांस्कृतिक तथा जातीय विविधता पूर्ण रूप से दिखाई देती है। इसका मुख्य कारण भारतीय महाद्वीप में लंबे समय से मनुष्यों के आबाद होने की प्रक्रिया है। अलग-अलग समयों में अलग-अलग मानव समूह भारत में आए तथा विभिन्न क्षेत्रों में स्थानांतरित होते रहे तथा आपसी तथा स्थानीय जातियों के आपस में मिश्रण के कारण अलग से संस्कृति का जन्म हुआ। विभिन्न जातियों में सामाजिक तथा सांस्कृतिक मिलन होता रहा। प्रत्येक जाति-समूह ने अपनी अलग विशेषता प्राप्त की। इसलिए भारतीय जातियों में विविधताएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 18.
आयु संरचना क्या है? आयु वर्ग की दृष्टि से भारत की जनसंख्या को वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर:
आयु संरचना-किसी दी गई जनसंख्या में विभिन्न आयु वर्ग की जनसंख्या के मिलने वाले अनुपात को आयु संरचना कहते हैं। आयु वर्ग की दृष्टि से जनसंख्या का वर्गीकरण-आयु वर्ग की दृष्टि से भारत की जनसंख्या को निम्नलिखित तीन वर्गों में विभाजित किया गया है
1. बाल आयु वर्ग इसमें 0 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को सम्मिलित किया जाता है। सन् 2011 में भारत की कुल जनसंख्या में बाल आय वर्ग का प्रतिशत 29.5 रहा। यह आय वर्ग आश्रित आय वर्ग होता है।

2. युवा आयु वर्ग इसमें 15-59 वर्ष के आयु समूह को सम्मिलित किया गया है। सन् 2011 में भारत की कुल जनसंख्या में युवा वर्ग का प्रतिशत 62.5 रहा। यह वर्ग देश को विकास की ओर अग्रसर करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

3. वृद्ध आयु वर्ग इसमें 60 वर्ष से अधिक के आयु समूह को सम्मिलित किया गया है। सन् 2011 में भारत की कुल जनसंख्या में वृद्ध वर्ग का प्रतिशत 8 रहा। किसी भी देश के इस वर्ग की अधिक जनसंख्या अधिक महत्त्वपूर्ण नहीं होती।

प्रश्न 19.
भारत में तीव्र जनसंख्या वृद्धि के काल को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
भारत में जनसंख्या वृद्धि के इतिहास को स्पष्ट करें।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या वृद्धि के इतिहास/काल को हम निम्नलिखित तीन युगों में बांट सकते हैं
1. जनसंख्या वृद्धि की धीमी गति का युग-यह समय सन् 1921 से पहले का समय है। सन् 1911 से 1921 के दशक में जनसंख्या में कमी देखने को मिली है। अनुमान है कि सन् 1891 से 1921 के बीच के 30 वर्षों में केवल 6% जनसंख्या ही बढ़ी है।

2. जनसंख्या वृद्धि का मध्यम गतिकाल यह सन् 1921 से 1951 के बीच का काल है। इस काल में सन् 1921 से पहले के दशकों की अपेक्षा थोड़ी तेज गति से वृद्धि हुई, परंतु यह मध्यम गति से बढ़ी।

3. जनसंख्या का तीव्र गति से बढ़ने का युग-सन् 1951 से 1991 के बीच का काल तीव्र गति से जनसंख्या वृद्धि का काल कहलाता है। सन् 1951 से 1981 के बीच भारत की जनसंख्या लगभग दुगुनी और 1991 में यह ढाई गुना हो गई। हालांकि मामूली-सी कमी 1991 में वृद्धि-दर का 24.75% से घटकर 23.50% हो जाना था। सन् 2001 में वृद्धि दर 21.34% एवं सन् 2011 में वृद्धिं-दर 17.64% आंकी गई।

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
विगत वर्षों में भारत में जनसंख्या वृद्धि की प्रवृत्तियों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
वृद्धि प्राकृतिक है तथा प्रवासी वृद्धि बहुत कम है। अखिल भारतीय स्तर पर सर्वप्रथम सन् 1872 में जनगणना हुई थी, जो देश के अनेक भागों में की गई अलग-अलग जनसंख्या का जोड़ था। सन् 1881 में नियमित जनगणना का आरंभ हुआ, जो प्रत्येक 10 वर्ष के पश्चात् होती है। सन् 1981 की जनगणना के अनुसार, भारत की जनसंख्या 68.5 करोड़ थी। वर्तमान समय में लगभग 1.3 मिलियन व्यक्ति प्रति वर्ष मर जाते हैं। इस प्रकार भारत की वृद्धि दर 15 मिलियन व्यक्ति प्रति वर्ष है जो ऑस्ट्रेलिया की जनसंख्या के बराबर है अर्थात् जनसंख्या की दृष्टि से भारत में एक ऑस्ट्रेलिया प्रतिवर्ष जुड़ जाता है। जनसंख्या वृद्धि निम्नलिखित दो प्रकार की होती है (1) प्राकृतिक वृद्धि-दर, (2) वास्तविक वृद्धि-दर।

भारत की जनसंख्या वृद्धि के इतिहास पर नज़र डालने पर बहुत ही आश्चर्यजनक बातें हमारे सामने आती हैं। अनुमानतः सन् 1600 में भारत की कुल जनसंख्या 10 करोड़ थी। सन् 1800 में यह लगभग 12 करोड़ थी। इसका मतलब यह हुआ कि 200 वर्षों में भारत की जनसंख्या केवल 2 करोड़ बढ़ी, लेकिन सन् 1871 में यह जनसंख्या दोगुनी अर्थात् 25.5 करोड़ हो गई। सन् 1800 से 1871 अर्थात् 71 वर्ष का समय तीव्र जनसंख्या वृद्धि का समय था।

नीचे दी गई तालिका से भारत में जनसंख्या वृद्धि को दशकों में बांटकर रखा गया है-

दशकीय वृद्धि
जनगणना वर्षजनसंख्यानिरपेक्षप्रतिशत
1901238,396,327
1911252,093,39013,697,0635.75
1921251,321,213-772,177(-) 0.31
1931278,977,23827,656,02511.00
1941318,660,58039,683,34214.22
1951361,088,09042,427,51013.31
1961439,234,77178,146,68121.51
1971548,159,625108,924,88124.80
1981683,329,097135,169,44524.66
1991846,302,688162,973,59123.87
20011,028,737,436182,307,64021.54
20111,210,726,932181,583,09417.64

स्लोत : भारत – 2016

20वीं शताब्दी में भारत की जनसंख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। सन् 1901 में भारत की कुल जनसंख्या 23,83,96,327 व्यक्ति थी, जो 1911 में बढ़कर 25,20,93,390 व्यक्ति हो गई। इस तरह से 1901-11 के दशक में 1,36,97,063 व्यक्तियों की वृद्धि भारत में हुई, जो 5.75% थी। सन् 1921 में, देश की जनसंख्या 25,13,21,213 व्यक्ति रह गई। 1911-21 के दशक को अपवाद माना जाए, जिसमें 7,72,177 व्यक्ति अर्थात् संख्या में 0.31% की कमी हुई। 1921-31 के दशक में 11.00% की वृद्धि हई। 1931-41 में 14.22% वृद्धि देखने को मिली। 1941-51 के दशक में 13.31% वृद्धि हुई। 1951-61 में 21.64% वृद्धि तथा सन् 1971 में 24.80% वृद्धि हुई, जो 20वीं शताब्दी की सर्वाधिक वृद्धि मानी जाती है। सन् 1981 में 24.66 तथा सन् 1991 में 23.8% है, जो सन् 1981 की तुलना में 0.81% कम है। सन् 2011 में जनसंख्या वृद्धि दर 17.64 है, जो सन् 2001 की तुलना में 3.9% कम है।

