HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

Haryana State Board HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

HBSE 12th Class Physical Education शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता Textbook Questions and Answers

दीर्घ-उत्तरात्मक प्रश्न [Long Answer Type Questions]

प्रश्न 1.
शारीरिक पुष्टि के घटक (अंग) कौन-कौन से हैं? वर्णन कीजिए।
अथवा
शारीरिक पुष्टि (Physical Fitness) के प्रमुख घटकों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि के विभिन्न घटक या अंग निम्नलिखित हैं
1. गति (Speed):
गति से अभिप्राय मनुष्य की उस योग्यता से है जो किसी भी स्थिति में कम-से-कम समय लेकर अपने कार्य को पूरा करती है। गति दूसरे शारीरिक योग्यता के अंगों; जैसे शक्ति तथा सहनशीलता से भिन्न है। यह नाड़ी प्रणाली पर आधारित है। गति को साधारणतया लगभग 20 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता, क्योंकि गति बहुत सारी बातों पर आधारित होती है। भिन्न-भिन्न खेलों में गति भिन्न-भिन्न देखने को मिलती है। सभी खेल तेज तथा विस्फोटक मूवमैंट पर आधारित होते हैं।

2. शक्ति (Strength):
शक्ति शारीरिक पुष्टि का एक महत्त्वपूर्ण घटक है। शक्ति हमारे शरीर की माँसपेशियों द्वारा उत्पन्न की गई वह ऊर्जा है जिसके द्वारा हम कुछ कार्य कर सकते हैं। शक्ति को मापने के लिए पौंड या डाइन का प्रयोग किया जाता है। शक्ति को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है-(1) स्थिर शक्ति, (2) गतिशील शक्ति। स्थिर शक्ति को ‘आइसोमीट्रिक शक्ति’ के नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर यह शक्ति खेलकूद में प्रयोग नहीं की जाती, परन्तु वजन उठाने में इसका प्रयोग थोड़ी मात्रा में किया जाता है। गतिशील शक्ति को ‘आइसोटोनिक शक्ति’ के नाम से भी जाना जाता है। खींचने वाली क्रियाओं में इसका अधिक प्रयोग किया जाता है।

3. सहनशीलता (Endurance):
सहनशीलता शक्ति की तरह शारीरिक पुष्टि का एक महत्त्वपूर्ण घटक है। सहनशीलता एक प्रतिरोध योग्यता है जो थकावट के विरुद्ध होती है। सामान्य शब्दों में, यह खिलाड़ी की वह योग्यता है, जिसके कारण खिलाड़ी बिना किसी थकावट के क्रिया करता है। सहनशीलता प्रत्येक खेल में अच्छी कुशलता के लिए एक महत्त्वपूर्ण योग्यता है। एक अच्छी सहनशीलता वाला खिलाड़ी अधिक प्रशिक्षण का भार सहन करके अपनी कुशलता बढ़ा सकता है। कूपर और पीटर जैसे विद्वानों का विचार है कि सहनशीलता हृदय की बीमारियों और सामान्य स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है।

4. लचीलापन/लचक (Flexibility):
व्यक्ति के शरीर के जोड़ों की गतिक्षमता को लचक कहते हैं। अधिक लचक वाला व्यक्ति बिना किसी कष्ट के अधिक देर तक कार्य कर सकता है। अधिक लचक वाले व्यक्ति का व्यक्तित्व भी अच्छा होता है। लचकदार शरीर वाले व्यक्ति जब कोई गतिविधि करते हैं तो उनकी मांसपेशियों में कम तनाव उत्पन्न होता है जिस कारण ऊर्जा या शक्ति का बचाव होता है।

5. स्फूर्ति/चुस्ती (Agility):
खिलाड़ी जब अपने शरीर अथवा शरीर के किसी हिस्से को हवा में तेजी के साथ और सही ढंग से उसकी दिशा को बदलता है, तो उसको स्फूर्ति कहा जाता है। इसमें शरीर की बड़ी माँसपेशियाँ भाग लेती हैं और बड़ी तेजी व ठीक ढंग से तालमेल करती हैं। इसको पूरा करने के लिए अनुभव, तकनीक और कौशल की बहुत आवश्यकता होती है। यह विशेषतौर पर हर्डल्ज, कुश्ती, ऊँची छलाँग, फुटबॉल और बास्केटबॉल जैसी खेलों में बहुत महत्त्वपूर्ण है।

6. तालमेल (Co-ordination):
शारीरिक अंगों के आपस में मिलकर कार्य करने की शक्ति को तालमेल कहते हैं। मानवीय विकास शक्ति और वृद्धि के तालमेल के बिना नहीं हो सकता। तालमेल से शरीर का प्रत्येक अंग मिल-जुलकर कार्य करता है। यदि मनुष्य के सारे अंग ठीक ढंग से कार्य करते हों परंतु दिमाग कार्य न करता हो तो शरीर के बाकी सारे अंग बेकार हो जाते हैं। इसलिए दिमाग, शरीर और स्थिति तालमेल की माँग करते हैं। तालमेल के बिना शारीरिक पुष्टि विकसित नहीं हो सकती।

7. संतुलन (Balance):
एक ही स्थिति में अधिक समय तक रहने की शक्ति को संतुलन कहते हैं। यह शारीरिक पुष्टि के लिए बहुत आवश्यक है। उदाहरण के लिए, जब मनुष्य एक टाँग के बल पर कुछ समय के लिए खड़ा होने में सक्षम हो तो इसको उसका संतुलन कहेंगे। हैंड-स्टैंड और शीर्षासन भी ऐसी क्रियाएँ हैं जो संतुलन की उदाहरण हैं। शारीरिक शिक्षा में ऐसी बहुत सारी क्रियाएँ हैं जो संतुलन के लिए काफी लाभकारी होती हैं। शारीरिक पुष्टि के लिए संतुलन का होना बहुत आवश्यक है।

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

प्रश्न 2.
शारीरिक पुष्टि व सुयोग्यता को परिभाषित कीजिए। शारीरिक पुष्टि व सुयोग्यता का हमारे जीवन में क्या महत्त्व है?
अथवा
शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता से क्या अभिप्राय है? इनके महत्त्व का उल्लेख कीजिए।
अथवा
शारीरिक पुष्टि से क्या तात्पर्य है? दैनिक जीवन में शारीरिक पुष्टि के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि का अर्थ (Meaning of Physical Fitness):
आज के यांत्रिक युग में प्रत्येक मनुष्य अपनी शारीरिक पुष्टि बनाए रखने के लिए प्रयत्नशील है। यह मनुष्य की वह शक्ति तथा कार्य करने की योग्यता है, जिसको वह बिना किसी बाधा के आसानी से थोड़ी-सी शक्ति का प्रयोग करके पूरा कर लेता है। शारीरिक पुष्टि या योग्यता का अर्थ बहुत व्यापक है, इसलिए इसे परिभाषित करना बहुत कठिन है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि यह हमें अपने शरीर को सही ढंग से रखने और अधिक देर तक मेहनत करने की क्षमता प्रदान करती है।

1..डॉ०ए०के० उप्पल (Dr.A.K. Uppal) के अनुसार, “शारीरिक पुष्टि वह क्षमता है जिसके द्वारा शारीरिक क्रियाओं के विभिन्न रूपों को बिना थकावट के तर्कपूर्ण ढंग से किया जा सके। इसके अंतर्गत व्यक्तिगत स्वास्थ्य तथा नीरोगता के महत्त्वपूर्ण गुण सम्मिलित होते हैं।”

2. डेविड लैम्ब (David Lamb) के अनुसार, “शारीरिक पुष्टि को उस कुशलता के रूप में परिभाषित किया गया है जिसके द्वारा जीवन की वर्तमान तथा सशक्त शारीरिक चुनौतियों का सफलता के साथ मुकाबला किया जा सके।”

3. क्यूरेटन (Cureton) के अनुसार, “शारीरिक पुष्टि से अभिप्राय व्यक्ति को अपने शरीर का ठीक ढंग से प्रयोग करने और अधिक देर तक परिश्रम करने की क्षमता से है।”

सुयोग्यता का अर्थ (Meaning of Wellness):
सुयोग्यता एक ऐसी अवस्था है, जो हमारे दैनिक जीवन में प्रत्येक कार्य को प्रभावकारी ढंग से करने में सहायक होती है तथा शेष बची हुई शक्ति से हम खाली समय में मनोरंजन कर सकते हैं। सुयोग्यता क्रोध को सहन करने और तनाव को दूर करने में सहायक होती है। यह एक अच्छे स्वास्थ्य का चिह्न है। यह प्रत्येक मनुष्य में भिन्न-भिन्न होती है, क्योंकि इस पर पैतृक आदतों, व्यायाम, आयु तथा लिंग का प्रभाव पड़ता है। अतः सुयोग्यता व्यक्ति की वह क्षमता या योग्यता है जिसके द्वारा वह एक उत्तम एवं संतुलित जीवन व्यतीत करता है। इसमें मन, शरीर एवं आत्मा का संतुलन शामिल होता है। इसलिए । यह शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की दशा या विशेषता होती है।

शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता का महत्त्व (Importance of Physical Fitness and Wellness):
शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता का महत्त्व निम्नलिखित है-
(1) शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता शरीर की विभिन्न प्रणालियों की कार्यक्षमता में सुधार करती हैं। इनसे व्यक्ति कीकार्यकुशलता एवं क्षमता में वृद्धि होती है। शारीरिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति पहले की अपेक्षा अधिक कार्य करने में सक्षम हो जाता है।
(2) ये वृद्ध होने की प्रक्रिया को धीमा करती हैं और मनुष्य को दीर्घायु बनाती हैं।
(3) ये रोग निवारक क्षमता को बढ़ाती हैं और शरीर के सुचारु विकास में मदद करती हैं।
(4) ये व्यक्ति का आसन (Posture) ठीक करती हैं।
(5) ये मानसिक स्वास्थ्य तथा चेतना में सुधार करती हैं और मानसिक क्षमता में वृद्धि करती हैं।
(6) ये तनाव व दबाव को दूर करने में सहायक होती हैं।
(7) ये हृदय और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों को दूर करती हैं।
(8) ये कार्य की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्धि करती हैं।
(9) ये व्यक्ति को सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने हेतु प्रेरित करती हैं।
(10) ये शरीर के आकार एवं बनावट में सुधार करती हैं तथा शरीर को मोटापे या स्थूलता से बचाती हैं।

प्रश्न 3.
शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता पर प्रभाव डालने वाले विभिन्न तत्त्वों या कारकों का वर्णन करें।
अथवा
शारीरिक सुयोग्यता व पुष्टि को प्रभावित करने वाले कारक बताएँ। शारीरिक सुयोग्यता व पुष्टि में इनका क्या योगदान है?
अथवा
शारीरिक पुष्टि को प्रभावित करने वाले कारकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता को प्रभावित करने वाले कारक या तत्त्व निम्नलिखित हैं
1. आयु (Age):
आयु शारीरिक पुष्टि व सुयोग्यता पर सबसे अधिक प्रभाव डालती है। जैसे-जैसे व्यक्ति बड़ा होता है वैसे-वैसे उसकी शारीरिक क्रियाएँ कम हो जाती हैं जिसके कारण उसको कई प्रकार की बीमारियाँ घेर लेती हैं। शारीरिक क्रियाएँ कम होने से व्यक्ति की शारीरिक योग्यता प्रभावित होती है। जो व्यक्ति अपनी शारीरिक क्रियाओं को जारी रखते हैं वे स्वस्थ रहते हैं और उन पर बुढ़ापे के चिह्न कम नजर आते हैं। बच्चों की शारीरिक योग्यता पर कभी भी बड़ी आयु की शारीरिक योग्यताओं के व्यायाम नहीं थोपने चाहिएँ। प्रशिक्षण कार्यक्रम आयु-वर्गों के अनुसार ही तैयार करना चाहिए।

2.शारीरिक बनावट (Body Structure):
खिलाड़ियों का खेल के लिए चुनाव उनकी शारीरिक बनावट से किया जा सकता है। दौड़ों के लिए पतले शरीर का होना जरूरी है और फील्ड इवेंट्स में शरीर शक्तिशाली होना चाहिए। आजकल शारीरिक बनावट शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

3. लिंग-भेद (Gender Difference):
लिंग-भेद भी शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता को प्रभावित करता है। किशोरावस्था में लड़के-लड़कियों में शारीरिक विभिन्नताएँ आ जाती हैं; जैसे लड़कियों को माहवारी का आना, आवाज का मधुर होना आदि तथा लड़कों में दाड़ी-मूंछ आना, आवाज का भारी होना आदि। ये विभिन्नताएँ लड़के और लड़कियों की शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता को प्रभावित करती हैं। इन विभिन्नताओं के आधार पर ही दोनों वर्गों के लिए शारीरिक योग्यता के कार्यक्रम तैयार करने चाहिएँ।

4. अच्छा आसन (Good Posture):
अच्छे आसन वाला व्यक्ति जीवन में हर प्रकार से प्रशंसा का पात्र होता है। अच्छा आसन शारीरिक योग्यता को बढ़ाता है और व्यक्ति के व्यक्तित्व को सुधारता है।

5. वातावरण (Environment):
शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता पर वातावरण का काफी प्रभाव पड़ता है। गर्मियों में शारीरिक योग्यता का कार्यक्रम सर्दियों के कार्यक्रम से अलग होना चाहिए। गर्मियों के मौसम में व्यायाम प्रात:काल अथवा सायंकाल करने चाहिएँ। गर्मियों में व्यायाम करते समय कपड़े खुले और हल्के पहनने चाहिएँ। सर्दियों के मौसम में शरीर को सर्दी से बचाकर रखना चाहिए।

6. उचित अनुकूलन (Proper Conditioning):
उचित अनुकूलन से शारीरिक पुष्टि व सुयोग्यता में वृद्धि होती है। अनुकूलन का शारीरिक योग्यता के साथ सीधा सम्पर्क है। यदि अनुकूलन बढ़ता है तो खेलकूद में भी कार्यकुशलता बढ़ती है। इसलिए खेलों में अनुकूलन एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

7. संतुलित एवं पौष्टिक आहार (Balanced and Nutritive Food):
संतुलित एवं पौष्टिक आहार से हमारी शारीरिक संरचना अच्छी रहती है। इससे न केवल खेलकूद के क्षेत्र में, बल्कि आम दैनिक जीवन में भी हमारी कार्यकुशलता एवं कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। संतुलित व पौष्टिक आहार से हमारा तात्पर्य उन पोषक तत्त्वों; जैसे वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, खनिज-लवणों, विटामिनों एवं जल आदि से है जो आहार में उचित मात्रा में उपस्थित होते हैं तथा शरीर का संतुलित विकास करते हैं। मोटापे के कारण व्यक्ति की कार्यक्षमता में कमी आ जाती है। आजकल मोटापा एक गंभीर समस्या की भाँति फैल रहा है जिसको संतुलित आहार लेने से तथा उचित व्यायाम व आसन करने से नियंत्रित किया जा सकता है।

8. खेलकूद (Sports & Games):
खेलकूद शारीरिक पुष्टि के अंगों; जैसे शक्ति, गति, सहनशीलता, लचक और तालमेल संबंधी योग्यताओं को विकसित करके स्वस्थता की वृद्धि में अपना बहुमूल्य योगदान देते हैं । जब शारीरिक योग्यता से अंगों का विकास होता है तो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ जाती है।

9. धूम्रपान न करना (No Smoking);
धूम्रपान फेफड़ों के लिए हानिकारक है। इससे हृदय की बीमारियाँ भी हो जाती हैं। उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) भी रहने लगता है। व्यक्ति की कार्यक्षमता धीरे-धीरे क्षीण हो जाती है। धूम्रपान करने से मुँह, गले व आहारनली में कैंसर हो जाता है। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति कार्य को लंबी अवधि तक नहीं कर सकते। इसलिए शारीरिक पुष्टि व सुयोग्यता को बनाए रखने के लिए धूम्रपान नहीं करना चाहिए।

10. व्यायाम और प्रशिक्षण (Exercise and Training):
प्रात:काल और सायंकाल का समय व्यायाम और प्रशिक्षण के लिए बहुत लाभदायक होता है। प्रात:काल के व्यायाम शरीर को चुस्त और लचकदार बनाते हैं । सायंकाल के व्यायाम व्यक्ति को पूरे दिन के मानसिक तनाव और शारीरिक थकावट से छुटकारा दिलाते हैं। व्यायाम और प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाते समय अभ्यास सुविधाओं और गर्मी व सर्दी जैसे मौसम का ध्यान जरूर रखना चाहिए।

11. जिंदादिली व मनोरंजन (Joyfulness and Recreation):
शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता को बढ़ाने के लिए व्यक्ति को जिंदादिली व मनोरंजन के साथ जीना चाहिए। खेलकूद के द्वारा मनोरंजन व आमोद-प्रमोद भी होता है तथा व्यक्ति में जिंदादिली रहती है।

