HBSE 10th Class Hindi Solutions Kshitij Chapter 9 संगतकार

Haryana State Board HBSE 10th Class Hindi Solutions Kshitij Chapter 9 संगतकार Textbook Exercise Questions and Answers.

Haryana Board 10th Class Hindi Solutions Kshitij Chapter 9 संगतकार

HBSE 10th Class Hindi संगतकार Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
संगतकार के माध्यम से कवि किस प्रकार के व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाह रहा है?
उत्तर-
संगतकार के माध्यम से कवि ऐसे लोगों की ओर संकेत करना चाह रहा है जिनका किसी कार्य के करने में योगदान तो पूरा रहता है किंतु उनका नाम कोई नहीं जानता। सारा श्रेय मुखिया को ही जाता है। कवि यह स्पष्ट करना चाहता है कि समाज में हर व्यक्ति का अपना-अपना महत्त्व है। जिस प्रकार कोई टीम केवल कैप्टन के प्रयास से नहीं जीतती, अपितु हर खिलाड़ी के प्रयास से जीतती है। अतः जीत का श्रेय हर खिलाड़ी को मिलना चाहिए।

प्रश्न 2.
संगतकार जैसे व्यक्ति संगीत के अलावा और किन-किन क्षेत्रों में दिखाई देते हैं?
उत्तर-
संगतकार जैसे व्यक्ति संगीत के अलावा नाटक, फिल्म, विभिन्न खेलों की टीम, राजनीति आदि अनेक क्षेत्रों में दिखलाई पड़ते हैं। वैज्ञानिक क्षेत्र में प्रमुख वैज्ञानिक के साथ अनेक दूसरे वैज्ञानिक भी काम करते हैं। किंतु किसी महत्त्वपूर्ण खोज का श्रेय मुख्य वैज्ञानिक को दिया जाता है। कहने का अभिप्राय है कि काम तो अनेक लोग करते हैं, किंतु सफलता का श्रेय मुख्य व्यक्ति को ही दिया जाता है।

प्रश्न 3.
संगतकार किन-किन रूपों में मुख्य गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं?
उत्तर-
संगतकार अनेक प्रकार से मुख्य गायक-गायिकाओं की सहायता करते हैं, जैसे वे अपनी आवाज़ और गूंज को मुख्य गायक की आवाज़ और गूंज से मिलाकर उसे बल प्रदान करते हैं। वे मुख्य गायक द्वारा कहीं गहरे में चले जाने पर या आवाज़ को लंबी खींचने पर उनकी स्थायी पंक्ति अर्थात् गीत की टेक को पकड़े रखते हैं और गीत को बेसुरा नहीं होने देते। वे मुख्य गायक को मूल स्वर पर लौटा लाने का काम भी करते हैं। जब मुख्य गायक की आवाज़ थककर बिखरने व टूटने लगती है तो उस समय भी संगतकार उसे शक्ति प्रदान करते हैं। उसे अकेला नहीं पड़ने देते।

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प्रश्न 4.
भाव स्पष्ट कीजिए और उसकी आवाज़ में जो एक हिचक साफ सुनाई देती है या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है उसे विफलता नहीं उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।
उत्तर-
देखिए काव्यांश ‘3’ का अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न ‘ग’ भाग।

प्रश्न 5.
किसी भी क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने वाले लोगों को अनेक लोग तरह-तरह से अपना योगदान देते हैं। कोई एक उदाहरण देकर इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर-
समाज में ऐसे अनेक उदाहरण मिल जाते हैं। हम किसी भी विद्यालय के प्रधानाध्यापक या मुख्याध्यापकों का उदाहरण ले सकते हैं। विद्यालय को विकास के पथ पर ले जाने की सफलता का श्रेय प्रधानाचार्य को मिलता है जबकि उसमें अध्यापकों एवं अन्य कर्मचारियों का सहयोग भी रहता है। अकेला प्रधानाचार्य कुछ नहीं कर सकता। इसी प्रकार संसार के बड़े-बड़े सफल लोगों के उदाहरण भी दिए जा सकते हैं, जैसे-बिल गेट्स, अंबानी, लक्ष्मी मित्तल को देख लीजिए। इसकी सफलता के पीछे मैनेजमैंट से जुड़े लोगों की पूरी टीम है। ये लोग दिन-रात परिश्रम करते हैं। अकेले व्यक्ति के प्रयास से इतनी सफलता नहीं मिलती। अतः स्पष्ट है कि किसी भी महान् व्यक्ति की सफलता में अनेक लोगों का योगदान रहता है। कहा भी गया है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।

प्रश्न 6.
कभी-कभी तारसप्तक की ऊँचाई पर पहुँचकर मुख्य गायक का स्वर बिखरता नज़र आता है उस समय संगतकार उसे बिखरने से बचा लेता है। इस कथन के आलोक में संगतकार की विशेष भूमिका को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
संगतकार की प्रमुख भूमिका यही है कि वह मुख्य गायक का पूरा सहयोग करता है। जब भी उसका स्वर टूटने लगता है तो संगतकार उनकी आवाज़ में अपनी आवाज़ मिलाकर उन्हें बल देता है, श्रोताओं को इसका पता ही नहीं चलता। यदि मुख्य गायक बिना संगतकार के गीत गा रहा है तो उसका स्वर बीच-बीच में बिखरता रहेगा। संगतकार ही उसके स्वर को बिखरने से बचाता है। यही संगतकार की विशिष्ट भूमिका है।

प्रश्न 7.
सफलता के चरम शिखर पर पहुँचने के दौरान यदि व्यक्ति लड़खड़ाते हैं तब उसे सहयोगी किस तरह सँभालते हैं? ‘
उत्तर-
सफलता के चरम शिखर पर पहुँचने के दौरान यदि व्यक्ति लड़खड़ाते हैं, तब उसके सहयोगी उसे अपना पूर्ण योगदान या सहयोग देकर सँभालते हैं। उसे मानसिक तौर पर सहारा देने हेतु अपनी सहानुभूति भी देते हैं। उसके साथ रहते हुए बार-बार उसकी योग्यताओं का अहसास करवाते रहते हैं ताकि वह पहले से अधिक परिश्रम कर सके। . वे अपनी सारी शक्ति उसके लिए लगा देते हैं।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 8.
कल्पना कीजिए कि आपको किसी संगीत या नृत्य समारोह का कार्यक्रम प्रस्तुत करना है लेकिन आपके सहयोगी कलाकार किसी कारणवश नहीं पहुंच पाए
(क) ऐसे में अपनी स्थिति का वर्णन कीजिए।
(ख) ऐसी परिस्थिति का आप कैसे सामना करेंगे?
उत्तर-
(क) ऐसी स्थिति में आरंभ में तो थोड़ी चिंता होगी कि सहयोगी कलाकार के बिना काम करना कठिन होगा। किंतु समारोह का कार्यक्रम प्रस्तुत करना अति आवश्यक है तो मन में यह निश्चित करके अपना गीत व नृत्य अवश्य करूँगा।

