Class 12

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 4 मानव बस्तियाँ

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 4 मानव बस्तियाँ Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Solutions Chapter 4 मानव बस्तियाँ

अभ्यास केन प्रश्न

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. निम्नलिखित में से कौन-सा नगर नदी तट पर अवस्थित नहीं है?
(A) आगरा
(B) पटना
(C) भोपाल
(D) कोलकाता
उत्तर:
(C) भोपाल

2. भारत की जनगणना के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सी एक विशेषता नगर की परिभाषा का अंग नहीं है?
(A) जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०
(B) नगरपालिका, निगम का होना
(C) 75% से अधिक जनसंख्या का प्राथमिक खंड में संलग्न होना
(D) जनसंख्या आकार 5000 व्यक्तियों से अधिक
उत्तर:
(C) 75% से अधिक जनसंख्या का प्राथमिक खंड में संलग्न होना

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3. निम्नलिखित में से किस पर्यावरण में परिक्षिप्त ग्रामीण बस्तियों की अपेक्षा नहीं की जा सकती?
(A) गंगा का जलोढ़ मैदान
(B) हिमालय की निचली घाटियाँ
(C) राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क प्रदेश
(D) उत्तर-पूर्व के वन और पहाड़ियाँ
उत्तर:
(A) गंगा का जलोढ़ मैदान

4. निम्नलिखित में से नगरों का कौन-सा वर्ग अपने पदानुक्रम के अनुसार क्रमबद्ध है?
(A) बृहन मुंबई, बंगलौर, कोलकाता, चेन्नई
(B) कोलकाता, बृहन मुंबई, चेन्नई, कोलकाता
(C) दिल्ली, बृहन मुंबई, चेन्नई, कोलकाता
(D) बृहन मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई
उत्तर:
(D) बृहन मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
गैरिसन नगर क्या होते हैं? उनका क्या प्रकार्य होता है?
उत्तर:
सुरक्षा की दृष्टि से विकसित छावनी नगर गैरिसन नगर कहलाते हैं; जैसे अम्बाला, जालंधर, महू, बबीना, उधमपुर, मेरठ आदि। इन नगरों का विकास ब्रिटिशकाल में सुरक्षा सेवाओं की छावनी के रूप में हुआ था। इनका प्रमुख कार्य सुरक्षा प्रदान करना है।

प्रश्न 2.
किसी नगरीय संकुल की पहचान किस प्रकार की जा सकती है?
उत्तर:
नगरीय संकुल निम्नलिखित तीन में से कोई एक हो सकता है-

  1. नगर तथा उससे जुड़ा विस्तार।
  2. विस्तार सहित या विस्तार रहित दो या दो से अधिक सटे नगर।
  3. एक नगर या एक-से-अधिक संटे नगर और उनके क्रमिक विस्तार।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 4 मानव बस्तियाँ

प्रश्न 3.
मरुस्थली प्रदेशों में गाँवों की अवस्थिति के कौन से मुख्य कारक होते हैं?
उत्तर:
गाँवों की अवस्थिति में अनेक भौतिक कारक प्रभाव डालते हैं; जैसे धरातल, जल की सुविधा, जलवायु, मिट्टी आदि। मरुस्थलीय प्रदेशों में जहाँ पानी मिलता है, वहाँ बस्तियाँ शीघ्रता से बढ़ने व बसने लगती हैं। इसके अतिरिक्त सुरक्षा कारक भी गाँवों की अवस्थिति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रश्न 4.
महानगर क्या होते हैं? ये नगरीय संकुलों से किस प्रकार भिन्न होते हैं?
उत्तर:
जिन नगरों की जनसंख्या 10 से 50 लाख तक होती है, उन्हें महानगर कहा जाता है। महानगरों की अपेक्षा नगरीय संकुल अधिक बड़े होते हैं, क्योंकि इनमें आस-पास के नगरीय विस्तार को भी जोड़ा जाता है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
विभिन्न प्रकार की ग्रामीण बस्तियों के लक्षणों की विवेचना कीजिए। विभिन्न भौतिक पर्यावरणों में बस्तियों के प्रारूपों के लिए उत्तरदायी कारक कौन-से हैं?
उत्तर:
विभिन्न प्रकार की ग्रामीण बस्तियाँ हैं गुच्छित, अर्ध-गुच्छित, पल्लीकृत एवं परिक्षिप्त बस्तियाँ। इन बस्तियों के मुख्य लक्षण या विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

गुच्छित या संकुलित बस्तियों के लक्षण-

  • गुच्छित बस्तियों में मकान छोटे और एक-दूसरे से सटे हुए होते हैं।
  • ये बस्तियाँ नदी, घाटियों और जलोढ़ उपजाऊ मैदानों में पाई जाती हैं।
  • इन बस्तियों में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होती।

अर्ध-गुच्छित या विखंडित बस्तियों के लक्षण-

  • अर्ध-गुच्छित बस्तियों में मकान एक-दूसरे से दूर होते हैं परंतु एक ही बस्ती में होते हैं।
  • इनमें बस्तियाँ अनेक पुरवों में बँटी होती हैं।
  • निम्न कार्यों में संलग्न लोग इन बस्तियों में रहते हैं।

पल्लीकृत बस्तियों के लक्षण-

  • पल्लीकृत बस्तियों में मकान अधिक सटे होते हैं।
  • इन बस्तियों को देशों के विभिन्न भागों में स्थानीय स्तर पर पान्ना, पाड़ा, पाली, नगला, ढाँणी आदि कहा जाता है।
  • इन बस्तियों का विस्तार अपेक्षाकृत बड़े क्षेत्र में होता है।

परिक्षिप्त बस्तियों के लक्षण-

  • परिक्षिप्त बस्तियों में मकान बड़े और एक-दूसरे से दूर-दूर होते हैं।
  • ये बस्तियाँ उच्च भूमि, पर्वतीय क्षेत्रों और मरुस्थलीय क्षेत्रों में पाई जाती हैं।
  • इन बस्तियों में पानी की निकासी की अच्छी व्यवस्था होती है।

प्रारूपों के लिए उत्तरदायी कारक-ग्रामीण बस्तियों के प्रारूपों को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं-
1. भौतिक कारक बस्तियों के आकार तथा विस्तार पर अनेक भौतिक कारक; जैसे धरातल की बनावट, मिट्टी, जल-स्तर, जलवायु, ढलान, अपवाह तंत्र आदि गहरा प्रभाव डालते हैं। पहाड़ी भागों में विरल तथा मरुस्थलीय भागों में किसी तालाब के चारों ओर बस्तियों का विकास होता है।

2. सांस्कृतिक कारक-एक ही जाति या जनजाति या धर्म के लोग एक ही गाँव में रहते हैं। बस्ती के मध्य में गाँव के मुखिया या ज़मींदारों के मकान होते हैं तथा बाहर की ओर सेवा करने वाले समुदायों के मकान या झोंपड़े होते हैं। हरिजनों के घर बस्ती से दूर बसाए जाते हैं।

3. ऐतिहासिक कारक-मध्य युग में बाहर से होने वाले आक्रमणों तथा सेना के आतंक से बचने के लिए संहत बस्तियाँ बनाई जाती थीं। इनमें सुरक्षा और इकट्ठा रहने की स्थिति बनती थी।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 4 मानव बस्तियाँ

प्रश्न 2.
क्या एक प्रकार्य वाले नगर की कल्पना की जा सकती है? नगर बहप्रकार्यात्मक क्यों हो जाते हैं?
उत्तर:
एक प्रकार्य वाले नगर की कल्पना नहीं की जा सकती। कोई भी नगर कोई एक काम नहीं करता। सभी नगरों में थोड़ा या बहुत प्रशासनिक, औद्योगिक, व्यापारिक, शैक्षणिक तथा परिवहन से संबंधित काम होता है। अतः उसके प्रधान व्यवसाय के आधार पर ही नगर का वर्गीकरण किया जा सकता है; जैसे कुरुक्षेत्र एक धार्मिक नगर है और रोहतक एक शैक्षणिक नगर है, लेकिन यह वर्गीकरण एक सामान्य अवलोकन है। वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित तथ्य-परक अवलोकन नहीं है।

अपने केंद्रीय स्थान की भूमिका के अतिरिक्त अनेक शहर और नगर विशेषीकृत सेवाओं का निष्पादन करते हैं। कुछ शहरों और नगरों को कुछ निश्चित प्रकार्यों में विशिष्टता प्राप्त होती है और उन्हें कुछ विशिष्ट क्रियाओं, उत्पादनों अथवा सेवाओं के लिए जाना जाता है। फिर भी प्रत्येक नगर अनेक प्रकार्य करता है। उनके प्रमुख या विशेषीकृत कार्य के आधार पर उसका वर्गीकरण किया जाता है; जैसे जो नगर उच्चतर क्रम में प्रशासनिक मुख्यालय होते हैं उन्हें प्रशासनिक नगर कहते है; जैसे चंडीगढ़, दिल्ली, जयपुर आदि। मुम्बई, सेलम, मोदीनगर, हुगली आदि औद्योगिक नगरों के रूप में प्रसिद्ध हैं। नैनीताल, मसूरी, शिमला, जोधपुर, माऊंट आबू, पर्यटन नगरों के रूप में विकसित हैं।

विशेषीकृत नगर भी महानगर बनने पर बहुप्रकार्यात्मक नगर बन जाते हैं, जिनमें उद्योग, व्यवसाय, प्रशासन, परिवहन आदि महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं। ये प्रकार्य इतने अंतर्ग्रथित हो जाते हैं कि नगर को किसी विशेष प्रकार्य वर्ग में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता।

मानव बस्तियाँ HBSE 12th Class Geography Notes

→ बस्ती या अधिवास (Settlements) : मानव निवास की मूलभूत इकाई को घर कहते हैं। एक क्षेत्र के घरों के समूह को बस्ती कहते हैं। इसमें 6 से 12 झोंपड़ियाँ हो सकती हैं या सैकड़ों घरों का एक बड़ा गांव हो सकता है। ये नगरों तथा शहरों की तरह घरों के बड़े समूह हो सकते हैं। इनका एक अभिन्यास प्लान होता है। बस्ती में आवासीय भवन तथा विभिन्न आवश्यक वस्तुओं के भंडार-गृह होते हैं।

→ ग्रामीण बस्ती (Rural Settlement) : इन बस्तियों में मकानों तथा गलियों का योग पाया जाता है तथा इनके चारों ओर खेत होते हैं। ये विभिन्न ढंग की होती हैं।

→ ग्रामीण बस्तियों के प्रकार (Types of Rural Settlements):

  • गुच्छित अथवा केंद्रीकृत बस्ती
  • अर्द्ध-गुच्छित अथवा विखंडित बस्ती
  • पल्लीकृत बस्ती
  • परिक्षिप्त अथवा एकाकी बस्ती।

→ शहरी/नगरीय बस्ती (Urban Settlement) : ग्रामीण बस्तियों के विपरीत नगरीय बस्तियाँ सामान्यतया संहत एवं विशाल आकार की होती हैं। नगरीय क्षेत्रों में जीवन का ढंग जटिल और तीव्र होता है और सामाजिक संबंध भी औपचारिक व व्यक्तिगत होते हैं। ये बस्तियाँ द्वितीयक एवं तृतीयक क्रियाओं में विशेषीकृत होती हैं।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 4 मानव बस्तियाँ

→ प्रशासनिक नगर (Administration Towns) : इस प्रकार के नगर प्रशासनिक कार्यों के लिए विकसित होते हैं। देश की राजधानी तथा राज्यों की राजधानियाँ इन नगरों के अंतर्गत आती हैं। चंडीगढ़, दिल्ली, शिमला, भोपाल तथा शिलांग आदि ऐसे नगरों के उदाहरण हैं।

→ औद्योगिक नगर (Industrial Towns) : अनेक प्रकार के उद्योगों की अवस्थिति ही ऐसे नगरों की प्रेरक-शक्ति होती है; जैसे मुंबई, कोयंबटूर, भिलाई, हुगली, जमशेदपुर, सेलम तथा फरीदाबाद इत्यादि।

→ परिवहन नगर (Transport Towns) : ये नगर मुख्य रूप से आयात और निर्यात की गतिविधियों के कार्यों में सक्रिय रहते हैं; जैसे कांडला, कोच्चि, विशाखापट्टनम तथा कालीकट इत्यादि। कुछ नगर आंतरिक परिवहन के केंद्र भी होते हैं; जैसे आगरा, मुगलसराय, इटारसी तथा कटनी आदि।

→ छावनी/गैरिसन नगर (Cantt/Garrison Towns) : सुरक्षा की दृष्टि से विकसित छावनी नगर गैरिसन नगर कहलाते हैं; जैसे अम्बाला, जालंधर, महू, बबीना, उधमपुर, मेरठ आदि। इन नगरों का विकास ब्रिटिशकाल में सुरक्षा सेवाओं की छावनी के रूप में हुआ था। इनका मुख्य कार्य सुरक्षा प्रदान करना है।

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HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 3 मानव विकास

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 3 मानव विकास Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Solutions Chapter 3 मानव विकास

अभ्यास केन प्रश्न

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. मानव विकास सूचकांक (2011) के संदर्भ में विश्व के देशों में भारत की निम्नलिखित में से कौन-सी कोटि थी?
(A) 126
(B) 128
(C) 134
(D) 129
उत्तर:
(C) 134

2. मानव विकास सूचकांक में भारत के निम्नलिखित राज्यों से किस एक की कोटि उच्चतम है?
(A) तमिलनाडु
(B) केरल
(C) पंजाब
(D) हरियाणा
उत्तर:
(B) केरल

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 3 मानव विकास

3. भारत के निम्नलिखित राज्यों में से किस एक में स्त्री साक्षरता निम्नतम है?
(A) जम्मू और कश्मीर
(B) झारखंड
(C) अरुणाचल प्रदेश
(D) बिहार
उत्तर:
(D) बिहार

4. भारत के निम्नलिखित राज्यों में से किस एक में 0-6 आयु-वर्ग में बच्चों में लिंग अनुपात निम्नतम है?
(A) गुजरात
(B) पंजाब
(C) हरियाणा
(D) हिमाचल प्रदेश
उत्तर:
(C) हरियाणा

5. भारत के निम्नलिखित केंद्र-शासित प्रदेशों में से किस एक की साक्षरता दर उच्चतम है?
(A) लक्षद्वीप
(B) दमन और दीव
(C) चंडीगढ़
(D) अंडमान और निकोबार द्वीप
उत्तर:
(A) लक्षद्वीप

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
मानव विकास को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने 1990 ई० में मानव विकास को इस प्रकार परिभाषित किया-“लोगों के विकल्पों के परिवर्द्धन की प्रक्रिया और जन-कल्याण के स्तर को ऊँचा उठाना ही मानव विकास है।” अतः मानव विकास स्वस्थ भौतिक पर्यावरण से लेकर आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक स्वतंत्रता तक सभी प्रकार के मानव विकल्पों को शामिल करते हुए लोगों के विकल्पों में विस्तार तथा उनके शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सशक्तीकरण के अवसरों में वृद्धि की प्रक्रिया है।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 3 मानव विकास