12. तनाव एवं दबाव (Tension and Stress):
अधिक तनाव व दबाव व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। इस कारण उसे अनेक मानसिक बीमारियाँ भी हो सकती हैं। तनाव एवं दबाव के कारण व्यक्ति की कार्य करने की क्षमता भी कम होती है। खेलकूद से तनाव व दबाव को कम किया जा सकता है।

13. अन्य कारक (Other Factors):
शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता को अन्य कारक; जैसे नशीले पदार्थ, रहन-सहन का स्तर, वंशानुक्रम तथा आराम आदि भी प्रभावित करते हैं।

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

प्रश्न 4.
शारीरिक पुष्टि को बढ़ाने के लिए किन सिद्धांतों को अपनाना चाहिए?
अथवा
शारीरिक पुष्टि के विकास के प्रमुख सिद्धांत कौन-कौन से हैं? वर्णन कीजिए।
अथवा
शारीरिक पुष्टि के विकास की मुख्य विधियों या सिद्धांतों का वर्णन कीजिए।
अथवा
आप शारीरिक पुष्टि का विकास कैसे करेंगे?
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि के विकास के प्रमुख सिद्धांत या विधियाँ निम्नलिखित हैं-
1. गर्माना (Warming up):
शरीर के लिए गर्माना आवश्यक है क्योंकि गर्माना खिलाड़ी को प्रशिक्षण के लिए तैयार करता है। गर्माने से काफी हद तक खेल चोटों से बचा जा सकता है। इसलिए प्रशिक्षण व खेल प्रतियोगिताओं से पहले गर्माने की प्रक्रिया की जाती है। गर्माना के आरंभ में धीमी गति से दौड़ना चाहिए। उसके बाद खिंचाव वाले व्यायाम करने चाहिएँ। गर्माना से नाड़ी की गति तथा शरीर का तापमान बढ़ जाता है।

2. नियमितता का सिद्धांत (Principle of Regularity):
शारीरिक पुष्टि के विकास हेतु पूरा कार्यक्रम नियमित रूप से करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन अभ्यास नहीं करता तो उसके शरीर का आकार ठीक नहीं होगा और उसकी शारीरिक पुष्टि में भी धीरे-धीरे कमी हो जाएगी। इसलिए शारीरिक पुष्टि के लिए व्यायाम नियमित रूप से करना अति आवश्यक है।

3. अतिभार का सिद्धांत (Principle of Overload):
शारीरिक पुष्टि के विकास के लिए अतिभार के सिद्धांत को अपनाना अति आवश्यक है। अतिभार के सिद्धांत को अपनाने के लिए लंबी दूरी के धावक धीरे-धीरे दूरी में बढ़ोतरी करते रहते हैं। अतिभार के लिए यह ध्यान रखना चाहिए कि जब तक अनुकूलन (Adaptation) न हो जाए, तब तक अतिभार नहीं करना चाहिए।

4. लिम्बरिंग या कूलिंग डाउन (Limbering or Cooling Down):
लिम्बरिंग या कूलिंग डाउन भी गर्माना की तरह ही शरीर के लिए आवश्यक क्रिया है। किसी भी प्रतियोगिता या प्रशिक्षण के बाद यह क्रिया करनी चाहिए।

5. उचित आराम (Proper Rest):
शारीरिक पुष्टि के कार्यक्रम के दौरान तथा बाद में उचित आराम लेना चाहिए। यदि ऐसा न किया जाए तो व्यक्ति की कार्यक्षमता में कमी हो सकती है। इसके साथ-साथ उसकी गति में भी कमी आना स्वाभाविक है। उचित आराम न लेने की अवस्था में व्यक्ति की योग्यता के कार्यक्रम में रुचि कम होने लगती है।

6. सामान्य से जटिल का सिद्धांत (Principle of Simple to Complex):
शारीरिक पुष्टि के विकास के लिए जो भी व्यायाम या क्रियाएँ करें वे सभी सामान्य से जटिल सिद्धांत पर आधारित होनी चाहिएँ अर्थात् सबसे पहले सामान्य व्यायाम और बाद में कठिन या जटिल व्यायाम करने चाहिएँ।

7. प्रगतिशीलता का सिद्धांत (Principle of Progression):
शारीरिक पुष्टि के विकास के लिए प्रशिक्षण में प्रगतिशील सिद्धांत का पालन करना चाहिए। जब भार को जल्दी-जल्दी बढ़ाया जाता है तो इससे प्रगति की बजाय अवनति होने लगती है। इसलिए प्रगति करने हेतु भार को धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए, तभी शारीरिक पुष्टि का संतुलित विकास होगा।

8. विभिन्नता का सिद्धांत (Principle of Variety):
शारीरिक पुष्टि के विकास हेतु विभिन्नता के सिद्धांत को अपनाना चाहिए। व्यायाम में विभिन्नता होने से रुचि को अधिक बढ़ावा मिलता है और रुचि से किया गया कार्य शारीरिक पुष्टि में बहुत महत्त्वपूर्ण होता है।

प्रश्न 5.
शारीरिक पुष्टि के विकास के साधन कौन-कौन से हैं? वर्णन करें।
अथवा
शारीरिक योग्यता या पुष्टि के विकास की विभिन्न एरोबिक या वायवीय क्रियाओं का वर्णन कीजिए।
अथवा
शारीरिक पुष्टि में एरोबिक गतिविधियाँ कैसे सहायक होती हैं? वर्णन करें।
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि को विकसित करने वाले साधन निम्नलिखित हैं- .
1.खेलकूद में भागीदारी (Participation in Games & Sports):
खेलों में भाग लेने का सबसे मुख्य लाभ शारीरिक पुष्टि को विकसित करना है। वास्तव में, शारीरिक पुष्टि के अनेक अंग होते हैं और प्रत्येक खेल में इनका अलग-अलग मात्रा में विकास होता है; जैसे ऐसे खेल, जिनमें निरंतर गतियाँ होती हैं; जैसे तैरना और दौड़ना। इनसे फेफड़ों और हृदय की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है। दूसरे खेल; जैसे जिम्नास्टिक से लचक (Flexibility) में वृद्धि होती है। खेलकूद के क्षेत्र में शारीरिक पुष्टि को विकसित करने के लिए अनेक कारक होते हैं।

2. वजन/भार प्रशिक्षण (Weight Training):
वजन/भार प्रशिक्षण शारीरिक पुष्टि का महत्त्वपूर्ण साधन है। वजन या भार प्रशिक्षण से अभिप्राय उन व्यायामों या कसरतों से है जो हमारे शरीर की विशेष माँसपेशियों को मज़बूत एवं शक्तिशाली बनाती हैं। यह प्रशिक्षण BAR-BELLS की सहायता से किया जाता है। इससे शरीर के विभिन्न भागों का अनुकूलन होता है।

3. सर्किट या परिधि प्रशिक्षण (Circuit Training):
सर्किट प्रशिक्षण बहुत प्रभावशाली और लोकप्रिय व्यायाम है। यह प्राय: शक्ति तथा सहनशीलता बढ़ाने के लिए किए जाता है। सन् 1957 में मॉर्गन तथा एडम्सन ने सर्किट प्रशिक्षण का प्रारंभिक रूप से विकास किया। मॉर्गन व एडम्सन के अनुसार, “सर्किट प्रशिक्षण एक ऐसी विधि है जिसमें विभिन्न व्यायामों को यन्त्रों तथा बिना यन्त्रों के निश्चित मात्रा में किया जाता है।” सर्किट प्रशिक्षण एक प्रभावकारी ढंग से किया जाने वाला व्यायाम है, जो शक्ति तथा सहनशीलता जैसी योग्यताओं में वृद्धि करता है।

4. वायवीय/एरोबिक क्रियाएँ या गतिविधियाँ (Aerobic Activities):
शारीरिक पुष्टि के साधन के रूप में एरोबिक क्रियाएँ बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। शारीरिक पुष्टि के विकास की विभिन्न एरोबिक या वायवीय क्रियाएँ निम्नलिखित हैं
(1) जॉगिंग (Jogging):
जॉगिंग एक वायवीय क्रिया है। जॉगिंग से तात्पर्य है कि धीरे-धीरे या आराम से दौड़कर शरीर को गर्माना। जॉगिंग गर्माने का सबसे बढ़िया ढंग है। इससे शरीर की सभी प्रणालियाँ अच्छे ढंग से काम करना शुरू कर देती हैं।

(2) साइकलिंग (Cycling):
साइकलिंग वायवीय तथा अवायवीय क्रिया है। इससे हृदय और फेफड़ों की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है। शक्ति, सहनशीलता के लिए भी साइकलिंग करना महत्त्वपूर्ण है। इसका अभ्यास यदि प्रतिदिन नियमित रूप से किया जाए तो शारीरिक पुष्टि का विकास भली-भाँति किया जा सकता है।

(3) कैलिसथैनिक्स (Calisthanics):
शारीरिक पुष्टि के विकास के लिए कैलिसथैनिक्स का प्रयोग भी किया जाता है। हालांकि कैलिसथैनिक्स के द्वारा केवल सामान्य योग्यता का विकास ही संभव है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी के लिए कैलिसथैनिक्स सामान्य आधारशिला का कार्य करती है। इससे माँसपेशियों का व्यायाम होता है जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य, शक्ति, सौंदर्य में वृद्धि करना होता है। वास्तव में, कैलिसथैनिक्स एक प्रकार का स्वतंत्र व्यायाम है; जैसे Pull-ups, Push-ups और Chin-ups आदि। कैलिसथैनिक व्यायाम माँसपेशियों के तापमान और रक्त प्रवाह में वृद्धि करता है। यह शरीर में लचक को विकसित करता है।

(4)लयबद्ध व्यायाम (Rhythmic Exercises):
इस प्रकार के व्यायाम लय के साथ किए जाते हैं; जैसे लेजियम, डम्बल, जिम्नास्टिक में ग्राउंड फ्लोर व्यायाम और लोकनृत्य आदि। इस प्रकार के लयबद्ध व्यायामों से भी शारीरिक पुष्टि का विकास होता है। ऐसे व्यायामों से थोड़ी-बहुत सहनशीलता का विकास भी होता है। इसके अतिरिक्त लचक तथा तालमेल संबंधी योग्यताओं का विकास भी होता है। लयबद्ध या तालबद्ध व्यायाम के कुछ उदाहरण हैं-आगे मुड़ना, पीछे मुड़ना, एक ही स्थान पर दौड़ना, चिट-अप, स्टेप-अप, बराबर में मुड़ना आदि।

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प्रश्न 6.
परिधि या सर्किट प्रशिक्षण विधि का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
अथवा
परिधि प्रशिक्षण विधि क्या है? इसके लक्षणों पर प्रकाश डालिए।
अथवा
सर्किट प्रशिक्षण क्या है? इसकी विशेषताओं तथा लाभों का वर्णन कीजिए।
अथवा
सर्किट प्रशिक्षण विधि का संक्षिप्त ब्योरा दीजिए। इसके क्या लाभ हैं?
अथवा
शारीरिक योग्यता के विकास के लिए सर्किट प्रशिक्षण का ब्योरा दीजिए। इसके लाभों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
सर्किट या परिधि प्रशिक्षण विधि का अर्थ (Meaning of Circuit Training Method):
सन् 1957 में मॉर्गन तथा एडम्सन ने सर्किट (परिधि) प्रशिक्षण का प्रारंभिक रूप से विकास किया। मॉर्गन तथा एडम्सन (Morgan and Adamson) के अनुसार, “सर्किट प्रशिक्षण विधि एक ऐसी विधि है जिसमें विभिन्न व्यायामों को यन्त्रों तथा बिना यन्त्रों के निश्चित मात्रा में किया जाता है।” सन् 1979 में स्कोलिक ने सर्किट प्रशिक्षण के लिए नए-नए व्यायामों की जानकारी दी। सर्किट प्रशिक्षण में लगभग 10 से 15 तक व्यायाम चुने जाते हैं। इन व्यायामों को इस ढंग से चुना जाता है ताकि इनका प्रभाव प्रदर्शन पर प्रभावशाली ढंग से पड़े। प्रायः व्यायामों को एक क्रम में रखा जाता है ताकि भिन्न-भिन्न मांसपेशियों के समूह को चक्र में पूरा व्यायाम मिल सके। सर्किट प्रशिक्षण नई तकनीक सिखाने में बहुत सहायक होता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि सर्किट प्रशिक्षण एक प्रभावकारी ढंग से किए जाने वाला व्यायाम है, जो शक्ति तथा सहनशीलता जैसी योग्यताओं में वृद्धि करता है।

सर्किट या परिधि प्रशिक्षण की विशेषताएँ या लक्षण (Features of Circuit Training):
सर्किट प्रशिक्षण की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) इस विधि में व्यायाम सीखना आसान होता है तथा उसको लागू करना भी आसान होता है।
(2) इसमें व्यायाम मध्यम अवरोध तथा मध्यम भार के साथ किए जाते हैं।
(3) इसमें संख्या की अधिक पुनरावृत्ति होती है।
(4) इसका लक्ष्य सहनशीलता व शक्ति को बढ़ावा देना है।
(5) इसमें शरीर के सभी अंगों के व्यायाम शामिल होते हैं।
(6) इसमें खिलाड़ियों को तैयारी के समय मूल सहनशीलता व शक्ति बढ़ाने का अवसर प्राप्त होता है।
(7) इसमें व्यायाम का दबाव धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है।

सर्किट प्रशिक्षण के लाभ (Advantages of Circuit Training):
सर्किट प्रशिक्षण के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं-
(1) इस विधि से एक ही समय में बहुत से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
(2) यह विधि सीखने में बहुत सरल एवं रुचिकर है। कोई भी खिलाड़ी अपने-आप प्रशिक्षण ले सकता है।
(3) इस विधि को खिलाड़ी की योग्यता के अनुसार आसानी से घटाया-बढ़ाया जा सकता है।
(4) इस विधि द्वारा शक्ति, क्षमता एवं सहनशीलता का विकास होता है।
(5) इस विधि द्वारा समय की बचत होती है, क्योंकि इसमें विभिन्न व्यायामों को करने के लिए अधिक समय नहीं लगता।
(6) इस विधि से शरीर के सभी अंगों या भागों का व्यायाम हो सकता है।

प्रश्न 7.
भार प्रशिक्षण विधि (Weight Training Method) का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
अथवा
वज़न प्रशिक्षण से क्या अभिप्राय है? इससे होने वाले लाभों का वर्णन करें।
अथवा
भार प्रशिक्षण विधि क्या है? खिलाड़ियों के लिए इसके महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भार प्रशिक्षण विधि का अर्थ (Meaning of Weight Training Method):
भार प्रशिक्षण विधि से हमारा अभिप्राय उन व्यायामों या कसरतों से है जो हमारे शरीर की विशेष माँसपेशियों को मज़बूत एवं शक्तिशाली बनाती हैं। यह प्रशिक्षण BAR-BELLS की सहायता से किया जाता है। इससे शरीर के विभिन्न भागों के आकार में परिवर्तन होता है और विभिन्न भागों का अनुकूलन भी होता है। इसके माध्यम से शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति सामान्य होने की कोशिश करता है। इससे माँसपेशियाँ मजबूत बनती हैं, उनके आकार तथा शरीर के भार में भी परिवर्तन होता है। यह प्रशिक्षण शारीरिक पुष्टि को विकसित करता है।

भार प्रशिक्षण विधि में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए-
(1) भार प्रशिक्षण के समय श्वास क्रिया साधारण रूप से कार्य करती हुई होनी चाहिए।
(2) भार प्रशिक्षण सप्ताह में दो या चार दिन से अधिक न करें।
(3) प्रशिक्षण के कार्यक्रम को पहले साधारण शारीरिक विकास से शुरू करें। फिर इवेंट प्रशिक्षण के अनुसार व्यायाम करें।
(4) भार प्रशिक्षण के पश्चात् कुछ देर आराम करना जरूरी है।
(5) भार प्रशिक्षण इस प्रकार किया जाए कि शरीर के प्रत्येक अंग की कसरत हो, विशेषतौर पर बाजुओं, टाँगों तथा कमर आदि की।

भार प्रशिक्षण विधि का महत्त्व अथवा लाभ (Advantages or Importance of Weight Training Method):
खिलाड़ियों के लिए भार प्रशिक्षण विधि का महत्त्व अथवा लाभ निम्नलिखित हैं-
(1) भार प्रशिक्षण से शक्ति तथा लचक में वृद्धि होती है।
(2) भार प्रशिक्षण से माँसपेशियों के सिकुड़ने तथा फैलने में वृद्धि होती है।
(3) शरीर के सभी अंगों को शक्ति मिलने से शारीरिक शक्ति का विकास होता है।
(4) भार प्रशिक्षण द्वारा नाड़ी-माँसपेशियों के आपसी तालमेल में वृद्धि होती है।
(5) भार प्रशिक्षण से माँसपेशियाँ तथा हड्डियाँ मजबूत होती हैं।
(6) यह प्रशिक्षण न केवल शारीरिक कार्यक्षमता में वृद्धि करता है, बल्कि दैनिक जीवन की गतिविधियों को करने की क्षमता में भी सुधार करता है।
(7) यह वसा मुक्त शरीर द्रव्यमान को कम करता है। अगर हम अपनी दिनचर्या में भार प्रशिक्षण को नहीं जोड़ते हैं तो यह वसा में बदल जाएगा।
(8) यह संयोजी ऊतकों व मांसपेशियों की ताकत को बढ़ाता है। इससे गामक प्रदर्शन में सुधार होता है और चोट का जोखिम कम हो जाता है।

