Class 12

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 2 प्रशिक्षण विधियाँ

Haryana State Board HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 2 प्रशिक्षण विधियाँ Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physical Education Solutions Chapter 2 प्रशिक्षण विधियाँ

HBSE 12th Class Physical Education प्रशिक्षण विधियाँ Textbook Questions and Answers

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न [Long Answer Type Questions]

प्रश्न 1.
आइसोमीट्रिक, आइसोटोनिक एवं आइसोकाइनेटिक व्यायामों के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
1. आइसोमीट्रिक व्यायाम (Isometric Exercises):
ये वे व्यायाम होते हैं जिनमें खिलाड़ी द्वारा किया गया व्यायाम या कार्य नजर नहीं आता। ऐसे व्यायाम में तनाव की अधिकता तथा तापमान में वृद्धि की संभावना रहती है। हमारे अत्यधिक बल लगाने पर भी वस्तु अपने स्थान से नहीं हिलती। उदाहरणार्थ, एक ट्रक को धकेलने के लिए एक व्यक्ति बल लगाता है, परंतु वह अत्यधिक भारी होने के कारण अपनी जगह से नहीं हिलता, परंतु तनाव बना रहता है जिससे हमारी ऊर्जा का व्यय होता है। कई बार हमारे शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है। ऐसे व्यायाम करने से माँसपेशियों की लंबाई तथा मोटाई बढ़ जाती है। कुछ आइसोमीट्रिक व्यायाम निम्नलिखित हैं-
(1) बंद दरवाजों को धकेलना
(2) पीठ से दीवार को दबाना
(3) पैरलल बार को पुश करना
(4) दीवार या जमीन पर उँगली, कोहनी या कंधा दबाना
(5) कुर्सी को दोनों हाथों से अंदर की ओर दबाना
(6) घुटने मोड़ना
(7) डैस्क को हाथ, उँगली, पैर या पंजे से दबाना आदि।

2. आइसोटोनिक व्यायाम (Isotonic Exercises):
ऐसे व्यायामों में खिलाड़ी की गतिविधियाँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। इन व्यायामों का उद्देश्य माँसपेशियों की कार्यक्षमता में वृद्धि करना होता है। इनसे माँसपेशियों में लचक आती है। इन अभ्यासों को समशक्ति जोर भी कहते हैं। कुछ आइसोटोनिक व्यायाम हैं-
(1) हल्के भार के व्यायाम करना
(2) हल्का बोझ उठाना
(3) झूला झूलना
(4) बाल्टी उठाना आदि।

3. आइसोकाइनेटिक व्यायाम (Isokinetic Exercises):
ये व्यायाम आइसोमीट्रिक एवं आइसोटोनिक व्यायामों का मिश्रण हैं। इनमें मध्यम रूप में भार रहता है ताकि माँसपेशियाँ ‘Bulk’ और ‘Tone’ दोनों रूप में वृद्धि कर सके। ये अत्यंत आधुनिक व्यायाम हैं जिनमें पहले दोनों प्रकार के व्यायामों का लाभ मिल जाता है। इनसे हम अपने शरीर को गर्मा भी सकते हैं। इनके उदाहरण हमें दैनिक जीवन में भी देखने को मिल सकते हैं; जैसे-
(1) बर्फ पर स्केटिंग करना
(2) भार ढोना
(3) चिन-अप
(4) भारी रोलर धकेलना
(5) रस्सी पर चलना।

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प्रश्न 2.
सहनशीलता के विकास (Endurance Development) की विधियों का वर्णन कीजिए।
अथवा
सहनशीलता को किस प्रकार बढ़ाया जा सकता है? इसकी प्रशिक्षण विधियों का ब्यौरा दें।
उत्तर:
व्यक्ति के संपूर्ण विकास के लिए सहनशीलता का विकास होना बहुत आवश्यक है। सहनशीलता के विकास में अनेक प्रशिक्षण विधियाँ महत्त्वपूर्ण योगदान देती हैं। अतः इन विधियों का विवरण इस प्रकार है-
1. निरंतर प्रशिक्षण विधि (Continuous Training Method):
निरंतर प्रशिक्षण विधि सहनशीलता को बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है.। इस तरीके में व्यायाम लंबी अवधि तक बिना रुके अर्थात् निरंतर किया जाता है। इस तरीके में सघनता बहुत कम होती है क्योंकि व्यायाम लंबी अवधि तक किया जाता है। क्रॉस-कंट्री दौड़ इस प्रकार के व्यायाम का सबसे अच्छा उदाहरण है। इस तरह के व्यायाम में हृदय की धड़कन की दर लगभग 140 से 160 प्रति मिनट होती है। व्यायाम करने की अवधि कम-से-कम 30 मिनट होनी आवश्यक है। इस विधि से हृदय तथा फेफड़ों की कार्यकुशलता में वृद्धि हो जाती है। इससे इच्छा-शक्ति दृढ़ हो जाती है तथा थकावट की दशा में लगातार काम करने से व्यक्ति दृढ़-निश्चयी बन जाता है। इससे व्यक्ति में आत्म-संयम, आत्म-अनुशासन व आत्म-विश्वास बढ़ने लगता है।

2. अंतराल प्रशिक्षण विधि (Interval Training Method):
प्रसिद्ध एथलेटिक्स कोच बिकिला (Bikila) ने सन् 1920 में अंतराल प्रशिक्षण विधि की शुरुआत की। उन्होंने इसे टेरेस ट्रेनिंग का नाम दिया। वास्तव में यह विधि प्रयास व पुनः शक्ति प्राप्ति, फिर प्रयास व पुनः शक्ति प्राप्ति के सिद्धांत पर आधारित है। इस विधि का प्रयोग गति तथा सहनशीलता के विकास के लिए होता है। शिक्षित खिलाड़ी के लिए यह अति सुदृढ़ तथा प्रभावशाली प्रशिक्षण विधि है, परंतु इस विधि को अनुचित ढंग से अपनाने से उकताहट के कारण शारीरिक एवं मानसिक थकावट उत्पन्न होती है।

3. फार्टलेक प्रशिक्षण विधि (Fartlek Training Method):
फार्टलेक प्रशिक्षण विधि क्रॉस-कंट्री दौड़ पर आधारित है तथा दौड़ के साथ-साथ कई अन्य व्यायाम भी इसमें शामिल हैं। यह प्रशिक्षण खिलाड़ी की आयु, क्षमता आदि देखकर दिया जाता है। इस प्रशिक्षण विधि में कदमों के फासले या दूरी और तीव्रता आदि में फेर-बदल करके दौड़ का कार्यक्रम बनता है। भागते-भागते जमीन से कोई वस्तु उठाना, भागते-भागते आधी बैठक लगाना, एक टाँग से दौड़ना, दोनों पैरों से कूद लगाना, हाथ ऊपर करके भागना आदि इसके उदाहरण हैं। खिलाड़ी अपनी इच्छानुसार गति तथा अन्य व्यायामों में फेर-बदल कर सकता है। इस विधि से थकान का अनुभव नहीं होता। इसमें समय पर विशेष बल दिया जाता है। खिलाड़ी में अधिक शक्ति अथवा क्षमता बनाई जाती है।
इस प्रकार उपर्युक्त विधियों की सहायता से सहनशीलता को बढ़ाया जा सकता है।

प्रश्न 3.
गति को प्रशिक्षण विधि में कैसे विकसित किया जाता है?
अथवा
गति की प्रशिक्षण विधि का वर्णन कीजिए।
अथवा
गति के विकास की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए। अथवा
गति के विकास के लिए त्वरण दौड़ों का वर्णन कीजिए।
अथवा
त्वरण दौड़ों तथा पेस दौड़ों पर नोट लिखें।
उत्तर:
गति वह योग्यता या क्षमता है जिसके द्वारा एक ही प्रकार की गतिविधि को बार-बार तीव्र गति से किया जाता है। वास्तव में, किसी क्रिया को अधिक-से-अधिक तेज़ गति के साथ करने की योग्यता को गति कहा जाता है। अधिकतर खेलों में गति का प्रयोग किया जाता है। गति के विकास की विभिन्न विधियाँ निम्नलिखित हैं
1. त्वरण दौड़ें (Acceleration Races):
सामान्यतया गति के विकास के लिए त्वरण दौड़ें अपनाई जाती हैं, विशेष रूप से स्थिर अवस्था से अधिकतम गति प्राप्त करने के लिए इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी इवेन्ट की तकनीक शुरू में ही सीख लें। इस प्रकार की दौड़ों के लिए एथलीट या खिलाड़ी को एक विशेष दूरी की दौड़ लगानी होती है। वह स्टार्टिंग लाइन से स्टार्ट लेता है और जितनी जल्दी सम्भव हो सके, उतनी जल्दी अधिकतम गति प्राप्त करने का प्रयास करता है और उसी गति से निश्चित की हुई दूरी को पार करता है।

त्वरण दौड़ें बार-बार दौड़ी जाती हैं। इन दौड़ों के बीच में मध्यस्थ/अंतराल का समय काफी होता है। स्प्रिट लगाने वाले प्रायः स्थिर अवस्था के बाद से लेकर अधिकतम गति 6 सेकिण्ड में प्राप्त कर लेते हैं। इसका मतलब है कि स्टार्ट लेने से लेकर त्वरित करने तथा अधिकतम गति को बनाए रखने में 50 से 60 मी० की दूरी की आवश्यकता होती है। ऐसा प्रायः देखा गया है कि बहुत अच्छे खिलाड़ी/एथलीट केवल 20 मी० तक अपनी अधिकतम गति को बनाए रख सकते हैं। इन दौड़ों की संख्या खिलाड़ी/एथलीट की आयु, उसके अनुभव व उसकी क्षमता के अनुसार निश्चित की जा सकती है। यह संख्या 6 से 12 हो सकती है। त्वरण दौड़ में कम-से-कम दूरी 20 से 40 मीटर होती है। इन दौड़ों से पहले उचित गर्माना बहुत आवश्यक होता है। प्रत्येक त्वरण दौड़ के बाद उचित मध्यस्थ/अंतराल भी होना चाहिए, ताकि खिलाड़ी/एथलीट अगली दौड़ बिना किसी थकावट के लगा सके।

2. पेस दौड़ें (Pace Races):
पेस दौड़ों का अर्थ है-एक दौड़ की पूरी दूरी को एक निश्चित गति से दौड़ना। इन दौड़ों में एक खिलाड़ी/एथलीट दौड़ को समरूप या समान रूप से दौड़ता है। सामान्यतया 800 मी० व इससे अधिक दूरी की दौड़ें पेस दौड़ों में शामिल होती हैं। वास्तव में, एक एथलीट लगभग 300 मी० की दूरी पूरी गति से दौड़ सकता है। इसलिए मध्यम व लम्बी दौड़ों में; जैसे 800 मी० व इससे अधिक दूरी की दौड़ों में उसे अपनी गति में कमी करके अपनी ऊर्जा को संरक्षित रखना जरूरी है। उदाहरण के लिए, यदि एक 800 मी० की दौड़ लगाने वाला एथलीट है और उसका समय 1 मिनट 40 सेकिण्ड है, तो उसे पहली 400 मी० दौड़ 49 सेकिण्ड में तथा 400 मी० दौड़ 51 सेकिण्ड में लगानी चाहिए। यह प्रक्रिया ही पेस दौड़ कहलाती है। पेस दौड़ों की दोहराई खिलाड़ी की योग्यता के अनुसार निश्चित की जा सकती हैं।

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प्रश्न 4.
निरंतर प्रशिक्षण विधि क्या है? खिलाड़ियों में सहनशीलता के विकास में इस विधि का क्या योगदान है?
अथवा
निरंतर प्रशिक्षण विधि (Continuous Training Method) क्या है? इस विधि के लाभों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
निरंतर प्रशिक्षण विधि (Continuous Training Method):
निरंतर प्रशिक्षण विधि सहनशीलता को बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है। यह ऐसी विधि है जिसमें व्यायाम लंबी अवधि तक बिना रुके अर्थात् निरंतर किए जाते हैं। इस तरीके में सघनता बहुत कम होती है क्योंकि व्यायाम लंबी अवधि तक किया जाता है। क्रॉस-कंट्री दौड़ इस प्रकार के व्यायाम का सबसे अच्छा उदाहरण है। इस तरह के व्यायाम में हृदय की धड़कन की दर लगभग 140 से 160 प्रति मिनट होती है। व्यायाम करने की अवधि कम-से-कम 30 मिनट होनी आवश्यक है। एथलीट या खिलाड़ी की सहनशीलता की योग्यता के अनुसार व्यायाम करने की अवधि में बढ़ोतरी की जा सकती है।

निरंतर प्रशिक्षण विधि के लाभ (Advantages of Continuous Training Method): निरंतर प्रशिक्षण विधि के लाभ निम्नलिखित हैं-
(1) इस व्यायाम से माँसपेशियों तथा जिगर में ग्लाइकोजिन बढ़ जाता है।
(2) इससे हृदय तथा फेफड़ों की कार्यकुशलता में वृद्धि हो जाती है।
(3) इससे इच्छा-शक्ति दृढ़ हो जाती है तथा थकावट की दशा में लगातार काम करने से व्यक्ति दृढ़-निश्चयी बन जाता है।
(4) अच्छे परिणाम प्राप्त करने के लिए व्यायाम की सघनता को बढ़ाया जा सकता है।
(5) इससे व्यक्ति में आत्म-संयम, आत्म-अनुशासन व आत्म-विश्वास बढ़ने लगता है।

प्रश्न 5.
फार्टलेक प्रशिक्षण विधि का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
अथवा
फार्टलेक प्रशिक्षण विधि क्या है? खिलाड़ियों में सहनशीलता के विकास में इस विधि का क्या योगदान है?
अथवा
फार्टलेक प्रशिक्षण विधि से आप क्या समझते हैं? इस विधि के लाभों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
फार्टलेक प्रशिक्षण विधि (Fartlek Training Method):
फार्टलेक (Fartlek) स्वीडन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है-‘Speed Play’ अर्थात् ‘गति से खेलना’ इस प्रकार का प्रशिक्षण खिलाड़ी खेल के मैदान या जिम्नेजियम में नहीं करता। यह प्रशिक्षण घास के मैदान, पहाड़ों, रेतीली ज़मीन, जंगल आदि में लिया जाता है। इस प्रशिक्षण में शारीरिक शक्ति और सहनशीलता बढ़ाने के लिए दौड़ने के अतिरिक्त प्राकृतिक साधनों की सहायता से व्यायाम किए जाते हैं; जैसे पेड़ पर चढ़ना, नदी को पार करना, पहाड़ों पर चढ़ना व उतरना आदि। खिलाड़ियों में सहनशीलता के विकास में इस प्रशिक्षण विधि का विशेष योगदान है। इस प्रशिक्षण विधि का मुख्य लाभ खिलाड़ी को यह मिलता है कि वह रोज़ाना एक ही प्रकार के व्यायाम खेल के मैदान तथा जिम्नेजियम में करते-करते बोरियत अनुभव करता है, उससे उसे निजात मिलती है। वह इस परिवर्तित प्रशिक्षण के ढंग से उत्साहित होता है।

फार्टलेक प्रशिक्षण विधि में खिलाड़ी एक निश्चित दूरी तक दौड़ने का कार्यक्रम बनाते हैं। दूरी तय करने का समय निश्चित किया जाता है लेकिन पग के फासले तथा उनकी तीव्रता में फेर-बदल पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। दौड़ समाप्त करने का फैसला खिलाड़ी के स्तर को देखकर किया जाता है। प्रशिक्षण प्राप्तकर्ता धीमी गति से दौड़ प्रारम्भ करता है तथा उसको पगों में फेर-बदल करने की छूट होती है। इस दौड़ में केवल निश्चित समय में दौड़ समाप्त करने तथा मध्य में तीव्र गति की दौड़-दौड़ने पर जोर दिया जाता है। इस दौड़ के साथ प्रशिक्षक विभिन्न किस्म के व्यायाम जोड़ सकता है; जैसे एक टाँग पर छलाँग लगानी, दोनों पाँवों से छलाँग लगानी तथा दोहरी छलाँग आदि । व्यायाम का चयन खिलाड़ी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर करना चाहिए। फार्टलेक प्रशिक्षण विधि को गति का खेल (Speed Play) भी कहा जाता है।

फार्टलेक प्रशिक्षण विधि के लाभ (Advantages of Fartlek Training Method): फार्टलेक प्रशिक्षण विधि के लाभ निम्नलिखित हैं-
(1) खिलाड़ी अपनी इच्छानुसार गति तथा अन्य व्यायामों में फेर-बदल कर सकता है।
(2) इससे थकान का अनुभव नहीं होता।
(3) इसमें समय पर विशेष बल दिया जाता है।
(4) इससे चहुंमुखी विकास होता है।
(5) शरीर प्रत्येक कठोर व्यायाम अथवा प्रतियोगिता में भाग लेने के योग्य हो जाता है।
(6) इससे आत्म-विश्वास बढ़ता है।
(7) इससे नए अनुभव प्राप्त होते हैं और रचनात्मकता बढ़ती है।

निष्कर्ष (Conclusion):
इस प्रशिक्षण विधि के निष्कर्ष में यह कहा जाता है कि यह ऐसी ज़मीन पर करवाया जाता है जो कि प्रतियोगिता में प्रयुक्त किए जाने वाले ट्रैक (दौड़ पथ) से कोई सम्बन्ध न होने के कारण कोई लाभ नहीं होता। वास्तव में, जो व्यक्ति असमतल धरातल पर प्रशिक्षण करते हैं, वे बनाए गए बढ़िया ट्रैक पर सुगमतापूर्वक भाग ले सकते हैं। ऐसे खिलाड़ी बढ़िया प्रदर्शन कर सकते हैं। इससे खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता तथा सहनशीलता में वृद्धि होती है। यह प्रशिक्षण विधि सभी किस्मों के खेलकूद की गतिविधियों के लिए शक्ति तथा सहनशीलता बढ़ाने का एक बढ़िया साधन है।

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प्रश्न 6.
मध्यांतर/अंतराल विधि की सविस्तार व्याख्या कीजिए।
अथवा
अंतराल प्रशिक्षण विधि क्या है? खिलाड़ियों में सहनशीलता के विकास में इस विधि का प्रयोग कैसे किया जाता है?
अथवा
अंतराल प्रशिक्षण विधि (Interval Training Method) क्या है? इस विधि के लाभों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
अंतराल प्रशिक्षण विधि (Interval Training Method):
प्रसिद्ध एथलेटिक्स कोच बिकिला (Bikila) ने सन् 1920 में अंतराल प्रशिक्षण विधि की शुरुआत की। उन्होंने इसे टेरेस ट्रेनिंग (Terrace Training) का नाम दिया। वास्तव में यह विधि प्रयास व पुनः शक्ति प्राप्ति, फिर प्रयास व पुनः शक्ति प्राप्ति के सिद्धांत पर आधारित है। अंतराल प्रशिक्षण के समय खिलाड़ी को हर बार तेज गति के कार्य करने के बाद पुनः शक्ति प्राप्त करने हेतु समय प्रदान किया जाता है। खिलाड़ी की क्षमता के अनुसार पुनः शक्ति प्राप्त करने के समय को व्यवस्थित किया जा सकता है। पुनः शक्ति प्राप्ति का समय कम करके या बढ़ाकर भार को घटाया या बढ़ाया जा सकता है।

अतः पूरी गति से एक चक्कर ट्रैक का लगाकर दूसरा चक्कर धीरे-धीरे दौड़कर फिर एक गति पूर्ण, फिर धीरे-धीरे दौड़कर चक्र पूरा करने को अंतराल प्रशिक्षण कहते हैं। इसे तेज और धीरे दौड़ना भी कहते हैं। इस प्रशिक्षण में पाँच बातों का ध्यान रखना चाहिए-
(1) दूरी
(2) अंतराल
(3) दौड़ों के बीच आराम का समय
(4) तेज दौड़ों का समय
(5) आराम।
इस विधि का प्रयोग गति तथा सहनशीलता के विकास के लिए होता है। खिलाड़ी के लिए यह अति सुदृढ़ तथा प्रभावशाली प्रशिक्षण विधि है, परंतु इस विधि को अनुचित ढंग से अपनाने से उकताहट के कारण शारीरिक एवं मानसिक थकावट उत्पन्न होती है।

अंतराल प्रशिक्षण विधि के लाभ (Advantages of Interval Training Method):
इस प्रशिक्षण विधि के मुख्य लाभ निम्नलिखित प्रकार से हैं-
(1) अंतराल प्रशिक्षण विधि व्यक्ति की आवश्यकताओं के अनुसार बिना टीम के दबाव के चलाई जाने वाली व्यक्तिगत विधि है।
(2) इस प्रशिक्षण विधि में आवश्यक आराम के क्षणों में कमी करके शक्ति, क्षमता एवं धैर्य से विकास किया जा सकता है।
(3) इस प्रशिक्षण विधि से खिलाड़ी अपनी प्रगति का स्वयं अनुमान लगा सकता है।
(4) इस प्रशिक्षण विधि में नाड़ी की धड़कन को स्थिर बनाकर शीघ्र एकात्मक क्षमता को विकसित किया जा सकता है।
(5) इस प्रशिक्षण विधि के द्वारा थकावट के पश्चात् शीघ्र विश्राम पाने की क्षमता में वृद्धि की जा सकती है। .

प्रश्न 7.
गर्माने से आपका क्या अभिप्राय है? इसके महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
अथवा
वार्मिंग-अप से क्या अभिप्राय है? खिलाड़ियों के लिए इसके महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
गर्माने का अर्थ (Meaning of Warming-up):
किसी कार्य को सुचारु रूप से करने के लिए मांसपेशियों को उसके अनुरूप तैयार करना पड़ता है। इसे माँसपेशियों का गर्माना कहते हैं। अतः गर्माने का अर्थ है-शरीर को प्रतियोगिता अथवा कार्य के लिए उचित व्यवस्था में लाना। इससे अच्छे परिणाम निकलते हैं तथा शरीर को कोई आघात नहीं पहुँचता।

शरीर को गर्माने का महत्त्व (Importance of Warming-up): शरीर को गर्माने से हमारे शरीर पर अनेक लाभदायक प्रभाव पड़ते हैं-
(1) शरीर को गर्माने से श्वसन प्रक्रिया में आवश्यकतानुसार सुधार हो जाता है।
(2) शरीर को गर्माने से शरीर का तापमान बढ़ जाता है।
(3) खेल-प्रतियोगिता से पूर्व शरीर को गर्माना बहुत आवश्यक है। यदि शरीर को बिना गर्माए प्रतियोगिता में भाग लिया जाए तो खेल में चोट लगने की संभावना अधिक रहती है। अच्छी तरह शरीर को गर्माने से खिलाड़ी को अच्छा प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है और इससे शरीर में अधिक कार्य करने की क्षमता आ जाती है।
(4) रक्त संचार आवश्यकतानुसार बढ़ता है तथा अतिरिक्त कार्यभार के अनुरूप हो जाता है।
(5) शरीर व मांसपेशियों में तालमेल व सामंजस्य बनाए रखने के लिए शरीर को गर्माना आवश्यक है। इससे माँसपेशियाँ अनुकूल हो जाती हैं।
(6) इसके द्वारा शरीर के विभिन्न भागों व इन्द्रियों में आपसी तालमेल बढ़ जाता है।
(7) इससे फेफड़ों की साँस खींचने व छोड़ने की प्रक्रिया का विकास होता है।
(8) खेल प्रतियोगिता से पूर्व शरीर को गर्म करने से खिलाड़ी का अपने खेल मुकाबले के प्रति मानसिक तनाव कम हो जाता है जिससे उसका प्रदर्शन बढ़ जाता है।
(9) शरीर को गर्माने से पाचन क्रिया में सुधार होता है। शरीर को गर्माने से एक ओर तो भूख अधिक लगती है और दूसरी ओर भोजन अति शीघ्र पच जाता है।
(10) गर्माने से खिलाड़ी शारीरिक-मानसिक रूप से तैयार हो जाता है। शरीर को गर्माने से उसका भय खत्म हो जाता है और खेल खेलने के लिए उसमें आत्म-विश्वास या हौसला उत्पन्न हो जाता है।
(11) कसरत से मानवीय शरीर में लाल रक्ताणुओं और हीमोग्लोबिन की मात्रा में वृद्धि होती है। इनके बढ़ने से शरीर तंदुरुस्त और चुस्त रहता है। तंदुरुस्त और चुस्त शरीर खिलाड़ी की कुशलता में वृद्धि करता है।
(12) शरीर की अंदरुनी तोड़-फोड़ मानवीय शरीर को कमज़ोर और सुस्त बनाती है। इससे उसकी कार्यक्षमता में कमी आ जाती है। खेल से पहले गर्माना शरीर की अंदरुनी तोड़-फोड़ को ठीक करता है जिससे खिलाड़ी की कुशलता बढ़ती है।

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प्रश्न 8.
शरीर को गर्माने की विभिन्न क्रियाओं व विधियों का वर्णन कीजिए।
अथवा
गर्माने (वार्मिंग-अप) की विभिन्न व्यायाम क्रियाओं का ब्यौरा दें।
उत्तर:
किसी कार्य को सुचारु रूप से करने के लिए माँसपेशियों को उसके अनुरूप तैयार करना गर्माना कहलाता है। यदि शरीर को. बिना गर्माए कठोर व्यायाम किया जाए तो माँसपेशियों को चोट पहुँच सकती है या उनमें कोई विकार उत्पन्न हो सकता है।

गर्माने की क्रियाएँ/गतिविधियाँ (Exercises of Warming-up):
शरीर और माँसपेशियों को गर्माने के लिए निम्नलिखित क्रियाएँ/गतिविधियाँ सरल से कठिन के सिद्धांत पर आधारित हैं-
1. धीमी गति से दौड़ना या जॉगिंग (Running at Slow Speed or Jogging):
प्रत्येक खिलाड़ी को अपनी क्षमता और स्तर के अनुसार धीमी गति से दौड़ना चाहिए। निम्न स्तर के खिलाड़ी को दो-तीन चक्कर लगाने चाहिएँ। स्तर में वृद्धि के साथ चक्करों की संख्या में भी वृद्धि होनी चाहिए।

2. आसान व्यायाम (Simple Exercises):
धीमी गति से दौड़ने के पश्चात् खिलाड़ी को आसान व्यायाम करने चाहिएँ। ये व्यायाम हाथ, पैर, कंधे, कमर से संबंधित होने चाहिएँ। व्यायाम सरल से जटिल के अनुसार करने चाहिएँ।

3. स्ट्राइडिंग (Striding):
इस व्यायाम में खिलाड़ी को अपनी पूरी गति से दौड़ना चाहिए। इसमें लंबे तथा ऊँचे कदम लेने चाहिएँ। इस प्रकार का व्यायाम लगभग 60 से 80 मी० तक दौड़कर करना चाहिए तथा वापसी पर चलकर आना चाहिए। यह क्रिया 4 से 6 बार दोहरानी चाहिए। दौड़ते समय कदम लंबे, शरीर आगे की ओर तथा घुटने ऊपर उठाकर दौड़ना चाहिए।

4. खिंचाव वाले व्यायाम (Pulling Exercises): स्ट्राइडिंग के बाद शरीर के विभिन्न अंगों के व्यायाम करने चाहिएँ। इनमें मुड़ना, झुकना, खिंचाव तथा झटके वाले व्यायाम भी शामिल हैं।

5. विंड स्प्रिंट्स (Wind Sprints):
ये व्यायाम हवा के झोंकों की भांति रुक-रुककर 20-25 मीटर तीव्र गति से दौड़कर करने चाहिएँ। इनकी पुनरावृत्ति 4-6 बार होनी चाहिए। इसमें यह अनिवार्य है कि सदैव स्पाईक्स पहनकर ही चक्कर लगाने चाहिएँ न कि कपड़ों के जूते पहनकर।

उपर्युक्त पाँचों व्यायाम करने के बाद खिलाड़ी, धावक तथा एथलीट को 5-7 मिनट तक कार्यरत व्यायाम करना चाहिए। ये सब व्यायाम प्रतियोगिता की अंतिम पुकार से पूर्व कर लेने चाहिएँ। प्रतियोगिता में शांत मन से भाग लेना चाहिए और प्रतियोगिता के स्थान पर समय से पहुँच जाना चाहिए।

गर्माने की विधियाँ (Methods of Warming-up):
शरीर को गर्माने के लिए निम्नलिखित विधियों का प्रयोग किया जा सकता है-
1. वातानुकूलित स्थान पर शरीर को गर्माना (Warming-up of the Body in Air Conditioned Place):
जहाँ सारा साल बर्फ पड़ती है या मौसम खराब रहता है, वहाँ गर्माने के वैज्ञानिक साधन अपनाए जाते हैं, यथा खिलाड़ी या एथलीट गर्माने के लिए आवश्यकतानुसार कमरे में जाकर शरीर को गर्मा लेते हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के यंत्र भी कार्य में लाए जाते हैं।

2. मालिश द्वारा शरीर को गर्माना (Warming-up of the Body through Massage):
मालिश द्वारा शरीर को गर्माने की विधि बहुत पुरानी है। इस विधि से शरीर की मांसपेशियों को गर्माने से वे अर्ध-तनाव की स्थिति में आ जाती हैं जिससे कार्य तत्परता के साथ किया जाता है। इस विधि में एक बड़ी कठिनाई यह है कि मालिश या तो स्वयं खिलाड़ी को करनी चाहिए अथवा उसके किसी साथी को। हर समय मालिश वाले साथी का साथ संभव नहीं है।

3. गर्म पानी से गर्माना (Warming-up through Hot Water): गर्म पानी से नहाकर भी शरीर को गर्माया जा सकता है।

4. चाय व कॉफी आदि का सेवन (Drinking Tea & Coffee etc.):
कुछ लोगों का विचार है कि प्रतियोगिता से पूर्व चाय अथवा कॉफी पीने से भी शरीर को गर्माया जा सकता है, पर यह विधि वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं मानी जाती।

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प्रश्न 9.
शरीर को गर्माने के मुख्य सिद्धांत कौन-कौन-से हैं? वर्णन करें।
अथवा
गर्माने के मार्गदर्शक नियमों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शरीर को गर्माने के मुख्य सिद्धांत अथवा नियम निम्नलिखित हैं-
1. स्वास्थ्य (Health):
खिलाड़ी या एथलीट को गरम होने से पहले अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखना चाहिए। उसको अपने स्वास्थ्य के अनुसार ही व्यायाम करना चाहिए। अगर किसी कमजोर स्वास्थ्य वाले खिलाड़ी के शरीर को गर्माने के लिए कोई कठिन व्यायाम दे दिया जाए तो उससे शरीर को अच्छी तरह गर्माने की बजाय शरीर की अलग-अलग प्रणालियों में दोष उत्पन्न हो जाएंगे।

2. जलवायु संबंधी सिद्धांत (Principle Related to Climate):
किसी भी खिलाड़ी को गरम या ठंडे मौसम या मैदानी और पहाड़ी जलवायु को देखकर गर्माने वाले व्यायाम करने चाहिएँ।

3. क्रमानुसार (Systematic):
किसी भी खिलाड़ी को गर्माने वाले व्यायाम क्रमानुसार ही करने चाहिएँ। ये व्यायाम इस ढंग से करने चाहिएँ ताकि उस खिलाड़ी के शरीर के सारे अंगों का तापमान और खून की गति ठीक ढंग से काम करे।

4. शरीर के सारे अंगों से संबंधित व्यायाम (Exercises Pertaining to All Parts of Body):
किसी भी खिलाड़ी को गर्माने वाले व्यायाम इस तरीके से करने चाहिएँ कि खिलाड़ी के शरीर के सारे अंग गरम हो जाएँ। किसी भी खेल में भाग लेने से पहले शरीर के सभी अंगों को गर्माना बहुत जरूरी है।

5. व्यक्ति की क्षमता और प्रशिक्षण (Capacity and Training of Individual):
किसी भी खिलाड़ी को गर्माने से पहले यह देखना चाहिए कि उसका प्रशिक्षण किस अवस्था में चल रहा है और उसका अपना लक्ष्य क्या है? उसकी उद्देश्य अवस्था किस प्रकार की है? उसके प्रशिक्षण का कार्यक्रम कैसा चल रहा है? इन सभी बातों को ध्यान में रखकर ही उसको गर्माने वाले व्यायाम करने चाहिएँ।

