Author name: Prasanna

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण Textbook Exercise Questions, and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण

HBSE 10th Class Science हमारा पर्यावरण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन से समूहों में केवल जैव निम्नीकरणीय पदार्थ हैं?
(a) घास, पुष्प तथा चमड़ा
(b) घास, लकड़ी तथा प्लास्टिक
(c) फलों के छिलके, केक एवं नीबू का रस
(d) केक, लकड़ी एवं घास।
उत्तर-(c) एवं (d)।

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन आहार श्रृंखला का निर्माण करते हैं?
(a) घास, गेहूँ तथा आम
(b) घास, बकरी तथा मानव
(c) बकरी, गाय तथा हाथी
(d) घास, मछली तथा बकरी
उत्तर-
(b) घास, बकरी तथा मानव।

प्रश्न 3.
निम्न में से कौन पर्यावरण-मित्र व्यवहार कहलाते हैं?
(a) बाजार जाते समय सामान के लिए कपड़े का थैला ले जाना।
(b) कार्य समाप्त हो जाने पर लाइट (बल्ब) तथा पंखे का स्विच बंद करना।
(c) माँ द्वारा स्कूटर विद्यालय छोड़ने की बजाय तुम्हारा विद्यालय तक पैदल जाना।
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 4.
क्या होगा यदि हम एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दें (मार डाले)?
उत्तर-
एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर देने से पारिस्थितिक असंतुलन उत्पन्न हो जाएगा। प्रकृति में सभी आहार श्रृंखलाएँ अनेक कड़ियों से मिलकर बनी हैं। इसकी प्रत्येक कड़ी एक पोषी स्तर कहलाती है। यदि आहार श्रृंखला की किसी भी कड़ी (पोषी स्तर) को समाप्त कर दें तो उससे पहले के पोषी स्तर में जीवों की संख्या अत्यधिक बढ़ जाएगी और उसके बाद के पोषी स्तर के लिए भोजन अनुपलब्ध होने के कारण संख्या घट जाएगी। उदाहरण के लिए यदि हम प्रथम पोषी स्तर (हरी घास) को नष्ट कर दें तो इन पर निर्भर करने वाले सभी जीव भूखे मर जाएँगे।

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प्रश्न 5.
क्या किसी पोषी स्तर के सभी सदस्यों को हटाने का प्रभाव भिन्न-भिन्न पोषी स्तरों के लिए अलगअलग होगा? क्या किसी पोषी स्तर के जीवों को पारितंत्र को प्रभावित किए बिना हटाना संभव है ?
उत्तर-
नहीं, यदि एक पोषी स्तर के जीवों को नष्ट कर दिया जाए तो पहले तथा बाद के पोषी स्तरों में आने वाले जीवधारी प्रभावित होंगे और पहले तीव्रता से तत्पश्चात् धीमी गति से सभी पोषी स्तर प्रभावित होंगे। किसी भी पोषी स्तर (trophic level) के सभी जीवधारी पारितंत्र में बिना किसी हानि के अथवा क्षति के समाप्त नहीं होते।

प्रश्न 6.
जैविक आवर्धन (Biological Magnification) क्या है ? क्या पारितंत्र के विभिन्न स्तरों पर जैव आवर्धन का प्रभाव भी भिन्न-भिन्न होगा?
उत्तर-
फसलों में अनेक रसायनों जैसे-कीटनाशी, पीड़कनाशी, शाकना ी तथा उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है। इनका कुछ भाग मृदा में मिल जाता है जो पौधों द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है. जबकि इनका कछ भाग वर्षा जल के साथ घुल कर जलाशयों में चला जाता है। जलीय पौधे इन्हें अवशोषित करते हैं जिससे यह खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर जाते हैं। ये रसायन अजैव निम्नीकरणीय होते हैं जो आहार श्रृंखला के विभिन्न पोषीस्तरों में संचित होते जाते हैं, इस प्रक्रम को जैव आवर्धन कहते हैं। हाँ, विभिन्न पोषी स्तरों में रसायनों की सान्द्रता भिन्न-भिन्न होती है। जैसे-जैसे आहार श्रृंखला की श्रेणी बढ़ती जाती है रसायनों की सांद्रता में भी अधिकता होती रहती है और उसका प्रभाव भी बढ़ता जाता है।

प्रश्न 7.
हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरे से कौन-कौन सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं ? .
उत्तर-
हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों जैसे-प्लास्टिक, चमड़ा, काँच, डी. डी. टी. आदि से युक्त कचरे से अनेक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं-

  • प्लास्टिक जैसे पदार्थों को निगल लेने से शाकाहारी जन्तुओं की मृत्यु हो सकती है।
  • नाले-नालियों में अवरोध उत्पन्न होता है।
  • मृदा प्रदूषण बढ़ता है।
  • जीवधारियों में जैविक आवर्धन होता है।
  • जल एवं वायु प्रदूषण बढ़ता है।
  • पर्यावरण अस्वच्छ होता है।
  • पारिस्थितिक संतुलन में अवरोध उत्पन्न होता है।
  • भूमि की उत्पादकता कम होती है।

प्रश्न 8.
यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय ही, तो क्या इनका हमारे पर्यावरण पर कोई प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर-
यदि हमारे द्वारा (उत्पादित) सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय हो तो निपटान आसानी से कर दिया जाएगा। जैव निम्नीकरणीय पदार्थ सरलता से सूक्ष्म जीवों द्वारा अपघटित कर दिए जाते हैं। अतः इनसे हमारे पर्यावरण पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

प्रश्न 9.
ओजोन परत की क्षति हमारे लिए चिंता का विषय क्यों है ? इस क्षति को सीमित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं ? (CBSE 2016)
उत्तर-
ओजोन परत सूर्य की पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करती है। यह सूर्य से आने वाले हानिकारक विकिरण को सोख लेती है। यह विकिरण हमारे शरीर में विभिन्न व्याधियों जैसे-कैंसर, त्वचा रोग, आँखों के रोग आदि उत्पन्न कर सकता है। रेफ्रिजरेशन वक्स, एरोसोल, जेट यानों आदि से उत्सर्जित रसायन जैसे-क्लोरोफ्लुओरो कार्बन्स (CFCs) ओजोन परत का क्षरण करते हैं जिससे सूर्य की पराबैगनी किरणों (UV-rays) के पृथ्वी पर आने की सम्भावना बढ़ रही है अतः ओजोन परत की क्षति हमारे लिए चिन्ता का विषय है।

ओजोन परत की क्षति को रोकने के लिए 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) में सर्वसम्मति से यह पारित हुआ कि क्लोरोफ्लुओरो कार्बन का उत्पादन 1986 के स्तर पर सीमित रखा जाए। मांट्रियल प्रोटोकॉल में 1987 में यह पारित हुआ कि 1998 तक इसके प्रयोग में 50% तक की कमी लायी जाए। धीरे-धीरे सभी देश इस समस्या से निपटने के लिए अग्रसर हो रहे हैं।

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(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 292)

प्रश्न 1.
पोषी-स्तर क्या है? एक आहार श्रृंखला का उदाहरण दीजिए तथा इसमें विभिन्न पोषी स्तर बताइए। (RBSE 2016) (नमूना प्रश्न पत्र 2012)
उत्तर-
पोषी-स्तर (Trophic Level) हरे पौधे सौर ऊर्जा की सहायता से अपना भोजन बनाते हैं। इन पौधों को शाकाहारी प्राणियों द्वारा खाया जाता है जिन्हें मांसाहारी प्राणियों द्वारा भोजन के रूप में ग्रहण किया जाता है। इस प्रकार से खाद्य के आहार के अनुसार विभिन्न प्राणियों में एक श्रृंखला निर्मित होती जाती है जिसे आहार श्रृंखला कहते है। आहार श्रृंखला की प्रत्येक कड़ी पोषी स्तर कहलाती है। एक आहार श्रृंखला नीचे दी गई है-
घास → कीट → मेंढ़क → सर्प → बाज

उपरोक्त आहार श्रृंखला में पाँच पोषी स्तर हैं –

  • प्रथम पोषी स्तर घास है जो कि स्वयंपोषी है और उत्पादक कहलाती है।
  • द्वितीय पोषी स्तर कीट है जो शाकाहारी है और प्राथमिक उपभोक्ता कहलाता है।
  • तृतीय पोषी स्तर मेंढ़क है जो मांसाहारी है और द्वितीयक उपभोक्ता कहलाता है।
  • चतुर्थ पोषी स्तर सर्प है जो मांसाहारी है और तृतीयक उपभोक्ता कहलाता है।
  • पंचम पोषी स्तर बाज़ है जो मांसाहारी है और चतुर्थ उपभोक्ता कहलाता है।

प्रश्न 2.
पारितंत्र में अपमार्जकों की क्या भूमिका है ?
उत्तर-
पारितंत्र में अपमार्जकों (scavengers) का प्रमुख स्थान है। जीवाणु तथा अन्य सूक्ष्म जीव अपमार्जकों का कार्य करते हैं। ये पेड़-पौधों एवं जीव-जन्तुओं के मृत शरीरों पर आक्रमण कर जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में बदल देते हैं। इसी प्रकार कचरा जैसे- सब्जियों एवं फलों के छिलके, जन्तुओं के मल-मूत्र, पौधों के सड़े-गले भाग अपमार्जकों द्वारा ही विघटित कर दिए जाते हैं। इस प्रकार पदार्थों के पुनः चक्रण में अपमार्जक सहायता करते हैं और वातावरण को स्वच्छ रखते हैं।

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(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 295)

प्रश्न 1.
क्या कारण है कि कुछ पदार्थ जैव निम्नीकरणीय होते हैं तथा कुछ अजैव-निम्नीकरणीय ?
उत्तर-
ऐसे अपशिष्ट पदार्थ जो सूक्ष्म जीवधारियों द्वारा अपघटित होकर अपेक्षाकृत सरल एवं अहानिकारक पदार्थों में बदल दिए जाते हैं, जैव निम्नीकरणीय पदार्थ कहलाते हैं। उदाहरण के लिए शाक-सब्जियों, फलों आदि के अवशेष तथा मल-मूत्र आदि पदार्थों को सूक्ष्म जीवों द्वारा अपघटित कर दिया जाता है। कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं जो इन सूक्ष्म जीव धारियों द्वारा अपघटित नहीं किये जा सकते हैं। ये लम्बे समय तक प्रकृति में बने रहते हैं। यह पदार्थ अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ कहलाते हैं जैसे-प्लास्टिक, पॉलीथीन, काँच, डी. डी. टी. आदि।

प्रश्न 2.
ऐसे दो तरीके सुझाइए जिनमें जैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
उत्तर-
जैव निम्नीकरणीय पदार्थ निम्न प्रकार से पर्यावरण को प्रभावित करते हैं-

  • जैव निम्नीकरणीय पदार्थों के सूक्ष्म जीवों द्वारा विघटन से मुक्त विषाक्त एवं दुर्गन्धमय गैसें पर्यावरण को प्रदूषित करती हैं।
  • कार्बनिक जैव निम्नीकरणीय पदार्थों की अधिकता से ऑक्सीजन की कमी हो जाने से सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं। इसके फलस्वरूप अपघटन क्रिया प्रभावित होती है और पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है।

प्रश्न 3.
ऐसे दो तरीके बताइए जिनमें अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
उत्तर-
अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ निम्न प्रकार से पर्यावरण को प्रभावित करते हैं-

  • अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ लम्बे समय तक पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। ये पदार्थ विभिन्न पदार्थों के चक्रण में रुकावट उत्पन्न करते हैं।
  • अनेक कीटनाशक तथा पीड़कनाशक रसायन खाद्य श्रृंखला के माध्यम से जीवधारियों तथा मनुष्य के शरीर में पहुँचकर उसे क्षति पहुचाते हैं।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 296)

प्रश्न 1.
ओजोन क्या है तथा यह किसी पारितंत्र को किस प्रकार प्रभावित करती है ? (CBSE 2016)
उत्तर-
ओजोन एक गैस है जिसका अणुसूत्र ‘o,’ है तथा इसका प्रत्येक अणु ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनता है। ओजोन गैस की परत वायुमंडल के समताप मण्डल में पायी जाती है। यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को रोकती है। अतः पृथ्वी के जीवों को पराबैंगनी किरणों के घातक प्रभाव से बचाती है। पराबैंगनी किरणें ऑक्सीजन अणुओं को विघटित करके स्वतंत्र ऑक्सीजन (Nascent Oxygen; O) परमाणु बनाती हैं। ऑक्सीजन के ये स्वतंत्र परमाणु संयुक्त होकर ओजोन बनाते हैं।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 15 हमारा पर्यावरण 1
यदि वायुमण्डल में ओजोन परत नहीं होती तो हानिकारक पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर पहुँच जाती और मानव सहित विभिन्न जीवधारियों में घातक रोग जैसे कैंसर, आँख के रोग आदि उत्पन्न करती।

प्रश्न 2.
आप कचरा निपटान की समस्या कम करने में क्या योगदान कर सकते हैं ?
उत्तर-
कचरा निपटान की समस्या कम करने में हम निम्नलिखित योगदान कर सकते हैं-

  • हमें जैव निम्नीकरणीय तथा अजैव निम्नीकरणीय कचरे को अलग-अलग कर लेना चाहिए। अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों को पुनः चक्रण हेतु कारखाने भेज देना चाहिए जिससे इन्हें पुनः प्रयोग में लाया जा सके।
  • जैव निम्नीकरणीय पदार्थों का प्रयोग ह्यूमस या खाद बनाने के लिए करना चाहिए जिससे पौधों को उच्च कोटि की खाद उपलब्ध हो सके।

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क्रियाकलाप 15.1. (पा. पु. पृ. सं. 289)

प्रश्न 1.
जल जीवशाला बनाते समय हमें किन बातों का ध्यान रखना होगा ?
उत्तर-
मछलियों को तैरने के लिए स्थान, जल, ऑक्सीजन एवं भोजन।

प्रश्न 2.
यदि हम इसमें कुछ पौधे लगा दें तो यह एक स्व निर्वाह तंत्र बन जाएगा। क्या आप सोच सकते हैं कि यह कैसे होता है ?
उत्तर-
पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में 02 निकाल कर जल को स्वच्छ बनाते रहेंगे तथा श्वसन में छोड़ी गई CO2, को भोजन बनाने में काम लेते रहेंगे।

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प्रश्न 3.
क्या हम जल जीवशाला बनाने के उपरान्त इसे ऐसे ही छोड़ सकते हैं ? कभी-कभी इसकी सफाई की क्या आवश्यकता है ?
उत्तर-
नहीं, हमें जलजीवशाला की समय-समय पर देख-रेख करनी होगी। इसमें जीवाणु उत्पन्न हो सकते हैं जिन्हें हटाने के लिए कभी-कभी जल भी बदलना होगा।

प्रश्न 4.
क्या हमें इसी प्रकार तालाबों एवं झीलों की सफाई भी करनी चाहिए ? क्यों और क्यों नहीं ?
उत्तर-
तालाबों एवं झीलों की भी यदि सम्भव हो तो सफाई करनी चाहिए, क्योंकि तालाबों एवं झीलों में सुपोषण (eutrophication) की संभावना बनी रहती है।

क्रियाकलाप 15.2. (पा. पु. पृ. सं. 289)

प्रश्न 1.
जल जीवशाला बनाते समय क्या आपने इस बात का ध्यान रखा कि ऐसे जन्तुओं को साथ न रखें जो दूसरों को खा जाएँ।
उत्तर-
माँसाहारी मछलियाँ अन्य मछलियों को खा जाएँगी। कृत्रिम पारितंत्र में वे अपनी वंश वृद्धि भी नहीं कर सकती हैं।

प्रश्न 2.
समूह बनाइए तथा चर्चा करें कि उपर्युक्त समूह एक दूसरे पर निर्भर करते हैं?
उत्तर-
मछलियाँ भोजन खाती हैं। उत्सर्जन करती हैं जिससे जलीय पादपों और काई का पोषण होता है और वे मछलियों का भोजन बनते हैं। इससे वे एक-दूसरे पर निर्भर हैं।

प्रश्न 3.
जलीय जीवों के नाम उसी क्रम में लिखिए जिसमें एक जीव दूसरे जीव को खाता है तथा एक ही श्रृंखला की स्थापना कीजिए जिसमें कम से कम तीन चरण हों।
उत्तर-
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प्रश्न 4.
क्या आप किसी एक समूह को सबसे अधिक महत्व का मानते हैं? क्यों एवं क्यों नहीं ?
उत्तर-
सभी समूह महत्वपूर्ण हैं परन्तु उत्पादक (पादप) सबसे महत्वपूर्ण हैं। उनके बिना अन्य प्राणियों का जीवन संभव नहीं है।

क्रियाकलाप 15.3. (पा. पु. पृ. स. 292)

प्रश्न 1.
समाचार पत्रों में, तैयार सामग्री अथवा भोज्य पदार्थों में पीड़क एवं रसायनों की मात्रा के विषय में अक्सर ही समाचार छपते रहते हैं। कुछ राज्यों ने इन पदार्थों पर रोक भी लगा दी है। इस प्रकार की रोक के औचित्य पर चर्चा कीजिए।
उत्तर-
पीड़कनाशी जैव आवर्धन द्वारा आहार श्रृंखला में प्रवेश कर जाते हैं और अन्ततः मानव में प्रवेश करके अनेक बीमारियों का कारण बनते हैं। विभिन्न प्रकार के शीतल पेय पदार्थों में इनकी उपस्थिति प्रायः समाचार पत्रों में छपती रहती है। अनेक राज्यों ने इनके प्रयोग पर रोक लगा दी है।

प्रश्न 2.
आपके विचार में इन खाद्य पदार्थों में पीड़क नाशियों का स्रोत क्या है ? क्या यह पीड़कनाशी अन्य खाद्य स्त्रोतों के माध्यम से हमारे शरीर में पहुँच सकते हैं ?
उत्तर-
खेत-खलिहानों में फसलों की सुरक्षा की दृष्टि से विभिन्न कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है। ये फसल के माध्यम से धान्यों में पहुँच जाते हैं, साथ ही पशुओं द्वारा खाये गये ‘चारे से उनके मांस एव दूध में भी पहुँच जाते हैं। फल, सब्जियाँ, दालों आदि में भी इनकी मात्रा संचित हो जाती है। जब ये वस्तुएँ मानव द्वारा खायी जाती हैं तो मानव के शरीर में वे संचित हो जाते हैं।

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प्रश्न 3.
किन उपायों द्वारा शरीर में इन पीड़कनाशियों की मात्रा कम की जा सकती है ? चर्चा कीजिए।
उत्तर-
फलों एवं सब्जियों को भली भाँति धो लेने से, इन्हें छीलकर इस्तेमाल करने से इन कीटनाशकों से कुछ बचाव किया जा सकता है। विभिन्न स्रोतों से प्राप्त खाद्य पदार्थों के प्रयोग से भी कुछ बचाव हो सकता है।

क्रियाकलाप 15.4. (पा. पु. पृ. सं. 293)

प्रश्न 1.
पुस्तकालय, इंटरनेट अथवा समाचार-पत्रों से पता लगाइए कि वे कौन से रसायन हैं जो ओजोन परत की क्षीणता के लिए उत्तरदायी हैं ?
उत्तर-
क्लोरो-फ्लुओरो कार्बन, नाइट्रोजन ऑक्साइड तथा हाइड्रोकार्बन, ओजोन परत की क्षीणता के लिए उत्तरदायी हैं |

प्रश्न 2.
पता लगाइए इन पदार्थों के उत्पादन एवं उत्सर्जन के नियमन संबंधी कानून ओजोन क्षरण कम करने में सफल रहे हैं? क्या पिछले कुछ वर्षों में ओजोन छिद्र के आकार में कुछ परिवर्तन आया है?
उत्तर-
रेफ्रिजरेटर्स, अग्निशामकों, ऐरोसोल आदि से उत्सर्जित क्लोरो-फ्लुओरो कार्बन के कारण ओजोन क्षरण होता है। मांट्रियल प्रोटोकोल के प्रयासों से पिछले कुछ वर्षों में ओजोन-छिद्र के आकार में कुछ परिवर्तन आया है।

क्रियाकलाप 15.5. (पा. पु. पृ. सं. 294)

प्रश्न 1.
वे कौनसे पदार्थ हैं जो लम्बे समय बाद भी अपरिवर्तित रहते हैं ?
उत्तर-
लंबे समय तक दूध की खाली थैलियाँ, दवा की खाली बोतलें, स्ट्रिप्स, टूटे जूते आदि अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ अपरिवर्तित रहते हैं।

प्रश्न 2.
वे कौन-से पदार्थ हैं जिनके स्वरूप व संरचना में परिवर्तन होता है ?
उत्तर-
संदूषित भोजन, सब्जियों के छिलके, चाय की उपयोग की गयी पत्तियाँ, रद्दी कागज आदि पदार्थों की संरचना में परिवर्तन होते हैं।

प्रश्न 3.
जिन पदार्थों के स्वरूप में समय के साथ परिवर्तन आया है, कौन-से पदार्थ अल्पतम समय में अतिशीघ्र परिवर्तित हुए हैं ?
उत्तर-
सबसे कम समय में सूती कपड़े, सब्जियों के छिलके, संदूषित भोजन और चाय की उपयोग की गई पत्तियों का स्वरूप परिवर्तित हुआ है।

क्रियाकलाप 15.6 (पा. पु. पृ. सं. 294)

प्रश्न 1.
अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ कितने समय तक पर्यावरण में इसी रूप में बने रह सकते हैं ?
उत्तर-
जैव और अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों को अपनी संरचना बदलने में अलग-अलग समय लगता है। सूती कपड़ों के चीथड़े प्रायः 1-6 माह, कागज 2-6 माह, फलों व सब्जियों के छिलके 6 माह, ऊनी कपड़े 1-5 वर्ष, लेमिनेटेड डिब्बे 5 वर्ष, चमड़े के जूते 25-40 वर्ष, नाइलॉन/टेरीलीन 30-40 वर्ष, धातुएँ 50 से 100 वर्ष और काँच की बोतलें/बर्तन दस लाख वर्ष में अपनी संरचना बदल लेते हैं। प्लास्टिक का सामान कभी भी विकृत नहीं होता है।

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प्रश्न 2.
आजकल ‘जैव निम्नीकरणीय प्लास्टिक’ उपलब्ध हैं। इन पदार्थों के विषय में अधिक जानकारी प्राप्त कीजिए तथा पता लगाइए कि क्या उनसे पर्यावरण को हानि हो सकती है अथवा नहीं।
उत्तर-
गेहूँ, मकई या आलू से प्राप्त स्टार्च की लैक्टिक अम्ल से जीवाणुओं की उपस्थिति में क्रिया से जैव निम्नीकरणीय प्लास्टिक बनाया जा रहा है। इसे पॉलीलैक्टाइड (Polylactide) कहते हैं। इनसे पर्यावरण की हानि नहीं होती।

क्रियाकलाप 15.7. (पा. पु. पृ.सं. 295)

प्रश्न 1.
पता लगाइए कि घरों में उत्पादित कचरे का क्या होता है? क्या किसी स्थान से इसे एकत्र करने का कोई प्रबन्ध है?
उत्तर-
आमतौर पर घरों से उत्पन्न कूड़ा-कर्कट किसी बन्द बाल्टी में एकत्र कर लिया जाता है जिसे स्थानीय निकायों के कर्मचारी किसी बड़े स्थान पर ले जाते हैं।

प्रश्न 2.
पता लगाइए कि स्थानीय निकायों (पंचायत, नगर पालिका, आवास कल्याण समिति ‘RWA’) द्वारा इसका निपटान किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर-
स्थानीय निकाय एकत्र किए गए कचरे को गाड़ियों द्वारा व्यर्थ भूमि के भराव के लिए या खाद बनाने के लिए भेजते हैं।

प्रश्न 3.
क्या वहाँ जैव अपघटित तथा अजैव अपघटित कचरे को अलग-अलग करने की व्यवस्था है?
उत्तर-
हाँ। जैव निम्नीकरणीय कचरे को खाद निर्माण के लिए तथा अजैव निम्नीकरणीय कचरे को पुनः चक्रण हेतु भेज दिया जाता है।

प्रश्न 4.
गणना कीजिए कि एक दिन में घर से कितना कचरा उत्पादित होता है ?
उत्तर-
सामान्यतया एक दिन में घर से 2 से 3 किग्रा कचरा उत्पन्न होता है।

प्रश्न 5.
इसमें से कितना कचरा जैव निम्नीकरणीय है?
उत्तर-
इसका अधिकांश भाग जैव निम्नीकरणीय है।

प्रश्न 6.
गणना कीजिए कि कक्षा में प्रति दिन कितना कचरा उत्पादित होता है ?
उत्तर-
कक्षा में उत्पन्न कचरा प्रायः फटे कागज, धूल, बचे-खुचे खाद्य पदार्थ, पेंसिल की छीलन, चॉक के टुकड़े आदि होता है।

प्रश्न 7.
इसमें कितना कचरा जैव निम्नीकरणीय है और कितना अजैव निम्नीकरणीय है ?
उत्तर-
अधिकांश भाग जैव निम्नीकरणीय होता है।

प्रश्न 8.
इस कचरे से निपटने के कुछ उपाय सुझाइए।
उत्तर-
कचरे को स्कूल में बगीचे में गड्ढा खोदकर दबा देना चाहिए।

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क्रियाकलाप 15.8. (पा. पु. पृ. सं. 295)

प्रश्न 1.
पता लगाइए कि आपके क्षेत्र में मल व्ययन की क्या व्यवस्था है? क्या वहाँ इस बात का प्रबंध है कि स्थानीय जलाशय एवं जल के अन्य स्रोत जल मल से प्रभावित न हों?
उत्तर-
हमारे क्षेत्र में मल व्ययन के लिए भूमिगत सीवरेज की व्यवस्था है। सड़क के एक ओर जलवाही पाइप लाइनें हैं तो दूसरी ओर सीवेज पाइपलाइनें हैं इसलिए पेय जल मल प्रभावित नहीं हो सकता।

प्रश्न 2.
अपने क्षेत्र में पता लगाइए कि स्थानीय उद्योग अपने अपशिष्ट (कूड़े-कचरे एवं तरल अपशिष्ट) के निपटान का क्या प्रबन्ध करते हैं? क्या वहाँ इस बात का प्रबन्धन है जिससे सुनिश्चित हो सके कि इन पदार्थों से भूमि तथा जल का प्रदूषण नहीं होगा।
उत्तर-
गंदे प्रदूषित जल को साफ करके विभिन्न रासायनिक पदार्थों द्वारा उपचारित किया जाता है और नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है।

क्रियाकलाप 15.9. (पा. पु. पृ. सं. 296)

प्रश्न 1.
इंटरनेट अथवा पुस्तकालय की सहायता से पता लगाएँ कि इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के निपटान के समय किन खतरनाक वस्तुओं से आपको सुरक्षापूर्वक छुटकारा पाना है। यह पदार्थ पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
उत्तर-
इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं में सीसा, कैडमियम, सिलिकॉन, प्लास्टिक आदि आते हैं जो मृदा को प्रदूषित करते हैं। इसका हमारे स्वास्थ्य तथा अन्य जीवों पर कुप्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 2.
पता लगाइए कि प्लास्टिक का पुनः चक्रण किस प्रकार होता है? क्या प्लास्टिक के पुनः चक्रण का पर्यावरण पर कोई प्रभाव होता है ?
उत्तर-
प्लास्टिक को पिघलाकर खिलौने, मग, कंघे, बाल्टियाँ आदि तैयार किए जाते हैं। पुनः चक्रण के समय प्लास्टिक से अनेक हानिकारक गैसें उत्पन्न होती हैं जो वाय को प्रदूषित करती हैं। प्रदूषित वायु से हमारे स्वास्थ्य तथा अन्य जीवों पर बुरा प्रभाव होता है।

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HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत Textbook Exercise Questions, and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

HBSE 10th Class Science उर्जा के स्रोत Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
गर्म जल प्राप्त करने के लिए हम सौर जल तापक का उपयोग किस दिन नहीं कर सकते?
(a) धूप वाले दिन
(b) बादलों वाले दिन
(c) गरम दिन
(d) पवनों (वायु) वाले दिन।
उत्तर-
(b) बादलों वाले दिन।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन जैव-मात्रा ऊर्जा स्त्रोत का उदाहरण नहीं है?
(a) लकड़ी
(b) गोबर गैस
(c) नाभिकीय ऊर्जा
(d) कोयला।
उत्तर-
(c) नाभिकीय ऊर्जा।

प्रश्न 3.
जितने ऊर्जा स्रोत हम उपयोग में लाते हैं, उनमें से अधिकांश सौर ऊर्जा को निरूपित करते हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा ऊर्जा स्रोत अन्ततः सौर ऊर्जा से व्युत्पन्न नहीं है?
(a) भूतापीय ऊर्जा
(b) पवन ऊर्जा
(c) नाभिकीय ऊर्जा
(d) जैवमात्रा।
उत्तर-
(c) नाभिकीय ऊर्जा।

प्रश्न 4.
ऊर्जा स्त्रोत के रूप में जीवाश्मी ईंधनों तथा सूर्य की तुलना कीजिए और उनमें अन्तर लिखिए।
उत्तर-
जीवाश्मी ईंधनों तथा सूर्य की तुलना-

जीवाश्मी ईंधनसूर्य
1.यह ऊर्जा का अनवीकरणीय स्रोत हैं।यह ऊर्जा का नवीकरणीय स्रोत है।
2. जीवाश्म ईंधन प्रदूषण फैलाते हैं।सूर्य से प्राप्त ऊर्जा में कोई प्रदूषण नहीं होता।
3. जीवाश्म ईंधन से हमारी सभी ऊर्जाओं की पूर्ति हो सकती है।सौर ऊर्जा से हमारी सभी ऊर्जा सम्बन्धी आवश्य कताओं की पूर्ति सम्भव नहीं है।
4. इससे ऊर्जा प्रत्येक समय, प्रत्येक परिस्थिति में प्राप्त की जा सकती है।बादलों से घिरे आकाश वाले दिन तथा रात्रि में सूर्य से ऊर्जा प्राप्त नहीं की जा सकती।

प्रश्न 5.
जैव मात्रा तथा ऊर्जा स्रोत के रूप में जल विद्युत की तुलना कीजिए और उनमें अन्तर लिखिए।
उत्तर-
जैव मात्रा तथा जल विद्युत की तुलना-

जैव मात्राजल विद्युत
1. जैव मात्रा से ऊर्जा प्राप्त करने के प्रक्रम में प्रदूषण फैलता है।जल विद्युत ऊर्जा का स्वच्छ स्रोत है।
2. जैव मात्रा द्वारा प्राप्त ऊर्जा को सीमित स्थान में ही प्रयोग किया जा सकता है।जल विद्युत ऊर्जा को लाइनों द्वारा कहीं भी संचरित किया जा सकता है।
3. जैव मात्रा केवल सीमित मात्रा में ही ऊर्जा प्रदान कर सकती है।जल विद्युत ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से ऊर्जा निष्कर्षित करने की सीमाएँ लिखिए
(a) पवनें,
(b) तरंगें,
(c) ज्वार-भाटा।
उत्तर-
(a) पवन ऊर्जा की सीमाएँ-
1. पवन ऊर्जा के निष्कर्षण हेतु पवन ऊर्जा फार्म की स्थापना के लिये बहुत अधिक बड़े स्थान की आवश्यकता होती है।
2. हवा की तेज गति के कारण टूट-फूट और नुकसान की संभावनाएँ अधिक होती हैं।
3. पवन ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए हवा की गति 15 km/h से अधिक होनी चाहिए।

(b) तरंगों से प्राप्त ऊर्जा की सीमाएँ-समुद्र तल पर जल तरंगें तीव्र वेग से चलने वाली समुद्री हवाओं के कारण उत्पन्न होती हैं। केवल कुछ ही स्थानों पर ये तरंगें इतनी शक्तिशाली होती हैं कि उनसे सम्बद्ध ऊर्जा का दोहन किया जा सके।

(c) ज्वार-भाटा ऊर्जा की सीमाएँ-प्रत्येक ज्वार के समय जल का चढ़ाव इतना पर्याप्त नहीं हो पाता है कि उससे विद्युत उत्पन्न की जा सके। इसके अतिरिक्त समुद्र तट का केवल कुछ ही स्थान बाँध बनाने के लिए अच्छा रहता है। इस कारण से ज्वारीय ऊर्जा को विश्वसनीय ऊर्जा स्रोत के रूप में नहीं मान सकते।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

प्रश्न 7.
ऊर्जा स्रोतों का वर्गीकरण निम्नलिखित वर्गों में किस आधार पर करेंगे
(a) नवीकरणीय तथा अनवीकरणीय
(b) समाप्य तथा अक्षय क्या (a) तथा (b) के विकल्प समान हैं ?
उत्तर-
(a) नवीकरणीय तथा अनवीकरणीय स्रोतयदि कोई ऊर्जा स्रोत एक बार अपनी ऊर्जा दे देने के उपरान्त पुनः ऊर्जा देने की स्थिति में आ सकता है तो ऐसे स्रोतों को नवीकरणीय स्रोतों के वर्ग में रखा जाता है उदाहरण के लिए-जल विद्युत, जैव मात्रा। – यदि कोई ऊर्जा स्रोत अपनी सम्पूर्ण ऊर्जा दे चुकने के पश्चात् पुनर्जीवित नहीं हो सकता तो ऐसे स्रोत को अनवीकरणीय स्रोतों के वर्ग में रखा जाएगा। उदाहरण के लिएजीवाश्मी ईंधन।

(b) समाप्य तथा अक्षय स्रोत-यदि कोई ऊर्जा स्रोत निश्चित समय तक ऊर्जा प्रदान करने के पश्चात् समाप्त हो जाए तथा उसे पुनः प्राप्त न किया जा सके तो उसे समाप्य ऊर्जा स्रोत माना जाएगा। उदाहरण के लिए जीवाश्मी ईंधन।

यदि किसी ऊर्जा स्रोत को प्रयोग करने के पश्चात् बार-बार फिर से प्राप्त किया जा सकता हो तो उसे अक्षय ऊर्जा स्रोत कहते हैं। पवन ऊर्जा अक्षय ऊर्जा स्रोत है। ऊपर दिए गए विवरणों से स्पष्ट है कि (a) तथा (b) विकल्प एक जैसे हैं।

प्रश्न 8.
ऊर्जा के आदर्श स्त्रोत में क्या गुण होते हैं ?
उत्तर-

  • पर्याप्त मात्रा में स्त्रोत द्वारा ऊर्जा प्रदान करने की क्षमता होनी चाहिए।
  • सरलता से प्रयोग करने की सुविधा से संपन्न होना चाहिए।
  • यह पर्यावरण के लिए हितकारी होना चाहिए।
  • ऊर्जा स्रोत ऐसा होना चाहिए जो दीर्घकाल तक नियत दर पर ऊर्जा प्रदान कर सके।
  • यह आर्थिक रूप से सस्ता होना चाहिए।

प्रश्न 9.
सौर कुकर का उपयोग करने के क्या लाभ तथा हानियाँ हैं? क्या ऐसे भी क्षेत्र हैं जहाँ सौर कुकरों की सीमित उपयोगिता है ?
उत्तर-
सौर कुकर के लाभ-
1. ईंधन का कोई खर्च नहीं होता तथा इससे प्रदूषण नहीं होता है।
2. इसमें धीमी गति से खाना पकता है इसलिए इसके द्वारा पके भोजन, से पोषक तत्व नष्ट नहीं होते।
3. इसमें निरन्तर देखभाल की आवश्यकता नहीं होती है।

सौर कुकर से हानियाँ-
1. यह बहुत अधिक तापमान उत्पन्न नहीं कर सकता है।
2. यह रात्रि में, बरसात में तथा बादल वाले दिनों में काम नहीं करते।
3. सौर कुकर से खाना धीमी गति से पकता है, अतः खाना पकाने में बहुत अधिक समय लगता है।
4. यह 100°C -140°C तापमान प्राप्त करने के लिए 2-3 घंटे ले लेता है। ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जहाँ सौर कुकरों का प्रयोग सीमित अवधि में हो पाता है। जिन क्षेत्रों में आकाश में बादल रहते हैं वहाँ यह ठीक से कार्य नहीं कर पाता है वहाँ इनकी सीमित उपयोगिता है।

प्रश्न 10.
ऊर्जा की बढ़ती माँग के पर्यावरणीय परिणाम क्या हैं ? ऊर्जा की खपत को कम करने के उपाय लिखिए।
उत्तर-
ऊर्जा की माँग जनसंख्या वृद्धि के साथ निरंतर बढ़ती जाती है। ऊर्जा किसी प्रकार की हो उसका पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। जीवाश्मी ईंधनों को जलाने पर ये वायु प्रदूषण फैलाते हैं फलस्वरूप पृथ्वी का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। नाभिकीय रिऐक्टर से निकलने वाले कचरे द्वारा खतरनाक विकिरण उत्सर्जित होते हैं जो पर्यावरण के लिए नुकसानदेय हैं।

ऊर्जा की खपत को कम करने के उपाय-
1. घरों में विद्युत के उपकरणों को आवश्यकता होने पर ही प्रयोग में लाया जाना चाहिए।
2. जीवाश्मी ईंधन का प्रयोग कम से कम करना चाहिए। अलग-अलग वाहनों की बजाय सामूहिक वाहन (सार्वजनिक परिवहन प्रणाली) का प्रयोग करना चाहिए।

HBSE 10th Class Science उर्जा के स्रोत InText Questions and Answers

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 273)

प्रश्न 1.
ऊर्जा का उत्तम स्त्रोत किसे कहते हैं ?
उत्तर-
ऊर्जा का उत्तम स्रोत वह स्रोत है जिसमें निम्नलिखित गुण होते हैं-

  • जिसके प्रति एकांक द्रव्यमान से अधिक ऊर्जा प्राप्त हो सके।
  • जो सरलता से उपलब्ध हो सके।
  • जिसका भण्डारण आसान व परिवहन में आसानी हो।
  • सस्ता हो।