प्रश्न 2.
उत्तरी भारत के अधिकांश राज्यों में मानव विकास के निम्न स्तरों के दो कारण बताइए।
उत्तर:
उत्तरी भारत के अधिकांश राज्यों; जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार आदि में मानव विकास निम्न स्तर का है। इसके मुख्य कारण गरीबी, बेरोज़गारी व अपूर्ण रोज़गार जैसी समस्याओं का होना है। इनके अतिरिक्त सामाजिक एवं राजनीतिक कारण भी इसके लिए उत्तरदायी हैं।

प्रश्न 3.
भारत के बच्चों में घटते लिंगानुपात के दो कारण बताइए।
उत्तर:
भारत के बच्चों में घटते लिंगानुपात के निम्नलिखित कारण हैं-

  1. लड़कों को प्राथमिकता देने के कारण कुछ क्षेत्रों में कन्या भ्रूण हत्या की जाती है, जिससे लिंगानुपात घटता है।
  2. इन वैज्ञानिक विधियों के कारण कन्या जन्म में गिरावट आई है। इन विधियों का प्रयोग अवैध है। वर्तमान में सरकार इन गैर-कानूनी तरीकों को रोकने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
भारत में 2001 के स्त्री साक्षरता के स्थानिक प्रारूपों की विवेचना कीजिए और इसके लिए उत्तरदायी कारणों को समझाइए।
उत्तर:
भारत में साक्षरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। सन् 2001 में भारत की स्त्री साक्षरता दर 53.67% थी। सन् 1951-2001 की अवधि में कुल जनसंख्या की साक्षरता दर में तीन गुना वृद्धि हुई है, जबकि स्त्री साक्षरता में छः गुना से भी साक्षरता दर सन् 1951 में मात्र 8.86% थी जो सन् 2001 में बढ़कर 53.67% हो गई। भारत में 2001 के स्त्री साक्षरता के स्थानिक प्रारूपों को निम्नलिखित तालिका में दर्शाया गया है –
HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 3 मानव विकास 1
भारत के राज्यों में साक्षरता दर में व्यापक प्रादेशिक असमानता पाई जाती है। जहाँ केरल, मिजोरम में साक्षरता दर क्रमशः 90.86% व 88.80% पाई जाती है, वहीं बिहार जैसे राज्य में साक्षरता दर केवल 47.00% है। गोवा, दिल्ली, पुडुचेरी (पांडिचेरी), चंडीगढ़, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह व दमन दीव में भी स्त्री साक्षरता का ऊँचा अनुपात पाया जाता है। दक्षिण भारत के अधिकांश राज्यों में महिला साक्षरता राष्ट्रीय औसत से ऊँची है।

इन राज्यों में साक्षरता दर ऊँची होने में इन राज्यों का अत्यधिक नगरीकरण होना व अनेक सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं का शिक्षा के प्रसार में योगदान देना है। इसके अतिरिक्त कुछ ईसाई मिशनरियों ने भी इन राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में शिक्षा के प्रसार में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है व निम्न साक्षरता दर का प्रमुख कारण पराधीन भारत में ब्रिटिश शासन का साक्षरता की ओर कम ध्यान था व स्त्रियों को शिक्षित करने की प्रथा भी नहीं थी। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल साक्षरता दर 74.04% है। पुरुष साक्षरता दर 82.14% और महिला साक्षरता दर 65.46% है।

प्रश्न 2.
भारत के 15 प्रमुख राज्यों में मानव विकास के स्तरों में किन कारकों ने स्थानिक भिन्नता उत्पन्न की है?
उत्तर:
भारत, माध्यम विकास दर्शाने वाले देशों की श्रेणी में आता है। मानव विकास रिपोर्ट-2018 के अनुसार विश्व के 189 देशों में इसका 130वाँ स्थान है। भारत के प्रमुख 15 राज्यों में केरल 0.790 सूचकांक मूल्य के साथ कोटि-क्रम में सर्वोच्च है।
भारत : मानव विकास सूचकांक-2011

राज्यमानव विकास सूचकांक मूल्यराज्यमानव विकास सूचकांक मूल्य
केरल0.790पश्चिम बंगाल0.492
हिमाचल प्रदेश0.652उत्तराखंड0.490
गोवा0.617आंध्र प्रदेश0.473
पंजाब0.605असम0.444
महाराष्ट्र0.572राजस्थान0.434
तमिलनाडु0.570उत्तर प्रदेश0.380
हरियाणा0.552झारखण्ड0.376
गुजरात0.527

मानव विकास के विभिन्न स्तरों के लिए अनेक सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, ऐतिहासिक कारण उत्तरदायी हैं। केरल के कोटि-क्रम में सर्वोच्च मूल्य इसकी सर्वोच्च साक्षरता दर प्राप्त करने के लिए की गई प्रभावी कार्यशीलता के कारण है। धयों के अतिरिक्त आर्थिक विकास भी मानव विकास सूचकांक पर सार्थक प्रभाव डालता है। जो राज्य आर्थिक दृष्टि से ऊँचे हैं; जैसे महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा आदि में मानव सूचकांक असम, बिहार, मध्य प्रदेश की तुलना में ऊँचा है।

ऐतिहासिक कारण भी मानव-विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उपनिवेश काल में विकसित प्रादेशिक विकृतियाँ और सामाजिक विषमताएँ अब भी भारत की अर्थव्यवस्था, राजतंत्र व समाज में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सामाजिक वितरण न्याय के अपने मुख्य उद्देश्य को पूरा करने के लिए भारत सरकार ने नियोजित विकास के माध्यम से संतुलित विकास के लिए अनेक प्रयास किए हैं।

मानव विकास HBSE 12th Class Geography Notes

→ मानव विकास (Human Development) : मानव के समग्र विकास के लिए अवसरों की प्राप्ति तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार मानव विकास कहलाता है।

→ जीवन प्रत्याशा (Longevity) : जन्म के समय संभावित आयु जीवन प्रत्याशा कहलाती है।

→ आर्थिक विकास (Economic Development) : आर्थिक विकास को प्रति व्यक्ति आय तथा सकल राष्ट्रीय उत्पाद जैसे संकेतकों से मापा जाता है।

→ आर्थिक विकास एक साधन है। आर्थिक उपलब्धियों के सूचक (Indicators of Economic Achievements):

  • सकल राष्ट्रीय उत्पाद
  • प्रति व्यक्ति आय
  • गरीबी उन्मूलन
  • रोजगार।

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HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Solutions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

अभ्यास केन प्रश्न

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में पुरुष प्रवास का मुख्य कारण है?
(A) शिक्षा
(B) काम और रोज़गार
(C) व्यवसाय
(D) विवाह
उत्तर:
(B) काम और रोज़गार

2. निम्नलिखित में से किस राज्य में सर्वाधिक संख्या में आप्रवासी आते हैं?
(A) उत्तर प्रदेश में
(B) महाराष्ट्र में
(C) दिल्ली में
(D) बिहार में
उत्तर:
(B) महाराष्ट्र में

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

3. भारत में प्रवास की निम्नलिखित धाराओं में से कौन-सी एक धारा पुरुष प्रधान है?
(A) ग्रामीण से ग्रामीण
(B) ग्रामीण से नगरीय
(C) नगरीय से ग्रामीण
(D) नगरीय से नगरीय
उत्तर:
(B) ग्रामीण से नगरीय

4. निम्नलिखित में से किस नगरीय समूहन में प्रवासी जनसंख्या का अंश सर्वाधिक है?
(A) मुंबई नगरीय समूहन
(B) बँगलुरु नगरीय समूहन
(C) दिल्ली नगरीय समूहन
(D) चेन्नई नगरीय समूहन
उत्तर:
(A) मुंबई नगरीय समूहन

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
जीवन पर्यंत प्रवासी और पिछले निवास के अनुसार प्रवासी में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जीवन पर्यन्त प्रवासी और पिछले निवास के अनुसार प्रवासी में निम्नलिखित अन्तर है-

जीवन पर्यन्त प्रवासीपिछले निवास के अनुसार प्रवासी
(1) ये वे प्रवासी होते हैं जिनका जन्म किसी अन्य स्थान पर होता है, परन्तु जनगणना के समय ये नहीं होते।(1) ये वे प्रवासी होते हैं जो जनगणना के समय एक विशेष क्षेत्र से गिने जाते हैं, परन्तु वे उस क्षेत्र के स्थायी निवासी किसी ओर स्थान से गिने जाते हैं।
(2) ये प्रवासी प्रायः अपने रोजगार के लिए स्थान परिवर्तन करते हैं।(2) ये प्रवासी प्रायः अपने रोजगार के लिए स्थान परिवर्तन नहीं करते।

प्रश्न 2.
पुरुष/स्त्री चयनात्मक प्रवास के मुख्य कारण की पहचान कीजिए।
उत्तर:
शहरी क्षेत्रों में जीविका व रोजगार के लिए पुरुष वरणात्मक प्रवास अधिक होता है, जबकि महिलाएँ विवाह के कारण प्रवास करती हैं। देश में प्रत्येक लड़की को विवाह के बाद अपने पिता के घर को छोड़कर ससुराल के घर तक प्रवास करना होता है।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

प्रश्न 3.
उद्गम और गंतव्य स्थान की आयु एवं लिंग संरचना पर ग्रामीण-नगरीय प्रवास का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर:
गम और गंतव्य स्थान की आयु एवं लिंग संरचना से असंतुलन पैदा होता है। ग्रामीण क्षेत्रों के युवा, कुशल एवं दक्ष लोग नगरों की ओर प्रवास करते हैं। फलस्वरूप नगरों में जनसंख्या बढ़ती है और ग्रामीण क्षेत्रों में कम हो जाती है। अतः ग्रामीण एवं नगरीय प्रवास से उद्गम और गंतव्य दोनों ही स्थानों की आय एवं लिंग संरचना पर प्रभाव पड़ता है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 150 शब्दों में दीजिए.

प्रश्न 1.
भारत में अंतर्राष्ट्रीय प्रवास के कारणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
जब किसी देश का निवासी, अन्य किसी देश में प्रवासित हो जाता है, तो उसे अन्तर्राष्ट्रीय प्रवास कहते हैं। यह प्रवास तभी सम्भव है जब वहाँ का समाज व सरकार आने वाले लोगों को स्वीकार करे। भारत में अंतर्राष्ट्रीय प्रवास के प्रमुख कारण अग्रलिखित हैं
1. आर्थिक कारण सभी प्रकार के प्रवासों का महत्त्वपूर्ण आधार/पक्ष आर्थिक होता है। भारत में प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। अंतर्राष्ट्रीय प्रवास में इनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। वर्तमान में अनेक विदेशी कम्पनियाँ इसी आकर्षण के कारण आई हैं, क्योंकि यहाँ कच्चा माल व श्रम सस्ता प्राप्त होता है और तैयार माल के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध है।

2. आजीविका-आजीविका के लिए भी भारत में अंतर्राष्ट्रीय प्रवास को बढ़ावा मिलता है।

3. राजनीतिक कारण-भारत में रोजनीतिक कारणों और विदेश नीतियों के लचीलेपन के कारण भी विदेशी प्रवास करते हैं। सीमावर्ती देशों से होने वाले प्रवास का कारण भी ये ही है।

4. धार्मिक कारण भारत में सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है। सभी लोगों को धार्मिक स्वतन्त्रता प्राप्त है।

5. सामाजिक कारण-भारत सर्वधर्म समभाव, वसुधैव कुटुम्बकम् सिद्धांत वाला देश है। यहाँ मेहमान को भगवान का दर्जा दिया जाता है। यहाँ की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक सम्पन्नता से प्रभावित होकर विदेशी यहाँ आते हैं।

प्रश्न 2.
प्रवास के सामाजिक एवं जनांकिकीय परिणाम क्या-क्या हैं?
उत्तर:
प्रवास के सामाजिक एवं जनांकिकीय परिणाम निम्नलिखित हैं-
1. सामाजिक परिणाम-प्रवासी, सामाजिक परिवर्तन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नई प्रौद्योगिकी, परिणाम नियोजन, बालिका शिक्षा इत्यादि से संबंधित नए विचारों का नगरीय क्षेत्रों से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर पहुँचना भी इन्हीं के माध्यम से होता है। प्रवास से विविध संस्कृतियों के लोगों का अंतर्मिश्रण होता है। इसके द्वारा संकीर्ण विचारों को दूर करने में योगदान मिलता है और नए विचारों के विकास में सकारात्मक योगदान मिलता है। इसी के द्वारा लोगों का मानसिक विकास होता है। सकारात्मक पक्ष के साथ-साथ सामाजिक परिणाम के नकारात्मक पक्ष भी होते हैं जो लोगों में सामाजिक द्वेष एवं खिन्नता की भावना भर देते हैं।

2. जनांकिकीय परिणाम-प्रवास से देश की जनसंख्या का पुनर्वितरण होता है। नगरीय जनसंख्या में वृद्धि का प्रमुख कारण ग्रामीण-नगरीय प्रवास है। ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाला कुशल एवं दक्ष लोगों का बाल प्रवास ग्रामीण जनांकिकीय संघटन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। यद्यपि उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पूर्वी महाराष्ट्र से होने वाले बाह्य प्रवास ने इन राज्यों की आयु एवं लिंग संरचना में गंभीर असंतुलन पैदा कर दिया है। ऐसे ही असंतुलन उन राज्यों में भी उत्पन्न हो गए हैं जिनमें ये प्रवासी जाते हैं।

प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम HBSE 12th Class Geography Notes

→ प्रवास (Migration) : जनसंख्या का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना प्रवास कहलाता है अर्थात् किसी एक स्थान से जनसंख्या के दूसरे स्थान पर जाकर बसने को प्रवास कहते हैं। कुछ प्रवास स्थायी होते हैं तथा कुछ अस्थायी। स्थायी प्रवास में व्यक्ति मूल-स्थान से दूसरे स्थान पर स्थायी रूप से रहने लगता है, जबकि अस्थायी प्रवास में मौसमी, वार्षिक तथा दैनिक प्रवास भी हो सकते हैं।

→ प्रवास के प्रकारों के आधार (Basic of the types of Migration):

  • समय के आधार पर
  • दूरी के आधार पर
  • उद्देश्य के आधार पर
  • क्षेत्र के आधार पर।

→ प्रवास की धाराएँ (Streams of Migration):

  • ग्रामीण से ग्रामीण
  • ग्रामीण से नगरीय
  • नगरीय से नगरीय
  • नगरीय से ग्रामीण।

प्रवास के परिणाम (Results of Migration):

  • आर्थिक परिणाम
  • सामाजिक परिणाम
  • सांस्कृतिक परिणाम
  • राजनीतिक परिणाम
  • जनांकिकीय परिणाम।