प्रश्न 2.
भारत में जनसंख्या के असमान वितरण के कारणों का उल्लेख कीजिए। अथवा भारत में जनसंख्या के वितरण की असमानता के कारणों का वर्णन करें।
अथवा
“भारत में जनसंख्या का वितरण बहुत असमान है।” उचित उदाहरण देते हुए इस कथन की व्याख्या करें।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या का प्रादेशिक वितरण बहत-ही असमान पाया जाता है। सन 2011 की जनगणन 121,01,93,422 व्यक्ति देश के सभी भागों में समान रूप से निवास नहीं करते अर्थात् वे समान रूप से वितरित नहीं हैं। एक ओर तो केरल व पश्चिम बंगाल में जनसंख्या का घनत्व 1029 व्यक्ति वर्ग कि०मी० है या उससे अधिक है, जबकि कश्मीर में यह 124, अरुणाचल प्रदेश में मात्र 17 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। गंगा के मैदानी भाग, बंगाल का डेल्टा व मालाबार तट में जनसंख्या अधिक है, जबकि थार के मरुस्थल, कश्मीर की ऊंची घाटियों व रण के दलदल में यह विरल है। भारत में जनसंख्या का घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। दिल्ली में जनसंख्या का घनत्व 11,297, चंडीगढ़ में 9252, लक्षद्वीप में 2013 तथा पुडुचेरी में 2598 है, जबकि 100 से कम घनत्व वाले प्रदेशों की संख्या भी 4 है।

भारत में जनसंख्या के असमान वितरण के कारण भौतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, राजनीतिक, सामाजिक व धार्मिक कारण हैं। भारत में औद्योगिक विकास अभी अपनी यवावस्था में है। औद्योगिक विकास के साथ-साथ जनसंख्या में है। नए औद्योगिक स्थानों की ओर लगातार जनसंख्या का स्थानांतरण हो रहा है क्योंकि जनसंख्या का घनत्व आर्थिक उत्पादन से ही सबसे अधिक प्रभावित होता है।

जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन भारत में जनसंख्या की अधिकता मैदानी भागों में होने का कारण समतल धरातल, अनुकूल जलवायु, उर्वरा मिट्टियाँ, वर्षा अथवा सिंचाई के साधन तथा सघन कृषि, यातायात सुविधाएँ, एक ही वर्ष में कई फसलों का होना, सूती-ऊनी वस्त्र, चीनी, कागज आदि उद्योगों का पाया जाना है। देश की 60% जनसंख्या विस्तृत उपजाऊ मैदान में जहाँ कृषि की सुविधाएँ अधिक हैं तथा समुद्र तल से ऊंचाई 200 कि०मी० कम हो जाती है। इन प्रदेशों में घनत्व 300 से 800 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० है। उत्तरी मैदान में जनसंख्या का वितरण अधिक होने के कारण-

  • वर्षा, उपजाऊ मिट्टी जो कि नदियों द्वारा बहाकर लाई जाती है
  • वर्षा की मात्रा पर्याप्त व सिंचाई की सुविधा का होना
  • जलवायु का अच्छी होना
  • याताया के साधनों की उपलब्धता
  • उद्योगों का विकास होना
  • व्यापार के लिए समुचित सुविधाएँ होना है।

दक्षिण के पठार में जनसंख्या का घनत्व मध्यम है। इन पठारी प्रदेशों में जनसंख्या का विक्षेपण विषम धरातल पर कम तथा नदी-घाटियों व उच्च समतल मैदानी भागों पर अधिक है। गुजरात व काठियावाड़, नर्मदा घाटी, आंध्र में कर्नाटक, मालवा का पठार, छत्तीसगढ़ का मैदान, छोटा नागपुर का पठार, थार, आंध्र में जनसंख्या का घनत्व सामान्य है। दक्षिण के पठार में जनसंख्या का कम घनत्व, असमान धरातल, सीमित कृषि क्षेत्र, साधारण वर्षा, सिंचाई के साधनों की कमी, यातायात के साधनों का अभाव होने के कारण है। यहाँ जनसंख्या वितरण व घनत्व दोनों मध्यम हैं।

  • भारत के पूर्वी व पश्चिमी तट घने बसे होने का कारण पठारों की नदियों द्वारा बहाकर लाई गई मिट्टी (कांप मिट्टी) से बना होना है
  • शीतकाल व ग्रीष्मकाल में पर्याप्त वर्षा की मात्रा
  • समुद्र के निकट होने के कारण कम जलवायु
  • चावल का अधिक उत्पादन, जो अन्य फसलों की तुलना में सघन घनत्व समेटे रहता है
  • यातायात व उद्योगों का विकास होना है।

भारत के सीमा प्रांतीय भागों में विरल जनसंख्या पाई जाती है। इसका कारण पाकिस्तान सीमा के साथ कच्छ का दलदल, थार का मरुस्थल व कश्मीर के पर्वतीय भागों में उबड़-खाबड़ धरातल तथा जलवायु के कारण ही जनसंख्या न्यून व दूर-दूर तक बिखरी हुई है। उत्तर में हिमालय के कारण पूर्व में अरुणाचल, नगालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम के पहाड़ी वनों से युक्त जंगलों में जनसंख्या कम है। यहाँ पर कृषि भूमि की कमी, यातायात के साधनों में कठिनाई तथा औद्योगिक विकास के न होने से , यहाँ की जनसंख्या का वितरण कम है।

प्रश्न 3.
भारत में लिंग अनुपात के वितरण प्रतिरूपों का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत में लिंग अनुपात की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
लिंगानुपात को प्रति एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है। भारत में लिंगानुपात महिलाओं के लिए हमेशा ही प्रतिकूल रहा है। बीसवीं सदी के शुरू में यह अनुपात 972 था और 1941 के बाद इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई। 1901 से 2011 तक 2001 के मुकाबले 2011 में लिंगानुपात में 10 अंकों की बढ़त दर्ज की गई है। हमारे देश का लिंगानुपात विकसित देशों की तुलना में बहुत कम है। संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया तथा ब्रिटेन आदि देशों में प्रति हजार पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या अधिक है।

भारत में लिंग अनुपात की महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यहाँ सन् 1901 के बाद लगातार लिंग अनुपात घटता जा रहा है जो निम्न तालिका से सिद्ध हो जाता है। केवल 1951 तथा 1981 के वर्ष अपवाद हैं।
तालिका : भारत में लिंगानुपात
(1,000 पुरुषों के पीछे स्त्रियों की संख्या)

जनगणना वर्षलिंगानुपातजनगणना वर्षलिंगानुपात
19019721961941
19119641971930
19219551981934
19319501991927
19419452001933
19519462011943

भारत में केवल केरल राज्य का अनुपात स्त्रियों के पक्ष में है। केंद्र-प्रशासित प्रदेशों दादरा तथा नगर हवेली, दमन तथा दीव, लक्षद्वीप और पुडुचेरी में लिंग अनुपात भारत के औसत अनुपात से अधिक है। केरल में 1,000 पुरुषों के पीछे 1,084 स्त्रियाँ हैं। शेष देश के हर राज्य में स्त्रियों की संख्या पुरुषों से कम है। सबसे कम लिंगानुपात हरियाणा का है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ 1000 पुरुषों के पीछे 877 महिलाएं हैं।

भारत में नगरीय जनसंख्या का लिंगानुपात बहुत ही कम है। भारत के अधिकांश उत्तरी राज्यों में लिंगानुपात में पुरुषों की प्रमुखता पाई जाती है। 2011 की जनगणना के अनुसार देश के लगभग आधे राज्यों में लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत से अधिक है। ये सभी या तो भारत के तटीय राज्य हैं या पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित हैं।