प्रश्न 2.
उत्तम ईंधन किसे कहते हैं ?
उत्तर-
उत्तम ईंधन के निम्नलिखित गुण होते हैं-

  • ईंधन के जलाने पर प्रति एकांक द्रव्यमान से अधिक ऊष्मा प्राप्त हो सके।
  • जलने पर उससे कम से कम धुआँ उत्पन्न हो। ]
  • आसानी से उपलब्ध हो।

प्रश्न 3.
यदि आप अपने भोजन को गरम करने के लिए किसी भी ऊर्जा-स्रोत का उपयोग कर सकते हैं तो आप किसका उपयोग करेंगे और क्यों?
उत्तर-
हम रसोई गैस या माइक्रोवेव ओवन का प्रयोग करेंगे क्योंकि उपर्युक्त दोनों स्रोत उपयोग में आसान हैं, आर्थिक रूप से सस्ते हैं तथा प्रदूषण भी नहीं फैलाते हैं।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 279)

प्रश्न 1.
जीवाश्मी ईधन की क्या हानियाँ हैं ?
उत्तर-
जीवाश्मी ईंधन से निम्नलिखित हानियाँ हैं-

  • पृथ्वी पर जीवाश्मी ईंधन का सीमित भण्डार उपलब्ध है अतः इनका संरक्षण आवश्यक है। .
  • जीवाश्मी ईंधन, जलाए जाने पर प्रदूषण फैलाते हैं।
  • ये अम्ल वर्षा करने में भागीदार होते हैं।

प्रश्न 2.
हम ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर क्यों ध्यान दे रहे हैं ?
उत्तर-
हमारे जीवन के लिए प्रत्येक कार्य में ऊर्जा की आवश्यकता होती है। खाना पकाने, बिजली उत्पन्न करने, कल कारखानों को चलाने हेतु ऊर्जा की आवश्यकता होती है जिसे हम आजकल अधिकतर पेट्रोलियम पदार्थों से पूरा कर रहे हैं। इनका प्रयोग होने पर इन्हें पुनः उत्पन्न नहीं किया जा सकता इस कारण से इनका संरक्षण आवश्यक है। अतः हमें ऐसे नवीकरणीय स्रोतों की ओर ध्यान देना होगा जो कि आसानी से उपलब्ध हैं और जिनका असीमित तथा व्यापक उपयोग किया जा सकता है।

सौर ऊर्जा एक ऐसा स्रोत है जो विभिन्न माध्यमों से ऊर्जा प्रदान करता है। सौर ऊर्जा का सीधा प्रयोग युगों से किया जा रहा है। हमारी आवश्यकताएँ निरंतर बढ़ने के कारण उन्हें पूरा करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग में वृद्धि करनी चाहिए ताकि भविष्य में हमें ऊर्जा संकट का सामना न करना पड़े। नवीकरणीय ऊर्जा से वातावरण का प्रदूषण भी रोका जा सकता है।

प्रश्न 3.
हमारी सुविधा के लिए पवनों तथा जल ऊर्जा के पारंपरिक उपयोग में किस प्रकार सुधार किए गए हैं ?
उत्तर-
प्राचीनकाल में पवन ऊर्जा का उपयोग पालदार नावों को चलाने में एवं पवनचक्की की सहायता से यान्त्रिक कार्य करने के लिए किया जाता था परन्तु अन्य प्रकार की ऊर्जा की तुलना में विद्युत ऊर्जा का उपयोग सबसे अधिक सुविधाजनक है। इसलिए पवन ऊर्जा का उपयोग विद्युत उत्पादन में किया जाने लगा है। इसके लिए समुद्र तट के समीप के स्थानों में बहुत सी पवन चक्कियाँ एक साथ लगाकर बड़े-बड़े ऊर्जा फार्म स्थापित किये गये हैं जहाँ पर्याप्त विद्युत ऊर्जा का उत्पादन होता है। इसी प्रकार जल ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा के रूप में प्रयोग करने के लिए पहाड़ी ढालों पर बाँध बनाकर जल को एकत्रित किया जाता है। एकत्रित जल को जनित्र की टरबाइन पर डालकर विद्युत ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 285)

प्रश्न 1.
सौर कुकर के लिए कौन सा दर्पण अवतल, उत्तल अथवा समतल सर्वाधिक उपयुक्त होता है ? क्यों ?
उत्तर-
अवतल दर्पण सर्वाधिक उपयुक्त होता है क्योंकि यह अपने ऊपर गिरने वाली सम्पूर्ण सौर ऊर्जा को अपने फोकस पर सूक्ष्म बिन्दु के रूप में केन्द्रित कर देता है।

प्रश्न 2.
महासागरों से प्राप्त हो सकने वाली ऊर्जाओं
उत्तर-

  • ज्वार-भाटा की ऊर्जा का उपयोग करने के लिए बाँध बनाने योग्य स्थान सीमित हैं|
  • तरंग ऊर्जा भी केवल उन्हीं स्थानों पर उपयोग की जा सकती है जहाँ तरंगें पर्याप्त शक्तिशाली हों।
  • महासागरीय तापीय ऊर्जा के दोहन की तकनीक बहुत ही कठिन है।

प्रश्न 3.
भूतापीय ऊर्जा क्या होती है ?
उत्तर-
पृथ्वी के आन्तरिक भाग में स्थित, पिघली हुई चट्टानें भूगर्भीय हलचल के कारण केन्द्रीय भाग से सतह की ओर विस्थापित हो जाती हैं तथा गर्म क्षेत्रों का निर्माण करती हैं। जब कभी भूगर्भीय जल इस प्रकार के गर्म क्षेत्रों के संपर्क में आता है तो वाष्प में बदल जाता है तथा इस जल वाष्प को पाइपों की सहायता से बाहर लाकर टरबाइन चलाकर विद्युत ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है। पृथ्वी के गर्भ में स्थित उच्च ताप क्षेत्रों से सम्बद्ध ऊर्जा को भूतापीय ऊर्जा कहते हैं।

प्रश्न 4.
नाभिकीय ऊर्जा का क्या महत्व है ?
उत्तर-
अन्य परम्परागत ऊर्जा स्रोत सीमित तथा शीघ्र समाप्त हो जाने वाले हैं जबकि नाभिकीय ऊर्जा बहुत लम्बे समय तक हमारी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है। जीवाश्मी ईंधन से प्राप्त ऊर्जा की तुलना में यूरेनियम के विखण्डन से बहुत अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 285)

प्रश्न 1.
क्या कोई ऊर्जा स्त्रोत प्रदूषण मुक्त हो सकता है? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
उत्तर-
नहीं, कोई भी ऊर्जा स्रोत पूर्ण रूप से प्रदूषण मुक्त नहीं हो सकता, चाहे ऊर्जा स्रोत कितना ही विकसित क्यों न हो फिर भी वह पर्यावरण को किसी न किसी प्रकार से नुकसान पहुंचाता ही है। सौर सेल को प्रायः प्रदूषण मुक्त कहते हैं परन्तु इस युक्ति के निर्माण में पर्यावरणीय क्षति होती ही है।

प्रश्न 2.
राकेट ईधन के रूप में हाइड्रोजन का उपयोग न किया जाता रहा है ? क्या आप इसे CNG की तुलना में अधिक स्वच्छ ईंधन मानते हैं ? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
उत्तर-
हाइड्रोजन CNG से स्वच्छ ईंधन है क्योंकि यह दहन क्रिया में CO2, को उत्पन्न नहीं करती और न ही इसका अपूर्ण दहन होता है। इसके जलने से केवल जल उत्पन्न होता है। CNG के जलने से CO2, उत्पन्न होती है जो कि ग्रीन हाऊस गैस है और पर्यावरण के लिए हानिकारक है।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 286)

प्रश्न 1.
ऐसे दो ऊर्जा स्रोतों के नाम लिखिए जिन्हें आप नवीकरणीय मानते हैं। अपने चयन के लिए तर्क दीजिए।
उत्तर-
वायु ऊर्जा, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा एवं सागरीय ऊर्जा नवीकरणीय स्रोत हैं क्योंकि इनका प्रयोग तब तक किया जा सकता है जब तक हमारे सौर परिवार की समान परिस्थितियाँ बनी रहेंगी।

प्रश्न 2.
ऐसे दो ऊर्जा स्रोतों के नाम लिखिए जिन्हें आप समाप्य मानते हैं। अपने चयन के लिए तर्क दीजिए।
उत्तर-
कोयला तथा पेट्रोलियम, दोनों ऊर्जा के दो समाप्य स्रोत हैं। कोयला तथा पेट्रोलियम, दोनों के पृथ्वी पर उपलब्ध भण्डार सीमित हैं तथा जल्दी ही समाप्त हो जाने वाले हैं तथा इन्हें कभी भी पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता, अतः ये दोनों ऊर्जा के समाप्य स्रोत हैं।

HBSE 10th Class Science उर्जा के स्रोत InText Activity Questions and Answers

क्रियाकलाप 14.1 (पा. पु. पृ. सं. 272)

प्रश्न 1.
प्रातःकाल सोकर उठने से विद्यालय पहुँचने तक आप जिन ऊर्जाओं का उपयोग करते हैं उनमें से ऊर्जा के किन्हीं चार रूपों की सूची बनाइए।
उत्तर-
हम अग्रलिखित ऊर्जा का उपयोग करते हैं

  • ऊष्मीय ऊर्जा खाना पकाने के लिए।
  • घर को प्रकाशित करने के लिए प्रकाशीय ऊर्जा ।
  • साइकिल चलाने और बैग होने के लिए वेशीय ऊर्जा।
  • मित्रों को बुलाने के लिए ध्वनि ऊर्जा।

प्रश्न 2.
इन विभिन्न रूपों की ऊर्जाओं को हम कहाँ से प्राप्त करते हैं?
उत्तर-
इस विभिन्न रूपों की ऊर्जाओं के स्रोत इस प्रकार हैं-
सौर ऊर्जा – सूर्य
ऊष्मीय ऊर्जा – सूर्य,
LPG पेशीय ऊर्जा – भोजन
प्रकाश ऊर्जा – विद्युत, सूर्य

प्रश्न 3.
क्या हम इन्हें ऊर्जा का स्रोत’ कह सकते हैं ? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
उत्तर-
सूर्य ऊर्जा का स्रोत है परन्तु अन्य स्रोत ऊर्जा के रूपान्तरण से प्राप्त होते हैं।

क्रियाकलाप 14.2. (पा. पु. पृ. सं. 272)

प्रश्न 1.
उन विविध विकल्पों पर विचार कीजिए जो भोजन पकाने के लिए ईंधन का चयन करते समय हमारे पास होते हैं तथा किसी ईंधन को अच्छे ईंधन की श्रेणी में रखने का प्रयास करते समय आप किन मानदंडों पर विचार करेंगे?
उत्तर-
कोयला, कोक, कैरोसीन, लकड़ी, L.P.G. ईंधन का अच्छा स्रोत होने के कारण इसका कैलोरी मान अधिक होता है। ईंधन प्रदूषण रहित, सस्ता एवं सुलभ होना चाहिए।

प्रश्न 2.
क्या तब आपकी पसंद अलग होती जब आप
(a) वन में जीवन निर्वाह कर रहे होते?
(b) किसी सुदूर पर्वतीय ग्राम अथवा छोटे द्वीप पर जीवन निर्वाह कर रहे होते ?
(c) नई दिल्ली में जीवन निर्वाह करते ?
(d) पाँच शताब्दियों पहले जीवन निर्वाह करते ?
उत्तर-
हाँ प्रत्येक स्थिति में पसंद भिन्न-भिन्न होती।
(a) वन में निर्वाह करते समय ईंधन के रूप में लकड़ी, ऊष्मा और प्रकाश के लिये सूर्य और शारीरिक ऊर्जा के लिए फलों आदि पर निर्भर करना पड़ता ।
(b) किसी पर्वतीय ग्राम अथवा छोटे द्वीप पर भी वन में जीवन निर्वाह के समान ऊर्जा के स्रोतों पर निर्भर करना पड़ता।
(c) नई दिल्ली में विद्युत चलित उपकरणों एवं पेट्रोलियम पदार्थों पर निर्भर करते।
(d) पाँच शताब्दी पहले जीवन निर्वाह के लिये, सूर्य से प्राप्त ऊर्जा, वनों की लकड़ी आदि पर निर्भर रहते।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

प्रश्न 3.
उपर्युक्त प्रत्येक परिस्थिति ईंधन की उपलब्धता की दृष्टि से किस प्रकार भिन्न थी ?
उत्तर-
पहले आबादी कम थी और ऊर्जा के सीमित स्रोत उपलब्ध थे। परन्तु जैसे-जैसे विकास हुआ, औद्योगिक क्रांति आई, आबादी बढ़ी, वैसे-वैस मानव ने ऊर्जा के नए स्रोतों को ढूँढना शुरू किया। आज ऊर्जा के परम्परागत स्रोतों की उपलब्धता धीरे-धीरे कम हो रही है तथा गैर-परम्परागत स्त्रोतों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

क्रियाकलाप 14.3. (पा. पु. पृ. सं. 274)

प्रश्न-क्या आप देखते हैं?
उत्तर-
इस प्रयोग में हम यह देखते हैं कि भाप द्वारा पंखुड़ियाँ घूमती हैं जिससे वह यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपांतरित करने के लिए डायनेमो के शैफ्ट को घुमाती है जिससे बल्ब जलने लगता है।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत 1

क्रियाकलाप 14.4. (पा. पु. पृ. सं. 279)

प्रश्न 1.
अपने दादा-दादी अथवा अन्य वयोवृद्धों से पता लगाइए कि वे
(a) अपने विद्यालय कैसे जाते थे ?
(b) अपने बचपन में दैनिक आवश्यकताओं के लिए जल कैसे प्राप्त करते थे ?
(c) मनोरंजन कैसे करते थे ?
उत्तर-
(a) हमारे दादा-दादी अपने विद्यालय पैदल या साइकिल से जाते थे, हम बस या स्कूटर से स्कूल जाते हैं।
(b) वे पानी को कुओं व हैण्डपम्प तथा नदियों से प्राप्त करते थे। हम जल की प्राप्ति नलों से करते हैं। चूँकि ऊर्जा की आवश्यकता बढ़ गयी है अतः अधिक ऊर्जा उपभुक्त हो रही है।

प्रश्न 2.
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तरों की तुलना इस प्रश्न के उत्तर से कीजिए कि “अब आप इन कार्यों को कैसे करते हैं ?”
उत्तर-
दादा दादी के युग में मनोरंजन के साधन रामलीला, लोक संगीत, रेडियो आदि थे। आधुनिक युग में मनोरंजन के अनेक साधन, जैसे—मल्टीमीडिया, कम्प्यूटर, मोबाइल, इन्टरनेट आदि मौजूद हैं।

प्रश्न 3.
क्या इन उत्तरों में कोई अन्तर है? यदि हाँ तो किस स्थिति में बाह्य स्रोतों से अधिक ऊर्जा उपभुक्त हुई।
उत्तर-
हाँ, इन उत्तरों में काफी अन्तर है। आधुनिक युग में बाह्य स्त्रोतों से अधिक ऊर्जा उपभुक्त हुई है। क्योंकि वाहनों को चलाने, जल प्राप्ति तथा मनोरंजन के लिए ऊर्जा (ईंधन) की आवश्यकता होती है।

क्रियाकलाप 14.5. (पा. पु. पृ. सं. 280)

प्रश्न 1.
दोनों फ्लास्कों को स्पर्श कीजिए। इनमें कौन तप्त है। आप इन दोनों फ्लास्कों के जल के ताप तापमापी द्वारा भी माप सकते हैं।
उत्तर-
वह फ्लास्क जिसे काले रंग से पेंट किया गया है वह तप्त है।

प्रश्न 2.
क्या आप कोई ऐसा उपाय सोच सकते है जिसके द्वारा इस ज्ञान का उपयोग आप अपने दैनिक जीवन में कर सकें।
उत्तर-
इस ज्ञान का उपयोग हम अपने दैनिक जीवन में निम्न रूपों से कर सकते हैं-

  • खाना बनाने के बर्तन के आधार को काला पेंट करके।
  • जाड़ों में गहरे रंग के कपड़े पहनकर ।
  • पानी गर्म करने में।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

क्रियाकलाप 14.6. (पा. पु. पृ. सं. 281)

प्रश्न 1.
किसी सौर कुकर/अथवा सौर जल तापक की संरचना तथा कार्य प्रणाली का विशेषकर इस दृष्टि से अध्ययन कीजिए कि उसमें ऊष्मारोधन कैसे किया जाता है तथा अधिकतम ऊष्मा अवशोषण कैसे सुनिश्चित करते
उत्तर-
अधिकतम ऊष्मा अवशोषण के लिए काँच के टुकड़े का उपयोग करते हैं। सामान्य सौर कुकर से लगभग 100°C से 120°C का तापमान उत्पन्न हो सकता है। सौर कुकर
और सौर जल तापक का उपयोग रात के समय नहीं किया जा सकता है। इनसे बहुत अधिक तापमान प्राप्त नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 2.
सस्ती सुलभ सामग्री का उपयोग करके किसी सौर कुकर अथवा सौर जल तापक का डिजाइन बनाकर उसकी संरचना प्राप्त करके यह जाँच कीजिए कि आपके इस निकाय में अधिकतम कितना ताप प्राप्त किया जा सकता है।
उत्तर-
सौर सेल, सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं। धूप में रखे जाने पर किसी सौर सेल से 0.5 – 1.0 V तक वोल्टता विकसित होती है तथा यह लगभग 0.7 W विद्युत ऊर्जा उत्पन्न कर सकते हैं। जब बहुत अधिक संख्या में सौर सेलों को संयोजित करते हैं तो यह व्यवस्था सौर पैनल कहलाती है जिनसे उपयोग के लिए पर्याप्त विद्युत की प्राप्ति हो जाती है। सौर सेलों का रख-रखाव सस्ता है तथा इन्हें कहीं भी स्थापित किया जा सकता है। सौर सेलों को बनाने के लिए सिलिकॉन का उपयोग किया जाता है सौर सेलों के उत्पादन की प्रक्रिया बहुत महँगी है, इसे परस्पर संयोजित करके सौर पैनल बनाने में सिल्वर (चाँदी) का उपयोग होता है जिसके कारण इसकी लागत में वृद्धि हो जाती है।

प्रश्न 3.
सौर कुकरों अथवा सौर जल तापकों के उपयोग की सीमाओं एवं विशेषताओं पर चर्चा कीजिए।
उत्तर-
सौर कुकर-परावर्तक पृष्ठ अथवा श्वेत (सफेद) पृष्ठ की तुलना में काला पृष्ठ अधिक ऊष्मा अवशोषित करता है। सौर कुकरों में सूर्य की किरणों को फोकसित करने के लिए दर्पणों का उपयोग किया जाता है जिससे इनका ताप . उच्च हो जाता है। सौर कुकरों में काँच की शीट का एक ढक्कन होता है।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत 2

ट्रैफिक सिग्नलों, परिकलकों तथा बहुत से खिलौनों में सौर सेल लगे होते हैं। अधिक महँगा होने के कारण सौर सेलों का घरेलू उपयोग अभी तक सीमित है।

क्रियाकलाप 14.7. (पा. पु. पृ. सं. 284)

प्रश्न 1.
कक्षा में इस प्रश्न पर चर्चा कीजिए कि महासागरीय तापीय ऊर्जा, पवनों तथा जैव मात्रा की ऊर्जाओं का अंतिम स्त्रोत क्या है ?
उत्तर-
इन सभी ऊर्जाओं का अंतिम स्रोत सूर्य है इसकी ऊर्जा से ही अन्य ऊर्जाओं का रूपांतरण होता है।

प्रश्न 2.
क्या इस संदर्भ में भूतापीय ऊर्जा तथा नाभिकीय ऊर्जा भिन्न है? क्यों ?
उत्तर-
भूतापीय ऊर्जा के लिए भूमिगत लावा से उत्पन्न ऊष्मा आधार है तो नाभिकीय ऊर्जा भारी नाभिक तत्वों के नाभिको के विखंडन से उत्पन्न ऊर्जा का आधार है।

प्रश्न 3.
आप जल विद्युत ऊर्जा को किस श्रेणी में रखेंगे?
उत्तर-
जल विद्युत एवं तरंग ऊर्जा भी अंततः सूर्य की ऊष्मा द्वारा ही प्राप्त होते हैं।

क्रियाकलाप 14.8. (पा. पु. पृ. सं. 285)

प्रश्न-
1. विविध ऊर्जा स्त्रोतों के विषय में जानकारी एकत्र करके उसके बारे में ज्ञात कीजिए कि उसमें से प्रत्येक पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करता है।
2. प्रत्येक ऊर्जा स्रोत के लाभ तथा हानियों पर वाद-विवाद कीजिए तथा इस आधार पर ऊर्जा का सर्वोतम स्रोत चुनिए।
उत्तर-
स्रोत द्वारा पर्यावरण का नुकसान नहीं होना चाहिए तथा सर्वोतम स्रोत उसी को माना जाना चाहिए जिससे पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो तथा उच्च स्तरीय ऊर्जा सस्ते में प्राप्त हो सके तथा उसका भंडारण संभव हो।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 14 उर्जा के स्रोत

क्रियाकलाप 14.9. (पा. पु. पृ. सं. 286)
प्रश्न-कक्षा में निम्नलिखित समस्याओं पर वादविवाद कीजिए –
(a) यह कहा जाता है कि अनुमानतः कोयले के भंडार आने वाले दो सौ वर्ष के लिए पर्याप्त हैं। क्या इस प्रकरण में हमें चिंता करने की आवश्यकता है कि हमारे कोयले के भंडार रिक्त होते जा रहे हैं? क्यों अथवा क्यों नहीं?
(b) ऐसा अनुमान है कि सूर्य आगामी 5 करोड़ वर्ष तक जीवित रहेगा। क्या हमें यह चिन्ता करनी चाहिए कि सौर ऊर्जा समाप्त हो रही है? क्यों अथवा क्यों नहीं ?
(c) वाद-विवाद के आधार पर यह निर्णय लीजिए कि कौन सा ऊर्जा स्रोत (a) समाप्य, (b) अक्षय, (c) नवीकरणीय तथा (d) अनवीकरणीय है। प्रत्येक चयन के लिए अपना तर्क दीजिए।
उत्तर-
अध्यापक/अध्यापिकाओं की सहायता से कक्षा में वाद-विवाद कीजिए।

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HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव Textbook Exercise Questions, and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

HBSE 10th Class Science विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन किसी लम्बे विद्युत धारावाही तार के निकट चुम्बकीय क्षेत्र का सही वर्णन करता है?
(a) चुम्बकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के लम्बवत् होती हैं।
(b) चुम्बकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ तार के समान्तर होती हैं।
(c) चुम्बकीय क्षेत्र की क्षेत्र रेखाएँ अरीय होती हैं जिनका उद्भव तार से होता है।
(d) चुम्बकीय क्षेत्र की संकेन्द्रीय क्षेत्र रेखाओं का केन्द्र तार होता है।
उत्तर-
(d) चुम्बकीय क्षेत्र की संकेन्द्रीय क्षेत्र रेखाओं का केन्द्र तार होता है।

प्रश्न 2.
वैद्युत-चुम्बकीय प्रेरण की परिघटना
(a) किसी वस्तु को आवेशित करने की प्रक्रिया है।
(b) किसी कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित होने के कारण चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने की प्रक्रिया है।
(c) कुंडली तथा चुम्बक के बीच आपेक्षिक गति के कारण कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न करना है।
(d) किसी विद्युत मोटर की कुंडली को घूर्णन कराने की प्रक्रिया है।
उत्तर-
(c) कुंडली तथा चुम्बक के बीच आपेक्षिक गति के कारण कुंडली में प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न करना है।

प्रश्न 3.
विद्युत धारा उत्पन्न करने की युक्ति को कहते हैं-
(a) जनित्र
(b) गैल्वेनोमीटर
(c) ऐमीटर
(d) मोटर।
उत्तर-
(a) जनित्र।

प्रश्न 4.
किसी ac जनित्र तथा dc जनित्र में एक मूलभूत अन्तर यह है कि- .
(a) ac जनित्र में विद्युत चुम्बक होता है जबकि dc मोटर में स्थायी चुम्बक होता है।
(b) dc जनित्र उच्च वोल्टता का जनन करता है।
(c) ac जनित्र उच्च वोल्टता का जनन करता है।
(d) ac जनित्र में सी वलय होते हैं, जबकि dc जनित्र में दिक्परिवर्तक होता है।
उत्तर-
(d) ac जनित्र में सी वलय होते हैं, जबकि dc जनित्र में दिक्परिवर्तक होता है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

प्रश्न 5.
लघुपथन के समय, परिपथ में विद्युत धारा का मान
(a) बहुत कम हो जाता है
(b) परिवर्तित नहीं होता
(c) बहुत अधिक बढ़ जाता है
(d) निरन्तर परिवर्तित होता है।
उत्तर-
(c) बहुत अधिक बढ़ जाता है।

प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रकथनों में कौन-सा सही है तथा कौन-सा गलत है? इसे प्रकथन के सामने अंकित कीजिए
(a) विद्युत मोटर यान्त्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित करता है।
(b) विद्युत जनित्र विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धान्त पर कार्य करता है।
(c) किसी लम्बी वृत्ताकार विद्युत धारावाही कुंडली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र समान्तर सीधी क्षेत्र रेखाएँ होता है।
(d) हरे विद्युतरोधन वाला तार प्रायः विद्युन्मय तार होता है।
उत्तर-
(a) असत्य,
(b) सत्य,
(c) सत्य,
(d) असत्य।

प्रश्न 7.
चुम्बकीय क्षेत्र के तीन स्त्रोतों की सूची बनाइए।
उत्तर-
चुम्बकीय क्षेत्र के स्रोत हैं-
(1) स्थायी चुम्बक,
(2) विद्युत धारा तथा
(3) गतिमान आवेश।

प्रश्न 8.
परिनालिका चुम्बक की भाँति कैसे व्यवहार करती है? क्या आप किसी छड़ चुम्बक की सहायता से किसी विद्युत धारावाही परिनालिका के उत्तर ध्रुव तथा दक्षिण ध्रुव का निर्धारण कर सकते हैं।
उत्तर-
धारावाही परिनालिका एक छड़ चुम्बक की भाँति ही व्यवहार करती है। इनमें निम्नलिखित समानताएँ होती हैं-

  • धारावाही परिनालिका एवं छड़ चुम्बक दोनों को स्वतन्त्रतापूर्वक लटकाए जाने पर दोनों के अक्ष उत्तर एवं दक्षिण दिशा में ठहरते हैं।
  • धारावाही परिनालिका एवं छड़ चुम्बक दोनों के समान ध्रुवों में प्रतिकर्षण एवं असमान ध्रुवों में आकर्षण होता है।
  • दोनों ही लोहे के छोटे-छोटे टुकड़ों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं तथा दिक्सूचक सुई लाने पर सुई विक्षेपित हो जाती है।

दण्ड चुम्बक की सहायता से परिनालिका के ध्रुवों का निर्धारण-दण्ड चुम्बक द्वारा परिनालिका के ध्रुवों का निर्धारण निम्न प्रकार से किया जा सकता है-

  • परिनालिका को उसके केन्द्र पर धागा बाँधकर स्वतन्त्रतापूर्वक लटका देते हैं।
  • दण्ड चुम्बक के उत्तरी ध्रुव को परिनालिका के एक सिरे के पास लाते हैं। यदि परिनालिका का यह सिरा चुम्बक की ओर आकर्षित होता है तो परिनालिका का यह सिरा दक्षिणी ध्रुव होगा तथा विपरीत सिरा उत्तरी ध्रुव होगा।
  • यदि दण्ड चुम्बक का उत्तरी ध्रुव समीप लाने पर परिनालिका विक्षेपित हो जाती है तब दण्ड चुम्बक के उत्तरी ध्रुव के सामने वाला परिनालिका का सिरा उत्तरी ध्रुव होगा तथा विपरीत सिरा दक्षिणी ध्रुव होगा।

प्रश्न 9.
किसी चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित विद्युत धारावाही चालक पर आरोपित बल कब अधिकतम होता है?
उत्तर-
जब चालक चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत् रखा गया हो तब आरोपित बल अधिकतम होता है।

प्रश्न 10.
मान लीजिए आप किसी चैम्बर में अपनी पीठको किसी एक दीवार से लगाकर बैठे हैं। कोई इलेक्ट्रॉन पुंज आपके पीछे की दीवार से सामने की ओर क्षैतिजतः गमन करते हुए किसी प्रबल चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा आपके दाईं ओर विक्षेपित हो जाता है। चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा क्या है?
उत्तर-
फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम के अनुसार चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा ऊर्ध्वाधरतः नीचे की ओर होगी।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

प्रश्न 11.
विद्युत मोटर का नामांकित आरेख खींचिए। इसका सिद्धान्त तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। विद्युत मोटर में विभक्त वलय का क्या महत्त्व है? (CBSE 2018)
उत्तर-
विद्युत मोटर (Electric Motor) विद्युत मोटर द्वारा विद्युत ऊर्जा को यान्त्रिक ऊर्जा में बदला जाता है।
सिद्धान्त (Principle)-यदि किसी चुम्बकीय क्षेत्र में एक बन्द कुंडली रखकर उसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाए तो कुंडली विक्षेपित हो जाती है। यदि कुंडली में धारा का प्रवाह एक ही दिशा में होता रहे तो कुंडली भी एक दिशा में घूमती रहेगी। इस तथ्य का उपयोग विद्युत मोटर बनाने में किया जाता है। इसे विद्युत मोटर का सिद्धान्त कहा जाता है।

रचना-विद्युत मोटर के निम्नांकित मुख्य भाग होते हैं
(i) क्षेत्र चुम्बक,
(ii) आर्मेचर,
(iii) विभक्त वलय,
(iv) ब्रुश।

(i) क्षेत्र चुम्बक (Field magnet)-यह एक शक्तिशाली स्थायी चुम्बक होता है, जिसके ध्रुव खण्ड N व S हैं। इस चुम्बक के ध्रुवों के बीच उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र में आर्मेचर कुंडली घूमती है।

(ii) आर्मेचर (Armature) यह अनेक फेरों वाली एक आयताकार कुंडली ABCD होती है जो कच्चे लोहे के क्रोड पर ताँबे के पृथक्कित तार लपेटकर बनायी जाती है।

(iii) विभक्त वलय (Split rings) यह दो अर्द्ध-वृत्ताकार वलयों L व M के रूप में होता है। कुंडली के सिरे A व B इन भागों में अलग-अलग जुड़े रहते हैं। यह कुंडली में प्रवाहित होने वाली धारा की दिशा को इस प्रकार परिवर्तित करता है कि कुंडली सदैव एक ही दिशा में क्षैतिज अक्ष पर घूमती है।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 1

(iv) बुश (Brush) विभक्त वलय L व M धातु की बनी दो पत्तियों को स्पर्श करते हैं। इन्हें ब्रुश कहते हैं। इन ब्रुशों का सम्बन्ध दो संयोजक पेचों से कर दिया जाता है। बाह्य परिपथ से आने वाली धारा को इन्हीं पेचों से सम्बन्धित कर देते हैं।

कार्यविधि (Working)-जब बैटरी से कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तब फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियमानुसार, कुंडली की भुजाओं AB तथा CD पर बराबर, परन्तु विपरीत दिशा में दो बल कार्य करने लगते हैं। ये बल एक बलयुग्म का निर्माण करते हैं, जिसके कारण कुंडली दक्षिणावर्त दिशा में घूमने लगती है। आधे चक्कर के बाद कुंडली की भुजाएँ AB तथा CD अपना स्थान बदल देती हैं तथा साथ ही साथ विभक्त वलय L व M भी अपनी स्थितियाँ बदल देते हैं। इन विभक्त वलयों की सहायता से धारा की दिशा इस प्रकार रखी जाती है कि कुंडली पर बलयुग्म एक ही दिशा में कार्य करे अर्थात् कुंडली एक ही दिशा में घूमती रहे।

कुंडली के घूमने की दर निम्नलिखित उपायों से बढ़ाई जा सकती है-

  • कुंडली में प्रवाहित धारा को बढ़ाकर,
  • कुंडली में फेरों की संख्या बढ़ाकर,
  • कुंडली का क्षेत्रफल बढ़ाकर तथा
  • चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ाकर।

प्रश्न 12.
ऐसी कुछ युक्तियों के नाम लिखिए जिनमें विद्युत मोटर उपयोग किए जाते हैं?
उत्तर-
विद्युत मोटर का उपयोग बिजली के पंखे, विद्युत मिश्रकों, वाशिंग मशीनों, कम्प्यूटरों आदि में किया जाता है।

प्रश्न 13.
कोई विद्युतरोधी ताँबे के तार की कुंडली किसी गैल्वेनोमीटर से संयोजित है। क्या होगा यदि कोई छड़ चुम्बक-
(i) कुंडली में धकेला जाता है।
(ii) कुंडली के भीतर से बाहर खींचा जाता है।
(iii) कुंडली के भीतर स्थिर रखा जाता है।
उत्तर-
(i) कुंडली में एक प्रेरित धारा उत्पन्न होगी तथा धारामापी विक्षेप प्रदर्शित करेगा।
(ii) प्रेरित धारा उत्पन्न होने से धारामापी में विक्षेप होगा, विक्षेप की दिशा पहले से विपरीत होगी।
(iii) कोई प्रेरित धारा उत्पन्न नहीं होगी, धारामापी में कोई विक्षेप नहीं आएगा।

प्रश्न 14.
दो वृत्ताकार कुंडली A तथा B एक-दूसरे के निकट स्थित हैं। यदि कुंडली A में विद्युत धारा में कोई परिवर्तन करें तो क्या कुंडली B में कोई विद्युत धारा प्रेरित होगी? कारण लिखिए।
उत्तर-
कुंडली B में धारा प्रेरित होगी। इसका कारण यह है कि जब कुंडली A में प्रवाहित धारा में बदलाव किया जाता है तो इसके चारों ओर स्थित चुम्बकीय क्षेत्र में भी परिवर्तन होता है। इस क्षेत्र की बल रेखाओं के कुंडली B से गुजरते समय बल रेखाओं की संख्या में परिवर्तन होने के कारण कुंडली B में प्रेरित धारा उत्पन्न हो जाती है।

प्रश्न 15.
निम्नलिखित की दिशा को निर्धारित करने वाला नियम लिखिए
(i) किसी विद्युत धारावाही सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र,
(ii) किसी चुम्बकीय क्षेत्र में, क्षेत्र के लम्बवत् स्थित, विद्युत धारावाही सीधे चालक पर आरोपित बल, तथा
(iii) किसी चुम्बकीय क्षेत्र में किसी कुंडली के घूर्णन करने पर उस कुंडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत धारा।
उत्तर-
(i) किसी धारावाही चालक के चारों ओर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम द्वारा निर्धारित होती है, इस नियम के अनुसार, “यदि दाएँ हाथ की अंगुलियों को धारावाही चालक के चारों ओर मोड़कर, अंगूठे को धारावाही चालक में प्रवाहित धारा के अनुदिश रखें तो मुड़ी हुई अंगुलियाँ चुम्बकीय बल रेखाओं की दिशा को प्रदर्शित करेंगी।”

(ii) चुम्बकीय क्षेत्र में रखे गये धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा फ्लेमिंग के बाएँ हाथ के नियम द्वारा निर्धारित की जाती है।
फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम-इस नियम के अनुसार, “यदि हम बाएँ हाथ के अंगूठे तथा पहली दो अंगुलियों को इस प्रकार फैलाएँ कि तीनों परस्पर लम्बवत् रहें तब यदि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा, मध्यमा चालक में प्रवाहित धारा की दिशा को प्रदर्शित करे तो अँगूठा चालक पर लगने वाले बल की दिशा को प्रदर्शित करेगा।”

(iii) किसी चुम्बकीय क्षेत्र में किसी कुंडली की गति के कारण उसमें उत्पन्न प्रेरित धारा की दिशा फ्लेमिंग के दाएँ हाथ के नियम से ज्ञात की जाती है- फ्लेमिंग का दाएँ हाथ का नियम-इस नियम के अनुसार, “यदि दाएँ हाथ का अंगूठा, उसके पास वाली तर्जनी अंगुली तथा मध्यमा अंगुली को परस्पर एक-दूसरे के लम्बवत् फैलाकर इस प्रकार रखें कि तर्जनी अंगुली चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में तथा अंगूठा चालक की गति की दिशा में हो तो मध्यमा अंगुली चालक में धारा की दिशा बताएगी।”

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

प्रश्न 16.
नामांकित आरेख खींचकर किसी विद्युत जनित्र का मूल सिद्धान्त तथा कार्यविधि स्पष्ट कीजिए। इसमें ब्रुशों का क्या कार्य है?
उत्तर-
विद्युत जनित्र अथवा प्रत्यावर्ती धारा डायनमो (Electric Generator or Alternating Current Dynamo)- विद्युत जनित्र (डायनमो) एक ऐसा यन्त्र है जो कि यान्त्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।

सिद्धान्त (Principle)-जब किसी शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र में किसी बन्द कुंडली को घुमाया जाता है, तो उसमें से होकर गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स में लगातार परिवर्तन होता रहता है, जिसके कारण कुंडली में एक विद्युत वाहक बल तथा विद्युत धारा प्रेरित हो जाती है। कुंडली को घुमाने में जो कार्य किया जाता है वह विद्युत ऊर्जा के रूप में परिणित हो जाता है।

संरचना (Construction)-इसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं-
(i) क्षेत्र चुम्बक,
(ii) आर्मेचर,
(iii) सपी वलय,
(iv) ब्रुश।

(i) क्षेत्र चुम्बक (Field magnet)-यह एक अति शक्तिशाली नाल चुम्बक होता है जिसके ध्रुवों के मध्य शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र में एक कुंडली को तीव्र गति से घुमाया जाता है।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 2

