HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 बचपन

Haryana State Board HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 बचपन Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 बचपन

HBSE 6th Class Hindi बचपन Textbook Questions and Answers

संस्मरण से

प्रश्न 1.
लेखिका बचपन में इतवार की सुबह क्या-क्या काम करती थी?
उत्तर :
लेखिका बचपन में इतवार की सुबह निम्नलिखित काम करती थी

  • वह इतवार की सुबह अपने मोजे स्वयं धोती थी।
  • इसके बाद वह अपने जूतों को पॉलिश करके खूब चमकाती थी।

प्रश्न 2.
“तुम्हें बताऊँगी कि हमारे समय और तुम्हारे समय में कितनी दूरी हो चुकी है।”-यह कह कर लेखिका क्या-क्या बताती है?
उत्तर :
यह कहकर लेखिका बताती है
1. पहले केवल कुछ घरों में ग्रामोफोन थे, जबकि अब रेडियो और टेलीविज़न आ गए हैं।
2. तब कुल्फी, कचौड़ी-समोसा खाए जाते थे जबकि अब उनका स्थान आइसक्रीम और पैटीज ने ले लिया है।
3. तब शहतूत, फालसे तथा खसखस का शरबत पिया जाता था, जबकि अब कोक-पेप्सी पिया जाता है। उन दिनों लैम्नेड, विमटो मिलती थी।
4. तब चने गरम तथा अनारदाने का चूर्ण खाने में बच्चों को बहुत मजा आता था। तब चने की पुड़िया बनाने में हाथ का कमाल दिखाई देता था।

प्रश्न 3.
पाठ से पता करके लिखो कि लेखिका के चश्मा लगाने पर उनके चचेरे भाई उन्हें क्यों छेड़ते थे?
उत्तर :
लेखिका के चचेरे भाई उन्हें तंग करने एवं चिढ़ाने के लिए छेड़ते थे। वे कहते आँख पर चश्मा लगाया ताकि सूझे दूर की यह नहीं लड़की को मालूम सूरत बनी लंगूर की।

प्रश्न 4.
लेखिका बचपन में कौन-कौन-सी चीजें मजा ले-लेकर खाती थी? उनमें से प्रमुख फलों के नाम लिखो।
उत्तर :
लेखिका बचपन में निम्नलिखित चीजे मजा ले-लेकर खाती थीं

  • लेखिका के पास चॉकलेट और टॉफी का काफी स्टॉक रहता था। वह चॉकलेट रात के खाने के बाद बिस्तर में लेट कर मजे ले-लेकर खाती थी।
  • वह शिमला के काफल और चैस्टनट भी खूब खाती थी।
  • वह गरम चने तथा अनारदाने का चूर्ण भी मजे लेकर खाती थी।

प्रमुख फलों के नाम

  • काफल
  • रसभरी
  • कसमल
  • चैस्टनट

संस्मरण से आगे

प्रश्न 1.
लेखिका की तरह तुम्हारी उम्र बढ़ने से तुम्हारे पहनने-ओढ़ने में क्या-क्या बदलाव आए हैं ? उन्हें याद कर लिखो।
उत्तर :
पहले हम निकर पहनते थे और अब पैंट पहनने लगे हैं। तब एक स्वेटर पहनने से काम चल जाता था, अब कोट तथा पुलोअर पहनने लगे हैं। गर्मियों में तरह-तरह की टी-शर्ट पहनने लगे हैं।

HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 बचपन

प्रश्न 2.
लेखिका के बचपन में ग्रामोफोन, घुड़सवारी, शोरूम में शिमला-कालका ट्रेन का मॉडल और हवाई जहाज की आवाजें ही आश्चर्यजनक चीजें थीं। आज क्या-क्या आश्चर्यजनक आधुनिक चीजें तुम्हें आकर्षित करती हैं ? उनके नाम लिखो।
उत्तर :
अब हमें ये चीजें आकर्षित करती हैं :
1. कंप्यूटर
2. मोबाइल फोन
3. गानों की नई-नई धुनें
4. क्रिकेट।