6. प्रतियोगिता और काम करने की तीव्रता के अनुसार (According to Competition and Intensity of Work):
खेल प्रतियोगिता को ध्यान में रखकर ही हमें खिलाड़ी को गर्माने वाले व्यायाम करवाने चाहिएँ और यह भी देखना चाहिए कि कितने समय पहले गर्माना चाहिए, ताकि खिलाड़ी अपने खेल का बढ़िया प्रदर्शन कर सके।

7. आसान से जटिल का सिद्धांत (Principle of Simple to Complex):
खिलाड़ी को खेल में भाग लेने से पहले शरीर को इस तरीके से गर्माना चाहिए कि शरीर पर अधिक दबाव न पड़े, क्योंकि यदि आरंभ में ही अभ्यास में कठिनाई दे दी जाए तो माँसपेशियों में कई प्रकार के दोष उत्पन्न हो सकते हैं। इसी कारण हमें गर्माने के आसान से जटिल वाले सिद्धांत को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए।

8. ऊँचाई, आयु, भार और शरीर संरचना (Height, Age, Weight and Body Structure):
खिलाड़ी को गर्माने से पहले उसकी ऊँचाई, उसका भार, आयु और शरीर संरचना आदि देख लेनी चाहिए। छोटी उम्र के खिलाड़ी को वे व्यायाम नहीं दिए जा सकते जो 20-25 वर्ष के खिलाड़ी को दिए जाते हैं। इसी तरह एक महिला खिलाड़ी को वे व्यायाम नहीं दिए जाते जो एक पुरुष को दिए जाते हैं, क्योंकि दोनों की कार्यक्षमता एवं शरीर संरचना में अंतर होता है।

9. अन्य सिद्धांत (Other Principles):
शरीर को गर्माने के लिए खिंचाव या आसान वाले व्यायाम भी किए जाने चाहिएँ। गर्माने की क्रिया खेल के अनुसार होनी चाहिए। हमें शरीर को उतना ही गर्माना चाहिए, जिससे हमारे शरीर का तापमान खेल के अनुसार हो सके अर्थात् गर्माना उतना ही होना चाहिए जिससे हमें थकावट का अनुभव न हो। हमें गर्माने की प्रक्रिया में खेल संबंधी सभी व्यायामों को शामिल करना चाहिए।

प्रश्न 10.
गर्माने के शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन कीजिए।
अथवा
शरीर को गर्माने से हमारे शरीर पर क्या-क्या लाभदायक प्रभाव पड़ते हैं? वर्णन करें।
अथवा
गर्माने (वार्मिंग-अप) के शरीर क्रियात्मक तथा मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
गर्माने के शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों को दो भागों में बाँटा जा सकता है-
(क) शरीरक्रियात्मक प्रभाव (Physiological Effects)
(ख) मनोवैज्ञानिक प्रभाव (Psychological Effects)।

(क) शरीर क्रियात्मक प्रभाव (Physiological Effects):
गर्माने के शारीरिक क्रिया संबंधी प्रभाव निम्नलिखित हैं-
1.शरीर के तापमान में वृद्धि (Increase in Body Temperature):
गर्माने से माँसपेशियाँ गति में आ जाती हैं जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि खेल में अच्छे प्रदर्शन के लिए पहले गर्माना लाभदायक होता है।

2. लाल रक्ताणुओं में वृद्धि (Increase in the Red Blood Corpuscles):
कसरत से मानवीय शरीर में लाल रक्ताणुओं और हीमोग्लोबिन की मात्रा में वृद्धि होती है। इनके बढ़ने से शरीर तंदुरुस्त और चुस्त रहता है। तंदुरुस्त और चुस्त शरीर खिलाड़ी की कुशलता में वृद्धि करता है।

3. श्वास क्रिया में वृद्धि (Increase in the Respiration Process):
गर्माने से फेफड़ों से साँस लेने और बाहर निकालने की क्रिया में वृद्धि होती है। फेफड़े शुद्ध हवा अंदर रखकर गंदी वायु को शरीर से बाहर निकालते रहते हैं। जिस कारण शरीर से कई हानिकारक पदार्थ या गैस बाहर निकल जाती हैं। श्वास क्रिया में वृद्धि खिलाड़ी की निपुणता में वृद्धि करता है।

4. प्रतिक्रिया समय में वृद्धि (Increase in Reaction Time):
गर्माने से खिलाड़ी का मानसिक और मांसपेशियों का तालमेल बढ़ जाता है। इस तालमेल के बढ़ने से प्रतिक्रिया का समय बढ़ जाता है, जो कि खिलाड़ी के लिए खेल में अच्छा प्रदर्शन दिखाने के लिए आवश्यक होता है। तेज दौड़ में यह अत्यंत आवश्यक है।

5. माँसपेशियों का सिकुड़ना और आराम की अवस्था में वृद्धि (Increase in the Speed of Contraction and Relaxation of Muscles):
गर्माने से शरीर की सभी प्रणालियाँ प्रभावित होती हैं परंतु सबसे अधिक प्रभाव माँसपेशियों पर पड़ता है। रक्त सारे शरीर में जल्दी से पहुँचता है। जिस कारण माँसपेशियाँ जल्दी सिकुड़ती हैं और विश्राम की अवस्था में आ जाती हैं।

(ख) मनोवैज्ञानिक प्रभाव (Psychological Effects):
गर्माने से मानवीय शरीर पर निम्नलिखित मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ते हैं-
1. मानसिक तैयारी (Psycho Preparation):
खेलों में मानसिक तैयारी सबसे अधिक योगदान देती है। गर्माना एक प्रकार से खेल में भाग लेने की मानसिक तैयारी है। जो खिलाड़ी गर्माने के बिना क्रियाओं में भाग लेता है वह एकाग्र मन से नहीं खेल पाता, जिससे उसकी मेहनत सफल नहीं होती।

2. भीड़ के डर का प्रभाव (Effect of Crowd Fear):
भीड़ का डर एक मनोवैज्ञानिक डर है। यह डर प्रत्येक खिलाड़ी में खेल में भाग लेने से पहले होता है। परंतु कई लोगों में यह अधिक और कई लोगों में यह कम होता है। जब खिलाड़ी क्रिया में भाग लेने के लिए भीड़ के सामने गर्माना शुरू करता है तो उसका काफी डर दूर हो जाता है। वह मानसिक रूप से तैयार होना शुरू हो जाता है। यह तैयारी उसके प्रदर्शन में वृद्धि करती है।

3. हृदय-क्षमता में वृद्धि (Increase in Cardiac Efficiency):
गर्माना शरीर की सभी प्रणालियों को ठीक ढंग से काम करने के योग्य कर देता है। हृदय-क्षमता गर्माने से काफी प्रभावित होती है। गर्माने के बाद हृदय में रक्त की मात्रा अधिक होती है और इस क्रिया से दिल की माँसपेशियाँ अधिक ताकतवर बनती हैं। इससे हृदय की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 2 प्रशिक्षण विधियाँ

प्रश्न 11.
लिम्बरिंग डाउन से आप क्या समझते हैं? खिलाड़ियों के लिए लिम्बरिंग डाउन के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
अथवा
कूलिंग डाउन से आप क्या समझते हैं ? खिलाड़ियों के लिए कूलिंग डाउन क्यों आवश्यक है ? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लिम्बरिंग डाउन का अर्थ (Meaning of Limbering Down):
लिम्बरिंग या कूलिंग डाउन से तात्पर्य शरीर को व्यायामों द्वारा आराम की हालत में वापस लाना है। मुकाबले के दौरान शरीर का तापमान बढ़ जाता है। तापमान को सामान्य अवस्था में लाने के लिए धीरे-धीरे दौड़कर या चलकर ट्रैक का चक्कर लगाना चाहिए। इस तरह मुकाबले के दौरान बढ़ा हुआ तापमान सामान्य अवस्था में आ जाता है। शरीर को धीरे-धीरे ठंडा करने से थकावट जल्दी दूर होती है और माँसपेशियों की मालिश भी हो जाती है। उचित ढंग से कूलिंग डाउन करने के लिए हमें कम-से-कम 5 से 10 मिनट तक जॉगिंग या वॉकिंग करनी चाहिए। इसके बाद स्थिर खिंचाव वाले व्यायाम भी लगभग 5 से 10 मिनट तक करने चाहिएँ।

लिम्बरिंग डाउन का महत्त्व या आवश्यकता (Importance or Need of Limbering Down):
किसी प्रतियोगिता या प्रशिक्षण से पूर्व जिस.प्रकार शरीर को गर्माना आवश्यक होता है उसी प्रकार प्रतियोगिता या प्रशिक्षण के बाद कूलिंग डाउन भी उतना ही आवश्यक होता है। अन्य शब्दों में यह कहा जा सकता है कि कूलिंग डाउन एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण क्रिया है जिसकी खिलाड़ी प्रायः उपेक्षा करते हैं। वास्तव में कूलिंग डाउन को खेल क्रिया या प्रशिक्षण के बाद कम नहीं आँकना चाहिए, क्योंकि खेल प्रतिस्पर्धा प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों की खर्च की गई शक्ति या ऊर्जा वापिस आती है अर्थात् इससे खिलाड़ी अपनी शक्ति को पुनः प्राप्त करता है। संक्षेप में, खिलाड़ियों के लिए इसकी आवश्यकता या महत्ता निम्नलिखित है…
(1) काफी तीव्र गति एवं जटिल प्रशिक्षण या प्रतियोगिता के दौरान शरीर का तापमान लगभग 160° फॉरेनहाइट या इससे कुछ अधिक हो जाता है। उचित कूलिंग डाउन शरीर के बढ़े तापमान को कम करने में सहायता करती है। इसलिए खिलाड़ियों के लिए इसकी अति आवश्यकता है।

(2) जब भी कोई खिलाड़ी किसी प्रतियोगिता में भाग लेता है या नियमित अभ्यास करता है तो उसके शरीर में व्यर्थ के पदार्थः जैसे लैक्टिक एसिड, यूरिक एसिड, फॉस्फेट व कार्बन-डाइऑक्साइड आदि का जमाव हो जाता है। शरीर में इनके अधिक जमाव से माँसपेशियाँ भली-भाँति कार्य नहीं कर सकतीं। कूलिंग डाउन से इन पदार्थों का उचित निष्कासन हो जाता है।

(3) मुकाबले में भाग लेने से शरीर की काफी ताकत खर्च होती है। शरीर थकावट और सुस्ती महसूस करता है। कार्बोहाइड्रेट्स का बहुत अधिक हिस्सा खर्च हो जाता है। कूलिंग डाउन से शरीर की ताकत की पूर्ति की जा सकती है।

(4) कूलिंग डाउन करने से दिमागी तनाव में कमी आ जाती है। खेल के दौरान तनाव होना स्वाभाविक होता है। इसके साथ-साथ गर्माने से अर्ध-तनाव की दशा में आने वाली माँसपेशियाँ भी तनाव-रहित हो जाती हैं। इस प्रकार कूलिंग – डाउन से दिमाग व माँसपेशियों के तनाव में कमी आती है।

(5) खेल के दौरान शरीर में सामान्य अवस्था की अपेक्षा ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। कूलिंग डाउन से ऑक्सीजन की पूर्ति हो जाती है।

(6) वार्मिंग अप के दौरान रक्त में एड्रिनलिन नामक हॉर्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे रक्त के बहाव की गति तेज हो जाती ..है, लेकिन कूलिंग डाउन से रक्त में एड्रिनलिन का स्तर कम हो जाता है, जिससे रक्त का बहाव भी सामान्य हो जाता है।

(7) खिलाड़ियों के लिए कूलिंग डाउन करना अति आवश्यक है। खेल प्रतियोगिता या वार्मिंग अप के दौरान माँसपेशियाँ अकड़ जाती है। कूलिंग डाउन करने से माँसपेशियाँ कठोर (Stiff) नहीं रहतीं, बल्कि ढीली (Relax) या शिथिल हो जाती हैं।

प्रश्न 12.
ठण्डा करना (Cooling Down) क्या है? इसके शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर:
ठण्डा करने का अर्थ (Meaning of Cooling Down):
ठण्डा करने (Cooling Down) से तात्पर्य शरीर को व्यायामों द्वारा आराम की हालत में वापस लाना है। मुकाबले के दौरान शरीर का तापमान बढ़ जाता है। तापमान को अपनी वास्तविकता में लाने के लिए धीरे-धीरे दौड़कर या चलकर ट्रैक का चक्कर लगाना चाहिए। इस तरह मुकाबले के दौरान बढ़ा हुआ तापमान सामान्य अवस्था में आ जाता है।

कूलिंग/लिम्बरिंग या ठण्डा करने से शरीर पर पड़ने वाले लाभदायक प्रभाव (Advantageous Effects of Cooling Down on Body):
ठण्डा करने से शरीर पर पड़ने वाले लाभदायक प्रभाव निम्नलिखित हैं-
1. माँसपेशियों के लचीलेपन में वृद्धि (Increase in Flexibility in Muscles):
जब खिलाड़ी खेलों में भाग लेता है तो उसकी माँसपेशियों में तनाव बना होता है। तनाव बढ़ने से माँसपेशियों में खिंचाव पैदा होता है। शरीर को व्यायाम द्वारा ठण्डा करने से तनाव एवं खिंचाव दूर होता है। इस प्रकार माँसपेशियों में लचीलापन आ जाता है।

2. हृदय-गति और शरीर के तापमान का साधारण अवस्था में आना (To Normalise the Heart Beating Rate and Body Temperature):
मुकाबले के दौरान खिलाड़ी के हृदय की धड़कन और शरीर का तापमान बहुत बढ़ जाता है। शरीर को व्यायामों द्वारा ठण्डा करने से शरीर का तापमान और दिल की धड़कन सामान्य हो जाती है।

3. भिन्न-भिन्न शारीरिक प्रणालियों का साधारण कार्यक्रम (Normal Function of Different Body System):
कसरतों के दौरान शरीर की भिन्न-भिन्न प्रणालियाँ तेजी से काम करती हैं जिससे शरीर में अतिरिक्त पदार्थ पैदा हो जाते हैं। शरीर में तनाव और थकावट के चिह्न पैदा हो जाते हैं और शरीर सुस्त हो जाता है। अलग-अलग प्रणालियों को अपने सही स्थान पर लाने के लिए कसरतों द्वारा ठण्डा करने से तनाव और थकावट दूर होती है, और शरीर फिर चुस्ती में आ जाता है।

4. मानसिक तनाव में कमी (Decrease in Mental Tension):
कसरतों के दौरान सभी प्रणालियाँ साधारण अवस्था से अधिक कार्य कर रही होती हैं। जिस कारण शरीर में मानसिक तनाव बढ़ा होता है। कसरतों से शरीर को ठण्डा करने से सारी प्रणालियाँ अपनी पहली अवस्था में आ जाती हैं जिससे मानसिक तनाव समाप्त हो जाता है।

5. खर्च की गई ताकत की पूर्ति (Regaining of Spending Energy):
मुकाबले में भाग लेने से शरीर की काफी ताकत खर्च होती है। शरीर थकावट और सुस्ती महसूस करता है, क्योंकि क्रिया द्वारा ऑक्सीजन काफी मात्रा में खर्च हो जाती है। कार्बोहाइड्रेट्स का बहुत अधिक हिस्सा खर्च हो जाता है। क्रिया के बाद लंबे-लंबे साँस लेकर ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाना जरूरी है। संतुलित भोजन खाने से शरीर की ताकत की पूर्ति की जा सकती है।

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प्रश्न 13.
खिलाड़ियों के लिए गर्माना क्यों आवश्यक है? विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उत्तर:
खिलाड़ियों के लिए गर्माना बहुत आवश्यक है, क्योंकि इससे खिलाड़ियों को निम्नलिखित फायदे होते हैं-
(1) खेल से पूर्व शरीर को गर्माने से माँसपेशियाँ अर्ध-तनाव की स्थिति में आ जाती हैं, जिससे प्रतियोगिता के दौरान शरीर को आघात पहुँचने की संभावना कम हो जाती है।
(2) बढ़िया स्तर के प्रदर्शन के लिए माँसपेशियों को गर्माना आवश्यक होता है, क्योंकि गर्माने से माँसपेशियों की कार्यक्षमता बढ़ती है।
(3) अच्छी तरह शरीर को गर्माने से खिलाड़ी को अच्छा प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है और इससे शरीर में अधिक कार्य करने की क्षमता आ जाती है।
(4) रक्त संचार आवश्यकतानुसार बढ़ता है तथा अतिरिक्त कार्यभार के अनुरूप हो जाता है।
(5) शरीर व माँसपेशियों में तालमेल व सामंजस्य बनाए रखने के लिए शरीर को गर्माना आवश्यक है। इससे माँसपेशियाँ अनुकूल हो जाती हैं।
(6) इसके द्वारा शरीर के विभिन्न भागों व इन्द्रियों में आपसी तालमेल बढ़ जाता है।
(7) इससे फेफड़ों की साँस खींचने व छोड़ने की प्रक्रिया का विकास होता है।
(8) खेल प्रतियोगिता से पूर्व शरीर को गर्म करने से खिलाड़ी का अपने खेल मुकाबले के प्रति मानसिक तनाव कम हो जाता है जिससे उसका प्रदर्शन बढ़ जाता है।
(9) शरीर को गर्माने से पाचन क्रिया में सुधार होता है। शरीर को गर्माने से एक ओर तो भूख अधिक लगती है और दूसरी ओर भोजन अति शीघ्र पच जाता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न [Short Answer Type Questions]

प्रश्न 1.
प्रशिक्षण के अर्थ व अवधारणा का संक्षिप्त रूप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वास्तव में प्रशिक्षण’ शब्द कोई नया शब्द नहीं है। लोग इस शब्द को प्राचीन समय से प्रयोग कर रहे हैं। प्रशिक्षण का अर्थ किसी कार्य की तैयारी की प्रक्रिया से है। यहाँ हमारा मुख्य कार्य खेलकूद के लिए शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता प्रदान करना है। इसी कारण यह शब्द खेलकूद के क्षेत्र में अधिक प्रयोग किया जाता है। प्रशिक्षण’ की धारणा और खिलाड़ी की तैयारी’ आपस में मिलती-जुलती हैं लेकिन फिर भी ये एक-दूसरे की पूरक नहीं हैं। तैयारी एक जटिल प्रक्रिया है। यह खिलाड़ी के विकास को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है तथा काफी हद तक सफलता के लिए एकाग्रता को बढ़ाती है। इस कठिन प्रक्रिया में, खेल प्रशिक्षण, खेल प्रतियोगिताएँ (तैयारी के रूप में) और पौष्टिक व संतुलित आहार आदि शामिल किए जाते हैं। दूसरे शब्दों में, अनेक व्यायामों सहित यह एक सुव्यवस्थित एवं योजनापूर्ण तैयारी होती है। शारीरिक व्यायाम, जिसका प्रशिक्षण में प्रयोग किया जाता है, का खिलाड़ी के शारीरिक विकास पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। इसका अर्थ यह है कि शारीरिक व्यायाम या प्रशिक्षण खिलाड़ी का शारीरिक विकास करता है।

प्रश्न 2.
मानव की जिंदगी में खेल व मनोरंजन क्यों महत्त्वपूर्ण हैं? स्पष्ट कीजिए।
अथवा
खेल व मनोरंजन की आवश्यकता तथा महत्त्व का वर्णन कीजिए।
अथवा
मनोरंजन पर एक संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर:
खेल व मनोरंजन ऐसी प्रक्रियाएँ हैं जो विश्व के प्रत्येक स्थान पर अनुभव की जाती हैं। बिना खेल व मनोरंजन के व्यक्ति का जीवन नीरस व निरर्थक है। स्वस्थ व नीरोग रहने हेतु खेल व मनोरंजन आवश्यक होते हैं। ये वे गतिविधियाँ हैं जिनमें भाग लेकर व्यक्ति आनंद की अनुभूति करता है और अपने जीवन को खुशियों से भरपूर व तरोताजा करने की कोशिश करता है। खेल गतिविधियों में हम अपनी अतिरिक्त शक्ति व समय का उचित प्रयोग करते हैं और मनोरंजन के माध्यम से हम गतिविधियों द्वारा खोई हुई ऊर्जा या शक्ति पुनः प्राप्त कर आनंद की अनुभूति करते हैं। एडवर्ड्स के शब्दों में, “मनोरंजन वह गतिविधि है जिसमें कोई कर्ता स्वेच्छा से शामिल होता है तथा जो दैनिक जीवन में मानसिक-शारीरिक दबाव बनाने वाली अन्य गतिविधियों से अलग होती है। इस गतिविधि का प्रभाव मन अथवा शरीरको तरोताजा करने वाला होता है।”खेल व मनोरंजन के बिना जिंदगी नीरस हो जाती है और व्यक्ति गलत गतिविधियों की ओर आकर्षित हो जाता है। खेल व मनोरंजन गतिविधियों में भाग लेकर हम अपने अतिरिक्त समय का उचित प्रयोग करते हैं और जीवन को सार्थक व सफल बनाने हेतु प्रयास करते हैं। इसलिए हमारी जिंदगी में खेल और मनोरंजन बहुत महत्त्वपूर्ण एवं आवश्यक हैं।

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प्रश्न 3.
खेल प्रशिक्षण की अवधारणा का संक्षेप में उल्लेख करें।
अथवा
खेल प्रशिक्षण को परिभाषित करें और इसके संप्रत्यय का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मार्टिन के अनुसार खेल प्रशिक्षण लक्ष्य की प्राप्ति हेतु एक नियोजित व नियंत्रित प्रक्रिया है जिसमें प्रशिक्षक (कोच) द्वारा प्रशिक्षार्थी को खेलकूद के जटिल प्रदर्शनों व व्यवहार में निहित परिवर्तनों को संचालित करने के बारे में जानकारी दी जाती है। सामान्य शब्दों में, खेल प्रशिक्षण के द्वारा एक सामान्य व्यक्ति को उत्कृष्ट व श्रेष्ठ खिलाड़ी में परिवर्तित किया जा सकता है परिवर्तन की इसी प्रक्रिया को खेल प्रशिक्षण कहा जाता है। खेल प्रशिक्षण की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं-
1. डॉ० हरदयाल सिंह के अनुसार, “खेल प्रशिक्षण अध्ययन से संबंधित प्रक्रिया है जो वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है जिसका मुख्य उद्देश्य खेल मुकाबलों में उच्चतम प्रदर्शन करने के लिए खिलाड़ियों को तैयार करना है।”
2. हरे के अनुसार, “खेल प्रशिक्षण खेलकूद विकास की ऐसी प्रक्रिया है जो वैज्ञानिक सिद्धांतों पर संचालित की जाती है जिनके माध्यम से मानसिक-शारीरिक दक्षता, क्षमता व प्रेरणा के योजनाबद्ध विकास से खिलाड़ियों को उत्कृष्ट व स्थापित कीर्तिमान तोड़ने वाले खेल प्रदर्शन में सहायता मिलती है।”

प्रश्न 4.
आइसोमीट्रिक व्यायाम क्या होते हैं? उदाहरण दीजिए।
अथवा
आइसोमीट्रिक व्यायामों के बारे में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आइसोमीट्रिक व्यायाम वे व्यायाम होते हैं जिनमें खिलाड़ी द्वारा किया गया व्यायाम या कार्य नजर नहीं आता। ऐसे व्यायाम में तनाव की अधिकता तथा तापमान में वृद्धि की संभावना रहती है। हमारे अत्यधिक बल लगाने पर भी वस्तु अपने स्थान से नहीं हिलती। उदाहरणार्थ, एक ट्रक को धकेलने के लिए एक व्यक्ति बल लगाता है, परंतु वह अत्यधिक भारी होने के कारण अपनी जगह से नहीं हिलता, परंतु तनाव बना रहता है जिससे हमारी ऊर्जा का व्यय होता है। कई बार हमारे शरीर का तापमान भी बढ़ जाता है। ऐसे व्यायाम करने से माँसपेशियों की लंबाई तथा मोटाई बढ़ जाती है। आइसोमीट्रिक व्यायाम के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं-
(1) बंद दरवाजों को धकेलना
(2) पीठ से दीवार को दबाना
(3) पैरलल बार को पुश करना
(4) दीवार या जमीन पर उँगली, कोहनी या कंधा दबाना
(5) कुर्सी को दोनों हाथों से अंदर की ओर दबाना
(6) घुटने मोड़ना
(7) डैस्क को हाथ, उँगली, पैर या पंजे से दबाना आदि।

प्रश्न 5.
आइसोकाइनेटिक व्यायाम से आप क्या समझते हैं? यह अधिक प्रचलित क्यों है?
अथवा
आइसोकाइनेटिक व्यायाम क्या हैं? उदाहरण दें।
उत्तर:
आइसोकाइनेटिक व्यायाम आइसोमीट्रिक एवं आइसोटोनिक व्यायामों का मिश्रण हैं। इनमें मध्यम रूप में भार रहता है ताकि माँसपेशियाँ ‘Bulk’ और ‘Tone’ दोनों रूप में वृद्धि कर सकें। ये अत्यंत आधुनिक व्यायाम हैं जिनमें पहले दोनों प्रकार के व्यायामों का लाभ मिल जाता है। इनसे हम अपने शरीर को गर्मा भी सकते हैं। इनके उदाहरण हमें दैनिक जीवन में भी देखने को मिल सकते हैं; जैसे (1) बर्फ पर स्केटिंग करना
(2) भार ढोना
(3) चिन-अप
(4) भारी रोलर धकेलना
(5) रस्सी पर चलना आदि।
आइसोकाइनेटिक व्यायाम अधिक प्रचलित हैं, क्योंकि ये आधुनिक समय के व्यायाम हैं। आजकल विकसित देश इन व्यायामों का अधिक-से-अधिक प्रयोग कर रहे हैं, क्योंकि इन व्यायामों के उदाहरण हमारे दैनिक जीवन में भी मिल जाते हैं।

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प्रश्न 6.
आइसोटोनिक व आइसोमीट्रिक व्यायामों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
आइसोटोनिक व आइसोमीट्रिक व्यायामों में अन्तर इस प्रकार हैं-

आइसोटोनिक व्यायामआइसोमीट्रिक व्यायाम
1. आइसोटोनिक व्यायाम वे होते हैं जिनमें किसी खिलाड़ी की गतिविधियाँ प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देती हैं।1. आइसोमीट्रिक व्यायाम वे होते हैं जिनमें किसी खिलाड़ी की गतिविधियाँ प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देती।
2. इस प्रकार के व्यायामों में माँसपेशियों की लम्बाई घटती-बढ़ती हुई दिखाई देती है।2. इस प्रकार के व्यायामों में माँसपेशियों की लम्बाई में कोई परिवर्तन नहीं होता।
3. इस प्रकार के व्यायामों को कहीं पर भी किया जा सकता है और इनमें बहुत-ही कम उपकरणों की आवश्यकता होती है।3. इस प्रकार के व्यायामों को उपकरणों के साथ और बिना उपकरणों के भी किया जा सकता है।
4. उदाहरण
(i) किसी बॉल को फेंकना,
(ii) दौड़ना-भागना,
(iii) भार उठाना आदि।
4. उदाहरण
(i) पक्की दीवार को धकेलने की कोशिश करना,
(ii) पीठ से दीवार को दबाना,
(iii) पैरलल बार को पुश करना आदि।

प्रश्न 7.
निरंतर प्रशिक्षण विधि पर संक्षेप में एक नोट लिखें।
उत्तर:
निरंतर प्रशिक्षण विधि सहनशीलता को बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है। इस तरीके में व्यायाम लंबी अवधि तक बिना रुके अर्थात् निरंतर किया जाता है। इस तरीके में सघनता बहुत कम होती है क्योंकि व्यायाम लंबी अवधि तक किया जाता है। क्रॉस-कंट्री दौड़ इस प्रकार के व्यायाम का सबसे अच्छा उदाहरण है। इस तरह के व्यायाम में हृदय की धड़कन की दर लगभग 140 से 160 प्रति मिनट होती है। व्यायाम करने की अवधि कम-से-कम 30 मिनट होनी आवश्यक है। एथलीट या खिलाड़ी की सहनशीलता की योग्यता के अनुसार व्यायाम करने की अवधि में बढ़ोतरी की जा सकती है। इस विधि से हृदय तथा फेफड़ों की कार्यकुशलता में वृद्धि हो जाती है। इससे इच्छा-शक्ति दृढ़ हो जाती है तथा थकावट की दशा में लगातार काम करने से व्यक्ति दृढ़-निश्चयी बन जाता है। इससे व्यक्ति में आत्म-संयम, आत्म-अनुशासन व आत्म-विश्वास बढ़ने लगता है।

प्रश्न 8.
अंतराल प्रशिक्षण विधि के लाभदायक प्रभाव बताएँ।
उत्तर:
अंतराल प्रशिक्षण विधि के लाभदायक प्रभाव निम्नलिखित हैं-
(1) अंतराल प्रशिक्षण विधि व्यक्ति की आवश्यकताओं के अनुसार बिना टीम के दबाव के चलाई जाने वाली व्यक्तिगत विधि है।
(2) इस प्रशिक्षण विधि से खिलाड़ी अपनी प्रगति का स्वयं अनुमान लगा सकता है।
(3) इस प्रशिक्षण विधि में नाड़ी की धड़कन को स्थिर बनाकर शीघ्र एकात्मक क्षमता को विकसित किया जा सकता है।
(4) इस प्रशिक्षण विधि के द्वारा थकावट के पश्चात् शीघ्र विश्राम पाने की क्षमता में वृद्धि की जा सकती है।
(5) इस प्रशिक्षण विधि में आवश्यक आराम के क्षणों में कमी करके शक्ति, क्षमता एवं धैर्य से विकास किया जा सकता है।

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प्रश्न 9.
फार्टलेक प्रशिक्षण विधि के लाभों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
फार्टलेक प्रशिक्षण विधि के लाभ निम्नलिखित हैं
(1) खिलाड़ी अपनी इच्छानुसार गति तथा अन्य व्यायामों में फेर-बदल कर सकता है।
(2) इससे थकान का अनुभव नहीं होता।
(3) इसमें समय पर विशेष बल दिया जाता है।
(4) खिलाड़ी में अधिक शक्ति अथवा क्षमता बनाई जाती है।
(5) इससे चहुंमुखी विकास होता है।
(6) शरीर प्रत्येक कठोर व्यायाम अथवा प्रतियोगिता में भाग लेने के योग्य हो जाता है।

प्रश्न 10.
शरीर को गर्माने के क्या-क्या फायदे हैं?
अथवा
शरीर को गर्माना क्यों आवश्यक है? व्याख्या कीजिए।
अथवा
माँसपेशियों को गर्माने की आवश्यकता क्यों होती है?
अथवा
खेलने से पूर्व शरीर को गर्माना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
खेल से पूर्व शरीर को गर्माने से माँसपेशियाँ अर्ध-तनाव की स्थिति में आ जाती हैं, जिससे प्रतियोगिता के दौरान शरीर को आघात पहुँचने की संभावना कम हो जाती है इसलिए शरीर को गर्माना आवश्यक है। शरीर को गर्माने के निम्नलिखित फायदे होते हैं-
(1) बढ़िया स्तर के प्रदर्शन के लिए माँसपेशियों को गर्माना आवश्यक होता है, क्योंकि गर्माने से माँसपेशियों की कार्यक्षमता बढ़ती है।
(2) शरीर से मानसिक तनाव व दबाव कम होता है।
(3) माँसपेशियों में लचक आ जाती है और उनके फैलने व सिकुड़ने की ताकत बढ़ती है।
(4) शरीर का मन एवं माँसपेशियों के साथ तालमेल बना रहता है।
(5) शरीर में किसी भी प्रकार की चोट लगने का भय नहीं रहता। मन और शरीर कठोर कार्य करने में सक्षम हो जाते हैं और दोनों में संतुलन बना रहता है।
(6) इससे शारीरिक तथा मानसिक तैयारी होती है।