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

प्रश्न 8.
लचीलापन क्या है? इसकी विभिन्न किस्में कौन-कौन-सी हैं? इसको कैसे बढ़ाया जा सकता है? अथवा लचक से आप क्या समझते हैं? इसके प्रकारों का वर्णन करें।
उत्तर:
लचीलापन/लचक का अर्थ (Meaning of Flexibility):
व्यक्ति के शरीर के जोड़ों की गति-क्षमता को लचक कहते हैं। अधिक लचक वाला व्यक्ति बिना किसी कष्ट के अधिक देर तक कार्य कर सकता है तथा उसका व्यक्तित्व भी अच्छा होता है। लचकदार शरीर वाले व्यक्ति जब कोई गतिविधि करते हैं तो उनकी माँसपेशियों में कम तनाव उत्पन्न होता है जिस कारण ऊर्जा या शक्ति की बचत होती है। आमतौर पर लचीलापन, कोमलता और गतिशीलता को एक-दूसरे के लिए प्रयोग किया जाता है, परंतु इनमें बहुत अंतर है। अतः लचीलापन वह योग्यता है, जिसमें प्रत्येक क्रिया अधिक विस्तार से बिना किसी रोक-टोक के की जाती है।

लचक/लचीलेपन की किस्में अथवा प्रकार (Types of Flexibility):
लचीलेपन की किस्में (प्रकार) निम्नलिखित हैं
1. सक्रिय लचीलापन (Active Flexibility):
सक्रिय लचीलेपन को खिलाड़ी बिना किसी बाहरी सहायता के स्वतंत्र रूप से माँसपेशियों की क्रियाशीलता द्वारा प्राप्त करता है। सक्रिय लचीलापन न केवल माँसपेशियों के सिकुड़ने, बल्कि जोड़ों की मांसपेशियों पर भी निर्भर करता है। अतः बिना किसी बाहरी सहायता से शरीर के जोड़ों का अधिक देर तक गति करना सक्रिय लचीलापन कहलाता है; जैसे खिंचाव वाला व्यायाम बिना किसी की सहायता से करना आदि। यह दो प्रकार का होता है
(1) गतिशील लचीलापन (Dynamic Flexibility): शरीर गति में होने के कारण जब अधिक विस्तार से क्रिया करता है, तो उसको गतिशील लचीलापन कहते हैं।
(2) स्थिर लचीलापन (Static Flexibility): जब कोई खिलाड़ी लेटा, बैठा या खड़ा हुआ किसी प्रकार की गतिविधि करता है, तो उसे स्थिर लचीलापन कहते हैं।

2. निष्क्रिय लचीलापन (Passive Flexibility):
निष्क्रिय लचीलेपन से तात्पर्य बाहरी सहायता द्वारा अधिक-से-अधिक विस्तार से क्रिया करने वाली योग्यता से है। निष्क्रिय लचीलापन अन्य सभी किस्मों का आधार है। यह बहुत अधिक माँसपेशियों के सिकुड़ने, जोड़ों (लिगामेंट्स) और हड्डियों की बनावट पर निर्भर करता है।

लचक बढ़ाने के ढंग/तरीके (Methods of Increasing Flexibility):
लचक बढ़ाने के बहुत-से ढंग है, जिनमें सक्रिय, निष्क्रिय स्टैटिक और कनट्रैक्ट-रिलैक्स व्यायाम आते हैं। अतः लचक को बढ़ाने के तरीके निम्नलिखित हैं-
(1) सक्रिय ढंग में तेज और धीमी किस्म की मूवमैंट करनी चाहिएँ।
(2) निष्क्रिय ढंग में माँसपेशियों को ठीक स्थिति में रखने के लिए फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा व्यायाम करवाए जाते हैं। ये क्रियाएँ अपने-आप भी की जा सकती हैं अथवा किसी की सहायता से भी की जा सकती हैं।
(3) स्टैटिक व्यायाम में माँसपेशियों को धीमे स्तर पर मोड़ना होता है ताकि बिना किसी तकलीफ के इसको 10 से 60 सेकिण्ड तक बढ़ाया जा सके।
(4) कनट्रैक्ट-रिलैक्स किस्म के व्यायाम नाड़ी तथा माँसपेशियों के तालमेल पर आधारित होते हैं । जब माँसपेशियाँ खिंचाव की स्थिति में होती हैं तो वे फिर 5 से 10 सेकिण्ड तक अपनी पहली स्थिति में आ जाती हैं।
(5) विभिन्न प्रकार के आसनों; जैसे चक्रासन, धनुरासन, हलासन आदि द्वारा लचक को बढ़ाया जा सकता है।

प्रश्न 9.
सहनशीलता से क्या अभिप्राय है? इसकी किस्मों तथा उपयोगिता या महत्ता का वर्णन करें।
अथवा
सहनक्षमता या सहनशीलता क्या है? इसके प्रकारों या भेदों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सहनशीलता या सहनक्षमता का अर्थ (Meaning of Endurance):
सहनशीलता या सहनक्षमता शक्ति की तरह एक महत्त्वपूर्ण योग्यता है। यह एक प्रतिरोध योग्यता है जो थकावट के विरुद्ध होती है। सामान्य शब्दों में, यह खिलाड़ी की वह योग्यता है, जिसके साथ खिलाड़ी बिना किसी थकावट के क्रिया करता है। वास्तव में, किसी गति या भार को अधिक समय तक अपने ऊपर स्थिर रखने की व्यक्ति के शरीर की संरचनात्मक क्षमता को उसकी सहनक्षमता कहा जाता है।

सहनशीलता की किस्में या भेद (Types of Endurance):
सहनशीलता की किस्में (भेद) निम्नलिखित हैं-
1. बुनियादी या मौलिक सहनशीलता (Basic Endurance):
बुनियादी सहनशीलता को एरोबिक सहनशीलता भी कहते हैं। यह वह क्षमता है, जो धीरे से मध्यम गति के साथ क्रिया करने से होने वाली थकावट पर नियंत्रण रखती है। इसके अंतर्गत जॉगिंग एवं साइकलिंग आदि,क्रियाएँ आती हैं।

2. साधारण सहनशीलता (General Endurance):
भिन्न-भिन्न प्रकार की क्रियाएँ चाहे वे वायवीय (एरोबिक) अथवा अवायवीय (अनएरोबिक) हों, इसके दौरान आई थकावट पर नियंत्रण करने वाली क्षमता को साधारण सहनशीलता कहते हैं । साधारण सहनशीलता और बुनियादी सहनशीलता में अंतर है। बुनियादी सहनशीलता एरोबिक व्यायामों पर आधारित होती है जबकि साधारण सहनशीलता एरोबिक और अनएरोबिक व्यायामों को बिना किसी थकावट के लंबे समय तक करने वाली योग्यता है।

3. विशेष सहनशीलता (Special Endurance):
विशेष खेलों में थकावट का प्रतिरोध करने वाली योग्यता को विशेष सहनशीलता कहते हैं। जिस तरह स्वाभाविक रूप से थकावट भिन्न-भिन्न खेलों में भिन्न-भिन्न होती है, उसी तरह सहनशीलता भी भिन्न-भिन्न खेलों में भिन्न-भिन्न होती है। इसको शक्ति सहनशीलता भी कहते हैं। इसका प्रयोग लम्बी दूरी की दौड़ों, तैराकी, मैराथन दौड़ तथा पोल वॉल्ट में काफी हद तक किया जाता है।

सहनशीलता की महत्ता या उपयोगिता (Importance or Utility of Endurance):
सहनशीलता प्रत्येक खेल में अच्छी कुशलता के लिए एक महत्त्वपूर्ण योग्यता है। हमारे लिए इसकी महत्ता निम्नलिखित प्रकार से है
(1) एक अच्छी सहनशीलता वाला खिलाड़ी अधिक प्रशिक्षण का भार सहन करके अपनी कुशलता बढ़ा सकता है।
(2) अच्छी सहनशीलता वाला खिलाड़ी प्रतियोगिता के समय चौकन्ना रहता है और पूरा ध्यान रखता है ताकि चोट से बचा जा सके।
(3) लंबे समय वाली खेलों में तकनीकी कार्यकुशलता सहनशीलता पर आधारित होती है।
(4) सहनशीलता खिलाड़ी को मुकाबले के दौरान सामान्य बनाए रखती है। सहनशीलता केवल खिलाड़ियों के लिए ही महत्त्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह सामान्य पुरुषों, स्त्रियों और नौजवानों के लिए भी आवश्यक है। कूपर और पीटर जैसे विद्वानों का विचार है कि सहनशीलता हृदय की बीमारियों और सामान्य स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है।
(5) सहनशीलता का सीधा संबंध व्यक्ति के शारीरिक संस्थानों से है। यदि सहनशीलता बढ़ती है तो विशेष रूप से श्वसन वरक्त प्रवाह संस्थानों की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है।

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प्रश्न 10.
गति से आप क्या समझते हैं? इसको कैसे सुधारा जाए?
उत्तर:
गति का अर्थ (Meaning of Speed):
गति या रफ्तार से अभिप्राय मनुष्य की उस योग्यता से है जो किसी भी स्थिति में कम-से-कम समय लेकर अपने कार्य को पूरा करती है। गति दूसरे शारीरिक योग्यता अंगों; जैसे शक्ति तथा सहनशीलता से भिन्न है। यह नाड़ी प्रणाली पर आधारित है। गति को साधारणतया लगभग 20 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता, क्योंकि गति बहुत सारी बातों पर आधारित होती है। भिन्न-भिन्न खेलों में गति भिन्न-भिन्न किस्मों में देखने को मिलती है।

गति को कैसे सुधारा जाए? (How can speed be improved?):
गति को अग्रलिखित तरीकों से सुधारा जा सकता है-
1. अच्छी तकनीक (Good Technique):
गति को सुधारने के लिए अच्छी तथा बढ़िया तकनीक की आवश्यकता होती है। जिम्नास्टिक तथा मुक्केबाज़ से अपनी खेल का प्रदर्शन बढ़िया कर सकते हैं।

2. विस्फोटक ताकत (Explosive Strength):
प्रत्येक विस्फोटक गति के लिए विस्फोटक शक्ति का होना अति आवश्यक है। एक अच्छे बॉक्सर तथा जिम्नास्ट की गति को तभी सुधारा जा सकता है जब उसमें विस्फोटक शक्ति होगी।

3. मांसपेशियों की बनावट (Structure of Muscles):
शरीर की भिन्न-भिन्न माँसपेशियों में भिन्न-भिन्न फास्ट ट्विच फाइबर (Fast Twitch Fiber) तथा स्लो ट्विच फाइबर (Slow Twitch Fiber) होते हैं। ये फाइबर जन्मजात होते हैं जो गति की कुशलता को दर्शाते हैं।

4. तालमेल या समन्वय की योग्यता (Co-ordination Ability):
लगभग सभी खेलों; जैसे फुटबॉल, हॉकी, बॉक्सिंग, बास्केटबॉल आदि में शारीरिक अंगों के तालमेल की आवश्यकता होती है।

5. लचीलापन (Flexibility):
जब खिलाड़ी के प्रत्येक जोड़ पर अधिक गतिविधि हो तथा उसके जोड़ प्रत्येक दिशा की ओर अत्यधिक झुक जाए अथवा मुड़ जाए तो गति-प्रदर्शन बढ़िया होगा। अल्पायु की लड़कियों में बड़ी आयु के व्यक्तियों से अधिक लचीलापन होता है।

6. प्रतिक्रिया की योग्यता (Metalogic Power):
गति सुधारने में ऊर्जा उत्पन्न करने वाली प्रतिक्रियाएँ भी पर्याप्त तीव्रतापूर्वक होनी चाहिए। प्रतिक्रिया की योग्यता, स्पीड मूवमैंट आदि में सुधार करके गति बढ़ाई जा सकती है।

7. अन्य तरीके (Other Methods):
(1) गति को बढ़ाने के लिए शक्ति व सहनशीलता दोनों का तालमेल जरूरी है।
(2) गति को बढ़ाने के लिए लचक व विस्फोटक शक्ति को बढ़ाना चाहिए।
(3) अच्छी तरह से गर्म होना गति को बढ़ाने में सहायक होता है।

प्रश्न 11.
शक्ति से आपका क्या अभिप्राय है? शक्ति को विकसित करने या सुधारने वाली विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।
अथवा
शक्ति के विकास की विधियों का वर्णन कीजिए।
अथवा
शक्ति से आप क्या समझते हैं? इसके प्रकार क्या हैं?
उत्तर:
शक्ति का अर्थ (Meaning of Strength):
शक्ति या ताकत शारीरिक योग्यता का एक महत्त्वपूर्ण घटक है। साधारण शक्ति से अभिप्राय उस शक्ति से है, जो भिन्न-भिन्न स्थितियों में प्रत्येक किस्म का प्रतिरोध करती है। यह कोई क्रिया अथवा मूवमैंट नहीं है। विशेष शक्ति वह क्षमता है, जो विशेष खेलों में आवश्यक है। यह एक ऐसी क्रिया और मूवमैंट है जो हमेशा तकनीकी कौशल और तालमेल वाले सामर्थ्य के साथ जुड़ी हुई है। अतः शक्ति हमारे शरीर की माँसपेशियों द्वारा उत्पन्न की गई वह ऊर्जा है जिसके द्वारा हम कुछ कार्य कर सकते हैं। इसको मापने के लिए पौंड या डाइन (Dynes) का प्रयोग किया जाता है। एक सामान्य व्यक्ति के जीवन में साधारण शक्ति व एक खिलाड़ी लिए विशेष शक्ति आवश्यक होती है। प्रत्येक खेल में मूवमैंट अवश्य होते हैं और इनमें अनेक प्रकार की शक्तियाँ प्रयोग की जाती हैं।

शक्ति के प्रकार (Types of Strength):
शक्ति के दो प्रकार होते हैं-
(1) स्थिर शक्ति
(2) गतिशील शक्ति।

शक्ति को विकसित करने की विधियाँ (Methods of Improving Strength):
शक्ति को विकसित करने या बढ़ाने के लिए बहुत सारे तरीके हैं लेकिन शक्ति को बढ़ाने के लिए भार प्रशिक्षण (Weight Training) सबसे अच्छा तथा कारगर तरीका है। इसमें खिलाड़ी की माँसपेशियाँ प्रतिरोध के विरुद्ध कार्य करती हैं और ऐसा करने से माँसपेशियों की शक्ति में वृद्धि होती है। शक्ति को ।
सुधारने या बढ़ाने की विधियाँ या तरीके निम्नलिखित हैं
1. अधिकतम उत्सुकता विधि (High Intensity Method):
यह विधि अक्सर वजन उठाने तथा थ्रो करते समय प्रयोग में लाई जाती है। इस तरीके में शक्ति तथा प्रतिरोध वाले व्यायाम अधिक लाभप्रद होते हैं।

2. विस्फोटक विधि (Explosive Method):
इस विधि को जिम्नास्ट तथा जम्प करने वाले ज्यादा प्रयोग में लाते हैं। जब कोई खिलाड़ी तीव्र गति से किसी प्रतिरोध को रोकने का प्रयास करता है तो उसकी इस क्षमता को विस्फोटक शक्ति कहते हैं।

3. प्रतिक्रिया विधि (Reaction Method):
इस विधि के द्वारा अधिकतम शक्ति तथा विस्फोटक शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। इसमें पुली द्वारा व्यायाम, रेत के थैलों के साथ व्यायाम तथा विशेष प्रकार से बने औजार (Equipment) के साथ व्यायाम करवाए जाते हैं।

4. आइसोकाइनेटिक व्यायाम (Isokinetic Exercise):
इस प्रकार के व्यायाम तैराकी के द्वारा करवाए जाते हैं क्योंकि तैराकी द्वारा माँसपेशियों की सिकुड़न अधिक तेजी के साथ होती है। इस विधि में चोट आदि लगने का खतरा कम रहता है।

5. आइसोमीट्रिक व्यायाम (Isometric Exercise):
शक्ति को बढ़ाने का यह तरीका गतिशील ताकत की जगह स्थिर – ताकत को ज़्यादा बढ़ाता है। इस प्रकार के व्यायाम में कम समय तथा कम उपकरणों की आवश्यकता होती है।