प्रश्न 3.
अपने बचपन की किसी मनमोहक घटना को याद करके विस्तार से लिखो।
उत्तर :
मेरे बचपन में एक बार एक मनमोहक घटना घटी। हमें दिल्ली से मुंबई ट्रेन से जाना था। हम सभी परिवारजन राजधानी एक्सप्रेस में सवार होने के लिए नई दिल्ली स्टेशन पर पहुंचे। तब मेरी आयु मात्र चार वर्ष की थी। मैं पैदल चलने की जिद कर रहा था। घर के सदस्य आगे निकल गए। मैं पीछे रह गया। अकेला समझकर मैं रोने लगा। थोड़ी देर के बाद एक लाल वर्दी वाला कुली आया। वह मुझे गोदी में उठाकर तेजी से आगे चला और पिताजी को सौंप दिया। सारी घटना जानकर सब सुख-दुःख की भावनाओं में तैरने लगे।

HBSE 6th Class Hindi बचपन Important Questions and Answers

प्रश्न 1.
लेखिका को बचपन की किन-किन चीजों और बातों की अभी तक याद है?
उत्तर :
लेखिका को निम्नलिखित चीजों व बातों की अभी तक याद है- दो ट्यूनिकों की-एक चॉकलेट रंग की, दूसरी ग्रे कलर की। मोजे और स्टॉकिंग की। इतवार को मोज़े धोने और बूट पॉलिश करने की। लम्बी सैर पर निकलने की। हर शनिवार को औलिव ऑयल या केस्टर ऑयल पीने की।

प्रश्न 2.
लेखिका को बचपन में पहनी गई किन-किन फ्रॉकों की अभी तक याद है?
उत्तर :
लेखिका को बचपन में पहनी गई निम्नलिखित फ्रांकों की अब तक याद है-
1. हल्की नीली और पीली धारीवाला फ्रॉक। गोल कॉलर और बाजू पर भी गोल कफ।
2. एक हल्के गुलाबी रंग का बारीक चुन्नटों वाला घेरदार फ्रॉक। नीचे गुलाबी रंग की फ्रिल।
3. उन दिनों फ्रॉक के ऊपर की जेब में रूमाल और बालों में इतराते रंग-बिरंगे का चलन था।
4. लैमन कलर का बड़े प्लेटोंवाला गर्म फ्रॉक, जिसके नीचे फर टॅकी थी।

प्रश्न 3.
बचपन के खाने की चीज़ों में क्या बदलाव हो गया है?
उत्तर :
बचपन की कुल्फी आइसक्रीम हो गई है। कचौड़ी-समोसा पैटीज में बदल गया है। शहतूत, फाल्से और खसखस के शरबत कोक-पेप्सी में। उन दिनों कोक नहीं, लैम्नेड, विमटो मिलती थी। शिमला और नई दिल्ली में बड़े हुए बच्चों को बैंगर्स और डेविको रेस्तरों की चॉकलेट और पेस्ट्री मजा देने वाली होती।

प्रश्न 4.
लेखिका ने बचपन के दिनों के चने जोर गरम की क्या विशेषता बताई है?
उत्तर :
लेखिका बताती है कि चने जोर गरम और अनारदाने का चूर्ण! हाँ, चने जोर गरम की पुड़िया जो तब थी, वह अब भी नजर आती है। पुराने कागजों से बनाई हुई इस पुड़िया में निरा हाथ का कमाल है। नीचे से तिरछी लपेटते हुए ऊपर से इतनी चौड़ी कि चने आसानी से हथेली पर पहुंच जाएँ। एक वक्त था, जब फिल्म का गाना-चना जोर गरम बाबू मैं लाया मजेदार, चना जोर गरम-यह गाना उन दिनों स्कूल के हर बच्चे को आता था।

कुछ बच्चे पुड़िया पर तेज़ मसाला बुरकवाते। पूरा गिरजा मैदान घूमने तक यह पुड़िया चलती। एक-एक चना-पापड़ी मुंह में डालने और कदम उठाने में एक खास ही लय-रफ्तार थी।

प्रश्न 5.
लेखिका जाखू के पहाड़ के सौन्दर्य का वर्णन किन शब्दों में करती है?
उत्तर :
लेखिका बताती है कि शाम को रंग-बिरंगे गुब्बारे। सामने जाखू का पहाड़। ऊँचा चर्च। चर्च की घटियाँ बजतीं तो दूर-दूर तक उनकी गूंज फैल जाती। लगता, इसके संगीत से प्रभु ईशू स्वयं कुछ कह रहे हैं। सामने आकाश पर सूर्यास्त हो रहा है। गुलाबी सुनहरी धारियों नीले आसमान पर फैल रही हैं। दूर-दूर फैले पहाड़ों के मुखड़े गहराने लगे और देखते-देखते बत्तियाँ टिमटिमाने लगीं। रिज पर की रौनक और मॉल की दुकानों की चमक के भी क्या कहने! स्केंडल प्वाइंट की भीड़ से उभरता कोलाहल।