भारत में लिंगानुपात की महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि जिला स्तर पर, दिल्ली तथा इसके आस-पास के क्षेत्रों; जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, उत्तर:पश्चिमी मध्य प्रदेश में लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत से कम है। उत्तर प्रदेश के पहाड़ी जिलों, हिमाचल प्रदेश, दक्षिण-पूर्वी तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा तथा आंध्र प्रदेश के अधिकतर जिलों में स्त्रियों की संख्या पुरुषों से अधिक है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 4.
भारत में जनसंख्या वृद्धि की प्रावस्थाओं का वर्णन करें।
अथवा
सन् 1901 से 2011 तक भारत में जनसंख्या वृद्धि की प्रावस्थाओं व कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत की जनसंख्या के दोनों दशकीय और वार्षिक वृद्धि-दर बहुत ऊँचे हैं और समय के साथ निरन्तर बढ़ रहे हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या की दशकीय वृद्धि-दर 17.64 प्रतिशत व वार्षिक वृद्धि-दर 2.4 प्रतिशत है। वृद्धि की इस वर्तमान दर से अनुमान लगाया गया है कि अगले लगभग 30-50 वर्षों में देश की जनसंख्या दुगुनी हो जाएगी और यहाँ तक कि चीन की जनसंख्या को भी पार कर जाएगी।

भारत में दशकीय वृद्धि-दर
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन 2
भारत में जनसंख्या की वृद्धि वार्षिक जन्म-दर, मृत्यु-दर तथा प्रवास की दर के कारण हुई है और यह वृद्धि विभिन्न प्रवृत्तियों और प्रावस्थाओं को दर्शाती है। भारत के जनांकिकीय इतिहास को चार सुस्पष्ट प्रावस्थाओं में बाँटा जा सकता है

प्रावस्था ‘क’ – 1901 से 1921 की अवधि को भारत की जनसंख्या की वृद्धि की रूद्ध अथवा स्थिर प्रावस्था (Stagnant phase) कहा जाता है, क्योंकि इस अवधि में वृद्धि-दर अत्यन्त निम्न थी। 1911-21 के दौरान जनसंख्या बढ़ने के स्थान पर 0.31 प्रतिशत कम हो गई।

कारण – इस दौरान जनसंख्या घटने का प्रमुख कारण बीमारियाँ और महामारियाँ थीं। सन् 1918 में अकेले इंफ्लूएंजा से ही देश में सवा करोड़ लोग मर गए।

  • स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाएँ निम्न स्तरीय थीं।
  • प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) में हजारों भारतीय काम आए।
  • लगातार हो रही फसल की खराबी से भी अनेक लोग भुखमरी का शिकार हो गए। भोजन और अन्य आधारभूत जरूरतों की वितरण प्रणाली अदक्ष (Inefficient) थी।
  • इन सभी कारणों के साथ अधिकतर लोगों की निरक्षरता भी मोटे तौर पर उच्च जन्म और मृत्यु-दरों के लिए उत्तरदायी थी।

प्रावस्था ‘ख’ – 1921-1951 के दशकों को जनसंख्या की स्थिर वृद्धि (Steady growth of population) की अवधि के रूप में जाना जाता है, क्योंकि 1921 के बाद भारत की जनसंख्या में सामान्य वृद्धि होने लगी।

कारण-
(i) इस अवधि में चिकित्सा विज्ञान में हुई उन्नति के फलस्वरूप चेचक, हैज़ा, प्लेग, निमोनिया तथा इंफ्लूएंजा जैसी महामारियों पर काफी हद तक काबू पा लिया गया। इससे मृत्यु-दर में उल्लेखनीय कमी आई।

(ii) परिवहन के साधनों के विकास ने – सामग्री पहुंचाने का काम आसान कर दिया। इससे भी मृत्यु-दर को घटाने में सफलता मिली।

(iii) कृषीय अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ। परिणामस्वरूप अशोधित जन्म-दर ऊँची बनी रही। इससे पिछली प्रावस्था की तुलना में वृद्धि-दर . उच्चतर हुई। 1920 के दशक की महान आर्थिक मन्दी और द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि में यह वृद्धि-दर प्रभावशाली थी।

(iv) जनसंख्या की वृद्धि-दर सन् 1941 में 1.42 प्रतिशत से घटकर सन् 1951 में 1.33 प्रतिशत रह गई। इसका कारण देश के विभाजन के फलस्वरूप लाखों लोगों का प्रवास (Migration) और अनेक लोगों का मारा जाना था इसे मृत्यु-प्रेरित वृद्धि कहा गया है।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन 3
प्रावस्था ‘ग’-1951-1981 के दशकों को भारत में जनसंख्या-विस्फोट (Population Explosion) की अवधि के रूप में जाना जाता है। यह देश में मृत्यु-दर में तीव्र ह्रास और जनसंख्या की उच्च प्रजनन-दर के कारण हुआ। इस दौरान जनसंख्या की औसत वार्षिक वृद्धि-दर 2.2 प्रतिशत तक ऊँची रही और जनसंख्या दुगुनी हो गई।

कारण-
(i) स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद यही वह अवधि थी जिसमें केन्द्रीकृत नियोजन प्रक्रिया (Centralised Planning Process) के माध्यम से विकासात्मक कार्यों को आरंभ किया गया। कृषि और उद्योग खण्डों के विकास, रोज़गार में वृद्धि, चिकित्सा सुविधाओं की प्रगति और विस्तार तथा जन्म और मृत्यु-दरों पर नियन्त्रण; जैसी उपलब्धियों के कारण जनसंख्या तेजी से बढ़ने लगी।

(ii) साठ के दशक में देश में आई हरित-क्रान्ति से उपजी खाद्यान्नों में आत्म-निर्भरता से अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ। सुनिश्चित भोजन ने जीवन की दशाओं को बेहतर किया जिससे जनसंख्या की बेतहाशा वृद्धि हुई।

(iii) इसी दौरान तिब्बतियों, नेपालियों, बांग्लादेशियों और पाकिस्तान से आने वाले लागों के बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय प्रवास के कारण भी भारत की जनसंख्या में बढ़ोतरी हुई।

(iv) सन् 1971 के पश्चात्, शिक्षा के प्रचार-प्रसार के प्रभाव तथा चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से जनसंख्या की वृद्धि-दर में कुछ-कुछ कमी आने लगी। सन् 1981 में जनसंख्या की वृद्धि-दर हल्की-सी घटकर 24.66 प्रतिशत रह गई, इसे प्रजनन प्रेरित वृद्धि कहा गया है।
भारत : दशकीय जन्म-दर, मृत्यु-दर और प्राकृतिक वृद्धि-दर, 1901-2011

दशकअशोधित जन्म-दर(प्रति 1000)अशोधित मृत्यु-दर(प्रति 1000)प्राकृतिक वृद्धि-दर(प्रति 1000)
1901-191149.242.66.6
1911-192148.147.20.9
1921-193146.436.210.1
1931-194145.937.214.0
1941-195139.927.412.5
1951-196141.722.818.9
1961-197141.219.022.3
1971-198137.21521.0
1981-199129.59.820.1
1991-200126.29.017.0
2001-201125.08.116.9

[Source : Census of India, Sample Registration System (SRS) Bulletin, April, 2011]
प्रावस्था ‘घ’-1981 के बाद वर्तमान तक देश की जनसंख्या वृद्धि-दर यद्यपि ऊँची बनी रही, परन्तु धीरे-धीरे मन्द-गति से घटने लगी। इसका तात्पर्य यह नहीं कि देश की कुल अथवा निरपेक्ष जनसंख्या घट गई। इसका अभिप्राय केवल यह है कि जनसंख्या बढ़ने की गति पर थोड़े ब्रेक लग गए। लोग तो बढ़े लेकिन कम गति से।

कारण-

  • जनसंख्या की ऐसी वृद्धि के लिए अशोधित जन्म-दर की अधोमुखी प्रवृत्ति (Downward Trend) को उत्तरदायी माना जाता है।
  • देश में विवाह के समय औसत आयु में वृद्धि, जीवन की गुणवत्ता में बढ़ोतरी तथा स्त्री-शिक्षा में सुधार से भी जनसंख्या की वृद्धि-दर में कमी के निश्चित संकेत मिले हैं।