प्रश्न 11.
गर्माने की प्रमुख किस्में कौन-सी हैं? अथवा गर्माने के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
गर्माना दो प्रकार का होता है
1. मनोवैज्ञानिक या मानसिक गर्माना-खेल मुकाबले से पहले खिलाड़ी को मनोवैज्ञानिक रूप से मुकाबले के लिए तैयार करना मनोवैज्ञानिक गर्माना कहलाता है। इसमें विभिन्न मनोवैज्ञानिक विधियों द्वारा खिलाड़ी की मानसिक तैयारी हो जाती है।

2. शारीरिक गर्माना-शारीरिक गर्माने में शारीरिक माँसपेशियों को मुकाबले में पड़ने वाले दबाव के लिए तैयार किया जाता है। शारीरिक गर्माना निम्नलिखित दो विधियों द्वारा किया जाता है
(1) सकर्मक या सक्रिय गर्माना-सकर्मक गर्माना में शारीरिक कसरतों और मुकाबलों की तैयारी की जाती है। इसे मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है-
(i) सामान्य गर्माना-सामान्य गर्माने से हमारा उद्देश्य उन क्रियाओं को करने से है जो सभी खेलों के लिए लगभग एक जैसी हो सकती हैं; जैसे धीमी गति से दौड़ना, हाथ-पैर घुमाना, खिंचाव वाली क्रियाएँ करना। ये क्रियाएँ किसी भी खेल को शुरू करने से पहले की जाती हैं।
(ii) विशेष गर्माना-विशेष गर्माना उस समय शुरू किया जाता है जब सामान्य गर्माना समाप्त कर लिया जाता है। इसका उद्देश्य खिलाड़ी को उस खेल के लिए शारीरिक रूप से तैयार करना होता है जो अभी खेली जानी होती है। इस प्रकार के विशेष गर्माने में शरीर के उन अंगों और मांसपेशियों को लेना चाहिए जिनका प्रयोग विशेष प्रकार के प्रशिक्षण और मुकाबले की स्थितियों में विशेष रूप से होता है।

(2) अकर्मक या निष्क्रिय गर्माना-अकर्मक गर्माना में खिलाड़ी द्वारा कोई शारीरिक कसरत नहीं की जाती। इसमें खिलाड़ी
बैठकर ही अपने शरीर को गर्म कर मुकाबले के लिए तैयार करता है; जैसे
(i) दवाइयों द्वारा गर्माना
(ii) मालिश द्वारा गर्माना,
(iii) गर्म पानी से नहाकर गर्माना
(iv) अल्ट्रा किरणों द्वारा गर्माना आदि।

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प्रश्न 12.
गर्माना और अनुकूलन में क्या अंतर है? स्पष्ट करें।
उत्तर:
गर्माना और अनुकूलन देखने में एक-जैसी क्रियाएँ लगती हैं। इसलिए इन दोनों में कोई अंतर नहीं लगता, लेकिन ऐसा नहीं है। इन दोनों में बहुत अंतर है; जैसे-

गर्माना (Warming-up)अनुकूलन (Conditioning)
1. गर्माना में किसी क्रिया को करने से उसकी इंद्रियाँ अभ्यस्त नहीं होती।1. अनुकूलन में किसी क्रिया को लगातार करने से उसकी इंद्रियाँ अभ्यस्त हो जाती हैं।
2. गर्माना एक अल्पकालिक क्रिया है अर्थात् इसमें क्रिया थोड़े समय के लिए होती है।2. अनुकूलन एक दीर्घकालिक क्रिया है अर्थात् इसमें क्रिया लंबे समय के लिए होती है।
3. इसमें क्रिया प्रत्येक व्यायाम से पहले करते हैं।3. इसमें क्रिया खेलने के कार्यक्रम को शुरू करवाने से पहले करवाई जाती है।

प्रश्न 13.
गर्माने से शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
गर्माने से शरीर पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं-
(1) शरीर के विभिन्न अंगों व इंद्रियों में आपसी तालमेल बढ़ जाता है।
(2) श्वास प्रक्रिया संस्थान में आवश्यकतानुसार सुधार आ जाता है।
(3) हृदय अधिक कार्य करने की क्षमता में आ जाता है।
(4) रक्त संचार बढ़कर अतिरिक्त कार्य के अनुरूप हो जाता है।
(5) माँसपेशियाँ अर्ध-तनाव स्थिति में आकर अनुकूल हो जाती हैं।
(6) रक्त में लैक्टिक अम्ल का जमाव कम हो जाता है।
(7) कार्यकुशलता में सुधार आता है तथा कार्य विशेष के लिए ऑक्सीजन की कम आवश्यकता पड़ती है।

प्रश्न 14.
शरीर ठण्डा करने के लाभों का वर्णन कीजिए। अथवा प्रतियोगिता के बाद कूलिंग डाउन के लाभ या महत्त्व बताएँ।
उत्तर:
शरीर ठण्डा करने या प्रतियोगिता के बाद कूलिंग डाउन के लाभ निम्नलिखित हैं-
(1) शरीर ठण्डा करने से शारीरिक प्रणालियाँ सामान्य रूप से कार्य करने के योग्य हो जाती हैं।
(2) शरीर का तापमान सामान्य हो जाता है।
(3) हृदय की धड़कन भी सामान्य हो जाती है।
(4) दिमागी या मानसिक तनाव कम हो जाता है।
(5) मुकाबला करने का भय समाप्त हो जाता है।
(6) माँसपेशियों में लचीलापन आ जाता है।
(7) रक्त संचार प्रवाह ठीक रहता है।
(8) शरीर की थकावट सामान्य हो जाती है।

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 2 प्रशिक्षण विधियाँ

प्रश्न 15.
अनुकूलन का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
अथवा
अनुकूलन का शारीरिक अंगों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
अनुकूलन का शारीरिक अंगों अथवा शरीर पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ता है-
(1) इससे रक्त-संचार ठीक ढंग से होता है। इससे शरीर में अतिरिक्त कार्य करने की शक्ति में वृद्धि होती है।
(2) माँसपेशियाँ अर्द्ध-खिंचाव की हालत में रहने लगती हैं जिससे माँसपेशियों में अनुकूलन हो जाता है।
(3) इससे शरीर के विभिन्न अंगों और इन्द्रियों में तालमेल बढ़ता है।
(4) अनुकूलन से हृदय की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।
(5) श्वास प्रक्रिया में आवश्यकतानुसार सुधार आता है। इससे श्वास क्रिया नियमित होती है।

प्रश्न 16.
त्वरण दौड़ों की गति के विकास में क्या भूमिका है? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सामान्यतया गति के विकास के लिए त्वरण दौड़ें अपनाई जाती हैं, विशेष रूप से स्थिर अवस्था से अधिकतम गति प्राप्त करने के लिए इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी इवेन्ट की तकनीक शुरू में ही सीख लें। इस प्रकार की दौड़ों के लिए एथलीट या खिलाड़ी को एक विशेष दूरी की दौड़ लगानी होती है। वह स्टाटिंग लाइन से स्टार्ट लेता है और जितनी जल्दी सम्भव हो सके, उतनी जल्दी अधिकतम गति प्राप्त करने का प्रयास करता है और उसी गति से निश्चित की हुई दूरी को पार करता है।

त्वरण दौड़ें बार-बार दौड़ी जाती हैं। इन दौड़ों के बीच में मध्यस्थ/अंतराल का समय काफी होता है। स्प्रिंट लगाने वाले प्रायः स्थिर अवस्था के बाद से लेकर अधिकतम गति 6 सेकिण्ड में प्राप्त कर लेते हैं। इसका मतलब है कि स्टार्ट लेने से लेकर त्वरित करने तथा अधिकतम गति को बनाए रखने में 50 से 60 मी० की दूरी की आवश्यकता होती है। ऐसा प्रायः देखा गया है कि बहुत अच्छे खिलाड़ी/एथलीट केवल 20 मी० तक अपनी अधिकतम गति को बनाए रख सकते हैं। इन दौड़ों की संख्या खिलाड़ी/एथलीट की आयु, उसके अनुभव व उसकी क्षमता के अनुसार निश्चित की जा सकती है। यह संख्या 6 से 12 हो सकती है। त्वरण दौड़ में कम-से-कम दूरी 20 से 40 मीटर होती है। इन दौड़ों से पहले उचित गर्माना बहुत आवश्यक होता है। प्रत्येक त्वरण दौड़ के बाद उचित मध्यस्थ/अंतराल भी होना चाहिए, ताकि खिलाड़ी/एथलीट अगली दौड़ बिना किसी थकावट के लगा सके।

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न [Very Short Answer Type Questions]

प्रश्न 1.
प्रशिक्षण का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:प्रशिक्षण का अर्थ किसी कार्य की तैयारी की प्रक्रिया से है। ‘प्रशिक्षण’ की धारणा और खिलाड़ी की तैयारी’ आपस में मिलती-जुलती हैं लेकिन फिर भी ये एक-दूसरे की पूरक नहीं हैं । तैयारी एक जटिल प्रक्रिया है। यह खिलाड़ी के विकास को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। सामान्यतया प्रशिक्षण खेलों में प्रदर्शन की बढ़ोतरी के लिए किए जाने वाले शारीरिक व्यायामों से संबंधित होता है।

प्रश्न 2.
प्रशिक्षण के मुख्य सिद्धांतों का उल्लेख करें।
उत्तर:
(1) निरंतरता का सिद्धांत
(2) विशिष्टता का सिद्धांत
(3) व्यक्तिगत भेद का सिद्धांत
(4) अतिभार का सिद्धांत
(5) सामान्य व विशिष्ट तैयारी का सिद्धांत आदि।

प्रश्न 3.
प्रशिक्षण के कोई दो उद्देश्य लिखें।
उत्तर:
(1) उत्तम स्वास्थ्य का विकास करना
(2) व्यक्तिगत, मानसिक तथा भावात्मक विकास करना।

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प्रश्न 4.
डॉ० हदयाल सिंह के अनुसार खेल प्रशिक्षण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
डॉ० हरदयाल सिंह के अनुसार, “खेल प्रशिक्षण अध्ययन से संबंधित प्रक्रिया है जो वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है जिसका मुख्य उद्देश्य खेल मुकाबलों में उच्चतम प्रदर्शन करने के लिए खिलाड़ियों को तैयार करना हैं।”

प्रश्न 5.
प्रशिक्षण की विधियों को सूचीबद्ध करें।
उत्तर:
(1) निरंतर प्रशिक्षण विधि
(2) अंतराल प्रशिक्षण विधि
(3) फार्टलेक प्रशिक्षण विधि
(4) सर्किट प्रशिक्षण विधि
(5) भार प्रशिक्षण विधि आदि।

प्रश्न 6.
गर्माना क्या है?
अथवा
शरीर को गर्माने (Warming-up) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
किसी कार्य को सुचारु रूप से करने के लिए माँसपेशियों को उसके अनुरूप तैयार करना पड़ता है। इसे माँसपेशियों का गर्माना कहते हैं। इससे अच्छे परिणाम निकलते हैं तथा शरीर को कोई आघात नहीं पहुँचता। यदि शरीर को बिना गर्माए कठोर व्यायाम किया जाए तो माँसपेशियों को कई बार चोट पहुँच सकती है अथवा कोई विकार उत्पन्न हो सकता है। अत: गर्माना वह क्रिया है जिसको मुकाबले के तनाव में दबे हुए और मुकाबले की माँग को पूरा करने के लिए खेल मुकाबले में भाग लेने वालों को शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक ढंग से तैयार किया जाता है।

प्रश्न 7.
गर्माना अभ्यास आप कैसे करेंगे?
उत्तर:
आरंभ में धीमी गति से दौड़ना चाहिए। धीमी गति से दौड़ने के बाद आसान व्यायाम करने चाहिएँ। इन व्यायामों को करते समय किसी प्रकार के झटके का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इसके बाद खिंचाव वाले व्यायाम और विंड स्प्रिंट्स आदि क्रियाएँ करनी चाहिए।

प्रश्न 8.
गर्माना किस प्रकार ठण्डा होने से भिन्न है?
उत्तर:
(1) गर्माने से शरीर का तापमान बढ़ जाता है जबकि ठण्डा होने से शरीर का तापमान कम हो जाता है।
(2) गर्माने से हृदय की धड़कन बढ़ती है जबकि ठण्डा होने से हृदय की धड़कन सामान्य हो जाती है।

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प्रश्न 9.
मनोवैज्ञानिक गर्माना क्या है?
अथवा
मानसिक गर्माना क्या है?
अथवा
मनोवैज्ञानिक गर्माना कैसे किया जाता है?
उत्तर:
खेल मुकाबले से पहले खिलाड़ी को मनोवैज्ञानिक या मानसिक रूप से मुकाबले के लिए तैयार करना मनोवैज्ञानिक या मानसिक गर्माना कहलाता है। भिन्न-भिन्न विधियाँ; जैसे कोच द्वारा खिलाड़ी को प्रेरित करना, उसके व्यवहार को संतुलन में लाना तथा फीडबैक द्वारा खिलाड़ी की मानसिक या मनोवैज्ञानिक तैयारी हो जाती है। उसके मन से मुकाबले का डर निकाल देना मनोवैज्ञानिक उत्साह भरने के लिए आवश्यक होता है।

प्रश्न 10.
शारीरिक गर्माना क्या होता है? अथवा शारीरिक गर्माना कैसे किया जाता है?
उत्तर:
शारीरिक गर्माने में मुकाबले के लिए शारीरिक माँसपेशियों को मुकाबले में पड़ने वाले दवाब के लिए तैयार किया जाता है। शारीरिक गर्माना निम्नलिखित दो विधियों द्वारा किया जाता है
1. सकर्मक या सक्रिय गर्माना-सकर्मक गर्माना में शारीरिक कसरतों और मुकाबलों की तैयारी की जाती है।
2. अकर्मक या निष्क्रिय गर्माना-अकर्मक गर्माना में खिलाड़ी द्वारा कोई शारीरिक कसरत नहीं की जाती। इसमें खिलाड़ी बैठकर ही अपने शरीर को गर्म कर मुकाबले के लिए तैयार करता है।

प्रश्न 11.
स्ट्राइडिंग (Striding) क्या है?
उत्तर:
स्ट्राइडिंग व्यायाम में खिलाड़ी को अपनी पूरी गति से दौड़ना चाहिए। इसमें लंबे तथा ऊँचे कदम लेने चाहिएँ। इस प्रकार का व्यायाम लगभग 60 से 80 मी० तक दौड़कर करना चाहिए तथा वापसी पर चलकर आना चाहिए। यह क्रिया 4 से 6 बार दोहरानी चाहिए। दौड़ते समय कदम लंबे, शरीर आगे की ओर तथा घुटने ऊपर उठाकर दौड़ना चाहिए।

प्रश्न 12.
विंड स्प्रिंट्स (Wind Sprints) से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
विंड स्प्रिंट्स का अर्थ है-हवा की गति के समान दौड़ना। विंड स्प्रिंट्स लगाते समय हवा की गति के समान अर्थात् पूरी क्षमता से 20-25 मीटर तक दौड़ना चाहिए। यह क्रिया चार से छः बार तक की जानी चाहिए। यह क्रिया हमेशा कीलदार जूते पहनकर की जानी चाहिए।

प्रश्न 13.
सामान्य गर्माने से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
‘सामान्य शरीर गर्माने से हमारा उद्देश्य उन क्रियाओं को करने से है जो सभी खेलों के लिए लगभग एक जैसी हो सकती हैं; जैसे धीमी गति से दौड़ना, हाथ-पैर घुमाना, खिंचाव वाली क्रियाएँ करना। ये क्रियाएँ किसी भी खेल को शुरू करने से पहले की जाती हैं। ये खिलाड़ी को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करती हैं।

प्रश्न 14.
विशेष गर्माने से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
विशेष गर्माना उस समय शुरू किया जाता है जब सामान्य गर्माना समाप्त कर लिया जाता है। इसका उद्देश्य खिलाड़ी को उस खेल के लिए शारीरिक रूप से तैयार करना होता है जो अभी खेली जानी होती है। इस प्रकार के विशेष गर्माने में शरीर के उन अंगों और माँसपेशियों को लेना चाहिए जिनका प्रयोग विशेष प्रकार के प्रशिक्षण और मुकाबले की स्थितियों में विशेष रूप से होता है। यदि खिलाड़ी अपनी गति में सुधार लाने का लक्ष्य रखता है तो उसे विशेष क्रियाओं के द्वारा शरीर में धीरे-धीरे प्रचण्डता लानी होगी। ये क्रियाएँ साधारण गर्माना से अधिक महत्त्वपूर्ण हैं। इन्हें मालिश, गर्म पानी अथवा भाप से नहाने से अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है।

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प्रश्न 15.
सामान्य तथा विशेष गर्माने में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर:
सामान्य गर्माने संबंधी क्रियाएँ सभी प्रकार के खेलों हेतु एक-सम्मान होती हैं। ये खिलाड़ी को शारीरिक-मानसिक रूप से तैयार करती हैं, जबकि विशेष गर्माने संबंधी क्रियाएँ सभी प्रकार के खेलों हेतु भिन्न-भिन्न होती हैं। इनका उद्देश्य खिलाड़ी को उस खेल के लिए शारीरिक रूप से तैयार करना होता है जो अभी-अभी खेला जाना हो।

प्रश्न 16.
शरीर को ठण्डा करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
शरीर को ठण्डा करना निम्नलिखित कारणों से आवश्यक है
(1) रक्त संचार की प्रक्रिया सामान्य करना
(2) माँसपेशियों की मालिश करना
(3) माँसपेशियों में लचीलापन आ जाना
(4) मानसिक तनाव दूर होना।

प्रश्न 17.
लिम्बरिंग या कूलिंग डाउन क्या है?
अथवा
शरीर को ठण्डा करने से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
लिम्बरिंग डाउन या ठण्डा करने से तात्पर्य शरीर को व्यायामों द्वारा आराम की हालत में वापस लाना है। मुकाबले के दौरान शरीर का तापमान बढ़ जाता है। तापमान को अपनी वास्तविकता में लाने के लिए धीरे-धीरे दौड़कर या चलकर ट्रैक का चक्कर लगाना चाहिए। इस तरह मुकाबले के दौरान बढ़ा हुआ तापमान साधारण अवस्था में आ जाता है। शरीर को धीरे-धीरे ठण्डा करने से थकावट जल्दी दूर होती है और माँसपेशियों की मालिश भी हो जाती है।

प्रश्न 18.
अनुकूलन (Conditioning) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जब किसी कार्य या व्यायाम को निरंतर करने से इंद्रियाँ उसकी अभ्यस्त हो जाती हैं और वह कार्य अधिक ध्यान दिए बिना या बिना ध्यान दिए अपने-आप ही होता जाता है, इस अवस्था को अनुकूलन कहते हैं। उदाहरणस्वरूप जब एक टाइपिस्ट अपनी कला में निपुण हो जाता है तो बिना की-बोर्ड देखे ही टाइप करता रहता है। इसे अनुकूलन का नाम दिया जाता है।

प्रश्न 19.
आइसोमीट्रिक व्यायाम किसे कहते हैं? उदाहरण दें।
अथवा
आइसोमीट्रिक कसरतों से क्या भाव है? इनके उदाहरण लिखें।
अथवा
आइसोमीट्रिक व्यायामों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आइसोमीट्रिक व्यायाम वे व्यायाम होते हैं जिनमें खिलाड़ी द्वारा किया गया व्यायाम या कार्य नजर नहीं आता। ऐसे व्यायाम में तनाव की अधिकता तथा तापमान में वृद्धि की संभावना रहती है। हमारे द्वारा अत्यधिक बल लगाने पर भी वस्तु अपने स्थान से नहीं हिलती।
उदाहरण:
(1) बंद दरवाजों को धकेलना
(2) पीठ से दीवार को दबाना
(3) पैरलल बार को पुश करना आदि।

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प्रश्न 20.
आइसोटोनिक व्यायाम क्या होते हैं? उदाहरण दें।
अथवा
आइसोटोनिक कसरतों से क्या अभिप्राय है? इनके उदाहरण लिखें।
उत्तर:
आइसोटोनिक व्यायामों में खिलाड़ी की गतिविधियाँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। इन व्यायामों का उद्देश्य माँसपेशियों की कार्यक्षमता में वृद्धि करना होता है। इनसे माँसपेशियों तथा जोड़ों में लचक आती है। इन कसरतों को समशक्ति जोर भी कहते हैं। शरीर को गर्माने के लिए इन व्यायामों का विशेष महत्त्व होता है।
उदाहरण:
(1) हल्के भार के व्यायाम करना
(2) हल्का बोझ उठाना
(3) झूला झूलना आदि।

प्रश्न 21.
आइसोटोनिक व्यायाम कितने प्रकार के होते हैं? नाम बताएँ।
अथवा
कंसैंट्रिक अभ्यास एक्सैंट्रिक अभ्यास से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
आइसोटोनिक व्यायाम या अभ्यास दो प्रकार के होते हैं
1. कंसैंट्रिक व्यायाम-कंसैंट्रिक व्यायाम वे व्यायाम होते हैं जिनसे माँसपेशियाँ खिंचाव के कारण सिकुड़कर छोटी हो जाती हैं। ऐसा प्रायः हल्के-फुल्के एवं तीव्र गति के व्यायामों में होता है।
2. एक्सैंट्रिक व्यायाम-कठोर तथा नियंत्रित क्रियाओं जैसे कि कार या स्कूटर चलाना आदि में आपसी विरोधाभास माँसपेशियों में परिवर्तन के साथ-साथ तनाव बढ़ाता है उसे एक्सैंट्रिक व्यायाम कहते हैं।

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प्रश्न 22.
सर्किट प्रशिक्षण और अन्तराल प्रशिक्षण में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर:
सर्किट प्रशिक्षण अनुकूलन का ही भाग माना जाता है। यह ऐसी प्रणाली है जिसमें खिलाड़ी एक के बाद दूसरी क्रिया करते हैं। इनके बीच आराम किया जा सकता है परन्तु अन्तराल प्रशिक्षण विधि में किसी एक व्यायाम को बार-बार किया जाता है परन्तु गति में अन्तर पाया जा सकता है।

प्रश्न 23.
क्या गर्माना लचीलेपन को बढ़ाता है?
उत्तर:
हाँ, गर्माना लचीलेपन को बढ़ाता है। शरीर को अच्छे से गर्माने से शरीर में लचकता बढ़ती है। यदि कोई खिलाड़ी प्रतियोगिता से पूर्व अपने शरीर को अच्छे से न गर्माए तो इससे उसके शरीर में लचक कम होती है, जिस कारण वह खेल में अच्छे परिणाम देने में असफल हो सकता है। विश्राम या आराम की स्थिति में हम अपने अंगों को अधिक नहीं मोड़ पाते, लेकिन गर्माने के बाद हम अपने अंगों को अधिक मोड़ पाते हैं, क्योंकि गर्माने से शरीर में लचकता बढ़ जाती है। अतः स्पष्ट है कि गर्माना लचीलेपन को बढ़ाता है।

प्रश्न 24.
फार्टलेक प्रशिक्षण विधि क्या है? उदाहरण दें।
अथवा
फार्टलेक प्रशिक्षण विधि पर संक्षिप्त नोट लिखें।
उत्तर:
फार्टलेक प्रशिक्षण विधि क्रॉस-कंट्री दौड़ पर आधारित है तथा दौड़ के साथ-साथ कई अन्य व्यायाम भी इसमें शामिल हैं। यह प्रशिक्षण खिलाड़ी की आयु, क्षमता आदि देखकर दिया जाता है। इस विधि में कदमों के फासले या दूरी और तीव्रता आदि में फेर-बदल करके दौड़ का कार्यक्रम बनता है। भागते-भागते जमीन से कोई वस्तु उठाना, भागते-भागते आधी बैठक लगाना, एक टाँग से दौड़ना, दोनों पैरों से कूद लगाना, हाथ ऊपर करके भागना आदि इसके उदाहरण हैं।

प्रश्न 25.
पेस दौड़ के बारे में आप क्या जानते हैं?
अथवा
पेस दौड़ों पर नोट लिखें।
अथवा
गति को विकसित करने में पेस दौड़ों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पेस दौड़ों का अर्थ है-एक दौड़ की पूरी दूरी को एक निश्चित गति से दौड़ना। इन दौड़ों में एक खिलाड़ी/एथलीट दौड़ को समरूप या समान रूप से दौड़ता है। सामान्यतया 800 मी० व इससे अधिक दूरी की दौड़ें पेस दौड़ों में शामिल होती हैं। वास्तव में, एक एथलीट लगभग 300 मी० की दूरी पूरी गति से दौड़ सकता है। इसलिए मध्यम व लम्बी दौड़ों में; जैसे 800 मी० व इससे अधिक दूरी की दौड़ों में उसे अपनी गति में कमी करके अपनी ऊर्जा को संरक्षित रखना जरूरी है। उदाहरण के लिए, यदि एक 800 मी० की दौड़ लगाने वाला एथलीट है और उसका समय 1 मिनट 40 सेकिण्ड है, तो उसे पहली 400 मी० दौड़ 49 सेकिण्ड में तथा 400 मी० दौड़ 51 सेकिण्ड में लगानी चाहिए। यह प्रक्रिया ही पेस दौड़ कहलाती है। पेस दौड़ों की दोहराई खिलाड़ी की योग्यता के अनुसार निश्चित की जा सकती हैं।

प्रश्न 26.
त्वरण दौड़ें क्या हैं?
उत्तर:
त्वरण दौड़ों से त्वरण योग्यता में वृद्धि हो जाती है। त्वरण योग्यता विस्फोटक शक्ति, तकनीक तथा लचक पर निर्भर करती है। इस योग्यता में वृद्धि करने के लिए छोटी दौड़ों का उपयोग किया जा सकता है। प्रायः तेज धावक अपनी अधिकतम गति स्थिर अवस्था के बाद से 6 सेकिण्ड में प्राप्त कर लेते हैं। युवा धावक अपनी त्वरण योग्यता में त्वरण दौड़ों के द्वारा वृद्धि कर सकते हैं। त्वरण दौड़ों की संख्या, एथलीट की आयु व उसके अनुभव के अनुसार निश्चित की जा सकती है।

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प्रश्न 27.
अंतराल प्रशिक्षण विधि की कोई दो विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:
(1) इसमें धावक के लिए दूरी निश्चित की जाती है।
(2) बीच में दो या तीन मिनट का समय पुनः शक्ति प्राप्त करने के लिए निश्चित कर दिया जाता है।

प्रश्न 28.
सहनशीलता के विकास की विभिन्न विधियों के नाम बताएँ।
उत्तर:
(1) निरंतर प्रशिक्षण विधि (Continuous Training Method)
(2) अंतराल प्रशिक्षण विधि (Interval Training Method)
(3) फार्टलेक प्रशिक्षण विधि (Fartlek Training Method)।

प्रश्न 29.
क्या कूलिंग डाउन से मानसिक तनाव कम होता है?
उत्तर:
हाँ, कूलिंग डाउन से मानसिक तनाव कम होता है। खेल मुकाबले के दौरान सभी शारीरिक प्रणालियाँ सामान्य अवस्था से अधिक कार्य कर रही होती हैं, जिस कारण मानसिक तनाव बढ़ जाता है। कूलिंग डाउन से सभी प्रणालियाँ अपनी पहले वाली अवस्था में आ जाती हैं, जिससे मानसिक तनाव कम व दूर होता है।

HBSE 12th Class Physical Education प्रशिक्षण विधियाँ Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रश्न [Objective Type Questions]

भाग-1: एक शब्द/वाक्य में उत्तर दें-

प्रश्न 1.
हमारा शरीर किसकी तरह है?
उत्तर:
हमारा शरीर एक मशीन की तरह है।

प्रश्न 2.
शरीर गर्माना कितने प्रकार का होता है?
उत्तर:
शरीर गर्माना दो प्रकार का होता है-
(1) सकर्मक गर्माना
(2) अकर्मक गर्माना।

प्रश्न 3.
शरीर को गर्माने से किसमें फैलाव आता है?
उत्तर:
शरीर को गर्माने से माँसपेशियों में फैलाव आता है।

प्रश्न 4.
आइसोकाइनेटिक व्यायाम का जन्मदाता कौन है?
उत्तर:
आइसोकाइनेटिक व्यायाम का जन्मदाता पेरिन है।

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प्रश्न 5.
लगातार कार्य करते रहने से शरीर में अभ्यस्तता आ जाती है, उसे क्या कहते हैं?
उत्तर:
लगातार कार्य करते रहने से शरीर में अभ्यस्तता आ जाती है, उसे अनुकूलन कहते हैं।

प्रश्न 6.
गर्माने में किन अंगों का व्यायाम करना चाहिए?
उत्तर:
गर्माने में शरीर के लगभग सभी अंगों का व्यायाम करना चाहिए।

प्रश्न 7.
फार्टलेक प्रशिक्षण विधि सर्वप्रथम किस देश ने अपनाई?
उत्तर:
फार्टलेक प्रशिक्षण विधि सर्वप्रथम स्वीडन ने अपनाई।

प्रश्न 8.
वे व्यायाम, जिनमें खिलाड़ी की गतिविधियाँ या कार्य स्पष्ट दिखाई दें, उन्हें क्या कहते हैं?
अथवा
किस प्रकार के व्यायामों में गतियाँ प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देती हैं?
उत्तर:
आइसोटोनिक व्यायाम।

प्रश्न 9.
ऐसे व्यायाम जिनमें खिलाड़ी की प्रत्यक्ष क्रिया दिखाई नहीं देती, उन्हें क्या कहते हैं?
अथवा
किस प्रकार के व्यायाम में गतियाँ प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देती हैं?
उत्तर:
आइसोमीट्रिक व्यायाम।

प्रश्न 10.
त्वरण दौड़ में कम-से-कम कितनी दूरी होती है?
उत्तर:
त्वरण दौड़ में लगभग 20 से 40 मीटर दूरी होती है।

प्रश्न 11.
तैयारी किस प्रकार की प्रक्रिया है?
उत्तर:
तैयारी एक जटिल प्रक्रिया है।

प्रश्न 12.
शरीर को गर्माने के दो उदाहरण दें।
उत्तर:
(i) जॉगिंग
(ii) विंड स्प्रिंट्स।

प्रश्न 13.
सर्वप्रथम अंतराल प्रशिक्षण विधि की शुरुआत किस देश में हुई?
उत्तर:
सर्वप्रथम अंतराल प्रशिक्षण विधि की शुरुआत फिनलैंड में हुई।

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प्रश्न 14.
अंतराल प्रशिक्षण विधि किस सिद्धांत पर आधारित है?
उत्तर:
अंतराल प्रशिक्षण विधि प्रयास व पुनः शक्ति प्राप्ति, फिर प्रयास व पुनः शक्ति प्राप्ति के सिद्धांत पर आधारित है।

प्रश्न 15.
क्या गर्माने से माँसपेशियों में तालमेल बढ़ जाता है?
अथवा
क्या गर्माना माँसपेशियों की गति को बढ़ाता है?
उत्तर:
हाँ, गर्माना माँसपेशियों की गति को बढ़ाता है, क्योंकि इससे माँसपेशियों में तालमेल व सामंजस्य बढ़ जाता है।

प्रश्न 16.
क्या आर्द्रता प्रतिदिन के अभ्यास को प्रभावित करती है?
उत्तर:
हाँ, आर्द्रता प्रतिदिन के अभ्यास को प्रभावित करती है।

प्रश्न 17.
क्या गर्माना शक्ति या ऊर्जा को बढ़ाता है?
उत्तर:
गर्माना शक्ति या ऊर्जा को बढ़ाता है, क्योंकि इससे माँसपेशियों में संकुचन और प्रसार की शक्ति बढ़ जाती है।

प्रश्न 18.
बिकिला कौन था?
उत्तर:
बिकिला फिनलैंड के एथलेटिक्स कोच थे। इन्होंने हमें सन् 1920 में अंतराल प्रशिक्षण विधि से परिचित करवाया।

प्रश्न 19.
क्या गर्माना प्रदर्शन का स्तर कम करता है?
उत्तर:
नही, गर्माना प्रदर्शन का स्तर कम नहीं करता, बल्कि बढ़ाता है।

प्रश्न 20.
अंतराल प्रशिक्षण विधि की शुरुआत कब और किसने की?
उत्तर:
अंतराल प्रशिक्षण विधि की शुरुआत सन् 1920 में बिकिला ने की।