(ii) आर्मेचर या कुंडली (Armature)-यह मुलायम लोहे के एक क्रोड पर लिपटी अत्यधिक संख्या में पृथक्कृत तारों की कुंडली है जिसे चुम्बकीय क्षेत्र में तीव्र गति से घुमाया जाता है। यह सामान्य रूप से 50 चक्कर प्रति सेकण्ड की दर से चक्कर लगाती है जो प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति. कहलाती है।

(iii) सी वलय (Slip rings)-कुंडली के सिरे A व D क्रमशः अलग-अलग पृथक्कृत धात्विक वलयों C, व C, से जोड़ दिए जाते हैं। ये कुंडली के साथ-साथ घूमते हैं।

(iv) बुश (Brushes)-ये कार्बन या किसी धातु की पत्तियों से बने दो ब्रुश होते हैं। इनका एक सिरा सी वलयों को स्पर्श करता है एवं शेष दूसरे सिरों को बाह्य परिपथ से सम्बन्धित कर दिया जाता है। ब्रुश कुंडली के साथ नहीं घूमते हैं।

कार्यविधि (Working)-माना कि कुंडली ABCD दक्षिणावर्त दिशा में घूम रही है, जिससे भुजा CD नीचे की ओर व भुजा AB ऊपर की ओर आ रही होती है तब फ्लेमिंग के दाएँ हाथ के नियमानुसार, इन भुजाओं में प्रेरित धारा की दिशा चित्रानुसार होगी। अतः बाह्य परिपथ में धारा B2, से जाएगी तथा B1, से वापस आएगी। जब कुंडली अपनी
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ऊर्ध्वाधर स्थिति से गुजरेगी, तब भुजा AB नीचे की ओर तथा CD ऊपर की ऊपर की ओर जाने लगेगी। इस कारण AB तथा CD में धारा की दिशाएँ पहले से विपरीत हो जाएँगी। इस प्रकार की धारा को प्रत्यावर्ती धारा (alternating current) कहते हैं, क्योंकि प्रत्येक आधे चक्कर के बाद बाह्य परिपथ में धारा की दिशा बदल जाती है।

प्रश्न 17.
किसी विद्युत परिपथ में लघुपथन कब होता
उत्तर-
जब विद्युन्मय तार एवं उदासीन तार परस्पर सम्पर्कित हो जाते हैं तो परिपथ लघुपथित हो जाता है। इस स्थिति में परिपथ का प्रतिरोध अचानक शून्य हो जाता है तथा धारा का मान अचानक बहुत अधिक बढ़ जाता है।

प्रश्न 18.
भूसंपर्क तार का क्या कार्य है? धातु के आवरण वाले विद्युत साधित्रों को भूसंपर्कित करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर-
भूसंपर्क तार-घरेलू विद्युत परिपथ में विद्युन्मय एवं उदासीन तारों के साथ एक तीसरा तार भी लगा होता है, इस तार का सम्पर्क घर के निकट जमीन के नीचे दबी धातु के प्लेट के साथ होता है। इस तार को भूसंपर्क तार कहते हैं। धातु के साधित्रों जैसे बिजली की प्रेस, फ्रिज, टोस्टर आदि को भूसंपर्क तार से जोड़ देने पर साधित्र के आवरण से विद्युत धारा का क्षरण होने पर आवरण का विभव भूमि के बराबर हो जाता है। इससे साधित्र का उपयोग करने वाले व्यक्ति को तीव्र विद्युत आघात लगने का खतरा समाप्त हो जाता है।

HBSE 10th Class Science विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव InText Questions and Answers

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 250)

प्रश्न 1.
चुम्बक के निकट लाने पर दिक्सूचक की सुई विक्षेपित क्यों हो जाती है?
उत्तर-
चुम्बक के समीप लाए जाने पर, चुम्बक के चुम्बकीय क्षेत्र के कारण दिक्सूचक सुई पर एक बलयुग्म कार्य करने लगता है जो सुई को विक्षेपित कर देता है।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 255)

प्रश्न 1.
किसी छड़ चुम्बक के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ खींचिए।
उत्तर-
किसी छड़ चुम्बक के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ –
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 4

प्रश्न 2.
चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं के गुणों की सूची बनाइए।
उत्तर-
चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं के निम्नलिखित गुण हैं-

  • चुम्बक के बाहर इन बल रेखाओं की दिशा उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर तथा चुम्बक के अन्दर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होती है। ये बन्द वक्र के रूप में होती हैं।
  • चुम्बकीय बल रेखा के किसी बिन्दु पर खींची गयी स्पर्श रेखा उस बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करती है!
  • चुम्बकीय बल रेखाएँ एक-दूसरे को कभी नहीं काटती, क्योंकि एक बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ सम्भव नहीं हैं।
  • एक समान चुम्बकीय क्षेत्र की चुम्बकीय बल रेखाएँ, परस्पर समान्तर एवं बराबर दूरियों पर होती हैं।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

प्रश्न 3.
दो चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद क्यों नहीं करती?
उत्तर-
यदि दो चुम्बकीय बल रेखाएँ एक-दूसरे को परस्पर काटेंगी तो उस बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ होंगी जोकि असम्भव है।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 256)

प्रश्न 1.
मेज के तल में पड़े तार के वृत्ताकार पाश पर विचार कीजिए। मान लीजिए इस पाश में दक्षिणावर्त विद्युत धारा प्रवाहित हो रही है। दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम को लागू करके पाश के भीतर तथा बाहर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात कीजिए। .
उत्तर-
चित्र के अनुसार, यदि दाहिने हाथ की अंगुलियाँ तार के ऊपर इस प्रकार लपेटी जाएँ कि अँगूठा तार में प्रवाहित धारा की दिशा में हों, तब अंगुलियों के मुड़ने की दिशा चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करेगी।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 5
अतः पाश के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा पाश के तल (मेज के तल) के लम्बवत् नीचे की ओर होगी, जबकि पाश के बाहर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा पाश (मेज) के तल के लम्बवत् ऊपर की ओर होगी।

प्रश्न 2.
किसी दिए गए क्षेत्र में चुम्बकीय क्षेत्र एक समान है। इसे निरूपित करने के लिए आरेख खींचिए।
उत्तर-
एक समान चम्बकीय क्षेत्र परस्पर समान्तर बल रेखाओं द्वारा प्रदर्शित किया जाएगा जैसा कि निम्न चित्र में प्रदर्शित किया गया है।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 6

प्रश्न 3.
सही विकल्प चुनिए
किसी विद्युत धारावाही सीधी लम्बी परिनालिका के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र
(a) शून्य होता है।
(b) इसके सिरे की ओर जाने पर घटता है।
(c) इसके सिरे की ओर जाने पर बढ़ता है।
(d) सभी बिन्दुओं पर समान होता है।
उत्तर-
(b) इसके सिरे की ओर जाने पर घटता है।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 259)

प्रश्न 1.
किसी प्रोटॉन का निम्नलिखित में से कौन-सा गुण चुम्बकीय क्षेत्र में मुक्त गति करते समय परिवर्तित हो जाता है?
(a) द्रव्यमान
(b) चाल
(c) वेग
(d) संवेग।
उत्तर-
(c) वेग तथा (d) संवेग।

प्रश्न 2.
क्रियाकलाप 13.7 में, हमारे विचार से छड़ AB का विस्थापन किस प्रकार प्रभावित होगा, यदि
(a) छड़ AB में प्रवाहित विद्युत धारा में वृद्धि हो जाए
(b) अधिक प्रबल नाल चुम्बक प्रयोग किया जाए और
(c) छड़ AB की लम्बाई में वृद्धि कर दी जाए?
उत्तर-
(a) छड़ का विस्थापन बढ़ जाएगा; क्योंकि इस पर कार्यरत बल प्रवाहित विद्युत धारा के अनुक्रमानुपाती होता है।
(b) छड़ का विस्थापन बढ़ जाएगा; क्योंकि इस पर कार्यरत बल चुम्बकीय क्षेत्र के अनुक्रमानुपाती होता है।
(c) छड़ का विस्थापन बढ़ जाएगा; क्योंकि इस पर कार्यरत बल छड़ की लम्बाई के अनुक्रमानुपाती होता है।

प्रश्न 3.
पश्चिम की ओर प्रक्षेपित कोई धनावेशित कण (अल्फा-कण) किसी चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा उत्तर की ओर विक्षेपित हो जाता है। चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा क्या
(a) दक्षिण की ओर
(b) पूर्व की ओर
(c) अधोमुखी
(d) उपरिमुखी।
उत्तर-
(d) उपरिमुखी।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 261)

प्रश्न 1.
फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम लिखिए।
उत्तर-
फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम-इस नियम के अनुसार, “यदि हम अपने बाएँ हाथ के अंगूठे तथा पहली दो चुम्बकीय क्षेत्र
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अंगुलियों को इस प्रकार फैलाएँ कि तीनों परस्पर लम्बवत् रहें, तब यदि तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को प्रदर्शित करे, मध्यमा चालक में प्रवाहित धारा की दिशा को प्रदर्शित करे तो अँगूठा चालक पर लगने वाले बल की दिशा को प्रदर्शित करेगा।

प्रश्न 2.
विद्युत मोटर का क्या सिद्धान्त है?
उत्तर-
विद्युत मोटर का सिद्धान्त-जब किसी कुंडली को चुम्बकीय क्षेत्र में रखकर उसमें धारा प्रवाहित की जाती है तो कुंडली पर एक बलयुग्म कार्य करता है जो कुंडली को उसकी अक्ष पर घुमाने का प्रयास करता है। यदि कुंडली अपनी अक्ष पर घूमने के लिए स्वतन्त्र हो तो वह घूमने लगती है। यही विद्युत मोटर का सिद्धान्त है।

प्रश्न 3.
विद्युत मोटर में विभक्त वलय की क्या भूमिका है?
उत्तर-
विद्युत मोटर में विभक्त वलय दिक्परिवर्तक का कार्य करता है। वह युक्ति जो परिपथ में विद्युत धारा के प्रवाह को उत्क्रमित कर देती है, उसे दिक्परिवर्तक कहते हैं।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 264)

प्रश्न 1.
किसी कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित करने के विभिन्न ढंग स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-

  • यदि कुंडली को स्थिर रखकर, दण्ड चुम्बक को कुण्डली की ओर लाएँ या कुण्डली से दूर ले जाएँ, तो कुंडली में प्रेरित धारा उत्पन्न की जा सकती है।
  • चुम्बक को स्थिर रखकर कुंडली को चुम्बक के समीप या उससे दूर ले जाकर कुण्डली में विद्युत धारा प्रेरित की जा सकती है।
  • कुंडली को किसी चुम्बकीय क्षेत्र में घुमाकर उसमें धारा प्रेरित की जा सकती है।
  • कुंडली के समीप रखी किसी अन्य कुण्डली में प्रवाहित धारा में परिवर्तन करके भी पहली कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित की जा सकती है।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 265)

प्रश्न 1.
विद्युत जनित्र का सिद्धान्त लिखिए।
उत्तर-
विद्युत जनित्र का सिद्धान्त-जब किसी बन्द कुंडली को किसी शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र में तेजी से घुमाया जाता है तब उसमें से होकर गुजरने वाले चुम्बकीय फ्लक्स में लगातार परिवर्तन होने के कारण कुंडली में एक विद्युत धारा प्रवाहित हो जाती है। कुंडली को घुमाने में किया गया कार्य ही कुंडली में विद्युत-ऊर्जा के रूप में परिणित हो जाता है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

प्रश्न 2.
दिष्ट धारा के कुछ स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर-

  1. विद्युत सेल या बैटरी तथा
  2. दिष्ट धारा जनित्र।

प्रश्न 3.
प्रत्यावर्ती विद्युत धारा उत्पन्न करने वाले स्रोतों के नाम लिखिए।
उत्तर-
प्रत्यावर्ती धारा जनित्र द्वारा प्रत्यावर्ती धारा उत्पन्न होती है।

प्रश्न 4.
सही विकल्प का चयन कीजिए-ताँबे के तार की एक आयताकार कुंडली किसी चुम्बकीय क्षेत्र में घूर्णी गति कर रही है। इस कुंडली में प्रेरित विद्युत् धारा की दिशा में कितने परिभ्रमण के पश्चात् परिवर्तन होता है।
(a) दो
(b) एक
(c) आधे
(d) चौथाई।
उत्तर-
(c) आधे।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 267)

प्रश्न 1.
विद्युत परिपथों तथा साधित्रों में सामान्यतया उपयोग होने वाले दो सुरक्षा उपायों के नाम लिखिए।
उत्तर-
(i) विद्युत फ्यूज,
(ii) भू सम्पर्क तार ।

प्रश्न 2.
2kW शक्ति अनुमतांक का एक विद्युत तन्दूर किसी घरेलू विद्युत परिपथ (220V) में प्रचालित किया जाता है जिसका विद्युत धारा अनुमतांक 5A है, इससे आप किस परिणाम की अपेक्षा करते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
विद्युत तन्दूर की शक्ति
P=2kW =2000w
V=220V
I = \(\frac{\mathrm{P}}{\mathrm{V}}=\frac{2000 \mathrm{~W}}{200 \mathrm{~V}}\)
=9.09A
विद्युत धारा का अनुमतांक 5A है, विद्युत तन्दूर इससे बहुत अधिक धारा ले रहा है जिससे अतिभारण हो जाएगा तथा फ्यूज गल जाएगा एवं विद्युत पथ अवरोधित हो जाएगा।

प्रश्न 3.
घरेलू विद्युत परिपथों में अतिभारण से बचाव के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
उत्तर-
घरेलू विद्युत परिपथों में अतिभारण से बचाव के लिए मेन स्विच के पास, विद्युन्मय तार में उचित सामर्थ्य का फ्यूज तार जोड़ना चाहिए।

HBSE 10th Class Science विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव InText Activity Questions and Answers

क्रियाकलाप 13.1. (पा. पु. पृ. सं. 249)

प्रेक्षण (Observation)-दिक्सूचक सुई विक्षेपित हो जाती है, इसका अर्थ है कि ताँबे के तार से प्रवाहित विद्युत धारा ने एक चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न किया है। इस प्रकार यह ज्ञात होता है कि विद्युत तथा चुम्बकत्व एक दूसरे से सम्बन्धित

क्रियाकलाप 13.2. (पा. पु. पृ. सं. 250)

प्रश्न 1.
आप क्या प्रेक्षण करते हैं ?
उत्तर-
लौह-चूर्ण चित्र में दर्शाए गए पैटर्न के अनुसार व्यवस्थित हो जाते हैं।

प्रश्न 2.
यह पैटर्न क्या निर्देशित करता हैं ?
उत्तर-
लौह-चूर्ण एक बल का अनुभव करता है जो उस चुम्बक के चारों ओर होता है। इसे चुम्बकीय क्षेत्र कहते हैं।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 8

प्रश्न 3.
लौह-चूर्ण किस स्थान पर अधिक आकर्षित होता है ?
उत्तर-
दोनों ध्रुवों पर।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

क्रियाकलाप 13.3. (पा. पु. पृ. सं. 251)
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव 9
प्रेक्षण (Observation) चुम्बकीय क्षेत्र में परिमाण एवं दिशा दोनों होते हैं, किसी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा वह मानी जाती है जिसके अनुदिश दिक्सूची का उत्तरी ध्रुव उस क्षेत्र के भीतर गमन करता है। अतः चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ चुम्बक के उत्तरी ध्रुव से प्रकट होती हैं तथा दक्षिणी ध्रुव पर विलीन हो जाती हैं। चुम्बक के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा उसके दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर होती है अतः चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक बन्द वक्र के रूप में होती हैं।

क्रियाकलाप 13.4. (पा. पु. पृ. सं. 252)

प्रश्न 1.
दिक्-सूचक सुई के ऊपर यदि धारावाही चालक रखा जाए तो क्या होगा ?
उत्तर-
दिक्-सूचक सुई की भुजाओं में विचलन होगा। यह दिशा SNOW नियम की मदद से ज्ञात कर सकते हैं।

प्रश्न 2.
SNOW नियम क्या है ?
उत्तर-
यदि चालक में धारा की दिशा दक्षिण से उत्तर दिशा की तरफ हो तो दिक्सूचक सुई की दिशा के पश्चिम दिशा में विक्षेपण होगा।

प्रश्न 3.
क्या होगा यदि धारावाही चालक में धारा की दिशा को उल्टा कर दिया जाए ?
उत्तर-
दिक्सूचक सुई की भुजाओं में विक्षेपण की दिशा उल्टी हो जाएगी।

प्रश्न 4.
यदि सीधे तार में प्रवाहित विद्युत धारा की दिशा को उत्क्रमित कर दिया जाए, तो क्या चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा भी उत्क्रमित हो जाएगी?
उत्तर-
हाँ, चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा भी उत्क्रमित हो जाएगी।

क्रियाकलाप 13.5. (पा. पु. पृ. सं. 253)

प्रश्न 1.
लौह-चूर्ण किस प्रकार व्यवस्थित होते हैं? .
उत्तर-
लौह-चूर्ण संरेखित होकर तार के चारों ओर संकेन्द्री वृत्तों के रूप में व्यवस्थित होते हैं।

प्रश्न 2.
ये संकेन्द्री वृत्त क्या निरूपित करते हैं ? ।
उत्तर-
ये संकेन्द्री वृत्त, चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं को निरूपित करते हैं।

प्रश्न 3.
इस प्रकार उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा आप कैसे ज्ञात करेंगे?
उत्तर-
दिक्सूची द्वारा ज्ञात करेंगे। वृत्त के किसी बिंदु P पर दिक्सूची का उत्तर ध्रुव विद्युत धारा द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र रेखा की दिशा बताता है।

प्रश्न 4.
विद्युत धारा की दिशा उत्क्रमित करने पर क्या होता है ?
उत्तर-
चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा भी उत्क्रमित हो जाती है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

प्रश्न 5.
क्या दिक्सूची के विक्षेप पर धारा के परिमाप – में वृद्धि और तार से दूरी का प्रभाव पड़ता है?
उत्तर-
हाँ, धारा के परिमाप में वृद्धि होने पर विक्षेप में भी वृद्धि होती है तथा तार के दूसरे किसी बिंदु Q पर दिक्सूची रखने पर इसका विक्षेप घट जाता है।

क्रियाकलाप 13.6. (पा. पु. पृ. सं. 256)

प्रश्न 1.
कार्ड बोर्ड को हल्के से कुछ बार थपथपाइए। कार्ड बोर्ड पर जो पैटर्न बनता दिखाई दे उसका प्रेक्षण कीजिए।
उत्तर-
दोनों छिद्रों के पास लौह-चूर्ण संकेन्द्रीय वृत्ताकार पैटर्न में व्यवस्थित हो जाते है। इसका अर्थ हुआ कि धारावाही वृत्ताकार चालक का प्रत्येक भाग चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है जो संकेन्द्रीय वृत्ताकार होते हैं।

प्रश्न 2.
क्या धारावाही वृत्ताकार चालक के आस-पास चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है ?
उत्तर-
हाँ, धारावाही वृत्ताकार चालक के आसपास चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।

प्रश्न 3.
धारावाही वृत्ताकार चालक के दो विपरीत बिन्दुओं पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की प्रकृति में अन्तर बताइए।
उत्तर-
दोनों ही बिन्दुओं पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा विपरीत होती है। इन दोनों बिन्दुओं पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ संकेन्द्रीय वृत्ताकार होती हैं।

प्रश्न 4.
धारावाही वृत्ताकार चालक द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का मान सबसे अधिक कहाँ पर होता है?
उत्तर-
धारावाही वृत्ताकार चालक के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान सबसे अधिक होता है।

क्रियाकलाप 13.7. (पा. पु. पृ. सं. 257)

प्रश्न 1.
आप क्या देखते हैं ?
उत्तर-
हम देखते हैं कि विद्युत धारा प्रवाहित होते ही छड़ बाईं दिशा में विस्थापित होती है।

प्रश्न 2.
अब छड़ में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा की दिशा उत्क्रमित कीजिए और छड़ के विस्थापन की दिशा नोट कीजिए। अब यह दाईं ओर विस्थापित होती है। छड़ क्यों विस्थापित होती है?
उत्तर-
फ्लेमिंग के अनुसार धारावाही चालक पर चुम्बकीय क्षेत्र में बल लगता है। इसलिए धारावाही चालक की चुम्बक के ध्रुवों के बीच स्थिर रखने पर अपनी स्थिति से विस्थापित हो जाता है। इस छड़ पर लगने वाला बल छड़ पर लम्बवत दिशा में होता है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 13 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

प्रश्न 3.
जब एक धारावाही चालक को चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो क्या होता है ?
उत्तर-
ज़ब धारावाही चालक को चुम्बकीय क्षेत्र में रखते हैं तो उस पर एक बल आरोपित होता है।

प्रश्न 4.
उस नियम का मात्र नाम लिखो जिसकी मदद से धारावाही चालक पर चुम्बकीय क्षेत्र में लगने वाले बल की दिशा ज्ञात करते हैं ?
उत्तर-
फ्लेमिंग का वामहस्त का नियम।

प्रश्न 5.
किन कारकों पर चालक पर आरोपित बल का मान निर्भर करता है ?
उत्तर-

  • चुम्बकीय क्षेत्र के मान पर,
  • चालक की लम्बाई पर,
  • चालक में प्रवाहित धारा के मान पर।

प्रश्न 6.
क्या होगा यदि चुम्बकीय क्षेत्र में रखे चालक में प्रवाहित धारा की दिशा को विपरीत दिशा में प्रवाहित किया जाए ?
उत्तर-
चालक पर आरोपित बल की दिशा विपरीत दिशा में हो जाती है।

क्रियाकलाप 13.8. (पा. पु. पृ. सं. 261)

प्रश्न-इस क्रियाकलाप से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं ? ..
उत्तर-
इस क्रियाकलाप से यह स्पष्ट होता है कि कुंडली के सापेक्ष चुंबक की गति एक प्रेरित विभवान्तर उत्पन्न करती है, जिसके कारण परिपथ में प्रेरित विद्युत धारा प्रवाहित होती है। याद रखिए गैल्वेनोमीटर एक ऐसा उपकरण है, जो किसी परिपथ में विद्युत् धारा की उपस्थिति संसूचित करता है।

क्रियाकलाप 13.9. (पा. पु. पृ. सं. 263)

प्रश्न 1.
जब एक धारावाही कुण्डली को दूसरी कुण्डली के पास लाते है तो क्या होता है ?
उत्तर-
दूसरी कुण्डली में धारा प्रेरित होती है।

प्रश्न 2.
प्राथमिक कुंडली में स्थिर धारा प्रवाहित होने पर द्वितीय कुण्डली में धारा का मान क्या होगा ?
उत्तर-
शून्य।

प्रश्न 3.
धारावाही कुंडली एवं प्रेरित धारा कुण्डली का क्या नाम है ?
उत्तर-
धारावाही कुण्डली को प्राथमिक कुण्डली एवं प्रेरित धारा कुण्डली को द्वितीयक कुण्डली कहते हैं।

प्रश्न 4.
कौन-सी कुण्डली से चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है ?
उत्तर-
प्राथमिक कुण्डली से चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है क्योंकि यह धारावाही कुण्डली होती है।

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प्रश्न 5.
कुण्डली 2 में प्रेरित धारा की प्रबलता को कौन से कारक प्रभावित करते हैं ?
उत्तर-

  1. प्राथमिक कुण्डली में धारा की प्रबलता।
  2. प्राथमिक कुण्डली में तार के फेरों की संख्या।

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HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत Textbook Exercise Questions, and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

HBSE 10th Class Science विद्युत Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
प्रतिरोध R के किसी तार के टुकड़े को पाँच बराबर भागों में काटा जाता है। इन टुकड़ों को फिर पार्श्वक्रम में संयोजित कर देते हैं। यदि संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R’ है तो R/R’ अनुपात का मान क्या है
(a) 1/25
(b) 1/5
(c) 5
(d) 25.
उत्तर-
(d) 25.

संकेत-प्रत्येक कटे भाग का प्रतिरोध R/5 होगा।
अतः तुल्य प्रतिरोध
\(\frac{1}{R^{\prime}}=\frac{1}{R / 5}+\frac{1}{R / 5}+\frac{1}{R / 5}+\frac{1}{R / 5}+\frac{1}{R / 5}\)
\(\frac{1}{R^{\prime}}=\frac{5}{R}+\frac{5}{R}+\frac{5}{R}+\frac{5}{R}+\frac{5}{R}=\frac{25}{R}\)
अतः \(\frac{R}{R^{\prime}}\) = 25

प्रश्न 2.
निम्नलिखित में से कौन-सा पद विद्युत परिपथ में विद्युत शक्ति को निरूपित नहीं करता ?
(a) PR
(b) IR2
(c)VI
(d)V2/R.
उत्तर-
(b) IR2

प्रश्न 3.
किसी विद्युत बल्ब का अनुमंताक 220 v; 100 w है। जब इसे 110V पर प्रचालित करते हैं तब इसके द्वारा उपभुक्त शक्ति कितनी होती है?
(a) 100W
(b) 75w
(c) 50 W
(d) 25 W
उत्तर-
(d) 25 W.
संकेतसूत्र P= \(\frac{\mathrm{v}^2}{\mathrm{R}}\) अतः बल्ब का प्रतिरोध R = \(\frac{v^2}{P}\)
R = \(\frac{220 \times 220}{100}\) = 484Ω
∴ द्वितीय स्थिति में शक्ति खर्च P1 = \(\frac{v_1^2}{R}\)
= \(\frac{110 \times 110}{484}\) =25 W

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

प्रश्न 4.
दो चालक तार जिनके पदार्थ, लम्बाई तथा व्यास समान हैं किसी विद्युत परिपथ में पहले श्रेणीक्रम में और फिर पावक्रम में संयोजित किए जाते हैं। श्रेणीक्रम तथा पार्श्वक्रम संयोजन में उत्पन्न ऊष्माओं का अनुपात क्या होगा?
(a) 1:2
(b) 2:1
(c) 1:4
(d) 4:1.
उत्तर-
(c) 1 : 4.

संकेत-यदि एक तार का प्रतिरोध R हो तो श्रेणी संयोजन का प्रतिरोध R1 = 2R व पार्श्व संयोजन का प्रतिरोध R2 = \( \frac{\mathrm{R}}{2}\) होगा।
यदि विभवान्तर V है तो ऊष्माओं का अनुपात
\(\frac{\mathrm{H}_1}{\mathrm{H}_2}=\frac{\mathrm{V}^2 / \mathrm{R}_1}{\mathrm{~V}^2 / \mathrm{R}_2}=\frac{\mathrm{R}_2}{\mathrm{R}_1}=\frac{\mathrm{R} / 2}{2 \mathrm{R}}=\frac{1}{4}\)

प्रश्न 5.
किसी विद्युत परिपथ में दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर मापने के लिए वोल्टमीटर को किस प्रकार संयोजित किया जाता है ?
उत्तर-
दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर मापने के लिए वोल्टमीटर को दोनों बिन्दुओं के बीच में पार्श्वक्रम में संयोजित किया जाता है।

प्रश्न 6.
किसी ताँबे के तार का व्यास 0.5 mm तथा प्रतिरोधकता 1.6 x 10-8Ωm है। 100 प्रतिरोध का प्रतिरोधक बनाने के लिए कितने लम्बे तार की आवश्यकता होगी? यदि इससे दोगुना व्यास का तार लें तो प्रतिरोध में क्या अन्तर आएगा?
हल : दिया है प्रतिरोधकता ρ = 1.6 x 10-8 Ωm,
प्रतिरोध R=10Ω
व्यास 2r= 0.5 mm
∴ त्रिज्या r = \(\frac{0.5}{2}\) mm = 2.5 x 10-4m
∵ R = ρ \(\frac{l}{\mathrm{~A}}\)
∴ तार की लम्बाई l = \(\frac{R \times A}{\rho}\)
= \(\frac{10 \times \pi \mathrm{r}^2}{\rho}\)
= \(\frac{10 \times 3.14 \times\left(2.5 \times 10^{-4}\right)^2}{1.6 \times 10^{-8} \Omega \mathrm{m}} \)
= 12.26 x 103m = 122.6 m
व्यास दोगुना करने पर त्रिज्या r दोगुनी तथा अनुप्रस्थं क्षेत्रफल (A = πr²) चार गुना हो जाएगा।
∵ R ∝ \(\frac{1}{\mathrm{~A}}\)
∴ क्षेत्रफल चार गुना होने पर प्रतिरोध एक चौथाई रह जाएगा।
अतः नया प्रतिरोध R1 = \(\frac{1}{4}\) R = \(\frac{1}{4} \times 10\) = 2.5 Ω

प्रश्न 7.
किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवान्तर v के विभिन्न मानों के लिए उससे प्रवाहित विद्युत धाराओं I के संगत मान आगे दिए गए हैं –
I(ऐम्पियर),: 0.5 1.0 2.0 3.0 4.0
v(वोल्ट): 1.6 3.4 6.7 10.2 13.2
V और I के बीच ग्राफ खींचकर इस प्रतिरोधक का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 1
हल : अभीष्ट ग्राफ के लिए उपयुक्त चित्र देखिए। प्रतिरोधक का प्रतिरोध, ग्राफ के ढाल के बराबर होगा।
R= \(\frac{\Delta V}{\Delta I}\)
अर्थात्
दिए गए आँकड़ों से,
V 1 =3.4V, V2 = 10.2V
तथा संगत धाराएँ I1 = 1.0A
I2 = 3.0A
ΔV=V2 -V1
= 10.2 – 3.4=6.8V

ΔI= I2 -I1
= 3.0 – 1.0=2.0A
∴ प्रतिरोध R = \( \frac{\Delta \mathrm{V}}{\Delta \mathrm{I}}=\frac{6.8 \mathrm{~V}}{2.0 \mathrm{~A}}\) = 3.4Ω

प्रश्न 8.
किसी अज्ञात प्रतिरोध के प्रतिरोधक के सिरों से 12V की बैटरी को संयोजित करने पर परिपथ में 2.5 mA विद्युत धारा प्रवाहित होती है। प्रतिरोधक का प्रतिरोध परिकलित कीजिए।
हल : दिया है : V= 12 V, I = 2.5 mA= 2.5 x 10-3A
प्रतिरोध R = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{I}}=\frac{12 \mathrm{~V}}{2.5 \times 10^{-3} \mathrm{~A}}\)
=4.8 x 103 Ω या R=4.8kΩ

प्रश्न 9.
9v की किसी बैटरी को 0.2Ω, 0.3Ω, 0.4Ω, 0.5Ω तथा 122 के प्रतिरोधकों के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया गया है, 122 के प्रतिरोधक से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होगी ?
हल : दिया है-
R1 = 0.2Ω, R2 = 0.3Ω, R3 = 0.4Ω, R4 = 0.5Ω तथा R5 = 12Ω
श्रेणी संयोजन का कुल प्रतिरोध
R =R1 +R2+R3 + R4 + R5
= 0.2+0.3+0.4+0.5+ 12
R =13.4Ω

∴ परिपथ में प्रवाहित कुल धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}=\frac{9}{13.4}\) = 0.67A
श्रेणी संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोध से होकर इतनी ही धारा प्रवाहित होगी।
∴ 122 के प्रतिरोध में धारा = 0.67A

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

प्रश्न 10.
176 Ω प्रतिरोध के कितने प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में संयोजित करें कि 220 V के विद्युत स्रोत के संयोजन से 5A विद्युत धारा प्रवाहित हो ?
हल : I=5A, V= 220 V
परिपथ की प्रतिरोधकता R=\(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{I}}=\frac{220}{5} \) = 44Ω
प्रत्येक प्रतिरोधक का प्रतिरोध r = 176Ω
यदि n प्रतिरोधक, प्रत्येक की प्रतिरोधकताको पार्श्वक्रम में संयोजित करें तो इच्छित प्रतिरोध होगा R = r/n
या 44 = \(\frac{176}{n}\) or n=\(\frac{176}{44}\) = 4

प्रश्न 11.
यह दर्शाइए कि आप 6Ω प्रतिरोध के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि प्राप्त संयोजन का प्रतिरोध
(i) 9Ω, (ii) 4Ω हो।
हल :
(i) 9Ω का प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए, पहले दो प्रतिरोधकों को पार्यक्रम में और इसके बाद तीसरे प्रतिरोध को श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 2
पार्श्व संयोजन का प्रतिरोध \(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{6}+\frac{1}{6}=\frac{2}{6}\)
या R = \(\frac{6}{2}\) = 3Ω
यह 3 Ω का प्रतिरोध 6Ω के तीसरे प्रतिरोध के साथ श्रेणीक्रम में जुड़कर 3 + 6 = 9Ω का प्रतिरोध हो जाएगा।

(ii) 4Ω का प्रतिरोध पाने के लिए पहले 6-60 के दो प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में जोड़ना होगा और फिर इसके पश्चात् तीसरा प्रतिरोधक इनके पार्श्वक्रम में जोड़ना होगा।
6Ω – 6 Ω के दो प्रतिरोधकों के श्रेणी संयोजन का प्रतिरोध 6 + 6 = 12 Ω होगा।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 3
∴ \(\frac{1}{R}=\frac{1}{6}+\frac{1}{12}=\frac{2+1}{12}=\frac{3}{12}\)
अत: R=\(\frac{12}{3}\) =4Ω

प्रश्न 12.
220 V की विद्युत लाइन पर उपयोग किए जाने वाले बहुत से बल्बों का अनुमतांक 10 w है। यदि 220 V लाइन से अनुमत अधिकतम विद्युत धारा 5A है तो इस लाइन के दो तारों के बीच कितने बल्ब पार्श्वक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं ?
हल : माना n बल्बों को पार्यक्रम में जोड़ा जाता है, तब परिपथ में कुल शक्ति व्यय
P=n x एक बल्ब की शक्ति
=n x 10 W = 10 nw होगी।
दिया है : V= 220 V, I = 5A
तब P= VI से, (10 nw = 220 V x 5A)
n = \(\frac{220 \times 5}{10}\) = 110
अर्थात् 110 बल्बों को पार्यक्रम में जोड़ा जा सकता है।

प्रश्न 13.
किसी विद्युत भट्टी की तप्त प्लेट दो प्रतिरोधक कुंडलियोंA तथा B की बनी हैं जिनमें प्रत्येक का प्रतिरोध 24 0 है तथा इन्हें पृथक्-पृथक्, श्रेणीक्रम में अथवा पार्श्वक्रम में संयोजित करके उपयोग किया जा सकता है। यदि यह भट्टी 220 V विद्युत स्रोत से संयोजित की जाती है तो तीनों प्रकरणों में प्रवाहित विद्युत धाराएँ क्या हैं ?
हल : दिया है : V = 220 V, कुंडलियों का प्रतिरोध
R1 = R2 = 24Ω
प्रथम स्थिति में : जब किसी एक कुण्डली का प्रयोग किया जाता है तो कुल प्रतिरोध
R1 = R2 = 24Ω
∴ ली गई धारा 1= \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}=\frac{220}{24}\) = 9.17A
द्वितीय स्थिति में : जब दोनों कुण्डलियों को श्रेणीक्रम में प्रयोग किया जाता है तब कुल प्रतिरोध
R= R1 + R2 = 48 Ω
∴ ली गई धारा I= \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}=\frac{220}{48}\) = 4.58 A

तृतीय स्थिति में : जब कुण्डलियों को पार्यक्रम में संयोजित किया जाता है, तब
\(\frac{1}{R}=\frac{1}{R_1}+\frac{1}{R_2}=\frac{1}{24}+\frac{1}{24}=\frac{2}{24}\)
R = \(\frac{24}{2}\) = 120
∴ ली गई धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}=\frac{220}{12}\) = 18.33 A

प्रश्न 14.
निम्नलिखित परिपथों में प्रत्येक में 2Ω प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्तियों की तुलना कीजिए :
(i) 6 V की बैटरी से संयोजित 1Ω तथा 2Ω श्रेणीक्रम संयोजन,
(ii) 4 V बैटरी से संयोजित 12Ω तथा 2Ω का पावक्रम संयोजन।
हल :
(i) दिया है, V=6V 1Ω, 2Ω के श्रेणी संयोजन का प्रतिरोध R= 1+2=3Ω
परिपथ में धारा I= \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}=\frac{6}{3}\) = 2A
श्रेणीक्रम में प्रत्येक प्रतिरोध में धारा 2A ही प्रवाहित होगी अत: 2 Ω के प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्ति
P1, =I2 R = (2)2 x 2 =8 W
(ii) ∵ दोनों प्रतिरोध पार्श्वक्रम में जुड़े हैं ; अतः प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों के बीच एक ही विभवान्तर 4 V होगा।
∴ 2Ω के प्रतिरोध द्वारा उपभुक्त शक्ति
P2 = \(\frac{\mathrm{V}^2}{\mathrm{R}}\)
P2 = \(\frac{(4 \mathrm{~V})^2}{2 \Omega}\) = 8W
अतः दोनों दशाओं में 2Ω प्रतिरोधक में समान शक्ति खर्च होगी।

प्रश्न 15.
दो विद्युत लैम्प जिनमें से एक का अनुमतांक 100 W; 220 V तथा दूसरे का 60 W; 220 V है, विद्युत मेन्स के साथ पार्श्वक्रम में संयोजित हैं। यदि विद्युत आपूर्ति की वोल्टता 220 V है तो विद्युत मेन्स से कितनी धारा ली जाती है ?
हल : प्रथम बल्ब के लिए V1, = 220 V, P1, = 100 W
माना इसका प्रतिरोध R1, है ता P = V2/R से, .
R1 = \(\frac{\mathrm{V}_1^2}{\mathrm{P}_1}=\frac{(220 \mathrm{~V})^2}{100 \mathrm{~W}}\) = 484 Ω
दूसरे बल्ब के लिए
V2 = 220V, P2= 60W
∴ इसका प्रतिरोध R2 = \(\frac{\mathrm{V}_2^2}{\mathrm{P}_2} \) = \(\frac{(220 \mathrm{~V})^2}{60}=\frac{2420}{3} \Omega\)
माना कि दोनों को पार्श्वक्रम में जोड़ने पर संयोजन का प्रतिरोध R है, तो \(\frac{1}{R}=\frac{1}{R_1}+\frac{1}{R_2}=\frac{1}{484}+\frac{8}{2420}\)
\(\frac{1}{R}=\frac{5+3}{2420}=\frac{8}{2420}\)
∴ \(\frac{1}{R}=\frac{2420}{8}\) = 302.5 Ω
∴ लाइन वोल्टेज V = 220 v
∴ लाइन से ली गई धारा I= \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}=\frac{220}{302.5}\) = 0.73A

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

प्रश्न 16.
किसमें अधिक विद्युत ऊर्जा उपभुक्त होती है : 250 w का टी.वी. सेट जो एक घण्टे तक चलाया जाता है अथवा 120 W का विद्युत हीटर जो 10 मिनट के लिए चलाया जाता है ?
हल : T.V. सेट के लिए P1, = 250 W
t1, = 1h= 60 x 60s
खर्च की गई ऊर्जा = P1 t1 = 250 x 60 x 60
=9x 105 जूल
तथा विद्युत हीटर के लिए P2 = 120 W, t2, = 10 min =600s
∴ खर्च की गई ऊर्जा = P2 x t2 = 120 x 600=7.2 x 104 जूल
अतः T.V. सेट द्वारा खर्च की गई ऊर्जा अधिक है।

प्रश्न 17.
8Ω प्रतिरोध का कोई विद्युत हीटर विद्युत मेन्स से 2 घण्टे तक 15A विद्युत धारा लेता है। हीटर में उत्पन्न ऊष्मा की दर परिकलित कीजिए।
हल : दिया है R=8Ω, I = 15A .
विद्युत हीटर में ऊष्मा उत्पन्न होने की दर या विद्युत हीटर की शक्ति
P=I2R
=(15)2 x 8= 1800W .