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प्रश्न 12.
खेलकूद में भागीदारी की महत्ता पर प्रकाश डालिए।
अथवा
खेलों में भागीदारी (Participation in Games & Sports) का क्या महत्त्व है? वर्णन करें।
उत्तर:
खेलों में भागीदारी का महत्त्व निम्नलिखित है
1. सामाजिक अनुभव (Social Experience):
खेलों में भागीदारी व्यक्तिगत तौर पर अकेले खेल खेलकर संभव नहीं है। किसी खेल को संभव बनाने के लिए एक से अधिक खिलाड़ियों का होना जरूरी है। जैसे कि फुटबॉल की टीम जब कभी किसी मुकाबले या प्रशिक्षण में भाग लेती है तो इसमें अधिकतम 25 (11+11+1+ 2) व्यक्ति शामिल होते हैं। वे खेल के नियमों तथा कोच या रैफरी द्वारा निर्देशित आदेशों की पालना करते हैं। इससे हमें समाज के नियमों को सीखने का अनुभव प्राप्त होता है।

2. सामाजिक मूल्य (Social Values):
सामाजिक मूल्य मनुष्य की अंतर-प्रतिक्रियाओं के वे पक्ष हैं, जिनको समाज में प्रत्येक स्थिति में सुरक्षित और उत्साहित रखना चाहिए। प्रत्येक समाज के कुछ ऐसे मूल्य हैं, जो उसकी परंपरा की देन हैं। जीवन के यही गुण हमें उन्नति की सीमा तक पहुँचाने के लिए सहायक होते हैं। सामाजिक गुण जीवन के आदर्श और वास्तविक का मेल हैं। शिक्षा के उद्देश्य ही व्यक्ति में इन मूल्यों और गुणों की उत्पत्ति के कारण हैं। इसलिए वही अध्यापक बच्चों में सामाजिक गुण पैदा कर सकता है, जिसके अंदर सामाजिक गुण मौजूद हों। एक अच्छी खेल-भावना (Sportmanship) रखने वाला शारीरिक शिक्षा का अध्यापक ही बच्चों में खिलाड़ीपन के गुणों का विकास कर सकता है।

3. प्रतिस्पर्धा (Competition):
सभ्यता की उन्नति का दूसरा तथ्य प्रतिस्पर्धा (Competition) है। प्रतिस्पर्धा वह चैलेंज है जिसमें व्यक्ति अथवा समूह दूसरे व्यक्ति अथवा समूह से आगे निकलने का प्रयत्न करता है। प्रतिस्पर्धा की भावना से जीवन-स्तर ऊँचा होता है, व्यक्ति और समूह कार्यशील रहते हैं और समाज उन्नति के रास्ते पर चलता रहता है। प्रतिस्पर्धा सामाजिक जीवन का एक स्वाभाविक क्रम है। बर–ड रसल (Bertrand Russel) का विचार है, “प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों व्यक्ति की प्राकृतिक क्रियाएँ हैं और व्यक्ति को पछाड़े बिना मुकाबले को समाप्त नहीं किया जा सकता।”

4. सहयोग (Co-operation):
समाज में रहकर हमें एक-दूसरे के साथ मिलकर कार्य करना पड़ता है। इसका कारण यह है कि कोई भी सामाजिक जीव अपने आप में पूर्ण नहीं है। यह बहुत सारी चीजें समाज को देता है और बहुत सारी चीजें अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए समाज से लेता है। परिवार, देश, समाज और सारा विश्व व्यक्तियों, समूहों, दलों, की आपसी सहयोग के कारण ही सुरक्षित है। आपसी सहयोग तभी संभव है जब व्यक्ति और समूह अपने आपको उसके लिए पेश करे। हमदर्दी, मित्रता, प्रेम, त्याग आदि ऐसे गुण हैं, जिन पर सहयोग की नींव रखी जाती है। शारीरिक शिक्षा क्षेत्र में सहयोग की भावना बहुत ही आवश्यक है। सामूहिक खेलों में तो सहयोग की भावना की ओर भी अधिक जरूरत है। हॉकी, फुटबॉल, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल आदि खेल खिलाड़ियों के आपसी सहयोग के साथ ही खेली और जीती जा सकती हैं। सहयोग तभी लाभदायक सिद्ध हो सकता है जब उसके पीछे कार्य की इच्छा और भावना अच्छी हो। खेल के मैदान में सहयोग की भावना तभी शक्तिशाली हो सकती है जब खिलाड़ियों को खेलों का उद्देश्य अच्छी तरह बताया जाए और उनको पूरे अनुशासन में रहकर उस उद्देश्य की पूर्ति करनी सिखाई जाए। इस तरह सहयोग की. भावना दृढ़ होगी और समूह और समाज अच्छी तरह कार्य करेंगे।

5. सामाजिक पहचान (Social Recognition):
पहचान प्राप्त करने की प्रवृत्ति बच्चे में जन्मजात होती है और वह इसी स्वार्थ के लिए बचपन में ही अन्य व्यक्तियों का ध्यान अपनी ओर खींचने का प्रयत्न करता है। यह कई प्रकार की योग्यताओं और विशेष कारनामों का दिखावा करता है। यह प्रवृत्ति जीवन के अंतिम समय तक बनी रहती है। प्रतिस्पर्धा और सहयोग की भावना की नींव इसी मूल-प्रवृत्ति पर रखी जाती है। व्यक्ति अपनी पहचान और मान प्राप्त करने के लिए ही प्रतिस्पर्धा करता है। वह चाहता है कि समाज के अन्य सदस्य उसकी योग्यताओं और गुणों का लोहा मानें। प्रशंसा द्वारा उसमें प्रतिस्पर्धा शक्ति और सहयोग प्रवृत्ति और भी तेज होती है।

प्रश्न 13.
सुयोग्यता (Wellness) के प्रमुख अंगों या घटकों का वर्णन करें।
अथवा
सुयोग्यता के अवयव कौन-कौन से हैं? वर्णन करें।
उत्तर:
सुयोग्यता के प्रमुख अंग या घटक अग्रलिखित हैं
1. सामाजिक सुयोग्यता (Social Wellness):
सामाजिक सुयोग्यता व्यक्ति के सामाजिक एवं नैतिक विचारों के आदान-प्रदान से संबंधित कौशलों को बढ़ाने पर बल देती है। इसको बढ़ाने व विकसित करने के लिए व्यक्ति को सकारात्मक या रचनात्मक क्रियाएँ करते रहना चाहिए। उसे अपने पड़ोसियों व मित्रों से मिलते-जुलते रहना चाहिए।

2. शारीरिक सुयोग्यता (Physical Wellness):
शारीरिक सुयोग्यता की प्राप्ति के लिए व्यक्ति को विभिन्न शारीरिक क्रियाओं; जैसे जॉगिंग, तैराकी व खेलों में भाग लेना चाहिए। उसे स्वयं को स्वच्छ एवं शुद्ध वातावरण में रहने का प्रयास करना चाहिए और संतुलित एवं पौष्टिक भोजन करना चाहिए।

3. भावनात्मक सुयोग्यता (Emotional Wellness):
भावनात्मक या संवेगात्मक सुयोग्यता भी शारीरिक सुयोग्यता के प्रमुख अंगों में से एक है। इसको बढ़ाने के लिए व्यक्ति को अतिभार से दूर रहने, हास्य फ़िल्में देखने व मनोरंजनदायक क्रियाओं में व्यस्त रहने पर ध्यान देना चाहिए।

4. बौद्धिक सुयोग्यता (Intellectual Wellness):
बौद्धिक या मानसिक सुयोग्यता व्यक्ति की तर्कसंगत निर्णय करने की योग्यता होती है जो मानसिक सजगता, नए विचारों का खुलापन, अभिप्रेरणा, सृजनता व जिज्ञासा पर बल देती है। इसको विकसित करने के लिए व्यक्ति को अपने ज्ञान को विस्तृत करने व कौशल को बढ़ाने का निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।

5. आध्यात्मिक सुयोग्यता (Spiritual Wellness):
आध्यात्मिक सुयोग्यता आध्यात्मिक नवीनीकरण व आत्मिक शान्ति पर बल देती है। इसको विकसित करने के लिए व्यक्ति को स्वयं के प्रति सच्चा रहना चाहिए, अच्छे चरित्र का निर्माण करना चाहिए तथा सद्गुणों को विकसित करना चाहिए।

6. पोषण-संबंधी सुयोग्यता (Nutritional Wellness):
पोषण संबंधी सुयोग्यता संतुलित व स्वास्थ्यवर्द्धक आहार के माध्यम से अधिकतम ऊर्जा के स्तरों की प्राप्ति पर बल देती है। पोषण-संबंधी सुयोग्यता बढ़ाने के लिए व्यक्ति को भोजन में वसा कम लेनी चाहिए तथा ताजे फल तथा सब्जियों का अधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए।

7. पर्यावरणीय सुयोग्यता (Environmental Wellness):\
पर्यावरणीय सुयोग्यता भी शारीरिक सुयोग्यता का एक महत्त्वपूर्ण घटक है। पर्यावरणीय सुयोग्यता, पृथ्वी की दशा व इसके भौतिक पर्यावरण पर हमारी आदतों के प्रभावों के प्रति सजगता होती है। इसको बढ़ाने के लिए व्यक्ति को प्रदूषण की मात्रा को कम करने का प्रयास करना चाहिए।

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

लघूत्तरात्मक प्रश्न [Short Answer Type Questions]

प्रश्न 1.
शारीरिक पुष्टि की महत्ता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि की महत्ता को निम्नलिखित तथ्यों से समझा जा सकता है-
(1) शारीरिक पुष्टि शरीर की विभिन्न प्रणालियों के कार्य करने की गति में सुधार करती है।
(2) यह शरीर के संस्थानों को सुचारु रूप से कार्य करने में सहायता करती है।
(3) यह मनुष्य को दीर्घायु बनाती है।
(4) यह रोग निवारक क्षमता को बढ़ाती है।
(5) यह शरीर के सुचारु विकास में सहायक होती है।
(6) यह मानसिक स्वास्थ्य तथा चेतना में सुधार लाती है।

प्रश्न 2.
जीवन में शारीरिक सुयोग्यता के लाभ बताएँ।
अथवा
शारीरिक सुयोग्यता का महत्त्व लिखें।
उत्तर:
शारीरिक सुयोग्यता के मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं-
(1) खुशहाल जीवन जीने के लिए शारीरिक सुयोग्यता बहुत महत्त्वपूर्ण है।
(2) शारीरिक सुयोग्यता मानसिक क्षमता में वृद्धि करती है।
(3) शारीरिक सुयोग्यता से कार्य की गुणवत्ता एवं क्षमता में भी वृद्धि होती है।
(4) शारीरिक सुयोग्यता से तनाव एवं दबाव को दूर रखने में सहायता मिलती है।

प्रश्न 3.
शारीरिक सुयोग्यता व खेलों में भार प्रशिक्षण कैसे महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर:
शारीरिक सुयोग्यता व खेलों में भार प्रशिक्षण का बहुत महत्त्व है। भार प्रशिक्षण में खेल संबंधी उपकरण आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं। इस प्रशिक्षण द्वारा खिलाड़ी बहुत कम समय में अच्छे परिणाम दे सकते हैं। खिलाड़ियों के लिए सीखने हेतु यह विधि बहुत आसान है। खिलाड़ी स्वयं भी प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रशिक्षण के द्वारा शरीर के प्रत्येक अंग का व्यायाम हो जाता है। इससे माँसपेशियाँ और हड्डियाँ मजबूत होती हैं। शरीर के सभी अंगों को शक्ति मिलने से शारीरिक सुयोग्यता का विकास होता है। इस प्रकार भार प्रशिक्षण शारीरिक सुयोग्यता व खेलों में बहुत महत्त्वपूर्ण है।

प्रश्न 4.
सहनशीलता या सहनक्षमता के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
प्रत्येक खेल में अच्छी कुशलता के लिए सहनशीलता बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। हमारे लिए इसका महत्त्व निम्नलिखित है-
(1) एक अच्छी सहनशीलता वाला खिलाड़ी अधिक प्रशिक्षण का भार सहन करके अपनी कुशलता बढ़ा सकता है।
(2) अच्छी सहनशीलता वाला खिलाड़ी प्रतियोगिता के समय सतर्क रहता है, ताकि चोट से बचा जा सके।
(3) लंबे समय वाली खेलों में तकनीकी कार्यकुशलता सहनशीलता पर आधारित होती है।
(4) यह खिलाड़ी की मुकाबले के दौरान संयम बनाए रखने में सहायक होती है।
(5) यह थकावट को रोकने में सहायक होती है। इसकी सहायता से खिलाड़ी अपनी थकान को दूर कर सकता है।

प्रश्न 5.
एरोबिक गतिविधियों के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
एरोबिक गतिविधियाँ वे गतिविधियाँ हैं जिनको करने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। इन गतिविधियों में कम तीव्रता तथा लंबी अवधि वाली गतिविधियाँ शामिल होती हैं जो लयात्मक होती हैं और शरीर को गति में लाती हैं। जॉगिंग, साइकलिंग, लयबद्ध व्यायाम एरोबिक गतिविधियों के उदाहरण हैं । एरोबिक गतिविधियाँ करने से शारीरिक फिटनेस बनी रहती है। इनसे हृदय और फेफड़ों की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। इनसे रक्त धमनियों में सुधार होता है। एरोबिक गतिविधियाँ करने से पेट ठीक रहता है और पाचन शक्ति बढ़ती है। इनसे भूख में वृद्धि होती है और शरीर में लचकता बढ़ती है। इन गतिविधियों के मनोवैज्ञानिक फायदे भी हैं। इस प्रकार एरोबिक गतिविधियों का बहुत महत्त्व है।

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प्रश्न 6.
अनएरोबिक गतिविधियों के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अनएरोबिक गतिविधियाँ एरोबिक गतिविधियों के विपरीत होती हैं। अनएरोबिक गतिविधियों में हमारा शरीर कसरत के दौरान ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए ऑक्सीजन का उपयोग नहीं करता। इन क्रियाओं में ऊर्जा का स्रोत एडिनोसिन ट्राईफास्फेट होता है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनएरोबिक गतिविधियाँ बहुत महत्त्वपूर्ण होती हैं। ये गतिविधियाँ शारीरिक पुष्टि के विकास एवं इसे बनाए रखने के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण साधन हैं। संक्षेप में, अनएरोबिक गतिविधियों का महत्त्व निम्नलिखित है
(1) अनएरोबिक गतिविधियों के माध्यम से माँसपेश्यिाँ मजबूत बनती हैं और माँसपेशियाँ की कमजोरियाँ दूर होती हैं।
(2) ये गतिविधियाँ मोटापे को कम करती हैं।
(3) ये गतिविधियाँ अन्य गतिविधियों के लिए सहनशक्ति में सुधार करती हैं।
(4) ये हड्डी के नुकसान के प्रभावों को दूर करने में सहायक होती हैं और टूटी हुई हड्डियों या ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को कम करती हैं।
(5) ये गतिविधियाँ मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होती हैं।

प्रश्न 7.
शारीरिक पुष्टि के विकास में जॉगिंग का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि के विकास में जॉगिंग या धीमी गति की दौड़ की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। जॉगिंग दौड़ का एक ऐसा रूप है जिसमें व्यक्ति लगातार धीमी गति से दौड़ता है। इसका मुख्य उद्देश्य शारीरिक पुष्टि को बढ़ाना है। इससे शरीर पर वह तनाव उत्पन्न नहीं होता, जो तेज गति की दौड़ के कारण होता है।

जॉगिंग वार्मिंग-अप का सबसे बढ़िया तरीका हैं। इसके लिए किसी विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसे प्रत्येक व्यक्ति कर सकता है। पहले की अपेक्षा पिछले कुछ वर्षों में यह एरोबिक क्रिया काफी लोकप्रिय हुई है। यह उन व्यक्तियों के लिए भी सबसे अच्छी क्रिया है जो अपने शरीर के भार को कम करना चाहते हैं। इसके द्वारा शरीर की सभी प्रमुख माँसपेशियों का व्यायाम हो जाता है। इसको हृदय वाहिका प्रणाली (Cardio-Vascular System) विशेषकर हृदय की कोरोनरी धमनियों (CoronaryArteries) के रोगों से बचाव के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। यह हृदय व फेफड़ों की कार्य-कुशलता को बढ़ाने के लिए अत्यन्त लाभदायक है। समूह में जॉगिंग करने से उत्साह व मनोरंजन प्राप्त होता है। इससे तनाव व थकान महसूस भी नहीं होती। जॉगिंग लम्बी अवधि के लिए की जाती है। इसलिए यह ध्यान रखना चाहिए कि कपड़े कुछ ढीले पहनने चाहिएँ और जूते हल्के व सॉफ्ट होने चाहिएँ। जॉगिंग क्रिया न केवल शारीरिक पुष्टि को बढ़ाती, बल्कि सुयोग्यता में भी वृद्धि करने में सहायक होती है।

प्रश्न 8.
जॉगिंग करने के चार लाभ बताइए।
अथवा
जॉगिंग के लाभदायक प्रभाव क्या हैं?
उत्तर:
जॉगिंग करने के लाभ निम्नलिखित हैं-
(1) जॉगिंग शरीर की साँस लेने वाली क्रिया में सुधार करती है।
(2) जॉगिंग से शरीर के सभी अंगों का अभ्यास होता है।
(3) जॉगिंग करने से समय से पहले बुढ़ापा नहीं आता।
(4) जॉगिंग मोटापे को कम करती है।
(5) जॉगिंग से उच्च रक्तचाप की समस्या दूर होती है।