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(ख) ऐसी स्थिति को सँभालने के लिए सहयोगी कलाकारों से संपर्क करके उन्हें बुलाने का प्रयास करूंगा। उनसे संपर्क न होने की स्थिति में किसी नये संगतकार को बुलाने की कोशिश करूँगा। कुछ क्षणों के लिए नये सहयोगी कलाकारों के साथ अभ्यास करूँगा ताकि हमारी उनसे ताल-मेल ठीक बैठ जाए। यदि ऐसा न हो सका तो कार्यक्रम को स्थगित कर दूंगा तथा कार्यक्रम कि अन्य तिथि की घोषणा कर दूंगा।

प्रश्न 9.
आपके विद्यालय में मनाए जाने वाले सांस्कृतिक समारोह में मंच के पीछे काम करने वाले सहयोगियों की भूमिका पर एक अनुच्छेद लिखिए। .
उत्तर-
विद्यालय में मनाए जाने वाले सांस्कृतिक समारोह में जितना महत्त्व मंच पर कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले का है, उतना ही महत्त्व मंच के पीछे काम करने वाले सहयोगियों का भी है। मंच पर उद्घोषणा करने वाले सहयोगी के समान ही अन्य सहयोगी कलाकारों का भी महत्त्व है। जिस प्रकार अच्छी नींव पर मजबूत भवन खड़ा हो सकता है। वैसे ही अच्छे एवं कुशल सहयोगी कलाकारों के बल पर ही कोई भी सांस्कृतिक कार्यक्रम सफल होता है। संगीत व नृत्य के कार्यक्रम तो मंच के पीछे के सहयोगी कलाकारों के बिना होना संभव ही नहीं है। संगतकार नृत्य एवं संगीत के कार्यक्रमों की जान होते हैं। वे कार्यक्रम को जीवंतता प्रदान करते हैं। प्रकाश की अनुकूल व्यवस्था मंच के पीछे काम करने वाले ही करते हैं। प्रकाश की व्यवस्था का नाटक की प्रस्तुति में तो अत्यधिक महत्त्व रहता है। इसी प्रकार मंच की साज-सज्जा का दर्शक के मन पर सर्वप्रथम प्रभाव पड़ता है। साज-सज्जा का प्रभाव सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति पर पड़ता है। इसलिए मंच साज-सज्जा करने वाले सहायकों का महत्त्व भी उल्लेखनीय है। ध्वनि व्यवस्था का भी अपना ही महत्त्व है। ध्वनि की उचित व्यवस्था के अभाव में कार्यक्रम संभव नहीं है। किसी नृत्य की प्रस्तुति में मंच के पीछे गायन या वाद्य ध्वनि प्रस्तुत करने वाले कलाकारों की भूमिका का अत्यधिक महत्त्व है। अतः निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि सांस्कृतिक समारोह की प्रस्तुति में मंच के पीछे काम करने वाले सहयोगियों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

प्रश्न 10.
किसी भी क्षेत्र में संगतकार की पंक्ति वाले लोग प्रतिभावान होते हुए भी मुख्य या शीर्ष स्थान पर नहीं पहुँच पाते होंगे?
उत्तर-
किसी भी क्षेत्र में संगतकार की पंक्ति वाले प्रतिभावान लोग मुख्य कलाकार नहीं बन पाते। इसका मुख्य कारण है कि वे मुख्य गायक या कलाकार के सहायक के रूप में आते हैं। यदि वे आजीवन तबला, हारमोनियम आदि वाद्ययंत्र ही बजाते रहें तो मुख्य गायक या कलाकार नहीं बन सकते। यदि वे स्वतंत्र रूप से अपनी प्रतिभा दिखाएँ तो वे मुख्य कलाकार बन सकते हैं। भले ही वे अपना तबला या हारमोनियम के बजाने की कला का प्रदर्शन करें। हाँ, यदि दूसरों के सहायक बनकर काम करेंगे तो उन्हें मुख्य कलाकार बनने का अवसर नहीं मिलेगा।

यदि संगतकार प्रतिभावान है तो वह शीघ्र ही अपनी कला में इतनी प्रसिद्धि प्राप्त कर लेगा कि उसे मुख्य कलाकार के रूप में स्वीकार कर लिया जाता है। प्रायः देखने में आया है कि संगतकार द्वितीय श्रेणी की प्रतिभा वाले होते हैं। इसलिए वे सदा मुख्य कलाकार के सहायक के रूप में बने रहते हैं। इसमें संदेह नहीं कि संगतकार हमेशा ही मंच के पीछे रहते हैं, इसलिए वे प्रतिभा संपन्न होकर भी श्रेष्ठ स्थान प्राप्त नहीं कर सकते।

पाठेतर सक्रियता

आप फिल्में तो देखते ही होंगे। अपनी पसंद की किसी एक फिल्म के आधार पर लिखिए कि उस फिल्म की सफलता में अभिनय करने वाले कलाकारों के अतिरिक्त और किन-किन लोगों का योगदान रहा?
उत्तर-
विद्यार्थी अपने अध्यापक/अध्यापिका की सहायता से स्वयं करें।

आपके विद्यालय में किसी प्रसिद्ध गायिका की गीत प्रस्तुति का आयोजन है।
(क) इस संबंध पर सूचना पट के लिए एक नोटिस तैयार कीजिए।
(ख) गायिका व उसके संगतकारों का परिचय देने के लिए आलेख (स्क्रिप्ट) तैयार कीजिए।
उत्तर-
(क) नोटिस
विद्यालय के सांस्कृतिक क्लब द्वारा एक गीतों भरी संध्या का आयोजन विद्यालय के सांस्कृतिक भवन में दिनांक 5.5.20….. को सायं पाँच बजे किया जा रहा है। देशभर में ही नहीं अपितु संसार भर में सुप्रसिद्ध गायिका मुनिश्वरी देवी और मनोज देव अपने-अपने मधुर स्वरों में गंगा बहाने आ रहे हैं। आप अपने माता-पिता के साथ इस आयोजन में सादर आमंत्रित हैं। आप समय पर पहुँचकर अपना-अपना स्थान ग्रहण करें।