प्रश्न 21.
क्या लिम्बरिंग डाउन से माँसपेशियों से तनाव दूर होता है?
उत्तर:
हाँ, लिम्बरिंग डाउन से माँसपेशियों से तनाव दूर होता है।

प्रश्न 22.
पेरीन द्वारा किस प्रकार के व्यायामों को विकसित किया गया?
उत्तर:
पेरीन द्वारा आइसोकाइनेटिक व्यायामों को विकसित किया गया।

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प्रश्न 23.
किसी प्रतियोगिता या प्रशिक्षण से पहले नियमित रूप से कौन-सी क्रिया करनी चाहिए?
उत्तर:
प्रतियोगिता या प्रशिक्षण से पहले नियमित रूप से वार्मिंग-अप क्रिया करनी चाहिए।

प्रश्न 24.
किसी प्रतियोगिता या प्रशिक्षण के बाद नियमित रूप से कौन-सी क्रिया करनी चाहिए?
अथवा
शारीरिक क्रियाओं अथवा खेल खेलने के बाद शरीर को सामान्य अवस्था में लाने की प्रक्रिया का क्या नाम है?
अथवा
शारीरिक क्रियाकलाप या खेल खेलने के बाद शरीर को सामान्य अवस्था में लाने की प्रक्रिया का क्या नाम है?
अथवा
कौन-सी क्रिया में शरीर का तापमान सामान्य हो जाता है?
उत्तर:
लिम्बरिंग या कूलिंग डाउन।

प्रश्न 25.
अंतराल प्रशिक्षण को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
अंतराल प्रशिक्षण को टेरेस प्रशिक्षण के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 26.
निरंतर प्रशिक्षण विधि में हृदय की धड़कन की दर कितनी होती है?
उत्तर:
निरंतर प्रशिक्षण विधि में हृदय की धड़कन की दर 140 से 160 प्रति मिनट होती है।

प्रश्न 27.
किस प्रशिक्षण विधि में माँसपेशियों तथा यकृत में ग्लाइकोजेन बढ़ जाता है?
उत्तर:
निरंतर प्रशिक्षण विधि में माँसपेशियों तथा यकृत में ग्लाइकोजेन बढ़ जाता है।

प्रश्न 28.
आइसोटोनिक व्यायाम का कोई एक लाभ बताएँ।
उत्तर:
माँसपेशियों की कार्यक्षमता में वृद्धि होना।

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प्रश्न 29.
आइसोमीट्रिक व्यायाम सर्वप्रथम कब और किसने आरंभ की?
उत्तर:
आइसोमीट्रिक व्यायाम सर्वप्रथम सन् 1953 में हैटिंजर ने आरंभ की।

प्रश्न 30.
आइसोमीट्रिक व्यायाम का कोई एक लाभ बताएँ।
उत्तर:
आइसोमीट्रिक व्यायाम में कम समय लगता है अर्थात् इसमें समय की बचत होती है।

प्रश्न 31.
आइसोटोनिक व्यायाम कब और किसने आरंभ की?
उत्तर:
आइसोटोनिक व्यायाम सन् 1954 में डी लून ने आरंभ की।

प्रश्न 32.
आइसोकाइनेटिक व्यायाम कब आरंभ हुई?
उत्तर:
आइसोकाइनेटिक व्यायाम सन् 1968 में आरंभ हुई।

प्रश्न 33.
शरीर को कब गर्माना चाहिए?
उत्तर:
शरीर को खेल प्रतियोगिता से पूर्व गर्माना चाहिए।

प्रश्न 34.
‘फार्टलेक’ किस भाषा का शब्द है?
उत्तर:
‘फार्टलेक’ स्वीडिश भाषा का शब्द है।

प्रश्न 35.
गर्माने का कोई एक सिद्धांत बताएँ।
उत्तर:
सरल से जटिल का सिद्धांत।

प्रश्न 36.
‘पीठ से दीवार को दबाना’ किस व्यायाम का उदाहरण है?
उत्तर:
आइसोमीट्रिक व्यायाम का।

प्रश्न 37.
आइसोटोनिक व्यायाम कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
आइसोटोनिक व्यायाम दो प्रकार के होते हैं।

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प्रश्न 38.
“जिम्नास्टिक क्रियाएँ’ किस व्यायाम की उदाहरण हैं?
उत्तर:
आइसोटोनिक व्यायाम की।

प्रश्न 39.
बलिस्टिक विधि किसके सुधार की विधि है?
उत्तर:
लचीलापन।

प्रश्न 40.
फार्टलेक प्रशिक्षण विधि में हृदय-गति क्या रहती है?
उत्तर:
फार्टलेक प्रशिक्षण विधि में हृदय-गति 140-180 के बीच प्रति मिनट रहती है।

प्रश्न 41.
फार्टलेक प्रशिक्षण विधि को ‘स्पीड प्ले’ किसने कहा?
उत्तर:
सन् 1930 में स्वीडन के गोस्ट होल्मर ने।

प्रश्न 42.
‘झूला झूलना’ किस व्यायाम का उदाहरण है?
उत्तर:
आइसोटोनिक व्यायाम का।

प्रश्न 43.
‘भारी रोलर धकेलना’ किस व्यायाम का उदाहरण है?
उत्तर:
आइसोकाइनेटिक व्यायाम का।

प्रश्न 44.
‘बर्फ पर स्केटिंग करना’ किस व्यायाम का उदाहरण है?
उत्तर:
आइसोकाइनेटिक व्यायाम का।

प्रश्न 45.
‘बंद दरवाजे को धकेलना’ किस व्यायाम का उदाहरण है?
उत्तर:
आइसोमीट्रिक व्यायाम का।

प्रश्न 46.
‘कूदना, दौड़ना व हल्का भार उठाना’ किस व्यायाम के उदाहरण हैं?
उत्तर;’
आइसोटोनिक व्यायाम के।

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प्रश्न 47.
‘डैस्क या मेज आदि को हाथ, कोहनी या पैर से दबाना’ किस व्यायाम के उदाहरण हैं?
उत्तर:
आइसोमीट्रिक व्यायाम के।

भाग-II : सही विकल्प का चयन करें-

1. प्रशिक्षण का अर्थ है
(A) किसी कार्य की तैयारी की प्रक्रिया
(B) किसी कार्य को करने के बारे में जानकारी
(C) किसी कार्य की रूपरेखा
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(A) किसी कार्य की तैयारी की प्रक्रिया

2. तैयारी किस प्रकार की प्रक्रिया है?
(A) जटिल
(B) मिश्रित
(C) आसान
(D) तीव्र
उत्तर:
(A) जटिल

3. गर्माने की कितनी किस्में होती हैं?
(A) सात
(B) पाँच
(C) तीन
(D) दो
उत्तर:
(D) दो

4. शारीरिक अभ्यास में लाभ शामिल है
(A) मनोवैज्ञानिक तंदुरुस्ती
(B) दीर्घ आयु को बढ़ाना
(C) कुछ बीमारियों में कमी
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

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5. ताकत, गति तथा सहनशीलता को प्रायः बढ़ाया जा सकता है
(A) दवाइयों के सेवन द्वारा
(B) खेलों में भाग लेकर
(C) व्यायाम द्वारा
(D) (B) व (C) दोनों
उत्तर:
(D) (B) व (C) दोनों

6. धीमी गति से दौड़ना किस व्यायाम का उदाहरण है?
(A) आइसोकाइनेटिक व्यायाम
(B) एरोबिक
(C) आइसोटोनिक व्यायाम
(D) आइसोमीट्रिक व्यायाम
उत्तर:
(B) एरोबिक

7. अकर्मक गर्माना किस प्रकार किया जाता है?
(A) दवाइयों तथा मालिश द्वारा
(B) गर्म पानी से नहाकर
(C) अल्ट्रा किरणों द्वारा
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

8. किस खिंचाव के कारण माँसपेशी छोटी हो जाती है?
(A) आइसोमीट्रिक
(B) आइसोकाइनेटिक
(C) कंसैंट्रिक
(D) एक्सैंट्रिक
उत्तर:
(C) कंसैंट्रिक

9. निम्नलिखित में से कौन-सी क्रिया आइसोटोनिक व्यायाम की उदाहरण है?
(A) किसी के आने के लिए दरवाजा खोलना
(B) खिड़की को खींचना व खोलना
(C) झूला-झूलना
(D) भारी रोलर धकेलना
उत्तर:
(C) झूला-झूलना

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10. निम्नलिखित में से खेल प्रशिक्षण के उद्देश्यों में शामिल है
(A) उत्तम स्वास्थ्य का विकास
(B) व्यक्तिगत व भावात्मक विकास
(C) खेल संबंधी विकास
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

11. गर्माना कार्य करता है
(A) दिल की गति को कम करना
(B) शरीर व माँसपेशियों के तापमान को बढ़ाना
(C) फेफड़ों का आयतन बढ़ाना
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) शरीर व माँसपेशियों के तापमान को बढ़ाना

12. अभ्यासकर्ता व खिलाड़ियों को वार्मिंग-अप व कलिंग डाउन मदद करती है
(A) शरीर व दिमाग को आराम देने में
(B) बीमारी से बचाने में
(C) चोट से बचाना तथा कार्य करने के कौशल में वृद्धि
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) चोट से बचाना तथा कार्य करने के कौशल में वृद्धि

3. खिलाड़ी का सर्वांगीण शारीरिक अनुकूलन करने के लिए क्या आवश्यक है?
(A) अच्छा पारिवारिक माहौल
(B) अच्छा संतुलित आहार
(C) खेल प्रशिक्षण.
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) खेल प्रशिक्षण

14. खेलों से पूर्व शरीर को भली-भाँति तैयार करना क्या कहलाता है?
(A) गर्माना
(B) अनुकूलन
(C) ठण्डा करना
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) गर्माना

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15. “गर्माना रक्त के तापमान को बढ़ाता है जिसके फलस्वरूप माँसपेशियाँ प्रदर्शन को बढ़ाती हैं।” यह कथन किसका है?
(A) डेवरिस का
(B) हिल का
(C) डेविड लैम्ब का
(D) थॉम्पसन का
उत्तर:
(A) डेवरिस का

16. खेल प्रशिक्षण के सिद्धांत हैं
(A) निरंतरता का सिद्धांत
(B) विशिष्टता का सिद्धांत
(C) अतिभार का सिद्धांत
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

17. गर्माने के मनोवैज्ञानिक प्रभावों में से निम्नलिखित में से कौन-सा नहीं है?
(A) श्वसन क्रिया में वृद्धि
(B) मानसिक तैयारी
(C) भीड़ के डर का प्रभाव
(D) हृदय-योग्यता में वृद्धि
उत्तर:
(A) श्वसन क्रिया में वृद्धि

18. गर्माने में कितनी व्यायाम या कसरतें हो सकती हैं?
(A) 10 से 20 तक
(B) 10 से 15 तक
(C) 8 से 10 तक
(D) 5 से 10 तक
उत्तर:
(B) 10 से 15 तक

19. एक ऐसी क्रिया जो किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम या खेल प्रतियोगिता के तुरंत बाद की जाती है, वह क्या कहलाती है?
(A) गर्माना
(B) अनुकूलन
(C) ठण्डा करना या कूलिंग डाउन
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) ठण्डा करना या कूलिंग डाउन

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20. अंतराल प्रशिक्षण विधि किस देश की देन है?
(A) कनाडा की
(B) इंग्लैंड की
(C) फिनलैंड की
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) फिनलैंड की।

21. विंड स्प्रिंट्स उदाहरण है
(A) लिम्बरिंग डाउन
(B) गर्माना
(C) ठण्डा करना
(D) अनुकूलन
उत्तर:
(B) गर्माना

22. स्थिर शक्ति के विकास के लिए आइसोमीट्रिक विधि के प्रथम समर्थक थे-
(A) गुनलैच
(B) जे० जे० पेरिन
(C) बूनर
(D) हैटिंजर और मूलर
उत्तर:
(D) हैटिंजर और मूलर

23. निम्नलिखित में से कौन-सी क्रिया आइसोमीट्रिक व्यायाम की उदाहरण है?
(A) कुर्सी को दोनों हाथों से अंदर की ओर दबाना
(B) झूला झूलना
(C) बाल्टी उठाना
(D) भारी रोलर को धकेलना
उत्तर:
(A) कुर्सी को दोनों हाथों से अंदर की ओर दबाना

24. निम्नलिखित में से कौन-सी क्रिया आइसोकाइनेटिक व्यायाम की उदाहरण है?
(A) घुटने मोड़ना
(B) बर्फ पर स्केटिंग करना
(C) हल्का बोझ उठाना
(D) बंद दरवाजे को धकेलना
उत्तर:
(B) बर्फ पर स्केटिंग करना

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25. लिम्बरिंग डाउन या शरीर को ठण्डा करने का शरीर पर क्या प्रभाव होता है?
(A) रक्त दबाव में कमी
(B) रक्त-प्रवाह की दर में कमी
(C) शरीर के तापमान में कमी
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

26. शरीर को धीरे-धीरे ठण्डा करने से क्या होता है?
(A) नींद आती है
(B) थकान होती है
(C) शरीर सुस्त हो जाता है
(D) थकावट दूर हो जाती है
उत्तर:
(D) थकावट दूर हो जाती है

27. लगातार कार्य करते रहने से शरीर में जो अभ्यस्तता आ जाती है, उसे क्या कहते हैं?
(A) अनुकूलन
(B) गर्माना
(C) ठण्डा करना
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) अनुकूलन

28. प्रशिक्षण का उद्देश्य है
(A) उत्तम स्वास्थ्य का निर्माण करना
(B) मानसिक विकास करना
(C) व्यक्तिगत विकास करना
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

29. आइसोकाइनेटिक व्यायामों को किसने विकसित किया?
(A) टोनो ने
(B) बिकिला ने
(C) पेरीन ने
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) पेरीन ने

30. फार्टलेक प्रशिक्षण विधि सर्वप्रथम किस देश ने अपनाई?
(A) स्वीडन ने
(B) हॉलैंड ने
(C) बेल्जियम ने
(D) पोलैंड ने
उत्तर:
(A) स्वीडन ने

31. फार्टलेक प्रशिक्षण विधि सुधारता है
(A) क्षमता
(B) गति
(C) शक्ति
(D) लचीलापन
उत्तर:
(B) गति

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32. गर्माना करता है
(A) हृदय गति में कमी
(B) शरीर व मांसपेशियों के तापमान में वृद्धि
(C) फेफड़ों के साइज में वृद्धि
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) शरीर व मांसपेशियों के तापमान में वृद्धि

33. ऐसे व्यायाम जिनमें खिलाड़ी की प्रत्यक्ष क्रिया दिखाई नहीं देती, उन्हें क्या कहते हैं?
(A) आइसोमीट्रिक व्यायाम
(B) आइसोकाइनेटिक व्यायाम
(C) आइसोटोनिक व्यायाम
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) आइसोमीट्रिक व्यायाम

34. वे व्यायाम जिनमें खिलाड़ी की गतिविधियाँ या कार्य स्पष्ट दिखाई दें, उन्हें क्या कहते हैं?
(A) आइसोमीट्रिक व्यायाम
(B) आइसोकाइनेटिक व्यायाम
(C) आइसोटोनिक व्यायाम
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) आइसोटोनिक व्यायाम

35. बोझा उठाकर खड़े रहना ……………….. व्यायाम का उदाहरण है।
(A) आइसोटोनिक
(B) आइसोमीट्रिक
(C) आइसोकाइनेटिक
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) आइसोमीट्रिक

36. आइसोटोनिक व्यायाम का उदाहरण है
(A) हल्का बोझ उठाना
(B) हल्का व्यायाम करना
(C) कलाई घुमाना
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

37. आइसोमीट्रिक तथा आइसोटोनिक व्यायामों के मिश्रण को क्या कहते हैं?
(A) आइसोकाइनेटिक व्यायाम
(B) अनएरोबिक व्यायाम
(C) एरोबिक क्रिया
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) आइसोकाइनेटिक व्यायाम

38. ‘पीठ से दीवार को धक्का देना’ किस व्यायाम का उदाहरण है?
(A) आइसोकाइनेटिक व्यायाम का
(B) आइसोटोनिक व्यायाम का
(C) एरोबिक क्रिया का
(D) आइसोमीट्रिक व्यायाम का
उत्तर:
(D) आइसोमीट्रिक व्यायाम का

39. किस वर्ष में पेरीन ने आइसोकाइनेटिक व्यायामों को विकसित किया था?
(A) 1964 में
(B) 1968 में
(C) 1972 में
(D) 1976 में
उत्तर:
(B) 1968 में

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40. परिधि प्रशिक्षण विधि का प्रतिपादन किसने किया था?
(A) बील्स
(B) क्लेयर
(C) मॉर्गन व स्टेनले
(D) मॉर्गन व एडमसन
उत्तर:
(D) मॉर्गन व एडमसन

41. खिंचाव जिसमें विभिन्न तनाव से भार उठाने से खिंचाव के कारण मांसपेशियाँ छोटी होने लगती हैं, को कहते हैं
(A) कॉनसेन्ट्रिक खिंचाव
(B) आइसोमीट्रिक खिंचाव
(C) आइसोटोनिक खिंचाव
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) कॉनसेन्ट्रिक खिंचाव

42. खिंचाव जिसमें तनाव का विकास होता है परन्तु मांसपेशियों की लम्बाई में कोई बदलाव नहीं आता, कहलाता है
(A) इसेंट्रिक खिंचाव
(B) आइसोटोनिक खिंचाव
(C) आइसोमीट्रिक खिंचाव
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) इसेंट्रिक खिंचाव

भाग-III: रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

1. सावधान की स्थिति में खड़े रहना ……………….. व्यायाम का उदाहरण है।
2. ‘स्ट्राइडिंग’ ……………… का उदाहरण है।
3. अनुकूलन एक ………………… प्रक्रिया है।
4. धीमी गति से दौड़ना .. ………………. का उदाहरण है।
5. ‘बोझा उठाकर खड़े करना’ ………………… व्यायाम का उदाहरण है।
6. फार्टलेक प्रशिक्षण विधि एक प्रकार की ………………… दौड़ पर आधारित है।
7. विंड स्प्रिंट्स ……………….. का उदाहरण है।
8. तैयारी ………………. प्रक्रिया है।
9. एक्सैंट्रिक अभ्यास ………………… व्यायाम का उदाहरण है।
10. ठण्डा करने (Cooling Down) से शरीर का तापमान ………………… हो जाता है।
11. बिना भार वाली बैंच प्रेस अभ्यास करना ……………. संकुचन का एक उदाहरण है।
12. ……………… व्यायाम में माँसपेशियों में संकुचन होता है।
उत्तर:
1. आइसोमीट्रिक
2. गर्माने
3. अभ्यस्त होने की
4. गर्माने
5. आइसोमीट्रिक
6. क्रॉस-कंट्री
7. गर्माने
8. जटिल
9. आइसोटोनिक
10. सामान्य
11. कंसैंटिक
12. आइसोटोनिक।

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 2 प्रशिक्षण विधियाँ

प्रशिक्षण विधियाँ Summary

प्रशिक्षण विधियाँ परिचय

वास्तव में प्रशिक्षण’ शब्द कोई नया शब्द नहीं है। व्यक्ति इस शब्द को प्राचीन समय से प्रयोग कर रहे हैं। प्रशिक्षण का अर्थ किसी कार्य की तैयारी की प्रक्रिया से है। इसी कारण यह शब्द खेलकूद के क्षेत्र में अधिक प्रयोग किया जाता है। ‘प्रशिक्षण’ की धारणा और खिलाड़ी की तैयारी’ आपस में मिलती-जुलती हैं लेकिन फिर भी ये एक-दूसरे की पूरक नहीं हैं। तैयारी एक कठिन प्रक्रिया है। यह खिलाड़ी के विकास को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है तथा काफी हद तक सफलता के लिए एकाग्रता को बढ़ाती है। इस कठिन प्रक्रिया में, खेल प्रशिक्षण, खेल प्रतियोगिताएँ (तैयारी के रूप में) और संतुलित आहार आदि शामिल किए जाते हैं। दूसरे शब्दों में, अनेक व्यायामों सहित यह एक सुव्यवस्थित एवं योजनापूर्ण तैयारी होती है। इसलिए खेल प्रशिक्षण को एक विशेष प्रक्रिया समझा जाना चाहिए जो खिलाड़ी का सर्वांगीण शारीरिक अनुकूलन करती है तथा जिसका लक्ष्य खेलकूद में खिलाड़ी के प्रदर्शन के लिए तैयारी करना होता है।

खेल प्रशिक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है जो सामान्यतया लंबी अवधि के लिए प्रयोग की जाती है। यदि हम प्रतियोगिताओं में अच्छे परिणाम प्राप्त करना चाहते हैं तो खेल प्रशिक्षण, वैज्ञानिक आधारों या सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। यदि ऐसा संभव नहीं होता तो खेल प्रशिक्षण सफल अभ्यास के परिणामस्वरूप मिले अच्छे परिणामों पर आधारित होना चाहिए। प्रशिक्षण की विभिन्न विधियाँ होती हैं जिनकी सहायता से गति, शक्ति, सहनशीलता आदि को बढ़ाया जा सकता है। शक्ति का विकास करने के उत्तम तरीके या विधियाँ-आइसोमीट्रिक, आइसोटोनिक और आइसोकाइनेटिक आदि व्यायाम हैं । सहनशीलता का विकास करने की विधियाँ हैं-निरंतर विधि, अंतराल विधि और फार्टलेक विधि। त्वरण एवं पेस दौड़ें (Acceleration and Pace Races) गति के विकास में सहायक होती हैं।

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HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

Haryana State Board HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

HBSE 12th Class Physical Education शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता Textbook Questions and Answers

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न [Long Answer Type Questions]

प्रश्न 1.
शारीरिक पुष्टि के घटक (अंग) कौन-कौन से हैं? वर्णन कीजिए।
अथवा
शारीरिक पुष्टि (Physical Fitness) के प्रमुख घटकों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि के विभिन्न घटक या अंग निम्नलिखित हैं
1. गति (Speed):
गति से अभिप्राय मनुष्य की उस योग्यता से है जो किसी भी स्थिति में कम-से-कम समय लेकर अपने कार्य को पूरा करती है। गति दूसरे शारीरिक योग्यता के अंगों; जैसे शक्ति तथा सहनशीलता से भिन्न है। यह नाड़ी प्रणाली पर आधारित है। गति को साधारणतया लगभग 20 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता, क्योंकि गति बहुत सारी बातों पर आधारित होती है। भिन्न-भिन्न खेलों में गति भिन्न-भिन्न देखने को मिलती है। सभी खेल तेज तथा विस्फोटक मूवमैंट पर आधारित होते हैं।

2. शक्ति (Strength):
शक्ति शारीरिक पुष्टि का एक महत्त्वपूर्ण घटक है। शक्ति हमारे शरीर की माँसपेशियों द्वारा उत्पन्न की गई वह ऊर्जा है जिसके द्वारा हम कुछ कार्य कर सकते हैं। शक्ति को मापने के लिए पौंड या डाइन का प्रयोग किया जाता है। शक्ति को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है-(1) स्थिर शक्ति, (2) गतिशील शक्ति। स्थिर शक्ति को ‘आइसोमीट्रिक शक्ति’ के नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर यह शक्ति खेलकूद में प्रयोग नहीं की जाती, परन्तु वजन उठाने में इसका प्रयोग थोड़ी मात्रा में किया जाता है। गतिशील शक्ति को ‘आइसोटोनिक शक्ति’ के नाम से भी जाना जाता है। खींचने वाली क्रियाओं में इसका अधिक प्रयोग किया जाता है।

3. सहनशीलता (Endurance):
सहनशीलता शक्ति की तरह शारीरिक पुष्टि का एक महत्त्वपूर्ण घटक है। सहनशीलता एक प्रतिरोध योग्यता है जो थकावट के विरुद्ध होती है। सामान्य शब्दों में, यह खिलाड़ी की वह योग्यता है, जिसके कारण खिलाड़ी बिना किसी थकावट के क्रिया करता है। सहनशीलता प्रत्येक खेल में अच्छी कुशलता के लिए एक महत्त्वपूर्ण योग्यता है। एक अच्छी सहनशीलता वाला खिलाड़ी अधिक प्रशिक्षण का भार सहन करके अपनी कुशलता बढ़ा सकता है। कूपर और पीटर जैसे विद्वानों का विचार है कि सहनशीलता हृदय की बीमारियों और सामान्य स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है।

4. लचीलापन/लचक (Flexibility):
व्यक्ति के शरीर के जोड़ों की गतिक्षमता को लचक कहते हैं। अधिक लचक वाला व्यक्ति बिना किसी कष्ट के अधिक देर तक कार्य कर सकता है। अधिक लचक वाले व्यक्ति का व्यक्तित्व भी अच्छा होता है। लचकदार शरीर वाले व्यक्ति जब कोई गतिविधि करते हैं तो उनकी मांसपेशियों में कम तनाव उत्पन्न होता है जिस कारण ऊर्जा या शक्ति का बचाव होता है।

5. स्फूर्ति/चुस्ती (Agility):
खिलाड़ी जब अपने शरीर अथवा शरीर के किसी हिस्से को हवा में तेजी के साथ और सही ढंग से उसकी दिशा को बदलता है, तो उसको स्फूर्ति कहा जाता है। इसमें शरीर की बड़ी माँसपेशियाँ भाग लेती हैं और बड़ी तेजी व ठीक ढंग से तालमेल करती हैं। इसको पूरा करने के लिए अनुभव, तकनीक और कौशल की बहुत आवश्यकता होती है। यह विशेषतौर पर हर्डल्ज, कुश्ती, ऊँची छलाँग, फुटबॉल और बास्केटबॉल जैसी खेलों में बहुत महत्त्वपूर्ण है।

6. तालमेल (Co-ordination):
शारीरिक अंगों के आपस में मिलकर कार्य करने की शक्ति को तालमेल कहते हैं। मानवीय विकास शक्ति और वृद्धि के तालमेल के बिना नहीं हो सकता। तालमेल से शरीर का प्रत्येक अंग मिल-जुलकर कार्य करता है। यदि मनुष्य के सारे अंग ठीक ढंग से कार्य करते हों परंतु दिमाग कार्य न करता हो तो शरीर के बाकी सारे अंग बेकार हो जाते हैं। इसलिए दिमाग, शरीर और स्थिति तालमेल की माँग करते हैं। तालमेल के बिना शारीरिक पुष्टि विकसित नहीं हो सकती।

7. संतुलन (Balance):
एक ही स्थिति में अधिक समय तक रहने की शक्ति को संतुलन कहते हैं। यह शारीरिक पुष्टि के लिए बहुत आवश्यक है। उदाहरण के लिए, जब मनुष्य एक टाँग के बल पर कुछ समय के लिए खड़ा होने में सक्षम हो तो इसको उसका संतुलन कहेंगे। हैंड-स्टैंड और शीर्षासन भी ऐसी क्रियाएँ हैं जो संतुलन की उदाहरण हैं। शारीरिक शिक्षा में ऐसी बहुत सारी क्रियाएँ हैं जो संतुलन के लिए काफी लाभकारी होती हैं। शारीरिक पुष्टि के लिए संतुलन का होना बहुत आवश्यक है।

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

प्रश्न 2.
शारीरिक पुष्टि व सुयोग्यता को परिभाषित कीजिए। शारीरिक पुष्टि व सुयोग्यता का हमारे जीवन में क्या महत्त्व है?
अथवा
शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता से क्या अभिप्राय है? इनके महत्त्व का उल्लेख कीजिए।
अथवा
शारीरिक पुष्टि से क्या तात्पर्य है? दैनिक जीवन में शारीरिक पुष्टि के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि का अर्थ (Meaning of Physical Fitness):
आज के यांत्रिक युग में प्रत्येक मनुष्य अपनी शारीरिक पुष्टि बनाए रखने के लिए प्रयत्नशील है। यह मनुष्य की वह शक्ति तथा कार्य करने की योग्यता है, जिसको वह बिना किसी बाधा के आसानी से थोड़ी-सी शक्ति का प्रयोग करके पूरा कर लेता है। शारीरिक पुष्टि या योग्यता का अर्थ बहुत व्यापक है, इसलिए इसे परिभाषित करना बहुत कठिन है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि यह हमें अपने शरीर को सही ढंग से रखने और अधिक देर तक मेहनत करने की क्षमता प्रदान करती है।

1..डॉ०ए०के० उप्पल (Dr.A.K. Uppal) के अनुसार, “शारीरिक पुष्टि वह क्षमता है जिसके द्वारा शारीरिक क्रियाओं के विभिन्न रूपों को बिना थकावट के तर्कपूर्ण ढंग से किया जा सके। इसके अंतर्गत व्यक्तिगत स्वास्थ्य तथा नीरोगता के महत्त्वपूर्ण गुण सम्मिलित होते हैं।”

2. डेविड लैम्ब (David Lamb) के अनुसार, “शारीरिक पुष्टि को उस कुशलता के रूप में परिभाषित किया गया है जिसके द्वारा जीवन की वर्तमान तथा सशक्त शारीरिक चुनौतियों का सफलता के साथ मुकाबला किया जा सके।”

3. क्यूरेटन (Cureton) के अनुसार, “शारीरिक पुष्टि से अभिप्राय व्यक्ति को अपने शरीर का ठीक ढंग से प्रयोग करने और अधिक देर तक परिश्रम करने की क्षमता से है।”

सुयोग्यता का अर्थ (Meaning of Wellness):
सुयोग्यता एक ऐसी अवस्था है, जो हमारे दैनिक जीवन में प्रत्येक कार्य को प्रभावकारी ढंग से करने में सहायक होती है तथा शेष बची हुई शक्ति से हम खाली समय में मनोरंजन कर सकते हैं। सुयोग्यता क्रोध को सहन करने और तनाव को दूर करने में सहायक होती है। यह एक अच्छे स्वास्थ्य का चिह्न है। यह प्रत्येक मनुष्य में भिन्न-भिन्न होती है, क्योंकि इस पर पैतृक आदतों, व्यायाम, आयु तथा लिंग का प्रभाव पड़ता है। अतः सुयोग्यता व्यक्ति की वह क्षमता या योग्यता है जिसके द्वारा वह एक उत्तम एवं संतुलित जीवन व्यतीत करता है। इसमें मन, शरीर एवं आत्मा का संतुलन शामिल होता है। इसलिए । यह शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की दशा या विशेषता होती है।

शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता का महत्त्व (Importance of Physical Fitness and Wellness):
शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता का महत्त्व निम्नलिखित है-
(1) शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता शरीर की विभिन्न प्रणालियों की कार्यक्षमता में सुधार करती हैं। इनसे व्यक्ति कीकार्यकुशलता एवं क्षमता में वृद्धि होती है। शारीरिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति पहले की अपेक्षा अधिक कार्य करने में सक्षम हो जाता है।
(2) ये वृद्ध होने की प्रक्रिया को धीमा करती हैं और मनुष्य को दीर्घायु बनाती हैं।
(3) ये रोग निवारक क्षमता को बढ़ाती हैं और शरीर के सुचारु विकास में मदद करती हैं।
(4) ये व्यक्ति का आसन (Posture) ठीक करती हैं।
(5) ये मानसिक स्वास्थ्य तथा चेतना में सुधार करती हैं और मानसिक क्षमता में वृद्धि करती हैं।
(6) ये तनाव व दबाव को दूर करने में सहायक होती हैं।
(7) ये हृदय और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों को दूर करती हैं।
(8) ये कार्य की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्धि करती हैं।
(9) ये व्यक्ति को सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने हेतु प्रेरित करती हैं।
(10) ये शरीर के आकार एवं बनावट में सुधार करती हैं तथा शरीर को मोटापे या स्थूलता से बचाती हैं।