प्रश्न 18.
निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए
(a) विद्युत लैम्पों के तन्तुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र टंगस्टन का ही उपयोग क्यों किया जाता है ?
(b) विद्युत तापन युक्तियों जैसे ब्रेड-टोस्टर तथा विद्युत इस्तरी के चालक शुद्ध धातुओं के स्थान पर मिश्रातुओं के क्यों बनाए जाते हैं ?
(c) घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है ?
(d) किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल में परिवर्तन के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता
(e) विद्युत संचारण के लिए प्रायः कॉपर तथा ऐलुमिनियम के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर-(a) विद्युत लैम्पों के तन्तुओं में प्रायः एकमात्र टंगस्टन का ही उपयोग किया जाता है, क्योंकि टंगस्टन के बहत पतले तार बनाए जा सकते हैं तथा टंगस्टन का गलनांक 3400°C होता है जो अन्य धातुओं की तुलना में बहुत अधिक होता है।
(b) ब्रेड-टोस्टर, विद्युत इस्तरी आदि के चालक मिश्रधातुओं के इसलिए बनाए जाते हैं, क्योंकि मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता, शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक होती है तथा ताप वृद्धि के साथ इनकी प्रतिरोधकता में नगण्य परिवर्तन होता है। इसके अलावा मिश्रधातुओं का ऑक्सीकरण भी कम होता है। फलतः मिश्रधातुओं से बने चालकों की उम्र शुद्ध धात्विक चालकों की तुलना में अधिक होती है।
(c) श्रेणीक्रम में प्रतिरोध बढ़ने पर अलग-अलग प्रतिरोधकों के सिरों के बीच उपलब्ध विभवान्तर घटता जाता है। अतः परिपथ में धारा भी घटती जाती है। यदि घरों में प्रकाश करने के लिए श्रेणी सम्बद्ध व्यवस्था प्रयोग की जाए तो परिपथ में जितने अधिक संयन्त्र (बल्ब), जुड़े होंगे उनका प्रकाश उतना ही कम हो जाएगा। इसके अतिरिक्त श्रेणीक्रम में सभी संयन्त्र एक साथ एक ही स्विच से कार्य करेंगे व एक साथ एक ही स्विच से बंद होंगे एवं यदि कोई एक भी संयन्त्र खराब हो जाएगा तो शेष सभी उपकरण कार्य करना बन्द कर देंगे। इस कारण से घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग नहीं किया जाता ।
(d) तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है, अर्थात् RA
(e) कॉपर तथा एलुमिनियम के तारों का प्रतिरोध न्यूनतम है। इस कारण से इनका प्रयोग विद्युत संचारण के लिए प्रयुक्त तारों में किया जाता है। ये दोनों धातुएँ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं एवं सस्ती भी हैं।

HBSE 10th Class Science विद्युत InText Questions and Answers

(पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 222)

प्रश्न 1.
विद्युत परिपथ का क्या अर्थ है ?
उत्तर-
किसी विद्युत धारा के सतत तथा बन्द पथ को विद्युत परिपथ कहते हैं।

प्रश्न 2.
विद्युत धारा के मात्रक की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
विद्युत धारा का S.I. मात्रक ऐम्पियर है। इसे A से प्रदर्शित करते हैं।
सूत्र I = \(\frac{\mathrm{Q}}{t}\) से यदि Q = 1C, 1 = 1s तब I = 1A
अतः यदि आवेश 1 कूलॉम/सेकण्ड की दर से प्रवाहित होता है तब उस चालक में प्रवाहित होने वाली धारा 1A होगी।

प्रश्न 3.
एक कूलॉम आवेश की रचना करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या परिकलित कीजिए।
हल : दिया है
Q = 1C
∵ सूत्र Q = n e से,
n = \(\frac{\mathrm{Q}}{e}=\frac{1}{1.6 \times 10^{-19}}\)
= \(\frac{10 \times 10^{18}}{1.6}\) = 6.25 × 1018
अतः 1 कूलॉम आवेश में 6.25 x 1018 इलेक्ट्रॉन होंगे।

(पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 224)

प्रश्न 1.
उस युक्ति का नाम लिखिए जो किसी चालक के सिरों पर विभवान्तर बनाए रखने में सहायता करती है।
उत्तर-
विद्युत सेल।

प्रश्न 2.
यह कहने का क्या तात्पर्य है कि दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर 1V है?
उत्तर-
इस कथन का अर्थ है कि 1C के आवेश को एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु तक ले जाने में 1J कार्य करना होगा।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

प्रश्न 3.
6 V बैटरी से गुजरने वाले हर एक कूलॉम आवेश को कितनी ऊर्जा दी जाती है ?
उत्तर-
बैटरी का विभवान्तर 6V अर्थात 6J/C है, अतः । हर एक कूलॉम आवेश को 6J ऊर्जा दी जाएगी।

(पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 232)

प्रश्न 1.
किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है ?
उत्तर-
किसी चालक का प्रतिरोध R उसकी लम्बाई 1, उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल A तथा उसके पदार्थ पर निम्न प्रकार से निर्भर करता है
R ∝ l, R ∝ \(\frac{1}{\mathrm{~A}}\) अत: R= ρ\(\frac{1}{\mathrm{~A}}\)
जहाँ p चालक के पदार्थ की प्रतिरोधकता है।

प्रश्न 2.
समान पदार्थ के दो तारों में यदि एक पतला तथा दूसरा मोटा हो तो इनमें से किसमें विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होगी जबकि उन्हें समान विद्युत स्रोत से संयोजित किया जाता है ? क्यों ?
उत्तर-
∵ तार का प्रतिरोध RC अतः मोटे तार का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल अधिक है अतः इसका प्रतिरोध कम होगा, इसलिए मोटे तार से धारा आसानी से प्रवाहित हो जाएगी।

प्रश्न 3.
मान लीजिए किसी वैद्युत अवयव के दो सिरों के बीच विभवान्तर को उसके पूर्व के विभवान्तर की तुलना में घटाकर आधा कर देने पर भी उसका प्रतिरोध नियत रहता है। तब उस अवयव से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा में क्या परिवर्तन होगा ?
उत्तर-
धारा I = \(\frac{\mathrm{V}}{\mathrm{R}}\) जब R नियत है तब I∝ V अर्थात् विभवान्तर का मान आधा कर देने पर धारा भी आधी हो जाएगी।

प्रश्न 4.
विद्युत टोस्टरों तथा विद्युत इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रातु के क्यों बनाए जाते हैं ?
उत्तर-
मिश्रातुओं की प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक होती है तथा तापवृद्धि के साथ इनकी प्रतिरोधकता में नगण्य परिवर्तन होता है, इसके अतिरिक्त मिश्रातुओं का ऑक्सीकरण भी कम होता है, इस कारण से टोस्टर, इस्त्री आदि के चालक मिश्रातुओं के बनाए जाते हैं।

प्रश्न 5.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तालिका (पृ. 298) में दिए गए आँकड़ों के आधार पर दीजिए-
(a) आयरन (Fe) तथा मर्करी (Hg) में कौन अच्छा वैद्युत चालक है ?
(b) कौन-सा पदार्थ सर्वश्रेष्ठ चालक है?
उत्तर-
(a) आयरन की प्रतिरोधकता 10 x 10-8 Ω m
तथा मर्करी (Hg) की प्रतिरोधकता 94 x 10-8Ω m है। अतः आयरन (Fe), मर्करी (Hg) की अपेक्षा विद्युत का अच्छा चालक है।
(b) सारणी के आधार पर सिल्वर (Ag) की प्रतिरोधकता 1.6 x 10-8Ω m अर्थात् सबसे कम है ; अतः यह सर्वश्रेष्ठ चालक है।

(पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 237)

प्रश्न 1.
किसी विद्युत परिपथ का व्यवस्था आरेख खींचिए जिसमें 2 V के तीन सेलों की बैटरी, एक 5Ω प्रतिरोधक, एक 8Ω प्रतिरोधक, एक 12Ω प्रतिरोधक तथा प्लग कुंजी सभी श्रेणीक्रम में संयोजित हों।
हल:
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 4

प्रश्न 2.
प्रश्न 1 का परिपथ दुबारा खींचिए तथा इसमें प्रतिरोधकों से प्रवाहित विद्युत धारा को मापने के लिए ऐमीटर तथा 12Ω के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवान्तर मापने के लिए वोल्टमीटर लगाइए। ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के क्या पाठ्यांक होंगे?
हल:
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 5
परिपथ में जुड़े 5Ω , 8Ω , व 12Ω का तुल्य प्रतिरोध
R=R1,+R2,+R3,
=5+8+ 12 = 25Ω
∵ बैटरी में तीन सेल श्रेणीक्रम में जुड़ी हैं अतः बैटरी का विभवान्तर V=2 + 2 + 2 = 6V
∵ परिपथ में धारा I = \(\frac{V}{R}=\frac{6}{25}\) = 0.24 A
अतः अमीटर का पाठ्यांक 0.24 A होगा।
12Ω के सिरों पर जुड़े वोल्टमीटर का पाठ्यांक
V3 =IR3, = 0.24 x 12
V3= 2.88 V
अत: वोल्टमीटर का पाठ्यांक 2.88 V होगा।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

(पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 240)

प्रश्न 1.
जब (a) 1Ω तथा 106 Ω
(b) 1Ω , 103 तथा 106Ω के प्रतिरोध पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं तो इनके तुल्य प्रतिरोध के सम्बन्ध में आप क्या निर्णय करेंगे?
हल :
(a) दिया है R1, = 12,R2, = 106 = 1000000Ω
समान्तर संयोजन के सूत्र \(\frac{1}{R}=\frac{1}{R_1}+\frac{1}{R_2}\) स
\(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{1}+\frac{1}{1000000}\)
= \(\frac{1000000+1}{1000000}=\frac{1000001}{1000000}\)
अतः तुल्य प्रतिरोध R = \(\frac{1000000}{1000001} \) = 0.9999 Ω
अतः तुल्य प्रतिरोध, संयोजन में जुड़े अल्पतम प्रतिरोध से भी कम प्राप्त होता है।

(b) दिया है, R1 = 1Ω, R2, = 103Ω = 1000Ω
R3= 1000000Ω
समान्तर संयोजन के सूत्र
\(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{\mathrm{R}_1}+\frac{1}{\mathrm{R}_2}+\frac{1}{\mathrm{R}_3}\)
\(\frac{1}{R}=\frac{1}{1}+\frac{1}{1000}+\frac{1}{1000000}\)
\(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{1}+\frac{1}{1000}+\frac{1}{1000000}\)
\(\frac{1}{R}=\frac{1000000+1000+1}{1000000}\)
\(\frac{1}{R}=\frac{1001001}{1000000}\)
∴ तुल्य प्रतिरोध R = \(\frac{1000000}{1001001}\) = 0.999Ω
अतः तुल्य प्रतिरोध, संयोजन में जुड़े अल्पतम प्रतिरोध से भी कम होता है।

प्रश्न 2.
100Ω का एक विद्युत लैम्प, 50Ω का एक विद्युत टोस्टर तथा 500 Ω का एक जल फिल्टर 200 V के विद्युत स्रोत से पार्श्वक्रम में संयोजित हैं। उस विद्युत इस्तरी का प्रतिरोध क्या है जिसे यदि समान स्रोत के साथ संयोजित कर दें तो वह उतनी ही विद्युत धारा लेती है जितनी तीनों युक्तियाँ लेती हैं। यह भी ज्ञात कीजिए कि इस विद्युत इस्तरी से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होती है ?
हल : विद्युत इस्तरी, तीनों उपकरणों के बराबर धारा लेती है; अत इस्तरी का प्रतिरोध, उपकरणों के समान्तर संयोजन के तुल्य प्रतिरोध के बराबर होगा।

यहाँ R1, = 100 Ω, R2,= 50 Ω तथा R3, =500 Ω
माना कि इस्तरी का प्रतिरोध R है तो समान्तर संयोजन के सूत्र से,
\(\frac{1}{R}=\frac{1}{R_1}+\frac{1}{R_2}+\frac{1}{R_3}=\frac{1}{100}+\frac{1}{50}+\frac{1}{500}\)
= \(\frac{5+10+1}{500}=\frac{16}{500}\)
∴ विद्युत इस्तरी का प्रतिरोध R= \(\frac{500}{16}\) = 31.25 Ω
तथा विद्युत इस्तरी द्वारा ली गई धारा
I = \(\frac{V}{R}=\frac{220}{(500 / 16)}\) = 7.04 A

प्रश्न 3.
श्रेणीक्रम में संयोजित करने के स्थान पर वैद्युत युक्तियों को पार्श्वक्रम में संयोजित करने के क्या लाभ हैं ?
उत्तर-
उपकरणों को पार्यक्रम में जोड़ने से निम्नलिखित लाभ होते हैं
(i) पार्श्वक्रम में जोड़ने पर किसी भी चालक में स्विच का उपयोग करके स्वतन्त्रतापूर्वक विद्युतधारा भेजी जा सकती
(ii) उपकरणों को पार्यक्रम में जोड़ने पर सभी उपकरणों को समान विभवान्तर प्राप्त हो जाता है।

प्रश्न 4.
2Ω,3Ω तथा 6Ω के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि संयोजन का कुल प्रतिरोध (a) 4Ω, (b) 1Ω हो ?
हल :
(a) यहाँ R1 = 2Ω,R2,=3Ω तथा R3, =6Ω,4Ω तुल्य प्रतिरोध प्राप्ति हेतु 3Ω व 6Ω के प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में जोड़कर उन्हें श्रेणीक्रम में चित्रानुसार जोड़ना होगा
अतः3Ω व 6Ω के पार्श्व संयोजन का प्रतिरोध यदि R’ हो, तब
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 6
\(\frac{1}{R^{\prime}}=\frac{1}{3}+\frac{1}{6}=\frac{2+1}{6}=\frac{3}{6}\)
∴ R’ = \(\frac{6}{3}\) = 2Ω
यह R’ = 2Ω का प्रतिरोध 20 के साथ श्रेणीक्रम में जुड़ा है अतः तुल्य प्रतिरोध R= R1, + R’ = 2 + 2 = 4Ω

(b) 1 Ω तुल्य प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए तीनों प्रतिरोधकों को पार्यक्रम में जोड़ना होगा।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 7
चित्र-तुल्य प्रतिरोध प्राप्त करने हेतु पार्श्व क्रम संयोजन
∴ \(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{\mathrm{R}_1}+\frac{1}{\mathrm{R}_2}+\frac{1}{\mathrm{R}_3}\)
\(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{1}{2}+\frac{1}{3}+\frac{1}{6}\)
\(\frac{1}{\mathrm{R}}=\frac{3+2+1}{6}=\frac{6}{6}\)
अतः R= 1Ω

प्रश्न 5.
4Ω,8Ω, 12 Ω तथा 24 Ω प्रतिरोध की चार कुंडलियों को किस प्रकार संयोजित करें कि संयोजन से (a) अधिकतम, (b) निम्नतम प्रतिरोध प्राप्त हो सके ?
उत्तर-
(a) यदि इन चारों प्रतिरोधों को श्रेणीक्रम में रखा जाए तो अधिकतम प्रतिरोध प्राप्त होगा
Rs=4Ω+8Ω+ 12Ω + 24Ω=48Ω
(b) न्यूनतम प्रतिरोध पाने के लिए उपर्युक्त चारों प्रतिरोधों को पार्यक्रम में रखा जाएगा।
\(\frac{1}{R_P}=\frac{1}{4}+\frac{1}{8}+\frac{1}{12}+\frac{1}{24}=\frac{6+3+2+1}{24}=\frac{12}{24}\)
Rp = \(\frac{24}{12}\) = 2 Ω

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 242) .

प्रश्न 1.
किसी विद्युत हीटर की डोरी क्यों उत्तप्त नहीं होती, जबकि उसका तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है ?
उत्तर-
विद्युत हीटर की कुण्डली मिश्रधातु नाइक्रोम की बनी होती है। नाइक्रोम की प्रतिरोधकता ताँबे से बहुत अधिक होने के कारण कुण्डली का प्रतिरोध डोरी में प्रयुक्त ताँबे के प्रतिरोध से बहुत अधिक होता है।
विद्युत हीटर में व्यय शक्ति P = I2 R के अनुसार समान धारा I के लिए P ∝ R
अतः विद्युत हीटर कुण्डली में डोरी की तुलना में अधिक शक्ति व्यय होती है जिससे उसकी कुण्डली उत्तप्त हो जाती है जबकि डोरी उत्तप्त नहीं होती है।

प्रश्न 2.
एक घण्टे में 50 w विभवान्तर से 96000 कूलॉम आवेश को स्थानान्तरित करने में उत्पन्न ऊष्मा का परिकलन कीजिए।
हल : दिया है; V = 50 W, स्थानान्तरित आवेश
Q=96000 कूलॉम
आवेश के स्थानान्तरण में खर्च की गई ऊर्जा
W =OV
=96000×50=4800000J
=4.8x 106J

प्रश्न 3.
202 प्रतिरोध की कोई विद्युत इस्तरी 5 A विद्युत धारा लेती है। 30s में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए।
हल : दिया है R = 20Ω, I = 5A, t=30s
∴उत्पन्न ऊष्मा (H) = I2Rt
= (5)2 x 20 x 30 = 15000 जूल
= 1.5 x 104 जूल

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 245)

प्रश्न 1.
विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण कैसे किया जाता है ?
उत्तर-
विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण विद्युत शक्ति द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 2.
`कोई विद्युत मोटर 220 V के विद्युत स्रोत से 5.0 A विद्युत धारा लेता है। मोटर की शक्ति निर्धारित कीजिए तथा 2 घण्टे में मोटर द्वारा उपभुक्त ऊर्जा परिकलित कीजिए।
हल : दिया है : V = 220 V, I = 5A, समय t=2 घंटे
∴ मोटर की शक्ति P= VI= 220 x 5 = 1100 W
अत: 2 घंटे में मोटर द्वारा व्यय ऊर्जा W = Pt
∴ W = 1100 Wx 2 h = 2200 Wh
W = 2.2 kWh

HBSE 10th Class Science विद्युत InText Activity Questions and Answers

क्रियाकलाप 12.1 (पा. पु. पृ. सं. 226)

प्रश्न 1.
विभवान्तर V तथ विद्युत धारा I के प्रत्येक युगल के लिए अनुपात V/I परिकलित कीजिए।
उत्तर –
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 8

प्रश्न 2.
V तथा I के बीच ग्राफ खींचिए तथा इस ग्राफ की प्रकृति का प्रेक्षण कीजिए।
उत्तर-
इस क्रियाकलाप में हम यह पाते हैं कि प्रत्येक प्रकरण में VII का मान लगभग एक समान प्राप्त होता है। इस प्रकार V-I ग्राफ मूल बिन्दु से गुजरने वाली एक सरल रेखा होती है। 1827 में जर्मन वैज्ञानिक जार्ज साइमन ओम ने यह बताया कि “किसी धातु के तार में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा उस तार के सिरों के बीच विभवान्तर के अनुक्रमानुपाती होती है, परन्तु तार का ताप समान रहना चाहिए” इसे ही ओम का नियम कहते हैं । ग्राफ चित्र में प्रदर्शित है। ।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 9
चित्र निक्रोम तार के लिए V-I ग्राफ। सरल रेखीय ग्राफ यह दर्शाता है कि जैसे-जैसे तार में प्रवाहित विद्युत धारा बढ़ती है विभवान्तर रैखिकतः बढ़ता है। यही ओम का नियम है।

क्रियाकलाप 12.2. (पा. पु. पृ.सं. 228)

क्रिया विधि (Procedure)-
1. एक निक्रोम तार, एक टॉर्च बल्ब, एक 10 W का बल्ब तथा एक ऐमीटर (0-5A परिसर), एक प्लग कुंजी तथा कुछ संयोजी तार लेकर चार शुष्क सेलों (प्रत्येक 1.5 V का) को श्रेणीक्रम में संयोजित करके परिपथ में XY एक अन्तराल छोड़ देते हैं।
2. अन्तराल XY में निक्रोम के तार को जोड़कर परिपथ पूरा करके कुंजी लगाकर ऐमीटर का पाठ्यांक नोट करके प्लग कुंजी को बाहर निकाल लेते हैं।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 10

3. अब निक्रोम तार के स्थान पर XY में टार्च बल्ब को परिपथ में जोड़कर ऐमीटर का पाठ्यांक लेकर बल्ब में प्रवाहित विद्युत धारा मापते हैं तथा XY में विभिन्न अवयवों को जोड़ने पर ऐमीटर के पाठ्यांक के भिन्न-भिन्न होने का अवलोकन करते हैं।

प्रेक्षण (Observation)-इस क्रियाकलाप से यह पता चलता है कि किसी चालक से होकर इलेक्ट्रानों की गति उसके प्रतिरोध द्वारा मन्द हो जाती है। एक ही आकार के चालकों में जिसमें प्रतिरोध कम होता है वह अच्छा चालक होता है। पर्याप्त आकार के चालकों में जो पर्याप्त प्रतिरोध आरोपित करता है, प्रतिरोधक कहलाता है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत

क्रियाकलाप 12.3. (पा. पु. पृ. सं. 229)

प्रश्न 1.
क्या विद्युत धारा चालक की लम्बाई पर निर्भर करती है?
उत्तर-
हाँ, चालक में प्रवाहित विद्युत धारा चालक की लंबाई के व्युक्रमानुपाती होती है। क्योंकि लंबाई बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ जाता है व धारा की मात्रा कम हो जाती है।

प्रश्न 2.
क्या विद्युत धारा उपयोग किए जान वाले तार के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर निर्भर करती है?
उत्तर-
हाँ, विद्युत धारा चालक के तार के अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के समानुपाती होती है।
I ∝ \(\frac{1}{\mathrm{~L}}\)
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल बढ़ने पर प्रतिरोध कम हो जाता है अत: धारा का मान बढ़ जाता है।

क्रियाकलाप 12.4. (पा. पु. पृ. सं. 234)

प्रश्न-क्या आप एमीटर के द्वारा विद्युत धारा के मान में कोई अंतर पाते हैं?
उत्तर-
ऐमीटर के पाठ्यांक में कोई भी परिवर्तन नहीं होता है अतः प्रत्येक स्थिति में धारा का मान समान रहता है। अथात् श्रणी क्रम में जुड़े सभा प्रतिरोधका से समान धारा प्रवाहित होती है।

क्रियाकलाप 12.5. (पा. पु. पृ. सं. 234)

प्रश्न-श्रेणी में x वY के बीच वोल्टमीटर V1,V2, V3, लगाने पर कुल विभवान्तर क्या होगा?
उत्तर-
विभवान्तर V, अन्य विभवान्तरों V1,V2, व V3, के योग के बराबर प्राप्त होता है।
V= V1+V2 + V3,

क्रियाकलाप 12.6. (पा. पु. पृ. सं. 237)
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 12 विद्युत 11

प्रेक्षण (Observation)-प्रेक्षण करने पर यह पाया गया कि कुल विद्युत धारा 1, संयोजन की प्रत्येक शाखा में प्रवाहित होने वाली पृथक् धाराओं के योग के बराबर है।
∴ I= I1+I2+I3

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HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार Textbook Exercise Questions, and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार

HBSE 10th Class Science मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
मानव नेत्र अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी को समायोजित करके विभिन्न दूरियों पर रखी वस्तुओं को फोकसित कर सकता है। ऐसा हो पाने का कारण है
(a) जरा-दूरदृष्टिता
(b) समंजन
(c) निकट-दृष्टि
(d) दीर्घ-दृष्टि।
उत्तर-
(b) समंजन।

प्रश्न. 2.
मानव नेत्र जिस भाग पर किसी वस्तु का प्रतिबिम्ब बनाते हैं, वह है-
(a) कॉर्निया
(b) परितारिका
(c) पुतली
(d) दृष्टि पटल।
उत्तर-
(d) दृष्टि पटल।

प्रश्न 3.
सामान्य दृष्टि के वयस्क के लिए सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी होती है, लगभग –
(a) 25 m
(b)2.5 cm
(c)25 cm
(d)2.5 m.
उत्तर-
(c)25 cm.

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार

प्रश्न 4.
अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी में परिवर्तन किया जाता है
(a) पुतली द्वारा
(b) दृष्टि पटल द्वारा
(c) पक्ष्माभी द्वारा
(d) पारितारिका द्वारा।
उत्तर-
(c) पक्ष्माभी द्वारा।

प्रश्न 5.
किसी व्यक्ति को अपनी दूर की दृष्टि को संशोधित करने के लिए -5.5 डाइऑप्टर क्षमता के लेंस की आवश्यकता है। अपनी निकट की दृष्टि को संशोधित करने के लिए उसे +1.5 डाइऑप्टर क्षमता के लेंस की आवश्यकता है। संशोधित करने के लिए आवश्यक लेंस की फोकस दूरी क्या होगी-(i) दूर की दृष्टि के लिए, (ii) निकट की दृष्टि के लिए।
हल :
(i) दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देखने के लिए आवश्यक लेंस की क्षमता
∴ सूत्र P = \(\frac{1}{f \text { (मी० में })} \text { से }\)
f = \(\frac{1}{p}\)m
f = \(\frac{1}{-5.5}=-\frac{100}{5.5} \mathrm{~cm}=\frac{200}{11}\) cm

(ii) दिया है-निकट की वस्तुओं को स्पष्ट देखने के लिए अवश्यक लेंस की क्षमता P = +1.5 D
∴ f = \(\frac{100}{\mathrm{P}} \mathrm{cm} \text { में }=\frac{100}{1.5}=\frac{200}{3} \mathrm{~cm}\)

प्रश्न 6.
किसी निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति का दूर बिन्दु नेत्र के सामने 80 cm दूरी पर है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लेंस की प्रकृति तथा क्षमता क्या होगी?
हल: व्यक्ति को ऐसे लेंस की आवश्यकता है जो कि अनन्त पर रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब आँख के सामने 80 cm दूरी पर बना सके।
अतः u= – 20, v=-80 cm,f = ?
सूत्र \(\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\) \(\text { से } \frac{1}{-80}-\frac{1}{-\infty}=\frac{1}{f} \)
अतः f=80 cm = -0.8m
∴ लेंस की क्षमता P = \(\frac{1}{f}=\frac{1}{-0.8} \mathrm{D}\) =-1.25 D
अतः आवश्यक लेंस की प्रकृति अपसारी तथा क्षमता -1.25 D है।

प्रश्न 7.
चित्र बनाकर दर्शाइए कि दीर्घ-दृष्टि दोष कैसे संशोधित किया जाता है? एक दीर्घ-दृष्टि दोष युक्त नेत्र का निकट बिन्दु 1 m है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लेंस की क्षमता क्या होगी? यह मान लीजिए कि सामान्य नेत्र का निकट बिन्दु 25cm है।
उत्तर-
दूर दृष्टि दोष में व्यक्ति का निकट बिन्दु दूर खिसक जाता है तथा मनुष्य समीप की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता है। इस दोष को दूर करने के लिए उत्तल लेंस का प्रयोग किया जाता है। चित्र आरेख इस प्रकार है-
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 1
मनुष्य के नेत्र का निकट बिन्दु 25 cm से दूर खिसक कर 100 cm दूर पहुँच गया है।
अतः u=-25 cm,v=-100 cm
∴ लेंस के सूत्र से, \(\frac{1}{f}=\frac{1}{v}-\frac{1}{u}\)
= \(\frac{1}{-100}-\frac{1}{-25}=\frac{1}{25}-\frac{1}{100}\)
= \(\frac{1}{f}=\frac{4-1}{100}=\frac{3}{100}\)
∴ f= \(\frac{100}{3} \mathrm{~cm} \text { या } \frac{1}{3} \mathrm{~m} \)
∴ आवश्यक लेंस की क्षमता P = \(\frac{1}{f(\mathrm{~m} \text { में })}=\frac{1}{1 / 3} \)
P= + 3D.

प्रश्न 8.
सामान्य नेत्र 25 cm से निकट रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट क्यों नहीं देख पाते ?
उत्तर-
25 cm की दूरी पर स्थित वस्तु का प्रतिबिम्ब बनाने के लिए नेत्र द्वारा अपनी सम्पूर्ण समंजन क्षमता का प्रयोग कर लिया जाता है तथा वस्तु स्पष्ट दिखायी पड़ने लगती है। यदि वस्तु को 25 cm से कम दूरी पर रख दिया जाए तो नेत्र लेंस वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना पर नहीं बना पाता तथा वस्तु स्पष्ट दिखाई नहीं देती है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार

प्रश्न 9.
जब हम नेत्र से किसी वस्तु की दूरी को बढ़ा देते हैं तो नेत्र में प्रतिबिम्ब दूरी का क्या होता है?
उत्तर-
नेत्र से वस्तु की दूरी बढ़ा देने पर नेत्र के समंजन गुण के कारण रेटिना पर ही प्रतिबिम्ब बनता है अतः नेत्र में बने प्रतिबिम्ब की दूरी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

प्रश्न 10.
तारे क्यों टिमटिमाते हैं?
उत्तर-
तारों से आने वाला प्रकाश हमारी आँख तक पहुँचने से पहले वायुमण्डल से होकर गुजरता है, वायुमण्डल की विभिन्न परतों का घनत्व अनियमित रूप से परिवर्तित होता रहता है, इस कारण से उनका अपवर्तनांक भी परिवर्तित होता रहता है। अपवर्तनांक परिवर्तन के कारण तारे से आने वाली किरणें लगातार अपना मार्ग बदलती रहती हैं तथा हमारी आँख तक पहुँचने वाले प्रकाश की मात्रा भी बदलती रहती है। इस कारण से तारे टिमटिमाते दिखाई पड़ते हैं।

प्रश्न 11.
व्याख्या कीजिए कि ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते?
उत्तर-
तारों की अपेक्षा ग्रह हमारी पृथ्वी के बहुत निकट हैं, उन्हें विस्तृत स्रोत की भाँति माना जा सकता है। यदि ग्रह को बिन्दु आकार के अनेक प्रकाश स्रोतों का संग्रह मान लें तो उन सभी से हमारे नेत्रों में प्रवेश करने वाली प्रकाश की मात्रा में कुल परिवर्तन का औसत मान शून्य होगा, यही कारण है कि वे टिमटिमाते प्रतीत नहीं होते।

प्रश्न 12.
सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ क्यों प्रतीत होता है?
उत्तर-
दिन के समय प्रात:काल सूर्य क्षितिज के निकट होता है, सूर्य की किरणों को हम तक पहुँचने के लिए वातावरणीय मोटी परतों से गुजर कर पहुँचना पड़ता है। नीले
और कम तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का अधिकांश भाग वहाँ उपस्थित कणों के द्वारा प्रकीर्णित कर दिया जाता है। हमारी आँखों तक पहुँचने वाला प्रकाश अधिक तरंगदैर्ध्य का होता है। इसलिए सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य रक्ताभ प्रतीत होता है।

प्रश्न 13.
किसी अंतरिक्ष यात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला क्यों प्रतीत होता है ?
उत्तर-
अंतरिक्ष यात्री आकाश में उस ऊँचाई पर होते हैं जहाँ वह वायुमण्डल से बाहर हो जाते हैं तथा वहाँ प्रकाश का प्रकीर्णन होकर प्रकाश नहीं पहुँच पाता है। प्रकीर्णन की क्रिया न होने के कारण अंतरिक्ष यात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला प्रतीत होता है।

HBSE 10th Class Science मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार InText Questions and Answers

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 211)

प्रश्न 1.
नेत्र की समंजन क्षमता से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर-
नेत्र के लेंस की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित कर लेता है, समंजन क्षमता कहलाती है।

प्रश्न 2.
निकट दृष्टि दोष का कोई व्यक्ति 1.2 m से अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख सकता। इस दोष को दूर करने के लिए प्रयुक्त लेंस किस प्रकार का होना चाहिए ?
उत्तर-
अवतल लेंस।

प्रश्न 3.
मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिए दूर बिन्दु तथा निकट बिन्दु नेत्र से कितनी दूरी पर होते हैं ?
उत्तर-
सामान्य दृष्टि के लिए दूर बिन्दु अनन्त पर तथा निकट बिन्दु नेत्र से 25 cm की दूरी पर होता है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार

प्रश्न 4.
अन्तिम पंक्ति में बैठे किसी विद्यार्थी को श्यामपट पढ़ने में कठिनाई होती है। यह विद्यार्थी किस दृष्टि दोष से पीड़ित है ? इसे किस प्रकार संशोधित किया जा सकता है?
उत्तर-
छात्र श्यामपट को दूर से नही पढ़ पाता है, परन्तु निकट से पढ़ लेता है, अतः छात्र की आँखों में निकट दृष्टि दोष है। इस दोष को दूर करने के लिए अपसारी लेन्स का प्रयोग करना पड़ेगा।

HBSE 10th Class Science मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार InText Activity Questions and Answers

क्रियाकलाप 11.1 (पा. पु. पृ. सं. 213)

प्रश्न 1.
आपतित किरण, अपवर्तित किरण, निर्गत किरण तथा विचलन कोण को दर्शाने के लिए एक चित्र बनाइए।
उत्तर-
PE-आपतित किरण
Li- आपतन कोण
EF-अपवर्तित किरण
Lr- अपवर्तन कोण
FS-निर्गत किरण
Le – निर्गत कोण
LA-प्रिज्म कोण.
LD- विचलन कोण
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार 2

प्रश्न 2.
एक प्रकाश की किरण कितनी बार अपवर्तित होती है और प्रत्येक बार अपवर्तित किरण की दिशा क्या होगी?
उत्तर-
जब प्रकाश की किरण प्रिज्म से गुजरती हैं तो यह दो बार अपवर्तित होती हैं। एक बार तब, जब यह हवा से काँच में प्रवेश करती है तथा दूसरी बार तब, जब यह काँच से हवा में प्रवेश करती है। प्रत्येक बार यह प्रिज्म के आधार की तरफ मुड़ती है।

प्रश्न 3.
विचलन कोण क्या है?
उत्तर-
आपतित किरण की दिशा तथा निर्गत किरण की दिशा के बीच बनने वाले कोण को विचलन कोण कहते हैं।

क्रियाकलाप 11.2 (पा. पु. पृ. सं. 214)

प्रश्न-आप क्या देखते हैं? आप वर्णों की एक आकर्षक पट्टी देखेंगे। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर-
ऐसा प्रकाश के विक्षेपण के कारण होता है। काँच में प्रकाश के अलग-अलग अवयवी वर्गों की चाल अलग-अलग होने से ये अलग-अलग कोणों पर विक्षेपित हो जाते हैं।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 11 मानव नेत्र एवं रंगबिरंगा संसार

क्रियाकलाप 11.3 (पा. पु. पृ. सं. 218)

प्रश्न-टैंक में लगभग 2 L स्वच्छ जल लेकर 200 g सोडियम थायोसल्फेट (हाइपो) घोलिए। जल में लगभग 1 से 2 mL सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल डालिए। आप क्या देखते हैं?
उत्तर-
2-3 मिनट के बाद सल्फर के कण बनते हैं तथा काँच के टैंक के तीनों पाश्वॉ (side) से नीला प्रकाश दिखाई देता है। इसका कारण सल्फर के सूक्ष्म कणों द्वारा कम तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का प्रकीर्णन होना है। काँच के टैंक के चौथे पार्श्व से, वृत्ताकार छिद्र की ओर से पारगत प्रकाश का रंग पहले नारंगी लाल तथा बाद में किरमिजी लाल दिखाई देता है।

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HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन Textbook Exercise Questions, and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

HBSE 10th Class Science प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-सा पदार्थ लेंस बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता ?
(a) जल
(b) काँच
(c) प्लास्टिक
(d) मिट्टी।
उत्तर-
(d) मिट्टी।

प्रश्न 2.
किसी बिम्ब का अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा बिम्ब से बड़ा पाया गया। वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए ?
(a) मुख्य फोकस तथा वक्रता केन्द्र के बीच
(b) वक्रता केन्द्र पर
(c) वक्रता केन्द्र से परे
(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच।
उत्तर-
(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच।