रामपाल
अध्यक्ष
विद्यालय सांस्कृतिक क्लब

(ख) स्वरों की मल्लिका मुनिश्वरी देवी देशभर में अपनी मधुर आवाज़ के लिए प्रसिद्ध हैं। इनका नाम गीत-संगीत की दुनिया में बड़े आदर से लिया जाता है। इन्होंने अनेक फिल्मों के लिए गीत गाए हैं। बाल गीतों और भजनों के क्षेत्र में भी इन्होंने अपनी मधुर ध्वनि का सिक्का जमाया हुआ है। इनके साथ संगतकारों की पूरी टीम है। इस सभा में हारमोनियम पर पवन कुमार, तबला पर मुनीश, सारंगी पर उदय शर्मा, बाँसुरी पर अजीज तथा मृदंग पर गुरविन्द्र पाल साथ देंगे।

यह भी जानें

सरगम संगीत के लिए सात स्वर तय किए गए हैं। वे हैं-षडज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत और निषाद। इन्हीं नामों के पहले अक्षर लेकर इन्हें सा, रे, ग, म, प, ध और नि कहा गया है।
सप्तक-सप्तक का अर्थ है सात का समूह। सात शुद्ध स्वर हैं इसीलिए यह नाम पड़ा। लेकिन ध्वनि की ऊँचाई और निचाई के आधार पर संगीत में तीन तरह के सप्तक माने गए हैं। यदि साधारण ध्वनि है तो उसे ‘मध्य सप्तक’ कहेंगे और ध्वनि मध्य सप्तक से ऊपर है तो उसे ‘तार सप्तक’ कहेंगे तथा यदि ध्वनि मध्य सप्तक से नीचे है तो उसे ‘मंद्र सप्तक’ कहते हैं।

HBSE 10th Class Hindi संगतकार Important Questions and Answers

विषय-वस्तु संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
मुख्य गायक एवं संगतकार के संबंधों पर सार रूप में प्रकाश डालिए।
उत्तर-
मुख्य गायक और संगतकार का संबंध प्राचीनकाल से चला आ रहा है। मुख्य गायक और संगतकार का संबंध चोलीदामन का संबंध है। मुख्य गायक को संगतकारों के सहयोग के बिना प्रसिद्धि नहीं मिल सकती तथा मुख्य गायक के बिना संगतकारों की कला महत्त्वहीन ही रहती है। संगतकार मुख्य गायक की आवाज़ में अपनी आवाज़ मिलाकर सदा से उसे बल प्रदान करता आया है। वह मुख्य कलाकार या गायक की आवाज़ के मुकाबले में अपनी आवाज़ को कमज़ोर व धीमा रखता आया है।

प्रश्न 2.
गायन के क्षेत्र में प्रयोग होने वाले ‘स्थायी’ एवं ‘अंतरा’ शब्दों का अर्थ समझाइए।
उत्तर-
स्थायी-गायन के क्षेत्र में ‘स्थायी’ का अर्थ गीत की मुख्य पंक्ति या टेक है जिसे बार-बार दोहराया जाता है।।
अंतरा-‘अंतरा’ गीत की टेक की पंक्ति के अतिरिक्त दूसरी पंक्तियों को कहते हैं। गीत में एक से अधिक चरण या अंतरे होते हैं। हर अंतरे के पश्चात् स्थायी अर्थात् टेक की पंक्तियाँ होती हैं।

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प्रश्न 3.
सरगम किसे कहते हैं?
उत्तर-
‘सरगम’ संगीत के क्षेत्र में सात स्वरों के समूह को सरगम कहते हैं। संगीत के सात स्वर हैं-षडज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम्, धैवत और निषाद। इन्हीं नामों के पहले अक्षर लेकर इन्हें सा, रे, ग, म, प, ध और नि कहा गया है।

प्रश्न 4.
सप्तक किसे कहते हैं? उसके कितने भेद होते हैं?
उत्तर-
संगीत के क्षेत्र में सप्तक का अत्यधिक महत्त्व है। सप्तक का अर्थ है-सात का समूह । सात शुद्ध स्वर हैं इसीलिए यह नाम पड़ा। लेकिन ध्वनि की ऊँचाई और निचाई के आधार पर संगीत में तीन तरह के सप्तक माने गए हैं। यदि साधारण ध्वनि से है तो उसे ‘मध्य सप्तक’ कहेंगे और ध्वनि मध्य सप्तक से ऊपर है तो उसे ‘तार सप्तक’ कहेंगे तथा ध्वनि मध्य सप्तक से नीचे है तो उसे ‘मंद्र सप्तक’ कहते हैं।

संदेश/जीवन-मूल्यों संबंधी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 5.
‘संगतकार’ कविता का उद्देश्य/मूलभाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
‘संगतकार’ शीर्षक कविता में कवि का लक्ष्य मुख्य कलाकार के सहयोगी कलाकारों की भूमिका के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें सम्मान प्रदान करना है। ठीक इसी प्रकार समाज के विभिन्न क्षेत्रों में भूमिका रूप में रहते हुए समाज के विकास में योगदान देने वाले लोगों को भी सम्मान देने की भावना को बढ़ावा देना है। संगतकार भले ही मुख्य कलाकार के सहायक हैं तथा उसके पीछे-पीछे चलते हैं। उसकी आवाज़ और गूंज में अपनी आवाज़ और गूंज मिलाकर उसे शक्ति व बल प्रदान करते हैं। उसे गीत के मुख्य स्वर से विचलित नहीं होने देते। उनके बिना मुख्य गायक सफल नहीं हो सकता। इसी प्रकार समाज में सामान्य लोगों के सहयोग के बिना शासक भी सफल नहीं हो सकता। अतः कविता का परम लक्ष्य संगतकारों के महत्त्व को उजागर करना है।

प्रश्न 6.
‘संगतकार’ शब्द यहाँ प्रतीक के रूप में प्रयुक्त हुआ है। इस शब्द के माध्यम से लेखक ने क्या स्पष्ट किया?
उत्तर-
‘संगतकार’ मुख्य कलाकार के सहायक को कहा जाता है। वह अपनी शक्ति को मुख्य कलाकार का बल बना देता है। वह अपनी संपूर्ण शक्ति का प्रयोग मुख्य कलाकार को आगे बढ़ाने में करता है। वह स्वयं पीछे रहकर उसे आगे बढ़ाता है। इस प्रतीक के माध्यम से कवि यह बताना चाहता है कि जीवन के हर क्षेत्र में सहायकों का कार्य महत्त्वपूर्ण होता है। वे कभी स्वयं ऊपर नहीं आ पाते। उनका समाज में उतना ही योगदान है जितना कि मुख्य कलाकारों का। यह सब कुछ जानते हुए भी वे अपने नेता को ही आगे बढ़ाते हैं। अतः उनके इस निःस्वार्थ भाव से किए गए त्याग को उजागर करना ही कविता का परम लक्ष्य है।