प्रश्न 3.
शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता पर प्रभाव डालने वाले विभिन्न तत्त्वों या कारकों का वर्णन करें।
अथवा
शारीरिक सुयोग्यता व पुष्टि को प्रभावित करने वाले कारक बताएँ। शारीरिक सुयोग्यता व पुष्टि में इनका क्या योगदान है?
अथवा
शारीरिक पुष्टि को प्रभावित करने वाले कारकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता को प्रभावित करने वाले कारक या तत्त्व निम्नलिखित हैं
1. आयु (Age):
आयु शारीरिक पुष्टि व सुयोग्यता पर सबसे अधिक प्रभाव डालती है। जैसे-जैसे व्यक्ति बड़ा होता है वैसे-वैसे उसकी शारीरिक क्रियाएँ कम हो जाती हैं जिसके कारण उसको कई प्रकार की बीमारियाँ घेर लेती हैं। शारीरिक क्रियाएँ कम होने से व्यक्ति की शारीरिक योग्यता प्रभावित होती है। जो व्यक्ति अपनी शारीरिक क्रियाओं को जारी रखते हैं वे स्वस्थ रहते हैं और उन पर बुढ़ापे के चिह्न कम नजर आते हैं। बच्चों की शारीरिक योग्यता पर कभी भी बड़ी आयु की शारीरिक योग्यताओं के व्यायाम नहीं थोपने चाहिएँ। प्रशिक्षण कार्यक्रम आयु-वर्गों के अनुसार ही तैयार करना चाहिए।

2.शारीरिक बनावट (Body Structure):
खिलाड़ियों का खेल के लिए चुनाव उनकी शारीरिक बनावट से किया जा सकता है। दौड़ों के लिए पतले शरीर का होना जरूरी है और फील्ड इवेंट्स में शरीर शक्तिशाली होना चाहिए। आजकल शारीरिक बनावट शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

3. लिंग-भेद (Gender Difference):
लिंग-भेद भी शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता को प्रभावित करता है। किशोरावस्था में लड़के-लड़कियों में शारीरिक विभिन्नताएँ आ जाती हैं; जैसे लड़कियों को माहवारी का आना, आवाज का मधुर होना आदि तथा लड़कों में दाड़ी-मूंछ आना, आवाज का भारी होना आदि। ये विभिन्नताएँ लड़के और लड़कियों की शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता को प्रभावित करती हैं। इन विभिन्नताओं के आधार पर ही दोनों वर्गों के लिए शारीरिक योग्यता के कार्यक्रम तैयार करने चाहिएँ।

4. अच्छा आसन (Good Posture):
अच्छे आसन वाला व्यक्ति जीवन में हर प्रकार से प्रशंसा का पात्र होता है। अच्छा आसन शारीरिक योग्यता को बढ़ाता है और व्यक्ति के व्यक्तित्व को सुधारता है।

5. वातावरण (Environment):
शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता पर वातावरण का काफी प्रभाव पड़ता है। गर्मियों में शारीरिक योग्यता का कार्यक्रम सर्दियों के कार्यक्रम से अलग होना चाहिए। गर्मियों के मौसम में व्यायाम प्रात:काल अथवा सायंकाल करने चाहिएँ। गर्मियों में व्यायाम करते समय कपड़े खुले और हल्के पहनने चाहिएँ। सर्दियों के मौसम में शरीर को सर्दी से बचाकर रखना चाहिए।

6. उचित अनुकूलन (Proper Conditioning):
उचित अनुकूलन से शारीरिक पुष्टि व सुयोग्यता में वृद्धि होती है। अनुकूलन का शारीरिक योग्यता के साथ सीधा सम्पर्क है। यदि अनुकूलन बढ़ता है तो खेलकूद में भी कार्यकुशलता बढ़ती है। इसलिए खेलों में अनुकूलन एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

7. संतुलित एवं पौष्टिक आहार (Balanced and Nutritive Food):
संतुलित एवं पौष्टिक आहार से हमारी शारीरिक संरचना अच्छी रहती है। इससे न केवल खेलकूद के क्षेत्र में, बल्कि आम दैनिक जीवन में भी हमारी कार्यकुशलता एवं कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। संतुलित व पौष्टिक आहार से हमारा तात्पर्य उन पोषक तत्त्वों; जैसे वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, खनिज-लवणों, विटामिनों एवं जल आदि से है जो आहार में उचित मात्रा में उपस्थित होते हैं तथा शरीर का संतुलित विकास करते हैं। मोटापे के कारण व्यक्ति की कार्यक्षमता में कमी आ जाती है। आजकल मोटापा एक गंभीर समस्या की भाँति फैल रहा है जिसको संतुलित आहार लेने से तथा उचित व्यायाम व आसन करने से नियंत्रित किया जा सकता है।

8. खेलकूद (Sports & Games):
खेलकूद शारीरिक पुष्टि के अंगों; जैसे शक्ति, गति, सहनशीलता, लचक और तालमेल संबंधी योग्यताओं को विकसित करके स्वस्थता की वृद्धि में अपना बहुमूल्य योगदान देते हैं । जब शारीरिक योग्यता से अंगों का विकास होता है तो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ जाती है।

9. धूम्रपान न करना (No Smoking);
धूम्रपान फेफड़ों के लिए हानिकारक है। इससे हृदय की बीमारियाँ भी हो जाती हैं। उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) भी रहने लगता है। व्यक्ति की कार्यक्षमता धीरे-धीरे क्षीण हो जाती है। धूम्रपान करने से मुँह, गले व आहारनली में कैंसर हो जाता है। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति कार्य को लंबी अवधि तक नहीं कर सकते। इसलिए शारीरिक पुष्टि व सुयोग्यता को बनाए रखने के लिए धूम्रपान नहीं करना चाहिए।

10. व्यायाम और प्रशिक्षण (Exercise and Training):
प्रात:काल और सायंकाल का समय व्यायाम और प्रशिक्षण के लिए बहुत लाभदायक होता है। प्रात:काल के व्यायाम शरीर को चुस्त और लचकदार बनाते हैं । सायंकाल के व्यायाम व्यक्ति को पूरे दिन के मानसिक तनाव और शारीरिक थकावट से छुटकारा दिलाते हैं। व्यायाम और प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाते समय अभ्यास सुविधाओं और गर्मी व सर्दी जैसे मौसम का ध्यान जरूर रखना चाहिए।

11. जिंदादिली व मनोरंजन (Joyfulness and Recreation):
शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता को बढ़ाने के लिए व्यक्ति को जिंदादिली व मनोरंजन के साथ जीना चाहिए। खेलकूद के द्वारा मनोरंजन व आमोद-प्रमोद भी होता है तथा व्यक्ति में जिंदादिली रहती है।

12. तनाव एवं दबाव (Tension and Stress):
अधिक तनाव व दबाव व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। इस कारण उसे अनेक मानसिक बीमारियाँ भी हो सकती हैं। तनाव एवं दबाव के कारण व्यक्ति की कार्य करने की क्षमता भी कम होती है। खेलकूद से तनाव व दबाव को कम किया जा सकता है।

13. अन्य कारक (Other Factors):
शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता को अन्य कारक; जैसे नशीले पदार्थ, रहन-सहन का स्तर, वंशानुक्रम तथा आराम आदि भी प्रभावित करते हैं।

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

प्रश्न 4.
शारीरिक पुष्टि को बढ़ाने के लिए किन सिद्धांतों को अपनाना चाहिए?
अथवा
शारीरिक पुष्टि के विकास के प्रमुख सिद्धांत कौन-कौन से हैं? वर्णन कीजिए।
अथवा
शारीरिक पुष्टि के विकास की मुख्य विधियों या सिद्धांतों का वर्णन कीजिए।
अथवा
आप शारीरिक पुष्टि का विकास कैसे करेंगे?
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि के विकास के प्रमुख सिद्धांत या विधियाँ निम्नलिखित हैं-
1. गर्माना (Warming up):
शरीर के लिए गर्माना आवश्यक है क्योंकि गर्माना खिलाड़ी को प्रशिक्षण के लिए तैयार करता है। गर्माने से काफी हद तक खेल चोटों से बचा जा सकता है। इसलिए प्रशिक्षण व खेल प्रतियोगिताओं से पहले गर्माने की प्रक्रिया की जाती है। गर्माना के आरंभ में धीमी गति से दौड़ना चाहिए। उसके बाद खिंचाव वाले व्यायाम करने चाहिएँ। गर्माना से नाड़ी की गति तथा शरीर का तापमान बढ़ जाता है।

2. नियमितता का सिद्धांत (Principle of Regularity):
शारीरिक पुष्टि के विकास हेतु पूरा कार्यक्रम नियमित रूप से करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन अभ्यास नहीं करता तो उसके शरीर का आकार ठीक नहीं होगा और उसकी शारीरिक पुष्टि में भी धीरे-धीरे कमी हो जाएगी। इसलिए शारीरिक पुष्टि के लिए व्यायाम नियमित रूप से करना अति आवश्यक है।

3. अतिभार का सिद्धांत (Principle of Overload):
शारीरिक पुष्टि के विकास के लिए अतिभार के सिद्धांत को अपनाना अति आवश्यक है। अतिभार के सिद्धांत को अपनाने के लिए लंबी दूरी के धावक धीरे-धीरे दूरी में बढ़ोतरी करते रहते हैं। अतिभार के लिए यह ध्यान रखना चाहिए कि जब तक अनुकूलन (Adaptation) न हो जाए, तब तक अतिभार नहीं करना चाहिए।

4. लिम्बरिंग या कूलिंग डाउन (Limbering or Cooling Down):
लिम्बरिंग या कूलिंग डाउन भी गर्माना की तरह ही शरीर के लिए आवश्यक क्रिया है। किसी भी प्रतियोगिता या प्रशिक्षण के बाद यह क्रिया करनी चाहिए।

5. उचित आराम (Proper Rest):
शारीरिक पुष्टि के कार्यक्रम के दौरान तथा बाद में उचित आराम लेना चाहिए। यदि ऐसा न किया जाए तो व्यक्ति की कार्यक्षमता में कमी हो सकती है। इसके साथ-साथ उसकी गति में भी कमी आना स्वाभाविक है। उचित आराम न लेने की अवस्था में व्यक्ति की योग्यता के कार्यक्रम में रुचि कम होने लगती है।

6. सामान्य से जटिल का सिद्धांत (Principle of Simple to Complex):
शारीरिक पुष्टि के विकास के लिए जो भी व्यायाम या क्रियाएँ करें वे सभी सामान्य से जटिल सिद्धांत पर आधारित होनी चाहिएँ अर्थात् सबसे पहले सामान्य व्यायाम और बाद में कठिन या जटिल व्यायाम करने चाहिएँ।

7. प्रगतिशीलता का सिद्धांत (Principle of Progression):
शारीरिक पुष्टि के विकास के लिए प्रशिक्षण में प्रगतिशील सिद्धांत का पालन करना चाहिए। जब भार को जल्दी-जल्दी बढ़ाया जाता है तो इससे प्रगति की बजाय अवनति होने लगती है। इसलिए प्रगति करने हेतु भार को धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए, तभी शारीरिक पुष्टि का संतुलित विकास होगा।

8. विभिन्नता का सिद्धांत (Principle of Variety):
शारीरिक पुष्टि के विकास हेतु विभिन्नता के सिद्धांत को अपनाना चाहिए। व्यायाम में विभिन्नता होने से रुचि को अधिक बढ़ावा मिलता है और रुचि से किया गया कार्य शारीरिक पुष्टि में बहुत महत्त्वपूर्ण होता है।

प्रश्न 5.
शारीरिक पुष्टि के विकास के साधन कौन-कौन से हैं? वर्णन करें।
अथवा
शारीरिक योग्यता या पुष्टि के विकास की विभिन्न एरोबिक या वायवीय क्रियाओं का वर्णन कीजिए।
अथवा
शारीरिक पुष्टि में एरोबिक गतिविधियाँ कैसे सहायक होती हैं? वर्णन करें।
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि को विकसित करने वाले साधन निम्नलिखित हैं- .
1.खेलकूद में भागीदारी (Participation in Games & Sports):
खेलों में भाग लेने का सबसे मुख्य लाभ शारीरिक पुष्टि को विकसित करना है। वास्तव में, शारीरिक पुष्टि के अनेक अंग होते हैं और प्रत्येक खेल में इनका अलग-अलग मात्रा में विकास होता है; जैसे ऐसे खेल, जिनमें निरंतर गतियाँ होती हैं; जैसे तैरना और दौड़ना। इनसे फेफड़ों और हृदय की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है। दूसरे खेल; जैसे जिम्नास्टिक से लचक (Flexibility) में वृद्धि होती है। खेलकूद के क्षेत्र में शारीरिक पुष्टि को विकसित करने के लिए अनेक कारक होते हैं।

2. वजन/भार प्रशिक्षण (Weight Training):
वजन/भार प्रशिक्षण शारीरिक पुष्टि का महत्त्वपूर्ण साधन है। वजन या भार प्रशिक्षण से अभिप्राय उन व्यायामों या कसरतों से है जो हमारे शरीर की विशेष माँसपेशियों को मज़बूत एवं शक्तिशाली बनाती हैं। यह प्रशिक्षण BAR-BELLS की सहायता से किया जाता है। इससे शरीर के विभिन्न भागों का अनुकूलन होता है।

3. सर्किट या परिधि प्रशिक्षण (Circuit Training):
सर्किट प्रशिक्षण बहुत प्रभावशाली और लोकप्रिय व्यायाम है। यह प्राय: शक्ति तथा सहनशीलता बढ़ाने के लिए किए जाता है। सन् 1957 में मॉर्गन तथा एडम्सन ने सर्किट प्रशिक्षण का प्रारंभिक रूप से विकास किया। मॉर्गन व एडम्सन के अनुसार, “सर्किट प्रशिक्षण एक ऐसी विधि है जिसमें विभिन्न व्यायामों को यन्त्रों तथा बिना यन्त्रों के निश्चित मात्रा में किया जाता है।” सर्किट प्रशिक्षण एक प्रभावकारी ढंग से किया जाने वाला व्यायाम है, जो शक्ति तथा सहनशीलता जैसी योग्यताओं में वृद्धि करता है।

4. वायवीय/एरोबिक क्रियाएँ या गतिविधियाँ (Aerobic Activities):
शारीरिक पुष्टि के साधन के रूप में एरोबिक क्रियाएँ बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। शारीरिक पुष्टि के विकास की विभिन्न एरोबिक या वायवीय क्रियाएँ निम्नलिखित हैं
(1) जॉगिंग (Jogging):
जॉगिंग एक वायवीय क्रिया है। जॉगिंग से तात्पर्य है कि धीरे-धीरे या आराम से दौड़कर शरीर को गर्माना। जॉगिंग गर्माने का सबसे बढ़िया ढंग है। इससे शरीर की सभी प्रणालियाँ अच्छे ढंग से काम करना शुरू कर देती हैं।

(2) साइकलिंग (Cycling):
साइकलिंग वायवीय तथा अवायवीय क्रिया है। इससे हृदय और फेफड़ों की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है। शक्ति, सहनशीलता के लिए भी साइकलिंग करना महत्त्वपूर्ण है। इसका अभ्यास यदि प्रतिदिन नियमित रूप से किया जाए तो शारीरिक पुष्टि का विकास भली-भाँति किया जा सकता है।

(3) कैलिसथैनिक्स (Calisthanics):
शारीरिक पुष्टि के विकास के लिए कैलिसथैनिक्स का प्रयोग भी किया जाता है। हालांकि कैलिसथैनिक्स के द्वारा केवल सामान्य योग्यता का विकास ही संभव है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी के लिए कैलिसथैनिक्स सामान्य आधारशिला का कार्य करती है। इससे माँसपेशियों का व्यायाम होता है जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य, शक्ति, सौंदर्य में वृद्धि करना होता है। वास्तव में, कैलिसथैनिक्स एक प्रकार का स्वतंत्र व्यायाम है; जैसे Pull-ups, Push-ups और Chin-ups आदि। कैलिसथैनिक व्यायाम माँसपेशियों के तापमान और रक्त प्रवाह में वृद्धि करता है। यह शरीर में लचक को विकसित करता है।

(4)लयबद्ध व्यायाम (Rhythmic Exercises):
इस प्रकार के व्यायाम लय के साथ किए जाते हैं; जैसे लेजियम, डम्बल, जिम्नास्टिक में ग्राउंड फ्लोर व्यायाम और लोकनृत्य आदि। इस प्रकार के लयबद्ध व्यायामों से भी शारीरिक पुष्टि का विकास होता है। ऐसे व्यायामों से थोड़ी-बहुत सहनशीलता का विकास भी होता है। इसके अतिरिक्त लचक तथा तालमेल संबंधी योग्यताओं का विकास भी होता है। लयबद्ध या तालबद्ध व्यायाम के कुछ उदाहरण हैं-आगे मुड़ना, पीछे मुड़ना, एक ही स्थान पर दौड़ना, चिट-अप, स्टेप-अप, बराबर में मुड़ना आदि।

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

प्रश्न 6.
परिधि या सर्किट प्रशिक्षण विधि का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
अथवा
परिधि प्रशिक्षण विधि क्या है? इसके लक्षणों पर प्रकाश डालिए।
अथवा
सर्किट प्रशिक्षण क्या है? इसकी विशेषताओं तथा लाभों का वर्णन कीजिए।
अथवा
सर्किट प्रशिक्षण विधि का संक्षिप्त ब्योरा दीजिए। इसके क्या लाभ हैं?
अथवा
शारीरिक योग्यता के विकास के लिए सर्किट प्रशिक्षण का ब्योरा दीजिए। इसके लाभों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
सर्किट या परिधि प्रशिक्षण विधि का अर्थ (Meaning of Circuit Training Method):
सन् 1957 में मॉर्गन तथा एडम्सन ने सर्किट (परिधि) प्रशिक्षण का प्रारंभिक रूप से विकास किया। मॉर्गन तथा एडम्सन (Morgan and Adamson) के अनुसार, “सर्किट प्रशिक्षण विधि एक ऐसी विधि है जिसमें विभिन्न व्यायामों को यन्त्रों तथा बिना यन्त्रों के निश्चित मात्रा में किया जाता है।” सन् 1979 में स्कोलिक ने सर्किट प्रशिक्षण के लिए नए-नए व्यायामों की जानकारी दी। सर्किट प्रशिक्षण में लगभग 10 से 15 तक व्यायाम चुने जाते हैं। इन व्यायामों को इस ढंग से चुना जाता है ताकि इनका प्रभाव प्रदर्शन पर प्रभावशाली ढंग से पड़े। प्रायः व्यायामों को एक क्रम में रखा जाता है ताकि भिन्न-भिन्न मांसपेशियों के समूह को चक्र में पूरा व्यायाम मिल सके। सर्किट प्रशिक्षण नई तकनीक सिखाने में बहुत सहायक होता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि सर्किट प्रशिक्षण एक प्रभावकारी ढंग से किए जाने वाला व्यायाम है, जो शक्ति तथा सहनशीलता जैसी योग्यताओं में वृद्धि करता है।

सर्किट या परिधि प्रशिक्षण की विशेषताएँ या लक्षण (Features of Circuit Training):
सर्किट प्रशिक्षण की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) इस विधि में व्यायाम सीखना आसान होता है तथा उसको लागू करना भी आसान होता है।
(2) इसमें व्यायाम मध्यम अवरोध तथा मध्यम भार के साथ किए जाते हैं।
(3) इसमें संख्या की अधिक पुनरावृत्ति होती है।
(4) इसका लक्ष्य सहनशीलता व शक्ति को बढ़ावा देना है।
(5) इसमें शरीर के सभी अंगों के व्यायाम शामिल होते हैं।
(6) इसमें खिलाड़ियों को तैयारी के समय मूल सहनशीलता व शक्ति बढ़ाने का अवसर प्राप्त होता है।
(7) इसमें व्यायाम का दबाव धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है।

सर्किट प्रशिक्षण के लाभ (Advantages of Circuit Training):
सर्किट प्रशिक्षण के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं-
(1) इस विधि से एक ही समय में बहुत से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
(2) यह विधि सीखने में बहुत सरल एवं रुचिकर है। कोई भी खिलाड़ी अपने-आप प्रशिक्षण ले सकता है।
(3) इस विधि को खिलाड़ी की योग्यता के अनुसार आसानी से घटाया-बढ़ाया जा सकता है।
(4) इस विधि द्वारा शक्ति, क्षमता एवं सहनशीलता का विकास होता है।
(5) इस विधि द्वारा समय की बचत होती है, क्योंकि इसमें विभिन्न व्यायामों को करने के लिए अधिक समय नहीं लगता।
(6) इस विधि से शरीर के सभी अंगों या भागों का व्यायाम हो सकता है।

प्रश्न 7.
भार प्रशिक्षण विधि (Weight Training Method) का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
अथवा
वज़न प्रशिक्षण से क्या अभिप्राय है? इससे होने वाले लाभों का वर्णन करें।
अथवा
भार प्रशिक्षण विधि क्या है? खिलाड़ियों के लिए इसके महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भार प्रशिक्षण विधि का अर्थ (Meaning of Weight Training Method):
भार प्रशिक्षण विधि से हमारा अभिप्राय उन व्यायामों या कसरतों से है जो हमारे शरीर की विशेष माँसपेशियों को मज़बूत एवं शक्तिशाली बनाती हैं। यह प्रशिक्षण BAR-BELLS की सहायता से किया जाता है। इससे शरीर के विभिन्न भागों के आकार में परिवर्तन होता है और विभिन्न भागों का अनुकूलन भी होता है। इसके माध्यम से शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति सामान्य होने की कोशिश करता है। इससे माँसपेशियाँ मजबूत बनती हैं, उनके आकार तथा शरीर के भार में भी परिवर्तन होता है। यह प्रशिक्षण शारीरिक पुष्टि को विकसित करता है।

भार प्रशिक्षण विधि में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए-
(1) भार प्रशिक्षण के समय श्वास क्रिया साधारण रूप से कार्य करती हुई होनी चाहिए।
(2) भार प्रशिक्षण सप्ताह में दो या चार दिन से अधिक न करें।
(3) प्रशिक्षण के कार्यक्रम को पहले साधारण शारीरिक विकास से शुरू करें। फिर इवेंट प्रशिक्षण के अनुसार व्यायाम करें।
(4) भार प्रशिक्षण के पश्चात् कुछ देर आराम करना जरूरी है।
(5) भार प्रशिक्षण इस प्रकार किया जाए कि शरीर के प्रत्येक अंग की कसरत हो, विशेषतौर पर बाजुओं, टाँगों तथा कमर आदि की।

भार प्रशिक्षण विधि का महत्त्व अथवा लाभ (Advantages or Importance of Weight Training Method):
खिलाड़ियों के लिए भार प्रशिक्षण विधि का महत्त्व अथवा लाभ निम्नलिखित हैं-
(1) भार प्रशिक्षण से शक्ति तथा लचक में वृद्धि होती है।
(2) भार प्रशिक्षण से माँसपेशियों के सिकुड़ने तथा फैलने में वृद्धि होती है।
(3) शरीर के सभी अंगों को शक्ति मिलने से शारीरिक शक्ति का विकास होता है।
(4) भार प्रशिक्षण द्वारा नाड़ी-माँसपेशियों के आपसी तालमेल में वृद्धि होती है।
(5) भार प्रशिक्षण से माँसपेशियाँ तथा हड्डियाँ मजबूत होती हैं।
(6) यह प्रशिक्षण न केवल शारीरिक कार्यक्षमता में वृद्धि करता है, बल्कि दैनिक जीवन की गतिविधियों को करने की क्षमता में भी सुधार करता है।
(7) यह वसा मुक्त शरीर द्रव्यमान को कम करता है। अगर हम अपनी दिनचर्या में भार प्रशिक्षण को नहीं जोड़ते हैं तो यह वसा में बदल जाएगा।
(8) यह संयोजी ऊतकों व मांसपेशियों की ताकत को बढ़ाता है। इससे गामक प्रदर्शन में सुधार होता है और चोट का जोखिम कम हो जाता है।

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प्रश्न 8.
लचीलापन क्या है? इसकी विभिन्न किस्में कौन-कौन-सी हैं? इसको कैसे बढ़ाया जा सकता है? अथवा लचक से आप क्या समझते हैं? इसके प्रकारों का वर्णन करें।
उत्तर:
लचीलापन/लचक का अर्थ (Meaning of Flexibility):
व्यक्ति के शरीर के जोड़ों की गति-क्षमता को लचक कहते हैं। अधिक लचक वाला व्यक्ति बिना किसी कष्ट के अधिक देर तक कार्य कर सकता है तथा उसका व्यक्तित्व भी अच्छा होता है। लचकदार शरीर वाले व्यक्ति जब कोई गतिविधि करते हैं तो उनकी माँसपेशियों में कम तनाव उत्पन्न होता है जिस कारण ऊर्जा या शक्ति की बचत होती है। आमतौर पर लचीलापन, कोमलता और गतिशीलता को एक-दूसरे के लिए प्रयोग किया जाता है, परंतु इनमें बहुत अंतर है। अतः लचीलापन वह योग्यता है, जिसमें प्रत्येक क्रिया अधिक विस्तार से बिना किसी रोक-टोक के की जाती है।

लचक/लचीलेपन की किस्में अथवा प्रकार (Types of Flexibility):
लचीलेपन की किस्में (प्रकार) निम्नलिखित हैं
1. सक्रिय लचीलापन (Active Flexibility):
सक्रिय लचीलेपन को खिलाड़ी बिना किसी बाहरी सहायता के स्वतंत्र रूप से माँसपेशियों की क्रियाशीलता द्वारा प्राप्त करता है। सक्रिय लचीलापन न केवल माँसपेशियों के सिकुड़ने, बल्कि जोड़ों की मांसपेशियों पर भी निर्भर करता है। अतः बिना किसी बाहरी सहायता से शरीर के जोड़ों का अधिक देर तक गति करना सक्रिय लचीलापन कहलाता है; जैसे खिंचाव वाला व्यायाम बिना किसी की सहायता से करना आदि। यह दो प्रकार का होता है
(1) गतिशील लचीलापन (Dynamic Flexibility): शरीर गति में होने के कारण जब अधिक विस्तार से क्रिया करता है, तो उसको गतिशील लचीलापन कहते हैं।
(2) स्थिर लचीलापन (Static Flexibility): जब कोई खिलाड़ी लेटा, बैठा या खड़ा हुआ किसी प्रकार की गतिविधि करता है, तो उसे स्थिर लचीलापन कहते हैं।

2. निष्क्रिय लचीलापन (Passive Flexibility):
निष्क्रिय लचीलेपन से तात्पर्य बाहरी सहायता द्वारा अधिक-से-अधिक विस्तार से क्रिया करने वाली योग्यता से है। निष्क्रिय लचीलापन अन्य सभी किस्मों का आधार है। यह बहुत अधिक माँसपेशियों के सिकुड़ने, जोड़ों (लिगामेंट्स) और हड्डियों की बनावट पर निर्भर करता है।

लचक बढ़ाने के ढंग/तरीके (Methods of Increasing Flexibility):
लचक बढ़ाने के बहुत-से ढंग है, जिनमें सक्रिय, निष्क्रिय स्टैटिक और कनट्रैक्ट-रिलैक्स व्यायाम आते हैं। अतः लचक को बढ़ाने के तरीके निम्नलिखित हैं-
(1) सक्रिय ढंग में तेज और धीमी किस्म की मूवमैंट करनी चाहिएँ।
(2) निष्क्रिय ढंग में माँसपेशियों को ठीक स्थिति में रखने के लिए फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा व्यायाम करवाए जाते हैं। ये क्रियाएँ अपने-आप भी की जा सकती हैं अथवा किसी की सहायता से भी की जा सकती हैं।
(3) स्टैटिक व्यायाम में माँसपेशियों को धीमे स्तर पर मोड़ना होता है ताकि बिना किसी तकलीफ के इसको 10 से 60 सेकिण्ड तक बढ़ाया जा सके।
(4) कनट्रैक्ट-रिलैक्स किस्म के व्यायाम नाड़ी तथा माँसपेशियों के तालमेल पर आधारित होते हैं । जब माँसपेशियाँ खिंचाव की स्थिति में होती हैं तो वे फिर 5 से 10 सेकिण्ड तक अपनी पहली स्थिति में आ जाती हैं।
(5) विभिन्न प्रकार के आसनों; जैसे चक्रासन, धनुरासन, हलासन आदि द्वारा लचक को बढ़ाया जा सकता है।

प्रश्न 9.
सहनशीलता से क्या अभिप्राय है? इसकी किस्मों तथा उपयोगिता या महत्ता का वर्णन करें।
अथवा
सहनक्षमता या सहनशीलता क्या है? इसके प्रकारों या भेदों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सहनशीलता या सहनक्षमता का अर्थ (Meaning of Endurance):
सहनशीलता या सहनक्षमता शक्ति की तरह एक महत्त्वपूर्ण योग्यता है। यह एक प्रतिरोध योग्यता है जो थकावट के विरुद्ध होती है। सामान्य शब्दों में, यह खिलाड़ी की वह योग्यता है, जिसके साथ खिलाड़ी बिना किसी थकावट के क्रिया करता है। वास्तव में, किसी गति या भार को अधिक समय तक अपने ऊपर स्थिर रखने की व्यक्ति के शरीर की संरचनात्मक क्षमता को उसकी सहनक्षमता कहा जाता है।

सहनशीलता की किस्में या भेद (Types of Endurance):
सहनशीलता की किस्में (भेद) निम्नलिखित हैं-
1. बुनियादी या मौलिक सहनशीलता (Basic Endurance):
बुनियादी सहनशीलता को एरोबिक सहनशीलता भी कहते हैं। यह वह क्षमता है, जो धीरे से मध्यम गति के साथ क्रिया करने से होने वाली थकावट पर नियंत्रण रखती है। इसके अंतर्गत जॉगिंग एवं साइकलिंग आदि,क्रियाएँ आती हैं।

2. साधारण सहनशीलता (General Endurance):
भिन्न-भिन्न प्रकार की क्रियाएँ चाहे वे वायवीय (एरोबिक) अथवा अवायवीय (अनएरोबिक) हों, इसके दौरान आई थकावट पर नियंत्रण करने वाली क्षमता को साधारण सहनशीलता कहते हैं । साधारण सहनशीलता और बुनियादी सहनशीलता में अंतर है। बुनियादी सहनशीलता एरोबिक व्यायामों पर आधारित होती है जबकि साधारण सहनशीलता एरोबिक और अनएरोबिक व्यायामों को बिना किसी थकावट के लंबे समय तक करने वाली योग्यता है।

3. विशेष सहनशीलता (Special Endurance):
विशेष खेलों में थकावट का प्रतिरोध करने वाली योग्यता को विशेष सहनशीलता कहते हैं। जिस तरह स्वाभाविक रूप से थकावट भिन्न-भिन्न खेलों में भिन्न-भिन्न होती है, उसी तरह सहनशीलता भी भिन्न-भिन्न खेलों में भिन्न-भिन्न होती है। इसको शक्ति सहनशीलता भी कहते हैं। इसका प्रयोग लम्बी दूरी की दौड़ों, तैराकी, मैराथन दौड़ तथा पोल वॉल्ट में काफी हद तक किया जाता है।

सहनशीलता की महत्ता या उपयोगिता (Importance or Utility of Endurance):
सहनशीलता प्रत्येक खेल में अच्छी कुशलता के लिए एक महत्त्वपूर्ण योग्यता है। हमारे लिए इसकी महत्ता निम्नलिखित प्रकार से है
(1) एक अच्छी सहनशीलता वाला खिलाड़ी अधिक प्रशिक्षण का भार सहन करके अपनी कुशलता बढ़ा सकता है।
(2) अच्छी सहनशीलता वाला खिलाड़ी प्रतियोगिता के समय चौकन्ना रहता है और पूरा ध्यान रखता है ताकि चोट से बचा जा सके।
(3) लंबे समय वाली खेलों में तकनीकी कार्यकुशलता सहनशीलता पर आधारित होती है।
(4) सहनशीलता खिलाड़ी को मुकाबले के दौरान सामान्य बनाए रखती है। सहनशीलता केवल खिलाड़ियों के लिए ही महत्त्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह सामान्य पुरुषों, स्त्रियों और नौजवानों के लिए भी आवश्यक है। कूपर और पीटर जैसे विद्वानों का विचार है कि सहनशीलता हृदय की बीमारियों और सामान्य स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है।
(5) सहनशीलता का सीधा संबंध व्यक्ति के शारीरिक संस्थानों से है। यदि सहनशीलता बढ़ती है तो विशेष रूप से श्वसन वरक्त प्रवाह संस्थानों की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है।