→ उत्प्रवास (Out Migration) : किसी गाँव या नगर में आबादी के अधिक बढ़ने या रोज़गार की कमी के कारण जब लोग उस स्थान को छोड़कर रोज़गार की तलाश में दूसरे स्थान पर चले जाते हैं तो यह उत्प्रवास प्रक्रिया कहलाती है।

→ आप्रवास (In Migration) : यदि व्यक्ति अन्य स्थानों से आकर एक विशिष्ट स्थान पर बस जाता है तो वह आप्रवास कहलाता है। बड़े-बड़े नगरों, व्यापारिक केंद्रों, औद्योगिक नगरों, बंदरगाहों, मंडियों और खनिज क्षेत्रों में रोजगार की तलाश में लोग आकर बस जाते हैं, यह प्रक्रिया आप्रवास कहलाती है।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 2 प्रवास : प्रकार, कारण और परिणाम

→ अंतःराज्यीय प्रवास (Intra-State Migration) : यह वह प्रवास होता है जिसमें राज्य के एक भाग से उसी राज्य के दूसरे भाग में प्रवास किया जाता है; जैसे रोहतक से गुरुग्राम या भिवानी से अंबाला या नारनौल से फरीदाबाद इत्यादि। इसमें प्रवास का आरंभ और गंतव्य दोनों एक ही राज्य अर्थात् हरियाणा में है।

→ अन्तर-राज्यीय प्रवास (Inter-State Migration) यदि लोग एक राज्य से दूसरे राज्य या केंद्र-शासित प्रदेश में प्रवास करें तो यह अन्तर-राज्यीय प्रवास कहलाएगा; जैसे शिमला से हिसार या दिल्ली से बंगलुरु या आगरा से भरतपुर । इनमें प्रवास का आरंभ अलग राज्य में तथा गंतव्य अलग राज्य में है।

→ अपकर्ष कारक (Pull Factors) : नगरीय सुविधाओं तथा आर्थिक परिस्थितियों के कारण जब लोग नगरों की ओर प्रवास करते हैं, तो इसे अपकर्ष कारक कहा जाता है। प्रतिकर्ष कारक (Push Factors) : जब लोग जीविका के साधन उपलब्ध न होने के कारण गरीबी तथा बेरोजगारी के कारण नगरों की ओर प्रवास करते हैं तो इसे प्रतिकर्ष कारक कहा जाता है।

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HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Solutions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

अभ्यास केन प्रश्न

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या निम्नलिखित में से कितनी थी?
(A) 102.8 करोड़
(B) 328.7 करोड़
(C) 318.2 करोड़
(D) 121 करोड़
उत्तर:
(D) 121 करोड़

2. निम्नलिखित राज्यों में से किस एक में जनसंख्या का घनत्व सर्वाधिक है?
(A) पश्चिमी बंगाल
(B) उत्तर प्रदेश
(C) केरल
(D) पंजाब
उत्तर:
(A) पश्चिमी बंगाल

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

3. सन 2011 की जनगणना के अनुसार निम्नलिखित में से किस राज्य में नगरीय जनसंख्या का अनुपात सर्वाधिक था?
(A) तमिलनाडु
(B) केरल
(C) महाराष्ट्र
(D) गोआ
उत्तर:
(D) गोआ

4. निम्नलिखित में से कौन-सा एक समूह भारत में विशालतम भाषाई-
(A) चीनी-तिब्बती
(B) आस्ट्रिक
(C) भारतीय-आर्य
(D) द्रविड़
उत्तर:
(C) भारतीय-आर्य

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
भारत के अत्यंत उष्ण एवं शुष्क तथा अत्यंत शीत व आर्द्र प्रदेशों में जनसंख्या का घनत्व निम्न है। इस कथन के दृष्टिकोण से जनसंख्या के वितरण में जलवायु की भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या के वितरण में जलवायु महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत के अत्यंत उष्ण व शुष्क क्षेत्रों और अत्यन्त शीत व आर्द्र प्रदेशों में जलवायु क्रमशः प्रतिकूल होती है। इन क्षेत्रों में गर्मियों में अधिक गर्मी व सर्दियों में अधिक सर्दी होती है। राजस्थान का थार क्षेत्र उष्णता व शुष्कता के कारण, जम्मू व कश्मीर का क्षेत्र अति शीत के कारण, मेघालय का क्षेत्र अति आर्द्रता के कारण कम घने बसे हैं।

प्रश्न 2.
भारत के किन राज्यों में विशाल ग्रामीण जनसंख्या है? इतनी विशाल ग्रामीण जनसंख्या के लिए उत्तरदायी एक कारण को लिखिए।
उत्तर:
2001 की जनगणना के अनसार हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण जनसंख्या का अनुपात सर्वाधिक (90.21%) था। भारत की लगभग 68.84% जनसंख्या गाँवों में रहती है। 2011 की जनगणना के अनुसार हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण जनसंख्या का अनुपात सर्वाधिक (89.96%) है। इसके बाद बिहार (88.70%), असम (85.92%), ओडिशा (83.32%), मेघालय (79.92%), उत्तर प्रदेश (77.72%), अरुणाचल प्रदेश (77.33%) आदि हैं। उच्चतम ग्रामीण अनुपात का उत्तरदायी कारण हमारी अर्थव्यवस्था का कृषि पर निर्भर होना है।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

प्रश्न 3.
भारत के कुछ राज्यों में अन्य राज्यों की अपेक्षा श्रम सहभागिता ऊँची क्यों है?
उत्तर:
भारत के कुछ राज्यों में श्रम सहभागिता दर ऊँची इसलिए है क्योंकि इन राज्यों में अधिकतर जनसंख्या कार्यशील है। श्रम सहभागिता दर में वृद्धि से अभिप्राय अर्थव्यवस्था में सुधार, रोजगार के अवसरों में वृद्धि तथा श्रम के साथ जुड़ी सामाजिक सोच वाली मानसिकता में बदलाव का परिचायक है।

प्रश्न 4.
“कृषि सेक्टर में भारतीय श्रमिकों का सर्वाधिक अंश संलग्न है।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
देश की श्रम-शक्ति का बहुत बड़ा भाग खेती या कृषि सेक्टर में संलग्न है क्योंकि सन् 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ की 68.84% आबादी गाँवों में निवास करती है। भारत की कुल श्रमजीवी जनसंख्या का लगभग 58.3 प्रतिशत कृषक एवं कृषि श्रमिक हैं, जबकि 4.2 प्रतिशत श्रमिक घरेलू उद्योगों में और 37.6 प्रतिशत श्रमिक अन्य विनिर्माण, व्यापार व वाणिज्य सेवाओं में कार्यरत हैं। अधिकांश ग्रामीण लोग कृषि तथा कृषि से सम्बन्धित व्यवस्थाओं से जीविका कमाते हैं। अतः आँकड़ों के आधार पर स्पष्ट है कि भारतीय श्रमिकों का सर्वाधिक अंश कृषि सेक्टर में संलग्न है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
भारत में जनसंख्या के घनत्व के स्थानिक वितरण की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या के घनत्व में राज्य स्तर तथा जिला स्तर पर जनसंख्या के घनत्व में क्षेत्रीय विभिन्नताएँ पाई जाती हैं। भारत में जनसंख्या का घनत्व धरातल, मिट्टी, वर्षा, जलवायु, उद्योग तथा नगरीकरण पर निर्भर करता है। भारत की जनसंख्या के घनत्व को अग्रलिखित प्रकार से विभाजित किया जा सकता है
1. अति न्यून घनत्व क्षेत्र (Very Low Density Areas) – इस वर्ग में वे क्षेत्र आते हैं जहाँ जनसंख्या का घनत्व 75 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० या इससे कम है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और अरुणाचल प्रदेश में जनसंख्या घनत्व 50 व्यक्ति प्रति कि०मी० से कम पाया जाता है। राजस्थान के पश्चिमी कोना, सिक्किम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर के उत्तर व दक्षिण में न्यून जनसंख्या घनत्व मिलता है। भारतीय पठार में न्यून घनत्व सरगोजा, शहडोल, मंडला की पहाड़ी, बस्तर और चंद्रपुर के वुन प्रदेश में मिलता है। उत्तर:पूर्वी पर्वतीय भाग में दर्गम पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण न्यून घनत्व पाया जाता है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में जलवायु मानव स्वास्थ्य के लिए अनुकूल न होने के कारण न्यून जनसंख्या घनत्व है।

2. न्यून मध्यम घनत्व क्षेत्र (Low Medium DensityAreas) – न्यून मध्यम घनत्व वाले क्षेत्रों में 76 से 200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० जनसंख्या घनत्व होता है। इस वर्ग में उत्तराखण्ड (189 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०), राजस्थान (200 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०), मेघालय (132 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०), जम्मू कश्मीर (124 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०), हिमाचल प्रदेश (123 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०), मणिपुर (122 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०) दक्षिणी आंध्र प्रदेश का भीतरी भाग, ओडिशा की नवचंद्राकार पेटी आदि प्रमुख क्षेत्र हैं। इसके अन्य क्षेत्र गंगानगर, शिमला, सिरमौर, अल्मोड़ा, सुरेंद्र सागर, जामनगर आदि जिले हैं। राजस्थान में रेगिस्तानी इलाके तथा मध्य प्रदेश में उबड़-खाबड़ पहाड़ियों के कारण न्यून जनसंख्या घनत्व मिलता है। इसी तरह मेघालय तथा मणिपुर में दुर्गम पहाड़ियों के कारण कम जनसंख्या घनत्व होता है।

3. मध्यम घनत्व क्षेत्र (Medium Density Areas) – इस वर्ग में 151 से 350 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० जनसंख्या घनत्व मिलता है। हमारे देश में लगभग एक-तिहाई भाग में मध्यम घनत्व पाया जाता है। उत्तरी आंध्र प्रदेश, असम, दक्षिणी कर्नाटक तथा में मध्यम घनत्व मिलता है। इसका दूसरा क्षेत्र गंगा की ऊपरी घाटी के दक्षिणी सीमांत के सहारे तथा पश्चिम में अरावली श्रेणी, पश्चिमी हरियाणा और दक्षिणी-पंजाब है। कर्नाटक में (319 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०), गुजरात (308 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०), ओडिशा (269 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०), त्रिपुरा (350 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०) मध्यम जनसंख्या घनत्व मिलता है।

4. उच्च मध्यम घनत्व क्षेत्र (High Medium Density Areas) – उच्च मध्यम घनत्व के संयुक्त खंड में दादर नगर हवेली, तमिलनाडु, झारखंड, पंजाब, गोआ, हरियाणा के 351 से 700 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी० वाले क्षेत्र सम्मिलित हैं। गंगा सतलुज का मैदान उपजाऊ होने के कारण यहाँ उच्च मध्यम घनत्व का क्षेत्र है। इसी तरह तमिलनाडु की तटीय भूमि उपजाऊ होने के कारण उच्च मध्यम घनत्व मिलता है।

5. उच्च घनत्व क्षेत्र (High Density Areas) – इस वर्ग में 701 से 1200 व्यक्ति प्रति कि०मी० जनसंख्या घनत्व पाया जाता है। पश्चिमी बंगाल, केरल, बिहार, उत्तर प्रदेश में उच्च घनत्व क्षेत्र पाए जाते हैं। गंगा-ब्रह्मपुत्र के उपजाऊ डेल्टा के कारण पश्चिमी बंगाल व इसके निकटवर्ती क्षेत्रों में उच्च घनत्व मिलता है।

6. अति उच्च घनत्व क्षेत्र (Very High Density Areas) – इस प्रकार के क्षेत्रों में 1200 व्यक्ति प्रति कि०मी० से ज्यादा जनसंख्या घनत्व पाया जाता है। दिल्ली (11,297 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०), लक्षद्वीप (2013 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०), चण्डीगढ (9252 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०), पुद्दचेरी (2598 व्यक्ति प्रति वर्ग कि०मी०), कोलकाता, हावड़ा, मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई तथा कानपुर में औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहाँ अति उच्च घनत्व मिलता है।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

भारत में जनसंख्या घनत्व (2011 की जनगणना के अनुसार) को तालिका में दर्शाया गया है।

राज्य/केंद्र-शासित प्रदेशघनत्वकोटि-क्रम
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली11,2971
चंडीगढ़9,2522
पुद्देचे2,5983
दमन तथा दीव2,1694
लक्षद्वीप2,0135
बिहार1,1026
पश्चिम बंगाल1,0297
केरल8598
उत्तर प्रदेश8289
दादरा व नगर हवेली69810
हरियाणा57311
तमिलनाडु55512
पंजाब55013
झारखंड41414
अंध्र प्रदेश39815
असम39716
गोआ39417
महाराष्ट्र36518
त्रिपुरा35019
कर्नाटक31920
गुजरात30821
ओडिशा26922
मध्य प्रदेश23623
राजस्थान20124
उत्तराखंड18925
छत्तीसगढ़18926
मेघालय13227
ज़म्मू कश्मीर12428
हिमाचल प्रदेश12329
मणिपुर12230
नगालैंड11931
सिक्किम8632
मिजोरम5233
अंडमान व निकोबार द्वीप समूह4634
अरुणाचल प्रदेश1735

प्रश्न 2.
भारत की जनसंख्या के व्यावसायिक संघटन का विवरण दीजिए।
उत्तर:
व्यावसायिक संघटन-अपनी आजीविका या रोजी-रोटी कमाने के लिए व्यक्ति जो व्यवसाय करता है उसे ही व्यक्ति का व्यावसायिक संघटन कहा जाता है। व्यावसायिक संघटन को चार मुख्य वर्गों में बाँटा गया है

  • प्राथमिक व्यवसाय – इन व्यवसायों में आखेट, मत्स्यपालन, फल संग्रहण, कृषि संग्रहण, कृषि तथा वानिकी इत्यादि आते हैं।
  • द्वितीयक व्यवसाय – इन व्यवसायों में विनिर्माण उद्योग तथा शक्ति उत्पादन इत्यादि आते हैं।
  • तृतीयक व्यवसाय – इन व्यवसायों के अंतर्गत परिवहन, संचार, व्यापार, सेवाएँ आदि शामिल किए जाते हैं।
  • चतुर्थक व्यवसाय – इनके अंतर्गत चिंतन, शोध योजना तथा विचारों के विकास से जुड़े अत्यधिक बौद्धिकतापूर्ण व्यवसायों को रखा जाता है।

भारत में श्रम-शक्ति का सेक्टर-वार संघटन, 2011

संवर्गजनसंख्या
प्राथमिकव्यक्तिकुल श्रमिकों का प्रतिशतपुरुषमहिला
द्वितीयक26,30,22,47354.616,54,47,0759,75,75,398
तृतीयक1,83,36,3073.897,75,63585,60,672
संवर्ग20,03,84,53141.615,66,43,2204,37,41,311