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अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
श्री मंगलेश डबराल का जन्म कब हुआ था?
उत्तर-
श्री मंगलेश डबराल का जन्म सन् 1948 में हुआ था।

प्रश्न 2.
कवि ने अपने काव्य में किसका पक्ष लिया है?
उत्तर-
कवि ने अपने काव्य में उपेक्षितों का पक्ष लिया है।

प्रश्न 3.
अंतरा किसे कहते हैं?
उत्तर-
स्थायी टेक को छोड़कर गीत के शेष भाग को अंतरा कहते हैं।

प्रश्न 4.
‘संगतकार’ कविता में स्थायी किसे कहा गया है?
उत्तर-
‘संगतकार’ कविता में गीत की मुख्य टेक को स्थायी कहा गया है।

प्रश्न 5.
संगतकार मुख्य गायक को ढाँढस कब बँधाता है?
उत्तर-
जब उसका राग गिरने लगता है, तब संगतकार मुख्य गायक को ढाँढस बँधाता है।

प्रश्न 6.
संगतकार की मुख्य भूमिका क्या होती है?
उत्तर-
मुख्य गायक के स्वर को शक्ति देना संगतकार की मुख्य भूमिका होती है।

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प्रश्न 7.
‘संगतकार’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
मुख्य गायक के सहायक गायक को संगतकार कहा है।

प्रश्न 8.
‘मनुष्यता’ का क्या अर्थ है?
उत्तर-
‘मनुष्यता’ का अर्थ है-भलाई की भावना।

प्रश्न 9.
कवि ने संगतकार की कौन-सी महानता की ओर संकेत किया है?
उत्तर-
कवि ने संगतकार की मुख्य गायक के स्वर को उठाने के लिए अपने स्वर को नीचे रखने वाली महानता की ओर संकेत किया है।

प्रश्न 10.
‘संगतकार’ कविता के रचयिता कौन हैं?
उत्तर-
श्री मंगलेश डबराल।

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
श्री मंगलेश डबराल किस प्रदेश के रहने वाले हैं?
(A) उत्तर प्रदेश
(B) उत्तराखंड
(C) हरियाणा
(D) पंजाब
उत्तर-
(B) उत्तराखंड

प्रश्न 2.
संगतकार की आवाज कैसी कही गई है?
(A) भारी
(B) ऊँची
(C) अति मधुर
(D) कमजोर
उत्तर-
(A) भारी

प्रश्न 3.
मुख्य गायक का गला किसमें बैठता है?
(A) शीत में
(B) तारसप्तक में
(C) रोग में
(D) प्रीतिभोज में
उत्तर-
(B) तारसप्तक में

प्रश्न 4.
‘संगतकार’ शीर्षक कविता के कवि का क्या नाम है?
(A) मंगलेश डबराल
(B) ऋतुराज
(C) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(D) जयशंकर प्रसाद
उत्तर-
(A) मंगलेश डबराल

प्रश्न 5.
संगतकार शब्द का प्रतीकार्थ है-
(A) सहयोगी
(B) संग चलने वाला
(C) भजन सुनने वाला
(D) उपदेश-श्रोता
उत्तर-
(A) सहयोगी

प्रश्न 6.
‘संगतकार’ कौन-सी रचना है-
(A) उपन्यास
(B) नाटक
(C) कविता
(D) निबन्ध
उत्तर-
(C) कविता

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प्रश्न 7.
किसकी आवाज़ को कमजोर एवं काँपती हुई बताया गया है?
(A) मुख्य गायक की
(B) संगतकार की
(C) श्रोता की
(D) गीत-लेखक की
उत्तर-
(B) संगतकार की

प्रश्न 8.
संगतकार का क्या काम है?
(A) मुख्य गायक की आवाज़ में अपनी आवाज़ मिलाना
(B) मुख्य गायक की प्रशंसा करना।
(C) मुख्य गायक का गीत सुनना
(D) मुख्य गायक की कमियाँ निकालना
उत्तर-
(A) मुख्य गायक की आवाज़ में अपनी आवाज़ मिलाना

प्रश्न 9.
प्रस्तुत कविता में स्थायी या टेक को छोड़कर गीत के चरण को क्या कहा है?
(A) तान
(B) तार सप्तक
(C) अंतरा
(D) सरगम
उत्तर-
(C) अंतरा

प्रश्न 10.
नौसिखिया किसे कहते हैं?
(A) जिसने अभी सीखना आरंभ किया हो
(B) नौ बातें जानने वाला
(C) नई शिक्षा
(D) नया काम सिखाने वाला
उत्तर-
(A) जिसने अभी सीखना आरंभ किया हो

प्रश्न 11.
‘मुख्य गायक की गरज में’ यहाँ गरज का अर्थ है
(A) गर्जन
(B) गड़गड़ाहट
(C) ऊँची गंभीर आवाज़
(D) ऊंची गंभीर आवाज़
उत्तर-
(D) ऊँची गंभीर आवाज़

प्रश्न 12.
‘स्थायी’ किसे कहा गया है?
(A) स्थान को
(B) स्थिर को
(C) गीत की मुख्य टेक को
(D) गीत के शेष भाग को
उत्तर-
(C) गीत की मुख्य टेक को

प्रश्न 13.
‘अनहद’ का कविता के संदर्भ में क्या अर्थ है?
(A) सीमाहीन
(B) असीम
(C) अनंत
(D) असीम मस्ती
उत्तर-
(D) असीम मस्ती

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प्रश्न 14.
‘तारसप्तक’ किसे कहा गया है?
(A) सरगम के ऊँचे स्वर को
(B) पक्के राग को
(C) मध्य स्वर में गाए गए राग को
(D) अति धीमे स्वर को
उत्तर-
(A) सरगम के ऊँचे स्वर को

प्रश्न 15.
किस कारण से मुख्य गायक की आवाज़ साथ नहीं देती?
(A) थक जाने के कारण
(B) स्वर ताल उखड़ने के कारण
(C) गला बैठ जाने के कारण
(D) सांस फूल जाने के कारण
उत्तर-
(C) गला बैठ जाने के कारण