प्रश्न 3.
किसी बिम्ब का वास्तविक तथा समान आकार का प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए बिम्ब को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखें ?
(a) लेंस के मुख्य फोकस पर
(b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
(c) अनन्त पर
(d) लेंस के प्रकाशिक केन्द्र तथा मुख्य फोकस के बीच।
उत्तर-
(b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

प्रश्न 4.
किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस दोनों की फोकस दूरियाँ – 15 cm हैं। दर्पण तथा लेंस सम्भवतः हैं- .
(a) दोनों अवतल
(b) दोनों उत्तल
(c) दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल
(d) दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल।
उत्तर-
(a) दोनों अवतल।

प्रश्न 5.
किसी दर्पण से आप चाहे कितनी ही दूरी पर स खड़े हों, आपका प्रतिबिम्ब सदैव सीधा प्रतीत होता है। है। सम्भवतः दर्पण है
(a) केवल समतल
(b) केवल अवतल
(c) केवल उत्तल
(d) या तो समतल अथवा उत्तल।
उत्तर-
(d) या तो समतल अथवा उत्तल।

प्रश्न 6.
किसी शब्दकोष (dictionary) में पाए गए छोटे अक्षरों को पढ़ते समय आप निम्न में से कौन-सा लेंस पसन्द करेंगे?
(a) 50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(b) 50 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस
(c) 5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(d) 5 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस
उत्तर-
(a) 50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस।

प्रश्न 7.
15 cm फोकस दूरी के एक अवतल दर्पण का उपयोग करके हम किसी बिम्ब का सीधा प्रतिबिम्ब बनाना चाहते हैं। बिम्ब का दर्पण से दूरी का परिसर (range) क्या होना चाहिए ? प्रतिबिम्ब की प्रकृति कैसी है ? प्रतिबिम्ब बिम्ब से बड़ा है अथवा छोटा ? इस स्थिति में प्रतिबिम्ब बनने का एक किरण आरेख बनाइए।
उत्तर-
अवतल दर्पण द्वारा वस्तु का सीधा प्रतिबिम्ब
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 1
प्राप्त करने के लिए वस्तु को दर्पण के मुख्य फोकस एवं ध्रुव के बीच रखना होगा। अतः वस्तु की दर्पण के ध्रुव से दूरी 15 cm से कुछ कम हो सकती है। वस्तु का प्रतिबिम्ब सीधा तथा आभासी है तथा आकार में वस्तु से बड़ा है।

प्रश्न 8.
निम्न स्थितियों में प्रयुक्त दर्पण का प्रकार बताइए
(a) किसी कार का अग्र-दीप (हैड-लाइट)
(b) किसी वाहन का पार्श्व/पश्च-दृश्य दर्पण
(c) सौर भट्टी अपने उत्तर की कारण सहित पुष्टि कीजिए।
उत्तर-
(a) कार की हैडलाइटों में अवतल दर्पण प्रयुक्त होता है। बल्ब दर्पण के मुख्य फोकस पर स्थित होता है तथा परावर्तन के पश्चात् दर्पण से किरणें समान्तर होकर सड़क पर पड़ती हैं।
(b) उत्तल दर्पण ; क्योंकि उत्तल दर्पण सदैव वस्तु का सीधा तथा छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है। इसका दृष्टि क्षेत्र बड़ा होता है जिससे चालक को सड़क के पृष्ठ भाग का सम्पूर्ण प्रतिबिम्ब प्राप्त होता रहता है।
(c) सौर भट्टी में अवतल दर्पण का प्रयोग होता है, गर्म किए जाने वाले बर्तन को दर्पण के फोकस पर रखते हैं। अवतल दर्पण सूर्य की समान्तर किरणों के रूप में आती ऊर्जा को दर्पण से परावर्तन के उपरान्त फोकस पर रखे बर्तन पर केन्द्रित कर देता है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

प्रश्न 9.
किसी उत्तल लेंस का आधा भाग काले कागज से ढक दिया गया है। क्या यह लेंस किसी बिम्ब का पूरा प्रतिबिम्ब बना पाएगा? अपने उत्तर की प्रयोग द्वारा जाँच कीजिए। अपने प्रेक्षणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
लेंस द्वारा वस्तु का पूर्ण प्रतिबिम्ब बनेगा परन्तु इसकी तीव्रता पहले की तुलना में कम हो जाती है। प्रायोगिक सत्यापन-सर्वप्रथम एक प्रकाशिक बैंच के – स्टैण्ड पर उत्तल लेंस लगाते हैं, लेंस की फोकस दूरी से | कुछ अधिक दूरी पर, स्टैण्ड में एक जलती मोमबत्ती लगाकर व दूसरी ओर से मोमबत्ती को देखते हैं। व . अब लेंस के आधे भाग को काले कागज से ढक देते हैं तथा लेंस के दूसरी ओर से मोमबत्ती को देखते हैं। .
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व्याख्या-आधा लेंस काला कर देने पर भी उस बिन्दु पर किरणें आएँगी तथा मोमबत्ती का पूरा प्रतिबिम्ब प्राप्त होगा परन्तु किरणों की संख्या कम होने के कारण प्रतिबिम्ब की तीव्रता घट जाती है।

प्रश्न 10.
5 cm लम्बा कोई बिम्ब 10 cm फोकस – दूरी के किसी अभिसारी लेंस से 25 cm दूरी पर रखा जाता है। प्रकाश किरण-आरेख खींचकर बनने वाले प्रतिबिम्ब की स्थिति, आकार तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है- u = – 25 cm, f=+ 10 cm
∴ लेंस के सूत्र से
\(\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\)
∴ \(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}+\frac{1}{u}=\frac{1}{10}+\frac{1}{-25}=\frac{5-2}{50}\)
\(\frac{1}{v}=\frac{3}{50}\)
∴ υ = + \(\frac{50}{3}\) cm
अर्थात् प्रतिबिम्ब लेंस के दूसरी ओर bp cm दूरी पर बनेगा।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 3
पुनः वस्तु की लम्बाई h = 5 cm
यदि प्रतिबिम्ब की लम्बाई h है, तो
आवर्धन m = \(\frac{v}{u}=\frac{h}{h}\) ‘से
प्रतिबिम्ब की लम्बाई h’ = \(h\left(\frac{v}{u}\right)\) = 5 \(\left(\frac{+50 / 3}{-25}\right)\)
= \(\frac{-5 \times 50}{3 \times 25}=\frac{-10}{3}\)cm
प्रतिबिम्ब की लम्बाई \(\frac{10}{3}\) cm होगी तथा यह एक वास्तविक प्रतिबिम्ब होगा।

प्रश्न 11.
15 cm फोकस दूरी का कोई अवतल लेंस किसी बिम्ब का प्रतिबिम्ब लेंस से 10 cm दूरी पर बनाता है। बिम्ब लेंस से कितनी दूरी पर स्थित है ? किरण आरेख खींचिए।
हल : दिया है-f =- 15 cm
प्रतिबिम्ब की लेंस से दूरी v = – 10 cm
बिम्ब की लेंस से दूरी u = ?
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 4
लेंस सूत्र
\(\frac{1}{f}=\frac{1}{u}+\frac{1}{v}\)
∴ \(\frac{1}{u}=\frac{1}{v}-\frac{1}{f}=\frac{1}{-10}+\frac{1}{15}\)
= \(\frac{-3+2}{30}=\frac{-1}{30}\)
∴ u = -30 cm अर्थात् वस्तु लेंस से 30 cm की दूरी पर स्थित है।

प्रश्न 12.
15 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल दर्पण से कोई बिम्ब 10 cm दूरी पर रखा है। प्रतिबिम्ब की स्थिति तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल : दिया है-उत्तल दर्पण की फोकस दूरी
f=+15 cm
वस्तु से दर्पण की दूरी u = – 10 cm
दर्पण सूत्र से, \(\frac{1}{v}+\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\)
∴ \(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}=\frac{1}{15}-\frac{1}{-10}=\frac{1}{15}+\frac{1}{10}\)
= \(\frac{2+3}{30}=\frac{5}{30}\)
∴ v= =+6 cm
अत: दर्पण से पीछे की ओर 6 cm की दूरी पर प्रतिबिम्ब बनेगा तथा यह सीधा और आभासी होगा।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

प्रश्न 13.
एक समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन +1 है, इसका क्या अर्थ है ?
उत्तर-
m = \(\frac{h_2}{h_1}\) = +1 या h2 = h1
चूँकि प्रतिबिम्ब एवं बिम्ब का आकार बराबर है। धनात्मक चिह्न प्रदर्शित करता है कि समतल दर्पण द्वारा बनाया गया प्रतिबिम्ब आभासी होता है तथा वस्तु के विपरीत (दर्पण के पीछे) बनता है।

प्रश्न 14.
5.0 cm लम्बाई का कोई बिम्ब 30 cm वक्रता त्रिज्या के किसी उत्तल दर्पण के सामने 20 cm दूरी पर रखा गया है। प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति तथा आकार ज्ञात कीजिए।
हल : दिया है- वस्तु की दर्पण से दूरी
u = – 20 cm
दर्पण की वक्रता त्रिज्या R = + 30 cm
वस्तु की लम्बाई h = 5.0 cm
दर्पण की फोकस दूरी
f = \(\frac{\mathrm{R}}{2}=\frac{30}{2}\) = +15 cm
∵ \(\frac{1}{v}+\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\)
∴ \(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}=\frac{1}{15}-\frac{1}{-20}\)
= \(\frac{1}{15}+\frac{1}{20}=\frac{4+3}{60}=\frac{7}{60}\)
= \( \frac{-3+2}{30}=\frac{-1}{30}\)
∴ प्रतिबिम्ब दर्पण से \(\frac{60}{7}\) cm दर्पण के दूसरी ओर बनेगा। यदि प्रतिबिम्ब की ऊँचाई ‘ हो, तब
m = – \(\frac{v}{u}=\frac{h^{\prime}}{h}\) से
h ‘ = – h \(\left(\frac{v}{u}\right)\) = -5 × \(\frac{(60 / 7)}{-20}=\frac{15}{7}\) cm
अतः वस्तु का प्रतिबिम्ब \( \frac{15}{7}\) cm ऊँचा, सीधा तथा आभासी होगा तथा दर्पण के पीछे-cm की दूरी पर बनेगा।

प्रश्न 15.
7.0 cm आकार का कोई बिम्ब 18 cm फोकस दूरी के किसी अवतल दर्पण के सामने 27 cm दूरी पर रखा गया है। दर्पण से कितनी दूरी पर किसी परदे को रखें कि उस पर वस्तु का स्पष्ट फोकसित प्रतिबिम्ब प्राप्त किया जा सके। प्रतिबिम्ब का आकार तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल:
बिम्ब का आकार h’ = 7.0 cm
दर्पण की बिम्ब से दूरी u = – 27 cm
फोकस दूरी f= – 18 cm
प्रतिबिम्ब की दर्पण से दूरी v = ?
दर्पण सत्र से, \(\frac{1}{v}+\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\)
∴ \(\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}=\frac{1}{-18}+\frac{1}{27}\)
= \(\frac{-3+2}{54}=\frac{-1}{54}\) या v=- 54 cm
अतः परदे को दर्पण के आगे 54 cm दूरी पर रखना चाहिए। परदे पर बना प्रतिबिम्ब वास्तविक होगा।
आवर्धन m = \( -\frac{v}{u}=-\frac{h^{\prime}}{h}\)
∴ h’ = \( h \times \frac{v}{u}=-7 \times\left(\frac{-54}{-24}\right)\) = -14 cm
अर्थात् प्रतिबिम्ब की ऊँचाई 14 cm होगी तथा यह उल्टा तथा वास्तविक होगा।

प्रश्न 16.
उस लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी क्षमता- 2.0 D है। यह किस प्रकार का लेंस है ?
हल : सूत्र : लेंस की क्षमता
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 5
f = \(\frac{1}{p}\) m = \(\frac{1}{-2.0} \) = -0.5 cm
f= – 50 cm
∵ फोकस दूरी ऋणात्मक है अत: यह अवतल लेंस है।

प्रश्न 17.
कोई डॉक्टर +1.5D क्षमता का संशोधक लेंस निर्धारित करता है। लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। क्या निर्धारित लेंस अभिसारी है अथवा अपसारी ?
हल : दिया हैलेंस की क्षमता P=+ 1.5 D
∴ P= \(\frac{1}{f}\)
अतः फोकस दूरी f= \(\frac{1}{P}=\frac{1}{1.5}=\frac{2}{3}\) m
∴ f=+ 0.67m
∴ फोकस दूरी धनात्मक है, अतः यह एक अभिसारी लेंस है।

HBSE 10th Class Science प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन InText Questions and Answers

(पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 185)

प्रश्न 1.
अवतल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा लिखिए।
उत्तर-
मुख्य अक्ष पर स्थित ऐसा बिन्दु जहाँ पर दर्पण के मुख्य अक्ष के समान्तर आने वाली प्रकाश किरणें, परावर्तन के पश्चात् मिलती हैं, अवतल दर्पण का मुख्य फोकस कहलाता है। इसे F से प्रदर्शित करते हैं।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 15

प्रश्न 2.
एक गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20 सेमी है। इसकी फोकस दूरी क्या होगी?
उत्तर-
दिया है-R = 20 सेमी. f= ?
f = \(\frac{\mathrm{R}}{2}=\frac{20}{2}\) = 10 सेमी.

प्रश्न 3.
उस दर्पण का नाम बताइए जो बिम्ब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिम्ब बना सके। .
उत्तर-
अवतल दर्पण।

प्रश्न 4.
हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों देते हैं ?
उत्तर-
वाहनों में उत्तल दर्पण को वरीयता देने के कारण निम्नलिखित हैं-

  • उत्तल दर्पण द्वारा वस्तु का सीधा प्रतिबिम्ब बनता है।
  • इनका दृष्टि क्षेत्र अधिक होता है क्योंकि ये बाहर की ओर वक्रित होते हैं तथा चालक छोटे से दर्पण में सड़क का सम्पूर्ण क्षेत्र आसानी से देख पाता है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

(पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 188)

प्रश्न 1.
उस उत्तल दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी वक्रता त्रिज्या 32 cm है।
उत्तर-
दिया है-उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या .
R= + 32 cm_
∴ इसकी फोकस दूरी f = \(\frac{R}{2}=\frac{+32}{2}\)
f= + 16 cm

प्रश्न 2.
कोई अवतल दर्पण अपने सामने 10 cm दूरी पर रखे किसी बिम्ब का तीन गुना आवर्धित (बड़ा) वास्तविक प्रतिबिम्ब बनाता है। प्रतिबिम्ब दर्पण से कितनी दूरी पर है ?
उत्तर-
दिया है-
m = – 3
(वास्तविक प्रतिबिम्ब के लिए ऋणात्मक चि )
बिम्ब की दूरी u = – 10 cm
प्रतिबिम्ब की दूरी v = ?
∴ m= \(\frac{-v}{u}\)
∴ -3 = \(\frac{-v}{-10}\)
अत: v = – 30 cm
अर्थात् प्रतिबिम्ब दर्पण से 30 cm की दूरी पर उसके सामने बनेगा।

(पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 194)

प्रश्न 1.
वायु में गमन करती हुयी प्रकाश की एक किरण जल में तिरछी प्रवेश करती है। क्या प्रकाश किरण अभिलम्ब की ओर झुकेगी अथवा अभिलम्ब से दूर हटेगी ? बताइए क्यों ?
उत्तर-
जल, वायु की तुलना में सघन है अतः प्रकाश किरण वायु से जल में प्रवेश करते समय अभिलम्ब की ओर झुक जाएगी।

प्रश्न 2.
प्रकाश वायु से 1.50 अपवर्तनांक की काँच की प्लेट में प्रवेश करता है। काँच में प्रकाश की चाल कितनी है ? निर्वात में प्रकाश की चाल 3 x 108 m/s है। CBSE
उत्तर-
दिया है-काँच का अपवर्तनांक n = 1.50
निर्वात या वायु में प्रकाश की चाल c = 3 x108 m/s
n = \(\frac{c}{v}\) अतः v = \(\frac{c}{n}\)
अतः काँच में प्रकाश की चाल v = \(\frac{3 \times 10^8}{1.5}\)
v = 2 x 108 ms-1

प्रश्न 3.
सारणी 10.3 से अधिकतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को ज्ञात कीजिए। न्यूनतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को भी ज्ञात कीजिए।
उत्तर-
सारणी 10.3 से हीरे का अपवर्तनांक सबसे अधिक (2.42) तथा वायु का अपवर्तनांक सबसे कम (1.0003) है। अतः हीरे का प्रकाशिक घनत्व सबसे अधिक तथा वायु का प्रकाशिक घनत्व सबसे कम है।

प्रश्न 4.
आपको केरोसिन, तारपीन का तेल तथा जल दिए गए हैं। इनमें से किसमें प्रकाश सबसे अधिक तीव्र गति से चलता है ? सारणी 10.3 में दिए गए आँकड़ों का उपयोग कीजिए।
उत्तर-
सारणी 10.3 से,
केरोसीन का अपवर्तनांक = 1.44
जल का अपवर्तनांक =1.33
तारपीन के तेल का अपवर्तनांक = 1.47
जल का अपवर्तनांक उपर्युक्त तीनों में सबसे कम है, अतः जल में प्रकाश की चाल सबसे अधिक होगी।

प्रश्न 5.
हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है। इस कथन से क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
इस कथन से यह अभिप्राय है कि हीरे में प्रकाश की चाल निर्वात् में प्रकाश की चाल की , गुनी होगी।

(पाठ्य पुस्तक पृ. सं. 203)

प्रश्न 1.
किसी लेन्स की 1 डाइऑप्टर क्षमता को परिभाषित कीजिए।
उत्तर-
डाइऑप्टर-1 डाइऑप्टर उस लेंस की क्षमता के बराबर है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर हो।

प्रश्न 2.
कोई उत्तल लेंस किसी सुई का वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिम्ब उस लेंस से 50 cm दूर बनाता है। यह सुई, उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखी है, यदि इसका प्रतिबिम्ब उसी आकार का बन रहा है जिस आकार का बिम्ब है। लेंस की क्षमता भी ज्ञात कीजिए।
हल : दिया है- v = + 50 cm
तथा प्रतिबिम्ब की लम्बाई (h’) = वस्तु की लम्बाई (h)
∴ आवर्धन , m = \(\frac{h^{\prime}}{h}\) = -1
परन्तु लेंस की लिए m = \(\frac{v}{u} ; \frac{v}{u}\) = -1
अतः u=- v = – 50 cm
अतः सुई उत्तल लेंस के सामने उससे 50 cm दूरी पर रखी है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

लेंस के सूत्र से
\(\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}\)
अतः \(\frac{1}{f}=\frac{1}{50}-\frac{1}{-50}=\frac{2}{50}\)
∴ f = \(\frac{50}{2}\) = 25cm = 0.25m

लेंस की क्षमता
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 16

प्रश्न 3.
2 m फोकस दूरी वाले किसी अवतल लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।
हल :
दिया है-अवतल लेंस की फोकस दूरी f= -2m
∴ क्षमता P = \(\frac{1}{f}=\frac{1}{-2 m}\) =-0.5 D

HBSE 10th Class Science प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन InText Activity Questions and Answers

क्रियाकलाप 10.1 (पा. पु. पृ.सं. 177)

प्रश्न 1.
क्या आप प्रतिबिम्ब देख पाते हैं? यह छोटा है या बड़ा है?
उत्तर-
हाँ, प्रतिबिम्ब छोटा है।

प्रश्न 2.
चम्मच को धीरे-धीरे चेहरे से दूर ले जाने पर प्रतिबिम्ब में क्या परिवर्तन होता है ?
उत्तर-
प्रतिबिम्ब का आकार छोटा होता जा रहा है।

प्रश्न 3.
चम्मच को पलटकर दूसरे पृष्ठसे क्रियाकलाप को दोहराकर प्रेक्षण लें तथा दोनों पृष्ठों पर प्रतिबिम्ब के अभिलक्षणों की तुलना करें।
उत्तर-
चम्मच को पलटने से यह उत्तल दर्पण की भाँति व्यवहार करता है, इससे छोटा और सीधा आकार दिखाई देता है।

आंतरिक पृष्ठबाहरी पृष्ठ
(i) कभी-कभी प्रतिबिम्ब उल्टा तथा कभी सीधा दिखाई देता है।(i) प्रतिबिम्ब हमेशा सीधा होता है।
(ii) प्रतिबिम्ब का आकार कभी छोटा तो कभी बड़ा दिखाई देता है।(ii) प्रतिबिम्ब हमेशा छोटा होता है।

क्रियाकलाप 10.2  (पा. पु. पृ.सं. 178)

प्रश्न 1.
आप क्या देखते हैं? ऐसा क्यों होता है?
उत्तर-
कागज जलना शुरू हो जाता है। सूर्य से आने वाला प्रकाश दर्पण के द्वारा एक तीक्ष्ण, चमकदार बिन्दु के रूप में अभिकेन्द्रित होता है जिससे ऊष्मा उत्पन्न होती है और कागज जलने लगता है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

क्रियाकलाप 10.3 (पा. पु. पृ.सं. 180)

प्रश्न 1.
अपने प्रेक्षणों को नोट कीजिये तथा सारणीबद्ध कीजिए।
उत्तर-
किसी अवतल दर्पण से बिम्ब की विभिन्न स्थितियों के लिए बने प्रतिबिम्ब।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 6

क्रियाकलाप 10.4 (पा. पु. पृ. सं. 182)
प्रश्न- अवतल दर्पण को विभिन्न स्थितियों में रखकर किसी वस्तु की विभिन्न स्थितियों में बने प्रतिबिम्बों का अध्ययन करना।
उत्तर-
(a) अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना (Image Formation by Concave Mirror)
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 7
वस्तु की स्थिति – अनंत पर
प्रतिबिम्ब की स्थिति – फोकस F पर
प्रतिबिम्ब का आकार-अत्यधिक छोटा (बिन्दुनुमा)
प्रतिबिम्ब की प्रकृति – वास्तविक एवं उल्टा

(ii)
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 8
वस्तु की स्थिति – C से परे
प्रतिबिम्ब की स्थिति – F तथा C के बीच
प्रतिबिम्ब का आकार – छोटा
प्रतिबिम्ब की प्रकृति- वास्तविक एवं उल्टा

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 9
वस्तु की स्थिति-C पर,
प्रतिबिम्ब की स्थिति – वस्तु के बराबर
प्रतिबिम्ब का आकार – C पर
प्रतिबिम्ब की प्रकृति – वास्तविक एवं उल्टा

(iv)
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 10
वस्तु की स्थिति – C व F के बीच,
प्रतिबिम्ब की स्थिति – C से परे
प्रतिबिम्ब का आकार – वस्तु से बड़ा
प्रतिबिम्ब की प्रकृति – वास्तविक एवं उल्टा

(v)
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 11
वस्तु की स्थिति – F पर,
प्रतिबिम्ब की स्थिति – अनंत पर
प्रतिबिम्ब का आकार – वस्तु से अत्यधिक बड़ा
प्रतिबिम्ब की प्रकृति – वास्तविक एवं उल्टा

(vi)
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 12
वस्तु की स्थिति – P व F के बीच
प्रतिबिम्ब की स्थिति – दर्पण के पीछे
प्रतिबिम्ब का आकार – वस्तु से बड़ा
प्रतिबिम्ब की प्रकृति- आभासी एवं सीधा ॥

क्रियाकलाप 10.5 (पा. पु. पृ. सं. 183)

प्रश्न 1.
दर्पण में पेंसिल का प्रतिबिम्ब देखिये प्रतिबिंब सीधा है या उल्टा? क्या यह छोटा है अथवा विवर्धित (बड़ा) है?
उत्तर-
सीधा एवं छोटा।

प्रश्न 2.
पेंसिल को धीरे-धीरे दर्पण से दूर ले जाइए। क्या प्रतिबिंब छोटा होता जाता है या बड़ा होता जाता है?
उत्तर-
प्रतिबिम्ब छोटा होता जाता है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

प्रश्न 3.
क्रियाकलाप को सावधानीपूर्वक दोहराइये। बताइये कि जब बिम्ब को दर्पण से दूर ले जाते हैं तो प्रतिबिम्ब फोकस के निकट आता है अथवा उससे और दूर चला जाता है?
उत्तर-
प्रतिबिम्ब फोकस के निकट आता है। प्रतिबिम्ब फोकस के निकट बनता है।

क्रियाकलाप 10.6 (पा. पु. पृ. सं. 184)

प्रश्न 1.
क्या आप पूर्ण लम्बाई का प्रतिबिम्ब देख पाते हैं?
उत्तर-
पूर्ण लम्बाई का प्रतिबिम्ब नहीं देख पाते हैं।

प्रश्न 2.
विभिन्न साइज के समतल दर्पण लेकर प्रयोग दोहराइये। क्या आप दर्पण में बिम्ब का संपूर्ण प्रतिबिम्ब देख पाते हैं?
उत्तर-
नहीं।

प्रश्न 3.
इस क्रियाकलाप को अवतल दर्पण लेकर दोहराइये। क्या यह दर्पण बिम्ब की पूरी लम्बाई का प्रतिबिम्ब बना पाता है?
उत्तर-
नहीं।

प्रश्न 4.
अब एक उत्तल दर्पण लेकर इस प्रयोग को दोहराइए, क्या पूर्ण प्रतिबिम्ब प्राप्त होता है?
उत्तर-
किसी छोटे उत्तल दर्पण द्वारा किसी ऊँचे भवन/पेड़ आदि का पूर्ण लम्बाई का प्रतिबिम्ब देख सकते

क्रियाकलाप 10.7 (पा. पु. पृ. सं. 189)

प्रश्न 1.
पानी से भरी एक बाल्टी की तली पर एक सिक्का रखकर अपनी आँख को पानी के ऊपर पार्श्व (side) में रखकर सिक्के को एक बार में उठाने का प्रयत्न कीजिए। क्या आप सिक्का उठाने में सफल हो पाते हैं?
उत्तर-
नहीं।

प्रश्न 2:
इस क्रियाकलाप को दोहराइए, आप इसे एक बार में करने में सफल क्यों नहीं हो पाये थे ?
उत्तर-
प्रकाश के अपवर्तन के कारण सिक्का थोड़ा सा ऊँचा उठा हुआ प्रतीत होता है इसलिए इसे उठाने में थोड़ी कठिनाई होती है। थोड़ा अभ्यास करने से सिक्का उठाने में सफलता प्राप्त हो जाती है।

क्रियाकलाप 10.8 (पा. पु. पृ. सं. 189)

प्रश्न-अपने किसी साथी से सिक्के को बिना विचलित किए उस कटोरे में पानी डालवाइए। अपनी स्थिति से पुनः यह सिक्का आपको दिखाई देने लगता है। यह कैसे सम्भव हो पाता है?
उत्तर-
प्रकाश के अपवर्तन के कारण सिक्का अपनी वास्तविक स्थिति से थोड़ा सा ऊपर उठा हुआ प्रतीत होता है तथा वह पानी डालने से पुनः दिखाई देने लगता है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

क्रियाकलाप 10.9 (पा. पु. प्र. सं. 190)

प्रश्न 1.
स्लैब के नीचे आए रेखा के भाग को पार्श्व से देखिये। आप क्या देखते हैं? क्या काँच के स्लैब के नीचे की रेखा कोरों के पास मुड़ी हुई प्रतीत होती है? ।
उत्तर-
हाँ, ऐसा रोशनी के अपवर्तन के कारण हो रहा है।

प्रश्न 2.
अब काँच के स्लैब को इस प्रकार रखिए कि यह रेखा के अभिलम्बवत हो। अब आप क्या देखते हैं? क्या काँच के स्लैब के नीचे रेखा का भाग मुड़ा हुआ प्रतीत होता है?
उत्तर-
अब, रेखा सीधी है और मुड़ी हुई प्रतीत नहीं हो ब रही क्योंकि रोशनी की सीधी किरण में अपवर्तन नहीं होता है।

प्रश्न 3.
रेखा को काँच के स्लैब के ऊपर से देखिये। क्या स्लैब के नीचे रेखा का भाग उठा हुआ प्रतीत होता है? ऐसा क्यों होता है?
उत्तर-
हाँ, ऐसा अपवर्तन के कारण होता है। इसके कारण बिम्ब की स्थिति वास्तविक स्थिति से उठी हुई दिखाई देती है।

क्रियाकलाप 10.10 (पा. पु. पृ. सं. 190)

प्रश्न 1.
क्या होता है जब प्रकाश की किरणें काँच की – स्लैब में प्रवेश करती हैं?
उत्तर-
प्रकाश का अपवर्तन होता है और यह अभिलम्ब की तरफ मुड़ जाती है। ऐसा प्रकाश की चाल काँच के स्लैब में अपेक्षाकृत कम होने के कारण होता है।

प्रश्न 2.
क्या होता है जब प्रकाश की किरणें स्लैब से बाहर निकलती हैं?
उत्तर-
वायु में प्रकाश की चाल अधिक होती है अतः प्रकाश अभिलम्ब से दूर मुड़ जाता है।

प्रश्न 3.
निर्गत किरण तथा आपतित किरण के बीच की लम्बवत् दूरी को क्या कहते हैं?
उत्तर-
पाश्विक विस्थापन।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

प्रश्न 4.
आपतित कोण तथा निर्गत कोण के बीच क्या संबंध होता है यदि आपतित किरण तथा निर्गत किरण का माध्यम समान हो?
उत्तर-
आपतित कोण = निर्गत कोण।

क्रियाकलाप 10.11 (पा. पु. पृ. सं. 195)

प्रश्न 1.
कागज तथा लेंस को कुछ समय के लिए उसी स्थिति में पकड़े रखने पर कागज का क्या होता है, प्रेक्षण कीजिए।
उत्तर-
कागज सुलगता है तथा उससे धुआँ उत्पन्न होता है व कुछ समय बाद यह आग भी पकड़ लेता है, इसका कारण यह है कि सूर्य से आने वाली प्रकाश की किरणें एक तीक्ष्ण चमकदार बिन्दु के रूप में कागज पर अभिकेन्द्रित कर ली जाती हैं जिसके फलस्वरूप कागज जलने लगता है।

क्रियाकलाप 10.12 (पा. पु. पृ. सं. 196)

प्रश्न 1.
उत्तल लेन्स द्वारा बने बिम्बों की विभिन्न स्थितियों का अध्ययन कीजिये।
उत्तर-

  • एक उत्तल लेंस लेकर क्रियाकलाप 10.11 में दी गई विधि से इसकी फोकस दूरी का मान (लगभग) ज्ञात करते हैं।
  • एक लम्बी मेज पर चॉक द्वारा पाँच समान्तर रेखाएँ इस प्रकार खींचते हैं कि किन्हीं दो उत्तरोत्तर रेखाओं के बीच की दूरी लेंस की फोकस दूरी के बराबर हो। लेंस को एक स्टैण्ड पर लगाकर इसे मध्य रेखा पर इस प्रकार रखते हैं कि लेंस का प्रकाशिक केन्द्र इस रेखा पर स्थित हो।
  • लेंस के दोनों ओर दो रेखाएँ क्रमशः लेंस के F तथा 2 F के तदनुरूपी होंगी। इन्हें 2F1 , F1, F2, तथा 2F2, से प्रदर्शित किया जाता है।
  • एक जलती हुई मोमबत्ती को बायीं ओर 2F1, से काफी दूर रखकर लेंस की विपरीत दिशा में रखे एक परदे पर इसका स्पष्ट एवं तीक्ष्ण प्रतिबिम्ब बनाकर प्रतिबिम्ब की प्रकृति, स्थिति तथा आकार नोट करते हैं।
  • इस क्रियाकलाप में बिम्ब को 2F1, से थोड़ा दूर, F1, तथा 2F1, के बीच, F1, पर तथा F1, व O के बीच रखकर प्रेक्षणों को नोट करके सारणीबद्ध करने पर निम्न निष्कर्ष प्राप्त होते हैं।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 13

क्रियाकलाप 10.13 (पा. पु. पृ. सं. 197)

प्रश्न-अवतल लेन्स द्वारा बने बिम्बों की विभिन्न स्थितियों का अध्ययन कीजिये।
उत्तर-

  • एक अवतल लेंस लेकर इसे एक स्टैण्ड में लगाकर लेंस के एक ओर एक जलती मोमबत्ती रखकर लेंस के दूसरी ओर से प्रतिबिम्ब का प्रेक्षण करते हैं।
  • इस स्थिति में प्रतिबिम्ब की प्रकृति, आपेक्षिक आकार तथा स्थिति नोट करते हैं।
  • अब मोमबत्ती को लेंस से दूर ले जाकर प्रतिबिम्ब के आकार में परिवर्तन नोट कर लेते हैं। जब मोमबत्ती को लेंस से बहुत दूर रखा जाता है तो प्रतिबिम्ब के आकार पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करने पर निष्कर्ष इस प्रकार प्राप्त होते हैं।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 10 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन 14
अतः अवतल लेंस से सदैव एक आभासी, सीधा तथा छोटा प्रतिबिम्ब बनेगा चाहे बिम्ब कहीं भी स्थित हो।

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HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है Textbook Exercise Questions, and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Solutions Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है

HBSE 10th Class Science जीव जनन कैसे करते है Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
अलैंगिक जनन मुकुलन द्वारा होता है –
(a) अमीबा में
(b) यीस्ट में
(c) प्लाज्मोडियम में
(d) लेस्मानिया में।
उत्तर-
(b) यीस्ट।

प्रश्न 2.
निम्न में से कौन मानव में मादा जनन तन्त्र का भाग नहीं है
(a) अण्डाशय
(b) गर्भाशय
(c) शुक्रवाहिका
(d) डिम्बवाहिनी।
उत्तर-
(c) शुक्रवाहिका।

प्रश्न 3.
परागकोश में होते हैं-.
(a) बाह्यदल
(b) अण्डाशय
(c) अण्डप
(d) पराग कण।
उत्तर –
(d) पराग कण।

प्रश्न 4.
अलैंगिक जनन की अपेक्षा लैंगिक जनन के क्या लाभ हैं ?
उत्तर –
अलैंगिक जनन में केवल एक जीवधारी के लक्षण ही संतति जीव में आते हैं। इन संतति जीवों में आनुवंशिक ओज क्षीण होता है। इनके जननद्रव्य में विभिन्नताओं की सम्भावना कम होती है।

लैंगिक जनन निम्नलिखित कारणों से अलैंगिक जनन की अपेक्षा अधिक लाभकारी है-

  • लैंगिक जनन में नर एवं मादा के सम्मिलन से नये जीव की उत्पत्ति होती है जिससे दो प्रकार के जनन द्रव्यों का मिलन होता है। इन संतति जीवों में विभिन्नता की सम्भावनाएँ होती हैं।
  • लैंगिक जनन से गुणसूत्रों के नये जोड़े बनते हैं। – इससे विकासवाद की दिशा को नये आयाम प्राप्त होते हैं।
  • लैंगिक जनन से उत्पन्न जीवों में श्रेष्ठ गुणों का समावेश होता है तथा इनमें संकर ओज अधिक होता है।

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प्रश्न 5.
मानव में वृषण के क्या कार्य हैं ?
उत्तर-
मानव में वृषण के प्रमुख कार्य निम्न हैं-

  • ये शुक्राणुओं का निर्माण करते हैं।
  • ये टेस्टोस्टेरॉन नामक हॉर्मोन उत्पन्न करते हैं, जो शुक्राणुओं के उत्पादन को नियन्त्रित करता है।
  • यह हॉर्मोन बालकों में द्वितीय लक्षणों के विकास को प्रेरित करता है।

प्रश्न 6.
ऋतुस्राव क्यों होता है?
उत्तर-
स्त्रियों में अण्डाशय प्रत्येक माह एक अण्ड का निर्मोचन (Ovulation) करता है। निषेचित अण्डाणु द्वारा बने भ्रूण के रोपण के लिए गर्भाशय में कुछ परिवर्तन होते हैं। गर्भाशय की भित्ति में सूक्ष्मांकुर बन जाते हैं, चौड़ी वाहिकाओं का निर्माण हो जाता है तथा भ्रूण के पोषण के लिए परिवर्तन होते हैं। यदि अण्ड का निषेचन नहीं होता है तो गर्भाशय में हुए परिवर्तनों से पुन: सामान्य सी स्थिति बनती है जिसमें गर्भाशय भित्ति, सूक्ष्मांकुरों, म्यूकस तथा वाहिकाओं का विघटन होता है। ये सभी रचनाएँ एक स्राव के रूप में प्रत्येक 28 दिन पश्चात् योनि मार्ग से स्रावित होती हैं। इसे ऋतुस्राव (menstruation cycle) कहते हैं। यदि अण्ड का निषेचन हो जाता है तो ऋतुस्राव चक्र रुक जाता है और गर्भ धारण हो जाता है।

प्रश्न 7.
पुष्प की अनुदैर्ध्य काट का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर-
पुष्य की अनुदैर्ध्य काट-
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है 1

प्रश्न 8.
गर्भ निरोधन की विभिन्न विधियाँ कौन-सी
उत्तर-
मादा द्वारा गर्भधारण न होने देना गर्भ निरोधन (Contraception) कहलाता है। गर्भ निरोधन की विधियाँ , निम्नलिखित हैं:
1. रासायनिक विधियाँ-अनेक प्रकार के रासायनिक पदार्थ मादा में निषेचन क्रिया को रोक सकते हैं। ऐसी अनेक गोलियाँ (pills) बाजारों में उपलब्ध हैं जिन्हें खाने से गर्भधारण नहीं हो पाता है। झाग की गोली, जैली तथा विभिन्न क्रीमों के प्रयोग से भी गर्भधारण रोका जा सकता है।

2. शल्य विधियाँ-पुरुष नसबंदी (Vasectomy) तथा स्त्री नसबंदी (Tubectomy) द्वारा निषेचन क्रिया को बाधित किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में कुशल चिकित्सकों द्वारा पुरुषों में शुक्रवाहिनी तथा स्त्रियों में अण्डवाहिनी को काटकर बाँध दिया जाता है जिससे शुक्राणुओं का अण्डाणुओं से मिलन नहीं हो पाता है।

3. भौतिक विधियाँ-इन विधियों में कुछ उपकरणों द्वारा शुक्राणु एवं अण्डाणु के मिलन को रोक दिया जाता है। पुरुष कण्डोम, स्त्री कण्डोम, कॉपर ‘टी’, गर्भ निरोधन लूप आदि भौतिक गर्भ निरोधन युक्तियाँ हैं।

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प्रश्न 9.
एककोशिक तथा बहुकोशिक जीवों की जनन पद्धति में क्या अन्तर है ?
उत्तर-
एककोशिक तथा बहुकोशिक जीवों की जनन पद्धति में अन्तर –

एककोशिक जीवों में जननबहुकोशिक जीवों में जनन
1. इनमें जनन विधि सरल होती है।इनमें जनन विधि जटिल होती है।
2. इनमें जनन प्रायः अलैं- गिक विधियों द्वारा होताइनमें जनन प्रायः लैंगिक विधियों द्वारा होता है।
3. इनमें जनन के लिए विशेष प्रकार की कोशिकाएँ नहीं होती हैं।इनमें जनन के लिए विशिष्ट प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं।
4. इनमें जनन के लिए कोई विशेष अंग भी नहीं होता हैं।इनमें जनन के लिए विशेष अंग होते हैं।
5. यह सामान्यतः सूत्री विभाजन द्वारा होता है।यह प्रायः अर्धसूत्री विभाजन द्वारा होता है।

प्रश्न 10.
जनन किसी स्पीशीज की समष्टि के स्थायित्व में किस प्रकार सहायक है ?
उत्तर-
जनन द्वारा पैतृक पीढ़ी से पुत्री पीढ़ी का निर्माण होता है। पुत्री पीढ़ी आगे चलकर पैतृक पीढ़ी का कार्य करती है और सन्तान उत्पन्न करती है। यह क्रम लगातार चलता रहता है और इस प्रकार स्पीशीज की समष्टि का स्थायित्व बना रहता है।

प्रश्न 11.
गर्भ-निरोधक युक्तियाँ अपनाने के क्या कारण हो सकते हैं ?
उत्तर-
गर्भ-निरोधक युक्तियों के अपनाने के निम्नलिखित कारण हैं

  • इनके द्वारा बढ़ती हुई जनसंख्या पर नियन्त्रण किया जा सकता है।
  • इसके द्वारा अवांछित सन्तान से बचा जा सकता है।
  • इनके द्वारा जल्दी-जल्दी गर्भधारण को रोका जा सकता है क्योंकि जल्दी-जल्दी गर्भधारण से स्त्री के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव होता है।
  • कुछ गर्भ निरोधन युक्तियाँ यौन-संचारित रोगों से बचने में सहायता करती हैं।
  • परिवार नियोजन अपना कर खुशहाल जीवनयापन किया जा सकता है। .