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प्रश्न 10.
गति से आप क्या समझते हैं? इसको कैसे सुधारा जाए?
उत्तर:
गति का अर्थ (Meaning of Speed):
गति या रफ्तार से अभिप्राय मनुष्य की उस योग्यता से है जो किसी भी स्थिति में कम-से-कम समय लेकर अपने कार्य को पूरा करती है। गति दूसरे शारीरिक योग्यता अंगों; जैसे शक्ति तथा सहनशीलता से भिन्न है। यह नाड़ी प्रणाली पर आधारित है। गति को साधारणतया लगभग 20 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता, क्योंकि गति बहुत सारी बातों पर आधारित होती है। भिन्न-भिन्न खेलों में गति भिन्न-भिन्न किस्मों में देखने को मिलती है।

गति को कैसे सुधारा जाए? (How can speed be improved?):
गति को अग्रलिखित तरीकों से सुधारा जा सकता है-
1. अच्छी तकनीक (Good Technique):
गति को सुधारने के लिए अच्छी तथा बढ़िया तकनीक की आवश्यकता होती है। जिम्नास्टिक तथा मुक्केबाज़ से अपनी खेल का प्रदर्शन बढ़िया कर सकते हैं।

2. विस्फोटक ताकत (Explosive Strength):
प्रत्येक विस्फोटक गति के लिए विस्फोटक शक्ति का होना अति आवश्यक है। एक अच्छे बॉक्सर तथा जिम्नास्ट की गति को तभी सुधारा जा सकता है जब उसमें विस्फोटक शक्ति होगी।

3. मांसपेशियों की बनावट (Structure of Muscles):
शरीर की भिन्न-भिन्न माँसपेशियों में भिन्न-भिन्न फास्ट ट्विच फाइबर (Fast Twitch Fiber) तथा स्लो ट्विच फाइबर (Slow Twitch Fiber) होते हैं। ये फाइबर जन्मजात होते हैं जो गति की कुशलता को दर्शाते हैं।

4. तालमेल या समन्वय की योग्यता (Co-ordination Ability):
लगभग सभी खेलों; जैसे फुटबॉल, हॉकी, बॉक्सिंग, बास्केटबॉल आदि में शारीरिक अंगों के तालमेल की आवश्यकता होती है।

5. लचीलापन (Flexibility):
जब खिलाड़ी के प्रत्येक जोड़ पर अधिक गतिविधि हो तथा उसके जोड़ प्रत्येक दिशा की ओर अत्यधिक झुक जाए अथवा मुड़ जाए तो गति-प्रदर्शन बढ़िया होगा। अल्पायु की लड़कियों में बड़ी आयु के व्यक्तियों से अधिक लचीलापन होता है।

6. प्रतिक्रिया की योग्यता (Metalogic Power):
गति सुधारने में ऊर्जा उत्पन्न करने वाली प्रतिक्रियाएँ भी पर्याप्त तीव्रतापूर्वक होनी चाहिए। प्रतिक्रिया की योग्यता, स्पीड मूवमैंट आदि में सुधार करके गति बढ़ाई जा सकती है।

7. अन्य तरीके (Other Methods):
(1) गति को बढ़ाने के लिए शक्ति व सहनशीलता दोनों का तालमेल जरूरी है।
(2) गति को बढ़ाने के लिए लचक व विस्फोटक शक्ति को बढ़ाना चाहिए।
(3) अच्छी तरह से गर्म होना गति को बढ़ाने में सहायक होता है।

प्रश्न 11.
शक्ति से आपका क्या अभिप्राय है? शक्ति को विकसित करने या सुधारने वाली विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।
अथवा
शक्ति के विकास की विधियों का वर्णन कीजिए।
अथवा
शक्ति से आप क्या समझते हैं? इसके प्रकार क्या हैं?
उत्तर:
शक्ति का अर्थ (Meaning of Strength):
शक्ति या ताकत शारीरिक योग्यता का एक महत्त्वपूर्ण घटक है। साधारण शक्ति से अभिप्राय उस शक्ति से है, जो भिन्न-भिन्न स्थितियों में प्रत्येक किस्म का प्रतिरोध करती है। यह कोई क्रिया अथवा मूवमैंट नहीं है। विशेष शक्ति वह क्षमता है, जो विशेष खेलों में आवश्यक है। यह एक ऐसी क्रिया और मूवमैंट है जो हमेशा तकनीकी कौशल और तालमेल वाले सामर्थ्य के साथ जुड़ी हुई है। अतः शक्ति हमारे शरीर की माँसपेशियों द्वारा उत्पन्न की गई वह ऊर्जा है जिसके द्वारा हम कुछ कार्य कर सकते हैं। इसको मापने के लिए पौंड या डाइन (Dynes) का प्रयोग किया जाता है। एक सामान्य व्यक्ति के जीवन में साधारण शक्ति व एक खिलाड़ी लिए विशेष शक्ति आवश्यक होती है। प्रत्येक खेल में मूवमैंट अवश्य होते हैं और इनमें अनेक प्रकार की शक्तियाँ प्रयोग की जाती हैं।

शक्ति के प्रकार (Types of Strength):
शक्ति के दो प्रकार होते हैं-
(1) स्थिर शक्ति
(2) गतिशील शक्ति।

शक्ति को विकसित करने की विधियाँ (Methods of Improving Strength):
शक्ति को विकसित करने या बढ़ाने के लिए बहुत सारे तरीके हैं लेकिन शक्ति को बढ़ाने के लिए भार प्रशिक्षण (Weight Training) सबसे अच्छा तथा कारगर तरीका है। इसमें खिलाड़ी की माँसपेशियाँ प्रतिरोध के विरुद्ध कार्य करती हैं और ऐसा करने से माँसपेशियों की शक्ति में वृद्धि होती है। शक्ति को ।
सुधारने या बढ़ाने की विधियाँ या तरीके निम्नलिखित हैं
1. अधिकतम उत्सुकता विधि (High Intensity Method):
यह विधि अक्सर वजन उठाने तथा थ्रो करते समय प्रयोग में लाई जाती है। इस तरीके में शक्ति तथा प्रतिरोध वाले व्यायाम अधिक लाभप्रद होते हैं।

2. विस्फोटक विधि (Explosive Method):
इस विधि को जिम्नास्ट तथा जम्प करने वाले ज्यादा प्रयोग में लाते हैं। जब कोई खिलाड़ी तीव्र गति से किसी प्रतिरोध को रोकने का प्रयास करता है तो उसकी इस क्षमता को विस्फोटक शक्ति कहते हैं।

3. प्रतिक्रिया विधि (Reaction Method):
इस विधि के द्वारा अधिकतम शक्ति तथा विस्फोटक शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। इसमें पुली द्वारा व्यायाम, रेत के थैलों के साथ व्यायाम तथा विशेष प्रकार से बने औजार (Equipment) के साथ व्यायाम करवाए जाते हैं।

4. आइसोकाइनेटिक व्यायाम (Isokinetic Exercise):
इस प्रकार के व्यायाम तैराकी के द्वारा करवाए जाते हैं क्योंकि तैराकी द्वारा माँसपेशियों की सिकुड़न अधिक तेजी के साथ होती है। इस विधि में चोट आदि लगने का खतरा कम रहता है।

5. आइसोमीट्रिक व्यायाम (Isometric Exercise):
शक्ति को बढ़ाने का यह तरीका गतिशील ताकत की जगह स्थिर – ताकत को ज़्यादा बढ़ाता है। इस प्रकार के व्यायाम में कम समय तथा कम उपकरणों की आवश्यकता होती है।

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

प्रश्न 12.
खेलकूद में भागीदारी की महत्ता पर प्रकाश डालिए।
अथवा
खेलों में भागीदारी (Participation in Games & Sports) का क्या महत्त्व है? वर्णन करें।
उत्तर:
खेलों में भागीदारी का महत्त्व निम्नलिखित है
1. सामाजिक अनुभव (Social Experience):
खेलों में भागीदारी व्यक्तिगत तौर पर अकेले खेल खेलकर संभव नहीं है। किसी खेल को संभव बनाने के लिए एक से अधिक खिलाड़ियों का होना जरूरी है। जैसे कि फुटबॉल की टीम जब कभी किसी मुकाबले या प्रशिक्षण में भाग लेती है तो इसमें अधिकतम 25 (11+11+1+ 2) व्यक्ति शामिल होते हैं। वे खेल के नियमों तथा कोच या रैफरी द्वारा निर्देशित आदेशों की पालना करते हैं। इससे हमें समाज के नियमों को सीखने का अनुभव प्राप्त होता है।

2. सामाजिक मूल्य (Social Values):
सामाजिक मूल्य मनुष्य की अंतर-प्रतिक्रियाओं के वे पक्ष हैं, जिनको समाज में प्रत्येक स्थिति में सुरक्षित और उत्साहित रखना चाहिए। प्रत्येक समाज के कुछ ऐसे मूल्य हैं, जो उसकी परंपरा की देन हैं। जीवन के यही गुण हमें उन्नति की सीमा तक पहुँचाने के लिए सहायक होते हैं। सामाजिक गुण जीवन के आदर्श और वास्तविक का मेल हैं। शिक्षा के उद्देश्य ही व्यक्ति में इन मूल्यों और गुणों की उत्पत्ति के कारण हैं। इसलिए वही अध्यापक बच्चों में सामाजिक गुण पैदा कर सकता है, जिसके अंदर सामाजिक गुण मौजूद हों। एक अच्छी खेल-भावना (Sportmanship) रखने वाला शारीरिक शिक्षा का अध्यापक ही बच्चों में खिलाड़ीपन के गुणों का विकास कर सकता है।

3. प्रतिस्पर्धा (Competition):
सभ्यता की उन्नति का दूसरा तथ्य प्रतिस्पर्धा (Competition) है। प्रतिस्पर्धा वह चैलेंज है जिसमें व्यक्ति अथवा समूह दूसरे व्यक्ति अथवा समूह से आगे निकलने का प्रयत्न करता है। प्रतिस्पर्धा की भावना से जीवन-स्तर ऊँचा होता है, व्यक्ति और समूह कार्यशील रहते हैं और समाज उन्नति के रास्ते पर चलता रहता है। प्रतिस्पर्धा सामाजिक जीवन का एक स्वाभाविक क्रम है। बर–ड रसल (Bertrand Russel) का विचार है, “प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों व्यक्ति की प्राकृतिक क्रियाएँ हैं और व्यक्ति को पछाड़े बिना मुकाबले को समाप्त नहीं किया जा सकता।”

4. सहयोग (Co-operation):
समाज में रहकर हमें एक-दूसरे के साथ मिलकर कार्य करना पड़ता है। इसका कारण यह है कि कोई भी सामाजिक जीव अपने आप में पूर्ण नहीं है। यह बहुत सारी चीजें समाज को देता है और बहुत सारी चीजें अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए समाज से लेता है। परिवार, देश, समाज और सारा विश्व व्यक्तियों, समूहों, दलों, की आपसी सहयोग के कारण ही सुरक्षित है। आपसी सहयोग तभी संभव है जब व्यक्ति और समूह अपने आपको उसके लिए पेश करे। हमदर्दी, मित्रता, प्रेम, त्याग आदि ऐसे गुण हैं, जिन पर सहयोग की नींव रखी जाती है। शारीरिक शिक्षा क्षेत्र में सहयोग की भावना बहुत ही आवश्यक है। सामूहिक खेलों में तो सहयोग की भावना की ओर भी अधिक जरूरत है। हॉकी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल आदि खेल खिलाड़ियों के आपसी सहयोग के साथ ही खेली और जीती जा सकती हैं। सहयोग तभी लाभदायक सिद्ध हो सकता है जब उसके पीछे कार्य की इच्छा और भावना अच्छी हो। खेल के मैदान में सहयोग की भावना तभी शक्तिशाली हो सकती है जब खिलाड़ियों को खेलों का उद्देश्य अच्छी तरह बताया जाए और उनको पूरे अनुशासन में रहकर उस उद्देश्य की पूर्ति करनी सिखाई जाए। इस तरह सहयोग की. भावना दृढ़ होगी और समूह और समाज अच्छी तरह कार्य करेंगे।

5. सामाजिक पहचान (Social Recognition):
पहचान प्राप्त करने की प्रवृत्ति बच्चे में जन्मजात होती है और वह इसी स्वार्थ के लिए बचपन में ही अन्य व्यक्तियों का ध्यान अपनी ओर खींचने का प्रयत्न करता है। यह कई प्रकार की योग्यताओं और विशेष कारनामों का दिखावा करता है। यह प्रवृत्ति जीवन के अंतिम समय तक बनी रहती है। प्रतिस्पर्धा और सहयोग की भावना की नींव इसी मूल-प्रवृत्ति पर रखी जाती है। व्यक्ति अपनी पहचान और मान प्राप्त करने के लिए ही प्रतिस्पर्धा करता है। वह चाहता है कि समाज के अन्य सदस्य उसकी योग्यताओं और गुणों का लोहा मानें। प्रशंसा द्वारा उसमें प्रतिस्पर्धा शक्ति और सहयोग प्रवृत्ति और भी तेज होती है।

प्रश्न 13.
सुयोग्यता (Wellness) के प्रमुख अंगों या घटकों का वर्णन करें।
अथवा
सुयोग्यता के अवयव कौन-कौन से हैं? वर्णन करें।
उत्तर:
सुयोग्यता के प्रमुख अंग या घटक अग्रलिखित हैं
1. सामाजिक सुयोग्यता (Social Wellness):
सामाजिक सुयोग्यता व्यक्ति के सामाजिक एवं नैतिक विचारों के आदान-प्रदान से संबंधित कौशलों को बढ़ाने पर बल देती है। इसको बढ़ाने व विकसित करने के लिए व्यक्ति को सकारात्मक या रचनात्मक क्रियाएँ करते रहना चाहिए। उसे अपने पड़ोसियों व मित्रों से मिलते-जुलते रहना चाहिए।

2. शारीरिक सुयोग्यता (Physical Wellness):
शारीरिक सुयोग्यता की प्राप्ति के लिए व्यक्ति को विभिन्न शारीरिक क्रियाओं; जैसे जॉगिंग, तैराकी व खेलों में भाग लेना चाहिए। उसे स्वयं को स्वच्छ एवं शुद्ध वातावरण में रहने का प्रयास करना चाहिए और संतुलित एवं पौष्टिक भोजन करना चाहिए।

3. भावनात्मक सुयोग्यता (Emotional Wellness):
भावनात्मक या संवेगात्मक सुयोग्यता भी शारीरिक सुयोग्यता के प्रमुख अंगों में से एक है। इसको बढ़ाने के लिए व्यक्ति को अतिभार से दूर रहने, हास्य फ़िल्में देखने व मनोरंजनदायक क्रियाओं में व्यस्त रहने पर ध्यान देना चाहिए।

4. बौद्धिक सुयोग्यता (Intellectual Wellness):
बौद्धिक या मानसिक सुयोग्यता व्यक्ति की तर्कसंगत निर्णय करने की योग्यता होती है जो मानसिक सजगता, नए विचारों का खुलापन, अभिप्रेरणा, सृजनता व जिज्ञासा पर बल देती है। इसको विकसित करने के लिए व्यक्ति को अपने ज्ञान को विस्तृत करने व कौशल को बढ़ाने का निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।

5. आध्यात्मिक सुयोग्यता (Spiritual Wellness):
आध्यात्मिक सुयोग्यता आध्यात्मिक नवीनीकरण व आत्मिक शान्ति पर बल देती है। इसको विकसित करने के लिए व्यक्ति को स्वयं के प्रति सच्चा रहना चाहिए, अच्छे चरित्र का निर्माण करना चाहिए तथा सद्गुणों को विकसित करना चाहिए।

6. पोषण-संबंधी सुयोग्यता (Nutritional Wellness):
पोषण संबंधी सुयोग्यता संतुलित व स्वास्थ्यवर्द्धक आहार के माध्यम से अधिकतम ऊर्जा के स्तरों की प्राप्ति पर बल देती है। पोषण-संबंधी सुयोग्यता बढ़ाने के लिए व्यक्ति को भोजन में वसा कम लेनी चाहिए तथा ताजे फल तथा सब्जियों का अधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए।

7. पर्यावरणीय सुयोग्यता (Environmental Wellness):\
पर्यावरणीय सुयोग्यता भी शारीरिक सुयोग्यता का एक महत्त्वपूर्ण घटक है। पर्यावरणीय सुयोग्यता, पृथ्वी की दशा व इसके भौतिक पर्यावरण पर हमारी आदतों के प्रभावों के प्रति सजगता होती है। इसको बढ़ाने के लिए व्यक्ति को प्रदूषण की मात्रा को कम करने का प्रयास करना चाहिए।

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

लघूत्तरात्मक प्रश्न [Short Answer Type Questions]

प्रश्न 1.
शारीरिक पुष्टि की महत्ता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि की महत्ता को निम्नलिखित तथ्यों से समझा जा सकता है-
(1) शारीरिक पुष्टि शरीर की विभिन्न प्रणालियों के कार्य करने की गति में सुधार करती है।
(2) यह शरीर के संस्थानों को सुचारु रूप से कार्य करने में सहायता करती है।
(3) यह मनुष्य को दीर्घायु बनाती है।
(4) यह रोग निवारक क्षमता को बढ़ाती है।
(5) यह शरीर के सुचारु विकास में सहायक होती है।
(6) यह मानसिक स्वास्थ्य तथा चेतना में सुधार लाती है।

प्रश्न 2.
जीवन में शारीरिक सुयोग्यता के लाभ बताएँ।
अथवा
शारीरिक सुयोग्यता का महत्त्व लिखें।
उत्तर:
शारीरिक सुयोग्यता के मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं-
(1) खुशहाल जीवन जीने के लिए शारीरिक सुयोग्यता बहुत महत्त्वपूर्ण है।
(2) शारीरिक सुयोग्यता मानसिक क्षमता में वृद्धि करती है।
(3) शारीरिक सुयोग्यता से कार्य की गुणवत्ता एवं क्षमता में भी वृद्धि होती है।
(4) शारीरिक सुयोग्यता से तनाव एवं दबाव को दूर रखने में सहायता मिलती है।

प्रश्न 3.
शारीरिक सुयोग्यता व खेलों में भार प्रशिक्षण कैसे महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर:
शारीरिक सुयोग्यता व खेलों में भार प्रशिक्षण का बहुत महत्त्व है। भार प्रशिक्षण में खेल संबंधी उपकरण आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं। इस प्रशिक्षण द्वारा खिलाड़ी बहुत कम समय में अच्छे परिणाम दे सकते हैं। खिलाड़ियों के लिए सीखने हेतु यह विधि बहुत आसान है। खिलाड़ी स्वयं भी प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रशिक्षण के द्वारा शरीर के प्रत्येक अंग का व्यायाम हो जाता है। इससे माँसपेशियाँ और हड्डियाँ मजबूत होती हैं। शरीर के सभी अंगों को शक्ति मिलने से शारीरिक सुयोग्यता का विकास होता है। इस प्रकार भार प्रशिक्षण शारीरिक सुयोग्यता व खेलों में बहुत महत्त्वपूर्ण है।

प्रश्न 4.
सहनशीलता या सहनक्षमता के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
प्रत्येक खेल में अच्छी कुशलता के लिए सहनशीलता बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। हमारे लिए इसका महत्त्व निम्नलिखित है-
(1) एक अच्छी सहनशीलता वाला खिलाड़ी अधिक प्रशिक्षण का भार सहन करके अपनी कुशलता बढ़ा सकता है।
(2) अच्छी सहनशीलता वाला खिलाड़ी प्रतियोगिता के समय सतर्क रहता है, ताकि चोट से बचा जा सके।
(3) लंबे समय वाली खेलों में तकनीकी कार्यकुशलता सहनशीलता पर आधारित होती है।
(4) यह खिलाड़ी की मुकाबले के दौरान संयम बनाए रखने में सहायक होती है।
(5) यह थकावट को रोकने में सहायक होती है। इसकी सहायता से खिलाड़ी अपनी थकान को दूर कर सकता है।

प्रश्न 5.
एरोबिक गतिविधियों के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
एरोबिक गतिविधियाँ वे गतिविधियाँ हैं जिनको करने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इन गतिविधियों में कम तीव्रता तथा लंबी अवधि वाली गतिविधियाँ शामिल होती हैं जो लयात्मक होती हैं और शरीर को गति में लाती हैं। जॉगिंग, साइकलिंग, लयबद्ध व्यायाम एरोबिक गतिविधियों के उदाहरण हैं । एरोबिक गतिविधियाँ करने से शारीरिक फिटनेस बनी रहती है। इनसे हृदय और फेफड़ों की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। इनसे रक्त धमनियों में सुधार होता है। एरोबिक गतिविधियाँ करने से पेट ठीक रहता है और पाचन शक्ति बढ़ती है। इनसे भूख में वृद्धि होती है और शरीर में लचकता बढ़ती है। इन गतिविधियों के मनोवैज्ञानिक फायदे भी हैं। इस प्रकार एरोबिक गतिविधियों का बहुत महत्त्व है।

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प्रश्न 6.
अनएरोबिक गतिविधियों के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अनएरोबिक गतिविधियाँ एरोबिक गतिविधियों के विपरीत होती हैं। अनएरोबिक गतिविधियों में हमारा शरीर कसरत के दौरान ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए ऑक्सीजन का उपयोग नहीं करता। इन क्रियाओं में ऊर्जा का स्रोत एडिनोसिन ट्राईफास्फेट होता है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनएरोबिक गतिविधियाँ बहुत महत्त्वपूर्ण होती हैं। ये गतिविधियाँ शारीरिक पुष्टि के विकास एवं इसे बनाए रखने के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण साधन हैं। संक्षेप में, अनएरोबिक गतिविधियों का महत्त्व निम्नलिखित है
(1) अनएरोबिक गतिविधियों के माध्यम से माँसपेश्यिाँ मजबूत बनती हैं और माँसपेशियाँ की कमजोरियाँ दूर होती हैं।
(2) ये गतिविधियाँ मोटापे को कम करती हैं।
(3) ये गतिविधियाँ अन्य गतिविधियों के लिए सहनशक्ति में सुधार करती हैं।
(4) ये हड्डी के नुकसान के प्रभावों को दूर करने में सहायक होती हैं और टूटी हुई हड्डियों या ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को कम करती हैं।
(5) ये गतिविधियाँ मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होती हैं।

प्रश्न 7.
शारीरिक पुष्टि के विकास में जॉगिंग का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि के विकास में जॉगिंग या धीमी गति की दौड़ की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। जॉगिंग दौड़ का एक ऐसा रूप है जिसमें व्यक्ति लगातार धीमी गति से दौड़ता है। इसका मुख्य उद्देश्य शारीरिक पुष्टि को बढ़ाना है। इससे शरीर पर वह तनाव उत्पन्न नहीं होता, जो तेज गति की दौड़ के कारण होता है।

जॉगिंग वार्मिंग-अप का सबसे बढ़िया तरीका हैं। इसके लिए किसी विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसे प्रत्येक व्यक्ति कर सकता है। पहले की अपेक्षा पिछले कुछ वर्षों में यह एरोबिक क्रिया काफी लोकप्रिय हुई है। यह उन व्यक्तियों के लिए भी सबसे अच्छी क्रिया है जो अपने शरीर के भार को कम करना चाहते हैं। इसके द्वारा शरीर की सभी प्रमुख माँसपेशियों का व्यायाम हो जाता है। इसको हृदय वाहिका प्रणाली (Cardio-Vascular System) विशेषकर हृदय की कोरोनरी धमनियों (CoronaryArteries) के रोगों से बचाव के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। यह हृदय व फेफड़ों की कार्य-कुशलता को बढ़ाने के लिए अत्यन्त लाभदायक है। समूह में जॉगिंग करने से उत्साह व मनोरंजन प्राप्त होता है। इससे तनाव व थकान महसूस भी नहीं होती। जॉगिंग लम्बी अवधि के लिए की जाती है। इसलिए यह ध्यान रखना चाहिए कि कपड़े कुछ ढीले पहनने चाहिएँ और जूते हल्के व सॉफ्ट होने चाहिएँ। जॉगिंग क्रिया न केवल शारीरिक पुष्टि को बढ़ाती, बल्कि सुयोग्यता में भी वृद्धि करने में सहायक होती है।

प्रश्न 8.
जॉगिंग करने के चार लाभ बताइए।
अथवा
जॉगिंग के लाभदायक प्रभाव क्या हैं?
उत्तर:
जॉगिंग करने के लाभ निम्नलिखित हैं-
(1) जॉगिंग शरीर की साँस लेने वाली क्रिया में सुधार करती है।
(2) जॉगिंग से शरीर के सभी अंगों का अभ्यास होता है।
(3) जॉगिंग करने से समय से पहले बुढ़ापा नहीं आता।
(4) जॉगिंग मोटापे को कम करती है।
(5) जॉगिंग से उच्च रक्तचाप की समस्या दूर होती है।

प्रश्न 9.
कैलिसथैनिक्स पर एक संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए।
अथवा
कैलिस्थैनिक्स का शारीरिक पुष्टि के विकास के साधन के रूप में व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि के विकास के लिए कैलिसथैनिक्स का प्रयोग भी किया जाता है। हालांकि कैलिसथैनिक्स के द्वारा केवल सामान्य योग्यता का विकास ही संभव है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी के लिए कैलिसथैनिक्स सामान्य आधारशिला का कार्य करती है। सैंचुरी शब्दकोश के अनुसार, “कैलिसथैनिक्स हल्की जिम्नास्टिक की तरह का व्यायाम होता है।” इससे मांसपेशियों का व्यायाम होता है जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य, शक्ति, सौंदर्य में वृद्धि करना होता है। वास्तव में, कैलिसथैनिक्स एक प्रकार का स्वतंत्र व्यायाम है; जैसे Pull-ups, Push-ups और Chin-ups आदि। कैलिसथैनिक व्यायाम माँसपेशियों के तापमान और रक्त प्रवाह में वृद्धि करता है। यह शरीर में लचक को विकसित करता है। कैलिसथैनिक व्यायाम में विभिन्न प्रकार के हल्के उपकरणों का प्रयोग किया जा सकता है, जिन्हें करने में कम शक्ति की आवश्यकता पड़ती है।

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प्रश्न 10.
शारीरिक पुष्टि के विकास में खेलकूद की भूमिका का वर्णन करें।
उत्तर:
खेलों में भाग लेने का सबसे मुख्य लाभ शारीरिक पुष्टि को प्राप्त करना है। वास्तव में, शारीरिक पुष्टि के अनेक अंग होते हैं और खेलों में इनका अलग-अलग मात्रा में विकास होता है; जैसे ऐसे खेल, जिनमें निरंतर गतियाँ होती हैं; जैसे तैरना और दौड़ना। इनसे फेफड़ों और हृदय की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है। दूसरे खेल; जैसे जिम्नास्टिक से लचक (Flexibility) में वृद्धि होती है। खेलकूद के क्षेत्र में शारीरिक पुष्टि को विकसित करने के लिए अनेक कारक होते हैं। प्रशिक्षण और अभ्यास की सघनता, नियमितता और कौन-सा खेल है जिसके लिए प्रशिक्षण लिया जा रहा है, ये सभी कारक महत्त्वपूर्ण हैं। खिलाड़ी के किसी खेल में खेलने की दिशा और उसकी निपुणता (Skill) का स्तर भी उसकी योग्यता पर प्रभाव डालता है। यदि वह आईस हॉकी में गोल-कीपर के रूप में खेलता है तो उसकी एरोबिक योग्यता विकसित नहीं होगी। दूसरी ओर बास्केटबॉल, फुटबॉल तथा वाटर-पोलो में एरोबिक योग्यता का विकास होता है। निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि खेलों में भाग लेने से शारीरिक पुष्टि विकसित होती है।

प्रश्न 11.
शारीरिक सुयोग्यता में साइकलिंग के कोई चार योगदान बताइए।
अथवा
साइकिल चलाने (Cycling) के चार लाभ बताइए।
उत्तर:
साइकलिंग एक अनएरोबिक व्यायाम है। इसका शारीरिक सुयोग्यता के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान है। इसके लाभ अथवा शारीरिक सुयोग्यता में योगदान निम्नलिखित हैं
(1) साइकिल चलाने से शरीर की माँसपेशियों में सुधार होता है।
(2) इससे श्वास संस्थान की निपुणता में सुधार होता है।
(3) इससे सहनशीलता का विकास होता है।
(4) इससे हृदय व फेफड़ों की कार्यकुशलता में बढ़ोतरी होती है।
(5) इससे शरीर से वसा कम होती है और दिल के दौरे को सामान्य बनाती है।

प्रश्न 12.
भार प्रशिक्षण के महत्त्व का वर्णन कीजिए। अथवा
भार प्रशिक्षण के मुख्य लाभ बताएँ। उत्तर-भार प्रशिक्षण के लाभ अथवा महत्त्व निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट हैं-
(1) भार प्रशिक्षण के द्वारा शरीर के वजन को घटाया व बढ़ाया जा सकता है।
(2) भार प्रशिक्षण से शक्ति तथा लचक में वृद्धि होती है।
(3) भार प्रशिक्षण के द्वारा माँसपेशियों के सिकुड़ने तथा फैलने में वृद्धि होती है।
(4) शरीर के सभी अंगों को शक्ति मिलने से शारीरिक शक्ति का विकास होता है।
(5) भार प्रशिक्षण द्वारा नाड़ी-संस्थान के आपसी तालमेल में वृद्धि होती है।
(6) भार प्रशिक्षण से माँसपेशियाँ तथा हडियाँ मजबूत होती हैं।

प्रश्न 13.
भार प्रशिक्षण के प्रमुख सिद्धांत लिखें।
अथवा
आप भार प्रशिक्षण किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
भार प्रशिक्षण में अधिक भार सिद्धांत का प्रयोग किया जाता है अर्थात् व्यायाम धीरे-धीरे अधिक भार बढ़ाकर किए जाते हैं। इसके प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित हैं
(1) व्यायाम सरल से कठिन की ओर होने चाहिएँ।
(2) भार प्रशिक्षण से पहले झुकने तथा मुड़ने वाले व्यायाम करने चाहिएँ, ताकि शरीर में गर्मी आ जाए।
(3) भार प्रशिक्षण के समय श्वसन क्रिया सामान्य रहनी चाहिए।
(4) व्यायाम करते हुए बीच-बीच में आराम करना चाहिए।
(5) शरीर को शक्तिशाली बनाने के लिए अधिक भार उठाना चाहिए तथा क्षमता बढ़ाने के लिए हल्के भार का प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 14.
सर्किट (परिधि) प्रशिक्षण का संक्षिप्त ब्यौरा दें।
उत्तर:
सर्किट/परिधि प्रशिक्षण बहुत प्रभावशाली और लोकप्रिय व्यायाम है। यह प्रायः शक्ति तथा सहनशीलता बढ़ाने के लिए किए जाता है। सन् 1957 में मॉर्गन तथा एडम्सन ने सर्किट प्रशिक्षण का प्रारंभिक रूप से विकास किया। मॉर्गन तथा एडम्सन के अनुसार, “सर्किट प्रशिक्षण एक ऐसी विधि है जिसमें विभिन्न व्यायामों को यन्त्रों तथा बिना यन्त्रों के निश्चित मात्रा में किया जाता है।” इसके पश्चात् इस प्रशिक्षण में बहुत अधिक परिवर्तन आए। सन् 1979 में स्कोलिक ने सर्किट प्रशिक्षण के लिए नए-नए व्यायामों की जानकारी दी। सर्किट प्रशिक्षण में लगभग 10 से 15 तक व्यायाम चुने जाते हैं। इन व्यायामों को इस ढंग से चुना जाता है ताकि इनका प्रभाव प्रदर्शन पर प्रभावशाली ढंग से पड़े। प्रायः व्यायामों को एक क्रम में रखा जाता है ताकि भिन्न-भिन्न मांसपेशियों के समूह को चक्र में पूरा व्यायाम मिल सके। सर्किट प्रशिक्षण नई तकनीक सिखाने में बहुत सहायक होता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि सर्किट प्रशिक्षण एक प्रभावकारी ढंग से किया जाने वाला व्यायाम है, जो शक्ति तथा सहनशीलता जैसी योग्यताओं में वृद्धि करता है।