प्रश्न 16.
मुख्य गायक को यह अहसास कौन दिलाता है कि वह अकेला नहीं है?
(A) श्रोतागण
(B) वाद्यतंत्र को बजाने वाले
(C) गीत लेखक
(D) संगतकार
उत्तर-
(D) संगतकार

प्रश्न 17.
मुख्य गायक का स्वर किसमें खो जाता है?
(A) मध्यम अंतरे की तान में
(B) अंतरे की जटिल तान में
(C) अंतरे की तान में
(D) अंतरे की सरल तान में
उत्तर-
(B) अंतरे की जटिल तान में

प्रश्न 18.
संगतकार के धीमे स्वर में क्या निहित रहती है?
(A) प्रेरणा
(B) मनुष्यता
(C) विफलता
(D) पीड़ा
उत्तर-
(B) मनुष्यता

प्रश्न 19.
मुख्य गायक के साथ स्वर साधने वाला है
(A) सितारवादक
(B) तबलावादक
(C) सह-गायिका
(D) संगतकार
उत्तर-
(D) संगतकार

प्रश्न 20.
‘सरगम’ का अर्थ है
(A) ज्ञान
(B) सरककर चलना
(C) स्वर-बोध
(D) सरोवर
उत्तर-
(C) स्वर-बोध

प्रश्न 21.
मुख्य गायक के भारी स्वर का उपमान क्या है?
(A) चट्टान
(B) समुद्र
(C) स्वर-बोध
(D) झील
उत्तर-
(A) चट्टान

संगतकार पद्यांशों के आधार पर अर्थग्रहण संबंधी प्रश्नोत्तर

[1] मुख्य गायक के चट्टान जैसे भारी स्वर का साथ देती
वह आवाज़ सुंदर कमज़ोर काँपती हुई थी
वह मुख्य गायक का छोटा भाई है
या उसका शिष्य
या पैदल चलकर सीखने आने वाला दूर का कोई रिश्तेदार
मुख्य गायक की गरज़ में
वह अपनी गूंज मिलाता आया है प्राचीन काल से [पृष्ठ 54]

शब्दार्थ-संगतकार = मुख्य गायक के साथ गायन करने वाला या कोई वाद्य बजाने वाला। मुख्य गायक = प्रधान गायक। शिष्य = चेला। गरज़ = ऊँची गंभीर आवाज़। गूंज = स्वर। प्राचीन काल = पुराना समय।

प्रश्न-
(क) कवि एवं कविता का नाम लिखिए।
(ख) प्रस्तुत पद्यांश का प्रसंग लिखिए।
(ग) प्रस्तुत काव्यांश की व्याख्या कीजिए।
(घ) मुख्य गायक की आवाज़ का साथ कौन देती है?
(ङ) संगतकार का स्वर कैसा है?
(च) संगतकार का काम क्या है?
(छ) मुख्य गायक की आवाज़ की प्रमुख विशेषता क्या है?
(ज) इस काव्यांश के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
(झ) प्रस्तुत काव्य-पंक्तियों में निहित शिल्प-सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।
(ञ) प्रस्तुत काव्यांश की भाषागत विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
(क) कवि का नाम-मंगलेश डबराल। कविता का नाम-संगतकार।

(ख) प्रस्तुत काव्यांश हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘क्षितिज’ भाग 2 में संकलित ‘संगतकार’ नामक कविता से उद्धृत है। इसके रचयिता श्री मंगलेश डबराल हैं। कवि ने इस कविता में मुख्य गायक के साथ गाने वाले संगतकार की भूमिका का वर्णन करते हुए उसके महत्त्व को प्रतिपादित किया है। संगतकार के बिना मुख्य गायक अधूरा-सा लगता है।

(ग) कवि का कथन है कि जब गायक मंडली का मुख्य गायक अपनी चट्टान जैसी भारी-भरकम आवाज़ में गाता था तो उसका संगतकार सदा उसका साथ देता था। संगतकार की आवाज़ बहुत सुंदर, कमज़ोर और काँपती हुई सी थी। वह संगतकार ऐसा लगता था मानो मुख्य गायक का छोटा भाई हो या उसका कोई शिष्य हो या फिर कोई दूर का संबंधी हो जो पैदल चलकर उसके पास संगीत सीखने आता है। कहने का भाव है कि संगतकार मुख्य गायक से छोटा एवं महत्त्वहीन-सा लगता था। ऐसा उसके व्यवहार से जान पड़ता था। यह संगतकार आज से नहीं प्राचीन काल से मुख्य गायक की गरज में अपना स्वर मिलाता आया है।

(घ) मुख्य गायक की भारी-भरकम आवाज़ का साथ संगतकार की आवाज़ देती है।

(ङ) संगतकार का स्वर सुंदर, कमज़ोर और काँपता हुआ था।

(च) संगतकार का काम है-मुख्य गायक की गरजदार आवाज में अपनी मधुर-सी गूंज मिलाना। इस प्रकार मुख्य गायक की आवाज को और अधिक बल देकर उसे ऊपर उठाना। .

(छ) मुख्य गायक की आवाज भारी-भरकम होती हुई भी कड़क और गरजदार है। उसमें चट्टान जैसा भारीपन है।

(ज) मुख्य गायक गाकर अपनी गायन कला का प्रदर्शन करता है। किंतु संगतकार उसकी आवाज़ में अपनी आवाज़ मिलाता ही नहीं, अपितु वह मुख्य गायक के स्वर और दिशा को भी संभालता है। उसे स्वरों से दूर भटकने से रोकता है। इस प्रकार कवि ने इस पद्यांश में संगतकार के महत्त्व को प्रतिपादित किया है।

(झ)

  • कवि ने संगीतकार व गायक के साथ-साथ संगतकार के महत्त्व पर प्रकाश डाला है।
  • खड़ी बोली का प्रयोग किया गया है।
  • सामान्य बोलचाल के शब्दों का सार्थक एवं सटीक प्रयोग किया गया है।
  • भाषा प्रसाद गुण संपन्न है।
  • उपमा एवं अनुप्रास अलंकारों का प्रयोग हुआ है।

(ञ) कविवर डबराल शब्दों को नए अर्थ देने के लिए माहिर हैं। भाषा सरल एवं सहज है। उनकी भाषा की अन्य प्रमुख विशेषता पारदर्शिता है। सम्पूर्ण पद्यांश में प्रयुक्त भाषा प्रसादगुण सम्पन्न है।