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प्रश्न 6.
चश्मे के डॉक्टर ने लेखिका को क्या आश्वासन दिया था?
उत्तर :
डॉक्टर ने आश्वासन दिया था कि दूध पिया करो। कुछ दिनों चश्मा पहनोगी तो यह उतर जाएगा। वैसे डॉक्टर साहिब ने पूरा आश्वासन दिया था, लेकिन चश्मा तो अब तक नहीं उतरा। नम्बर बस कम ही होता रहा। मैं अपने-आप इसकी जिम्मेवार हूँ।

प्रश्न 7.
अब लेखिका क्या पहनना-ओढ़ना पसन्द करती है?
उत्तर :
लेखिका इन दिनों शिमला में सिर पर टोपी लगाना पसन्द करती है। उसने कई रंगों की टोपियों जमा कर ली हैं। कहाँ दुपट्टों का ओढ़ना और कहाँ सहज-सहल सुभीते वाली हिमाचली टोपियाँ!

प्रश्न 8.
इस पाठ में घोड़ों के बारे में क्या बताया गया है?
उत्तर :
शिमला रिज पर घोड़ों की सवारी मजेदार होती है।

  • बच्चे घोड़ों को कुछ कमतर समझते थे। उन पर हँसते थे।
  • ननिहाल के घोड़े खूब हष्ट-पुष्ट और खूबसूरत होते थे।

प्रश्न 9.
लेखिका का बचपन 1935-40 के बीच शिमला में अधिक गुजरा। उन दिनों के शिमला के विषय में अनुमान लगा कर बताइए।
उत्तर :
लेखिका ने 1935-40 के मध्य शिमला का जो खाका खींचा है, उसे पढ़ कर प्रतीत होता है कि उन दिनों शिमला बहुत खूबसूरत पर्वतीय शहर रहा होगा। छोटी-छोटी पहाड़ियों से घिरा शहर, थोड़ी चढ़ाई चढ़ कर गिरजा मैदान पहुँचना, उतराई पर माल का होना, वहाँ की आकर्षक दुकानें बड़ी अच्छी लगती होंगी।

वहाँ शाम का दृश्य अत्यंत मनमोहक रहता था। सूर्यास्त के समय आसमान पर गुलाबी सुनहरी धारियाँ फैल जाती थी। पहाड़ों के मुखड़े गहराने लगते थे और बत्तियाँ टिमटिमाने लगती थीं। रिज की रौनक और माल की दुकानों की चमक देखते बनती थी। स्केंडल प्वाइंट पर भीड़ का कोलाहल रहता था। उन दिनों शिमला कालका मिनी ट्रेन चलती थी। उसमें सवारी का अपना ही मज़ा रहता था।

प्रश्न 10.
उम्र बढ़ने के साथ-साथ लेखिका में क्या-क्या बदलाव हुए है? पाठ से मालूम करके लिखो।
उत्तर :
उम्र बढ़ने के साथ-साथ लेखिका में निम्नलिखित बदलाव हुए-

  • उसके पहनने-ओढने के कपड़ों में बदलाव आया है। पहले वह नीले, जामुनी, ग्रे, काले, चॉकलेटी रंग के कपड़े पहनती थी। अब सफेद और हल्के रंग के कपड़े पहनना पसन्द करती है।
  • पोशाक भी बदल गई हैं। पहले फ्रॉक, निकर-वॉकर, स्कर्ट, लहैगे, गरारे पहनना पसन्द करती थी अब चूड़ीदार और घेरदार कुर्ते पहनना अच्छा लगता है।

बचपन गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या/आशय स्पष्ट करना

1. हाँ, मैं इन दिनों कुछ बड़ा-बड़ा यानी उम्र में सयाना महसूस करने लगी हूँ। शायद इसलिए कि पिछली शताब्दी में पैदा हुई थी। मेरे पहनने-ओढ़ने में भी काफी बदलाव आए हैं। पहले मैं रंग-बिरंगे कपड़े पहनती रही हूँ। नीला-जामुनी-प्रे काला-चॉकलेटी। अब मन कुछ ऐसा करता है कि सफेद पहनो। गहरे नहीं, हलके रंग। मैंने पिछले दशकों में तरह-तरह की पोशाकें पहनी है। पहले फ्रॉक, फिर निकर-वॉकर, स्कट। लहँगे। गरारे और अब चूड़ीदार और घेरेदार कुत।