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प्रश्न 15.
सर्किट प्रशिक्षण खेलों व शारीरिक सुयोग्यता में कैसे महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर:
सर्किट प्रशिक्षण का खेलों व शारीरिक सुयोग्यता के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। यह निम्नलिखित बातों/तथ्यों से स्पष्ट है
(1) सर्किट प्रशिक्षण से थोड़े स्थान पर ही अधिक व्यायाम संभव हैं।
(2) इस प्रशिक्षण से खिलाड़ी के प्रत्येक अंग की तैयारी हो जाती है।
(3) इस प्रशिक्षण द्वारा बहुत-से खिलाड़ी एक-साथ अभ्यास कर सकते हैं।
(4) इस प्रशिक्षण द्वारा शक्ति, क्षमता एवं सहनशीलता का विकास होता है अर्थात् यह शारीरिक पुष्टि व सुयोग्यता के सभी घटकों के विकास में सहायक होती है।
(5) यह प्रशिक्षण आसान एवं रुचिकर होता है और इसमें विभिन्न आसन होते हैं, जिस कारण खिलाड़ी उबता नहीं है।

प्रश्न 16.
सर्किट प्रशिक्षण की प्रमुख विधियों का वर्णन करें।
अथवा
आप सर्किट प्रशिक्षण किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
सर्किट प्रशिक्षण की प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं-
1. लगातार विधि: सर्किट प्रशिक्षण विधि में अन्य विधियों से अधिक व्यायाम होते हैं। इसमें बिना किसी रुकावट के व्यायाम करने होते हैं, जब तक एक चक्र पूरा नहीं हो जाता। दो चक्रों के मध्य 3 से 5 मिनट की रुकावट की जा सकती है। इसमें यह बताना कि कितनी बार दोहराई होनी है, बहुत कठिन है, परंतु कोच अपने निर्णय के अनुसार व्यायामों की दोहराई की संख्या निश्चित कर सकता है।

2. अंतराल विधि: इसमें लगातार विधि से कम व्यायाम होते हैं। इसमें तीव्रता अधिक होती है तथा आयतन कम होता है। इस विधि में खिलाड़ी निश्चित समय में ही निश्चित व्यायाम करता है तथा फिर थोड़ा आराम करता है।

3. दोहराई विधि: यह विधि सर्किट प्रशिक्षण में कम प्रयोग की जाती है। इसमें पहली दोनों विधियों से कम संख्या में व्यायाम होते हैं।

प्रश्न 17.
सर्किट प्रशिक्षण की मुख्य विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
सर्किट प्रशिक्षण की मुख्य विशेषताएँ अग्रलिखित हैं
(1) इस विधि में व्यायाम सीखना आसान होता है तथा उसको लागू करना भी आसान होता है।
(2) इसमें व्यायाम मध्यम अवरोध तथा मध्यम भार के साथ किए जाते हैं।
(3) इसमें संख्या की अधिक पुनरावृत्ति होती है।
(4) इसका लक्ष्य सहनशीलता व शक्ति को बढ़ावा देना है।
(5) इसमें शरीर के सभी अंगों के व्यायाम शामिल होते हैं।
(6) इसमें खिलाड़ियों को तैयारी के समय मूल सहनशीलता व शक्ति बढ़ाने का अवसर प्राप्त होता है।
(7) इसमें व्यायाम का दबाव धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है।

प्रश्न 18.
परिधि प्रशिक्षण के लाभों का वर्णन कीजिए।
अथवा
सर्किट प्रशिक्षण के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
परिधि/परिधि प्रशिक्षण के लाभ निम्नलिखित हैं-
(1) परिधि प्रशिक्षण में खेल संबंधी उपकरण आसानी से प्राप्त किए जाते हैं।
(2) यह प्रशिक्षण रुचिकर है और सीखने में बहुत आसान है।
(3) इसमें विभिन्न अभ्यासों या व्यायामों को करने के लिए अधिक समय की जरूरत नहीं पड़ती।
(4) इनमें एक ही समय में बहुत-से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
(5) इसमें सीखने वालों की योग्यता के अनुसार प्रशिक्षण को घटाया-बढ़ाया जा सकता है।
(6) यह प्रशिक्षण पुष्टि व सुयोग्यता के सभी घटकों के विकास में सहायक होता है।

प्रश्न 19.
तालमेल संबंधी योग्यता का वर्णन कीजिए।
अथवा
तालबद्ध व्यायाम क्या होते हैं? उदाहरण दें।
अथवा
तालबद्ध व्यायामों का शारीरिक पुष्टि के विकास के साधन के रूप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शारीरिक अंगों के आपस में मिलकर कार्य करने की शक्ति को तालमेल कहते हैं। मानवीय विकास शक्ति और वृद्धि के तालमेल के बिना नहीं हो सकता। तालमेल से शरीर का प्रत्येक अंग मिल-जुलकर कार्य करता है। जब मानवीय शरीर तालमेल से कार्य करता है तो मनुष्य के व्यक्तित्व में वृद्धि होती है। यदि मनुष्य के सारे अंग ठीक ढंग से कार्य करते हों, परंतु दिमाग कार्य न करता हो तो शरीर के बाकी सारे अंग बेकार हो जाते हैं। इसलिए दिमाग, शरीर और स्थिति तालमेल की माँग करते हैं। तालमेल के बिना शारीरिक पुष्टि विकसित नहीं हो सकती। लेजियम, लोक-नृत्य, जम्पिंग, पी०टी० कसरतें आदि तालबद्ध व्यायाम हैं। इनमें शरीर की तालबद्ध गतिविधियाँ होती हैं जो समूह में की जाती हैं। ये गतिविधियाँ हृदय की माँसपेशियों के लिए जरूरी होती हैं। इन व्यायामों से लचक एवं लय संबंधी योग्यताओं का विकास होता है।

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न [Very Short Answer Type Questions]

प्रश्न 1.
शारीरिक पुष्टि से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि/योग्यता का अर्थ बहुत व्यापक है, इसलिए इसे परिभाषित करना बहुत कठिन है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि यह हमें अपने शरीर को सही ढंग से रखने और अधिक देर तक मेहनत करने की क्षमता प्रदान करती है। डॉ० ए० के० उप्पल के अनुसार, “शारीरिक पुष्टि वह क्षमता है जिसके द्वारा शारीरिक क्रियाओं के विभिन्न रूपों को बिना थकावट के तर्कपूर्ण ढंग से किया जा सके। इसके अंतर्गत व्यक्तिगत स्वास्थ्य तथा नीरोगता के महत्त्वपूर्ण गुण सम्मिलित होते हैं।”

प्रश्न 2.
सुयोग्यता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सुयोग्यता एक ऐसी अवस्था है, जो हमारे दैनिक जीवन में प्रत्येक कार्य को प्रभावकारी ढंग से करने में सहायक होती है तथा शेष बची हुई शक्ति से हम खाली समय में मनोरंजन कर सकते हैं। सुयोग्यता व्यक्ति की वह क्षमता या योग्यता है जिसके द्वारा वह एक उत्तम एवं संतुलित जीवन व्यतीत करता है। इसमें मन, शरीर एवं आत्मा का संतुलन शामिल होता है। इसलिए यह शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की दशा या विशेषता होती है।

प्रश्न 3. शारीरिक योग्यता के क्या अवयव हैं?
उत्तर:
(1) गति, (2) शक्ति, (3) लचक, (4) सहनशीलता, (5) स्फूर्ति, (6) तालमेल, (7) समन्वय आदि।

प्रश्न 4.
शक्ति या ताकत से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
शक्ति हमारे शरीर की माँसपेशियों द्वारा उत्पन्न की गई वह ऊर्जा है जिसके द्वारा हम कुछ कार्य कर सकते हैं। शक्ति को मापने के लिए पौंड या डाइन का प्रयोग किया जाता है। यह मुख्यतः दो प्रकार की होती है:

स्थिर शक्ति
गतिशील शक्ति।

प्रश्न 5.
स्थिर शक्ति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
स्थिर शक्ति को ‘आइसोमीट्रिक शक्ति’ भी कहा जाता है। कुछ समय के लिए मनुष्य लगातार अपनी माँसपेशियों की अधिक-से-अधिक जितनी शक्ति लगा सकता है, वह उसकी स्थिर शक्ति कहलाती है। इस शक्ति को डायनेमोमीटर (Dynamometer) द्वारा मापा जाता है। प्रत्यक्ष रूप से इस प्रकार की शक्ति में कार्य होता हुआ दिखाई नहीं पड़ता।

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प्रश्न 6.
लचक का क्या अर्थ है?
उत्तर:
व्यक्ति के शरीर के जोड़ों की गतिक्षमता को लचक कहते हैं। अधिक लचक वाला व्यक्ति बिना किसी कष्ट के अधिक देर तक कार्य कर सकता है तथा उसका व्यक्तित्व भी अच्छा होता है। आमतौर पर लचीलापन, कोमलता और गतिशीलता को एक-दूसरे के लिए प्रयोग किया जाता है, परंतु इनमें बहुत अंतर है। अतः लचक वह योग्यता है, जिसमें प्रत्येक क्रिया अधिक विस्तार से बिना किसी रोक-टोक के की जाती है।

प्रश्न 7.
सक्रिय लचक क्या है?
उत्तर:
सक्रिय लचक को खिलाड़ी बिना किसी बाहरी सहायता के स्वतंत्र रूप से माँसपेशियों की क्रियाशीलता द्वारा प्राप्त करता है। सक्रिय लचक न केवल माँसपेशियों के सिकुड़ने, बल्कि जोड़ों की मांसपेशियों पर भी निर्भर करती है। अतः बिना किसी बाहरी सहायता से शरीर के जोड़ों का अधिक देर तक गति करना सक्रिय लचक कहलाता है; जैसे खिंचाव वाला व्यायाम बिना किसी की सहायता से करना आदि।

प्रश्न 8.
गतिशील लचक से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब शरीर गति में होने के कारण अधिक विस्तार से क्रिया करता है, तो उसको गतिशील लचक कहते हैं। लचक का यह रूप शरीर को अधिक श्रम और खेल प्रदर्शन के लिए तैयार करता है। इस प्रकार की लचक चोट के जोखिम को कम करती है।

प्रश्न 9.
निष्क्रिय लचक क्या है?
उत्तर:
निष्क्रिय लचक से तात्पर्य बाहरी सहायता से अधिक-से-अधिक विस्तार से क्रिया करने वाली योग्यता से है। निष्क्रिय लचक अन्य सभी किस्मों का आधार है। यह बहुत अधिक माँसपेशियों के सिकुड़ने, जोड़ों (लिगामेंट्स) और हड्डियों की बनावट पर निर्भर करती है।

प्रश्न 10.
सहनक्षमता/सहनशीलता का क्या अर्थ है?
अथवा
सहनशीलता के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
सहनशीलता या सहनक्षमता एक प्रतिरोध योग्यता है जो थकावट के विरुद्ध होती है। सामान्य शब्दों में, यह खिलाड़ी की वह योग्यता है, जिसके साथ खिलाड़ी बिना किसी थकावट के क्रिया करता है। वास्तव में, किसी गति या भार को अधिक समय तक अपने ऊपर स्थिर रखने की व्यक्ति के शरीर की संरचनात्मक क्षमता को उसकी सहनक्षमता या सहनशीलता कहा जाता है।

प्रश्न 11.
अनएरोबिक क्रियाएँ क्या होती हैं? उदाहरण दें।
उत्तर:
अनएरोबिक क्रियाएँ वे होती हैं जो ऑक्सीजन के बिना की जाती हैं। इन क्रियाओं से एडिनोसिन ट्राइफास्फेट जोकि माँसपेशियों के लिए ऊर्जा या शक्ति का साधन होता है ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कार्बन-डाइऑक्साइड के प्रयोग द्वारा तैयार होता है। थ्रोइंग व जम्पिंग क्रियाएँ, वेट लिफ्टिंग, तैराकी आदि अनएरोबिक क्रियाओं के उदाहरण हैं।

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प्रश्न 12.
एरोबिक क्रियाएँ क्या होती हैं? उदाहरण दें।
उत्तर:
एरोबिक क्रियाएँ वे होती हैं जिनको करने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है। जॉगिंग, साइकलिंग आदि एरोबिक क्रियाएँ हैं।

प्रश्न 13.
प्रतिक्रिया योग्यता क्या है?
उत्तर:
प्रतिक्रिया योग्यता द्वारा खिलाड़ी किसी संकेत को देखकर अथवा सुनकर पूर्ण तीव्रता से प्रक्रिया प्रारम्भ करता है। जैसे दौड़ के प्रारम्भ होने के समय बंदूक की आवाज़ से पूर्व केवल संकेत का आभास करके खिलाड़ी ब्लॉक में से बाहर आकर दौड़ता है।

प्रश्न 14.
अधिकतम शक्ति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अधिकतम शक्ति, शक्ति का एक महत्त्वपूर्ण रूप है। अधिकतम अवरोध के विरूद्ध कार्य करने की योग्यता अधिकतम शक्ति (Maximum Strength) कहलाती है।

प्रश्न 15.
आहार शारीरिक योग्यता को कैसे प्रभावित करता है? अथवा संतुलित आहार शारीरिक योग्यता को किस प्रकार प्रभावित करता है?
उत्तर:
संतुलित आहार से हमारी शारीरिक संरचना अच्छी रहती है। इससे न केवल खेलकूद के क्षेत्र में, बल्कि आम दैनिक जीवन में भी हमारी कार्यकुशलता एवं कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। संतुलित व पौष्टिक आहार से हमारा तात्पर्य उन पोषक तत्त्वों; जैसे वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, खनिज-लवणों, विटामिनों एवं जल आदि से है जो आहार में उचित मात्रा में उपस्थित होते हैं तथा शरीर का संतुलित विकास करते हैं। मोटापे के कारण व्यक्ति की कार्यक्षमता में कमी आ जाती है। आजकल मोटापा एक महामारी की भाँति फैल रहा है जिसको संतुलित आहार लेने से तथा उचित व्यायाम करने से नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रश्न 16.
शारीरिक पुष्टि (Physical Fitness) के विकास के सिद्धांतों को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि के विकास के सिद्धांत निम्नलिखित हैं
(1) निरंतरता का सिद्धांत
(2) नियमितता का सिद्धांत
(3) अतिभार का सिद्धांत
(4) विभिन्नता का सिद्धांत
(5) प्रगतिशीलता का सिद्धांत
(6) गर्माना
(7) लिम्बरिंग डाउन आदि।

प्रश्न 17.
विस्फोटक शक्ति क्या है?
उत्तर:
विस्फोटक शक्ति खिलाड़ी का वह सामर्थ्य है जब वह तेज गति से प्रतिरोध पर काबू पाता है। यह शक्ति हमेशा डायनैमिक होती है तथा प्रत्येक क्षेत्र के लिए महत्त्वपूर्ण होती है। यह गति तथा शक्ति का सुमेल है। यह भिन्न-भिन्न खेलों में भिन्न-भिन्न किस्मों में पाई जाती है।

प्रश्न 18.
गति क्या है?
उत्तर:
गति व्यक्ति की वह योग्यता या क्षमता है जिसके द्वारा वह एक ही प्रकार की हलचल या हरकत को पुनः तेज गति से करता है अर्थात् शरीर के अंगों या संपूर्ण शरीर को अधिकतम वेग से घुमाने की क्षमता को गति कहते हैं।

प्रश्न 19.
व्यायाम शारीरिक योग्यता को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर:
व्यायाम शारीरिक योग्यता को बहुत प्रभावित करता है। प्रात:काल और सायंकाल का समय व्यायाम और प्रशिक्षण के लिए अति लाभदायक है। प्रात:काल के व्यायाम शरीर को चुस्त और लचकदार: बनाते हैं । सायंकाल के व्यायाम व्यक्ति को पूरे दिन के मानसिक तनाव और शारीरिक थकावट से छुटकारा दिलाते हैं। व्यायाम और प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाते समय अभ्यास सुविधाओं और गर्मी व सर्दी जैसे मौसम का ध्यान जरूर रखना चाहिए।

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प्रश्न 20.
जॉगिंग (Jogging) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जॉगिंग से तात्पर्य है कि धीरे-धीरे या आराम से दौड़कर शरीर को गर्माना। जॉगिंग गर्माने का सबसे बढ़िया ढंग है। इससे शरीर की सभी प्रणालियाँ अच्छे ढंग से काम करना शुरू कर देती हैं।

प्रश्न 21.
साइकलिंग (Cycling) से आपका क्या आशय है?
उत्तर:
साइकलिंग वायवीय तथा अवायवीय क्रिया है। इससे हृदय और फेफड़ों की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है। साइकलिंग का अभ्यास यदि प्रतिदिन नियमित रूप से किया जाए तो शारीरिक पुष्टि आसानी से विकसित की जा सकती है।

प्रश्न 22.
भार प्रशिक्षण क्या है?
उत्तर:
भार प्रशिक्षण विधि से हमारा अभिप्राय उन व्यायामों या कसरतों से है जो हमारे शरीर की विशेष माँसपेशियों को मज़बूत एवं शक्तिशाली बनाती हैं। यह प्रशिक्षण BAR-BELLS की सहायता से किया जाता है। इससे शरीर के विभिन्न भागों के आकार में परिवर्तन होता है और विभिन्न भागों का अनुकूलन भी होता है। इसके माध्यम से शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति सामान्य होने की कोशिश करता है। इससे माँसपेशियाँ मजबूत बनती हैं, उनके आकार तथा शरीर के भार में भी परिवर्तन होता है। यह प्रशिक्षण शारीरिक पुष्टि को विकसित करता है।

प्रश्न 23.
वज़न (भार) प्रशिक्षण के कोई दो लाभ बताएँ।
उत्तर:
(1) वज़न प्रशिक्षण से शक्ति तथा लचक में वृद्धि होती है।
(2) वज़न प्रशिक्षण से माँसपेशियों के सिकुड़ने तथा फैलने में वृद्धि होती है।

प्रश्न 24.
स्फूर्ति किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब खिलाड़ी अपने शरीर या शरीर के किसी हिस्से को हवा में तेजी के साथ और सही ढंग से उसकी दिशा को बदलता है तो उसको स्फूर्ति कहते हैं।

प्रश्न 25.
सुयोग्यता कार्यक्रम क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
सुयोग्यता कार्यक्रम व्यक्ति के आकार एवं आकृति में सुधार करने में सहायता करते हैं। ये व्यक्ति की कार्यक्षमता, उत्पादकता व गुणवत्ता में सुधार करने में सहायक होते हैं। इसलिए सुयोग्यता कार्यक्रम हमारे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हैं।

प्रश्न 26.
वंशानुक्रम से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
वंशानुक्रम से अभिप्राय है-अपने पूर्वजों से प्राप्त होने वाले शारीरिक गुण। यह व्यक्ति की शारीरिक योग्यता को प्रभावित करता है। इसका मुख्य कारण व्यक्ति की शारीरिक संरचना होती है जोकि व्यक्ति के वंश से मिले गुणों द्वारा निर्धारित होती है।

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प्रश्न 27.
तालबद्ध व्यायाम क्या होते हैं?
उत्तर:
तालबद्ध व्यायाम में शरीर की तालबद्ध गतिविधियाँ होती हैं जो समूह में की जाती हैं। ये गतिविधियाँ हृदय की मांसपेशियों के लिए अच्छी होती हैं। इन व्यायामों से लचक एवं लय संबंधी योग्यताओं का विकास होता है। लेजियम, समूह नृत्य, पी०टी० कसरतें आदि तालबद्ध व्यायाम हैं।

प्रश्न 28.
शारीरिक योग्यता के विकास में अतिभार का सिद्धांत कैसे सहायक है?
उत्तर:
शारीरिक योग्यता के विकास के लिए अतिभार के सिद्धांत को अपनाना अति आवश्यक है। अतिभार के सिद्धांत को अपनाने के लिए लंबी दूरी के धावक धीरे-धीरे दूरी में बढ़ोतरी करते रहते हैं। अतिभार सघनता के द्वारा भी बढ़ाया जा सकता है। अतिभार के लिए यह ध्यान में रखना चाहिए कि जब तक अनुकूलन न हो जाए तब तक अतिभार नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 29.
मनोरंजनात्मक क्रियाएँ क्या होती हैं?
उत्तर:
मनोरंजनात्मक क्रियाएँ, वे क्रियाएँ होती हैं जो व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक ऊर्जा का पुनरुद्धार (Restoring) करने में सहायक होती है। इस पुनरुद्धार से व्यक्ति अपना दैनिक कार्य अधिक कुशलतापूर्वक करने के योग्य हो जाता है।

प्रश्न 30.
सर्किट प्रशिक्षण विधि को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
मॉर्गन तथा एडम्सन के अनुसार, “सर्किट प्रशिक्षण विधि एक ऐसी विधि है जिसमें विभिन्न व्यायामों को यन्त्रों तथा यन्त्रों के बिना निश्चित मात्रा में किया जाता है।”

प्रश्न 31.
सर्किट प्रशिक्षण विधि के मुख्य व्यायामों के नाम लिखिए।
उत्तर:
(1) स्टैपिंग-अप ऑन ए बॉक्स
(2) पुश-अप
(3) सिट-अप
(4) जंपिंग ओवर द हर्डल्स
(5) गुड मॉर्निंग व्यायाम
(6) पुल-अप।

प्रश्न 32.
सर्किट प्रशिक्षण विधि के प्रमुख सिद्धांत बताएँ।
उत्तर:
(1) प्रशिक्षण स्टेशनों की संख्या बढ़ाना
(2) सर्किट दोहराई
(3) भार में वृद्धि करना
(4) आराम की अवधि को घटाना
(5) व्यायाम के समय को बढ़ाना।

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प्रश्न 33.
बुनियादी या मौलिक सहनशीलता क्या है?
उत्तर:
बुनियादी सहनशीलता को एरोबिक सहनशीलता भी कहते हैं। यह वह योग्यता है, जो धीरे से मध्यम गति के साथ क्रिया करने से होने वाली थकावट पर नियंत्रण रखती है। इसके अंतर्गत जॉगिंग एवं साइकलिंग आदि क्रियाएँ आती हैं।

प्रश्न 34.
सामान्य सहनशीलता क्या है?
उत्तर:
भिन्न-भिन्न प्रकार की क्रियाएँ चाहे वे वायवीय (एरोबिक) अथवा अवायवीय (अनएरोबिक) हों, इसके दौरान आई थकावट पर नियंत्रण करने वाली क्षमता को सामान्य सहनशीलता कहते हैं। यह एरोबिक और अनएरोबिक व्यायामों को बिना किसी थकावट के लंबे समय तक करने वाली योग्यता है।

प्रश्न 35.
विशेष सहनशीलता क्या है?
उत्तर:
विशेष खेलों में थकावट का प्रतिरोध करने वाली योग्यता को विशेष सहनशीलता कहते हैं। जिस तरह स्वाभाविक रूप से थकावट भिन्न-भिन्न खेलों में भिन्न-भिन्न होती है, उसी तरह सहनशीलता भी भिन्न-भिन्न खेलों में भिन्न-भिन्न होती है। इसको शक्ति सहनशीलता भी कहते हैं। इसका प्रयोग लम्बी दूरी की दौड़ों, तैराकी, मैराथन दौड़ तथा पोल वॉल्ट में काफी हद तक किया जाता है।

प्रश्न 36.
संतुलन योग्यता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
शारीरिक प्रक्रियाओं के दौरान खिलाड़ी को अपना संतुलन बनाए रखना पड़ता है। ऐसा करते समय वह अपनी क्रिया प्रारम्भ रखता है। कई खेल-क्रियाएँ ऐसी होती हैं जोकि खिलाड़ी का संतुलन बिगाड़ने में भूमिका निभाती है लेकिन खिलाड़ी तत्काल ही स्वयं संतुलन उत्पन्न कर लेता है। यथा-जिम्नास्टिक की प्रक्रियाओं के समय खिलाड़ी का संतुलन बिगड़ जाता है लेकिन पाँवों पर खड़ा होने के समय वह स्वयं ही संतुलित हो जाता है।

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HBSE 12th Class Physical Education शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न [Objective Type Questions]

भाग-I : एक शब्द/वाक्य में उत्तर दें

प्रश्न 1.
शक्ति कितने प्रकार की होती है?
उत्तर:
शक्ति दो प्रकार की होती है।

प्रश्न 2.
लचक कितने प्रकार की होती है?
उत्तर:
लचक दो प्रकार की होती है।

प्रश्न 3.
वाटरलू की प्रसिद्ध लड़ाई कहाँ जीती गई?
उत्तर:
वाटरलू की प्रसिद्ध लड़ाई ऐटन के खेल के मैदानों पर जीती गई।

प्रश्न 4.
अत्यधिक गर्मी में अभ्यास करने से क्या हो सकता है?
उत्तर:
अत्यधिक गर्मी में अभ्यास करने से हीटस्ट्रोक हो सकता है।

प्रश्न 5.
अत्यधिक सर्दी में अभ्यास करने से क्या हो सकता है?
उत्तर:
अत्यधिक सर्दी में अभ्यास करने से फ्रास्ट बाइट हो सकता है।

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प्रश्न 6.
किस विधि में शरीर के सभी अंगों का अभ्यास हो सकता है?
उत्तर:
सर्किट या परिधि प्रशिक्षण विधि में शरीर के सभी अंगों का अभ्यास हो सकता है।

प्रश्न 7.
सहनशीलता कितने प्रकार की होती है?
उत्तर:
सहनशीलता तीन प्रकार की होती है।

प्रश्न 8.
भार प्रशिक्षण को सर्वप्रथम किस राष्ट्र ने अपनाया था?
उत्तर:
भार प्रशिक्षण को सर्वप्रथम जर्मनी ने अपनाया था।

प्रश्न 9.
जिम्नास्टिक द्वारा किस शारीरिक पुष्टि के घटक में वृद्धि होती है?
उत्तर:
जिम्नास्टिक द्वारा लचक में वृद्धि होती है।

प्रश्न 10.
किस योग्यता में प्रत्येक क्रिया अधिक विस्तार से बिना रोक-टोक के की जाती है?
उत्तर:
लचक में प्रत्येक क्रिया अधिक विस्तार से बिना रोक-टोक के की जाती है।

प्रश्न 11.
स्थिर शक्ति का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
स्थिर शक्ति का दूसरा नाम आइसोमीट्रिक (Isometric) शक्ति या क्षमता है।

प्रश्न 12.
1980 के दशक से पूर्व शारीरिक पुष्टि के कितने तत्त्व या घटक समझे जाते थे?
उत्तर:
1980 के दशक से पूर्व शारीरिक पुष्टि के पाँच तत्त्व या घटक समझे जाते थे।

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प्रश्न 13.
1980 के बाद शारीरिक पुष्टि का कौन-सा घटक नहीं माना जाता?
उत्तर:
1980 के बाद शारीरिक पुष्टि का फूर्तीलापन या स्फूर्ति घटक नहीं माना जाता।

प्रश्न 14.
गति सर्वाधिक किस प्रणाली पर निर्भर करती है?
उत्तर:
गति सर्वाधिक माँसपेशी प्रणाली पर निर्भर करती है।

प्रश्न 15.
सहनशीलता को कैसे मापा जा सकता है?
उत्तर:
सहनशीलता को पुनरावृत्ति की संख्या द्वारा मापा जा सकता है।

प्रश्न 16.
अतिभार किसके द्वारा बढ़ाया जा सकता है?
उत्तर:
अतिभार सघनता द्वारा बढ़ाया जा सकता है।

प्रश्न 17.
वायवीय क्रियाओं में किस गैस का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर:
वायवीय क्रियाओं में ऑक्सीजन का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 18.
साइकलिंग कैसी क्रिया है?
उत्तर:
साइकलिंग एक वायवीय एवं अवायवीय क्रिया है।

प्रश्न 19.
किसी खिलाड़ी की स्फूर्ति को कैसे परखा जा सकता है?
उत्तर:
साइड स्टैप परीक्षण से खिलाड़ी की स्फूर्ति को परखा जा सकता है।

प्रश्न 20.
शारीरिक पुष्टि का कोई एक घटक बताएँ।
उत्तर:
सहनशीलता।

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प्रश्न 21.
थो करने के लिए किस प्रकार की शक्ति आवश्यक होती है?
उत्तर:
थ्रो करने के लिए विस्फोटक शक्ति आवश्यक होती है।

प्रश्न 22.
पेशीय रेशे कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
पेशीय रेशे दो प्रकार के होते हैं।

प्रश्न 23.
स्थिर शक्ति को किस प्रकार नापा जाता है?
उत्तर:
स्थिर शक्ति को डायनेमोमीटर द्वारा नापा जाता है।

प्रश्न 24.
कैलिसथैनिक्स में किस प्रकार के उपकरणों का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर:
कैलिसथैनिक्स में हल्के उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 25.
जिम्नास्टिक में ग्राउंड फ्लोर व्यायाम और लोकनृत्य किस प्रकार के व्यायाम हैं?
उत्तर:
जिम्नास्टिक में ग्राउंड फ्लोर व्यायाम और लोकनृत्य लयबद्ध या तालबद्ध व्यायाम हैं।

प्रश्न 26.
जॉगिंग करते समय किस तरह के कपड़े पहनने चाहिएँ?
उत्तर:
जॉगिंग करते समय ढीले कपड़े (Loose Clothes) पहनने चाहिएँ।

प्रश्न 27.
जॉगिंग के लिए सतह कैसी होनी चाहिए?
उत्तर:
जॉगिंग के लिए सतह समतल होनी चाहिए।

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प्रश्न 28.
शारीरिक पुष्टि को प्रभावित करने वाले कोई दो कारक बताएँ।
उत्तर:
1. पौष्टिक आहार
2. नियमित व्यायाम।

प्रश्न 29.
शारीरिक अंगों का विकास किससे होता है?
उत्तर:
नियमित व्यायाम गतिविधियों एवं संतुलित व पौष्टिक आहार से शारीरिक अंगों का विकास होता है।

प्रश्न 30.
क्या शारीरिक योग्यता से हमारा स्वास्थ्य ठीक रहता है?
उत्तर:
हाँ, शारीरिक योग्यता से हमारा स्वास्थ्य ठीक रहता है।

प्रश्न 31.
क्या जिम्नास्टिक से शारीरिक योग्यता में वृद्धि होती है?
उत्तर:
हाँ, जिम्नास्टिक से शारीरिक योग्यता में वृद्धि होती है।

प्रश्न 32.
हमारे शरीर में शक्ति किससे पैदा होती है?
उत्तर:
हमारे शरीर में शक्ति माँसपेशियों से पैदा होती है।

प्रश्न 33.
एरोबिक क्रियाओं के कोई दो उदाहरण दें।
उत्तर:
1. जॉगिंग
2. साइकलिंग।

प्रश्न 34.
अनएरोबिक क्रियाओं के कोई दो उदाहरण दें।
उत्तर:
1. वेट-लिफ्टिग
2. थ्रोइंग इवेंट्स।

प्रश्न 35.
कैलिसथैनिक्स कैसी क्रिया है?
उत्तर:
कैलिसथैनिक्स एक स्वतंत्र वायवीय क्रिया है।

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प्रश्न 36.
शक्ति को किस इकाई से मापा जाता है?
उत्तर:
शक्ति को पौंड या डाइन इकाई से मापा जाता है।

प्रश्न 37.
भार प्रशिक्षण के प्रयोग का सुझाव कब और किसने दिया था?
उत्तर:
भार प्रशिक्षण के प्रयोग का सुझाव सन् 1812 में कैड्रिक बान ने दिया था।

प्रश्न 38.
जॉगिंग किस प्रकार की क्रिया है?
उत्तर:
जॉगिंग एक वायवीय क्रिया है।

प्रश्न 39.
कौन-सी शक्ति, गति एवं शक्ति की योग्यताओं का संयोग होती है?
उत्तर:
विस्फोटक शक्ति, गति एवं शक्ति की योग्यताओं का संयोग होती है।