[2] गायक जब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में
खो चुका होता है
या अपने ही सरगम को लाँधकर चला जाता
है भटकता हुआ एक अनहद में
तब संगतकार ही स्थायी को सँभाले रहता है
जैसे समेटता हो मुख्य गायक का पीछे छूटा हुआ सामान
जैसे उसे याद दिलाता हो उसका बचपन
जब वह नौसिखिया था। [पृष्ठ 54]

शब्दार्थ-अंतरा = स्थायी टेक को छोड़कर गीत का शेष चरण। जटिल तान = कठिन आलाप। सरगम = संगीत के सात स्वरों को उठाना। लाँघकर = पार करके। अनहद = असीम, बहुत दूर, बहुत ऊँचा। स्थायी = गीत की मुख्य टेक, लय। समेटना = इकट्ठा करना। नौसिखिया = जिसने अभी सीखना आरंभ किया हो।

प्रश्न-
(क) कवि एवं कविता का नाम लिखिए।
(ख) इस पद्यांश का प्रसंग लिखिए।
(ग) प्रस्तुत काव्यांश की व्याख्या कीजिए।
(घ) ‘अंतरे की जटिल तानों के जंगल’ से क्या तात्पर्य है?
(ङ) ‘सरगम को लाँघने’ का अर्थ स्पष्ट करें।
(च) ‘अनहद’ का कविता के संदर्भ में क्या अर्थ है?
(छ) संगतकार मुख्य गायक को नौसिखिया की स्थिति कैसे याद दिलाता है?
(ज) स्थायी को संभालने का क्या अभिप्राय है?
(झ) इस पद्यांश के भाव-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
(ञ) प्रस्तुत पद्यांश के शिल्प-सौंदर्य को स्पष्ट कीजिए।
(ट) प्रस्तुत काव्यांश में प्रयुक्त भाषा की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
(क) कवि का नाम-मंगलेश डबराल।
कविता का नाम-संगतकार।

(ख) प्रस्तुत काव्य-पंक्तियाँ हिंदी की पाठ्यपुस्तक :क्षितिज’ भाग 2 में संकलित ‘संगतकार’ नामक कविता से ली गई हैं। इस कविता के रचयिता श्री मंगलेश डबराल हैं। इसमें मुख्य गायक के साथ-साथ सम्मान से वंचित सहायकों की भूमिका के महत्त्व पर प्रकाश डाला गया है। भले ही लोग उनका नाम तक लेते हों, किंतु सच्चाई यह है कि मुख्य गायक की सफलता इनके सहयोग पर ही निर्भर करती है।

(ग) कवि कहता है कि मुख्य गायक जब स्वर को लंबा खींचकर अंतरे की कठिन तानों के जंगल में खो जाता है अर्थात् मुख्य गायक जब गीत की मुख्य पंक्ति को गाने के पश्चात् गीत की अन्य पंक्तियों को गाने लगता है तो वह टेढ़े-मेढ़े स्वरों में उलझ जाता है और मुख्य स्वर से भटक जाता है। वह अपने निश्चित स्वरों की सीमा को लाँघकर गहरी संगीत-साधना में लीन हो जाता है, असीम-सी मस्ती में डूब जाता है। तब संगतकार ही गीत की मुख्य टेक के स्वर को अलापता रहता है तथा उसे सँभाले रखता है। इस प्रकार वह मुख्य गायक को मूल स्वर में लौटा लाता है। ऐसा लगता है कि मानो वह मुख्य गायक के पीछे छूटे हुए सामान को सँभालने में लगा हो। मानो वह मुख्य गायक को उसके बचपन की याद दिला रहा हो। जब वह नया-नया संगीत सीख रहा था तथा अकसर मूल स्वर को भूल जाता था, तब उसने संगीत में निपुणता प्राप्त नहीं की थी।

(घ) अंतरे की जटिल तानों के जंगल से तात्पर्य है कि गीत की मुख्य टेक के अतिरिक्त गीत के चरण की अन्य पंक्तियाँ, जिनके स्वर बहुत कठिन एवं अधिक होते हैं।

(ङ) सरगम को लाँघने का अर्थ है-गीत की मुख्य लय या स्वर की सीमा को भूलकर और अधिक कठिन आलापों में खो जाना और मुख्य स्वर से अधिक ऊँचा स्वर उठाना।

(च) ‘अनहद’ का शाब्दिक अर्थ है-असीम, सीमाहीन, अनंत। ‘अनहद’ का आध्यात्मिक अर्थ है-आध्यात्मिक मस्ती। कविता के संदर्भ में इसका अर्थ है- असीम मस्ती।

(छ) कभी-कभी मुख्य गायक गीत गाने में इतना डूब जाता है कि गीत के लय व स्वर को भूल जाता है अथवा जटिल तानों में खो जाता है। इससे गीत की मुख्य तान में आघात पहुँचता है। संगतकार उसे वापस मूल स्वर में लौटा लाता है। यही स्थिति किसी नए-नए गीत सीखने वाले की होती है, जो गीत गाते-गाते मुख्य स्वर को भूल जाता है, उस्ताद उसे फिर मुख्य स्वर में लाता है। संगतकार मुख्य गायक को गीत के स्वर में लौटा लाता है। ऐसी स्थिति बचपन में मुख्य गायक की होती थी। इस प्रकार संगतकार मुख्य गायक को उसके बचपन में ले जाता है।

(ज) स्थायी को संभालने का तात्पर्य है किसी गीत की मुख्य पंक्ति या टेक के मुख्य स्वर को गाते रहना। उसकी टेक को बिखरने न देना। उसकी गति, लय आदि को कम या अधिक न होने देना।

(झ) कवि ने मुख्य गायक के सहायक की भूमिका को अत्यंत मनोरम शब्दों में व्यक्त किया है। मुख्य गायक जब कोई गीत गाता है तो संगतकार उसमें केवल अपनी आवाज़ को ही नहीं मिलाता, अपितु गीत के स्वर को सँभालता भी है। वह उसे स्वरों से दूर भटकने से भी रोकता है तथा उसे सही दिशा में ले जाता है।

(ञ)

  • कवि ने संगतकार की भूमिका के महत्त्व को अत्यंत कलात्मकतापूर्ण अभिव्यक्ति प्रदान की है।
  • अभिधा शब्द-शक्ति के कारण कवि का कथन अत्यंत सरल एवं सहज बन पड़ा है।
  • भाषा में बोलचाल के शब्दों का प्रयोग किया गया है।
  • अतुकांत छंद का प्रयोग किया गया है।
  • रूपक, उत्प्रेक्षा, अनुप्रास आदि अलंकारों का प्रयोग किया गया है।