प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश कृष्णा सोबती द्वारा लिखित पाठ ‘बचपन’ से अवतरित है। इसमें लेखिका अपने बचपन का स्मरण कर रही है।

व्याख्या :
लेखिका बताती है कि अब मैं खुद को बड़ी उम्र की महसूस करने लगी हूँ। शायद इसका कारण यह है कि पिछली शताब्दी में जन्मी थी। तब से अब तक मेरे कपड़ों के ढंग में काफी परिवर्तन आए हैं। बचपन में मुझे रंग-बिरंगे कपड़े पहनना पसंद था। तब मैं नीला-जामुनी, ग्रे, काला तथा चॉकलेटी रंग पसंद करती थी। अब बड़ी उम्र में सफेद रंग या हल्के रंग के कपड़े पहनने का मन रहता है। पिछले दशकों में मैंने तरह-तरह के कपड़े पहने हैं। पहले फ्रॉक पहनती थी. फिर निकर-वॉकर और फिर स्कर्ट पहनने लगी। मैंने लहँगे, गरारे भी खूब पहने। अब मैं चूड़ीदार पजामा तथा घरेदार कुर्ते पहनना पसंद करती हूँ।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :
1. यह गद्यांश किस पाठ से लिया गया है? इसके लेखिका कौन हैं?
2. लेखिका स्वयं को कैसा महसूस करने लगी है और क्यों?
3. लेखिका के पहनने-ओढ़ने में क्या बदलाव आया है?
4. लेखिका ने क्या-क्या पोशाकें पहनी हैं?
उत्तर:
1. यह गद्यांश ‘बचपन’ शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसकी लेखिका हैं-कृष्णा सोबती।
2. लेखिका स्वयं को कुछ बड़ा-बड़ा यानी सयाना महसूस करने लगी है। इसका कारण यह है कि वह पिछली शताब्दी में पैदा हुई थी।
3. लेखिका तरह-तरह के कपड़े पहनती रही है। वह पहले नौले-जामुनी-प्रे काला-चॉकलेटी रंग के कपड़े पहनती थी। अब उसे सफेद रंग के कपड़े अच्छे लगते हैं। अब वह हल्के रंग के कपड़े पसन्द करने लगी है।
4. लेखिका पहले फ्रॉक, निकर-वॉकर, स्कर्ट, लहँगे पहनती थी और अब चूड़ीदार और घेरदार कुर्ते पहनती है।

बहुविकल्पी प्रश्न सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. इन दिनों लेखिका स्वयं को कैसा महसूस करने लगी
(क) सयाना
(ख) युवा
(ग) मूर्ख
(घ) चालाक
उत्तर:
(क) सयाना

2. किस बात में काफी बदलाव आए हैं?
(क) खाने-पीने में
(ख) रहन-सहन में
(ग) पहनने-ओढ़ने में
(घ) घूमने-फिरने में
उत्तर:
(ग) पहनने-ओढ़ने में

3. लेखिका पहले किस रंग के कपड़े पहनती रही है?
(क) नौले-जामुनी
(ख) ग्रे-काले
(ग) चॉकलेटी
(घ) ये सभी
उत्तर:
(घ) ये सभी

4. अब लेखिका का मन कैसे कपड़े पहनने का करता है?
(क) गहरे रंग के
(ख) हल्के रंग के
(ग) चमकीले
(घ) रंग-बिरंगे
उत्तर:
(ख) हल्के रंग के

5. ‘दशक’ में कितने वर्ष होते हैं?
(क) आठ
(ख) दस
(ग) बीस
(घ) सौ।
उत्तर:
(ख) दस

HBSE 6th Class Hindi Solutions Vasant Chapter 2 बचपन

2. पिछली सदी में तेज रफ्तार वाली गाड़ी वही थी। कभी-कभी हवाई जहाज भी देखने को मिलते! दिल्ली में जब भी उनकी आवाज आती, बच्चे उन्हें देखने बाहर दौड़ते। दीखता एक भारी-भरकम पक्षी उड़ा जा रहा है पंख फैलाकर। यह देखो और वह गायब। उसकी स्पीड ही इतनी तेज लगती। हाँ, गाड़ी के मॉडलवाली दुकान के साथ एक और ऐसी दुकान थी जो मुझे कभी नहीं भूलती। यह वह दुकान थी जहाँ मेरा पहला चश्मा बना था। वहाँ आँखों के डॉक्टर अंग्रेज थे।