HBSE 10th Class Science जीव जनन कैसे करते है  InText Questions and Answers

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 142)

प्रश्न 1.
डी.एन.ए. प्रतिकृति का प्रजनन में क्या महत्त्व
उत्तर-
डी.एन.ए. में आनुवंशिक सूचनाएँ निहित होती हैं। डी.एन.ए. गुणसूत्रों के रूप में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाते हैं। अतः डी.एन.ए. द्वारा अपने जैसे ही प्रतिरूप बनाने की क्षमता होती है। ऐसा डी.एन.ए. के प्रतिकृतिकरण द्वारा होता है। इसके द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी डी.एन.ए. की मात्रा सन्तुलित बनी रहती है।

प्रश्न 2.
जीवों में विभिन्नता स्पीशीज के लिए तो लाभदायक है परन्तु व्यष्टि के लिए आवश्यक नहीं है क्यों ?
उत्तर-
विभिन्नताएँ प्रजाति (Species) के लिए लाभदायक होती हैं, क्योंकि इनके कारण प्रजाति में कुछ ऐसे सदस्य उत्पन्न हो जाते हैं, जो अनेक प्रतिकूल परिस्थितियों के लिए स्वयं को अनुकूलित कर लेते हैं या इनके प्रतिरोधी होते हैं। प्राकृतिक चयन के फलस्वरूप योग्यतम जीव जीवित रहते हैं। व्यक्तिगत सदस्य में उत्पन्न विभिन्नताएँ पर्यावरण से अनुकूलित न रहने के कारण सदस्य जीवित नहीं रह पाता है। अतः विभिन्नताएँ प्रजाति के लिए लाभदायक किन्तु व्यष्टि के लिए हानिकारक होती हैं। विभिन्नताएं प्रजाति की उत्तरजीविता बनाये रखने में उपयोगी हैं।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 146)

प्रश्न 1.
द्विखण्डन बहुखण्डन से किस प्रकार भिन्न
उत्तर-
द्विखण्डन तथा बहुखण्डन में अन्तर-

द्विखण्डन (Binary Fission)बहुखण्डन (Multiple Fission)
1. यह प्रायः अनुकूल परि स्थितियों में होता है।यह प्रायः प्रतिकूल परि स्थितियों में होता है।
2. इसमें केन्द्रक दो पुत्री केन्द्रकों में विभाजित होता है।इसमें केन्द्रक अनेक संतति केन्द्रकों में विभाजित होता है।
3. इसमें केन्द्रक विभाजन के साथ ही कोशिकाद्रव्य का विभाजन भी होता है।इसमें केन्द्रक का विभाजन होने के पश्चात् प्रत्येक संतति केन्द्रक के चारों ओर थोड़ा- थोड़ा जीवद्रव्य एकत्र हो जाता है।
4. इसमें एक मातृ जीव से दो संतति जीव बनते हैं।इसमें एक मातृ जीव से अनेक संतति जीव बनते हैं।

प्रश्न 2.
बीजाणु द्वारा जनन से जीव किस प्रकार लाभान्वित होता है ?
उत्तर-
बीजाणुजनन प्रायः पौधों में पाया जाता है। बीजाणुओं के ऊपर एक मोटा रक्षी आवरण होता है, जो इनकी प्रतिकूल पर्यावरण में रक्षा करता है। हल्के होने के कारण वायु द्वारा इनका प्रकीर्णन सरल होता है। अनुकूल परिस्थितियाँ (उचित ताप, नमी, भोज्य पदार्थ आदि) मिलने पर बीजाणु अंकुरण करके नये जीव को जन्म देते हैं। जैसे-राइजोपस, म्यूकर आदि।

प्रश्न 3.
क्या आप कुछ कारण सोच सकते हैं जिससे पता चलता हो कि जटिल संरचना वाले जीव पुनरुद्भवन द्वारा नयी संतति उत्पन्न नहीं कर सकते ?
उत्तर-
जटिल संरचना वाले जीवधारियों में कोशिकाएँ कार्यों के लिए विशिष्टीकृत होती हैं। ये कोशिकाएँ मिलकर, ऊतक, अंग, अंगतन्त्र तथा जीव शरीर का निर्माण करती हैं। इनमें केवल लैंगिक कोशिकाओं (नर तथा मादा युग्मक) के मिलने से ही नया जीव उत्पन्न होता है। इन जीवों की किसी अन्य कोशिका या ऊतक में नयी संतति उत्पन्न करने की क्षमता नहीं होती। इसके विपरीत कुछ सरल बहुकोशिकीय जीवों,जैसे-स्पंजों, हाइड्रा आदि में पुनरुद्भवन द्वारा नयी संतति बनाने की क्षमता होती है। इस प्रक्रिया में जीव का कोई कटा हुआ भाग नये जीव का निर्माण कर लेता है। जटिल संरचना वाले जीवों में पुनरुद्भवन की क्षमता केवल घाव भरने तक सीमित रह जाती है।

प्रश्न 4.
कुछ पौधों को उगाने के लिए कायिक प्रवर्धन का उपयोग क्यों किया जाता है ?
उत्तर-
कुछ पौधों को उगाने के लिए कायिक प्रवर्धन का उपयोग निम्नलिखित कारणों से किया जाता है –

  • कायिक प्रवर्धन से प्राप्त पौधे पूर्ण रूप से अपने जनकों के समान लक्षणों वाले होते हैं।
  • कुछ पौधे जिनके बीजों में जनन क्षमता नहीं होती उनका कायिक प्रवर्धन किया जा सकता है।
  • कायिक प्रजनन द्वारा कम समय में अधिक पौधे प्राप्त किये जा सकते हैं।
  • पौधों को बीज से उत्पन्न करने में लम्बा समय लगता है, जबकि कायिक प्रवर्धन से काफी बड़े पौधे कम समय में तैयार किये जा सकते हैं।
  • कायिक प्रवर्धन एक सस्ती विधि है।

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प्रश्न 5.
डी.एन.ए. की प्रतिकृति बनाना जनन के लिए क्यों आवश्यक है ?
उत्तर-
डी. एन. ए. की प्रतिकृति बनाना जनन के लिए आवश्यक है। यह जनन के लिए एक मूल घटना है। जनक कोशिका की दो कोशिकाएँ बनती है। ये दोनों प्रतिकृतियाँ अलग होना आवश्यक हैं तभी जनन हो सकता है। इसके लिए एक अलग से कोशिकीय संरचना आवश्यक है। एक प्रतिकृति नई संरचना में तथा एक मूल कोशिका में रह जाती है। इस प्रकार दो प्रतिकृतियाँ दो नई कोशिकाएँ बनाने में सहायता करती हैं और जनन होता है।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 154)

प्रश्न 1.
परागण क्रिया निषेचन से किस प्रकार भिन्न
उत्तर-
परागण तथा निषेचन में अन्तर-

परागण (Pollination)निषेचन  (Fertilization)
1. परागकोष (anther) से परागकणों का वर्तिकाग्र पर पहुँचना परागण कहलाती है।1. नर तथा मादा युग्मकों के मिलने की क्रिया निषेचन कहलाता है।
2. यह क्रिया किसी माध्यम (जैसे-वायु, जल, कीट, पक्षी आदि) द्वारा होती है।2. निषेचन में नर युग्मक परागण नलिका के माध यम से मादा युग्मक तक पहुँचते हैं। अत: किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।
3. यह क्रिया निषेचन से पहले होती है।3. परागण क्रिया के सफलतापूर्वक सम्पन्न होने के पश्चात् निषेचन की क्रिया होती है।

प्रश्न 2.
शुक्राशय तथा प्रोस्टेट ग्रन्थि की क्या भूमिका
उत्तर-
शुक्राशय (Seminal Vesicle) तथा प्रोस्टेट ग्रन्थि (Prostate gland) नर जनन तन्त्र के भाग होते हैं। शुक्राशय एक पोषक तरल पदार्थ स्रावित करता है जो शुक्राणुओं के साथ मिलकर वीर्य (Semen) बनाता है। यह तरल शुक्राणुओं का पोषण करता है, इनकी सुरक्षा करता है तथा इन्हें सक्रिय बनाये रखता है। यह तरल स्त्री की योनि के अम्लीय प्रभाव को कम करके शुक्राणुओं की रक्षा करता है।

प्रोस्टेट ग्रन्थि से हल्का अम्लीय तरल स्रावित होता है। यह वीर्य का लगभग 25 प्रतिशत भाग बनाता है। इसमें उपस्थित पदार्थ शुक्राणुओं के स्कन्दन को रोकते हैं तथा इन्हें सक्रिय रखते हैं।

प्रश्न 3.
यौवनारम्भ के समय लड़कियों में कौन-कौन से परिवर्तन दिखाई देते हैं ?
उत्तर-
लड़कों एवं लड़कियों में बाल्यावस्था में इनके जननांगों के अलावा अन्य शारीरिक लक्षणों तथा व्यवहार
आदि में विशेष अन्तर नहीं होता है। लड़कियों में लगभग 11 से 13 वर्ष की आयु से यौवनारम्भ था किशोरावस्था प्रारम्भ होती है।

इसमें निम्नलिखित परिवर्तन दिखाई देते हैं-

  • स्तनों की वृद्धि तथा दुग्धग्रन्थियों का विकास होने लगता है।
  • स्तनों के मध्य उभरे भाग पर स्थित चूचुक (nipples) के चारों ओर छोटा-सा रंगयुक्त क्षेत्र और अधिक गहरा हो जाता है।
  • श्रोणि भाग चौड़ा और नितम्ब भारी हो जाते हैं।
  • आवाज महीन एवं सुरीली हो जाती है।
  • त्वचा तैलीय हो जाती है।
  • बगल एवं जंघा प्रदेश में बाल उग आते हैं।
  • आर्तव चक्र (Menstrual cycle) प्रारम्भ हो जाता
  • व्यवहार में भी बदलाव होने लगते हैं।
  • अंडवाही नलियाँ (fallopian tube), गर्भाशय (uterus) और योनि (vagina) के आकार में वृद्धि हो जाती है।

प्रश्न 4.
माँ के शरीर में गर्भस्थ भ्रूण को पोषण किस प्रकार प्राप्त होता है?
उत्तर-
मनुष्य एक स्तनधारी प्राणी है। निम्न श्रेणी के स्तनधारियों को छोड़कर अन्य सभी स्तनधारी जरायुजी (Viviparous) होते हैं अर्थात् शिशु को जन्म देते हैं। इनमें भ्रूण का विकास गर्भाशय में होता है और विकासशील भ्रूण का पोषण माता के गर्भाशय की दीवारों से अपरा (Placenta) द्वारा होता है। भ्रूणीय विकास के तीसरे सप्ताह में भ्रूण का रोपण गर्भाशय में प्राथमिक रसांकुरों (Primary Villi) द्वारा होता है और अन्त में अपरा नाल द्वारा गर्भाशय की दीवार से जुड़ जाता है। अपरा द्वारा पोषक पदार्थ तथा ऑक्सीजन भ्रूण को प्राप्त होती रहती है तथा भ्रूण के उत्सर्जी पदार्थ अपरा द्वारा ही माँ के रुधिर में छोड़ दिये जाते हैं, जहाँ से ये बाहर उत्सर्जित किये जाते हैं।

प्रश्न 5.
यदि कोई महिला कॉपर ‘टी’ का प्रर कर रही है तो क्या यह उसकी यौन-संचारित रोगों से रक्षा करेगी?
उत्तर-
नहीं। कॉपर ‘टी’ का प्रयोग गर्भ निरोधन के लिए किया जाता है। इसका यौन-संचारित रोगों से बचाव में कोई योगदान नहीं होता है।

HBSE 10th Class Science जीव जनन कैसे करते है InText Activity Questions and Answers

क्रियाकलाप 8.1 (पा. पु. पृ. सं. 142)

प्रेक्षण (Observation)-यीस्ट कोशिकाएँ रंगहीन तथा गोलाकार दिखाई देती हैं। इनका ऊपरी सिरा उभरा हुआ दिखाई देता है। यीस्ट कोशिकाएँ श्रृंखलाओं और झुण्डों के रूप में दिखाई देती हैं।

क्रियाकलाप 8.2  (पा. पु. पृ. सं. 142)

प्रेक्षण (Observation)-प्रारम्भ में डबलरोटी पर सफेद रंग के धागे बिखरे दिखाई देते हैं जो धीरे-धीरे घने होकर एक जाल जैसी रचना बना लेते हैं, जिसे कवक-जाल (Mycelium) कहते हैं। एक सप्ताह के अन्त तक ये अत्यधिक घने तथा धूसर रंग के हो जाते हैं। क्योंकि स्पोरेजियम तथा स्पोर (बीजाणु) बन जाते हैं।

क्रियाकलाप 8.3 (पा. पु. पृ. सं. 143)
प्रेक्षण (Observation)-अमीबा की स्थाई स्लाइड में अमीबा की कोशिका दिखाई देती है जिसमें कोशिका द्रव्य तथा केन्द्रक दिखाई देते हैं। जबकि द्विखण्डन की स्थायी स्लाइड में केन्द्रक दो भागों में विभाजित होता हुआ प्रतीत होता है। प्रारंभ में इसका आकार बढ़ता है तथा केन्द्रक और कोशिका द्रव्य दो भागों में विभक्त हो जाते हैं।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है 2

क्रियाकलाप 8.4 (पा. पु. पृ. सं. 143)
प्रेक्षण (Observation)-स्लाइड में अशाखित तन्तु दिखाई देते हैं जो एक ही पंक्ति पर निरन्तर रखी कोशिकाओं से बने हैं। ये कोशिकाएँ बेलनाकार हैं। इनकी चौड़ाई की अपेक्षा लम्बाई अधिक है। इनका ऊपरी सिरा गुम्बद जैसा है।
प्रश्न-क्या आप स्पाइरोगाइरा तन्तुओं में विभिन्न ऊतक पहचान सकते हैं ?
उत्तर-
स्पाइरोगाइरा में ऊतक नहीं होते हैं। यह एक तन्तुवत् शैवाल है। इनके तन्तु अनेक कोशिकाओं के मिलने से बनते हैं।

क्रियाकलाप 8.5 (पा. पु. पृ. सं. 145)

प्रेक्षण (Observation) -आलू के कुछ टुकड़ों में गर्त दिखाई देते हैं। ये गर्त कलिकाएँ कहलाते हैं जिनसे नमी की उपस्थिति में प्ररोह तथा जड़ें विकसित होती हैं। गर्तरहित टुकड़ों से प्ररोह व जड़ों का निर्माण नहीं होता है।

प्रश्न-वे कौन-से टुकड़े हैं जिनसे हरे प्ररोह तथा जड़ विकसित हो रहे हैं?
उत्तर-
गर्तयुक्त टुकड़े।

क्रियाकलाप 8.6 (पा. पु. पृ. सं. 145)

प्रेक्षण (Observation)-कुछ टुकड़ों में कायिक जनन होता है तथा नई पत्तियाँ आदि निकलती हैं कुछ अन्य में ऐसी क्रिया नहीं होती है।

प्रश्न 1.
कौन-से टुकड़ो में वृद्धि होती है तथा नयी पत्तियाँ निकलती हैं?
उत्तर-
दो पत्तियों के मध्य वाले भाग में शीघ्र वृद्धि होती है और नई पत्तियाँ निकलती हैं।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है

प्रश्न 2.
आप अपने प्रेक्षणों से क्या निष्कर्ष निकालते
उत्तर-
पत्तियों के निकट या टुकड़ों पर जहाँ कलिका थी वहाँ कायिक जनन के कारण पत्तियाँ निकलनी आरम्भ हुईं। इससे स्पष्ट है कि मनीप्लाण्ट कायिक जनन करता है।

क्रियाकलाप 8.7  (पा. पु. पृ. सं. 149)

प्रेक्षण (Observation)-हाँ, चित्र में दिए गए सभी भागों को पहचाना जा सकता है। ये भाग हैं- बीजपत्र, प्रांकुर तथा मूलांकुर।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 8 जीव जनन कैसे करते है 3

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HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय Textbook Exercise Questions, and Answers.

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HBSE 10th Class Science नियंत्रण एवं समन्वय Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
निम्नलिखित में से कौन सा पादप हॉर्मोन है –
(a) इन्सुलिन
(b) थायरॉक्सिन
(c) एस्ट्रोजन
(d) सायटोकाइनिन।
उत्तर-
(d) सायटोकाइनिन।

प्रश्न 2.
दो तंत्रिका कोशिकाओं के मध्य खाली स्थान को कहते हैं –
(a) द्रुमिका
(b) सिनेप्स
(c) एक्सॉन
(d) आवेग।
उत्तर-
(b) सिनेप्स।

प्रश्न 3.
मस्तिष्क उत्तरदायी है –
(a) सोचने के लिए
(b) हृदय स्पंदन के लिए
(c) शरीर का सन्तुलन बनाने के लिए
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 4.
हमारे शरीर में ग्राही का क्या कार्य है ? ऐसी स्थिति पर विचार कीजिए जहाँ ग्राही उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहे हों, क्या समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं ?
उत्तर-
शरीर में स्थित संवेदांग (Sensory receptors) शरीर के भीतरी एवं बाहरी वातावरण में होने वाले परिवर्तनों का अनुभव करके संवेदी तंत्रिकाओं द्वारा केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र को पहुँचा देते हैं। ये संवेदांग ग्राही कहलाते हैं। गन्ध का ज्ञान घ्राणग्राही द्वारा, स्वाद का ज्ञान स्वादग्राही द्वारा, स्पर्श का ज्ञान त्वक्ग्राही द्वारा, ध्वनि तथा सन्तुलन का ज्ञान श्रवणोसन्तुलनग्राही द्वारा होता है। जब ग्राही अपना कार्य सामान्य रूप से नहीं करते हैं तो उपर्युक्त संवेदनाओं को ग्रहण नहीं किया जा सकता जिससे कभी-कभी विकराल परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।

जैसे-गर्म वस्तु पर हाथ पड़ने पर यदि ताप की पीड़ा का उद्दीपन संवेदी तंत्रिका द्वारा केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र में प्रेषित नहीं होगा तो व्यक्ति जलकर घायल हो जाएगा। सामान्य स्थिति में प्रतिवर्ती क्रिया के फलस्वरूप गर्म वस्तु पर हाथ पड़ने पर ताप का उद्दीपन संवेदी तंत्रिका द्वारा मेरुरज्जु में पहुँचता है और चालक तंत्रिका द्वारा सम्बन्धित कंकाल पेशी को पहुँचा दिया जाता है। कंकाल पेशी में संकुचन के फलस्वरूप हाथ गर्म वस्तु से हट जाता है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय

प्रश्न 5.
एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना बनाइए तथा इसके कार्यों का वर्णन कीजिए। (नमूना प्र.प. 2012, राज. 2015)
उत्तर-
तंत्रिका कोशिका की संरचना (Structure of Neuron) –
(1) केन्द्रक (Nucleus) केन्द्रक तंत्रिका कोशिका का केन्द्र होता है। यह तंत्रिका कोशिका को कार्य करने के निर्देश देता है एवं सभी प्रकार के संदेशों का वहन इसकी सहायता से ही होता है।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय 1
(2) कोशिकाकाय (Cell Body)-यह केन्द्र के चारों ओर बना होता है। इसका कार्य केन्द्रक की सुरक्षा करना होता है।
(3) दुमिका (Dendrite)-दूमिका, तंत्रिका कोशिका के सिरे पर बनी होती है, इसका कार्य तंत्रिका से जुड़ने का होता है।
(4) तंत्रिकाक्ष (Axon)-इसका कार्य पिछली तंत्रिका के अन्तिम सिरे से प्राप्त संदेश को उसके केन्द्रक तक पहुँचाना होता है।
तंत्रिका कोशिकाएँ तीन प्रकार की होती है
(i) संवेदी तंत्रिकोशिका-संवेदनाओं को शरीर के विभिन्न भागों से मस्तिष्क की ओर ले जाती है।
(ii) प्रेरक तंत्रिकोशिका-यह मस्तिष्क से आदेशों को पेशियों तक ले जाती हैं।
(iii) बहुध्रुवी तंत्रिकोशिका-यह संवेदनाओं को मस्तिष्क की ओर तथा मस्तिष्क से पेशियों की ओर ले जाती है।

तंत्रिका कोशिका के कार्य-

  • तंत्रिका कोशिका आपस में मिलकर श्रृंखलाएँ बनाती हैं। ये उद्दीपन और प्रेरणाओं को विद्युत् आवेश के रूप में द्रुत गति से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाती हैं जिससे क्रियाएँ तुरन्त सम्पन्न हो जाती हैं। .
  • तंत्रिका कोशिका का अन्य कार्य अवचेतन मस्तिष्क से जुड़े रहना भी है गौरतलब है कि अवचेतन मस्तिष्क मनुष्य के जीवन से जुड़ी सभी यादों को सुरक्षित एवं संग्रहित करके रखता है। इस कारण तंत्रिका कोशिका का कार्य अनेकों क्षणों की प्रतिमा पहुँचाना भी है।

प्रश्न 6.
पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है?
उत्तर-
पादप प्ररोह का प्रकाश की ओर मुड़ना प्रकाशानुवर्तन कहलाता है। प्ररोह में एक पादप हॉर्मोन ऑक्सिन का स्रावण होता है। जब प्ररोह को एक दिशीय प्रकाश मिलता है तो ऑक्सिन प्रकाश की विपरीत दिशा की ओर विसरित हो जाता है। ऑक्सिन के कारण प्रकाश के विपरीत दिशा वाली प्ररोह कोशिकाएँ तीव्र विभाजन करती हैं जिससे पादप प्ररोह प्रकाश की ओर मुड़ जाता है।
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प्रश्न 7.
मेरुरज्जु आघात में किन संकेतों को आने में व्यवधान होगा?
उत्तर-
मेरुरज्जु आघात में प्रतिवर्ती क्रियाएँ तथा अनैच्छिक ‘क्रियाओं के लिए आने वाले संकेतों में व्यवधान होगा।

प्रश्न 8.
पादप में रासायनिक समन्वय किस प्रकार होता है ?
उत्तर-
पादप में रासायनिक समन्वय हॉर्मोन्स द्वारा होता है। पादपों में उद्दीपित कोशिकाएँ विभिन्न हॉर्मोन्स का स्रावण करती हैं। विभिन्न हॉर्मोन्स पौधों की वृद्धि, विकास एवं पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया के समन्वयन में सहायता करते हैं। हॉर्मोन्स का संश्लेषण प्रायः क्रिया क्षेत्र से दूर होता है और इनका स्थानान्तरण विसरण द्वारा होता है।

उदाहरण के लिए, वृद्धि हॉर्मोन पादप प्ररोह के शीर्ष भाग में संश्लेषित होकर विभिन्न भागों में पहुँचता है जो कि कोशिका प्रवर्धन, शीर्ष प्रभावन, जड़ों की वृद्धि में कमी उत्पन्न करता है। इसी प्रकार साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन को उत्प्रेरित करता है। एब्सीसिक अम्ल पतझड़ के मौसम में पर्णविलगन को बढ़ाता है। एथिलीन हॉर्मोन फलों के पकने में सहायता प्रदान करते हैं।

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प्रश्न 9.
एक जीव में नियन्त्रण एवं समन्वयन के तंत्र की क्या आवश्यकता है ?
उत्तर-
किसी भी जीव को अपने पर्यावरण में स्वयं के अस्तित्व के लिए नियन्त्रण एवं समन्वय की आवश्यकता होती है। सभी पादपों एवं प्राणियों में नियन्त्रण एवं समन्वय की क्षमता पायी जाती है। जीव में नियन्त्रण एवं समन्वय तंत्र की आवश्यकता निम्न दो प्रमुख प्रकार्यों के लिए होती है
1. इससे शरीर के विभिन्न अंग एवं अंगतंत्र एक सुनिश्चित तथा व्यवस्थित तरीके से कार्य करते हैं। उदाहरण के लिए, जब हम भोजन करते हैं तो इस समय हमारे हाथ भोजन लेकर मुँह की ओर आते हैं, घ्राण अंग भोजन की गन्ध लेते हैं, चक्षु भोजन को देखते हैं, दाँत भोजन को चबाते हैं, उसी समय लार स्रावित होती है इत्यादि। ये सभी अंग एवं अंगतंत्र एक नियन्त्रित तरीके से कार्य करते हैं।

2. बहुत सी क्रियाएँ आदतन हो जाती हैं, जैसे-गर्म वस्तु को छूने पर हाथ का दूर छिटकना, काँटा चुभने पर अंग को वापस खींचना आदि। ये क्रियाएँ हमारे मस्तिष्क में विचार आने से पहले ही घट जाती हैं। पौधों में भी ऐसी अनेक क्रियाएँ होती हैं, जैसे प्रतानों का आधार के सहारे लिपटना आदि।

प्रश्न 10.
अनैच्छिक क्रियाएँ तथा प्रतिवर्ती क्रियाएँ एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर-
अनैच्छिक एवं प्रतिवर्ती क्रियाओं में भिन्नता-

प्रतिवर्ती क्रियाएँ (Reflex Action)अनैच्छिक क्रियाएँ (Involuntary Action)
हमारे शरीर में अनेक क्रियाएँ ऐसी होती हैं जो शीघ्र घटित होती हैं और उनका नियन्त्रण मस्तिष्क द्वारा न होकर मेरुरज्जु द्वारा हो जाता है। ऐसी क्रियाओं को प्रतिवर्ती क्रियाएँ कहते हैं। उदाहरण के लिए, किसी गर्म वस्तु से हाथ छू जाने पर हाथ का पीछे खींचा जाना।हमारे शरीर में अनेक ऐसी क्रियाएँ भी होती हैं जिनका नियन्त्रण मस्तिष्क द्वारा होता है। ऐसी क्रियाएँ अनैच्छिक क्रियाएँ कहलाती हैं। जैसे, भोजन को देखकर मुँह में लार आना, उल्टी होना आदि। इन क्रियाओं का नियन्त्रण केन्द्र पश्च- मस्तिष्क का मेडुला भाग होता है।

प्रश्न 11.
जन्तुओं में नियन्त्रण एवं समन्वयन के लिए तंत्रिका तथा हॉर्मोन क्रियाविधि की तुलना तथा व्यतिरेक (Contrast) कीजिए।
उत्तर-
जन्तुओं में नियन्त्रण एवं समन्वयन दो तंत्रों के द्वारा होता है-
(i) तंत्रिका तंत्र (Nervous System),
(ii) हॉर्मोनी तंत्र या अन्तःस्रावी तंत्र (Endocrine System)।

तन्त्रिकीय नियन्त्रणहॉर्मोनिक क्रियाविधि
1. यह तंत्रिकाओं द्वारा होता है तथा तंत्रिकाएँ शरीर में जाल बनाती हैं।यह हॉर्मोन्स द्वारा होता है। हॉर्मोन्स का स्रावण अन्तः ग्रन्थियों द्वारा होता है।
2. यह एक तीव्रगामी क्रिया है। तंत्रिकाओं द्वारा तुरन्त आवश्यक क्रियाओं का नियन्त्रण होता है।यह एक मन्द गति से होने वाली क्रिया है।
3. इससे तंत्रिका कोशिकाएँ संवेदांगों से उद्दीपन प्राप्त करके इन्हें मस्तिष्क या मेरुरज्जु तक पहुँचाती हैं। ये उद्दीपन, प्रेरणाओं के रूप में मस्तिष्क द्वारा कार्यकारी अंगों तक विद्युत् आवेश के रूप में प्रेषित किये जाते हैं।हॉर्मोन्स अन्तःस्रावी ग्रन्थियों से स्रावित होकर लक्ष्य कोशिकाओं में पहुँचकर उनकी उपापचयी क्रियाओं को प्रभावित करते हैं।
4. इसके कार्यकर अंग प्रायः पेशियाँ या ग्रंथिंया होती है। यह अंग प्रतिक्रिया को प्रदर्शित करते हैं।हॉर्मोन प्रायः पाचन, वृद्धि जनन, स्त्रावण, उपापचय आदि क्रियाओं का नियन्त्रण और नियमन करते हैं।

प्रश्न 12.
छुई-मुई पादप में गति तथा हमारी टाँगों में होने वाली गति के तरीके में क्या अन्तर है ?
उत्तर-
छुई-मुई पादप में गति-छुई-मुई पादप में गति स्पर्श उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया के फलस्वरूप होती है। ऐसी गति को स्पर्शानुकुंचन (Thigmonasty) कहते हैं। जब पत्ती को छूते हैं तब उद्दीपन पत्ती में आधार तक संचरित हो जाता है और पत्तियाँ नीचे की ओर झुक जाती हैं। यह आधार कोशिकाओं में परासरणीय दाब में कमी होने के कारण होता है।

हमारे पैरों (टाँगों) की गति-हमारे पैरों की हड्डियों से कंकाल पेशियाँ जुड़ी होती हैं और पेशियों का सम्बन्ध तंत्रिकाओं से होता है। इन तंत्रिकाओं का संचालन मस्तिष्क द्वारा न होकर मेरुरज्जु द्वारा क्रियाएँ कहलाती हैं। जैसे, हो जाता है। ऐसी क्रियाओं भोजन को देखकर मुँह में लार को प्रतिवर्ती क्रियाएँ कहते आना, उल्टी होना आदि। इन हैं। उदाहरण के लिए, क्रियाओं का नियन्त्रण केन्द्र किसी गर्म वस्तु से हाथ छु पश्च- मस्तिष्क का मेडुला जाने पर हाथ का पीछे खींचा भाग होता है। जाना।

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HBSE 10th Class Science नियंत्रण एवं समन्वय InText Questions and Answers

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 132)

प्रश्न 1.
प्रतिवर्ती क्रिया तथा टहलने के बीच क्या अन्तर है ?
उत्तर-
प्रतिवर्ती क्रिया तथा टहलने के बीच अन्तर-

प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action)टहलना (Walking)
1. वे क्रियाएँ जिन्हें हम अपनी इच्छानुसार नहीं कर सकते प्रतिवर्ती क्रियाएँ कहलाती हैं।वे क्रियाएँ जिन्हें हम अपनी इच्छानुसार कर सकते हैं ऐच्छिक क्रियाएँ कहलाती हैं अतः टहलना एक ऐच्छिक क्रिया है।
2. यह क्रिया मेरुरज्जु द्वारा नियन्त्रित होती हैं।यह मस्तिष्क द्वारा नियन्त्रित होता है।

प्रश्न 2.
दो तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन) के मध्य अंतर्गंथन (सिनेप्स) में क्या होता है ?
उत्तर-
तंत्रिका तंत्र में तंत्रिका कोशिकाएँ आपस में जुड़कर शृंखलाएँ बनाकर सूचनाओं का प्रेषण करती हैं। दो र तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन) के मध्य अंतर्ग्रथन (सिनेप्स) पर न्यूरॉन के तंत्रिकाक्ष (axon) का घुण्डीनुमा अन्तिम छोर । दूसरी न्यूरॉन के डेन्ड्राइट के साथ सन्धि बनाता है।
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“निकटवर्ती तंत्रिका कोशिकाओं की जोड़ी के बीच अति सूक्ष्म रिक्त स्थान जिसके पार तंत्रिका आवेगों को जब एक तंत्रिका कोशिका से अगली तंत्रिका कोशिका को जाने पर, आगे बढ़ाया जाता है, अंतर्ग्रथन कहलाता है।” अंतर्ग्रथन वास्तव में एकलमार्ग वाल्वों की तरह कार्य करते हैं। कारण यह है कि सन्धि स्थल पर रासायनिक पदार्थ केवल एक तरफ उपस्थित होता है। इसके कारण न्यूरॉन के एक विशिष्ट सेट के द्वारा तंत्रिका आवेग केवल एक तरफ से ही पार जा सकते हैं।

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प्रश्न 3.
मस्तिष्क का कौन-सा भाग शरीर की स्थिति तथा सन्तुलन का अनुरक्षण करता है ?
उत्तर-
पश्च मस्तिष्क (Hind brain) का अनुमस्तिष्क (Cerebellum) भाग हमारे शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है।

प्रश्न 4.
हम एक अगरबत्ती की गन्ध का पता कैसे लगाते हैं?
उत्तर-
हम अगरबत्ती की गंध का पता नासिका में स्थित घ्राण संवेदांगों (Olfactory receptors) द्वारा लगाते हैं। गंध ज्ञान का केन्द्र हमारे मस्तिष्क के प्रमस्तिष्क भाग में स्थित होता है।

प्रश्न 5.
प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की क्या भूमिका
उत्तर-
सामान्यतः दैहिक प्रतिवर्ती क्रियाएँ मेरुरज्जु द्वारा नियन्त्रित की जाती हैं तथापि मध्य मस्तिष्क सिर, गर्दन एवं धड़ की प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियन्त्रण करता है। यह नेत्र पेशियों (eye muscles); आइरिस पेशियों के संकुचन व शिथिलन, नेत्र लेंस की फोकस दूरियों में परिवर्तन आदि क्रियाओं को भी नियन्त्रित करता है। पश्च मस्तिष्क का मस्तिष्क पुच्छ (Medulla oblongata) हृदय स्पंदन, श्वास दर, खाँसना, छींकना, लार स्रवण, रुधिर दाब, वमन, पसीना आना आदि क्रियाओं का नियमन करता है।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 136)

प्रश्न 1.
पादप हॉर्मोन्स क्या हैं ?
उत्तर-
पौधों में उत्पन्न विशेष प्रकार के कार्बनिक पदार्थ जो पौधों की वृद्धि, विकास एवं अनुक्रियाओं का नियमन करते हैं, पादप हॉर्मोन्स (Phyto hormones) कहलाते हैं। इन्हें वृद्धि नियामक (Growth regulators) भी कहते हैं। पौधों में पाँच प्रकार के पादप हॉर्मोन्स पाए जाते हैं- ऑक्सिन्स, जिब्रेलिन्स, साइटोकाइनिन्स, एब्सीसिक अम्ल तथा इथाइलीन ।

प्रश्न 2.
छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति, प्रकाश की ओर प्ररोह की गति से किस प्रकार भिन्न है ?
उत्तर-
छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति एक अनुकुंचन (Nastic) गति है। इसे स्पर्शानुकुंचन (Thigmonasty) कहते हैं और यह उद्दीपन की दिशा से प्रभावित नहीं होती है।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय 6
इसके विपरीत प्रकाश की ओर प्ररोह की गति अनुवर्तन (Tropic) गति है। इसे प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) कहते हैं और इस पर उद्दीपन की दिशा का प्रभाव होता है।

प्रश्न 3.
एक पादप हॉर्मोन का उदाहरण दीजिए जो वृद्धि को बढ़ाता है।
उत्तर-
ऑक्सिन (Auxin)।

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प्रश्न 4.
किसी सहारे के चारों ओर एक प्रतान की वृद्धि में ऑक्सिन किस प्रकार सहायक है ?
उत्तर-
प्रतान (Tendril) स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism) गति प्रदर्शित करता है अर्थात् यह स्पर्श के प्रति संवेदनशील होता है। प्रतान जैसे ही किसी आधार के सम्पर्क में आता है इसमें स्थित ऑक्सिन स्पर्श के दूसरी ओर विसरित हो जाता है जिससे दूसरी ओर की कोशिकाएँ अधिक विवर्धन करने लगती हैं और प्रतान विपरीत दिशा में मुड़ता है। इस प्रकार वह सहारे के चारों ओर लिपट जाता है।