प्रश्न 40.
सर्किट प्रशिक्षण विधि किस प्रणाली पर आधारित है?
उत्तर:
सर्किट प्रशिक्षण विधि जिम्नास्टिक प्रणाली पर आधारित है।

प्रश्न 41.
सर्किट प्रशिक्षण पर अनुसंधान सर्वप्रथम कहाँ किया गया?
उत्तर:
सर्किट प्रशिक्षण पर अनुसंधान सर्वप्रथम यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स, इंग्लैंड में किया गया।

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प्रश्न 42.
जोड़ों की गति-क्षमता को क्या कहते हैं?
उत्तर:
जोड़ों की गति-क्षमता को लचक कहते हैं।

प्रश्न 43.
शीर्षासन से कौन-सी योग्यता मिलती है?
उत्तर:
शीर्षासन से शारीरिक योग्यता मिलती है।

प्रश्न 44.
भार प्रशिक्षण कितनी उम्र में शुरू करना चाहिए?
उत्तर:
भार प्रशिक्षण लगभग 12 वर्ष की उम्र में शुरू करना चाहिए।

प्रश्न 45.
सर्किट/परिधि प्रशिक्षण विधि का प्रतिपादन किसने किया था?
उत्तर:
परिधि प्रशिक्षण विधि का प्रतिपादन मॉर्गन व एडम्सन ने किया था।

प्रश्न 46.
परिधि प्रशिक्षण विधि का प्रतिपादन किस सन में किया गया था?
उत्तर:
परिधि प्रशिक्षण विधि का प्रतिपादन मॉर्गन व एडम्सन द्वारा सन् 1957 में किया गया था।

प्रश्न 47.
गतिशील शक्ति किस प्रकार की शक्ति है?
उत्तर:
गतिशील शक्ति एक आइसोटोनिक शक्ति है।

प्रश्न 48.
खींचने (Pull-up) तथा धक्का लगाने (Push-up) में कौन-सी शक्ति का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर:
खींचने (Pull-up) तथा धक्का लगाने (Push-up) में गतिशील शक्ति का प्रयोग किया जाता है।

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प्रश्न 49.
तालमेल क्या है?
उत्तर:
शारीरिक अंगों के आपस में मिलकर कार्य करने की शक्ति को तालमेल कहते हैं।

प्रश्न 50.
शो/फेंकने के लिए कौन-सी गति की आवश्यकता होती है?
अथवा
गोला फेंकने में किस प्रकार की शक्ति की आवश्यकता होती है?
उत्तर:
गोला फेंकने में गतिशील शक्ति (Dynamic Strength) की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 51.
ऊँची कूद, ट्रिपल जम्प तथा पोल वॉल्ट में उतरते समय कौन-सी शक्ति प्रयोग होती है?
उत्तर:
ऊँची कूद, ट्रिपल जम्प तथा पोल वॉल्ट में उतरते समय अधिकतम शक्ति प्रयोग होती है।

प्रश्न 52.
“सहनशीलता थकावट को रोकने या विरोध करने की योग्यता है।” ये शब्द किसने कहे?
उत्तर:
ये शब्द हर्रे ने कहे।

प्रश्न 53.
वह कौन-सी शक्ति है जो हमेशा तकनीकी कौशल और तालमेल व सामर्थ्य के साथ जुड़ी है?
उत्तर:
साधारण शक्ति हमेशा तकनीकी कौशल और तालमेल व सामर्थ्य के साथ जुड़ी है।

प्रश्न 54.
शारीरिक पुष्टि का कौन-सा घटक एक प्रतिरोध योग्यता है जो थकावट के विरुद्ध होता है?
उत्तर:
सहनशीलता।

प्रश्न 55.
तैराकी में बैक स्ट्रोक सीखने के लिए शरीर में कौन-सा शारीरिक पुष्टि का घटक होना चाहिए?
उत्तर:
तैराकी में बैक स्ट्रोक सीखने के लिए शरीर में लचक होनी चाहिए।

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प्रश्न 56.
शारीरिक योग्यता के कौन-से अंग को आंतरिक बल (Stamina) भी कहा जाता है?
उत्तर:
सहनशीलता को।

प्रश्न 57.
साइकलिंग शारीरिक पुष्टि के किस अवयव के लिए महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर:
साइकलिंग शक्ति व सहनशीलता के लिए महत्त्वपूर्ण है।

प्रश्न 58.
तैराकी तथा दौड़ों के द्वारा शरीर के किस अंग की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है?
उत्तर:
तैराकी तथा दौड़ों के द्वारा फेफड़ों की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।

प्रश्न 59.
ऑक्सीजन की उपस्थिति में किया गया शारीरिक अभ्यास क्या कहलाता है?
उत्तर:
ऑक्सीजन की उपस्थिति में किया गया शारीरिक अभ्यास एरोबिक अभ्यास कहलाता है।

प्रश्न 60.
एक ही स्थिति में अधिक समय तक रहने की शक्ति को क्या कहते हैं?
उत्तर:
एक ही स्थिति में अधिक समय तक रहने की शक्ति को संतुलन कहते हैं।

प्रश्न 61.
जॉगिंग करने से शरीर के किस अंग की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है?
उत्तर:
जॉगिंग करने से हृदय और फेफड़ों की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है।

प्रश्न 62.
वजन प्रशिक्षण को सप्ताह में कितने दिन करना चाहिए?
उत्तर:
वजन प्रशिक्षण को सप्ताह में दो से चार दिन करना चाहिए।

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

प्रश्न 63.
सर्किट प्रशिक्षण में कितने व्यायाम होते हैं?
उत्तर:
सर्किट प्रशिक्षण में 10 से 15 व्यायाम होते हैं।

प्रश्न 64.
परिधि प्रशिक्षण विधि में लगभग कितने स्टेशन होते हैं ?
उत्तर:
परिधि प्रशिक्षण विधि में लगभग 8 से 12 स्टेशन होते हैं।

प्रश्न 65.
खिलाड़ियों को जॉगिंग कैसी सतह पर करनी चाहिए?
उत्तर:
खिलाड़ियों को जॉगिंग समतल सतह वाले मैदान पर करनी चाहिए।

प्रश्न 66.
अत्यधिक गर्मी व आर्द्रता वाले मौसम में खिलाड़ी को अभ्यास करते हुए कैसे कपड़े पहनने चाहिए?
उत्तर:
अत्यधिक गर्मी व आर्द्रता वाले मौसम में खिलाड़ी को अभ्यास करते हुए सूती के हल्के कपड़े पहनने चाहिए।

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भाग-II: सही विकल्प का चयन करें

1. अनएरोबिक योग्यता सहायक है
(A) क्षमता के विकास में
(B) शक्ति के विकास में
(C) दिमाग एवं माँसपेशीय विकास में
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) दिमाग एवं माँसपेशीय विकास में

2. “शारीरिक पुष्टि किसी के जीने के ढंग के दबावों का सफल अनुकूलन है।” ये शब्द किसने कहे?
(A) मॉर्गन ने
(B) एडम्सन ने
(C) डॉ० क्रोल्स ने
(D) डॉ०ए०के० उप्पल ने
उत्तर:
(C) डॉ० क्रोल्स ने

3. व्यक्ति की ऐसी दक्षता या कुशलता जिसके द्वारा व्यक्ति संतुलित जीवन व्यतीत करता है, को क्या कहते हैं?
(A) कुशलता
(B) सामर्थ्य
(C) सुयोग्यता
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) सुयोग्यता

4. निम्नलिखित में से कौन-सी शारीरिक गतिविधि मानसिक लाभ का वर्णन करती है?
(A) शारीरिक गतिविधि शारीरिक बनावट को बढ़ाती है
(B) शारीरिक गतिविधि नियम की समझ का विकास करती है
(C) शारीरिक गतिविधि स्ट्रेस व तनाव को दूर करने में सहायक है
(D) शारीरिक गतिविधि दोस्ती का विकास करती है
उत्तर:
(C) शारीरिक गतिविधि स्ट्रेस व तनाव को दूर करने में सहायक है

5. निम्नलिखित में से शारीरिक पुष्टि के अंग हैं
(A) गति
(B) सहनशीलता
(C) शक्ति
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

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6. गति का सीधा संबंध व्यक्ति के किस संस्थान से होता है?
(A) नाड़ी प्रणाली
(B) माँसपेशी प्रणाली
(C) पाचन प्रणाली
(D) श्वसन प्रणाली
उत्तर:
(B) माँसपेशी प्रणाली

7. नियमित व्यायाम करने से क्या किया जा सकता है?
(A) नियमितता बनाए रखी जा सकती है
(B) शरीर को स्थूल बनाया जा सकता है
(C) शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता बढ़ाई जा सकती है
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता बढ़ाई जा सकती है

8. सुयोग्यता के आवश्यक अंग हैं
(A) सामाजिक सुयोग्यता
(B) शारीरिक सुयोग्यता
(C) बौद्धिक सुयोग्यता
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

9. स्वास्थ्य संबंधित सुयोग्यता का उद्देश्य है
(A) शारीरिक सुयोग्यता का विकास करना
(B) पोषण संबंधी सुयोग्यता बढ़ाना
(C) सक्रिय व स्वस्थ जीवन-शैली का विकास करना
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

10. एरोबिक योग्यता का विकास होता है
(A) बास्केटबॉल खेलने से
(B) फुटबॉल खेलने से
(C) वाटर-पोलो खेलने से
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

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11. शारीरिक पुष्टि को संतुलित बनाए रखने में सहायक है
(A) नियमित व्यायाम
(B) स्वच्छ वातावरण
(C) संतुलित व पौष्टिक भोजन
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

12. शारीरिक पुष्टि का अर्थ है
(A) अच्छे शरीर का होना
(B) शरीर के सभी संस्थानों का सुचारु रूप से कार्य करना
(C) दैनिक कार्य करने की क्षमता
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

13. शारीरिक पुष्टि का एक पहलू है
(A) शारीरिक सुयोग्यता
(B) शारीरिक शिक्षा
(C) शारीरिक क्रिया
(D) शारीरिक ढाँचा
उत्तर:
(A) शारीरिक सुयोग्यता

14. शारीरिक पुष्टि का एक घटक है
(A) माँसपेशीय शक्ति
(B) पोषण
(C) नींद
(D) दिखना
उत्तर:
(A) माँसपेशीय शक्ति

15. शारीरिक पुष्टि व्यक्ति की उम्र को ………..
(A) रोकती
(B) कम करती
(C) बढ़ाती
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) बढ़ाती

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16. शक्ति हमारे शरीर के किस अंग द्वारा पैदा होती है?
(A) फेफड़ों द्वारा
(B) माँसपेशियों द्वारा
(C) नाड़ियों द्वारा
(D) मस्तिष्क द्वारा
उत्तर:
(B) माँसपेशियों द्वारा

17. मनुष्य की वह योग्यता जो किसी भी स्थिति में कम-से-कम समय लेकर अपने कार्य को पूरा करती है, वह कहलाती है
(A) शक्ति
(B) स्फूर्ति
(C) गति
(D) सहनशीलता
उत्तर:
(C) गति

18. गति के विकास की विधियाँ हैं
(A) त्वरण दौड़ें
(B) पेस दौड़ें
(C) लिम्बरिंग डाउन
(D) (A) व (B) दोनों
उत्तर:
(D) (A) व (B) दोनों

19. गतिशील शक्ति किस प्रकार की शक्ति है?
(A) आइसोटोनिक
(B) आइसोकाइनेटिक
(C) आइसोमीट्रिक
(D) एरोबिक
उत्तर:
(A) आइसोटोनिक

20. खींचना (Pull-up) तथा धक्का लगाने (Push-up) में कौन-सी शक्ति का प्रयोग किया गया है?
(A) गतिशील शक्ति का
(B) स्थिर शक्ति का
(C) अधिकतम शक्ति का
(D) शक्ति सहनशीलता का
उत्तर:
(A) गतिशील शक्ति का

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21. सर्किट प्रशिक्षण विधि किस प्रणाली पर आधारित है?
(A) जिम्नास्टिक पर
(B) एथलेटिक्स पर
(C) स्पिंटस पर
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) जिम्नास्टिक पर

22. शीर्षासन से कौन-सी योग्यता मिलती है?
(A) मानसिक योग्यता
(B) शारीरिक योग्यता
(C) सामाजिक योग्यता
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) शारीरिक योग्यता

23. शक्ति के कितने प्रकार होते हैं?
(A) चार
(B) दो
(C) तीन
(D) पाँच
उत्तर:
(B) दो

24. स्थिर शक्ति को किस यन्त्र से मापा जाता है?
(A) थर्मामीटर
(B) लैक्टोमीटर
(C) डायनेमोमीटर
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) डायनेमोमीटर

25. शरीर की शक्ति को नापा जा सकता है
(A) किलोग्राम में
(B) डाइन में
(C) मीटर में
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) डाइन में

26. निम्नलिखित में से कौन-सा एक गतिशील शक्ति का भाग नहीं है?
(A) अधिकतम शक्ति
(B) शक्ति सहनक्षमता
(C) विस्फोटक शक्ति
(D) स्थिर शक्ति
उत्तर:
(D) स्थिर शक्ति

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27. लचक को बढ़ाने वाले आसन हैं
(A) चक्रासन व हलासन
(B) धनुरासन व भुजंगासन
(C) शलभासन व पश्चिमोत्तानासन
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

28. ऊँची कूद, ट्रिपल जम्प तथा पोल वॉल्ट में उतरते समय कौन-सी शक्ति प्रयोग होती है?
(A) स्थिर शक्ति
(B) अधिकतम शक्ति
(C) विस्फोटक शक्ति
(D) शक्ति सहनशीलता
उत्तर:
(B) अधिकतम शक्ति

29. जैवलिन थ्रो तथा डिस्कस थ्रो में कौन-सी शक्ति प्रयोग होती है?
(A) विस्फोटक शक्ति
(B) अधिकतम शक्ति
(C) स्थिर शक्ति
(D) गतिशील शक्ति
उत्तर:
(A) विस्फोटक शक्ति

30. वह शक्ति जो भिन्न-भिन्न स्थितियों में तेज गति के साथ अवरोध पर काबू पाती है, कौन-सी शक्ति कहलाती है?
(A) साधारण शक्ति
(B) विस्फोटक शक्ति
(C) गतिशील शक्ति
(D) स्थिर शक्ति
उत्तर:
(B) विस्फोटक शक्ति

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31. वह कौन-सी शक्ति है जो हमेशा तकनीकी कौशल और तालमेल व सामर्थ्य के साथ जुड़ी है?
(A) साधारण शक्ति
(B) गतिशील शक्ति
(C) विशेष शक्ति
(D) विस्फोटक शक्ति
उत्तर:
(A) साधारण शक्ति

32. थकावट के विरुद्ध अवरोधक योग्यता कहलाती है
(A) गति
(B) शक्ति
(C) लचीलापन
(D) सहनशीलता
उत्तर:
(D) सहनशीलता

33. माँसपेशीय सहनशीलता विशेषतः एक
(A) शारीरिक थकावट को रोकने की क्षमता है
(B) सभी प्रकार के खिलाड़ियों की अर्जित विशेषता है
(C) जिम्नास्ट की मूलभूत सुयोग्यता का घटक है
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) शारीरिक थकावट को रोकने की क्षमता है

34. जिम्नास्टिक द्वारा शारीरिक पुष्टि के किस घटक में वृद्धि होती है?
(A) लचक में
(B) गति में
(C) शक्ति में
(D) सहनशीलता में
उत्तर:
(A) लचक में

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35. स्वास्थ्य संबंधित सुयोग्यता के घटकों में से मुख्य घटक है
(A) गति
(B) शक्ति
(C) लचीलापन
(D) शारीरिक बनावट
उत्तर:
(D) शारीरिक बनावट

36. सर्किट प्रशिक्षण सर्वप्रथम किसके द्वारा शुरुआत, व्याख्यायित व अध्ययन किया गया?
(A) मॉर्गन व एडम्सन
(B) एच०क्लार्क व डी० क्लार्क
(C) स्कोलिक
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) मॉर्गन व एडम्सन

37. सहनशीलता को कैसे मापा जा सकता है?
(A) अवधि द्वारा
(B) पुनरावृत्ति की संख्या द्वारा
(C) थर्मामीटर द्वारा
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) पुनरावृत्ति की संख्या द्वारा

38. सहनशीलता की कितनी किस्में हैं?
(A) दो
(B) चार
(C) तीन
(D) पाँच
उत्तर:
(C) तीन

39. किस सहनशीलता के लिए जॉगिंग और साइकलिंग जैसी क्रियाएँ आवश्यक हैं?
(A) साधारण सहनशीलता
(B) विशेष सहनशीलता
(C) मौलिक सहनशीलता
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) मौलिक सहनशीलता

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40. एरोबिक अथवा अनएरोबिक व्यायामों के दौरान आई थकावट पर नियंत्रण करने वाली क्षमता को क्या कहते हैं?
(A) मौलिक सहनशीलता
(B) साधारण सहनशीलता
(C) विशेष सहनशीलता
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) साधारण सहनशीलता

41. तैराकी में बैक स्ट्रोक सीखने के लिए शरीर में कौन-सा शारीरिक पुष्टि का घटक होना चाहिए?
(A) स्फूर्ति
(B) लचक
(C) गति
(D) शक्ति
उत्तर:
(B) लचक

42. शारीरिक योग्यता के कौन-से अंग को आंतरिक बल (Stamina) भी कहा जाता है?
(A) सहनशीलता
(B) गति
(C) संतुलन
(D) तालमेल
उत्तर:
(A) सहनशीलता

43. पुनः दोहराना विधि सुधार में सहायक है
(A) तेजी योग्यता
(B) अधिकतम शक्ति
(C) विस्फोटक शक्ति
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

44. कैलिसथैनिक्स में किस प्रकार के उपकरणों का प्रयोग किया जाता है?
(A) भारी
(B) हल्के
(C) (A) व (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) हल्के

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45. साधारण शक्ति को बढ़ाया जा सकता है
(A) अंतराल प्रशिक्षण द्वारा
(B) फार्टलेक सिद्धांत द्वारा
(C) निरंतर प्रशिक्षण द्वारा
(D) सर्किट प्रशिक्षण द्वारा
उत्तर:
(D) सर्किट प्रशिक्षण द्वारा

46. स्फूर्ति में शरीर का कौन-सा अंग हिस्सा लेता है?
(A) माँसपेशियाँ
(B) त्वचा
(C) टाँगें
(D) पाँव
उत्तर:
(A) माँसपेशियाँ

47. प्रतिक्रिया व बढ़ना किस योग्यता के प्रकार हैं?
(A) लचीलापन
(B) फुर्ति
(C) सहनशीलता
(D) तेजी
उत्तर:
(D) तेजी

48. साइकलिंग शारीरिक पुष्टि के किस अवयव के लिए महत्त्वपूर्ण है?
(A) शक्ति
(B) गति
(C) लचक
(D) शक्ति व सहनशीलता
उत्तर:
(D) शक्ति व सहनशीलता

49. कौन-सा व्यायाम कार्बनिक शक्ति, शरीर के नियंत्रण तथा लचक को विकसित करता है?
(A) जॉगिंग
(B) साइकलिंग
(C) कैलिसथैनिक्स
(D) लयबद्ध व्यायाम
उत्तर:
(C) कैलिसथैनिक्स

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50. लेजियम, डम्बल, जिम्नास्टिक में ग्राउंड फ्लोर व्यायाम और लोक-नृत्य किस प्रकार के व्यायाम हैं?
(A) वायवीय
(B) अवायवीय
(C) लयबद्ध
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(C) लयबद्ध

51. तैराकी तथा दौड़ों के द्वारा शरीर के किस अंग की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है?
(A) दिमाग की
(B) जिगर की
(C) फेफड़ों की
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) फेफड़ों की

52. ऑक्सीजन की उपस्थिति में किया गया शारीरिक अभ्यास कहलाता है
(A) एरोबिक
(B) अनएरोबिक
(C) आइसोमीट्रिक
(D) आइसोकाइनेटिक
उत्तर:
(A) एरोबिक

53. शारीरिक अंगों के आपस में मिलकर कार्य करने की शक्ति को कहते हैं
(A) शक्ति
(B) लचीलापन
(C) तालमेल
(D) सहनशीलता
उत्तर:
(C) तालमेल

54. लय योग्यता, समायोजन की योग्यता, प्रतिक्रिया योग्यता और संतुलन की योग्यता किस प्रकार की क्रियाएँ हैं?
(A) शारीरिक क्रियाएँ
(B) मानसिक क्रियाएँ
(C) तालमेल संबंधी क्रियाएँ
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) तालमेल संबंधी क्रियाएँ

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55. एक ही स्थिति में अधिक समय तक रहने की शक्ति को क्या कहते हैं?
(A) संतुलन
(B) तालमेल
(C) स्फूर्ति
(D) सहनशीलता
उत्तर:
(A) संतुलन

56. सर्किट प्रशिक्षण का अनुसंधान कहाँ किया गया?
(A) कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, कुरुक्षेत्र में
(B) ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, लंदन में
(C) कैंब्रिज यूनिवर्सिटी, इंग्लैंड में
(D) यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स, इंग्लैंड में
उत्तर:
(D) यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स, इंग्लैंड में

57. ऐसी एक्टिविटी जो ऑक्सीजन की उपस्थिति में की जाती है, कहलाती है-
(A) अनएरोबिक
(B) एरोबिक
(C) एरोबिक व अनएरोबिक
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) एरोबिक

58. वैज्ञानिक विधि से प्रशिक्षण प्राप्त करने की विधि है
(A) निरंतर प्रशिक्षण विधि
(B) सर्किट प्रशिक्षण विधि
(C) अंतराल प्रशिक्षण विधि
(D) वज़न प्रशिक्षण विधि
उत्तर:
(B) सर्किट प्रशिक्षण विधि

59. हमारी मांसपेशियाँ …………………… ऊतकों से बनी होती हैं।
(A) संयोजी
(B) धारीदार
(C) पेशीय
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) पेशीय

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60. एरोबिक अभ्यास है
(A) कम अवधि का
(B) लम्बी अवधि का
(C) (A) व (B) दोनों
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(C) (A) व (B) दोनों

61. अतिभार (Overload) किसके द्वारा बढ़ाया जा सकता है?
(A) अधिक वजन उठाकर
(B) भरपेट भोजन खाकर
(C) सघनता द्वारा
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) सघनता द्वास

62. धीरे-धीरे या आराम से दौड़कर शरीर को गर्म करना क्या कहलाता है?
(A) जॉगिंग
(B) गर्माना
(C) अतिभार
(D) लिम्बरिंग डाउन
उत्तर:
(A) जॉगिंग

63. वायवीय प्रक्रिया में किस गैस का प्रयोग किया जाता है?
(A) नाइट्रोजन
(B) ऑक्सीजन
(C) कार्बन-डाइऑक्साइड
(D) ऑर्गन
उत्तर:
(B) ऑक्सीजन

64. जॉगिंग करने से शरीर के किस अंग की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है?
(A) हृदय की
(B) फेफड़ों की
(C) हृदय और फेफड़ों की
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) हृदय और फेफड़ों की

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65. सर्किट ट्रेनिंग निम्नलिखित के विकास में एक प्रभावशाली विधि है
(A) गति
(B) लचीलापन
(C) ताकत क्षमता
(D) चपलता
उत्तर:
(C) ताकत क्षमता

66. भार प्रशिक्षण किस आयु-वर्ग में आरम्भ करना चाहिए?
(A) 11 वर्ष
(B) 12 वर्ष
(C) 13 वर्ष
(D) 14 वर्ष
उत्तर:
(B) 12 वर्ष

67. वजन प्रशिक्षण से सहज क्रियाएँ; जैसे माँसपेशियों के ……………… तथा ……………… में वृद्धि होती है।
(A) सिकुड़ने, फैलने
(B) फैलने, सिकुड़ने
(C) तीव्र, मंद
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) सिकुड़ने, फैलने

68. निम्नलिखित में से पुष्टि के विकास का साधन कौन-सा है?
(A) खेलकूद
(B) जॉगिंग
(C) तालबद्ध व्यायाम
(D) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(D) उपरोक्त सभी

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69. परिधि प्रशिक्षण विधि का प्रतिपादन किसने किया था?
(A) मॉर्गन व स्टेनले
(B) मॉर्गन व एडम्सन
(C) हिल
(D) थॉम्पसन व डेवरिस
उत्तर:
(A) मॉर्गन व स्टेनले

भाग-III: रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

1. सर्किट प्रशिक्षण विधि ………………… पर आधारित है।
2. गति को साधारणतया लगभग ………………… तक बढ़ाया जा सकता है।
3. थ्रो फेंकने के लिए ………………… की आवश्यकता होती है।
4. शक्ति ………………… द्वारा पैदा होती है।
5. शरीर की शक्ति को ………………… में मापा जा सकता है।
6. व्यक्ति के शरीर के जोड़ों में गति-क्षमता को ……………….. कहते हैं।
7. ………………. प्रशिक्षण विधि में स्टेशन रखे जाते हैं।
8. एरोबिक्स ………………… वर्ष की उम्र के बाद नहीं करनी चाहिए।
9. विस्फोटक शक्ति गति और ……………… की योग्यताओं का मिश्रण है।
10. एक ही स्थिति में अधिक समय तक रहने की शक्ति को ………………… कहा जाता है।
11. अतिभार के सिद्धांत को निभाने के लिए लंबी दूरी के दौड़ाक धीरे-धीरे दूरी में ………………. करते हैं।
12. भार प्रशिक्षण को सर्वप्रथम ………………… ने अपनाया था।
13. एरोबिक्स में समय की अवधि ………………… होती है।
14. सभी तरह की खेलें ………………… पर आधारित होती हैं।
15. सक्रिय लचक ……………….. प्रकार की होती है।
उत्तर:
1. जिम्नास्टिक
2. 20 प्रतिशत
3. परिवर्तनशील गति
4. माँसपेशियों
5. पौंड या डाइन
6. लचक
7. सर्किट
8. 60
9. शक्ति
10. संतुलन
11. बढ़ोतरी
12. जर्मनी
13. लम्बी
14. विस्फोटक गति
15. दो।

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता Summary

शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता परिचय
शारीरिक पुष्ट्रि(Physical Fitness):
आधुनिक युग में प्रत्येक मनुष्य अपनी शारीरिक पुष्टि बनाए रखने के लिए प्रयत्नशील है। यह मनुष्य की वह शक्ति तथा कार्य करने की योग्यता है, जिसको वह बिना किसी बाधा के आसानी से थोड़ी-सी शक्ति का प्रयोग करके पूरा कर लेता है। शारीरिक पुष्टि का अर्थ बहुत व्यापक है, इसलिए इसे परिभाषित करना बहुत कठिन है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि यह हमें अपने शरीर को सही ढंग से रखने और अधिक देर तक मेहनत करने की क्षमता प्रदान करती है।

सुयोग्यता (Wellness):
सुयोग्यता एक ऐसी अवस्था है, जो हमारे दैनिक जीवन में प्रत्येक कार्य को प्रभावकारी ढंग से करने में सहायक होती है तथा शेष बची हुई शक्ति से हम खाली समय में मनोरंजन कर सकते हैं। यह क्रोध को सहन करने और तनाव को दूर करने में सहायक होती है। यह एक अच्छे स्वास्थ्य का चिह्न है। यह प्रत्येक मनुष्य में भिन्न-भिन्न होती है, क्योंकि इस पर पैतृक आदतों, व्यायाम, आयु तथा लिंग का प्रभाव पड़ता है। अतः सुयोग्यता व्यक्ति की वह क्षमता या योग्यता है जिसके द्वारा वह एक उत्तम एवं संतुलित जीवन व्यतीत करता है। इसमें मन, शरीर एवं आत्मा का संतुलन शामिल होता है। इसलिए यह शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की दशा या विशेषता होती है।

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HBSE 12th Class Physical Education Solutions Haryana Board

Haryana Board HBSE 12th Class Physical Education Solutions

HBSE 12th Class Physical Education Solutions in Hindi Medium

HBSE 12th Class Physical Education Solutions in English Medium

  • Chapter 1 Physical Fitness and Wellness
  • Chapter 2 Training Methods
  • Chapter 3 Health Education
  • Chapter 4 Athletic Care
  • Chapter 5 Sociological Aspects of Physical Education
  • Chapter 6 Family Life Education
  • Chapter 7 Yoga Education
  • Chapter 8 Olympic Movement
  • Chapter 9 National Sports Awards

HBSE 12th Class Physical Education Syllabus

Class: XII
Subject: Physical Education

1. Unit I: Physical Fitness & Wellness
Part-A: Meaning & Definition of Physical Fitness, Method of Fitness development, Components of Physical Fitness, Factor affecting Physical Fitness, Means of Fitness development
Part-B: Practical – Athletics
History of Athletics, Track & Field (Sector) Measurements, Rules & Regulations of different Track & Field Events

2. Unit II: Training Method
Part-A: Meaning & Concept of Training, Different training methods, Methods of strength development: isometric, isotonic, isokinetic exercise, Methods of endurance development: Continuous training, Fartlek training & Interval training method, Methods of speed development: Acceleration & Pace Running, Meaning of Warming-up & Limbering down, Importance of Warming-up & Limbering down, Types & Methods of Warming-up
Part-B: Practical – Foot Ball & KHO-KHO
History of Foot Ball & KHO-KHO, Ground Measurements of Foot Ball & KHO-KHO, Rules & Regulations of Foot Ball & KHO-KHO

3. Unit III: Health Education
Part-A: Meaning & Definition of Health Education, Objectives of Health Education, Meaning of School Health Programme, Importance of School Health Programme, Components of School Health Programme – Healthful School Living – Health Services – Health Instruction, Role of teacher in School Health Programme
Part-B: Practical – Hockey & Kabaddi
Ground Measurements of Hockey & Kabaddi, Rules & Regulations of Hockey & Kabaddi

4. Unit IV: Athletic Care
Part-A: Meaning of Athletic Care, Meaning & Definition of first aid, Qualities & duties of a first aider, Common sports injuries: Causes, Symptoms & their treatment – sprain, strain, fracture, dislocation, confusion, abrasion
Part-B: Practical – Cricket & Judo
History of Cricket & Judo, Ground Measurements of Cricket & Judo, Rules & Regulations of Cricket & Judo

5. Unit V: Sociological Aspects of Physical Education
Part-A: Meaning & Definition of Sociology, Importance of Sociology in Physical Education, Meaning of Socialization, Role of Physical Education in Socialization, Effects of Social Institution on individual behaviour, Game & sports as men Cultural Heritage
Part-B: Practical – Hand Ball, Basket Ball
History of Hand Ball & Basket Ball, Ground Measurements of Hand Ball & Basket Ball, Rules & Regulations of Hand Ball & Basket Ball

6. Unit VI: Family Life Education
Part-A: Meaning of Family, Types of Family, Importance of Family as a social institution, Role of parents in child care, Preparation of Marriage, Meaning of Adolescence, Problem & Management of adolescence Problem
Part-B: Practical – VolleyBall & Wrestling
History of Volley Ball & Wrestling, Ground Measurements of Volley Ball & Wrestling, Rules & Regulations of Volley Ball &
Wrestling

7. Unit VII: Yoga Education
Part-A: Meaning & Definition of Yoga, Importance of Yoga, Elements of Yoga (Ashtanga Yog), Meaning & Types of Pranayam
Part-B: Practical – Yogic Exercise
History of Yoga, Different Asanas

8. Unit VIII: Olympic Movements
Part-A: History of Ancient & Modern Olympic Games, Rules of Participations in Modern Olympic Games, Objectives of Modern Olympic Games, Short Notes on – Olympic oath, Olympic flag, Olympic Motto, Olympic Prize, Meaning of Olympic movement
Part-B: Practical – Badminton & Table Tennis
History of Badminton & Table Tennis, Ground Measurements of Badminton & Table Tennis, Rules & Regulations of Badminton & Table Tennis

9. Unit IX: National Sports Awards
Part-A: Meaning of National sports awards, Explain the following in detail – Rajiv Gandhi Khel Ratna award – Arjuna award, Dronacharya award, Bhim award
Part-B: Practical – Boxing, Judo
History of Boxing & Judo, Ground Measurements of Boxing & Judo, Rules & Regulations of Boxing & Judo

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