प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ कृष्णा सोबती के संस्मरण ‘बचपन’ से ली गई हैं। इनमें लेखिका अपने बचपन की घटनाओं को याद करती है।

व्याख्या :
लेखिका बताती है कि उसके बचपन के दिनों में सबसे तेज चलने वाली गाड़ी शिमला-कालका ट्रेन थी। (अब इसे सबसे धीमी ट्रेन माना जाता है) पिछली सदी में वही तेज रफ्तारवाली गाड़ी थी। हाँ, कभी-कभी आकाश में उड़ता हवाई जहाज भी दिखाई दे जाता था। दिल्ली में हवाई जहाज की आवाज सुनकर बच्चे निकलकर उसे देखने लगते।

ऐसा लगता था कि कोई भारी-भरकम पक्षी उड़ा जा रहा है। देखते-देखते वह गायब हो जाता था। उसकी गति बहुत अधिक होती थी। जिस दुकान पर इस कालका-शिमला ट्रेन का मॉडल रखा हुआ था. उसके पास ही एक अन्य दुकान थी, जहाँ चश्मे बनाए जाते थे। यहीं मेरा (लेखिका का) पहला चश्मा बना था। वहाँ आँखों की जाँच करने के लिए एक अंग्रेज डॉक्टर होता था।

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न :

1. पाठ की नाम और लेखिका का नाम बताओ।
2. इस गद्यांश में किस गाड़ी की बात कही गई है?
3. हवाई जहास किनमें क्या उत्सुकता जगाते थे?
4. तब हवाई जहाज कैसा प्रतीत होता था?
5. लेखिका को कौन-सी दुकान अभी तक नहीं भूलती और क्यों?
उत्तर:
1. पाठ का नाम – बचपन
लेखिका का नाम – कृष्णा सोबती।

2. इस गद्यांश में शिमला-कालका ट्रेन की बात कही गई है। उसी का मॉडल एक दुकान में रखा हुआ था।
3. दिल्ली के बच्चे जब भी हवाई जहाज़ की आवाज़ सुनते, वे उसे देखने के लिए घर से बाहर निकल कर दौड़ पड़ते थे।
4. तब हवाई जहाज एक भारी-भरकम पक्षी के समान उडता प्रतीत होता था।
5. लेखिका को गाड़ी के मॉडल के पास वाली वह दुकान कभी नहीं भूलती, क्योंकि उस दुकान पर उसका पहला चश्मा बना था। वहाँ आँखों का डॉक्टर एक अंग्रेज था।

बहुविकल्पी प्रश्न सही विकल्प चुनकर लिखिए

1. बच्चे किसकी आवाज सुनकर उसे देखने दौड़ पड़ते
(क) रेलगाड़ी की
(ख) हवाई जहाज़ की
(ग) घोड़ों की
(घ) बारिश की
उत्तर:
(ख) हवाई जहाज़ की

2. बच्चों को हवाई जहाज़ कैसा प्रतीत होता था?
(क) भारी-भरकम पक्षी
(ख) जानवर
(ग) काला धब्या
(घ) पहाड़
उत्तर:
(क) भारी-भरकम पक्षी

3. मॉडल वाली दुकान में किसका मॉडल था?
(क) शिमला-कालका ट्रेन का
(ख) दिल्ली-शिमला ट्रेन का
(ग) हवाई जहाज का
(घ) चश्मों का
उत्तर:
(क) शिमला-कालका ट्रेन का

4. मॉडल वाली दुकान के साथ किसकी दुकान थी?
(क) कन्फैक्शनरी की
(ख) चश्मे की
(ग) डॉक्टर की
(घ) किराने की
उत्तर:
(ख) चश्मे की

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बचपन Summary in Hindi

बचपन पाठ का सार

लेखिका बताती है कि वह इतनी बड़ी आयु की है कि वह बच्चों की दादी या नानी भी हो सकती है, पर परिवार में उसे लोग जीजी कहकर पुकारते हैं। अब वह स्वयं को सयाना महसूस करती है। पहले वह रंग-बिरंगे कपड़े पहना करती थी, पर अब उसका मन सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनने को करता है।