सन् 2011 के व्यावसायिक संघटन (संरचना) से निम्नलिखित निष्कर्ष निकलते हैं-

  • सन् 1991 में देश में कृषिकों की श्रम-शक्ति 38.41% थी, जबकि 2011 में यह मात्र 41.6% रह गई।
  • कृषि मजदूरों की प्रतिशत मात्रा में कोई गिरावट नहीं आई, बल्कि इनकी संख्या थोड़ी बहुत बढ़ी है।
  • किसानों और कृषीय मजदूरों की संयुक्त भागीदारी 58.2% यह साबित करती है कि व्यावसायिक संरचना में कृषि का प्रभुत्व है जो धीरे-धीरे कम हो रहा है।
  • खेती में रोजगार न पा सकने वाले कामगारों को द्वितीयक क्षेत्रों के व्यवसायों में भी ज्यादा काम नहीं मिल पाया।
  • लगभग 9 करोड़ स्त्रियाँ कृषि कार्यों में अर्थात् प्राथमिक क्रियाओं में लगी हुई हैं जबकि पुरुष लगभग 16 करोड़ हैं।
  • लगभग 28% स्त्रियाँ गैर-कृषि कार्यों में लगी हुई हैं, जबकि परुषों का प्रतिशत लगभग 47.74% है।
  • घरेलू उद्योगों में कामगारों की संख्या लगभग 4.07% है।
  • विभिन्न व्यवसायों में लगे कामगारों के अनुपात में अत्यधिक क्षेत्रीय विषमता पाई जाती है। उदाहरणतया नगालैंड में मुख्य कामगारों में किसान लगभग 63.23% हैं, जबकि चंडीगढ़ में यह केवल लगभग 0.47% है।

जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन HBSE 12th Class Geography Notes

→ जनसंख्या (Population) : 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 102.8 करोड़ थी जो विश्व की आबादी का 16.7 प्रतिशत थी। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 121 करोड़ से अधिक है।

→ जनसंख्या घनत्व (Population Density) : 2001 की जनगणना के अनुसार भारत का जनसंख्या घनत्व 325 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था। 2011 की जनगणना के अनुसार भारत का जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है जो 17.54 प्रतिशत दशकीय वृद्धि को दर्शाता है।

→ साक्षरता (Literacy) : ऐसी जनसंख्या जो पढ़-लिख सकती हो और जिसमें समझ के साथ अंकगणितीय गणना करने की योग्यता हो, साक्षरता कहलाती है।

→ जनसंख्या संघटन (Population Structure) : जनसंख्या की भौतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को जनसंख्या की संरचना या संघटन या संयोजन कहा जाता है। जनसंख्या का संयोजन लिंग, आयु, श्रम-शक्ति, आवास, इकाइयों, धर्म, भाषा, वैवाहिक स्थिति, साक्षरता, शिक्षा और व्यावसायिक संरचना से होता है।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 1 जनसंख्या : वितरण, घनत्व, वृद्धि और संघटन

→ लिंगानुपात (Sex Ratio) : जनसंख्या का लिंग-संयोजन अक्सर एक अनुपात के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, जिसे कहते हैं। इसे ‘भारत में प्रति हजार पुरुषों के पीछे कितनी स्त्रियाँ हैं’ के द्वारा दर्शाया जाता है। प्रति हजार पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की संख्या का अनुपात लिंगानुपात कहलाता है। भारत में लिंगानुपात लगातार कम हो रहा है। उदाहरण के लिए सन् 1901 में यह लिंगानुपात 972 था जो सन् 2011 में घटकर 943 हो गया।

→ 2001 व 2011 की जनगणना के मुख्य आँकड़े (Main Data of census of 2001 and 2011) :

2001 की जनगणना2011 की जनगणना
कुल जनसंख्यालगभग 102.8 करोड़लगभग 121.01 करोड़
पुरुष जनसंख्यालगभग 53.2 करोड़लगभग 62.3 करोड़
महिला जनसंख्यालगभग 49.6 करोड़लगभग 58.6 करोड़
ग्रामीण जनसंख्यालगभग 743 लाख (72.2%)लगभग 834(68.85%)
शहरी/नगरीय जनसंख्यालगभग 286 लाख (27.8%)लगभग 377(31.15%)
सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्यउत्तर प्रदेश (लगभग 16.6 करोड़)उत्तर प्रदेश (लगभग 19.9 करोड़)
न्यूनतम जनसंख्या वाला राज्यसिक्किम (लगभग 540851)सिक्किम (607688)
सर्वाधिक जनसंख्या वालाराष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्लीराष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली
केन्द्र-शासित प्रदेश(लगभग 1.38 करोड़)(लगभग 1.67 करोड़)
जनसंख्या वृद्धि21.54 %(1991-2001)17.64%(2001-2011)
न्यूनतम जनसंख्या वाला केन्द्र-शासित प्रदेशलक्षद्वीप (60650)लक्षद्वीप (64429)
जनसंख्या घनत्व325 प्रति वर्ग कि०मी०382 प्रति वर्ग कि०मी०
सवाधिक जनसंख्या घनत्व वाल्ता राज्यपं० बंगाल (903 प्रति वर्ग कि०मी०)बिहार (1102 प्रति वर्ग कि०मी०)
न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाला राज्यअरुणाचल प्रदेश (13 प्रति वर्ग कि०मी०)अरुणाचल प्रदेश (17 प्रति वर्ग कि०मी०)
सर्बाधिक जनसंख्या घनत्व वाता केन्द्र-शासित प्रदेशराष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (9340 प्रति वर्ग कि०मी०)राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (11297 प्रति वर्ग कि०मी०)
न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाला केन्म-शासित प्रदेशअंडमान व निकोबार द्वीप समूह (43 प्रति वर्ग कि०मी०)अंडमान व निकोबार द्वीप समूह (46 प्रति वर्ग कि०मी०)
साक्षरता दर64.84%74.04 %
पुरुष साक्षरता दर75.26%82.14 %
महिला साक्षरता दर53.6%65.46 %
सर्वायिक साष्षरता दर बाला राज्यकेरल (90.86%)केरल (93.91%)
न्यूनतम साक्षरता दर वाला राज्यबिहार (47%)बिहार (69.72%)
सर्वाधिक साकरता दर वाला केन्द्र-शासित प्रदेशलक्षद्वीप (86.66%)लक्षद्वीप (92.28 %)
न्यूनतम साक्षरता दर बाला केन्म्शासित प्रदेशदादर व नगर हवेली (57.63%)दादर व नगंर हवेली(77.05%)
लिंगानुपात/स्ती-पुरुष अनुपात933 महिलाएँ प्रति हजार पुरुष943 महिलाएँ प्रति हजार पुरुष
सर्वाघिक लिंगानुपात बाला राज्यकेरल (1058)केरल (1084)
न्यूनतम लिंगानुपात वाला राज्यहरियाणा (861)हरियाणा (877)
सर्वाधिक लिंगानुपात वाला केन्द्र-शासित प्रदेशपुद्चेरी (1001)पुद्धचेरी (1038)
न्यूनतम लिंगानुपात वाला केन्म-शासित प्रदेशदमन व दीव (710)दमन व दीव (618)

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HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 10 मानव बस्ती

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 10 मानव बस्ती Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Solutions Chapter 10 मानव बस्ती

अभ्यास केन प्रश्न

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. निम्नलिखित में से किस प्रकार की बस्तियाँ सड़क, नदी या नहर के किनारे होती हैं?
(A) वृत्ताकार
(B) चौक पट्टी
(C) रेखीय
(D) वर्गाकार
उत्तर:
(C) रेखीय

2. निम्नलिखित में से कौन-सी एक आर्थिक क्रिया ग्रामीण बस्तियों की मुख्य आर्थिक क्रिया है?
(A) प्राथमिक
(B) तृतीयक
(C) द्वितीयक
(D) चतुर्थ
उत्तर:
(A) प्राथमिक

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 10 मानव बस्ती

3. निम्नलिखित में से किस प्रदेश में प्रलेखित प्राचीनतम नगरीय बस्ती रही है?
(A) हांगही की घाटी
(B) सिंधु घाटी
(C) नील घाटी
(D) मेसोपोटामिया
उत्तर:
(B) सिंधु घाटी

4. 2006 के प्रारंभ में भारत में कितने मिलियन सिटी थे?
(A) 40
(B) 41
(C) 42
(D) 43
उत्तर:
(A) 40

5. विकासशील देशों की जनसंख्या के सामाजिक ढाँचे के विकास एवं आवश्यकताओं की पूर्ति में कौन-से प्रकार के संसाधन सहायक हैं?
(A) वित्तीय
(B) मानवीय
(C) प्राकृतिक
(D) सामाजिक
उत्तर:
(A) वित्तीय

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए.

प्रश्न 1.
आप बस्ती को कैसे परिभाषित करेंगे?
उत्तर:
बस्ती से अभिप्राय उस मानव अधिवास से है जिसमें एक से अधिक मकान होते हैं। यह मनुष्य के उस संगठित निवास स्थान से संबंधित है, जिसमें उनके रहने तथा प्रयोग करने वाले भवनों तथा उनके आने-जाने के लिए बनाए गए रास्तों एवं गलियों को शामिल किया जाता है।

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प्रश्न 2.
स्थान (साइट) एवं स्थिति (सिचुएसन) के मध्य अंतर बताएँ।
उत्तर:
बस्तियों के स्थान एवं स्थिति में निम्नलिखित अंतर हैं-

बस्तियों के स्थानबस्तियों की स्थिति
बस्ती के स्थान से अभिप्राय उस भूमि से होता है जिस पर कोई बस्ती बसी हुई है।बस्तियों की स्थिति से तात्पर्य उसके आस-पास के गाँवों के संदर्भ में उसकी अवस्थिति से हैं।

प्रश्न 3.
बस्तियों के वर्गीकरण के क्या आधार हैं?
उत्तर:
बस्तियों के वर्गीकरण के दो आधार हैं-
1. बस्तियों का आकार-बस्तियों में भेद नगरीय व ग्रामीण आधार पर होता है, लेकिन विश्व के विभिन्न देशों में जनसंख्या के आधार पर बस्ती का वर्गीकरण भिन्न-भिन्न है।

2. बस्तियों के लिए किए जाने वाले आर्थिक कार्य-विश्व के विकसित और विकासशील देशों में बस्तियों के लिए किए जाने वाले आर्थिक कार्य भी भिन्न-भिन्न हैं। विकासशील देशों का द्वितीयक व्यवसाय विकसित देशों का प्राथमिक व्यवसाय हो सकता है।

प्रश्न 4.
मानव भूगोल में मानव बस्तियों के अध्ययन का औचित्य बताएँ।
उत्तर:
मानव भूगोल में बस्तियों का अध्ययन बहुत ही महत्त्वपूर्ण है क्योंकि बस्तियों की स्थिति, प्रतिरूप तथा विन्यास के अध्ययन द्वारा हम यह जान सकते हैं कि मनुष्य ने प्रारंभ से अब तक आस-पास की भूमि का उपयोग कैसे किया। इसके अतिरिक्त बस्तियाँ मानव समाज के सांस्कृतिक, धार्मिक एवं सामाजिक रीति-रिवाजों पर भी प्रकाश डालती हैं।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए।

प्रश्न 1.
ग्रामीण एवं नगरीय बस्ती किसे कहते हैं? उनकी विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर:
ग्रामीण बस्तियाँ-एफ०एस० हडसन के अनुसार, “ग्रामीण बस्ती से आशय उस बस्ती से है जिसके निवासी अपने जीवनयापन के लिए भूमि विदोहन पर निर्भर करते हैं। अधिकांश ग्रामीण बस्तियों के अधिकांश निवासी कृषि कार्यों में संलग्न रहते हैं।” कृषि कार्यों के अतिरिक्त ग्रामीण बस्तियों में पशुपालन, मुर्गीपालन, मछली पकड़ना, लकड़ी काटना जैसे प्राथमिक कार्यों पर निर्भर जनसंख्या भी हो सकती है।

विशेषताएँ-

  • ग्रामीण बस्तियों का आकार छोटा होता है।
  • इनकी जनसंख्या 5000 से कम होती है।
  • यहाँ के निवासियों का प्रमुख व्यवसाय कृषि है।
  • कृषि प्रधान क्षेत्र होने के कारण नगरों को कृषि तथा पशु उत्पाद भेजते हैं।
  • यहाँ आधुनिक सुविधाओं का अभाव होता है।

नगरीय बस्तियाँ वान रिक्टोफन के अनुसार, “नगर एक संगठित समूह होता है जिसमें सामान्यतः कृषि कार्यों के विपरीत प्रमुख व्यवसाय वाणिज्य तथा उद्योग से संबंधित होते हैं।”

विशेषताएँ-

  • नगरीय बस्तियों का आकार बड़ा होता है।
  • उनकी जनसंख्या 5000 से अधिक होती है।
  • यहाँ के निवासियों का प्रमुख व्यवसाय व्यापार एवं विभिन्न उद्योग-धंधे हैं।
  • ये उद्योग प्रधान क्षेत्र होने के कारण गाँवों को उत्पादित वस्तुएँ भेजते हैं।
  • यहाँ सभी प्रकार की आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 10 मानव बस्ती

प्रश्न 2.
विकासशील देशों में नगरीय बस्तियों की समस्याओं का विवेचन कीजिए।
उत्तर:
विकासशील देशों में नगरीय बस्तियों से संबंधित समस्याएँ निम्नलिखित हैं-
1. अवैध व मलिन बस्तियों की वृद्धि विकासशील देशों के महानगरों में द्रुत गति से बढ़ती जनसंख्या के फलस्वरूप गंदी बस्तियों और झोंपड़ पट्टियों का उदय हो जाता है। जहाँ मानव का जीवन-स्तर निम्नतम होता है। मुंबई स्थित धारावी बस्ती एशिया महाद्वीप की सबसे बड़ी मलिन बस्ती है।

2. सार्वजनिक सुविधाओं का अभाव-विकासशील देशों की नगरीय बस्तियां आवास, परिवहन, स्वास्थ्य, पेयजल तथा रोजगार जैसी सार्वजनिक सुविधाओं की कमियों से जूझ रही हैं। आर्थिक विषमताएँ दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं तथा गुणवत्ता युक्त जीवन का ह्रास हो रहा है।

3. प्रदूषण की समस्या-नगरीकरण के परिणामस्वरूप औद्योगिक बस्तियों का विकास हुआ जिससे भूमि, जल, वायु और ध्वनि प्रदूषण की समस्या उभरकर आई। महानगरों में वाहनों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि से वायु प्रदूषण एक प्रमुख समस्या बन गई है। महानगरों में प्रदूषण के दुष्प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर घातक सिद्ध हो रहे हैं।

4. सामाजिक समस्याएँ महानगरों में आकर बसे लोगों पर किसी तरह का सामाजिक दबाव नहीं होता इसलिए वहाँ अपराधिक प्रवृत्तियों का विकास होने की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं। इसके अतिरिक्त गरीबी और बेरोज़गारी अपराधिक प्रवृत्तियों को बढ़ाने में सहायक होती हैं इसलिए नगरीकरण से सामाजिक असुरक्षा की भावना पनपती है।