प्रश्न 5.
भारत में ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या के वितरण का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत में ग्रामीण जनसंख्या के वितरण का वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत में नगरीय जनसंख्या का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आवास के आधार पर भारतीय जनसंख्या को दो वर्गों में बांटा गया है-

  1. ग्रामीण जनसंख्या तथा
  2. नगरीय जनसंख्या।

ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या की अपनी अलग-अलग विशेषताएँ होती हैं तथा इनको अलग-अलग व्यवसाय संरचना, जीवन-पद्धति आदि के आधार पर पहचाना जा सकता है। गांव के सभी लोग साधारण, सामाजिक संबंधों से ओत-प्रोत तथा अधिकतर कृषि-कार्यों में संलग्न रहते हैं। उनके आचार-विचार तथा सांस्कृतिक दृष्टिकोण नगर में रहने वाले लोगों से भिन्न होते हैं। इसके विपरीत, नगरों में रहने वाले लोग उद्योग तथा व्यापार में संलग्न रहते हैं। इनके आपसी सामाजिक संबंध हैं तथा इनका दृष्टिकोण अपेक्षतया भिन्न होता है।

भारत की अधिकांश जनसंख्या गांवों में रहती है। यहाँ आवासीय इकाइयाँ छोटी-छोटी झोंपड़ियाँ, छोटे-छोटे कच्चे या पक्के मकानों के समूह तथा छोटी बस्तियाँ हैं, जहाँ 30 से 50 लोगों का समुदाय रहता है। कुछ बड़े गांव भी होते हैं, जहाँ कई सौ से कई हज़ार तक लोग निवास करते हैं। चाहे गांव छोटा हो या बड़ा, सभी लोगों का मुख्य धंधा कृषि या इससे संबंधित कार्य करना होता है।

सन् 1981 की जनगणना के अनुसार, भारत में 76.66% जनसंख्या गांवों में तथा 33.34% जनसंख्या शहरों में रहती थी। लेकिन सन 2011 में थोड़ा परिवर्तन आया। गांवों में रहने वाली जनसंख्या का अनुपात घटकर 68.84% रह गया तथा शहरी जनसंख्या का अनुपात बढ़कर 31.16% हो गया। फिर भी ग्रामीण जनसंख्या का आकार तो भारत में बड़ा ही है।

ग्रामीण जनसंख्या का वितरण भारत में कुल जनसंख्या के अनुपात में तथा ग्रामीण जनसंख्या के प्रतिशत अनुपात में अत्यधिक क्षेत्रीय भिन्नताएँ पाई जाती हैं। भारतीय संघ के कुछ राज्यों में ग्रामीण जनसंख्या की बहुलता है; सन् 2011 की जनगणना के अनुसार हिमाचल प्रदेश, असम, बिहार व ओडिशा में 80% से अधिक जनसंख्या गाँवों में रहती है। लगभग यही प्रतिरूप ओडिशा (83.32%), त्रिपुरा (73.82%), नगालैंड (71.03%) और मेघालय (79.92%) में पाया जाता है।

अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखण्ड, राजस्थान, सिक्किम में 75% से 80% जनसंख्या ग्रामीण है। जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तराखंड में ग्रामीण जनसंख्या का अनुपात राष्ट्रीय औसत अनुपात (60%) से अधिक है। राष्ट्रीय औसत से कम ग्रामीण जनसंख्या आध्र प्रदेश, गोआ, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मिजोरम, पंजाब, तमिलनाडु, पश्चिमी बंगाल तथा दादर व नगर हवेली को छोड़कर सभी केंद्र-शासित प्रदेशों में पाई जाती है। देश में सबसे कम ग्रामीण जनसंख्या दिल्ली में 2.5% व चंडीगढ़ में 2.72% पाई जाती है।

दिए गए विवेचन से पता चलता है कि उच्चतम ग्रामीण अनुपात के कारण हमारी अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर करती है। दूसरी बात, जो सामने आई है, वह यह है कि भारत के अधिकांश तटीय राज्यों में नगरीकरण अधिक हुआ है। भारत के कई राज्य ऐसे हैं, जहाँ नगरीकरण बहुत कम हुआ है तथा जिनमें कुछ जिले ऐसे हैं जहाँ 90% से भी अधिक जनसंख्या गांवों में रहती है; जैसे जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में, बिहार के गोपालगंज जिले में, छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में तथा राजस्थान के जलौर। जनसंख्या ग्रामीण है।

अनेक राज्यों में ग्रामीण जनसंख्या का उच्च अनुपात प्रदर्शित करता है कि अर्थव्यवस्था में विविधता न होने के कारण यहाँ कृषि पर निर्भरता अत्यधिक है। परंपरागत सामाजिक ढांचे में कोई विशेष परिवर्तन नहीं आया है। भारत के चार राज्यों बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश व राजस्थान में वास्तव में यही स्थिति है। आर्थिक दृष्टिकोण से अविकसित इन राज्यों में नगरीकरण और औद्योगीकरण दोनों की गति धीमी है। भारत के कम नगरीकरण वाले राज्यों में बहुत-से जिले ऐसे हैं जो लगभग ग्रामीण हैं और जहाँ 90% से अधिक लोग गाँवों में रहते हैं।

ऊपर दिए गए विवरण से पता चलता है कि भारत में ग्रामीण जनसंख्या का अधिक अनुपात होने के कारण हमारी अर्थव्यवस्था अधिकतर कृषि पर निर्भर है तथा यहाँ रूढ़िवादी अर्थव्यवस्था प्रचलित है। नगरीय जनसंख्या का वितरण नगरीकरण यद्यपि भारत में, नगरों में रहने वाले लोगों की संख्या का आकार बहुत बड़ा है तथा संभवतः विश्व में कुल नगरीय जनसंख्या में इसका चौथा स्थान है, परंतु कुल जनसंख्या में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत बहुत कम है। चीन तथा पाकिस्तान की नगरीय जनसंख्या का भी प्रतिशत भारत से अधिक है। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या का 31.16% ही नगरीय जनसंख्या है, जबकि 1990 के आंकड़ों के अनुसार विश्व की कुल जनसंख्या का 45% नगरीय है।

विश्व के कई देशों में नगरीकरण इतना अधिक हुआ है कि भारत की तुलना इन देशों से किसी भी दिशा में नहीं की जा सकती; जैसे यू०एस०ए० में 75%, जापान में 77%, ऑस्ट्रेलिया में 85%, न्यूजीलैंड में 84% नगरीय जनसंख्या का अनुपात है। भारत की तुलना तो इस संदर्भ में कुछ विकासशील देशों से ही की जा सकती है। मिस्र तथा पाकिस्तान की भी नगरीय जनसंख्या का अनुपात भारत से अधिक है।

सन् 1911 की जनगणना के अनुसार भारत में जिन राज्यों में राष्ट्रीय औसत से अधिक नगरीकरण है, उनमें महाराष्ट्र (45.23%), गुजरात (42.58%), कर्नाटक (38.57%), पश्चिम बंगाल (31.89%), आंध्र प्रदेश (33.49%) तथा उत्तराखंड (22.28%), गोआ (62.19%), तमिलनाडु (48.45%), पंजाब (37.49%), मध्य प्रदेश (27.63%), मिजोरम (51.51%), हरियाणा (34.79%) अंकित किए गए हैं।

भारत में पिछले 100 वर्षों में नगरीय जनसंख्या में हर दशक में वृद्धि होती रही है, इससे नगरीकरण की प्रवृत्ति का अनुमान लग सकता है। यह बात दी गई तालिका से भी स्पष्ट हो जाती है।।
तालिका : नगरीय जनसंख्या का अनुपात (1901-2011)