प्रश्न 9.
कैलिसथैनिक्स पर एक संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए।
अथवा
कैलिस्थैनिक्स का शारीरिक पुष्टि के विकास के साधन के रूप में व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि के विकास के लिए कैलिसथैनिक्स का प्रयोग भी किया जाता है। हालांकि कैलिसथैनिक्स के द्वारा केवल सामान्य योग्यता का विकास ही संभव है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी के लिए कैलिसथैनिक्स सामान्य आधारशिला का कार्य करती है। सैंचुरी शब्दकोश के अनुसार, “कैलिसथैनिक्स हल्की जिम्नास्टिक की तरह का व्यायाम होता है।” इससे मांसपेशियों का व्यायाम होता है जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य, शक्ति, सौंदर्य में वृद्धि करना होता है। वास्तव में, कैलिसथैनिक्स एक प्रकार का स्वतंत्र व्यायाम है; जैसे Pull-ups, Push-ups और Chin-ups आदि। कैलिसथैनिक व्यायाम माँसपेशियों के तापमान और रक्त प्रवाह में वृद्धि करता है। यह शरीर में लचक को विकसित करता है। कैलिसथैनिक व्यायाम में विभिन्न प्रकार के हल्के उपकरणों का प्रयोग किया जा सकता है, जिन्हें करने में कम शक्ति की आवश्यकता पड़ती है।

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

प्रश्न 10.
शारीरिक पुष्टि के विकास में खेलकूद की भूमिका का वर्णन करें।
उत्तर:
खेलों में भाग लेने का सबसे मुख्य लाभ शारीरिक पुष्टि को प्राप्त करना है। वास्तव में, शारीरिक पुष्टि के अनेक अंग होते हैं और खेलों में इनका अलग-अलग मात्रा में विकास होता है; जैसे ऐसे खेल, जिनमें निरंतर गतियाँ होती हैं; जैसे तैरना और दौड़ना। इनसे फेफड़ों और हृदय की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है। दूसरे खेल; जैसे जिम्नास्टिक से लचक (Flexibility) में वृद्धि होती है। खेलकूद के क्षेत्र में शारीरिक पुष्टि को विकसित करने के लिए अनेक कारक होते हैं। प्रशिक्षण और अभ्यास की सघनता, नियमितता और कौन-सा खेल है जिसके लिए प्रशिक्षण लिया जा रहा है, ये सभी कारक महत्त्वपूर्ण हैं। खिलाड़ी के किसी खेल में खेलने की दिशा और उसकी निपुणता (Skill) का स्तर भी उसकी योग्यता पर प्रभाव डालता है। यदि वह आईस हॉकी में गोल-कीपर के रूप में खेलता है तो उसकी एरोबिक योग्यता विकसित नहीं होगी। दूसरी ओर बास्केटबॉल, फुटबॉल तथा वाटर-पोलो में एरोबिक योग्यता का विकास होता है। निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि खेलों में भाग लेने से शारीरिक पुष्टि विकसित होती है।

प्रश्न 11.
शारीरिक सुयोग्यता में साइकलिंग के कोई चार योगदान बताइए।
अथवा
साइकिल चलाने (Cycling) के चार लाभ बताइए।
उत्तर:
साइकलिंग एक अनएरोबिक व्यायाम है। इसका शारीरिक सुयोग्यता के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान है। इसके लाभ अथवा शारीरिक सुयोग्यता में योगदान निम्नलिखित हैं
(1) साइकिल चलाने से शरीर की माँसपेशियों में सुधार होता है।
(2) इससे श्वास संस्थान की निपुणता में सुधार होता है।
(3) इससे सहनशीलता का विकास होता है।
(4) इससे हृदय व फेफड़ों की कार्यकुशलता में बढ़ोतरी होती है।
(5) इससे शरीर से वसा कम होती है और दिल के दौरे को सामान्य बनाती है।

प्रश्न 12.
भार प्रशिक्षण के महत्त्व का वर्णन कीजिए। अथवा
भार प्रशिक्षण के मुख्य लाभ बताएँ। उत्तर-भार प्रशिक्षण के लाभ अथवा महत्त्व निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट हैं-
(1) भार प्रशिक्षण के द्वारा शरीर के वजन को घटाया व बढ़ाया जा सकता है।
(2) भार प्रशिक्षण से शक्ति तथा लचक में वृद्धि होती है।
(3) भार प्रशिक्षण के द्वारा माँसपेशियों के सिकुड़ने तथा फैलने में वृद्धि होती है।
(4) शरीर के सभी अंगों को शक्ति मिलने से शारीरिक शक्ति का विकास होता है।
(5) भार प्रशिक्षण द्वारा नाड़ी-संस्थान के आपसी तालमेल में वृद्धि होती है।
(6) भार प्रशिक्षण से माँसपेशियाँ तथा हडियाँ मजबूत होती हैं।

प्रश्न 13.
भार प्रशिक्षण के प्रमुख सिद्धांत लिखें।
अथवा
आप भार प्रशिक्षण किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
भार प्रशिक्षण में अधिक भार सिद्धांत का प्रयोग किया जाता है अर्थात् व्यायाम धीरे-धीरे अधिक भार बढ़ाकर किए जाते हैं। इसके प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित हैं
(1) व्यायाम सरल से कठिन की ओर होने चाहिएँ।
(2) भार प्रशिक्षण से पहले झुकने तथा मुड़ने वाले व्यायाम करने चाहिएँ, ताकि शरीर में गर्मी आ जाए।
(3) भार प्रशिक्षण के समय श्वसन क्रिया सामान्य रहनी चाहिए।
(4) व्यायाम करते हुए बीच-बीच में आराम करना चाहिए।
(5) शरीर को शक्तिशाली बनाने के लिए अधिक भार उठाना चाहिए तथा क्षमता बढ़ाने के लिए हल्के भार का प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 14.
सर्किट (परिधि) प्रशिक्षण का संक्षिप्त ब्यौरा दें।
उत्तर:
सर्किट/परिधि प्रशिक्षण बहुत प्रभावशाली और लोकप्रिय व्यायाम है। यह प्रायः शक्ति तथा सहनशीलता बढ़ाने के लिए किए जाता है। सन् 1957 में मॉर्गन तथा एडम्सन ने सर्किट प्रशिक्षण का प्रारंभिक रूप से विकास किया। मॉर्गन तथा एडम्सन के अनुसार, “सर्किट प्रशिक्षण एक ऐसी विधि है जिसमें विभिन्न व्यायामों को यन्त्रों तथा बिना यन्त्रों के निश्चित मात्रा में किया जाता है।” इसके पश्चात् इस प्रशिक्षण में बहुत अधिक परिवर्तन आए। सन् 1979 में स्कोलिक ने सर्किट प्रशिक्षण के लिए नए-नए व्यायामों की जानकारी दी। सर्किट प्रशिक्षण में लगभग 10 से 15 तक व्यायाम चुने जाते हैं। इन व्यायामों को इस ढंग से चुना जाता है ताकि इनका प्रभाव प्रदर्शन पर प्रभावशाली ढंग से पड़े। प्रायः व्यायामों को एक क्रम में रखा जाता है ताकि भिन्न-भिन्न मांसपेशियों के समूह को चक्र में पूरा व्यायाम मिल सके। सर्किट प्रशिक्षण नई तकनीक सिखाने में बहुत सहायक होता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि सर्किट प्रशिक्षण एक प्रभावकारी ढंग से किया जाने वाला व्यायाम है, जो शक्ति तथा सहनशीलता जैसी योग्यताओं में वृद्धि करता है।

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प्रश्न 15.
सर्किट प्रशिक्षण खेलों व शारीरिक सुयोग्यता में कैसे महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर:
सर्किट प्रशिक्षण का खेलों व शारीरिक सुयोग्यता के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। यह निम्नलिखित बातों/तथ्यों से स्पष्ट है
(1) सर्किट प्रशिक्षण से थोड़े स्थान पर ही अधिक व्यायाम संभव हैं।
(2) इस प्रशिक्षण से खिलाड़ी के प्रत्येक अंग की तैयारी हो जाती है।
(3) इस प्रशिक्षण द्वारा बहुत-से खिलाड़ी एक-साथ अभ्यास कर सकते हैं।
(4) इस प्रशिक्षण द्वारा शक्ति, क्षमता एवं सहनशीलता का विकास होता है अर्थात् यह शारीरिक पुष्टि व सुयोग्यता के सभी घटकों के विकास में सहायक होती है।
(5) यह प्रशिक्षण आसान एवं रुचिकर होता है और इसमें विभिन्न आसन होते हैं, जिस कारण खिलाड़ी उबता नहीं है।

प्रश्न 16.
सर्किट प्रशिक्षण की प्रमुख विधियों का वर्णन करें।
अथवा
आप सर्किट प्रशिक्षण किस प्रकार करेंगे?
उत्तर:
सर्किट प्रशिक्षण की प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं-
1. लगातार विधि: सर्किट प्रशिक्षण विधि में अन्य विधियों से अधिक व्यायाम होते हैं। इसमें बिना किसी रुकावट के व्यायाम करने होते हैं, जब तक एक चक्र पूरा नहीं हो जाता। दो चक्रों के मध्य 3 से 5 मिनट की रुकावट की जा सकती है। इसमें यह बताना कि कितनी बार दोहराई होनी है, बहुत कठिन है, परंतु कोच अपने निर्णय के अनुसार व्यायामों की दोहराई की संख्या निश्चित कर सकता है।

2. अंतराल विधि: इसमें लगातार विधि से कम व्यायाम होते हैं। इसमें तीव्रता अधिक होती है तथा आयतन कम होता है। इस विधि में खिलाड़ी निश्चित समय में ही निश्चित व्यायाम करता है तथा फिर थोड़ा आराम करता है।

3. दोहराई विधि: यह विधि सर्किट प्रशिक्षण में कम प्रयोग की जाती है। इसमें पहली दोनों विधियों से कम संख्या में व्यायाम होते हैं।

प्रश्न 17.
सर्किट प्रशिक्षण की मुख्य विशेषताएँ लिखें।
उत्तर:
सर्किट प्रशिक्षण की मुख्य विशेषताएँ अग्रलिखित हैं
(1) इस विधि में व्यायाम सीखना आसान होता है तथा उसको लागू करना भी आसान होता है।
(2) इसमें व्यायाम मध्यम अवरोध तथा मध्यम भार के साथ किए जाते हैं।
(3) इसमें संख्या की अधिक पुनरावृत्ति होती है।
(4) इसका लक्ष्य सहनशीलता व शक्ति को बढ़ावा देना है।
(5) इसमें शरीर के सभी अंगों के व्यायाम शामिल होते हैं।
(6) इसमें खिलाड़ियों को तैयारी के समय मूल सहनशीलता व शक्ति बढ़ाने का अवसर प्राप्त होता है।
(7) इसमें व्यायाम का दबाव धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है।

प्रश्न 18.
परिधि प्रशिक्षण के लाभों का वर्णन कीजिए।
अथवा
सर्किट प्रशिक्षण के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
परिधि/परिधि प्रशिक्षण के लाभ निम्नलिखित हैं-
(1) परिधि प्रशिक्षण में खेल संबंधी उपकरण आसानी से प्राप्त किए जाते हैं।
(2) यह प्रशिक्षण रुचिकर है और सीखने में बहुत आसान है।
(3) इसमें विभिन्न अभ्यासों या व्यायामों को करने के लिए अधिक समय की जरूरत नहीं पड़ती।
(4) इनमें एक ही समय में बहुत-से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
(5) इसमें सीखने वालों की योग्यता के अनुसार प्रशिक्षण को घटाया-बढ़ाया जा सकता है।
(6) यह प्रशिक्षण पुष्टि व सुयोग्यता के सभी घटकों के विकास में सहायक होता है।

प्रश्न 19.
तालमेल संबंधी योग्यता का वर्णन कीजिए।
अथवा
तालबद्ध व्यायाम क्या होते हैं? उदाहरण दें।
अथवा
तालबद्ध व्यायामों का शारीरिक पुष्टि के विकास के साधन के रूप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शारीरिक अंगों के आपस में मिलकर कार्य करने की शक्ति को तालमेल कहते हैं। मानवीय विकास शक्ति और वृद्धि के तालमेल के बिना नहीं हो सकता। तालमेल से शरीर का प्रत्येक अंग मिल-जुलकर कार्य करता है। जब मानवीय शरीर तालमेल से कार्य करता है तो मनुष्य के व्यक्तित्व में वृद्धि होती है। यदि मनुष्य के सारे अंग ठीक ढंग से कार्य करते हों, परंतु दिमाग कार्य न करता हो तो शरीर के बाकी सारे अंग बेकार हो जाते हैं। इसलिए दिमाग, शरीर और स्थिति तालमेल की माँग करते हैं। तालमेल के बिना शारीरिक पुष्टि विकसित नहीं हो सकती। लेजियम, लोक-नृत्य, जम्पिंग, पी०टी० कसरतें आदि तालबद्ध व्यायाम हैं। इनमें शरीर की तालबद्ध गतिविधियाँ होती हैं जो समूह में की जाती हैं। ये गतिविधियाँ हृदय की माँसपेशियों के लिए जरूरी होती हैं। इन व्यायामों से लचक एवं लय संबंधी योग्यताओं का विकास होता है।

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अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न [Very Short Answer Type Questions]

प्रश्न 1.
शारीरिक पुष्टि से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि/योग्यता का अर्थ बहुत व्यापक है, इसलिए इसे परिभाषित करना बहुत कठिन है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि यह हमें अपने शरीर को सही ढंग से रखने और अधिक देर तक मेहनत करने की क्षमता प्रदान करती है। डॉ० ए० के० उप्पल के अनुसार, “शारीरिक पुष्टि वह क्षमता है जिसके द्वारा शारीरिक क्रियाओं के विभिन्न रूपों को बिना थकावट के तर्कपूर्ण ढंग से किया जा सके। इसके अंतर्गत व्यक्तिगत स्वास्थ्य तथा नीरोगता के महत्त्वपूर्ण गुण सम्मिलित होते हैं।”

प्रश्न 2.
सुयोग्यता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
सुयोग्यता एक ऐसी अवस्था है, जो हमारे दैनिक जीवन में प्रत्येक कार्य को प्रभावकारी ढंग से करने में सहायक होती है तथा शेष बची हुई शक्ति से हम खाली समय में मनोरंजन कर सकते हैं। सुयोग्यता व्यक्ति की वह क्षमता या योग्यता है जिसके द्वारा वह एक उत्तम एवं संतुलित जीवन व्यतीत करता है। इसमें मन, शरीर एवं आत्मा का संतुलन शामिल होता है। इसलिए यह शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की दशा या विशेषता होती है।

प्रश्न 3. शारीरिक योग्यता के क्या अवयव हैं?
उत्तर:
(1) गति, (2) शक्ति, (3) लचक, (4) सहनशीलता, (5) स्फूर्ति, (6) तालमेल, (7) समन्वय आदि।

प्रश्न 4.
शक्ति या ताकत से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
शक्ति हमारे शरीर की माँसपेशियों द्वारा उत्पन्न की गई वह ऊर्जा है जिसके द्वारा हम कुछ कार्य कर सकते हैं। शक्ति को मापने के लिए पौंड या डाइन का प्रयोग किया जाता है। यह मुख्यतः दो प्रकार की होती है:

स्थिर शक्ति
गतिशील शक्ति।

प्रश्न 5.
स्थिर शक्ति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
स्थिर शक्ति को ‘आइसोमीट्रिक शक्ति’ भी कहा जाता है। कुछ समय के लिए मनुष्य लगातार अपनी माँसपेशियों की अधिक-से-अधिक जितनी शक्ति लगा सकता है, वह उसकी स्थिर शक्ति कहलाती है। इस शक्ति को डायनेमोमीटर (Dynamometer) द्वारा मापा जाता है। प्रत्यक्ष रूप से इस प्रकार की शक्ति में कार्य होता हुआ दिखाई नहीं पड़ता।

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प्रश्न 6.
लचक का क्या अर्थ है?
उत्तर:
व्यक्ति के शरीर के जोड़ों की गतिक्षमता को लचक कहते हैं। अधिक लचक वाला व्यक्ति बिना किसी कष्ट के अधिक देर तक कार्य कर सकता है तथा उसका व्यक्तित्व भी अच्छा होता है। आमतौर पर लचीलापन, कोमलता और गतिशीलता को एक-दूसरे के लिए प्रयोग किया जाता है, परंतु इनमें बहुत अंतर है। अतः लचक वह योग्यता है, जिसमें प्रत्येक क्रिया अधिक विस्तार से बिना किसी रोक-टोक के की जाती है।

प्रश्न 7.
सक्रिय लचक क्या है?
उत्तर:
सक्रिय लचक को खिलाड़ी बिना किसी बाहरी सहायता के स्वतंत्र रूप से माँसपेशियों की क्रियाशीलता द्वारा प्राप्त करता है। सक्रिय लचक न केवल माँसपेशियों के सिकुड़ने, बल्कि जोड़ों की मांसपेशियों पर भी निर्भर करती है। अतः बिना किसी बाहरी सहायता से शरीर के जोड़ों का अधिक देर तक गति करना सक्रिय लचक कहलाता है; जैसे खिंचाव वाला व्यायाम बिना किसी की सहायता से करना आदि।