5. बेरोज़गारी व गरीबी-विकासशील देशों के बड़े राजधानी नगरों में आर्थिक निवेश की तीव्र प्रवृत्ति छोटे नगरों को पंगु बना रही है। मशीनीकरण व औद्योगीकरण के कारण गाँवों में रोजगार समाप्त हो गए हैं, जिससे गाँव के अधिकतम लोग शहरों में रोज़गार की तलाश में भटक रहे हैं।

मानव बस्ती HBSE 12th Class Geography Notes

→ नगरीकरण (Urbanization) : वे प्रक्रियाएँ जिनसे नगर की जनसंख्या बढ़ती है; जैसे प्राकृतिक वृद्धि, प्रवास तथा निकटवर्ती गाँवों के शहर में सम्मिलित होने पर।

→ नगर की संरचना (Structure of the Town) : नगर के विभिन्न भागों में दिखाई पड़ने वाले विविध प्रकार के भूमि उपयोग।

→ ग्रामीण बस्ती (Rural Settlement) : ग्रामीण बस्तियाँ वे बस्तियाँ होती हैं जिनके निवासी अपने जीवनयापन के लिए भूमि के विदोहन पर निर्भर करते हैं।

→ प्रतिरक्षा नगर (Defence Cities) : जिन नगरों का विकास प्रतिरक्षा सामग्री तथा छावनी के कारण होता है। इनका सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण स्थान होता है जहाँ सैनिकों को प्रशिक्षण तथा अभ्यास की सुविधा होती है; जैसे भारत में अंबाला, पुणे, देहरादून आदि प्रतिरक्षा नगरों के रूप में जाने जाते हैं। औद्योगिक नगर (Industrial Cities) : जिन नगरों का अस्तित्व तथा विकास

→ औद्योगिक विकास के साथ हुआ हो तथा जो उद्योगों के लिए जाने जाते हैं, उन्हें औद्योगिक नगर कहते हैं; जैसे बर्मिंघम, पिट्सबर्ग, मानचेस्टर, जमशेदपुर, भिलाई, राउरकेला, सूरत आदि।

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HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Solutions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

अभ्यास केन प्रश्न

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. संसार के अधिकांश महान पत्तन इस प्रकार वर्गीकृत किए गए हैं
(A) नौसेना पत्तन
(B) विस्तृत पत्तन
(C) तैल पत्तन
(D) औद्योगिक पत्तन
उत्तर:
(B) विस्तृत पत्तन

2. निम्नलिखित महाद्वीपों में से किस एक से विश्व व्यापार का सर्वाधिक प्रवाह होता है?
(A) एशिया
(B) यूरोप
(C) उत्तरी अमेरिका
(D) अफ्रीका
उत्तर:
(C) उत्तरी अमेरिका

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

3. दक्षिण अमरीकी राष्ट्रों में से कौन-सा एक ओपेक का सदस्य है?
(A) ब्राज़ील
(B) वेनेजुएला
(C) चिली
(D) पेरू
उत्तर:
(B) वेनेजुएला

4. निम्न व्यापार स से भारत किसका एक सह-सदस्य है?
(A) साफ्टा (SAFTA)
(B) आसियान (ASEAN)
(C) ओइसीडी (OECD)
(D) ओपेक (OPEC)
उत्तर:
(A) साफ्टा (SAFTA)

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
विश्व व्यापार संगठन के आधारभूत कार्य कौन-से हैं?
उत्तर:
विश्व व्यापार संगठन एकमात्र ऐसा अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो राष्ट्रों के मध्य वैश्विक नियमों का व्यवहार करता है। यह विश्वव्यापी व्यापार तंत्र के लिए नियमों को नियत करता है और इसके सदस्य देशों के बीच विवादों का निपटारा करते हैं।

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प्रश्न 2.
ऋणात्मक भुगतान संतुलन का होना किसी देश के लिए क्यों हानिकारक होता है?
उत्तर:
यदि किसी देश में निर्यात की जाने वाली वस्तुओं की अपेक्षा आयात की जाने वाली वस्तुओं का मूल्य ज्यादा होता है तो उस देश का व्यापार संतुलन ऋणात्मक कहा जाता है। इसे विलोम व्यापार संतुलन या प्रतिकूल व्यापार संतुलन कहते हैं। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 3.
व्यापारिक समूहों के निर्माण द्वारा राष्ट्रों को क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
उत्तर:
प्रादेशिक व्यापार समूह व्यापार की मदों में भौगोलिक समीपता, समरूपता और पूरकता के साथ देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने एवं विकासशील देशों के व्यापार पर लगे प्रतिबंध को हटाने के उद्देश्य से विकसित हुए हैं। ये व्यापारिक समूह राष्ट्रों में . व्यापार शुल्क को हटा देते हैं तथा मुक्त व्यापार को बढ़ावा देते हैं।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
पत्तन किस प्रकार व्यापार के लिए सहायक होते हैं? पत्तनों का वर्गीकरण उनकी अवस्थिति के आधार पर कीजिए।
उत्तर:
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में पत्तन महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हीं पत्तनों द्वारा जहाज़ी माल तथा यात्री विश्व के एक भाग से दूसरे भाग को जाते हैं। पत्तन जहाज़ के लिए गोदी लादने, उतारने तथा भंडारण के लिए सुविधाएँ प्रदान करते हैं तथा पत्तन आयात और निर्यात करने के क्षेत्र हैं। ये अपने पृष्ठ क्षेत्र से यातायात के साधनों द्वारा जुड़े होते हैं। यहाँ स्थल मार्गों द्वारा विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ आती हैं जिन्हें सागरीय मार्ग द्वारा दूसरे देशों में भेजा जाता है व अन्य देशों से आयात किया गया माल इन पत्तनों द्वारा ही पृष्ठ देश में भेजा जाता है।

अवस्थिति के आधार पर पत्तनों का वर्गीकरण-अवस्थिति के आधार पर पत्तनों के प्रकार निम्नलिखित हैं-

  1. अंतर्देशीय पत्तन-ये पत्तन समुद्री तट से दूर अवस्थित होते हैं। ये समुद्र से एक नदी अथवा नहर द्वारा जुड़े होते हैं। ऐसे पत्तन चौरस तल वाले जहाज़ द्वारा ही गम्य होते हैं। उदाहरणतया मानचेस्टर, कोलकाता।
  2. बाह्य पत्तन-ये गहरे जल के पत्तन हैं जो वास्तविक पत्तन से दूर बने होते हैं। ये उन जहाज़ों, जो अपने बड़े आकार के कारण उन तक पहुँचने में असमर्थ हैं, को ग्रहण करके पैतृक पत्तनों को सेवाएं प्रदान करते हैं।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 9 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार

प्रश्न 2.
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से देश कैसे लाभ प्राप्त करते हैं?
उत्तर:
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का लाभ सभी व्यापारी देशों को मिलता है-

  1. इससे श्रम विभाजन एवं विशिष्टीकरण के सभी लाभ प्राप्त होते हैं।
  2. व्यापार के लिए वस्तुओं का उत्पादन बढ़ाना होता है। परिणामस्वरूप वस्तुओं का उपभोग बढ़ता है और इससे लोगों . का कल्याण अर्थात् जीवन स्तर बढ़ता है।
  3. विभिन्न प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं की विश्वव्यापी उपलब्धता के कारण कीमतों और वेतन का समानीकरण होता है।
  4. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में प्रवेश करने से पहले निष्क्रिय, भूमि, श्रम व अन्य संसाधनों का प्रयोग अधिक उत्पादन के लिए किया जाता है।
  5. विदेशी व्यापार के माध्यम से हर देश अपनी सर्वश्रेष्ठ वस्तु को बाजार में उतारता है। आयात और निर्यात से अन्य आर्थिक क्रियाओं का विकास होता है।

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार HBSE 12th Class Geography Notes

→ अंतर्देशीय या प्रादेशिक या देशी व्यापार (Inland or Regional Trade) : देश के विभिन्न राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों के बीच होने वाला व्यापार।

→ सीमाप्रांतीय व्यापार (Overland Trade) : किसी देश का अपने उन पड़ोसी देशों के साथ व्यापार जिनकी स्थलीय सीमा उस देश को स्पर्श करती है; जैसे भारत का बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल व सिक्किम इत्यादि से व्यापार।

→ तटीय व्यापार (Coastal Trade) : एक ही देश के बंदरगाहों के बीच होने वाला व्यापार।

→ पुनः निर्यात व्यापार (Entrepot Trade) : किसी वस्तु का आयात करके उसे पुनः उन देशों को निर्यात कर देना जिनके पास समुद्री तट की सुविधा नहीं है।

→ विदेशी मुद्रा विनिमय (Foreign Exchange) : यह एक प्रणाली है जिसके अंतर्गत एक देश की मुद्रा का दूसरे देश की मुद्रा से अदल-बदल किया जाता है।

→ व्यापार का संघटन या संरचना (Composition of Trade): व्यापार में वस्तुओं और सेवाओं के प्रकार।

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HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 8 परिवहन एवं संचार

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 8 परिवहन एवं संचार Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Solutions Chapter 8 परिवहन एवं संचार

अभ्यास केन प्रश्न

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. पारमहाद्वीपीय स्टुवर्ट महामार्ग किनके मध्य से गुज़रता है?
(A) डार्विन और मेलबोर्न
(B) एडमंटन और एंकॉरेज
(C) बैंकूवर और सेंट जॉन नगर
(D) चेगडू और ल्हासा
उत्तर:
(A) डार्विन और मेलबोर्न

2. किस देश में रेलमार्गों के जाल का सघनतम घनत्व पाया जाता है?
(A) ब्राजील
(B) कनाडा
(C) संयुक्त राज्य अमेरिका
(D) रूस
उत्तर:
(C) संयुक्त राज्य अमेरिका

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 8 परिवहन एवं संचार

3. बृहद ट्रंक मार्ग होकर जाता है
(A) भूमध्य सागर हिंद महासागर से होकर
(B) उत्तर अटलांटिक महासागर से होकर
(C) दक्षिण अटलांटिक महासागर से होकर
(D) उत्तर प्रशांत महासागर से होकर
उत्तर:
(B) उत्तर अटलांटिक महासागर से होकर

4. ‘बिग इंच’ पाइप लाइन के द्वारा परिवहित किया है-
(A) दूध
(B) जल
(C) तरल पेट्रोलियम गैस (L.P.G.)
(D) पेट्रोलियम
उत्तर:
(D) पेट्रोलियम

5. चैनल टनल जोड़ता है
(A) लंदन – बर्लिन
(B) बर्लिन – पेरिस
(C) पेरिस – लंदन
(D) बार्सीलोना- बर्लिन
उत्तर:
(B) बर्लिन – पेरिस

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
पर्वतों, मरुस्थलों तथा बाढ़ संभावित प्रदेशों में स्थल परिवहन की क्या-क्या समस्याएँ हैं?
उत्तर:
पर्वतों, मरुस्थलों और बाढ़ संभावित प्रदेशों में केवल सड़कें ही यातायात की सुविधा प्रदान करती हैं, लेकिन इन क्षेत्रों में रेलमार्ग नहीं बिछाए जा सकते क्योंकि इन्हें बनाने में भारी खर्च आता है और ऐसे क्षेत्रों में रेल-दुर्घटना का जोखिम भी बना रहता है।

प्रश्न 2.
पारमहाद्वीपीय रेलमार्ग क्या होता है?
उत्तर:
महाद्वीप के आर-पार बनाए गए और इसके दो सिरों को जोड़ने वाले मार्गों को पारमहाद्वीपीय रेलमार्ग कहते हैं। इनका निर्माण आर्थिक और राजनीतिक कारणों से विभिन्न दशाओं से लंबी यात्राओं की सुविधा प्रदान करने के लिए किया गया था।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 8 परिवहन एवं संचार

प्रश्न 3.
जल परिवहन के क्या लाभ हैं?
उत्तर:
जल परिवहन के निम्नलिखित लाभ हैं-

  1. जल परिवहन में मार्गों का निर्माण नहीं करना पड़ता।
  2. यह परिवहन बहुत सस्ता होता है क्योंकि जल का घर्षण स्थल की अपेक्षा बहुत कम होता है।
  3. जल परिवहन की ऊर्जा लागत की अपेक्षा कम होती है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
“एक सुप्रबंधित परिवहन प्रणाली में विभिन्न विधाएँ एक-दूसरे की संपूरक होती है” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
परिवहन एक ऐसी सुविधा या सेवा है जो व्यक्तियों और वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने का कार्य करती है। इसमें मनुष्यों, पशुओं तथा विभिन्न प्रकार की गाड़ियों का प्रयोग किया जाता है। यह सुविधा स्थल, जल तथा वायु से दी जाती है। सड़कें व रेलमार्ग स्थल परिवहन का भाग हैं जबकि नौ परिवहन तथा जलमार्ग एवं वायुमार्ग परिवहन के अन्य दो प्रकार हैं। पाइपलाइनें, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस का परिवहन करती हैं। प्रत्येक देश ने प्रतिरक्षा के उद्देश्यों के लिए विभिन्न प्रकार से परिवहन का विकास किया है। अनेक स्थान जिन्हें परस्पर मार्गों की श्रेणियों द्वारा जोड़ दिए जाने पर जिस प्रारूप का निर्माण होता है उसे परिवहन जाल कहते हैं। विश्व परिवहन की प्रमुख विधाओं का प्रयोग अंतप्रदिशिक तथा अंतरा-प्रादेशिक परिवहन के लिए किया जाता है।

किसी विधा की सार्थकता परिवाहित की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के प्रकार, परिवहन की लागतों और उपलब्ध विधा पर निर्भर करती है। वस्तुओं के अंतर्राष्ट्रीय संचलन का निपटान भारवाही जलयानों द्वारा किया जाता है। कम दूरी की सेवाएँ प्रदान करने में सड़क परिवहन सस्ता एवं तीव्रगामी है। किसी देश के भीतर लंबी दूरियों तक परिवहन करने के लिए रेल सर्वाधिक अनुकूल साधन है। उच्च मूल्य वाली, हल्की तथा नाशवान वस्तुओं का वायुमार्गों द्वारा परिवहन सर्वश्रेष्ठ होता है। अतः स्पष्ट है कि एक सुप्रबंधित परिवहन तंत्र में ये विभिन्न विधाएँ एक-दूसरे की पूरक होती हैं।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 8 परिवहन एवं संचार