वर्षनगरीय जनसंख्या (प्रतिशत में)वर्षनगरीय जनसंख्या (प्रतिशत में)
190110.84196117.97
191110.29197119.90
192111.17198123.31
193111.99199125.72
194113.85200128.2
195117.29201131.16

दी गई तालिका से पता चलता है कि भारत में नगरीकरण में बृद्धि तो हुई है, लेकिन बड़ी मंद गति से। भारत में नगरीकरण की वृद्धि को अगर राज्यों के आधार पर देखा जाए तो भारत की कुल नगरीय जनसंख्या का 54.16% भारत के केवल पांच राज्यों; महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल तथा आंध्र प्रदेश में निवास करता है। भारत के अन्य पांच राज्यों; कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार तथा राजस्थान में देश के नगरीय जनसंख्या के सामान्य अनुपात से कुछ अधिक जनसंख्या (26.03%) नगरों में निवास करती है। केंद्र-शासित प्रदेशों में से दिल्ली तथा चंडीगढ़ में सबसे अधिक नगरीकरण हुआ है। इन दो प्रदेशों का वास्तव में शुरू से ही नगरों के रूप में विकास हुआ है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 6.
भारत में श्रमजीवी जनसंख्या के संघटनों या लक्षणों की व्याख्या करें।
उत्तर:
किसी जनसंख्या में श्रम का अनुपात सहभागिता दर द्वारा व्यक्त किया जाता है जो कुल जनसंख्या में कार्यरत जनसंख्या के प्रतिशत द्वारा व्यक्त किया जाता है। सहभागिता अनुपात पुरुषों तथा स्त्रियों के लिए अलग-अलग होता है। किसी भी अर्थव्यवस्था में ‘कामगार’ की परिभाषा आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सन् 1981 की जनगणना के अनुसार जो व्यक्ति वर्ष में 183 दिन लाभकारी कार्य में लगा रहता हो, उसे कामगार व्यक्ति कहेंगे। इससे कम समय का रोज़गार पाने वाले व्यक्ति को ‘सीमांत कामगार’ कहते हैं। 15 से 59 वर्ष की आयु-वर्ग के लोग सामान्यतः श्रमजीवी कहलाते हैं। श्रमजीवी जनसंख्या का अनुपात जितना अधिक होगा, उतनी ही अधिक सामाजिक तथा आर्थिक खुशहाली होगी।

सन् 1991 में भारत में कुल सहभागिता दर 37.46% थी। इसमें पुरुषों की दर 51.55% तथा स्त्रियों की दर 22.25% थी। अतः सहभागिता दर में पुरुषों का महत्त्व अधिक है। प्रति कामगार के पीछे औसतन दो आर्थिक व्यक्ति पाए गए हैं। इसी प्रकार ग्रामीण तथा नगरीय क्षेत्रों की सहभागिता दर में बहुत अंतर पाया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों की सहभागिता दर 53% तथा स्त्रियों की 16% है जो कि नगरीय क्षेत्रों में काफी अधिक है। भारत में नगरीय महिलाओं की औसत सहभागिता दर 7.3% है, अतः अधिकतर महिलाएँ आश्रित हैं।

ग्रामीण श्रमजीवियों का 81% भाग कृषि में कार्यरत है तथा 3% हस्तकलाओं में और 16% अन्य कार्यों में लगा हुआ है। राज्य स्तर पर सहभागिता दर में विषमताएँ पाई जाती हैं। 1991 के जनगणना आंकड़ों के अनुसार पूर्वोत्तर राज्यों में पुरुष सहभागिता दर सिक्किम में 51.26%, मेघालय में 50.07% तथा नगालैंड में 46.86% है। यह दर ओडिशा में 53.79%, कर्नाटक में 54.09% तथा हरियाणा में 48.51% है। यह काफी ऊंची सहभागिता दर है।

महिलाओं की सहभागिता दर पंजाब तथा हरियाणा में भारत के सभी राज्यों से कम है जो क्रमशः 4.40% तथा 10.76% है। उत्तर:पूर्व के जन-जातीय क्षेत्रों में महिला तथा पुरुष सहभागिता दर में विशेष अंतर नहीं पाया जाता। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान तथा ओडिशा में महिलाओं की सहभागिता दर केवल 11% से 28% तक ही है।

प्रश्न 7.
भारत में विभिन्न धार्मिक समुदायों के वितरण प्रतिरूप (2011) का वर्णन कीजिए। अथवा भारत की जनसंख्या के धार्मिक संघटन की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
भारत एक विशाल देश है जिसमें हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, जैन, सिक्ख आदि अनेक महत्त्वपूर्ण धर्म पाए जाते हैं। ईसाई धर्म के लोग भी भारत में बहुत आते रहे हैं तथा यहाँ बसे हुए भी हैं। पारसी भी विदेशों से आकर यहाँ बस गए हैं।
1. हिन्दू-हिन्दू भारत की कुल जनसंख्या का 79.8 प्रतिशत तथा विश्व की कुल जनसंख्या का 1 प्रतिशत है। हिन्दुओं की जनसंख्या विश्व में ईसाइयों की जनसंख्या से कुछ कम व मुस्लिम जनसंख्या के लगभग बराबर है।

देश के अधिकांश भागों में हिंदुओं का बाहल्य है। ओडिशा में केवल 3 जिलों को छोड़कर शेष जिलों में हिंदुओं का अनुपात 95% से 100% तक है। इन तीन जिलों में हिंदुओं का प्रतिशत अनुपात इतना ऊँचा नहीं है। इसी प्रकार मध्य प्रदेश के 17 जिलों में, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश के उपहिमालयी 6 जिलों में, हरियाणा व तमिलनाडु के कुछ जिलों में हिंदुओं की संख्या 95% से ऊपर है। सतलुज-गंगा के मैदान के लगभग 30 जिलों में व मध्य भारत तथा प्रायद्वीपीय भारत के कुछ जिलों में हिंदू जनसंख्या का अनुपात 90% से अधिक है।

पंजाब में सिक्खों, उत्तर-पूर्व में ईसाइयों, जम्मू-कश्मीर, केरल के मालापुरम व पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिलों में मुस्लिम जनसंख्या के अधिक होने के कारण हिंदुओं का अनुपात कम है। मेघालय, मिज़ोरम तथा नगालैंड में हिंदुओं की संख्या 3 से 12% तक है।

2. मुस्लिम-मुसलमान भारत में दूसरे सबसे बड़े धार्मिक समुदाय का निर्माण करते हैं। यह देश का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक वर्ग है। मुस्लिम जनसंख्या भारत की कुल जनसंख्या का 14.2% है। मुस्लिम जनसंख्या की दृष्टि से भारत विश्व में चौथा बड़ा राष्ट्र है। यहाँ की मुस्लिम जनसंख्या पाकिस्तान की कुल जनसंख्या के बराबर है।

उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक मुसलमान हैं और इस प्रदेश में लगभग 19.26% जनसंख्या मुसलमानों की है। ऊपरी गंगा के मैदान के कुछ जिलों में मुस्लिम जनसंख्या का अनुपात 16% से 48% तक है। केरल के मालापुरम् जिले में मुस्लिम जनसंख्या का अनुपात 70% से अधिक है। इसी प्रकार पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में 50% से 60% तथा लक्षद्वीप में सर्वाधिक 96.58% तक जनसंख्या मुसलमानों की है। महाराष्ट्र में 11.54%, आंध्र प्रदेश में 9.56%, कर्नाटक में 12.92%, गुजरात में 9.67% तथा तमिलनाडु में 5.86% मुस्लिम जनसंख्या है। दिल्ली व निकटवर्ती मेवात क्षेत्र में मुसलमानों का संकेंद्रण पाया जाता है। दिल्ली की कुल जनसंख्या में मुसलमानों का अनुपात 12.86% है।