प्रश्न 8.
गतिशील लचक से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जब शरीर गति में होने के कारण अधिक विस्तार से क्रिया करता है, तो उसको गतिशील लचक कहते हैं। लचक का यह रूप शरीर को अधिक श्रम और खेल प्रदर्शन के लिए तैयार करता है। इस प्रकार की लचक चोट के जोखिम को कम करती है।

प्रश्न 9.
निष्क्रिय लचक क्या है?
उत्तर:
निष्क्रिय लचक से तात्पर्य बाहरी सहायता से अधिक-से-अधिक विस्तार से क्रिया करने वाली योग्यता से है। निष्क्रिय लचक अन्य सभी किस्मों का आधार है। यह बहुत अधिक माँसपेशियों के सिकुड़ने, जोड़ों (लिगामेंट्स) और हड्डियों की बनावट पर निर्भर करती है।

प्रश्न 10.
सहनक्षमता/सहनशीलता का क्या अर्थ है?
अथवा
सहनशीलता के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
सहनशीलता या सहनक्षमता एक प्रतिरोध योग्यता है जो थकावट के विरुद्ध होती है। सामान्य शब्दों में, यह खिलाड़ी की वह योग्यता है, जिसके साथ खिलाड़ी बिना किसी थकावट के क्रिया करता है। वास्तव में, किसी गति या भार को अधिक समय तक अपने ऊपर स्थिर रखने की व्यक्ति के शरीर की संरचनात्मक क्षमता को उसकी सहनक्षमता या सहनशीलता कहा जाता है।

प्रश्न 11.
अनएरोबिक क्रियाएँ क्या होती हैं? उदाहरण दें।
उत्तर:
अनएरोबिक क्रियाएँ वे होती हैं जो ऑक्सीजन के बिना की जाती हैं। इन क्रियाओं से एडिनोसिन ट्राइफास्फेट जोकि माँसपेशियों के लिए ऊर्जा या शक्ति का साधन होता है ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कार्बन-डाइऑक्साइड के प्रयोग द्वारा तैयार होता है। थ्रोइंग व जम्पिंग क्रियाएँ, वेट लिफ्टिंग, तैराकी आदि अनएरोबिक क्रियाओं के उदाहरण हैं।

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प्रश्न 12.
एरोबिक क्रियाएँ क्या होती हैं? उदाहरण दें।
उत्तर:
एरोबिक क्रियाएँ वे होती हैं जिनको करने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है। जॉगिंग, साइकलिंग आदि एरोबिक क्रियाएँ हैं।

प्रश्न 13.
प्रतिक्रिया योग्यता क्या है?
उत्तर:
प्रतिक्रिया योग्यता द्वारा खिलाड़ी किसी संकेत को देखकर अथवा सुनकर पूर्ण तीव्रता से प्रक्रिया प्रारम्भ करता है। जैसे दौड़ के प्रारम्भ होने के समय बंदूक की आवाज़ से पूर्व केवल संकेत का आभास करके खिलाड़ी ब्लॉक में से बाहर आकर दौड़ता है।

प्रश्न 14.
अधिकतम शक्ति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
अधिकतम शक्ति, शक्ति का एक महत्त्वपूर्ण रूप है। अधिकतम अवरोध के विरूद्ध कार्य करने की योग्यता अधिकतम शक्ति (Maximum Strength) कहलाती है।

प्रश्न 15.
आहार शारीरिक योग्यता को कैसे प्रभावित करता है? अथवा संतुलित आहार शारीरिक योग्यता को किस प्रकार प्रभावित करता है?
उत्तर:
संतुलित आहार से हमारी शारीरिक संरचना अच्छी रहती है। इससे न केवल खेलकूद के क्षेत्र में, बल्कि आम दैनिक जीवन में भी हमारी कार्यकुशलता एवं कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। संतुलित व पौष्टिक आहार से हमारा तात्पर्य उन पोषक तत्त्वों; जैसे वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, खनिज-लवणों, विटामिनों एवं जल आदि से है जो आहार में उचित मात्रा में उपस्थित होते हैं तथा शरीर का संतुलित विकास करते हैं। मोटापे के कारण व्यक्ति की कार्यक्षमता में कमी आ जाती है। आजकल मोटापा एक महामारी की भाँति फैल रहा है जिसको संतुलित आहार लेने से तथा उचित व्यायाम करने से नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रश्न 16.
शारीरिक पुष्टि (Physical Fitness) के विकास के सिद्धांतों को सूचीबद्ध कीजिए।
उत्तर:
शारीरिक पुष्टि के विकास के सिद्धांत निम्नलिखित हैं
(1) निरंतरता का सिद्धांत
(2) नियमितता का सिद्धांत
(3) अतिभार का सिद्धांत
(4) विभिन्नता का सिद्धांत
(5) प्रगतिशीलता का सिद्धांत
(6) गर्माना
(7) लिम्बरिंग डाउन आदि।

प्रश्न 17.
विस्फोटक शक्ति क्या है?
उत्तर:
विस्फोटक शक्ति खिलाड़ी का वह सामर्थ्य है जब वह तेज गति से प्रतिरोध पर काबू पाता है। यह शक्ति हमेशा डायनैमिक होती है तथा प्रत्येक क्षेत्र के लिए महत्त्वपूर्ण होती है। यह गति तथा शक्ति का सुमेल है। यह भिन्न-भिन्न खेलों में भिन्न-भिन्न किस्मों में पाई जाती है।

प्रश्न 18.
गति क्या है?
उत्तर:
गति व्यक्ति की वह योग्यता या क्षमता है जिसके द्वारा वह एक ही प्रकार की हलचल या हरकत को पुनः तेज गति से करता है अर्थात् शरीर के अंगों या संपूर्ण शरीर को अधिकतम वेग से घुमाने की क्षमता को गति कहते हैं।

प्रश्न 19.
व्यायाम शारीरिक योग्यता को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर:
व्यायाम शारीरिक योग्यता को बहुत प्रभावित करता है। प्रात:काल और सायंकाल का समय व्यायाम और प्रशिक्षण के लिए अति लाभदायक है। प्रात:काल के व्यायाम शरीर को चुस्त और लचकदार: बनाते हैं । सायंकाल के व्यायाम व्यक्ति को पूरे दिन के मानसिक तनाव और शारीरिक थकावट से छुटकारा दिलाते हैं। व्यायाम और प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाते समय अभ्यास सुविधाओं और गर्मी व सर्दी जैसे मौसम का ध्यान जरूर रखना चाहिए।

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प्रश्न 20.
जॉगिंग (Jogging) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
जॉगिंग से तात्पर्य है कि धीरे-धीरे या आराम से दौड़कर शरीर को गर्माना। जॉगिंग गर्माने का सबसे बढ़िया ढंग है। इससे शरीर की सभी प्रणालियाँ अच्छे ढंग से काम करना शुरू कर देती हैं।

प्रश्न 21.
साइकलिंग (Cycling) से आपका क्या आशय है?
उत्तर:
साइकलिंग वायवीय तथा अवायवीय क्रिया है। इससे हृदय और फेफड़ों की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है। साइकलिंग का अभ्यास यदि प्रतिदिन नियमित रूप से किया जाए तो शारीरिक पुष्टि आसानी से विकसित की जा सकती है।

प्रश्न 22.
भार प्रशिक्षण क्या है?
उत्तर:
भार प्रशिक्षण विधि से हमारा अभिप्राय उन व्यायामों या कसरतों से है जो हमारे शरीर की विशेष माँसपेशियों को मज़बूत एवं शक्तिशाली बनाती हैं। यह प्रशिक्षण BAR-BELLS की सहायता से किया जाता है। इससे शरीर के विभिन्न भागों के आकार में परिवर्तन होता है और विभिन्न भागों का अनुकूलन भी होता है। इसके माध्यम से शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति सामान्य होने की कोशिश करता है। इससे माँसपेशियाँ मजबूत बनती हैं, उनके आकार तथा शरीर के भार में भी परिवर्तन होता है। यह प्रशिक्षण शारीरिक पुष्टि को विकसित करता है।

प्रश्न 23.
वज़न (भार) प्रशिक्षण के कोई दो लाभ बताएँ।
उत्तर:
(1) वज़न प्रशिक्षण से शक्ति तथा लचक में वृद्धि होती है।
(2) वज़न प्रशिक्षण से माँसपेशियों के सिकुड़ने तथा फैलने में वृद्धि होती है।

प्रश्न 24.
स्फूर्ति किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब खिलाड़ी अपने शरीर या शरीर के किसी हिस्से को हवा में तेजी के साथ और सही ढंग से उसकी दिशा को बदलता है तो उसको स्फूर्ति कहते हैं।

प्रश्न 25.
सुयोग्यता कार्यक्रम क्यों महत्त्वपूर्ण हैं?
उत्तर:
सुयोग्यता कार्यक्रम व्यक्ति के आकार एवं आकृति में सुधार करने में सहायता करते हैं। ये व्यक्ति की कार्यक्षमता, उत्पादकता व गुणवत्ता में सुधार करने में सहायक होते हैं। इसलिए सुयोग्यता कार्यक्रम हमारे लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हैं।

प्रश्न 26.
वंशानुक्रम से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
वंशानुक्रम से अभिप्राय है-अपने पूर्वजों से प्राप्त होने वाले शारीरिक गुण। यह व्यक्ति की शारीरिक योग्यता को प्रभावित करता है। इसका मुख्य कारण व्यक्ति की शारीरिक संरचना होती है जोकि व्यक्ति के वंश से मिले गुणों द्वारा निर्धारित होती है।

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प्रश्न 27.
तालबद्ध व्यायाम क्या होते हैं?
उत्तर:
तालबद्ध व्यायाम में शरीर की तालबद्ध गतिविधियाँ होती हैं जो समूह में की जाती हैं। ये गतिविधियाँ हृदय की मांसपेशियों के लिए अच्छी होती हैं। इन व्यायामों से लचक एवं लय संबंधी योग्यताओं का विकास होता है। लेजियम, समूह नृत्य, पी०टी० कसरतें आदि तालबद्ध व्यायाम हैं।

प्रश्न 28.
शारीरिक योग्यता के विकास में अतिभार का सिद्धांत कैसे सहायक है?
उत्तर:
शारीरिक योग्यता के विकास के लिए अतिभार के सिद्धांत को अपनाना अति आवश्यक है। अतिभार के सिद्धांत को अपनाने के लिए लंबी दूरी के धावक धीरे-धीरे दूरी में बढ़ोतरी करते रहते हैं। अतिभार सघनता के द्वारा भी बढ़ाया जा सकता है। अतिभार के लिए यह ध्यान में रखना चाहिए कि जब तक अनुकूलन न हो जाए तब तक अतिभार नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 29.
मनोरंजनात्मक क्रियाएँ क्या होती हैं?
उत्तर:
मनोरंजनात्मक क्रियाएँ, वे क्रियाएँ होती हैं जो व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक ऊर्जा का पुनरुद्धार (Restoring) करने में सहायक होती है। इस पुनरुद्धार से व्यक्ति अपना दैनिक कार्य अधिक कुशलतापूर्वक करने के योग्य हो जाता है।

प्रश्न 30.
सर्किट प्रशिक्षण विधि को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
मॉर्गन तथा एडम्सन के अनुसार, “सर्किट प्रशिक्षण विधि एक ऐसी विधि है जिसमें विभिन्न व्यायामों को यन्त्रों तथा यन्त्रों के बिना निश्चित मात्रा में किया जाता है।”

प्रश्न 31.
सर्किट प्रशिक्षण विधि के मुख्य व्यायामों के नाम लिखिए।
उत्तर:
(1) स्टैपिंग-अप ऑन ए बॉक्स
(2) पुश-अप
(3) सिट-अप
(4) जंपिंग ओवर द हर्डल्स
(5) गुड मॉर्निंग व्यायाम
(6) पुल-अप।

प्रश्न 32.
सर्किट प्रशिक्षण विधि के प्रमुख सिद्धांत बताएँ।
उत्तर:
(1) प्रशिक्षण स्टेशनों की संख्या बढ़ाना
(2) सर्किट दोहराई
(3) भार में वृद्धि करना
(4) आराम की अवधि को घटाना
(5) व्यायाम के समय को बढ़ाना।

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प्रश्न 33.
बुनियादी या मौलिक सहनशीलता क्या है?
उत्तर:
बुनियादी सहनशीलता को एरोबिक सहनशीलता भी कहते हैं। यह वह योग्यता है, जो धीरे से मध्यम गति के साथ क्रिया करने से होने वाली थकावट पर नियंत्रण रखती है। इसके अंतर्गत जॉगिंग एवं साइकलिंग आदि क्रियाएँ आती हैं।

प्रश्न 34.
सामान्य सहनशीलता क्या है?
उत्तर:
भिन्न-भिन्न प्रकार की क्रियाएँ चाहे वे वायवीय (एरोबिक) अथवा अवायवीय (अनएरोबिक) हों, इसके दौरान आई थकावट पर नियंत्रण करने वाली क्षमता को सामान्य सहनशीलता कहते हैं। यह एरोबिक और अनएरोबिक व्यायामों को बिना किसी थकावट के लंबे समय तक करने वाली योग्यता है।

प्रश्न 35.
विशेष सहनशीलता क्या है?
उत्तर:
विशेष खेलों में थकावट का प्रतिरोध करने वाली योग्यता को विशेष सहनशीलता कहते हैं। जिस तरह स्वाभाविक रूप से थकावट भिन्न-भिन्न खेलों में भिन्न-भिन्न होती है, उसी तरह सहनशीलता भी भिन्न-भिन्न खेलों में भिन्न-भिन्न होती है। इसको शक्ति सहनशीलता भी कहते हैं। इसका प्रयोग लम्बी दूरी की दौड़ों, तैराकी, मैराथन दौड़ तथा पोल वॉल्ट में काफी हद तक किया जाता है।

प्रश्न 36.
संतुलन योग्यता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
शारीरिक प्रक्रियाओं के दौरान खिलाड़ी को अपना संतुलन बनाए रखना पड़ता है। ऐसा करते समय वह अपनी क्रिया प्रारम्भ रखता है। कई खेल-क्रियाएँ ऐसी होती हैं जोकि खिलाड़ी का संतुलन बिगाड़ने में भूमिका निभाती है लेकिन खिलाड़ी तत्काल ही स्वयं संतुलन उत्पन्न कर लेता है। यथा-जिम्नास्टिक की प्रक्रियाओं के समय खिलाड़ी का संतुलन बिगड़ जाता है लेकिन पाँवों पर खड़ा होने के समय वह स्वयं ही संतुलित हो जाता है।

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HBSE 12th Class Physical Education शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता Important Questions and Answers

वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न [Objective Type Questions]

भाग-I : एक शब्द/वाक्य में उत्तर दें

प्रश्न 1.
शक्ति कितने प्रकार की होती है?
उत्तर:
शक्ति दो प्रकार की होती है।

प्रश्न 2.
लचक कितने प्रकार की होती है?
उत्तर:
लचक दो प्रकार की होती है।

प्रश्न 3.
वाटरलू की प्रसिद्ध लड़ाई कहाँ जीती गई?
उत्तर:
वाटरलू की प्रसिद्ध लड़ाई ऐटन के खेल के मैदानों पर जीती गई।

प्रश्न 4.
अत्यधिक गर्मी में अभ्यास करने से क्या हो सकता है?
उत्तर:
अत्यधिक गर्मी में अभ्यास करने से हीटस्ट्रोक हो सकता है।

प्रश्न 5.
अत्यधिक सर्दी में अभ्यास करने से क्या हो सकता है?
उत्तर:
अत्यधिक सर्दी में अभ्यास करने से फ्रास्ट बाइट हो सकता है।

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प्रश्न 6.
किस विधि में शरीर के सभी अंगों का अभ्यास हो सकता है?
उत्तर:
सर्किट या परिधि प्रशिक्षण विधि में शरीर के सभी अंगों का अभ्यास हो सकता है।

प्रश्न 7.
सहनशीलता कितने प्रकार की होती है?
उत्तर:
सहनशीलता तीन प्रकार की होती है।

प्रश्न 8.
भार प्रशिक्षण को सर्वप्रथम किस राष्ट्र ने अपनाया था?
उत्तर:
भार प्रशिक्षण को सर्वप्रथम जर्मनी ने अपनाया था।

प्रश्न 9.
जिम्नास्टिक द्वारा किस शारीरिक पुष्टि के घटक में वृद्धि होती है?
उत्तर:
जिम्नास्टिक द्वारा लचक में वृद्धि होती है।

प्रश्न 10.
किस योग्यता में प्रत्येक क्रिया अधिक विस्तार से बिना रोक-टोक के की जाती है?
उत्तर:
लचक में प्रत्येक क्रिया अधिक विस्तार से बिना रोक-टोक के की जाती है।