प्रश्न 2.
विश्व के वे कौन-से प्रमुख प्रदेश हैं जहाँ वायुमार्ग का सघन तंत्र पाया जाता है?
उत्तर:
वायु परिवहन, परिवहन का तीव्रतम साधन होने के साथ-साथ बहुत महँगा भी है। तेज गति का साधन होने के कारण लंबी दूरी की यात्रा के लिए यात्री इसे वरीयता देते हैं। इसके द्वारा मूल्यवान जहाजी भार को तेजी से पूरे विश्व में भेजा जा सकता है। पर्वतीय हिमक्षेत्रों तथा मरुस्थलीय भू-भागों में भी इस परिवहन ने सफलता प्राप्त कर ली है। वायुयानों के निर्माण तथा उनकी कार्य प्रणाली के लिए अत्यंत विकसित सुविधाओं; जैसे विमानशाला, भूमि पर उतारने, ईंधन तथा रख-रखाव की सुविधाओं की आवश्यकता होती है। हवाई पत्तनों का निर्माण भी अत्यधिक खर्चीला है और यह उन्हीं देशों में जहाँ अत्यधिक औद्योगीकरण एवं अधिक संख्या में यातायात उपलब्ध है, विकसित हुआ है।

पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका, पश्चिमी यूरोप और दक्षिणी-पूर्वी एशिया में वायुमार्गों का सघन जाल पाया जाता है। विश्व के कुल वायुमार्गों के 60% भाग का प्रयोग अकेला संयुक्त राज्य अमेरिका करता है। न्यूयॉर्क, लंदन, पेरिस, एम्सटर्डम और शिकागो नोडीय बिंदु हैं। वर्तमान समय में विश्व में कोई भी स्थान 35 घंटे से अधिक की दूरी पर नहीं है। वर्षों और महीनों के स्थान पर वायुमार्ग द्वारा की गई यात्रा को अब घंटों और मिनटों में मापा जा सकता है। विश्व के अनेक भागों में नित्य वायु सेवाएँ उपलब्ध हैं।

प्रश्न 3.
वे कौन-सी विधाएँ हैं जिनके द्वारा साइबर स्पेस मनुष्यों के समकालीन आर्थिकी और सामाजिक स्पेस की वृद्धि करेगा?
उत्तर:
साइबर स्पेस विद्युत द्वारा कंप्यूटरीकृत स्पेस का संसार है, जिसे इंटरनेट के नाम से भी जाना जाता है। यह बिना गतिशील हुए भेजने वाले और प्राप्त करने वालों को कंप्यूटर पर सूचनाओं के भेजने व प्राप्त करने की प्रक्रिया है। माइबर सोम हर जगह विद्यमान है। यह किसी कार्यालय में, जल में चलती नौका में, उड़ते जहाजों में और अन्य किसी स्थान पर भी हो सकता है। इलैक्ट्रॉनिक नेटवर्क का विस्तार बहुत तीव्र गति से हो रहा है। इंटरनेट का प्रयोग करने वाले सन् 1995 में 5 करोड़, सन् 2000 में 40 करोड़ एवं सन् 2005 में 100 करोड़ थे। वर्तमान में इंटरनेट का प्रयोग करने वालों की संख्या में बहुत वृद्धि हुई है।

अब विश्व के अधिकांश प्रयोक्ता संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, चीन और भारत में हैं, साइबर स्पेस लोगों के समकालीन आर्थिक और सामाजिक स्पेस को ई० मेल, ई० वाणिज्य, ई० शिक्षा और ई० प्रशासन के माध्यम से विस्तृत करेगा। फैक्स, टेलीविजन और रेडियो के साथ इंटरनेट समय और स्थान की सीमाओं को लांघते हए अधिक-से-अधिक लोगों तक पहुँचगा। ये आधुनिक संचार प्रणालियाँ हैं जिन्होंने परिवहन से कहीं ज्यादा वैश्विक ग्राम की संकल्पना को साकार किया है। जैसे-जैसे तकनीकी का विकास हो रहा है वैसे-वैसे सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से इस पर लगाए गए प्रतिबंध समाप्त हो रहे हैं, निजी व्यावसायिक कंपनियाँ, शैक्षणिक संस्थान तथा संस्कार द्वारा इन सूचनाओं तथा उपग्रह चित्रों का उपयोग असैनिक क्षेत्रों; जैसे नगरीय नियोजन, प्रदूषण नियंत्रण, वन विनाश (वनोन्मूलन) से प्रभावित क्षेत्रों को ढूँढ़ना आदि के लिए किया जाएगा।

परिवहन एवं संचार HBSE 12th Class Geography Notes

→ बंदरगाह (Harbour) : यह समुद्र का अंशतः परिबद्ध (Partially Encircled) क्षेत्र होता है; जैसे निवेशिका (Creek), नदमुख (Estuary) अथवा समुद्र-अंतर्गम (Inlet) आदि, जो आने वाले जहाजों को आश्रय देता है।

→ पत्तन (Port) : यह गोदी (Dock), घाट एवं सामान उतारने और चढ़ाने की सुविधाओं से युक्त ऐसा स्थान होता है जो स्थल मार्गों से जुड़ा होता है। पत्तन वास्तव में बंदरगाह की Operational Site होती है।

→ पश्च प्रदेश (Hinter Land) : किसी महानगर या बंदरगाह से जुड़ा वह विस्तृत क्षेत्र जो उस महानगर और बंदरगाह की सेवा करता है और उनसे सेवाएँ भी प्राप्त करता है।

→ संचार (Communication) : सूचनाओं। उनके उद्गम स्थल से गंतव्य तक किसी चैनल के माध्यम से पहुँचाना।

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HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Solutions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

अभ्यास केन प्रश्न

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. निम्नलिखित में से कौन-सा एक तृतीयक क्रियाकलाप है?
(A) खेती
(B) बुनाई
(C) व्यापार
(D) आखेट
उत्तर:
(C) व्यापार

2. निम्नलिखित क्रियाकलापों में से कौन-सा एक द्वितीयक सेक्टर का क्रियाकलाप नहीं है?
(A) इस्पात प्रगलन
(B) वस्त्र निर्माण
(C) मछली पकड़ना
(D) टोकरी बुनना
उत्तर:
(C) मछली पकड़ना

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

3. निम्नलिखित में से कौन-सा एक सेक्टर दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में सर्वाधिक रोज़गार प्रदान करता है?
(A) प्राथमिक
(B) द्वितीयक
(C) पर्यटन
(D) सेवा
उत्तर:
(D) सेवा

4. वे काम जिनमें उच्च परिमाण और स्तर वाले अन्वेषण सम्मिलित होते हैं, कहलाते हैं-
(A) द्वितीयक क्रियाकलाप
(B) पंचम क्रियाकलाप
(C) चतुर्थक क्रियाकलाप
(D) प्राथमिक क्रियाकलाप
उत्तर:
(B) पंचम क्रियाकलाप

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

5. निम्नलिखित में से कौन-सा क्रियाकलाप चतुर्थक सेक्टर से संबंधित है?
(A) संगणक विनिर्माण
(B) विश्वविद्यालयी अध्यापन
(C) कागज़ और कच्ची लुगदी निर्माण
(D) पुस्तकों का मुद्रण
उत्तर:
(B) विश्वविद्यालयी अध्यापन

6. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक सत्य नहीं है?
(A) बाह्यस्रोतन दक्षता को बढ़ाता है और लागतों को घटाता है।
(B) कभी-कभार अभियांत्रिकी और विनिर्माण कार्यों की भी बाह्यस्रोतन की जा सकती है।
(C) बी०पी०ओज़ के पास के०पी०ओज़ की तुलना में बेहतर व्यावसायिक अवसर होते हैं।
(D) कामों के बाह्यस्रोतन करने वाले देशों में काम की तलाश करने वालों में असंतोष पाया जाता है।
उत्तर:
(D) कामों के बाह्यस्रोतन करने वाले देशों में काम की तलाश करने वालों में असंतोष पाया जाता है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
फुटकर व्यापार सेवा को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ये वे व्यापारिक क्रियाकलाप हैं जो उपभोक्ताओं की वस्तुओं के प्रत्यक्ष विक्रय से संबंधित हैं। अधिकांश फुटकर व्यापार केवल विक्रय के लिए तय दुकानों और भंडारों में संपन्न होते हैं। उदाहरणतया फेरी, रेहड़ी, ट्रक, द्वार से द्वार डाक आदेश, दूरभाष, इंटरनेट, फुटकर बिक्री आदि।

प्रश्न 2.
चतुर्थ सेवाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
चतुर्थ सेवाएँ अनुसंधान एवं विकास पर केंद्रित होती हैं और विशिष्टीकृत ज्ञान प्रौद्योगिक कुशलता और प्रशासकीय सामर्थ्य से संबद्ध सेवाओं के उन्नत नमूने के रूप में देखी जाती हैं। उच्च कोटि के बौद्धिक व्यवसायों को चतुर्थ सेवाओं के अंतर्गत रखा जाता है। अध्यापन, चिकित्सा, वकालत, अनुसंधान, सूचना आधारित ज्ञान आदि चतुर्थ सेवाओं के उदाहरण हैं।

प्रश्न 3.
विश्व में चिकित्सा पर्यटन के क्षेत्रों में तेजी से उभरते हुए देशों के नाम लिखिए।
उत्तर:
विश्व में चिकित्सा पर्यटन के क्षेत्रों में तेजी से उभरते हुए देशों में भारत तेजी से उभर रहा है। इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र में उभरते हुए देश हैं थाइलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, स्विट्ज़रलैंड, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस आदि।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

प्रश्न 4.
अंकीय विभाजन क्या है?
उत्तर:
सूचना और संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित विकास से मिलने वाले अवसरों का वितरण पूरे ग्लोब पर असमान रूप से वितरित है। देशों में विस्तृत आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक भिन्नताएँ पाई जाती हैं। विकसित देश, सामान्य रूप से इस दिशा में आगे बढ़ गए हैं जबकि विकासशील देश पिछड़ गए हैं। यही अंकीय विभाजन कहलाता है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
आधुनिक आर्थिक विकास में सेवा सेक्टर की सार्थकता और वृद्धि की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
आधुनिक युग में आर्थिक विकास के लिए सेवाओं का महत्त्व बढ़ता जा रहा है। कुछ वर्ष पूर्व सेवाओं की अपेक्षा वस्तुओं के उत्पादन पर अधिक बल दिया जाता था लेकिन विकसित अर्थव्यवस्था में सेवाओं पर आधारित विकास में तेजी आई है। आधुनिक आर्थिक विकास में सेवा सेक्टर की सार्थकता के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं

  • सेवा सेक्टर में फुटकर बिक्री और परिवहन के साधन सम्मिलित हैं जो विक्रेताओं एवं उपभोक्ताओं को जोड़ते हैं।
  • सेवा सेक्टर कच्चे माल को कारखाने तक और निर्मित माल को कारखाने से बाजार तक ले जाने में सहायता करते हैं।
  • सेवा सेक्टर वाणिज्यिक सेवा कम्पनियों की उत्पादकता एवं क्षमता में वृद्धि लाते हैं।

आधुनिक आर्थिक विकास में सेवा सेक्टर की वृद्धि – विकसित देशों के सेवा क्षेत्र में रोज़गार के अवसरों में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। विकासशील देशों में भी विनिर्माण क्षेत्र की तुलना में सेवा क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है लेकिन इन देशों में बहुत-से लोग असंगठित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जिनका लेखा-जोखा अच्छी तरह से नहीं रखा जाता।

अधिकतर देशों में विकास की प्रक्रिया का एक निश्चित क्रम होता है। पहले प्राथमिक क्षेत्र का वर्चस्व होता है, उसके बाद द्वितीयक क्षेत्र का महत्त्व बढ़ने लगता है। अंतिम अवस्थाओं में तृतीयक और चतुर्थक क्रियाकलाप महत्त्वपूर्ण बन जाते हैं। बहुत-से देशों में विनिर्माण उद्योगों में रोज़गार के अवसर घटते जा रहे हैं तथा सकल घरेलू उत्पाद में उनका अनुपात कम होता जा रहा है। आधुनिक आर्थिक विकास में सेवाओं का महत्त्व इतना बढ़ गया है कि उन्हें उत्पादक कार्यों की श्रेणी में रखा जाने लगा है। सेवाएँ अब निर्यातक बन गई हैं। कुछ देश; जैसे स्विट्ज़रलैंड तथा यूनाइटिड किंगडम सेवा क्षेत्र में उद्योगों से आगे निकल गए हैं।

प्रश्न 2.
परिवहन और संचार सेवाओं की सार्थकता को विस्तारपूर्वक स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
परिवहन सेवाएँ परिवहन एक ऐसी सेवा है जिससे व्यक्तियों, विनिर्मित माल तथा संपत्ति को भौतिक रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता है। मनुष्य के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने, उसकी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यह एक संगठित उद्योग है। आधुनिक समाज वस्तुओं के उत्पादन, वितरण और उपभोग में सहायता देने के लिए तीव्र और सक्षम परिवहन व्यवस्था चाहते हैं। परिवहन दूरी को किलोमीटर दूरी, समय दूरी और लागत दूरी के रूप में मापा जा सकता है। परिवहन के साधन के चयन में समय अथवा लागत के संदर्भ में एक निर्णायक कारक है। परिवहन की माँग जनसंख्या के आकार से प्रभावित होती है। जनसंख्या का आकार जितना बड़ा होगा, परिवहन की माँग उतनी ही अधिक होगी।

संचार सेवाएँ-संचार सेवाओं में शब्दों, संदेशों, तथ्यों तथा विचारों को भेजना शामिल रहता है। लेखन के आविष्कार ने संदेशों संचार को परिवहन के साधनों पर निर्भर करने में सहायता की। जहाँ परिवहन जाल तंत्र सक्षम होता है वहाँ संचार का फैलाव सरल होता है। मोबाइल फोन और उपग्रहों जैसे कुछ विकासों ने संचार को परिवहन से मुक्त कर दिया है। उदाहरणतया दूरसंचार का प्रयोग विद्युतीय प्रौद्योगिकी के विकास से जुड़ा है। संदेशों के भेजे जाने की गति के कारण संचार जगत में क्रांति आ गई है। रेडियो और दूरदर्शन भी जनसंचार माध्यम के रूप में विकसित हैं।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 7 तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप

तृतीयक और चतर्थ क्रियाकलाप HBSE 12th Class Geography Notes

→ तृतीयक क्रियाकलाप (Tertiary Activities) : ये बुद्धि तथा कुशलता से जुड़ी सेवाएँ हैं जिनका उत्पादन अमूर्त होता है।

→ चतुर्थक क्रियाकलाप (Quarternary Activities) : उच्च बौद्धिक व्यवसाय जो चिंतन तथा शोध के लिए विचार देते हैं। इनका उत्पादन भी अमूर्त होता है।

→ सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) : सूचनाओं, ज्ञान तथा आँकड़ों के एकत्रीकरण, संग्रहण, संपादन तथा प्रसारण की ऐसी तकनीक जिसमें कंप्यूटर, सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिकी, दूरसंचार, प्रसारण तथा आप्ट्रो इलेक्ट्रॉनिक्स इत्यादि विज्ञान शामिल हैं।

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HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Solutions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ

अभ्यास केन प्रश्न

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?
(A) हुगली के सहारे जूट के कारखाने सस्ती जल यातायात की सुविधा के कारण स्थापित हुए।
(B) चीनी, सूती वस्त्र एवं वनस्पति तेल उद्योग स्वच्छंद उद्योग हैं।
(C) खनिज तेल एवं जलविद्युत शक्ति के विकास ने उद्योगों की अवस्थिति कारक के रूप में कोयला शक्ति के महत्त्व को कम किया है।
(D) पत्तन नगरों ने भारत में उद्योगों को आकर्षित किया है।
उत्तर:
(B) चीनी, सूती वस्त्र एवं वनस्पति तेल उद्योग स्वच्छंद उद्योग हैं।

2. निम्न में से कौन-सी एक अर्थव्यवस्था में उत्पादन का स्वामित्व व्यक्तिगत होता है?
(A) पूँजीवाद
(B) मिश्रित
(C) समाजवाद
(D) कोई भी नहीं
उत्तर:
(A) पूँजीवाद

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ

3. निम्न में से कौन-सा एक प्रकार का उद्योग अन्य उद्योगों के लिए कच्चे माल का उत्पादन करता है?
(A) कुटीर उद्योग
(B) छोटे पैमाने के उद्योग
(C) आधारभूत उद्योग
(D) स्वच्छंद उद्योग
उत्तर:
(C) आधारभूत उद्योग

4. निम्न में से कौन-सा एक जोड़ा सही मेल खाता है?
(A) स्वचालित वाहन उद्योग … लॉस एंजिल्स
(B) पोत निर्माण उद्योग … लूसाका
(C) वायुयान निर्माण उद्योग … फलोरेंस
(D) लौह-इस्पात उद्योग … पिट्सबर्ग
उत्तर:
(D) लौह-इस्पात उद्योग … पिट्सबर्ग

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

(i) उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग
(ii) विनिर्माण
(iii) स्वच्छंद उद्योग।
उत्तर:
(i) उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग-निर्माण क्रियाओं में उच्च प्रौद्योगिकी नवीनतम पीढ़ी है। इसमें उन्नत वैज्ञानिक एवं इंजीनियरिंग उत्पादकों का निर्माण गहन शोध एवं विकास के प्रयोग द्वारा किया जाता है। उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग में यंत्र, कंप्यूटर आधारित डिजाइन तथा निर्माण, धातु पिघलाने एवं शोधन के इलैक्ट्रोनिक नियंत्रण एवं नए रासायनिक व औषधीय उत्पाद प्रमुख स्थान रखते हैं।. .

(ii) विनिर्माण-वे प्रतिक्रियाएँ जिनके द्वारा कच्चे पदार्थों के स्वरूप को परिवर्तित करके तैयार माल का रूप देकर अधिक उपयोगी बनाया जाता है, उसे विनिर्माण अथवा निर्माण उद्योग कहते हैं। यह मानव का गौण अथवा द्वितीयक व्यवसाय है। उदाहरण के लिए गन्ने से चीनी बनाना, कपास से धागा तथा कपड़ा तैयार करना आदि। विनिर्माण उद्योग में कच्चे माल को मशीनों की सहायता से या विभिन्न उपकरणों की सहायता से तैयार सामग्री के रूप में बदला जाता है तथा उसकी उपयोगिता के मूल्यों में वृद्धि हो जाती है। सुई से लेकर विशाल जलयानों, वायुयानों तथा उपग्रहों तक का निर्माण करना विनिर्माण उद्योग के अंतर्गत आता है।

(iii) स्वच्छंद उद्योग-स्वच्छंद उद्योग व्यापक विविधता वाले स्थानों में स्थित होते हैं। ये उद्योग किसी विशिष्ट कच्चे माल के भार में कमी हो रही है अथवा नहीं, पर निर्भर नहीं रहते हैं। ये उद्योग संघटक पुों पर निर्भर रहते हैं जो कहीं से भी प्राप्त किए जा सकते हैं। इसमें उत्पादन कम मात्रा में होता है एवं श्रमिकों की कम आवश्यकता होती है। ये उद्योग प्रदूषण नहीं फैलाते।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
प्राथमिक एवं द्वितीयक गतिविधियों में क्या अंतर है?
उत्तर:
प्राथमिक एवं द्वितीयक गतिविधियों में निम्नलिखित अंतर हैं-

प्रायमिक गतिविधियाँद्वितीयक गतिविधियाँ
1. प्राथमिक गतिविधियाँ वे होती हैं जो सीधे पर्यावरण पर निर्भर होती हैं। ये प्राकृतिक पर्यावरण से प्राप्त संसाधनों के विकास से संबंधित हैं।1. द्वितीयक गतिविधियों के द्वारा प्राकृतिक संसाधनों में परिवर्तन करके उन्हें और अधिक मूल्यवान एवं उपयोगी बनाया जाता है।
2. इनके अंतर्गत प्रकृति से प्राप्त संसाधनों का उपभोग बिना प्रसंस्करण के उपभोक्ताओं द्वारा किया जाता है।2. इनके अंतर्गत प्रकृति से प्राप्त या प्राथमिक संसाधनों को मशीनीकृत प्रक्रियाओं द्वारा प्रसंस्कृत करने के बाद उपभोक्ताओं द्वारा उपयोग किया जाता है।
3. इन गतिविधियों के माध्यम से उद्योगों को कच्चा माल प्राप्त होता है।3. इन गतिविधियों के माध्यम से कच्चे माल का परिष्करण होता है। इनके द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य बढ़ जाता है।
4. इन गतिविधियों में विषम जलवायविक एवं भौगोलिक दशाओं को अधिक महत्त्व दिया जाता है।4. इन गतिविधियों में भौगोलिक दशाओं का अधिक महत्त्व नहीं रहता।
5. उदाहरण-आखेट, संग्रहण, पशुचारण, खनन, मछलीपकड़ना, लकड़ी काटना, कृषि आदि।5. उदाहरण-विनिर्माण, कुटीर उद्योग, डेयरी या दुग्ध उद्योग आदि।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ

प्रश्न 2.
विश्व के विकसित देशों के उद्योगों के संदर्भ में आधुनिक औद्योगिक क्रियाओं की मुख्य प्रवृत्तियों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
विश्व में कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ उद्योगों की स्थापना के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ मिल जाती हैं और वहाँ कई उद्योग स्थापित हो जाते हैं और धीरे-धीरे उद्योगों का जमघट (पुंज) बन जाता है, जिसे औद्योगिक प्रदेश या औद्योगिक संकुल कहते हैं। उद्योगों के लिए अनकल क्षेत्र में एक या अनेक प्रकार के उद्योगों की एक कड़ी-सी बन जाती है जिसमें कई नगरों के उद्योग सम्मिलित हो जाते हैं। उद्योगों की स्थापना के लिए विशेष भौगोलिक कारक उत्तरदायी होते हैं। इन्हीं अनुकूल भौगोलिक कारकों के कारण वे क्षेत्र नए-नए उद्योगों को अपनी ओर आकर्षित करते रहते हैं। उद्योगों के जमघट में अनुकूल उत्तरदायी कारकों के अंतर्गत कच्चे माल की सुविधा, श्रमिकों की उपलब्धता, ऊर्जा के पर्याप्त संसाधन, जलवायु तथा परिवहन सुविधाएँ आदि हैं। कई बार सरकार की नीति भी उद्योगों की स्थापना में सहायक सिद्ध होती है। विश्व में प्रमुख औद्योगिक प्रदेश निम्नलिखित हैं

  • यूरोप के औद्योगिक प्रदेश
  • उत्तरी अमेरिका के औद्योगिक प्रदेश
  • दक्षिणी अमेरिका के औद्योगिक प्रदेश
  • रूस के औद्योगिक प्रदेश
  • एशिया के औद्योगिक प्रदेश
  • अफ्रीका के औद्योगिक प्रदेश
  • आस्ट्रेलिया के औद्योगिक प्रदेश।

विश्व के विकसित देशों में उद्योगों में आधुनिक औद्योगिक क्रियाओं की मुख्य प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं
1. कौशल या श्रम का विशिष्टीकरण-शिल्प तरीकों से कारखानों व फैक्ट्रियों में सीमित मात्रा में ही सामान उत्पादित किया जाता है, जोकि आदेशानुसार ही तैयार किया जाता है। अतः इस पर अधिक लागत आती है। अधिक. उत्पादन के लिए प्रत्येक कारीगर निरंतर एक ही तरह का कार्य करे जिसमें उसकी विशिष्टता है।

2. प्रौद्योगिकीय नवाचार-प्रौद्योगिकीय नवाचार में शोध एवं विकासमान युक्तियों द्वारा विनिर्माण की गुणवत्ता को नियंत्रित करने, प्रदूषण को नियंत्रित करने और दक्षता को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

3. यंत्रीकरण यंत्रीकरण से अभिप्राय किसी कार्य को पूर्ण करने के लिए मशीनों या उपकरणों के इस्तेमाल से है। यंत्रीकरण की विकसित एवं उत्तम अवस्था स्वचालित है। स्वचालित मशीनों ने लोगों की सोच को विकसित किया है।

4. संगठनात्मक ढाँचा एवं स्तरीकरण-आधुनिक औद्योगिक क्रियाओं के निर्माण की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • एक जटिल प्रौद्योगिकी यंत्र
  • अत्यधिक विशिष्टीकरण व श्रम विभाजन द्वारा अल्प लागत से अधिक उत्पादन करना
  • बड़े संगठन एवं प्रशासकीय अधिकारी वर्ग
  • अधिक पूँजी निवेश करना

5. अनियमित भौगोलिक वितरण-विश्व के कुल स्थलीय भाग के 10% से कम भू-भाग पर इनका विस्तार है, किन्तु फिर भी ये क्षेत्र आर्थिक एवं राजनीतिक शक्ति के केंद्र बन गए हैं। यहाँ हजारों बेरोजगारों को रोजगार भरण-पोषण अच्छे से हो रहा है।

प्रश्न 3.
अधिकतर देशों में उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग प्रमुख महानगरों के परिधि क्षेत्रों में ही क्यों विकसित हो रहे हैं? व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
उच्च प्रौद्योगिकी पर आधारित उद्योग तेजी से विकसित हो रहे हैं। इन उद्योगों में वैज्ञानिक अनुसंधान एवं विकास के बल पर अत्यधिक परिष्कृत उत्पादों का निर्माण किया जाता है। इन उद्योगों पर पारंपरिक कारकों का कोई विशेष प्रभाव नहीं होता। आज अधिकतर देशों में उच्च प्रौद्योगिक उद्योग प्रमुख महानगरों की परिधि में विकसित हो रहे हैं। इनके स्थानीयकरण में कुछ नए कारकों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है जो निम्नलिखित हैं

  • ये हल्के उद्योग होते हैं जो अधिकतर कच्चे माल की जगह उत्पादन के लिए अर्ध-निर्मित अथवा संसाधित वस्तुओं का उपयोग करते हैं।
  • वैज्ञानिक और तकनीकी दक्षता पर निर्भर रहने के कारण ये उद्योग प्रायः विश्वविद्यालयों तथा शोध संस्थाओं के निकट स्थापित किए जाते हैं।
  • इन उद्योगों के लिए ऊर्जा की आपूर्ति बिजली द्वारा होती है जो मुख्यतः राष्ट्रीय ग्रिड से प्राप्त होती हैं।
  • इन उद्योगों के लिए अनुकूल जलवायु वाले महानगरीय क्षेत्र अधिक अनुकूल साबित होते हैं। महानगरों की सामाजिक, सांस्कृतिक व वैज्ञानिक गतिविधियाँ इन उद्योगों को अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देती हैं।
  • इन उद्योगों का अंतिम उत्पाद छोटा किंतु परिष्कृत होता. है। अतः इन्हें सड़क मार्गों के निकट प्रदूषण-रहित आवासीय क्षेत्रों में लगाया जा सकता है।
  • परिवहन और संचार के अति आधुनिक साधनों के बिना ये उद्योग जीवित ही नहीं रह सकते। उपभोक्ताओं, वित्तीय संस्थाओं, सरकारी विभागों से तत्काल संपर्क बनाने तथा शोध के विभिन्न चरणों की सफलता के लिए महानगरीय व परिवहन के साधन जरूरी हैं।

प्रश्न 4.
अफ्रीका में अपरिमित प्राकृतिक संसाधन हैं फिर भी औद्योगिक दृष्टि से यह बहत पिछड़ा महाद्वीप है। समीक्षा कीजिए।
उत्तर:
उद्योगों को हर जगह स्थापित नहीं किया जा सकता, उद्योग वहीं पर स्थापित किए जाते हैं जहाँ पर इनके निर्माण में कम-से-कम लागत आए व ज्यादा-से-ज्यादा लाभ हो। उद्योगों की अवस्थिति में कई भौगोलिक व गैर-भौगोलिक कारक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं; जैसे-कच्चा माल, बाजार, पूँजी, बैंकिंग व्यवस्था, श्रम, ऊर्जा के स्रोत आदि। दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित अफ्रीका महाद्वीप प्राकृतिक संसाधन में उन्नत है। इस महाद्वीप का मध्य भाग उष्ण कटिबंधीय वर्षा वनों से आच्छादित है। इसके पठारी भागों में खनिज के अपार भंडार निक्षेपित हैं जिनमें खनिज तेल, यूरेनियम, ताँबा, लौह अयस्क, कोयला, जस्ता, बॉक्साइट आदि महत्त्वपूर्ण हैं। यहाँ की अनेक सदानीरा नदियों में जलविद्युत पैदा करने की असीम संभावनाएँ हैं। एक अनुमान के अनुसार लगभग 40% जलविद्युत अफ्रीका की नदियों में विद्यमान है। इतना होने के बावजूद भी इस क्षेत्र में उद्योग विकसित नहीं हुए। यह महाद्वीप औद्योगिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं

  • विषम जलवायु, अधिक तापमान व गर्म पवनें।
  • उच्च प्रौद्योगिकी की अनुपलब्धता।
  • कुशल श्रम का अभाव।
  • परिवहन व संचार के साधनों का अभाव।
  • पूँजी का अभाव।

इनके अतिरिक्त इसके अधिकांश भू-भाग यूरोपीय साम्राज्यवादी शक्तियों के अधीन रहे। इन साम्राज्यवादी शक्तियों ने यहाँ के प्राकृतिक संसाधनों का खूब दोहन किया। इन शक्तियों के कारण यहाँ की अर्थव्यवस्था पिछड़ी रही। इसी कारण यहाँ आज तक आधारभूत प्रौद्योगिकी विकास नहीं हो पाया है। अतः स्पष्ट है कि संसाधनों की बहुलता होते हुए भी अफ्रीका महाद्वीप औद्योगिक दृष्टि से आज भी पिछड़ा हुआ है।

द्वितीयक क्रियाएँ HBSE 12th Class Geography Notes

→ उद्योग (Industry) : लाभदायक अथवा उत्पादी उद्यमों का एक वर्ग, जिसमें उत्पादन के समान प्रौद्योगिकीय तकनीकों का उपयोग किया जाता है और जिससे उपयोगी सामान, सेवाएँ अथवा आय के साधन उपलब्ध होते हैं, उद्योग कहलाते हैं।