3. ईसाई-ईसाई जनसंख्या अधिकांशत देश के ग्रामीण क्षेत्रों में वितरित हैं। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में 2.78 करोड़ ईसाई हैं। केरल में भारत के 18.38% ईसाई रहते हैं। केरल के कोट्टायम में 45% व इडुक्की में 42% जनसंख्या ईसाई है। ईसाइयों के संकेंद्रण के अन्य क्षेत्र गोआ और तमिलनाडु हैं। गोआ में 25.10% जनसंख्या ईसाई है। ओडिशा एवं बिहार के कई जन-जातीय जिलों में ईसाई जनसंख्या का अनुपात काफी अधिक है। ईसाईयों का अधिक संकेंद्रण उत्तर:पूर्वी राज्यों में है। उदाहरणतः मिज़ोरम की 87.16%, नगालैंड की 87.93%, मेघालय की 74.59% तथा मणिपुर की 41.29% जनसंख्या ईसाई है। ईसाइयों की कुल जनसंख्या के आधार पर महत्त्वपूर्ण राज्य केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, बिहार, मिज़ोरम व गोआ आदि है।

4. सिक्ख–भारत में 2.08 करोड़ सिक्ख हैं जो देश की जनसंख्या का कुल 1.7% हैं। क्योंकि सिक्ख धर्म का उद्भव पंजाब में हुआ इसलिए इनका सर्वाधिक सांद्रण पंजाब में है। पंजाब में 57.69% जनसंख्या सिक्खों की है। पंजाब के अधिकांश जिलों में कुल जनसंख्या का 60-65% भाग सिक्खों का है। उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र, राजस्थान के गंगा नगर, अलवर, भरतपुर व दिल्ली में सिक्ख पर्याप्त संख्या में बसे हुए हैं।

5. बौद्धभारत में 84 लाख से अधिक बौद्ध हैं, जो मुख्यतः महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम तथा जम्मू-कश्मीर में केंद्रित हैं। कुछ बौद्ध हिमाचल प्रदेश, मिज़ोरम व त्रिपुरा में भी हैं। भारत के 5.81% बौद्ध महाराष्ट्र में हैं। महाराष्ट्र के 50 लाख बौद्ध वास्तव में डॉ० बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के प्रभाव से धर्म परिवर्तन करके नव-बौद्ध बने हैं। सिक्किम में एक लाख से ऊपर बौद्ध हैं जो राज्य की कुल जनसंख्या का 27.39% हैं। अरुणाचल प्रदेश में भी एक लाख से ऊपर बौद्ध हैं जो राज्य की 11.77% जनसंख्या है।

6. जैन भारत में 45 लाख जैन धर्मावलंबी हैं। भारत में जैन महाराष्ट्र, राजस्थान तथा गुजरात में अधिक है। इन तीनों के लगभग 60% जैन रहते हैं। जैनियों की प्रमुख विशेषता यह है कि ये मुख्यतः व्यापार और सेवाओं में लगे हैं और नगरों में रहते हैं।

7. अन्य धर्म-भारत में अन्य धर्मों को मानने वालों की जनसंख्या 0.7% है। इनकी कुल जनसंख्या 79 लाख से अधिक है।

8. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 0.2% जनसंख्या के धर्म की कोई जानकारी नहीं है।
भारत में सांस्कृतिक संश्लेषण एक विचित्र विशेषता है। यहाँ विभिन्न धर्मों के लोग आपसी भाईचारे.नथा संस्कृति से घनिष्ठता से जुड़े हुए हैं। वे तो प्रादेशिक पहचान ही बनाए हुए हैं, न कि धार्मिक; जैसे पंजाब के लोग सिक्ख न होकर पहले पंजाबी हैं तथा बाद में कछ और हैं। धार्मिक विविधता तो केवल ऊपर से दिखाई देती है।

प्रश्न 8.
भारतीय भाषाओं का वर्गीकरण कीजिए तथा विभिन्न भाषा परिवारों का विस्तृत वर्णन दीजिए। अथवा भारत के भाषाई संघटन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भाषाई संघटन-भारत जैसे विशाल देश में विभिन्न प्रकार की भाषाओं तथा बोलियों का होना स्वाभाविक है। यहाँ नृ-जातीय वर्ग भी अपने साथ बाहर के विभिन्न भागों से भाषाएँ लाए हैं। भाषा की अपनी लिपि होती है, जबकि बोलियों की कोई लिपि नहीं होती। सन् 1961 की जनगणना के अनुसार, भारत में लगभग 187 भाषाएँ बोली जाती थीं, इनमें से 94 भाषाएँ 10,000 से भी कम लोगों द्वारा बोली जाती हैं, जिनमें से अंग्रेज़ी के अतिरिक्त 22 भाषाएँ हमारे संविधान की 8वीं अनुसूची में रखी गई हैं। ये 22 भाषाएँ इस प्रकार हैं-

  • हिन्दी
  • तेलुगू
  • बांग्ला
  • मराठी
  • तमिल
  • उर्दू
  • गुजराती
  • मलयालम
  • कन्नड़
  • ओड़िया
  • असमिया
  • पंजाबी
  • कश्मीरी
  • सिंधी
  • संस्कृत
  • कोंकणी
  • मणिपुरी
  • नेपाली
  • डोगरी
  • मैथिली
  • बोडो
  • संथाली।

भारतीय भाषाओं का वर्गीकरण-भारत में भाषाओं को निम्नलिखित चार मुख्य परिवारों में बांटा गया है-

  • आस्ट्रिक परिवार
  • चीनी-तिब्बती परिवार
  • द्रविड़ परिवार
  • भारतीय-यूरोपीय परिवार।

भारत की कुल जनसंख्या का 73% भाग भारतीय-यूरोपीय परिवार (आय) भाषाओं को बोलने वाले हैं।
1. आस्ट्रिक परिवार की भाषाएँ-इन भाषाओं के बोलने वाले लोगों की संख्या भारत में अधिक नहीं हैं। इनका प्रतिशत कुल वल 0.73 है। भारत में 62 लाख से अधिक लोगों के द्वारा यह भाषा बोली जाती है। इनमें सबसे बड़ा वर्ग संथाली भाषा को बोलने वालों का है। इस भाषा के बोलने वाले लोग आस्ट्रो-एशियाई उप-परिवार के हैं जिसे अन्य शाखाओं में बांटा गया है; जैसे (क) मुंडा, (ख) मान ख्मेर, जिसमें दो वर्ग मिलते हैं-खासी और निकोबारी।

2. चीनी-तिब्बती परिवार की भाषाएँ इस भाषा को तीन शाखाओं में बांटा गया है; जैसे-

  • तिब्बती-हिमालयी
  • उत्तर असमी
  • असमी-बर्मी।

तिब्बती-हिमालयी भाषा के आगे दो वर्ग पाए जाते हैं-

  • भोटिया वर्ग
  • हिमालयी वर्ग।

भोटिया वर्ग की मुख्य भाषाएँ तिब्बती, लद्दाखी, लाहुली तथा शेरपा हैं। इसी प्रकार हिमालयी वर्ग में चम्बा, किन्नौरी तथा लेपचा भाषाएँ आती हैं। उत्तर:असमी भाषा में छह बोलियाँ बोली जाती हैं जिनमें सबसे अधिक प्रचलित बो शाखा के भी आगे पांच वर्ग पाए गए हैं; जैसे-

  • बोडो
  • नागा
  • कांचिन
  • कुकीचन तथा।
  • बर्मी वर्ग।

इनमें नागा वर्ग की संख्या सबसे अधिक है। इन बोलियों के बोलने वाले लोगों की संख्या में भिन्नता पाई जाती है। जिनके बोलने वालों की संख्या 1 से 7 लाख है। मणिपुरी बोली बोलने वालों की संख्या सबसे अधिक है। इस वर्ग की अन्य बोलियाँ गारो, बोरो, त्रिपुरी, मिकिर तथा मिजो हैं।