(ट) प्रस्तुत पद्यांश में सहज एवं सरल भाषा का प्रयोग किया गया है। कवि ने लययुक्त भाषा का सफल प्रयोग किया है। कविता का प्रमुख विषय गायक व संगतकार से सम्बन्धित है इसलिए विषय से सम्बन्धित शब्दों का सफल प्रयोग किया गया है। सजगता भाषा की अन्य प्रमुख विशेषता है।

[3] तारसप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला
प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ
आवाज़ से राख जैसा कुछ गिरता हुआ
तभी मुख्य गायक को ढाँढस बँधाता
कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर
कभी-कभी वह यों ही दे देता है उसका साथ
यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है
और यह कि फिर से गाया जा सकता है।
गाया जा चुका राग
और उसकी आवाज़ में जो एक हिचक साफ सुनाई देती है
या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है
उसे विफलता नहीं
उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए। [पृष्ठ 54-55]

HBSE 10th Class Hindi Solutions Kshitij Chapter 9 संगतकार

शब्दार्थ-तारसप्तक = सरगम के ऊँचे स्वर। प्रेरणा = आगे बढ़ने की इच्छा-शक्ति। उत्साह अस्त होता हुआ = हौंसला कम होता हुआ। राख जैसा = बुझता हुआ, कम होता हुआ। ढाढ़स बंधाना = सांत्वना देना, तसल्ली देना। राग = ताल, लय-स्वर। हिचक = संकोच। विफलता = असफलता। मनुष्यता = मानवता, भलाई की भावना।

प्रश्न-
(क) कवि एवं कविता का नाम लिखिए।
(ख) प्रस्तुत पद्यांश का प्रसंग लिखें।
(ग) प्रस्तुत पद्यांश की व्याख्या कीजिए।
(घ) तारसप्तक से क्या तात्पर्य है?
(ङ) किस कारण से गायक की आवाज़ साथ नहीं देती?
(च) मुख्य गायक को कौन धीरज बँधाता है और कैसे?
(छ) किसकी आवाज़ में हिचक सुनाई पड़ती है और क्यों?
(ज) संगतकार अपने स्वर को ऊँचा क्यों नहीं उठने देता?
(झ) कवि ने किसे मानवता माना है?
(ञ) इस पद्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
(ट) प्रस्तुत काव्यांश में निहित शिल्प-सौंदर्य पर प्रकाश डालिए।
(ठ) उपर्युक्त काव्यांश की भाषागत विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
(क) कवि का नाम-मंगलेश डबराल। कविता का नाम-संगतकार।

(ख) प्रस्तुत काव्यांश श्री मंगलेश डबराल द्वारा रचित सुप्रसिद्ध कविता ‘संगतकार’ से उद्धृत है। इसमें कवि ने मुख्य गायक के साथ-साथ उसके सहायक के कार्य के महत्त्व को भी उजागर किया है। संगतकार मुख्य गायक के महत्त्व को बढ़ाने में अपनी योग्यता एवं शक्ति को लगा देता है। कवि ने उसकी इसी मनुष्यता को उजागर किया है।

(ग) कवि कहता है कि तारसप्तक को गाते हुए जब उतार-चढ़ाव के कारण मुख्य गायक का गला बैठने लगता है, तो उसकी आवाज़ भी उसका साथ नहीं देती। गाते-गाते उसकी साँस भी उखड़ने लगती है। उसके मंद पड़ते उत्साह को संगतकार ही अपनी आवाज़ का सहारा देकर उसे उबारता है। वह उसे सांत्वना देता है और उसका धैर्य बँधाता है वह कहता है कि तुम अकेले नहीं हो अपितु में भी तुम्हारे साथ हूँ। जिस राग को वह गा रहा है, उसे कोई और भी फिर से गा सकता है अर्थात् संगतकार मुख्य गायक के गाए हुए राग को उसके पीछे-पीछे दोहराकर बता देना चाहता है कि कोई भी उसे गा सकता है। इससे मुख्य गायक का हौसला बढ़ता है।
कवि कहता है कि संगति करने वाले गायक की आवाज़ में एक संकोच स्पष्ट रूप से अनुभव किया जा सकता है कि वह अपने स्वर को उस्ताद के स्वर से नीचे ही रखता है। इसको उसकी कमज़ोरी न समझकर उसकी मनुष्यता या मानवता ही समझना चाहिए।

(घ) ऊँचे स्वर में गाए गए सरगम को तार सप्तक कहते हैं।

(ङ) ऊँचे स्वर में गाते रहने के कारण मुख्य गायक का गला बैठने लगता है, आवाज़ डूबने लगती है। गाने की इच्छा भी नहीं होती। इससे गायक की आवाज़ उसका साथ छोड़ देती है।

(च) मुख्य गायक को संगतकार धीरज बँधाता है। वह उसके पीछे-पीछे लगातार गाता रहता है। वह उसके डूबते स्वर को सँभाले रहता है।

(छ) मुख्य गायक संगतकार की आवाज़ में हिचक साफ सुनाई देती है क्योंकि वह जान-बूझकर मुख्य गायक की आवाज़ की भाँति खुलकर नहीं गाना चाहता ताकि मुख्य गायक का स्वर उभरकर आ सके।

(ज) संगतकार अपने स्वर को मुख्य गायक के स्वर से ऊँचा इसलिए नहीं उठाता क्योंकि यह उसका धर्म है। वह मुख्य गायक के स्वर को ऊँचाई और शक्ति देने की भूमिका निभाता है। मुख्य गायक के स्वर से ऊँचे स्वर में गाना उसके लक्ष्य के विरुद्ध है।

(झ) कवि संगतकार द्वारा अपने स्वर को मुख्य गायक के स्वर से कम रखना ही उसकी मनुष्यता मानता है। अपने-आपको पीछे या भूमिका में रखते हुए दूसरों के महत्त्व को बढ़ावा देना ही सच्ची मानवता है।

(ञ) प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने संगतकार के माध्यम से बताया है कि मुख्य गायक के सहायक गायक भी महानता में सम्मिलित हैं। वे मुख्य गायक को ऊँचा उठाने की कोशिश में अपने स्वर को और अपने-आपको कुछ नीचा रखते हैं। कवि के अनुसार उनका यह त्याग ही उनकी महानता का संकेत है।