प्रश्न 5.
जलानुवर्तन दर्शाने के लिए एक प्रयोग की अभिकल्पना कीजिए।
उत्तर-
जलानुवर्तन का प्रदर्शन (Demonstration of Hydrotropism)- नमी के कारण होने वाली पादप गति को जलानुवर्तन कहते हैं। इस प्रकार की गति उच्च श्रेणी के पौधों की जड़ों, ब्रायोफाइट्स के मूलाभास, कवकों के हाइफा आदि में देखने को मिलती है। प्रयोग के लिए एक हम काँच की दो द्रोणिकाएँ A और B लेते हैं और प्रत्येक में 3-4 सेमी मोटी मृदा की सतह बिछाते हैं। दोनों द्रोणिकाओं में समान किस्म का एक-एक बीज बोते हैं और बीज उगने तक बराबर पानी छिड़कते हैं। अब द्रोणी A में एक समान जल देते हैं जबकि द्रोणी B में जल से भरा सछिद्र बर्तन चित्रानुसार रखते हैं।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 7 नियंत्रण एवं समन्वय 7
हम देखते हैं कि द्रोणी A के पौधे की जड़ सीधी रहती है, जबकि द्रोणी B के पौधे की जड़ पानी से भरे बर्तन की ओर मुड़ जाती है। इससे स्पष्ट है कि जड़ें जलानुवर्तन गति प्रदर्शित करती हैं।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 139)

प्रश्न 1.
जन्तुओं में रासायनिक समन्वय कैसे होता है?
उत्तर-
जन्तुओं में रासायनिक समन्वय (Chemical Coordination) अन्तःस्रावी ग्रन्थियों द्वारा स्रावित हॉर्मोन्स द्वारा होता है। ये हार्मोन्स विशिष्ट ग्रन्थियों से स्रावित होकर रासायनिक संदेशवाहकों के रूप में लक्ष्य कोशिकाओं में पहुँचकर उनके कार्यों पर नियन्त्रण एवं समन्वयन करते हैं। हॉर्मोन्स द्वारा क्रियाओं का मंद गति से नियमन होता है।

प्रश्न 2.
आयोडीन युक्त नमक खाने की सलाह क्यों दी जाती है?
उत्तर-
अवटुग्रन्थि अथवा थायरॉइड ग्रन्थि द्वारा थायरॉक्सिन के निर्माण के लिए आयोडीन आवश्यक है। थायरॉक्सिन हमारे शरीर में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के उपापचय का नियन्त्रण करता है जिससे वृद्धि के लिए उत्कृष्ट सन्तुलन उपलब्ध कराया जा सके। यदि भोजन में आयोडीन की कमी हो जाती है तो थायरॉक्सिन के निर्माण में कमी आ जाती है। इसके कारण थायरॉइड ग्रन्थि फूल जाती है जिसे घेघा (goiter) रोग कहते हैं। इस बीमारी का एक लक्षण फूली हुई गर्दन है।

प्रश्न 3.
जब एड्रीनलीन रुधिर में स्रावित होती है तो हमारे शरीर में क्या अनुक्रिया होती है?
उत्तर-
एड्रीनलीन (adrenaline) को “आपातकालीन हॉर्मोन’ भी कहते हैं क्योंकि भय, क्रोध अथवा संकट की अवस्था में यह हॉर्मोन ऐसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए शरीर को तुरन्त तैयार करता है। ऐसी स्थिति में एड्रीनल ग्रन्थि में काफी मात्रा में एड्रीनलीन का स्रावण होता है।

इससे हृदय की धड़कन बढ़ जाती है ताकि शरीर की पेशियों को अधिक ऑक्सीजन उपलब्ध हो सके। पाचन तंत्र एवं त्वचा में रुधिर आपूर्ति कम हो जाती है। रुधिर की दिशा कंकाल पेशियों की ओर हो जाती है। पसलियों तथा डायफ्राम की पेशियों में तीव्र गति होने लगती है जिससे श्वास दर बढ़ जाती है। ये सभी क्रियाएँ मिलकर जन्तु शरीर को संकट की स्थिति से निपटने के लिए तैयार करती हैं।

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प्रश्न 4.
मधुमेह के कुछ रोगियों की चिकित्सा इन्सुलिन का इंजेक्शन देकर क्यों की जाती है?
उत्तर-
इन्सुलिन हॉर्मोन अग्न्याशय में स्थित लैंगरहँस की B कोशिकाओं से स्रावित होता है। यह रुधिर में शर्करा की मात्रा का नियमन करता है। यदि इन्सुलिन का स्रावण उचित मात्रा में नहीं होता है तो रुधिर में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है इससे शरीर पर हानिकारक प्रभाव होने लगते हैं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए मधुमेह रोगी को इन्सुलिन के इंजेक्शन दिए जाते हैं।

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क्रियाकलाप 7.1 (पा. पु. पृ. सं. 128)

प्रश्न 1.
कुछ चीनी अपने मुँह में रखिए। इसका स्वाद कैसा है?
उत्तर-
चीनी मीठी (sweet) लगती है।

प्रश्न 2.
अपनी नाक को अंगूठा तथा तर्जनी अंगुली से दबाकर बन्द कर लीजिए। अब फिर से चीनी खाइये। इसके स्वाद में क्या कोई अन्तर है?
उत्तर-
द्वितीय क्रिया में स्वाद में कोई अन्तर नहीं होता है।

प्रश्न 3.
खाना खाते समय उसी तरह से अपनी नाक बन्द कर लीजिए तथा ध्यान दीजिए कि जिस भोजन को आप खा रहे हैं, क्या उस खाने का आप पूरा स्वाद ले रहे हैं?
उत्तर-
तीसरी क्रिया में खाने की गन्ध न मिलने से खाने का पूरा स्वाद नहीं आता है।

क्रियाकलाप 7.2 (पा. पु. पृ. सं. 134)

प्रश्न-
(i) क्या प्ररोह और जड़ के पुराने भागों ने दिशा बदल दी है ? क्या ये अन्तर नयी वृद्धि की दिशा में है?
(ii) इस क्रियाकलाप से हम क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर-
(i) हाँ, प्ररोह प्रकाश की ओर तथा जड़ प्रकाश से विपरीत दिशा में वृद्धि करेगी।
(ii) प्ररोह प्रकाशानुवर्तनी गति तथा जड़ें गुरुत्वानुवर्तनी गति प्रदर्शित करती हैं।

क्रियाकलाप 7.3 (पा. पु. पृ. सं. 137)

प्रश्न-
अन्य ग्रंथियों के कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त करके निम्न तालिका में प्रदर्शित करें।
उत्तर
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HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम Textbook Exercise Questions, and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम

HBSE 10th Class Science जैव प्रक्रम Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
मनुष्य में वृक्क एक तन्त्र का भाग है जो सम्बन्धित है –
(a) पोषण से
(b) श्वसन से
(c) उत्सर्जन से
(d) परिवहन से।
उत्तर-
(c) उत्सर्जन से।

प्रश्न 2.
पादप में जाइलम उत्तरदायी है –
(a) जल का वहन
(b) भोजन का वहन
(c) अमीनो अम्ल का वहन
(d) ऑक्सीजन का वहन।
उत्तर-
(a) जल का वहन।

प्रश्न 3.
स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक है –
(a) कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल
(b) क्लोरोफिल
(c) सूर्य का प्रकाश
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर-
(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 4.
पायरूवेट के विखण्डन से यह कार्बन डाइऑक्साइड, जल तथा ऊर्जा देता है और यह क्रिया होती है
(a) कोशिका द्रव्य
(b) माइटोकॉण्ड्रिया
(c) हरित लवक
(d) केन्द्रक।
उत्तर-
(d) केन्द्रक।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम

प्रश्न 5.
हमारे शरीर में वसा का पाचन कैसे होता है ? यह प्रक्रम कहाँ होता है?
उत्तर-
हमारे शरीर में वसा (Fat) का पाचन आहार नाल (alimentary canal) में लाइपेज (lipase) नामक विकर द्वारा होता है। पित्त रस (bile juice) में उपस्थित पित्त लवण (bile salts) वसा का इमल्सीकरण करते हैं। जठर रस, अग्न्याशयी रस तथा आंत्रीय रस में लाइपेज एन्जाइम उपस्थित होता है। यह इमल्सीकृत वसा को वसीय अम्ल तथा ग्लिसरॉल में बदलता है। इस प्रकार वसा का पाचन होता है।

प्रश्न 6.
भोजन के पाचन में लार की क्या भूमिका है?
उत्तर-
भोजन के पाचन में लार की भूमिका निम्न प्रकार है-

  • यह भोजन को गीला एवं चिकना करती है जिससे भोजन को चबाने तथा निगलने में आसानी होती है।
  • लार में उपस्थित टायलिन (Ptylin) विकर भोजन की मंड को माल्टोज शर्करा में बदलता है।
  • लार में उपस्थित लाइसोजाइम (Lysozyme) जीवाणु एवं अन्य सूक्ष्म जीवों को नष्ट करता है।
  • लार दाँतों के बीच फंसे अन्न के कणों को निकालने में सहायता करती है।

प्रश्न 7.
स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ कौन-सी हैं और उनके उपोत्पाद क्या हैं ?
उत्तर-
स्वपोषी पोषण (Autotrophic nutrition) के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ अथवा कारक निम्नलिखित

  • सूर्य का प्रकाश,
  • पादपों में उपस्थित पर्णहरित,
  • जल तथा
  • कार्बन डाइऑक्साइड।

सभी हरे पौधों में पर्णहरित (chlorophyll) उपस्थित होता है। इसकी सहायता से ये पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल द्वारा भोजन (कार्बोहाइड्रेट) का निर्माण करते हैं।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 1
ग्लूकोज प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया का मुख्य उत्पाद ग्लूकोज है तथा. इसके उपोत्पाद जल तथा ऑक्सीजन हैं।

प्रश्न 8.
वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में क्या अन्तर है? कुछ जीवों के नाम लिखिए जिनमें अवायवीय श्वसन होता है। (नमूना प्रश्न-पत्र 2012)
उत्तर-
वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में अन्तर-

वायवीय श्वसन (Aerobic Respiration)अवायवीय श्वसन  (Anaerobic Respiration)
1. इसे ऑक्सीश्वसन भी कहते हैं।1. इसे अनॉक्सीश्वसन भी कहते हैं।
2. यह ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है।2. ऑक्सीजन की उपस्थिति अनिवार्य नहीं है।
3. इसके द्वारा भोज्य पदार्थों का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है।3. इसके द्वारा भोज्य पदार्थों का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है।
4. इसके अन्तिम उत्पाद कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल होते हैं।4. इसके अन्तिम उत्पाद कार्बन डाइऑक्साइड तथा कार्बनिक अम्ल होते हैं।
5. इसमें अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है।5. इसमें अपेक्षाकृत कम ऊर्जा उत्पन्न होती है।

यीस्ट में अवायवीय श्वसन होता है। इसके द्वारा ग्लूकोज के अपघटन से इथाइल ऐल्कोहॉल तथा CO2, उत्पन्न होते

प्रश्न 9.
गैसों के अधिकतम विनिमय के लिए कूपिकाएँ किस प्रकार अभिकल्पित हैं ?
उत्तर –
श्वसन नली (Trachea) वक्ष गुहा में प्रवेश करके दाईं तथा बाईं दो शाखाओं में विभाजित हो जाती है। अब इन्हें श्वसनियाँ कहते हैं। फेफड़ों में प्रवेश करके प्रत्येक श्वसनी पुनः बार-बार विभाजित होकर अनेक श्वसनिकाओं (Bronchioles) में बँट जाती हैं। श्वसनियाँ पुनः कूपिका नलिकाओं में बँट जाती हैं। प्रत्येक कूपिका नलिका दो-तीन छोटी-छोटी थैलीनुमा रचनाओं में खुलती है जिन्हें कूपिकाएँ (Alveoli) कहते हैं।

हमारे प्रत्येक फेफड़े में लगभग 15 करोड़ कूपिकाएँ होती हैं। इस प्रकार दोनों फेफड़ों की सतह के धरातल का क्षेत्रफल जिसके द्वारा गैस-विनिमय होता है, लगभग 80 वर्ग मीटर होता है। कूपिकाओं की इतनी अधिक संख्या के कारण सतह का धरातल भी अत्यधिक बड़ा होता है जिससे गैस-विनिमय अधिक दक्षतापूर्वक होता है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम

प्रश्न 10.
हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के क्या परिणाम हो सकते हैं ?
उत्तर-
हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन का प्रमुख कार्य फेफड़ों से ऑक्सीजन ग्रहण करके शरीर के विभिन्न ऊतकों तक पहुँचाना है अतः इसे श्वसन वर्णक भी कहते हैं। हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन (haemoglobin) की कमी के कारण फेफड़ों से शरीर की कोशिकाओं के लिए ऑक्सीजन की उपलब्धता में कमी हो जाएगी, फलस्वरूप भोज्य पदार्थों के ऑक्सीकरण में बाधा उत्पन्न होगी। ऐसा होने से शरीर की विभिन्न क्रियाओं के संचालन के लिए आवश्यक ऊर्जा में कमी हो जाएगी। इसके कारण स्वास्थ्य खराब हो सकता है तथा शरीर में थकान रहने लगती है। हीमोग्लोबिन की कमी से होने वाले रोग को रक्ताल्पता (anaemia) कहते हैं। इसकी अत्यधिक कमी से रोगी की मृत्यु भी हो सकती है।

प्रश्न 11.
मनुष्य में दोहरे परिसंचरण की व्याख्या कीजिए। यह क्यों आवश्यक है?
उत्तर-
मनुष्य के हृदय में चार कक्ष पाए जाते हैं-दो अलिंद तथा दो निलय। ऐसी व्यवस्था होने से मनुष्य में शुद्ध (ऑक्सीकृत) तथा अशुद्ध (अनॉक्सीकृत) रुधिर पृथक रहता है। मनुष्य के रुधिर परिसंचरण में रुधिर को हृदय से होकर दो बार गुजरना पड़ता है। पहले चक्र में अशुद्ध रुधिर को हृदय फेफड़ों में ऑक्सीकृत होने के लिए पम्प करता है। फेफड़ों से ऑक्सीकृत रुधिर वापस बाएँ निलय में आता है जहाँ से दूसरे चक्र में इसे विभिन्न अंगों को पम्प किया जाता है। शरीर के अंगों से अशुद्ध रुधिर पुनः हृदय के दाएँ अलिन्द में आता है। अतः रुधिर का परिसंचरण दो बार होता दोहरा परिसंचरण होने के कारण शरीर के विभिन्न ऊतकों को अधिक-से-अधिक ऑक्सीजन उपलब्ध हो पाती है। मनुष्य को नियततापी होने के कारण ताप नियन्त्रण के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है जो श्वसन से प्राप्त होती है।

प्रश्न 12.
जाइलम तथा फ्लोएम में पदार्थों के वहन में क्या अन्तर है?
उत्तर-
जाइलम तथा फ्लोएम में पदार्थों के वहन में अन्तर –

जाइलम में वहनफ्लोएम में वहन
1. जाइलम में जल एवं इसमें घुलित खनिज लवणों का वहन होता है।1. इसमें पत्तियों में संश्लेषित खाद्य पदार्थों का वहन होता है।
2. जाइलम में वहन केवल ऊपर की ओर होता है।2. फ्लोएम में वहन ऊपर तथा नीचे की ओर दोनों दिशाओं में होता है।
3. जाइलम में वहन भौतिक बलों द्वारा सम्पन्न होता है।3. फ्लोएम में वहन ऊर्जा का उपयोग करके होता है।

प्रश्न 13.
फुफ्फुस में कूपिकाओं की तथा वृक्क में वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रिया-विधि की तुलना कीजिए।
उत्तर-
फुफ्फुस में कूपिकाओं तथा वृक्क  में वृक्काणु की तुलना

फुफ्फुस में कूपिकाएँवृक्क में वृक्काणु
1. वायु कूपिकाएँ फेफड़ों की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाइयाँ हैं।1. वृक्काणु वृक्क की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाइयाँ हैं।
2. इनकी संख्या अत्यधिक (लगभग 15 करोड़ प्रति फेफड़ा) होती है।2. इनकी संख्या भी अत्यधिक (लगभग 10 लाख  प्रति वृक्क) होती है।
3. इनमें पतली केशिकाओं का जाल होता है।3. इनमें भी पतली केशि काओं का जाल होता है।
4. वायु कूपिकाएँ गैसों के आदान-प्रदान के लिए अत्यधिक सतह धरातल उपलब्ध कराती हैं।4. वृक्काणु रुधिर से उत्सर्जी पदार्थों को पृथक् करने के लिए अत्यधिक सतह धरातल उपलब्ध करात हैं।
5. कूपिकाओं में CO2, रुधिर से अलग तथा O2, रुधिर होते हैं।5. वृक्काणु में रुधिर से वर्ण्य नाइट्रोजनी पदार्थ पृथक् में मिलती है।

HBSE 10th Class Science तत्वों का आवर्त वर्गीकरण  InText Questions and Answers

(पाठ्य-पुस्तक पृ.सं. 105)

प्रश्न 1.
हमारे जैसे बहुकोशिकीय जीवों में ऑक्सीजन की आवश्यकता पूरी करने में विसरण क्यों अपर्याप्त है ?
उत्तर-
हमारे जैसे बहुकोशिकीय जीवों में विसरण द्वारा ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो सकती क्योंकि विसरण द्वारा ऑक्सीजन उन्हीं कोशिकाओं में पहुँच सकती है जो वायु के सम्पर्क में होती हैं। हमारे आंतरिक अंगों की कोशिकाएँ एवं ऊतक वायु से दूर गहराई में स्थित होते हैं। अतः इन्हें विसरण द्वारा ऑक्सीजन नहीं मिल सकती।

प्रश्न 2.
कोई वस्तु सजीव है, इसका निर्धारण करने के लिए हम किस मापदण्ड का उपयोग करेंगे? .
उत्तर-
किसी वस्तु को सजीव की संज्ञा तभी दी जा सकती है जब उसमें निम्नलिखित लक्षण उपस्थित होते हैं-

  • सजीवों का एक निश्चित आकार एवं आकृति होती
  • सजीवों का शरीर कोशिका/कोशिकाओं/ऊतकों का बना होता है।
  • सजीवों में पोषण होता है।
  • सजीवों में विभिन्न उपापचयी क्रियाएँ; जैसे-पाचन, श्वसन, स्वांगीकरण आदि पायी जाती हैं।
  • सजीव जनन करके अपनी संतति को बढ़ाते हैं।
  • सजीवों में वृद्धि होती है।
  • सजीव गति करते हैं तथा संवेदनशीलता प्रदर्शित करते हैं।
  • सजीवों की मृत्यु होती है।

यद्यपि सजीव रूप-रंग, आकार आदि में समान भी होते हैं और भिन्न भी। जन्तु दौड़ते-भागते हैं, साँस लेते हैं, बोलते हैं, उत्सर्जन करते हैं। परन्तु पौधों में चलने, साँस लेने, बोलने या उत्सर्जन की क्षमता नहीं होती फिर भी पौधे सजीव हैं, क्योंकि इनमें अन्य सभी क्रियाएँ सामान्य रूप से होती हैं।

प्रश्न 3.
किसी जीव द्वारा किन कच्ची सामग्रियों का उपयोग किया जाता है ?
उत्तर-
किसी जीव द्वारा कच्ची सामग्रियों का उपयोग कार्बन आधारित अणुओं के रूप में किया जाता है।

प्रश्न 4.
जीवन के अनुरक्षण के लिए आप किन प्रक्रमों को आवश्यक मानेंगे?
उत्तर-
जीवन के अनुरक्षण के लिए, हम पोषण (Nutrition), श्वसन (Respiration), परिवहन (Transportation), वृद्धि (Growth), उत्सर्जन (Excretion) आदि को आवश्यक प्रक्रम मानेंगे।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 111)

प्रश्न 1.
स्वयंपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में क्या अन्तर है ?
उत्तर-
स्वयंपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में अन्तर –

स्वयंपोषी पोषण  (Autotrophic Nutrition)विषमपोषी पोषण (Heterotrophic Nutrition)
1. वे जीवधारी जो सरल अकार्बनिक पदार्थों से कार्बनिक भोज्य पदार्थों का निर्माण स्वयं कर लेते हैं, स्वयंपोषी कहलाते हैं और पोषण की यह विधि स्वयंपोणी पोषण कहलाती है।वे जीवधारी जो सरल अकार्बनिक पदार्थों से भोजन निर्मित नहीं कर पाते और दूसरे जीवों से प्राप्त करते हैं, विषमपोषी कहलाते हैं और यह पोषण विधि विषमपोषी पोषण कहलाती है।
2. सभी हरे पौधे स्वयंपोषी पोषण विधि अपनाते हैं और ये सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में पर्णहरित द्वारा जल व CO2, से ग्लूकोज का निर्माण करते हैं | उदाहरण-सभी हरे पौधे, नीले-हरे शैवाल तथा कुछ प्रकाश-संश्लेषी जीवाण।।सभी जन्तु विषमपोषी पोषण विधि प्रदर्शित करते हैं, तथा ये शाकाहारी, माँसाहारी, परजीवी या मृतोपजीवी हो सकते हैं। उदाहरण-सभी जन्तु, कवक, अधिकांश जीवाणु, परजीवी पादप।

प्रश्न 2.
प्रकाश-संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री पौधा कहाँ से प्राप्त करता है ?
उत्तर-
प्रकाश-संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री के रूप में पौधे को प्रकाश सूर्य से प्राप्त होता है। जल पौधे की जड़ों द्वारा मृदा से ग्रहण किया जाता है तथा कार्बन डाइऑक्साइड वायुमण्डल से ली जाती है। पौधे के प्रकाशसंश्लेषी भागों में रन्ध्र (Stomata) उपस्थित होते हैं जिनसे होकर CO2, ऊतकों तक पहुँचती है। मृदा से जड़ों द्वारा अवशोषित जल जाइलम द्वारा प्रकाश-संश्लेषी भाग तक पहुँचता है। जलीय पौधे जल में घुली हुई CO2, तथा जल तने की सतह द्वारा अवशोषित करते हैं।

प्रश्न 3.
हमारे आमाशय में अम्ल की क्या भूमिका है?
उत्तर-
हमारे आमाशय में उपस्थित जठर ग्रन्थियों (Gastric glands) द्वारा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) स्रावित होता है। यह आमाशय में अम्लीय माध्यम बनाता है जिससे पेप्सिन नामक विकर प्रभावशाली होकर प्रोटीन पाचन का कार्य करता है। HCl भोजन के साथ आए जीवाणुओं को नष्ट करके भोजन को सड़ने से बचाता है। यह भोजन में उपस्थित Ca को कोमल बनाता है। यह पाइलोरिक वाल्वों के खुलने एवं बन्द होने पर भी नियन्त्रण रखता है। साथ ही यह वसा के इमल्शीकरण में भी सहायक होता है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम

प्रश्न 4.
पाचक एन्जाइमों का क्या कार्य है ?
उत्तर-
एन्जाइम (Enzymes) कार्बनिक जैव-उत्प्रेरक (Biocatalysts) हैं जो विभिन्न जैव-रासायनिक क्रियाओं की दर बढ़ा देते हैं। ये पाचन क्रिया में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन व वसा के पाचन को सुगम बनाते हैं। मुख गुहा में एमिलेस नामक एन्जाइम कार्बोहाइड्रेट का आंशिक पाचन करके इसे माल्टोज में बदलता है। उदर में लाइपेज नामक एन्जाइम वसा को वसीय अम्ल एवं ग्लिसरॉल में बदलता है। आंत्र लाइपेज, सुक्रेज, माल्टेज एवं लैक्टेज क्रमशः वसा, सुक्रोज, माल्टोज एवं दुग्ध शर्करा का पाचन करते हैं। अतः पाचक एन्जाइम हमारी पाचन क्रिया को सुगम बनाते हैं।

प्रश्न 5.
पचे हुए भोजन को अवशोषित करने के लिए क्षुद्रांत्र को कैसे अभिकल्पित किया गया है?
उत्तर-
छोटी आंत अर्थात् क्षुद्रांत्र (small intestine) की भीतरी सतह पर असंख्य उंगली सदश रसांकर (villi) तथा सूक्ष्म रसांकुर (microvilli) पाए जाते । ये क्षुद्रांत्र की अवशोषी सतह को लगभग 600 गुना बढ़ा देते हैं। प्रत्येक रसांकुर में रुधिर कोशिकाओं तथा लसीका कोशिकाओं का जाल फैला रहता है। वसीय अम्लों एवं ग्लिसरॉल का अवशोषण लसीका कोशिकाओं द्वारा तथा अन्य भोज्य पदार्थों का अवशोषण रुधिर कोशिकाओं द्वारा होता है। अतः क्षुद्रांत्र को पचे हुए भोजन के अवशोषण का स्तम्भ माना जाता है।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 116)

प्रश्न 1.
श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करने की दिशा में एक जलीय जीव की अपेक्षा स्थलीय जीव किस प्रकार लाभप्रद है ?
उत्तर-
जलीय जीव श्वसन के लिए जल में घुली हुई ऑक्सीजन का प्रयोग करते हैं। जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा सीमित होती है। स्थलीय जीव वायु से ऑक्सीजन लेते हैं जहाँ ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है। अतः स्थलीय जीव को जलीय जीव की अपेक्षा अधिक ऑक्सीजन मिल जाती है।

प्रश्न 2.
ग्लूकोज के ऑक्सीकरण से भिन्न जीवों में ऊर्जा प्राप्त करने के विभिन्न पथ क्या हैं ?
उत्तर-
विभिन्न जैविक-क्रियाओं के लिए आवश्यक ऊर्जा ग्लूकोज के ऑक्सीकरण से प्राप्त होती है, जोकि ATP के रूप में संचित रहती है। विभिन्न जीवधारियों में ग्लूकोज का ऑक्सीकरण निम्न प्रकार से हो सकता है –
1. वायवीय श्वसन (Aerobic respiration)- यदि ग्लूकोज का ऑक्सीकरण ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है तो इसे वायवीय श्वसन कहते हैं। अधिकांश जीवों में इसी प्रकार से ऊर्जा उत्पादन होता है।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 2
2. अवायवीय श्वसन (Anaerobic respiration)यदि ग्लूकोज का ऑक्सीकरण ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है तो इसे अवायवीय श्वसन कहते हैं। , .
(i) जब अवायवीय श्वसन किसी सूक्ष्म जीव (जैसेयीस्ट) में होता है तो इथाइल ऐल्कोहॉल, CO2, तथा ऊर्जा उत्पन्न होती है।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 3

(ii) जब अवायवीय श्वसन माँसपेशियों में होता है तब लैक्टिक अम्ल एवं ऊर्जा उत्पन्न होती है।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 4

प्रश्न 3.
मनुष्यों में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन कैसे होता है?
उत्तर-
श्वासोच्छ्वास की क्रिया में खींची गयी वायु फेफड़ों की कूपिकाओं (Alveoli) में भर जाती है। फेफड़ों के अन्दर रुधिर केशिकाओं का जाल फैला रहता है। लाल रुधिराणुओं में उपस्थित हीमोग्लोबिन में ऑक्सीजन के प्रति काफी सहिष्णुता होती है। अतः वायु कूपिकाओं से विसरित होकर ऑक्सीजन हीमोग्लोबिन के अणुओं से बँध जाती है। रुधिर इस ऑक्सीजन को ऑक्सीजन की कमी वाले ऊतकों में पहुँचा देता है। CO2, रुधिर में विलेय होकर फेफड़ों तक लायी जाती है। वायु कूपिकाओं में CO2,’ की सान्द्रता कम होने के कारण रुधिर से यह विसरित होट र फेफड़ों में आ जाती है। अब CO2, युक्त वायु निःश्वसन द्वारा शरीर से बाहर निकाल दी जाती है।

प्रश्न 4.
गैसों के विनिमय के लिए मानव फुफ्फुस में अधिकतम क्षेत्रफल को कैसे अभिकल्पित किया गया है?
उत्तर-
श्वास नाल अथवा ट्रैकिया (Trachea) वक्ष गुहा में प्रवेश करके दाईं तथा बाईं दो शाखाओं में बँट जाती है। अब इन्हें श्वसनियाँ (Bronchi) कहते हैं। फेफड़ों में प्रवेश करके प्रत्येक श्वसनी, पुनः बारम्बार विभाजित होकर अनेक श्वसनिकाओं (Bronchioles) में बँट जाती हैं। श्वसनिकाएँ पुनः कूपिका नलिकाओं (Alveolar ducts) में बँट जाती हैं। प्रत्येक कूपिका नलिका दो-तीन छोटी-छोटी थैलीनुमा रचनाओं में खुलती है जिन्हें कूपिकाएँ (alveoli) कहते हैं। हमारे प्रत्येक फेफड़े (Lung) में लगभग 15 करोड़ वायु कूपिकाएँ (Alveoli) होती हैं। इस प्रकार दोनों फेफड़ों का सतह धरातल जिसके द्वारा गैस विनिमय होता है, लगभग 80 वर्ग मीटर होता है। इस प्रकार हमारे फेफड़े गैसों के अधिकतम आदान-प्रदान के लिए उपयोजित होते हैं।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 122)

प्रश्न 1.
मानव में परिवहन तन्त्र के घटक कौन से हैं ? इन घटकों के क्या कार्य हैं ?
उत्तर-
मानव में परिवहन तन्त्र के घटक एवं इनके कार्य निम्नलिखित हैं-

  1. हृदय (Heart)-यह मानव शरीर में एक पम्पिंग स्टेशन का कार्य करता है। यह रुधिर को विभिन्न अंगों में पम्प करता है।
  2. धमनियाँ (Arteries)-ये मोटी भित्ति वाली रुधिर वाहिकाएँ हैं जो हृदय से रुधिर को विभिन्न अंगों में पहुँचाती
  3. शिराएँ (Veins)-ये पतली भित्ति वाली वाहिकाएँ हैं जो विभिन्न अंगों से रुधिर एकत्र कर हृदय में लाती हैं।
  4. केशिकाएँ (Capillaries)-ये अत्यधिक पतली एवं संकीर्ण वाहिकाएँ हैं जो धमनियों को शिराओं से जोड़ती हैं।
  5. रुधिर (Blood)-रुधिर में एक प्रकार के तरल संर्योजी ऊतक होते हैं, जो भोजन, ऑक्सीजन, लवणों, विकरों, हॉर्मोनों एवं अपशिष्ट पदार्थों को शरीर के एक भाग से दूसरे भाग तक पहुँचाते हैं।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम

प्रश्न 2.
स्तनधारी तथा पक्षियों में ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुधिर को अलग करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर-
स्तनधारी तथा पक्षियों में दोहरा रुधिर परिसंचरण (Double blood circulation) पाया जाता है। इसका अर्थ है कि रुधिर अपने एक चक्र में दो बार हृदय से होकर गुजरता है। स्तनधारी एवं पक्षियों का हृदय चार कक्षों में बँटा होता है-दो अलिन्द तथा दो निलय। हृदय का बायाँ भाग दैहिक हृदय (Systemic heart) तथा दायाँ भाग पल्मोनरी हृदय (Pulmonary heart) कहलाता है। बाएँ भाग में शुद्ध रुधिर तथा दाएँ भाग में अशुद्ध रुधिर भरा होता है।

शुद्ध अथवा ऑक्सीजन युक्त रुधिर शरीर के विभिन्न अंगों को पहुँचाया जाता है जबकि अशुद्ध रुधिर फेफड़ों में शुद्ध होने के लिए भेजा जाता है। शुद्ध तथा अशुद्ध रुधिर के पृथक् होने से ऑक्सीजन का ऊतकों में वितरण अधिक प्रभावी तरीके से किया जाता है। स्तनधारी तथा पक्षियों के शरीर का ताप सदैव एक जैसा बनाए रखने एवं अधिक ऊर्जा की उत्पत्ति के लिए अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 3.
उच्च संगठित पादपों में परिवहन तन्त्र के घटक क्या हैं?
उत्तर-
उच्च संगठित पादपों में परिवहन तन्त्र के निम्नलिखित घटक हैं –

  • जाइलम (Xylem)-यह ऊतक जड़ों द्वारा अवशोषित जल एवं खनिज लवणों को पौधे के विभिन्न वायवीय भागों में परिवहन करता है।
  • फ्लोएम (Phloem)-यह ऊतक पत्तियों में प्रकाशसंश्लेषण के फलस्वरूप बने कार्बनिक भोज्य पदार्थों तथा हॉर्मोन्स का पौधे के विभिन्न भागों में परिवहन करता है।

प्रश्न 4.
पादप में जल और खनिज लवण का परिवहन कैसे होता है ?
उत्तर-
पादप में जल एवं इसमें घुलित लवणों का परिवहन जाइलम ऊतक (Xylem tissue) द्वारा किया जाता है। जाइलम वाहिकाएँ तथा वाहिनिकाएँ आपस में सम्बद्ध होकर पादप की जड़ से लेकर पत्तियों तक एक अनवरत जल संचालक मार्ग बनाती हैं। ऐसे अनेक मार्ग पौधे के विभिन्न भागों तक पहँचते हैं। पौधे की पत्तियों में उपस्थित रंध्रों (Stomata) से जल का वाष्पोत्सर्जन होता है जिससे अनवरत जलमार्ग में एक ‘ वाष्पोत्सर्जन अपकर्ष उत्पन्न होता है। साथ ही जल के अणुओं में ससंजक एवं आसंजक क्षमता भी पायी जाती है जिसके फलस्वरूप जड़ों से लेकर पत्तियों तक जल का एक सतत स्तम्भ बना रहता है और जल ऊपर की ओर चढ़ता है!