3. द्रविड़ परिवार की भाषाएँ-द्रविड़ भाषा के आगे पाए जाने वाले वर्ग हैं-(क) दक्षिणी द्रविड़, (ख) मध्य द्रविड़ तथा (ग) उत्तरी द्रविड़। दक्षिणी द्रविड़ वर्ग में तमिल, मलयालम, कन्नड़ जैसी भाषाएँ तथा तुजु, कुरगी एवं येरुकला जैसी गौण भाषाएँ तथा बोलियाँ पाई जाती हैं। इसी प्रकार मध्य द्रविड़ वर्ग में तेलुगू और येरुकला जैसी गौण भाषाएँ तथा बोलियाँ पाई जाती हैं। इसी प्रकार मध्य द्रविड़ वर्ग में तेलुगू और गोंडी मुख्य भाषा के रूप में तथा कुई, पारसी एवं खोड, बोलियों के रूप में पाई जाती हैं। उत्तरी द्रविड़ भाषाओं में अधिकतर यानि 95% जनसंख्या तमिल, मलयालम, कन्नड़ तथा तेलुगू भाषाओं के बोलने वालों की है।

4. भारतीय-यूरोपीय परिवार की भाषाएँ इन्हें आर्य भाषाएँ भी कहा जाता है। देश की लगभग 73% जनसंख्या इसी भाषा का प्रयोग करती है। इस परिवार की भाषा को मुख्य दो वर्गों में बाँटा गया है-

  • भारतीय आर्य भाषाएँ तथा
  • दरदी आर्य भाषाएँ।

(1) भारतीय आर्य भाषाओं को आगे कई उपवर्गों में बांटा गया है; जैसे-

  • उत्तर-पश्चिमी
  • दक्षिणी
  • पूर्वी
  • मध्य-पूर्वी
  • मध्य तथा
  • उत्तरी वर्ग।

उत्तर-पश्चिमी उपवर्ग के अंतर्गत सिंधी, लहंदा तथा कच्छी भाषाएँ; दक्षिणी वर्ग में मराठी तथा कोंकणी भाषाएँ आती हैं। पूर्वी वर्ग बहुत बड़ा है, इसमें बांग्ला, बिहारी, ओडिया तथा असमिया भाषाएँ पाई जाती हैं। इसी वर्ग में अवधी, मैथिली तथा भोजपुरी बोलियाँ बोली जाती हैं। मध्य-पूर्वी वर्ग में तीन उपवर्ग हैं जिनकी भाषा क्रमशः अवधी, बघेली तथा छत्तीसगढ़ी है। मध्य वर्ग में हिंदी, पंजाबी, राजस्थानी तथा गुजराती भाषाएँ शामिल हैं। विभिन्न पहाड़ी बोलियाँ पाई जाती हैं; जैसे नेपाली, मध्य पहाड़ी तथा पश्चिमी पहाड़ी।

(2) दरदी आर्य भाषाओं में कश्मीरी, शिना, कोहिस्तानी तथा दरदी भाषाएँ शामिल हैं। इनमें कश्मीरी बोलने वालों की संख्या लगभग 20 लाख है जो सबसे अधिक है। बाकी भाषाओं के बोलने वालों की संख्या सात-सात हजार से अधिक नहीं है।

प्रश्न 9.
भारत में भाषा परिवारों के भौगोलिक वितरण का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:
वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार, अपने परिवर्तित रूपों के साथ हिंदी भारत के लगभग 42.20 करोड़ (41.03) प्रतिशत लोगों की मातृभाषा है। हिंदी के बाद बांग्ला, तेलुगू, मराठी और तमिल भाषा बोलने वाले लोगों की संख्या सर्वाधिक है।
भारतीय भाषाओं का वर्गीकरण-
(i) आग्नेय (ऑस्ट्रिक) परिवार-(निषाद)
(ii) चीनी-तिब्बत परिवार (किरात)
(iii) द्रविड़ भाषा परिवार (द्रविड़)
(iv) भारतीय यूरोपीय भाषा परिवार (आर्य)
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन 4
विवरण-भारतीय भाषाओं का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित हैं
I. आग्नेय (ऑस्ट्रिक) परिवार-(निषाद)-भारत में बोली जाने वाली आग्नेय भाषा ऑस्ट्रो-ऐशियाई उप-परिवार की है। यह उप-परिवार दो शाखाओं में बाँटा जाता है

  • मुंडा- (i) मुंडा आग्नेय भाषाओं की सबसे बड़ी शाखा है। (ii) यह भाषा 14 जन-जातियों में बोली जाती है।
  • खासी-मान ख्मेर-खासी भाषा मेघालय की खासी और जयंतिया पहाड़ियों में रहने वाले आदिवासियों द्वारा बोली जाती है।
  • निकोबारी-निकोबारी भाषा निकोबार द्वीप समूह के आदिवासियों द्वारा बोली जाती है। आस्ट्रो-एशियाई भाषाएँ भारत में 60 लाख से अधिक लोग बोलते हैं।

II. चीनी-तिब्बत परिवार (किरात)-भारत में चीनी-तिब्बती परिवार की भाषाएँ बोलने वाले मुख्यतः तीन शाखाओं में विभाजित हैं।
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन 5
(i) तिब्बती हिमालयी-इस शाखा में दो वर्ग हैं – (a) भोटिया वर्ग, (b) हिमालयी वर्ग।
भोटिया वर्ग – इस वर्ग में तिब्बती, बाल्ती, लद्दाखी, लाहुली, शेरपा तथा सिक्किमी-भोटिया इत्यादि भाषाएँ सम्मिलित हैं।
हिमालय वर्ग – इस वर्ग में चंबा, किन्नौरी और लेह भाषाएँ सम्मिलित हैं।

(ii) उत्तर-असमी-उत्तर:असमी या अरुणाचल वर्ग में निम्नलिखित 6 भाषाएँ हैं-(a) अका, (b) डफला, (c) अंबोर, (a) मिरी, (e) मिशमी, ) मिशिंग।

(iii) असम-बर्मी-इस वर्ग में निम्नलिखित पाँच भाषाएँ बोली जाती हैं-(a) बोरो, (b) नागा, (c) काचिन, (d) कुकिचिन, (e) मयनमारी। .

III. द्रविड़ भाषा परिवार (द्रविड़)

  • दक्षिण-द्रविड़-इस वर्ग में तमिल, मलयालम, तुजु, कुरगी तथा कन्नड़ जैसी मुख्य भाषाएँ सम्मिलित हैं।
  • मध्य-द्रविड़-इस वर्ग में मुख्य भाषाएँ तेलुगू एवं गोंडी, कुई, पारजी एवं खोंड भाषाएँ सम्मिलित हैं।
  • उत्तर-द्रविड़-इस वर्ग में कुरूख एवं मालतो भाषाएँ सम्मिलित हैं।

IV. भारतीय यूरोपीय भाषा परिवार (आर्य)-भारत की अधिकांश जनसंख्या आर्य भाषाओं का एक या कोई दूसरा रूप बताती है। इन भाषाओं को मुख्यतः दो वर्गों में बाँटा जाता है।

  • दरदी आर्य भाषाएँ।
  • इंडो-आर्य भाषाएँ।

(1) दरदी-आर्य भाषाएँ-इस वर्ग में दरदी, शिना, कोहिस्तानी तथा कश्मीरी भाषाएँ सम्मिलित हैं। इनमें से कश्मीरी बोलने वालों की संख्या सर्वाधिक अर्थात् 20 लाख है।