(ट)

  • भाषा गद्यात्मक किंतु लययुक्त है।
  • भाषा सुगम, सरल एवं सुव्यवस्थित है।
  • उत्साह अस्त होना, राख जैसा कुछ गिरना आदि प्रतीकात्मक प्रयोग दृष्टव्य हैं।
  • अनुप्रास अलंकार की छटा है।
  • छंद युक्त कविता है।

(ठ) कविवर डबराल ने प्रस्तुत काव्यांश में सरल एवं सहज भाषा का प्रयोग किया है। कवि ने मुख्य गायक व संगतकार के अन्तः सम्बन्धों को व्यक्त करने हेतु विषयानुकूल भाषा का प्रयोग किया है। भाषा पारदर्शी और व्यावहारिक है। प्रवाहमयता एवं लयबद्धता भाषा प्रयोग की मुख्य विशेषता है।

संगतकार Summary in Hindi

संगतकार कवि-परिचय

प्रश्न-
मंगलेश डबराल का संक्षिप्त जीवन-परिचय, रचनाओं, काव्यगत विशेषताओं एवं भाषा-शैली का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
1. जीवन-परिचय-मंगलेश डबराल आधुनिक हिंदी कवि एवं पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं। इनका जन्म सन् 1948 में टिहरी गढ़वाल (उत्तराखंड) के काफलपानी नामक गाँव में हुआ था। इनकी शिक्षा-दीक्षा देहरादून में हुई थी। दिल्ली आकर ये पत्रकारिता से जुड़ गए थे। श्री डबराल जी ने हिंदी पेट्रियट, प्रतिपक्ष और आसपास आदि पत्र-पत्रिकाओं में काम किया। तत्पश्चात् ये भारत भवन, भोपाल से प्रकाशित होने वाले पत्र पूर्वग्रह में सहायक संपादक के पद पर नियुक्त हुए। इन्होंने इलाहाबाद और लखनऊ से प्रकाशित होने वाले अमृत प्रभात में भी काम किया। सन् 1983 में जनसत्ता में साहित्यिक संपादक के पद को सँभाला था। श्री डबराल ने कुछ समय के लिए सहारा समय का भी संपादन किया है। आजकल डबराल जी नेशनल बुक ट्रस्ट से जुड़कर ‘काम कर रहे हैं।

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2. प्रमुख रचनाएँ-अब तक डबराल जी के चार काव्य-संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं-‘पहाड़ पर लालटेन’, ‘घर का रास्ता’, ‘हम जो देखते हैं’, ‘आवाज़ भी एक जगह है’ । इनकी रचनाओं के भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त अंग्रेज़ी, रूसी, जर्मन, पोल्स्की, बल्गारी आदि भाषाओं में भी अनुवाद हो चुके हैं। काव्य के अतिरिक्त साहित्य सिनेमा, संचार माध्यम और संस्कृति से संबंधित विषयों पर भी इनकी गद्य रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। इनकी साहित्यिक उपलब्धियों के कारण इन्हें विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। श्री डबराल कवि के रूप में ही अधिक प्रतिष्ठित हुए हैं तथा अच्छे अनुवादक के रूप में भी इन्होंने नाम कमाया है।

3. काव्यगत विशेषताएँ-श्री मंगलेश डबराल के काव्य में सामंती बोध एवं पूँजीवादी छल-छद्म दोनों का विरोध किया गया है। वे यह विरोध अथवा प्रतिकार किसी शोर-शराबे के साथ नहीं, अपितु प्रतिपक्ष में सुंदर सपना रचकर करते हैं। वे वंचितों का पक्ष लेकर काव्य रचना करते हैं। इनकी कविताओं में अनुभूति एवं रागात्मकता विद्यमान है। श्री डबराल जहाँ पुरानी परंपराओं का विरोध करते हैं, वहाँ नए जीवन-मूल्यों का पक्षधर बनकर सामने आते हैं। इनका सौंदर्य बोध अत्यंत सूक्ष्म है। सजग भाषा की सृष्टि इनकी कविताओं के कलापक्ष की प्रमुख विशेषता है।।

4. भाषा-शैली-इन्होंने शब्दों का प्रयोग नए अर्थों में किया है। छंद विधान को भी इन्होंने परंपरागत रूप में स्वीकार नहीं किया, किंतु कविता में लय के बंधन का निर्वाह सफलतापूर्वक किया है। इन्होंने काव्य में नई-नई कल्पनाओं का सृजन किया है। बिंब-विधान भी नवीनता लिए हुए हैं। नए-नए प्रतीकों के प्रति इनका मोह छुपा हुआ नहीं है। भाषा पारदर्शी और सुंदर है।

संगतकार कविता का सार

प्रश्न-
‘संगतकार’ शीर्षक कविता का सार अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर-
‘संगतकार’ कविता में कवि ने मुख्य गायक का साथ देने वाले संगतकार की भूमिका पर प्रकाश डाला है। कवि ने बताया है कि दृश्य माध्यम की प्रस्तुतियाँ; यथा-नाटक, फिल्म, संगीत नृत्य के बारे में तो यह बिल्कुल सही है। किंतु समाज और इतिहास में भी हम ऐसे अनेक उदाहरण देख सकते हैं। नायक की सफलता में अनेक लोगों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रस्तुत कविता में कवि ने यही संदेश दिया है कि हर व्यक्ति की अपनी-अपनी भूमिका होती है, अपना-अपना महत्त्व होता है। उनका सामने न आना उनकी कमज़ोरी नहीं, अपितु मानवीयता है। युगों से संगतकार अपनी आवाज़ को मुख्य गायक से मिलाते आए हैं। जब मुख्य गायक अंतरे की जटिल तान में खो जाता है या अपने सरगम को लाँघ जाता है, तब संगतकार ही स्थायी पंक्ति को संभालकर आगे बढ़ाता है। ऐसा करके वह मुख्य गायक के गिरते हुए स्वर को ढाँढस बँधाता है। कभी-कभी उसे यह भी अहसास दिलाता है कि वह अकेला नहीं है, उसका साथ देने वाला है। जो राग पहले गाया जा चुका है, उसे फिर से गाया जा सकता है। वह सक्षम होते हुए भी मुख्य गायक के समान अपने स्वर को ऊँचा उठाने का प्रयास नहीं करता। इसे उसकी असफलता नहीं समझनी चाहिए। यह उसकी मानवीयता है, वह ऐसा करके मुख्य गायक के प्रति अपना सम्मान प्रकट करता है।

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