प्रश्न 11.
स्थिर शक्ति का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर:
स्थिर शक्ति का दूसरा नाम आइसोमीट्रिक (Isometric) शक्ति या क्षमता है।

प्रश्न 12.
1980 के दशक से पूर्व शारीरिक पुष्टि के कितने तत्त्व या घटक समझे जाते थे?
उत्तर:
1980 के दशक से पूर्व शारीरिक पुष्टि के पाँच तत्त्व या घटक समझे जाते थे।

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प्रश्न 13.
1980 के बाद शारीरिक पुष्टि का कौन-सा घटक नहीं माना जाता?
उत्तर:
1980 के बाद शारीरिक पुष्टि का फूर्तीलापन या स्फूर्ति घटक नहीं माना जाता।

प्रश्न 14.
गति सर्वाधिक किस प्रणाली पर निर्भर करती है?
उत्तर:
गति सर्वाधिक माँसपेशी प्रणाली पर निर्भर करती है।

प्रश्न 15.
सहनशीलता को कैसे मापा जा सकता है?
उत्तर:
सहनशीलता को पुनरावृत्ति की संख्या द्वारा मापा जा सकता है।

प्रश्न 16.
अतिभार किसके द्वारा बढ़ाया जा सकता है?
उत्तर:
अतिभार सघनता द्वारा बढ़ाया जा सकता है।

प्रश्न 17.
वायवीय क्रियाओं में किस गैस का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर:
वायवीय क्रियाओं में ऑक्सीजन का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 18.
साइकलिंग कैसी क्रिया है?
उत्तर:
साइकलिंग एक वायवीय एवं अवायवीय क्रिया है।

प्रश्न 19.
किसी खिलाड़ी की स्फूर्ति को कैसे परखा जा सकता है?
उत्तर:
साइड स्टैप परीक्षण से खिलाड़ी की स्फूर्ति को परखा जा सकता है।

प्रश्न 20.
शारीरिक पुष्टि का कोई एक घटक बताएँ।
उत्तर:
सहनशीलता।

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प्रश्न 21.
थो करने के लिए किस प्रकार की शक्ति आवश्यक होती है?
उत्तर:
थ्रो करने के लिए विस्फोटक शक्ति आवश्यक होती है।

प्रश्न 22.
पेशीय रेशे कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
पेशीय रेशे दो प्रकार के होते हैं।

प्रश्न 23.
स्थिर शक्ति को किस प्रकार नापा जाता है?
उत्तर:
स्थिर शक्ति को डायनेमोमीटर द्वारा नापा जाता है।

प्रश्न 24.
कैलिसथैनिक्स में किस प्रकार के उपकरणों का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर:
कैलिसथैनिक्स में हल्के उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 25.
जिम्नास्टिक में ग्राउंड फ्लोर व्यायाम और लोकनृत्य किस प्रकार के व्यायाम हैं?
उत्तर:
जिम्नास्टिक में ग्राउंड फ्लोर व्यायाम और लोकनृत्य लयबद्ध या तालबद्ध व्यायाम हैं।

प्रश्न 26.
जॉगिंग करते समय किस तरह के कपड़े पहनने चाहिएँ?
उत्तर:
जॉगिंग करते समय ढीले कपड़े (Loose Clothes) पहनने चाहिएँ।

प्रश्न 27.
जॉगिंग के लिए सतह कैसी होनी चाहिए?
उत्तर:
जॉगिंग के लिए सतह समतल होनी चाहिए।

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प्रश्न 28.
शारीरिक पुष्टि को प्रभावित करने वाले कोई दो कारक बताएँ।
उत्तर:
1. पौष्टिक आहार
2. नियमित व्यायाम।

प्रश्न 29.
शारीरिक अंगों का विकास किससे होता है?
उत्तर:
नियमित व्यायाम गतिविधियों एवं संतुलित व पौष्टिक आहार से शारीरिक अंगों का विकास होता है।

प्रश्न 30.
क्या शारीरिक योग्यता से हमारा स्वास्थ्य ठीक रहता है?
उत्तर:
हाँ, शारीरिक योग्यता से हमारा स्वास्थ्य ठीक रहता है।

प्रश्न 31.
क्या जिम्नास्टिक से शारीरिक योग्यता में वृद्धि होती है?
उत्तर:
हाँ, जिम्नास्टिक से शारीरिक योग्यता में वृद्धि होती है।

प्रश्न 32.
हमारे शरीर में शक्ति किससे पैदा होती है?
उत्तर:
हमारे शरीर में शक्ति माँसपेशियों से पैदा होती है।

प्रश्न 33.
एरोबिक क्रियाओं के कोई दो उदाहरण दें।
उत्तर:
1. जॉगिंग
2. साइकलिंग।

प्रश्न 34.
अनएरोबिक क्रियाओं के कोई दो उदाहरण दें।
उत्तर:
1. वेट-लिफ्टिग
2. थ्रोइंग इवेंट्स।

प्रश्न 35.
कैलिसथैनिक्स कैसी क्रिया है?
उत्तर:
कैलिसथैनिक्स एक स्वतंत्र वायवीय क्रिया है।

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प्रश्न 36.
शक्ति को किस इकाई से मापा जाता है?
उत्तर:
शक्ति को पौंड या डाइन इकाई से मापा जाता है।

प्रश्न 37.
भार प्रशिक्षण के प्रयोग का सुझाव कब और किसने दिया था?
उत्तर:
भार प्रशिक्षण के प्रयोग का सुझाव सन् 1812 में कैड्रिक बान ने दिया था।

प्रश्न 38.
जॉगिंग किस प्रकार की क्रिया है?
उत्तर:
जॉगिंग एक वायवीय क्रिया है।

प्रश्न 39.
कौन-सी शक्ति, गति एवं शक्ति की योग्यताओं का संयोग होती है?
उत्तर:
विस्फोटक शक्ति, गति एवं शक्ति की योग्यताओं का संयोग होती है।

प्रश्न 40.
सर्किट प्रशिक्षण विधि किस प्रणाली पर आधारित है?
उत्तर:
सर्किट प्रशिक्षण विधि जिम्नास्टिक प्रणाली पर आधारित है।

प्रश्न 41.
सर्किट प्रशिक्षण पर अनुसंधान सर्वप्रथम कहाँ किया गया?
उत्तर:
सर्किट प्रशिक्षण पर अनुसंधान सर्वप्रथम यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स, इंग्लैंड में किया गया।

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प्रश्न 42.
जोड़ों की गति-क्षमता को क्या कहते हैं?
उत्तर:
जोड़ों की गति-क्षमता को लचक कहते हैं।

प्रश्न 43.
शीर्षासन से कौन-सी योग्यता मिलती है?
उत्तर:
शीर्षासन से शारीरिक योग्यता मिलती है।

प्रश्न 44.
भार प्रशिक्षण कितनी उम्र में शुरू करना चाहिए?
उत्तर:
भार प्रशिक्षण लगभग 12 वर्ष की उम्र में शुरू करना चाहिए।

प्रश्न 45.
सर्किट/परिधि प्रशिक्षण विधि का प्रतिपादन किसने किया था?
उत्तर:
परिधि प्रशिक्षण विधि का प्रतिपादन मॉर्गन व एडम्सन ने किया था।

प्रश्न 46.
परिधि प्रशिक्षण विधि का प्रतिपादन किस सन में किया गया था?
उत्तर:
परिधि प्रशिक्षण विधि का प्रतिपादन मॉर्गन व एडम्सन द्वारा सन् 1957 में किया गया था।

प्रश्न 47.
गतिशील शक्ति किस प्रकार की शक्ति है?
उत्तर:
गतिशील शक्ति एक आइसोटोनिक शक्ति है।

प्रश्न 48.
खींचने (Pull-up) तथा धक्का लगाने (Push-up) में कौन-सी शक्ति का प्रयोग किया जाता है?
उत्तर:
खींचने (Pull-up) तथा धक्का लगाने (Push-up) में गतिशील शक्ति का प्रयोग किया जाता है।

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प्रश्न 49.
तालमेल क्या है?
उत्तर:
शारीरिक अंगों के आपस में मिलकर कार्य करने की शक्ति को तालमेल कहते हैं।

प्रश्न 50.
शो/फेंकने के लिए कौन-सी गति की आवश्यकता होती है?
अथवा
गोला फेंकने में किस प्रकार की शक्ति की आवश्यकता होती है?
उत्तर:
गोला फेंकने में गतिशील शक्ति (Dynamic Strength) की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 51.
ऊँची कूद, ट्रिपल जम्प तथा पोल वॉल्ट में उतरते समय कौन-सी शक्ति प्रयोग होती है?
उत्तर:
ऊँची कूद, ट्रिपल जम्प तथा पोल वॉल्ट में उतरते समय अधिकतम शक्ति प्रयोग होती है।

प्रश्न 52.
“सहनशीलता थकावट को रोकने या विरोध करने की योग्यता है।” ये शब्द किसने कहे?
उत्तर:
ये शब्द हर्रे ने कहे।

प्रश्न 53.
वह कौन-सी शक्ति है जो हमेशा तकनीकी कौशल और तालमेल व सामर्थ्य के साथ जुड़ी है?
उत्तर:
साधारण शक्ति हमेशा तकनीकी कौशल और तालमेल व सामर्थ्य के साथ जुड़ी है।

प्रश्न 54.
शारीरिक पुष्टि का कौन-सा घटक एक प्रतिरोध योग्यता है जो थकावट के विरुद्ध होता है?
उत्तर:
सहनशीलता।

प्रश्न 55.
तैराकी में बैक स्ट्रोक सीखने के लिए शरीर में कौन-सा शारीरिक पुष्टि का घटक होना चाहिए?
उत्तर:
तैराकी में बैक स्ट्रोक सीखने के लिए शरीर में लचक होनी चाहिए।

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प्रश्न 56.
शारीरिक योग्यता के कौन-से अंग को आंतरिक बल (Stamina) भी कहा जाता है?
उत्तर:
सहनशीलता को।

प्रश्न 57.
साइकलिंग शारीरिक पुष्टि के किस अवयव के लिए महत्त्वपूर्ण है?
उत्तर:
साइकलिंग शक्ति व सहनशीलता के लिए महत्त्वपूर्ण है।

प्रश्न 58.
तैराकी तथा दौड़ों के द्वारा शरीर के किस अंग की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है?
उत्तर:
तैराकी तथा दौड़ों के द्वारा फेफड़ों की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।

प्रश्न 59.
ऑक्सीजन की उपस्थिति में किया गया शारीरिक अभ्यास क्या कहलाता है?
उत्तर:
ऑक्सीजन की उपस्थिति में किया गया शारीरिक अभ्यास एरोबिक अभ्यास कहलाता है।

प्रश्न 60.
एक ही स्थिति में अधिक समय तक रहने की शक्ति को क्या कहते हैं?
उत्तर:
एक ही स्थिति में अधिक समय तक रहने की शक्ति को संतुलन कहते हैं।

प्रश्न 61.
जॉगिंग करने से शरीर के किस अंग की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है?
उत्तर:
जॉगिंग करने से हृदय और फेफड़ों की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है।

प्रश्न 62.
वजन प्रशिक्षण को सप्ताह में कितने दिन करना चाहिए?
उत्तर:
वजन प्रशिक्षण को सप्ताह में दो से चार दिन करना चाहिए।

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प्रश्न 63.
सर्किट प्रशिक्षण में कितने व्यायाम होते हैं?
उत्तर:
सर्किट प्रशिक्षण में 10 से 15 व्यायाम होते हैं।

प्रश्न 64.
परिधि प्रशिक्षण विधि में लगभग कितने स्टेशन होते हैं ?
उत्तर:
परिधि प्रशिक्षण विधि में लगभग 8 से 12 स्टेशन होते हैं।

प्रश्न 65.
खिलाड़ियों को जॉगिंग कैसी सतह पर करनी चाहिए?
उत्तर:
खिलाड़ियों को जॉगिंग समतल सतह वाले मैदान पर करनी चाहिए।

प्रश्न 66.
अत्यधिक गर्मी व आर्द्रता वाले मौसम में खिलाड़ी को अभ्यास करते हुए कैसे कपड़े पहनने चाहिए?
उत्तर:
अत्यधिक गर्मी व आर्द्रता वाले मौसम में खिलाड़ी को अभ्यास करते हुए सूती के हल्के कपड़े पहनने चाहिए।

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भाग-II: सही विकल्प का चयन करें

1. अनएरोबिक योग्यता सहायक है
(A) क्षमता के विकास में
(B) शक्ति के विकास में
(C) दिमाग एवं माँसपेशीय विकास में
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) दिमाग एवं माँसपेशीय विकास में

2. “शारीरिक पुष्टि किसी के जीने के ढंग के दबावों का सफल अनुकूलन है।” ये शब्द किसने कहे?
(A) मॉर्गन ने
(B) एडम्सन ने
(C) डॉ० क्रोल्स ने
(D) डॉ०ए०के० उप्पल ने
उत्तर:
(C) डॉ० क्रोल्स ने

3. व्यक्ति की ऐसी दक्षता या कुशलता जिसके द्वारा व्यक्ति संतुलित जीवन व्यतीत करता है, को क्या कहते हैं?
(A) कुशलता
(B) सामर्थ्य
(C) सुयोग्यता
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) सुयोग्यता

4. निम्नलिखित में से कौन-सी शारीरिक गतिविधि मानसिक लाभ का वर्णन करती है?
(A) शारीरिक गतिविधि शारीरिक बनावट को बढ़ाती है
(B) शारीरिक गतिविधि नियम की समझ का विकास करती है
(C) शारीरिक गतिविधि स्ट्रेस व तनाव को दूर करने में सहायक है
(D) शारीरिक गतिविधि दोस्ती का विकास करती है
उत्तर:
(C) शारीरिक गतिविधि स्ट्रेस व तनाव को दूर करने में सहायक है

5. निम्नलिखित में से शारीरिक पुष्टि के अंग हैं
(A) गति
(B) सहनशीलता
(C) शक्ति
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

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6. गति का सीधा संबंध व्यक्ति के किस संस्थान से होता है?
(A) नाड़ी प्रणाली
(B) माँसपेशी प्रणाली
(C) पाचन प्रणाली
(D) श्वसन प्रणाली
उत्तर:
(B) माँसपेशी प्रणाली

7. नियमित व्यायाम करने से क्या किया जा सकता है?
(A) नियमितता बनाए रखी जा सकती है
(B) शरीर को स्थूल बनाया जा सकता है
(C) शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता बढ़ाई जा सकती है
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता बढ़ाई जा सकती है

8. सुयोग्यता के आवश्यक अंग हैं
(A) सामाजिक सुयोग्यता
(B) शारीरिक सुयोग्यता
(C) बौद्धिक सुयोग्यता
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

9. स्वास्थ्य संबंधित सुयोग्यता का उद्देश्य है
(A) शारीरिक सुयोग्यता का विकास करना
(B) पोषण संबंधी सुयोग्यता बढ़ाना
(C) सक्रिय व स्वस्थ जीवन-शैली का विकास करना
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

10. एरोबिक योग्यता का विकास होता है
(A) बास्केटबॉल खेलने से
(B) फुटबॉल खेलने से
(C) वाटर-पोलो खेलने से
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

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11. शारीरिक पुष्टि को संतुलित बनाए रखने में सहायक है
(A) नियमित व्यायाम
(B) स्वच्छ वातावरण
(C) संतुलित व पौष्टिक भोजन
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

12. शारीरिक पुष्टि का अर्थ है
(A) अच्छे शरीर का होना
(B) शरीर के सभी संस्थानों का सुचारु रूप से कार्य करना
(C) दैनिक कार्य करने की क्षमता
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

13. शारीरिक पुष्टि का एक पहलू है
(A) शारीरिक सुयोग्यता
(B) शारीरिक शिक्षा
(C) शारीरिक क्रिया
(D) शारीरिक ढाँचा
उत्तर:
(A) शारीरिक सुयोग्यता

14. शारीरिक पुष्टि का एक घटक है
(A) माँसपेशीय शक्ति
(B) पोषण
(C) नींद
(D) दिखना
उत्तर:
(A) माँसपेशीय शक्ति

15. शारीरिक पुष्टि व्यक्ति की उम्र को ………..
(A) रोकती
(B) कम करती
(C) बढ़ाती
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) बढ़ाती

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16. शक्ति हमारे शरीर के किस अंग द्वारा पैदा होती है?
(A) फेफड़ों द्वारा
(B) माँसपेशियों द्वारा
(C) नाड़ियों द्वारा
(D) मस्तिष्क द्वारा
उत्तर:
(B) माँसपेशियों द्वारा

17. मनुष्य की वह योग्यता जो किसी भी स्थिति में कम-से-कम समय लेकर अपने कार्य को पूरा करती है, वह कहलाती है
(A) शक्ति
(B) स्फूर्ति
(C) गति
(D) सहनशीलता
उत्तर:
(C) गति

18. गति के विकास की विधियाँ हैं
(A) त्वरण दौड़ें
(B) पेस दौड़ें
(C) लिम्बरिंग डाउन
(D) (A) व (B) दोनों
उत्तर:
(D) (A) व (B) दोनों