अब वह चूड़ीदार पजामे और घेरेदार कुरते पहनना पसंद करती है। सब कुछ बदल गया है। लेखिका को याद है कि बचपन में वह कैसे फ्रॉक पहना करती थी। एक फ्रॉक हल्की नीली धारीवाला था, गोल कॉलर और बाजू पर भी गोल कफ। दुसरा फ्रॉक गुलाबी रंग का चुन्नटों वाला था।

दूसरा फ्रॉक गुलाबी रंग का चुन्नटों वालाा था। उन दिनों फ्रॉक के ऊपर की जेब में रूमाल रखने और बालों में रिबन लगाने का फैशन था। लैमन कलर का गर्म फ्रॉक था, जिस पर फर टॅकी थी। लेखिका को तब की दो ट्यूनिकों की भी याद है-एक चॉकलेट रंग की थी और दूसरी ग्रे। बचपन में उसे अपने मोजे खुद धोने पड़ते थे।

इतवार इसी काम में लगता था। इसके बाद जूतों को पॉलिश से चमकाया जाता था। उसे अब भी बूट पॉलिश करना अच्छा लगता है। अब तो नए-नए ढंग के जूते आ गए हैं। नए-नए जूते पैरों को काटते थे, अत: रुई पास रखी जाती थी। हर शनिवार को ऑलिव ऑयल या कैस्टर ऑयल पीना पड़ता था।

उन दिनों कुछ घरों में ग्रामोफोन थे। तब रेडियो और टेलीविजन नहीं थे। तब हम कुलफी खाते थे जो अब आइसक्रीम हो गई है। तब की कचौड़ी-समोसा अब पैटीज में बदल गया है। तब शहतूत, फालसे और खसखस के शरबत पिए जाते थे और अब कोक-पेप्सी। तब शिमला और नई दिल्ली के बच्चों को बैंगर्स और डेविको रेस्तराँ की चॉकलेट और पेस्ट्री मजा देती थी।

तब लेखिका और उसके भाई-बहनों की ड्यूटी शिमला मॉल से ब्राउन ब्रेड लाने की लगती थी। उसका घर मॉल से ज्यादा दूर नहीं था। उन्हें हफ्ते में एक बार चॉकलेट खरीदने की छूट थी। उसे वह रात के खाने के बाद मजे ले-लेकर खाती थी।

लेखिका को शिमला के काफल भी बहुत याद आते हैंखट्टे-मीठे। चेस्टनट एक और गजब की चीज थी। इसे आग पर भूनकर और छीलकर खाया जाता था। अनारदाने का चूर्ण भी उसे खूब याद आता है। लेखिका ने छुटपन में शिमला रिज पर बहुत मजे किए। वहीं घुड़सवारी भी की। शिमला का प्राकृतिक सौंदर्य भी लुभावना होता था। स्कैंडल प्वाइंट पर खूब भीड़ उमड़ती थी। उसके सामने एक दुकान हुआ करती थी, जिसके शोरूम में शिमला-कालका ट्रेन का मॉडल बना हुआ था।

पिछली सदी में तेज रफ्तार वाली गाड़ी वही थी। कभी-कभी हवाई जहाज भी देखने को मिलते थे। वहीं एक दुकान थी, जहाँ लेखिका का पहला चश्मा बना था। वहाँ आँखों के अंग्रेज डॉक्टर थे। शुरू-शुरू में यह अटपटा-सा लगता था। मुझे चचेरे भाई चिढ़ाते भी थे। उनके जाने के बाद मैं शीशे के सामने अपनी शक्ल देखती थी। अब तो यह चश्मा चेहरे के साथ घुल-मिल गया है। अब मैं टोपी लगाना भी पसंद करती हूँ। मैंने कई रंगों की टोपियाँ जमा कर ली हैं।

बचपन शब्दार्थ

फ्रिल-झालर (Frill)। ऑलिव ऑयल-जैतून का तेल (Olive oil)। कैस्टर ऑयल-अरंडी का तेल (Castor oil)। खुराक-निश्चित मात्रा (Dose)। स्टॉक-संग्रह, भंडार (Stock)। बुरकना-चूर्ण जैसी वस्तु को छिड़कना (To sprinkle)। छुटपन-बचपन (Childhood)। हृष्ट-पुष्ट-तगड़ा, हट्टा-कट्टा (Healthy)। कोलाहल-शोर, हंगामा, हल्ला (Noise)। अटपटा-टेढ़ा, कठिन, ऊटपटाँग (Strange)। आश्वासन-भरोसा (Belief)। खीजना-झुंझलाना, क्रुद्ध होना (Annoyed)। सहल-आसान (Simple)।

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