प्रश्न 5.
पादप में भोजन का स्थानान्तरण कैसे होता है।
उत्तर-
पादप की पत्तियों में प्रकाश-संश्लेषण द्वारा निर्मित भोज्य पदार्थों का पौधे के अन्य भागों में स्थानान्तरण फ्लोएम (Pholem) नामक ऊतक द्वारा होता है। फ्लोएम चालनी नलिका तथा सहचर कोशिकाओं द्वारा निर्मित होता है। ऊर्जा का उपयोग करके फ्लोएम द्वारा भोजन का स्थानान्तरण होता है। वह स्थान जहाँ भोजन का निर्माण होता है, स्त्रोत (Source) कहलाता है तथा जहाँ इसका प्रयोग होता है, उपभोग (Sink) कहलाता है। स्रोत से भोज्य पदार्थ ATP की ऊर्जा का प्रयोग करके फ्लोएम की चालनी नलिकाओं में भरा जाता है।

अब शर्करायुक्त चालनी नलिका में परासरण द्वारा जल प्रवेश करता है जिससे फ्लोएम ऊतकों में दाब बढ़ जाता है। फ्लोएम भोज्य पदार्थों का उच्च दाब क्षेत्र से कम दाब क्षेत्र की ओर परिवहन करता है। भोज्य पदार्थों का परिवहन उपभोग स्थल एवं संचय स्थल की ओर अधिक होता है।

(पाठ्य-पुस्तक घृ. सं. 124)

प्रश्न 1.
वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रिया विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
वृक्काणु (Nephrons)-वृक्काणु मानव के वृक्क की उत्सर्जी इकाई कहलाते हैं। प्रत्येक वृक्क का निर्माण असंख्य सूक्ष्म कुण्डलित वृक्क नलिकाओं या वृक्काणु से होता है। प्रत्येक वृक्काणु के दो भाग होते हैं-

  • मैल्पीघी कोष (Malpighian corpuscles) तथा
  • स्रावी नलिका (Secretory tubule)।

मैल्पीघी कोष में प्यालेनुमा संरचना बोमैन सम्पुट (Bowman’s capsule) तथा रुधिर केशिकाओं का गुच्छा ग्लोमेरुलस (glomerulus) होता है।

स्रावी नलिका के तीन भाग होते हैं-
(a) समीपस्थ कुण्डलित नलिका (Proximal convulated tube),
(b) मध्य का हेनले लूप (middle Henle’s loop) तथा
(c) अन्तिम कुण्डलित नलिका (Distal convulated tube)।

मध्य U-आकार की नलिका हेनले लप के चारों ओर रुधिर केशिकाओं का बना परिनालिका केशिका चालक होता है। वृक्काणु का अन्तिम कुण्डलित भाग चौड़ी गुहा वाली संग्रह नलिका में खुलता है। ग्लोमेरुलस के रुधिर का परानिष्यंदन (ultrafiltration) होता है। इसके फलस्वरूप नेफ्रिक फिल्ट्रेट (nephric filtrate) बनता है। इससे पुनः अवशोषण (re-absorption) तथा स्रावण (secretion) द्वारा मूत्र (Urine) का निर्माण होता हैं। मूत्र में विभिन्न उत्सर्जी पदार्थ; जैसे-यूरिया, अमोनिया, यूरिक अम्ल, औषधि आदि होते हैं।
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम 5

प्रश्न 2.
उत्सर्जी उत्पाद से छुटकारा पाने के लिए पादप किन विधियों का उपयोग करते हैं ?
उत्तर-
उत्सर्जी उत्पाद से छुटकारा पाने के लिए पादपों ‘ में निम्नलिखित विधियाँ पायी जाती हैं-

  • पादपों का मुख्य उत्सर्जी पदार्थ CO2, है। इसका निर्माण श्वसन क्रिया में होता है। श्वसन क्रिया में उत्पन्न CO2, तथा जलवाष्प का निष्कासन सामान्य विसरण द्वारा रन्ध्रों (Stomata) एवं वातरन्ध्रों (Lenticels) द्वारा किया जाता
  • पौधों के उत्सर्जी वर्ण्य पदार्थों को पत्तियों, छाल एवं फलों में पहुँचा दिया जाता है। इनके पौधों से पृथक् होने पर पौधों को इनसे छुटकारा मिल जाता है।
  • अनेक उत्सर्जी पदार्थ कोशिकाओं की रिक्तिकाओं में संचित कर दिए जाते हैं।
  • गोंद, रेजिन, टेनिन आदि पदार्थ मृत काष्ठ में पहुँचा दिए जाते हैं।
  • अनावश्यक जल वाष्पोत्सर्जन द्वारा वायुमण्डल में मुक्त कर दिया जाता है।
  • कुछ अपशिष्ट पदार्थों को पौधों की जड़ों द्वारा मृदा में स्रावित कर दिया जाता है।

प्रश्न 3.
मूत्र बनने की मात्रा का नियमन किस प्रकार किया जाता है ?
उत्तर-
मूत्र बनने की मात्रा प्रमुख रूप से पुनः अवशोषण पर निर्भर करती है। वृक्काणु नलिका द्वारा पानी का पुनः अवशोषण निम्न बातों पर निर्भर करता है-

  • जब शरीर के ऊतकों में पर्याप्त मात्रा में जल हो, तब एक बड़ी मात्रा में तनु मूत्र का उत्सर्जन होता है और पुनः अवशोषण कम होता है। यदि शरीर के ऊतकों में जल की मात्रा कम हो, तब सान्द्र मूत्र का उत्सर्जन होता है और पुनः अवशोषण अधिक होता है।
  • जब मूत्र में घुलनशील उत्सर्जकों (जैसे-यूरिया, यूरिक अम्ल, औषधि) की मात्रा अधिक हो तो इनके उत्सर्जन के लिए अधिक जल की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति में मूत्र की मात्रा बढ़ जाती है।

HBSE 10th Class Science जैव प्रक्रम InText Activity Questions and Answers

क्रियाकलाप 6.1 (पा. पु. पृ. सं. 107)

प्रश्न 1.
पत्ती के रंग का क्या होता है? विलयन का रंग कैसा हो जाता है?
उत्तर-
पत्ती का हरा भाग रंगहीन हो जाता है। विलयन का रंग क्लोरोफिल निकलने के कारण हरा हो जाता है।

प्रश्न 2.
पत्ती के रंग का अवलोकन कीजिए और प्रारम्भ में पत्ती का जो हरा भाग ट्रेस किया था उससे इसकी तुलना कीजिए।
उत्तर-
पत्ती का वह भाग जो पहले हरा था अब वह बैंगनी काला हो गया है।

प्रश्न 3.
पत्ती के विभिन्न भागों में मंड की उपस्थिति के बारे में आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर-
निष्कर्ष- क्रोटन अथवा मनीप्लांट की पत्ती शबलित या चितकबरी होती है। पत्ती के हरे भाग में पर्णहरित की उपस्थिति के कारण मंड का निर्माण हुआ जो आयोडीन परीक्षण करने पर बैंगनी काला हो गया। पत्ती के रंगहीन भाग पर मंड परीक्षण का प्रभाव नहीं हुआ। इससे स्पष्ट है कि प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में मंड के निर्माण के लिए क्लोरोफिल आवश्यक है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम

क्रियाकलाप 6.2 (पा. पु. पृ. सं. 108)

प्रश्न 1.
क्या दोनों पत्तियाँ समान मात्रा में मंड की उपस्थिति दर्शाती हैं ?
उत्तर-
नहीं, (a) पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ रखे गये पौधे की पत्ती में मंड अनुपस्थित है, जबकि पौधे (b) की पत्ती में मंड उपस्थित है।

प्रश्न 2.
इस क्रियाकलाप से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं ?
उत्तर-
इस क्रियाकलाप से यह निष्कर्ष प्राप्त होता है कि मंड के निर्माण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड की आवश्यकता होती है। पौधा (a) के साथ पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड रखने से यह बेलजार के अन्दर की सारी CO2, को सोख लेता है और पौधे को प्रकाश-संश्लेषण के लिए CO2, उपलब्ध नहीं होती है।

क्रियाकलाप 6.3 (पा. पु. पृ. सं. 109)

प्रश्न 1.
किस परखनली में आपको रंग में परिवर्तन दिखाई दे रहा है ?
उत्तर-
परखनली ‘B’ के विलयन का रंग परिवर्तित हो जाता है। परखनली ‘A’ में रंग परिवर्तन नहीं होता है। . प्रश्न 2. दोनों परखनलियों में मंड की उपस्थिति के बारे में यह क्या इंगित करता है ? – उत्तर-लार में एमाइलेज एन्जाइम होता है। जब परखनली ‘A’ में 1 ml लार डाली जाती है तो इसमें उपस्थित एन्जाइम एमिलेस मण्ड को माल्टोज शर्करा में बदल देता है। जब दोनों परखनलियों में आयोडीन डाली जाती है तो परखनली ‘B’ में उपस्थित मंड के कारण विलयन का रंग नीला हो जाता है। परखनली ‘A’ में बने माल्टोज पर आयोडीन की क्रिया नहीं होती, अतः इसका रंग अपरिवर्तित रहता है।

प्रश्न 3.
यह लार की मंड पर क्रिया के बारे में क्या दर्शाता है ?
उत्तर-
लार में उपस्थित ऐमिलेस एन्जाइम मंड से क्रिया करके इसे माल्टोज शर्करा में बदल देता है।

क्रियाकलाप 6.4 (पा. पु. पृ. सं. 112)

प्रश्न 1.
एक परखनली में ताजा तैयार किया हुआ चूने का पानी लीजिए। इस चूने के पानी में निःश्वास द्वारा निकली वायु प्रवाहित कीजिए। नोट कीजिए कि चूने के पानी को दूधिया होने में कितना समय लगता है?
उत्तर-
छात्र स्वयं समय नोट करें।

प्रश्न 2.
एक सिरिंज या पिचकारी द्वारा दूसरी परखनली में ताजा चूने का पानी लेकर वायु प्रवाहित करते हैं। चित्र (b)। नोट कीजिए कि इस बार चूने के पानी को दूधिया होने में कितना समय लगता है।
उत्तर-
छात्र स्वयं समय नोट करें।

प्रश्न 3.
निःश्वास द्वारा निकली वायु में कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा के बारे में यह हमें क्या दर्शाता है?
उत्तर-
निःश्वास द्वारा निकली वायु में CO2, की मात्रा सामान्य वायु की अपेक्षा अधिक होती है। यह चूने के पानी के साथ क्रिया करके कैल्सियम कार्बोनेट बनाती है, जोकि एक अवक्षेप के रूप में चूने के पानी को दूधिया कर देता है।
Ca(OH)2, + CO2, →CaCO2, + HO
इससे यह भी सिद्ध होता है कि नि:श्वास में निकली वायु में CO2, होती है।

क्रियाकलाप 6.5 (पा. पु. पृ. सं. 112)

प्रश्न-किण्वन के उत्पाद के बारे में यह हमें क्या दर्शाता है ?
उत्तर-
फल के रस या चीनी के घोल में यीस्ट द्वारा किण्वन की क्रिया होती है जिससे एक गैस उत्पन्न होती है। यह गैस चूने के पानी को दूधिया कर देती है। इससे पता चलता है कि किण्वन की क्रिया में CO2, गैस उत्पन्न होती है अर्थात् CO2, गैस किण्वन का उत्पाद है।

क्रियाकलाप 6.6 (पा.पु. पृ.सं. 114)

प्रश्न 1.
एक जलशाला में मछली का अवलोकन कीजिए। वे अपना मुँह खोलती और बन्द करती रहती हैं, साथ ही आँखों के पीछे क्लोमछिद्र (या क्लोमछिद्र को ढकने वाला प्रच्छद) भी खुलता है और बन्द होता रहता है। क्या मुँह और क्लोम छिद्र के खुलने और बन्द होने के समय में किसी प्रकार का समन्वय है?
उत्तर-
मछलियाँ जल में घुली हुई ऑक्सीजन को अपनी श्वसन क्रिया के लिए ग्रहण करती हैं। जल में वायु की अपेक्षा कम ऑक्सीजन घुली रहती है। मछलियाँ अपना मुँह खोलकर पानी अन्दर खींचती हैं और क्लोम छिद्र से होकर बाहर निकाल देती हैं। अतः क्लोम छिद्र एवं मुँह के खुलने में आपसी समन्वय है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 6 जैव प्रक्रम

प्रश्न 2.
गिनती करो कि मछली एक मिनट में कितनी बार मुँह खोलती और बन्द करती है। इसकी तुलना आप अपनी श्वास को एक मिनट में अन्दर और बाहर करने से कीजिए।
उत्तर-
हम एक मिनट में 15 से 18 बार श्वास लेते हैं जबकि मछलियाँ एक मिनट में इससे अधिक बार मुँह खोलती हैं एवं बन्द करती हैं।

क्रियाकलाप 6.7 (पा. पु. पृ. सं. 116) 

प्रश्न 1.
अपने आस-पास के एक स्वास्थ्य केन्द्र का भ्रमण कीजिए और ज्ञात कीजिए कि मनुष्यों में हीमोग्लोबिन की मात्रा का सामान्य परिसर क्या है ?
उत्तर-
मनुष्यों में हीमोग्लोबिन का सामान्य परिसर 12 से 15% होता है।

प्रश्न 2.
क्या यह बच्चे और वयस्क के लिए समान
उत्तर-
हाँ, यह बच्चे और वयस्क के लिए समान

प्रश्न 3.
क्या पुरुष और महिलाओं के हीमोग्लोबिन स्तर में कोई अन्तर है ?
उत्तर-
प्रायः महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर पुरुषों से कुछ कम होता है।

प्रश्न 4.
अपने आस-पास के एक पशुचिकित्सा क्लीनिक का भ्रमण कीजिए। ज्ञात कीजिए कि पशुओं, जैसे-भैंस या गाय में हीमोग्लोबिन की मात्रा का सामान्य परिसर क्या है ?
उत्तर-
भैंस या गाय में हीमोग्लोबिन की मात्रा के सामान्य परिसर में थोड़ा फर्क होता है। गाय का हीमोग्लोबिन परिसर 11.4 से 17% एवं भैंस का 12 से 18% तक होता है।

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क्रियाकलाप 6.8 (पा. पु. पृ. सं. 121)

प्रश्न-
क्या आप दोनों में कोई अन्तर देखते हैं ?
उत्तर-
हाँ, पौधे लगे गमले के ऊपर ढके बेलजार की भीतरी सतह पर पानी की बूँदें जमा हो जाती हैं। दूसरे गमले में ऐसा नहीं होता है।

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HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

Haryana State Board HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण Textbook Exercise Questions, and Answers.

Haryana Board 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

HBSE 10th Class Science तत्वों का आवर्त वर्गीकरण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
आवर्त सारणी में बाईं से दाईं ओर जाने पर, प्रवृत्तियों के बारे में निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) तत्वों की धात्विक प्रकृति घटती है।
(b) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ जाती है।
(c) परमाणु आसानी से इलेक्ट्रॉन का त्याग करते हैं।
(d) इसमें ऑक्साइड अधिक अम्लीय हो जाते हैं।
उत्तर-
(c) परमाणु आसानी से इलेक्ट्रॉन का त्याग करते हैं।

प्रश्न 2.
तत्व X, XCl2, सूत्र वाला एक क्लोराइड बनाता है जो एक ठोस है तथा जिसका गलनांक अधिक है। आवर्त सारणी में यह तत्व सम्भवतः किस समूह के अन्तर्गत होगा?
(a) Na
(b) Mg
(c) Al
(d) Si
उत्तर-
(b) Mg.

प्रश्न 3.
किस तत्व में
(a) दो कोश हैं तथा दोनों इलेक्ट्रॉनों से पूर्ण हैं?
(b) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 2 है?
(c) कुल तीन कोश हैं तथा संयोजकता कोश में चार इलेक्ट्रॉन हैं?
(d) कुल दो कोश हैं तथा संयोजकता कोश में तीन इलेक्ट्रॉन हैं?
(e) दूसरे कोश में पहले कोश से दोगुने इलेक्ट्रॉन हैं?
उत्तर-
(a) नीऑन (Ne)।
(b) मैग्नीशियम (Mg)।
(c) सिलिकॉन (Si)।
(d) बोरॉन (B)।
(e) कार्बन (C)।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

प्रश्न 4.
(a) आवर्त सारणी में बोरॉन के स्तम्भ के सभी तत्वों के कौन-से गुणधर्म समान हैं?
(b) आवर्त सारणी में फ्लुओरीन के स्तम्भ के सभी तत्वों के कौन-से गुणधर्म समान हैं? ।
उत्तर-
(a) बोरॉन की भाँति, आवर्त सारणी के समान स्तम्भ में सभी तत्वों के बाह्यतम कोशों में तीन इलेक्ट्रॉन होते हैं अर्थात् इनकी संयोजकता तीन होती है। सभी विद्युत के सुचालक होते हैं।
(b) फ्लुओरीन की भाँति, आवर्त सारणी के समान स्तम्भ में सभी तत्वों के बाह्यतम कोशों में सात इलेक्ट्रॉन होते हैं तथा ये हैलोजेन कहलाते हैं। इन सभी की संयोजकता 1 होती है। सभी विद्युत के अचालक और भंगुर होते हैं।

प्रश्न 5.
एक परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,7
(a) इस तत्व की परमाणु संख्या क्या है?
(b) निम्न में किस तत्व के साथ इसकी रासायनिक समानता होगी? (परमाणु संख्या कोष्ठक में दी गई है।)
N(7) F(9) P(15) Ar (18)
उत्तर-
(a) तत्व की परमाणु संख्या 17 है।
(b) यह रासायनिक रूप से F (9) के समान होगा।

प्रश्न 6.
आवर्त सारणी में तीन तत्व A, B, तथा C की स्थिति निम्न प्रकार है –

वर्ग 16वर्ग 17
A
BC

अब बताइए कि –
(a) A धातु है या अधातु।
(b) A की अपेक्षा C अधिक अभिक्रियाशील है या कम।
(c) C का साइज B से बड़ा होगा या छोटा।
(d) तत्व A किस प्रकार के आयन, धनायन या ऋणायन बनाएगा?
उत्तर-
(a) A अधातु है।
(b) A की तुलना में C कम अभिक्रियाशील है।
(c) B की तुलना में C छोटा होगा।
(d) तत्व A ऋणायन बनाएगा।

प्रश्न 7.
नाइट्रोजन (परमाणु-संख्या 7) तथा फॉस्फोरस (परमाणु-संख्या 15) आवर्त सारणी के समूह 15 के तत्व हैं। इन दोनों तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। इनमें से कौन-सा तत्व अधिक ऋणविद्युती होगा और क्यों?
उत्तर-
नाइट्रोजन (7) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास : 2, 5 फॉस्फोरस (15) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास : 2, 8, 5-नाइट्रोजन अधिक विद्युत्-ऋणात्मक होगा क्योंकि किसी समूह में ऊपर से नीचे जाने पर विद्युत ऋणात्मकता घटती है।

प्रश्न 8.
तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का आधुनिक आवर्त सारणी में तत्व की स्थिति से क्या सम्बन्ध है?
उत्तर-
किसी तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास आधुनिक आवर्त सारणी में इसकी स्थिति से सम्बन्धित होता है, जिन परमाणुओं के बाह्यतम कोशों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, उन्हें समान समूह में रखा जाता है! किसी आवर्त में बाएँ से दाएँ चलते समय संयोजकता कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 1 इकाई बढ़ जाती है क्योंकि परमाणु क्रमांक 1 इकाई बढ़ जाता है।

प्रश्न 9.
आधुनिक आवर्त सारणी में कैल्सियम (परमाणु-संख्या 20) के चारों ओर 12, 19, 21 तथा 38 परमाणु-संख्या वाले तत्व स्थित हैं। इनमें से किन तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्म कैल्सियम के समान हैं?
उत्तर-
इन तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास इस प्रकार हैं –

परमाणु संख्याइलेक्ट्रॉनिक विन्यास
122,8,2
192,8,8,1
20 (कैल्सियम)2,8,8,2
212,8,8,3
382,8, 18, 8,2

हम पाते हैं कि परमाणु संख्या 12 व 38 वाले तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कैल्सियम से मिलते-जुलते हैं और इसलिए इनके भौतिक व रासायनिक गुणधर्म भी समान होते हैं।

प्रश्न 10.
आधुनिक आवर्त सारणी एवं मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में तत्वों की व्यवस्था की तुलना कीजिए।
उत्तर-
1. मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी के समय 63 ज्ञात तत्व थे परन्तु आधुनिक आवर्त सारणी में 114 ज्ञात तत्व
2. मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में कुछ तत्वों के लिए स्थान खाली छोड़ दिए गए थे जो कि उस समय ज्ञात नहीं थे परन्तु अब आधुनिक आवर्त सारणी में सभी तत्व भली-भाँति व्यवस्थित हैं।
3. मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में कोबाल्ट व निकल तथा टेलुरियम व आयोडीन गलत रखे गये थे, परन्तु आधुनिक आवर्त सारणी में नियमानुसार वे सही क्रम में व्यवस्थित हैं।
4. मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी का आधार द्रव्यमान है .. जबकि आधुनिक आवर्त सारणी का आधार परमाणु क्रमांक है। अत: मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में तत्व परमाणु द्रव्यमानों के वृद्धि क्रम में रखे हुए हैं, जबकि आधुनिक सारणी में तत्व परमाणु क्रमांक के वृद्धि क्रम में रखे गए हैं।
5. मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में 9 ऊर्ध्वाधर स्तम्भ हैं जिन्हें समूह कहते हैं, जबकि आधुनिक आवर्त सारणी में 18 ऊर्ध्वाधर स्तम्भ हैं जिन्हें समूह कहते हैं।

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HBSE 10th Class Science तत्वों का आवर्त वर्गीकरण  InText Questions and Answers

(पाठ्य-पुस्तक पृ.सं.91)

प्रश्न 1.
क्या डॉबेराइनर के त्रिक, न्यूलैंड्स के अष्टक के स्तम्भ में भी पाए जाते हैं ? तुलना करके पता कीजिए।
उत्तर-
हाँ, डॉबेराइनर के त्रिक न्यूलैंड्स के अष्टक के स्तम्भ में भी पाए जाते हैं। उदाहरण के लिए

  • त्रिक-Li, Na तथा K न्यूलैंड्स अष्टकों के ‘रे’ स्तम्भ में उपस्थित हैं।
  • त्रिक-Ca, Sr तथा Ba न्यूलैंड्स के अष्टक के ‘गा’ स्तम्भ में उपस्थित हैं।

प्रश्न 2.
डॉबेराइनर के वर्गीकरण की क्या सीमाएँ हैं?
उत्तर-
डॉबेराइनर के वर्गीकरण की सीमाओं के रूप में यह वर्गीकरण उस समय ज्ञात तत्वों में से केवल तीन त्रिकों को निर्धारित करने में सफल रहा। अतः यह वर्गीकरण

प्रश्न 3.
न्यूलैंड्स के अष्टक सिद्धान्त की क्या सीमाएँ
उत्तर-
न्यूलैंड्स के अष्टक नियम की निम्नलिखित सीमाएँ हैं-
1. यह वर्गीकरण केवल कैल्सियम तक ही मान्य हो पाया क्योंकि कैल्सियम के बाद प्रत्येक आठवें तत्व का गुणधर्म पहले तत्व से नहीं मिलता था। .
2. बाद में खोजे गए अनेक तत्व अष्टक नियम के अनुसार इसमें व्यवस्थित न हो सके।
3. इसमें कुछ असमान तत्वों को एक स्तर के अन्तर्गत रखा गया था। उदाहरण के लिए, कोबाल्ट तथा निकल को एक ही स्थान पर रखा गया परन्तु इन्हें फ्लुओरीन, क्लोरीन तथा ब्रोमीन के साथ एक ही स्तम्भ ‘सा’ के अन्तर्गत रखा गया है जबकि कोबाल्ट तथा निकल के गुण फ्लुओरीन, क्लोरीन तथा ब्रोमीन से सर्वथा भिन्न हैं।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 94).

प्रश्न 1.
मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी का उपयोग कर निम्नलिखित तत्वों के ऑक्साइड के सूत्र का अनुमान दीजिए- K,C,Al, Si, Ba
उत्तर –

तत्वऑक्साइडों के सूत्र
K,K2O
CCO2
AlAl2O3
SiSiO2
BaBaO

प्रश्न 2.
गैलियम के अतिरिक्त, अब तक कौन-कौन से तत्वों का पता चला है जिसके लिए मेन्डेलीफ ने अपनी आवर्त सारणी में खाली स्थान छोड़ दिया था? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर-
जर्मेनियम (Ge) तथा पोलोनियम (Po) वर्ग IVA के दो तत्व हैं। इन दोनों तत्वों के लिए भी मेन्डेलीफ ने अपनी आवर्त सारणी में खाली स्थान छोड़ा था। इन तत्वों की बाद में खोज होने पर इनके गुणधर्म मेन्डेलीफ के बताए गुणधर्म से मिलते हैं।

प्रश्न 3.
मेन्डेलीफने अपनी आवर्त सारणी तैयार करने के लिए कौन सा मानदण्ड अपनाया?
उत्तर-
मेन्डेलीफ ने अपनी आवर्त सारणी में तत्वों को उनके मूल गुणधर्म, परमाणु द्रव्यमान तथा रासायनिक गुणधर्मों में समानता के आधार पर व्यवस्थित किया।

प्रश्न 4.
आपके अनुसार उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह में क्यों रखा गया?
उत्तर-
सभी तत्वों में से उत्कृष्ट गैसें, जैसे-हीलियम (He), नीऑन (Ne), आर्गन (Ar), क्रिप्टॉन (Kr) तथा जीनॉन (Xe), सबसे अधिक अक्रियाशील हैं। ये अन्य तत्वों से अभिक्रिया नहीं करते, इसलिए मेन्डेलीफ ने उन्हें अलग वर्ग में रखा जिसे उन्होंने शून्य वर्ग कहा।

(पाठ्य-पुस्तक पृ. सं. 100)

प्रश्न 1.
आधुनिक आवर्त सारणी द्वारा किस प्रकार से मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी की विविध विसंगतियों को दूर किया गया?
उत्तर-
सन् 1913 में हेनरी मोजले ने बताया कि परमाणु का आधारभूत गुण परमाणु क्रमांक है न कि परमाणु भार । इसके द्वारा आधुनिक आवर्त सारणी का निर्माण किया गया तथा इस सारणी द्वारा मेन्डेलीफ की सारणी के निम्न दोषों को दूर किया गया-

  • आधुनिक आवर्त सारणी में सभी समस्थानिकों को एक ही स्थान दिया गया क्योंकि इनके परमाणु क्रमांक एकसमान होते हैं।
  • आर्गन तथा पोटैशियम की परमाणु संख्या क्रमश: 18 एवं 19 है। तत्वों की बढ़ती परमाणु संख्या के आधार पर व्यवस्थित करने पर आर्गन पहले आता है, जबकि उनके परमाणु द्रव्यमान इसके विपरीत हैं। आधुनिक आवर्त सारणी में इस दोष को दूर किया गया है।
  • सभी मृदा तत्वों को एक ही स्थान पर रखा गया है क्योंकि इनकी बाह्यतम कक्षा में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

प्रश्न 2.
मैग्नीशियम की तरह रासायनिक अभिक्रियाशीलता दिखाने वाले दो तत्वों के नाम लिखिए। आपके चयन का क्या आधार है?
उत्तर-
मैग्नीशियम की तरह रासायनिक अभिक्रिया शीलता दिखाने वाले दो तत्व बेरीलियम तथा कैल्सियम हैं। . आधुनिक आवर्त सारणी के अनुसार, “जिन तत्वों का बाहरी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है उनके गुणधर्म भी समान होते हैं। मैग्नीशियम के बाहरी कोश में 2 इलेक्ट्रॉन हैं अत: वे सभी तत्व जिनके बाहरी कोश में 2 इलेक्ट्रॉन होंगे Mg के समान ही गुणधर्म प्रदर्शित करेंगे।

प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रकृति वाले तत्वों के नाम बताइए –
(a) तीन तत्व जिनके सबसे बाहरी कोश में एक इलेक्ट्रॉन उपस्थित हो।
(b) दो तत्व जिनके सबसे बाहरी कोश में दो इलेक्ट्रॉन उपस्थित हों।
(c) तीन तत्व जिनका बाहरी कोश पूर्ण हो।
उत्तर-
(a) लीथियम, सोडियम, पोटैशियम।
(b) मैग्नीशियम, कैल्सियम।
(c) हीलियम, नीऑन, आर्गन।

प्रश्न 4.
(a) लीथियम, सोडियम, पोटैशियम ये सभी धातुएँ जल से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं। क्या इन तत्वों के परमाणुओं में कोई समानता है?
(b) हीलियम एक अक्रियाशील गैस है जबकि नीऑन की अभिक्रियाशीलता अत्यन्त कम है। इनके परमाणुओं में कोई समानता है?
उत्तर-
(a) लीथियम, सोडियम, पोटैशियम समूह से सम्बन्धित हैं। इन सभी तत्वों के परमाणुओं के बाह्यतम कोश में एक इलेक्ट्रॉन होता है।
(b) हीलियम तथा नीऑन दोनों अक्रिय गैसें हैं तथा इनके बाह्यतम कक्ष पूर्ण हैं।

प्रश्न 5.
आधुनिक आवर्त सारणी में पहले दस तत्वों में कौन-सी धातुएँ हैं?
उत्तर-
पहले दस तत्व हैं-
H. He, Li. Be: B.C, N.O. F तथा Ne इन सभी तत्वों में से धातु हैं – Li तथा Be

प्रश्न 6.
आवर्त सारणी में इनके स्थान के आधार पर इनमें से किस तत्व में सबसे अधिक धात्विक अभिलक्षण की विशेषता है?
Ga Ge As Se Be
उत्तर-
Ga; चूँकि धात्विक गुण बाएँ से दाएँ घटता है। दिए गए तत्वों की आवर्त सारणी में ऐसी स्थिति के अनुसार Ga धातु है, Ge तथा AS उपधातु हैं तथा Se, Be अधातु हैं। स्पष्ट है Ga में धात्विक गण सर्वाधिक है।

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क्रियाकलाप 5.1 (पा. पु. पृ. सं. 94)

प्रश्न-क्षार धातुओं एवं हैलोजेन कुल की समानता को ध्यान में रखते हुए हाइड्रोजन को मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में उचित स्थान पर रखिए। हाइड्रोजन को किस समूह एवं आवर्त में रखना चाहिए?
उत्तर-
मेन्डेलीफ की आवर्त सारणी में हाइड्रोजन को नियत स्थान नहीं दिया जा सकता क्योंकि हाइड्रोजन, ऑक्सीजन एवं सल्फर के साथ एक सूत्र वाले यौगिक बनाती है। दूसरी ओर हाइड्रोजन द्विपरमाणुक अणु के रूप में भी पायी जाती हैं।

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क्रियाकलाप 5.2 (पा. पु. पृ.सं. 94)

प्रश्न –
क्लोरीन के समस्थानिक Cl-35 व Cl-37 के परमाणु क्रमांक भिन्न-भिन्न होने के कारण क्या आप उन्हें अलग-अलग रखेंगे? या रासायनिक गुणधर्म समान होने के कारण आप दोनों को एक ही स्थान पर रखेंगे?
उत्तर-
सभी तत्वों के समस्थानिक मेन्डेलीफ के आवर्त नियम के लिए एक चुनौती थी तथा समस्या यह थी कि एक तत्व से दूसरे तत्व की ओर आगे बढ़ने पर परमाणु द्रव्यमान नियमित रूप से नहीं बढ़ते हैं। इसलिए यह अनुमान लगाना कठिन हो गया कि दो तत्वों के बीच कितने तत्व खोजे जा सकते हैं। मेन्डेलीफ के आवर्त नियमानुसार इन्हें इनकी सारणी में स्थान देना चाहिए था परन्तु रासायनिक गुणधर्म के समान होने के कारण ये एक ही स्थान पर रखे जायेंगे। आधुनिक आवर्त सारणी में यह समस्या दूर हो गयी थी क्योंकि इसे परमाणु क्रमांकों के बढ़ते क्रम के आधार पर बनाया गया था।

क्रियाकलाप 5.3 (पा. पु. पृ. सं. 95)

प्रश्न 1.
आधुनिक आवर्त सारणी में कोबाल्ट एवं निकल के स्थान कैसे निर्धारित किए गए हैं?
2. आधुनिक आवर्त सारणी में विभिन्न तत्वों के समस्थानिकों का स्थान कैसे सुनिश्चित किया गया
3. क्या 1.5 परमाणु संख्या वाले किसी तत्व को हाइड्रोजन एवं हीलियम के बीच रखा जा सकता
4. आपके अनुसार आवर्त सारणी में हाइड्रोजन को – कहाँ रखना चाहिए? –
उत्तर-
(1) कोबाल्ट का परमाणु क्रमांक 27 एवं निकिल · का परमाणु क्रमांक 28 है। आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार आवर्त सारणी में तत्वों को बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के क्रम में रखा जाता है। अतः कम परमाणु क्रमांक वाला तत्व कोबाल्ट पहले तथा अधिक परमाणु क्रमांक वाला तत्व निकिल बाद में आएगा। पूर्व में परमाणु भार के आधार पर ये दोनों तत्व गलत क्रम में व्यवस्थित थे क्योंकि कोबाल्ट का परमाणु भार 58.93 तथा निकिल का परमाणु भार 58.71 है।

(2) आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार एक ही तत्व के सभी समस्थानिकों का परमाणु क्रमांक एक समान होता है – अतः इन्हें एक ही स्थान पर रखा गया है जो कि उचित है। .

(3) 1.5 परमाणु क्रमांक वाला तत्व हाइड्रोजन व हीलियम के बीच स्थित नहीं हो सकता।

(4) हाइड्रोजन परमाणु पहले समूह के तत्वों की तरह एक इलेक्ट्रॉन खोकर तथा सातवें समूह के तत्वों की तरह एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके संयोजन करता है, अतः इसको प्रथम तथा सप्तम समूह में रखना ठीक है।

क्रियाकलाप 5.4 (पा. पु. पृ. सं. 95)

प्रश्न 1.
आधुनिक आवर्त सारणी के समूह –
1. में उपस्थित तत्वों के नाम बताइए।
2. समूह के पहले तीन तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
3. इन तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में क्या समानता
4. इन तीनों तत्वों में कितने संयोजकता इलेक्ट्रॉन
उत्तर-
1. हाइड्रोजन (H), लीथियम (Li), सोडियम (Na), पोटैशियम (K), रूबीडियम (Rb), कैल्सियम (Ca), फ्रान्शियम (Fr)।
2. प्रथम तीन तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास –
हाइड्रोजन (H) =1
लीथियम (Li)=2,1
सोडियम (Na)= 2,8,1 3.
3. इनके सबसे बाहरी कोश में इलेकनों की संख्या समान (प्रत्येक में 1) है। अतः इनके संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी समान है।
4. एक संयोजी इलेक्ट्रॉन।

क्रियाकलाप 5.5 (पा. पु. पृ. सं.97)
प्रश्न
1. यदि आप आवर्त सारणी के लम्बे रूप को देखें . तो आपको पता चलेगा कि Li, Be, B, C,N,O, F तथा Ne दूसरे आवर्त के तत्व हैं। इनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
2. क्या इन सभी तत्वों के भी संयोजकता इलेक्ट्रॉनों . की संख्या समान है।
3. क्या इनके कोशों की संख्या समान है।
उत्तर-
1.
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 1
2. नहीं, सभी में असमान हैं।
3. हाँ, सभी में समान हैं। ‘

क्रियाकलाप 5.6 (पा. पु. पृ. सं.98)

प्रश्न 1.
किसी तत्व के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से आप उसकी संयोजकता का परिकलन कैसे करेंगे?
2. परमाणु संख्या 12 वाले मैग्नीशियम तथा परमाणु संख्या 16 वाले सल्फर की संयोजकता क्या है?
3. इसी प्रकार पहले 20 तत्वों की संयोजकताएँ ज्ञात कीजिए।
4. आवर्त में बाईं से दाईं ओर जाने पर संयोजकता किस प्रकार परिवर्तित होती है?
5. समूह में ऊपर से नीचे जाने पर संयोजकता किस – प्रकार परिवर्तित होती है?
उत्तर-
1. यदि तत्वों के परमाणुओं के बाह्यतम कोशों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 1, 2, 3 या 4 है तो उन तत्वों की संयोजकताएँ क्रमश: 1, 2, 3 तथा 4 होंगी। ..यदि तत्वों के परमाणुओं के बाह्यतम कोशों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 5, 6 या 7 है तो उन तत्वों की संयोजकताएँ क्रमश: 3,2, 1 होंगी। यदि तत्वों के परमाणुओं के बाह्यतम कोशों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 8 है तो उन तत्वों की संयोजकता शृन्य (0) होगी।
2. मैग्नीशियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 2 है, अतः इसकी संयोजकता 2 है। सल्फर का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 6 है, अत: इसकी संयोजकता 2 है।
3. आवर्त सारणी के प्रथम बीस तत्वों की ‘वयोजकताएँ निम्नलिखित है-
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 2
4. आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर संयोजकता पहले 1 से 4 तक बढ़ती है फिर 1 तक घटकर उत्कृष्ट गैस की स्थिति में शून्य हो जाती है।
5. समूह में सभी तत्वों की संयोजकताएँ समान होती है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

क्रियाकलाप 5.7 (पा.पु. पृ.सं.98)

प्रश्न-
आधुनिक आवर्त सारणी का अध्ययन कर दिये गये प्रश्नों का उत्तर देना। दूसरे आवर्त के तत्वों की परमाणु त्रिज्याएँ नीचे दी गई हैं-
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 4
1. इन्हें परमाणु त्रिज्या के अवरोही क्रम में व्यवस्थित – कीजिए।
2. क्या ये तत्व अब आवर्त सारणी के आवर्त की – तरह ही व्यवस्थित हैं?
3. किस तत्व का परमाणु सबसे बड़ा एवं किसका . सबसे छोटा है?
4. आवर्त में बाईं से दाईं ओर जाने पर परमाणु त्रिज्या .. किस प्रकार बदलती है?
उत्तर-
1. अवरोही क्रम
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 5
2. हाँ, ये आवर्त सारणी के आवर्त की भाँति व्यवस्थित
3. लीथियम का परमाणु सबसे बड़ा तथा ऑक्सीजन का सबसे छोटा है। 4. परमाणु त्रिज्या, आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर घटती है।

क्रियाकलाप 5.8 (पा. पु. पृ. सं. 99)

प्रश्न 1.
प्रथम समूह के तत्वों की परमाणु त्रिज्या में परिवर्तन का अध्ययन कीजिए तथा उन्हें आरोही
क्रम में व्यवस्थित कीजिए। प्रथम समूह के तत्व
Na | Li] Rs |Cs | K परमाणु त्रिज्या (pm) | 86 | 152| 244 262|231
2. किस तत्व का परमाणु सबसे छोटा तथा किसका सबसे बड़ा है?
3. समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार में परिवर्तन किस प्रकार होगा?
उत्तर-
1. परमाणु त्रिज्या का आरोही क्रम निम्नवत्
HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण 6
2. सोडियम (Na) के परमाणु सबसे छोटे तथा सीजियम (Cs) के परमाणु सबसे बड़े हैं।
3. समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है। इसका कारण यह है कि नीचे जाने पर एक नया कोश जुड़ जाता है, इससे नाभिक तथा सबसे बाहरी कोश के बीच की दूरी बढ़ जाती है और इस कारण नाभिक का आवेश बढ़ जाने के बाद भी परमाणु का आकार बढ़ जाता है।

क्रियाकलाप 5.9 (पा. पु. पृ.सं. 99)

प्रश्न 1.
तीसरे आवर्त के तत्वों की जाँच कर उन्हें धातु एवं अधातु में वर्गीकृत करें।
2. सारणी के किस ओर धातएं स्थित है?
3. सारणी के किस ओर अधातुएं स्थित हैं?
उत्तर-
1. तीसरे आवर्त में Na. Mg व AI धातुएँ हैं तथा P, S, CIव Ar अधातुएँ हैं।
2. सारणी में तिरछी रेखा के बाईं ओर धातुएँ स्थित हैं।
3. सारणी में तिरछी रेखा के दाईं ओर अधातुएँ स्थित हैं।

क्रियाकलाप 5.10 (पा.पु. पृ. सं. 99)

प्रश्न – समूह में इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति किस प्रकार बदलती है? आवर्त में यह प्रवृत्ति कैसे बदलेगी?
उत्तर-
आवर्त में जैसे-जैसे संयोजकता कोश के इलेक्ट्रॉनों पर क्रिया करने वाला प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है, इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति घट जाती है। समूह में नीचे की ओर, संयोजकता इलेक्ट्रॉन पर क्रिया करने वाला प्रभावी नाभिकीय आवेश घटता है। बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से सुगमतापूर्वक निकल जाते हैं, अतः धात्विक अभिलक्षण आवर्त में घटता है तथा समूह में नीचे जाने पर धात्विक अभिलक्षण में वृद्धि होती है। अधातुएँ विद्युत ऋणात्मक होती हैं, उनमें इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके आबन्ध बनाने की प्रवृत्ति होती है।

HBSE 10th Class Science Solutions Chapter 5 तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

क्रियाकलाप 5.11 (पा. पु. पृ. सं. 100)

प्रश्न-
आवर्त में बाईं से दाईं ओर जाने पर इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति कैसे परिवर्तित होती है तथा समूह में ऊपर से नीचे जाने पर इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति कैसे परिवर्तित होगी?
उत्तर-
किसी आवर्त में बाईं से दाईं ओर जाने पर इलेक्ट्रॉन बन्धुता या इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति बढ़ती है। किसी समूह में ऊपर से नीचे आने पर इलेक्ट्रॉन बन्धुता घटती है।

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