→ औद्योगिक जड़त्व (Industrial Inertia) : किसी उद्योग की उस स्थान पर अपनी क्रिया बनाए रखने की प्रवृत्ति, जहाँ पर उसके स्थापित होने के कारण महत्त्वहीन हैं या समाप्त हो चुके हैं, औद्योगिक जड़त्व कहलाता है।

→ औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) : यूरोपीय इतिहास में सन् 1750 से आधुनिक समय तक का काल जिसमें महत्त्वपूर्ण आविष्कारों के परिणामस्वरूप अधिकाधिक औद्योगिक विकास हुआ है।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएँ

→ भार हासमान पदार्थ (Weight-Loosing Items) : ऐसा कच्चा माल, जिसके कुल भार में से निर्मित माल बहुत थोड़ा बन पाए (जैसे 10 टन गन्ना केवल एक टन चीनी बनाता है) भार ह्रासमान पदार्थ कहलाता है।

→ शुद्ध कच्चा माल (Pure Raw Material) : ऐसे पदार्थ जिनके कुल भार के बराबर या थोड़ा-सा कम निर्मित माल बनता है (जैसे एक टन पिंजी हुई रूई से लगभग एक टन सूत ही बनता है) ‘शुद्ध कच्चा माल’ कहलाते हैं।

→ औद्योगिक समूहन (Industrial Cluster) : अनुकूल दशाओं के कारण जब एक ही स्थान पर अनेक प्रकार के उद्योग स्थापित हो जाएँ तो उसे ‘औद्योगिक समूहन’ कहा जाता है।

→ औद्योगिक प्रदेश (Industrial Region) : स्थानीयकरण की विशिष्ट सुविधाओं के कारण किसी विशेष प्रदेश में ‘ उद्योगों का व्यापक रूप से विकास होता है तो उस प्रदेश को औद्योगिक प्रदेश की संज्ञा दी जाती है।

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HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

Haryana State Board HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 12th Class Geography Solutions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

अभ्यास केन प्रश्न

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए

1. निम्नलिखित में से कौन-सी रोपण फसल नहीं है?
(A) कॉफी
(B) गन्ना
(C) गेहूँ
(D) रबड़
उत्तर:
(C) गेहूँ

2. निम्नलिखित देशों में से किस देश में सहकारी कृषि का सफल परीक्षण किया गया है?
(A) रूस
(B) डेनमार्क
(C) भारत
(D) नीदरलैंड
उत्तर:
(B) डेनमार्क

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

3. फूलों की कृषि कहलाती है-
(A) ट्रक फार्मिंग
(B) कारखाना कृषि
(C) मिश्रित कृषि
(D) पुष्पोत्पादन
उत्तर:
(D) पुष्पोत्पादन

4. निम्नलिखित में से कौन-सी कृषि के प्रकार का विकास यूरोपीय औपनिवेशिक समूहों द्वारा किया गया?
(A) कोलखोज़
(B) अंगूरोत्पादन
(C) मिश्रित कृषि
(D) रोपण कृषि
उत्तर:
(D) रोपण कृषि

5. निम्नलिखित प्रदेशों में से किसमें विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि नहीं की जाती है?
(A) अमेरिका एवं कनाडा के प्रेयरी क्षेत्र
(B) अर्जेंटाइना के पंपास क्षेत्र
(C) यूरोपीय स्टैपीज़ क्षेत्र
(D) अमेजन बेसिन
उत्तर:
(D) अमेजन बेसिन

6. निम्नलिखित में से किस प्रकार की कृषि में खट्टे रसदार फलों की कृषि की जाती है?
(A) बाजारीय सब्जी कृषि
(B) भूमध्यसागरीय कृषि
(C) रोपण कृषि
(D) सहकारी कृषि
उत्तर:
(B) भूमध्यसागरीय कृषि

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

7. निम्नलिखित कृषि के प्रकारों में से कौन-सा प्रकार कर्तन-दहन कृषि का प्रकार है?
(A) विस्तृत जीवन-निर्वाह कृषि
(B) आदिकालीन निर्वाहक कृषि
(C) विस्तृत वाणिज्य अनाज कृषि
(D) मिश्रित कृषि
उत्तर:
(B) आदिकालीन निर्वाहक कृषि

8. निम्नलिखित में से कौन-सी एकल कृषि नहीं है?
(A) डेयरी कृषि
(B) मिश्रित कृषि
(C) रोपण कृषि
(D) वाणिज्य अनाज कृषि
उत्तर:
(B) मिश्रित कृषि

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
स्थानांतरी कृषि का भविष्य अच्छा नहीं है। विवेचना कीजिए।
उत्तर:
स्थानांतरी कृषि प्राचीन तथा आदिम कालीन पद्धति है। यह उष्ण-आर्द्र वन प्रदेशों में आदिम जातियों द्वारा की गई कृषि है। इस कृषि में लोग अपने भोजन की पूर्ति के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर कृषि करते हैं। इस कृषि से पर्यावरण का विनाश होता है। इस कृषि में मृदा अपरदन की समस्या गंभीर है तथा भूमि की उपजाऊ शक्ति का ह्रास होता है। इसलिए आधुनिक युग में स्थानांतरी कृषि का क्षेत्र कम हो रहा है। भविष्य में इस कृषि को स्थानबद्ध करने के प्रयत्न किए जा रहे हैं। इसलिए स्थानांतरी कृषि का भविष्य उज्ज्वल नहीं है।

प्रश्न 2.
बाज़ारीय सब्जी कृषि नगरीय क्षेत्रों के समीप ही क्यों की जाती है?
उत्तर:
इस प्रकार की कृषि में अधिक कीमत मिलने वाली फसलें उगाई जाती हैं जिनकी माँग नगरीय क्षेत्रों में अधिक होती है। इस कृषि में खेतों का आकार छोटा होता है एवं खेत अच्छे यातायात के साधनों द्वारा नगरीय केंद्रों से जुड़े होते हैं।

प्रश्न 3.
विस्तृत पैमाने पर डेयरी कृषि का विकास यातायात के साधनों एवं प्रशीतकों के विकास के बाद ही क्यों संभव हो सका है?
उत्तर:
डेयरी उत्पाद तथा ट्रक कृषि के उत्पाद; जैसे-सब्जियाँ, फल और फूल शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुएँ हैं। इन्हें शीघ्रता से मांग वाले क्षेत्रों में पहुंचाना आवश्यक है। इसलिए सब्जियों तथा फलों को शहरों में पहुंचाने के लिए तीव्र गति से चलने वाले यातायात के साधनों का प्रयोग किया जाता है। इन वस्तुओं को खराब होने से बचाने के लिए कई देशों में ट्रक प्रयोग किए जाते हैं। इस प्रकार इस कृषि की सफलता तथा उपयोगिता तीव्र गति से चलने वाले यातायात के साधनों पर निर्भर करती है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए

प्रश्न 1.
चलवासी पशुचारण और वाणिज्य पशुधन पालन में अंतर कीजिए।
उत्तर:
चलवासी तथा व्यापारिक पशुपालन में निम्नलिखित अंतर हैं-

चलवासी पशुचारणव्यापारिक पशुपालन
1. चलवासी पशुचारण में चरवाहे चारे तथा जल की तलाश में इधर-उधर घूमते हैं।1. व्यापारिक पशुपालन में चारे तथा जल की समुचित व्यवस्था की जाती है तथा चरवाहे स्थायी तौर पर एक ही स्थान पर पशुओं के साथ रहते हैं।
2. चलवासी चरवाहे अविकसित तथा प्राचीन पद्धति से पशुपालन करते हैं।2. व्यापारिक पशुपालन में आधुनिक पद्धति से पशुपालन किया जाता है।
3. चलवासी पशुपालन एक जीवन-निर्वाह पद्धति है।3. व्यापारिक पशुपालन में दूध, मांस, खाल, ऊन आदि का उत्पादन होता है जिसका अन्य देशों के साथ व्यापार किया जाता है। अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से उत्पादन किया जाता है।
4. चलवासी पशुचारण में विभिन्न प्रकार के पशुओं को रखा जाता है।4. व्यापारिक पशुपालन में पशुओं को अनुकूल दशाओं के अनुसार रखा जाता है अर्थात् जिस पशु के लिए भौगोलिक दशा अनुकूल हो उनको वहीं रखा जाता है।
5. चलवासी पशुपालन में चारा प्राकृतिक रूप से विकसित होता है।5. व्यापारिक पशुपालन में पशुओं के लिए चारा फार्म में उगाया जाता है।
6. इसमें पशुओं के प्रजनन तथा नस्ल सुधार के प्रयास नहीं किए जाते।6. इस पद्धति में पशुओं के प्रजनन तथा नस्ल सुधार के प्रयास किए जाते हैं।
7. चलवासी पशुचारण में पशुओं के स्वास्थ्य की जांच तथा उपचार की व्यवस्था नहीं होती है।7. व्यापारिक पशुपालन में पशुओं के स्वास्थ्य तथा बीमारियों की रोकथाम तथा उपचार की व्यवस्था होती है।
8. चलवासी पशुचारण अर्धशुष्क प्रदेशों की कठोर जलवायु में होता है।8. व्यापारिक पशुपालन शीतोष्ण घास के मैदानों में सम जलवायु में होता है।
9. चलवासी पशुचारण के मुख्य क्षेत्र सहारा, दक्षिणी-पश्चिमी व मध्य एशिया, यूरेशिया में टुंड्रा का दक्षिणी सीमांत व दक्षिणी पश्चिमी अफ्रीका हैं।9. व्यापारिक पशुपालन के मुख्य क्षेत्र उत्तरी अमेरिका के प्रेयरी, दक्षिणी अमेरिका के लानोस व पम्पास, दक्षिणी अफ्रीका के वेल्ड, ऑस्ट्रेलिया के डाऊन्स व न्यूज़ीलैंड के घास स्थल हैं।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

प्रश्न 2.
रोपण कृषि की मुख्य विशेषताएँ बतलाइए एवं भिन्न-भिन्न देशों में उगाई जाने वाली कुछ प्रमुख रोपण फसलों के नाम बतलाइए।
उत्तर:
रोपण कृषि-रोपण कृषि में कृषि क्षेत्र का आकार बहुत बड़ा होता है। इसमें अधिक पूँजी, उन्नत तकनीक व वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है। इसके लिए अधिक श्रम व विकसित यातायात के साधनों की आवश्यकता होती है।

रोपण कृषि की विशेषताएँ-रोपण कृषि की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • रोपण कृषि के अंतर्गत एक फसली कृषि का विशिष्टीकरण किया जाता है।
  • बागानी उपजों को फार्मों पर ही संसाधित करके निर्यात हेतु उपलब्ध कराया जाता है।
  • इस कृषि व्यवस्था का आरंभ कम जनसंख्या घनत्व वाले देशों में हुआ था।
  • इन फार्मों पर मशीनों, उर्वरकों, कीटनाशक दवाओं व रोगनाशक रसायनों का प्रयोग किया जाता है।
  • इन बागानों की प्रमुख उपजें रबड़, चाय, कॉफी, कोको, कपास, गन्ना, केले, अनानास, गरी, पटसन है।
  • रोपण कृषि के क्षेत्रों की विकसित यातायात व्यवस्था एवं बाजार है।
  • तटीय भागों से कृषि उपजों को सस्ते समुद्री परिवहन द्वारा विदेशों में निर्यात किया जाता है।
  • यह एक आधुनिक, संगठित एवं व्यवस्थित कृषि है।
  • इस कृषि की तुलना विनिर्माण उद्योग से की जा सकती है।
  • बागानों पर श्रमिकों की पूर्ति स्थानीय मजदूरों, बाहर से लाए गए मजदूरों द्वारा की जाती है।

मुख्य फसलें – यूरोपीय लोगों ने विश्व के अनेक भागों का औपनिवेशीकरण किया तथा कृषि के कुछ अन्य रूप जैसे-रोपण कृषि की शुरुआत की। रोपण कृषि की मुख्य फसले हैं-चाय, कॉफी, कोको, रबड़, गन्ना, कपास, केला एवं अनानास।

प्राथमिक क्रियाएँ HBSE 12th Class Geography Notes

→ चरवाही जीवन (Foraging) : जंतुओं को पालतू बनाए बिना उनका शिकार करके और पौधों को स्वयं उगाए बिना उन्हें काटकर भोजन के रूप में प्रयोग करना।

→ संग्रहण (Gathering) : आदिकालीन मानव द्वारा भोजन के लिए वनों से पौधों की जड़ें, पत्तियाँ, छाल, नट व बीज और फल इत्यादि एकत्र करना।

→ ऋतु-प्रवास (Transhumance) : चरवाहे कबीलों द्वारा ऋतु अनुसार अपने पशुओं के साथ प्रवास।

→ खनिज ईंधन (Mineral Fuel): ऐसे खनिज जिनका उपयोग ऊर्जा पैदा करने के लिए ईंधन के रूप में किया जाता है; जैसे कोयला तथा पेट्रोलियम। इन खनिजों की संरचना में कार्बनिक तत्त्वों का योगदान होता है।

→ खनिकूप (Shaft Mine) : गहराई में दबे खनिजों तक पहुँचने के लिए भूपर्पटी में किया गया बड़ा व गहरा छिद्र।

→ कृषि-अवसंरचना (Agricultural Infrastructure) : किसी उद्यम के लिए आधारभूत सुविधाएँ और संरचना; जैसे सड़कें, रेलमार्ग, विद्युत उत्पादक केंद्र, सिंचाई, उर्वरक-उत्पादक केंद्र, मंडियाँ, बैंक इत्यादि।

→ संस्थागत वित्त (Institutional Finance) : ऐसा वित्त या धन जो बैंकों, सहकारी बैंकों, सहकारी समितियों द्वारा उपलब्ध कराया जाए, न कि साहूकारों द्वारा।

→ शस्यावर्तन (Crop Rotation) : फसलों को एक ही खेत में हेर-फेर करके बोने की वैज्ञानिक प्रणाली।

HBSE 12th Class Geography Solutions Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ

→ खाद्य शस्य (Food Cropping) : दालें, तिलहन, चना, फल व सब्जियाँ आदि जो मानव का मुख्य भोजन न होकर कभी-कभी प्रयुक्त होती हों।

→ गहन कृषि (Intensive Agriculture) : उत्तम बीज, अधिक श्रम, वैज्ञानिक उपकरणों तथा रासायनिक खाद आदि के प्रयोग से प्रति इकाई क्षेत्र अधिक उत्पादन देने वाली खेती को गहन कृषि कहा जाता है।

→ विस्तृत कृषि (Extensive Agriculture) : कम जनसंख्या वाले प्रदेशों में बहुत बड़े भूखंड पर श्रम, पूंजी और वैज्ञानिक साधनों को बढ़ाए बिना की जाने वाली कृषि विस्तृत कृषि कहलाती है।

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