(2) इंडो-आर्य भाषाएँ-इन भाषाओं को निम्नलिखित वर्गों में बाँटा जाता है

  • उत्तरी-आर्य भाषाएँ-इस वर्ग में विभिन्न पहाड़ी भाषाएँ सम्मिलित हैं, जिसमें नेपाली, मध्य-पहाड़ी एवं पश्चिमी-पहाड़ी प्रमुख है।
  • उत्तर-पश्चिमी आर्य भाषाएँ-इस वर्ग में लहंदा, कच्छी एवं सिंधी भाषाएँ आती हैं।
  • दक्षिणी आर्य भाषाएँ-इस वर्ग में मराठी और कोंकणी भाषाएँ सम्मिलित की जाती हैं।
  • पूर्वी आर्य भाषाएँ-इस वर्ग में ओडिया, बिहारी, बंगला तथा असमिया भाषाएँ सम्मिलित हैं। इनमें बिहारी भाषा की बोलियों में मैथिली, भोजपुरी तथा मगधी सम्मिलित हैं।।
  • पूर्व-मध्य आर्य भाषाएँ-इस वर्ग में अवधी, बघेली तथा छत्तीसगढ़ी भाषाएँ सम्मिलित की जाती हैं।
  • मध्य आर्य भाषाएँ-इस वर्ग में हिंदी, पंजाबी, राजस्थानी तथा गुजराती भाषाएँ आती हैं। आर्य भाषाओं में हिंदी का महत्त्वपूर्ण स्थान है।

निष्कर्ष – भारत के लोग यहाँ के मूल निवासी नहीं हैं। यहाँ बसने वाले विभिन्न नृ-जातीय वर्ग अपने साथ विभिन्न देशों की भाषाएँ व बोलियाँ भी लेकर आए।

प्रश्न 10.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या राज्य स्तरीय विवरण दें।
अथवा
भारत में जनसंख्या वृद्धि के स्थानिक प्रतिरूपों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या के राज्यवार वितरण में भी अनेक विषमताएँ देखने को मिलती हैं। सामान्यतः अधिक क्षेत्रफल वाले बड़े आकार के राज्यों में जनसंख्या अधिक पाई जाती है, परन्तु यह नियम सर्वत्र लागू नहीं होता, क्योंकि जनसंख्या का संकेन्द्रण प्राकृतिक संसाधनों, विशेषतः भूमि की प्रकृति पर निर्भर करता है।

निम्नलिखित तालिका के अध्ययन से भारत की जनसंख्या के वितरण के बारे में निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण लक्षण उभरते हैं-
तालिका : भारत में जनसंख्या का राज्यवार वितरण (2011)
HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन 6
(i) देश की सबसे ज्यादा (19.9 करोड़) जनसंख्या उत्तर प्रदेश में बसी हुई है। यहाँ भारत की 17.64 प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या रहती है। इसके बाद क्रमशः महाराष्ट्र (11.23 करोड़), बिहार (10.38 करोड़), पश्चिम बंगाल (9.13 करोड़) तथा आन्ध्र प्रदेश का स्थान आता है। इन पाँच राज्यों में देश की आधी जनसंख्या रहती है।

(ii) भारत की एक-चौथाई जनसंख्या दो राज्यों उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में रहती है।

(iii) क्षेत्रफल की दृष्टि से देश के दो सबसे बड़े राज्य राजस्थान और मध्य प्रदेश हैं जिनका क्षेत्रफल देश के कुल क्षेत्रफल का क्रमशः 10.4 प्रतिशत और 9.37 प्रतिशत है, परन्तु इन राज्यों में भारत की केवल 5.6 प्रतिशत और 6.00 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है।

(iv) इसके विपरीत उत्तर प्रदेश 7.26 प्रतिशत क्षेत्र पर स्थित है जबकि इस राज्य में देश की 16.49 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है।

(v) देश के 2.86 प्रतिशत क्षेत्रफल वाले राज्य बिहार में 8.58 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है।

(vi) देश के 11 राज्यों और 6 केन्द्र-शासित प्रदेशों में जनसंख्या उनके क्षेत्रफल की तुलना में अधिक है। परिणामस्वरूप इन राज्यों में प्रति इकाई क्षेत्रफल पर जनसंख्या का दबाव राष्ट्रीय औसत से अधिक है।

(vii) दूसरी ओर, जम्मू और कश्मीर (1.04%), अरुणाचल प्रदेश (0.11%) और उत्तराखंड (0.84%); जैसे राज्यों की जनसंख्या का आकार इनके विशाल भौगोलिक क्षेत्र के बावजूद अत्यन्त छोटा है।

(viii) हिमालयी लघु राज्य सिक्किम की जनसंख्या (6.07 लाख) भारत के सभी राज्यों की जनसंख्या से कम है जबकि दिल्ली . की जनसंख्या 1.67 करोड़, जम्मू-कश्मीर की जनसंख्या अथवा सभी केन्द्र-शासित प्रदेशों की संयुक्त जनसंख्या से भी अधिक है।

जनसंख्या वृद्धि के आँकड़ों का विश्लेषण करने पर भारत में निम्नलिखित तीन प्रकार के क्षेत्र मिलते हैं
1. तीव्र जनसंख्या वृद्धि वाले राज्य एवं केंद्र-शासित प्रदेश इस वर्ग में 2001-2011 के दशक के दौरान 30% से अधिक वृद्धि रखने वाले क्षेत्रों को सम्मिलित किया गया है। इस वर्ग में भारत के केवल दो केंद्र-शासित प्रदेश सम्मिलित हैं

  • दादर एवं नगर हवेली (55.5%)
  • दमन व दीव (53.5%)

2. मध्यम जनसंख्या वृद्धि वाले राज्य एवं केंद्र-शासित प्रदेश इस वर्ग में 2001-2011 के दशक के दौरान 20 से 30% तक वृद्धि रखने वाले क्षेत्रों को सम्मिलित किया गया है। इस वर्ग में सम्मिलित क्षेत्र हैं

  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (20.96%)
  • पुडुचेरी (27.72%)
  • मेघालय (27.82%)
  • बिहार (25.07%)
  • जम्मू-कश्मीर (23.7%)
  • मिजोरम (22.34%)
  • छत्तीसगढ़ (22.59%)
  • झारखण्ड (22.34%)
  • राजस्थान (21.44%)
  • मध्य प्रदेश (20.3%)
  • उत्तर प्रदेश (20.09%) आदि।

3. कम जनसंख्या वृद्धि वाले राज्य एवं केंद्र-शासित प्रदेश इस वर्ग में 2001 से 2011 के दशक के दौरान 20% से कम जनसंख्या वृद्धि रखने वाले क्षेत्रों को सम्मिलित किया गया है। इसमें अन्य सभी राज्यों व केन्द्र-शासित प्रदेशों को सम्मिलित किया गया है।

HBSE 12th Class Geography Important Questions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 11.
2001 की जनगणना के अनुसार भारत का जनसंख्या घनत्व तालिका की सहायता से दर्शाएँ।
उत्तर:
2001 की जनगणना के अनुसार भारत का जनसंख्या घनत्व निम्न तालिका में दर्शाया गया है-

राज्य/केंद्य-शासित प्रदेशघनत्वकोटि क्रम्म
दिली9,2441
चंडीगढ़7,9032
पांडिचेरी2,0293
लक्षद्वीप1,8944
दमन तथा दीव1,4115
पश्चिमी बंगाल9046
बिह्नर8807
केरल8198
उत्तर प्रदेश6899
पंजाब48210
तमिलनाहु47811
हरियाणा47712
दादरा ब नगर हबेली44913
गोवा36314
असम34015
झारखंड33816
महाराष्ट्र31417
त्रिपुरा30418
आंध्र प्रदेश27519
कर्नाटक27520
गुजरात25821
उड़ीसा23622
मध्य प्रदेश19623
राजस्थान16524
उत्तराखंड15925
छत्तीसगढ़15426
नगालैंड12027
हिमाचल प्रदेश10928
मणिपुर10729
मेघालय10330
जम्मू कश्मीर9931
सिक्किम7632
अंडमान व निकोबार4933
द्वीप समूह4234
मिजोरम1335

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