19. गतिशील शक्ति किस प्रकार की शक्ति है?
(A) आइसोटोनिक
(B) आइसोकाइनेटिक
(C) आइसोमीट्रिक
(D) एरोबिक
उत्तर:
(A) आइसोटोनिक

20. खींचना (Pull-up) तथा धक्का लगाने (Push-up) में कौन-सी शक्ति का प्रयोग किया गया है?
(A) गतिशील शक्ति का
(B) स्थिर शक्ति का
(C) अधिकतम शक्ति का
(D) शक्ति सहनशीलता का
उत्तर:
(A) गतिशील शक्ति का

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21. सर्किट प्रशिक्षण विधि किस प्रणाली पर आधारित है?
(A) जिम्नास्टिक पर
(B) एथलेटिक्स पर
(C) स्पिंटस पर
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) जिम्नास्टिक पर

22. शीर्षासन से कौन-सी योग्यता मिलती है?
(A) मानसिक योग्यता
(B) शारीरिक योग्यता
(C) सामाजिक योग्यता
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) शारीरिक योग्यता

23. शक्ति के कितने प्रकार होते हैं?
(A) चार
(B) दो
(C) तीन
(D) पाँच
उत्तर:
(B) दो

24. स्थिर शक्ति को किस यन्त्र से मापा जाता है?
(A) थर्मामीटर
(B) लैक्टोमीटर
(C) डायनेमोमीटर
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) डायनेमोमीटर

25. शरीर की शक्ति को नापा जा सकता है
(A) किलोग्राम में
(B) डाइन में
(C) मीटर में
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) डाइन में

26. निम्नलिखित में से कौन-सा एक गतिशील शक्ति का भाग नहीं है?
(A) अधिकतम शक्ति
(B) शक्ति सहनक्षमता
(C) विस्फोटक शक्ति
(D) स्थिर शक्ति
उत्तर:
(D) स्थिर शक्ति

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27. लचक को बढ़ाने वाले आसन हैं
(A) चक्रासन व हलासन
(B) धनुरासन व भुजंगासन
(C) शलभासन व पश्चिमोत्तानासन
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

28. ऊँची कूद, ट्रिपल जम्प तथा पोल वॉल्ट में उतरते समय कौन-सी शक्ति प्रयोग होती है?
(A) स्थिर शक्ति
(B) अधिकतम शक्ति
(C) विस्फोटक शक्ति
(D) शक्ति सहनशीलता
उत्तर:
(B) अधिकतम शक्ति

29. जैवलिन थ्रो तथा डिस्कस थ्रो में कौन-सी शक्ति प्रयोग होती है?
(A) विस्फोटक शक्ति
(B) अधिकतम शक्ति
(C) स्थिर शक्ति
(D) गतिशील शक्ति
उत्तर:
(A) विस्फोटक शक्ति

30. वह शक्ति जो भिन्न-भिन्न स्थितियों में तेज गति के साथ अवरोध पर काबू पाती है, कौन-सी शक्ति कहलाती है?
(A) साधारण शक्ति
(B) विस्फोटक शक्ति
(C) गतिशील शक्ति
(D) स्थिर शक्ति
उत्तर:
(B) विस्फोटक शक्ति

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31. वह कौन-सी शक्ति है जो हमेशा तकनीकी कौशल और तालमेल व सामर्थ्य के साथ जुड़ी है?
(A) साधारण शक्ति
(B) गतिशील शक्ति
(C) विशेष शक्ति
(D) विस्फोटक शक्ति
उत्तर:
(A) साधारण शक्ति

32. थकावट के विरुद्ध अवरोधक योग्यता कहलाती है
(A) गति
(B) शक्ति
(C) लचीलापन
(D) सहनशीलता
उत्तर:
(D) सहनशीलता

33. माँसपेशीय सहनशीलता विशेषतः एक
(A) शारीरिक थकावट को रोकने की क्षमता है
(B) सभी प्रकार के खिलाड़ियों की अर्जित विशेषता है
(C) जिम्नास्ट की मूलभूत सुयोग्यता का घटक है
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) शारीरिक थकावट को रोकने की क्षमता है

34. जिम्नास्टिक द्वारा शारीरिक पुष्टि के किस घटक में वृद्धि होती है?
(A) लचक में
(B) गति में
(C) शक्ति में
(D) सहनशीलता में
उत्तर:
(A) लचक में

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35. स्वास्थ्य संबंधित सुयोग्यता के घटकों में से मुख्य घटक है
(A) गति
(B) शक्ति
(C) लचीलापन
(D) शारीरिक बनावट
उत्तर:
(D) शारीरिक बनावट

36. सर्किट प्रशिक्षण सर्वप्रथम किसके द्वारा शुरुआत, व्याख्यायित व अध्ययन किया गया?
(A) मॉर्गन व एडम्सन
(B) एच०क्लार्क व डी० क्लार्क
(C) स्कोलिक
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) मॉर्गन व एडम्सन

37. सहनशीलता को कैसे मापा जा सकता है?
(A) अवधि द्वारा
(B) पुनरावृत्ति की संख्या द्वारा
(C) थर्मामीटर द्वारा
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) पुनरावृत्ति की संख्या द्वारा

38. सहनशीलता की कितनी किस्में हैं?
(A) दो
(B) चार
(C) तीन
(D) पाँच
उत्तर:
(C) तीन

39. किस सहनशीलता के लिए जॉगिंग और साइकलिंग जैसी क्रियाएँ आवश्यक हैं?
(A) साधारण सहनशीलता
(B) विशेष सहनशीलता
(C) मौलिक सहनशीलता
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) मौलिक सहनशीलता

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40. एरोबिक अथवा अनएरोबिक व्यायामों के दौरान आई थकावट पर नियंत्रण करने वाली क्षमता को क्या कहते हैं?
(A) मौलिक सहनशीलता
(B) साधारण सहनशीलता
(C) विशेष सहनशीलता
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) साधारण सहनशीलता

41. तैराकी में बैक स्ट्रोक सीखने के लिए शरीर में कौन-सा शारीरिक पुष्टि का घटक होना चाहिए?
(A) स्फूर्ति
(B) लचक
(C) गति
(D) शक्ति
उत्तर:
(B) लचक

42. शारीरिक योग्यता के कौन-से अंग को आंतरिक बल (Stamina) भी कहा जाता है?
(A) सहनशीलता
(B) गति
(C) संतुलन
(D) तालमेल
उत्तर:
(A) सहनशीलता

43. पुनः दोहराना विधि सुधार में सहायक है
(A) तेजी योग्यता
(B) अधिकतम शक्ति
(C) विस्फोटक शक्ति
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(D) उपर्युक्त सभी

44. कैलिसथैनिक्स में किस प्रकार के उपकरणों का प्रयोग किया जाता है?
(A) भारी
(B) हल्के
(C) (A) व (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) हल्के

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45. साधारण शक्ति को बढ़ाया जा सकता है
(A) अंतराल प्रशिक्षण द्वारा
(B) फार्टलेक सिद्धांत द्वारा
(C) निरंतर प्रशिक्षण द्वारा
(D) सर्किट प्रशिक्षण द्वारा
उत्तर:
(D) सर्किट प्रशिक्षण द्वारा

46. स्फूर्ति में शरीर का कौन-सा अंग हिस्सा लेता है?
(A) माँसपेशियाँ
(B) त्वचा
(C) टाँगें
(D) पाँव
उत्तर:
(A) माँसपेशियाँ

47. प्रतिक्रिया व बढ़ना किस योग्यता के प्रकार हैं?
(A) लचीलापन
(B) फुर्ति
(C) सहनशीलता
(D) तेजी
उत्तर:
(D) तेजी

48. साइकलिंग शारीरिक पुष्टि के किस अवयव के लिए महत्त्वपूर्ण है?
(A) शक्ति
(B) गति
(C) लचक
(D) शक्ति व सहनशीलता
उत्तर:
(D) शक्ति व सहनशीलता

49. कौन-सा व्यायाम कार्बनिक शक्ति, शरीर के नियंत्रण तथा लचक को विकसित करता है?
(A) जॉगिंग
(B) साइकलिंग
(C) कैलिसथैनिक्स
(D) लयबद्ध व्यायाम
उत्तर:
(C) कैलिसथैनिक्स

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50. लेजियम, डम्बल, जिम्नास्टिक में ग्राउंड फ्लोर व्यायाम और लोक-नृत्य किस प्रकार के व्यायाम हैं?
(A) वायवीय
(B) अवायवीय
(C) लयबद्ध
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(C) लयबद्ध

51. तैराकी तथा दौड़ों के द्वारा शरीर के किस अंग की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है?
(A) दिमाग की
(B) जिगर की
(C) फेफड़ों की
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) फेफड़ों की

52. ऑक्सीजन की उपस्थिति में किया गया शारीरिक अभ्यास कहलाता है
(A) एरोबिक
(B) अनएरोबिक
(C) आइसोमीट्रिक
(D) आइसोकाइनेटिक
उत्तर:
(A) एरोबिक

53. शारीरिक अंगों के आपस में मिलकर कार्य करने की शक्ति को कहते हैं
(A) शक्ति
(B) लचीलापन
(C) तालमेल
(D) सहनशीलता
उत्तर:
(C) तालमेल

54. लय योग्यता, समायोजन की योग्यता, प्रतिक्रिया योग्यता और संतुलन की योग्यता किस प्रकार की क्रियाएँ हैं?
(A) शारीरिक क्रियाएँ
(B) मानसिक क्रियाएँ
(C) तालमेल संबंधी क्रियाएँ
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) तालमेल संबंधी क्रियाएँ

HBSE 12th Class Physical Education Solutions Chapter 1 शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता

55. एक ही स्थिति में अधिक समय तक रहने की शक्ति को क्या कहते हैं?
(A) संतुलन
(B) तालमेल
(C) स्फूर्ति
(D) सहनशीलता
उत्तर:
(A) संतुलन

56. सर्किट प्रशिक्षण का अनुसंधान कहाँ किया गया?
(A) कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, कुरुक्षेत्र में
(B) ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, लंदन में
(C) कैंब्रिज यूनिवर्सिटी, इंग्लैंड में
(D) यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स, इंग्लैंड में
उत्तर:
(D) यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स, इंग्लैंड में

57. ऐसी एक्टिविटी जो ऑक्सीजन की उपस्थिति में की जाती है, कहलाती है-
(A) अनएरोबिक
(B) एरोबिक
(C) एरोबिक व अनएरोबिक
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(B) एरोबिक

58. वैज्ञानिक विधि से प्रशिक्षण प्राप्त करने की विधि है
(A) निरंतर प्रशिक्षण विधि
(B) सर्किट प्रशिक्षण विधि
(C) अंतराल प्रशिक्षण विधि
(D) वज़न प्रशिक्षण विधि
उत्तर:
(B) सर्किट प्रशिक्षण विधि

59. हमारी मांसपेशियाँ …………………… ऊतकों से बनी होती हैं।
(A) संयोजी
(B) धारीदार
(C) पेशीय
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) पेशीय

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60. एरोबिक अभ्यास है
(A) कम अवधि का
(B) लम्बी अवधि का
(C) (A) व (B) दोनों
(D) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(C) (A) व (B) दोनों

61. अतिभार (Overload) किसके द्वारा बढ़ाया जा सकता है?
(A) अधिक वजन उठाकर
(B) भरपेट भोजन खाकर
(C) सघनता द्वारा
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) सघनता द्वास

62. धीरे-धीरे या आराम से दौड़कर शरीर को गर्म करना क्या कहलाता है?
(A) जॉगिंग
(B) गर्माना
(C) अतिभार
(D) लिम्बरिंग डाउन
उत्तर:
(A) जॉगिंग

63. वायवीय प्रक्रिया में किस गैस का प्रयोग किया जाता है?
(A) नाइट्रोजन
(B) ऑक्सीजन
(C) कार्बन-डाइऑक्साइड
(D) ऑर्गन
उत्तर:
(B) ऑक्सीजन

64. जॉगिंग करने से शरीर के किस अंग की कार्यकुशलता में वृद्धि होती है?
(A) हृदय की
(B) फेफड़ों की
(C) हृदय और फेफड़ों की
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(C) हृदय और फेफड़ों की

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65. सर्किट ट्रेनिंग निम्नलिखित के विकास में एक प्रभावशाली विधि है
(A) गति
(B) लचीलापन
(C) ताकत क्षमता
(D) चपलता
उत्तर:
(C) ताकत क्षमता

66. भार प्रशिक्षण किस आयु-वर्ग में आरम्भ करना चाहिए?
(A) 11 वर्ष
(B) 12 वर्ष
(C) 13 वर्ष
(D) 14 वर्ष
उत्तर:
(B) 12 वर्ष

67. वजन प्रशिक्षण से सहज क्रियाएँ; जैसे माँसपेशियों के ……………… तथा ……………… में वृद्धि होती है।
(A) सिकुड़ने, फैलने
(B) फैलने, सिकुड़ने
(C) तीव्र, मंद
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(A) सिकुड़ने, फैलने

68. निम्नलिखित में से पुष्टि के विकास का साधन कौन-सा है?
(A) खेलकूद
(B) जॉगिंग
(C) तालबद्ध व्यायाम
(D) उपरोक्त सभी
उत्तर:
(D) उपरोक्त सभी

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69. परिधि प्रशिक्षण विधि का प्रतिपादन किसने किया था?
(A) मॉर्गन व स्टेनले
(B) मॉर्गन व एडम्सन
(C) हिल
(D) थॉम्पसन व डेवरिस
उत्तर:
(A) मॉर्गन व स्टेनले

भाग-III: रिक्त स्थानों की पूर्ति करें

1. सर्किट प्रशिक्षण विधि ………………… पर आधारित है।
2. गति को साधारणतया लगभग ………………… तक बढ़ाया जा सकता है।
3. थ्रो फेंकने के लिए ………………… की आवश्यकता होती है।
4. शक्ति ………………… द्वारा पैदा होती है।
5. शरीर की शक्ति को ………………… में मापा जा सकता है।
6. व्यक्ति के शरीर के जोड़ों में गति-क्षमता को ……………….. कहते हैं।
7. ………………. प्रशिक्षण विधि में स्टेशन रखे जाते हैं।
8. एरोबिक्स ………………… वर्ष की उम्र के बाद नहीं करनी चाहिए।
9. विस्फोटक शक्ति गति और ……………… की योग्यताओं का मिश्रण है।
10. एक ही स्थिति में अधिक समय तक रहने की शक्ति को ………………… कहा जाता है।
11. अतिभार के सिद्धांत को निभाने के लिए लंबी दूरी के दौड़ाक धीरे-धीरे दूरी में ………………. करते हैं।
12. भार प्रशिक्षण को सर्वप्रथम ………………… ने अपनाया था।
13. एरोबिक्स में समय की अवधि ………………… होती है।
14. सभी तरह की खेलें ………………… पर आधारित होती हैं।
15. सक्रिय लचक ……………….. प्रकार की होती है।
उत्तर:
1. जिम्नास्टिक
2. 20 प्रतिशत
3. परिवर्तनशील गति
4. माँसपेशियों
5. पौंड या डाइन
6. लचक
7. सर्किट
8. 60
9. शक्ति
10. संतुलन
11. बढ़ोतरी
12. जर्मनी
13. लम्बी
14. विस्फोटक गति
15. दो।

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शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता Summary

शारीरिक पुष्टि एवं सुयोग्यता परिचय
शारीरिक पुष्ट्रि(Physical Fitness):
आधुनिक युग में प्रत्येक मनुष्य अपनी शारीरिक पुष्टि बनाए रखने के लिए प्रयत्नशील है। यह मनुष्य की वह शक्ति तथा कार्य करने की योग्यता है, जिसको वह बिना किसी बाधा के आसानी से थोड़ी-सी शक्ति का प्रयोग करके पूरा कर लेता है। शारीरिक पुष्टि का अर्थ बहुत व्यापक है, इसलिए इसे परिभाषित करना बहुत कठिन है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि यह हमें अपने शरीर को सही ढंग से रखने और अधिक देर तक मेहनत करने की क्षमता प्रदान करती है।

सुयोग्यता (Wellness):
सुयोग्यता एक ऐसी अवस्था है, जो हमारे दैनिक जीवन में प्रत्येक कार्य को प्रभावकारी ढंग से करने में सहायक होती है तथा शेष बची हुई शक्ति से हम खाली समय में मनोरंजन कर सकते हैं। यह क्रोध को सहन करने और तनाव को दूर करने में सहायक होती है। यह एक अच्छे स्वास्थ्य का चिह्न है। यह प्रत्येक मनुष्य में भिन्न-भिन्न होती है, क्योंकि इस पर पैतृक आदतों, व्यायाम, आयु तथा लिंग का प्रभाव पड़ता है। अतः सुयोग्यता व्यक्ति की वह क्षमता या योग्यता है जिसके द्वारा वह एक उत्तम एवं संतुलित जीवन व्यतीत करता है। इसमें मन, शरीर एवं आत्मा का संतुलन शामिल होता है। इसलिए यह शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की दशा या विशेषता होती है।

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